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भारत
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HINDUSTAN कंट्री HINDU
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JAY HIHDUSTAN{{Infobox country
| conventional_long_name = भारत गणराज्य
| common_name = भारत
| native_name = Republic of India <br /> <small> ([[भारत की आधिकारिक भाषाओं में भारत गणराज्य के नाम|अन्य क्षेत्रीय भाषाओं में]] देखें) </small>
| image_flag = Flag of India.svg
| alt_flag = क्षैतिज तिरंगे झंडे में ऊपर से नीचे तक गहरी केसरिया, सफ़ेद और हरी क्षैतिज पट्टियाँ हैं। सफेद पट्टी के केंद्र में 24 तीलियों वाला एक नेवी-ब्लू पहिया है।
| image_coat = Emblem of India.svg
| symbol_width = 60px
| alt_coat = एक चित्रावली है जिसमें एक सरपट दौड़ता घोड़ा, एक 24-आरियों वाला पहिया और एक हाथी है। इसके उपर तीन शेर बाएँ, दाएँ और दर्शक की ओर मुख किए हुए हैं। चित्र में सबसे नीचे एक आदर्श वाक्य है: "सत्यमेव जयते"।
| symbol_type = [[भारत का राज्य प्रतीक|राज्य प्रतीक]]
| other_symbol_type = राष्ट्रीय गीत: "[[वन्दे मातरम्]]" ([[संस्कृत भाषा|संस्कृत]]){{efn|संस्कृत और [[साधु भाषा|संस्कृतिकृत बांग्ला]] के मिश्रण में लिखा गया है।}}
| other_symbol = "मैं आपको नमन करता हूँ, माँ"{{lower|0.2em|{{efn|"[...] ''जन गण मन'' भारत का राष्ट्रीय गान है, जिसके शब्दों में सरकार अवसर पड़ने पर परिवर्तन कर सकती है; और गीत ''वंदे मातरम्'', जिसने भारतीय स्वतंत्रता के संघर्ष में एक ऐतिहासिक भूमिका निभाई है, को ''जन गण मन'' के साथ समान रूप से सम्मानित किया जाएगा और इसके साथ समान दर्जा दिया जाएगा।"{{snf|<ref>{{cite web |url=https://india.gov.in/hi/india-glance/national-symbols |title=Constituent Assembly of India – Volume XII(अंग्रेजी में) |publisher=[[हिन्दी
राष्ट्रीय सूचना-विज्ञान केन्द्र]] [[भारत सरकार]] 24 जनवरी 1950 |access-date=25 जुलाई 2024 |archive-url=https://web.archive.org/web/20170201215621/https://india.gov.in/hi/india-glance/national-symbols |archive-date=1 फ़रवरी 2017 |url-status=bot: unknown }}</ref>}}<!--end efn:-->}}<ref name="india.gov.in" />}}<br />
<div style="display:inline-block;margin-top:0.4em;">[[File: Vande Mataram on Mohan Veena.ogg]]</div>
| national_motto = "[[सत्यमेव जयते]]" ([[संस्कृत भाषा|संस्कृत]])
| national_anthem = "[[जन गण मन]]" ([[हिन्दी]]){{efn|मूल रूप से [[साधु भाषा|संस्कृतिकृत बांग्ला]] में लिखा गया और इसके हिन्दी अनुवाद में राष्ट्रगान के रूप में अपनाया गया।}}{{efn|"भारत का राष्ट्रीय गान जन गण मन, जो मूल रूप से रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा बांग्ला में लिखा गया था, को 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा द्वारा इसके हिन्दी संस्करण में भारत के राष्ट्रगान के रूप में अपनाया गया था।"}}<ref name="india.gov.in" /><ref name="tatsama">{{cite news |title=भारत का राष्ट्रीय गान: 'जन गण मन' पर एक संक्षिप्त जानकारी |url=https://www.news18.com/news/india/national-anthem-of-india-a-brief-on-jana-gana-mana-498576.html |date=14 अगस्त 2012 |access-date=7 जून 2019 |publisher=[[न्यूज़18 इंडिया|न्यूज़18]] |archive-url=https://web.archive.org/web/20190417194530/https://www.news18.com/news/india/national-anthem-of-india-a-brief-on-jana-gana-mana-498576.html |archive-date=17 अप्रैल 2019}}</ref>
<div style="display:inline-block;margin-top:0.4em;">[[File:Jana Gana Mana instrumental.ogg]]</div>
| image_map = India (orthographic projection).svg
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| alt_map = भारत पर केंद्रित ग्लोब की छवि, जिसमें भारत पर प्रकाश डाला गया है।
| map_caption = {{Legend|#336830|भारत}}
{{Legend|#61E760|भारत का विवादित क्षेत्र}}
| capital = [[नई दिल्ली]]
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* [[मुंबई]] (शहर उचित)
* [[दिल्ली]] (महानगरीय क्षेत्र)
}}
| official_languages = {{hlist |[[मानक हिन्दी|हिन्दी]]|[[अंग्रेज़ी भाषा|अंग्रेज़ी]]{{efn|[[देवनागरी]] लिपि में लिखी जाने वाली [[मानक हिन्दी|हिन्दी]] संघ की राजभाषा है। सरकारी कामकाज के लिए [[अंग्रेज़ी]] (इंग्लिश) सह-राजभाषा है।{{sfn|राष्ट्रीय सूचना-विज्ञान केंद्र|2005}}<ref name="india.gov.in2">{{cite web |url=http://india.gov.in/india-glance/profile |title=Profile | National Portal of India |publisher=इंडिया पोर्टल |accessdate=१३ मई २०१४ |archive-url=https://web.archive.org/web/20140209020314/http://india.gov.in/india-glance/profile |archive-date=9 फ़रवरी 2014 |url-status=live }}</ref>[[भारत के राज्य और संघशासित प्रदेश]] हिन्दी या अंग्रेज़ी के अलावा अपने स्वयं की एक अलग आधिकारिक भाषा हो सकती है।}}<ref>{{Cite web|url=http://rajbhasha.nic.in/UI/pagecontent.aspx?pc=MzU%3d |title=Constitutional Provisions – Official Language Related Part-17 Of The Constitution Of India |language=Hindi |website=[[राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र]] |accessdate=27 दिसम्बर 2015 |url-status=dead |archiveurl=https://web.archive.org/web/20160201081439/http://rajbhasha.nic.in/UI/pagecontent.aspx?pc=MzU%3D |archivedate= 1 फ़रवरी 2016 |df= }}</ref>}}
| languages_type = स्थानीय भाषाएं
| languages = [[भारत में स्थानीय वक्ताओं की संख्यानुसार भाषाओं की सूची|447 बोली]]{{efn|अलग-अलग स्रोतों से हमें यह संख्या भिन्न-भिन्न प्राप्त होती है, यह प्राथमिक तौर पर इसपर निर्भर करता है कि "भाषा" और "बोली" को कैसे समाहित एवं परिभाषित किया गया है। [[ऍथनोलॉग]] सूची में भारत की 461 ज़ुबान (विश्वस्तर पर 6,912 में से) हैं, जिनमें 447 अभी बोली जाती हैं जबकि 14 लुप्तप्राय हैं।<ref name="Ethnologue">{{cite web|editor=लेविस, एम पॉल |editor2=सिमन्स, गेरी एफ॰ |editor3=फेन्निग, चार्ल्स डी॰ |year=2014|title=Ethnologue: Languages of the World : India|publisher=एसआईएल इंटरनेशनल द्वारा [[ऍथनोलॉग]] |edition=17वाँ|location= डल्लास, टेक्सास |url= https://www.ethnologue.com/country/IN|access-date=15 December 2014}}</ref><ref name="Ethnologue2">{{cite web|url=https://archive.ethnologue.com/15/ethno_docs/distribution.asp?by=area|archive-url=https://web.archive.org/web/20141217151950/https://archive.ethnologue.com/15/ethno_docs/distribution.asp?by=area|title=Ethnologue : Languages of the World (Seventeenth edition) : Statistical Summaries |publisher=एसआईएल इंटरनेशनल द्वारा [[ऍथनोलॉग]] |archive-date=17 दिसम्बर 2014|access-date=17 दिसम्बर 2014}}</ref>}}
| regional_languages = {{collapsible list
|titlestyle = background:transparent;text-align:left;
|title = [[भारत की आधिकारिक भाषाएँ|राज्य स्तरीय]] तथा [[आठवीं अनुसूची|{{nowrap|आठवीं अनुसूची}}]]<ref>{{cite web |url=http://nclm.nic.in/shared/linkimages/NCLM50thReport.pdf |title=Report of the Commissioner for linguistic minorities: 50th report (July 2012 to June 2013) |publisher=Commissioner for Linguistic Minorities, Ministry of Minority Affairs, Government of India |access-date=26 दिसम्बर 2014 |url-status=dead |archive-url=https://web.archive.org/web/20160708012438/http://nclm.nic.in/shared/linkimages/NCLM50thReport.pdf |archive-date=8 जुलाई 2016 }}</ref>
|{{hlist
| [[असमिया भाषा|असमिया]]
| [[बांग्ला भाषा|बांग्ला]]
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}}
}}
| demonym = [[भारत के लोग|भारतीय]]
| government_type = [[संघवाद|संघीय]] [[संसदीय प्रणाली|संसदीय]] [[भारत का संविधान|संवैधानिक]] [[गणराज्य]]
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| {{nowrap|{{abbr|dd|day}}-{{abbr|mm|month}}-{{abbr|yyyy|year}}}}{{efn|[[:en:Date and time notation in India]] देखें।}}
}}
| drives_on = left<ref>{{Cite web |title=List of all left- & right-driving countries around the world |url=https://www.worldstandards.eu/cars/list-of-left-driving-countries/ |date=13 मई 2020 |access-date=10 जून 2020 |website=worldstandards.eu}}</ref>
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| englishmotto = "सत्य की ही विजय होती है"<ref name="india.gov.in">{{cite web |url=https://www.xn--i1bj3fqcyde.xn--11b7cb3a6a.xn--h2brj9c/india-glance/national-symbols |title=राष्ट्रीय चिन्ह |publisher=[[भारत का राष्ट्रीय पोर्टल]] [[भारत सरकार]] |access-date= 25 जुलाई 2024 |archive-url=https://web.archive.org/web/20170201215621/https://india.gov.in/hi/india-glance/national-symbols |archive-date=4 फ़रवरी 2017 }}</ref>
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| 79.8% [[भारत में हिन्दू धर्म|हिन्दू]]
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| official_website = <!-- do not add www.gov.in – The article is about the country, not the government – from Template:Infobox country, do not use government website (e.g. usa.gov) for countries (e.g. United States) -->
| iso3166code = IN
}}
'''भारत''' (आधिकारिक नाम: '''भारत गणराज्य''', {{langx|en|Republic of India}}, [[लिप्यन्तरण]]: ''रिपब्लिक् ऑफ़् इण्डिया'') [[दक्षिण एशिया]] में स्थित [[भारतीय उपमहाद्वीप]] का सबसे बड़ा देश है। भारत भौगोलिक दृष्टि से विश्व का [[भारत का भूगोल|सातवाँ]] सबसे बड़ा देश है, जबकि [[जनसंख्या]] के दृष्टिकोण से विश्व का सबसे बड़ा देश है<ref>{{Cite news|url=https://www.bbc.com/news/world-asia-india-65322706|title=Most populous nation: Should India rejoice or panic?|date=2023-05-01|work=BBC News|access-date=2023-06-26|language=en-GB}}</ref>। भारत के पश्चिम में [[पाकिस्तान]], उत्तर पश्चिम में अफगानिस्तान, उत्तर-पूर्व में [[चीनी जनवादी गणराज्य|चीन]], [[नेपाल]] और [[भूटान]], पूर्व में [[बांग्लादेश]] और [[म्यान्मार]] स्थित हैं। [[हिन्द महासागर]] में इसके दक्षिण पश्चिम में [[मालदीव]], दक्षिण में [[श्रीलंका]] और दक्षिण-पूर्व में [[इंडोनेशिया]] से भारत की सामुद्रिक सीमा लगती है। इसके उत्तर में [[हिमालय|हिमालय पर्वत]] तथा दक्षिण में [[हिन्द महासागर|भारतीय महासागर]] स्थित है। दक्षिण-पूर्व में [[बंगाल की खाड़ी]] तथा पश्चिम में [[अरब सागर]] है।
<!--content repeated in इतिहास section
आधुनिक मानव ''([[होमो सेपियन्स|होमो सेपियंस]])'' [[अफ्रीका]] से भारतीय उपमहाद्वीप में ५५,००० साल पहले आये थे।<ref name="Combined-1">(a) {{citation|last=Dyson|first=Tim|title=A Population History of India: From the First Modern People to the Present Day|url=https://books.google.com/books?id=3TRtDwAAQBAJ&pg=PA1 | year=2018 | publisher=ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस|isbn=978-0-19-882905-8|page=1}}; (b) {{cite book |author1=Michael D. Petraglia |author2=Bridget Allchin |author-link2=Bridget Allchin |title=The Evolution and History of Human Populations in South Asia: Inter-disciplinary Studies in Archaeology, Biological Anthropology, Linguistics and Genetics |url=https://books.google.com/books?id=Qm9GfjNlnRwC&pg=PA10#v=onepage&q&f=false |publisher=Springer Science + Business Media |page=6 |isbn=978-1-4020-5562-1|date=22 मई 2007 }}; (c) {{citation|last=Fisher|first=Michael H.|title=An Environmental History of India: From Earliest Times to the Twenty-First Century|url=https://books.google.com/books?id=kZVuDwAAQBAJ&pg=PA23|year=2018|publisher=Cambridge University Press|isbn=978-1-107-11162-2|page=23}} </ref> 1,000 वर्ष पहले ये [[सिंधु नदी]] के पश्चिमी हिस्से की तरफ बसे हुए थे जहां से इन्होने धीरे धीरे पलायन किया और [[सिंधु घाटी सभ्यता]] के रूप में विकसित हुए।<ref name="Combined-2"> (a) {{citation|last=Dyson|first=Tim|title=A Population History of India: From the First Modern People to the Present Day|url=https://books.google.com/books?id=3TRtDwAAQBAJ&pg=PA4|year=2018|publisher=ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस|isbn=978-0-19-882905-8|pages=4–5}}; (b) {{citation|last=Fisher|first=Michael H.|title=An Environmental History of India: From Earliest Times to the Twenty-First Century | url=https://books.google.com/books?id=kZVuDwAAQBAJ&pg=PA23 |year=2018|publisher=Cambridge University Press|isbn=978-1-107-11162-2|page=33}}
</ref>-->
1,200 ईसा पूर्व [[संस्कृत भाषा]] सम्पूर्ण भारतीय उपमहाद्वीप में फैली हुए थी और तब तक यहां पर [[हिन्दू धर्म]] का उद्धव हो चुका था और [[ऋग्वेद]] की रचना भी हो चुकी थी।<ref name="Combined-3"> (a) {{citation|last=Dyson|first=Tim|title=A Population History of India: From the First Modern People to the Present Day|url=https://books.google.com/books?id=3TRtDwAAQBAJ&pg=PA14|year=2018|publisher=[[ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रे]]|isbn=978-0-19-882905-8|pages=14–15}}; (b) {{citation|last=Robb|first=Peter|title=A History of India|url=https://books.google.com/books?id=GQ-2VH1LO_EC&pg=PA46|year=2011|publisher=[[मैकमिलन पब्लिशर्स|मैकमिलन]] |isbn=978-0-230-34549-2|page=46}}{{Dead link|date=फ़रवरी 2023 |bot=InternetArchiveBot }}; (c) {{citation|last=Ludden|first=David|title=India and South Asia: A Short History |url=https://books.google.com/books?id=EbFHAQAAQBAJ&pg=PA19|year=2013|publisher=Oneworld Publications|isbn=978-1-78074-108-6|page=19}}</ref> इसी समय बौद्ध एवं जैन धर्म उत्पन्न हो रहे होते थे।<ref name="Fisher2018-59">{{citation|last=Fisher|first=Michael H.|title=An Environmental History of India: From Earliest Times to the Twenty-First Century|url=https://books.google.com/books?id=kZVuDwAAQBAJ&pg=PA59|year=2018|publisher=[[कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी प्रेस]]|isbn=978-1-107-11162-2|page=59}}
</ref>
प्रारम्भिक राजनीतिक एकत्रीकरण ने [[गंगा बेसिन]] में स्थित [[मौर्य]] और [[गुप्त राजवंश|गुप्त साम्राज्यों]] को जन्म दिया।<ref name="Combined-5">(a) {{citation|last=Dyson|first=Tim|title=A Population History of India: From the First Modern People to the Present Day|url=https://books.google.com/books?id=3TRtDwAAQBAJ&pg=PA16|year=2018|publisher=[[ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस]]|isbn=978-0-19-882905-8|pages=16–17}}; (b) {{citation|last=Fisher|first=Michael H.|title=An Environmental History of India: From Earliest Times to the Twenty-First Century|url=https://books.google.com/books?id=kZVuDwAAQBAJ&pg=PA67|year=2018|publisher=[[कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी प्रेस]]|isbn=978-1-107-11162-2|page=67}}; (c) {{citation|last=Robb|first=Peter|title=A History of India|url=https://books.google.com/books?id=GQ-2VH1LO_EC&pg=PA56|year=2011|publisher=[[मैकमिलन पब्लिशर्स|मैकमिलन]] |isbn=978-0-230-34549-2|pages=56–57}}{{Dead link|date=फ़रवरी 2023 |bot=InternetArchiveBot }}; (d) {{citation|last=Ludden|first=David|title=India and South Asia: A Short History|url=https://books.google.com/books?id=EbFHAQAAQBAJ&pg=PA29|year=2013|publisher=[[वनवर्ल्ड पब्लिकेशन्स]]|isbn=978-1-78074-108-6|pages=29–30}}</ref>
उनका समाज विस्तृत सृजनशीलता से भरा हुआ था। <ref name="Combined-6">
(a) {{citation
|last=Ludden
|first=David|title=India and South Asia: A Short History|url=https://books.google.com/books?id=EbFHAQAAQBAJ&pg=PA28|year=2013|publisher=[[वनवर्ल्ड पब्लिकेशन्स]]|isbn=978-1-78074-108-6|pages=28–29}}; (b) {{citation|author=Glenn Van Brummelen |editor=Thomas F. Glick |editor2=Steven Livesey |editor3=Faith Wallis |title=Medieval Science, Technology, and Medicine: An Encyclopedia|chapter-url=https://books.google.com/books?id=77y2AgAAQBAJ&pg=PA46|year=2014|publisher=रूटलेज|isbn=978-1-135-45932-1|pages=46–48|chapter=Arithmetic}}
</ref>
प्रारम्भिक मध्ययुगीन काल में, [[ईसाई धर्म]], [[इस्लाम]], [[यहूदी धर्म]] और [[पारसी धर्म]] ने भारत के दक्षिणी और पश्चिमी तटों पर जड़ें जमा लीं।<ref name="Combined-8">
(a) {{citation
|last=Ludden
|first=David|title=India and South Asia: A Short History|url=https://books.google.com/books?id=EbFHAQAAQBAJ&pg=PA54|year=2013|publisher=Oneworld Publications|isbn=978-1-78074-108-6|page=54}}; (b) {{citation
|last1=Asher|first1=Catherine B.|last2=Talbot|first2=Cynthia|title=India Before Europe|url=https://books.google.com/books?id=ZvaGuaJIJgoC&pg=PA78|year=2006|publisher=Cambridge University Press|isbn=978-0-521-80904-7|pages=78–79}}; (c) {{citation
|last=Fisher|first=Michael H.|title=An Environmental History of India: From Earliest Times to the Twenty-First Century|url=https://books.google.com/books?id=kZVuDwAAQBAJ&pg=PA76|year=2018|publisher=Cambridge University Press|isbn=978-1-107-11162-2|page=76}}
</ref> [[मध्य एशिया]] से मुस्लिम सेनाओं ने भारत के उत्तरी मैदानों पर लगातार अत्याचार किया,<ref name="Combined-9">
(a) {{citation|last=Ludden|first=David|title=India and South Asia: A Short History|url=https://books.google.com/books?id=EbFHAQAAQBAJ&pg=PA68|year=2013|publisher=Oneworld Publications|isbn=978-1-78074-108-6|pages=68–70}}; (b) {{citation|last1=Asher|first1=Catherine B.|last2=Talbot|first2=Cynthia|title=India Before Europe|url=https://books.google.com/books?id=ZvaGuaJIJgoC&pg=PA19|year=2006|publisher=Cambridge University Press|isbn=978-0-521-80904-7|pages=19, 24}}
</ref> अन्ततः दिल्ली सल्तनत की स्थापना हुई और उत्तर भारत को [[इस्लामी स्वर्ण युग|मध्यकालीन इस्लाम साम्राज्य]] में मिला लिया गया।<ref name="Combined-10">
(a) {{citation
|last=Dyson
|first=Tim|title=A Population History of India: From the First Modern People to the Present Day|url=https://books.google.com/books?id=0UVvDwAAQBAJ&pg=PA48|date=20 सितम्बर 2018|publisher=ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस|isbn=978-0-19-256430-6|page=48}}; (b) {{citation
|last1=Asher|first1=Catherine B.|last2=Talbot|first2=Cynthia|title=India Before Europe|url=https://books.google.com/books?id=ZvaGuaJIJgoC&pg=PA53|year=2006|publisher=Cambridge University Press|isbn=978-0-521-80904-7|page=52}}
</ref> 15 वीं शताब्दी में, [[विजयनगर साम्राज्य]] ने दक्षिण भारत में एक लंबे समय तक चलने वाली समग्र हिन्दू संस्कृति बनाई।<ref name="AsherAsher2006-74">
{{citation
|last1=Asher
|first1=Catherine B.|last2=Talbot|first2=Cynthia|title=India Before Europe|url=https://books.google.com/books?id=ZvaGuaJIJgoC&pg=PA74|year=2006|publisher=Cambridge University Press|isbn=978-0-521-80904-7|page=74}}"
</ref> [[पंजाब]] में [[सिख धर्म]] की स्थापना हुई।<ref name="AsherAsher2006-267">
{{citation
|last1=Asher
|first1=Catherine B.|last2=Talbot|first2=Cynthia|title=India Before Europe|url=https://books.google.com/books?id=ZvaGuaJIJgoC&pg=PA267|year=2006|publisher=Cambridge University Press|isbn=978-0-521-80904-7|page=267}}
</ref><!-----Don't add this line GOOGLE TRANSLATED. 1526 में, मुगल साम्राज्य ने दो सदियों में सापेक्ष शांति की शुरुआत की, चमकदार वास्तुकला की विरासत छोड़कर।-----> धीरे-धीरे [[कंपनी राज|ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के शासन]] का विस्तार हुआ, जिसने भारत को औपनिवेशिक अर्थव्यवस्था में बदल दिया तथा अपनी [[सम्प्रभुता|सम्प्रभुता]] को भी मज़बूत किया।<ref name="Combined-11">
(a) {{citation|last1=Asher|first1=Catherine B.|last2=Talbot|first2=Cynthia|title=India Before Europe|url=https://books.google.com/books?id=ZvaGuaJIJgoC&pg=PA289|year=2006|publisher=Cambridge University Press|isbn=978-0-521-80904-7|page=289}}; (b) {{citation
|last=Fisher|first=Michael H.|title=An Environmental History of India: From Earliest Times to the Twenty-First Century|url=https://books.google.com/books?id=kZVuDwAAQBAJ&pg=PA120|year=2018|publisher=Cambridge University Press|isbn=978-1-107-11162-2|page=120}}
</ref> [[ब्रिटिश राज|ब्रिटिश राज शासन]] १८५८ में शुरू हुआ। धीरे धीरे एक प्रभावशाली राष्ट्रवादी आंदोलन शुरू हुआ जिसे अहिंसक विरोध के लिए जाना गया और ब्रिटिश शासन को समाप्त करने का प्रमुख कारक बन गया।<ref name="Marshall2001-179-181">{{citation|last=Marshall|first=P. J.|title=The Cambridge Illustrated History of the British Empire|url=https://books.google.com/books?id=S2EXN8JTwAEC&pg=PAPA179|year=2001|publisher=Cambridge University Press|isbn=978-0-521-00254-7|pages=179–181}}</ref> 1947 में ब्रिटिश [[भारत का विभाजन|भारतीय साम्राज्य]] को दो स्वतंत्र प्रभुत्वों में विभाजित किया गया, [[भारतीय अधिराज्य]] तथा [[पाकिस्तान अधिराज्य]], जिन्हें धर्म के आधार पर विभाजित किया गया।<ref name="Copland2001-71-72-78">{{harvnb|Copland|2001|pp=71–78}}</ref><ref name="MetcalfMetcalf2006-222">{{harvnb|Metcalf|Metcalf|2006|p=222}}</ref>
1950 से भारत एक संघीय गणराज्य है। भारत की जनसंख्या 1951 में 36.1 करोड़ से बढ़कर 2011 में 121.1 करोड़, 2021 में बढ़कर 140.76 करोड़ हो गई।<ref name="Dyson2018-219">
{{citation
|last=Dyson|first=Tim|title=A Population History of India: From the First Modern People to the Present Day|url=https://books.google.com/books?id=3TRtDwAAQBAJ&pg=PA219|year=2018|publisher=ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस|isbn=978-0-19-882905-8|pages=219, 262}}
</ref> [[प्रति व्यक्ति आय]] $64 से बढ़कर $1,498, 2020- 21 में $2150, शुरुआती 2022- 23 में $2450 हो गई और इसकी साक्षरता दर 16.6% से बढ़कर 74.04% पुरुषों के लिए एवम 64% महिलाओं की हो गई। भारत एक तेज़ी से बढ़ती हुई [[जी-20|प्रमुख अर्थव्यवस्था]] और [[भारत में सूचना प्रौद्योगिकी|सूचना प्रौद्योगिकी]] सेवाओं का केंद्र बन गया है।<ref name="MetcalfMetcalf2012-265">
{{citation
|last1=Metcalf
|first1=Barbara D.|last2=Metcalf|first2=Thomas R.|title=A Concise History of Modern India|url=https://books.google.com/books?id=mjIfqyY7jlsC&pg=PA265|year=2012|publisher=Cambridge University Press|isbn=978-1-107-02649-0|pages=265–266}}
</ref> [[भारतीय अन्तरिक्ष अनुसंधान संगठन|अन्तरिक्ष क्षेत्र]] में भारत ने उल्लेखनीय तथा अद्वितीय प्रगति की। भारतीय फ़िल्में, संगीत और आध्यात्मिक शिक्षा वैश्विक संस्कृति में विशेष भूमिका निभाती हैं।<ref name="MetcalfMetcalf2012-266">
{{citation
|last1=Metcalf
|first1=Barbara D.|last2=Metcalf|first2=Thomas R.|title=A Concise History of Modern India|url=https://books.google.com/books?id=mjIfqyY7jlsC&pg=PA266|year=2012|publisher=Cambridge University Press|isbn=978-1-107-02649-0|page=266}}
</ref> भारत ने ग़रीबी दर को काफ़ी हद तक कम कर दिया है।<ref name="Dyson2018-216-a">
{{citation
|last=Dyson|first=Tim|title=A Population History of India: From the First Modern People to the Present Day|url=https://books.google.com/books?id=3TRtDwAAQBAJ&pg=PA216|year=2018|publisher=ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस|isbn=978-0-19-882905-8|page=216}}
</ref> भारत देश [[परमाणु अस्त्रों से युक्त देशों की सूची|परमाणु बम रखने वाला देश]] है। भारत-चीन सीमा पर भारत का चीन से विवाद चल रहा है। [[कश्मीर]] क्षेत्र को लेकर भारत और [[पाकिस्तान]] में विवाद है।<ref name=kashmir-disputes>(a) {{citation |title=Kashmir, region Indian subcontinent |encyclopedia=Encyclopaedia Britannica |url=https://www.britannica.com/place/Kashmir-region-Indian-subcontinent |access-date=15 अगस्त 2019 |url-access=subscription |quote=Kashmir, region of the northwestern Indian subcontinent ... has been the subject of dispute between India and Pakistan since the partition of the Indian subcontinent in 1947. |archive-url=https://web.archive.org/web/20190813203817/https://www.britannica.com/place/Kashmir-region-Indian-subcontinent |archive-date=13 अगस्त 2019 |url-status=live }};<br /> (b) {{citation |last1=Pletcher |first1=Kenneth |title=Aksai Chin, Plateau Region, Asia |encyclopedia=Encyclopaedia Britannica |url=https://www.britannica.com/place/Aksai-Chin |access-date=16 अगस्त 2019 |url-access=subscription |quote=Aksai Chin, Chinese (Pinyin) Aksayqin, portion of the Kashmir region, ... constitutes nearly all the territory of the Chinese-administered sector of Kashmir that is claimed by India |archive-url=https://web.archive.org/web/20190402090308/https://www.britannica.com/place/Aksai-Chin |archive-date=2 अप्रैल 2019 |url-status=live }}; <br /> (c) {{cite encyclopedia|chapter=Kashmir|encyclopedia=Encyclopedia Americana |publisher=Scholastic Library Publishing|chapter-url=https://books.google.com/books?id=l_cWAQAAMAAJ&pg=PA328 |year=2006 |isbn=978-0-7172-0139-6 |page=328 |author=C. E Bosworth |title=Encyclopedia Americana: Jefferson to Latin |quote=KASHMIR, kash'mer, the northernmost region of the Indian subcontinent, administered partly by India, partly by Pakistan, and partly by China. The region has been the subject of a bitter dispute between India and Pakistan since they became independent in 1947}}</ref> [[भारत में लैंगिक असमानता|लैंगिक असमानता]], बाल शोषण, [[भारत में कुपोषण|बाल कुपोषण]],<ref name="NarayanJohn2018-lead">{{cite journal|last1=Narayan|first1=Jitendra|last2=John|first2=Denny|last3=Ramadas|first3=Nirupama|title=Malnutrition in India: status and government initiatives|journal=Journal of Public Health Policy|volume=40|issue=1|year=2018|pages=126–141|issn=0197-5897|doi=10.1057/s41271-018-0149-5|pmid=30353132}}
</ref> ग़रीबी, भ्रष्टाचार, प्रदूषण इत्यादि भारत के सामने प्रमुख चुनौतियाँ है।<ref name="BalakrishnanDey2019-lead">{{cite journal|last1=Balakrishnan|first1=Kalpana|last2=Dey|first2=Sagnik|title=The impact of air pollution on deaths, disease burden, and life expectancy across the states of India: the Global Burden of Disease Study 2017|journal=The Lancet Planetary Health|volume=3|issue=1|year=2019|pages=e26–e39|display-authors=etal|issn=2542-5196|doi=10.1016/S2542-5196(18)30261-4|pmid=30528905}}
</ref> 21.4% क्षेत्र पर वन है।<ref name="Jha2018-lead">
{{citation
|last=Jha|first=Raghbendra|title=Facets of India's Economy and Her Society Volume II: Current State and Future Prospects|url=https://books.google.com/books?id=9n9SDwAAQBAJ&pg=PA198|year=2018|publisher=Springer|isbn=978-1-349-95342-4|page=198}}
</ref> [[भारतीय पशु और पक्षी|भारत के वन्यजीव]], जिन्हें परंपरागत रूप से [[भारत की संस्कृति]] में सहिष्णुता के साथ देखा गया है,<ref name="WoodroffeThirgood2005">{{citation|last1=Karanth|first1=K. Ullas|last2=Gopal|first2=Rajesh |editor=Rosie Woodroffe |editor2=Simon Thirgood |editor3=Alan Rabinowitz |title=People and Wildlife, Conflict Or Co-existence?|chapter-url=https://books.google.com/books?id=6vNzRzcjntAC&pg=PA374|year=2005|publisher=Cambridge University Press|isbn=978-0-521-53203-7|page=374|chapter=An ecology-based policy framework for human-tiger coexistence in India}}</ref> इन जंगलों और अन्य जगहों पर [[भारत के संरक्षित क्षेत्र|संरक्षित आवासों]] में निवास करते हैं।
12 फ़रवरी वर्ष 1948 में [[महात्मा गांधी|महात्मा गाँधी]] के अस्थि कलश जिन 12 तटों पर विसर्जित किए गए थे, त्रिमोहिनी संगम भी उनमें से एक है |
==नामोत्पत्ति==
{{मुख्य|भारत नाम की उत्पत्ति}}
भारत के दो आधिकारिक नाम हैं- [[हिन्दी]] में '''भारत''' और [[अंग्रेज़ी]] में '''इंडिया''' (''India'')। इंडिया नाम की उत्पत्ति [[सिंधु नदी]] के [[अंग्रेज़ी]] नाम "इंडस" से हुई है।{{sfn|Oxford English Dictionary}} [[भागवत पुराण|श्रीमद्भागवत महापुराण]] में वर्णित एक कथा के अनुसार भारत नाम [[मनु]] के वंशज तथा [[ऋषभदेव]] के सबसे बड़े बेटे एक प्राचीन सम्राट '''[[भरत (भागवत)|भरत]]''' के नाम से लिया गया है। <ref>{{Cite web|url=https://archive.org/stream/HindiBookBhagwatPuran/Hindi%20Book-Bhagwat-Puran#page/n274/mode/1up|title=Hindi Book Bhagwat Puran|website=archive.org|access-date=2020-04-29}}</ref><ref>{{Cite book|url=http://archive.org/details/VayuPuranam|title=Vayu Puranam}}</ref><ref>{{Cite book|url=http://archive.org/details/puran_varah|title=Varah Puran - वराह पुराण - हिन्दी|last=Sanatan}}</ref><ref>{{Cite book|url=http://archive.org/details/puran_ling|title=Ling Puran - लिंग पुराण - हिन्दी|last=Sanatan}}</ref><ref>{{Cite book|url=http://archive.org/details/puran_narad|title=Narad Puran - नारद पुराण - हिन्दी|last=Sanatan}}</ref><ref>{{Cite book|url=http://archive.org/details/puran_narsimha|title=Narsimha Puran - नरसिंह पुराण - हिन्दी|last=Sanatan}}</ref> एक व्युत्पत्ति के अनुसार भारत (भा + रत) शब्द का मतलब है आंतरिक प्रकाश या विदेक-रूपी प्रकाश में लीन। एक तीसरा नाम [[हिन्दुस्तान|हिन्दुस्तान]] भी है जिसका अर्थ ''हिन्द'' ''की भूमि'', यह नाम विशेषकर [[अरब देश|अरब]] तथा [[ईरान]] में प्रचलित हुआ। <ref>{{Cite web|url=https://scroll.in/article/855876/land-of-hindus-mohan-bhagwat-narendra-modi-and-the-sangh-parivar-are-using-hindustan-all-wrong|title=Land of Hindus? Mohan Bhagwat, Narendra Modi and the Sangh Parivar are using ‘Hindustan’ all wrong|first=Shoaib|last=Daniyal|website=Scroll.in|accessdate=1 मार्च 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190212132749/https://scroll.in/article/855876/land-of-hindus-mohan-bhagwat-narendra-modi-and-the-sangh-parivar-are-using-hindustan-all-wrong|archive-date=12 फ़रवरी 2019|url-status=dead}}</ref> <ref>{{cite web|url=http://www.britannica.com/eb/article-9040520/Hindustan|title=Hindustan|year=2007|publisher=[[ब्रिटैनिका विश्वकोष]], Inc.|archive-url=https://web.archive.org/web/20071016055949/http://www.britannica.com/eb/article-9040520/Hindustan|archive-date=16 अक्तूबर 2007|accessdate=18 जून 2007|url-status=live}}</ref> बहुत पहले भारत का एक मुंहबोला नाम ''सोने की चिड़िया'' भी प्रचलित था। <ref>{{Cite web|url=https://www.jagranjosh.com/general-knowledge/why-was-india-called-as-golden-bird-in-hindi-1533709498-2|title=भारत को सोने की चिड़िया क्यों कहा जाता था?|date=2019-01-24|website=Jagranjosh.com|access-date=2021-05-07}}</ref> संस्कृत महाकाव्य महाभारत में वर्णित है की वर्तमान उत्तर भारत का क्षेत्र भारत के अन्तर्गत आता था। भारत को कई अन्य नामों इंडिया, भारतवर्ष, आर्यावर्त, हिन्द, हिन्दुस्तान, जंबूद्वीप आदि से भी जाना जाता है।
== इतिहास ==
<!-- यह अंश एक सार है। अगर आप कुछ बदलाव या बढोतरी करना चाहें तो [[भारतीय इतिहास]] लेख में करें -->
{{main|भारत का इतिहास}}
[[चित्र:Sanchi2.jpg|thumb|तीसरी शताब्दी में सम्राट [[अशोक]] द्वारा बनाया गया [[मध्य प्रदेश]] में [[साँची का स्तूप]]]]
===प्राचीन भारत===
{{multiple image|perrow=1/1|total_width=300|caption_align=center
| align = left
| image_style = border:none;
| image1 = 1500-1200 BCE Rigveda, manuscript page sample i, Mandala 1, Hymn 1 (Sukta 1), Adhyaya 1, lines 1.1.1 to 1.1.9, Sanskrit, Devanagari.jpg
| image2 = Battle at Lanka, Ramayana, Udaipur, 1649-53.jpg
| footer = {{font|size=100%|font=Sans-serif|text=(शीर्ष) [[ऋग्वेद]] की एक मध्यकालीन [[पांडुलिपि]], मौखिक रूप से, १५००-१२०० ई.पू. (नीचे) संस्कृत महाकाव्य [[रामायण]] की एक पांडुलिपि से एक चित्रण}}
}}
<!-----इस अनुभाग में किसी भी तरह का परिवर्तन न करें | इसकी अच्छी तरह से जाँच की गयी है। इसपर कोई भी भाषागत त्रुटि का सुधार तो किया है सकता है परन्तु कोई भी मान परिवर्तन न करें। कोई भी स्रोत न तो जोड़ें और न ही मिटायें। यदि फिर भी कोई त्रुटि दिखे तो कृपया पृष्ठ के वार्ता पर चर्चा करें या चौपाल पर सूचित कर त्रुटियों से अवगत करवाएं।----->
भारत का इतिहास अत्यंत प्राचीन और समृद्ध रहा है, जिसमें सिंधु घाटी सभ्यता से लेकर मौर्य और गुप्त साम्राज्यों तथा स्वतंत्रता संग्राम तक अनेक महत्वपूर्ण चरण शामिल हैं।लगभग 55,000 वर्ष पहले ([[प्राचीन भारत]]) <ref>{{cite web |last1=Ayra |first1=Agrawal |title=भारत का इतिहास |url=https://findgyan.com/history-of-india-ancient-in-hindi-2022/ |website=Find Gyan |accessdate=14 फरवरी 2022 |ref=५५००० |archive-date=18 फ़रवरी 2022 |archive-url=https://web.archive.org/web/20220218235422/https://findgyan.com/history-of-india-ancient-in-hindi-2022/ |url-status=dead }}</ref> आधुनिक मानव या [[होमो सेपियन्स|होमो सेपियंस]] [[अफ्रीका]] से [[भारतीय उपमहाद्वीप]] में पहुँचे थे। <ref name="Dyson2018">{{citation|last=Dyson|first=Tim |title=ए पॉप्युलेशन हिस्ट्री ऑफ इंडिया: प्रारम्भिक मानव से लेकर वर्तमान मानव तक|url=https://books.google.com/books?id=3TRtDwAAQBAJ&pg=PA1|year=2018 |publisher=[[ऑक्सफोर्ड यूनिवरसिटि प्रेस]]|isbn=978-0-19-882905-8|page=1}} उद्धरण: "आधुनिक मानव - होमो सेपियन्स- की उत्पत्ति अफ्रीका में हुई थी । फिर, 60,000 से 80,000 साल के बीच कुछ समय पहले, उनमें से कुछ छोटे समूहों ने भारतीय उपमहाद्वीप के उत्तर-पश्चिम हिस्से में प्रवेश करना शुरू कर दिया था। ऐसा लगता है कि शुरू में वे तट के रास्ते से आए थे। ... यह वास्तव में निश्चित है कि 55,000 साल पहले उपमहाद्वीप में होमो सेपियन्स (आधुनिक मनुष्य)थे, भले ही सबसे पुराने जीवाश्म जो वर्तमान से लगभग 30,000 साल पहले के हो। (पृष्ठ 1)"</ref><ref name="PetragliaAllchin">{{cite book |author1=Michael D. Petraglia |author2=Bridget Allchin |author-link2=Bridget Allchin |title=दक्षिण एशिया में मानव का विकास और इतिहास: पुरातत्व, जैविक नृविज्ञान, भाषाविज्ञान और आनुवंशिकी में अन्तर-अनुशासनात्मक अध्ययन|url=https://books.google.com/books?id=Qm9GfjNlnRwC&pg=PA10 |publisher=Springer Science + Business Media |page=6 |isbn=978-1-4020-5562-1|date=22 मई 2007 }}</ref><ref name="Fisher2018">{{citation|last=Fisher|first=Michael H.|title=भारत का एक पर्यावरणीय इतिहास: प्रारम्भ से २१ वीं शताब्दी तक|url=https://books.google.com/books?id=kZVuDwAAQBAJ&pg=PA23|year=2018|publisher=Cambridge University Press|isbn=978-1-107-11162-2|page=23}}</ref> [[दक्षिण एशिया]] में ज्ञात मानव का प्राचीनतम अवशेष 30,000 वर्ष पुराना है।{{sfn|Petraglia|Allchin|2007|p=6}} [[भीमबेटका]], [[मध्य प्रदेश]] की गुफाएँ भारत में मानव जीवन का प्राचीनतम प्रमाण हैं जो आज भी देखने को मिलता है। प्रथम स्थाई बस्तियों ने 9000 वर्ष पूर्व स्वरुप लिया था। 6,500 ईसा पूर्व तक आते आते मनुष्य ने खेती करना, जानवरों को पालना तथा घरों का निर्माण करना शुरू कर दिया था, जिसका अवशेष [[मेहरगढ़]] में मिला था जो कि अभी [[पाकिस्तान]] में है। {{sfn|Coningham|Young|2015|pp = 104–105}} यह धीरे-धीरे [[सिंधु घाटी सभ्यता]] के रूप में विकसित हुए,{{sfn|Kulke|Rothermund|2004|pp = 21–23}}{{sfn|Coningham|Young|2015|pp = 104–105}} जो की [[दक्षिण एशिया]] की सबसे प्राचीन शहरी सभ्यता है।{{sfn|Singh|2009|p = 181}} यह [[२६वीं शताब्दी ईसा पूर्व|2600 ईसा पूर्व]] और [[२०वीं शताब्दी ईसा पूर्व|1900 ईसा पूर्व]] के मध्य अपने चरम पर थी।<ref>{{cite web |title = Introduction to the Ancient Indus Valley |url = http://www.harappa.com/indus/indus1.html |accessdate = 18 जून 2007 |year = 1996 |publisher = Harappa |archive-url = https://www.webcitation.org/64LGyivx4?url=http://www.harappa.com/indus/indus1.html |archive-date = 31 दिसंबर 2011 |url-status = dead }}</ref> यह वर्तमान पश्चिम भारत तथा पाकिस्तान में स्थित है।{{sfn|Possehl|2003|p = 2}} यह [[मोहन जोदड़ो|मोहनजोदड़ो]], [[हड़प्पा]], [[धोलावीरा]], और [[कालीबंगा]] जैसे शहरों के आसपास केंद्रित थी और विभिन्न प्रकार के निर्वाह पर निर्भर थी, यहाँ व्यापक बाजार था तथा शिल्प उत्पादन होता था।{{sfn|Singh|2009|p = 181}}
2000 से 500 ईसा पूर्व तक [[ताम्र पाषाण युग (चाल्कोलिथिक)|ताम्र पाषाण युग]] संस्कृति से [[लौह युग]] का आगमन हुआ।{{sfn|Singh|2009|p = 255}} इसी युग को [[हिन्दू धर्म]] से जुड़े प्राचीनतम [[धर्म ग्रंथ]],{{sfn|Singh|2009|pp = 186–187}} [[वेद|वेदों]] का रचनाकाल माना जाता है{{sfn|Witzel|2003|pp = 68–69}} तथा [[पंजाब]] तथा [[सिन्धु-गंगा का मैदान|गंगा के ऊपरी मैदानी क्षेत्र]] को [[वैदिक संस्कृति]] का निवास स्थान माना जाता है।{{sfn|Singh|2009|p = 255}} कुछ इतिहासकारों का मानना है की इसी युग में उत्तर-पश्चिम से [[आर्य प्रवास सिद्धान्त|भारतीय-आर्यन]] का आगमन हुआ था।{{Sfn|Singh|2009|pp=186–187}} इसी अवधि में [[जाति|जाति प्रथा]] भी प्रारम्भ हुई थी।{{Sfn|Kulke|Rothermund|2004|pp=41–43}}
[[वैदिक सभ्यता]] में ईसा पूर्व 6 वीं शताब्दी में [[गंगा]] के मैदानी क्षेत्र तथा उत्तर-पश्चिम भारत में छोटे-छोटे राज्य तथा उनके प्रमुख मिल कर 16 कुलीन और राजशाही में सम्मिलित हुए जिन्हे ''[[महाजनपद]]'' के नाम से जाना जाता है। {{sfn|Singh|2009|pp = 260–265}} {{sfn|Kulke|Rothermund|2004|pp = 53–54}} बढ़ते शहरीकरण के बीच दो अन्य स्वतंत्र अ-वैदिक धर्मों का उदय हुआ। [[महावीर]] के जीवन काल में जैन धर्म अस्तित्व में आया।{{sfn|Singh|2009|pp = 312–313}} [[गौतम बुद्ध]] की शिक्षाओं पर आधारित [[बौद्ध धर्म]] ने मध्यम वर्ग के अनुयायिओं को छोड़कर अन्य सभी वर्ग के लोगों को आकर्षित किया; इसी काल में भारत का इतिहास लेखन प्रारम्भ हुआ। {{sfn|Kulke|Rothermund|2004|pp = 54–56}}{{sfn|Stein|1998|p = 21}}{{sfn|Stein|1998|pp = 67–68}} <!-------------------------------------------------------------------------- सूचना: कृपया इस पंक्ति का मिलान अंग्रेजी विकिपीडिया के लेख से कर लें। अनुवाद में त्रुटि है।-----------------------------> बढ़ती शहरी सम्पदा के युग में, दोनों धर्मों ने त्याग को एक आदर्श माना,{{sfn|Singh|2009|p = 300}} और दोनों ने लंबे समय तक चलने वाली मठ परंपराओं की स्थापना की। राजनीतिक रूप से तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व तक [[मगध साम्राज्य]] ने अन्य राज्यों को अपने अंदर मिला कर मौर्य साम्राज्य के रूप में उभरा। {{sfn|Singh|2009|p = 319}} [[मगध]] ने [[दक्षिण भारत]] के कुछ हिस्सों को छोड़कर पूरे भारत पर अपना अधिपत्य स्थापित कर लिया किन्तु कुछ अन्य प्रमुख बड़े राज्यों ने इसके प्रमुख क्षेत्रों को अलग कर लिया। {{sfn|Stein|1998|pp = 78–79}}{{sfn|Kulke|Rothermund|2004|p = 70}} मौर्य राजाओं को उनके साम्राज्य की उन्नति के लिए तथा उच्च जीवन सतर के लिए जाना जाता है क्योंकि [[अशोक|सम्राट अशोक]] ने [[बौद्ध धम्म]] की स्थापना की तथा शस्त्र मुक्त सेना का निर्माण किया।{{sfn|Singh|2009|p = 367}}{{sfn|Kulke|Rothermund|2004|p = 63}}180 ईसवी के आरम्भ से [[मध्य एशिया]] से कई आक्रमण हुए, जिनके परिणामस्वरूप उत्तर भारतीय उपमहाद्वीप में [[यूनानी]], [[शक]], [[पार्थी]] और अन्ततः [[कुषाण]] राजवंश स्थापित हुए। [[तीसरी शताब्दी]] के आगे का समय जब भारत पर [[गुप्त वंश]] का शासन था, भारत का ''स्वर्णिम काल'' कहलाया।<ref>{{cite web|url=http://india.gov.in/knowindia/ancient_history4.php|title=Gupta period has been described as the Golden Age of Indian history|accessdate=3 अक्टूबर 2007|publisher=[[राष्ट्रीय सूचना-विज्ञान केन्द्र]] (NIC)|archive-url=https://web.archive.org/web/20091227223339/http://india.gov.in/knowindia/ancient_history4.php|archive-date=27 दिसंबर 2009|url-status=live}}</ref>
[[तमिल भाषा|तमिल]] के ''[[संगम साहित्य]]'' के अनुसार ईसा पूर्व 200 से 200 ईस्वी तक दक्षिण प्रायद्वीप पर [[चेर राजवंश]], [[चोल राजवंश]] तथा [[पांड्य राजवंश]] का शासन था जिन्होंने बड़े सतर पर [[रोमन साम्राज्य|भारत और रोम के व्यापारिक संबंध]] और [[पश्चिमी एशिया|पश्चिम]] और [[दक्षिण पूर्व एशिया]] के साम्राज्यों के साथ व्यापर किया।{{sfn|Stein|1998|pp = 89–90}}{{sfn|Singh|2009|pp = 408–415}} चौथी-पाँचवी शताब्दी के बीच [[गुप्त साम्राज्य]] ने वृहद् गंगा के मैदानी क्षेत्र में प्रशासन तथा कर निर्धारण की एक जटिल प्रणाली बनाई; यह प्रणाली बाद के भारतीय राज्यों के लिए एक आदर्श बन गई। {{sfn|Kulke|Rothermund|2004|pp = 89–91}}{{sfn|Singh|2009|p = 545}} गुप्त साम्राज्य में भक्ति पर आधारित हिन्दू धर्म का प्रचलन हुई। {{sfn|Stein|1998|pp = 98–99}} [[प्राचीन भारतीय विज्ञान तथा तकनीक|विज्ञान]], [[भारतीय कला|कला]], [[भारतीय साहित्य|साहित्य]], [[भारतीय गणित|गणित]], [[खगोलशास्त्र]], [[प्राचीन प्रौद्योगिकी]], [[धर्म]], तथा [[दर्शन]] इन्हीं राजाओं के शासनकाल में फले-फूले, जो शास्त्रीय संस्कृत में रचा गया। {{sfn|Singh|2009|p = 545}}
===मध्यकालीन भारत===
६०० से १२०० के बीच का समय क्षेत्रीय राज्यों में सांस्कृतिक उत्थान के युग के रूप में जाना जाता है।{{sfn|Stein|1998|p = 132}} [[कन्नौज]] के राजा [[हर्षवर्धन|हर्ष]] ने ६०६ से ६४७ तक गंगा के मैदानी क्षेत्र में शासन किया तथा उसने दक्षिण में अपने राज्य का विस्तार करने का प्रयास किया किन्तु दक्क्न के [[चालुक्य राजवंश|चालुक्यों]] ने उसे हरा दिया।{{sfn|Stein|1998|pp = 119–120}} उसके उत्तराधिकारी ने पूर्व की और राज्य का विस्तार करना चाहा किन्तु [[बंगाल]] के [[पाल वंश|पाल]] शासकों से उसे हारना पड़ा।{{sfn|Stein|1998|pp = 119–120}} जब चालुक्यों ने दक्षिण की और विस्तार करने का प्रयास किया तो [[पल्लव राजवंश|पल्ल्वों]] ने उन्हें पराजित कर दिया, जिनका सुदूर दक्षिण में [[पाण्ड्य राजवंश|पांड्यों]] तथा [[चोल राजवंश|चोलों]] द्वारा उनका विरोध किया जा रहा था।{{sfn|Stein|1998|pp = 119–120}} इस काल में कोई भी शासक एक साम्राज्य बनाने में सक्षम नहीं था और लगातार मूल भूमि की तुलना में दुसरे क्षेत्र की ओर आगे बढ़ने का क्रम जारी था।{{sfn|Stein|1998|p = 132}} इस अवधि में नये शासन के कारण जाति में बांटे गए सामान्य कृषकों के लिए कृषि करना और सहज हो गया।{{sfn|Stein|1998|pp = 121–122}} जाति व्यवस्था के परिणामस्वरूप स्थानीय मतभेद होने लगे।{{sfn|Stein|1998|pp = 121–122}}
6 और 7 वीं शताब्दी में, पहली भक्ति भजन तमिल भाषा में बनाया गया था। पूरे भारत में उनकी नकल की गई और हिन्दू धर्म के पुनरुत्थान और इसने उपमहाद्वीप की सभी आधुनिक भाषाओं के विकास का नेतृत्व किया। राजघरानो ने लोगों को राजधानी की आकर्षित किया। शहरीकरण के साथ शहरों में बड़े स्तर पर मंदिरों का निर्माण किया।{{sfn|Stein|1998|p = 124}} दक्षिण भारत की राजनीतिक और सांस्कृतिक व्यवस्था का प्रभाव दक्षिण एशिया के देशों [[म्यांमार]], [[थाईलैंड]], [[लाओस]], [[कंबोडिया]], [[वियतनाम]], [[फिलीपींस]], [[मलेशिया]] और [[जावा (द्वीप)|जावा]] में देखा जा सकता है।{{sfn|Stein|1998|pp = 127–128}}
१० वीं शताब्दी के बाद घुमन्तु मुस्लिम वंशों ने जातियता तथा धर्म द्वारा संघठित तेज घोड़ों से युक्त बड़ी सेना के द्वारा उत्तर-पश्चिमी मैदानों पर बार बार आकर्मण किया, अन्ततः १२०६ [[दिल्ली सल्तनत|इस्लामीक दिल्ली सल्तनत]] की स्थापना हुई।{{sfn|Ludden|2002|p = 68}} उन्हें उतर भारत को अधिक नियंत्रित करना था तथा दक्षिण भारत पर आकर्मण करना था। भारतीय कुलीन वर्ग के विघटनकारी सल्तनत ने बड़े पैमाने पर गैर-मुस्लिमों को स्वयं के रीतिरिवाजों पर छोड़ दिया।{{sfn|Asher|Talbot|2008|p = 47}}{{sfn|Metcalf|Metcalf|2006|p = 6}} १३ वीं शताब्दी में [[मंगोल साम्राज्य|मंगोलों]] द्वारा किये के विनाशकारी आकर्मण से भारत की रक्षा की। सल्तनत के पतन के कारण स्वशासित [[विजयनगर साम्राज्य|विजयनगर साम्राज्य]] का मार्ग प्रशस्त हुआ।{{sfn|Asher|Talbot|2008|p = 53}} एक मजबूत [[शैव|शैव परंपरा]] और सल्तनत की सैन्य तकनीक पर निर्माण करते हुए साम्राज्य ने भारत के विशाल भाग पर शासन किया और इसके बाद लंबे समय तक दक्षिण भारतीय समाज को प्रभावित किया।{{sfn|Metcalf|Metcalf|2006|p = 12}}{{sfn|Asher|Talbot|2008|p = 53}}
===प्रारम्भिक आधुनिक भारत===
१७वीं शताब्दी के मध्यकाल में [[पुर्तगाल]], [[डच ईस्ट इंडिया कंपनी|डच]], [[फ्रांस]], [[यूनाइटेड किंगडम|ब्रिटेन]] सहित अनेक यूरोपीय देशों, जो भारत से व्यापार करने के इच्छुक थे, उन्होंने देश की आतंरिक शासकीय अराजकता का फायदा उठाया हालांकि अंग्रेजों ने व्यापार करने के बहाने से देश में आए और आंतरिक विद्रोह करवाने की कोशिश की ताकि वे आपस में लड़ाई करवाकर भारतीयों को कमजोर कर सकें। इसमें वे कामयाब हुए और [[१८४०]] तक लगभग सम्पूर्ण देश पर शासन करने में सफल हुए। वास्तव में ये शासन की दृष्टि से नहीं आए बल्कि वे देश की भोलीभाली जनता को लूटना चाहते थे। क्योंकि भारत देश में बाहर से आया हर कोई मेहमान होता है और उसे वे देवता का दर्जा देते हैं। इसी का फायदा अंग्रेजों ने उठाया और धीरे धीरे आंतरिक अशांति इस प्रकार फैलाई की सबसे पहले यहां की शिक्षा व्यवस्था को बदला जो की विश्वं में सबसे अच्छी व्यवस्था थी। और वर्ण व्यवस्था को जाती वाद में बदल दिया गया। ऊंची नीची जातियों में विभाजन किया। मुस्लिम धर्म वालों को धक्के से गाय माता की हत्या करवाने में लगा दिया। और फिर हिन्दुओं को बोला की देखो आपके मुस्लिम भाई , आपकी माता की हत्या कर रहे हैं। ये तो आपके भाई कहलाने के लायक भी नहीं है। इस प्रकार देखते ही देखते दंगा फैला दिया। किन्तु[[१८५७]] में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कम्पनी के विरुद्ध असफल विद्रोह, जो [[१८५७ का प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम|भारतीय स्वतन्त्रता के प्रथम संग्राम]] से भी जाना जाता है, के बाद भारत का अधिकांश भाग सीधे [[अंग्रेजी शासन]] के प्रशासनिक नियंत्रण में आ गया।<ref>{{cite web|url=http://india.gov.in/knowindia/history_freedom_struggle.php|title=History : Indian Freedom Struggle (1857-1947)|accessdate=3 अक्टूबर 2007|publisher=[[राष्ट्रीय सूचना-विज्ञान केन्द्र|राष्ट्रीय सूचना-विज्ञान केन्द्र (NIC)]]|quote=And by 1856, the British conquest and its authority were firmly established.|archive-url=https://web.archive.org/web/20091227213048/http://india.gov.in/knowindia/history_freedom_struggle.php|archive-date=27 दिसंबर 2009|url-status=dead}}</ref>
[[File:Konarak Sun Temple Wheel By Piyal Kundu (2).jpg|thumb|270px| कोणार्क-चक्र - १३वीं शताब्दी में बने [[उड़ीसा]] के सूर्य मन्दिर में स्थित, यह विश्व के सब से प्रसिद्घ ऐतिहासिक स्मारकों में से एक है।]]
===आधुनिक भारत===
बीसवी सदी के प्रारम्भ में आधुनिक शिक्षा के प्रसार और विश्वपटल पर बदलती राजनीतिक परिस्थितियों के चलते भारत में एक बौद्धिक आन्दोलन का सूत्रपात हुआ जिसने सामाजिक और राजनीतिक स्तरों पर अनेक परिवर्तनों एवम आन्दोलनों की नीव रखी। १८८५ में [[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस]] की स्थापना ने स्वतन्त्रता आन्दोलन को एक गतिमान स्वरूप दिया। बीसवीं शताब्दी के प्रारम्भ में लम्बे समय तक स्वतंत्रता प्राप्ति के लिये विशाल अहिंसावादी संघर्ष चला, जिसका नेतृत्व [[महात्मा गांधी]], जो आधिकारिक रूप से आधुनिक भारत के 'राष्ट्रपिता' के रूप में संबोधित किये जाते हैं, इसी सदी में [[भारत के सामाजिक आन्दोलन]], जो सामाजिक स्वतंत्रता प्राप्ति के लिए भी विशाल अहिंसावादी एवं क्रांतिवादी संघर्ष चला, जिसका नेतृत्व [[भीमराव आंबेडकर|डॉ॰ बाबासाहेब आंबेडकर]] ने किया, जो ‘आधुनिक भारत के निर्माता’, ‘संविधान निर्माता' एवं ‘दलितों के मसिहा’ के रूप में संबोधित किये जाते है। इसके साथ-साथ [[चंद्रशेखर आजाद]], [[सरदार भगत सिंह]], [[सुखदेव]], [[राजगुरु|राजगुरू]], [[नेताजी सुभाष चन्द्र बोस]], आदि के नेतृत्व में चले क्रांतिकारी संघर्ष के फलस्वरुप [[१५ अगस्त]], [[१९४७]] भारत ने [[अंग्रेजी शासन]] से पूर्णतः [[स्वतंत्रता]] प्राप्त की। तदुपरान्त [[२६ जनवरी]], [[१९५०]] को भारत एक [[गणराज्य]] बना।
एक बहुजातीय तथा बहुधार्मिक राष्ट्र होने के कारण भारत को समय-समय पर [[साम्प्रदायिक]] तथा जातीय विद्वेष का शिकार होना पड़ा है। क्षेत्रीय असंतोष तथा विद्रोह भी हालाँकि देश के अलग-अलग हिस्सों में होते रहे हैं, पर इसकी [[धर्मनिरपेक्षता]] तथा जनतांत्रिकता, केवल १९७५-७७ को छोड़, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री [[इंदिरा गांधी]] ने [[आपातकाल]] की घोषणा कर दी थी, अक्षुण्ण रही है।
भारत के पड़ोसी राष्ट्रों के साथ अनसुलझे सीमा विवाद हैं। इसके कारण इसे छोटे पैमानों पर युद्ध का भी सामना करना पड़ा है। १९६२ में [[चीन]] के साथ, तथा १९४७, १९६५, १९७१ एवं १९९९ में [[पाकिस्तान]] के साथ लड़ाइयाँ हो चुकी हैं।
भारत [[गुटनिरपेक्ष आन्दोलन]] तथा [[संयुक्त राष्ट्र संघ]] के संस्थापक सदस्य देशों में से एक है।
१९७४ में भारत ने अपना पहला [[परमाणु परीक्षण]] किया था जिसके बाद १९९८ में ५ और परीक्षण किये गये। १९९० के दशक में किये गये आर्थिक सुधारीकरण की बदौलत आज देश सबसे तेज़ी से विकासशील राष्ट्रों की सूची में आ गया है।
==भूगोल एवं जलवायु==
{{main|भारत का भूगोल}}
=== भू-आकृतिक विशेषतायें===
[[चित्र:Yumthanghimalayas.jpg|thumb|right|300px|हिमालय उत्तर में जम्मू और कश्मीर से लेकर पूर्व में अरुणांचल प्रदेश तक भारत की अधिकतर पूर्वी सीमा बनाता है]]
[[File:Rathong from Zemathang2.jpg|thumb|right|300px| राथोंग शिखर, [[कंचनजंघा]] के समीप स्थित, जेमाथांग ग्लेशियर के पास से लिया गया चित्र]]
भारत पूरी तौर पर [[भारतीय प्लेट]] के ऊपर स्थित है जो भारतीय आस्ट्रेलियाई प्लेट (''Indo-Australian Plate'') का उपखण्ड है। प्राचीन काल में यह प्लेट गोंडवानालैण्ड का हिस्सा थी और [[अफ्रीका]] और [[अंटार्कटिका]] के साथ जुड़ी हुई थी। तकरीबन ९ करोड़ वर्ष पहले क्रीटेशियस काल में भारतीय प्लेट १५ सेमी. वर्ष की गति से उत्तर की ओर बढ़ने लगी और इओसीन पीरियड में यूरेशियन प्लेट से टकराई। भारतीय प्लेट और यूरेशियन प्लेट के मध्य स्थित [[टेथीज सागर | टेथीस]] भूसन्नति के अवसादों के वालन द्वारा ऊपर उठने से तिब्बत पठार और [[हिमालय]] पर्वत का निर्माण हुआ। सामने की द्रोणी में बाद में अवसाद जमा हो जाने से सिन्धु-गंगा मैदान बना। भारतीय प्लेट अभी भी लगभग ५ सेमी./वर्ष की गति से उत्तर की ओर गतिशील है और हिमालय की ऊँचाई में अभी भी २ मिमी./वर्ष कि गति से उत्थान हो रहा है।
भारत के उत्तर में हिमालय की पर्वतमाला नए और [[वलित पर्वत|मोड़दार पहाड़ों]] से बनी है। यह पर्वतश्रेणी कश्मीर से अरुणाचल तक लगभग १,५०० मील तक फैली हुई है। इसकी चौड़ाई १५० से २०० मील तक है। यह संसार की सबसे ऊँची पर्वतमाला है और इसमें अनेक चोटियाँ २४,००० फुट से अधिक ऊँची हैं। हिमालय की सबसे ऊँची चोटी माउंट एवरेस्ट है जिसकी ऊँचाई २९,०२८ फुट है जो नेपाल में स्थित है।
हिमालय के दक्षिण [[सिन्धु-गंगा मैदान]] है जो सिंधु, गंगा तथा ब्रह्मपुत्र और उनकी सहायक नदियों द्वारा बना है। हिमालय (शिवालिक) की तलहटी में जहाँ नदियाँ पर्वतीय क्षेत्र को छोड़कर मैदान में प्रवेश करती हैं, एक संकीर्ण पेटी में कंकड पत्थर मिश्रित निक्षेप पाया जाता है जिसमें नदियाँ अन्तर्धान हो जाती हैं। इस ढलुवाँ क्षेत्र को [[भाबर]] कहते हैं। भाबर के दक्षिण में [[तराई]] प्रदेश है, जहाँ विलुप्त नदियाँ पुन: प्रकट हो जाती हैं। यह क्षेत्र दलदलों और जंगलों से भरा है। तराई के दक्षिण में जलोढ़ मैदान पाया जाता है। मैदान में जलोढ़ दो किस्म के हैं, पुराना जलोढ़ और नवीन जलोढ़। पुराने जलोढ़ को [[बाँगर]] कहते हैं। यह अपेक्षाकृत ऊँची भूमि में पाया जाता है, जहाँ नदियों की बाढ़ का जल नहीं पहुँच पाता। इसमें कहीं कहीं चूने के कंकड मिलते हैं। नवीन जलोढ़ को [[खादर]] कहते हैं। यह नदियों की बाढ़ के मैदान तथा डेल्टा प्रदेश में पाया जाता है जहाँ नदियाँ प्रति वर्ष नई तलछट जमा करती हैं।
उत्तरी भारत के मैदान के दक्षिण का पूरा भाग एक विस्तृत पठार है जो विश्व के सबसे पुराने स्थल खंड का अवशेष है और मुख्यत: कड़ी तथा दानेदार कायांतरित चट्टानों से बना है। पठार तीन ओर पहाड़ी श्रेणियों से घिरा है। उत्तर में [[विंध्याचल]] तथा [[सतपुड़ा]] की पहाड़ियाँ हैं, जिनके बीच [[नर्मदा नदी]] पश्चिम की ओर बहती है। नर्मदा घाटी के उत्तर विंध्याचल प्रपाती ढाल बनाता है। सतपुड़ा की पर्वतश्रेणी उत्तर भारत को दक्षिण भारत से अलग करती है और पूर्व की ओर महादेव पहाड़ी तथा मैकाल पहाड़ी के नाम से जानी जाती है। सतपुड़ा के दक्षिण [[अजंता]] की पहाड़ियाँ हैं। प्रायद्वीप के पश्चिमी किनारे पर [[पश्चिमी घाट]] और पूर्वी किनारे पर [[पूर्वी घाट]] नामक पहाडियाँ हैं। कई महत्वपूर्ण और बड़ी नदियाँ जैसे [[गंगा]], [[ब्रह्मपुत्र]], [[यमुना]], [[गोदावरी]] और [[कृष्णा नदी|कृष्णा]] भारत से होकर बहती हैं।
=== जलवायु ===
[[कोपेन का जलवायु वर्गीकरण|कोपेन]] के वर्गीकरण में भारत में छह प्रकार की जलवायु का निरूपण है किन्तु यहाँ यह भी ध्यातव्य है कि भू-आकृति के प्रभाव में छोटे और स्थानीय स्तर पर भी जलवायु में बहुत विविधता और विशिष्टता मिलती है। भारत की जलवायु दक्षिण में [[उष्णकटिबंधीय]] है और हिमालयी क्षेत्रों में अधिक ऊँचाई के कारण [[अल्पाइन]] (ध्रुवीय जैसी), एक ओर यह पुर्वोत्तर भारत में उष्ण कटिबंधीय नम प्रकार की है तो पश्चिमी भागों में शुष्क प्रकार की।
कोपेन के वर्गीकरण के अनुसार भारत में निम्नलिखित छह प्रकार के जलवायु प्रदेश पाए जाते हैं:
* [[अल्पाइन]] – (''ETh'');
* आर्द्र उपोष्ण – (''Cwa'');
* [[उष्णकटिबंधीय|उष्ण कटिबंधीय नम और शुष्क]] – (''Aw'');
* [[उष्णकटिबंधीय|उष्ण कटिबंधीय नम]] – (''Am'');
* अर्धशुष्क – (''BSh'');
* शुष्क मरुस्थलीय – (''BWh'').
परंपरागत रूप से भारत में छह [[ऋतु|ऋतुएँ]] मानी जाती रहीं हैं परन्तु [[भारतीय मौसम विज्ञान विभाग]] चार ऋतुओं का वर्णन करता है जिन्हें हम उनके परंपरागत नामों से तुलनात्मक रूप में निम्नवत लिख सकते हैं:
'''शीत ऋतु''' (''Winters'') – दिसंबर से मार्च तक, जिसमें दिसंबर और जनवरी सबसे ठंडे महीने होते हैं; उत्तरी भारत में औसत तापमान १० से १५ डिग्री सेल्सियस होता है।
'''ग्रीष्म ऋतु''' (''Summers or Pre-monsoon'') – अप्रैल से जून तक जिसमें मई सबसे गर्म महीना होता है, औसत तापमान ३२ से ४० डिग्री सेल्सियस होता है।
'''वर्षा ऋतु''' (''Monsoon or Rainy'') – जून से सितम्बर तक, जिसमें सार्वाधिक वर्षा अगस्त महीने में होती है, वस्तुतः मानसून का आगमन और प्रत्यावर्तन (लौटना) दोनों क्रमिक रूप से होते हैं और अलग अलग स्थानों पर इनका समय अलग अलग होता है। सामान्यतः १ जून को केरल तट पर मानसून के आगमन तारीख होती है इसके ठीक बाद यह पूर्वोत्तर भारत में पहुँचता है और क्रमशः पूर्व से पश्चिम तथा उत्तर से दक्षिण की ओर गतिशील होता है इलाहाबाद में मानसून के पहुँचने की तिथि १८ जून मानी जाती है और दिल्ली में २९ जून।
'''शरद ऋतु''' (''Post-monsoon ot Autumn'') - उत्तरी भारत में अक्टूबर और नवंबर माह में मौसम साफ़ और शांत रहता है और अक्टूबर में मानसून लौटना शुरू हो जाता है जिससे तमिलनाडु के तट पर लौटते मानसून से वर्षा होती है।
भारत के मुख्य शहर हैं – [[दिल्ली]], [[मुम्बई]], [[कोलकाता]], [[चेन्नई]], [[बंगलोर]] ([[बेंगलुरु]])|
यह भी देंखे – [[भारत के शहर]]
==राजनीति एवं सरकार==
===राजनीति===
{{main|भारत की राजनीति}}
भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है।भारत एक संघीय लोकतांत्रिक गणराज्य है, जहाँ संविधान के अनुसार केंद्र और राज्य सरकारों के बीच शक्तियों का स्पष्ट विभाजन किया गया है। बहुदलीय प्रणाली वाले इस संसदीय गणराज्य में छ: मान्यता-प्राप्त राष्ट्रीय पार्टियां, और ४० से भी ज़्यादा क्षेत्रीय पार्टियां हैं। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), जिसकी नीतियों को केंद्रीय-दक्षिणपंथी या रूढिवादी माना जाता है, के नेतृत्व में केंद्र में सरकार है जिसके प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी हैं।{{update after|2029|05}} अन्य पार्टियों में सबसे बडी भारतीय राष्ट्रीय कॉंग्रेस (कॉंग्रेस) है, जिसे भारतीय राजनीति में केंद्र-वामपंथी और उदार माना जाता है। २००४ से २०१४ तक केंद्र में मनमोहन सिंह की गठबन्धन सरकार का सबसे बड़ा हिस्सा कॉंग्रेस पार्टी का था। १९५० में गणराज्य के घोषित होने से १९८० के दशक के अन्त तक कॉंग्रेस का संसद में निरंतर बहुमत रहा। पर तब से राजनैतिक पटल पर भाजपा और कॉंग्रेस को अन्य पार्टियों के साथ सत्ता बांटनी पडी है। १९८९ के बाद से क्षेत्रीय पार्टियों के उदय ने केंद्र में गठबंधन सरकारों के नये दौर की शुरुआत की है।
गणराज्य के पहले तीन चुनावों (१९५१–५२, १९५७, १९६२) में जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व में कॉंग्रेस ने आसान जीत पाई। १९६४ में नेहरू की मृत्यु के बाद लाल बहादुर शास्त्री कुछ समय के लिये प्रधानमंत्री बने, और १९६६ में उनकी खुद की मौत के बाद इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री बनीं। १९६७ और १९७१ के चुनावों में जीतने के बाद १९७७ के चुनावों में उन्हें हार का सामना करना पडा। १९७५ में प्रधानमंत्री रहते हुए उन्होंने राष्ट्रीय आपात्काल की घोषणा कर दी थी। इस घोषणा और इससे उपजी आम नाराज़गी के कारण १९७७ के चुनावों में नवगठित जनता पार्टी ने कॉंग्रेस को हरा दिया और पूर्व में कॉंग्रेस के सदस्य और नेहरु के केबिनेट में मंत्री रहे मोरारजी देसाई के नेतृत्व में नई सरकार बनी। यह सरकार सिर्फ़ तीन साल चली, और १९८० में हुए चुनावों में जीतकर इंदिरा गांधी फिर से प्रधानमंत्री बनीं। १९८४ में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद उनके बेटे राजीव गांधी कॉंग्रेस के नेता और प्रधानमंत्री बने। १९८४ के चुनावों में ज़बरदस्त जीत के बाद १९८९ में
नवगठित जनता दल के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय मोर्चा ने वाम मोर्चा के बाहरी समर्थन से सरकार बनाई, जो केवल दो साल चली। १९९१ के चुनावों में किसी पार्टी को बहुमत नहीं मिला, परंतु कॉंग्रेस सबसे बडी पार्टी बनी, और पी वी नरसिंहा राव के नेतृत्व में अल्पमत सरकार बनी जो अपना कार्यकाल पूरा करने में सफल रही।
१९९६ के चुनावों के बाद दो साल तक राजनैतिक उथल पुथल का वक्त रहा, जिसमें कई गठबंधन सरकारें आई और गई। १९९६ में भाजपा ने केवल १३ दिन के लिये सरकार बनाई, जो समर्थन ना मिलने के कारण गिर गई। उसके बाद दो संयुक्त मोर्चे की सरकारें आई जो कुछ लंबे वक्त तक चली। ये सरकारें कॉंग्रेस के बाहरी समर्थन से बनी थीं। १९९८ के चुनावों के बाद भाजपा एक सफल गठबंधन बनाने में सफल रही। भाजपा के अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग, या एनडीए) नाम के इस गठबंधन की सरकार पहली ऐसी सरकार बनी जिसने अपना पाँच साल का कार्यकाल पूरा किय। २००४ के चुनावों में भी किसी पार्टी को बहुमत नहीं मिला, पर कॉंग्रेस सबसे बडी पार्टी बनके उभरी, और इसने संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (सम्प्रग, या यूपीए) के नाम से नया गठबंधन बनाया। इस गठबंधन ने वामपंथी और गैर-भाजपा सांसदों के सहयोग से मनमोहन सिंह के नेतृत्व में पाँच साल तक शासन चलाया। २००९ के चुनावों में यूपीए और अधिक सीटें जीता जिसके कारण यह साम्यवादी (कॉम्युनिस्ट) दलों के बाहरी सहयोग के बिना ही सरकार बनाने में कामयाब रहा। इसी साल मनमोहन सिंह जवाहरलाल नेहरू के बाद ऐसे पहले प्रधानमंत्री बने जिन्हे दो लगातार कार्यकाल के लिये प्रधानमंत्री बनने का अवसर प्राप्त हुआ। २०१४ के चुनावों में १९८४ के बाद पहली बार किसी राजनैतिक पार्टी को बहुमत प्राप्त हुआ, और भाजपा ने गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार बनाई।
===सरकार===
{{भारत के प्रभाग}}
{{main|भारत सरकार}}
[[File:Glimpses of the new Parliament Building, in New Delhi (2).jpg|thumb|भारतीय संसद भवन]]
[[File:Supreme Court of India 01.jpg|thumb|भारतीय सर्वोच्च न्यायालय]]
[[भारत का संविधान]] भारत को एक सम्प्रभु, [[समाजवादी]], [[धर्मनिरपेक्ष]], लोकतान्त्रिक गणराज्य घोषित करता है। भारत एक [[लोकतांत्रिक गणराज्य]] है, जिसकी द्विसदनात्मक [[संसद]] [[वेस्टमिन्स्टर शैली]] की संसदीय प्रणाली द्वारा संचालित है। भारत का प्रशासन संघीय ढांचे के अन्तर्गत चलाया जाता है, जिसके अनुसार राष्ट्रीय स्तर पर केंद्र सरकार और राज्य स्तर पर राज्य सरकारें हैं। केंद्र और राज्य सरकारों के बीच शक्तियों का बंटवारा संविधान में दी गई रूपरेखा के आधार पर होता है। वर्तमान में भारत में २८ राज्य और ८ केंद्र-शासित प्रदेश हैं। केंद्र शासित प्रदेशों में, स्थानीय प्रशासन को राज्यों की तुलना में कम शक्तियां प्राप्त होती हैं। भारत का सरकारी ढाँचा, जिसमें केंद्र राज्यों की तुलना में ज़्यादा सशक्त है, उसे आमतौर पर अर्ध-संघीय (सेमि-फ़ेडेरल) कहा जाता रहा है, पर १९९० के दशक के राजनैतिक, आर्थिक और सामाजिक बदलावों के कारण इसकी रूपरेखा धीरे-धीरे और अधिक संघीय (फ़ेडेरल) होती जा रही है।
इसके शासन में तीन मुख्य अंग हैं:- [[न्यायपालिका]], [[कार्यपालिका]] और [[विधायिका]]।
विधायिका [[संसद]] को कहते हैं, जिसके दो सदन हैं – उच्चसदन ''[[राज्यसभा]]'', अथवा राज्यपरिषद् और निम्नसदन ''[[लोकसभा]]''. राज्यसभा में २४५ सदस्य होते हैं जबकि लोकसभा में ५४५। राज्यसभा एक स्थाई सदन है और इसके सदस्यों का चुनाव, अप्रत्यक्ष विधि से ६ वर्षों के लिये होता है। राज्यसभा के ज़्यादातर सदस्यों का चयन राज्यों की विधानसभाओं के सदस्यों द्वारा किया जाता है, और हर दूसरे साल राज्य सभा के एक तिहाई सदस्य पदमुक्त हो जाते हैं। लोकसभा के ५४३ सदस्यों का चुनाव प्रत्यक्ष विधि से, ५ वर्षों की अवधि के लिये आम चुनावों के माध्यम से किया जाता है जिनमें १८ वर्ष से अधिक उम्र के सभी भारतीय नागरिक मतदान कर सकते हैं।
कार्यपालिका [[मंत्रिमण्डल]] को कहते हैं। [[प्रधानमन्त्री]] मंत्रिमण्डल का प्रमुख है और कार्यपालिका की सारी शक्तियाँ उसी के पास होती हैं। इसकी नियुक्ति [[राष्ट्रपति]] द्वारा संसद में बहुमत प्राप्त करने पर की जाती है। बहुमत बने रहने की स्थिति में इसका कार्यकाल ५ वर्षों का होता है। संविधान में किसी उप-प्रधानमंत्री का प्रावधान नहीं है पर समय-समय पर इसमें फेरबदल होता रहा है। मंत्रिमण्डल के प्रत्येक मंत्री को संसद की सदस्यता के योग्य होना अनिवार्य है। कार्यपालिका संसद के प्रति उत्तरदायी होती है, और प्रधानमंत्री और उनका मंत्रिमण्डल लोक सभा में बहुमत के समर्थन के आधार पर ही अपने कार्यालय में बने रह सकते हैं।
भारत की स्वतंत्र न्यायपालिका का ढाँचा त्रिस्तरीय है, जिसमें [[सर्वोच्च न्यायालय]], जिसके प्रधान [[प्रधान न्यायाधीश]] है; २४ उच्च न्यायालय और बहुत सारी निचली अदालतें हैं। सर्वोच्च न्यायालय को अपने मूल न्यायाधिकार (ओरिजिनल ज्युरिडिक्शन), और [[उच्च न्यायालय|उच्च न्यायालयों]] के ऊपर अपीलीय न्यायाधिकार के मामलों, दोनो को देखने का अधिकार है। सर्वोच्च न्यायालय के मूल न्ययाधिकार में मौलिक अधिकारों के हनन के इलावा राज्यों और केंद्र, और दो या दो से अधिक राज्यों के बीच के विवाद आते हैं। सर्वोच्च न्यायालय को राज्य और केंद्रीय कानूनों को असंवैधानिक ठहराने के अधिकार है। भारत में २४ उच्च न्यायालयों के अधिकार और उत्तरदायित्व [[सर्वोच्च न्यायालय]] की अपेक्षा सीमित हैं। संविधान ने न्यायपालिका को विस्तृत अधिकार दिये हैं, जिनमें संविधान की अन्तिम व्याख्या करने का अधिकार भी सम्मिलित है।
===प्रशासनिक प्रभाग===
{{main|भारत के राज्य}}
वर्तमान में भारत 28 राज्यों तथा 8 केन्द्रशासित प्रदेशों में बँटा हुआ है। राज्यों की चुनी हुई स्वतंत्र सरकारें हैं, जबकि केन्द्रशासित प्रदेशों पर केन्द्र द्वारा नियुक्त प्रबंधन शासन करता है, हालाँकि पॉण्डिचेरी और दिल्ली की लोकतांत्रिक सरकार भी हैं।
[[अन्टार्कटिका]] और [[दक्षिण गंगोत्री]] और मैत्री पर भी भारत के वैज्ञानिक-स्थल हैं, यद्यपि अभी तक कोई वास्तविक आधिपत्य स्थापित नहीं किया गया है।
;राज्यों के नाम निम्नवत हैं (कोष्ठक में राजधानी का नाम):
{{भारतीय राज्य (परस्पर संवादात्मक)|image-width=340}}
{|
|-
|
* [[अरुणाचल प्रदेश]] ([[इटानगर]])
* [[असम]] ([[दिसपुर]])
* [[उत्तर प्रदेश]] ([[लखनऊ]])
* [[उत्तराखण्ड]] ([[देहरादून]])
* [[ओड़िशा]] ([[भुवनेश्वर]])
* [[आंध्र प्रदेश]] ([[अमरावती]])
* [[कर्नाटक]] ([[बंगलोर]])
* [[केरल]] ([[तिरुवनंतपुरम]])
* [[गोआ]] ([[पणजी]])
* [[गुजरात]] ([[गांधीनगर]])
* [[छत्तीसगढ़]] ([[रायपुर]])
* [[झारखंड]] ([[रांची]])
* [[तमिलनाडु]] ([[चेन्नई]])
* [[तेलंगाना]] ([[हैदराबाद]])
| width="20" |
| valign=top |
* [[त्रिपुरा]] ([[अगरतला]])
* [[नागालैंड]] ([[कोहिमा]])
* [[पश्चिम बंगाल]] ([[कोलकाता]])
* [[पंजाब (भारत)|पंजाब]] ([[चंडीगढ़]]†)
* [[बिहार]] ([[पटना]])
* [[मणिपुर]] ([[इम्फाल]])
* [[मध्य प्रदेश]] ([[भोपाल]])
* [[महाराष्ट्र]] ([[मुंबई]])
* [[मिज़ोरम]] ([[आइजोल]])
* [[मेघालय]] ([[शिलांग]])
* [[राजस्थान]] ([[जयपुर]])
* [[सिक्किम]] ([[गान्तोक]])
* [[हरियाणा]] ([[चंडीगढ़]]†)
* [[हिमाचल प्रदेश]] ([[शिमला]])
|}
;केन्द्रशासित प्रदेश
{|
|-
|
* [[जम्मू और कश्मीर (केंद्र शासित प्रदेश)|जम्मू और कश्मीर]] ([[श्रीनगर]]/[[जम्मू]])
* [[लदाख]]* ([[लेह]])
* [[अंडमान व निकोबार द्वीपसमूह]]([[पोर्ट ब्लेयर]])
* [[चंडीगढ़]]†* (चंडीगढ़)
* [[दमन और दीव]]* ([[दमन]])
* [[दादरा और नागर हवेली]]* ([[सिलवासा]])
* [[पॉण्डिचेरी]]* ([[पुडुचेरी]])
* [[लक्षद्वीप]]* ([[कवरत्ती]])
* [[दिल्ली]] ([[नई दिल्ली]])
|}
† चंडीगढ़ एक केंद्रशासित प्रदेश है तथा यह पंजाब और हरियाणा दोनों राज्यों की राजधानी है।
26 जनवरी 2020 को दादरा एव नगर हवेली तथा दमन द्वीप का विलय करके एक केंद्रशासित प्रदेश बना दिया गया है। अब इसका पूरा नाम दादरा एवं नगर हवेली तथा दमन द्वीप है।
{{anchor|भारत के प्रमुख शहर}}
<div style="margin:0 auto">{{भारत के सबसे बड़े महानगरीय क्षेत्र}}</div>
{{Clear}}
===विदेश-सम्बन्ध===
{{main | भारत के वैदेशिक सम्बन्ध}}
[[File:Putin and Modi in New Delhi in 2014.jpeg|thumb|2014 में पुतिन और मोदी नई दिल्ली में]]
1947 में अपनी स्वतंत्रता के बाद, भारत के अधिकांश देशों के साथ सौहार्दपूर्ण संबंध बनाए रखा है। 1950 के दशक में, भारत ने पुरजोर रूप से [[अफ्रीका]] और [[एशिया]] में यूरोपीय उपनिवेशों की स्वतंत्रता का समर्थन किया और गुट निरपेक्ष आंदोलन में एक अग्रणी की भूमिका निभाई।<ref>{{Citation|title=The Non-Aligned Movement: Description and History|url=http://www.nam.gov.za/background/history.htm|publisher=The Non-Aligned Movement|work=nam.gov.za|date=21 सितंबर 2001|accessdate=23 अगस्त 2007|archive-url=https://www.webcitation.org/6174YxJPe?url=http://www.nam.gov.za/background/history.htm|archive-date=21 अगस्त 2011|url-status=dead}}</ref> 1980 के दशक में भारत दो पड़ोसी देशों के निमंत्रण पर, सेना के द्वारा संक्षिप्त सैन्य हस्तक्षेप किया, एक श्रीलंका में और दुसरा मालदीव में। भारत के पड़ोसी [[पाकिस्तान]] के साथ एक तनाव भरा संबंध है और दोनों देशों के बीच चार बार युद्ध हुआ था, 1947, 1965, 1971 और 1999 में। कश्मीर विवाद इन युद्धों का प्रमुख कारण था।<ref>{{Citation|last=Gilbert|first=Martin|title=A History of the Twentieth Century: The Concise Edition of the Acclaimed World History|url=http://books.google.com/books?id=jhwY1j8Ao3kC&pg=PA486|accessdate=22 जुलाई 2011|date=17 दिसम्बर 2002|publisher=HarperCollins|isbn=9780060505943|pages=486–487|archive-url=https://web.archive.org/web/20111212130509/http://books.google.com/books?id=jhwY1j8Ao3kC&pg=PA486|archive-date=12 दिसंबर 2011|url-status=live}}</ref> 1962 के भारत - चीन युद्ध और पाकिस्तान के साथ 1965 के युद्ध के बाद भारत और सोवियत संघ के साथ सैन्य संबंधों में बहुत बढ़ोतरी हुई। 1960 के दशक के अन्त में सोवियत संघ भारत का सबसे बड़ा हथियार आपूर्तिकर्ता के रूप में उभरी थी।<ref>{{Cite web |url=http://library.fes.de/pdf-files/bueros/genf/50205.pdf |title=संग्रहीत प्रति |access-date=1 अक्तूबर 2011 |archive-url=https://web.archive.org/web/20110913154659/http://library.fes.de/pdf-files/bueros/genf/50205.pdf |archive-date=13 सितंबर 2011 |url-status=dead }}</ref>
रूस के साथ सामरिक संबंधों के अलावा, भारत का [[इजरायल]] और [[फ्रांस]] के साथ विस्तृत रक्षा संबंध हैं। हाल के वर्षों में, भारत ने क्षेत्रीय सहयोग और विश्व व्यापार संगठन के लिए एक दक्षिण एशियाई एसोसिएशन में प्रभावशाली भूमिका निभाई है। <ref>{{Citation|url=http://library.fes.de/pdf-files/bueros/genf/50205.pdf|title=India's negotiation positions at the WTO|format=PDF|date=नवम्बर 2005|accessdate=23 अगस्त 2010|archive-url=https://web.archive.org/web/20110913154659/http://library.fes.de/pdf-files/bueros/genf/50205.pdf|archive-date=13 सितंबर 2011|url-status=dead}}</ref> भारत ने 100,000 सैन्य और पुलिस कर्मियों को चार महाद्वीपों भर में संयुक्त राष्ट्र के पैंतीस शांति अभियानों में सेवा प्रदान की है।<ref>{{Cite web |url=http://www.un.int/india/india_and_the_un_pkeeping.html |title=संग्रहीत प्रति |access-date=1 अक्तूबर 2011 |archive-url=https://web.archive.org/web/20060504184925/http://www.un.int/india/india_and_the_un_pkeeping.html |archive-date=4 मई 2006 |url-status=dead }}</ref> भारत ने विभिन्न बहुपक्षीय मंचों, सबसे खासकर पूर्वी एशिया के शिखर बैठक और [[जी-8]] 5 में एक सक्रिय भागीदारी निभाई है। आर्थिक क्षेत्र में भारत का दक्षिण अमेरिका, एशिया, और अफ्रीका के विकासशील देशों के साथ घनिष्ठ संबंध है।<ref>{{Citation|url=http://goliath.ecnext.com/coms2/gi_0199-4519133/ANALYSTS-SAY-INDIA-S-POWER.html|title=Analysts Say India'S Power Aided Entry Into East Asia Summit. | Goliath Business News|publisher=Goliath.ecnext.com|date=29 जुलाई 2005|accessdate=21 नवम्बर 2009|archive-url=https://web.archive.org/web/20110809024401/http://goliath.ecnext.com/coms2/gi_0199-4519133/ANALYSTS-SAY-INDIA-S-POWER.html|archive-date=9 अगस्त 2011|url-status=live}}</ref>
<ref>{{Cite web|url=https://naidunia.jagran.com/world-s-jaishankar-will-be-the-new-foriegn-secretary-296665|title=एस. जयशंकर होंगे भारत के नए विदेश सचिव|website=Nai Dunia|accessdate=1 मार्च 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20160304122451/http://naidunia.jagran.com/world-s-jaishankar-will-be-the-new-foriegn-secretary-296665|archive-date=4 मार्च 2016|url-status=dead}}</ref>
===सैन्य शक्ति===
{{main| भारतीय सशस्त्र सेनाएँ | भारत के अर्धसैनिक बल}}
[[चित्र:Indian Navy's aircraft carriers INS Viraat and Vikramaditya.jpg|thumb|right|200px| भारतीय नौसेना के विमानवाहक पोत - विराट एवं विक्रमादित्य]]
[[चित्र:HAL Tejas AeroIndia-2009.JPG|thumb|right|200px| एच.ए.एल तेजस भारत द्वारा विकसित एक हल्का सुपरसौनिक लड़ाकू विमान है।]]
[[चित्र:Yudh Abhyas-09 BMP.JPG|thumb|right|200px| युद्ध अभ्यास करते भारतीय टैंक]]
[[File:Agni missile range-hi.svg|thumb|200px|भारतीय प्रक्षेपास्त्र अग्नि की मारक सीमा]]
लगभग 13 लाख सक्रिय सैनिकों के साथ, [[भारतीय सेना]] विश्व में तीसरी सबसे बड़ी है। भारत की सशस्त्र सेना में एक [[भारतीय थलसेना|थलसेना]], [[भारतीय नौसेना|नौसेना]], [[भारतीय वायुसेना|वायु सेना]] और [[भारत के अर्द्धसैनिक बल|अर्द्धसैनिक बल]], [[भारतीय तटरक्षक|तटरक्षक]], जैसे सामरिक और सहायक बल विद्यमान हैं। भारत के राष्ट्रपति भारतीय सशस्त्र बलों के सर्वोच्च कमांडर है।
1947 में अपनी स्वतंत्रता के बाद से, भारत ने ज्यादातर देशों के साथ सौहार्दपूर्ण संबंध बनाए रखा है। 1950 के दशक में, [[भारत]] ने दृढ़ता से [[अफ्रीका]] और [[एशिया]] में यूरोपीय कालोनियों की स्वतंत्रता का समर्थन किया और गुट निरपेक्ष आंदोलन में एक अग्रणी भूमिका निभाई। 1980 के दशक में भारत ने आमंत्रण पर दो पड़ोसी देशों में संक्षिप्त सैन्य हस्तक्षेप किया। मालदीव, [[श्रीलंका]] और अन्य देशों में ऑपरेशन कैक्टस में भारतीय शांति सेना को भेजा गया। हालाँकि, भारत के पड़ोसी देश [[पाकिस्तान]] के साथ एक तनावपूर्ण संबंध बने रहे और दोनों देशों में चार बार युध्द (1947, 1965, 1971 और 1999 में) हुए हैं। [[कश्मीर]] विवाद इन युद्धों के प्रमुख कारण था, सिवाय 1971 के, जो कि तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान में नागरिक अशांति के लिए किया गया था। 1962 के भारत-चीन युद्ध और पाकिस्तान के साथ 1965 के युद्ध के बाद भारत ने अपनी सैन्य और आर्थिक स्थिति का विकास करने का प्रयास किया। [[सोवियत संघ]] के साथ अच्छे संबंधों के कारण सन् 1960 के दशक से, सोवियत संघ भारत का सबसे बड़ा हथियार आपूर्तिकर्ता के रूप में उभरा।
आज [[रूस]] के साथ सामरिक संबंधों को जारी रखने के अलावा, भारत विस्तृत [[इजरायल]] और [[फ्रांस]] के साथ रक्षा संबंध रखा है। हाल के वर्षों में, भारत में क्षेत्रीय सहयोग और विश्व व्यापार संगठन के लिए एक दक्षिण एशियाई एसोसिएशन में प्रभावशाली भूमिका निभाई है। १०,००० राष्ट्र सैन्य और पुलिस कर्मियों को चार महाद्वीपों भर में पैंतीस संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में सेवा प्रदान की है। भारत भी विभिन्न बहुपक्षीय मंचों, खासकर पूर्वी एशिया शिखर बैठक और जी-८५ बैठक में एक सक्रिय भागीदार रहा है। आर्थिक क्षेत्र में भारत दक्षिण अमेरिका, अफ्रीका और एशिया के विकासशील देशों के साथ घनिष्ठ संबंध रखते है। अब भारत एक "पूर्व की ओर देखो नीति" में भी संयोग किया है। यह "आसियान" देशों के साथ अपनी भागीदारी को मजबूत बनाने के मुद्दों की एक विस्तृत शृंखला है जिसमे [[जापान]] और [[दक्षिण कोरिया]] ने भी मदद किया है। यह विशेष रूप से आर्थिक निवेश और क्षेत्रीय सुरक्षा का प्रयास है।
1974 में भारत अपनी पहले [[परमाणु हथियार|परमाणु हथियारों]] का परीक्षण किया और आगे 1998 में भूमिगत परीक्षण किया। जिसके कारण भारत पर कई तरह के प्रतिबन्ध भी लगाये गए। भारत के पास अब तरह-तरह के परमाणु हथियारें है। भारत अभी रूस के साथ मिलकर पाँचवीं पीढ़ के विमान बना रहे है।
हाल ही में, भारत का संयुक्त राष्ट्रे अमेरिका और यूरोपीय संघ के साथ आर्थिक, सामरिक और सैन्य सहयोग बढ़ गया है। 2008 में, भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच असैनिक परमाणु समझौते हस्ताक्षर किए गए थे। हालाँकि उस समय भारत के पास परमाणु हथियार था और परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) के पक्ष में नहीं था यह अन्तरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी और न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप (एनएसजी) से छूट प्राप्त है, भारत की परमाणु प्रौद्योगिकी और वाणिज्य पर पहले प्रतिबंध समाप्त. भारत विश्व का छठा वास्तविक परमाणु हथियार राष्ट्रत बन गया है। एनएसजी छूट के बाद भारत भी रूस, फ्रांस, यूनाइटेड किंगडम और कनाडा सहित देशों के साथ असैनिक परमाणु ऊर्जा सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर करने में सक्षम है।
वित्त वर्ष 2014-15 के केन्द्रीय अन्तरिम बजट में रक्षा आवंटन में 10 प्रतिशत बढ़ोत्तरी करते हुए 224,000 करोड़ रूपए आवंटित किए गए। 2013-14 के बजट में यह राशि 203,672 करोड़ रूपए थी।<ref name="pib-17feb14">{{cite web | url = http://pib.nic.in/newsite/hindirelease.aspx?relid=26921 | title = रक्षा आवंटन 10 प्रतिशत बढ़ाया गया | publisher = पत्र सूचना कार्यालय, भारत सरकार | date = 17 फ़रवरी 2014 | accessdate = 18 फ़रवरी 2014 | archive-url = https://web.archive.org/web/20140222141810/http://pib.nic.in/newsite/hindirelease.aspx?relid=26921 | archive-date = 22 फ़रवरी 2014 | url-status = live }}</ref> 2012–13 में रक्षा सेवाओं के लिए 1,93,407 करोड़ रुपए<ref name="pib-16mar12">{{cite web | url = http://pib.nic.in/newsite/hindirelease.aspx?relid=14218 | title = रक्षा सेवाओं के लिए प्रावधान | publisher = पत्र सूचना कार्यालय, भारत सरकार | date = 16 मार्च 2012 | accessdate = 18 फ़रवरी 2014 | archive-url = https://web.archive.org/web/20140222141816/http://pib.nic.in/newsite/hindirelease.aspx?relid=14218 | archive-date = 22 फ़रवरी 2014 | url-status = live }}</ref> का प्रावधान किया गया था, जबकि 2011–2012 में यह राशि 1,64,415 करोइ़<ref name="pib-7mar2011">{{cite web | url = http://pib.nic.in/newsite/erelease.aspx?relid=70604 | title = Defence Budget | publisher = पत्र सूचना कार्यालय, भारत सरकार | date = 7 मार्च 2011 | accessdate = 18 फ़रवरी 2014 | archive-url = https://web.archive.org/web/20140222141813/http://pib.nic.in/newsite/erelease.aspx?relid=70604 | archive-date = 22 फ़रवरी 2014 | url-status = live }}</ref> थी। साल 2011 में भारतीय रक्षा बजट 36.03 अरब अमरिकी डॉलर रहा (या सकल घरेलू उत्पाद का 1,83%)। 2008 के एक SIRPI रिपोर्ट के अनुसार, भारत क्रय शक्ति के मामले में भारतीय सेना के सैन्य खर्च 72.7 अरब अमेरिकी डॉलर रहा। साल 2011 में भारतीय रक्षा मंत्रालय के वार्षिक रक्षा बजट में 11.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई, हालाँकि यह पैसा सरकार की अन्य शाखाओं के माध्यम से सैन्य की ओर जाते हुए पैसों में शमिल नहीं होता है। भारत विश्व का सबसे बड़े हथियार आयातक है।
{| class = "wikitable"
|-
!वित्त वर्ष !! 2007-2008 !! 2008-2009 !! 2009-2010 !! 2011-2012 !! 2012-2013 !! 2013-2014 !! 2014-2015 !! 2015-2016 !! 2016-2017
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|बजट (करोड़ रूपए)|| 96,000<ref name="pib-7mar2011"/> || 1,05,600<ref name="pib-7mar2011"/> || 1,41,703<ref name="pib-7mar2011"/> || 1,64,415<ref name="pib-7mar2011"/> || 1,93,407<ref name="pib-16mar12"/> || 2,03,672<ref name="pib-17feb14"/> || 2,24,000<ref name="pib-17feb14"/> || 2,94,320|| 3,59,854
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|}
२०१४ में नरेन्द्र मोदी नीत भाजपा सरकार ने [[मेक इन इण्डिया]] के नाम से भारत में निर्माण अभियान की शुरुआत की और भारत को हथियार आयातक से निर्यातक बनाने के लक्ष्य की घोषणा की। रक्षा निर्माण के द्वार निजी कंपनियों के लिए भी खोल दिए गए और भारत के कई उद्योग घरानों ने बड़े पैमाने पर इस क्षेत्र में पूंजी निवेश की योजनाएँ घोषित की। फ्राँस की डसॉल्ट एविएशन ने अंबानी समूह के साथ साझेदारी में रफेल लड़ाकू विमान<ref>http://hindi.economictimes.indiatimes.com/business/business-news/frances-dassault-to-bring-in-largest-defence-fdi-via-rafale-joint-venture-with-reliance-defence/articleshow/59063463.cms {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20170717180836/http://hindi.economictimes.indiatimes.com/business/business-news/frances-dassault-to-bring-in-largest-defence-fdi-via-rafale-joint-venture-with-reliance-defence/articleshow/59063463.cms |date=17 जुलाई 2017 }} नवभारत टाईम्स ९ जून २०१७</ref>, तथा अमेरिका की लॉकहीड मार्टिन ने टाटा समूह के साथ साझेदारी लड़ाकू विमान एफ-१६ <ref>http://navbharattimes.indiatimes.com/business/business-news/paris-airshow-lockheed-martin-signs-pact-with-tata-to-make-f-16-planes-in-india/articleshow/59219961.cms {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20170623171242/http://navbharattimes.indiatimes.com/business/business-news/paris-airshow-lockheed-martin-signs-pact-with-tata-to-make-f-16-planes-in-india/articleshow/59219961.cms |date=23 जून 2017 }} नवभारत टाईम्स १९ जून २०१७</ref> का निर्माण भारत में प्रारम्भ करने की घोषणाएँ की हैं। अन्य प्रतिष्ठित समूह जैसे एल एंड टी,<ref>http://hindi.economictimes.indiatimes.com/business/business-news/govt-signed-agreement-with-lt-for-firearms/articleshow/58646476.cms {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20200314001109/http://hindi.economictimes.indiatimes.com/business/business-news/govt-signed-agreement-with-lt-for-firearms/articleshow/58646476.cms |date=14 मार्च 2020 }} सेना के तोपों के लिए L&T से करार नवभारत टाईम्स १२ मई २०१७</ref><ref>https://scholar.valpo.edu/cgi/viewcontent.cgi?referer=https://en.wikipedia.org/&httpsredir=1&article=1095&context=jvbl वालपराइसो विश्वविद्यालय अनुसंधान</ref> महिन्द्रा, कल्याणी आदि भी कई परियोजनाओं के निर्माण की पहल कर चुके हैं जिनमें तोपें, असला, जलपोत व पनडुब्बियों का निर्मान शामिल है। रूस के साथ कमोव हेलीकॉप्टर का निर्माण भी भारत में करने के लिए समझौता हुआ है।
== अर्थव्यवस्था ==
{{main|भारत की अर्थव्यवस्था}}
[[File:GDP PPP 2021 Selection.svg|thumb|330 px|२०१४ में क्रयशक्ति समानता के आधार पर भारतीय अर्थव्यवस्था विश्व में तीसरी सबसे बड़ी थी।]]
मुद्रा स्थानांतरण की दर से भारत की अर्थव्यवस्था विश्व में दसवें और क्रयशक्ति के अनुसार तीसरे स्थान पर है। वर्ष [[२००३]] में भारत में लगभग ८% की दर से आर्थिक वृद्धि हुई है जो कि विश्व की सबसे तीव्र बढती हुई अर्थव्यवस्थओं में से एक है। परंतु भारत की अत्यधिक जनसंख्या के कारण प्रतिव्यक्ति आय क्रयशक्ति की दर से मात्र ३,२६२ अमेरिकन डॉलर है जो कि विश्व बैंक के अनुसार १२५वें स्थान पर है। भारत का विदेशी मुद्रा भंडार २६५ (मार्च २००९) अरब अमेरिकी डॉलर है। [[मुम्बई]] भारत की आर्थिक राजधानी है और [[भारतीय रिजर्व बैंक]] और [[बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज]] का मुख्यालय भी। यद्यपि एक चौथाई भारतीय अभी भी [[निर्धनता रेखा]] से नीचे हैं, तीव्रता से बढ़ती हुई [[सूचना प्रौद्योगिकी]] कंपनियों के कारण मध्यमवर्ग में वृद्धि हुई है। १९९१ के बाद भारत में [[आर्थिक सुधार]] की नीति ने भारत के सर्वंगीण विकास में बड़ी भूमिका निभाई है।
[[चित्र:InfosysHQFrontView.jpg|thumb|270px|left|[[सूचना प्रोद्योगिकी]] (आईटी) भारत के सबसे अधिक विकासशील उद्योगों में से एक है, वार्षिक आय २८५० करोड़ डालर, [[इन्फोसिस]], भारत की सबसे बडी आईटी कम्पनियों में से एक]]
१९९१ के बाद भारत में हुए [[आर्थिक सुधार|आर्थिक सुधारोँ]] ने भारत के सर्वांगीण विकास में बड़ी भूमिका निभाई। भारतीय अर्थव्यवस्था ने [[कृषि]] पर अपनी ऐतिहासिक निर्भरता कम की है और कृषि अब भारतीय [[सकल घरेलू उत्पाद]] (जीडीपी) का केवल २५% है। दूसरे प्रमुख उद्योग हैं [[उत्खनक|उत्खनन]], [[पेट्रोलियम]], [[बहुमूल्य रत्न]], [[चलचित्र]], [[वस्त्र]], [[सूचना प्रौद्योगिकी]] सेवाएं, तथा [[सजावटी वस्तुऐं]]। भारत के अधिकतर औद्योगिक क्षेत्र उसके प्रमुख महानगरों के आसपास स्थित हैं। हाल ही के वर्षों में $१७२० करोड़ अमरीकी डालर वार्षिक आय [[२००४]]-[[२००५]] के साथ भारत सॉफ़्टवेयर और बीपीओ सेवाओं का सबसे बड़ा केन्द्र बन कर उभरा है। इसके साथ ही कई लघु स्तर के उद्योग भी हैं जोकि छोटे [[भारतीय गाँव]] और [[भारत के शहरों की सूची|भारतीय नगरों]] के कई नागरिकों को जीविका प्रदान करते हैं। पिछले वर्षों में भारत में [[वित्तीय संस्थान|वित्तीय संस्थानों]] ने विकास में बड़ी भूमिका निभाई है।
केवल तीस लाख विदेशी पर्यटकों के प्रतिवर्ष आने के बाद भी [[भारतीय पर्यटन]] राष्ट्रीय आय का एक अति आवश्यक, परन्तु कम विकसित स्रोत है। पर्यटन उद्योग भारत के जीडीपी का कुल ५,३% है। पर्यटन १०% भारतीय कामगारों को आजीविका देता है। वास्तविक संख्या ४.२ करोड है। आर्थिक रूप से देखा जाए तो पर्यटन [[भारतीय अर्थव्यवस्था]] को लगभग $४०० करोड डालर प्रदान करता है। भारत के प्रमुख व्यापार सहयोगी हैं [[अमरीका]], [[जापान]], [[चीन]] और [[संयुक्त अरब अमीरात]]।
भारत के निर्यातों में कृषि उत्पाद, [[चाय]], कपड़ा, [[बहुमूल्य रत्न]] व आभूषण, [[सॉफ्टवेयर|साफ़्टवेयर सेवायें]], इंजीनियरिंग सामान, रसायन तथा चमड़ा उत्पाद प्रमुख हैं जबकि उसके आयातों में कच्चा तेल, मशीनरी, बहुमूल्य रत्न, [[उर्वरक]] (फ़र्टिलाइज़र) तथा रसायन प्रमुख हैं। वर्ष २००४ के लिये भारत के कुल निर्यात $६९१८ करोड़ [[डालर]] के थे जबकि उसके आयात $८९३३ करोड़ [[डालर]] के थे।
दिसम्बर 2013 के अन्त में भारत का कुल विदेशी कर्ज 426.0 अरब अमरीकी डॉलर था, जिसमें कि दीर्घकालिक कर्ज 333.3 अरब (78,2%) तथा अल्पकालिक कर्ज 92,7% अरब अमरीकी डॉलर (21,8%) था। कुल विदेशी कर्ज में सरकार का विदेशी कर्ज 76.4 अरब अमरीकी डॉलर (कुल विदेशी कर्ज का 17.9 प्रतिशत) था, बाकी में व्यावसायिक उधार, एनआरआई जमा और बहुउद्देश्यीय कर्ज आदि हैं।<ref name="pib">{{cite web | url = http://pib.nic.in/newsite/hindirelease.aspx?relid=27502 | title = दिसम्बर 2013 के अन्त में भारत का विदेशी कर्ज 426.0 अरब अमरीकी डॉलर, मार्च 2013 के अन्त के स्तर पर 21.1 अरब (5.2 प्रतिशत) की बढ़ोतरी | publisher = पत्र सूचना कार्यालय, भारत सरकार | date = 28 मार्च 2014 | accessdate = 7 मई 2014 | archive-url = https://web.archive.org/web/20140508024825/http://pib.nic.in/newsite/hindirelease.aspx?relid=27502 | archive-date = 8 मई 2014 | url-status = live }}</ref>
== जनसांख्यिकी एवं भाषाएँ ==
{{main|भारत के लोग}}
भारत [[चीन]] के बाद विश्व का दूसरा सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश है। भारत की विभिन्नताओं से भरी जनता में [[भाषा]], [[जाति]] और [[धर्म]], <ref>{{Cite web|url=https://janganana.in/bharat-me-sabhi-dharmo-ki-jansankhya/|title=भारत में सभी धर्मों की जनसंख्या, साक्षरता, लिंगानुपात एवं वृद्धि दर 2011|access-date=31 जुलाई 2024|archive-date=31 जुलाई 2024|archive-url=https://web.archive.org/web/20240731074902/https://janganana.in/bharat-me-sabhi-dharmo-ki-jansankhya/|url-status=dead}}</ref>सामाजिक और राजनीतिक सौहार्द और समरसता के मुख्य शत्रु हैं।
[[भारत की जनगणना २०११|भारत में २०११ की जनगणना के अनुसार]] ७४.०४ प्रतिशत साक्षरता <ref>{{Cite web|url=https://janganana.in/state-literacy-rate/|title=सभी राज्यों की साक्षरता दर, स्कूल से लेकर डिग्री तक।|access-date=31 जुलाई 2024|archive-date=31 जुलाई 2024|archive-url=https://web.archive.org/web/20240731091604/https://janganana.in/state-literacy-rate/|url-status=dead}}</ref>है, जिस में से ८२.१४% पुरुष और स्त्रियो की साक्षरता ६५.४६ हैं। <ref>{{Cite web|url=https://m.jagranjosh.com/general-knowledge/census-2011-literacy-rate-and-sex-ratio-in-india-since-1901-to-2011-1476359944-1|title=Census 2011: Literacy Rate and Sex Ratio in India Since 1901 to 2011|date=2016-10-13|website=Jagranjosh.com|access-date=2021-05-07}}</ref> [[लिंग अनुपात]] की दृष्टि से भारत में प्रत्येक १००० पुरुषों के पीछे मात्र ९४० महिलायें हैं। कार्य भागीदारी दर (कुल जनसंख्या में कार्य करने वालों का भाग) ३९.१% है। पुरुषों के लिए यह दर ५१,७% और स्त्रियों के लिये २५,६% है। भारत की १००० जनसंख्या में २२.३२ जन्मों के साथ बढ़ती जनसंख्या के आधे लोग २२.६६ वर्ष से कम आयु के हैं।
===धर्म===
[[File:Sree Padmanabhaswamy temple Thiruvananthapuram,.jpg|thumb|[[पद्मनाभस्वामी मंदिर]], [[तिरुवनन्तपुरम]], [[केरल]]]]
[[File:Sikh pilgrim at the Golden Temple (Harmandir Sahib) in Amritsar, India.jpg|thumb|[[हरिमन्दिर साहिब|स्वर्ण मंदिर (हरमंदिर साहिब)]] में [[सिख]] तीर्थयात्री, [[अमृतसर]], [[पंजाब (भारत)|पंजाब]]]]
{{bar box
|title= [[भारत में धर्म|भारत में धार्मिक समूह]] ([[भारत की जनगणना २०११|२०११ की जनगणना]])<ref>{{Cite web|url=http://www.census2011.co.in/religion.php|title=Religion Data - Population of Hindu / Muslim / Sikh / Christian - Census 2011 India|website=www.census2011.co.in|accessdate=1 मार्च 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190814173118/http://www.census2011.co.in/religion.php|archive-date=14 अगस्त 2019|url-status=dead}}</ref>
|titlebar=#ddd
|left1='''धार्मिक समूह'''
|right1='''प्रतिशत'''
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{{bar percent|हिन्दू|orange|79.80}}
{{bar percent|मुस्लिम|green|14.23}}
{{bar percent|ईसाई|gray|2.30}}
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}}
यद्यपि भारत की ७९.८० प्रतिशत या ९६.६२ करोड़ जनसंख्या [[हिन्दू]] है,<ref>{{Cite web|url=https://www.bbc.com/hindi/india/2015/08/150825_census_report_population_religion_ps|title=हिन्दू-मुस्लिम आबादी की पेचीदगी को समझें|website=BBC News हिन्दी|accessdate=1 मार्च 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20180824035755/https://www.bbc.com/hindi/india/2015/08/150825_census_report_population_religion_ps|archive-date=24 अगस्त 2018|url-status=live}}</ref> १४.२३ प्रतिशत या १७.२२ करोड़ जनसंख्या के साथ भारत विश्व में मुसलमानों की संख्या में भी [[इंडोनेशिया]] और [[पाकिस्तान]] के बाद तीसरे स्थान पर है। अन्य धर्मावलम्बियों में [[ईसाई]] (२.३० % या २.७८ करोड़), [[सिख]] (१,७२ % या २.०८ करोड़), [[बौद्ध]] (०,७० % या ८४.४३ लाख), [[जैन]] (०,३७ % या ४४.५२ लाख), अन्य धर्म (०,६६ % या ७९.३८ लाख) इनमें [[यहूदी]], [[पारसी]], [[अहमदी]] और [[बहाई]] आदि धर्मीय हैं। [[नास्तिकता]] ०,२४% या ३८.३७ लाख है।
=== भारत की जनजातियां ===
*[[गोंड (जनजाति)|गोंड]] - गोंड भारत की जनजाति है , मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में इनका शासन था ।
*[[ भील]] - भील देश की सबसे विस्तृत क्षेत्र में फैली हुई जनजाति है , यह जनजाति मुख्यरूप से राजस्थान , मध्यप्रदेश , गुजरात और महाराष्ट्र में निवास करती है , इस जनजाति का इतिहास बेहद ही गौरवशाली रहा है , यह जनजाति प्राचीन समय में एक कबीले में ना रह कर , देश के कई क्षेत्रों पर शासन किया । भील जनजाति देश में भील रेजिमेंट और भील प्रदेश चाहती है।
*[[ मीणा ]] - मीणा राजस्थान की मुख्य जनजाति है। मध्य प्रदेश में मीणाओं को पूर्ण रूप से अनुसूचित जनजाति के रूप में प्रस्तावित किया गया है, जिस पर भारत सरकार विचार कर रही है।
*[[ नागा ]] - नागा जनजाति मुख्यरूप से नागालैंड में पाई जाती है , देश में नागा रेजिमेंट है।
*[[ गारो]] - एक जनजाति
*[[ भूमिज ]] - भारत की सबसे प्राचीन जनजाति; पश्चिम बंगाल, झारखण्ड, उड़ीसा और असम में पाई जाती है।
===भाषाएँ===
{{main|भारत की भाषाएँ}}
भारत दो मुख्य भाषा-सूत्रों: आर्य और द्रविड़ भाषाओं का स्रोत भी है। [[भारत का संविधान]] कुल २३ भाषाओं को मान्यता देता है। [[हिन्दी]] और [[अंग्रेजी]] केन्द्रीय सरकार द्वारा सरकारी कामकाज के लिए उपयोग की जाती हैं। [[संस्कृत]] और [[तमिल]] जैसी अति प्राचीन भाषाएं भारत में ही जन्मी हैं। संस्कृत, संसार की सर्वाधिक प्राचीन भाषाओं में से एक है, जिसका विकास पथ्यास्वस्ति नाम की अति प्राचीन भाषा/बोली से हुआ था। तमिल के अलावा सारी भारतीय भाषाएँ संस्कृत से ही विकसित हुई हैं, हालाँकि संस्कृत और तमिल में कई शब्द समान हैं, कुल मिला कर भारत में १६५२ से भी अधिक भाषाएं एवं बोलियाँ बोली जातीं हैं।
भाषाओं के मामले में भारतवर्ष विश्व के समृद्धतम देशों में से है। संविधान के अनुसार [[हिन्दी]] भारत की [[राजभाषा]] है, और [[अंग्रेजी]] को सहायक राजाभाषा का स्थान दिया गया है। १९४७-१९५० के संविधान के निर्माण के समय देवनागरी लिपि में लिखी हिन्दी भाषा और हिन्दी-अरबी अंकों के अन्तर्राष्ट्रीय स्वरूप को संघ (केंद्र) सरकार की कामकाज की भाषा बनाया गया था, और गैर-हिन्दी भाषी राज्यों में हिन्दी के प्रचलन को बढ़ाकर उन्हें हिन्दी-भाषी राज्यों के समान स्तर तक आने तक के लिये १५ वर्षों तक अंग्रेजी के इस्तेमाल की इजाज़त देते हुए इसे सहायक राजभाषा का दर्ज़ा दिया गया था। संविधान के अनुसार यह व्यवस्था १९५० में समाप्त हो जाने वाली थी, किन्तु् तमिलनाडु राज्य के [[तमिलनाडु के हिन्दी भाषा विरोधी आन्दोलन|हिन्दी भाषा विरोधी आन्दोलन]] और हिन्दी भाषी राज्यों राजनैतिक विरोध के परिणामस्वरूप, संसद ने इस व्यवस्था की समाप्ति को अनिश्चित काल तक स्थगित कर दिया है। इस वजह से वर्तमान समय में केंद्रीय सरकार में काम हिन्दी और अंग्रेज़ी भाषाओं में होता है और राज्यों में हिन्दी अथवा अपने-अपने क्षेत्रीय भाषाओं में काम होता है। केन्द्र और राज्यों और अन्तर-राज्यीय पत्र-व्यवहार के लिए, यदि कोई राज्य ऐसी मांग करे, तो हिन्दी और अंग्रेज़ी दोनों भाषाओं का होना आवश्यक है। भारतीय संविधान एक [[राष्ट्रभाषा]] का वर्णन नहीं करता। हिन्दी और अंग्रेजी भारत सरकार की आधिकारिक भाषाएं हैं, किन्तु कोई राष्ट्रीय भाषा नहीं है। भारत में 22 आधिकारिक भाषाएँ हैं, जिनमें से प्रत्येक को बड़ी संख्या में लोग बोलते हैं। हालाँकि, हिन्दी का उपयोग अनिवार्य नहीं है, और अन्य आधिकारिक भाषाओं का भी उपयोग किया जा सकता है।
हिन्दी और अंग्रेज़ी के इलावा संविधान की आठवीं अनुसूची में २० अन्य भाषाओं का वर्णन है जिन्हें भारत में आधिकारिक कामकाज में इस्तेमाल किया जा सकता है। संविधान के अनुसार सरकार इन भाषाओं के विकास के लिये प्रयास करेगी, और अधिकृत राजभाषा (हिन्दी) को और अधिक समृद्ध बनाने के लिए इन भाषाओं का उपयोग करेगी। आठवीं अनुसूची में दर्ज़ २२ भाषाएँ यह हैं:
{{Div col|4}}
* [[संस्कृत]]
* [[हिन्दी]]
* [[अंग्रेजी]]
* [[मराठी]]
* [[नेपाली]]
* [[मैथिली]]
* [[पंजाबी भाषा|पंजाबी]]
* [[तमिल]]
* [[तेलुगू]]
* [[मलयालम]]
* [[कन्नड]]
* [[गुजराती]]
* [[बांग्ला]]
* [[असमिया]]
* [[ओड़िया भाषा|ओड़िया]]
* [[कश्मीरी भाषा|कश्मीरी]]
* [[मणिपुरी भाषा|मणिपुरी]]
* [[कोंकणी]]
* [[डोगरी]]
* [[उर्दू]]
* [[सिन्धी]]
* [[संथाली]]
{{Div col end}}
राज्यवार भाषाओं की आधिकारिक स्थिति इस प्रकार है:
{| class = "wikitable sortable"
|-
! क्र॰सं॰ || राज्य || आधिकारिक भाषा(एं) || अन्य मान्यता प्राप्त भाषाएं
|-
| १. || [[अरुणाचल प्रदेश]] || [[अंग्रेज़ी भाषा|अंग्रेज़ी]]<ref name=langoff>{{cite web |url=http://nclm.nic.in/shared/linkimages/NCLM50thReport.pdf |title=Report of the Commissioner for linguistic minorities: 50th report (जुलाई 2012 to जून 2013) |pages= |publisher=Commissioner for Linguistic Minorities, Ministry of Minority Affairs, भारत सरकार |accessdate=26 दिसम्बर 2014 |archive-url=https://web.archive.org/web/20160708012438/http://nclm.nic.in/shared/linkimages/NCLM50thReport.pdf |archive-date=8 जुलाई 2016 |url-status=dead }}</ref>{{rp|65}} ||
|-
| २. || [[असम]] || [[असमिया]], [[अंग्रेज़ी भाषा|अंग्रेज़ी]]<ref name="AOL1968">{{cite web|url=http://www.neportal.org/northeastfiles/Assam/ActsOrdinances/Assam_Official_Language_Act_1968.asp|title=The Assam Official Language Act, 1960|website=Northeast Portal|date=19 दिसम्बर 1960|accessdate=25 दिसम्बर 2014|archive-url=https://web.archive.org/web/20160226063540/http://www.neportal.org/northeastfiles/Assam/ActsOrdinances/Assam_Official_Language_Act_1968.asp|archive-date=26 फ़रवरी 2016|url-status=dead}}</ref> || [[बांग्ला]] बराक घाटी के तीन ज़िलों में;<ref name="BarakValley">{{cite web|url=http://www.dnaindia.com/india/report-assam-government-withdraws-assamese-as-official-language-in-barak-valley-restores-bengali-2017504|title=Assam government withdraws Assamese as official language in Barak Valley, restores Bengali|website=DNA India|date=10 सितम्बर 2014|author=ANI|accessdate=25 दिसम्बर 2014|archive-url=https://web.archive.org/web/20141225150741/http://www.dnaindia.com/india/report-assam-government-withdraws-assamese-as-official-language-in-barak-valley-restores-bengali-2017504|archive-date=25 दिसंबर 2014|url-status=live}}</ref> [[[बोड़ो भाषा|बोडो]] बोडोलैंड क्षेत्रीय परिषद् के ज़िलों में।<ref name="BTC">{{cite web|url=http://www.satp.org/satporgtp/countries/india/states/assam/documents/papers/memorandum_feb02.htm|title=Memorandum of Settlement on Bodoland Territorial Council (BTC)|date=10 फ़रवरी 2003|website=South Asia Terrorism Portal|accessdate=25 दिसम्बर 2014|archive-url=https://web.archive.org/web/20141108080405/http://www.satp.org/satporgtp/countries/india/states/assam/documents/papers/memorandum_feb02.htm|archive-date=8 नवंबर 2014|url-status=dead}}</ref>
|-
| ३. || [[आंध्र प्रदेश]] || [[तेलुगु]]<ref name="APOnline">{{cite web |url=http://www.aponline.gov.in/Quick%20links/HIST-CULT/languages.html |title=Languages |website=APOnline |year=2002 |accessdate=25 दिसम्बर 2014 |archive-url=https://web.archive.org/web/20120208110254/http://www.aponline.gov.in/Quick%20links/HIST-CULT/languages.html |archive-date=8 फ़रवरी 2012 |url-status=dead }}</ref> ||[[उर्दू]] इन ज़िलों में दूसरी आधिकारिक भाषा है: [[कुर्नूल]], [[कडपा]], [[अनंतपुर]], गुन्टूर, [[चित्तूर]] और [[नेल्लोर]] जहां १२% से अधिक जनसंख्या उर्दू को प्राथमिक भाषा के तौर पर बोलती है।<ref name="MilliGazette">{{cite web|url=http://www.milligazette.com/Archives/01102001/18.htm|title=Official status of Urdu in Andhra Pradesh|accessdate=25 दिसम्बर 2014|archive-url=https://web.archive.org/web/20160304090338/http://www.milligazette.com/Archives/01102001/18.htm|archive-date=4 मार्च 2016|url-status=dead}}</ref>
|-
|४. || [[उत्तर प्रदेश]] || [[हिन्दी]] || [[उर्दू]]<ref name="upofflang">Hindi is the official language, and Urdu is used for seven specific purposes, similar to those for which it is used in Bihar. {{citation |last=Commissioner Linguistic Minorities |title=43rd report: जुलाई 2004 - जून 2005 |pages=paras 6.1–6.2 |url=http://nclm.nic.in/index1.asp?linkid=203 |accessdate=16 जुलाई 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20090410022828/http://nclm.nic.in/index1.asp?linkid=203 |archive-date=10 अप्रैल 2009 |url-status=dead }}</ref>,[[भोजपुरी भाषा|भोजपुरी]],[[अवधी]],[[संस्कृत]]
|-
| ५. || [[उत्तराखण्ड]] || [[हिन्दी]] || [[संस्कृत]]<ref name="uttarkhoffsans">Sanskrit to be promoted with priority: Nishank {{citation |last=Nishank |title=Sanskrit made official language |url=http://www.garhwalpost.com/index.php?mod=article&cat=Uttarakhand&article=5051 |accessdate=28 दिसंबर 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20111112032732/http://www.garhwalpost.com/index.php?mod=article&cat=Uttarakhand&article=5051 |archive-date=12 नवंबर 2011 |url-status=dead }}</ref>
|-
| ६. || [[ओडिशा|ओड़िशा]] || [[ओड़िया भाषा|ओड़िया]]||
|-
| ७. || [[कर्नाटक]] || [[कन्नड]]
|-
| ८. || [[केरल]] || [[मलयालम]] || [[अंग्रेज़ी भाषा|अंग्रेज़ी]]<ref name="kerala">{{Citation|url=http://www.languageinindia.com/feb2005/malayalamdevelopmentchandraj1.html|title=Malayalam, How to Arrest its Withering Away?|work=M. K. Chand Raj, Ph.D. on Language in India|publisher=Central Institute of Indian Languages, Mysore|accessdate=16 जुलाई 2007|archive-url=https://web.archive.org/web/20070928031046/http://www.languageinindia.com/feb2005/malayalamdevelopmentchandraj1.html|archive-date=28 सितंबर 2007|url-status=dead}}</ref>
|-
| ९. || [[गुजरात]] || [[गुजराती]]<ref name=langoff/>{{rp|28}} ||
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| १०. || [[गोआ]] || [[कोंकणी]]<ref name="GDDOLAct1987">{{cite web|url=http://www.daman.nic.in/acts-rules%5CHindi-department%5Cdocuments/Official%20Language%20Act.pdf|title=The Goa, Daman and Diu Official Language Act, 1987|date=19 दिसम्बर 1987|website=U.T. Administration of Daman & Diu|accessdate=26 दिसम्बर 2014|archive-url=https://web.archive.org/web/20130508141416/http://daman.nic.in/acts-rules/Hindi-department/documents/Official%20Language%20Act.pdf|archive-date=8 मई 2013|url-status=dead}}</ref> || [[मराठी]],<ref name=langoff/>{{rp|27}}<ref name="Kurzon2004">{{cite book|last=Kurzon|first=Dennis|title=Where East Looks West: Success in English in Goa and on the Konkan Coast|url=http://books.google.com/books?id=p5iK3CmIW6EC&pg=PA48|accessdate=26 दिसम्बर 2014|year=2004|publisher=Multilingual Matters|isbn=978-1-85359-673-5|pages=42–58|chapter=3. The Konkani-Marathi Controversy : 2000-01 version|archive-url=https://web.archive.org/web/20150322212723/http://books.google.com/books?id=p5iK3CmIW6EC&pg=PA48|archive-date=22 मार्च 2015|url-status=live}} Dated, but gives a good overview of the controversy to give Marathi full "official status".</ref> English<ref name="DOLGOG">{{cite web|url=http://www.dol.goa.gov.in/|title=Directorate of Official Language|website=Government of Goa|accessdate=26 दिसम्बर 2014|archive-url=https://web.archive.org/web/20141226165729/http://www.dol.goa.gov.in/|archive-date=26 दिसंबर 2014|url-status=dead}}</ref>
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| ११. || [[छत्तीसगढ]] || [[हिन्दी]]<ref name=langoff/>{{rp|pg 29}}<ref name="Comment">The National Commission for Linguistic Minorities, 1950 (ibid) makes no mention of Chhattisgarhi as an additional state language, despite the 2007 notification of the State Govt, presumably because Chhattisgarhi is considered as a dialect of Hindi.</ref> || छत्तीसगढी<ref name="36OLAmdt2007">The Chhattisgarh Official Language (Amendment) Act, 2007 added "[[छत्तीसगढ़ी]]" as an official language of the state, in addition to Hindi.{{cite web|title=The Chhattisgarh Official Language (Amendment) Act, 2007|url=http://www.lawsofindia.org/statelaw/2885/TheChhattisgarhOfficialLanguageAmendmentAct2007.html|work=Government of India|accessdate=26 दिसम्बर 2014|archive-url=https://www.webcitation.org/61C8mDwtj?url=http://www.lawsofindia.org/statelaw/2885/TheChhattisgarhOfficialLanguageAmendmentAct2007.html|archive-date=25 अगस्त 2011|url-status=dead}}</ref>
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| १२. || [[जम्मू और कश्मीर]] || [[उर्दू]] || [[अंग्रेज़ी भाषा|अंग्रेज़ी]]<ref>[http://jkgad.nic.in/statutory/Rules-Costitution-of-J&K.pdf Article 145] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20120507200338/http://jkgad.nic.in/statutory/Rules-Costitution-of-J%26K.pdf|date=7 मई 2012}} of the [[जम्मू और कश्मीर का संविधान]] makes Urdu the official language of the state, but provides for the continued use of English for all official purposes.</ref>
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| १३. || [[झारखण्ड]] || [[हिन्दी]] || [[संथाली]], [[ओडिया]] और् [[बांग्ला]]<ref name=langoff/>
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| १४. || [[तमिल नाडु]] || [[तमिल]] || [[अंग्रेज़ी भाषा|अंग्रेज़ी]]<ref name=langoff/>
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| १५. || [[तेलंगाना]] || [[तेलुगु]] || [[उर्दू]] इन ज़िलों में दूसरी आधिकारिक भाषा है: [[हैदराबाद]], रंगा रेड्डी, मेडक, [[निज़ामाबाद]], [[महबूबनगर]], अदीलाबाद और [[वारंगल]] <ref name="MilliGazette"/>
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| १६. || [[त्रिपुरा]] || [[बांग्ला]] और कोक्रोबोरोक<ref>{{cite news | url=https://tripura.gov.in/knowtripura | title=Bengali and Kokborok are the state/official language, English, Hindi, Manipuri and Chakma are other languages | work=Tripura Official government website | accessdate=29 जून 2013 | archive-url=https://web.archive.org/web/20150212025154/http://tripura.gov.in/knowtripura | archive-date=12 फ़रवरी 2015 | url-status=dead }}</ref><ref>{{Cite web|url=http://www.lawsofindia.org/pdf/tripura/1964/1964TRIPURA5.pdf|title=Tripura Official Language Act, 1964|accessdate=1 मार्च 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20160607172332/http://www.lawsofindia.org/pdf/tripura/1964/1964TRIPURA5.pdf|archive-date=7 जून 2016|url-status=dead}}</ref> ||
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| १७. || [[नागालैंड]] || [[अंग्रेज़ी भाषा|अंग्रेज़ी]]<ref name=langoff/> ||
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| १८. || [[पंजाब]] || [[पंजाबी भाषा|पंजाबी]] ||
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| १९. || [[पश्चिमी बंगाल]] || [[बांग्ला]] || [[अंग्रेज़ी भाषा|अंग्रेज़ी]] और [[नेपाली]]<ref name=langoff/>
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| २०. || [[बिहार]] || [[हिन्दी]]<ref name="BiharOLACt1950">{{cite web|url=http://nclm.nic.in/shared/linkimages/NCLM50thReport.pdf|title=The Bihar Official Language Act, 1950|date=29 नवम्बर 1950|website=National Commission for Linguistic Minorities|accessdate=26 दिसम्बर 2014|archive-url=https://web.archive.org/web/20160708012438/http://nclm.nic.in/shared/linkimages/NCLM50thReport.pdf|archive-date=8 जुलाई 2016|url-status=dead}}</ref> || [[उर्दू]] (कुछ क्षेत्रों और कामों के लिये)<ref name="Benedikter2009">{{cite book|last=Benedikter|first=Thomas|title=Language Policy and Linguistic Minorities in India: An Appraisal of the Linguistic Rights of Minorities in India|url=http://books.google.com/books?id=vpZv2GHM7VQC&pg=PA89|year=2009|publisher=LIT Verlag Münster|isbn=978-3-643-10231-7|page=89|access-date=17 मई 2015|archive-url=https://web.archive.org/web/20150322201857/http://books.google.com/books?id=vpZv2GHM7VQC&pg=PA89|archive-date=22 मार्च 2015|url-status=live}}</ref>, [[अंगिका]], [[भोजपुरी भाषा|भोजपुरी]], [[बज्जिका]], और [[मैथिली]]
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| २१. || [[मणिपुर]] || [[मणिपुरी भाषा|मणिपुरी]](मेइतेई, या मेइतेईलॉन भी कहा जाता है)<ref>Section 2(f) of the Manipur Official Language Act, 1979 states that the official language of Manipur is the Manipuri language (an older English name for the Meitei language) written in the [[बंगाली लिपि]]. {{citation |last=The Sangai Express |title=Mayek body threatens to stall proceeding |url=http://www.e-pao.net/epRelatedNews.asp?heading=9&src=290703 |accessdate=16 जुलाई 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20070927183339/http://www.e-pao.net/epRelatedNews.asp?heading=9&src=290703 |archive-date=27 सितंबर 2007 |url-status=dead }}</ref> || [[अंग्रेज़ी भाषा|अंग्रेज़ी]]<ref name=langoff/>
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| २२. || [[मध्य प्रदेश]] || [[हिन्दी]]<ref name="mp">{{Citation|url=http://www.mpgovt.nic.in/culture/language.htm|title=Language and Literature|work=Official website of Government of Madhya Pradesh|publisher=Government of Madhya Pradesh|accessdate=16 जुलाई 2007|archive-url=https://web.archive.org/web/20070929062809/http://www.mpgovt.nic.in/culture/language.htm|archive-date=29 सितंबर 2007|url-status=dead}}</ref> ||
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| २३. || [[महाराष्ट्र]] || [[मराठी]] ||
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| २४. || [[मिज़ोरम]] || मिज़ो ||
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| २५. || [[मेघालय]] || [[अंग्रेज़ी भाषा|अंग्रेज़ी]]<ref>{{citation |last=Commissioner Linguistic Minorities |title=42nd report: जुलाई 2003 - जून 2004 |page=para 25.5 |url=http://nclm.nic.in/shared/linkimages/35.htm |accessdate=16 जुलाई 2007 |archiveurl=https://web.archive.org/web/20071008113359/http://nclm.nic.in/shared/linkimages/35.htm |archivedate=8 अक्तूबर 2007 |url-status=dead }}</ref>[[खासी भाषा|खासी]] भाषा और [[गारो भाषा|गारो]] भाषा<ref>राष्ट्रीय भाषाई अल्पसंख्यक आयोग की 43वीं रिपोर्ट बताती है कि निर्धारित तिथि से खासी को पूर्वी खासी हिल्स, वेस्ट खासी हिल्स, जयंतिया हिल्स और री भोई जिलों में एक सहयोगी आधिकारिक भाषा का दर्जा प्राप्त होगा। पूर्वी गारो हिल्स, वेस्ट गारो हिल्स और साउथ गारो हिल्स के जिलों में गारो का समान दर्जा होगा।{{citation |last=आयुक्त भाषाई अल्पसंख्यक |title=43rd report: जुलाई 2004 - जून 2005 |page=para 25.1 |url=http://nclm.nic.in/index1.asp?linkid=203 |accessdate=16 जुलाई 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20090410022828/http://nclm.nic.in/index1.asp?linkid=203 |archive-date=10 अप्रैल 2009 |url-status=dead }}. On 21 मार्च 2006, the Chief Minister of Meghalaya stated in the State Assembly that a notification to this effect had been issued. {{citation |title=Meghalaya Legislative Assembly, Budget session: Starred Questions and Answers - Tuesday, the 21st मार्च 2006. |url=http://megassembly.gov.in/questions/2006/21-03-2006s.htm |accessdate=16 जुलाई 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20070927050159/http://megassembly.gov.in/questions/2006/21-03-2006s.htm |archive-date=27 सितंबर 2007 |url-status=dead }}</ref>
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| २६. || [[राजस्थान]] || [[हिन्दी]] ||
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| २७. || [[सिक्किम]] || [[नेपाली]]<ref>{{citation |last=भारत सरकार |title=सिक्किम भारत का राज्य |url=http://www.aees.gov.in/htmldocs/downloads/Econtent_aug2020/M%201-3%20Handout%20Cl%20X%20Hin%20Sana%20Sana.pdf |accessdate=16 जुलाई 2007 }}</ref> || ११ अन्य भाषाओं को आधिकारिक भाषा का दर्ज़ा प्राप्त है, किन्तु सिर्फ़ संस्कृति और परंपरा के संरक्षण के नज़रिये से <ref>Eleven other languages — Bhutia, Lepcha, Limboo, Newari, Gurung, Mangar, Mukhia, Rai, Sherpa and Tamang - are termed "official", but only for the purposes of the preservation of culture and tradition. {{citation |last=Commissioner Linguistic Minorities |title=43rd report: जुलाई 2004 - जून 2005 |pages=paras 27.3–27.4 |url=http://nclm.nic.in/index1.asp?linkid=203 |accessdate=16 जुलाई 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20090410022828/http://nclm.nic.in/index1.asp?linkid=203 |archive-date=10 अप्रैल 2009 |url-status=dead }}. See also {{citation |last=Commissioner Linguistic Minorities |title=41st report: जुलाई 2002 - जून 2003 |page=paras 28.4, 28.9 |url=http://nclm.nic.in/shared/linkimages/23.htm |accessdate=16 जुलाई 2007 |archiveurl=https://web.archive.org/web/20070224124226/http://nclm.nic.in/shared/linkimages/23.htm |archivedate=24 फ़रवरी 2007 |url-status=dead }}</ref>
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| २८. || [[हरियाणा]] || [[हिन्दी]]<ref name="HOLA1969">{{cite web|url=http://acts.gov.in/HR/964.pdf|title=The Haryana Official Language Act, 1969|date=15 मार्च 1969|website=acts.gov.in (server)|accessdate=27 दिसम्बर 2014|archive-url=https://web.archive.org/web/20141227123310/http://acts.gov.in/HR/964.pdf|archive-date=27 दिसंबर 2014|url-status=dead}}</ref>|| [[पंजाबी भाषा|पंजाबी]]<ref name="DNA">{{cite web|url=http://www.dnaindia.com/india/report-punjabi-edges-out-tamil-in-haryana-1356124|title=Punjabi edges out Tamil in Haryana|date=7 मार्च 2010|website=DNA India|accessdate=27 दिसम्बर 2014|archive-url=https://web.archive.org/web/20150102061421/http://www.dnaindia.com/india/report-punjabi-edges-out-tamil-in-haryana-1356124|archive-date=2 जनवरी 2015|url-status=live}}</ref>
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| २९.|| [[हिमाचल प्रदेश]] || [[हिन्दी]]<ref name="HPOL1975">{{cite web|url=http://hp.gov.in/LAC/bhasha/Adhiniyam/THE%20HIMACHAL%20PRADESH%20OFFICIAL%20LANGUAGE%20ACT,%201975.pdf|title=The Himachal Pradesh Official Language Act, 1975|date=21 Feb 1975|accessdate=27 दिसम्बर 2014|archive-url=https://web.archive.org/web/20140101085810/http://hp.gov.in/LAC/bhasha/Adhiniyam/THE%20HIMACHAL%20PRADESH%20OFFICIAL%20LANGUAGE%20ACT,%201975.pdf|archive-date=1 जनवरी 2014|url-status=dead}}</ref>||[[अंग्रेज़ी भाषा|अंग्रेज़ी]]<ref name=langoff/>{{rp|13}}
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|}
== संस्कृति ==
{{main|भारतीय संस्कृति}}
[[File:Pexels-The tajmahal.jpg|thumb|270px|right| [[ताजमहल]], विश्व के सबसे प्रसिद्ध [[पर्यटन स्थल|पर्यटक स्थलों]] में गिना जाता है।]]
भारत की सांस्कृतिक धरोहर बहुत सम्पन्न है। यहाँ की संस्कृति अनोखी है और वर्षों से इसके कई अवयव अब तक अक्षुण्ण हैं। आक्रमणकारियों तथा प्रवासियों से विभिन्न चीजों को समेट कर यह एक मिश्रित संस्कृति बन गई है। आधुनिक भारत का समाज, भाषाएं, रीति-रिवाज इत्यादि इसका प्रमाण हैं। [[ताजमहल]] और अन्य उदाहरण, [[इस्लाम]] प्रभावित स्थापत्य कला के उत्कृष्ट नमूने हैं।
[[चित्र:gumpa.jpg|thumb|left|270px|गुम्पा नृत्य एक [[तिब्बती बौद्ध धर्म|तिब्बती बौद्ध]] समाज का [[सिक्किम]] में छिपा नृत्य है। यह बौद्ध नव वर्ष पर किया जाता है।]]
भारतीय समाज बहुधर्मिक, बहुभाषी तथा मिश्र-सांस्कृतिक है। पारंपरिक भारतीय पारिवारिक मूल्यों को बहुत आदर की दृष्टि से देखा जाता है।
विभिन्न धर्मों के इस भूभाग पर कई मनभावन पर्व त्यौहार मनाए जाते हैं - [[दिवाली]], [[होली]], [[दशहरा]], [[पोंगल]] तथा [[ओणम]], [[ईद उल-फ़ित्र]], [[ईद-उल-जुहा]], [[मुहर्रम]], क्रिसमस, ईस्टर आदि भी बहुत लोकप्रिय हैं।
भारत में [[संगीत]] तथा [[नृत्य]] की अपनी शैलियां भी विकसित हुईं, जो बहुत ही लोकप्रिय हैं। [[भरतनाट्यम]], [[ओडिसी]], [[कथक]] प्रसिद्ध भारतीय नृत्य शैली है। [[हिन्दुस्तानी संगीत]] तथा [[कर्नाटक संगीत]] भारतीय परंपरागत संगीत की दो मुख्य धाराएं हैं। [[भारत के लोक नृत्य|लोक नृत्यों]] में शामिल हैं [[पंजाब क्षेत्र|पंजाब]] का ''[[भाँगङा|भांगड़ा]]'', [[असम]] का ''[[बिहु नृत्य|बिहू]], [[झारखंड]] का [[झुमइर]] और [[डमकच]], [[झारखंड]] और [[उड़ीसा]] का ''[[छऊ नृत्य|छाऊ]]'', [[राजस्थान]] का ''[[घूमर]]'', [[गुजरात]] का ''[[डंडिया रास|डांडिया]] '' और ''[[गरबा]]'', कर्नाटक जा ''[[यक्षगान]]'', [[महाराष्ट्र]] का ''[[लावणी|लावनी]]'' और गोवा का ''[[देख्न्नी|देख्ननी]] ''।
हालाँकि [[हॉकी]] देश का राष्ट्रीय खेल है, क्रिकेट सबसे अधिक लोकप्रिय है। वर्तमान में [[फुटबॉल]], [[हॉकी]] तथा [[टेनिस]] में भी बहुत भारतीयों की अभिरुचि है। देश की राष्ट्रीय क्रिकेट टीम 1983 और 2011 में दो बार [[विश्व कप क्रिकेट|विश्व कप]] और 2007 का 20–20 विश्व-कप जीत चुकी है। इसके अतिरिक्त वर्ष 2003 में वह विश्व कप के फाइनल तक पहुँची थी। 1930 तथा 40 के दशक में हॉकी भारत में अपने चरम पर थी। [[मेजर ध्यानचंद]] ने हॉकी में भारत को बहुत प्रसिद्धि दिलाई और एक समय भारत ने [[अमरीका]] को 24–0 से हराया था जो अब तक विश्व कीर्तिमान है। [[शतरंज]] के जनक देश भारत के खिलाड़ी विश्वनाथ आनंद ने अच्छा प्रदर्शन किया है।
वैश्वीकरण के इस युग में शेष विश्व की तरह भारतीय समाज पर भी अंग्रेजी तथा यूरोपीय प्रभाव पड़ रहा है। बाहरी लोगों की खूबियों को अपनाने की भारतीय परंपरा का नया दौर कई भारतीयों की दृष्टि में उचित नहीं है। एक खुले समाज के जीवन का यत्न कर रहे लोगों को मध्यमवर्गीय तथा वरिष्ठ नागरिकों की उपेक्षा का शिकार होना पड़ता है। कुछ लोग इसे भारतीय पारंपरिक मूल्यों का हनन भी मानते हैं। विज्ञान तथा साहित्य में अधिक प्रगति न कर पाने की वजह से भारतीय समाज यूरोपीय लोगों पर निर्भर होता जा रहा है। ऐसे समय में लोग विदेशी अविष्कारों का भारत में प्रयोग अनुचित भी समझते हैं।
=== भारतीय पर्व ===
भारत में कई सारे पर्व मनाए जाते हैं, जिसमें 26 जनवरी को [[स्वतंत्रता दिवस (भारत)|गणतंत्र दिवस]], 15 अगस्त को [[गणतंत्र दिवस (भारत)|स्वतंत्रता दिवस]], 2 अक्टूबर को [[गांधी जयंती]], [[दिवाली]], [[होली]], [[नवरात्रि]], [[राम नवमी|रामनवमी]], [[दशहरा]] और [[ईद]] पूरे देश में मनाई जाती है। इसके अलावा अन्य पर्व राज्यों के अनुसार होते हैं।
{{clear}}
=== सिनेमा और टेलीविज़न ===
{{main|भारतीय सिनेमा}}
भारतीय फिल्म उद्योग, विश्व की सबसे ज्यादा देखी जाने वाली सिनेमा का उत्पादन करता है। इसके अलावा यहाँ [[असमिया सिनेमा|असमिया]], [[बाङ्ला सिनेमा|बंगाली]], [[भोजपुरी सिनेमा|भोजपुरी]], [[हिन्दी सिनेमा|हिन्दी]], [[कन्नड़ सिनेमा|कन्नड़]], [[मलयाली सिनेमा|मलयालम]], [[पंजाबी सिनेमा|पंजाबी]], [[गुजराती सिनेमा|गुजराती]], [[मराठी सिनेमा|मराठी]], [[ओडिया सिनेमा|ओडिया]], [[तमिल सिनेमा|तमिल]] और [[तेलुगू सिनेमा|तेलुगू]] भाषाओं के क्षेत्रीय सिनेमाई परंपराएं भी मौजूद हैं। दक्षिण भारतीय सिनेमा का राष्ट्रीय फिल्म राजस्व में 75% से अधिक का हिस्सा है। भारत में सितंबर 2016 तक 2200 मल्टीप्लेक्स स्क्रीन सिनेमाघर थे तथा इसके 2019 तक 3000 तक बढ़ने की अपेक्षा की गई हैं।<ref>{{cite web|title=2019 तक मल्टीप्लेक्स स्क्रीन 3,000 से अधिक बढ़ने की उम्मीद:रिपोर्ट|url=http://timesofindia.indiatimes.com/city/delhi/Multiplex-screens-set-to-rise-over-3000-by-2019-Report/articleshow/54547871.cms|publisher=टाइम्स ऑफ इंडिया|access-date=29 मार्च 2017|archive-url=https://web.archive.org/web/20170225090947/http://timesofindia.indiatimes.com/city/delhi/Multiplex-screens-set-to-rise-over-3000-by-2019-Report/articleshow/54547871.cms|archive-date=25 फरवरी 2017|url-status=live}}</ref>
1959 में भारत में टेलीविजन का प्रसारण, राज्य संचालित संचार के माध्यम के रूप में शुरू हुआ, और अगले दो दशकों तक इसका धीमी गति से विस्तार हुआ। 1990 के दशक में टेलीविजन प्रसारण पर राज्य के एकाधिकार समाप्त हो गया, और तब से, उपग्रह चैनलों ने भारतीय समाज की लोकप्रिय संस्कृति को आकार दिया है। आज, भारत में टेलीविज़न मनोरंजन का सबसे प्रचलित माध्यम हैं, तथा इसकी पैठ समाज के हर वर्ग तक फैली हैं। उद्योग के अनुमान हैं कि भारत में 2012 तक 462 मिलियन उपग्रह या केबल कनेक्शन के साथ, कुल 554 मिलियन से अधिक टीवी उपभोक्ता हैं, मनोरंजन के अन्य साधनो में प्रेस मीडिया (350 मिलियन), रेडियो (156 मिलियन) तथा इंटरनेट (37 मिलियन) भी सम्मलित हैं
=== पाक-शैली (खानपान)===
{{main|भारतीय खाना}}
[[File:Vegetarian Curry.jpeg|thumb|]]
[[File:'4' A Southern Indian Thali, traditional style of serving meal in India.jpg|thumb|दक्षिण भारत का खाना]]
भारतीय खानपान बहुत ही समृद्ध है। शाकाहारी तथा मांसाहारी दोनों ही तरह का खाना पसन्द किया जाता है। भारतीय व्यंजन विदेशों में भी बहुत पसन्द किए जाते हैं।
== इन्हें भी देखें ==
* [[भारत सारावली]]
== सन्दर्भ ==
{{टिप्पणीसूची|2}}
== टिप्पणी सूची ==
{{notelist}}
== बाहरी कड़ियाँ ==
{{प्रवेशद्वार|भारत}}
* {{विकियात्रा|भारत}}
* [https://web.archive.org/web/20090619075310/http://www.bharat.gov.in/ भारत का राष्ट्रीय पोर्टल] (हिन्दी में)
* [https://web.archive.org/web/20120511032957/http://publicationsdivision.nic.in/others/Bharat_2011.pdf '''भारत २०११'''] (प्रकाशन विभाग द्वारा प्रकाशित भारत के बारे में सम्पूर्ण जानकारी)
* [https://web.archive.org/web/20100611181128/http://ucblibraries.colorado.edu/govpubs/for/india.htm भारत] ''यूसीबी लाइब्रेरीज़ गॉवपब्स'' पर
* [[बीबीसी हिन्दी]] पर [https://web.archive.org/web/20131023001422/http://www.bbc.co.uk/hindi/india/ भारत]
*[https://www.easyeducation22.com/2020/02/india-gk-pdf.html भारत जीके प्रश्न उत्तर हिन्दी पीडीएफ में] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20200222162628/https://www.easyeducation22.com/2020/02/india-gk-pdf.html |date=22 फ़रवरी 2020 }}
{{भारत के विषय }}
{{अतुल्य भारत}}
{{Template group
|title = [[चित्र:Gnome-globe.svg|25px]] भारत के बारे में
|list =
{{भारत के प्रान्त और संघ राज्यक्षेत्र}}
{{दक्षिण एशिया के देश और क्षेत्र}}
{{हिन्द महासागर के तटीय देश}}
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{{एशिया के देश}}
}}
{{Authority control}}
[[श्रेणी:एशिया के देश]]
[[श्रेणी:१९४७ में स्थापित देश या क्षेत्र]]
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wikitext
text/x-wiki
JAY HIHDUSTAN{{Infobox country
| conventional_long_name = भारत गणराज्य
| common_name = हिंदुस्तान भारत
| native_name = Republic of India <br /> <small> ([[भारत की आधिकारिक भाषाओं में भारत गणराज्य के नाम|अन्य क्षेत्रीय भाषाओं में]] देखें) </small>
| image_flag = Flag of India.svg
| alt_flag = क्षैतिज तिरंगे झंडे में ऊपर से नीचे तक गहरी केसरिया, सफ़ेद और हरी क्षैतिज पट्टियाँ हैं। सफेद पट्टी के केंद्र में 24 तीलियों वाला एक नेवी-ब्लू पहिया है।
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| symbol_width = 60px
| alt_coat = एक चित्रावली है जिसमें एक सरपट दौड़ता घोड़ा, एक 24-आरियों वाला पहिया और एक हाथी है। इसके उपर तीन शेर बाएँ, दाएँ और दर्शक की ओर मुख किए हुए हैं। चित्र में सबसे नीचे एक आदर्श वाक्य है: "सत्यमेव जयते"।
| symbol_type = [[भारत का राज्य प्रतीक|राज्य प्रतीक]]
| other_symbol_type = राष्ट्रीय गीत: "[[वन्दे मातरम्]]" ([[संस्कृत भाषा|संस्कृत]]){{efn|संस्कृत और [[साधु भाषा|संस्कृतिकृत बांग्ला]] के मिश्रण में लिखा गया है।}}
| other_symbol = "मैं आपको नमन करता हूँ, माँ"{{lower|0.2em|{{efn|"[...] ''जन गण मन'' भारत का राष्ट्रीय गान है, जिसके शब्दों में सरकार अवसर पड़ने पर परिवर्तन कर सकती है; और गीत ''वंदे मातरम्'', जिसने भारतीय स्वतंत्रता के संघर्ष में एक ऐतिहासिक भूमिका निभाई है, को ''जन गण मन'' के साथ समान रूप से सम्मानित किया जाएगा और इसके साथ समान दर्जा दिया जाएगा।"{{snf|<ref>{{cite web |url=https://india.gov.in/hi/india-glance/national-symbols |title=Constituent Assembly of India – Volume XII(अंग्रेजी में) |publisher=[[हिन्दी
राष्ट्रीय सूचना-विज्ञान केन्द्र]] [[भारत सरकार]] 24 जनवरी 1950 |access-date=25 जुलाई 2024 |archive-url=https://web.archive.org/web/20170201215621/https://india.gov.in/hi/india-glance/national-symbols |archive-date=1 फ़रवरी 2017 |url-status=bot: unknown }}</ref>}}<!--end efn:-->}}<ref name="india.gov.in" />}}<br />
<div style="display:inline-block;margin-top:0.4em;">[[File: Vande Mataram on Mohan Veena.ogg]]</div>
| national_motto = "[[सत्यमेव जयते]]" ([[संस्कृत भाषा|संस्कृत]])
| national_anthem = "[[जन गण मन]]" ([[हिन्दी]]){{efn|मूल रूप से [[साधु भाषा|संस्कृतिकृत बांग्ला]] में लिखा गया और इसके हिन्दी अनुवाद में राष्ट्रगान के रूप में अपनाया गया।}}{{efn|"भारत का राष्ट्रीय गान जन गण मन, जो मूल रूप से रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा बांग्ला में लिखा गया था, को 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा द्वारा इसके हिन्दी संस्करण में भारत के राष्ट्रगान के रूप में अपनाया गया था।"}}<ref name="india.gov.in" /><ref name="tatsama">{{cite news |title=भारत का राष्ट्रीय गान: 'जन गण मन' पर एक संक्षिप्त जानकारी |url=https://www.news18.com/news/india/national-anthem-of-india-a-brief-on-jana-gana-mana-498576.html |date=14 अगस्त 2012 |access-date=7 जून 2019 |publisher=[[न्यूज़18 इंडिया|न्यूज़18]] |archive-url=https://web.archive.org/web/20190417194530/https://www.news18.com/news/india/national-anthem-of-india-a-brief-on-jana-gana-mana-498576.html |archive-date=17 अप्रैल 2019}}</ref>
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| alt_map = भारत पर केंद्रित ग्लोब की छवि, जिसमें भारत पर प्रकाश डाला गया है।
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* [[मुंबई]] (शहर उचित)
* [[दिल्ली]] (महानगरीय क्षेत्र)
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| official_languages = {{hlist |[[मानक हिन्दी|हिन्दी]]|[[अंग्रेज़ी भाषा|अंग्रेज़ी]]{{efn|[[देवनागरी]] लिपि में लिखी जाने वाली [[मानक हिन्दी|हिन्दी]] संघ की राजभाषा है। सरकारी कामकाज के लिए [[अंग्रेज़ी]] (इंग्लिश) सह-राजभाषा है।{{sfn|राष्ट्रीय सूचना-विज्ञान केंद्र|2005}}<ref name="india.gov.in2">{{cite web |url=http://india.gov.in/india-glance/profile |title=Profile | National Portal of India |publisher=इंडिया पोर्टल |accessdate=१३ मई २०१४ |archive-url=https://web.archive.org/web/20140209020314/http://india.gov.in/india-glance/profile |archive-date=9 फ़रवरी 2014 |url-status=live }}</ref>[[भारत के राज्य और संघशासित प्रदेश]] हिन्दी या अंग्रेज़ी के अलावा अपने स्वयं की एक अलग आधिकारिक भाषा हो सकती है।}}<ref>{{Cite web|url=http://rajbhasha.nic.in/UI/pagecontent.aspx?pc=MzU%3d |title=Constitutional Provisions – Official Language Related Part-17 Of The Constitution Of India |language=Hindi |website=[[राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र]] |accessdate=27 दिसम्बर 2015 |url-status=dead |archiveurl=https://web.archive.org/web/20160201081439/http://rajbhasha.nic.in/UI/pagecontent.aspx?pc=MzU%3D |archivedate= 1 फ़रवरी 2016 |df= }}</ref>}}
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| languages = [[भारत में स्थानीय वक्ताओं की संख्यानुसार भाषाओं की सूची|447 बोली]]{{efn|अलग-अलग स्रोतों से हमें यह संख्या भिन्न-भिन्न प्राप्त होती है, यह प्राथमिक तौर पर इसपर निर्भर करता है कि "भाषा" और "बोली" को कैसे समाहित एवं परिभाषित किया गया है। [[ऍथनोलॉग]] सूची में भारत की 461 ज़ुबान (विश्वस्तर पर 6,912 में से) हैं, जिनमें 447 अभी बोली जाती हैं जबकि 14 लुप्तप्राय हैं।<ref name="Ethnologue">{{cite web|editor=लेविस, एम पॉल |editor2=सिमन्स, गेरी एफ॰ |editor3=फेन्निग, चार्ल्स डी॰ |year=2014|title=Ethnologue: Languages of the World : India|publisher=एसआईएल इंटरनेशनल द्वारा [[ऍथनोलॉग]] |edition=17वाँ|location= डल्लास, टेक्सास |url= https://www.ethnologue.com/country/IN|access-date=15 December 2014}}</ref><ref name="Ethnologue2">{{cite web|url=https://archive.ethnologue.com/15/ethno_docs/distribution.asp?by=area|archive-url=https://web.archive.org/web/20141217151950/https://archive.ethnologue.com/15/ethno_docs/distribution.asp?by=area|title=Ethnologue : Languages of the World (Seventeenth edition) : Statistical Summaries |publisher=एसआईएल इंटरनेशनल द्वारा [[ऍथनोलॉग]] |archive-date=17 दिसम्बर 2014|access-date=17 दिसम्बर 2014}}</ref>}}
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|title = [[भारत की आधिकारिक भाषाएँ|राज्य स्तरीय]] तथा [[आठवीं अनुसूची|{{nowrap|आठवीं अनुसूची}}]]<ref>{{cite web |url=http://nclm.nic.in/shared/linkimages/NCLM50thReport.pdf |title=Report of the Commissioner for linguistic minorities: 50th report (July 2012 to June 2013) |publisher=Commissioner for Linguistic Minorities, Ministry of Minority Affairs, Government of India |access-date=26 दिसम्बर 2014 |url-status=dead |archive-url=https://web.archive.org/web/20160708012438/http://nclm.nic.in/shared/linkimages/NCLM50thReport.pdf |archive-date=8 जुलाई 2016 }}</ref>
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| [[असमिया भाषा|असमिया]]
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| official_website = <!-- do not add www.gov.in – The article is about the country, not the government – from Template:Infobox country, do not use government website (e.g. usa.gov) for countries (e.g. United States) -->
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}}
'''भारत''' (आधिकारिक नाम: '''भारत गणराज्य''', {{langx|en|Republic of India}}, [[लिप्यन्तरण]]: ''रिपब्लिक् ऑफ़् इण्डिया'') [[दक्षिण एशिया]] में स्थित [[भारतीय उपमहाद्वीप]] का सबसे बड़ा देश है। भारत भौगोलिक दृष्टि से विश्व का [[भारत का भूगोल|सातवाँ]] सबसे बड़ा देश है, जबकि [[जनसंख्या]] के दृष्टिकोण से विश्व का सबसे बड़ा देश है<ref>{{Cite news|url=https://www.bbc.com/news/world-asia-india-65322706|title=Most populous nation: Should India rejoice or panic?|date=2023-05-01|work=BBC News|access-date=2023-06-26|language=en-GB}}</ref>। भारत के पश्चिम में [[पाकिस्तान]], उत्तर पश्चिम में अफगानिस्तान, उत्तर-पूर्व में [[चीनी जनवादी गणराज्य|चीन]], [[नेपाल]] और [[भूटान]], पूर्व में [[बांग्लादेश]] और [[म्यान्मार]] स्थित हैं। [[हिन्द महासागर]] में इसके दक्षिण पश्चिम में [[मालदीव]], दक्षिण में [[श्रीलंका]] और दक्षिण-पूर्व में [[इंडोनेशिया]] से भारत की सामुद्रिक सीमा लगती है। इसके उत्तर में [[हिमालय|हिमालय पर्वत]] तथा दक्षिण में [[हिन्द महासागर|भारतीय महासागर]] स्थित है। दक्षिण-पूर्व में [[बंगाल की खाड़ी]] तथा पश्चिम में [[अरब सागर]] है।
<!--content repeated in इतिहास section
आधुनिक मानव ''([[होमो सेपियन्स|होमो सेपियंस]])'' [[अफ्रीका]] से भारतीय उपमहाद्वीप में ५५,००० साल पहले आये थे।<ref name="Combined-1">(a) {{citation|last=Dyson|first=Tim|title=A Population History of India: From the First Modern People to the Present Day|url=https://books.google.com/books?id=3TRtDwAAQBAJ&pg=PA1 | year=2018 | publisher=ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस|isbn=978-0-19-882905-8|page=1}}; (b) {{cite book |author1=Michael D. Petraglia |author2=Bridget Allchin |author-link2=Bridget Allchin |title=The Evolution and History of Human Populations in South Asia: Inter-disciplinary Studies in Archaeology, Biological Anthropology, Linguistics and Genetics |url=https://books.google.com/books?id=Qm9GfjNlnRwC&pg=PA10#v=onepage&q&f=false |publisher=Springer Science + Business Media |page=6 |isbn=978-1-4020-5562-1|date=22 मई 2007 }}; (c) {{citation|last=Fisher|first=Michael H.|title=An Environmental History of India: From Earliest Times to the Twenty-First Century|url=https://books.google.com/books?id=kZVuDwAAQBAJ&pg=PA23|year=2018|publisher=Cambridge University Press|isbn=978-1-107-11162-2|page=23}} </ref> 1,000 वर्ष पहले ये [[सिंधु नदी]] के पश्चिमी हिस्से की तरफ बसे हुए थे जहां से इन्होने धीरे धीरे पलायन किया और [[सिंधु घाटी सभ्यता]] के रूप में विकसित हुए।<ref name="Combined-2"> (a) {{citation|last=Dyson|first=Tim|title=A Population History of India: From the First Modern People to the Present Day|url=https://books.google.com/books?id=3TRtDwAAQBAJ&pg=PA4|year=2018|publisher=ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस|isbn=978-0-19-882905-8|pages=4–5}}; (b) {{citation|last=Fisher|first=Michael H.|title=An Environmental History of India: From Earliest Times to the Twenty-First Century | url=https://books.google.com/books?id=kZVuDwAAQBAJ&pg=PA23 |year=2018|publisher=Cambridge University Press|isbn=978-1-107-11162-2|page=33}}
</ref>-->
1,200 ईसा पूर्व [[संस्कृत भाषा]] सम्पूर्ण भारतीय उपमहाद्वीप में फैली हुए थी और तब तक यहां पर [[हिन्दू धर्म]] का उद्धव हो चुका था और [[ऋग्वेद]] की रचना भी हो चुकी थी।<ref name="Combined-3"> (a) {{citation|last=Dyson|first=Tim|title=A Population History of India: From the First Modern People to the Present Day|url=https://books.google.com/books?id=3TRtDwAAQBAJ&pg=PA14|year=2018|publisher=[[ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रे]]|isbn=978-0-19-882905-8|pages=14–15}}; (b) {{citation|last=Robb|first=Peter|title=A History of India|url=https://books.google.com/books?id=GQ-2VH1LO_EC&pg=PA46|year=2011|publisher=[[मैकमिलन पब्लिशर्स|मैकमिलन]] |isbn=978-0-230-34549-2|page=46}}{{Dead link|date=फ़रवरी 2023 |bot=InternetArchiveBot }}; (c) {{citation|last=Ludden|first=David|title=India and South Asia: A Short History |url=https://books.google.com/books?id=EbFHAQAAQBAJ&pg=PA19|year=2013|publisher=Oneworld Publications|isbn=978-1-78074-108-6|page=19}}</ref> इसी समय बौद्ध एवं जैन धर्म उत्पन्न हो रहे होते थे।<ref name="Fisher2018-59">{{citation|last=Fisher|first=Michael H.|title=An Environmental History of India: From Earliest Times to the Twenty-First Century|url=https://books.google.com/books?id=kZVuDwAAQBAJ&pg=PA59|year=2018|publisher=[[कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी प्रेस]]|isbn=978-1-107-11162-2|page=59}}
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प्रारम्भिक राजनीतिक एकत्रीकरण ने [[गंगा बेसिन]] में स्थित [[मौर्य]] और [[गुप्त राजवंश|गुप्त साम्राज्यों]] को जन्म दिया।<ref name="Combined-5">(a) {{citation|last=Dyson|first=Tim|title=A Population History of India: From the First Modern People to the Present Day|url=https://books.google.com/books?id=3TRtDwAAQBAJ&pg=PA16|year=2018|publisher=[[ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस]]|isbn=978-0-19-882905-8|pages=16–17}}; (b) {{citation|last=Fisher|first=Michael H.|title=An Environmental History of India: From Earliest Times to the Twenty-First Century|url=https://books.google.com/books?id=kZVuDwAAQBAJ&pg=PA67|year=2018|publisher=[[कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी प्रेस]]|isbn=978-1-107-11162-2|page=67}}; (c) {{citation|last=Robb|first=Peter|title=A History of India|url=https://books.google.com/books?id=GQ-2VH1LO_EC&pg=PA56|year=2011|publisher=[[मैकमिलन पब्लिशर्स|मैकमिलन]] |isbn=978-0-230-34549-2|pages=56–57}}{{Dead link|date=फ़रवरी 2023 |bot=InternetArchiveBot }}; (d) {{citation|last=Ludden|first=David|title=India and South Asia: A Short History|url=https://books.google.com/books?id=EbFHAQAAQBAJ&pg=PA29|year=2013|publisher=[[वनवर्ल्ड पब्लिकेशन्स]]|isbn=978-1-78074-108-6|pages=29–30}}</ref>
उनका समाज विस्तृत सृजनशीलता से भरा हुआ था। <ref name="Combined-6">
(a) {{citation
|last=Ludden
|first=David|title=India and South Asia: A Short History|url=https://books.google.com/books?id=EbFHAQAAQBAJ&pg=PA28|year=2013|publisher=[[वनवर्ल्ड पब्लिकेशन्स]]|isbn=978-1-78074-108-6|pages=28–29}}; (b) {{citation|author=Glenn Van Brummelen |editor=Thomas F. Glick |editor2=Steven Livesey |editor3=Faith Wallis |title=Medieval Science, Technology, and Medicine: An Encyclopedia|chapter-url=https://books.google.com/books?id=77y2AgAAQBAJ&pg=PA46|year=2014|publisher=रूटलेज|isbn=978-1-135-45932-1|pages=46–48|chapter=Arithmetic}}
</ref>
प्रारम्भिक मध्ययुगीन काल में, [[ईसाई धर्म]], [[इस्लाम]], [[यहूदी धर्म]] और [[पारसी धर्म]] ने भारत के दक्षिणी और पश्चिमी तटों पर जड़ें जमा लीं।<ref name="Combined-8">
(a) {{citation
|last=Ludden
|first=David|title=India and South Asia: A Short History|url=https://books.google.com/books?id=EbFHAQAAQBAJ&pg=PA54|year=2013|publisher=Oneworld Publications|isbn=978-1-78074-108-6|page=54}}; (b) {{citation
|last1=Asher|first1=Catherine B.|last2=Talbot|first2=Cynthia|title=India Before Europe|url=https://books.google.com/books?id=ZvaGuaJIJgoC&pg=PA78|year=2006|publisher=Cambridge University Press|isbn=978-0-521-80904-7|pages=78–79}}; (c) {{citation
|last=Fisher|first=Michael H.|title=An Environmental History of India: From Earliest Times to the Twenty-First Century|url=https://books.google.com/books?id=kZVuDwAAQBAJ&pg=PA76|year=2018|publisher=Cambridge University Press|isbn=978-1-107-11162-2|page=76}}
</ref> [[मध्य एशिया]] से मुस्लिम सेनाओं ने भारत के उत्तरी मैदानों पर लगातार अत्याचार किया,<ref name="Combined-9">
(a) {{citation|last=Ludden|first=David|title=India and South Asia: A Short History|url=https://books.google.com/books?id=EbFHAQAAQBAJ&pg=PA68|year=2013|publisher=Oneworld Publications|isbn=978-1-78074-108-6|pages=68–70}}; (b) {{citation|last1=Asher|first1=Catherine B.|last2=Talbot|first2=Cynthia|title=India Before Europe|url=https://books.google.com/books?id=ZvaGuaJIJgoC&pg=PA19|year=2006|publisher=Cambridge University Press|isbn=978-0-521-80904-7|pages=19, 24}}
</ref> अन्ततः दिल्ली सल्तनत की स्थापना हुई और उत्तर भारत को [[इस्लामी स्वर्ण युग|मध्यकालीन इस्लाम साम्राज्य]] में मिला लिया गया।<ref name="Combined-10">
(a) {{citation
|last=Dyson
|first=Tim|title=A Population History of India: From the First Modern People to the Present Day|url=https://books.google.com/books?id=0UVvDwAAQBAJ&pg=PA48|date=20 सितम्बर 2018|publisher=ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस|isbn=978-0-19-256430-6|page=48}}; (b) {{citation
|last1=Asher|first1=Catherine B.|last2=Talbot|first2=Cynthia|title=India Before Europe|url=https://books.google.com/books?id=ZvaGuaJIJgoC&pg=PA53|year=2006|publisher=Cambridge University Press|isbn=978-0-521-80904-7|page=52}}
</ref> 15 वीं शताब्दी में, [[विजयनगर साम्राज्य]] ने दक्षिण भारत में एक लंबे समय तक चलने वाली समग्र हिन्दू संस्कृति बनाई।<ref name="AsherAsher2006-74">
{{citation
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|first1=Catherine B.|last2=Talbot|first2=Cynthia|title=India Before Europe|url=https://books.google.com/books?id=ZvaGuaJIJgoC&pg=PA74|year=2006|publisher=Cambridge University Press|isbn=978-0-521-80904-7|page=74}}"
</ref> [[पंजाब]] में [[सिख धर्म]] की स्थापना हुई।<ref name="AsherAsher2006-267">
{{citation
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|first1=Catherine B.|last2=Talbot|first2=Cynthia|title=India Before Europe|url=https://books.google.com/books?id=ZvaGuaJIJgoC&pg=PA267|year=2006|publisher=Cambridge University Press|isbn=978-0-521-80904-7|page=267}}
</ref><!-----Don't add this line GOOGLE TRANSLATED. 1526 में, मुगल साम्राज्य ने दो सदियों में सापेक्ष शांति की शुरुआत की, चमकदार वास्तुकला की विरासत छोड़कर।-----> धीरे-धीरे [[कंपनी राज|ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के शासन]] का विस्तार हुआ, जिसने भारत को औपनिवेशिक अर्थव्यवस्था में बदल दिया तथा अपनी [[सम्प्रभुता|सम्प्रभुता]] को भी मज़बूत किया।<ref name="Combined-11">
(a) {{citation|last1=Asher|first1=Catherine B.|last2=Talbot|first2=Cynthia|title=India Before Europe|url=https://books.google.com/books?id=ZvaGuaJIJgoC&pg=PA289|year=2006|publisher=Cambridge University Press|isbn=978-0-521-80904-7|page=289}}; (b) {{citation
|last=Fisher|first=Michael H.|title=An Environmental History of India: From Earliest Times to the Twenty-First Century|url=https://books.google.com/books?id=kZVuDwAAQBAJ&pg=PA120|year=2018|publisher=Cambridge University Press|isbn=978-1-107-11162-2|page=120}}
</ref> [[ब्रिटिश राज|ब्रिटिश राज शासन]] १८५८ में शुरू हुआ। धीरे धीरे एक प्रभावशाली राष्ट्रवादी आंदोलन शुरू हुआ जिसे अहिंसक विरोध के लिए जाना गया और ब्रिटिश शासन को समाप्त करने का प्रमुख कारक बन गया।<ref name="Marshall2001-179-181">{{citation|last=Marshall|first=P. J.|title=The Cambridge Illustrated History of the British Empire|url=https://books.google.com/books?id=S2EXN8JTwAEC&pg=PAPA179|year=2001|publisher=Cambridge University Press|isbn=978-0-521-00254-7|pages=179–181}}</ref> 1947 में ब्रिटिश [[भारत का विभाजन|भारतीय साम्राज्य]] को दो स्वतंत्र प्रभुत्वों में विभाजित किया गया, [[भारतीय अधिराज्य]] तथा [[पाकिस्तान अधिराज्य]], जिन्हें धर्म के आधार पर विभाजित किया गया।<ref name="Copland2001-71-72-78">{{harvnb|Copland|2001|pp=71–78}}</ref><ref name="MetcalfMetcalf2006-222">{{harvnb|Metcalf|Metcalf|2006|p=222}}</ref>
1950 से भारत एक संघीय गणराज्य है। भारत की जनसंख्या 1951 में 36.1 करोड़ से बढ़कर 2011 में 121.1 करोड़, 2021 में बढ़कर 140.76 करोड़ हो गई।<ref name="Dyson2018-219">
{{citation
|last=Dyson|first=Tim|title=A Population History of India: From the First Modern People to the Present Day|url=https://books.google.com/books?id=3TRtDwAAQBAJ&pg=PA219|year=2018|publisher=ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस|isbn=978-0-19-882905-8|pages=219, 262}}
</ref> [[प्रति व्यक्ति आय]] $64 से बढ़कर $1,498, 2020- 21 में $2150, शुरुआती 2022- 23 में $2450 हो गई और इसकी साक्षरता दर 16.6% से बढ़कर 74.04% पुरुषों के लिए एवम 64% महिलाओं की हो गई। भारत एक तेज़ी से बढ़ती हुई [[जी-20|प्रमुख अर्थव्यवस्था]] और [[भारत में सूचना प्रौद्योगिकी|सूचना प्रौद्योगिकी]] सेवाओं का केंद्र बन गया है।<ref name="MetcalfMetcalf2012-265">
{{citation
|last1=Metcalf
|first1=Barbara D.|last2=Metcalf|first2=Thomas R.|title=A Concise History of Modern India|url=https://books.google.com/books?id=mjIfqyY7jlsC&pg=PA265|year=2012|publisher=Cambridge University Press|isbn=978-1-107-02649-0|pages=265–266}}
</ref> [[भारतीय अन्तरिक्ष अनुसंधान संगठन|अन्तरिक्ष क्षेत्र]] में भारत ने उल्लेखनीय तथा अद्वितीय प्रगति की। भारतीय फ़िल्में, संगीत और आध्यात्मिक शिक्षा वैश्विक संस्कृति में विशेष भूमिका निभाती हैं।<ref name="MetcalfMetcalf2012-266">
{{citation
|last1=Metcalf
|first1=Barbara D.|last2=Metcalf|first2=Thomas R.|title=A Concise History of Modern India|url=https://books.google.com/books?id=mjIfqyY7jlsC&pg=PA266|year=2012|publisher=Cambridge University Press|isbn=978-1-107-02649-0|page=266}}
</ref> भारत ने ग़रीबी दर को काफ़ी हद तक कम कर दिया है।<ref name="Dyson2018-216-a">
{{citation
|last=Dyson|first=Tim|title=A Population History of India: From the First Modern People to the Present Day|url=https://books.google.com/books?id=3TRtDwAAQBAJ&pg=PA216|year=2018|publisher=ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस|isbn=978-0-19-882905-8|page=216}}
</ref> भारत देश [[परमाणु अस्त्रों से युक्त देशों की सूची|परमाणु बम रखने वाला देश]] है। भारत-चीन सीमा पर भारत का चीन से विवाद चल रहा है। [[कश्मीर]] क्षेत्र को लेकर भारत और [[पाकिस्तान]] में विवाद है।<ref name=kashmir-disputes>(a) {{citation |title=Kashmir, region Indian subcontinent |encyclopedia=Encyclopaedia Britannica |url=https://www.britannica.com/place/Kashmir-region-Indian-subcontinent |access-date=15 अगस्त 2019 |url-access=subscription |quote=Kashmir, region of the northwestern Indian subcontinent ... has been the subject of dispute between India and Pakistan since the partition of the Indian subcontinent in 1947. |archive-url=https://web.archive.org/web/20190813203817/https://www.britannica.com/place/Kashmir-region-Indian-subcontinent |archive-date=13 अगस्त 2019 |url-status=live }};<br /> (b) {{citation |last1=Pletcher |first1=Kenneth |title=Aksai Chin, Plateau Region, Asia |encyclopedia=Encyclopaedia Britannica |url=https://www.britannica.com/place/Aksai-Chin |access-date=16 अगस्त 2019 |url-access=subscription |quote=Aksai Chin, Chinese (Pinyin) Aksayqin, portion of the Kashmir region, ... constitutes nearly all the territory of the Chinese-administered sector of Kashmir that is claimed by India |archive-url=https://web.archive.org/web/20190402090308/https://www.britannica.com/place/Aksai-Chin |archive-date=2 अप्रैल 2019 |url-status=live }}; <br /> (c) {{cite encyclopedia|chapter=Kashmir|encyclopedia=Encyclopedia Americana |publisher=Scholastic Library Publishing|chapter-url=https://books.google.com/books?id=l_cWAQAAMAAJ&pg=PA328 |year=2006 |isbn=978-0-7172-0139-6 |page=328 |author=C. E Bosworth |title=Encyclopedia Americana: Jefferson to Latin |quote=KASHMIR, kash'mer, the northernmost region of the Indian subcontinent, administered partly by India, partly by Pakistan, and partly by China. The region has been the subject of a bitter dispute between India and Pakistan since they became independent in 1947}}</ref> [[भारत में लैंगिक असमानता|लैंगिक असमानता]], बाल शोषण, [[भारत में कुपोषण|बाल कुपोषण]],<ref name="NarayanJohn2018-lead">{{cite journal|last1=Narayan|first1=Jitendra|last2=John|first2=Denny|last3=Ramadas|first3=Nirupama|title=Malnutrition in India: status and government initiatives|journal=Journal of Public Health Policy|volume=40|issue=1|year=2018|pages=126–141|issn=0197-5897|doi=10.1057/s41271-018-0149-5|pmid=30353132}}
</ref> ग़रीबी, भ्रष्टाचार, प्रदूषण इत्यादि भारत के सामने प्रमुख चुनौतियाँ है।<ref name="BalakrishnanDey2019-lead">{{cite journal|last1=Balakrishnan|first1=Kalpana|last2=Dey|first2=Sagnik|title=The impact of air pollution on deaths, disease burden, and life expectancy across the states of India: the Global Burden of Disease Study 2017|journal=The Lancet Planetary Health|volume=3|issue=1|year=2019|pages=e26–e39|display-authors=etal|issn=2542-5196|doi=10.1016/S2542-5196(18)30261-4|pmid=30528905}}
</ref> 21.4% क्षेत्र पर वन है।<ref name="Jha2018-lead">
{{citation
|last=Jha|first=Raghbendra|title=Facets of India's Economy and Her Society Volume II: Current State and Future Prospects|url=https://books.google.com/books?id=9n9SDwAAQBAJ&pg=PA198|year=2018|publisher=Springer|isbn=978-1-349-95342-4|page=198}}
</ref> [[भारतीय पशु और पक्षी|भारत के वन्यजीव]], जिन्हें परंपरागत रूप से [[भारत की संस्कृति]] में सहिष्णुता के साथ देखा गया है,<ref name="WoodroffeThirgood2005">{{citation|last1=Karanth|first1=K. Ullas|last2=Gopal|first2=Rajesh |editor=Rosie Woodroffe |editor2=Simon Thirgood |editor3=Alan Rabinowitz |title=People and Wildlife, Conflict Or Co-existence?|chapter-url=https://books.google.com/books?id=6vNzRzcjntAC&pg=PA374|year=2005|publisher=Cambridge University Press|isbn=978-0-521-53203-7|page=374|chapter=An ecology-based policy framework for human-tiger coexistence in India}}</ref> इन जंगलों और अन्य जगहों पर [[भारत के संरक्षित क्षेत्र|संरक्षित आवासों]] में निवास करते हैं।
12 फ़रवरी वर्ष 1948 में [[महात्मा गांधी|महात्मा गाँधी]] के अस्थि कलश जिन 12 तटों पर विसर्जित किए गए थे, त्रिमोहिनी संगम भी उनमें से एक है |
==नामोत्पत्ति==
{{मुख्य|भारत नाम की उत्पत्ति}}
भारत के दो आधिकारिक नाम हैं- [[हिन्दी]] में '''भारत''' और [[अंग्रेज़ी]] में '''इंडिया''' (''India'')। इंडिया नाम की उत्पत्ति [[सिंधु नदी]] के [[अंग्रेज़ी]] नाम "इंडस" से हुई है।{{sfn|Oxford English Dictionary}} [[भागवत पुराण|श्रीमद्भागवत महापुराण]] में वर्णित एक कथा के अनुसार भारत नाम [[मनु]] के वंशज तथा [[ऋषभदेव]] के सबसे बड़े बेटे एक प्राचीन सम्राट '''[[भरत (भागवत)|भरत]]''' के नाम से लिया गया है। <ref>{{Cite web|url=https://archive.org/stream/HindiBookBhagwatPuran/Hindi%20Book-Bhagwat-Puran#page/n274/mode/1up|title=Hindi Book Bhagwat Puran|website=archive.org|access-date=2020-04-29}}</ref><ref>{{Cite book|url=http://archive.org/details/VayuPuranam|title=Vayu Puranam}}</ref><ref>{{Cite book|url=http://archive.org/details/puran_varah|title=Varah Puran - वराह पुराण - हिन्दी|last=Sanatan}}</ref><ref>{{Cite book|url=http://archive.org/details/puran_ling|title=Ling Puran - लिंग पुराण - हिन्दी|last=Sanatan}}</ref><ref>{{Cite book|url=http://archive.org/details/puran_narad|title=Narad Puran - नारद पुराण - हिन्दी|last=Sanatan}}</ref><ref>{{Cite book|url=http://archive.org/details/puran_narsimha|title=Narsimha Puran - नरसिंह पुराण - हिन्दी|last=Sanatan}}</ref> एक व्युत्पत्ति के अनुसार भारत (भा + रत) शब्द का मतलब है आंतरिक प्रकाश या विदेक-रूपी प्रकाश में लीन। एक तीसरा नाम [[हिन्दुस्तान|हिन्दुस्तान]] भी है जिसका अर्थ ''हिन्द'' ''की भूमि'', यह नाम विशेषकर [[अरब देश|अरब]] तथा [[ईरान]] में प्रचलित हुआ। <ref>{{Cite web|url=https://scroll.in/article/855876/land-of-hindus-mohan-bhagwat-narendra-modi-and-the-sangh-parivar-are-using-hindustan-all-wrong|title=Land of Hindus? Mohan Bhagwat, Narendra Modi and the Sangh Parivar are using ‘Hindustan’ all wrong|first=Shoaib|last=Daniyal|website=Scroll.in|accessdate=1 मार्च 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190212132749/https://scroll.in/article/855876/land-of-hindus-mohan-bhagwat-narendra-modi-and-the-sangh-parivar-are-using-hindustan-all-wrong|archive-date=12 फ़रवरी 2019|url-status=dead}}</ref> <ref>{{cite web|url=http://www.britannica.com/eb/article-9040520/Hindustan|title=Hindustan|year=2007|publisher=[[ब्रिटैनिका विश्वकोष]], Inc.|archive-url=https://web.archive.org/web/20071016055949/http://www.britannica.com/eb/article-9040520/Hindustan|archive-date=16 अक्तूबर 2007|accessdate=18 जून 2007|url-status=live}}</ref> बहुत पहले भारत का एक मुंहबोला नाम ''सोने की चिड़िया'' भी प्रचलित था। <ref>{{Cite web|url=https://www.jagranjosh.com/general-knowledge/why-was-india-called-as-golden-bird-in-hindi-1533709498-2|title=भारत को सोने की चिड़िया क्यों कहा जाता था?|date=2019-01-24|website=Jagranjosh.com|access-date=2021-05-07}}</ref> संस्कृत महाकाव्य महाभारत में वर्णित है की वर्तमान उत्तर भारत का क्षेत्र भारत के अन्तर्गत आता था। भारत को कई अन्य नामों इंडिया, भारतवर्ष, आर्यावर्त, हिन्द, हिन्दुस्तान, जंबूद्वीप आदि से भी जाना जाता है।
== इतिहास ==
<!-- यह अंश एक सार है। अगर आप कुछ बदलाव या बढोतरी करना चाहें तो [[भारतीय इतिहास]] लेख में करें -->
{{main|भारत का इतिहास}}
[[चित्र:Sanchi2.jpg|thumb|तीसरी शताब्दी में सम्राट [[अशोक]] द्वारा बनाया गया [[मध्य प्रदेश]] में [[साँची का स्तूप]]]]
===प्राचीन भारत===
{{multiple image|perrow=1/1|total_width=300|caption_align=center
| align = left
| image_style = border:none;
| image1 = 1500-1200 BCE Rigveda, manuscript page sample i, Mandala 1, Hymn 1 (Sukta 1), Adhyaya 1, lines 1.1.1 to 1.1.9, Sanskrit, Devanagari.jpg
| image2 = Battle at Lanka, Ramayana, Udaipur, 1649-53.jpg
| footer = {{font|size=100%|font=Sans-serif|text=(शीर्ष) [[ऋग्वेद]] की एक मध्यकालीन [[पांडुलिपि]], मौखिक रूप से, १५००-१२०० ई.पू. (नीचे) संस्कृत महाकाव्य [[रामायण]] की एक पांडुलिपि से एक चित्रण}}
}}
<!-----इस अनुभाग में किसी भी तरह का परिवर्तन न करें | इसकी अच्छी तरह से जाँच की गयी है। इसपर कोई भी भाषागत त्रुटि का सुधार तो किया है सकता है परन्तु कोई भी मान परिवर्तन न करें। कोई भी स्रोत न तो जोड़ें और न ही मिटायें। यदि फिर भी कोई त्रुटि दिखे तो कृपया पृष्ठ के वार्ता पर चर्चा करें या चौपाल पर सूचित कर त्रुटियों से अवगत करवाएं।----->
भारत का इतिहास अत्यंत प्राचीन और समृद्ध रहा है, जिसमें सिंधु घाटी सभ्यता से लेकर मौर्य और गुप्त साम्राज्यों तथा स्वतंत्रता संग्राम तक अनेक महत्वपूर्ण चरण शामिल हैं।लगभग 55,000 वर्ष पहले ([[प्राचीन भारत]]) <ref>{{cite web |last1=Ayra |first1=Agrawal |title=भारत का इतिहास |url=https://findgyan.com/history-of-india-ancient-in-hindi-2022/ |website=Find Gyan |accessdate=14 फरवरी 2022 |ref=५५००० |archive-date=18 फ़रवरी 2022 |archive-url=https://web.archive.org/web/20220218235422/https://findgyan.com/history-of-india-ancient-in-hindi-2022/ |url-status=dead }}</ref> आधुनिक मानव या [[होमो सेपियन्स|होमो सेपियंस]] [[अफ्रीका]] से [[भारतीय उपमहाद्वीप]] में पहुँचे थे। <ref name="Dyson2018">{{citation|last=Dyson|first=Tim |title=ए पॉप्युलेशन हिस्ट्री ऑफ इंडिया: प्रारम्भिक मानव से लेकर वर्तमान मानव तक|url=https://books.google.com/books?id=3TRtDwAAQBAJ&pg=PA1|year=2018 |publisher=[[ऑक्सफोर्ड यूनिवरसिटि प्रेस]]|isbn=978-0-19-882905-8|page=1}} उद्धरण: "आधुनिक मानव - होमो सेपियन्स- की उत्पत्ति अफ्रीका में हुई थी । फिर, 60,000 से 80,000 साल के बीच कुछ समय पहले, उनमें से कुछ छोटे समूहों ने भारतीय उपमहाद्वीप के उत्तर-पश्चिम हिस्से में प्रवेश करना शुरू कर दिया था। ऐसा लगता है कि शुरू में वे तट के रास्ते से आए थे। ... यह वास्तव में निश्चित है कि 55,000 साल पहले उपमहाद्वीप में होमो सेपियन्स (आधुनिक मनुष्य)थे, भले ही सबसे पुराने जीवाश्म जो वर्तमान से लगभग 30,000 साल पहले के हो। (पृष्ठ 1)"</ref><ref name="PetragliaAllchin">{{cite book |author1=Michael D. Petraglia |author2=Bridget Allchin |author-link2=Bridget Allchin |title=दक्षिण एशिया में मानव का विकास और इतिहास: पुरातत्व, जैविक नृविज्ञान, भाषाविज्ञान और आनुवंशिकी में अन्तर-अनुशासनात्मक अध्ययन|url=https://books.google.com/books?id=Qm9GfjNlnRwC&pg=PA10 |publisher=Springer Science + Business Media |page=6 |isbn=978-1-4020-5562-1|date=22 मई 2007 }}</ref><ref name="Fisher2018">{{citation|last=Fisher|first=Michael H.|title=भारत का एक पर्यावरणीय इतिहास: प्रारम्भ से २१ वीं शताब्दी तक|url=https://books.google.com/books?id=kZVuDwAAQBAJ&pg=PA23|year=2018|publisher=Cambridge University Press|isbn=978-1-107-11162-2|page=23}}</ref> [[दक्षिण एशिया]] में ज्ञात मानव का प्राचीनतम अवशेष 30,000 वर्ष पुराना है।{{sfn|Petraglia|Allchin|2007|p=6}} [[भीमबेटका]], [[मध्य प्रदेश]] की गुफाएँ भारत में मानव जीवन का प्राचीनतम प्रमाण हैं जो आज भी देखने को मिलता है। प्रथम स्थाई बस्तियों ने 9000 वर्ष पूर्व स्वरुप लिया था। 6,500 ईसा पूर्व तक आते आते मनुष्य ने खेती करना, जानवरों को पालना तथा घरों का निर्माण करना शुरू कर दिया था, जिसका अवशेष [[मेहरगढ़]] में मिला था जो कि अभी [[पाकिस्तान]] में है। {{sfn|Coningham|Young|2015|pp = 104–105}} यह धीरे-धीरे [[सिंधु घाटी सभ्यता]] के रूप में विकसित हुए,{{sfn|Kulke|Rothermund|2004|pp = 21–23}}{{sfn|Coningham|Young|2015|pp = 104–105}} जो की [[दक्षिण एशिया]] की सबसे प्राचीन शहरी सभ्यता है।{{sfn|Singh|2009|p = 181}} यह [[२६वीं शताब्दी ईसा पूर्व|2600 ईसा पूर्व]] और [[२०वीं शताब्दी ईसा पूर्व|1900 ईसा पूर्व]] के मध्य अपने चरम पर थी।<ref>{{cite web |title = Introduction to the Ancient Indus Valley |url = http://www.harappa.com/indus/indus1.html |accessdate = 18 जून 2007 |year = 1996 |publisher = Harappa |archive-url = https://www.webcitation.org/64LGyivx4?url=http://www.harappa.com/indus/indus1.html |archive-date = 31 दिसंबर 2011 |url-status = dead }}</ref> यह वर्तमान पश्चिम भारत तथा पाकिस्तान में स्थित है।{{sfn|Possehl|2003|p = 2}} यह [[मोहन जोदड़ो|मोहनजोदड़ो]], [[हड़प्पा]], [[धोलावीरा]], और [[कालीबंगा]] जैसे शहरों के आसपास केंद्रित थी और विभिन्न प्रकार के निर्वाह पर निर्भर थी, यहाँ व्यापक बाजार था तथा शिल्प उत्पादन होता था।{{sfn|Singh|2009|p = 181}}
2000 से 500 ईसा पूर्व तक [[ताम्र पाषाण युग (चाल्कोलिथिक)|ताम्र पाषाण युग]] संस्कृति से [[लौह युग]] का आगमन हुआ।{{sfn|Singh|2009|p = 255}} इसी युग को [[हिन्दू धर्म]] से जुड़े प्राचीनतम [[धर्म ग्रंथ]],{{sfn|Singh|2009|pp = 186–187}} [[वेद|वेदों]] का रचनाकाल माना जाता है{{sfn|Witzel|2003|pp = 68–69}} तथा [[पंजाब]] तथा [[सिन्धु-गंगा का मैदान|गंगा के ऊपरी मैदानी क्षेत्र]] को [[वैदिक संस्कृति]] का निवास स्थान माना जाता है।{{sfn|Singh|2009|p = 255}} कुछ इतिहासकारों का मानना है की इसी युग में उत्तर-पश्चिम से [[आर्य प्रवास सिद्धान्त|भारतीय-आर्यन]] का आगमन हुआ था।{{Sfn|Singh|2009|pp=186–187}} इसी अवधि में [[जाति|जाति प्रथा]] भी प्रारम्भ हुई थी।{{Sfn|Kulke|Rothermund|2004|pp=41–43}}
[[वैदिक सभ्यता]] में ईसा पूर्व 6 वीं शताब्दी में [[गंगा]] के मैदानी क्षेत्र तथा उत्तर-पश्चिम भारत में छोटे-छोटे राज्य तथा उनके प्रमुख मिल कर 16 कुलीन और राजशाही में सम्मिलित हुए जिन्हे ''[[महाजनपद]]'' के नाम से जाना जाता है। {{sfn|Singh|2009|pp = 260–265}} {{sfn|Kulke|Rothermund|2004|pp = 53–54}} बढ़ते शहरीकरण के बीच दो अन्य स्वतंत्र अ-वैदिक धर्मों का उदय हुआ। [[महावीर]] के जीवन काल में जैन धर्म अस्तित्व में आया।{{sfn|Singh|2009|pp = 312–313}} [[गौतम बुद्ध]] की शिक्षाओं पर आधारित [[बौद्ध धर्म]] ने मध्यम वर्ग के अनुयायिओं को छोड़कर अन्य सभी वर्ग के लोगों को आकर्षित किया; इसी काल में भारत का इतिहास लेखन प्रारम्भ हुआ। {{sfn|Kulke|Rothermund|2004|pp = 54–56}}{{sfn|Stein|1998|p = 21}}{{sfn|Stein|1998|pp = 67–68}} <!-------------------------------------------------------------------------- सूचना: कृपया इस पंक्ति का मिलान अंग्रेजी विकिपीडिया के लेख से कर लें। अनुवाद में त्रुटि है।-----------------------------> बढ़ती शहरी सम्पदा के युग में, दोनों धर्मों ने त्याग को एक आदर्श माना,{{sfn|Singh|2009|p = 300}} और दोनों ने लंबे समय तक चलने वाली मठ परंपराओं की स्थापना की। राजनीतिक रूप से तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व तक [[मगध साम्राज्य]] ने अन्य राज्यों को अपने अंदर मिला कर मौर्य साम्राज्य के रूप में उभरा। {{sfn|Singh|2009|p = 319}} [[मगध]] ने [[दक्षिण भारत]] के कुछ हिस्सों को छोड़कर पूरे भारत पर अपना अधिपत्य स्थापित कर लिया किन्तु कुछ अन्य प्रमुख बड़े राज्यों ने इसके प्रमुख क्षेत्रों को अलग कर लिया। {{sfn|Stein|1998|pp = 78–79}}{{sfn|Kulke|Rothermund|2004|p = 70}} मौर्य राजाओं को उनके साम्राज्य की उन्नति के लिए तथा उच्च जीवन सतर के लिए जाना जाता है क्योंकि [[अशोक|सम्राट अशोक]] ने [[बौद्ध धम्म]] की स्थापना की तथा शस्त्र मुक्त सेना का निर्माण किया।{{sfn|Singh|2009|p = 367}}{{sfn|Kulke|Rothermund|2004|p = 63}}180 ईसवी के आरम्भ से [[मध्य एशिया]] से कई आक्रमण हुए, जिनके परिणामस्वरूप उत्तर भारतीय उपमहाद्वीप में [[यूनानी]], [[शक]], [[पार्थी]] और अन्ततः [[कुषाण]] राजवंश स्थापित हुए। [[तीसरी शताब्दी]] के आगे का समय जब भारत पर [[गुप्त वंश]] का शासन था, भारत का ''स्वर्णिम काल'' कहलाया।<ref>{{cite web|url=http://india.gov.in/knowindia/ancient_history4.php|title=Gupta period has been described as the Golden Age of Indian history|accessdate=3 अक्टूबर 2007|publisher=[[राष्ट्रीय सूचना-विज्ञान केन्द्र]] (NIC)|archive-url=https://web.archive.org/web/20091227223339/http://india.gov.in/knowindia/ancient_history4.php|archive-date=27 दिसंबर 2009|url-status=live}}</ref>
[[तमिल भाषा|तमिल]] के ''[[संगम साहित्य]]'' के अनुसार ईसा पूर्व 200 से 200 ईस्वी तक दक्षिण प्रायद्वीप पर [[चेर राजवंश]], [[चोल राजवंश]] तथा [[पांड्य राजवंश]] का शासन था जिन्होंने बड़े सतर पर [[रोमन साम्राज्य|भारत और रोम के व्यापारिक संबंध]] और [[पश्चिमी एशिया|पश्चिम]] और [[दक्षिण पूर्व एशिया]] के साम्राज्यों के साथ व्यापर किया।{{sfn|Stein|1998|pp = 89–90}}{{sfn|Singh|2009|pp = 408–415}} चौथी-पाँचवी शताब्दी के बीच [[गुप्त साम्राज्य]] ने वृहद् गंगा के मैदानी क्षेत्र में प्रशासन तथा कर निर्धारण की एक जटिल प्रणाली बनाई; यह प्रणाली बाद के भारतीय राज्यों के लिए एक आदर्श बन गई। {{sfn|Kulke|Rothermund|2004|pp = 89–91}}{{sfn|Singh|2009|p = 545}} गुप्त साम्राज्य में भक्ति पर आधारित हिन्दू धर्म का प्रचलन हुई। {{sfn|Stein|1998|pp = 98–99}} [[प्राचीन भारतीय विज्ञान तथा तकनीक|विज्ञान]], [[भारतीय कला|कला]], [[भारतीय साहित्य|साहित्य]], [[भारतीय गणित|गणित]], [[खगोलशास्त्र]], [[प्राचीन प्रौद्योगिकी]], [[धर्म]], तथा [[दर्शन]] इन्हीं राजाओं के शासनकाल में फले-फूले, जो शास्त्रीय संस्कृत में रचा गया। {{sfn|Singh|2009|p = 545}}
===मध्यकालीन भारत===
६०० से १२०० के बीच का समय क्षेत्रीय राज्यों में सांस्कृतिक उत्थान के युग के रूप में जाना जाता है।{{sfn|Stein|1998|p = 132}} [[कन्नौज]] के राजा [[हर्षवर्धन|हर्ष]] ने ६०६ से ६४७ तक गंगा के मैदानी क्षेत्र में शासन किया तथा उसने दक्षिण में अपने राज्य का विस्तार करने का प्रयास किया किन्तु दक्क्न के [[चालुक्य राजवंश|चालुक्यों]] ने उसे हरा दिया।{{sfn|Stein|1998|pp = 119–120}} उसके उत्तराधिकारी ने पूर्व की और राज्य का विस्तार करना चाहा किन्तु [[बंगाल]] के [[पाल वंश|पाल]] शासकों से उसे हारना पड़ा।{{sfn|Stein|1998|pp = 119–120}} जब चालुक्यों ने दक्षिण की और विस्तार करने का प्रयास किया तो [[पल्लव राजवंश|पल्ल्वों]] ने उन्हें पराजित कर दिया, जिनका सुदूर दक्षिण में [[पाण्ड्य राजवंश|पांड्यों]] तथा [[चोल राजवंश|चोलों]] द्वारा उनका विरोध किया जा रहा था।{{sfn|Stein|1998|pp = 119–120}} इस काल में कोई भी शासक एक साम्राज्य बनाने में सक्षम नहीं था और लगातार मूल भूमि की तुलना में दुसरे क्षेत्र की ओर आगे बढ़ने का क्रम जारी था।{{sfn|Stein|1998|p = 132}} इस अवधि में नये शासन के कारण जाति में बांटे गए सामान्य कृषकों के लिए कृषि करना और सहज हो गया।{{sfn|Stein|1998|pp = 121–122}} जाति व्यवस्था के परिणामस्वरूप स्थानीय मतभेद होने लगे।{{sfn|Stein|1998|pp = 121–122}}
6 और 7 वीं शताब्दी में, पहली भक्ति भजन तमिल भाषा में बनाया गया था। पूरे भारत में उनकी नकल की गई और हिन्दू धर्म के पुनरुत्थान और इसने उपमहाद्वीप की सभी आधुनिक भाषाओं के विकास का नेतृत्व किया। राजघरानो ने लोगों को राजधानी की आकर्षित किया। शहरीकरण के साथ शहरों में बड़े स्तर पर मंदिरों का निर्माण किया।{{sfn|Stein|1998|p = 124}} दक्षिण भारत की राजनीतिक और सांस्कृतिक व्यवस्था का प्रभाव दक्षिण एशिया के देशों [[म्यांमार]], [[थाईलैंड]], [[लाओस]], [[कंबोडिया]], [[वियतनाम]], [[फिलीपींस]], [[मलेशिया]] और [[जावा (द्वीप)|जावा]] में देखा जा सकता है।{{sfn|Stein|1998|pp = 127–128}}
१० वीं शताब्दी के बाद घुमन्तु मुस्लिम वंशों ने जातियता तथा धर्म द्वारा संघठित तेज घोड़ों से युक्त बड़ी सेना के द्वारा उत्तर-पश्चिमी मैदानों पर बार बार आकर्मण किया, अन्ततः १२०६ [[दिल्ली सल्तनत|इस्लामीक दिल्ली सल्तनत]] की स्थापना हुई।{{sfn|Ludden|2002|p = 68}} उन्हें उतर भारत को अधिक नियंत्रित करना था तथा दक्षिण भारत पर आकर्मण करना था। भारतीय कुलीन वर्ग के विघटनकारी सल्तनत ने बड़े पैमाने पर गैर-मुस्लिमों को स्वयं के रीतिरिवाजों पर छोड़ दिया।{{sfn|Asher|Talbot|2008|p = 47}}{{sfn|Metcalf|Metcalf|2006|p = 6}} १३ वीं शताब्दी में [[मंगोल साम्राज्य|मंगोलों]] द्वारा किये के विनाशकारी आकर्मण से भारत की रक्षा की। सल्तनत के पतन के कारण स्वशासित [[विजयनगर साम्राज्य|विजयनगर साम्राज्य]] का मार्ग प्रशस्त हुआ।{{sfn|Asher|Talbot|2008|p = 53}} एक मजबूत [[शैव|शैव परंपरा]] और सल्तनत की सैन्य तकनीक पर निर्माण करते हुए साम्राज्य ने भारत के विशाल भाग पर शासन किया और इसके बाद लंबे समय तक दक्षिण भारतीय समाज को प्रभावित किया।{{sfn|Metcalf|Metcalf|2006|p = 12}}{{sfn|Asher|Talbot|2008|p = 53}}
===प्रारम्भिक आधुनिक भारत===
१७वीं शताब्दी के मध्यकाल में [[पुर्तगाल]], [[डच ईस्ट इंडिया कंपनी|डच]], [[फ्रांस]], [[यूनाइटेड किंगडम|ब्रिटेन]] सहित अनेक यूरोपीय देशों, जो भारत से व्यापार करने के इच्छुक थे, उन्होंने देश की आतंरिक शासकीय अराजकता का फायदा उठाया हालांकि अंग्रेजों ने व्यापार करने के बहाने से देश में आए और आंतरिक विद्रोह करवाने की कोशिश की ताकि वे आपस में लड़ाई करवाकर भारतीयों को कमजोर कर सकें। इसमें वे कामयाब हुए और [[१८४०]] तक लगभग सम्पूर्ण देश पर शासन करने में सफल हुए। वास्तव में ये शासन की दृष्टि से नहीं आए बल्कि वे देश की भोलीभाली जनता को लूटना चाहते थे। क्योंकि भारत देश में बाहर से आया हर कोई मेहमान होता है और उसे वे देवता का दर्जा देते हैं। इसी का फायदा अंग्रेजों ने उठाया और धीरे धीरे आंतरिक अशांति इस प्रकार फैलाई की सबसे पहले यहां की शिक्षा व्यवस्था को बदला जो की विश्वं में सबसे अच्छी व्यवस्था थी। और वर्ण व्यवस्था को जाती वाद में बदल दिया गया। ऊंची नीची जातियों में विभाजन किया। मुस्लिम धर्म वालों को धक्के से गाय माता की हत्या करवाने में लगा दिया। और फिर हिन्दुओं को बोला की देखो आपके मुस्लिम भाई , आपकी माता की हत्या कर रहे हैं। ये तो आपके भाई कहलाने के लायक भी नहीं है। इस प्रकार देखते ही देखते दंगा फैला दिया। किन्तु[[१८५७]] में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कम्पनी के विरुद्ध असफल विद्रोह, जो [[१८५७ का प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम|भारतीय स्वतन्त्रता के प्रथम संग्राम]] से भी जाना जाता है, के बाद भारत का अधिकांश भाग सीधे [[अंग्रेजी शासन]] के प्रशासनिक नियंत्रण में आ गया।<ref>{{cite web|url=http://india.gov.in/knowindia/history_freedom_struggle.php|title=History : Indian Freedom Struggle (1857-1947)|accessdate=3 अक्टूबर 2007|publisher=[[राष्ट्रीय सूचना-विज्ञान केन्द्र|राष्ट्रीय सूचना-विज्ञान केन्द्र (NIC)]]|quote=And by 1856, the British conquest and its authority were firmly established.|archive-url=https://web.archive.org/web/20091227213048/http://india.gov.in/knowindia/history_freedom_struggle.php|archive-date=27 दिसंबर 2009|url-status=dead}}</ref>
[[File:Konarak Sun Temple Wheel By Piyal Kundu (2).jpg|thumb|270px| कोणार्क-चक्र - १३वीं शताब्दी में बने [[उड़ीसा]] के सूर्य मन्दिर में स्थित, यह विश्व के सब से प्रसिद्घ ऐतिहासिक स्मारकों में से एक है।]]
===आधुनिक भारत===
बीसवी सदी के प्रारम्भ में आधुनिक शिक्षा के प्रसार और विश्वपटल पर बदलती राजनीतिक परिस्थितियों के चलते भारत में एक बौद्धिक आन्दोलन का सूत्रपात हुआ जिसने सामाजिक और राजनीतिक स्तरों पर अनेक परिवर्तनों एवम आन्दोलनों की नीव रखी। १८८५ में [[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस]] की स्थापना ने स्वतन्त्रता आन्दोलन को एक गतिमान स्वरूप दिया। बीसवीं शताब्दी के प्रारम्भ में लम्बे समय तक स्वतंत्रता प्राप्ति के लिये विशाल अहिंसावादी संघर्ष चला, जिसका नेतृत्व [[महात्मा गांधी]], जो आधिकारिक रूप से आधुनिक भारत के 'राष्ट्रपिता' के रूप में संबोधित किये जाते हैं, इसी सदी में [[भारत के सामाजिक आन्दोलन]], जो सामाजिक स्वतंत्रता प्राप्ति के लिए भी विशाल अहिंसावादी एवं क्रांतिवादी संघर्ष चला, जिसका नेतृत्व [[भीमराव आंबेडकर|डॉ॰ बाबासाहेब आंबेडकर]] ने किया, जो ‘आधुनिक भारत के निर्माता’, ‘संविधान निर्माता' एवं ‘दलितों के मसिहा’ के रूप में संबोधित किये जाते है। इसके साथ-साथ [[चंद्रशेखर आजाद]], [[सरदार भगत सिंह]], [[सुखदेव]], [[राजगुरु|राजगुरू]], [[नेताजी सुभाष चन्द्र बोस]], आदि के नेतृत्व में चले क्रांतिकारी संघर्ष के फलस्वरुप [[१५ अगस्त]], [[१९४७]] भारत ने [[अंग्रेजी शासन]] से पूर्णतः [[स्वतंत्रता]] प्राप्त की। तदुपरान्त [[२६ जनवरी]], [[१९५०]] को भारत एक [[गणराज्य]] बना।
एक बहुजातीय तथा बहुधार्मिक राष्ट्र होने के कारण भारत को समय-समय पर [[साम्प्रदायिक]] तथा जातीय विद्वेष का शिकार होना पड़ा है। क्षेत्रीय असंतोष तथा विद्रोह भी हालाँकि देश के अलग-अलग हिस्सों में होते रहे हैं, पर इसकी [[धर्मनिरपेक्षता]] तथा जनतांत्रिकता, केवल १९७५-७७ को छोड़, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री [[इंदिरा गांधी]] ने [[आपातकाल]] की घोषणा कर दी थी, अक्षुण्ण रही है।
भारत के पड़ोसी राष्ट्रों के साथ अनसुलझे सीमा विवाद हैं। इसके कारण इसे छोटे पैमानों पर युद्ध का भी सामना करना पड़ा है। १९६२ में [[चीन]] के साथ, तथा १९४७, १९६५, १९७१ एवं १९९९ में [[पाकिस्तान]] के साथ लड़ाइयाँ हो चुकी हैं।
भारत [[गुटनिरपेक्ष आन्दोलन]] तथा [[संयुक्त राष्ट्र संघ]] के संस्थापक सदस्य देशों में से एक है।
१९७४ में भारत ने अपना पहला [[परमाणु परीक्षण]] किया था जिसके बाद १९९८ में ५ और परीक्षण किये गये। १९९० के दशक में किये गये आर्थिक सुधारीकरण की बदौलत आज देश सबसे तेज़ी से विकासशील राष्ट्रों की सूची में आ गया है।
==भूगोल एवं जलवायु==
{{main|भारत का भूगोल}}
=== भू-आकृतिक विशेषतायें===
[[चित्र:Yumthanghimalayas.jpg|thumb|right|300px|हिमालय उत्तर में जम्मू और कश्मीर से लेकर पूर्व में अरुणांचल प्रदेश तक भारत की अधिकतर पूर्वी सीमा बनाता है]]
[[File:Rathong from Zemathang2.jpg|thumb|right|300px| राथोंग शिखर, [[कंचनजंघा]] के समीप स्थित, जेमाथांग ग्लेशियर के पास से लिया गया चित्र]]
भारत पूरी तौर पर [[भारतीय प्लेट]] के ऊपर स्थित है जो भारतीय आस्ट्रेलियाई प्लेट (''Indo-Australian Plate'') का उपखण्ड है। प्राचीन काल में यह प्लेट गोंडवानालैण्ड का हिस्सा थी और [[अफ्रीका]] और [[अंटार्कटिका]] के साथ जुड़ी हुई थी। तकरीबन ९ करोड़ वर्ष पहले क्रीटेशियस काल में भारतीय प्लेट १५ सेमी. वर्ष की गति से उत्तर की ओर बढ़ने लगी और इओसीन पीरियड में यूरेशियन प्लेट से टकराई। भारतीय प्लेट और यूरेशियन प्लेट के मध्य स्थित [[टेथीज सागर | टेथीस]] भूसन्नति के अवसादों के वालन द्वारा ऊपर उठने से तिब्बत पठार और [[हिमालय]] पर्वत का निर्माण हुआ। सामने की द्रोणी में बाद में अवसाद जमा हो जाने से सिन्धु-गंगा मैदान बना। भारतीय प्लेट अभी भी लगभग ५ सेमी./वर्ष की गति से उत्तर की ओर गतिशील है और हिमालय की ऊँचाई में अभी भी २ मिमी./वर्ष कि गति से उत्थान हो रहा है।
भारत के उत्तर में हिमालय की पर्वतमाला नए और [[वलित पर्वत|मोड़दार पहाड़ों]] से बनी है। यह पर्वतश्रेणी कश्मीर से अरुणाचल तक लगभग १,५०० मील तक फैली हुई है। इसकी चौड़ाई १५० से २०० मील तक है। यह संसार की सबसे ऊँची पर्वतमाला है और इसमें अनेक चोटियाँ २४,००० फुट से अधिक ऊँची हैं। हिमालय की सबसे ऊँची चोटी माउंट एवरेस्ट है जिसकी ऊँचाई २९,०२८ फुट है जो नेपाल में स्थित है।
हिमालय के दक्षिण [[सिन्धु-गंगा मैदान]] है जो सिंधु, गंगा तथा ब्रह्मपुत्र और उनकी सहायक नदियों द्वारा बना है। हिमालय (शिवालिक) की तलहटी में जहाँ नदियाँ पर्वतीय क्षेत्र को छोड़कर मैदान में प्रवेश करती हैं, एक संकीर्ण पेटी में कंकड पत्थर मिश्रित निक्षेप पाया जाता है जिसमें नदियाँ अन्तर्धान हो जाती हैं। इस ढलुवाँ क्षेत्र को [[भाबर]] कहते हैं। भाबर के दक्षिण में [[तराई]] प्रदेश है, जहाँ विलुप्त नदियाँ पुन: प्रकट हो जाती हैं। यह क्षेत्र दलदलों और जंगलों से भरा है। तराई के दक्षिण में जलोढ़ मैदान पाया जाता है। मैदान में जलोढ़ दो किस्म के हैं, पुराना जलोढ़ और नवीन जलोढ़। पुराने जलोढ़ को [[बाँगर]] कहते हैं। यह अपेक्षाकृत ऊँची भूमि में पाया जाता है, जहाँ नदियों की बाढ़ का जल नहीं पहुँच पाता। इसमें कहीं कहीं चूने के कंकड मिलते हैं। नवीन जलोढ़ को [[खादर]] कहते हैं। यह नदियों की बाढ़ के मैदान तथा डेल्टा प्रदेश में पाया जाता है जहाँ नदियाँ प्रति वर्ष नई तलछट जमा करती हैं।
उत्तरी भारत के मैदान के दक्षिण का पूरा भाग एक विस्तृत पठार है जो विश्व के सबसे पुराने स्थल खंड का अवशेष है और मुख्यत: कड़ी तथा दानेदार कायांतरित चट्टानों से बना है। पठार तीन ओर पहाड़ी श्रेणियों से घिरा है। उत्तर में [[विंध्याचल]] तथा [[सतपुड़ा]] की पहाड़ियाँ हैं, जिनके बीच [[नर्मदा नदी]] पश्चिम की ओर बहती है। नर्मदा घाटी के उत्तर विंध्याचल प्रपाती ढाल बनाता है। सतपुड़ा की पर्वतश्रेणी उत्तर भारत को दक्षिण भारत से अलग करती है और पूर्व की ओर महादेव पहाड़ी तथा मैकाल पहाड़ी के नाम से जानी जाती है। सतपुड़ा के दक्षिण [[अजंता]] की पहाड़ियाँ हैं। प्रायद्वीप के पश्चिमी किनारे पर [[पश्चिमी घाट]] और पूर्वी किनारे पर [[पूर्वी घाट]] नामक पहाडियाँ हैं। कई महत्वपूर्ण और बड़ी नदियाँ जैसे [[गंगा]], [[ब्रह्मपुत्र]], [[यमुना]], [[गोदावरी]] और [[कृष्णा नदी|कृष्णा]] भारत से होकर बहती हैं।
=== जलवायु ===
[[कोपेन का जलवायु वर्गीकरण|कोपेन]] के वर्गीकरण में भारत में छह प्रकार की जलवायु का निरूपण है किन्तु यहाँ यह भी ध्यातव्य है कि भू-आकृति के प्रभाव में छोटे और स्थानीय स्तर पर भी जलवायु में बहुत विविधता और विशिष्टता मिलती है। भारत की जलवायु दक्षिण में [[उष्णकटिबंधीय]] है और हिमालयी क्षेत्रों में अधिक ऊँचाई के कारण [[अल्पाइन]] (ध्रुवीय जैसी), एक ओर यह पुर्वोत्तर भारत में उष्ण कटिबंधीय नम प्रकार की है तो पश्चिमी भागों में शुष्क प्रकार की।
कोपेन के वर्गीकरण के अनुसार भारत में निम्नलिखित छह प्रकार के जलवायु प्रदेश पाए जाते हैं:
* [[अल्पाइन]] – (''ETh'');
* आर्द्र उपोष्ण – (''Cwa'');
* [[उष्णकटिबंधीय|उष्ण कटिबंधीय नम और शुष्क]] – (''Aw'');
* [[उष्णकटिबंधीय|उष्ण कटिबंधीय नम]] – (''Am'');
* अर्धशुष्क – (''BSh'');
* शुष्क मरुस्थलीय – (''BWh'').
परंपरागत रूप से भारत में छह [[ऋतु|ऋतुएँ]] मानी जाती रहीं हैं परन्तु [[भारतीय मौसम विज्ञान विभाग]] चार ऋतुओं का वर्णन करता है जिन्हें हम उनके परंपरागत नामों से तुलनात्मक रूप में निम्नवत लिख सकते हैं:
'''शीत ऋतु''' (''Winters'') – दिसंबर से मार्च तक, जिसमें दिसंबर और जनवरी सबसे ठंडे महीने होते हैं; उत्तरी भारत में औसत तापमान १० से १५ डिग्री सेल्सियस होता है।
'''ग्रीष्म ऋतु''' (''Summers or Pre-monsoon'') – अप्रैल से जून तक जिसमें मई सबसे गर्म महीना होता है, औसत तापमान ३२ से ४० डिग्री सेल्सियस होता है।
'''वर्षा ऋतु''' (''Monsoon or Rainy'') – जून से सितम्बर तक, जिसमें सार्वाधिक वर्षा अगस्त महीने में होती है, वस्तुतः मानसून का आगमन और प्रत्यावर्तन (लौटना) दोनों क्रमिक रूप से होते हैं और अलग अलग स्थानों पर इनका समय अलग अलग होता है। सामान्यतः १ जून को केरल तट पर मानसून के आगमन तारीख होती है इसके ठीक बाद यह पूर्वोत्तर भारत में पहुँचता है और क्रमशः पूर्व से पश्चिम तथा उत्तर से दक्षिण की ओर गतिशील होता है इलाहाबाद में मानसून के पहुँचने की तिथि १८ जून मानी जाती है और दिल्ली में २९ जून।
'''शरद ऋतु''' (''Post-monsoon ot Autumn'') - उत्तरी भारत में अक्टूबर और नवंबर माह में मौसम साफ़ और शांत रहता है और अक्टूबर में मानसून लौटना शुरू हो जाता है जिससे तमिलनाडु के तट पर लौटते मानसून से वर्षा होती है।
भारत के मुख्य शहर हैं – [[दिल्ली]], [[मुम्बई]], [[कोलकाता]], [[चेन्नई]], [[बंगलोर]] ([[बेंगलुरु]])|
यह भी देंखे – [[भारत के शहर]]
==राजनीति एवं सरकार==
===राजनीति===
{{main|भारत की राजनीति}}
भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है।भारत एक संघीय लोकतांत्रिक गणराज्य है, जहाँ संविधान के अनुसार केंद्र और राज्य सरकारों के बीच शक्तियों का स्पष्ट विभाजन किया गया है। बहुदलीय प्रणाली वाले इस संसदीय गणराज्य में छ: मान्यता-प्राप्त राष्ट्रीय पार्टियां, और ४० से भी ज़्यादा क्षेत्रीय पार्टियां हैं। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), जिसकी नीतियों को केंद्रीय-दक्षिणपंथी या रूढिवादी माना जाता है, के नेतृत्व में केंद्र में सरकार है जिसके प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी हैं।{{update after|2029|05}} अन्य पार्टियों में सबसे बडी भारतीय राष्ट्रीय कॉंग्रेस (कॉंग्रेस) है, जिसे भारतीय राजनीति में केंद्र-वामपंथी और उदार माना जाता है। २००४ से २०१४ तक केंद्र में मनमोहन सिंह की गठबन्धन सरकार का सबसे बड़ा हिस्सा कॉंग्रेस पार्टी का था। १९५० में गणराज्य के घोषित होने से १९८० के दशक के अन्त तक कॉंग्रेस का संसद में निरंतर बहुमत रहा। पर तब से राजनैतिक पटल पर भाजपा और कॉंग्रेस को अन्य पार्टियों के साथ सत्ता बांटनी पडी है। १९८९ के बाद से क्षेत्रीय पार्टियों के उदय ने केंद्र में गठबंधन सरकारों के नये दौर की शुरुआत की है।
गणराज्य के पहले तीन चुनावों (१९५१–५२, १९५७, १९६२) में जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व में कॉंग्रेस ने आसान जीत पाई। १९६४ में नेहरू की मृत्यु के बाद लाल बहादुर शास्त्री कुछ समय के लिये प्रधानमंत्री बने, और १९६६ में उनकी खुद की मौत के बाद इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री बनीं। १९६७ और १९७१ के चुनावों में जीतने के बाद १९७७ के चुनावों में उन्हें हार का सामना करना पडा। १९७५ में प्रधानमंत्री रहते हुए उन्होंने राष्ट्रीय आपात्काल की घोषणा कर दी थी। इस घोषणा और इससे उपजी आम नाराज़गी के कारण १९७७ के चुनावों में नवगठित जनता पार्टी ने कॉंग्रेस को हरा दिया और पूर्व में कॉंग्रेस के सदस्य और नेहरु के केबिनेट में मंत्री रहे मोरारजी देसाई के नेतृत्व में नई सरकार बनी। यह सरकार सिर्फ़ तीन साल चली, और १९८० में हुए चुनावों में जीतकर इंदिरा गांधी फिर से प्रधानमंत्री बनीं। १९८४ में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद उनके बेटे राजीव गांधी कॉंग्रेस के नेता और प्रधानमंत्री बने। १९८४ के चुनावों में ज़बरदस्त जीत के बाद १९८९ में
नवगठित जनता दल के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय मोर्चा ने वाम मोर्चा के बाहरी समर्थन से सरकार बनाई, जो केवल दो साल चली। १९९१ के चुनावों में किसी पार्टी को बहुमत नहीं मिला, परंतु कॉंग्रेस सबसे बडी पार्टी बनी, और पी वी नरसिंहा राव के नेतृत्व में अल्पमत सरकार बनी जो अपना कार्यकाल पूरा करने में सफल रही।
१९९६ के चुनावों के बाद दो साल तक राजनैतिक उथल पुथल का वक्त रहा, जिसमें कई गठबंधन सरकारें आई और गई। १९९६ में भाजपा ने केवल १३ दिन के लिये सरकार बनाई, जो समर्थन ना मिलने के कारण गिर गई। उसके बाद दो संयुक्त मोर्चे की सरकारें आई जो कुछ लंबे वक्त तक चली। ये सरकारें कॉंग्रेस के बाहरी समर्थन से बनी थीं। १९९८ के चुनावों के बाद भाजपा एक सफल गठबंधन बनाने में सफल रही। भाजपा के अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग, या एनडीए) नाम के इस गठबंधन की सरकार पहली ऐसी सरकार बनी जिसने अपना पाँच साल का कार्यकाल पूरा किय। २००४ के चुनावों में भी किसी पार्टी को बहुमत नहीं मिला, पर कॉंग्रेस सबसे बडी पार्टी बनके उभरी, और इसने संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (सम्प्रग, या यूपीए) के नाम से नया गठबंधन बनाया। इस गठबंधन ने वामपंथी और गैर-भाजपा सांसदों के सहयोग से मनमोहन सिंह के नेतृत्व में पाँच साल तक शासन चलाया। २००९ के चुनावों में यूपीए और अधिक सीटें जीता जिसके कारण यह साम्यवादी (कॉम्युनिस्ट) दलों के बाहरी सहयोग के बिना ही सरकार बनाने में कामयाब रहा। इसी साल मनमोहन सिंह जवाहरलाल नेहरू के बाद ऐसे पहले प्रधानमंत्री बने जिन्हे दो लगातार कार्यकाल के लिये प्रधानमंत्री बनने का अवसर प्राप्त हुआ। २०१४ के चुनावों में १९८४ के बाद पहली बार किसी राजनैतिक पार्टी को बहुमत प्राप्त हुआ, और भाजपा ने गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार बनाई।
===सरकार===
{{भारत के प्रभाग}}
{{main|भारत सरकार}}
[[File:Glimpses of the new Parliament Building, in New Delhi (2).jpg|thumb|भारतीय संसद भवन]]
[[File:Supreme Court of India 01.jpg|thumb|भारतीय सर्वोच्च न्यायालय]]
[[भारत का संविधान]] भारत को एक सम्प्रभु, [[समाजवादी]], [[धर्मनिरपेक्ष]], लोकतान्त्रिक गणराज्य घोषित करता है। भारत एक [[लोकतांत्रिक गणराज्य]] है, जिसकी द्विसदनात्मक [[संसद]] [[वेस्टमिन्स्टर शैली]] की संसदीय प्रणाली द्वारा संचालित है। भारत का प्रशासन संघीय ढांचे के अन्तर्गत चलाया जाता है, जिसके अनुसार राष्ट्रीय स्तर पर केंद्र सरकार और राज्य स्तर पर राज्य सरकारें हैं। केंद्र और राज्य सरकारों के बीच शक्तियों का बंटवारा संविधान में दी गई रूपरेखा के आधार पर होता है। वर्तमान में भारत में २८ राज्य और ८ केंद्र-शासित प्रदेश हैं। केंद्र शासित प्रदेशों में, स्थानीय प्रशासन को राज्यों की तुलना में कम शक्तियां प्राप्त होती हैं। भारत का सरकारी ढाँचा, जिसमें केंद्र राज्यों की तुलना में ज़्यादा सशक्त है, उसे आमतौर पर अर्ध-संघीय (सेमि-फ़ेडेरल) कहा जाता रहा है, पर १९९० के दशक के राजनैतिक, आर्थिक और सामाजिक बदलावों के कारण इसकी रूपरेखा धीरे-धीरे और अधिक संघीय (फ़ेडेरल) होती जा रही है।
इसके शासन में तीन मुख्य अंग हैं:- [[न्यायपालिका]], [[कार्यपालिका]] और [[विधायिका]]।
विधायिका [[संसद]] को कहते हैं, जिसके दो सदन हैं – उच्चसदन ''[[राज्यसभा]]'', अथवा राज्यपरिषद् और निम्नसदन ''[[लोकसभा]]''. राज्यसभा में २४५ सदस्य होते हैं जबकि लोकसभा में ५४५। राज्यसभा एक स्थाई सदन है और इसके सदस्यों का चुनाव, अप्रत्यक्ष विधि से ६ वर्षों के लिये होता है। राज्यसभा के ज़्यादातर सदस्यों का चयन राज्यों की विधानसभाओं के सदस्यों द्वारा किया जाता है, और हर दूसरे साल राज्य सभा के एक तिहाई सदस्य पदमुक्त हो जाते हैं। लोकसभा के ५४३ सदस्यों का चुनाव प्रत्यक्ष विधि से, ५ वर्षों की अवधि के लिये आम चुनावों के माध्यम से किया जाता है जिनमें १८ वर्ष से अधिक उम्र के सभी भारतीय नागरिक मतदान कर सकते हैं।
कार्यपालिका [[मंत्रिमण्डल]] को कहते हैं। [[प्रधानमन्त्री]] मंत्रिमण्डल का प्रमुख है और कार्यपालिका की सारी शक्तियाँ उसी के पास होती हैं। इसकी नियुक्ति [[राष्ट्रपति]] द्वारा संसद में बहुमत प्राप्त करने पर की जाती है। बहुमत बने रहने की स्थिति में इसका कार्यकाल ५ वर्षों का होता है। संविधान में किसी उप-प्रधानमंत्री का प्रावधान नहीं है पर समय-समय पर इसमें फेरबदल होता रहा है। मंत्रिमण्डल के प्रत्येक मंत्री को संसद की सदस्यता के योग्य होना अनिवार्य है। कार्यपालिका संसद के प्रति उत्तरदायी होती है, और प्रधानमंत्री और उनका मंत्रिमण्डल लोक सभा में बहुमत के समर्थन के आधार पर ही अपने कार्यालय में बने रह सकते हैं।
भारत की स्वतंत्र न्यायपालिका का ढाँचा त्रिस्तरीय है, जिसमें [[सर्वोच्च न्यायालय]], जिसके प्रधान [[प्रधान न्यायाधीश]] है; २४ उच्च न्यायालय और बहुत सारी निचली अदालतें हैं। सर्वोच्च न्यायालय को अपने मूल न्यायाधिकार (ओरिजिनल ज्युरिडिक्शन), और [[उच्च न्यायालय|उच्च न्यायालयों]] के ऊपर अपीलीय न्यायाधिकार के मामलों, दोनो को देखने का अधिकार है। सर्वोच्च न्यायालय के मूल न्ययाधिकार में मौलिक अधिकारों के हनन के इलावा राज्यों और केंद्र, और दो या दो से अधिक राज्यों के बीच के विवाद आते हैं। सर्वोच्च न्यायालय को राज्य और केंद्रीय कानूनों को असंवैधानिक ठहराने के अधिकार है। भारत में २४ उच्च न्यायालयों के अधिकार और उत्तरदायित्व [[सर्वोच्च न्यायालय]] की अपेक्षा सीमित हैं। संविधान ने न्यायपालिका को विस्तृत अधिकार दिये हैं, जिनमें संविधान की अन्तिम व्याख्या करने का अधिकार भी सम्मिलित है।
===प्रशासनिक प्रभाग===
{{main|भारत के राज्य}}
वर्तमान में भारत 28 राज्यों तथा 8 केन्द्रशासित प्रदेशों में बँटा हुआ है। राज्यों की चुनी हुई स्वतंत्र सरकारें हैं, जबकि केन्द्रशासित प्रदेशों पर केन्द्र द्वारा नियुक्त प्रबंधन शासन करता है, हालाँकि पॉण्डिचेरी और दिल्ली की लोकतांत्रिक सरकार भी हैं।
[[अन्टार्कटिका]] और [[दक्षिण गंगोत्री]] और मैत्री पर भी भारत के वैज्ञानिक-स्थल हैं, यद्यपि अभी तक कोई वास्तविक आधिपत्य स्थापित नहीं किया गया है।
;राज्यों के नाम निम्नवत हैं (कोष्ठक में राजधानी का नाम):
{{भारतीय राज्य (परस्पर संवादात्मक)|image-width=340}}
{|
|-
|
* [[अरुणाचल प्रदेश]] ([[इटानगर]])
* [[असम]] ([[दिसपुर]])
* [[उत्तर प्रदेश]] ([[लखनऊ]])
* [[उत्तराखण्ड]] ([[देहरादून]])
* [[ओड़िशा]] ([[भुवनेश्वर]])
* [[आंध्र प्रदेश]] ([[अमरावती]])
* [[कर्नाटक]] ([[बंगलोर]])
* [[केरल]] ([[तिरुवनंतपुरम]])
* [[गोआ]] ([[पणजी]])
* [[गुजरात]] ([[गांधीनगर]])
* [[छत्तीसगढ़]] ([[रायपुर]])
* [[झारखंड]] ([[रांची]])
* [[तमिलनाडु]] ([[चेन्नई]])
* [[तेलंगाना]] ([[हैदराबाद]])
| width="20" |
| valign=top |
* [[त्रिपुरा]] ([[अगरतला]])
* [[नागालैंड]] ([[कोहिमा]])
* [[पश्चिम बंगाल]] ([[कोलकाता]])
* [[पंजाब (भारत)|पंजाब]] ([[चंडीगढ़]]†)
* [[बिहार]] ([[पटना]])
* [[मणिपुर]] ([[इम्फाल]])
* [[मध्य प्रदेश]] ([[भोपाल]])
* [[महाराष्ट्र]] ([[मुंबई]])
* [[मिज़ोरम]] ([[आइजोल]])
* [[मेघालय]] ([[शिलांग]])
* [[राजस्थान]] ([[जयपुर]])
* [[सिक्किम]] ([[गान्तोक]])
* [[हरियाणा]] ([[चंडीगढ़]]†)
* [[हिमाचल प्रदेश]] ([[शिमला]])
|}
;केन्द्रशासित प्रदेश
{|
|-
|
* [[जम्मू और कश्मीर (केंद्र शासित प्रदेश)|जम्मू और कश्मीर]] ([[श्रीनगर]]/[[जम्मू]])
* [[लदाख]]* ([[लेह]])
* [[अंडमान व निकोबार द्वीपसमूह]]([[पोर्ट ब्लेयर]])
* [[चंडीगढ़]]†* (चंडीगढ़)
* [[दमन और दीव]]* ([[दमन]])
* [[दादरा और नागर हवेली]]* ([[सिलवासा]])
* [[पॉण्डिचेरी]]* ([[पुडुचेरी]])
* [[लक्षद्वीप]]* ([[कवरत्ती]])
* [[दिल्ली]] ([[नई दिल्ली]])
|}
† चंडीगढ़ एक केंद्रशासित प्रदेश है तथा यह पंजाब और हरियाणा दोनों राज्यों की राजधानी है।
26 जनवरी 2020 को दादरा एव नगर हवेली तथा दमन द्वीप का विलय करके एक केंद्रशासित प्रदेश बना दिया गया है। अब इसका पूरा नाम दादरा एवं नगर हवेली तथा दमन द्वीप है।
{{anchor|भारत के प्रमुख शहर}}
<div style="margin:0 auto">{{भारत के सबसे बड़े महानगरीय क्षेत्र}}</div>
{{Clear}}
===विदेश-सम्बन्ध===
{{main | भारत के वैदेशिक सम्बन्ध}}
[[File:Putin and Modi in New Delhi in 2014.jpeg|thumb|2014 में पुतिन और मोदी नई दिल्ली में]]
1947 में अपनी स्वतंत्रता के बाद, भारत के अधिकांश देशों के साथ सौहार्दपूर्ण संबंध बनाए रखा है। 1950 के दशक में, भारत ने पुरजोर रूप से [[अफ्रीका]] और [[एशिया]] में यूरोपीय उपनिवेशों की स्वतंत्रता का समर्थन किया और गुट निरपेक्ष आंदोलन में एक अग्रणी की भूमिका निभाई।<ref>{{Citation|title=The Non-Aligned Movement: Description and History|url=http://www.nam.gov.za/background/history.htm|publisher=The Non-Aligned Movement|work=nam.gov.za|date=21 सितंबर 2001|accessdate=23 अगस्त 2007|archive-url=https://www.webcitation.org/6174YxJPe?url=http://www.nam.gov.za/background/history.htm|archive-date=21 अगस्त 2011|url-status=dead}}</ref> 1980 के दशक में भारत दो पड़ोसी देशों के निमंत्रण पर, सेना के द्वारा संक्षिप्त सैन्य हस्तक्षेप किया, एक श्रीलंका में और दुसरा मालदीव में। भारत के पड़ोसी [[पाकिस्तान]] के साथ एक तनाव भरा संबंध है और दोनों देशों के बीच चार बार युद्ध हुआ था, 1947, 1965, 1971 और 1999 में। कश्मीर विवाद इन युद्धों का प्रमुख कारण था।<ref>{{Citation|last=Gilbert|first=Martin|title=A History of the Twentieth Century: The Concise Edition of the Acclaimed World History|url=http://books.google.com/books?id=jhwY1j8Ao3kC&pg=PA486|accessdate=22 जुलाई 2011|date=17 दिसम्बर 2002|publisher=HarperCollins|isbn=9780060505943|pages=486–487|archive-url=https://web.archive.org/web/20111212130509/http://books.google.com/books?id=jhwY1j8Ao3kC&pg=PA486|archive-date=12 दिसंबर 2011|url-status=live}}</ref> 1962 के भारत - चीन युद्ध और पाकिस्तान के साथ 1965 के युद्ध के बाद भारत और सोवियत संघ के साथ सैन्य संबंधों में बहुत बढ़ोतरी हुई। 1960 के दशक के अन्त में सोवियत संघ भारत का सबसे बड़ा हथियार आपूर्तिकर्ता के रूप में उभरी थी।<ref>{{Cite web |url=http://library.fes.de/pdf-files/bueros/genf/50205.pdf |title=संग्रहीत प्रति |access-date=1 अक्तूबर 2011 |archive-url=https://web.archive.org/web/20110913154659/http://library.fes.de/pdf-files/bueros/genf/50205.pdf |archive-date=13 सितंबर 2011 |url-status=dead }}</ref>
रूस के साथ सामरिक संबंधों के अलावा, भारत का [[इजरायल]] और [[फ्रांस]] के साथ विस्तृत रक्षा संबंध हैं। हाल के वर्षों में, भारत ने क्षेत्रीय सहयोग और विश्व व्यापार संगठन के लिए एक दक्षिण एशियाई एसोसिएशन में प्रभावशाली भूमिका निभाई है। <ref>{{Citation|url=http://library.fes.de/pdf-files/bueros/genf/50205.pdf|title=India's negotiation positions at the WTO|format=PDF|date=नवम्बर 2005|accessdate=23 अगस्त 2010|archive-url=https://web.archive.org/web/20110913154659/http://library.fes.de/pdf-files/bueros/genf/50205.pdf|archive-date=13 सितंबर 2011|url-status=dead}}</ref> भारत ने 100,000 सैन्य और पुलिस कर्मियों को चार महाद्वीपों भर में संयुक्त राष्ट्र के पैंतीस शांति अभियानों में सेवा प्रदान की है।<ref>{{Cite web |url=http://www.un.int/india/india_and_the_un_pkeeping.html |title=संग्रहीत प्रति |access-date=1 अक्तूबर 2011 |archive-url=https://web.archive.org/web/20060504184925/http://www.un.int/india/india_and_the_un_pkeeping.html |archive-date=4 मई 2006 |url-status=dead }}</ref> भारत ने विभिन्न बहुपक्षीय मंचों, सबसे खासकर पूर्वी एशिया के शिखर बैठक और [[जी-8]] 5 में एक सक्रिय भागीदारी निभाई है। आर्थिक क्षेत्र में भारत का दक्षिण अमेरिका, एशिया, और अफ्रीका के विकासशील देशों के साथ घनिष्ठ संबंध है।<ref>{{Citation|url=http://goliath.ecnext.com/coms2/gi_0199-4519133/ANALYSTS-SAY-INDIA-S-POWER.html|title=Analysts Say India'S Power Aided Entry Into East Asia Summit. | Goliath Business News|publisher=Goliath.ecnext.com|date=29 जुलाई 2005|accessdate=21 नवम्बर 2009|archive-url=https://web.archive.org/web/20110809024401/http://goliath.ecnext.com/coms2/gi_0199-4519133/ANALYSTS-SAY-INDIA-S-POWER.html|archive-date=9 अगस्त 2011|url-status=live}}</ref>
<ref>{{Cite web|url=https://naidunia.jagran.com/world-s-jaishankar-will-be-the-new-foriegn-secretary-296665|title=एस. जयशंकर होंगे भारत के नए विदेश सचिव|website=Nai Dunia|accessdate=1 मार्च 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20160304122451/http://naidunia.jagran.com/world-s-jaishankar-will-be-the-new-foriegn-secretary-296665|archive-date=4 मार्च 2016|url-status=dead}}</ref>
===सैन्य शक्ति===
{{main| भारतीय सशस्त्र सेनाएँ | भारत के अर्धसैनिक बल}}
[[चित्र:Indian Navy's aircraft carriers INS Viraat and Vikramaditya.jpg|thumb|right|200px| भारतीय नौसेना के विमानवाहक पोत - विराट एवं विक्रमादित्य]]
[[चित्र:HAL Tejas AeroIndia-2009.JPG|thumb|right|200px| एच.ए.एल तेजस भारत द्वारा विकसित एक हल्का सुपरसौनिक लड़ाकू विमान है।]]
[[चित्र:Yudh Abhyas-09 BMP.JPG|thumb|right|200px| युद्ध अभ्यास करते भारतीय टैंक]]
[[File:Agni missile range-hi.svg|thumb|200px|भारतीय प्रक्षेपास्त्र अग्नि की मारक सीमा]]
लगभग 13 लाख सक्रिय सैनिकों के साथ, [[भारतीय सेना]] विश्व में तीसरी सबसे बड़ी है। भारत की सशस्त्र सेना में एक [[भारतीय थलसेना|थलसेना]], [[भारतीय नौसेना|नौसेना]], [[भारतीय वायुसेना|वायु सेना]] और [[भारत के अर्द्धसैनिक बल|अर्द्धसैनिक बल]], [[भारतीय तटरक्षक|तटरक्षक]], जैसे सामरिक और सहायक बल विद्यमान हैं। भारत के राष्ट्रपति भारतीय सशस्त्र बलों के सर्वोच्च कमांडर है।
1947 में अपनी स्वतंत्रता के बाद से, भारत ने ज्यादातर देशों के साथ सौहार्दपूर्ण संबंध बनाए रखा है। 1950 के दशक में, [[भारत]] ने दृढ़ता से [[अफ्रीका]] और [[एशिया]] में यूरोपीय कालोनियों की स्वतंत्रता का समर्थन किया और गुट निरपेक्ष आंदोलन में एक अग्रणी भूमिका निभाई। 1980 के दशक में भारत ने आमंत्रण पर दो पड़ोसी देशों में संक्षिप्त सैन्य हस्तक्षेप किया। मालदीव, [[श्रीलंका]] और अन्य देशों में ऑपरेशन कैक्टस में भारतीय शांति सेना को भेजा गया। हालाँकि, भारत के पड़ोसी देश [[पाकिस्तान]] के साथ एक तनावपूर्ण संबंध बने रहे और दोनों देशों में चार बार युध्द (1947, 1965, 1971 और 1999 में) हुए हैं। [[कश्मीर]] विवाद इन युद्धों के प्रमुख कारण था, सिवाय 1971 के, जो कि तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान में नागरिक अशांति के लिए किया गया था। 1962 के भारत-चीन युद्ध और पाकिस्तान के साथ 1965 के युद्ध के बाद भारत ने अपनी सैन्य और आर्थिक स्थिति का विकास करने का प्रयास किया। [[सोवियत संघ]] के साथ अच्छे संबंधों के कारण सन् 1960 के दशक से, सोवियत संघ भारत का सबसे बड़ा हथियार आपूर्तिकर्ता के रूप में उभरा।
आज [[रूस]] के साथ सामरिक संबंधों को जारी रखने के अलावा, भारत विस्तृत [[इजरायल]] और [[फ्रांस]] के साथ रक्षा संबंध रखा है। हाल के वर्षों में, भारत में क्षेत्रीय सहयोग और विश्व व्यापार संगठन के लिए एक दक्षिण एशियाई एसोसिएशन में प्रभावशाली भूमिका निभाई है। १०,००० राष्ट्र सैन्य और पुलिस कर्मियों को चार महाद्वीपों भर में पैंतीस संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में सेवा प्रदान की है। भारत भी विभिन्न बहुपक्षीय मंचों, खासकर पूर्वी एशिया शिखर बैठक और जी-८५ बैठक में एक सक्रिय भागीदार रहा है। आर्थिक क्षेत्र में भारत दक्षिण अमेरिका, अफ्रीका और एशिया के विकासशील देशों के साथ घनिष्ठ संबंध रखते है। अब भारत एक "पूर्व की ओर देखो नीति" में भी संयोग किया है। यह "आसियान" देशों के साथ अपनी भागीदारी को मजबूत बनाने के मुद्दों की एक विस्तृत शृंखला है जिसमे [[जापान]] और [[दक्षिण कोरिया]] ने भी मदद किया है। यह विशेष रूप से आर्थिक निवेश और क्षेत्रीय सुरक्षा का प्रयास है।
1974 में भारत अपनी पहले [[परमाणु हथियार|परमाणु हथियारों]] का परीक्षण किया और आगे 1998 में भूमिगत परीक्षण किया। जिसके कारण भारत पर कई तरह के प्रतिबन्ध भी लगाये गए। भारत के पास अब तरह-तरह के परमाणु हथियारें है। भारत अभी रूस के साथ मिलकर पाँचवीं पीढ़ के विमान बना रहे है।
हाल ही में, भारत का संयुक्त राष्ट्रे अमेरिका और यूरोपीय संघ के साथ आर्थिक, सामरिक और सैन्य सहयोग बढ़ गया है। 2008 में, भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच असैनिक परमाणु समझौते हस्ताक्षर किए गए थे। हालाँकि उस समय भारत के पास परमाणु हथियार था और परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) के पक्ष में नहीं था यह अन्तरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी और न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप (एनएसजी) से छूट प्राप्त है, भारत की परमाणु प्रौद्योगिकी और वाणिज्य पर पहले प्रतिबंध समाप्त. भारत विश्व का छठा वास्तविक परमाणु हथियार राष्ट्रत बन गया है। एनएसजी छूट के बाद भारत भी रूस, फ्रांस, यूनाइटेड किंगडम और कनाडा सहित देशों के साथ असैनिक परमाणु ऊर्जा सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर करने में सक्षम है।
वित्त वर्ष 2014-15 के केन्द्रीय अन्तरिम बजट में रक्षा आवंटन में 10 प्रतिशत बढ़ोत्तरी करते हुए 224,000 करोड़ रूपए आवंटित किए गए। 2013-14 के बजट में यह राशि 203,672 करोड़ रूपए थी।<ref name="pib-17feb14">{{cite web | url = http://pib.nic.in/newsite/hindirelease.aspx?relid=26921 | title = रक्षा आवंटन 10 प्रतिशत बढ़ाया गया | publisher = पत्र सूचना कार्यालय, भारत सरकार | date = 17 फ़रवरी 2014 | accessdate = 18 फ़रवरी 2014 | archive-url = https://web.archive.org/web/20140222141810/http://pib.nic.in/newsite/hindirelease.aspx?relid=26921 | archive-date = 22 फ़रवरी 2014 | url-status = live }}</ref> 2012–13 में रक्षा सेवाओं के लिए 1,93,407 करोड़ रुपए<ref name="pib-16mar12">{{cite web | url = http://pib.nic.in/newsite/hindirelease.aspx?relid=14218 | title = रक्षा सेवाओं के लिए प्रावधान | publisher = पत्र सूचना कार्यालय, भारत सरकार | date = 16 मार्च 2012 | accessdate = 18 फ़रवरी 2014 | archive-url = https://web.archive.org/web/20140222141816/http://pib.nic.in/newsite/hindirelease.aspx?relid=14218 | archive-date = 22 फ़रवरी 2014 | url-status = live }}</ref> का प्रावधान किया गया था, जबकि 2011–2012 में यह राशि 1,64,415 करोइ़<ref name="pib-7mar2011">{{cite web | url = http://pib.nic.in/newsite/erelease.aspx?relid=70604 | title = Defence Budget | publisher = पत्र सूचना कार्यालय, भारत सरकार | date = 7 मार्च 2011 | accessdate = 18 फ़रवरी 2014 | archive-url = https://web.archive.org/web/20140222141813/http://pib.nic.in/newsite/erelease.aspx?relid=70604 | archive-date = 22 फ़रवरी 2014 | url-status = live }}</ref> थी। साल 2011 में भारतीय रक्षा बजट 36.03 अरब अमरिकी डॉलर रहा (या सकल घरेलू उत्पाद का 1,83%)। 2008 के एक SIRPI रिपोर्ट के अनुसार, भारत क्रय शक्ति के मामले में भारतीय सेना के सैन्य खर्च 72.7 अरब अमेरिकी डॉलर रहा। साल 2011 में भारतीय रक्षा मंत्रालय के वार्षिक रक्षा बजट में 11.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई, हालाँकि यह पैसा सरकार की अन्य शाखाओं के माध्यम से सैन्य की ओर जाते हुए पैसों में शमिल नहीं होता है। भारत विश्व का सबसे बड़े हथियार आयातक है।
{| class = "wikitable"
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!वित्त वर्ष !! 2007-2008 !! 2008-2009 !! 2009-2010 !! 2011-2012 !! 2012-2013 !! 2013-2014 !! 2014-2015 !! 2015-2016 !! 2016-2017
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|बजट (करोड़ रूपए)|| 96,000<ref name="pib-7mar2011"/> || 1,05,600<ref name="pib-7mar2011"/> || 1,41,703<ref name="pib-7mar2011"/> || 1,64,415<ref name="pib-7mar2011"/> || 1,93,407<ref name="pib-16mar12"/> || 2,03,672<ref name="pib-17feb14"/> || 2,24,000<ref name="pib-17feb14"/> || 2,94,320|| 3,59,854
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२०१४ में नरेन्द्र मोदी नीत भाजपा सरकार ने [[मेक इन इण्डिया]] के नाम से भारत में निर्माण अभियान की शुरुआत की और भारत को हथियार आयातक से निर्यातक बनाने के लक्ष्य की घोषणा की। रक्षा निर्माण के द्वार निजी कंपनियों के लिए भी खोल दिए गए और भारत के कई उद्योग घरानों ने बड़े पैमाने पर इस क्षेत्र में पूंजी निवेश की योजनाएँ घोषित की। फ्राँस की डसॉल्ट एविएशन ने अंबानी समूह के साथ साझेदारी में रफेल लड़ाकू विमान<ref>http://hindi.economictimes.indiatimes.com/business/business-news/frances-dassault-to-bring-in-largest-defence-fdi-via-rafale-joint-venture-with-reliance-defence/articleshow/59063463.cms {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20170717180836/http://hindi.economictimes.indiatimes.com/business/business-news/frances-dassault-to-bring-in-largest-defence-fdi-via-rafale-joint-venture-with-reliance-defence/articleshow/59063463.cms |date=17 जुलाई 2017 }} नवभारत टाईम्स ९ जून २०१७</ref>, तथा अमेरिका की लॉकहीड मार्टिन ने टाटा समूह के साथ साझेदारी लड़ाकू विमान एफ-१६ <ref>http://navbharattimes.indiatimes.com/business/business-news/paris-airshow-lockheed-martin-signs-pact-with-tata-to-make-f-16-planes-in-india/articleshow/59219961.cms {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20170623171242/http://navbharattimes.indiatimes.com/business/business-news/paris-airshow-lockheed-martin-signs-pact-with-tata-to-make-f-16-planes-in-india/articleshow/59219961.cms |date=23 जून 2017 }} नवभारत टाईम्स १९ जून २०१७</ref> का निर्माण भारत में प्रारम्भ करने की घोषणाएँ की हैं। अन्य प्रतिष्ठित समूह जैसे एल एंड टी,<ref>http://hindi.economictimes.indiatimes.com/business/business-news/govt-signed-agreement-with-lt-for-firearms/articleshow/58646476.cms {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20200314001109/http://hindi.economictimes.indiatimes.com/business/business-news/govt-signed-agreement-with-lt-for-firearms/articleshow/58646476.cms |date=14 मार्च 2020 }} सेना के तोपों के लिए L&T से करार नवभारत टाईम्स १२ मई २०१७</ref><ref>https://scholar.valpo.edu/cgi/viewcontent.cgi?referer=https://en.wikipedia.org/&httpsredir=1&article=1095&context=jvbl वालपराइसो विश्वविद्यालय अनुसंधान</ref> महिन्द्रा, कल्याणी आदि भी कई परियोजनाओं के निर्माण की पहल कर चुके हैं जिनमें तोपें, असला, जलपोत व पनडुब्बियों का निर्मान शामिल है। रूस के साथ कमोव हेलीकॉप्टर का निर्माण भी भारत में करने के लिए समझौता हुआ है।
== अर्थव्यवस्था ==
{{main|भारत की अर्थव्यवस्था}}
[[File:GDP PPP 2021 Selection.svg|thumb|330 px|२०१४ में क्रयशक्ति समानता के आधार पर भारतीय अर्थव्यवस्था विश्व में तीसरी सबसे बड़ी थी।]]
मुद्रा स्थानांतरण की दर से भारत की अर्थव्यवस्था विश्व में दसवें और क्रयशक्ति के अनुसार तीसरे स्थान पर है। वर्ष [[२००३]] में भारत में लगभग ८% की दर से आर्थिक वृद्धि हुई है जो कि विश्व की सबसे तीव्र बढती हुई अर्थव्यवस्थओं में से एक है। परंतु भारत की अत्यधिक जनसंख्या के कारण प्रतिव्यक्ति आय क्रयशक्ति की दर से मात्र ३,२६२ अमेरिकन डॉलर है जो कि विश्व बैंक के अनुसार १२५वें स्थान पर है। भारत का विदेशी मुद्रा भंडार २६५ (मार्च २००९) अरब अमेरिकी डॉलर है। [[मुम्बई]] भारत की आर्थिक राजधानी है और [[भारतीय रिजर्व बैंक]] और [[बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज]] का मुख्यालय भी। यद्यपि एक चौथाई भारतीय अभी भी [[निर्धनता रेखा]] से नीचे हैं, तीव्रता से बढ़ती हुई [[सूचना प्रौद्योगिकी]] कंपनियों के कारण मध्यमवर्ग में वृद्धि हुई है। १९९१ के बाद भारत में [[आर्थिक सुधार]] की नीति ने भारत के सर्वंगीण विकास में बड़ी भूमिका निभाई है।
[[चित्र:InfosysHQFrontView.jpg|thumb|270px|left|[[सूचना प्रोद्योगिकी]] (आईटी) भारत के सबसे अधिक विकासशील उद्योगों में से एक है, वार्षिक आय २८५० करोड़ डालर, [[इन्फोसिस]], भारत की सबसे बडी आईटी कम्पनियों में से एक]]
१९९१ के बाद भारत में हुए [[आर्थिक सुधार|आर्थिक सुधारोँ]] ने भारत के सर्वांगीण विकास में बड़ी भूमिका निभाई। भारतीय अर्थव्यवस्था ने [[कृषि]] पर अपनी ऐतिहासिक निर्भरता कम की है और कृषि अब भारतीय [[सकल घरेलू उत्पाद]] (जीडीपी) का केवल २५% है। दूसरे प्रमुख उद्योग हैं [[उत्खनक|उत्खनन]], [[पेट्रोलियम]], [[बहुमूल्य रत्न]], [[चलचित्र]], [[वस्त्र]], [[सूचना प्रौद्योगिकी]] सेवाएं, तथा [[सजावटी वस्तुऐं]]। भारत के अधिकतर औद्योगिक क्षेत्र उसके प्रमुख महानगरों के आसपास स्थित हैं। हाल ही के वर्षों में $१७२० करोड़ अमरीकी डालर वार्षिक आय [[२००४]]-[[२००५]] के साथ भारत सॉफ़्टवेयर और बीपीओ सेवाओं का सबसे बड़ा केन्द्र बन कर उभरा है। इसके साथ ही कई लघु स्तर के उद्योग भी हैं जोकि छोटे [[भारतीय गाँव]] और [[भारत के शहरों की सूची|भारतीय नगरों]] के कई नागरिकों को जीविका प्रदान करते हैं। पिछले वर्षों में भारत में [[वित्तीय संस्थान|वित्तीय संस्थानों]] ने विकास में बड़ी भूमिका निभाई है।
केवल तीस लाख विदेशी पर्यटकों के प्रतिवर्ष आने के बाद भी [[भारतीय पर्यटन]] राष्ट्रीय आय का एक अति आवश्यक, परन्तु कम विकसित स्रोत है। पर्यटन उद्योग भारत के जीडीपी का कुल ५,३% है। पर्यटन १०% भारतीय कामगारों को आजीविका देता है। वास्तविक संख्या ४.२ करोड है। आर्थिक रूप से देखा जाए तो पर्यटन [[भारतीय अर्थव्यवस्था]] को लगभग $४०० करोड डालर प्रदान करता है। भारत के प्रमुख व्यापार सहयोगी हैं [[अमरीका]], [[जापान]], [[चीन]] और [[संयुक्त अरब अमीरात]]।
भारत के निर्यातों में कृषि उत्पाद, [[चाय]], कपड़ा, [[बहुमूल्य रत्न]] व आभूषण, [[सॉफ्टवेयर|साफ़्टवेयर सेवायें]], इंजीनियरिंग सामान, रसायन तथा चमड़ा उत्पाद प्रमुख हैं जबकि उसके आयातों में कच्चा तेल, मशीनरी, बहुमूल्य रत्न, [[उर्वरक]] (फ़र्टिलाइज़र) तथा रसायन प्रमुख हैं। वर्ष २००४ के लिये भारत के कुल निर्यात $६९१८ करोड़ [[डालर]] के थे जबकि उसके आयात $८९३३ करोड़ [[डालर]] के थे।
दिसम्बर 2013 के अन्त में भारत का कुल विदेशी कर्ज 426.0 अरब अमरीकी डॉलर था, जिसमें कि दीर्घकालिक कर्ज 333.3 अरब (78,2%) तथा अल्पकालिक कर्ज 92,7% अरब अमरीकी डॉलर (21,8%) था। कुल विदेशी कर्ज में सरकार का विदेशी कर्ज 76.4 अरब अमरीकी डॉलर (कुल विदेशी कर्ज का 17.9 प्रतिशत) था, बाकी में व्यावसायिक उधार, एनआरआई जमा और बहुउद्देश्यीय कर्ज आदि हैं।<ref name="pib">{{cite web | url = http://pib.nic.in/newsite/hindirelease.aspx?relid=27502 | title = दिसम्बर 2013 के अन्त में भारत का विदेशी कर्ज 426.0 अरब अमरीकी डॉलर, मार्च 2013 के अन्त के स्तर पर 21.1 अरब (5.2 प्रतिशत) की बढ़ोतरी | publisher = पत्र सूचना कार्यालय, भारत सरकार | date = 28 मार्च 2014 | accessdate = 7 मई 2014 | archive-url = https://web.archive.org/web/20140508024825/http://pib.nic.in/newsite/hindirelease.aspx?relid=27502 | archive-date = 8 मई 2014 | url-status = live }}</ref>
== जनसांख्यिकी एवं भाषाएँ ==
{{main|भारत के लोग}}
भारत [[चीन]] के बाद विश्व का दूसरा सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश है। भारत की विभिन्नताओं से भरी जनता में [[भाषा]], [[जाति]] और [[धर्म]], <ref>{{Cite web|url=https://janganana.in/bharat-me-sabhi-dharmo-ki-jansankhya/|title=भारत में सभी धर्मों की जनसंख्या, साक्षरता, लिंगानुपात एवं वृद्धि दर 2011|access-date=31 जुलाई 2024|archive-date=31 जुलाई 2024|archive-url=https://web.archive.org/web/20240731074902/https://janganana.in/bharat-me-sabhi-dharmo-ki-jansankhya/|url-status=dead}}</ref>सामाजिक और राजनीतिक सौहार्द और समरसता के मुख्य शत्रु हैं।
[[भारत की जनगणना २०११|भारत में २०११ की जनगणना के अनुसार]] ७४.०४ प्रतिशत साक्षरता <ref>{{Cite web|url=https://janganana.in/state-literacy-rate/|title=सभी राज्यों की साक्षरता दर, स्कूल से लेकर डिग्री तक।|access-date=31 जुलाई 2024|archive-date=31 जुलाई 2024|archive-url=https://web.archive.org/web/20240731091604/https://janganana.in/state-literacy-rate/|url-status=dead}}</ref>है, जिस में से ८२.१४% पुरुष और स्त्रियो की साक्षरता ६५.४६ हैं। <ref>{{Cite web|url=https://m.jagranjosh.com/general-knowledge/census-2011-literacy-rate-and-sex-ratio-in-india-since-1901-to-2011-1476359944-1|title=Census 2011: Literacy Rate and Sex Ratio in India Since 1901 to 2011|date=2016-10-13|website=Jagranjosh.com|access-date=2021-05-07}}</ref> [[लिंग अनुपात]] की दृष्टि से भारत में प्रत्येक १००० पुरुषों के पीछे मात्र ९४० महिलायें हैं। कार्य भागीदारी दर (कुल जनसंख्या में कार्य करने वालों का भाग) ३९.१% है। पुरुषों के लिए यह दर ५१,७% और स्त्रियों के लिये २५,६% है। भारत की १००० जनसंख्या में २२.३२ जन्मों के साथ बढ़ती जनसंख्या के आधे लोग २२.६६ वर्ष से कम आयु के हैं।
===धर्म===
[[File:Sree Padmanabhaswamy temple Thiruvananthapuram,.jpg|thumb|[[पद्मनाभस्वामी मंदिर]], [[तिरुवनन्तपुरम]], [[केरल]]]]
[[File:Sikh pilgrim at the Golden Temple (Harmandir Sahib) in Amritsar, India.jpg|thumb|[[हरिमन्दिर साहिब|स्वर्ण मंदिर (हरमंदिर साहिब)]] में [[सिख]] तीर्थयात्री, [[अमृतसर]], [[पंजाब (भारत)|पंजाब]]]]
{{bar box
|title= [[भारत में धर्म|भारत में धार्मिक समूह]] ([[भारत की जनगणना २०११|२०११ की जनगणना]])<ref>{{Cite web|url=http://www.census2011.co.in/religion.php|title=Religion Data - Population of Hindu / Muslim / Sikh / Christian - Census 2011 India|website=www.census2011.co.in|accessdate=1 मार्च 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190814173118/http://www.census2011.co.in/religion.php|archive-date=14 अगस्त 2019|url-status=dead}}</ref>
|titlebar=#ddd
|left1='''धार्मिक समूह'''
|right1='''प्रतिशत'''
|float=right
|bars=
{{bar percent|हिन्दू|orange|79.80}}
{{bar percent|मुस्लिम|green|14.23}}
{{bar percent|ईसाई|gray|2.30}}
{{bar percent|सिख|yellow|1.72}}
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}}
यद्यपि भारत की ७९.८० प्रतिशत या ९६.६२ करोड़ जनसंख्या [[हिन्दू]] है,<ref>{{Cite web|url=https://www.bbc.com/hindi/india/2015/08/150825_census_report_population_religion_ps|title=हिन्दू-मुस्लिम आबादी की पेचीदगी को समझें|website=BBC News हिन्दी|accessdate=1 मार्च 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20180824035755/https://www.bbc.com/hindi/india/2015/08/150825_census_report_population_religion_ps|archive-date=24 अगस्त 2018|url-status=live}}</ref> १४.२३ प्रतिशत या १७.२२ करोड़ जनसंख्या के साथ भारत विश्व में मुसलमानों की संख्या में भी [[इंडोनेशिया]] और [[पाकिस्तान]] के बाद तीसरे स्थान पर है। अन्य धर्मावलम्बियों में [[ईसाई]] (२.३० % या २.७८ करोड़), [[सिख]] (१,७२ % या २.०८ करोड़), [[बौद्ध]] (०,७० % या ८४.४३ लाख), [[जैन]] (०,३७ % या ४४.५२ लाख), अन्य धर्म (०,६६ % या ७९.३८ लाख) इनमें [[यहूदी]], [[पारसी]], [[अहमदी]] और [[बहाई]] आदि धर्मीय हैं। [[नास्तिकता]] ०,२४% या ३८.३७ लाख है।
=== भारत की जनजातियां ===
*[[गोंड (जनजाति)|गोंड]] - गोंड भारत की जनजाति है , मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में इनका शासन था ।
*[[ भील]] - भील देश की सबसे विस्तृत क्षेत्र में फैली हुई जनजाति है , यह जनजाति मुख्यरूप से राजस्थान , मध्यप्रदेश , गुजरात और महाराष्ट्र में निवास करती है , इस जनजाति का इतिहास बेहद ही गौरवशाली रहा है , यह जनजाति प्राचीन समय में एक कबीले में ना रह कर , देश के कई क्षेत्रों पर शासन किया । भील जनजाति देश में भील रेजिमेंट और भील प्रदेश चाहती है।
*[[ मीणा ]] - मीणा राजस्थान की मुख्य जनजाति है। मध्य प्रदेश में मीणाओं को पूर्ण रूप से अनुसूचित जनजाति के रूप में प्रस्तावित किया गया है, जिस पर भारत सरकार विचार कर रही है।
*[[ नागा ]] - नागा जनजाति मुख्यरूप से नागालैंड में पाई जाती है , देश में नागा रेजिमेंट है।
*[[ गारो]] - एक जनजाति
*[[ भूमिज ]] - भारत की सबसे प्राचीन जनजाति; पश्चिम बंगाल, झारखण्ड, उड़ीसा और असम में पाई जाती है।
===भाषाएँ===
{{main|भारत की भाषाएँ}}
भारत दो मुख्य भाषा-सूत्रों: आर्य और द्रविड़ भाषाओं का स्रोत भी है। [[भारत का संविधान]] कुल २३ भाषाओं को मान्यता देता है। [[हिन्दी]] और [[अंग्रेजी]] केन्द्रीय सरकार द्वारा सरकारी कामकाज के लिए उपयोग की जाती हैं। [[संस्कृत]] और [[तमिल]] जैसी अति प्राचीन भाषाएं भारत में ही जन्मी हैं। संस्कृत, संसार की सर्वाधिक प्राचीन भाषाओं में से एक है, जिसका विकास पथ्यास्वस्ति नाम की अति प्राचीन भाषा/बोली से हुआ था। तमिल के अलावा सारी भारतीय भाषाएँ संस्कृत से ही विकसित हुई हैं, हालाँकि संस्कृत और तमिल में कई शब्द समान हैं, कुल मिला कर भारत में १६५२ से भी अधिक भाषाएं एवं बोलियाँ बोली जातीं हैं।
भाषाओं के मामले में भारतवर्ष विश्व के समृद्धतम देशों में से है। संविधान के अनुसार [[हिन्दी]] भारत की [[राजभाषा]] है, और [[अंग्रेजी]] को सहायक राजाभाषा का स्थान दिया गया है। १९४७-१९५० के संविधान के निर्माण के समय देवनागरी लिपि में लिखी हिन्दी भाषा और हिन्दी-अरबी अंकों के अन्तर्राष्ट्रीय स्वरूप को संघ (केंद्र) सरकार की कामकाज की भाषा बनाया गया था, और गैर-हिन्दी भाषी राज्यों में हिन्दी के प्रचलन को बढ़ाकर उन्हें हिन्दी-भाषी राज्यों के समान स्तर तक आने तक के लिये १५ वर्षों तक अंग्रेजी के इस्तेमाल की इजाज़त देते हुए इसे सहायक राजभाषा का दर्ज़ा दिया गया था। संविधान के अनुसार यह व्यवस्था १९५० में समाप्त हो जाने वाली थी, किन्तु् तमिलनाडु राज्य के [[तमिलनाडु के हिन्दी भाषा विरोधी आन्दोलन|हिन्दी भाषा विरोधी आन्दोलन]] और हिन्दी भाषी राज्यों राजनैतिक विरोध के परिणामस्वरूप, संसद ने इस व्यवस्था की समाप्ति को अनिश्चित काल तक स्थगित कर दिया है। इस वजह से वर्तमान समय में केंद्रीय सरकार में काम हिन्दी और अंग्रेज़ी भाषाओं में होता है और राज्यों में हिन्दी अथवा अपने-अपने क्षेत्रीय भाषाओं में काम होता है। केन्द्र और राज्यों और अन्तर-राज्यीय पत्र-व्यवहार के लिए, यदि कोई राज्य ऐसी मांग करे, तो हिन्दी और अंग्रेज़ी दोनों भाषाओं का होना आवश्यक है। भारतीय संविधान एक [[राष्ट्रभाषा]] का वर्णन नहीं करता। हिन्दी और अंग्रेजी भारत सरकार की आधिकारिक भाषाएं हैं, किन्तु कोई राष्ट्रीय भाषा नहीं है। भारत में 22 आधिकारिक भाषाएँ हैं, जिनमें से प्रत्येक को बड़ी संख्या में लोग बोलते हैं। हालाँकि, हिन्दी का उपयोग अनिवार्य नहीं है, और अन्य आधिकारिक भाषाओं का भी उपयोग किया जा सकता है।
हिन्दी और अंग्रेज़ी के इलावा संविधान की आठवीं अनुसूची में २० अन्य भाषाओं का वर्णन है जिन्हें भारत में आधिकारिक कामकाज में इस्तेमाल किया जा सकता है। संविधान के अनुसार सरकार इन भाषाओं के विकास के लिये प्रयास करेगी, और अधिकृत राजभाषा (हिन्दी) को और अधिक समृद्ध बनाने के लिए इन भाषाओं का उपयोग करेगी। आठवीं अनुसूची में दर्ज़ २२ भाषाएँ यह हैं:
{{Div col|4}}
* [[संस्कृत]]
* [[हिन्दी]]
* [[अंग्रेजी]]
* [[मराठी]]
* [[नेपाली]]
* [[मैथिली]]
* [[पंजाबी भाषा|पंजाबी]]
* [[तमिल]]
* [[तेलुगू]]
* [[मलयालम]]
* [[कन्नड]]
* [[गुजराती]]
* [[बांग्ला]]
* [[असमिया]]
* [[ओड़िया भाषा|ओड़िया]]
* [[कश्मीरी भाषा|कश्मीरी]]
* [[मणिपुरी भाषा|मणिपुरी]]
* [[कोंकणी]]
* [[डोगरी]]
* [[उर्दू]]
* [[सिन्धी]]
* [[संथाली]]
{{Div col end}}
राज्यवार भाषाओं की आधिकारिक स्थिति इस प्रकार है:
{| class = "wikitable sortable"
|-
! क्र॰सं॰ || राज्य || आधिकारिक भाषा(एं) || अन्य मान्यता प्राप्त भाषाएं
|-
| १. || [[अरुणाचल प्रदेश]] || [[अंग्रेज़ी भाषा|अंग्रेज़ी]]<ref name=langoff>{{cite web |url=http://nclm.nic.in/shared/linkimages/NCLM50thReport.pdf |title=Report of the Commissioner for linguistic minorities: 50th report (जुलाई 2012 to जून 2013) |pages= |publisher=Commissioner for Linguistic Minorities, Ministry of Minority Affairs, भारत सरकार |accessdate=26 दिसम्बर 2014 |archive-url=https://web.archive.org/web/20160708012438/http://nclm.nic.in/shared/linkimages/NCLM50thReport.pdf |archive-date=8 जुलाई 2016 |url-status=dead }}</ref>{{rp|65}} ||
|-
| २. || [[असम]] || [[असमिया]], [[अंग्रेज़ी भाषा|अंग्रेज़ी]]<ref name="AOL1968">{{cite web|url=http://www.neportal.org/northeastfiles/Assam/ActsOrdinances/Assam_Official_Language_Act_1968.asp|title=The Assam Official Language Act, 1960|website=Northeast Portal|date=19 दिसम्बर 1960|accessdate=25 दिसम्बर 2014|archive-url=https://web.archive.org/web/20160226063540/http://www.neportal.org/northeastfiles/Assam/ActsOrdinances/Assam_Official_Language_Act_1968.asp|archive-date=26 फ़रवरी 2016|url-status=dead}}</ref> || [[बांग्ला]] बराक घाटी के तीन ज़िलों में;<ref name="BarakValley">{{cite web|url=http://www.dnaindia.com/india/report-assam-government-withdraws-assamese-as-official-language-in-barak-valley-restores-bengali-2017504|title=Assam government withdraws Assamese as official language in Barak Valley, restores Bengali|website=DNA India|date=10 सितम्बर 2014|author=ANI|accessdate=25 दिसम्बर 2014|archive-url=https://web.archive.org/web/20141225150741/http://www.dnaindia.com/india/report-assam-government-withdraws-assamese-as-official-language-in-barak-valley-restores-bengali-2017504|archive-date=25 दिसंबर 2014|url-status=live}}</ref> [[[बोड़ो भाषा|बोडो]] बोडोलैंड क्षेत्रीय परिषद् के ज़िलों में।<ref name="BTC">{{cite web|url=http://www.satp.org/satporgtp/countries/india/states/assam/documents/papers/memorandum_feb02.htm|title=Memorandum of Settlement on Bodoland Territorial Council (BTC)|date=10 फ़रवरी 2003|website=South Asia Terrorism Portal|accessdate=25 दिसम्बर 2014|archive-url=https://web.archive.org/web/20141108080405/http://www.satp.org/satporgtp/countries/india/states/assam/documents/papers/memorandum_feb02.htm|archive-date=8 नवंबर 2014|url-status=dead}}</ref>
|-
| ३. || [[आंध्र प्रदेश]] || [[तेलुगु]]<ref name="APOnline">{{cite web |url=http://www.aponline.gov.in/Quick%20links/HIST-CULT/languages.html |title=Languages |website=APOnline |year=2002 |accessdate=25 दिसम्बर 2014 |archive-url=https://web.archive.org/web/20120208110254/http://www.aponline.gov.in/Quick%20links/HIST-CULT/languages.html |archive-date=8 फ़रवरी 2012 |url-status=dead }}</ref> ||[[उर्दू]] इन ज़िलों में दूसरी आधिकारिक भाषा है: [[कुर्नूल]], [[कडपा]], [[अनंतपुर]], गुन्टूर, [[चित्तूर]] और [[नेल्लोर]] जहां १२% से अधिक जनसंख्या उर्दू को प्राथमिक भाषा के तौर पर बोलती है।<ref name="MilliGazette">{{cite web|url=http://www.milligazette.com/Archives/01102001/18.htm|title=Official status of Urdu in Andhra Pradesh|accessdate=25 दिसम्बर 2014|archive-url=https://web.archive.org/web/20160304090338/http://www.milligazette.com/Archives/01102001/18.htm|archive-date=4 मार्च 2016|url-status=dead}}</ref>
|-
|४. || [[उत्तर प्रदेश]] || [[हिन्दी]] || [[उर्दू]]<ref name="upofflang">Hindi is the official language, and Urdu is used for seven specific purposes, similar to those for which it is used in Bihar. {{citation |last=Commissioner Linguistic Minorities |title=43rd report: जुलाई 2004 - जून 2005 |pages=paras 6.1–6.2 |url=http://nclm.nic.in/index1.asp?linkid=203 |accessdate=16 जुलाई 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20090410022828/http://nclm.nic.in/index1.asp?linkid=203 |archive-date=10 अप्रैल 2009 |url-status=dead }}</ref>,[[भोजपुरी भाषा|भोजपुरी]],[[अवधी]],[[संस्कृत]]
|-
| ५. || [[उत्तराखण्ड]] || [[हिन्दी]] || [[संस्कृत]]<ref name="uttarkhoffsans">Sanskrit to be promoted with priority: Nishank {{citation |last=Nishank |title=Sanskrit made official language |url=http://www.garhwalpost.com/index.php?mod=article&cat=Uttarakhand&article=5051 |accessdate=28 दिसंबर 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20111112032732/http://www.garhwalpost.com/index.php?mod=article&cat=Uttarakhand&article=5051 |archive-date=12 नवंबर 2011 |url-status=dead }}</ref>
|-
| ६. || [[ओडिशा|ओड़िशा]] || [[ओड़िया भाषा|ओड़िया]]||
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| ७. || [[कर्नाटक]] || [[कन्नड]]
|-
| ८. || [[केरल]] || [[मलयालम]] || [[अंग्रेज़ी भाषा|अंग्रेज़ी]]<ref name="kerala">{{Citation|url=http://www.languageinindia.com/feb2005/malayalamdevelopmentchandraj1.html|title=Malayalam, How to Arrest its Withering Away?|work=M. K. Chand Raj, Ph.D. on Language in India|publisher=Central Institute of Indian Languages, Mysore|accessdate=16 जुलाई 2007|archive-url=https://web.archive.org/web/20070928031046/http://www.languageinindia.com/feb2005/malayalamdevelopmentchandraj1.html|archive-date=28 सितंबर 2007|url-status=dead}}</ref>
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| ९. || [[गुजरात]] || [[गुजराती]]<ref name=langoff/>{{rp|28}} ||
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| १०. || [[गोआ]] || [[कोंकणी]]<ref name="GDDOLAct1987">{{cite web|url=http://www.daman.nic.in/acts-rules%5CHindi-department%5Cdocuments/Official%20Language%20Act.pdf|title=The Goa, Daman and Diu Official Language Act, 1987|date=19 दिसम्बर 1987|website=U.T. Administration of Daman & Diu|accessdate=26 दिसम्बर 2014|archive-url=https://web.archive.org/web/20130508141416/http://daman.nic.in/acts-rules/Hindi-department/documents/Official%20Language%20Act.pdf|archive-date=8 मई 2013|url-status=dead}}</ref> || [[मराठी]],<ref name=langoff/>{{rp|27}}<ref name="Kurzon2004">{{cite book|last=Kurzon|first=Dennis|title=Where East Looks West: Success in English in Goa and on the Konkan Coast|url=http://books.google.com/books?id=p5iK3CmIW6EC&pg=PA48|accessdate=26 दिसम्बर 2014|year=2004|publisher=Multilingual Matters|isbn=978-1-85359-673-5|pages=42–58|chapter=3. The Konkani-Marathi Controversy : 2000-01 version|archive-url=https://web.archive.org/web/20150322212723/http://books.google.com/books?id=p5iK3CmIW6EC&pg=PA48|archive-date=22 मार्च 2015|url-status=live}} Dated, but gives a good overview of the controversy to give Marathi full "official status".</ref> English<ref name="DOLGOG">{{cite web|url=http://www.dol.goa.gov.in/|title=Directorate of Official Language|website=Government of Goa|accessdate=26 दिसम्बर 2014|archive-url=https://web.archive.org/web/20141226165729/http://www.dol.goa.gov.in/|archive-date=26 दिसंबर 2014|url-status=dead}}</ref>
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| ११. || [[छत्तीसगढ]] || [[हिन्दी]]<ref name=langoff/>{{rp|pg 29}}<ref name="Comment">The National Commission for Linguistic Minorities, 1950 (ibid) makes no mention of Chhattisgarhi as an additional state language, despite the 2007 notification of the State Govt, presumably because Chhattisgarhi is considered as a dialect of Hindi.</ref> || छत्तीसगढी<ref name="36OLAmdt2007">The Chhattisgarh Official Language (Amendment) Act, 2007 added "[[छत्तीसगढ़ी]]" as an official language of the state, in addition to Hindi.{{cite web|title=The Chhattisgarh Official Language (Amendment) Act, 2007|url=http://www.lawsofindia.org/statelaw/2885/TheChhattisgarhOfficialLanguageAmendmentAct2007.html|work=Government of India|accessdate=26 दिसम्बर 2014|archive-url=https://www.webcitation.org/61C8mDwtj?url=http://www.lawsofindia.org/statelaw/2885/TheChhattisgarhOfficialLanguageAmendmentAct2007.html|archive-date=25 अगस्त 2011|url-status=dead}}</ref>
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| १२. || [[जम्मू और कश्मीर]] || [[उर्दू]] || [[अंग्रेज़ी भाषा|अंग्रेज़ी]]<ref>[http://jkgad.nic.in/statutory/Rules-Costitution-of-J&K.pdf Article 145] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20120507200338/http://jkgad.nic.in/statutory/Rules-Costitution-of-J%26K.pdf|date=7 मई 2012}} of the [[जम्मू और कश्मीर का संविधान]] makes Urdu the official language of the state, but provides for the continued use of English for all official purposes.</ref>
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| १३. || [[झारखण्ड]] || [[हिन्दी]] || [[संथाली]], [[ओडिया]] और् [[बांग्ला]]<ref name=langoff/>
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| १४. || [[तमिल नाडु]] || [[तमिल]] || [[अंग्रेज़ी भाषा|अंग्रेज़ी]]<ref name=langoff/>
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| १५. || [[तेलंगाना]] || [[तेलुगु]] || [[उर्दू]] इन ज़िलों में दूसरी आधिकारिक भाषा है: [[हैदराबाद]], रंगा रेड्डी, मेडक, [[निज़ामाबाद]], [[महबूबनगर]], अदीलाबाद और [[वारंगल]] <ref name="MilliGazette"/>
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| १६. || [[त्रिपुरा]] || [[बांग्ला]] और कोक्रोबोरोक<ref>{{cite news | url=https://tripura.gov.in/knowtripura | title=Bengali and Kokborok are the state/official language, English, Hindi, Manipuri and Chakma are other languages | work=Tripura Official government website | accessdate=29 जून 2013 | archive-url=https://web.archive.org/web/20150212025154/http://tripura.gov.in/knowtripura | archive-date=12 फ़रवरी 2015 | url-status=dead }}</ref><ref>{{Cite web|url=http://www.lawsofindia.org/pdf/tripura/1964/1964TRIPURA5.pdf|title=Tripura Official Language Act, 1964|accessdate=1 मार्च 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20160607172332/http://www.lawsofindia.org/pdf/tripura/1964/1964TRIPURA5.pdf|archive-date=7 जून 2016|url-status=dead}}</ref> ||
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| १७. || [[नागालैंड]] || [[अंग्रेज़ी भाषा|अंग्रेज़ी]]<ref name=langoff/> ||
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| १८. || [[पंजाब]] || [[पंजाबी भाषा|पंजाबी]] ||
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| १९. || [[पश्चिमी बंगाल]] || [[बांग्ला]] || [[अंग्रेज़ी भाषा|अंग्रेज़ी]] और [[नेपाली]]<ref name=langoff/>
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| २०. || [[बिहार]] || [[हिन्दी]]<ref name="BiharOLACt1950">{{cite web|url=http://nclm.nic.in/shared/linkimages/NCLM50thReport.pdf|title=The Bihar Official Language Act, 1950|date=29 नवम्बर 1950|website=National Commission for Linguistic Minorities|accessdate=26 दिसम्बर 2014|archive-url=https://web.archive.org/web/20160708012438/http://nclm.nic.in/shared/linkimages/NCLM50thReport.pdf|archive-date=8 जुलाई 2016|url-status=dead}}</ref> || [[उर्दू]] (कुछ क्षेत्रों और कामों के लिये)<ref name="Benedikter2009">{{cite book|last=Benedikter|first=Thomas|title=Language Policy and Linguistic Minorities in India: An Appraisal of the Linguistic Rights of Minorities in India|url=http://books.google.com/books?id=vpZv2GHM7VQC&pg=PA89|year=2009|publisher=LIT Verlag Münster|isbn=978-3-643-10231-7|page=89|access-date=17 मई 2015|archive-url=https://web.archive.org/web/20150322201857/http://books.google.com/books?id=vpZv2GHM7VQC&pg=PA89|archive-date=22 मार्च 2015|url-status=live}}</ref>, [[अंगिका]], [[भोजपुरी भाषा|भोजपुरी]], [[बज्जिका]], और [[मैथिली]]
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| २१. || [[मणिपुर]] || [[मणिपुरी भाषा|मणिपुरी]](मेइतेई, या मेइतेईलॉन भी कहा जाता है)<ref>Section 2(f) of the Manipur Official Language Act, 1979 states that the official language of Manipur is the Manipuri language (an older English name for the Meitei language) written in the [[बंगाली लिपि]]. {{citation |last=The Sangai Express |title=Mayek body threatens to stall proceeding |url=http://www.e-pao.net/epRelatedNews.asp?heading=9&src=290703 |accessdate=16 जुलाई 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20070927183339/http://www.e-pao.net/epRelatedNews.asp?heading=9&src=290703 |archive-date=27 सितंबर 2007 |url-status=dead }}</ref> || [[अंग्रेज़ी भाषा|अंग्रेज़ी]]<ref name=langoff/>
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| २२. || [[मध्य प्रदेश]] || [[हिन्दी]]<ref name="mp">{{Citation|url=http://www.mpgovt.nic.in/culture/language.htm|title=Language and Literature|work=Official website of Government of Madhya Pradesh|publisher=Government of Madhya Pradesh|accessdate=16 जुलाई 2007|archive-url=https://web.archive.org/web/20070929062809/http://www.mpgovt.nic.in/culture/language.htm|archive-date=29 सितंबर 2007|url-status=dead}}</ref> ||
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| २३. || [[महाराष्ट्र]] || [[मराठी]] ||
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| २४. || [[मिज़ोरम]] || मिज़ो ||
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| २५. || [[मेघालय]] || [[अंग्रेज़ी भाषा|अंग्रेज़ी]]<ref>{{citation |last=Commissioner Linguistic Minorities |title=42nd report: जुलाई 2003 - जून 2004 |page=para 25.5 |url=http://nclm.nic.in/shared/linkimages/35.htm |accessdate=16 जुलाई 2007 |archiveurl=https://web.archive.org/web/20071008113359/http://nclm.nic.in/shared/linkimages/35.htm |archivedate=8 अक्तूबर 2007 |url-status=dead }}</ref>[[खासी भाषा|खासी]] भाषा और [[गारो भाषा|गारो]] भाषा<ref>राष्ट्रीय भाषाई अल्पसंख्यक आयोग की 43वीं रिपोर्ट बताती है कि निर्धारित तिथि से खासी को पूर्वी खासी हिल्स, वेस्ट खासी हिल्स, जयंतिया हिल्स और री भोई जिलों में एक सहयोगी आधिकारिक भाषा का दर्जा प्राप्त होगा। पूर्वी गारो हिल्स, वेस्ट गारो हिल्स और साउथ गारो हिल्स के जिलों में गारो का समान दर्जा होगा।{{citation |last=आयुक्त भाषाई अल्पसंख्यक |title=43rd report: जुलाई 2004 - जून 2005 |page=para 25.1 |url=http://nclm.nic.in/index1.asp?linkid=203 |accessdate=16 जुलाई 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20090410022828/http://nclm.nic.in/index1.asp?linkid=203 |archive-date=10 अप्रैल 2009 |url-status=dead }}. On 21 मार्च 2006, the Chief Minister of Meghalaya stated in the State Assembly that a notification to this effect had been issued. {{citation |title=Meghalaya Legislative Assembly, Budget session: Starred Questions and Answers - Tuesday, the 21st मार्च 2006. |url=http://megassembly.gov.in/questions/2006/21-03-2006s.htm |accessdate=16 जुलाई 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20070927050159/http://megassembly.gov.in/questions/2006/21-03-2006s.htm |archive-date=27 सितंबर 2007 |url-status=dead }}</ref>
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| २६. || [[राजस्थान]] || [[हिन्दी]] ||
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| २७. || [[सिक्किम]] || [[नेपाली]]<ref>{{citation |last=भारत सरकार |title=सिक्किम भारत का राज्य |url=http://www.aees.gov.in/htmldocs/downloads/Econtent_aug2020/M%201-3%20Handout%20Cl%20X%20Hin%20Sana%20Sana.pdf |accessdate=16 जुलाई 2007 }}</ref> || ११ अन्य भाषाओं को आधिकारिक भाषा का दर्ज़ा प्राप्त है, किन्तु सिर्फ़ संस्कृति और परंपरा के संरक्षण के नज़रिये से <ref>Eleven other languages — Bhutia, Lepcha, Limboo, Newari, Gurung, Mangar, Mukhia, Rai, Sherpa and Tamang - are termed "official", but only for the purposes of the preservation of culture and tradition. {{citation |last=Commissioner Linguistic Minorities |title=43rd report: जुलाई 2004 - जून 2005 |pages=paras 27.3–27.4 |url=http://nclm.nic.in/index1.asp?linkid=203 |accessdate=16 जुलाई 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20090410022828/http://nclm.nic.in/index1.asp?linkid=203 |archive-date=10 अप्रैल 2009 |url-status=dead }}. See also {{citation |last=Commissioner Linguistic Minorities |title=41st report: जुलाई 2002 - जून 2003 |page=paras 28.4, 28.9 |url=http://nclm.nic.in/shared/linkimages/23.htm |accessdate=16 जुलाई 2007 |archiveurl=https://web.archive.org/web/20070224124226/http://nclm.nic.in/shared/linkimages/23.htm |archivedate=24 फ़रवरी 2007 |url-status=dead }}</ref>
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| २८. || [[हरियाणा]] || [[हिन्दी]]<ref name="HOLA1969">{{cite web|url=http://acts.gov.in/HR/964.pdf|title=The Haryana Official Language Act, 1969|date=15 मार्च 1969|website=acts.gov.in (server)|accessdate=27 दिसम्बर 2014|archive-url=https://web.archive.org/web/20141227123310/http://acts.gov.in/HR/964.pdf|archive-date=27 दिसंबर 2014|url-status=dead}}</ref>|| [[पंजाबी भाषा|पंजाबी]]<ref name="DNA">{{cite web|url=http://www.dnaindia.com/india/report-punjabi-edges-out-tamil-in-haryana-1356124|title=Punjabi edges out Tamil in Haryana|date=7 मार्च 2010|website=DNA India|accessdate=27 दिसम्बर 2014|archive-url=https://web.archive.org/web/20150102061421/http://www.dnaindia.com/india/report-punjabi-edges-out-tamil-in-haryana-1356124|archive-date=2 जनवरी 2015|url-status=live}}</ref>
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| २९.|| [[हिमाचल प्रदेश]] || [[हिन्दी]]<ref name="HPOL1975">{{cite web|url=http://hp.gov.in/LAC/bhasha/Adhiniyam/THE%20HIMACHAL%20PRADESH%20OFFICIAL%20LANGUAGE%20ACT,%201975.pdf|title=The Himachal Pradesh Official Language Act, 1975|date=21 Feb 1975|accessdate=27 दिसम्बर 2014|archive-url=https://web.archive.org/web/20140101085810/http://hp.gov.in/LAC/bhasha/Adhiniyam/THE%20HIMACHAL%20PRADESH%20OFFICIAL%20LANGUAGE%20ACT,%201975.pdf|archive-date=1 जनवरी 2014|url-status=dead}}</ref>||[[अंग्रेज़ी भाषा|अंग्रेज़ी]]<ref name=langoff/>{{rp|13}}
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|}
== संस्कृति ==
{{main|भारतीय संस्कृति}}
[[File:Pexels-The tajmahal.jpg|thumb|270px|right| [[ताजमहल]], विश्व के सबसे प्रसिद्ध [[पर्यटन स्थल|पर्यटक स्थलों]] में गिना जाता है।]]
भारत की सांस्कृतिक धरोहर बहुत सम्पन्न है। यहाँ की संस्कृति अनोखी है और वर्षों से इसके कई अवयव अब तक अक्षुण्ण हैं। आक्रमणकारियों तथा प्रवासियों से विभिन्न चीजों को समेट कर यह एक मिश्रित संस्कृति बन गई है। आधुनिक भारत का समाज, भाषाएं, रीति-रिवाज इत्यादि इसका प्रमाण हैं। [[ताजमहल]] और अन्य उदाहरण, [[इस्लाम]] प्रभावित स्थापत्य कला के उत्कृष्ट नमूने हैं।
[[चित्र:gumpa.jpg|thumb|left|270px|गुम्पा नृत्य एक [[तिब्बती बौद्ध धर्म|तिब्बती बौद्ध]] समाज का [[सिक्किम]] में छिपा नृत्य है। यह बौद्ध नव वर्ष पर किया जाता है।]]
भारतीय समाज बहुधर्मिक, बहुभाषी तथा मिश्र-सांस्कृतिक है। पारंपरिक भारतीय पारिवारिक मूल्यों को बहुत आदर की दृष्टि से देखा जाता है।
विभिन्न धर्मों के इस भूभाग पर कई मनभावन पर्व त्यौहार मनाए जाते हैं - [[दिवाली]], [[होली]], [[दशहरा]], [[पोंगल]] तथा [[ओणम]], [[ईद उल-फ़ित्र]], [[ईद-उल-जुहा]], [[मुहर्रम]], क्रिसमस, ईस्टर आदि भी बहुत लोकप्रिय हैं।
भारत में [[संगीत]] तथा [[नृत्य]] की अपनी शैलियां भी विकसित हुईं, जो बहुत ही लोकप्रिय हैं। [[भरतनाट्यम]], [[ओडिसी]], [[कथक]] प्रसिद्ध भारतीय नृत्य शैली है। [[हिन्दुस्तानी संगीत]] तथा [[कर्नाटक संगीत]] भारतीय परंपरागत संगीत की दो मुख्य धाराएं हैं। [[भारत के लोक नृत्य|लोक नृत्यों]] में शामिल हैं [[पंजाब क्षेत्र|पंजाब]] का ''[[भाँगङा|भांगड़ा]]'', [[असम]] का ''[[बिहु नृत्य|बिहू]], [[झारखंड]] का [[झुमइर]] और [[डमकच]], [[झारखंड]] और [[उड़ीसा]] का ''[[छऊ नृत्य|छाऊ]]'', [[राजस्थान]] का ''[[घूमर]]'', [[गुजरात]] का ''[[डंडिया रास|डांडिया]] '' और ''[[गरबा]]'', कर्नाटक जा ''[[यक्षगान]]'', [[महाराष्ट्र]] का ''[[लावणी|लावनी]]'' और गोवा का ''[[देख्न्नी|देख्ननी]] ''।
हालाँकि [[हॉकी]] देश का राष्ट्रीय खेल है, क्रिकेट सबसे अधिक लोकप्रिय है। वर्तमान में [[फुटबॉल]], [[हॉकी]] तथा [[टेनिस]] में भी बहुत भारतीयों की अभिरुचि है। देश की राष्ट्रीय क्रिकेट टीम 1983 और 2011 में दो बार [[विश्व कप क्रिकेट|विश्व कप]] और 2007 का 20–20 विश्व-कप जीत चुकी है। इसके अतिरिक्त वर्ष 2003 में वह विश्व कप के फाइनल तक पहुँची थी। 1930 तथा 40 के दशक में हॉकी भारत में अपने चरम पर थी। [[मेजर ध्यानचंद]] ने हॉकी में भारत को बहुत प्रसिद्धि दिलाई और एक समय भारत ने [[अमरीका]] को 24–0 से हराया था जो अब तक विश्व कीर्तिमान है। [[शतरंज]] के जनक देश भारत के खिलाड़ी विश्वनाथ आनंद ने अच्छा प्रदर्शन किया है।
वैश्वीकरण के इस युग में शेष विश्व की तरह भारतीय समाज पर भी अंग्रेजी तथा यूरोपीय प्रभाव पड़ रहा है। बाहरी लोगों की खूबियों को अपनाने की भारतीय परंपरा का नया दौर कई भारतीयों की दृष्टि में उचित नहीं है। एक खुले समाज के जीवन का यत्न कर रहे लोगों को मध्यमवर्गीय तथा वरिष्ठ नागरिकों की उपेक्षा का शिकार होना पड़ता है। कुछ लोग इसे भारतीय पारंपरिक मूल्यों का हनन भी मानते हैं। विज्ञान तथा साहित्य में अधिक प्रगति न कर पाने की वजह से भारतीय समाज यूरोपीय लोगों पर निर्भर होता जा रहा है। ऐसे समय में लोग विदेशी अविष्कारों का भारत में प्रयोग अनुचित भी समझते हैं।
=== भारतीय पर्व ===
भारत में कई सारे पर्व मनाए जाते हैं, जिसमें 26 जनवरी को [[स्वतंत्रता दिवस (भारत)|गणतंत्र दिवस]], 15 अगस्त को [[गणतंत्र दिवस (भारत)|स्वतंत्रता दिवस]], 2 अक्टूबर को [[गांधी जयंती]], [[दिवाली]], [[होली]], [[नवरात्रि]], [[राम नवमी|रामनवमी]], [[दशहरा]] और [[ईद]] पूरे देश में मनाई जाती है। इसके अलावा अन्य पर्व राज्यों के अनुसार होते हैं।
{{clear}}
=== सिनेमा और टेलीविज़न ===
{{main|भारतीय सिनेमा}}
भारतीय फिल्म उद्योग, विश्व की सबसे ज्यादा देखी जाने वाली सिनेमा का उत्पादन करता है। इसके अलावा यहाँ [[असमिया सिनेमा|असमिया]], [[बाङ्ला सिनेमा|बंगाली]], [[भोजपुरी सिनेमा|भोजपुरी]], [[हिन्दी सिनेमा|हिन्दी]], [[कन्नड़ सिनेमा|कन्नड़]], [[मलयाली सिनेमा|मलयालम]], [[पंजाबी सिनेमा|पंजाबी]], [[गुजराती सिनेमा|गुजराती]], [[मराठी सिनेमा|मराठी]], [[ओडिया सिनेमा|ओडिया]], [[तमिल सिनेमा|तमिल]] और [[तेलुगू सिनेमा|तेलुगू]] भाषाओं के क्षेत्रीय सिनेमाई परंपराएं भी मौजूद हैं। दक्षिण भारतीय सिनेमा का राष्ट्रीय फिल्म राजस्व में 75% से अधिक का हिस्सा है। भारत में सितंबर 2016 तक 2200 मल्टीप्लेक्स स्क्रीन सिनेमाघर थे तथा इसके 2019 तक 3000 तक बढ़ने की अपेक्षा की गई हैं।<ref>{{cite web|title=2019 तक मल्टीप्लेक्स स्क्रीन 3,000 से अधिक बढ़ने की उम्मीद:रिपोर्ट|url=http://timesofindia.indiatimes.com/city/delhi/Multiplex-screens-set-to-rise-over-3000-by-2019-Report/articleshow/54547871.cms|publisher=टाइम्स ऑफ इंडिया|access-date=29 मार्च 2017|archive-url=https://web.archive.org/web/20170225090947/http://timesofindia.indiatimes.com/city/delhi/Multiplex-screens-set-to-rise-over-3000-by-2019-Report/articleshow/54547871.cms|archive-date=25 फरवरी 2017|url-status=live}}</ref>
1959 में भारत में टेलीविजन का प्रसारण, राज्य संचालित संचार के माध्यम के रूप में शुरू हुआ, और अगले दो दशकों तक इसका धीमी गति से विस्तार हुआ। 1990 के दशक में टेलीविजन प्रसारण पर राज्य के एकाधिकार समाप्त हो गया, और तब से, उपग्रह चैनलों ने भारतीय समाज की लोकप्रिय संस्कृति को आकार दिया है। आज, भारत में टेलीविज़न मनोरंजन का सबसे प्रचलित माध्यम हैं, तथा इसकी पैठ समाज के हर वर्ग तक फैली हैं। उद्योग के अनुमान हैं कि भारत में 2012 तक 462 मिलियन उपग्रह या केबल कनेक्शन के साथ, कुल 554 मिलियन से अधिक टीवी उपभोक्ता हैं, मनोरंजन के अन्य साधनो में प्रेस मीडिया (350 मिलियन), रेडियो (156 मिलियन) तथा इंटरनेट (37 मिलियन) भी सम्मलित हैं
=== पाक-शैली (खानपान)===
{{main|भारतीय खाना}}
[[File:Vegetarian Curry.jpeg|thumb|]]
[[File:'4' A Southern Indian Thali, traditional style of serving meal in India.jpg|thumb|दक्षिण भारत का खाना]]
भारतीय खानपान बहुत ही समृद्ध है। शाकाहारी तथा मांसाहारी दोनों ही तरह का खाना पसन्द किया जाता है। भारतीय व्यंजन विदेशों में भी बहुत पसन्द किए जाते हैं।
== इन्हें भी देखें ==
* [[भारत सारावली]]
== सन्दर्भ ==
{{टिप्पणीसूची|2}}
== टिप्पणी सूची ==
{{notelist}}
== बाहरी कड़ियाँ ==
{{प्रवेशद्वार|भारत}}
* {{विकियात्रा|भारत}}
* [https://web.archive.org/web/20090619075310/http://www.bharat.gov.in/ भारत का राष्ट्रीय पोर्टल] (हिन्दी में)
* [https://web.archive.org/web/20120511032957/http://publicationsdivision.nic.in/others/Bharat_2011.pdf '''भारत २०११'''] (प्रकाशन विभाग द्वारा प्रकाशित भारत के बारे में सम्पूर्ण जानकारी)
* [https://web.archive.org/web/20100611181128/http://ucblibraries.colorado.edu/govpubs/for/india.htm भारत] ''यूसीबी लाइब्रेरीज़ गॉवपब्स'' पर
* [[बीबीसी हिन्दी]] पर [https://web.archive.org/web/20131023001422/http://www.bbc.co.uk/hindi/india/ भारत]
*[https://www.easyeducation22.com/2020/02/india-gk-pdf.html भारत जीके प्रश्न उत्तर हिन्दी पीडीएफ में] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20200222162628/https://www.easyeducation22.com/2020/02/india-gk-pdf.html |date=22 फ़रवरी 2020 }}
{{भारत के विषय }}
{{अतुल्य भारत}}
{{Template group
|title = [[चित्र:Gnome-globe.svg|25px]] भारत के बारे में
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{{भारत के प्रान्त और संघ राज्यक्षेत्र}}
{{दक्षिण एशिया के देश और क्षेत्र}}
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{{एशिया के देश}}
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{{Authority control}}
[[श्रेणी:एशिया के देश]]
[[श्रेणी:१९४७ में स्थापित देश या क्षेत्र]]
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wikitext
text/x-wiki
{{Infobox settlement
| name = गोड्डा Mrs. Anna Marc. Dr. Pranesh Solomon माचोद भारत(aryan Dravidian )चोर है माचोद हिन्दू माचोद राम मां चोद भूम-ईहर गोत्र कुर्-मी कोइरी झा वर्मा शर्मा शुक्ला गुप्ता श्रीवास्तव सिंह चौधरी राय पाल योगी मोदी उपाध्याय घोष खान कपूर पांडेय तोमर साही इत्यादि
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'''गोड्डा''' (Godda) [[भारत]] के [[झारखंड]] राज्य के [[गोड्डा ज़िले]] में स्थित एक नगर है। यह ज़िले का मुख्यालय भी है।<ref>"[https://books.google.com/books?id=RQeAAAAAMAAJ Tourism and Its Prospects in Bihar and Jharkhand] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20130411085305/http://books.google.com/books?id=RQeAAAAAMAAJ |date=11 अप्रैल 2013 }}," Kamal Shankar Srivastava, Sangeeta Prakashan, 2003</ref><ref>"[https://books.google.com/books?id=X3ZuAAAAMAAJ The district gazetteer of Jharkhand]," SC Bhatt, Gyan Publishing House, 2002</ref>
== विवरण ==
गोड्डा खनिज संपदाओ से भरा है। यहाँ एशिया प्रसिद्ध खुला कोयला खदान ललमटिया है। जिसके कोयले से दो ताप बिजली घर कहलगाँव व फरक्का संचालित होती है।
== इन्हें भी देखें ==
* [[गोड्डा ज़िला]]
* [https://www.prabhatkhabar.com/state/jharkhand/godda गोड्डा जिले का ताज़ा खबरे]
== सन्दर्भ ==
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'''गोड्डा''' (Godda) [[भारत]] के [[झारखंड]] राज्य के [[गोड्डा ज़िले]] में स्थित एक नगर है। यह ज़िले का मुख्यालय भी है।<ref>"[https://books.google.com/books?id=RQeAAAAAMAAJ Tourism and Its Prospects in Bihar and Jharkhand] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20130411085305/http://books.google.com/books?id=RQeAAAAAMAAJ |date=11 अप्रैल 2013 }}," Kamal Shankar Srivastava, Sangeeta Prakashan, 2003</ref><ref>"[https://books.google.com/books?id=X3ZuAAAAMAAJ The district gazetteer of Jharkhand]," SC Bhatt, Gyan Publishing House, 2002</ref>
== विवरण ==
गोड्डा खनिज संपदाओ से भरा है। यहाँ एशिया प्रसिद्ध खुला कोयला खदान ललमटिया है। जिसके कोयले से दो ताप बिजली घर कहलगाँव व फरक्का संचालित होती है।
== इन्हें भी देखें ==
* [[गोड्डा ज़िला]]
* [https://www.prabhatkhabar.com/state/jharkhand/godda गोड्डा जिले का ताज़ा खबरे]
== सन्दर्भ ==
{{टिप्पणीसूची}}
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*[[अरुणाचल प्रदेश विधान सभा|विधान सभा]] (60 सीटें)
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}}
'''अरुणाचल प्रदेश''' [[भारत]] का एक [[उत्तर-पूर्वी राज्य]] है।<ref>{{Cite web|url=https://ignca.gov.in/hi/divisionss/janapada-sampada/northeastern-regional-centre/introduction-arunachal-pradesh/|title=परिचय – अरुणाचल प्रदेश {{!}} IGNCA|website=ignca.gov.in|access-date=2021-10-22}}</ref> अरुणाचल का अर्थ "उगते सूर्य का पर्वत" है (अरूण + अचल ; 'अचल' का अर्थ 'न चलने वाला' = पर्वत होता है।)।
प्रदेश की सीमाएँ दक्षिण में [[असम]] दक्षिणपूर्व में [[नागालैण्ड|नागालैंड]] पूर्व में [[म्यान्मार|बर्मा]]/[[म्यान्मार|म्यांमार]] पश्चिम में [[भूटान]] और उत्तर में [[तिब्बत]] से मिलती हैं। [[ईटानगर]] राज्य की राजधानी है। प्रदेश की बोलचाल की मुख्य भाषा [[हिन्दी]] <ref>{{Cite web |url=https://arunachaltimes.in/index.php/2017/12/31/hindi-arunachals-new-mother-tongue/ |title=Hindi: Arunachal’s new mother tongue |access-date=31 दिसंबर 2017 |archive-url=https://web.archive.org/web/20171231104047/https://arunachaltimes.in/index.php/2017/12/31/hindi-arunachals-new-mother-tongue/ |archive-date=31 दिसंबर 2017 |url-status=live }}</ref>है। अरुणाचल प्रदेश [[चीन]] के [[तिब्बत]] स्वायत्त क्षेत्र के साथ 1,129 किलोमीटर सीमा साझा करता है।<ref>{{cite web|url=https://www.ndtv.com/india-news/arunachal-pradesh-residents-quote-national-security-as-they-write-to-pm-modi-on-stalled-road-project-2299974|title=Arunachal Residents Write To PM On Road Project, Quote National Security}}</ref><ref>{{cite web|url=https://interactive.aljazeera.com/aje/2020/mapping-india-and-china-disputed-borders/index.html|title=Mapping India and China disputed borders}}</ref>
[[भारत की जनगणना २०११]] के अनुसार, अरुणाचल प्रदेश की आबादी 1,382,611 और 83,743 वर्ग किलोमीटर (32,333 वर्ग मील) का क्षेत्रफल है। यह एक नैतिक रूप से विविध राज्य है, जिसमें मुख्य रूप से पश्चिम में मोनपा लोग, केन्द्र में तानी लोग, पूर्व में ताई लोग और राज्य के दक्षिण में नागा लोग हैं।
राज्य का एक बड़ा हिस्सा दक्षिण तिब्बत के क्षेत्र के हिस्से के रूप में पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ़ चाइना और [[चीन]] गणराज्य ([[ताइवान]]) दोनों द्वारा दावा किया जाता है।
भौगोलिक दृष्टि से पूर्वोत्तर के राज्यों में यह सबसे बड़ा राज्य है। पूर्वोत्तर के अन्य राज्यों की तरह इस प्रदेश के लोग भी तिब्बती-बर्मी मूल के हैं। वर्तमान समय में भारत के अन्य भागों से बहुत से लोग आकर यहाँ आर्थिक और सांस्कृतिक गतिविधियाँ कर रहे ।
== इतिहास ==
अरुणाचल प्रदेश को पहले पूर्वात्तर सीमान्त एजेंसी (नॉर्थ ईस्ट फ़्रण्टियर एजेंसी- नेफ़ा) के नाम से जाना जाता था। यहाँ का इतिहास लिखित रूप में उपलब्ध नहीं है। मौखिक परंपरा के रूप में कुछ थोड़ा सा साहित्य और ऐतिहासिक खंडहर हैं जो इस पर्वतीय क्षेत्र में मिलते हैं। इन स्थानों की खुदाई और विश्लेषण के द्वारा पता चलता है कि ये ईस्वी सन प्रारम्भ होने के समय के हैं। ऐतिहासिक प्रमाणों से पता चलता है कि यह जाना-पहचाना क्षेत्र ही नहीं था वरन जो लोग यहाँ रहते थे और उनका देश के अन्य भागों से निकट का सम्बन्ध था। अरुणाचल प्रदेश का आधुनिक इतिहास 24 फरवरी 1826 को 'यण्डाबू सन्धि' होने के बाद असम में [[ब्रिटिश राज|ब्रिटिश शासन]] लागू होने के बाद से प्राप्त होता हैं। सन 1962 से पहले इस राज्य को नार्थ-ईस्ट फ़्रण्टियर एजेंसी (नेफ़ा) के नाम से जाना जाता था। संवैधानिक रूप से यह असम का ही एक भाग था परन्तु सामरिक महत्त्व के कारण 1965 तक यहाँ के प्रशासन की देखभाल विदेश मन्त्रालय करता था। 1965 के पश्चात असम के राज्पाल के द्वारा यहाँ का प्रशासन गृह मन्त्रालय के अन्तर्गत आ गया था। सन 1972 में अरुणाचल प्रदेश को केन्द्र शासित राज्य बनाया गया था और इसका नाम 'अरुणाचल प्रदेश' किया गया। इस सब के बाद 20 फरवरी 1987 को यह भारतीय संघ का 24वाँ राज्य बनाया गया।
== भूगोल ==
इस राज्य के पश्चिम, उत्तर और पूर्व में क्रमश: भूटान, तिब्बत, चीन और म्यांमार देशों की अन्तरराष्ट्रीय सीमाएँ हैं। अरुणाचल प्रदेश की सीमा नागालैंड और असम से भी मिलती है। इस राज्य में पहाड़ी और अर्द्ध-पहाड़ी क्षेत्र है। इसके पहाड़ों की ढलान असम राज्य के मैदानी भाग की ओर है। 'कामेंग', 'सुबनसिरी', 'सिआंग', 'लोहित' और 'तिरप' आदि नदियाँ इसे अलग-अलग घाटियों में विभाजित कर देती हैं।
अरुणाचल का अधिकांश भाग [[हिमालय]] से ढका है, लेकिन [[लोहित नदी|लोहित]], [[चांगलांग]] और तिरप पतकाई पहाडि़यों में स्थित हैं। [[कंगतो पर्वत|काँग्तो]], न्येगी कांगसांग, मुख्य [[गोरिचेन|गोरीचन]] चोटी और पूर्वी गोरीचन चोटी इस क्षेत्र में हिमालय की सबसे ऊँची चोटियाँ हैं।
[[तवांग]] में स्थित [[बुम ला|बुमला दर्रा]] 2006 में 44 वर्षों में पहली बार व्यापार के लिए खोला गया। दोनों तरफ के व्यापारियों को एक दूसरे के क्षेत्र में प्रवेश करने की अनुमति दी गई।
यहाँ के प्रमुख दर्रो में यांगयाप दर्रा, दीफू दर्रा, पंगसौ दर्रा और बुमडिला दर्रा भी शामिल हैं।
हिमालय पर्वतमाला का पूर्वी विस्तार इसे चीन से अलग करता है। यह पर्वतमाला [[नागालैण्ड|नागालैंड]] की ओर मुड़ती है और [[भारत]] और [[म्यान्मार|बर्मा]] के बीच चांगलांग और तिरप जिले में एक प्राकृतिक सीमा का निर्माण करती है और एक प्राकृतिक बाधा के रूप में कार्य करती है। यह पहाड़ महान हिमालय से कम ऊँचे हैं।
== जनसांख्यिकी ==
[[File:Nishi tribal lightened.jpg|left|thumb|200px|
* निशि जनजाति का एक पुरुष अपनी पारम्परिक वेशभूषा में।
]]
63% अरुणाचल वासी 19 प्रमुख [[जनजाति|जनजातियों]] और 85 अन्य जनजातियों से संबद्ध हैं। इनमें से अधिकांश या तो तिब्बती-बर्मी या ताई-बर्मी मूल के हैं। बाकी 35 % जनसंख्या आप्रवासियों की है, जिनमें 31000 [[बंगाली भाषा|बंगाली]], [[बोडो]], हजोन्ग, [[बांग्लादेश]] से आये [[चकमा लोग|चकमा]] [[शरणार्थी]] और पड़ोसी [[असम]], [[नागालैण्ड|नागालैंड]] और भारत के अन्य भागों से आये प्रवासी शामिल हैं। सबसे बडी़ जनजातियों में आदि, गालो, [[निशि]], खम्ति, मोंपा और अपातनी प्रमुख हैं।
राज्य की साक्षरता दर 1991 में 41.59 % से बढ़कर 54.74 % हो गयी। 487796 व्यक्ति साक्षर है। भारत सरकार की 2001 की जनगणना के आँकड़ों से पता चलता है कि अरुणाचल की 20% जनसंख्या के प्रकृतिधर्मी हैं, जो जीववादी धर्म जैसे डोन्यी-पोलो और [[रन्गफ्राह]] का पालन करते है। मिरि और नोक्ते लोगों को मिलाकर 29 प्रतिशत [[हिन्दू धर्म|हिंदू]] हैं।<ref>{{cite web|url=https://economictimes.indiatimes.com/news/politics-and-nation/how-churches-in-arunachal-pradesh-are-facing-resistance-over-conversion-of-tribals/articleshow/61703687.cms|title=How churches in Arunachal Pradesh are facing resistance over conversion of tribals|access-date=24 नवंबर 2017|archive-url=https://web.archive.org/web/20171201122855/https://economictimes.indiatimes.com/news/politics-and-nation/how-churches-in-arunachal-pradesh-are-facing-resistance-over-conversion-of-tribals/articleshow/61703687.cms|archive-date=1 दिसंबर 2017|url-status=live}}</ref> राज्य की 13% जनसंख्या [[बौद्ध धर्म|बौद्ध]] है। तिब्बती बौद्ध पन्थ मुख्यतः [[तवांग]], पश्चिम कामेंग और [[तिब्बत]] से सटे क्षेत्रों में प्रचलित है। थेरावाद बौद्ध पन्थ का [[म्यान्मार|बर्मी सीमा]] के निकट रहने वाले समूहों द्वारा पालन किया जाता है। लगभग 19% आबादी [[ईसाई]]पन्थ की अनुयायी है।
== कृषि ==
[[चित्र:Salna Bari, Bhalukpong.jpg|अंगूठाकार|[[भालुकपोंग|भालुकपुंग]] से लिया गया एक दृष्य]]
अरुणाचल प्रदेश के नागरिकों के जीवनयापन का मुख्य आधार [[कृषि]] है। इस प्रदेश की अर्थव्यवस्था मुख्यत: '[[झूम]]' खेती पर ही आधरित है। आजकल नकदी फसलों जैसे- [[आलू]], और बागबानी की फसलें जैसे [[सेब]], [[संतरा (फल)|संतरे]] और [[अनानास|अनन्नास]] आदि को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। अरुणाचल प्रदेश के पहाड़ी लोग खेती की पारंपरिक विधि शिइंग (झूम) का प्रयोग करते हैं। इस कृषि विधि की मुख्य पैदावार [[चावल]], [[मक्का]], [[जौ]] एवं मोथी (कूटू) हैं। अरुणाचल प्रदेश की मुख्य फसलों में [[चावल]], [[मक्का]], [[बजड़ी|बाजरा]], [[गेहूँ]], [[जौ]], [[दलहन]], [[गन्ना]], [[अदरक]] और [[तिलहन]] हैं।
== खनिज और उद्योग ==
राज्य की विशाल खनिज संपदा के संरक्षण के लिए 1991 में 'अरुणाचल प्रदेश खनिज विकास' और 'व्यापार निगम लिमिटेड' (ए॰पी॰एम॰डी॰टी॰सी॰एल॰) की स्थापना की गई थी। विभिन्न प्रकार के व्यापार में हस्तशिल्पियों को प्रशिक्षण देना, रोइंग, टबारीजो, दिरांग, युपैया और मैओ में कार्यरत पाँच 'सरकारी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान' (आई॰टी॰आई॰) हैं। आई॰टी॰आई॰ युपैया महिलाओं के लिए विशेष रूप से बना है जो पापुम पारे जनपद में स्थित है।
== सिंचाई और बिजली ==
अरुणाचल प्रदेश में 87,500 हेक्टेयर से अधिक भूमि सिंचित क्षेत्र है। राज्य की विद्युत क्षमता लगभग 30,735 मेगावॉट है। राज्य के 3,649 गाँवों में से लगभग 2,600 गाँवों
== अर्थव्यवस्था ==
सन 2004 में अरुणाचल प्रदेश का सकल घरेलू उत्पादन 70.6 करोड़ डॉलर के लगभग था। अर्थव्यवस्था मुख्यत: कृषि प्रधान है। 'झुम' खेती जो आदिवासी समूहों में पहले प्रचलित थी, अब कम लोग इस प्रकार खेती करते हैं। अरुणाचल प्रदेश का लगभग 61,000 वर्ग किलोमीटर का भाग घने जंगलों से भरा है और वन्य उत्पाद राज्य की अर्थव्यवस्था का दूसरा महत्त्वपूर्ण भाग है। यहाँ फ़सलों में चावल, मक्का, बाजरा, गेहूँ, दलहन, गन्ना, अदरक और तिलहन मुख्य रूप से हैं।
अरुणाचल प्रदेश फलों के उत्पादन के लिए आदर्श है। पर्यावरण की दृष्टि से यहाँ के प्रमुख उद्योग आरा मिल और प्लाईवुड को कानूनन बन्द कर दिया गया है। चावल मिल, फल परिरक्षण इकाइयाँ, हस्तशिल्प और हथकरघा आदि यहाँ के अन्य प्रमुख उद्योग हैं।
यह तालिका अरूणाचल प्रदेश के राज्य सकल घरेलू उत्पाद का रुझान बाजार मूल्यों पर सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मन्त्रालय के अनुमान पर आधारित है। लाखों रुपयों में।
{| class="wikitable"
|-
! वर्ष || राज्य का सकल घरेलू उत्पाद
|-
| 1980 || 1,070
|-
| 1985 || 2,690
|-
| 1990 || 5,080
|-
| 1995 || 11,840
|-
| 2000 || 17,830
|}
2004 में अरुणाचल प्रदेश का राज्य सकल घरेलू उत्पाद 706 मिलियन डॉलर के करीब था। राज्य की अर्थव्यवस्था कृषि आधारित है। झुम खेती जो आदिवासी समूहों के बीच पहले व्यापक रूप से प्रचलित थी अब कम लोगों में प्रचलित है। अरुणाचल प्रदेश के करीब 61,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र जंगलों से ढका है और वन्य उत्पाद अर्थव्यवस्था का सबसे दूसरा सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्र है। यहाँ की फसलों में [[चावल]], [[मक्का]], [[बजड़ी|बाजरा]], [[गेहूँ]], [[दलहन]], [[गन्ना]], [[अदरक]] और [[तिलहन]] प्रमुख हैं। अरुणाचल फलों के उत्पादन के लिए भी आदर्श स्थान है। यहाँ प्रमुख उद्योग आरामिल और प्लाईवुड को कानून द्वारा बन्द कर दिया गया है। चावल मिल, फल परिरक्षण इकाइयों हस्तशिल्प और हथकरघा आदि अन्य प्रमुख उद्योग हैं।
== सामाजिक जीवन ==
[[चित्र:Nyokum festival Nyishi.JPG|अंगूठाकार|निशिंग जनजाति का न्योकुम उत्सव]]
अरुणाचल प्रदेश के कुछ महत्त्वपूर्ण त्योहारों में 'अदीस' समुदाय का 'मापिन और सोलंगु', 'मोनपा' समुदाय का त्योहार 'लोस्सार', 'अपतानी' समुदाय का 'द्री', 'तगिनों' समुदाय का 'सी-दोन्याई', 'इदु-मिशमी' समुदाय का 'रेह', 'निशिंग' समुदाय का 'न्योकुम' आदि त्योहार शामिल हैं। अधिकतर त्योहारों पर [[प्राणी|पशुओं]] को बलि चढ़ाने की पुरातन प्रथा है।
== राजनीति ==
अरुणाचल प्रदेश में मुख्यत: पाँच राजनैतिक दल हैं-
* [[भारतीय जनता पार्टी]]
* अरुणाचल कांग्रेस
* अरुणाचल कांग्रेस (मेइते)
* कांग्रेस (दोलो)
* पिपुल्स पार्टी आफ़ अरुणाचल
== मुख्य पर्यटन स्थल ==
[[चित्र:Mountains of Arunachal Pradesh.jpg|right|thumb|250px|अरुणाचल अपने पहाड़ी दृश्यों के लिये प्रसिद्ध है।]]
=== किला ===
ईटानगर में पर्यटक ईटा किला भी देख सकते हैं। इस किले का निर्माण 14-15वीं शताब्दी में किया गया था। इसके नाम पर ही इसका नाम ईटानगर रखा गया है। पर्यटक इस किले में कई खूबसूरत दृश्य देख सकते हैं। किले की सैर के बाद पर्यटक यहाँ पर पौराणिक गंगा झील भी देख सकते हैं। इनके अलावा अन्य कई झीले व वास्तुकला के मनोहर दृश्य है जो पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।
=== पौराणिक गंगा झील ===
यह ईटानगर से 6 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। झील के पास खूबसूरत जंगल भी है। यह जंगल बहुत खूबसूरत है। पर्यटक इस जंगल में सुन्दर पेड़-पौधे, वन्य जीव और फूलों के बगीचे देख सकते हैं। यहाँ आने वाले पर्यटकों को इस झील और जंगल की सैर जरूर करनी चाहिए।
=== बौद्ध मंदिर ===
[[चित्र:Golden Pagoda Namsai Arunachal Pradesh.jpg|अंगूठाकार|[[नामसाइ]] स्थित स्वर्ण पगोडा]]
यहाँ पर एक खूबसूरत बौद्ध मन्दिर है। बौद्ध गुरु [[तेनजिन ग्यात्सो|दलाई लामा]] भी इसकी यात्रा कर चुके हैं। इस मन्दिर की छत [[पीला|पीली]] है और इस मन्दिर का निर्माण तिब्बती शैली में किया गया है। इस मन्दिर की छत से पूरे ईटानगर के खूबसूरत दृश्य देखे जा सकते हैं। इस मन्दिर में एक संग्राहलय का निर्माण भी किया गया है। इसका नाम [[जवाहरलाल नेहरू|जवाहर लाल नेहरू]] संग्राहलय है। यहाँ पर पर्यटक पूरे अरूणाचल प्रदेश की झलक देख सकते हैं।
==दर्शनीय स्थल ==
इसके अलावा यहाँ पर लकड़ियों से बनी खूबसूरत वस्तुएँ, वाद्ययन्त्र, शानदार कपड़े, हस्तनिर्मित वस्तुएँ और केन की बनी सुन्दर कलाकृतियों को देख सकते हैं। संग्राहलय में एक पुस्तकालय का निर्माण भी किया गया है। इसके अलावा भी यहाँ पर पर्यटक कई शानदार पर्यटन स्थलों की सैर कर सकते हैं।
इन पर्यटन स्थलों में दोन्यी-पोलो विद्या भवन, विज्ञान संस्थान, इन्दिरा गांधी उद्यान और अभियान्त्रिकी संस्थान प्रमुख हैं।
== इतिहास ==
अरुणाचल प्रदेश को पहले पूर्वात्तर सीमांत एजेंसी (नार्थ ईस्ट फ्रंटियर एजेंसी- नेफा) के नाम से जाना जाता था। इस राज्य के पश्चिम, उत्तर और पूर्व में क्रमश: भूटान, तिब्बत, चीन और म्यांमार देशों की अंतरराष्ट्रीय सीमाएं हैं। अरुणाचल प्रदेश की सीमा नागालैंड और असम से भी मिलती है। इस राज्य में पहाड़ी और अर्द्ध-पहाड़ी क्षेत्र है। इसके पहाड़ों की ढलान असम राज्य के मैदानी भाग की ओर है।
'कामेंग', 'सुबनसिरी', 'सिआंग', 'लोहित' और 'तिरप' आदि नदियां इन्हें अलग-अलग घाटियों में विभाजित कर देती हैं। यहाँ का इतिहास लिखित रूप में उपलब्ध नहीं है। मौखिक परंपरा के रूप में कुछ थोड़ा सा साहित्य और ऐतिहासिक खंडहर हैं जो इस पर्वतीय क्षेत्र में मिलते हैं। इन स्थानों की खुदाई और विश्लेषण के द्वारा पता चलता है कि ये ईस्वी सन प्रारंभ होने के समय के हैं। ऐतिहासिक प्रमाणों से पता चलता है कि यह जाना-पहचाना क्षेत्र ही नहीं था वरन जो लोग यहाँ रहते थे और उनका देश के अन्य भागों से निकट का संबंध था। अरुणाचल प्रदेश का आधुनिक इतिहास 24 फ़रवरी 1826 को 'यंडाबू संधि' होने के बाद असम में [[ब्रिटिश राज|ब्रिटिश शासन]] लागू होने के बाद से प्राप्त होता हैं। सन 1962 से पहले इस राज्य को नार्थ-ईस्ट फ्रंटियर एजेंसी (नेफा) के नाम से जाना जाता था। संवैधानिक रूप से यह असम का ही एक भाग था परंतु सामरिक महत्त्व के कारण 1965 तक यहाँ के प्रशासन की देखभाल विदेश मंत्रालय करता था। 1965 के पश्चात असम के राज्पाल के द्वारा यहाँ का प्रशासन गृह मंत्रालय के अन्तर्गत आ गया था। सन 1972 में अरुणाचल प्रदेश को केंद्र शासित राज्य बनाया गया था और इसका नाम 'अरुणाचल प्रदेश' किया गया। इस सब के बाद 20 फ़रवरी 1987 को यह भारतीय संघ का 24वां राज्य बनाया गया।
== जिले ==
[[चित्र:ArunachalDistrictMapBengali.png|400px|अंगूठाकार|अरुणाचल प्रदेश के जिले]]
अरुणाचल प्रदेश में 25 जिले हैं -
* [[अंजॉ जिला]]
* [[चांगलांग जिला|चेंगलॉन्ग जिला]]
* [[पूर्व कमेंग जिला]]
* [[पूर्व सियांग जिला]]
* [[कुरुंग कुमे जिला]]
* [[लोहित जिला]]
* [[निचली दिबांग घाटी जिला]]
* [[निचला सुबनसिरी ज़िला|निचली सुबनसिरी जिला]]
* [[पपुमपारे जिला]]
* [[तवांग जिला]]
* [[तिराप ज़िला|तिरप जिला]]
* [[ऊपरी दिबांग घाटी ज़िला|उपरी दिबांग घाटी जिला]]
* [[ऊपरी सुबनसिरी ज़िला|उपरी सुबनसिरी जिला]]
* [[ऊपरी सियांग ज़िला|उपरी सियांग जिला]]
* [[पश्चिम सियांग ज़िला|पश्चिम सियांग जिला]]
* [[पश्चिम कमेंग जिला]]
==भाषाएँ==
{{Pie chart
| thumb = right
| caption = सन 2001 में अरुणाचल प्रदेश की भाषाएँ<ref name="Census of India">{{cite web |url=http://censusindia.gov.in/Census_Data_2001/Census_Data_Online/Language/parta.htm |title=Distribution of the 22 Scheduled Languages |work=Census of India |publisher=Registrar General & Census Commissioner, India |year=2001 |accessdate=4 January 2014 |archive-url=https://web.archive.org/web/20190716200738/http://censusindia.gov.in/Census_Data_2001/Census_Data_Online/Language/parta.htm |archive-date=16 जुलाई 2019 |url-status=dead }}</ref><ref name="censusindia.gov.in">{{cite web |url=http://censusindia.gov.in/Census_Data_2001/Census_data_finder/A_Series/Total_population.htm |title=Census Reference Tables, A-Series – Total Population |work=Census of India |publisher=Registrar General & Census Commissioner, India |year=2001 |accessdate=4 January 2014 |archive-url=https://web.archive.org/web/20131113154514/http://www.censusindia.gov.in/Census_Data_2001/Census_data_finder/A_Series/Total_population.htm |archive-date=13 नवंबर 2013 |url-status=dead }}</ref><ref>[http://www.censusindia.gov.in/Census_Data_2001/Census_Data_Online/Language/partb.htm] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20160811065050/http://www.censusindia.gov.in/Census_Data_2001/Census_Data_Online/Language/partb.htm |date=11 अगस्त 2016 }} Census 2011 Non scheduled languages</ref>
| label1 = [[निशि लोग|न्यिशी]]
| value1 = 18.94
| color1 = Green
| label2 = [[आदि भाषा|आदि]]
| value2 = 17.57
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| label3 = [[बंगाली भाषा|बांग्ला]]
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| label4 = [[नेपाली (बहुविकल्पी)|नेपाली]]
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| label5 = [[हिन्दी]]
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| label6 = [[असमिया भाषा|असमिया]]
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| label7 = [[मोनपा भाषा|मोनपा]]
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| label8 = [[वान्चो भाषा|वान्चो]]
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}}
वर्तमान समय में भाषा की दृष्टि से अरुणाचल प्रदेश एशिया का सबसे अधिक विविधतापूर्ण क्षेत्र है जिसमें 30 से 50 तक विभिन्न भाषाओं के बोलने वाले रहते हैं। इनमें से अधिकांश भाषाएँ तिब्बती-बर्मी परिवार की हैं।
हाल के वर्षों में अरुणाचल प्रदेश में [[हिन्दी]] का प्रचलन बढ़ा है और अब यह यहाँ की जनभाषा बन चुकी है।<ref>[http://indianexpress.com/article/research/how-hindi-language-became-arunachal-pradeshs-lingua-franca-narendra-modi-5079079/ How Hindi became Arunachal Pradesh’s lingua franca] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20180227153520/http://indianexpress.com/article/research/how-hindi-language-became-arunachal-pradeshs-lingua-franca-narendra-modi-5079079/ |date=27 फ़रवरी 2018 }} (इण्डियन एक्सप्रेस ; फरवरी २०१८)</ref><ref>{{Cite web |url=https://arunachaltimes.in/index.php/2017/12/31/hindi-arunachals-new-mother-tongue/ |title=Hindi: Arunachal’s new mother tongue |access-date=31 दिसंबर 2017 |archive-url=https://web.archive.org/web/20171231104047/https://arunachaltimes.in/index.php/2017/12/31/hindi-arunachals-new-mother-tongue/ |archive-date=31 दिसंबर 2017 |url-status=live }}</ref>
== इन्हें भी देखें ==
* [[अरुणाचल की जनजातियाँ]]
* [[अरुणाचल प्रदेश के जिले]]
==सन्दर्भ==
{{reflist}}
== बाहरी कड़ियाँ ==
* [https://www.youtube.com/watch?v=_iFEKU7avCY China 1962 War जीतकर भी Arunachal Pradesh से पीछे क्यों हट गया था]
* [https://web.archive.org/web/20041204185550/http://www.arunachaltourism.com/] अरुणाचल पर्यटन
* [https://web.archive.org/web/20061212201923/http://arunachalpradesh.nic.in/] अरुणाचल सरकार (अंगरेजी में)
* [https://web.archive.org/web/20110708024951/http://bharatparytan.blogspot.com/2009/08/blog-post_15.html तवांग अरुणाचल प्रदेश] (भारत दर्शन ब्लाग)
* [https://web.archive.org/web/20110422191041/http://janshabd.blogspot.com/ अरुणाचल को समझने का बेजोड़ प्रयास है ‘जनपथ’ का ताजा अंक (दिसम्बर, 09)]
{{प्रवेशद्वार}}
{{अरुणाचल प्रदेश}}
{{भारत के प्रान्त और संघ राज्यक्षेत्र}}
{{अरुणाचल प्रदेश के धार्मिक एवं पर्यटन स्थल}}
[[श्रेणी:भारत के राज्य]]
[[श्रेणी:अरुणाचल प्रदेश]]
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text/x-wiki
{{ज्ञानसन्दूक व्यक्ति
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| caption=डोगरी भाषा
}}
{{स्रोतहीन|date=मई 2016}}
'''डोगरी''' [[भारत]] के [[जम्मू (विभाग)|जम्मू]] ,[[हिमाचल प्रदेश|हिमाचल]] के [[काँगड़ा जिला|कांगड़ा]] और उत्तरी [[पंजाब क्षेत्र|पंजाब]] के कुछ [[प्रांत|प्रान्त]] में बोली जाने वाली एक भाषा है। वर्ष 2003 में इसे [[भारत का संविधान|भारतीय संविधान]] की [[आठवीं अनुसूची]] में शामिल किया गया है। पश्चिमी पहाड़ी बोलियों के परिवार में, मध्यवर्ती पहाड़ी पट्टी की जनभाषाओं में, डोगरी, चंबयाली, मडवाली, मंडयाली, बिलासपुरी, बागडी आदि उल्लेखनीय भाषा हैं।
डोगरी इस विशाल परिवार में कई कारणों से विशिष्ट जनभाषा है। इसकी पहली विशेषता यह है कि दूसरी बोलियों की अपेक्षा इसके बोलनेवालों की संख्या विशेष रूप से अधिक है। दूसरी यह कि इस परिवार में केवल डोगरी ही साहित्यिक रूप से गतिशील और सम्पन्न है। डोगरी की तीसरी विशिष्टता यह भी है कि एक समय यह भाषा कश्मीर रियासत तथा चंबा राज्य में राजकीय प्रशासन के अंदरूनी व्यवहार का माध्यम रह चुकी है। इसी भाषा के संबंध से इसके बोलने वाले डोगरे कहलाते हैं तथा डोगरी के भाषाई क्षेत्र को सामान्यतः "डुग्गर" कहा जाता है।
इस बेल्लै डोगरी लिखने गितै "देवनागरी लिपि" दी बरतून होआ करदी ऐ जदके पैह्ले इसदी अपनी लिपि "टाकरी" ही
== डोगरी का केंद्र ==
रियासत जम्मू कश्मीर की शरतकालीन राजधानी [[जम्मू]] नाम का ऐतिहासिक नगर, डोगरी की साहित्यिक साधना का प्रमुख केंद्र है, जहाँ डोगरी के साहित्यिकों का प्रतिनिधि संगठन "डोगरी संस्था" के नाम से, इस भाषा के साहित्यिक योगक्षेम के लिये गत लगभग ६० वर्षो से प्रयत्नशील है।
डोगरी [[पंजाबी]] की उपबोली है - यह '''भ्रांत धारणा''' डॉ॰ ग्रियर्सन के भाषाई सर्वेक्षण के प्रशंसनीय कार्य में डोगरी के पंजाबी की उपबोली के रूप में उल्लेख से फैली। इसमें उनका दोष नहीं। उस समय उनके इन सर्वेक्षण में प्रत्येक भाषा, बोली का स्वतंत्र गंभीर अध्ययन संभव नहीं था।
जॉन बीम्ज ने भारतीय [[भाषाविज्ञान|भाषा विज्ञान]] की रूपरेखा संबंधी अपनी पुस्तक (प्रकाशित 1866 ई॰) में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया है कि डोगरी ना तो कश्मीरी की अंगभूत बोली है, ना पंजाबी की। उन्होंने इसे भारतीय-जर्मन परिवार की आर्य शाखा की प्रमुख 11 भाषाओं में गिना है।
डॉ॰ सिद्धेश्वर वर्मा ने भी डोगरी की गणना भारत की प्रमुख सात सीमांत भाषाओं में की है।
== डोगरी की लिपि ==
डोगरी की अपनी एक लिपि है जिसे '''[[डोगरी लिपि|टाकरी या टक्करी लिपि]]''' कहते हैं। यह लिपि काफी पुरानी है। गुरमुखी लिपि का प्रादुर्भाव इसी से माना जाता है। [[कुल्लू]] तथा [[चंबा]] के कुछ प्राचीन ताम्रपट्टों से ज्ञात होता है कि इस लिपि का प्रारंभिक रूप में विकास 10 वीं- 11वीं शताब्दी में हो गया था। वैसे टाकरी वर्ग के अंतर्गत आने वाली कई लिपियाँ इस विस्तृत प्रदेश में प्रचलित हैं जैसे, लंडे, किश्तवाड़ी, चंबयाली, मंडयाली, सिरमौरी और कुल्लूई आदि। डॉ॰ ग्रियर्सन शारदा को और टाकरी को सहोदरा मानते हैं। श्री व्हूलर का मत है कि टाकरी शारदा की आत्मजा है।
टाकरी लिपि आज भी डुग्गर के देहाती समाज में बहीखातों में प्रयुक्त होती है। इसका एक विकसित रूप भी है जिसमें कई ग्रंथों का प्रकाशन हुआ है। कश्मीर नरेश महाराज रणवीर सिंह ने, आज से लगभग एक सौ वर्ष पूर्व, अपने राज्यकाल में, डोगरी लिपि में, नागरी के अनुरूप, सुधार करने का प्रयत्न किया था। मात्रा, चिह्नों के प्रयोग को अपनाया गया तथा पहली बार नई टाकरी लिपि में डोगरी भाषा के ग्रंथों के मुद्रण की समुचित व्यवस्था के लिये जम्मू में शासन की ओर से रणवीर प्रेस की स्थापना की गई।
पुरानी डोगरी वर्णमाला का यह संशोधित रूप जनव्यवहार में लोकप्रिय न हो सका।
=== डोगरी के लिये नागरी लिपि ===
डोगरी की नव साहित्यिक चेतना के साथ ही साथ टाकरी का स्थान [[देवनागरी|देव नागरी]] ने ले लिया।
== डोगरी की कुछ स्वर विषयक विशेषताएँ: ==
*(१) डोगरी में शब्दों के आदि में य तथा व ध्वनियाँ नहीं आतीं, इनके स्थान पर ज तथा ब ध्वनियाँ उच्चरित होती है।
:(पंजाबी) वेहड़ा (आगण) - बेड़ा (डोगरी)
:यजमान (हिंदी) - जजमान (डोगरी)
:यश (हिंदी) - जस (डोगरी)
*(२) डोगरी में शब्दों के आदि में '''ह''' का उच्चारण हिंदी पंजाबी से सर्वथा भिन्न होता है।
*(३) डोगरी में वर्गों के चतुर्थ वर्णो के उच्चारण में तद्वर्गीय प्रथम अक्षर के साथ हल्की चढ़ती सुर जोड़ी जाती है।
*(४) ह जब शब्दों के मध्य में आता है तब इसके डोगरी उच्चारण में चढ़ते सुर के स्थान पर उतरते सुर का प्रयोग होता है, जैसे:
:'''हिंदी - डोगरी'''
:पहाड़ प्हाड़ - पा/ड़
:मोहर म्होर - मो/र
*(५) डोगरी के कुछ शब्दों के आदि में '''ङ''' तथा '''ञ''' का जैसे अनुनासिकों का विशुद्ध उच्चारण मिलता है, जैसे-
:'''हिंदी - डोगरी'''
:अंगार - ङार
:अंगूर - ङूर
:अञाणा (पंजाबी) - ञ्याणा
:ग्यारह - ञारां
*(६) [[संस्कृत भाषा|संस्कृत]] का '''र''' जो हिंदी में लुप्त हो जाता है, डोगरी में प्राय: सुरक्षित है।
:'''संस्कृत - हिंदी - डोगरी'''
:ग्राम - गाँव - ग्राँ
:क्षेत्र - खेत - खेतर
:पत्र - पात - पत्तर
:स्त्री - तिय, तीमी (पं0) - त्रीम्त
:मित्र - मीत - मित्तर
इसी प्रवृति के कारण कई रूपों में '''र''' का अतिरिक्त आगम भी हुआ है, जैसे-
:'''संस्कृत - हिंदी - डोगरी'''
:तीक्ष्ण - तीखा - त्रिक्खना
:दौड़ - द्रौड़
:पसीना - परसीना, परसा
:कोप - कोप - करोपी
:धिक् - धिक्कार - घ्रिग
*(७) डोगरी संश्लेषणात्मक भाषा है। इसी के प्रभाव से इसमें संक्षेपीकरण की असाधारण प्रवृति पाई जाती है। संश्लेषणात्मकता जैसे -
:'''संस्कृत - हिंदी - डोगरी'''
:अहम् - मैने - में
:माम् - मुझको - में
:माम् - मुझको - मिगी (ऊ मी)
:अस्माभि: - हमने - असें (हमारे द्वारा)
:मह्मम् - मुझे मेरे - तै (गितै) (मेरे लेई पं0)
:मत् - मुझसे मेरे - शा (मेरे कोलो-पं0)
:मयि - मुझ में - मेरे च (मेरे निच-पं0)
'''संक्षेपीकरण'''- जैसे
:हिंदी - पंजाबी - डोगरी
: मुझसे नहीं आया जाता -मेरे थीं नई आया जांदा - मेरेशा नि नोंदा (औन हुन्दा)
: खाया जाता - खान हुंदा - खनोंदा
*(८) डोगरी में कर्मवाच्य (तथा भाववाच्य) के क्रियारुपों की प्रवृति पाई जाती है:
:खनोंदा - खाया जाता नोग तां - औन होग (पं0) ता
:पनोंदा- पिया जाता पजोग - पुज्जन होग उ पहुँच सका तो सनोंदा - सोया जाता
*(९) डोगरी में वर्णविशर्यय की प्रवृति भी असाधारण रूप से पाई जाती है:
:उधार - दुआर
:उजाड़ - जुआड़
:ताम्र - तरामां
:कीचड़ - चिक्कड़ आदि
*(१०) डोगरी में शब्दों के प्रारंभ के लघु स्वर का प्राय: लोप हो जाता है-
:अनाज - नाज
:अखबार - खबर
:इजाजत - जाजत
:एतराज - तराज
== डोगरी साहित्य ==
विस्तृत लेख [[डोगरी साहित्य]] के अन्तर्गत देखें।
== इन्हें भी देखें ==
* [[भारत की भाषाएँ]]
* [[भाषा-परिवार|भाषाई परिवार]]
{{भारत की भाषाएँ |state=autocollapse}}
{{पश्चिमी पहाड़ी भाषाएँ}}
{{हिन्द-आर्य भाषाएँ}}
[[श्रेणी:डोगरी भाषा]]
[[श्रेणी:हिन्द-आर्य भाषाएँ]]
[[श्रेणी:विश्व की भाषाएँ]]
[[श्रेणी:सुरभेदी भाषाएँ]]
[[श्रेणी:जम्मू और कश्मीर की भाषाएँ]]
[[श्रेणी:पहाड़ी भाषाएँ]]
m86yzsfibv5japc0s9gl8wwvc07k0tv
मॉरिशस
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2026-05-02T21:09:37Z
AllahMaaliqwaHafiz
922701
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wikitext
text/x-wiki
{{इंफ़ोबॉक्स देश|
native_name = République de Maurice<br>मॉरिशस गणतंत्र<br>Repiblik Moris|
conventional_long_name = मॉरिशस गणराज्य |
common_name = मॉरिशस |
image_flag = Flag of Mauritius.svg |
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national_motto = ''"Stella Clavisque Maris Indici"''{{spaces|2}}<small>([[लैटिन]])<br />"हिन्द महासागर का सितारा और कुंजी"</small> |
national_anthem = ''मदरलैंड'' (मातृभूमि)|
official_languages = [[अंग्रेजी भाषा|अंग्रेजी]]|
languages_type = अन्य प्रमुख भाषायें |
languages = मॉरिशन क्रिओल <br> [[फ्रांसीसी]]| [[अवधी]]
capital = [[पोर्ट लुई]] |
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|HDI_change = increase<!--increase/decrease/steady-->
|HDI = 0.771 <!--number only-->
|HDI_ref = <ref name="HDI">{{cite web |url=http://hdr.undp.org/sites/default/files/hdr14-summary-en.pdf |title=2014 Human Development Report Summary |date=2014 |accessdate=27 जुलाई 2014 |publisher=संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम |pages=21–25 |archive-url=https://web.archive.org/web/20160729080443/http://hdr.undp.org/sites/default/files/hdr14-summary-en.pdf |archive-date=29 जुलाई 2016 |url-status=live }}</ref>
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utc_offset_DST= +5<ref>{{Cite web |url=http://www.timeanddate.com/news/time/mauritius-daylight-saving-time.html |title=Mauritius turns the clock forward in October 2008 |access-date=18 सितंबर 2008 |archive-url=https://web.archive.org/web/20150912151919/https://www.timeanddate.com/news/time/mauritius-daylight-saving-time.html |archive-date=12 सितंबर 2015 |url-status=dead }}</ref>|
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footnotes=<ref>{{cite web|url= http://www.gov.mu/portal/site/abtmtius/menuitem.42f3149f267522984d57241079b521ca/|title= Republic of Mauritius, Government Portal (Mauritius)|access-date= 18 सितंबर 2008|archive-url= https://web.archive.org/web/20120111170725/http://www.gov.mu/portal/site/abtmtius/menuitem.42f3149f267522984d57241079b521ca|archive-date= 11 जनवरी 2012|url-status= dead}}</ref><ref>{{Cite web |url=http://www.gov.mu/portal/site/AssemblySite/menuitem.ee3d58b2c32c60451251701065c521ca/ |title=The Constitution<!-- Bot generated title --> |access-date=18 सितंबर 2008 |archive-url=https://web.archive.org/web/20110226194556/http://www.gov.mu/portal/site/AssemblySite/menuitem.ee3d58b2c32c60451251701065c521ca/ |archive-date=26 फ़रवरी 2011 |url-status=dead }}</ref>
|footnote2 = The population estimate is for the whole republic. For the island of Mauritius '''only''', as at 31 दिसम्बर 2007, it is 1,227,078<ref>{{cite web |url=http://www.gov.mu/portal/goc/cso/ei683/toc.htm |title=Population and Vital Statistics, Republic of Mauritius, Year 2007 - Highlights |publisher=Central Statistics Office (Mauritius) |accessdate=26 मई 2008 |month=March |year=2008 |archive-url=https://web.archive.org/web/20080510230951/http://www.gov.mu/portal/goc/cso/ei683/toc.htm |archive-date=10 मई 2008 |url-status=dead }}</ref>
|}}'''मॉरिशस''' ( {{Lang-fr|{{noitalic|Maurice}}}}), [[अफ़्रीका|अफ़्रीकी]] महाद्वीप के तट के दक्षिणपूर्व में लगभग 900 किलोमीटर की दूरी पर [[हिंद महासागर]] में और [[मेडागास्कर]] के पूर्व में स्थित एक द्वीपीय देश है। मॉरीशस में हिंदुओं की आबादी तीसरे नंबर पर है<ref>{{Cite web|url=https://www.hindi.studyaffairs.in/daily-current-affairs/all-about-mauritius-day-in-hindi/|title=मॉरीशस दिवस 2023 (mauritius day): जानिए इसके बारे में|last=admin|date=2023-03-11|website=स्टडी अफेयर्स|language=en-US|access-date=2023-03-11|archive-date=11 मार्च 2023|archive-url=https://web.archive.org/web/20230311173825/https://www.hindi.studyaffairs.in/daily-current-affairs/all-about-mauritius-day-in-hindi/|url-status=dead}}</ref> दुनिया में मॉरीशस द्वीप के अतिरिक्त इस गणराज्य मे, [[सेंट ब्रेंडन]], रॉड्रीगज़ और अगालेगा द्वीप भी शामिल हैं। दक्षिणपश्चिम में 200 किलोमीटर पर स्थित [[फ्रांसीसी रीयूनियन द्वीप]] और 570 किलोमीटर उत्तर पूर्व में स्थित रॉड्रीगज़ द्वीप के साथ मॉरीशस मस्कारेने द्वीप समूह का हिस्सा है। मारीशस की [[संस्कृति]], मिश्रित संस्कृति है, जिसका कारण पहले इसका [[फ्रांस]] के आधीन होना तथा बाद में ब्रिटिश स्वामित्व में आना है। मॉरीशस द्वीप [[विलुप्त]] हो चुके [[डोडो]] पक्षी के अंतिम और एकमात्र घर के रूप में भी विख्यात है।
== इतिहास ==
मॉरीशस के सबसे पुराने अभिलेख लगभग 10 वीं शताब्दी की शुरुआत के हैं जो [[द्रविड़]] ([[तमिल]]) और औस्ट्रोनेशी नाविकों के संदंर्भ से आते है। [[पुर्तगाली]] नाविकों पहले पहल यहाँ 1507 में आये और उन्होने इस निर्जन द्वीप पर एक यात्रा अड्डा स्थापित किया और फिर इस द्वीप को छोड़ कर चले गये। सन् 1598 में [[हॉलैंड]] के तीन पोत जो मसाला द्वीप (स्पाइस आइलैंड) की यात्रा पर निकले थे एक चक्रवात के दौरान रास्ता भटक कर यहाँ पहुँच गये। उन्होने इस द्वीप का नाम अपने नासाओ के युवराज मॉरिस के सम्मान में मॉरिशस रख दिया। सन्1638 में, डच लोगों ने यहाँ पहली स्थायी बस्ती बसाई। चक्रवातों वाली कठोर जलवायु परिस्थितियों और बस्ती को होने वाले लगातार नुक्सान के कारण डचो ने कुछ दशकों बाद इस द्वीप को छोड़ दिया। [[फ्रांस]], जिसका पहले से ही इसके पड़ोसी आइल बॉरबोन (अब [[रीयूनियन]]) द्वीप पर नियंत्रण था ने सन् 1715 में मॉरीशस पर कब्ज़ा कर लिया और इसका नाम बदलकर – आइल दे फ्रांस (फ्रांस का द्वीप) रख दिया। फ्रांस के शासन मे, यह द्वीप एक समृद्ध अर्थव्यवस्था के रूप में विकसित हुआ जो [[चीनी]] उत्पादन पर आधारित थी। यह आर्थिक परिवर्तन गवर्नर (राज्यपाल) फ्रेंकॉएस माहे दे लेबॉर्डॉनाइस के द्वारा शुरू किया गया था।
ब्रिटेन के साथ अपने कई सैन्य संघर्षों के दौरान, फ्रांस ने गैरकानूनी घोषित जलदस्युओं "कोर्सेर्स" को शरण दी, जो अक्सर ब्रिटिश जहाजो, जिन पर मूल्यवान व्यापार का माल लदा होता था को उनकी भारत और ब्रिटेन के मध्य होने वाली यात्राओं के दौरान लूट लेते थे। सन् 1803-1815 के दौरान हुए [[नेपोलियन]] युद्धों में ब्रिटिश इस द्वीप का नियंत्रण पाने में सफल हो गये। [[ग्रांड पोर्ट]] की लड़ाई जीतने के बावजूद, जो कि नेपोलियन की ब्रिटिशों पर एकमात्र समुद्री विजय थी, फ्रांसीसी, तीन महीने बाद, केप मैलह्युरॉ में ब्रिटेन से हार गये। उन्होनें औपचारिक रूप से 3 दिसम्बर 1810 को कुछ शर्तों के साथ समर्पण कर दिया, ये शर्तें थीं, कि द्वीप पर फ्रांसीसी भाषा का प्रयोग जारी रहेगा और आपराधिक मामलों में नागरिकों पर फ्रांस का कानून लागू होगा। ब्रिटिश शासन के अंतर्गत, इस द्वीप का नाम बदलकर वापस मॉरीशस कर दिया गया।
सन् 1965 में, ब्रिटेन (यूनाइटेड किंगडम) ने [[चागोस द्वीपसमूह]] को मॉरीशस से अलग कर दिया। उन्होने ऎसा [[ब्रिटिश हिंद महासागर क्षेत्र]] स्थापित करने के लिये किया जिससे वे [[सामरिक]] महत्व के द्वीपों का प्रयोग संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ रक्षा सहयोग के विभिन्न प्रयोजनों के लिए कर सकें। हालाँकि मॉरीशस की तत्कालीन सरकार उनके इस कदम से सहमत थी पर बाद की सरकारों ने उनके इस कदम को अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अवैध बताया है {{Fact}} और इन द्वीप समूहों पर अपना अधिकार जताया है। उनके इस दावे को, संयुक्त राष्ट्र द्वारा भी मान्यता दी गयी है {{Fact}}।
मॉरीशस ने 1968 में स्वतंत्रता प्राप्त की और देश सन् 1992 में एक [[गणतंत्र]] बना। मॉरीशस एक स्थिर लोकतंत्र है जहाँ नियमित रूप से स्वतंत्र चुनाव होते हैं और मानवाधिकारों के मामले में भी देश की छवि अच्छी है, इसके चलते यहाँ काफी विदेशी निवेश हुआ है और यह देश अफ्रीका में सबसे अधिक प्रति व्यक्ति आय वाले देशों में से एक है।
== राजनीति ==
मॉरीशस एक संसदीय लोकतंत्र है जिसकी संरचना ब्रिटेन की संसदीय प्रणाली पर आधारित है। राज्य का प्रमुख राष्ट्रपति होता है जिसका कार्यकाल पाँच वर्ष का होता है और उसका चुनाव राष्ट्रीय सभा, मॉरीशस की एकसदनीय संसद करती है। राष्ट्रीय सभा (नेशनल असेंबली) के 62 सदस्य जनता द्वारा चुने जाते हैं जबकि चार से आठ सदस्यों की नियुक्ति चुनाव में हारे "श्रेष्ट पराजित" उम्मीदवारों के बीच से जातीय अल्पसंख्यकों का प्रतिनिधित्व करने के लिये तब की जाती है जब इन समुदायों को चुनाव से उचित प्रतिनिधित्व ना मिला हो। प्रधानमंत्री और मंत्री परिषद सरकार का नेतृत्व करते हैं। सरकार पांच साल के आधार पर निर्वाचित होती है। सबसे हाल के आम चुनाव 3 जुलाई 2005 में मुख्य भूमि के सभी 20 निर्वाचन क्षेत्रों के साथ ही रॉड्रीगज़ द्वीप के निर्वाचन क्षेत्र में भी कराये गये थे। अंतरराष्ट्रीय मामलों में, मॉरीशस हिंद महासागर आयोग, दक्षिणी अफ्रीकी विकास समुदाय, राष्ट्रमंडल और ला फ्रेंकोफोनी (फ़्रांसीसी बोलने वाले देशों) का हिस्सा है। सन् 2006 में, मॉरीशस को पुर्तगाली भाषाई देशों के समुदाय का एक प्रेक्षक सदस्य बनने को कहा गया जिससे यह उन देशों के और करीब हो सके। मॉरीशस की कोई सेना नहीं है, लेकिन इसके पास एक [[तटरक्षक]] बल तथा [[पुलिस]] और सुरक्षा बल हैं।
== जिले और अधीन क्षेत्र ==
[[चित्र:Mauritius districts numbered.svg|Thumb|right|250px|मॉरीशस के जिले]]
मॉरीशस द्वीप नौ जिलों में विभाजित है:
# [[Black River District, Mauritius|ब्लैक रि]]
#[[Black River District, Mauritius|वर]] (राजधानी: [[बैम्बॉस]])
# [[फ्लाक़]] (राजधानी: [[सेन्टर दे फ्लाक़]])
# [[ग्रांड पोर्ट]] (राजधानी: [[माहेबॉर्ग]])
# [[मोका]] (राजधानी: [[क्वार्टियर मिलिटायरे]])
# [[पैम्प्लेमूजे़स]] (राजधानी: [[ट्रिओलेट]])
# [[प्लाईनेस् विल्हेम्स]] (राजधानी: [[रोज़ हिल]]/ [[क्यूरेपाईप]])
# [[पोर्ट लुई]] (मॉरीशस की राजधानी)
# [[रिवियेरे दु रेम्पार्त (मॉरीशस)|रिवियेरे दु रेम्पार्त]] (राजधानी: [[मापाउ]])
# [[सवान्ने]] (राजधानी: [[सूलेक]])
=== अधीन क्षेत्र ===
* [[Rodrigues (island)|रॉड्रीगज़]], द्वीप जो मॉरीशस के उत्तर पूर्व में 560 किलोमीटर पर स्थित है, जिसे अक्टूबर 2002 में आंशिक स्वायत्ता प्रदान की गयी, स्वायत्ता मिलने से पहले यह मॉरीशस का 10 वाँ प्रशासनिक जिला था।
* [[अगालेगा]], मॉरीशस के उत्तर में 933 किलोमीटर पर दो छोटे टापू हैं।
* [[कार्गादोस काराजोस शोआल्स]], जिसे सेंट ब्रेन्डन द्वीप के नाम से भी जाना जाता है मॉरीशस के उत्तर में 402 किलोमीटर पर स्थित है।
=== मॉरीशस के अन्य क्षेत्र ===
* [[साउदेन टापू]] (पूर्वी साउदेन टापू सहित)
* [[नजारेथ टापू]]
* [[साया दे मल्हा टापू]]
* [[हॉकिन्स टापू]]
* [[चागोस द्वीपसमूह]]
मॉरीशस निम्न क्षेत्रों पर भी अधिकार जताता है:<ref name="CIA-Transnational issues">{{cite web |url=https://www.cia.gov/library/publications/the-world-factbook/geos/mp.html#Issues |title=CIA - The World Factbook -- Mauritius |accessdate=2007-11-194 |publisher=CIA |archive-url=https://web.archive.org/web/20151019084557/https://www.cia.gov/library/publications/the-world-factbook/geos/mp.html#Issues |archive-date=19 अक्तूबर 2015 |url-status=live }}</ref>
* [[ट्रोमेलिन द्वीप]]
== भूगोल ==
[[चित्र:Mauritius-Map.png|thumb|right|200px|मॉरीशस का मानचित्र]]
मॉरीशस मास्कारेने द्वीप समूह का हिस्सा है। इस द्वीपसमूह की श्रृंखला उन अंत:समुद्री ज्वालामुखीय विस्फोटों के कारण बनी है जो अब सक्रिय नहीं हैं। यह ज्वालामुखीय विस्फोट अफ्रीकी प्लेट के रीयूनियन तप्तबिन्दु के ऊपर सरकने के कारण हुए थे। मॉरीशस द्वीप एक केंद्रीय पठार के चारों ओर बना है, जिसकी उच्चतम चोटी [[पितोन डे ला पेतित रिवियेरे नोएरे]] 828 मीटर (2717 फुट) उंची है और इसके दक्षिण में स्थित है। पठार के आसपास, मूल [[गर्त]] फिर भी पहाड़ों से अलग दिखाई पड़ता है।
स्थानीय जलवायु उष्णकटिबंधीय है, जो दक्षिणपूर्व की हवाओं द्वारा संशोधित होती है। यहाँ मई से नवंबर तक शुष्क सर्दियों पड़तीं हैं और नवम्बर से मई का मौसम गर्म, आद्र और गीली गर्मी का होता है। विरोधी-चक्रवात देश को मई से सितंबर के दौरान प्रभावित करते है। चक्रवातों का समय नवंबर-अप्रैल होता है। हॉलैंडा (1994) और दीना (2002) पिछले दो [[चक्रवात]] हैं जिन्होने द्वीप को सबसे ज्यादा प्रभावित किया है।
उत्तरपश्चिम में स्थित [[पोर्ट लुई]] इस द्वीप की राजधानी और सबसे बड़ा शहर है। अन्य महत्वपूर्ण शहरों में [[क्यूरेपाइप]], [[वकोआस]], [[फ़ीनिक्स]], [[कुआर्ते बोर्नेस]], [[रोज़ हिल]] और [[बीयू-बासिन]] शामिल है।
यह् द्वीप अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है। उदाहरण के लिए, लेखक [[मार्क ट्वेन]], ने अपने निजी यात्रा वृतांत ‘फॉलॉइंग द एक्वेटर’ में लिखा है कि " मॉरिशस के देख कर आपको विचार आता है पहले मॉरिशस बना और फिर स्वर्ग और स्वर्ग, मॉरीशस की एक नकल मात्र है।”
== अर्थव्यवस्था ==
[[चित्र:Evening Port Louis.jpg|thumb|300px|मॉरीशस की राजधानी [[पोर्ट लुई]] का एक विहंगम दृश्य.]]
सन् 1968 में आजादी के बाद से, मारीशस एक निम्न आय वाली, कृषि उत्पाद आधारित अर्थव्यवस्था से विकसित होकर एक विविधतापूर्ण मध्यम आय वाली अर्थव्यवस्था में परिवर्तित हो गया है जिसमे तेजी से बढ़ता औद्योगिक, वित्तीय और पर्यटन क्षेत्र शामिल है। अधिकांश अवधि में वार्षिक वृद्धि दर, 5 % से 6 % के बीच दर्ज की गई है। यह दर बढ़ती [[जीवन प्रत्याशा]], घटती [[शिशु मृत्यु दर]] और [[बुनियादी ढांचे]] में सुधार से परिलक्षित होती है।
सन् 2005 में, अनुमानित 10155 अमरीकी डालर, क्रयशक्ति समता (पीपीपी), के साथ मॉरीशस अफ्रीका में प्रति व्यक्ति [[सकल घरेलू उत्पाद]] के हिसाब से सातवें स्थान पर है, इससे आगे हैं रीयूनियन (19233 अमरीकी डॉलर, वास्तविक विनिमय दरों पर), [[सेशल्स]] (13887 अमरीकी डालर, पीपीपी पर), [[गैबॉन]] (12742 अमरीकी डालर, पीपीपी पर), [[बोत्सवाना]] (12057 अमरीकी डालर पीपीपी पर), [[भूमध्य रेखीय गिनी]] (11999 अमरीकी डालर, पीपीपी पर) और [[लीबिया]] (10727 अमरीकी डालर, पीपीपी पर)।
अर्थव्यवस्था मुख्यतः गन्ना बागान, पर्यटन, कपड़ा और सेवा क्षेत्र पर निर्भर है, लेकिन अन्य क्षेत्रों में भी तेजी से विकास हो रहा हैं। मॉरीशस, लीबिया और सेशल्स केवल तीन ऎसे अफ्रीकी देश हैं जिनका दर्ज़ा " [[मानव विकास सूचकांक]]<nowiki/>” के हिसाब से ‘उच्च’ है। (रीयूनियन, को फ्रांस का हिस्से मानते हुए, संयुक्त राष्ट्र ने मानव विकास सूचकांक की वरीयता श्रेणी में सूचीबद्ध नहीं किया है)
गन्ना 90% कृषि योग्य भूमि पर उगाया जाता है और जिससे कुल निर्यात आय का 25% प्राप्त होता है। लेकिन 1999 में पड़े भयंकर सूखे से गन्ने की फसल बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुई थी। सरकार की विकास योजनायें विदेशी निवेश पर आधारित है। मारीशस ने 9000 से अधिक अपतटीय संस्थाओं को आकर्षित किया है जिनका उद्देश्य भारत और [[दक्षिण अफ्रीका]] से व्यापार करना है जबकि अकेले बैंकिंग क्षेत्र में निवेश 1 अरब डॉलर से अधिक पहुँच गया है। दिसम्बर 2004 में बेरोजगारी की दर 7.6 % थी। फ्रांस देश का सबसे बड़ा व्यापारिक साझीदार है जिसका इस देश के साथ न सिर्फ निकट संबंध है, बल्कि वो इसे विभिन्न रूपों में तकनीकी सहायता प्रदान करता है।
स्थानीय निवासिओं को कम कीमतों पर आयात करने की सुविधा देने और अधिक पर्यटकों जो फिलहाल [[दुबई]] और [[सिंगापुर]] जाते हैं, को आकर्षित के लिए मॉरीशस अगले चार साल में एक [[शुल्क मुक्त]] (ड्यूटी फ्री) द्वीप बनने की दिशा में प्रयासरत है। कई उत्पादों पर ड्यूटी (शुल्क) समाप्त कर दिया गया है और 1850 से अधिक उत्पादों पर जिनमें कपड़े, भोजन, गहने, [[छायांकन]] (फोटोग्राफिक) उपकरण, [[श्रव्य दृश्य]] उपकरण और प्रकाश व्यवस्था के उपकरण शामिल है पर शुल्क घटा दिया गया है। इसके अतिरिक्त, नए व्यावसायिक अवसरों को आकर्षित करने के उद्देश्य से आर्थिक सुधारों को भी लागू किया गया है। हाल ही में, 2007-2008 के बजट में वित्त मंत्री राम सीतानन ने कंपनी (कार्पोरेट) कर को घटा कर 15 % कर दिया है {{तथ्य}}। ब्रिटिश अमेरिकी इंवेस्टमेंट कंपनी मॉरीशस में [[मर्सिडीज बेंज]], [[पीजो]], [[मित्सुबिशी]] और साब कारों की बिक्री का प्रतिनिधित्व करती है।
ए डी बी नेटवर्क की योजना पूरे मॉरीशस में लोगों को वायरलेस इंटरनेट पहुँचाने की है, अभी तक यह पहुँच द्वीप के 60% क्षेत्र और 70% जनसंख्या के पास है।
[[भारत]] के कुल 10.98 अरब अमरीकी डालर के [[प्रत्यक्ष विदेशी निवेश]] में मॉरीशस का स्थान पहला है। शीर्ष 2000 और जनवरी 2005 के बीच होने वाला मॉरीशस का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश मुख्यत: बिजली के उपकरण, [[दूरसंचार]], [[ईंधन]], [[सीमेंट]] और जिप्सम उत्पाद तथा सेवा क्षेत्र (वित्तीय और गैर वित्तीय) जैसे विभिन्न क्षेत्रों में आकर्षित है।
== जनसाँख्यिकी ==
[[File:Mauritius population pyramid 2011.svg|thumb|2011 की जनगणना के अनुसार मॉरीशस का [[जनसंख्या पिरामिड]]।]]
मॉरीशस का समाज विभिन्न जातीय समूहों के लोगों से मिल कर बना है। 1 जुलाई 2019 तक मॉरीशस गणराज्य की अनुमानित जनसंख्या 1,265,985 थी, जिसमें 626,341 पुरुष और 639,644 महिलाएं थीं। मॉरीशस द्वीप पर जनसंख्या 1,222,340 थी, और रोड्रिग्स द्वीप की जनसंख्या 43,371 था। अगालेगा और सेंट ब्रैंडन की अनुमानित जनसंख्या 274 थी। मॉरीशस, अफ्रीका महाद्वीप में दूसरा सबसे अधिक जनसंख्या घनत्व वाला देश है। 1982 में एक संवैधानिक संशोधन के बाद, जनगणना के उद्देश्य के लिए किसी मॉरीशियाई को अपनी जातीय पहचान प्रकट करने की कोई आवश्यकता नहीं है। जातीयता पर आधिकारिक आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं। 1972 की जनगणना, जातीय आधार पर होने वाली अंतिम जनगणना थी। <ref>{{cite news|url=https://www.lexpress.mu/article/critical-appraisal-best-loser-system|title=A critical appraisal of the Best Loser System|newspaper=[[L'Express (Mauritius)]]|date=5 June 2008|access-date=11 November 2017|author=La Redaction}}</ref><ref>{{cite web|url=http://www.defimedia.info/blog/item/18524-debate-on-best-loser-system.html|title=Debate on Best Loser System|publisher=Le Défi Media Group|date=10 September 2012|access-date=21 January 2015|author=M. Rafic Soormally|url-status=dead|archive-url=https://web.archive.org/web/20150121084740/http://www.defimedia.info/blog/item/18524-debate-on-best-loser-system.html|archive-date=21 January 2015|df=dmy-all}}</ref> मॉरीशस एक बहुजातीय समाज है, जिसमें भारतीय, अफ्रीकी, चीनी और यूरोपीय (ज्यादातर फ्रांसीसी) मूल के व्यक्ति शामिल हैं।
=== भाषा ===
[[मॉरीशस की भाषा]]
मॉरीशस की आधिकारिक भाषा [[अंग्रेजी]] है, इसलिए सरकार का सारा प्रशासनिक कामकाज अंग्रेजी में होता है। शिक्षा प्रणाली में अंग्रेजी के साथ [[फ़्रांसीसी]] का भी इस्तेमाल किया जाता है। फ्रांसीसी भाषा मीडिया की मुख्य भाषा है, चाहें प्रसारण हो या मुद्रण। इसके अलावा व्यापार और उद्योग जगत के मामलों में भी मुख्यतः [[फ्रांसीसी]] ही प्रयोग में आती है। सबसे व्यापक रूप से यहाँ मॉरीशियन [[क्रेयोल]] भाषा बोली जाती है। [[हिन्दी]] भी एक बड़े वर्ग द्वारा बोली व समझी जाती है। देखें ([[मॉरिशस में हिन्दी]]।
=== धर्म ===
{{Pie chart
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|caption = मॉरिशस में धर्म (2011 जनगणना)<ref name="2011 Census Religion"/>
|label1 = [[हिंदु धर्म]]
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}}
[[सांख्यिकी मॉरीशस]] द्वारा की गयी 2011 की जनगणना के अनुसार, 48.5% मॉरिशियाई जनसंख्या [[हिन्दु धर्म]] का पालन करती है, इसके बाद 32.7% ईसाई, 17.2% मुस्लिम और लगभग 0.7% अन्य धर्मों को मानती है। 0.7% लोगों ने स्वयं को नास्तिक या अधार्मिक बताया जबकि 0.1% ने कोई उत्तर नहीं दिया।<ref name="2011 Census Religion">{{cite web|url=http://statsmauritius.govmu.org/English/CensusandSurveys/Documents/HPC/2011/HPC_TR_Vol2_Demography_Yr11.pdf|publisher=Statistics Mauritius, Government Portal of Mauritius|page=68|title=Resident population by religion and sex|access-date=13 April 2020}}</ref>
== संस्कृति ==
[[चित्र:Mauritius2.jpg|right|thumb|250px|मॉरिशस में शंकर की मूर्ति]]
[[चित्र:Maurice-plage.jpg|right|thumb|250px|मॉरीशस में सागर तट]]
मॉरीशस को इसके स्वादिष्ट खाने से भी जाना जाता है, जो भारतीय, चीनी, क्रेयोल और यूरोपियन खानो का मिश्रण है।
इस द्वीप पर [[रम]] का उत्पादन बड़े पैमाने पर होता है। 1638 में डच लोगों ने मॉरीशस को सबसे पहले [[गन्ना]] से परिचित कराया। डच गन्ने की खेती मुख्यतः [[अरक]] (रम का एक पूर्व प्रकार) के उत्पादन के लिए करते थे। लेकिन फ्रांस और ब्रिटेन के शासन के दौरान यहाँ गन्ने की खेती को बड़े पैमाने पर किया गया जिसने इस द्वीप के आर्थिक विकास में काफी योगदान दिया।{{तथ्य}} [[पियरे चार्ल्स फ्रेंकोएज़ हरेल]] पहला व्यक्ति था जिसने 1850 में मॉरीशस में रम के स्थानीय [[आसवन]] का प्रस्ताव किया।
[[सेगा]] स्थानीय लोक संगीत है। सेगा मूलत: अफ्रीकी संगीत है जिसमे परंपरागत वाद्यो का उपयोग होता है जैसे '''रवाने''' जिसे बकरी की त्वचा से बनाया जाता है। आमतौर पर सेगा में गुलामी के दिनों की यातनाओं का वर्णन होता है साथ ही इन गीतों में आजकल के दौर में अश्वेतों की सामाजिक समस्याओं को भी उठाया जाता है। आमतौर पर पुरुषों वाद्य बजाते हैं और महिलायें साथ में नृत्य करती हैं। तटीय क्षेत्र के होटलों में ये शो नियमित रूप से आयोजित किये जाते है।
1847 में मॉरीशस [[डाक टिकट]] जारी करने वाला पाँचवां देश बना। यहाँ से दो प्रकार के डाक टिकट जारी किए गये जिन्हें तब '''मॉरीशस "डाकघर" टिकट''' के नाम से जाना जाता था। एक टिकट एक "लाल पेनी" और दूसरी " दो नीले पेंस" मूल्य वर्ग की थी और आज यह टिकट शायद दुनिया की सबसे प्रसिद्ध और मूल्यवान टिकटें है।
मॉरीशस की जब इसकी खोज हुई थी, तब यह द्वीप एक अज्ञात पक्षी प्रजाति का घर था जिसे, [[पुर्तगाल|पुर्तगालियों]] ने [[डोडो]] (मूर्ख) कह कर पुकारा क्योकि यह बहुत अक्लमंद नहीं लगते थे। लेकिन, 1681 तक सभी डोडो पक्षियों को बसने वालों और उनके पालतू जानवरों ने मार दिया। एक वैकल्पिक सिद्धांत बताता है कि बसने वालों के साथ आये जंगली सूअरों ने धीमी गति से प्रजनन करने वाले डोडो के घोंसले उजाड़ दिये। फिर भी, डोडो आज मॉरीशस का राष्ट्रीय प्रतीक चिन्ह बन गया है।
== सन्दर्भ ==
{{reflist}}
== बाहरी कड़ियाँ==
* [https://web.archive.org/web/20190928102613/https://www.youtube.com/watch?v=SrOwkNEHIlk&gl=US&hl=en&has_verified=1&bpctr=9999999999 मॉरिशस का भूगोल]
* [https://web.archive.org/web/20110629220743/http://www.picstropical.com/mauritius/ Pictures of mauritius | मॉरीशस के चित्र]
{{अफ़्रीका}}
{{हिन्द महासागर तटवर्ती देश}}
[[श्रेणी:मॉरीशस]]
[[श्रेणी:हिन्द महासागर के द्वीप]]
[[श्रेणी:द्वीप देश]]
[[श्रेणी:अफ़्रीका के द्वीप]]
[[श्रेणी:अंग्रेज़ी-भाषी देश व क्षेत्र]]
[[श्रेणी:फ़्रान्सीसी-भाषी देश व क्षेत्र]]
[[श्रेणी:अफ़्रीका के देश]]
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wikitext
text/x-wiki
{{इंफ़ोबॉक्स देश|
native_name = République de Maurice<br>मॉरिशस गणतंत्र<br>Repiblik Moris|
conventional_long_name = मॉरिशस गणराज्य |
common_name = मॉरिशस |
image_flag = Flag of Mauritius.svg |
image_coat = Coat_of_arms_of_Mauritius.svg |
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national_motto = ''"Stella Clavisque Maris Indici"''{{spaces|2}}<small>([[लैटिन]])<br />"हिन्द महासागर का सितारा और कुंजी"</small> |
national_anthem = ''मदरलैंड'' (मातृभूमि)|
official_languages = कोई आधिकारिक नहीं|
languages_type = मुख्य भाषाएँ |
languages = [[मॉरिशन क्रिओल]], <br> [[फ्रांसीसी]], [[भोजपुरी]], [[तमिल]]| [[अवधी]]
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|footnote2 = The population estimate is for the whole republic. For the island of Mauritius '''only''', as at 31 दिसम्बर 2007, it is 1,227,078<ref>{{cite web |url=http://www.gov.mu/portal/goc/cso/ei683/toc.htm |title=Population and Vital Statistics, Republic of Mauritius, Year 2007 - Highlights |publisher=Central Statistics Office (Mauritius) |accessdate=26 मई 2008 |month=March |year=2008 |archive-url=https://web.archive.org/web/20080510230951/http://www.gov.mu/portal/goc/cso/ei683/toc.htm |archive-date=10 मई 2008 |url-status=dead }}</ref>
|}}'''मॉरिशस''' ( {{Lang-fr|{{noitalic|Maurice}}}}), [[अफ़्रीका|अफ़्रीकी]] महाद्वीप के तट के दक्षिणपूर्व में लगभग 900 किलोमीटर की दूरी पर [[हिंद महासागर]] में और [[मेडागास्कर]] के पूर्व में स्थित एक द्वीपीय देश है। मॉरीशस में हिंदुओं की आबादी तीसरे नंबर पर है<ref>{{Cite web|url=https://www.hindi.studyaffairs.in/daily-current-affairs/all-about-mauritius-day-in-hindi/|title=मॉरीशस दिवस 2023 (mauritius day): जानिए इसके बारे में|last=admin|date=2023-03-11|website=स्टडी अफेयर्स|language=en-US|access-date=2023-03-11|archive-date=11 मार्च 2023|archive-url=https://web.archive.org/web/20230311173825/https://www.hindi.studyaffairs.in/daily-current-affairs/all-about-mauritius-day-in-hindi/|url-status=dead}}</ref> दुनिया में मॉरीशस द्वीप के अतिरिक्त इस गणराज्य मे, [[सेंट ब्रेंडन]], रॉड्रीगज़ और अगालेगा द्वीप भी शामिल हैं। दक्षिणपश्चिम में 200 किलोमीटर पर स्थित [[फ्रांसीसी रीयूनियन द्वीप]] और 570 किलोमीटर उत्तर पूर्व में स्थित रॉड्रीगज़ द्वीप के साथ मॉरीशस मस्कारेने द्वीप समूह का हिस्सा है। मारीशस की [[संस्कृति]], मिश्रित संस्कृति है, जिसका कारण पहले इसका [[फ्रांस]] के आधीन होना तथा बाद में ब्रिटिश स्वामित्व में आना है। मॉरीशस द्वीप [[विलुप्त]] हो चुके [[डोडो]] पक्षी के अंतिम और एकमात्र घर के रूप में भी विख्यात है।
== इतिहास ==
मॉरीशस के सबसे पुराने अभिलेख लगभग 10 वीं शताब्दी की शुरुआत के हैं जो [[द्रविड़]] ([[तमिल]]) और औस्ट्रोनेशी नाविकों के संदंर्भ से आते है। [[पुर्तगाली]] नाविकों पहले पहल यहाँ 1507 में आये और उन्होने इस निर्जन द्वीप पर एक यात्रा अड्डा स्थापित किया और फिर इस द्वीप को छोड़ कर चले गये। सन् 1598 में [[हॉलैंड]] के तीन पोत जो मसाला द्वीप (स्पाइस आइलैंड) की यात्रा पर निकले थे एक चक्रवात के दौरान रास्ता भटक कर यहाँ पहुँच गये। उन्होने इस द्वीप का नाम अपने नासाओ के युवराज मॉरिस के सम्मान में मॉरिशस रख दिया। सन्1638 में, डच लोगों ने यहाँ पहली स्थायी बस्ती बसाई। चक्रवातों वाली कठोर जलवायु परिस्थितियों और बस्ती को होने वाले लगातार नुक्सान के कारण डचो ने कुछ दशकों बाद इस द्वीप को छोड़ दिया। [[फ्रांस]], जिसका पहले से ही इसके पड़ोसी आइल बॉरबोन (अब [[रीयूनियन]]) द्वीप पर नियंत्रण था ने सन् 1715 में मॉरीशस पर कब्ज़ा कर लिया और इसका नाम बदलकर – आइल दे फ्रांस (फ्रांस का द्वीप) रख दिया। फ्रांस के शासन मे, यह द्वीप एक समृद्ध अर्थव्यवस्था के रूप में विकसित हुआ जो [[चीनी]] उत्पादन पर आधारित थी। यह आर्थिक परिवर्तन गवर्नर (राज्यपाल) फ्रेंकॉएस माहे दे लेबॉर्डॉनाइस के द्वारा शुरू किया गया था।
ब्रिटेन के साथ अपने कई सैन्य संघर्षों के दौरान, फ्रांस ने गैरकानूनी घोषित जलदस्युओं "कोर्सेर्स" को शरण दी, जो अक्सर ब्रिटिश जहाजो, जिन पर मूल्यवान व्यापार का माल लदा होता था को उनकी भारत और ब्रिटेन के मध्य होने वाली यात्राओं के दौरान लूट लेते थे। सन् 1803-1815 के दौरान हुए [[नेपोलियन]] युद्धों में ब्रिटिश इस द्वीप का नियंत्रण पाने में सफल हो गये। [[ग्रांड पोर्ट]] की लड़ाई जीतने के बावजूद, जो कि नेपोलियन की ब्रिटिशों पर एकमात्र समुद्री विजय थी, फ्रांसीसी, तीन महीने बाद, केप मैलह्युरॉ में ब्रिटेन से हार गये। उन्होनें औपचारिक रूप से 3 दिसम्बर 1810 को कुछ शर्तों के साथ समर्पण कर दिया, ये शर्तें थीं, कि द्वीप पर फ्रांसीसी भाषा का प्रयोग जारी रहेगा और आपराधिक मामलों में नागरिकों पर फ्रांस का कानून लागू होगा। ब्रिटिश शासन के अंतर्गत, इस द्वीप का नाम बदलकर वापस मॉरीशस कर दिया गया।
सन् 1965 में, ब्रिटेन (यूनाइटेड किंगडम) ने [[चागोस द्वीपसमूह]] को मॉरीशस से अलग कर दिया। उन्होने ऎसा [[ब्रिटिश हिंद महासागर क्षेत्र]] स्थापित करने के लिये किया जिससे वे [[सामरिक]] महत्व के द्वीपों का प्रयोग संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ रक्षा सहयोग के विभिन्न प्रयोजनों के लिए कर सकें। हालाँकि मॉरीशस की तत्कालीन सरकार उनके इस कदम से सहमत थी पर बाद की सरकारों ने उनके इस कदम को अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अवैध बताया है {{Fact}} और इन द्वीप समूहों पर अपना अधिकार जताया है। उनके इस दावे को, संयुक्त राष्ट्र द्वारा भी मान्यता दी गयी है {{Fact}}।
मॉरीशस ने 1968 में स्वतंत्रता प्राप्त की और देश सन् 1992 में एक [[गणतंत्र]] बना। मॉरीशस एक स्थिर लोकतंत्र है जहाँ नियमित रूप से स्वतंत्र चुनाव होते हैं और मानवाधिकारों के मामले में भी देश की छवि अच्छी है, इसके चलते यहाँ काफी विदेशी निवेश हुआ है और यह देश अफ्रीका में सबसे अधिक प्रति व्यक्ति आय वाले देशों में से एक है।
== राजनीति ==
मॉरीशस एक संसदीय लोकतंत्र है जिसकी संरचना ब्रिटेन की संसदीय प्रणाली पर आधारित है। राज्य का प्रमुख राष्ट्रपति होता है जिसका कार्यकाल पाँच वर्ष का होता है और उसका चुनाव राष्ट्रीय सभा, मॉरीशस की एकसदनीय संसद करती है। राष्ट्रीय सभा (नेशनल असेंबली) के 62 सदस्य जनता द्वारा चुने जाते हैं जबकि चार से आठ सदस्यों की नियुक्ति चुनाव में हारे "श्रेष्ट पराजित" उम्मीदवारों के बीच से जातीय अल्पसंख्यकों का प्रतिनिधित्व करने के लिये तब की जाती है जब इन समुदायों को चुनाव से उचित प्रतिनिधित्व ना मिला हो। प्रधानमंत्री और मंत्री परिषद सरकार का नेतृत्व करते हैं। सरकार पांच साल के आधार पर निर्वाचित होती है। सबसे हाल के आम चुनाव 3 जुलाई 2005 में मुख्य भूमि के सभी 20 निर्वाचन क्षेत्रों के साथ ही रॉड्रीगज़ द्वीप के निर्वाचन क्षेत्र में भी कराये गये थे। अंतरराष्ट्रीय मामलों में, मॉरीशस हिंद महासागर आयोग, दक्षिणी अफ्रीकी विकास समुदाय, राष्ट्रमंडल और ला फ्रेंकोफोनी (फ़्रांसीसी बोलने वाले देशों) का हिस्सा है। सन् 2006 में, मॉरीशस को पुर्तगाली भाषाई देशों के समुदाय का एक प्रेक्षक सदस्य बनने को कहा गया जिससे यह उन देशों के और करीब हो सके। मॉरीशस की कोई सेना नहीं है, लेकिन इसके पास एक [[तटरक्षक]] बल तथा [[पुलिस]] और सुरक्षा बल हैं।
== जिले और अधीन क्षेत्र ==
[[चित्र:Mauritius districts numbered.svg|Thumb|right|250px|मॉरीशस के जिले]]
मॉरीशस द्वीप नौ जिलों में विभाजित है:
# [[Black River District, Mauritius|ब्लैक रि]]
#[[Black River District, Mauritius|वर]] (राजधानी: [[बैम्बॉस]])
# [[फ्लाक़]] (राजधानी: [[सेन्टर दे फ्लाक़]])
# [[ग्रांड पोर्ट]] (राजधानी: [[माहेबॉर्ग]])
# [[मोका]] (राजधानी: [[क्वार्टियर मिलिटायरे]])
# [[पैम्प्लेमूजे़स]] (राजधानी: [[ट्रिओलेट]])
# [[प्लाईनेस् विल्हेम्स]] (राजधानी: [[रोज़ हिल]]/ [[क्यूरेपाईप]])
# [[पोर्ट लुई]] (मॉरीशस की राजधानी)
# [[रिवियेरे दु रेम्पार्त (मॉरीशस)|रिवियेरे दु रेम्पार्त]] (राजधानी: [[मापाउ]])
# [[सवान्ने]] (राजधानी: [[सूलेक]])
=== अधीन क्षेत्र ===
* [[Rodrigues (island)|रॉड्रीगज़]], द्वीप जो मॉरीशस के उत्तर पूर्व में 560 किलोमीटर पर स्थित है, जिसे अक्टूबर 2002 में आंशिक स्वायत्ता प्रदान की गयी, स्वायत्ता मिलने से पहले यह मॉरीशस का 10 वाँ प्रशासनिक जिला था।
* [[अगालेगा]], मॉरीशस के उत्तर में 933 किलोमीटर पर दो छोटे टापू हैं।
* [[कार्गादोस काराजोस शोआल्स]], जिसे सेंट ब्रेन्डन द्वीप के नाम से भी जाना जाता है मॉरीशस के उत्तर में 402 किलोमीटर पर स्थित है।
=== मॉरीशस के अन्य क्षेत्र ===
* [[साउदेन टापू]] (पूर्वी साउदेन टापू सहित)
* [[नजारेथ टापू]]
* [[साया दे मल्हा टापू]]
* [[हॉकिन्स टापू]]
* [[चागोस द्वीपसमूह]]
मॉरीशस निम्न क्षेत्रों पर भी अधिकार जताता है:<ref name="CIA-Transnational issues">{{cite web |url=https://www.cia.gov/library/publications/the-world-factbook/geos/mp.html#Issues |title=CIA - The World Factbook -- Mauritius |accessdate=2007-11-194 |publisher=CIA |archive-url=https://web.archive.org/web/20151019084557/https://www.cia.gov/library/publications/the-world-factbook/geos/mp.html#Issues |archive-date=19 अक्तूबर 2015 |url-status=live }}</ref>
* [[ट्रोमेलिन द्वीप]]
== भूगोल ==
[[चित्र:Mauritius-Map.png|thumb|right|200px|मॉरीशस का मानचित्र]]
मॉरीशस मास्कारेने द्वीप समूह का हिस्सा है। इस द्वीपसमूह की श्रृंखला उन अंत:समुद्री ज्वालामुखीय विस्फोटों के कारण बनी है जो अब सक्रिय नहीं हैं। यह ज्वालामुखीय विस्फोट अफ्रीकी प्लेट के रीयूनियन तप्तबिन्दु के ऊपर सरकने के कारण हुए थे। मॉरीशस द्वीप एक केंद्रीय पठार के चारों ओर बना है, जिसकी उच्चतम चोटी [[पितोन डे ला पेतित रिवियेरे नोएरे]] 828 मीटर (2717 फुट) उंची है और इसके दक्षिण में स्थित है। पठार के आसपास, मूल [[गर्त]] फिर भी पहाड़ों से अलग दिखाई पड़ता है।
स्थानीय जलवायु उष्णकटिबंधीय है, जो दक्षिणपूर्व की हवाओं द्वारा संशोधित होती है। यहाँ मई से नवंबर तक शुष्क सर्दियों पड़तीं हैं और नवम्बर से मई का मौसम गर्म, आद्र और गीली गर्मी का होता है। विरोधी-चक्रवात देश को मई से सितंबर के दौरान प्रभावित करते है। चक्रवातों का समय नवंबर-अप्रैल होता है। हॉलैंडा (1994) और दीना (2002) पिछले दो [[चक्रवात]] हैं जिन्होने द्वीप को सबसे ज्यादा प्रभावित किया है।
उत्तरपश्चिम में स्थित [[पोर्ट लुई]] इस द्वीप की राजधानी और सबसे बड़ा शहर है। अन्य महत्वपूर्ण शहरों में [[क्यूरेपाइप]], [[वकोआस]], [[फ़ीनिक्स]], [[कुआर्ते बोर्नेस]], [[रोज़ हिल]] और [[बीयू-बासिन]] शामिल है।
यह् द्वीप अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है। उदाहरण के लिए, लेखक [[मार्क ट्वेन]], ने अपने निजी यात्रा वृतांत ‘फॉलॉइंग द एक्वेटर’ में लिखा है कि " मॉरिशस के देख कर आपको विचार आता है पहले मॉरिशस बना और फिर स्वर्ग और स्वर्ग, मॉरीशस की एक नकल मात्र है।”
== अर्थव्यवस्था ==
[[चित्र:Evening Port Louis.jpg|thumb|300px|मॉरीशस की राजधानी [[पोर्ट लुई]] का एक विहंगम दृश्य.]]
सन् 1968 में आजादी के बाद से, मारीशस एक निम्न आय वाली, कृषि उत्पाद आधारित अर्थव्यवस्था से विकसित होकर एक विविधतापूर्ण मध्यम आय वाली अर्थव्यवस्था में परिवर्तित हो गया है जिसमे तेजी से बढ़ता औद्योगिक, वित्तीय और पर्यटन क्षेत्र शामिल है। अधिकांश अवधि में वार्षिक वृद्धि दर, 5 % से 6 % के बीच दर्ज की गई है। यह दर बढ़ती [[जीवन प्रत्याशा]], घटती [[शिशु मृत्यु दर]] और [[बुनियादी ढांचे]] में सुधार से परिलक्षित होती है।
सन् 2005 में, अनुमानित 10155 अमरीकी डालर, क्रयशक्ति समता (पीपीपी), के साथ मॉरीशस अफ्रीका में प्रति व्यक्ति [[सकल घरेलू उत्पाद]] के हिसाब से सातवें स्थान पर है, इससे आगे हैं रीयूनियन (19233 अमरीकी डॉलर, वास्तविक विनिमय दरों पर), [[सेशल्स]] (13887 अमरीकी डालर, पीपीपी पर), [[गैबॉन]] (12742 अमरीकी डालर, पीपीपी पर), [[बोत्सवाना]] (12057 अमरीकी डालर पीपीपी पर), [[भूमध्य रेखीय गिनी]] (11999 अमरीकी डालर, पीपीपी पर) और [[लीबिया]] (10727 अमरीकी डालर, पीपीपी पर)।
अर्थव्यवस्था मुख्यतः गन्ना बागान, पर्यटन, कपड़ा और सेवा क्षेत्र पर निर्भर है, लेकिन अन्य क्षेत्रों में भी तेजी से विकास हो रहा हैं। मॉरीशस, लीबिया और सेशल्स केवल तीन ऎसे अफ्रीकी देश हैं जिनका दर्ज़ा " [[मानव विकास सूचकांक]]<nowiki/>” के हिसाब से ‘उच्च’ है। (रीयूनियन, को फ्रांस का हिस्से मानते हुए, संयुक्त राष्ट्र ने मानव विकास सूचकांक की वरीयता श्रेणी में सूचीबद्ध नहीं किया है)
गन्ना 90% कृषि योग्य भूमि पर उगाया जाता है और जिससे कुल निर्यात आय का 25% प्राप्त होता है। लेकिन 1999 में पड़े भयंकर सूखे से गन्ने की फसल बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुई थी। सरकार की विकास योजनायें विदेशी निवेश पर आधारित है। मारीशस ने 9000 से अधिक अपतटीय संस्थाओं को आकर्षित किया है जिनका उद्देश्य भारत और [[दक्षिण अफ्रीका]] से व्यापार करना है जबकि अकेले बैंकिंग क्षेत्र में निवेश 1 अरब डॉलर से अधिक पहुँच गया है। दिसम्बर 2004 में बेरोजगारी की दर 7.6 % थी। फ्रांस देश का सबसे बड़ा व्यापारिक साझीदार है जिसका इस देश के साथ न सिर्फ निकट संबंध है, बल्कि वो इसे विभिन्न रूपों में तकनीकी सहायता प्रदान करता है।
स्थानीय निवासिओं को कम कीमतों पर आयात करने की सुविधा देने और अधिक पर्यटकों जो फिलहाल [[दुबई]] और [[सिंगापुर]] जाते हैं, को आकर्षित के लिए मॉरीशस अगले चार साल में एक [[शुल्क मुक्त]] (ड्यूटी फ्री) द्वीप बनने की दिशा में प्रयासरत है। कई उत्पादों पर ड्यूटी (शुल्क) समाप्त कर दिया गया है और 1850 से अधिक उत्पादों पर जिनमें कपड़े, भोजन, गहने, [[छायांकन]] (फोटोग्राफिक) उपकरण, [[श्रव्य दृश्य]] उपकरण और प्रकाश व्यवस्था के उपकरण शामिल है पर शुल्क घटा दिया गया है। इसके अतिरिक्त, नए व्यावसायिक अवसरों को आकर्षित करने के उद्देश्य से आर्थिक सुधारों को भी लागू किया गया है। हाल ही में, 2007-2008 के बजट में वित्त मंत्री राम सीतानन ने कंपनी (कार्पोरेट) कर को घटा कर 15 % कर दिया है {{तथ्य}}। ब्रिटिश अमेरिकी इंवेस्टमेंट कंपनी मॉरीशस में [[मर्सिडीज बेंज]], [[पीजो]], [[मित्सुबिशी]] और साब कारों की बिक्री का प्रतिनिधित्व करती है।
ए डी बी नेटवर्क की योजना पूरे मॉरीशस में लोगों को वायरलेस इंटरनेट पहुँचाने की है, अभी तक यह पहुँच द्वीप के 60% क्षेत्र और 70% जनसंख्या के पास है।
[[भारत]] के कुल 10.98 अरब अमरीकी डालर के [[प्रत्यक्ष विदेशी निवेश]] में मॉरीशस का स्थान पहला है। शीर्ष 2000 और जनवरी 2005 के बीच होने वाला मॉरीशस का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश मुख्यत: बिजली के उपकरण, [[दूरसंचार]], [[ईंधन]], [[सीमेंट]] और जिप्सम उत्पाद तथा सेवा क्षेत्र (वित्तीय और गैर वित्तीय) जैसे विभिन्न क्षेत्रों में आकर्षित है।
== जनसाँख्यिकी ==
[[File:Mauritius population pyramid 2011.svg|thumb|2011 की जनगणना के अनुसार मॉरीशस का [[जनसंख्या पिरामिड]]।]]
मॉरीशस का समाज विभिन्न जातीय समूहों के लोगों से मिल कर बना है। 1 जुलाई 2019 तक मॉरीशस गणराज्य की अनुमानित जनसंख्या 1,265,985 थी, जिसमें 626,341 पुरुष और 639,644 महिलाएं थीं। मॉरीशस द्वीप पर जनसंख्या 1,222,340 थी, और रोड्रिग्स द्वीप की जनसंख्या 43,371 था। अगालेगा और सेंट ब्रैंडन की अनुमानित जनसंख्या 274 थी। मॉरीशस, अफ्रीका महाद्वीप में दूसरा सबसे अधिक जनसंख्या घनत्व वाला देश है। 1982 में एक संवैधानिक संशोधन के बाद, जनगणना के उद्देश्य के लिए किसी मॉरीशियाई को अपनी जातीय पहचान प्रकट करने की कोई आवश्यकता नहीं है। जातीयता पर आधिकारिक आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं। 1972 की जनगणना, जातीय आधार पर होने वाली अंतिम जनगणना थी। <ref>{{cite news|url=https://www.lexpress.mu/article/critical-appraisal-best-loser-system|title=A critical appraisal of the Best Loser System|newspaper=[[L'Express (Mauritius)]]|date=5 June 2008|access-date=11 November 2017|author=La Redaction}}</ref><ref>{{cite web|url=http://www.defimedia.info/blog/item/18524-debate-on-best-loser-system.html|title=Debate on Best Loser System|publisher=Le Défi Media Group|date=10 September 2012|access-date=21 January 2015|author=M. Rafic Soormally|url-status=dead|archive-url=https://web.archive.org/web/20150121084740/http://www.defimedia.info/blog/item/18524-debate-on-best-loser-system.html|archive-date=21 January 2015|df=dmy-all}}</ref> मॉरीशस एक बहुजातीय समाज है, जिसमें भारतीय, अफ्रीकी, चीनी और यूरोपीय (ज्यादातर फ्रांसीसी) मूल के व्यक्ति शामिल हैं।
=== भाषा ===
[[मॉरीशस की भाषा]]
मॉरीशस की आधिकारिक भाषा [[अंग्रेजी]] है, इसलिए सरकार का सारा प्रशासनिक कामकाज अंग्रेजी में होता है। शिक्षा प्रणाली में अंग्रेजी के साथ [[फ़्रांसीसी]] का भी इस्तेमाल किया जाता है। फ्रांसीसी भाषा मीडिया की मुख्य भाषा है, चाहें प्रसारण हो या मुद्रण। इसके अलावा व्यापार और उद्योग जगत के मामलों में भी मुख्यतः [[फ्रांसीसी]] ही प्रयोग में आती है। सबसे व्यापक रूप से यहाँ मॉरीशियन [[क्रेयोल]] भाषा बोली जाती है। [[हिन्दी]] भी एक बड़े वर्ग द्वारा बोली व समझी जाती है। देखें ([[मॉरिशस में हिन्दी]]।
=== धर्म ===
{{Pie chart
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|caption = मॉरिशस में धर्म (2011 जनगणना)<ref name="2011 Census Religion"/>
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}}
[[सांख्यिकी मॉरीशस]] द्वारा की गयी 2011 की जनगणना के अनुसार, 48.5% मॉरिशियाई जनसंख्या [[हिन्दु धर्म]] का पालन करती है, इसके बाद 32.7% ईसाई, 17.2% मुस्लिम और लगभग 0.7% अन्य धर्मों को मानती है। 0.7% लोगों ने स्वयं को नास्तिक या अधार्मिक बताया जबकि 0.1% ने कोई उत्तर नहीं दिया।<ref name="2011 Census Religion">{{cite web|url=http://statsmauritius.govmu.org/English/CensusandSurveys/Documents/HPC/2011/HPC_TR_Vol2_Demography_Yr11.pdf|publisher=Statistics Mauritius, Government Portal of Mauritius|page=68|title=Resident population by religion and sex|access-date=13 April 2020}}</ref>
== संस्कृति ==
[[चित्र:Mauritius2.jpg|right|thumb|250px|मॉरिशस में शंकर की मूर्ति]]
[[चित्र:Maurice-plage.jpg|right|thumb|250px|मॉरीशस में सागर तट]]
मॉरीशस को इसके स्वादिष्ट खाने से भी जाना जाता है, जो भारतीय, चीनी, क्रेयोल और यूरोपियन खानो का मिश्रण है।
इस द्वीप पर [[रम]] का उत्पादन बड़े पैमाने पर होता है। 1638 में डच लोगों ने मॉरीशस को सबसे पहले [[गन्ना]] से परिचित कराया। डच गन्ने की खेती मुख्यतः [[अरक]] (रम का एक पूर्व प्रकार) के उत्पादन के लिए करते थे। लेकिन फ्रांस और ब्रिटेन के शासन के दौरान यहाँ गन्ने की खेती को बड़े पैमाने पर किया गया जिसने इस द्वीप के आर्थिक विकास में काफी योगदान दिया।{{तथ्य}} [[पियरे चार्ल्स फ्रेंकोएज़ हरेल]] पहला व्यक्ति था जिसने 1850 में मॉरीशस में रम के स्थानीय [[आसवन]] का प्रस्ताव किया।
[[सेगा]] स्थानीय लोक संगीत है। सेगा मूलत: अफ्रीकी संगीत है जिसमे परंपरागत वाद्यो का उपयोग होता है जैसे '''रवाने''' जिसे बकरी की त्वचा से बनाया जाता है। आमतौर पर सेगा में गुलामी के दिनों की यातनाओं का वर्णन होता है साथ ही इन गीतों में आजकल के दौर में अश्वेतों की सामाजिक समस्याओं को भी उठाया जाता है। आमतौर पर पुरुषों वाद्य बजाते हैं और महिलायें साथ में नृत्य करती हैं। तटीय क्षेत्र के होटलों में ये शो नियमित रूप से आयोजित किये जाते है।
1847 में मॉरीशस [[डाक टिकट]] जारी करने वाला पाँचवां देश बना। यहाँ से दो प्रकार के डाक टिकट जारी किए गये जिन्हें तब '''मॉरीशस "डाकघर" टिकट''' के नाम से जाना जाता था। एक टिकट एक "लाल पेनी" और दूसरी " दो नीले पेंस" मूल्य वर्ग की थी और आज यह टिकट शायद दुनिया की सबसे प्रसिद्ध और मूल्यवान टिकटें है।
मॉरीशस की जब इसकी खोज हुई थी, तब यह द्वीप एक अज्ञात पक्षी प्रजाति का घर था जिसे, [[पुर्तगाल|पुर्तगालियों]] ने [[डोडो]] (मूर्ख) कह कर पुकारा क्योकि यह बहुत अक्लमंद नहीं लगते थे। लेकिन, 1681 तक सभी डोडो पक्षियों को बसने वालों और उनके पालतू जानवरों ने मार दिया। एक वैकल्पिक सिद्धांत बताता है कि बसने वालों के साथ आये जंगली सूअरों ने धीमी गति से प्रजनन करने वाले डोडो के घोंसले उजाड़ दिये। फिर भी, डोडो आज मॉरीशस का राष्ट्रीय प्रतीक चिन्ह बन गया है।
== सन्दर्भ ==
{{reflist}}
== बाहरी कड़ियाँ==
* [https://web.archive.org/web/20190928102613/https://www.youtube.com/watch?v=SrOwkNEHIlk&gl=US&hl=en&has_verified=1&bpctr=9999999999 मॉरिशस का भूगोल]
* [https://web.archive.org/web/20110629220743/http://www.picstropical.com/mauritius/ Pictures of mauritius | मॉरीशस के चित्र]
{{अफ़्रीका}}
{{हिन्द महासागर तटवर्ती देश}}
[[श्रेणी:मॉरीशस]]
[[श्रेणी:हिन्द महासागर के द्वीप]]
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[[श्रेणी:अफ़्रीका के द्वीप]]
[[श्रेणी:अंग्रेज़ी-भाषी देश व क्षेत्र]]
[[श्रेणी:फ़्रान्सीसी-भाषी देश व क्षेत्र]]
[[श्रेणी:अफ़्रीका के देश]]
2ymim30sj9xd24hzra8pilo3pdmpj9k
मुहम्मद
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2026-05-02T23:09:17Z
PappUwU
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मूसा व ईसा के बीच में कॉमा
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wikitext
text/x-wiki
{{ज्ञानसन्दूक व्यक्ति
| name = मुह़म्मद <br><small>इस्लामी पैगंबर</small> <br /> <small> مُحَمَّد </small>
| honorific_suffix = <small>[[इस्लाम के पैग़म्बर, रसूलुल्लाह]]</small>
| image = Calligraphic representation of Muhammad's name.jpg
| image_size = 299px
| caption = [[अरबी कैलीग्राफ़ी|अरबी सुलेख]] में '''मुहम्मद''' का नाम
| birth_name = मुह़म्मद इब्न अ़ब्दुल्लाह अल हाशिम
| birth_date = 570 ईसवी
| birth_place = [[मक्का|मक्का (शहर)]], [[मक्का]] प्रदेश, [[इस्लाम से पहले का अरब|अरब]]<br />(अब [[सउदी अरब|सऊदी अरब]])
| death_date = {{Death date and age|632|06|08|570|04|26|df=y}}
| death_place = [[मदीना|यस्रिब]], [[अरबी प्रायद्वीप|अरब]] (अब [[मदीना]], [[हिजाज़|हेजाज़]], [[सउदी अरब|सऊदी अरब]])
| death_cause = बुख़ार
| body_discovered =
| resting_place = [[मस्जिद ए नबवी]], [[मदीना]], [[हिजाज़|हेजाज़]], [[सउदी अरब|सऊ़दी अ़रब]]
| known = इस्लाम के पैगंबर
| nationality =
| other_names = मुसतफ़ा, अह़मद, ह़ामिद ''[[मुहम्मद के नाम और ख़िताब|मुहम्मद के नाम]]''
| religion = [[इस्लाम]]
| spouse = '''पत्नियां:''' [[खदीजा बिन्त खुवायलद]] (५९५–६१९)<br />[[सौदा बिन्ते ज़मआ]] (६१९–६३२)<br />[[आइशा|आयशा बिन्त अबू बक्र]] (६१९–६३२)<br />[[हफ्सा बिन्त उमर]] (६२४–६३२)<br />[[ज़ैनब बिन्त खुज़ैमा]] (६२५–६२७)<br />[[हिन्द उम्मे सलमा]] (६२९–६३२)<br />[[ज़ैनब बिन्त जहश]] (६२७–६३२)<br />[[जुवेरिया बिन्त अल-हरिस|जुवेरिया बिन्त अल-हारिस]] (६२८–६३२)<br />[[उम्मे हबीबा रमला बिन्त अबू सुफयान|उम्मे हबीबा रमला]] (६२८–६३२)<br />[[रेहाना बिन्त ज़ैद]] (६२९–६३१)<br />[[सफिय्या बिन्ते हुयेय]] (६२९–६३२)<br />[[मैमूना बिन्ते अल हारिस]] (६३०–६३२)<br />[[मरिया अल-क़ीब्टिय्या|मारिया अल किबतिया]] (६३०–६३२)
| parents = '''पिता''' [[अब्दुल्लाह इब्न अब्दुल मुत्तलिब|अब्दुल्लह इब्न अब्दुल मुत्तलिब]]<br />'''माता''' [[आमिना बिन्त वहब]]
| children = '''बेटे''' [[क़ासिम इब्न मुहम्मद|अल-क़ासिम]], [[अब्दुल्लाह इब्न मुहम्मद|अब्दुल्लाह]], [[इब्राहिम इब्न मुहम्मद|इब्राहिम]]<br />'''बेटियाँ''' [[ज़ैनब बिन्त मुहम्मद|ज़ैनब]], [[रुकैया बिन्त मुहम्मद|रुकैया]], [[उम्मे कुलसूम बिन्त मुहम्मद|उम्मे कुलसूम]], [[फ़ातिमा|फ़ातिमा ज़हरा]]
| relatives = [[अहल अल-बैत]]
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}}
{{मुहम्मद}}
{{इस्लाम}}
'''मुहम्मद''' <ref group="n">[[Arabic name|Full name]]: '''Abū al-Qāsim Muḥammad ibn ʿAbd Allāh ibn ʿAbd al-Muṭṭalib ibn Hāšim''' ({{lang-ar|ابو القاسم محمد ابن عبد الله ابن عبد المطلب ابن هاشم}}, lit: Father of [[Qasim ibn Muhammad|Qasim]] Muhammad son of [[Abdallah ibn Abd al-Muttalib|Abd Allah]] son of [[Abd al-Muttalib]] son of [[Hashim ibn Abd Manaf|Hashim]])</ref> <ref group="n">Classical Arabic pronunciation</ref> 570 ई - 8 जून 632 ई) <ref name="Goldman">Elizabeth Goldman (1995), p. 63, gives 8 June 632 CE, the dominant Islamic tradition. Many earlier (primarily non-Islamic) traditions refer to him as still alive at the time of the [[Muslim conquest of the Levant#Conquest of Palestine|invasion of Palestine]]. See Stephen J. Shoemaker,''The Death of a Prophet: The End of Muhammad's Life and the Beginnings of Islam,'' page 248, University of Pennsylvania Press, 2011.</ref> इस्लाम के संस्थापक थें। <ref name="OEIW">{{cite encyclopedia |author=Alford T. Welch, Ahmad S. Moussalli, Gordon D. Newby |title=Muḥammad |encyclopedia=The Oxford Encyclopedia of the Islamic World |editor=John L. Esposito |publisher=Oxford University Press |location=Oxford |year=2009 |url=http://www.oxfordislamicstudies.com/article/opr/t236/e0550 |quote=The Prophet of Islam was a religious, political, and social reformer who gave rise to one of the great civilizations of the world. From a modern, historical perspective, Muḥammad was the founder of Islam. From the perspective of the Islamic faith, he was God's Messenger (''rasūl Allāh''), called to be a "warner," first to the Arabs and then to all humankind. |url-status=live |archiveurl=https://web.archive.org/web/20170211050118/http://www.oxfordislamicstudies.com/article/opr/t236/e0550 |archivedate=11 February 2017 |df=dmy-all }} {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20170211050118/http://www.oxfordislamicstudies.com/article/opr/t236/e0550 |date=11 फ़रवरी 2017 }}</ref> [[इस्लामी पौराणिक कथाएँ|इस्लामिक मान्यता]] के अनुसार, वह एक पैगम्बर और [[अल्लाह|ईश्वर]] के संदेशवाहक थे, जिन्हें [[इस्लाम]] के पैग़म्बर भी कहते हैं, जो पहले [[आदम]] , [[अब्राहम|इब्राहीम]] , [[मूसा]], [[ईसा]] (येशू) और अन्य पैगम्बरोऺ द्वारा प्रचारित एकेश्वरवादी शिक्षाओं को प्रस्तुत करने और पुष्टि करने के लिए भेजे गए थे। <ref name=OEIW/><ref>Esposito (2002b), pp. 4–5.</ref><ref>{{cite book |last=Peters |first=F.E. |title=Islam: A Guide for Jews and Christians |year=2003 |publisher=Princeton University Press |isbn=978-0-691-11553-5 |page=[https://archive.org/details/islamguideforjew00fepe/page/9 9] |url=https://archive.org/details/islamguideforjew00fepe/page/9 }}</ref><ref>{{cite book |last=Esposito |first=John |title=Islam: The Straight Path (3rd ed.) |year=1998 |publisher=Oxford University Press |isbn=978-0-19-511234-4 |pages=[https://archive.org/details//page/9 9, 12] |url=https://archive.org/details//page/9 }}</ref> इस्लाम की सभी मुख्य शाखाओं में उन्हें [[अल्लाह]] के अंतिम पैगम्बर के रूप में देखा जाता है, हालांकि कुछ आधुनिक संप्रदाय इस विश्वास से अलग भी नज़र आते हैं। <ref group="n">The Ahmadiyya considers Muhammad to be the "Seal of the Prophets" (Khātam an-Nabiyyīn) and the last law-bearing Prophet but not the last Prophet. See:
* {{cite book|url=https://books.google.com/?id=MdRth02Q6nAC&pg=PA134&dq#v=onepage&q&f=false|title=Islam and the Ahmadiyya Jama'at: History, Belief, Practice|author=Simon Ross Valentine|publisher=Columbia University Press|year=2008|isbn=978-1-85065-916-7|page=134}}
* {{cite web|url=http://www.alislam.org/books/truth/finality.html|title=Finality of Prophethood {{!}} Hadhrat Muhammad (PUBH) the Last Prophet|publisher=[[Ahmadiyya Muslim Community]]|archiveurl=https://web.archive.org/web/20110724234544/http://www.alislam.org/books/truth/finality.html|archivedate=24 जुलाई 2011|access-date=9 दिसंबर 2018|url-status=dead|df=dmy-all}}
There are also smaller sects which believe Muhammad to be not the last Prophet:
* The [[Nation of Islam]] considers [[Elijah Muhammad]] to be a prophet (source: African American Religious Leaders – p. 76, Jim Haskins, Kathleen Benson – 2008).
* [[United Submitters International]] consider [[Rashad Khalifa]] to be a prophet. (Source: Daniel Pipes, ''Miniatures: Views of Islamic and Middle Eastern Politics'', p. 98 (2004))</ref> मुसलमान यह विश्वास रखते हैं कि कुरान जिब्राईल (ईसाईयत में गैब्रियल) नामक एक फरिश्ते के द्वारा, मुहम्मद को ७वीं सदी के अरब में, लगभग ४० साल में याद-कंठस्थ कराया गया था। मुहम्मद , विश्वासियों को एकजुट करने में एक मुस्लिम धर्म स्थापित करने में, एक साथ इस्लामिक धार्मिक विश्वास के आधार पर कुरान के साथ-साथ उनकी शिक्षाओं और प्रथाओं के साथ नज़र आते हैं।
लगभग 570 ई (आम-[[अल-फ़ील]] (हाथी का वर्ष)) में अरब के शहर मक्का में पैदा हुए, मुहम्मद की छह साल की उम्र तक उनके माता-पिता का देहांत हो चुका था। <ref>{{Cite web|url=https://www.al-islam.org/life-muhammad-prophet-sayyid-saeed-akhtar-rizvi/early-years|title=Early Years|website=Al-Islam.org|language=en|access-date=2018-10-18|archive-url=https://web.archive.org/web/20181120133729/https://www.al-islam.org/life-muhammad-prophet-sayyid-saeed-akhtar-rizvi/early-years|archive-date=20 नवंबर 2018|url-status=dead}}</ref> ; वह अपने पैतृक चाचा अबू तालिब और अबू तालिब की पत्नी फातिमा बिन्त असद की देखभाल में थे। <ref>{{cite book|last1=Razwy|first1=Sayed Ali Asgher|title=A Restatement of the History of Islam & Muslims|pages=165–166}}</ref> समय-समय पर, वह प्रार्थना के लिए कई रातों के लिए हिरा नाम की पर्वत गुफा में अल्लाह की याद में बैठते। बाद में 40 साल की उम्र में उन्होंने गुफा में जिब्रील अलै. को देखा, <ref name="abraha">* {{cite journal |doi=10.1017/S0041977X00049016 |last1=Conrad |first1=Lawrence I. |year=1987 |title=Abraha and Muhammad: some observations apropos of chronology and literary topoi in the early Arabic historical tradition1 |url=http://journals.cambridge.org/action/displayAbstract?fromPage=online&aid=3863868&fulltextType=RA&fileId=S0041977X00049016 |journal=Bulletin of the School of Oriental and African Studies |volume=50 |issue=2 |pages=225–40 |url-status=live |archiveurl=https://web.archive.org/web/20120121152608/http://journals.cambridge.org/action/displayAbstract?fromPage=online&aid=3863868&fulltextType=RA&fileId=S0041977X00049016 |archivedate=21 January 2012 |df=dmy-all }}
* {{Cite book |publisher=G. Bell |last=Sherrard Beaumont Burnaby |title=Elements of the Jewish and Muhammadan calendars: with rules and tables and explanatory notes on the Julian and Gregorian calendars |year=1901 |url=https://archive.org/details/elementsofjewish00burnuoft |page=465 |access-date=9 दिसंबर 2018 |archive-url=https://web.archive.org/web/20190408065309/https://archive.org/details/elementsofjewish00burnuoft |archive-date=8 अप्रैल 2019 |url-status=live }}
* {{Cite journal |pages=6–12 |last=Hamidullah |first=Muhammad |authorlink=Muhammad Hamidullah |title=The Nasi', the Hijrah Calendar and the Need of Preparing a New Concordance for the Hijrah and Gregorian Eras: Why the Existing Western Concordances are Not to be Relied Upon |journal=The Islamic Review & Arab Affairs |date=February 1969 |url=http://aaiil.org/text/articles/islamicreview/1969/02feb/islamicreview_196902.pdf |url-status=dead |archiveurl=https://web.archive.org/web/20121105021544/http://aaiil.org/text/articles/islamicreview/1969/02feb/islamicreview_196902.pdf |archivedate=5 November 2012 |df=dmy-all }}</ref><ref name="EncWorldHistory">''Encyclopedia of World History'' (1998), p. 452</ref> जहां उन्होंने कहा कि उन्हें अल्लाह से अपना पहला [[इल्हाम]] प्राप्त हुआ। तीन साल बाद, 610 में, <ref>Howarth, Stephen. ''Knights Templar.'' 1985. {{ISBN|9780826480347}} p. 199</ref>
मुहम्मद ने सार्वजनिक रूप से इन रहस्योद्घाटनों का प्रचार करना शुरू किया, <ref name="Al-A'zami2">[[Muhammad Mustafa Al-A'zami]] (2003), ''The History of The Qur'anic Text: From Revelation to Compilation: A Comparative Study with the Old and New Testaments'', pp. 26–27. UK Islamic Academy. {{ISBN|978-1872531656}}.</ref> यह घोषणा करते हुए कि " ईश्वर एक है ", अल्लाह को पूर्ण "समर्पण" (इस्लाम) <ref>{{Cite web|url=http://www.oxfordislamicstudies.com/article/opr/t125/e1087|title=Islam: An Overview - Oxford Islamic Studies Online|website=www.oxfordislamicstudies.com|language=en|access-date=2018-07-25|archive-url=https://web.archive.org/web/20181019080456/http://www.oxfordislamicstudies.com/article/opr/t125/e1087|archive-date=19 अक्तूबर 2018|url-status=live}}</ref> कार्यवाही का सही तरीका है (दीन), <ref>{{cite encyclopedia |author=Anis Ahmad |title=Dīn |encyclopedia=The Oxford Encyclopedia of the Islamic World |editor=John L. Esposito |publisher=Oxford University Press |location=Oxford |year=2009 |url=http://www.oxfordislamicstudies.com/article/opr/t236/e1102 |subscription=yes |quote=A second important aspect of the meaning of the term emerges in Meccan revelations concerning the practice of the Prophet Abraham. Here it stands for the straight path (al-dīn al-ḥanīf) toward which Abraham and other messengers called the people [...] The Qurʿān asserts that this was the path or practice followed by Abraham [...] In the final analysis, dīn encompasses social and spiritual, as well the legal and political behaviour of the believers as a comprehensive way of life, a connotation wider than the word "religion." |url-status=live |archiveurl=https://web.archive.org/web/20171205093241/http://www.oxfordislamicstudies.com/article/opr/t236/e1102 |archivedate=5 December 2017 |df=dmy-all }} {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20171205093241/http://www.oxfordislamicstudies.com/article/opr/t236/e1102 |date=5 दिसंबर 2017 }}</ref> और वह इस्लाम के अन्य पैगम्बर के समान, ख़ुदा के पैगंबर और दूत हैं। <ref name = "Peters 2003 9">F.E. Peters (2003), p. 9.</ref><ref name="EspositoI">Esposito (1998), p. 12; (1999) p. 25; (2002) pp. 4–5</ref><ref name="EoI-Muhammad">{{Cite encyclopedia |edition=2nd |publisher=Brill |volume=7 |pages=[https://archive.org/details//page/360 360–376] |last2=Welch |first2=A.T. |last1=Buhl |first1=F. |title=Muḥammad |encyclopedia=[[Encyclopaedia of Islam]] |isbn=978-90-04-09419-2 |year=1993 }}</ref>
मुहम्मद ने शुरुआत में कुछ अनुयायियों को प्राप्त किया,और मक्का में अविश्वासियों से शत्रुता का अनुभव किया। चल रहे उत्पीड़न से बचने के लिए,उन्होंने कुछ अनुयायियों को 615 ई में [[अबीसीनिया का पठार|अबीसीनिया]] भेजा, इससे पहले कि वह और उनके अनुयायियों ने मक्का से मदीना (जिसे [[यस्रीब]] के नाम से जाना जाता था)से पहले 622 ई में [[हिजरत]] (प्रवास या स्थानांतरित)किया। यह घटना हिजरा या इस्लामी कैलेंडर की शुरुआत को चिह्नित करता है,जिसे हिजरी कैलेंडर के रूप में भी जाना जाता है। मदीना में,मुहम्मद साहब ने मदीना के संविधान के तहत जनजातियों को एकजुट किया। दिसंबर 622 में,मक्का जनजातियों के साथ आठ वर्षों के अंतराल युद्धों के बाद,मुहम्मद साहब ने 10,000 मुसलमानों की एक सेना इकट्ठी की और मक्का शहर पर चढ़ाई की। विजय बहुत हद तक अनचाहे हो गई, 632 में विदाई तीर्थयात्रा से लौटने के कुछ महीने बाद, वह बीमार पड़ गए और वह इस दुनिया से विदा हो गए। <ref>"Muhammad", Encyclopedia of Islam and the Muslim world
</ref><ref name="Lapidus 2002 pp 0">
See:
* Holt (1977a), p. 57
* Lapidus (2002), pp. 31–32
</ref>
रहस्योद्घाटन (प्रत्येक को [[आयत|आयह]] के नाम से जाना जाता है, (अल्लाह के इशारे), जो मुहम्मद सल्लल्लाहु तआला अलैही वसल्लम ने दुनिया से जाने तक प्राप्त करने की सूचना दी, कुरान के छंदों का निर्माण किया, मुसलमानों द्वारा शब्द" अल्लाह का वचन "के रूप में माना जाता है और जिसके आस-पास धर्म आधारित है। कुरान के अलावा, हदीस और [[सीरत उन-नबी|सीरा]] (जीवनी) साहित्य में पाए गए मुहम्मद साहब की शिक्षाओं और प्रथाओं (सुन्नत) को भी इस्लामी कानून के स्रोतों के रूप में उपयोग किया जाता है, मुहम्मद 2 वक्त का खाना। खाते खाने में एक ही सब्जी लेते।
== परिचय ==
मुहम्मद का जन्म मुस्लिम इतिहासकारों के अनुसार अरब के रेगिस्तान के शहर [[मक्का]] में 8 जून, 570 ई. मेंं हुआ। ‘मुहम्मद’ का अर्थ होता है ‘जिस की अत्यन्त प्रशंसा की गई हो'। इनके पिता का नाम [[अब्दुल्लाह इब्न अब्दुल मुत्तलिब|अब्दुल्लाह]] और माता का नाम [[आमिना बिन्त वहब| आमिना]] है। मुहम्मद की सशक्त आत्मा ने इस सूने रेगिस्तान से एक नए संसार का निर्माण किया, एक नए जीवन का, एक नई संस्कृति और नई सभ्यता का। आपके द्वारा एक ऐसे नये राज्य की स्थापना हुई, जो मराकश से ले कर इंडीज़ तक फैला और जिसने तीन महाद्वीपों-एशिया, अफ्रीका, और यूरोप के विचार और जीवन पर अपना अभूतपूर्व प्रभाव डाला।
==नाम और कुरान में प्रश्ंसा==
[[File:Muhammad Salat.svg|thumb|right|मुहम्मद नाम इस्लामिक सुलेख की लिपि विविधता, सुलुस में लिखा गया है]]
मोहम्मद (/mʊhæməd,-hɑːməd/) <ref>[http://dictionary.reference.com/browse/muhammad "Muhammad"] {{webarchive|url=https://web.archive.org/web/20141215011659/http://dictionary.reference.com/browse/Muhammad|date=15 December 2014}}. ''[[Random House Webster's Unabridged Dictionary]]''.</ref> का अर्थ है "प्रशंसनीय" और कुरान में चार बार प्रकट होता है। <ref>Jean-Louis Déclais, ''Names of the Prophet'', [[Encyclopedia of the Quran]]</ref> कुरान दूसरे अपील में मुहम्मद को विभिन्न अपीलों से संबोधित करता है; भविष्यवक्ता, दूत, अल्लाह का अब्द (दास), उद्घोषक ( बशीर ), {{Quran-usc|2|119|q=}} गवाह (शाहिद), {{Quran-usc|33|45|q=}} अच्छी ख़बरें (मुबारशीर), चेतावनीकर्ता (नाथिर), {{Quran-usc|11|2|q=}} अनुस्मारक (मुधाकीर), {{Quran-usc|88|21|q=}} जो [अल्लाह की तरफ बुलाता है] (दायी) कहते हैं, {{Quran-usc|12|108|q=}} तेजस्व व्यक्तित्व (नूर), {{Quran-usc|05|15|q=}} और प्रकाश देने वाला दीपक (सिराज मुनीर)। {{Quran-usc|33|46|q=}} मुहम्मद को कभी-कभी पते के समय अपने राज्य से प्राप्त पदनामों द्वारा संबोधित किया जाता है: इस प्रकार उन्हें {{cite quran|73|1 |s=ns |b=n}} में ढका हुआ (अल-मुज़ममिल) के रूप में जाना जाता है और झुका हुआ अल-मुदाथथिर) सुरा अल-अहज़ाब में 33:40 ईश्वर ने मुहम्मद को " भविष्यद्वक्ताओं की मुहर " या भविष्यवक्ताओं के अंतिम रूप में एकल किया। <ref name="Ernst">Ernst (2004), p. 80</ref> कुरान मुहम्मद को अहमद के रूप में भी संदर्भित करता है "अधिक प्रशंसनीय" (अरबी : أحمد, सूरा ({{lang-ar|أحمد}}, सूरा [[अस-सफ़]] {{cite quran|61|6 |s=ns |b=n}}).<ref name="IEQ1">{{cite book |authorlink1=Gibril Fouad Haddad |editor1-last=Iqbal |editor1-first=Muzaffar |title=Integrated Encyclopedia of the Qur'an |date=2013 |publisher=Center for Islamic Sciences |isbn=978-1926620008 |page=[https://archive.org/details//page/33 33] |volume=1 |url=https://archive.org/details//page/33 }}</ref>
अबू अल-कासिम मुहम्मद इब्न 'अब्द अल्लाह इब्न' [[अब्द अल-मुत्तलिब]] इब्न हाशिम नाम, <ref name="auto">[https://www.britannica.com/biography/Muhammad Muhammad] {{webarchive|url=https://web.archive.org/web/20170209125352/https://www.britannica.com/biography/Muhammad|date=9 February 2017}} [[Encyclopedia Britannica]] Retrieved 15 February 2017</ref> कुन्या <ref>[[S. D. Goitein|Goitein, S.D.]] (1967) – [https://books.google.com/books?id=g13-owKVXY4C&pg A Mediterranean Society: The Jewish Communities of the Arab World as Portrayed in the Documents of the Cairo Geniza, Volume 1] {{webarchive|url=https://web.archive.org/web/20180122105439/https://books.google.com/books?id=g13-owKVXY4C&pg|date=22 January 2018}} p. 357. [[University of California Press]] {{ISBN|0520221583}} Retrieved 17 February 2017</ref> अबू से शुरू होता है, जो अंग्रेजी के पिता के अनुरूप है। <ref>Ward, K. (2008) – [https://books.google.com/books?id=_HYiqv333C8C&pgExpressing Islam: Religious Life and Politics in Indonesia] {{webarchive|url=https://web.archive.org/web/20180122105439/https://books.google.com/books?id=_HYiqv333C8C&pgExpressing|date=22 January 2018}} p. 221, [[Institute of Southeast Asian Studies]] {{ISBN|9812308512}} Retrieved 17 February 2017</ref>
==मुहम्मद साहब की पत्नियां==
{{मुख्य|मुहम्मद की पत्नियाँ|मुहम्मद की पत्नियाँ=}}
मुसलमानों का मानना है कि मुहम्मद साहब की पत्नियां विश्वासियों के माता (अरबी: أمهات المؤمنين उम्महत अल-मुमीनिन) है। मुसलमानों ने सम्मान की निशानी के रूप में उन्हें संदर्भित करने से पहले या बाद में प्रमुख शब्द का प्रयोग किया। यह शब्द कुरान 33: 6 से लिया गया है: "पैगंबर अपने विश्वासियों की तुलना में विश्वासियों के करीब है, और उनकी पत्नियां उनकी माताओं (जैसे) हैं।"
मुहम्मद साहब 25 वर्ष के लिए मोनोग्राम थे। अपनी पहली पत्नी [[खदीजा बिन्त खुवायलद]] की मृत्यु के बाद, उन्होंने नीचे दी गई पत्नियों से शादी करने के लिए आगे बढ़ दिया, और उनमें से ज्यादातर विधवा थे मुहम्मद के जीवन को पारम्परिक रूप से दो युगों के रूप में चित्रित किया गया है: पूर्व हिजरत (पश्चिमी उत्प्रवासन) में मक्का में 570 से 622 तक, और मदीना में, 622 से 632 तक अपनी मृत्यु तक।<ref>{{cite web|url=http://www.bbc.com/hindi/international-41291092|title=जो महिला मोहम्मद के पैग़ंबर बनने में साथ रही|access-date=18 मई 2018|archive-url=https://web.archive.org/web/20171129115735/http://www.bbc.com/hindi/international-41291092|archive-date=29 नवंबर 2017|url-status=live}}</ref> हिजरत (मदीना के प्रवास) के बाद उनके विवाह का अनुबंध किया गया था। मुहम्मद की तेरह "पत्नियों" से एक [[मरिया अल-क़ीब्टिय्या|मारिया अल किबतिया]], वास्तव में केवल उपपत्नी थीं; हालांकि, मुसलमानों में बहस होती है कि इन एक पत्नियां बन गईं हैं। उनकी 13 पत्नियों और में से केवल दो बच्चों ने उसे बोर दिया था, जो कि एक तथ्य है जिसे कॉर्नेल यूनिवर्सिटी के करीब ईस्टर्न स्टडीज डेविड एस पॉवर्स के प्रोफेसर द्वारा "जिज्ञासु" कहा गया है।
==सूत्र==
[[File:Lower city, Petra.jpg|thumb|200px|[[पेट्रा]]; इस्लामिक इतिहास और पुरातत्व शोधकर्ता डैन गिब्सन के अनुसार, यह वह स्थान था जहाँ मोहम्मद ने अपनी युवावस्था जीती थी और अपना पहला रहस्योद्घाटन प्राप्त किया था। जैसा कि पहली मुस्लिम मस्जिद और कब्रिस्तान दिखाते हैं, यह मुसलमानों की पहली क़िबला दिशा भी थी<ref>Dan Gibson: Qur'ānic geography: a survey and evaluation of the geographical references in the qurãn with suggested solutions for various problems and issues. Independent Scholars Press, Surrey (BC) 2011, ISBN 978-0-9733642-8-6</ref>]]
'''वैज्ञानिक अध्ययन:''' इस्लामी इतिहास के शोधकर्ताओं ने समय के साथ इस्लाम के जन्मस्थान और किबला के परिवर्तन की जांच की है। [[पेट्रीसिया क्रोन]], [[माइकल कुक]] और कई अन्य शोधकर्ताओं ने पाठ और पुरातात्विक अनुसंधान के आधार पर यह मान लिया है कि "मस्जिद अल-हरम" मक्का में नहीं बल्कि उत्तर-पश्चिमी अरब प्रायद्वीप में स्थित था।<ref> https://bora.uib.no/bora-xmlui/bitstream/handle/1956/12367/144806851.pdf?sequence=4&isAllowed=y</ref><ref>Meccan Trade And The Rise Of Islam, (Princeton, U.S.A: Princeton University Press, 1987</ref><ref>https://repository.upenn.edu/cgi/viewcontent.cgi?article=5006&context=edissertations</ref><ref> https://dergipark.org.tr/tr/download/article-file/592002</ref>
===कुरान===
[[File:Folio from a Koran (8th-9th century).jpg|thumb|कूफिक लिपि में लिखा एक प्रारंभिक कुरान से एक फोलियो (अब्बासिड अवधि, 8 वीं-9वीं शताब्दी)]]
कुरान इस्लाम का केंद्रीय धार्मिक पाठ है। मुसलमानों का मानना है कि यह [[मलाइका|मलक]] [[जिब्राईल|जिब्रील]] द्वारा मुहम्मद को अल्लाह की जानिब से भेज गया कलाम है। <ref name="Britannica">{{cite encyclopedia |last=Nasr |first=Seyyed Hossein |authorlink=Seyyed Hossein Nasr |title=Qurʾān |year=2007 |encyclopedia=Encyclopædia Britannica Online |accessdate=24 September 2013 |location= |publisher= |url=http://www.britannica.com/EBchecked/topic/487666/Quran |url-status=live |archiveurl=https://web.archive.org/web/20150505001543/http://www.britannica.com/EBchecked/topic/487666/Quran |archivedate=5 May 2015 |df=dmy-all }}</ref><ref name = LivRlgP338>''Living Religions: An Encyclopaedia of the World's Faiths'', Mary Pat Fisher, 1997, p. 338, I.B. Tauris Publishers.</ref><ref name = QuranC17V106>{{Quran-usc|17|106|style=nosup}}</ref> कुरान, हालांकि, मुहम्मद की कालानुक्रमिक जीवनी के लिए न्यूनतम सहायता प्रदान करता है; कुरान एक पवित्र किताब है जो इंसान को भलाई के मार्ग पर ले जाने का काम करती है, दुनिया के कई ऐसे रेह्स्यो के बारे में बताया गया है जिसके बारे में लोग अभी तक नहीं जान पाए हैं जैसे एक चीन्टी दूसरी चीन्टी से कैसे संपर्क करती है इसके बारे में क़ुरआन में बताया गया है कि चीटी अपने दोनों बालों जो उनके सर उगे होते है उनको रगडकर संपर्क करती। ऐसी ही कई रोचक और दिल का सुकून देने वाली बहुत सी बाते हैं। <ref name="Benn98a">{{cite book |author=Clinton Bennett |title=In search of Muhammad |url=https://books.google.com/books?id=-VTIkkcUFHQC&pg=PA18 |year=1998 |publisher=Continuum International Publishing Group |isbn=978-0-304-70401-9 |pages=18–19 |url-status=live |archiveurl=https://web.archive.org/web/20150930140431/https://books.google.com/books?id=-VTIkkcUFHQC&pg=PA18 |archivedate=30 September 2015 |df=dmy-all }}</ref><ref name="Peters1994">{{cite book |author=Francis E. Peters |title=Muhammad and the origins of Islam |url=https://books.google.com/books?id=Jrq6boXdJOAC&pg=PA261 |year=1994 |publisher=SUNY Press |isbn=978-0-7914-1876-5 |page=261 |url-status=live |archiveurl=https://web.archive.org/web/20150924044319/https://books.google.com/books?id=Jrq6boXdJOAC&pg=PA261 |archivedate=24 September 2015 |df=dmy-all }}</ref>
===प्रारंभिक जीवनी===
मुख्य लेख: भविष्यवाणी जीवनी
मुहम्मद के जीवन के बारे में महत्वपूर्ण स्रोत मुस्लिम युग (हिजरी - 8 वीं और 9वीं शताब्दी ई) की दूसरी और तीसरी शताब्दियों के लेखकों द्वारा ऐतिहासिक कार्यों में पाया जा सकता है। <ref name="Watt-Mecca-xi">Watt (1953), p. xi</ref> इनमें मुहम्मद की पारंपरिक मुस्लिम जीवनी शामिल हैं, जो मुहम्मद के जीवन के बारे में अतिरिक्त जानकारी प्रदान करती हैं। <ref name="Reeves">Reeves (2003), pp. 6–7</ref>
सबसे पुरानी जीवित सिरा (मुहम्मद की जीवनी और उद्धरण उनके लिए जिम्मेदार) इब्न इशाक का जीवन भगवान का मैसेंजर लिखित सी है। 767 सीई (150 एएच)। यद्यपि काम खो गया था, इस सीरा का इस्तेमाल इब्न हिशाम और अल-ताबररी द्वारा थोड़ी सी सीमा तक किया गया था। <ref name="Nigosian6">S.A. Nigosian (2004), p. 6</ref><ref>Donner (1998), p. 132</ref> हालांकि, इब्न हिशम मुहम्मद की अपनी जीवनी के प्रस्ताव में स्वीकार करते हैं कि उन्होंने इब्न इशाक की जीवनी से मामलों को छोड़ दिया जो "कुछ लोगों को परेशान करेगा"। <ref>{{cite book |author=Holland, Tom |title=In the Shadow of the Sword |url=https://books.google.com/?id=5u3Ukw7AftwC&pg=PT28&lpg=PT28&dq=%22in+the+shadow+of+the+sword%22+%22would+distress+certain+people%22#v=onepage&q=%22in%20the%20shadow%20of%20the%20sword%22%20%22would%20distress%20certain%20people%22&f=false |year=2012 |publisher=Doubleday |pages=42|isbn=9780748119516 }}</ref> एक और प्रारंभिक इतिहास स्रोत मुहम्मद के अभियानों का इतिहास अल-वकिदी (मुस्लिम युग की मृत्यु 207), और उनके सचिव इब्न साद अल-बगदादी (मुस्लिम युग की मौत 230) का काम है। <ref name="Watt-Mecca-xi"/>
कई विद्वान इन शुरुआती जीवनी को प्रामाणिक मानते हैं, हालांकि उनकी सटीकता अनिश्चित है। <ref name="Nigosian6"/> हाल के अध्ययनों ने विद्वानों को कानूनी मामलों और पूरी तरह से ऐतिहासिक घटनाओं को छूने वाली परंपराओं के बीच अंतर करने का नेतृत्व किया है। कानूनी समूह में, परंपराएं आविष्कार के अधीन हो सकती थीं, जबकि ऐतिहासिक घटनाएं, असाधारण मामलों से अलग हो सकती हैं, केवल "प्रवृत्त आकार" के अधीन हो सकती हैं। <ref>Watt (1953), p. xv</ref>
===हदीस===
{{मुख्य|हदीस}}
अन्य महत्वपूर्ण स्रोतों में हदीस संग्रह, मौखिक और शारीरिक शिक्षाओं और मुहम्मद की परंपराओं के विवरण शामिल हैं। हदीस के ग्रन्थ [[सहीह अल-बुख़ारी]], मुस्लिम इब्न अल-हजज, मुहम्मद इब्न ईसा -तिर्मिधि, अब्द अर-रहमान अल-नसाई, [[अबू दाऊद]], [[इब्न माजह]], [[मालिक इब्न अनस]], अल-दराकुत्नी सहित अनुयायियों द्वारा मुहम्मद की मृत्यु के बाद संकलित किया गया था। <ref name="Lewis 1993, pp. 33–34">Lewis (1993), pp. 33–34</ref><ref>{{cite book |first1=A.C. Brown |last1=Jonathan |authorlink=Jonathan A.C. Brown |date=2007 |url=https://books.google.com/books?id=nyMKDEAb4GsC&lpg=PP1&pg=PA9#v=onepage&q&f=false |title=The Canonization of al-Bukhārī and Muslim: The Formation and Function of the Sunnī Ḥadīth Canon |page=9 |publisher=[[Brill Publishers]] |isbn=978-9004158399 |quote=We can discern three strata of the Sunni ḥadīth canon. The perennial core has been the ''Ṣaḥīḥayn''. Beyond these two foundational classics, some fourth-/tenth-century scholars refer to a four-book selection that adds the two ''Sunans'' of Abū Dāwūd (d. 275/889) and al-Nāsaʾī (d. 303/915). The Five Book canon, which is first noted in the sixth/twelfth century, incorporates the ''Jāmiʿ'' of al-Tirmidhī (d. 279/892). Finally, the Six Book canon, which hails from the same period, adds either the ''Sunan'' of Ibn Mājah (d. 273/887), the ''Sunan'' of al-Dāraquṭnī (d. 385/995) or the ''Muwaṭṭaʾ'' of Mālik b. Anas (d. 179/796). Later ḥadīth compendia often included other collections as well. None of these books, however, has enjoyed the esteem of al-Bukhārīʼs and Muslimʼs works. |url-status=live |archiveurl=https://web.archive.org/web/20171018150501/https://books.google.com/books?id=nyMKDEAb4GsC#v=onepage&q&f=false |archivedate=18 October 2017 |df=dmy-all }}</ref>
कुछ पश्चिमी शिक्षाविदों ने सावधानीपूर्वक हदीस संग्रह को सटीक ऐतिहासिक स्रोतों के रूप में देखा है। <ref name="Lewis 1993, pp. 33–34"/> मैडलंग जैसे विद्वान बाद की अवधि में संकलित किए गए कथाओं को अस्वीकार नहीं करते हैं, लेकिन इतिहास के संदर्भ में और घटनाओं और आंकड़ों के साथ उनकी संगतता के आधार पर उनका न्याय करते हैं। <ref>Madelung (1997), pp. xi, 19–20</ref> दूसरी तरफ मुस्लिम विद्वान आमतौर पर जीवनी साहित्य की बजाय हदीस साहित्य पर अधिक जोर देते हैं, क्योंकि हदीस ट्रांसमिशन (इस्नद) की एक सत्यापित श्रृंखला बनाए रखते हैं; जीवनी साहित्य के लिए ऐसी श्रृंखला की कमी से उनकी आँखों में कम सत्यापन योग्य हो जाता है। <ref>{{citation |url=https://books.google.com/books?id=ZAXNxxkJKYsC&pg=PA99 |author=Nurullah Ardic |page=99 |title=Islam and the Politics of Secularism |publisher=Routledge |isbn=9781136489846 |date=21 August 2012 |url-status=live |archiveurl=https://web.archive.org/web/20180122105439/https://books.google.com/books?id=ZAXNxxkJKYsC&pg=PA99 |archivedate=22 January 2018 |df=dmy-all }}</ref>
==पूर्व इस्लामी अरब==
[[File:Tribes english.png|thumb|मुहम्मद के जीवनकाल में मुख्य जनजातियों और अरब के बस्तियों।]]
अरब प्रायद्वीप काफी हद तक शुष्क और ज्वालामुखीय था, जो निकट ओएस या स्प्रिंग्स को छोड़कर कृषि को मुश्किल बना देता था। परिदृश्य कस्बों और शहरों के साथ बिखरा हुआ था; मक्का और मदीना के सबसे प्रमुख दो हैं। मदीना एक बड़ा समृद्ध कृषि समझौता था, जबकि मक्का कई आसपास के जनजातियों के लिए एक महत्वपूर्ण वित्तीय केंद्र था। <ref name="Muhammad-Mecca-12">Watt (1953), pp. 1–2</ref> रेगिस्तानी स्थितियों में अस्तित्व के लिए सांप्रदायिक जीवन जरूरी था, कठोर पर्यावरण और जीवनशैली के खिलाफ स्वदेशी जनजातियों का समर्थन करना। जनजातीय संबद्धता, चाहे संबंध या गठजोड़ पर आधारित, सामाजिक एकजुटता का एक महत्वपूर्ण स्रोत था। <ref>Watt (1953), pp. 16–18</ref> स्वदेशी अरब या तो भयावह या आसन्न थे, पूर्व लगातार एक स्थान से दूसरे स्थान पर यात्रा करते थे और अपने झुंडों के लिए पानी और चरागाह मांगते थे, जबकि बाद में व्यापार और कृषि पर ध्यान केंद्रित करते थे। नोमाडिक अस्तित्व भी हमलावर कारवां या oases पर निर्भर करता है; मनोदशा इसे अपराध के रूप में नहीं देखते थे। <ref name="Rue">Loyal Rue, ''Religion Is Not about God: How Spiritual Traditions Nurture Our Biological'',2005, p. 224</ref><ref name="Esposito4">John Esposito, ''Islam'', Expanded edition, Oxford University Press, pp. 4–5</ref>
पूर्व इस्लामी अरब में, देवताओं या देवियों को व्यक्तिगत जनजातियों के संरक्षक के रूप में देखा जाता था, उनकी आत्मा पवित्र पेड़ों, पत्थरों, झरनों और कुओं से जुड़ी थी। साथ ही साथ वार्षिक तीर्थयात्रा की साइट होने के कारण, मक्का में काबा मंदिर में जनजातीय संरक्षक देवताओं की 360 मूर्तियां थीं। तीन देवी अल्लाह के साथ उनकी बेटियों के रूप में जुड़े थे: अल्लात, मनात और अल-उज्जा। ईसाई और यहूदी समेत अरब में एकेश्वरवादी समुदाय मौजूद थे। <ref>See:
* Esposito, ''Islam'', Extended Edition, Oxford University Press, pp. 5–7
* Quran 3:95</ref> हनीफ - मूल पूर्व-इस्लामी अरब जिन्होंने "कठोर एकेश्वरवाद का दावा किया" <ref>{{cite book |last=Ueberweg |first=Friedrich |title=History of Philosophy, Vol. 1: From Thales to the Present Time |publisher=Charles Scribner's Sons |page=409 |url=https://books.google.com/?id=GZfL4GsU3JAC&pg=PA409&dq=Hanifs&cd=2#v=onepage&q=Hanifs&f=false |isbn=978-1-4400-4322-2}}</ref> - कभी-कभी पूर्व इस्लामी अरब में यहूदियों और ईसाइयों के साथ भी सूचीबद्ध होते हैं, हालांकि उनकी ऐतिहासिकता विद्वानों के बीच विवादित होती है। <ref>Kochler (1982), p. 29</ref><ref>cf. Uri Rubin, ''Hanif'', Encyclopedia of the Qur'an</ref> मुस्लिम परंपरा के मुताबिक, मुहम्मद खुद हनीफ और इब्राहीम अलै. के पुत्र ईस्माइल अलै. के वंशज थे। <ref>See:
* Louis Jacobs (1995), p. 272
* Turner (2005), p. 16</ref>
छठी शताब्दी का दूसरा भाग अरब में राजनीतिक विकार की अवधि थी और संचार मार्ग अब सुरक्षित नहीं थे। <ref>{{cite book |author=Christian Julien Robin |title=Arabia and Ethiopia. In The Oxford Handbook of Late Antiquity |url=https://books.google.com/books?id=GKRybwb17WMC&pg=PA297 |year=2012 |publisher=OUP USA |pages=297–299 |isbn=9780195336931 |url-status=live |archiveurl=https://web.archive.org/web/20160516010339/https://books.google.com/books?id=GKRybwb17WMC&pg=PA297 |archivedate=16 May 2016 |df=dmy-all }}</ref> धार्मिक विभाजन संकट का एक महत्वपूर्ण कारण थे। <ref name="Robin302">{{cite book |author=Christian Julien Robin |title=Arabia and Ethiopia. In The Oxford Handbook of Late Antiquity |url=https://books.google.com/books?id=GKRybwb17WMC&pg=PA302 |year=2012 |publisher=OUP USA |pages=302 |isbn=9780195336931 |url-status=live |archiveurl=https://web.archive.org/web/20160501235340/https://books.google.com/books?id=GKRybwb17WMC&pg=PA302 |archivedate=1 May 2016 |df=dmy-all }}</ref> यहूदी धर्म यमन में प्रमुख धर्म बन गया, जबकि ईसाई धर्म ने फारस खाड़ी क्षेत्र में जड़ ली। <ref name="Robin302"/> प्राचीन दुनिया के व्यापक रुझानों के साथ, इस क्षेत्र में बहुसंख्यक संप्रदायों के अभ्यास और धर्म के एक और आध्यात्मिक रूप में बढ़ती दिलचस्पी में गिरावट देखी गई। <ref name="Robin302"/> जबकि कई लोग विदेशी विश्वास में परिवर्तित होने के लिए अनिच्छुक थे, वहीं उन धर्मों ने बौद्धिक और आध्यात्मिक संदर्भ बिंदु प्रदान किए। <ref name="Robin302"/>
मुहम्मद के जीवन के प्रारंभिक वर्षों के दौरान, कुरैशी जनजाति वह पश्चिमी अरब में एक प्रमुख शक्ति बन गई थी। <ref name="Robin286">{{cite book |author=Christian Julien Robin |title=Arabia and Ethiopia. In The Oxford Handbook of Late Antiquity |url=https://books.google.com/books?id=GKRybwb17WMC&pg=PA286 |year=2012 |publisher=OUP USA |pages=286–287 |isbn=9780195336931 |url-status=live |archiveurl=https://web.archive.org/web/20160604024657/https://books.google.com/books?id=GKRybwb17WMC&pg=PA286 |archivedate=4 June 2016 |df=dmy-all }}</ref> उन्होंने hums के पंथ संघ का गठन किया, जो पश्चिमी अरब में कई जनजातियों के सदस्यों को काबा में बंधे और मक्का अभयारण्य की प्रतिष्ठा को मजबूत किया। <ref name="Robin301"/> अराजकता के प्रभावों का मुकाबला करने के लिए, कुरैश ने पवित्र महीनों की संस्था को बरकरार रखा, जिसके दौरान सभी हिंसा को मना कर दिया गया था, और बिना किसी खतरे के तीर्थयात्रा और मेलों में भाग लेना संभव था। <ref name="Robin301">{{cite book |author=Christian Julien Robin |title=Arabia and Ethiopia. In The Oxford Handbook of Late Antiquity |url=https://books.google.com/books?id=GKRybwb17WMC&pg=PA301 |year=2012 |publisher=OUP USA |page=301 |isbn=9780195336931 |url-status=live |archiveurl=https://web.archive.org/web/20160517040025/https://books.google.com/books?id=GKRybwb17WMC&pg=PA301 |archivedate=17 May 2016 |df=dmy-all }}</ref> इस प्रकार, हालांकि, hums का संघ मुख्य रूप से धार्मिक था, लेकिन इसके लिए शहर के लिए भी महत्वपूर्ण आर्थिक परिणाम थे। <ref name="Robin301"/>
==जिंदगी==
{| class="wikitable collapsible" width="25%" style="float:right; border:1px solid #ddd; margin:0 0 1em 1em; padding:0 0 1em 1em; vertical-align:right; font-size:80%;"
! colspan="2" style="text-align:center;" |<big>मुहम्मद की जीवनी की समयरेखा </big>
|-
| colspan="2" style="text-align:center;" |मुहम्मद के जीवन में महत्वपूर्ण तिथियां और स्थान
|-
| style="text-align:right;" |{{circa}} 569
|अपने पिता [[अब्दुल्लाह इब्न अब्दुल मुत्तलिब|अब्दुल्लह इब्न अब्दुल मुत्तलिब]] की मृत्यु
|-
| style="text-align:right;" |c. 570
|जन्म की संभावित तिथि: 12 रबी अल अव्वल: [[अरब]] में [[मक्का]]
|-
| style="text-align:right;" |c. 576
|माता, आमिना की मृत्यु
|-
| style="text-align:right;" |c. 583
|उनके दादा ने उन्हें सीरिया भेजा
|-
| style="text-align:right;" |c. 595
|[[खदीजा बिन्त खुवायलद|खदीजा]] रजी. से मुलाक़ात और विवाह
|-
| style="text-align:right;" |597
|ज्येष्ठ पुत्री [[ज़ैनब बिन्त मुहम्मद|ज़ैनब]] रजी. का जन्म, बाद में [[उम्मे कुलसूम बिन्त मुहम्मद]], [[फ़ातिमा|फ़ातिमा ज़हरा]] रजी.
|-
| style="text-align:right;" |610
|मक्का के पास जबल एक नूर "प्रकाश का पर्वत" पर हिरा की गुफा में कुरानिक प्रकाशन शुरू होता है
|-
| style="text-align:right;" |610
| 40 वर्ष की आयु में, देवदूत [[जिब्राईल|जिब्रील]] अलै. प्रत्यक्ष होकर, मुहम्मद को "अल्लाह का प्रेषित" घोषित करना
|-
| style="text-align:right;" |610
|मक्का में अनुयाइयों का छुप कर मिलना और इस्लाम को जानना
|-
| style="text-align:right;" |c. 613
|मक्का वासियों को खुले तौर पर इस्लाम का मेसेज देना
|-
| style="text-align:right;" |c. 614
|मुसलमानों पर कडे ज़ुल्म की शुरूआत
|-
| style="text-align:right;" |c. 615
| मुसलमानों का इथियोपिया को प्रवास
|-
| style="text-align:right;" |616
|[[बनू हाशिम]] वंश को बायकॉट करने की शुरूआत
|-
| style="text-align:right;" |619
|दुखद वर्ष: खदीजा रजी. (पत्नी) और अबू तालिब (चाचा) की मृत्यु
|-
| style="text-align:right;" |619
|[[बनू हाशिम]] वंश को बायकॉट करना बंद
|-
| style="text-align:right;" |c. 620
|[[इस्रा और मेराज]] (आसमानी सफ़र का वाक़या)
|-
| style="text-align:right;" |622
|[[हिजरी]], मदीने (यसरब) का प्रवास
|-
| style="text-align:right;" |623
|[[बद्र की लड़ाई]]
|-
| style="text-align:right;" |625
|[[उहुद की लड़ाई]]
|-
| style="text-align:right;" |627
|[[खंदक़ की लड़ाई|खाई की लड़ाई]]
|-
| style="text-align:right;" |628
| [[सुलह हुदैबिया]] क़ुरैश और मुसलमानों के बीच मदीना में 10 वर्ष की संधी
|-
| style="text-align:right;" |629
|मक्का पर विजय
|-
| style="text-align:right;" |632
|विदाई तीर्थयात्रा, ग़दीर ए खुम्म का वाकिया, मृत्यु, और अब का सऊदी अरब
|-
| colspan="2" style="text-align:center;" |{{navbar|Muhammad timeline in Mecca|style=text-align:center}}
|}
<!-- END TIMELINE -->
<noinclude>
</noinclude>
===बचपन और प्रारंभिक जीवन===
अबू अल-क़ासिम मुहम्मद इब्न 'अब्द अल्लाह इब्न' अब्द अल-मुआलिब इब्न हाशिम, <ref name="auto"/> वर्ष 570 <ref name="abraha"/> के बारे में पैदा हुआ था और उनका जन्मदिन रबी अल-औवाल के महीने में माना जाता है। <ref>{{cite book |title=The Oxford Dictionary of Islam |last=Esposito |first=John L. (ed.) |year=2003 |isbn=978-0-19-512558-0 |page=198 |pages= |url=https://books.google.com/?id=E324pQEEQQcC&pg=PA198&dq=muhammad+birthday+Rabi%27+al-awwal#v=onepage&q=muhammad%20birthday%20Rabi%27%20al-awwal&f=false |accessdate=19 June 2012}}</ref> वह कुरैशी जनजाति का हिस्सा बनू हाशिम कबीले का था, और मक्का के प्रमुख परिवारों में से एक था, हालांकि यह मुहम्मद के शुरुआती जीवनकाल में कम समृद्ध प्रतीत होता है। <ref name="EoI-Muhammad"/><ref>See also {{cite quran|43|31 |s=ns}} cited in EoI; Muhammad</ref> परंपरा हाथी के वर्ष के साथ मुहम्मद के जन्म के वर्ष को रखती है, जिसका नाम उस वर्ष मक्का के असफल विनाश के नाम पर रखा गया है, यमन के राजा, जिन्होंने हाथियों के साथ अपनी सेना को पूरक बनाया था। <ref>Marr J.S., Hubbard E., Cathey J.T. (2014): The Year of the Elephant. figshare.
{{DOI|10.6084/m9.figshare.1186833}}
Retrieved 21 October 2014 (GMT)</ref><ref>''The Oxford Handbook of Late Antiquity''; edited by Scott Fitzgerald Johnson; p. 287</ref><ref>''Muhammad and the Origins of Islam''; by Francis E. Peters; p. 88</ref> वैकल्पिक रूप से कुछ 20 वीं शताब्दी के विद्वानों ने 568 या 56 9 जैसे विभिन्न वर्षों का सुझाव दिया है।
मुहम्मद के पिता अब्दुल्लाह का जन्म होने से लगभग छह महीने पहले उनकी मृत्यु हो गई थी। <ref name="Meri2004">{{cite book |last=Meri |first=Josef W. |authorlink=Josef W. Meri |title=Medieval Islamic civilization |url=https://books.google.com/books?id=H-k9oc9xsuAC |accessdate=3 January 2013 |volume=1 |year=2004 |publisher=Routledge |isbn=978-0-415-96690-0 |page=525 |url-status=live |archiveurl=https://web.archive.org/web/20121114153019/http://books.google.com/books?id=H-k9oc9xsuAC |archivedate=14 November 2012 |df=dmy-all }}</ref> इस्लामी परंपरा के अनुसार, जन्म के तुरंत बाद उन्हें रेगिस्तान में एक बेडौइन परिवार के साथ रहने के लिए भेजा गया था, क्योंकि शिशु जीवन शिशुओं के लिए स्वस्थ माना जाता था; कुछ पश्चिमी विद्वान इस परंपरा की ऐतिहासिकता को अस्वीकार करते हैं। <ref name="WattHalimah">Watt, "[http://referenceworks.brillonline.com/entries/encyclopaedia-of-islam-2/halima-bint-abi-dhuayb-SIM_2648 Halimah bint Abi Dhuayb] {{webarchive|url=https://web.archive.org/web/20140203073455/http://referenceworks.brillonline.com/entries/encyclopaedia-of-islam-2/halima-bint-abi-dhuayb-SIM_2648|date=3 February 2014}}", ''[[Encyclopaedia of Islam]]''.</ref> मुहम्मद अपनी पालक-मां, हलीमा बंट अबी धुआब और उसके पति के साथ दो वर्ष की उम्र तक रहे। छः वर्ष की आयु में, मुहम्मद ने अपनी जैविक मां अमिना को बीमारी से खो दिया और अनाथ बन गये। <ref name= WattHalimah/><ref>Watt, ''Amina'', [[Encyclopaedia of Islam]]</ref> अगले दो सालों तक, जब तक वह आठ वर्ष का नहीं था, तब तक मुहम्मद बनू हाशिम वंश के अपने दादा अब्दुल-मुतालिब की अभिभावक के अधीन थे। तब वह बनू हाशिम के नए नेता, अपने चाचा अबू तालिब की देखभाल में आए। <ref name="Watt7"/> इस्लामी इतिहासकार विलियम मोंटगोमेरी वाट के अनुसार 6 वीं शताब्दी के दौरान मक्का में जनजातियों के कमजोर सदस्यों की देखभाल करने में अभिभावकों ने एक सामान्य उपेक्षा की थी, "मुहम्मद के अभिभावकों ने देखा कि वह मौत के लिए भूखे नहीं थे, लेकिन यह मुश्किल था उन्हें उनके लिए और अधिक करने के लिए, खासकर जब हाशिम के कबीले की किस्मत उस समय घट रही है। <ref name="Watt8">Watt (1974), p. 8.</ref>
अपने किशोर व्यवस्था में, मुहम्मद वाणिज्यिक व्यापार में अनुभव हासिल करने के लिए सीरिया के व्यापारिक यात्रा पर अपने चाचा के साथ थे। <ref name="Watt8"/> इस्लामी परंपरा में कहा गया है कि जब मुहम्मद या तो बारह या तो बारह के मक्का के कारवां के साथ थे, तो उन्होंने एक ईसाई भिक्षु या बहरी नाम से भक्त से मुलाकात की, जिसे भगवान के भविष्यवक्ता के रूप में मुहम्मद के करियर के बारे में बताया गया था। <ref>Armand Abel, ''Bahira'', [[Encyclopaedia of Islam]]</ref>
बाद के युवाओं के दौरान मुहम्मद के बारे में बहुत कुछ पता नहीं है, उपलब्ध जानकारी खंडित है, जिससे इतिहास को किंवदंती से अलग करना मुश्किल हो गया है। <ref name="Watt8"/> यह ज्ञात है कि वह एक व्यापारी बन गया और " हिंद महासागर और भूमध्य सागर के बीच व्यापार में शामिल था।" <ref name="BerkWorldHistory">''Berkshire Encyclopedia of World History'' (2005), v. 3, p. 1025</ref> अपने ईमानदार चरित्र के कारण उन्होंने उपनाम " अल-अमीन " (अरबी: الامين) का अधिग्रहण किया, जिसका अर्थ है "विश्वासयोग्य, भरोसेमंद" और "अल-सादिक" जिसका अर्थ है "सत्य" <ref>{{cite book |last1=Khan |first1=Majid Ali |title=Muhammad the final messenger |edition=1998 |page=[https://archive.org/details//page/332 332] |year=1998 |publisher=Islamic Book Service |location=India |isbn=978-81-85738-25-3 |ref= |url=https://archive.org/details//page/332 }}</ref> और निष्पक्ष मध्यस्थ के रूप में बाहर निकला गया। <ref name="EncWorldHistory"/><ref name="EoI-Muhammad"/><ref>Esposito (1998), p. 6</ref> उनकी प्रतिष्ठा ने 40 वर्षीय विधवा ख़दीजा से 595 में एक प्रस्ताव को आकर्षित किया। मुहम्मद ने विवाह को सहमति दी, जो सभी खातों से एक खुश था। <ref name="BerkWorldHistory"/>
कई सालों बाद, इतिहासकार इब्न इशाक द्वारा एकत्रित एक वर्णन के अनुसार, मुहम्मद 605 सीई में काबा की दीवार में काले पत्थर की स्थापना के बारे में एक प्रसिद्ध कहानी के साथ शामिल थे। काले पत्थर, एक पवित्र वस्तु, काबा के नवीनीकरण के दौरान हटा दी गई थी। मक्का नेता इस बात से सहमत नहीं हो सकते कि कौन से कबीले को ब्लैक स्टोन को अपनी जगह पर वापस कर देना चाहिए। वे अगले आदमी है जो कि निर्णय करने के लिए गेट के माध्यम से आता है पूछने का फैसला किया; वह आदमी 35 वर्षीय मुहम्मद थे। यह घटना गैब्रियल द्वारा उनके पहले प्रकाशन के पांच साल पहले हुई थी। उसने एक कपड़े के लिए कहा और ब्लैक स्टोन को अपने केंद्र में रख दिया। कबीले नेताओं ने कपड़े के कोनों को पकड़ लिया और साथ में ब्लैक स्टोन को सही जगह पर ले जाया, फिर मुहम्मद ने पत्थर रख दिया, सभी के सम्मान को संतुष्ट किया। <ref name="Dairesi">{{cite book |title=The Sacred Trusts: Pavilion of the Sacred Relics, Topkapı Palace Museum, Istanbul |editor=Uğurluel, Talha |editor2=Doğru, Ahmet |author1=Dairesi, Hırka-i Saadet |author2=Aydin, Hilmi |publisher=Tughra Books |year=2004 |isbn=978-1-932099-72-0 |url-access=registration |url=https://archive.org/details/ |access-date=9 दिसंबर 2018 |archive-url=https://web.archive.org/web/20191002040748/https://archive.org/details/ |archive-date=2 अक्तूबर 2019 |url-status=live }}</ref><ref>[[Muhammad Mustafa Al-A'zami]] (2003), ''The History of The Qur'anic Text: From Revelation to Compilation: A Comparative Study with the Old and New Testaments'', p. 24. UK Islamic Academy. {{ISBN|978-1872531656}}.</ref>
===कुरान की शुरुआत===
[[File:Cave Hira.jpg|right|upright|thumb|पर्वत [[जबल अल-नूर|जबल अल-नूर]] में हिरा गुफ़ा, जहां मुस्लिम विश्वास के अनुसार, मुहम्मद ने अपना पहला प्रकाशन (वही) प्राप्त किया।]]
मुहम्मद ने हर साल कई हफ्तों तक मक्का के पास [[जबल अल-नूर]] पर्वत पर [[ग़ार ए हिरा]] नाम की एक गुफा में अकेले प्रार्थना करना शुरू किया। <ref>Emory C. Bogle (1998), p. 6</ref><ref>John Henry Haaren, Addison B. Poland (1904), p. 83</ref> इस्लामिक परंपरा का मानना है कि उस गुफा में उनकी एक यात्रा के दौरान, वर्ष 610 में परी जिब्रिल अलै. ने उनके सामने प्रकट किया और मुहम्मद को उन छंदों को पढ़ने का आदेश दिया जो कुरान में शामिल किए जाएंगे। <ref>Brown (2003), pp. 72–73</ref> आम सहमति मौजूद है कि पहले कुरानिक शब्द प्रकट हुए थे सुराह 96:1 की शुरुआत। <ref name="EI2-Wahy">{{Cite encyclopedia |edition=2nd |publisher=Brill Academic Publishers |volume=11 |pages=[https://archive.org/details//page/54 54] |first=A.J. |last=Wensinck |first2=A. |last2=Rippen |title=Waḥy |encyclopedia=[[Encyclopaedia of Islam]] |year=2002 |isbn=978-90-04-12756-2 }}</ref> मुहम्मद अपने पहले रहस्योद्घाटन प्राप्त करने पर बहुत परेशान थे। घर लौटने के बाद, मुहम्मद को खदिजा रजी. और उसके ईसाई चचेरे भाई वारका इब्न नवाफल ने सांत्वना दी और आश्वस्त किया। <ref name=autogenerated1>Esposito (2010), p. 8</ref> उन्हें यह भी डर था कि अन्य लोग अपने दावों को बर्खास्त कर देंगे। <ref name=Esposito4/> शिया परंपरा कहती है कि मुहम्मद जिब्रिल अलै. की उपस्थिति में हैरान नहीं था या भयभीत नहीं थे; बल्कि उन्होंने परी का स्वागत किया, जैसे कि उसकी उम्मीद थी। <ref>''See:''
* Emory C. Bogle (1998), p. 7
* Razwy (1996), ch. 9
* Rodinson (2002), p. 71</ref> प्रारंभिक प्रकाशन के बाद तीन साल की रोकथाम (एक अवधि जिसे वत्रा कहा जाता है) जिसके दौरान मुहम्मद उदास महसूस करते थे और आगे प्रार्थनाओं और आध्यात्मिक प्रथाओं को देते थे। <ref name=EI2-Wahy /> जब रहस्योद्घाटन फिर से शुरू हुआ, तो उसे आश्वस्त किया गया और प्रचार करने का आदेश दिया गया: "तेरा अभिभावक-यहोवा ने तुम्हें त्याग दिया नहीं है, न ही वह नाराज है।"
सहहि बुखारी ने मुहम्मद को अपने रहस्योद्घाटन का वर्णन करते हुए बताया कि "कभी-कभी यह घंटी बजने की तरह (प्रकट होता है)" होता है। आयेशा रजी. ने बताया, "मैंने पैगंबर को बहुत ही ठंडे दिन ईश्वरीय रूप से प्रेरित किया और देखा कि पसीना उसके माथे से गिर रहा है (जैसे प्रेरणा खत्म हो गई थी)"। <ref>{{cite web |url=http://www.cmje.org/religious-texts/hadith/bukhari/001-sbt.php |title=Center for Muslim-Jewish Engagement |publisher=Cmje.org |accessdate=26 January 2012 |url-status=dead |archiveurl=https://web.archive.org/web/20120110054749/http://www.cmje.org/religious-texts/hadith/bukhari/001-sbt.php |archivedate=10 January 2012 |df=dmy-all}}</ref> वेल्च के अनुसार इन विवरणों को वास्तविक माना जा सकता है, क्योंकि बाद में मुसलमानों द्वारा जाली की संभावना नहीं है। <ref name="EoI-Muhammad"/> मुहम्मद को भरोसा था कि वह इन संदेशों से अपने विचारों को अलग कर सकता है। <ref>Watt, ''The Cambridge History of Islam'' (1977), p. 31.</ref> कुरान के मुताबिक, मुहम्मद की मुख्य भूमिकाओं में से एक अपने eschatological सजा के अविश्वासियों को चेतावनी देना है ((Quran {{cite quran|38|70 |s=ns |b=n}}, Quran {{cite quran|6|19 |s=ns |b=n}})। कभी-कभी कुरान ने स्पष्ट रूप से जजमेंट डे को संदर्भित नहीं किया लेकिन विलुप्त समुदायों के इतिहास से उदाहरण प्रदान किए और मुहम्मद के समान आपदाओं के समकालीन लोगों को चेतावनी दी {{cite quran|41|13 |e=16 |s=ns |b=n}}).<ref name="EoQ-Muhammad"/> मुहम्मद ने न केवल उन लोगों को चेतावनी दी जिन्होंने परमेश्वर के प्रकाशन को खारिज कर दिया, बल्कि उन लोगों के लिए अच्छी खबर भी दी जिन्होंने बुराई छोड़ दी, दिव्य शब्दों को सुनकर और परमेश्वर की सेवा की। <ref>Daniel C. Peterson, ''Good News'', [[Encyclopedia of the Quran]]</ref> मुहम्मद के मिशन में एकेश्वरवाद का प्रचार भी शामिल है: कुरान मुहम्मद को अपने भगवान के नाम की घोषणा और प्रशंसा करने का आदेश देता है और उसे मूर्तियों की पूजा करने या भगवान के साथ अन्य देवताओं को जोड़ने के लिए निर्देश नहीं देता है। <ref name="EoQ-Muhammad"/>
{{Quote box|quoted=true|bgcolor=#ffeeaa|align=right|width=30%|salign=right|quote=अपने भगवान के नाम पर सुनाई जिसने बनाया - एक चिपकने वाला पदार्थ से बनाया गया आदमी। याद रखें, और आपका भगवान सबसे उदार है - कलम द्वारा सिखाया गया - वह आदमी जिसे वह नहीं जानता था।
|source=— क़ुरआन - सूरा 96; आयात: 1–5)}}
प्रारंभिक कुरानिक छंदों के प्रमुख विषयों में मनुष्य के प्रति अपने निर्माता की ज़िम्मेदारी शामिल थी; मृतकों के पुनरुत्थान, भगवान के अंतिम निर्णय के बाद नरक में उत्पीड़न और स्वर्ग में सुख, और जीवन के सभी पहलुओं में ईश्वर (अल्लाह) के संकेतों के स्पष्ट वर्णन के बाद। इस समय विश्वासियों के लिए आवश्यक धार्मिक कर्तव्यों कम थे: भगवान में विश्वास, पापों की क्षमा मांगना, लगातार प्रार्थनाओं की पेशकश करना, विशेष रूप से उन लोगों की सहायता करना, धोखाधड़ी को अस्वीकार करना और धन के प्यार (वाणिज्यिक जीवन में महत्वपूर्ण माना जाता है) मक्का), शुद्ध होने और महिला बालहत्या नहीं कर रहा है। <ref name = "EoI-Muhammad"/>
===विरोध===
[[File:Surat An-Najm.jpg|thumb|right|सूरा अन-नज्म की आखिरी आयत: "तो अल्लाह के लिए सजग और पूजा करते हैं।" मुहम्मद के एकेश्वरवाद के संदेश ने पारंपरिक आदेश को चुनौती दी।]]
मुस्लिम परंपरा के अनुसार, मुहम्मद की पत्नी खदीजा रजी. पहली बार मानते थे कि वह एक भविष्यवक्ता थे। <ref name="Watt53-86">Watt (1953), p. 86</ref> उसके बाद मुहम्मद के दस वर्षीय चचेरे भाई अली इब्न अबी तालिब रजी., करीबी दोस्त अबू बकर रजी., और बेटे जैद रजी. को अपनाया गया। <ref name="Watt53-86"/> लगभग 613, मुहम्मद जनता के लिए प्रचार करना शुरू कर दिया (Quran {{cite quran|26|214 |s=ns |b=n}}).<ref name="Al-A'zami2"/><ref>Ramadan (2007), pp. 37–39</ref> अधिकांश मक्का ने उन्हें नजरअंदाज कर दिया और उनका मज़ाक उड़ाया, हालांकि कुछ उसके अनुयायी बन गए। इस्लाम के शुरुआती परिवर्तनों के तीन मुख्य समूह थे: छोटे भाइयों और महान व्यापारियों के पुत्र; वे लोग जो अपने जनजाति में पहले स्थान से बाहर हो गए थे या इसे प्राप्त करने में नाकाम रहे; और कमजोर, ज्यादातर असुरक्षित विदेशियों। <ref name = "Cambridge 1977 36">Watt, ''The Cambridge History of Islam'' (1977), p. 36</ref>
इब्न साद रजी. के मुताबिक, मक्का में विपक्ष तब शुरू हुआ जब मुहम्मद ने उन छंदों को बचाया जो मूर्ति पूजा और मक्का के पूर्वजों द्वारा किए गए बहुविश्वास की निंदा करते थे। <ref>F.E. Peters (1994), p. 169</ref> हालांकि, कुरान के exegesis का कहना है कि यह शुरू हुआ क्योंकि मुहम्मद सार्वजनिक प्रचार शुरू किया। <ref name="Rubin">Uri Rubin'', Quraysh'', [[Encyclopaedia of the Qur'an]]</ref> जैसे ही उनके अनुयायियों में वृद्धि हुई, मुहम्मद शहर के स्थानीय जनजातियों और शासकों के लिए खतरा बन गया, जिनकी संपत्ति काबा पर विश्राम करती थी, मक्का धार्मिक जीवन का केंद्र बिंदु मुहम्मद ने उखाड़ फेंकने की धमकी दी थी। मक्का पारंपरिक धर्म के मुहम्मद की निंदा विशेष रूप से अपने जनजाति, कुरैशी के लिए आक्रामक थी, क्योंकि वे काबा के अभिभावक थे। <ref name = "Cambridge 1977 36" /> शक्तिशाली व्यापारियों ने मुहम्मद को अपने प्रचार को त्यागने के लिए मनाने का प्रयास किया; उन्हें व्यापारियों के आंतरिक मंडल के साथ-साथ एक फायदेमंद विवाह में प्रवेश की पेशकश की गई थी। उन्होंने इन दोनों प्रस्तावों से इंकार कर दिया। <ref name = "Cambridge 1977 36" />
{{Quote box|quoted=true|bgcolor=#ffeeaa|align=right|width=25%|salign=right|quote=क्या हमने उसके लिए दो आँखें नहीं बनाई हैं? और एक जीभ और दो होंठ? और उसे दो तरीकों से दिखाया है? लेकिन वह मुश्किल पास से नहीं टूट गया है। और आपको क्या पता चलेगा कि मुश्किल पास क्या है? यह गुलाम की मुक्तता है। या गंभीर भूख के दिन पर भोजन; निकट संबंध के अनाथ, या दुख में एक जरूरतमंद व्यक्ति। और फिर उन लोगों में से एक थे जिन्होंने विश्वास किया और एक दूसरे को धैर्य के लिए सलाह दी और एक दूसरे को दया के लिए सलाह दी।
- | कुरान (90:8–17)}}
मुहम्मद और उसके अनुयायियों की ओर छेड़छाड़ और बीमारियों के दौरान लंबे समय तक पारंपरिक अभिलेख। <ref name="EoI-Muhammad"/> सुमायाह बिन खयायत, एक प्रमुख मक्का नेता अबू जहल का गुलाम, इस्लाम के पहले शहीद के रूप में प्रसिद्ध है; जब उसने अपनी आस्था छोड़ने से इनकार कर दिया तो उसके मालिक द्वारा भाले के साथ मारा गया। बिलाल रजी., एक और मुस्लिम दास, उमायाह बिन खल्फ ने यातना दी थी, जिन्होंने अपनी छाती पर भारी चट्टान लगाया था ताकि वह अपना रूपांतरण लागू कर सके। <ref>Jonathan E. Brockopp, ''Slaves and Slavery'', [[Encyclopedia of the Qur'an]]</ref><ref>W. Arafat, ''Bilal b. Rabah'', [[Encyclopedia of Islam]]</ref>
615 में, मुहम्मद के कुछ अनुयायी अकुम के इथियोपियाई साम्राज्य में चले गए और ईसाई इथियोपियाई सम्राट अमामा इब्न अबजर की सुरक्षा के तहत एक छोटी कॉलोनी की स्थापना की। <ref name="EoI-Muhammad"/> इब्न साद ने दो अलग-अलग प्रवासन का उल्लेख किया। उनके अनुसार, अधिकांश मुसलमान हिजरा से पहले मक्का लौट आए, जबकि दूसरा समूह उन्हें मदीना में फिर से शामिल कर दिया। इब्न हिशम और तबारी, हालांकि, केवल इथियोपिया के प्रवासन के बारे में बात करते हैं। ये खाते इस बात से सहमत हैं कि मक्का के उत्पीड़न ने मुहम्मद के फैसले में एक प्रमुख भूमिका निभाई है ताकि यह सुझाव दिया जा सके कि उनके कई अनुयायी अबिसिनिया में ईसाइयों के बीच शरण लेते हैं। अल- ताबारी में संरक्षित' उआरवा के प्रसिद्ध पत्र के मुताबिक, मुसलमानों का बहुमत अपने मूल शहर लौट आया क्योंकि इस्लाम ने उमर और हमजाह जैसे कनवर्ट किए गए मक्काओं की ताकत और उच्च रैंकिंग हासिल की। <ref>{{cite journal |last1=Horovitz |first1=Josef |author-link1=Josef Horovitz |last2= |first2= |date=1927 |title=The Earliest Biographies of the Prophet and Their Authors |journal=Islamic Culture |volume=1 |issue= 2|pages=279–284 |doi=10.1163/157005807780220576 |url-status=live |df=dmy-all }}</ref>
हालांकि, मुसलमान इथियोपिया से मक्का तक लौटने के कारण पर एक पूरी तरह से अलग कहानी है। इस खाते के मुताबिक- अल-वकिदी द्वारा शुरू में उल्लेख किया गया था, फिर इब्न साद और तबारी द्वारा, लेकिन इब्न हिशाम द्वारा नहीं, इब्न इशाक द्वारा नहीं <ref>"Muḥammad", [[Encyclopaedia of Islam]], Second Edition. Edited by [[P. J. Bearman]], [[Th. Bianquis]], [[C. E. Bosworth]], [[E. van Donzel]], [[W. P. Heinrichs]] et al. Brill Online, 2014</ref> -मुहम्मद, जो अपने जनजाति के साथ आवास की उम्मीद कर रहे थे,एक कविता स्वीकार की तीन मक्का देवी के अस्तित्व को अल्लाह की बेटियां माना जाता है। मुहम्मद ने अगले दिन छंदों को जिब्रिल अलै. के आदेश पर वापस ले लिया, दावा किया कि छंद स्वयं शैतान द्वारा फुसफुसाए गए थे। इसके बजाय, इन देवताओं का एक उपहास पेश किया गया था। <ref>The Cambridge Companion to Muhammad (2010), p. 35</ref><ref group="n">The aforementioned Islamic [[Satanic Verses#Tabarī's account|histories recount]] that as Muhammad was reciting Sūra Al-Najm (Q.53), as revealed to him by the [[Archangel Gabriel]], Satan tempted him to utter the following lines after verses 19 and 20: "Have you thought of Allāt and al-'Uzzā and Manāt the third, the other; These are the exalted Gharaniq, whose intercession is hoped for." (Allāt, al-'Uzzā and Manāt were three goddesses worshiped by the Meccans). cf Ibn Ishaq, A. Guillaume p. 166</ref><ref group="n">"Apart from this one-day lapse, which was excised from the text, the Quran is simply unrelenting, unaccommodating and outright despising of paganism." (The Cambridge Companion to Muhammad, Jonathan E. Brockopp, p. 35)</ref> इस प्रकरण को "द स्टोरी ऑफ द क्रेन" के नाम से जाना जाता है, जिसे " शैतानिक वर्सेज " भी कहा जाता है। कहानी के अनुसार, इसने मुहम्मद और मक्का के बीच एक सामान्य सुलह का नेतृत्व किया, और एबीसिनिया मुसलमानों ने घर लौटना शुरू कर दिया। जब वे पहुंचे तो जिब्रिल अलै. ने मुहम्मद को सूचित किया था कि दो छंद रहस्योद्घाटन का हिस्सा नहीं थे, लेकिन शैतान ने उन्हें डाला था। उस समय के विद्वानों ने इन छंदों की ऐतिहासिक प्रामाणिकता और कहानी को विभिन्न आधारों पर तर्क दिया। <ref>"Kuran" in the ''[[Encyclopaedia of Islam]]'', 2nd Edition, Vol. 5 (1986), p. 404</ref><ref>''"Muḥammad", [[Encyclopaedia of Islam]], Second Edition. Edited by [[P. J. Bearman]], [[Th. Bianquis]], [[C. E. Bosworth]], [[E. van Donzel]], [[W. P. Heinrichs]] et al. Brill Online, 2014''</ref><ref group="n">"Although, there could be some historical basis for the story, in its present form, it is certainly a later, exegetical fabrication. Sura LIII, 1–20 and the end of the sura are not a unity, as is claimed by the story, XXII, 52 is later than LIII, 2107 and is almost certainly Medinan; and several details of the story—the mosque, the sadjda, and others not mentioned in the short summary above do not belong to Meccan setting. Caetani and J. Burton have argued against the historicity of the story on other grounds, Caetani on the basis of week isnads, Burton concluded that the story was invented by jurists so that XXII 52 could serve as a Kuranic proof-text for their abrogation theories."("Kuran" in the ''[[Encyclopaedia of Islam]]'', 2nd Edition, Vol. 5 (1986), p. 404)</ref> इस्लिक विद्वानों जैसे मलिक इब्न अनास, अल-शफीई, अहमद इब्न हनबल, अल-नासाई, अल बुखारी, अबू दाऊद, अल-इस्की द्वारा अल-वकिदी की गंभीर आलोचना की गई थी। नवावी और दूसरों को झूठा और फोर्जर के रूप में। <ref name="arafat">{{citation |title=New Light on the Story of Banu Qurayza and the Jews of Medina |author=W.N. Arafat |publisher=Journal of the Royal Asiatic Society of Great Britain and Ireland |year=1976 |pages=101–107}}</ref><ref>{{citation |url=https://books.google.com/books?id=c1ZsBgAAQBAJ&pg=PA754 |title=Medieval Islamic Civilization: An Encyclopedia |page=754 |author=Rizwi Faizer |publisher=Routledge |url-status=live |archiveurl=https://web.archive.org/web/20170227162611/https://books.google.com/books?id=c1ZsBgAAQBAJ |archivedate=27 February 2017 |df=dmy-all |isbn=9781135455965 |date=2005-10-31 }}</ref><ref>{{citation |url=https://books.google.com/books?id=2AtvBAAAQBAJ |title=Muhammad in History, Thought, and Culture |page=279 |publisher=ABC-CLIO |url-status=live |archiveurl=https://web.archive.org/web/20170319044010/https://books.google.com/books?id=2AtvBAAAQBAJ |archivedate=19 March 2017 |df=dmy-all |isbn=9781610691789 |date=2014-04-25 }}</ref><ref>{{citation |url=https://books.google.com/books?id=mDqtAgAAQBAJ&pg=PA109 |page=109 |title=The Quran and Hadith |author=Sayyid Saeed Akhtar Rizvi |url-status=live |archiveurl=https://web.archive.org/web/20180122105439/https://books.google.com/books?id=mDqtAgAAQBAJ&pg=PA109 |archivedate=22 January 2018 |df=dmy-all |isbn=9789976956870 }}</ref> बाद में, इस घटना को कुछ समूहों के बीच कुछ स्वीकृति मिली, हालांकि दसवीं शताब्दी के दौरान इसके लिए मजबूत आपत्तियां जारी रहीं। इन छंदों को अस्वीकार करने तक आपत्तियां जारी रहीं और कहानी अंततः एकमात्र स्वीकार्य रूढ़िवादी मुस्लिम स्थिति बन गई। <ref>Shahab Ahmed, "Satanic Verses" in the ''[[Encyclopedia of the Qur'an]]''.</ref>
617 में, मखज़म के नेता और बानू अब्द-शम्स, दो महत्वपूर्ण कुरैश कुलों ने मुहम्मद की सुरक्षा को वापस लेने में दबाव डालने के लिए अपने व्यावसायिक प्रतिद्वंद्वी बनू हाशिम के खिलाफ सार्वजनिक बहिष्कार घोषित कर दिया। बहिष्कार तीन साल तक चला, लेकिन आखिर में गिर गया क्योंकि यह अपने उद्देश्य में विफल रहा। <ref>F.E. Peters (2003b), p. 96</ref><ref name="Momen">Moojan Momen (1985), p. 4</ref> इस समय के दौरान, मुहम्मद केवल पवित्र तीर्थ महीनों के दौरान प्रचार करने में सक्षम थे, जिसमें अरबों के बीच सभी शत्रुताएं निलंबित कर दी गई थीं।
===इस्रा और मिराज===
{{मुख्य|इस्रा और मेराज}}
[[File:Al-Aqsa Mosque by David Shankbone.jpg|thumb|यरूशलेम में अल-हरम राख-शरीफ परिसर का हिस्सा अल-अक्सा मस्जिद और 705 में बनाया गया था, जिसे मुहम्मद ने अपनी रात की यात्रा में यात्रा के संभावित स्थान का सम्मान करने के लिए "सबसे दूर की मस्जिद" नामित किया था।<ref name="Grabar2006">{{cite book |author=Oleg Grabar |title=The Dome of the Rock |url=https://books.google.com/books?id=OeIOowshe6EC&pg=PA14 |accessdate=26 December 2011 |date=1 October 2006 |publisher=Harvard University Press |isbn=978-0-674-02313-0 |page=14 |url-status=live |archiveurl=https://web.archive.org/web/20130615020045/http://books.google.com/books?id=OeIOowshe6EC&pg=PA14 |archivedate=15 June 2013 |df=dmy-all }}</ref>]]
इस्लामी परंपरा में कहा गया है कि 620 में, मुहम्मद ने इस्रा और मिराज का अनुभव किया, एक चमत्कारिक रात्रि लंबी यात्रा देवदुत जिब्रिल के साथ हुई थी। यात्रा की शुरुआत में, कहा जाता है कि इस्रा, मक्का से "सबसे दूर की मस्जिद" के लिए एक [[बुर्राक़]] जानवर पर यात्रा कर रहे थे।<ref>{{cite web|url=https://www.bbc.com/hindi/news/020403_jerusalam_spl_ac.shtml|title=यरुशलम का धार्मिक महत्व|access-date=16 मई 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190528153031/https://www.bbc.com/hindi/news/020403_jerusalam_spl_ac.shtml|archive-date=28 मई 2019|url-status=live}}</ref> बाद में, मिराज के दौरान, मुहम्मद ने स्वर्ग और नरक का दौरा किया, और पहले के नबी, जैसे इब्राहीम , मूसा और यीशु के साथ बात की थी। <ref name="EoIMW"/> मुहम्मद की पहली जीवनी के लेखक [[इब्न इशाक]] ने इस घटना को आध्यात्मिक अनुभव के रूप में प्रस्तुत किया; बाद में इतिहासकार, जैसे अल-ताबारी और इब्न कथिर , इसे एक शारीरिक यात्रा के रूप में प्रस्तुत करते हैं। <ref name="EoIMW">''Encyclopedia of Islam and the Muslim World'' (2003), p. 482</ref>
कुछ पश्चिमी विद्वान का कहना है कि इस्रा और मिराज यात्रा ने मक्का में पवित्र घेरे से स्वर्ग के माध्यम से दिव्य अल-बेत अल-मामूर (काबा का स्वर्गीय प्रोटोटाइप) तक यात्रा की; बाद की परंपराओं ने मुक्का से यरूशलेम जाने के रूप में मुहम्मद की यात्रा को इंगित किया। <ref>Sells, Michael. ''Ascension'', [[Encyclopedia of the Quran]].</ref>
===हिजरत से पिछले साल पहले===
[[File:Domeoftherock1.jpg|thumb|रॉक के गुंबद पर कुरानिक शिलालेख। माना जाता है कि मुहम्मद स्वर्ग का आरोहण किया था। <ref name="BloomBlair2009">{{cite book |author1=Jonathan M. Bloom |author2=Sheila Blair |title=The Grove encyclopedia of Islamic art and architecture |url=https://books.google.com/books?id=un4WcfEASZwC&pg=PA76 |accessdate=26 December 2011 |year=2009 |publisher=Oxford University Press |isbn=978-0-19-530991-1 |page=76 |url-status=live |archiveurl=https://web.archive.org/web/20130615020218/http://books.google.com/books?id=un4WcfEASZwC&pg=PA76 |archivedate=15 June 2013 |df=dmy-all }}</ref>]]
मुहम्मद की पत्नी खदिजा रजी. और चाचा अबू तालिब दोनों की मृत्यु 619 में हुई, इस साल इस वर्ष " दुःख का वर्ष " कहा जाता है। अबू तालिब की मृत्यु के साथ, बानू हाशिम वंश के नेतृत्व ने मुहम्मद के एक दृढ़ दुश्मन [[अबू लहब]] को पारित किया। इसके तुरंत बाद, अबू लाहब ने मुहम्मद पर कबीले की सुरक्षा वापस ले ली। इसने मोहम्मद को खतरे में डाल दिया; कबीले संरक्षण की वापसी से संकेत मिलता है कि उसकी हत्या के लिए रक्त बदला ठीक नहीं किया जाएगा। मुहम्मद ने फिर अरब में एक और महत्वपूर्ण शहर ताइफ़ का दौरा किया, और एक संरक्षक को खोजने की कोशिश की, लेकिन उनका प्रयास विफल रहा और आगे उनहें शारीरिक खतरे में लाया। <ref name = "EoI-Muhammad"/><ref name="Momen"/> मुहम्मद को मक्का लौटने के लिए मजबूर होना पड़ा। मुक्ति इब्न आदि (और बनू नफाइल के जनजाति की सुरक्षा) नामक एक मक्का आदमी ने उसे अपने मूल शहर में सुरक्षित रूप से प्रवेश करने के लिए संभव बनाया। <ref name="EoI-Muhammad"/><ref name="Momen"/>
कई लोग व्यापार पर मक्का गए या काबा के तीर्थयात्रियों के रूप में गए। मुहम्मद ने अपने और अपने अनुयायियों के लिए एक नया घर तलाशने का अवसर लिया। कई असफल वार्ता के बाद, उन्हें यसरब (बाद में मदीना शहर) के कुछ लोगों के साथ आशा मिली। <ref name= "EoI-Muhammad"/> यसरब की अरब आबादी एकेश्वरवाद से परिचित थी और एक भविष्यवक्ता की उपस्थिति के लिए तैयार थी क्योंकि वहां एक यहूदी समुदाय मौजूद था। <ref name= "EoI-Muhammad" /> उन्होंने मक्का पर सर्वोच्चता हासिल करने के लिए, मुहम्मद और नए विश्वास के माध्यम से आशा की थी; तीर्थयात्रा की जगह के रूप में यसरब अपने महत्व के प्रति ईर्ष्यावान थे। इस्लाम में कनवर्ट मदीना के लगभग सभी अरब जनजातियों से आया; अगले वर्ष जून तक, पचास मुस्लिम तीर्थयात्रा के लिए मक्का आए और मुहम्मद से मिलते थे। रात को गुप्त रूप से उससे मिलकर, समूह ने " अल-अबाबा का दूसरा वचन " या ओरिएंटलिस्ट के विचार में, " युद्ध की शपथ " के रूप में जाना जाता है। <ref>Watt (1974), p. 83</ref> अकबाह के प्रतिज्ञाओं के बाद, मुहम्मद ने अपने अनुयायियों को यसरब में जाने के लिए प्रोत्साहित किया। एबिसिनिया के प्रवासन के साथ, कुरैशी ने प्रवासन को रोकने का प्रयास किया। हालांकि, लगभग सभी मुस्लिम छोड़ने में कामयाब रहे। <ref name = P87>Peterson (2006), pp. 86–89</ref>
===हिजरत===
{{मुख्य|हिजरी}}
{| class="wikitable collapsible" align="right" width="25%" style="border:1px solid #ddd; margin:0 0 1em 1em; padding:0 0 1em 1em; vertical-align:right; font-size:75%;"
!colspan="2" align="center"|<big>मदीना में मुहम्मद की समयरेखा</big>
|-
|align="right">|{{circa}} 622
|मदीने को प्रवास ([[हिजरी]])
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|align="right">|623
|कारवां छापों की शुरूआत
|-
|align="right">|623
|अल कुद्र आक्रमण
|-
|align="right">|623
|[[बद्र की लड़ाई]] : मुसलमानोंका मक्का को हराना
|-
|align="right">|624
|साविक की लड़ाई, अबू सूफान का पकड़ा जाना
|-
|align="right">|624
|बनू क़ायनुका का निष्कासन
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|align="right">|624
|सी अम्र का छापा, मुहम्मद का गटफान जनजातियों पर आक्रमण
|-
|align="right">|624
|खालिद बिन सुफियान की ह्त्या, और अबू रफी के हमले
|-
|align="right">|624
|उहूद की लड़ाई: मक्का वाले मुस्लिमों को हराते हैं
|-
|align="right">|625
|बिर मौना की ट्रेजेडी और अल-रजी का हमला
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|align="right">|625
|हमरा अल-असद पर आक्रमण, सफलतापूर्वक दुश्मन को पीछे हटने का कारण बनता है
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|align="right">|625
|आक्रमण के बाद बानू नादिर निष्कासित
|-
|align="right">|625
|नेजद, बद्र और दुमातुल जंदल पर आक्रमण
|-
|align="right">|627
|[[खंदक़ की लड़ाई|खाई की लड़ाई]]
|-
|align="right">|627
|बनू कुरैजा पर आक्रमण, सफल घेराबंदी
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|align="right">|628
|[[हुदैबिया संधी]], काबे तक पहुंच का रास्ता मिला
|-
|align="right">|628
|खयबर ओएसिस पर विजय
|-
|align="right">|629
|पहली हज तीर्थयात्रा
|-
|align="right">|629
|बीजान्टिन साम्राज्य पर विफल हमला: मुताह की लड़ाई
|-
|align="right">|629
|मक्का पर रक्तहीन विजय
|-
|align="right">|629
|[[हुनैन की लड़ाई]]
|-
|align="right">|630
|[[ताइफ़ की घेराबंदी]]
|-
|align="right">|631
|अधिकांश अरब प्रायद्वीप नियम
|-
|align="right">|632
|गस्सानिद पर हमला: तबूक
|-
|align="right">|632
|विदाई हज तीर्थयात्रा
|-
|align="right">|632
|8 जून को मदीना में मौत
|-
| style="colspan:2;" |
| {{navbar|Muhammad timeline in Medina|style=text-align:center}}
|}
<!-- END TIMELINE --><noinclude>
[[श्रेणी:Islam templates]]
</noinclude>
अंत में सन् 622 में उन्हें अपने अनुयायियों के साथ मक्का से [[मदीना]] के लिए कूच करना पड़ा। इस यात्रा को [[हिजरत]] कहा जाता है और यहीं से इस्लामी कैलेंडर [[हिजरी]] की शुरुआत होती है। [[मदीना]] में उनका स्वागत हुआ और कई संभ्रांत लोगों द्वारा स्वीकार किया गया। मदीना के लोगों की ज़िंदगी आपसी लड़ाईयों से परेशान-सी थी और मुहम्मद के संदेशों ने उन्हें वहाँ बहुत लोकप्रिय बना दिया। उस समय मदीना में तीन महत्वपूर्ण [[यहूदी]] कबीले थे। आरंभ में मुहम्मद ने जेरुसलम को प्रार्थना की दिशा बनाने को कहा था।
सन् 630 में मुहम्मद ने अपने अनुयायियों के साथ मक्का पर चढ़ाई कर दी। मक्के वालों ने हथियार डाल दिये। मक्का मुसलमानों के आधीन में आगया। मक्का में स्थित काबा को इस्लाम का पवित्र स्थल घोषित कर दिया गया। सन् 632 में मुहम्मद का देहांत हो गया। पर उनकी मृत्यु तक लगभग सम्पूर्ण अरब इस्लाम कबूल कर चुका था।
हिजरा 622 ई में मक्का से उनके अनुयायियों और मक्का से मदीना का प्रवास है। जून 622 में, उन्हें मारने के लिए एक साजिश की चेतावनी दी गई, मुहम्मद गुप्त रूप से मक्का से बाहर निकल गये और मक्का के उत्तर में <ref name="Al-A'zami4">[[Muhammad Mustafa Al-A'zami]] (2003), ''The History of The Qur'anic Text: From Revelation to Compilation: A Comparative Study with the Old and New Testaments'', pp. 30–31. UK Islamic Academy. {{ISBN|978-1872531656}}.</ref> 450 किलोमीटर (280 मील) उत्तर में अपने अनुयायियों को मदीना ले गये। <ref name="Al-A'zami3">[[Muhammad Mustafa Al-A'zami]] (2003), ''The History of The Qur'anic Text: From Revelation to Compilation: A Comparative Study with the Old and New Testaments'', p. 29. UK Islamic Academy. {{ISBN|978-1872531656}}.</ref>
====मदीना में प्रवासन====
मदीना के बारह महत्वपूर्ण कुलों के प्रतिनिधियों से मिलकर एक प्रतिनिधिमंडल ने मुहम्मद को पूरे समुदाय के लिए मुख्य मध्यस्थ के रूप में सेवा करने के लिए आमंत्रित किया; एक तटस्थ बाहरी व्यक्ति के रूप में उनकी स्थिति के कारण। <ref name="Cambridge39"/><ref name="Esp">Esposito (1998), p. 17</ref> यसरब में लड़ रहा था: मुख्य रूप से इस विवाद में अरब और यहूदी निवासियों को शामिल किया गया था, और अनुमान लगाया गया था कि 620 से पहले सौ साल तक चल रहा था। <ref name="Cambridge39"/> परिणामी दावों पर आवर्ती हत्याएं और असहमति, विशेष रूप से बुआथ की लड़ाई के बाद जिसमें सभी कुलों शामिल थे, ने उन्हें स्पष्ट किया कि रक्त-विवाद की आबादी की अवधारणा और आँखों की आँख अब तक काम करने योग्य नहीं थी जब तक कि विवादित मामलों में निर्णय लेने के लिए एक व्यक्ति नहीं था। <ref name="Cambridge39">Watt, ''The Cambridge History of Islam'', p. 39</ref> मदीना के प्रतिनिधिमंडल ने खुद को और उनके साथी नागरिकों को मुहम्मद को अपने समुदाय में स्वीकार करने और शारीरिक रूप से उन्हें अपने आप में से एक के रूप में संरक्षित करने का वचन दिया। <ref name="EoI-Muhammad"/>
मुहम्मद ने अपने अनुयायियों को मदीना में जाने के लिए निर्देश दिया, जब तक कि उनके लगभग सभी अनुयायियों ने मक्का छोड़ दिया। परंपरा के अनुसार, प्रस्थान पर चिंतित होने के कारण, मक्का ने मुहम्मद की हत्या करने की योजना बनाई। अली रजी. की मदद से, मुहम्मद ने उन्हें देखकर मक्का को मूर्ख बना दिया, और गुप्त रूप से अबू बकर रजी. के साथ शहर से फिसल गये। <ref name="EoI-Muhammad"/> 622 तक, मुहम्मद एक बड़ी कृषि ओएसिस मदीना चले गए। मुहम्मद के साथ मक्का से प्रवास करने वाले लोग मुहाजिरीन (प्रवासियों) के रूप में जाने जाते थे। <ref name="EoI-Muhammad"/>
====एक नई राजनीति की स्थापना====
{{मुख्य|मदीना का संविधान}}
पहली बातों में मुहम्मद ने मदीना के जनजातियों में लंबी शिकायतों को कम करने के लिए किया था, मदीना के आठ मेदिनी जनजातियों और मुस्लिम प्रवासियों के बीच मदीना के संविधान के रूप में जाना जाने वाला एक दस्तावेज तैयार करना था, "गठबंधन या संघ का एक प्रकार स्थापित करना"; सभी नागरिकों के इस निर्दिष्ट अधिकार और कर्तव्यों, और मदीना के विभिन्न समुदायों के संबंध (मुस्लिम समुदाय सहित अन्य समुदायों, विशेष रूप से यहूदी और अन्य " पुस्तक के लोग ")। <ref name="Cambridge39"/><ref name="Esp"/> मदीना, उम्मा के संविधान में परिभाषित समुदाय का धार्मिक दृष्टिकोण था, जो व्यावहारिक विचारों से भी आकार था और पुराने अरब जनजातियों के कानूनी रूपों को काफी हद तक संरक्षित करता था। <ref name="EoI-Muhammad"/>
मदीना में इस्लाम में परिवर्तित होने वाला पहला समूह महान नेताओं के बिना कुलों थे; इन कुलों को बाहर से शत्रुतापूर्ण नेताओं द्वारा अधीन कर दिया गया था। <ref>Watt (1956), p. 175.</ref> इसके बाद कुछ अपवादों के साथ मदीना की मूर्तिपूजा आबादी द्वारा इस्लाम की सामान्य स्वीकृति मिली। इब्न इशाक के मुताबिक, यह इस्लाम के लिए साद इब्न मुआद (एक प्रमुख मेदीन नेता) के रूपांतरण से प्रभावित था। <ref>Watt (1956), p. 177</ref> मदीन जो इस्लाम में परिवर्तित हो गए और मुस्लिम प्रवासियों को आश्रय खोजने में मदद मिली, उन्हें अंसार (समर्थक) के रूप में जाना जाने लगा। <ref name="EoI-Muhammad" /> तब मुहम्मद ने प्रवासियों और समर्थकों के बीच भाईचारे की स्थापना की और उन्होंने अली रजी. को अपने भाई के रूप में चुना। <ref>{{cite encyclopedia |title=Ali ibn Abitalib |encyclopedia=Encyclopedia Iranica |accessdate=25 October 2007 |url=http://www.iranica.com/newsite/articles/v1f8/v1f8a043.html |archiveurl=https://web.archive.org/web/20070812205939/http://www.iranica.com/newsite/articles/v1f8/v1f8a043.html |archivedate=12 August 2007 }} {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20070812205939/http://www.iranica.com/newsite/articles/v1f8/v1f8a043.html |date=12 अगस्त 2007 }}</ref>
====सशस्त्र संघर्ष की शुरुआत====
{{मुख्य|मुहम्मद के अभियानों की सूची|बद्र की लड़ाई}}
प्रवासन के बाद, मक्का के लोगों ने मुस्लिम प्रवासियों की संपत्ति मदीना को जब्त कर ली। <ref>[[Fazlur Rahman]] (1979), p. 21</ref> युद्ध बाद में मक्का और मुसलमानों के बीच टूट जाएगा। मुहम्मद ने कुरान के छंदों को मुसलमानों को मक्का से लड़ने की अनुमति दी (सूरा अल-हज , कुरान {{cite quran|22|39 |e=40 |s=ns |b=n}})। <ref>[[John Kelsay]] (1993), p. 21</ref> परंपरागत खाते के अनुसार, 11 फरवरी 624 को, मदीना में मस्जिद अल-क़िबलायत में प्रार्थना करते हुए, मुहम्मद को भगवान से खुलासा हुआ कि उन्हें प्रार्थना के दौरान यरूशलेम की बजाय मक्का का सामना करना चाहिए। मुहम्मद ने नई दिशा में समायोजित किया, और उनके साथ प्रार्थना करने वाले उनके साथी प्रार्थना के दौरान मक्का का सामना करने की परंपरा शुरू करते हुए उनके नेतृत्व का पीछा करते थे। <ref name="Watt1974">{{cite book |author=William Montgomery Watt |title=Muhammad: Prophet and Statesman |url=https://books.google.com/books?id=zLN2hNidLw4C&pg=PA113 |accessdate=29 December 2011 |date=7 February 1974 |publisher=Oxford University Press |isbn=978-0-19-881078-0 |pages=112–14 |url-status=live |archiveurl=https://web.archive.org/web/20130615195815/http://books.google.com/books?id=zLN2hNidLw4C&pg=PA113 |archivedate=15 June 2013 |df=dmy-all }}</ref>
{{Quote box|quoted=true|bgcolor=#ffeeaa|align=right|width=25%|salign=right|quote=उन लोगों को अनुमति दी गई है जो लड़े जा रहे हैं, क्योंकि वे गलत थे। और वास्तव में, अल्लाह उन्हें जीत देने के लिए सक्षम है। जिन लोगों को बिना घर के अपने घरों से बेदखल कर दिया गया है - केवल इसलिए कि वे कहते हैं, "हमारा ईश्वर अल्लाह है।" और यह नहीं था कि अल्लाह लोगों की जांच करता है, कुछ दूसरों के माध्यम से, वहां मठों, चर्चों, सभास्थलों और मस्जिदों को ध्वस्त कर दिया गया था, जिसमें अल्लाह का नाम बहुत उल्लेख किया गया था। और अल्लाह निश्चित रूप से उन लोगों का समर्थन करेगा जो उसका समर्थन करते हैं। दरअसल, अल्लाह शक्तिशाली और महान हो सकता है।
- कुरान (22: 3 9 -40)}}
मार्च 624 में, मुहम्मद ने मक्का व्यापारी कारवां पर छापे में लगभग तीन सौ योद्धाओं का नेतृत्व किया। मुसलमानों ने बद्र में कारवां के लिए हमला किया। <ref>Rodinson (2002), p. 164</ref> योजना से अवगत, मक्का कारवां ने मुस्लिमों को छोड़ दिया। एक मक्का बल को कारवां की रक्षा के लिए भेजा गया था और मुसलमानों को यह शब्द प्राप्त करने के लिए मुकाबला करने के लिए चला गया था कि कारवां सुरक्षित था। बद्र की लड़ाई शुरू हुई। <ref>Watt, ''The Cambridge History of Islam'', p. 45</ref> हालांकि तीन से एक से अधिक की संख्या में, मुसलमानों ने युद्ध जीता, जिसमें चौदह मुसलमानों के साथ कम से कम पचास मक्का मारे गए। वे अबू जहल समेत कई मक्का नेताओं की हत्या में भी सफल रहे। <ref>Glubb (2002), pp. 179–86</ref> सत्तर कैदियों का अधिग्रहण किया गया था, जिनमें से कई को छुड़ौती मिली थी। <ref name="Lewisw">Lewis (2002), p. 41.</ref><ref name="W123">Watt (1961), p. 123</ref><ref name = "Rodinson 168-9">Rodinson (2002), pp. 168–69</ref> मुहम्मद और उनके अनुयायियों ने जीत को उनके विश्वास की पुष्टि के रूप में देखा <ref name="EoI-Muhammad"/> और मुहम्मद ने एक अदृश्य मेजबानों की सहायता से जीत के रूप में जीत दर्ज की। इस अवधि के कुरानिक छंद, मक्का छंदों के विपरीत, सरकार की व्यावहारिक समस्याओं और लूट के वितरण जैसे मुद्दों से निपटा। <ref>Lewis(2002), p. 44</ref>
जीत ने मदीना में मुहम्मद की स्थिति को मजबूत किया और अपने अनुयायियों के बीच पहले के संदेहों को दूर कर दिया। <ref>Russ Rodgers, ''The Generalship of Muhammad: Battles and Campaigns of the Prophet of Allah'' (University Press of Florida; 2012) ch 1</ref> नतीजतन, उनका विरोध कम मुखर हो गया। जिन लोगों ने अभी तक परिवर्तित नहीं किया था, वे इस्लाम के अग्रिम के बारे में बहुत कड़वा थे। दो पगान, अवेस मणत जनजाति के असमा बंट मारवान और अमृत बी के अबू 'अफक । 'ऑफ जनजाति, मुसलमानों को taunting और अपमानित छंद बना दिया था। <ref name=watt-medina-178>Watt (1956), p. 178</ref> वे अपने या संबंधित कुलों से संबंधित लोगों द्वारा मारे गए थे, और मुहम्मद ने हत्याओं को अस्वीकार नहीं किया था। <ref name=watt-medina-178/> हालांकि, इस रिपोर्ट को कुछ लोगों द्वारा एक निर्माण के रूप में माना जाता है। <ref>Maulana Muhammad Ali, ''Muhammad The Prophet'', pp. 199–200</ref> उन जनजातियों के अधिकांश सदस्य इस्लाम में परिवर्तित हो गए, और थोड़ा मूर्तिपूजा विपक्ष बना रहा। <ref>Watt (1956), p. 179</ref>
मोहम्मद ने मदीना से तीन मुख्य यहूदी जनजातियों में से एक बनू क़ैनुक़ा से निष्कासित किया, <ref name="EoI-Muhammad"/> लेकिन कुछ इतिहासकारों का तर्क है कि मुहम्मद की मृत्यु के बाद निष्कासन हुआ। <ref>{{Cite book |publisher=John Wiley and Sons |isbn=9780745654881 |last=Zeitlin |first=Irving M. |title=The Historical Muhammad |date=2007 |page=[https://archive.org/details//page/148 148] |url=https://archive.org/details//page/148 }}</ref> अल- वकिदी के अनुसार, अब्द-अल्लाह इब्न उबाई ने उनके लिए बात करने के बाद, मुहम्मद ने उन्हें निष्पादित करने से रोका और आदेश दिया कि उन्हें मदीना से निर्वासित किया जाए। <ref>{{Cite book |publisher=Routledge |isbn=9781136921131 |last=Faizer |first=Rizwi |title=The Life of Muhammad: Al-Waqidi's Kitab al-Maghazi |date=2010 |page=[https://archive.org/details//page/79 79] |url=https://archive.org/details//page/79 }}</ref> बद्र की लड़ाई के बाद, मुहम्मद ने अपने समुदाय को हेजाज़ के उत्तरी हिस्से से हमलों से बचाने के लिए कई बेदुईन जनजातियों के साथ पारस्परिक सहायता गठजोड़ भी किया। <ref name="EoI-Muhammad"/>
====मक्का के साथ संघर्ष====
{{मुख्य|उहुद की लड़ाई|उहुद की लड़ाई=}}
मक्का उनकी हार का बदला लेने के लिए उत्सुक थे। आर्थिक समृद्धि को बनाए रखने के लिए, मक्का को अपनी प्रतिष्ठा बहाल करने की आवश्यकता थी, जिसे बदर में कम कर दिया गया था। <ref>Watt (1961), p. 132.</ref> आने वाले महीनों में, मक्का ने मदीना को हमला करने वाले दलों को भेजा जबकि मुहम्मद ने मक्का के साथ संबद्ध जनजातियों के खिलाफ अभियान चलाया और हमलावरों को मक्का कारवां पर भेज दिया। <ref>Watt (1961), p. 134</ref> अबू सूफान ने 3000 पुरुषों की एक सेना इकट्ठी की और मदीना पर हमले के लिए तैयार किया। <ref name = "Lewis 1960 45">Lewis (1960), p. 45</ref>
एक स्काउट ने एक दिन बाद मक्का सेना की उपस्थिति और संख्याओं के मुहम्मद को चेतावनी दी। अगली सुबह, युद्ध के मुस्लिम सम्मेलन में, एक विवाद सामने आया कि मक्का को कैसे पीछे हटाना है। मुहम्मद और कई वरिष्ठ आंकड़ों ने सुझाव दिया कि मदीना के भीतर लड़ना और भारी मजबूत गढ़ों का लाभ उठाना सुरक्षित होगा। युवा मुसलमानों ने तर्क दिया कि मक्का फसलों को नष्ट कर रहे थे, और गढ़ों में उलझन से मुस्लिम प्रतिष्ठा नष्ट हो जाएगी। मुहम्मद अंततः युवा मुस्लिमों को स्वीकार कर लिया और युद्ध के लिए मुस्लिम बल तैयार किया। मुहम्मद ने उहूद (मक्का शिविर का स्थान) के पहाड़ पर अपनी सेना का नेतृत्व किया और 23 मार्च 625 को उहूद की लड़ाई लड़ी। <ref>C.F. Robinson, ''Uhud'', [[Encyclopedia of Islam]]</ref><ref>Watt (1964), p. 137</ref> हालांकि मुस्लिम सेना के शुरुआती मुठभेड़ों में लाभ था, अनुशासन की कमी रणनीतिक रूप से रखे तीरंदाजों का हिस्सा मुस्लिम हार का कारण बन गया; मुहम्मद के चाचा हमजा समेत 75 मुस्लिम मारे गए, जो मुस्लिम परंपरा में सबसे प्रसिद्ध शहीदों में से एक बन गए। मक्का ने मुसलमानों का पीछा नहीं किया, बल्कि, वे मक्का को जीत घोषित कर दिया। घोषणा शायद इसलिए है क्योंकि मुहम्मद घायल हो गए थे और मरे हुए थे। जब उन्होंने पाया कि मुहम्मद रहते थे, तो उनकी सहायता के लिए आने वाली नई ताकतों के बारे में झूठी जानकारी के कारण मक्का वापस नहीं लौटे। हमले मुस्लिमों को पूरी तरह से नष्ट करने के अपने लक्ष्य को हासिल करने में नाकाम रहे थे। <ref>Watt (1974), p. 137</ref><ref>David Cook (2007), p. 24</ref> मुसलमानों ने मरे हुओं को दफनाया और उस शाम मदीना लौट आए। नुकसान के कारणों के बारे में जमा प्रश्न; मुहम्मद ने कुरान के छंदों को 3: 152{{cite quran|3|152 |s=ns |b=n}} दिया जो दर्शाता है कि हार दो गुना थी: आंशिक रूप से अवज्ञा के लिए सजा, आंशिक रूप से दृढ़ता के लिए एक परीक्षण। <ref>See:
* Watt (1981), p. 432
* Watt (1964), p. 144</ref>
[[अबू सुफ़ियान]] ने मदीना पर एक और हमले की दिशा में अपना प्रयास निर्देशित किया। उन्होंने मदीना के उत्तर और पूर्व में भिक्षु जनजातियों से समर्थन प्राप्त किया; मुहम्मद की कमजोरी, लूट के वादे, कुरैश प्रतिष्ठा की यादें और रिश्वत के माध्यम से प्रचार का उपयोग करना। <ref name = "Watt Medina 30">Watt (1956), p. 30.</ref> मुहम्मद की नई नीति उनके खिलाफ गठजोड़ को रोकने के लिए थी। जब भी मदीना के खिलाफ गठबंधन गठित किए गए, तो उन्होंने उन्हें तोड़ने के लिए अभियानों को भेजा। <ref name = "Watt Medina 30" /> मुहम्मद ने मदीना के खिलाफ शत्रुतापूर्ण इरादे से पुरुषों के बारे में सुना, और गंभीर तरीके से प्रतिक्रिया व्यक्त की। <ref>Watt (1956), p. 34</ref> एक उदाहरण बनू नादिर के यहूदी जनजाति के प्रधान काब इब्न अल-अशरफ की हत्या है। अल-अशरफ मक्का गए और कविताओं को लिखा जो मकर के दुःख, क्रोध और बद्री की लड़ाई के बाद बदला लेने की इच्छा रखते थे। <ref>Watt (1956), p. 18</ref><ref>{{cite journal |last1=Rubin |first1=Uri |year=1990 |title=The Assassination of Kaʿb b. al-Ashraf |journal=Oriens |volume=32 |issue=1 |pages=65–71 |jstor=1580625 |doi=10.2307/1580625}}</ref> लगभग एक साल बाद, मुहम्मद ने मदीना <ref>Watt (1956), pp. 220–21</ref> से बनू नादिर को सीरिया में प्रवासन करने के लिए मजबूर कर दिया; उन्होंने उन्हें कुछ संपत्ति लेने की इजाजत दी, क्योंकि वह अपने गढ़ों में बनू नादिर को कम करने में असमर्थ थे। मुहम्मद ने भगवान के नाम पर उनकी बाकी संपत्ति पर दावा किया था क्योंकि यह रक्तपात से प्राप्त नहीं हुआ था। मुहम्मद ने विभिन्न अरब जनजातियों को व्यक्तिगत रूप से आश्चर्यचकित कर दिया, जिससे भारी दुश्मनों ने उन्हें दुश्मनों को खत्म करने के लिए एकजुट हो गया। मुहम्मद के खिलाफ एक कन्फेडरेशन रोकने की कोशिशें असफल रहीं, हालांकि वह अपनी ताकतों को बढ़ाने में सक्षम था और कई संभावित जनजातियों को अपने दुश्मनों से जुड़ने से रोक दिया था। <ref>Watt (1956), p. 35</ref>
====मदीना की घेराबंदी====
{{main|खाई की लड़ाई}}
[[File:Masjid al-Qiblatain.jpg|thumb|मस्जिद अल-क़िबलायत, जहां मुहम्मद ने नई क्यूबाला, या प्रार्थना की दिशा स्थापित की।]]
निर्वासित बानू नादिर की मदद से, कुरैश के सैन्य नेता अबू सूफान ने 10,000 लोगों की एक शक्ति जताई। मुहम्मद ने लगभग 3,000 पुरुषों की एक सेना तैयार की और उस समय अरब में अज्ञात रक्षा का एक रूप अपनाया; मुसलमानों ने एक खाई खोद दी जहां मदीना घुड़सवार हमले के लिए खुली थी। इस विचार को फ़ारसी में इस्लाम, सलमान फारसी में परिवर्तित करने के लिए श्रेय दिया जाता है। मदीना की घेराबंदी 31 मार्च 627 को शुरू हुई और दो सप्ताह तक चली। <ref>Watt (1956), pp. 36, 37</ref> अबू सुफ़ियान की सेना किलेबंदी के लिए तैयार नहीं थी, और एक अप्रभावी घेराबंदी के बाद, गठबंधन ने घर लौटने का फैसला किया। <ref>See:
* Rodinson (2002), pp. 209–11
* Watt (1964), p. 169</ref> कुरान 33: 9-27{{cite quran|33|9 |e=27 |s=ns |b=n}}.<ref name="Rubin"/> छंद में सुर अल-अहज़ाब में इस लड़ाई पर चर्चा करता है। [88] युद्ध के दौरान, मदीना के दक्षिण में स्थित बनू कुरैजा के यहूदी जनजाति ने मुहम्मद के खिलाफ विद्रोह करने के लिए मक्का सेनाओं के साथ वार्ता में प्रवेश किया। यद्यपि मक्का सेनाओं को सुझावों से प्रभावित किया गया था कि मुहम्मद को अभिभूत होना निश्चित था, लेकिन अगर संघ उन्हें नष्ट करने में असमर्थ था तो वे आश्वासन चाहते थे। लंबे समय तक वार्ता के बाद कोई समझौता नहीं हुआ, आंशिक रूप से मुहम्मद के स्काउट्स द्वारा तबाही के प्रयासों के कारण। <ref>Watt (1964) pp. 170–72</ref> गठबंधन की वापसी के बाद, मुसलमानों ने विश्वासघात के बनू कुरैजा पर आरोप लगाया और उन्हें 25 दिनों तक अपने किलों में घेर लिया। अंततः बानू कुरैजा ने आत्मसमर्पण कर दिया; इब्न इशाक के मुताबिक, इस्लाम में कुछ धर्मों के अलावा सभी पुरुष मारे गए थे, जबकि महिलाएं और बच्चे दास थे। [<ref>Peterson (2007), p. 126</ref><ref>Ramadan (2007), p. 141</ref> वलीद एन अराफात और बराकत अहमद ने इब्न इशाक की कथा की सटीकता पर विवाद किया है। <ref name="Meri1">Meri, ''Medieval Islamic Civilization: An Encyclopedia'', p. 754.</ref> अराफात का मानना है कि इस घटना के 100 वर्षों बाद बोलते हुए इब्न इशाक के यहूदी स्रोतों ने यहूदी इतिहास में पहले नरसंहार की यादों के साथ इस खाते को स्वीकार किया; उन्होंने नोट किया कि इब्न इशाक को उनके समकालीन मलिक इब्न अनास द्वारा अविश्वसनीय इतिहासकार माना गया था, और बाद में इब्न हजर द्वारा "विषम कहानियों" का एक ट्रांसमीटर माना गया था। <ref name="Arafat">{{cite journal |last1=Arafat |first1= |year= |title=New Light on the Story of Banu Qurayza and the Jews of Medina |url= |journal=Journal of the Royal Asiatic Society of Great Britain and Ireland |volume=1976 |issue= |pages=100–07}}</ref> अहमद का तर्क है कि केवल कुछ जनजाति मारे गए थे, जबकि कुछ सेनानियों को केवल गुलाम बना दिया गया था। <ref name="Ahmad85">Ahmad, pp. 85–94.</ref><ref>Nemoy, "Barakat Ahmad's "Muhammad and the Jews", p. 325. Nemoy is sourcing Ahmad's ''Muhammad and the Jews''.</ref> वाट को अराफात के तर्क "पूरी तरह से भरोसेमंद नहीं" मिलते हैं, जबकि मीर जे किस्टर ने अराफात और अहमद के तर्कों की व्याख्या का खंडन किया है। <ref>Kister, "The Massacre of the Banu Quraiza"</ref>
मदीना की घेराबंदी में, मक्का ने मुस्लिम समुदाय को नष्ट करने के लिए उपलब्ध ताकत प्रदान की। विफलता के परिणामस्वरूप प्रतिष्ठा का एक महत्वपूर्ण नुकसान हुआ; सीरिया के साथ उनका व्यापार गायब हो गया। <ref>Watt (1956), p. 39</ref> खाई की लड़ाई के बाद, मुहम्मद ने उत्तर में दो अभियान किए, दोनों बिना किसी लड़ाई के समाप्त हो गए। <ref name="EoI-Muhammad"/> इन यात्राओं में से एक (या कुछ शुरुआती खातों के अनुसार कुछ साल पहले) लौटने के दौरान, मुहम्मद की पत्नी आइशा रजी. के खिलाफ व्यभिचार का आरोप लगाया गया था। आइशा रजी. को आरोपों से दूर कर दिया गया जब मुहम्मद ने घोषणा की कि उन्हें आइशा रजी. की निर्दोषता की पुष्टि करने और निर्देशन के आरोपों को चार प्रत्यक्षदर्शी (सूरा 24, अन-नूर) द्वारा समर्थित किया गया है। <ref name="Watt-encyc-online"/>
====हुदैबिया की संधि ====
{{मुख्य|सुलह हुदैबिया |सुलह हुदैबिया =}}
{{Quote box|align=right|quote=
"हे अल्लाह! <br />
यह मुहम्मद स. इब्न अब्दुल्ला और सुहायल इब्न अमृत के बीच शांति की संधि है। वे दस साल तक अपनी बाहों को आराम करने की अनुमति देने के लिए सहमत हुए हैं। इस समय के दौरान प्रत्येक पार्टी सुरक्षित होगी, और न ही दूसरे को चोट पहुंचाएगी; कोई गुप्त नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा, लेकिन उनके बीच ईमानदारी और सम्मान प्रबल होगा। जो भी अरब में मुहम्मद के साथ एक संधि या वाचा में प्रवेश करना चाहता है, वह ऐसा कर सकता है, और जो भी कुरैशी के साथ संधि या अनुबंध में प्रवेश करना चाहता है वह ऐसा कर सकता है। और यदि कुरैशीत मुहम्मद को अपने अभिभावक की अनुमति के बिना आता है, तो उसे कुरैशी तक पहुंचाया जाएगा; लेकिन यदि दूसरी तरफ, मुहम्मद के लोगों में से एक कुरैशी के पास आता है, तो उसे मुहम्मद तक नहीं पहुंचाया जाएगा। इस साल, मुहम्मद, अपने साथी के साथ, मक्का से हटना चाहिए, लेकिन अगले वर्ष, वह मक्का आएगा और तीन दिनों तक रहेगा, फिर भी एक यात्री के अलावा उनके हथियारों के बिना; तलवारें उनके म्यान में बनी हैं। "
|source=—हुदैबिया की संधि का बयान <ref name=Text>{{cite book |title=Learning Islam 8 |year=2009 |publisher=Islamic Services Foundation |isbn=978-1-933301-12-9 |page=[https://archive.org/details//page/ D14] |url=https://archive.org/details//page/ }}</ref>
}}
यद्यपि मुहम्मद ने हज को आदेश देने वाले कुरान के छंद दिए थे, <ref>{{cite quran|2|196 |e=210 |s=ns}}</ref> मुसलमानों ने कुरैश शत्रुता के कारण इसे नहीं किया था। शाववाल 628 के महीने में, मुहम्मद ने अपने अनुयायियों को बलिदान जानवरों को प्राप्त करने और मक्का को एक तीर्थयात्रा ([[उम्रह]]) तैयार करने का आदेश दिया और कहा कि भगवान ने उन्हें इस दृष्टिकोण की पूर्ति का वादा किया था जब वह पूरा होने के बाद अपने सिर को हिला रहे थे हज <ref>Lings (1987), p. 249</ref>1,400 मुसलमानों की सुनवाई पर, कुरैशी ने उन्हें रोकने के लिए 200 घुड़सवार भेज दिए। मुहम्मद ने उन्हें एक और कठिन मार्ग लेकर उन्हें उखाड़ फेंक दिया, जिससे उनके अनुयायियों को मक्का के बाहर अल-हुदायबिया पहुंचने में मदद मिली। <ref name = "Hudaybiya"/> वाट के अनुसार, हालांकि तीर्थयात्रा बनाने का मुहम्मद का निर्णय उनके सपने पर आधारित था, लेकिन वह मूर्तिपूजक मक्काओं का भी प्रदर्शन कर रहा था कि इस्लाम ने अभयारण्यों की प्रतिष्ठा को खतरा नहीं दिया था, कि इस्लाम एक अरब धर्म था। <ref name="Hudaybiya">Watt, ''al- Hudaybiya or al-Hudaybiyya'' [[Encyclopedia of Islam]]</ref>
[[File:Kabaa.jpg|thumb|मक्का में काबा लंबे समय से इस क्षेत्र के लिए एक प्रमुख आर्थिक और धार्मिक भूमिका निभाता है। मदीना में मुहम्मद के आगमन के सत्रह महीने बाद, यह मुस्लिम क्यूबाला, या प्रार्थना (सलात) की दिशा बन गई। काबा कई बार पुनर्निर्मित किया गया है; 1629 में निर्मित वर्तमान संरचना 683 के पहले की इमारत की एक पुनर्निर्माण है।<ref name="Peters2005">{{cite book |author=F.E. Peters |title=The Monotheists: Jews, Christians, and Muslims in Conflict and Competition, Volume I: The Peoples of God |url=https://books.google.com/books?id=RsafPfUjC6EC&pg=PA88 |accessdate=29 December 2011 |date=25 July 2005 |publisher=Princeton University Press |isbn=978-0-691-12372-1 |page=88 |url-status=live |archiveurl=https://web.archive.org/web/20130615001550/http://books.google.com/books?id=RsafPfUjC6EC&pg=PA88 |archivedate=15 June 2013 |df=dmy-all }}</ref>]]
मक्का से यात्रा करने वाले उत्सवों के साथ बातचीत शुरू हुई। हालांकि, ये जारी रहे, अफवाहें फैल गईं कि मुस्लिम वार्ताकारों में से एक उथमान बिन अल-एफ़ान कुरैशी द्वारा मारा गया था। मुहम्मद ने तीर्थयात्रियों को मक्का के साथ युद्ध में उतरने पर प्रतिज्ञा करने के लिए कहा था (या मुहम्मद के साथ रहना, जो भी निर्णय लिया)। इस प्रतिज्ञा को "स्वीकृति का वचन" या " पेड़ के नीचे प्रतिज्ञा " के रूप में जाना जाने लगा। उथमान की सुरक्षा के समाचारों को जारी रखने के लिए वार्ता की अनुमति दी गई, और दस साल तक चलने वाली संधि पर अंततः मुसलमानों और कुरैशी के बीच हस्ताक्षर किए गए। <ref name = "Hudaybiya" /><ref>Lewis (2002), p. 42</ref> संधि के मुख्य बिंदुओं में शामिल थे: शत्रुता का समापन, मुहम्मद की तीर्थयात्रा का स्थगित अगले वर्ष, और किसी भी मक्का को वापस भेजने के लिए समझौता जो उनके संरक्षक से अनुमति के बिना मदीना में आ गया। <ref name = "Hudaybiya"/>
कई मुसलमान संधि से संतुष्ट नहीं थे। हालांकि, कुरानिक सुर " अल-फाथ " (विजय) (कुरान 48: 1-29) ने उन्हें आश्वासन दिया कि अभियान को विजयी माना जाना चाहिए। <ref>Lings (1987), p. 255</ref> बाद में यह हुआ कि मुहम्मद के अनुयायियों ने संधि के पीछे लाभ को महसूस किया। इन लाभों में मुसलमानों को मुहम्मद की पहचान करने के लिए मिलिना को सैन्य गतिविधि की समाप्ति के रूप में पहचानने की आवश्यकता शामिल थी, जिसमें मदीना को ताकत हासिल करने की अनुमति मिली, और तीर्थयात्रा अनुष्ठानों से प्रभावित मक्का की प्रशंसा। <ref name="EoI-Muhammad"/>
संघर्ष पर हस्ताक्षर करने के बाद, मुहम्मद खैबर के यहूदी ओएसिस के खिलाफ अभियान चलाए, जिसे खैबर की लड़ाई के रूप में जाना जाता है। यह संभवतः बानू नादिर के आवास के कारण था जो मुहम्मद के खिलाफ शत्रुता को उत्तेजित कर रहे थे, या हुदैबिया के संघर्ष के असंगत परिणाम के रूप में दिखाई देने वाली प्रतिष्ठा हासिल करने के लिए। <ref name = "Lewis 1960 45" /><ref>Vaglieri, ''Khaybar'', Encyclopedia of Islam</ref> मुस्लिम परंपरा के अनुसार, मुहम्मद ने कई शासकों को पत्र भी भेजे, उन्हें इस्लाम में परिवर्तित करने के लिए कहा (सटीक तारीख स्रोतों में अलग-अलग दी गई है)। <ref name="EoI-Muhammad"/><ref name=King_Lings>Lings (1987), p. 260</ref><ref name=Kings_Khan>Khan (1998), pp. 250–251</ref> उन्होंने बीजान्टिन साम्राज्य (पूर्वी रोमन साम्राज्य), फारस के खोसरू, यमन के मुखिया और कुछ अन्य लोगों के हेराकेलियस को दूत भेजे। <ref name=King_Lings/><ref name=Kings_Khan/> हुदैबिया के संघर्ष के बाद के वर्षों में, मुहम्मद ने मुहता की लड़ाई में ट्रांसजॉर्डियन बीजान्टिन मिट्टी पर अरबों के खिलाफ अपनी सेनाओं को निर्देशित किया। <ref>F. Buhl, ''Muta'', [[Encyclopedia of Islam]]</ref>
===अंतिम वर्ष===
====मक्का पर विजय====
{{मुख्य|मक्का पर विजय}}
हुदैबिय्याह का संघर्ष दो साल तक लागू किया गया था। <ref name=khan_274>Khan (1998), p. 274</ref><ref name = "Lings_291">Lings (1987), p. 291</ref> बानू खुजा के जनजाति के साथ मुहम्मद के साथ अच्छे संबंध थे, जबकि उनके दुश्मन बानू बकर ने मक्का के साथ सहयोग किया था। <ref name=khan_274/><ref name = "Lings_291" /> बकर के एक समूह ने खुजा के खिलाफ रात की छाप छोड़ी, उनमें से कुछ को मार डाला। <ref name=khan_274/><ref name=Lings_291/> मक्का ने बानू बकर को हथियार से मदद की और कुछ सूत्रों के मुताबिक, कुछ मक्का ने भी लड़ाई में हिस्सा लिया। <ref name=khan_274//> इस घटना के बाद, मुहम्मद ने मक्का को तीन शर्तों के साथ एक संदेश भेजा, उनसे उनमें से एक को स्वीकार करने के लिए कहा। ये थे: या तो मक्का खूजाह जनजाति के बीच मारे गए लोगों के लिए रक्त धन का भुगतान करेंगे, वे स्वयं बानू बकर से वंचित हो जाएंगे, या उन्हें हुदाय्याह के नल की घोषणा करनी चाहिए। <ref name=khan_274_275>Khan (1998), pp. 274–75</ref>
मक्का ने जवाब दिया कि उन्होंने अंतिम स्थिति स्वीकार कर ली है। <ref name=khan_274_275/> जल्द ही उन्होंने अपनी गलती को महसूस किया और मुहम्मद द्वारा अस्वीकार किया गया अनुरोध, हुदैबिय्याह संधि को नवीनीकृत करने के लिए अबू सूफान को भेजा।
मुहम्मद ने अभियान की तैयारी की शुरुआत की। <ref>Lings (1987), p. 292</ref> 630 में, मुहम्मद ने 10,000 मुस्लिम धर्मों के साथ मक्का पर चढ़ाई की। कम से कम हताहतों के साथ, मुहम्मद ने मक्का का नियंत्रण जब्त कर लिया। <ref>Watt (1956), p. 66.</ref> उन्होंने पिछले पुरुषों के लिए माफी घोषित की, दस लोगों और महिलाओं को छोड़कर जो "हत्या या अन्य अपराधों के दोषी थे या युद्ध से उछल गए थे और शांति को बाधित कर दिया था"। <ref>Watt (1956), p. 66.</ref> इनमें से कुछ बाद में क्षमा कर दिए गए थे। <ref name="Subhani">''The Message'' by Ayatullah Ja'far Subhani, [http://www.al-islam.org/message/49.htm#n582 chapter 48] {{webarchive|url=https://web.archive.org/web/20120502163638/http://www.al-islam.org/message/49.htm|date=2 May 2012}} referencing Sirah by [[Ibn Hisham]], vol. II, page 409.</ref> अधिकांश मक्का इस्लाम में परिवर्तित हो गए और मुहम्मद काबा के आसपास और आसपास अरब देवताओं की सभी मूर्तियों को नष्ट कर दिया। <ref>Harold Wayne Ballard, Donald N. Penny, W. Glenn Jonas (2002), p. 163</ref><ref>F.E. Peters (2003), p. 240</ref> इब्न इशाक और अल-अज़राकी द्वारा एकत्रित रिपोर्टों के मुताबिक, मुहम्मद ने व्यक्तिगत रूप से मैरी और जीसस के चित्रों या भित्तिचित्रों को बचाया, लेकिन अन्य परंपराओं से पता चलता है कि सभी चित्र मिटा दिए गए थे। <ref>{{cite book |title=The Life of Muhammad. A translation of Ishaq's "Sirat Rasul Allah" |publisher=Oxford University Press |last=Guillaume |first=Alfred |authorlink=Alfred Guillaume |year=1955 |page=[https://archive.org/details//page/552 552] |isbn=978-0-19-636033-1 |quote=Quraysh had put pictures in the Ka'ba including two of Jesus son of Mary and Mary (on both of whom be peace!). ... The apostle ordered that the pictures should be erased except those of Jesus and Mary. |url=https://archive.org/details//page/552 |accessdate=8 December 2011 }}</ref> कुरान मक्का की विजय पर चर्चा करता है। <ref name="Rubin"/><ref>{{cite quran|110|1|3 |s=ns}}</ref>
====अरब पर विजय====
{{मुख्य|हुनैन की लड़ाई|तबूक का अभियान}}
[[File:Muslim Conquest.PNG|thumb|मुहम्मद (हरी रेखाएं) और रशीदुन खलिफा (काला रेखाएं) की विजय। दिखाया गया: बीजान्टिन साम्राज्य (उत्तर और पश्चिम) और सस्सिद-फारसी साम्राज्य (पूर्वोत्तर)।]]
मक्का की विजय के बाद, मुहम्मद हौजिन की संघीय जनजातियों से सैन्य खतरे से डर गए थे, जो मुहम्मद के आकार को एक सेना को बढ़ा रहे थे। बनू हवाज़िन मक्का के पुराने दुश्मन थे। वे बनू याकिफ़ ([[ताइफ़]] शहर में रहने वाले) से जुड़े थे जिन्होंने मक्का की प्रतिष्ठा के पतन के कारण मक्का विरोधी नीति को अपनाया था। <ref>Watt (1974), p. 207</ref> मुहम्मद [[हुनैन की लड़ाई]] में हवाजिन और थाकिफ जनजातियों को हराया। <ref name="EoI-Muhammad"/>
उसी वर्ष, मुहम्मद ने मुहता की लड़ाई में अपनी पिछली हार और मुस्लिमों के खिलाफ शत्रुता की रिपोर्ट के कारण उत्तरी अरब के खिलाफ हमला किया। बड़ी कठिनाई के साथ उन्होंने 30,000 पुरुषों को इकट्ठा किया; जिनमें से आधे दूसरे दिन अब्द-अल्लाह इब्न उबाय के साथ लौट आये, जो मुहम्मद उन पर डूबने वाले हानिकारक छंदों से परेशान थे। यद्यपि मोहम्मद तबुक में शत्रुतापूर्ण ताकतों से जुड़ा नहीं था, फिर भी उन्होंने इस क्षेत्र के कुछ स्थानीय प्रमुखों को जमा कर लिया। <ref name="EoI-Muhammad"/><ref>M.A. al-Bakhit, ''Tabuk'', [[Encyclopedia of Islam]]</ref>
उन्होंने पूर्वी अरब में किसी भी शेष मूर्तिपूजक मूर्तियों के विनाश का भी आदेश दिया। पश्चिमी अरब में मुस्लिमों के खिलाफ होने वाला अंतिम शहर ताइफ था। मुहम्मद ने शहर के आत्मसमर्पण को स्वीकार करने से इनकार कर दिया जब तक वे इस्लाम में परिवर्तित होने के लिए सहमत नहीं हुए और पुरुषों को उनकी देवी अल-लात की मूर्ति को नष्ट करने की अनुमति दी। </ref><ref>Husayn, M.J. Biography of Imam 'Ali Ibn Abi-Talib, Translation of Sirat Amir Al-Mu'minin, Translated by: Sayyid Tahir Bilgrami, Ansariyan Publications, Qum, Islamic Republic of Iran</ref>
[[तबूक की लड़ाई]] के एक साल बाद, बनू थाकिफ ने मंत्रियों को मुहम्मद को आत्मसमर्पण करने और इस्लाम को अपनाने के लिए भेजा। मुहम्मद को अपने हमलों के खिलाफ सुरक्षा और युद्ध की लूट से लाभ उठाने के लिए कई बेदूइन प्रस्तुत किए गए। <ref name="EoI-Muhammad"/> हालांकि, बेडरूम इस्लाम की प्रणाली के लिए विदेशी थे और स्वतंत्रता बनाए रखना चाहते थे: अर्थात् उनके गुण और पितृ परंपराओं का कोड। मुहम्मद को एक सैन्य और राजनीतिक समझौते की आवश्यकता होती है जिसके अनुसार वे "मुसलमानों और उनके सहयोगियों पर हमले से बचने के लिए, और मुस्लिम धार्मिक टैक्स जकात का भुगतान करने के लिए मदीना की सर्वोच्चता को स्वीकार करते हैं।" <ref>Lewis (1993), pp. 43–44</ref>
====विदाई तीर्थयात्रा====
{{मुख्य|विदाई तीर्थयात्रा}}
* यह भी देखें: [[ग़दीर ए ख़ुम की घटना]]
632 में, मदीना के प्रवास के दसवें वर्ष के अंत में, मुहम्मद ने अपनी पहली सच्ची इस्लामी तीर्थयात्रा पूरी की, वार्षिक महान तीर्थयात्रा के लिए प्राथमिकता स्थापित की, जिसे हज के नाम से जाना जाता है। <ref name="EoI-Muhammad"/> धू अल-हिजजाह मुहम्मद के 9 वें स्थान पर मक्का के पूर्व में अराफात पर्वत पर अपने विदाई उपदेश दिया गया। इस उपदेश में, मुहम्मद ने अपने अनुयायियों को कुछ पूर्व इस्लामी रीति-रिवाजों का पालन न करने की सलाह दी। मिसाल के तौर पर, उन्होंने कहा कि एक सफेद पर काले रंग की कोई श्रेष्ठता नहीं है, न ही एक काले रंग की शुद्धता और अच्छी क्रिया के अलावा एक सफेद पर कोई श्रेष्ठता है। <ref>{{cite book |last=Sultan |first=Sohaib |title=The Koran For Dummies |publisher=[[John Wiley and Sons]] |date=March 2011 |isbn=978-0-7645-5581-7 |url-access=registration |url=https://archive.org/details/ |access-date=9 दिसंबर 2018 |archive-url=https://web.archive.org/web/20191002040748/https://archive.org/details/ |archive-date=2 अक्तूबर 2019 |url-status=live }}</ref> उन्होंने पूर्व जनजातीय व्यवस्था के आधार पर पुराने रक्त विवादों और विवादों को समाप्त कर दिया और नए इस्लामी समुदाय के निर्माण के प्रभाव के रूप में पुरानी प्रतिज्ञाओं को वापस करने के लिए कहा। अपने समाज में महिलाओं की भेद्यता पर टिप्पणी करते हुए, मुहम्मद ने अपने पुरुष अनुयायियों से "महिलाओं के लिए अच्छा होने का उपदेश दिया, क्योंकि वे आपके घरों में शक्तिहीन बंधुआ (अवान) हैं। आप उन्हें अल्लाह के विश्वास में लाये, और अल्लाह ने आप को अपने यौन संबंधों को वचन के साथ वैध बना दिया, तो अपनी इंद्रियों को काबू में रखो, और मेरे शब्दों को सुनें ... "उन्होंने उनसे कहा कि वे अपनी पत्नियों को अनुशासन देने के हकदार थे लेकिन दयालुता से ऐसा करना चाहिए। उन्होंने पितृत्व के झूठे दावों या मृतक के साथ ग्राहक संबंधों को मना कर विरासत के मुद्दे को संबोधित किया और अपने अनुयायियों को अपनी संपत्ति को विवादास्पद उत्तराधिकारी को देने से मना कर दिया। उन्होंने प्रत्येक वर्ष चार चंद्र महीने की पवित्रता को भी बरकरार रखा। <ref>[[Devin J. Stewart]], ''Farewell Pilgrimage'', Encyclopedia of the Qur'an</ref><ref>Al-Hibri (2003), p. 17</ref> सुन्नी [[तफ़्सीर|तफ़सीर]] के अनुसार, इस घटना के दौरान निम्नलिखित कुरानिक आयात वितरित की गई: "आज मैंने आपके धर्म को पूरा किया है, और आपके लिए मेरे पक्षों को पूरा किया है और इस्लाम को आपके लिए धर्म के रूप में चुना है" (कुरान 5: 3)। <ref name="EoI-Muhammad"/> शिया तफ़सीर के अनुसार, यह मुहम्मद के उत्तराधिकारी के रूप में खुम के तालाब में अली इब्न अबी तालिब की नियुक्ति को संदर्भित करता है, यह कुछ दिनों बाद हुआ जब मुसलमान मक्का से मदीना लौट रहे थे। <ref>See:
* [http://www.almizan.org/Tafseer/Volume3/Baqarah50.asp Tabatabae, Tafsir Al-Mizan, vol. 9, pp. 227–47] {{webarchive|url=https://web.archive.org/web/20071011223853/http://almizan.org/Tafseer/Volume3/Baqarah50.asp |date=11 October 2007 }}
* {{Cite web |url=http://www.tafseercomparison.org/study2.asp?TitleText=Study%202:%20Verse%205:3 |title=Comparing the Tafsir of various exegetes |publisher=Tafseer Comparison |archiveurl=https://web.archive.org/web/20120514111339/http://www.tafseercomparison.org/study2.asp?TitleText=Study%202%3A%20Verse%205%3A3 |archivedate=14 मई 2012 |accessdate=2 February 2013 |url-status=dead |df= }}</ref>
====मौत और मक़बरा====
विदाई तीर्थयात्रा के कुछ महीने बाद, मुहम्मद बीमार पड़ गए और बुखार, सिर दर्द और कमजोरी के साथ कई दिनों तक पीड़ित हो गए। सोमवार, 8 जून 632, मदीना में 62 वर्ष या 63 वर्ष की उम्र में उनकी पत्नी आइशा रजी. के घर में उनकी मृत्यु हो गई। <ref name="USN&WR">[https://www.usnews.com/articles/news/religion/2008/04/07/the-last-prophet.html?PageNr=3 ''The Last Prophet''] {{webarchive|url=https://web.archive.org/web/20090123041056/http://www.usnews.com/articles/news/religion/2008/04/07/the-last-prophet.html?PageNr=3|date=23 January 2009}}, p. 3. Lewis Lord of [[U.S. News & World Report]]. 7 April 2008.</ref> अपने सिर के साथ आइशा रजी. की गोद में आराम करने के बाद, उसने उससे अपने आखिरी सांसारिक सामान (सात सिक्कों) का निपटान करने के लिए कहा, फिर अपने अंतिम शब्द बोलते हुए कहा:
{{Quote|हे अल्लाह, अर-रफीक अल-आला (महान मित्र, सर्वोच्च मित्र या सबसे ऊपर, स्वर्ग में सबसे ऊंचा मित्र)।
<ref>{{cite book |url=https://books.google.com/books?id=HTC6BwAAQBAJ&pg=PT255 |title=The Luminous Life of Our Prophet |author=Reşit Haylamaz |page=355 |publisher=Tughra Books |year=2013 |url-status=live |archiveurl=https://web.archive.org/web/20180122105439/https://books.google.com/books?id=HTC6BwAAQBAJ&pg=PT255 |archivedate=22 January 2018 |df=dmy-all |isbn=9781597846813 }}</ref><ref>{{cite book |url=https://books.google.com/books?id=C75RN7Smxy0C&pg=PA24 |title=Muhammad The Messenger of God |author=Fethullah Gülen |page=24 |publisher=The Light, Inc. |isbn=978-1-932099-83-6 |year=2000 |access-date=9 दिसंबर 2018 |archive-url=https://web.archive.org/web/20171014034241/https://books.google.com/books?id=C75RN7Smxy0C&pg=PA24 |archive-date=14 अक्तूबर 2017 |url-status=live }}</ref><ref>{{cite book |url=https://books.google.com/books?id=85sjN3wM5I8C&pg=PA214 |page=214 |title=Tafsir Ibn Kathir (Volume 5) |publisher=DARUSSALAM |isbn=9789960892764 |year=2003 |access-date=9 दिसंबर 2018 |archive-url=https://web.archive.org/web/20171014034600/https://books.google.com/books?id=85sjN3wM5I8C&pg=PA214 |archive-date=14 अक्तूबर 2017 |url-status=live }}</ref>|मुहम्मद}}
इस्लाम के विश्वकोष के मुताबिक, मुहम्मद की मौत को मेडिनन बुखार शारीरिक और मानसिक थकान से उत्तेजित होने के कारण माना जा सकता है। <ref name=death-cause>{{Cite encyclopedia |author=F. Buhl, A.T. Welch |year=1993 |title=Muhammad |encyclopedia=Encyclopaedia of Islam |edition=2nd |publisher=Brill |editors=P. Bearman, Th. Bianquis, C.E. Bosworth, E. van Donzel, W.P. Heinrichs |volume=7 |page=374 |quote=Then Mumammad suddenly fell ill, presumably of the ordinary Medina fever (al-Farazdak, ix, 13); but this was dangerous to a man physically and mentally overwrought.}}</ref>
अकादमिक रीसाइट हैलामाज और फतेह हरपी का कहना है कि अर-रफीक अल-आला भगवान का जिक्र कर रहे हैं। <ref>{{cite book |title=Prophet Muhammad – Sultan of Hearts – Vol 2 |author1=Reşit Haylamaz |author2=Fatih Harpci |publisher=Tughra Books |isbn=978-1-59784-683-7 |page=[https://archive.org/details//page/472 472] |date=2014-08-07 |url=https://archive.org/details//page/472 }}</ref> उन्हें दफनाया गया जहां वह आइशा रजी. के घर में मर गए। <ref name="EoI-Muhammad"/><ref>Leila Ahmed (1986), 665–91 (686)</ref><ref name="Peters90">F.E. Peters (2003), [https://books.google.com/books?id=HYJ2c9E9IM8C&pg=PA90 p. 90] {{webarchive|url=https://web.archive.org/web/20150922124552/https://books.google.com/books?id=HYJ2c9E9IM8C&pg=PA90 |date=22 September 2015 }}</ref> उमायद खलीफ अल-वालिद प्रथम के शासनकाल के दौरान, मुहम्मद की मकबरे की साइट को शामिल करने के लिए अल-मस्जिद-ए-नबवी (पैगंबर की मस्जिद) का विस्तार किया गया था। <ref>{{Cite book |publisher=Penerbit UTM |isbn=978-983-52-0373-2 |last=Ariffin |first=Syed Ahmad Iskandar Syed |title=Architectural Conservation in Islam: Case Study of the Prophet's Mosque |year=2005 |page=[https://archive.org/details//page/88 88] |url=https://archive.org/details//page/88 }}</ref> मकबरे के ऊपर ग्रीन डोम 13 वीं शताब्दी में मामलुक सुल्तान अल मंसूर कलकवुन द्वारा बनाया गया था, हालांकि 16 वीं शताब्दी में ग्रीन रंग जोड़ा गया था, जो ओटोमन सुल्तान सुलेमान द मैग्नीफिशेंट के शासनकाल में था। <ref>{{cite web |url=http://archnet.org/library/sites/one-site.jsp?site_id=10061 |title=Prophet's Mosque |publisher=Archnet.org |date=2 May 2005 |accessdate=26 January 2012 |url-status=dead |archiveurl=https://web.archive.org/web/20120323131933/http://archnet.org/library/sites/one-site.jsp?site_id=10061 |archivedate=23 March 2012 |df=}}</ref> मुहम्मद के समीप कब्रिस्तानों में से उनके साथी (सहाबा), पहले दो मुस्लिम खलीफा अबू बकर रजी. और उमर रजी. हैं, और एक खाली व्यक्ति जो मुसलमानों का मानना है कि यीशु का इंतजार है। <ref name="Peters90"/><ref>"Isa", ''Encyclopedia of Islam''</ref><ref name="Al-HaqqaniKabbani2002">{{cite book |author1=Shaykh Adil Al-Haqqani |author2=Shaykh Hisham Kabbani |title=The Path to Spiritual Excellence |url=https://books.google.com/books?id=mzpV0QnOVxsC&pg=PA65 |year=2002 |publisher=ISCA |isbn=978-1-930409-18-7 |pages=65–66 |url-status=live |archiveurl=https://web.archive.org/web/20150924043430/https://books.google.com/books?id=mzpV0QnOVxsC&pg=PA65 |archivedate=24 September 2015 |df=dmy-all }}</ref> जब बिन सौद ने 1805 में मदीना लिया, मुहम्मद की मकबरा अपने सोने और गहने के गहने से छीन ली गई थी। <ref name="Weston2008"/> वहाबीवाद के अनुयायियों, बिन सऊद के अनुयायियों ने अपनी पूजा को रोकने के लिए मदीना में लगभग हर मकबरे गुंबद को नष्ट कर दिया, <ref name="Weston2008">{{cite book |author=Mark Weston |title=Prophets and princes: Saudi Arabia from Muhammad to the present |url=https://books.google.com/books?id=EEEFsVYLko4C&pg=PA102 |year=2008 |publisher=John Wiley and Sons |isbn=978-0-470-18257-4 |pages=102–03 |url-status=live |archiveurl=https://web.archive.org/web/20160101063555/https://books.google.com/books?id=EEEFsVYLko4C&pg=PA102 |archivedate=1 January 2016 |df=dmy-all }}</ref> और मुहम्मद में से एक को बच निकला है। <ref name="Behrens-AbouseifVernoit2006">{{cite book |author1=Doris Behrens-Abouseif |author2=Stephen Vernoit |title=Islamic art in the 19th century: tradition, innovation, and eclecticism |url=https://books.google.com/books?id=A4q58Af5zAoC&pg=PA22 |year=2006 |publisher=Brill |isbn=978-90-04-14442-2 |page=22 |url-status=live |archiveurl=https://web.archive.org/web/20150930145617/https://books.google.com/books?id=A4q58Af5zAoC&pg=PA22 |archivedate=30 September 2015 |df=dmy-all }}</ref> इसी तरह की घटनाएं 1925 में हुईं जब सऊदी मिलिशिया ने पीछे हटना शुरू किया- और इस बार शहर को रखने में कामयाब रहे। <ref name="Weston2008b">{{cite book |author=Mark Weston |title=Prophets and princes: Saudi Arabia from Muhammad to the present |url=https://books.google.com/books?id=EEEFsVYLko4C&pg=PA136 |year=2008 |publisher=John Wiley and Sons |isbn=978-0-470-18257-4 |page=136 |url-status=live |archiveurl=https://web.archive.org/web/20160101063555/https://books.google.com/books?id=EEEFsVYLko4C&pg=PA136 |archivedate=1 January 2016 |df=dmy-all }}</ref><ref name="Cornell2007">{{cite book |author=Vincent J. Cornell |title=Voices of Islam: Voices of the spirit |url=https://books.google.com/books?id=8dNKFLJVvNkC&pg=PA84 |year=2007 |publisher=Greenwood Publishing Group |isbn=978-0-275-98734-3 |page=84 |url-status=live |archiveurl=https://web.archive.org/web/20160101063555/https://books.google.com/books?id=8dNKFLJVvNkC&pg=PA84 |archivedate=1 January 2016 |df=dmy-all }}</ref><ref name="Ernst2004">{{cite book |author=Carl W. Ernst |title=Following Muhammad: Rethinking Islam in the contemporary world |url=https://books.google.com/books?id=DOWn22EkJsQC&pg=PA1173 |year=2004 |publisher=Univ of North Carolina Press |isbn=978-0-8078-5577-5 |pages=173–74 |url-status=live |archiveurl=https://web.archive.org/web/20160101063555/https://books.google.com/books?id=DOWn22EkJsQC&pg=PA1173 |archivedate=1 January 2016 |df=dmy-all }}</ref> इस्लाम की वहाबी व्याख्या में, अनियमित कब्रों में दफनाया जाना है। <ref name="Behrens-AbouseifVernoit2006"/> हालांकि सौदी द्वारा फंसे हुए, कई तीर्थयात्रियों ने मयूरत-एक अनुष्ठान का दौरा किया-मकबरे के लिए। <ref name="Bennett1998">{{cite book |author=Clinton Bennett |title=In search of Muhammad |url=https://books.google.com/books?id=-VTIkkcUFHQC&pg=PA182 |year=1998 |publisher=Continuum International Publishing Group |isbn=978-0-304-70401-9 |pages=182–83 |url-status=live |archiveurl=https://web.archive.org/web/20150922131141/https://books.google.com/books?id=-VTIkkcUFHQC&pg=PA182 |archivedate=22 September 2015 |df=dmy-all }}</ref><ref name="Clark2011">{{cite book |author=Malcolm Clark |title=Islam For Dummies |url=https://books.google.com/books?id=zPXu561ZpvgC&pg=PT165 |year=2011 |publisher=John Wiley and Sons |isbn=978-1-118-05396-6 |page=165 |url-status=live |archiveurl=https://web.archive.org/web/20150924035138/https://books.google.com/books?id=zPXu561ZpvgC&pg=PT165 |archivedate=24 September 2015 |df=dmy-all }}</ref>
{{wide image|Madina_Haram_at_evening.jpg|800px|मदीना, सऊदी अरब में अल-मस्जिद एन-नाबावी ("पैगंबर की मस्जिद"), केंद्र में मुहम्मद की कब्र पर बने ग्रीन डोम के साथ|left}}
===मुहम्मद के बाद===
[[File:Map of expansion of Caliphate.svg|thumb|right|ख़िलाफ़त का विस्तार, 622–750 CE.
{{legend|#a1584e| मुहम्मद , 622-632 ई।}}
{{legend|#ef9070| राशिदीन ख़िलाफ़त 632-661 ई}}
{{legend|#fad07d| उमय्यद ख़िलाफ़त, 661-750 ई}}]]
मुहम्मद का उत्तराधिकार केंद्रीय मुद्दा है जिसने मुस्लिम समुदाय को मुस्लिम इतिहास की पहली शताब्दी में कई डिवीजनों में विभाजित किया। उनकी मृत्यु से कुछ महीने पहले, मुहम्मद ने गदिर खुम में एक उपदेश दिया जहां उन्होंने घोषणा की कि अली इब्न अबी तालिब उनके उत्तराधिकारी होंगे। <ref>{{cite book|last1=Majd|first1=Vahid|title=The Sermon of Prophet Muhammad (saww) at Ghadir Khum}}</ref> उपदेश के बाद, मुहम्मद ने मुसलमानों को अली रजी. के प्रति निष्ठा देने का आदेश दिया। शिया और सुन्नी दोनों स्रोत इस बात से सहमत हैं कि अबू बकर रजी., उमर इब्न अल-खत्ताब रजी. और उस्मान इब्न अफ़ान रजी. इस घटना में अली रजी. के प्रति निष्ठा देने वाले कई लोगों में से थे। <ref>{{cite web |title=A Shi'ite Encyclopedia |url=https://www.al-islam.org/shiite-encyclopedia-ahlul-bayt-dilp-team |website=Al-Islam.org |publisher=Ahlul Bayt Digital Islamic Library Project |accessdate=27 February 2018 |archive-url=https://web.archive.org/web/20180218134346/https://www.al-islam.org/shiite-encyclopedia-ahlul-bayt-dilp-team |archive-date=18 फ़रवरी 2018 |url-status=dead }}</ref><ref>{{cite book |title=Musnad Ahmad Ibn Hanbal, Volume 4 |page=281}}</ref><ref>{{cite book |last1=al-Razi |first1=Fakhr |title=Tafsir al-Kabir, Volume 12 |pages=49-50}}</ref> हालांकि, मुहम्मद की मृत्यु के बाद, मुस्लिमों का एक समूह साकिफा में मिला, जहां उमर रजी. ने अबू बकर रजी. के प्रति निष्ठा का वचन दिया था। अबू बकर रजी. ने राजनीतिक शक्ति ग्रहण की, और उनके समर्थकों को सुन्नी के रूप में जाना जाने लगा। इसके बावजूद, मुसलमानों के एक समूह ने अली रजी. को अपना निष्ठा रखा। इन लोगों, जो शिया के नाम से जाना जाने लगा, ने कहा कि अली रजी. के राजनीतिक नेता होने का अधिकार लिया जा सकता है, फिर भी वह मुहम्मद के बाद धार्मिक और आध्यात्मिक नेता थे।
आखिरकार, अबू बकर रजी. और दो अन्य सुन्नी नेताओं, उमर रजी. और उस्मान रजी. की मौत के बाद, सुन्नी मुस्लिम राजनीतिक नेतृत्व के लिए अली रजी. गए। अली रजी. की मृत्यु के बाद, उनके पुत्र हसन इब्न अली रजी. ने शासकीय रूप से शिया के अनुसार राजनीतिक रूप से और दोनों सफल हुए। हालांकि, छह महीने बाद, उन्होंने मुवाइया इब्न अबू सूफान के साथ एक शांति संधि की, जिसमें यह निर्धारित किया गया कि, अन्य स्थितियों में, मुवाया के पास राजनीतिक शक्ति होगी जब तक कि वह यह नहीं चुनता कि वह कौन सफल होगा। मुआविया ने संधि तोड़ दी और अपने बेटे यजीद को उनके उत्तराधिकारी बना दिया, इस प्रकार उमायाद वंश बना दिया। हालांकि यह चल रहा था, हसन रजी. और, उनकी मृत्यु के बाद, उनके भाई हुसैन इब्न अली रजी., कम से कम शिया के अनुसार, धार्मिक नेताओं बने रहे। इस प्रकार, सुन्नी के मुताबिक, जो भी राजनीतिक सत्ता धारण करता था उसे मुहम्मद के उत्तराधिकारी माना जाता था, जबकि शिया ने बारह इमाम (अली रजी., हसन रजी., हुसैन रजी. और हुसैन रजी. के वंशज) मुहम्मद के उत्तराधिकारी थे, भले ही वे राजनीतिक शक्ति नहीं रखते।
इन दो मुख्य शाखाओं के अतिरिक्त, मुहम्मद के उत्तराधिकार के संबंध में कई अन्य राय भी बनाई गईं।
==इस्लामी सामाजिक सुधार==
{{मुख्य|इस्लाम के तहत प्रारंभिक सामाजिक परिवर्तन}}
विलियम मोंटगोमेरी वाट के मुताबिक, मुहम्मद के लिए धर्म एक निजी और व्यक्तिगत मामला नहीं था, बल्कि "अपनी व्यक्तित्व की कुल प्रतिक्रिया जिसकी कुल स्थिति में वह खुद को मिली थी। वह [न केवल] ... धार्मिक और बौद्धिक पहलुओं पर प्रतिक्रिया दे रहा था स्थिति के साथ-साथ आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक दबावों के लिए भी समकालीन मक्का विषय थे। " <ref>Cambridge History of Islam (1970), p. 30.</ref> बर्नार्ड लुईस का कहना है कि इस्लाम में दो महत्वपूर्ण राजनीतिक परंपराएं हैं - मोहम्मद में एक राजनेता के रूप में और मुहम्मद मक्का में एक विद्रोही के रूप में। उनके विचार में, इस्लाम नए समाजों के साथ पेश होने पर, एक क्रांति के समान, एक महान परिवर्तन है। <ref name="LewisNYRB">Lewis [http://www.nybooks.com/articles/4557 (1998)] {{webarchive|url=https://web.archive.org/web/20100408105440/http://www.nybooks.com/articles/4557 |date=8 April 2010 }}</ref>
इतिहासकार आम तौर पर सहमत हैं कि सामाजिक सुरक्षा , पारिवारिक संरचना, दासता और महिलाओं और बच्चों के अधिकारों जैसे अरब समाज की स्थिति में इस्लामी सामाजिक परिवर्तन। <ref name="LewisNYRB"/><ref>* Watt (1974), p. 234
* Robinson (2004), p. 21
* Esposito (1998), p. 98
* R. Walzer, ''Ak̲h̲lāḳ'', [[Encyclopaedia of Islam Online]]</ref> उदाहरण के लिए, लुईस के अनुसार, इस्लाम "पहली बार अभिजात वर्ग के विशेषाधिकार से वंचित, पदानुक्रम को खारिज कर दिया, और प्रतिभा के लिए खुले करियर का एक सूत्र अपनाया"। <ref name="LewisNYRB"/> मुहम्मद के संदेश ने अरब प्रायद्वीप में समाज और समाज के नैतिक आदेशों को बदल दिया; समाज ने अनुमानित पहचान, विश्व दृश्य और मूल्यों के पदानुक्रम में परिवर्तनों पर ध्यान केंद्रित किया। आर्थिक सुधारों ने गरीबों की दुर्दशा को संबोधित किया, जो पूर्व इस्लामी मक्का में एक मुद्दा बन रहा था। <ref>Watt, ''The Cambridge History of Islam'', p. 34</ref> कुरान को गरीबों के लाभ के लिए एक भत्ता कर ([[ज़कात]]) का भुगतान करने की आवश्यकता है; चूंकि मुहम्मद की शक्ति में वृद्धि हुई, उन्होंने मांग की कि जनजातियां जो उनके साथ सहयोग करने की कामना करती हैं, विशेष रूप से जकात को लागू करें। <ref>Esposito (1998), p. 30</ref><ref>Watt, ''The Cambridge History of Islam'', p. 52</ref>
==दिखावट==
[[File:Hilye-i serif 5.jpg|thumb|हफीज उस्मान (1642-1698) द्वारा मुहम्मद का वर्णन वाला एक हिला।]]
मुहम्मद के वर्णन के बारे में अल बुखारी की किताब साहिह अल बुखारी में अध्याय 61 में दिए गए विवरण, हदीस 57 और हदीस 60, <ref>{{cite web |title=Virtues and Merits of the Prophet (pbuh) and his Companions |url=https://sunnah.com/bukhari/61/57 |website=Sunnah.com |accessdate=25 March 2017 |url-status=dead |archiveurl=https://web.archive.org/web/20170326135947/https://sunnah.com/bukhari/61/57 |archivedate=26 मार्च 2017 |df=dmy-all }}</ref><ref>{{cite web |title=Virtues and Merits of the Prophet (pbuh) and his Companions |url=https://sunnah.com/bukhari/61/60 |website=Sunnah.com |accessdate=25 March 2017 |url-status=dead |archiveurl=https://web.archive.org/web/20170326050856/https://sunnah.com/bukhari/61/60 |archivedate=26 मार्च 2017 |df=dmy-all }}</ref> उनके दो साथी द्वारा चित्रित किया गया है:
{{quotation|अल्लाह के पैगम्बर न तो बहुत लंबे थे और न ही छोटे, न तो बिल्कुल सफेद और न ही गहरे भूरे थे। उनके बाल न तो घुंघराले थे और न ही लंगड़े थे। अल्लाह ने उन्हें (प्रेषित के रूप में) भेजा जब वह चालीस वर्ष के थे। बाद में वह मक्का में दस साल और मदीना में दस और वर्षों तक रहे। जब अल्लाह उसे उसके पास ले गये, तो उनके सिर और दाढ़ी में शायद ही कभी बीस सफेद बाल थे।
- अनस}}
{{quotation|पैगंबर मध्यम ऊंचाई के थे जिसमें व्यापक कंधे (लंबे) बाल अपने कान-लोब तक पहुंचते थे। एक बार मैंने उन्हें लाल कपड़े में देखा और मैंने कभी उनसे किसी और को सुन्दर नहीं देखा था।
- अल-बरा}}
मोहम्मद इब्न ईसा में- तिर्मिधि की पुस्तक शामाइल अल-मुस्तफा में दिए गए विवरण, अली इब्न अबी तालिब और हिंद इब्न अबी हला को जिम्मेदार ठहराया गया है: <ref name="AsaniAbdel-Malek1995">{{cite book |author1=Ali Sultaan Asani |author2=Kamal Abdel-Malek |author3=Annemarie Schimmel |title=Celebrating Muḥammad: images of the prophet in popular Muslim poetry |url=https://books.google.com/books?id=_10OAAAAYAAJ |accessdate=5 November 2011 |date=October 1995 |publisher=University of South Carolina Press |isbn=978-1-57003-050-5 |url-status=live |archiveurl=https://web.archive.org/web/20130615003334/http://books.google.com/books?id=_10OAAAAYAAJ |archivedate=15 June 2013 |df=dmy-all }}</ref><ref name="Schimmel1985">{{cite book |author=Annemarie Schimmel |title=And Muhammad is his messenger: the veneration of the Prophet in Islamic piety |url=https://books.google.com/books?id=gZojDQAAQBAJ&pg=PT44 |accessdate=5 November 2011 |year=1985 |publisher=University of North Carolina Press |isbn=978-0-8078-1639-4 |page=34 |url-status=live |archiveurl=https://web.archive.org/web/20170326161811/https://books.google.com/books?id=gZojDQAAQBAJ&pg=PT44 |archivedate=26 March 2017 |df=dmy-all }}</ref><ref>Al-Tirmidhi, [https://sunnah.com/shamail/1 Shama'il Muhammadiyah] {{webarchive|url=https://web.archive.org/web/20170326230223/https://sunnah.com/shamail/1 |date=26 March 2017 }} Book 1, Hadith 5 & Book 1, Hadith 7/8</ref>
{{quotation|मुहम्मद मध्यम आकार के थे, उनके पास लंगड़ा या कुरकुरा बाल नहीं थे, वसा नहीं था, एक सफेद गोलाकार चेहरा था, चौड़ी काली आँखें थीं, और लंबी आँखें थीं। जब वह चला गया, तो वह चला गया जैसे कि वह एक गिरावट नीचे चला गया। उसके कंधे के ब्लेड के बीच "भविष्यवाणी की मुहर" थी ... वह भारी था। उसका चेहरा चंद्रमा की तरह चमक गया। वह कताई से अधिक लंबा था लेकिन विशिष्ट लम्बाई से छोटा था। वह मोटी, घुंघराले बाल था। उसके बालों के टुकड़े विभाजित थे। उसके बाल उसके कान के लोब से परे पहुंचे। उसका रंग अज़हर [उज्ज्वल, चमकीला] था। मुहम्मद के पास एक विस्तृत माथे था, और ठीक, लंबी, कमानी भौहें जो मिलती नहीं थीं। उसकी भौहें के बीच एक नस थी जो गुस्सा होने पर परेशान थी। उनकी नाक के ऊपरी हिस्सा झुका हुआ था; उनकी मोटी दाढ़ीदार थी, चिकने गाल, एक मजबूत मुंह था, और उनके दांत अलग हो गए थे। उनके छाती पर पतले बाल थे। उनकी गर्दन चांदी की शुद्धता के साथ एक हाथीदांत मूर्ति की गर्दन की तरह थी। मुहम्मद आनुपातिक, कठोर, फंसे हुए, यहां तक कि पेट और सीने, व्यापक छाती और व्यापक कंधे के थे।}}
मुहम्मद के कंधों के बीच "पैग़म्बर की मुहर" (मुहर ए नबुव्वत) को आमतौर पर एक कबूतर के अंडा के आकार के उठाए गए तिल के रूप में वर्णित किया जाता है। मुहम्मद का एक अन्य विवरण उम्म माबाद द्वारा प्रदान किया गया था, वह एक महिला जो मदीना की यात्रा पर मिली थी: <ref name="Safi2009">{{cite book |author=Omid Safi |title=Memories of Muhammad: why the Prophet matters |url=https://books.google.com/books?id=Gs2oDbagvfIC&pg=PA273 |accessdate=5 November 2011 |date=17 November 2009 |publisher=HarperCollins |isbn=978-0-06-123134-6 |pages=273–274 |url-status=live |archiveurl=https://web.archive.org/web/20130615065426/http://books.google.com/books?id=Gs2oDbagvfIC&pg=PA273 |archivedate=15 June 2013 |df=dmy-all }}</ref><ref>{{cite book |title=Following Muhammad: Rethinking Islam in the Contemporary World |author=Carl W. Ernst |page=78}}</ref>
{{quotation|मैंने एक सुन्दर चेहरे और एक अच्छी आकृति के साथ एक आदमी, शुद्ध और साफ देखा। वह एक पतले शरीर से नाराज नहीं थे, और न ही वह सिर और गर्दन में बहुत छोटा था। वह बेहद काले आँखों और मोटी eyelashes के साथ, सुंदर और सुरुचिपूर्ण थे। उनकी आवाज़ में एक भूसी थी, और उनकी गर्दन लंबी थी। उनकी दाढ़ी मोटी थी, और उनकी भौहें बारीकी से कमाना और एक साथ शामिल हो गए थे।
जब चुप हो गया, वह गंभीर और सम्मानित था, और जब उसने बात की, तो महिमा बढ़ी और उसे पराजित कर दिया। वह दूर से सबसे खूबसूरत पुरुषों और सबसे गौरवशाली था, और करीब वह सबसे प्यारा और प्यारा था। वह भाषण और अभिव्यक्ति का मीठा था, लेकिन छोटा या छोटा नहीं था। उनका भाषण कैस्केडिंग मोती की एक स्ट्रिंग थी, जिसे माप दिया गया था ताकि कोई भी उसकी लंबाई से निराश न हो, और किसी भी आँख ने उसे शव के कारण चुनौती दी। कंपनी में वह दो अन्य शाखाओं के बीच एक शाखा की तरह है, लेकिन वह उपस्थिति में तीनों में से सबसे बढ़िया है, और सत्ता में सबसे प्यारा है। उसके पास उसके आस-पास के दोस्त हैं, जो उसके शब्दों को सुनते हैं। यदि वह आदेश देता है, तो वे बिना किसी फंसे या शिकायत के उत्सुकता से, उत्सुकता से पालन करते हैं।}}
इन तरह के विवरण अक्सर सुलेख पैनलों (हिला या तुर्की, हिली में) में पुन: उत्पन्न किए जाते थे, जो 17 वीं शताब्दी में तुर्क साम्राज्य में अपने स्वयं के एक कला रूप में विकसित हुआ था। <ref name="Safi2009" />
==गृहस्थी==
{{मुख्य|अहल अल-बैत}}
[[File:Mrs Aisha room.jpg|thumb| मुहम्मद का मकबरा अपनी तीसरी पत्नी आइशा (रजी०) के हुजरा (कमरे) में स्थित है। परंपरानुसा उनका निधन आईशा के कमरे में ही हुआ था। (अल-मस्जिद एन-नाबावी, मदीना)।]]
मुहम्मद का जीवन पारंपरिक रूप से दो अवधियों में परिभाषित किया जाता है: मक्का में पूर्व-हिजरा (प्रवासन) (570 से 622 तक), और मदीना में पोस्ट-हिजरा (622 से 632 तक)। कहा जाता है कि मुहम्मद की कुल में तेरह पत्नियां थीं (हालांकि दो में संदिग्ध खाते हैं, रेहाना बिंत जयद और मारिया अल-क़िबतिया, पत्नी या उपनिवेश के रूप में। <ref>See for example Marco Schöller, '' Banu Qurayza'', [[Encyclopedia of the Quran]] mentioning the differing accounts of the status of [[Rayhana]]</ref><ref name="Barbara Freyer">Barbara Freyer Stowasser, ''Wives of the Prophet'', [[Encyclopedia of the Quran]]</ref>)) मदीना के प्रवास के बाद तेरह विवाह का ग्यारह हुआ।
25 साल की उम्र में, मुहम्मद ने अमीर खदीजा बिंत खुवेलीड से विवाह किया जो 40 साल का था। <ref>{{cite book |last=Subhani |first=Jafar |title=The Message |url=http://www.al-islam.org/message |publisher=Ansariyan Publications, Qom |chapter=Chapter 9 |url-status=dead |archiveurl=https://web.archive.org/web/20101007221418/http://www.al-islam.org/message/ |archivedate=7 अक्तूबर 2010 |df=dmy-all |access-date=9 दिसंबर 2018 }}</ref> शादी 25 साल तक चली और वह खुश था। <ref name="Esp2">Esposito (1998), p. 18</ref> मुहम्मद इस विवाह के दौरान किसी और महिला के साथ शादी में नहीं गए थे। <ref name = "Bullough 1998 119">Bullough (1998), p. 119</ref><ref name="Reeves46">Reeves (2003), p. 46</ref>खदीजा (रजी.) की मौत के बाद, खवला बिंत हाकिम ने मुहम्मद को सुझाव दिया कि उन्हें उस्मान विधवा सावा बिंत जमा, उम्म रुमान और मक्का के अबू बकर की बेटी आइशा (रजी.) से शादी करनी चाहिए। कहा जाता है कि मुहम्मद दोनों से शादी करने की व्यवस्था के लिए कहा गया है। <ref name="Watt-encyc-online">Watt, ''Aisha'', [[Encyclopedia of Islam]]</ref> खदीजा (रजी.) की मृत्यु के बाद मुहम्मद के विवाहों को ज्यादातर राजनीतिक या मानवीय कारणों से अनुबंधित किया गया था। महिलाएं या तो युद्ध में मारे गए मुस्लिमों की विधवा थीं और उन्हें संरक्षक के बिना छोड़ दिया गया था, या महत्वपूर्ण परिवारों या कुलों से संबंधित थे जिन्हें गठबंधन के सम्मान और मजबूत करने के लिए जरूरी था। <ref>Momen (1985), p. 9</ref>
परंपरागत स्रोतों के मुताबिक, आइशा (रजी.) मुहम्मद से प्रार्थना करते समय छः या सात वर्ष का था, <ref name="Watt-encyc-online"/><ref name="Spellberg">[[Denise Spellberg|D. A. Spellberg]], ''Politics, Gender, and the Islamic Past: the Legacy of A'isha bint Abi Bakr'', [[Columbia University Press]], 1994, p. 40</ref><ref name="Armstrong">Karen Armstrong, ''Muhammad: A Biography of the Prophet'', Harper San Francisco, 1992, p. 145</ref> विवाह के साथ नौ या दस वर्ष की आयु में युवावस्था तक पहुंचने तक शादी नहीं हो रही थी। <ref name="Watt-encyc-online"/><ref name="Spellberg"/><ref name="Karen_Armstrong">[[Karen Armstrong]], ''Muhammad: Prophet For Our Time'', HarperPress, 2006, p. 105</ref><ref name="Haykal">Muhammad Husayn Haykal, ''The Life of Muhammad'', North American Trust Publications (1976), p. 139</ref><ref>Barlas (2002), pp. 125–26</ref><ref>{{cite book |last1=A.C. Brown |first1=Jonathan |authorlink=Jonathan A.C. Brown |title=Misquoting Muhammad: The Challenge and Choices of Interpreting the Prophet's Legacy |date=2014 |publisher=[[Oneworld Publications]] |isbn=978-1780744209 |pages=[https://archive.org/details/misquotingmuhamm0000brow/page/143 143–44] |url=https://archive.org/details/misquotingmuhamm0000brow/page/143 }}</ref><ref>{{cite book |last1=A.C. Brown |first1=Jonathan |authorlink=Jonathan A.C. Brown |title=Misquoting Muhammad: The Challenge and Choices of Interpreting the Prophet's Legacy |date=2014 |publisher=[[Oneworld Publications]] |isbn=978-1780744209 |page=[https://archive.org/details/misquotingmuhamm0000brow/page/316 316. n° 50] |quote=Evidence that the Prophet waited for Aisha to reach physical maturity before consummation comes from al-Ṭabarī, who says she was too young for intercourse at the time of the marriage contract; |url=https://archive.org/details/misquotingmuhamm0000brow/page/316 }}</ref><ref>{{Hadith-usc|bukhari|5|58|234}}, {{Hadith-usc|bukhari|usc=yes|5|58|236}}, {{Hadith-usc|bukhari|usc=yes|7|62|64}}, {{Hadith-usc|bukhari|usc=yes|7|62|65}}, {{Hadith-usc|bukhari|usc=yes|7|62|88}}, {{Hadith-usc|usc=yes|muslim|8|3309}}, {{Hadith-usc|muslim|8|3310}}, {{Hadith-usc|muslim|8|3311}}, {{Hadith-usc|abudawud|41|4915}}, {{Hadith-usc|abudawud|usc=yes|41|4917}}</ref><ref>Tabari, Volume 9, Page 131; Tabari, Volume 7, Page 7</ref> इसलिए वह शादी में एक कुंवारी थीं। <ref name="Spellberg" /> आधुनिक मुस्लिम लेखक जो आइशा की उम्र की गणना के अन्य स्रोतों के आधार पर गणना करते हैं, जैसे कि ऐशा और उनकी बहन असमा के बीच उम्र अंतर के बारे में हदीस, का अनुमान है कि वह तेरह से अधिक थीं और शायद अपने विवाह के समय किशोरों के उत्तरार्ध में। <ref>{{cite book |first=Asma |last=Barlas |year=2012 |title="Believing Women" in Islam: Unreading Patriarchal Interpretations of the Qur'an |publisher=University of Texas Press |page=126 |quote=On the other hand, however, Muslims who calculate 'Ayesha's age based on details of her sister Asma's age, about whom more is known, as well as on details of the Hijra (the Prophet's migration from Mecca to Madina), maintain that she was over thirteen and perhaps between seventeen and nineteen when she got married. Such views cohere with those Ahadith that claim that at her marriage Ayesha had "good knowledge of Ancient Arabic poetry and genealogy" and "pronounced the fundamental rules of Arabic Islamic ethics.}}</ref><ref>{{cite web |url=http://www.al-islam.org/polygamy-marriages-prophet |title=The Concept of Polygamy and the Prophet's Marriages (Chapter: The Other Wives) |url-status=dead |archiveurl=https://web.archive.org/web/20110207094707/http://www.al-islam.org/polygamy-marriages-prophet/ |archivedate=7 फ़रवरी 2011 |df=dmy-all |access-date=9 दिसंबर 2018 }}</ref><ref>{{cite book |last1=Ali |first1=Muhammad |author1-link=Muhammad Ali (writer) |title=Muhammad the Prophet |url=https://books.google.com/?id=od6dAQKgK-YC&pg=PT150#v=onepage&q&f=false |year=1997 |publisher=Ahamadiyya Anjuman Ishaat Islam |isbn=978-0913321072 |ref=harv |page=150 |url-status=live |archiveurl=https://web.archive.org/web/20160101063555/https://books.google.com/books?id=od6dAQKgK-YC&pg=PT150&redir_esc=y#v=onepage&q&f=false |archivedate=1 January 2016 |df=dmy-all }}</ref><ref>{{cite web |url=http://www.valiasr-aj.com/fa/page.php?bank=question&id=699 |title=Ayesha married the Prophet when she was young? (In Persian and Arabic) |last=Ayatollah Qazvini |url-status=dead |archiveurl=https://web.archive.org/web/20100926234317/http://www.valiasr-aj.com/fa/page.php?bank=question&id=699 |archivedate=26 September 2010 |df=dmy-all}}</ref><ref>{{cite book |last1=[[Jonathan A.C. Brown|A.C. Brown]] |first1=[[Jonathan A.C. Brown|Jonathan]] |title=Misquoting Muhammad: The Challenge and Choices of Interpreting the Prophet's Legacy |date=2014 |publisher=[[Oneworld Publications]] |isbn=978-1780744209 |pages=[https://archive.org/details/misquotingmuhamm0000brow/page/146 146–47] |url=https://archive.org/details/misquotingmuhamm0000brow/page/146 }}</ref>
मदीना के प्रवास के बाद, मुहम्मद , जो उसके अर्धशतक में थे, ने कई और महिलाओं से विवाह किया।
मुहम्मद ने घर के कामों का प्रदर्शन किया जैसे भोजन, सिलाई कपड़े और जूते की मरम्मत करना। ऐसा कहा जाता है कि उन्होंने अपनी पत्नियों को बातचीत करने का आदी माना था; उन्होंने उनकी सलाह सुनी, और पत्नियों ने बहस की और यहां तक कि उनके साथ तर्क भी दिया। <ref>[[Tariq Ramadan]] (2007), pp. 168–69</ref><ref>Asma Barlas (2002), p. 125</ref><ref>Armstrong (1992), p. 157</ref>
कहा जाता है कि खदीजा (रजी.) मुहम्मद (रुक्यायाह बिन मुहम्मद, उम्म कुलथम बिंत मुहम्मद, जैनब बिंत मुहम्मद, फातिमाह जहर) और दो बेटे (अब्द-अल्लाह इब्न मुहम्मद और कासिम इब्न मुहम्मद, जो बचपन में दोनों की मृत्यु हो गई) के साथ चार बेटियां थीं। उसकी बेटियों में से एक, फातिमा, उसके सामने मृत्यु हो गई। <ref name="Nich"/> कुछ शिया विद्वानों का तर्क है कि फातिमा (रजी.) मुहम्मद की एकमात्र बेटी थीं। <ref>Ordoni (1990), pp. 32, 42–44.</ref> मारिया अल-क़िबतिया ने उन्हें इब्राहिम इब्न मुहम्मद नाम का एक पुत्र बनाया, लेकिन जब वह दो साल का था तब बच्चा मर गया। <ref name="Nich">Nicholas Awde (2000), p. 10</ref>
मुहम्मद की पत्नियों में से नौ ने उसे बचा लिया। <ref name="Barbara Freyer"/> सुन्नी परंपरा में मुहम्मद की पसंदीदा पत्नी के रूप में जाने जाने वाले आइशा (रजी.) दशकों तक जीवित रहे और इस्लाम की सुन्नी शाखा के लिए हदीस साहित्य बनाने वाले मुहम्मद की बिखरी हुई कहानियों को इकट्ठा करने में मदद करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। <ref name="Watt-encyc-online"/>
फातिमा (रजी.) के माध्यम से मुहम्मद के वंशज शरीफ , सिड्स या सय्यियस के रूप में जाने जाते हैं। ये अरबी में आदरणीय खिताब हैं, शरीफ का अर्थ 'महान' है और कहा जाता है या कहा जाता है या 'भगवान' या 'सर' कहता है। मुहम्मद के एकमात्र वंश के रूप में, उन्हें सुन्नी और शिया दोनों का सम्मान किया जाता है, हालांकि शिआ उनके भेद पर अधिक जोर और मूल्य डालते हैं। <ref>{{cite encyclopedia |title=Ali |encyclopedia=Encyclopædia Britannica Online}}</ref>
जयद इब्न हरिथा एक दास था जिसे मुहम्मद ने खरीदा, मुक्त किया, और फिर अपने बेटे के रूप में अपनाया। उसके पास एक गीली नर्स भी थी। <ref name="Zad116">Ibn Qayyim al-Jawziyya recorded the list of some names of Muhammad's female-slaves in [[Zad al-Ma'ad]], Part I, p. 116</ref> बीबीसी सारांश के मुताबिक, "मुहम्मद ने दासता को खत्म करने की कोशिश नहीं की, और खुद को दास, बेचा, कब्जा कर लिया, और मालिकों का स्वामित्व किया। लेकिन उन्होंने जोर देकर कहा कि दास मालिक अपने दासों को अच्छी तरह से मानते हैं और गुलामों को मुक्त करने के गुण पर बल देते हैं। मुहम्मद ने मनुष्यों के रूप में दासों का इलाज किया और स्पष्ट रूप से सर्वोच्च सम्मान में कुछ लोगों को रखा। <ref>{{cite web |url=http://www.bbc.co.uk/religion/religions/islam/history/slavery_1.shtml |title=Slavery in Islam |publisher=BBC |accessdate=16 April 2016 |url-status=live |archiveurl=https://web.archive.org/web/20170624234057/http://www.bbc.co.uk/religion/religions/islam/history/slavery_1.shtml |archivedate=24 June 2017 |df=dmy-all }}</ref>
==विरासत==
{{मुहम्मद}}
===मुस्लिम परंपरा===
अल्लाह की एकता के प्रमाणन के बाद, मुहम्मद की भविष्यवाणी में विश्वास इस्लामी विश्वास का मुख्य पहलू है। हर मुस्लिम [[शहादा]] में घोषित करता है: "मैं गवाही देता हूं कि अल्लाह के अलावा कोई अल्लाह नहीं है, और मैं प्रमाणित करता हूं कि मुहम्मद अल्लाह के संदेशवाहक हैं।" शहादा इस्लाम का मूल धर्म या सिद्धांत है। इस्लामी विश्वास यह है कि आदर्श रूप से शहादा पहला शब्द है जो नवजात शिशु सुनेंगे; बच्चों को तुरंत इसे पढ़ाया जाता है और इसे मृत्यु पर सुनाया जाएगा। मुसलमान प्रार्थना (सलात) और प्रार्थना के लिए कॉल (अज़ान में शाहदाह दोहराते हैं। इस्लाम में परिवर्तित करने की इच्छा रखने वाले गैर-मुसलमानों को इन पंक्तियों को पढ़ना आवश्यक है। <ref>Farah (1994), p. 135</ref>
इस्लामी विश्वास में, मुहम्मद को अल्लाह द्वारा भेजे गए अंतिम भविष्यवक्ता के रूप में जाना जाता है। <ref name="espos12">Esposito (1998), p. 12.</ref><ref>{{cite book |last=Clark |first=Malcolm |title=Islam for Dummies |url=https://books.google.com/books?id=zPXu561ZpvgC&pg=PT100#v=onepage&q&f=true |year=2003 |publisher=Wiley Publishing Inc. |location=[[Indiana]] |isbn= 9781118053966|page=100 |url-status=live |archiveurl=https://web.archive.org/web/20150924043530/https://books.google.com/books?id=zPXu561ZpvgC&pg=PT100#v=onepage&q&f=true |archivedate=24 September 2015 |df=dmy-all }}</ref><ref>{{cite book |last=Nigosian |first=S. A. |title=Islam: Its History, Teaching, and Practices |url=https://books.google.com/books?id=my7hnALd_NkC&pg=PA17#v=onepage&q&f=false |year=2004 |publisher=[[Indiana University Press]] |location=[[Indiana]] |isbn=978-0-253-21627-4 |page=17 |url-status=live |archiveurl=https://web.archive.org/web/20150924032200/https://books.google.com/books?id=my7hnALd_NkC&pg=PA17#v=onepage&q&f=false |archivedate=24 September 2015 |df=dmy-all }}</ref><ref>{{cite encyclopedia |editor=Juan E. Campo |encyclopedia=Encyclopedia of Islam |url=https://books.google.com/books?id=OZbyz_Hr-eIC&lpg=PP1&dq=isbn%3A1438126964&pg=PA494#v=onepage&q&f=false |publisher=[[Facts on File]] |year=2009 |isbn=978-0-8160-5454-1 |page=494 |url-status=live |archiveurl=https://web.archive.org/web/20150930121515/https://books.google.com/books?id=OZbyz_Hr-eIC&lpg=PP1&dq=isbn%3A1438126964&pg=PA494#v=onepage&q&f=false |archivedate=30 September 2015 |df=dmy-all |title=Encyclopedia of Islam }}</ref><ref>{{cite web |url=http://www.britannica.com/EBchecked/topic/396226/Muhammad |title=Muhammad |year=2013 |website=Encyclopædia Britannica Online |publisher=Encyclopædia Britannica, Inc |accessdate=27 January 2013 |url-status=live |archiveurl=https://web.archive.org/web/20130202060950/http://www.britannica.com/EBchecked/topic/396226/Muhammad |archivedate=2 February 2013 |df=dmy-all }}</ref> कुरान 10:37 कहता है कि "... यह (कुरान) इसकी पुष्टि (रहस्योद्घाटन) है जो इससे पहले चला गया, और पुस्तक की पूर्ण व्याख्या - जिसमें दुनिया के अल्लाह से कोई संदेह नहीं है। " इसी प्रकार कुरान 46:12 कहता है "... और इससे पहले मूसा अलैहिस्सलाम की पुस्तक एक गाइड और दया के रूप में थी। और यह पुस्तक पुष्टि करता है (यह) ...", जबकि 2: 136 इस्लाम के विश्वासियों को आज्ञा देता है " : हम अल्लाह में विश्वास करते हैं और जो हमें बताया गया है, और जो इब्राहीम अलै. और इस्माईल अलै., इसहाक अलै. और याकूब अलै. और जनजातियों के लिए प्रकट हुआ था, और जो मूसा अलै. और ईसा (यीशु) अलै. ने प्राप्त किया था, और जो भविष्यवक्ताओं ने उनके भगवान से प्राप्त किया था। हम नहीं करते उनमें से किसी के बीच भेद, और उसके लिए हमने आत्मसमर्पण कर दिया है। "
[[File:Sahadah-Topkapi-Palace.jpg|thumb|left|विश्वास के मुस्लिम पेशे, शाहदाह, मुहम्मद की भूमिका के मुस्लिम अवधारणा को दर्शाते हैं: "अल्लाह को छोड़कर कोई अल्लाह हीं है और मुहम्मद अल्लाह के संदेशवाहक है।" (टॉपकापी पैलेस)]]
मुस्लिम परंपरा मुहम्मद को कई चमत्कारों या अलौकिक घटनाओं के साथ श्रेय देती है। <ref name="EoI-Miracle">A.J. Wensinck, ''Muʿd̲j̲iza'', [[Encyclopaedia of Islam|Encyclopedia of Islam]]</ref> उदाहरण के लिए, कई मुस्लिम टिप्पणीकारों और कुछ पश्चिमी विद्वानों ने सूरह 54: 1-2 का अर्थ दिया है, मुहम्मद को कुरैशी के मद्देन में चंद्रमा को विभाजित करते हुए, जब उन्होंने अनुयायियों को सताया था। <ref name="EoQ-Miracle">Denis Gril, ''Miracles'', [[Encyclopedia of the Qur'an]]</ref><ref>Daniel Martin Varisco, ''Moon'', [[Encyclopedia of the Qur'an]]</ref> इस्लाम के पश्चिमी इतिहासकार डेनिस ग्रिल का मानना है कि कुरान मुहम्मद प्रदर्शन चमत्कारों का अत्यधिक वर्णन नहीं करता है, और मुहम्मद का सर्वोच्च चमत्कार "[[क़ुरआन|कुरान]]" के साथ ही पहचाना जाता है। <ref name="EoQ-Miracle"/>
इस्लामी परंपरा के अनुसार, मुहम्मद पर ताइफ के लोगों ने हमला किया था और बुरी तरह घायल हो गये। परंपरा में एक [[देवदूत]] प्रकट होता है और हमलावरों के खिलाफ प्रतिशोध की पेशकश करता है, मुहम्मद ने प्रस्ताव को खारिज कर दिया और ताइफ के लोगों के मार्गदर्शन के लिए प्रार्थना की। <ref>[[A Restatement of the History of Islam and Muslims]] chapter "[http://www.al-islam.org/restatement/16.htm Muhammad's Visit to Ta’if] {{webarchive|url=https://web.archive.org/web/20130926090245/http://www.al-islam.org/restatement/16.htm|date=26 September 2013}}" on al-islam.org</ref>
सुन्नह या सुन्नत मुहम्मद के कार्यों और कहानियों का प्रतिनिधित्व करता है (हदीस के नाम से जाना जाने वाली रिपोर्टों में संरक्षित), और धार्मिक अनुष्ठानों, व्यक्तिगत स्वच्छता, मृतकों के दफन से लेकर मनुष्यों और ईश्वर के बीच प्रेम को शामिल करने वाले रहस्यमय प्रश्नों से लेकर गतिविधियों और मान्यताओं की विस्तृत श्रृंखला को शामिल करता है। सुन्नतों को पवित्र मुसलमानों के लिए अनुकरण का एक आदर्श माना जाता है और मुस्लिम संस्कृति को प्रभावित करने के लिए एक बड़ी डिग्री है। अभिवादन कि मुहम्मद ने मुसलमानों को एक-दूसरे की पेशकश करने के लिए सिखाया था, "आप पर शांति हो" (अरबी: [[अस्सलामु अलैकुम]]) दुनिया भर में मुस्लिमों द्वारा उपयोग की जाती है। दैनिक इस्लामिक अनुष्ठानों जैसे कि दैनिक प्रार्थनाओं, उपवास और वार्षिक तीर्थयात्रा के कई विवरण केवल सुन्नत में पाए जाते हैं, कुरान में नहीं। <ref>''Muhammad'', Encyclopædia Britannica, p. 9</ref>
मुहम्मद के नाम लिखने के बाद पारंपरिक रूप से जोड़ा गया, "ईश्वर उन्हें सम्मान दे और उन्हें शांति प्रदान करे" का सुलेख प्रस्तुत करता है। <ref name="unicode">{{cite web |url=https://www.unicode.org/charts/PDF/Unicode-3.1/U31-FB50.pdf |title=Arabic Presentation Forms-A |date=1 October 2009 |website=The Unicode Standard, Version 5.2 |publisher=Unicode, Inc. |location=Mountain View, Ca. |format=PDF |accessdate=9 May 2010 |archive-url=https://web.archive.org/web/20100401073727/http://www.unicode.org/charts/PDF/Unicode-3.1/U31-FB50.pdf |archive-date=1 अप्रैल 2010 |url-status=live }}</ref> ﷺ।
सुन्नतो ने इस्लामिक कानून के विकास में विशेष रूप से पहली इस्लामी शताब्दी के अंत तक योगदान दिया। <ref>J. Schacht, ''Fiḳh'', Encyclopedia of Islam</ref> मुस्लिम रहस्यवादी, जो सूफ़ी के नाम से जाना जाता है, जो कुरान के आंतरिक अर्थ और मुहम्मद की आंतरिक प्रकृति की तलाश में थे, उन्होंने इस्लाम के पैगंबर को न केवल एक भविष्यद्वक्ता के रूप में बल्कि एक परिपूर्ण इंसान के रूप में भी देखा। सभी सूफी आदेश मुहम्मद को आध्यात्मिक वंश की अपनी श्रृंखला का पता लगाते हैं। <ref>''Muhammad'', Encyclopædia Britannica, pp. 11–12</ref>
मुसलमानों ने परंपरागत रूप से मुहम्मद के लिए प्यार और पूजा व्यक्त की है। मुहम्मद के जीवन की कहानियां, उनके मध्यस्थता और उनके चमत्कार (विशेष रूप से " चंद्रमा का विभाजन ") ने लोकप्रिय मुस्लिम विचार और कविता में प्रवेश किया है। मिस्र के सूफी अल-बुसीरी (1211-1294) द्वारा मुहम्मद, [[क़सीदा अल-बुर्दा]] जो अरबी में अरबी शैली में लिखा गया और मशहूर भी है। और व्यापक रूप से मानसिक शांति और आध्यात्मिक शक्ति रखने के लिए आयोजित किया जाता है। <ref name="Stetkevych2010">{{cite book |author=Suzanne Pinckney Stetkevych |title=The mantle odes: Arabic praise poems to the Prophet Muḥammad |url=https://books.google.com/books?id=F-nY3_DXo-gC&pg=PR12 |accessdate=27 January 2012 |date=24 May 2010 |publisher=Indiana University Press |isbn=978-0-253-22206-0 |page=xii |url-status=live |archiveurl=https://web.archive.org/web/20130615211359/http://books.google.com/books?id=F-nY3_DXo-gC&pg=PR12 |archivedate=15 June 2013 |df=dmy-all }}</ref> कुरान मुहम्मद को "दुनिया के लिए दया (रमत)" के रूप में संदर्भित करता है (कुरान 21: 107 )। <ref name="EoI-Muhammad"/> ओरिएंटल देशों में दया के साथ बारिश के सहयोग ने मुहम्मद को बारिश बादल के रूप में आशीर्वाद देने और भूमि पर फैलाने, मृत दिल को पुनर्जीवित करने के लिए प्रेरित किया है, जैसे वर्षा बारिश पृथ्वी को पुनर्जीवित करती है (उदाहरण के लिए, सिंधी कविता शाह 'अब्द अल-लतीफ)। <ref name="EoI-Muhammad"/> मुहम्मद इनका जन्मदिन इस्लामी दुनिया भर में एक प्रमुख दावत के रूप में मनाया जाता है, वहाबी- सशस्त्र सऊदी अरब को छोड़कर जहां इन सार्वजनिक समारोहों को हतोत्साहित किया जाता है। <ref name="Nasr-Muhammad">[[Seyyed Hossein Nasr]], Encyclopædia Britannica, ''Muhammad'', p. 13</ref> जब मुस्लिम मुहम्मद का नाम कहते हैं या लिखते हैं, तो वे आम तौर पर इसका पालन करते हैं और भगवान उन्हें सम्मान दे सकते हैं (अरबी: लाहु अलैही व म)। <ref name="Ann Goldman 2006 p. 212">Ann Goldman, Richard Hain, Stephen Liben (2006), p. 212</ref> अनौपचारिक लेखन में, इसे कभी-कभी पीबीयूएच या एसएडब्ल्यू के रूप में संक्षिप्त किया जाता है; मुद्रित पदार्थ में, एक छोटा सा सुलेख चित्र आमतौर पर उपयोग किया जाता है (ﷺ)।
==आलोचना==
7 वीं शताब्दी के बाद से मुहम्मद की आलोचना अस्तित्व में रही है, जब मुहम्मद को उनके गैर-मुस्लिम अरब समकालीनों ने एकेश्वरवाद प्रचार करने के लिए और अरब के यहूदी जनजातियों द्वारा बाइबिल के वर्णनों और आंकड़ों के अनचाहे विनियमन के लिए अपमानित किया था, <ref name="JE2">{{Cquote|The Jews [...] could not let pass unchallenged the way in which [[Biblical and Quranic narratives|the Koran appropriated Biblical accounts and personages]]; for instance, its making Abraham an Arab and the founder of the [[Kaaba|Ka'bah]] at [[Mecca]]. The prophet, who looked upon every evident correction of his gospel as an attack upon his own reputation, brooked no contradiction, and unhesitatingly threw down the gauntlet to the Jews. Numerous passages in the Koran show how he gradually went from slight thrusts to malicious vituperations and brutal attacks on the customs and beliefs of the Jews. When they justified themselves by referring to the Bible, Mohammed, who had taken nothing therefrom at first hand, accused them of intentionally concealing its true meaning or of entirely misunderstanding it, and taunted them with being "asses who carry books" (sura lxii. 5). The increasing bitterness of this vituperation, which was similarly directed against the less numerous [[Arab Christians|Christians]] of [[Medina]], indicated that in time Mohammed would not hesitate to proceed to actual hostilities. The outbreak of the latter was deferred by the fact that the hatred of the prophet was turned more forcibly in another direction, namely, against the [[Quraysh|people of Mecca]], whose earlier refusal of Islam and whose attitude toward the community appeared to him at Medina as a personal insult which constituted a sufficient cause for [[Islam and war|war]].|author=Richard Gottheil, Mary W. Montgomery, Hubert Grimme|source=[http://jewishencyclopedia.com/articles/10918-mohammed "Mohammed"] (1906), ''[[Jewish Encyclopedia]]'', [[Kopelman Foundation]].}}</ref> यहूदी विश्वास का विघटन, <ref name="JE2"/> और खुद को किसी भी चमत्कार किए बिना " आखिरी भविष्यद्वक्ता " के रूप में घोषित करना और न ही हिब्रू बाइबिल में किसी भी व्यक्तिगत आवश्यकता को दिखाने के लिए एक झूठे दावेदार से इज़राइल के भगवान द्वारा चुने गए एक सच्चे भविष्यद्वक्ता को अलग करना ; इन कारणों से, उन्होंने उन्हें अपमानजनक उपनाम हे- मेशगाह ( हिब्रू : מְשֻׁגָּע , "मैडमैन" या "कब्जा") दिया। <ref name="Stillman">{{cite book|author=[[Norman Stillman|Norman A. Stillman]]|title=The Jews of Arab Lands: A History and Source Book|url=https://books.google.com/books?id=bFN2ismyhEYC&pg=PA236|year=1979|publisher=Jewish Publication Society|isbn=978-0-8276-0198-7|page=236|access-date=9 दिसंबर 2018|archive-url=https://web.archive.org/web/20160514132608/https://books.google.com/books?id=bFN2ismyhEYC&pg=PA236|archive-date=14 मई 2016|url-status=live}}</ref><ref>[[Ibn Warraq]], ''[https://books.google.com/books?id=M8o6UZ37ppUC&pg=PA255#v=onepage&q&f=false Defending the West: A Critique of Edward Said's Orientalism] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20160508044342/https://books.google.com/books?id=M8o6UZ37ppUC&pg=PA255#v=onepage&q&f=false|date=8 मई 2016}}'', p. 255.</ref><ref>Andrew G. Bostom, ''[https://books.google.com/books?id=vjFNPT52XjUC&pg=PA21#v=onepage&q&f=false The Legacy of Islamic Antisemitism: From Sacred Texts to Solemn History] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20160426084012/https://books.google.com/books?id=vjFNPT52XjUC&pg=PA21#v=onepage&q&f=false |date=26 अप्रैल 2016 }}'', p. 21.</ref> मध्य युग के दौरान विभिन्न पश्चिमी और बीजान्टिन ईसाई विचारकों ने मुहम्मद को विकृत माना, अपमानजनक व्यक्ति, एक झूठा भविष्यद्वक्ता, और यहां तक कि एंटीक्राइस्ट माना, क्योंकि वह अक्सर ईसाईजगत में एक विद्रोही के रूप में देखे गए थे।
मुहम्मद की आलोचना में मुहम्मद की ईमानदारी के संदर्भ में एक भविष्यद्वक्ता, उनकी नैतिकता और उनके विवाह होने का दावा शामिल था। 7 वीं शताब्दी के बाद से आलोचना का अस्तित्व है, जब मुहम्मद को उनके गैर-मुस्लिम अरब समकालीन लोगों ने उपेक्षित एकेश्वरवाद के लिए निंदा की थी। मध्य युग के दौरान वह अक्सर ईसाई धर्म में एक विद्रोही के रूप में देखा जाता था, और / या राक्षसों के पास था।
===मुहम्मद के विवाह===
====आइशा====
20 वीं शताब्दी के बाद से, विवाद का एक आम मुद्दा मुहम्मद और [[आइशा]] के विवाह के बारे में उठाया गया है, जिसे पारंपरिक इस्लामिक स्रोतों में हज़रात आइशा की उम्र नौ वर्ष की, या इब्न हिशम के अनुसार दस वर्ष की, या फिर जब शादी तक पहुंचने के अपने युवावस्था पर शादी हुई थी। अमेरिकी इतिहासकार डेनिस स्पेलबर्ग का कहना है कि "दुल्हन की उम्र के इन विशिष्ट संदर्भों में [[आइशा]] के पूर्व-मेनारच्चिल दर्जा को और मजबूत किया जाता है।" मुस्लिम लेखकों ने अपनी बहन अस्मा के बारे में उपलब्ध अधिक विस्तृत जानकारी के आधार पर आयशा की आयु की गणना की है। वह तेरह से अधिक थी और शायद उनकी शादी के दौरान सत्रह और उन्नीस के बीच थी।
इस्लामिक अध्ययन के यूके के प्रोफेसर कॉलिन टर्नर, में कहा गया है कि जब एक बूढ़े आदमी और एक जवान लड़की के बीच विवाह हो जाती है, तो एक बार जब तक प्रौढ़ व्यक्ति उम्र के होने के बारे में सोचता है, तब तक वह बीमारियों में रूढ़िवादी थे, और इसलिए मुहम्मद विवाह को उनके समकालीनों द्वारा अनुचित नहीं माना जाता।
तुलनात्मक धर्म पर ब्रिटिश लेखक करेन आर्मस्ट्रांग ने पुष्टि की है कि "मुहम्मद की [[आइशा]] से शादी में कोई अनौचित्य नहीं था। एक गठबंधन को मुहैया कराने के लिए अनुपस्थिति में किए गए विवाह अक्सर वयस्कों और नाबालिगों के बीच अनुबंधित होते थे जो अब भी आयशा से भी छोटे थे। अभ्यास यूरोप में अच्छी तरह से शुरुआती आधुनिक काल में जारी रहा। "
==गैलरी==
{{gallery
|File:Mohammed kaaba 1315.jpg|इस्लामी पश्चात मुहम्मद काले पत्थर को अल-काबा में स्थिति में उठाने पर एक विवाद का हल करते हैं। एडिसबर्गः एडिनबर्ग यूनिवर्सिटी प्रेस, सी 1976: "रशीद अल-दीन / डेविड टैलबोट राइस के विश्व इतिहास के चित्र, बेसिल ग्रे द्वारा संपादित की पीपी 100-101 से नोट।" - केंद्र में, पैगंबर मुहम्मद, दो लंबे बालों वाली प्लैट्स के साथ, चार जनजातियों के प्रतिनिधियों द्वारा चार कोनों में आयोजित कालीन पर पत्थर रखता है, ताकि सभी इसे उठाने का सम्मान कर सकें। कालीन मध्य एशिया से एक केलीम है पीछे, दो अन्य पुरुष काले पर्दे उठाते हैं जो अभयारण्य के द्वार को छिपाते हैं। यह काम पैगंबर के जीवन से पर्दे के मास्टर को सौंपा जा सकता है।
|File:Rashid al-Din Tabib - Jami al-Tawarikh, f.45v detail - c. 1306-15.png|मोहम्मद ने स्वर्गदूत गेब्रियल से अपना पहला रहस्योद्घाटन प्राप्त किया ताबीज़, फारस, 1307 सीई में प्रकाशित अबीद अल-दीन द्वारा किताब जामी 'अल-तवरिख (शाब्दिक रूप से "क्रॉनिकल्स के संकलन" को अक्सर यूनिवर्सल हिस्ट्री या विश्व का इतिहास कहा जाता है) से लघु चित्रण एडिनबर्ग विश्वविद्यालय पुस्तकालय, स्कॉटलैंड का संग्रह।
|File:The Prophet Muhammad and the Muslim Army at the Battle of Uhud, from the Siyer-i Nebi, 1595.jpg|पैगंबर मुहम्मद और उहुद की लड़ाई में मुस्लिम सेना, 155 9 सीर-आई नेबी से
|File:Maome.jpg|मुहम्मद मध्यवर्ती पर रोक लगाते हैं; उत्तर-पूर्वी ईरान या उत्तरी इराक ("एडिनबर्ग कोडवेक्स") की प्रारंभिक 14 वीं शताब्दी (आईलखानाट अवधि) पांडुलिपि की 17 वीं शताब्दी की ओटोमन प्रतिलिपि अउ रायहन अल-बिरुनी के अल-अथा-अल-बाकाय़ाह (الآثار الباقية, "पिछली सदी के शेष लक्षण") का चित्रण
फ्रांसीसी: ले प्रोहेते डे ला इस्लाम महमेट, चित्रण डी अन पांडुलिपि ओट्टोमेन डु 17e साइल
|File:Miraj by Sultan Muhammad.jpg|[[इस्रा और मेराज]]-निज़ामी के खमसेह से मुहम्मद की स्वर्ग (1539-1543 ईस्वी) तक चढ़ाई।
|File:Muhammad destroying idols - L'Histoire Merveilleuse en Vers de Mahomet BNF.jpg|मुहम्मद मूर्तियों को नष्ट
|File:Siyer-i Nebi 298a.jpg|पैगंबर और उसके साथी मक्का पर आगे बढ़ रहे हैं, स्वर्गदूतों गेब्रियल, माइकल, इस्त्राइल और आज़्रेल ने भाग लिया।
|}}
==मुहम्मद पर बनी फिल्में==
* [[द मेसेज (1976 फ़िल्म)]]
* [[उमर (टीवी सीरियल)]]
* [[मुहम्मद द मेसेंजर ऑफ़ गॉड (फ़िल्म)]]
== इन्हें भी देखें ==
{{div col|colwidth=20em}}
*[[मुहम्मद के अभियानों की सूची]]
*[[मुहम्मद की पत्नियाँ]]
* [[इस्लाम का इतिहास|इस्लाम का उदय]]
* [[इब्राहिम]]
* [[सज़ाह]]
* [[सफिय्या बिन्ते हुयेय]]
* [[रेहाना बिन्त ज़ैद]]
* हाशिम इब्न अब्द मुनाफ
* [[अब्द अल-मुत्तलिब]]
* [[अब्दुल्लाह इब्न अब्दुल मुत्तलिब]]
* [[अबू ताहिर अल-जनाबी]]
* [[अल-फ़ील]]
* [[मूहाम्मद: द फाइनाल लिगेसी]]
* [[द सेटेनिक वर्सेज़]]
* [[अहल अल-बैत]]
* [[इस्लामी पौराणिक कथाएँ]]
* [[अल-लात]]
* [[मुहम्मद का वंश वृक्ष]]
* अबू सुफ़ियान
* हिंद बिंत उतबाह
* [[इस्लामी शब्दावली]]
* [[शब-ए-क़द्र]]
* [[शार्ली एब्डो]]
* [[द मेसेज (1976 फ़िल्म)|द मेसेज]]
* [[इस्लाम से पहले का अरब]]
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{{portalbar|व्यक्तिगत जीवन|इस्लाम|मध्य प्राच्य|मुहम्मद}}
==टिप्पणियाँ==
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==सन्दर्भ==
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== बाहरी कड़ियाँ ==
* [https://web.archive.org/web/20080719223312/http://www.britannica.com/eb/article-9105853/Muhammad Muhammad], article on ''Encyclopædia Britannica Online''
* [https://web.archive.org/web/20151017071407/http://www.pbs.org/muhammad/ Muhammad: Legacy of a Prophet — PBS Site]
* [https://web.archive.org/web/20110925034150/http://islaminhindi.blogspot.com/2010/04/book-prof-rama-krishna-rao.html इस्लाम के पैग़म्बर मुहम्मद]
{{Sister project links|मुहम्मद|d=Q9458|c=محمد بن عبد الله|v=no|voy=no|m=no|mw=no|species=no|n=no|s=no|b=no}}
* [https://web.archive.org/web/20170211050118/http://www.oxfordislamicstudies.com/article/opr/t236/e0550 Muḥammad], in ''The Oxford Encyclopedia of the Islamic World''
{{इस्लामी विषय}}
{{मुहम्मद का चित्रायन}}
{{Authority control}}
[[श्रेणी:मुहम्मद]]
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बौद्ध धर्म
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{{बौद्ध धर्म}}
[[चित्र:Dharma Wheel (2).svg]]
'''बौद्ध धर्म''' [[गौतम बुद्ध|बुद्ध]] की शिक्षाओं पर आधारित एक [[भारतीय धर्म|भारतीय]] [[भारतीय दर्शन|दार्शनिक परंपरा]] है।<ref>{{Cite web|url=https://plato.stanford.edu/entries/buddha/|title=Buddha|last=Siderits|first=Mark|date=2019|website=The Stanford Encyclopedia of Philosophy|publisher=Metaphysics Research Lab, Stanford University|archive-url=https://web.archive.org/web/20220521121053/https://plato.stanford.edu/entries/buddha/|archive-date=21 May 2022|access-date=22 October 2021}}</ref> इसे '''बुद्ध धर्म''' भी कहा जाता है।<ref>एस धम्मो सनातनों अर्थात यह धर्म आदि अनंत हैं [https://www.tipitaka.org/hindi/Dhammapada.pdf PDF]</ref> [[गौतम बुद्ध]] को ६वीं सदी ईशा पूर्व से ५वीं सदी ईशा पूर्व का माना जाता है।<ref>{{Citation|last=Siderits|first=Mark|title=Buddha|date=2023|url=https://plato.stanford.edu/entries/buddha/|work=The Stanford Encyclopedia of Philosophy|editor-last=Zalta|editor-first=Edward N.|edition=Spring 2023|publisher=Metaphysics Research Lab, Stanford University|access-date=2024-10-26|editor2-last=Nodelman|editor2-first=Uri}}</ref> यह विश्व का [[प्रमुख धार्मिक समूह|चौथा सबसे बड़ा धर्म]] है,<ref>{{Cite web|url=https://www.britannica.com/topic/Buddhism|title=Buddhism {{!}} Definition, Beliefs, Origin, Systems, & Practice {{!}} Britannica|date=2023-10-28|website=www.britannica.com|language=en|access-date=2023-11-10}}</ref><ref>{{Citation|title=Buddhism|date=2023-11-06|url=https://en.wikipedia.org/w/index.php?title=Buddhism&oldid=1183750355|work=Wikipedia|language=en|access-date=2023-11-10}}</ref> जिसके ५२ करोड़ से अधिक अनुयायी (बौद्ध) हैं, जो वैश्विक [[जनसंख्या|आबादी]] का सात प्रतिशत हैं। <ref>{{Citation|title=Christianity 2015: Religious Diversity and Personal|date=January 2015|url=http://www.gordonconwell.edu/resources/documents/1IBMR2015.pdf|volume=39|issue=1|pages=28–29|archive-url=https://web.archive.org/web/20170525141543/http://www.gordonconwell.edu/resources/documents/1IBMR2015.pdf|periodical=International Bulletin of Missionary Research|doi=10.1177/239693931503900108|access-date=2015-05-29|archive-date=25 May 2017| issn=0272-6122}}</ref><ref>{{Citation|title=Buddhism|date=2023-11-06|url=https://en.wikipedia.org/w/index.php?title=Buddhism&oldid=1183750355|work=Wikipedia|language=en|access-date=2023-11-10}}</ref><ref>{{Cite journal|last=Malikov|first=Aladdin|date=2022|title=History, Beliefs and Sects of Buddhism|url=https://rgdoi.net/10.13140/RG.2.2.12273.35689|journal=Elm və Həyat journal|language=az|doi=10.13140/RG.2.2.12273.35689}}</ref>
== शब्द ==
बौद्ध धर्म एक भारतीय धर्म <ref>{{Cite book|url=https://archive.org/details/encyclopediaofas00leej/page/504|title=Encyclopedia of Asian American Folklore and Folklife|last=Jonathan H. X. Lee|last2=Kathleen M. Nadeau|publisher=ABC-CLIO|year=2011|isbn=978-0-313-35066-5|page=[https://archive.org/details/encyclopediaofas00leej/page/504 504]}}, Quote: "The three other major Indian religions – Buddhism, Jainism and Sikhism – originated in India as an alternative to Brahmanic/Hindu philosophy";
[[जन गोण्डा|Jan Gonda]] (1987), ''Indian Religions: An Overview – Buddhism and Jainism'', Encyclopedia of Religion, 2nd Edition, Volume 7, Editor: Lindsay Jones, Macmillan Reference, {{ISBN|0-02-865740-3}}, p. 4428;
{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=m0_njwEACAAJ|title=Encyclopedia of Indian Religions: Buddhism and Jainism|last=[[K. T. S. Sarao]]|last2=Jefferey Long|publisher=Springer Netherlands|year=2017|isbn=978-94-024-0851-5}}, Quote: "Buddhism and Jainism, two religions which, together with Hinduism, constitute the three pillars of Indic religious tradition in its classical formulation."</ref> या दर्शन है। बुद्ध ("जागृत व्यक्ति") एक [[श्रमण परम्परा|श्रमण]] थे जो [[दक्षिण एशिया]] में छठी या पाँचवीं शताब्दी [[ईसा पूर्व]] रहते थे।<ref>{{Cite book|url=https://en.wikipedia.org/wiki/Special:BookSources/978-0-19-289223-2|title=The foundations of Buddhism|last=Gethin|first=Rupert|date=2010|publisher=Oxford Univ. Press|isbn=978-0-19-289223-2|edition=1. publ. paperback, 17th pr|series=An OPUS book|location=Oxford}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://en.wikipedia.org/wiki/Special:BookSources/978-0-86171-811-5|title=Buddhist Teaching in India|last=Bronkhorst|first=Johannes|date=10 July 2016|website=en.wikipedia.org|language=en|archive-url=https://web.archive.org/web/20230111060325/https://books.google.com/books?id=fjU6AwAAQBAJ|archive-date=11 January 2023|access-date=2023-11-10}}</ref>
बौद्ध धर्म के अनुयायी, जिन्हें हिन्दी में ''बौद्ध'' कहा जाता है, प्राचीन भारत में खुद को ''शाक्य'' -एस या ''शाक्यभिक्षु'' कहते थे। <ref>''Beyond Enlightenment: Buddhism, Religion, Modernity'' by Richard Cohen. Routledge 1999. {{ISBN|0-415-54444-0}}. p. 33. "Donors adopted Sakyamuni Buddha's family name to assert their legitimacy as his heirs, both institutionally and ideologically. To take the name of Sakya was to define oneself by one's affiliation with the buddha, somewhat like calling oneself a Buddhist today.</ref> <ref>''Sakya or Buddhist Origins'' by Caroline Rhys Davids (London: Kegan Paul, Trench, Trubner, 1931) p. 1. "Put away the word "Buddhism" and think of your subject as "Sakya." This will at once place you for your perspective at a true point. You are now concerned to learn less about 'Buddha' and 'Buddhism,' and more about him whom India has ever known as Sakya-muni, and about his men who, as their records admit, were spoken of as the Sakya-sons, or men of the Sakyas."</ref> बौद्ध विद्वान डोनाल्ड एस. लोपेज़ का दावा है कि उन्होंने भी ''बौद्ध'' शब्द का इस्तेमाल किया था, <ref>Lopez, Donald S. (1995). ''Curators of the Buddha'', University of Chicago Press. p. 7</ref> हालांकि विद्वान रिचर्ड कोहेन का दावा है कि उस शब्द का इस्तेमाल केवल बाहरी लोगों द्वारा बौद्धों का वर्णन करने के लिए किया गया था। <ref>''Beyond Enlightenment: Buddhism, Religion, Modernity'' by Richard Cohen. Routledge 1999. {{ISBN|0-415-54444-0}}. p. 33. Bauddha is "a secondary derivative of buddha, in which the vowel's lengthening indicates connection or relation. Things that are bauddha pertain to the buddha, just as things Saiva related to Siva and things Vaisnava belong to Visnu. ... baudda can be both adjectival and nominal; it can be used for doctrines spoken by the buddha, objects enjoyed by him, texts attributed to him, as well as individuals, communities, and societies that offer him reverence or accept ideologies certified through his name. Strictly speaking, Sakya is preferable to bauddha since the latter is not attested at Ajanta. In fact, as a collective noun, bauddha is an outsider's term. The bauddha did not call themselves this in India, though they did sometimes use the word adjectivally (e.g., as a possessive, the buddha's)."</ref>[[Image:Wat Mahathat Sukhothai 01.jpg|right|thumb|300px|[[थाईलैंड]] में एक [[भिक्षु]], बुद्ध की प्रतिमा को नमस्कार करते हुए]]
[[चित्र:Hong Kong Budha.jpg|right|thumb|300px|शाक्यमुनि बुद्ध, [[अभयमुद्रा|अभय मुद्रा]] में ([[हांगकांग]])]]
== गौतम बुद्ध ==
{{main|गौतम बुद्ध}}
[[चित्र:Lightmatter buddha3.jpg|thumb|left|बुद्ध की पत्थर की मूर्ति]]
[[गौतम बुद्ध]] शाक्य कोलिय के जीवन के विषय में प्रामाणिक सामग्री विरल है। इस प्रसंग में उपलब्ध अधिकांश वृत्तान्त एवं कथानक भक्तिप्रधान रचनाएँ हैं और बुद्धकाल के बहुत बाद के हैं। प्राचीनतम सामग्री में [[पालि त्रिपिटक]] के कुछ स्थलों पर उपलब्ध अल्प विवरण उल्लेख्य हैं, जैसे - बुद्ध की पर्येषणा, संबोधि, [[धर्मचक्रप्रवर्तनसूत्र|धर्मचक्रप्रवर्तन]] एवं [[महापरिनिर्वाण]] के विवरण। बुद्ध की जीवनी के आधुनिक विवरण प्रायः [[पालि]] की [[निदान आरम्भकथा|निदानकथा]] अथवा [[संस्कृत]] के [[महावस्तु]], [[ललितविस्तर सूत्र|ललितविस्तर]] एवं [[अश्वघोष]] कृत [[बुद्धचरित]] पर आधारित होते हैं। किंतु इन विवरणों की ऐतिहासिकता वहीं तक स्वीकार की जा सकती है जहाँ तक उनके लिए प्राचीनतर समर्थन उपलब्ध हों।
ईसा पूर्व 563 के लगभग [[शाक्य|शाक्यों]] की राजधानी [[कपिलवस्तु]] के निकट [[लुंबिनी]] वन में गौतम बुद्ध का जन्म प्रसिद्ध है। यह स्थान वर्तमान [[नेपाल]] राज्य के अंतर्गत [[भारत]] की सीमा से 7 किलोमीटर दूर है। यहाँ पर प्राप्त [[सम्राट अशोक|अशोक]] के [[रुम्मिनदेई स्तम्भलेख|रुम्मिनदेई स्तंभलेख]] से ज्ञात होता है 'हिद बुधे जाते' (= यहाँ बुद्ध जन्मे थे)। [[सुत्तनिपात]] में शाक्यों को [[हिमालय]] के निकट [[कोशल]] में रहनेवाले गौतम गोत्र के [[क्षत्रिय]] कहा गया है। कोशलराज के अधीन होते हुए भी शाक्य जनपद स्वयं एक गणराज्य था। इस प्रकार के राजा [[शुद्धोदन]] बुद्ध के पिता एवं मायादेवी उनकी माता प्रसिद्ध हैं। जन्म के पाँचवे दिन बुद्ध को 'सिद्धार्थ' नाम दिया गया और जन्मसप्ताह में ही माता के देहांत के कारण उनका पालन-पोषण उनकी मौसी एवं विमाता महाप्रजापती गौतमी द्वारा हुआ।
बुद्ध के शैशव के विषय में प्राचीन सूचना अत्यंत अल्प है। सिद्धार्थ के बत्तीस महापुरुषलक्षणों को देखकर असित मुनि ने उनके बुद्धत्व की भविष्यवाणी की, इसके अनेक वर्णन मिलते हैं। ऐसा भी कहा जाता है कि एक दिन [[जामुन]] की छाँह में उन्हें सहज रूप में प्रथम ध्यान की उपलब्धि हुई थी। दूसरी ओर [[ललितविस्तर सूत्र|ललितविस्तार]] आदि ग्रंथों में उनके शैशव का चमत्कारपूर्ण वर्णन प्राप्त होता है। ललितविस्तर के अनुसार जब सिद्धार्थ को देवायतन ले जाया गया तो देवप्रतिमाओं ने स्वयं उठकर उन्हें प्रणाम किया। उनके शरीर पर सब स्वर्णाभरण मलिन प्रतीत होते थे, लिपिशिक्षक आचार्य विश्वामित्र को उन्होंने 64 [[लिपि]]यों का नाम लेकर और गणक महामात्र अर्जुन को परमाणु-रजः प्रवेशानुगत गणना के विवरण से विस्मय में डाल दिया। नाना शिल्प, अस्त्रविद्या, एवं कलाओं में सहज-निष्णात सिद्धार्थ का कोलिय नरेश दंडपाणि की पुत्री गोपा यशोदारह कोलिय साथ परिणय संपन्न हुआ। पालि आकरों के अनुसार सिद्धार्थ की पत्नी सुप्रबुद्ध की कन्या थी और उसका नाम 'भद्दकच्चाना', भद्रकात्यायनी, यशोधरा, बिंबा, अथवा बिंबासुंदरी था। [[विनयपिटक|विनय]] में उसे केवल 'राहुलमाता' कहा गया है। [[बुद्धचरित]] में यशोधरा नाम दिया गया है।
सिद्धार्थ के प्रव्राजित होने की भविष्यवाणी से भयभीत होकर शुद्धोदन ने उनके लिए तीन विशिष्ट प्रासाद (महल) बनवाए - ग्रैष्मिक, वार्षिक, एवं हैमंतिक। इन्हें रम्य, सुरम्य और शुभ की संज्ञा भी दी गई है। इन प्रासादों में सिद्धार्थ को व्याधि और जन्म-मरण से दूर एक कृत्रिम, नित्य मनोरम लोक में रखा गया जहाँ [[संगीत]], यौवन और सौंदर्य का अक्षत साम्राज्य था। किंतु देवताओं की प्रेरणा से सिद्धार्थ को उद्यानयात्रा में व्याधि, जरा, मरण और परिव्राजक के दर्शन हुए और उनके चित्त में प्रव्राज्या का संकल्प विरूढ़ हुआ। इस प्रकार के विवरण की अत्युक्ति और चमत्कारिता उसके आक्षरिक सत्य पर संदेह उत्पन्न करती है। यह निश्चित है कि सिद्धार्थ के मन में संवेग संसार के अनिवार्य दुःख पर विचार करने से उत्पन्न हुआ। उनकी ध्यानप्रवणता ने, जिसका ऊपर उल्लेख किया गया है, इस दुःख की अनुभूति को एक गंभीर सत्य के रूप में प्रकट किया होगा। निदानकथा के अनुसार इसी समय उन्होंने पुत्रजन्म का संवाद सुना और नवजात को 'राहुल' नाम मिला। उसी अवसर पर प्रासाद की ओर जाते हुए सिद्धार्थ की शोभा से मुग्ध होकर राजकुमारी कृशा गौतमी ने उनकी प्रशंसा में एक प्रसिद्ध गाथा कही जिसमें 'नुबुत्त' (निर्वृत्त, प्रशांत) शब्द आता है।
: ''निब्बुता नून सा माता निब्बुतो नून सो पिता।''
: ''निब्बुता नून सा नारी यस्सायमीदिसो पति॥''
:(अवश्य ही परम शांत है वह माता, परम शांत है वह पिता, परम शांत है वह नारी जिसका ऐसा पति हो।)
सिद्धार्थ को इस गाथा में गुरुवाक्य के समान गंभीर आध्यात्मिक संकेत उपलब्ध हुआ। उन्होने सोचा कि इसने पाप और पुनर्जन्म से मुक्ति के लिए मुझे संदेश दिया है। इसके साथ ही उन्होने मोतियों का अपना हार उतारकर उस युवती को दे दिया।
आधी रात के अंधकार में सोती हुई पत्नी और पुत्र को छोड़कर सिद्धार्थ [[कंथक]] पर आरूढ़ हो नगर से और कुटुंबजीवन से निष्क्रांत हुए। उस समय सिद्धार्थ 29 वर्ष के थे। [[निदान आरम्भकथा|निदानकथा]] के अनुसार रात भर में शाक्य, कोलिय और मल्ल (राम ग्राम) इन तीन राज्यों को पार कर सिद्धार्थ 30 योजन की दूरी पर अनोमा नाम की नदी के तट पर पहुँचे। वहीं उन्होंने प्रव्राज्या के उपयुक्त वेश धारण किया और छन्दक को विदा कर स्वयं अपनी अनुत्तर शांति की पर्येषणा (खोज) की ओर अग्रसर हुए।
आर्य पर्येषणा के प्रसंग में सिद्धार्थ अनेक तपस्वियों से मिले जिनमें [[आलार कालाम]] (आराड़) एवं [[उद्दक रामपुत्त]] (रुद्रक) मुख्य हैं। ललितविस्तर में आलार कालाम का स्थान वैशाली कहा गया है जबकि अश्वघोष के बुद्धिचरित में उसे विंध्य कोष्ठवासी बताया गया है। पालि निकायों से विदित होता है कि कालाम ने बोधिसत्व को 'आर्किचन्यायतन' नाम की 'अल्प समापत्ति' सिखाई। अश्वघोष ने कालाम के सिद्धांतों का [[सांख्य दर्शन|सांख्य]] से सादृश्य प्रदर्शित किया है। ललितविस्तर में रुद्रक का आश्रम [[राजगृह]] के निकट कहा गया है। रुद्रक के 'नैवसंज्ञानासंज्ञायतन' के उपदेश से भी बोधिसत्व असंतुष्ट रहे। राजगृह में उनका मगधराज [[बिंबिसार]] से साक्षात्मार [[सुत्तनिपात]] के पब्बज्जसुत्त, ललितविस्तर और बुद्धचरित में वर्णित है।
[[बोधगया|गया]] में बोधिसत्व ने यह विचार किया कि जैसे गीली लकड़ियों से अग्नि उत्पन्न नहीं हो सकती, ऐसे ही भोगों में स्पृहा रहते हुए ज्ञान की प्राप्ति नहीं हो सकती। अतएव उरुविल्व के निकट सेनापति ग्राम में निरंजना नदी के तटवर्ती रमणीय प्रदेश में उन्होंने कठोर तपश्चर्या (प्रधान) का निश्चय किया। किंतु अंततोगत्वा उन्होंने तप को व्यर्थ समझकर छोड़ दिया। इसपर उनके साथ कौंडिन्य आदि पंचवर्षीय परिव्राजकों ने उन्हें तपोभ्रष्ट निश्चित कर त्याग दिया। बोधिसत्व ने अब शैशव में अनुभूत ध्यानाभ्यास का स्मरण कर ध्यान के द्वारा ज्ञानप्राप्ति का यत्न किया। इस ध्यानकाल में उन्हें [[मार]] सेना का सामना करना पड़ा, यह प्राचीन ग्रंथों में उल्लिखित है। स्पष्ट ही [[मार घर्षण]] को [[काम]] और [[मृत्यु]] पर विजय का प्रतीकात्मक विवरण समझना चाहिए। आर्य पर्येषणा के छठे वर्ष के पूरे होने पर [[वैशाखी पूर्णिमा]] को बोधिसत्व ने [[सम्बोधि|संबोधि]] प्राप्त की। रात्रि के प्रथम याम में उन्होंने पूर्वजन्मों की स्मृति रूपी प्रथम विद्या, द्वितीय याम में दिव्य चक्षु और तृतीय याम में [[प्रतीत्यसमुत्पाद]] का ज्ञान प्राप्त किया। एक मत से इसके समानांतर ही सर्वधर्माभिसमय रूप सर्वाकारक प्रज्ञा अथवा संबोधि का उदय हुआ।
संबोधि के अनंतर बुद्ध के प्रथम वचनों के विषय में विभिन्न परंपराएँ हैं जिनमें [[बुद्धघोष]] के द्वारा समर्थित 'अनेक जाति संसार संघाविस्सं पुनप्पुनं' आदि गाथाएँ विशेषतः उल्लेखनीय हैं। संबोधि की गंभीरता के कारण बुद्ध के मन में उसके उपदेश के प्रति उदासीनता स्वाभाविक थी। संसारी जीव उस गंभीर सत्य को कैसे समझ पाएँगे जो अत्यंत सूक्ष्म और अतर्क्य है? बुद्ध की इस अनभिरुचि पर [[ब्रह्मा]] ने उनसे धर्मचक्र-प्रवर्तन का अनुरोध किया जिसपर दुःखमग्न संसारियों को देखते हुए बुद्ध ने उन्हें विकास की विभिन्न अवस्थाओं में पाया।
सारनाथ के ऋषिपत्तन मृगदान में भगवान बुद्ध ने पंचवर्गीय भिक्षुओं को उपदेश देकर धर्मचक्रप्रवर्तन किया। इस प्रथम उपदेश में दो अंतों का परिवर्जन और मध्यमा प्रतिपदा की आश्रयणीयता बताई गई है। इन पंचवर्गीयों के अनंतर श्रेष्ठिपुत्र यश और उसके संबंधी एवं मित्र सद्धर्म में दीक्षित हुए। इस प्रकार बुद्ध के अतिरिक्त 60 और [[अर्हत]] उस समय थे जिन्हें बुद्ध ने अलग-अलग दिशाओं में प्रचारार्थ भेजा और वे स्वयं [[उरुवेला]] के सेनानिगम की ओर प्रस्थित हुए। मार्ग में 30 भद्रवर्गीय कुमारों को उपदेश देते हुए उरुवेला में उन्होंने तीन जटिल काश्यपों को उनके एक सहस्र अनुयायियों के साथ चमत्कार और उपदेश के द्वारा धर्म में दीक्षित किया। इसके पश्चात राजगृह जाकर उन्होंने मगधराज [[बिंबिसार]] को धर्म का उपदेश दिया। बिंबिसार ने वेणुवन नामक उद्यान भिक्षुसंघ को उपहार में दिया। राजगृह में ही संजय नाम के परिव्राजक के दो शिष्य कोलित और उपतिष्य सद्धर्म में दीक्षित होकर [[मौद्गल्यायन]] और [[सारिपुत्र]] के नाम से प्रसिद्ध हुए। विनय के महावग्ग में दिया हुआ संबोधि के बाद की घटनाओं का क्रमबद्ध विवरण यहाँ पूरा हो जाता है।
इस प्रकार अस्सी वर्ष की आयु तक धर्म का प्रचार करते हुए उन क्षेत्रों में भ्रमण करते रहे जो वर्तमान समय में [[उत्तर प्रदेश]] और [[बिहार]] के के अंतर्गत आते हैं। [[श्रावस्ती]] में उनका सर्वाधिक निवास हुआ और उसके बाद [[राजगृह]], [[वैशाली]] और [[कपिलवस्तु]] में।
प्रसिद्ध [[महापरिनिर्वाण सूत्र]] में बुद्ध की अंतिम पदयात्रा का मार्मिक विवरण प्राप्त होता है। बुद्ध उस समय राजगृह में थे जब मगधराज [[अजातशत्रु]] वृजि जनपद पर आक्रमण करना चाहता था। राजगृह से बुद्ध पाटलि ग्राम होते हुए [[गंगा]] पार कर वैशाली पहुँचे जहाँ प्रसिद्ध गणिका [[आम्रपाली]] ने उनको भिक्षुसंघ के साथ भोजन कराया। इस समय परिनिर्वाण के तीन मास शेष थे। वेलुवग्राम में भगवान ने वर्षावास व्यतीत किया। यहाँ वे अत्यंत रुग्ण हो गए। वैशाली से भगवान भंडग्राम और भोगनगर होते हुए [[पावा]] पहुँचे। वहाँ चुंद कम्मारपुत्त के आतिथ्य ग्रहण में 'सूकर मद्दव' खाने से उन्हें [[रक्तातिसार]] उत्पन्न हुआ। रुग्णावस्था में ही उन्होंने [[कुशीनगर]] की ओर प्रस्थान किया और हिरण्यवती नदी पार कर वे शालवन में दो शालवृक्षों के बीच लेट गए। [[सुभद्र]] परिव्राजक को उन्होंने उपदेश दिया और भिक्षुओं से कहा कि उनके अनंतर [[धर्म]] ही संघ का शास्ता रहेगा। छोटे मोटे शिक्षापदों में परिवर्तन करने की अनुमति भी इन्होंने संघ को दी और छन्न भिक्षु पर ब्रह्मदंड का विधान किया। पालि परंपरा के अनुसार भगवान के अंतिम शब्द थे 'वयधम्मा संखारा अप्पमादेन संपादेथ।' (वयधर्माः संस्काराः अप्रमादेन संपादयेत - सभी संस्कार नाशवान हैं, आलस्य न करते हुये संपादन करना चाहिए।) लेखक-पीयुष कुमार शर्मा (गनेड़ी)
== बुद्ध के समकालीन ==
* बुद्ध के प्रमुख गुरु थे - आदिगुरु, [[आलार कालाम]], उद्दक रामपुत्त, सूरज आजाद आदि। उनके प्रमुख शिष्य थे- आनंद, अनिरुद्ध, महाकश्यप, रानी खेमा (महिला), महाप्रजापति (महिला), भद्रिका, भृगु, किंबाल, देवदत्त, उपाली, अंगुलिमाल आदि।<ref>{{Cite web |url=https://www.sansarlochan.in/buddhas-contemporaries-hindi/ |title=महात्मा बुद्ध के समकालीन लोग |access-date=27 अप्रैल 2020 |archive-date=15 अगस्त 2020 |archive-url=https://web.archive.org/web/20200815052247/https://www.sansarlochan.in/buddhas-contemporaries-hindi/ |url-status=dead }}</ref>
* '''गुरु आलार कालाम और उद्दक रामपुत्त''' : ज्ञान की तलाश में सिद्धार्थ घूमते-घूमते आलारा कालाम और उद्दक रामपुत्त के पास पहुँचे। उनसे उन्होंने योग-साधना सीखी। कई माह तक योग करने के बाद भी जब ज्ञान की प्राप्ति नहीं हुई तो उन्होंने उरुवेला पहुँच कर वहाँ घोर तपस्या की। छः साल बीत गए तपस्या करते हुए। सिद्धार्थ की तपस्या सफल नहीं हुई। तब एक दिन कुछ स्त्रियाँ किसी नगर से लौटती हुई वहाँ से निकलीं, जहां सिद्धार्थ तपस्या कर रहे थे। उनका एक गीत सिद्धार्थ के कान में पड़ा- ‘वीणा के तारों को ढीला मत छोड़ दो। ढीला छोड़ देने से उनका सुरीला स्वर नहीं निकलेगा। पर तारों को इतना कसो भी मत कि वे टूट जाएँ।’ बात सिद्धार्थ को जंच गई। वह मान गए कि नियमित आहार-विहार से ही योग सिद्ध होता है। अति किसी बात की अच्छी नहीं। किसी भी प्राप्ति के लिए मध्यम मार्ग ही ठीक होता है। बस फिर क्या था कुछ ही समय बाद ज्ञान प्राप्त हो गया।
* बुध के प्रथम शिष्य उनके पुत्र राहुल बने और महिला में प्रथम उनकी मासी जो उनकी माता के तरह पालन पोषण की थी
* '''आनंद''' :- यह बुद्ध और देवदत्त के भाई थे और बुद्ध के दस सर्वश्रेष्ठ शिष्यों में से एक हैं। यह लगातार बीस वर्षों तक बुद्ध की संगत में रहे। इन्हें गुरु का सर्वप्रिय शिष्य माना जाता था। आनंद को बुद्ध के निर्वाण के पश्चात प्रबोधन प्राप्त हुआ। वह अपनी स्मरण शक्ति के लिए प्रसिद्ध थे।
* '''महाकश्यप''' : महाकश्यप मगध के ब्राह्मण थे, जो तथागत के नजदीकी शिष्य बन गए थे। इन्होंने प्रथम बौद्ध अधिवेशन की अध्यक्षता की थी।
* '''रानी खेमा''' : रानी खेमा सिद्ध धर्मसंघिनी थीं। यह [[बिंबिसार]] की रानी थीं और अति सुंदर थीं। आगे चलकर खेमा बौद्ध धर्म की अच्छी शिक्षिका बनीं।
* '''महाप्रजापति''' : महाप्रजापति बुद्ध की माता महामाया की बहन थीं। इन दोनों ने राजा शुद्धोदन से विवाह किया था। गौतम बुद्ध के जन्म के सात दिन पश्चात महामाया की मृत्यु हो गई। तत्पश्चात महाप्रजापति ने उनका अपने पुत्र जैसे पालन-पोषण किया। राजा शुद्धोदन की मृत्यु के बाद बौद्ध मठ में पहली महिला सदस्य के रूप में महाप्रजापिता को स्थान मिला था।
== पालि साहित्य ==
{{main|पालि साहित्य}}
[[त्रिपिटक]] (तिपिटक) बौद्ध धर्म का मुख्य ग्रंथ है। यह पालिभाषा में लिखा गया है। यह ग्रंथ बुद्ध के महापरिनिर्वाण के पश्चात बुद्ध के द्वारा दिया गया उपदेशों को सूत्रबद्ध करने का सबसे वृहद प्रयास है। बुद्ध के उपदेशों को इस ग्रंथ में [[सूत्र]] ([[पालि]] : सुत्त) के रूप में प्रस्तुत किया गया है। सूत्रों को वर्ग (वग्ग) में बांधा गया है। वग्ग को निकाय (सुत्तपिटक) में व खंड में समाहित किया गया है। निकायों को पिटक (अर्थ : टोकरी) में एकिकृत किया गया है। इस प्रकार से तीन पिटक निर्मित है जिन के संयोजन को त्रि-पिटक कहा जाता है।
पालिभाषा का त्रिपिटक थेरवादी (और नवयान) बुद्ध परंपरा में श्रीलंका, थाइलैंड, बर्मा, लाओस, कंबोडिया, भारत आदि राष्ट्र के बौद्ध धर्म अनुयायी पालना करते है। पालि के तिपिटक को संस्कृत में भी भाषांतरण किया गया है, जिस को त्रिपिटक कहते है। संस्कृत का पूर्ण त्रिपिटक अभी अनुपलब्ध है। वर्तमान में संस्कृत त्रिपिटक प्रयोजन का जीवित परंपरा केवल नेपाल के [[नेवार|नेवार जाति]] में उपलब्ध है। इस के अलावा तिब्बत, चीन, मंगोलिया, जापान, कोरिया, वियतनाम, मलेशिया, रुस आदि देश में संस्कृत मूल मंत्र के साथ में स्थानीय भाषा में बौद्ध साहित्य परंपरा पालना करते है।
== बुद्ध की शिक्षाएँ ==
भगवान बुद्ध की मूल देशना (शिक्षा) क्या थी, इसपर प्रचुर विवाद है। स्वयं बौद्धों में कालांतर में अलग-अलग संप्रदायों का जन्म और विकास हुआ और वे सभी अपने को बुद्ध से अनुप्राणित मानते हैं।
अधिकांश आधुनिक विद्वान [[पालि त्रिपिटक]] के अंतर्गत [[विनयपिटक]] और [[सुत्तपिटक]] में संगृहीत सिद्धांतों को मूल बुद्धदेशना मान लेते हैं। कुछ विद्वान [[सर्वास्तिवाद]] अथवा [[महायान]] के सारांश को मूल देशना स्वीकार करना चाहते हैं। अन्य विद्वान मूल ग्रंथों के ऐतिहासिक विश्लेषण से प्रारंभिक और उत्तरकालीन सिद्धांतों में अधिकाधिक विवेक करना चाहते हैं, जिसके विपरीत कुछ अन्य विद्वान इस प्रकार के विवेक के प्रयास को प्रायः असंभव समझते हैं।
[[आर्यसत्य]], [[अष्टांगिक मार्ग]], [[दस पारमिता]], [[पंचशील]] आदि के रूप में बुद्ध की शिक्षाएँ समझी जा सकतीं हैं।
=== चार सत्य ===
तथागत बुद्ध का पहला धर्मोपदेश, जो उन्होने अपने साथ के कुछ साधुओं को दिया था, इन चार आर्य सत्यों के बारे में था। बुद्ध ने चार आर्य सत्य बताये हैं।
;1. दुःख
इस दुनिया में दुःख है। जन्म में, बूढ़े होने में, बीमारी में, मौत में, प्रियतम से दूर होने में, नापसंद चीजों के साथ में, चाहत को न पाने में, सब में दुःख है।
;2. दुःख कारण
तृष्णा, या चाहत, दुःख का कारण है और फिर से सशरीर करके संसार को जारी रखती है।
;3. दुःख निरोध
दुःख-निरोध के आठ साधन बताये गये हैं जिन्हें ‘अष्टांगिक मार्ग’ कहा गया है। तृष्णा से मुक्ति पाई जा सकती है।
;4. दुःख निरोध का मार्ग
तृष्णा से मुक्ति [[अष्टांगिक मार्ग]] के अनुसार जीने से पाई जा सकती है।
=== अष्टांगिक मार्ग ===
{{main|अष्टांगिक मार्ग}}
बौद्ध धर्म के अनुसार, चौथे आर्य सत्य का आर्य अष्टांग मार्ग है दुःख निरोध पाने का रास्ता। गौतम बुद्ध कहते थे कि चार आर्य सत्य की सत्यता का निश्चय करने के लिए इस मार्ग का अनुसरण करना चाहिए :
# '''सम्यक दृष्टि'''- वस्तुओं के यथार्थ स्वरूप को जानना ही सम्यक दृष्टि है।
# '''सम्यक संकल्प'''- आसक्ति, द्वेष तथा हिंसा से मुक्त विचार रखना ही सम्यक संकल्प है।
# '''सम्यक वाक'''- सदा सत्य तथा मृदु वाणी का प्रयोग करना ही सम्यक वाक है।
# '''सम्यक कर्मांत'''- इसका आशय अच्छे कर्मों में संलग्न होने तथा बुरे कर्मों के परित्याग से है।
# '''सम्यक आजीव'''- विशुद्ध रूप से सदाचरण से जीवन-यापन करना ही सम्यक आजीव है।
# '''सम्यक व्यायाम'''- अकुशल धर्मों का त्याग तथा कुशल धर्मों का अनुसरण ही सम्यक व्यायाम है।
# '''सम्यक स्मृति'''- इसका आशय वस्तुओं के वास्तविक स्वरूप के संबंध में सदैव जागरूक रहना है।
# '''सम्यक समाधि''' - चित्त की समुचित एकाग्रता ही सम्यक समाधि है।
कुछ लोग आर्य अष्टांग मार्ग को पथ की तरह समझते है, जिसमें आगे बढ़ने के लिए, पिछले के स्तर को पाना आवश्यक है। और लोगों को लगता है कि इस मार्ग के स्तर सब साथ-साथ पाए जाते है। मार्ग को तीन हिस्सों में वर्गीकृत किया जाता है : प्रज्ञा, शील और समाधि।
=== पंचशील ===
भगवान बुद्ध ने अपने अनुयायिओं को पांच शीलों का पालन करने की शिक्षा दी है।
;१. [[अहिंसा]]
:[[पालि]] में – पाणातिपाता वेरमनी सीक्खापदम् सम्मादीयामी !
:'''अर्थ''' – मैं प्राणि-हिंसा से विरत रहने की शिक्षा ग्रहण करता हूँ।
;२. [[अस्तेय]]:
:[[पालि]] में – आदिन्नादाना वेरमणाी सिक्खापदम् समादियामी
:'''अर्थ''' – मैं चोरी से विरत रहने की शिक्षा ग्रहण करता हूँ।
;३. [[अपरिग्रह]]:
:[[पालि]] में – कामेसूमीच्छाचारा वेरमणाी सिक्खापदम् समादियामी
:'''अर्थ''' – मैं व्यभिचार से विरत रहने की शिक्षा ग्रहण करता हूँ।
;४. [[सत्य]]:
:[[पालि]] नें – मुसावादा वेरमणाी सिक्खापदम् समादियामी
:'''अर्थ''' – मैं झूठ बोलने से विरत रहने की शिक्षा ग्रहण करता हूँ।
;५. सभी नशा से विरत:
:[[पालि]] में – सुरामेरय मज्जपमादठटाना वेरमणाी सिक्खापदम् समादियामी।
:'''अर्थ''' – मैं पक्की शराब (सुरा) कच्ची शराब (मेरय), नशीली चीजों (मज्जपमादठटाना) के सेवन से विरत रहने की शिक्षा ग्रहण करता हूँ।
=== बोधि ===
गौतम बुद्ध ने जिस ज्ञान की प्राप्ति की थी उसे '[[बोधि]]' कहते हैं। माना जाता है कि बोधि पाने के बाद ही संसार से छुटकारा पाया जा सकता है। सारी पारमिताओं (पूर्णताओं) की निष्पत्ति, चार आर्य सत्यों की पूरी समझ और कर्म के निरोध से ही बोधि पाई जा सकती है। इस समय, लोभ, दोष, मोह, अविद्या, तृष्णा और आत्मा में विश्वास सब गायब हो जाते हैं। बोधि के तीन स्तर होते हैं : [[श्रावकबुद्ध|श्रावकबोधि]], [[प्रत्येकबुद्ध|प्रत्येकबोधि]] और [[सम्यकसंबुद्ध|सम्यकसंबोधि]]। सम्यकसंबोधि बौध धर्म की सबसे उन्नत आदर्श मानी जाती है।
== दर्शन एवं सिद्धांत ==
{{मुख्य|बौद्ध दर्शन}}
गौतम बुद्ध के महापरिनिर्वाण के बाद, बौद्ध धर्म के अलग-अलग संप्रदाय उपस्थित हो गये हैं, परंतु इन सब के बहुत से सिद्धांत मिलते हैं।
=== प्रतीत्यसमुत्पाद ===
{{मुख्य|प्रतीत्यसमुत्पाद}}
प्रतीत्यसमुत्पाद का सिद्धांत कहता है कि कोई भी घटना केवल दूसरी घटनाओं के कारण ही एक जटिल कारण-परिणाम के जाल में विद्यमान होती है। प्राणियों के लिये, इसका अर्थ है कर्म और विपाक (कर्म के परिणाम) के अनुसार अनंत संसार का चक्र। क्योंकि सब कुछ अनित्य और अनात्मं (बिना आत्मा के) होता है, कुछ भी सच में विद्यमान नहीं है। हर घटना मूलतः शुन्य होती है। परंतु, मानव, जिनके पास ज्ञान की शक्ति है, तृष्णा को, जो दुःख का कारण है, त्यागकर, तृष्णा में नष्ट की हुई शक्ति को ज्ञान और ध्यान में बदलकर, निर्वाण पा सकते हैं।तृष्णा शून्य जीवन केवल विपश्यना से संभव है। आज के इस युग मे प्रतीत्यसमुत्पाद समाज से कही गायब हो ।
=== क्षणिकवाद ===
{{मुख्य|क्षणिकवाद}}
इस दुनिया में सब कुछ क्षणिक है और नश्वर है। कुछ भी स्थायी नहीं। परंतु वैदिक मत से भिन्न है।
=== अनात्मवाद ===
{{मुख्य|अनात्मवाद}}
आत्मा का अर्थ 'मैं' होता है। किन्तु, प्राणी शरीर और मन से बने है, जिसमे स्थायित्व नहीं है। क्षण-क्षण बदलाव होता है। इसलिए, 'मैं' अर्थात आत्मा नाम की कोई स्थायी चीज नहीं। जिसे लोग [[आत्मा]] समझते हैं, वो चेतना का अविच्छिन्न प्रवाह है। आत्मा का स्थान मन ने लिया है।
=== अनीश्वरवाद ===
बुद्ध ने ब्रह्म-जाल सुत्त में सृष्टि का निर्माण कैसा हुआ, ये बताया है। सृष्टि का निर्माण होना और नष्ट होना बार-बार होता है। [[ईश्वर]] या महाब्रह्मा सृष्टि का निर्माण नहीं करते क्योंकि दुनिया [[प्रतीत्यसमुत्पाद]] अर्थात कार्यकरण-भाव के नियम पर चलती है। भगवान बुद्ध के अनुसार, मनुष्यों के दू:ख और सुख के लिए कर्म जिम्मेदार है, [[ईश्वर]] या महाब्रह्मा नहीं। पर अन्य जगह बुद्ध ने सर्वोच्च सत्य को अवर्णनीय कहा हैं।
=== शून्यतावाद ===
[[शून्यता]] महायान बौद्ध सम्प्रदाय का प्रधान दर्शन है।
=== यथार्थवाद ===
बौद्ध धर्म का मतलब निराशावाद नहीं है। दुख का मतलब निराशावाद नहीं है, बल्कि सापेक्षवाद और यथार्थवाद है<ref>मीर्चा ईटु, दर्शन और धर्म का इतिहास, बुखारेस्ट, कल की रोमानिया का प्रकाशन संस्था, दो हजार चार, एक सौ इक्यासी का पृष्ठ। (ISBN 973-582-971-1)</ref>।
बुद्ध, धम्म और संघ, बौद्ध धर्म के तीन त्रिरत्न हैं।
भिक्षु, भिक्षुणी, उपसका और उपसिका संघ के चार अवयव हैं।<ref>आनंद केंटिश कुमारस्वामी, हिंदू धर्म और बौद्ध धर्म, न्यू यॉर्क, गोल्डन एलिक्सिर प्रेस, दो हजार ग्यारह, चौहत्तर का पृष्ठ। (ISBN 978-0-9843082-3-1)</ref>
===बोधिसत्व===
{{main|बोधिसत्व}}
दस पारमिताओं का पूर्ण पालन करने वाला [[बोधिसत्व]] कहलाता है। बोधिसत्व जब दस बलों या भूमियों (मुदिता, विमला, दीप्ति, अर्चिष्मती, सुदुर्जया, अभिमुखी, दूरंगमा, अचल, साधुमती, धम्म-मेघा) को प्राप्त कर लेते हैं तब "बुद्ध" कहलाते हैं। बुद्ध बनना ही बोधिसत्व के जीवन की पराकाष्ठा है। इस पहचान को [[बोधि]] (ज्ञान) नाम दिया गया है। कहा जाता है कि बुद्ध शाक्यमुनि केवल एक बुद्ध हैं - उनके पहले बहुत सारे थे और भविष्य में और होंगे। उनका कहना था कि कोई भी बुद्ध बन सकता है अगर वह दस पारमिताओं का पूर्ण पालन करते हुए बोधिसत्व प्राप्त करे और बोधिसत्व के बाद दस बलों या भूमियों को प्राप्त करे। बौद्ध धर्म का अंतिम लक्ष्य है संपूर्ण मानव समाज से दुःख का अंत। "मैं केवल एक ही पदार्थ सिखाता हूँ - दुःख है, दुःख का कारण है, दुःख का निरोध है, और दुःख के निरोध का मार्ग है" (बुद्ध)। बौद्ध धर्म के अनुयायी [[अष्टांगिक मार्ग]] पर चलकर न के अनुसार जीकर अज्ञानता और दुःख से मुक्ति और निर्वाण पाने की कोशिश करते हैं।
== संप्रदाय ==
बौद्ध धर्म में [[संघ]] का बड़ा स्थान है। इस धर्म में [[बुद्ध]], [[धम्म]] और [[संघ]] को '[[त्रिरत्न]]' कहा जाता है। संघ के नियम के बारे में [[गौतम बुद्ध]] ने कहा था कि छोटे नियम भिक्षुगण परिवर्तन कर सकते है। उन के महापरिनिर्वाण पश्चात संघ का आकार में व्यापक वृद्धि हुआ। इस वृद्धि के पश्चात विभिन्न क्षेत्र, संस्कृति, सामाजिक अवस्था, दीक्षा, आदि के आधार पर भिन्न लोग बुद्ध धर्म से आबद्ध हुए और संघ का नियम धीरे-धीरे परिवर्तन होने लगा। साथ ही में [[अंगुत्तर निकाय]] के [[कालाम सुत्त]] में बुद्ध ने अपने अनुभव के आधार पर धर्म पालन करने की स्वतंत्रता दी है। अतः, विनय के नियम में परिमार्जन/परिवर्तन, स्थानीय सांस्कृतिक/भाषिक पक्ष, व्यक्तिगत धर्म का स्वतंत्रता, धर्म के निश्चित पक्ष में ज्यादा वा कम जोड़ आदि कारण से बुद्ध धर्म में विभिन्न संप्रदाय व संघ में परिमार्जित हुए। वर्तमान में, इन संघ में प्रमुख संप्रदाय या पंथ [[थेरवाद]], [[महायान]] और [[वज्रयान]] है। भारत में बौद्ध धर्म का [[नवयान]] संप्रदाय है जो भीमराव आंबेडकर द्वारा निर्मित है।
=== थेरवाद ===
{{main|थेरवाद}}
* श्रावकयान
* प्रत्येकबुद्धयान
* [[थेरवाद]] बुद्ध के मौलिक उपदेश ही मानता है।
* [[श्रीलंका]], [[थाईलैंड]], [[म्यान्मार]], [[कंबोडिया]], [[लाओस]], [[बांग्लादेश]], [[नेपाल]] आदि देशों में थेरवाद बौद्ध धर्म का प्रभाव हैं।
=== महायान ===
{{main|महायान}}
* [[महायान]] बुद्ध की वास्तविक शिक्षाओं का पालन नहीं करता।
* बुद्ध के अलावा हजारों बोधिसत्व की पूजा करता है।
* बोधिसत्त्वयान
* बोधिसत्त्वसुत्रयान
* बोधिसत्त्वतंत्रयान / वज्रयान
* [[महायान]] बुद्ध की पूजा करता है।
* [[चीन]], [[जापान]], [[उत्तर कोरिया]], [[वियतनाम]], [[दक्षिण कोरिया]] आदी देशों में प्रभाव हैं।
==== वज्रयान ====
{{main|वज्रयान}}
* महायान की शाखा
* वज्रयान को तिब्बती तांत्रिक धर्म भी कहा जाता हैं।
* [[भूटान]] में राष्ट्रधर्म
* [[भूटान]], [[तिब्बत]] और [[मंगोलिया]] में प्रभाव
=== नवयान ===
{{main|नवयान}}
* डॉ. भीमराव आंबेडकर के सिद्धांतों का अनुसरण
* बुद्ध की मूल शिक्षाओं का अनुसरण
* महायान, वज्रयान, थेरवाद से भिन्न सिद्धांत
* [[भारत]] में (मुख्यतः [[महाराष्ट्र]] में) प्रभाव
== प्रमुख तीर्थ ==
{{main|बौद्ध धर्म के तीर्थ स्थल}}
भगवान बुद्ध के अनुयायीओं के लिए विश्व भर में पाँच मुख्य तीर्थ मुख्य माने जाते हैं :
{{बौद्ध तीर्थ}}
# [[लुंबिनी]] – जहाँ भगवान बुद्ध का जन्म हुआ।
# [[बोधगया]] – जहाँ बुद्ध ने ज्ञान प्राप्त हुआ।
# [[सारनाथ]] – जहाँ से बुद्ध ने दिव्यज्ञान देना प्रारंभ किया।
# [[कुशीनगर]] – जहाँ बुद्ध का महापरिनिर्वाण हुआ।
# [[दीक्षाभूमि, नागपुर]] – जहाँ [[भारत में बौद्ध धर्म का पुनरूत्थान]] हुआ।
=== लुंबिनी ===
[[Image:Maya Devi Lumbini.jpg|thumb|300px|[[माया देवी मंदिर, लुंबिनी]], [[नेपाल]]]]
यह स्थान [[नेपाल]] की [[तराई]] में [[नौतनवाँ]] रेलवे स्टेशन से 25 किलोमीटर और गोरखपुर-गोंडा लाइन के [[सिद्धार्थ नगर]] स्टेशन से करीब 12 किलोमीटर दूर है। अब तो सिद्धार्थ नगर से [[लुंबिनी]] तक पक्की सड़क भी बन गई है। ईसा पूर्व 563 में राजकुमार सिद्धार्थ गौतम (बुद्ध) का जन्म यहीं हुआ था। हालाँकि, यहाँ के बुद्ध के समय के अधिकतर प्राचीन विहार नष्ट हो चुके हैं। केवल [[सम्राट अशोक]] का एक स्तंभ अवशेष के रूप में इस बात की गवाही देता है कि भगवान बुद्ध का जन्म यहाँ हुआ था। इस स्तंभ के अलावा एक समाधि स्तूप में बुद्ध की एक मूर्ति है। [[नेपाल सरकार]] ने भी यहाँ पर दो स्तूप और बनवाएँ हैं।
=== बोधगया ===
[[Image:Mahabodhitemple.jpg|thumb|300px|[[महाबोधि मंदिर|महाबोधि विहार]], [[बोधगया]]]]
लगभग छह वर्ष तक जगह-जगह और विभिन्न गुरुओं के पास भटकने के बाद भी बुद्ध को कहीं परम ज्ञान न मिला। इसके बाद वे [[गया]] पहुँचे। आखिर में उन्होंने प्रण लिया कि जब तक असली ज्ञान उपलब्ध नहीं होता, वह पिपल वृक्ष के नीचे से नहीं उठेंगे, चाहे उनके प्राण ही क्यों न निकल जाएँ। इसके बाद करीब छह साल तक दिन रात एक [[पीपल|पीपल वृक्ष]] के नीचे भूखे-प्यासे [[तप]] किया। आखिर में उन्हें परम ज्ञान या [[बुद्धत्व]] उपलब्ध हुआ। जिस पिपल वृक्ष के नीचे वह बैठे, उसे [[बोधि वृक्ष]] अर्थात 'ज्ञान का वृक्ष' कहा जाता है। वहीं गया को [[बोधगया]] के नाम से जाना जाता है।
=== सारनाथ ===
[[File:Ancient Buddhist monasteries near Dhamekh Stupa Monument Site, Sarnath.jpg|right|300px|thumb|[[धामेक स्तूप]] के पास प्राचीण बौद्ध मठ, [[सारनाथ]], [[उत्तर प्रदेश]], [[भारत]]]]
[[बनारस]] छावनी स्टेशन से छह किलोमीटर, बनारस-सिटी स्टेशन से साढ़े तीन किलोमीटर और सड़क मार्ग से [[सारनाथ]] चार किलोमीटर दूर पड़ता है। यह पूर्वोत्तर रेलवे का स्टेशन है और बनारस से यहाँ जाने के लिए सवारी तांगा और रिक्शा आदि मिलते हैं। सारनाथ में बौद्ध-धर्मशाला है। यह बौद्ध तीर्थ है। लाखों की संख्या में बौद्ध अनुयायी और बौद्ध धर्म में रुचि रखने वाले लोग हर साल यहाँ पहुँचते हैं। बौद्ध अनुयायीओं के यहाँ हर साल आने का सबसे बड़ा कारण यह है कि भगवान बुद्ध ने अपना प्रथम उपदेश यहीं दिया था। सदियों पहले इसी स्थान से उन्होंने धर्म-चक्र-प्रवर्तन प्रारंभ किया था। बौद्ध अनुयायी सारनाथ के मिट्टी, पत्थर एवं कंकरों को भी पवित्र मानते हैं। सारनाथ की दर्शनीय वस्तुओं में अशोक का चतुर्मुख सिंह स्तंभ, भगवान बुद्ध का प्राचीन मंदिर, [[धामेक स्तूप]], [[चौखंडी स्तूप]], आदि शामिल हैं।
=== कुशीनगर ===
[[Image:kusinara.jpg|thumb|300px|महापरिनिर्वाण स्तूप, [[कुशीनगर]], [[उत्तर प्रदेश]], [[भारत]]]]
[[कुशीनगर]] बौद्ध अनुयायीओं का बहुत बड़ा पवित्र तीर्थ स्थल है। भगवान बुद्ध कुशीनगर में ही [[महापरिनिर्वाण]] को प्राप्त हुए। कुशीनगर के समीप हिरन्यवती नदी के समीप बुद्ध ने अपनी आखरी साँस ली। रंभर स्तूप के निकट उनका अंतिम संस्कार किया गया। [[उत्तर प्रदेश]] के जिला [[गोरखपुर]] से 55 किलोमीटर दूर कुशीनगर बौद्ध अनुयायीओं के अलावा पर्यटन प्रेमियों के लिए भी खास आकर्षण का केंद्र है। 80 वर्ष की आयु में शरीर त्याग से पहले भारी संख्या में लोग बुद्ध से मिलने पहुँचे। माना जाता है कि लगभग 20 वर्षीय ब्राह्मण सुभद्र ने बुद्ध के वचनों से प्रभावित होकर संघ से जुड़ने की इच्छा जताईं। माना जाता है कि सुभद्र आखरी भिक्षु थे जिन्हें बुद्ध ने दीक्षित किया।
=== दीक्षाभूमी ===
{{मुख्य|दीक्षाभूमि}}
[[चित्र:Diksha Bhumi.jpg|thumb|300px|[[दीक्षाभूमि, नागपुर|दीक्षाभूमि]], [[नागपुर]], [[महाराष्ट्र]], [[भारत]]]]
[[दीक्षाभूमि, नागपुर]] [[महाराष्ट्र]] राज्य के [[नागपुर]] शहर में स्थित पवित्र एवं महत्त्वपूर्ण बौद्ध तीर्थ स्थल है। यहीं पर [[भीमराव आंबेडकर|डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर]] ने [[14 अक्टूबर]], [[1956]] को '''विजयादशमी / दशहरा''' के दिन पहले स्वयं अपनी पत्नी डॉ. सविता आंबेडकर के साथ बौद्ध धर्म की दीक्षा ली और फिर अपने 5,00,000 हिंदू दलित समर्थकों को बौद्ध धर्म की दीक्षा दी थी। 1956 से आज तक हर साल यहाँ देश-विदेश से 20 से 25 लाख बुद्ध और बाबासाहेब के बौद्ध अनुयायी दर्शन करने के लिए आते है। इस पवित्र एवं महत्त्वपूर्ण तीर्थ स्थल को [[महाराष्ट्र सरकार]] द्वारा ‘अ’वर्ग पर्यटन एवं तीर्थ स्थल का दर्जा दिया गया हैं।
==बौद्ध समुदाय ==
{{मुख्य|विश्व में बौद्ध धर्म}}
संपूर्ण विश्व में लगभग 2 अरब लोग बौद्ध हैं। इनमें से लगभग 70% महायानी बौद्ध और शेष 25% से 30% थेरावादी, नवयानी (भारतीय) और वज्रयानी बौद्ध है। [[महायान]] और [[थेरवाद]] ([[हीनयान]]), [[नवयान]], [[वज्रयान]] के अतिरिक्त बौद्ध धर्म में इनके अन्य कई उपसंप्रदाय या उपवर्ग भी हैं परंतु इन का प्रभाव बहुत कम है। सबसे अधिक बौद्ध [[पूर्वी एशिया]] और [[दक्षिण पूर्व एशिया]] के देशों में रहते हैं। [[दक्षिण एशिया]] के दो देशों में भी बौद्ध धर्म बहुसंख्यक है। [[अमेरिका]], [[ऑस्ट्रेलिया]], [[अफ्रीका]] और [[यूरोप]] जैसे महाद्वीपों में भी बौद्ध रहते हैं। विश्व में लगभग '''8''' से अधिक देश ऐसे हैं जहाँ बौद्ध बहुसंख्यक या बहुमत में हैं। विश्व में कई देश ऐसे भी हैं जहाँ की बौद्ध जनसंख्या के बारे में कोई विश्वसनीय जानकारी नहीं हैं।
{| class="wikitable sortable"
|+ अधिकतम बौद्ध जनसंख्या वाले देश
|-
! देश
! बौद्ध जनसंख्या
! बौद्ध प्रतिशत
|- style="text-align:center;"
| {{flag|चीन}}
| 22,50,87,000
| 18%
|- style="text-align:center;"
| {{flag|जापान}}
| 4,33,45,000
| 36%
|- style="text-align:center;"
| {{flag|वियतनाम}}
| 1,45,78,000
| 23%
|- style="text-align:center;"
| {{flag|भारत}}
| 79,87,899
| 0.6%
|- style="text-align:center;"
| {{flag|थाईलैंड}}
| 6,46,87,000
| 95% <ref>Department of Census and Statistics,[http://www.statistics.gov.lk/PopHouSat/CPH2011/index.php?fileName=pop43&gp=Activities&tpl=3 The Census of Population and Housing of Sri Lanka-2011] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20171017221053/http://www.statistics.gov.lk/PopHouSat/CPH2011/index.php?fileName=pop43&gp=Activities&tpl=3 |date=17 अक्तूबर 2017 }}</ref>
|- style="text-align:center;"
| {{flag|म्यान्मार}}
| 4,99,92,000
| 80%
|- style="text-align:center;"
| {{flag|दक्षिण कोरिया}}
| 2,46,56,000
| 18%
|- style="text-align:center;"
| {{flag|ताइवान}}
| 2,21,45,000
| 28%
|- style="text-align:center;"
| {{flag|उत्तर कोरिया}}
| 1,76,56,000
| 12%
|- style="text-align:center;"
| {{flag|श्रीलंका}}
| 1,60,45,600
| 75%<ref>{{Cite web |url=https://www.directtraveller.com/blog/buddhism-and-sri-lankan-cultural-heritage/ |title=बौद्ध धर्म और श्रीलंकन संस्कृती |access-date=10 दिसंबर 2016 |archive-url=https://web.archive.org/web/20161220081628/https://www.directtraveller.com/blog/buddhism-and-sri-lankan-cultural-heritage/ |archive-date=20 दिसंबर 2016 |url-status=dead }}</ref>
|-style="text-align:center;"
| {{flag|कंबोडिया}}
| 1,48,80,000
| 97%
|- style="text-align:center;"
| {{flag|इंडोनेशिया}}
| 80,75,400
| 03%
|- style="text-align:center;"
| {{flag|हांगकांग}}
| 65,87,703
| 93%
|- style="text-align:center;"
| {{flag|मलेशिया}}
| 63,47,220
| 22%
|- style="text-align:center;"
| {{flag|नेपाल}}
| 62,28,690
| 22%
|- style="text-align:center;"
| {{flag|लाओस}}
| 62,87,610
| 98%
|- style="text-align:center;"
| {{flag|अमेरिका}}
| 61,49,900
| 02%
|- style="text-align:center;"
| {{flag|सिंगापुर}}
| 37,75,666
| 67%
|- style="text-align:center;"
| {{flag|मंगोलिया}}
| 30,55,690
| 98%
|- style="text-align:center;"
| {{flag|फिलीपींस}}
| 28,55,700
| 03%
|- style="text-align:center;"
| {{flag|रूस}}
| 20,96,608
| 02%
|- style="text-align:center;"
| {{flag|बांग्लादेश}}
| 20,46,800
| 01%
|- style="text-align:center;"
| {{flag|कनाडा}}
| 21,47,600
| 03%
|- style="text-align:center;"
| {{flag|ब्राजील}}
| 11,45,680
| 01%
|- style="text-align:center;"
| {{flag|फ्रांस}}
| 10,55,600
| 02%
|}
;बहुसंख्यक बौद्ध देश
आज विश्व में 8 से अधिक देशों ([[गणतंत्र]] राज्य भी) में बौद्ध धर्म बहुसंख्यक या प्रमुख धर्म के रूप में हैं।
;अधिकृत बौद्ध देश
विश्व में , [[कंबोडिया]], [[भूटान]], [[थाईलैंड]], [[म्यान्मार]] और [[श्रीलंका]] यह देश "अधिकृत" रूप से '<nowiki/>'''बौद्ध देश'''' है, क्योंकि इन देशों के [[संविधान]]ों में बौद्ध धर्म को ‘राजधर्म’ या ‘राष्ट्रधर्म’ का दर्जा प्राप्त है।
== सन्दर्भ ==
{{reflist}}
== इन्हें भी देखें ==
* [[गौतम बुद्ध]]
* [[सम्राट अशोक]]
* [[विश्व में बौद्ध धर्म]]
* [[बौद्ध धर्म का इतिहास]]
* [[पालि भाषा का साहित्य]]
* [[बौद्ध शब्दावली|बौद्ध शब्दावली]]
* [[भारत में बौद्ध धर्म]]
* [[तिब्बती बौद्ध धर्म]]
* [[चीनी बौद्ध धर्म]]
* [[दलित बौद्ध आंदोलन]]
* [[नवयान]]
* [[भारतयान]]
* [[भारत में बौद्ध धर्म का पतन]]
==बाहरी कड़ियाँ==
{{विकिसूक्ति|बौद्ध धर्म}}
*[https://web.archive.org/web/20160715072542/http://www.dhammawiki.com/index.php?title=Main_Page धर्मविकी]
{{भारत के धर्म}}
[[श्रेणी:धर्म]]
[[श्रेणी:बौद्ध धर्म]]
[[श्रेणी:गौतम बुद्ध]]
ky9eh1rrtd4x62u21ci3awkl2j6fohh
नरसिंहपुर ज़िला
0
7537
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2026-05-02T15:30:32Z
~2026-26789-02
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भौगोलिक स्थिति
6547804
wikitext
text/x-wiki
{{ज्ञानसन्दूक प्रांत
|province_name = नरसिंहपुर ज़िला<br /><small>Narsinghpur district</small>
|loc_map = MP Narsinghpur district map.svg
|capital = [[नरसिंहपुर]]
|area = 5,125.55
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}}
[[File:Narsinghpur railway station- - 1.jpeg|thumb|270px| नरसिंहपुर रेलवे स्टेशन]]
'''नरसिंहपुर ''' भारतीय राज्य [[मध्य प्रदेश]] का एक [[ज़िला|जिला]] है। जिले का मुख्यालय [[नरसिंहपुर]] है। इसमें चार विधानसभा क्षेत्र आते हैं जो नरसिंहपुर, तेंदूखेड़ा, गाडरवारा और गोटेगांव हैं।मध्य प्रदेश के मध्य में स्थित नरसिंहपुर 5000 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्रफल में फैला राज्य का प्रमुख जिला है। उत्तर में [[विन्ध्याचल]] और दक्षिण में [[सतपुड़ा]] की पहाड़ियों से घिरे नरसिंहपुर पर प्रकृति खूब मेहरबान हुई है। पवित्र [[नर्मदा नदी|नर्मदा]] नदी जिले की खूबसूरती में वृद्धि करती है। प्राचीन काल में यहां अनेक वंशों ने शासन किया था। महान वीरांगना रानी दुर्गावती के काल में यह स्थान काफी चर्चित रहा था। हीरापुर के राजा हृदय शाह लोधी व माने गांव के रुद्र प्रताप सिंह स्वतंत्रता आंदोलन में सेनानी रह चुके यहां अनेक ऐतिहासिक दर्शनीय स्थल हैं।मृृगन्नाथ धाम राजमार्ग, नरसिंह मंदिर, ब्राह्मण घाट, जोटेश्वर आश्रम और दमारू घाटी यहां के लोकप्रिय पर्यटन स्थल हैं।
जिले की प्रमुख व्यावसायिक फसलें सोयाबीन और गन्ना हैं, [6] जो बड़ी मात्रा में उत्पादित होती हैं और आय का एक प्रमुख स्रोत हैं। मध्य प्रदेश में नरसिंहपुर सोयाबीन का सबसे बड़ा उत्पादक है। सोयाबीन का उपयोग तेल निकालने के लिए और गन्ने का उपयोग चीनी और गुड़ के लिए किया जाता है। मध्य प्रदेश के गन्ना उत्पादन में अकेले नरसिंहपुर का योगदान लगभग 80% है। जाहिर तौर पर करेली (तहसील) भारत की सबसे बड़ी गुड़ मंडी है। पिछले दशक में चीनी उद्योग ने उल्लेखनीय प्रगति देखी है।<ref>{{Cite web|url=https://en.wikipedia.org/wiki/Narsinghpur#cite_ref-:0_5-6|title=Narsinghpur}}</ref>
== '''ऐतिहासिक पृष्ठभूमि''' ==
नरसिंहपुर जिला क्षेत्र अपने भीतर अस्तित्व के प्राचीनतम प्रमाण छुपाये हुये है । जो विभिन्न पुरातात्विक खोजों से समय समय पर उजागर होते रहे हैं । जिले के गजेटियर में उल्लेखित पुरातात्विक प्रमाणों के अनुसार जिले के गाडरवारा से दूर भटरा नामक ग्राम में 1872 में पाषाण युग के जीवाश्म युक्त पशु और बलुआ पत्थर से निर्मित उपकरण प्राप्त हुये हैं । अन्य खोज अभियानों में देवाकछार, धुवघट, कुम्हड़ी, रातीकरार और ब्रम्हाण घाट आदि स्थलों में प्रागेतिहासिक अवशेष मिले हैं । बिजौरी ग्राम के समीप चिन्हित शैलामय एवं नक्कासीदार चट्टानी गुफायें भी जिले के अस्तित्व को प्राचीनतम काल से जोड़ते हैं । ब्रम्हाण घाट से झांसी घाट के बीच नर्मदा के तटवर्ती खोज अभियानों में मिले स्तनधारी जीवाश्म तथा पुरातात्विक औजारों के अवशेष जिले को प्रागेतिहासिक इतिहास से जोड़ते हैं ।
अनुकृतियों के अनुसार इस क्षेत्र का संबंध रामायण और महाभारत काल की घटनाओं से रहा है । पौराणिक संदर्भो के अनुसार ब्रम्हाण घाट वह स्थल है जहां सृष्टि के रचियता ब्रम्हा ने पवित्र नर्मदा के तट पर यज्ञ सम्पन्न किया था । चांवरपाठा विकास खंड के बिल्थारी ग्राम का प्राचीन नाम बलि स्थली " कहा जाता है । इसे राजा बलि का निवास स्थान माना जाता है ।
महाभारत काल में बरमान घाट के सत्धारा पर पाण्डवों द्वारा नर्मदा की धारा को एक ही रात में बांधने के प्रयत्न का उल्लेख पुराणों में हुआ है । सत्धारा के निकट भीम कुण्ड, अर्जुन कुण्ड आदि इसी को ईंगित करते हैं । कहा जाता है कि पाण्डवों ने वनवास की कुछ अवधि यहां बिताई थी । सांकल घाट की गुफा आदि गुरू शंकराचार्य के गुरूदेव के अध्ययन एवं साधना से जुड़ी है ।
जिले का बरहटा ग्राम महाभारत काल के विराट नगर का अवशेष माना जाता है । यहीं कदम कदम पर मिलतीं पाषाण मूर्तियां और कलात्मक अवशेष से इस किवदंती को बल मिलता है । बचई के निकट पड़ी मानवाकार पाषाण शिला को कीचक" से जोड़ा जाता है । जिले के बोहानी क्षेत्र को पृथ्वीराज कालीन वीरचरित नायकों आल्हा-ऊदल के पिता जसराज व चाचा बछराज का गढ़ माना जाता है । अनेक ऐतिहासिक प्रमाणों खुदाई में प्राप्त प्राचीन वस्तुओं तथा उल्लेखों से जिले का संदर्भ प्राचीन काल से जोड़ने वाले तथ्य और अनुकृतियां बहुतायत में हैं । पर इतिहास ग्रंथों तथा ऐतिहासिक अभिलेखों द्वारा जिले के प्रामाणिक इतिहास की श्रृंखला दूसरी शताब्दी के इतिहास से मिलती है ।
==== सातवाहन काल ====
दूसरी शताब्दी में इस क्षेत्र पर सातवाहन शासकों का अधिपत्य था । चौथी शताब्दी में यह गुप्त साम्राज्य के अधीन रहा जब समुद्र गुप्त ने मध्य भारत क्षेत्र तथा दक्षिण तक अपने साम्राज्य की सीमायें स्थापित करने में सफलता पाई । छठी शताब्दी में पेदीराज्य के कुछ संकेत मिलते हैं । पर लगभग 300 वर्षो तक का काल पुन: अंधेरों में खोया हुआ है । नौवीं शताब्दी में क्षेत्र कलचुरी शासन (हैहय) के स्थापित होने का उल्लेख प्राप्त है । कलचुरी राजवंश की राजधानी नर्मदा किनारे माहिष्मती नगरी थी जो आगे चलकर त्रिपुरी में स्थापित हो गई । कलचुरी राज्य के गोमती से नर्मदा घाट तक फैले होने का विवरण इतिहास ग्रंथों में सुरक्षित है । कलचुरी सत्ता के पतन के पश्चात इस क्षेत्र पर आल्हा-ऊदल के पिता व चाचा के संरक्षण का उल्लेख मिलता है । जिनने बोहानी को अपना राज केन्द्र बनाया उनके पश्चात लगातार चार शताब्दियों तक यह क्षेत्र राजगौड़ वंश के साम्राज्य का अंग रहा ।
==== राजगौड़ वंश ====
इस शासन की स्थापना से जिले में नये व्यवस्थित शांतिपूर्ण एवं खुशहाली का दौर प्रारंभ होता है । इस राजवंश के उदय का श्रेय यादव राव (यदुराव) को दिया जाता है । जिनने चौदहवीं शताब्दी के अंतिम वर्षो में गढ़ा कटंगा में स्थापित किया और एक महत्वपूर्ण शासन क्रम की नींव डाली । इसी राजवंश के प्रसिद्ध शासक संग्राम शाह (1400-1541) ने 52 गढ़ स्थापित कर अपने साम्राज्य को सुदृढ़ बनाया । नरसिंहपुर जिले में चौरागढ़ (चौगान) किले का निर्माण भी उसने ही कराया था जो रानी दुर्गावती के पुत्र वीरनारायण की वीरता का मूक साक्षी है । संग्राम शाह के उत्तराधिकारियों में दलपति शाह ने सात वर्ष शांति पूर्वक शासन किया । उसके पश्चात उसकी वीरांगना रानी दुर्गावती ने राज्य संभाला और अदम्य साहस एवं वीरता पूर्वक 16 वर्ष (1540-1564) शासन किया । सन् 1564 में अकबर के सिपहसलार आतफ खां से युद्ध करते हुये रानी ने वीरगति पाःथ्द्यर्; । नरसिंहपुर जिले में स्थित चौरागढ़ एक सुदृढ़ पहाड़ी किले के रूप में था जहां पहुंच कर आतफ खां ने राजकुमार वीरनारायण को घेर लिया और अंतत: कुटिल चालों से उसका बध कर दिया । गढ़ा कटंगा राज्य पर 1564 में मुगलों का अधिकार हो गया गौंड़, मुगल, और इनके पश्चात यह क्षेत्र मराठों के शासन काल में प्रशासनिक और सैनिक अधिकारियों तथा अनुवांशिक सरदारों में बंटा हुआ रहा । जिनके प्रभाव और शक्ति के अनुसार ईलाकों की सीमायें समय समय पर बदलती रहती थीं । जिले के चांवरपाठा, बारहा, सांःथ्द्यर्;खेड़ा, शाहपुर, सिंहपुर, श्रीनगर और तेन्दूखेड़ा इस समूचे काल में परगानों के मुख्यालय के रूप में प्रसिद्ध रहे ।
==== भोंसले शासक ====
सन् 1785 में माधो जी भोसले ने 27 लाख रूपये में मण्डला और नर्मदा घाटी को प्राप्त कर लिया जो राधो जी भोसले/भोपाल नबाब/पिंडोरी सरदारों आदि की खींचतान और सैन्य शासन के क्रूर दबाब में डूबता उतराता रहा । इसे संकटो और अस्थिरता का कौल कहा जा सकता है । जिसमें लूटपाट के साथ क्षेत्र की जनता का जबरजस्त शोषण हुआ । अंतत: 1817 में ब्रिटिश शासन के अंतर्गत आ गया ।
==== स्वतन्त्रता संग्राम ====
ब्रिटिश अधिपत्य के कठोर शिकंजे में रहने के वावजूद जिले में आजादी की तड़प जन मानस में सदैव कौंधती रही । 1857 में चांवरपाठा और तेन्दूखेड़ा पुलिस स्टेशनों पर बिद्रोही सैनानियों ने अधिकार कर लिया । मदनपुर के गौड़ प्रमुख डेलन शाह के नेतृत्व में आजादी के लिये विप्लव का शंखनाद हुआ । 1858 में डेलन शाह को पकड़ लिया जाकर फांसी पर लटका दिया गया । 1857 के पहले स्वतंत्रता संघर्ष को कुचलकर ब्रिटिश सम्राट अपनी जडें जमाने में सफल होता रहा ।
==== कांग्रेस आंदोलन ====
1885 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना के पश्चात जिले में आजादी के लिये आंदोलन की चिनगारी सदैव प्रज्वलित रही - लोकमान्य तिलक, महात्मा गांधी, पं. जवाहर लाल नेहरू, सुभाष चंद्र वोस प्रभूति नेताओं की प्रेरणा और नेतृत्व में जिले में स्वतंत्रता के लिये आंदोलन का जोश पूर्ण वातावरण रहा । जिले के नेताओं में गयादत्त, माणिकचंद कोचर, चौधरी शंकर लाल, ठाकुर निरंजन सिंह, श्याम सुंदर नारायण मुशरान आदि के नेतृत्व में जिले से बड़ी संख्या में आंदोलन कारी सक्रिय रहे । इसी एकता एवं उत्साह को भंग करने के लिये ब्रिटिश शासन ने 1932 में जिले को पुन: तोड़कर होशंगावाद जिले में मिला दिया गया । परंतु इससे आंदोलन और सत्याग्रह के उत्साह मे कोई शिथिलता नहीं आई । 1942 में चीचली मे सत्याग्राही जुलूस पर हुये गोली चालन में मंशाराम और गौरादेवी शहीद हो गये । सैंकडों आंदोलन-कारियों ने दमन चक्र को हंसते हंसते झेला और ब्रिटिश शासन के विरूद्ध त्याग और वलिदान की अनूठी परम्परा कायम की ।
== भूगोल ==
नरसिंहपुर जिले का विस्तार 23°25 उ. तथा 22°45 उ. अक्षांशों के बीच है। पश्चिम से लेकर पूर्व तक भारत का विस्तार 78°.44 पू. तथा 79°.64 पू. देशांतरों के बीच है।जिले का क्षेत्रफल 5125.55 वर्ग किमी. है। उत्तर से लेकर दक्षिण तक जिले का विस्तार लगभग 86.91 किमी है तथा पूर्व से पश्चिम इसका विस्तार लगभग 123.01 किमी. तक है। नरसिंहपुर जिला एक स्थल बद्ध जिला हैं क्योकि इसकी सीमा किसी अन्य राज्य की सीमा को स्पर्श नही करतीं हैं। । जिले की औसतन उचाँई लगभग 347 मीटर (1138 फीट) है ।पड़ोसी जिले रायसेन, सागर, दमोह, जबलपुर, सिवनी, छिंदवाड़ा और नर्मदापुरम जिले हैं।
=== जलवायु ===
जलवायु के आधार पर यह नर्मदा घाटी भाग में हैं। यह जिला कर्क रेखा के अधिक नजदीक हैं। जिससे इस क्षेत्र में ग्रीष्म ऋतु अत्यधिक गर्म एवं शीत ऋतु साधारण ठण्डी रहती हैं।
(मार्च-जून) अधिकतम 45.4 डिग्रीसें. न्यूनतम 9.4डिग्रीसें.
(जुलाई-अक्टूबर) अधिकतम 13.5डिग्रीसें. न्यूनतम 39 डिग्रीसें.
(नवम्बर-फरवरी) अधिकतम 3.2 डिग्रीसें. न्यूनतम 35.4 डिग्रीसें.
=== वर्षा ===
नरसिंहपुर जिला औसत से अधिक वर्षा (125 सेमी- 150 सेमी) वाले क्षेत्र में आता हैं ।
=== नदी ===
नर्मदा नदी जिले में प्रमुख नदी हैं जो कि लगभग 160 किमी हैं झांसीघाट, मुआर घाट, ब्रम्हकुण्ड, महादेव पिपरिया जबरेश्वर महादेव का सिद्ध स्थान बरमानघाट, लिंगा घाट, पटना-घघरौला घाट, बिलथारी घाट, ककरा घाट, हीरापुर घाट,टिमरावन घाट (सिद्धेश्वर महादेव मंदिर) हैं। नर्मदा नदी के बाद शक्कर, शेर, सनेर, ऊमर, वारूरेवा आदि नदीयाँ हैं। टोनघाट जलप्रपात शेर नदी पर हैं जो कि गोटेगाँव तहसील में स्थति हैं। जो कि जिला मुख्यालय से लगभग 45 किमी हैं। सिंचाई नदीयों, तालाबों एवं नलकूपों के अलावा रानी अवन्ती बाई सागर (बरगी परियोजना) नहर द्धारा जिले में जल उपलब्ध कराया जा रहा हैं। जिलें में 50-60 प्रतिशत शुद्ध सिंचित क्षेत्र हैं।
जिले में छछली एवं मध्यम काली मृदा पायी जाती हैं। मुख्य फसल गन्ना, तुअर दाल, सोयाबीन, चावल, मसूर आदि हैं।जिले का कलमतहार क्षेत्र एशिया का सबसे उपजाऊ क्षेत्र है। गाडरवारा मुख्य रूप से तुवार (अरहार) दालों के लिए प्रसिद्ध है जिला स्तर पर कृषि खेतों में, मिट्टी प्रयोग प्रयोगशालाएं हैं। जहां किसानों को कीटनाशकों, सर्वोत्तम गुणवत्ता वाले बीज, उर्वरक और सबसे महत्वपूर्ण तकनीकी मार्गदर्शन मिलते हैं।
=== वन सम्पदा ===
जिलें का 26.55 प्रतिशत क्षेत्र वन हैं । वनों में सागौन, बाँस, तेंदुपत्ता आदि एवं आम, महुआ, आचार, खैरी आदि से भरा पड़ा हैं। वन्य जीव में बंदर, नील गाय, हिरण, खरगोश मिलतें हैं।
=== खनिज ===
जिले में प्रमुख खनिज सोप स्टोन, डोलोमाइट, फायर क्ले, लाइम स्टोन हैं। मुरम व नर्मदा नदी की रेत का उपयोग निर्माण कार्य में किया जाता हैं।
=== प्रमुख उद्योग ===
चीनी / गन्ने से गुड़:
कई जगहों पर गुड़ गन्ने के सभी हिस्सों से तैयार किया गया है। गुड़ मंडी के लिए करेली बहुत प्रसिद्ध है नरसिंहपुर और गाडरवारा में चीनी मिलें हैं
बीड़ी उद्योग:
यह काम मुख्य रूप से नरसिंहपुर, गाडरवारा, गोटेगांव में किया जाता हैं।
दाल मिल्स:
तुवार (अरहर) दाल मुख्य रूप से नरसिंहपुर और गाडरवारा में तैयार कि जाती हैं
तेल मिल्स:
जिलें में कई तेल मिल हैं जहां सोया बीन, मूंगफली और तिल्ली तेल निकाले जाते हैं।
== प्रमुख आकर्षण ==
'''<big>गाडरवारा</big>'''
गाडरवारा से 15 किमी कि दुरी पर स्थित ग्राम मोहपानी के पास स्थित बहुत खोबसूरत जगह जिसे छोटे जबलपुर नाम से जाना जाता है लोगो का कहना है कि अंग्रेजो के ज़माने का स्थित एक पुल और गुफाय है यहाँ एक नदी है जो गर्मी के दिनों में भी नहीं सूखती है उसके आगे '''रानी दहार''' नाम कि जगह है यहाँ पर राजा रानी का निबास था इस लिए रानी दहार नाम से जाना जाता है
=== चौरागढ़ (चौगान) किला ===
<div class="rellink relarticle mainarticle">मुख्य लेख : [[चौरागढ़ किला]]</div>गोंड शासक संग्राम शाह ने इस किले को 15वीं शताब्दी में बनवाया था। यह किला गाडरवाड़ा रेलवे स्टेशन से लगभग 19 किमी. दूर है। वर्तमान में प्रशासन की उपेक्षा के कारण किला क्षतिग्रस्त अवस्था में पहुंच गया है। किले के निकट ही नोनिया में 6 विशाल प्रतिमाएं देखी जा सकती हैं।
=== नरसिंह मंदिर ===
नरसिंहपुर का यह प्राचीन मंदिर जबलपुर से लगभग 84Km दूर है। मंदिर को 18वीं शताब्दी में '''राजा नरसिंह विजय बहादुर निजाम सिंह''' के सेनापति जाट सरदार ने बनवाया था। मंदिर में विष्णु के अवतार भगवान नरसिंह की सपाट प्रतिमा स्थापित है।
=== ब्राह्मण घाट(बरमान घाट) ===
नर्मदा नदी के मणि सागर पर बना यह घाट नरसिंहपुर के सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में है। भगवान ब्रह्मा की यज्ञशाला, रानी दुर्गावती मंदिर, हाथी दरवाजा और वराह मूर्ति यहां के मुख्य आकर्षण हैं। मकर संक्रांति और बसंत पंचमी के अवसर पर यह स्थान संगीत और रंगों से जीवंत हो उठता है।
=== झोतेश्वर् आश्रम ===
यह आश्रम परमहंसी गंगा आश्रम के नाम से भी जाना जाता है। नरसिंहपुर का यह लोकप्रिय आध्यात्मिक केन्द्र संत जगतगुरू शंकराचार्य जोतेश और द्वारकाधीश पीठाधेश्वर सरस्वती महाराज से संबंधित है। कहा जाता है कि उन्होंने काफी लंबे समय तक ध्यान लगाया था। सुनहरा राजाराजेश्वरी त्रिपुर सुंदरी मंदिर यहां का मुख्य आकर्षण है। जोटेश्वर मंदिर, लोधेश्वर मंदिर, हनुमान टेकरी और शिवलिंग यहां के अन्य पूज्यनीय स्थल हैं। बसंत पंचमी के मौके पर यहां सात दिन तक समारोह आयोजित किया जाता है।
=== डमरु घाटी ===
डमरू घाटी नरसिंहपुर का एक पवित्र स्थल है। गाडरवारा रेलवे स्टेशन से यह घाटी ५. किमी. की दूरी पर है। घाटी की मुख्य विशेषता यहां के दो शिवलिंग है। यहां बड़े शिवलिंग के भीतर एक छोटा शिवलिंग बना हुआ है। हर बर्ष महाशिवरात्रि पर 7 दिन यहाँ मेला लगता है
=== बचई ===
इस प्राचीन नगर की खुदाई से अनेक ऐतिहासिक इमारतों का पता चला है। इतिहास की किताबों और दूसरी शताब्दी की हस्तलिपियों में इस स्थान का उल्लेख मिलता है। बचई के निकट ही बरहाटा एक अन्य ऐतिहासिक स्थल है।
=== बिलथारी ===
प्रारंभ में बालीस्थली के नाम से मशहूर यह नरसिंहपुर का एक छोटा-सा गांव है। यह स्थान महाभारत से भी संबंधित माना जाता है। कहा जाता है कि पांडवों ने अपने वनवास का कुछ समय यहां व्यतीत किया था।
=== श्रीधाम ===
स्वामी स्वरूपानंद सरश्वती महाराज ने गोटेगाव का नाम झोतेश्वर धाम के कारण श्रीधाम कर दिया। झोतेश्वर श्रीधाम से 16 k.m. पर है। यह आश्रम परमहंसी गंगा आश्रम के नाम से भी जाना जाता है। नरसिंहपुर का यह लोकप्रिय आध्यात्मिक केन्द्र संत जगतगुरू शंकराचार्य जोतेश और द्वारकाधीश पीठाधेश्वर सरस्वती महाराज से संबंधित है। कहा जाता है कि उन्होंने काफी लंबे समय तक ध्यान लगाया था। सुनहरा राजराजेश्वरी त्रिपुर सुंदरी मंदिर यहां का मुख्य आकर्षण है। जोटेश्वर मंदिर, लोधेश्वर मंदिर, हनुमान टेकरी , क्रिष्ण मंदिर , विचार शिला और शिवलिंग यहां के अन्य पूज्यनीय स्थल हैं। बसंत पंचमी के मौके पर यहां सात दिन तक समारोह आयोजित किया जाता है।
=== पीपरपानी (कंजई) ===
गोटेगाँव तहसील में जबलपुर रोड पर कंजई गाँव से 3 K.M. अंदर पीपरपानी गाँव है वास्तव मे ये पीपरपानी की माता के नाम पर रखा गया है। यहां पर पीपरपानी माता की सर्वकामना सिद्धि मढिया है जहां नवरात्रि के अवसर पर माँ के दर्शन और मनोकामनाये माँगी जाती हैं। माता के परम भक्त स्व.जमना प्रसाद कुशवाहा जी के स्वर्गवास होने के बाद उनके चेले श्री परशराम कुशवाहा जी ने माता की भक्ति की और जन समूह की जड़ी-बूटियो और माता की कृपा से पीड़ितों और जानवरों का इलाज किया करते हैं। इनके अलावा यहां पर बघेण नदी कालांतर में बाघन नदी के नाम से जानी जाती थी इसके किनारे पर दो बड़े टीले है जिसे 1. पीली कगार 2. हथियागढ की कगार कहा जाता है। कहते हैं कि पीली कगार पर भूतो का डेरा है, गाँव वाले भूतो से रूबरू होने का दावा किया करते हैं, पर इसका कोई साक्ष्य नहीं है। और हथियागढ की कगार पर कहा जाता है; कि, बहुत पहले हाथियों का झुंड इस से गिर कर मर गया था। जिसके कारण इसका नाम हथियागढ कहा जाता है। भिरभी दौनो कगार बेहद डरावनी और रोचक है।
हाथी नाला जलप्रपात
जिला मुख्यालय से करीब 50 60 किलोमीटर की दूरी पर स्थित हाथी नाला जलप्रपात बरसात के मौसम में सैलानियों को अपनी ओर आकर्षित करता है,,,,
माना जाता है कि दिनेश पेंटर मुराछ जब अपने साथियों के साथ हाथी नाला देखने गए थे तो उन्होंने हाथी नाला के छायाचित्र अपने फेसबुक अकाउंट पर शेयर किए थे उसके बाद यह जलप्रपात चर्चा में आया था
=== सिद्धेश्वर महादेव मंदिर टिमरावन ===
टिमरावन का सिद्धेश्वर महादेव मंदिर अपने आप में शान्ति को समेंटे हुए प्राचीन धार्मिक स्थलों में से एक हे जहाँ से नर्मदा नदी का वेहत मनोरम दृश्य देखने को मिलता है। यहाँ के मंदिर के साथ साथ गांव के चारों दिशाओं में शिव मंदिर,कृष्ण मंदिर,दुर्गा मंदिर एवं दक्षिण मुखी हनुमान मंदिर होने से गांव को एक दिव्यमई स्वरुप प्रदान करते हे।
== आवागमन ==
; वायु मार्ग
[[जबलपुर विमानक्षेत्र]] यहां का नजदीकी एयरपोर्ट जो नरसिंहपुर से करीब 84 किमी. दूर है। देश के अनेक शहर इस एयरपोर्ट से वायुमार्ग द्वारा जुड़े हैं।
; रेल मार्ग
नरसिंहपुर रेलवे स्टेशन मुंबई-हावडा रूट का प्रमुख स्टेशन है। इस रूट पर चलने वाली ट्रेनें नरसिंहपुर को देश के अन्य शहरों से जोड़ती हैं।जिले में रेल्वे ट्रेक की लम्बाई लगभग 105 किमी हैं
कुल स्टेशनों की संख्या 11 हैं जिसमें 3 मुख्य स्टेशन हैं जहाँ सुपर फास्ट ट्रेनों के स्टॉपेज हैं 5 ऐसे स्टेशन हैं जहाँ सिर्फ पैसेन्जर ट्रेनों के स्टॉपेज हैं और ऐसे 3 से स्टेशन हैं जहाँ सिर्फ एक्सप्रेस वपैसेन्जर ट्रेनों के स्टॉपेज है
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|+नरसिंहपुर जिलें की स्टेशन
!क्र
!स्टेशन का नाम
!स्टेशन कोड
!दूरी
|-
|1
|विक्रमपुर
|BMR
|0
|-
|2
|श्रीधाम
|SRID
|12
|-
|3
|करकबेल
|KKB
|28
|-
|4
|बेलखेड़ा
|BELD
|32
|-
|5
|घाटपिंडरई
|GPC
|37
|-
|6
|नरसिंहपुर
|NU
|43
|-
|7
|करेली
|KY
|59
|-
|8
|करपगाँव
|KFY
|68
|-
|9
|बोहानी
|BNE
|75
|-
|10
|गाडरवारा
|GAR
|87
|-
|11
|सालीचौका रोड
|SCKR
|101
|}
; सड़क मार्ग
{{main|चौरागढ़ किला}}
नरसिंहपुर सड़क मार्ग द्वारा जबलपुर, छिंडवाडा, सिवनी, होशंगाबाद, देवरी, सागर आदि शहरों से जुड़ा हुआ है। जिलें से उत्तर-दक्षिण कॉरिडोर NH-26 के माध्यम से बरमान, करेली नरसिंहपुर, मुगवानी से गुजरता हैं। बरमान के पास राजमार्ग चौराहा हैं जहाँ से NH- 26 तथा NH-12 गुजरते हैं।राज्य के अनेक शहरों से यहां के लिए बसें चलती हैं।
== जनसंख्या ==
2011 में, नरसिंहपुर की जनसंख्या 1,091,854 थी, जिसमें पुरुष और महिला क्रमशः 568,810 और 523,044 थे। <ref>{{Cite web|url=https://www.census2011.co.in/census/district/319-narsimhapur.html|title=Narsimhapur District - Population 2011-2024}}</ref>
== बाहरी कड़ियाँ ==
* [https://web.archive.org/web/20110525083846/http://www.bundelkhanddarshan.com/bundelkhand-district/82.html Narsinghpur on Bundelkhand Darshan]
{{मध्य प्रदेश के जिले }}
१००% साक्च्हर्त
[[श्रेणी:मध्य प्रदेश के जिले]]
[[श्रेणी:नरसिंहपुर ज़िला|*]]
चीचली, चावरपाठा, गोटेगांव करेली नरसिंहपुर एवं सांईखेड़ा
qxhbg7h07g4dh1ely00lr91zo96duoe
6547808
6547804
2026-05-02T15:45:13Z
~2026-26789-02
922671
higway
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wikitext
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{{ज्ञानसन्दूक प्रांत
|province_name = नरसिंहपुर ज़िला<br /><small>Narsinghpur district</small>
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}}
[[File:Narsinghpur railway station- - 1.jpeg|thumb|270px| नरसिंहपुर रेलवे स्टेशन]]
'''नरसिंहपुर ''' भारतीय राज्य [[मध्य प्रदेश]] का एक [[ज़िला|जिला]] है। जिले का मुख्यालय [[नरसिंहपुर]] है। इसमें चार विधानसभा क्षेत्र आते हैं जो नरसिंहपुर, तेंदूखेड़ा, गाडरवारा और गोटेगांव हैं।मध्य प्रदेश के मध्य में स्थित नरसिंहपुर 5000 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्रफल में फैला राज्य का प्रमुख जिला है। उत्तर में [[विन्ध्याचल]] और दक्षिण में [[सतपुड़ा]] की पहाड़ियों से घिरे नरसिंहपुर पर प्रकृति खूब मेहरबान हुई है। पवित्र [[नर्मदा नदी|नर्मदा]] नदी जिले की खूबसूरती में वृद्धि करती है। प्राचीन काल में यहां अनेक वंशों ने शासन किया था। महान वीरांगना रानी दुर्गावती के काल में यह स्थान काफी चर्चित रहा था। हीरापुर के राजा हृदय शाह लोधी व माने गांव के रुद्र प्रताप सिंह स्वतंत्रता आंदोलन में सेनानी रह चुके यहां अनेक ऐतिहासिक दर्शनीय स्थल हैं।मृृगन्नाथ धाम राजमार्ग, नरसिंह मंदिर, ब्राह्मण घाट, जोटेश्वर आश्रम और दमारू घाटी यहां के लोकप्रिय पर्यटन स्थल हैं।
जिले की प्रमुख व्यावसायिक फसलें सोयाबीन और गन्ना हैं, [6] जो बड़ी मात्रा में उत्पादित होती हैं और आय का एक प्रमुख स्रोत हैं। मध्य प्रदेश में नरसिंहपुर सोयाबीन का सबसे बड़ा उत्पादक है। सोयाबीन का उपयोग तेल निकालने के लिए और गन्ने का उपयोग चीनी और गुड़ के लिए किया जाता है। मध्य प्रदेश के गन्ना उत्पादन में अकेले नरसिंहपुर का योगदान लगभग 80% है। जाहिर तौर पर करेली (तहसील) भारत की सबसे बड़ी गुड़ मंडी है। पिछले दशक में चीनी उद्योग ने उल्लेखनीय प्रगति देखी है।<ref>{{Cite web|url=https://en.wikipedia.org/wiki/Narsinghpur#cite_ref-:0_5-6|title=Narsinghpur}}</ref>
== '''ऐतिहासिक पृष्ठभूमि''' ==
नरसिंहपुर जिला क्षेत्र अपने भीतर अस्तित्व के प्राचीनतम प्रमाण छुपाये हुये है । जो विभिन्न पुरातात्विक खोजों से समय समय पर उजागर होते रहे हैं । जिले के गजेटियर में उल्लेखित पुरातात्विक प्रमाणों के अनुसार जिले के गाडरवारा से दूर भटरा नामक ग्राम में 1872 में पाषाण युग के जीवाश्म युक्त पशु और बलुआ पत्थर से निर्मित उपकरण प्राप्त हुये हैं । अन्य खोज अभियानों में देवाकछार, धुवघट, कुम्हड़ी, रातीकरार और ब्रम्हाण घाट आदि स्थलों में प्रागेतिहासिक अवशेष मिले हैं । बिजौरी ग्राम के समीप चिन्हित शैलामय एवं नक्कासीदार चट्टानी गुफायें भी जिले के अस्तित्व को प्राचीनतम काल से जोड़ते हैं । ब्रम्हाण घाट से झांसी घाट के बीच नर्मदा के तटवर्ती खोज अभियानों में मिले स्तनधारी जीवाश्म तथा पुरातात्विक औजारों के अवशेष जिले को प्रागेतिहासिक इतिहास से जोड़ते हैं ।
अनुकृतियों के अनुसार इस क्षेत्र का संबंध रामायण और महाभारत काल की घटनाओं से रहा है । पौराणिक संदर्भो के अनुसार ब्रम्हाण घाट वह स्थल है जहां सृष्टि के रचियता ब्रम्हा ने पवित्र नर्मदा के तट पर यज्ञ सम्पन्न किया था । चांवरपाठा विकास खंड के बिल्थारी ग्राम का प्राचीन नाम बलि स्थली " कहा जाता है । इसे राजा बलि का निवास स्थान माना जाता है ।
महाभारत काल में बरमान घाट के सत्धारा पर पाण्डवों द्वारा नर्मदा की धारा को एक ही रात में बांधने के प्रयत्न का उल्लेख पुराणों में हुआ है । सत्धारा के निकट भीम कुण्ड, अर्जुन कुण्ड आदि इसी को ईंगित करते हैं । कहा जाता है कि पाण्डवों ने वनवास की कुछ अवधि यहां बिताई थी । सांकल घाट की गुफा आदि गुरू शंकराचार्य के गुरूदेव के अध्ययन एवं साधना से जुड़ी है ।
जिले का बरहटा ग्राम महाभारत काल के विराट नगर का अवशेष माना जाता है । यहीं कदम कदम पर मिलतीं पाषाण मूर्तियां और कलात्मक अवशेष से इस किवदंती को बल मिलता है । बचई के निकट पड़ी मानवाकार पाषाण शिला को कीचक" से जोड़ा जाता है । जिले के बोहानी क्षेत्र को पृथ्वीराज कालीन वीरचरित नायकों आल्हा-ऊदल के पिता जसराज व चाचा बछराज का गढ़ माना जाता है । अनेक ऐतिहासिक प्रमाणों खुदाई में प्राप्त प्राचीन वस्तुओं तथा उल्लेखों से जिले का संदर्भ प्राचीन काल से जोड़ने वाले तथ्य और अनुकृतियां बहुतायत में हैं । पर इतिहास ग्रंथों तथा ऐतिहासिक अभिलेखों द्वारा जिले के प्रामाणिक इतिहास की श्रृंखला दूसरी शताब्दी के इतिहास से मिलती है ।
==== सातवाहन काल ====
दूसरी शताब्दी में इस क्षेत्र पर सातवाहन शासकों का अधिपत्य था । चौथी शताब्दी में यह गुप्त साम्राज्य के अधीन रहा जब समुद्र गुप्त ने मध्य भारत क्षेत्र तथा दक्षिण तक अपने साम्राज्य की सीमायें स्थापित करने में सफलता पाई । छठी शताब्दी में पेदीराज्य के कुछ संकेत मिलते हैं । पर लगभग 300 वर्षो तक का काल पुन: अंधेरों में खोया हुआ है । नौवीं शताब्दी में क्षेत्र कलचुरी शासन (हैहय) के स्थापित होने का उल्लेख प्राप्त है । कलचुरी राजवंश की राजधानी नर्मदा किनारे माहिष्मती नगरी थी जो आगे चलकर त्रिपुरी में स्थापित हो गई । कलचुरी राज्य के गोमती से नर्मदा घाट तक फैले होने का विवरण इतिहास ग्रंथों में सुरक्षित है । कलचुरी सत्ता के पतन के पश्चात इस क्षेत्र पर आल्हा-ऊदल के पिता व चाचा के संरक्षण का उल्लेख मिलता है । जिनने बोहानी को अपना राज केन्द्र बनाया उनके पश्चात लगातार चार शताब्दियों तक यह क्षेत्र राजगौड़ वंश के साम्राज्य का अंग रहा ।
==== राजगौड़ वंश ====
इस शासन की स्थापना से जिले में नये व्यवस्थित शांतिपूर्ण एवं खुशहाली का दौर प्रारंभ होता है । इस राजवंश के उदय का श्रेय यादव राव (यदुराव) को दिया जाता है । जिनने चौदहवीं शताब्दी के अंतिम वर्षो में गढ़ा कटंगा में स्थापित किया और एक महत्वपूर्ण शासन क्रम की नींव डाली । इसी राजवंश के प्रसिद्ध शासक संग्राम शाह (1400-1541) ने 52 गढ़ स्थापित कर अपने साम्राज्य को सुदृढ़ बनाया । नरसिंहपुर जिले में चौरागढ़ (चौगान) किले का निर्माण भी उसने ही कराया था जो रानी दुर्गावती के पुत्र वीरनारायण की वीरता का मूक साक्षी है । संग्राम शाह के उत्तराधिकारियों में दलपति शाह ने सात वर्ष शांति पूर्वक शासन किया । उसके पश्चात उसकी वीरांगना रानी दुर्गावती ने राज्य संभाला और अदम्य साहस एवं वीरता पूर्वक 16 वर्ष (1540-1564) शासन किया । सन् 1564 में अकबर के सिपहसलार आतफ खां से युद्ध करते हुये रानी ने वीरगति पाःथ्द्यर्; । नरसिंहपुर जिले में स्थित चौरागढ़ एक सुदृढ़ पहाड़ी किले के रूप में था जहां पहुंच कर आतफ खां ने राजकुमार वीरनारायण को घेर लिया और अंतत: कुटिल चालों से उसका बध कर दिया । गढ़ा कटंगा राज्य पर 1564 में मुगलों का अधिकार हो गया गौंड़, मुगल, और इनके पश्चात यह क्षेत्र मराठों के शासन काल में प्रशासनिक और सैनिक अधिकारियों तथा अनुवांशिक सरदारों में बंटा हुआ रहा । जिनके प्रभाव और शक्ति के अनुसार ईलाकों की सीमायें समय समय पर बदलती रहती थीं । जिले के चांवरपाठा, बारहा, सांःथ्द्यर्;खेड़ा, शाहपुर, सिंहपुर, श्रीनगर और तेन्दूखेड़ा इस समूचे काल में परगानों के मुख्यालय के रूप में प्रसिद्ध रहे ।
==== भोंसले शासक ====
सन् 1785 में माधो जी भोसले ने 27 लाख रूपये में मण्डला और नर्मदा घाटी को प्राप्त कर लिया जो राधो जी भोसले/भोपाल नबाब/पिंडोरी सरदारों आदि की खींचतान और सैन्य शासन के क्रूर दबाब में डूबता उतराता रहा । इसे संकटो और अस्थिरता का कौल कहा जा सकता है । जिसमें लूटपाट के साथ क्षेत्र की जनता का जबरजस्त शोषण हुआ । अंतत: 1817 में ब्रिटिश शासन के अंतर्गत आ गया ।
==== स्वतन्त्रता संग्राम ====
ब्रिटिश अधिपत्य के कठोर शिकंजे में रहने के वावजूद जिले में आजादी की तड़प जन मानस में सदैव कौंधती रही । 1857 में चांवरपाठा और तेन्दूखेड़ा पुलिस स्टेशनों पर बिद्रोही सैनानियों ने अधिकार कर लिया । मदनपुर के गौड़ प्रमुख डेलन शाह के नेतृत्व में आजादी के लिये विप्लव का शंखनाद हुआ । 1858 में डेलन शाह को पकड़ लिया जाकर फांसी पर लटका दिया गया । 1857 के पहले स्वतंत्रता संघर्ष को कुचलकर ब्रिटिश सम्राट अपनी जडें जमाने में सफल होता रहा ।
==== कांग्रेस आंदोलन ====
1885 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना के पश्चात जिले में आजादी के लिये आंदोलन की चिनगारी सदैव प्रज्वलित रही - लोकमान्य तिलक, महात्मा गांधी, पं. जवाहर लाल नेहरू, सुभाष चंद्र वोस प्रभूति नेताओं की प्रेरणा और नेतृत्व में जिले में स्वतंत्रता के लिये आंदोलन का जोश पूर्ण वातावरण रहा । जिले के नेताओं में गयादत्त, माणिकचंद कोचर, चौधरी शंकर लाल, ठाकुर निरंजन सिंह, श्याम सुंदर नारायण मुशरान आदि के नेतृत्व में जिले से बड़ी संख्या में आंदोलन कारी सक्रिय रहे । इसी एकता एवं उत्साह को भंग करने के लिये ब्रिटिश शासन ने 1932 में जिले को पुन: तोड़कर होशंगावाद जिले में मिला दिया गया । परंतु इससे आंदोलन और सत्याग्रह के उत्साह मे कोई शिथिलता नहीं आई । 1942 में चीचली मे सत्याग्राही जुलूस पर हुये गोली चालन में मंशाराम और गौरादेवी शहीद हो गये । सैंकडों आंदोलन-कारियों ने दमन चक्र को हंसते हंसते झेला और ब्रिटिश शासन के विरूद्ध त्याग और वलिदान की अनूठी परम्परा कायम की ।
== भूगोल ==
नरसिंहपुर जिले का विस्तार 23°25 उ. तथा 22°45 उ. अक्षांशों के बीच है। पश्चिम से लेकर पूर्व तक भारत का विस्तार 78°.44 पू. तथा 79°.64 पू. देशांतरों के बीच है।जिले का क्षेत्रफल 5125.55 वर्ग किमी. है। उत्तर से लेकर दक्षिण तक जिले का विस्तार लगभग 86.91 किमी है तथा पूर्व से पश्चिम इसका विस्तार लगभग 123.01 किमी. तक है। नरसिंहपुर जिला एक स्थल बद्ध जिला हैं क्योकि इसकी सीमा किसी अन्य राज्य की सीमा को स्पर्श नही करतीं हैं। । जिले की औसतन उचाँई लगभग 347 मीटर (1138 फीट) है ।पड़ोसी जिले रायसेन, सागर, दमोह, जबलपुर, सिवनी, छिंदवाड़ा और नर्मदापुरम जिले हैं।
=== जलवायु ===
जलवायु के आधार पर यह नर्मदा घाटी भाग में हैं। यह जिला कर्क रेखा के अधिक नजदीक हैं। जिससे इस क्षेत्र में ग्रीष्म ऋतु अत्यधिक गर्म एवं शीत ऋतु साधारण ठण्डी रहती हैं।
(मार्च-जून) अधिकतम 45.4 डिग्रीसें. न्यूनतम 9.4डिग्रीसें.
(जुलाई-अक्टूबर) अधिकतम 13.5डिग्रीसें. न्यूनतम 39 डिग्रीसें.
(नवम्बर-फरवरी) अधिकतम 3.2 डिग्रीसें. न्यूनतम 35.4 डिग्रीसें.
=== वर्षा ===
नरसिंहपुर जिला औसत से अधिक वर्षा (125 सेमी- 150 सेमी) वाले क्षेत्र में आता हैं ।
=== नदी ===
नर्मदा नदी जिले में प्रमुख नदी हैं जो कि लगभग 160 किमी हैं झांसीघाट, मुआर घाट, ब्रम्हकुण्ड, महादेव पिपरिया जबरेश्वर महादेव का सिद्ध स्थान बरमानघाट, लिंगा घाट, पटना-घघरौला घाट, बिलथारी घाट, ककरा घाट, हीरापुर घाट,टिमरावन घाट (सिद्धेश्वर महादेव मंदिर) हैं। नर्मदा नदी के बाद शक्कर, शेर, सनेर, ऊमर, वारूरेवा आदि नदीयाँ हैं। टोनघाट जलप्रपात शेर नदी पर हैं जो कि गोटेगाँव तहसील में स्थति हैं। जो कि जिला मुख्यालय से लगभग 45 किमी हैं। सिंचाई नदीयों, तालाबों एवं नलकूपों के अलावा रानी अवन्ती बाई सागर (बरगी परियोजना) नहर द्धारा जिले में जल उपलब्ध कराया जा रहा हैं। जिलें में 50-60 प्रतिशत शुद्ध सिंचित क्षेत्र हैं।
जिले में छछली एवं मध्यम काली मृदा पायी जाती हैं। मुख्य फसल गन्ना, तुअर दाल, सोयाबीन, चावल, मसूर आदि हैं।जिले का कलमतहार क्षेत्र एशिया का सबसे उपजाऊ क्षेत्र है। गाडरवारा मुख्य रूप से तुवार (अरहार) दालों के लिए प्रसिद्ध है जिला स्तर पर कृषि खेतों में, मिट्टी प्रयोग प्रयोगशालाएं हैं। जहां किसानों को कीटनाशकों, सर्वोत्तम गुणवत्ता वाले बीज, उर्वरक और सबसे महत्वपूर्ण तकनीकी मार्गदर्शन मिलते हैं।
=== वन सम्पदा ===
जिलें का 26.55 प्रतिशत क्षेत्र वन हैं । वनों में सागौन, बाँस, तेंदुपत्ता आदि एवं आम, महुआ, आचार, खैरी आदि से भरा पड़ा हैं। वन्य जीव में बंदर, नील गाय, हिरण, खरगोश मिलतें हैं।
=== खनिज ===
जिले में प्रमुख खनिज सोप स्टोन, डोलोमाइट, फायर क्ले, लाइम स्टोन हैं। मुरम व नर्मदा नदी की रेत का उपयोग निर्माण कार्य में किया जाता हैं।
=== प्रमुख उद्योग ===
चीनी / गन्ने से गुड़:
कई जगहों पर गुड़ गन्ने के सभी हिस्सों से तैयार किया गया है। गुड़ मंडी के लिए करेली बहुत प्रसिद्ध है नरसिंहपुर और गाडरवारा में चीनी मिलें हैं
बीड़ी उद्योग:
यह काम मुख्य रूप से नरसिंहपुर, गाडरवारा, गोटेगांव में किया जाता हैं।
दाल मिल्स:
तुवार (अरहर) दाल मुख्य रूप से नरसिंहपुर और गाडरवारा में तैयार कि जाती हैं
तेल मिल्स:
जिलें में कई तेल मिल हैं जहां सोया बीन, मूंगफली और तिल्ली तेल निकाले जाते हैं।
== प्रमुख आकर्षण ==
'''<big>गाडरवारा</big>'''
गाडरवारा से 15 किमी कि दुरी पर स्थित ग्राम मोहपानी के पास स्थित बहुत खोबसूरत जगह जिसे छोटे जबलपुर नाम से जाना जाता है लोगो का कहना है कि अंग्रेजो के ज़माने का स्थित एक पुल और गुफाय है यहाँ एक नदी है जो गर्मी के दिनों में भी नहीं सूखती है उसके आगे '''रानी दहार''' नाम कि जगह है यहाँ पर राजा रानी का निबास था इस लिए रानी दहार नाम से जाना जाता है
=== चौरागढ़ (चौगान) किला ===
<div class="rellink relarticle mainarticle">मुख्य लेख : [[चौरागढ़ किला]]</div>गोंड शासक संग्राम शाह ने इस किले को 15वीं शताब्दी में बनवाया था। यह किला गाडरवाड़ा रेलवे स्टेशन से लगभग 19 किमी. दूर है। वर्तमान में प्रशासन की उपेक्षा के कारण किला क्षतिग्रस्त अवस्था में पहुंच गया है। किले के निकट ही नोनिया में 6 विशाल प्रतिमाएं देखी जा सकती हैं।
=== नरसिंह मंदिर ===
नरसिंहपुर का यह प्राचीन मंदिर जबलपुर से लगभग 84Km दूर है। मंदिर को 18वीं शताब्दी में '''राजा नरसिंह विजय बहादुर निजाम सिंह''' के सेनापति जाट सरदार ने बनवाया था। मंदिर में विष्णु के अवतार भगवान नरसिंह की सपाट प्रतिमा स्थापित है।
=== ब्राह्मण घाट(बरमान घाट) ===
नर्मदा नदी के मणि सागर पर बना यह घाट नरसिंहपुर के सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में है। भगवान ब्रह्मा की यज्ञशाला, रानी दुर्गावती मंदिर, हाथी दरवाजा और वराह मूर्ति यहां के मुख्य आकर्षण हैं। मकर संक्रांति और बसंत पंचमी के अवसर पर यह स्थान संगीत और रंगों से जीवंत हो उठता है।
=== झोतेश्वर् आश्रम ===
यह आश्रम परमहंसी गंगा आश्रम के नाम से भी जाना जाता है। नरसिंहपुर का यह लोकप्रिय आध्यात्मिक केन्द्र संत जगतगुरू शंकराचार्य जोतेश और द्वारकाधीश पीठाधेश्वर सरस्वती महाराज से संबंधित है। कहा जाता है कि उन्होंने काफी लंबे समय तक ध्यान लगाया था। सुनहरा राजाराजेश्वरी त्रिपुर सुंदरी मंदिर यहां का मुख्य आकर्षण है। जोटेश्वर मंदिर, लोधेश्वर मंदिर, हनुमान टेकरी और शिवलिंग यहां के अन्य पूज्यनीय स्थल हैं। बसंत पंचमी के मौके पर यहां सात दिन तक समारोह आयोजित किया जाता है।
=== डमरु घाटी ===
डमरू घाटी नरसिंहपुर का एक पवित्र स्थल है। गाडरवारा रेलवे स्टेशन से यह घाटी ५. किमी. की दूरी पर है। घाटी की मुख्य विशेषता यहां के दो शिवलिंग है। यहां बड़े शिवलिंग के भीतर एक छोटा शिवलिंग बना हुआ है। हर बर्ष महाशिवरात्रि पर 7 दिन यहाँ मेला लगता है
=== बचई ===
इस प्राचीन नगर की खुदाई से अनेक ऐतिहासिक इमारतों का पता चला है। इतिहास की किताबों और दूसरी शताब्दी की हस्तलिपियों में इस स्थान का उल्लेख मिलता है। बचई के निकट ही बरहाटा एक अन्य ऐतिहासिक स्थल है।
=== बिलथारी ===
प्रारंभ में बालीस्थली के नाम से मशहूर यह नरसिंहपुर का एक छोटा-सा गांव है। यह स्थान महाभारत से भी संबंधित माना जाता है। कहा जाता है कि पांडवों ने अपने वनवास का कुछ समय यहां व्यतीत किया था।
=== श्रीधाम ===
स्वामी स्वरूपानंद सरश्वती महाराज ने गोटेगाव का नाम झोतेश्वर धाम के कारण श्रीधाम कर दिया। झोतेश्वर श्रीधाम से 16 k.m. पर है। यह आश्रम परमहंसी गंगा आश्रम के नाम से भी जाना जाता है। नरसिंहपुर का यह लोकप्रिय आध्यात्मिक केन्द्र संत जगतगुरू शंकराचार्य जोतेश और द्वारकाधीश पीठाधेश्वर सरस्वती महाराज से संबंधित है। कहा जाता है कि उन्होंने काफी लंबे समय तक ध्यान लगाया था। सुनहरा राजराजेश्वरी त्रिपुर सुंदरी मंदिर यहां का मुख्य आकर्षण है। जोटेश्वर मंदिर, लोधेश्वर मंदिर, हनुमान टेकरी , क्रिष्ण मंदिर , विचार शिला और शिवलिंग यहां के अन्य पूज्यनीय स्थल हैं। बसंत पंचमी के मौके पर यहां सात दिन तक समारोह आयोजित किया जाता है।
=== पीपरपानी (कंजई) ===
गोटेगाँव तहसील में जबलपुर रोड पर कंजई गाँव से 3 K.M. अंदर पीपरपानी गाँव है वास्तव मे ये पीपरपानी की माता के नाम पर रखा गया है। यहां पर पीपरपानी माता की सर्वकामना सिद्धि मढिया है जहां नवरात्रि के अवसर पर माँ के दर्शन और मनोकामनाये माँगी जाती हैं। माता के परम भक्त स्व.जमना प्रसाद कुशवाहा जी के स्वर्गवास होने के बाद उनके चेले श्री परशराम कुशवाहा जी ने माता की भक्ति की और जन समूह की जड़ी-बूटियो और माता की कृपा से पीड़ितों और जानवरों का इलाज किया करते हैं। इनके अलावा यहां पर बघेण नदी कालांतर में बाघन नदी के नाम से जानी जाती थी इसके किनारे पर दो बड़े टीले है जिसे 1. पीली कगार 2. हथियागढ की कगार कहा जाता है। कहते हैं कि पीली कगार पर भूतो का डेरा है, गाँव वाले भूतो से रूबरू होने का दावा किया करते हैं, पर इसका कोई साक्ष्य नहीं है। और हथियागढ की कगार पर कहा जाता है; कि, बहुत पहले हाथियों का झुंड इस से गिर कर मर गया था। जिसके कारण इसका नाम हथियागढ कहा जाता है। भिरभी दौनो कगार बेहद डरावनी और रोचक है।
हाथी नाला जलप्रपात
जिला मुख्यालय से करीब 50 60 किलोमीटर की दूरी पर स्थित हाथी नाला जलप्रपात बरसात के मौसम में सैलानियों को अपनी ओर आकर्षित करता है,,,,
माना जाता है कि दिनेश पेंटर मुराछ जब अपने साथियों के साथ हाथी नाला देखने गए थे तो उन्होंने हाथी नाला के छायाचित्र अपने फेसबुक अकाउंट पर शेयर किए थे उसके बाद यह जलप्रपात चर्चा में आया था
=== सिद्धेश्वर महादेव मंदिर टिमरावन ===
टिमरावन का सिद्धेश्वर महादेव मंदिर अपने आप में शान्ति को समेंटे हुए प्राचीन धार्मिक स्थलों में से एक हे जहाँ से नर्मदा नदी का वेहत मनोरम दृश्य देखने को मिलता है। यहाँ के मंदिर के साथ साथ गांव के चारों दिशाओं में शिव मंदिर,कृष्ण मंदिर,दुर्गा मंदिर एवं दक्षिण मुखी हनुमान मंदिर होने से गांव को एक दिव्यमई स्वरुप प्रदान करते हे।
== आवागमन ==
; वायु मार्ग
[[जबलपुर विमानक्षेत्र]] यहां का नजदीकी एयरपोर्ट जो नरसिंहपुर से करीब 84 किमी. दूर है। देश के अनेक शहर इस एयरपोर्ट से वायुमार्ग द्वारा जुड़े हैं।
; रेल मार्ग
नरसिंहपुर रेलवे स्टेशन मुंबई-हावडा रूट का प्रमुख स्टेशन है। इस रूट पर चलने वाली ट्रेनें नरसिंहपुर को देश के अन्य शहरों से जोड़ती हैं।जिले में रेल्वे ट्रेक की लम्बाई लगभग 105 किमी हैं
कुल स्टेशनों की संख्या 11 हैं जिसमें 3 मुख्य स्टेशन हैं जहाँ सुपर फास्ट ट्रेनों के स्टॉपेज हैं 5 ऐसे स्टेशन हैं जहाँ सिर्फ पैसेन्जर ट्रेनों के स्टॉपेज हैं और ऐसे 3 से स्टेशन हैं जहाँ सिर्फ एक्सप्रेस वपैसेन्जर ट्रेनों के स्टॉपेज है
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|+नरसिंहपुर जिलें की स्टेशन
!क्र
!स्टेशन का नाम
!स्टेशन कोड
!दूरी
|-
|1
|विक्रमपुर
|BMR
|0
|-
|2
|श्रीधाम
|SRID
|12
|-
|3
|करकबेल
|KKB
|28
|-
|4
|बेलखेड़ा
|BELD
|32
|-
|5
|घाटपिंडरई
|GPC
|37
|-
|6
|नरसिंहपुर
|NU
|43
|-
|7
|करेली
|KY
|59
|-
|8
|करपगाँव
|KFY
|68
|-
|9
|बोहानी
|BNE
|75
|-
|10
|गाडरवारा
|GAR
|87
|-
|11
|सालीचौका रोड
|SCKR
|101
|}
; सड़क मार्ग
{{main|चौरागढ़ किला}}
नरसिंहपुर सड़क मार्ग द्वारा जबलपुर, छिंडवाडा, सिवनी, होशंगाबाद, देवरी, सागर आदि शहरों से जुड़ा हुआ है। जिलें से उत्तर-दक्षिण कॉरिडोर NH-44 (94.3 किलोमीटर) के माध्यम से बरमान, करेली नरसिंहपुर, मुगवानी से गुजरता हैं। NH-45 (64.2 किलोमीटर) राजमार्ग और तेंदूखेड़ा से गुजरता हैं। SH- 22 लगभग 122 किलोमीटर जिले से गुजरता हैं जो कि जिले को राज्य के अन्य प्रमुख शहरों से जोडता हैं। राज्य के अनेक शहरों से यहां के लिए बसें चलती हैं।
== जनसंख्या ==
2011 में, नरसिंहपुर की जनसंख्या 1,091,854 थी, जिसमें पुरुष और महिला क्रमशः 568,810 और 523,044 थे। <ref>{{Cite web|url=https://www.census2011.co.in/census/district/319-narsimhapur.html|title=Narsimhapur District - Population 2011-2024}}</ref>
== बाहरी कड़ियाँ ==
* [https://web.archive.org/web/20110525083846/http://www.bundelkhanddarshan.com/bundelkhand-district/82.html Narsinghpur on Bundelkhand Darshan]
{{मध्य प्रदेश के जिले }}
१००% साक्च्हर्त
[[श्रेणी:मध्य प्रदेश के जिले]]
[[श्रेणी:नरसिंहपुर ज़िला|*]]
चीचली, चावरपाठा, गोटेगांव करेली नरसिंहपुर एवं सांईखेड़ा
n1ijmtiyrkuae16gou12e6h81lvdxwa
6547809
6547808
2026-05-02T15:50:47Z
~2026-26789-02
922671
cancer line
6547809
wikitext
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{{ज्ञानसन्दूक प्रांत
|province_name = नरसिंहपुर ज़िला<br /><small>Narsinghpur district</small>
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}}
[[File:Narsinghpur railway station- - 1.jpeg|thumb|270px| नरसिंहपुर रेलवे स्टेशन]]
'''नरसिंहपुर ''' भारतीय राज्य [[मध्य प्रदेश]] का एक [[ज़िला|जिला]] है। जिले का मुख्यालय [[नरसिंहपुर]] है। इसमें चार विधानसभा क्षेत्र आते हैं जो नरसिंहपुर, तेंदूखेड़ा, गाडरवारा और गोटेगांव हैं।मध्य प्रदेश के मध्य में स्थित नरसिंहपुर 5000 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्रफल में फैला राज्य का प्रमुख जिला है। उत्तर में [[विन्ध्याचल]] और दक्षिण में [[सतपुड़ा]] की पहाड़ियों से घिरे नरसिंहपुर पर प्रकृति खूब मेहरबान हुई है। पवित्र [[नर्मदा नदी|नर्मदा]] नदी जिले की खूबसूरती में वृद्धि करती है। प्राचीन काल में यहां अनेक वंशों ने शासन किया था। महान वीरांगना रानी दुर्गावती के काल में यह स्थान काफी चर्चित रहा था। हीरापुर के राजा हृदय शाह लोधी व माने गांव के रुद्र प्रताप सिंह स्वतंत्रता आंदोलन में सेनानी रह चुके यहां अनेक ऐतिहासिक दर्शनीय स्थल हैं।मृृगन्नाथ धाम राजमार्ग, नरसिंह मंदिर, ब्राह्मण घाट, जोटेश्वर आश्रम और दमारू घाटी यहां के लोकप्रिय पर्यटन स्थल हैं।
जिले की प्रमुख व्यावसायिक फसलें सोयाबीन और गन्ना हैं, [6] जो बड़ी मात्रा में उत्पादित होती हैं और आय का एक प्रमुख स्रोत हैं। मध्य प्रदेश में नरसिंहपुर सोयाबीन का सबसे बड़ा उत्पादक है। सोयाबीन का उपयोग तेल निकालने के लिए और गन्ने का उपयोग चीनी और गुड़ के लिए किया जाता है। मध्य प्रदेश के गन्ना उत्पादन में अकेले नरसिंहपुर का योगदान लगभग 80% है। जाहिर तौर पर करेली (तहसील) भारत की सबसे बड़ी गुड़ मंडी है। पिछले दशक में चीनी उद्योग ने उल्लेखनीय प्रगति देखी है।<ref>{{Cite web|url=https://en.wikipedia.org/wiki/Narsinghpur#cite_ref-:0_5-6|title=Narsinghpur}}</ref>
== '''ऐतिहासिक पृष्ठभूमि''' ==
नरसिंहपुर जिला क्षेत्र अपने भीतर अस्तित्व के प्राचीनतम प्रमाण छुपाये हुये है । जो विभिन्न पुरातात्विक खोजों से समय समय पर उजागर होते रहे हैं । जिले के गजेटियर में उल्लेखित पुरातात्विक प्रमाणों के अनुसार जिले के गाडरवारा से दूर भटरा नामक ग्राम में 1872 में पाषाण युग के जीवाश्म युक्त पशु और बलुआ पत्थर से निर्मित उपकरण प्राप्त हुये हैं । अन्य खोज अभियानों में देवाकछार, धुवघट, कुम्हड़ी, रातीकरार और ब्रम्हाण घाट आदि स्थलों में प्रागेतिहासिक अवशेष मिले हैं । बिजौरी ग्राम के समीप चिन्हित शैलामय एवं नक्कासीदार चट्टानी गुफायें भी जिले के अस्तित्व को प्राचीनतम काल से जोड़ते हैं । ब्रम्हाण घाट से झांसी घाट के बीच नर्मदा के तटवर्ती खोज अभियानों में मिले स्तनधारी जीवाश्म तथा पुरातात्विक औजारों के अवशेष जिले को प्रागेतिहासिक इतिहास से जोड़ते हैं ।
अनुकृतियों के अनुसार इस क्षेत्र का संबंध रामायण और महाभारत काल की घटनाओं से रहा है । पौराणिक संदर्भो के अनुसार ब्रम्हाण घाट वह स्थल है जहां सृष्टि के रचियता ब्रम्हा ने पवित्र नर्मदा के तट पर यज्ञ सम्पन्न किया था । चांवरपाठा विकास खंड के बिल्थारी ग्राम का प्राचीन नाम बलि स्थली " कहा जाता है । इसे राजा बलि का निवास स्थान माना जाता है ।
महाभारत काल में बरमान घाट के सत्धारा पर पाण्डवों द्वारा नर्मदा की धारा को एक ही रात में बांधने के प्रयत्न का उल्लेख पुराणों में हुआ है । सत्धारा के निकट भीम कुण्ड, अर्जुन कुण्ड आदि इसी को ईंगित करते हैं । कहा जाता है कि पाण्डवों ने वनवास की कुछ अवधि यहां बिताई थी । सांकल घाट की गुफा आदि गुरू शंकराचार्य के गुरूदेव के अध्ययन एवं साधना से जुड़ी है ।
जिले का बरहटा ग्राम महाभारत काल के विराट नगर का अवशेष माना जाता है । यहीं कदम कदम पर मिलतीं पाषाण मूर्तियां और कलात्मक अवशेष से इस किवदंती को बल मिलता है । बचई के निकट पड़ी मानवाकार पाषाण शिला को कीचक" से जोड़ा जाता है । जिले के बोहानी क्षेत्र को पृथ्वीराज कालीन वीरचरित नायकों आल्हा-ऊदल के पिता जसराज व चाचा बछराज का गढ़ माना जाता है । अनेक ऐतिहासिक प्रमाणों खुदाई में प्राप्त प्राचीन वस्तुओं तथा उल्लेखों से जिले का संदर्भ प्राचीन काल से जोड़ने वाले तथ्य और अनुकृतियां बहुतायत में हैं । पर इतिहास ग्रंथों तथा ऐतिहासिक अभिलेखों द्वारा जिले के प्रामाणिक इतिहास की श्रृंखला दूसरी शताब्दी के इतिहास से मिलती है ।
==== सातवाहन काल ====
दूसरी शताब्दी में इस क्षेत्र पर सातवाहन शासकों का अधिपत्य था । चौथी शताब्दी में यह गुप्त साम्राज्य के अधीन रहा जब समुद्र गुप्त ने मध्य भारत क्षेत्र तथा दक्षिण तक अपने साम्राज्य की सीमायें स्थापित करने में सफलता पाई । छठी शताब्दी में पेदीराज्य के कुछ संकेत मिलते हैं । पर लगभग 300 वर्षो तक का काल पुन: अंधेरों में खोया हुआ है । नौवीं शताब्दी में क्षेत्र कलचुरी शासन (हैहय) के स्थापित होने का उल्लेख प्राप्त है । कलचुरी राजवंश की राजधानी नर्मदा किनारे माहिष्मती नगरी थी जो आगे चलकर त्रिपुरी में स्थापित हो गई । कलचुरी राज्य के गोमती से नर्मदा घाट तक फैले होने का विवरण इतिहास ग्रंथों में सुरक्षित है । कलचुरी सत्ता के पतन के पश्चात इस क्षेत्र पर आल्हा-ऊदल के पिता व चाचा के संरक्षण का उल्लेख मिलता है । जिनने बोहानी को अपना राज केन्द्र बनाया उनके पश्चात लगातार चार शताब्दियों तक यह क्षेत्र राजगौड़ वंश के साम्राज्य का अंग रहा ।
==== राजगौड़ वंश ====
इस शासन की स्थापना से जिले में नये व्यवस्थित शांतिपूर्ण एवं खुशहाली का दौर प्रारंभ होता है । इस राजवंश के उदय का श्रेय यादव राव (यदुराव) को दिया जाता है । जिनने चौदहवीं शताब्दी के अंतिम वर्षो में गढ़ा कटंगा में स्थापित किया और एक महत्वपूर्ण शासन क्रम की नींव डाली । इसी राजवंश के प्रसिद्ध शासक संग्राम शाह (1400-1541) ने 52 गढ़ स्थापित कर अपने साम्राज्य को सुदृढ़ बनाया । नरसिंहपुर जिले में चौरागढ़ (चौगान) किले का निर्माण भी उसने ही कराया था जो रानी दुर्गावती के पुत्र वीरनारायण की वीरता का मूक साक्षी है । संग्राम शाह के उत्तराधिकारियों में दलपति शाह ने सात वर्ष शांति पूर्वक शासन किया । उसके पश्चात उसकी वीरांगना रानी दुर्गावती ने राज्य संभाला और अदम्य साहस एवं वीरता पूर्वक 16 वर्ष (1540-1564) शासन किया । सन् 1564 में अकबर के सिपहसलार आतफ खां से युद्ध करते हुये रानी ने वीरगति पाःथ्द्यर्; । नरसिंहपुर जिले में स्थित चौरागढ़ एक सुदृढ़ पहाड़ी किले के रूप में था जहां पहुंच कर आतफ खां ने राजकुमार वीरनारायण को घेर लिया और अंतत: कुटिल चालों से उसका बध कर दिया । गढ़ा कटंगा राज्य पर 1564 में मुगलों का अधिकार हो गया गौंड़, मुगल, और इनके पश्चात यह क्षेत्र मराठों के शासन काल में प्रशासनिक और सैनिक अधिकारियों तथा अनुवांशिक सरदारों में बंटा हुआ रहा । जिनके प्रभाव और शक्ति के अनुसार ईलाकों की सीमायें समय समय पर बदलती रहती थीं । जिले के चांवरपाठा, बारहा, सांःथ्द्यर्;खेड़ा, शाहपुर, सिंहपुर, श्रीनगर और तेन्दूखेड़ा इस समूचे काल में परगानों के मुख्यालय के रूप में प्रसिद्ध रहे ।
==== भोंसले शासक ====
सन् 1785 में माधो जी भोसले ने 27 लाख रूपये में मण्डला और नर्मदा घाटी को प्राप्त कर लिया जो राधो जी भोसले/भोपाल नबाब/पिंडोरी सरदारों आदि की खींचतान और सैन्य शासन के क्रूर दबाब में डूबता उतराता रहा । इसे संकटो और अस्थिरता का कौल कहा जा सकता है । जिसमें लूटपाट के साथ क्षेत्र की जनता का जबरजस्त शोषण हुआ । अंतत: 1817 में ब्रिटिश शासन के अंतर्गत आ गया ।
==== स्वतन्त्रता संग्राम ====
ब्रिटिश अधिपत्य के कठोर शिकंजे में रहने के वावजूद जिले में आजादी की तड़प जन मानस में सदैव कौंधती रही । 1857 में चांवरपाठा और तेन्दूखेड़ा पुलिस स्टेशनों पर बिद्रोही सैनानियों ने अधिकार कर लिया । मदनपुर के गौड़ प्रमुख डेलन शाह के नेतृत्व में आजादी के लिये विप्लव का शंखनाद हुआ । 1858 में डेलन शाह को पकड़ लिया जाकर फांसी पर लटका दिया गया । 1857 के पहले स्वतंत्रता संघर्ष को कुचलकर ब्रिटिश सम्राट अपनी जडें जमाने में सफल होता रहा ।
==== कांग्रेस आंदोलन ====
1885 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना के पश्चात जिले में आजादी के लिये आंदोलन की चिनगारी सदैव प्रज्वलित रही - लोकमान्य तिलक, महात्मा गांधी, पं. जवाहर लाल नेहरू, सुभाष चंद्र वोस प्रभूति नेताओं की प्रेरणा और नेतृत्व में जिले में स्वतंत्रता के लिये आंदोलन का जोश पूर्ण वातावरण रहा । जिले के नेताओं में गयादत्त, माणिकचंद कोचर, चौधरी शंकर लाल, ठाकुर निरंजन सिंह, श्याम सुंदर नारायण मुशरान आदि के नेतृत्व में जिले से बड़ी संख्या में आंदोलन कारी सक्रिय रहे । इसी एकता एवं उत्साह को भंग करने के लिये ब्रिटिश शासन ने 1932 में जिले को पुन: तोड़कर होशंगावाद जिले में मिला दिया गया । परंतु इससे आंदोलन और सत्याग्रह के उत्साह मे कोई शिथिलता नहीं आई । 1942 में चीचली मे सत्याग्राही जुलूस पर हुये गोली चालन में मंशाराम और गौरादेवी शहीद हो गये । सैंकडों आंदोलन-कारियों ने दमन चक्र को हंसते हंसते झेला और ब्रिटिश शासन के विरूद्ध त्याग और वलिदान की अनूठी परम्परा कायम की ।
== भूगोल ==
नरसिंहपुर जिले का विस्तार 23°25 उ. तथा 22°45 उ. अक्षांशों के बीच है। पश्चिम से लेकर पूर्व तक भारत का विस्तार 78°.44 पू. तथा 79°.64 पू. देशांतरों के बीच है।जिले का क्षेत्रफल 5125.55 वर्ग किमी. है। उत्तर से लेकर दक्षिण तक जिले का विस्तार लगभग 86.91 किमी है तथा पूर्व से पश्चिम इसका विस्तार लगभग 123.01 किमी. तक है। नरसिंहपुर जिला एक स्थल बद्ध जिला हैं क्योकि इसकी सीमा किसी अन्य राज्य की सीमा को स्पर्श नही करतीं हैं। । जिले की औसतन उचाँई लगभग 347 मीटर (1138 फीट) है ।पड़ोसी जिले रायसेन, सागर, दमोह, जबलपुर, सिवनी, छिंदवाड़ा और नर्मदापुरम जिले हैं।
=== जलवायु ===
जलवायु के आधार पर यह नर्मदा घाटी भाग में हैं। जिला मुख्यालय कर्क रेखा के दक्षिणी ओर लगभग 55 किलोमीटर दूर स्थित हैं। जिससे इस क्षेत्र में ग्रीष्म ऋतु अत्यधिक गर्म एवं शीत ऋतु साधारण ठण्डी रहती हैं।
(मार्च-जून) अधिकतम 45.4 डिग्रीसें. न्यूनतम 9.4डिग्रीसें.
(जुलाई-अक्टूबर) अधिकतम 13.5डिग्रीसें. न्यूनतम 39 डिग्रीसें.
(नवम्बर-फरवरी) अधिकतम 3.2 डिग्रीसें. न्यूनतम 35.4 डिग्रीसें.
=== वर्षा ===
नरसिंहपुर जिला औसत से अधिक वर्षा (125 सेमी- 150 सेमी) वाले क्षेत्र में आता हैं ।
=== नदी ===
नर्मदा नदी जिले में प्रमुख नदी हैं जो कि लगभग 160 किमी हैं झांसीघाट, मुआर घाट, ब्रम्हकुण्ड, महादेव पिपरिया जबरेश्वर महादेव का सिद्ध स्थान बरमानघाट, लिंगा घाट, पटना-घघरौला घाट, बिलथारी घाट, ककरा घाट, हीरापुर घाट,टिमरावन घाट (सिद्धेश्वर महादेव मंदिर) हैं। नर्मदा नदी के बाद शक्कर, शेर, सनेर, ऊमर, वारूरेवा आदि नदीयाँ हैं। टोनघाट जलप्रपात शेर नदी पर हैं जो कि गोटेगाँव तहसील में स्थति हैं। जो कि जिला मुख्यालय से लगभग 45 किमी हैं। सिंचाई नदीयों, तालाबों एवं नलकूपों के अलावा रानी अवन्ती बाई सागर (बरगी परियोजना) नहर द्धारा जिले में जल उपलब्ध कराया जा रहा हैं। जिलें में 50-60 प्रतिशत शुद्ध सिंचित क्षेत्र हैं।
जिले में छछली एवं मध्यम काली मृदा पायी जाती हैं। मुख्य फसल गन्ना, तुअर दाल, सोयाबीन, चावल, मसूर आदि हैं।जिले का कलमतहार क्षेत्र एशिया का सबसे उपजाऊ क्षेत्र है। गाडरवारा मुख्य रूप से तुवार (अरहार) दालों के लिए प्रसिद्ध है जिला स्तर पर कृषि खेतों में, मिट्टी प्रयोग प्रयोगशालाएं हैं। जहां किसानों को कीटनाशकों, सर्वोत्तम गुणवत्ता वाले बीज, उर्वरक और सबसे महत्वपूर्ण तकनीकी मार्गदर्शन मिलते हैं।
=== वन सम्पदा ===
जिलें का 26.55 प्रतिशत क्षेत्र वन हैं । वनों में सागौन, बाँस, तेंदुपत्ता आदि एवं आम, महुआ, आचार, खैरी आदि से भरा पड़ा हैं। वन्य जीव में बंदर, नील गाय, हिरण, खरगोश मिलतें हैं।
=== खनिज ===
जिले में प्रमुख खनिज सोप स्टोन, डोलोमाइट, फायर क्ले, लाइम स्टोन हैं। मुरम व नर्मदा नदी की रेत का उपयोग निर्माण कार्य में किया जाता हैं।
=== प्रमुख उद्योग ===
चीनी / गन्ने से गुड़:
कई जगहों पर गुड़ गन्ने के सभी हिस्सों से तैयार किया गया है। गुड़ मंडी के लिए करेली बहुत प्रसिद्ध है नरसिंहपुर और गाडरवारा में चीनी मिलें हैं
बीड़ी उद्योग:
यह काम मुख्य रूप से नरसिंहपुर, गाडरवारा, गोटेगांव में किया जाता हैं।
दाल मिल्स:
तुवार (अरहर) दाल मुख्य रूप से नरसिंहपुर और गाडरवारा में तैयार कि जाती हैं
तेल मिल्स:
जिलें में कई तेल मिल हैं जहां सोया बीन, मूंगफली और तिल्ली तेल निकाले जाते हैं।
== प्रमुख आकर्षण ==
'''<big>गाडरवारा</big>'''
गाडरवारा से 15 किमी कि दुरी पर स्थित ग्राम मोहपानी के पास स्थित बहुत खोबसूरत जगह जिसे छोटे जबलपुर नाम से जाना जाता है लोगो का कहना है कि अंग्रेजो के ज़माने का स्थित एक पुल और गुफाय है यहाँ एक नदी है जो गर्मी के दिनों में भी नहीं सूखती है उसके आगे '''रानी दहार''' नाम कि जगह है यहाँ पर राजा रानी का निबास था इस लिए रानी दहार नाम से जाना जाता है
=== चौरागढ़ (चौगान) किला ===
<div class="rellink relarticle mainarticle">मुख्य लेख : [[चौरागढ़ किला]]</div>गोंड शासक संग्राम शाह ने इस किले को 15वीं शताब्दी में बनवाया था। यह किला गाडरवाड़ा रेलवे स्टेशन से लगभग 19 किमी. दूर है। वर्तमान में प्रशासन की उपेक्षा के कारण किला क्षतिग्रस्त अवस्था में पहुंच गया है। किले के निकट ही नोनिया में 6 विशाल प्रतिमाएं देखी जा सकती हैं।
=== नरसिंह मंदिर ===
नरसिंहपुर का यह प्राचीन मंदिर जबलपुर से लगभग 84Km दूर है। मंदिर को 18वीं शताब्दी में '''राजा नरसिंह विजय बहादुर निजाम सिंह''' के सेनापति जाट सरदार ने बनवाया था। मंदिर में विष्णु के अवतार भगवान नरसिंह की सपाट प्रतिमा स्थापित है।
=== ब्राह्मण घाट(बरमान घाट) ===
नर्मदा नदी के मणि सागर पर बना यह घाट नरसिंहपुर के सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में है। भगवान ब्रह्मा की यज्ञशाला, रानी दुर्गावती मंदिर, हाथी दरवाजा और वराह मूर्ति यहां के मुख्य आकर्षण हैं। मकर संक्रांति और बसंत पंचमी के अवसर पर यह स्थान संगीत और रंगों से जीवंत हो उठता है।
=== झोतेश्वर् आश्रम ===
यह आश्रम परमहंसी गंगा आश्रम के नाम से भी जाना जाता है। नरसिंहपुर का यह लोकप्रिय आध्यात्मिक केन्द्र संत जगतगुरू शंकराचार्य जोतेश और द्वारकाधीश पीठाधेश्वर सरस्वती महाराज से संबंधित है। कहा जाता है कि उन्होंने काफी लंबे समय तक ध्यान लगाया था। सुनहरा राजाराजेश्वरी त्रिपुर सुंदरी मंदिर यहां का मुख्य आकर्षण है। जोटेश्वर मंदिर, लोधेश्वर मंदिर, हनुमान टेकरी और शिवलिंग यहां के अन्य पूज्यनीय स्थल हैं। बसंत पंचमी के मौके पर यहां सात दिन तक समारोह आयोजित किया जाता है।
=== डमरु घाटी ===
डमरू घाटी नरसिंहपुर का एक पवित्र स्थल है। गाडरवारा रेलवे स्टेशन से यह घाटी ५. किमी. की दूरी पर है। घाटी की मुख्य विशेषता यहां के दो शिवलिंग है। यहां बड़े शिवलिंग के भीतर एक छोटा शिवलिंग बना हुआ है। हर बर्ष महाशिवरात्रि पर 7 दिन यहाँ मेला लगता है
=== बचई ===
इस प्राचीन नगर की खुदाई से अनेक ऐतिहासिक इमारतों का पता चला है। इतिहास की किताबों और दूसरी शताब्दी की हस्तलिपियों में इस स्थान का उल्लेख मिलता है। बचई के निकट ही बरहाटा एक अन्य ऐतिहासिक स्थल है।
=== बिलथारी ===
प्रारंभ में बालीस्थली के नाम से मशहूर यह नरसिंहपुर का एक छोटा-सा गांव है। यह स्थान महाभारत से भी संबंधित माना जाता है। कहा जाता है कि पांडवों ने अपने वनवास का कुछ समय यहां व्यतीत किया था।
=== श्रीधाम ===
स्वामी स्वरूपानंद सरश्वती महाराज ने गोटेगाव का नाम झोतेश्वर धाम के कारण श्रीधाम कर दिया। झोतेश्वर श्रीधाम से 16 k.m. पर है। यह आश्रम परमहंसी गंगा आश्रम के नाम से भी जाना जाता है। नरसिंहपुर का यह लोकप्रिय आध्यात्मिक केन्द्र संत जगतगुरू शंकराचार्य जोतेश और द्वारकाधीश पीठाधेश्वर सरस्वती महाराज से संबंधित है। कहा जाता है कि उन्होंने काफी लंबे समय तक ध्यान लगाया था। सुनहरा राजराजेश्वरी त्रिपुर सुंदरी मंदिर यहां का मुख्य आकर्षण है। जोटेश्वर मंदिर, लोधेश्वर मंदिर, हनुमान टेकरी , क्रिष्ण मंदिर , विचार शिला और शिवलिंग यहां के अन्य पूज्यनीय स्थल हैं। बसंत पंचमी के मौके पर यहां सात दिन तक समारोह आयोजित किया जाता है।
=== पीपरपानी (कंजई) ===
गोटेगाँव तहसील में जबलपुर रोड पर कंजई गाँव से 3 K.M. अंदर पीपरपानी गाँव है वास्तव मे ये पीपरपानी की माता के नाम पर रखा गया है। यहां पर पीपरपानी माता की सर्वकामना सिद्धि मढिया है जहां नवरात्रि के अवसर पर माँ के दर्शन और मनोकामनाये माँगी जाती हैं। माता के परम भक्त स्व.जमना प्रसाद कुशवाहा जी के स्वर्गवास होने के बाद उनके चेले श्री परशराम कुशवाहा जी ने माता की भक्ति की और जन समूह की जड़ी-बूटियो और माता की कृपा से पीड़ितों और जानवरों का इलाज किया करते हैं। इनके अलावा यहां पर बघेण नदी कालांतर में बाघन नदी के नाम से जानी जाती थी इसके किनारे पर दो बड़े टीले है जिसे 1. पीली कगार 2. हथियागढ की कगार कहा जाता है। कहते हैं कि पीली कगार पर भूतो का डेरा है, गाँव वाले भूतो से रूबरू होने का दावा किया करते हैं, पर इसका कोई साक्ष्य नहीं है। और हथियागढ की कगार पर कहा जाता है; कि, बहुत पहले हाथियों का झुंड इस से गिर कर मर गया था। जिसके कारण इसका नाम हथियागढ कहा जाता है। भिरभी दौनो कगार बेहद डरावनी और रोचक है।
हाथी नाला जलप्रपात
जिला मुख्यालय से करीब 50 60 किलोमीटर की दूरी पर स्थित हाथी नाला जलप्रपात बरसात के मौसम में सैलानियों को अपनी ओर आकर्षित करता है,,,,
माना जाता है कि दिनेश पेंटर मुराछ जब अपने साथियों के साथ हाथी नाला देखने गए थे तो उन्होंने हाथी नाला के छायाचित्र अपने फेसबुक अकाउंट पर शेयर किए थे उसके बाद यह जलप्रपात चर्चा में आया था
=== सिद्धेश्वर महादेव मंदिर टिमरावन ===
टिमरावन का सिद्धेश्वर महादेव मंदिर अपने आप में शान्ति को समेंटे हुए प्राचीन धार्मिक स्थलों में से एक हे जहाँ से नर्मदा नदी का वेहत मनोरम दृश्य देखने को मिलता है। यहाँ के मंदिर के साथ साथ गांव के चारों दिशाओं में शिव मंदिर,कृष्ण मंदिर,दुर्गा मंदिर एवं दक्षिण मुखी हनुमान मंदिर होने से गांव को एक दिव्यमई स्वरुप प्रदान करते हे।
== आवागमन ==
; वायु मार्ग
[[जबलपुर विमानक्षेत्र]] यहां का नजदीकी एयरपोर्ट जो नरसिंहपुर से करीब 84 किमी. दूर है। देश के अनेक शहर इस एयरपोर्ट से वायुमार्ग द्वारा जुड़े हैं।
; रेल मार्ग
नरसिंहपुर रेलवे स्टेशन मुंबई-हावडा रूट का प्रमुख स्टेशन है। इस रूट पर चलने वाली ट्रेनें नरसिंहपुर को देश के अन्य शहरों से जोड़ती हैं।जिले में रेल्वे ट्रेक की लम्बाई लगभग 105 किमी हैं
कुल स्टेशनों की संख्या 11 हैं जिसमें 3 मुख्य स्टेशन हैं जहाँ सुपर फास्ट ट्रेनों के स्टॉपेज हैं 5 ऐसे स्टेशन हैं जहाँ सिर्फ पैसेन्जर ट्रेनों के स्टॉपेज हैं और ऐसे 3 से स्टेशन हैं जहाँ सिर्फ एक्सप्रेस वपैसेन्जर ट्रेनों के स्टॉपेज है
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|+नरसिंहपुर जिलें की स्टेशन
!क्र
!स्टेशन का नाम
!स्टेशन कोड
!दूरी
|-
|1
|विक्रमपुर
|BMR
|0
|-
|2
|श्रीधाम
|SRID
|12
|-
|3
|करकबेल
|KKB
|28
|-
|4
|बेलखेड़ा
|BELD
|32
|-
|5
|घाटपिंडरई
|GPC
|37
|-
|6
|नरसिंहपुर
|NU
|43
|-
|7
|करेली
|KY
|59
|-
|8
|करपगाँव
|KFY
|68
|-
|9
|बोहानी
|BNE
|75
|-
|10
|गाडरवारा
|GAR
|87
|-
|11
|सालीचौका रोड
|SCKR
|101
|}
; सड़क मार्ग
{{main|चौरागढ़ किला}}
नरसिंहपुर सड़क मार्ग द्वारा जबलपुर, छिंडवाडा, सिवनी, होशंगाबाद, देवरी, सागर आदि शहरों से जुड़ा हुआ है। जिलें से उत्तर-दक्षिण कॉरिडोर NH-44 (94.3 किलोमीटर) के माध्यम से बरमान, करेली नरसिंहपुर, मुगवानी से गुजरता हैं। NH-45 (64.2 किलोमीटर) राजमार्ग और तेंदूखेड़ा से गुजरता हैं। SH- 22 लगभग 122 किलोमीटर जिले से गुजरता हैं जो कि जिले को राज्य के अन्य प्रमुख शहरों से जोडता हैं। राज्य के अनेक शहरों से यहां के लिए बसें चलती हैं।
== जनसंख्या ==
2011 में, नरसिंहपुर की जनसंख्या 1,091,854 थी, जिसमें पुरुष और महिला क्रमशः 568,810 और 523,044 थे। <ref>{{Cite web|url=https://www.census2011.co.in/census/district/319-narsimhapur.html|title=Narsimhapur District - Population 2011-2024}}</ref>
== बाहरी कड़ियाँ ==
* [https://web.archive.org/web/20110525083846/http://www.bundelkhanddarshan.com/bundelkhand-district/82.html Narsinghpur on Bundelkhand Darshan]
{{मध्य प्रदेश के जिले }}
१००% साक्च्हर्त
[[श्रेणी:मध्य प्रदेश के जिले]]
[[श्रेणी:नरसिंहपुर ज़िला|*]]
चीचली, चावरपाठा, गोटेगांव करेली नरसिंहपुर एवं सांईखेड़ा
obpg6lze3gh7ag0wgelhuclz7fknax7
बीड जिला
0
7735
6547832
5157320
2026-05-02T18:35:59Z
~2026-26550-48
922695
“काही वृत्तसंस्था आणि अधिकृत अहवालांनुसार, जिल्ह्यातील विविध समुदायांशी संबंधित सामाजिक तणाव आणि भेदभावाच्या घटना नोंदवण्यात आल्या आहेत.” 👉 ब्राह्मण समुदायाशी संबंधित तक्रारींचाही उल्लेख आढळतो.”
6547832
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'''बीड ज़िला''' [[भारत]] के [[महाराष्ट्र]] राज्य का एक ज़िला है। ज़िले का मुख्यालय [[बीड]] है।<ref>"[https://books.google.com/books?id=TQ1ACQAAQBAJ RBS Visitors Guide India: Maharashtra Travel Guide] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20190703140613/https://books.google.com/books?id=TQ1ACQAAQBAJ |date=3 जुलाई 2019 }}," Ashutosh Goyal, Data and Expo India Pvt. Ltd., 2015, ISBN 9789380844831</ref><ref>"[https://books.google.com/books?id=5xefEXhvG8EC Mystical, Magical Maharashtra] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20190630170850/https://books.google.com/books?id=5xefEXhvG8EC |date=30 जून 2019 }}," Milind Gunaji, Popular Prakashan, 2010, ISBN 9788179914458</ref><ref>"[https://books.google.com/books?id=6ohvu8D3LbgC Maharashtra, Development Report] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20171011162739/https://books.google.com/books?id=6ohvu8D3LbgC |date=11 अक्तूबर 2017 }}," State Development Report Series, Planning Commission of the Government of India, Academic Foundation, 2007, ISBN 9788171885404</ref> काही वृत्तसंस्था आणि अधिकृत अहवालांनुसार, जिल्ह्यातील विविध समुदायांशी संबंधित सामाजिक तणाव आणि भेदभावाच्या घटना नोंदवण्यात आल्या आहेत.” “काही अहवालांमध्ये ब्राह्मण समुदायाशी संबंधित तक्रारींचाही उल्लेख आढळतो.”
== इन्हें भी देखेंd ==
* [[बीड]]
* [[महाराष्ट्र]]
* [[महाराष्ट्र के जिले]]
== सन्दर्भ ==
{{टिप्पणीसूची}}
{{महाराष्ट्र के जिले}}
[[श्रेणी:महाराष्ट्र के जिले]]
[[श्रेणी:बीड ज़िला|*]]
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6547832
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चाहर धर्मेंद्र
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6547918
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'''बीड ज़िला''' [[भारत]] के [[महाराष्ट्र]] राज्य का एक ज़िला है। ज़िले का मुख्यालय [[बीड]] है।<ref>"[https://books.google.com/books?id=TQ1ACQAAQBAJ RBS Visitors Guide India: Maharashtra Travel Guide] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20190703140613/https://books.google.com/books?id=TQ1ACQAAQBAJ |date=3 जुलाई 2019 }}," Ashutosh Goyal, Data and Expo India Pvt. Ltd., 2015, ISBN 9789380844831</ref><ref>"[https://books.google.com/books?id=5xefEXhvG8EC Mystical, Magical Maharashtra] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20190630170850/https://books.google.com/books?id=5xefEXhvG8EC |date=30 जून 2019 }}," Milind Gunaji, Popular Prakashan, 2010, ISBN 9788179914458</ref><ref>"[https://books.google.com/books?id=6ohvu8D3LbgC Maharashtra, Development Report] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20171011162739/https://books.google.com/books?id=6ohvu8D3LbgC |date=11 अक्तूबर 2017 }}," State Development Report Series, Planning Commission of the Government of India, Academic Foundation, 2007, ISBN 9788171885404</ref>
== इन्हें भी देखें ==
* [[बीड]]
* [[महाराष्ट्र]]
* [[महाराष्ट्र के जिले]]
== सन्दर्भ ==
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{{महाराष्ट्र के जिले}}
[[श्रेणी:महाराष्ट्र के जिले]]
[[श्रेणी:बीड ज़िला|*]]
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'''कश्मीरी भाषा''' एक भारतीय-आर्य भाषा है जो मुख्यतः [[कश्मीर घाटी]] तथा [[चेनाब]] घाटी में बोली जाती है। वर्ष 2001 की जनगणना के अनुसार [[भारत]] में इसके बोलने वालों की संख्या लगभग 56 लाख है। [[पाक-अधिकृत कश्मीर]] में 1998 की जनगणना के अनुसार लगभग 1 लाख कश्मीरी भाषा बोलने वाले हैं। [[कश्मीर]] की वितस्ता घाटी के अतिरिक्त उत्तर में [[ज़ोजीला]] और बर्ज़ल तक तथा दक्षिण में बानहाल से परे [[किश्तवाड़]] (जम्मू प्रान्त) की छोटी उपत्यका तक इस भाषा के बोलने वाले हैं। कश्मीरी, जम्मू प्रान्त के बानहाल, रामबन तथा भद्रवाह में भी बोली जाती है। प्रधान उपभाषा किश्तवाड़ की "कश्तवाडी" है।
कश्मीर की भाषा कश्मीरी (काॅशुर) है ये कश्मीर में वर्तमान समय में बोली जाने वाली भाषा है। कश्मीरी भाषा के लिए विभिन्न लिपियों का उपयोग किया गया है, जिसमें मुख्य लिपियां हैं- शारदा, देवनागरी, रोमन और परशो-अरबी है। कश्मीर वादी के उत्तर और पश्चिम में बोली जाने वाली भाषाएँ - दर्ददी, श्रीन्या, कोहवाड़ कश्मीरी भाषा के उलट थीं। यह भाषा इण्डो-आर्यन और हिन्दुस्तानी-ईरानी भाषा के समान है।
भाषाविदों का मानना है कि कश्मीर के पहाड़ों में रहने वाले पूर्व नागावासी जैसे गन्धर्व, यक्ष और किन्नर आदि ,बहुत पहले ही मूल आर्यन से अलग हो गए। इसी तरह कश्मीरी भाषा को आर्य भाषा जैसा बनने में बहुत समय लगा। नागा भाषा स्वतः ही विकसित हुई है इस सब के बावजूद, कश्मीरी भाषा ने अपनी विशिष्ट स्वर शैली को बनाए रखा और 8-9वीं शताब्दी में अन्य आधुनिक भारतीय भाषाओं की तरह, कई चरणों से गुजरना पड़ा।
==इतिहास==
तेरहवीं शताब्दी के शितिकण्ठ की महानयप्रकाश में इस भाषा की बानगी मिलती है जिसे उस समय सर्वगोचर देशभाषा कहा जाता था। वह उस समय [[प्राकृत]] की तुलना में [[अपभ्रंश]] के अधिक निकट थी। चौदहवीं शताब्दी में [[ललद्यद]] की वाणी में कश्मीरी भाषा का लालित्य देखने को मिलता है। [[शैव]] [[सिद्ध|सिद्धों]] ने इस भाषा का उपयोग अपने [[तन्त्र साहित्य]] में किया जिसके बाद यह धीरे-धीरे साहित्य की भी भाषा बनती चली गयी।
कश्मीरी भाषा लिखने के लिए [[शारदा लिपि]] का उपयोग दसवीं शताब्दी के आसपास किया गया था। चौदहवीं शताब्दी में [[फारसी]] के कश्मीर की राजभाषा बनने के पहले कश्मीरी [[शारदा लिपि]] में लिखी जाती थी। परन्तु उसके बाद फारसी लिपि में भी कश्मीरी लिखी जाने लगी। पौराणिक कश्मीरी लिपि को केवल शारदा में लिखा गया है<ref>{{cite web | title=लुप्तप्राय शारदा लिपि को पुनर्जीवित करने के प्रयास | website=univarta.com | date=2025-11-10 | url=https://www.univarta.com/news/regional/story/176976.html | language=hi | access-date=2025-11-10}}</ref>। शारदा भाषा लिखने का तरीका स्वदेशी है, जो मूल [[ब्राह्मी लिपि|ब्राह्मी]] से विकसित हुआ था। विद्वान, शासक और हिन्दू, मुस्लिम, बौद्ध आदि जैसे सभी धर्मों के लोग शारदा लिपि में लिखते थे। लालदा, रुपा भवानी, नन्द ऋषि और अन्य भक्ति कविता शारदा लिपि में ही लिखी गई थीं और अभी भी पुस्तकालय में इन्हे पढ़ा जा सकता हैं। इस लिपि का इस्तेमाल कश्मीरी पण्डितों द्वारा जन्म प्रमाणपत्र बनाने के लिए भी किया जाता है।
==वर्त्तमान स्वरुप ==
वर्त्तमान में शारदा लिपि हिन्दुओं तक ही सीमित है लेकिन कश्मीरी भाषा लिखने के लिए, मुसलमान अरबी अक्षरों का उपयोग करते हैं। कश्मीरी भाषा में शारदा के अलावा, देवनागरी लिपि, रोमन और पर्शियन-अरबिक का भी इस्तेमाल किया गया है। कश्मीरी भाषा में कोशुर न्यूज़, ख़ासर भवानी टाइम्स, विभूता, मिलर आदि पत्र और पत्रिकाएँ भी शामिल हैं।
अब कश्मीरी भाषा का सॉफ़्टवेयर भी आ गया है। रोमन लिपि का कश्मीरी भाषा के लिए भी इस्तेमाल किया गया है लेकिन यह लोकप्रिय नहीं है जम्मू और कश्मीर सरकार ने भी, अब पर्शियन-अरबिक लिपि, जो अब कश्मीरी लिपि के नाम से जानी जाती है, को ही आधिकारिक लिपि माना है। व्यापक रूप से इस भाषा को प्रकाशन में उपयोग किया जाता है<ref name=":0">{{Cite web |url=http://www.jagran.com/haryana/kurukshetra-7550915.html |title=संग्रहीत प्रति |access-date=28 अप्रैल 2017 |archive-url=https://web.archive.org/web/20190809165506/https://www.jagran.com/haryana/kurukshetra-7550915.html |archive-date=9 अगस्त 2019 |url-status=live }}</ref>।
कुछ लोग अरबी-फारसी लिपि में कश्मीरी लिखते हैं, जो [[उर्दू]] से बहुत अलग नहीं है। कश्मीरी में, अ, आ, उ, ऊ आदि जैसे व्यंजनों के कई रूप होते हैं और व्यंजनों में दन्तुलुलिये च, ज, मराठी की तरह होते हैं, लेकिन उन्हें सामान्य लेखन में नहीं रखा जाता है।
== नामकरण ==
कश्मीरी का स्थानीय नाम ''''काशुर'''' है; पर 17वीं शती तक इसके लिए "भाषा" या "देशभाषा" नाम ही प्रचलित रहा। संभवतः अन्य प्रदेशों में इसे कश्मीरी भाषा के नाम से ही सूचित किया जाता रहा। ऐतिहासिक दृष्टि से इस नाम का सबसे पहला निर्देश [[अमीर खुसरो]] (13वीं शती) की नुह-सिपिह्न (सि. 3) में [[सिंधी]], लाहौरी, तिलंगी और माबरी आदि के साथ चलता हे। स्पष्टतः यह दिशा वही है जो [[पंजाबी]], [[सिंधी]], [[गुजराती]], [[मराठी]], [[बँगला]], [[हिन्दी]] और [[उर्दू]] आदि भारतीय भाषाओं की रही है<ref>{{Cite web |url=http://www.deshbandhu.co.in/parishist/%E0%A4%95%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%AE%E0%A5%80%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%AA%E0%A4%BF-13640-2 |title=संग्रहीत प्रति |access-date=28 अप्रैल 2017 |archive-url=https://web.archive.org/web/20170429001618/http://www.deshbandhu.co.in/parishist/%E0%A4%95%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%AE%E0%A5%80%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%AA%E0%A4%BF-13640-2 |archive-date=29 अप्रैल 2017 |url-status=live }}</ref>।
== उद्भव ==
ग्रियर्सन ने जिन तर्कों के आधार पर कश्मीरी के "दारद" होने की परिकल्पना की थी, उन्हें फिर से परखना आवश्यक है; क्योंकि इससे भी कश्मीरी भाषा की गई गुत्थियाँ सुलझ नहीं पातीं। घोष महाप्राण के अभाव में जो दारद प्रभाव देखा गया है वह तो सिन्धी, पश्तू, पंजाबी, डोगरी के अतिरिक्त पूर्वी बँगला और राजस्थानी में भी दिखाई पड़ता है; पर क्रियापदों के संश्लेषण में कर्ता के अतिरिक्त कर्म के पुरुष, लिंग और वचन का जो स्पर्श पाया जाता है उसपर दारद भाषाएँ कोई प्रकाश नहीं डालतीं। सम्भवतः कश्मीरी भाषा "दारद" से प्रभावित तो है, पर उद्भूत नहीं।
== लिपि ==
15वीं शती तक कश्मीरी भाषा केवल [[शारदा लिपि]] में लिखी जाती थी। बाद में [[फारसी लिपि]] का प्रचलन बढ़ता गया और अब इसी का एक अनुकूलित रूप स्थिर हो चुका है। सिरामपुर से [[बाइबल]] का सर्वप्रथम कश्मीरी अनुवाद शारदा लिपि ही में छपा था, दूसरा फारसी लिपि में और कुछ संस्करण रोमन में भी निकले। [[देवनागरी]] को अपनाने के प्रयोग भी होते रहे हैं और आजकल यह देवनागरी में भी लिखी जा रही है।
'''<big>शारदा लिपि में</big>'''
==== व्यंजन ====
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==== स्वर वर्ण ====
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'''स्वर का निशान'''
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!स्वर का चिह्न व्यंजन प पर इंगित करता है
!विशेष व्यंजन पर स्वर के निशान को इंगित करने के विशिष्ट तरीके
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=== देवनागरी लिपि में ===
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|+ स्वर
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| औ
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| ौ
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|+ अतिरिक्त स्वर
! scope="row" | सतंत्र स्वर
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| ऎ || ऒ
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! scope="row" | मात्राएँ
| ॖ || ॗ || ऺ || ऻ || ॏ
| ॆ || ॊ
|}
{|class="wikitable"
|+ अन्य
| अं || अः
|}
{|class="wikitable"
|+ व्यंजन
|-
! scope="row" | सम्पूर्ण व्यंजन
| क ख ग च छ ज च़ छ़ ज़ ट ठ ड त थ द न प फ ब म य र ल व श स ह त्र
|}
===फारसी-अरबी लिपि में===
{|class="wikitable"
|+ कॉशुर की फारसी-अरबी वर्णमाला
| ا ب پ ت ٹ ث ج چ ح خ د ڈ ذ ر ڑ ز ژ س ش ص ض ط ظ ع غ ف ق ک گ ل م ن و ھ ء ی ے
|}
== ध्वनिमाला ==
कश्मीरी ध्वनिमाला में कुल 46 ध्वनिम (फ़ोनीम) हैं।
'''स्वर''' : अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ए, ओ, अ", आ", उ", ऊ", ए", ओ";
'''मात्रा स्वर''' : इ, -उ्, -ऊ्
'''अनुस्वार''' : अं
'''अन्त:स्थ स्वर''' : य, व
'''व्यंजन''' :
क, ख, ग, ङ, च, छ, ज; च, छ़, ज़, ञ;
ट, ठ, ड, त, थ, द, न; प, फ, ब, म;
य, र, ल, व, श, स, ''''
इ, ई, उ, ऊ और ए के रूप पदारम्भ में यि, यी, -वु, वू और ये" हो जाते हैं। च, छ और ज़ दन्ततालव्य हैं और छ़ ज़ का महाप्राण हैं। पदान्त अ बोला नहीं जाता।
== कारक ==
कश्मीरी कारकों में संश्लेषणात्मकता के अवशेष आज भी दिखाई पड़ते हैं; जैसे-
सु ज़ोग्न Ð। सो जनो Ð। स जनो; तिम ज़"न्य Ð। तें जने (ते जना:); त"म्य ज़"न्य Ð। तें3 जनें3 (तेन जनेन); तिमव, जन्यव Ð। तैं जनै: (तै: जनै:);
कर्म, संप्रदान, अपादान और अधिकरण में प्राय: संबंध के मूल रूप में ही [[परसर्ग]] जोड़कर काम निकाला जाता है; यद्यपि नपुंसक के अधिकरण (एफ.) में प्राचीन रूपों की झलक भी मिलती है।
संबंध कारक का मूल रूप यों है- तस ज़"निस Ð। तस्स जनस्स Ð तस्य जनस्य; तिमन ज़न्यन Ð। तेंणाँ जनेणां (तेषां जनानाम्)।
नपुंसक में- तथ गरस Ð। तद् घरस्स; रु" Ð। तम्हादो घरदो; तमि गरुक Ð। घरको (गृहक:); तमि गरि Ð। घरे (गृहे)।
== क्रियापद ==
कश्मीरी क्रियापदों में भारतीय अर्थविशेषताओं के ऊपर बहुत ही विलक्षण प्रभाव पड़ता गया है, जिनसे कुछ विद्वानों को उनके अभारतीय होने का भ्रम भी हुआ है। लिंग, वचन, पुरुष और काल के अनुसार एक-एक धातु के सैंकड़ों रूप बनते हैं; जैसे-
वुछ (वीक्षस्व)
वुछान छु ( वीक्ष (म) मणः अस्ति) (वह देखता/देख रहा है);
वुछान छुम (वह मुझे देखता/देख रहा है);
वुछान छम (वह मुझे देखती/देख रही है।)
-छुहम (तू मुझे . . . है);
-छसथ (मैं तुम्हें. . . हूँ);
-छुसन (में उसे . . .हूँ);
वुछन (मैं उसे देखूँगा); वुछथ (मैं तुझे देखूँगा);
वुछुथ (तुमने देखा);
वुछथस (तुमने मुझे देखा)। तुमने उसके लिए देखा);
वुछथन (तुमने उसे देखा);
वुछिथ (तुमने उन्हें देखा);
वुछु"थ (तुमने उस (स्त्री) को देखा);
वुछ्यथ (तुमने उन (स्त्रियों) को देखा);
वुछुथम (तुमने मेरा/मेरे लिए देखा);
वुछ्यथम (तुमने मेरी/मेरे लिए देखीं), आदि-आदि।
क्रियापदों की यह विलक्षण प्रवृत्ति संभवत: मध्य एशियाई प्रभाव है जो [[खुरासान]] से होकर [[कश्मीर]] पहुँचा है।
== इन्हें भी देखें ==
* [[कश्मीरी साहित्य]]
* [[दार्दी भाषाएँ]]
==सन्दर्भ==
{{टिप्पणीसूची|2}}
== बाहरी कड़ियाँ ==
* [https://web.archive.org/web/20140707114156/http://kas-encyclopedia.wikia.com/wiki/%E0%A4%86%E0%A4%B9%E0%A4%AE_%E0%A4%B8%E0%A4%AB%E0%A4%BC%E0%A4%BE कश्मीरी विश्वकोश] (देवनागरी लिपि में)
* [https://web.archive.org/web/20120210223233/http://www.koshur.org/index.html कशूर] - कश्मीरी भाषा के आनलाइन ट्यूटोरियल
* [https://web.archive.org/web/20170519013318/http://www.koshur.org/pdf/BasicReader.pdf Basic Reader for Kashmiri Language ]
* [https://web.archive.org/web/20170517010606/http://www.koshur.org/pdf/Let%20Us%20Learn%20Kashmiri.pdf कॉशुर किथॖ पाठ्य परव तॖ लेखव? ] (How to read and write Kashmiri in Devanagari?)
* [https://web.archive.org/web/20140328213351/http://books.google.co.in/books?id=eji45TXYiUQC&printsec=frontcover#v=onepage&q=&f=false कश्मीरी भाषा का भाषाशास्त्रीय अध्ययन] (गूगल पुस्तक ; लेखक - त्रिलोकीनाथ गंजू)
* [https://web.archive.org/web/20110703112503/http://hi.wiktionary.org/wiki/%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%AE%E0%A5%80%E0%A4%B0%E0%A5%80_%E0%A4%B6%E0%A4%AC%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%B6 हिन्दी-कश्मीरी शब्दकोश]
* [http://bharatdiscovery.org/india/देवनागरी_लिपि_(कश्मीरी_भाषा_के_सन्दर्भ_में)_-मोहनलाल_सर देवनागरी लिपि (कश्मीरी भाषा के सन्दर्भ में)]{{Dead link|date=जून 2020 |bot=InternetArchiveBot }} (मोहनलाल सर)
* [https://web.archive.org/web/20120723093507/http://archive.org/details/dictionaryofkash01grieuoft A dictionary of the Kashmiri language]
* [https://web.archive.org/web/20161128002940/http://www.kashmirizaban.com/ Online Kashmiri Dictionary]
* [https://web.archive.org/web/20110304234526/http://www.koausa.org/Saints/index.html kashmiri saints and Sages]
* [https://web.archive.org/web/20170506140443/http://dsal.uchicago.edu/dictionaries/grierson/ A dictionary of the Kashmiri language] (George Abraham Grierson, Calcutta: Asiatic Society of Bengal, 1932)
*[https://web.archive.org/web/20170308043133/https://makingindiaonline.in/online-news-in-hindi/2017/02/25/kashmir-language-devnagari-lipi/ काश्मीरी भाषा को मिल सकती है देवनागरी लिपि के प्रयोग की मान्यता]
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प्राकृत
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अनुनाद सिंह
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/* 'प्राकृत' शब्द की व्युत्पत्ति */
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[[चित्र:Suryaprajnapati Sutra.jpg|right|thumb|400px|१५०० ई में जैन प्राकृत में लिखा गया [[सूर्यप्रज्ञप्ति सूत्र|सूर्यप्रज्ञप्तिसूत्र]] । इसकी रचना मूलतः तीसरी-चौथी शताब्दी ईसापूर्व में की गयी थी।]]
भारतीय आर्यभाषा के मध्ययुग में जो अनेक प्रादेशिक भाषाएँ विकसित हुई उनका सामान्य नाम '''प्राकृत''' है और उन भाषाओं में जो ग्रंथ रचे गए उन सबको समुच्चय रूप से [[प्राकृत साहित्य]] कहा जाता है। प्राकृत का का प्रचार प्राचीन काल में भारत में था और यह प्राचीन [[संस्कृत नाटक|संस्कृत नाटकों]] आदि में स्त्रियों, सेवकों और साधारण व्यक्तियों की बोलचाल में तथा अलग ग्रंथों में पाई जाती है । भारत की बालचाल की भाषाएँ बोलचाल की प्राकृतों से बनी हैं ।
विकास की दृष्टि से भाषावैज्ञानिकों ने [[भारत]] में आर्यभाषा के तीन स्तर नियत किए हैं - प्राचीन, मध्यकालीन और अर्वाचीन। प्राचीन स्तर की भाषाएँ [[वैदिक संस्कृत]] और [[संस्कृत भाषा|संस्कृत]] हैं, जिनके विकास का काल अनुमानतः ईसापूर्व 2000 से ईसापूर्व 600 तक माना जाता है। मध्ययुगीन भाषाएँ हैं - [[मागधी]], [[अर्धमागधी]], [[शौरसेनी]], [[पैशाची भाषा]], [[महाराष्ट्री प्राकृत|महाराष्ट्री]] और [[अपभ्रंश]]। इनका विकासकाल ई. पूर्व 600 ई. 1000 तक पाया जाता है।
[[हेमचन्द्राचार्य|हेमचंद्र]] ने संस्कृत को प्राकृत की 'प्रकृति' कहकर सूचित किया है कि प्राकृत, संस्कृत से निकलती है, पर प्रकृति का यह अर्थ नहीं है । केवल संस्कृत का आधार रखकर प्राकृत व्याकरण की रचना हुई है। पर अनुमान है कि ईसवी सन् से प्रायः ३०० वर्ष पहलै यह भाषा प्राकृत रूप में आ चुकी थी । उस समय इसके पश्चिमी और पूर्वी दो भेद थे । यह पूर्वी प्राकृत ही [[पालि|पाली भाषा]] के नाम से प्रसिद्ध हुई। बौद्ध धर्म के प्रचार के साथ इस मागधी या पाली भाषा की बहुत अधिक उन्नति हुई, क्योंकि बौद्ध धर्म के सभी ग्रंथ पहले इसी भाषा में लिखे गए । धीरे-धीरे प्राचीन प्राकृतों के विकास से आज से प्रायः १००० वर्ष पहले देश-भाषाओं का जन्म हुआ था । जिस प्रकार संस्कृत भाषा का सबसे पुराना रूप वैदिक भाषा है, उसी प्रकार प्राकृत भाषा का भी जो पूराना रूप मिलता है उसे "आर्ष प्राकृत" कहते हैं । कुछ बौद्ध तथा जैन विद्वानों का मत है कि [[पाणिनि]] ने इस आर्ष प्राकृत का भी एक व्याकरण बनाया था । पर कुछ लोगों को यह संदेह है कि कदाचित् पाणिनि के समय प्राकृत भाषा का जन्म ही नहीं हुआ था । मार्कण्डेय ने प्राकृत के इस प्रकार भेद किए हैं—(१) भाषा (महाराष्ट्रा, शौरसेनी, प्राच्या, आवंती, मागधी, अद्धंमागधी), (२) विभाषा (शाकारी, चांडाली, शावरी, आभीरी, टाक्की, औड्री, द्रविडी), (३) अपभ्रंश, और (४) पैशाची । चूलिका पैशाची आदि कुछ निम्न श्रेणी की प्राकृतें भी हैं । सबसे प्राचीन काल में मागधी की भाषा पाली के नाम से साहित्य की ओर अग्रसर हुई । [[बौद्ध ग्रंथ]] पहले इसी भाषा में लिखे गए । यह मागधी, व्याकरणों की मागधी से पृथक् और प्राचीन भाषा है । पीछे जैनों के द्वारा अर्द्धमागधी और महाराष्ट्री का आदर हुआ । महाराष्ट्री साहित्य की प्राकृत हुई जिसके एक कृत्रिम रूप का व्यवहार संस्कृत के नाटकों में हुआ । इन प्राकृतों से आगे चलकर और घिसकर जो रूप हुआ वह [[अपभ्रंश]] कहलाया । इसी अपभ्रंश के नाना रूपों से आजकल की आर्य शाखा की देशभाषाएँ निकली हैं । इसके अतिरिक्त [[ललितविस्तर]] में एक प्रकार की और प्राकृत मिलती है जो संस्कृत से बहुत कुछ मिलती जुलती है।
== प्राकृत का उदाहरण ==
निम्नलिखित प्राकृत गद्यांश "अमंगलियपुुरिसस्स कहा" (अमांगलिक पुरुष की कथा) से लिया गया है।
: ''एगंमि नयरे एगो अमंगलिओ मुद्धो पुरिसो आसि। सो एरिसो अत्थि, जो को वि पभायंमि तस्स मुहं पासेइ, सो भोयणं पि न लहेज्जा। पउरा वि पच्चूसे कया वि तस्स मुहं न पिक्खंति। नरवइणावि अमंगलियपुरिसस्स वट्टा सुणिआ। परिक्खणथं णरिंदेण एगया पभायकाले सो आहूओ, तस्स मुहं दिट्ठं। जया राया भोयणत्थमुवविसइ, कवलं च मुहे पक्खिवइ, तया अहिलंमि नयरे अकम्हा परचक्कभएण हलबोलो जाओ। तया नरवई वि भोयणं चिच्चा सहसा उत्थाय ससेण्णो नयराओ बहिं निग्गओ। भयकारणमदट्ठूण पुणो पच्छा आगओ समाणो नरिंदो चिंतेइ, अस्स अमंगलियं अस्स बोल्लाविऊण सरूवं मए पच्चक्खं दिट्ठं, तओ एसो हंतव्वो ̧ एवं चिंतिऊण अमंगलियं बोल्लाविऊण वहत्थं चंडालस्स अप्पेइ।
: ''विविध् प्रावृफत-पाठ: वज्जालग्ग ;वज्जालग्गंद्धजया एसो रुयंतो, सकम्मं निंदंतो चंडालेण सह गच्छेइ। तया एगो कारुणिओ बुद्धिणिहाणो वहाइ नेइज्जमाणं तं दट्ठूणं कारणं णच्चा तस्स रक्खणाय कण्णे किंपि कहिऊण उवायं दंसेइ। हरिसंतो जया वहत्थंभे ठविओ, तया चंडालेण सो पुच्छिओ, "जीवणं विणा तव कावि इच्छा सिया, तया मग्गसु त्ति।" सो कहेइ, "मज्झ नरिंदमुहदंसणेच्छा अत्थि। जया सो नरिंदसमीवमाणीओ तया नरिंदो तं पुच्छइ, "किमेत्थ आगमणपओयणं? सो केहेइ, "हे नरिंद! पच्चूसे मम मुुहस्स दंसणेण भोयणं न लब्भइ, परंतु तुम्हाणं मुह पेक्खणेण मम वहो भविस्सइ, तथा पउरा किं कहिस्संति?। मम मुहाओ सिरिमंताणं मुहदंसणं केरिसपफलयं संजायं, नायरा वि पभाए तुम्हाणं मुुहं कहं पासिहिरे। एवं तस्स वयणजुत्तीए संतुट्ठो नरिंदो वहाएसं निसेहिऊण पारितोसिअं च दच्चा तं अमंगलिअं संतोसीअ।
; हिन्दी-भावार्थ
: एक नगर में एक अमांगलिक मूर्ख-पुरुष था। वह ऐसा था कि जो कोई भी प्रभात में उसके मुख को देखता, वह उस दिन भोजन भी नहीं पाता (उसे भोजन भी नहीं मिलता)। नगर के निवासी प्रातःकाल में कभी भी उसके मुंह को नहीं देखते थे। राजा के द्वारा भी अमांगलिक पुरुष की बात सुनी गयी थी। परीक्षा के लिए राजा के द्वारा एक बार प्रभातकाल में वह बुलाया गया। अमांगलिक पुरुष का मुख देखकर ज्यों हि राजा भोजन के लिए बैठा और मुंह में (रोटी का) ग्रास रखा त्यों हि समस्त नगर में अकस्मात् शत्रु के द्वारा आक्रमण के भय से शोरगुल हुआ। तब राजा भी भोजन को छोड़कर (और) शीघ्र उठकर सेना-सहित नगर से बाहर गया और भय के कारण बीत जाने पर वापस आया। अहंकारी राजा ने सोचा, इस अमांगलिक के स्वरूप को मेरे द्वारा प्रत्यक्ष देखा गया, इसलिए यह मारा जाना चाहिए।
: इस प्रकार विचारकर अमांगलिक को बुलवाकर वध के लिए चांडाल को सौंप दिया। जब यह अमांगलिक रोता हुआ स्व-कर्म की निन्दा करता हुआ चाण्डाल के साथ जा रहा था। तब एक दयावान बुद्धिमान ने वध के लिए ले जाए जाते हुए उसको देखकर, कारण को जानकर उसकी रक्षा के लिए उसके कान में कुछ कहकर उपाय सुझाया। इसके पफलस्वरूप वह प्रसन्न होते हुए चला। जब वह वध के खम्भे पर खड़ा किया गया तब चाण्डाल ने उससे पूछा- जीवन के अलावा कोई तुम्हारी, (वस्तु की) इच्छा हो, तो (तुम्हारे द्वारा) वह वस्तुद्ध मांगी जानी चाहिए। उसने कहा मेरी इच्छा राजा के मुख-दर्शन की है। तब वह राजा के सामने लाया गया। राजा ने उसको पूछाः यहाँ आने का प्रयोजन क्या है? उसने कहाः हे राजन्! प्रातःकाल में मेरे मुख के दर्शन से (तुम्हारे द्वारा) भोजन ग्रहण नहीं किया गया, परन्तु तुम्हारा मुख देखने से मेरा वध होगा तब नगर के निवासी क्या कहेंगे? मेरे मुँह (दर्शन) की तुलना में श्रीमान् का मुख-दर्शन कैसा फल उत्पन्न करता है? नागरिक भी प्रभात् में तुम्हारे मुख को कैसे देखेंगे? इसप्रकार उसकी वचन की युक्ति से संतुष्ट हुए राजा ने वध के आदेश को रद्द करके और उसको पारितोषिक देकर उस अमांगलिक को संतुष्ट किया।
== 'प्राकृत' शब्द की व्युत्पत्ति ==
'प्राकृत' शब्द को लेकर अनेकों अर्थ विचारणाएं उपलब्ध होती हैं। उन में से कुछ ये हैं-
*(०) प्रकृत्या भवं प्राकृतं
* (अर्थ : जो स्वाभाविक रूप से उद्भूत हुई, वही प्राकृत है।)
*(१) प्रकृतिः संस्कृतं तत्र भवं तत आगतं वा प्राकृतम् (हेमचन्द्रकृत प्राकृत-व्याकरण ८।१।१)
: (अर्थ : प्रकृति या मूल संस्कृत है ; और जो संस्कृत से उत्पन्न हुआ है या वहाँ से से आगत है, वह प्राकृत है। )
(2) प्रकृत्या स्वभावेन सिद्धं प्राकृतम्
: (अर्थ: जन सामान्य की स्वाभाविक भाषा प्राकृत है ।)
*(२) प्रकृतिः संस्कृतं तत्र भवं प्राकृतमुच्यते (प्राकृतसर्वस्व १।१)
: (अर्थ : प्रकृति या मूल संस्कृत है, उससे उत्पन्न भाषा को प्राकृत कहते हैं।)
*(३) प्रकृतिः संस्कृतं तत्र भवत्वात् प्राकृतं स्मृतम् (प्राकृत-चन्द्रिका)
: (अर्थ : प्रकृति या मूल संस्कृत है, उससे उत्पन्न भाषा को प्राकृत कहते हैं।)
*(४) प्राकृतेः संस्कृतायास्तु विकृतिः प्राकृती मता (लक्ष्मीधर कृत षड्भाषाचन्द्रिका, पृष्ठ ४ )
: ( अर्थ : संस्कृत की विकृति, प्राकृत है।)
*(५) प्राकृतस्य तु सर्वमेव संस्कृत योनिः (वासुदेवकृत कर्पूरमञ्जरी सञ्जीवनी-टीका ९।२ )
: (अर्थ : प्राकृत की जननी संस्कृत है।)
*(६) प्रकृतेः संस्कृतात् आगतं प्राकृतम् (सिंह देवमणि)
: ( अर्थ : प्रकृति संस्कृत से आगत प्राकृत है।)
*(७) प्रकृतिः संस्कृतं तत्र भवं प्राकृतमुच्यते (मार्कण्डेय कृत प्राकृतसर्वस्व)।
: ( अर्थ : प्रकृति या मूल संस्कृत है, उससे उत्पन्न भाषा को प्राकृत कहते हैं। )
*(८) प्राचीन विद्वान नमिसाधु के अनुसार प्राकृत शब्द का अर्थ है- व्याकरण आदि संस्कारों से रहित लोगों का स्वाभाविक वचन-व्यापार। उससे उत्पन्न अथवा वही वचन व्यापार प्राकृत है ।
अब प्रायः सभी विद्वानों ने इस बात को स्वीकार लिया है कि प्राकृत की उत्पत्ति संस्कृत से हुई है। प्राकृत शब्द की इन सब व्युत्पत्तियों का जब गंभीरता से परिशीलन करते हैं तो यह स्पष्ट हो जाता है कि 'प्राकृत' शब्द, 'प्रकृति' शब्द से निष्पन्न हुआ है और प्रकृति का अर्थ है-संस्कृत भाषा। इस विचारणा से यह स्पष्ट हो जाता है कि संस्कृत भाषा प्राकृत भाषा की जननी है । अर्थात् संस्कृत भाषा से होने वाली भाषा प्राकृत भाषा कहलाती है ।
== मध्ययुगीन भाषाओं '''(प्राकृत)''' की मुख्य विशेषताएँ ==
प्राकृत भाषा में द्विवचन नहीं है और उसकी वर्णमाला में ऋ ऋ लृ लृ ऐ और औ स्वर तथा श ष और विसर्ग (ः) नहीं हैं । प्राचीन भाषाओं से उक्त मध्ययुगीन भाषाओं में मुख्यतः निम्न विशेषताएँ पाई जाती हैं :
'''(1)''' संस्कृत के स्वरों में ऋ, लृ, एवं ऐ और औ का मध्ययुगीन भाषाओं में अभाव है। ए और ओ की ह्रस्व मात्राओं का प्रयोग इन भाषाओं की अपनी विशेषता है।
'''(2)''' विसर्ग यहाँ सर्वथा नहीं पाया जाता।
'''(3)''' क से लेकर म् तक के स्पर्शवर्ण पाए जाते हैं। किंतु अनुनासिकों में संकोच तथा व्यत्यय होता है।
'''(4)''' तीनों ऊष्म वर्णो के स्थान पर केवल एक और विशेषतः '''स् ''' ही अवशिष्ट पाया जाता है।
'''(5)''' संयुक्त व्यंजनों का प्राय अभाव है। दोनों संयोगी व्यंजनों का या तो समीकरण कर लिया जाता है अथवा स्वरागम द्वारा दोनों को विभक्त कर दिया जाता है, या उनमें से एक का लोप कर दिया जाता है।
'''(6)''' द्वित्व व्यंजन से पूर्व का दीर्घ स्वर ह्रस्व कर दिया जाता है एवं संयुक्त व्यंजन में से एक का लोप कर उससे पूर्व का ह्रस्व स्वर दीर्घ कर दिया जाता है।
'''(7)''' हलन्त संज्ञाओं और धातुओं को स्वरान्त बनाकर चलाया जाता है।
'''(8)''' व्याकरण की दृष्टि से संज्ञाओं तथा क्रियाओं के रूपों में द्विवचन नहीं पाया जाता।
'''(9)''' [[कारक]] के रूपों में संकोच पाया जाता है।
'''(10)''' क्रियाओं में गणभेद एवं परस्मैपद आत्मनेपद का भेद नहीं किया जाता।
'''(11)''' सभी प्रकार के रूप विकल्प से चलते हैं।
'''(12)''' क्रियारूपों में कालादि भेदों का अल्पीकरण हुआ है। इनका बहुत काम बहुधा कृदंतों से चलाया जाता है।
== प्राकृत की उत्पत्ति के विभिन्न सिद्धान्त ==
अब प्रश्न यह होता है कि मध्ययुग की भाषाओं में संस्कृत की अपेक्षा इतनी अधिक विशेषताएँ कब, क्यों, कैसे और कहाँ पर उत्पन्न हो गईं। प्राकृत के वररुचि आदि वैयाकरणों ने प्राकृत भाषाओं की प्रकृति संस्कृत को मानकर उससे प्राकृत शब्द की व्युत्पत्ति की है। "प्रकृति: संस्कृतं, तत्रभवं तत आगतं वा प्राकृतम्"। किंतु संस्कृत भाषा का वर्तमान स्वरूप स्वयं ई. पूर्व छठी शती के लगभग विकसित हुआ है और उसे स्थिर रूप तो पाणिनि द्वारा ई. पू. तीसरी चौथी शती में दिया गया है। संस्कृत के उक्त प्रकार के अनेक लक्षणों से विभिन्न भाषाओं का छठी शती ई. पू. में ही उत्पन्न होना कैसे संभव हो सकता है ? इसके अतिरिक्त प्राकृत में ऐसे भी अनेक शब्द पाए जाते हैं जिनका संस्कृत में अभाव है, किंतु वैदिक भाषा में वे विद्यमान हैं। प्राकृत की अनेक प्रवृत्तियों को लिए हुए बहुत से शब्द वेदों में पाए जाते हैं, जो [[संस्कृत व्याकरण]] के अनुकूल नहीं हैं। इस समस्या पर अनेक पाश्चात्य विद्वानों का एक मत यह है कि आर्यभाषा जब भारतवर्ष में प्रचलित हुई, अनार्य लोग उसका आर्यो के सदृश शुद्ध शुद्ध उच्चारण और प्रयोग नहीं कर पाए; अतएव उन्होंने अपने निजी उच्चारण एवं भाषाशैली के अनुसार उसे बोलना प्रारंभ किया और उनके संपर्क से इस का प्रभाव आर्यो पर भी पड़ा। इसी के फलस्वरूप प्राकृत भाषा की प्रवृत्तियों का विकास हुआ। इस मत के समर्थन में यह बात भी ध्यान देने योग्य है कि वैदिक काल से ही जो ट् ठ् आदि मूर्धन्य ध्वनियों का प्रवेश आर्यभाषा में हुआ, वह बहुलता से उस काल की अनार्य भाषाओं का ही प्रभाव था। किंतु प्राचीन अनार्य भाषाओं का विश्लेषण कर यह सिद्ध नहीं किया जा सकता कि प्राकृत की उक्त विशेषताओं का बीज उन अनार्य भाषाओं में विद्यमान थे। इसीलिये इस मत के संबंध में विवाद है।
दूसरा मत यह है कि वेदों की भाषा बोलनेवाले जातियों में ही स्वयं ध्वन्यात्मक भेद थे, जिनके कुछ प्रमाण वेदों में ही उपस्थित है अनुमानत: वेदों की भाषा उस काल की रूढ़िबद्ध वेदभाषा के क्रमविक से अनुमानत: कई हजार वर्षो में संस्कृत भाषा का विकास हुआ, पर विशेषत: सुशिक्षित पुरोहित वर्ग की अपनी भाषा थी, तथा जिसमें धार्मिक कार्यों मे ही उपयोग किया जाता था। उतने ही काल प्राचीनतम वैदिक भाषा की समकालीन जनसाधारण की लोकभाषा से संस्कृत के साथ साथ ही प्राकृत का भी विकास हुआ, जिसमें प्रदेशभेदानुसार नाना भेद थे। इस संबंध में यह भी बात ध्यान देने योग्य है कि भारत में आर्यों का प्रवेश एक ही काल में एवं एक धारा में हुआ नहीं कहा जा सकता। यदि आगे पीछे आनेवाली आर्य जातियों के भाषाभेद से प्राकृत भाषाओं के उद्गम और विकास व संबंध हो तो आश्चर्य नहीं। इस संबंध में हॉर्नले और ग्रियर्सन के वह मत भी उल्लेखनीय है जिसके अनुसार भारतीय आर्यभाषाएँ दो वर्गो में विभाजित पाई जाती हैं हृ एक बाह्य और दूसरा आभ्यंतर उत्तर, पश्चिम, दक्षिण और पूर्व की भाषाओं के उक्त प्रकार दो वर्ग उत्पन्न हो गए। इसे संक्षेप में समझने के लिये महाराष्ट्र प्रदेश के नामों जैसे गोखले, खेर, परांजपे, पाध्ये, मुंजे गोडवोले, तांबे, तथा लंका में प्रचलित नामों जैसे गुणतिलके सेना नायके, बंदरनायक आदि में जो अकारांत कर्ता एक वचन के रूप से ए प्रत्यय दिखाई देता है, वही पूर्व की मागधी प्राकृत मे अपने नियमित स्थिरता को प्राप्त हुआ पाया जाता है। आदि आर्यभाषा मे वैदिक र् के स्थान पर ल् का उच्चारण भी माना गया है, जैसे कुलउ उ श्रोत्र। उसी प्रवृत्ति के फलस्वरूप वैदिक वृक् के स्थान पर जर्मन भाषासमूह में वुल्फ़ एवं ग्रीक में पृथु का प्लुतुस् पाया जाता है। यह र् के स्थान पर ल् का उच्चाराण ध्वनि मागधी से सुरक्षित हैं, किंतु उसी काल की बोलियों में उनके समीकृत रूप जैसे ओत्त अत्त, सत्त, भी पाए जाते हैं। बोगाजकुई के भिन्न मितन्नि (मैत्रा यणी ?) आर्यशाखा के जो लगभग 200 ई. पू. के लेख मिले हैं उनमें इंद्र और नासत्य देवताओं के नाम इंदर और नासातीय रूप से अंकित हैं। उनमें स्वरभक्ति द्वारा संयुक्त वर्णो के संयुक्त किए जाने की प्रवृत्ति विद्यमान है। वरुण देवता का नाम "उरुवन" रूप में उल्लिखित है जिसमें स्वर के अग्रागम तथा वर्णव्यत्यय की प्रवृत्ति स्पष्ट दिखाई देती है। ये प्रवृत्तियाँ प्राकृत के सामान्य लक्षण हैं। पालि में प्रयुक्त इध संस्कृत तथा वैदिक के इह से पूर्वकालीन परंपरा का है इसमें भी किसी को कोई संदेह नहीं है। आदि आर्यभाषा में ए तथा ओ के ह्रस्व रूप थे; ऐ और औ का अभाव था; किंतु अइ, अउ जैसे मिश्र स्वर प्रचलित थे; अनुनासिक स्पर्शों का संकोच था; तीन ऊष्मों में केवल एकमात्र स् ही था। ये ध्वन्यात्मक विशेषताएँ प्रधानत: शौरसेनी प्राकृत में सुरक्षित पाई जाती हैं, इत्यादि। इन लक्षणों के सद्भाव का समाधान समुचित रूप से यही मानकर किया जा सकता है कि प्राकृत भाषाओं में उनका आगमन प्राचीनतम आर्य जातियों की बोलियों से अविच्छिन्न परंपरा द्वारा चला आया है। यथार्थत: संस्कृत हो अथवा वैदिक को ही प्राकृत की प्रकृति मान लेने से उक्त लक्षणों का कोई समाधान नहीं होता।
तब प्राकृत के वैयाकरणों ने संस्कृत को प्राकृत की प्रकृति क्यों कहा? इसका कारण उन व्याकरणों के रचे जाने के काल और उनके स्वरूप पर ध्यान देने से स्पष्टत: समझ मे आ जाता है। वे व्याकरण उस काल में लिखे गए जब विद्वत्समाज में प्राकृत की अपेक्षा संस्कृत का अधिक प्रचार और सम्मान था। वे लिखे भी संस्कृत भाषा में गए हैं तथा उनका उद्देश्य भी संस्कृत नाटकों में भी प्राकृतिकता रखने के लिए करना पड़ता था और जिनमें उत्कृष्ट साहित्यिक रचनाएँ भी निर्मित हो चुकी थीं। अतएव उन वैयाकरणों ने संस्कृत को आदर्श ठहराकर उससे जो विशेषताएँ प्राकृत में थीं उनका विवरण उपस्थित कर दिया और इसकी सार्थकता संस्कृत को प्राकृत की प्रकृति कहकर सिद्ध कर दी। तथापि नमिसाधु ने अपना यह मत स्पष्ट प्रकट किया है कि प्रकृति का अर्थ लोक या जनता है और जनसाधारण को भाषा होने से ही वह प्राकृत कहलाई। प्रकृति का अर्थ लोक बहुत प्राचीन है तथा [[कालिदास]] ने भी उसका लोक के अर्थ में प्रयोग किया है (राजा प्रकृति रंजनात्, रघु. सर्ग, 4)। प्राकृतों की इस अति प्राचीन परंपरा के प्रकाश में इन भाषाओं को वैदिक और संस्कृत की अपेक्षा उत्तरकालीन व मध्ययुगीन कहने का औचित्य भी विचारणीय हो जाता है। उसकी यदि कोई सार्थकता है तो केवल इतनी कि ये भाषाएँ वैदिक और संस्कृत के पश्चात् ही साहित्य में प्रयुक्त हुईं। उनका प्रथम बार धार्मिक प्रचार के लिये उपयोग ई. पू. छठी शती मे श्रमण महावीर और बुद्ध ने किया। तथा उनकी साहित्यिक रचनाओं में शब्दों तथा शैली की दृष्टि से संस्कृत का बड़ा प्रभाव दृष्टिगोचर होता है।
== प्राकृत भाषा का स्वरूप एवं क्रमिक विकास ==
भाषा जब तक बोली के रूप में रहती है, उसमें देश और काल की अपेक्षा निरंतर परिवर्तन होते रहते हैं। इसी नियम के अनुसार काल के सापेक्ष प्राकृत के तीन स्तर स्वीकार किए गए हैं -
* पूर्वकालीन (ई. पू. 600 से 100 ई. तक),
* मध्यकालीन (ई. 100 से 600 ई. स. तक) तथा
* उत्तरकालीन (ई. सन् 600 से 1000 तक)।
=== प्राचीन स्तर की प्राकृत ===
श्रमण महावीर और बुद्ध ने जिस भाषा या भाषाओं में अपने उपदेश दिए वे प्राकृत के प्राचीन स्तर के उत्कृष्ट रूप रहे होंगे। उनके उपदेशों की भाषा को क्रमश: मागधी एवं अर्धमागधी कहा गया है। किंतु वर्तमान में पालि कही जानेवाली भाषा के ग्रंथों में हमे मागधी का वह स्वरूप नहीं मिलता जैसा पश्चात्कालीन वैयाकरणों ने बतलाया है। तथापि भाषा का जो स्वरूप बौद्ध [[त्रिपिटक]] ग्रंथों में पाया जाता है वह प्राकृत के प्राचीन स्तर का ही स्वीकार किया जाता है। इस स्तर प्राकृत का सर्वत: प्रामाणिक स्वरूप अशोक की शिलाओं और स्तंभो पर उत्कीर्ण धर्मलिपियों में उपलबध होता है। इन शिलाओं की संख्या लगभग 30 है। सौभाग्य से इनमें केवल ई. पूर्व तृतीय शती की प्राकृत भाषा का स्वरूप सुरक्षित है, किंतु उन प्रशस्तियों में तत्कालीन भाषा के प्रादेशिक भेद भी हमें प्राप्त होते हैं। पश्चिमोत्तर प्रदेश में शहबाजगढ़ी और मानसेहरा नामक स्थानों की शिलाओं पर जो 14 प्रशस्तियाँ खुदी हुई पाई गई हैं उनमें स्पर्श वर्णों के अतिरिक्त र् और ल् एवं श् ष् स् ये तीनों ऊष्म प्राय: अपने अपने स्थानों पर सुरक्षित हैं। रकार युक्त संयुक्त वर्ण भी दिखाई देते हैं। किंतु ज्ञ और णय के स्थान पर ंञ का प्रयोग पाया जाता है। इस प्रकार यह भाषा वैयाकरणों की पैशाची प्राकृत का पूर्वरूप कही जा सकती है। ये ही 14 प्रशस्तियाँ उस भाषा को शौरसेनी का प्राचीन रूप प्रकट करती हैं। उत्तर प्रदेशवर्ती कालसी, जौगड़ नछौली नामक स्थानों पर भी वे ही 14 प्रशस्तियाँ उत्कीर्ण हैं। इनमें हमें र् के स्थान पर ल् तथा अकारांत संज्ञाओं के कर्ता कारक एक वचन की ए विभक्ति प्राप्त होती है। तथापि तीनों ऊष्मों के स्थान पर श् नहीं किंतु स् का अस्तित्व मिलता है। इस प्रकार यहाँ मागधी प्राकृत के तीन लक्षण नहीं। अतएव इसे मागधी की अपेक्षा अर्धमागधी प्राकृत के तीन लक्षणों में से दो प्रचुर रूप से प्राप्त होते हैं, किंतु सकार संबंधी तीसरा लक्षण नहीं। अतएव इसे मागधी की अपेक्षा अर्धमागधी प्राकृत का प्राचीन रूप कहना अधिक उपयुक्त प्रतीत होता है। अशोक की प्रशस्तियाँ उनके भाषात्मक महत्व के अतिरिक्त साहित्यिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण हैं। उनमें प्राचीन भारत (ई. पू. 3री शती) के एक ऐसे सम्राट के नीति, धर्म एवं सदाचार संबंधी विचार और उपदेश निहित हैं जिसने न केवल इस विशाल देश के समस्त भागों पर राजनीतिक अधिकार ही प्राप्त किया था, तथा देश के बाहर भी अलेक्जेंड्रिया तक भिन्न भिन्न देशों से सांस्कृतिक संबंध स्थापित किया था और यहाँ अपने धर्मदूत भी भेजे थे। इस सबके बाहर भी अलेक्जेंड्रिया तक भिन्न भिन्न देशों से सांस्कृतिक संबंध स्थापित किया था और वहाँ अपने धर्मदूत भी भेजे थे। इन सब दृष्टियों से यह साहित्य अपने ढंग का अद्वितीय है।
प्राचीन स्तर की प्राकृत का दूसरा उदाहरण उड़ीसा की उदयगिरि खंडगिरि की हाथीगुंफा नामक गुहा में उत्कीर्ण कलिंगसम्राट् खारवेल का लेख है जो अनेक बातों में अशोक के शिलालेखों से समता रखता है। किंतु इसकी अपनी विशेषता यह है कि इसमें उस सम्राट् के वर्षो की विजयों तथा लोककल्याण संबंधी कार्यो का विवरण लिखा गया है। इसका काल अनुमानत: ईसापूर्व द्वितीय शती है। उसकी भाषा [[सम्राट अशोक|अशोक]] की [[अशोक के अभिलेख|गिरनार की प्रशस्तियों]] से मेल खाती है, अतएव वह प्राचीन शौरसेनी कही जा सकती है। इस प्राकृत का ईसापूर्व तीसरी शताब्दी में [[पश्चिमी भारत|पश्चिम भारत]] और उसके सौ, डेढ़ सौ वर्ष पश्चात् [[षट्खण्डागम|जैन षट्खंडागम]] आदि ग्रंथों एवं [[कुन्दकुन्द|कुंदकुंदाचार्य]] आदि की दक्षिण प्रदेश की रचनाओं में पाया जाना उसकी तत्कालीन दिग्विजय तथा सार्वभौमिकता का प्रमाण है। उस काल में इतना प्रचार और किसी भाषा का नहीं पाया जाता।
इसी प्राचीन स्तर की प्राकृत का प्रयोग हमें [[अश्वघोष]] कृत सारिपुत्र प्रकरण आदि नाटकों के उपलब्ध खंडों में प्राप्त होता है। इनमें नायकों तथा एक दो अन्य पात्रों को छोड़कर शेष सभी पात्र प्राकृत बोलते हैं, जिसके तीन रूप स्पष्ट दिखाई देते हैं। सारिपुत्र प्रकरण में दुष्ट की भाषा में र् के स्थान पर ल्, तीनों ऊष्मों के स्थान पर श् तथा अकारांत संज्ञाओं के कर्ताकारक एकवचन के रूप में ए विभक्ति, ये तीन लक्षण स्पष्टत: उस भाग को मागधी सिद्ध करते हैं। यहाँ क् त् आदि अघोष वर्ण न तो ग् द् आदि सघोषों में परिवर्तित हुए मिलते, न थ घ् आदि महाप्राण वर्ण ह् में परिवर्तित हुए मिलते, न थ् घ् आदि महाप्राण वर्ण हृ में परिवर्तित हुए और न दंत्य न् के स्थान पर मूर्धन्य ण दिखाई देता। ये अश्वघोष की प्राकृत के लक्षण उसे प्राचीन स्तर की सिद्ध कर रहे हैं। गोर्व नामक पात्र की भाषा की प्राकृत में र् के स्थान पर स् का प्रयोग हुआ है। ये लक्षण उसे अर्धमागधी सिद्ध कर रहे हैं। नायिका, विदूषक तथा अन्य पात्रों की प्राकृत में र् और ल् अपने अपने स्थानों पर हैं। सब ऊष्म स् के रूपमें पाए जाते हैं तथा कर्ताकारक एकवचन ओकारांत पाया जाता है। इनसे यह भाषा स्पष्टत: प्राचीन शौरसेनी कही जा सकती है।
=== द्वितीय स्तर की प्राकृत ===
इसके पश्चात् प्राकृत भाषाओं के जो भेद प्रभेद हुए उनका विशद वर्णन भरत [[नाट्य शास्त्र|नाट्यशास्त्र]] (अध्याय 17) में प्राप्त होता है। उन्होंने वाणी का पाठ दो प्रकार का माना है- संस्कृत और प्राकृत; तथा कहा है कि प्राकृत में तीन प्रकार के शब्द प्रचलित हैं- समान (तत्सम), विभ्रष्ट (तद्भव) और देशी। नाटक में भाषाप्रयोग का विवरण उन्होंने इस प्रकार दिया है - उत्तम पात्र संस्कृत बोलें, किंतु यदि वे दरिद्र हो जाएँ तो प्राकृत बोलें; श्रमण, तपस्वी, भिक्षु, स्त्री, बालक, आदि अशुद्ध हैं। तथापि इतना स्पष्ट है कि उन्होंने क, त, द, य और व के लोप, ख, घ आदि महाप्राण वर्णो के स्थान पर ह का आदेश; ट का ड, अनादि त् का अस्पष्ट द कार उच्चारण; ष्ट, ष्ण आदि का खकार, इन परिवर्तनों का उल्लेख किया है। इससे प्रमाणित है कि वे द्वितीय स्तर की प्राकृत का ही वर्णन कर रहे हैं। 32वें अध्याय में उन्होंने ध्रुवा नामक गीतिकाव्य का विस्तार से उदाहरणों सहित वर्णन किया है और स्पष्ट कहा है कि ध्रुवा में शौरसेनी का ही प्रयोग किया जाना चाहिए (भाषा तु शोरसेनी ध्रुवायाँ संप्रयोजयेत्)। यह बात उनके उदाहरणों से भी प्रमाणित है। अतः पश्चात्कालीन धारणा निर्मूल है कि नाटकों के गेय भाग में महाराष्ट्री का प्रयोग किया जाय। भरत के मत से नाटक में शौरसेनी भाषा का प्रयोग किया जाय या इच्छानुसार किसी भी देशभाषा का। ऐसी देशभाषाएँ सात हैं - मागधी, आवंती, शौरसेनी, अर्धमागधी, वाह्लीका और दक्षिणात्या। अंतःपुर निवासियों के लिये मागधी; चेट, राजपुत्र और सेठों के लिये अर्घमागधी; विदूषकादि के लिये प्राच्या; नायिका एवं सखियों के लिये अर्धमागघी; विदूषकादि के लिये प्राच्या; नायिका एवं सखियों के लिये शौरसेनी से अविरुद्ध आवंती; योद्धा, नागरिक तथा जुआरियों के लिये दाक्षिणात्या; तथा उदीच्य, खस, शबर, शक आदि जातियों के लिये वाह्लीका का प्रयोग करें। इनके अतिरिक्त भरत ने शबर, आभीर, चांडाल आदि की हीन भाषाओं को विभाशा कहा है। इस प्रकार भरत के नाटक के पात्रों में जो प्राकृत भावनाओं का बँटवारा किया है उसका संस्कृत के नाटकों में आंशिक रूप से ही पालन किया जाता है।
संस्कृत नाटकों में सबसे अधिक प्राकृत का उपयोग और वैचित्र्य [[शूद्रक]] कृत [[मृच्छकटिकम्]] में मिलता है। पिशल, कीथ विद्वानों आदि के मतानुसार तो मृच्छकटिक की रचना का उद्देश्य ही प्राकृत सम्बन्धी नाट्यशास्त्र के नियमों को उदाहृत करना प्रतीत होता है। इस नाटक के टीकाकार पृथ्वीधर के मतानुसार नाटक में चार प्रकार की प्राकृत का ही प्रयोग किया जाता है - शौरसेनी, अवंतिका, प्राच्य और मागधी। प्रस्तुत नाटक में सूत्रधार, नटी, नायिका वसंतसेना, चारुदत्त की ब्राह्मणी स्त्री एवं श्रेष्ठी तथा इनके परिचारक परिचारिकाऐं ऐसे 11 पात्र शौरसेनी बोलते हैं। आवंती भाषा बोलनेवाले केवल दो अप्रधान पात्र हैं। प्राच्य भाषा केवल विदूषक बोलता है; तब कुंज, चेटक, भिक्षु और चारुदत्त का पुत्र कुल छह पात्र मागधी बोलते हैं इनके अतिरिक्त शकारि, चांडाली तथा ढक्की के भी बोलनेवाले एक एक दो दो पात्र हैं। किंतु यदि इन सब पात्रों की भाषा का विश्लेषण किया जाए तो वे सब केवल दो भागों में बाँटी जा सकती हैं - शौरसेनी और मागघी। टीकाकार ने स्वयं कहा है कि आवंती में केवल रकार व लोकोक्तियों का बाहुल्य होता है और प्राच्या में स्वार्थिक ककार का। अन्य बातों में वे शौरसेनी ही हैं। शकारी, चांडाली तथा ढक्की सब मागधी की ही शैलियाँ है। इस प्रकार नामचार का प्राकृत बाहुल्य होने पर भी वस्तुत: [[मृच्छकटिकम्|मृच्छकटिक]] में अश्वघोष के नाटकों की अपेक्षा कोई अधिक भाषाभेद नहीं दिखाई देता। प्राकृत का स्वरूप कालगति से विशेष विकसित हो गया है और उसमें कुछ ऐसे लक्षण आ गए हैं जिनके कारण इस प्राकृत को प्राचीन स्तर की अपेक्षा द्वितीय स्तर की कहा जाता है। इसी स्तर की प्राकृत तथा उसके देशभेदों का विवरण हमें उपलब्ध प्राकृत व्याकरणों में मिलता है और उन्हीं का विपुल साहित्य भी विद्यमान है।
द्वितीय स्तर की प्राकृत का सर्वप्राचीन व्याकरण चंडकृत [[प्राकृत लक्षण]] या [[आर्ष प्राकृत व्याकरण]] है। यह अति संक्षिप्त है और केवल 99 सूत्रों में प्राकृत की विधियों का निरूपण कर दिया गया है। इस स्तर की विशेषता बतलाने वाले सूत्र ध्यान देने योग्य हैं। सूत्र 76 के अनुसार वर्गो के प्रथम क् च् ट् त् आदि वर्णों के स्थान पर तृतीय का आदेश होता है, जैसे, पिशाची --> बिसाजी, जटा --> डटा, कृतं --> कदं, प्रतिसिद्ध --> पदिसिद्धं। सूत्र 77 के अनुसार ख् घ् च् और भ के स्थान में हकार का आदेश जैसे- मुखं --> मुहं, मेघः --> नेहो, माधवः --> माहवो, वृषभः -- वसहो। सूत्र 97 के अनुसार क् तथा वर्गों के तृतीय वर्णो (ग् ज् आदि) का स्वर के परे लोप होता है, जैसे - कोकिलः --> कोहली, भौगिकः --> भोइओ, राजा --> राया, नदी --> नई। सूत्र 98 के अनुसार लुप्त व्यंजन के परे अ होने पर य होता है, जैसे - काकाऊ --> कायाऊ, नानाऊ --> नाया, राजाऊ --> राया। अंतिम 99वें सूत्र में कहा गया है कि प्राकृत की शेष व्यवस्था शिष्ट प्रयोगों से जाननी चाहिए। इनसे आगे के चार सूत्रों में अपभ्रंश का लक्षण, संयुक्त वर्ण से लकार का लोप न होना, पेशाची का र् और ण् के स्थान पर ल् और न का आदेश, मागधिका का र् और स् के स्थान पर ल् और श् का आदेश, तथा शौरसेनी का त् के स्थान में विकल्प से द् का आदेश बतलाया गया है। भाषाशास्त्रियों का मत है कि द्वितीय स्तर के आदि में क आदि अबोध वर्णों के स्थान पर ग् आदि सघोष वर्णो का उच्चारण होने लगा। फिर इनकी अल्पतर ध्वनि शेष रही और फिर सर्वथा लोप हो गया, तथा महाप्राण ध्वनियों के स्थान पर केवल एक शुद्ध ऊष्म ध्वनि ह् अवशिष्ट रह गई। ये प्रवृत्तियाँ तथा उक्त आर्ष व्याकरण में निर्दिष्ट य श्रुति विकल्प से समस्त जैन प्राकृत है। किंतु पश्चात्कालीन 16वीं, 17वीं शती के प्राकृत वैयाकरणों ने प्राकृतों के निरूपण में जो भ्रांतियाँ उत्पन्न की हैं, उनके आधार पर कुछ पाश्चात्य विद्वानों ने जैन साहित्य की प्राकृतों को उक्त विकल्पों के सद्भाव के कारण जैन शौरसेनी तथा जैन महाराष्ट्री नामों द्वारा पृथक् निर्दिष्ट करना आवश्यक समझा, यह ऐतिहासिक दृष्टि से वास्तविक नहीं है।
इस आर्ष प्राकृत व्याकरण के पश्चात् [[प्राकृतप्रकाश]] नामक व्याकरण लिखा गया, जिसमें आगे दो बार वृद्धि की गई। आदि के नौ परिच्छेद [[वररुचि]] कृत हैं। इनमे आदर्श प्राकृत की क्रमशः स्वरविधि, व्यंजनविधि, संयुक्तवर्ण विधि, संकीर्ण, संज्ञारूप, सर्वनाम विधि, क्रियारूप, धात्वादेश एवं अव्ययों का निरूपण किया गया है। अंत में कहा गया है कि प्राकृत का शेष स्वरूप संस्कृत के समझना चाहिए। इस व्याकरण में द्वितीय स्तर के प्राकृत का स्वरूप पूर्णरूप से निर्धारित हुआ पाया जाता है। इसके अनुसार मध्यवर्ती क् ग् च् ज् त् द् प् य और द का प्रायः लोप होता है, एवं ख् घ् थ् ध् और भ् के स्थान पर ह् आदेश। प्राकृतप्रकाश के इस प्राचीन विभाग पर कात्यायन, भामह, वसंतराज, सदानंद और रामपाणिवादकृत टीकाएँ पाई जाती हैं। आगे के 10वें और 12वें परिच्छेदों में क्रमश: पैशाची का 14 सूत्रों में तथा मागधी का 17 सूत्रों में निरूपण किया गया है। इन दोनों भाषाओं की प्रकृति शौरसेनी कही गई है। किंतु इससे पूर्व कहीं भी शौरेसेनी का नाम नहीं आया। अतएव अनुमानतः इसके कर्ताओं की दृष्टि में सामान्य प्राकृत का निरूपण उस काल की सुप्रचलित शोरसेनी का ही है। इन दो परिच्छेदों पर केवल [[भामह]] की टीका है और विद्वानों का अनुमान है कि ये दोनों परिच्छेद उन्हीं के जोड़े हुए हैं। इनमें पैशाची का विशेषता शब्द के मध्य में तृतीय चतुर्थ वर्णो के स्थान पर प्रथम तथा द्वितीय का आदेश, ण के स्थान पर न्, ज्ं, न्य के स्थान पर ंञ तथा त्वा के स्थान पर तूण बतलाई गई है और मागधी की ष्, स्, के स्थान पर क्ष ज् के स्थान पर य्, क्ष के स्थान पर एक अहं के स्थान पर हके, हगे व अहके, तथा अकारांत कर्ता कारक एकवचन के अंत में ए कही गई हैं। प्राकृत प्रकाश का अंतिम 12 वाँ परिच्छेद बहुत पीछे जोड़ा गया प्रतीत होता है। इसपर भामह व अन्य किसी की टीका नहीं है। इस परिच्छेद की अवस्था बड़ी विलक्षण है। इसमें शौरसेनी के लक्षण बतलाए गए हैं, जिसकी आदि में ही प्रकृति संस्कृत कही गई हैं। किंतु अंतिम 32वें सूत्र में पुन: कहा गया है - शेषं महाराष्ट्री वत्। परंतु महाराष्ट्री शब्द इससे पूर्व ग्रंथ भर में अथवा अन्य कहीं व्याकरण में आया ही नहीं है। जान पड़ता है यह परिच्छेद उस समय जोड़ा गया है जब यह धारणा सुदृढ़ हो गई कि प्राकृत काव्य की भाषा महाराष्ट्री ही होनी चाहिए। अतएव जहाँ प्राकृत का निर्देश है, वहाँ महाराष्ट्री का ही तात्पर्य ग्रहण किया जाय। यहाँ जो शौरसेनी का स्वरूप बतलाया गया है, उसी से स्पष्ट हो जाता है कि जो स्वरूप यहाँ सामान्य प्राकृत का बतलाया गया है, वह शौरसेनी का ही कालानुसार विकसित रूप है। उदाहरणार्थ शौरसेनी में मध्यवर्ती त् और थ् के स्थान क्रमश: द् और ध् होते हैं, वहाँ प्राकृत में द् का लोप और थ का ह होता है। "भ्" धातु का शौरसेनी में "भो" ही रहता है, कि किंतु प्राकृत में वहाँ "हो" आदेश कहा गया है। शौरसेनी में नपुंसक बहुवचन के रूप में वहाँ णि होता है, जैसे जलाणि, वाणणि, वहाँ प्राकृत के केवल इ रहता है, जैसे जलाइं, वणाइं शौरसेनी में दोला, दंड तथा दसण का आदि द् प्रकृति रूप रहता है, जबकि प्राकृत में वह ड् हो जाता है, जैसे डोला, डंड व डसण इत्यादि।
प्राकृतप्रकाश के पश्चात् प्राकृत तथा उसकी प्रादेशिक भाषाओं का सर्वांगपूर्ण निरूपण करनेवाला, प्राकृत व्याकरण [[हेमचन्द्राचार्य|हेमचंद्र]] द्वारा 12वीं शती ई० में लिखा गया। इसके चार परिच्छेद हैं, जिनमें से लगभग साढ़े तीन परिच्छेदों में प्राकृत का सुव्यवस्थित विवरण दिया गया है और शेष लगभग 200 सूत्रों में क्रमशः शौरसेनी, मागधी, पैशाची, चूलिका पैशाची और अपभ्रंश भाषाओं के विशेष लक्षण बतलाए हैं। इन भाषाओं में से प्रथम तीन का स्वरूप तो अधिक विस्तृत रूप मे वही है जो ऊपर बतलाया जा चुका है। चूलिका पैशाची के लक्षण यहाँ चार सूत्रों में ये बतलाए गए हैं कि उसमें तीसरे और चौथे वर्णो के स्थान पर प्रथम और द्वितीय का आदेश होता है, र् का ल् विकल्प से होता है, कुछ आचार्यो के मत से आदिवर्ण की ध्वनि में परिवर्तन नहीं होता, शेष बातें पैशाची के समान जाननी चाहिए।
== यह भी देखिये ==
* [[प्राकृत साहित्य]]
* [[अपभ्रंश]]
* [[पालि भाषा]]
* [[शौरसेनी]]
* [[संस्कृत भाषा|संस्कृत]]
* [[भारत की भाषाएँ]]
== बाहरी कड़ियाँ ==
*[https://hi.wiktionary.org/wiki/विक्षनरी:प्राकृत-हिन्दी_शब्दकोश '''पाइअ-सद्द-महण्णवो''' ( प्राकृत-शब्द-महार्णवः)] (हिन्दी विक्षनरी पर पण्डित हरगोविन्ददास विक्रमचन्द सेठ द्वारा रचित प्राकृत-हिन्दी शब्दकोश)
*[http://books.google.co.in/books?id=8wTGMIRwVZ4C&printsec=frontcover#v=onepage&q&f=true प्राकृत शब्द महार्णव (पाइअ सद्द महण्णवो)] (प्राकृत-हिन्दी शब्दकोश ; गूगल पुस्तक ; पण्डित हरगोविन्ददास विक्रमचन्द सेठ)
*[http://www.dli.gov.in/scripts/FullindexDefault.htm?path1=/data4/upload/0098/201&first=1&last=159&barcode=99999990245397 प्राकृत लक्षणम् या चन्द्र व्याकरण] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20160817065334/http://www.dli.gov.in/scripts/FullindexDefault.htm?path1=%2Fdata4%2Fupload%2F0098%2F201&first=1&last=159&barcode=99999990245397 |date=17 अगस्त 2016 }} (भारतीय अंकीय पुस्तकालय)
*[http://gyanpradayani.com/प्राकृत-भाषा-एवं-उसकी-विश/ प्राकृत भाषा एवं उसकी विशेषतायें] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20170223172551/http://gyanpradayani.com/%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%95%e0%a5%83%e0%a4%a4-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b7%e0%a4%be-%e0%a4%8f%e0%a4%b5%e0%a4%82-%e0%a4%89%e0%a4%b8%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%b6/ |date=23 फ़रवरी 2017 }}
*[http://gadyakosh.org/gk/अन्य_प्राकृतिक_भाषाएँ_और_हिन्दी_/_भाषा_की_परिभाषा_/_'हरिऔध' अन्य प्राकृतिक भाषाएँ और हिन्दी] (अयोध्या सिंह उपाध्याय 'हरिऔध')
*[http://www.pravakta.com/contribution-of-prakrit-to-hindi/ प्राकृत का हिन्दी को योगदान] (प्रवक्ता)
*[https://sumedhasanskrtistudies.blogspot.com/2019/06/Prakrit.html प्राकृत भाषा का परिचय]
*[http://www.rachanakar.org/2013/06/blog-post_1496.html साहित्यिक प्राकृतों (शौरसेनी, महाराष्ट्री, मागधी, अर्द्ध-मागधी, पैशाची) को भिन्न भाषाएँ मानने की परम्परागत मान्यताः पुनर्विचार] (प्रोफेसर महावीर सरन जैन का आलेख)
*[https://ia801501.us.archive.org/19/items/in.ernet.dli.2015.402650/2015.402650.Prakrit-Vyakaran.pdf प्राकृत व्याकरण]
*[https://jainworld.jainworld.com/JWHindi/Books/Prakrit+Vyakarnam2+Siddhahem.pdf श्री हेमचन्द्र कृत प्राकृत-व्याकरण] (हिन्दी और संस्कृत टीक्का से युक्त)
*[https://jainworld.jainworld.com/JWHindi/Books/Prakrit+Vyakarnam_2+Hemchandra.pdf हेमचन्द्र-प्रणीत प्राकृत व्याकरण] (हिन्दी टीका सहित)
*[https://rajeduboard.rajasthan.gov.in/books-2019/books-2020/cls12/PrakratBhasha.pdf प्राकृत भाषा एवं साहित्य]
*[https://sanskrit.nic.in/msp/upload/digitized_slm_pdf/Elementary_Course_in_Prakrit/ECPR.pdf प्राकृत परिचय पाठ्यक्रम]
*[https://archive.org/details/in.ernet.dli.2015.405679/page/n25/mode/2up A Grammar Of The Prakrit Language] (डी० जी० सरकार)
*[https://archive.org/details/in.ernet.dli.2015.546001/page/n5/mode/2up Prakrit Grammar Of Hemcandra] (पी० एल० वैद्य)
[[श्रेणी:भारत की भाषाएँ]]
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2026-05-03T04:35:23Z
अनुनाद सिंह
1634
/* 'प्राकृत' शब्द की व्युत्पत्ति */
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wikitext
text/x-wiki
[[चित्र:Suryaprajnapati Sutra.jpg|right|thumb|400px|१५०० ई में जैन प्राकृत में लिखा गया [[सूर्यप्रज्ञप्ति सूत्र|सूर्यप्रज्ञप्तिसूत्र]] । इसकी रचना मूलतः तीसरी-चौथी शताब्दी ईसापूर्व में की गयी थी।]]
भारतीय आर्यभाषा के मध्ययुग में जो अनेक प्रादेशिक भाषाएँ विकसित हुई उनका सामान्य नाम '''प्राकृत''' है और उन भाषाओं में जो ग्रंथ रचे गए उन सबको समुच्चय रूप से [[प्राकृत साहित्य]] कहा जाता है। प्राकृत का का प्रचार प्राचीन काल में भारत में था और यह प्राचीन [[संस्कृत नाटक|संस्कृत नाटकों]] आदि में स्त्रियों, सेवकों और साधारण व्यक्तियों की बोलचाल में तथा अलग ग्रंथों में पाई जाती है । भारत की बालचाल की भाषाएँ बोलचाल की प्राकृतों से बनी हैं ।
विकास की दृष्टि से भाषावैज्ञानिकों ने [[भारत]] में आर्यभाषा के तीन स्तर नियत किए हैं - प्राचीन, मध्यकालीन और अर्वाचीन। प्राचीन स्तर की भाषाएँ [[वैदिक संस्कृत]] और [[संस्कृत भाषा|संस्कृत]] हैं, जिनके विकास का काल अनुमानतः ईसापूर्व 2000 से ईसापूर्व 600 तक माना जाता है। मध्ययुगीन भाषाएँ हैं - [[मागधी]], [[अर्धमागधी]], [[शौरसेनी]], [[पैशाची भाषा]], [[महाराष्ट्री प्राकृत|महाराष्ट्री]] और [[अपभ्रंश]]। इनका विकासकाल ई. पूर्व 600 ई. 1000 तक पाया जाता है।
[[हेमचन्द्राचार्य|हेमचंद्र]] ने संस्कृत को प्राकृत की 'प्रकृति' कहकर सूचित किया है कि प्राकृत, संस्कृत से निकलती है, पर प्रकृति का यह अर्थ नहीं है । केवल संस्कृत का आधार रखकर प्राकृत व्याकरण की रचना हुई है। पर अनुमान है कि ईसवी सन् से प्रायः ३०० वर्ष पहलै यह भाषा प्राकृत रूप में आ चुकी थी । उस समय इसके पश्चिमी और पूर्वी दो भेद थे । यह पूर्वी प्राकृत ही [[पालि|पाली भाषा]] के नाम से प्रसिद्ध हुई। बौद्ध धर्म के प्रचार के साथ इस मागधी या पाली भाषा की बहुत अधिक उन्नति हुई, क्योंकि बौद्ध धर्म के सभी ग्रंथ पहले इसी भाषा में लिखे गए । धीरे-धीरे प्राचीन प्राकृतों के विकास से आज से प्रायः १००० वर्ष पहले देश-भाषाओं का जन्म हुआ था । जिस प्रकार संस्कृत भाषा का सबसे पुराना रूप वैदिक भाषा है, उसी प्रकार प्राकृत भाषा का भी जो पूराना रूप मिलता है उसे "आर्ष प्राकृत" कहते हैं । कुछ बौद्ध तथा जैन विद्वानों का मत है कि [[पाणिनि]] ने इस आर्ष प्राकृत का भी एक व्याकरण बनाया था । पर कुछ लोगों को यह संदेह है कि कदाचित् पाणिनि के समय प्राकृत भाषा का जन्म ही नहीं हुआ था । मार्कण्डेय ने प्राकृत के इस प्रकार भेद किए हैं—(१) भाषा (महाराष्ट्रा, शौरसेनी, प्राच्या, आवंती, मागधी, अद्धंमागधी), (२) विभाषा (शाकारी, चांडाली, शावरी, आभीरी, टाक्की, औड्री, द्रविडी), (३) अपभ्रंश, और (४) पैशाची । चूलिका पैशाची आदि कुछ निम्न श्रेणी की प्राकृतें भी हैं । सबसे प्राचीन काल में मागधी की भाषा पाली के नाम से साहित्य की ओर अग्रसर हुई । [[बौद्ध ग्रंथ]] पहले इसी भाषा में लिखे गए । यह मागधी, व्याकरणों की मागधी से पृथक् और प्राचीन भाषा है । पीछे जैनों के द्वारा अर्द्धमागधी और महाराष्ट्री का आदर हुआ । महाराष्ट्री साहित्य की प्राकृत हुई जिसके एक कृत्रिम रूप का व्यवहार संस्कृत के नाटकों में हुआ । इन प्राकृतों से आगे चलकर और घिसकर जो रूप हुआ वह [[अपभ्रंश]] कहलाया । इसी अपभ्रंश के नाना रूपों से आजकल की आर्य शाखा की देशभाषाएँ निकली हैं । इसके अतिरिक्त [[ललितविस्तर]] में एक प्रकार की और प्राकृत मिलती है जो संस्कृत से बहुत कुछ मिलती जुलती है।
== प्राकृत का उदाहरण ==
निम्नलिखित प्राकृत गद्यांश "अमंगलियपुुरिसस्स कहा" (अमांगलिक पुरुष की कथा) से लिया गया है।
: ''एगंमि नयरे एगो अमंगलिओ मुद्धो पुरिसो आसि। सो एरिसो अत्थि, जो को वि पभायंमि तस्स मुहं पासेइ, सो भोयणं पि न लहेज्जा। पउरा वि पच्चूसे कया वि तस्स मुहं न पिक्खंति। नरवइणावि अमंगलियपुरिसस्स वट्टा सुणिआ। परिक्खणथं णरिंदेण एगया पभायकाले सो आहूओ, तस्स मुहं दिट्ठं। जया राया भोयणत्थमुवविसइ, कवलं च मुहे पक्खिवइ, तया अहिलंमि नयरे अकम्हा परचक्कभएण हलबोलो जाओ। तया नरवई वि भोयणं चिच्चा सहसा उत्थाय ससेण्णो नयराओ बहिं निग्गओ। भयकारणमदट्ठूण पुणो पच्छा आगओ समाणो नरिंदो चिंतेइ, अस्स अमंगलियं अस्स बोल्लाविऊण सरूवं मए पच्चक्खं दिट्ठं, तओ एसो हंतव्वो ̧ एवं चिंतिऊण अमंगलियं बोल्लाविऊण वहत्थं चंडालस्स अप्पेइ।
: ''विविध् प्रावृफत-पाठ: वज्जालग्ग ;वज्जालग्गंद्धजया एसो रुयंतो, सकम्मं निंदंतो चंडालेण सह गच्छेइ। तया एगो कारुणिओ बुद्धिणिहाणो वहाइ नेइज्जमाणं तं दट्ठूणं कारणं णच्चा तस्स रक्खणाय कण्णे किंपि कहिऊण उवायं दंसेइ। हरिसंतो जया वहत्थंभे ठविओ, तया चंडालेण सो पुच्छिओ, "जीवणं विणा तव कावि इच्छा सिया, तया मग्गसु त्ति।" सो कहेइ, "मज्झ नरिंदमुहदंसणेच्छा अत्थि। जया सो नरिंदसमीवमाणीओ तया नरिंदो तं पुच्छइ, "किमेत्थ आगमणपओयणं? सो केहेइ, "हे नरिंद! पच्चूसे मम मुुहस्स दंसणेण भोयणं न लब्भइ, परंतु तुम्हाणं मुह पेक्खणेण मम वहो भविस्सइ, तथा पउरा किं कहिस्संति?। मम मुहाओ सिरिमंताणं मुहदंसणं केरिसपफलयं संजायं, नायरा वि पभाए तुम्हाणं मुुहं कहं पासिहिरे। एवं तस्स वयणजुत्तीए संतुट्ठो नरिंदो वहाएसं निसेहिऊण पारितोसिअं च दच्चा तं अमंगलिअं संतोसीअ।
; हिन्दी-भावार्थ
: एक नगर में एक अमांगलिक मूर्ख-पुरुष था। वह ऐसा था कि जो कोई भी प्रभात में उसके मुख को देखता, वह उस दिन भोजन भी नहीं पाता (उसे भोजन भी नहीं मिलता)। नगर के निवासी प्रातःकाल में कभी भी उसके मुंह को नहीं देखते थे। राजा के द्वारा भी अमांगलिक पुरुष की बात सुनी गयी थी। परीक्षा के लिए राजा के द्वारा एक बार प्रभातकाल में वह बुलाया गया। अमांगलिक पुरुष का मुख देखकर ज्यों हि राजा भोजन के लिए बैठा और मुंह में (रोटी का) ग्रास रखा त्यों हि समस्त नगर में अकस्मात् शत्रु के द्वारा आक्रमण के भय से शोरगुल हुआ। तब राजा भी भोजन को छोड़कर (और) शीघ्र उठकर सेना-सहित नगर से बाहर गया और भय के कारण बीत जाने पर वापस आया। अहंकारी राजा ने सोचा, इस अमांगलिक के स्वरूप को मेरे द्वारा प्रत्यक्ष देखा गया, इसलिए यह मारा जाना चाहिए।
: इस प्रकार विचारकर अमांगलिक को बुलवाकर वध के लिए चांडाल को सौंप दिया। जब यह अमांगलिक रोता हुआ स्व-कर्म की निन्दा करता हुआ चाण्डाल के साथ जा रहा था। तब एक दयावान बुद्धिमान ने वध के लिए ले जाए जाते हुए उसको देखकर, कारण को जानकर उसकी रक्षा के लिए उसके कान में कुछ कहकर उपाय सुझाया। इसके पफलस्वरूप वह प्रसन्न होते हुए चला। जब वह वध के खम्भे पर खड़ा किया गया तब चाण्डाल ने उससे पूछा- जीवन के अलावा कोई तुम्हारी, (वस्तु की) इच्छा हो, तो (तुम्हारे द्वारा) वह वस्तुद्ध मांगी जानी चाहिए। उसने कहा मेरी इच्छा राजा के मुख-दर्शन की है। तब वह राजा के सामने लाया गया। राजा ने उसको पूछाः यहाँ आने का प्रयोजन क्या है? उसने कहाः हे राजन्! प्रातःकाल में मेरे मुख के दर्शन से (तुम्हारे द्वारा) भोजन ग्रहण नहीं किया गया, परन्तु तुम्हारा मुख देखने से मेरा वध होगा तब नगर के निवासी क्या कहेंगे? मेरे मुँह (दर्शन) की तुलना में श्रीमान् का मुख-दर्शन कैसा फल उत्पन्न करता है? नागरिक भी प्रभात् में तुम्हारे मुख को कैसे देखेंगे? इसप्रकार उसकी वचन की युक्ति से संतुष्ट हुए राजा ने वध के आदेश को रद्द करके और उसको पारितोषिक देकर उस अमांगलिक को संतुष्ट किया।
== 'प्राकृत' शब्द की व्युत्पत्ति ==
'प्राकृत' शब्द को लेकर अनेकों अर्थ विचारणाएं उपलब्ध होती हैं। उन में से कुछ ये हैं-
*(०) प्रकृत्या भवं प्राकृतं
* (अर्थ : जो स्वाभाविक रूप से उद्भूत हुई, वही प्राकृत है।)
*(१) प्रकृतिः संस्कृतं तत्र भवं तत आगतं वा प्राकृतम् (हेमचन्द्रकृत प्राकृत-व्याकरण ८।१।१)
: (अर्थ : प्रकृति या मूल संस्कृत है ; और जो संस्कृत से उत्पन्न हुआ है या वहाँ से से आगत है, वह प्राकृत है। )
*(२) प्रकृतिः संस्कृतं तत्र भवं प्राकृतमुच्यते (प्राकृतसर्वस्व १।१)
: (अर्थ : प्रकृति या मूल संस्कृत है, उससे उत्पन्न भाषा को प्राकृत कहते हैं।)
*(३) प्रकृतिः संस्कृतं तत्र भवत्वात् प्राकृतं स्मृतम् (प्राकृत-चन्द्रिका)
: (अर्थ : प्रकृति या मूल संस्कृत है, उससे उत्पन्न भाषा को प्राकृत कहते हैं।)
*(४) प्राकृतेः संस्कृतायास्तु विकृतिः प्राकृती मता (लक्ष्मीधर कृत षड्भाषाचन्द्रिका, पृष्ठ ४ )
: ( अर्थ : संस्कृत की विकृति, प्राकृत है।)
*(५) प्राकृतस्य तु सर्वमेव संस्कृत योनिः (वासुदेवकृत कर्पूरमञ्जरी सञ्जीवनी-टीका ९।२ )
: (अर्थ : प्राकृत की जननी संस्कृत है।)
*(६) प्रकृतेः संस्कृतात् आगतं प्राकृतम् (सिंह देवमणि)
: ( अर्थ : प्रकृति संस्कृत से आगत प्राकृत है।)
*(७) प्रकृतिः संस्कृतं तत्र भवं प्राकृतमुच्यते (मार्कण्डेय कृत प्राकृतसर्वस्व)।
: ( अर्थ : प्रकृति या मूल संस्कृत है, उससे उत्पन्न भाषा को प्राकृत कहते हैं। )
*(८) प्रकृत्या स्वभावेन सिद्धं प्राकृतम्
: (अर्थ: जन सामान्य की स्वाभाविक भाषा प्राकृत है ।)
*(९) प्राचीन विद्वान नमिसाधु के अनुसार प्राकृत शब्द का अर्थ है- व्याकरण आदि संस्कारों से रहित लोगों का स्वाभाविक वचन-व्यापार। उससे उत्पन्न अथवा वही वचन व्यापार प्राकृत है ।
अब प्रायः सभी विद्वानों ने इस बात को स्वीकार लिया है कि प्राकृत की उत्पत्ति संस्कृत से हुई है। प्राकृत शब्द की इन सब व्युत्पत्तियों का जब गंभीरता से परिशीलन करते हैं तो यह स्पष्ट हो जाता है कि 'प्राकृत' शब्द, 'प्रकृति' शब्द से निष्पन्न हुआ है और प्रकृति का अर्थ है-संस्कृत भाषा। इस विचारणा से यह स्पष्ट हो जाता है कि संस्कृत भाषा प्राकृत भाषा की जननी है । अर्थात् संस्कृत भाषा से होने वाली भाषा प्राकृत भाषा कहलाती है ।
== मध्ययुगीन भाषाओं '''(प्राकृत)''' की मुख्य विशेषताएँ ==
प्राकृत भाषा में द्विवचन नहीं है और उसकी वर्णमाला में ऋ ऋ लृ लृ ऐ और औ स्वर तथा श ष और विसर्ग (ः) नहीं हैं । प्राचीन भाषाओं से उक्त मध्ययुगीन भाषाओं में मुख्यतः निम्न विशेषताएँ पाई जाती हैं :
'''(1)''' संस्कृत के स्वरों में ऋ, लृ, एवं ऐ और औ का मध्ययुगीन भाषाओं में अभाव है। ए और ओ की ह्रस्व मात्राओं का प्रयोग इन भाषाओं की अपनी विशेषता है।
'''(2)''' विसर्ग यहाँ सर्वथा नहीं पाया जाता।
'''(3)''' क से लेकर म् तक के स्पर्शवर्ण पाए जाते हैं। किंतु अनुनासिकों में संकोच तथा व्यत्यय होता है।
'''(4)''' तीनों ऊष्म वर्णो के स्थान पर केवल एक और विशेषतः '''स् ''' ही अवशिष्ट पाया जाता है।
'''(5)''' संयुक्त व्यंजनों का प्राय अभाव है। दोनों संयोगी व्यंजनों का या तो समीकरण कर लिया जाता है अथवा स्वरागम द्वारा दोनों को विभक्त कर दिया जाता है, या उनमें से एक का लोप कर दिया जाता है।
'''(6)''' द्वित्व व्यंजन से पूर्व का दीर्घ स्वर ह्रस्व कर दिया जाता है एवं संयुक्त व्यंजन में से एक का लोप कर उससे पूर्व का ह्रस्व स्वर दीर्घ कर दिया जाता है।
'''(7)''' हलन्त संज्ञाओं और धातुओं को स्वरान्त बनाकर चलाया जाता है।
'''(8)''' व्याकरण की दृष्टि से संज्ञाओं तथा क्रियाओं के रूपों में द्विवचन नहीं पाया जाता।
'''(9)''' [[कारक]] के रूपों में संकोच पाया जाता है।
'''(10)''' क्रियाओं में गणभेद एवं परस्मैपद आत्मनेपद का भेद नहीं किया जाता।
'''(11)''' सभी प्रकार के रूप विकल्प से चलते हैं।
'''(12)''' क्रियारूपों में कालादि भेदों का अल्पीकरण हुआ है। इनका बहुत काम बहुधा कृदंतों से चलाया जाता है।
== प्राकृत की उत्पत्ति के विभिन्न सिद्धान्त ==
अब प्रश्न यह होता है कि मध्ययुग की भाषाओं में संस्कृत की अपेक्षा इतनी अधिक विशेषताएँ कब, क्यों, कैसे और कहाँ पर उत्पन्न हो गईं। प्राकृत के वररुचि आदि वैयाकरणों ने प्राकृत भाषाओं की प्रकृति संस्कृत को मानकर उससे प्राकृत शब्द की व्युत्पत्ति की है। "प्रकृति: संस्कृतं, तत्रभवं तत आगतं वा प्राकृतम्"। किंतु संस्कृत भाषा का वर्तमान स्वरूप स्वयं ई. पूर्व छठी शती के लगभग विकसित हुआ है और उसे स्थिर रूप तो पाणिनि द्वारा ई. पू. तीसरी चौथी शती में दिया गया है। संस्कृत के उक्त प्रकार के अनेक लक्षणों से विभिन्न भाषाओं का छठी शती ई. पू. में ही उत्पन्न होना कैसे संभव हो सकता है ? इसके अतिरिक्त प्राकृत में ऐसे भी अनेक शब्द पाए जाते हैं जिनका संस्कृत में अभाव है, किंतु वैदिक भाषा में वे विद्यमान हैं। प्राकृत की अनेक प्रवृत्तियों को लिए हुए बहुत से शब्द वेदों में पाए जाते हैं, जो [[संस्कृत व्याकरण]] के अनुकूल नहीं हैं। इस समस्या पर अनेक पाश्चात्य विद्वानों का एक मत यह है कि आर्यभाषा जब भारतवर्ष में प्रचलित हुई, अनार्य लोग उसका आर्यो के सदृश शुद्ध शुद्ध उच्चारण और प्रयोग नहीं कर पाए; अतएव उन्होंने अपने निजी उच्चारण एवं भाषाशैली के अनुसार उसे बोलना प्रारंभ किया और उनके संपर्क से इस का प्रभाव आर्यो पर भी पड़ा। इसी के फलस्वरूप प्राकृत भाषा की प्रवृत्तियों का विकास हुआ। इस मत के समर्थन में यह बात भी ध्यान देने योग्य है कि वैदिक काल से ही जो ट् ठ् आदि मूर्धन्य ध्वनियों का प्रवेश आर्यभाषा में हुआ, वह बहुलता से उस काल की अनार्य भाषाओं का ही प्रभाव था। किंतु प्राचीन अनार्य भाषाओं का विश्लेषण कर यह सिद्ध नहीं किया जा सकता कि प्राकृत की उक्त विशेषताओं का बीज उन अनार्य भाषाओं में विद्यमान थे। इसीलिये इस मत के संबंध में विवाद है।
दूसरा मत यह है कि वेदों की भाषा बोलनेवाले जातियों में ही स्वयं ध्वन्यात्मक भेद थे, जिनके कुछ प्रमाण वेदों में ही उपस्थित है अनुमानत: वेदों की भाषा उस काल की रूढ़िबद्ध वेदभाषा के क्रमविक से अनुमानत: कई हजार वर्षो में संस्कृत भाषा का विकास हुआ, पर विशेषत: सुशिक्षित पुरोहित वर्ग की अपनी भाषा थी, तथा जिसमें धार्मिक कार्यों मे ही उपयोग किया जाता था। उतने ही काल प्राचीनतम वैदिक भाषा की समकालीन जनसाधारण की लोकभाषा से संस्कृत के साथ साथ ही प्राकृत का भी विकास हुआ, जिसमें प्रदेशभेदानुसार नाना भेद थे। इस संबंध में यह भी बात ध्यान देने योग्य है कि भारत में आर्यों का प्रवेश एक ही काल में एवं एक धारा में हुआ नहीं कहा जा सकता। यदि आगे पीछे आनेवाली आर्य जातियों के भाषाभेद से प्राकृत भाषाओं के उद्गम और विकास व संबंध हो तो आश्चर्य नहीं। इस संबंध में हॉर्नले और ग्रियर्सन के वह मत भी उल्लेखनीय है जिसके अनुसार भारतीय आर्यभाषाएँ दो वर्गो में विभाजित पाई जाती हैं हृ एक बाह्य और दूसरा आभ्यंतर उत्तर, पश्चिम, दक्षिण और पूर्व की भाषाओं के उक्त प्रकार दो वर्ग उत्पन्न हो गए। इसे संक्षेप में समझने के लिये महाराष्ट्र प्रदेश के नामों जैसे गोखले, खेर, परांजपे, पाध्ये, मुंजे गोडवोले, तांबे, तथा लंका में प्रचलित नामों जैसे गुणतिलके सेना नायके, बंदरनायक आदि में जो अकारांत कर्ता एक वचन के रूप से ए प्रत्यय दिखाई देता है, वही पूर्व की मागधी प्राकृत मे अपने नियमित स्थिरता को प्राप्त हुआ पाया जाता है। आदि आर्यभाषा मे वैदिक र् के स्थान पर ल् का उच्चारण भी माना गया है, जैसे कुलउ उ श्रोत्र। उसी प्रवृत्ति के फलस्वरूप वैदिक वृक् के स्थान पर जर्मन भाषासमूह में वुल्फ़ एवं ग्रीक में पृथु का प्लुतुस् पाया जाता है। यह र् के स्थान पर ल् का उच्चाराण ध्वनि मागधी से सुरक्षित हैं, किंतु उसी काल की बोलियों में उनके समीकृत रूप जैसे ओत्त अत्त, सत्त, भी पाए जाते हैं। बोगाजकुई के भिन्न मितन्नि (मैत्रा यणी ?) आर्यशाखा के जो लगभग 200 ई. पू. के लेख मिले हैं उनमें इंद्र और नासत्य देवताओं के नाम इंदर और नासातीय रूप से अंकित हैं। उनमें स्वरभक्ति द्वारा संयुक्त वर्णो के संयुक्त किए जाने की प्रवृत्ति विद्यमान है। वरुण देवता का नाम "उरुवन" रूप में उल्लिखित है जिसमें स्वर के अग्रागम तथा वर्णव्यत्यय की प्रवृत्ति स्पष्ट दिखाई देती है। ये प्रवृत्तियाँ प्राकृत के सामान्य लक्षण हैं। पालि में प्रयुक्त इध संस्कृत तथा वैदिक के इह से पूर्वकालीन परंपरा का है इसमें भी किसी को कोई संदेह नहीं है। आदि आर्यभाषा में ए तथा ओ के ह्रस्व रूप थे; ऐ और औ का अभाव था; किंतु अइ, अउ जैसे मिश्र स्वर प्रचलित थे; अनुनासिक स्पर्शों का संकोच था; तीन ऊष्मों में केवल एकमात्र स् ही था। ये ध्वन्यात्मक विशेषताएँ प्रधानत: शौरसेनी प्राकृत में सुरक्षित पाई जाती हैं, इत्यादि। इन लक्षणों के सद्भाव का समाधान समुचित रूप से यही मानकर किया जा सकता है कि प्राकृत भाषाओं में उनका आगमन प्राचीनतम आर्य जातियों की बोलियों से अविच्छिन्न परंपरा द्वारा चला आया है। यथार्थत: संस्कृत हो अथवा वैदिक को ही प्राकृत की प्रकृति मान लेने से उक्त लक्षणों का कोई समाधान नहीं होता।
तब प्राकृत के वैयाकरणों ने संस्कृत को प्राकृत की प्रकृति क्यों कहा? इसका कारण उन व्याकरणों के रचे जाने के काल और उनके स्वरूप पर ध्यान देने से स्पष्टत: समझ मे आ जाता है। वे व्याकरण उस काल में लिखे गए जब विद्वत्समाज में प्राकृत की अपेक्षा संस्कृत का अधिक प्रचार और सम्मान था। वे लिखे भी संस्कृत भाषा में गए हैं तथा उनका उद्देश्य भी संस्कृत नाटकों में भी प्राकृतिकता रखने के लिए करना पड़ता था और जिनमें उत्कृष्ट साहित्यिक रचनाएँ भी निर्मित हो चुकी थीं। अतएव उन वैयाकरणों ने संस्कृत को आदर्श ठहराकर उससे जो विशेषताएँ प्राकृत में थीं उनका विवरण उपस्थित कर दिया और इसकी सार्थकता संस्कृत को प्राकृत की प्रकृति कहकर सिद्ध कर दी। तथापि नमिसाधु ने अपना यह मत स्पष्ट प्रकट किया है कि प्रकृति का अर्थ लोक या जनता है और जनसाधारण को भाषा होने से ही वह प्राकृत कहलाई। प्रकृति का अर्थ लोक बहुत प्राचीन है तथा [[कालिदास]] ने भी उसका लोक के अर्थ में प्रयोग किया है (राजा प्रकृति रंजनात्, रघु. सर्ग, 4)। प्राकृतों की इस अति प्राचीन परंपरा के प्रकाश में इन भाषाओं को वैदिक और संस्कृत की अपेक्षा उत्तरकालीन व मध्ययुगीन कहने का औचित्य भी विचारणीय हो जाता है। उसकी यदि कोई सार्थकता है तो केवल इतनी कि ये भाषाएँ वैदिक और संस्कृत के पश्चात् ही साहित्य में प्रयुक्त हुईं। उनका प्रथम बार धार्मिक प्रचार के लिये उपयोग ई. पू. छठी शती मे श्रमण महावीर और बुद्ध ने किया। तथा उनकी साहित्यिक रचनाओं में शब्दों तथा शैली की दृष्टि से संस्कृत का बड़ा प्रभाव दृष्टिगोचर होता है।
== प्राकृत भाषा का स्वरूप एवं क्रमिक विकास ==
भाषा जब तक बोली के रूप में रहती है, उसमें देश और काल की अपेक्षा निरंतर परिवर्तन होते रहते हैं। इसी नियम के अनुसार काल के सापेक्ष प्राकृत के तीन स्तर स्वीकार किए गए हैं -
* पूर्वकालीन (ई. पू. 600 से 100 ई. तक),
* मध्यकालीन (ई. 100 से 600 ई. स. तक) तथा
* उत्तरकालीन (ई. सन् 600 से 1000 तक)।
=== प्राचीन स्तर की प्राकृत ===
श्रमण महावीर और बुद्ध ने जिस भाषा या भाषाओं में अपने उपदेश दिए वे प्राकृत के प्राचीन स्तर के उत्कृष्ट रूप रहे होंगे। उनके उपदेशों की भाषा को क्रमश: मागधी एवं अर्धमागधी कहा गया है। किंतु वर्तमान में पालि कही जानेवाली भाषा के ग्रंथों में हमे मागधी का वह स्वरूप नहीं मिलता जैसा पश्चात्कालीन वैयाकरणों ने बतलाया है। तथापि भाषा का जो स्वरूप बौद्ध [[त्रिपिटक]] ग्रंथों में पाया जाता है वह प्राकृत के प्राचीन स्तर का ही स्वीकार किया जाता है। इस स्तर प्राकृत का सर्वत: प्रामाणिक स्वरूप अशोक की शिलाओं और स्तंभो पर उत्कीर्ण धर्मलिपियों में उपलबध होता है। इन शिलाओं की संख्या लगभग 30 है। सौभाग्य से इनमें केवल ई. पूर्व तृतीय शती की प्राकृत भाषा का स्वरूप सुरक्षित है, किंतु उन प्रशस्तियों में तत्कालीन भाषा के प्रादेशिक भेद भी हमें प्राप्त होते हैं। पश्चिमोत्तर प्रदेश में शहबाजगढ़ी और मानसेहरा नामक स्थानों की शिलाओं पर जो 14 प्रशस्तियाँ खुदी हुई पाई गई हैं उनमें स्पर्श वर्णों के अतिरिक्त र् और ल् एवं श् ष् स् ये तीनों ऊष्म प्राय: अपने अपने स्थानों पर सुरक्षित हैं। रकार युक्त संयुक्त वर्ण भी दिखाई देते हैं। किंतु ज्ञ और णय के स्थान पर ंञ का प्रयोग पाया जाता है। इस प्रकार यह भाषा वैयाकरणों की पैशाची प्राकृत का पूर्वरूप कही जा सकती है। ये ही 14 प्रशस्तियाँ उस भाषा को शौरसेनी का प्राचीन रूप प्रकट करती हैं। उत्तर प्रदेशवर्ती कालसी, जौगड़ नछौली नामक स्थानों पर भी वे ही 14 प्रशस्तियाँ उत्कीर्ण हैं। इनमें हमें र् के स्थान पर ल् तथा अकारांत संज्ञाओं के कर्ता कारक एक वचन की ए विभक्ति प्राप्त होती है। तथापि तीनों ऊष्मों के स्थान पर श् नहीं किंतु स् का अस्तित्व मिलता है। इस प्रकार यहाँ मागधी प्राकृत के तीन लक्षण नहीं। अतएव इसे मागधी की अपेक्षा अर्धमागधी प्राकृत के तीन लक्षणों में से दो प्रचुर रूप से प्राप्त होते हैं, किंतु सकार संबंधी तीसरा लक्षण नहीं। अतएव इसे मागधी की अपेक्षा अर्धमागधी प्राकृत का प्राचीन रूप कहना अधिक उपयुक्त प्रतीत होता है। अशोक की प्रशस्तियाँ उनके भाषात्मक महत्व के अतिरिक्त साहित्यिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण हैं। उनमें प्राचीन भारत (ई. पू. 3री शती) के एक ऐसे सम्राट के नीति, धर्म एवं सदाचार संबंधी विचार और उपदेश निहित हैं जिसने न केवल इस विशाल देश के समस्त भागों पर राजनीतिक अधिकार ही प्राप्त किया था, तथा देश के बाहर भी अलेक्जेंड्रिया तक भिन्न भिन्न देशों से सांस्कृतिक संबंध स्थापित किया था और यहाँ अपने धर्मदूत भी भेजे थे। इस सबके बाहर भी अलेक्जेंड्रिया तक भिन्न भिन्न देशों से सांस्कृतिक संबंध स्थापित किया था और वहाँ अपने धर्मदूत भी भेजे थे। इन सब दृष्टियों से यह साहित्य अपने ढंग का अद्वितीय है।
प्राचीन स्तर की प्राकृत का दूसरा उदाहरण उड़ीसा की उदयगिरि खंडगिरि की हाथीगुंफा नामक गुहा में उत्कीर्ण कलिंगसम्राट् खारवेल का लेख है जो अनेक बातों में अशोक के शिलालेखों से समता रखता है। किंतु इसकी अपनी विशेषता यह है कि इसमें उस सम्राट् के वर्षो की विजयों तथा लोककल्याण संबंधी कार्यो का विवरण लिखा गया है। इसका काल अनुमानत: ईसापूर्व द्वितीय शती है। उसकी भाषा [[सम्राट अशोक|अशोक]] की [[अशोक के अभिलेख|गिरनार की प्रशस्तियों]] से मेल खाती है, अतएव वह प्राचीन शौरसेनी कही जा सकती है। इस प्राकृत का ईसापूर्व तीसरी शताब्दी में [[पश्चिमी भारत|पश्चिम भारत]] और उसके सौ, डेढ़ सौ वर्ष पश्चात् [[षट्खण्डागम|जैन षट्खंडागम]] आदि ग्रंथों एवं [[कुन्दकुन्द|कुंदकुंदाचार्य]] आदि की दक्षिण प्रदेश की रचनाओं में पाया जाना उसकी तत्कालीन दिग्विजय तथा सार्वभौमिकता का प्रमाण है। उस काल में इतना प्रचार और किसी भाषा का नहीं पाया जाता।
इसी प्राचीन स्तर की प्राकृत का प्रयोग हमें [[अश्वघोष]] कृत सारिपुत्र प्रकरण आदि नाटकों के उपलब्ध खंडों में प्राप्त होता है। इनमें नायकों तथा एक दो अन्य पात्रों को छोड़कर शेष सभी पात्र प्राकृत बोलते हैं, जिसके तीन रूप स्पष्ट दिखाई देते हैं। सारिपुत्र प्रकरण में दुष्ट की भाषा में र् के स्थान पर ल्, तीनों ऊष्मों के स्थान पर श् तथा अकारांत संज्ञाओं के कर्ताकारक एकवचन के रूप में ए विभक्ति, ये तीन लक्षण स्पष्टत: उस भाग को मागधी सिद्ध करते हैं। यहाँ क् त् आदि अघोष वर्ण न तो ग् द् आदि सघोषों में परिवर्तित हुए मिलते, न थ घ् आदि महाप्राण वर्ण ह् में परिवर्तित हुए मिलते, न थ् घ् आदि महाप्राण वर्ण हृ में परिवर्तित हुए और न दंत्य न् के स्थान पर मूर्धन्य ण दिखाई देता। ये अश्वघोष की प्राकृत के लक्षण उसे प्राचीन स्तर की सिद्ध कर रहे हैं। गोर्व नामक पात्र की भाषा की प्राकृत में र् के स्थान पर स् का प्रयोग हुआ है। ये लक्षण उसे अर्धमागधी सिद्ध कर रहे हैं। नायिका, विदूषक तथा अन्य पात्रों की प्राकृत में र् और ल् अपने अपने स्थानों पर हैं। सब ऊष्म स् के रूपमें पाए जाते हैं तथा कर्ताकारक एकवचन ओकारांत पाया जाता है। इनसे यह भाषा स्पष्टत: प्राचीन शौरसेनी कही जा सकती है।
=== द्वितीय स्तर की प्राकृत ===
इसके पश्चात् प्राकृत भाषाओं के जो भेद प्रभेद हुए उनका विशद वर्णन भरत [[नाट्य शास्त्र|नाट्यशास्त्र]] (अध्याय 17) में प्राप्त होता है। उन्होंने वाणी का पाठ दो प्रकार का माना है- संस्कृत और प्राकृत; तथा कहा है कि प्राकृत में तीन प्रकार के शब्द प्रचलित हैं- समान (तत्सम), विभ्रष्ट (तद्भव) और देशी। नाटक में भाषाप्रयोग का विवरण उन्होंने इस प्रकार दिया है - उत्तम पात्र संस्कृत बोलें, किंतु यदि वे दरिद्र हो जाएँ तो प्राकृत बोलें; श्रमण, तपस्वी, भिक्षु, स्त्री, बालक, आदि अशुद्ध हैं। तथापि इतना स्पष्ट है कि उन्होंने क, त, द, य और व के लोप, ख, घ आदि महाप्राण वर्णो के स्थान पर ह का आदेश; ट का ड, अनादि त् का अस्पष्ट द कार उच्चारण; ष्ट, ष्ण आदि का खकार, इन परिवर्तनों का उल्लेख किया है। इससे प्रमाणित है कि वे द्वितीय स्तर की प्राकृत का ही वर्णन कर रहे हैं। 32वें अध्याय में उन्होंने ध्रुवा नामक गीतिकाव्य का विस्तार से उदाहरणों सहित वर्णन किया है और स्पष्ट कहा है कि ध्रुवा में शौरसेनी का ही प्रयोग किया जाना चाहिए (भाषा तु शोरसेनी ध्रुवायाँ संप्रयोजयेत्)। यह बात उनके उदाहरणों से भी प्रमाणित है। अतः पश्चात्कालीन धारणा निर्मूल है कि नाटकों के गेय भाग में महाराष्ट्री का प्रयोग किया जाय। भरत के मत से नाटक में शौरसेनी भाषा का प्रयोग किया जाय या इच्छानुसार किसी भी देशभाषा का। ऐसी देशभाषाएँ सात हैं - मागधी, आवंती, शौरसेनी, अर्धमागधी, वाह्लीका और दक्षिणात्या। अंतःपुर निवासियों के लिये मागधी; चेट, राजपुत्र और सेठों के लिये अर्घमागधी; विदूषकादि के लिये प्राच्या; नायिका एवं सखियों के लिये अर्धमागघी; विदूषकादि के लिये प्राच्या; नायिका एवं सखियों के लिये शौरसेनी से अविरुद्ध आवंती; योद्धा, नागरिक तथा जुआरियों के लिये दाक्षिणात्या; तथा उदीच्य, खस, शबर, शक आदि जातियों के लिये वाह्लीका का प्रयोग करें। इनके अतिरिक्त भरत ने शबर, आभीर, चांडाल आदि की हीन भाषाओं को विभाशा कहा है। इस प्रकार भरत के नाटक के पात्रों में जो प्राकृत भावनाओं का बँटवारा किया है उसका संस्कृत के नाटकों में आंशिक रूप से ही पालन किया जाता है।
संस्कृत नाटकों में सबसे अधिक प्राकृत का उपयोग और वैचित्र्य [[शूद्रक]] कृत [[मृच्छकटिकम्]] में मिलता है। पिशल, कीथ विद्वानों आदि के मतानुसार तो मृच्छकटिक की रचना का उद्देश्य ही प्राकृत सम्बन्धी नाट्यशास्त्र के नियमों को उदाहृत करना प्रतीत होता है। इस नाटक के टीकाकार पृथ्वीधर के मतानुसार नाटक में चार प्रकार की प्राकृत का ही प्रयोग किया जाता है - शौरसेनी, अवंतिका, प्राच्य और मागधी। प्रस्तुत नाटक में सूत्रधार, नटी, नायिका वसंतसेना, चारुदत्त की ब्राह्मणी स्त्री एवं श्रेष्ठी तथा इनके परिचारक परिचारिकाऐं ऐसे 11 पात्र शौरसेनी बोलते हैं। आवंती भाषा बोलनेवाले केवल दो अप्रधान पात्र हैं। प्राच्य भाषा केवल विदूषक बोलता है; तब कुंज, चेटक, भिक्षु और चारुदत्त का पुत्र कुल छह पात्र मागधी बोलते हैं इनके अतिरिक्त शकारि, चांडाली तथा ढक्की के भी बोलनेवाले एक एक दो दो पात्र हैं। किंतु यदि इन सब पात्रों की भाषा का विश्लेषण किया जाए तो वे सब केवल दो भागों में बाँटी जा सकती हैं - शौरसेनी और मागघी। टीकाकार ने स्वयं कहा है कि आवंती में केवल रकार व लोकोक्तियों का बाहुल्य होता है और प्राच्या में स्वार्थिक ककार का। अन्य बातों में वे शौरसेनी ही हैं। शकारी, चांडाली तथा ढक्की सब मागधी की ही शैलियाँ है। इस प्रकार नामचार का प्राकृत बाहुल्य होने पर भी वस्तुत: [[मृच्छकटिकम्|मृच्छकटिक]] में अश्वघोष के नाटकों की अपेक्षा कोई अधिक भाषाभेद नहीं दिखाई देता। प्राकृत का स्वरूप कालगति से विशेष विकसित हो गया है और उसमें कुछ ऐसे लक्षण आ गए हैं जिनके कारण इस प्राकृत को प्राचीन स्तर की अपेक्षा द्वितीय स्तर की कहा जाता है। इसी स्तर की प्राकृत तथा उसके देशभेदों का विवरण हमें उपलब्ध प्राकृत व्याकरणों में मिलता है और उन्हीं का विपुल साहित्य भी विद्यमान है।
द्वितीय स्तर की प्राकृत का सर्वप्राचीन व्याकरण चंडकृत [[प्राकृत लक्षण]] या [[आर्ष प्राकृत व्याकरण]] है। यह अति संक्षिप्त है और केवल 99 सूत्रों में प्राकृत की विधियों का निरूपण कर दिया गया है। इस स्तर की विशेषता बतलाने वाले सूत्र ध्यान देने योग्य हैं। सूत्र 76 के अनुसार वर्गो के प्रथम क् च् ट् त् आदि वर्णों के स्थान पर तृतीय का आदेश होता है, जैसे, पिशाची --> बिसाजी, जटा --> डटा, कृतं --> कदं, प्रतिसिद्ध --> पदिसिद्धं। सूत्र 77 के अनुसार ख् घ् च् और भ के स्थान में हकार का आदेश जैसे- मुखं --> मुहं, मेघः --> नेहो, माधवः --> माहवो, वृषभः -- वसहो। सूत्र 97 के अनुसार क् तथा वर्गों के तृतीय वर्णो (ग् ज् आदि) का स्वर के परे लोप होता है, जैसे - कोकिलः --> कोहली, भौगिकः --> भोइओ, राजा --> राया, नदी --> नई। सूत्र 98 के अनुसार लुप्त व्यंजन के परे अ होने पर य होता है, जैसे - काकाऊ --> कायाऊ, नानाऊ --> नाया, राजाऊ --> राया। अंतिम 99वें सूत्र में कहा गया है कि प्राकृत की शेष व्यवस्था शिष्ट प्रयोगों से जाननी चाहिए। इनसे आगे के चार सूत्रों में अपभ्रंश का लक्षण, संयुक्त वर्ण से लकार का लोप न होना, पेशाची का र् और ण् के स्थान पर ल् और न का आदेश, मागधिका का र् और स् के स्थान पर ल् और श् का आदेश, तथा शौरसेनी का त् के स्थान में विकल्प से द् का आदेश बतलाया गया है। भाषाशास्त्रियों का मत है कि द्वितीय स्तर के आदि में क आदि अबोध वर्णों के स्थान पर ग् आदि सघोष वर्णो का उच्चारण होने लगा। फिर इनकी अल्पतर ध्वनि शेष रही और फिर सर्वथा लोप हो गया, तथा महाप्राण ध्वनियों के स्थान पर केवल एक शुद्ध ऊष्म ध्वनि ह् अवशिष्ट रह गई। ये प्रवृत्तियाँ तथा उक्त आर्ष व्याकरण में निर्दिष्ट य श्रुति विकल्प से समस्त जैन प्राकृत है। किंतु पश्चात्कालीन 16वीं, 17वीं शती के प्राकृत वैयाकरणों ने प्राकृतों के निरूपण में जो भ्रांतियाँ उत्पन्न की हैं, उनके आधार पर कुछ पाश्चात्य विद्वानों ने जैन साहित्य की प्राकृतों को उक्त विकल्पों के सद्भाव के कारण जैन शौरसेनी तथा जैन महाराष्ट्री नामों द्वारा पृथक् निर्दिष्ट करना आवश्यक समझा, यह ऐतिहासिक दृष्टि से वास्तविक नहीं है।
इस आर्ष प्राकृत व्याकरण के पश्चात् [[प्राकृतप्रकाश]] नामक व्याकरण लिखा गया, जिसमें आगे दो बार वृद्धि की गई। आदि के नौ परिच्छेद [[वररुचि]] कृत हैं। इनमे आदर्श प्राकृत की क्रमशः स्वरविधि, व्यंजनविधि, संयुक्तवर्ण विधि, संकीर्ण, संज्ञारूप, सर्वनाम विधि, क्रियारूप, धात्वादेश एवं अव्ययों का निरूपण किया गया है। अंत में कहा गया है कि प्राकृत का शेष स्वरूप संस्कृत के समझना चाहिए। इस व्याकरण में द्वितीय स्तर के प्राकृत का स्वरूप पूर्णरूप से निर्धारित हुआ पाया जाता है। इसके अनुसार मध्यवर्ती क् ग् च् ज् त् द् प् य और द का प्रायः लोप होता है, एवं ख् घ् थ् ध् और भ् के स्थान पर ह् आदेश। प्राकृतप्रकाश के इस प्राचीन विभाग पर कात्यायन, भामह, वसंतराज, सदानंद और रामपाणिवादकृत टीकाएँ पाई जाती हैं। आगे के 10वें और 12वें परिच्छेदों में क्रमश: पैशाची का 14 सूत्रों में तथा मागधी का 17 सूत्रों में निरूपण किया गया है। इन दोनों भाषाओं की प्रकृति शौरसेनी कही गई है। किंतु इससे पूर्व कहीं भी शौरेसेनी का नाम नहीं आया। अतएव अनुमानतः इसके कर्ताओं की दृष्टि में सामान्य प्राकृत का निरूपण उस काल की सुप्रचलित शोरसेनी का ही है। इन दो परिच्छेदों पर केवल [[भामह]] की टीका है और विद्वानों का अनुमान है कि ये दोनों परिच्छेद उन्हीं के जोड़े हुए हैं। इनमें पैशाची का विशेषता शब्द के मध्य में तृतीय चतुर्थ वर्णो के स्थान पर प्रथम तथा द्वितीय का आदेश, ण के स्थान पर न्, ज्ं, न्य के स्थान पर ंञ तथा त्वा के स्थान पर तूण बतलाई गई है और मागधी की ष्, स्, के स्थान पर क्ष ज् के स्थान पर य्, क्ष के स्थान पर एक अहं के स्थान पर हके, हगे व अहके, तथा अकारांत कर्ता कारक एकवचन के अंत में ए कही गई हैं। प्राकृत प्रकाश का अंतिम 12 वाँ परिच्छेद बहुत पीछे जोड़ा गया प्रतीत होता है। इसपर भामह व अन्य किसी की टीका नहीं है। इस परिच्छेद की अवस्था बड़ी विलक्षण है। इसमें शौरसेनी के लक्षण बतलाए गए हैं, जिसकी आदि में ही प्रकृति संस्कृत कही गई हैं। किंतु अंतिम 32वें सूत्र में पुन: कहा गया है - शेषं महाराष्ट्री वत्। परंतु महाराष्ट्री शब्द इससे पूर्व ग्रंथ भर में अथवा अन्य कहीं व्याकरण में आया ही नहीं है। जान पड़ता है यह परिच्छेद उस समय जोड़ा गया है जब यह धारणा सुदृढ़ हो गई कि प्राकृत काव्य की भाषा महाराष्ट्री ही होनी चाहिए। अतएव जहाँ प्राकृत का निर्देश है, वहाँ महाराष्ट्री का ही तात्पर्य ग्रहण किया जाय। यहाँ जो शौरसेनी का स्वरूप बतलाया गया है, उसी से स्पष्ट हो जाता है कि जो स्वरूप यहाँ सामान्य प्राकृत का बतलाया गया है, वह शौरसेनी का ही कालानुसार विकसित रूप है। उदाहरणार्थ शौरसेनी में मध्यवर्ती त् और थ् के स्थान क्रमश: द् और ध् होते हैं, वहाँ प्राकृत में द् का लोप और थ का ह होता है। "भ्" धातु का शौरसेनी में "भो" ही रहता है, कि किंतु प्राकृत में वहाँ "हो" आदेश कहा गया है। शौरसेनी में नपुंसक बहुवचन के रूप में वहाँ णि होता है, जैसे जलाणि, वाणणि, वहाँ प्राकृत के केवल इ रहता है, जैसे जलाइं, वणाइं शौरसेनी में दोला, दंड तथा दसण का आदि द् प्रकृति रूप रहता है, जबकि प्राकृत में वह ड् हो जाता है, जैसे डोला, डंड व डसण इत्यादि।
प्राकृतप्रकाश के पश्चात् प्राकृत तथा उसकी प्रादेशिक भाषाओं का सर्वांगपूर्ण निरूपण करनेवाला, प्राकृत व्याकरण [[हेमचन्द्राचार्य|हेमचंद्र]] द्वारा 12वीं शती ई० में लिखा गया। इसके चार परिच्छेद हैं, जिनमें से लगभग साढ़े तीन परिच्छेदों में प्राकृत का सुव्यवस्थित विवरण दिया गया है और शेष लगभग 200 सूत्रों में क्रमशः शौरसेनी, मागधी, पैशाची, चूलिका पैशाची और अपभ्रंश भाषाओं के विशेष लक्षण बतलाए हैं। इन भाषाओं में से प्रथम तीन का स्वरूप तो अधिक विस्तृत रूप मे वही है जो ऊपर बतलाया जा चुका है। चूलिका पैशाची के लक्षण यहाँ चार सूत्रों में ये बतलाए गए हैं कि उसमें तीसरे और चौथे वर्णो के स्थान पर प्रथम और द्वितीय का आदेश होता है, र् का ल् विकल्प से होता है, कुछ आचार्यो के मत से आदिवर्ण की ध्वनि में परिवर्तन नहीं होता, शेष बातें पैशाची के समान जाननी चाहिए।
== यह भी देखिये ==
* [[प्राकृत साहित्य]]
* [[अपभ्रंश]]
* [[पालि भाषा]]
* [[शौरसेनी]]
* [[संस्कृत भाषा|संस्कृत]]
* [[भारत की भाषाएँ]]
== बाहरी कड़ियाँ ==
*[https://hi.wiktionary.org/wiki/विक्षनरी:प्राकृत-हिन्दी_शब्दकोश '''पाइअ-सद्द-महण्णवो''' ( प्राकृत-शब्द-महार्णवः)] (हिन्दी विक्षनरी पर पण्डित हरगोविन्ददास विक्रमचन्द सेठ द्वारा रचित प्राकृत-हिन्दी शब्दकोश)
*[http://books.google.co.in/books?id=8wTGMIRwVZ4C&printsec=frontcover#v=onepage&q&f=true प्राकृत शब्द महार्णव (पाइअ सद्द महण्णवो)] (प्राकृत-हिन्दी शब्दकोश ; गूगल पुस्तक ; पण्डित हरगोविन्ददास विक्रमचन्द सेठ)
*[http://www.dli.gov.in/scripts/FullindexDefault.htm?path1=/data4/upload/0098/201&first=1&last=159&barcode=99999990245397 प्राकृत लक्षणम् या चन्द्र व्याकरण] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20160817065334/http://www.dli.gov.in/scripts/FullindexDefault.htm?path1=%2Fdata4%2Fupload%2F0098%2F201&first=1&last=159&barcode=99999990245397 |date=17 अगस्त 2016 }} (भारतीय अंकीय पुस्तकालय)
*[http://gyanpradayani.com/प्राकृत-भाषा-एवं-उसकी-विश/ प्राकृत भाषा एवं उसकी विशेषतायें] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20170223172551/http://gyanpradayani.com/%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%95%e0%a5%83%e0%a4%a4-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b7%e0%a4%be-%e0%a4%8f%e0%a4%b5%e0%a4%82-%e0%a4%89%e0%a4%b8%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%b6/ |date=23 फ़रवरी 2017 }}
*[http://gadyakosh.org/gk/अन्य_प्राकृतिक_भाषाएँ_और_हिन्दी_/_भाषा_की_परिभाषा_/_'हरिऔध' अन्य प्राकृतिक भाषाएँ और हिन्दी] (अयोध्या सिंह उपाध्याय 'हरिऔध')
*[http://www.pravakta.com/contribution-of-prakrit-to-hindi/ प्राकृत का हिन्दी को योगदान] (प्रवक्ता)
*[https://sumedhasanskrtistudies.blogspot.com/2019/06/Prakrit.html प्राकृत भाषा का परिचय]
*[http://www.rachanakar.org/2013/06/blog-post_1496.html साहित्यिक प्राकृतों (शौरसेनी, महाराष्ट्री, मागधी, अर्द्ध-मागधी, पैशाची) को भिन्न भाषाएँ मानने की परम्परागत मान्यताः पुनर्विचार] (प्रोफेसर महावीर सरन जैन का आलेख)
*[https://ia801501.us.archive.org/19/items/in.ernet.dli.2015.402650/2015.402650.Prakrit-Vyakaran.pdf प्राकृत व्याकरण]
*[https://jainworld.jainworld.com/JWHindi/Books/Prakrit+Vyakarnam2+Siddhahem.pdf श्री हेमचन्द्र कृत प्राकृत-व्याकरण] (हिन्दी और संस्कृत टीक्का से युक्त)
*[https://jainworld.jainworld.com/JWHindi/Books/Prakrit+Vyakarnam_2+Hemchandra.pdf हेमचन्द्र-प्रणीत प्राकृत व्याकरण] (हिन्दी टीका सहित)
*[https://rajeduboard.rajasthan.gov.in/books-2019/books-2020/cls12/PrakratBhasha.pdf प्राकृत भाषा एवं साहित्य]
*[https://sanskrit.nic.in/msp/upload/digitized_slm_pdf/Elementary_Course_in_Prakrit/ECPR.pdf प्राकृत परिचय पाठ्यक्रम]
*[https://archive.org/details/in.ernet.dli.2015.405679/page/n25/mode/2up A Grammar Of The Prakrit Language] (डी० जी० सरकार)
*[https://archive.org/details/in.ernet.dli.2015.546001/page/n5/mode/2up Prakrit Grammar Of Hemcandra] (पी० एल० वैद्य)
[[श्रेणी:भारत की भाषाएँ]]
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2026-05-03T04:43:55Z
अनुनाद सिंह
1634
/* प्राकृत का उदाहरण */
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wikitext
text/x-wiki
[[चित्र:Suryaprajnapati Sutra.jpg|right|thumb|400px|१५०० ई में जैन प्राकृत में लिखा गया [[सूर्यप्रज्ञप्ति सूत्र|सूर्यप्रज्ञप्तिसूत्र]] । इसकी रचना मूलतः तीसरी-चौथी शताब्दी ईसापूर्व में की गयी थी।]]
भारतीय आर्यभाषा के मध्ययुग में जो अनेक प्रादेशिक भाषाएँ विकसित हुई उनका सामान्य नाम '''प्राकृत''' है और उन भाषाओं में जो ग्रंथ रचे गए उन सबको समुच्चय रूप से [[प्राकृत साहित्य]] कहा जाता है। प्राकृत का का प्रचार प्राचीन काल में भारत में था और यह प्राचीन [[संस्कृत नाटक|संस्कृत नाटकों]] आदि में स्त्रियों, सेवकों और साधारण व्यक्तियों की बोलचाल में तथा अलग ग्रंथों में पाई जाती है । भारत की बालचाल की भाषाएँ बोलचाल की प्राकृतों से बनी हैं ।
विकास की दृष्टि से भाषावैज्ञानिकों ने [[भारत]] में आर्यभाषा के तीन स्तर नियत किए हैं - प्राचीन, मध्यकालीन और अर्वाचीन। प्राचीन स्तर की भाषाएँ [[वैदिक संस्कृत]] और [[संस्कृत भाषा|संस्कृत]] हैं, जिनके विकास का काल अनुमानतः ईसापूर्व 2000 से ईसापूर्व 600 तक माना जाता है। मध्ययुगीन भाषाएँ हैं - [[मागधी]], [[अर्धमागधी]], [[शौरसेनी]], [[पैशाची भाषा]], [[महाराष्ट्री प्राकृत|महाराष्ट्री]] और [[अपभ्रंश]]। इनका विकासकाल ई. पूर्व 600 ई. 1000 तक पाया जाता है।
[[हेमचन्द्राचार्य|हेमचंद्र]] ने संस्कृत को प्राकृत की 'प्रकृति' कहकर सूचित किया है कि प्राकृत, संस्कृत से निकलती है, पर प्रकृति का यह अर्थ नहीं है । केवल संस्कृत का आधार रखकर प्राकृत व्याकरण की रचना हुई है। पर अनुमान है कि ईसवी सन् से प्रायः ३०० वर्ष पहलै यह भाषा प्राकृत रूप में आ चुकी थी । उस समय इसके पश्चिमी और पूर्वी दो भेद थे । यह पूर्वी प्राकृत ही [[पालि|पाली भाषा]] के नाम से प्रसिद्ध हुई। बौद्ध धर्म के प्रचार के साथ इस मागधी या पाली भाषा की बहुत अधिक उन्नति हुई, क्योंकि बौद्ध धर्म के सभी ग्रंथ पहले इसी भाषा में लिखे गए । धीरे-धीरे प्राचीन प्राकृतों के विकास से आज से प्रायः १००० वर्ष पहले देश-भाषाओं का जन्म हुआ था । जिस प्रकार संस्कृत भाषा का सबसे पुराना रूप वैदिक भाषा है, उसी प्रकार प्राकृत भाषा का भी जो पूराना रूप मिलता है उसे "आर्ष प्राकृत" कहते हैं । कुछ बौद्ध तथा जैन विद्वानों का मत है कि [[पाणिनि]] ने इस आर्ष प्राकृत का भी एक व्याकरण बनाया था । पर कुछ लोगों को यह संदेह है कि कदाचित् पाणिनि के समय प्राकृत भाषा का जन्म ही नहीं हुआ था । मार्कण्डेय ने प्राकृत के इस प्रकार भेद किए हैं—(१) भाषा (महाराष्ट्रा, शौरसेनी, प्राच्या, आवंती, मागधी, अद्धंमागधी), (२) विभाषा (शाकारी, चांडाली, शावरी, आभीरी, टाक्की, औड्री, द्रविडी), (३) अपभ्रंश, और (४) पैशाची । चूलिका पैशाची आदि कुछ निम्न श्रेणी की प्राकृतें भी हैं । सबसे प्राचीन काल में मागधी की भाषा पाली के नाम से साहित्य की ओर अग्रसर हुई । [[बौद्ध ग्रंथ]] पहले इसी भाषा में लिखे गए । यह मागधी, व्याकरणों की मागधी से पृथक् और प्राचीन भाषा है । पीछे जैनों के द्वारा अर्द्धमागधी और महाराष्ट्री का आदर हुआ । महाराष्ट्री साहित्य की प्राकृत हुई जिसके एक कृत्रिम रूप का व्यवहार संस्कृत के नाटकों में हुआ । इन प्राकृतों से आगे चलकर और घिसकर जो रूप हुआ वह [[अपभ्रंश]] कहलाया । इसी अपभ्रंश के नाना रूपों से आजकल की आर्य शाखा की देशभाषाएँ निकली हैं । इसके अतिरिक्त [[ललितविस्तर]] में एक प्रकार की और प्राकृत मिलती है जो संस्कृत से बहुत कुछ मिलती जुलती है।
== प्राकृत का उदाहरण ==
निम्नलिखित प्राकृत गद्यांश "अमंगलियपुुरिसस्स कहा" (अमांगलिक पुरुष की कथा) से लिया गया है।
: ''एगंमि नयरे एगो अमंगलिओ मुद्धो पुरिसो आसि। सो एरिसो अत्थि, जो को वि पभायंमि तस्स मुहं पासेइ, सो भोयणं पि न लहेज्जा। पउरा वि पच्चूसे कया वि तस्स मुहं न पिक्खंति। नरवइणावि अमंगलियपुरिसस्स वट्टा सुणिआ। परिक्खणथं णरिंदेण एगया पभायकाले सो आहूओ, तस्स मुहं दिट्ठं। जया राया भोयणत्थमुवविसइ, कवलं च मुहे पक्खिवइ, तया अहिलंमि नयरे अकम्हा परचक्कभएण हलबोलो जाओ। तया नरवई वि भोयणं चिच्चा सहसा उत्थाय ससेण्णो नयराओ बहिं निग्गओ। भयकारणमदट्ठूण पुणो पच्छा आगओ समाणो नरिंदो चिंतेइ, अस्स अमंगलियं अस्स बोल्लाविऊण सरूवं मए पच्चक्खं दिट्ठं, तओ एसो हंतव्वो ̧ एवं चिंतिऊण अमंगलियं बोल्लाविऊण वहत्थं चंडालस्स अप्पेइ।
: ''विविध् प्रावृफत-पाठ: वज्जालग्ग ;वज्जालग्गंद्धजया एसो रुयंतो, सकम्मं निंदंतो चंडालेण सह गच्छेइ। तया एगो कारुणिओ बुद्धिणिहाणो वहाइ नेइज्जमाणं तं दट्ठूणं कारणं णच्चा तस्स रक्खणाय कण्णे किंपि कहिऊण उवायं दंसेइ। हरिसंतो जया वहत्थंभे ठविओ, तया चंडालेण सो पुच्छिओ, "जीवणं विणा तव कावि इच्छा सिया, तया मग्गसु त्ति।" सो कहेइ, "मज्झ नरिंदमुहदंसणेच्छा अत्थि। जया सो नरिंदसमीवमाणीओ तया नरिंदो तं पुच्छइ, "किमेत्थ आगमणपओयणं? सो केहेइ, "हे नरिंद! पच्चूसे मम मुुहस्स दंसणेण भोयणं न लब्भइ, परंतु तुम्हाणं मुह पेक्खणेण मम वहो भविस्सइ, तथा पउरा किं कहिस्संति?। मम मुहाओ सिरिमंताणं मुहदंसणं केरिसपफलयं संजायं, नायरा वि पभाए तुम्हाणं मुुहं कहं पासिहिरे। एवं तस्स वयणजुत्तीए संतुट्ठो नरिंदो वहाएसं निसेहिऊण पारितोसिअं च दच्चा तं अमंगलिअं संतोसीअ।
; हिन्दी-भावार्थ
: एक नगर में एक अमांगलिक मूर्ख-पुरुष था। वह ऐसा था कि जो कोई भी प्रभात में उसके मुख को देखता, वह उस दिन भोजन भी नहीं पाता (उसे भोजन भी नहीं मिलता)। नगर के निवासी प्रातःकाल में कभी भी उसके मुंह को नहीं देखते थे। राजा के द्वारा भी अमांगलिक पुरुष की बात सुनी गयी थी। परीक्षा के लिए राजा के द्वारा एक बार प्रभातकाल में वह बुलाया गया। अमांगलिक पुरुष का मुख देखकर ज्यों हि राजा भोजन के लिए बैठा और मुंह में (रोटी का) ग्रास रखा त्यों हि समस्त नगर में अकस्मात् शत्रु के द्वारा आक्रमण के भय से शोरगुल हुआ। तब राजा भी भोजन को छोड़कर (और) शीघ्र उठकर सेना-सहित नगर से बाहर गया और भय के कारण बीत जाने पर वापस आया। अहंकारी राजा ने सोचा, इस अमांगलिक के स्वरूप को मेरे द्वारा प्रत्यक्ष देखा गया, इसलिए यह मारा जाना चाहिए।
: इस प्रकार विचारकर अमांगलिक को बुलवाकर वध के लिए चांडाल को सौंप दिया। जब यह अमांगलिक रोता हुआ स्व-कर्म की निन्दा करता हुआ चाण्डाल के साथ जा रहा था। तब एक दयावान बुद्धिमान ने वध के लिए ले जाए जाते हुए उसको देखकर, कारण को जानकर उसकी रक्षा के लिए उसके कान में कुछ कहकर उपाय सुझाया। इसके पफलस्वरूप वह प्रसन्न होते हुए चला। जब वह वध के खम्भे पर खड़ा किया गया तब चाण्डाल ने उससे पूछा- जीवन के अलावा कोई तुम्हारी, (वस्तु की) इच्छा हो, तो (तुम्हारे द्वारा) वह वस्तु मांगी जानी चाहिए। उसने कहा मेरी इच्छा राजा के मुख-दर्शन की है। तब वह राजा के सामने लाया गया। राजा ने उसको पूछा : यहाँ आने का प्रयोजन क्या है? उसने कहा : हे राजन्! प्रातःकाल में मेरे मुख के दर्शन से (तुम्हारे द्वारा) भोजन ग्रहण नहीं किया गया, परन्तु तुम्हारा मुख देखने से मेरा वध होगा तब नगर के निवासी क्या कहेंगे? मेरे मुँह (दर्शन) की तुलना में श्रीमान् का मुख-दर्शन कैसा फल उत्पन्न करता है? नागरिक भी प्रभात् में तुम्हारे मुख को कैसे देखेंगे? इसप्रकार उसकी वचन की युक्ति से संतुष्ट हुए राजा ने वध के आदेश को निरस्त करके और उसको पारितोषिक देकर उस अमांगलिक को संतुष्ट किया।
== 'प्राकृत' शब्द की व्युत्पत्ति ==
'प्राकृत' शब्द को लेकर अनेकों अर्थ विचारणाएं उपलब्ध होती हैं। उन में से कुछ ये हैं-
*(०) प्रकृत्या भवं प्राकृतं
* (अर्थ : जो स्वाभाविक रूप से उद्भूत हुई, वही प्राकृत है।)
*(१) प्रकृतिः संस्कृतं तत्र भवं तत आगतं वा प्राकृतम् (हेमचन्द्रकृत प्राकृत-व्याकरण ८।१।१)
: (अर्थ : प्रकृति या मूल संस्कृत है ; और जो संस्कृत से उत्पन्न हुआ है या वहाँ से से आगत है, वह प्राकृत है। )
*(२) प्रकृतिः संस्कृतं तत्र भवं प्राकृतमुच्यते (प्राकृतसर्वस्व १।१)
: (अर्थ : प्रकृति या मूल संस्कृत है, उससे उत्पन्न भाषा को प्राकृत कहते हैं।)
*(३) प्रकृतिः संस्कृतं तत्र भवत्वात् प्राकृतं स्मृतम् (प्राकृत-चन्द्रिका)
: (अर्थ : प्रकृति या मूल संस्कृत है, उससे उत्पन्न भाषा को प्राकृत कहते हैं।)
*(४) प्राकृतेः संस्कृतायास्तु विकृतिः प्राकृती मता (लक्ष्मीधर कृत षड्भाषाचन्द्रिका, पृष्ठ ४ )
: ( अर्थ : संस्कृत की विकृति, प्राकृत है।)
*(५) प्राकृतस्य तु सर्वमेव संस्कृत योनिः (वासुदेवकृत कर्पूरमञ्जरी सञ्जीवनी-टीका ९।२ )
: (अर्थ : प्राकृत की जननी संस्कृत है।)
*(६) प्रकृतेः संस्कृतात् आगतं प्राकृतम् (सिंह देवमणि)
: ( अर्थ : प्रकृति संस्कृत से आगत प्राकृत है।)
*(७) प्रकृतिः संस्कृतं तत्र भवं प्राकृतमुच्यते (मार्कण्डेय कृत प्राकृतसर्वस्व)।
: ( अर्थ : प्रकृति या मूल संस्कृत है, उससे उत्पन्न भाषा को प्राकृत कहते हैं। )
*(८) प्रकृत्या स्वभावेन सिद्धं प्राकृतम्
: (अर्थ: जन सामान्य की स्वाभाविक भाषा प्राकृत है ।)
*(९) प्राचीन विद्वान नमिसाधु के अनुसार प्राकृत शब्द का अर्थ है- व्याकरण आदि संस्कारों से रहित लोगों का स्वाभाविक वचन-व्यापार। उससे उत्पन्न अथवा वही वचन व्यापार प्राकृत है ।
अब प्रायः सभी विद्वानों ने इस बात को स्वीकार लिया है कि प्राकृत की उत्पत्ति संस्कृत से हुई है। प्राकृत शब्द की इन सब व्युत्पत्तियों का जब गंभीरता से परिशीलन करते हैं तो यह स्पष्ट हो जाता है कि 'प्राकृत' शब्द, 'प्रकृति' शब्द से निष्पन्न हुआ है और प्रकृति का अर्थ है-संस्कृत भाषा। इस विचारणा से यह स्पष्ट हो जाता है कि संस्कृत भाषा प्राकृत भाषा की जननी है । अर्थात् संस्कृत भाषा से होने वाली भाषा प्राकृत भाषा कहलाती है ।
== मध्ययुगीन भाषाओं '''(प्राकृत)''' की मुख्य विशेषताएँ ==
प्राकृत भाषा में द्विवचन नहीं है और उसकी वर्णमाला में ऋ ऋ लृ लृ ऐ और औ स्वर तथा श ष और विसर्ग (ः) नहीं हैं । प्राचीन भाषाओं से उक्त मध्ययुगीन भाषाओं में मुख्यतः निम्न विशेषताएँ पाई जाती हैं :
'''(1)''' संस्कृत के स्वरों में ऋ, लृ, एवं ऐ और औ का मध्ययुगीन भाषाओं में अभाव है। ए और ओ की ह्रस्व मात्राओं का प्रयोग इन भाषाओं की अपनी विशेषता है।
'''(2)''' विसर्ग यहाँ सर्वथा नहीं पाया जाता।
'''(3)''' क से लेकर म् तक के स्पर्शवर्ण पाए जाते हैं। किंतु अनुनासिकों में संकोच तथा व्यत्यय होता है।
'''(4)''' तीनों ऊष्म वर्णो के स्थान पर केवल एक और विशेषतः '''स् ''' ही अवशिष्ट पाया जाता है।
'''(5)''' संयुक्त व्यंजनों का प्राय अभाव है। दोनों संयोगी व्यंजनों का या तो समीकरण कर लिया जाता है अथवा स्वरागम द्वारा दोनों को विभक्त कर दिया जाता है, या उनमें से एक का लोप कर दिया जाता है।
'''(6)''' द्वित्व व्यंजन से पूर्व का दीर्घ स्वर ह्रस्व कर दिया जाता है एवं संयुक्त व्यंजन में से एक का लोप कर उससे पूर्व का ह्रस्व स्वर दीर्घ कर दिया जाता है।
'''(7)''' हलन्त संज्ञाओं और धातुओं को स्वरान्त बनाकर चलाया जाता है।
'''(8)''' व्याकरण की दृष्टि से संज्ञाओं तथा क्रियाओं के रूपों में द्विवचन नहीं पाया जाता।
'''(9)''' [[कारक]] के रूपों में संकोच पाया जाता है।
'''(10)''' क्रियाओं में गणभेद एवं परस्मैपद आत्मनेपद का भेद नहीं किया जाता।
'''(11)''' सभी प्रकार के रूप विकल्प से चलते हैं।
'''(12)''' क्रियारूपों में कालादि भेदों का अल्पीकरण हुआ है। इनका बहुत काम बहुधा कृदंतों से चलाया जाता है।
== प्राकृत की उत्पत्ति के विभिन्न सिद्धान्त ==
अब प्रश्न यह होता है कि मध्ययुग की भाषाओं में संस्कृत की अपेक्षा इतनी अधिक विशेषताएँ कब, क्यों, कैसे और कहाँ पर उत्पन्न हो गईं। प्राकृत के वररुचि आदि वैयाकरणों ने प्राकृत भाषाओं की प्रकृति संस्कृत को मानकर उससे प्राकृत शब्द की व्युत्पत्ति की है। "प्रकृति: संस्कृतं, तत्रभवं तत आगतं वा प्राकृतम्"। किंतु संस्कृत भाषा का वर्तमान स्वरूप स्वयं ई. पूर्व छठी शती के लगभग विकसित हुआ है और उसे स्थिर रूप तो पाणिनि द्वारा ई. पू. तीसरी चौथी शती में दिया गया है। संस्कृत के उक्त प्रकार के अनेक लक्षणों से विभिन्न भाषाओं का छठी शती ई. पू. में ही उत्पन्न होना कैसे संभव हो सकता है ? इसके अतिरिक्त प्राकृत में ऐसे भी अनेक शब्द पाए जाते हैं जिनका संस्कृत में अभाव है, किंतु वैदिक भाषा में वे विद्यमान हैं। प्राकृत की अनेक प्रवृत्तियों को लिए हुए बहुत से शब्द वेदों में पाए जाते हैं, जो [[संस्कृत व्याकरण]] के अनुकूल नहीं हैं। इस समस्या पर अनेक पाश्चात्य विद्वानों का एक मत यह है कि आर्यभाषा जब भारतवर्ष में प्रचलित हुई, अनार्य लोग उसका आर्यो के सदृश शुद्ध शुद्ध उच्चारण और प्रयोग नहीं कर पाए; अतएव उन्होंने अपने निजी उच्चारण एवं भाषाशैली के अनुसार उसे बोलना प्रारंभ किया और उनके संपर्क से इस का प्रभाव आर्यो पर भी पड़ा। इसी के फलस्वरूप प्राकृत भाषा की प्रवृत्तियों का विकास हुआ। इस मत के समर्थन में यह बात भी ध्यान देने योग्य है कि वैदिक काल से ही जो ट् ठ् आदि मूर्धन्य ध्वनियों का प्रवेश आर्यभाषा में हुआ, वह बहुलता से उस काल की अनार्य भाषाओं का ही प्रभाव था। किंतु प्राचीन अनार्य भाषाओं का विश्लेषण कर यह सिद्ध नहीं किया जा सकता कि प्राकृत की उक्त विशेषताओं का बीज उन अनार्य भाषाओं में विद्यमान थे। इसीलिये इस मत के संबंध में विवाद है।
दूसरा मत यह है कि वेदों की भाषा बोलनेवाले जातियों में ही स्वयं ध्वन्यात्मक भेद थे, जिनके कुछ प्रमाण वेदों में ही उपस्थित है अनुमानत: वेदों की भाषा उस काल की रूढ़िबद्ध वेदभाषा के क्रमविक से अनुमानत: कई हजार वर्षो में संस्कृत भाषा का विकास हुआ, पर विशेषत: सुशिक्षित पुरोहित वर्ग की अपनी भाषा थी, तथा जिसमें धार्मिक कार्यों मे ही उपयोग किया जाता था। उतने ही काल प्राचीनतम वैदिक भाषा की समकालीन जनसाधारण की लोकभाषा से संस्कृत के साथ साथ ही प्राकृत का भी विकास हुआ, जिसमें प्रदेशभेदानुसार नाना भेद थे। इस संबंध में यह भी बात ध्यान देने योग्य है कि भारत में आर्यों का प्रवेश एक ही काल में एवं एक धारा में हुआ नहीं कहा जा सकता। यदि आगे पीछे आनेवाली आर्य जातियों के भाषाभेद से प्राकृत भाषाओं के उद्गम और विकास व संबंध हो तो आश्चर्य नहीं। इस संबंध में हॉर्नले और ग्रियर्सन के वह मत भी उल्लेखनीय है जिसके अनुसार भारतीय आर्यभाषाएँ दो वर्गो में विभाजित पाई जाती हैं हृ एक बाह्य और दूसरा आभ्यंतर उत्तर, पश्चिम, दक्षिण और पूर्व की भाषाओं के उक्त प्रकार दो वर्ग उत्पन्न हो गए। इसे संक्षेप में समझने के लिये महाराष्ट्र प्रदेश के नामों जैसे गोखले, खेर, परांजपे, पाध्ये, मुंजे गोडवोले, तांबे, तथा लंका में प्रचलित नामों जैसे गुणतिलके सेना नायके, बंदरनायक आदि में जो अकारांत कर्ता एक वचन के रूप से ए प्रत्यय दिखाई देता है, वही पूर्व की मागधी प्राकृत मे अपने नियमित स्थिरता को प्राप्त हुआ पाया जाता है। आदि आर्यभाषा मे वैदिक र् के स्थान पर ल् का उच्चारण भी माना गया है, जैसे कुलउ उ श्रोत्र। उसी प्रवृत्ति के फलस्वरूप वैदिक वृक् के स्थान पर जर्मन भाषासमूह में वुल्फ़ एवं ग्रीक में पृथु का प्लुतुस् पाया जाता है। यह र् के स्थान पर ल् का उच्चाराण ध्वनि मागधी से सुरक्षित हैं, किंतु उसी काल की बोलियों में उनके समीकृत रूप जैसे ओत्त अत्त, सत्त, भी पाए जाते हैं। बोगाजकुई के भिन्न मितन्नि (मैत्रा यणी ?) आर्यशाखा के जो लगभग 200 ई. पू. के लेख मिले हैं उनमें इंद्र और नासत्य देवताओं के नाम इंदर और नासातीय रूप से अंकित हैं। उनमें स्वरभक्ति द्वारा संयुक्त वर्णो के संयुक्त किए जाने की प्रवृत्ति विद्यमान है। वरुण देवता का नाम "उरुवन" रूप में उल्लिखित है जिसमें स्वर के अग्रागम तथा वर्णव्यत्यय की प्रवृत्ति स्पष्ट दिखाई देती है। ये प्रवृत्तियाँ प्राकृत के सामान्य लक्षण हैं। पालि में प्रयुक्त इध संस्कृत तथा वैदिक के इह से पूर्वकालीन परंपरा का है इसमें भी किसी को कोई संदेह नहीं है। आदि आर्यभाषा में ए तथा ओ के ह्रस्व रूप थे; ऐ और औ का अभाव था; किंतु अइ, अउ जैसे मिश्र स्वर प्रचलित थे; अनुनासिक स्पर्शों का संकोच था; तीन ऊष्मों में केवल एकमात्र स् ही था। ये ध्वन्यात्मक विशेषताएँ प्रधानत: शौरसेनी प्राकृत में सुरक्षित पाई जाती हैं, इत्यादि। इन लक्षणों के सद्भाव का समाधान समुचित रूप से यही मानकर किया जा सकता है कि प्राकृत भाषाओं में उनका आगमन प्राचीनतम आर्य जातियों की बोलियों से अविच्छिन्न परंपरा द्वारा चला आया है। यथार्थत: संस्कृत हो अथवा वैदिक को ही प्राकृत की प्रकृति मान लेने से उक्त लक्षणों का कोई समाधान नहीं होता।
तब प्राकृत के वैयाकरणों ने संस्कृत को प्राकृत की प्रकृति क्यों कहा? इसका कारण उन व्याकरणों के रचे जाने के काल और उनके स्वरूप पर ध्यान देने से स्पष्टत: समझ मे आ जाता है। वे व्याकरण उस काल में लिखे गए जब विद्वत्समाज में प्राकृत की अपेक्षा संस्कृत का अधिक प्रचार और सम्मान था। वे लिखे भी संस्कृत भाषा में गए हैं तथा उनका उद्देश्य भी संस्कृत नाटकों में भी प्राकृतिकता रखने के लिए करना पड़ता था और जिनमें उत्कृष्ट साहित्यिक रचनाएँ भी निर्मित हो चुकी थीं। अतएव उन वैयाकरणों ने संस्कृत को आदर्श ठहराकर उससे जो विशेषताएँ प्राकृत में थीं उनका विवरण उपस्थित कर दिया और इसकी सार्थकता संस्कृत को प्राकृत की प्रकृति कहकर सिद्ध कर दी। तथापि नमिसाधु ने अपना यह मत स्पष्ट प्रकट किया है कि प्रकृति का अर्थ लोक या जनता है और जनसाधारण को भाषा होने से ही वह प्राकृत कहलाई। प्रकृति का अर्थ लोक बहुत प्राचीन है तथा [[कालिदास]] ने भी उसका लोक के अर्थ में प्रयोग किया है (राजा प्रकृति रंजनात्, रघु. सर्ग, 4)। प्राकृतों की इस अति प्राचीन परंपरा के प्रकाश में इन भाषाओं को वैदिक और संस्कृत की अपेक्षा उत्तरकालीन व मध्ययुगीन कहने का औचित्य भी विचारणीय हो जाता है। उसकी यदि कोई सार्थकता है तो केवल इतनी कि ये भाषाएँ वैदिक और संस्कृत के पश्चात् ही साहित्य में प्रयुक्त हुईं। उनका प्रथम बार धार्मिक प्रचार के लिये उपयोग ई. पू. छठी शती मे श्रमण महावीर और बुद्ध ने किया। तथा उनकी साहित्यिक रचनाओं में शब्दों तथा शैली की दृष्टि से संस्कृत का बड़ा प्रभाव दृष्टिगोचर होता है।
== प्राकृत भाषा का स्वरूप एवं क्रमिक विकास ==
भाषा जब तक बोली के रूप में रहती है, उसमें देश और काल की अपेक्षा निरंतर परिवर्तन होते रहते हैं। इसी नियम के अनुसार काल के सापेक्ष प्राकृत के तीन स्तर स्वीकार किए गए हैं -
* पूर्वकालीन (ई. पू. 600 से 100 ई. तक),
* मध्यकालीन (ई. 100 से 600 ई. स. तक) तथा
* उत्तरकालीन (ई. सन् 600 से 1000 तक)।
=== प्राचीन स्तर की प्राकृत ===
श्रमण महावीर और बुद्ध ने जिस भाषा या भाषाओं में अपने उपदेश दिए वे प्राकृत के प्राचीन स्तर के उत्कृष्ट रूप रहे होंगे। उनके उपदेशों की भाषा को क्रमश: मागधी एवं अर्धमागधी कहा गया है। किंतु वर्तमान में पालि कही जानेवाली भाषा के ग्रंथों में हमे मागधी का वह स्वरूप नहीं मिलता जैसा पश्चात्कालीन वैयाकरणों ने बतलाया है। तथापि भाषा का जो स्वरूप बौद्ध [[त्रिपिटक]] ग्रंथों में पाया जाता है वह प्राकृत के प्राचीन स्तर का ही स्वीकार किया जाता है। इस स्तर प्राकृत का सर्वत: प्रामाणिक स्वरूप अशोक की शिलाओं और स्तंभो पर उत्कीर्ण धर्मलिपियों में उपलबध होता है। इन शिलाओं की संख्या लगभग 30 है। सौभाग्य से इनमें केवल ई. पूर्व तृतीय शती की प्राकृत भाषा का स्वरूप सुरक्षित है, किंतु उन प्रशस्तियों में तत्कालीन भाषा के प्रादेशिक भेद भी हमें प्राप्त होते हैं। पश्चिमोत्तर प्रदेश में शहबाजगढ़ी और मानसेहरा नामक स्थानों की शिलाओं पर जो 14 प्रशस्तियाँ खुदी हुई पाई गई हैं उनमें स्पर्श वर्णों के अतिरिक्त र् और ल् एवं श् ष् स् ये तीनों ऊष्म प्राय: अपने अपने स्थानों पर सुरक्षित हैं। रकार युक्त संयुक्त वर्ण भी दिखाई देते हैं। किंतु ज्ञ और णय के स्थान पर ंञ का प्रयोग पाया जाता है। इस प्रकार यह भाषा वैयाकरणों की पैशाची प्राकृत का पूर्वरूप कही जा सकती है। ये ही 14 प्रशस्तियाँ उस भाषा को शौरसेनी का प्राचीन रूप प्रकट करती हैं। उत्तर प्रदेशवर्ती कालसी, जौगड़ नछौली नामक स्थानों पर भी वे ही 14 प्रशस्तियाँ उत्कीर्ण हैं। इनमें हमें र् के स्थान पर ल् तथा अकारांत संज्ञाओं के कर्ता कारक एक वचन की ए विभक्ति प्राप्त होती है। तथापि तीनों ऊष्मों के स्थान पर श् नहीं किंतु स् का अस्तित्व मिलता है। इस प्रकार यहाँ मागधी प्राकृत के तीन लक्षण नहीं। अतएव इसे मागधी की अपेक्षा अर्धमागधी प्राकृत के तीन लक्षणों में से दो प्रचुर रूप से प्राप्त होते हैं, किंतु सकार संबंधी तीसरा लक्षण नहीं। अतएव इसे मागधी की अपेक्षा अर्धमागधी प्राकृत का प्राचीन रूप कहना अधिक उपयुक्त प्रतीत होता है। अशोक की प्रशस्तियाँ उनके भाषात्मक महत्व के अतिरिक्त साहित्यिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण हैं। उनमें प्राचीन भारत (ई. पू. 3री शती) के एक ऐसे सम्राट के नीति, धर्म एवं सदाचार संबंधी विचार और उपदेश निहित हैं जिसने न केवल इस विशाल देश के समस्त भागों पर राजनीतिक अधिकार ही प्राप्त किया था, तथा देश के बाहर भी अलेक्जेंड्रिया तक भिन्न भिन्न देशों से सांस्कृतिक संबंध स्थापित किया था और यहाँ अपने धर्मदूत भी भेजे थे। इस सबके बाहर भी अलेक्जेंड्रिया तक भिन्न भिन्न देशों से सांस्कृतिक संबंध स्थापित किया था और वहाँ अपने धर्मदूत भी भेजे थे। इन सब दृष्टियों से यह साहित्य अपने ढंग का अद्वितीय है।
प्राचीन स्तर की प्राकृत का दूसरा उदाहरण उड़ीसा की उदयगिरि खंडगिरि की हाथीगुंफा नामक गुहा में उत्कीर्ण कलिंगसम्राट् खारवेल का लेख है जो अनेक बातों में अशोक के शिलालेखों से समता रखता है। किंतु इसकी अपनी विशेषता यह है कि इसमें उस सम्राट् के वर्षो की विजयों तथा लोककल्याण संबंधी कार्यो का विवरण लिखा गया है। इसका काल अनुमानत: ईसापूर्व द्वितीय शती है। उसकी भाषा [[सम्राट अशोक|अशोक]] की [[अशोक के अभिलेख|गिरनार की प्रशस्तियों]] से मेल खाती है, अतएव वह प्राचीन शौरसेनी कही जा सकती है। इस प्राकृत का ईसापूर्व तीसरी शताब्दी में [[पश्चिमी भारत|पश्चिम भारत]] और उसके सौ, डेढ़ सौ वर्ष पश्चात् [[षट्खण्डागम|जैन षट्खंडागम]] आदि ग्रंथों एवं [[कुन्दकुन्द|कुंदकुंदाचार्य]] आदि की दक्षिण प्रदेश की रचनाओं में पाया जाना उसकी तत्कालीन दिग्विजय तथा सार्वभौमिकता का प्रमाण है। उस काल में इतना प्रचार और किसी भाषा का नहीं पाया जाता।
इसी प्राचीन स्तर की प्राकृत का प्रयोग हमें [[अश्वघोष]] कृत सारिपुत्र प्रकरण आदि नाटकों के उपलब्ध खंडों में प्राप्त होता है। इनमें नायकों तथा एक दो अन्य पात्रों को छोड़कर शेष सभी पात्र प्राकृत बोलते हैं, जिसके तीन रूप स्पष्ट दिखाई देते हैं। सारिपुत्र प्रकरण में दुष्ट की भाषा में र् के स्थान पर ल्, तीनों ऊष्मों के स्थान पर श् तथा अकारांत संज्ञाओं के कर्ताकारक एकवचन के रूप में ए विभक्ति, ये तीन लक्षण स्पष्टत: उस भाग को मागधी सिद्ध करते हैं। यहाँ क् त् आदि अघोष वर्ण न तो ग् द् आदि सघोषों में परिवर्तित हुए मिलते, न थ घ् आदि महाप्राण वर्ण ह् में परिवर्तित हुए मिलते, न थ् घ् आदि महाप्राण वर्ण हृ में परिवर्तित हुए और न दंत्य न् के स्थान पर मूर्धन्य ण दिखाई देता। ये अश्वघोष की प्राकृत के लक्षण उसे प्राचीन स्तर की सिद्ध कर रहे हैं। गोर्व नामक पात्र की भाषा की प्राकृत में र् के स्थान पर स् का प्रयोग हुआ है। ये लक्षण उसे अर्धमागधी सिद्ध कर रहे हैं। नायिका, विदूषक तथा अन्य पात्रों की प्राकृत में र् और ल् अपने अपने स्थानों पर हैं। सब ऊष्म स् के रूपमें पाए जाते हैं तथा कर्ताकारक एकवचन ओकारांत पाया जाता है। इनसे यह भाषा स्पष्टत: प्राचीन शौरसेनी कही जा सकती है।
=== द्वितीय स्तर की प्राकृत ===
इसके पश्चात् प्राकृत भाषाओं के जो भेद प्रभेद हुए उनका विशद वर्णन भरत [[नाट्य शास्त्र|नाट्यशास्त्र]] (अध्याय 17) में प्राप्त होता है। उन्होंने वाणी का पाठ दो प्रकार का माना है- संस्कृत और प्राकृत; तथा कहा है कि प्राकृत में तीन प्रकार के शब्द प्रचलित हैं- समान (तत्सम), विभ्रष्ट (तद्भव) और देशी। नाटक में भाषाप्रयोग का विवरण उन्होंने इस प्रकार दिया है - उत्तम पात्र संस्कृत बोलें, किंतु यदि वे दरिद्र हो जाएँ तो प्राकृत बोलें; श्रमण, तपस्वी, भिक्षु, स्त्री, बालक, आदि अशुद्ध हैं। तथापि इतना स्पष्ट है कि उन्होंने क, त, द, य और व के लोप, ख, घ आदि महाप्राण वर्णो के स्थान पर ह का आदेश; ट का ड, अनादि त् का अस्पष्ट द कार उच्चारण; ष्ट, ष्ण आदि का खकार, इन परिवर्तनों का उल्लेख किया है। इससे प्रमाणित है कि वे द्वितीय स्तर की प्राकृत का ही वर्णन कर रहे हैं। 32वें अध्याय में उन्होंने ध्रुवा नामक गीतिकाव्य का विस्तार से उदाहरणों सहित वर्णन किया है और स्पष्ट कहा है कि ध्रुवा में शौरसेनी का ही प्रयोग किया जाना चाहिए (भाषा तु शोरसेनी ध्रुवायाँ संप्रयोजयेत्)। यह बात उनके उदाहरणों से भी प्रमाणित है। अतः पश्चात्कालीन धारणा निर्मूल है कि नाटकों के गेय भाग में महाराष्ट्री का प्रयोग किया जाय। भरत के मत से नाटक में शौरसेनी भाषा का प्रयोग किया जाय या इच्छानुसार किसी भी देशभाषा का। ऐसी देशभाषाएँ सात हैं - मागधी, आवंती, शौरसेनी, अर्धमागधी, वाह्लीका और दक्षिणात्या। अंतःपुर निवासियों के लिये मागधी; चेट, राजपुत्र और सेठों के लिये अर्घमागधी; विदूषकादि के लिये प्राच्या; नायिका एवं सखियों के लिये अर्धमागघी; विदूषकादि के लिये प्राच्या; नायिका एवं सखियों के लिये शौरसेनी से अविरुद्ध आवंती; योद्धा, नागरिक तथा जुआरियों के लिये दाक्षिणात्या; तथा उदीच्य, खस, शबर, शक आदि जातियों के लिये वाह्लीका का प्रयोग करें। इनके अतिरिक्त भरत ने शबर, आभीर, चांडाल आदि की हीन भाषाओं को विभाशा कहा है। इस प्रकार भरत के नाटक के पात्रों में जो प्राकृत भावनाओं का बँटवारा किया है उसका संस्कृत के नाटकों में आंशिक रूप से ही पालन किया जाता है।
संस्कृत नाटकों में सबसे अधिक प्राकृत का उपयोग और वैचित्र्य [[शूद्रक]] कृत [[मृच्छकटिकम्]] में मिलता है। पिशल, कीथ विद्वानों आदि के मतानुसार तो मृच्छकटिक की रचना का उद्देश्य ही प्राकृत सम्बन्धी नाट्यशास्त्र के नियमों को उदाहृत करना प्रतीत होता है। इस नाटक के टीकाकार पृथ्वीधर के मतानुसार नाटक में चार प्रकार की प्राकृत का ही प्रयोग किया जाता है - शौरसेनी, अवंतिका, प्राच्य और मागधी। प्रस्तुत नाटक में सूत्रधार, नटी, नायिका वसंतसेना, चारुदत्त की ब्राह्मणी स्त्री एवं श्रेष्ठी तथा इनके परिचारक परिचारिकाऐं ऐसे 11 पात्र शौरसेनी बोलते हैं। आवंती भाषा बोलनेवाले केवल दो अप्रधान पात्र हैं। प्राच्य भाषा केवल विदूषक बोलता है; तब कुंज, चेटक, भिक्षु और चारुदत्त का पुत्र कुल छह पात्र मागधी बोलते हैं इनके अतिरिक्त शकारि, चांडाली तथा ढक्की के भी बोलनेवाले एक एक दो दो पात्र हैं। किंतु यदि इन सब पात्रों की भाषा का विश्लेषण किया जाए तो वे सब केवल दो भागों में बाँटी जा सकती हैं - शौरसेनी और मागघी। टीकाकार ने स्वयं कहा है कि आवंती में केवल रकार व लोकोक्तियों का बाहुल्य होता है और प्राच्या में स्वार्थिक ककार का। अन्य बातों में वे शौरसेनी ही हैं। शकारी, चांडाली तथा ढक्की सब मागधी की ही शैलियाँ है। इस प्रकार नामचार का प्राकृत बाहुल्य होने पर भी वस्तुत: [[मृच्छकटिकम्|मृच्छकटिक]] में अश्वघोष के नाटकों की अपेक्षा कोई अधिक भाषाभेद नहीं दिखाई देता। प्राकृत का स्वरूप कालगति से विशेष विकसित हो गया है और उसमें कुछ ऐसे लक्षण आ गए हैं जिनके कारण इस प्राकृत को प्राचीन स्तर की अपेक्षा द्वितीय स्तर की कहा जाता है। इसी स्तर की प्राकृत तथा उसके देशभेदों का विवरण हमें उपलब्ध प्राकृत व्याकरणों में मिलता है और उन्हीं का विपुल साहित्य भी विद्यमान है।
द्वितीय स्तर की प्राकृत का सर्वप्राचीन व्याकरण चंडकृत [[प्राकृत लक्षण]] या [[आर्ष प्राकृत व्याकरण]] है। यह अति संक्षिप्त है और केवल 99 सूत्रों में प्राकृत की विधियों का निरूपण कर दिया गया है। इस स्तर की विशेषता बतलाने वाले सूत्र ध्यान देने योग्य हैं। सूत्र 76 के अनुसार वर्गो के प्रथम क् च् ट् त् आदि वर्णों के स्थान पर तृतीय का आदेश होता है, जैसे, पिशाची --> बिसाजी, जटा --> डटा, कृतं --> कदं, प्रतिसिद्ध --> पदिसिद्धं। सूत्र 77 के अनुसार ख् घ् च् और भ के स्थान में हकार का आदेश जैसे- मुखं --> मुहं, मेघः --> नेहो, माधवः --> माहवो, वृषभः -- वसहो। सूत्र 97 के अनुसार क् तथा वर्गों के तृतीय वर्णो (ग् ज् आदि) का स्वर के परे लोप होता है, जैसे - कोकिलः --> कोहली, भौगिकः --> भोइओ, राजा --> राया, नदी --> नई। सूत्र 98 के अनुसार लुप्त व्यंजन के परे अ होने पर य होता है, जैसे - काकाऊ --> कायाऊ, नानाऊ --> नाया, राजाऊ --> राया। अंतिम 99वें सूत्र में कहा गया है कि प्राकृत की शेष व्यवस्था शिष्ट प्रयोगों से जाननी चाहिए। इनसे आगे के चार सूत्रों में अपभ्रंश का लक्षण, संयुक्त वर्ण से लकार का लोप न होना, पेशाची का र् और ण् के स्थान पर ल् और न का आदेश, मागधिका का र् और स् के स्थान पर ल् और श् का आदेश, तथा शौरसेनी का त् के स्थान में विकल्प से द् का आदेश बतलाया गया है। भाषाशास्त्रियों का मत है कि द्वितीय स्तर के आदि में क आदि अबोध वर्णों के स्थान पर ग् आदि सघोष वर्णो का उच्चारण होने लगा। फिर इनकी अल्पतर ध्वनि शेष रही और फिर सर्वथा लोप हो गया, तथा महाप्राण ध्वनियों के स्थान पर केवल एक शुद्ध ऊष्म ध्वनि ह् अवशिष्ट रह गई। ये प्रवृत्तियाँ तथा उक्त आर्ष व्याकरण में निर्दिष्ट य श्रुति विकल्प से समस्त जैन प्राकृत है। किंतु पश्चात्कालीन 16वीं, 17वीं शती के प्राकृत वैयाकरणों ने प्राकृतों के निरूपण में जो भ्रांतियाँ उत्पन्न की हैं, उनके आधार पर कुछ पाश्चात्य विद्वानों ने जैन साहित्य की प्राकृतों को उक्त विकल्पों के सद्भाव के कारण जैन शौरसेनी तथा जैन महाराष्ट्री नामों द्वारा पृथक् निर्दिष्ट करना आवश्यक समझा, यह ऐतिहासिक दृष्टि से वास्तविक नहीं है।
इस आर्ष प्राकृत व्याकरण के पश्चात् [[प्राकृतप्रकाश]] नामक व्याकरण लिखा गया, जिसमें आगे दो बार वृद्धि की गई। आदि के नौ परिच्छेद [[वररुचि]] कृत हैं। इनमे आदर्श प्राकृत की क्रमशः स्वरविधि, व्यंजनविधि, संयुक्तवर्ण विधि, संकीर्ण, संज्ञारूप, सर्वनाम विधि, क्रियारूप, धात्वादेश एवं अव्ययों का निरूपण किया गया है। अंत में कहा गया है कि प्राकृत का शेष स्वरूप संस्कृत के समझना चाहिए। इस व्याकरण में द्वितीय स्तर के प्राकृत का स्वरूप पूर्णरूप से निर्धारित हुआ पाया जाता है। इसके अनुसार मध्यवर्ती क् ग् च् ज् त् द् प् य और द का प्रायः लोप होता है, एवं ख् घ् थ् ध् और भ् के स्थान पर ह् आदेश। प्राकृतप्रकाश के इस प्राचीन विभाग पर कात्यायन, भामह, वसंतराज, सदानंद और रामपाणिवादकृत टीकाएँ पाई जाती हैं। आगे के 10वें और 12वें परिच्छेदों में क्रमश: पैशाची का 14 सूत्रों में तथा मागधी का 17 सूत्रों में निरूपण किया गया है। इन दोनों भाषाओं की प्रकृति शौरसेनी कही गई है। किंतु इससे पूर्व कहीं भी शौरेसेनी का नाम नहीं आया। अतएव अनुमानतः इसके कर्ताओं की दृष्टि में सामान्य प्राकृत का निरूपण उस काल की सुप्रचलित शोरसेनी का ही है। इन दो परिच्छेदों पर केवल [[भामह]] की टीका है और विद्वानों का अनुमान है कि ये दोनों परिच्छेद उन्हीं के जोड़े हुए हैं। इनमें पैशाची का विशेषता शब्द के मध्य में तृतीय चतुर्थ वर्णो के स्थान पर प्रथम तथा द्वितीय का आदेश, ण के स्थान पर न्, ज्ं, न्य के स्थान पर ंञ तथा त्वा के स्थान पर तूण बतलाई गई है और मागधी की ष्, स्, के स्थान पर क्ष ज् के स्थान पर य्, क्ष के स्थान पर एक अहं के स्थान पर हके, हगे व अहके, तथा अकारांत कर्ता कारक एकवचन के अंत में ए कही गई हैं। प्राकृत प्रकाश का अंतिम 12 वाँ परिच्छेद बहुत पीछे जोड़ा गया प्रतीत होता है। इसपर भामह व अन्य किसी की टीका नहीं है। इस परिच्छेद की अवस्था बड़ी विलक्षण है। इसमें शौरसेनी के लक्षण बतलाए गए हैं, जिसकी आदि में ही प्रकृति संस्कृत कही गई हैं। किंतु अंतिम 32वें सूत्र में पुन: कहा गया है - शेषं महाराष्ट्री वत्। परंतु महाराष्ट्री शब्द इससे पूर्व ग्रंथ भर में अथवा अन्य कहीं व्याकरण में आया ही नहीं है। जान पड़ता है यह परिच्छेद उस समय जोड़ा गया है जब यह धारणा सुदृढ़ हो गई कि प्राकृत काव्य की भाषा महाराष्ट्री ही होनी चाहिए। अतएव जहाँ प्राकृत का निर्देश है, वहाँ महाराष्ट्री का ही तात्पर्य ग्रहण किया जाय। यहाँ जो शौरसेनी का स्वरूप बतलाया गया है, उसी से स्पष्ट हो जाता है कि जो स्वरूप यहाँ सामान्य प्राकृत का बतलाया गया है, वह शौरसेनी का ही कालानुसार विकसित रूप है। उदाहरणार्थ शौरसेनी में मध्यवर्ती त् और थ् के स्थान क्रमश: द् और ध् होते हैं, वहाँ प्राकृत में द् का लोप और थ का ह होता है। "भ्" धातु का शौरसेनी में "भो" ही रहता है, कि किंतु प्राकृत में वहाँ "हो" आदेश कहा गया है। शौरसेनी में नपुंसक बहुवचन के रूप में वहाँ णि होता है, जैसे जलाणि, वाणणि, वहाँ प्राकृत के केवल इ रहता है, जैसे जलाइं, वणाइं शौरसेनी में दोला, दंड तथा दसण का आदि द् प्रकृति रूप रहता है, जबकि प्राकृत में वह ड् हो जाता है, जैसे डोला, डंड व डसण इत्यादि।
प्राकृतप्रकाश के पश्चात् प्राकृत तथा उसकी प्रादेशिक भाषाओं का सर्वांगपूर्ण निरूपण करनेवाला, प्राकृत व्याकरण [[हेमचन्द्राचार्य|हेमचंद्र]] द्वारा 12वीं शती ई० में लिखा गया। इसके चार परिच्छेद हैं, जिनमें से लगभग साढ़े तीन परिच्छेदों में प्राकृत का सुव्यवस्थित विवरण दिया गया है और शेष लगभग 200 सूत्रों में क्रमशः शौरसेनी, मागधी, पैशाची, चूलिका पैशाची और अपभ्रंश भाषाओं के विशेष लक्षण बतलाए हैं। इन भाषाओं में से प्रथम तीन का स्वरूप तो अधिक विस्तृत रूप मे वही है जो ऊपर बतलाया जा चुका है। चूलिका पैशाची के लक्षण यहाँ चार सूत्रों में ये बतलाए गए हैं कि उसमें तीसरे और चौथे वर्णो के स्थान पर प्रथम और द्वितीय का आदेश होता है, र् का ल् विकल्प से होता है, कुछ आचार्यो के मत से आदिवर्ण की ध्वनि में परिवर्तन नहीं होता, शेष बातें पैशाची के समान जाननी चाहिए।
== यह भी देखिये ==
* [[प्राकृत साहित्य]]
* [[अपभ्रंश]]
* [[पालि भाषा]]
* [[शौरसेनी]]
* [[संस्कृत भाषा|संस्कृत]]
* [[भारत की भाषाएँ]]
== बाहरी कड़ियाँ ==
*[https://hi.wiktionary.org/wiki/विक्षनरी:प्राकृत-हिन्दी_शब्दकोश '''पाइअ-सद्द-महण्णवो''' ( प्राकृत-शब्द-महार्णवः)] (हिन्दी विक्षनरी पर पण्डित हरगोविन्ददास विक्रमचन्द सेठ द्वारा रचित प्राकृत-हिन्दी शब्दकोश)
*[http://books.google.co.in/books?id=8wTGMIRwVZ4C&printsec=frontcover#v=onepage&q&f=true प्राकृत शब्द महार्णव (पाइअ सद्द महण्णवो)] (प्राकृत-हिन्दी शब्दकोश ; गूगल पुस्तक ; पण्डित हरगोविन्ददास विक्रमचन्द सेठ)
*[http://www.dli.gov.in/scripts/FullindexDefault.htm?path1=/data4/upload/0098/201&first=1&last=159&barcode=99999990245397 प्राकृत लक्षणम् या चन्द्र व्याकरण] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20160817065334/http://www.dli.gov.in/scripts/FullindexDefault.htm?path1=%2Fdata4%2Fupload%2F0098%2F201&first=1&last=159&barcode=99999990245397 |date=17 अगस्त 2016 }} (भारतीय अंकीय पुस्तकालय)
*[http://gyanpradayani.com/प्राकृत-भाषा-एवं-उसकी-विश/ प्राकृत भाषा एवं उसकी विशेषतायें] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20170223172551/http://gyanpradayani.com/%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%95%e0%a5%83%e0%a4%a4-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b7%e0%a4%be-%e0%a4%8f%e0%a4%b5%e0%a4%82-%e0%a4%89%e0%a4%b8%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%b6/ |date=23 फ़रवरी 2017 }}
*[http://gadyakosh.org/gk/अन्य_प्राकृतिक_भाषाएँ_और_हिन्दी_/_भाषा_की_परिभाषा_/_'हरिऔध' अन्य प्राकृतिक भाषाएँ और हिन्दी] (अयोध्या सिंह उपाध्याय 'हरिऔध')
*[http://www.pravakta.com/contribution-of-prakrit-to-hindi/ प्राकृत का हिन्दी को योगदान] (प्रवक्ता)
*[https://sumedhasanskrtistudies.blogspot.com/2019/06/Prakrit.html प्राकृत भाषा का परिचय]
*[http://www.rachanakar.org/2013/06/blog-post_1496.html साहित्यिक प्राकृतों (शौरसेनी, महाराष्ट्री, मागधी, अर्द्ध-मागधी, पैशाची) को भिन्न भाषाएँ मानने की परम्परागत मान्यताः पुनर्विचार] (प्रोफेसर महावीर सरन जैन का आलेख)
*[https://ia801501.us.archive.org/19/items/in.ernet.dli.2015.402650/2015.402650.Prakrit-Vyakaran.pdf प्राकृत व्याकरण]
*[https://jainworld.jainworld.com/JWHindi/Books/Prakrit+Vyakarnam2+Siddhahem.pdf श्री हेमचन्द्र कृत प्राकृत-व्याकरण] (हिन्दी और संस्कृत टीक्का से युक्त)
*[https://jainworld.jainworld.com/JWHindi/Books/Prakrit+Vyakarnam_2+Hemchandra.pdf हेमचन्द्र-प्रणीत प्राकृत व्याकरण] (हिन्दी टीका सहित)
*[https://rajeduboard.rajasthan.gov.in/books-2019/books-2020/cls12/PrakratBhasha.pdf प्राकृत भाषा एवं साहित्य]
*[https://sanskrit.nic.in/msp/upload/digitized_slm_pdf/Elementary_Course_in_Prakrit/ECPR.pdf प्राकृत परिचय पाठ्यक्रम]
*[https://archive.org/details/in.ernet.dli.2015.405679/page/n25/mode/2up A Grammar Of The Prakrit Language] (डी० जी० सरकार)
*[https://archive.org/details/in.ernet.dli.2015.546001/page/n5/mode/2up Prakrit Grammar Of Hemcandra] (पी० एल० वैद्य)
[[श्रेणी:भारत की भाषाएँ]]
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हरनावा
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शहीदों की जानकारी
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[[चित्र:Ranabaisamadhi1.JPG|thumb|हरनावा में रानाबाई जी की समाधी है]]
'''हरनावा''' [[राजस्थान]] के [[नागौर]] के [[परबतसर]] जिले का एक [[गाँव|गांव]] है।<ref>{{cite|url=http://www.rajpanchayat.gov.in/common/sidelinks/panchayat.htm|title=नागौर जिले की पंचायतें|publisher=राजपंचायत|4=|access-date=10 मार्च 2022|archive-date=8 मई 2015|archive-url=https://web.archive.org/web/20150508061345/http://www.rajpanchayat.gov.in/common/sidelinks/panchayat.htm|url-status=bot: unknown}}</ref> यह [[बडू]] से मात्र 7 किमी दूर है।<ref>{{cite|url=https://nagaur.rajasthan.gov.in/jankalyan-category-and-entry-type/45/78/78|title=नागौर जिले में ग्राम पंचायतें|publisher=राजस्थान सरकार|}}</ref>यहां प्रसिद्ध वीराँगना [[रानाबाई]] का सन् 1543 में चौधरी जालमसिंह धूण के घर में जन्म हुआ।
हरनावा है देव भूमि
हरनावा की स्थापना हरजी जी भाटी ने की। हरजी जी भटनेर हनुमान गढ़ के भाटी शासक थे। भटनेर पर हुए आक्रमणों से परेशान होकर मालवा ( मंदसौर) जा रहे थे।रात्रि हो जाने के कारण हरनावा में रुके। हरनावा में पागल नाथ जी अपने धूणे पर तपस्या कर रहे थे।
हरनावा गांव के दो सपूत देश की रक्षार्थ शहीद हो गए। 1991 में मेघदूत ऑपरेशन में सिपाही रामकरण थाकण शहीद हुए और 1999 में कारगिल युद्ध में मंगेज सिंह राठौड़ शहीद हुए।
==सन्दर्भ==
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हरनावा है देव भूमि
हरनावा की स्थापना हरजी जी भाटी ने की। हरजी जी भटनेर हनुमान गढ़ के भाटी शासक थे। भटनेर पर हुए आक्रमणों से परेशान होकर मालवा ( मंदसौर) जा रहे थे।रात्रि हो जाने के कारण हरनावा में रुके। हरनावा में पागल नाथ जी अपने धूणे पर तपस्या कर रहे थे।
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'''हरनावा''' [[राजस्थान]] के [[नागौर]] के [[परबतसर]] जिले का एक [[गाँव|गांव]] है।<ref>{{cite|url=http://www.rajpanchayat.gov.in/common/sidelinks/panchayat.htm|title=नागौर जिले की पंचायतें|publisher=राजपंचायत|4=|access-date=10 मार्च 2022|archive-date=8 मई 2015|archive-url=https://web.archive.org/web/20150508061345/http://www.rajpanchayat.gov.in/common/sidelinks/panchayat.htm|url-status=bot: unknown}}</ref> यह [[बडू]] से मात्र 7 किमी दूर है।<ref>{{cite|url=https://nagaur.rajasthan.gov.in/jankalyan-category-and-entry-type/45/78/78|title=नागौर जिले में ग्राम पंचायतें|publisher=राजस्थान सरकार|}}</ref>यहां प्रसिद्ध वीराँगना [[रानाबाई]] का सन् 1543 में चौधरी जालमसिंह धूण के घर में जन्म हुआ।
==सन्दर्भ==
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[[चित्र:Ranabaisamadhi1.JPG|thumb|हरनावा में रानाबाई जी की समाधी है]]
'''''हरनावा''''', [[राजस्थान]] राज्य के [[नागौर]] ज़िले की [[परबतसर]] तहसील में स्थित एक ग्रामीण बस्ती है,<ref>{{cite|url=http://www.rajpanchayat.gov.in/common/sidelinks/panchayat.htm|title=नागौर जिले की पंचायतें|publisher=राजपंचायत|access-date=10 मार्च 2022|archive-date=8 मई 2015|archive-url=https://web.archive.org/web/20150508061345/http://www.rajpanchayat.gov.in/common/sidelinks/panchayat.htm}}</ref> जो अपने भौगोलिक स्थान के कारण स्थानीय परिवहन और संपर्क की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण मानी जाती है। यह गाँव देगाना और परबतसर के मध्य स्थित है तथा गच्छीपुरा रेलवे स्टेशन के समीप होने के कारण आवागमन की सुविधाओं से भी जुड़ा हुआ है।
==भूगोल==
हरनावा भौगोलिक रूप से 26.89° उत्तरी अक्षांश और 74.52° पूर्वी देशांतर पर स्थित है, जो इसे राजस्थान के नागौर क्षेत्र के मध्यवर्ती भाग में स्थापित करता है।{{Coord|26.89|N|74.52|E|}}
==जनसांख्यिकी==
सन् 2001 की भारत की [[जनगणना]] के अनुसार, हरनावा गाँव की कुल जनसंख्या 5,034 थी,<ref>{{cite web|url=http://www.censusindia.net/results/town.php?stad=A&state5=999|archiveurl=https://web.archive.org/web/20040616075334/http://www.censusindia.net/results/town.php?stad=A&state5=999|archivedate=2004-06-16|title= Census of India 2001: Data from the 2001 Census, including cities, villages and towns (Provisional)|accessdate=2008-11-01|publisher= भारत जनगणना आयोग}}</ref> जो उस समय के ग्रामीण जनजीवन की एक संतुलित तस्वीर प्रस्तुत करती है। इस कुल जनसंख्या में पुरुषों की संख्या 2,527 तथा महिलाओं की संख्या 2,507 दर्ज की गई थी।
==मार्ग==
हरनावा तक पहुँचने के लिए विभिन्न मार्ग उपलब्ध हैं, जो इसे आसपास के प्रमुख कस्बों और शहरों से सुगमता से जोड़ते हैं। परबतसर से हरनावा जाने के लिए एक मार्ग परबतसर–पिपलोद–कंवलाद–जंजीला–बडू होते हुए जाता है, जबकि दूसरा मार्ग परबतसर–हुलधाणी–बडू के रास्ते हरनावा तक पहुँचाता है। इसी प्रकार, मेड़ता सिटी से आने वाले यात्री भेरुंदा–हरसोर–भाकरी मार्ग का अनुसरण करते हुए हरनावा पहुँच सकते हैं।
यदि आप [[जयपुर]] से यात्रा कर रहे हों, तो [[किशनगढ़]] के रास्ते हरनावा तक पहुँचना सुविधाजनक रहता है।
==सन्दर्भ==
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}}
'''पेन्ना नदी''' (Penna River), जिसे '''पेन्नार''' और '''उत्तर पिनाकिनी''' भी कहते हैं, [[भारत]] के [[कर्नाटक]] और [[आन्ध्र प्रदेश]] राज्यों में बहने वाली एक नदी है। यह कर्नाटक के [[चिक्कबल्लापुर ज़िले]] में [[नंदी पहाड़ियों]] से उत्पन्न होती है और उत्तर व पूर्व दिशाओं में कर्नाटक और आन्ध्र प्रदेश राज्यों से बहकर [[बंगाल की खाड़ी]] में विलय हो जाती है। नदी की कुल लम्बाई 597 किमी है और इसका [[जलसम्भर]] क्षेत्र 55,213 वर्ग किमी है, जिसमें से 6,937 वर्ग किमी कर्नाटक में और 48,276 वर्ग किमी आन्ध्र प्रदेश में है। पापाग्नि, चित्रावती और चेय्येरु नदियाँ इसकी [[उपनदियाँ]] हैं।<ref name="WaterResIndia">{{cite book|author=Sharad K. Jain, Pushpendra K. Agarwal, Vijay P. Singh|title=Hydrology and Water Resources of India|url=https://books.google.com/books?id=ZKs1gBhJSWIC|pages=727–740|year=1873|publisher=Springer|location=The Netherlands}}</ref><ref>{{cite web|url=http://india-wris.nrsc.gov.in/Publications/BasinReports/Pennar%20Basin.pdf|title=Penna river basin status report, 2014|publisher=WRIS, India|accessdate=13 June 2015|archive-date=8 अगस्त 2016|archive-url=https://web.archive.org/web/20160808053940/http://india-wris.nrsc.gov.in/Publications/BasinReports/Pennar%20Basin.pdf|url-status=dead}}</ref> भारत का ग्रैंड कैनियन गोंडिकोटा इस नदी पर स्थित है ।
== इन्हें भी देखें ==
* [[चिक्कबल्लापुर ज़िला]]
== सन्दर्भ ==
{{टिप्पणीसूची}}
{{आंध्र प्रदेश के जल निकाय}}
[[श्रेणी:कर्नाटक की नदियाँ]]
[[श्रेणी:आन्ध्र प्रदेश की नदियाँ]]
[[श्रेणी:पेन्ना नदी|*]]
[[श्रेणी:चिक्कबल्लापुर ज़िले का भूगोल]]
[[श्रेणी:नेल्लोर ज़िले का भूगोल]]
[[श्रेणी:अनंतपुर ज़िले का भूगोल]]
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भारत के उपराष्ट्रपति
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[[भारत]] में [[भारत के राष्ट्रपति|राष्ट्रपति]] के बाद '''उपराष्ट्रपति''' का पद [[कार्यकारिणी]] में दूसरा सबसे बड़ा पद होता है। भारत का उपराष्ट्रपति [[राज्य सभा|राज्यसभा]] के पदेन सभापति होता है और विधायी कार्यों में भी हिस्सा लेता है।
वर्तमान में जगदीप धनकड़ के त्यागपत्र के पश्चात इस पद पर दिनांक 09 सितंबर 2025 को श्री सी.पी. राधाकृष्णन को नियुक्त किया गया है l
==परिचय==
;राज्य सभा का पदेन सभापति होना–
उपराष्ट्रपति, राज्य सभा का पदेन सभापति होगा और अन्य कोई लाभ का पद धारण नहीं करेगा। परंतु जिस किसी अवधि के दौरान उपराष्ट्रपति, अनुच्छेद 65 के अधीन राष्ट्रपति के रूप में कार्य करता है या राष्ट्रपति के कृत्यों का निर्वहन करता है, उस अवधि के दौरान वह राज्य सभा के सभापति के पद के कर्तव्यों का पालन नहीं करेगा और वह अनुच्छेद 97 के अधीन राज्य सभा के सभापति को संदेय वेतन या भत्ते का हकदार नहीं होगा।
;पद रिक्त होना:
:*(१) राष्ट्रपति की मृत्यु, पदत्याग या पद से हटाए जाने या अन्य कारण से उसके पद में हुई रिक्ति की दशा में उपराष्ट्रपति उस तारीख तक राष्ट्रपति के रूप में कार्य करेगा जिस तारीख को ऐसी रिक्ति को भरने के लिए इस अध्याय के उपबंधों के अनुसार निर्वाचित नया राष्ट्रपति अपना पद ग्रहण करता है।
:*(२) जब राष्ट्रपति अनुपस्थिति, बीमारी या अन्य किसी कारण से अपने कृत्यों का निर्वहन करने में असमर्थ है तब उपराष्ट्रपति उस तारीख तक उसके कृत्यों का निर्वहन करेगा जिस तारीख को राष्ट्रपति अपने कर्तव्यों को फिर से संभालता है।
उपराष्ट्रपति को उस अवधि के दौरान और उस अवधि के संबंध में, जब वह राष्ट्रपति के रूप में इस प्रकार कार्य कर रहा है या उसके कृत्यों का निर्वहन कर रहा है, राष्ट्रपति की सभी शक्तियाँ और उन्मुक्तियाँ होंगी तथा वह ऐसी उपलब्धियों, भत्तों और विशेषाधिकारों का जो संसद, विधि द्वारा, अवधारित करे और जब तक इस निमित्त इस प्रकार उपबंध नहीं किया जाता है तब तक ऐसी उपलब्धियों, भत्तों और विशेषाधिकारों का, जो दूसरी अनुसूची में विनिर्दिष्ट हैं, हकदार होगा।
;उपराष्ट्रपति का निर्वाचन:
# उपराष्ट्रपति का निर्वाचन संसद के दोनों सदनों के सदस्यों से मिलकर बनने वाले निर्वाचकगण के सदस्यों द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति के अनुसार एकल संक्रमणीय मत द्वारा होगा और ऐसे निर्वाचन में मतदान गुप्त होगा।
# उपराष्ट्रपति संसद के किसी सदन का या किसी राज्य के विधान-मंडल के किसी सदन का सदस्य नहीं होगा और यदि संसद के किसी सदन का या किसी राज्य के विधान-मंडल के किसी सदन का कोई सदस्य उपराष्ट्रपति निर्वाचित हो जाता है तो यह समझा जाएगा कि उसने उस सदन में अपना स्थान उपराष्ट्रपति के रूप में अपने पद ग्रहण की तारीख से रिक्त कर दिया है।
# कोई व्यक्ति उपराष्ट्रपति निर्वाचित होने का पात्र तभी होगा जब वह–
#:(क) भारत का नागरिक है, (ख) पैंतीस वर्ष की आयु पूरी कर चुका है और
#:(ग) राज्य सभा का सदस्य निर्वाचित होने के लिए अर्हित है।
# कोई व्यक्ति, जो भारत सरकार के या किसी राज्य की सरकार के अधीन अथवा उक्त सरकारों में से किसी के नियंत्रण में किसी स्थानीय या अन्य प्राधिकारी के अधीन कोई लाभ का पद धारण करता है, उपराष्ट्रपति निर्वाचित होने का पात्र नहीं होगा।
स्पष्टीकरण--इस अनुच्छेद के प्रयोजनों के लिए, कोई व्यक्ति केवल इस कारण कोई लाभ का पद धारण करने वाला नहीं समझा जाएगा कि वह संघ का राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति या किसी राज्य का राज्यपाल है अथवा संघ का या किसी राज्य का मंत्री है।
;उपराष्ट्रपति की पदावधि:
उपराष्ट्रपति अपने पद ग्रहण की तारीख से पांच वर्ष की अवधि तक पद धारण करेगा: परंतु--
:(क) उपराष्ट्रपति, राष्ट्रपति को संबोधित अपने हस्ताक्षर सहित लेख द्वारा अपना पद त्याग सकेगा;
:(ख) उपराष्ट्रपति, राज्य सभा के ऐसे संकल्प द्वारा अपने पद से हटाया जा सकेगा जिसे राज्य सभा के तत्कालीन समस्त सदस्यों के बहुमत ने पारित किया है और जिससे लोकसभा सहमत है; किंतु इस खंड के प्रयोजन के लिए कई संकल्प तब तक प्रस्तावित नहीं किया जाएगा जब तक कि उस संकल्प को प्रस्तावित करने के आशय की कम से कम चौदह दिन की सूचना न दे दी गई हो;
:(ग) उपराष्ट्रपति, अपने पद की अवधि समाप्त हो जाने पर भी, तब तक पद धारण करता रहेगा जब तक उसका उत्तराधिकारी अपना पद ग्रहण नहीं कर लेता है।
;उपराष्ट्रपति के पद में रिक्ति को भरने के लिए निर्वाचन करने का समय और आकस्मिक रिक्ति को भरने के लिए निर्वाचित व्यक्ति की पदावधि:
# उपराष्ट्रपति की पदावधि की समाप्ति से हुई रिक्ति को भरने के लिए निर्वाचन, पदावधि की समाप्ति से पहले ही पूर्ण कर लिया जाएगा।
# उपराष्ट्रपति की मृत्यु, पदत्याग या पद से हटाए जाने या अन्य कारण से हुई उसके पद में रिक्ति को भरने के लिए निर्वाचन, रिक्ति होने के पश्चात् यथाशीघ्र किया जाएगा और रिक्ति को भरने के लिए निर्वाचित व्यक्ति, अनुच्छेद 67 के उपबंधों के अधीन रहते हुए, अपने पद ग्रहण की तारीख से पाँच वर्ष की पूरी अवधि तक पद धारण करने का हकदार होगा।
;उपराष्ट्रपति द्वारा शपथ या प्रतिज्ञान:
प्रत्येक उपराष्ट्रपति अपना पद ग्रहण करने से पहले राष्ट्रपति अथवा उसके द्वारा इस निमित्त नियुक्त किसी व्यक्ति के समक्ष निम्नलिखित प्ररूप में शपथ लेगा या प्रतिज्ञान करेगा और उस पर अपने हस्ताक्षर करेगा, अर्थात्: – ईश्वर की शपथ लेता हूँ।
: ''मैं, अमुक ---------------------------------कि मैं विधि द्वारा स्थापित भारत के संविधान के प्रति सच्ची सत्यनिष्ठा से प्रतिज्ञा करता हूँ, श्रद्धा और निष्ठा रखूँगा तथा जिस पद को मैं ग्रहण करने वाला हूँ उसके कर्तव्यों का श्रद्धापूर्वक निर्वहन करूँगा।''
== इन्हें भी देखें ==
* [[भारत के उपराष्ट्रपतियों की सूची]]
* [[भारत सरकार]]
* [[भारत के राष्ट्रपति]]
* [[भारत का प्रधानमन्त्री|भारत के प्रधानमंत्री]]
==सन्दर्भ==
{{reflist}}
== बाहरी कड़ियाँ ==
* [https://web.archive.org/web/20080121233311/http://vicepresidentofindia.nic.in/ उपराष्ट्रपति का आधिकारिक जालस्थल]
{{भारत सरकार}}
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[[भारत]] में [[भारत के राष्ट्रपति|राष्ट्रपति]] के बाद '''उपराष्ट्रपति''' का पद [[कार्यकारिणी]] में दूसरा सबसे बड़ा पद होता है। भारत का उपराष्ट्रपति [[राज्य सभा|राज्यसभा]] के पदेन सभापति होता है और विधायी कार्यों में भी हिस्सा लेता है।
वर्तमान में जगदीप धनकड़ के त्यागपत्र के पश्चात इस पद पर दिनांक 09 सितंबर 2025 को श्री सी.पी. राधाकृष्णन को नियुक्त किया गया है l
==परिचय==
;राज्य सभा का पदेन सभापति होना–
उपराष्ट्रपति, राज्य सभा का पदेन सभापति होगा और अन्य कोई लाभ का पद धारण नहीं करेगा। परंतु जिस किसी अवधि के दौरान उपराष्ट्रपति, अनुच्छेद 65 के अधीन राष्ट्रपति के रूप में कार्य करता है या राष्ट्रपति के कृत्यों का निर्वहन करता है, उस अवधि के दौरान वह राज्य सभा के सभापति के पद के कर्तव्यों का पालन नहीं करेगा और वह अनुच्छेद 97 के अधीन राज्य सभा के सभापति को संदेय वेतन या भत्ते का हकदार नहीं होगा।
;पद रिक्त होना:
:*(१) राष्ट्रपति की मृत्यु, पदत्याग या पद से हटाए जाने या अन्य कारण से उसके पद में हुई रिक्ति की दशा में उपराष्ट्रपति उस तारीख तक राष्ट्रपति के रूप में कार्य करेगा जिस तारीख को ऐसी रिक्ति को भरने के लिए इस अध्याय के उपबंधों के अनुसार निर्वाचित नया राष्ट्रपति अपना पद ग्रहण करता है।
:*(२) जब राष्ट्रपति अनुपस्थिति, बीमारी या अन्य किसी कारण से अपने कृत्यों का निर्वहन करने में असमर्थ है तब उपराष्ट्रपति उस तारीख तक उसके कृत्यों का निर्वहन करेगा जिस तारीख को राष्ट्रपति अपने कर्तव्यों को फिर से संभालता है।
उपराष्ट्रपति को उस अवधि के दौरान और उस अवधि के संबंध में, जब वह राष्ट्रपति के रूप में इस प्रकार कार्य कर रहा है या उसके कृत्यों का निर्वहन कर रहा है, राष्ट्रपति की सभी शक्तियाँ और उन्मुक्तियाँ होंगी तथा वह ऐसी उपलब्धियों, भत्तों और विशेषाधिकारों का जो संसद, विधि द्वारा, अवधारित करे और जब तक इस निमित्त इस प्रकार उपबंध नहीं किया जाता है तब तक ऐसी उपलब्धियों, भत्तों और विशेषाधिकारों का, जो दूसरी अनुसूची में विनिर्दिष्ट हैं, हकदार होगा।
;उपराष्ट्रपति का निर्वाचन:
# उपराष्ट्रपति का निर्वाचन संसद के दोनों सदनों के सदस्यों से मिलकर बनने वाले निर्वाचकगण के सदस्यों द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति के अनुसार एकल संक्रमणीय मत द्वारा होगा और ऐसे निर्वाचन में मतदान गुप्त होगा।
# उपराष्ट्रपति संसद के किसी सदन का या किसी राज्य के विधान-मंडल के किसी सदन का सदस्य नहीं होगा और यदि संसद के किसी सदन का या किसी राज्य के विधान-मंडल के किसी सदन का कोई सदस्य उपराष्ट्रपति निर्वाचित हो जाता है तो यह समझा जाएगा कि उसने उस सदन में अपना स्थान उपराष्ट्रपति के रूप में अपने पद ग्रहण की तारीख से रिक्त कर दिया है।
# कोई व्यक्ति उपराष्ट्रपति निर्वाचित होने का पात्र तभी होगा जब वह–
#:(क) भारत का नागरिक है, (ख) पैंतीस वर्ष की आयु पूरी कर चुका है और
#:(ग) राज्य सभा का सदस्य निर्वाचित होने के लिए अर्हित है।
# कोई व्यक्ति, जो भारत सरकार के या किसी राज्य की सरकार के अधीन अथवा उक्त सरकारों में से किसी के नियंत्रण में किसी स्थानीय या अन्य प्राधिकारी के अधीन कोई लाभ का पद धारण करता है, उपराष्ट्रपति निर्वाचित होने का पात्र नहीं होगा।
स्पष्टीकरण--इस अनुच्छेद के प्रयोजनों के लिए, कोई व्यक्ति केवल इस कारण कोई लाभ का पद धारण करने वाला नहीं समझा जाएगा कि वह संघ का राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति या किसी राज्य का राज्यपाल है अथवा संघ का या किसी राज्य का मंत्री है।
;उपराष्ट्रपति की पदावधि:
उपराष्ट्रपति अपने पद ग्रहण की तारीख से पांच वर्ष की अवधि तक पद धारण करेगा: परंतु--
:(क) उपराष्ट्रपति, राष्ट्रपति को संबोधित अपने हस्ताक्षर सहित लेख द्वारा अपना पद त्याग सकेगा;
:(ख) उपराष्ट्रपति, राज्य सभा के ऐसे संकल्प द्वारा अपने पद से हटाया जा सकेगा जिसे राज्य सभा के तत्कालीन समस्त सदस्यों के बहुमत ने पारित किया है और जिससे लोकसभा सहमत है; किंतु इस खंड के प्रयोजन के लिए कई संकल्प तब तक प्रस्तावित नहीं किया जाएगा जब तक कि उस संकल्प को प्रस्तावित करने के आशय की कम से कम चौदह दिन की सूचना न दे दी गई हो;
:(ग) उपराष्ट्रपति, अपने पद की अवधि समाप्त हो जाने पर भी, तब तक पद धारण करता रहेगा जब तक उसका उत्तराधिकारी अपना पद ग्रहण नहीं कर लेता है।
;उपराष्ट्रपति के पद में रिक्ति को भरने के लिए निर्वाचन करने का समय और आकस्मिक रिक्ति को भरने के लिए निर्वाचित व्यक्ति की पदावधि:
# उपराष्ट्रपति की पदावधि की समाप्ति से हुई रिक्ति को भरने के लिए निर्वाचन, पदावधि की समाप्ति से पहले ही पूर्ण कर लिया जाएगा।
# उपराष्ट्रपति की मृत्यु, पदत्याग या पद से हटाए जाने या अन्य कारण से हुई उसके पद में रिक्ति को भरने के लिए निर्वाचन, रिक्ति होने के पश्चात् यथाशीघ्र किया जाएगा और रिक्ति को भरने के लिए निर्वाचित व्यक्ति, अनुच्छेद 67 के उपबंधों के अधीन रहते हुए, अपने पद ग्रहण की तारीख से पाँच वर्ष की पूरी अवधि तक पद धारण करने का हकदार होगा।
;उपराष्ट्रपति द्वारा शपथ या प्रतिज्ञान:
प्रत्येक उपराष्ट्रपति अपना पद ग्रहण करने से पहले राष्ट्रपति अथवा उसके द्वारा इस निमित्त नियुक्त किसी व्यक्ति के समक्ष निम्नलिखित प्ररूप में शपथ लेगा या प्रतिज्ञान करेगा और उस पर अपने हस्ताक्षर करेगा, अर्थात्: – ईश्वर की शपथ लेता हूँ।
: ''मैं, अमुक ---------------------------------कि मैं विधि द्वारा स्थापित भारत के संविधान के प्रति सच्ची सत्यनिष्ठा से प्रतिज्ञा करता हूँ, श्रद्धा और निष्ठा रखूँगा तथा जिस पद को मैं ग्रहण करने वाला हूँ उसके कर्तव्यों का श्रद्धापूर्वक निर्वहन करूँगा।''
== इन्हें भी देखें ==
* [[भारत के उपराष्ट्रपतियों की सूची]]
* [[भारत सरकार]]
* [[भारत के राष्ट्रपति]]
* [[भारत का प्रधानमन्त्री|भारत के प्रधानमंत्री]]
==सन्दर्भ==
{{reflist}}
== बाहरी कड़ियाँ ==
* [https://web.archive.org/web/20080121233311/http://vicepresidentofindia.nic.in/ उपराष्ट्रपति का आधिकारिक जालस्थल]
{{भारत सरकार}}
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[[श्रेणी:भारत के उपराष्ट्रपति|*]]
[[श्रेणी:भारतीय राजनीति]]
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'''समान्तर कोश''' या '''पर्यायकोश''', [[शब्दकोश]] के ही समान सन्दर्भ पुस्तक को कहा जाता है जिसमें शब्दों के अर्थ व उच्चारण की बजाय उसके [[पर्यायवाची|समानार्थक]] तथा विलोम शब्दों व उनके प्रयोग पर जोर दिया जाता है। शब्दकोश की भाँति समान्तर कोश में शब्दों को पारिभाषित नहीं किया जाता वरन् समान शब्दों में भेद स्पष्ट कर सटीक शब्द के चुनाव को आसान बनाया जाना इसका ध्येय होता है। अतः समान्तर कोश को शब्दसूची नहीं समझा जाना चाहिये।
[[हिन्दी]] का पहला समान्तर कोश बनाने का श्रेय [[अरविन्द कुमार]] व उनकी पत्नी कुसुम को दिया जाता है।
समान्तर कोश व थिसॉरस अपनी अर्थपूर्ण एवम भाषाई तकनीक के साथ डिजिटल दुनिया में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा हैं। यह अपनी सार्थक क्षमताओं के साथ फुल टेक्स्ट इनफ़ोर्मेशन रिट्रीवल सिस्टम को और भी समर्थ बनाने में योगदान देता है।<ref>Aitchison, J. Bawden, D. Bawden, and Gilchrist, A.(2002). Theasurus Construction and use: A Practical Manual. London: Aslib। </ref>
== इन्हें भी देखें ==
* [[शब्दकोश]]
* [[शब्दतंत्र]] (WorldNet)
* [[पारिभाषिक शब्दावली]]
* [[विश्वज्ञानकोश|विश्वकोष]]
* [[अरविन्द कुमार]]
== बाहरी कड़ियाँ ==
*[http://lexicon.arvindlexicon.com/Pages/ArvindLexiconHTML.aspx?hid=4950&language=English&hv=1 अरविन्द समान्तर कोश (Arvind Lexicon)] (ऑनलाइन)
* [http://books.google.co.in/books?id=AMO036cxZPwC&printsec=frontcover#v=onepage&q&f=false अरविंद सहज समांतर कोश: शब्दकोश भी, थिसारस भी] (गूगल पुस्तक ; अरविंद कुमार, कुसुम कुमार)
* [http://rachanakar.blogspot.com/2008/10/blog-post_2038.html#comment-form शब्द और भाषा] डॉ [[अरविन्द कुमार]] का लेख
* [https://web.archive.org/web/20140620161437/http://kavitakosh.org/kk/%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A5%80_%E0%A4%95%E0%A4%BE_%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%A5%E0%A4%AE_%E0%A4%A5%E0%A4%BF%E0%A4%B8%E0%A5%89%E0%A4%B0%E0%A4%B8_/_%E0%A4%B6%E0%A5%87%E0%A4%B7%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%A5_%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%A6 हिंदी का प्रथम थिसॉरस ("पद्य-शब्द-कोश" के बारे में पहला भाग)] (शेषनाथ प्रसाद)
* [https://web.archive.org/web/20160330130128/http://kavitakosh.org/kk/%E0%A4%AA%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%AF-%E0%A4%B6%E0%A4%AC%E0%A5%8D%E0%A4%A6-%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%B6:_%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%B0%E0%A4%9A%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%AE%E0%A4%95_%E0%A4%AA%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%9A%E0%A4%AF_/_%E0%A4%B6%E0%A5%87%E0%A4%B7%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%A5_%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%A6 पद्य-शब्द-कोश: संरचनात्मक परिचय] (शेषनाथ प्रसाद)
* [https://web.archive.org/web/20080228191948/http://www.bartleby.com/110/ Roget's International Thesaurus]
* [https://web.archive.org/web/20090121150412/http://tematres.r020.com.ar/index.en.html TemaTres: open source thesaurus management]
* [https://web.archive.org/web/20080308073250/http://www.cs.utexas.edu/users/jared/aiksaurus/ Aiksaurus: open source and online thesaurus]
* [https://web.archive.org/web/20080308212506/http://education.yahoo.com/reference/thesaurus/category_index] One of the few examples of the old-style categorical listings available online.
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'''वन विहार राष्ट्रीय उद्यान''' [[भारत]] के [[मध्य प्रदेश]] राज्य की राजधानी [[भोपाल]] में एक [[राष्ट्रीय उद्यान]] है।
राष्ट्रीय उद्यान (नेशनल पार्क) का नाम सुनते ही आँखों के सामने दूर तक फैला घना जंगल और खुले घूमते जंगली जानवरों का दृश्य उभर आता है। लेकिन अगर आप कभी मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल जाएँ तो वहाँ शहर के बीचोंबीच बना 'वन विहार' राष्ट्रीय उद्यान इन सब बातों को गलत साबित करता प्रतीत होगा। यह 'थ्री इन वन' राष्ट्रीय उद्यान है।
यह अनोखा उद्यान नेशनल पार्क होने के साथ-साथ एक चिड़ियाघर (जू) तथा जंगली जानवरों का रेस्क्यू सेंटर (बचाव केन्द्र) भी है। 445 हैक्टेयर क्षेत्र में फैले इस राष्ट्रीय उद्यान में मिलने वाले जानवरों को जंगल से पकड़कर नहीं लाया गया है। यहाँ ज्यादातर वो जानवर हैं जो लावारिस, कमजोर, रोगी, घायल अथवा बूढ़े थे या फिर जंगलों से भटक-कर ग्रामीण-शहरी क्षेत्रों में आ गए थे तथा बाद में उन्हें पकड़कर यहाँ लाया गया। कुछ जानवर दूसरे प्राणी संग्रहालयों से भी यहाँ लाए गए हैं जबकि कुछ सर्कसों से छुड़ाकर यहाँ रखे गए हैं।
वन विहार अद्भुत है। पाँच किलोमीटर लंबे इस राष्ट्रीय उद्यान के एक तरफ पूरा पहाड़ और हराभरा मैदानी क्षेत्र है जो जंगलों तथा हरियाली से आच्छादित है। दूसरी ओर भोपाल का मशहूर तथा खूबसूरत बड़ा तालाब (ताल) है। ये संगम अपने आप में बहुत सुंदर लगता है। वन विहार विस्तृत फैला हुआ चिड़ियाघर है। यह प्रदेश का एकमात्र 'लार्ज जू' यानी विशाल चिड़ियाघर है। इससे पहले यह मध्यम श्रेणी के चिड़ियाघर में आता था। यह प्रदेश का एकमात्र ऐसा चिड़ियाघर भी है जिसकी देखरेख वन विभाग करता है।
प्रदेश में दो अन्य चिड़ियाघर भी हैं। ये इंदौर और ग्वालियर में स्थित हैं। लेकिन ये दोनों ही चिड़ियाघर 'स्मॉल जू' यानी छोटे चिड़ियाघरों की श्रेणी में आते हैं और इनकी देखरेख स्थानीय नगर-निगम करता है। ये दोनों ही चिड़ियाघर किसी भी मामले में वन विहार के आस-पास नहीं ठहरते। वन विहार की शानदार खासियतों की वजह से ही इसे 18 जनवरी 1983 को राष्ट्रीय उद्यान का दर्जा दिया गया जो अपने आप में एक उपलब्धि है।
वन विहार के अंदर घुसने से पहले लगता ही नहीं है कि आप एक खूबसूरत जंगल में प्रवेश करने वाले हैं। इस राष्ट्रीय उद्यान का मुख्य द्वार बोट क्लब के पास से है। इसका नाम रामू गेट है। इस गेट से दूसरी ओर भदभदा क्षेत्र स्थित चीकू गेट तक की कुल दूरी 5 किलोमीटर है। इस रास्ते को पार करते हुए आपको कई खूबसूरत तथा कभी ना भूलने वाले दृश्य दिखाई देंगे। आप इस विहार में इच्छानुसार पैदल, साइकिल, मोटरसाइकिल, कार या फिर बस से भी घूम सकते हैं। आपको इसके लिए वन विभाग द्वारा निर्धारित किया गया शुल्क चुकाना होगा।
इसके बाद आपकी बाँई ओर जानवरों के खुले तथा विशाल बाड़े मिलते जाएँगे जहाँ उनको उनके प्राकृतिक आवास में देखा जा सकता है। शुरुआत सियार तथा हाइना (लगड़बग्घे) के बाड़ों से होती है। इसके बाद भालू, शेर, हिमालयी भालू, तेंदुए और बाघ के बाड़े आते हैं। इन सब बड़े जानवरों को देखने के लिए पार्क में सुबह या शाम का समय सबसे अधिक मुफीद रहता है। दोपहर के समय ये सब जानवर धूप से बचने के लिए कहीं छाँव तलाशकर आराम करते रहते हैं। पानी वाले क्षेत्र में आपको पहाड़ी कछुए, मगरमच्छ और घड़ियाल देखने को मिलेंगे। पार्क के बीचोंबीच स्नेक पार्क भी मिलेगा वहाँ विभिन्न प्रकार के साँप देखने को मिलते हैं।
हिरण के बाड़े बच्चों को बहुत आकर्षित करते हैं और मुझे तो वहाँ हिरण सड़क पर हमारे साथ-साथ चलते-घूमते दिखे। इतना ही नहीं वन विहार में बहुतायत में सांभर, चीतल, नीलगाय, कृष्णमृग, लंगूर, लाल मुंह वाले बंदर, जंगली सुअर, सेही और खरगोश हैं। विहार में पक्षियों की 250 से अधिक प्रजातियों को चिन्हित किया गया है। यहाँ कई प्रकार की वनस्पति है जो यहाँ के जंगल को समृद्ध बनाती है। भोपाल के बड़े तालाब का 50 हेक्टेयर हिस्सा वन विहार के साथ-साथ चलता है। यह पूरे भूदृश्य को बहुत मनोरम बना देता है। शाम को यहाँ पक्षियों की चहचहाहट देखने लायक होती है। पर्यटकों के लिए यहाँ ट्रेकिंग का भी इंतजाम है जिसे करके पूरे उद्यान की भौगोलिक स्थिति को पास से देखा तथा महसूस किया जा सकता है।
रुकिए, अगर इतना सब घूमकर आप थक गए हैं, थोड़ा विश्राम करना चाहते हैं और आपको भूख भी लगी है तो यहाँ आपके लिए शानदार 'वाइल्ड कैफे' मौजूद है। इस खूबसूरत कैफे में बैठकर आप प्रकृति के साथ लजीज भोजन या नाश्ते का लुत्फ ले सकते हैं। बारिश के समय तो लकड़ियों की ऊँची बल्लियों पर बने इस कैफे के नीचे से पानी भी बहता है जो एक मनोरम वातावरण पैदा कर देता है। नाश्ता कर चुकने के बाद आप कैफे के साथ ही बने 'विहार वीथिका' में जा सकते हैं। वहाँ आपको चित्रों तथा कुछ वास्तविक चीजों के माध्यम से जंगलों तथा जंगली जानवरों के विषय में महत्वपूर्ण जानकारियाँ मिलेंगी।
छुट्टियों के दिन :
- पार्क सभी शुक्रवार बंद रहता है।
- इसके अलावा होली तथा रंगपंचमी को भी पार्क बंद रहता है।
महत्वपूर्ण जानकारियाँ :
- कब जाएँ : उद्यान पूरे साल भर खुला रहता है।
- समय : 1 अप्रैल से 30 सितंबर तक सुबह 7 से शाम 6:30 तक
1 अक्टूबर से 31 मार्च तक सुबह 7 से शाम 6 बजे तक
== स्थिति ==
छुट्टियों के दिन : - पार्क सभी शुक्रवार बंद रहता है। - इसके अलावा होली तथा रंगपंचमी को भी पार्क बंद रहता है।
महत्वपूर्ण जानकारियाँ : - कब जाएँ : उद्यान पूरे साल भर खुला रहता है। - समय : 1 अप्रैल से 30 सितंबर तक सुबह 7 से शाम 6:30 तक 1 अक्टूबर से 31 मार्च तक सुबह 7 से शाम 6 बजे तक
== विस्तार ==
== विशेषता ==
== बाहरी कडियाँ ==
{{भारत के राष्ट्रीय उद्यान}}{{मध्य प्रदेश पर्यटन}}
[[श्रेणी:राष्ट्रीय उद्यान, भारत]]
[[श्रेणी:भारत के राष्ट्रीय उद्यान]]
[[श्रेणी:भारत के वन्य अभयारण्य]]
[[श्रेणी:मध्य प्रदेश में राष्ट्रीय उद्यान]]
[[श्रेणी:भोपाल के पर्यटन स्थल]]
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'''''वन विहार राष्ट्रीय उद्यान''''' [[मध्य भारत एजेंसी|मध्य भारत]] में स्थित [[मध्य प्रदेश]] की राजधानी [[भोपाल]] का एक विशिष्ट प्राकृतिक स्थल है, जो संरक्षण और संवर्धन की आधुनिक अवधारणा का सजीव उदाहरण प्रस्तुत करता है। सन् 1979 में [[राष्ट्रीय उद्यान]] के रूप में स्थापित यह उद्यान लगभग 4.45 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में विस्तृत है। यद्यपि इसे राष्ट्रीय उद्यान का दर्जा प्राप्त है, फिर भी इसका प्रबंधन [[केन्द्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण]] के दिशा-निर्देशों के अनुरूप एक आधुनिक प्राणी उद्यान की भाँति किया जाता है, जहाँ संरक्षण और देखरेख का संतुलन बनाए रखा गया है।
इस उद्यान की सबसे उल्लेखनीय विशेषता यह है कि यहाँ निवास करने वाले पशुओं को उनके स्वाभाविक परिवेश के निकटतम परिस्थितियों में रखा जाता है, जिससे वे अपेक्षाकृत स्वतंत्र और सहज जीवन व्यतीत कर सकें। यहाँ अधिकांश जीव ऐसे हैं, जो या तो अनाथ अवस्था में विभिन्न क्षेत्रों से लाए गए हैं या अन्य प्राणी उद्यानों के साथ आदान-प्रदान के माध्यम से प्राप्त हुए हैं; किसी भी पशु को जानबूझकर उसके प्राकृतिक वन्य आवास से पकड़कर यहाँ नहीं लाया जाता।<ref name=van_vihar>{{Cite web |publisher=वन विहार राष्ट्रीय उद्यान |title=Van Vihar National Park - an Introduction |year=2007 |url=http://210.212.144.202/vanvihar/about_vvnp.html |archive-url=https://web.archive.org/web/20120323190711/http://210.212.144.202/vanvihar/about_vvnp.html |archive-date=23 मार्च 2012 |url-status=dead}}</ref> यह नीति वन्यजीव संरक्षण के प्रति उद्यान की संवेदनशीलता और उत्तरदायित्व को दर्शाती है।
वन विहार का अनुभव भी विशिष्ट है—आगंतुक एक मार्ग के माध्यम से उद्यान के भीतर प्रवेश करते हुए विभिन्न प्राणियों को उनके विस्तृत और सुरक्षित आवासों में देख सकते हैं। खाइयों, दीवारों और जालीदार अवरोधों की सहायता से न केवल आगंतुकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाती है, बल्कि पशुओं को भी ऐसा वातावरण प्रदान किया जाता है, जो उनके प्राकृतिक निवास का आभास कराता है।
== इतिहास ==
बीसवीं शताब्दी के मध्य में यह क्षेत्र अनेक चुनौतियों से घिरा हुआ था। यहाँ अवैध पत्थर की खदानें सक्रिय थीं, और बड़ी झील के किनारे स्थित इसकी शांत एवं रमणीय भू-स्थिति के कारण कई व्यावसायिक संस्थाएँ इस मूल्यवान भूमि पर अधिकार स्थापित करने का प्रयास कर रही थीं। ऐसे समय में, स्थानीय तथा व्यापक स्तर पर वन्यजीव संरक्षण के महत्व को समझते हुए, इस क्षेत्र को विधिक संरक्षण प्रदान करने का निर्णय लिया गया और इसे [[वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972]] के अंतर्गत सुरक्षित करने की प्रक्रिया प्रारंभ हुई।
इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए विशेषज्ञों की एक समिति का गठन किया गया, जिसने क्षेत्र को संरक्षित रूप देने की संभावनाओं का सूक्ष्म अध्ययन किया। अंततः सन् 1983 में समिति की अनुशंसा पर राज्य सरकार ने लगभग 4.4521 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को राष्ट्रीय उद्यान घोषित कर दिया। इस कुल क्षेत्रफल में से लगभग 3.8839 वर्ग किलोमीटर भूमि सरकारी स्वामित्व में थी, जबकि शेष भाग प्रेमपुरा, धरमपुरी और अमखेड़ा गाँवों के ग्रामीणों के अधीन था। भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया के अंतर्गत निजी स्वामित्व वाली लगभग 0.5692 वर्ग किलोमीटर भूमि के लिए ग्रामीणों को उपयुक्त मुआवजा प्रदान किया गया, जिसमें लगभग 23.52 लाख रुपये का भुगतान किया गया।
राष्ट्रीय उद्यान के गठन के उपरांत, अधिग्रहित क्षेत्र को पत्थर की दीवारों और जालीदार बाड़ से सुरक्षित किया गया, ताकि संरक्षण की सीमाएँ स्पष्ट रहें और वन्यजीवों के लिए एक सुरक्षित एवं नियंत्रित वातावरण सुनिश्चित किया जा सके।
वन विहार राष्ट्रीय उद्यान के सुव्यवस्थित संचालन हेतु पहली प्रबंधन योजना वर्ष 2000 से 2010 की अवधि के लिए तैयार की गई, जिसने इसके संरक्षण, विकास और प्रबंधन की दिशा को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया।<ref name=van_history>{{Cite web |title=History : Peep into the Past |publisher=वन विहार राष्ट्रीय उद्यान |location=भोपाल, भारत |year=2007 |url=http://210.212.144.202/vanvihar/history.html |archive-url=https://web.archive.org/web/20120323185553/http://210.212.144.202/vanvihar/history.html |archive-date=23 मार्च 2012 |url-status=dead}}</ref>
[[File:Van Vihar at Sunset.jpg|thumb|सूर्यास्त के समय वन विहार]]
इससे पूर्व, श्यामला हिल की उपेक्षित पहाड़ियों तथा आसपास की निजी ग्रामीण भूमि को सन् 1980 में विकसित करने की पहल आरंभ की गई थी, जो आगे चलकर सन् 1983 में इस क्षेत्र को राष्ट्रीय उद्यान घोषित किए जाने का आधार बनी।
उद्यान के विकास को एक नई गति तब मिली, जब सन् 1993–94 में [[केन्द्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण]] से अनुदान प्राप्त होना शुरू हुआ। उसी वर्ष इसे एक मध्यम आकार के [[चिड़ियाघर]] के रूप में औपचारिक मान्यता भी प्रदान की गई, जिससे इसके प्रबंधन और संरचना में और अधिक सुव्यवस्था आई। निरंतर प्रयासों, दूरदर्शी योजना और समर्पित प्रबंधन के परिणामस्वरूप यह क्षेत्र, जो कभी उपेक्षित और अव्यवस्थित था, आज एक सघन हरियाली से आच्छादित नखलिस्तान में परिवर्तित हो चुका है।
वर्तमान में वन विहार न केवल वन्यजीव संरक्षण का एक महत्त्वपूर्ण केंद्र है, बल्कि भोपाल नगर के लिए “हरित फेफड़े” के रूप में भी कार्य करता है, जहाँ की हरियाली और स्वच्छ वातावरण शहर के पारिस्थितिक संतुलन को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं।
== वन्यजीव ==
===स्तनधारी===
[[File:Cheetal (spotted deer) at Van Vihar National Park.jpg|thumb|चीतल]]
वन विहार राष्ट्रीय उद्यान जैव-विविधता से परिपूर्ण एक सजीव पारिस्थितिक तंत्र प्रस्तुत करता है, जहाँ अनेक प्रकार के शाकाहारी और अन्य जीव अपने स्वाभाविक परिवेश में स्वतंत्र रूप से विचरण करते हैं। यहाँ [[चीतल]], [[साम्भर (हिरण)|सांभर]], [[कृष्णमृग|काला हिरण]], [[नीलगाय]], [[चौसिंगा|चार सींग वाला हिरण]], [[जंगली सूअर]], [[साही]], [[खरहा|खरगोश]], [[रीसस बंदर]] और [[धूसर लंगूर|लंगूर]] जैसे जीव खुले वातावरण में चरते और जीवन-यापन करते देखे जा सकते हैं। उद्यान में उगने वाली प्राकृतिक घास और विविध वनस्पतियाँ सामान्यतः इन शाकाहारी जीवों की आहार आवश्यकताओं को पूर्ण करती हैं, जिससे उनके लिए संतुलित और स्वाभाविक भोजन व्यवस्था बनी रहती है।
गर्मियों के महीनों में, जब प्राकृतिक घास की उपलब्धता घट जाती है, तब प्रबंधन द्वारा अतिरिक्त पोषण की व्यवस्था की जाती है। इसके अंतर्गत चारा फार्म में उत्पादित हरा चारा तथा बाजार से प्राप्त गेहूँ का छिलका पूरक आहार के रूप में प्रदान किया जाता है, ताकि जीवों का स्वास्थ्य और पोषण स्तर संतुलित बना रहे। उद्यान के जलाशयों और तालाबों में भी समृद्ध जलीय जीवन देखने को मिलता है, जहाँ भारतीय तारा कछुआ, अन्य कछुए और विभिन्न प्रकार की मछलियाँ निवास करती हैं।
इसके अतिरिक्त, वन विहार लुप्तप्राय प्रजातियों के संरक्षण में भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह न केवल उन्हें सुरक्षित आवास प्रदान करता है, बल्कि उनके संरक्षण और संवर्धन के माध्यम से जैविक संतुलन बनाए रखने की दिशा में एक सशक्त योगदान भी देता है।
===पक्षी===
[[File:Cinnamon bittern, Van Vihar National Park Bhopal, May 3017.jpg|thumb|दालचीनी बिटरन]]
वन विहार राष्ट्रीय उद्यान का वन्य क्षेत्र पक्षी विविधता की दृष्टि से अत्यंत समृद्ध और अनुकूल आवास प्रदान करता है। यहाँ अब तक लगभग दो सौ से अधिक पक्षी प्रजातियों का अभिलेखन किया जा चुका है,<ref name=vanvihar_birds>{{cite web |url=http://www.bhopalbirds.com/birdingspot/Van%20vihar |title=Van Vihar National Park - A Rich Birding Spot |access-date=2011-11-08 |archive-url=https://web.archive.org/web/20111204203612/http://www.bhopalbirds.com/birdingspot/Van%20vihar |archive-date=2011-12-04 |url-status=dead}}</ref> जो इस क्षेत्र की पारिस्थितिक संपन्नता को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। उद्यान की हरियाली, जलस्रोतों की उपलब्धता और शांत वातावरण मिलकर पक्षियों के लिए एक सुरक्षित और पोषक निवास-स्थल का निर्माण करते हैं।
विशेष रूप से शीत ऋतु के आगमन के साथ यह क्षेत्र और भी जीवंत हो उठता है, जब दूरस्थ क्षेत्रों से प्रवासी जलपक्षी बड़ी संख्या में यहाँ आते हैं। समीप स्थित बड़ी झील की विस्तृत आर्द्रभूमि इन पक्षियों के लिए एक आदर्श अवतरण स्थल सिद्ध होती है, जहाँ वे विश्राम, आहार और प्रजनन की गतिविधियाँ संचालित करते हैं। यह दृश्य न केवल जैव-विविधता का प्रतीक है, बल्कि प्रकृति के अद्भुत चक्र का भी सजीव उदाहरण प्रस्तुत करता है।
इसी क्रम में, सन् 2010 के दशक में उद्यान के भीतर एक गिद्ध प्रजनन केंद्र की स्थापना की गई, जिसका उद्देश्य संकटग्रस्त गिद्ध प्रजातियों के संरक्षण और पुनर्वास को बढ़ावा देना था। इस केंद्र ने विशेष रूप से सफेद पूँछ वाले गिद्ध और लंबी चोंच वाले गिद्धों की घटती आबादी को पुनर्स्थापित करने पर ध्यान केंद्रित किया।<ref>{{Cite news |date=2014 |title=Kerwa breeding centre to get another 50 pairs of vultures |newspaper=[[द टाइम्स ऑफ इंडिया]] |url=http://timesofindia.indiatimes.com/city/bhopal/Kerwa-breeding-centre-to-get-another-50-pairs-of-vultures/articleshow/35370726.cms|archive-url=https://web.archive.org/web/20140521002805/http://timesofindia.indiatimes.com/city/bhopal/Kerwa-breeding-centre-to-get-another-50-pairs-of-vultures/articleshow/35370726.cms|archive-date=21 May 2014|url-status=live}}</ref>
== प्रशासन ==
यह उद्यान मध्य प्रदेश के वन विभाग द्वारा सुव्यवस्थित रूप से संचालित किया जाता है, जहाँ प्रशासनिक संरचना स्पष्ट और कार्यक्षम है। इसके संचालन का दायित्व मुख्य वन संरक्षक स्तर के एक निदेशक के हाथों में होता है, जिनकी सहायता के लिए एक सहायक निदेशक, तीन रेंज अधिकारी, तीन उप-रेंजर, चार वनपाल तथा चौबीस वन रक्षक नियुक्त रहते हैं। इन सभी के समन्वित प्रयासों से उद्यान की देखरेख, संरक्षण और दैनिक व्यवस्थाएँ सुचारु रूप से संचालित होती हैं। इसके अतिरिक्त, पशुओं की देखभाल और प्रबंधन की नियमित आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए दिहाड़ी कर्मियों की भी सेवाएँ ली जाती हैं, जो इस तंत्र को और सुदृढ़ बनाती हैं।
वन विहार प्रशासन पर्यावरण-अनुकूल गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के प्रति भी सजग है। इसी क्रम में, उद्यान के भीतर साइकिल चलाने को बढ़ावा दिया गया है, जिससे आगंतुक प्रकृति के निकट रहकर शांत और संतुलित अनुभव प्राप्त कर सकें। पार्क के दोनों छोरों पर स्थित प्रवेश द्वारों के भीतर साइकिल किराए पर उपलब्ध कराई जाती हैं, जिससे यह सुविधा सहज और सुलभ बनी रहती है।
उल्लेखनीय है कि वन विहार प्रति सप्ताह शुक्रवार को आगंतुकों के लिए बंद रहता है, जिससे उस दिन उद्यान के रखरखाव, प्रबंधन और संरक्षण से संबंधित कार्यों को व्यवस्थित रूप से संपन्न किया जा सके।
महत्वपूर्ण जानकारियाँ :
- कब जाएँ : उद्यान पूरे साल भर खुला रहता है।
- समय : 1 अप्रैल से 30 सितंबर तक सुबह 7 से शाम 6:30 तक
1 अक्टूबर से 31 मार्च तक सुबह 7 से शाम 6 बजे तक
==इन्हें भी देखें==
* [[भारतीय पशु और पक्षी]]
== सन्दर्भ ==
{{टिप्पणीसूची}}
==बाहरी कड़ियाँ==
* [https://web.archive.org/web/20160313115138/http://cza.nic.in/van%20vihar%20national%20park%20mp.jpg वन विहार राष्ट्रीय उद्यान का मानचित्र]
* [https://timesofindia.indiatimes.com/city/bhopal/patna-zoo-lion-sheru-to-roar-at-van-vihar/articleshow/64318412.cms पटना चिड़ियाघर का शेर शेरू वन विहार में दहाड़ेगा]
* [https://www.mptourism.com/van-vihar-national-park-bhopal.html वन विहार राष्ट्रीय उद्यान, भोपाल]
{{commons category|Van Vihar National Park}}
{{भारत के राष्ट्रीय उद्यान}}{{मध्य प्रदेश पर्यटन}}
[[श्रेणी:राष्ट्रीय उद्यान, भारत]]
[[श्रेणी:भारत के राष्ट्रीय उद्यान]]
[[श्रेणी:भारत के वन्य अभयारण्य]]
[[श्रेणी:मध्य प्रदेश में राष्ट्रीय उद्यान]]
[[श्रेणी:भोपाल के पर्यटन स्थल]]
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'''''वन विहार राष्ट्रीय उद्यान''''' [[मध्य भारत एजेंसी|मध्य भारत]] में स्थित [[मध्य प्रदेश]] की राजधानी [[भोपाल]] का एक विशिष्ट प्राकृतिक स्थल है,<ref>{{cite book|last=लोकसभा|first=भारत. संसद.|url=https://www.google.co.th/books/edition/Parliamentary_Debates_House_of_the_Peopl/0OAf7EJ7ulMC?hl=en&gbpv=1&bsq=%E0%A4%B5%E0%A4%A8+%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%B0+%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%AF+%E0%A4%89%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A8&dq=%E0%A4%B5%E0%A4%A8+%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%B0+%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%AF+%E0%A4%89%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A8&printsec=frontcover|title=Parliamentary Debates, House of the People|publisher=संसद सचिवालय|year= 2012}}</ref> जो संरक्षण और संवर्धन की आधुनिक अवधारणा का सजीव उदाहरण प्रस्तुत करता है। सन् 1979 में [[राष्ट्रीय उद्यान]] के रूप में स्थापित यह उद्यान लगभग 4.45 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में विस्तृत है।<ref>{{cite book|last=कुमार|first=संजीत|url=https://www.google.co.th/books/edition/Madhya_Pradesh_Samanya_Gyan/dkkCEAAAQBAJ?hl=en&gbpv=1&dq=%E0%A4%B5%E0%A4%A8+%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%B0+%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%AF+%E0%A4%89%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A8&pg=PA62&printsec=frontcover|title=Madhya Pradesh Samanya Gyan (H)|publisher=अरिहंत पब्लिकेशन इंडिया लिमिटेड|year=2020}}</ref> यद्यपि इसे राष्ट्रीय उद्यान का दर्जा प्राप्त है, फिर भी इसका प्रबंधन [[केन्द्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण]] के दिशा-निर्देशों के अनुरूप एक आधुनिक प्राणी उद्यान की भाँति किया जाता है, जहाँ संरक्षण और देखरेख का संतुलन बनाए रखा गया है।
इस उद्यान की सबसे उल्लेखनीय विशेषता यह है कि यहाँ निवास करने वाले पशुओं को उनके स्वाभाविक परिवेश के निकटतम परिस्थितियों में रखा जाता है, जिससे वे अपेक्षाकृत स्वतंत्र और सहज जीवन व्यतीत कर सकें। यहाँ अधिकांश जीव ऐसे हैं, जो या तो अनाथ अवस्था में विभिन्न क्षेत्रों से लाए गए हैं या अन्य प्राणी उद्यानों के साथ आदान-प्रदान के माध्यम से प्राप्त हुए हैं; किसी भी पशु को जानबूझकर उसके प्राकृतिक वन्य आवास से पकड़कर यहाँ नहीं लाया जाता।<ref name=van_vihar>{{Cite web |publisher=वन विहार राष्ट्रीय उद्यान |title=Van Vihar National Park - an Introduction |year=2007 |url=http://210.212.144.202/vanvihar/about_vvnp.html |archive-url=https://web.archive.org/web/20120323190711/http://210.212.144.202/vanvihar/about_vvnp.html |archive-date=23 मार्च 2012 |url-status=dead}}</ref> यह नीति वन्यजीव संरक्षण के प्रति उद्यान की संवेदनशीलता और उत्तरदायित्व को दर्शाती है।
वन विहार का अनुभव भी विशिष्ट है—आगंतुक एक मार्ग के माध्यम से उद्यान के भीतर प्रवेश करते हुए विभिन्न प्राणियों को उनके विस्तृत और सुरक्षित आवासों में देख सकते हैं। खाइयों, दीवारों और जालीदार अवरोधों की सहायता से न केवल आगंतुकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाती है, बल्कि पशुओं को भी ऐसा वातावरण प्रदान किया जाता है, जो उनके प्राकृतिक निवास का आभास कराता है।
== इतिहास ==
बीसवीं शताब्दी के मध्य में यह क्षेत्र अनेक चुनौतियों से घिरा हुआ था। यहाँ अवैध पत्थर की खदानें सक्रिय थीं, और बड़ी झील के किनारे स्थित इसकी शांत एवं रमणीय भू-स्थिति के कारण कई व्यावसायिक संस्थाएँ इस मूल्यवान भूमि पर अधिकार स्थापित करने का प्रयास कर रही थीं। ऐसे समय में, स्थानीय तथा व्यापक स्तर पर वन्यजीव संरक्षण के महत्व को समझते हुए, इस क्षेत्र को विधिक संरक्षण प्रदान करने का निर्णय लिया गया और इसे [[वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972]] के अंतर्गत सुरक्षित करने की प्रक्रिया प्रारंभ हुई।
इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए विशेषज्ञों की एक समिति का गठन किया गया, जिसने क्षेत्र को संरक्षित रूप देने की संभावनाओं का सूक्ष्म अध्ययन किया। अंततः सन् 1983 में समिति की अनुशंसा पर राज्य सरकार ने लगभग 4.4521 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को राष्ट्रीय उद्यान घोषित कर दिया।<ref name=mpforest>{{Cite web |publisher=intranet.mpforest.gov.in |title=वन विहार
|year=2024 |url=https://www.intranet.mpforest.gov.in/ho_outer/vanvihar.aspx |archive-url=https://web.archive.org/web/20240529120222/https://www.intranet.mpforest.gov.in/ho_outer/vanvihar.aspx|archive-date=29 मई 2024 |url-status=dead}}</ref> इस कुल क्षेत्रफल में से लगभग 3.8839 वर्ग किलोमीटर भूमि सरकारी स्वामित्व में थी, जबकि शेष भाग प्रेमपुरा, धरमपुरी और अमखेड़ा गाँवों के ग्रामीणों के अधीन था। भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया के अंतर्गत निजी स्वामित्व वाली लगभग 0.5692 वर्ग किलोमीटर भूमि के लिए ग्रामीणों को उपयुक्त मुआवजा प्रदान किया गया, जिसमें लगभग 23.52 लाख रुपये का भुगतान किया गया।
राष्ट्रीय उद्यान के गठन के उपरांत, अधिग्रहित क्षेत्र को पत्थर की दीवारों और जालीदार बाड़ से सुरक्षित किया गया, ताकि संरक्षण की सीमाएँ स्पष्ट रहें और वन्यजीवों के लिए एक सुरक्षित एवं नियंत्रित वातावरण सुनिश्चित किया जा सके।
वन विहार राष्ट्रीय उद्यान के सुव्यवस्थित संचालन हेतु पहली प्रबंधन योजना वर्ष 2000 से 2010 की अवधि के लिए तैयार की गई, जिसने इसके संरक्षण, विकास और प्रबंधन की दिशा को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया।<ref name=van_history>{{Cite web |title=History : Peep into the Past |publisher=वन विहार राष्ट्रीय उद्यान |location=भोपाल, भारत |year=2007 |url=http://210.212.144.202/vanvihar/history.html |archive-url=https://web.archive.org/web/20120323185553/http://210.212.144.202/vanvihar/history.html |archive-date=23 मार्च 2012 |url-status=dead}}</ref>
[[File:Van Vihar at Sunset.jpg|thumb|सूर्यास्त के समय वन विहार]]
इससे पूर्व, श्यामला हिल की उपेक्षित पहाड़ियों तथा आसपास की निजी ग्रामीण भूमि को सन् 1980 में विकसित करने की पहल आरंभ की गई थी, जो आगे चलकर सन् 1983 में इस क्षेत्र को राष्ट्रीय उद्यान घोषित किए जाने का आधार बनी।
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वर्तमान में वन विहार न केवल वन्यजीव संरक्षण का एक महत्त्वपूर्ण केंद्र है, बल्कि भोपाल नगर के लिए “हरित फेफड़े” के रूप में भी कार्य करता है, जहाँ की हरियाली और स्वच्छ वातावरण शहर के पारिस्थितिक संतुलन को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं।
== वन्यजीव ==
===स्तनधारी===
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वन विहार राष्ट्रीय उद्यान जैव-विविधता से परिपूर्ण एक सजीव पारिस्थितिक तंत्र प्रस्तुत करता है, जहाँ अनेक प्रकार के शाकाहारी और अन्य जीव अपने स्वाभाविक परिवेश में स्वतंत्र रूप से विचरण करते हैं। यहाँ [[चीतल]], [[साम्भर (हिरण)|सांभर]], [[कृष्णमृग|काला हिरण]], [[नीलगाय]], [[चौसिंगा|चार सींग वाला हिरण]], [[जंगली सूअर]], [[साही]], [[खरहा|खरगोश]], [[रीसस बंदर]] और [[धूसर लंगूर|लंगूर]] जैसे जीव खुले वातावरण में चरते और जीवन-यापन करते देखे जा सकते हैं।<ref name=mpforest/> उद्यान में उगने वाली प्राकृतिक घास और विविध वनस्पतियाँ सामान्यतः इन शाकाहारी जीवों की आहार आवश्यकताओं को पूर्ण करती हैं, जिससे उनके लिए संतुलित और स्वाभाविक भोजन व्यवस्था बनी रहती है।
गर्मियों के महीनों में, जब प्राकृतिक घास की उपलब्धता घट जाती है, तब प्रबंधन द्वारा अतिरिक्त पोषण की व्यवस्था की जाती है। इसके अंतर्गत चारा फार्म में उत्पादित हरा चारा तथा बाजार से प्राप्त गेहूँ का छिलका पूरक आहार के रूप में प्रदान किया जाता है, ताकि जीवों का स्वास्थ्य और पोषण स्तर संतुलित बना रहे। उद्यान के जलाशयों और तालाबों में भी समृद्ध जलीय जीवन देखने को मिलता है, जहाँ भारतीय तारा कछुआ, अन्य कछुए और विभिन्न प्रकार की मछलियाँ निवास करती हैं।
इसके अतिरिक्त, वन विहार लुप्तप्राय प्रजातियों के संरक्षण में भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह न केवल उन्हें सुरक्षित आवास प्रदान करता है, बल्कि उनके संरक्षण और संवर्धन के माध्यम से जैविक संतुलन बनाए रखने की दिशा में एक सशक्त योगदान भी देता है।
===पक्षी===
[[File:Cinnamon bittern, Van Vihar National Park Bhopal, May 3017.jpg|thumb|दालचीनी बिटरन]]
वन विहार राष्ट्रीय उद्यान का वन्य क्षेत्र पक्षी विविधता की दृष्टि से अत्यंत समृद्ध और अनुकूल आवास प्रदान करता है। यहाँ अब तक लगभग दो सौ से अधिक पक्षी प्रजातियों का अभिलेखन किया जा चुका है,<ref name=vanvihar_birds>{{cite web |url=http://www.bhopalbirds.com/birdingspot/Van%20vihar |title=Van Vihar National Park - A Rich Birding Spot |access-date=2011-11-08 |archive-url=https://web.archive.org/web/20111204203612/http://www.bhopalbirds.com/birdingspot/Van%20vihar |archive-date=2011-12-04 |url-status=dead}}</ref> जो इस क्षेत्र की पारिस्थितिक संपन्नता को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। उद्यान की हरियाली, जलस्रोतों की उपलब्धता और शांत वातावरण मिलकर पक्षियों के लिए एक सुरक्षित और पोषक निवास-स्थल का निर्माण करते हैं।
विशेष रूप से शीत ऋतु के आगमन के साथ यह क्षेत्र और भी जीवंत हो उठता है, जब दूरस्थ क्षेत्रों से प्रवासी जलपक्षी बड़ी संख्या में यहाँ आते हैं। समीप स्थित बड़ी झील की विस्तृत आर्द्रभूमि इन पक्षियों के लिए एक आदर्श अवतरण स्थल सिद्ध होती है, जहाँ वे विश्राम, आहार और प्रजनन की गतिविधियाँ संचालित करते हैं। यह दृश्य न केवल जैव-विविधता का प्रतीक है, बल्कि प्रकृति के अद्भुत चक्र का भी सजीव उदाहरण प्रस्तुत करता है।
इसी क्रम में, सन् 2010 के दशक में उद्यान के भीतर एक गिद्ध प्रजनन केंद्र की स्थापना की गई, जिसका उद्देश्य संकटग्रस्त गिद्ध प्रजातियों के संरक्षण और पुनर्वास को बढ़ावा देना था। इस केंद्र ने विशेष रूप से सफेद पूँछ वाले गिद्ध और लंबी चोंच वाले गिद्धों की घटती आबादी को पुनर्स्थापित करने पर ध्यान केंद्रित किया।<ref>{{Cite news |date=2014 |title=Kerwa breeding centre to get another 50 pairs of vultures |newspaper=[[द टाइम्स ऑफ इंडिया]] |url=http://timesofindia.indiatimes.com/city/bhopal/Kerwa-breeding-centre-to-get-another-50-pairs-of-vultures/articleshow/35370726.cms|archive-url=https://web.archive.org/web/20140521002805/http://timesofindia.indiatimes.com/city/bhopal/Kerwa-breeding-centre-to-get-another-50-pairs-of-vultures/articleshow/35370726.cms|archive-date=21 May 2014|url-status=live}}</ref>
== प्रशासन ==
यह उद्यान मध्य प्रदेश के वन विभाग द्वारा सुव्यवस्थित रूप से संचालित किया जाता है, जहाँ प्रशासनिक संरचना स्पष्ट और कार्यक्षम है। इसके संचालन का दायित्व मुख्य वन संरक्षक स्तर के एक निदेशक के हाथों में होता है, जिनकी सहायता के लिए एक सहायक निदेशक, तीन रेंज अधिकारी, तीन उप-रेंजर, चार वनपाल तथा चौबीस वन रक्षक नियुक्त रहते हैं।<ref>{{Cite web |publisher=bhopal.nic.in |title=वन विहार राष्ट्रीय उद्यान|year=1981 |url=https://bhopal.nic.in/tourist-place/%E0%A4%B5%E0%A4%A8-%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%AF-%E0%A4%89%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE/ |archive-url=https://web.archive.org/web/20191017113016/https://bhopal.nic.in/tourist-place/%E0%A4%B5%E0%A4%A8-%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%AF-%E0%A4%89%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE/|archive-date=17 अक्टूबर 2019 |url-status=live}}</ref> इन सभी के समन्वित प्रयासों से उद्यान की देखरेख, संरक्षण और दैनिक व्यवस्थाएँ सुचारु रूप से संचालित होती हैं। इसके अतिरिक्त, पशुओं की देखभाल और प्रबंधन की नियमित आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए दिहाड़ी कर्मियों की भी सेवाएँ ली जाती हैं, जो इस तंत्र को और सुदृढ़ बनाती हैं।
वन विहार प्रशासन पर्यावरण-अनुकूल गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के प्रति भी सजग है। इसी क्रम में, उद्यान के भीतर साइकिल चलाने को बढ़ावा दिया गया है, जिससे आगंतुक प्रकृति के निकट रहकर शांत और संतुलित अनुभव प्राप्त कर सकें। पार्क के दोनों छोरों पर स्थित प्रवेश द्वारों के भीतर साइकिल किराए पर उपलब्ध कराई जाती हैं, जिससे यह सुविधा सहज और सुलभ बनी रहती है।
उल्लेखनीय है कि वन विहार प्रति सप्ताह शुक्रवार को आगंतुकों के लिए बंद रहता है, जिससे उस दिन उद्यान के रखरखाव, प्रबंधन और संरक्षण से संबंधित कार्यों को व्यवस्थित रूप से संपन्न किया जा सके।
महत्वपूर्ण जानकारियाँ :
* - कब जाएँ : उद्यान पूरे साल भर खुला रहता है।
* - समय : 16 फरवरी से 15 अप्रैल तक - प्रात: 6.30 बजे से सायं 6.30 बजे तक, 16 अप्रैल से 31 जुलाई तक - प्रात: 6.00 बजे से सायं 7.00 बजे तक, 01 अगस्त से 31 अक्टूबर तक - प्रात: 6.30 बजे से सायं 6.30 बजे तक, 01 नवम्बर से 15 फरवरी तक - प्रात: 6.30 बजे प्रात: से सायं 6.00 बजे तक<ref name=mpforest/>
==इन्हें भी देखें==
* [[भारतीय पशु और पक्षी]]
== सन्दर्भ ==
{{टिप्पणीसूची}}
==बाहरी कड़ियाँ==
* [https://web.archive.org/web/20160313115138/http://cza.nic.in/van%20vihar%20national%20park%20mp.jpg वन विहार राष्ट्रीय उद्यान का मानचित्र]
* [https://timesofindia.indiatimes.com/city/bhopal/patna-zoo-lion-sheru-to-roar-at-van-vihar/articleshow/64318412.cms पटना चिड़ियाघर का शेर शेरू वन विहार में दहाड़ेगा]
* [https://www.mptourism.com/van-vihar-national-park-bhopal.html वन विहार राष्ट्रीय उद्यान, भोपाल]
{{commons category|Van Vihar National Park}}
{{भारत के राष्ट्रीय उद्यान}}{{मध्य प्रदेश पर्यटन}}
[[श्रेणी:राष्ट्रीय उद्यान, भारत]]
[[श्रेणी:भारत के राष्ट्रीय उद्यान]]
[[श्रेणी:भारत के वन्य अभयारण्य]]
[[श्रेणी:मध्य प्रदेश में राष्ट्रीय उद्यान]]
[[श्रेणी:भोपाल के पर्यटन स्थल]]
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सूरज का सातवाँ घोड़ा (फ़िल्म)
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{{Infobox Film
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'''सूरज का सातवाँ घोड़ा''' 1993 में बनी [[हिन्दी|हिन्दी भाषा]] की फिल्म है जो [[धर्मवीर भारती]] के प्रसिद्ध उपन्यास [[सूरज का सातवाँ घोड़ा]] पर आधारित है।
== संक्षेप ==
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== मुख्य कलाकार ==
* [[नीना गुप्ता]] - sati
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* [[रजत कपूर]] - Manik mulla
* [[अमरीश पुरी]]
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== दल ==
== संगीत ==
== रोचक तथ्य ==
== परिणाम ==
=== बौक्स ऑफिस ===
=== समीक्षाएँ ===
== नामांकन और पुरस्कार ==
== बाहरी कड़ियाँ ==
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[[श्रेणी:1993 में बनी हिन्दी फ़िल्म]]
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'''सूरज का सातवाँ घोड़ा''' 1993 में बनी [[हिन्दी|हिन्दी भाषा]] की फिल्म है जो [[धर्मवीर भारती]] के प्रसिद्ध उपन्यास [[सूरज का सातवाँ घोड़ा]] पर आधारित है।
== संक्षेप ==
== चरित्र ==
== मुख्य कलाकार ==
* [[नीना गुप्ता]] - sati
* [[पल्लवी जोशी]] - लिली
* [[रजत कपूर]] - Manek Mulla
* [[अमरीश पुरी]] - Mahesar Dalal
* Tanna - Riju Bajaj
* [[के के रैना]] - Manek's Brother
* [[राजेशवरी सचदेव]] - Jamuna
* [[विरेन्द्र सक्सेना|वीरेन्द्र सक्सेना]] - Shopkeeper
* [[हिमानी शिवपुरी]] - Roma bibi
* [[ललित तिवारी]] - Chaman Thakur
* [[रघुवीर यादव]] - Shyam
* Illa Arun - Lilly's mother
● Anag Desai - Jamuna's Father
● Mohini Sharma- Jamuna's Mother
== दल ==
== संगीत ==
== रोचक तथ्य ==
== परिणाम ==
=== बौक्स ऑफिस ===
=== समीक्षाएँ ===
== नामांकन और पुरस्कार ==
== बाहरी कड़ियाँ ==
* {{imdb title|0108256|सूरज का सातवाँ घोड़ा}}
[[श्रेणी:1993 में बनी हिन्दी फ़िल्म]]
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{{सफाई|reason=अनाआवश्यक कडी के अलावा, लहजा सुधारने की आवश्यकता है|date=अप्रैल 2020}}{{Infobox holiday
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'''पृथ्वी दिवस''' एक वार्षिक आयोजन है जिसे 22 अप्रैल को दुनिया भर में पर्यावरण संरक्षण के लिए आयोजित किया जाता है। इसकी स्थापना अमेरिकी सीनेटर [[जेराल्ड नेल्सन]] ने 1970 में एक पर्यावरण [[शिक्षण|शिक्षा]] के रूप की थी। अब इसे 192 से अधिक देशों में प्रति वर्ष मनाया जाता है। यह तारीख उत्तरी गोलार्द्ध में वसन्त और दक्षिणी गोलार्द्ध में शरद का मौसम है।जब बार से चुनगी आते थे [[संयुक्त राष्ट्र]] में पृथ्वी दिवस को प्रत्येक वर्ष '' मार्च विषुव '' (वर्ष का वह समय जब दिन और रात बराबर होते हैं) पर मनाया जाता है, यह अक्सर 20 मार्च होता है, यह एक परम्परा है जिसकी स्थापना शान्ति कार्यकर्ता जॉन मक्कोनेल के द्वारा की गयी। यह पृथ्वी का बड़ा ही मनाया जाने वाला दिवस है।
== महत्व ==
पृथ्वी दिवस का महत्व इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि, इस दिन हमें [[भूमंडलीय ऊष्मीकरण|ग्लोबल वार्मिंग]] के बारे में पर्यावरणविदों के माध्यम से पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव का पता चलता है। पृथ्वी दिवस जीवन संपदा को बचाने व [[पर्यावरण]] को ठीक रखने के बारे में जागरूक करता है। जनसंख्या वृद्धि ने प्राकृतिक संसाधनों पर '''अनावश्यक''' बोझ डाला है, संसाधनों के सही इस्तेमाल के लिए पृथ्वी दिवस जैसे कार्यक्रमों का महत्व बढ़ गया है।
== 22 अप्रैल दिवस का इतिहास ==
=== जेराल्ड नेल्सन की घोषणा ===
सितम्बर 1969 में [[सिएटल]], [[वॉशिंगटन|वाशिंगटन]] में एक सम्मलेन में [[विस्कांसिन|विस्कोंसिन]] के अमेरिकी सीनेटर [[जेराल्ड नेल्सन]] घोषणा की कि 1970 की वसंत में पर्यावरण पर राष्ट्रव्यापी जन साधारण प्रदर्शन किया जायेगा.
सीनेटर नेल्सन ने पर्यावरण को एक राष्ट्रीय कार्यसूची में जोड़ने के लिए पहले राष्ट्रव्यापी पर्यावरण विरोध की प्रस्तावना दी। वे याद करते हैं कि '' यह एक जुआ था लेकिन इसने काम किया। ''<ref name=":0">{{Cite web|url=https://www.bhaskar.com/news/MP-HSZ-ITAR-MAT-latest-itarsi-news-043018-1746614-NOR.html|title=1970 में पहली बार की थी पृथ्वी दिवस मनाने की चिंता|last=|first=|date=|website=दैनिक भास्कर|archive-url=|archive-date=|dead-url=|access-date=}}</ref> जानेमाने फिल्म और टेलिविज़न अभिनेता एड्डी अलबर्ट ने पृथ्वी दिवस, के निर्माण में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभायी.<ref>[0] ^ कॉङ्ग्रेशनल रिकार्ड, 18 जुलाई 2005, धारा 22</ref> हालाँकि पर्यावरण सक्रियता का सन्दर्भ में जारी इस वार्षिक घटना के निर्माण के लिए अलबर्ट ने प्राथमिक और महत्वपूर्ण कार्य किये, जिसे उसने अपने सम्पूर्ण कार्यकाल के दौरान प्रबल समर्थन दिया, लेकिन विशेष रूप से 1970 के बाद, एक रिपोर्ट के अनुसार पृथ्वी दिवस को अलबर्ट के जन्मदिन 22 अप्रैल, को मनाया जाने लगा, एक स्रोत के अनुसार यह गलत भी हो सकता है।
अलबर्ट को टीवी शो ग्रीन एकर्समें प्राथमिक भूमिका के लिए भी जाना जाता था, जिसने तत्कालीन सांस्कृतिक और पर्यावरण चेतना पर बहुमूल्य प्रभाव डाला।<ref name=":0" />
=== संकल्पात्मक विकास ===
रॉन कोब ने एक पारिस्थितिक प्रतीक का निर्माण किया, जिसे बाद में पृथ्वी दिवस के प्रतीक के रूप में अपनाया गया और लोस एंजिल्स फ्री प्रेस में 7 नवम्बर 1969 को प्रकाशित किया गया और फिर इसे [[सार्वजनिक डोमेन]] में रखा गया। यह प्रतीक "E" व "O" अक्षरों के संयोजन से बनाया गया था जिन्हें क्रमशः "Environment" व "Organism" शब्दों से लिया गया था। यह थीटा चिन्ह जो इसके समान है, का उपयोग पूरे इतिहास में एक चेतावनी के रूप किया जाता रहा है। {{Fact|date=जून 2009}} लुक मैगजीन ने अपने [[21 अप्रैल]] [[1970]] के अंक में एक ध्वज में इस प्रतीक को प्रस्तुत किया।
इस ध्वज का प्रतिरूप संयुक्त राज्य के ध्वज के प्रतिरूप से लिया गया था और इसमें एक बाद एक तेरह हरी और सफ़ेद पट्टियां थीं।
इसका केण्टन पारिस्थितिक प्रतीक के साथ हरा था जहाँ तारे संयुक्त राज्य के ध्वज में थे।
विज्ञापन मुद्रण लेखक जुलियन केनिग 1969 में नेल्सन की संगठन समिति में सीनेटर थे और उन्होंने इस घटना को "पृथ्वी दिवस" नाम दिया।
इस नए आन्दोलन को मनाने के लिए 22 अप्रैल का दिन चुना गया, जब केनिग का जन्मदिन भी होता है।
उन्होंने कहा कि किल "अर्थ डे" "बर्थ डे" के साथ ताल मिलाता है, इसलिए यह विचार उन्हें आसानी से आया।<ref>[2] ^ दी अमेरिकी लाइफ, प्रकरण 383, [http://www.thislife.org/Radio_Episode.aspx?episode=383 "ओरिजिन स्टोरी"]</ref><ref>[3] ^ नाभिकीय नियंत्रण संस्थान की 25 वीं वर्षगाँठ पर पॉल लेवेंथल का वक्तव्य, 6/21/2006 [http://www.nci.org/06nci/06/NCI25thAnniversary.htm http://www.nci.org/06nci/06/NCI25thAnniversary.htm]</ref>
30 नवम्बर 1969 को ''[[न्यूयॉर्क टाइम्स|न्यूयार्क टाइम्स]]'' में, सामने के पेज पर, एक लम्बे लेख में, ग्लेडविन हिल ने लिखा
<blockquote>
"पर्यावरण संकट" की बढती चिन्ता राष्ट्रों को प्रभावित कर रही है, जो छात्रों को वियतनाम में युद्ध में भाग लेने के लिए प्रेरित कर रही है। पर्यावरण की समस्या के प्रेक्षण का एक राष्ट्रीय दिन, जो वियतनाम में सामूहिक प्रदर्शन के समान है, अगले वसन्त के लिए इसकी योजना बनायी जा रही है, जब सीनेटर जेराल्ड नेल्सन के कार्यालय से समन्वित राष्ट्रव्यापी पर्यावरणी 'शिक्षण' का आयोजन किया जायेगा.
<ref>[4] ^ 'एन्वायरनमेंटल क्राइसिस' में एक्लिप्स वियतनाम एज कॉलेज इशु, न्यूयॉर्क टाइम्स, 11/30/1969</ref>
</blockquote>
सेनेटर नेल्सन ने इस घटना में राष्ट्रीय स्तर पर समन्वय के लिए डेनिस हायेस को भी नियुक्त किया।
=== शुरुआत और जारी विकास ===
22 अप्रैल 1970 को पृथ्वी दिवस ने आधुनिक पर्यावरण आन्दोलन की शुरुआत को चिन्हित किया। लगभग 20 लाख अमेरिकी लोगों ने, एक स्वस्थ, स्थायी पर्यावरण के लक्ष्य के साथ भाग लिया।
हायेज और उनके पुराने स्टाफ ने बड़े पैमाने पर तट से तट तक रैली का आयोजन किया।
हजारों कॉलेजों और विश्वविद्यालयों ने पर्यावरण के दूषण के विरुद्ध प्रदर्शनों का आयोजन किया। वे समूह जो [[तेल छलकना|तेल रिसाव]], प्रदुषण करने वाली फैक्ट्रियों और उर्जा संयन्त्रों, कच्चे मलजल, विषैले कचरे, [[कीटनाशक]], खुले रास्तों, जंगल की क्षति और [[वन्य जीवन|वन्यजीवों]] के [[विलोपन]] के विरुद्ध लड़ रहे थे, ने अचानक महसूस किया कि वे समान मूल्यों का समर्थन कर रहें हैं।
200 मिलियन लोगों का 141 देशों में आगमन और विश्व स्तर पर पर्यावरण के विषयों को उठा कर, पृथ्वी दिवस ने 1990 में 22 अप्रैल को पूरी दुनिया में पुनः चक्रीकरण के प्रयासों को उत्साहित किया और रियो डी जेनेरियो में 1992 के [[संयुक्त राष्ट्र]] [[पृथ्वी सम्मेलन|पृथ्वी सम्मलेन]] के लिए मार्ग बनाया।
सहस्राब्दी की शुरुआत के साथ ही, हायेज ने एक अन्य अभियान के नेतृत्व के लिए सहमति जतायी, इस बार [[ग्लोबल वार्मिंग]] पर ध्यान केन्द्रित किया गया और [[हरित ऊर्जा|स्वच्छ ऊर्जा]] को प्रोत्साहन दिया गया।
22 अप्रैल 2000 का पृथ्वी दिवस पहले पृथ्वी दिवस की उमंग और 1990 के पृथ्वी दिवस की अन्तरराष्ट्रीय जनसाधारण कार्यशैली का संगम था।
2000 में, [[इण्टरनेट]] ने पूरी दुनिया के कार्यकर्ताओं को जोड़ने में पृथ्वी दिवस की मदद की।
22 अप्रैल के आते ही, पूरी दुनिया के 5000 समूह एकजुट हो गए और 184 देशों के लाखों लोगों ने इसमें हिस्सा लिया।
ऐसे विविध घटनाक्रम थे: [[गैबॉन|गेबन]], [[अफ्रीका]] में गाँव से गाँव तक यात्रा करने वाली एक बोलते ड्रम की शृङ्खला, उदाहरण के लिए जब सैंकडों हजारों लोग [[वॉशिंगटन, डी॰ सी॰|वाशिंगटन, डी.सी.]], संयुक्त राज्य अमेरिका में नेशनल मॉल में एकत्रित हुए।
2007 का पृथ्वी दिवस अब तक के सबसे बड़े पृथ्वी दिवसों में से एक था, जिसमें अनुमानतः हजारों स्थानों जैसे [[कीव]], [[युक्रेन]]; काराकास, [[वेनेजुएला]]; [[तुवालू|तुवालु]]; [[मनीला]], [[फिलिप्स|फिलिपींस]]; [[टोगो]]; [[मैड्रिड]], [[स्पेन]], [[लंदन|लन्दन]]; और [[न्यूयार्क]] के करोड़ों लोगों ने भाग लिया।
{{Fact|date=मई 2009}}
== पृथ्वी दिवस नेटवर्क ==
राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पर्यावरण नागरिकता और साल भर उन्नति को बढ़ावा देने के लिए 1970 में पृथ्वी दिवस नेटवर्क की स्थापना पहले पृथ्वी दिवस के आयोजकों के द्वारा की गयी।
पृथ्वी दिवस के नेटवर्क के माध्यम से, कार्यकर्ता, राष्ट्रीय, स्थानीय और वैश्विक नीतियों में परिवर्तनों को आपस में जोड़ सकते हैं। अन्तरराष्ट्रीय नेटवर्क 174 देशों में 17,000 संस्थानों तक पहुँच गया है, जबकि घरेलू कार्यक्रमों में 5,000 समूह और 25,000 से अधिक शिक्षक शामिल हैं, जो साल भर कई मिलियन समुदायों के विकास और पर्यावरण सुरक्षा कार्यकर्ताओं की मदद करते हैं।<ref>[6] ^ [http://www.kidzworld.com/article/3382-earth-day-cleaning-up-our-planet/ "पृथ्वी दिवस:: हमारे ग्रह की सफाई"] Kidzworld.com 25 मार्च 2009 को पुनः प्राप्त</ref>
== विषुव (इक्विनोक्स) (सम्पात या वर्ष का वह समय जब दिन और रात बराबर होते हैं) पृथ्वी दिवस के इतिहास ==
सम्पातिक पृथ्वी दिवस को मार्च इक्विनोक्स ([[20 मार्च]] के आस पास) पर मनाया जाता है, यह [[उत्तरी गोलार्ध|उत्तरी गोलार्द्ध]] में खगोलीय मध्य वसंत को तथा [[दक्षिणी गोलार्द्ध]] में खगोलीय [[शरद ऋतु|मध्य पतझड़]] को चिन्हित करता है।
खगोल विज्ञान में सम्पात वह समय है जब सूर्य के केन्द्र को पृथ्वी की भूमध्य रेखा के ठीक "ऊपर" देखा जा सकता है, यह स्थिति प्रति वर्ष 20 मार्च और 23 सितम्बर को देखी जा सकती है। अधिकांश संस्कृतियों में सम्पात और आयनकाल को किसी [[मौसम]] की शुरुआत या दो मौसमों के पृथक्करण का संकेत माना जाता है।
[[चित्र:John McConnell Mar15 2008 cmm.jpg|right|thumb|200px|जॉन मेक कोनेल डेन्वर कोलोराडो में अपने घर के सामने, अमरीका पृथ्वी के ध्वज के साथ जिसे उन्होंने डिजाइन किया।]]
जॉन मैक कोनेल<ref>[7] ^ [http://www.earthsite.org "EarthSite"] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20060422193041/http://www.earthsite.org/ |date=22 अप्रैल 2006 }}</ref> ने 1969 में [[यूनेस्को|यूनेस्को (युनेस्को)]] में पर्यावरण पर हो रहे एक सम्मलेन के दौरान पहली बार "पृथ्वी दिवस" नामक एक विश्व अवकाश का विचार पेश किया।
पहले पृथ्वी दिवस की [[घोषणा]] [[21 मार्च]], [[1970]] को [[सेन फ्रांसिस्को]] के मेयर जोसेफ अलिओटो के द्वारा जारी की गयी,
कई नगरों में समारोहों का आयोजन किया गया जैसे सेन फ्रांसिस्को, डेविस, केलिफोर्निया और साथ ही कई स्थानों पर बहुदिवसीय सड़क पार्टियों का आयोजन किया गया।
संयुक्त राष्ट्र के महासचिव यु थाण्ट ने इस वार्षिक घटना को मनाने के लिए मैक कोनेल की विश्वस्तरीय शुरुआत को समर्थन दिया और [[26 फ़रवरी|26 फरवरी]] [[1971]] को उन्होंने इस प्रभाव के लिए घोषणा पर हस्ताक्षर किये, जिसमें कहा गया था :
<blockquote>
हमारी सुन्दर अन्तरिक्षयान पृथ्वी के लिए केवल शान्तिपूर्वक और खुशी से युक्त पृथ्वी दिवस आयें, क्योंकि यह एक उष्ण और मृदु जीवन्त प्राण के भार को उठाकर इस स्नेहरहित अन्तरिक्ष में निरन्तर घूर्णन और वृत्तीय गति करती है।
<ref>[8] ^ [http://www.un.org/cyberschoolbus/earthday/peacebell_2004.asp "2004 पृथ्वी दिवस".] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20140425070035/http://www.un.org/cyberschoolbus/earthday/peacebell_2004.asp |date=25 अप्रैल 2014 }} संयुक्त राष्ट्र "साइबर स्कूल बस".</ref>
</blockquote>
महासचिव वाल्धेइम ने पृथ्वी दिवस का अवलोकन 1972 में मार्च विषुव के समान उत्सवों के साथ किया और तभी से संयुक्त राष्ट्र पृथ्वी दिवस उत्सव प्रतिवर्ष मार्च इक्विनोक्स को मनाया जाता है (संयुक्त राष्ट्र 22 अप्रैल की वैश्विक घटना के साथ भी काम करता है)
[[मार्गरेट मीड|मारग्रेट मीड]] ने भी सम्पात (इक्विनोक्स) पृथ्वी दिवस के लिए अपना समर्थन दिया और 1978 में घोषित किया:
<blockquote>
"पृथ्वी दिवस पहला पवित्र दिन है जो सभी राष्ट्रीय सीमाओं का पार करता है, फिर भी सभी भौगोलिक सीमाओं को अपने आप में समाये हुए हैं, सभी पहाड़, महासागर और समय की सीमाएँ इसमें शामिल हैं और पूरी दुनिया के लोगों को एक गूँज के द्वारा बाँध देता है, यह प्राकृतिक सन्तुलन को बनाये रखने के लिए समर्पित है, फिर भी पूरे ब्रह्माण्ड में तकनीक, समय मापन और तुरन्त संचार को कायम रखता है।
<br />
पृथ्वी दिवस खगोल शास्त्रीय घटना पर एक नए तरीके से ध्यान केन्द्रित करता है- जो सबसे प्राचीन तरीका भी है- वर्नल इक्विनोक्स का उपयोग करते हुए, जिस समय सूर्य पृथ्वी की भूमध्य रेखा को पार करते हुए पृथ्वी के सभी भागों में दिन और रात की लम्बाई को बराबर कर देता है।
वार्षिक पञ्चाङ्ग में इस बिन्दु पर, पृथ्वी दिवस प्रतीकों के किसी भी स्थानीय या विभाजक समुच्चय से सम्बन्धित नहीं होता है, जीवन के किसी भी एक रूप का दूसरे रूप पर प्रभावी होने या सत्य की स्थिति को नहीं देखा जा सकता है।
लेकिन मार्च सम्पात का चुनाव एक सहभाजित घटना के ग्रहीय प्रेक्षण को सम्भव बनता है और एक ध्वज जो पृथ्वी को अन्तरिक्ष से उपयुक्त रूप से दर्शाता है।"
<ref>[9] ^ मार्गरेट मीड, "पृथ्वी दिवस," EPA जर्नल, मार्च 1978.</ref>
</blockquote>
सम्पात के क्षण पर, जापानी शान्ति घण्टी बजाकर पृथ्वी दिवस का प्रेक्षण करना पारंपरिक है, इस घण्टी को जापान के द्वारा संयुक्त राष्ट्र को दान कर दिया गया था।<ref>[10] ^ [http://www.un.org/pubs/cyberschoolbus/untour/subjap.htm "जापानी शांति बेल"] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20130928182232/http://www.un.org/Pubs/CyberSchoolBus/untour/subjap.htm |date=28 सितंबर 2013 }} संयुक्त राष्ट्र "साइबर स्कूल बस". [[25 अप्रैल]] [[2006]] को उपलब्ध</ref> इन सालों में दुनिया के कई स्थानों पर उत्सव मनाये गए, साथ ही संयुक्त राष्ट्र में भी उत्सव मनाया गया। 20 मार्च 2008 को, संयुक्त राष्ट्र के उत्सव के अलावा, न्यूजीलैंड में उत्सव मनाये गए और केलिफोर्निया, वियना, पेरिस, लिथुअनिया, टोकियो और कई अन्य स्थानों पर घण्टियाँ बजायीं गयीं।
संयुक्त राष्ट्र में समान्त पृथ्वी दिवस का आयोजन अर्थ सोसाइटी फाउण्डेशन के द्वारा किया जाता है।<ref>[11] ^ [http://www.earthsocietyfoundation.org "पृथ्वी सोसायटी फाउंडेशन"]</ref>
== 22 अप्रैल के अनुसरण ==
=== 1970 के पृथ्वी दिवस से पहले बढ़ती हुई पर्यावरणीय गतिविधियां. ===
1960 का दशक, संयुक्त राज्य में पारिस्थितिकी के लिए सैद्धांतिक और व्यवहारिक दोनों ही प्रकार से बहुत गतिशील रहा।
1960 दशक के मध्य में कोंग्रेस ने स्वीपिंग वाइल्डरनेस अधिनियम पारित किया और सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश विलियम ओ डगलस ने पूछा, "कौन पेड़ों के लिए बोल रहा है?"
1960 के प्रारंभ में नसाऊ काउंटी, न्युयोर्क में [[DDT]] के खिलाफ जन साधारण सक्रियता ने राचेल कार्सन को अपनी श्रेष्ठ विकृत पुस्तक साइलेंट स्प्रिंग लिखने के लिए प्रेरित किया।
राल्फ नाडर ने 1970 में पारिस्थितिकी के महत्त्व के बारे में बात करना शुरू किया।
=== पृथ्वी दिवस 1970 ===
[[चित्र:GaylordNelson.jpg|right|thumb|जेराल्ड नेल्सन]]
व्यापक पर्यावरण प्रदूषण की प्रतिक्रिया स्वरुप, [[विस्कांसिन|विस्कोंसिन]] से एक अमेरिकी सीनेटर, [[जेराल्ड नेल्सन]] ने एक [[पर्यावरणवाद|पर्यावरणी]] [[शिक्षण]], या पृथ्वी दिवस की शुरुआत [[22 अप्रैल]] [[1970]] को की।
उस साल 20 मिलयन से अधिक लोगों ने भाग लिया और अब पृथ्वी दिवस प्रतिवर्ष [[22 अप्रैल]] को 175 देशों में राष्ट्रीय सरकारों और 500 मिलियन से अधिक लोगों के द्वारा प्रेक्षित किया जाता है। <ref>{{Cite web|url=https://hindi.webdunia.com/current-affairs/world-earth-day-119042100039_1.html|title=विश्व पृथ्वी दिवस विशेष|last=|first=|date=|website=Hindi Webdunia|archive-url=|archive-date=|dead-url=|access-date=}}</ref>
एक पर्यावरण कार्यकर्ता, सीनेटर नेल्सन ने, एक पर्यावरणी मुद्दे के लिए लोकप्रिय राजनैतिक समर्थन के प्रदर्शन की आशा में, इस उत्सव के आयोजन में मुख्य भूमिका निभायी,
उन्होंने इसे तत्कालीन सबसे प्रभावी विएतनाम युद्ध विरोध पर प्रतिरूपित किया।<ref>[13] ^ ब्राउन, टिम ([[11 अप्रैल]] [[2005]] [http://usinfo.state.gov/gi/Archive/2005/Apr/11-390328.html "पृथ्वी दिवस क्या है?"] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20080516042154/http://usinfo.state.gov/gi/Archive/2005/Apr/11-390328.html|date=16 मई 2008}} [[संयुक्त राज्य अमेरिका विभाग राज्य के]]. [[25 अप्रैल]] [[2006]] को उपलब्ध</ref> पृथ्वी दिवस की अवधारणा सबसे पहले फ्रेड दत्तन के द्वारा लिखित JFK के लिए ज्ञापन में प्रस्तावित की गयी।<ref name="fd">{{cite web|title=Fred Dutton 1923-2005|url=http://www.freddutton.com}}</ref>
सेंटा बारबरा, कैलिफोर्निया की समुदाय पर्यावरण परिषद के अनुसार:
<blockquote>
कहा जाता है कि पृथ्वी दिवस की धारणा को सीनेटर जेराल्ड नेल्सन ने सेंटा बारबरा से घूम कर आने के बाद शुरू किया, यह शुरुआत 1969 में भयंकर तेल रिसाव के ठीक बाद हुई.
वह यह देखकर इतने आग-बबूला हुए कि वे वॉशिंगटन वापस लौट आये और 22 अप्रैल को पृथ्वी दिवस मनाने के लिए एक राष्ट्रीय दिवस के रूप में एक चर्चित बिल पारित किया।
<ref>[http://www.communityenvironmentalcouncil.org/Events/Earthday/ "पृथ्वी दिवस".] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20090416085233/http://communityenvironmentalcouncil.org/Events/earthday/ |date=16 अप्रैल 2009 }} सांता बारबरा समुदाय पर्यावरण परिषद. [[25 अप्रैल]] [[2006]] को उपलब्ध</ref>
</blockquote>
[[चित्र:Denis hayes 1980.jpg|right|thumb|डेनिस हायेस]]
सेनेटर नेल्सन ने गतिविधियों के राष्ट्रीय समन्वय के लिए [[हार्वर्ड विश्वविद्यालय]] के स्नातक छात्र डेनिस हेल्स को नियुक्त किया। हयेज ने कहा कि वे चाहते हैं कि पृथ्वी दिवस "पारम्परिक राजनितिक प्रक्रिया से हटकर हो."<ref name="time-memento">{{cite web | url = http://www.time.com/time/magazine/article/0,9171,943782,00.html | title = A Memento Mori to the Earth | accessdate = | date = [[4 मई 1970]] | work = [[Time (magazine)|Time]] | archive-date = 24 अप्रैल 2009 | archive-url = https://web.archive.org/web/20090424195552/http://www.time.com/time/magazine/article/0,9171,943782,00.html | url-status = dead }}</ref>गरेट ड्यूबेल ने एन्वायरनमेंटल हेंड बुक दी फर्स्ट गाइड टू दी एन्वायरनमेंटल टीच-इन का संकलन और संपादन किया।
इसका प्रतीक था एक हरे रंग का ग्रीक अक्षर थीटा "दी डेड थीटा"
समारोह के आयोजकों में से एक ने कहा:
<blockquote>
"हम पर्यावरणी घटनाओं की एक पूर्ण और बड़ी रेंज पर सार्वजनिक रूचि की काफी मात्रा पर ध्यान केन्द्रित करने जा रहे हैं, हम ऐसे तरीके से ऐसा करेंगे ताकि यह उनके बीच अंतर्संबंधों को चित्रित करे और लोग इसके द्वारा स्थिरतापूर्वक एक तस्वीर के रूप में पूरे मामले पर ध्यान दें, समाज का वह चित्र जो तेजी से गलत दिशा में जा रहा है और इसे रोक कर मोड़ना होगा.
</blockquote>
<blockquote>
"यह एक बहुत बड़ा मामला होगा, मुझे लगता है। अब हमारे पास 12,000 हाई स्कूलों में, 2000 कॉलेजों में और विश्वविद्यालयों में दो हजार अन्य समुदायों में कार्यरत समूह हैं। मेरे ख्याल में यह कहना सुरक्षित होगा कि लोगों की कुल संख्या जो किसी न किसी तरह इस काम में भाग लेगी, कई मिलियन होने जा रही है।<ref>[19] ^ [http://www.upi.com/Audio/Year_in_Review/Events-of-1970/Apollo-13/12303235577467-2/#title "पारिस्थितिकी: 1970 वर्ष समीक्षा में, UPI.com]</ref>
</blockquote>
यह विएतनाम युद्ध विरोध कार्यक्रम सहित राष्ट्रव्यापी घटना है, लेकिन माना जाता है कि यह पर्यावरण सन्देश के लिए प्रतिकर्षणउत्पन्न करेगी। वाशिंगटन DC के घटनाक्रम में पीट सीगेर प्रमुख वक्ता और कलाकार थे। पाल न्यूमेन और अली मैक्ग्रा ने न्यूयार्क शहर की घटना में भाग लिया।<ref>[20] ^ [http://wellington.usembassy.gov/environment.html "पर्यावरण".] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20080821131720/http://wellington.usembassy.gov/environment.html |date=21 अगस्त 2008 }} संयुक्त राज्य अमेरिका के दूतावास, वेलिंगटन, न्यूज़ीलैंड. [[25 अप्रैल]] [[2006]] को उपलब्ध</ref>
इस घटना का विरोध करने सबसे उल्लेखनीय संगठन था डॉटर्स ऑफ़ अमेरिकन रेवोलुशन.
=== पृथ्वी दिवस 1970 के परिणाम ===
[[चित्र:Earth Day 2007 at City College San Diego.JPG|left|thumb|पृथ्वी दिवस 2007 सेन डिएगो के सेन डिएगो सिटी कॉलेज, कैलिफोर्निया में.]]
पृथ्वी दिवस 1990 संयुक्त राज्य अमेरिका और दुनिया में लोकप्रिय साबित हुआ। पहले पृथ्वी दिवस में भाग लेने वाले प्रशंसक दो हज़ार कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में, प्रायः दस हज़ार प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों में और संयुक्त राज्य अमेरिका में सैंकडों संस्थाओं में थे। ज्यादा महत्वपूर्ण बात यह है कि "पर्यावरण सुधार के पक्ष में शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के लिए 20 लाख अमेरिकीयों ने स्प्रिंग सनशाइन में भाग लिया।"<ref>लुईस, जैक (नवंबर 1985). [http://epa.gov/35thanniversary/topics/epa/15c.htm "जन्म EPA की".] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20060922192621/http://epa.gov/35thanniversary/topics/epa/15c.htm|date=22 सितंबर 2006}} ''[[संयुक्त राज्य पर्यावरण सुरक्षा एजेंसी]]'' ''[[25 अप्रैल]] [[2006]] को उपलब्ध ''</ref>
सेनेटर नेल्सन ने कहा कि इस पृथ्वी दिवस ने [[जनसाधारण]] स्तर पर स्वतः प्रतिक्रिया के कारण "काम" किया।
बीस मिलियन प्रदर्शनकारियों और हजारों स्कूलों और स्थानीय समुदायों ने भाग लिया।<ref>[22] ^ नेल्सन, जेराल्ड. [http://earthday.envirolink.org/history.html " पहला पृथ्वी दिवस के कैसे आया".] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20100421232940/http://earthday.envirolink.org/history.html |date=21 अप्रैल 2010 }} Envirolink.org. [[22 अप्रैल]] [[2007]] को उपलब्ध</ref> उन्होंने पहले पृथ्वी दिवस का श्रेय संयुक्त राज्य के राजनेताओं को दिया, जिनकी पर्यावरणी [[विधान|विधायिका]] में एक ठोस और स्थायी क्षेत्र है। 1970 के पृथ्वी दिवस के साथ कोंग्रेस के द्वारा कई महत्वपूर्ण कानून पारित किये गए, जिनमें शामिल हैं, स्वच्छ वायु अधिनियम, वन भूमि और [[महासागर]] और संयुक्त राज्य पर्यावरण सुरक्षा एजेन्सी का निर्माण .<ref name="edn history" />
अब यह 175 देशों में मनाया जाता है और लाभ रहित पृथ्वी दिवस नेटवर्क इसका समन्वयन करता है, जिसके अनुसार अब पृथ्वी दिवस "विश्व का सबसे बड़ा धर्म निरपेक्ष अवकाश है, जिसे प्रतिवर्ष आधे बिलियन से अधिक लोगों के द्वारा मनाया जाता है।"<ref>[24] ^ [http://www.earthday.org/about/default.aspx "पृथ्वी दिवस नेटवर्क के बारे में".] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20070423053633/http://www.earthday.org/about/default.aspx |date=23 अप्रैल 2007 }} www.earthday.org. [[22 अप्रैल]] [[2007]] को उपलब्ध</ref> पर्यावरण समूहों ने पृथ्वी दिवस को एक कार्यशील दिवस बनाने के लिए प्रयास किये हैं, जो मानव के व्यवहार को परिवर्तित करते हैं और नीति परिवर्तनों को बढ़ावा देते हैं।<ref name="edn history">[25] ^ [http://www.earthday.net/resources/history.aspx "पृथ्वी दिवस के इतिहास".] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20090425052736/http://www.earthday.net/resources/history.aspx |date=25 अप्रैल 2009 }} पृथ्वी दिवस नेटवर्क. [[25 अप्रैल]] [[2006]] को उपलब्ध</ref>
=== 22 अप्रैल का महत्व ===
* सीनेटर नेल्सन ने ऐसी तारीख को चुना जो कॉलेज केम्पस में पर्यावरण शिक्षण की भागीदारी को अधिकतम कर सके। उन्होंने निर्धारित किया कि इसके लिए 19-25 अप्रैल तक का सप्ताह सर्वोत्तम है।
यह परीक्षा या वसंत की छुट्टियों के समय में नहीं आता है, न ही इस समय धार्मिक छुट्टियां जैसे [[ईस्टर]] आदि होती हैं और वसंत में इतनी पर्याप्त देरी से होता है कि इस समय मौसम अच्छा होता है।
ज्यादा विद्यार्थियों के कक्षा में रहने की उम्मीद होती है और सप्ताह के मध्य में अन्य घटनाओं के साथ कम प्रतिस्पर्धा होती है, इसलिए उन्होंने बुधवार, 22 अप्रैल को चुना।
पूछे जाने पर कि क्या उन्होंने जानबूझकर लेनिन के सौंवें जन्मदिन को चुना है, नेल्सन ने स्पष्ट किया कि प्रत्येक वर्ष में 365 दिन होते हैं और दुनिया में 3.7 बिलियन लोग रहते हैं, तो हर दिन 10 मिलियन लोगों का जन्म दिन होता है।
"किसी भी दिन, बहुत सारे अच्छे और बुरे लोग जन्मे हैं," उन्होंने कहा."एक व्यक्ति जिसे बहुत से लोग दुनिया का प्रथम पर्यावरणवादी मानते हैं, वे हैं असीसी के संत फ्रांसिस, जिनका जन्म 22 अप्रैल को हुआ।"<ref>[26] ^ क्रिस्टोफेर्सन, बिल, "दी में फ्रॉम क्लियर लेक: पृथ्वी दिवस के संस्थापक जेराल्ड नेल्सन", विस्कोंसिन प्रेस विश्विद्यालय, मेडिसन, 2004, पी. 310</ref>
* [[21 अप्रैल]] जॉन मुइर का जन्म दिन था, जिन्होंने सियरा क्लब की स्थापना की। आयोजक इस बात को नहीं भूले थे कि मुइर का जन्मदिन अप्रैल 22 को होता है। {{Fact|date= जनवरी 2009}}
* [[22 अप्रैल]] [[1970]] [[व्लादिमीर लेनिन]] का 100 वां जन्मदिन था। ''[[टाइम (पत्रिका)|टाइम]]'' की रिपोर्ट के अनुसार कुछ लोगों का संदेह था कि यह दिनांक कोई संयोग नहीं है, लेकिन एक संकेत था कि घटना "एक कम्युनिस्ट चालाकी" थी और डॉटर्स ऑफ़ दी अमेरिकन रेवोल्यूशन के एक सदस्य ने कहा, "विनाशी तत्व इस बात की योजना बना रहे हैं कि अमेरिकी बच्चे एक ऐसे वातावरण में रहें जो उनके लिए अच्छा है।"
<ref name="time-memento" /> [[फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन|यू. एस. फेडेरल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टीगेशन के निदेशक]], [[जे एडगर हूवर|जे. एडगर हूवर]] को लेनिन के साथ यह सम्बन्ध संदेहात्मक लगा; यह अभियोग लगाया गया कि FBI ने 1970 के प्रदर्शन में निरीक्षण किया।<ref>{{cite news|author=Finney, John W.|url=http://select.nytimes.com/gst/abstract.html?res=FB0917F73A5F127A93C7A8178FD85F458785F9|title=MUSKIE SAYS F.B.I. SPIED AT RALLIES ON '70 EARTH DAY|publisher=''दि न्यू यॉर्क टाइम्स''|date=[[April 15]] [[1971]]|page=1}}</ref> यह विचार कि इस दिनांक को लेनिन के सौ वर्ष पूरे करने के उत्सव के रूप में चुना गया है, अभी भी कुछ खेमों में पाया जाता है,<ref>{{Citation |title= Of Leo and Lenin: Happy Earth Day from the Religious Right |journal= Church & State |volume= 53 |issue= 5 |date= मई 2000 |pages= 20 }}</ref><ref>{{cite web |url= http://www.capmag.com/article.asp?ID=3382 |title= This Earth Day Celebrate Vladimir Lenin's Birthday! |accessdate= 22 अप्रैल 2007 |last= Marriott |first= Alexander |date= [[21 अप्रैल 2004]] |work= Capitalism Magazine }}</ref> हालांकि लेनिन को कभी भी एक पर्यावरणवादी नहीं माना गया।
कुछ दूर छूट गए समूहों ने यह भी कहा कि उन्होंने प्रारंभिक संगठनात्मक अवधि के दौरान 22 अप्रैल को चुनने के लिए नेल्सन को 'प्रभावित' किया, लेकिन यह उनका चेतना पूर्ण निर्णय प्रतीत नहीं होता है।
* [[22 अप्रैल]] जूलियस स्टर्लिंग मोर्टन का भी जन्मदिन है, जो अर्बोर डे के संस्थापक थे, यह दिन एक राष्ट्रीय वृक्षारोपण अवकाश है, जो 1872 में शुरू हुआ।
अर्बोर दिवस [[नेब्रास्का]] में 1885 से नीतिगत छुट्टी बन गया। नेशनल अर्बोर डे फाउंडेशन के अनुसार "राज्य अनुसरण के लिए सबसे सामान्य दिन है अप्रैल महीने का अंतिम शुक्रवार... लेकिन अन्य समय पर कई राज्य अर्बोर दिवस, सर्वश्रेष्ठ वृक्ष रोपण मौसम के साथ संयोगवश मेल खाते हैं।"<ref>{{cite web |url= http://www.arborday.org/arborday/history.cfm |title= Arbor Day's Beginnings |accessdate= 22 अप्रैल 2007 |publisher= The National Arbor Day Foundation |archive-date= 10 जनवरी 2015 |archive-url= https://web.archive.org/web/20150110211544/http://www.arborday.org/arborday/history.cfm |url-status= dead }}</ref> नेब्रास्का के अलावा, जहां इसकी उत्पत्ति हुई, यह व्यापक रूप से अधिक विस्तरित पृथ्वी दिवस के रूप में स्थापित हो गया है।
=== पृथ्वी सप्ताह ===
{{Cleanup|date=मार्च 2009}}
कई शहर पृथ्वी दिवस को पृथ्वी सप्ताह के रूप में पूरे सप्ताह के लिए मनाते हैं, आमतौर पर [[16 अप्रैल]] से शुरू कर के, 22 अप्रैल को पृथ्वी दिवस के दिन इसे समाप्त किया जाता है।
<ref name="chicago">{{cite web|title=City Celebrates Earth Week|publisher=City of Chicago|date=2007|accessdate=1 अप्रैल 2008|url=http://www.cityofchicago.org/city/webportal/portalContentItemAction.do?topChannelName=HomePage&contentOID=536937837&Failed_Reason=Invalid+timestamp,+engine+has+been+restarted&contenTypeName=COC_EDITORIAL&com.broadvision.session.new=Yes&Failed_Page=%2fwebportal%2fportalContentItemAction.do}}
</ref> इन घटनाओं को पर्यावरण से सम्बंधित जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए डिजाइन किया जाता है। इन घटनाओं में शामिल हैं, पुनः चक्रीकरण को बढ़ावा देना, ऊर्जा की प्रभाविता में सुधार करना और डिज्पोजेबल वस्तुओं में कमी लाना।
<ref>[40] ^ उदाहरण [http://www.kidzworld.com/article/3382-earth-day-cleaning-up-our-planet/ "पृथ्वी दिवस:: हमारे ग्रह की सफाई "] Kidzworld.com 25 मार्च 2009 को पुनः प्राप्त</ref>
22 अप्रैल वार्षिक इओवाहॉक "वर्चुअल क्रुइसे" की भी तिथि है। दुनिया भर से लाखों लोग इसमे भाग लेते हैं।
=== पृथ्वी दिवस पर्यावरणीय ध्वज ===
[[चित्र:EcologyTheta.svg|thumb|150px|right|पारिस्थितिकीय फ्लैग थेटा के साथ]]विश्व के ध्वजों के अनुसार, पारिस्थितिक ध्वज का निर्माण [[कार्टूनिस्ट]] रोन कोब्ब के द्वारा किया गया और इसे [[7 नवंबर|7 नवम्बर]], [[1969]] को लोस एंजेलेस फ्री प्रेस में प्रकाशित किया गया और फिर बाद में पुब्लिक डोमेन में रखा गया। यह प्रतीक "E" व "O" अक्षरों के संयोजन से बनाया गया था, जिन्हें क्रमशः "Environment" व "Organism" शब्दों से लिया गया था।
इस झंडे का प्रतिरूप संयुक्त राज्य अमेरिकी ध्वज से लिया गया था और इसमें एक के बाद एक तेरह हरी और सफ़ेद धारियां थीं।
इसकी केंटन हरी थी और इसमें पीला थीटा था। बाद के ध्वजों में थीटा का उपयोग ऐतिहासिक रूप से या तो एक चेतावनी के प्रतीक के रूप में या शांति के प्रतीक के रूप में किया गया। थीटा बाद में पृथ्वी दिवस से सम्बंधित हो गया।
एक16 वर्षीय स्कूल छात्र बेट्सी वोगेल जो पर्यावरणी एडवोकेट और सामाजिक कार्यकर्ता थे, उन्हें कोस्ट्युम सिलना और अनोखे उपहार बनाना पसंद था, उन्होंने पहले पृथ्वी दिवस की याद में एक 4 x {{convert|6|ft|m|sing=on}} हरा और सफ़ेद "थीटा" पारिस्थितिक ध्वज बनाया।
प्रारंभ में उन्हें इस ध्वज को श्रेवेपोर्ट, लुसियाना में सी ई बिर्ड हाई स्कूल पर लहराने की आज्ञा नहीं दी गयी, वोगेल ने लुसियाना राज्य विधायिका और लुसियाना के गवर्नर जॉन मेककीथेन से पृथ्वी दिवस के समय ध्वज के प्रदर्शन की अनुमति प्राप्त कर ली।
=== पृथ्वी दिवस [[२०२०|2020]] का विषय ===
पृथ्वी दिवस [[२०२०|2020]] के लिए विषय जलवायु कार्रवाई है। भारी चुनौती - लेकिन जलवायु परिवर्तन पर कार्रवाई के विशाल अवसरों ने इस मुद्दे को [[५०|50]]वीं वर्षगाँठ के लिए सबसे अधिक दबाव वाले विषय के रूप में प्रतिष्ठित किया है।
जलवायु परिवर्तन मानवता के भविष्य और जीवन-समर्थन प्रणालियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती है जो हमारी दुनिया को रहने योग्य बनाता है।<ref name=":1" />
=== पृथ्वी दिवस पर आलोचनाएँ ===
कुछ पर्यावरणवादी पृथ्वी दिवस के समालोचक बन गए, खास कर वे जो ब्राईट ग्रीन एन्वायरनमेंटलिज्म कैम्प में शामिल थे। उनका दावा था कि पृथ्वी दिवस पर्यावरण के खरखाव को सीमित करने का प्रतीक है और इसे मनाने से इसकी उपयोगिता और कम हो गयी है।<ref>[43] ^ [http://www.worldchanging.com/archives//006520.html वर्ल्ड चेंजिंग: एक हरित उज्जवल भविष्य बनाने के लिए उपकरण, मॉडल और विचार: इस पृथ्वी दिवस को आपका अंतिम बनाओ!] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20090921120251/http://www.worldchanging.com/archives/006520.html |date=21 सितंबर 2009 }}</ref>
5 मई 2009 को द वॉशिंगटन टाईम्स ने की तुलना पृथ्वी दिवस से की, दावा किया कि अर्बोर दिवस पेड़ों का एक खुश, गैर-राजनैतिक उत्सव है, जबकि पृथ्वी दिवस एक निराशावादी, राजनैतिक विचार है जो मानव में नकारात्मक रोशनी को दर्शाता है।<ref>[44] ^ [http://www.washingtontimes.com/news/2009/may/05/arbor-vs-earth-day/ अर्बोर बनाम पृथ्वी दिवस] द वाशिंगटन टाइम्स, 5 मई 2009</ref>
== यह भी देखिए ==
* [[विश्व पर्यावरण दिवस]]
== सन्दर्भ ==
{{reflist|2}}
==बाहरी कड़ियाँ==
{{wikinews|Earth Day 2008 marked in various ways}}{{wikinews|Earth Day 2009 celebrated around the globe}}
{{wikiquote|Environment}}
{{commons|Earth Day}}
'''22 अप्रैल पृथ्वी दिवस'''
* [http://www.earthday.net/ पृथ्वी दिवस नेटवर्क] - पृथ्वी दिवस के लिए दुनिया भर की घटनाओं के साथ समन्वय.
* [http://www.earthsocietyfoundation.org पृथ्वी सोसायटी फाउंडेशन] - अधिकारिक संगठन जो संयुक्त राष्ट्र में वार्षिक समान्त पृथ्वी दिवस समारोह का आयोजन करता है।
* [http://www.earthday.gov/ संयुक्त राज्य पृथ्वी दिवस] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20091008114705/http://www.earthday.gov/ |date=8 अक्तूबर 2009 }}- अमेरिकी सरकार की ''पृथ्वी दिवस'' साइट.
* [http://www.earthday.ca/ पृथ्वी दिवस कनाडा] - कनाडा की आधिकारिक साइट ''पृथ्वी दिवस'' के लिए
* [http://www.kab.org/ अमेरिका को सुंदर रखें] -अमेरिका को सुंदर रखें अभियान में राष्ट्र में समुदायों में सफाई के कार्य इस संगठन ने 1971 में पृथ्वी दिवस पर [[रोते हुए भारतीय|रोते हुए भारतीयों]] का प्रसिद्द अभियान शुरू किया।
* [http://www.nature.org/earthday पृथ्वी दिवस प्रकृति संरक्षण में]
* [http://www.lessonplanet.com/curriculum_connections/science_lesson_plans/25_March_2009/17/earth_day_lessons_with_the_right_stuff?frm=PREarthday पृथ्वी दिवस पाठ योजना एवं शिक्षण संसाधन]
[[श्रेणी:दिवस]]
[[श्रेणी:मार्च के अनुष्ठान]]
[[श्रेणी:अप्रैल के अनुष्ठान]]
[[श्रेणी:पर्यावरण जागरूकता दिवस]]
[[श्रेणी:पर्यावरणवाद का इतिहास]]
[[श्रेणी:धर्मनिरपेक्ष छुट्टियाँ]]
[[श्रेणी:संयुक्त राष्ट्र दिवस]]
[[श्रेणी:आवर्ती घटनाएं 1970 में स्थापित]]
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क्षत्रिय (1993 फ़िल्म)
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| starring = [[सुनील दत्त]], <br />[[राखी गुलज़ार]], <br />[[विनोद खन्ना]], <br />[[मीनाक्षी शेषाद्रि]], <br />[[धर्मेन्द्र]], <br />[[विजयेन्द्र घटगे]], <br />[[सनी द्योल]], <br />[[रवीना टंडन]], <br />[[संजय दत्त]], <br />[[दिव्या भारती]], <br />[[कबीर बेदी]], <br />[[प्रेम चोपड़ा]], <br />[[पुनीत इस्सर]], <br />[[नफ़ीसा अली]], <br />
| screenplay =
| released = [[1993]]
| country = [[भारत]]
| language = [[हिन्दी]]
| budget = 5 करोड़
| gross = 8 करोड़
}}
'''क्षत्रिय''' 1993 में बनी [[हिन्दी भाषा]] की फिल्म है।
राजस्थान के दो राजपूत परिवारो कि आपसी दुश्मनी को दर्शाती ये फिल्म।
== चरित्र ==
== मुख्य कलाकार ==
* [[सुनील दत्त]]
* [[राखी गुलज़ार]]
* [[विनोद खन्ना]]
* [[मीनाक्षी शेषाद्रि]] - मधु
* [[धर्मेन्द्र]]
* [[विजयेन्द्र घटगे]]
* [[सनी द्योल]] - विनय
* [[रवीना टंडन]]
* [[संजय दत्त]]
* [[दिव्या भारती]]
* [[कबीर बेदी]]
* [[प्रेम चोपड़ा]]
* [[पुनीत इस्सर]]
* [[नफ़ीसा अली]]
* Kiran mam
* Rajpal yadav
== दल ==
== संगीत ==
== रोचक तथ्य ==
== परिणाम == ये फिल्म सुपरहिट साबित हुई थी।
=== बौक्स ऑफिस ===
=== समीक्षाएँ ===
== नामांकन और पुरस्कार ==
== बाहरी कड़ियाँ ==
* {{imdb title|0104645|क्षत्रिय}}
[[श्रेणी:1993 में बनी हिन्दी फ़िल्म]]
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चाहर धर्मेंद्र
703114
सन्दर्भ + जानकारी
6547926
wikitext
text/x-wiki
{{Infobox Film
| name = क्षत्रिय
| image = क्षत्रिय (1993 फ़िल्म).jpeg
| caption = '''क्षत्रिय''' का पोस्टर
| producer =
| director = [[जे पी दत्ता]]
| music =
| writer =
| starring = [[सुनील दत्त]], <br />[[राखी गुलज़ार]], <br />[[विनोद खन्ना]], <br />[[मीनाक्षी शेषाद्रि]], <br />[[धर्मेन्द्र]], <br />[[विजयेन्द्र घटगे]], <br />[[सनी द्योल]], <br />[[रवीना टंडन]], <br />[[संजय दत्त]], <br />[[दिव्या भारती]], <br />[[कबीर बेदी]], <br />[[प्रेम चोपड़ा]], <br />[[पुनीत इस्सर]], <br />[[नफ़ीसा अली]], <br />
| screenplay =
| released = [[1993]]
| country = [[भारत]]
| language = [[हिन्दी]]
| budget = 5 करोड़<ref name="figure">{{cite news|url=https://www.india.com/entertainment/this-action-film-had-dharmendra-vinod-khanna-sunny-deol-in-lead-roles-still-failed-at-box-office-sanjay-dutt-was-reason-for-flop-due-to-his-arrest-in-bombay-bombing-case-movie-is-kshatriya-7711853|title=This action film had Dharmendra, Vinod Khanna, Sunny Deol in lead roles, still failed at box-office, Sanjay Dutt was reason for flop due to...|date=26 मार्च 2025|accessdate=12 मार्च 2026|author=मल्लिका मेहज़बीन|work=इंडिया डॉट कॉम}}</ref>
| gross = 2.5 करोड़<ref name="figure" />
}}
'''क्षत्रिय''' 1993 में बनी [[हिन्दी भाषा]] की फिल्म है। इसे 26 मार्च 1993 को विश्व स्तर पर रिलीज किया गया था।
== चरित्र ==
== मुख्य कलाकार ==
* [[सुनील दत्त]]
* [[राखी गुलज़ार]]
* [[विनोद खन्ना]]
* [[मीनाक्षी शेषाद्रि]] - मधु
* [[धर्मेन्द्र]]
* [[विजयेन्द्र घटगे]]
* [[सनी द्योल]] - विनय
* [[रवीना टंडन]]
* [[संजय दत्त]]
* [[दिव्या भारती]]
* [[कबीर बेदी]]
* [[प्रेम चोपड़ा]]
* [[पुनीत इस्सर]]
* [[नफ़ीसा अली]]
== दल ==
== संगीत ==
{{Infobox album
| name = क्षत्रिय<br>{{small|(मूल मोशन पिक्चर साउंडट्रैक)}}
| type = साउंडट्रैक एल्बम
| cover =
| caption =
| artist = [[लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल]]
| alt =
| released = 26 मार्च 1993
| recorded = 1992–1993
| genre = [[ध्वनि-पट्टी| चलचित्र साउंडट्रैक]], फिल्मी
| length = 39:37
| language = हिन्दी
| label = सुझाव
| producer = लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल
| misc = {{External media
| audio1 = {{YouTube|BO3R45M6woY|Kshatriya: नमस्ते नमस्ते}}
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}}
}}
फिल्म का संगीत [[लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल]] ने तैयार किया था और गानों के बोल [[आनंद बख्शी]] ने लिखे थे।
{| class="wikitable"
! # !! गाना !! गायक
|-
| 1
| "नमस्ते नमस्ते"
| [[मुहम्मद अज़ीज़]]
|-
| 1
| "हेलो हेलो" (संस्करण 2)
| मुहम्मद अज़ीज़
|-
| 3
| "मैं खिंची चली आई"
| [[अलका याज्ञिक]]
|-
| 4
| "दिल ना किसी का जाए"
| [[लता मंगेशकर]], [[कविता कृष्णमूर्ति]]
|-
| 4
| "दिल ना किसी का जाए" (संस्करण 2)
| कविता कृष्णमूर्ति
|-
| 6
| "छम छम बरसा पानी"
| [[साधना सरगम]], कविता कृष्णमूर्ति
|-
| 7
| "मैं एक प्यासी कली"
| कविता कृष्णमूर्ति
|-
| 8
| "सपने में सखी"
| कविता कृष्णमूर्ति
|-
| 9
| "तूने किया था वादा"
| कविता कृष्णमूर्ति
|}
== रोचक तथ्य ==
== परिणाम ==
=== बौक्स ऑफिस ===
=== समीक्षाएँ ===
== नामांकन और पुरस्कार ==
== सन्दर्भ ==
{{टिप्पणीसूची}}
== बाहरी कड़ियाँ ==
* {{imdb title|0104645|क्षत्रिय}}
[[श्रेणी:1993 में बनी हिन्दी फ़िल्म]]
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पश्चिमी तट
0
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The Sorter
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wikitext
text/x-wiki
{{Infobox country|conventional_long_name=पश्चिमी तट|image_map=West_Bank_in_Palestine_(%2Bclaimed).svg|map_caption=[[फ़िलिस्तीन]] में पश्चिमी तट की अवस्थिति|coordinates={{Coord|32|00|N|35|21|E|region:PS|display=inline,title}}|religion=[[इस्लाम]], [[यहूदी धर्म]], [[ईसाई धर्म]], [[सामरी धर्म]]|demonym=|population_estimate=2022 तक, 2,949,246{{efn|6,70,000 से अधिक [[इसराइली बस्ती|इसराइली उपनिवेशी]] पश्चिम तट में रहते हैं; 2019 तक लगभग 2,27,100 इसराइली उपनिवेशी [[पूर्व यरुशलम]] में रहते हैं।<ref>{{Cite web|url=https://www.cia.gov/the-world-factbook/countries/west-bank/#people-and-society|title=West Bank|date=17 October 2023|publisher=[[Central Intelligence Agency]]|access-date=25 December 2021|archive-date=22 July 2021|archive-url=https://web.archive.org/web/20210722231029/https://www.cia.gov/the-world-factbook/countries/west-bank/#people-and-society|url-status=dead}}</ref>}}|population_estimate_year=2021|area_km2=5655|population_density_km2=522|currency=[[इसराइली नई शेकेल]] (ILS)<br />[[जॉर्डनी दीनार]] (JOD)|time_zone=[[फ़िलिस्तीन मानक समय]]|utc_offset=+2|time_zone_DST=[[फ़िलिस्तीन ग्रीष्मसमय]]|utc_offset_DST=+3|calling_code=[[+970]], [[+972]]<ref>{{Cite web |title=About |url=https://www.972mag.com/about/ |access-date=2025-04-16 |website=+972 Magazine |language=en-US}}</ref>|iso3166code=PS|status=* [[फ़िलिस्तीन]] का दावा{{efn|[[फ़िलिस्तीन]] संयुक्त राष्ट्र के 157 सदस्यों द्वारा पहचाना जाता है।}}<ref>{{cite web|date=23 September 2011|title=Ban sends Palestinian application for UN membership to Security Council|url=https://www.un.org/apps/news/story.asp?NewsID=39722#.VfMZaZeM-ao|url-status=live|archive-url=https://web.archive.org/web/20151010151934/http://www.un.org/apps/news/story.asp?NewsID=39722#.VfMZaZeM-ao|archive-date=10 October 2015|access-date=11 September 2015|publisher=United Nations News Centre}}</ref>
* [[फ़िलिस्तीनी अंतःक्षेत्र|क्षेत्रों A और B]] में आधो-आध [[फ़िलिस्तीनी अधिकार]] द्वारा अधिकृत<ref>[https://www.nytimes.com/1994/05/05/world/mideast-accord-overview-rabin-arafat-sign-accord-ending-israel-s-27-year-hold.html?pagewanted=all "Mideast accord: the overview; Rabin and Arafat sign accord ending Israel's 27-year hold on Jericho and the Gaza Strip"] {{Webarchive |url=https://web.archive.org/web/20201209052541/https://www.nytimes.com/1994/05/05/world/mideast-accord-overview-rabin-arafat-sign-accord-ending-israel-s-27-year-hold.html?pagewanted=all |date=9 December 2020 }}. Chris Hedges, ''[[The New York Times]]'', 5 May 1994.</ref>
* [[पश्चिमी तट पर इसराइली क़ब्ज़ा|इसराइली क़ब्ज़े]] के तहत, जो [[अंतरराष्ट्रीय विधि]] के अनुसार अवैध है<ref name="bbc.com">{{Cite web |date=2024-07-19 |title=ICJ says Israeli occupation of Palestinian territories is illegal |url=https://www.bbc.com/news/articles/cjerjzxlpvdo |access-date=2024-07-19 |website=[[BBC News Online|BBC News]] |language=en-GB}}</ref><ref name="auto3">{{Cite journal |last1=Roberts |first1=Adam |author-link=Adam Roberts (scholar) |year=1990 |title=Prolonged Military Occupation: The Israeli-Occupied Territories Since 1967 |url=https://pdfs.semanticscholar.org/8aaa/455b51d4c49285089a97a08496071e322877.pdf |url-status=dead |journal=[[American Journal of International Law|The American Journal of International Law]] |volume=84 |issue=1 |pages=85–86 |doi=10.2307/2203016 |jstor=2203016 |s2cid=145514740 |archive-url=https://web.archive.org/web/20200215100933/https://pdfs.semanticscholar.org/8aaa/455b51d4c49285089a97a08496071e322877.pdf |archive-date=2020-02-15 |quote=The international community has taken a critical view of both deportations and settlements as being contrary to international law. General Assembly resolutions have condemned the deportations since 1969, and have done so by overwhelming majorities in recent years. Likewise, they have consistently deplored the establishment of settlements, and have done so by overwhelming majorities throughout the period (since the end of 1976) of the rapid expansion in their numbers. The Security Council has also been critical of deportations and settlements; and other bodies have viewed them as an obstacle to peace, and illegal under international law... Although East Jerusalem and the Golan Heights have been brought directly under Israeli law, by acts that amount to annexation, both of these areas continue to be viewed by the international community as occupied, and their status as regards the applicability of international rules is in most respects identical to that of the West Bank and Gaza.|issn = 0002-9300}}</ref>|common_languages=[[अरबी भाषा|अरबी]], [[इब्रानी भाषा|इब्रानी]]|common_name=पश्चिमी तट|native_name={{lang|ar|الضفة الغربية}}<br>{{Script/Hebrew|יְהוּדָה וְשׁוֹמְרוֹן}}}}
'''पश्चिमी''' '''तट''' ({{Langx|ar|الضفة الغربية}}, {{Langx|he|יְהוּדָה וְשׁוֹמְרוֹן|4=[[यहूदिया और सामरिया]]}}) [[जॉर्डन नदी]] के पश्चिम स्थित [[फ़िलिस्तीन राज्य|फ़िलिस्तीन]] का एक क्षेत्र है। [[पश्चिम एशिया]] के [[भूमध्य सागर|भूमध्यसागरीय]] तट के निकट स्थलरुद्ध होने के नाते,<ref>{{Citation|title=West Bank|date=2022-09-27|url=https://www.cia.gov/the-world-factbook/countries/west-bank/|work=The World Factbook|archive-url=https://web.archive.org/web/20210722231029/https://www.cia.gov/the-world-factbook/countries/west-bank/|publisher=[[Central Intelligence Agency]]|access-date=2022-09-30|archive-date=22 July 2021|url-status=dead}}</ref> इसके पूर्व में [[जॉर्डन]] और [[मृत सागर]] तथा दक्षिण, पश्चिम और उत्तर में [[इसराइल]] स्थित है।<ref name="CIA" /> 1967 से, पश्चिम तट [[पश्चिमी तट पर इसराइली क़ब्ज़ा|इसराइली क़ब्ज़े]] में है, जिसे अंतरराष्ट्रीय विधि के तहत अवैध माना जाता है।<ref name="bbc.com" />
[[1948 अरब-इजरायल युद्ध|1948 में अरब-इसराइल युद्ध]] में जॉर्डन द्वारा कब्जा किए जाने के बाद इस इलाके को "वेस्ट बैंक" का नाम दिया गया था क्योंकि यह जॉर्डन नदी के पश्चिम तट पर स्थित है। जॉर्डन ने बाद में 1950 में इस क्षेत्र पर कब्जा कर लिया और 1967 तक इसे नियन्त्रित किया। 1967 में एक छह-दिवसीय युद्ध के दौरान इसराइल ने इस इलाके को अपने कब्ज़े में ले लिया।
फिलिस्तीन लिबरेशन ऑर्गनाइजेशन और इसराइल के बीच हस्ताक्षर किए गए ओस्लो समझौते ने प्रत्येक क्षेत्र के भीतर फिलिस्तीनी स्वायत्तता के विभिन्न स्तरों के साथ प्रशासनिक जिले बनाए। क्षेत्र 'स' जो पश्चिमी किनारे का लगभग 60% से अधिक है पर इसराइल ने पूर्ण नागरिक और सुरक्षा नियन्त्रण बनाए रखा है।<ref name=worldbank>{{cite web|title=Area C and the future of Palestinian economy|url=https://openknowledge.worldbank.org/bitstream/handle/10986/16686/AUS29220REPLAC0EVISION0January02014.pdf?sequence=1|publisher=World Bank|access-date=7 September 2015}}</ref>
वेस्ट बैंक जिसमें [[पूर्वी यरुशलम]] शामिल है लगभग 5,640 वर्ग किमी का भू-भाग और 220 वर्ग किमी का जल क्षेत्र है, जिसमें मृत सागर के उत्तर-पश्चिमी चतुर्थांश शामिल है। जुलाई 2017 तक इसकी अनुमानित आबादी 27,47,943 फिलिस्तीनियों और लगभग 3,91,000 इसराइलियों और पूर्वी यरुशलम में लगभग 2,01,200 इसराइलियों की है। अंतर्राष्ट्रीय समुदाय पश्चिमी किनाने में इसराइली बस्तियों को मान्यता देता है, जिसमें पूर्वी यरुशलम शामिल है हालाँकि यह अन्तरराष्ट्रीय कानून के तहत अवैध है, हालाँकि इसराइल इसे वैध मानता है।<ref>{{Cite journal|title=Prolonged Military Occupation: The Israeli-Occupied Territories Since 1967|last1=Roberts|first1=Adam|author-link=Adam Roberts (scholar)|journal=The American Journal of International Law|volume=84|issue=1|pages=85–86|quote=The international community has taken a critical view of both deportations and settlements as being contrary to international law. General Assembly resolutions have condemned the deportations since 1969, and have done so by overwhelming majorities in recent years. Likewise, they have consistently deplored the establishment of settlements, and have done so by overwhelming majorities throughout the period (since the end of 1976) of the rapid expansion in their numbers. The Security Council has also been critical of deportations and settlements; and other bodies have viewed them as an obstacle to peace, and illegal under international law... Although East Jerusalem and the Golan Heights have been brought directly under Israeli law, by acts that amount to annexation, both of these areas continue to be viewed by the international community as occupied, and their status as regards the applicability of international rules is in most respects identical to that of the West Bank and Gaza.|doi=10.2307/2203016|jstor=2203016|year=1990|s2cid=145514740|url=http://pdfs.semanticscholar.org/8aaa/455b51d4c49285089a97a08496071e322877.pdf|access-date=29 दिसंबर 2020|archive-date=15 फ़रवरी 2020|archive-url=https://web.archive.org/web/20200215100933/https://pdfs.semanticscholar.org/8aaa/455b51d4c49285089a97a08496071e322877.pdf|url-status=dead}}</ref><ref name=maj>{{Cite book|title=The Italian Yearbook of International Law|volume=14|year=2005|editor1-last=Conforti|editor1-first=Benedetto|editor2-last=Bravo|editor2-first=Luigi|first1=Marco|last1=Pertile|chapter='Legal Consequences of the Construction of a Wall in the Occupied Palestinian Territory': A Missed Opportunity for International Humanitarian Law?|publisher=Martinus Nijhoff Publishers|isbn=978-90-04-15027-0|page=141|quote=the establishment of the Israeli settlements in the Occupied Palestinian Territory has been considered illegal by the international community and by the majority of legal scholars.}}</ref><ref>{{Cite journal|journal=International Journal of Constitutional Law|title=Israel: The security barrier—between international law, constitutional law, and domestic judicial review|volume=4|last1=Barak-Erez|first1=Daphne|author-link=Daphne Barak Erez|year=2006|page=548|quote=The real controversy hovering over all the litigation on the security barrier concerns the fate of the Israeli settlements in the occupied territories. Since 1967, Israel has allowed and even encouraged its citizens to live in the new settlements established in the territories, motivated by religious and national sentiments attached to the history of the Jewish nation in the land of Israel. This policy has also been justified in terms of security interests, taking into consideration the dangerous geographic circumstances of Israel before 1967 (where Israeli areas on the Mediterranean coast were potentially threatened by Jordanian control of the West Bank ridge). The international community, for its part, has viewed this policy as patently illegal, based on the provisions of the Fourth Geneva Convention that prohibit moving populations to or from territories under occupation.|issue=3|doi=10.1093/icon/mol021|doi-access=free}}</ref><ref>{{Cite book|chapter=Self-determination and population transfer|last1=Drew|first1=Catriona|title=Human rights, self-determination and political change in the occupied Palestinian territories|volume=52|series=International studies in human rights|editor-last=Bowen|editor-first=Stephen|publisher=Martinus Nijhoff Publishers|year=1997|isbn=978-90-411-0502-8|pages=151–152|quote=It can thus clearly be concluded that the transfer of Israeli settlers into the occupied territories violates not only the laws of belligerent occupation but the Palestinian right of self-determination under international law. The question remains, however, whether this is of any practical value. In other words, given the view of the international community that the Israeli settlements are illegal under the law if belligerent occupation, what purpose does it serve to establish that an additional breach of international law has occurred?}}</ref> अन्तरराष्ट्रीय न्यायालय के परामर्शी निर्णय (2004) के अनुसार 1967 के इसराइली कब्ज़े के बाद घटित होने वाली घटनाएँ जिनमें 'यरुशलम कानून', जॉर्डन के साथ इसराइल की शान्ति सन्धि और ओस्लो समझौते शामिल हैं, ने वेस्ट बैंक की स्थिति में कोई बदलाव नहीं किया है।
==सन्दर्भ==
{{टिप्पणीसूची}}
{{आधार}}
[[श्रेणी:पश्चिमी तट]]
[[श्रेणी:फ़िलिस्तीन]]
[[श्रेणी:इसराइल-अधिकृत क्षेत्र]]
5gbkmu8hlf96fiow75oo0nm5up39kba
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2026-05-03T08:36:45Z
The Sorter
845290
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wikitext
text/x-wiki
{{Infobox country|conventional_long_name=पश्चिमी तट|image_map=West_Bank_in_Palestine_(%2Bclaimed).svg|map_caption=[[फ़िलिस्तीन]] में पश्चिमी तट की अवस्थिति|coordinates={{Coord|32|00|N|35|21|E|region:PS|display=inline,title}}|religion=[[इस्लाम]], [[यहूदी धर्म]], [[ईसाई धर्म]], [[सामरी धर्म]]|demonym=|population_estimate=2022 तक, 2,949,246{{efn|6,70,000 से अधिक [[इसराइली बस्ती|इसराइली उपनिवेशी]] पश्चिम तट में रहते हैं; 2019 तक लगभग 2,27,100 इसराइली उपनिवेशी [[पूर्व यरुशलम]] में रहते हैं।<ref>{{Cite web|url=https://www.cia.gov/the-world-factbook/countries/west-bank/#people-and-society|title=West Bank|date=17 October 2023|publisher=[[Central Intelligence Agency]]|access-date=25 December 2021|archive-date=22 July 2021|archive-url=https://web.archive.org/web/20210722231029/https://www.cia.gov/the-world-factbook/countries/west-bank/#people-and-society|url-status=dead}}</ref>}}|population_estimate_year=2021|area_km2=5655|population_density_km2=522|currency=[[इसराइली नई शेकेल]] (ILS)<br />[[जॉर्डनी दीनार]] (JOD)|time_zone=[[फ़िलिस्तीन मानक समय]]|utc_offset=+2|time_zone_DST=[[फ़िलिस्तीन ग्रीष्मसमय]]|utc_offset_DST=+3|calling_code=[[+970]], [[+972]]<ref>{{Cite web |title=About |url=https://www.972mag.com/about/ |access-date=2025-04-16 |website=+972 Magazine |language=en-US}}</ref>|iso3166code=PS|status=* [[फ़िलिस्तीन]] का दावा{{efn|[[फ़िलिस्तीन]] संयुक्त राष्ट्र के 157 सदस्यों द्वारा पहचाना जाता है।}}<ref>{{cite web|date=23 September 2011|title=Ban sends Palestinian application for UN membership to Security Council|url=https://www.un.org/apps/news/story.asp?NewsID=39722#.VfMZaZeM-ao|url-status=live|archive-url=https://web.archive.org/web/20151010151934/http://www.un.org/apps/news/story.asp?NewsID=39722#.VfMZaZeM-ao|archive-date=10 October 2015|access-date=11 September 2015|publisher=United Nations News Centre}}</ref>
* [[फ़िलिस्तीनी अंतःक्षेत्र|क्षेत्रों A और B]] में आधो-आध [[फ़िलिस्तीनी अधिकार]] द्वारा अधिकृत<ref>[https://www.nytimes.com/1994/05/05/world/mideast-accord-overview-rabin-arafat-sign-accord-ending-israel-s-27-year-hold.html?pagewanted=all "Mideast accord: the overview; Rabin and Arafat sign accord ending Israel's 27-year hold on Jericho and the Gaza Strip"] {{Webarchive |url=https://web.archive.org/web/20201209052541/https://www.nytimes.com/1994/05/05/world/mideast-accord-overview-rabin-arafat-sign-accord-ending-israel-s-27-year-hold.html?pagewanted=all |date=9 December 2020 }}. Chris Hedges, ''[[The New York Times]]'', 5 May 1994.</ref>
* [[पश्चिमी तट पर इसराइली क़ब्ज़ा|इसराइली क़ब्ज़े]] के तहत, जो [[अंतरराष्ट्रीय विधि]] के अनुसार अवैध है<ref name="bbc.com">{{Cite web |date=2024-07-19 |title=ICJ says Israeli occupation of Palestinian territories is illegal |url=https://www.bbc.com/news/articles/cjerjzxlpvdo |access-date=2024-07-19 |website=[[BBC News Online|BBC News]] |language=en-GB}}</ref><ref name="auto3">{{Cite journal |last1=Roberts |first1=Adam |author-link=Adam Roberts (scholar) |year=1990 |title=Prolonged Military Occupation: The Israeli-Occupied Territories Since 1967 |url=https://pdfs.semanticscholar.org/8aaa/455b51d4c49285089a97a08496071e322877.pdf |url-status=dead |journal=[[American Journal of International Law|The American Journal of International Law]] |volume=84 |issue=1 |pages=85–86 |doi=10.2307/2203016 |jstor=2203016 |s2cid=145514740 |archive-url=https://web.archive.org/web/20200215100933/https://pdfs.semanticscholar.org/8aaa/455b51d4c49285089a97a08496071e322877.pdf |archive-date=2020-02-15 |quote=The international community has taken a critical view of both deportations and settlements as being contrary to international law. General Assembly resolutions have condemned the deportations since 1969, and have done so by overwhelming majorities in recent years. Likewise, they have consistently deplored the establishment of settlements, and have done so by overwhelming majorities throughout the period (since the end of 1976) of the rapid expansion in their numbers. The Security Council has also been critical of deportations and settlements; and other bodies have viewed them as an obstacle to peace, and illegal under international law... Although East Jerusalem and the Golan Heights have been brought directly under Israeli law, by acts that amount to annexation, both of these areas continue to be viewed by the international community as occupied, and their status as regards the applicability of international rules is in most respects identical to that of the West Bank and Gaza.|issn = 0002-9300}}</ref>|common_languages=[[अरबी भाषा|अरबी]], [[इब्रानी भाषा|इब्रानी]]|common_name=पश्चिमी तट|native_name={{lang|ar|الضفة الغربية}}<br>{{Script/Hebrew|יְהוּדָה וְשׁוֹמְרוֹן}}}}
'''पश्चिमी''' '''तट''' ({{Langx|ar|الضفة الغربية}}, {{Langx|he|יְהוּדָה וְשׁוֹמְרוֹן|4=[[यहूदिया और सामरिया]]}}) [[जॉर्डन नदी]] के पश्चिम स्थित [[फ़िलिस्तीन राज्य|फ़िलिस्तीन]] का एक क्षेत्र है। [[पश्चिम एशिया]] के [[भूमध्य सागर|भूमध्यसागरीय]] तट के निकट स्थलरुद्ध होने के नाते,<ref>{{Citation|title=West Bank|date=2022-09-27|url=https://www.cia.gov/the-world-factbook/countries/west-bank/|work=The World Factbook|archive-url=https://web.archive.org/web/20210722231029/https://www.cia.gov/the-world-factbook/countries/west-bank/|publisher=[[Central Intelligence Agency]]|access-date=2022-09-30|archive-date=22 July 2021|url-status=dead}}</ref> इसके पूर्व में [[जॉर्डन]] और [[मृत सागर]] तथा दक्षिण, पश्चिम और उत्तर में [[इसराइल]] स्थित है।<ref name="CIA" /> 1967 से, पश्चिम तट [[पश्चिमी तट पर इसराइली क़ब्ज़ा|इसराइली क़ब्ज़े]] में है, जिसे अंतरराष्ट्रीय विधि के तहत अवैध माना जाता है।<ref name="bbc.com" />
[[1948 अरब-इजरायल युद्ध|1948 में अरब-इसराइल युद्ध]] में जॉर्डन द्वारा कब्जा किए जाने के बाद इस इलाके को "वेस्ट बैंक" का नाम दिया गया था क्योंकि यह जॉर्डन नदी के पश्चिम तट पर स्थित है। जॉर्डन ने बाद में 1950 में इस क्षेत्र पर कब्जा कर लिया और 1967 तक इसे नियन्त्रित किया। 1967 में एक छह-दिवसीय युद्ध के दौरान इसराइल ने इस इलाके को अपने कब्ज़े में ले लिया।
फिलिस्तीन लिबरेशन ऑर्गनाइजेशन और इसराइल के बीच हस्ताक्षर किए गए ओस्लो समझौते ने प्रत्येक क्षेत्र के भीतर फिलिस्तीनी स्वायत्तता के विभिन्न स्तरों के साथ प्रशासनिक जिले बनाए। क्षेत्र 'स' जो पश्चिमी किनारे का लगभग 60% से अधिक है पर इसराइल ने पूर्ण नागरिक और सुरक्षा नियन्त्रण बनाए रखा है।<ref name=worldbank>{{cite web|title=Area C and the future of Palestinian economy|url=https://openknowledge.worldbank.org/bitstream/handle/10986/16686/AUS29220REPLAC0EVISION0January02014.pdf?sequence=1|publisher=World Bank|access-date=7 September 2015}}</ref>
वेस्ट बैंक जिसमें [[पूर्वी यरुशलम]] शामिल है लगभग 5,640 वर्ग किमी का भू-भाग और 220 वर्ग किमी का जल क्षेत्र है, जिसमें मृत सागर के उत्तर-पश्चिमी चतुर्थांश शामिल है। जुलाई 2017 तक इसकी अनुमानित आबादी 27,47,943 फिलिस्तीनियों और लगभग 3,91,000 इसराइलियों और पूर्वी यरुशलम में लगभग 2,01,200 इसराइलियों की है। अंतर्राष्ट्रीय समुदाय पश्चिमी किनाने में इसराइली बस्तियों को मान्यता देता है, जिसमें पूर्वी यरुशलम शामिल है हालाँकि यह अन्तरराष्ट्रीय कानून के तहत अवैध है, हालाँकि इसराइल इसे वैध मानता है।<ref>{{Cite journal|title=Prolonged Military Occupation: The Israeli-Occupied Territories Since 1967|last1=Roberts|first1=Adam|author-link=Adam Roberts (scholar)|journal=The American Journal of International Law|volume=84|issue=1|pages=85–86|quote=The international community has taken a critical view of both deportations and settlements as being contrary to international law. General Assembly resolutions have condemned the deportations since 1969, and have done so by overwhelming majorities in recent years. Likewise, they have consistently deplored the establishment of settlements, and have done so by overwhelming majorities throughout the period (since the end of 1976) of the rapid expansion in their numbers. The Security Council has also been critical of deportations and settlements; and other bodies have viewed them as an obstacle to peace, and illegal under international law... Although East Jerusalem and the Golan Heights have been brought directly under Israeli law, by acts that amount to annexation, both of these areas continue to be viewed by the international community as occupied, and their status as regards the applicability of international rules is in most respects identical to that of the West Bank and Gaza.|doi=10.2307/2203016|jstor=2203016|year=1990|s2cid=145514740|url=http://pdfs.semanticscholar.org/8aaa/455b51d4c49285089a97a08496071e322877.pdf|access-date=29 दिसंबर 2020|archive-date=15 फ़रवरी 2020|archive-url=https://web.archive.org/web/20200215100933/https://pdfs.semanticscholar.org/8aaa/455b51d4c49285089a97a08496071e322877.pdf|url-status=dead}}</ref><ref name=maj>{{Cite book|title=The Italian Yearbook of International Law|volume=14|year=2005|editor1-last=Conforti|editor1-first=Benedetto|editor2-last=Bravo|editor2-first=Luigi|first1=Marco|last1=Pertile|chapter='Legal Consequences of the Construction of a Wall in the Occupied Palestinian Territory': A Missed Opportunity for International Humanitarian Law?|publisher=Martinus Nijhoff Publishers|isbn=978-90-04-15027-0|page=141|quote=the establishment of the Israeli settlements in the Occupied Palestinian Territory has been considered illegal by the international community and by the majority of legal scholars.}}</ref><ref>{{Cite journal|journal=International Journal of Constitutional Law|title=Israel: The security barrier—between international law, constitutional law, and domestic judicial review|volume=4|last1=Barak-Erez|first1=Daphne|author-link=Daphne Barak Erez|year=2006|page=548|quote=The real controversy hovering over all the litigation on the security barrier concerns the fate of the Israeli settlements in the occupied territories. Since 1967, Israel has allowed and even encouraged its citizens to live in the new settlements established in the territories, motivated by religious and national sentiments attached to the history of the Jewish nation in the land of Israel. This policy has also been justified in terms of security interests, taking into consideration the dangerous geographic circumstances of Israel before 1967 (where Israeli areas on the Mediterranean coast were potentially threatened by Jordanian control of the West Bank ridge). The international community, for its part, has viewed this policy as patently illegal, based on the provisions of the Fourth Geneva Convention that prohibit moving populations to or from territories under occupation.|issue=3|doi=10.1093/icon/mol021|doi-access=free}}</ref><ref>{{Cite book|chapter=Self-determination and population transfer|last1=Drew|first1=Catriona|title=Human rights, self-determination and political change in the occupied Palestinian territories|volume=52|series=International studies in human rights|editor-last=Bowen|editor-first=Stephen|publisher=Martinus Nijhoff Publishers|year=1997|isbn=978-90-411-0502-8|pages=151–152|quote=It can thus clearly be concluded that the transfer of Israeli settlers into the occupied territories violates not only the laws of belligerent occupation but the Palestinian right of self-determination under international law. The question remains, however, whether this is of any practical value. In other words, given the view of the international community that the Israeli settlements are illegal under the law if belligerent occupation, what purpose does it serve to establish that an additional breach of international law has occurred?}}</ref> अन्तरराष्ट्रीय न्यायालय के परामर्शी निर्णय (2004) के अनुसार 1967 के इसराइली कब्ज़े के बाद घटित होने वाली घटनाएँ जिनमें 'यरुशलम कानून', जॉर्डन के साथ इसराइल की शान्ति सन्धि और ओस्लो समझौते शामिल हैं, ने वेस्ट बैंक की स्थिति में कोई बदलाव नहीं किया है।
==सन्दर्भ==
{{टिप्पणीसूची}}
{{आधार}}
[[श्रेणी:पश्चिमी तट| ]]
[[श्रेणी:फ़िलिस्तीन]]
[[श्रेणी:इसराइल-अधिकृत क्षेत्र]]
3jeiwk084emmp9qvek13zz25022z5pn
प्रकार्यात्मक समूह
0
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6547768
6529941
2026-05-02T13:07:18Z
Innerstream
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wikitext
text/x-wiki
[[चित्र:Benzyl acetate - functional groups and moieties.svg|right|thumb|300px|बेंजिल एसिटेट में [[इस्टर]] प्रकार्यात्मक समूह (केसरिया घेरे में) उपस्थित है।]]
[[कार्बनिक रसायन]] में, किसी [[अणु]] में उपस्थित [[परमाणु|परमाणुओं]] या [[रासायनिक आबंध|बन्धों]] का वह विशिष्ट समूह जो उस [[कार्बनिक यौगिक]] के रासायनिक गुणों का निर्धारण करता है, '''प्रकार्यात्मक समूह''' (फंक्शनल ग्रुप) कहलाता है। विभिन्न अणुओं में उपस्थित प्रकार्यात्मक समूह एक ही या समान रासायनिक अभिक्रिया प्रदर्शित करेगा, चाहे अणु का आकार छोटा हो या बड़ा।
== प्रमुख प्रकार्यात्मक समूहों की सारणी ==
=== [[हाइड्रोकार्बन]] ===
{| class="wikitable" style="background: #ffffff; text-align: center;width:550px"
|-
! रासायनिक वर्ग
! समूह
! सूत्र
! संरचनात्मक सूत्र
! उपसर्ग (Prefix)
! प्रत्यय (Suffix)
! उदाहरण
|-
| [[ऐल्केन]] <br>Alkane || [[Alkane|Alkyl]]
| R(CH<sub>2</sub>)<sub>n</sub>H
| [[Image:Alkyl-(general)-skeletal.svg|75px|Alkyl]]
| alkyl- || -ane
| [[Image:Ethane-2D.png|75px|methane]]<br>[[Ethane]]
|-
| [[ऐल्कीन]] <br>Alkene || [[Alkene|Alkenyl]]
| R<sub>2</sub>C=CR<sub>2</sub>
| [[Image:Alkene-2D-skeletal.svg|75px|Alkene]]
| alkenyl- || -ene
| [[Image:Ethylene.svg|75px|ethylene]]<br>[[Ethylene]]<br/>''(Ethene)''
|-
| [[ऐल्काइन]] <br>Alkyne || [[Alkyne|Alkynyl]]
| RC≡CR'
| [[Image:Alkyne general.svg|100px|Alkyne]]
| alkynyl- || -yne
| [[Image:Acetylene-2D.svg|100px|acetylene]]<br>[[Acetylene]]<br/>''(Ethyne)''
|-
|-
| [[बेंजीन|बेंजीन व्युत्पाद]]<br>Benzene derivative
| [[फेनिल]]<br>Phenyl
| RC<sub>6</sub>H<sub>5</sub><br />RPh
| [[Image:Phenyl-group.svg|75px|Phenyl]]
| phenyl- || -benzene
| [[Image:Cumene-skeletal.svg|55px|Cumene]]<br />[[Cumene]]<br/>''(2-phenylpropane)''
|-
| [[टॉल्यूइन|टॉल्यूइन व्युत्पाद]]<br>Toluene
| [[ बेंजिल]] <br>Benzyl
| RCH<sub>2</sub>C<sub>6</sub>H<sub>5</sub><br />RBn
| [[Image:Benzyl-group.svg|75px|Benzyl]]
| benzyl-
| 1-(''substituent'')toluene
| [[Image:Benzyl-bromide-skeletal.svg|75px|Benzyl bromide]]<br />[[Benzyl bromide]]<br />''(α-Bromotoluene)''
|-
|}
=== हाइड्रोजन वाले प्रकार्यात्मक समूह ===
{| class="wikitable" style="background: #ffffff; text-align: center;width:550px"
|-
! [[रासायनिक वर्ग]]
! समूह
! सूत्र
! संरचनात्मक सूत्र
! उपसर्ग (Prefix)
! प्रत्यय (Suffix)
! उदाहरण
|-
| [[haloalkane]] || [[halogen|halo]]
| RX
| [[Image:Halide-group.svg|50px|Halide group]]
| halo- || alkyl '''halide'''
| [[Image:Chloroethane-skeletal.png|75px|Chloroethane]]<br>[[Chloroethane]]<br>''(Ethyl chloride)''
|-
| [[fluoroalkane]] || [[fluorine|fluoro]]
| RF
| [[Image:Fluoro-group.svg|50px|Fluoro group]]
| fluoro- || alkyl '''fluoride'''
| [[Image:Fluoromethane.svg|75px|Fluoromethane]]<br>[[Fluoromethane]]<br>''(Methyl fluoride)''
|-
| [[chloroalkane]] || [[chlorine|chloro]]
| RCl
| [[Image:Chloro-group.svg|50px|Chloro group]]
| chloro- || alkyl '''chloride'''
| [[Image:Chloromethane.svg|75px|Chloromethane]]<br>[[Chloromethane]]<br>''(Methyl chloride)''
|-
| [[bromoalkane]] || [[bromine|bromo]]
| RBr
| [[Image:Bromo-group.svg|50px|Bromo group]]
| bromo- || alkyl '''bromide'''
| [[Image:Methyl bromide.svg|75px|Bromomethane]]<br>[[Bromomethane]]<br>''(Methyl bromide)''
|-
| [[iodoalkane]] || [[iodine|iodo]]
| RI
| [[Image:Alkyl iodide.svg|50px|Iodo group]]
| iodo- || alkyl '''iodide'''
| [[Image:Iodomethane.svg|75px|Iodomethane]]<br>[[Iodomethane]]<br>''(Methyl iodide)''
|-
|}
=== आक्सीजन वाले प्रकार्यात्मक समूह ===
{| class="wikitable" style="background: #ffffff; text-align: center;width:300px"
|-
! [[रासायनिक वर्ग]]
! समूह
! सूत्र
! संरचनात्मक सूत्र
! उपसर्ग (Prefix)
! प्रत्यय (Suffix)
! उदाहरण
|-
| [[ऐल्कोहॉल]]<br>Alcohol || [[Hydroxyl]]
| ROH
| [[Image:Hydroxy-group-bw.svg|75px|Hydroxyl]]
| hydroxy- || '''-ol'''
| [[Image:Methanol-2D.svg|75px|methanol]]<br>[[Methanol]]
|-
| [[कीटोन]] <br>Ketone || [[Carbonyl]]
| RCOR'
| [[File:Ketone-group-2D-skeletal.svg|Ketone|75px]]
| -oyl- (-COR')<br>or<br>oxo- (=O) || '''-one'''
| [[Image:Butanone-structure-skeletal.png|75px|Butanone]]<br />[[Butanone]]<br>''(Methyl ethyl ketone)''
|-
| [[ऐल्डिहाइड]]<br>Aldehyde || [[ऐल्डिहाइड]]
| RCHO
| [[Image:Skeletal formula of an aldehyde group.svg|75px|Aldehyde]]
| formyl- (-COH)<br>or<br>oxo- (=O)|| '''-al'''
| [[Image:Acetaldehyde-skeletal.svg|75px|acetaldehyde]]<br>[[Acetaldehyde]]<br/>''(Ethanal)''
|-
| [[Acyl halide]] || Haloformyl
| RCOX
| [[Image:Acyl-halide-skeletal2D.svg|75px|Acyl halide]]
| carbonofluoridoyl-<br/>carbonochloridoyl-<br/>carbonobromidoyl-<br/>carbonoiodidoyl- || -oyl '''halide'''
| [[Image:Acetyl-chloride.svg|75px|Acetyl chloride]]<br />[[Acetyl chloride]]<br/>''(Ethanoyl chloride)''
|-
|[[Carbonate ester|Carbonate]]
| [[Carbonate ester]]
| ROCOOR
| [[Image:Carbonate-group.svg|75px|Carbonate]]
| (alkoxycarbonyl)oxy-
| alkyl '''carbonate'''
| [[Image:Triphosgene-skeletal.png|90px|triphosgene]]<br>[[Triphosgene]]<br/>''(bis(trichloromethyl) carbonate)''
|-
| [[Carboxylic acid|Carboxylate]]
| [[Carboxylate]] || RCOO<sup>−</sup>
| [[Image:Carboxylate-resonance-hybrid.svg|75px|Carboxylate]]<br>
[[Image:Carboxylate-canonical-forms.svg|75px|Carboxylate]]
| carboxy- || -oate
| [[Image:Sodium-acetate-2D-skeletal.png|75px|Sodium acetate]]<br />[[Sodium acetate]]<br />''(Sodium ethanoate)''
|-
| [[Carboxylic acid]]
| [[Carboxyl]] || RCOOH
| [[Image:Carboxylic-acid-skeletal.svg|75px|Carboxylic acid]]
| carboxy- || -oic '''acid'''
| [[Image:Acetic-acid-2D-skeletal.svg|75px|Acetic acid]]<br />[[Acetic acid]]<br />''(Ethanoic acid)''
|-
| [[Ester]] || [[Ester]]
| RCOOR'
| [[Image:Ester-skeletal.svg|Ester|75px]]
| alkanoyloxy-<br>or<br>alkoxycarbonyl|| alkyl alkan'''oate'''
| [[Image:Ethyl butyrate.png|75px|Ethyl butyrate]]<br>[[Ethyl butyrate]]<br>''(Ethyl butanoate)''
|-
| [[Methoxy]] || [[Methoxy]]
| ROCH3
| [[Image:Methoxy-group.svg|75px|Methoxy]]
| methoxy-
|
|
|-
| [[Organic peroxide|Hydroperoxide]]
| [[Organic peroxide|Hydroperoxy]]
| ROOH
| [[Image:Hydroperoxide-group-2D.svg|75px|Hydroperoxy]]
| hydroperoxy-
| alkyl '''hydroperoxide'''
| [[File:TBHP.png|75px|''tert''-Butyl hydroperoxide]]<br />[[tert-Butyl hydroperoxide|''tert''-Butyl hydroperoxide]]
|-
| [[Organic peroxide|Peroxide]]
| [[Organic peroxide|Peroxy]]
| ROOR
| [[Image:Peroxy-group.svg|75px|Peroxy]]
| peroxy-
| alkyl '''peroxide'''
| [[Image:Di-tert-butyl peroxide.svg|75px|Di-tert-butyl peroxide]]<br />[[Di-tert-butyl peroxide]]
|-
| [[Ether]] || [[Ether]]
| ROR'
| [[Image:Ether-(general).svg|75px|Ether]]
| alkoxy-
| alkyl '''ether'''
| [[Image:Diethyl ether chemical structure.svg|75px|Diethyl ether]]<br>[[Diethyl ether]]<br>''(Ethoxyethane)''
|-
| [[Hemiacetal]] || [[Hemiacetal]]
| RCH(OR')(OH)
| [[Image:Hemiacetal general.svg|75px|Hemiacetal]]
| alkoxy -ol
| -al alkyl '''hemiacetal'''
|
|-
| [[Hemiketal]] || [[Hemiketal]]
| RC(ORʺ)(OH)R'
| [[File:Hemiketal-2D-skeletal.png|75px|Hemiketal]]
| alkoxy -ol
| -one alkyl '''hemiketal'''
|
|-
| [[Acetal]] || [[Acetal]]
| RCH(OR')(OR")
| [[Image:Generic Acetal.png|75px|Acetal]]
| dialkoxy-
| -al dialkyl '''acetal'''
|
|-
| [[Ketal]] (or [[Acetal]]) || [[Ketal]] (or [[Acetal]])
| {{nowrap|RC(ORʺ)(OR‴)R'}}
| [[File:Ketal-2D-skeletal.png|75px|Ketal]]
| dialkoxy-
| -one dialkyl '''ketal'''
|
|-
| [[Orthoester]] || [[Orthoester]]
| {{nowrap|RC(OR')(ORʺ)(OR‴)}}
| [[File:Orthoester general structure.svg|75px|Orthoester]]
| trialkoxy-
|
|
|-
| [[Heterocycle]] || [[Methylenedioxy]]
| {{nowrap|PhOCOPh}}
| [[File:Methylenedioxy skeletal.svg|75px|Methylenedioxy chemical structure.]]
| methylenedioxy-
| -dioxole
| [[File:Benzo(d)(1,3)dioxole 200.svg|75px]]<br>[[1,3-Benzodioxole|1,2-Methylenedioxybenzene]]<br/>''(1,3-Benzodioxole)''
|-
| [[Orthocarbonate ester]] || [[Orthocarbonate ester]]
| {{nowrap|C(OR)(OR')(ORʺ)(OR″)}}
| [[File:Orthocarbonate-ester.svg|75px|Orthocarbonate ester]]
| tetralkoxy-
| ''tetraalkyl'' '''orthocarbonate'''
|
|}
=== नाइट्रोजन वाले प्रकार्यात्मक समूह ===
{| class="wikitable" style="background: #ffffff; text-align: center;width:700px"
|-
! [[रासायनिक वर्ग]]
! समूह
! सूत्र
! संरचनात्मक सूत्र
! उपसर्ग (Prefix)
! प्रत्यय (Suffix)
! उदाहरण
|-
| [[Amide]] || [[Carboxamide]]
| RCONR<sub>2</sub>
| [[Image:Amide-(tertiary)-skeletal.svg|75px|Amide]]
| carboxamido-<br>or<br>carbamoyl-|| -amide
| [[Image:Acetamide skeletal.svg|75px|acetamide]]<br>[[Acetamide]]<br/>''(Ethanamide)''
|-
| rowspan="4" | [[Amine]]s
| [[amine|Primary amine]]
| RNH<sub>2</sub>
| [[Image:1°-amino-group.png|75px|Primary amine]]
| amino- || -amine
| [[Image:Methylamine-2D.svg|75px|methylamine]]<br>[[Methylamine]]<br/>''(Methanamine)''
|-
| [[amine|Secondary amine]]
| R<sub>2</sub>NH
| [[Image:Amine-(secondary).png|75px|Secondary amine]]
| amino- || -amine
| [[Image:Dimethylamine-2D.png|75px|dimethylamine]]<br>[[Dimethylamine]]
|-
| [[amine|Tertiary amine]]
| R<sub>3</sub>N
| [[Image:Amine-(tertiary).png|75px|Tertiary amine]]
| amino- || -amine
| [[Image:Trimethylamine chemical structure.png|75px|trimethylamine]]<br>[[Trimethylamine]]
|-
| [[Quaternary ammonium cation|4° ammonium ion]]
| R<sub>4</sub>N<sup>+</sup>
| [[Image:Quaternary-ammonium-cation.svg|75px|Quaternary ammonium cation]]
| ammonio- || -ammonium
| [[Image:Choline-skeletal.svg|150px|choline]]<br>[[Choline]]
|-
|rowspan="4" | [[Imine]]
| [[imine|Primary ketimine]]
| RC(=NH)R'
| [[Image:Imine-(primary)-skeletal.svg|75px|Imine]]
| imino- || -imine
|
|-
| [[imine|Secondary ketimine]]
| RC(=NR'')R'
| [[Image:Imine-(secondary)-skeletal.svg|75px|Imine]]
| imino- || -imine
|
|-
| [[imine|Primary aldimine]]
| RC(=NH)H
| [[Image:Aldimine-(primary)-skeletal.svg|75px|Imine]]
| imino- || -imine
| [[Image:Ethanimine skeletal.svg|150px|Ethanimine]]<br>[[Ethanimine]]
|-
| [[imine|Secondary aldimine]]
| RC(=NR')H
| [[Image:Aldimine-(secondary)-skeletal.svg|75px|Imine]]
| imino- || -imine
|
|-
| [[Imide]] || [[Imide]]
| (RCO)<sub>2</sub>NR'
| [[Image:Imide-group.svg|75px|Imide]]
| imido-
| -imide
| [[Image:Succinimide.svg|75px|Succinimide]]<br>[[Succinimide]]<br>(Pyrrolidine-2,5-dione)
|-
| [[Azide]]
| [[Azide]]
| RN<sub>3</sub>
| [[Image:Azide-2D.svg|75px|Organoazide]]
| azido- || alkyl '''azide'''
| [[Image:Phenyl azide-chemical.png|75px|Phenyl azide]]<br/>[[Phenyl azide]]<br/>(Azidobenzene)
|-
| [[Azo compound]]
| [[Azo compound|Azo<br />(Diimide)]]
| RN<sub>2</sub>R'
| [[Image:Azo-group.svg|75px|Azo.pngl]]
| azo- || -diazene
| [[Image:Methyl-orange-skeletal.png|150px|Methyl orange]]<br/>[[Methyl orange]]<br/>(p-dimethylamino-azobenzenesulfonic acid)
|-
| rowspan=2|[[Cyanate]]s
| [[Cyanate]] || ROCN
| [[Image:Cyanate-group.svg|75px|Cyanate]]
| cyanato-
| alkyl '''cyanate'''
|[[Image:Methyl cyanate.png|75px|Methyl cyanate]]<br>[[Methyl cyanate]]
|-
| [[Isocyanate]] || RNCO
| [[Image:Isocyanate-group.svg|75px|Isocyanate]]
| isocyanato-
| alkyl '''isocyanate'''
| [[Image:Methyl-isocyanate.svg|75px|Methyl isocyanate]]<br>[[Methyl isocyanate]]
|-
| [[Nitrate]] || [[Nitrate]]
| RONO<sub>2</sub>
| [[Image:Nitrate-group-2D.svg|75px|Nitrate]]
| nitrooxy-, nitroxy- ||
alkyl '''nitrate'''
| [[Image:Amyl nitrate.svg|150px|Amyl nitrate]]<br/>[[Amyl nitrate]]<br>''(1-nitrooxypentane)''
|-
| rowspan=2|[[Nitrile]]
| [[Nitrile]]
| RCN
| [[Image:Nitril (vzorec).svg|75px|Nitrile]]
| cyano-
| alkane'''nitrile'''<br>alkyl '''cyanide'''
| [[Image:Benzonitrile.svg|75px|Benzonitrile]]<br />[[Benzonitrile]]<br>''(Phenyl cyanide)''
|-
| [[Isonitrile]] || RNC
| [[Image:Isocyanide-2D.png|75px|Isocyanide]]
| isocyano-
| alkane'''isonitrile'''<br>alkyl '''isocyanide'''
| [[Image:Methyl isocyanide.svg|90px|Methyl isocyanide]]<br />[[Methyl isocyanide]]
|-
| [[Nitrite]] || [[Nitrite|Nitrosooxy]]
| RONO
| [[Image:Nitrite-group-2D.svg|75px|Nitrite]]
| nitrosooxy- ||
alkyl '''nitrite'''
| [[Image:Amyl nitrite.svg|150px|Amyl nitrite]]<br/>[[Isoamyl nitrite]]<br>''(3-methyl-1-nitrosooxybutane)''
|-
| [[Nitro compound]]
| [[Nitro functional group|Nitro]]
| RNO<sub>2</sub>
| [[Image:Nitro-group.svg|75px|Nitro]]
| nitro- ||
| [[Image:Nitromethane2.png|75px|Nitromethane]]<br />[[Nitromethane]]
|-
| [[Nitroso|Nitroso compound]]
| [[Nitroso]] || RNO
| [[Image:Nitroso-compound-2D.svg|75px|Nitroso]]
| nitroso- (Nitrosyl-) ||
| [[Image:Nitrosobenzene.png|75px|Nitrosobenzene]]<br />[[Nitrosobenzene]]
|-
| [[Pyridine|Pyridine derivative]]
| [[Pyridine|Pyridyl]]
| RC<sub>5</sub>H<sub>4</sub>N
|
[[Image:4-pyridyl.svg|75px|4-pyridyl group]]<br>
[[Image:3-pyridyl.svg|75px|3-pyridyl group]]<br>
[[Image:2-pyridyl.svg|75px|2-pyridyl group]]<br>
|
4-pyridyl<br>(pyridin-4-yl)
3-pyridyl<br>(pyridin-3-yl)
2-pyridyl<br>(pyridin-2-yl)
| -pyridine
| [[Image:Nicotine skeletal.svg|75px|Nicotine]]<br />[[Nicotine]]
|-
|}
=== गंधक वाले प्रकार्यात्मक समूह ===
{| class="wikitable" style="background: #ffffff; text-align: center;width:800px"
|-
! [[रासायनिक वर्ग]]
! समूह
! सूत्र
! संरचनात्मक सूत्र
! उपसर्ग (Prefix)
! प्रत्यय (Suffix)
! उदाहरण
|-
| [[Thiol]]
| [[Thiol|Sulfhydryl]]
| RSH
| [[Image:Thiol-group.svg|75px|Sulfhydryl]]
| sulfanyl-<br>(-SH)
| -'''thiol'''
| [[Image:Ethanethiol-skeletal.svg|75px|Ethanethiol]]<br />[[Ethanethiol]]
|-
| [[Sulfide]]<br/>([[Thioether]])
| [[Sulfide]]
| RSR'
| [[Image:Sulfide-group-2D.svg|75px|Sulfide group]]
| ''substituent'' sulfanyl-<br>(-SR')
| di(''substituent'') '''sulfide'''
|<br>[[Image:Dimethyl sulfide structure.svg|130px|Dimethyl sulfide]]<br><br />[[(Methylsulfanyl)methane]] (prefix) or<br/>[[Dimethyl sulfide]] (suffix)
|-
| [[Disulfide bond|Disulfide]] || [[Disulfide]]
| RSSR'
| [[Image:Disulfide general formula.svg|75px|Disulfide]]
| ''substituent'' disulfanyl-<br>(-SSR')
| di(''substituent'') '''disulfide'''
|<br/>[[Image:Dimethyl disulfide.PNG|130px|Dimethyl disulfide]]<br><br>[[(Methyldisulfanyl)methane]] (prefix) or<br>[[Dimethyl disulfide]] (suffix)
|-
| [[Sulfoxide]]
| [[Sulfoxide|Sulfinyl]]
| RSOR'
| [[Image:Sulfoxide.svg|75px|Sulfinyl group]]
| -sulfinyl-<br>(-SOR')
| di(''substituent'') '''sulfoxide'''
| [[Image:Dimethylsulfoxid.svg|130px|DMSO]]<br />[[(Methanesulfinyl)methane]] (prefix) or<br>[[Dimethyl sulfoxide]] (suffix)
|-
| [[Sulfone]]
| [[Sulfone|Sulfonyl]]
| RSO<sub>2</sub>R'
| [[Image:Sulfone.svg|75px|Sulfonyl group]]
| -sulfonyl-<br>(-SO<sub>2</sub>R')
| di(''substituent'') '''sulfone'''
| [[Image:DMSO2.svg|75px|Dimethyl sulfone]]<br/>[[(Methanesulfonyl)methane]] (prefix) or<br>[[Dimethyl sulfone]] (suffix)
|-
| [[Sulfinic acid]] || Sulfino
| RSO<sub>2</sub>H
| [[Image:Sulfinic-acid-2D.svg|75px]]
| sulfino-<br>(-SO<sub>2</sub>H)
| -'''sulfinic acid'''
| [[Image:Hypotaurine.svg|75px|Hypotaurine]]<br />[[2-Aminoethanesulfinic acid]]
|-
| [[Sulfonic acid]] || Sulfo
| RSO<sub>3</sub>H
| [[Image:Sulfonic-acid.svg|75px|Sulfonyl group]]
| sulfo-<br>(-SO<sub>3</sub>H)
| -'''sulfonic acid'''
| [[Image:Benzenesulfonic-acid-2D-skeletal.png|75px|Benzenesulfonic acid]]<br />[[Benzenesulfonic acid]]
|-
| rowspan=2|[[Thiocyanate]]
| [[Thiocyanate]] || RSCN
| [[Image:Thiocyanate-group.svg|75px|Thiocyanate]]
| thiocyanato-<br>(-SCN)
| ''substituent'' '''thiocyanate'''
| [[Image:Phenyl thiocyanate.svg|100px|Phenyl thiocyanate]]<br />[[Phenyl thiocyanate]]
|-
| [[Isothiocyanate]] || RNCS
| [[Image:Isothiocyanate-group.svg|75px|Isothiocyanate]]
| isothiocyanato-<br>(-NCS)
| ''substituent'' '''isothiocyanate'''
| [[Image:Allyl-isothiocyanate-2D-skeletal.png|100px|Allyl isothiocyanate]]<br />[[Allyl isothiocyanate]]
|-
| [[Thione]]
| [[Carbonothioyl]]
| RCSR'
| [[Image:Thioketone-skeletal.svg|60px|Thione]]
| -thioyl-<br/>(-CSR')<br/>or<br/>sulfanylidene-<br>(=S)
| -'''thione'''
| [[Image:Thiobenzophenone.svg|75px|Diphenylmethanethione]]<br />[[Diphenylmethanethione]]<br/>([[Thiobenzophenone]])
|-
| [[Thial]]
| [[Carbonothioyl]]
| RCSH
| [[Image:Thial.svg|60px|Thial]]
| methanethioyl-<br/>(-CSH)<br/>or<br/>sulfanylidene-<br>(=S)
| -'''thial'''
|
|}
=== फॉस्फोरस वाले प्रकार्यात्मक समूह ===
{| class="wikitable" style="background: #ffffff; text-align: center;width:800px"
|-
! [[रासायनिक वर्ग]]
! समूह
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! संरचनात्मक सूत्र
! उपसर्ग (Prefix)
! प्रत्यय (Suffix)
! उदाहरण
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| [[Phosphine]]<br>([[Phosphane]]) || Phosphino
| R<sub>3</sub>P
| [[Image:Phosphine-general.svg|75px|A tertiary phosphine]]
| phosphanyl- || -phosphane
| [[Image:Methylpropylphosphane-skeletal.svg|75px|Methylpropylphosphane]]<br />Methylpropylphosphane
|-
| [[Phosphonic acid]]
| Phosphono
| RP(=O)(OH)<sub>2</sub>
| [[Image:Phosphonic-acid.svg|75px|Phosphono group]]
| phosphono-
| ''substituent'' '''phosphonic acid'''
| [[Image:Benzylphosphonic-acid-2D-skeletal.png|75px|Benzylphosphonic acid]]<br />Benzylphosphonic acid
|-
| rowspan=2| [[Phosphate]]
| rowspan=2| Phosphate
| rowspan=2| ROP(=O)(OH)<sub>2</sub>
| rowspan=2| [[Image:Phosphate-group.svg|75px|Phosphate group]]
| rowspan=2| phosphonooxy-<br>or<br>''O''-phosphono- (phospho-)
| rowspan=2| ''substituent'' '''phosphate'''
| [[Image:G3P-2D-skeletal.png|75px|Glyceraldehyde 3-phosphate]]<br />[[Glyceraldehyde 3-phosphate|Glyceraldehyde 3-phosphate]] (suffix)
|-
| [[Image:Phosphocholine.png|75px|Phosphocholine]]<br />''O''-Phosphonocholine (prefix)<br>([[Phosphocholine]])
|-
| rowspan=2|[[Phosphodiester bonds|Phosphodiester]]
| rowspan=2|[[Phosphate]]
| rowspan=2|HOPO(OR)<sub>2</sub>
| rowspan=2|[[Image:Phosphodiester-group.svg|75px|Phosphodiester]]
| rowspan=2|<small>[(alkoxy)hydroxyphosphoryl]oxy-<br>or<br>''O''-[(alkoxy)hydroxyphosphoryl]-</small>
| rowspan=2|di(''substituent'') hydrogen '''phosphate'''<br>or<br>phosphoric acid di(''substituent'') '''ester'''
| [[DNA]]
|-
| <small>''O''‑[(2‑Guanidinoethoxy)hydroxyphosphoryl]‑{{Smallcaps|l}}‑serine</small> (prefix)<br>([[Lombricine]])
|}
=== बोरॉन वाले प्रकार्यात्मक समूह ===
{| class="wikitable"
|-
! [[रासायनिक वर्ग]]
! समूह
! सूत्र
! संरचनात्मक सूत्र
! उपसर्ग (Prefix)
! प्रत्यय (Suffix)
! उदाहरण
|-
| [[Boronic acid]] || Borono || RB(OH)<sub>2</sub> || [[Image:Boronic-acid-2D.svg|70px]] || Borono- || ''substituent''<br>'''boronic acid''' || <div style="text-align: center;">[[Image:Phenylboronic acid.png|70px|Phenylboronic acid]]<br>[[Phenylboronic acid]]</div>
|-
| [[Boronic acid#Boronic esters (also named boronate esters)|Boronic ester]] || Boronate || RB(OR)<sub>2</sub> || [[Image:Boronate-ester-2D.svg|70px]] || O-[bis(alkoxy)alkylboronyl]- || ''substituent''<br>'''boronic acid'''<br>di(''substituent'') '''ester''' ||
|-
| [[Borinic acid]] || Borino || R<sub>2</sub>BOH || [[Image:Borinic-acid-2D.svg|70px]] || Hydroxyborino- || di(''substituent'')<br>'''borinic acid''' ||
|-
| [[Boronic acid#Borinic acids and esters|Borinic ester]] || Borinate || R<sub>2</sub>BOR || [[Image:Borinate-ester-2D.svg|70px]] || O-[alkoxydialkylboronyl]- || di(''substituent'')<br>'''borinic acid'''<br>''substituent'' '''ester''' || <div style="text-align: center;">[[Image:2-APB.png|140px|2-Aminoethoxydiphenyl borate]]<br><small>Diphenylborinic acid 2-aminoethyl ester</small><br>([[2-Aminoethoxydiphenyl borate]])</div>
|}
[[श्रेणी:प्रकार्यात्मक समूह]]
[[श्रेणी:कार्बनिक यौगिक]]
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कर
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wikitext
text/x-wiki
[[चित्र:Tax revenues as a share of GDP, 2022.png]]
किसी [[राज्यपाल|राज्य]] द्वारा व्यक्तियों या विविध संस्था से जो अपनी आय पर अधिभार या धन लिया जाता है उसे '''कर''' या '''टैक्स''' कहते हैं। राष्ट्र के अधीन आने वाली विविध संस्थाएँ भी तरह-तरह के कर लगातीं हैं। कर प्राय: [[धन]] (money) के रूप में लगाया जाता है किन्तु यह धन के तुल्य [[श्रम]] के रूप में भी लगाया जा सकता है। कर दो तरह के हो सकते हैं - [[प्रत्यक्ष कर]] (direct tax) या [[अप्रत्यक्ष कर]] (indirect tax)। एक तरफ इसे जनता पर बोझ के रूप में देखा जा सकता है वहीं इसे [[सरकार]] को चलाने के लिये आधारभूत आवश्यकता के रूप में भी समझा जा सकता है
आधुनिक सरकारों के लिए कराधान (ation), आय का सबसे महत्वपूर्ण स्रोत है। लोकतंत्र में कराधान ही सरकार की राजनीतिक गतिविधियों को स्वरूप प्रदान करता है। कर करदाता द्वारा किया जाने वाला ऐसा अनिवार्य अंशदान है जो कि सामाजिक उद्देश्य जैसे आय व संपत्ति की असमानता को कम करके उच्च रोजगार स्तर प्राप्त करने तथा आर्थिक स्थिरता व वृद्धि प्राप्त करने में सहायक होता है।
कर एक ऐसा भुगतान है जो आवश्यक रुप से सरकार को उसके बनाए गए कानूनों के अनुसार दिया जाता है। इसके बदले में किसी सेवा प्राप्ति की आशा नहीं की जा सकती है।
====== करारोपण के उद्देश्य ======
कर लोगों द्वारा किया जाने वाला अनिवार्य भुगतान है। यदि कोई व्यक्ति कर का भुगतान नहीं करता है, तो उसे कानून द्वारा दंडित किया जा सकता है। आय, संपत्ति तथा किसी वस्तु की खरीद के समय कर लगाया जाता है। कर सरकार की आय का मुख्य स्रोत है। करारोपण के मुख्य उद्देश्यों को निम्न प्रकार से रेखांकित किया जा सकता हैः
1. आय प्राप्त करना
2. नियमन तथा नियन्त्रण करना
3. साधनों का आबंटन
4. असमानता को कम करना
5. आर्थिक विकास
6. कीमत वृद्धि पर नियन्त्रण
== करों का वर्गीकरण==
सरकार द्वारा कई प्रकार के करों को लगाया जाता है। इनके वर्गीकरण को निम्न प्रकार से स्पष्ट किया जा सकता हैः
=== स्वरूप के आधार पर===
स्वरूप के आधार पर करों को दो भागों में बांटा जाता हैः
*1. '''[[प्रत्यक्ष कर]]''' : प्रत्यक्ष कर ऐसे कर हैं जो विधिगत रूप से जिस पर लगाए जाते हैं उसे ही इसका भुगतान करना पड़ता है। जैसेः आय कर।
*2. '''[[अप्रत्यक्ष कर|परोक्ष कर]]''' : परोक्ष कर या अप्रत्यक्ष कर एक व्यक्ति पर लगाए जाते हैं जबकि ये पूर्णतः या आंशिक रूप से दूसरे व्यक्ति द्वारा दिए जाते हैं। जैसे - बिक्री कर, सीमा शुल्क परोक्ष कर हैं क्योंकि इनका भार व्यापारी से उपभोक्ता को स्थानांतरिक होता है। अप्रत्यक्ष कर का सबसे अच्छा उदहारण वस्तु एवं सेवा कर हैं और अंग्रेजी भाषा में इसे GST के नाम से भी जाना जाता हैं |
=== तरीके के आधार पर===
तरीके के आधार पर कर तीन प्रकार के होते हैंः
*1. '''अनुपातिक कराधान''' : आनुपातिक कर में कर की मात्रा समान रहती है। सभी आयों पर एक दर से कर लगाया जाता है। इसका करदाता की आय से कोई संबंध नहीं होता। इसे एक रेखाचित्र द्वारा दिखाया जा सकता हैः
*2. '''प्रगतिशील कराधान''' : प्रगतिशील कर में व्यक्ति की आय में परिवर्तन के साथ परिवर्तन होता है। आय की दर जितनी अधिक होती है। कर की दर भी उतनी ही अधिक होती है। भारत में प्रगतिशील कराधान को ही अपनाया गया है। इसे एक रेखाचित्र द्वारा दिखाया जा सकता हैः
*3. '''प्रतिगामी कराधान''' : प्रतिगामी कराधान में करदाता की आय जितनी अधिक होगी कर के रूप में वह उतना ही कम अनुपात सरकार को देगा। यह प्रगतिशील करों के विपरीत है। इसे एक रेखाचित्र द्वारा दिखाया जा सकता हैः
*4. '''अधोगामी कर''' : अधोगामी कर प्रगतिशील करों और प्रतिगामी करों का मिश्रण है। इसमें एक निश्चित सीमा तक कराधान की दर में वृद्धि होती है और उसके बाद आय में परिवर्तन के साथ कर की दर स्थिर रहती है। इसे एक रेखाचित्र द्वारा दिखाया जा सकता हैः
=== मात्रा के अनुसार===
मात्रा के अनुसार कर दो प्रकार के होते हैंः
*1. '''एक कर''' : इसमें कर केवल एक मद अथवा शीर्ष पर लगाया जाता है। इसमें एक वस्तु पर कर लगता है जैसे - भूमि कर। यह कर प्रत्येक माह या प्रत्येक वर्ष एकत्रित किए जाते हैं।
*2. '''बहु कर''' : इसमें अनेक वस्तुओं पर एक साथ कर लगाया जाता है। जैसेः- उत्पादन कर, बिक्री कर इत्यादि।
=== मूल्यांकन के आधार पर ===
मूल्यांकन के आधार पर करों के तीन प्रकार हैः
*1. '''विशिष्ट कर''' : जो कर वस्तुओं के विशिष्ट गुणों पर आधारित हो उन्हें विशिष्ट कर कहा जाता है। ये कर वस्तु के भार, आकार और मात्रा आदि के अनुसार लगाए जाते हैं। जैसेः- कपड़े पर शुल्क उसकी लंबाई के आधार पर लगाया जाता है।
*2. '''मूल्यानुसार कर''' : यह कर वस्तु पर उसके मूल्य के अनुसार लगाए जाते हैं। इस प्रकार के कर योग्य वस्तु के मूल्यांकन के पश्चात् लगाए जाते हैं। जैसे निर्यात अथवा आयात शुल्क 5 पैसे प्रति रूपए या वस्तु के मूल्य के 5 प्रतिशत की दर पर लगाया जाता है।
*3. '''दोहरे कर''' : यदि एक व्यक्ति एक ही सेवा के लिए दो बार कर देता है तो उसे दोहरा कर कहा जाता है। उदाहरण के रूप में, यदि भारत का व्यक्ति विदेश में आय प्राप्त करता है तो उसे एक ही आय पर दो बार कर देना पड़ेगा एक तो विदेश में और फिर एक भारत में भी।
== करों के सिद्धान्त==
कराधान के सिद्धान्तों को विभिन्न अर्थशास्त्रियों द्वारा प्रतिपादित किया गया है। इसकी निम्नलिखित प्रकार से व्याख्या की जा सकती हैः
1. '''समानता का सिद्धान्त''' : इस सिद्धान्त के अनुसार व्यक्ति की कर देने की क्षमता के अनुरूप ही उस पर कर लगाया जाना चाहिए। अमीर लोगों पर गरीबों से अधिक कर लगाया जाना चाहिए। अर्थात् अधिक आय पर अधिक कर और कम आय पर कम कर।
2. '''निश्चितता का सिद्धान्त''' : प्रत्येक व्यक्ति द्वारा दिया जाने वाला कर निश्चित होना चाहिए तथा उसमें कुछ भी असंगत नहीं होना चाहिए। प्रत्येक करदाता का भुगतान का समय, भुगतान की राशि भुगतान का तरीका, भुगतान का स्थान, जिस अधिकारी को कर देना है, वह भी निश्चित होना चाहिए। निश्चितता का सिद्धान्त करदाताओं व सरकार दोनों के लिए जरूरी है।
3. '''सुविधा का सिद्धान्त''' : सार्वजनिक अधिकारियों को यह ध्यान में रखना चाहिए कि करदाता को कर के भुगतान में कम से कम असुविधा हो। उदाहरण के लिए भू-राजस्व को फसलों के समय ले लिया जाना चाहिए।
4. '''मितव्ययता का सिद्धान्त''' : कर संग्रहण में कम से कम धन खर्च किया जाना चाहिए। संग्रह की गई राशि का अधिकतम अंश सरकारी खजाने में जमा करवाया जाना चाहिए। इस प्रक्रिया में फालतू खर्च से बचा जाना चाहिए।
5. '''उत्पादकता का सिद्धान्त''' : इस सिद्धान्त के अनुसार अनेक अनुत्पादक कर लगाने के स्थान पर कुछ उत्पादक कर लगाए जाने चाहिए। कर इतने अच्छे तरीके से लगाए जाने चाहिए कि वह लोगों की उत्पादन क्षमता को निरूत्साहित न करें।
6. '''लोचशीलता का सिद्धान्त''' : कर इस प्रकार के लगाए जाने चाहिए कि उनके द्वारा एकत्र होने वाली राशि को समय और आवश्यकतानुसार कम से कम असुविधा से घटायाया बढ़ाया जा सके।
7. '''विविधता का सिद्धान्त''' : इसके अनुसार देश की कर व्यवस्था में विविधता होनी चाहिए। कर का बोझ विभिन्न वर्ग के लोगों पर वितरित होना चाहिए।
== करों के प्रभाव==
कराधान के प्रभावों की व्याख्या निम्न प्रकार से की जा सकती हैः
1. '''कराधान के उत्पादन पर प्रभाव''' : कराधान से कार्य करने, बचत करने तथा निवेश की क्षमता और कार्य करने, बचत करने तथा निवेश करने की इच्छा प्रभावित होती है। कर इन्हें कम करता है। परन्तु जब सरकार कराधान द्वारा एकत्रित धन खर्च करती है तो उससे देश के नागरिकों को सुविधाएं एवं सुगमताएं प्राप्त होती है। इसलिए कार्य करने, बचत करने और निवेश करने की योग्यता पर विचार करते समय सार्वजनिक व्यय के प्रभावों को भी ध्यान में रखा जाए।
2. '''कराधान के वितरण पर प्रभाव''' : आधुनिक कल्याणकारी सरकार का मुख्य उद्देश्य है आय और सम्पति की असमनताओं को कम करना। समान वितरण की प्राप्ति के लिए सार्वजनिक व्यय इस प्रकार किया जाये जिससे निर्धन लोगों की आय बढ़े। करारोपन का प्रबन्ध इस प्रकार किया जाये जिससे समृद्ध लोगों की आय और सम्पति में वृद्धि पर रोक लगे।
3. '''मुद्रा स्फीति पर करों का प्रभाव''' : मुद्रा स्फीति के समयपर कराधान का लक्ष्य होता है उपभोक्ता की क्रय शक्ति को कम करना। इस दिशा में आय और व्यय पर करारोपण, सार्वजनिक व्यय को नियन्त्रित करने में उपयुक्त होता है। आयातशुल्कों में कमी और वस्तुओं की पूर्ति में वृद्धि भी अर्थव्यवस्था पर स्फीतिकारी दबावों को कम करती है।
4. '''करारोपण का मन्दी के समय में प्रभाव''' : [[आर्थिक मंदी|मन्दी]] की स्थिति से निपटने के लिए करारोपण में कमी आवश्यक है। विशेष रूप से उन करो को घटाना आवश्यक है जो निम्न आय वर्गों पर पड़ते है। वस्तुकरों में कमी से उपभोग की प्रवृति में बढ़ोतरी होगी और बाजार मांग बढ़ेगी। ऐसे समय में प्रायः घाटे वाले बजटों को प्राथमिकता दी जाती है।
5. '''करारोपण का उपभोग पर प्रभाव''' : उपभोग की मात्रा तथा प्रकृति पर नियन्त्रण कुछ वस्तुओं की बिक्री पर भारी कर लगाकर किया जा सकता है। राष्ट्रीय सीमाओं से पार से आने वाले उत्पादो का नियमन आयात-निर्यात शुल्क लगा कर किया जा सकता है।
इस प्रकार कर सरकार की आय का मुख्य स्रोत है। इसके कुछ सिद्धान्त और प्रभाव है। इसका प्रयोग इस प्रकार से किया जाना चाहिए कि आर्थिक विकास और कल्याण में अधिकतम वृद्धि हो सके।
== कराघात व करापात ==
कर के प्रथम आघात को '''[[कराघात]]''' (Impact of tax) कहते हैं। सरकार कर जमा कराने का दायित्व जिस व्यक्ति पर डालती है, उस पर कराघात होता है। किन्तु कर भार के अन्तिम आघात बिंदु पर '''[[करापात]]''' (incidence of Tax) होता है। अतः करापात उस व्यक्ति पर पड़ता है, जो कर के भार को किसी अन्य व्यक्ति पर डालने में असमर्थ होता है। अर्थात कर का प्रथम आघात कराघात कहलाता है, किन्तु यह भी सम्भव है कि वह व्यक्ति वस्तु की कीमत बढ़ा कर कर भार को दूसरे व्यक्ति पर और दूसरा व्यक्ति, तीसरे व्यक्ति पर डाल दें। करापात उस व्यक्ति पर माना जाएगा जो कर को आगे नहीं डाल सकता।
'''[[कर विवर्तन]]''' (Shifting of taxation) वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा एक व्यक्ति स्वयं पर लगाए गए कर भार को अन्य व्यक्तियों पर डाल देता है। कर का विवर्तन करना कानूनन अपराध नहीं है।
कई लोग आय कम दर्शाकर, कर चुकाने से बच जाते हैं। इसे '''[[कर अपवंचन|कर का अपवंचन]]''' कहते हैं। कर अपवंचन गैरकानूनी है।
मान लीजिए सरकार चीनी पर कर लगाती है और चीनी के उत्पादकों से कर राशि प्राप्त करती है। इस प्रकार का मौद्रिक भार प्रत्यक्षतः चीनी के उत्पादकों पर पड़ता है। अब यदि उत्पादक कर का मौद्रिक भार किसी अन्य व्यक्ति पर (माना थोक विक्रेता पर) चीनी की कीमतों में वृद्धि करके डालता है और विवर्तन की यह प्रक्रिया थोक विक्रेता से अन्तिम उपभोक्ता तक जारी रहती है जो करापात उस उपभोक्ता पर पडेगा जो अन्तिम दशा में मौद्रिक भार उठायेगा। इसे परोक्ष मौद्रिक भार कहा जाता है। इस सम्बन्ध में डाल्टन ने अपने विचारों को इस प्रकार से परिभाषित किया हैः
:''‘‘करापात की समस्या से साधारणतः यह अभिप्राय लिया जाता है कि कर का भुगतान कौन करता है। अधिक निश्चित रूप से हम यह कह सकते है कि कर का मौद्रिक बोझ उस पर पड़ता है जो प्रत्यक्ष रूप से कर का बोझ उठाते है।’’
फिन्डले शिराज के अनुसार,"कर भार की समस्या का विश्लेषण यह निर्धारित करता है कि कर का भुगतान कौन करता है अर्थात् कर का मौद्रिक भार किस पर पड़ता है।"
=== करापात के प्रकार===
प्रो. मसग्रेव के अनुसार करापात तीन प्रकार का हैः
1. '''विशेष करापात''' : जब कोई कर सरकारी खाते के व्यय पक्ष में बिना किसी परिवर्तन से लगाया जाता है।
2. '''विभेदी करापात''' : जब कोई कर किसी अन्य कर के विकल्प के रूप में लगाया जाता है।
3. '''संतुलित बजट करापात''' : जब कर की आय से सरकार अपने व्यय में वृद्धि करती है।
=== कराघात ===
[[कराघात]] से अभिप्राय कर के तत्काल भार से है। अतः कराघात कर का तत्काल परिणाम है जो उस व्यक्ति पर पड़ता है जिससे सरकार कर एकत्रित करती हैं अर्थात् जो सर्वप्रथम कर का भुगतान करता है। यह आवश्यक नहीं है कि कर का कराघात और करापात एक ही व्यक्ति पर पड़े। कराघात उत्पादक पर पड़ता है जबकि करापात उपभोक्ता पर। जिस व्यक्ति को कर तुरंत भुगतान करना पड़ता है उस पर कराघात होता है। उदाहरणतः आयात कर सरकार को आयातकर्ता देगा उत्पादन कर उस व्यक्ति को देना पड़ता है जो उस वस्तु का उत्पादन करता है। कराघात उत्पादक की आय को कम नहीं करता, यद्यपि यह उस पर कुछ समय के लिए दबाव डालता है जबकि करापात स्थायी होता है। इसका अर्थ है कि करापात की अपेक्षा कराघात का अध्ययन कम महत्वपूर्ण है।
प्रो. जे.के. मेहता के अनुसार, “कराघात को तत्काल मुद्रा भार कहा जा सकता है। जो व्यक्ति सरकार को कर का भुगतान करता है वह कराघात सहन करता है।“ कपड़े का उत्पादक सरकार को कर देता है। अतः वह कराधान वहन करता है। उत्पादक अपने कपड़े की कीमत में वृद्धि करता है ताकि कर का भार खरीदने वाले पर पड़े। अगर वह कीमत बढ़ाने में सफल रहता है तो इसका अर्थ है कि पूर्ण या आंशिक रूप से कर का विवर्तन हुआ है। यदि कीमत पूरी सीमा तक नहीं बढ़ पाती तो इसका अर्थ है कि करापात का कुछ भाग कपड़ा उत्पादक पर शेष रह गया है। लेकिन कराघात केवल उत्पादक पर ही पड़ेगा। क्योंकि सबसे पहले वही करके बोझ को सहन करता है।
कर लगाने का उद्देश्य केवल धन एकत्र करना ही नहीं, इसका उद्देश्य आर्थिक और सामाजिक न्याय प्राप्त करना भी है। समाज में धन का समान वितरण, उत्पादन तथा रोजगार में वृद्धि और देश के आर्थिक विकास के लिए कर भार की समस्या का अध्ययन करना आवश्यक है। इससे पता चलता है कि किस व्यक्ति पर कर का कितना भार पड़ेगा और यह बात निश्चित होने पर कोई भी कर अनुचित रूप से नहीं लगाना पड़ेगा।
== अच्छी कर प्रणाली की विशेषताएं==
एक अच्छी कर प्रणाली की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैंः-
;1. कर एक अनिवार्य भुगतान है
यदि करदाताओं ने कर लगाने योग्य पर्याप्त स्थितियों को प्राप्त कर लिया है तो कर भुगतान अनिवार्य है। अतः कुछ परिस्थितियों के अधीन ही कर देना अनिवार्य है। उदाहरण के रूप में यदि एक व्यक्ति सिगरेट नहीं पीता तो वह तंबाकू पर ब्रिक्री कर देने से इंकार कर सकता है।
;2. त्याग का तत्व
कर भुगतान में त्याग का तत्व भी सम्मिलित होता है। जब हम कोई चीज खरीदते हैं तो हमें कीमत देनी ही पड़ती है। परंतु करों के प्रकरण में कम से कम सैद्धान्तिक रूप में त्याग की भावना होती है, क्योंकि करदाता सावर्जनिक हित में कर देता है।
;3. कर सरकार को दिया गया एक भुगतान है
कर अधिकृत संस्थाओं द्वारा लगाए जाते हैं और ऐसी संस्थाओं में हम सरकार के अतिरिक्त अन्य किसी संस्था को नही ले सकते। इसलिए कर केवल जनता द्वारा सरकार को किया गया भुगतान है।
;4. कर एकत्रीकरण का लक्ष्य है जन कल्याण
सामान्य जनता के लाभ तथा समस्त समुदाय के अधिकतम कल्याण के लिए कर लगाए तथा एकत्रित किए जाते हैं। कर राजस्व का व्यय समाज के समग्र कल्याण को ध्यान में रखते हुए किया जाता है न कि किसी विशेष वर्ग को ध्यान में रखते हुए।
;5. कर लाभों की कीमत पर नहीं
कर सरकार द्वारा लोगों को दिए गए लाभों का मूल्य नहीं है। करों का भुगतान निःसंदेह सामान्य लोगों को लाभ पहुंचाने के लक्ष्य से किया जाता है परंतु इसका एकत्रीकरण दिए गए लाभों की लागत वसूलने के लिए नहीं किया जाता ।
;6. प्राप्त लाभ स्पष्ट रूप में कर की वापसी नहीं हैः
सरकार लोगों को इस बात गारंटी नहीं देती कि वह एक विशेष व्यक्ति को उसके द्वारा करों के रूप में किए भुगतान की वापसी अथवा उसके अनुपात में लाभ उपलब्ध करवाएगी।
;7. कर व्यक्तियों द्वारा दिए जाते हैं
कर व्यक्ति द्वारा दिया जाता है, यद्यपि वह व्यक्तियों की संपत्ति अथवा वस्तुओं पर भी लगाए जाते हैं। कर लेना एक व्यक्तिगत दायित्व है। इसलिए सभी कर व्यक्तियों द्वारा दिए जाते है न कि उन वस्तुओं और संपतियों द्वारा जिन पर वे लगाए जाते हैं।
;8. कानूनी स्वीकृति
जब सरकार कर लगाने का अधिनियम पारित कर देती है तो उसके पश्चात् ही कर लगाया जा सकता है। करों के पीछे कानूनी स्वीकृति होती है। उनका एकत्रीकरण भी कानूनी होता है तथा एक व्यक्ति जो कर देने में असफल रहता है उसे कानूनी दंड दिया जा सकता है।
9. कर की विभिन्न किस्त में
कर कई प्रकार के हो सकते हैं जैसे आय कर, बिक्री कर, धन कर, मनोरंजन कर, संपत्ति कर, जल कर, गृह कर आदि।
;10. व्यापार तथा उद्योग पर कोई प्रभाव नहीं
एक अच्छा कर व्यापार तथा उद्योग की वृद्धि में रूकावट नहीं बनता, बल्कि यह देश के तीव्र आर्थिक विकास में सहायता करता है। इसकी रचना इस प्रकार की जाए, जिससे अतिरिक्त साधन गतिशील हो तथा उनका प्रयोग सामान्य कल्याण के लिए हो।
== इन्हें भी देखें ==
* [[कराधान के सिद्धान्त]]
* [[उत्पाद कर]] (Excise Tax)
* [[इष्टतम कर]] (Optimal tax)
* [[लोक वित्त]] (Public finance)
* [[कर कानून]] (Tax law)
* [[कर नीति]] (Tax policy)
* [[संपत्ति कर|सम्पत्ति कर]] (Wealth tax)
* [[भारतीय कर व्यवस्था|भारत में कराधान]] (Taxation in India)
== बाहरी कड़ियाँ ==
*[https://www.panchjanya.com/culture-dialogue-there-is-a-treasury-4768.html प्राचीन ग्रंथों में है राजकोष, करारोपण पर व्यापक विमर्श] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20220109010645/https://www.panchjanya.com/culture-dialogue-there-is-a-treasury-4768.html |date=9 जनवरी 2022 }}
* [https://web.archive.org/web/20070326120948/http://www.wikicpa.com/index.php/Category:Taxation WikiCPA.com tax articles]
* [https://web.archive.org/web/20090314113033/http://demonstrations.wolfram.com/TaxRatesAndTaxRevenue/ Tax Rates and Tax Revenue] by Seth J. Chandler and [https://web.archive.org/web/20090219142656/http://demonstrations.wolfram.com/PerUnitTax/ Per Unit Tax] by Fiona Maclachlan, [[Wolfram Demonstrations Project]]
* [https://top10inserts.com/2022/07/26/%e0%a4%9f%e0%a5%88%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b8-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a4%a4%e0%a4%b2%e0%a4%ac-%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%8b%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%88/ टैक्स का मतलब क्या होता है] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20220911163731/https://top10inserts.com/2022/07/26/%E0%A4%9F%E0%A5%88%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B8-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%AE%E0%A4%A4%E0%A4%B2%E0%A4%AC-%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%B9%E0%A5%8B%E0%A4%A4%E0%A4%BE-%E0%A4%B9%E0%A5%88/ |date=11 सितंबर 2022 }}
[[श्रेणी:कर| ]]
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[[चित्र:Tax revenues as a share of GDP, 2022.png]]
किसी [[राज्यपाल|राज्य]] द्वारा व्यक्तियों या विविध संस्था से जो अधिभार या धन लिया जाता है उसे '''कर''' या '''टैक्स''' कहते हैं। राष्ट्र के अधीन आने वाली विविध संस्थाएँ भी तरह-तरह के कर लगातीं हैं। कर प्राय: [[धन]] (money) के रूप में लगाया जाता है किन्तु यह धन के तुल्य [[श्रम]] के रूप में भी लगाया जा सकता है। कर दो तरह के हो सकते हैं - [[प्रत्यक्ष कर]] (direct tax) या [[अप्रत्यक्ष कर]] (indirect tax)। एक तरफ इसे जनता पर बोझ के रूप में देखा जा सकता है वहीं इसे [[सरकार]] को चलाने के लिये आधारभूत आवश्यकता के रूप में भी समझा जा सकता है
आधुनिक सरकारों के लिए कराधान (ation), आय का सबसे महत्वपूर्ण स्रोत है। लोकतंत्र में कराधान ही सरकार की राजनीतिक गतिविधियों को स्वरूप प्रदान करता है। कर करदाता द्वारा किया जाने वाला ऐसा अनिवार्य अंशदान है जो कि सामाजिक उद्देश्य जैसे आय व संपत्ति की असमानता को कम करके उच्च रोजगार स्तर प्राप्त करने तथा आर्थिक स्थिरता व वृद्धि प्राप्त करने में सहायक होता है।
कर एक ऐसा भुगतान है जो आवश्यक रुप से सरकार को उसके बनाए गए कानूनों के अनुसार दिया जाता है। इसके बदले में किसी सेवा प्राप्ति की आशा नहीं की जा सकती है।
====== करारोपण के उद्देश्य ======
कर लोगों द्वारा किया जाने वाला अनिवार्य भुगतान है। यदि कोई व्यक्ति कर का भुगतान नहीं करता है, तो उसे कानून द्वारा दंडित किया जा सकता है। आय, संपत्ति तथा किसी वस्तु की खरीद के समय कर लगाया जाता है। कर सरकार की आय का मुख्य स्रोत है। करारोपण के मुख्य उद्देश्यों को निम्न प्रकार से रेखांकित किया जा सकता हैः
1. आय प्राप्त करना
2. नियमन तथा नियन्त्रण करना
3. साधनों का आबंटन
4. असमानता को कम करना
5. आर्थिक विकास
6. कीमत वृद्धि पर नियन्त्रण
== करों का वर्गीकरण==
सरकार द्वारा कई प्रकार के करों को लगाया जाता है। इनके वर्गीकरण को निम्न प्रकार से स्पष्ट किया जा सकता हैः
=== स्वरूप के आधार पर===
स्वरूप के आधार पर करों को दो भागों में बांटा जाता हैः
*1. '''[[प्रत्यक्ष कर]]''' : प्रत्यक्ष कर ऐसे कर हैं जो विधिगत रूप से जिस पर लगाए जाते हैं उसे ही इसका भुगतान करना पड़ता है। जैसेः आय कर।
*2. '''[[अप्रत्यक्ष कर|परोक्ष कर]]''' : परोक्ष कर या अप्रत्यक्ष कर एक व्यक्ति पर लगाए जाते हैं जबकि ये पूर्णतः या आंशिक रूप से दूसरे व्यक्ति द्वारा दिए जाते हैं। जैसे - बिक्री कर, सीमा शुल्क परोक्ष कर हैं क्योंकि इनका भार व्यापारी से उपभोक्ता को स्थानांतरिक होता है। अप्रत्यक्ष कर का सबसे अच्छा उदहारण वस्तु एवं सेवा कर हैं और अंग्रेजी भाषा में इसे GST के नाम से भी जाना जाता हैं |
=== तरीके के आधार पर===
तरीके के आधार पर कर तीन प्रकार के होते हैंः
*1. '''अनुपातिक कराधान''' : आनुपातिक कर में कर की मात्रा समान रहती है। सभी आयों पर एक दर से कर लगाया जाता है। इसका करदाता की आय से कोई संबंध नहीं होता। इसे एक रेखाचित्र द्वारा दिखाया जा सकता हैः
*2. '''प्रगतिशील कराधान''' : प्रगतिशील कर में व्यक्ति की आय में परिवर्तन के साथ परिवर्तन होता है। आय की दर जितनी अधिक होती है। कर की दर भी उतनी ही अधिक होती है। भारत में प्रगतिशील कराधान को ही अपनाया गया है। इसे एक रेखाचित्र द्वारा दिखाया जा सकता हैः
*3. '''प्रतिगामी कराधान''' : प्रतिगामी कराधान में करदाता की आय जितनी अधिक होगी कर के रूप में वह उतना ही कम अनुपात सरकार को देगा। यह प्रगतिशील करों के विपरीत है। इसे एक रेखाचित्र द्वारा दिखाया जा सकता हैः
*4. '''अधोगामी कर''' : अधोगामी कर प्रगतिशील करों और प्रतिगामी करों का मिश्रण है। इसमें एक निश्चित सीमा तक कराधान की दर में वृद्धि होती है और उसके बाद आय में परिवर्तन के साथ कर की दर स्थिर रहती है। इसे एक रेखाचित्र द्वारा दिखाया जा सकता हैः
=== मात्रा के अनुसार===
मात्रा के अनुसार कर दो प्रकार के होते हैंः
*1. '''एक कर''' : इसमें कर केवल एक मद अथवा शीर्ष पर लगाया जाता है। इसमें एक वस्तु पर कर लगता है जैसे - भूमि कर। यह कर प्रत्येक माह या प्रत्येक वर्ष एकत्रित किए जाते हैं।
*2. '''बहु कर''' : इसमें अनेक वस्तुओं पर एक साथ कर लगाया जाता है। जैसेः- उत्पादन कर, बिक्री कर इत्यादि।
=== मूल्यांकन के आधार पर ===
मूल्यांकन के आधार पर करों के तीन प्रकार हैः
*1. '''विशिष्ट कर''' : जो कर वस्तुओं के विशिष्ट गुणों पर आधारित हो उन्हें विशिष्ट कर कहा जाता है। ये कर वस्तु के भार, आकार और मात्रा आदि के अनुसार लगाए जाते हैं। जैसेः- कपड़े पर शुल्क उसकी लंबाई के आधार पर लगाया जाता है।
*2. '''मूल्यानुसार कर''' : यह कर वस्तु पर उसके मूल्य के अनुसार लगाए जाते हैं। इस प्रकार के कर योग्य वस्तु के मूल्यांकन के पश्चात् लगाए जाते हैं। जैसे निर्यात अथवा आयात शुल्क 5 पैसे प्रति रूपए या वस्तु के मूल्य के 5 प्रतिशत की दर पर लगाया जाता है।
*3. '''दोहरे कर''' : यदि एक व्यक्ति एक ही सेवा के लिए दो बार कर देता है तो उसे दोहरा कर कहा जाता है। उदाहरण के रूप में, यदि भारत का व्यक्ति विदेश में आय प्राप्त करता है तो उसे एक ही आय पर दो बार कर देना पड़ेगा एक तो विदेश में और फिर एक भारत में भी।
== करों के सिद्धान्त==
कराधान के सिद्धान्तों को विभिन्न अर्थशास्त्रियों द्वारा प्रतिपादित किया गया है। इसकी निम्नलिखित प्रकार से व्याख्या की जा सकती हैः
1. '''समानता का सिद्धान्त''' : इस सिद्धान्त के अनुसार व्यक्ति की कर देने की क्षमता के अनुरूप ही उस पर कर लगाया जाना चाहिए। अमीर लोगों पर गरीबों से अधिक कर लगाया जाना चाहिए। अर्थात् अधिक आय पर अधिक कर और कम आय पर कम कर।
2. '''निश्चितता का सिद्धान्त''' : प्रत्येक व्यक्ति द्वारा दिया जाने वाला कर निश्चित होना चाहिए तथा उसमें कुछ भी असंगत नहीं होना चाहिए। प्रत्येक करदाता का भुगतान का समय, भुगतान की राशि भुगतान का तरीका, भुगतान का स्थान, जिस अधिकारी को कर देना है, वह भी निश्चित होना चाहिए। निश्चितता का सिद्धान्त करदाताओं व सरकार दोनों के लिए जरूरी है।
3. '''सुविधा का सिद्धान्त''' : सार्वजनिक अधिकारियों को यह ध्यान में रखना चाहिए कि करदाता को कर के भुगतान में कम से कम असुविधा हो। उदाहरण के लिए भू-राजस्व को फसलों के समय ले लिया जाना चाहिए।
4. '''मितव्ययता का सिद्धान्त''' : कर संग्रहण में कम से कम धन खर्च किया जाना चाहिए। संग्रह की गई राशि का अधिकतम अंश सरकारी खजाने में जमा करवाया जाना चाहिए। इस प्रक्रिया में फालतू खर्च से बचा जाना चाहिए।
5. '''उत्पादकता का सिद्धान्त''' : इस सिद्धान्त के अनुसार अनेक अनुत्पादक कर लगाने के स्थान पर कुछ उत्पादक कर लगाए जाने चाहिए। कर इतने अच्छे तरीके से लगाए जाने चाहिए कि वह लोगों की उत्पादन क्षमता को निरूत्साहित न करें।
6. '''लोचशीलता का सिद्धान्त''' : कर इस प्रकार के लगाए जाने चाहिए कि उनके द्वारा एकत्र होने वाली राशि को समय और आवश्यकतानुसार कम से कम असुविधा से घटायाया बढ़ाया जा सके।
7. '''विविधता का सिद्धान्त''' : इसके अनुसार देश की कर व्यवस्था में विविधता होनी चाहिए। कर का बोझ विभिन्न वर्ग के लोगों पर वितरित होना चाहिए।
== करों के प्रभाव==
कराधान के प्रभावों की व्याख्या निम्न प्रकार से की जा सकती हैः
1. '''कराधान के उत्पादन पर प्रभाव''' : कराधान से कार्य करने, बचत करने तथा निवेश की क्षमता और कार्य करने, बचत करने तथा निवेश करने की इच्छा प्रभावित होती है। कर इन्हें कम करता है। परन्तु जब सरकार कराधान द्वारा एकत्रित धन खर्च करती है तो उससे देश के नागरिकों को सुविधाएं एवं सुगमताएं प्राप्त होती है। इसलिए कार्य करने, बचत करने और निवेश करने की योग्यता पर विचार करते समय सार्वजनिक व्यय के प्रभावों को भी ध्यान में रखा जाए।
2. '''कराधान के वितरण पर प्रभाव''' : आधुनिक कल्याणकारी सरकार का मुख्य उद्देश्य है आय और सम्पति की असमनताओं को कम करना। समान वितरण की प्राप्ति के लिए सार्वजनिक व्यय इस प्रकार किया जाये जिससे निर्धन लोगों की आय बढ़े। करारोपन का प्रबन्ध इस प्रकार किया जाये जिससे समृद्ध लोगों की आय और सम्पति में वृद्धि पर रोक लगे।
3. '''मुद्रा स्फीति पर करों का प्रभाव''' : मुद्रा स्फीति के समयपर कराधान का लक्ष्य होता है उपभोक्ता की क्रय शक्ति को कम करना। इस दिशा में आय और व्यय पर करारोपण, सार्वजनिक व्यय को नियन्त्रित करने में उपयुक्त होता है। आयातशुल्कों में कमी और वस्तुओं की पूर्ति में वृद्धि भी अर्थव्यवस्था पर स्फीतिकारी दबावों को कम करती है।
4. '''करारोपण का मन्दी के समय में प्रभाव''' : [[आर्थिक मंदी|मन्दी]] की स्थिति से निपटने के लिए करारोपण में कमी आवश्यक है। विशेष रूप से उन करो को घटाना आवश्यक है जो निम्न आय वर्गों पर पड़ते है। वस्तुकरों में कमी से उपभोग की प्रवृति में बढ़ोतरी होगी और बाजार मांग बढ़ेगी। ऐसे समय में प्रायः घाटे वाले बजटों को प्राथमिकता दी जाती है।
5. '''करारोपण का उपभोग पर प्रभाव''' : उपभोग की मात्रा तथा प्रकृति पर नियन्त्रण कुछ वस्तुओं की बिक्री पर भारी कर लगाकर किया जा सकता है। राष्ट्रीय सीमाओं से पार से आने वाले उत्पादो का नियमन आयात-निर्यात शुल्क लगा कर किया जा सकता है।
इस प्रकार कर सरकार की आय का मुख्य स्रोत है। इसके कुछ सिद्धान्त और प्रभाव है। इसका प्रयोग इस प्रकार से किया जाना चाहिए कि आर्थिक विकास और कल्याण में अधिकतम वृद्धि हो सके।
== कराघात व करापात ==
कर के प्रथम आघात को '''[[कराघात]]''' (Impact of tax) कहते हैं। सरकार कर जमा कराने का दायित्व जिस व्यक्ति पर डालती है, उस पर कराघात होता है। किन्तु कर भार के अन्तिम आघात बिंदु पर '''[[करापात]]''' (incidence of Tax) होता है। अतः करापात उस व्यक्ति पर पड़ता है, जो कर के भार को किसी अन्य व्यक्ति पर डालने में असमर्थ होता है। अर्थात कर का प्रथम आघात कराघात कहलाता है, किन्तु यह भी सम्भव है कि वह व्यक्ति वस्तु की कीमत बढ़ा कर कर भार को दूसरे व्यक्ति पर और दूसरा व्यक्ति, तीसरे व्यक्ति पर डाल दें। करापात उस व्यक्ति पर माना जाएगा जो कर को आगे नहीं डाल सकता।
'''[[कर विवर्तन]]''' (Shifting of taxation) वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा एक व्यक्ति स्वयं पर लगाए गए कर भार को अन्य व्यक्तियों पर डाल देता है। कर का विवर्तन करना कानूनन अपराध नहीं है।
कई लोग आय कम दर्शाकर, कर चुकाने से बच जाते हैं। इसे '''[[कर अपवंचन|कर का अपवंचन]]''' कहते हैं। कर अपवंचन गैरकानूनी है।
मान लीजिए सरकार चीनी पर कर लगाती है और चीनी के उत्पादकों से कर राशि प्राप्त करती है। इस प्रकार का मौद्रिक भार प्रत्यक्षतः चीनी के उत्पादकों पर पड़ता है। अब यदि उत्पादक कर का मौद्रिक भार किसी अन्य व्यक्ति पर (माना थोक विक्रेता पर) चीनी की कीमतों में वृद्धि करके डालता है और विवर्तन की यह प्रक्रिया थोक विक्रेता से अन्तिम उपभोक्ता तक जारी रहती है जो करापात उस उपभोक्ता पर पडेगा जो अन्तिम दशा में मौद्रिक भार उठायेगा। इसे परोक्ष मौद्रिक भार कहा जाता है। इस सम्बन्ध में डाल्टन ने अपने विचारों को इस प्रकार से परिभाषित किया हैः
:''‘‘करापात की समस्या से साधारणतः यह अभिप्राय लिया जाता है कि कर का भुगतान कौन करता है। अधिक निश्चित रूप से हम यह कह सकते है कि कर का मौद्रिक बोझ उस पर पड़ता है जो प्रत्यक्ष रूप से कर का बोझ उठाते है।’’
फिन्डले शिराज के अनुसार,"कर भार की समस्या का विश्लेषण यह निर्धारित करता है कि कर का भुगतान कौन करता है अर्थात् कर का मौद्रिक भार किस पर पड़ता है।"
=== करापात के प्रकार===
प्रो. मसग्रेव के अनुसार करापात तीन प्रकार का हैः
1. '''विशेष करापात''' : जब कोई कर सरकारी खाते के व्यय पक्ष में बिना किसी परिवर्तन से लगाया जाता है।
2. '''विभेदी करापात''' : जब कोई कर किसी अन्य कर के विकल्प के रूप में लगाया जाता है।
3. '''संतुलित बजट करापात''' : जब कर की आय से सरकार अपने व्यय में वृद्धि करती है।
=== कराघात ===
[[कराघात]] से अभिप्राय कर के तत्काल भार से है। अतः कराघात कर का तत्काल परिणाम है जो उस व्यक्ति पर पड़ता है जिससे सरकार कर एकत्रित करती हैं अर्थात् जो सर्वप्रथम कर का भुगतान करता है। यह आवश्यक नहीं है कि कर का कराघात और करापात एक ही व्यक्ति पर पड़े। कराघात उत्पादक पर पड़ता है जबकि करापात उपभोक्ता पर। जिस व्यक्ति को कर तुरंत भुगतान करना पड़ता है उस पर कराघात होता है। उदाहरणतः आयात कर सरकार को आयातकर्ता देगा उत्पादन कर उस व्यक्ति को देना पड़ता है जो उस वस्तु का उत्पादन करता है। कराघात उत्पादक की आय को कम नहीं करता, यद्यपि यह उस पर कुछ समय के लिए दबाव डालता है जबकि करापात स्थायी होता है। इसका अर्थ है कि करापात की अपेक्षा कराघात का अध्ययन कम महत्वपूर्ण है।
प्रो. जे.के. मेहता के अनुसार, “कराघात को तत्काल मुद्रा भार कहा जा सकता है। जो व्यक्ति सरकार को कर का भुगतान करता है वह कराघात सहन करता है।“ कपड़े का उत्पादक सरकार को कर देता है। अतः वह कराधान वहन करता है। उत्पादक अपने कपड़े की कीमत में वृद्धि करता है ताकि कर का भार खरीदने वाले पर पड़े। अगर वह कीमत बढ़ाने में सफल रहता है तो इसका अर्थ है कि पूर्ण या आंशिक रूप से कर का विवर्तन हुआ है। यदि कीमत पूरी सीमा तक नहीं बढ़ पाती तो इसका अर्थ है कि करापात का कुछ भाग कपड़ा उत्पादक पर शेष रह गया है। लेकिन कराघात केवल उत्पादक पर ही पड़ेगा। क्योंकि सबसे पहले वही करके बोझ को सहन करता है।
कर लगाने का उद्देश्य केवल धन एकत्र करना ही नहीं, इसका उद्देश्य आर्थिक और सामाजिक न्याय प्राप्त करना भी है। समाज में धन का समान वितरण, उत्पादन तथा रोजगार में वृद्धि और देश के आर्थिक विकास के लिए कर भार की समस्या का अध्ययन करना आवश्यक है। इससे पता चलता है कि किस व्यक्ति पर कर का कितना भार पड़ेगा और यह बात निश्चित होने पर कोई भी कर अनुचित रूप से नहीं लगाना पड़ेगा।
== अच्छी कर प्रणाली की विशेषताएं==
एक अच्छी कर प्रणाली की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैंः-
;1. कर एक अनिवार्य भुगतान है
यदि करदाताओं ने कर लगाने योग्य पर्याप्त स्थितियों को प्राप्त कर लिया है तो कर भुगतान अनिवार्य है। अतः कुछ परिस्थितियों के अधीन ही कर देना अनिवार्य है। उदाहरण के रूप में यदि एक व्यक्ति सिगरेट नहीं पीता तो वह तंबाकू पर ब्रिक्री कर देने से इंकार कर सकता है।
;2. त्याग का तत्व
कर भुगतान में त्याग का तत्व भी सम्मिलित होता है। जब हम कोई चीज खरीदते हैं तो हमें कीमत देनी ही पड़ती है। परंतु करों के प्रकरण में कम से कम सैद्धान्तिक रूप में त्याग की भावना होती है, क्योंकि करदाता सावर्जनिक हित में कर देता है।
;3. कर सरकार को दिया गया एक भुगतान है
कर अधिकृत संस्थाओं द्वारा लगाए जाते हैं और ऐसी संस्थाओं में हम सरकार के अतिरिक्त अन्य किसी संस्था को नही ले सकते। इसलिए कर केवल जनता द्वारा सरकार को किया गया भुगतान है।
;4. कर एकत्रीकरण का लक्ष्य है जन कल्याण
सामान्य जनता के लाभ तथा समस्त समुदाय के अधिकतम कल्याण के लिए कर लगाए तथा एकत्रित किए जाते हैं। कर राजस्व का व्यय समाज के समग्र कल्याण को ध्यान में रखते हुए किया जाता है न कि किसी विशेष वर्ग को ध्यान में रखते हुए।
;5. कर लाभों की कीमत पर नहीं
कर सरकार द्वारा लोगों को दिए गए लाभों का मूल्य नहीं है। करों का भुगतान निःसंदेह सामान्य लोगों को लाभ पहुंचाने के लक्ष्य से किया जाता है परंतु इसका एकत्रीकरण दिए गए लाभों की लागत वसूलने के लिए नहीं किया जाता ।
;6. प्राप्त लाभ स्पष्ट रूप में कर की वापसी नहीं हैः
सरकार लोगों को इस बात गारंटी नहीं देती कि वह एक विशेष व्यक्ति को उसके द्वारा करों के रूप में किए भुगतान की वापसी अथवा उसके अनुपात में लाभ उपलब्ध करवाएगी।
;7. कर व्यक्तियों द्वारा दिए जाते हैं
कर व्यक्ति द्वारा दिया जाता है, यद्यपि वह व्यक्तियों की संपत्ति अथवा वस्तुओं पर भी लगाए जाते हैं। कर लेना एक व्यक्तिगत दायित्व है। इसलिए सभी कर व्यक्तियों द्वारा दिए जाते है न कि उन वस्तुओं और संपतियों द्वारा जिन पर वे लगाए जाते हैं।
;8. कानूनी स्वीकृति
जब सरकार कर लगाने का अधिनियम पारित कर देती है तो उसके पश्चात् ही कर लगाया जा सकता है। करों के पीछे कानूनी स्वीकृति होती है। उनका एकत्रीकरण भी कानूनी होता है तथा एक व्यक्ति जो कर देने में असफल रहता है उसे कानूनी दंड दिया जा सकता है।
9. कर की विभिन्न किस्त में
कर कई प्रकार के हो सकते हैं जैसे आय कर, बिक्री कर, धन कर, मनोरंजन कर, संपत्ति कर, जल कर, गृह कर आदि।
;10. व्यापार तथा उद्योग पर कोई प्रभाव नहीं
एक अच्छा कर व्यापार तथा उद्योग की वृद्धि में रूकावट नहीं बनता, बल्कि यह देश के तीव्र आर्थिक विकास में सहायता करता है। इसकी रचना इस प्रकार की जाए, जिससे अतिरिक्त साधन गतिशील हो तथा उनका प्रयोग सामान्य कल्याण के लिए हो।
== इन्हें भी देखें ==
* [[कराधान के सिद्धान्त]]
* [[उत्पाद कर]] (Excise Tax)
* [[इष्टतम कर]] (Optimal tax)
* [[लोक वित्त]] (Public finance)
* [[कर कानून]] (Tax law)
* [[कर नीति]] (Tax policy)
* [[संपत्ति कर|सम्पत्ति कर]] (Wealth tax)
* [[भारतीय कर व्यवस्था|भारत में कराधान]] (Taxation in India)
== बाहरी कड़ियाँ ==
*[https://www.panchjanya.com/culture-dialogue-there-is-a-treasury-4768.html प्राचीन ग्रंथों में है राजकोष, करारोपण पर व्यापक विमर्श] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20220109010645/https://www.panchjanya.com/culture-dialogue-there-is-a-treasury-4768.html |date=9 जनवरी 2022 }}
* [https://web.archive.org/web/20070326120948/http://www.wikicpa.com/index.php/Category:Taxation WikiCPA.com tax articles]
* [https://web.archive.org/web/20090314113033/http://demonstrations.wolfram.com/TaxRatesAndTaxRevenue/ Tax Rates and Tax Revenue] by Seth J. Chandler and [https://web.archive.org/web/20090219142656/http://demonstrations.wolfram.com/PerUnitTax/ Per Unit Tax] by Fiona Maclachlan, [[Wolfram Demonstrations Project]]
* [https://top10inserts.com/2022/07/26/%e0%a4%9f%e0%a5%88%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b8-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a4%a4%e0%a4%b2%e0%a4%ac-%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%8b%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%88/ टैक्स का मतलब क्या होता है] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20220911163731/https://top10inserts.com/2022/07/26/%E0%A4%9F%E0%A5%88%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B8-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%AE%E0%A4%A4%E0%A4%B2%E0%A4%AC-%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%B9%E0%A5%8B%E0%A4%A4%E0%A4%BE-%E0%A4%B9%E0%A5%88/ |date=11 सितंबर 2022 }}
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मग
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चाहर धर्मेंद्र
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[[चित्र:Mug_of_Tea.JPG|upright=1.35|अंगूठाकार|दुध वाली चाय का एक मग]]
मग एक प्रकार का [[कप]] होता है,{{sfn|Kronenfeld|1996|p=6}} जिसे विशेष रूप से [[कॉफी]], [[हॉट चॉकलेट|गरम चॉकलेट]] या [[चाय]] जैसे गर्म पेय पदार्थों के सेवन के लिए उपयोग किया जाता है। इसकी सबसे प्रमुख विशेषता इसका हैंडल होता है, जो इसे पकड़ने में सुविधा प्रदान करता है, विशेषकर तब जब पेय गरम हो। आकार की दृष्टि से, मग सामान्य कपों—जैसे चाय या कॉफी के पारंपरिक कप—की तुलना में अधिक [[तरल]] धारण करने में सक्षम होता है।
आमतौर पर एक मग की क्षमता लगभग 250 से 350 मिलीलीटर के बीच होती है,<ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=IZRDIcz6uEQC&q=usually+mug+holds+12+fluid+ounces|title=The Boat Galley Cookbook: 800 Everyday Recipes and Essential Tips for Cooking Aboard : 800 Everyday Recipes and Essential Tips for Cooking Aboard: 800 Everyday Recipes and Essential Tips for Cooking Aboard|last1=शियरलॉक|first1=कैरोलिन|last2=आयरन्स|first2=जेन|date=2012-09-14|publisher=मैकग्रा हिल प्रोफेशनल|isbn=9780071782364|access-date=2021-03-12|archive-date=2024-04-25|archive-url=https://web.archive.org/web/20240425165047/https://books.google.com/books?id=IZRDIcz6uEQC&q=usually+mug+holds+12+fluid+ounces|url-status=live}}</ref> जो इसे दैनिक उपयोग के लिए अत्यंत व्यावहारिक बनाती है। यदि आकार इससे भी बड़ा हो, तो ऐसे बर्तन को टैंकर्ड कहा जाता है। इस प्रकार, मग केवल एक साधारण बर्तन नहीं, बल्कि दैनिक जीवन की सहजता और आराम का एक अभिन्न हिस्सा है।
मग का आकार प्रायः सरल और उपयोगितावादी होता है—यह या तो सीधी, बेलनाकार रेखाओं वाला होता है अथवा हल्का घुमाव लिए हुए रूप में भी निर्मित किया जाता है। यद्यपि इसके आकार में विविधता संभव है, फिर भी इसकी मूल पहचान एक सुविधाजनक हैंडल से जुड़ी होती है, जो इसे पकड़ने में सहजता प्रदान करता है; इसी विशेषता के अभाव में इसे बीकर कहा जाता है। सामान्यतः मग के साथ तश्तरी नहीं होती, जो इसे अन्य पारंपरिक कपों से भिन्न बनाती है।<ref>{{cite encyclopedia |title=mug, n.1 |url=http://www.oed.com/view/Entry/123325 |encyclopedia=ओईडी ऑनलाइन |date=दिसंबर 2014 |publisher=ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस |quote=A drinking vessel, freq. cylindrical (and now usually with a handle), generally used without a saucer. |access-date=2015-03-06 |archive-date=2024-04-25 |archive-url=https://web.archive.org/web/20240425165036/https://www.oed.com/dictionary/mug_n1 |url-status=live }}</ref>
मग को [[पेय]] पदार्थों के सेवन का अपेक्षाकृत अनौपचारिक माध्यम माना जाता है, इसलिए इसका प्रयोग प्रायः घरेलू या सहज वातावरण में अधिक होता है, जबकि औपचारिक भोजन कक्षों में चाय या कॉफी के पारंपरिक कपों को प्राथमिकता दी जाती है। इसके अतिरिक्त, मग का एक विशेष रूप [[हजामत|शेविंग]] मग भी होता है, जिसका उपयोग गीली दाढ़ी बनाने की प्रक्रिया में सहायक के रूप में किया जाता है। इस प्रकार, मग अपनी सरलता और बहुउपयोगिता के कारण दैनिक जीवन में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है।
मग का विकास समय के साथ उसकी उपयोगिता और निर्माण सामग्री के अनुसार निरंतर परिवर्तित होता रहा है। प्राचीन काल में मग प्रायः [[लकड़ी]] को तराशकर या [[कुंभकारी|मिट्टी]] से बनाए जाते थे, जो उस समय उपलब्ध संसाधनों और शिल्पकला का प्रतिबिंब थे। आधुनिक युग में इनका निर्माण अधिक परिष्कृत सामग्रियों—जैसे बोन चाइना, अर्दनवेयर, [[पॉर्सिलेन]] और स्टोनवेयर—से किया जाने लगा है, जो न केवल आकर्षक होते हैं, बल्कि टिकाऊ भी होते हैं।
आकार और प्रयोजन के अनुसार कुछ बड़े मग, जो प्रायः धातु या मिट्टी से निर्मित होते हैं और विशेष रूप से पेय पदार्थ जैसे [[बियर]] के लिए उपयोग किए जाते हैं, टैंकर्ड कहलाते हैं। इसके अतिरिक्त, कुछ मग सुदृढ़ [[कांच]]—जैसे पाइरेक्स—से भी बनाए जाते हैं, जो ताप और झटकों के प्रति अधिक सहनशील होते हैं। हल्के वजन और टूट-फूट से बचाव के लिए [[मीनाकारी|एनामेल्ड]] धातु, [[प्लास्टिक]] या [[इस्पात]] जैसी सामग्रियों का उपयोग भी किया जाता है, विशेषकर बाहरी गतिविधियों जैसे [[कैंपिंग|शिविर-यात्रा]] में।
यात्रा के लिए विशेष रूप से बनाए गए ट्रैवल मग में ऊष्मा बनाए रखने की क्षमता होती है और इनमें छलकने से बचाने के लिए ढक्कन भी लगाया जाता है। सजावट की दृष्टि से, मग पर [[लोगो]], चित्र या कलात्मक आकृतियाँ अंकित करने के लिए [[आवरण मुद्रण|सिल्क-स्क्रीन मुद्रण]] या डिकल तकनीक का प्रयोग किया जाता है, जिन्हें पकाकर स्थायी रूप प्रदान किया जाता है। इस प्रकार, मग केवल एक साधारण बर्तन नहीं, बल्कि उपयोगिता, सौंदर्य और तकनीकी विकास का संगम है।
==सामान्य बनावट और कार्य==
[[File:Mug vs cup.jpg|thumb|एक मग और एक कप अगल-बगल रखे हुए हैं]]
मग के बनावट का एक प्रमुख उद्देश्य ऊष्मीय इन्सुलेशन सुनिश्चित करना होता है, जिससे उसमें रखा पेय अपेक्षाकृत अधिक समय तक अपने तापमान को बनाए रख सके। चाय के पारंपरिक कपों की पतली दीवारों की तुलना में मग की दीवारें मोटी होती हैं, जो ऊष्मा के आदान-प्रदान को धीमा करती हैं और पेय को जल्दी ठंडा या अत्यधिक गरम होने से बचाती हैं।
इसके अतिरिक्त, मग का आधार प्रायः पूर्णतः समतल नहीं होता, बल्कि हल्का अवतल या किनारीयुक्त बनाया जाता है। यह संरचना उस सतह के साथ प्रत्यक्ष संपर्क को कम करती है, जिस पर मग रखा जाता है, जिससे ऊष्मा का अपव्यय घटता है। इसी कारण अक्सर सतह पर एक विशिष्ट गोलाकार चिह्न भी दिखाई देता है, जो इस संरचनात्मक विशेषता का परिणाम होता है।
मग का हैंडल भी इसके ऊष्मीय गुणों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह हाथ को गरम सतह से दूर रखता है और उसके अपेक्षाकृत छोटे अनुप्रस्थ क्षेत्र के कारण ऊष्मा के प्रवाह को सीमित करता है, जिससे उपयोगकर्ता को पकड़ने में सुविधा और सुरक्षा दोनों मिलती हैं। इसी कारण, मग सामान्यतः ऐसी सामग्रियों—जैसे मिट्टी के बर्तन, बोन चाइना, [[पॉर्सिलेन]] या काँच—से बनाए जाते हैं,<ref>{{cite book|url=https://books.google.com/books?id=fJw0K1ZGY1kC&pg=PA98|page=98|title=The really useful science book: a framework of knowledge for primary teachers|author=स्टीव फैरो|publisher= रूटलेज |year=1999|isbn=0-7507-0983-9}}</ref><ref>{{cite book|url=https://books.google.com/books?id=esDW3xTKoLIC&pg=PA27|page=27|title=The handbook of evolutionary psychology|author=डेविड एम. बस|publisher=जॉन विली एंड संस.|year=2005|isbn=0-471-26403-2}}</ref> जिनकी [[ऊष्मा चालकता|ऊष्मीय चालकता]] कम होती है और जो ताप को नियंत्रित रखने में सहायक होती हैं।
===कपों की तुलना में अंतर===
मग और पारंपरिक कप के बीच का अंतर केवल आकार या बनावट तक सीमित नहीं है, बल्कि यह विभिन्न भाषाओं और संस्कृतियों में भी स्पष्ट रूप से परिलक्षित होता है। फ्रेंच, इतालवी, पोलिश, रूसी, जर्मन और अंग्रेज़ी जैसी अनेक भाषाओं में इन दोनों के लिए अलग-अलग शब्द प्रचलित हैं, जो इनके भिन्न उपयोग और सांस्कृतिक संदर्भों को दर्शाते हैं।
भाषाविद् अन्ना विर्ज़बिका के अनुसार, यह भिन्नता इनके कार्यात्मक अंतर से उत्पन्न होती है। पारंपरिक कप सामान्यतः औपचारिक परिवेश में मेज पर बैठकर पेय का आनंद लेने के लिए बनाए जाते हैं, जहाँ साज-सज्जा और शिष्टाचार का विशेष महत्व होता है। इसके विपरीत, मग अधिक अनौपचारिक और बहुउपयोगी होता है, जिसे किसी भी स्थान पर सहजता से उपयोग में लाया जा सकता है।{{sfn|Wierzbicka|1984|pp=214–216}}
==इतिहास==
===शुरुआती मग===
[[File:CMOC Treasures of Ancient China exhibit - large grey mug.jpg|upright|thumb|left|चीन के [[झेंगझोऊ]] में [[नवपाषाण युग|नवपाषाण काल]] के उत्तरार्ध ( लगभग 2500-2000 ईसा पूर्व) में कुम्हार के चाक पर बनाया गया एक मग।]]
मग का प्रारंभिक इतिहास यह दर्शाता है कि इसका उपयोग आज की अपेक्षा भिन्न उद्देश्यों के लिए किया जाता था। वर्तमान में जहाँ मग प्रायः गर्म पेय, दूध या शीतल पेयों से जुड़ा हुआ है, वहीं आरंभिक काल में इसका प्रमुख उपयोग [[बियर]] अथवा अन्य मादक पेयों के सेवन के लिए होता था। उस समय के मग आकार में भी अधिक बड़े होते थे, जो उनके उपयोग और सामाजिक परिवेश के अनुरूप थे। लकड़ी से बने प्रारंभिक मग संभवतः प्राचीन काष्ठ-शिल्प के आरंभिक दौर से ही प्रचलन में थे, किंतु समय के प्रभाव के कारण ऐसे अधिकांश नमूने आज सुरक्षित नहीं रह पाए हैं।<ref name="columbia">{{cite web|url=http://www.encyclopedia.com/doc/1E1-porcelai.html|title=Porcelain|publisher=कोलंबिया विश्वकोश छठा संस्करण. 2008|access-date=2008-06-27|archive-date=2008-08-21|archive-url=https://web.archive.org/web/20080821093621/http://www.encyclopedia.com/doc/1E1-porcelai.html|url-status=live}}</ref><ref name="G. J. Monson-Fitzjohn, B.Sc., F.R.Hist.S">{{cite book|url=http://www.nicks.com.au/index.aspx?link_id=76.623|title=Drinking Vessels of Bygone Days|author=जी. जे. मोनसन-फिट्ज़जॉन, बी.एससी., एफ.आर.एच.आई.एस.|url-status=dead|archive-url=https://web.archive.org/web/20100719162453/http://www.nicks.com.au/Index.aspx?link_id=76.623|archive-date=2010-07-19}}</ref>
मिट्टी के बर्तनों के विकास ने मग के निर्माण को एक नई दिशा दी। प्रारंभ में इन्हें [[कुंभकारी|हाथ से आकार]] दिया जाता था, परंतु कुम्हार का चाक के आविष्कार (लगभग 6500 से 3000 ईसा पूर्व के बीच) ने इस प्रक्रिया को अधिक सरल और परिष्कृत बना दिया। इस तकनीक के कारण बर्तनों में हैंडल जोड़ना भी सहज हो गया, जिससे आधुनिक स्वरूप के मग का विकास संभव हुआ। प्राचीन ग्रीस में 4000 से 5000 ईसा पूर्व के काल का एक सुसज्जित मिट्टी का मग प्राप्त हुआ है,<ref>{{cite web|url=http://www.ceramicstudies.me.uk/histx105.html|title=Ceramic Web Page Tutorials|website=Ceramicstudies.me.uk|access-date= नवंबर 16, 2012|archive-date= जून 5, 2023|archive-url=https://web.archive.org/web/20230605205500/http://www.ceramicstudies.me.uk/histx105.html|url-status=live}}</ref> जो उस युग की कलात्मकता और शिल्पकौशल का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करता है।
[[File:AnasaziMugs.jpeg|thumb|upright=1.1|[[कॉलोराडो|दक्षिण-पश्चिमी कोलोराडो]] से प्राप्त [[पुएब्लो कों के पूर्वज|पुएब्लो]] (अनासाज़ी) पूर्वजों के मग , जो 1000 से 1280 ईस्वी के बीच बनाए गए थे। इनके हैंडल पर की गई नक्काशी का अर्थ अभी तक अज्ञात है, लेकिन संभवतः इसका कोई कार्यात्मक महत्व नहीं है।]]
मग के विकासक्रम में प्रारंभिक मिट्टी के मगों की एक प्रमुख कमी उनकी अत्यधिक मोटी दीवारें थीं, जो पीने के लिए सुविधाजनक नहीं मानी जाती थीं। जैसे-जैसे [[धातुकार्य|धातु-कर्म]] की तकनीकों में प्रगति हुई, बर्तनों की दीवारों को अधिक पतला और सुडौल बनाया जाने लगा। लगभग 2000 ईसा पूर्व से [[कांसा|कांस्य]],<ref>{{cite web|url=http://www.thomaslayton.org.uk/joomla/index.php?option=com_content&task=view&id=26&Itemid=41|archive-url=https://web.archive.org/web/20201205022717/http://www.thomaslayton.org.uk/joomla/index.php?option=com_content&task=view&id=26&Itemid=41|url-status=dead|archive-date= दिसंबर 5, 2020|title=The Collection – Archaeology|website=Thomaslayton.org.uk|access-date= नवंबर 16, 2012}}</ref> [[चाँदी]], [[सोना]]<ref>{{cite web|url=http://www.visual-arts-cork.com/ancient-art/mycenean.htm|title=Mycenean Art|website=Visual-arts-cork.com|access-date=नवंबर 16, 2012|archive-date= मई 11, 2023|archive-url=https://web.archive.org/web/20230511213611/http://www.visual-arts-cork.com/ancient-art/mycenean.htm|url-status=live}}</ref> और यहाँ तक कि [[सीसा]]<ref>{{cite web|url=http://www.nicks.com.au/index.aspx?link_id=76.633|title=Lead drinking cup|website=Nicks.com.au|access-date=नवंबर 16, 2012|url-status=dead|archive-url=https://web.archive.org/web/20120927082915/http://www.nicks.com.au/index.aspx?link_id=76.633|archive-date= सितंबर 27, 2012}}</ref> जैसी धातुओं से भी मग निर्मित होने लगे। यद्यपि ये देखने में आकर्षक और टिकाऊ थे, फिर भी गर्म पेयों के साथ इनका उपयोग सहज नहीं था, क्योंकि धातु ऊष्मा का तीव्र संचार करती है।
मग के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ तब आया, जब [[चीनी जनवादी गणराज्य|चीन]] में लगभग 600 ईस्वी के आसपास [[पॉर्सिलेन|चीनी मिट्टी के बर्तनों]] का विकास हुआ। इस नवाचार ने पतली दीवारों वाले ऐसे मगों का निर्माण संभव बनाया, जो न केवल ठंडे, बल्कि गर्म पेयों के लिए भी उपयुक्त थे। यह परंपरा आज भी जारी है और आधुनिक मगों के स्वरूप में उसी विकास की छाप स्पष्ट दिखाई देती है।<ref name="columbia"/><ref name="G. J. Monson-Fitzjohn, B.Sc., F.R.Hist.S"/>
भाषाई दृष्टि से, “मग” शब्द का वर्तमान अर्थ में सबसे प्रारंभिक ज्ञात प्रयोग 1664 ईस्वी में मिलता है,<ref>{{cite web |title=Mug |url=https://www.merriam-webster.com/dictionary/mug#word-history |website=merriam-webster.com |publisher=मेरियम-वेबस्टर |access-date=30 जून 2025}}</ref> जो इस बर्तन के सांस्कृतिक और व्यावहारिक विकास की ऐतिहासिक यात्रा को भी रेखांकित करता है।
===विक्टर कॉफी मग===
[[द्वितीय विश्व युद्ध]] के दौरान [[अमेरिकी नौसेना|संयुक्त राज्य अमेरिका की नौसेना]] ने ऐसे कॉफी मग के निर्माण हेतु अमेरिकी कंपनियों से प्रस्ताव आमंत्रित किए, जो गिरने पर भी सुरक्षित रहें और जहाज़ों पर उपयोग के दौरान अत्यधिक टिकाऊ सिद्ध हों। कई प्रकार के डिज़ाइन प्रस्तुत किए गए, किंतु अंततः चयन [[विद्युतरोधी|उच्च-वोल्टेज पोर्सिलेन इन्सुलेटर]] निर्माता विक्टर इंसुलेटर द्वारा निर्मित एक विशेष डिज़ाइन का हुआ। उस समय युद्धकालीन परिस्थितियों में इन्सुलेटर की माँग घट गई थी, इसलिए कंपनी ने अपने कार्यों को बनाए रखने के लिए स्वच्छतापूर्ण बर्तनों के निर्माण की दिशा में कदम बढ़ाया।<ref name="Upstate">{{Cite web|url=https://exploringupstate.com/how-victor-changed-the-coffee-mug/|title=How the Victor Coffee Mug Changed the Way We Drink Coffee|last=क्लेमेंस|first=क्रिस|date= मार्च 6, 2016|website=एक्सप्लोरिंग अपस्टेट|language=en-US}}</ref>
विक्टर ने नौसेना के लिए एक विशिष्ट मग विकसित किया, जो बिना हैंडल के, सफेद चमकदार सतह वाला और मोटी दीवारों से युक्त था। यह डिज़ाइन अपनी मजबूती और उपयोगिता के कारण सैन्य बलों द्वारा अत्यंत सराहा गया। चूँकि इन मगों के निर्माण में वही पोर्सिलेन सामग्री प्रयुक्त हुई, जिसका उपयोग कंपनी अपने इन्सुलेटर बनाने में करती थी, इसलिए इनमें उत्कृष्ट ऊष्मा-रोधक गुण विद्यमान थे। इस प्रकार, युद्धकालीन आवश्यकताओं ने न केवल एक नए प्रकार के मग को जन्म दिया, बल्कि उसके व्यावहारिक और तकनीकी गुणों को भी परिष्कृत किया।<ref name="Upstate"/><ref name= cjow>{{cite web |last1=गिश|first1=एल्टन |title=Porcelain Insulator News |url=https://www.cjow.com/archive/article.php?month=2&a=02Porcelain%20Insulator%20News.htm&year=2004 |website=cjow.com |publisher=द वायर के क्राउन ज्वेल्स |date= फरवरी 2004}}</ref>
द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति के पश्चात विक्टर इंसुलेटर ने अपने उत्पादन को आंशिक रूप से सैनिटरीवेयर उत्पादों की ओर बनाए रखने का निर्णय लिया और अपने प्रसिद्ध मग का एक अधिक व्यावसायिक रूप से अनुकूल संस्करण प्रस्तुत किया। इस नए रूप में मग में सुविधाजनक हैंडल जोड़ा गया, उसका शरीर अपेक्षाकृत हल्का और पतला बनाया गया, तथा विभिन्न रंगों के विकल्प भी उपलब्ध कराए गए, जिससे यह आम उपभोक्ताओं के लिए अधिक आकर्षक बन गया।
इस सफल डिज़ाइन की लोकप्रियता इतनी बढ़ी कि इसकी नकल संयुक्त राज्य अमेरिका के भीतर ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अनेक निर्माताओं द्वारा बड़े पैमाने पर की जाने लगी।<ref name="Upstate"/> किंतु समय के साथ सस्ते और बड़े पैमाने पर उत्पादित [[चीनी जनवादी गणराज्य|चीनी]] निर्मित विकल्पों से कड़ी प्रतिस्पर्धा के कारण विक्टर को गंभीर आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा। परिणामस्वरूप, 1990 के दशक की शुरुआत में कंपनी को मग का उत्पादन बंद करना पड़ा।<ref name= cjow/>
आज, उत्पादन बंद होने के बाद भी विक्टर द्वारा निर्मित ये मग अपनी विशिष्ट गुणवत्ता और ऐतिहासिक महत्व के कारण संग्राहकों के बीच अत्यंत लोकप्रिय हो गए हैं।<ref>{{cite web |last1=डेलगाडो |first1=मिशेल |title=The Classic Diner Mug That's Disappearing |url=https://medium.com/@mdelgadia/the-classic-diner-mug-thats-disappearing-619c55935aa9 |website=medium.com |publisher= मीडियम |date= मई 24, 2017}}</ref> वे न केवल एक उपयोगी वस्तु के रूप में, बल्कि औद्योगिक इतिहास और डिज़ाइन विकास के प्रतीक के रूप में भी मूल्यवान माने जाते हैं।
==अन्य मग के प्रकार ==
===यात्रा मग===
[[File:travel mug.jpg|thumb|left|upright=.6|यात्रा मग]]
यात्रा मग का प्रचलन 1980 के दशक में बढ़ा, जब ऐसे बर्तनों की आवश्यकता महसूस हुई जो गर्म या ठंडे पेयों को सुरक्षित रूप से एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जा सकें। इन मगों का निर्माण इस प्रकार किया जाता है कि उनमें [[ऊष्मा रोधन|उत्कृष्ट ऊष्मीय इन्सुलेशन गुण]] हों, जिससे पेय लंबे समय तक अपने तापमान को बनाए रख सके। संरचना की दृष्टि से ये [[निर्वात फ्लास्क|वैक्यूम फ्लास्क]] के समान होते हैं—अर्थात् ये अच्छी तरह से इन्सुलेटेड और लगभग पूर्णतः बंद होते हैं, ताकि रिसाव या छलकाव की संभावना न्यूनतम रहे।<ref name=travel>मोरी कार्प "ट्रैवल मग" {{US patent|5249703}} जारी होने की तिथि: अक्टूबर 5, 1993</ref> फिर भी, इनके ढक्कन में एक छोटा छिद्र होता है, जिससे यात्रा के दौरान बिना खोले ही पेय का सेवन किया जा सके।
गर्म पेयों के ठंडा होने का प्रमुख कारण वाष्पीकरण होता है, इसलिए ट्रैवल मग में ढक्कन की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। यह वाष्प के बाहर निकलने को सीमित करता है और इस प्रकार पेय को अधिक समय तक गरम बनाए रखने में सहायक होता है, चाहे ढक्कन पतले प्लास्टिक का ही क्यों न हो।
इसके अतिरिक्त, कुछ मग ऐसे भी होते हैं जिनमें भीतरी और बाहरी दोहरी दीवारें होती हैं, परंतु उनके बीच वैक्यूम नहीं बनाया जाता। ऐसे बर्तनों को डबल वॉल मग कहा जाता है। इनमें भीतरी दीवार सामान्यतः स्टेनलेस स्टील की होती है, जबकि बाहरी परत स्टेनलेस स्टील, प्लास्टिक या अन्य सामग्रियों से निर्मित हो सकती है। यह संरचना भी कुछ हद तक ऊष्मा संरक्षण प्रदान करती है, यद्यपि वैक्यूम युक्त मग की तुलना में इसकी क्षमता अपेक्षाकृत कम होती है।
ड्राइविंग के दौरान उपयोग में आने वाला मग, जिसे प्रायः ऑटो मग या कम्यूटर मग कहा जाता है, केवल एक साधारण पात्र नहीं, बल्कि सुविधा, सुरक्षा और सूझबूझ का संतुलित रूप है। यह विशेष प्रकार का यात्रा मग इस प्रकार निर्मित होता है कि चलते वाहन में भी पेय का आनंद सहज और सुरक्षित बना रहे। इसके ऊपर लगा रिसाव-रोधी ढक्कन, जिसमें पीने के लिए एक छोटा सा छिद्र या नलिका होती है,<ref name="Jackson, Joe">{{cite web|author=जैक्सन, जो|title=Q: What's the Best Insulated Travel Mug? We tested five of the best. Here's how they stacked up.|date= दिसंबर 22, 2014|work=आउटसाइड|url=http://www.outsideonline.com/1786136/whats-best-insulated-travel-mug|access-date= दिसंबर 10, 2015|archive-date= दिसंबर 11, 2015|archive-url=https://web.archive.org/web/20151211031852/http://www.outsideonline.com/1786136/whats-best-insulated-travel-mug|url-status=live}}</ref> इस बात का ध्यान रखता है कि मार्ग की हलचल पेय को बाहर न छलकाए। साथ ही, इसका आधार प्रायः संकरा रखा जाता है, ताकि यह विभिन्न वाहनों में बने कप धारकों में दृढ़ता से स्थापित हो सके और अनचाही हलचल से बचा रहे।
ऐसे मग का मूल्यांकन केवल उसके रूप या आकार से नहीं, बल्कि उसके व्यावहारिक गुणों से किया जाता है। यह अपेक्षित है कि उसे एक हाथ से सरलता से खोला और बंद किया जा सके, जिससे चालक का ध्यान मार्ग से न भटके। उसमें भरण-सीमा का स्पष्ट संकेत हो, ताकि अधिक भराव के कारण होने वाले रिसाव से बचा जा सके। बिना हत्थे का स्वरूप इसे पकड़ने में अधिक सहज बनाता है, जिससे नियंत्रण बना रहता है। इसके अतिरिक्त, इसका विन्यास ऐसा होना चाहिए कि पेय ग्रहण करते समय चालक की दृष्टि मार्ग से विचलित न हो।<ref>{{cite news|work=कुक्स कंट्री|date= अक्टूबर 2011|title=Travel Mugs|url=http://www.cooksillustrated.com/equipment_reviews/1328-travel-mugs?extcode=MASCZ00L0&ref=search_results_1|access-date=2015-12-10|archive-date=2015-12-11|archive-url=https://web.archive.org/web/20151211023117/http://www.cooksillustrated.com/equipment_reviews/1328-travel-mugs?extcode=MASCZ00L0&ref=search_results_1|url-status=live}}</ref><ref name="Jackson, Joe"/><ref>{{cite news|work=अमेरिकाज़ टेस्ट किचन (सीज़न 8, एपिसोड 22)]]|title=Coffeehouse Treats: Equipment Corner/Gadget Guru: Commuter Coffee Mugs|date=2008}}</ref> अंततः, यह विभिन्न प्रकार के कप धारकों में स्थिरता से बैठ सके—यही इसकी उपयोगिता और विश्वसनीयता की वास्तविक कसौटी है।
===बियर मग===
[[File:Humpen.jpg|thumb|upright|एक सामान्य आधा लीटर का जर्मन बीयर मग]]
बीयर स्टाइन, परंपरा और शिल्पकला का एक विशिष्ट संगम, वास्तव में पारंपरिक बीयर मगों का वह रूप है जो प्रायः स्टोनवेयर मिट्टी से निर्मित होता है और ऐतिहासिक रूप से [[जर्मनी]] से जुड़ा हुआ माना जाता है। “स्टाइन” शब्द का अंग्रेज़ी में प्रचलन उन्नीसवीं शताब्दी के मध्य, लगभग 1855 के आसपास, [[जर्मन भाषा|जर्मन]] शब्द से रूपांतरित होकर हुआ;<ref name="mw">{{cite web|url=http://www.merriam-webster.com/dictionary/stein|title=Definition of STEIN|website=www.merriam-webster.com|date=5 सितम्बर 2023 }}</ref> किंतु रोचक तथ्य यह है कि जर्मनी में स्वयं इस शब्द का स्वतंत्र रूप से पेय पात्र के अर्थ में सामान्यतः उपयोग नहीं किया जाता। वहाँ इसके स्थान पर “क्रुग”, “हम्पेन” या “सीडेल” जैसे शब्द अधिक प्रचलित हैं, जो इन पात्रों की विविध आकृतियों और उपयोगों को अधिक सटीक रूप से व्यक्त करते हैं।
आधुनिक बीयर मग, जो इस परंपरा के उत्तराधिकारी माने जा सकते हैं, प्रायः आधा [[लीटर]] या एक लीटर की मानक धारिता में उपलब्ध होते हैं। इनके निर्माण में उपयोगिता और सौंदर्य का संतुलन स्पष्ट दिखाई देता है—मजबूत संरचना के साथ-साथ इनमें प्रायः धातु से निर्मित [[कब्ज़ा|कब्जेदार ढक्कन]] लगाए जाते हैं, जो स्वच्छता और संरक्षण दोनों की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण होते हैं। इसके अतिरिक्त, इन मगों की सतह पर उकेरे गए जर्मन [[राज्यचिह्न|प्रतीक-चिह्न]], ऐतिहासिक दृश्य या पारंपरिक कलात्मक आकृतियाँ इन्हें केवल पेय पात्र नहीं, बल्कि सांस्कृतिक विरासत के जीवंत प्रतीक के रूप में स्थापित करती हैं।
===टिकी मग===
[[File: Tiki7.jpg|अंगूठा|ईमानदार|टिकी मग]]
टिकी मग की उत्पत्ति बीसवीं शताब्दी के मध्य में उन उष्णकटिबंधीय वातावरण से प्रेरित भोजनालयों और विशेष पेय स्थलों में हुई, जहाँ वातावरण, सजावट और परोसे जाने वाले पेय—तीनों में एक विशिष्ट विदेशी आकर्षण रचा-बसा रहता था। “टिकी मग” वस्तुतः एक व्यापक और सामान्य संज्ञा है, जिसका उपयोग उन मूर्तिकला-सदृश पेय पात्रों के लिए किया जाता है, जिन पर [[मॅलानिशिया]], [[माइक्रोनीशिया]] अथवा [[पोलीनेशिया]] की सांस्कृतिक छवियों, प्रतीकों और आकृतियों का कलात्मक निरूपण किया गया होता है। समय के साथ इसका दायरा और भी विस्तृत हुआ है, और अब यह शब्द किसी भी ऐसे पात्र के लिए प्रयुक्त होने लगा है, जो उष्णकटिबंधीय परिवेश, समुद्री जीवन या सर्फिंग संस्कृति से संबंधित सौंदर्य-बोध को अभिव्यक्त करता हो।<ref>{{cite book|title=Tiki Mugs: Cult Artifacts of Polynesian Pop|author1=स्ट्रॉन्गमैन, जे |author2=वेस्टलैंड, होल्डन |publisher=कोरेरो बुक्स|year=2008|isbn=978-0-9553398-1-3}}</ref>
ये मग केवल उपयोग की वस्तु भर नहीं, बल्कि स्मृतियों और अनुभवों के संवाहक भी बन जाते हैं। प्रायः इन्हें स्मृति-चिह्न के रूप में बेचा जाता है, जिससे ये किसी स्थान, अनुभव या संस्कृति का प्रतीकात्मक प्रतिनिधित्व करने लगते हैं। यही कारण है कि अनेक लोग इन्हें संग्रहणीय वस्तुओं के रूप में संजोकर रखते हैं—जहाँ प्रत्येक टिकी मग अपने भीतर एक विशिष्ट कथा, सौंदर्य और सांस्कृतिक स्पर्श समेटे होता है।
===मनोरंजन मग===
व्हिसल मग, जिसे हबल-बबल के नाम से भी जाना जाता है, एक मनोरंजक और कौतुकपूर्ण पेय पात्र है, जो अपनी विशिष्ट बनावट के कारण साधारण मगों से अलग पहचान रखता है। इसकी संरचना में एक खोखला हत्था होता है, जिसे इस प्रकार निर्मित किया जाता है कि उसमें से हवा प्रवाहित करने पर सीटी जैसी ध्वनि उत्पन्न हो सके। यही विशेषता इसे केवल उपयोगी वस्तु न बनाकर एक खेल-भावना से जुड़ा अनुभव भी प्रदान करती है।
इस मग की ध्वनि उसकी अवस्था के अनुसार परिवर्तित होती है—जब यह खाली होता है, तब उससे एक सरल, एकल स्वर सुनाई देता है; किंतु जैसे ही इसमें द्रव भरा जाता है, ध्वनि का स्वरूप बदलकर अधिक मधुर, झंकारयुक्त और चहचहाहट जैसी जटिल ध्वनियों में परिवर्तित हो जाता है।<ref name=puzzle/>
===मेंढक मग===
मेंढक मग, जिसे सरप्राइज़ मग भी कहा जाता है, विनोद और आश्चर्य की भावना से निर्मित एक विशिष्ट पेय पात्र है। इसका रूप साधारण प्रतीत होता है, किंतु जैसे ही पेय धीरे-धीरे समाप्त होता है, उसके भीतर छिपा एक छोटा सिरेमिक जीव—अक्सर मेंढक—अचानक प्रकट होकर पीने वाले को चकित कर देता है। यही अप्रत्याशित अनुभव इसे मात्र उपयोगी वस्तु से आगे बढ़ाकर एक मनोरंजक परंपरा का हिस्सा बना देता है।
ऐसे मगों का इतिहास अठारहवीं शताब्दी के उत्तरार्ध, लगभग 1775 के आसपास तक जाता है, और उन्नीसवीं शताब्दी के अंत तक इनकी लोकप्रियता बनी रही। उस समय यह केवल हास्य या खिलवाड़ का साधन ही नहीं, बल्कि कुछ लोकमान्यताओं से भी जुड़ा हुआ था। कुछ परंपराओं में यह विश्वास प्रचलित था कि यदि बीयर में मेंढक या टोड दिखाई दे, तो उससे [[ज्वर]] दूर हो सकता है।<ref>{{Cite web |url=http://www2.epl.ca/InfoFile/EPLInfofileDetail.cfm?subject_detail=Mugs%2C%20Frog%2FToad%2FSurprise |title=Country Life, September 1983. |access-date=2016-02-06 |archive-date=2016-02-16 |archive-url=https://web.archive.org/web/20160216124057/http://www2.epl.ca/InfoFile/EPLInfofileDetail.cfm?subject_detail=Mugs%2C%20Frog%2FToad%2FSurprise |url-status=dead }}</ref> यद्यपि यह धारणा वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित नहीं है, फिर भी यह उन सांस्कृतिक विश्वासों और मानवीय कल्पनाओं की झलक अवश्य प्रस्तुत करती है, जिन्होंने ऐसे मगों को एक विशेष आकर्षण प्रदान किया।
===पहेली मग===
[[File:Fuddling cups.JPG|अंगूठा|बाएं|ईमानदार|फ़डलिंग कप। इन कपों में खोखले जोड़ होते हैं जिनकी मदद से इनके अंदर की सामग्री को बिना गिराए पिया जा सकता है।]]
पहेली मग एक ऐसा पेय पात्र है, जिसकी बनावट में चतुराई और कौतुक का अद्भुत समावेश होता है। इसे इस प्रकार निर्मित किया जाता है कि साधारण ढंग से इसका उपयोग करना संभव न हो, और पीने वाले को उसकी युक्ति समझने के लिए थोड़ी बुद्धि और धैर्य का सहारा लेना पड़े। उदाहरणतः, कुछ पज़ल मगों के किनारों पर अनेक सूक्ष्म छिद्र होते हैं, जिनके कारण सामान्य रूप से पेय ग्रहण करना असंभव हो जाता है। पहली दृष्टि में ऐसा प्रतीत होता है कि इन छिद्रों को हाथ से ढककर समस्या का समाधान किया जा सकता है, किंतु ऐसा करने पर पेय ऊपर की ओर स्थित अदृश्य छिद्रों से बाहर निकलने लगता है। इस पहेली का वास्तविक समाधान यह है कि किनारों के छिद्रों को उचित प्रकार से ढकते हुए, मग के खोखले हत्थे में बने एक गुप्त मार्ग से पेय ग्रहण किया जाए—यही इसकी चतुर संरचना का रहस्य है।<ref name=puzzle>{{cite news|url=http://ceramicstoday.com/articles/puzzle_mug.htm |title=In Their Cups – The Story of the English Puzzle Mug |author= डेलिया रॉबिन्सन |work=सेरामिक्स टुडे |url-status=unfit |archive-url=https://web.archive.org/web/20100103221715/http://ceramicstoday.com/articles/puzzle_mug.htm |archive-date= जनवरी 3, 2010 }}</ref>
[[File:Pythagorean cup sold in Crete.jpg|thumb|upright|एक पाइथागोरस कप]]
इसी श्रेणी में “फडलिंग कप्स” नामक एक और रोचक प्रकार मिलता है, जिसमें तीन अलग-अलग मग आपस में अपनी दीवारों और हत्थों के माध्यम से जुड़े होते हैं। इनकी भीतरी संरचना में ऐसे छिद्र बनाए जाते हैं, जो तरल के प्रवाह को नियंत्रित करते हैं। परिणामस्वरूप, इन मगों को एक निश्चित और सही क्रम में ही खाली किया जा सकता है; यदि क्रम का पालन न किया जाए, तो पेय अनपेक्षित रूप से बाहर निकल सकता है। इस प्रकार, यह केवल एक पेय पात्र नहीं, बल्कि एक मनोरंजक चुनौती बन जाता है।<ref name=puzzle/>
इसी प्रकार, “पाइथागोरस कप” एक विशिष्ट और शिक्षाप्रद पज़ल मग का उदाहरण है, जिसमें केंद्र में स्थित एक स्तंभ के भीतर एक सूक्ष्म [[दाबलंघिका|साइफन तंत्र]] छिपा होता है। जब तक कप में द्रव उस स्तंभ की ऊँचाई से नीचे रहता है, तब तक वह सुरक्षित रहता है; किंतु जैसे ही द्रव उस सीमा से ऊपर पहुँचता है, साइफन सक्रिय होकर संपूर्ण द्रव को कप के तले में बने छिद्र के माध्यम से बाहर निकाल देता है। यह संरचना केवल कौतुक ही नहीं उत्पन्न करती, बल्कि संयम और संतुलन का एक प्रतीकात्मक संदेश भी देती है—अधिकता अंततः हानि का कारण बन सकती है।
=== शेविंग मग और बाल्टी ===
[[File:ShavingMug1.jpg|अंगूठा |बाएं|वर्टिकल|शेविंग मग]]
19वीं शताब्दी के आसपास एक शेविंग बकेट और एक शेविंग बकेट विकसित किया गया था। शेविंग मग; शेविंग मग के लिए पहला पेटेंट 1867 का है।<ref name=smug>जॆ पॆ ब्रूक्स और जे मैकग्राडी "शेविंग मग का सुधार" जारी करने की तिथि: जुलाई 1867</ref> चूंकि कई घरों में गर्म पानी आम नहीं था, एक गर्म सूद प्रदान करने का तरीका एक बाल्टी या कप का उपयोग करना था।की तरह दिखती है एक [जिसमें एक विस्तृत टोंटी होती है जिसमें गर्म पानी डाला जाता है; यह वह जगह है जहां यह एक शेविंग मग से अलग होता है, जिसमें टोंटी नहीं होती है। शेविंग बाल्टी और कप दोनों में आमतौर पर एक हैंडल होता है, लेकिन कुछ में नहीं होता है। शेविंग कप अक्सर एक मानक कप की तरह दिखते हैं, हालांकि कुछ में एक अंतर्निर्मित ब्रश धारक भी होता है, इसलिए ब्रश सूड में नहीं बैठता है। क्यूब के आधुनिक संस्करण सीमित उत्पादन में हैं, आमतौर पर [[सिरेमिक्स| . द्वारा स्वतंत्र]] कुम्हार जो कम मात्रा में काम करते हैं।
[[चित्र:ShavingMug2.png|अंगूठाकार|शेविंग स्कटल, 1867 का पेटेंट।]]
बाल्टी या कप के शीर्ष पर एक साबुन धारक होता है। परंपरागत रूप से इसका उपयोग शेविंग साबुन (नरम या क्रीम साबुन के बजाय) के एक कठिन ब्लॉक के साथ किया जाता था और इसलिए तल पर जल निकासी छेद होते थे। बाद में बाल्टी और कप में छेद नहीं होते हैं और इसलिए हल्के साबुन और क्रीम के साथ इस्तेमाल किया जा सकता है। कुछ शक्तियों और कपों में तल पर संकेंद्रित वृत्त होते हैं, जिनमें थोड़ा पानी होता है और झाग बनने में मदद मिलती है।
उपयोग में, [[शेविंग ब्रश]] को चौड़े टोंटी में डुबोया जाता है, जिससे पानी और गर्मी मिलती है। साबुन का साबुन धारा में रखा जाता है। तब आवश्यक हो, फोम की एक परत उठाकर, ब्रश को साबुन के खिलाफ ले पाया और जोड़ा जा सकता है; अतिरिक्त पानी वापस बह जाता है। यह साबुन और पानी के संरक्षण की अनुमति देता है, जबकि लंबी दाढ़ी सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त गर्मी बरकरार रखता है।
===पज़ल कप===
[[File:Fuddling cups.JPG|अंगूठा|बाएं|ईमानदार|फडलिंग कप। कपों में खोखले अंतर्संबंध होते हैं जो सामग्री को बिना छलकने के पीने की अनुमति देते हैं।]]
एक पहेली कप एक ऐसा कप होता है जिसमें कुछ नौटंकी होती है जो सामान्य संचालन को रोकती है। एक उदाहरण रिम में कई छेद वाला एक कप है, जिसमें सामान्य रूप से जीना असंभव हो जाता है। यद्यपि यह कप के शरीर को पकड़ने के लिए आकर्षक है जो दृश्य छिद्रों को ढकता है और तरल को सामान्य तरीके से पीता है, यह कप के शीर्ष के पास छिपे हुए छिद्रों के माध्यम से तरल मिलेगा। इसका उपाय यह है कि रिम के छिद्रों को अपने हाथों से ढक दिया जाए, लेकिन ऊपर से नहीं, बल्कि खोखले हैंडल में "गुप्त" छेद से पियें।
नामक पहेली कप ''[[खिलौना कप|टॉय कप]]''कपों की दीवारों में आंतरिक छिद्रों को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि कपों को एक ही क्रम में खाली करना होगा या वे खर्च होंगे।
[[पायथागॉरियन कप]] (चित्र देखें) में एक छोटा [[सामान]] होता है जो कप के केंद्र में रखी एक छड़ में छिपा होता है। कांच में तरल होता है यदि यह तन की ऊंचाई से नीचे भरता है, लेकिन एक बार जब यह उस स्तर से ऊपर भर जाता है, तो यह सामान के माध्यम से सभी तरल को अपने आधार के एक छेद में बहा देता है।
=== हीट चेंजिंग मग ===
[[File: थर्मोक्रोमिक मग.वेबम|थंब|राइट|एक "मैजिक मग" में गर्म पानी डालने का वीडियो और उसके बाद का रंग |alt=एक काले मग में गर्म पानी डालना, लगभग 20 सेकंड में, अधिकांश मग का रंग सफेद में बदल जाता है, जिससे काले लोगों के चिह्नों का पता चलता है]]
[मग मैजिक] जो गर्मी को बदलते हैं, गर्मी के प्रति संवेदनशील होते हैं, या जब आप पीते हैं तो [[थर्मोक्रोमिज़्म]] का उपयोग अपनी स्थिति बदलने के लिए करते हैं। गर्म ड्रिंक। उनमें डाला। [[बेरोजगार दार्शनिक गिल्ड]] के एक लोकप्रिय मग में [[बॉब रॉस]] की एक छवि है। जब मग में एक गर्म तेल डाला जाता है, तो एक पेंटिंग सामने आती है।
== समग्र डिजाइन और कार्य ==
मग के अधिकांश डिजाइन थर्मल इन्सुलेशन के उद्देश्य से हैं: एक मग की मोटी दीवार, चाय के प्याले की पतली दीवारों की तुलना में, पेट को ठंडा होने या जल्दी गर्म होने से बचाने के लिए इसे इंसुलेट करती हैं। मग का तेल अक्सर सपाट नहीं होता है, लेकिन अवतल होता है या उस सतह के साथ थर्मल संपर्क को कम करने के लिए एक अतिरिक्त रिम होता है जिस पर मग रखा जाता है। ये विशेषताएं अक्सर सतह पर एक विशिष्ट गोलाकार दाग छोड़ती हैं। अंत में, एक मग हैंडल आपके हाथ को मग के गर्म पक्षों से दूर रखता है। हैंडल का छोटा क्रॉस सेक्शन तरल और हाथ के बीच गर्मी के प्रभाव को कम करता है। थर्मल इन्सुलेशन के इसी कारण से, मग अक्सर कम [[थर्मल चालकता]], जैसे [[मिट्टी के बर्तन]], [[बोन चाइना]], [[चीनी मिट्टी के बर्तन]], या कांच के साथ सामग्री से बने होते हैं।
== सजावट ==
[[चित्र:Thermochromic_mug.webm|दाएँ|पाठ=Hot water is poured into a black mug, over about 20 seconds most of the mug changes colour to white, revealing black logo markings|अंगूठाकार|मैजिक मग में गर्म पानी डालने के बाद होने वाल रंग परिवर्तन को दिखाने वाला वीडियो]]
एक सर्वव्यापी डेस्कटॉप आइटम के रूप में, मग का उपयोग अक्सर एक कला या विज्ञापन वस्तु के रूप में किया जाता है; कुछ मग पीने के बर्तनों की तुलना में अधिक सजावट हैं। प्राचीन काल में पारंपरिक रूप से कपों पर नक्काशी की जाती थी। यह कभी-कभी एक कप को असामान्य आकार में बदलने के लिए प्रयोग किया जाता है। हालांकि, सबसे लोकप्रिय सजावट तकनीक आज मग पर छपाई कर रही है, जो आमतौर पर निम्नलिखित तरीके से की जाती है: सिरेमिक पाउडर को चुने हुए रंग के रंगों और एक प्लास्टिसाइज़र के साथ मिलाया जाता है। फिर इसे पारंपरिक स्क्रीन प्रिंटिंग तकनीक का उपयोग करके जिलेटिनस पेपर पर मुद्रित किया जाता है, जो मिश्रण को एक महीन बुने हुए जाल के माध्यम से लागू करता है, जिसे एक फ्रेम पर फैलाया जाता है और वांछित आकार में मुखौटा किया जाता है। यह तकनीक एक पतली सजातीय परत पैदा करती है; हालांकि, यदि चिकनाई की आवश्यकता नहीं है, तो सिरेमिक मिश्रण को सीधे ब्रश से रंगा जाता है। एक और अधिक जटिल विकल्प यह है कि कागज पर एक फोटोग्राफिक इमल्शन के साथ कोट किया जाए, छवि की तस्वीर खींची जाए और फिर इमल्शन को पराबैंगनी प्रकाश से ठीक किया जाए।
सूखने के बाद, मुद्रित कागज, कैसे [[ट्रांसफर-प्रिंट|लिथो]] कहा जाता है, को अनिश्चित काल तक संग्रहीत किया जा सकता है। जब मग पर लिथोग्राफ लगाया जाता है, तो इसे पहले गर्म पानी में गर्म किया जाता है।
== भंडार==
एक लोकप्रिय तरीका कप का भंडार एक 'कप ट्री' पर होता है, एक लकड़ी या धातु की पोस्ट जो एक गोल आधार पर लगाई जाती है और उनके हैंडल से कप लटकने के लिए खूंटे से सुसज्जित होती है।<ref>जेन एंकोना, ब्रूस एंकोना "कप ट्री" अंक दिनांक: 4 दिसंबर 1990</ref> कप को लटकाने के लिए डिज़ाइन किए गए रैक भी हैं ताकि वे हाथ में हों। वे विशेष रूप से उच्च तरंगों वाली नावों पर उपयोगी होते हैं।
==गणित में ==
कप [[होमोमोर्फिज्म]] के [[टोपोलॉजी]] में सबसे लोकप्रिय उदाहरणों में से एक के रूप में कार्य करता है। दो वस्तुएं होमोमोर्फिक होती हैं यदि एक को बिना काटे या चिपकाए दूसरे में विकृत किया जा सकता है। इसलिए, टोपोलॉजी में, एक कप डोनट ([[टोरस]]) के बराबर (होमियोमॉर्फिक) होता है क्योंकि इसे बिना काटे, टूटे, ड्रिलिंग या ग्लूइंग के बिना निरंतर विरूपण द्वारा डोनट में बदला जा सकता है। एक अन्य टोपोलॉजिकल उदाहरण दो हैंडल वाला एक कप है, जो एक [[सरफेस जीनस-2|डबल टोरस]] के बराबर है - संख्या 8 जैसी दिखने वाली एक वस्तु। |date=1 जनवरी 2000}}</ref> बिना हैंडल वाला कप, यानी एक [[बाउल (कंटेनर)|कटोरा]] या [[बीकर (ग्लास)|बीकर] ], टोपोलॉजिकल रूप से एक के बराबर है [ [तश्तरी]], जो काफी स्पष्ट है जब एक कच्ची मिट्टी के कटोरे को चपटा किया जाता है एक [[कुम्हार का पहिया]]।
== गैलरी==
<gallery>
File:Kitchenware Steel Mug Rezowan.JPG|स्टील मग
File:Mug of tea, Smithfield Market, City of London.jpg|टी मग, यूके
File:Enamel mug.jpg|एनामेल मग
File:Lipton- mug-tea.jpg|चाय का गिलास मग
File:Frog or Surprise mug.JPG|[[मेंढक मग]]
File:Doughnut-shaped Coffee mug.jpg|डोना द्वारा आकार का मग
File:Wikipedia - filled with knowledge (beskuren).jpg|विकिपीडिया लोगों के साथ एक मग
File:Rosehage kopp cropped.jpg|[[मंगम्मा]] [[मूमिन मग|मूमिन-थीम्ड मग]] पर
File:Dinermug.jpg|थंब|ऑल्ट=एक ठेठ अमेरिकी मग|अमेरिकी ठेठ मग
File:Merchandising Coffee mug from band Dead Can Dance with 'DCD' logo - black.jpg|मग अक्सर [[व्यापारिक आइटम ]] के रूप में पॉप समूहों और कंपनियों द्वारा उपयोग किए जाते हैं, यहां बैंड [[डेड कैन डांस]]
</gallery>
==इन्हें भी देखें==
*[[कप]]
== सन्दर्भ ==
{{Reflist}}
[[श्रेणी:पीने के उपकरण]]
[[श्रेणी:चाय]]
[[श्रेणी:गर्म पेय]]
jpawiqsbjdnxxoq1xteelp9wqffshnx
6547781
6547777
2026-05-02T14:09:00Z
चाहर धर्मेंद्र
703114
सुधार किया गया
6547781
wikitext
text/x-wiki
{{db-badtrans}}
{{खराब अनुवाद|अंग्रेज़ी}}
[[चित्र:Mug_of_Tea.JPG|upright=1.35|अंगूठाकार|दुध वाली चाय का एक मग]]
मग एक प्रकार का [[कप]] होता है,{{sfn|Kronenfeld|1996|p=6}} जिसे विशेष रूप से [[कॉफी]], [[हॉट चॉकलेट|गरम चॉकलेट]] या [[चाय]] जैसे गर्म पेय पदार्थों के सेवन के लिए उपयोग किया जाता है। इसकी सबसे प्रमुख विशेषता इसका हैंडल होता है, जो इसे पकड़ने में सुविधा प्रदान करता है, विशेषकर तब जब पेय गरम हो। आकार की दृष्टि से, मग सामान्य कपों—जैसे चाय या कॉफी के पारंपरिक कप—की तुलना में अधिक [[तरल]] धारण करने में सक्षम होता है।
आमतौर पर एक मग की क्षमता लगभग 250 से 350 मिलीलीटर के बीच होती है,<ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=IZRDIcz6uEQC&q=usually+mug+holds+12+fluid+ounces|title=The Boat Galley Cookbook: 800 Everyday Recipes and Essential Tips for Cooking Aboard : 800 Everyday Recipes and Essential Tips for Cooking Aboard: 800 Everyday Recipes and Essential Tips for Cooking Aboard|last1=शियरलॉक|first1=कैरोलिन|last2=आयरन्स|first2=जेन|date=2012-09-14|publisher=मैकग्रा हिल प्रोफेशनल|isbn=9780071782364|access-date=2021-03-12|archive-date=2024-04-25|archive-url=https://web.archive.org/web/20240425165047/https://books.google.com/books?id=IZRDIcz6uEQC&q=usually+mug+holds+12+fluid+ounces|url-status=live}}</ref> जो इसे दैनिक उपयोग के लिए अत्यंत व्यावहारिक बनाती है। यदि आकार इससे भी बड़ा हो, तो ऐसे बर्तन को टैंकर्ड कहा जाता है। इस प्रकार, मग केवल एक साधारण बर्तन नहीं, बल्कि दैनिक जीवन की सहजता और आराम का एक अभिन्न हिस्सा है।
मग का आकार प्रायः सरल और उपयोगितावादी होता है—यह या तो सीधी, बेलनाकार रेखाओं वाला होता है अथवा हल्का घुमाव लिए हुए रूप में भी निर्मित किया जाता है। यद्यपि इसके आकार में विविधता संभव है, फिर भी इसकी मूल पहचान एक सुविधाजनक हैंडल से जुड़ी होती है, जो इसे पकड़ने में सहजता प्रदान करता है; इसी विशेषता के अभाव में इसे बीकर कहा जाता है। सामान्यतः मग के साथ तश्तरी नहीं होती, जो इसे अन्य पारंपरिक कपों से भिन्न बनाती है।<ref>{{cite encyclopedia |title=mug, n.1 |url=http://www.oed.com/view/Entry/123325 |encyclopedia=ओईडी ऑनलाइन |date=दिसंबर 2014 |publisher=ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस |quote=A drinking vessel, freq. cylindrical (and now usually with a handle), generally used without a saucer. |access-date=2015-03-06 |archive-date=2024-04-25 |archive-url=https://web.archive.org/web/20240425165036/https://www.oed.com/dictionary/mug_n1 |url-status=live }}</ref>
मग को [[पेय]] पदार्थों के सेवन का अपेक्षाकृत अनौपचारिक माध्यम माना जाता है, इसलिए इसका प्रयोग प्रायः घरेलू या सहज वातावरण में अधिक होता है, जबकि औपचारिक भोजन कक्षों में चाय या कॉफी के पारंपरिक कपों को प्राथमिकता दी जाती है। इसके अतिरिक्त, मग का एक विशेष रूप [[हजामत|शेविंग]] मग भी होता है, जिसका उपयोग गीली दाढ़ी बनाने की प्रक्रिया में सहायक के रूप में किया जाता है। इस प्रकार, मग अपनी सरलता और बहुउपयोगिता के कारण दैनिक जीवन में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है।
मग का विकास समय के साथ उसकी उपयोगिता और निर्माण सामग्री के अनुसार निरंतर परिवर्तित होता रहा है। प्राचीन काल में मग प्रायः [[लकड़ी]] को तराशकर या [[कुंभकारी|मिट्टी]] से बनाए जाते थे, जो उस समय उपलब्ध संसाधनों और शिल्पकला का प्रतिबिंब थे। आधुनिक युग में इनका निर्माण अधिक परिष्कृत सामग्रियों—जैसे बोन चाइना, अर्दनवेयर, [[पॉर्सिलेन]] और स्टोनवेयर—से किया जाने लगा है, जो न केवल आकर्षक होते हैं, बल्कि टिकाऊ भी होते हैं।
आकार और प्रयोजन के अनुसार कुछ बड़े मग, जो प्रायः धातु या मिट्टी से निर्मित होते हैं और विशेष रूप से पेय पदार्थ जैसे [[बियर]] के लिए उपयोग किए जाते हैं, टैंकर्ड कहलाते हैं। इसके अतिरिक्त, कुछ मग सुदृढ़ [[कांच]]—जैसे पाइरेक्स—से भी बनाए जाते हैं, जो ताप और झटकों के प्रति अधिक सहनशील होते हैं। हल्के वजन और टूट-फूट से बचाव के लिए [[मीनाकारी|एनामेल्ड]] धातु, [[प्लास्टिक]] या [[इस्पात]] जैसी सामग्रियों का उपयोग भी किया जाता है, विशेषकर बाहरी गतिविधियों जैसे [[कैंपिंग|शिविर-यात्रा]] में।
यात्रा के लिए विशेष रूप से बनाए गए ट्रैवल मग में ऊष्मा बनाए रखने की क्षमता होती है और इनमें छलकने से बचाने के लिए ढक्कन भी लगाया जाता है। सजावट की दृष्टि से, मग पर [[लोगो]], चित्र या कलात्मक आकृतियाँ अंकित करने के लिए [[आवरण मुद्रण|सिल्क-स्क्रीन मुद्रण]] या डिकल तकनीक का प्रयोग किया जाता है, जिन्हें पकाकर स्थायी रूप प्रदान किया जाता है। इस प्रकार, मग केवल एक साधारण बर्तन नहीं, बल्कि उपयोगिता, सौंदर्य और तकनीकी विकास का संगम है।
==सामान्य बनावट और कार्य==
[[File:Mug vs cup.jpg|thumb|एक मग और एक कप अगल-बगल रखे हुए हैं]]
मग के बनावट का एक प्रमुख उद्देश्य ऊष्मीय इन्सुलेशन सुनिश्चित करना होता है, जिससे उसमें रखा पेय अपेक्षाकृत अधिक समय तक अपने तापमान को बनाए रख सके। चाय के पारंपरिक कपों की पतली दीवारों की तुलना में मग की दीवारें मोटी होती हैं, जो ऊष्मा के आदान-प्रदान को धीमा करती हैं और पेय को जल्दी ठंडा या अत्यधिक गरम होने से बचाती हैं।
इसके अतिरिक्त, मग का आधार प्रायः पूर्णतः समतल नहीं होता, बल्कि हल्का अवतल या किनारीयुक्त बनाया जाता है। यह संरचना उस सतह के साथ प्रत्यक्ष संपर्क को कम करती है, जिस पर मग रखा जाता है, जिससे ऊष्मा का अपव्यय घटता है। इसी कारण अक्सर सतह पर एक विशिष्ट गोलाकार चिह्न भी दिखाई देता है, जो इस संरचनात्मक विशेषता का परिणाम होता है।
मग का हैंडल भी इसके ऊष्मीय गुणों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह हाथ को गरम सतह से दूर रखता है और उसके अपेक्षाकृत छोटे अनुप्रस्थ क्षेत्र के कारण ऊष्मा के प्रवाह को सीमित करता है, जिससे उपयोगकर्ता को पकड़ने में सुविधा और सुरक्षा दोनों मिलती हैं। इसी कारण, मग सामान्यतः ऐसी सामग्रियों—जैसे मिट्टी के बर्तन, बोन चाइना, [[पॉर्सिलेन]] या काँच—से बनाए जाते हैं,<ref>{{cite book|url=https://books.google.com/books?id=fJw0K1ZGY1kC&pg=PA98|page=98|title=The really useful science book: a framework of knowledge for primary teachers|author=स्टीव फैरो|publisher= रूटलेज |year=1999|isbn=0-7507-0983-9}}</ref><ref>{{cite book|url=https://books.google.com/books?id=esDW3xTKoLIC&pg=PA27|page=27|title=The handbook of evolutionary psychology|author=डेविड एम. बस|publisher=जॉन विली एंड संस.|year=2005|isbn=0-471-26403-2}}</ref> जिनकी [[ऊष्मा चालकता|ऊष्मीय चालकता]] कम होती है और जो ताप को नियंत्रित रखने में सहायक होती हैं।
===कपों की तुलना में अंतर===
मग और पारंपरिक कप के बीच का अंतर केवल आकार या बनावट तक सीमित नहीं है, बल्कि यह विभिन्न भाषाओं और संस्कृतियों में भी स्पष्ट रूप से परिलक्षित होता है। फ्रेंच, इतालवी, पोलिश, रूसी, जर्मन और अंग्रेज़ी जैसी अनेक भाषाओं में इन दोनों के लिए अलग-अलग शब्द प्रचलित हैं, जो इनके भिन्न उपयोग और सांस्कृतिक संदर्भों को दर्शाते हैं।
भाषाविद् अन्ना विर्ज़बिका के अनुसार, यह भिन्नता इनके कार्यात्मक अंतर से उत्पन्न होती है। पारंपरिक कप सामान्यतः औपचारिक परिवेश में मेज पर बैठकर पेय का आनंद लेने के लिए बनाए जाते हैं, जहाँ साज-सज्जा और शिष्टाचार का विशेष महत्व होता है। इसके विपरीत, मग अधिक अनौपचारिक और बहुउपयोगी होता है, जिसे किसी भी स्थान पर सहजता से उपयोग में लाया जा सकता है।{{sfn|Wierzbicka|1984|pp=214–216}}
==इतिहास==
===शुरुआती मग===
[[File:CMOC Treasures of Ancient China exhibit - large grey mug.jpg|upright|thumb|left|चीन के [[झेंगझोऊ]] में [[नवपाषाण युग|नवपाषाण काल]] के उत्तरार्ध ( लगभग 2500-2000 ईसा पूर्व) में कुम्हार के चाक पर बनाया गया एक मग।]]
मग का प्रारंभिक इतिहास यह दर्शाता है कि इसका उपयोग आज की अपेक्षा भिन्न उद्देश्यों के लिए किया जाता था। वर्तमान में जहाँ मग प्रायः गर्म पेय, दूध या शीतल पेयों से जुड़ा हुआ है, वहीं आरंभिक काल में इसका प्रमुख उपयोग [[बियर]] अथवा अन्य मादक पेयों के सेवन के लिए होता था। उस समय के मग आकार में भी अधिक बड़े होते थे, जो उनके उपयोग और सामाजिक परिवेश के अनुरूप थे। लकड़ी से बने प्रारंभिक मग संभवतः प्राचीन काष्ठ-शिल्प के आरंभिक दौर से ही प्रचलन में थे, किंतु समय के प्रभाव के कारण ऐसे अधिकांश नमूने आज सुरक्षित नहीं रह पाए हैं।<ref name="columbia">{{cite web|url=http://www.encyclopedia.com/doc/1E1-porcelai.html|title=Porcelain|publisher=कोलंबिया विश्वकोश छठा संस्करण. 2008|access-date=2008-06-27|archive-date=2008-08-21|archive-url=https://web.archive.org/web/20080821093621/http://www.encyclopedia.com/doc/1E1-porcelai.html|url-status=live}}</ref><ref name="G. J. Monson-Fitzjohn, B.Sc., F.R.Hist.S">{{cite book|url=http://www.nicks.com.au/index.aspx?link_id=76.623|title=Drinking Vessels of Bygone Days|author=जी. जे. मोनसन-फिट्ज़जॉन, बी.एससी., एफ.आर.एच.आई.एस.|url-status=dead|archive-url=https://web.archive.org/web/20100719162453/http://www.nicks.com.au/Index.aspx?link_id=76.623|archive-date=2010-07-19}}</ref>
मिट्टी के बर्तनों के विकास ने मग के निर्माण को एक नई दिशा दी। प्रारंभ में इन्हें [[कुंभकारी|हाथ से आकार]] दिया जाता था, परंतु कुम्हार का चाक के आविष्कार (लगभग 6500 से 3000 ईसा पूर्व के बीच) ने इस प्रक्रिया को अधिक सरल और परिष्कृत बना दिया। इस तकनीक के कारण बर्तनों में हैंडल जोड़ना भी सहज हो गया, जिससे आधुनिक स्वरूप के मग का विकास संभव हुआ। प्राचीन ग्रीस में 4000 से 5000 ईसा पूर्व के काल का एक सुसज्जित मिट्टी का मग प्राप्त हुआ है,<ref>{{cite web|url=http://www.ceramicstudies.me.uk/histx105.html|title=Ceramic Web Page Tutorials|website=Ceramicstudies.me.uk|access-date= नवंबर 16, 2012|archive-date= जून 5, 2023|archive-url=https://web.archive.org/web/20230605205500/http://www.ceramicstudies.me.uk/histx105.html|url-status=live}}</ref> जो उस युग की कलात्मकता और शिल्पकौशल का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करता है।
[[File:AnasaziMugs.jpeg|thumb|upright=1.1|[[कॉलोराडो|दक्षिण-पश्चिमी कोलोराडो]] से प्राप्त [[पुएब्लो कों के पूर्वज|पुएब्लो]] (अनासाज़ी) पूर्वजों के मग , जो 1000 से 1280 ईस्वी के बीच बनाए गए थे। इनके हैंडल पर की गई नक्काशी का अर्थ अभी तक अज्ञात है, लेकिन संभवतः इसका कोई कार्यात्मक महत्व नहीं है।]]
मग के विकासक्रम में प्रारंभिक मिट्टी के मगों की एक प्रमुख कमी उनकी अत्यधिक मोटी दीवारें थीं, जो पीने के लिए सुविधाजनक नहीं मानी जाती थीं। जैसे-जैसे [[धातुकार्य|धातु-कर्म]] की तकनीकों में प्रगति हुई, बर्तनों की दीवारों को अधिक पतला और सुडौल बनाया जाने लगा। लगभग 2000 ईसा पूर्व से [[कांसा|कांस्य]],<ref>{{cite web|url=http://www.thomaslayton.org.uk/joomla/index.php?option=com_content&task=view&id=26&Itemid=41|archive-url=https://web.archive.org/web/20201205022717/http://www.thomaslayton.org.uk/joomla/index.php?option=com_content&task=view&id=26&Itemid=41|url-status=dead|archive-date= दिसंबर 5, 2020|title=The Collection – Archaeology|website=Thomaslayton.org.uk|access-date= नवंबर 16, 2012}}</ref> [[चाँदी]], [[सोना]]<ref>{{cite web|url=http://www.visual-arts-cork.com/ancient-art/mycenean.htm|title=Mycenean Art|website=Visual-arts-cork.com|access-date=नवंबर 16, 2012|archive-date= मई 11, 2023|archive-url=https://web.archive.org/web/20230511213611/http://www.visual-arts-cork.com/ancient-art/mycenean.htm|url-status=live}}</ref> और यहाँ तक कि [[सीसा]]<ref>{{cite web|url=http://www.nicks.com.au/index.aspx?link_id=76.633|title=Lead drinking cup|website=Nicks.com.au|access-date=नवंबर 16, 2012|url-status=dead|archive-url=https://web.archive.org/web/20120927082915/http://www.nicks.com.au/index.aspx?link_id=76.633|archive-date= सितंबर 27, 2012}}</ref> जैसी धातुओं से भी मग निर्मित होने लगे। यद्यपि ये देखने में आकर्षक और टिकाऊ थे, फिर भी गर्म पेयों के साथ इनका उपयोग सहज नहीं था, क्योंकि धातु ऊष्मा का तीव्र संचार करती है।
मग के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ तब आया, जब [[चीनी जनवादी गणराज्य|चीन]] में लगभग 600 ईस्वी के आसपास [[पॉर्सिलेन|चीनी मिट्टी के बर्तनों]] का विकास हुआ। इस नवाचार ने पतली दीवारों वाले ऐसे मगों का निर्माण संभव बनाया, जो न केवल ठंडे, बल्कि गर्म पेयों के लिए भी उपयुक्त थे। यह परंपरा आज भी जारी है और आधुनिक मगों के स्वरूप में उसी विकास की छाप स्पष्ट दिखाई देती है।<ref name="columbia"/><ref name="G. J. Monson-Fitzjohn, B.Sc., F.R.Hist.S"/>
भाषाई दृष्टि से, “मग” शब्द का वर्तमान अर्थ में सबसे प्रारंभिक ज्ञात प्रयोग 1664 ईस्वी में मिलता है,<ref>{{cite web |title=Mug |url=https://www.merriam-webster.com/dictionary/mug#word-history |website=merriam-webster.com |publisher=मेरियम-वेबस्टर |access-date=30 जून 2025}}</ref> जो इस बर्तन के सांस्कृतिक और व्यावहारिक विकास की ऐतिहासिक यात्रा को भी रेखांकित करता है।
===विक्टर कॉफी मग===
[[द्वितीय विश्व युद्ध]] के दौरान [[अमेरिकी नौसेना|संयुक्त राज्य अमेरिका की नौसेना]] ने ऐसे कॉफी मग के निर्माण हेतु अमेरिकी कंपनियों से प्रस्ताव आमंत्रित किए, जो गिरने पर भी सुरक्षित रहें और जहाज़ों पर उपयोग के दौरान अत्यधिक टिकाऊ सिद्ध हों। कई प्रकार के डिज़ाइन प्रस्तुत किए गए, किंतु अंततः चयन [[विद्युतरोधी|उच्च-वोल्टेज पोर्सिलेन इन्सुलेटर]] निर्माता विक्टर इंसुलेटर द्वारा निर्मित एक विशेष डिज़ाइन का हुआ। उस समय युद्धकालीन परिस्थितियों में इन्सुलेटर की माँग घट गई थी, इसलिए कंपनी ने अपने कार्यों को बनाए रखने के लिए स्वच्छतापूर्ण बर्तनों के निर्माण की दिशा में कदम बढ़ाया।<ref name="Upstate">{{Cite web|url=https://exploringupstate.com/how-victor-changed-the-coffee-mug/|title=How the Victor Coffee Mug Changed the Way We Drink Coffee|last=क्लेमेंस|first=क्रिस|date= मार्च 6, 2016|website=एक्सप्लोरिंग अपस्टेट|language=en-US}}</ref>
विक्टर ने नौसेना के लिए एक विशिष्ट मग विकसित किया, जो बिना हैंडल के, सफेद चमकदार सतह वाला और मोटी दीवारों से युक्त था। यह डिज़ाइन अपनी मजबूती और उपयोगिता के कारण सैन्य बलों द्वारा अत्यंत सराहा गया। चूँकि इन मगों के निर्माण में वही पोर्सिलेन सामग्री प्रयुक्त हुई, जिसका उपयोग कंपनी अपने इन्सुलेटर बनाने में करती थी, इसलिए इनमें उत्कृष्ट ऊष्मा-रोधक गुण विद्यमान थे। इस प्रकार, युद्धकालीन आवश्यकताओं ने न केवल एक नए प्रकार के मग को जन्म दिया, बल्कि उसके व्यावहारिक और तकनीकी गुणों को भी परिष्कृत किया।<ref name="Upstate"/><ref name= cjow>{{cite web |last1=गिश|first1=एल्टन |title=Porcelain Insulator News |url=https://www.cjow.com/archive/article.php?month=2&a=02Porcelain%20Insulator%20News.htm&year=2004 |website=cjow.com |publisher=द वायर के क्राउन ज्वेल्स |date= फरवरी 2004}}</ref>
द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति के पश्चात विक्टर इंसुलेटर ने अपने उत्पादन को आंशिक रूप से सैनिटरीवेयर उत्पादों की ओर बनाए रखने का निर्णय लिया और अपने प्रसिद्ध मग का एक अधिक व्यावसायिक रूप से अनुकूल संस्करण प्रस्तुत किया। इस नए रूप में मग में सुविधाजनक हैंडल जोड़ा गया, उसका शरीर अपेक्षाकृत हल्का और पतला बनाया गया, तथा विभिन्न रंगों के विकल्प भी उपलब्ध कराए गए, जिससे यह आम उपभोक्ताओं के लिए अधिक आकर्षक बन गया।
इस सफल डिज़ाइन की लोकप्रियता इतनी बढ़ी कि इसकी नकल संयुक्त राज्य अमेरिका के भीतर ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अनेक निर्माताओं द्वारा बड़े पैमाने पर की जाने लगी।<ref name="Upstate"/> किंतु समय के साथ सस्ते और बड़े पैमाने पर उत्पादित [[चीनी जनवादी गणराज्य|चीनी]] निर्मित विकल्पों से कड़ी प्रतिस्पर्धा के कारण विक्टर को गंभीर आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा। परिणामस्वरूप, 1990 के दशक की शुरुआत में कंपनी को मग का उत्पादन बंद करना पड़ा।<ref name= cjow/>
आज, उत्पादन बंद होने के बाद भी विक्टर द्वारा निर्मित ये मग अपनी विशिष्ट गुणवत्ता और ऐतिहासिक महत्व के कारण संग्राहकों के बीच अत्यंत लोकप्रिय हो गए हैं।<ref>{{cite web |last1=डेलगाडो |first1=मिशेल |title=The Classic Diner Mug That's Disappearing |url=https://medium.com/@mdelgadia/the-classic-diner-mug-thats-disappearing-619c55935aa9 |website=medium.com |publisher= मीडियम |date= मई 24, 2017}}</ref> वे न केवल एक उपयोगी वस्तु के रूप में, बल्कि औद्योगिक इतिहास और डिज़ाइन विकास के प्रतीक के रूप में भी मूल्यवान माने जाते हैं।
==अन्य मग के प्रकार ==
===यात्रा मग===
[[File:travel mug.jpg|thumb|left|upright=.6|यात्रा मग]]
यात्रा मग का प्रचलन 1980 के दशक में बढ़ा, जब ऐसे बर्तनों की आवश्यकता महसूस हुई जो गर्म या ठंडे पेयों को सुरक्षित रूप से एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जा सकें। इन मगों का निर्माण इस प्रकार किया जाता है कि उनमें [[ऊष्मा रोधन|उत्कृष्ट ऊष्मीय इन्सुलेशन गुण]] हों, जिससे पेय लंबे समय तक अपने तापमान को बनाए रख सके। संरचना की दृष्टि से ये [[निर्वात फ्लास्क|वैक्यूम फ्लास्क]] के समान होते हैं—अर्थात् ये अच्छी तरह से इन्सुलेटेड और लगभग पूर्णतः बंद होते हैं, ताकि रिसाव या छलकाव की संभावना न्यूनतम रहे।<ref name=travel>मोरी कार्प "ट्रैवल मग" {{US patent|5249703}} जारी होने की तिथि: अक्टूबर 5, 1993</ref> फिर भी, इनके ढक्कन में एक छोटा छिद्र होता है, जिससे यात्रा के दौरान बिना खोले ही पेय का सेवन किया जा सके।
गर्म पेयों के ठंडा होने का प्रमुख कारण वाष्पीकरण होता है, इसलिए ट्रैवल मग में ढक्कन की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। यह वाष्प के बाहर निकलने को सीमित करता है और इस प्रकार पेय को अधिक समय तक गरम बनाए रखने में सहायक होता है, चाहे ढक्कन पतले प्लास्टिक का ही क्यों न हो।
इसके अतिरिक्त, कुछ मग ऐसे भी होते हैं जिनमें भीतरी और बाहरी दोहरी दीवारें होती हैं, परंतु उनके बीच वैक्यूम नहीं बनाया जाता। ऐसे बर्तनों को डबल वॉल मग कहा जाता है। इनमें भीतरी दीवार सामान्यतः स्टेनलेस स्टील की होती है, जबकि बाहरी परत स्टेनलेस स्टील, प्लास्टिक या अन्य सामग्रियों से निर्मित हो सकती है। यह संरचना भी कुछ हद तक ऊष्मा संरक्षण प्रदान करती है, यद्यपि वैक्यूम युक्त मग की तुलना में इसकी क्षमता अपेक्षाकृत कम होती है।
ड्राइविंग के दौरान उपयोग में आने वाला मग, जिसे प्रायः ऑटो मग या कम्यूटर मग कहा जाता है, केवल एक साधारण पात्र नहीं, बल्कि सुविधा, सुरक्षा और सूझबूझ का संतुलित रूप है। यह विशेष प्रकार का यात्रा मग इस प्रकार निर्मित होता है कि चलते वाहन में भी पेय का आनंद सहज और सुरक्षित बना रहे। इसके ऊपर लगा रिसाव-रोधी ढक्कन, जिसमें पीने के लिए एक छोटा सा छिद्र या नलिका होती है,<ref name="Jackson, Joe">{{cite web|author=जैक्सन, जो|title=Q: What's the Best Insulated Travel Mug? We tested five of the best. Here's how they stacked up.|date= दिसंबर 22, 2014|work=आउटसाइड|url=http://www.outsideonline.com/1786136/whats-best-insulated-travel-mug|access-date= दिसंबर 10, 2015|archive-date= दिसंबर 11, 2015|archive-url=https://web.archive.org/web/20151211031852/http://www.outsideonline.com/1786136/whats-best-insulated-travel-mug|url-status=live}}</ref> इस बात का ध्यान रखता है कि मार्ग की हलचल पेय को बाहर न छलकाए। साथ ही, इसका आधार प्रायः संकरा रखा जाता है, ताकि यह विभिन्न वाहनों में बने कप धारकों में दृढ़ता से स्थापित हो सके और अनचाही हलचल से बचा रहे।
ऐसे मग का मूल्यांकन केवल उसके रूप या आकार से नहीं, बल्कि उसके व्यावहारिक गुणों से किया जाता है। यह अपेक्षित है कि उसे एक हाथ से सरलता से खोला और बंद किया जा सके, जिससे चालक का ध्यान मार्ग से न भटके। उसमें भरण-सीमा का स्पष्ट संकेत हो, ताकि अधिक भराव के कारण होने वाले रिसाव से बचा जा सके। बिना हत्थे का स्वरूप इसे पकड़ने में अधिक सहज बनाता है, जिससे नियंत्रण बना रहता है। इसके अतिरिक्त, इसका विन्यास ऐसा होना चाहिए कि पेय ग्रहण करते समय चालक की दृष्टि मार्ग से विचलित न हो।<ref>{{cite news|work=कुक्स कंट्री|date= अक्टूबर 2011|title=Travel Mugs|url=http://www.cooksillustrated.com/equipment_reviews/1328-travel-mugs?extcode=MASCZ00L0&ref=search_results_1|access-date=2015-12-10|archive-date=2015-12-11|archive-url=https://web.archive.org/web/20151211023117/http://www.cooksillustrated.com/equipment_reviews/1328-travel-mugs?extcode=MASCZ00L0&ref=search_results_1|url-status=live}}</ref><ref name="Jackson, Joe"/><ref>{{cite news|work=अमेरिकाज़ टेस्ट किचन (सीज़न 8, एपिसोड 22)]]|title=Coffeehouse Treats: Equipment Corner/Gadget Guru: Commuter Coffee Mugs|date=2008}}</ref> अंततः, यह विभिन्न प्रकार के कप धारकों में स्थिरता से बैठ सके—यही इसकी उपयोगिता और विश्वसनीयता की वास्तविक कसौटी है।
===बियर मग===
[[File:Humpen.jpg|thumb|upright|एक सामान्य आधा लीटर का जर्मन बीयर मग]]
बीयर स्टाइन, परंपरा और शिल्पकला का एक विशिष्ट संगम, वास्तव में पारंपरिक बीयर मगों का वह रूप है जो प्रायः स्टोनवेयर मिट्टी से निर्मित होता है और ऐतिहासिक रूप से [[जर्मनी]] से जुड़ा हुआ माना जाता है। “स्टाइन” शब्द का अंग्रेज़ी में प्रचलन उन्नीसवीं शताब्दी के मध्य, लगभग 1855 के आसपास, [[जर्मन भाषा|जर्मन]] शब्द से रूपांतरित होकर हुआ;<ref name="mw">{{cite web|url=http://www.merriam-webster.com/dictionary/stein|title=Definition of STEIN|website=www.merriam-webster.com|date=5 सितम्बर 2023 }}</ref> किंतु रोचक तथ्य यह है कि जर्मनी में स्वयं इस शब्द का स्वतंत्र रूप से पेय पात्र के अर्थ में सामान्यतः उपयोग नहीं किया जाता। वहाँ इसके स्थान पर “क्रुग”, “हम्पेन” या “सीडेल” जैसे शब्द अधिक प्रचलित हैं, जो इन पात्रों की विविध आकृतियों और उपयोगों को अधिक सटीक रूप से व्यक्त करते हैं।
आधुनिक बीयर मग, जो इस परंपरा के उत्तराधिकारी माने जा सकते हैं, प्रायः आधा [[लीटर]] या एक लीटर की मानक धारिता में उपलब्ध होते हैं। इनके निर्माण में उपयोगिता और सौंदर्य का संतुलन स्पष्ट दिखाई देता है—मजबूत संरचना के साथ-साथ इनमें प्रायः धातु से निर्मित [[कब्ज़ा|कब्जेदार ढक्कन]] लगाए जाते हैं, जो स्वच्छता और संरक्षण दोनों की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण होते हैं। इसके अतिरिक्त, इन मगों की सतह पर उकेरे गए जर्मन [[राज्यचिह्न|प्रतीक-चिह्न]], ऐतिहासिक दृश्य या पारंपरिक कलात्मक आकृतियाँ इन्हें केवल पेय पात्र नहीं, बल्कि सांस्कृतिक विरासत के जीवंत प्रतीक के रूप में स्थापित करती हैं।
===टिकी मग===
[[File: Tiki7.jpg|अंगूठा|ईमानदार|टिकी मग]]
टिकी मग की उत्पत्ति बीसवीं शताब्दी के मध्य में उन उष्णकटिबंधीय वातावरण से प्रेरित भोजनालयों और विशेष पेय स्थलों में हुई, जहाँ वातावरण, सजावट और परोसे जाने वाले पेय—तीनों में एक विशिष्ट विदेशी आकर्षण रचा-बसा रहता था। “टिकी मग” वस्तुतः एक व्यापक और सामान्य संज्ञा है, जिसका उपयोग उन मूर्तिकला-सदृश पेय पात्रों के लिए किया जाता है, जिन पर [[मॅलानिशिया]], [[माइक्रोनीशिया]] अथवा [[पोलीनेशिया]] की सांस्कृतिक छवियों, प्रतीकों और आकृतियों का कलात्मक निरूपण किया गया होता है। समय के साथ इसका दायरा और भी विस्तृत हुआ है, और अब यह शब्द किसी भी ऐसे पात्र के लिए प्रयुक्त होने लगा है, जो उष्णकटिबंधीय परिवेश, समुद्री जीवन या सर्फिंग संस्कृति से संबंधित सौंदर्य-बोध को अभिव्यक्त करता हो।<ref>{{cite book|title=Tiki Mugs: Cult Artifacts of Polynesian Pop|author1=स्ट्रॉन्गमैन, जे |author2=वेस्टलैंड, होल्डन |publisher=कोरेरो बुक्स|year=2008|isbn=978-0-9553398-1-3}}</ref>
ये मग केवल उपयोग की वस्तु भर नहीं, बल्कि स्मृतियों और अनुभवों के संवाहक भी बन जाते हैं। प्रायः इन्हें स्मृति-चिह्न के रूप में बेचा जाता है, जिससे ये किसी स्थान, अनुभव या संस्कृति का प्रतीकात्मक प्रतिनिधित्व करने लगते हैं। यही कारण है कि अनेक लोग इन्हें संग्रहणीय वस्तुओं के रूप में संजोकर रखते हैं—जहाँ प्रत्येक टिकी मग अपने भीतर एक विशिष्ट कथा, सौंदर्य और सांस्कृतिक स्पर्श समेटे होता है।
===मनोरंजन मग===
व्हिसल मग, जिसे हबल-बबल के नाम से भी जाना जाता है, एक मनोरंजक और कौतुकपूर्ण पेय पात्र है, जो अपनी विशिष्ट बनावट के कारण साधारण मगों से अलग पहचान रखता है। इसकी संरचना में एक खोखला हत्था होता है, जिसे इस प्रकार निर्मित किया जाता है कि उसमें से हवा प्रवाहित करने पर सीटी जैसी ध्वनि उत्पन्न हो सके। यही विशेषता इसे केवल उपयोगी वस्तु न बनाकर एक खेल-भावना से जुड़ा अनुभव भी प्रदान करती है।
इस मग की ध्वनि उसकी अवस्था के अनुसार परिवर्तित होती है—जब यह खाली होता है, तब उससे एक सरल, एकल स्वर सुनाई देता है; किंतु जैसे ही इसमें द्रव भरा जाता है, ध्वनि का स्वरूप बदलकर अधिक मधुर, झंकारयुक्त और चहचहाहट जैसी जटिल ध्वनियों में परिवर्तित हो जाता है।<ref name=puzzle/>
===मेंढक मग===
मेंढक मग, जिसे सरप्राइज़ मग भी कहा जाता है, विनोद और आश्चर्य की भावना से निर्मित एक विशिष्ट पेय पात्र है। इसका रूप साधारण प्रतीत होता है, किंतु जैसे ही पेय धीरे-धीरे समाप्त होता है, उसके भीतर छिपा एक छोटा सिरेमिक जीव—अक्सर मेंढक—अचानक प्रकट होकर पीने वाले को चकित कर देता है। यही अप्रत्याशित अनुभव इसे मात्र उपयोगी वस्तु से आगे बढ़ाकर एक मनोरंजक परंपरा का हिस्सा बना देता है।
ऐसे मगों का इतिहास अठारहवीं शताब्दी के उत्तरार्ध, लगभग 1775 के आसपास तक जाता है, और उन्नीसवीं शताब्दी के अंत तक इनकी लोकप्रियता बनी रही। उस समय यह केवल हास्य या खिलवाड़ का साधन ही नहीं, बल्कि कुछ लोकमान्यताओं से भी जुड़ा हुआ था। कुछ परंपराओं में यह विश्वास प्रचलित था कि यदि बीयर में मेंढक या टोड दिखाई दे, तो उससे [[ज्वर]] दूर हो सकता है।<ref>{{Cite web |url=http://www2.epl.ca/InfoFile/EPLInfofileDetail.cfm?subject_detail=Mugs%2C%20Frog%2FToad%2FSurprise |title=Country Life, September 1983. |access-date=2016-02-06 |archive-date=2016-02-16 |archive-url=https://web.archive.org/web/20160216124057/http://www2.epl.ca/InfoFile/EPLInfofileDetail.cfm?subject_detail=Mugs%2C%20Frog%2FToad%2FSurprise |url-status=dead }}</ref> यद्यपि यह धारणा वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित नहीं है, फिर भी यह उन सांस्कृतिक विश्वासों और मानवीय कल्पनाओं की झलक अवश्य प्रस्तुत करती है, जिन्होंने ऐसे मगों को एक विशेष आकर्षण प्रदान किया।
===पहेली मग===
[[File:Fuddling cups.JPG|अंगूठा|बाएं|ईमानदार|फ़डलिंग कप। इन कपों में खोखले जोड़ होते हैं जिनकी मदद से इनके अंदर की सामग्री को बिना गिराए पिया जा सकता है।]]
पहेली मग एक ऐसा पेय पात्र है, जिसकी बनावट में चतुराई और कौतुक का अद्भुत समावेश होता है। इसे इस प्रकार निर्मित किया जाता है कि साधारण ढंग से इसका उपयोग करना संभव न हो, और पीने वाले को उसकी युक्ति समझने के लिए थोड़ी बुद्धि और धैर्य का सहारा लेना पड़े। उदाहरणतः, कुछ पज़ल मगों के किनारों पर अनेक सूक्ष्म छिद्र होते हैं, जिनके कारण सामान्य रूप से पेय ग्रहण करना असंभव हो जाता है। पहली दृष्टि में ऐसा प्रतीत होता है कि इन छिद्रों को हाथ से ढककर समस्या का समाधान किया जा सकता है, किंतु ऐसा करने पर पेय ऊपर की ओर स्थित अदृश्य छिद्रों से बाहर निकलने लगता है। इस पहेली का वास्तविक समाधान यह है कि किनारों के छिद्रों को उचित प्रकार से ढकते हुए, मग के खोखले हत्थे में बने एक गुप्त मार्ग से पेय ग्रहण किया जाए—यही इसकी चतुर संरचना का रहस्य है।<ref name=puzzle>{{cite news|url=http://ceramicstoday.com/articles/puzzle_mug.htm |title=In Their Cups – The Story of the English Puzzle Mug |author= डेलिया रॉबिन्सन |work=सेरामिक्स टुडे |url-status=unfit |archive-url=https://web.archive.org/web/20100103221715/http://ceramicstoday.com/articles/puzzle_mug.htm |archive-date= जनवरी 3, 2010 }}</ref>
[[File:Pythagorean cup sold in Crete.jpg|thumb|upright|एक पाइथागोरस कप]]
इसी श्रेणी में “फडलिंग कप्स” नामक एक और रोचक प्रकार मिलता है, जिसमें तीन अलग-अलग मग आपस में अपनी दीवारों और हत्थों के माध्यम से जुड़े होते हैं। इनकी भीतरी संरचना में ऐसे छिद्र बनाए जाते हैं, जो तरल के प्रवाह को नियंत्रित करते हैं। परिणामस्वरूप, इन मगों को एक निश्चित और सही क्रम में ही खाली किया जा सकता है; यदि क्रम का पालन न किया जाए, तो पेय अनपेक्षित रूप से बाहर निकल सकता है। इस प्रकार, यह केवल एक पेय पात्र नहीं, बल्कि एक मनोरंजक चुनौती बन जाता है।<ref name=puzzle/>
इसी प्रकार, “पाइथागोरस कप” एक विशिष्ट और शिक्षाप्रद पज़ल मग का उदाहरण है, जिसमें केंद्र में स्थित एक स्तंभ के भीतर एक सूक्ष्म [[दाबलंघिका|साइफन तंत्र]] छिपा होता है। जब तक कप में द्रव उस स्तंभ की ऊँचाई से नीचे रहता है, तब तक वह सुरक्षित रहता है; किंतु जैसे ही द्रव उस सीमा से ऊपर पहुँचता है, साइफन सक्रिय होकर संपूर्ण द्रव को कप के तले में बने छिद्र के माध्यम से बाहर निकाल देता है। यह संरचना केवल कौतुक ही नहीं उत्पन्न करती, बल्कि संयम और संतुलन का एक प्रतीकात्मक संदेश भी देती है—अधिकता अंततः हानि का कारण बन सकती है।
===तापमान बदलने वाले मग===
[[चित्र:Thermochromic_mug.webm|दाएँ|पाठ=Hot water is poured into a black mug, over about 20 seconds most of the mug changes colour to white, revealing black logo markings|अंगूठाकार|एक "जादुई मग" में गर्म पानी डालने और उसके बाद रंग में होने वाले परिवर्तन का वीडियो]]
ऊष्मा-परिवर्तनकारी, ऊष्मा-संवेदनशील अथवा तथाकथित “जादुई” मग ऐसे विशेष पेय पात्र होते हैं, जो तापमान में परिवर्तन के साथ अपना रूप और दृश्य स्वरूप बदल लेते हैं। यह अद्भुत परिवर्तन थर्मोक्रोमिज़्म नामक गुण के कारण संभव होता है, जिसमें ताप के प्रभाव से रंग अथवा चित्र क्रमशः प्रकट या लुप्त होने लगते हैं। जब इन मगों में गर्म पेय डाला जाता है, तो उनकी सतह पर छिपे हुए चित्र, संदेश या रंग धीरे-धीरे उभर आते हैं, मानो कोई रहस्य अचानक सजीव हो उठा हो।
इन मगों की यही विशेषता उन्हें केवल उपयोगी वस्तु तक सीमित नहीं रखती, बल्कि एक आकर्षक अनुभव का माध्यम भी बना देती है। ठंडा होने पर उनका स्वरूप पुनः बदल जाता है, जिससे यह परिवर्तनशीलता एक निरंतर दृश्य कौतुक का आभास कराती है।
=== शेविंग मग और बाल्टी ===
[[File:ShavingMug1.jpg|अंगूठा |बाएं|वर्टिकल|शेविंग मग]]
19वीं शताब्दी के आसपास एक शेविंग बकेट और एक शेविंग बकेट विकसित किया गया था। शेविंग मग; शेविंग मग के लिए पहला पेटेंट 1867 का है।<ref name=smug>जॆ पॆ ब्रूक्स और जे मैकग्राडी "शेविंग मग का सुधार" जारी करने की तिथि: जुलाई 1867</ref> चूंकि कई घरों में गर्म पानी आम नहीं था, एक गर्म सूद प्रदान करने का तरीका एक बाल्टी या कप का उपयोग करना था।की तरह दिखती है एक [जिसमें एक विस्तृत टोंटी होती है जिसमें गर्म पानी डाला जाता है; यह वह जगह है जहां यह एक शेविंग मग से अलग होता है, जिसमें टोंटी नहीं होती है। शेविंग बाल्टी और कप दोनों में आमतौर पर एक हैंडल होता है, लेकिन कुछ में नहीं होता है। शेविंग कप अक्सर एक मानक कप की तरह दिखते हैं, हालांकि कुछ में एक अंतर्निर्मित ब्रश धारक भी होता है, इसलिए ब्रश सूड में नहीं बैठता है। क्यूब के आधुनिक संस्करण सीमित उत्पादन में हैं, आमतौर पर [[सिरेमिक्स| . द्वारा स्वतंत्र]] कुम्हार जो कम मात्रा में काम करते हैं।
[[चित्र:ShavingMug2.png|अंगूठाकार|शेविंग स्कटल, 1867 का पेटेंट।]]
बाल्टी या कप के शीर्ष पर एक साबुन धारक होता है। परंपरागत रूप से इसका उपयोग शेविंग साबुन (नरम या क्रीम साबुन के बजाय) के एक कठिन ब्लॉक के साथ किया जाता था और इसलिए तल पर जल निकासी छेद होते थे। बाद में बाल्टी और कप में छेद नहीं होते हैं और इसलिए हल्के साबुन और क्रीम के साथ इस्तेमाल किया जा सकता है। कुछ शक्तियों और कपों में तल पर संकेंद्रित वृत्त होते हैं, जिनमें थोड़ा पानी होता है और झाग बनने में मदद मिलती है।
उपयोग में, [[शेविंग ब्रश]] को चौड़े टोंटी में डुबोया जाता है, जिससे पानी और गर्मी मिलती है। साबुन का साबुन धारा में रखा जाता है। तब आवश्यक हो, फोम की एक परत उठाकर, ब्रश को साबुन के खिलाफ ले पाया और जोड़ा जा सकता है; अतिरिक्त पानी वापस बह जाता है। यह साबुन और पानी के संरक्षण की अनुमति देता है, जबकि लंबी दाढ़ी सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त गर्मी बरकरार रखता है।
== समग्र डिजाइन और कार्य ==
मग के अधिकांश डिजाइन थर्मल इन्सुलेशन के उद्देश्य से हैं: एक मग की मोटी दीवार, चाय के प्याले की पतली दीवारों की तुलना में, पेट को ठंडा होने या जल्दी गर्म होने से बचाने के लिए इसे इंसुलेट करती हैं। मग का तेल अक्सर सपाट नहीं होता है, लेकिन अवतल होता है या उस सतह के साथ थर्मल संपर्क को कम करने के लिए एक अतिरिक्त रिम होता है जिस पर मग रखा जाता है। ये विशेषताएं अक्सर सतह पर एक विशिष्ट गोलाकार दाग छोड़ती हैं। अंत में, एक मग हैंडल आपके हाथ को मग के गर्म पक्षों से दूर रखता है। हैंडल का छोटा क्रॉस सेक्शन तरल और हाथ के बीच गर्मी के प्रभाव को कम करता है। थर्मल इन्सुलेशन के इसी कारण से, मग अक्सर कम [[थर्मल चालकता]], जैसे [[मिट्टी के बर्तन]], [[बोन चाइना]], [[चीनी मिट्टी के बर्तन]], या कांच के साथ सामग्री से बने होते हैं।
== सजावट ==
एक सर्वव्यापी डेस्कटॉप आइटम के रूप में, मग का उपयोग अक्सर एक कला या विज्ञापन वस्तु के रूप में किया जाता है; कुछ मग पीने के बर्तनों की तुलना में अधिक सजावट हैं। प्राचीन काल में पारंपरिक रूप से कपों पर नक्काशी की जाती थी। यह कभी-कभी एक कप को असामान्य आकार में बदलने के लिए प्रयोग किया जाता है। हालांकि, सबसे लोकप्रिय सजावट तकनीक आज मग पर छपाई कर रही है, जो आमतौर पर निम्नलिखित तरीके से की जाती है: सिरेमिक पाउडर को चुने हुए रंग के रंगों और एक प्लास्टिसाइज़र के साथ मिलाया जाता है। फिर इसे पारंपरिक स्क्रीन प्रिंटिंग तकनीक का उपयोग करके जिलेटिनस पेपर पर मुद्रित किया जाता है, जो मिश्रण को एक महीन बुने हुए जाल के माध्यम से लागू करता है, जिसे एक फ्रेम पर फैलाया जाता है और वांछित आकार में मुखौटा किया जाता है। यह तकनीक एक पतली सजातीय परत पैदा करती है; हालांकि, यदि चिकनाई की आवश्यकता नहीं है, तो सिरेमिक मिश्रण को सीधे ब्रश से रंगा जाता है। एक और अधिक जटिल विकल्प यह है कि कागज पर एक फोटोग्राफिक इमल्शन के साथ कोट किया जाए, छवि की तस्वीर खींची जाए और फिर इमल्शन को पराबैंगनी प्रकाश से ठीक किया जाए।
सूखने के बाद, मुद्रित कागज, कैसे [[ट्रांसफर-प्रिंट|लिथो]] कहा जाता है, को अनिश्चित काल तक संग्रहीत किया जा सकता है। जब मग पर लिथोग्राफ लगाया जाता है, तो इसे पहले गर्म पानी में गर्म किया जाता है।
== भंडार==
एक लोकप्रिय तरीका कप का भंडार एक 'कप ट्री' पर होता है, एक लकड़ी या धातु की पोस्ट जो एक गोल आधार पर लगाई जाती है और उनके हैंडल से कप लटकने के लिए खूंटे से सुसज्जित होती है।<ref>जेन एंकोना, ब्रूस एंकोना "कप ट्री" अंक दिनांक: 4 दिसंबर 1990</ref> कप को लटकाने के लिए डिज़ाइन किए गए रैक भी हैं ताकि वे हाथ में हों। वे विशेष रूप से उच्च तरंगों वाली नावों पर उपयोगी होते हैं।
==गणित में ==
कप [[होमोमोर्फिज्म]] के [[टोपोलॉजी]] में सबसे लोकप्रिय उदाहरणों में से एक के रूप में कार्य करता है। दो वस्तुएं होमोमोर्फिक होती हैं यदि एक को बिना काटे या चिपकाए दूसरे में विकृत किया जा सकता है। इसलिए, टोपोलॉजी में, एक कप डोनट ([[टोरस]]) के बराबर (होमियोमॉर्फिक) होता है क्योंकि इसे बिना काटे, टूटे, ड्रिलिंग या ग्लूइंग के बिना निरंतर विरूपण द्वारा डोनट में बदला जा सकता है। एक अन्य टोपोलॉजिकल उदाहरण दो हैंडल वाला एक कप है, जो एक [[सरफेस जीनस-2|डबल टोरस]] के बराबर है - संख्या 8 जैसी दिखने वाली एक वस्तु। |date=1 जनवरी 2000}}</ref> बिना हैंडल वाला कप, यानी एक [[बाउल (कंटेनर)|कटोरा]] या [[बीकर (ग्लास)|बीकर] ], टोपोलॉजिकल रूप से एक के बराबर है [ [तश्तरी]], जो काफी स्पष्ट है जब एक कच्ची मिट्टी के कटोरे को चपटा किया जाता है एक [[कुम्हार का पहिया]]।
== गैलरी==
<gallery>
File:Kitchenware Steel Mug Rezowan.JPG|स्टील मग
File:Mug of tea, Smithfield Market, City of London.jpg|टी मग, यूके
File:Enamel mug.jpg|एनामेल मग
File:Lipton- mug-tea.jpg|चाय का गिलास मग
File:Frog or Surprise mug.JPG|[[मेंढक मग]]
File:Doughnut-shaped Coffee mug.jpg|डोना द्वारा आकार का मग
File:Wikipedia - filled with knowledge (beskuren).jpg|विकिपीडिया लोगों के साथ एक मग
File:Rosehage kopp cropped.jpg|[[मंगम्मा]] [[मूमिन मग|मूमिन-थीम्ड मग]] पर
File:Dinermug.jpg|थंब|ऑल्ट=एक ठेठ अमेरिकी मग|अमेरिकी ठेठ मग
File:Merchandising Coffee mug from band Dead Can Dance with 'DCD' logo - black.jpg|मग अक्सर [[व्यापारिक आइटम ]] के रूप में पॉप समूहों और कंपनियों द्वारा उपयोग किए जाते हैं, यहां बैंड [[डेड कैन डांस]]
</gallery>
==इन्हें भी देखें==
*[[कप]]
== सन्दर्भ ==
{{Reflist}}
[[श्रेणी:पीने के उपकरण]]
[[श्रेणी:चाय]]
[[श्रेणी:गर्म पेय]]
4cflolq5u6df7v1onvkgv39pcqgdpsv
6547785
6547781
2026-05-02T14:22:55Z
चाहर धर्मेंद्र
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सुधार किया गया
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wikitext
text/x-wiki
{{db-badtrans}}
{{खराब अनुवाद|अंग्रेज़ी}}
[[चित्र:Mug_of_Tea.JPG|upright=1.35|अंगूठाकार|दुध वाली चाय का एक मग]]
मग एक प्रकार का [[कप]] होता है,{{sfn|Kronenfeld|1996|p=6}} जिसे विशेष रूप से [[कॉफी]], [[हॉट चॉकलेट|गरम चॉकलेट]] या [[चाय]] जैसे गर्म पेय पदार्थों के सेवन के लिए उपयोग किया जाता है। इसकी सबसे प्रमुख विशेषता इसका हैंडल होता है, जो इसे पकड़ने में सुविधा प्रदान करता है, विशेषकर तब जब पेय गरम हो। आकार की दृष्टि से, मग सामान्य कपों—जैसे चाय या कॉफी के पारंपरिक कप—की तुलना में अधिक [[तरल]] धारण करने में सक्षम होता है।
आमतौर पर एक मग की क्षमता लगभग 250 से 350 मिलीलीटर के बीच होती है,<ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=IZRDIcz6uEQC&q=usually+mug+holds+12+fluid+ounces|title=The Boat Galley Cookbook: 800 Everyday Recipes and Essential Tips for Cooking Aboard : 800 Everyday Recipes and Essential Tips for Cooking Aboard: 800 Everyday Recipes and Essential Tips for Cooking Aboard|last1=शियरलॉक|first1=कैरोलिन|last2=आयरन्स|first2=जेन|date=2012-09-14|publisher=मैकग्रा हिल प्रोफेशनल|isbn=9780071782364|access-date=2021-03-12|archive-date=2024-04-25|archive-url=https://web.archive.org/web/20240425165047/https://books.google.com/books?id=IZRDIcz6uEQC&q=usually+mug+holds+12+fluid+ounces|url-status=live}}</ref> जो इसे दैनिक उपयोग के लिए अत्यंत व्यावहारिक बनाती है। यदि आकार इससे भी बड़ा हो, तो ऐसे बर्तन को टैंकर्ड कहा जाता है। इस प्रकार, मग केवल एक साधारण बर्तन नहीं, बल्कि दैनिक जीवन की सहजता और आराम का एक अभिन्न हिस्सा है।
मग का आकार प्रायः सरल और उपयोगितावादी होता है—यह या तो सीधी, बेलनाकार रेखाओं वाला होता है अथवा हल्का घुमाव लिए हुए रूप में भी निर्मित किया जाता है। यद्यपि इसके आकार में विविधता संभव है, फिर भी इसकी मूल पहचान एक सुविधाजनक हैंडल से जुड़ी होती है, जो इसे पकड़ने में सहजता प्रदान करता है; इसी विशेषता के अभाव में इसे बीकर कहा जाता है। सामान्यतः मग के साथ तश्तरी नहीं होती, जो इसे अन्य पारंपरिक कपों से भिन्न बनाती है।<ref>{{cite encyclopedia |title=mug, n.1 |url=http://www.oed.com/view/Entry/123325 |encyclopedia=ओईडी ऑनलाइन |date=दिसंबर 2014 |publisher=ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस |quote=A drinking vessel, freq. cylindrical (and now usually with a handle), generally used without a saucer. |access-date=2015-03-06 |archive-date=2024-04-25 |archive-url=https://web.archive.org/web/20240425165036/https://www.oed.com/dictionary/mug_n1 |url-status=live }}</ref>
मग को [[पेय]] पदार्थों के सेवन का अपेक्षाकृत अनौपचारिक माध्यम माना जाता है, इसलिए इसका प्रयोग प्रायः घरेलू या सहज वातावरण में अधिक होता है, जबकि औपचारिक भोजन कक्षों में चाय या कॉफी के पारंपरिक कपों को प्राथमिकता दी जाती है। इसके अतिरिक्त, मग का एक विशेष रूप [[हजामत|शेविंग]] मग भी होता है, जिसका उपयोग गीली दाढ़ी बनाने की प्रक्रिया में सहायक के रूप में किया जाता है। इस प्रकार, मग अपनी सरलता और बहुउपयोगिता के कारण दैनिक जीवन में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है।
मग का विकास समय के साथ उसकी उपयोगिता और निर्माण सामग्री के अनुसार निरंतर परिवर्तित होता रहा है। प्राचीन काल में मग प्रायः [[लकड़ी]] को तराशकर या [[कुंभकारी|मिट्टी]] से बनाए जाते थे, जो उस समय उपलब्ध संसाधनों और शिल्पकला का प्रतिबिंब थे। आधुनिक युग में इनका निर्माण अधिक परिष्कृत सामग्रियों—जैसे बोन चाइना, अर्दनवेयर, [[पॉर्सिलेन]] और स्टोनवेयर—से किया जाने लगा है, जो न केवल आकर्षक होते हैं, बल्कि टिकाऊ भी होते हैं।
आकार और प्रयोजन के अनुसार कुछ बड़े मग, जो प्रायः धातु या मिट्टी से निर्मित होते हैं और विशेष रूप से पेय पदार्थ जैसे [[बियर]] के लिए उपयोग किए जाते हैं, टैंकर्ड कहलाते हैं। इसके अतिरिक्त, कुछ मग सुदृढ़ [[कांच]]—जैसे पाइरेक्स—से भी बनाए जाते हैं, जो ताप और झटकों के प्रति अधिक सहनशील होते हैं। हल्के वजन और टूट-फूट से बचाव के लिए [[मीनाकारी|एनामेल्ड]] धातु, [[प्लास्टिक]] या [[इस्पात]] जैसी सामग्रियों का उपयोग भी किया जाता है, विशेषकर बाहरी गतिविधियों जैसे [[कैंपिंग|शिविर-यात्रा]] में।
यात्रा के लिए विशेष रूप से बनाए गए ट्रैवल मग में ऊष्मा बनाए रखने की क्षमता होती है और इनमें छलकने से बचाने के लिए ढक्कन भी लगाया जाता है। सजावट की दृष्टि से, मग पर [[लोगो]], चित्र या कलात्मक आकृतियाँ अंकित करने के लिए [[आवरण मुद्रण|सिल्क-स्क्रीन मुद्रण]] या डिकल तकनीक का प्रयोग किया जाता है, जिन्हें पकाकर स्थायी रूप प्रदान किया जाता है। इस प्रकार, मग केवल एक साधारण बर्तन नहीं, बल्कि उपयोगिता, सौंदर्य और तकनीकी विकास का संगम है।
==सामान्य बनावट और कार्य==
[[File:Mug vs cup.jpg|thumb|एक मग और एक कप अगल-बगल रखे हुए हैं]]
मग के बनावट का एक प्रमुख उद्देश्य ऊष्मीय इन्सुलेशन सुनिश्चित करना होता है, जिससे उसमें रखा पेय अपेक्षाकृत अधिक समय तक अपने तापमान को बनाए रख सके। चाय के पारंपरिक कपों की पतली दीवारों की तुलना में मग की दीवारें मोटी होती हैं, जो ऊष्मा के आदान-प्रदान को धीमा करती हैं और पेय को जल्दी ठंडा या अत्यधिक गरम होने से बचाती हैं।
इसके अतिरिक्त, मग का आधार प्रायः पूर्णतः समतल नहीं होता, बल्कि हल्का अवतल या किनारीयुक्त बनाया जाता है। यह संरचना उस सतह के साथ प्रत्यक्ष संपर्क को कम करती है, जिस पर मग रखा जाता है, जिससे ऊष्मा का अपव्यय घटता है। इसी कारण अक्सर सतह पर एक विशिष्ट गोलाकार चिह्न भी दिखाई देता है, जो इस संरचनात्मक विशेषता का परिणाम होता है।
मग का हैंडल भी इसके ऊष्मीय गुणों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह हाथ को गरम सतह से दूर रखता है और उसके अपेक्षाकृत छोटे अनुप्रस्थ क्षेत्र के कारण ऊष्मा के प्रवाह को सीमित करता है, जिससे उपयोगकर्ता को पकड़ने में सुविधा और सुरक्षा दोनों मिलती हैं। इसी कारण, मग सामान्यतः ऐसी सामग्रियों—जैसे मिट्टी के बर्तन, बोन चाइना, [[पॉर्सिलेन]] या काँच—से बनाए जाते हैं,<ref>{{cite book|url=https://books.google.com/books?id=fJw0K1ZGY1kC&pg=PA98|page=98|title=The really useful science book: a framework of knowledge for primary teachers|author=स्टीव फैरो|publisher= रूटलेज |year=1999|isbn=0-7507-0983-9}}</ref><ref>{{cite book|url=https://books.google.com/books?id=esDW3xTKoLIC&pg=PA27|page=27|title=The handbook of evolutionary psychology|author=डेविड एम. बस|publisher=जॉन विली एंड संस.|year=2005|isbn=0-471-26403-2}}</ref> जिनकी [[ऊष्मा चालकता|ऊष्मीय चालकता]] कम होती है और जो ताप को नियंत्रित रखने में सहायक होती हैं।
===कपों की तुलना में अंतर===
मग और पारंपरिक कप के बीच का अंतर केवल आकार या बनावट तक सीमित नहीं है, बल्कि यह विभिन्न भाषाओं और संस्कृतियों में भी स्पष्ट रूप से परिलक्षित होता है। फ्रेंच, इतालवी, पोलिश, रूसी, जर्मन और अंग्रेज़ी जैसी अनेक भाषाओं में इन दोनों के लिए अलग-अलग शब्द प्रचलित हैं, जो इनके भिन्न उपयोग और सांस्कृतिक संदर्भों को दर्शाते हैं।
भाषाविद् अन्ना विर्ज़बिका के अनुसार, यह भिन्नता इनके कार्यात्मक अंतर से उत्पन्न होती है। पारंपरिक कप सामान्यतः औपचारिक परिवेश में मेज पर बैठकर पेय का आनंद लेने के लिए बनाए जाते हैं, जहाँ साज-सज्जा और शिष्टाचार का विशेष महत्व होता है। इसके विपरीत, मग अधिक अनौपचारिक और बहुउपयोगी होता है, जिसे किसी भी स्थान पर सहजता से उपयोग में लाया जा सकता है।{{sfn|Wierzbicka|1984|pp=214–216}}
==इतिहास==
===शुरुआती मग===
[[File:CMOC Treasures of Ancient China exhibit - large grey mug.jpg|upright|thumb|left|चीन के [[झेंगझोऊ]] में [[नवपाषाण युग|नवपाषाण काल]] के उत्तरार्ध ( लगभग 2500-2000 ईसा पूर्व) में कुम्हार के चाक पर बनाया गया एक मग।]]
मग का प्रारंभिक इतिहास यह दर्शाता है कि इसका उपयोग आज की अपेक्षा भिन्न उद्देश्यों के लिए किया जाता था। वर्तमान में जहाँ मग प्रायः गर्म पेय, दूध या शीतल पेयों से जुड़ा हुआ है, वहीं आरंभिक काल में इसका प्रमुख उपयोग [[बियर]] अथवा अन्य मादक पेयों के सेवन के लिए होता था। उस समय के मग आकार में भी अधिक बड़े होते थे, जो उनके उपयोग और सामाजिक परिवेश के अनुरूप थे। लकड़ी से बने प्रारंभिक मग संभवतः प्राचीन काष्ठ-शिल्प के आरंभिक दौर से ही प्रचलन में थे, किंतु समय के प्रभाव के कारण ऐसे अधिकांश नमूने आज सुरक्षित नहीं रह पाए हैं।<ref name="columbia">{{cite web|url=http://www.encyclopedia.com/doc/1E1-porcelai.html|title=Porcelain|publisher=कोलंबिया विश्वकोश छठा संस्करण. 2008|access-date=2008-06-27|archive-date=2008-08-21|archive-url=https://web.archive.org/web/20080821093621/http://www.encyclopedia.com/doc/1E1-porcelai.html|url-status=live}}</ref><ref name="G. J. Monson-Fitzjohn, B.Sc., F.R.Hist.S">{{cite book|url=http://www.nicks.com.au/index.aspx?link_id=76.623|title=Drinking Vessels of Bygone Days|author=जी. जे. मोनसन-फिट्ज़जॉन, बी.एससी., एफ.आर.एच.आई.एस.|url-status=dead|archive-url=https://web.archive.org/web/20100719162453/http://www.nicks.com.au/Index.aspx?link_id=76.623|archive-date=2010-07-19}}</ref>
मिट्टी के बर्तनों के विकास ने मग के निर्माण को एक नई दिशा दी। प्रारंभ में इन्हें [[कुंभकारी|हाथ से आकार]] दिया जाता था, परंतु कुम्हार का चाक के आविष्कार (लगभग 6500 से 3000 ईसा पूर्व के बीच) ने इस प्रक्रिया को अधिक सरल और परिष्कृत बना दिया। इस तकनीक के कारण बर्तनों में हैंडल जोड़ना भी सहज हो गया, जिससे आधुनिक स्वरूप के मग का विकास संभव हुआ। प्राचीन ग्रीस में 4000 से 5000 ईसा पूर्व के काल का एक सुसज्जित मिट्टी का मग प्राप्त हुआ है,<ref>{{cite web|url=http://www.ceramicstudies.me.uk/histx105.html|title=Ceramic Web Page Tutorials|website=Ceramicstudies.me.uk|access-date= नवंबर 16, 2012|archive-date= जून 5, 2023|archive-url=https://web.archive.org/web/20230605205500/http://www.ceramicstudies.me.uk/histx105.html|url-status=live}}</ref> जो उस युग की कलात्मकता और शिल्पकौशल का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करता है।
[[File:AnasaziMugs.jpeg|thumb|upright=1.1|[[कॉलोराडो|दक्षिण-पश्चिमी कोलोराडो]] से प्राप्त [[पुएब्लो कों के पूर्वज|पुएब्लो]] (अनासाज़ी) पूर्वजों के मग , जो 1000 से 1280 ईस्वी के बीच बनाए गए थे। इनके हैंडल पर की गई नक्काशी का अर्थ अभी तक अज्ञात है, लेकिन संभवतः इसका कोई कार्यात्मक महत्व नहीं है।]]
मग के विकासक्रम में प्रारंभिक मिट्टी के मगों की एक प्रमुख कमी उनकी अत्यधिक मोटी दीवारें थीं, जो पीने के लिए सुविधाजनक नहीं मानी जाती थीं। जैसे-जैसे [[धातुकार्य|धातु-कर्म]] की तकनीकों में प्रगति हुई, बर्तनों की दीवारों को अधिक पतला और सुडौल बनाया जाने लगा। लगभग 2000 ईसा पूर्व से [[कांसा|कांस्य]],<ref>{{cite web|url=http://www.thomaslayton.org.uk/joomla/index.php?option=com_content&task=view&id=26&Itemid=41|archive-url=https://web.archive.org/web/20201205022717/http://www.thomaslayton.org.uk/joomla/index.php?option=com_content&task=view&id=26&Itemid=41|url-status=dead|archive-date= दिसंबर 5, 2020|title=The Collection – Archaeology|website=Thomaslayton.org.uk|access-date= नवंबर 16, 2012}}</ref> [[चाँदी]], [[सोना]]<ref>{{cite web|url=http://www.visual-arts-cork.com/ancient-art/mycenean.htm|title=Mycenean Art|website=Visual-arts-cork.com|access-date=नवंबर 16, 2012|archive-date= मई 11, 2023|archive-url=https://web.archive.org/web/20230511213611/http://www.visual-arts-cork.com/ancient-art/mycenean.htm|url-status=live}}</ref> और यहाँ तक कि [[सीसा]]<ref>{{cite web|url=http://www.nicks.com.au/index.aspx?link_id=76.633|title=Lead drinking cup|website=Nicks.com.au|access-date=नवंबर 16, 2012|url-status=dead|archive-url=https://web.archive.org/web/20120927082915/http://www.nicks.com.au/index.aspx?link_id=76.633|archive-date= सितंबर 27, 2012}}</ref> जैसी धातुओं से भी मग निर्मित होने लगे। यद्यपि ये देखने में आकर्षक और टिकाऊ थे, फिर भी गर्म पेयों के साथ इनका उपयोग सहज नहीं था, क्योंकि धातु ऊष्मा का तीव्र संचार करती है।
मग के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ तब आया, जब [[चीनी जनवादी गणराज्य|चीन]] में लगभग 600 ईस्वी के आसपास [[पॉर्सिलेन|चीनी मिट्टी के बर्तनों]] का विकास हुआ। इस नवाचार ने पतली दीवारों वाले ऐसे मगों का निर्माण संभव बनाया, जो न केवल ठंडे, बल्कि गर्म पेयों के लिए भी उपयुक्त थे। यह परंपरा आज भी जारी है और आधुनिक मगों के स्वरूप में उसी विकास की छाप स्पष्ट दिखाई देती है।<ref name="columbia"/><ref name="G. J. Monson-Fitzjohn, B.Sc., F.R.Hist.S"/>
भाषाई दृष्टि से, “मग” शब्द का वर्तमान अर्थ में सबसे प्रारंभिक ज्ञात प्रयोग 1664 ईस्वी में मिलता है,<ref>{{cite web |title=Mug |url=https://www.merriam-webster.com/dictionary/mug#word-history |website=merriam-webster.com |publisher=मेरियम-वेबस्टर |access-date=30 जून 2025}}</ref> जो इस बर्तन के सांस्कृतिक और व्यावहारिक विकास की ऐतिहासिक यात्रा को भी रेखांकित करता है।
===विक्टर कॉफी मग===
[[द्वितीय विश्व युद्ध]] के दौरान [[अमेरिकी नौसेना|संयुक्त राज्य अमेरिका की नौसेना]] ने ऐसे कॉफी मग के निर्माण हेतु अमेरिकी कंपनियों से प्रस्ताव आमंत्रित किए, जो गिरने पर भी सुरक्षित रहें और जहाज़ों पर उपयोग के दौरान अत्यधिक टिकाऊ सिद्ध हों। कई प्रकार के डिज़ाइन प्रस्तुत किए गए, किंतु अंततः चयन [[विद्युतरोधी|उच्च-वोल्टेज पोर्सिलेन इन्सुलेटर]] निर्माता विक्टर इंसुलेटर द्वारा निर्मित एक विशेष डिज़ाइन का हुआ। उस समय युद्धकालीन परिस्थितियों में इन्सुलेटर की माँग घट गई थी, इसलिए कंपनी ने अपने कार्यों को बनाए रखने के लिए स्वच्छतापूर्ण बर्तनों के निर्माण की दिशा में कदम बढ़ाया।<ref name="Upstate">{{Cite web|url=https://exploringupstate.com/how-victor-changed-the-coffee-mug/|title=How the Victor Coffee Mug Changed the Way We Drink Coffee|last=क्लेमेंस|first=क्रिस|date= मार्च 6, 2016|website=एक्सप्लोरिंग अपस्टेट|language=en-US}}</ref>
विक्टर ने नौसेना के लिए एक विशिष्ट मग विकसित किया, जो बिना हैंडल के, सफेद चमकदार सतह वाला और मोटी दीवारों से युक्त था। यह डिज़ाइन अपनी मजबूती और उपयोगिता के कारण सैन्य बलों द्वारा अत्यंत सराहा गया। चूँकि इन मगों के निर्माण में वही पोर्सिलेन सामग्री प्रयुक्त हुई, जिसका उपयोग कंपनी अपने इन्सुलेटर बनाने में करती थी, इसलिए इनमें उत्कृष्ट ऊष्मा-रोधक गुण विद्यमान थे। इस प्रकार, युद्धकालीन आवश्यकताओं ने न केवल एक नए प्रकार के मग को जन्म दिया, बल्कि उसके व्यावहारिक और तकनीकी गुणों को भी परिष्कृत किया।<ref name="Upstate"/><ref name= cjow>{{cite web |last1=गिश|first1=एल्टन |title=Porcelain Insulator News |url=https://www.cjow.com/archive/article.php?month=2&a=02Porcelain%20Insulator%20News.htm&year=2004 |website=cjow.com |publisher=द वायर के क्राउन ज्वेल्स |date= फरवरी 2004}}</ref>
द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति के पश्चात विक्टर इंसुलेटर ने अपने उत्पादन को आंशिक रूप से सैनिटरीवेयर उत्पादों की ओर बनाए रखने का निर्णय लिया और अपने प्रसिद्ध मग का एक अधिक व्यावसायिक रूप से अनुकूल संस्करण प्रस्तुत किया। इस नए रूप में मग में सुविधाजनक हैंडल जोड़ा गया, उसका शरीर अपेक्षाकृत हल्का और पतला बनाया गया, तथा विभिन्न रंगों के विकल्प भी उपलब्ध कराए गए, जिससे यह आम उपभोक्ताओं के लिए अधिक आकर्षक बन गया।
इस सफल डिज़ाइन की लोकप्रियता इतनी बढ़ी कि इसकी नकल संयुक्त राज्य अमेरिका के भीतर ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अनेक निर्माताओं द्वारा बड़े पैमाने पर की जाने लगी।<ref name="Upstate"/> किंतु समय के साथ सस्ते और बड़े पैमाने पर उत्पादित [[चीनी जनवादी गणराज्य|चीनी]] निर्मित विकल्पों से कड़ी प्रतिस्पर्धा के कारण विक्टर को गंभीर आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा। परिणामस्वरूप, 1990 के दशक की शुरुआत में कंपनी को मग का उत्पादन बंद करना पड़ा।<ref name= cjow/>
आज, उत्पादन बंद होने के बाद भी विक्टर द्वारा निर्मित ये मग अपनी विशिष्ट गुणवत्ता और ऐतिहासिक महत्व के कारण संग्राहकों के बीच अत्यंत लोकप्रिय हो गए हैं।<ref>{{cite web |last1=डेलगाडो |first1=मिशेल |title=The Classic Diner Mug That's Disappearing |url=https://medium.com/@mdelgadia/the-classic-diner-mug-thats-disappearing-619c55935aa9 |website=medium.com |publisher= मीडियम |date= मई 24, 2017}}</ref> वे न केवल एक उपयोगी वस्तु के रूप में, बल्कि औद्योगिक इतिहास और डिज़ाइन विकास के प्रतीक के रूप में भी मूल्यवान माने जाते हैं।
==अन्य मग के प्रकार ==
===यात्रा मग===
[[File:travel mug.jpg|thumb|left|upright=.6|यात्रा मग]]
यात्रा मग का प्रचलन 1980 के दशक में बढ़ा, जब ऐसे बर्तनों की आवश्यकता महसूस हुई जो गर्म या ठंडे पेयों को सुरक्षित रूप से एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जा सकें। इन मगों का निर्माण इस प्रकार किया जाता है कि उनमें [[ऊष्मा रोधन|उत्कृष्ट ऊष्मीय इन्सुलेशन गुण]] हों, जिससे पेय लंबे समय तक अपने तापमान को बनाए रख सके। संरचना की दृष्टि से ये [[निर्वात फ्लास्क|वैक्यूम फ्लास्क]] के समान होते हैं—अर्थात् ये अच्छी तरह से इन्सुलेटेड और लगभग पूर्णतः बंद होते हैं, ताकि रिसाव या छलकाव की संभावना न्यूनतम रहे।<ref name=travel>मोरी कार्प "ट्रैवल मग" {{US patent|5249703}} जारी होने की तिथि: अक्टूबर 5, 1993</ref> फिर भी, इनके ढक्कन में एक छोटा छिद्र होता है, जिससे यात्रा के दौरान बिना खोले ही पेय का सेवन किया जा सके।
गर्म पेयों के ठंडा होने का प्रमुख कारण वाष्पीकरण होता है, इसलिए ट्रैवल मग में ढक्कन की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। यह वाष्प के बाहर निकलने को सीमित करता है और इस प्रकार पेय को अधिक समय तक गरम बनाए रखने में सहायक होता है, चाहे ढक्कन पतले प्लास्टिक का ही क्यों न हो।
इसके अतिरिक्त, कुछ मग ऐसे भी होते हैं जिनमें भीतरी और बाहरी दोहरी दीवारें होती हैं, परंतु उनके बीच वैक्यूम नहीं बनाया जाता। ऐसे बर्तनों को डबल वॉल मग कहा जाता है। इनमें भीतरी दीवार सामान्यतः स्टेनलेस स्टील की होती है, जबकि बाहरी परत स्टेनलेस स्टील, प्लास्टिक या अन्य सामग्रियों से निर्मित हो सकती है। यह संरचना भी कुछ हद तक ऊष्मा संरक्षण प्रदान करती है, यद्यपि वैक्यूम युक्त मग की तुलना में इसकी क्षमता अपेक्षाकृत कम होती है।
ड्राइविंग के दौरान उपयोग में आने वाला मग, जिसे प्रायः ऑटो मग या कम्यूटर मग कहा जाता है, केवल एक साधारण पात्र नहीं, बल्कि सुविधा, सुरक्षा और सूझबूझ का संतुलित रूप है। यह विशेष प्रकार का यात्रा मग इस प्रकार निर्मित होता है कि चलते वाहन में भी पेय का आनंद सहज और सुरक्षित बना रहे। इसके ऊपर लगा रिसाव-रोधी ढक्कन, जिसमें पीने के लिए एक छोटा सा छिद्र या नलिका होती है,<ref name="Jackson, Joe">{{cite web|author=जैक्सन, जो|title=Q: What's the Best Insulated Travel Mug? We tested five of the best. Here's how they stacked up.|date= दिसंबर 22, 2014|work=आउटसाइड|url=http://www.outsideonline.com/1786136/whats-best-insulated-travel-mug|access-date= दिसंबर 10, 2015|archive-date= दिसंबर 11, 2015|archive-url=https://web.archive.org/web/20151211031852/http://www.outsideonline.com/1786136/whats-best-insulated-travel-mug|url-status=live}}</ref> इस बात का ध्यान रखता है कि मार्ग की हलचल पेय को बाहर न छलकाए। साथ ही, इसका आधार प्रायः संकरा रखा जाता है, ताकि यह विभिन्न वाहनों में बने कप धारकों में दृढ़ता से स्थापित हो सके और अनचाही हलचल से बचा रहे।
ऐसे मग का मूल्यांकन केवल उसके रूप या आकार से नहीं, बल्कि उसके व्यावहारिक गुणों से किया जाता है। यह अपेक्षित है कि उसे एक हाथ से सरलता से खोला और बंद किया जा सके, जिससे चालक का ध्यान मार्ग से न भटके। उसमें भरण-सीमा का स्पष्ट संकेत हो, ताकि अधिक भराव के कारण होने वाले रिसाव से बचा जा सके। बिना हत्थे का स्वरूप इसे पकड़ने में अधिक सहज बनाता है, जिससे नियंत्रण बना रहता है। इसके अतिरिक्त, इसका विन्यास ऐसा होना चाहिए कि पेय ग्रहण करते समय चालक की दृष्टि मार्ग से विचलित न हो।<ref>{{cite news|work=कुक्स कंट्री|date= अक्टूबर 2011|title=Travel Mugs|url=http://www.cooksillustrated.com/equipment_reviews/1328-travel-mugs?extcode=MASCZ00L0&ref=search_results_1|access-date=2015-12-10|archive-date=2015-12-11|archive-url=https://web.archive.org/web/20151211023117/http://www.cooksillustrated.com/equipment_reviews/1328-travel-mugs?extcode=MASCZ00L0&ref=search_results_1|url-status=live}}</ref><ref name="Jackson, Joe"/><ref>{{cite news|work=अमेरिकाज़ टेस्ट किचन (सीज़न 8, एपिसोड 22)]]|title=Coffeehouse Treats: Equipment Corner/Gadget Guru: Commuter Coffee Mugs|date=2008}}</ref> अंततः, यह विभिन्न प्रकार के कप धारकों में स्थिरता से बैठ सके—यही इसकी उपयोगिता और विश्वसनीयता की वास्तविक कसौटी है।
===बियर मग===
[[File:Humpen.jpg|thumb|upright|एक सामान्य आधा लीटर का जर्मन बीयर मग]]
बीयर स्टाइन, परंपरा और शिल्पकला का एक विशिष्ट संगम, वास्तव में पारंपरिक बीयर मगों का वह रूप है जो प्रायः स्टोनवेयर मिट्टी से निर्मित होता है और ऐतिहासिक रूप से [[जर्मनी]] से जुड़ा हुआ माना जाता है। “स्टाइन” शब्द का अंग्रेज़ी में प्रचलन उन्नीसवीं शताब्दी के मध्य, लगभग 1855 के आसपास, [[जर्मन भाषा|जर्मन]] शब्द से रूपांतरित होकर हुआ;<ref name="mw">{{cite web|url=http://www.merriam-webster.com/dictionary/stein|title=Definition of STEIN|website=www.merriam-webster.com|date=5 सितम्बर 2023 }}</ref> किंतु रोचक तथ्य यह है कि जर्मनी में स्वयं इस शब्द का स्वतंत्र रूप से पेय पात्र के अर्थ में सामान्यतः उपयोग नहीं किया जाता। वहाँ इसके स्थान पर “क्रुग”, “हम्पेन” या “सीडेल” जैसे शब्द अधिक प्रचलित हैं, जो इन पात्रों की विविध आकृतियों और उपयोगों को अधिक सटीक रूप से व्यक्त करते हैं।
आधुनिक बीयर मग, जो इस परंपरा के उत्तराधिकारी माने जा सकते हैं, प्रायः आधा [[लीटर]] या एक लीटर की मानक धारिता में उपलब्ध होते हैं। इनके निर्माण में उपयोगिता और सौंदर्य का संतुलन स्पष्ट दिखाई देता है—मजबूत संरचना के साथ-साथ इनमें प्रायः धातु से निर्मित [[कब्ज़ा|कब्जेदार ढक्कन]] लगाए जाते हैं, जो स्वच्छता और संरक्षण दोनों की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण होते हैं। इसके अतिरिक्त, इन मगों की सतह पर उकेरे गए जर्मन [[राज्यचिह्न|प्रतीक-चिह्न]], ऐतिहासिक दृश्य या पारंपरिक कलात्मक आकृतियाँ इन्हें केवल पेय पात्र नहीं, बल्कि सांस्कृतिक विरासत के जीवंत प्रतीक के रूप में स्थापित करती हैं।
===टिकी मग===
[[File: Tiki7.jpg|अंगूठा|ईमानदार|टिकी मग]]
टिकी मग की उत्पत्ति बीसवीं शताब्दी के मध्य में उन उष्णकटिबंधीय वातावरण से प्रेरित भोजनालयों और विशेष पेय स्थलों में हुई, जहाँ वातावरण, सजावट और परोसे जाने वाले पेय—तीनों में एक विशिष्ट विदेशी आकर्षण रचा-बसा रहता था। “टिकी मग” वस्तुतः एक व्यापक और सामान्य संज्ञा है, जिसका उपयोग उन मूर्तिकला-सदृश पेय पात्रों के लिए किया जाता है, जिन पर [[मॅलानिशिया]], [[माइक्रोनीशिया]] अथवा [[पोलीनेशिया]] की सांस्कृतिक छवियों, प्रतीकों और आकृतियों का कलात्मक निरूपण किया गया होता है। समय के साथ इसका दायरा और भी विस्तृत हुआ है, और अब यह शब्द किसी भी ऐसे पात्र के लिए प्रयुक्त होने लगा है, जो उष्णकटिबंधीय परिवेश, समुद्री जीवन या सर्फिंग संस्कृति से संबंधित सौंदर्य-बोध को अभिव्यक्त करता हो।<ref>{{cite book|title=Tiki Mugs: Cult Artifacts of Polynesian Pop|author1=स्ट्रॉन्गमैन, जे |author2=वेस्टलैंड, होल्डन |publisher=कोरेरो बुक्स|year=2008|isbn=978-0-9553398-1-3}}</ref>
ये मग केवल उपयोग की वस्तु भर नहीं, बल्कि स्मृतियों और अनुभवों के संवाहक भी बन जाते हैं। प्रायः इन्हें स्मृति-चिह्न के रूप में बेचा जाता है, जिससे ये किसी स्थान, अनुभव या संस्कृति का प्रतीकात्मक प्रतिनिधित्व करने लगते हैं। यही कारण है कि अनेक लोग इन्हें संग्रहणीय वस्तुओं के रूप में संजोकर रखते हैं—जहाँ प्रत्येक टिकी मग अपने भीतर एक विशिष्ट कथा, सौंदर्य और सांस्कृतिक स्पर्श समेटे होता है।
===मनोरंजन मग===
व्हिसल मग, जिसे हबल-बबल के नाम से भी जाना जाता है, एक मनोरंजक और कौतुकपूर्ण पेय पात्र है, जो अपनी विशिष्ट बनावट के कारण साधारण मगों से अलग पहचान रखता है। इसकी संरचना में एक खोखला हत्था होता है, जिसे इस प्रकार निर्मित किया जाता है कि उसमें से हवा प्रवाहित करने पर सीटी जैसी ध्वनि उत्पन्न हो सके। यही विशेषता इसे केवल उपयोगी वस्तु न बनाकर एक खेल-भावना से जुड़ा अनुभव भी प्रदान करती है।
इस मग की ध्वनि उसकी अवस्था के अनुसार परिवर्तित होती है—जब यह खाली होता है, तब उससे एक सरल, एकल स्वर सुनाई देता है; किंतु जैसे ही इसमें द्रव भरा जाता है, ध्वनि का स्वरूप बदलकर अधिक मधुर, झंकारयुक्त और चहचहाहट जैसी जटिल ध्वनियों में परिवर्तित हो जाता है।<ref name=puzzle/>
===मेंढक मग===
मेंढक मग, जिसे सरप्राइज़ मग भी कहा जाता है, विनोद और आश्चर्य की भावना से निर्मित एक विशिष्ट पेय पात्र है। इसका रूप साधारण प्रतीत होता है, किंतु जैसे ही पेय धीरे-धीरे समाप्त होता है, उसके भीतर छिपा एक छोटा सिरेमिक जीव—अक्सर मेंढक—अचानक प्रकट होकर पीने वाले को चकित कर देता है। यही अप्रत्याशित अनुभव इसे मात्र उपयोगी वस्तु से आगे बढ़ाकर एक मनोरंजक परंपरा का हिस्सा बना देता है।
ऐसे मगों का इतिहास अठारहवीं शताब्दी के उत्तरार्ध, लगभग 1775 के आसपास तक जाता है, और उन्नीसवीं शताब्दी के अंत तक इनकी लोकप्रियता बनी रही। उस समय यह केवल हास्य या खिलवाड़ का साधन ही नहीं, बल्कि कुछ लोकमान्यताओं से भी जुड़ा हुआ था। कुछ परंपराओं में यह विश्वास प्रचलित था कि यदि बीयर में मेंढक या टोड दिखाई दे, तो उससे [[ज्वर]] दूर हो सकता है।<ref>{{Cite web |url=http://www2.epl.ca/InfoFile/EPLInfofileDetail.cfm?subject_detail=Mugs%2C%20Frog%2FToad%2FSurprise |title=Country Life, September 1983. |access-date=2016-02-06 |archive-date=2016-02-16 |archive-url=https://web.archive.org/web/20160216124057/http://www2.epl.ca/InfoFile/EPLInfofileDetail.cfm?subject_detail=Mugs%2C%20Frog%2FToad%2FSurprise |url-status=dead }}</ref> यद्यपि यह धारणा वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित नहीं है, फिर भी यह उन सांस्कृतिक विश्वासों और मानवीय कल्पनाओं की झलक अवश्य प्रस्तुत करती है, जिन्होंने ऐसे मगों को एक विशेष आकर्षण प्रदान किया।
===पहेली मग===
[[File:Fuddling cups.JPG|अंगूठा|बाएं|ईमानदार|फ़डलिंग कप। इन कपों में खोखले जोड़ होते हैं जिनकी मदद से इनके अंदर की सामग्री को बिना गिराए पिया जा सकता है।]]
पहेली मग एक ऐसा पेय पात्र है, जिसकी बनावट में चतुराई और कौतुक का अद्भुत समावेश होता है। इसे इस प्रकार निर्मित किया जाता है कि साधारण ढंग से इसका उपयोग करना संभव न हो, और पीने वाले को उसकी युक्ति समझने के लिए थोड़ी बुद्धि और धैर्य का सहारा लेना पड़े। उदाहरणतः, कुछ पज़ल मगों के किनारों पर अनेक सूक्ष्म छिद्र होते हैं, जिनके कारण सामान्य रूप से पेय ग्रहण करना असंभव हो जाता है। पहली दृष्टि में ऐसा प्रतीत होता है कि इन छिद्रों को हाथ से ढककर समस्या का समाधान किया जा सकता है, किंतु ऐसा करने पर पेय ऊपर की ओर स्थित अदृश्य छिद्रों से बाहर निकलने लगता है। इस पहेली का वास्तविक समाधान यह है कि किनारों के छिद्रों को उचित प्रकार से ढकते हुए, मग के खोखले हत्थे में बने एक गुप्त मार्ग से पेय ग्रहण किया जाए—यही इसकी चतुर संरचना का रहस्य है।<ref name=puzzle>{{cite news|url=http://ceramicstoday.com/articles/puzzle_mug.htm |title=In Their Cups – The Story of the English Puzzle Mug |author= डेलिया रॉबिन्सन |work=सेरामिक्स टुडे |url-status=unfit |archive-url=https://web.archive.org/web/20100103221715/http://ceramicstoday.com/articles/puzzle_mug.htm |archive-date= जनवरी 3, 2010 }}</ref>
[[File:Pythagorean cup sold in Crete.jpg|thumb|upright|एक पाइथागोरस कप]]
इसी श्रेणी में “फडलिंग कप्स” नामक एक और रोचक प्रकार मिलता है, जिसमें तीन अलग-अलग मग आपस में अपनी दीवारों और हत्थों के माध्यम से जुड़े होते हैं। इनकी भीतरी संरचना में ऐसे छिद्र बनाए जाते हैं, जो तरल के प्रवाह को नियंत्रित करते हैं। परिणामस्वरूप, इन मगों को एक निश्चित और सही क्रम में ही खाली किया जा सकता है; यदि क्रम का पालन न किया जाए, तो पेय अनपेक्षित रूप से बाहर निकल सकता है। इस प्रकार, यह केवल एक पेय पात्र नहीं, बल्कि एक मनोरंजक चुनौती बन जाता है।<ref name=puzzle/>
इसी प्रकार, “पाइथागोरस कप” एक विशिष्ट और शिक्षाप्रद पज़ल मग का उदाहरण है, जिसमें केंद्र में स्थित एक स्तंभ के भीतर एक सूक्ष्म [[दाबलंघिका|साइफन तंत्र]] छिपा होता है। जब तक कप में द्रव उस स्तंभ की ऊँचाई से नीचे रहता है, तब तक वह सुरक्षित रहता है; किंतु जैसे ही द्रव उस सीमा से ऊपर पहुँचता है, साइफन सक्रिय होकर संपूर्ण द्रव को कप के तले में बने छिद्र के माध्यम से बाहर निकाल देता है। यह संरचना केवल कौतुक ही नहीं उत्पन्न करती, बल्कि संयम और संतुलन का एक प्रतीकात्मक संदेश भी देती है—अधिकता अंततः हानि का कारण बन सकती है।
===तापमान बदलने वाले मग===
[[चित्र:Thermochromic_mug.webm|दाएँ|पाठ=Hot water is poured into a black mug, over about 20 seconds most of the mug changes colour to white, revealing black logo markings|अंगूठाकार|एक "जादुई मग" में गर्म पानी डालने और उसके बाद रंग में होने वाले परिवर्तन का वीडियो]]
ऊष्मा-परिवर्तनकारी, ऊष्मा-संवेदनशील अथवा तथाकथित “जादुई” मग ऐसे विशेष पेय पात्र होते हैं, जो तापमान में परिवर्तन के साथ अपना रूप और दृश्य स्वरूप बदल लेते हैं। यह अद्भुत परिवर्तन थर्मोक्रोमिज़्म नामक गुण के कारण संभव होता है, जिसमें ताप के प्रभाव से रंग अथवा चित्र क्रमशः प्रकट या लुप्त होने लगते हैं। जब इन मगों में गर्म पेय डाला जाता है, तो उनकी सतह पर छिपे हुए चित्र, संदेश या रंग धीरे-धीरे उभर आते हैं, मानो कोई रहस्य अचानक सजीव हो उठा हो।
इन मगों की यही विशेषता उन्हें केवल उपयोगी वस्तु तक सीमित नहीं रखती, बल्कि एक आकर्षक अनुभव का माध्यम भी बना देती है। ठंडा होने पर उनका स्वरूप पुनः बदल जाता है, जिससे यह परिवर्तनशीलता एक निरंतर दृश्य कौतुक का आभास कराती है।
==गैर-पेय मग==
=== दाढ़ी बनाने के मग और स्कटल्स (पात्र) ===
[[File:ShavingMug1.jpg|अंगूठा |बाएं|वर्टिकल|शेविंग मग]]
दाढ़ी बनाने के मग और स्कटल्स (पात्र) का विकास उन्नीसवीं शताब्दी के आसपास हुआ, और शेविंग मग का पहला पेटेंट सन् 1867 में दर्ज किया गया।<ref name=smug>पी. ब्रूक्स और जे. मैकग्राडी द्वारा "शेविंग कप में सुधार"" {{US patent|66788}} जुलाई 1867 में प्रकाशित हुआ था।</ref> उस समय अधिकांश घरों में गर्म जल की सहज उपलब्धता नहीं होती थी, इसलिए दाढ़ी बनाने के लिए आवश्यक गरम झाग तैयार करने हेतु विशेष प्रकार के पात्रों की आवश्यकता महसूस हुई। इसी आवश्यकता से स्कटल और शेविंग मग का प्रचलन आरंभ हुआ, जिन्होंने उस दौर की दैनिक दिनचर्या में एक व्यावहारिक समाधान प्रदान किया।
पारंपरिक शेविंग स्कटल का रूप किसी चायदानी से मिलता-जुलता होता है, जिसमें एक चौड़ी टोंटी होती है, जिसके माध्यम से उसमें गरम जल डाला जाता है। यही विशेषता इसे शेविंग मग से अलग करती है, क्योंकि शेविंग मग में सामान्यतः टोंटी नहीं होती। दोनों ही प्रकार के इन पात्रों में प्रायः पकड़ने के लिए हत्था होता है, यद्यपि कुछ रूप ऐसे भी मिलते हैं जिनमें यह नहीं होता। शेविंग मग का बाह्य स्वरूप प्रायः साधारण मग जैसा ही होता है, किंतु कई बार इसमें ब्रश रखने के लिए विशेष रूप से निर्मित स्थान भी होता है, जिससे ब्रश झाग में पूरी तरह डूबने से बचा रहता है और उपयोग अधिक सुविधाजनक बनता है।
आधुनिक समय में शेविंग स्कटल के रूप अपेक्षाकृत कम देखने को मिलते हैं और इनका निर्माण सीमित मात्रा में ही होता है। प्रायः इन्हें छोटे स्तर पर कार्य करने वाले स्वतंत्र [[कुंभकारी|कुम्हारों द्वारा]] पारंपरिक शिल्पकला के रूप में तैयार किया जाता है,<ref name=sara>{{cite web|url=http://www.sarabonnymanpottery.com/moss_scuttle.htm|title=Moss Scuttle|website=Sarabonnymanpottery.com|access-date= नवंबर 16, 2012|url-status=dead|archive-url=https://web.archive.org/web/20080509085958/http://www.sarabonnymanpottery.com/moss_scuttle.htm|archive-date= मई 9, 2008}}</ref> जिससे ये न केवल उपयोगी वस्तु बने रहते हैं, बल्कि एक सांस्कृतिक और हस्तशिल्पीय धरोहर का रूप भी धारण कर लेते हैं।
[[चित्र:ShavingMug2.png|अंगूठाकार|शेविंग स्कटल, 1867 का पेटेंट।<ref name=smug/>]]
स्कटल या शेविंग मग की संरचना उपयोगिता और सूक्ष्म कारीगरी का संतुलित उदाहरण प्रस्तुत करती है। इसके ऊपरी भाग में सामान्यतः साबुन रखने के लिए एक विशेष आधार या स्थान निर्मित होता है, जिसे इस प्रकार रूपांकित किया जाता है कि साबुन स्थिर बना रहे और झाग तैयार करने की प्रक्रिया सुगम हो सके। पारंपरिक रूप से इनका उपयोग कठोर शेविंग साबुन के साथ किया जाता था, जिसके कारण निचले भाग में जल निकासी के लिए सूक्ष्म छिद्र बनाए जाते थे, ताकि अतिरिक्त जल बाहर निकल सके और साबुन अत्यधिक गीला न हो।
समय के साथ इनके स्वरूप में परिवर्तन आया और बाद के स्कटल तथा मगों में ये छिद्र प्रायः नहीं पाए जाते, जिससे उनका उपयोग क्रीम अथवा नरम साबुन के साथ भी सहजता से किया जा सके। इसके अतिरिक्त, कुछ स्कटल और मगों के निचले भाग में संकेंद्रित वृत्ताकार रेखाएँ उकेरी जाती हैं, जो थोड़ी मात्रा में जल को रोके रखती हैं और झाग बनाने की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी तथा संतुलित बनाती हैं।<ref name=sara/>
उपयोग के दौरान शेविंग स्कटल की रचना अपनी पूरी उपयोगिता के साथ सामने आती है। इसमें शेविंग ब्रश को चौड़ी टोंटी वाले भाग में डुबोया जाता है, जहाँ वह जल में भीगकर पर्याप्त रूप से गरम हो जाता है। इसके बाद साबुन को ऊपरी भाग में बने विशेष आधार पर रखा जाता है। आवश्यकता होने पर ब्रश को साबुन पर घुमाया जाता है, जिससे धीरे-धीरे घना और मुलायम झाग तैयार हो जाता है, जबकि अतिरिक्त जल पुनः नीचे की ओर प्रवाहित हो जाता है।
इस सुविचारित व्यवस्था के कारण जल और साबुन—दोनों का अपव्यय कम होता है, और साथ ही आवश्यक ऊष्मा भी लंबे समय तक बनी रहती है। परिणामस्वरूप, शेविंग की प्रक्रिया अधिक आरामदायक, नियंत्रित और निरंतर बनी रहती है, जो उस युग की व्यावहारिक बुद्धिमत्ता और शिल्प कौशल का सुंदर उदाहरण प्रस्तुत करती है।
== समग्र डिजाइन और कार्य ==
मग के अधिकांश डिजाइन थर्मल इन्सुलेशन के उद्देश्य से हैं: एक मग की मोटी दीवार, चाय के प्याले की पतली दीवारों की तुलना में, पेट को ठंडा होने या जल्दी गर्म होने से बचाने के लिए इसे इंसुलेट करती हैं। मग का तेल अक्सर सपाट नहीं होता है, लेकिन अवतल होता है या उस सतह के साथ थर्मल संपर्क को कम करने के लिए एक अतिरिक्त रिम होता है जिस पर मग रखा जाता है। ये विशेषताएं अक्सर सतह पर एक विशिष्ट गोलाकार दाग छोड़ती हैं। अंत में, एक मग हैंडल आपके हाथ को मग के गर्म पक्षों से दूर रखता है। हैंडल का छोटा क्रॉस सेक्शन तरल और हाथ के बीच गर्मी के प्रभाव को कम करता है। थर्मल इन्सुलेशन के इसी कारण से, मग अक्सर कम [[थर्मल चालकता]], जैसे [[मिट्टी के बर्तन]], [[बोन चाइना]], [[चीनी मिट्टी के बर्तन]], या कांच के साथ सामग्री से बने होते हैं।
== सजावट ==
एक सर्वव्यापी डेस्कटॉप आइटम के रूप में, मग का उपयोग अक्सर एक कला या विज्ञापन वस्तु के रूप में किया जाता है; कुछ मग पीने के बर्तनों की तुलना में अधिक सजावट हैं। प्राचीन काल में पारंपरिक रूप से कपों पर नक्काशी की जाती थी। यह कभी-कभी एक कप को असामान्य आकार में बदलने के लिए प्रयोग किया जाता है। हालांकि, सबसे लोकप्रिय सजावट तकनीक आज मग पर छपाई कर रही है, जो आमतौर पर निम्नलिखित तरीके से की जाती है: सिरेमिक पाउडर को चुने हुए रंग के रंगों और एक प्लास्टिसाइज़र के साथ मिलाया जाता है। फिर इसे पारंपरिक स्क्रीन प्रिंटिंग तकनीक का उपयोग करके जिलेटिनस पेपर पर मुद्रित किया जाता है, जो मिश्रण को एक महीन बुने हुए जाल के माध्यम से लागू करता है, जिसे एक फ्रेम पर फैलाया जाता है और वांछित आकार में मुखौटा किया जाता है। यह तकनीक एक पतली सजातीय परत पैदा करती है; हालांकि, यदि चिकनाई की आवश्यकता नहीं है, तो सिरेमिक मिश्रण को सीधे ब्रश से रंगा जाता है। एक और अधिक जटिल विकल्प यह है कि कागज पर एक फोटोग्राफिक इमल्शन के साथ कोट किया जाए, छवि की तस्वीर खींची जाए और फिर इमल्शन को पराबैंगनी प्रकाश से ठीक किया जाए।
सूखने के बाद, मुद्रित कागज, कैसे [[ट्रांसफर-प्रिंट|लिथो]] कहा जाता है, को अनिश्चित काल तक संग्रहीत किया जा सकता है। जब मग पर लिथोग्राफ लगाया जाता है, तो इसे पहले गर्म पानी में गर्म किया जाता है।
== भंडार==
एक लोकप्रिय तरीका कप का भंडार एक 'कप ट्री' पर होता है, एक लकड़ी या धातु की पोस्ट जो एक गोल आधार पर लगाई जाती है और उनके हैंडल से कप लटकने के लिए खूंटे से सुसज्जित होती है।<ref>जेन एंकोना, ब्रूस एंकोना "कप ट्री" अंक दिनांक: 4 दिसंबर 1990</ref> कप को लटकाने के लिए डिज़ाइन किए गए रैक भी हैं ताकि वे हाथ में हों। वे विशेष रूप से उच्च तरंगों वाली नावों पर उपयोगी होते हैं।
==गणित में ==
कप [[होमोमोर्फिज्म]] के [[टोपोलॉजी]] में सबसे लोकप्रिय उदाहरणों में से एक के रूप में कार्य करता है। दो वस्तुएं होमोमोर्फिक होती हैं यदि एक को बिना काटे या चिपकाए दूसरे में विकृत किया जा सकता है। इसलिए, टोपोलॉजी में, एक कप डोनट ([[टोरस]]) के बराबर (होमियोमॉर्फिक) होता है क्योंकि इसे बिना काटे, टूटे, ड्रिलिंग या ग्लूइंग के बिना निरंतर विरूपण द्वारा डोनट में बदला जा सकता है। एक अन्य टोपोलॉजिकल उदाहरण दो हैंडल वाला एक कप है, जो एक [[सरफेस जीनस-2|डबल टोरस]] के बराबर है - संख्या 8 जैसी दिखने वाली एक वस्तु। |date=1 जनवरी 2000}}</ref> बिना हैंडल वाला कप, यानी एक [[बाउल (कंटेनर)|कटोरा]] या [[बीकर (ग्लास)|बीकर] ], टोपोलॉजिकल रूप से एक के बराबर है [ [तश्तरी]], जो काफी स्पष्ट है जब एक कच्ची मिट्टी के कटोरे को चपटा किया जाता है एक [[कुम्हार का पहिया]]।
== गैलरी==
<gallery>
File:Kitchenware Steel Mug Rezowan.JPG|स्टील मग
File:Mug of tea, Smithfield Market, City of London.jpg|टी मग, यूके
File:Enamel mug.jpg|एनामेल मग
File:Lipton- mug-tea.jpg|चाय का गिलास मग
File:Frog or Surprise mug.JPG|[[मेंढक मग]]
File:Doughnut-shaped Coffee mug.jpg|डोना द्वारा आकार का मग
File:Wikipedia - filled with knowledge (beskuren).jpg|विकिपीडिया लोगों के साथ एक मग
File:Rosehage kopp cropped.jpg|[[मंगम्मा]] [[मूमिन मग|मूमिन-थीम्ड मग]] पर
File:Dinermug.jpg|थंब|ऑल्ट=एक ठेठ अमेरिकी मग|अमेरिकी ठेठ मग
File:Merchandising Coffee mug from band Dead Can Dance with 'DCD' logo - black.jpg|मग अक्सर [[व्यापारिक आइटम ]] के रूप में पॉप समूहों और कंपनियों द्वारा उपयोग किए जाते हैं, यहां बैंड [[डेड कैन डांस]]
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==इन्हें भी देखें==
*[[कप]]
== सन्दर्भ ==
{{Reflist}}
[[श्रेणी:पीने के उपकरण]]
[[श्रेणी:चाय]]
[[श्रेणी:गर्म पेय]]
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चाहर धर्मेंद्र
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{{खराब अनुवाद|अंग्रेज़ी}}
[[चित्र:Mug_of_Tea.JPG|upright=1.35|अंगूठाकार|दुध वाली चाय का एक मग]]
मग एक प्रकार का [[कप]] होता है,{{sfn|Kronenfeld|1996|p=6}} जिसे विशेष रूप से [[कॉफी]], [[हॉट चॉकलेट|गरम चॉकलेट]] या [[चाय]] जैसे गर्म पेय पदार्थों के सेवन के लिए उपयोग किया जाता है। इसकी सबसे प्रमुख विशेषता इसका हैंडल होता है, जो इसे पकड़ने में सुविधा प्रदान करता है, विशेषकर तब जब पेय गरम हो। आकार की दृष्टि से, मग सामान्य कपों—जैसे चाय या कॉफी के पारंपरिक कप—की तुलना में अधिक [[तरल]] धारण करने में सक्षम होता है।
आमतौर पर एक मग की क्षमता लगभग 250 से 350 मिलीलीटर के बीच होती है,<ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=IZRDIcz6uEQC&q=usually+mug+holds+12+fluid+ounces|title=The Boat Galley Cookbook: 800 Everyday Recipes and Essential Tips for Cooking Aboard : 800 Everyday Recipes and Essential Tips for Cooking Aboard: 800 Everyday Recipes and Essential Tips for Cooking Aboard|last1=शियरलॉक|first1=कैरोलिन|last2=आयरन्स|first2=जेन|date=2012-09-14|publisher=मैकग्रा हिल प्रोफेशनल|isbn=9780071782364|access-date=2021-03-12|archive-date=2024-04-25|archive-url=https://web.archive.org/web/20240425165047/https://books.google.com/books?id=IZRDIcz6uEQC&q=usually+mug+holds+12+fluid+ounces|url-status=live}}</ref> जो इसे दैनिक उपयोग के लिए अत्यंत व्यावहारिक बनाती है। यदि आकार इससे भी बड़ा हो, तो ऐसे बर्तन को टैंकर्ड कहा जाता है। इस प्रकार, मग केवल एक साधारण बर्तन नहीं, बल्कि दैनिक जीवन की सहजता और आराम का एक अभिन्न हिस्सा है।
मग का आकार प्रायः सरल और उपयोगितावादी होता है—यह या तो सीधी, बेलनाकार रेखाओं वाला होता है अथवा हल्का घुमाव लिए हुए रूप में भी निर्मित किया जाता है। यद्यपि इसके आकार में विविधता संभव है, फिर भी इसकी मूल पहचान एक सुविधाजनक हैंडल से जुड़ी होती है, जो इसे पकड़ने में सहजता प्रदान करता है; इसी विशेषता के अभाव में इसे बीकर कहा जाता है। सामान्यतः मग के साथ तश्तरी नहीं होती, जो इसे अन्य पारंपरिक कपों से भिन्न बनाती है।<ref>{{cite encyclopedia |title=mug, n.1 |url=http://www.oed.com/view/Entry/123325 |encyclopedia=ओईडी ऑनलाइन |date=दिसंबर 2014 |publisher=ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस |quote=A drinking vessel, freq. cylindrical (and now usually with a handle), generally used without a saucer. |access-date=2015-03-06 |archive-date=2024-04-25 |archive-url=https://web.archive.org/web/20240425165036/https://www.oed.com/dictionary/mug_n1 |url-status=live }}</ref>
मग को [[पेय]] पदार्थों के सेवन का अपेक्षाकृत अनौपचारिक माध्यम माना जाता है, इसलिए इसका प्रयोग प्रायः घरेलू या सहज वातावरण में अधिक होता है, जबकि औपचारिक भोजन कक्षों में चाय या कॉफी के पारंपरिक कपों को प्राथमिकता दी जाती है। इसके अतिरिक्त, मग का एक विशेष रूप [[हजामत|शेविंग]] मग भी होता है, जिसका उपयोग गीली दाढ़ी बनाने की प्रक्रिया में सहायक के रूप में किया जाता है। इस प्रकार, मग अपनी सरलता और बहुउपयोगिता के कारण दैनिक जीवन में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है।
मग का विकास समय के साथ उसकी उपयोगिता और निर्माण सामग्री के अनुसार निरंतर परिवर्तित होता रहा है। प्राचीन काल में मग प्रायः [[लकड़ी]] को तराशकर या [[कुंभकारी|मिट्टी]] से बनाए जाते थे, जो उस समय उपलब्ध संसाधनों और शिल्पकला का प्रतिबिंब थे। आधुनिक युग में इनका निर्माण अधिक परिष्कृत सामग्रियों—जैसे बोन चाइना, अर्दनवेयर, [[पॉर्सिलेन]] और स्टोनवेयर—से किया जाने लगा है, जो न केवल आकर्षक होते हैं, बल्कि टिकाऊ भी होते हैं।
आकार और प्रयोजन के अनुसार कुछ बड़े मग, जो प्रायः धातु या मिट्टी से निर्मित होते हैं और विशेष रूप से पेय पदार्थ जैसे [[बियर]] के लिए उपयोग किए जाते हैं, टैंकर्ड कहलाते हैं। इसके अतिरिक्त, कुछ मग सुदृढ़ [[कांच]]—जैसे पाइरेक्स—से भी बनाए जाते हैं, जो ताप और झटकों के प्रति अधिक सहनशील होते हैं। हल्के वजन और टूट-फूट से बचाव के लिए [[मीनाकारी|एनामेल्ड]] धातु, [[प्लास्टिक]] या [[इस्पात]] जैसी सामग्रियों का उपयोग भी किया जाता है, विशेषकर बाहरी गतिविधियों जैसे [[कैंपिंग|शिविर-यात्रा]] में।
यात्रा के लिए विशेष रूप से बनाए गए ट्रैवल मग में ऊष्मा बनाए रखने की क्षमता होती है और इनमें छलकने से बचाने के लिए ढक्कन भी लगाया जाता है। सजावट की दृष्टि से, मग पर [[लोगो]], चित्र या कलात्मक आकृतियाँ अंकित करने के लिए [[आवरण मुद्रण|सिल्क-स्क्रीन मुद्रण]] या डिकल तकनीक का प्रयोग किया जाता है, जिन्हें पकाकर स्थायी रूप प्रदान किया जाता है। इस प्रकार, मग केवल एक साधारण बर्तन नहीं, बल्कि उपयोगिता, सौंदर्य और तकनीकी विकास का संगम है।
==सामान्य बनावट और कार्य==
[[File:Mug vs cup.jpg|thumb|एक मग और एक कप अगल-बगल रखे हुए हैं]]
मग के बनावट का एक प्रमुख उद्देश्य ऊष्मीय इन्सुलेशन सुनिश्चित करना होता है, जिससे उसमें रखा पेय अपेक्षाकृत अधिक समय तक अपने तापमान को बनाए रख सके। चाय के पारंपरिक कपों की पतली दीवारों की तुलना में मग की दीवारें मोटी होती हैं, जो ऊष्मा के आदान-प्रदान को धीमा करती हैं और पेय को जल्दी ठंडा या अत्यधिक गरम होने से बचाती हैं।
इसके अतिरिक्त, मग का आधार प्रायः पूर्णतः समतल नहीं होता, बल्कि हल्का अवतल या किनारीयुक्त बनाया जाता है। यह संरचना उस सतह के साथ प्रत्यक्ष संपर्क को कम करती है, जिस पर मग रखा जाता है, जिससे ऊष्मा का अपव्यय घटता है। इसी कारण अक्सर सतह पर एक विशिष्ट गोलाकार चिह्न भी दिखाई देता है, जो इस संरचनात्मक विशेषता का परिणाम होता है।
मग का हैंडल भी इसके ऊष्मीय गुणों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह हाथ को गरम सतह से दूर रखता है और उसके अपेक्षाकृत छोटे अनुप्रस्थ क्षेत्र के कारण ऊष्मा के प्रवाह को सीमित करता है, जिससे उपयोगकर्ता को पकड़ने में सुविधा और सुरक्षा दोनों मिलती हैं। इसी कारण, मग सामान्यतः ऐसी सामग्रियों—जैसे मिट्टी के बर्तन, बोन चाइना, [[पॉर्सिलेन]] या काँच—से बनाए जाते हैं,<ref>{{cite book|url=https://books.google.com/books?id=fJw0K1ZGY1kC&pg=PA98|page=98|title=The really useful science book: a framework of knowledge for primary teachers|author=स्टीव फैरो|publisher= रूटलेज |year=1999|isbn=0-7507-0983-9}}</ref><ref>{{cite book|url=https://books.google.com/books?id=esDW3xTKoLIC&pg=PA27|page=27|title=The handbook of evolutionary psychology|author=डेविड एम. बस|publisher=जॉन विली एंड संस.|year=2005|isbn=0-471-26403-2}}</ref> जिनकी [[ऊष्मा चालकता|ऊष्मीय चालकता]] कम होती है और जो ताप को नियंत्रित रखने में सहायक होती हैं।
===कपों की तुलना में अंतर===
मग और पारंपरिक कप के बीच का अंतर केवल आकार या बनावट तक सीमित नहीं है, बल्कि यह विभिन्न भाषाओं और संस्कृतियों में भी स्पष्ट रूप से परिलक्षित होता है। फ्रेंच, इतालवी, पोलिश, रूसी, जर्मन और अंग्रेज़ी जैसी अनेक भाषाओं में इन दोनों के लिए अलग-अलग शब्द प्रचलित हैं, जो इनके भिन्न उपयोग और सांस्कृतिक संदर्भों को दर्शाते हैं।
भाषाविद् अन्ना विर्ज़बिका के अनुसार, यह भिन्नता इनके कार्यात्मक अंतर से उत्पन्न होती है। पारंपरिक कप सामान्यतः औपचारिक परिवेश में मेज पर बैठकर पेय का आनंद लेने के लिए बनाए जाते हैं, जहाँ साज-सज्जा और शिष्टाचार का विशेष महत्व होता है। इसके विपरीत, मग अधिक अनौपचारिक और बहुउपयोगी होता है, जिसे किसी भी स्थान पर सहजता से उपयोग में लाया जा सकता है।{{sfn|Wierzbicka|1984|pp=214–216}}
==इतिहास==
===शुरुआती मग===
[[File:CMOC Treasures of Ancient China exhibit - large grey mug.jpg|upright|thumb|left|चीन के [[झेंगझोऊ]] में [[नवपाषाण युग|नवपाषाण काल]] के उत्तरार्ध ( लगभग 2500-2000 ईसा पूर्व) में कुम्हार के चाक पर बनाया गया एक मग।]]
मग का प्रारंभिक इतिहास यह दर्शाता है कि इसका उपयोग आज की अपेक्षा भिन्न उद्देश्यों के लिए किया जाता था। वर्तमान में जहाँ मग प्रायः गर्म पेय, दूध या शीतल पेयों से जुड़ा हुआ है, वहीं आरंभिक काल में इसका प्रमुख उपयोग [[बियर]] अथवा अन्य मादक पेयों के सेवन के लिए होता था। उस समय के मग आकार में भी अधिक बड़े होते थे, जो उनके उपयोग और सामाजिक परिवेश के अनुरूप थे। लकड़ी से बने प्रारंभिक मग संभवतः प्राचीन काष्ठ-शिल्प के आरंभिक दौर से ही प्रचलन में थे, किंतु समय के प्रभाव के कारण ऐसे अधिकांश नमूने आज सुरक्षित नहीं रह पाए हैं।<ref name="columbia">{{cite web|url=http://www.encyclopedia.com/doc/1E1-porcelai.html|title=Porcelain|publisher=कोलंबिया विश्वकोश छठा संस्करण. 2008|access-date=2008-06-27|archive-date=2008-08-21|archive-url=https://web.archive.org/web/20080821093621/http://www.encyclopedia.com/doc/1E1-porcelai.html|url-status=live}}</ref><ref name="G. J. Monson-Fitzjohn, B.Sc., F.R.Hist.S">{{cite book|url=http://www.nicks.com.au/index.aspx?link_id=76.623|title=Drinking Vessels of Bygone Days|author=जी. जे. मोनसन-फिट्ज़जॉन, बी.एससी., एफ.आर.एच.आई.एस.|url-status=dead|archive-url=https://web.archive.org/web/20100719162453/http://www.nicks.com.au/Index.aspx?link_id=76.623|archive-date=2010-07-19}}</ref>
मिट्टी के बर्तनों के विकास ने मग के निर्माण को एक नई दिशा दी। प्रारंभ में इन्हें [[कुंभकारी|हाथ से आकार]] दिया जाता था, परंतु कुम्हार का चाक के आविष्कार (लगभग 6500 से 3000 ईसा पूर्व के बीच) ने इस प्रक्रिया को अधिक सरल और परिष्कृत बना दिया। इस तकनीक के कारण बर्तनों में हैंडल जोड़ना भी सहज हो गया, जिससे आधुनिक स्वरूप के मग का विकास संभव हुआ। प्राचीन ग्रीस में 4000 से 5000 ईसा पूर्व के काल का एक सुसज्जित मिट्टी का मग प्राप्त हुआ है,<ref>{{cite web|url=http://www.ceramicstudies.me.uk/histx105.html|title=Ceramic Web Page Tutorials|website=Ceramicstudies.me.uk|access-date= नवंबर 16, 2012|archive-date= जून 5, 2023|archive-url=https://web.archive.org/web/20230605205500/http://www.ceramicstudies.me.uk/histx105.html|url-status=live}}</ref> जो उस युग की कलात्मकता और शिल्पकौशल का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करता है।
[[File:AnasaziMugs.jpeg|thumb|upright=1.1|[[कॉलोराडो|दक्षिण-पश्चिमी कोलोराडो]] से प्राप्त [[पुएब्लो कों के पूर्वज|पुएब्लो]] (अनासाज़ी) पूर्वजों के मग , जो 1000 से 1280 ईस्वी के बीच बनाए गए थे। इनके हैंडल पर की गई नक्काशी का अर्थ अभी तक अज्ञात है, लेकिन संभवतः इसका कोई कार्यात्मक महत्व नहीं है।]]
मग के विकासक्रम में प्रारंभिक मिट्टी के मगों की एक प्रमुख कमी उनकी अत्यधिक मोटी दीवारें थीं, जो पीने के लिए सुविधाजनक नहीं मानी जाती थीं। जैसे-जैसे [[धातुकार्य|धातु-कर्म]] की तकनीकों में प्रगति हुई, बर्तनों की दीवारों को अधिक पतला और सुडौल बनाया जाने लगा। लगभग 2000 ईसा पूर्व से [[कांसा|कांस्य]],<ref>{{cite web|url=http://www.thomaslayton.org.uk/joomla/index.php?option=com_content&task=view&id=26&Itemid=41|archive-url=https://web.archive.org/web/20201205022717/http://www.thomaslayton.org.uk/joomla/index.php?option=com_content&task=view&id=26&Itemid=41|url-status=dead|archive-date= दिसंबर 5, 2020|title=The Collection – Archaeology|website=Thomaslayton.org.uk|access-date= नवंबर 16, 2012}}</ref> [[चाँदी]], [[सोना]]<ref>{{cite web|url=http://www.visual-arts-cork.com/ancient-art/mycenean.htm|title=Mycenean Art|website=Visual-arts-cork.com|access-date=नवंबर 16, 2012|archive-date= मई 11, 2023|archive-url=https://web.archive.org/web/20230511213611/http://www.visual-arts-cork.com/ancient-art/mycenean.htm|url-status=live}}</ref> और यहाँ तक कि [[सीसा]]<ref>{{cite web|url=http://www.nicks.com.au/index.aspx?link_id=76.633|title=Lead drinking cup|website=Nicks.com.au|access-date=नवंबर 16, 2012|url-status=dead|archive-url=https://web.archive.org/web/20120927082915/http://www.nicks.com.au/index.aspx?link_id=76.633|archive-date= सितंबर 27, 2012}}</ref> जैसी धातुओं से भी मग निर्मित होने लगे। यद्यपि ये देखने में आकर्षक और टिकाऊ थे, फिर भी गर्म पेयों के साथ इनका उपयोग सहज नहीं था, क्योंकि धातु ऊष्मा का तीव्र संचार करती है।
मग के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ तब आया, जब [[चीनी जनवादी गणराज्य|चीन]] में लगभग 600 ईस्वी के आसपास [[पॉर्सिलेन|चीनी मिट्टी के बर्तनों]] का विकास हुआ। इस नवाचार ने पतली दीवारों वाले ऐसे मगों का निर्माण संभव बनाया, जो न केवल ठंडे, बल्कि गर्म पेयों के लिए भी उपयुक्त थे। यह परंपरा आज भी जारी है और आधुनिक मगों के स्वरूप में उसी विकास की छाप स्पष्ट दिखाई देती है।<ref name="columbia"/><ref name="G. J. Monson-Fitzjohn, B.Sc., F.R.Hist.S"/>
भाषाई दृष्टि से, “मग” शब्द का वर्तमान अर्थ में सबसे प्रारंभिक ज्ञात प्रयोग 1664 ईस्वी में मिलता है,<ref>{{cite web |title=Mug |url=https://www.merriam-webster.com/dictionary/mug#word-history |website=merriam-webster.com |publisher=मेरियम-वेबस्टर |access-date=30 जून 2025}}</ref> जो इस बर्तन के सांस्कृतिक और व्यावहारिक विकास की ऐतिहासिक यात्रा को भी रेखांकित करता है।
===विक्टर कॉफी मग===
[[द्वितीय विश्व युद्ध]] के दौरान [[अमेरिकी नौसेना|संयुक्त राज्य अमेरिका की नौसेना]] ने ऐसे कॉफी मग के निर्माण हेतु अमेरिकी कंपनियों से प्रस्ताव आमंत्रित किए, जो गिरने पर भी सुरक्षित रहें और जहाज़ों पर उपयोग के दौरान अत्यधिक टिकाऊ सिद्ध हों। कई प्रकार के डिज़ाइन प्रस्तुत किए गए, किंतु अंततः चयन [[विद्युतरोधी|उच्च-वोल्टेज पोर्सिलेन इन्सुलेटर]] निर्माता विक्टर इंसुलेटर द्वारा निर्मित एक विशेष डिज़ाइन का हुआ। उस समय युद्धकालीन परिस्थितियों में इन्सुलेटर की माँग घट गई थी, इसलिए कंपनी ने अपने कार्यों को बनाए रखने के लिए स्वच्छतापूर्ण बर्तनों के निर्माण की दिशा में कदम बढ़ाया।<ref name="Upstate">{{Cite web|url=https://exploringupstate.com/how-victor-changed-the-coffee-mug/|title=How the Victor Coffee Mug Changed the Way We Drink Coffee|last=क्लेमेंस|first=क्रिस|date= मार्च 6, 2016|website=एक्सप्लोरिंग अपस्टेट|language=en-US}}</ref>
विक्टर ने नौसेना के लिए एक विशिष्ट मग विकसित किया, जो बिना हैंडल के, सफेद चमकदार सतह वाला और मोटी दीवारों से युक्त था। यह डिज़ाइन अपनी मजबूती और उपयोगिता के कारण सैन्य बलों द्वारा अत्यंत सराहा गया। चूँकि इन मगों के निर्माण में वही पोर्सिलेन सामग्री प्रयुक्त हुई, जिसका उपयोग कंपनी अपने इन्सुलेटर बनाने में करती थी, इसलिए इनमें उत्कृष्ट ऊष्मा-रोधक गुण विद्यमान थे। इस प्रकार, युद्धकालीन आवश्यकताओं ने न केवल एक नए प्रकार के मग को जन्म दिया, बल्कि उसके व्यावहारिक और तकनीकी गुणों को भी परिष्कृत किया।<ref name="Upstate"/><ref name= cjow>{{cite web |last1=गिश|first1=एल्टन |title=Porcelain Insulator News |url=https://www.cjow.com/archive/article.php?month=2&a=02Porcelain%20Insulator%20News.htm&year=2004 |website=cjow.com |publisher=द वायर के क्राउन ज्वेल्स |date= फरवरी 2004}}</ref>
द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति के पश्चात विक्टर इंसुलेटर ने अपने उत्पादन को आंशिक रूप से सैनिटरीवेयर उत्पादों की ओर बनाए रखने का निर्णय लिया और अपने प्रसिद्ध मग का एक अधिक व्यावसायिक रूप से अनुकूल संस्करण प्रस्तुत किया। इस नए रूप में मग में सुविधाजनक हैंडल जोड़ा गया, उसका शरीर अपेक्षाकृत हल्का और पतला बनाया गया, तथा विभिन्न रंगों के विकल्प भी उपलब्ध कराए गए, जिससे यह आम उपभोक्ताओं के लिए अधिक आकर्षक बन गया।
इस सफल डिज़ाइन की लोकप्रियता इतनी बढ़ी कि इसकी नकल संयुक्त राज्य अमेरिका के भीतर ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अनेक निर्माताओं द्वारा बड़े पैमाने पर की जाने लगी।<ref name="Upstate"/> किंतु समय के साथ सस्ते और बड़े पैमाने पर उत्पादित [[चीनी जनवादी गणराज्य|चीनी]] निर्मित विकल्पों से कड़ी प्रतिस्पर्धा के कारण विक्टर को गंभीर आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा। परिणामस्वरूप, 1990 के दशक की शुरुआत में कंपनी को मग का उत्पादन बंद करना पड़ा।<ref name= cjow/>
आज, उत्पादन बंद होने के बाद भी विक्टर द्वारा निर्मित ये मग अपनी विशिष्ट गुणवत्ता और ऐतिहासिक महत्व के कारण संग्राहकों के बीच अत्यंत लोकप्रिय हो गए हैं।<ref>{{cite web |last1=डेलगाडो |first1=मिशेल |title=The Classic Diner Mug That's Disappearing |url=https://medium.com/@mdelgadia/the-classic-diner-mug-thats-disappearing-619c55935aa9 |website=medium.com |publisher= मीडियम |date= मई 24, 2017}}</ref> वे न केवल एक उपयोगी वस्तु के रूप में, बल्कि औद्योगिक इतिहास और डिज़ाइन विकास के प्रतीक के रूप में भी मूल्यवान माने जाते हैं।
==अन्य मग के प्रकार ==
===यात्रा मग===
[[File:travel mug.jpg|thumb|left|upright=.6|यात्रा मग]]
यात्रा मग का प्रचलन 1980 के दशक में बढ़ा, जब ऐसे बर्तनों की आवश्यकता महसूस हुई जो गर्म या ठंडे पेयों को सुरक्षित रूप से एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जा सकें। इन मगों का निर्माण इस प्रकार किया जाता है कि उनमें [[ऊष्मा रोधन|उत्कृष्ट ऊष्मीय इन्सुलेशन गुण]] हों, जिससे पेय लंबे समय तक अपने तापमान को बनाए रख सके। संरचना की दृष्टि से ये [[निर्वात फ्लास्क|वैक्यूम फ्लास्क]] के समान होते हैं—अर्थात् ये अच्छी तरह से इन्सुलेटेड और लगभग पूर्णतः बंद होते हैं, ताकि रिसाव या छलकाव की संभावना न्यूनतम रहे।<ref name=travel>मोरी कार्प "ट्रैवल मग" {{US patent|5249703}} जारी होने की तिथि: अक्टूबर 5, 1993</ref> फिर भी, इनके ढक्कन में एक छोटा छिद्र होता है, जिससे यात्रा के दौरान बिना खोले ही पेय का सेवन किया जा सके।
गर्म पेयों के ठंडा होने का प्रमुख कारण वाष्पीकरण होता है, इसलिए ट्रैवल मग में ढक्कन की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। यह वाष्प के बाहर निकलने को सीमित करता है और इस प्रकार पेय को अधिक समय तक गरम बनाए रखने में सहायक होता है, चाहे ढक्कन पतले प्लास्टिक का ही क्यों न हो।
इसके अतिरिक्त, कुछ मग ऐसे भी होते हैं जिनमें भीतरी और बाहरी दोहरी दीवारें होती हैं, परंतु उनके बीच वैक्यूम नहीं बनाया जाता। ऐसे बर्तनों को डबल वॉल मग कहा जाता है। इनमें भीतरी दीवार सामान्यतः स्टेनलेस स्टील की होती है, जबकि बाहरी परत स्टेनलेस स्टील, प्लास्टिक या अन्य सामग्रियों से निर्मित हो सकती है। यह संरचना भी कुछ हद तक ऊष्मा संरक्षण प्रदान करती है, यद्यपि वैक्यूम युक्त मग की तुलना में इसकी क्षमता अपेक्षाकृत कम होती है।
ड्राइविंग के दौरान उपयोग में आने वाला मग, जिसे प्रायः ऑटो मग या कम्यूटर मग कहा जाता है, केवल एक साधारण पात्र नहीं, बल्कि सुविधा, सुरक्षा और सूझबूझ का संतुलित रूप है। यह विशेष प्रकार का यात्रा मग इस प्रकार निर्मित होता है कि चलते वाहन में भी पेय का आनंद सहज और सुरक्षित बना रहे। इसके ऊपर लगा रिसाव-रोधी ढक्कन, जिसमें पीने के लिए एक छोटा सा छिद्र या नलिका होती है,<ref name="Jackson, Joe">{{cite web|author=जैक्सन, जो|title=Q: What's the Best Insulated Travel Mug? We tested five of the best. Here's how they stacked up.|date= दिसंबर 22, 2014|work=आउटसाइड|url=http://www.outsideonline.com/1786136/whats-best-insulated-travel-mug|access-date= दिसंबर 10, 2015|archive-date= दिसंबर 11, 2015|archive-url=https://web.archive.org/web/20151211031852/http://www.outsideonline.com/1786136/whats-best-insulated-travel-mug|url-status=live}}</ref> इस बात का ध्यान रखता है कि मार्ग की हलचल पेय को बाहर न छलकाए। साथ ही, इसका आधार प्रायः संकरा रखा जाता है, ताकि यह विभिन्न वाहनों में बने कप धारकों में दृढ़ता से स्थापित हो सके और अनचाही हलचल से बचा रहे।
ऐसे मग का मूल्यांकन केवल उसके रूप या आकार से नहीं, बल्कि उसके व्यावहारिक गुणों से किया जाता है। यह अपेक्षित है कि उसे एक हाथ से सरलता से खोला और बंद किया जा सके, जिससे चालक का ध्यान मार्ग से न भटके। उसमें भरण-सीमा का स्पष्ट संकेत हो, ताकि अधिक भराव के कारण होने वाले रिसाव से बचा जा सके। बिना हत्थे का स्वरूप इसे पकड़ने में अधिक सहज बनाता है, जिससे नियंत्रण बना रहता है। इसके अतिरिक्त, इसका विन्यास ऐसा होना चाहिए कि पेय ग्रहण करते समय चालक की दृष्टि मार्ग से विचलित न हो।<ref>{{cite news|work=कुक्स कंट्री|date= अक्टूबर 2011|title=Travel Mugs|url=http://www.cooksillustrated.com/equipment_reviews/1328-travel-mugs?extcode=MASCZ00L0&ref=search_results_1|access-date=2015-12-10|archive-date=2015-12-11|archive-url=https://web.archive.org/web/20151211023117/http://www.cooksillustrated.com/equipment_reviews/1328-travel-mugs?extcode=MASCZ00L0&ref=search_results_1|url-status=live}}</ref><ref name="Jackson, Joe"/><ref>{{cite news|work=अमेरिकाज़ टेस्ट किचन (सीज़न 8, एपिसोड 22)]]|title=Coffeehouse Treats: Equipment Corner/Gadget Guru: Commuter Coffee Mugs|date=2008}}</ref> अंततः, यह विभिन्न प्रकार के कप धारकों में स्थिरता से बैठ सके—यही इसकी उपयोगिता और विश्वसनीयता की वास्तविक कसौटी है।
===बियर मग===
[[File:Humpen.jpg|thumb|upright|एक सामान्य आधा लीटर का जर्मन बीयर मग]]
बीयर स्टाइन, परंपरा और शिल्पकला का एक विशिष्ट संगम, वास्तव में पारंपरिक बीयर मगों का वह रूप है जो प्रायः स्टोनवेयर मिट्टी से निर्मित होता है और ऐतिहासिक रूप से [[जर्मनी]] से जुड़ा हुआ माना जाता है। “स्टाइन” शब्द का अंग्रेज़ी में प्रचलन उन्नीसवीं शताब्दी के मध्य, लगभग 1855 के आसपास, [[जर्मन भाषा|जर्मन]] शब्द से रूपांतरित होकर हुआ;<ref name="mw">{{cite web|url=http://www.merriam-webster.com/dictionary/stein|title=Definition of STEIN|website=www.merriam-webster.com|date=5 सितम्बर 2023 }}</ref> किंतु रोचक तथ्य यह है कि जर्मनी में स्वयं इस शब्द का स्वतंत्र रूप से पेय पात्र के अर्थ में सामान्यतः उपयोग नहीं किया जाता। वहाँ इसके स्थान पर “क्रुग”, “हम्पेन” या “सीडेल” जैसे शब्द अधिक प्रचलित हैं, जो इन पात्रों की विविध आकृतियों और उपयोगों को अधिक सटीक रूप से व्यक्त करते हैं।
आधुनिक बीयर मग, जो इस परंपरा के उत्तराधिकारी माने जा सकते हैं, प्रायः आधा [[लीटर]] या एक लीटर की मानक धारिता में उपलब्ध होते हैं। इनके निर्माण में उपयोगिता और सौंदर्य का संतुलन स्पष्ट दिखाई देता है—मजबूत संरचना के साथ-साथ इनमें प्रायः धातु से निर्मित [[कब्ज़ा|कब्जेदार ढक्कन]] लगाए जाते हैं, जो स्वच्छता और संरक्षण दोनों की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण होते हैं। इसके अतिरिक्त, इन मगों की सतह पर उकेरे गए जर्मन [[राज्यचिह्न|प्रतीक-चिह्न]], ऐतिहासिक दृश्य या पारंपरिक कलात्मक आकृतियाँ इन्हें केवल पेय पात्र नहीं, बल्कि सांस्कृतिक विरासत के जीवंत प्रतीक के रूप में स्थापित करती हैं।
===टिकी मग===
[[File: Tiki7.jpg|अंगूठा|ईमानदार|टिकी मग]]
टिकी मग की उत्पत्ति बीसवीं शताब्दी के मध्य में उन उष्णकटिबंधीय वातावरण से प्रेरित भोजनालयों और विशेष पेय स्थलों में हुई, जहाँ वातावरण, सजावट और परोसे जाने वाले पेय—तीनों में एक विशिष्ट विदेशी आकर्षण रचा-बसा रहता था। “टिकी मग” वस्तुतः एक व्यापक और सामान्य संज्ञा है, जिसका उपयोग उन मूर्तिकला-सदृश पेय पात्रों के लिए किया जाता है, जिन पर [[मॅलानिशिया]], [[माइक्रोनीशिया]] अथवा [[पोलीनेशिया]] की सांस्कृतिक छवियों, प्रतीकों और आकृतियों का कलात्मक निरूपण किया गया होता है। समय के साथ इसका दायरा और भी विस्तृत हुआ है, और अब यह शब्द किसी भी ऐसे पात्र के लिए प्रयुक्त होने लगा है, जो उष्णकटिबंधीय परिवेश, समुद्री जीवन या सर्फिंग संस्कृति से संबंधित सौंदर्य-बोध को अभिव्यक्त करता हो।<ref>{{cite book|title=Tiki Mugs: Cult Artifacts of Polynesian Pop|author1=स्ट्रॉन्गमैन, जे |author2=वेस्टलैंड, होल्डन |publisher=कोरेरो बुक्स|year=2008|isbn=978-0-9553398-1-3}}</ref>
ये मग केवल उपयोग की वस्तु भर नहीं, बल्कि स्मृतियों और अनुभवों के संवाहक भी बन जाते हैं। प्रायः इन्हें स्मृति-चिह्न के रूप में बेचा जाता है, जिससे ये किसी स्थान, अनुभव या संस्कृति का प्रतीकात्मक प्रतिनिधित्व करने लगते हैं। यही कारण है कि अनेक लोग इन्हें संग्रहणीय वस्तुओं के रूप में संजोकर रखते हैं—जहाँ प्रत्येक टिकी मग अपने भीतर एक विशिष्ट कथा, सौंदर्य और सांस्कृतिक स्पर्श समेटे होता है।
===मनोरंजन मग===
व्हिसल मग, जिसे हबल-बबल के नाम से भी जाना जाता है, एक मनोरंजक और कौतुकपूर्ण पेय पात्र है, जो अपनी विशिष्ट बनावट के कारण साधारण मगों से अलग पहचान रखता है। इसकी संरचना में एक खोखला हत्था होता है, जिसे इस प्रकार निर्मित किया जाता है कि उसमें से हवा प्रवाहित करने पर सीटी जैसी ध्वनि उत्पन्न हो सके। यही विशेषता इसे केवल उपयोगी वस्तु न बनाकर एक खेल-भावना से जुड़ा अनुभव भी प्रदान करती है।
इस मग की ध्वनि उसकी अवस्था के अनुसार परिवर्तित होती है—जब यह खाली होता है, तब उससे एक सरल, एकल स्वर सुनाई देता है; किंतु जैसे ही इसमें द्रव भरा जाता है, ध्वनि का स्वरूप बदलकर अधिक मधुर, झंकारयुक्त और चहचहाहट जैसी जटिल ध्वनियों में परिवर्तित हो जाता है।<ref name=puzzle/>
===मेंढक मग===
मेंढक मग, जिसे सरप्राइज़ मग भी कहा जाता है, विनोद और आश्चर्य की भावना से निर्मित एक विशिष्ट पेय पात्र है। इसका रूप साधारण प्रतीत होता है, किंतु जैसे ही पेय धीरे-धीरे समाप्त होता है, उसके भीतर छिपा एक छोटा सिरेमिक जीव—अक्सर मेंढक—अचानक प्रकट होकर पीने वाले को चकित कर देता है। यही अप्रत्याशित अनुभव इसे मात्र उपयोगी वस्तु से आगे बढ़ाकर एक मनोरंजक परंपरा का हिस्सा बना देता है।
ऐसे मगों का इतिहास अठारहवीं शताब्दी के उत्तरार्ध, लगभग 1775 के आसपास तक जाता है, और उन्नीसवीं शताब्दी के अंत तक इनकी लोकप्रियता बनी रही। उस समय यह केवल हास्य या खिलवाड़ का साधन ही नहीं, बल्कि कुछ लोकमान्यताओं से भी जुड़ा हुआ था। कुछ परंपराओं में यह विश्वास प्रचलित था कि यदि बीयर में मेंढक या टोड दिखाई दे, तो उससे [[ज्वर]] दूर हो सकता है।<ref>{{Cite web |url=http://www2.epl.ca/InfoFile/EPLInfofileDetail.cfm?subject_detail=Mugs%2C%20Frog%2FToad%2FSurprise |title=Country Life, September 1983. |access-date=2016-02-06 |archive-date=2016-02-16 |archive-url=https://web.archive.org/web/20160216124057/http://www2.epl.ca/InfoFile/EPLInfofileDetail.cfm?subject_detail=Mugs%2C%20Frog%2FToad%2FSurprise |url-status=dead }}</ref> यद्यपि यह धारणा वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित नहीं है, फिर भी यह उन सांस्कृतिक विश्वासों और मानवीय कल्पनाओं की झलक अवश्य प्रस्तुत करती है, जिन्होंने ऐसे मगों को एक विशेष आकर्षण प्रदान किया।
===पहेली मग===
[[File:Fuddling cups.JPG|अंगूठा|बाएं|ईमानदार|फ़डलिंग कप। इन कपों में खोखले जोड़ होते हैं जिनकी मदद से इनके अंदर की सामग्री को बिना गिराए पिया जा सकता है।]]
पहेली मग एक ऐसा पेय पात्र है, जिसकी बनावट में चतुराई और कौतुक का अद्भुत समावेश होता है। इसे इस प्रकार निर्मित किया जाता है कि साधारण ढंग से इसका उपयोग करना संभव न हो, और पीने वाले को उसकी युक्ति समझने के लिए थोड़ी बुद्धि और धैर्य का सहारा लेना पड़े। उदाहरणतः, कुछ पज़ल मगों के किनारों पर अनेक सूक्ष्म छिद्र होते हैं, जिनके कारण सामान्य रूप से पेय ग्रहण करना असंभव हो जाता है। पहली दृष्टि में ऐसा प्रतीत होता है कि इन छिद्रों को हाथ से ढककर समस्या का समाधान किया जा सकता है, किंतु ऐसा करने पर पेय ऊपर की ओर स्थित अदृश्य छिद्रों से बाहर निकलने लगता है। इस पहेली का वास्तविक समाधान यह है कि किनारों के छिद्रों को उचित प्रकार से ढकते हुए, मग के खोखले हत्थे में बने एक गुप्त मार्ग से पेय ग्रहण किया जाए—यही इसकी चतुर संरचना का रहस्य है।<ref name=puzzle>{{cite news|url=http://ceramicstoday.com/articles/puzzle_mug.htm |title=In Their Cups – The Story of the English Puzzle Mug |author= डेलिया रॉबिन्सन |work=सेरामिक्स टुडे |url-status=unfit |archive-url=https://web.archive.org/web/20100103221715/http://ceramicstoday.com/articles/puzzle_mug.htm |archive-date= जनवरी 3, 2010 }}</ref>
[[File:Pythagorean cup sold in Crete.jpg|thumb|upright|एक पाइथागोरस कप]]
इसी श्रेणी में “फडलिंग कप्स” नामक एक और रोचक प्रकार मिलता है, जिसमें तीन अलग-अलग मग आपस में अपनी दीवारों और हत्थों के माध्यम से जुड़े होते हैं। इनकी भीतरी संरचना में ऐसे छिद्र बनाए जाते हैं, जो तरल के प्रवाह को नियंत्रित करते हैं। परिणामस्वरूप, इन मगों को एक निश्चित और सही क्रम में ही खाली किया जा सकता है; यदि क्रम का पालन न किया जाए, तो पेय अनपेक्षित रूप से बाहर निकल सकता है। इस प्रकार, यह केवल एक पेय पात्र नहीं, बल्कि एक मनोरंजक चुनौती बन जाता है।<ref name=puzzle/>
इसी प्रकार, “पाइथागोरस कप” एक विशिष्ट और शिक्षाप्रद पज़ल मग का उदाहरण है, जिसमें केंद्र में स्थित एक स्तंभ के भीतर एक सूक्ष्म [[दाबलंघिका|साइफन तंत्र]] छिपा होता है। जब तक कप में द्रव उस स्तंभ की ऊँचाई से नीचे रहता है, तब तक वह सुरक्षित रहता है; किंतु जैसे ही द्रव उस सीमा से ऊपर पहुँचता है, साइफन सक्रिय होकर संपूर्ण द्रव को कप के तले में बने छिद्र के माध्यम से बाहर निकाल देता है। यह संरचना केवल कौतुक ही नहीं उत्पन्न करती, बल्कि संयम और संतुलन का एक प्रतीकात्मक संदेश भी देती है—अधिकता अंततः हानि का कारण बन सकती है।
===तापमान बदलने वाले मग===
[[चित्र:Thermochromic_mug.webm|दाएँ|पाठ=Hot water is poured into a black mug, over about 20 seconds most of the mug changes colour to white, revealing black logo markings|अंगूठाकार|एक "जादुई मग" में गर्म पानी डालने और उसके बाद रंग में होने वाले परिवर्तन का वीडियो]]
ऊष्मा-परिवर्तनकारी, ऊष्मा-संवेदनशील अथवा तथाकथित “जादुई” मग ऐसे विशेष पेय पात्र होते हैं, जो तापमान में परिवर्तन के साथ अपना रूप और दृश्य स्वरूप बदल लेते हैं। यह अद्भुत परिवर्तन थर्मोक्रोमिज़्म नामक गुण के कारण संभव होता है, जिसमें ताप के प्रभाव से रंग अथवा चित्र क्रमशः प्रकट या लुप्त होने लगते हैं। जब इन मगों में गर्म पेय डाला जाता है, तो उनकी सतह पर छिपे हुए चित्र, संदेश या रंग धीरे-धीरे उभर आते हैं, मानो कोई रहस्य अचानक सजीव हो उठा हो।
इन मगों की यही विशेषता उन्हें केवल उपयोगी वस्तु तक सीमित नहीं रखती, बल्कि एक आकर्षक अनुभव का माध्यम भी बना देती है। ठंडा होने पर उनका स्वरूप पुनः बदल जाता है, जिससे यह परिवर्तनशीलता एक निरंतर दृश्य कौतुक का आभास कराती है।
==गैर-पेय मग==
=== दाढ़ी बनाने के मग और स्कटल्स (पात्र) ===
[[File:ShavingMug1.jpg|अंगूठा |बाएं|वर्टिकल|शेविंग मग]]
दाढ़ी बनाने के मग और स्कटल्स (पात्र) का विकास उन्नीसवीं शताब्दी के आसपास हुआ, और शेविंग मग का पहला पेटेंट सन् 1867 में दर्ज किया गया।<ref name=smug>पी. ब्रूक्स और जे. मैकग्राडी द्वारा "शेविंग कप में सुधार"" {{US patent|66788}} जुलाई 1867 में प्रकाशित हुआ था।</ref> उस समय अधिकांश घरों में गर्म जल की सहज उपलब्धता नहीं होती थी, इसलिए दाढ़ी बनाने के लिए आवश्यक गरम झाग तैयार करने हेतु विशेष प्रकार के पात्रों की आवश्यकता महसूस हुई। इसी आवश्यकता से स्कटल और शेविंग मग का प्रचलन आरंभ हुआ, जिन्होंने उस दौर की दैनिक दिनचर्या में एक व्यावहारिक समाधान प्रदान किया।
पारंपरिक शेविंग स्कटल का रूप किसी चायदानी से मिलता-जुलता होता है, जिसमें एक चौड़ी टोंटी होती है, जिसके माध्यम से उसमें गरम जल डाला जाता है। यही विशेषता इसे शेविंग मग से अलग करती है, क्योंकि शेविंग मग में सामान्यतः टोंटी नहीं होती। दोनों ही प्रकार के इन पात्रों में प्रायः पकड़ने के लिए हत्था होता है, यद्यपि कुछ रूप ऐसे भी मिलते हैं जिनमें यह नहीं होता। शेविंग मग का बाह्य स्वरूप प्रायः साधारण मग जैसा ही होता है, किंतु कई बार इसमें ब्रश रखने के लिए विशेष रूप से निर्मित स्थान भी होता है, जिससे ब्रश झाग में पूरी तरह डूबने से बचा रहता है और उपयोग अधिक सुविधाजनक बनता है।
आधुनिक समय में शेविंग स्कटल के रूप अपेक्षाकृत कम देखने को मिलते हैं और इनका निर्माण सीमित मात्रा में ही होता है। प्रायः इन्हें छोटे स्तर पर कार्य करने वाले स्वतंत्र [[कुंभकारी|कुम्हारों द्वारा]] पारंपरिक शिल्पकला के रूप में तैयार किया जाता है,<ref name=sara>{{cite web|url=http://www.sarabonnymanpottery.com/moss_scuttle.htm|title=Moss Scuttle|website=Sarabonnymanpottery.com|access-date= नवंबर 16, 2012|url-status=dead|archive-url=https://web.archive.org/web/20080509085958/http://www.sarabonnymanpottery.com/moss_scuttle.htm|archive-date= मई 9, 2008}}</ref> जिससे ये न केवल उपयोगी वस्तु बने रहते हैं, बल्कि एक सांस्कृतिक और हस्तशिल्पीय धरोहर का रूप भी धारण कर लेते हैं।
[[चित्र:ShavingMug2.png|अंगूठाकार|शेविंग स्कटल, 1867 का पेटेंट।<ref name=smug/>]]
स्कटल या शेविंग मग की संरचना उपयोगिता और सूक्ष्म कारीगरी का संतुलित उदाहरण प्रस्तुत करती है। इसके ऊपरी भाग में सामान्यतः साबुन रखने के लिए एक विशेष आधार या स्थान निर्मित होता है, जिसे इस प्रकार रूपांकित किया जाता है कि साबुन स्थिर बना रहे और झाग तैयार करने की प्रक्रिया सुगम हो सके। पारंपरिक रूप से इनका उपयोग कठोर शेविंग साबुन के साथ किया जाता था, जिसके कारण निचले भाग में जल निकासी के लिए सूक्ष्म छिद्र बनाए जाते थे, ताकि अतिरिक्त जल बाहर निकल सके और साबुन अत्यधिक गीला न हो।
समय के साथ इनके स्वरूप में परिवर्तन आया और बाद के स्कटल तथा मगों में ये छिद्र प्रायः नहीं पाए जाते, जिससे उनका उपयोग क्रीम अथवा नरम साबुन के साथ भी सहजता से किया जा सके। इसके अतिरिक्त, कुछ स्कटल और मगों के निचले भाग में संकेंद्रित वृत्ताकार रेखाएँ उकेरी जाती हैं, जो थोड़ी मात्रा में जल को रोके रखती हैं और झाग बनाने की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी तथा संतुलित बनाती हैं।<ref name=sara/>
उपयोग के दौरान शेविंग स्कटल की रचना अपनी पूरी उपयोगिता के साथ सामने आती है। इसमें शेविंग ब्रश को चौड़ी टोंटी वाले भाग में डुबोया जाता है, जहाँ वह जल में भीगकर पर्याप्त रूप से गरम हो जाता है। इसके बाद साबुन को ऊपरी भाग में बने विशेष आधार पर रखा जाता है। आवश्यकता होने पर ब्रश को साबुन पर घुमाया जाता है, जिससे धीरे-धीरे घना और मुलायम झाग तैयार हो जाता है, जबकि अतिरिक्त जल पुनः नीचे की ओर प्रवाहित हो जाता है।
इस सुविचारित व्यवस्था के कारण जल और साबुन—दोनों का अपव्यय कम होता है, और साथ ही आवश्यक ऊष्मा भी लंबे समय तक बनी रहती है। परिणामस्वरूप, शेविंग की प्रक्रिया अधिक आरामदायक, नियंत्रित और निरंतर बनी रहती है, जो उस युग की व्यावहारिक बुद्धिमत्ता और शिल्प कौशल का सुंदर उदाहरण प्रस्तुत करती है।
== समग्र डिजाइन और कार्य ==
मग के अधिकांश डिजाइन थर्मल इन्सुलेशन के उद्देश्य से हैं: एक मग की मोटी दीवार, चाय के प्याले की पतली दीवारों की तुलना में, पेट को ठंडा होने या जल्दी गर्म होने से बचाने के लिए इसे इंसुलेट करती हैं। मग का तेल अक्सर सपाट नहीं होता है, लेकिन अवतल होता है या उस सतह के साथ थर्मल संपर्क को कम करने के लिए एक अतिरिक्त रिम होता है जिस पर मग रखा जाता है। ये विशेषताएं अक्सर सतह पर एक विशिष्ट गोलाकार दाग छोड़ती हैं। अंत में, एक मग हैंडल आपके हाथ को मग के गर्म पक्षों से दूर रखता है। हैंडल का छोटा क्रॉस सेक्शन तरल और हाथ के बीच गर्मी के प्रभाव को कम करता है। थर्मल इन्सुलेशन के इसी कारण से, मग अक्सर कम [[थर्मल चालकता]], जैसे [[मिट्टी के बर्तन]], [[बोन चाइना]], [[चीनी मिट्टी के बर्तन]], या कांच के साथ सामग्री से बने होते हैं।
== सजावट ==
[[File:I got smashed in Grafenwöhr - Germany.jpg|left|upright|thumb|टूटा हुआ मग]]
मग, अपनी सर्वव्यापी उपस्थिति के कारण, केवल एक उपयोगी पेय पात्र तक सीमित नहीं रहा, बल्कि समय के साथ वह कला और अभिव्यक्ति का एक सशक्त माध्यम भी बन गया है। अनेक अवसरों पर इसका उपयोग विज्ञापन वस्तु के रूप में किया जाता है, जहाँ साधारण-सा दिखने वाला मग किसी विचार, संदेश या पहचान का वाहक बन जाता है। कुछ मग तो ऐसे भी होते हैं, जिन्हें पीने के लिए नहीं, बल्कि सजावट के रूप में अधिक महत्व दिया जाता है। प्राचीन काल से ही मगों पर नक्काशी और अलंकरण की परंपरा रही है, और कभी-कभी इन्हें विशिष्ट आकर्षण देने के लिए असामान्य आकृतियों में भी ढाला जाता रहा है।
आधुनिक समय में मगों की सजावट की सबसे लोकप्रिय विधि उन पर छपाई करना है, जिसमें तकनीक और सौंदर्य का सुंदर समन्वय दिखाई देता है। इस प्रक्रिया में सिरेमिक चूर्ण को चयनित रंगों और एक लचीले माध्यम के साथ मिलाकर एक विशेष मिश्रण तैयार किया जाता है। इसके बाद इस मिश्रण को जिलेटिन-लेपित कागज़ पर पारंपरिक [[आवरण मुद्रण|जाल-छपाई विधि]] के माध्यम से अंकित किया जाता है, जिसमें एक महीन बुने हुए जाल को फ्रेम पर कसकर लगाया जाता है और इच्छित आकृति के अनुसार एक छाप तैयार की जाती है। यह विधि सतह पर एक पतली और समान परत बनाने में सक्षम होती है।
यदि अत्यधिक चिकनाई या एकरूपता आवश्यक न हो, तो इसी मिश्रण को सीधे ब्रश की सहायता से भी मग की सतह पर लगाया जा सकता है, जिससे हस्तनिर्मित कलात्मकता का स्पर्श मिलता है। इसके अतिरिक्त, एक और अधिक जटिल तकनीक में कागज़ को प्रकाश-संवेदनशील परत से ढककर उस पर छवि अंकित की जाती है, और फिर पराबैंगनी प्रकाश के माध्यम से उस परत को स्थिर किया जाता है।<ref name=print>{{cite web|title=Printing Ceramics|url=http://www.ceramicstoday.com/articles/090798.htm|publisher=सिरेमिक्स टुडे|access-date=2009-08-30|archive-url=https://web.archive.org/web/20090601072522/http://www.ceramicstoday.com/articles/090798.htm|archive-date=2009-06-01|url-status=dead}}</ref>
सूखने के उपरांत “लिथो” कहलाने वाला यह मुद्रित कागज़ लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है, क्योंकि उसमें अंकित छवि स्थिर और संरक्षित रहती है। जब इस लिथो का उपयोग मग पर छवि स्थानांतरित करने के लिए किया जाता है, तो सबसे पहले उसे गरम जल में भिगोकर नरम किया जाता है। इस प्रक्रिया से मुद्रित छवि से युक्त जिलेटिन की पतली परत कागज़ से अलग हो जाती है, जिसे सावधानीपूर्वक मग की सतह पर चढ़ा दिया जाता है।
इसके बाद मग को उच्च ताप पर, लगभग 700 से 750 डिग्री सेल्सियस तक, भट्ठी में पकाया जाता है। इस ताप पर मग की चमकीली परत (ग्लेज़) की ऊपरी सतह हल्की-सी नरम हो जाती है, जिससे स्थानांतरित छवि उसमें स्थायी रूप से समाहित हो जाती है। परिणामस्वरूप, चित्र केवल सतह पर अंकित नहीं रहता, बल्कि मग का अभिन्न हिस्सा बन जाता है—जो दीर्घकाल तक अपनी स्पष्टता और सौंदर्य बनाए रखता है।<ref name=print/>
== भंडार==
एक लोकप्रिय तरीका कप का भंडार एक 'कप ट्री' पर होता है, एक लकड़ी या धातु की पोस्ट जो एक गोल आधार पर लगाई जाती है और उनके हैंडल से कप लटकने के लिए खूंटे से सुसज्जित होती है।<ref>जेन एंकोना, ब्रूस एंकोना "कप ट्री" अंक दिनांक: 4 दिसंबर 1990</ref> कप को लटकाने के लिए डिज़ाइन किए गए रैक भी हैं ताकि वे हाथ में हों। वे विशेष रूप से उच्च तरंगों वाली नावों पर उपयोगी होते हैं।
==गणित में ==
कप [[होमोमोर्फिज्म]] के [[टोपोलॉजी]] में सबसे लोकप्रिय उदाहरणों में से एक के रूप में कार्य करता है। दो वस्तुएं होमोमोर्फिक होती हैं यदि एक को बिना काटे या चिपकाए दूसरे में विकृत किया जा सकता है। इसलिए, टोपोलॉजी में, एक कप डोनट ([[टोरस]]) के बराबर (होमियोमॉर्फिक) होता है क्योंकि इसे बिना काटे, टूटे, ड्रिलिंग या ग्लूइंग के बिना निरंतर विरूपण द्वारा डोनट में बदला जा सकता है। एक अन्य टोपोलॉजिकल उदाहरण दो हैंडल वाला एक कप है, जो एक [[सरफेस जीनस-2|डबल टोरस]] के बराबर है - संख्या 8 जैसी दिखने वाली एक वस्तु। |date=1 जनवरी 2000}}</ref> बिना हैंडल वाला कप, यानी एक [[बाउल (कंटेनर)|कटोरा]] या [[बीकर (ग्लास)|बीकर] ], टोपोलॉजिकल रूप से एक के बराबर है [ [तश्तरी]], जो काफी स्पष्ट है जब एक कच्ची मिट्टी के कटोरे को चपटा किया जाता है एक [[कुम्हार का पहिया]]।
== गैलरी==
<gallery>
File:Kitchenware Steel Mug Rezowan.JPG|स्टील मग
File:Mug of tea, Smithfield Market, City of London.jpg|टी मग, यूके
File:Enamel mug.jpg|एनामेल मग
File:Lipton- mug-tea.jpg|चाय का गिलास मग
File:Frog or Surprise mug.JPG|[[मेंढक मग]]
File:Doughnut-shaped Coffee mug.jpg|डोना द्वारा आकार का मग
File:Wikipedia - filled with knowledge (beskuren).jpg|विकिपीडिया लोगों के साथ एक मग
File:Rosehage kopp cropped.jpg|[[मंगम्मा]] [[मूमिन मग|मूमिन-थीम्ड मग]] पर
File:Dinermug.jpg|थंब|ऑल्ट=एक ठेठ अमेरिकी मग|अमेरिकी ठेठ मग
File:Merchandising Coffee mug from band Dead Can Dance with 'DCD' logo - black.jpg|मग अक्सर [[व्यापारिक आइटम ]] के रूप में पॉप समूहों और कंपनियों द्वारा उपयोग किए जाते हैं, यहां बैंड [[डेड कैन डांस]]
</gallery>
==इन्हें भी देखें==
*[[कप]]
== सन्दर्भ ==
{{Reflist}}
[[श्रेणी:पीने के उपकरण]]
[[श्रेणी:चाय]]
[[श्रेणी:गर्म पेय]]
r5e23dwh6dr1yjvxh1y86x5m150qzf0
6547789
6547788
2026-05-02T14:40:44Z
चाहर धर्मेंद्र
703114
सुधार किया गया /* गणित में */
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wikitext
text/x-wiki
{{db-badtrans}}
{{खराब अनुवाद|अंग्रेज़ी}}
[[चित्र:Mug_of_Tea.JPG|upright=1.35|अंगूठाकार|दुध वाली चाय का एक मग]]
मग एक प्रकार का [[कप]] होता है,{{sfn|Kronenfeld|1996|p=6}} जिसे विशेष रूप से [[कॉफी]], [[हॉट चॉकलेट|गरम चॉकलेट]] या [[चाय]] जैसे गर्म पेय पदार्थों के सेवन के लिए उपयोग किया जाता है। इसकी सबसे प्रमुख विशेषता इसका हैंडल होता है, जो इसे पकड़ने में सुविधा प्रदान करता है, विशेषकर तब जब पेय गरम हो। आकार की दृष्टि से, मग सामान्य कपों—जैसे चाय या कॉफी के पारंपरिक कप—की तुलना में अधिक [[तरल]] धारण करने में सक्षम होता है।
आमतौर पर एक मग की क्षमता लगभग 250 से 350 मिलीलीटर के बीच होती है,<ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=IZRDIcz6uEQC&q=usually+mug+holds+12+fluid+ounces|title=The Boat Galley Cookbook: 800 Everyday Recipes and Essential Tips for Cooking Aboard : 800 Everyday Recipes and Essential Tips for Cooking Aboard: 800 Everyday Recipes and Essential Tips for Cooking Aboard|last1=शियरलॉक|first1=कैरोलिन|last2=आयरन्स|first2=जेन|date=2012-09-14|publisher=मैकग्रा हिल प्रोफेशनल|isbn=9780071782364|access-date=2021-03-12|archive-date=2024-04-25|archive-url=https://web.archive.org/web/20240425165047/https://books.google.com/books?id=IZRDIcz6uEQC&q=usually+mug+holds+12+fluid+ounces|url-status=live}}</ref> जो इसे दैनिक उपयोग के लिए अत्यंत व्यावहारिक बनाती है। यदि आकार इससे भी बड़ा हो, तो ऐसे बर्तन को टैंकर्ड कहा जाता है। इस प्रकार, मग केवल एक साधारण बर्तन नहीं, बल्कि दैनिक जीवन की सहजता और आराम का एक अभिन्न हिस्सा है।
मग का आकार प्रायः सरल और उपयोगितावादी होता है—यह या तो सीधी, बेलनाकार रेखाओं वाला होता है अथवा हल्का घुमाव लिए हुए रूप में भी निर्मित किया जाता है। यद्यपि इसके आकार में विविधता संभव है, फिर भी इसकी मूल पहचान एक सुविधाजनक हैंडल से जुड़ी होती है, जो इसे पकड़ने में सहजता प्रदान करता है; इसी विशेषता के अभाव में इसे बीकर कहा जाता है। सामान्यतः मग के साथ तश्तरी नहीं होती, जो इसे अन्य पारंपरिक कपों से भिन्न बनाती है।<ref>{{cite encyclopedia |title=mug, n.1 |url=http://www.oed.com/view/Entry/123325 |encyclopedia=ओईडी ऑनलाइन |date=दिसंबर 2014 |publisher=ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस |quote=A drinking vessel, freq. cylindrical (and now usually with a handle), generally used without a saucer. |access-date=2015-03-06 |archive-date=2024-04-25 |archive-url=https://web.archive.org/web/20240425165036/https://www.oed.com/dictionary/mug_n1 |url-status=live }}</ref>
मग को [[पेय]] पदार्थों के सेवन का अपेक्षाकृत अनौपचारिक माध्यम माना जाता है, इसलिए इसका प्रयोग प्रायः घरेलू या सहज वातावरण में अधिक होता है, जबकि औपचारिक भोजन कक्षों में चाय या कॉफी के पारंपरिक कपों को प्राथमिकता दी जाती है। इसके अतिरिक्त, मग का एक विशेष रूप [[हजामत|शेविंग]] मग भी होता है, जिसका उपयोग गीली दाढ़ी बनाने की प्रक्रिया में सहायक के रूप में किया जाता है। इस प्रकार, मग अपनी सरलता और बहुउपयोगिता के कारण दैनिक जीवन में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है।
मग का विकास समय के साथ उसकी उपयोगिता और निर्माण सामग्री के अनुसार निरंतर परिवर्तित होता रहा है। प्राचीन काल में मग प्रायः [[लकड़ी]] को तराशकर या [[कुंभकारी|मिट्टी]] से बनाए जाते थे, जो उस समय उपलब्ध संसाधनों और शिल्पकला का प्रतिबिंब थे। आधुनिक युग में इनका निर्माण अधिक परिष्कृत सामग्रियों—जैसे बोन चाइना, अर्दनवेयर, [[पॉर्सिलेन]] और स्टोनवेयर—से किया जाने लगा है, जो न केवल आकर्षक होते हैं, बल्कि टिकाऊ भी होते हैं।
आकार और प्रयोजन के अनुसार कुछ बड़े मग, जो प्रायः धातु या मिट्टी से निर्मित होते हैं और विशेष रूप से पेय पदार्थ जैसे [[बियर]] के लिए उपयोग किए जाते हैं, टैंकर्ड कहलाते हैं। इसके अतिरिक्त, कुछ मग सुदृढ़ [[कांच]]—जैसे पाइरेक्स—से भी बनाए जाते हैं, जो ताप और झटकों के प्रति अधिक सहनशील होते हैं। हल्के वजन और टूट-फूट से बचाव के लिए [[मीनाकारी|एनामेल्ड]] धातु, [[प्लास्टिक]] या [[इस्पात]] जैसी सामग्रियों का उपयोग भी किया जाता है, विशेषकर बाहरी गतिविधियों जैसे [[कैंपिंग|शिविर-यात्रा]] में।
यात्रा के लिए विशेष रूप से बनाए गए ट्रैवल मग में ऊष्मा बनाए रखने की क्षमता होती है और इनमें छलकने से बचाने के लिए ढक्कन भी लगाया जाता है। सजावट की दृष्टि से, मग पर [[लोगो]], चित्र या कलात्मक आकृतियाँ अंकित करने के लिए [[आवरण मुद्रण|सिल्क-स्क्रीन मुद्रण]] या डिकल तकनीक का प्रयोग किया जाता है, जिन्हें पकाकर स्थायी रूप प्रदान किया जाता है। इस प्रकार, मग केवल एक साधारण बर्तन नहीं, बल्कि उपयोगिता, सौंदर्य और तकनीकी विकास का संगम है।
==सामान्य बनावट और कार्य==
[[File:Mug vs cup.jpg|thumb|एक मग और एक कप अगल-बगल रखे हुए हैं]]
मग के बनावट का एक प्रमुख उद्देश्य ऊष्मीय इन्सुलेशन सुनिश्चित करना होता है, जिससे उसमें रखा पेय अपेक्षाकृत अधिक समय तक अपने तापमान को बनाए रख सके। चाय के पारंपरिक कपों की पतली दीवारों की तुलना में मग की दीवारें मोटी होती हैं, जो ऊष्मा के आदान-प्रदान को धीमा करती हैं और पेय को जल्दी ठंडा या अत्यधिक गरम होने से बचाती हैं।
इसके अतिरिक्त, मग का आधार प्रायः पूर्णतः समतल नहीं होता, बल्कि हल्का अवतल या किनारीयुक्त बनाया जाता है। यह संरचना उस सतह के साथ प्रत्यक्ष संपर्क को कम करती है, जिस पर मग रखा जाता है, जिससे ऊष्मा का अपव्यय घटता है। इसी कारण अक्सर सतह पर एक विशिष्ट गोलाकार चिह्न भी दिखाई देता है, जो इस संरचनात्मक विशेषता का परिणाम होता है।
मग का हैंडल भी इसके ऊष्मीय गुणों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह हाथ को गरम सतह से दूर रखता है और उसके अपेक्षाकृत छोटे अनुप्रस्थ क्षेत्र के कारण ऊष्मा के प्रवाह को सीमित करता है, जिससे उपयोगकर्ता को पकड़ने में सुविधा और सुरक्षा दोनों मिलती हैं। इसी कारण, मग सामान्यतः ऐसी सामग्रियों—जैसे मिट्टी के बर्तन, बोन चाइना, [[पॉर्सिलेन]] या काँच—से बनाए जाते हैं,<ref>{{cite book|url=https://books.google.com/books?id=fJw0K1ZGY1kC&pg=PA98|page=98|title=The really useful science book: a framework of knowledge for primary teachers|author=स्टीव फैरो|publisher= रूटलेज |year=1999|isbn=0-7507-0983-9}}</ref><ref>{{cite book|url=https://books.google.com/books?id=esDW3xTKoLIC&pg=PA27|page=27|title=The handbook of evolutionary psychology|author=डेविड एम. बस|publisher=जॉन विली एंड संस.|year=2005|isbn=0-471-26403-2}}</ref> जिनकी [[ऊष्मा चालकता|ऊष्मीय चालकता]] कम होती है और जो ताप को नियंत्रित रखने में सहायक होती हैं।
===कपों की तुलना में अंतर===
मग और पारंपरिक कप के बीच का अंतर केवल आकार या बनावट तक सीमित नहीं है, बल्कि यह विभिन्न भाषाओं और संस्कृतियों में भी स्पष्ट रूप से परिलक्षित होता है। फ्रेंच, इतालवी, पोलिश, रूसी, जर्मन और अंग्रेज़ी जैसी अनेक भाषाओं में इन दोनों के लिए अलग-अलग शब्द प्रचलित हैं, जो इनके भिन्न उपयोग और सांस्कृतिक संदर्भों को दर्शाते हैं।
भाषाविद् अन्ना विर्ज़बिका के अनुसार, यह भिन्नता इनके कार्यात्मक अंतर से उत्पन्न होती है। पारंपरिक कप सामान्यतः औपचारिक परिवेश में मेज पर बैठकर पेय का आनंद लेने के लिए बनाए जाते हैं, जहाँ साज-सज्जा और शिष्टाचार का विशेष महत्व होता है। इसके विपरीत, मग अधिक अनौपचारिक और बहुउपयोगी होता है, जिसे किसी भी स्थान पर सहजता से उपयोग में लाया जा सकता है।{{sfn|Wierzbicka|1984|pp=214–216}}
==इतिहास==
===शुरुआती मग===
[[File:CMOC Treasures of Ancient China exhibit - large grey mug.jpg|upright|thumb|left|चीन के [[झेंगझोऊ]] में [[नवपाषाण युग|नवपाषाण काल]] के उत्तरार्ध ( लगभग 2500-2000 ईसा पूर्व) में कुम्हार के चाक पर बनाया गया एक मग।]]
मग का प्रारंभिक इतिहास यह दर्शाता है कि इसका उपयोग आज की अपेक्षा भिन्न उद्देश्यों के लिए किया जाता था। वर्तमान में जहाँ मग प्रायः गर्म पेय, दूध या शीतल पेयों से जुड़ा हुआ है, वहीं आरंभिक काल में इसका प्रमुख उपयोग [[बियर]] अथवा अन्य मादक पेयों के सेवन के लिए होता था। उस समय के मग आकार में भी अधिक बड़े होते थे, जो उनके उपयोग और सामाजिक परिवेश के अनुरूप थे। लकड़ी से बने प्रारंभिक मग संभवतः प्राचीन काष्ठ-शिल्प के आरंभिक दौर से ही प्रचलन में थे, किंतु समय के प्रभाव के कारण ऐसे अधिकांश नमूने आज सुरक्षित नहीं रह पाए हैं।<ref name="columbia">{{cite web|url=http://www.encyclopedia.com/doc/1E1-porcelai.html|title=Porcelain|publisher=कोलंबिया विश्वकोश छठा संस्करण. 2008|access-date=2008-06-27|archive-date=2008-08-21|archive-url=https://web.archive.org/web/20080821093621/http://www.encyclopedia.com/doc/1E1-porcelai.html|url-status=live}}</ref><ref name="G. J. Monson-Fitzjohn, B.Sc., F.R.Hist.S">{{cite book|url=http://www.nicks.com.au/index.aspx?link_id=76.623|title=Drinking Vessels of Bygone Days|author=जी. जे. मोनसन-फिट्ज़जॉन, बी.एससी., एफ.आर.एच.आई.एस.|url-status=dead|archive-url=https://web.archive.org/web/20100719162453/http://www.nicks.com.au/Index.aspx?link_id=76.623|archive-date=2010-07-19}}</ref>
मिट्टी के बर्तनों के विकास ने मग के निर्माण को एक नई दिशा दी। प्रारंभ में इन्हें [[कुंभकारी|हाथ से आकार]] दिया जाता था, परंतु कुम्हार का चाक के आविष्कार (लगभग 6500 से 3000 ईसा पूर्व के बीच) ने इस प्रक्रिया को अधिक सरल और परिष्कृत बना दिया। इस तकनीक के कारण बर्तनों में हैंडल जोड़ना भी सहज हो गया, जिससे आधुनिक स्वरूप के मग का विकास संभव हुआ। प्राचीन ग्रीस में 4000 से 5000 ईसा पूर्व के काल का एक सुसज्जित मिट्टी का मग प्राप्त हुआ है,<ref>{{cite web|url=http://www.ceramicstudies.me.uk/histx105.html|title=Ceramic Web Page Tutorials|website=Ceramicstudies.me.uk|access-date= नवंबर 16, 2012|archive-date= जून 5, 2023|archive-url=https://web.archive.org/web/20230605205500/http://www.ceramicstudies.me.uk/histx105.html|url-status=live}}</ref> जो उस युग की कलात्मकता और शिल्पकौशल का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करता है।
[[File:AnasaziMugs.jpeg|thumb|upright=1.1|[[कॉलोराडो|दक्षिण-पश्चिमी कोलोराडो]] से प्राप्त [[पुएब्लो कों के पूर्वज|पुएब्लो]] (अनासाज़ी) पूर्वजों के मग , जो 1000 से 1280 ईस्वी के बीच बनाए गए थे। इनके हैंडल पर की गई नक्काशी का अर्थ अभी तक अज्ञात है, लेकिन संभवतः इसका कोई कार्यात्मक महत्व नहीं है।]]
मग के विकासक्रम में प्रारंभिक मिट्टी के मगों की एक प्रमुख कमी उनकी अत्यधिक मोटी दीवारें थीं, जो पीने के लिए सुविधाजनक नहीं मानी जाती थीं। जैसे-जैसे [[धातुकार्य|धातु-कर्म]] की तकनीकों में प्रगति हुई, बर्तनों की दीवारों को अधिक पतला और सुडौल बनाया जाने लगा। लगभग 2000 ईसा पूर्व से [[कांसा|कांस्य]],<ref>{{cite web|url=http://www.thomaslayton.org.uk/joomla/index.php?option=com_content&task=view&id=26&Itemid=41|archive-url=https://web.archive.org/web/20201205022717/http://www.thomaslayton.org.uk/joomla/index.php?option=com_content&task=view&id=26&Itemid=41|url-status=dead|archive-date= दिसंबर 5, 2020|title=The Collection – Archaeology|website=Thomaslayton.org.uk|access-date= नवंबर 16, 2012}}</ref> [[चाँदी]], [[सोना]]<ref>{{cite web|url=http://www.visual-arts-cork.com/ancient-art/mycenean.htm|title=Mycenean Art|website=Visual-arts-cork.com|access-date=नवंबर 16, 2012|archive-date= मई 11, 2023|archive-url=https://web.archive.org/web/20230511213611/http://www.visual-arts-cork.com/ancient-art/mycenean.htm|url-status=live}}</ref> और यहाँ तक कि [[सीसा]]<ref>{{cite web|url=http://www.nicks.com.au/index.aspx?link_id=76.633|title=Lead drinking cup|website=Nicks.com.au|access-date=नवंबर 16, 2012|url-status=dead|archive-url=https://web.archive.org/web/20120927082915/http://www.nicks.com.au/index.aspx?link_id=76.633|archive-date= सितंबर 27, 2012}}</ref> जैसी धातुओं से भी मग निर्मित होने लगे। यद्यपि ये देखने में आकर्षक और टिकाऊ थे, फिर भी गर्म पेयों के साथ इनका उपयोग सहज नहीं था, क्योंकि धातु ऊष्मा का तीव्र संचार करती है।
मग के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ तब आया, जब [[चीनी जनवादी गणराज्य|चीन]] में लगभग 600 ईस्वी के आसपास [[पॉर्सिलेन|चीनी मिट्टी के बर्तनों]] का विकास हुआ। इस नवाचार ने पतली दीवारों वाले ऐसे मगों का निर्माण संभव बनाया, जो न केवल ठंडे, बल्कि गर्म पेयों के लिए भी उपयुक्त थे। यह परंपरा आज भी जारी है और आधुनिक मगों के स्वरूप में उसी विकास की छाप स्पष्ट दिखाई देती है।<ref name="columbia"/><ref name="G. J. Monson-Fitzjohn, B.Sc., F.R.Hist.S"/>
भाषाई दृष्टि से, “मग” शब्द का वर्तमान अर्थ में सबसे प्रारंभिक ज्ञात प्रयोग 1664 ईस्वी में मिलता है,<ref>{{cite web |title=Mug |url=https://www.merriam-webster.com/dictionary/mug#word-history |website=merriam-webster.com |publisher=मेरियम-वेबस्टर |access-date=30 जून 2025}}</ref> जो इस बर्तन के सांस्कृतिक और व्यावहारिक विकास की ऐतिहासिक यात्रा को भी रेखांकित करता है।
===विक्टर कॉफी मग===
[[द्वितीय विश्व युद्ध]] के दौरान [[अमेरिकी नौसेना|संयुक्त राज्य अमेरिका की नौसेना]] ने ऐसे कॉफी मग के निर्माण हेतु अमेरिकी कंपनियों से प्रस्ताव आमंत्रित किए, जो गिरने पर भी सुरक्षित रहें और जहाज़ों पर उपयोग के दौरान अत्यधिक टिकाऊ सिद्ध हों। कई प्रकार के डिज़ाइन प्रस्तुत किए गए, किंतु अंततः चयन [[विद्युतरोधी|उच्च-वोल्टेज पोर्सिलेन इन्सुलेटर]] निर्माता विक्टर इंसुलेटर द्वारा निर्मित एक विशेष डिज़ाइन का हुआ। उस समय युद्धकालीन परिस्थितियों में इन्सुलेटर की माँग घट गई थी, इसलिए कंपनी ने अपने कार्यों को बनाए रखने के लिए स्वच्छतापूर्ण बर्तनों के निर्माण की दिशा में कदम बढ़ाया।<ref name="Upstate">{{Cite web|url=https://exploringupstate.com/how-victor-changed-the-coffee-mug/|title=How the Victor Coffee Mug Changed the Way We Drink Coffee|last=क्लेमेंस|first=क्रिस|date= मार्च 6, 2016|website=एक्सप्लोरिंग अपस्टेट|language=en-US}}</ref>
विक्टर ने नौसेना के लिए एक विशिष्ट मग विकसित किया, जो बिना हैंडल के, सफेद चमकदार सतह वाला और मोटी दीवारों से युक्त था। यह डिज़ाइन अपनी मजबूती और उपयोगिता के कारण सैन्य बलों द्वारा अत्यंत सराहा गया। चूँकि इन मगों के निर्माण में वही पोर्सिलेन सामग्री प्रयुक्त हुई, जिसका उपयोग कंपनी अपने इन्सुलेटर बनाने में करती थी, इसलिए इनमें उत्कृष्ट ऊष्मा-रोधक गुण विद्यमान थे। इस प्रकार, युद्धकालीन आवश्यकताओं ने न केवल एक नए प्रकार के मग को जन्म दिया, बल्कि उसके व्यावहारिक और तकनीकी गुणों को भी परिष्कृत किया।<ref name="Upstate"/><ref name= cjow>{{cite web |last1=गिश|first1=एल्टन |title=Porcelain Insulator News |url=https://www.cjow.com/archive/article.php?month=2&a=02Porcelain%20Insulator%20News.htm&year=2004 |website=cjow.com |publisher=द वायर के क्राउन ज्वेल्स |date= फरवरी 2004}}</ref>
द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति के पश्चात विक्टर इंसुलेटर ने अपने उत्पादन को आंशिक रूप से सैनिटरीवेयर उत्पादों की ओर बनाए रखने का निर्णय लिया और अपने प्रसिद्ध मग का एक अधिक व्यावसायिक रूप से अनुकूल संस्करण प्रस्तुत किया। इस नए रूप में मग में सुविधाजनक हैंडल जोड़ा गया, उसका शरीर अपेक्षाकृत हल्का और पतला बनाया गया, तथा विभिन्न रंगों के विकल्प भी उपलब्ध कराए गए, जिससे यह आम उपभोक्ताओं के लिए अधिक आकर्षक बन गया।
इस सफल डिज़ाइन की लोकप्रियता इतनी बढ़ी कि इसकी नकल संयुक्त राज्य अमेरिका के भीतर ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अनेक निर्माताओं द्वारा बड़े पैमाने पर की जाने लगी।<ref name="Upstate"/> किंतु समय के साथ सस्ते और बड़े पैमाने पर उत्पादित [[चीनी जनवादी गणराज्य|चीनी]] निर्मित विकल्पों से कड़ी प्रतिस्पर्धा के कारण विक्टर को गंभीर आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा। परिणामस्वरूप, 1990 के दशक की शुरुआत में कंपनी को मग का उत्पादन बंद करना पड़ा।<ref name= cjow/>
आज, उत्पादन बंद होने के बाद भी विक्टर द्वारा निर्मित ये मग अपनी विशिष्ट गुणवत्ता और ऐतिहासिक महत्व के कारण संग्राहकों के बीच अत्यंत लोकप्रिय हो गए हैं।<ref>{{cite web |last1=डेलगाडो |first1=मिशेल |title=The Classic Diner Mug That's Disappearing |url=https://medium.com/@mdelgadia/the-classic-diner-mug-thats-disappearing-619c55935aa9 |website=medium.com |publisher= मीडियम |date= मई 24, 2017}}</ref> वे न केवल एक उपयोगी वस्तु के रूप में, बल्कि औद्योगिक इतिहास और डिज़ाइन विकास के प्रतीक के रूप में भी मूल्यवान माने जाते हैं।
==अन्य मग के प्रकार ==
===यात्रा मग===
[[File:travel mug.jpg|thumb|left|upright=.6|यात्रा मग]]
यात्रा मग का प्रचलन 1980 के दशक में बढ़ा, जब ऐसे बर्तनों की आवश्यकता महसूस हुई जो गर्म या ठंडे पेयों को सुरक्षित रूप से एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जा सकें। इन मगों का निर्माण इस प्रकार किया जाता है कि उनमें [[ऊष्मा रोधन|उत्कृष्ट ऊष्मीय इन्सुलेशन गुण]] हों, जिससे पेय लंबे समय तक अपने तापमान को बनाए रख सके। संरचना की दृष्टि से ये [[निर्वात फ्लास्क|वैक्यूम फ्लास्क]] के समान होते हैं—अर्थात् ये अच्छी तरह से इन्सुलेटेड और लगभग पूर्णतः बंद होते हैं, ताकि रिसाव या छलकाव की संभावना न्यूनतम रहे।<ref name=travel>मोरी कार्प "ट्रैवल मग" {{US patent|5249703}} जारी होने की तिथि: अक्टूबर 5, 1993</ref> फिर भी, इनके ढक्कन में एक छोटा छिद्र होता है, जिससे यात्रा के दौरान बिना खोले ही पेय का सेवन किया जा सके।
गर्म पेयों के ठंडा होने का प्रमुख कारण वाष्पीकरण होता है, इसलिए ट्रैवल मग में ढक्कन की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। यह वाष्प के बाहर निकलने को सीमित करता है और इस प्रकार पेय को अधिक समय तक गरम बनाए रखने में सहायक होता है, चाहे ढक्कन पतले प्लास्टिक का ही क्यों न हो।
इसके अतिरिक्त, कुछ मग ऐसे भी होते हैं जिनमें भीतरी और बाहरी दोहरी दीवारें होती हैं, परंतु उनके बीच वैक्यूम नहीं बनाया जाता। ऐसे बर्तनों को डबल वॉल मग कहा जाता है। इनमें भीतरी दीवार सामान्यतः स्टेनलेस स्टील की होती है, जबकि बाहरी परत स्टेनलेस स्टील, प्लास्टिक या अन्य सामग्रियों से निर्मित हो सकती है। यह संरचना भी कुछ हद तक ऊष्मा संरक्षण प्रदान करती है, यद्यपि वैक्यूम युक्त मग की तुलना में इसकी क्षमता अपेक्षाकृत कम होती है।
ड्राइविंग के दौरान उपयोग में आने वाला मग, जिसे प्रायः ऑटो मग या कम्यूटर मग कहा जाता है, केवल एक साधारण पात्र नहीं, बल्कि सुविधा, सुरक्षा और सूझबूझ का संतुलित रूप है। यह विशेष प्रकार का यात्रा मग इस प्रकार निर्मित होता है कि चलते वाहन में भी पेय का आनंद सहज और सुरक्षित बना रहे। इसके ऊपर लगा रिसाव-रोधी ढक्कन, जिसमें पीने के लिए एक छोटा सा छिद्र या नलिका होती है,<ref name="Jackson, Joe">{{cite web|author=जैक्सन, जो|title=Q: What's the Best Insulated Travel Mug? We tested five of the best. Here's how they stacked up.|date= दिसंबर 22, 2014|work=आउटसाइड|url=http://www.outsideonline.com/1786136/whats-best-insulated-travel-mug|access-date= दिसंबर 10, 2015|archive-date= दिसंबर 11, 2015|archive-url=https://web.archive.org/web/20151211031852/http://www.outsideonline.com/1786136/whats-best-insulated-travel-mug|url-status=live}}</ref> इस बात का ध्यान रखता है कि मार्ग की हलचल पेय को बाहर न छलकाए। साथ ही, इसका आधार प्रायः संकरा रखा जाता है, ताकि यह विभिन्न वाहनों में बने कप धारकों में दृढ़ता से स्थापित हो सके और अनचाही हलचल से बचा रहे।
ऐसे मग का मूल्यांकन केवल उसके रूप या आकार से नहीं, बल्कि उसके व्यावहारिक गुणों से किया जाता है। यह अपेक्षित है कि उसे एक हाथ से सरलता से खोला और बंद किया जा सके, जिससे चालक का ध्यान मार्ग से न भटके। उसमें भरण-सीमा का स्पष्ट संकेत हो, ताकि अधिक भराव के कारण होने वाले रिसाव से बचा जा सके। बिना हत्थे का स्वरूप इसे पकड़ने में अधिक सहज बनाता है, जिससे नियंत्रण बना रहता है। इसके अतिरिक्त, इसका विन्यास ऐसा होना चाहिए कि पेय ग्रहण करते समय चालक की दृष्टि मार्ग से विचलित न हो।<ref>{{cite news|work=कुक्स कंट्री|date= अक्टूबर 2011|title=Travel Mugs|url=http://www.cooksillustrated.com/equipment_reviews/1328-travel-mugs?extcode=MASCZ00L0&ref=search_results_1|access-date=2015-12-10|archive-date=2015-12-11|archive-url=https://web.archive.org/web/20151211023117/http://www.cooksillustrated.com/equipment_reviews/1328-travel-mugs?extcode=MASCZ00L0&ref=search_results_1|url-status=live}}</ref><ref name="Jackson, Joe"/><ref>{{cite news|work=अमेरिकाज़ टेस्ट किचन (सीज़न 8, एपिसोड 22)]]|title=Coffeehouse Treats: Equipment Corner/Gadget Guru: Commuter Coffee Mugs|date=2008}}</ref> अंततः, यह विभिन्न प्रकार के कप धारकों में स्थिरता से बैठ सके—यही इसकी उपयोगिता और विश्वसनीयता की वास्तविक कसौटी है।
===बियर मग===
[[File:Humpen.jpg|thumb|upright|एक सामान्य आधा लीटर का जर्मन बीयर मग]]
बीयर स्टाइन, परंपरा और शिल्पकला का एक विशिष्ट संगम, वास्तव में पारंपरिक बीयर मगों का वह रूप है जो प्रायः स्टोनवेयर मिट्टी से निर्मित होता है और ऐतिहासिक रूप से [[जर्मनी]] से जुड़ा हुआ माना जाता है। “स्टाइन” शब्द का अंग्रेज़ी में प्रचलन उन्नीसवीं शताब्दी के मध्य, लगभग 1855 के आसपास, [[जर्मन भाषा|जर्मन]] शब्द से रूपांतरित होकर हुआ;<ref name="mw">{{cite web|url=http://www.merriam-webster.com/dictionary/stein|title=Definition of STEIN|website=www.merriam-webster.com|date=5 सितम्बर 2023 }}</ref> किंतु रोचक तथ्य यह है कि जर्मनी में स्वयं इस शब्द का स्वतंत्र रूप से पेय पात्र के अर्थ में सामान्यतः उपयोग नहीं किया जाता। वहाँ इसके स्थान पर “क्रुग”, “हम्पेन” या “सीडेल” जैसे शब्द अधिक प्रचलित हैं, जो इन पात्रों की विविध आकृतियों और उपयोगों को अधिक सटीक रूप से व्यक्त करते हैं।
आधुनिक बीयर मग, जो इस परंपरा के उत्तराधिकारी माने जा सकते हैं, प्रायः आधा [[लीटर]] या एक लीटर की मानक धारिता में उपलब्ध होते हैं। इनके निर्माण में उपयोगिता और सौंदर्य का संतुलन स्पष्ट दिखाई देता है—मजबूत संरचना के साथ-साथ इनमें प्रायः धातु से निर्मित [[कब्ज़ा|कब्जेदार ढक्कन]] लगाए जाते हैं, जो स्वच्छता और संरक्षण दोनों की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण होते हैं। इसके अतिरिक्त, इन मगों की सतह पर उकेरे गए जर्मन [[राज्यचिह्न|प्रतीक-चिह्न]], ऐतिहासिक दृश्य या पारंपरिक कलात्मक आकृतियाँ इन्हें केवल पेय पात्र नहीं, बल्कि सांस्कृतिक विरासत के जीवंत प्रतीक के रूप में स्थापित करती हैं।
===टिकी मग===
[[File: Tiki7.jpg|अंगूठा|ईमानदार|टिकी मग]]
टिकी मग की उत्पत्ति बीसवीं शताब्दी के मध्य में उन उष्णकटिबंधीय वातावरण से प्रेरित भोजनालयों और विशेष पेय स्थलों में हुई, जहाँ वातावरण, सजावट और परोसे जाने वाले पेय—तीनों में एक विशिष्ट विदेशी आकर्षण रचा-बसा रहता था। “टिकी मग” वस्तुतः एक व्यापक और सामान्य संज्ञा है, जिसका उपयोग उन मूर्तिकला-सदृश पेय पात्रों के लिए किया जाता है, जिन पर [[मॅलानिशिया]], [[माइक्रोनीशिया]] अथवा [[पोलीनेशिया]] की सांस्कृतिक छवियों, प्रतीकों और आकृतियों का कलात्मक निरूपण किया गया होता है। समय के साथ इसका दायरा और भी विस्तृत हुआ है, और अब यह शब्द किसी भी ऐसे पात्र के लिए प्रयुक्त होने लगा है, जो उष्णकटिबंधीय परिवेश, समुद्री जीवन या सर्फिंग संस्कृति से संबंधित सौंदर्य-बोध को अभिव्यक्त करता हो।<ref>{{cite book|title=Tiki Mugs: Cult Artifacts of Polynesian Pop|author1=स्ट्रॉन्गमैन, जे |author2=वेस्टलैंड, होल्डन |publisher=कोरेरो बुक्स|year=2008|isbn=978-0-9553398-1-3}}</ref>
ये मग केवल उपयोग की वस्तु भर नहीं, बल्कि स्मृतियों और अनुभवों के संवाहक भी बन जाते हैं। प्रायः इन्हें स्मृति-चिह्न के रूप में बेचा जाता है, जिससे ये किसी स्थान, अनुभव या संस्कृति का प्रतीकात्मक प्रतिनिधित्व करने लगते हैं। यही कारण है कि अनेक लोग इन्हें संग्रहणीय वस्तुओं के रूप में संजोकर रखते हैं—जहाँ प्रत्येक टिकी मग अपने भीतर एक विशिष्ट कथा, सौंदर्य और सांस्कृतिक स्पर्श समेटे होता है।
===मनोरंजन मग===
व्हिसल मग, जिसे हबल-बबल के नाम से भी जाना जाता है, एक मनोरंजक और कौतुकपूर्ण पेय पात्र है, जो अपनी विशिष्ट बनावट के कारण साधारण मगों से अलग पहचान रखता है। इसकी संरचना में एक खोखला हत्था होता है, जिसे इस प्रकार निर्मित किया जाता है कि उसमें से हवा प्रवाहित करने पर सीटी जैसी ध्वनि उत्पन्न हो सके। यही विशेषता इसे केवल उपयोगी वस्तु न बनाकर एक खेल-भावना से जुड़ा अनुभव भी प्रदान करती है।
इस मग की ध्वनि उसकी अवस्था के अनुसार परिवर्तित होती है—जब यह खाली होता है, तब उससे एक सरल, एकल स्वर सुनाई देता है; किंतु जैसे ही इसमें द्रव भरा जाता है, ध्वनि का स्वरूप बदलकर अधिक मधुर, झंकारयुक्त और चहचहाहट जैसी जटिल ध्वनियों में परिवर्तित हो जाता है।<ref name=puzzle/>
===मेंढक मग===
मेंढक मग, जिसे सरप्राइज़ मग भी कहा जाता है, विनोद और आश्चर्य की भावना से निर्मित एक विशिष्ट पेय पात्र है। इसका रूप साधारण प्रतीत होता है, किंतु जैसे ही पेय धीरे-धीरे समाप्त होता है, उसके भीतर छिपा एक छोटा सिरेमिक जीव—अक्सर मेंढक—अचानक प्रकट होकर पीने वाले को चकित कर देता है। यही अप्रत्याशित अनुभव इसे मात्र उपयोगी वस्तु से आगे बढ़ाकर एक मनोरंजक परंपरा का हिस्सा बना देता है।
ऐसे मगों का इतिहास अठारहवीं शताब्दी के उत्तरार्ध, लगभग 1775 के आसपास तक जाता है, और उन्नीसवीं शताब्दी के अंत तक इनकी लोकप्रियता बनी रही। उस समय यह केवल हास्य या खिलवाड़ का साधन ही नहीं, बल्कि कुछ लोकमान्यताओं से भी जुड़ा हुआ था। कुछ परंपराओं में यह विश्वास प्रचलित था कि यदि बीयर में मेंढक या टोड दिखाई दे, तो उससे [[ज्वर]] दूर हो सकता है।<ref>{{Cite web |url=http://www2.epl.ca/InfoFile/EPLInfofileDetail.cfm?subject_detail=Mugs%2C%20Frog%2FToad%2FSurprise |title=Country Life, September 1983. |access-date=2016-02-06 |archive-date=2016-02-16 |archive-url=https://web.archive.org/web/20160216124057/http://www2.epl.ca/InfoFile/EPLInfofileDetail.cfm?subject_detail=Mugs%2C%20Frog%2FToad%2FSurprise |url-status=dead }}</ref> यद्यपि यह धारणा वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित नहीं है, फिर भी यह उन सांस्कृतिक विश्वासों और मानवीय कल्पनाओं की झलक अवश्य प्रस्तुत करती है, जिन्होंने ऐसे मगों को एक विशेष आकर्षण प्रदान किया।
===पहेली मग===
[[File:Fuddling cups.JPG|अंगूठा|बाएं|ईमानदार|फ़डलिंग कप। इन कपों में खोखले जोड़ होते हैं जिनकी मदद से इनके अंदर की सामग्री को बिना गिराए पिया जा सकता है।]]
पहेली मग एक ऐसा पेय पात्र है, जिसकी बनावट में चतुराई और कौतुक का अद्भुत समावेश होता है। इसे इस प्रकार निर्मित किया जाता है कि साधारण ढंग से इसका उपयोग करना संभव न हो, और पीने वाले को उसकी युक्ति समझने के लिए थोड़ी बुद्धि और धैर्य का सहारा लेना पड़े। उदाहरणतः, कुछ पज़ल मगों के किनारों पर अनेक सूक्ष्म छिद्र होते हैं, जिनके कारण सामान्य रूप से पेय ग्रहण करना असंभव हो जाता है। पहली दृष्टि में ऐसा प्रतीत होता है कि इन छिद्रों को हाथ से ढककर समस्या का समाधान किया जा सकता है, किंतु ऐसा करने पर पेय ऊपर की ओर स्थित अदृश्य छिद्रों से बाहर निकलने लगता है। इस पहेली का वास्तविक समाधान यह है कि किनारों के छिद्रों को उचित प्रकार से ढकते हुए, मग के खोखले हत्थे में बने एक गुप्त मार्ग से पेय ग्रहण किया जाए—यही इसकी चतुर संरचना का रहस्य है।<ref name=puzzle>{{cite news|url=http://ceramicstoday.com/articles/puzzle_mug.htm |title=In Their Cups – The Story of the English Puzzle Mug |author= डेलिया रॉबिन्सन |work=सेरामिक्स टुडे |url-status=unfit |archive-url=https://web.archive.org/web/20100103221715/http://ceramicstoday.com/articles/puzzle_mug.htm |archive-date= जनवरी 3, 2010 }}</ref>
[[File:Pythagorean cup sold in Crete.jpg|thumb|upright|एक पाइथागोरस कप]]
इसी श्रेणी में “फडलिंग कप्स” नामक एक और रोचक प्रकार मिलता है, जिसमें तीन अलग-अलग मग आपस में अपनी दीवारों और हत्थों के माध्यम से जुड़े होते हैं। इनकी भीतरी संरचना में ऐसे छिद्र बनाए जाते हैं, जो तरल के प्रवाह को नियंत्रित करते हैं। परिणामस्वरूप, इन मगों को एक निश्चित और सही क्रम में ही खाली किया जा सकता है; यदि क्रम का पालन न किया जाए, तो पेय अनपेक्षित रूप से बाहर निकल सकता है। इस प्रकार, यह केवल एक पेय पात्र नहीं, बल्कि एक मनोरंजक चुनौती बन जाता है।<ref name=puzzle/>
इसी प्रकार, “पाइथागोरस कप” एक विशिष्ट और शिक्षाप्रद पज़ल मग का उदाहरण है, जिसमें केंद्र में स्थित एक स्तंभ के भीतर एक सूक्ष्म [[दाबलंघिका|साइफन तंत्र]] छिपा होता है। जब तक कप में द्रव उस स्तंभ की ऊँचाई से नीचे रहता है, तब तक वह सुरक्षित रहता है; किंतु जैसे ही द्रव उस सीमा से ऊपर पहुँचता है, साइफन सक्रिय होकर संपूर्ण द्रव को कप के तले में बने छिद्र के माध्यम से बाहर निकाल देता है। यह संरचना केवल कौतुक ही नहीं उत्पन्न करती, बल्कि संयम और संतुलन का एक प्रतीकात्मक संदेश भी देती है—अधिकता अंततः हानि का कारण बन सकती है।
===तापमान बदलने वाले मग===
[[चित्र:Thermochromic_mug.webm|दाएँ|पाठ=Hot water is poured into a black mug, over about 20 seconds most of the mug changes colour to white, revealing black logo markings|अंगूठाकार|एक "जादुई मग" में गर्म पानी डालने और उसके बाद रंग में होने वाले परिवर्तन का वीडियो]]
ऊष्मा-परिवर्तनकारी, ऊष्मा-संवेदनशील अथवा तथाकथित “जादुई” मग ऐसे विशेष पेय पात्र होते हैं, जो तापमान में परिवर्तन के साथ अपना रूप और दृश्य स्वरूप बदल लेते हैं। यह अद्भुत परिवर्तन थर्मोक्रोमिज़्म नामक गुण के कारण संभव होता है, जिसमें ताप के प्रभाव से रंग अथवा चित्र क्रमशः प्रकट या लुप्त होने लगते हैं। जब इन मगों में गर्म पेय डाला जाता है, तो उनकी सतह पर छिपे हुए चित्र, संदेश या रंग धीरे-धीरे उभर आते हैं, मानो कोई रहस्य अचानक सजीव हो उठा हो।
इन मगों की यही विशेषता उन्हें केवल उपयोगी वस्तु तक सीमित नहीं रखती, बल्कि एक आकर्षक अनुभव का माध्यम भी बना देती है। ठंडा होने पर उनका स्वरूप पुनः बदल जाता है, जिससे यह परिवर्तनशीलता एक निरंतर दृश्य कौतुक का आभास कराती है।
==गैर-पेय मग==
=== दाढ़ी बनाने के मग और स्कटल्स (पात्र) ===
[[File:ShavingMug1.jpg|अंगूठा |बाएं|वर्टिकल|शेविंग मग]]
दाढ़ी बनाने के मग और स्कटल्स (पात्र) का विकास उन्नीसवीं शताब्दी के आसपास हुआ, और शेविंग मग का पहला पेटेंट सन् 1867 में दर्ज किया गया।<ref name=smug>पी. ब्रूक्स और जे. मैकग्राडी द्वारा "शेविंग कप में सुधार"" {{US patent|66788}} जुलाई 1867 में प्रकाशित हुआ था।</ref> उस समय अधिकांश घरों में गर्म जल की सहज उपलब्धता नहीं होती थी, इसलिए दाढ़ी बनाने के लिए आवश्यक गरम झाग तैयार करने हेतु विशेष प्रकार के पात्रों की आवश्यकता महसूस हुई। इसी आवश्यकता से स्कटल और शेविंग मग का प्रचलन आरंभ हुआ, जिन्होंने उस दौर की दैनिक दिनचर्या में एक व्यावहारिक समाधान प्रदान किया।
पारंपरिक शेविंग स्कटल का रूप किसी चायदानी से मिलता-जुलता होता है, जिसमें एक चौड़ी टोंटी होती है, जिसके माध्यम से उसमें गरम जल डाला जाता है। यही विशेषता इसे शेविंग मग से अलग करती है, क्योंकि शेविंग मग में सामान्यतः टोंटी नहीं होती। दोनों ही प्रकार के इन पात्रों में प्रायः पकड़ने के लिए हत्था होता है, यद्यपि कुछ रूप ऐसे भी मिलते हैं जिनमें यह नहीं होता। शेविंग मग का बाह्य स्वरूप प्रायः साधारण मग जैसा ही होता है, किंतु कई बार इसमें ब्रश रखने के लिए विशेष रूप से निर्मित स्थान भी होता है, जिससे ब्रश झाग में पूरी तरह डूबने से बचा रहता है और उपयोग अधिक सुविधाजनक बनता है।
आधुनिक समय में शेविंग स्कटल के रूप अपेक्षाकृत कम देखने को मिलते हैं और इनका निर्माण सीमित मात्रा में ही होता है। प्रायः इन्हें छोटे स्तर पर कार्य करने वाले स्वतंत्र [[कुंभकारी|कुम्हारों द्वारा]] पारंपरिक शिल्पकला के रूप में तैयार किया जाता है,<ref name=sara>{{cite web|url=http://www.sarabonnymanpottery.com/moss_scuttle.htm|title=Moss Scuttle|website=Sarabonnymanpottery.com|access-date= नवंबर 16, 2012|url-status=dead|archive-url=https://web.archive.org/web/20080509085958/http://www.sarabonnymanpottery.com/moss_scuttle.htm|archive-date= मई 9, 2008}}</ref> जिससे ये न केवल उपयोगी वस्तु बने रहते हैं, बल्कि एक सांस्कृतिक और हस्तशिल्पीय धरोहर का रूप भी धारण कर लेते हैं।
[[चित्र:ShavingMug2.png|अंगूठाकार|शेविंग स्कटल, 1867 का पेटेंट।<ref name=smug/>]]
स्कटल या शेविंग मग की संरचना उपयोगिता और सूक्ष्म कारीगरी का संतुलित उदाहरण प्रस्तुत करती है। इसके ऊपरी भाग में सामान्यतः साबुन रखने के लिए एक विशेष आधार या स्थान निर्मित होता है, जिसे इस प्रकार रूपांकित किया जाता है कि साबुन स्थिर बना रहे और झाग तैयार करने की प्रक्रिया सुगम हो सके। पारंपरिक रूप से इनका उपयोग कठोर शेविंग साबुन के साथ किया जाता था, जिसके कारण निचले भाग में जल निकासी के लिए सूक्ष्म छिद्र बनाए जाते थे, ताकि अतिरिक्त जल बाहर निकल सके और साबुन अत्यधिक गीला न हो।
समय के साथ इनके स्वरूप में परिवर्तन आया और बाद के स्कटल तथा मगों में ये छिद्र प्रायः नहीं पाए जाते, जिससे उनका उपयोग क्रीम अथवा नरम साबुन के साथ भी सहजता से किया जा सके। इसके अतिरिक्त, कुछ स्कटल और मगों के निचले भाग में संकेंद्रित वृत्ताकार रेखाएँ उकेरी जाती हैं, जो थोड़ी मात्रा में जल को रोके रखती हैं और झाग बनाने की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी तथा संतुलित बनाती हैं।<ref name=sara/>
उपयोग के दौरान शेविंग स्कटल की रचना अपनी पूरी उपयोगिता के साथ सामने आती है। इसमें शेविंग ब्रश को चौड़ी टोंटी वाले भाग में डुबोया जाता है, जहाँ वह जल में भीगकर पर्याप्त रूप से गरम हो जाता है। इसके बाद साबुन को ऊपरी भाग में बने विशेष आधार पर रखा जाता है। आवश्यकता होने पर ब्रश को साबुन पर घुमाया जाता है, जिससे धीरे-धीरे घना और मुलायम झाग तैयार हो जाता है, जबकि अतिरिक्त जल पुनः नीचे की ओर प्रवाहित हो जाता है।
इस सुविचारित व्यवस्था के कारण जल और साबुन—दोनों का अपव्यय कम होता है, और साथ ही आवश्यक ऊष्मा भी लंबे समय तक बनी रहती है। परिणामस्वरूप, शेविंग की प्रक्रिया अधिक आरामदायक, नियंत्रित और निरंतर बनी रहती है, जो उस युग की व्यावहारिक बुद्धिमत्ता और शिल्प कौशल का सुंदर उदाहरण प्रस्तुत करती है।
== समग्र डिजाइन और कार्य ==
मग के अधिकांश डिजाइन थर्मल इन्सुलेशन के उद्देश्य से हैं: एक मग की मोटी दीवार, चाय के प्याले की पतली दीवारों की तुलना में, पेट को ठंडा होने या जल्दी गर्म होने से बचाने के लिए इसे इंसुलेट करती हैं। मग का तेल अक्सर सपाट नहीं होता है, लेकिन अवतल होता है या उस सतह के साथ थर्मल संपर्क को कम करने के लिए एक अतिरिक्त रिम होता है जिस पर मग रखा जाता है। ये विशेषताएं अक्सर सतह पर एक विशिष्ट गोलाकार दाग छोड़ती हैं। अंत में, एक मग हैंडल आपके हाथ को मग के गर्म पक्षों से दूर रखता है। हैंडल का छोटा क्रॉस सेक्शन तरल और हाथ के बीच गर्मी के प्रभाव को कम करता है। थर्मल इन्सुलेशन के इसी कारण से, मग अक्सर कम [[थर्मल चालकता]], जैसे [[मिट्टी के बर्तन]], [[बोन चाइना]], [[चीनी मिट्टी के बर्तन]], या कांच के साथ सामग्री से बने होते हैं।
== सजावट ==
[[File:I got smashed in Grafenwöhr - Germany.jpg|left|upright|thumb|टूटा हुआ मग]]
मग, अपनी सर्वव्यापी उपस्थिति के कारण, केवल एक उपयोगी पेय पात्र तक सीमित नहीं रहा, बल्कि समय के साथ वह कला और अभिव्यक्ति का एक सशक्त माध्यम भी बन गया है। अनेक अवसरों पर इसका उपयोग विज्ञापन वस्तु के रूप में किया जाता है, जहाँ साधारण-सा दिखने वाला मग किसी विचार, संदेश या पहचान का वाहक बन जाता है। कुछ मग तो ऐसे भी होते हैं, जिन्हें पीने के लिए नहीं, बल्कि सजावट के रूप में अधिक महत्व दिया जाता है। प्राचीन काल से ही मगों पर नक्काशी और अलंकरण की परंपरा रही है, और कभी-कभी इन्हें विशिष्ट आकर्षण देने के लिए असामान्य आकृतियों में भी ढाला जाता रहा है।
आधुनिक समय में मगों की सजावट की सबसे लोकप्रिय विधि उन पर छपाई करना है, जिसमें तकनीक और सौंदर्य का सुंदर समन्वय दिखाई देता है। इस प्रक्रिया में सिरेमिक चूर्ण को चयनित रंगों और एक लचीले माध्यम के साथ मिलाकर एक विशेष मिश्रण तैयार किया जाता है। इसके बाद इस मिश्रण को जिलेटिन-लेपित कागज़ पर पारंपरिक [[आवरण मुद्रण|जाल-छपाई विधि]] के माध्यम से अंकित किया जाता है, जिसमें एक महीन बुने हुए जाल को फ्रेम पर कसकर लगाया जाता है और इच्छित आकृति के अनुसार एक छाप तैयार की जाती है। यह विधि सतह पर एक पतली और समान परत बनाने में सक्षम होती है।
यदि अत्यधिक चिकनाई या एकरूपता आवश्यक न हो, तो इसी मिश्रण को सीधे ब्रश की सहायता से भी मग की सतह पर लगाया जा सकता है, जिससे हस्तनिर्मित कलात्मकता का स्पर्श मिलता है। इसके अतिरिक्त, एक और अधिक जटिल तकनीक में कागज़ को प्रकाश-संवेदनशील परत से ढककर उस पर छवि अंकित की जाती है, और फिर पराबैंगनी प्रकाश के माध्यम से उस परत को स्थिर किया जाता है।<ref name=print>{{cite web|title=Printing Ceramics|url=http://www.ceramicstoday.com/articles/090798.htm|publisher=सिरेमिक्स टुडे|access-date=2009-08-30|archive-url=https://web.archive.org/web/20090601072522/http://www.ceramicstoday.com/articles/090798.htm|archive-date=2009-06-01|url-status=dead}}</ref>
सूखने के उपरांत “लिथो” कहलाने वाला यह मुद्रित कागज़ लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है, क्योंकि उसमें अंकित छवि स्थिर और संरक्षित रहती है। जब इस लिथो का उपयोग मग पर छवि स्थानांतरित करने के लिए किया जाता है, तो सबसे पहले उसे गरम जल में भिगोकर नरम किया जाता है। इस प्रक्रिया से मुद्रित छवि से युक्त जिलेटिन की पतली परत कागज़ से अलग हो जाती है, जिसे सावधानीपूर्वक मग की सतह पर चढ़ा दिया जाता है।
इसके बाद मग को उच्च ताप पर, लगभग 700 से 750 डिग्री सेल्सियस तक, भट्ठी में पकाया जाता है। इस ताप पर मग की चमकीली परत (ग्लेज़) की ऊपरी सतह हल्की-सी नरम हो जाती है, जिससे स्थानांतरित छवि उसमें स्थायी रूप से समाहित हो जाती है। परिणामस्वरूप, चित्र केवल सतह पर अंकित नहीं रहता, बल्कि मग का अभिन्न हिस्सा बन जाता है—जो दीर्घकाल तक अपनी स्पष्टता और सौंदर्य बनाए रखता है।<ref name=print/>
== भंडार==
एक लोकप्रिय तरीका कप का भंडार एक 'कप ट्री' पर होता है, एक लकड़ी या धातु की पोस्ट जो एक गोल आधार पर लगाई जाती है और उनके हैंडल से कप लटकने के लिए खूंटे से सुसज्जित होती है।<ref>जेन एंकोना, ब्रूस एंकोना "कप ट्री" अंक दिनांक: 4 दिसंबर 1990</ref> कप को लटकाने के लिए डिज़ाइन किए गए रैक भी हैं ताकि वे हाथ में हों। वे विशेष रूप से उच्च तरंगों वाली नावों पर उपयोगी होते हैं।
==गणित में ==
[[File:Mug and Torus morph.gif|thumb|upright|एक कॉफी मग और एक डोनट के बीच निरंतर विरूपण यह दर्शाता है कि वे समरूप (टोपोलॉजिकली समतुल्य) हैं।]]
[[संस्थितिविज्ञान]] में मग का उदाहरण अत्यंत प्रसिद्ध और सहज रूप से समझ में आने वाला माना जाता है। इस गणितीय दृष्टिकोण के अनुसार, दो वस्तुएँ तब समतुल्य या होमियोमॉर्फिक कही जाती हैं, जब उन्हें बिना काटे, जोड़े या छेद किए, केवल निरंतर विरूपण के माध्यम से एक-दूसरे में रूपांतरित किया जा सके।<ref>{{cite book|url=https://books.google.com/books?id=S3biKR21i-QC&pg=PA51|page=51|title=Principles of robot motion: theory, algorithms, and implementation|author=हॉवी एम. चोसेट|publisher=एमआईटी प्रेस|year=2005|isbn=0-262-03327-5}}</ref> इसी आधार पर, एक सामान्य मग और डोनट—जिसे [[टॉरस]] कहा जाता है—आपस में समतुल्य माने जाते हैं, क्योंकि मग के हत्थे को धीरे-धीरे फैलाकर और उसके मुख्य भाग को रूपांतरित करके उसे डोनट के आकार में बदला जा सकता है, बिना उसकी संरचना को तोड़े।
इसी सिद्धांत का एक और रोचक उदाहरण दो हत्थों वाला मग है, जो टोपोलॉजिकल रूप से द्वि-टोरस के समतुल्य होता है—एक ऐसी आकृति जो अंक “8” के समान प्रतीत होती है।<ref>{{cite web|url=http://plus.maths.org/issue10/features/topology/|title=In space, do all roads lead to home?|author=जन्ना लेविन|date= जनवरी 1, 2000|access-date= अगस्त 30, 2009|archive-date= जुलाई 31, 2009|archive-url=https://web.archive.org/web/20090731130453/http://plus.maths.org/issue10/features/topology/|url-status=live}}</ref> यहाँ प्रत्येक हत्था एक अतिरिक्त “छिद्र” का प्रतिनिधित्व करता है, जिससे उसकी संरचनात्मक जटिलता बढ़ जाती है।
इसके विपरीत, यदि किसी मग में हत्था न हो—अर्थात वह केवल एक साधारण [[कटोरा|कटोरे]] या बीकर के रूप में हो—तो वह टोपोलॉजी की दृष्टि से एक तश्तरी के समतुल्य माना जाता है। यह समानता विशेष रूप से तब स्पष्ट होती है, जब कच्ची मिट्टी से बने कटोरे को कुम्हार के चाक पर दबाकर चपटा किया जाता है, और वह धीरे-धीरे एक समतल तश्तरी का रूप धारण कर लेता है।<ref>{{cite book|url=https://books.google.com/books?id=0f0v4wLTDmwC&pg=PA250|page=250|title=Computer aided engineering design|author=बीरेंद्र सहाय|publisher=स्प्रिंगर|year=2005|isbn=1-4020-2555-6}}</ref>
== गैलरी==
<gallery>
File:Kitchenware Steel Mug Rezowan.JPG|स्टील मग
File:Mug of tea, Smithfield Market, City of London.jpg|टी मग, यूके
File:Enamel mug.jpg|एनामेल मग
File:Lipton- mug-tea.jpg|चाय का गिलास मग
File:Frog or Surprise mug.JPG|[[मेंढक मग]]
File:Doughnut-shaped Coffee mug.jpg|डोना द्वारा आकार का मग
File:Wikipedia - filled with knowledge (beskuren).jpg|विकिपीडिया लोगों के साथ एक मग
File:Rosehage kopp cropped.jpg|[[मंगम्मा]] [[मूमिन मग|मूमिन-थीम्ड मग]] पर
File:Dinermug.jpg|थंब|ऑल्ट=एक ठेठ अमेरिकी मग|अमेरिकी ठेठ मग
File:Merchandising Coffee mug from band Dead Can Dance with 'DCD' logo - black.jpg|मग अक्सर [[व्यापारिक आइटम ]] के रूप में पॉप समूहों और कंपनियों द्वारा उपयोग किए जाते हैं, यहां बैंड [[डेड कैन डांस]]
</gallery>
==इन्हें भी देखें==
*[[कप]]
== सन्दर्भ ==
{{Reflist}}
[[श्रेणी:पीने के उपकरण]]
[[श्रेणी:चाय]]
[[श्रेणी:गर्म पेय]]
dkgcftchhptshld6cga3tg8scpjj9nl
6547793
6547789
2026-05-02T14:50:15Z
चाहर धर्मेंद्र
703114
/* गैलरी */
6547793
wikitext
text/x-wiki
{{db-badtrans}}
{{खराब अनुवाद|अंग्रेज़ी}}
[[चित्र:Mug_of_Tea.JPG|upright=1.35|अंगूठाकार|दुध वाली चाय का एक मग]]
मग एक प्रकार का [[कप]] होता है,{{sfn|Kronenfeld|1996|p=6}} जिसे विशेष रूप से [[कॉफी]], [[हॉट चॉकलेट|गरम चॉकलेट]] या [[चाय]] जैसे गर्म पेय पदार्थों के सेवन के लिए उपयोग किया जाता है। इसकी सबसे प्रमुख विशेषता इसका हैंडल होता है, जो इसे पकड़ने में सुविधा प्रदान करता है, विशेषकर तब जब पेय गरम हो। आकार की दृष्टि से, मग सामान्य कपों—जैसे चाय या कॉफी के पारंपरिक कप—की तुलना में अधिक [[तरल]] धारण करने में सक्षम होता है।
आमतौर पर एक मग की क्षमता लगभग 250 से 350 मिलीलीटर के बीच होती है,<ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=IZRDIcz6uEQC&q=usually+mug+holds+12+fluid+ounces|title=The Boat Galley Cookbook: 800 Everyday Recipes and Essential Tips for Cooking Aboard : 800 Everyday Recipes and Essential Tips for Cooking Aboard: 800 Everyday Recipes and Essential Tips for Cooking Aboard|last1=शियरलॉक|first1=कैरोलिन|last2=आयरन्स|first2=जेन|date=2012-09-14|publisher=मैकग्रा हिल प्रोफेशनल|isbn=9780071782364|access-date=2021-03-12|archive-date=2024-04-25|archive-url=https://web.archive.org/web/20240425165047/https://books.google.com/books?id=IZRDIcz6uEQC&q=usually+mug+holds+12+fluid+ounces|url-status=live}}</ref> जो इसे दैनिक उपयोग के लिए अत्यंत व्यावहारिक बनाती है। यदि आकार इससे भी बड़ा हो, तो ऐसे बर्तन को टैंकर्ड कहा जाता है। इस प्रकार, मग केवल एक साधारण बर्तन नहीं, बल्कि दैनिक जीवन की सहजता और आराम का एक अभिन्न हिस्सा है।
मग का आकार प्रायः सरल और उपयोगितावादी होता है—यह या तो सीधी, बेलनाकार रेखाओं वाला होता है अथवा हल्का घुमाव लिए हुए रूप में भी निर्मित किया जाता है। यद्यपि इसके आकार में विविधता संभव है, फिर भी इसकी मूल पहचान एक सुविधाजनक हैंडल से जुड़ी होती है, जो इसे पकड़ने में सहजता प्रदान करता है; इसी विशेषता के अभाव में इसे बीकर कहा जाता है। सामान्यतः मग के साथ तश्तरी नहीं होती, जो इसे अन्य पारंपरिक कपों से भिन्न बनाती है।<ref>{{cite encyclopedia |title=mug, n.1 |url=http://www.oed.com/view/Entry/123325 |encyclopedia=ओईडी ऑनलाइन |date=दिसंबर 2014 |publisher=ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस |quote=A drinking vessel, freq. cylindrical (and now usually with a handle), generally used without a saucer. |access-date=2015-03-06 |archive-date=2024-04-25 |archive-url=https://web.archive.org/web/20240425165036/https://www.oed.com/dictionary/mug_n1 |url-status=live }}</ref>
मग को [[पेय]] पदार्थों के सेवन का अपेक्षाकृत अनौपचारिक माध्यम माना जाता है, इसलिए इसका प्रयोग प्रायः घरेलू या सहज वातावरण में अधिक होता है, जबकि औपचारिक भोजन कक्षों में चाय या कॉफी के पारंपरिक कपों को प्राथमिकता दी जाती है। इसके अतिरिक्त, मग का एक विशेष रूप [[हजामत|शेविंग]] मग भी होता है, जिसका उपयोग गीली दाढ़ी बनाने की प्रक्रिया में सहायक के रूप में किया जाता है। इस प्रकार, मग अपनी सरलता और बहुउपयोगिता के कारण दैनिक जीवन में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है।
मग का विकास समय के साथ उसकी उपयोगिता और निर्माण सामग्री के अनुसार निरंतर परिवर्तित होता रहा है। प्राचीन काल में मग प्रायः [[लकड़ी]] को तराशकर या [[कुंभकारी|मिट्टी]] से बनाए जाते थे, जो उस समय उपलब्ध संसाधनों और शिल्पकला का प्रतिबिंब थे। आधुनिक युग में इनका निर्माण अधिक परिष्कृत सामग्रियों—जैसे बोन चाइना, अर्दनवेयर, [[पॉर्सिलेन]] और स्टोनवेयर—से किया जाने लगा है, जो न केवल आकर्षक होते हैं, बल्कि टिकाऊ भी होते हैं।
आकार और प्रयोजन के अनुसार कुछ बड़े मग, जो प्रायः धातु या मिट्टी से निर्मित होते हैं और विशेष रूप से पेय पदार्थ जैसे [[बियर]] के लिए उपयोग किए जाते हैं, टैंकर्ड कहलाते हैं। इसके अतिरिक्त, कुछ मग सुदृढ़ [[कांच]]—जैसे पाइरेक्स—से भी बनाए जाते हैं, जो ताप और झटकों के प्रति अधिक सहनशील होते हैं। हल्के वजन और टूट-फूट से बचाव के लिए [[मीनाकारी|एनामेल्ड]] धातु, [[प्लास्टिक]] या [[इस्पात]] जैसी सामग्रियों का उपयोग भी किया जाता है, विशेषकर बाहरी गतिविधियों जैसे [[कैंपिंग|शिविर-यात्रा]] में।
यात्रा के लिए विशेष रूप से बनाए गए ट्रैवल मग में ऊष्मा बनाए रखने की क्षमता होती है और इनमें छलकने से बचाने के लिए ढक्कन भी लगाया जाता है। सजावट की दृष्टि से, मग पर [[लोगो]], चित्र या कलात्मक आकृतियाँ अंकित करने के लिए [[आवरण मुद्रण|सिल्क-स्क्रीन मुद्रण]] या डिकल तकनीक का प्रयोग किया जाता है, जिन्हें पकाकर स्थायी रूप प्रदान किया जाता है। इस प्रकार, मग केवल एक साधारण बर्तन नहीं, बल्कि उपयोगिता, सौंदर्य और तकनीकी विकास का संगम है।
==सामान्य बनावट और कार्य==
[[File:Mug vs cup.jpg|thumb|एक मग और एक कप अगल-बगल रखे हुए हैं]]
मग के बनावट का एक प्रमुख उद्देश्य ऊष्मीय इन्सुलेशन सुनिश्चित करना होता है, जिससे उसमें रखा पेय अपेक्षाकृत अधिक समय तक अपने तापमान को बनाए रख सके। चाय के पारंपरिक कपों की पतली दीवारों की तुलना में मग की दीवारें मोटी होती हैं, जो ऊष्मा के आदान-प्रदान को धीमा करती हैं और पेय को जल्दी ठंडा या अत्यधिक गरम होने से बचाती हैं।
इसके अतिरिक्त, मग का आधार प्रायः पूर्णतः समतल नहीं होता, बल्कि हल्का अवतल या किनारीयुक्त बनाया जाता है। यह संरचना उस सतह के साथ प्रत्यक्ष संपर्क को कम करती है, जिस पर मग रखा जाता है, जिससे ऊष्मा का अपव्यय घटता है। इसी कारण अक्सर सतह पर एक विशिष्ट गोलाकार चिह्न भी दिखाई देता है, जो इस संरचनात्मक विशेषता का परिणाम होता है।
मग का हैंडल भी इसके ऊष्मीय गुणों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह हाथ को गरम सतह से दूर रखता है और उसके अपेक्षाकृत छोटे अनुप्रस्थ क्षेत्र के कारण ऊष्मा के प्रवाह को सीमित करता है, जिससे उपयोगकर्ता को पकड़ने में सुविधा और सुरक्षा दोनों मिलती हैं। इसी कारण, मग सामान्यतः ऐसी सामग्रियों—जैसे मिट्टी के बर्तन, बोन चाइना, [[पॉर्सिलेन]] या काँच—से बनाए जाते हैं,<ref>{{cite book|url=https://books.google.com/books?id=fJw0K1ZGY1kC&pg=PA98|page=98|title=The really useful science book: a framework of knowledge for primary teachers|author=स्टीव फैरो|publisher= रूटलेज |year=1999|isbn=0-7507-0983-9}}</ref><ref>{{cite book|url=https://books.google.com/books?id=esDW3xTKoLIC&pg=PA27|page=27|title=The handbook of evolutionary psychology|author=डेविड एम. बस|publisher=जॉन विली एंड संस.|year=2005|isbn=0-471-26403-2}}</ref> जिनकी [[ऊष्मा चालकता|ऊष्मीय चालकता]] कम होती है और जो ताप को नियंत्रित रखने में सहायक होती हैं।
===कपों की तुलना में अंतर===
मग और पारंपरिक कप के बीच का अंतर केवल आकार या बनावट तक सीमित नहीं है, बल्कि यह विभिन्न भाषाओं और संस्कृतियों में भी स्पष्ट रूप से परिलक्षित होता है। फ्रेंच, इतालवी, पोलिश, रूसी, जर्मन और अंग्रेज़ी जैसी अनेक भाषाओं में इन दोनों के लिए अलग-अलग शब्द प्रचलित हैं, जो इनके भिन्न उपयोग और सांस्कृतिक संदर्भों को दर्शाते हैं।
भाषाविद् अन्ना विर्ज़बिका के अनुसार, यह भिन्नता इनके कार्यात्मक अंतर से उत्पन्न होती है। पारंपरिक कप सामान्यतः औपचारिक परिवेश में मेज पर बैठकर पेय का आनंद लेने के लिए बनाए जाते हैं, जहाँ साज-सज्जा और शिष्टाचार का विशेष महत्व होता है। इसके विपरीत, मग अधिक अनौपचारिक और बहुउपयोगी होता है, जिसे किसी भी स्थान पर सहजता से उपयोग में लाया जा सकता है।{{sfn|Wierzbicka|1984|pp=214–216}}
==इतिहास==
===शुरुआती मग===
[[File:CMOC Treasures of Ancient China exhibit - large grey mug.jpg|upright|thumb|left|चीन के [[झेंगझोऊ]] में [[नवपाषाण युग|नवपाषाण काल]] के उत्तरार्ध ( लगभग 2500-2000 ईसा पूर्व) में कुम्हार के चाक पर बनाया गया एक मग।]]
मग का प्रारंभिक इतिहास यह दर्शाता है कि इसका उपयोग आज की अपेक्षा भिन्न उद्देश्यों के लिए किया जाता था। वर्तमान में जहाँ मग प्रायः गर्म पेय, दूध या शीतल पेयों से जुड़ा हुआ है, वहीं आरंभिक काल में इसका प्रमुख उपयोग [[बियर]] अथवा अन्य मादक पेयों के सेवन के लिए होता था। उस समय के मग आकार में भी अधिक बड़े होते थे, जो उनके उपयोग और सामाजिक परिवेश के अनुरूप थे। लकड़ी से बने प्रारंभिक मग संभवतः प्राचीन काष्ठ-शिल्प के आरंभिक दौर से ही प्रचलन में थे, किंतु समय के प्रभाव के कारण ऐसे अधिकांश नमूने आज सुरक्षित नहीं रह पाए हैं।<ref name="columbia">{{cite web|url=http://www.encyclopedia.com/doc/1E1-porcelai.html|title=Porcelain|publisher=कोलंबिया विश्वकोश छठा संस्करण. 2008|access-date=2008-06-27|archive-date=2008-08-21|archive-url=https://web.archive.org/web/20080821093621/http://www.encyclopedia.com/doc/1E1-porcelai.html|url-status=live}}</ref><ref name="G. J. Monson-Fitzjohn, B.Sc., F.R.Hist.S">{{cite book|url=http://www.nicks.com.au/index.aspx?link_id=76.623|title=Drinking Vessels of Bygone Days|author=जी. जे. मोनसन-फिट्ज़जॉन, बी.एससी., एफ.आर.एच.आई.एस.|url-status=dead|archive-url=https://web.archive.org/web/20100719162453/http://www.nicks.com.au/Index.aspx?link_id=76.623|archive-date=2010-07-19}}</ref>
मिट्टी के बर्तनों के विकास ने मग के निर्माण को एक नई दिशा दी। प्रारंभ में इन्हें [[कुंभकारी|हाथ से आकार]] दिया जाता था, परंतु कुम्हार का चाक के आविष्कार (लगभग 6500 से 3000 ईसा पूर्व के बीच) ने इस प्रक्रिया को अधिक सरल और परिष्कृत बना दिया। इस तकनीक के कारण बर्तनों में हैंडल जोड़ना भी सहज हो गया, जिससे आधुनिक स्वरूप के मग का विकास संभव हुआ। प्राचीन ग्रीस में 4000 से 5000 ईसा पूर्व के काल का एक सुसज्जित मिट्टी का मग प्राप्त हुआ है,<ref>{{cite web|url=http://www.ceramicstudies.me.uk/histx105.html|title=Ceramic Web Page Tutorials|website=Ceramicstudies.me.uk|access-date= नवंबर 16, 2012|archive-date= जून 5, 2023|archive-url=https://web.archive.org/web/20230605205500/http://www.ceramicstudies.me.uk/histx105.html|url-status=live}}</ref> जो उस युग की कलात्मकता और शिल्पकौशल का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करता है।
[[File:AnasaziMugs.jpeg|thumb|upright=1.1|[[कॉलोराडो|दक्षिण-पश्चिमी कोलोराडो]] से प्राप्त [[पुएब्लो कों के पूर्वज|पुएब्लो]] (अनासाज़ी) पूर्वजों के मग , जो 1000 से 1280 ईस्वी के बीच बनाए गए थे। इनके हैंडल पर की गई नक्काशी का अर्थ अभी तक अज्ञात है, लेकिन संभवतः इसका कोई कार्यात्मक महत्व नहीं है।]]
मग के विकासक्रम में प्रारंभिक मिट्टी के मगों की एक प्रमुख कमी उनकी अत्यधिक मोटी दीवारें थीं, जो पीने के लिए सुविधाजनक नहीं मानी जाती थीं। जैसे-जैसे [[धातुकार्य|धातु-कर्म]] की तकनीकों में प्रगति हुई, बर्तनों की दीवारों को अधिक पतला और सुडौल बनाया जाने लगा। लगभग 2000 ईसा पूर्व से [[कांसा|कांस्य]],<ref>{{cite web|url=http://www.thomaslayton.org.uk/joomla/index.php?option=com_content&task=view&id=26&Itemid=41|archive-url=https://web.archive.org/web/20201205022717/http://www.thomaslayton.org.uk/joomla/index.php?option=com_content&task=view&id=26&Itemid=41|url-status=dead|archive-date= दिसंबर 5, 2020|title=The Collection – Archaeology|website=Thomaslayton.org.uk|access-date= नवंबर 16, 2012}}</ref> [[चाँदी]], [[सोना]]<ref>{{cite web|url=http://www.visual-arts-cork.com/ancient-art/mycenean.htm|title=Mycenean Art|website=Visual-arts-cork.com|access-date=नवंबर 16, 2012|archive-date= मई 11, 2023|archive-url=https://web.archive.org/web/20230511213611/http://www.visual-arts-cork.com/ancient-art/mycenean.htm|url-status=live}}</ref> और यहाँ तक कि [[सीसा]]<ref>{{cite web|url=http://www.nicks.com.au/index.aspx?link_id=76.633|title=Lead drinking cup|website=Nicks.com.au|access-date=नवंबर 16, 2012|url-status=dead|archive-url=https://web.archive.org/web/20120927082915/http://www.nicks.com.au/index.aspx?link_id=76.633|archive-date= सितंबर 27, 2012}}</ref> जैसी धातुओं से भी मग निर्मित होने लगे। यद्यपि ये देखने में आकर्षक और टिकाऊ थे, फिर भी गर्म पेयों के साथ इनका उपयोग सहज नहीं था, क्योंकि धातु ऊष्मा का तीव्र संचार करती है।
मग के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ तब आया, जब [[चीनी जनवादी गणराज्य|चीन]] में लगभग 600 ईस्वी के आसपास [[पॉर्सिलेन|चीनी मिट्टी के बर्तनों]] का विकास हुआ। इस नवाचार ने पतली दीवारों वाले ऐसे मगों का निर्माण संभव बनाया, जो न केवल ठंडे, बल्कि गर्म पेयों के लिए भी उपयुक्त थे। यह परंपरा आज भी जारी है और आधुनिक मगों के स्वरूप में उसी विकास की छाप स्पष्ट दिखाई देती है।<ref name="columbia"/><ref name="G. J. Monson-Fitzjohn, B.Sc., F.R.Hist.S"/>
भाषाई दृष्टि से, “मग” शब्द का वर्तमान अर्थ में सबसे प्रारंभिक ज्ञात प्रयोग 1664 ईस्वी में मिलता है,<ref>{{cite web |title=Mug |url=https://www.merriam-webster.com/dictionary/mug#word-history |website=merriam-webster.com |publisher=मेरियम-वेबस्टर |access-date=30 जून 2025}}</ref> जो इस बर्तन के सांस्कृतिक और व्यावहारिक विकास की ऐतिहासिक यात्रा को भी रेखांकित करता है।
===विक्टर कॉफी मग===
[[द्वितीय विश्व युद्ध]] के दौरान [[अमेरिकी नौसेना|संयुक्त राज्य अमेरिका की नौसेना]] ने ऐसे कॉफी मग के निर्माण हेतु अमेरिकी कंपनियों से प्रस्ताव आमंत्रित किए, जो गिरने पर भी सुरक्षित रहें और जहाज़ों पर उपयोग के दौरान अत्यधिक टिकाऊ सिद्ध हों। कई प्रकार के डिज़ाइन प्रस्तुत किए गए, किंतु अंततः चयन [[विद्युतरोधी|उच्च-वोल्टेज पोर्सिलेन इन्सुलेटर]] निर्माता विक्टर इंसुलेटर द्वारा निर्मित एक विशेष डिज़ाइन का हुआ। उस समय युद्धकालीन परिस्थितियों में इन्सुलेटर की माँग घट गई थी, इसलिए कंपनी ने अपने कार्यों को बनाए रखने के लिए स्वच्छतापूर्ण बर्तनों के निर्माण की दिशा में कदम बढ़ाया।<ref name="Upstate">{{Cite web|url=https://exploringupstate.com/how-victor-changed-the-coffee-mug/|title=How the Victor Coffee Mug Changed the Way We Drink Coffee|last=क्लेमेंस|first=क्रिस|date= मार्च 6, 2016|website=एक्सप्लोरिंग अपस्टेट|language=en-US}}</ref>
विक्टर ने नौसेना के लिए एक विशिष्ट मग विकसित किया, जो बिना हैंडल के, सफेद चमकदार सतह वाला और मोटी दीवारों से युक्त था। यह डिज़ाइन अपनी मजबूती और उपयोगिता के कारण सैन्य बलों द्वारा अत्यंत सराहा गया। चूँकि इन मगों के निर्माण में वही पोर्सिलेन सामग्री प्रयुक्त हुई, जिसका उपयोग कंपनी अपने इन्सुलेटर बनाने में करती थी, इसलिए इनमें उत्कृष्ट ऊष्मा-रोधक गुण विद्यमान थे। इस प्रकार, युद्धकालीन आवश्यकताओं ने न केवल एक नए प्रकार के मग को जन्म दिया, बल्कि उसके व्यावहारिक और तकनीकी गुणों को भी परिष्कृत किया।<ref name="Upstate"/><ref name= cjow>{{cite web |last1=गिश|first1=एल्टन |title=Porcelain Insulator News |url=https://www.cjow.com/archive/article.php?month=2&a=02Porcelain%20Insulator%20News.htm&year=2004 |website=cjow.com |publisher=द वायर के क्राउन ज्वेल्स |date= फरवरी 2004}}</ref>
द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति के पश्चात विक्टर इंसुलेटर ने अपने उत्पादन को आंशिक रूप से सैनिटरीवेयर उत्पादों की ओर बनाए रखने का निर्णय लिया और अपने प्रसिद्ध मग का एक अधिक व्यावसायिक रूप से अनुकूल संस्करण प्रस्तुत किया। इस नए रूप में मग में सुविधाजनक हैंडल जोड़ा गया, उसका शरीर अपेक्षाकृत हल्का और पतला बनाया गया, तथा विभिन्न रंगों के विकल्प भी उपलब्ध कराए गए, जिससे यह आम उपभोक्ताओं के लिए अधिक आकर्षक बन गया।
इस सफल डिज़ाइन की लोकप्रियता इतनी बढ़ी कि इसकी नकल संयुक्त राज्य अमेरिका के भीतर ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अनेक निर्माताओं द्वारा बड़े पैमाने पर की जाने लगी।<ref name="Upstate"/> किंतु समय के साथ सस्ते और बड़े पैमाने पर उत्पादित [[चीनी जनवादी गणराज्य|चीनी]] निर्मित विकल्पों से कड़ी प्रतिस्पर्धा के कारण विक्टर को गंभीर आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा। परिणामस्वरूप, 1990 के दशक की शुरुआत में कंपनी को मग का उत्पादन बंद करना पड़ा।<ref name= cjow/>
आज, उत्पादन बंद होने के बाद भी विक्टर द्वारा निर्मित ये मग अपनी विशिष्ट गुणवत्ता और ऐतिहासिक महत्व के कारण संग्राहकों के बीच अत्यंत लोकप्रिय हो गए हैं।<ref>{{cite web |last1=डेलगाडो |first1=मिशेल |title=The Classic Diner Mug That's Disappearing |url=https://medium.com/@mdelgadia/the-classic-diner-mug-thats-disappearing-619c55935aa9 |website=medium.com |publisher= मीडियम |date= मई 24, 2017}}</ref> वे न केवल एक उपयोगी वस्तु के रूप में, बल्कि औद्योगिक इतिहास और डिज़ाइन विकास के प्रतीक के रूप में भी मूल्यवान माने जाते हैं।
==अन्य मग के प्रकार ==
===यात्रा मग===
[[File:travel mug.jpg|thumb|left|upright=.6|यात्रा मग]]
यात्रा मग का प्रचलन 1980 के दशक में बढ़ा, जब ऐसे बर्तनों की आवश्यकता महसूस हुई जो गर्म या ठंडे पेयों को सुरक्षित रूप से एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जा सकें। इन मगों का निर्माण इस प्रकार किया जाता है कि उनमें [[ऊष्मा रोधन|उत्कृष्ट ऊष्मीय इन्सुलेशन गुण]] हों, जिससे पेय लंबे समय तक अपने तापमान को बनाए रख सके। संरचना की दृष्टि से ये [[निर्वात फ्लास्क|वैक्यूम फ्लास्क]] के समान होते हैं—अर्थात् ये अच्छी तरह से इन्सुलेटेड और लगभग पूर्णतः बंद होते हैं, ताकि रिसाव या छलकाव की संभावना न्यूनतम रहे।<ref name=travel>मोरी कार्प "ट्रैवल मग" {{US patent|5249703}} जारी होने की तिथि: अक्टूबर 5, 1993</ref> फिर भी, इनके ढक्कन में एक छोटा छिद्र होता है, जिससे यात्रा के दौरान बिना खोले ही पेय का सेवन किया जा सके।
गर्म पेयों के ठंडा होने का प्रमुख कारण वाष्पीकरण होता है, इसलिए ट्रैवल मग में ढक्कन की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। यह वाष्प के बाहर निकलने को सीमित करता है और इस प्रकार पेय को अधिक समय तक गरम बनाए रखने में सहायक होता है, चाहे ढक्कन पतले प्लास्टिक का ही क्यों न हो।
इसके अतिरिक्त, कुछ मग ऐसे भी होते हैं जिनमें भीतरी और बाहरी दोहरी दीवारें होती हैं, परंतु उनके बीच वैक्यूम नहीं बनाया जाता। ऐसे बर्तनों को डबल वॉल मग कहा जाता है। इनमें भीतरी दीवार सामान्यतः स्टेनलेस स्टील की होती है, जबकि बाहरी परत स्टेनलेस स्टील, प्लास्टिक या अन्य सामग्रियों से निर्मित हो सकती है। यह संरचना भी कुछ हद तक ऊष्मा संरक्षण प्रदान करती है, यद्यपि वैक्यूम युक्त मग की तुलना में इसकी क्षमता अपेक्षाकृत कम होती है।
ड्राइविंग के दौरान उपयोग में आने वाला मग, जिसे प्रायः ऑटो मग या कम्यूटर मग कहा जाता है, केवल एक साधारण पात्र नहीं, बल्कि सुविधा, सुरक्षा और सूझबूझ का संतुलित रूप है। यह विशेष प्रकार का यात्रा मग इस प्रकार निर्मित होता है कि चलते वाहन में भी पेय का आनंद सहज और सुरक्षित बना रहे। इसके ऊपर लगा रिसाव-रोधी ढक्कन, जिसमें पीने के लिए एक छोटा सा छिद्र या नलिका होती है,<ref name="Jackson, Joe">{{cite web|author=जैक्सन, जो|title=Q: What's the Best Insulated Travel Mug? We tested five of the best. Here's how they stacked up.|date= दिसंबर 22, 2014|work=आउटसाइड|url=http://www.outsideonline.com/1786136/whats-best-insulated-travel-mug|access-date= दिसंबर 10, 2015|archive-date= दिसंबर 11, 2015|archive-url=https://web.archive.org/web/20151211031852/http://www.outsideonline.com/1786136/whats-best-insulated-travel-mug|url-status=live}}</ref> इस बात का ध्यान रखता है कि मार्ग की हलचल पेय को बाहर न छलकाए। साथ ही, इसका आधार प्रायः संकरा रखा जाता है, ताकि यह विभिन्न वाहनों में बने कप धारकों में दृढ़ता से स्थापित हो सके और अनचाही हलचल से बचा रहे।
ऐसे मग का मूल्यांकन केवल उसके रूप या आकार से नहीं, बल्कि उसके व्यावहारिक गुणों से किया जाता है। यह अपेक्षित है कि उसे एक हाथ से सरलता से खोला और बंद किया जा सके, जिससे चालक का ध्यान मार्ग से न भटके। उसमें भरण-सीमा का स्पष्ट संकेत हो, ताकि अधिक भराव के कारण होने वाले रिसाव से बचा जा सके। बिना हत्थे का स्वरूप इसे पकड़ने में अधिक सहज बनाता है, जिससे नियंत्रण बना रहता है। इसके अतिरिक्त, इसका विन्यास ऐसा होना चाहिए कि पेय ग्रहण करते समय चालक की दृष्टि मार्ग से विचलित न हो।<ref>{{cite news|work=कुक्स कंट्री|date= अक्टूबर 2011|title=Travel Mugs|url=http://www.cooksillustrated.com/equipment_reviews/1328-travel-mugs?extcode=MASCZ00L0&ref=search_results_1|access-date=2015-12-10|archive-date=2015-12-11|archive-url=https://web.archive.org/web/20151211023117/http://www.cooksillustrated.com/equipment_reviews/1328-travel-mugs?extcode=MASCZ00L0&ref=search_results_1|url-status=live}}</ref><ref name="Jackson, Joe"/><ref>{{cite news|work=अमेरिकाज़ टेस्ट किचन (सीज़न 8, एपिसोड 22)]]|title=Coffeehouse Treats: Equipment Corner/Gadget Guru: Commuter Coffee Mugs|date=2008}}</ref> अंततः, यह विभिन्न प्रकार के कप धारकों में स्थिरता से बैठ सके—यही इसकी उपयोगिता और विश्वसनीयता की वास्तविक कसौटी है।
===बियर मग===
[[File:Humpen.jpg|thumb|upright|एक सामान्य आधा लीटर का जर्मन बीयर मग]]
बीयर स्टाइन, परंपरा और शिल्पकला का एक विशिष्ट संगम, वास्तव में पारंपरिक बीयर मगों का वह रूप है जो प्रायः स्टोनवेयर मिट्टी से निर्मित होता है और ऐतिहासिक रूप से [[जर्मनी]] से जुड़ा हुआ माना जाता है। “स्टाइन” शब्द का अंग्रेज़ी में प्रचलन उन्नीसवीं शताब्दी के मध्य, लगभग 1855 के आसपास, [[जर्मन भाषा|जर्मन]] शब्द से रूपांतरित होकर हुआ;<ref name="mw">{{cite web|url=http://www.merriam-webster.com/dictionary/stein|title=Definition of STEIN|website=www.merriam-webster.com|date=5 सितम्बर 2023 }}</ref> किंतु रोचक तथ्य यह है कि जर्मनी में स्वयं इस शब्द का स्वतंत्र रूप से पेय पात्र के अर्थ में सामान्यतः उपयोग नहीं किया जाता। वहाँ इसके स्थान पर “क्रुग”, “हम्पेन” या “सीडेल” जैसे शब्द अधिक प्रचलित हैं, जो इन पात्रों की विविध आकृतियों और उपयोगों को अधिक सटीक रूप से व्यक्त करते हैं।
आधुनिक बीयर मग, जो इस परंपरा के उत्तराधिकारी माने जा सकते हैं, प्रायः आधा [[लीटर]] या एक लीटर की मानक धारिता में उपलब्ध होते हैं। इनके निर्माण में उपयोगिता और सौंदर्य का संतुलन स्पष्ट दिखाई देता है—मजबूत संरचना के साथ-साथ इनमें प्रायः धातु से निर्मित [[कब्ज़ा|कब्जेदार ढक्कन]] लगाए जाते हैं, जो स्वच्छता और संरक्षण दोनों की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण होते हैं। इसके अतिरिक्त, इन मगों की सतह पर उकेरे गए जर्मन [[राज्यचिह्न|प्रतीक-चिह्न]], ऐतिहासिक दृश्य या पारंपरिक कलात्मक आकृतियाँ इन्हें केवल पेय पात्र नहीं, बल्कि सांस्कृतिक विरासत के जीवंत प्रतीक के रूप में स्थापित करती हैं।
===टिकी मग===
[[File: Tiki7.jpg|अंगूठा|ईमानदार|टिकी मग]]
टिकी मग की उत्पत्ति बीसवीं शताब्दी के मध्य में उन उष्णकटिबंधीय वातावरण से प्रेरित भोजनालयों और विशेष पेय स्थलों में हुई, जहाँ वातावरण, सजावट और परोसे जाने वाले पेय—तीनों में एक विशिष्ट विदेशी आकर्षण रचा-बसा रहता था। “टिकी मग” वस्तुतः एक व्यापक और सामान्य संज्ञा है, जिसका उपयोग उन मूर्तिकला-सदृश पेय पात्रों के लिए किया जाता है, जिन पर [[मॅलानिशिया]], [[माइक्रोनीशिया]] अथवा [[पोलीनेशिया]] की सांस्कृतिक छवियों, प्रतीकों और आकृतियों का कलात्मक निरूपण किया गया होता है। समय के साथ इसका दायरा और भी विस्तृत हुआ है, और अब यह शब्द किसी भी ऐसे पात्र के लिए प्रयुक्त होने लगा है, जो उष्णकटिबंधीय परिवेश, समुद्री जीवन या सर्फिंग संस्कृति से संबंधित सौंदर्य-बोध को अभिव्यक्त करता हो।<ref>{{cite book|title=Tiki Mugs: Cult Artifacts of Polynesian Pop|author1=स्ट्रॉन्गमैन, जे |author2=वेस्टलैंड, होल्डन |publisher=कोरेरो बुक्स|year=2008|isbn=978-0-9553398-1-3}}</ref>
ये मग केवल उपयोग की वस्तु भर नहीं, बल्कि स्मृतियों और अनुभवों के संवाहक भी बन जाते हैं। प्रायः इन्हें स्मृति-चिह्न के रूप में बेचा जाता है, जिससे ये किसी स्थान, अनुभव या संस्कृति का प्रतीकात्मक प्रतिनिधित्व करने लगते हैं। यही कारण है कि अनेक लोग इन्हें संग्रहणीय वस्तुओं के रूप में संजोकर रखते हैं—जहाँ प्रत्येक टिकी मग अपने भीतर एक विशिष्ट कथा, सौंदर्य और सांस्कृतिक स्पर्श समेटे होता है।
===मनोरंजन मग===
व्हिसल मग, जिसे हबल-बबल के नाम से भी जाना जाता है, एक मनोरंजक और कौतुकपूर्ण पेय पात्र है, जो अपनी विशिष्ट बनावट के कारण साधारण मगों से अलग पहचान रखता है। इसकी संरचना में एक खोखला हत्था होता है, जिसे इस प्रकार निर्मित किया जाता है कि उसमें से हवा प्रवाहित करने पर सीटी जैसी ध्वनि उत्पन्न हो सके। यही विशेषता इसे केवल उपयोगी वस्तु न बनाकर एक खेल-भावना से जुड़ा अनुभव भी प्रदान करती है।
इस मग की ध्वनि उसकी अवस्था के अनुसार परिवर्तित होती है—जब यह खाली होता है, तब उससे एक सरल, एकल स्वर सुनाई देता है; किंतु जैसे ही इसमें द्रव भरा जाता है, ध्वनि का स्वरूप बदलकर अधिक मधुर, झंकारयुक्त और चहचहाहट जैसी जटिल ध्वनियों में परिवर्तित हो जाता है।<ref name=puzzle/>
===मेंढक मग===
मेंढक मग, जिसे सरप्राइज़ मग भी कहा जाता है, विनोद और आश्चर्य की भावना से निर्मित एक विशिष्ट पेय पात्र है। इसका रूप साधारण प्रतीत होता है, किंतु जैसे ही पेय धीरे-धीरे समाप्त होता है, उसके भीतर छिपा एक छोटा सिरेमिक जीव—अक्सर मेंढक—अचानक प्रकट होकर पीने वाले को चकित कर देता है। यही अप्रत्याशित अनुभव इसे मात्र उपयोगी वस्तु से आगे बढ़ाकर एक मनोरंजक परंपरा का हिस्सा बना देता है।
ऐसे मगों का इतिहास अठारहवीं शताब्दी के उत्तरार्ध, लगभग 1775 के आसपास तक जाता है, और उन्नीसवीं शताब्दी के अंत तक इनकी लोकप्रियता बनी रही। उस समय यह केवल हास्य या खिलवाड़ का साधन ही नहीं, बल्कि कुछ लोकमान्यताओं से भी जुड़ा हुआ था। कुछ परंपराओं में यह विश्वास प्रचलित था कि यदि बीयर में मेंढक या टोड दिखाई दे, तो उससे [[ज्वर]] दूर हो सकता है।<ref>{{Cite web |url=http://www2.epl.ca/InfoFile/EPLInfofileDetail.cfm?subject_detail=Mugs%2C%20Frog%2FToad%2FSurprise |title=Country Life, September 1983. |access-date=2016-02-06 |archive-date=2016-02-16 |archive-url=https://web.archive.org/web/20160216124057/http://www2.epl.ca/InfoFile/EPLInfofileDetail.cfm?subject_detail=Mugs%2C%20Frog%2FToad%2FSurprise |url-status=dead }}</ref> यद्यपि यह धारणा वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित नहीं है, फिर भी यह उन सांस्कृतिक विश्वासों और मानवीय कल्पनाओं की झलक अवश्य प्रस्तुत करती है, जिन्होंने ऐसे मगों को एक विशेष आकर्षण प्रदान किया।
===पहेली मग===
[[File:Fuddling cups.JPG|अंगूठा|बाएं|ईमानदार|फ़डलिंग कप। इन कपों में खोखले जोड़ होते हैं जिनकी मदद से इनके अंदर की सामग्री को बिना गिराए पिया जा सकता है।]]
पहेली मग एक ऐसा पेय पात्र है, जिसकी बनावट में चतुराई और कौतुक का अद्भुत समावेश होता है। इसे इस प्रकार निर्मित किया जाता है कि साधारण ढंग से इसका उपयोग करना संभव न हो, और पीने वाले को उसकी युक्ति समझने के लिए थोड़ी बुद्धि और धैर्य का सहारा लेना पड़े। उदाहरणतः, कुछ पज़ल मगों के किनारों पर अनेक सूक्ष्म छिद्र होते हैं, जिनके कारण सामान्य रूप से पेय ग्रहण करना असंभव हो जाता है। पहली दृष्टि में ऐसा प्रतीत होता है कि इन छिद्रों को हाथ से ढककर समस्या का समाधान किया जा सकता है, किंतु ऐसा करने पर पेय ऊपर की ओर स्थित अदृश्य छिद्रों से बाहर निकलने लगता है। इस पहेली का वास्तविक समाधान यह है कि किनारों के छिद्रों को उचित प्रकार से ढकते हुए, मग के खोखले हत्थे में बने एक गुप्त मार्ग से पेय ग्रहण किया जाए—यही इसकी चतुर संरचना का रहस्य है।<ref name=puzzle>{{cite news|url=http://ceramicstoday.com/articles/puzzle_mug.htm |title=In Their Cups – The Story of the English Puzzle Mug |author= डेलिया रॉबिन्सन |work=सेरामिक्स टुडे |url-status=unfit |archive-url=https://web.archive.org/web/20100103221715/http://ceramicstoday.com/articles/puzzle_mug.htm |archive-date= जनवरी 3, 2010 }}</ref>
[[File:Pythagorean cup sold in Crete.jpg|thumb|upright|एक पाइथागोरस कप]]
इसी श्रेणी में “फडलिंग कप्स” नामक एक और रोचक प्रकार मिलता है, जिसमें तीन अलग-अलग मग आपस में अपनी दीवारों और हत्थों के माध्यम से जुड़े होते हैं। इनकी भीतरी संरचना में ऐसे छिद्र बनाए जाते हैं, जो तरल के प्रवाह को नियंत्रित करते हैं। परिणामस्वरूप, इन मगों को एक निश्चित और सही क्रम में ही खाली किया जा सकता है; यदि क्रम का पालन न किया जाए, तो पेय अनपेक्षित रूप से बाहर निकल सकता है। इस प्रकार, यह केवल एक पेय पात्र नहीं, बल्कि एक मनोरंजक चुनौती बन जाता है।<ref name=puzzle/>
इसी प्रकार, “पाइथागोरस कप” एक विशिष्ट और शिक्षाप्रद पज़ल मग का उदाहरण है, जिसमें केंद्र में स्थित एक स्तंभ के भीतर एक सूक्ष्म [[दाबलंघिका|साइफन तंत्र]] छिपा होता है। जब तक कप में द्रव उस स्तंभ की ऊँचाई से नीचे रहता है, तब तक वह सुरक्षित रहता है; किंतु जैसे ही द्रव उस सीमा से ऊपर पहुँचता है, साइफन सक्रिय होकर संपूर्ण द्रव को कप के तले में बने छिद्र के माध्यम से बाहर निकाल देता है। यह संरचना केवल कौतुक ही नहीं उत्पन्न करती, बल्कि संयम और संतुलन का एक प्रतीकात्मक संदेश भी देती है—अधिकता अंततः हानि का कारण बन सकती है।
===तापमान बदलने वाले मग===
[[चित्र:Thermochromic_mug.webm|दाएँ|पाठ=Hot water is poured into a black mug, over about 20 seconds most of the mug changes colour to white, revealing black logo markings|अंगूठाकार|एक "जादुई मग" में गर्म पानी डालने और उसके बाद रंग में होने वाले परिवर्तन का वीडियो]]
ऊष्मा-परिवर्तनकारी, ऊष्मा-संवेदनशील अथवा तथाकथित “जादुई” मग ऐसे विशेष पेय पात्र होते हैं, जो तापमान में परिवर्तन के साथ अपना रूप और दृश्य स्वरूप बदल लेते हैं। यह अद्भुत परिवर्तन थर्मोक्रोमिज़्म नामक गुण के कारण संभव होता है, जिसमें ताप के प्रभाव से रंग अथवा चित्र क्रमशः प्रकट या लुप्त होने लगते हैं। जब इन मगों में गर्म पेय डाला जाता है, तो उनकी सतह पर छिपे हुए चित्र, संदेश या रंग धीरे-धीरे उभर आते हैं, मानो कोई रहस्य अचानक सजीव हो उठा हो।
इन मगों की यही विशेषता उन्हें केवल उपयोगी वस्तु तक सीमित नहीं रखती, बल्कि एक आकर्षक अनुभव का माध्यम भी बना देती है। ठंडा होने पर उनका स्वरूप पुनः बदल जाता है, जिससे यह परिवर्तनशीलता एक निरंतर दृश्य कौतुक का आभास कराती है।
==गैर-पेय मग==
=== दाढ़ी बनाने के मग और स्कटल्स (पात्र) ===
[[File:ShavingMug1.jpg|अंगूठा |बाएं|वर्टिकल|शेविंग मग]]
दाढ़ी बनाने के मग और स्कटल्स (पात्र) का विकास उन्नीसवीं शताब्दी के आसपास हुआ, और शेविंग मग का पहला पेटेंट सन् 1867 में दर्ज किया गया।<ref name=smug>पी. ब्रूक्स और जे. मैकग्राडी द्वारा "शेविंग कप में सुधार"" {{US patent|66788}} जुलाई 1867 में प्रकाशित हुआ था।</ref> उस समय अधिकांश घरों में गर्म जल की सहज उपलब्धता नहीं होती थी, इसलिए दाढ़ी बनाने के लिए आवश्यक गरम झाग तैयार करने हेतु विशेष प्रकार के पात्रों की आवश्यकता महसूस हुई। इसी आवश्यकता से स्कटल और शेविंग मग का प्रचलन आरंभ हुआ, जिन्होंने उस दौर की दैनिक दिनचर्या में एक व्यावहारिक समाधान प्रदान किया।
पारंपरिक शेविंग स्कटल का रूप किसी चायदानी से मिलता-जुलता होता है, जिसमें एक चौड़ी टोंटी होती है, जिसके माध्यम से उसमें गरम जल डाला जाता है। यही विशेषता इसे शेविंग मग से अलग करती है, क्योंकि शेविंग मग में सामान्यतः टोंटी नहीं होती। दोनों ही प्रकार के इन पात्रों में प्रायः पकड़ने के लिए हत्था होता है, यद्यपि कुछ रूप ऐसे भी मिलते हैं जिनमें यह नहीं होता। शेविंग मग का बाह्य स्वरूप प्रायः साधारण मग जैसा ही होता है, किंतु कई बार इसमें ब्रश रखने के लिए विशेष रूप से निर्मित स्थान भी होता है, जिससे ब्रश झाग में पूरी तरह डूबने से बचा रहता है और उपयोग अधिक सुविधाजनक बनता है।
आधुनिक समय में शेविंग स्कटल के रूप अपेक्षाकृत कम देखने को मिलते हैं और इनका निर्माण सीमित मात्रा में ही होता है। प्रायः इन्हें छोटे स्तर पर कार्य करने वाले स्वतंत्र [[कुंभकारी|कुम्हारों द्वारा]] पारंपरिक शिल्पकला के रूप में तैयार किया जाता है,<ref name=sara>{{cite web|url=http://www.sarabonnymanpottery.com/moss_scuttle.htm|title=Moss Scuttle|website=Sarabonnymanpottery.com|access-date= नवंबर 16, 2012|url-status=dead|archive-url=https://web.archive.org/web/20080509085958/http://www.sarabonnymanpottery.com/moss_scuttle.htm|archive-date= मई 9, 2008}}</ref> जिससे ये न केवल उपयोगी वस्तु बने रहते हैं, बल्कि एक सांस्कृतिक और हस्तशिल्पीय धरोहर का रूप भी धारण कर लेते हैं।
[[चित्र:ShavingMug2.png|अंगूठाकार|शेविंग स्कटल, 1867 का पेटेंट।<ref name=smug/>]]
स्कटल या शेविंग मग की संरचना उपयोगिता और सूक्ष्म कारीगरी का संतुलित उदाहरण प्रस्तुत करती है। इसके ऊपरी भाग में सामान्यतः साबुन रखने के लिए एक विशेष आधार या स्थान निर्मित होता है, जिसे इस प्रकार रूपांकित किया जाता है कि साबुन स्थिर बना रहे और झाग तैयार करने की प्रक्रिया सुगम हो सके। पारंपरिक रूप से इनका उपयोग कठोर शेविंग साबुन के साथ किया जाता था, जिसके कारण निचले भाग में जल निकासी के लिए सूक्ष्म छिद्र बनाए जाते थे, ताकि अतिरिक्त जल बाहर निकल सके और साबुन अत्यधिक गीला न हो।
समय के साथ इनके स्वरूप में परिवर्तन आया और बाद के स्कटल तथा मगों में ये छिद्र प्रायः नहीं पाए जाते, जिससे उनका उपयोग क्रीम अथवा नरम साबुन के साथ भी सहजता से किया जा सके। इसके अतिरिक्त, कुछ स्कटल और मगों के निचले भाग में संकेंद्रित वृत्ताकार रेखाएँ उकेरी जाती हैं, जो थोड़ी मात्रा में जल को रोके रखती हैं और झाग बनाने की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी तथा संतुलित बनाती हैं।<ref name=sara/>
उपयोग के दौरान शेविंग स्कटल की रचना अपनी पूरी उपयोगिता के साथ सामने आती है। इसमें शेविंग ब्रश को चौड़ी टोंटी वाले भाग में डुबोया जाता है, जहाँ वह जल में भीगकर पर्याप्त रूप से गरम हो जाता है। इसके बाद साबुन को ऊपरी भाग में बने विशेष आधार पर रखा जाता है। आवश्यकता होने पर ब्रश को साबुन पर घुमाया जाता है, जिससे धीरे-धीरे घना और मुलायम झाग तैयार हो जाता है, जबकि अतिरिक्त जल पुनः नीचे की ओर प्रवाहित हो जाता है।
इस सुविचारित व्यवस्था के कारण जल और साबुन—दोनों का अपव्यय कम होता है, और साथ ही आवश्यक ऊष्मा भी लंबे समय तक बनी रहती है। परिणामस्वरूप, शेविंग की प्रक्रिया अधिक आरामदायक, नियंत्रित और निरंतर बनी रहती है, जो उस युग की व्यावहारिक बुद्धिमत्ता और शिल्प कौशल का सुंदर उदाहरण प्रस्तुत करती है।
== समग्र डिजाइन और कार्य ==
मग के अधिकांश डिजाइन थर्मल इन्सुलेशन के उद्देश्य से हैं: एक मग की मोटी दीवार, चाय के प्याले की पतली दीवारों की तुलना में, पेट को ठंडा होने या जल्दी गर्म होने से बचाने के लिए इसे इंसुलेट करती हैं। मग का तेल अक्सर सपाट नहीं होता है, लेकिन अवतल होता है या उस सतह के साथ थर्मल संपर्क को कम करने के लिए एक अतिरिक्त रिम होता है जिस पर मग रखा जाता है। ये विशेषताएं अक्सर सतह पर एक विशिष्ट गोलाकार दाग छोड़ती हैं। अंत में, एक मग हैंडल आपके हाथ को मग के गर्म पक्षों से दूर रखता है। हैंडल का छोटा क्रॉस सेक्शन तरल और हाथ के बीच गर्मी के प्रभाव को कम करता है। थर्मल इन्सुलेशन के इसी कारण से, मग अक्सर कम [[थर्मल चालकता]], जैसे [[मिट्टी के बर्तन]], [[बोन चाइना]], [[चीनी मिट्टी के बर्तन]], या कांच के साथ सामग्री से बने होते हैं।
== सजावट ==
[[File:I got smashed in Grafenwöhr - Germany.jpg|left|upright|thumb|टूटा हुआ मग]]
मग, अपनी सर्वव्यापी उपस्थिति के कारण, केवल एक उपयोगी पेय पात्र तक सीमित नहीं रहा, बल्कि समय के साथ वह कला और अभिव्यक्ति का एक सशक्त माध्यम भी बन गया है। अनेक अवसरों पर इसका उपयोग विज्ञापन वस्तु के रूप में किया जाता है, जहाँ साधारण-सा दिखने वाला मग किसी विचार, संदेश या पहचान का वाहक बन जाता है। कुछ मग तो ऐसे भी होते हैं, जिन्हें पीने के लिए नहीं, बल्कि सजावट के रूप में अधिक महत्व दिया जाता है। प्राचीन काल से ही मगों पर नक्काशी और अलंकरण की परंपरा रही है, और कभी-कभी इन्हें विशिष्ट आकर्षण देने के लिए असामान्य आकृतियों में भी ढाला जाता रहा है।
आधुनिक समय में मगों की सजावट की सबसे लोकप्रिय विधि उन पर छपाई करना है, जिसमें तकनीक और सौंदर्य का सुंदर समन्वय दिखाई देता है। इस प्रक्रिया में सिरेमिक चूर्ण को चयनित रंगों और एक लचीले माध्यम के साथ मिलाकर एक विशेष मिश्रण तैयार किया जाता है। इसके बाद इस मिश्रण को जिलेटिन-लेपित कागज़ पर पारंपरिक [[आवरण मुद्रण|जाल-छपाई विधि]] के माध्यम से अंकित किया जाता है, जिसमें एक महीन बुने हुए जाल को फ्रेम पर कसकर लगाया जाता है और इच्छित आकृति के अनुसार एक छाप तैयार की जाती है। यह विधि सतह पर एक पतली और समान परत बनाने में सक्षम होती है।
यदि अत्यधिक चिकनाई या एकरूपता आवश्यक न हो, तो इसी मिश्रण को सीधे ब्रश की सहायता से भी मग की सतह पर लगाया जा सकता है, जिससे हस्तनिर्मित कलात्मकता का स्पर्श मिलता है। इसके अतिरिक्त, एक और अधिक जटिल तकनीक में कागज़ को प्रकाश-संवेदनशील परत से ढककर उस पर छवि अंकित की जाती है, और फिर पराबैंगनी प्रकाश के माध्यम से उस परत को स्थिर किया जाता है।<ref name=print>{{cite web|title=Printing Ceramics|url=http://www.ceramicstoday.com/articles/090798.htm|publisher=सिरेमिक्स टुडे|access-date=2009-08-30|archive-url=https://web.archive.org/web/20090601072522/http://www.ceramicstoday.com/articles/090798.htm|archive-date=2009-06-01|url-status=dead}}</ref>
सूखने के उपरांत “लिथो” कहलाने वाला यह मुद्रित कागज़ लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है, क्योंकि उसमें अंकित छवि स्थिर और संरक्षित रहती है। जब इस लिथो का उपयोग मग पर छवि स्थानांतरित करने के लिए किया जाता है, तो सबसे पहले उसे गरम जल में भिगोकर नरम किया जाता है। इस प्रक्रिया से मुद्रित छवि से युक्त जिलेटिन की पतली परत कागज़ से अलग हो जाती है, जिसे सावधानीपूर्वक मग की सतह पर चढ़ा दिया जाता है।
इसके बाद मग को उच्च ताप पर, लगभग 700 से 750 डिग्री सेल्सियस तक, भट्ठी में पकाया जाता है। इस ताप पर मग की चमकीली परत (ग्लेज़) की ऊपरी सतह हल्की-सी नरम हो जाती है, जिससे स्थानांतरित छवि उसमें स्थायी रूप से समाहित हो जाती है। परिणामस्वरूप, चित्र केवल सतह पर अंकित नहीं रहता, बल्कि मग का अभिन्न हिस्सा बन जाता है—जो दीर्घकाल तक अपनी स्पष्टता और सौंदर्य बनाए रखता है।<ref name=print/>
== भंडार==
एक लोकप्रिय तरीका कप का भंडार एक 'कप ट्री' पर होता है, एक लकड़ी या धातु की पोस्ट जो एक गोल आधार पर लगाई जाती है और उनके हैंडल से कप लटकने के लिए खूंटे से सुसज्जित होती है।<ref>जेन एंकोना, ब्रूस एंकोना "कप ट्री" अंक दिनांक: 4 दिसंबर 1990</ref> कप को लटकाने के लिए डिज़ाइन किए गए रैक भी हैं ताकि वे हाथ में हों। वे विशेष रूप से उच्च तरंगों वाली नावों पर उपयोगी होते हैं।
==गणित में ==
[[File:Mug and Torus morph.gif|thumb|upright|एक कॉफी मग और एक डोनट के बीच निरंतर विरूपण यह दर्शाता है कि वे समरूप (टोपोलॉजिकली समतुल्य) हैं।]]
[[संस्थितिविज्ञान]] में मग का उदाहरण अत्यंत प्रसिद्ध और सहज रूप से समझ में आने वाला माना जाता है। इस गणितीय दृष्टिकोण के अनुसार, दो वस्तुएँ तब समतुल्य या होमियोमॉर्फिक कही जाती हैं, जब उन्हें बिना काटे, जोड़े या छेद किए, केवल निरंतर विरूपण के माध्यम से एक-दूसरे में रूपांतरित किया जा सके।<ref>{{cite book|url=https://books.google.com/books?id=S3biKR21i-QC&pg=PA51|page=51|title=Principles of robot motion: theory, algorithms, and implementation|author=हॉवी एम. चोसेट|publisher=एमआईटी प्रेस|year=2005|isbn=0-262-03327-5}}</ref> इसी आधार पर, एक सामान्य मग और डोनट—जिसे [[टॉरस]] कहा जाता है—आपस में समतुल्य माने जाते हैं, क्योंकि मग के हत्थे को धीरे-धीरे फैलाकर और उसके मुख्य भाग को रूपांतरित करके उसे डोनट के आकार में बदला जा सकता है, बिना उसकी संरचना को तोड़े।
इसी सिद्धांत का एक और रोचक उदाहरण दो हत्थों वाला मग है, जो टोपोलॉजिकल रूप से द्वि-टोरस के समतुल्य होता है—एक ऐसी आकृति जो अंक “8” के समान प्रतीत होती है।<ref>{{cite web|url=http://plus.maths.org/issue10/features/topology/|title=In space, do all roads lead to home?|author=जन्ना लेविन|date= जनवरी 1, 2000|access-date= अगस्त 30, 2009|archive-date= जुलाई 31, 2009|archive-url=https://web.archive.org/web/20090731130453/http://plus.maths.org/issue10/features/topology/|url-status=live}}</ref> यहाँ प्रत्येक हत्था एक अतिरिक्त “छिद्र” का प्रतिनिधित्व करता है, जिससे उसकी संरचनात्मक जटिलता बढ़ जाती है।
इसके विपरीत, यदि किसी मग में हत्था न हो—अर्थात वह केवल एक साधारण [[कटोरा|कटोरे]] या बीकर के रूप में हो—तो वह टोपोलॉजी की दृष्टि से एक तश्तरी के समतुल्य माना जाता है। यह समानता विशेष रूप से तब स्पष्ट होती है, जब कच्ची मिट्टी से बने कटोरे को कुम्हार के चाक पर दबाकर चपटा किया जाता है, और वह धीरे-धीरे एक समतल तश्तरी का रूप धारण कर लेता है।<ref>{{cite book|url=https://books.google.com/books?id=0f0v4wLTDmwC&pg=PA250|page=250|title=Computer aided engineering design|author=बीरेंद्र सहाय|publisher=स्प्रिंगर|year=2005|isbn=1-4020-2555-6}}</ref>
== गैलरी==
<gallery mode="packed">
File:Mug of tea, Smithfield Market, City of London.jpg|चाय के मग, यूके
File:Coffee at Dad's Diner (8786564351).jpg|एक विशिष्ट अमेरिकी डिनर मग
File:Enamel mug.jpg|एनामेल मग
File:Kitchenware Steel Mug Rezowan.JPG|स्टील मग
File:Lipton-mug-tea.jpg|चाय के लिए कांच का मग
File:Frog or Surprise mug.JPG|मेंढक वाला मग , टोड या सरप्राइज मग
File:Doughnut-shaped Coffee mug.jpg|डोनट के आकार का मग
File:Rosehage kopp cropped.jpg|मूमिन-थीम वाला मग
File:Entenbecher.jpg|बत्तख की आकृति वाला मग
File:Merchandising Coffee mug from band Dead Can Dance with 'DCD' logo - black.jpg|मर्चेंडाइजिंग के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला मग
File:Mug, traveller's (AM 1966.243-3).jpg|केस सहित फोल्डेबल मेटल यात्री मग
File:Dinermug.jpg|थंब|ऑल्ट=एक ठेठ अमेरिकी मग|अमेरिकी ठेठ मग
File:Wikipedia - filled with knowledge (beskuren).jpg|[[विकिपीडिया]] के लोगो वाला एक मग
</gallery>
==इन्हें भी देखें==
*[[कप]]
== सन्दर्भ ==
{{Reflist}}
[[श्रेणी:पीने के उपकरण]]
[[श्रेणी:चाय]]
[[श्रेणी:गर्म पेय]]
gurcdvtstj9t61x738kb5zevkof0sh4
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6547793
2026-05-02T15:01:07Z
चाहर धर्मेंद्र
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सन्दर्भ + चित्र
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wikitext
text/x-wiki
{{db-badtrans}}
{{खराब अनुवाद|अंग्रेज़ी}}
[[चित्र:Mug_of_Tea.JPG|upright=1.35|अंगूठाकार|दुध वाली चाय का एक मग]]
मग एक प्रकार का [[कप]] होता है,{{sfn|Kronenfeld|1996|p=6}} जिसे विशेष रूप से [[कॉफी]], [[हॉट चॉकलेट|गरम चॉकलेट]] या [[चाय]] जैसे गर्म पेय पदार्थों के सेवन के लिए उपयोग किया जाता है। इसकी सबसे प्रमुख विशेषता इसका हैंडल होता है, जो इसे पकड़ने में सुविधा प्रदान करता है, विशेषकर तब जब पेय गरम हो। आकार की दृष्टि से, मग सामान्य कपों—जैसे चाय या कॉफी के पारंपरिक कप—की तुलना में अधिक [[तरल]] धारण करने में सक्षम होता है।
आमतौर पर एक मग की क्षमता लगभग 250 से 350 मिलीलीटर के बीच होती है,<ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=IZRDIcz6uEQC&q=usually+mug+holds+12+fluid+ounces|title=The Boat Galley Cookbook: 800 Everyday Recipes and Essential Tips for Cooking Aboard : 800 Everyday Recipes and Essential Tips for Cooking Aboard: 800 Everyday Recipes and Essential Tips for Cooking Aboard|last1=शियरलॉक|first1=कैरोलिन|last2=आयरन्स|first2=जेन|date=2012-09-14|publisher=मैकग्रा हिल प्रोफेशनल|isbn=9780071782364|access-date=2021-03-12|archive-date=2024-04-25|archive-url=https://web.archive.org/web/20240425165047/https://books.google.com/books?id=IZRDIcz6uEQC&q=usually+mug+holds+12+fluid+ounces|url-status=live}}</ref> जो इसे दैनिक उपयोग के लिए अत्यंत व्यावहारिक बनाती है। यदि आकार इससे भी बड़ा हो, तो ऐसे बर्तन को टैंकर्ड कहा जाता है। इस प्रकार, मग केवल एक साधारण बर्तन नहीं, बल्कि दैनिक जीवन की सहजता और आराम का एक अभिन्न हिस्सा है।
मग का आकार प्रायः सरल और उपयोगितावादी होता है—यह या तो सीधी, बेलनाकार रेखाओं वाला होता है अथवा हल्का घुमाव लिए हुए रूप में भी निर्मित किया जाता है। यद्यपि इसके आकार में विविधता संभव है, फिर भी इसकी मूल पहचान एक सुविधाजनक हैंडल से जुड़ी होती है, जो इसे पकड़ने में सहजता प्रदान करता है; इसी विशेषता के अभाव में इसे बीकर कहा जाता है। सामान्यतः मग के साथ तश्तरी नहीं होती, जो इसे अन्य पारंपरिक कपों से भिन्न बनाती है।<ref>{{cite encyclopedia |title=mug, n.1 |url=http://www.oed.com/view/Entry/123325 |encyclopedia=ओईडी ऑनलाइन |date=दिसंबर 2014 |publisher=ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस |quote=A drinking vessel, freq. cylindrical (and now usually with a handle), generally used without a saucer. |access-date=2015-03-06 |archive-date=2024-04-25 |archive-url=https://web.archive.org/web/20240425165036/https://www.oed.com/dictionary/mug_n1 |url-status=live }}</ref>
मग को [[पेय]] पदार्थों के सेवन का अपेक्षाकृत अनौपचारिक माध्यम माना जाता है, इसलिए इसका प्रयोग प्रायः घरेलू या सहज वातावरण में अधिक होता है, जबकि औपचारिक भोजन कक्षों में चाय या कॉफी के पारंपरिक कपों को प्राथमिकता दी जाती है। इसके अतिरिक्त, मग का एक विशेष रूप [[हजामत|शेविंग]] मग भी होता है, जिसका उपयोग गीली दाढ़ी बनाने की प्रक्रिया में सहायक के रूप में किया जाता है। इस प्रकार, मग अपनी सरलता और बहुउपयोगिता के कारण दैनिक जीवन में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है।
मग का विकास समय के साथ उसकी उपयोगिता और निर्माण सामग्री के अनुसार निरंतर परिवर्तित होता रहा है। प्राचीन काल में मग प्रायः [[लकड़ी]] को तराशकर या [[कुंभकारी|मिट्टी]] से बनाए जाते थे, जो उस समय उपलब्ध संसाधनों और शिल्पकला का प्रतिबिंब थे। आधुनिक युग में इनका निर्माण अधिक परिष्कृत सामग्रियों—जैसे बोन चाइना, अर्दनवेयर, [[पॉर्सिलेन]] और स्टोनवेयर—से किया जाने लगा है, जो न केवल आकर्षक होते हैं, बल्कि टिकाऊ भी होते हैं।
आकार और प्रयोजन के अनुसार कुछ बड़े मग, जो प्रायः धातु या मिट्टी से निर्मित होते हैं और विशेष रूप से पेय पदार्थ जैसे [[बियर]] के लिए उपयोग किए जाते हैं, टैंकर्ड कहलाते हैं। इसके अतिरिक्त, कुछ मग सुदृढ़ [[कांच]]—जैसे पाइरेक्स—से भी बनाए जाते हैं, जो ताप और झटकों के प्रति अधिक सहनशील होते हैं। हल्के वजन और टूट-फूट से बचाव के लिए [[मीनाकारी|एनामेल्ड]] धातु, [[प्लास्टिक]] या [[इस्पात]] जैसी सामग्रियों का उपयोग भी किया जाता है, विशेषकर बाहरी गतिविधियों जैसे [[कैंपिंग|शिविर-यात्रा]] में।
यात्रा के लिए विशेष रूप से बनाए गए ट्रैवल मग में ऊष्मा बनाए रखने की क्षमता होती है और इनमें छलकने से बचाने के लिए ढक्कन भी लगाया जाता है। सजावट की दृष्टि से, मग पर [[लोगो]], चित्र या कलात्मक आकृतियाँ अंकित करने के लिए [[आवरण मुद्रण|सिल्क-स्क्रीन मुद्रण]] या डिकल तकनीक का प्रयोग किया जाता है, जिन्हें पकाकर स्थायी रूप प्रदान किया जाता है। इस प्रकार, मग केवल एक साधारण बर्तन नहीं, बल्कि उपयोगिता, सौंदर्य और तकनीकी विकास का संगम है।
==सामान्य बनावट और कार्य==
[[File:Mug vs cup.jpg|thumb|एक मग और एक कप अगल-बगल रखे हुए हैं]]
मग के बनावट का एक प्रमुख उद्देश्य ऊष्मीय इन्सुलेशन सुनिश्चित करना होता है, जिससे उसमें रखा पेय अपेक्षाकृत अधिक समय तक अपने तापमान को बनाए रख सके। चाय के पारंपरिक कपों की पतली दीवारों की तुलना में मग की दीवारें मोटी होती हैं, जो ऊष्मा के आदान-प्रदान को धीमा करती हैं और पेय को जल्दी ठंडा या अत्यधिक गरम होने से बचाती हैं।
इसके अतिरिक्त, मग का आधार प्रायः पूर्णतः समतल नहीं होता, बल्कि हल्का अवतल या किनारीयुक्त बनाया जाता है। यह संरचना उस सतह के साथ प्रत्यक्ष संपर्क को कम करती है, जिस पर मग रखा जाता है, जिससे ऊष्मा का अपव्यय घटता है। इसी कारण अक्सर सतह पर एक विशिष्ट गोलाकार चिह्न भी दिखाई देता है, जो इस संरचनात्मक विशेषता का परिणाम होता है।
मग का हैंडल भी इसके ऊष्मीय गुणों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह हाथ को गरम सतह से दूर रखता है और उसके अपेक्षाकृत छोटे अनुप्रस्थ क्षेत्र के कारण ऊष्मा के प्रवाह को सीमित करता है, जिससे उपयोगकर्ता को पकड़ने में सुविधा और सुरक्षा दोनों मिलती हैं। इसी कारण, मग सामान्यतः ऐसी सामग्रियों—जैसे मिट्टी के बर्तन, बोन चाइना, [[पॉर्सिलेन]] या काँच—से बनाए जाते हैं,<ref>{{cite book|url=https://books.google.com/books?id=fJw0K1ZGY1kC&pg=PA98|page=98|title=The really useful science book: a framework of knowledge for primary teachers|author=स्टीव फैरो|publisher= रूटलेज |year=1999|isbn=0-7507-0983-9}}</ref><ref>{{cite book|url=https://books.google.com/books?id=esDW3xTKoLIC&pg=PA27|page=27|title=The handbook of evolutionary psychology|author=डेविड एम. बस|publisher=जॉन विली एंड संस.|year=2005|isbn=0-471-26403-2}}</ref> जिनकी [[ऊष्मा चालकता|ऊष्मीय चालकता]] कम होती है और जो ताप को नियंत्रित रखने में सहायक होती हैं।
===कपों की तुलना में अंतर===
मग और पारंपरिक कप के बीच का अंतर केवल आकार या बनावट तक सीमित नहीं है, बल्कि यह विभिन्न भाषाओं और संस्कृतियों में भी स्पष्ट रूप से परिलक्षित होता है। फ्रेंच, इतालवी, पोलिश, रूसी, जर्मन और अंग्रेज़ी जैसी अनेक भाषाओं में इन दोनों के लिए अलग-अलग शब्द प्रचलित हैं, जो इनके भिन्न उपयोग और सांस्कृतिक संदर्भों को दर्शाते हैं।
भाषाविद् अन्ना विर्ज़बिका के अनुसार, यह भिन्नता इनके कार्यात्मक अंतर से उत्पन्न होती है। पारंपरिक कप सामान्यतः औपचारिक परिवेश में मेज पर बैठकर पेय का आनंद लेने के लिए बनाए जाते हैं, जहाँ साज-सज्जा और शिष्टाचार का विशेष महत्व होता है। इसके विपरीत, मग अधिक अनौपचारिक और बहुउपयोगी होता है, जिसे किसी भी स्थान पर सहजता से उपयोग में लाया जा सकता है।{{sfn|Wierzbicka|1984|pp=214–216}}
==इतिहास==
===शुरुआती मग===
[[File:CMOC Treasures of Ancient China exhibit - large grey mug.jpg|upright|thumb|left|चीन के [[झेंगझोऊ]] में [[नवपाषाण युग|नवपाषाण काल]] के उत्तरार्ध ( लगभग 2500-2000 ईसा पूर्व) में कुम्हार के चाक पर बनाया गया एक मग।]]
मग का प्रारंभिक इतिहास यह दर्शाता है कि इसका उपयोग आज की अपेक्षा भिन्न उद्देश्यों के लिए किया जाता था। वर्तमान में जहाँ मग प्रायः गर्म पेय, दूध या शीतल पेयों से जुड़ा हुआ है, वहीं आरंभिक काल में इसका प्रमुख उपयोग [[बियर]] अथवा अन्य मादक पेयों के सेवन के लिए होता था। उस समय के मग आकार में भी अधिक बड़े होते थे, जो उनके उपयोग और सामाजिक परिवेश के अनुरूप थे। लकड़ी से बने प्रारंभिक मग संभवतः प्राचीन काष्ठ-शिल्प के आरंभिक दौर से ही प्रचलन में थे, किंतु समय के प्रभाव के कारण ऐसे अधिकांश नमूने आज सुरक्षित नहीं रह पाए हैं।<ref name="columbia">{{cite web|url=http://www.encyclopedia.com/doc/1E1-porcelai.html|title=Porcelain|publisher=कोलंबिया विश्वकोश छठा संस्करण. 2008|access-date=2008-06-27|archive-date=2008-08-21|archive-url=https://web.archive.org/web/20080821093621/http://www.encyclopedia.com/doc/1E1-porcelai.html|url-status=live}}</ref><ref name="G. J. Monson-Fitzjohn, B.Sc., F.R.Hist.S">{{cite book|url=http://www.nicks.com.au/index.aspx?link_id=76.623|title=Drinking Vessels of Bygone Days|author=जी. जे. मोनसन-फिट्ज़जॉन, बी.एससी., एफ.आर.एच.आई.एस.|url-status=dead|archive-url=https://web.archive.org/web/20100719162453/http://www.nicks.com.au/Index.aspx?link_id=76.623|archive-date=2010-07-19}}</ref>
मिट्टी के बर्तनों के विकास ने मग के निर्माण को एक नई दिशा दी। प्रारंभ में इन्हें [[कुंभकारी|हाथ से आकार]] दिया जाता था, परंतु कुम्हार का चाक के आविष्कार (लगभग 6500 से 3000 ईसा पूर्व के बीच) ने इस प्रक्रिया को अधिक सरल और परिष्कृत बना दिया। इस तकनीक के कारण बर्तनों में हैंडल जोड़ना भी सहज हो गया, जिससे आधुनिक स्वरूप के मग का विकास संभव हुआ। प्राचीन ग्रीस में 4000 से 5000 ईसा पूर्व के काल का एक सुसज्जित मिट्टी का मग प्राप्त हुआ है,<ref>{{cite web|url=http://www.ceramicstudies.me.uk/histx105.html|title=Ceramic Web Page Tutorials|website=Ceramicstudies.me.uk|access-date= नवंबर 16, 2012|archive-date= जून 5, 2023|archive-url=https://web.archive.org/web/20230605205500/http://www.ceramicstudies.me.uk/histx105.html|url-status=live}}</ref> जो उस युग की कलात्मकता और शिल्पकौशल का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करता है।
[[File:AnasaziMugs.jpeg|thumb|upright=1.1|[[कॉलोराडो|दक्षिण-पश्चिमी कोलोराडो]] से प्राप्त [[पुएब्लो कों के पूर्वज|पुएब्लो]] (अनासाज़ी) पूर्वजों के मग , जो 1000 से 1280 ईस्वी के बीच बनाए गए थे। इनके हैंडल पर की गई नक्काशी का अर्थ अभी तक अज्ञात है, लेकिन संभवतः इसका कोई कार्यात्मक महत्व नहीं है।]]
मग के विकासक्रम में प्रारंभिक मिट्टी के मगों की एक प्रमुख कमी उनकी अत्यधिक मोटी दीवारें थीं, जो पीने के लिए सुविधाजनक नहीं मानी जाती थीं। जैसे-जैसे [[धातुकार्य|धातु-कर्म]] की तकनीकों में प्रगति हुई, बर्तनों की दीवारों को अधिक पतला और सुडौल बनाया जाने लगा। लगभग 2000 ईसा पूर्व से [[कांसा|कांस्य]],<ref>{{cite web|url=http://www.thomaslayton.org.uk/joomla/index.php?option=com_content&task=view&id=26&Itemid=41|archive-url=https://web.archive.org/web/20201205022717/http://www.thomaslayton.org.uk/joomla/index.php?option=com_content&task=view&id=26&Itemid=41|url-status=dead|archive-date= दिसंबर 5, 2020|title=The Collection – Archaeology|website=Thomaslayton.org.uk|access-date= नवंबर 16, 2012}}</ref> [[चाँदी]], [[सोना]]<ref>{{cite web|url=http://www.visual-arts-cork.com/ancient-art/mycenean.htm|title=Mycenean Art|website=Visual-arts-cork.com|access-date=नवंबर 16, 2012|archive-date= मई 11, 2023|archive-url=https://web.archive.org/web/20230511213611/http://www.visual-arts-cork.com/ancient-art/mycenean.htm|url-status=live}}</ref> और यहाँ तक कि [[सीसा]]<ref>{{cite web|url=http://www.nicks.com.au/index.aspx?link_id=76.633|title=Lead drinking cup|website=Nicks.com.au|access-date=नवंबर 16, 2012|url-status=dead|archive-url=https://web.archive.org/web/20120927082915/http://www.nicks.com.au/index.aspx?link_id=76.633|archive-date= सितंबर 27, 2012}}</ref> जैसी धातुओं से भी मग निर्मित होने लगे। यद्यपि ये देखने में आकर्षक और टिकाऊ थे, फिर भी गर्म पेयों के साथ इनका उपयोग सहज नहीं था, क्योंकि धातु ऊष्मा का तीव्र संचार करती है।
मग के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ तब आया, जब [[चीनी जनवादी गणराज्य|चीन]] में लगभग 600 ईस्वी के आसपास [[पॉर्सिलेन|चीनी मिट्टी के बर्तनों]] का विकास हुआ। इस नवाचार ने पतली दीवारों वाले ऐसे मगों का निर्माण संभव बनाया, जो न केवल ठंडे, बल्कि गर्म पेयों के लिए भी उपयुक्त थे। यह परंपरा आज भी जारी है और आधुनिक मगों के स्वरूप में उसी विकास की छाप स्पष्ट दिखाई देती है।<ref name="columbia"/><ref name="G. J. Monson-Fitzjohn, B.Sc., F.R.Hist.S"/>
भाषाई दृष्टि से, “मग” शब्द का वर्तमान अर्थ में सबसे प्रारंभिक ज्ञात प्रयोग 1664 ईस्वी में मिलता है,<ref>{{cite web |title=Mug |url=https://www.merriam-webster.com/dictionary/mug#word-history |website=merriam-webster.com |publisher=मेरियम-वेबस्टर |access-date=30 जून 2025}}</ref> जो इस बर्तन के सांस्कृतिक और व्यावहारिक विकास की ऐतिहासिक यात्रा को भी रेखांकित करता है।
===विक्टर कॉफी मग===
[[द्वितीय विश्व युद्ध]] के दौरान [[अमेरिकी नौसेना|संयुक्त राज्य अमेरिका की नौसेना]] ने ऐसे कॉफी मग के निर्माण हेतु अमेरिकी कंपनियों से प्रस्ताव आमंत्रित किए, जो गिरने पर भी सुरक्षित रहें और जहाज़ों पर उपयोग के दौरान अत्यधिक टिकाऊ सिद्ध हों। कई प्रकार के डिज़ाइन प्रस्तुत किए गए, किंतु अंततः चयन [[विद्युतरोधी|उच्च-वोल्टेज पोर्सिलेन इन्सुलेटर]] निर्माता विक्टर इंसुलेटर द्वारा निर्मित एक विशेष डिज़ाइन का हुआ। उस समय युद्धकालीन परिस्थितियों में इन्सुलेटर की माँग घट गई थी, इसलिए कंपनी ने अपने कार्यों को बनाए रखने के लिए स्वच्छतापूर्ण बर्तनों के निर्माण की दिशा में कदम बढ़ाया।<ref name="Upstate">{{Cite web|url=https://exploringupstate.com/how-victor-changed-the-coffee-mug/|title=How the Victor Coffee Mug Changed the Way We Drink Coffee|last=क्लेमेंस|first=क्रिस|date= मार्च 6, 2016|website=एक्सप्लोरिंग अपस्टेट|language=en-US}}</ref>
विक्टर ने नौसेना के लिए एक विशिष्ट मग विकसित किया, जो बिना हैंडल के, सफेद चमकदार सतह वाला और मोटी दीवारों से युक्त था। यह डिज़ाइन अपनी मजबूती और उपयोगिता के कारण सैन्य बलों द्वारा अत्यंत सराहा गया। चूँकि इन मगों के निर्माण में वही पोर्सिलेन सामग्री प्रयुक्त हुई, जिसका उपयोग कंपनी अपने इन्सुलेटर बनाने में करती थी, इसलिए इनमें उत्कृष्ट ऊष्मा-रोधक गुण विद्यमान थे। इस प्रकार, युद्धकालीन आवश्यकताओं ने न केवल एक नए प्रकार के मग को जन्म दिया, बल्कि उसके व्यावहारिक और तकनीकी गुणों को भी परिष्कृत किया।<ref name="Upstate"/><ref name= cjow>{{cite web |last1=गिश|first1=एल्टन |title=Porcelain Insulator News |url=https://www.cjow.com/archive/article.php?month=2&a=02Porcelain%20Insulator%20News.htm&year=2004 |website=cjow.com |publisher=द वायर के क्राउन ज्वेल्स |date= फरवरी 2004}}</ref>
द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति के पश्चात विक्टर इंसुलेटर ने अपने उत्पादन को आंशिक रूप से सैनिटरीवेयर उत्पादों की ओर बनाए रखने का निर्णय लिया और अपने प्रसिद्ध मग का एक अधिक व्यावसायिक रूप से अनुकूल संस्करण प्रस्तुत किया। इस नए रूप में मग में सुविधाजनक हैंडल जोड़ा गया, उसका शरीर अपेक्षाकृत हल्का और पतला बनाया गया, तथा विभिन्न रंगों के विकल्प भी उपलब्ध कराए गए, जिससे यह आम उपभोक्ताओं के लिए अधिक आकर्षक बन गया।
इस सफल डिज़ाइन की लोकप्रियता इतनी बढ़ी कि इसकी नकल संयुक्त राज्य अमेरिका के भीतर ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अनेक निर्माताओं द्वारा बड़े पैमाने पर की जाने लगी।<ref name="Upstate"/> किंतु समय के साथ सस्ते और बड़े पैमाने पर उत्पादित [[चीनी जनवादी गणराज्य|चीनी]] निर्मित विकल्पों से कड़ी प्रतिस्पर्धा के कारण विक्टर को गंभीर आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा। परिणामस्वरूप, 1990 के दशक की शुरुआत में कंपनी को मग का उत्पादन बंद करना पड़ा।<ref name= cjow/>
आज, उत्पादन बंद होने के बाद भी विक्टर द्वारा निर्मित ये मग अपनी विशिष्ट गुणवत्ता और ऐतिहासिक महत्व के कारण संग्राहकों के बीच अत्यंत लोकप्रिय हो गए हैं।<ref>{{cite web |last1=डेलगाडो |first1=मिशेल |title=The Classic Diner Mug That's Disappearing |url=https://medium.com/@mdelgadia/the-classic-diner-mug-thats-disappearing-619c55935aa9 |website=medium.com |publisher= मीडियम |date= मई 24, 2017}}</ref> वे न केवल एक उपयोगी वस्तु के रूप में, बल्कि औद्योगिक इतिहास और डिज़ाइन विकास के प्रतीक के रूप में भी मूल्यवान माने जाते हैं।
==अन्य मग के प्रकार ==
===यात्रा मग===
[[File:travel mug.jpg|thumb|left|upright=.6|यात्रा मग]]
यात्रा मग का प्रचलन 1980 के दशक में बढ़ा, जब ऐसे बर्तनों की आवश्यकता महसूस हुई जो गर्म या ठंडे पेयों को सुरक्षित रूप से एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जा सकें। इन मगों का निर्माण इस प्रकार किया जाता है कि उनमें [[ऊष्मा रोधन|उत्कृष्ट ऊष्मीय इन्सुलेशन गुण]] हों, जिससे पेय लंबे समय तक अपने तापमान को बनाए रख सके। संरचना की दृष्टि से ये [[निर्वात फ्लास्क|वैक्यूम फ्लास्क]] के समान होते हैं—अर्थात् ये अच्छी तरह से इन्सुलेटेड और लगभग पूर्णतः बंद होते हैं, ताकि रिसाव या छलकाव की संभावना न्यूनतम रहे।<ref name=travel>मोरी कार्प "ट्रैवल मग" {{US patent|5249703}} जारी होने की तिथि: अक्टूबर 5, 1993</ref> फिर भी, इनके ढक्कन में एक छोटा छिद्र होता है, जिससे यात्रा के दौरान बिना खोले ही पेय का सेवन किया जा सके।
गर्म पेयों के ठंडा होने का प्रमुख कारण वाष्पीकरण होता है, इसलिए ट्रैवल मग में ढक्कन की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। यह वाष्प के बाहर निकलने को सीमित करता है और इस प्रकार पेय को अधिक समय तक गरम बनाए रखने में सहायक होता है, चाहे ढक्कन पतले प्लास्टिक का ही क्यों न हो।
इसके अतिरिक्त, कुछ मग ऐसे भी होते हैं जिनमें भीतरी और बाहरी दोहरी दीवारें होती हैं, परंतु उनके बीच वैक्यूम नहीं बनाया जाता। ऐसे बर्तनों को डबल वॉल मग कहा जाता है। इनमें भीतरी दीवार सामान्यतः स्टेनलेस स्टील की होती है, जबकि बाहरी परत स्टेनलेस स्टील, प्लास्टिक या अन्य सामग्रियों से निर्मित हो सकती है। यह संरचना भी कुछ हद तक ऊष्मा संरक्षण प्रदान करती है, यद्यपि वैक्यूम युक्त मग की तुलना में इसकी क्षमता अपेक्षाकृत कम होती है।
ड्राइविंग के दौरान उपयोग में आने वाला मग, जिसे प्रायः ऑटो मग या कम्यूटर मग कहा जाता है, केवल एक साधारण पात्र नहीं, बल्कि सुविधा, सुरक्षा और सूझबूझ का संतुलित रूप है। यह विशेष प्रकार का यात्रा मग इस प्रकार निर्मित होता है कि चलते वाहन में भी पेय का आनंद सहज और सुरक्षित बना रहे। इसके ऊपर लगा रिसाव-रोधी ढक्कन, जिसमें पीने के लिए एक छोटा सा छिद्र या नलिका होती है,<ref name="Jackson, Joe">{{cite web|author=जैक्सन, जो|title=Q: What's the Best Insulated Travel Mug? We tested five of the best. Here's how they stacked up.|date= दिसंबर 22, 2014|work=आउटसाइड|url=http://www.outsideonline.com/1786136/whats-best-insulated-travel-mug|access-date= दिसंबर 10, 2015|archive-date= दिसंबर 11, 2015|archive-url=https://web.archive.org/web/20151211031852/http://www.outsideonline.com/1786136/whats-best-insulated-travel-mug|url-status=live}}</ref> इस बात का ध्यान रखता है कि मार्ग की हलचल पेय को बाहर न छलकाए। साथ ही, इसका आधार प्रायः संकरा रखा जाता है, ताकि यह विभिन्न वाहनों में बने कप धारकों में दृढ़ता से स्थापित हो सके और अनचाही हलचल से बचा रहे।
ऐसे मग का मूल्यांकन केवल उसके रूप या आकार से नहीं, बल्कि उसके व्यावहारिक गुणों से किया जाता है। यह अपेक्षित है कि उसे एक हाथ से सरलता से खोला और बंद किया जा सके, जिससे चालक का ध्यान मार्ग से न भटके। उसमें भरण-सीमा का स्पष्ट संकेत हो, ताकि अधिक भराव के कारण होने वाले रिसाव से बचा जा सके। बिना हत्थे का स्वरूप इसे पकड़ने में अधिक सहज बनाता है, जिससे नियंत्रण बना रहता है। इसके अतिरिक्त, इसका विन्यास ऐसा होना चाहिए कि पेय ग्रहण करते समय चालक की दृष्टि मार्ग से विचलित न हो।<ref>{{cite news|work=कुक्स कंट्री|date= अक्टूबर 2011|title=Travel Mugs|url=http://www.cooksillustrated.com/equipment_reviews/1328-travel-mugs?extcode=MASCZ00L0&ref=search_results_1|access-date=2015-12-10|archive-date=2015-12-11|archive-url=https://web.archive.org/web/20151211023117/http://www.cooksillustrated.com/equipment_reviews/1328-travel-mugs?extcode=MASCZ00L0&ref=search_results_1|url-status=live}}</ref><ref name="Jackson, Joe"/><ref>{{cite news|work=अमेरिकाज़ टेस्ट किचन (सीज़न 8, एपिसोड 22)]]|title=Coffeehouse Treats: Equipment Corner/Gadget Guru: Commuter Coffee Mugs|date=2008}}</ref> अंततः, यह विभिन्न प्रकार के कप धारकों में स्थिरता से बैठ सके—यही इसकी उपयोगिता और विश्वसनीयता की वास्तविक कसौटी है।
===बियर मग===
[[File:Humpen.jpg|thumb|upright|एक सामान्य आधा लीटर का जर्मन बीयर मग]]
बीयर स्टाइन, परंपरा और शिल्पकला का एक विशिष्ट संगम, वास्तव में पारंपरिक बीयर मगों का वह रूप है जो प्रायः स्टोनवेयर मिट्टी से निर्मित होता है और ऐतिहासिक रूप से [[जर्मनी]] से जुड़ा हुआ माना जाता है। “स्टाइन” शब्द का अंग्रेज़ी में प्रचलन उन्नीसवीं शताब्दी के मध्य, लगभग 1855 के आसपास, [[जर्मन भाषा|जर्मन]] शब्द से रूपांतरित होकर हुआ;<ref name="mw">{{cite web|url=http://www.merriam-webster.com/dictionary/stein|title=Definition of STEIN|website=www.merriam-webster.com|date=5 सितम्बर 2023 }}</ref> किंतु रोचक तथ्य यह है कि जर्मनी में स्वयं इस शब्द का स्वतंत्र रूप से पेय पात्र के अर्थ में सामान्यतः उपयोग नहीं किया जाता। वहाँ इसके स्थान पर “क्रुग”, “हम्पेन” या “सीडेल” जैसे शब्द अधिक प्रचलित हैं, जो इन पात्रों की विविध आकृतियों और उपयोगों को अधिक सटीक रूप से व्यक्त करते हैं।
आधुनिक बीयर मग, जो इस परंपरा के उत्तराधिकारी माने जा सकते हैं, प्रायः आधा [[लीटर]] या एक लीटर की मानक धारिता में उपलब्ध होते हैं। इनके निर्माण में उपयोगिता और सौंदर्य का संतुलन स्पष्ट दिखाई देता है—मजबूत संरचना के साथ-साथ इनमें प्रायः धातु से निर्मित [[कब्ज़ा|कब्जेदार ढक्कन]] लगाए जाते हैं, जो स्वच्छता और संरक्षण दोनों की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण होते हैं। इसके अतिरिक्त, इन मगों की सतह पर उकेरे गए जर्मन [[राज्यचिह्न|प्रतीक-चिह्न]], ऐतिहासिक दृश्य या पारंपरिक कलात्मक आकृतियाँ इन्हें केवल पेय पात्र नहीं, बल्कि सांस्कृतिक विरासत के जीवंत प्रतीक के रूप में स्थापित करती हैं।
===टिकी मग===
[[File: Tiki7.jpg|अंगूठा|ईमानदार|टिकी मग]]
टिकी मग की उत्पत्ति बीसवीं शताब्दी के मध्य में उन उष्णकटिबंधीय वातावरण से प्रेरित भोजनालयों और विशेष पेय स्थलों में हुई, जहाँ वातावरण, सजावट और परोसे जाने वाले पेय—तीनों में एक विशिष्ट विदेशी आकर्षण रचा-बसा रहता था। “टिकी मग” वस्तुतः एक व्यापक और सामान्य संज्ञा है, जिसका उपयोग उन मूर्तिकला-सदृश पेय पात्रों के लिए किया जाता है, जिन पर [[मॅलानिशिया]], [[माइक्रोनीशिया]] अथवा [[पोलीनेशिया]] की सांस्कृतिक छवियों, प्रतीकों और आकृतियों का कलात्मक निरूपण किया गया होता है। समय के साथ इसका दायरा और भी विस्तृत हुआ है, और अब यह शब्द किसी भी ऐसे पात्र के लिए प्रयुक्त होने लगा है, जो उष्णकटिबंधीय परिवेश, समुद्री जीवन या सर्फिंग संस्कृति से संबंधित सौंदर्य-बोध को अभिव्यक्त करता हो।<ref>{{cite book|title=Tiki Mugs: Cult Artifacts of Polynesian Pop|author1=स्ट्रॉन्गमैन, जे |author2=वेस्टलैंड, होल्डन |publisher=कोरेरो बुक्स|year=2008|isbn=978-0-9553398-1-3}}</ref>
ये मग केवल उपयोग की वस्तु भर नहीं, बल्कि स्मृतियों और अनुभवों के संवाहक भी बन जाते हैं। प्रायः इन्हें स्मृति-चिह्न के रूप में बेचा जाता है, जिससे ये किसी स्थान, अनुभव या संस्कृति का प्रतीकात्मक प्रतिनिधित्व करने लगते हैं। यही कारण है कि अनेक लोग इन्हें संग्रहणीय वस्तुओं के रूप में संजोकर रखते हैं—जहाँ प्रत्येक टिकी मग अपने भीतर एक विशिष्ट कथा, सौंदर्य और सांस्कृतिक स्पर्श समेटे होता है।
===मनोरंजन मग===
व्हिसल मग, जिसे हबल-बबल के नाम से भी जाना जाता है, एक मनोरंजक और कौतुकपूर्ण पेय पात्र है, जो अपनी विशिष्ट बनावट के कारण साधारण मगों से अलग पहचान रखता है। इसकी संरचना में एक खोखला हत्था होता है, जिसे इस प्रकार निर्मित किया जाता है कि उसमें से हवा प्रवाहित करने पर सीटी जैसी ध्वनि उत्पन्न हो सके। यही विशेषता इसे केवल उपयोगी वस्तु न बनाकर एक खेल-भावना से जुड़ा अनुभव भी प्रदान करती है।
इस मग की ध्वनि उसकी अवस्था के अनुसार परिवर्तित होती है—जब यह खाली होता है, तब उससे एक सरल, एकल स्वर सुनाई देता है; किंतु जैसे ही इसमें द्रव भरा जाता है, ध्वनि का स्वरूप बदलकर अधिक मधुर, झंकारयुक्त और चहचहाहट जैसी जटिल ध्वनियों में परिवर्तित हो जाता है।<ref name=puzzle/>
===मेंढक मग===
मेंढक मग, जिसे सरप्राइज़ मग भी कहा जाता है, विनोद और आश्चर्य की भावना से निर्मित एक विशिष्ट पेय पात्र है। इसका रूप साधारण प्रतीत होता है, किंतु जैसे ही पेय धीरे-धीरे समाप्त होता है, उसके भीतर छिपा एक छोटा सिरेमिक जीव—अक्सर मेंढक—अचानक प्रकट होकर पीने वाले को चकित कर देता है। यही अप्रत्याशित अनुभव इसे मात्र उपयोगी वस्तु से आगे बढ़ाकर एक मनोरंजक परंपरा का हिस्सा बना देता है।
ऐसे मगों का इतिहास अठारहवीं शताब्दी के उत्तरार्ध, लगभग 1775 के आसपास तक जाता है, और उन्नीसवीं शताब्दी के अंत तक इनकी लोकप्रियता बनी रही। उस समय यह केवल हास्य या खिलवाड़ का साधन ही नहीं, बल्कि कुछ लोकमान्यताओं से भी जुड़ा हुआ था। कुछ परंपराओं में यह विश्वास प्रचलित था कि यदि बीयर में मेंढक या टोड दिखाई दे, तो उससे [[ज्वर]] दूर हो सकता है।<ref>{{Cite web |url=http://www2.epl.ca/InfoFile/EPLInfofileDetail.cfm?subject_detail=Mugs%2C%20Frog%2FToad%2FSurprise |title=Country Life, September 1983. |access-date=2016-02-06 |archive-date=2016-02-16 |archive-url=https://web.archive.org/web/20160216124057/http://www2.epl.ca/InfoFile/EPLInfofileDetail.cfm?subject_detail=Mugs%2C%20Frog%2FToad%2FSurprise |url-status=dead }}</ref> यद्यपि यह धारणा वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित नहीं है, फिर भी यह उन सांस्कृतिक विश्वासों और मानवीय कल्पनाओं की झलक अवश्य प्रस्तुत करती है, जिन्होंने ऐसे मगों को एक विशेष आकर्षण प्रदान किया।
===पहेली मग===
[[File:Fuddling cups.JPG|अंगूठा|बाएं|ईमानदार|फ़डलिंग कप। इन कपों में खोखले जोड़ होते हैं जिनकी मदद से इनके अंदर की सामग्री को बिना गिराए पिया जा सकता है।]]
पहेली मग एक ऐसा पेय पात्र है, जिसकी बनावट में चतुराई और कौतुक का अद्भुत समावेश होता है। इसे इस प्रकार निर्मित किया जाता है कि साधारण ढंग से इसका उपयोग करना संभव न हो, और पीने वाले को उसकी युक्ति समझने के लिए थोड़ी बुद्धि और धैर्य का सहारा लेना पड़े। उदाहरणतः, कुछ पज़ल मगों के किनारों पर अनेक सूक्ष्म छिद्र होते हैं, जिनके कारण सामान्य रूप से पेय ग्रहण करना असंभव हो जाता है। पहली दृष्टि में ऐसा प्रतीत होता है कि इन छिद्रों को हाथ से ढककर समस्या का समाधान किया जा सकता है, किंतु ऐसा करने पर पेय ऊपर की ओर स्थित अदृश्य छिद्रों से बाहर निकलने लगता है। इस पहेली का वास्तविक समाधान यह है कि किनारों के छिद्रों को उचित प्रकार से ढकते हुए, मग के खोखले हत्थे में बने एक गुप्त मार्ग से पेय ग्रहण किया जाए—यही इसकी चतुर संरचना का रहस्य है।<ref name=puzzle>{{cite news|url=http://ceramicstoday.com/articles/puzzle_mug.htm |title=In Their Cups – The Story of the English Puzzle Mug |author= डेलिया रॉबिन्सन |work=सेरामिक्स टुडे |url-status=unfit |archive-url=https://web.archive.org/web/20100103221715/http://ceramicstoday.com/articles/puzzle_mug.htm |archive-date= जनवरी 3, 2010 }}</ref>
[[File:Pythagorean cup sold in Crete.jpg|thumb|upright|एक पाइथागोरस कप]]
इसी श्रेणी में “फडलिंग कप्स” नामक एक और रोचक प्रकार मिलता है, जिसमें तीन अलग-अलग मग आपस में अपनी दीवारों और हत्थों के माध्यम से जुड़े होते हैं। इनकी भीतरी संरचना में ऐसे छिद्र बनाए जाते हैं, जो तरल के प्रवाह को नियंत्रित करते हैं। परिणामस्वरूप, इन मगों को एक निश्चित और सही क्रम में ही खाली किया जा सकता है; यदि क्रम का पालन न किया जाए, तो पेय अनपेक्षित रूप से बाहर निकल सकता है। इस प्रकार, यह केवल एक पेय पात्र नहीं, बल्कि एक मनोरंजक चुनौती बन जाता है।<ref name=puzzle/>
इसी प्रकार, “पाइथागोरस कप” एक विशिष्ट और शिक्षाप्रद पज़ल मग का उदाहरण है, जिसमें केंद्र में स्थित एक स्तंभ के भीतर एक सूक्ष्म [[दाबलंघिका|साइफन तंत्र]] छिपा होता है। जब तक कप में द्रव उस स्तंभ की ऊँचाई से नीचे रहता है, तब तक वह सुरक्षित रहता है; किंतु जैसे ही द्रव उस सीमा से ऊपर पहुँचता है, साइफन सक्रिय होकर संपूर्ण द्रव को कप के तले में बने छिद्र के माध्यम से बाहर निकाल देता है। यह संरचना केवल कौतुक ही नहीं उत्पन्न करती, बल्कि संयम और संतुलन का एक प्रतीकात्मक संदेश भी देती है—अधिकता अंततः हानि का कारण बन सकती है।
===तापमान बदलने वाले मग===
[[चित्र:Thermochromic_mug.webm|दाएँ|पाठ=Hot water is poured into a black mug, over about 20 seconds most of the mug changes colour to white, revealing black logo markings|अंगूठाकार|एक "जादुई मग" में गर्म पानी डालने और उसके बाद रंग में होने वाले परिवर्तन का वीडियो]]
ऊष्मा-परिवर्तनकारी, ऊष्मा-संवेदनशील अथवा तथाकथित “जादुई” मग ऐसे विशेष पेय पात्र होते हैं, जो तापमान में परिवर्तन के साथ अपना रूप और दृश्य स्वरूप बदल लेते हैं। यह अद्भुत परिवर्तन थर्मोक्रोमिज़्म नामक गुण के कारण संभव होता है, जिसमें ताप के प्रभाव से रंग अथवा चित्र क्रमशः प्रकट या लुप्त होने लगते हैं। जब इन मगों में गर्म पेय डाला जाता है, तो उनकी सतह पर छिपे हुए चित्र, संदेश या रंग धीरे-धीरे उभर आते हैं, मानो कोई रहस्य अचानक सजीव हो उठा हो।
इन मगों की यही विशेषता उन्हें केवल उपयोगी वस्तु तक सीमित नहीं रखती, बल्कि एक आकर्षक अनुभव का माध्यम भी बना देती है। ठंडा होने पर उनका स्वरूप पुनः बदल जाता है, जिससे यह परिवर्तनशीलता एक निरंतर दृश्य कौतुक का आभास कराती है।
==गैर-पेय मग==
=== दाढ़ी बनाने के मग और स्कटल्स (पात्र) ===
[[File:ShavingMug1.jpg|अंगूठा |बाएं|वर्टिकल|शेविंग मग]]
दाढ़ी बनाने के मग और स्कटल्स (पात्र) का विकास उन्नीसवीं शताब्दी के आसपास हुआ, और शेविंग मग का पहला पेटेंट सन् 1867 में दर्ज किया गया।<ref name=smug>पी. ब्रूक्स और जे. मैकग्राडी द्वारा "शेविंग कप में सुधार"" {{US patent|66788}} जुलाई 1867 में प्रकाशित हुआ था।</ref> उस समय अधिकांश घरों में गर्म जल की सहज उपलब्धता नहीं होती थी, इसलिए दाढ़ी बनाने के लिए आवश्यक गरम झाग तैयार करने हेतु विशेष प्रकार के पात्रों की आवश्यकता महसूस हुई। इसी आवश्यकता से स्कटल और शेविंग मग का प्रचलन आरंभ हुआ, जिन्होंने उस दौर की दैनिक दिनचर्या में एक व्यावहारिक समाधान प्रदान किया।
पारंपरिक शेविंग स्कटल का रूप किसी चायदानी से मिलता-जुलता होता है, जिसमें एक चौड़ी टोंटी होती है, जिसके माध्यम से उसमें गरम जल डाला जाता है। यही विशेषता इसे शेविंग मग से अलग करती है, क्योंकि शेविंग मग में सामान्यतः टोंटी नहीं होती। दोनों ही प्रकार के इन पात्रों में प्रायः पकड़ने के लिए हत्था होता है, यद्यपि कुछ रूप ऐसे भी मिलते हैं जिनमें यह नहीं होता। शेविंग मग का बाह्य स्वरूप प्रायः साधारण मग जैसा ही होता है, किंतु कई बार इसमें ब्रश रखने के लिए विशेष रूप से निर्मित स्थान भी होता है, जिससे ब्रश झाग में पूरी तरह डूबने से बचा रहता है और उपयोग अधिक सुविधाजनक बनता है।
आधुनिक समय में शेविंग स्कटल के रूप अपेक्षाकृत कम देखने को मिलते हैं और इनका निर्माण सीमित मात्रा में ही होता है। प्रायः इन्हें छोटे स्तर पर कार्य करने वाले स्वतंत्र [[कुंभकारी|कुम्हारों द्वारा]] पारंपरिक शिल्पकला के रूप में तैयार किया जाता है,<ref name=sara>{{cite web|url=http://www.sarabonnymanpottery.com/moss_scuttle.htm|title=Moss Scuttle|website=Sarabonnymanpottery.com|access-date= नवंबर 16, 2012|url-status=dead|archive-url=https://web.archive.org/web/20080509085958/http://www.sarabonnymanpottery.com/moss_scuttle.htm|archive-date= मई 9, 2008}}</ref> जिससे ये न केवल उपयोगी वस्तु बने रहते हैं, बल्कि एक सांस्कृतिक और हस्तशिल्पीय धरोहर का रूप भी धारण कर लेते हैं।
[[चित्र:ShavingMug2.png|अंगूठाकार|शेविंग स्कटल, 1867 का पेटेंट।<ref name=smug/>]]
स्कटल या शेविंग मग की संरचना उपयोगिता और सूक्ष्म कारीगरी का संतुलित उदाहरण प्रस्तुत करती है। इसके ऊपरी भाग में सामान्यतः साबुन रखने के लिए एक विशेष आधार या स्थान निर्मित होता है, जिसे इस प्रकार रूपांकित किया जाता है कि साबुन स्थिर बना रहे और झाग तैयार करने की प्रक्रिया सुगम हो सके। पारंपरिक रूप से इनका उपयोग कठोर शेविंग साबुन के साथ किया जाता था, जिसके कारण निचले भाग में जल निकासी के लिए सूक्ष्म छिद्र बनाए जाते थे, ताकि अतिरिक्त जल बाहर निकल सके और साबुन अत्यधिक गीला न हो।
समय के साथ इनके स्वरूप में परिवर्तन आया और बाद के स्कटल तथा मगों में ये छिद्र प्रायः नहीं पाए जाते, जिससे उनका उपयोग क्रीम अथवा नरम साबुन के साथ भी सहजता से किया जा सके। इसके अतिरिक्त, कुछ स्कटल और मगों के निचले भाग में संकेंद्रित वृत्ताकार रेखाएँ उकेरी जाती हैं, जो थोड़ी मात्रा में जल को रोके रखती हैं और झाग बनाने की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी तथा संतुलित बनाती हैं।<ref name=sara/>
उपयोग के दौरान शेविंग स्कटल की रचना अपनी पूरी उपयोगिता के साथ सामने आती है। इसमें शेविंग ब्रश को चौड़ी टोंटी वाले भाग में डुबोया जाता है, जहाँ वह जल में भीगकर पर्याप्त रूप से गरम हो जाता है। इसके बाद साबुन को ऊपरी भाग में बने विशेष आधार पर रखा जाता है। आवश्यकता होने पर ब्रश को साबुन पर घुमाया जाता है, जिससे धीरे-धीरे घना और मुलायम झाग तैयार हो जाता है, जबकि अतिरिक्त जल पुनः नीचे की ओर प्रवाहित हो जाता है।
इस सुविचारित व्यवस्था के कारण जल और साबुन—दोनों का अपव्यय कम होता है, और साथ ही आवश्यक ऊष्मा भी लंबे समय तक बनी रहती है। परिणामस्वरूप, शेविंग की प्रक्रिया अधिक आरामदायक, नियंत्रित और निरंतर बनी रहती है, जो उस युग की व्यावहारिक बुद्धिमत्ता और शिल्प कौशल का सुंदर उदाहरण प्रस्तुत करती है।
== समग्र डिजाइन और कार्य ==
मग के अधिकांश डिजाइन थर्मल इन्सुलेशन के उद्देश्य से हैं: एक मग की मोटी दीवार, चाय के प्याले की पतली दीवारों की तुलना में, पेट को ठंडा होने या जल्दी गर्म होने से बचाने के लिए इसे इंसुलेट करती हैं। मग का तेल अक्सर सपाट नहीं होता है, लेकिन अवतल होता है या उस सतह के साथ थर्मल संपर्क को कम करने के लिए एक अतिरिक्त रिम होता है जिस पर मग रखा जाता है। ये विशेषताएं अक्सर सतह पर एक विशिष्ट गोलाकार दाग छोड़ती हैं। अंत में, एक मग हैंडल आपके हाथ को मग के गर्म पक्षों से दूर रखता है। हैंडल का छोटा क्रॉस सेक्शन तरल और हाथ के बीच गर्मी के प्रभाव को कम करता है। थर्मल इन्सुलेशन के इसी कारण से, मग अक्सर कम [[थर्मल चालकता]], जैसे [[मिट्टी के बर्तन]], [[बोन चाइना]], [[चीनी मिट्टी के बर्तन]], या कांच के साथ सामग्री से बने होते हैं।
== सजावट ==
[[File:I got smashed in Grafenwöhr - Germany.jpg|left|upright|thumb|टूटा हुआ मग]]
मग, अपनी सर्वव्यापी उपस्थिति के कारण, केवल एक उपयोगी पेय पात्र तक सीमित नहीं रहा, बल्कि समय के साथ वह कला और अभिव्यक्ति का एक सशक्त माध्यम भी बन गया है। अनेक अवसरों पर इसका उपयोग विज्ञापन वस्तु के रूप में किया जाता है, जहाँ साधारण-सा दिखने वाला मग किसी विचार, संदेश या पहचान का वाहक बन जाता है। कुछ मग तो ऐसे भी होते हैं, जिन्हें पीने के लिए नहीं, बल्कि सजावट के रूप में अधिक महत्व दिया जाता है। प्राचीन काल से ही मगों पर नक्काशी और अलंकरण की परंपरा रही है, और कभी-कभी इन्हें विशिष्ट आकर्षण देने के लिए असामान्य आकृतियों में भी ढाला जाता रहा है।
आधुनिक समय में मगों की सजावट की सबसे लोकप्रिय विधि उन पर छपाई करना है, जिसमें तकनीक और सौंदर्य का सुंदर समन्वय दिखाई देता है। इस प्रक्रिया में सिरेमिक चूर्ण को चयनित रंगों और एक लचीले माध्यम के साथ मिलाकर एक विशेष मिश्रण तैयार किया जाता है। इसके बाद इस मिश्रण को जिलेटिन-लेपित कागज़ पर पारंपरिक [[आवरण मुद्रण|जाल-छपाई विधि]] के माध्यम से अंकित किया जाता है, जिसमें एक महीन बुने हुए जाल को फ्रेम पर कसकर लगाया जाता है और इच्छित आकृति के अनुसार एक छाप तैयार की जाती है। यह विधि सतह पर एक पतली और समान परत बनाने में सक्षम होती है।
यदि अत्यधिक चिकनाई या एकरूपता आवश्यक न हो, तो इसी मिश्रण को सीधे ब्रश की सहायता से भी मग की सतह पर लगाया जा सकता है, जिससे हस्तनिर्मित कलात्मकता का स्पर्श मिलता है। इसके अतिरिक्त, एक और अधिक जटिल तकनीक में कागज़ को प्रकाश-संवेदनशील परत से ढककर उस पर छवि अंकित की जाती है, और फिर पराबैंगनी प्रकाश के माध्यम से उस परत को स्थिर किया जाता है।<ref name=print>{{cite web|title=Printing Ceramics|url=http://www.ceramicstoday.com/articles/090798.htm|publisher=सिरेमिक्स टुडे|access-date=2009-08-30|archive-url=https://web.archive.org/web/20090601072522/http://www.ceramicstoday.com/articles/090798.htm|archive-date=2009-06-01|url-status=dead}}</ref>
सूखने के उपरांत “लिथो” कहलाने वाला यह मुद्रित कागज़ लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है, क्योंकि उसमें अंकित छवि स्थिर और संरक्षित रहती है। जब इस लिथो का उपयोग मग पर छवि स्थानांतरित करने के लिए किया जाता है, तो सबसे पहले उसे गरम जल में भिगोकर नरम किया जाता है। इस प्रक्रिया से मुद्रित छवि से युक्त जिलेटिन की पतली परत कागज़ से अलग हो जाती है, जिसे सावधानीपूर्वक मग की सतह पर चढ़ा दिया जाता है।
इसके बाद मग को उच्च ताप पर, लगभग 700 से 750 डिग्री सेल्सियस तक, भट्ठी में पकाया जाता है। इस ताप पर मग की चमकीली परत (ग्लेज़) की ऊपरी सतह हल्की-सी नरम हो जाती है, जिससे स्थानांतरित छवि उसमें स्थायी रूप से समाहित हो जाती है। परिणामस्वरूप, चित्र केवल सतह पर अंकित नहीं रहता, बल्कि मग का अभिन्न हिस्सा बन जाता है—जो दीर्घकाल तक अपनी स्पष्टता और सौंदर्य बनाए रखता है।<ref name=print/>
== भंडार==
एक लोकप्रिय तरीका कप का भंडार एक 'कप ट्री' पर होता है, एक लकड़ी या धातु की पोस्ट जो एक गोल आधार पर लगाई जाती है और उनके हैंडल से कप लटकने के लिए खूंटे से सुसज्जित होती है।<ref>जेन एंकोना, ब्रूस एंकोना "कप ट्री" अंक दिनांक: 4 दिसंबर 1990</ref> कप को लटकाने के लिए डिज़ाइन किए गए रैक भी हैं ताकि वे हाथ में हों। वे विशेष रूप से उच्च तरंगों वाली नावों पर उपयोगी होते हैं।
==गणित में ==
[[File:Mug and Torus morph.gif|thumb|upright|एक कॉफी मग और एक डोनट के बीच निरंतर विरूपण यह दर्शाता है कि वे समरूप (टोपोलॉजिकली समतुल्य) हैं।]]
[[संस्थितिविज्ञान]] में मग का उदाहरण अत्यंत प्रसिद्ध और सहज रूप से समझ में आने वाला माना जाता है। इस गणितीय दृष्टिकोण के अनुसार, दो वस्तुएँ तब समतुल्य या होमियोमॉर्फिक कही जाती हैं, जब उन्हें बिना काटे, जोड़े या छेद किए, केवल निरंतर विरूपण के माध्यम से एक-दूसरे में रूपांतरित किया जा सके।<ref>{{cite book|url=https://books.google.com/books?id=S3biKR21i-QC&pg=PA51|page=51|title=Principles of robot motion: theory, algorithms, and implementation|author=हॉवी एम. चोसेट|publisher=एमआईटी प्रेस|year=2005|isbn=0-262-03327-5}}</ref> इसी आधार पर, एक सामान्य मग और डोनट—जिसे [[टॉरस]] कहा जाता है—आपस में समतुल्य माने जाते हैं, क्योंकि मग के हत्थे को धीरे-धीरे फैलाकर और उसके मुख्य भाग को रूपांतरित करके उसे डोनट के आकार में बदला जा सकता है, बिना उसकी संरचना को तोड़े।
इसी सिद्धांत का एक और रोचक उदाहरण दो हत्थों वाला मग है, जो टोपोलॉजिकल रूप से द्वि-टोरस के समतुल्य होता है—एक ऐसी आकृति जो अंक “8” के समान प्रतीत होती है।<ref>{{cite web|url=http://plus.maths.org/issue10/features/topology/|title=In space, do all roads lead to home?|author=जन्ना लेविन|date= जनवरी 1, 2000|access-date= अगस्त 30, 2009|archive-date= जुलाई 31, 2009|archive-url=https://web.archive.org/web/20090731130453/http://plus.maths.org/issue10/features/topology/|url-status=live}}</ref> यहाँ प्रत्येक हत्था एक अतिरिक्त “छिद्र” का प्रतिनिधित्व करता है, जिससे उसकी संरचनात्मक जटिलता बढ़ जाती है।
इसके विपरीत, यदि किसी मग में हत्था न हो—अर्थात वह केवल एक साधारण [[कटोरा|कटोरे]] या बीकर के रूप में हो—तो वह टोपोलॉजी की दृष्टि से एक तश्तरी के समतुल्य माना जाता है। यह समानता विशेष रूप से तब स्पष्ट होती है, जब कच्ची मिट्टी से बने कटोरे को कुम्हार के चाक पर दबाकर चपटा किया जाता है, और वह धीरे-धीरे एक समतल तश्तरी का रूप धारण कर लेता है।<ref>{{cite book|url=https://books.google.com/books?id=0f0v4wLTDmwC&pg=PA250|page=250|title=Computer aided engineering design|author=बीरेंद्र सहाय|publisher=स्प्रिंगर|year=2005|isbn=1-4020-2555-6}}</ref>
== गैलरी==
<gallery mode="packed">
File:Mug of tea, Smithfield Market, City of London.jpg|चाय के मग, यूके
File:Coffee at Dad's Diner (8786564351).jpg|एक विशिष्ट अमेरिकी डिनर मग
File:Enamel mug.jpg|एनामेल मग
File:Kitchenware Steel Mug Rezowan.JPG|स्टील मग
File:Lipton-mug-tea.jpg|चाय के लिए कांच का मग
File:Frog or Surprise mug.JPG|मेंढक वाला मग , टोड या सरप्राइज मग
File:Doughnut-shaped Coffee mug.jpg|डोनट के आकार का मग
File:Rosehage kopp cropped.jpg|मूमिन-थीम वाला मग
File:Entenbecher.jpg|बत्तख की आकृति वाला मग
File:Merchandising Coffee mug from band Dead Can Dance with 'DCD' logo - black.jpg|मर्चेंडाइजिंग के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला मग
File:Mug, traveller's (AM 1966.243-3).jpg|केस सहित फोल्डेबल मेटल यात्री मग
File:Dinermug.jpg|थंब|ऑल्ट=एक ठेठ अमेरिकी मग|अमेरिकी ठेठ मग
File:Wikipedia - filled with knowledge (beskuren).jpg|[[विकिपीडिया]] के लोगो वाला एक मग
</gallery>
==इन्हें भी देखें==
*[[कप]]
== सन्दर्भ ==
{{Reflist}}
== ग्रन्थसूची ==
* {{cite book | last=क्रोननफेल्ड | first=डी. | title=Plastic Glasses and Church Fathers: Semantic Extension From the Ethnoscience Tradition | publisher=ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस | series=ऑक्सफोर्ड स्टडीज इन एंथ्रोपोलॉजिकल लिंग्विस्टिक्स। | year=1996 | isbn=978-0-19-535749-3 | url=https://books.google.com/books?id=0iuGtpfpTh4C&pg=PA6 | access-date=2024-10-29}}
* {{cite journal | last=विर्ज़बिका | first=अन्ना | title=Cups and mugs: Lexicography and conceptual analysis | journal=ऑस्ट्रेलियाई जर्नल ऑफ लिंग्विस्टिक्स| publisher=इन्फॉर्मा यूके लिमिटेड | volume=4 | issue=2 | year=1984 | issn=0726-8602 | doi=10.1080/07268608408599326 | pages=205–255 | url=https://www.researchgate.net/publication/232938621}}
==बाहरी कड़ियाँ==
*{{commons category-inline}}
[[श्रेणी:पीने के उपकरण]]
[[श्रेणी:चाय]]
[[श्रेणी:गर्म पेय]]
ce6qjnx1iciyf8yiv5yxj8344lqo8tv
6547795
6547794
2026-05-02T15:04:49Z
चाहर धर्मेंद्र
703114
काम पुरा
6547795
wikitext
text/x-wiki
{{db-badtrans}}
[[चित्र:Mug_of_Tea.JPG|upright=1.35|अंगूठाकार|दुध वाली चाय का एक मग]]
मग एक प्रकार का [[कप]] होता है,{{sfn|Kronenfeld|1996|p=6}} जिसे विशेष रूप से [[कॉफी]], [[हॉट चॉकलेट|गरम चॉकलेट]] या [[चाय]] जैसे गर्म पेय पदार्थों के सेवन के लिए उपयोग किया जाता है। इसकी सबसे प्रमुख विशेषता इसका हैंडल होता है, जो इसे पकड़ने में सुविधा प्रदान करता है, विशेषकर तब जब पेय गरम हो। आकार की दृष्टि से, मग सामान्य कपों—जैसे चाय या कॉफी के पारंपरिक कप—की तुलना में अधिक [[तरल]] धारण करने में सक्षम होता है।
आमतौर पर एक मग की क्षमता लगभग 250 से 350 मिलीलीटर के बीच होती है,<ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=IZRDIcz6uEQC&q=usually+mug+holds+12+fluid+ounces|title=The Boat Galley Cookbook: 800 Everyday Recipes and Essential Tips for Cooking Aboard : 800 Everyday Recipes and Essential Tips for Cooking Aboard: 800 Everyday Recipes and Essential Tips for Cooking Aboard|last1=शियरलॉक|first1=कैरोलिन|last2=आयरन्स|first2=जेन|date=2012-09-14|publisher=मैकग्रा हिल प्रोफेशनल|isbn=9780071782364|access-date=2021-03-12|archive-date=2024-04-25|archive-url=https://web.archive.org/web/20240425165047/https://books.google.com/books?id=IZRDIcz6uEQC&q=usually+mug+holds+12+fluid+ounces|url-status=live}}</ref> जो इसे दैनिक उपयोग के लिए अत्यंत व्यावहारिक बनाती है। यदि आकार इससे भी बड़ा हो, तो ऐसे बर्तन को टैंकर्ड कहा जाता है। इस प्रकार, मग केवल एक साधारण बर्तन नहीं, बल्कि दैनिक जीवन की सहजता और आराम का एक अभिन्न हिस्सा है।
मग का आकार प्रायः सरल और उपयोगितावादी होता है—यह या तो सीधी, बेलनाकार रेखाओं वाला होता है अथवा हल्का घुमाव लिए हुए रूप में भी निर्मित किया जाता है। यद्यपि इसके आकार में विविधता संभव है, फिर भी इसकी मूल पहचान एक सुविधाजनक हैंडल से जुड़ी होती है, जो इसे पकड़ने में सहजता प्रदान करता है; इसी विशेषता के अभाव में इसे बीकर कहा जाता है। सामान्यतः मग के साथ तश्तरी नहीं होती, जो इसे अन्य पारंपरिक कपों से भिन्न बनाती है।<ref>{{cite encyclopedia |title=mug, n.1 |url=http://www.oed.com/view/Entry/123325 |encyclopedia=ओईडी ऑनलाइन |date=दिसंबर 2014 |publisher=ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस |quote=A drinking vessel, freq. cylindrical (and now usually with a handle), generally used without a saucer. |access-date=2015-03-06 |archive-date=2024-04-25 |archive-url=https://web.archive.org/web/20240425165036/https://www.oed.com/dictionary/mug_n1 |url-status=live }}</ref>
मग को [[पेय]] पदार्थों के सेवन का अपेक्षाकृत अनौपचारिक माध्यम माना जाता है, इसलिए इसका प्रयोग प्रायः घरेलू या सहज वातावरण में अधिक होता है, जबकि औपचारिक भोजन कक्षों में चाय या कॉफी के पारंपरिक कपों को प्राथमिकता दी जाती है। इसके अतिरिक्त, मग का एक विशेष रूप [[हजामत|शेविंग]] मग भी होता है, जिसका उपयोग गीली दाढ़ी बनाने की प्रक्रिया में सहायक के रूप में किया जाता है। इस प्रकार, मग अपनी सरलता और बहुउपयोगिता के कारण दैनिक जीवन में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है।
मग का विकास समय के साथ उसकी उपयोगिता और निर्माण सामग्री के अनुसार निरंतर परिवर्तित होता रहा है। प्राचीन काल में मग प्रायः [[लकड़ी]] को तराशकर या [[कुंभकारी|मिट्टी]] से बनाए जाते थे, जो उस समय उपलब्ध संसाधनों और शिल्पकला का प्रतिबिंब थे। आधुनिक युग में इनका निर्माण अधिक परिष्कृत सामग्रियों—जैसे बोन चाइना, अर्दनवेयर, [[पॉर्सिलेन]] और स्टोनवेयर—से किया जाने लगा है, जो न केवल आकर्षक होते हैं, बल्कि टिकाऊ भी होते हैं।
आकार और प्रयोजन के अनुसार कुछ बड़े मग, जो प्रायः धातु या मिट्टी से निर्मित होते हैं और विशेष रूप से पेय पदार्थ जैसे [[बियर]] के लिए उपयोग किए जाते हैं, टैंकर्ड कहलाते हैं। इसके अतिरिक्त, कुछ मग सुदृढ़ [[कांच]]—जैसे पाइरेक्स—से भी बनाए जाते हैं, जो ताप और झटकों के प्रति अधिक सहनशील होते हैं। हल्के वजन और टूट-फूट से बचाव के लिए [[मीनाकारी|एनामेल्ड]] धातु, [[प्लास्टिक]] या [[इस्पात]] जैसी सामग्रियों का उपयोग भी किया जाता है, विशेषकर बाहरी गतिविधियों जैसे [[कैंपिंग|शिविर-यात्रा]] में।
यात्रा के लिए विशेष रूप से बनाए गए ट्रैवल मग में ऊष्मा बनाए रखने की क्षमता होती है और इनमें छलकने से बचाने के लिए ढक्कन भी लगाया जाता है। सजावट की दृष्टि से, मग पर [[लोगो]], चित्र या कलात्मक आकृतियाँ अंकित करने के लिए [[आवरण मुद्रण|सिल्क-स्क्रीन मुद्रण]] या डिकल तकनीक का प्रयोग किया जाता है, जिन्हें पकाकर स्थायी रूप प्रदान किया जाता है। इस प्रकार, मग केवल एक साधारण बर्तन नहीं, बल्कि उपयोगिता, सौंदर्य और तकनीकी विकास का संगम है।
==सामान्य बनावट और कार्य==
[[File:Mug vs cup.jpg|thumb|एक मग और एक कप अगल-बगल रखे हुए हैं]]
मग के बनावट का एक प्रमुख उद्देश्य ऊष्मीय इन्सुलेशन सुनिश्चित करना होता है, जिससे उसमें रखा पेय अपेक्षाकृत अधिक समय तक अपने तापमान को बनाए रख सके। चाय के पारंपरिक कपों की पतली दीवारों की तुलना में मग की दीवारें मोटी होती हैं, जो ऊष्मा के आदान-प्रदान को धीमा करती हैं और पेय को जल्दी ठंडा या अत्यधिक गरम होने से बचाती हैं।
इसके अतिरिक्त, मग का आधार प्रायः पूर्णतः समतल नहीं होता, बल्कि हल्का अवतल या किनारीयुक्त बनाया जाता है। यह संरचना उस सतह के साथ प्रत्यक्ष संपर्क को कम करती है, जिस पर मग रखा जाता है, जिससे ऊष्मा का अपव्यय घटता है। इसी कारण अक्सर सतह पर एक विशिष्ट गोलाकार चिह्न भी दिखाई देता है, जो इस संरचनात्मक विशेषता का परिणाम होता है।
मग का हैंडल भी इसके ऊष्मीय गुणों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह हाथ को गरम सतह से दूर रखता है और उसके अपेक्षाकृत छोटे अनुप्रस्थ क्षेत्र के कारण ऊष्मा के प्रवाह को सीमित करता है, जिससे उपयोगकर्ता को पकड़ने में सुविधा और सुरक्षा दोनों मिलती हैं। इसी कारण, मग सामान्यतः ऐसी सामग्रियों—जैसे मिट्टी के बर्तन, बोन चाइना, [[पॉर्सिलेन]] या काँच—से बनाए जाते हैं,<ref>{{cite book|url=https://books.google.com/books?id=fJw0K1ZGY1kC&pg=PA98|page=98|title=The really useful science book: a framework of knowledge for primary teachers|author=स्टीव फैरो|publisher= रूटलेज |year=1999|isbn=0-7507-0983-9}}</ref><ref>{{cite book|url=https://books.google.com/books?id=esDW3xTKoLIC&pg=PA27|page=27|title=The handbook of evolutionary psychology|author=डेविड एम. बस|publisher=जॉन विली एंड संस.|year=2005|isbn=0-471-26403-2}}</ref> जिनकी [[ऊष्मा चालकता|ऊष्मीय चालकता]] कम होती है और जो ताप को नियंत्रित रखने में सहायक होती हैं।
===कपों की तुलना में अंतर===
मग और पारंपरिक कप के बीच का अंतर केवल आकार या बनावट तक सीमित नहीं है, बल्कि यह विभिन्न भाषाओं और संस्कृतियों में भी स्पष्ट रूप से परिलक्षित होता है। फ्रेंच, इतालवी, पोलिश, रूसी, जर्मन और अंग्रेज़ी जैसी अनेक भाषाओं में इन दोनों के लिए अलग-अलग शब्द प्रचलित हैं, जो इनके भिन्न उपयोग और सांस्कृतिक संदर्भों को दर्शाते हैं।
भाषाविद् अन्ना विर्ज़बिका के अनुसार, यह भिन्नता इनके कार्यात्मक अंतर से उत्पन्न होती है। पारंपरिक कप सामान्यतः औपचारिक परिवेश में मेज पर बैठकर पेय का आनंद लेने के लिए बनाए जाते हैं, जहाँ साज-सज्जा और शिष्टाचार का विशेष महत्व होता है। इसके विपरीत, मग अधिक अनौपचारिक और बहुउपयोगी होता है, जिसे किसी भी स्थान पर सहजता से उपयोग में लाया जा सकता है।{{sfn|Wierzbicka|1984|pp=214–216}}
==इतिहास==
===शुरुआती मग===
[[File:CMOC Treasures of Ancient China exhibit - large grey mug.jpg|upright|thumb|left|चीन के [[झेंगझोऊ]] में [[नवपाषाण युग|नवपाषाण काल]] के उत्तरार्ध ( लगभग 2500-2000 ईसा पूर्व) में कुम्हार के चाक पर बनाया गया एक मग।]]
मग का प्रारंभिक इतिहास यह दर्शाता है कि इसका उपयोग आज की अपेक्षा भिन्न उद्देश्यों के लिए किया जाता था। वर्तमान में जहाँ मग प्रायः गर्म पेय, दूध या शीतल पेयों से जुड़ा हुआ है, वहीं आरंभिक काल में इसका प्रमुख उपयोग [[बियर]] अथवा अन्य मादक पेयों के सेवन के लिए होता था। उस समय के मग आकार में भी अधिक बड़े होते थे, जो उनके उपयोग और सामाजिक परिवेश के अनुरूप थे। लकड़ी से बने प्रारंभिक मग संभवतः प्राचीन काष्ठ-शिल्प के आरंभिक दौर से ही प्रचलन में थे, किंतु समय के प्रभाव के कारण ऐसे अधिकांश नमूने आज सुरक्षित नहीं रह पाए हैं।<ref name="columbia">{{cite web|url=http://www.encyclopedia.com/doc/1E1-porcelai.html|title=Porcelain|publisher=कोलंबिया विश्वकोश छठा संस्करण. 2008|access-date=2008-06-27|archive-date=2008-08-21|archive-url=https://web.archive.org/web/20080821093621/http://www.encyclopedia.com/doc/1E1-porcelai.html|url-status=live}}</ref><ref name="G. J. Monson-Fitzjohn, B.Sc., F.R.Hist.S">{{cite book|url=http://www.nicks.com.au/index.aspx?link_id=76.623|title=Drinking Vessels of Bygone Days|author=जी. जे. मोनसन-फिट्ज़जॉन, बी.एससी., एफ.आर.एच.आई.एस.|url-status=dead|archive-url=https://web.archive.org/web/20100719162453/http://www.nicks.com.au/Index.aspx?link_id=76.623|archive-date=2010-07-19}}</ref>
मिट्टी के बर्तनों के विकास ने मग के निर्माण को एक नई दिशा दी। प्रारंभ में इन्हें [[कुंभकारी|हाथ से आकार]] दिया जाता था, परंतु कुम्हार का चाक के आविष्कार (लगभग 6500 से 3000 ईसा पूर्व के बीच) ने इस प्रक्रिया को अधिक सरल और परिष्कृत बना दिया। इस तकनीक के कारण बर्तनों में हैंडल जोड़ना भी सहज हो गया, जिससे आधुनिक स्वरूप के मग का विकास संभव हुआ। प्राचीन ग्रीस में 4000 से 5000 ईसा पूर्व के काल का एक सुसज्जित मिट्टी का मग प्राप्त हुआ है,<ref>{{cite web|url=http://www.ceramicstudies.me.uk/histx105.html|title=Ceramic Web Page Tutorials|website=Ceramicstudies.me.uk|access-date= नवंबर 16, 2012|archive-date= जून 5, 2023|archive-url=https://web.archive.org/web/20230605205500/http://www.ceramicstudies.me.uk/histx105.html|url-status=live}}</ref> जो उस युग की कलात्मकता और शिल्पकौशल का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करता है।
[[File:AnasaziMugs.jpeg|thumb|upright=1.1|[[कॉलोराडो|दक्षिण-पश्चिमी कोलोराडो]] से प्राप्त [[पुएब्लो कों के पूर्वज|पुएब्लो]] (अनासाज़ी) पूर्वजों के मग , जो 1000 से 1280 ईस्वी के बीच बनाए गए थे। इनके हैंडल पर की गई नक्काशी का अर्थ अभी तक अज्ञात है, लेकिन संभवतः इसका कोई कार्यात्मक महत्व नहीं है।]]
मग के विकासक्रम में प्रारंभिक मिट्टी के मगों की एक प्रमुख कमी उनकी अत्यधिक मोटी दीवारें थीं, जो पीने के लिए सुविधाजनक नहीं मानी जाती थीं। जैसे-जैसे [[धातुकार्य|धातु-कर्म]] की तकनीकों में प्रगति हुई, बर्तनों की दीवारों को अधिक पतला और सुडौल बनाया जाने लगा। लगभग 2000 ईसा पूर्व से [[कांसा|कांस्य]],<ref>{{cite web|url=http://www.thomaslayton.org.uk/joomla/index.php?option=com_content&task=view&id=26&Itemid=41|archive-url=https://web.archive.org/web/20201205022717/http://www.thomaslayton.org.uk/joomla/index.php?option=com_content&task=view&id=26&Itemid=41|url-status=dead|archive-date= दिसंबर 5, 2020|title=The Collection – Archaeology|website=Thomaslayton.org.uk|access-date= नवंबर 16, 2012}}</ref> [[चाँदी]], [[सोना]]<ref>{{cite web|url=http://www.visual-arts-cork.com/ancient-art/mycenean.htm|title=Mycenean Art|website=Visual-arts-cork.com|access-date=नवंबर 16, 2012|archive-date= मई 11, 2023|archive-url=https://web.archive.org/web/20230511213611/http://www.visual-arts-cork.com/ancient-art/mycenean.htm|url-status=live}}</ref> और यहाँ तक कि [[सीसा]]<ref>{{cite web|url=http://www.nicks.com.au/index.aspx?link_id=76.633|title=Lead drinking cup|website=Nicks.com.au|access-date=नवंबर 16, 2012|url-status=dead|archive-url=https://web.archive.org/web/20120927082915/http://www.nicks.com.au/index.aspx?link_id=76.633|archive-date= सितंबर 27, 2012}}</ref> जैसी धातुओं से भी मग निर्मित होने लगे। यद्यपि ये देखने में आकर्षक और टिकाऊ थे, फिर भी गर्म पेयों के साथ इनका उपयोग सहज नहीं था, क्योंकि धातु ऊष्मा का तीव्र संचार करती है।
मग के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ तब आया, जब [[चीनी जनवादी गणराज्य|चीन]] में लगभग 600 ईस्वी के आसपास [[पॉर्सिलेन|चीनी मिट्टी के बर्तनों]] का विकास हुआ। इस नवाचार ने पतली दीवारों वाले ऐसे मगों का निर्माण संभव बनाया, जो न केवल ठंडे, बल्कि गर्म पेयों के लिए भी उपयुक्त थे। यह परंपरा आज भी जारी है और आधुनिक मगों के स्वरूप में उसी विकास की छाप स्पष्ट दिखाई देती है।<ref name="columbia"/><ref name="G. J. Monson-Fitzjohn, B.Sc., F.R.Hist.S"/>
भाषाई दृष्टि से, “मग” शब्द का वर्तमान अर्थ में सबसे प्रारंभिक ज्ञात प्रयोग 1664 ईस्वी में मिलता है,<ref>{{cite web |title=Mug |url=https://www.merriam-webster.com/dictionary/mug#word-history |website=merriam-webster.com |publisher=मेरियम-वेबस्टर |access-date=30 जून 2025}}</ref> जो इस बर्तन के सांस्कृतिक और व्यावहारिक विकास की ऐतिहासिक यात्रा को भी रेखांकित करता है।
===विक्टर कॉफी मग===
[[द्वितीय विश्व युद्ध]] के दौरान [[अमेरिकी नौसेना|संयुक्त राज्य अमेरिका की नौसेना]] ने ऐसे कॉफी मग के निर्माण हेतु अमेरिकी कंपनियों से प्रस्ताव आमंत्रित किए, जो गिरने पर भी सुरक्षित रहें और जहाज़ों पर उपयोग के दौरान अत्यधिक टिकाऊ सिद्ध हों। कई प्रकार के डिज़ाइन प्रस्तुत किए गए, किंतु अंततः चयन [[विद्युतरोधी|उच्च-वोल्टेज पोर्सिलेन इन्सुलेटर]] निर्माता विक्टर इंसुलेटर द्वारा निर्मित एक विशेष डिज़ाइन का हुआ। उस समय युद्धकालीन परिस्थितियों में इन्सुलेटर की माँग घट गई थी, इसलिए कंपनी ने अपने कार्यों को बनाए रखने के लिए स्वच्छतापूर्ण बर्तनों के निर्माण की दिशा में कदम बढ़ाया।<ref name="Upstate">{{Cite web|url=https://exploringupstate.com/how-victor-changed-the-coffee-mug/|title=How the Victor Coffee Mug Changed the Way We Drink Coffee|last=क्लेमेंस|first=क्रिस|date= मार्च 6, 2016|website=एक्सप्लोरिंग अपस्टेट|language=en-US}}</ref>
विक्टर ने नौसेना के लिए एक विशिष्ट मग विकसित किया, जो बिना हैंडल के, सफेद चमकदार सतह वाला और मोटी दीवारों से युक्त था। यह डिज़ाइन अपनी मजबूती और उपयोगिता के कारण सैन्य बलों द्वारा अत्यंत सराहा गया। चूँकि इन मगों के निर्माण में वही पोर्सिलेन सामग्री प्रयुक्त हुई, जिसका उपयोग कंपनी अपने इन्सुलेटर बनाने में करती थी, इसलिए इनमें उत्कृष्ट ऊष्मा-रोधक गुण विद्यमान थे। इस प्रकार, युद्धकालीन आवश्यकताओं ने न केवल एक नए प्रकार के मग को जन्म दिया, बल्कि उसके व्यावहारिक और तकनीकी गुणों को भी परिष्कृत किया।<ref name="Upstate"/><ref name= cjow>{{cite web |last1=गिश|first1=एल्टन |title=Porcelain Insulator News |url=https://www.cjow.com/archive/article.php?month=2&a=02Porcelain%20Insulator%20News.htm&year=2004 |website=cjow.com |publisher=द वायर के क्राउन ज्वेल्स |date= फरवरी 2004}}</ref>
द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति के पश्चात विक्टर इंसुलेटर ने अपने उत्पादन को आंशिक रूप से सैनिटरीवेयर उत्पादों की ओर बनाए रखने का निर्णय लिया और अपने प्रसिद्ध मग का एक अधिक व्यावसायिक रूप से अनुकूल संस्करण प्रस्तुत किया। इस नए रूप में मग में सुविधाजनक हैंडल जोड़ा गया, उसका शरीर अपेक्षाकृत हल्का और पतला बनाया गया, तथा विभिन्न रंगों के विकल्प भी उपलब्ध कराए गए, जिससे यह आम उपभोक्ताओं के लिए अधिक आकर्षक बन गया।
इस सफल डिज़ाइन की लोकप्रियता इतनी बढ़ी कि इसकी नकल संयुक्त राज्य अमेरिका के भीतर ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अनेक निर्माताओं द्वारा बड़े पैमाने पर की जाने लगी।<ref name="Upstate"/> किंतु समय के साथ सस्ते और बड़े पैमाने पर उत्पादित [[चीनी जनवादी गणराज्य|चीनी]] निर्मित विकल्पों से कड़ी प्रतिस्पर्धा के कारण विक्टर को गंभीर आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा। परिणामस्वरूप, 1990 के दशक की शुरुआत में कंपनी को मग का उत्पादन बंद करना पड़ा।<ref name= cjow/>
आज, उत्पादन बंद होने के बाद भी विक्टर द्वारा निर्मित ये मग अपनी विशिष्ट गुणवत्ता और ऐतिहासिक महत्व के कारण संग्राहकों के बीच अत्यंत लोकप्रिय हो गए हैं।<ref>{{cite web |last1=डेलगाडो |first1=मिशेल |title=The Classic Diner Mug That's Disappearing |url=https://medium.com/@mdelgadia/the-classic-diner-mug-thats-disappearing-619c55935aa9 |website=medium.com |publisher= मीडियम |date= मई 24, 2017}}</ref> वे न केवल एक उपयोगी वस्तु के रूप में, बल्कि औद्योगिक इतिहास और डिज़ाइन विकास के प्रतीक के रूप में भी मूल्यवान माने जाते हैं।
==अन्य मग के प्रकार ==
===यात्रा मग===
[[File:travel mug.jpg|thumb|left|upright=.6|यात्रा मग]]
यात्रा मग का प्रचलन 1980 के दशक में बढ़ा, जब ऐसे बर्तनों की आवश्यकता महसूस हुई जो गर्म या ठंडे पेयों को सुरक्षित रूप से एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जा सकें। इन मगों का निर्माण इस प्रकार किया जाता है कि उनमें [[ऊष्मा रोधन|उत्कृष्ट ऊष्मीय इन्सुलेशन गुण]] हों, जिससे पेय लंबे समय तक अपने तापमान को बनाए रख सके। संरचना की दृष्टि से ये [[निर्वात फ्लास्क|वैक्यूम फ्लास्क]] के समान होते हैं—अर्थात् ये अच्छी तरह से इन्सुलेटेड और लगभग पूर्णतः बंद होते हैं, ताकि रिसाव या छलकाव की संभावना न्यूनतम रहे।<ref name=travel>मोरी कार्प "ट्रैवल मग" {{US patent|5249703}} जारी होने की तिथि: अक्टूबर 5, 1993</ref> फिर भी, इनके ढक्कन में एक छोटा छिद्र होता है, जिससे यात्रा के दौरान बिना खोले ही पेय का सेवन किया जा सके।
गर्म पेयों के ठंडा होने का प्रमुख कारण वाष्पीकरण होता है, इसलिए ट्रैवल मग में ढक्कन की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। यह वाष्प के बाहर निकलने को सीमित करता है और इस प्रकार पेय को अधिक समय तक गरम बनाए रखने में सहायक होता है, चाहे ढक्कन पतले प्लास्टिक का ही क्यों न हो।
इसके अतिरिक्त, कुछ मग ऐसे भी होते हैं जिनमें भीतरी और बाहरी दोहरी दीवारें होती हैं, परंतु उनके बीच वैक्यूम नहीं बनाया जाता। ऐसे बर्तनों को डबल वॉल मग कहा जाता है। इनमें भीतरी दीवार सामान्यतः स्टेनलेस स्टील की होती है, जबकि बाहरी परत स्टेनलेस स्टील, प्लास्टिक या अन्य सामग्रियों से निर्मित हो सकती है। यह संरचना भी कुछ हद तक ऊष्मा संरक्षण प्रदान करती है, यद्यपि वैक्यूम युक्त मग की तुलना में इसकी क्षमता अपेक्षाकृत कम होती है।
ड्राइविंग के दौरान उपयोग में आने वाला मग, जिसे प्रायः ऑटो मग या कम्यूटर मग कहा जाता है, केवल एक साधारण पात्र नहीं, बल्कि सुविधा, सुरक्षा और सूझबूझ का संतुलित रूप है। यह विशेष प्रकार का यात्रा मग इस प्रकार निर्मित होता है कि चलते वाहन में भी पेय का आनंद सहज और सुरक्षित बना रहे। इसके ऊपर लगा रिसाव-रोधी ढक्कन, जिसमें पीने के लिए एक छोटा सा छिद्र या नलिका होती है,<ref name="Jackson, Joe">{{cite web|author=जैक्सन, जो|title=Q: What's the Best Insulated Travel Mug? We tested five of the best. Here's how they stacked up.|date= दिसंबर 22, 2014|work=आउटसाइड|url=http://www.outsideonline.com/1786136/whats-best-insulated-travel-mug|access-date= दिसंबर 10, 2015|archive-date= दिसंबर 11, 2015|archive-url=https://web.archive.org/web/20151211031852/http://www.outsideonline.com/1786136/whats-best-insulated-travel-mug|url-status=live}}</ref> इस बात का ध्यान रखता है कि मार्ग की हलचल पेय को बाहर न छलकाए। साथ ही, इसका आधार प्रायः संकरा रखा जाता है, ताकि यह विभिन्न वाहनों में बने कप धारकों में दृढ़ता से स्थापित हो सके और अनचाही हलचल से बचा रहे।
ऐसे मग का मूल्यांकन केवल उसके रूप या आकार से नहीं, बल्कि उसके व्यावहारिक गुणों से किया जाता है। यह अपेक्षित है कि उसे एक हाथ से सरलता से खोला और बंद किया जा सके, जिससे चालक का ध्यान मार्ग से न भटके। उसमें भरण-सीमा का स्पष्ट संकेत हो, ताकि अधिक भराव के कारण होने वाले रिसाव से बचा जा सके। बिना हत्थे का स्वरूप इसे पकड़ने में अधिक सहज बनाता है, जिससे नियंत्रण बना रहता है। इसके अतिरिक्त, इसका विन्यास ऐसा होना चाहिए कि पेय ग्रहण करते समय चालक की दृष्टि मार्ग से विचलित न हो।<ref>{{cite news|work=कुक्स कंट्री|date= अक्टूबर 2011|title=Travel Mugs|url=http://www.cooksillustrated.com/equipment_reviews/1328-travel-mugs?extcode=MASCZ00L0&ref=search_results_1|access-date=2015-12-10|archive-date=2015-12-11|archive-url=https://web.archive.org/web/20151211023117/http://www.cooksillustrated.com/equipment_reviews/1328-travel-mugs?extcode=MASCZ00L0&ref=search_results_1|url-status=live}}</ref><ref name="Jackson, Joe"/><ref>{{cite news|work=अमेरिकाज़ टेस्ट किचन (सीज़न 8, एपिसोड 22)]]|title=Coffeehouse Treats: Equipment Corner/Gadget Guru: Commuter Coffee Mugs|date=2008}}</ref> अंततः, यह विभिन्न प्रकार के कप धारकों में स्थिरता से बैठ सके—यही इसकी उपयोगिता और विश्वसनीयता की वास्तविक कसौटी है।
===बियर मग===
[[File:Humpen.jpg|thumb|upright|एक सामान्य आधा लीटर का जर्मन बीयर मग]]
बीयर स्टाइन, परंपरा और शिल्पकला का एक विशिष्ट संगम, वास्तव में पारंपरिक बीयर मगों का वह रूप है जो प्रायः स्टोनवेयर मिट्टी से निर्मित होता है और ऐतिहासिक रूप से [[जर्मनी]] से जुड़ा हुआ माना जाता है। “स्टाइन” शब्द का अंग्रेज़ी में प्रचलन उन्नीसवीं शताब्दी के मध्य, लगभग 1855 के आसपास, [[जर्मन भाषा|जर्मन]] शब्द से रूपांतरित होकर हुआ;<ref name="mw">{{cite web|url=http://www.merriam-webster.com/dictionary/stein|title=Definition of STEIN|website=www.merriam-webster.com|date=5 सितम्बर 2023 }}</ref> किंतु रोचक तथ्य यह है कि जर्मनी में स्वयं इस शब्द का स्वतंत्र रूप से पेय पात्र के अर्थ में सामान्यतः उपयोग नहीं किया जाता। वहाँ इसके स्थान पर “क्रुग”, “हम्पेन” या “सीडेल” जैसे शब्द अधिक प्रचलित हैं, जो इन पात्रों की विविध आकृतियों और उपयोगों को अधिक सटीक रूप से व्यक्त करते हैं।
आधुनिक बीयर मग, जो इस परंपरा के उत्तराधिकारी माने जा सकते हैं, प्रायः आधा [[लीटर]] या एक लीटर की मानक धारिता में उपलब्ध होते हैं। इनके निर्माण में उपयोगिता और सौंदर्य का संतुलन स्पष्ट दिखाई देता है—मजबूत संरचना के साथ-साथ इनमें प्रायः धातु से निर्मित [[कब्ज़ा|कब्जेदार ढक्कन]] लगाए जाते हैं, जो स्वच्छता और संरक्षण दोनों की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण होते हैं। इसके अतिरिक्त, इन मगों की सतह पर उकेरे गए जर्मन [[राज्यचिह्न|प्रतीक-चिह्न]], ऐतिहासिक दृश्य या पारंपरिक कलात्मक आकृतियाँ इन्हें केवल पेय पात्र नहीं, बल्कि सांस्कृतिक विरासत के जीवंत प्रतीक के रूप में स्थापित करती हैं।
===टिकी मग===
[[File: Tiki7.jpg|अंगूठा|ईमानदार|टिकी मग]]
टिकी मग की उत्पत्ति बीसवीं शताब्दी के मध्य में उन उष्णकटिबंधीय वातावरण से प्रेरित भोजनालयों और विशेष पेय स्थलों में हुई, जहाँ वातावरण, सजावट और परोसे जाने वाले पेय—तीनों में एक विशिष्ट विदेशी आकर्षण रचा-बसा रहता था। “टिकी मग” वस्तुतः एक व्यापक और सामान्य संज्ञा है, जिसका उपयोग उन मूर्तिकला-सदृश पेय पात्रों के लिए किया जाता है, जिन पर [[मॅलानिशिया]], [[माइक्रोनीशिया]] अथवा [[पोलीनेशिया]] की सांस्कृतिक छवियों, प्रतीकों और आकृतियों का कलात्मक निरूपण किया गया होता है। समय के साथ इसका दायरा और भी विस्तृत हुआ है, और अब यह शब्द किसी भी ऐसे पात्र के लिए प्रयुक्त होने लगा है, जो उष्णकटिबंधीय परिवेश, समुद्री जीवन या सर्फिंग संस्कृति से संबंधित सौंदर्य-बोध को अभिव्यक्त करता हो।<ref>{{cite book|title=Tiki Mugs: Cult Artifacts of Polynesian Pop|author1=स्ट्रॉन्गमैन, जे |author2=वेस्टलैंड, होल्डन |publisher=कोरेरो बुक्स|year=2008|isbn=978-0-9553398-1-3}}</ref>
ये मग केवल उपयोग की वस्तु भर नहीं, बल्कि स्मृतियों और अनुभवों के संवाहक भी बन जाते हैं। प्रायः इन्हें स्मृति-चिह्न के रूप में बेचा जाता है, जिससे ये किसी स्थान, अनुभव या संस्कृति का प्रतीकात्मक प्रतिनिधित्व करने लगते हैं। यही कारण है कि अनेक लोग इन्हें संग्रहणीय वस्तुओं के रूप में संजोकर रखते हैं—जहाँ प्रत्येक टिकी मग अपने भीतर एक विशिष्ट कथा, सौंदर्य और सांस्कृतिक स्पर्श समेटे होता है।
===मनोरंजन मग===
व्हिसल मग, जिसे हबल-बबल के नाम से भी जाना जाता है, एक मनोरंजक और कौतुकपूर्ण पेय पात्र है, जो अपनी विशिष्ट बनावट के कारण साधारण मगों से अलग पहचान रखता है। इसकी संरचना में एक खोखला हत्था होता है, जिसे इस प्रकार निर्मित किया जाता है कि उसमें से हवा प्रवाहित करने पर सीटी जैसी ध्वनि उत्पन्न हो सके। यही विशेषता इसे केवल उपयोगी वस्तु न बनाकर एक खेल-भावना से जुड़ा अनुभव भी प्रदान करती है।
इस मग की ध्वनि उसकी अवस्था के अनुसार परिवर्तित होती है—जब यह खाली होता है, तब उससे एक सरल, एकल स्वर सुनाई देता है; किंतु जैसे ही इसमें द्रव भरा जाता है, ध्वनि का स्वरूप बदलकर अधिक मधुर, झंकारयुक्त और चहचहाहट जैसी जटिल ध्वनियों में परिवर्तित हो जाता है।<ref name=puzzle/>
===मेंढक मग===
मेंढक मग, जिसे सरप्राइज़ मग भी कहा जाता है, विनोद और आश्चर्य की भावना से निर्मित एक विशिष्ट पेय पात्र है। इसका रूप साधारण प्रतीत होता है, किंतु जैसे ही पेय धीरे-धीरे समाप्त होता है, उसके भीतर छिपा एक छोटा सिरेमिक जीव—अक्सर मेंढक—अचानक प्रकट होकर पीने वाले को चकित कर देता है। यही अप्रत्याशित अनुभव इसे मात्र उपयोगी वस्तु से आगे बढ़ाकर एक मनोरंजक परंपरा का हिस्सा बना देता है।
ऐसे मगों का इतिहास अठारहवीं शताब्दी के उत्तरार्ध, लगभग 1775 के आसपास तक जाता है, और उन्नीसवीं शताब्दी के अंत तक इनकी लोकप्रियता बनी रही। उस समय यह केवल हास्य या खिलवाड़ का साधन ही नहीं, बल्कि कुछ लोकमान्यताओं से भी जुड़ा हुआ था। कुछ परंपराओं में यह विश्वास प्रचलित था कि यदि बीयर में मेंढक या टोड दिखाई दे, तो उससे [[ज्वर]] दूर हो सकता है।<ref>{{Cite web |url=http://www2.epl.ca/InfoFile/EPLInfofileDetail.cfm?subject_detail=Mugs%2C%20Frog%2FToad%2FSurprise |title=Country Life, September 1983. |access-date=2016-02-06 |archive-date=2016-02-16 |archive-url=https://web.archive.org/web/20160216124057/http://www2.epl.ca/InfoFile/EPLInfofileDetail.cfm?subject_detail=Mugs%2C%20Frog%2FToad%2FSurprise |url-status=dead }}</ref> यद्यपि यह धारणा वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित नहीं है, फिर भी यह उन सांस्कृतिक विश्वासों और मानवीय कल्पनाओं की झलक अवश्य प्रस्तुत करती है, जिन्होंने ऐसे मगों को एक विशेष आकर्षण प्रदान किया।
===पहेली मग===
[[File:Fuddling cups.JPG|अंगूठा|बाएं|ईमानदार|फ़डलिंग कप। इन कपों में खोखले जोड़ होते हैं जिनकी मदद से इनके अंदर की सामग्री को बिना गिराए पिया जा सकता है।]]
पहेली मग एक ऐसा पेय पात्र है, जिसकी बनावट में चतुराई और कौतुक का अद्भुत समावेश होता है। इसे इस प्रकार निर्मित किया जाता है कि साधारण ढंग से इसका उपयोग करना संभव न हो, और पीने वाले को उसकी युक्ति समझने के लिए थोड़ी बुद्धि और धैर्य का सहारा लेना पड़े। उदाहरणतः, कुछ पज़ल मगों के किनारों पर अनेक सूक्ष्म छिद्र होते हैं, जिनके कारण सामान्य रूप से पेय ग्रहण करना असंभव हो जाता है। पहली दृष्टि में ऐसा प्रतीत होता है कि इन छिद्रों को हाथ से ढककर समस्या का समाधान किया जा सकता है, किंतु ऐसा करने पर पेय ऊपर की ओर स्थित अदृश्य छिद्रों से बाहर निकलने लगता है। इस पहेली का वास्तविक समाधान यह है कि किनारों के छिद्रों को उचित प्रकार से ढकते हुए, मग के खोखले हत्थे में बने एक गुप्त मार्ग से पेय ग्रहण किया जाए—यही इसकी चतुर संरचना का रहस्य है।<ref name=puzzle>{{cite news|url=http://ceramicstoday.com/articles/puzzle_mug.htm |title=In Their Cups – The Story of the English Puzzle Mug |author= डेलिया रॉबिन्सन |work=सेरामिक्स टुडे |url-status=unfit |archive-url=https://web.archive.org/web/20100103221715/http://ceramicstoday.com/articles/puzzle_mug.htm |archive-date= जनवरी 3, 2010 }}</ref>
[[File:Pythagorean cup sold in Crete.jpg|thumb|upright|एक पाइथागोरस कप]]
इसी श्रेणी में “फडलिंग कप्स” नामक एक और रोचक प्रकार मिलता है, जिसमें तीन अलग-अलग मग आपस में अपनी दीवारों और हत्थों के माध्यम से जुड़े होते हैं। इनकी भीतरी संरचना में ऐसे छिद्र बनाए जाते हैं, जो तरल के प्रवाह को नियंत्रित करते हैं। परिणामस्वरूप, इन मगों को एक निश्चित और सही क्रम में ही खाली किया जा सकता है; यदि क्रम का पालन न किया जाए, तो पेय अनपेक्षित रूप से बाहर निकल सकता है। इस प्रकार, यह केवल एक पेय पात्र नहीं, बल्कि एक मनोरंजक चुनौती बन जाता है।<ref name=puzzle/>
इसी प्रकार, “पाइथागोरस कप” एक विशिष्ट और शिक्षाप्रद पज़ल मग का उदाहरण है, जिसमें केंद्र में स्थित एक स्तंभ के भीतर एक सूक्ष्म [[दाबलंघिका|साइफन तंत्र]] छिपा होता है। जब तक कप में द्रव उस स्तंभ की ऊँचाई से नीचे रहता है, तब तक वह सुरक्षित रहता है; किंतु जैसे ही द्रव उस सीमा से ऊपर पहुँचता है, साइफन सक्रिय होकर संपूर्ण द्रव को कप के तले में बने छिद्र के माध्यम से बाहर निकाल देता है। यह संरचना केवल कौतुक ही नहीं उत्पन्न करती, बल्कि संयम और संतुलन का एक प्रतीकात्मक संदेश भी देती है—अधिकता अंततः हानि का कारण बन सकती है।
===तापमान बदलने वाले मग===
[[चित्र:Thermochromic_mug.webm|दाएँ|पाठ=Hot water is poured into a black mug, over about 20 seconds most of the mug changes colour to white, revealing black logo markings|अंगूठाकार|एक "जादुई मग" में गर्म पानी डालने और उसके बाद रंग में होने वाले परिवर्तन का वीडियो]]
ऊष्मा-परिवर्तनकारी, ऊष्मा-संवेदनशील अथवा तथाकथित “जादुई” मग ऐसे विशेष पेय पात्र होते हैं, जो तापमान में परिवर्तन के साथ अपना रूप और दृश्य स्वरूप बदल लेते हैं। यह अद्भुत परिवर्तन थर्मोक्रोमिज़्म नामक गुण के कारण संभव होता है, जिसमें ताप के प्रभाव से रंग अथवा चित्र क्रमशः प्रकट या लुप्त होने लगते हैं। जब इन मगों में गर्म पेय डाला जाता है, तो उनकी सतह पर छिपे हुए चित्र, संदेश या रंग धीरे-धीरे उभर आते हैं, मानो कोई रहस्य अचानक सजीव हो उठा हो।
इन मगों की यही विशेषता उन्हें केवल उपयोगी वस्तु तक सीमित नहीं रखती, बल्कि एक आकर्षक अनुभव का माध्यम भी बना देती है। ठंडा होने पर उनका स्वरूप पुनः बदल जाता है, जिससे यह परिवर्तनशीलता एक निरंतर दृश्य कौतुक का आभास कराती है।
==गैर-पेय मग==
=== दाढ़ी बनाने के मग और स्कटल्स (पात्र) ===
[[File:ShavingMug1.jpg|अंगूठा |बाएं|वर्टिकल|शेविंग मग]]
दाढ़ी बनाने के मग और स्कटल्स (पात्र) का विकास उन्नीसवीं शताब्दी के आसपास हुआ, और शेविंग मग का पहला पेटेंट सन् 1867 में दर्ज किया गया।<ref name=smug>पी. ब्रूक्स और जे. मैकग्राडी द्वारा "शेविंग कप में सुधार"" {{US patent|66788}} जुलाई 1867 में प्रकाशित हुआ था।</ref> उस समय अधिकांश घरों में गर्म जल की सहज उपलब्धता नहीं होती थी, इसलिए दाढ़ी बनाने के लिए आवश्यक गरम झाग तैयार करने हेतु विशेष प्रकार के पात्रों की आवश्यकता महसूस हुई। इसी आवश्यकता से स्कटल और शेविंग मग का प्रचलन आरंभ हुआ, जिन्होंने उस दौर की दैनिक दिनचर्या में एक व्यावहारिक समाधान प्रदान किया।
पारंपरिक शेविंग स्कटल का रूप किसी चायदानी से मिलता-जुलता होता है, जिसमें एक चौड़ी टोंटी होती है, जिसके माध्यम से उसमें गरम जल डाला जाता है। यही विशेषता इसे शेविंग मग से अलग करती है, क्योंकि शेविंग मग में सामान्यतः टोंटी नहीं होती। दोनों ही प्रकार के इन पात्रों में प्रायः पकड़ने के लिए हत्था होता है, यद्यपि कुछ रूप ऐसे भी मिलते हैं जिनमें यह नहीं होता। शेविंग मग का बाह्य स्वरूप प्रायः साधारण मग जैसा ही होता है, किंतु कई बार इसमें ब्रश रखने के लिए विशेष रूप से निर्मित स्थान भी होता है, जिससे ब्रश झाग में पूरी तरह डूबने से बचा रहता है और उपयोग अधिक सुविधाजनक बनता है।
आधुनिक समय में शेविंग स्कटल के रूप अपेक्षाकृत कम देखने को मिलते हैं और इनका निर्माण सीमित मात्रा में ही होता है। प्रायः इन्हें छोटे स्तर पर कार्य करने वाले स्वतंत्र [[कुंभकारी|कुम्हारों द्वारा]] पारंपरिक शिल्पकला के रूप में तैयार किया जाता है,<ref name=sara>{{cite web|url=http://www.sarabonnymanpottery.com/moss_scuttle.htm|title=Moss Scuttle|website=Sarabonnymanpottery.com|access-date= नवंबर 16, 2012|url-status=dead|archive-url=https://web.archive.org/web/20080509085958/http://www.sarabonnymanpottery.com/moss_scuttle.htm|archive-date= मई 9, 2008}}</ref> जिससे ये न केवल उपयोगी वस्तु बने रहते हैं, बल्कि एक सांस्कृतिक और हस्तशिल्पीय धरोहर का रूप भी धारण कर लेते हैं।
[[चित्र:ShavingMug2.png|अंगूठाकार|शेविंग स्कटल, 1867 का पेटेंट।<ref name=smug/>]]
स्कटल या शेविंग मग की संरचना उपयोगिता और सूक्ष्म कारीगरी का संतुलित उदाहरण प्रस्तुत करती है। इसके ऊपरी भाग में सामान्यतः साबुन रखने के लिए एक विशेष आधार या स्थान निर्मित होता है, जिसे इस प्रकार रूपांकित किया जाता है कि साबुन स्थिर बना रहे और झाग तैयार करने की प्रक्रिया सुगम हो सके। पारंपरिक रूप से इनका उपयोग कठोर शेविंग साबुन के साथ किया जाता था, जिसके कारण निचले भाग में जल निकासी के लिए सूक्ष्म छिद्र बनाए जाते थे, ताकि अतिरिक्त जल बाहर निकल सके और साबुन अत्यधिक गीला न हो।
समय के साथ इनके स्वरूप में परिवर्तन आया और बाद के स्कटल तथा मगों में ये छिद्र प्रायः नहीं पाए जाते, जिससे उनका उपयोग क्रीम अथवा नरम साबुन के साथ भी सहजता से किया जा सके। इसके अतिरिक्त, कुछ स्कटल और मगों के निचले भाग में संकेंद्रित वृत्ताकार रेखाएँ उकेरी जाती हैं, जो थोड़ी मात्रा में जल को रोके रखती हैं और झाग बनाने की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी तथा संतुलित बनाती हैं।<ref name=sara/>
उपयोग के दौरान शेविंग स्कटल की रचना अपनी पूरी उपयोगिता के साथ सामने आती है। इसमें शेविंग ब्रश को चौड़ी टोंटी वाले भाग में डुबोया जाता है, जहाँ वह जल में भीगकर पर्याप्त रूप से गरम हो जाता है। इसके बाद साबुन को ऊपरी भाग में बने विशेष आधार पर रखा जाता है। आवश्यकता होने पर ब्रश को साबुन पर घुमाया जाता है, जिससे धीरे-धीरे घना और मुलायम झाग तैयार हो जाता है, जबकि अतिरिक्त जल पुनः नीचे की ओर प्रवाहित हो जाता है।
इस सुविचारित व्यवस्था के कारण जल और साबुन—दोनों का अपव्यय कम होता है, और साथ ही आवश्यक ऊष्मा भी लंबे समय तक बनी रहती है। परिणामस्वरूप, शेविंग की प्रक्रिया अधिक आरामदायक, नियंत्रित और निरंतर बनी रहती है, जो उस युग की व्यावहारिक बुद्धिमत्ता और शिल्प कौशल का सुंदर उदाहरण प्रस्तुत करती है।
== समग्र डिजाइन और कार्य ==
मग के अधिकांश डिजाइन थर्मल इन्सुलेशन के उद्देश्य से हैं: एक मग की मोटी दीवार, चाय के प्याले की पतली दीवारों की तुलना में, पेट को ठंडा होने या जल्दी गर्म होने से बचाने के लिए इसे इंसुलेट करती हैं। मग का तेल अक्सर सपाट नहीं होता है, लेकिन अवतल होता है या उस सतह के साथ थर्मल संपर्क को कम करने के लिए एक अतिरिक्त रिम होता है जिस पर मग रखा जाता है। ये विशेषताएं अक्सर सतह पर एक विशिष्ट गोलाकार दाग छोड़ती हैं। अंत में, एक मग हैंडल आपके हाथ को मग के गर्म पक्षों से दूर रखता है। हैंडल का छोटा क्रॉस सेक्शन तरल और हाथ के बीच गर्मी के प्रभाव को कम करता है। थर्मल इन्सुलेशन के इसी कारण से, मग अक्सर कम [[थर्मल चालकता]], जैसे [[मिट्टी के बर्तन]], [[बोन चाइना]], [[चीनी मिट्टी के बर्तन]], या कांच के साथ सामग्री से बने होते हैं।
== सजावट ==
[[File:I got smashed in Grafenwöhr - Germany.jpg|left|upright|thumb|टूटा हुआ मग]]
मग, अपनी सर्वव्यापी उपस्थिति के कारण, केवल एक उपयोगी पेय पात्र तक सीमित नहीं रहा, बल्कि समय के साथ वह कला और अभिव्यक्ति का एक सशक्त माध्यम भी बन गया है। अनेक अवसरों पर इसका उपयोग विज्ञापन वस्तु के रूप में किया जाता है, जहाँ साधारण-सा दिखने वाला मग किसी विचार, संदेश या पहचान का वाहक बन जाता है। कुछ मग तो ऐसे भी होते हैं, जिन्हें पीने के लिए नहीं, बल्कि सजावट के रूप में अधिक महत्व दिया जाता है। प्राचीन काल से ही मगों पर नक्काशी और अलंकरण की परंपरा रही है, और कभी-कभी इन्हें विशिष्ट आकर्षण देने के लिए असामान्य आकृतियों में भी ढाला जाता रहा है।
आधुनिक समय में मगों की सजावट की सबसे लोकप्रिय विधि उन पर छपाई करना है, जिसमें तकनीक और सौंदर्य का सुंदर समन्वय दिखाई देता है। इस प्रक्रिया में सिरेमिक चूर्ण को चयनित रंगों और एक लचीले माध्यम के साथ मिलाकर एक विशेष मिश्रण तैयार किया जाता है। इसके बाद इस मिश्रण को जिलेटिन-लेपित कागज़ पर पारंपरिक [[आवरण मुद्रण|जाल-छपाई विधि]] के माध्यम से अंकित किया जाता है, जिसमें एक महीन बुने हुए जाल को फ्रेम पर कसकर लगाया जाता है और इच्छित आकृति के अनुसार एक छाप तैयार की जाती है। यह विधि सतह पर एक पतली और समान परत बनाने में सक्षम होती है।
यदि अत्यधिक चिकनाई या एकरूपता आवश्यक न हो, तो इसी मिश्रण को सीधे ब्रश की सहायता से भी मग की सतह पर लगाया जा सकता है, जिससे हस्तनिर्मित कलात्मकता का स्पर्श मिलता है। इसके अतिरिक्त, एक और अधिक जटिल तकनीक में कागज़ को प्रकाश-संवेदनशील परत से ढककर उस पर छवि अंकित की जाती है, और फिर पराबैंगनी प्रकाश के माध्यम से उस परत को स्थिर किया जाता है।<ref name=print>{{cite web|title=Printing Ceramics|url=http://www.ceramicstoday.com/articles/090798.htm|publisher=सिरेमिक्स टुडे|access-date=2009-08-30|archive-url=https://web.archive.org/web/20090601072522/http://www.ceramicstoday.com/articles/090798.htm|archive-date=2009-06-01|url-status=dead}}</ref>
सूखने के उपरांत “लिथो” कहलाने वाला यह मुद्रित कागज़ लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है, क्योंकि उसमें अंकित छवि स्थिर और संरक्षित रहती है। जब इस लिथो का उपयोग मग पर छवि स्थानांतरित करने के लिए किया जाता है, तो सबसे पहले उसे गरम जल में भिगोकर नरम किया जाता है। इस प्रक्रिया से मुद्रित छवि से युक्त जिलेटिन की पतली परत कागज़ से अलग हो जाती है, जिसे सावधानीपूर्वक मग की सतह पर चढ़ा दिया जाता है।
इसके बाद मग को उच्च ताप पर, लगभग 700 से 750 डिग्री सेल्सियस तक, भट्ठी में पकाया जाता है। इस ताप पर मग की चमकीली परत (ग्लेज़) की ऊपरी सतह हल्की-सी नरम हो जाती है, जिससे स्थानांतरित छवि उसमें स्थायी रूप से समाहित हो जाती है। परिणामस्वरूप, चित्र केवल सतह पर अंकित नहीं रहता, बल्कि मग का अभिन्न हिस्सा बन जाता है—जो दीर्घकाल तक अपनी स्पष्टता और सौंदर्य बनाए रखता है।<ref name=print/>
== भंडार==
एक लोकप्रिय तरीका कप का भंडार एक 'कप ट्री' पर होता है, एक लकड़ी या धातु की पोस्ट जो एक गोल आधार पर लगाई जाती है और उनके हैंडल से कप लटकने के लिए खूंटे से सुसज्जित होती है।<ref>जेन एंकोना, ब्रूस एंकोना "कप ट्री" अंक दिनांक: 4 दिसंबर 1990</ref> कप को लटकाने के लिए डिज़ाइन किए गए रैक भी हैं ताकि वे हाथ में हों। वे विशेष रूप से उच्च तरंगों वाली नावों पर उपयोगी होते हैं।
==गणित में ==
[[File:Mug and Torus morph.gif|thumb|upright|एक कॉफी मग और एक डोनट के बीच निरंतर विरूपण यह दर्शाता है कि वे समरूप (टोपोलॉजिकली समतुल्य) हैं।]]
[[संस्थितिविज्ञान]] में मग का उदाहरण अत्यंत प्रसिद्ध और सहज रूप से समझ में आने वाला माना जाता है। इस गणितीय दृष्टिकोण के अनुसार, दो वस्तुएँ तब समतुल्य या होमियोमॉर्फिक कही जाती हैं, जब उन्हें बिना काटे, जोड़े या छेद किए, केवल निरंतर विरूपण के माध्यम से एक-दूसरे में रूपांतरित किया जा सके।<ref>{{cite book|url=https://books.google.com/books?id=S3biKR21i-QC&pg=PA51|page=51|title=Principles of robot motion: theory, algorithms, and implementation|author=हॉवी एम. चोसेट|publisher=एमआईटी प्रेस|year=2005|isbn=0-262-03327-5}}</ref> इसी आधार पर, एक सामान्य मग और डोनट—जिसे [[टॉरस]] कहा जाता है—आपस में समतुल्य माने जाते हैं, क्योंकि मग के हत्थे को धीरे-धीरे फैलाकर और उसके मुख्य भाग को रूपांतरित करके उसे डोनट के आकार में बदला जा सकता है, बिना उसकी संरचना को तोड़े।
इसी सिद्धांत का एक और रोचक उदाहरण दो हत्थों वाला मग है, जो टोपोलॉजिकल रूप से द्वि-टोरस के समतुल्य होता है—एक ऐसी आकृति जो अंक “8” के समान प्रतीत होती है।<ref>{{cite web|url=http://plus.maths.org/issue10/features/topology/|title=In space, do all roads lead to home?|author=जन्ना लेविन|date= जनवरी 1, 2000|access-date= अगस्त 30, 2009|archive-date= जुलाई 31, 2009|archive-url=https://web.archive.org/web/20090731130453/http://plus.maths.org/issue10/features/topology/|url-status=live}}</ref> यहाँ प्रत्येक हत्था एक अतिरिक्त “छिद्र” का प्रतिनिधित्व करता है, जिससे उसकी संरचनात्मक जटिलता बढ़ जाती है।
इसके विपरीत, यदि किसी मग में हत्था न हो—अर्थात वह केवल एक साधारण [[कटोरा|कटोरे]] या बीकर के रूप में हो—तो वह टोपोलॉजी की दृष्टि से एक तश्तरी के समतुल्य माना जाता है। यह समानता विशेष रूप से तब स्पष्ट होती है, जब कच्ची मिट्टी से बने कटोरे को कुम्हार के चाक पर दबाकर चपटा किया जाता है, और वह धीरे-धीरे एक समतल तश्तरी का रूप धारण कर लेता है।<ref>{{cite book|url=https://books.google.com/books?id=0f0v4wLTDmwC&pg=PA250|page=250|title=Computer aided engineering design|author=बीरेंद्र सहाय|publisher=स्प्रिंगर|year=2005|isbn=1-4020-2555-6}}</ref>
== गैलरी==
<gallery mode="packed">
File:Mug of tea, Smithfield Market, City of London.jpg|चाय के मग, यूके
File:Coffee at Dad's Diner (8786564351).jpg|एक विशिष्ट अमेरिकी डिनर मग
File:Enamel mug.jpg|एनामेल मग
File:Kitchenware Steel Mug Rezowan.JPG|स्टील मग
File:Lipton-mug-tea.jpg|चाय के लिए कांच का मग
File:Frog or Surprise mug.JPG|मेंढक वाला मग , टोड या सरप्राइज मग
File:Doughnut-shaped Coffee mug.jpg|डोनट के आकार का मग
File:Rosehage kopp cropped.jpg|मूमिन-थीम वाला मग
File:Entenbecher.jpg|बत्तख की आकृति वाला मग
File:Merchandising Coffee mug from band Dead Can Dance with 'DCD' logo - black.jpg|मर्चेंडाइजिंग के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला मग
File:Mug, traveller's (AM 1966.243-3).jpg|केस सहित फोल्डेबल मेटल यात्री मग
File:Dinermug.jpg|थंब|ऑल्ट=एक ठेठ अमेरिकी मग|अमेरिकी ठेठ मग
File:Wikipedia - filled with knowledge (beskuren).jpg|[[विकिपीडिया]] के लोगो वाला एक मग
</gallery>
==इन्हें भी देखें==
*[[कप]]
== सन्दर्भ ==
{{Reflist}}
== ग्रन्थसूची ==
* {{cite book | last=क्रोननफेल्ड | first=डी. | title=Plastic Glasses and Church Fathers: Semantic Extension From the Ethnoscience Tradition | publisher=ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस | series=ऑक्सफोर्ड स्टडीज इन एंथ्रोपोलॉजिकल लिंग्विस्टिक्स। | year=1996 | isbn=978-0-19-535749-3 | url=https://books.google.com/books?id=0iuGtpfpTh4C&pg=PA6 | access-date=2024-10-29}}
* {{cite journal | last=विर्ज़बिका | first=अन्ना | title=Cups and mugs: Lexicography and conceptual analysis | journal=ऑस्ट्रेलियाई जर्नल ऑफ लिंग्विस्टिक्स| publisher=इन्फॉर्मा यूके लिमिटेड | volume=4 | issue=2 | year=1984 | issn=0726-8602 | doi=10.1080/07268608408599326 | pages=205–255 | url=https://www.researchgate.net/publication/232938621}}
==बाहरी कड़ियाँ==
*{{commons category-inline}}
[[श्रेणी:पीने के उपकरण]]
[[श्रेणी:चाय]]
[[श्रेणी:गर्म पेय]]
hoh8j8wxezhgkbvnd8jfjw6usdsawqx
6547799
6547795
2026-05-02T15:11:09Z
चाहर धर्मेंद्र
703114
/* भंडार */
6547799
wikitext
text/x-wiki
{{db-badtrans}}
[[चित्र:Mug_of_Tea.JPG|upright=1.35|अंगूठाकार|दुध वाली चाय का एक मग]]
मग एक प्रकार का [[कप]] होता है,{{sfn|Kronenfeld|1996|p=6}} जिसे विशेष रूप से [[कॉफी]], [[हॉट चॉकलेट|गरम चॉकलेट]] या [[चाय]] जैसे गर्म पेय पदार्थों के सेवन के लिए उपयोग किया जाता है। इसकी सबसे प्रमुख विशेषता इसका हैंडल होता है, जो इसे पकड़ने में सुविधा प्रदान करता है, विशेषकर तब जब पेय गरम हो। आकार की दृष्टि से, मग सामान्य कपों—जैसे चाय या कॉफी के पारंपरिक कप—की तुलना में अधिक [[तरल]] धारण करने में सक्षम होता है।
आमतौर पर एक मग की क्षमता लगभग 250 से 350 मिलीलीटर के बीच होती है,<ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=IZRDIcz6uEQC&q=usually+mug+holds+12+fluid+ounces|title=The Boat Galley Cookbook: 800 Everyday Recipes and Essential Tips for Cooking Aboard : 800 Everyday Recipes and Essential Tips for Cooking Aboard: 800 Everyday Recipes and Essential Tips for Cooking Aboard|last1=शियरलॉक|first1=कैरोलिन|last2=आयरन्स|first2=जेन|date=2012-09-14|publisher=मैकग्रा हिल प्रोफेशनल|isbn=9780071782364|access-date=2021-03-12|archive-date=2024-04-25|archive-url=https://web.archive.org/web/20240425165047/https://books.google.com/books?id=IZRDIcz6uEQC&q=usually+mug+holds+12+fluid+ounces|url-status=live}}</ref> जो इसे दैनिक उपयोग के लिए अत्यंत व्यावहारिक बनाती है। यदि आकार इससे भी बड़ा हो, तो ऐसे बर्तन को टैंकर्ड कहा जाता है। इस प्रकार, मग केवल एक साधारण बर्तन नहीं, बल्कि दैनिक जीवन की सहजता और आराम का एक अभिन्न हिस्सा है।
मग का आकार प्रायः सरल और उपयोगितावादी होता है—यह या तो सीधी, बेलनाकार रेखाओं वाला होता है अथवा हल्का घुमाव लिए हुए रूप में भी निर्मित किया जाता है। यद्यपि इसके आकार में विविधता संभव है, फिर भी इसकी मूल पहचान एक सुविधाजनक हैंडल से जुड़ी होती है, जो इसे पकड़ने में सहजता प्रदान करता है; इसी विशेषता के अभाव में इसे बीकर कहा जाता है। सामान्यतः मग के साथ तश्तरी नहीं होती, जो इसे अन्य पारंपरिक कपों से भिन्न बनाती है।<ref>{{cite encyclopedia |title=mug, n.1 |url=http://www.oed.com/view/Entry/123325 |encyclopedia=ओईडी ऑनलाइन |date=दिसंबर 2014 |publisher=ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस |quote=A drinking vessel, freq. cylindrical (and now usually with a handle), generally used without a saucer. |access-date=2015-03-06 |archive-date=2024-04-25 |archive-url=https://web.archive.org/web/20240425165036/https://www.oed.com/dictionary/mug_n1 |url-status=live }}</ref>
मग को [[पेय]] पदार्थों के सेवन का अपेक्षाकृत अनौपचारिक माध्यम माना जाता है, इसलिए इसका प्रयोग प्रायः घरेलू या सहज वातावरण में अधिक होता है, जबकि औपचारिक भोजन कक्षों में चाय या कॉफी के पारंपरिक कपों को प्राथमिकता दी जाती है। इसके अतिरिक्त, मग का एक विशेष रूप [[हजामत|शेविंग]] मग भी होता है, जिसका उपयोग गीली दाढ़ी बनाने की प्रक्रिया में सहायक के रूप में किया जाता है। इस प्रकार, मग अपनी सरलता और बहुउपयोगिता के कारण दैनिक जीवन में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है।
मग का विकास समय के साथ उसकी उपयोगिता और निर्माण सामग्री के अनुसार निरंतर परिवर्तित होता रहा है। प्राचीन काल में मग प्रायः [[लकड़ी]] को तराशकर या [[कुंभकारी|मिट्टी]] से बनाए जाते थे, जो उस समय उपलब्ध संसाधनों और शिल्पकला का प्रतिबिंब थे। आधुनिक युग में इनका निर्माण अधिक परिष्कृत सामग्रियों—जैसे बोन चाइना, अर्दनवेयर, [[पॉर्सिलेन]] और स्टोनवेयर—से किया जाने लगा है, जो न केवल आकर्षक होते हैं, बल्कि टिकाऊ भी होते हैं।
आकार और प्रयोजन के अनुसार कुछ बड़े मग, जो प्रायः धातु या मिट्टी से निर्मित होते हैं और विशेष रूप से पेय पदार्थ जैसे [[बियर]] के लिए उपयोग किए जाते हैं, टैंकर्ड कहलाते हैं। इसके अतिरिक्त, कुछ मग सुदृढ़ [[कांच]]—जैसे पाइरेक्स—से भी बनाए जाते हैं, जो ताप और झटकों के प्रति अधिक सहनशील होते हैं। हल्के वजन और टूट-फूट से बचाव के लिए [[मीनाकारी|एनामेल्ड]] धातु, [[प्लास्टिक]] या [[इस्पात]] जैसी सामग्रियों का उपयोग भी किया जाता है, विशेषकर बाहरी गतिविधियों जैसे [[कैंपिंग|शिविर-यात्रा]] में।
यात्रा के लिए विशेष रूप से बनाए गए ट्रैवल मग में ऊष्मा बनाए रखने की क्षमता होती है और इनमें छलकने से बचाने के लिए ढक्कन भी लगाया जाता है। सजावट की दृष्टि से, मग पर [[लोगो]], चित्र या कलात्मक आकृतियाँ अंकित करने के लिए [[आवरण मुद्रण|सिल्क-स्क्रीन मुद्रण]] या डिकल तकनीक का प्रयोग किया जाता है, जिन्हें पकाकर स्थायी रूप प्रदान किया जाता है। इस प्रकार, मग केवल एक साधारण बर्तन नहीं, बल्कि उपयोगिता, सौंदर्य और तकनीकी विकास का संगम है।
==सामान्य बनावट और कार्य==
[[File:Mug vs cup.jpg|thumb|एक मग और एक कप अगल-बगल रखे हुए हैं]]
मग के बनावट का एक प्रमुख उद्देश्य ऊष्मीय इन्सुलेशन सुनिश्चित करना होता है, जिससे उसमें रखा पेय अपेक्षाकृत अधिक समय तक अपने तापमान को बनाए रख सके। चाय के पारंपरिक कपों की पतली दीवारों की तुलना में मग की दीवारें मोटी होती हैं, जो ऊष्मा के आदान-प्रदान को धीमा करती हैं और पेय को जल्दी ठंडा या अत्यधिक गरम होने से बचाती हैं।
इसके अतिरिक्त, मग का आधार प्रायः पूर्णतः समतल नहीं होता, बल्कि हल्का अवतल या किनारीयुक्त बनाया जाता है। यह संरचना उस सतह के साथ प्रत्यक्ष संपर्क को कम करती है, जिस पर मग रखा जाता है, जिससे ऊष्मा का अपव्यय घटता है। इसी कारण अक्सर सतह पर एक विशिष्ट गोलाकार चिह्न भी दिखाई देता है, जो इस संरचनात्मक विशेषता का परिणाम होता है।
मग का हैंडल भी इसके ऊष्मीय गुणों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह हाथ को गरम सतह से दूर रखता है और उसके अपेक्षाकृत छोटे अनुप्रस्थ क्षेत्र के कारण ऊष्मा के प्रवाह को सीमित करता है, जिससे उपयोगकर्ता को पकड़ने में सुविधा और सुरक्षा दोनों मिलती हैं। इसी कारण, मग सामान्यतः ऐसी सामग्रियों—जैसे मिट्टी के बर्तन, बोन चाइना, [[पॉर्सिलेन]] या काँच—से बनाए जाते हैं,<ref>{{cite book|url=https://books.google.com/books?id=fJw0K1ZGY1kC&pg=PA98|page=98|title=The really useful science book: a framework of knowledge for primary teachers|author=स्टीव फैरो|publisher= रूटलेज |year=1999|isbn=0-7507-0983-9}}</ref><ref>{{cite book|url=https://books.google.com/books?id=esDW3xTKoLIC&pg=PA27|page=27|title=The handbook of evolutionary psychology|author=डेविड एम. बस|publisher=जॉन विली एंड संस.|year=2005|isbn=0-471-26403-2}}</ref> जिनकी [[ऊष्मा चालकता|ऊष्मीय चालकता]] कम होती है और जो ताप को नियंत्रित रखने में सहायक होती हैं।
===कपों की तुलना में अंतर===
मग और पारंपरिक कप के बीच का अंतर केवल आकार या बनावट तक सीमित नहीं है, बल्कि यह विभिन्न भाषाओं और संस्कृतियों में भी स्पष्ट रूप से परिलक्षित होता है। फ्रेंच, इतालवी, पोलिश, रूसी, जर्मन और अंग्रेज़ी जैसी अनेक भाषाओं में इन दोनों के लिए अलग-अलग शब्द प्रचलित हैं, जो इनके भिन्न उपयोग और सांस्कृतिक संदर्भों को दर्शाते हैं।
भाषाविद् अन्ना विर्ज़बिका के अनुसार, यह भिन्नता इनके कार्यात्मक अंतर से उत्पन्न होती है। पारंपरिक कप सामान्यतः औपचारिक परिवेश में मेज पर बैठकर पेय का आनंद लेने के लिए बनाए जाते हैं, जहाँ साज-सज्जा और शिष्टाचार का विशेष महत्व होता है। इसके विपरीत, मग अधिक अनौपचारिक और बहुउपयोगी होता है, जिसे किसी भी स्थान पर सहजता से उपयोग में लाया जा सकता है।{{sfn|Wierzbicka|1984|pp=214–216}}
==इतिहास==
===शुरुआती मग===
[[File:CMOC Treasures of Ancient China exhibit - large grey mug.jpg|upright|thumb|left|चीन के [[झेंगझोऊ]] में [[नवपाषाण युग|नवपाषाण काल]] के उत्तरार्ध ( लगभग 2500-2000 ईसा पूर्व) में कुम्हार के चाक पर बनाया गया एक मग।]]
मग का प्रारंभिक इतिहास यह दर्शाता है कि इसका उपयोग आज की अपेक्षा भिन्न उद्देश्यों के लिए किया जाता था। वर्तमान में जहाँ मग प्रायः गर्म पेय, दूध या शीतल पेयों से जुड़ा हुआ है, वहीं आरंभिक काल में इसका प्रमुख उपयोग [[बियर]] अथवा अन्य मादक पेयों के सेवन के लिए होता था। उस समय के मग आकार में भी अधिक बड़े होते थे, जो उनके उपयोग और सामाजिक परिवेश के अनुरूप थे। लकड़ी से बने प्रारंभिक मग संभवतः प्राचीन काष्ठ-शिल्प के आरंभिक दौर से ही प्रचलन में थे, किंतु समय के प्रभाव के कारण ऐसे अधिकांश नमूने आज सुरक्षित नहीं रह पाए हैं।<ref name="columbia">{{cite web|url=http://www.encyclopedia.com/doc/1E1-porcelai.html|title=Porcelain|publisher=कोलंबिया विश्वकोश छठा संस्करण. 2008|access-date=2008-06-27|archive-date=2008-08-21|archive-url=https://web.archive.org/web/20080821093621/http://www.encyclopedia.com/doc/1E1-porcelai.html|url-status=live}}</ref><ref name="G. J. Monson-Fitzjohn, B.Sc., F.R.Hist.S">{{cite book|url=http://www.nicks.com.au/index.aspx?link_id=76.623|title=Drinking Vessels of Bygone Days|author=जी. जे. मोनसन-फिट्ज़जॉन, बी.एससी., एफ.आर.एच.आई.एस.|url-status=dead|archive-url=https://web.archive.org/web/20100719162453/http://www.nicks.com.au/Index.aspx?link_id=76.623|archive-date=2010-07-19}}</ref>
मिट्टी के बर्तनों के विकास ने मग के निर्माण को एक नई दिशा दी। प्रारंभ में इन्हें [[कुंभकारी|हाथ से आकार]] दिया जाता था, परंतु कुम्हार का चाक के आविष्कार (लगभग 6500 से 3000 ईसा पूर्व के बीच) ने इस प्रक्रिया को अधिक सरल और परिष्कृत बना दिया। इस तकनीक के कारण बर्तनों में हैंडल जोड़ना भी सहज हो गया, जिससे आधुनिक स्वरूप के मग का विकास संभव हुआ। प्राचीन ग्रीस में 4000 से 5000 ईसा पूर्व के काल का एक सुसज्जित मिट्टी का मग प्राप्त हुआ है,<ref>{{cite web|url=http://www.ceramicstudies.me.uk/histx105.html|title=Ceramic Web Page Tutorials|website=Ceramicstudies.me.uk|access-date= नवंबर 16, 2012|archive-date= जून 5, 2023|archive-url=https://web.archive.org/web/20230605205500/http://www.ceramicstudies.me.uk/histx105.html|url-status=live}}</ref> जो उस युग की कलात्मकता और शिल्पकौशल का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करता है।
[[File:AnasaziMugs.jpeg|thumb|upright=1.1|[[कॉलोराडो|दक्षिण-पश्चिमी कोलोराडो]] से प्राप्त [[पुएब्लो कों के पूर्वज|पुएब्लो]] (अनासाज़ी) पूर्वजों के मग , जो 1000 से 1280 ईस्वी के बीच बनाए गए थे। इनके हैंडल पर की गई नक्काशी का अर्थ अभी तक अज्ञात है, लेकिन संभवतः इसका कोई कार्यात्मक महत्व नहीं है।]]
मग के विकासक्रम में प्रारंभिक मिट्टी के मगों की एक प्रमुख कमी उनकी अत्यधिक मोटी दीवारें थीं, जो पीने के लिए सुविधाजनक नहीं मानी जाती थीं। जैसे-जैसे [[धातुकार्य|धातु-कर्म]] की तकनीकों में प्रगति हुई, बर्तनों की दीवारों को अधिक पतला और सुडौल बनाया जाने लगा। लगभग 2000 ईसा पूर्व से [[कांसा|कांस्य]],<ref>{{cite web|url=http://www.thomaslayton.org.uk/joomla/index.php?option=com_content&task=view&id=26&Itemid=41|archive-url=https://web.archive.org/web/20201205022717/http://www.thomaslayton.org.uk/joomla/index.php?option=com_content&task=view&id=26&Itemid=41|url-status=dead|archive-date= दिसंबर 5, 2020|title=The Collection – Archaeology|website=Thomaslayton.org.uk|access-date= नवंबर 16, 2012}}</ref> [[चाँदी]], [[सोना]]<ref>{{cite web|url=http://www.visual-arts-cork.com/ancient-art/mycenean.htm|title=Mycenean Art|website=Visual-arts-cork.com|access-date=नवंबर 16, 2012|archive-date= मई 11, 2023|archive-url=https://web.archive.org/web/20230511213611/http://www.visual-arts-cork.com/ancient-art/mycenean.htm|url-status=live}}</ref> और यहाँ तक कि [[सीसा]]<ref>{{cite web|url=http://www.nicks.com.au/index.aspx?link_id=76.633|title=Lead drinking cup|website=Nicks.com.au|access-date=नवंबर 16, 2012|url-status=dead|archive-url=https://web.archive.org/web/20120927082915/http://www.nicks.com.au/index.aspx?link_id=76.633|archive-date= सितंबर 27, 2012}}</ref> जैसी धातुओं से भी मग निर्मित होने लगे। यद्यपि ये देखने में आकर्षक और टिकाऊ थे, फिर भी गर्म पेयों के साथ इनका उपयोग सहज नहीं था, क्योंकि धातु ऊष्मा का तीव्र संचार करती है।
मग के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ तब आया, जब [[चीनी जनवादी गणराज्य|चीन]] में लगभग 600 ईस्वी के आसपास [[पॉर्सिलेन|चीनी मिट्टी के बर्तनों]] का विकास हुआ। इस नवाचार ने पतली दीवारों वाले ऐसे मगों का निर्माण संभव बनाया, जो न केवल ठंडे, बल्कि गर्म पेयों के लिए भी उपयुक्त थे। यह परंपरा आज भी जारी है और आधुनिक मगों के स्वरूप में उसी विकास की छाप स्पष्ट दिखाई देती है।<ref name="columbia"/><ref name="G. J. Monson-Fitzjohn, B.Sc., F.R.Hist.S"/>
भाषाई दृष्टि से, “मग” शब्द का वर्तमान अर्थ में सबसे प्रारंभिक ज्ञात प्रयोग 1664 ईस्वी में मिलता है,<ref>{{cite web |title=Mug |url=https://www.merriam-webster.com/dictionary/mug#word-history |website=merriam-webster.com |publisher=मेरियम-वेबस्टर |access-date=30 जून 2025}}</ref> जो इस बर्तन के सांस्कृतिक और व्यावहारिक विकास की ऐतिहासिक यात्रा को भी रेखांकित करता है।
===विक्टर कॉफी मग===
[[द्वितीय विश्व युद्ध]] के दौरान [[अमेरिकी नौसेना|संयुक्त राज्य अमेरिका की नौसेना]] ने ऐसे कॉफी मग के निर्माण हेतु अमेरिकी कंपनियों से प्रस्ताव आमंत्रित किए, जो गिरने पर भी सुरक्षित रहें और जहाज़ों पर उपयोग के दौरान अत्यधिक टिकाऊ सिद्ध हों। कई प्रकार के डिज़ाइन प्रस्तुत किए गए, किंतु अंततः चयन [[विद्युतरोधी|उच्च-वोल्टेज पोर्सिलेन इन्सुलेटर]] निर्माता विक्टर इंसुलेटर द्वारा निर्मित एक विशेष डिज़ाइन का हुआ। उस समय युद्धकालीन परिस्थितियों में इन्सुलेटर की माँग घट गई थी, इसलिए कंपनी ने अपने कार्यों को बनाए रखने के लिए स्वच्छतापूर्ण बर्तनों के निर्माण की दिशा में कदम बढ़ाया।<ref name="Upstate">{{Cite web|url=https://exploringupstate.com/how-victor-changed-the-coffee-mug/|title=How the Victor Coffee Mug Changed the Way We Drink Coffee|last=क्लेमेंस|first=क्रिस|date= मार्च 6, 2016|website=एक्सप्लोरिंग अपस्टेट|language=en-US}}</ref>
विक्टर ने नौसेना के लिए एक विशिष्ट मग विकसित किया, जो बिना हैंडल के, सफेद चमकदार सतह वाला और मोटी दीवारों से युक्त था। यह डिज़ाइन अपनी मजबूती और उपयोगिता के कारण सैन्य बलों द्वारा अत्यंत सराहा गया। चूँकि इन मगों के निर्माण में वही पोर्सिलेन सामग्री प्रयुक्त हुई, जिसका उपयोग कंपनी अपने इन्सुलेटर बनाने में करती थी, इसलिए इनमें उत्कृष्ट ऊष्मा-रोधक गुण विद्यमान थे। इस प्रकार, युद्धकालीन आवश्यकताओं ने न केवल एक नए प्रकार के मग को जन्म दिया, बल्कि उसके व्यावहारिक और तकनीकी गुणों को भी परिष्कृत किया।<ref name="Upstate"/><ref name= cjow>{{cite web |last1=गिश|first1=एल्टन |title=Porcelain Insulator News |url=https://www.cjow.com/archive/article.php?month=2&a=02Porcelain%20Insulator%20News.htm&year=2004 |website=cjow.com |publisher=द वायर के क्राउन ज्वेल्स |date= फरवरी 2004}}</ref>
द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति के पश्चात विक्टर इंसुलेटर ने अपने उत्पादन को आंशिक रूप से सैनिटरीवेयर उत्पादों की ओर बनाए रखने का निर्णय लिया और अपने प्रसिद्ध मग का एक अधिक व्यावसायिक रूप से अनुकूल संस्करण प्रस्तुत किया। इस नए रूप में मग में सुविधाजनक हैंडल जोड़ा गया, उसका शरीर अपेक्षाकृत हल्का और पतला बनाया गया, तथा विभिन्न रंगों के विकल्प भी उपलब्ध कराए गए, जिससे यह आम उपभोक्ताओं के लिए अधिक आकर्षक बन गया।
इस सफल डिज़ाइन की लोकप्रियता इतनी बढ़ी कि इसकी नकल संयुक्त राज्य अमेरिका के भीतर ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अनेक निर्माताओं द्वारा बड़े पैमाने पर की जाने लगी।<ref name="Upstate"/> किंतु समय के साथ सस्ते और बड़े पैमाने पर उत्पादित [[चीनी जनवादी गणराज्य|चीनी]] निर्मित विकल्पों से कड़ी प्रतिस्पर्धा के कारण विक्टर को गंभीर आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा। परिणामस्वरूप, 1990 के दशक की शुरुआत में कंपनी को मग का उत्पादन बंद करना पड़ा।<ref name= cjow/>
आज, उत्पादन बंद होने के बाद भी विक्टर द्वारा निर्मित ये मग अपनी विशिष्ट गुणवत्ता और ऐतिहासिक महत्व के कारण संग्राहकों के बीच अत्यंत लोकप्रिय हो गए हैं।<ref>{{cite web |last1=डेलगाडो |first1=मिशेल |title=The Classic Diner Mug That's Disappearing |url=https://medium.com/@mdelgadia/the-classic-diner-mug-thats-disappearing-619c55935aa9 |website=medium.com |publisher= मीडियम |date= मई 24, 2017}}</ref> वे न केवल एक उपयोगी वस्तु के रूप में, बल्कि औद्योगिक इतिहास और डिज़ाइन विकास के प्रतीक के रूप में भी मूल्यवान माने जाते हैं।
==अन्य मग के प्रकार ==
===यात्रा मग===
[[File:travel mug.jpg|thumb|left|upright=.6|यात्रा मग]]
यात्रा मग का प्रचलन 1980 के दशक में बढ़ा, जब ऐसे बर्तनों की आवश्यकता महसूस हुई जो गर्म या ठंडे पेयों को सुरक्षित रूप से एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जा सकें। इन मगों का निर्माण इस प्रकार किया जाता है कि उनमें [[ऊष्मा रोधन|उत्कृष्ट ऊष्मीय इन्सुलेशन गुण]] हों, जिससे पेय लंबे समय तक अपने तापमान को बनाए रख सके। संरचना की दृष्टि से ये [[निर्वात फ्लास्क|वैक्यूम फ्लास्क]] के समान होते हैं—अर्थात् ये अच्छी तरह से इन्सुलेटेड और लगभग पूर्णतः बंद होते हैं, ताकि रिसाव या छलकाव की संभावना न्यूनतम रहे।<ref name=travel>मोरी कार्प "ट्रैवल मग" {{US patent|5249703}} जारी होने की तिथि: अक्टूबर 5, 1993</ref> फिर भी, इनके ढक्कन में एक छोटा छिद्र होता है, जिससे यात्रा के दौरान बिना खोले ही पेय का सेवन किया जा सके।
गर्म पेयों के ठंडा होने का प्रमुख कारण वाष्पीकरण होता है, इसलिए ट्रैवल मग में ढक्कन की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। यह वाष्प के बाहर निकलने को सीमित करता है और इस प्रकार पेय को अधिक समय तक गरम बनाए रखने में सहायक होता है, चाहे ढक्कन पतले प्लास्टिक का ही क्यों न हो।
इसके अतिरिक्त, कुछ मग ऐसे भी होते हैं जिनमें भीतरी और बाहरी दोहरी दीवारें होती हैं, परंतु उनके बीच वैक्यूम नहीं बनाया जाता। ऐसे बर्तनों को डबल वॉल मग कहा जाता है। इनमें भीतरी दीवार सामान्यतः स्टेनलेस स्टील की होती है, जबकि बाहरी परत स्टेनलेस स्टील, प्लास्टिक या अन्य सामग्रियों से निर्मित हो सकती है। यह संरचना भी कुछ हद तक ऊष्मा संरक्षण प्रदान करती है, यद्यपि वैक्यूम युक्त मग की तुलना में इसकी क्षमता अपेक्षाकृत कम होती है।
ड्राइविंग के दौरान उपयोग में आने वाला मग, जिसे प्रायः ऑटो मग या कम्यूटर मग कहा जाता है, केवल एक साधारण पात्र नहीं, बल्कि सुविधा, सुरक्षा और सूझबूझ का संतुलित रूप है। यह विशेष प्रकार का यात्रा मग इस प्रकार निर्मित होता है कि चलते वाहन में भी पेय का आनंद सहज और सुरक्षित बना रहे। इसके ऊपर लगा रिसाव-रोधी ढक्कन, जिसमें पीने के लिए एक छोटा सा छिद्र या नलिका होती है,<ref name="Jackson, Joe">{{cite web|author=जैक्सन, जो|title=Q: What's the Best Insulated Travel Mug? We tested five of the best. Here's how they stacked up.|date= दिसंबर 22, 2014|work=आउटसाइड|url=http://www.outsideonline.com/1786136/whats-best-insulated-travel-mug|access-date= दिसंबर 10, 2015|archive-date= दिसंबर 11, 2015|archive-url=https://web.archive.org/web/20151211031852/http://www.outsideonline.com/1786136/whats-best-insulated-travel-mug|url-status=live}}</ref> इस बात का ध्यान रखता है कि मार्ग की हलचल पेय को बाहर न छलकाए। साथ ही, इसका आधार प्रायः संकरा रखा जाता है, ताकि यह विभिन्न वाहनों में बने कप धारकों में दृढ़ता से स्थापित हो सके और अनचाही हलचल से बचा रहे।
ऐसे मग का मूल्यांकन केवल उसके रूप या आकार से नहीं, बल्कि उसके व्यावहारिक गुणों से किया जाता है। यह अपेक्षित है कि उसे एक हाथ से सरलता से खोला और बंद किया जा सके, जिससे चालक का ध्यान मार्ग से न भटके। उसमें भरण-सीमा का स्पष्ट संकेत हो, ताकि अधिक भराव के कारण होने वाले रिसाव से बचा जा सके। बिना हत्थे का स्वरूप इसे पकड़ने में अधिक सहज बनाता है, जिससे नियंत्रण बना रहता है। इसके अतिरिक्त, इसका विन्यास ऐसा होना चाहिए कि पेय ग्रहण करते समय चालक की दृष्टि मार्ग से विचलित न हो।<ref>{{cite news|work=कुक्स कंट्री|date= अक्टूबर 2011|title=Travel Mugs|url=http://www.cooksillustrated.com/equipment_reviews/1328-travel-mugs?extcode=MASCZ00L0&ref=search_results_1|access-date=2015-12-10|archive-date=2015-12-11|archive-url=https://web.archive.org/web/20151211023117/http://www.cooksillustrated.com/equipment_reviews/1328-travel-mugs?extcode=MASCZ00L0&ref=search_results_1|url-status=live}}</ref><ref name="Jackson, Joe"/><ref>{{cite news|work=अमेरिकाज़ टेस्ट किचन (सीज़न 8, एपिसोड 22)]]|title=Coffeehouse Treats: Equipment Corner/Gadget Guru: Commuter Coffee Mugs|date=2008}}</ref> अंततः, यह विभिन्न प्रकार के कप धारकों में स्थिरता से बैठ सके—यही इसकी उपयोगिता और विश्वसनीयता की वास्तविक कसौटी है।
===बियर मग===
[[File:Humpen.jpg|thumb|upright|एक सामान्य आधा लीटर का जर्मन बीयर मग]]
बीयर स्टाइन, परंपरा और शिल्पकला का एक विशिष्ट संगम, वास्तव में पारंपरिक बीयर मगों का वह रूप है जो प्रायः स्टोनवेयर मिट्टी से निर्मित होता है और ऐतिहासिक रूप से [[जर्मनी]] से जुड़ा हुआ माना जाता है। “स्टाइन” शब्द का अंग्रेज़ी में प्रचलन उन्नीसवीं शताब्दी के मध्य, लगभग 1855 के आसपास, [[जर्मन भाषा|जर्मन]] शब्द से रूपांतरित होकर हुआ;<ref name="mw">{{cite web|url=http://www.merriam-webster.com/dictionary/stein|title=Definition of STEIN|website=www.merriam-webster.com|date=5 सितम्बर 2023 }}</ref> किंतु रोचक तथ्य यह है कि जर्मनी में स्वयं इस शब्द का स्वतंत्र रूप से पेय पात्र के अर्थ में सामान्यतः उपयोग नहीं किया जाता। वहाँ इसके स्थान पर “क्रुग”, “हम्पेन” या “सीडेल” जैसे शब्द अधिक प्रचलित हैं, जो इन पात्रों की विविध आकृतियों और उपयोगों को अधिक सटीक रूप से व्यक्त करते हैं।
आधुनिक बीयर मग, जो इस परंपरा के उत्तराधिकारी माने जा सकते हैं, प्रायः आधा [[लीटर]] या एक लीटर की मानक धारिता में उपलब्ध होते हैं। इनके निर्माण में उपयोगिता और सौंदर्य का संतुलन स्पष्ट दिखाई देता है—मजबूत संरचना के साथ-साथ इनमें प्रायः धातु से निर्मित [[कब्ज़ा|कब्जेदार ढक्कन]] लगाए जाते हैं, जो स्वच्छता और संरक्षण दोनों की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण होते हैं। इसके अतिरिक्त, इन मगों की सतह पर उकेरे गए जर्मन [[राज्यचिह्न|प्रतीक-चिह्न]], ऐतिहासिक दृश्य या पारंपरिक कलात्मक आकृतियाँ इन्हें केवल पेय पात्र नहीं, बल्कि सांस्कृतिक विरासत के जीवंत प्रतीक के रूप में स्थापित करती हैं।
===टिकी मग===
[[File: Tiki7.jpg|अंगूठा|ईमानदार|टिकी मग]]
टिकी मग की उत्पत्ति बीसवीं शताब्दी के मध्य में उन उष्णकटिबंधीय वातावरण से प्रेरित भोजनालयों और विशेष पेय स्थलों में हुई, जहाँ वातावरण, सजावट और परोसे जाने वाले पेय—तीनों में एक विशिष्ट विदेशी आकर्षण रचा-बसा रहता था। “टिकी मग” वस्तुतः एक व्यापक और सामान्य संज्ञा है, जिसका उपयोग उन मूर्तिकला-सदृश पेय पात्रों के लिए किया जाता है, जिन पर [[मॅलानिशिया]], [[माइक्रोनीशिया]] अथवा [[पोलीनेशिया]] की सांस्कृतिक छवियों, प्रतीकों और आकृतियों का कलात्मक निरूपण किया गया होता है। समय के साथ इसका दायरा और भी विस्तृत हुआ है, और अब यह शब्द किसी भी ऐसे पात्र के लिए प्रयुक्त होने लगा है, जो उष्णकटिबंधीय परिवेश, समुद्री जीवन या सर्फिंग संस्कृति से संबंधित सौंदर्य-बोध को अभिव्यक्त करता हो।<ref>{{cite book|title=Tiki Mugs: Cult Artifacts of Polynesian Pop|author1=स्ट्रॉन्गमैन, जे |author2=वेस्टलैंड, होल्डन |publisher=कोरेरो बुक्स|year=2008|isbn=978-0-9553398-1-3}}</ref>
ये मग केवल उपयोग की वस्तु भर नहीं, बल्कि स्मृतियों और अनुभवों के संवाहक भी बन जाते हैं। प्रायः इन्हें स्मृति-चिह्न के रूप में बेचा जाता है, जिससे ये किसी स्थान, अनुभव या संस्कृति का प्रतीकात्मक प्रतिनिधित्व करने लगते हैं। यही कारण है कि अनेक लोग इन्हें संग्रहणीय वस्तुओं के रूप में संजोकर रखते हैं—जहाँ प्रत्येक टिकी मग अपने भीतर एक विशिष्ट कथा, सौंदर्य और सांस्कृतिक स्पर्श समेटे होता है।
===मनोरंजन मग===
व्हिसल मग, जिसे हबल-बबल के नाम से भी जाना जाता है, एक मनोरंजक और कौतुकपूर्ण पेय पात्र है, जो अपनी विशिष्ट बनावट के कारण साधारण मगों से अलग पहचान रखता है। इसकी संरचना में एक खोखला हत्था होता है, जिसे इस प्रकार निर्मित किया जाता है कि उसमें से हवा प्रवाहित करने पर सीटी जैसी ध्वनि उत्पन्न हो सके। यही विशेषता इसे केवल उपयोगी वस्तु न बनाकर एक खेल-भावना से जुड़ा अनुभव भी प्रदान करती है।
इस मग की ध्वनि उसकी अवस्था के अनुसार परिवर्तित होती है—जब यह खाली होता है, तब उससे एक सरल, एकल स्वर सुनाई देता है; किंतु जैसे ही इसमें द्रव भरा जाता है, ध्वनि का स्वरूप बदलकर अधिक मधुर, झंकारयुक्त और चहचहाहट जैसी जटिल ध्वनियों में परिवर्तित हो जाता है।<ref name=puzzle/>
===मेंढक मग===
मेंढक मग, जिसे सरप्राइज़ मग भी कहा जाता है, विनोद और आश्चर्य की भावना से निर्मित एक विशिष्ट पेय पात्र है। इसका रूप साधारण प्रतीत होता है, किंतु जैसे ही पेय धीरे-धीरे समाप्त होता है, उसके भीतर छिपा एक छोटा सिरेमिक जीव—अक्सर मेंढक—अचानक प्रकट होकर पीने वाले को चकित कर देता है। यही अप्रत्याशित अनुभव इसे मात्र उपयोगी वस्तु से आगे बढ़ाकर एक मनोरंजक परंपरा का हिस्सा बना देता है।
ऐसे मगों का इतिहास अठारहवीं शताब्दी के उत्तरार्ध, लगभग 1775 के आसपास तक जाता है, और उन्नीसवीं शताब्दी के अंत तक इनकी लोकप्रियता बनी रही। उस समय यह केवल हास्य या खिलवाड़ का साधन ही नहीं, बल्कि कुछ लोकमान्यताओं से भी जुड़ा हुआ था। कुछ परंपराओं में यह विश्वास प्रचलित था कि यदि बीयर में मेंढक या टोड दिखाई दे, तो उससे [[ज्वर]] दूर हो सकता है।<ref>{{Cite web |url=http://www2.epl.ca/InfoFile/EPLInfofileDetail.cfm?subject_detail=Mugs%2C%20Frog%2FToad%2FSurprise |title=Country Life, September 1983. |access-date=2016-02-06 |archive-date=2016-02-16 |archive-url=https://web.archive.org/web/20160216124057/http://www2.epl.ca/InfoFile/EPLInfofileDetail.cfm?subject_detail=Mugs%2C%20Frog%2FToad%2FSurprise |url-status=dead }}</ref> यद्यपि यह धारणा वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित नहीं है, फिर भी यह उन सांस्कृतिक विश्वासों और मानवीय कल्पनाओं की झलक अवश्य प्रस्तुत करती है, जिन्होंने ऐसे मगों को एक विशेष आकर्षण प्रदान किया।
===पहेली मग===
[[File:Fuddling cups.JPG|अंगूठा|बाएं|ईमानदार|फ़डलिंग कप। इन कपों में खोखले जोड़ होते हैं जिनकी मदद से इनके अंदर की सामग्री को बिना गिराए पिया जा सकता है।]]
पहेली मग एक ऐसा पेय पात्र है, जिसकी बनावट में चतुराई और कौतुक का अद्भुत समावेश होता है। इसे इस प्रकार निर्मित किया जाता है कि साधारण ढंग से इसका उपयोग करना संभव न हो, और पीने वाले को उसकी युक्ति समझने के लिए थोड़ी बुद्धि और धैर्य का सहारा लेना पड़े। उदाहरणतः, कुछ पज़ल मगों के किनारों पर अनेक सूक्ष्म छिद्र होते हैं, जिनके कारण सामान्य रूप से पेय ग्रहण करना असंभव हो जाता है। पहली दृष्टि में ऐसा प्रतीत होता है कि इन छिद्रों को हाथ से ढककर समस्या का समाधान किया जा सकता है, किंतु ऐसा करने पर पेय ऊपर की ओर स्थित अदृश्य छिद्रों से बाहर निकलने लगता है। इस पहेली का वास्तविक समाधान यह है कि किनारों के छिद्रों को उचित प्रकार से ढकते हुए, मग के खोखले हत्थे में बने एक गुप्त मार्ग से पेय ग्रहण किया जाए—यही इसकी चतुर संरचना का रहस्य है।<ref name=puzzle>{{cite news|url=http://ceramicstoday.com/articles/puzzle_mug.htm |title=In Their Cups – The Story of the English Puzzle Mug |author= डेलिया रॉबिन्सन |work=सेरामिक्स टुडे |url-status=unfit |archive-url=https://web.archive.org/web/20100103221715/http://ceramicstoday.com/articles/puzzle_mug.htm |archive-date= जनवरी 3, 2010 }}</ref>
[[File:Pythagorean cup sold in Crete.jpg|thumb|upright|एक पाइथागोरस कप]]
इसी श्रेणी में “फडलिंग कप्स” नामक एक और रोचक प्रकार मिलता है, जिसमें तीन अलग-अलग मग आपस में अपनी दीवारों और हत्थों के माध्यम से जुड़े होते हैं। इनकी भीतरी संरचना में ऐसे छिद्र बनाए जाते हैं, जो तरल के प्रवाह को नियंत्रित करते हैं। परिणामस्वरूप, इन मगों को एक निश्चित और सही क्रम में ही खाली किया जा सकता है; यदि क्रम का पालन न किया जाए, तो पेय अनपेक्षित रूप से बाहर निकल सकता है। इस प्रकार, यह केवल एक पेय पात्र नहीं, बल्कि एक मनोरंजक चुनौती बन जाता है।<ref name=puzzle/>
इसी प्रकार, “पाइथागोरस कप” एक विशिष्ट और शिक्षाप्रद पज़ल मग का उदाहरण है, जिसमें केंद्र में स्थित एक स्तंभ के भीतर एक सूक्ष्म [[दाबलंघिका|साइफन तंत्र]] छिपा होता है। जब तक कप में द्रव उस स्तंभ की ऊँचाई से नीचे रहता है, तब तक वह सुरक्षित रहता है; किंतु जैसे ही द्रव उस सीमा से ऊपर पहुँचता है, साइफन सक्रिय होकर संपूर्ण द्रव को कप के तले में बने छिद्र के माध्यम से बाहर निकाल देता है। यह संरचना केवल कौतुक ही नहीं उत्पन्न करती, बल्कि संयम और संतुलन का एक प्रतीकात्मक संदेश भी देती है—अधिकता अंततः हानि का कारण बन सकती है।
===तापमान बदलने वाले मग===
[[चित्र:Thermochromic_mug.webm|दाएँ|पाठ=Hot water is poured into a black mug, over about 20 seconds most of the mug changes colour to white, revealing black logo markings|अंगूठाकार|एक "जादुई मग" में गर्म पानी डालने और उसके बाद रंग में होने वाले परिवर्तन का वीडियो]]
ऊष्मा-परिवर्तनकारी, ऊष्मा-संवेदनशील अथवा तथाकथित “जादुई” मग ऐसे विशेष पेय पात्र होते हैं, जो तापमान में परिवर्तन के साथ अपना रूप और दृश्य स्वरूप बदल लेते हैं। यह अद्भुत परिवर्तन थर्मोक्रोमिज़्म नामक गुण के कारण संभव होता है, जिसमें ताप के प्रभाव से रंग अथवा चित्र क्रमशः प्रकट या लुप्त होने लगते हैं। जब इन मगों में गर्म पेय डाला जाता है, तो उनकी सतह पर छिपे हुए चित्र, संदेश या रंग धीरे-धीरे उभर आते हैं, मानो कोई रहस्य अचानक सजीव हो उठा हो।
इन मगों की यही विशेषता उन्हें केवल उपयोगी वस्तु तक सीमित नहीं रखती, बल्कि एक आकर्षक अनुभव का माध्यम भी बना देती है। ठंडा होने पर उनका स्वरूप पुनः बदल जाता है, जिससे यह परिवर्तनशीलता एक निरंतर दृश्य कौतुक का आभास कराती है।
==गैर-पेय मग==
=== दाढ़ी बनाने के मग और स्कटल्स (पात्र) ===
[[File:ShavingMug1.jpg|अंगूठा |बाएं|वर्टिकल|शेविंग मग]]
दाढ़ी बनाने के मग और स्कटल्स (पात्र) का विकास उन्नीसवीं शताब्दी के आसपास हुआ, और शेविंग मग का पहला पेटेंट सन् 1867 में दर्ज किया गया।<ref name=smug>पी. ब्रूक्स और जे. मैकग्राडी द्वारा "शेविंग कप में सुधार"" {{US patent|66788}} जुलाई 1867 में प्रकाशित हुआ था।</ref> उस समय अधिकांश घरों में गर्म जल की सहज उपलब्धता नहीं होती थी, इसलिए दाढ़ी बनाने के लिए आवश्यक गरम झाग तैयार करने हेतु विशेष प्रकार के पात्रों की आवश्यकता महसूस हुई। इसी आवश्यकता से स्कटल और शेविंग मग का प्रचलन आरंभ हुआ, जिन्होंने उस दौर की दैनिक दिनचर्या में एक व्यावहारिक समाधान प्रदान किया।
पारंपरिक शेविंग स्कटल का रूप किसी चायदानी से मिलता-जुलता होता है, जिसमें एक चौड़ी टोंटी होती है, जिसके माध्यम से उसमें गरम जल डाला जाता है। यही विशेषता इसे शेविंग मग से अलग करती है, क्योंकि शेविंग मग में सामान्यतः टोंटी नहीं होती। दोनों ही प्रकार के इन पात्रों में प्रायः पकड़ने के लिए हत्था होता है, यद्यपि कुछ रूप ऐसे भी मिलते हैं जिनमें यह नहीं होता। शेविंग मग का बाह्य स्वरूप प्रायः साधारण मग जैसा ही होता है, किंतु कई बार इसमें ब्रश रखने के लिए विशेष रूप से निर्मित स्थान भी होता है, जिससे ब्रश झाग में पूरी तरह डूबने से बचा रहता है और उपयोग अधिक सुविधाजनक बनता है।
आधुनिक समय में शेविंग स्कटल के रूप अपेक्षाकृत कम देखने को मिलते हैं और इनका निर्माण सीमित मात्रा में ही होता है। प्रायः इन्हें छोटे स्तर पर कार्य करने वाले स्वतंत्र [[कुंभकारी|कुम्हारों द्वारा]] पारंपरिक शिल्पकला के रूप में तैयार किया जाता है,<ref name=sara>{{cite web|url=http://www.sarabonnymanpottery.com/moss_scuttle.htm|title=Moss Scuttle|website=Sarabonnymanpottery.com|access-date= नवंबर 16, 2012|url-status=dead|archive-url=https://web.archive.org/web/20080509085958/http://www.sarabonnymanpottery.com/moss_scuttle.htm|archive-date= मई 9, 2008}}</ref> जिससे ये न केवल उपयोगी वस्तु बने रहते हैं, बल्कि एक सांस्कृतिक और हस्तशिल्पीय धरोहर का रूप भी धारण कर लेते हैं।
[[चित्र:ShavingMug2.png|अंगूठाकार|शेविंग स्कटल, 1867 का पेटेंट।<ref name=smug/>]]
स्कटल या शेविंग मग की संरचना उपयोगिता और सूक्ष्म कारीगरी का संतुलित उदाहरण प्रस्तुत करती है। इसके ऊपरी भाग में सामान्यतः साबुन रखने के लिए एक विशेष आधार या स्थान निर्मित होता है, जिसे इस प्रकार रूपांकित किया जाता है कि साबुन स्थिर बना रहे और झाग तैयार करने की प्रक्रिया सुगम हो सके। पारंपरिक रूप से इनका उपयोग कठोर शेविंग साबुन के साथ किया जाता था, जिसके कारण निचले भाग में जल निकासी के लिए सूक्ष्म छिद्र बनाए जाते थे, ताकि अतिरिक्त जल बाहर निकल सके और साबुन अत्यधिक गीला न हो।
समय के साथ इनके स्वरूप में परिवर्तन आया और बाद के स्कटल तथा मगों में ये छिद्र प्रायः नहीं पाए जाते, जिससे उनका उपयोग क्रीम अथवा नरम साबुन के साथ भी सहजता से किया जा सके। इसके अतिरिक्त, कुछ स्कटल और मगों के निचले भाग में संकेंद्रित वृत्ताकार रेखाएँ उकेरी जाती हैं, जो थोड़ी मात्रा में जल को रोके रखती हैं और झाग बनाने की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी तथा संतुलित बनाती हैं।<ref name=sara/>
उपयोग के दौरान शेविंग स्कटल की रचना अपनी पूरी उपयोगिता के साथ सामने आती है। इसमें शेविंग ब्रश को चौड़ी टोंटी वाले भाग में डुबोया जाता है, जहाँ वह जल में भीगकर पर्याप्त रूप से गरम हो जाता है। इसके बाद साबुन को ऊपरी भाग में बने विशेष आधार पर रखा जाता है। आवश्यकता होने पर ब्रश को साबुन पर घुमाया जाता है, जिससे धीरे-धीरे घना और मुलायम झाग तैयार हो जाता है, जबकि अतिरिक्त जल पुनः नीचे की ओर प्रवाहित हो जाता है।
इस सुविचारित व्यवस्था के कारण जल और साबुन—दोनों का अपव्यय कम होता है, और साथ ही आवश्यक ऊष्मा भी लंबे समय तक बनी रहती है। परिणामस्वरूप, शेविंग की प्रक्रिया अधिक आरामदायक, नियंत्रित और निरंतर बनी रहती है, जो उस युग की व्यावहारिक बुद्धिमत्ता और शिल्प कौशल का सुंदर उदाहरण प्रस्तुत करती है।
== समग्र डिजाइन और कार्य ==
मग के अधिकांश डिजाइन थर्मल इन्सुलेशन के उद्देश्य से हैं: एक मग की मोटी दीवार, चाय के प्याले की पतली दीवारों की तुलना में, पेट को ठंडा होने या जल्दी गर्म होने से बचाने के लिए इसे इंसुलेट करती हैं। मग का तेल अक्सर सपाट नहीं होता है, लेकिन अवतल होता है या उस सतह के साथ थर्मल संपर्क को कम करने के लिए एक अतिरिक्त रिम होता है जिस पर मग रखा जाता है। ये विशेषताएं अक्सर सतह पर एक विशिष्ट गोलाकार दाग छोड़ती हैं। अंत में, एक मग हैंडल आपके हाथ को मग के गर्म पक्षों से दूर रखता है। हैंडल का छोटा क्रॉस सेक्शन तरल और हाथ के बीच गर्मी के प्रभाव को कम करता है। थर्मल इन्सुलेशन के इसी कारण से, मग अक्सर कम [[थर्मल चालकता]], जैसे [[मिट्टी के बर्तन]], [[बोन चाइना]], [[चीनी मिट्टी के बर्तन]], या कांच के साथ सामग्री से बने होते हैं।
== सजावट ==
[[File:I got smashed in Grafenwöhr - Germany.jpg|left|upright|thumb|टूटा हुआ मग]]
मग, अपनी सर्वव्यापी उपस्थिति के कारण, केवल एक उपयोगी पेय पात्र तक सीमित नहीं रहा, बल्कि समय के साथ वह कला और अभिव्यक्ति का एक सशक्त माध्यम भी बन गया है। अनेक अवसरों पर इसका उपयोग विज्ञापन वस्तु के रूप में किया जाता है, जहाँ साधारण-सा दिखने वाला मग किसी विचार, संदेश या पहचान का वाहक बन जाता है। कुछ मग तो ऐसे भी होते हैं, जिन्हें पीने के लिए नहीं, बल्कि सजावट के रूप में अधिक महत्व दिया जाता है। प्राचीन काल से ही मगों पर नक्काशी और अलंकरण की परंपरा रही है, और कभी-कभी इन्हें विशिष्ट आकर्षण देने के लिए असामान्य आकृतियों में भी ढाला जाता रहा है।
आधुनिक समय में मगों की सजावट की सबसे लोकप्रिय विधि उन पर छपाई करना है, जिसमें तकनीक और सौंदर्य का सुंदर समन्वय दिखाई देता है। इस प्रक्रिया में सिरेमिक चूर्ण को चयनित रंगों और एक लचीले माध्यम के साथ मिलाकर एक विशेष मिश्रण तैयार किया जाता है। इसके बाद इस मिश्रण को जिलेटिन-लेपित कागज़ पर पारंपरिक [[आवरण मुद्रण|जाल-छपाई विधि]] के माध्यम से अंकित किया जाता है, जिसमें एक महीन बुने हुए जाल को फ्रेम पर कसकर लगाया जाता है और इच्छित आकृति के अनुसार एक छाप तैयार की जाती है। यह विधि सतह पर एक पतली और समान परत बनाने में सक्षम होती है।
यदि अत्यधिक चिकनाई या एकरूपता आवश्यक न हो, तो इसी मिश्रण को सीधे ब्रश की सहायता से भी मग की सतह पर लगाया जा सकता है, जिससे हस्तनिर्मित कलात्मकता का स्पर्श मिलता है। इसके अतिरिक्त, एक और अधिक जटिल तकनीक में कागज़ को प्रकाश-संवेदनशील परत से ढककर उस पर छवि अंकित की जाती है, और फिर पराबैंगनी प्रकाश के माध्यम से उस परत को स्थिर किया जाता है।<ref name=print>{{cite web|title=Printing Ceramics|url=http://www.ceramicstoday.com/articles/090798.htm|publisher=सिरेमिक्स टुडे|access-date=2009-08-30|archive-url=https://web.archive.org/web/20090601072522/http://www.ceramicstoday.com/articles/090798.htm|archive-date=2009-06-01|url-status=dead}}</ref>
सूखने के उपरांत “लिथो” कहलाने वाला यह मुद्रित कागज़ लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है, क्योंकि उसमें अंकित छवि स्थिर और संरक्षित रहती है। जब इस लिथो का उपयोग मग पर छवि स्थानांतरित करने के लिए किया जाता है, तो सबसे पहले उसे गरम जल में भिगोकर नरम किया जाता है। इस प्रक्रिया से मुद्रित छवि से युक्त जिलेटिन की पतली परत कागज़ से अलग हो जाती है, जिसे सावधानीपूर्वक मग की सतह पर चढ़ा दिया जाता है।
इसके बाद मग को उच्च ताप पर, लगभग 700 से 750 डिग्री सेल्सियस तक, भट्ठी में पकाया जाता है। इस ताप पर मग की चमकीली परत (ग्लेज़) की ऊपरी सतह हल्की-सी नरम हो जाती है, जिससे स्थानांतरित छवि उसमें स्थायी रूप से समाहित हो जाती है। परिणामस्वरूप, चित्र केवल सतह पर अंकित नहीं रहता, बल्कि मग का अभिन्न हिस्सा बन जाता है—जो दीर्घकाल तक अपनी स्पष्टता और सौंदर्य बनाए रखता है।<ref name=print/>
== भंडारण ==
[[File:Mugs hanging in a ship's mess 01A.jpg|thumb|जहाज के भोजनालय में खूंटियों पर लटके विक्टर शैली के मग]]
[[File:Mugtree1.jpg|thumb|left|upright|मग का पेड़]]
मगों के सुव्यवस्थित भंडारण और आकर्षक प्रदर्शन के लिए ‘मग ट्री’ एक अत्यंत लोकप्रिय और व्यावहारिक उपाय माना जाता है। यह सामान्यतः एक गोल आधार पर स्थापित लकड़ी या धातु का स्तंभ होता है, जिसमें चारों ओर छोटी-छोटी खूंटियाँ लगी रहती हैं।<ref>जेन एनकोना, ब्रूस एनकोना "मग ट्री" {{US patent|D312556}} जारी करने की तिथि: 4 दिसंबर, 1990</ref> इन खूंटियों पर मगों को उनके हत्थों से लटकाया जाता है, जिससे वे न केवल सुरक्षित रहते हैं, बल्कि देखने में भी सुसज्जित प्रतीत होते हैं। यह व्यवस्था रसोई या भोजन कक्ष में स्थान की बचत के साथ-साथ एक सजावटी प्रभाव भी उत्पन्न करती है।
इसके अतिरिक्त, विशेष रूप से निर्मित रैक भी उपलब्ध होते हैं, जिनमें मगों को इस प्रकार टांगा जाता है कि वे आसानी से हाथ में आ सकें और उपयोग के लिए तत्पर रहें। ऐसी व्यवस्थाएँ ऊँची लहरों वाले समुद्री जहाजों में विशेष रूप से उपयोगी सिद्ध होती हैं, जहाँ स्थिरता और सुविधा दोनों का ध्यान रखना आवश्यक होता है।
चूँकि मग अक्सर संग्रहणीय वस्तुओं के रूप में भी संजोए जाते हैं, इसलिए उनके भंडारण और प्रदर्शन के लिए उपयुक्त साधनों और रणनीतियों का चयन अत्यंत महत्त्वपूर्ण हो जाता है। सही व्यवस्था न केवल उनके संरक्षण को सुनिश्चित करती है, बल्कि उनके सौंदर्य और विशिष्टता को भी प्रभावशाली ढंग से प्रदर्शित करती है।
==गणित में ==
[[File:Mug and Torus morph.gif|thumb|upright|एक कॉफी मग और एक डोनट के बीच निरंतर विरूपण यह दर्शाता है कि वे समरूप (टोपोलॉजिकली समतुल्य) हैं।]]
[[संस्थितिविज्ञान]] में मग का उदाहरण अत्यंत प्रसिद्ध और सहज रूप से समझ में आने वाला माना जाता है। इस गणितीय दृष्टिकोण के अनुसार, दो वस्तुएँ तब समतुल्य या होमियोमॉर्फिक कही जाती हैं, जब उन्हें बिना काटे, जोड़े या छेद किए, केवल निरंतर विरूपण के माध्यम से एक-दूसरे में रूपांतरित किया जा सके।<ref>{{cite book|url=https://books.google.com/books?id=S3biKR21i-QC&pg=PA51|page=51|title=Principles of robot motion: theory, algorithms, and implementation|author=हॉवी एम. चोसेट|publisher=एमआईटी प्रेस|year=2005|isbn=0-262-03327-5}}</ref> इसी आधार पर, एक सामान्य मग और डोनट—जिसे [[टॉरस]] कहा जाता है—आपस में समतुल्य माने जाते हैं, क्योंकि मग के हत्थे को धीरे-धीरे फैलाकर और उसके मुख्य भाग को रूपांतरित करके उसे डोनट के आकार में बदला जा सकता है, बिना उसकी संरचना को तोड़े।
इसी सिद्धांत का एक और रोचक उदाहरण दो हत्थों वाला मग है, जो टोपोलॉजिकल रूप से द्वि-टोरस के समतुल्य होता है—एक ऐसी आकृति जो अंक “8” के समान प्रतीत होती है।<ref>{{cite web|url=http://plus.maths.org/issue10/features/topology/|title=In space, do all roads lead to home?|author=जन्ना लेविन|date= जनवरी 1, 2000|access-date= अगस्त 30, 2009|archive-date= जुलाई 31, 2009|archive-url=https://web.archive.org/web/20090731130453/http://plus.maths.org/issue10/features/topology/|url-status=live}}</ref> यहाँ प्रत्येक हत्था एक अतिरिक्त “छिद्र” का प्रतिनिधित्व करता है, जिससे उसकी संरचनात्मक जटिलता बढ़ जाती है।
इसके विपरीत, यदि किसी मग में हत्था न हो—अर्थात वह केवल एक साधारण [[कटोरा|कटोरे]] या बीकर के रूप में हो—तो वह टोपोलॉजी की दृष्टि से एक तश्तरी के समतुल्य माना जाता है। यह समानता विशेष रूप से तब स्पष्ट होती है, जब कच्ची मिट्टी से बने कटोरे को कुम्हार के चाक पर दबाकर चपटा किया जाता है, और वह धीरे-धीरे एक समतल तश्तरी का रूप धारण कर लेता है।<ref>{{cite book|url=https://books.google.com/books?id=0f0v4wLTDmwC&pg=PA250|page=250|title=Computer aided engineering design|author=बीरेंद्र सहाय|publisher=स्प्रिंगर|year=2005|isbn=1-4020-2555-6}}</ref>
== गैलरी==
<gallery mode="packed">
File:Mug of tea, Smithfield Market, City of London.jpg|चाय के मग, यूके
File:Coffee at Dad's Diner (8786564351).jpg|एक विशिष्ट अमेरिकी डिनर मग
File:Enamel mug.jpg|एनामेल मग
File:Kitchenware Steel Mug Rezowan.JPG|स्टील मग
File:Lipton-mug-tea.jpg|चाय के लिए कांच का मग
File:Frog or Surprise mug.JPG|मेंढक वाला मग , टोड या सरप्राइज मग
File:Doughnut-shaped Coffee mug.jpg|डोनट के आकार का मग
File:Rosehage kopp cropped.jpg|मूमिन-थीम वाला मग
File:Entenbecher.jpg|बत्तख की आकृति वाला मग
File:Merchandising Coffee mug from band Dead Can Dance with 'DCD' logo - black.jpg|मर्चेंडाइजिंग के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला मग
File:Mug, traveller's (AM 1966.243-3).jpg|केस सहित फोल्डेबल मेटल यात्री मग
File:Dinermug.jpg|थंब|ऑल्ट=एक ठेठ अमेरिकी मग|अमेरिकी ठेठ मग
File:Wikipedia - filled with knowledge (beskuren).jpg|[[विकिपीडिया]] के लोगो वाला एक मग
</gallery>
==इन्हें भी देखें==
*[[कप]]
== सन्दर्भ ==
{{Reflist}}
== ग्रन्थसूची ==
* {{cite book | last=क्रोननफेल्ड | first=डी. | title=Plastic Glasses and Church Fathers: Semantic Extension From the Ethnoscience Tradition | publisher=ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस | series=ऑक्सफोर्ड स्टडीज इन एंथ्रोपोलॉजिकल लिंग्विस्टिक्स। | year=1996 | isbn=978-0-19-535749-3 | url=https://books.google.com/books?id=0iuGtpfpTh4C&pg=PA6 | access-date=2024-10-29}}
* {{cite journal | last=विर्ज़बिका | first=अन्ना | title=Cups and mugs: Lexicography and conceptual analysis | journal=ऑस्ट्रेलियाई जर्नल ऑफ लिंग्विस्टिक्स| publisher=इन्फॉर्मा यूके लिमिटेड | volume=4 | issue=2 | year=1984 | issn=0726-8602 | doi=10.1080/07268608408599326 | pages=205–255 | url=https://www.researchgate.net/publication/232938621}}
==बाहरी कड़ियाँ==
*{{commons category-inline}}
[[श्रेणी:पीने के उपकरण]]
[[श्रेणी:चाय]]
[[श्रेणी:गर्म पेय]]
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6547800
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2026-05-02T15:13:02Z
चाहर धर्मेंद्र
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सफ़ाई
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wikitext
text/x-wiki
{{db-badtrans}}
[[चित्र:Mug_of_Tea.JPG|upright=1.35|अंगूठाकार|दुध वाली चाय का एक मग]]
मग एक प्रकार का [[कप]] होता है,{{sfn|Kronenfeld|1996|p=6}} जिसे विशेष रूप से [[कॉफी]], [[हॉट चॉकलेट|गरम चॉकलेट]] या [[चाय]] जैसे गर्म पेय पदार्थों के सेवन के लिए उपयोग किया जाता है। इसकी सबसे प्रमुख विशेषता इसका हैंडल होता है, जो इसे पकड़ने में सुविधा प्रदान करता है, विशेषकर तब जब पेय गरम हो। आकार की दृष्टि से, मग सामान्य कपों—जैसे चाय या कॉफी के पारंपरिक कप—की तुलना में अधिक [[तरल]] धारण करने में सक्षम होता है।
आमतौर पर एक मग की क्षमता लगभग 250 से 350 मिलीलीटर के बीच होती है,<ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=IZRDIcz6uEQC&q=usually+mug+holds+12+fluid+ounces|title=The Boat Galley Cookbook: 800 Everyday Recipes and Essential Tips for Cooking Aboard : 800 Everyday Recipes and Essential Tips for Cooking Aboard: 800 Everyday Recipes and Essential Tips for Cooking Aboard|last1=शियरलॉक|first1=कैरोलिन|last2=आयरन्स|first2=जेन|date=2012-09-14|publisher=मैकग्रा हिल प्रोफेशनल|isbn=9780071782364|access-date=2021-03-12|archive-date=2024-04-25|archive-url=https://web.archive.org/web/20240425165047/https://books.google.com/books?id=IZRDIcz6uEQC&q=usually+mug+holds+12+fluid+ounces|url-status=live}}</ref> जो इसे दैनिक उपयोग के लिए अत्यंत व्यावहारिक बनाती है। यदि आकार इससे भी बड़ा हो, तो ऐसे बर्तन को टैंकर्ड कहा जाता है। इस प्रकार, मग केवल एक साधारण बर्तन नहीं, बल्कि दैनिक जीवन की सहजता और आराम का एक अभिन्न हिस्सा है।
मग का आकार प्रायः सरल और उपयोगितावादी होता है—यह या तो सीधी, बेलनाकार रेखाओं वाला होता है अथवा हल्का घुमाव लिए हुए रूप में भी निर्मित किया जाता है। यद्यपि इसके आकार में विविधता संभव है, फिर भी इसकी मूल पहचान एक सुविधाजनक हैंडल से जुड़ी होती है, जो इसे पकड़ने में सहजता प्रदान करता है; इसी विशेषता के अभाव में इसे बीकर कहा जाता है। सामान्यतः मग के साथ तश्तरी नहीं होती, जो इसे अन्य पारंपरिक कपों से भिन्न बनाती है।<ref>{{cite encyclopedia |title=mug, n.1 |url=http://www.oed.com/view/Entry/123325 |encyclopedia=ओईडी ऑनलाइन |date=दिसंबर 2014 |publisher=ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस |quote=A drinking vessel, freq. cylindrical (and now usually with a handle), generally used without a saucer. |access-date=2015-03-06 |archive-date=2024-04-25 |archive-url=https://web.archive.org/web/20240425165036/https://www.oed.com/dictionary/mug_n1 |url-status=live }}</ref>
मग को [[पेय]] पदार्थों के सेवन का अपेक्षाकृत अनौपचारिक माध्यम माना जाता है, इसलिए इसका प्रयोग प्रायः घरेलू या सहज वातावरण में अधिक होता है, जबकि औपचारिक भोजन कक्षों में चाय या कॉफी के पारंपरिक कपों को प्राथमिकता दी जाती है। इसके अतिरिक्त, मग का एक विशेष रूप [[हजामत|शेविंग]] मग भी होता है, जिसका उपयोग गीली दाढ़ी बनाने की प्रक्रिया में सहायक के रूप में किया जाता है। इस प्रकार, मग अपनी सरलता और बहुउपयोगिता के कारण दैनिक जीवन में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है।
मग का विकास समय के साथ उसकी उपयोगिता और निर्माण सामग्री के अनुसार निरंतर परिवर्तित होता रहा है। प्राचीन काल में मग प्रायः [[लकड़ी]] को तराशकर या [[कुंभकारी|मिट्टी]] से बनाए जाते थे, जो उस समय उपलब्ध संसाधनों और शिल्पकला का प्रतिबिंब थे। आधुनिक युग में इनका निर्माण अधिक परिष्कृत सामग्रियों—जैसे बोन चाइना, अर्दनवेयर, [[पॉर्सिलेन]] और स्टोनवेयर—से किया जाने लगा है, जो न केवल आकर्षक होते हैं, बल्कि टिकाऊ भी होते हैं।
आकार और प्रयोजन के अनुसार कुछ बड़े मग, जो प्रायः धातु या मिट्टी से निर्मित होते हैं और विशेष रूप से पेय पदार्थ जैसे [[बियर]] के लिए उपयोग किए जाते हैं, टैंकर्ड कहलाते हैं। इसके अतिरिक्त, कुछ मग सुदृढ़ [[कांच]]—जैसे पाइरेक्स—से भी बनाए जाते हैं, जो ताप और झटकों के प्रति अधिक सहनशील होते हैं। हल्के वजन और टूट-फूट से बचाव के लिए [[मीनाकारी|एनामेल्ड]] धातु, [[प्लास्टिक]] या [[इस्पात]] जैसी सामग्रियों का उपयोग भी किया जाता है, विशेषकर बाहरी गतिविधियों जैसे [[कैंपिंग|शिविर-यात्रा]] में।
यात्रा के लिए विशेष रूप से बनाए गए ट्रैवल मग में ऊष्मा बनाए रखने की क्षमता होती है और इनमें छलकने से बचाने के लिए ढक्कन भी लगाया जाता है। सजावट की दृष्टि से, मग पर [[लोगो]], चित्र या कलात्मक आकृतियाँ अंकित करने के लिए [[आवरण मुद्रण|सिल्क-स्क्रीन मुद्रण]] या डिकल तकनीक का प्रयोग किया जाता है, जिन्हें पकाकर स्थायी रूप प्रदान किया जाता है। इस प्रकार, मग केवल एक साधारण बर्तन नहीं, बल्कि उपयोगिता, सौंदर्य और तकनीकी विकास का संगम है।
==सामान्य बनावट और कार्य==
[[File:Mug vs cup.jpg|thumb|एक मग और एक कप अगल-बगल रखे हुए हैं]]
मग के बनावट का एक प्रमुख उद्देश्य ऊष्मीय इन्सुलेशन सुनिश्चित करना होता है, जिससे उसमें रखा पेय अपेक्षाकृत अधिक समय तक अपने तापमान को बनाए रख सके। चाय के पारंपरिक कपों की पतली दीवारों की तुलना में मग की दीवारें मोटी होती हैं, जो ऊष्मा के आदान-प्रदान को धीमा करती हैं और पेय को जल्दी ठंडा या अत्यधिक गरम होने से बचाती हैं।
इसके अतिरिक्त, मग का आधार प्रायः पूर्णतः समतल नहीं होता, बल्कि हल्का अवतल या किनारीयुक्त बनाया जाता है। यह संरचना उस सतह के साथ प्रत्यक्ष संपर्क को कम करती है, जिस पर मग रखा जाता है, जिससे ऊष्मा का अपव्यय घटता है। इसी कारण अक्सर सतह पर एक विशिष्ट गोलाकार चिह्न भी दिखाई देता है, जो इस संरचनात्मक विशेषता का परिणाम होता है।
मग का हैंडल भी इसके ऊष्मीय गुणों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह हाथ को गरम सतह से दूर रखता है और उसके अपेक्षाकृत छोटे अनुप्रस्थ क्षेत्र के कारण ऊष्मा के प्रवाह को सीमित करता है, जिससे उपयोगकर्ता को पकड़ने में सुविधा और सुरक्षा दोनों मिलती हैं। इसी कारण, मग सामान्यतः ऐसी सामग्रियों—जैसे मिट्टी के बर्तन, बोन चाइना, [[पॉर्सिलेन]] या काँच—से बनाए जाते हैं,<ref>{{cite book|url=https://books.google.com/books?id=fJw0K1ZGY1kC&pg=PA98|page=98|title=The really useful science book: a framework of knowledge for primary teachers|author=स्टीव फैरो|publisher= रूटलेज |year=1999|isbn=0-7507-0983-9}}</ref><ref>{{cite book|url=https://books.google.com/books?id=esDW3xTKoLIC&pg=PA27|page=27|title=The handbook of evolutionary psychology|author=डेविड एम. बस|publisher=जॉन विली एंड संस.|year=2005|isbn=0-471-26403-2}}</ref> जिनकी [[ऊष्मा चालकता|ऊष्मीय चालकता]] कम होती है और जो ताप को नियंत्रित रखने में सहायक होती हैं।
===कपों की तुलना में अंतर===
मग और पारंपरिक कप के बीच का अंतर केवल आकार या बनावट तक सीमित नहीं है, बल्कि यह विभिन्न भाषाओं और संस्कृतियों में भी स्पष्ट रूप से परिलक्षित होता है। फ्रेंच, इतालवी, पोलिश, रूसी, जर्मन और अंग्रेज़ी जैसी अनेक भाषाओं में इन दोनों के लिए अलग-अलग शब्द प्रचलित हैं, जो इनके भिन्न उपयोग और सांस्कृतिक संदर्भों को दर्शाते हैं।
भाषाविद् अन्ना विर्ज़बिका के अनुसार, यह भिन्नता इनके कार्यात्मक अंतर से उत्पन्न होती है। पारंपरिक कप सामान्यतः औपचारिक परिवेश में मेज पर बैठकर पेय का आनंद लेने के लिए बनाए जाते हैं, जहाँ साज-सज्जा और शिष्टाचार का विशेष महत्व होता है। इसके विपरीत, मग अधिक अनौपचारिक और बहुउपयोगी होता है, जिसे किसी भी स्थान पर सहजता से उपयोग में लाया जा सकता है।{{sfn|Wierzbicka|1984|pp=214–216}}
==इतिहास==
===शुरुआती मग===
[[File:CMOC Treasures of Ancient China exhibit - large grey mug.jpg|upright|thumb|left|चीन के [[झेंगझोऊ]] में [[नवपाषाण युग|नवपाषाण काल]] के उत्तरार्ध ( लगभग 2500-2000 ईसा पूर्व) में कुम्हार के चाक पर बनाया गया एक मग।]]
मग का प्रारंभिक इतिहास यह दर्शाता है कि इसका उपयोग आज की अपेक्षा भिन्न उद्देश्यों के लिए किया जाता था। वर्तमान में जहाँ मग प्रायः गर्म पेय, दूध या शीतल पेयों से जुड़ा हुआ है, वहीं आरंभिक काल में इसका प्रमुख उपयोग [[बियर]] अथवा अन्य मादक पेयों के सेवन के लिए होता था। उस समय के मग आकार में भी अधिक बड़े होते थे, जो उनके उपयोग और सामाजिक परिवेश के अनुरूप थे। लकड़ी से बने प्रारंभिक मग संभवतः प्राचीन काष्ठ-शिल्प के आरंभिक दौर से ही प्रचलन में थे, किंतु समय के प्रभाव के कारण ऐसे अधिकांश नमूने आज सुरक्षित नहीं रह पाए हैं।<ref name="columbia">{{cite web|url=http://www.encyclopedia.com/doc/1E1-porcelai.html|title=Porcelain|publisher=कोलंबिया विश्वकोश छठा संस्करण. 2008|access-date=2008-06-27|archive-date=2008-08-21|archive-url=https://web.archive.org/web/20080821093621/http://www.encyclopedia.com/doc/1E1-porcelai.html|url-status=live}}</ref><ref name="G. J. Monson-Fitzjohn, B.Sc., F.R.Hist.S">{{cite book|url=http://www.nicks.com.au/index.aspx?link_id=76.623|title=Drinking Vessels of Bygone Days|author=जी. जे. मोनसन-फिट्ज़जॉन, बी.एससी., एफ.आर.एच.आई.एस.|url-status=dead|archive-url=https://web.archive.org/web/20100719162453/http://www.nicks.com.au/Index.aspx?link_id=76.623|archive-date=2010-07-19}}</ref>
मिट्टी के बर्तनों के विकास ने मग के निर्माण को एक नई दिशा दी। प्रारंभ में इन्हें [[कुंभकारी|हाथ से आकार]] दिया जाता था, परंतु कुम्हार का चाक के आविष्कार (लगभग 6500 से 3000 ईसा पूर्व के बीच) ने इस प्रक्रिया को अधिक सरल और परिष्कृत बना दिया। इस तकनीक के कारण बर्तनों में हैंडल जोड़ना भी सहज हो गया, जिससे आधुनिक स्वरूप के मग का विकास संभव हुआ। प्राचीन ग्रीस में 4000 से 5000 ईसा पूर्व के काल का एक सुसज्जित मिट्टी का मग प्राप्त हुआ है,<ref>{{cite web|url=http://www.ceramicstudies.me.uk/histx105.html|title=Ceramic Web Page Tutorials|website=Ceramicstudies.me.uk|access-date= नवंबर 16, 2012|archive-date= जून 5, 2023|archive-url=https://web.archive.org/web/20230605205500/http://www.ceramicstudies.me.uk/histx105.html|url-status=live}}</ref> जो उस युग की कलात्मकता और शिल्पकौशल का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करता है।
[[File:AnasaziMugs.jpeg|thumb|upright=1.1|[[कॉलोराडो|दक्षिण-पश्चिमी कोलोराडो]] से प्राप्त [[पुएब्लो कों के पूर्वज|पुएब्लो]] (अनासाज़ी) पूर्वजों के मग , जो 1000 से 1280 ईस्वी के बीच बनाए गए थे। इनके हैंडल पर की गई नक्काशी का अर्थ अभी तक अज्ञात है, लेकिन संभवतः इसका कोई कार्यात्मक महत्व नहीं है।]]
मग के विकासक्रम में प्रारंभिक मिट्टी के मगों की एक प्रमुख कमी उनकी अत्यधिक मोटी दीवारें थीं, जो पीने के लिए सुविधाजनक नहीं मानी जाती थीं। जैसे-जैसे [[धातुकार्य|धातु-कर्म]] की तकनीकों में प्रगति हुई, बर्तनों की दीवारों को अधिक पतला और सुडौल बनाया जाने लगा। लगभग 2000 ईसा पूर्व से [[कांसा|कांस्य]],<ref>{{cite web|url=http://www.thomaslayton.org.uk/joomla/index.php?option=com_content&task=view&id=26&Itemid=41|archive-url=https://web.archive.org/web/20201205022717/http://www.thomaslayton.org.uk/joomla/index.php?option=com_content&task=view&id=26&Itemid=41|url-status=dead|archive-date= दिसंबर 5, 2020|title=The Collection – Archaeology|website=Thomaslayton.org.uk|access-date= नवंबर 16, 2012}}</ref> [[चाँदी]], [[सोना]]<ref>{{cite web|url=http://www.visual-arts-cork.com/ancient-art/mycenean.htm|title=Mycenean Art|website=Visual-arts-cork.com|access-date=नवंबर 16, 2012|archive-date= मई 11, 2023|archive-url=https://web.archive.org/web/20230511213611/http://www.visual-arts-cork.com/ancient-art/mycenean.htm|url-status=live}}</ref> और यहाँ तक कि [[सीसा]]<ref>{{cite web|url=http://www.nicks.com.au/index.aspx?link_id=76.633|title=Lead drinking cup|website=Nicks.com.au|access-date=नवंबर 16, 2012|url-status=dead|archive-url=https://web.archive.org/web/20120927082915/http://www.nicks.com.au/index.aspx?link_id=76.633|archive-date= सितंबर 27, 2012}}</ref> जैसी धातुओं से भी मग निर्मित होने लगे। यद्यपि ये देखने में आकर्षक और टिकाऊ थे, फिर भी गर्म पेयों के साथ इनका उपयोग सहज नहीं था, क्योंकि धातु ऊष्मा का तीव्र संचार करती है।
मग के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ तब आया, जब [[चीनी जनवादी गणराज्य|चीन]] में लगभग 600 ईस्वी के आसपास [[पॉर्सिलेन|चीनी मिट्टी के बर्तनों]] का विकास हुआ। इस नवाचार ने पतली दीवारों वाले ऐसे मगों का निर्माण संभव बनाया, जो न केवल ठंडे, बल्कि गर्म पेयों के लिए भी उपयुक्त थे। यह परंपरा आज भी जारी है और आधुनिक मगों के स्वरूप में उसी विकास की छाप स्पष्ट दिखाई देती है।<ref name="columbia"/><ref name="G. J. Monson-Fitzjohn, B.Sc., F.R.Hist.S"/>
भाषाई दृष्टि से, “मग” शब्द का वर्तमान अर्थ में सबसे प्रारंभिक ज्ञात प्रयोग 1664 ईस्वी में मिलता है,<ref>{{cite web |title=Mug |url=https://www.merriam-webster.com/dictionary/mug#word-history |website=merriam-webster.com |publisher=मेरियम-वेबस्टर |access-date=30 जून 2025}}</ref> जो इस बर्तन के सांस्कृतिक और व्यावहारिक विकास की ऐतिहासिक यात्रा को भी रेखांकित करता है।
===विक्टर कॉफी मग===
[[द्वितीय विश्व युद्ध]] के दौरान [[अमेरिकी नौसेना|संयुक्त राज्य अमेरिका की नौसेना]] ने ऐसे कॉफी मग के निर्माण हेतु अमेरिकी कंपनियों से प्रस्ताव आमंत्रित किए, जो गिरने पर भी सुरक्षित रहें और जहाज़ों पर उपयोग के दौरान अत्यधिक टिकाऊ सिद्ध हों। कई प्रकार के डिज़ाइन प्रस्तुत किए गए, किंतु अंततः चयन [[विद्युतरोधी|उच्च-वोल्टेज पोर्सिलेन इन्सुलेटर]] निर्माता विक्टर इंसुलेटर द्वारा निर्मित एक विशेष डिज़ाइन का हुआ। उस समय युद्धकालीन परिस्थितियों में इन्सुलेटर की माँग घट गई थी, इसलिए कंपनी ने अपने कार्यों को बनाए रखने के लिए स्वच्छतापूर्ण बर्तनों के निर्माण की दिशा में कदम बढ़ाया।<ref name="Upstate">{{Cite web|url=https://exploringupstate.com/how-victor-changed-the-coffee-mug/|title=How the Victor Coffee Mug Changed the Way We Drink Coffee|last=क्लेमेंस|first=क्रिस|date= मार्च 6, 2016|website=एक्सप्लोरिंग अपस्टेट|language=en-US}}</ref>
विक्टर ने नौसेना के लिए एक विशिष्ट मग विकसित किया, जो बिना हैंडल के, सफेद चमकदार सतह वाला और मोटी दीवारों से युक्त था। यह डिज़ाइन अपनी मजबूती और उपयोगिता के कारण सैन्य बलों द्वारा अत्यंत सराहा गया। चूँकि इन मगों के निर्माण में वही पोर्सिलेन सामग्री प्रयुक्त हुई, जिसका उपयोग कंपनी अपने इन्सुलेटर बनाने में करती थी, इसलिए इनमें उत्कृष्ट ऊष्मा-रोधक गुण विद्यमान थे। इस प्रकार, युद्धकालीन आवश्यकताओं ने न केवल एक नए प्रकार के मग को जन्म दिया, बल्कि उसके व्यावहारिक और तकनीकी गुणों को भी परिष्कृत किया।<ref name="Upstate"/><ref name= cjow>{{cite web |last1=गिश|first1=एल्टन |title=Porcelain Insulator News |url=https://www.cjow.com/archive/article.php?month=2&a=02Porcelain%20Insulator%20News.htm&year=2004 |website=cjow.com |publisher=द वायर के क्राउन ज्वेल्स |date= फरवरी 2004}}</ref>
द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति के पश्चात विक्टर इंसुलेटर ने अपने उत्पादन को आंशिक रूप से सैनिटरीवेयर उत्पादों की ओर बनाए रखने का निर्णय लिया और अपने प्रसिद्ध मग का एक अधिक व्यावसायिक रूप से अनुकूल संस्करण प्रस्तुत किया। इस नए रूप में मग में सुविधाजनक हैंडल जोड़ा गया, उसका शरीर अपेक्षाकृत हल्का और पतला बनाया गया, तथा विभिन्न रंगों के विकल्प भी उपलब्ध कराए गए, जिससे यह आम उपभोक्ताओं के लिए अधिक आकर्षक बन गया।
इस सफल डिज़ाइन की लोकप्रियता इतनी बढ़ी कि इसकी नकल संयुक्त राज्य अमेरिका के भीतर ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अनेक निर्माताओं द्वारा बड़े पैमाने पर की जाने लगी।<ref name="Upstate"/> किंतु समय के साथ सस्ते और बड़े पैमाने पर उत्पादित [[चीनी जनवादी गणराज्य|चीनी]] निर्मित विकल्पों से कड़ी प्रतिस्पर्धा के कारण विक्टर को गंभीर आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा। परिणामस्वरूप, 1990 के दशक की शुरुआत में कंपनी को मग का उत्पादन बंद करना पड़ा।<ref name= cjow/>
आज, उत्पादन बंद होने के बाद भी विक्टर द्वारा निर्मित ये मग अपनी विशिष्ट गुणवत्ता और ऐतिहासिक महत्व के कारण संग्राहकों के बीच अत्यंत लोकप्रिय हो गए हैं।<ref>{{cite web |last1=डेलगाडो |first1=मिशेल |title=The Classic Diner Mug That's Disappearing |url=https://medium.com/@mdelgadia/the-classic-diner-mug-thats-disappearing-619c55935aa9 |website=medium.com |publisher= मीडियम |date= मई 24, 2017}}</ref> वे न केवल एक उपयोगी वस्तु के रूप में, बल्कि औद्योगिक इतिहास और डिज़ाइन विकास के प्रतीक के रूप में भी मूल्यवान माने जाते हैं।
==अन्य मग के प्रकार ==
===यात्रा मग===
[[File:travel mug.jpg|thumb|left|upright=.6|यात्रा मग]]
यात्रा मग का प्रचलन 1980 के दशक में बढ़ा, जब ऐसे बर्तनों की आवश्यकता महसूस हुई जो गर्म या ठंडे पेयों को सुरक्षित रूप से एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जा सकें। इन मगों का निर्माण इस प्रकार किया जाता है कि उनमें [[ऊष्मा रोधन|उत्कृष्ट ऊष्मीय इन्सुलेशन गुण]] हों, जिससे पेय लंबे समय तक अपने तापमान को बनाए रख सके। संरचना की दृष्टि से ये [[निर्वात फ्लास्क|वैक्यूम फ्लास्क]] के समान होते हैं—अर्थात् ये अच्छी तरह से इन्सुलेटेड और लगभग पूर्णतः बंद होते हैं, ताकि रिसाव या छलकाव की संभावना न्यूनतम रहे।<ref name=travel>मोरी कार्प "ट्रैवल मग" {{US patent|5249703}} जारी होने की तिथि: अक्टूबर 5, 1993</ref> फिर भी, इनके ढक्कन में एक छोटा छिद्र होता है, जिससे यात्रा के दौरान बिना खोले ही पेय का सेवन किया जा सके।
गर्म पेयों के ठंडा होने का प्रमुख कारण वाष्पीकरण होता है, इसलिए ट्रैवल मग में ढक्कन की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। यह वाष्प के बाहर निकलने को सीमित करता है और इस प्रकार पेय को अधिक समय तक गरम बनाए रखने में सहायक होता है, चाहे ढक्कन पतले प्लास्टिक का ही क्यों न हो।
इसके अतिरिक्त, कुछ मग ऐसे भी होते हैं जिनमें भीतरी और बाहरी दोहरी दीवारें होती हैं, परंतु उनके बीच वैक्यूम नहीं बनाया जाता। ऐसे बर्तनों को डबल वॉल मग कहा जाता है। इनमें भीतरी दीवार सामान्यतः स्टेनलेस स्टील की होती है, जबकि बाहरी परत स्टेनलेस स्टील, प्लास्टिक या अन्य सामग्रियों से निर्मित हो सकती है। यह संरचना भी कुछ हद तक ऊष्मा संरक्षण प्रदान करती है, यद्यपि वैक्यूम युक्त मग की तुलना में इसकी क्षमता अपेक्षाकृत कम होती है।
ड्राइविंग के दौरान उपयोग में आने वाला मग, जिसे प्रायः ऑटो मग या कम्यूटर मग कहा जाता है, केवल एक साधारण पात्र नहीं, बल्कि सुविधा, सुरक्षा और सूझबूझ का संतुलित रूप है। यह विशेष प्रकार का यात्रा मग इस प्रकार निर्मित होता है कि चलते वाहन में भी पेय का आनंद सहज और सुरक्षित बना रहे। इसके ऊपर लगा रिसाव-रोधी ढक्कन, जिसमें पीने के लिए एक छोटा सा छिद्र या नलिका होती है,<ref name="Jackson, Joe">{{cite web|author=जैक्सन, जो|title=Q: What's the Best Insulated Travel Mug? We tested five of the best. Here's how they stacked up.|date= दिसंबर 22, 2014|work=आउटसाइड|url=http://www.outsideonline.com/1786136/whats-best-insulated-travel-mug|access-date= दिसंबर 10, 2015|archive-date= दिसंबर 11, 2015|archive-url=https://web.archive.org/web/20151211031852/http://www.outsideonline.com/1786136/whats-best-insulated-travel-mug|url-status=live}}</ref> इस बात का ध्यान रखता है कि मार्ग की हलचल पेय को बाहर न छलकाए। साथ ही, इसका आधार प्रायः संकरा रखा जाता है, ताकि यह विभिन्न वाहनों में बने कप धारकों में दृढ़ता से स्थापित हो सके और अनचाही हलचल से बचा रहे।
ऐसे मग का मूल्यांकन केवल उसके रूप या आकार से नहीं, बल्कि उसके व्यावहारिक गुणों से किया जाता है। यह अपेक्षित है कि उसे एक हाथ से सरलता से खोला और बंद किया जा सके, जिससे चालक का ध्यान मार्ग से न भटके। उसमें भरण-सीमा का स्पष्ट संकेत हो, ताकि अधिक भराव के कारण होने वाले रिसाव से बचा जा सके। बिना हत्थे का स्वरूप इसे पकड़ने में अधिक सहज बनाता है, जिससे नियंत्रण बना रहता है। इसके अतिरिक्त, इसका विन्यास ऐसा होना चाहिए कि पेय ग्रहण करते समय चालक की दृष्टि मार्ग से विचलित न हो।<ref>{{cite news|work=कुक्स कंट्री|date= अक्टूबर 2011|title=Travel Mugs|url=http://www.cooksillustrated.com/equipment_reviews/1328-travel-mugs?extcode=MASCZ00L0&ref=search_results_1|access-date=2015-12-10|archive-date=2015-12-11|archive-url=https://web.archive.org/web/20151211023117/http://www.cooksillustrated.com/equipment_reviews/1328-travel-mugs?extcode=MASCZ00L0&ref=search_results_1|url-status=live}}</ref><ref name="Jackson, Joe"/><ref>{{cite news|work=अमेरिकाज़ टेस्ट किचन (सीज़न 8, एपिसोड 22)]]|title=Coffeehouse Treats: Equipment Corner/Gadget Guru: Commuter Coffee Mugs|date=2008}}</ref> अंततः, यह विभिन्न प्रकार के कप धारकों में स्थिरता से बैठ सके—यही इसकी उपयोगिता और विश्वसनीयता की वास्तविक कसौटी है।
===बियर मग===
[[File:Humpen.jpg|thumb|upright|एक सामान्य आधा लीटर का जर्मन बीयर मग]]
बीयर स्टाइन, परंपरा और शिल्पकला का एक विशिष्ट संगम, वास्तव में पारंपरिक बीयर मगों का वह रूप है जो प्रायः स्टोनवेयर मिट्टी से निर्मित होता है और ऐतिहासिक रूप से [[जर्मनी]] से जुड़ा हुआ माना जाता है। “स्टाइन” शब्द का अंग्रेज़ी में प्रचलन उन्नीसवीं शताब्दी के मध्य, लगभग 1855 के आसपास, [[जर्मन भाषा|जर्मन]] शब्द से रूपांतरित होकर हुआ;<ref name="mw">{{cite web|url=http://www.merriam-webster.com/dictionary/stein|title=Definition of STEIN|website=www.merriam-webster.com|date=5 सितम्बर 2023 }}</ref> किंतु रोचक तथ्य यह है कि जर्मनी में स्वयं इस शब्द का स्वतंत्र रूप से पेय पात्र के अर्थ में सामान्यतः उपयोग नहीं किया जाता। वहाँ इसके स्थान पर “क्रुग”, “हम्पेन” या “सीडेल” जैसे शब्द अधिक प्रचलित हैं, जो इन पात्रों की विविध आकृतियों और उपयोगों को अधिक सटीक रूप से व्यक्त करते हैं।
आधुनिक बीयर मग, जो इस परंपरा के उत्तराधिकारी माने जा सकते हैं, प्रायः आधा [[लीटर]] या एक लीटर की मानक धारिता में उपलब्ध होते हैं। इनके निर्माण में उपयोगिता और सौंदर्य का संतुलन स्पष्ट दिखाई देता है—मजबूत संरचना के साथ-साथ इनमें प्रायः धातु से निर्मित [[कब्ज़ा|कब्जेदार ढक्कन]] लगाए जाते हैं, जो स्वच्छता और संरक्षण दोनों की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण होते हैं। इसके अतिरिक्त, इन मगों की सतह पर उकेरे गए जर्मन [[राज्यचिह्न|प्रतीक-चिह्न]], ऐतिहासिक दृश्य या पारंपरिक कलात्मक आकृतियाँ इन्हें केवल पेय पात्र नहीं, बल्कि सांस्कृतिक विरासत के जीवंत प्रतीक के रूप में स्थापित करती हैं।
===टिकी मग===
[[File: Tiki7.jpg|अंगूठा|ईमानदार|टिकी मग]]
टिकी मग की उत्पत्ति बीसवीं शताब्दी के मध्य में उन उष्णकटिबंधीय वातावरण से प्रेरित भोजनालयों और विशेष पेय स्थलों में हुई, जहाँ वातावरण, सजावट और परोसे जाने वाले पेय—तीनों में एक विशिष्ट विदेशी आकर्षण रचा-बसा रहता था। “टिकी मग” वस्तुतः एक व्यापक और सामान्य संज्ञा है, जिसका उपयोग उन मूर्तिकला-सदृश पेय पात्रों के लिए किया जाता है, जिन पर [[मॅलानिशिया]], [[माइक्रोनीशिया]] अथवा [[पोलीनेशिया]] की सांस्कृतिक छवियों, प्रतीकों और आकृतियों का कलात्मक निरूपण किया गया होता है। समय के साथ इसका दायरा और भी विस्तृत हुआ है, और अब यह शब्द किसी भी ऐसे पात्र के लिए प्रयुक्त होने लगा है, जो उष्णकटिबंधीय परिवेश, समुद्री जीवन या सर्फिंग संस्कृति से संबंधित सौंदर्य-बोध को अभिव्यक्त करता हो।<ref>{{cite book|title=Tiki Mugs: Cult Artifacts of Polynesian Pop|author1=स्ट्रॉन्गमैन, जे |author2=वेस्टलैंड, होल्डन |publisher=कोरेरो बुक्स|year=2008|isbn=978-0-9553398-1-3}}</ref>
ये मग केवल उपयोग की वस्तु भर नहीं, बल्कि स्मृतियों और अनुभवों के संवाहक भी बन जाते हैं। प्रायः इन्हें स्मृति-चिह्न के रूप में बेचा जाता है, जिससे ये किसी स्थान, अनुभव या संस्कृति का प्रतीकात्मक प्रतिनिधित्व करने लगते हैं। यही कारण है कि अनेक लोग इन्हें संग्रहणीय वस्तुओं के रूप में संजोकर रखते हैं—जहाँ प्रत्येक टिकी मग अपने भीतर एक विशिष्ट कथा, सौंदर्य और सांस्कृतिक स्पर्श समेटे होता है।
===मनोरंजन मग===
व्हिसल मग, जिसे हबल-बबल के नाम से भी जाना जाता है, एक मनोरंजक और कौतुकपूर्ण पेय पात्र है, जो अपनी विशिष्ट बनावट के कारण साधारण मगों से अलग पहचान रखता है। इसकी संरचना में एक खोखला हत्था होता है, जिसे इस प्रकार निर्मित किया जाता है कि उसमें से हवा प्रवाहित करने पर सीटी जैसी ध्वनि उत्पन्न हो सके। यही विशेषता इसे केवल उपयोगी वस्तु न बनाकर एक खेल-भावना से जुड़ा अनुभव भी प्रदान करती है।
इस मग की ध्वनि उसकी अवस्था के अनुसार परिवर्तित होती है—जब यह खाली होता है, तब उससे एक सरल, एकल स्वर सुनाई देता है; किंतु जैसे ही इसमें द्रव भरा जाता है, ध्वनि का स्वरूप बदलकर अधिक मधुर, झंकारयुक्त और चहचहाहट जैसी जटिल ध्वनियों में परिवर्तित हो जाता है।<ref name=puzzle/>
===मेंढक मग===
मेंढक मग, जिसे सरप्राइज़ मग भी कहा जाता है, विनोद और आश्चर्य की भावना से निर्मित एक विशिष्ट पेय पात्र है। इसका रूप साधारण प्रतीत होता है, किंतु जैसे ही पेय धीरे-धीरे समाप्त होता है, उसके भीतर छिपा एक छोटा सिरेमिक जीव—अक्सर मेंढक—अचानक प्रकट होकर पीने वाले को चकित कर देता है। यही अप्रत्याशित अनुभव इसे मात्र उपयोगी वस्तु से आगे बढ़ाकर एक मनोरंजक परंपरा का हिस्सा बना देता है।
ऐसे मगों का इतिहास अठारहवीं शताब्दी के उत्तरार्ध, लगभग 1775 के आसपास तक जाता है, और उन्नीसवीं शताब्दी के अंत तक इनकी लोकप्रियता बनी रही। उस समय यह केवल हास्य या खिलवाड़ का साधन ही नहीं, बल्कि कुछ लोकमान्यताओं से भी जुड़ा हुआ था। कुछ परंपराओं में यह विश्वास प्रचलित था कि यदि बीयर में मेंढक या टोड दिखाई दे, तो उससे [[ज्वर]] दूर हो सकता है।<ref>{{Cite web |url=http://www2.epl.ca/InfoFile/EPLInfofileDetail.cfm?subject_detail=Mugs%2C%20Frog%2FToad%2FSurprise |title=Country Life, September 1983. |access-date=2016-02-06 |archive-date=2016-02-16 |archive-url=https://web.archive.org/web/20160216124057/http://www2.epl.ca/InfoFile/EPLInfofileDetail.cfm?subject_detail=Mugs%2C%20Frog%2FToad%2FSurprise |url-status=dead }}</ref> यद्यपि यह धारणा वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित नहीं है, फिर भी यह उन सांस्कृतिक विश्वासों और मानवीय कल्पनाओं की झलक अवश्य प्रस्तुत करती है, जिन्होंने ऐसे मगों को एक विशेष आकर्षण प्रदान किया।
===पहेली मग===
[[File:Fuddling cups.JPG|अंगूठा|बाएं|ईमानदार|फ़डलिंग कप। इन कपों में खोखले जोड़ होते हैं जिनकी मदद से इनके अंदर की सामग्री को बिना गिराए पिया जा सकता है।]]
पहेली मग एक ऐसा पेय पात्र है, जिसकी बनावट में चतुराई और कौतुक का अद्भुत समावेश होता है। इसे इस प्रकार निर्मित किया जाता है कि साधारण ढंग से इसका उपयोग करना संभव न हो, और पीने वाले को उसकी युक्ति समझने के लिए थोड़ी बुद्धि और धैर्य का सहारा लेना पड़े। उदाहरणतः, कुछ पज़ल मगों के किनारों पर अनेक सूक्ष्म छिद्र होते हैं, जिनके कारण सामान्य रूप से पेय ग्रहण करना असंभव हो जाता है। पहली दृष्टि में ऐसा प्रतीत होता है कि इन छिद्रों को हाथ से ढककर समस्या का समाधान किया जा सकता है, किंतु ऐसा करने पर पेय ऊपर की ओर स्थित अदृश्य छिद्रों से बाहर निकलने लगता है। इस पहेली का वास्तविक समाधान यह है कि किनारों के छिद्रों को उचित प्रकार से ढकते हुए, मग के खोखले हत्थे में बने एक गुप्त मार्ग से पेय ग्रहण किया जाए—यही इसकी चतुर संरचना का रहस्य है।<ref name=puzzle>{{cite news|url=http://ceramicstoday.com/articles/puzzle_mug.htm |title=In Their Cups – The Story of the English Puzzle Mug |author= डेलिया रॉबिन्सन |work=सेरामिक्स टुडे |url-status=unfit |archive-url=https://web.archive.org/web/20100103221715/http://ceramicstoday.com/articles/puzzle_mug.htm |archive-date= जनवरी 3, 2010 }}</ref>
[[File:Pythagorean cup sold in Crete.jpg|thumb|upright|एक पाइथागोरस कप]]
इसी श्रेणी में “फडलिंग कप्स” नामक एक और रोचक प्रकार मिलता है, जिसमें तीन अलग-अलग मग आपस में अपनी दीवारों और हत्थों के माध्यम से जुड़े होते हैं। इनकी भीतरी संरचना में ऐसे छिद्र बनाए जाते हैं, जो तरल के प्रवाह को नियंत्रित करते हैं। परिणामस्वरूप, इन मगों को एक निश्चित और सही क्रम में ही खाली किया जा सकता है; यदि क्रम का पालन न किया जाए, तो पेय अनपेक्षित रूप से बाहर निकल सकता है। इस प्रकार, यह केवल एक पेय पात्र नहीं, बल्कि एक मनोरंजक चुनौती बन जाता है।<ref name=puzzle/>
इसी प्रकार, “पाइथागोरस कप” एक विशिष्ट और शिक्षाप्रद पज़ल मग का उदाहरण है, जिसमें केंद्र में स्थित एक स्तंभ के भीतर एक सूक्ष्म [[दाबलंघिका|साइफन तंत्र]] छिपा होता है। जब तक कप में द्रव उस स्तंभ की ऊँचाई से नीचे रहता है, तब तक वह सुरक्षित रहता है; किंतु जैसे ही द्रव उस सीमा से ऊपर पहुँचता है, साइफन सक्रिय होकर संपूर्ण द्रव को कप के तले में बने छिद्र के माध्यम से बाहर निकाल देता है। यह संरचना केवल कौतुक ही नहीं उत्पन्न करती, बल्कि संयम और संतुलन का एक प्रतीकात्मक संदेश भी देती है—अधिकता अंततः हानि का कारण बन सकती है।
===तापमान बदलने वाले मग===
[[चित्र:Thermochromic_mug.webm|दाएँ|पाठ=Hot water is poured into a black mug, over about 20 seconds most of the mug changes colour to white, revealing black logo markings|अंगूठाकार|एक "जादुई मग" में गर्म पानी डालने और उसके बाद रंग में होने वाले परिवर्तन का वीडियो]]
ऊष्मा-परिवर्तनकारी, ऊष्मा-संवेदनशील अथवा तथाकथित “जादुई” मग ऐसे विशेष पेय पात्र होते हैं, जो तापमान में परिवर्तन के साथ अपना रूप और दृश्य स्वरूप बदल लेते हैं। यह अद्भुत परिवर्तन थर्मोक्रोमिज़्म नामक गुण के कारण संभव होता है, जिसमें ताप के प्रभाव से रंग अथवा चित्र क्रमशः प्रकट या लुप्त होने लगते हैं। जब इन मगों में गर्म पेय डाला जाता है, तो उनकी सतह पर छिपे हुए चित्र, संदेश या रंग धीरे-धीरे उभर आते हैं, मानो कोई रहस्य अचानक सजीव हो उठा हो।
इन मगों की यही विशेषता उन्हें केवल उपयोगी वस्तु तक सीमित नहीं रखती, बल्कि एक आकर्षक अनुभव का माध्यम भी बना देती है। ठंडा होने पर उनका स्वरूप पुनः बदल जाता है, जिससे यह परिवर्तनशीलता एक निरंतर दृश्य कौतुक का आभास कराती है।
==गैर-पेय मग==
=== दाढ़ी बनाने के मग और स्कटल्स (पात्र) ===
[[File:ShavingMug1.jpg|अंगूठा |बाएं|वर्टिकल|शेविंग मग]]
दाढ़ी बनाने के मग और स्कटल्स (पात्र) का विकास उन्नीसवीं शताब्दी के आसपास हुआ, और शेविंग मग का पहला पेटेंट सन् 1867 में दर्ज किया गया।<ref name=smug>पी. ब्रूक्स और जे. मैकग्राडी द्वारा "शेविंग कप में सुधार"" {{US patent|66788}} जुलाई 1867 में प्रकाशित हुआ था।</ref> उस समय अधिकांश घरों में गर्म जल की सहज उपलब्धता नहीं होती थी, इसलिए दाढ़ी बनाने के लिए आवश्यक गरम झाग तैयार करने हेतु विशेष प्रकार के पात्रों की आवश्यकता महसूस हुई। इसी आवश्यकता से स्कटल और शेविंग मग का प्रचलन आरंभ हुआ, जिन्होंने उस दौर की दैनिक दिनचर्या में एक व्यावहारिक समाधान प्रदान किया।
पारंपरिक शेविंग स्कटल का रूप किसी चायदानी से मिलता-जुलता होता है, जिसमें एक चौड़ी टोंटी होती है, जिसके माध्यम से उसमें गरम जल डाला जाता है। यही विशेषता इसे शेविंग मग से अलग करती है, क्योंकि शेविंग मग में सामान्यतः टोंटी नहीं होती। दोनों ही प्रकार के इन पात्रों में प्रायः पकड़ने के लिए हत्था होता है, यद्यपि कुछ रूप ऐसे भी मिलते हैं जिनमें यह नहीं होता। शेविंग मग का बाह्य स्वरूप प्रायः साधारण मग जैसा ही होता है, किंतु कई बार इसमें ब्रश रखने के लिए विशेष रूप से निर्मित स्थान भी होता है, जिससे ब्रश झाग में पूरी तरह डूबने से बचा रहता है और उपयोग अधिक सुविधाजनक बनता है।
आधुनिक समय में शेविंग स्कटल के रूप अपेक्षाकृत कम देखने को मिलते हैं और इनका निर्माण सीमित मात्रा में ही होता है। प्रायः इन्हें छोटे स्तर पर कार्य करने वाले स्वतंत्र [[कुंभकारी|कुम्हारों द्वारा]] पारंपरिक शिल्पकला के रूप में तैयार किया जाता है,<ref name=sara>{{cite web|url=http://www.sarabonnymanpottery.com/moss_scuttle.htm|title=Moss Scuttle|website=Sarabonnymanpottery.com|access-date= नवंबर 16, 2012|url-status=dead|archive-url=https://web.archive.org/web/20080509085958/http://www.sarabonnymanpottery.com/moss_scuttle.htm|archive-date= मई 9, 2008}}</ref> जिससे ये न केवल उपयोगी वस्तु बने रहते हैं, बल्कि एक सांस्कृतिक और हस्तशिल्पीय धरोहर का रूप भी धारण कर लेते हैं।
[[चित्र:ShavingMug2.png|अंगूठाकार|शेविंग स्कटल, 1867 का पेटेंट।<ref name=smug/>]]
स्कटल या शेविंग मग की संरचना उपयोगिता और सूक्ष्म कारीगरी का संतुलित उदाहरण प्रस्तुत करती है। इसके ऊपरी भाग में सामान्यतः साबुन रखने के लिए एक विशेष आधार या स्थान निर्मित होता है, जिसे इस प्रकार रूपांकित किया जाता है कि साबुन स्थिर बना रहे और झाग तैयार करने की प्रक्रिया सुगम हो सके। पारंपरिक रूप से इनका उपयोग कठोर शेविंग साबुन के साथ किया जाता था, जिसके कारण निचले भाग में जल निकासी के लिए सूक्ष्म छिद्र बनाए जाते थे, ताकि अतिरिक्त जल बाहर निकल सके और साबुन अत्यधिक गीला न हो।
समय के साथ इनके स्वरूप में परिवर्तन आया और बाद के स्कटल तथा मगों में ये छिद्र प्रायः नहीं पाए जाते, जिससे उनका उपयोग क्रीम अथवा नरम साबुन के साथ भी सहजता से किया जा सके। इसके अतिरिक्त, कुछ स्कटल और मगों के निचले भाग में संकेंद्रित वृत्ताकार रेखाएँ उकेरी जाती हैं, जो थोड़ी मात्रा में जल को रोके रखती हैं और झाग बनाने की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी तथा संतुलित बनाती हैं।<ref name=sara/>
उपयोग के दौरान शेविंग स्कटल की रचना अपनी पूरी उपयोगिता के साथ सामने आती है। इसमें शेविंग ब्रश को चौड़ी टोंटी वाले भाग में डुबोया जाता है, जहाँ वह जल में भीगकर पर्याप्त रूप से गरम हो जाता है। इसके बाद साबुन को ऊपरी भाग में बने विशेष आधार पर रखा जाता है। आवश्यकता होने पर ब्रश को साबुन पर घुमाया जाता है, जिससे धीरे-धीरे घना और मुलायम झाग तैयार हो जाता है, जबकि अतिरिक्त जल पुनः नीचे की ओर प्रवाहित हो जाता है।
इस सुविचारित व्यवस्था के कारण जल और साबुन—दोनों का अपव्यय कम होता है, और साथ ही आवश्यक ऊष्मा भी लंबे समय तक बनी रहती है। परिणामस्वरूप, शेविंग की प्रक्रिया अधिक आरामदायक, नियंत्रित और निरंतर बनी रहती है, जो उस युग की व्यावहारिक बुद्धिमत्ता और शिल्प कौशल का सुंदर उदाहरण प्रस्तुत करती है।
== सजावट ==
[[File:I got smashed in Grafenwöhr - Germany.jpg|left|upright|thumb|टूटा हुआ मग]]
मग, अपनी सर्वव्यापी उपस्थिति के कारण, केवल एक उपयोगी पेय पात्र तक सीमित नहीं रहा, बल्कि समय के साथ वह कला और अभिव्यक्ति का एक सशक्त माध्यम भी बन गया है। अनेक अवसरों पर इसका उपयोग विज्ञापन वस्तु के रूप में किया जाता है, जहाँ साधारण-सा दिखने वाला मग किसी विचार, संदेश या पहचान का वाहक बन जाता है। कुछ मग तो ऐसे भी होते हैं, जिन्हें पीने के लिए नहीं, बल्कि सजावट के रूप में अधिक महत्व दिया जाता है। प्राचीन काल से ही मगों पर नक्काशी और अलंकरण की परंपरा रही है, और कभी-कभी इन्हें विशिष्ट आकर्षण देने के लिए असामान्य आकृतियों में भी ढाला जाता रहा है।
आधुनिक समय में मगों की सजावट की सबसे लोकप्रिय विधि उन पर छपाई करना है, जिसमें तकनीक और सौंदर्य का सुंदर समन्वय दिखाई देता है। इस प्रक्रिया में सिरेमिक चूर्ण को चयनित रंगों और एक लचीले माध्यम के साथ मिलाकर एक विशेष मिश्रण तैयार किया जाता है। इसके बाद इस मिश्रण को जिलेटिन-लेपित कागज़ पर पारंपरिक [[आवरण मुद्रण|जाल-छपाई विधि]] के माध्यम से अंकित किया जाता है, जिसमें एक महीन बुने हुए जाल को फ्रेम पर कसकर लगाया जाता है और इच्छित आकृति के अनुसार एक छाप तैयार की जाती है। यह विधि सतह पर एक पतली और समान परत बनाने में सक्षम होती है।
यदि अत्यधिक चिकनाई या एकरूपता आवश्यक न हो, तो इसी मिश्रण को सीधे ब्रश की सहायता से भी मग की सतह पर लगाया जा सकता है, जिससे हस्तनिर्मित कलात्मकता का स्पर्श मिलता है। इसके अतिरिक्त, एक और अधिक जटिल तकनीक में कागज़ को प्रकाश-संवेदनशील परत से ढककर उस पर छवि अंकित की जाती है, और फिर पराबैंगनी प्रकाश के माध्यम से उस परत को स्थिर किया जाता है।<ref name=print>{{cite web|title=Printing Ceramics|url=http://www.ceramicstoday.com/articles/090798.htm|publisher=सिरेमिक्स टुडे|access-date=2009-08-30|archive-url=https://web.archive.org/web/20090601072522/http://www.ceramicstoday.com/articles/090798.htm|archive-date=2009-06-01|url-status=dead}}</ref>
सूखने के उपरांत “लिथो” कहलाने वाला यह मुद्रित कागज़ लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है, क्योंकि उसमें अंकित छवि स्थिर और संरक्षित रहती है। जब इस लिथो का उपयोग मग पर छवि स्थानांतरित करने के लिए किया जाता है, तो सबसे पहले उसे गरम जल में भिगोकर नरम किया जाता है। इस प्रक्रिया से मुद्रित छवि से युक्त जिलेटिन की पतली परत कागज़ से अलग हो जाती है, जिसे सावधानीपूर्वक मग की सतह पर चढ़ा दिया जाता है।
इसके बाद मग को उच्च ताप पर, लगभग 700 से 750 डिग्री सेल्सियस तक, भट्ठी में पकाया जाता है। इस ताप पर मग की चमकीली परत (ग्लेज़) की ऊपरी सतह हल्की-सी नरम हो जाती है, जिससे स्थानांतरित छवि उसमें स्थायी रूप से समाहित हो जाती है। परिणामस्वरूप, चित्र केवल सतह पर अंकित नहीं रहता, बल्कि मग का अभिन्न हिस्सा बन जाता है—जो दीर्घकाल तक अपनी स्पष्टता और सौंदर्य बनाए रखता है।<ref name=print/>
== भंडारण ==
[[File:Mugs hanging in a ship's mess 01A.jpg|thumb|जहाज के भोजनालय में खूंटियों पर लटके विक्टर शैली के मग]]
[[File:Mugtree1.jpg|thumb|left|upright|मग का पेड़]]
मगों के सुव्यवस्थित भंडारण और आकर्षक प्रदर्शन के लिए ‘मग ट्री’ एक अत्यंत लोकप्रिय और व्यावहारिक उपाय माना जाता है। यह सामान्यतः एक गोल आधार पर स्थापित लकड़ी या धातु का स्तंभ होता है, जिसमें चारों ओर छोटी-छोटी खूंटियाँ लगी रहती हैं।<ref>जेन एनकोना, ब्रूस एनकोना "मग ट्री" {{US patent|D312556}} जारी करने की तिथि: 4 दिसंबर, 1990</ref> इन खूंटियों पर मगों को उनके हत्थों से लटकाया जाता है, जिससे वे न केवल सुरक्षित रहते हैं, बल्कि देखने में भी सुसज्जित प्रतीत होते हैं। यह व्यवस्था रसोई या भोजन कक्ष में स्थान की बचत के साथ-साथ एक सजावटी प्रभाव भी उत्पन्न करती है।
इसके अतिरिक्त, विशेष रूप से निर्मित रैक भी उपलब्ध होते हैं, जिनमें मगों को इस प्रकार टांगा जाता है कि वे आसानी से हाथ में आ सकें और उपयोग के लिए तत्पर रहें। ऐसी व्यवस्थाएँ ऊँची लहरों वाले समुद्री जहाजों में विशेष रूप से उपयोगी सिद्ध होती हैं, जहाँ स्थिरता और सुविधा दोनों का ध्यान रखना आवश्यक होता है।
चूँकि मग अक्सर संग्रहणीय वस्तुओं के रूप में भी संजोए जाते हैं, इसलिए उनके भंडारण और प्रदर्शन के लिए उपयुक्त साधनों और रणनीतियों का चयन अत्यंत महत्त्वपूर्ण हो जाता है। सही व्यवस्था न केवल उनके संरक्षण को सुनिश्चित करती है, बल्कि उनके सौंदर्य और विशिष्टता को भी प्रभावशाली ढंग से प्रदर्शित करती है।
==गणित में ==
[[File:Mug and Torus morph.gif|thumb|upright|एक कॉफी मग और एक डोनट के बीच निरंतर विरूपण यह दर्शाता है कि वे समरूप (टोपोलॉजिकली समतुल्य) हैं।]]
[[संस्थितिविज्ञान]] में मग का उदाहरण अत्यंत प्रसिद्ध और सहज रूप से समझ में आने वाला माना जाता है। इस गणितीय दृष्टिकोण के अनुसार, दो वस्तुएँ तब समतुल्य या होमियोमॉर्फिक कही जाती हैं, जब उन्हें बिना काटे, जोड़े या छेद किए, केवल निरंतर विरूपण के माध्यम से एक-दूसरे में रूपांतरित किया जा सके।<ref>{{cite book|url=https://books.google.com/books?id=S3biKR21i-QC&pg=PA51|page=51|title=Principles of robot motion: theory, algorithms, and implementation|author=हॉवी एम. चोसेट|publisher=एमआईटी प्रेस|year=2005|isbn=0-262-03327-5}}</ref> इसी आधार पर, एक सामान्य मग और डोनट—जिसे [[टॉरस]] कहा जाता है—आपस में समतुल्य माने जाते हैं, क्योंकि मग के हत्थे को धीरे-धीरे फैलाकर और उसके मुख्य भाग को रूपांतरित करके उसे डोनट के आकार में बदला जा सकता है, बिना उसकी संरचना को तोड़े।
इसी सिद्धांत का एक और रोचक उदाहरण दो हत्थों वाला मग है, जो टोपोलॉजिकल रूप से द्वि-टोरस के समतुल्य होता है—एक ऐसी आकृति जो अंक “8” के समान प्रतीत होती है।<ref>{{cite web|url=http://plus.maths.org/issue10/features/topology/|title=In space, do all roads lead to home?|author=जन्ना लेविन|date= जनवरी 1, 2000|access-date= अगस्त 30, 2009|archive-date= जुलाई 31, 2009|archive-url=https://web.archive.org/web/20090731130453/http://plus.maths.org/issue10/features/topology/|url-status=live}}</ref> यहाँ प्रत्येक हत्था एक अतिरिक्त “छिद्र” का प्रतिनिधित्व करता है, जिससे उसकी संरचनात्मक जटिलता बढ़ जाती है।
इसके विपरीत, यदि किसी मग में हत्था न हो—अर्थात वह केवल एक साधारण [[कटोरा|कटोरे]] या बीकर के रूप में हो—तो वह टोपोलॉजी की दृष्टि से एक तश्तरी के समतुल्य माना जाता है। यह समानता विशेष रूप से तब स्पष्ट होती है, जब कच्ची मिट्टी से बने कटोरे को कुम्हार के चाक पर दबाकर चपटा किया जाता है, और वह धीरे-धीरे एक समतल तश्तरी का रूप धारण कर लेता है।<ref>{{cite book|url=https://books.google.com/books?id=0f0v4wLTDmwC&pg=PA250|page=250|title=Computer aided engineering design|author=बीरेंद्र सहाय|publisher=स्प्रिंगर|year=2005|isbn=1-4020-2555-6}}</ref>
== गैलरी==
<gallery mode="packed">
File:Mug of tea, Smithfield Market, City of London.jpg|चाय के मग, यूके
File:Coffee at Dad's Diner (8786564351).jpg|एक विशिष्ट अमेरिकी डिनर मग
File:Enamel mug.jpg|एनामेल मग
File:Kitchenware Steel Mug Rezowan.JPG|स्टील मग
File:Lipton-mug-tea.jpg|चाय के लिए कांच का मग
File:Frog or Surprise mug.JPG|मेंढक वाला मग , टोड या सरप्राइज मग
File:Doughnut-shaped Coffee mug.jpg|डोनट के आकार का मग
File:Rosehage kopp cropped.jpg|मूमिन-थीम वाला मग
File:Entenbecher.jpg|बत्तख की आकृति वाला मग
File:Merchandising Coffee mug from band Dead Can Dance with 'DCD' logo - black.jpg|मर्चेंडाइजिंग के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला मग
File:Mug, traveller's (AM 1966.243-3).jpg|केस सहित फोल्डेबल मेटल यात्री मग
File:Dinermug.jpg|थंब|ऑल्ट=एक ठेठ अमेरिकी मग|अमेरिकी ठेठ मग
File:Wikipedia - filled with knowledge (beskuren).jpg|[[विकिपीडिया]] के लोगो वाला एक मग
</gallery>
==इन्हें भी देखें==
*[[कप]]
== सन्दर्भ ==
{{Reflist}}
== ग्रन्थसूची ==
* {{cite book | last=क्रोननफेल्ड | first=डी. | title=Plastic Glasses and Church Fathers: Semantic Extension From the Ethnoscience Tradition | publisher=ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस | series=ऑक्सफोर्ड स्टडीज इन एंथ्रोपोलॉजिकल लिंग्विस्टिक्स। | year=1996 | isbn=978-0-19-535749-3 | url=https://books.google.com/books?id=0iuGtpfpTh4C&pg=PA6 | access-date=2024-10-29}}
* {{cite journal | last=विर्ज़बिका | first=अन्ना | title=Cups and mugs: Lexicography and conceptual analysis | journal=ऑस्ट्रेलियाई जर्नल ऑफ लिंग्विस्टिक्स| publisher=इन्फॉर्मा यूके लिमिटेड | volume=4 | issue=2 | year=1984 | issn=0726-8602 | doi=10.1080/07268608408599326 | pages=205–255 | url=https://www.researchgate.net/publication/232938621}}
==बाहरी कड़ियाँ==
*{{commons category-inline}}
[[श्रेणी:पीने के उपकरण]]
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ममता बनर्जी
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wikitext
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{{Infobox officeholder
| name = ममता बनर्जी <br /> Mamata banerjee
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| alt = ममता बनर्जी
| office = [[पश्चिम बंगाल के मुख्यमन्त्रियों की सूची|पश्चिम बंगाल की बारहबीं मुख्यमंत्री]]
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}}
'''ममता बैनर्जी''' जन्म: पौष [[१५|15]], 1876 / जनवरी 5, 1955) [[भारत के राज्य तथा केन्द्र-शासित प्रदेश|भारतीय राज्य]] [[पश्चिम बंगाल]] की वर्तमान [[मुख्यमन्त्री (भारत)|मुख्यमन्त्री]] एवं [[राजनीतिक दल|राजनैतिक दल]] [[सर्वभारतीय तृणमूल कांग्रेस|तृणमूल कांग्रेस]] की प्रमुख हैं। लोग उन्हें ''दीदी'' (बड़ी बहन) के नाम से सम्बोधित करते हैं।
== जीवन ==
बनर्जी का जन्म [[कोलकाता]] में गायत्री एवं प्रोमलेश्वर के यहाँ हुआ। उनके पिता की मृत्यु उपचार के अभाव से हो गई थी, उस समय ममता बनर्जी मात्र [[१७|17]] वर्ष की थी। ममता बनर्जी को दीदी के नाम से भी जाना जाता है। वह पश्चिम बंगाल की पहली महिला मुख्यमन्त्री हैं। <ref>{{Cite news|url=https://independentnews.in/how-mamata-banerjee-became-chief-minister-of-new-west-bengal/|title=Mamata banerjee: ममता बनर्जी कैसे बनी कलकत्ता की हर घर की दीदी|last=|first=|date=|work=Indpendent News|access-date=|archive-url=https://web.archive.org/web/20190511035052/https://independentnews.in/how-mamata-banerjee-became-chief-minister-of-new-west-bengal/|archive-date=11 मई 2019|url-status=dead}}</ref> उन्होंने बसन्ती देवी कॉलेज से स्नातक पूरा किया एवं जोगेश चन्द्र चौधरी लॉ कॉलेज से उन्होंने [[विधि|कानून]] की डिग्री प्राप्त की।
== प्रारम्भिक जीवन और शिक्षा ==
ममता बनर्जी का जन्म कोलकाता (पूर्व में कलकत्ता), पश्चिम बंगाल में एक बंगाली हिन्दू परिवार में हुआ था। उनके माता-पिता प्रोमिलेश्वर बनर्जी और गायत्री देवी थे। बनर्जी के पिता, प्रोमिलेश्वर (जो एक स्वतंत्रता सेनानी थे<ref>{{cite AV media|title=Mamata Banarjee life History/ Mamata banarjee Biography|url=https://www.youtube.com/watch?v=pVXIsjhiGi4|publisher=All Bangla News|via=[[यूट्यूब]]|date=2020-05-17|language=bn}}</ref>) की चिकित्सा के अभाव में मृत्यु हो गई, जब वह 17 वर्ष के थे।
1970 में, ममता बनर्जी ने देशबन्धु शिशुपाल से उच्च माध्यमिक बोर्ड की परीक्षा पूरी की। उन्होंने जोगमाया देवी कॉलेज से इतिहास में स्नातक की डिग्री प्राप्त की। बाद में, उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से इस्लामी इतिहास में अपनी मास्टर डिग्री हासिल की। इसके बाद श्री शिक्षाशयन कॉलेज से शिक्षा की डिग्री और जोगेश चन्द्र चौधरी लॉ कॉलेज, कोलकाता से कानून की डिग्री प्राप्त की। उन्हें कलिंग इंस्टीट्यूट ऑफ इण्डस्ट्रियल टेक्नोलॉजी, भुवनेश्वर से डॉक्टरेट की मानद उपाधि भी मिली। उन्हें कलकत्ता विश्वविद्यालय द्वारा डॉक्टरेट ऑफ़ लिटरेचर (डी.लिट) की डिग्री से भी सम्मानित किया गया था।
== राजनीतिक जीवन ==
ममता बन्द्योपाध्याय राजनीति में तब शामिल हो गए जब वह केवल 15 वर्ष के थे। योगमाया देवी कॉलेज में अध्ययन के दौरान, उन्होंने कांग्रेस (आई) पार्टी की छात्र शाखा, छत्र परिषद यूनियंस की स्थापना की, जिसने समाजवादी एकता केन्द्र से संबद्ध अखिल भारतीय लोकतान्त्रिक छात्र संगठन को हराया। भारत (कम्युनिस्ट)। वह पश्चिम बंगाल में कांग्रेस (आई) पार्टी में, पार्टी के भीतर और अन्य स्थानीय राजनीतिक संगठनों में विभिन्न पदों पर रही।।<ref>{{Cite news|url=https://www.ndtv.com/india-news/mamata-banerjee-turns-composer-pens-seven-songs-for-album-roudrachaya-1930670|title=Mamata Banerjee Turns Composer, Pens Seven Songs For Durga Puja|last=Ghosh|first=Aditi|date=11 October 2018|work=NDTV|access-date=10 June 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190811213655/https://www.ndtv.com/india-news/mamata-banerjee-turns-composer-pens-seven-songs-for-album-roudrachaya-1930670|archive-date=11 अगस्त 2019|url-status=live}}</ref>
दिसंबर १९९२ में, ममता ने एक शारीरिक रूप से अक्षम लड़की दीपालि बसाक को (जिसका कथित तौर पर सीपीआई(एम) कार्यकर्ता सौभाग्य बसाक द्वारा बलात्कार किया गया था) [[राइटर्स बिल्डिंग]] में तत्कालीन मुख्यमंत्री [[ज्योति बसु]] के पास ले गई, लेकिन पुलिस ने उन्हे उत्पीड़ित करने के बाद गिरफ्तार कर लिया और हिरासत में ले लिया।<ref name="auto">{{Cite web|url=http://www.millenniumpost.in/why-bengal-can-never-forget-21-july-5597|title=Why Bengal can never forget 21 July|website=www.millenniumpost.in|date=2012-07-21|language=en}}</ref><ref>{{cite news |date=23 March 2016 |title='Political pawns' Didi forgot |website=Telegraph India |url=https://www.telegraphindia.com/west-bengal/39-political-pawns-39-didi-forgot/cid/1321396 |access-date=14 August 2024 }}</ref> उन्होंने संकल्प लिया कि वह केवल मुख्यमंत्री के रूप में उस बिल्डिंग में फिर से प्रवेश करेंगे।<ref>{{Cite web|url=https://www.newslaundry.com/2021/05/03/bengals-election-result-is-narendra-modis-personal-failure|title=Bengal’s election result is Narendra Modi’s personal failure|website=Newslaundry.com|date=2021-05-03|language=en}}</ref>
ममता बनर्जी के नेतृत्व में राज्य युवा कांग्रेस ने २१ जुलाई १९९३ को राज्य की कम्युनिस्ट सरकार के खिलाफ कलकत्ता में राइटर्स बिल्डिंग तक एक विरोध मार्च का आयोजन किया। उनकी मांग थी कि [[भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी)|सीपीएम]] की "वैज्ञानिक धांधली" को रोकने के लिए वोटर आईडी कार्ड को वोटिंग के लिए एकमात्र आवश्यक दस्तावेज बनाया जाए। विरोध के दौरान पुलिस ने १३ लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी और कई अन्य घायल हो गए। इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए पश्चिम बंगाल के तत्कालीन मुख्यमंत्री ज्योति बसु ने कहा कि "पुलिस ने अच्छा काम किया है।" २०१४ की जांच के दौरान, उड़ीसा उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) सुशांत चटर्जी ने पुलिस की प्रतिक्रिया को "अकारण और असंवैधानिक" बताया। न्यायमूर्ति चटर्जी ने कहा, "आयोग इस नतीजे पर पहुंचा है कि यह मामला जलियांवाला बाग हत्याकांड से भी बदतर है।"<ref name="auto"/><ref>{{Cite web|url=https://www.thehindu.com/news/cities/kolkata/1993-kolkata-police-firing-worse-than-jalianwallah-bagh/article10963265.ece|title=Report on Kolkata firing may spark a fresh row|first=Suvojit|last=Bagchi|date=2014-12-29|via=www.thehindu.com|language=en}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://timesofindia.indiatimes.com/assembly-elections-2011/west-bengal/looking-back-at-july-21-1993/articleshow/8310909.cms|title=Looking back at July 21, 1993|website=Times of India|date=2011-05-14|language=en}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://indianexpress.com/article/india/politics/what-happened-on-july-21-1993/|title=What had happened on July 21 1993 at Writers’ building in West Bengal?|date=2014-12-29|language=en}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.telegraphindia.com/west-bengal/what-happened-on-july-21-1993/cid/1266400|title=What happened on July 21, 1993|website=www.telegraphindia.com|language=en}}</ref>
१९९७ में, तत्कालीन पश्चिम बंगाल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सोमेंद्र नाथ मित्रा के साथ राजनीतिक विचारों में अंतर के कारण, बनर्जी ने पश्चिम बंगाल में कांग्रेस पार्टी छोड़ दी और [[सर्वभारतीय तृणमूल कांग्रेस]] की स्थापना की। यह जल्दी ही राज्य में लंबे समय से शासन कर रही कम्युनिस्ट सरकार का प्रधान विपक्षी दल बन गया।
२० अक्टूबर २००६ को ममता ने पश्चिम बंगाल में [[बुद्धदेव भट्टाचार्य]] सरकार की औद्योगिक विकास नीति के नाम पर जबरन भूमि अधिग्रहण और स्थानीय किसानों के खिलाफ किए गए अत्याचारों का विरोध किया। जब [[इंडोनेशिया]] स्थित सलीम समूह के मालिक बेनी संतोसो ने पश्चिम बंगाल में एक बड़े निवेश का वादा किया था, तो सरकार ने उन्हें कारखाना स्थापित करने के लिए हावड़ा में एक खेती की जमीन दे दी थी। इसके बाद राज्य में विरोध प्रदर्शन तेज हो गया। भारी बारिश के बीच संतोसो के आगमन के विरोध में ममता और उनके समर्थक ताज होटल के सामने जमा हो गए, जहां संतोसो पहुंचे थे, जिसे पुलिस ने बंद कर दिया था। जब पुलिस ने उन्हें हटाया तो उन्होंने बाद में संतोसो के काफिले का पीछा किया। सरकार ने एक योजनाबद्ध "काला झंडा" प्रदर्शन कार्यक्रम से बचने के लिए संतोसो के कार्यक्रम को समय से तीन घंटे पहले कर दिया था।<ref>{{Cite web|title=Weather plays spoilsport for TMC|url=http://www.deccanherald.com/deccanherald/oct212005/national18114720051020.asp|date=2005-10-21}}</ref><ref>{{Cite web|title=Missing on bandh day: its champions -- Mamata stays indoors, Cong scarce|url=http://www.telegraphindia.com/1061010/asp/bengal/story_6851157.asp|date=2006-10-10|archive-date=2007-09-30|archive-url=https://web.archive.org/web/20070930041000/http://www.telegraphindia.com/1061010/asp/bengal/story_6851157.asp|url-status=dead
}}</ref>
नवंबर २००६ में, ममता को [[सिंगूर]] में [[टाटा नैनो]] परियोजना के खिलाफ एक रैली में शामिल होने से पुलिस ने जबरन रोक दिया था। ममता [[पश्चिम बंगाल विधानसभा]] में उपस्थित हुईं और ईसका विरोध किया। उन्होंने विधानसभा में हि एक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई और १२ घंटे के बांग्ला बंद की घोषणा की।<ref name="Trinamool_violence">{{cite web |title=Trinamool unleashes violence in West Bengal|url=http://www.hindustantimes.com/news/181_1856399%2C000900030001.htm |date=30 November 2006
|url-status=dead |archive-url=https://web.archive.org/web/20070930015135/http://www.hindustantimes.com/news/181_1856399%2C000900030001.htm
|archive-date=30 September 2007 }}</ref> तृणमूल कांग्रेस के विधायकों ने विधानसभा में तोड़फोड़ की<ref>{{cite news|date=2 December 2006|title=Heritage vandalised in Bengal House|work=[[द टाइम्स ऑफ़ इण्डिया]]|url=http://articles.timesofindia.indiatimes.com/2006-12-02/india/27828165_1_bengal-house-assembly-building-benches|url-status=dead|archive-url=https://web.archive.org/web/20121103201138/http://articles.timesofindia.indiatimes.com/2006-12-02/india/27828165_1_bengal-house-assembly-building-benches|archive-date=3 November 2012}}</ref> और सड़कों को जाम किया।<ref name="Trinamool_violence" /> फिर १४ दिसंबर २००६ को बड़े पैमाने पर हड़ताल का आह्वान किया गया। सरकार द्वारा कृषि भूमि के जबरन अधिग्रहण के विरोध में ममता ने ४ दिसंबर को कोलकाता में २६ दिनों की ऐतिहासिक भूख हड़ताल शुरू की। उनके स्वास्थ्य को लेकर चिंतित तत्कालीन राष्ट्रपति [[ए॰ पी॰ जे॰ अब्दुल कलाम]] ने इस मुद्दे को सुलझाने के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री [[मनमोहन सिंह]] से बात की। कलाम ने "जीवन अनमोल है" कहते हुए ममता से अपना अनशन खत्म करने की अपील की। मनमोहन सिंह का एक पत्र पश्चिम बंगाल के तत्कालीन राज्यपाल [[गोपालकृष्ण गांधी]] को फैक्स किया गया और फिर इसे तुरंत ममता को दिया गया। पत्र मिलने के बाद ममता ने आखिरकार २९ दिसंबर की आधी रात को अपना अनशन तोड़ दिया।<ref>{{Cite web|date=29 December 2006|url=https://www.hindustantimes.com/india/mamata-ends-25-day-hunger-strike/story-s7gIzBR4FvivAKFuYozrLM.html|title=Mamata ends 25-day hunger strike|website=Hindustan Times}}</ref><ref>{{Cite web|date=4 December 2020|url=https://www.tribuneindia.com/news/nation/farmers-agitation-mamata-reminds-people-of-her-26-day-hunger-strike-179907|title=Mamata Banerjee dials protesting farmers, assures TMC's support|website=The Tribune}}</ref><ref>{{Cite web|date=4 December 2020|url=https://www.sentinelassam.com/national-news/west-bengal-cm-mamata-banerjee-reminds-people-of-her-26-day-hunger-strike-514753|title=West Bengal CM Mamata Banerjee reminds people of her 26-day hunger strike|website=The Sentinel}}</ref><ref>{{Cite web|date=4 December 2020|url=https://www.thestatesman.com/bengal/mamata-banerjee-remembers-singur-hunger-strike-context-ongoing-farmers-protest-1502938968.html|title=Mamata Banerjee remembers Singur hunger strike in context of ongoing farmers protest|website=The Statesman}}</ref> (मुख्यमंत्री बनने के बाद उनके पहले कृत्यों में से एक था सिंगूर के किसानों को ४०० एकड़ जमीन लौटाना।<ref>{{Cite web|url=https://www.youtube.com/watch?v=Z-Qg-XAlmMc|title=The Rise Of Mamata: From A Youth Congress Worker To Defeating BJP & Becoming Bengal CM Third Time|via=www.youtube.com|date=2 May 2021|language=en}}</ref> २०१६ में [[भारत का उच्चतम न्यायालय|सुप्रीम कोर्ट]] ने घोषणा की कि सिंगूर में टाटा मोटर्स प्लांट के लिए पश्चिम बंगाल की वाम मोर्चा सरकार द्वारा ९९७ एकड़ भूमि का अधिग्रहण अवैध था।<ref>{{Cite web|url=https://www.livemint.com/Politics/Yrl5OkSielFvHttnG4AajM/CPM-govts-acquisition-of-land-for-Tata-Motors-in-Singur-ill.html?facet=amp|title=Singur case: Supreme Court declares land acquisition for Tata plant illegal|website=www.livemint.com|date=1 September 2016|language=en}}</ref>)
जब पश्चिम बंगाल सरकार [[पूर्व मेदिनीपुर जिला|पूर्वी मिदनापुर]] के [[नंदीग्राम]] में एक रासायनिक केंद्र स्थापित करना चाहती थी, तो तमलुक के सांसद लक्ष्मण सेठ की अध्यक्षता में हल्दिया विकास बोर्ड ने उस क्षेत्र में भूमि अधिग्रहण के लिए एक नोटिस जारी किया।<ref>{{Cite web|title=False alarm sparks clash|url=http://www.telegraphindia.com/1070104/asp/frontpage/story_7218357.asp|date=2007-01-04|archive-url=https://web.archive.org/web/20100815053937/http://www.telegraphindia.com/1070104/asp/frontpage/story_7218357.asp|archive-date=2010-08-15|url-status=dead}}</ref><ref>{{Cite web|title=Haldia authority's notification created confusion: Buddhadeb|url=http://www.hindu.com/2007/01/10/stories/2007011006381200.htm|date=2007-01-10|archive-url=https://web.archive.org/web/20080915182155/http://www.hindu.com/2007/01/10/stories/2007011006381200.htm|archive-date=2008-09-15|url-status=dead}}</ref> तृणमूल कांग्रेस इसका विरोध करती है। मुख्यमंत्री ने नोटिस को रद्द घोषित कर दिया।<ref>{{Cite web|title=Sub-Inspector killed in Nandigram|url=http://www.hindu.com/2007/02/08/stories/2007020806021200.htm|date=2007-02-08|archive-url=https://web.archive.org/web/20080327222553/http://www.hindu.com/2007/02/08/stories/2007020806021200.htm|archive-date=2008-03-27|url-status=dead}}</ref> किसानों की छह महीने की नाकेबंदी को हटाने के लिए १४ मार्च २००७ को पुलिस द्वारा की गई गोलीबारी में चौदह लोग मारे गए थे। तृणमूल कांग्रेस ने सरकार के खिलाफ स्थानीय किसान आंदोलन का नेतृत्व किया।<ref>{{Cite web|title=Stockpile squad trail heads towards party - Phone records spill Nandigram secret|url=http://telegraphindia.com/1070319/asp/frontpage/story_7537027.asp|date=2007-03-19|archive-url=https://web.archive.org/web/20070930042427/http://telegraphindia.com/1070319/asp/frontpage/story_7537027.asp|archive-date=2007-09-30|url-status=dead}}</ref> इसके बाद कई लोग राजनीतिक संघर्ष में विस्थापित हुए थे।<ref>{{Cite web|title=Red-hand Buddha: 14 killed in Nandigram re-entry bid|url=http://www.telegraphindia.com/1070315/asp/frontpage/story_7519166.asp|date=2007-03-15|archive-url=https://web.archive.org/web/20070317192827/http://www.telegraphindia.com/1070315/asp/frontpage/story_7519166.asp|archive-date=2007-03-17|url-status=dead}}</ref> नंदीग्राम में अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं द्वारा की गई हिंसा का समर्थन करते हुए बुद्धदेव भट्टाचार्य ने कहा था "उन्हें (विपक्षों को) एक ही सिक्के में वापस भुगतान किया गया है।"<ref>{{Cite web|url=https://zeenews.india.com/news/nation/violent-elements-paid-back-in-their-own-coin_407133.html|title=`Violent elements paid back in their own coin`|date=2007-11-13|website=Zee News}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.rediff.com/news/2007/nov/13nandi6.htm|title=Oppn paid back in the same coin, says Bengal CM|website=www.rediff.com}}</ref> नंदीग्राम नरसंहार के विरोध में, कलकत्ता में बुद्धिजीवियों का एक बड़ा वर्ग वाम मोर्चा सरकार के खिलाफ आंदोलन में शामिल हो गया।<ref>{{Cite web|title=Nandigram people's struggle "heroic": Clark|url=http://news.oneindia.in/2007/11/30/nandigram-peoples-struggle-heroic--clark-1196438590.html|archive-url=https://web.archive.org/web/20120217023009/http://news.oneindia.in/2007/11/30/nandigram-peoples-struggle-heroic--clark-1196438590.html|archive-date=2012-02-17|url-status=dead}}</ref><ref>{{Cite web|title=Nandigram says 'No!' to Dow's chemical hub|url=http://www.iacboston.org/india/1207-nandigram-says-no.html|archive-url=https://web.archive.org/web/20090706032521/http://www.iacboston.org/india/1207-nandigram-says-no.html|archive-date=2009-07-06|url-status=dead}}</ref><ref>{{Cite web|title=The Great Left Debate: Chomsky to Saddam, Iraq to Nandigram|url=http://www.indianexpress.com/story/246969.html|date=2007-12-05}}</ref> नंदीग्राम आक्रमण के दौरान सीपीआइ(एम) कार्यकर्ताओं पर ३०० महिलाओं और लड़कियों से छेड़छाड़ और बलात्कार करने का आरोप लगा था।<ref>{{cite news |last1=सरकार |first1=अरिन्दम |title=Mamata promises to marry off raped girls of Nandigram |url=https://www.hindustantimes.com/kolkata/mamata-promises-to-marry-off-raped-girls-of-nandigram/story-umlmKryBUWdkP6re98mV2L.html |newspaper=[[हिन्दुस्तान टाईम्स]] |access-date=27 अप्रैल 2019 |date=26 अप्रैल 2007}}</ref><ref>{{cite web|date=19 दिसम्बर 2007|title=CPI(M) leaders raped mother and daughters in Nandigram: CBI|url=https://www.indiatoday.in/latest-headlines/story/cpim-leaders-raped-mother-and-daughters-in-nandigram-cbi-21735-2007-12-19|work=इंडिया टुडे|access-date=30 नवम्बर 2021}}</ref> प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और तत्कालीन गृह मंत्री [[शिवराज पाटिल]] को लिखे पत्र में ममता बनर्जी ने सीपीआइ(एम) पर नंदीग्राम में राष्ट्रीय आतंकवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाया।<ref>{{Cite web|title=You are not what you were - Ashok Mitra after 14th November, 2007|url=http://sanhati.com/articles/446/|date=2007-11-15}}</ref><ref>{{Cite web|title='Go back Medha' posters in Kolkata|url=http://www.indiaenews.com/india/20061207/31650.htm|date=2006-12-07|archive-url=https://web.archive.org/web/20070111170928/http://www.indiaenews.com/india/20061207/31650.htm|archive-date=2007-01-11|url-status=dead}}</ref> आंदोलन के मद्देनजर, सरकार को नंदीग्राम केमिकल हब परियोजना को स्थगित करने के लिए मजबूर होना पड़ा। लेकिन ममता किसान आंदोलन का नेतृत्व करके अपार लोकप्रियता हासिल करने में सफल रहीं। उपजाऊ कृषि भूमि पर उद्योग के विरोध और पर्यावरण की सुरक्षा का जो संदेश नंदीग्राम आंदोलन ने दिया वह पूरे देश में फैल गया।
==यह भी देखें ==
*[[माँ माटि मानूश]]
== सन्दर्भ ==
{{Reflist}}
[[श्रेणी:1955 में जन्मे लोग]]
[[श्रेणी:जीवित लोग]]
[[श्रेणी:पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री]]
[[श्रेणी:१०वीं लोक सभा के सदस्य]]
[[श्रेणी:११वीं लोक सभा के सदस्य]]
[[श्रेणी:१२वीं लोक सभा के सदस्य]]
[[श्रेणी:१३वीं लोक सभा के सदस्य]]
[[श्रेणी:१४वीं लोक सभा के सदस्य]]
[[श्रेणी:१५वीं लोकसभा के सदस्य]]
[[श्रेणी:भारत के रेल मंत्री]]
[[श्रेणी:सर्वभारतीय तृणमूल कांग्रेस के राजनीतिज्ञ]]
[[श्रेणी:भारतीय महिला राजनीतिज्ञ]]
[[श्रेणी:पश्चिम बंगाल के सांसद]]
{{भारत-राजनीतिज्ञ-आधार}}
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प्राकृत साहित्य
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अनुनाद सिंह
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मध्ययुगीन [[प्राकृत|प्राकृतों]] का गद्य-पद्यात्मक [[साहित्य]] विशाल मात्रा में उपलब्ध है। प्राकृत, भारतीय उपमहाद्वीप में जनभाषा रही है। यह [[आगम (जैन)|जैन आगमों]] की भाषा मानी जाती है। [[महावीर स्वामी|भगवान महावीर]] ने इसी प्राकृतभाषा के [[अर्धमागधी]] रूप में अपना उपदेश दिया था। यह [[शिलालेख|शिलालेखों]] की भी भाषा रही है। [[हाथीगुम्फा शिलालेख|हाथीगुफा शिलालेख]], [[नासिक शिलालेख]], [[अशोक के शिलालेख]] प्राकृत भाषा में ही हैं। प्राकृत में [[व्याकरण]] ग्रन्थ, नाटक, गीत, धार्मिक उपदेश आदि विपुल साहित्य है।
प्राकृत साहित्य में सबसे प्राचीन वह [[अर्धमागधी]] साहित्य है जिसमें [[जैन धर्म|जैन]] धार्मिक ग्रंथ रचे गए हैं तथा जिन्हें समष्टि रूप से [[आगम (जैन)|जैनागम]] या [[आगम (जैन)|जैनश्रुतांग]] कहा जाता है।
[[कथा]] साहित्य की दृष्टि से सर्वाधिक प्राचीन रचना [[बड्डकहा]] ([[बृहत्कथा]]) भी प्राकृत भाषा ([[पैशाची]]) में ही लिखी गयी थी। पादलिप्तसूरी की तरंगवई, संघदासगणि की वसुदेवहिण्डी, हरिभद्रसूरि विरचित समराइच्चकहा, उद्योतनसूरिकृत [[कुवलयमाला]] आदि कृतियाँ उत्कृष्ट कथा-साहित्य की निदर्शन हैं।
[[विमलसूरि]] विरचित ‘[[पउमचरिउ|पउमचरियं]]’ (पद्मचरितम्) जैन रामायण का ग्रन्थ है जो प्राकृत में ही लिखा गया है। जंबूचरियं, सुरसुन्दरीचरियं, महावीरचरियं आदि अनेक प्राकृत चरितकाव्य हैं जिनके अध्ययन से तत्कालीन समाज एवं संस्कृति का बोध होता है।
[[हाल]]कवि की [[गाहासतसई]] (गाथा सप्तशती) [[बिहारी (साहित्यकार)|बिहारी]] की[[बिहारी सतसई|सतसई]] का प्रेरणास्रोत आधारग्रन्थ रही है। गाहा सतसई [[शृंगार रस|शृंगाररस]] प्रधान काव्य है, जिस पर १८ टीकाएँ लिखी जा चुकी हैं। [[रुद्रट]] , [[मम्मट]], [[विश्वनाथ]] आदि काव्य शास्त्रियों ने गाहासतसई की मुक्तकण्ठ से प्रशंसा की है तथा संस्कृत के काव्यशास्त्रों में गाहासतसई कवि [[भट्ट मथुरानाथ शास्त्री]] ने इस पर ‘सर्वङ्कषा’ संस्कृत टीका लिखी है।
[[जयवल्लभ]] द्वारा रचित ‘वज्जालग्ग’ भी प्राकृत की एक महत्वपूर्ण रचना है, जिसमें प्राकृत भाषा के सम्बन्ध में कहा है कि-
: ''ललिए महुरक्खरए जुवईयणवल्लहे ससिगारे।
: ''सन्ते पाइयकव्वे को सक्कइ सक्कयं पढिउं॥
अर्थात् ललित एवं मधुर अक्षरों से युक्त, युवतियों को प्रिय तथा शृंगाररसयुक्त [[प्राकृत]] काव्य के होते हुए [[संस्कृत]] को कौन पढ़ना चाहेगा? यह कथन प्राकृत की महत्ता को सुबोधता, सुग्राह्यता, सरसता आदि विशेषताओं से स्थापित करता है।
== जैनागम ==
{{मुख्य|आगम (जैन)}}
इस साहित्य की प्राचीन परम्परा यह है कि अंतिम जैन तीर्थंकर [[महावीर]] का विदेह प्रदेश में जन्म लगभग 600 ई. पूर्व हुआ। उन्होंने 30 वर्ष की अवस्था में मुनि दीक्षा ले ली और 12 वर्ष तप और ध्यान करके [[कैवल्य]]ज्ञान प्राप्त किया। तत्पश्चात् उन्होने अपना धर्मोपदेश सर्वप्रथम [[राजगृह]] में और फिर अन्य नाना स्थानों में देकर [[जैन धर्म]] का प्रचार किया। उनके उपदेशों को उनके जीवनकाल में ही उनके शिष्यों ने 12 अंगों में संकलित किया। उनके नाम हैं-
:(1) [[आचारांग]], (2) सूत्रकृतांग, (3) [[स्थानांग सूत्र|स्थानांग]], (4) समयांग, (5) भगवती व्याख्या प्रज्ञप्ति, (6) न्यायधर्म कथा (णायाधम्महाओ),
:(7) उपासकादशा, (8) अंतकृदशा, (9) अनुत्तेरोपपातिक (10) प्रश्न व्याकरण, (11) विपाक सूत्र और (12) [[दृष्टिवाद]]।
इन अंगों की भाषा वही अर्धमागधी प्राकृत है जिसमें महावीर ने अपने उपदेश दिए। संभवतः यह आगम उस समय लिपिबद्ध नहीं किया गया एवं गुरु-शिष्य परंपरा से मौखिक रूप में प्रचलित रहा और यही उसके '''श्रुतांग''' कहलाने की सार्थकता है।
महावीर का निर्वाण 72 वर्ष की अवस्था में ई. पू. 527 में हुआ और उसके पश्चात् शीघ्र ही उक्त अंगों की परम्परा में विप्रतिपत्तियाँ उत्पन्न होने लगीं। जैनधर्म के दिगम्बर संप्रदाय की मान्यता है कि श्रुतांगों का क्रमश: ह्रास होते-होते उनका खंडशः ज्ञान कुछ आचार्यो को रहा और उसके आधार से उन्होंने नए रूप में सैद्धांतिक ग्रंथ लिखे, जिनके प्राचीनतम उदाहरण कर्मप्राकृत ([[षट्खंडागम]]) व कषायप्राकृत (कसायपाहुड) नामक सूत्र हैं। किंतु श्वेतांबर संप्रदाय की मान्यता है कि उक्त आगम ग्रंथों को उत्पन्न होती हुई विकृतियों से बचाने के लिये समय-समय पर मुनियों ने उनकी वाचनाएँ कीं और उन्हें सुरक्षित रखने का प्रयत्न किया। प्रथम वाचना महावीर निर्वाण से 160 वर्षो पश्चात् [[पाटलिपुत्र]] में [[स्थूलभद्राचार्य]] की अध्यक्षता में हुई जिसमें 11 अंगों का संकलन किया गया। 12वें अंग का उपस्थित मुनियों में से किसी को भी व्यवस्थित ज्ञान न होने से उसका उद्धार नहीं किया जा सका। जैन मुनियों की अपरिग्रह वृत्ति तथा वर्षाकाल को छोड़ निरंतर परिभ्रमण एवं उस काल की कठिनाइयों के कारण यह अंगज्ञान पुन: छिन्न-भिन्न होने लगा। आर्य स्कंदित ने [[मथुरा]] में मुनिसंघ का सम्मेलन किया और उन्हीं 11 अंगों को एक बार पुन: व्यवस्थित करने का प्रयत्न किया। देवर्धिगणि क्षमाश्रमण ने वलभी नगर में मुनिसम्मेलन कराया और जैन आगम को वह रूप दिया जिसमें वह आज उपलब्ध है। इस वाचना में उपर्युक्त 11 अंगों के अतिरिक्त अन्य अनेक ग्रंथों को सुव्यवस्थित करने का प्रयत्न किया गया जो इस कालावधि तक रचे जा चुके थे। ये थे - 12 उपांग, 6 छेदसूत्र, 4 मूलसूत्र, 10 प्रकीर्णक और दो चूलिकाएँ। इस प्रकार वलभी वाचना के फलस्वरूप अर्धमागधी जैनागम के 45 ग्रंथ व्यवस्थित हो गए जो आज भी उपलब्ध हैं, तथा जिनका संक्षेप में परिचय निम्न प्रकार है :
=== ग्यारह अंग ===
१. '''आचारंग''' - इस श्रुतग्रंथ में मुनियों के पालने योग्य सदाचार का विवरण दिया गया है। यह दो श्रुतस्कंधों में विभाजित है। प्रथम श्रुतस्कंध में 9 अध्ययन और उनके अंतर्गत 44 उद्देश्यक हैं। ग्रंथ का यह भाग मूल एवं भाषा, शैली और विषय की दृष्टि से प्राचीनतम है। द्वि. श्रुतस्कंध इसकी चूलिका के रूप में है और वह तीन चूलिकाओं एवं 16 अध्ययनों में विभाजित है। प्रथम श्रुतस्कंध के नवमें उपधान नामक अध्ययन में महावीर की उग्र तपस्या एवं लाढ़ वज्रभूमि, शुभ्रभूमि आदि स्थानो में विहार करते हुए घोर उपसर्गो के सहने का मार्मिक वर्णन है।
२. '''सूत्रकृतांग''' - इसके भी दो श्रुतस्कंध हैं जिनमें क्रमश: 16 तथा 7 अध्ययन हैं1 प्रथम श्रुतांग प्राय: मद्यमय है और दूसरे में गद्य पद्य दोनों का प्रयोग हुआ है। इसमें प्राचीन काल के दार्शनिक वादों जैसे क्रियावाद, अक्रियावाद, नियतिवाद, अज्ञानवाद आदि का प्ररूपण तथा निराकरण किया गया है तथा श्रमण, ब्राह्मण, भिक्षु, निग्र्रंथ आदि के स्वरूप की व्याख्या की गई है। अंतिम अध्ययन नालदीय में महावीर के शिष्य गौतम तथा पाश्र्वनाथ की परंपरा के उदक पेढ़ालपुत्र के बीच वार्तालाप और चातुर्याम धर्म के संबंध में विचार जैनधर्म की महावीर से पूर्वपरंपरा पर प्रकाश डालता है।
३. '''स्थानांग''' - इसमें 10 अध्ययन हैं जिनमें क्रमश: एक से लेकर 10 तक की संख्यावाले पदार्थो का निरूपण किया गया है, जैसे एक दर्शन, एकचारित्र, एक समय, इत्यादि; दो क्रियाएँ जीव और अजीव; वृक्ष तीन प्रकार केहृ पत्रोपेत, फलोपेत और पुष्पोपेत, तीन वेद ऋक्, यजु और साम इत्यादि। इस पद्धति से इस ग्रंथ में अनेक विषयों का बहुमुखी वर्णन आया है जो अपने ढंग का एक विश्वकोश ही है। उसकी यह शैली पालि त्रिपिटक के अंगुततर निकाय से समता रखती है।
४. '''समवायांग''' - यह भी स्थानांग के सदृश एकोत्तर क्रम से वस्तुओं का निरूपण करनेवाला विश्वकोश है। विशेषता इसकी यह है कि इसमें संख्याक्रम क्रमश: बढ़ता हुआ शतों, सहस्रों, शतसहस्त्रों तथा कोटियों तक पहुँचाया गया है। यथास्थान इसमें जैन आगम तथा तीर्थकर, चक्रवर्ती आदि त्रिरसठ शलाकापुरुषों का परिचय नामवली पद्धति से वर्णित है।
५. '''भगवती व्याख्या प्रज्ञाप्ति''' - यह रचना आकार और विषय की दृष्टि जैनागम में सबसे अधिक विशाल और महत्वपूर्ण है। इसमें 41 शतक हैं और प्रत्येक शतक अनेक उद्देशक में विभाजित है। शैली प्रश्नोत्तरात्मक है। प्रश्नकर्ता हैं गौतम गणधर और उत्तरदाता स्वयं महावीर। टीकाकारों के अनुसार इसमें 36 सहस्र प्रश्नोत्तरों का समावेश है। दर्शन, आचार, इतिहास, भूगोल आदि समस्त विषयों पर किसी न किसी प्रसंग से प्रकाश डाला गया है। महावीरकाल की राजनीतिक परिस्थिति और उस समय के घोर युद्ध आदि का वर्णन जैसा इस ग्रंथ में आया है वैसा अन्यत्र कहीं नहीं पाया जाता।
६. '''न्यायधर्मकथा''' - इस अंग का प्राकृत नाम न्यायधम्मकहाओ है और उसका संस्कृत रूपांतर ज्ञातृ या ज्ञाताधर्मकथा भी किया जाता है जिसका अर्थ होता है ज्ञातृ अर्थात् ज्ञातृपुत्र महावीर का धर्मोपदेश। विषय को देखते हुए इसका प्रथम नाम ही अधिक सार्थक प्रतीत होता है क्योंकि इसमें कथाओं द्वारा किन्हीं न्यायों अर्थात् नीतिवाक्यों का स्पष्टीकरण किया गया है।
७. '''उपासकदशा''' - नामानुसार इसमें भी उपासक, कामदेव, चुलणीप्रिय आदि दस ऐसे उपासकों के चरित्र वर्णित हैं जिन्होंने कठिनाइयों के बीच धर्मपालन किया।
८. '''अंतकृदद्शा''' - नामानुसार इसमें भी उपासक दशा के समान दस अध्ययन ही रहे होंगे। किंतु वर्तमान में यहाँ आठ वर्ग हैं और प्रत्येक वर्ग अनेक अध्ययनों में विभाजित हैं। इसमें ऐसे साधुओं के चरित्र वर्णित किए गए हैं, जिन्होंने तपस्या द्वारा संसार का अंत कर निर्वाण प्राप्त किया।
९. '''अनुत्तरोपपातिक दशा''' - इसमें ऐसे मुनियों के चरित्र वर्णित हैं जिन्हें अपनी तपस्या के बीच घोर उपसर्ग सहन करने पड़े और उन्होंने मरकर उन अनुत्तर नामक स्वर्गो में जन्म लिया जहाँ से केवल एक बार पुन: मनुष्य जन्म धारण कर निर्वाण प्राप्त किया जाता है।
१०. '''प्रश्नव्याकरण''' - ग्रंथ के नाम से तथा स्थानांग एवं समवायांग से प्राप्त इस श्रुतांग के विषयपरिचय से ज्ञात होता है कि इसमें मूलत: प्रश्नोत्तर के रूप में नाना सिद्धांतों की व्याख्या की गई थी। किंतु वर्तमान में ऐसा न होकर इसके प्रथम खंड में हिंसादि पाँच पापों का और दूसरे खंड में अहिंसादि व्रतों का प्ररूपण पाया जाता है।
११. '''विपाकसूत्र''' - इसमें दो श्रुतस्कंध हैं और प्रत्येक में दस दस-अध्ययन हैं। इसमें जीव के अच्छे और बुरे कर्मो से फलित होनेवाले सुख दु:खों का बड़ा वैचित्र्य है जिसमें जीवन की सभी दशाओं का वर्णन आ गया है। जैनधर्म के कर्मसिद्धांतनुसार जीवन के समस्त अनुभव सुकर्म एवं दुष्कर्मो के परिणाम ही हैं। इसका इस श्रुतांग में विस्तार से प्ररूपण पाया जाता है।
=== बारह उपांग ===
(१) '''औपपातिक''' में नाना साधनाओं द्वारा पुनर्जन्म के स्वरूप का नाना उदाहरणों सहित व्याख्यान किया गया है। इसकी यह भी एक विशेषता है कि जिन नगर, राजा, चैत्य आदिक का अन्यत्र संकेत मात्र पाया जाता है, उसका यहाँ पूरा वर्णन मिलता है।
(२) '''रायपसेणिज्जं''' - इसका संस्कृत रूपांतर राजप्रश्नीय किया जाता है, किंतु संभवत: उसका संबंध कोशलनरेश प्रसेनजित से रहा है जो पहले भौतिकवादी था, किंतु पश्चात् केशी मुनि के उपदेश से सम्यगदृष्टि बन गया। यह ग्रंथ पालि "मिलिंद पंहो" से तुलनीय है।
(३) '''जीवाजीवाभिगम''' - में नामानुसार प्रश्नोत्तर के रूप में जीव और अजीव के भेदप्रभेदों का वर्णन किया गया है।
(४) '''प्रज्ञापना''' में जैन दर्शन की नाना व्यवस्थाओं का विवरण हुआ है, जिससे यह ग्रंथ भगवती के समान जैन सिद्धांत का ज्ञानकोश ही कहा जा सकता है।
(५) वें, (६) ठे और (७) वें उपांगों के नाम क्रमश: '''सूर्यप्रज्ञप्ति''', '''जंबुद्वीपप्रज्ञप्ति''' और '''चंद्रप्रज्ञाप्ति''' हैं जिनमें उन लोकों का जैन मान्यतानुसार वर्णन किया गया है।
(8) '''कल्पिका''' व (9) '''कल्पावतंसिका''' में मगधराज श्रेणिक, उसके पुत्र अजातशत्रु एवं उसके पोत्रों के चरित्र वर्णित हैं जिन्होंने अपने अपने कर्मानुसार नरक तथा स्वर्गगतियाँ प्राप्त कीं।
(१०) '''पुष्पिका''' एवं (११) '''पुष्पचूला''' में अनेक स्त्री पुरुषों की धार्मिक साधना, स्वर्गसुखों और महावीर की वंदना के लिये आगमन का वर्णन है।
(१२) '''वृष्णिदशा''' में द्वारावती के राजा कृष्णवासुदेव एवं तीर्थकर नेमिनाथ के चरित्र का वर्णन है।
=== छह छेदसूत्र ===
(१) निशीथ, (२) महानिशीथ, (३) व्यवहार, (४) आचारदशा, (५) कल्पसूत्र और (६) पंचकल्प।
इनमें मुनियों की साधनाओं एवं व्रतों का भंग होने पर प्रायश्चित्त का विचार किया गया है। इन सबमें कल्पसूत्र का सबसे अधिक प्रचार है। मुनि आचार के अतिरिक्त इसमें महावीर तथा ऋषभदेव, नेमिनाथ और पश्र्वनाथ के चरित्र भी वर्णित हैं।
=== चार मूलसूत्र ===
(1) उत्तराध्ययन, (2) दश्वैकालिक, (3) आवश्यक और (4) पिण्डनिर्युक्ति
इन सभी में मुख्यतया मुनि आचार का वर्णन है। इनमें उत्तराध्ययन की बड़ी प्रतिष्ठा है।
=== दस प्रकीर्णक ===
:(1) चतु:शरण (2) आतुर प्रत्याख्यान, (3) महाप्रत्याख्यान (4) भक्त परिज्ञा, (5) तंदुलवैचारिक,
:(6) संस्तारक (7) गच्छाचर, (8) गणिविद्य, (9) देवंद्रस्तव और (10) मरणसमाधि।
ये सभी प्रायः पद्यात्मक हैं और इनमें मुनियों के पालने योग्य नीति का उपदेश दिया गया है।
=== दो चूलिका सूत्र ===
(1) नंदी और (2) अनुयोगद्वार।
नंदी में ज्ञान के भेदों व श्रुतांगों का विस्तार से वर्णन है तथा अनुयोगद्वार में प्रश्नोत्तरों के रूप में नाना विषयों का परिचय कराया गया है जिसमें रसों व संगीत आदि का भी समावेश है।
उपरोक्त ही 45 जैनधार्मिक ग्रंथ है जो उपलब्ध अर्धमागधी साहित्य कहा जा सकता है। इन ग्रंथों पर निर्युक्ति, चूर्ण, टीका, भाष्य, वृत्ति आदि व्याख्यात्मक विशाल साहित्य प्राकृत और संस्कृत भाषाओं में पद्य और पद्यात्मक है। समस्त निर्युक्तियाँ भद्रबाहुकृत व चूर्णियाँ जिनदासगणि महत्तर कृत मानी जाती हैं। इनके भीतर जैन सिद्धांत के विवेचन के अतिरिक्त आख्यानात्मक रचनाओं का बड़ा वैपुल्य है जो साहित्य और इतिहास की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
दिगंबर संप्रदाय में इन 45 आगम ग्रंथों की मान्यता और प्रचार नहीं है। उस परम्परा में लुप्त हुए द्वादशांग श्रुत के आधार से [[शौरसेनी प्राकृत]] में स्वतंत्र साहित्य का निर्माण हुआ जिसकी सर्वप्राचीन रचनाएँ [[आचार्य पुष्पदंत|पुष्पदंत]] और [[भूतबलि|भूतबलिकृत]] '''कर्मप्राभृत''' नामक ग्रंथ हैं। इनमें जैन कर्मसिद्धांत का बड़ी व्यवस्था तथा सूक्ष्मता से प्ररूपण किया गया है। इनका रचनाकाल महावीर निर्वाण के के शीघ्र ही पश्चात् हुआ सिद्ध होता है। इनपर समय-समय पर अनेक टीकाएँ प्राकृत तथा संस्कृत में लिखी गईं, जिनमें से वर्तमान में सुप्रसिद्ध धवल और जयधवल नामक टीकाएँ हैं जिनके कर्ता [[वीरसेन]] और [[जिनसेन]] राष्ट्रकूट नरेश [[अमोघवर्ष]] (9वीं शती) के प्रायः समकालीन थे। प्राचीनता में कर्मप्राभृत और कषायप्राभृत के पश्चात् कुंदकुंदाचार्यकृत 12-13 शौरसेनी पद्यात्मक रचनाएँ हैं जिनमें प्रधान हैं - प्रवचनसार, समयसार, पंचास्तिकाय और नियमसार। इन सभी में जैन सिद्धांत, आचारशास्त्र, तथा स्थाद्वादात्मक न्याय का निरूपण किया गया है। [[समयसार]], पंचास्तिका और नियमासार। इन सभी में जैन सिद्धांत, आचारशास्त्र, तथा स्थाद्वादात्मक न्याय का निरूपण किया गया है। समयसार में जैसा आध्यामिक विवेचन किया गया है वैसा अन्यत्र नहीं पाया जाता।
== जैन परम्परा का कथात्मक साहित्य ==
धार्मिक साहित्य के अतिरिक्त जैन परम्परा का बहुत सा कथात्मक साहित्य भी प्राकृत में पाया जाता है। इस प्रकार की सबसे प्राचीन रचना [[विमलसूरि]]कृत '''[[पउमचरिउ|पउमचरियं]]''' (पद्मचरितम्) है जिसमें कर्ता ने अपने ग्रंथ की समाप्ति का समय दुषमा काल के 530 (वीर निर्वाण 534) वर्ष पश्चात् अर्थात् ईसवी सन् 7 सूचित किया है। किंतु विद्वानों को इसकी वास्तविकता में संदेह होता है और वह मुख्यत: इस आधार पर कि ग्रंथ में प्राकृत भाषा का जो स्वरूप मिलता है वह मध्ययुग के दूसरे स्तर का है, जिसका विकासकाल ई. सन् की दूसरी तीसरी शती से पूर्व नहीं माना जा सकता। यहाँ हमें भाषा की वे सब प्रवृत्तियाँ पुष्ट रूप से दिखाई देती हैं और जिन्हें प्राय: महाराष्ट्री प्राकृत के लक्षण माना जाता है। पउमचरियं में सात अधिकार हैं जो 118 उद्देश्यों में विभाजित हैं। समस्त रचना पद्यात्मक है। छंद गाथा है किंतु स्थान-स्थान पर छंदवैचित्र्य भी पाया जाता है। शैली सरस और सरल है तथा उसमें कथात्मकता ही प्रधान है। मूल कथा वाल्मीकि कृत [[रामायण]] के सदृश है, किंतु अवांतर बातों में उससे बहुत भिन्नता भी है, जैसे सीता का एक भाई भामंडल भी था; राम ने बर्बर जातियों के मिथिला पर आक्रमण होने पर जनक की सहायता की थी और इसी के उपलक्ष्य में जनक ने सीता को उन्हें अर्पित करने का संकल्प किया था। सुग्रीव, हनुमान आदि वानर नहीं थे, उनका ध्वजचिह्न वानर होने से वे वानरवंशी कहलाते थे। रावण के दशमुख नहीं थे, किंतु उसके प्राकृतिक एक मुख के अतिरिक्त नवरत्नमय हार में मुख के नव प्रतिबिंब दिखाई देने से वह दशानन कहलाने लगा था। उसकी मृत्यु राम के हाथ से नहीं, किंतु लक्ष्मण के हाथ से हुई।
प्राकृत में दूसरा जैन पुराण है- '''[[चउपन्नमहापुरिसरियं]]''' (चौपन महापुरुष चरित), जो शीलांकाचार्य द्वारा वि. सं. 925 में रचा गया था। यह प्रायः गद्यात्मक है और इसमें 24 तीर्थंकर, 12 चक्रवर्ती, 9 बलदेव और 9 वासुदेव - इन 54 महापुरुषों का चरित्र वर्णित है। वहाँ रामकथानक में वाल्मीकिकृत रामायण से कुछ और बातें भी ली गई हैं, जो पउमचरियं में नहीं हैं। प्राकृत गद्य में रचित एक और महापुराण भद्रेश्वरकृत '''कथावलि''' (12वीं शती) है, जिसमें उपर्युक्त 54 महापुरुषों के अतिरिक्त 9 प्रतिवासुदेवों के चरित्र सम्मिलित होने से समस्त 63 शलाकापुरुषों के चरित्र भी काव्य की रीति से वर्णित पाए जाते हैं। इनमें वर्धमानसूरिकृत '''आविनाथचरित''', सोमप्रभकृत '''सुमतिनाथचरित''', देवसूरिकृत '''पद्मप्रभचरित''', नेमिचंद्रकृत '''अनंतनाथचरित''', देवंद्रगणिकृत '''वर्धमान चरित''' आदि अनेक विशाल रचनाएँ प्रकाश में आ चुकी हैं। ये रचनाएँ प्राय: 12वीं, 13वीं शती ई. की हैं, इनकी भाषा वही प्राकृत है जिसका प्राकृत व्याकरणों में परिचय पाया जाता है और जिसे पाश्चात्य विद्वानों के "जैन महाराष्ट्रों" की संज्ञा प्रदान की है।
पादलिप्तसूरिकृत '''तरंगवतीकथा''' का उल्लेख अनेक प्राचीन ग्रंथों में मिलता है। यह मूल ग्रंथ पद्य अप्राप्य है, किंतु इसके आधार से निर्मित [[नेमिचंद्र]]कृत '''तरंगलीला''' (15वीं शती ई.) नामकरचना उपलब्ध है। इसका कथानक एक उपन्यास है, जिसमें पात्रों के अनेक जन्मों का वृत्तांत गुथा हुआ है और वह बाणकृत [[कादम्बरी|कादंबरी]] का स्मरण कराता है।
प्राकृत गद्य साहित्य में हरिभद्रसूरिकृत '''[[समरादित्यकथा]]''' (8वीं शती ई.) का विशेष स्थान है। यह धर्मकथा है जिसमें परस्पर विरोधी दो पुरुषों के नौ जन्मांतरों का क्रमश: वर्णन किया गया है। विद्वेषी पुरुष प्रत्येक जन्म में अपने वैरी से ईर्ष्याभाव के कारण उत्तरोत्तर अधोगति को प्राप्त होता है और चत्रिनायक अपने मन तथा चारित्र्य को उत्तरोत्तर शुद्ध बनाता हुआ अंतिम भाव में समरादित्य नाम का राजा होकर तपस्या द्वारा मोक्ष प्राप्त करता है। नौ ही भवों के कथानक अपने अपने रूप में स्वतंत्र और परिपूर्ण हैं तथा उनमें मानवीय भावनाओं तथा समाज के नाना स्तरों का सुदर चित्रण पाया जाता है। हरिभद्र की दूसरी उल्लेखनीय प्राकृत रचना है - '''[[धूर्ताख्यान]]'''। इसके पाँच आख्यानों में पाँच धूर्तों ने अपने अपने ऐसे कथानक सुनाए हैं जिनसे अनेक पौराणिक अतिशयोक्तिपूर्ण वृत्तांतों की व्यंग्यात्मक आलोचना होती है। इस प्रकार यह पद्यात्मक रचना प्राकृत में ही नहीं, किंतु प्राचीन भारतीय साहित्य में व्यंग्यकथा का एक अपूर्व उदाहरण है।
इसी प्रकार की एक कथा उद्योतनसूरिकृत '''[[कुवलयमाला]]''' (ई. सन् 778) है। इसमें नायिका तथा उसके अन्य साथियों के तीन-चार जन्मांतरों का वर्णन अति रोचकता के साथ ग्रथित किया गया है।
धनेश्वरसूरिकृत '''सुरसुंदरीचरित्र''' (11वीं शती ई.)। गाथात्मक कथानक है जिसमें अनेक संयोग और वियोगात्मक प्रेमाख्यान ग्रथित हैं। महेश्वरसूरिकृत '''ज्ञानपंचमीकथा''' (11वीं शती ई.) में दश धार्मिक कथाओं का समावेश हुआ है। हेमचंद्रकृत '''कुमारपालचरित''' (12वीं शती ई.) आठ सर्गो का एक काव्य है जिसमें कर्ता के समकालीन [[गुजरात]] के राजा [[कुमारपाल]] के चरित्रवर्णन के साथ साथ कवि ने अपने प्राकृत व्याकरण के नियमों को उसी क्रम से उदाहृत किया है। इस प्रकार यह संस्कृत के [[भट्टिकाव्य]] का स्मरण दिलाता है जिसमें पाणिनीय व्याकरण के उदाहरण उपस्थित किए गए हैं, यद्यपि यहाँ वे उदाहरण उस प्रकार क्रमबद्ध नहीं हैं जैसे कुमारपालचरित्र में। देवेंद्रसूरिकृत '''श्रीपालचरित''' (14वीं शती), देवंद्रगणिकृत '''रत्नचूडारायचरित''', सुमतिसूरिकृत '''जिनदत्ताख्यान''' तथा जिनहर्षगणिकृत '''रत्नशेखरीकथा''' आदि अनेक प्राकृत कथानक जैन साहित्य में उलब्ध हैं तथा इनके अतिरिक्त व्रतकथाओं के रूप में बहुत सी लघु कथाएँ भी प्राप्त हैं।
== महाराष्ट्री प्राकृत ==
{{मुख्य|महाराष्ट्री प्राकृत}}
[[दण्डी|दंडी]] ने अपने [[काव्यादर्श]] नामक [[काव्यशास्त्र|अलंकार शास्त्र]] में महाराष्ट्री को [[सेतुबंध]] आदि काव्यों की भाषा कहा है :
: ''सहाराष्ट्राश्रयां भाषां प्रकृतष्टं प्राकृतं विदुः।''
: ''सागरः सूक्तिरत्नानां सेतुबन्धादि यन्मयम्॥''
इससे प्राकृत भाषा और साहित्य के संबंध की दो महत्वपूर्ण बातें सिद्ध होती हैं- एक तो यह कि दंडी के समय (छठी सातवीं शती) में प्राकृत भाषा का जो स्वरूप विकसित होकर काव्यरचना में उतरने लगा था, उसी का नाम महाराष्ट्री प्राकृत प्रसिद्ध हुआ और दूसरी यह कि इसी प्राकृत में '''[[सेतुबंध]]''' और उसी के सदृश अन्य भी कुछ रचनाएँ उस समय प्रसिद्ध हो चुकी थीं। सौभाग्यतः [[दण्डी|दंडी]] द्वारा उल्लिखित सेतुबंध काव्य अब भी उपलब्ध है और प्राकृत की एक उत्कृष्ट रचना माना जाता है। इसका उल्लेख [[बाणभट्ट|वाणभट्ट]] ने भी [[हर्षचरितम्|हर्षचरित]] को उत्थानिका में इस प्रकार किया है :
: ''कीर्तिः प्रवरसेनस्य प्रयाता कुमुदोज्जवला।''
: ''सागरस्य परं पारं कपिसैनैव सेतुना॥''
इससे सिद्ध होता है कि इस सेतुबंध के कर्ता का नाम प्रवरसेन था और बाण के समय (सातवीं शती का मध्य) तक इसकी कीर्ति समुद्रपार संभवतः लंका तक पहुँच चुकी थी। इसका नाम रावणवध या दशमुखवध भी पाया जाता है। कहीं-कहीं इसके कर्ता [[कालिदास]] भी कहे गए हैं। इस संबंध के समस्त उल्लेखों के विवेचन से यह बात प्रमाणित होती है कि इस काव्य के कर्ता [[वाकाटक]]वंशी राजा रुद्रसेन के पुत्र प्रवरसेन ही हैं। उनके पिता की मृत्यु उनके बाल्यकाल में ही हो गई थी और उनकी माता प्रभावती गुप्ता राज्य का कार्य सँभालती थीं। प्रभावती गुप्ता सम्राट् [[चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य|चंद्रगुप्त विक्रमादित्य]] की पुत्री थीं। इसीलिये गुप्तसम्राट् ने अपनी सभा के महाकवि कालिदास का कुछ काल के लिये उनके सहायतार्थ भेजा था। अनुमानतः उसी बीच यह काव्यरचना हुई और कालिदास ने उसका कुछ संशोधन भी किया होगा। इस बात का कुछ आभास हमें काव्य के आदि में ही सातवीं गाथा में मिलता है। इन बातों से यह रचना गुप्तसम्राट् चंद्रगुप्त द्वितीय के राज्यकाल (ई. सन् 380 से 413) की सिद्ध होती है। इस काव्य में 15 आश्वास हैं और प्रत्येक आश्वास के अंतिम पद्य में कवि ने अपने को अनुरागअंक या अनुरागचिह्न द्वारा सूचित किया है। काव्य का कथानक सीता अपहरण के पश्चात् प्रारंभ होता है, जब राम वियोग की व्यथा में हैं। सुग्रीव की सहायता से हुनमान द्वारा लंका में सीता का पता लगाया गया और फिर राम लक्ष्मण वानरसेना सहित लंका पर आक्रमण करने के लिये निकले, किंतु समुद्रतट पर आकर एक बड़ी समस्या समुद्र पार करने की उपस्थित हुई। बड़े प्रयत्न से उस पर सेतु बनाया गया, सेना पार हुई; युद्ध में रावण मारा गया, तथा सीता की अग्निपरीक्षा के पश्चात् उन्हें साथ ले राम पुष्पक विमान द्वारा अयोध्या को लौट आए। कथानक वाल्मीकि रामायण का ही अनुसरण करता है, किंतु प्रकृति तथा घटनाओं का वर्णन कवि का अपना है। शैली समास और अलंकारप्रचुर है।
[[दण्डी|दंडी]] ने महाराष्ट्री को जो सेतुबंधादि काव्यों की भाषा कहा है, उससे उनका तात्पर्य संभवतः सेतुबंध के अतिरिक्त '''[[गाथासप्तशती]]''' से है जिसका उल्लेख [[बाणभट्ट|बाण]] ने [[हर्षचरितम्|हर्षचरित]] में इस प्रकार किया है:
: ''अविनाशिनमग्राह्यमकरोत्सातवाहन:।''
: ''विशुद्ध जातिभि: कोषं रत्नेखिसुभाषितै:॥'' ([[हर्षचरितम्|हर्षचरित]] 13)
इसके अनुसार सातवाहन ने सुंदर सुभाषितों का एक कोश निर्माण किया था। आदि में यह कोश सुभाषितकोश या गाथाकोश के नाम से ही प्रसिद्ध था। पीछे क्रमश: सात सौ गाथाओं का समावेश हो जाने पर उसकी सप्तशती नाम से प्रसिद्ध हुई। सातवाहन, शालिवाहन या हाल नरेश भारतीय कथासाहित्य में उसी प्रकार ख्यातिप्राप्त हैं जैसे विक्रमादित्य। [[वात्स्यायन]] तथा [[राजशेखर]] ने उन्हें कुंतल का राजा कहा है और सोमदेवकृत [[कथासरित्सागर]] के अनुसार वे नरवाहनदत के पुत्र थे तथा उनकी राजधानी प्रतिष्ठान (आधुनिक पैठण) थी। पुराणों में आंध्र भृत्यों की राजवंशावली में सर्वप्रथम राजा का नाम सातवाहन तथा सत्रहवें नरेश का नाम हाल निर्दिष्ट किया गया है। इन सब प्रमाणों से हाल का समय ई. की प्रथम दो, तीन शतियों के बीच सिद्ध होता है और उस समय गाथा सप्तशती का कोश नामक मूल संकलन किया गया होगा। राजशेखर के अनुसार सातवाहन ने अपने अंत:पुर में प्राकृत भाषा के ही प्रयोग का नियम बना दिया था। एक जनश्रुति के अनुसार उन्हीं के समय में गुणाढ्य द्वारा पैशाची प्राकृत में '''बृहत्कथा''' रची गई, जिसके अब केवल संस्कृत रूपांतर [[बृहत्कथामञ्जरी|बृहत्कथामंजरी]] तथा [[कथासरित्सागर]] मिलते हैं। गाथासप्तशती की प्रत्येक गाथा अपने रूप में परिपूर्ण है और किसी मानवीय भावना, व्यवहार या प्राकृतिक दृश्य का अत्यंत सरसता और सौंदर्य से चित्रण करती है। [[शृंगार रस|श्रृंगार रस]] की प्रधानता है, किंतु हास्य, कारुण्य आदि रसों का भी अभाव नहीं है। प्रकृतिचित्रण में विंध्यपर्वत ओर गोला (गोदावरी) नदी का नाम पुन:-पुन: आता है। ग्राम, खेत, उपवन, झाड़ी, नदी, कुएँ, तालाब आदि पर पुरुष स्त्रियों के विलासपूर्ण व्यवहार एव भावभंगियों का जैसा चित्रण यहाँ मिलता है, वैसा अन्यत्र दुर्लभ है। इस संग्रह का पश्चात्कालीन साहित्य पर बड़ा प्रभाव पड़ा है। इसी के आदर्श पर जैन कवि जयवल्लभ ने "वज्जालग्गं" नामक प्राकृत सुभाषितों का संग्रह तैयार किया, जिसकी लगभग 800 गाथाओं में से कोई 80 गाथाएँ इसी कोश से उद्धृत की गई हैं। संस्कृत में गोवर्धनाचार्य (11वीं-12वीं शती) ने इसी के अनुकरण पर '''आर्यासप्तशती''' की रचना की। हिंदी में तुलसीसतसई और बिहारी सतसई संभवत: इसी रचना से प्रभावित हुई हैं।
प्राकृत में जिस प्रकार सेतुबंध की ख्याति काव्य की दृष्टि से रही है, उसी प्रकार '''लीलावती''' की प्रसिद्धि कथा की दृष्टि से पाई जाती है। भोजदेव, हेमचंद्र, वाग्भट्ट आदि संस्कृत के अलंकार शास्त्रकारों ने गद्यमयी कथा का उदाहरण कादम्बरी और पद्यमयी कथा का लीलावती को दिया है। उद्योतनसूरि ने अपनी कुवलयमाला नामक कथा में कौतूहलकृत प्राकृत भाषा रचित एवं मरहट्ठ देशीवचन निबद्ध शुद्ध सकलकथा का उल्लेख किया है, जिससे इसी रचना का अभिप्राय सिद्ध होता है। उससे इसके कर्ता का नाम कौतूहल और रचनाकाल 778 ई. से पूर्व का निश्चय हो जाता है। यह रचना कुछ वर्ष पूर्व ही प्रकाश में आई है (भारतीय विद्याभवन, बंबई 1949) इसमें कोई परिच्छेदादि विभाग नहीं हैं। लगातार 13000 से कुछ अधिक गाथाओं में कथा समाप्त हुई है। 1330वीं गाथा में कवि ने स्वयं कहा है कि उन्होंने इसकी रचना महाराष्ट्री प्राकृत में की है (रइयं मरहट्ठ देसि भासाए)। इस कथा के नायक अस्मक देश के प्रतिष्ठाननगर के राजा सातवाहन हैं। एक महा घटनाचक्र के पश्चात् उनका विवाह सिंहल के राजा शिलामेघ की राजकुमारी लीलावती से हुआ। उनके मंत्रियों के नाम यहाँ पोट्सि और कुमारिल बतलाए गए हैं। ये दोनों नाम गाथासप्तशती व गाथाओं के कर्ताओं में भी पाए जाते हैं। इससे इस बात की भी पुष्टि होती है कि इस कथा के कर्ता सातवाहन, शालिवाहन या हाल ही हैं ये तीनों ही नाम इस कथा में यत्र-तत्र आए हैं। कथा बड़ी सरल और सरस शैली में वर्णित है।
महाराष्ट्री प्राकृत का एक उत्कृष्ट काव्य है '''गउडवहो''' (गौडवध) जिसके कर्ता [[वाक्पतिराज]] ने अपने को कान्यबुज नरेश [[यशोवर्मन (कन्नौज नरेश)|यशोवर्मा]] का समकालीन कहा है। उन्होंने [[भास]], संबंधु, हरिच एवं [[भवभूति]] आदि कवियों का उल्लेख भी किया है। इन सब लेखों पर से इनका समय 8 वीं शती ई. अनुमान किया जा सकता। इस काव्य में भी कोई परिच्छेद नहीं है। लगातार 1200 से कुछ ऊपर गाथाएँ हैं, जिनमें राजा यशोवर्मा के प्रताप और उनकी जययात्रा तथा गौड़देश के राजा के वध का वर्णन किया गया है।
प्राकृत काव्यरचना की परंपरा 18वीं शती तक बताई जाती है। इस शताब्दी के प्रसिद्ध प्राकृत कवि हैं [[रामपाणिवाद]] (ई. 1707 से 1775) जिनकी दो प्राकृत रचनाएँ सुप्रसिद्ध हैं। एक है '''कंसवहो''' (कंसवध) जिसके चार सर्गो में उद्धव के द्वारा कृष्ण और बलराम को धनुषयज्ञ के बहाने गोकुल से मथुरा ले जाने और उनके द्वारा कंस की मृत्यु का वर्णन भागवत की कथा के आधार किया गया है। शैली में [[कालिदास]], [[भारवि]] तथा [[माघ]] की रचनाओं का प्रभाव स्पष्ट दिखाई देता है। रामपाणिवाद का दूसरा प्राकाव्य है '''उषानिरुद्धं''', जिसमें प्रद्युम्न के पुत्र अनिरुद्ध का बाणाकी पुत्री उषा से [[विवाह]] का वर्णन चार सर्गो में किया गया है। यह कथानक भी [[भागवत पुराण|भागवतादि पुराणों]] पर आश्रित है, किंतु कवि ने अपनी काव्यप्रतिभा से अच्छा सजाया है। सुदूरवर्ती [[केरल]] में 18वीं शती में शुद्ध प्राकृत की ये काव्यरचनाएँ इस बात का प्रमाण हैं कि प्राकृत के पठन-पाठन तथा काव्यसृजन का प्रवाह परिस्थिति के अनुसार तीव्र और मंद भले ही पड़ा हो, किंतु वह सर्वथा सूखा नहीं है।
== प्राकृत साहित्य का महत्त्व ==
इस प्रकार प्राकृत साहित्य अपने रूप एवं विषय की दृष्टि से बड़ा महत्वपूर्ण है तथा भारतीय संस्कृति के सर्वांग परिशीलन के लिये उसका स्थान अद्वितीय है। उसमें उन लोकभाषाओं का प्रतिनिधित्व किया जाता है जिन्होंने वैदिक काल एवं संभवत: उससे भी पूर्वकाल से लेकर देश के नाना भागों को गंगा यमुना आदि महानदियों के अनुमान प्लावित किया है और उसकी साहित्यभूमि को उर्वरा बनाया हैं। ई. पूर्व छठी शती से लेकर प्राय: वर्तमान तक प्राकृत भाषाओं में ग्रंथरचना होती चली आई है, यद्यपि शास्त्रीय दृष्टि से उन भाषाओं का विकास ई. सन् 1000 तक ही माना जाता है, क्योंकि उसके पश्चात् हिंदी, गुजराती, मराठी, बँगला, आदि आधुनिक भाषाओं का युग प्रारंभ होता है। मगध से लेकर दरद प्रदेश (पश्चिमोत्तर भारत) तथा [[हिमालय]] से लेकर [[श्रीलंका का इतिहास|सिंहल द्वीप]] तक की नानाविध लोकभाषाओं का स्वरूप प्राकृत में सुरक्षित है। इस साहित्य का बहु भाग यद्यपि जैनधर्म विषयक है, तथापि उसमें तत्कालीन लोकजीवन ऐसा प्रतिबिंबित है जैसा अन्यत्र दुर्लभ है। इसमें नानाकालीन एवं नानादेशीय ऐतिहासिक, राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक आदि महत्वपूर्ण झाँकियाँ दिखाई देती है जिनका भारतीय इतिहास में यथोचित मूल्यांकन करना अभी शेष है। भाषाओं के अतिरिक्त देश के धार्मिक, दार्शनिक व नैतिक विकास की परम्परा और उसकी गुत्थियों को स्पष्टता से समझने में इस साहित्य से बहुमूल्य सहायता मिल सकती है। यह महत्वपूर्ण साहित्य अभी तक पूर्णत: प्रकाशित नहीं हो सका है। जितना भाग प्रकाशित हुआ है उसका भी समालोचनात्मक रीति से संपादन बहुत कम हुआ है वैज्ञानिक तथा तुलनात्मक अध्ययन भी बहुत शेष है।
== यह भी देखिये ==
* [[प्राकृत]]
* [[पालि]]
* [[अपभ्रंश]]
* [[अर्धमागधी]]
* [[शौरसेनी]]
* [[अवहट्ठ]]
* [[आगम (जैन)|जैन आगम]]
* [[संस्कृत साहित्य]]
* [[पालि भाषा का साहित्य]]
* [[हिंदी साहित्य|हिन्दी साहित्य]]
* [[भारत की भाषाएँ]]
==बाहरी कड़ियाँ==
*[https://archive.org/details/in.ernet.dli.2015.552436/page/n3/mode/2up प्राकृत साहित्य का इतिहास]
[[श्रेणी:साहित्य]]
[[श्रेणी:संस्कृत]]
[[श्रेणी:हिन्दी]]
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6547927
6547921
2026-05-03T05:21:12Z
अनुनाद सिंह
1634
/* महाराष्ट्री प्राकृत */
6547927
wikitext
text/x-wiki
मध्ययुगीन [[प्राकृत|प्राकृतों]] का गद्य-पद्यात्मक [[साहित्य]] विशाल मात्रा में उपलब्ध है। प्राकृत, भारतीय उपमहाद्वीप में जनभाषा रही है। यह [[आगम (जैन)|जैन आगमों]] की भाषा मानी जाती है। [[महावीर स्वामी|भगवान महावीर]] ने इसी प्राकृतभाषा के [[अर्धमागधी]] रूप में अपना उपदेश दिया था। यह [[शिलालेख|शिलालेखों]] की भी भाषा रही है। [[हाथीगुम्फा शिलालेख|हाथीगुफा शिलालेख]], [[नासिक शिलालेख]], [[अशोक के शिलालेख]] प्राकृत भाषा में ही हैं। प्राकृत में [[व्याकरण]] ग्रन्थ, नाटक, गीत, धार्मिक उपदेश आदि विपुल साहित्य है।
प्राकृत साहित्य में सबसे प्राचीन वह [[अर्धमागधी]] साहित्य है जिसमें [[जैन धर्म|जैन]] धार्मिक ग्रंथ रचे गए हैं तथा जिन्हें समष्टि रूप से [[आगम (जैन)|जैनागम]] या [[आगम (जैन)|जैनश्रुतांग]] कहा जाता है।
[[कथा]] साहित्य की दृष्टि से सर्वाधिक प्राचीन रचना [[बड्डकहा]] ([[बृहत्कथा]]) भी प्राकृत भाषा ([[पैशाची]]) में ही लिखी गयी थी। पादलिप्तसूरी की तरंगवई, संघदासगणि की वसुदेवहिण्डी, हरिभद्रसूरि विरचित समराइच्चकहा, उद्योतनसूरिकृत [[कुवलयमाला]] आदि कृतियाँ उत्कृष्ट कथा-साहित्य की निदर्शन हैं।
[[विमलसूरि]] विरचित ‘[[पउमचरिउ|पउमचरियं]]’ (पद्मचरितम्) जैन रामायण का ग्रन्थ है जो प्राकृत में ही लिखा गया है। जंबूचरियं, सुरसुन्दरीचरियं, महावीरचरियं आदि अनेक प्राकृत चरितकाव्य हैं जिनके अध्ययन से तत्कालीन समाज एवं संस्कृति का बोध होता है।
[[हाल]]कवि की [[गाहासतसई]] (गाथा सप्तशती) [[बिहारी (साहित्यकार)|बिहारी]] की[[बिहारी सतसई|सतसई]] का प्रेरणास्रोत आधारग्रन्थ रही है। गाहा सतसई [[शृंगार रस|शृंगाररस]] प्रधान काव्य है, जिस पर १८ टीकाएँ लिखी जा चुकी हैं। [[रुद्रट]] , [[मम्मट]], [[विश्वनाथ]] आदि काव्य शास्त्रियों ने गाहासतसई की मुक्तकण्ठ से प्रशंसा की है तथा संस्कृत के काव्यशास्त्रों में गाहासतसई कवि [[भट्ट मथुरानाथ शास्त्री]] ने इस पर ‘सर्वङ्कषा’ संस्कृत टीका लिखी है।
[[जयवल्लभ]] द्वारा रचित ‘वज्जालग्ग’ भी प्राकृत की एक महत्वपूर्ण रचना है, जिसमें प्राकृत भाषा के सम्बन्ध में कहा है कि-
: ''ललिए महुरक्खरए जुवईयणवल्लहे ससिगारे।
: ''सन्ते पाइयकव्वे को सक्कइ सक्कयं पढिउं॥
अर्थात् ललित एवं मधुर अक्षरों से युक्त, युवतियों को प्रिय तथा शृंगाररसयुक्त [[प्राकृत]] काव्य के होते हुए [[संस्कृत]] को कौन पढ़ना चाहेगा? यह कथन प्राकृत की महत्ता को सुबोधता, सुग्राह्यता, सरसता आदि विशेषताओं से स्थापित करता है।
== जैनागम ==
{{मुख्य|आगम (जैन)}}
इस साहित्य की प्राचीन परम्परा यह है कि अंतिम जैन तीर्थंकर [[महावीर]] का विदेह प्रदेश में जन्म लगभग 600 ई. पूर्व हुआ। उन्होंने 30 वर्ष की अवस्था में मुनि दीक्षा ले ली और 12 वर्ष तप और ध्यान करके [[कैवल्य]]ज्ञान प्राप्त किया। तत्पश्चात् उन्होने अपना धर्मोपदेश सर्वप्रथम [[राजगृह]] में और फिर अन्य नाना स्थानों में देकर [[जैन धर्म]] का प्रचार किया। उनके उपदेशों को उनके जीवनकाल में ही उनके शिष्यों ने 12 अंगों में संकलित किया। उनके नाम हैं-
:(1) [[आचारांग]], (2) सूत्रकृतांग, (3) [[स्थानांग सूत्र|स्थानांग]], (4) समयांग, (5) भगवती व्याख्या प्रज्ञप्ति, (6) न्यायधर्म कथा (णायाधम्महाओ),
:(7) उपासकादशा, (8) अंतकृदशा, (9) अनुत्तेरोपपातिक (10) प्रश्न व्याकरण, (11) विपाक सूत्र और (12) [[दृष्टिवाद]]।
इन अंगों की भाषा वही अर्धमागधी प्राकृत है जिसमें महावीर ने अपने उपदेश दिए। संभवतः यह आगम उस समय लिपिबद्ध नहीं किया गया एवं गुरु-शिष्य परंपरा से मौखिक रूप में प्रचलित रहा और यही उसके '''श्रुतांग''' कहलाने की सार्थकता है।
महावीर का निर्वाण 72 वर्ष की अवस्था में ई. पू. 527 में हुआ और उसके पश्चात् शीघ्र ही उक्त अंगों की परम्परा में विप्रतिपत्तियाँ उत्पन्न होने लगीं। जैनधर्म के दिगम्बर संप्रदाय की मान्यता है कि श्रुतांगों का क्रमश: ह्रास होते-होते उनका खंडशः ज्ञान कुछ आचार्यो को रहा और उसके आधार से उन्होंने नए रूप में सैद्धांतिक ग्रंथ लिखे, जिनके प्राचीनतम उदाहरण कर्मप्राकृत ([[षट्खंडागम]]) व कषायप्राकृत (कसायपाहुड) नामक सूत्र हैं। किंतु श्वेतांबर संप्रदाय की मान्यता है कि उक्त आगम ग्रंथों को उत्पन्न होती हुई विकृतियों से बचाने के लिये समय-समय पर मुनियों ने उनकी वाचनाएँ कीं और उन्हें सुरक्षित रखने का प्रयत्न किया। प्रथम वाचना महावीर निर्वाण से 160 वर्षो पश्चात् [[पाटलिपुत्र]] में [[स्थूलभद्राचार्य]] की अध्यक्षता में हुई जिसमें 11 अंगों का संकलन किया गया। 12वें अंग का उपस्थित मुनियों में से किसी को भी व्यवस्थित ज्ञान न होने से उसका उद्धार नहीं किया जा सका। जैन मुनियों की अपरिग्रह वृत्ति तथा वर्षाकाल को छोड़ निरंतर परिभ्रमण एवं उस काल की कठिनाइयों के कारण यह अंगज्ञान पुन: छिन्न-भिन्न होने लगा। आर्य स्कंदित ने [[मथुरा]] में मुनिसंघ का सम्मेलन किया और उन्हीं 11 अंगों को एक बार पुन: व्यवस्थित करने का प्रयत्न किया। देवर्धिगणि क्षमाश्रमण ने वलभी नगर में मुनिसम्मेलन कराया और जैन आगम को वह रूप दिया जिसमें वह आज उपलब्ध है। इस वाचना में उपर्युक्त 11 अंगों के अतिरिक्त अन्य अनेक ग्रंथों को सुव्यवस्थित करने का प्रयत्न किया गया जो इस कालावधि तक रचे जा चुके थे। ये थे - 12 उपांग, 6 छेदसूत्र, 4 मूलसूत्र, 10 प्रकीर्णक और दो चूलिकाएँ। इस प्रकार वलभी वाचना के फलस्वरूप अर्धमागधी जैनागम के 45 ग्रंथ व्यवस्थित हो गए जो आज भी उपलब्ध हैं, तथा जिनका संक्षेप में परिचय निम्न प्रकार है :
=== ग्यारह अंग ===
१. '''आचारंग''' - इस श्रुतग्रंथ में मुनियों के पालने योग्य सदाचार का विवरण दिया गया है। यह दो श्रुतस्कंधों में विभाजित है। प्रथम श्रुतस्कंध में 9 अध्ययन और उनके अंतर्गत 44 उद्देश्यक हैं। ग्रंथ का यह भाग मूल एवं भाषा, शैली और विषय की दृष्टि से प्राचीनतम है। द्वि. श्रुतस्कंध इसकी चूलिका के रूप में है और वह तीन चूलिकाओं एवं 16 अध्ययनों में विभाजित है। प्रथम श्रुतस्कंध के नवमें उपधान नामक अध्ययन में महावीर की उग्र तपस्या एवं लाढ़ वज्रभूमि, शुभ्रभूमि आदि स्थानो में विहार करते हुए घोर उपसर्गो के सहने का मार्मिक वर्णन है।
२. '''सूत्रकृतांग''' - इसके भी दो श्रुतस्कंध हैं जिनमें क्रमश: 16 तथा 7 अध्ययन हैं1 प्रथम श्रुतांग प्राय: मद्यमय है और दूसरे में गद्य पद्य दोनों का प्रयोग हुआ है। इसमें प्राचीन काल के दार्शनिक वादों जैसे क्रियावाद, अक्रियावाद, नियतिवाद, अज्ञानवाद आदि का प्ररूपण तथा निराकरण किया गया है तथा श्रमण, ब्राह्मण, भिक्षु, निग्र्रंथ आदि के स्वरूप की व्याख्या की गई है। अंतिम अध्ययन नालदीय में महावीर के शिष्य गौतम तथा पाश्र्वनाथ की परंपरा के उदक पेढ़ालपुत्र के बीच वार्तालाप और चातुर्याम धर्म के संबंध में विचार जैनधर्म की महावीर से पूर्वपरंपरा पर प्रकाश डालता है।
३. '''स्थानांग''' - इसमें 10 अध्ययन हैं जिनमें क्रमश: एक से लेकर 10 तक की संख्यावाले पदार्थो का निरूपण किया गया है, जैसे एक दर्शन, एकचारित्र, एक समय, इत्यादि; दो क्रियाएँ जीव और अजीव; वृक्ष तीन प्रकार केहृ पत्रोपेत, फलोपेत और पुष्पोपेत, तीन वेद ऋक्, यजु और साम इत्यादि। इस पद्धति से इस ग्रंथ में अनेक विषयों का बहुमुखी वर्णन आया है जो अपने ढंग का एक विश्वकोश ही है। उसकी यह शैली पालि त्रिपिटक के अंगुततर निकाय से समता रखती है।
४. '''समवायांग''' - यह भी स्थानांग के सदृश एकोत्तर क्रम से वस्तुओं का निरूपण करनेवाला विश्वकोश है। विशेषता इसकी यह है कि इसमें संख्याक्रम क्रमश: बढ़ता हुआ शतों, सहस्रों, शतसहस्त्रों तथा कोटियों तक पहुँचाया गया है। यथास्थान इसमें जैन आगम तथा तीर्थकर, चक्रवर्ती आदि त्रिरसठ शलाकापुरुषों का परिचय नामवली पद्धति से वर्णित है।
५. '''भगवती व्याख्या प्रज्ञाप्ति''' - यह रचना आकार और विषय की दृष्टि जैनागम में सबसे अधिक विशाल और महत्वपूर्ण है। इसमें 41 शतक हैं और प्रत्येक शतक अनेक उद्देशक में विभाजित है। शैली प्रश्नोत्तरात्मक है। प्रश्नकर्ता हैं गौतम गणधर और उत्तरदाता स्वयं महावीर। टीकाकारों के अनुसार इसमें 36 सहस्र प्रश्नोत्तरों का समावेश है। दर्शन, आचार, इतिहास, भूगोल आदि समस्त विषयों पर किसी न किसी प्रसंग से प्रकाश डाला गया है। महावीरकाल की राजनीतिक परिस्थिति और उस समय के घोर युद्ध आदि का वर्णन जैसा इस ग्रंथ में आया है वैसा अन्यत्र कहीं नहीं पाया जाता।
६. '''न्यायधर्मकथा''' - इस अंग का प्राकृत नाम न्यायधम्मकहाओ है और उसका संस्कृत रूपांतर ज्ञातृ या ज्ञाताधर्मकथा भी किया जाता है जिसका अर्थ होता है ज्ञातृ अर्थात् ज्ञातृपुत्र महावीर का धर्मोपदेश। विषय को देखते हुए इसका प्रथम नाम ही अधिक सार्थक प्रतीत होता है क्योंकि इसमें कथाओं द्वारा किन्हीं न्यायों अर्थात् नीतिवाक्यों का स्पष्टीकरण किया गया है।
७. '''उपासकदशा''' - नामानुसार इसमें भी उपासक, कामदेव, चुलणीप्रिय आदि दस ऐसे उपासकों के चरित्र वर्णित हैं जिन्होंने कठिनाइयों के बीच धर्मपालन किया।
८. '''अंतकृदद्शा''' - नामानुसार इसमें भी उपासक दशा के समान दस अध्ययन ही रहे होंगे। किंतु वर्तमान में यहाँ आठ वर्ग हैं और प्रत्येक वर्ग अनेक अध्ययनों में विभाजित हैं। इसमें ऐसे साधुओं के चरित्र वर्णित किए गए हैं, जिन्होंने तपस्या द्वारा संसार का अंत कर निर्वाण प्राप्त किया।
९. '''अनुत्तरोपपातिक दशा''' - इसमें ऐसे मुनियों के चरित्र वर्णित हैं जिन्हें अपनी तपस्या के बीच घोर उपसर्ग सहन करने पड़े और उन्होंने मरकर उन अनुत्तर नामक स्वर्गो में जन्म लिया जहाँ से केवल एक बार पुन: मनुष्य जन्म धारण कर निर्वाण प्राप्त किया जाता है।
१०. '''प्रश्नव्याकरण''' - ग्रंथ के नाम से तथा स्थानांग एवं समवायांग से प्राप्त इस श्रुतांग के विषयपरिचय से ज्ञात होता है कि इसमें मूलत: प्रश्नोत्तर के रूप में नाना सिद्धांतों की व्याख्या की गई थी। किंतु वर्तमान में ऐसा न होकर इसके प्रथम खंड में हिंसादि पाँच पापों का और दूसरे खंड में अहिंसादि व्रतों का प्ररूपण पाया जाता है।
११. '''विपाकसूत्र''' - इसमें दो श्रुतस्कंध हैं और प्रत्येक में दस दस-अध्ययन हैं। इसमें जीव के अच्छे और बुरे कर्मो से फलित होनेवाले सुख दु:खों का बड़ा वैचित्र्य है जिसमें जीवन की सभी दशाओं का वर्णन आ गया है। जैनधर्म के कर्मसिद्धांतनुसार जीवन के समस्त अनुभव सुकर्म एवं दुष्कर्मो के परिणाम ही हैं। इसका इस श्रुतांग में विस्तार से प्ररूपण पाया जाता है।
=== बारह उपांग ===
(१) '''औपपातिक''' में नाना साधनाओं द्वारा पुनर्जन्म के स्वरूप का नाना उदाहरणों सहित व्याख्यान किया गया है। इसकी यह भी एक विशेषता है कि जिन नगर, राजा, चैत्य आदिक का अन्यत्र संकेत मात्र पाया जाता है, उसका यहाँ पूरा वर्णन मिलता है।
(२) '''रायपसेणिज्जं''' - इसका संस्कृत रूपांतर राजप्रश्नीय किया जाता है, किंतु संभवत: उसका संबंध कोशलनरेश प्रसेनजित से रहा है जो पहले भौतिकवादी था, किंतु पश्चात् केशी मुनि के उपदेश से सम्यगदृष्टि बन गया। यह ग्रंथ पालि "मिलिंद पंहो" से तुलनीय है।
(३) '''जीवाजीवाभिगम''' - में नामानुसार प्रश्नोत्तर के रूप में जीव और अजीव के भेदप्रभेदों का वर्णन किया गया है।
(४) '''प्रज्ञापना''' में जैन दर्शन की नाना व्यवस्थाओं का विवरण हुआ है, जिससे यह ग्रंथ भगवती के समान जैन सिद्धांत का ज्ञानकोश ही कहा जा सकता है।
(५) वें, (६) ठे और (७) वें उपांगों के नाम क्रमश: '''सूर्यप्रज्ञप्ति''', '''जंबुद्वीपप्रज्ञप्ति''' और '''चंद्रप्रज्ञाप्ति''' हैं जिनमें उन लोकों का जैन मान्यतानुसार वर्णन किया गया है।
(8) '''कल्पिका''' व (9) '''कल्पावतंसिका''' में मगधराज श्रेणिक, उसके पुत्र अजातशत्रु एवं उसके पोत्रों के चरित्र वर्णित हैं जिन्होंने अपने अपने कर्मानुसार नरक तथा स्वर्गगतियाँ प्राप्त कीं।
(१०) '''पुष्पिका''' एवं (११) '''पुष्पचूला''' में अनेक स्त्री पुरुषों की धार्मिक साधना, स्वर्गसुखों और महावीर की वंदना के लिये आगमन का वर्णन है।
(१२) '''वृष्णिदशा''' में द्वारावती के राजा कृष्णवासुदेव एवं तीर्थकर नेमिनाथ के चरित्र का वर्णन है।
=== छह छेदसूत्र ===
(१) निशीथ, (२) महानिशीथ, (३) व्यवहार, (४) आचारदशा, (५) कल्पसूत्र और (६) पंचकल्प।
इनमें मुनियों की साधनाओं एवं व्रतों का भंग होने पर प्रायश्चित्त का विचार किया गया है। इन सबमें कल्पसूत्र का सबसे अधिक प्रचार है। मुनि आचार के अतिरिक्त इसमें महावीर तथा ऋषभदेव, नेमिनाथ और पश्र्वनाथ के चरित्र भी वर्णित हैं।
=== चार मूलसूत्र ===
(1) उत्तराध्ययन, (2) दश्वैकालिक, (3) आवश्यक और (4) पिण्डनिर्युक्ति
इन सभी में मुख्यतया मुनि आचार का वर्णन है। इनमें उत्तराध्ययन की बड़ी प्रतिष्ठा है।
=== दस प्रकीर्णक ===
:(1) चतु:शरण (2) आतुर प्रत्याख्यान, (3) महाप्रत्याख्यान (4) भक्त परिज्ञा, (5) तंदुलवैचारिक,
:(6) संस्तारक (7) गच्छाचर, (8) गणिविद्य, (9) देवंद्रस्तव और (10) मरणसमाधि।
ये सभी प्रायः पद्यात्मक हैं और इनमें मुनियों के पालने योग्य नीति का उपदेश दिया गया है।
=== दो चूलिका सूत्र ===
(1) नंदी और (2) अनुयोगद्वार।
नंदी में ज्ञान के भेदों व श्रुतांगों का विस्तार से वर्णन है तथा अनुयोगद्वार में प्रश्नोत्तरों के रूप में नाना विषयों का परिचय कराया गया है जिसमें रसों व संगीत आदि का भी समावेश है।
उपरोक्त ही 45 जैनधार्मिक ग्रंथ है जो उपलब्ध अर्धमागधी साहित्य कहा जा सकता है। इन ग्रंथों पर निर्युक्ति, चूर्ण, टीका, भाष्य, वृत्ति आदि व्याख्यात्मक विशाल साहित्य प्राकृत और संस्कृत भाषाओं में पद्य और पद्यात्मक है। समस्त निर्युक्तियाँ भद्रबाहुकृत व चूर्णियाँ जिनदासगणि महत्तर कृत मानी जाती हैं। इनके भीतर जैन सिद्धांत के विवेचन के अतिरिक्त आख्यानात्मक रचनाओं का बड़ा वैपुल्य है जो साहित्य और इतिहास की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
दिगंबर संप्रदाय में इन 45 आगम ग्रंथों की मान्यता और प्रचार नहीं है। उस परम्परा में लुप्त हुए द्वादशांग श्रुत के आधार से [[शौरसेनी प्राकृत]] में स्वतंत्र साहित्य का निर्माण हुआ जिसकी सर्वप्राचीन रचनाएँ [[आचार्य पुष्पदंत|पुष्पदंत]] और [[भूतबलि|भूतबलिकृत]] '''कर्मप्राभृत''' नामक ग्रंथ हैं। इनमें जैन कर्मसिद्धांत का बड़ी व्यवस्था तथा सूक्ष्मता से प्ररूपण किया गया है। इनका रचनाकाल महावीर निर्वाण के के शीघ्र ही पश्चात् हुआ सिद्ध होता है। इनपर समय-समय पर अनेक टीकाएँ प्राकृत तथा संस्कृत में लिखी गईं, जिनमें से वर्तमान में सुप्रसिद्ध धवल और जयधवल नामक टीकाएँ हैं जिनके कर्ता [[वीरसेन]] और [[जिनसेन]] राष्ट्रकूट नरेश [[अमोघवर्ष]] (9वीं शती) के प्रायः समकालीन थे। प्राचीनता में कर्मप्राभृत और कषायप्राभृत के पश्चात् कुंदकुंदाचार्यकृत 12-13 शौरसेनी पद्यात्मक रचनाएँ हैं जिनमें प्रधान हैं - प्रवचनसार, समयसार, पंचास्तिकाय और नियमसार। इन सभी में जैन सिद्धांत, आचारशास्त्र, तथा स्थाद्वादात्मक न्याय का निरूपण किया गया है। [[समयसार]], पंचास्तिका और नियमासार। इन सभी में जैन सिद्धांत, आचारशास्त्र, तथा स्थाद्वादात्मक न्याय का निरूपण किया गया है। समयसार में जैसा आध्यामिक विवेचन किया गया है वैसा अन्यत्र नहीं पाया जाता।
== जैन परम्परा का कथात्मक साहित्य ==
धार्मिक साहित्य के अतिरिक्त जैन परम्परा का बहुत सा कथात्मक साहित्य भी प्राकृत में पाया जाता है। इस प्रकार की सबसे प्राचीन रचना [[विमलसूरि]]कृत '''[[पउमचरिउ|पउमचरियं]]''' (पद्मचरितम्) है जिसमें कर्ता ने अपने ग्रंथ की समाप्ति का समय दुषमा काल के 530 (वीर निर्वाण 534) वर्ष पश्चात् अर्थात् ईसवी सन् 7 सूचित किया है। किंतु विद्वानों को इसकी वास्तविकता में संदेह होता है और वह मुख्यत: इस आधार पर कि ग्रंथ में प्राकृत भाषा का जो स्वरूप मिलता है वह मध्ययुग के दूसरे स्तर का है, जिसका विकासकाल ई. सन् की दूसरी तीसरी शती से पूर्व नहीं माना जा सकता। यहाँ हमें भाषा की वे सब प्रवृत्तियाँ पुष्ट रूप से दिखाई देती हैं और जिन्हें प्राय: महाराष्ट्री प्राकृत के लक्षण माना जाता है। पउमचरियं में सात अधिकार हैं जो 118 उद्देश्यों में विभाजित हैं। समस्त रचना पद्यात्मक है। छंद गाथा है किंतु स्थान-स्थान पर छंदवैचित्र्य भी पाया जाता है। शैली सरस और सरल है तथा उसमें कथात्मकता ही प्रधान है। मूल कथा वाल्मीकि कृत [[रामायण]] के सदृश है, किंतु अवांतर बातों में उससे बहुत भिन्नता भी है, जैसे सीता का एक भाई भामंडल भी था; राम ने बर्बर जातियों के मिथिला पर आक्रमण होने पर जनक की सहायता की थी और इसी के उपलक्ष्य में जनक ने सीता को उन्हें अर्पित करने का संकल्प किया था। सुग्रीव, हनुमान आदि वानर नहीं थे, उनका ध्वजचिह्न वानर होने से वे वानरवंशी कहलाते थे। रावण के दशमुख नहीं थे, किंतु उसके प्राकृतिक एक मुख के अतिरिक्त नवरत्नमय हार में मुख के नव प्रतिबिंब दिखाई देने से वह दशानन कहलाने लगा था। उसकी मृत्यु राम के हाथ से नहीं, किंतु लक्ष्मण के हाथ से हुई।
प्राकृत में दूसरा जैन पुराण है- '''[[चउपन्नमहापुरिसरियं]]''' (चौपन महापुरुष चरित), जो शीलांकाचार्य द्वारा वि. सं. 925 में रचा गया था। यह प्रायः गद्यात्मक है और इसमें 24 तीर्थंकर, 12 चक्रवर्ती, 9 बलदेव और 9 वासुदेव - इन 54 महापुरुषों का चरित्र वर्णित है। वहाँ रामकथानक में वाल्मीकिकृत रामायण से कुछ और बातें भी ली गई हैं, जो पउमचरियं में नहीं हैं। प्राकृत गद्य में रचित एक और महापुराण भद्रेश्वरकृत '''कथावलि''' (12वीं शती) है, जिसमें उपर्युक्त 54 महापुरुषों के अतिरिक्त 9 प्रतिवासुदेवों के चरित्र सम्मिलित होने से समस्त 63 शलाकापुरुषों के चरित्र भी काव्य की रीति से वर्णित पाए जाते हैं। इनमें वर्धमानसूरिकृत '''आविनाथचरित''', सोमप्रभकृत '''सुमतिनाथचरित''', देवसूरिकृत '''पद्मप्रभचरित''', नेमिचंद्रकृत '''अनंतनाथचरित''', देवंद्रगणिकृत '''वर्धमान चरित''' आदि अनेक विशाल रचनाएँ प्रकाश में आ चुकी हैं। ये रचनाएँ प्राय: 12वीं, 13वीं शती ई. की हैं, इनकी भाषा वही प्राकृत है जिसका प्राकृत व्याकरणों में परिचय पाया जाता है और जिसे पाश्चात्य विद्वानों के "जैन महाराष्ट्रों" की संज्ञा प्रदान की है।
पादलिप्तसूरिकृत '''तरंगवतीकथा''' का उल्लेख अनेक प्राचीन ग्रंथों में मिलता है। यह मूल ग्रंथ पद्य अप्राप्य है, किंतु इसके आधार से निर्मित [[नेमिचंद्र]]कृत '''तरंगलीला''' (15वीं शती ई.) नामकरचना उपलब्ध है। इसका कथानक एक उपन्यास है, जिसमें पात्रों के अनेक जन्मों का वृत्तांत गुथा हुआ है और वह बाणकृत [[कादम्बरी|कादंबरी]] का स्मरण कराता है।
प्राकृत गद्य साहित्य में हरिभद्रसूरिकृत '''[[समरादित्यकथा]]''' (8वीं शती ई.) का विशेष स्थान है। यह धर्मकथा है जिसमें परस्पर विरोधी दो पुरुषों के नौ जन्मांतरों का क्रमश: वर्णन किया गया है। विद्वेषी पुरुष प्रत्येक जन्म में अपने वैरी से ईर्ष्याभाव के कारण उत्तरोत्तर अधोगति को प्राप्त होता है और चत्रिनायक अपने मन तथा चारित्र्य को उत्तरोत्तर शुद्ध बनाता हुआ अंतिम भाव में समरादित्य नाम का राजा होकर तपस्या द्वारा मोक्ष प्राप्त करता है। नौ ही भवों के कथानक अपने अपने रूप में स्वतंत्र और परिपूर्ण हैं तथा उनमें मानवीय भावनाओं तथा समाज के नाना स्तरों का सुदर चित्रण पाया जाता है। हरिभद्र की दूसरी उल्लेखनीय प्राकृत रचना है - '''[[धूर्ताख्यान]]'''। इसके पाँच आख्यानों में पाँच धूर्तों ने अपने अपने ऐसे कथानक सुनाए हैं जिनसे अनेक पौराणिक अतिशयोक्तिपूर्ण वृत्तांतों की व्यंग्यात्मक आलोचना होती है। इस प्रकार यह पद्यात्मक रचना प्राकृत में ही नहीं, किंतु प्राचीन भारतीय साहित्य में व्यंग्यकथा का एक अपूर्व उदाहरण है।
इसी प्रकार की एक कथा उद्योतनसूरिकृत '''[[कुवलयमाला]]''' (ई. सन् 778) है। इसमें नायिका तथा उसके अन्य साथियों के तीन-चार जन्मांतरों का वर्णन अति रोचकता के साथ ग्रथित किया गया है।
धनेश्वरसूरिकृत '''सुरसुंदरीचरित्र''' (11वीं शती ई.)। गाथात्मक कथानक है जिसमें अनेक संयोग और वियोगात्मक प्रेमाख्यान ग्रथित हैं। महेश्वरसूरिकृत '''ज्ञानपंचमीकथा''' (11वीं शती ई.) में दश धार्मिक कथाओं का समावेश हुआ है। हेमचंद्रकृत '''कुमारपालचरित''' (12वीं शती ई.) आठ सर्गो का एक काव्य है जिसमें कर्ता के समकालीन [[गुजरात]] के राजा [[कुमारपाल]] के चरित्रवर्णन के साथ साथ कवि ने अपने प्राकृत व्याकरण के नियमों को उसी क्रम से उदाहृत किया है। इस प्रकार यह संस्कृत के [[भट्टिकाव्य]] का स्मरण दिलाता है जिसमें पाणिनीय व्याकरण के उदाहरण उपस्थित किए गए हैं, यद्यपि यहाँ वे उदाहरण उस प्रकार क्रमबद्ध नहीं हैं जैसे कुमारपालचरित्र में। देवेंद्रसूरिकृत '''श्रीपालचरित''' (14वीं शती), देवंद्रगणिकृत '''रत्नचूडारायचरित''', सुमतिसूरिकृत '''जिनदत्ताख्यान''' तथा जिनहर्षगणिकृत '''रत्नशेखरीकथा''' आदि अनेक प्राकृत कथानक जैन साहित्य में उलब्ध हैं तथा इनके अतिरिक्त व्रतकथाओं के रूप में बहुत सी लघु कथाएँ भी प्राप्त हैं।
== महाराष्ट्री प्राकृत ==
{{मुख्य|महाराष्ट्री प्राकृत}}
[[दण्डी|दंडी]] ने अपने [[काव्यादर्श]] नामक [[काव्यशास्त्र|अलंकार शास्त्र]] में महाराष्ट्री को [[सेतुबंध]] आदि काव्यों की भाषा कहा है :
: ''सहाराष्ट्राश्रयां भाषां प्रकृतष्टं प्राकृतं विदुः।''
: ''सागरः सूक्तिरत्नानां सेतुबन्धादि यन्मयम्॥''
इससे प्राकृत भाषा और साहित्य के संबंध की दो महत्वपूर्ण बातें सिद्ध होती हैं- एक तो यह कि दंडी के समय (छठी सातवीं शती) में प्राकृत भाषा का जो स्वरूप विकसित होकर काव्यरचना में उतरने लगा था, उसी का नाम महाराष्ट्री प्राकृत प्रसिद्ध हुआ और दूसरी यह कि इसी प्राकृत में '''[[सेतुबंध]]''' और उसी के सदृश अन्य भी कुछ रचनाएँ उस समय प्रसिद्ध हो चुकी थीं। सौभाग्यतः [[दण्डी|दंडी]] द्वारा उल्लिखित सेतुबंध काव्य अब भी उपलब्ध है और प्राकृत की एक उत्कृष्ट रचना माना जाता है। इसका उल्लेख [[बाणभट्ट|वाणभट्ट]] ने भी [[हर्षचरितम्|हर्षचरित]] को उत्थानिका में इस प्रकार किया है :
: ''कीर्तिः प्रवरसेनस्य प्रयाता कुमुदोज्जवला।''
: ''सागरस्य परं पारं कपिसैनैव सेतुना॥''
इससे सिद्ध होता है कि इस सेतुबंध के कर्ता का नाम प्रवरसेन था और बाण के समय (सातवीं शती का मध्य) तक इसकी कीर्ति समुद्रपार संभवतः लंका तक पहुँच चुकी थी। इसका नाम रावणवध या दशमुखवध भी पाया जाता है। कहीं-कहीं इसके कर्ता [[कालिदास]] भी कहे गए हैं। इस संबंध के समस्त उल्लेखों के विवेचन से यह बात प्रमाणित होती है कि इस काव्य के कर्ता [[वाकाटक]]वंशी राजा रुद्रसेन के पुत्र प्रवरसेन ही हैं। उनके पिता की मृत्यु उनके बाल्यकाल में ही हो गई थी और उनकी माता प्रभावती गुप्ता राज्य का कार्य सँभालती थीं। प्रभावती गुप्ता सम्राट् [[चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य|चंद्रगुप्त विक्रमादित्य]] की पुत्री थीं। इसीलिये गुप्तसम्राट् ने अपनी सभा के महाकवि कालिदास का कुछ काल के लिये उनके सहायतार्थ भेजा था। अनुमानतः उसी बीच यह काव्यरचना हुई और कालिदास ने उसका कुछ संशोधन भी किया होगा। इस बात का कुछ आभास हमें काव्य के आदि में ही सातवीं गाथा में मिलता है। इन बातों से यह रचना गुप्तसम्राट् चंद्रगुप्त द्वितीय के राज्यकाल (ई. सन् 380 से 413) की सिद्ध होती है। इस काव्य में 15 आश्वास हैं और प्रत्येक आश्वास के अंतिम पद्य में कवि ने अपने को अनुरागअंक या अनुरागचिह्न द्वारा सूचित किया है। काव्य का कथानक सीता अपहरण के पश्चात् प्रारंभ होता है, जब राम वियोग की व्यथा में हैं। सुग्रीव की सहायता से हुनमान द्वारा लंका में सीता का पता लगाया गया और फिर राम लक्ष्मण वानरसेना सहित लंका पर आक्रमण करने के लिये निकले, किंतु समुद्रतट पर आकर एक बड़ी समस्या समुद्र पार करने की उपस्थित हुई। बड़े प्रयत्न से उस पर सेतु बनाया गया, सेना पार हुई; युद्ध में रावण मारा गया, तथा सीता की अग्निपरीक्षा के पश्चात् उन्हें साथ ले राम पुष्पक विमान द्वारा अयोध्या को लौट आए। कथानक वाल्मीकि रामायण का ही अनुसरण करता है, किंतु प्रकृति तथा घटनाओं का वर्णन कवि का अपना है। शैली समास और अलंकारप्रचुर है।
[[दण्डी|दंडी]] ने महाराष्ट्री को जो सेतुबंधादि काव्यों की भाषा कहा है, उससे उनका तात्पर्य संभवतः सेतुबंध के अतिरिक्त '''[[गाथासप्तशती]]''' से है जिसका उल्लेख [[बाणभट्ट|बाण]] ने [[हर्षचरितम्|हर्षचरित]] में इस प्रकार किया है:
: ''अविनाशिनमग्राह्यमकरोत्सातवाहन:।''
: ''विशुद्ध जातिभि: कोषं रत्नेखिसुभाषितै:॥'' ([[हर्षचरितम्|हर्षचरित]] 13)
इसके अनुसार सातवाहन ने सुंदर सुभाषितों का एक कोश निर्माण किया था। आदि में यह कोश सुभाषितकोश या गाथाकोश के नाम से ही प्रसिद्ध था। पीछे क्रमश: सात सौ गाथाओं का समावेश हो जाने पर उसकी सप्तशती नाम से प्रसिद्ध हुई। सातवाहन, शालिवाहन या हाल नरेश भारतीय कथासाहित्य में उसी प्रकार ख्यातिप्राप्त हैं जैसे विक्रमादित्य। [[वात्स्यायन]] तथा [[राजशेखर]] ने उन्हें कुंतल का राजा कहा है और सोमदेवकृत [[कथासरित्सागर]] के अनुसार वे नरवाहनदत के पुत्र थे तथा उनकी राजधानी प्रतिष्ठान (आधुनिक पैठण) थी। पुराणों में आंध्र भृत्यों की राजवंशावली में सर्वप्रथम राजा का नाम सातवाहन तथा सत्रहवें नरेश का नाम हाल निर्दिष्ट किया गया है। इन सब प्रमाणों से हाल का समय ई. की प्रथम दो, तीन शतियों के बीच सिद्ध होता है और उस समय गाथा सप्तशती का कोश नामक मूल संकलन किया गया होगा। राजशेखर के अनुसार सातवाहन ने अपने अंत:पुर में प्राकृत भाषा के ही प्रयोग का नियम बना दिया था। एक जनश्रुति के अनुसार उन्हीं के समय में गुणाढ्य द्वारा पैशाची प्राकृत में '''बृहत्कथा''' रची गई, जिसके अब केवल संस्कृत रूपांतर [[बृहत्कथामञ्जरी|बृहत्कथामंजरी]] तथा [[कथासरित्सागर]] मिलते हैं। गाथासप्तशती की प्रत्येक गाथा अपने रूप में परिपूर्ण है और किसी मानवीय भावना, व्यवहार या प्राकृतिक दृश्य का अत्यंत सरसता और सौंदर्य से चित्रण करती है। [[शृंगार रस|श्रृंगार रस]] की प्रधानता है, किंतु हास्य, कारुण्य आदि रसों का भी अभाव नहीं है। प्रकृतिचित्रण में विंध्यपर्वत ओर गोला (गोदावरी) नदी का नाम पुन:-पुन: आता है। ग्राम, खेत, उपवन, झाड़ी, नदी, कुएँ, तालाब आदि पर पुरुष स्त्रियों के विलासपूर्ण व्यवहार एव भावभंगियों का जैसा चित्रण यहाँ मिलता है, वैसा अन्यत्र दुर्लभ है। इस संग्रह का पश्चात्कालीन साहित्य पर बड़ा प्रभाव पड़ा है। इसी के आदर्श पर जैन कवि जयवल्लभ ने "वज्जालग्गं" नामक प्राकृत सुभाषितों का संग्रह तैयार किया, जिसकी लगभग 800 गाथाओं में से कोई 80 गाथाएँ इसी कोश से उद्धृत की गई हैं। संस्कृत में गोवर्धनाचार्य (11वीं-12वीं शती) ने इसी के अनुकरण पर '''आर्यासप्तशती''' की रचना की। हिंदी में तुलसीसतसई और बिहारी सतसई संभवत: इसी रचना से प्रभावित हुई हैं।
प्राकृत में जिस प्रकार सेतुबंध की ख्याति काव्य की दृष्टि से रही है, उसी प्रकार '''लीलावती''' की प्रसिद्धि कथा की दृष्टि से पाई जाती है। भोजदेव, हेमचंद्र, वाग्भट्ट आदि संस्कृत के अलंकार शास्त्रकारों ने गद्यमयी कथा का उदाहरण कादम्बरी और पद्यमयी कथा का लीलावती को दिया है। उद्योतनसूरि ने अपनी कुवलयमाला नामक कथा में कौतूहलकृत प्राकृत भाषा रचित एवं मरहट्ठ देशीवचन निबद्ध शुद्ध सकलकथा का उल्लेख किया है, जिससे इसी रचना का अभिप्राय सिद्ध होता है। उससे इसके कर्ता का नाम कौतूहल और रचनाकाल 778 ई. से पूर्व का निश्चय हो जाता है। यह रचना कुछ वर्ष पूर्व ही प्रकाश में आई है (भारतीय विद्याभवन, बंबई 1949) इसमें कोई परिच्छेदादि विभाग नहीं हैं। लगातार 13000 से कुछ अधिक गाथाओं में कथा समाप्त हुई है। 1330वीं गाथा में कवि ने स्वयं कहा है कि उन्होंने इसकी रचना महाराष्ट्री प्राकृत में की है (रइयं मरहट्ठ देसि भासाए)। इस कथा के नायक अस्मक देश के प्रतिष्ठाननगर के राजा सातवाहन हैं। एक महा घटनाचक्र के पश्चात् उनका विवाह सिंहल के राजा शिलामेघ की राजकुमारी लीलावती से हुआ। उनके मंत्रियों के नाम यहाँ पोट्सि और कुमारिल बतलाए गए हैं। ये दोनों नाम गाथासप्तशती व गाथाओं के कर्ताओं में भी पाए जाते हैं। इससे इस बात की भी पुष्टि होती है कि इस कथा के कर्ता सातवाहन, शालिवाहन या हाल ही हैं ये तीनों ही नाम इस कथा में यत्र-तत्र आए हैं। कथा बड़ी सरल और सरस शैली में वर्णित है।
महाराष्ट्री प्राकृत का एक उत्कृष्ट काव्य है '''[[गउडवहो]]''' (गौडवध) जिसके कर्ता [[वाक्पतिराज]] ने अपने को कान्यबुज नरेश [[यशोवर्मन (कन्नौज नरेश)|यशोवर्मा]] का समकालीन कहा है। उन्होंने [[भास]], संबंधु, हरिच एवं [[भवभूति]] आदि कवियों का उल्लेख भी किया है। इन सब लेखों पर से इनका समय 8 वीं शती ई. अनुमान किया जा सकता। इस काव्य में भी कोई परिच्छेद नहीं है। लगातार 1200 से कुछ ऊपर [[गाथा]]एँ हैं, जिनमें राजा यशोवर्मा के प्रताप और उनकी जययात्रा तथा गौड़देश के राजा के वध का वर्णन किया गया है।
प्राकृत काव्यरचना की परंपरा 18वीं शती तक बताई जाती है। इस शताब्दी के प्रसिद्ध प्राकृत कवि हैं [[रामपाणिवाद]] (ई. 1707 से 1775) जिनकी दो प्राकृत रचनाएँ सुप्रसिद्ध हैं। एक है '''कंसवहो''' (कंसवध) जिसके चार सर्गो में उद्धव के द्वारा कृष्ण और बलराम को धनुषयज्ञ के बहाने गोकुल से मथुरा ले जाने और उनके द्वारा कंस की मृत्यु का वर्णन भागवत की कथा के आधार किया गया है। शैली में [[कालिदास]], [[भारवि]] तथा [[माघ]] की रचनाओं का प्रभाव स्पष्ट दिखाई देता है। रामपाणिवाद का दूसरा प्राकाव्य है '''उषानिरुद्धं''', जिसमें प्रद्युम्न के पुत्र अनिरुद्ध का बाणाकी पुत्री उषा से [[विवाह]] का वर्णन चार सर्गो में किया गया है। यह कथानक भी [[भागवत पुराण|भागवतादि पुराणों]] पर आश्रित है, किंतु कवि ने अपनी काव्यप्रतिभा से अच्छा सजाया है। सुदूरवर्ती [[केरल]] में 18वीं शती में शुद्ध प्राकृत की ये काव्यरचनाएँ इस बात का प्रमाण हैं कि प्राकृत के पठन-पाठन तथा काव्यसृजन का प्रवाह परिस्थिति के अनुसार तीव्र और मंद भले ही पड़ा हो, किंतु वह सर्वथा सूखा नहीं है।
== प्राकृत साहित्य का महत्त्व ==
इस प्रकार प्राकृत साहित्य अपने रूप एवं विषय की दृष्टि से बड़ा महत्वपूर्ण है तथा भारतीय संस्कृति के सर्वांग परिशीलन के लिये उसका स्थान अद्वितीय है। उसमें उन लोकभाषाओं का प्रतिनिधित्व किया जाता है जिन्होंने वैदिक काल एवं संभवत: उससे भी पूर्वकाल से लेकर देश के नाना भागों को गंगा यमुना आदि महानदियों के अनुमान प्लावित किया है और उसकी साहित्यभूमि को उर्वरा बनाया हैं। ई. पूर्व छठी शती से लेकर प्राय: वर्तमान तक प्राकृत भाषाओं में ग्रंथरचना होती चली आई है, यद्यपि शास्त्रीय दृष्टि से उन भाषाओं का विकास ई. सन् 1000 तक ही माना जाता है, क्योंकि उसके पश्चात् हिंदी, गुजराती, मराठी, बँगला, आदि आधुनिक भाषाओं का युग प्रारंभ होता है। मगध से लेकर दरद प्रदेश (पश्चिमोत्तर भारत) तथा [[हिमालय]] से लेकर [[श्रीलंका का इतिहास|सिंहल द्वीप]] तक की नानाविध लोकभाषाओं का स्वरूप प्राकृत में सुरक्षित है। इस साहित्य का बहु भाग यद्यपि जैनधर्म विषयक है, तथापि उसमें तत्कालीन लोकजीवन ऐसा प्रतिबिंबित है जैसा अन्यत्र दुर्लभ है। इसमें नानाकालीन एवं नानादेशीय ऐतिहासिक, राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक आदि महत्वपूर्ण झाँकियाँ दिखाई देती है जिनका भारतीय इतिहास में यथोचित मूल्यांकन करना अभी शेष है। भाषाओं के अतिरिक्त देश के धार्मिक, दार्शनिक व नैतिक विकास की परम्परा और उसकी गुत्थियों को स्पष्टता से समझने में इस साहित्य से बहुमूल्य सहायता मिल सकती है। यह महत्वपूर्ण साहित्य अभी तक पूर्णत: प्रकाशित नहीं हो सका है। जितना भाग प्रकाशित हुआ है उसका भी समालोचनात्मक रीति से संपादन बहुत कम हुआ है वैज्ञानिक तथा तुलनात्मक अध्ययन भी बहुत शेष है।
== यह भी देखिये ==
* [[प्राकृत]]
* [[पालि]]
* [[अपभ्रंश]]
* [[अर्धमागधी]]
* [[शौरसेनी]]
* [[अवहट्ठ]]
* [[आगम (जैन)|जैन आगम]]
* [[संस्कृत साहित्य]]
* [[पालि भाषा का साहित्य]]
* [[हिंदी साहित्य|हिन्दी साहित्य]]
* [[भारत की भाषाएँ]]
==बाहरी कड़ियाँ==
*[https://archive.org/details/in.ernet.dli.2015.552436/page/n3/mode/2up प्राकृत साहित्य का इतिहास]
[[श्रेणी:साहित्य]]
[[श्रेणी:संस्कृत]]
[[श्रेणी:हिन्दी]]
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अनुनाद सिंह
1634
/* प्राकृत साहित्य का महत्त्व */
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wikitext
text/x-wiki
मध्ययुगीन [[प्राकृत|प्राकृतों]] का गद्य-पद्यात्मक [[साहित्य]] विशाल मात्रा में उपलब्ध है। प्राकृत, भारतीय उपमहाद्वीप में जनभाषा रही है। यह [[आगम (जैन)|जैन आगमों]] की भाषा मानी जाती है। [[महावीर स्वामी|भगवान महावीर]] ने इसी प्राकृतभाषा के [[अर्धमागधी]] रूप में अपना उपदेश दिया था। यह [[शिलालेख|शिलालेखों]] की भी भाषा रही है। [[हाथीगुम्फा शिलालेख|हाथीगुफा शिलालेख]], [[नासिक शिलालेख]], [[अशोक के शिलालेख]] प्राकृत भाषा में ही हैं। प्राकृत में [[व्याकरण]] ग्रन्थ, नाटक, गीत, धार्मिक उपदेश आदि विपुल साहित्य है।
प्राकृत साहित्य में सबसे प्राचीन वह [[अर्धमागधी]] साहित्य है जिसमें [[जैन धर्म|जैन]] धार्मिक ग्रंथ रचे गए हैं तथा जिन्हें समष्टि रूप से [[आगम (जैन)|जैनागम]] या [[आगम (जैन)|जैनश्रुतांग]] कहा जाता है।
[[कथा]] साहित्य की दृष्टि से सर्वाधिक प्राचीन रचना [[बड्डकहा]] ([[बृहत्कथा]]) भी प्राकृत भाषा ([[पैशाची]]) में ही लिखी गयी थी। पादलिप्तसूरी की तरंगवई, संघदासगणि की वसुदेवहिण्डी, हरिभद्रसूरि विरचित समराइच्चकहा, उद्योतनसूरिकृत [[कुवलयमाला]] आदि कृतियाँ उत्कृष्ट कथा-साहित्य की निदर्शन हैं।
[[विमलसूरि]] विरचित ‘[[पउमचरिउ|पउमचरियं]]’ (पद्मचरितम्) जैन रामायण का ग्रन्थ है जो प्राकृत में ही लिखा गया है। जंबूचरियं, सुरसुन्दरीचरियं, महावीरचरियं आदि अनेक प्राकृत चरितकाव्य हैं जिनके अध्ययन से तत्कालीन समाज एवं संस्कृति का बोध होता है।
[[हाल]]कवि की [[गाहासतसई]] (गाथा सप्तशती) [[बिहारी (साहित्यकार)|बिहारी]] की[[बिहारी सतसई|सतसई]] का प्रेरणास्रोत आधारग्रन्थ रही है। गाहा सतसई [[शृंगार रस|शृंगाररस]] प्रधान काव्य है, जिस पर १८ टीकाएँ लिखी जा चुकी हैं। [[रुद्रट]] , [[मम्मट]], [[विश्वनाथ]] आदि काव्य शास्त्रियों ने गाहासतसई की मुक्तकण्ठ से प्रशंसा की है तथा संस्कृत के काव्यशास्त्रों में गाहासतसई कवि [[भट्ट मथुरानाथ शास्त्री]] ने इस पर ‘सर्वङ्कषा’ संस्कृत टीका लिखी है।
[[जयवल्लभ]] द्वारा रचित ‘वज्जालग्ग’ भी प्राकृत की एक महत्वपूर्ण रचना है, जिसमें प्राकृत भाषा के सम्बन्ध में कहा है कि-
: ''ललिए महुरक्खरए जुवईयणवल्लहे ससिगारे।
: ''सन्ते पाइयकव्वे को सक्कइ सक्कयं पढिउं॥
अर्थात् ललित एवं मधुर अक्षरों से युक्त, युवतियों को प्रिय तथा शृंगाररसयुक्त [[प्राकृत]] काव्य के होते हुए [[संस्कृत]] को कौन पढ़ना चाहेगा? यह कथन प्राकृत की महत्ता को सुबोधता, सुग्राह्यता, सरसता आदि विशेषताओं से स्थापित करता है।
== जैनागम ==
{{मुख्य|आगम (जैन)}}
इस साहित्य की प्राचीन परम्परा यह है कि अंतिम जैन तीर्थंकर [[महावीर]] का विदेह प्रदेश में जन्म लगभग 600 ई. पूर्व हुआ। उन्होंने 30 वर्ष की अवस्था में मुनि दीक्षा ले ली और 12 वर्ष तप और ध्यान करके [[कैवल्य]]ज्ञान प्राप्त किया। तत्पश्चात् उन्होने अपना धर्मोपदेश सर्वप्रथम [[राजगृह]] में और फिर अन्य नाना स्थानों में देकर [[जैन धर्म]] का प्रचार किया। उनके उपदेशों को उनके जीवनकाल में ही उनके शिष्यों ने 12 अंगों में संकलित किया। उनके नाम हैं-
:(1) [[आचारांग]], (2) सूत्रकृतांग, (3) [[स्थानांग सूत्र|स्थानांग]], (4) समयांग, (5) भगवती व्याख्या प्रज्ञप्ति, (6) न्यायधर्म कथा (णायाधम्महाओ),
:(7) उपासकादशा, (8) अंतकृदशा, (9) अनुत्तेरोपपातिक (10) प्रश्न व्याकरण, (11) विपाक सूत्र और (12) [[दृष्टिवाद]]।
इन अंगों की भाषा वही अर्धमागधी प्राकृत है जिसमें महावीर ने अपने उपदेश दिए। संभवतः यह आगम उस समय लिपिबद्ध नहीं किया गया एवं गुरु-शिष्य परंपरा से मौखिक रूप में प्रचलित रहा और यही उसके '''श्रुतांग''' कहलाने की सार्थकता है।
महावीर का निर्वाण 72 वर्ष की अवस्था में ई. पू. 527 में हुआ और उसके पश्चात् शीघ्र ही उक्त अंगों की परम्परा में विप्रतिपत्तियाँ उत्पन्न होने लगीं। जैनधर्म के दिगम्बर संप्रदाय की मान्यता है कि श्रुतांगों का क्रमश: ह्रास होते-होते उनका खंडशः ज्ञान कुछ आचार्यो को रहा और उसके आधार से उन्होंने नए रूप में सैद्धांतिक ग्रंथ लिखे, जिनके प्राचीनतम उदाहरण कर्मप्राकृत ([[षट्खंडागम]]) व कषायप्राकृत (कसायपाहुड) नामक सूत्र हैं। किंतु श्वेतांबर संप्रदाय की मान्यता है कि उक्त आगम ग्रंथों को उत्पन्न होती हुई विकृतियों से बचाने के लिये समय-समय पर मुनियों ने उनकी वाचनाएँ कीं और उन्हें सुरक्षित रखने का प्रयत्न किया। प्रथम वाचना महावीर निर्वाण से 160 वर्षो पश्चात् [[पाटलिपुत्र]] में [[स्थूलभद्राचार्य]] की अध्यक्षता में हुई जिसमें 11 अंगों का संकलन किया गया। 12वें अंग का उपस्थित मुनियों में से किसी को भी व्यवस्थित ज्ञान न होने से उसका उद्धार नहीं किया जा सका। जैन मुनियों की अपरिग्रह वृत्ति तथा वर्षाकाल को छोड़ निरंतर परिभ्रमण एवं उस काल की कठिनाइयों के कारण यह अंगज्ञान पुन: छिन्न-भिन्न होने लगा। आर्य स्कंदित ने [[मथुरा]] में मुनिसंघ का सम्मेलन किया और उन्हीं 11 अंगों को एक बार पुन: व्यवस्थित करने का प्रयत्न किया। देवर्धिगणि क्षमाश्रमण ने वलभी नगर में मुनिसम्मेलन कराया और जैन आगम को वह रूप दिया जिसमें वह आज उपलब्ध है। इस वाचना में उपर्युक्त 11 अंगों के अतिरिक्त अन्य अनेक ग्रंथों को सुव्यवस्थित करने का प्रयत्न किया गया जो इस कालावधि तक रचे जा चुके थे। ये थे - 12 उपांग, 6 छेदसूत्र, 4 मूलसूत्र, 10 प्रकीर्णक और दो चूलिकाएँ। इस प्रकार वलभी वाचना के फलस्वरूप अर्धमागधी जैनागम के 45 ग्रंथ व्यवस्थित हो गए जो आज भी उपलब्ध हैं, तथा जिनका संक्षेप में परिचय निम्न प्रकार है :
=== ग्यारह अंग ===
१. '''आचारंग''' - इस श्रुतग्रंथ में मुनियों के पालने योग्य सदाचार का विवरण दिया गया है। यह दो श्रुतस्कंधों में विभाजित है। प्रथम श्रुतस्कंध में 9 अध्ययन और उनके अंतर्गत 44 उद्देश्यक हैं। ग्रंथ का यह भाग मूल एवं भाषा, शैली और विषय की दृष्टि से प्राचीनतम है। द्वि. श्रुतस्कंध इसकी चूलिका के रूप में है और वह तीन चूलिकाओं एवं 16 अध्ययनों में विभाजित है। प्रथम श्रुतस्कंध के नवमें उपधान नामक अध्ययन में महावीर की उग्र तपस्या एवं लाढ़ वज्रभूमि, शुभ्रभूमि आदि स्थानो में विहार करते हुए घोर उपसर्गो के सहने का मार्मिक वर्णन है।
२. '''सूत्रकृतांग''' - इसके भी दो श्रुतस्कंध हैं जिनमें क्रमश: 16 तथा 7 अध्ययन हैं1 प्रथम श्रुतांग प्राय: मद्यमय है और दूसरे में गद्य पद्य दोनों का प्रयोग हुआ है। इसमें प्राचीन काल के दार्शनिक वादों जैसे क्रियावाद, अक्रियावाद, नियतिवाद, अज्ञानवाद आदि का प्ररूपण तथा निराकरण किया गया है तथा श्रमण, ब्राह्मण, भिक्षु, निग्र्रंथ आदि के स्वरूप की व्याख्या की गई है। अंतिम अध्ययन नालदीय में महावीर के शिष्य गौतम तथा पाश्र्वनाथ की परंपरा के उदक पेढ़ालपुत्र के बीच वार्तालाप और चातुर्याम धर्म के संबंध में विचार जैनधर्म की महावीर से पूर्वपरंपरा पर प्रकाश डालता है।
३. '''स्थानांग''' - इसमें 10 अध्ययन हैं जिनमें क्रमश: एक से लेकर 10 तक की संख्यावाले पदार्थो का निरूपण किया गया है, जैसे एक दर्शन, एकचारित्र, एक समय, इत्यादि; दो क्रियाएँ जीव और अजीव; वृक्ष तीन प्रकार केहृ पत्रोपेत, फलोपेत और पुष्पोपेत, तीन वेद ऋक्, यजु और साम इत्यादि। इस पद्धति से इस ग्रंथ में अनेक विषयों का बहुमुखी वर्णन आया है जो अपने ढंग का एक विश्वकोश ही है। उसकी यह शैली पालि त्रिपिटक के अंगुततर निकाय से समता रखती है।
४. '''समवायांग''' - यह भी स्थानांग के सदृश एकोत्तर क्रम से वस्तुओं का निरूपण करनेवाला विश्वकोश है। विशेषता इसकी यह है कि इसमें संख्याक्रम क्रमश: बढ़ता हुआ शतों, सहस्रों, शतसहस्त्रों तथा कोटियों तक पहुँचाया गया है। यथास्थान इसमें जैन आगम तथा तीर्थकर, चक्रवर्ती आदि त्रिरसठ शलाकापुरुषों का परिचय नामवली पद्धति से वर्णित है।
५. '''भगवती व्याख्या प्रज्ञाप्ति''' - यह रचना आकार और विषय की दृष्टि जैनागम में सबसे अधिक विशाल और महत्वपूर्ण है। इसमें 41 शतक हैं और प्रत्येक शतक अनेक उद्देशक में विभाजित है। शैली प्रश्नोत्तरात्मक है। प्रश्नकर्ता हैं गौतम गणधर और उत्तरदाता स्वयं महावीर। टीकाकारों के अनुसार इसमें 36 सहस्र प्रश्नोत्तरों का समावेश है। दर्शन, आचार, इतिहास, भूगोल आदि समस्त विषयों पर किसी न किसी प्रसंग से प्रकाश डाला गया है। महावीरकाल की राजनीतिक परिस्थिति और उस समय के घोर युद्ध आदि का वर्णन जैसा इस ग्रंथ में आया है वैसा अन्यत्र कहीं नहीं पाया जाता।
६. '''न्यायधर्मकथा''' - इस अंग का प्राकृत नाम न्यायधम्मकहाओ है और उसका संस्कृत रूपांतर ज्ञातृ या ज्ञाताधर्मकथा भी किया जाता है जिसका अर्थ होता है ज्ञातृ अर्थात् ज्ञातृपुत्र महावीर का धर्मोपदेश। विषय को देखते हुए इसका प्रथम नाम ही अधिक सार्थक प्रतीत होता है क्योंकि इसमें कथाओं द्वारा किन्हीं न्यायों अर्थात् नीतिवाक्यों का स्पष्टीकरण किया गया है।
७. '''उपासकदशा''' - नामानुसार इसमें भी उपासक, कामदेव, चुलणीप्रिय आदि दस ऐसे उपासकों के चरित्र वर्णित हैं जिन्होंने कठिनाइयों के बीच धर्मपालन किया।
८. '''अंतकृदद्शा''' - नामानुसार इसमें भी उपासक दशा के समान दस अध्ययन ही रहे होंगे। किंतु वर्तमान में यहाँ आठ वर्ग हैं और प्रत्येक वर्ग अनेक अध्ययनों में विभाजित हैं। इसमें ऐसे साधुओं के चरित्र वर्णित किए गए हैं, जिन्होंने तपस्या द्वारा संसार का अंत कर निर्वाण प्राप्त किया।
९. '''अनुत्तरोपपातिक दशा''' - इसमें ऐसे मुनियों के चरित्र वर्णित हैं जिन्हें अपनी तपस्या के बीच घोर उपसर्ग सहन करने पड़े और उन्होंने मरकर उन अनुत्तर नामक स्वर्गो में जन्म लिया जहाँ से केवल एक बार पुन: मनुष्य जन्म धारण कर निर्वाण प्राप्त किया जाता है।
१०. '''प्रश्नव्याकरण''' - ग्रंथ के नाम से तथा स्थानांग एवं समवायांग से प्राप्त इस श्रुतांग के विषयपरिचय से ज्ञात होता है कि इसमें मूलत: प्रश्नोत्तर के रूप में नाना सिद्धांतों की व्याख्या की गई थी। किंतु वर्तमान में ऐसा न होकर इसके प्रथम खंड में हिंसादि पाँच पापों का और दूसरे खंड में अहिंसादि व्रतों का प्ररूपण पाया जाता है।
११. '''विपाकसूत्र''' - इसमें दो श्रुतस्कंध हैं और प्रत्येक में दस दस-अध्ययन हैं। इसमें जीव के अच्छे और बुरे कर्मो से फलित होनेवाले सुख दु:खों का बड़ा वैचित्र्य है जिसमें जीवन की सभी दशाओं का वर्णन आ गया है। जैनधर्म के कर्मसिद्धांतनुसार जीवन के समस्त अनुभव सुकर्म एवं दुष्कर्मो के परिणाम ही हैं। इसका इस श्रुतांग में विस्तार से प्ररूपण पाया जाता है।
=== बारह उपांग ===
(१) '''औपपातिक''' में नाना साधनाओं द्वारा पुनर्जन्म के स्वरूप का नाना उदाहरणों सहित व्याख्यान किया गया है। इसकी यह भी एक विशेषता है कि जिन नगर, राजा, चैत्य आदिक का अन्यत्र संकेत मात्र पाया जाता है, उसका यहाँ पूरा वर्णन मिलता है।
(२) '''रायपसेणिज्जं''' - इसका संस्कृत रूपांतर राजप्रश्नीय किया जाता है, किंतु संभवत: उसका संबंध कोशलनरेश प्रसेनजित से रहा है जो पहले भौतिकवादी था, किंतु पश्चात् केशी मुनि के उपदेश से सम्यगदृष्टि बन गया। यह ग्रंथ पालि "मिलिंद पंहो" से तुलनीय है।
(३) '''जीवाजीवाभिगम''' - में नामानुसार प्रश्नोत्तर के रूप में जीव और अजीव के भेदप्रभेदों का वर्णन किया गया है।
(४) '''प्रज्ञापना''' में जैन दर्शन की नाना व्यवस्थाओं का विवरण हुआ है, जिससे यह ग्रंथ भगवती के समान जैन सिद्धांत का ज्ञानकोश ही कहा जा सकता है।
(५) वें, (६) ठे और (७) वें उपांगों के नाम क्रमश: '''सूर्यप्रज्ञप्ति''', '''जंबुद्वीपप्रज्ञप्ति''' और '''चंद्रप्रज्ञाप्ति''' हैं जिनमें उन लोकों का जैन मान्यतानुसार वर्णन किया गया है।
(8) '''कल्पिका''' व (9) '''कल्पावतंसिका''' में मगधराज श्रेणिक, उसके पुत्र अजातशत्रु एवं उसके पोत्रों के चरित्र वर्णित हैं जिन्होंने अपने अपने कर्मानुसार नरक तथा स्वर्गगतियाँ प्राप्त कीं।
(१०) '''पुष्पिका''' एवं (११) '''पुष्पचूला''' में अनेक स्त्री पुरुषों की धार्मिक साधना, स्वर्गसुखों और महावीर की वंदना के लिये आगमन का वर्णन है।
(१२) '''वृष्णिदशा''' में द्वारावती के राजा कृष्णवासुदेव एवं तीर्थकर नेमिनाथ के चरित्र का वर्णन है।
=== छह छेदसूत्र ===
(१) निशीथ, (२) महानिशीथ, (३) व्यवहार, (४) आचारदशा, (५) कल्पसूत्र और (६) पंचकल्प।
इनमें मुनियों की साधनाओं एवं व्रतों का भंग होने पर प्रायश्चित्त का विचार किया गया है। इन सबमें कल्पसूत्र का सबसे अधिक प्रचार है। मुनि आचार के अतिरिक्त इसमें महावीर तथा ऋषभदेव, नेमिनाथ और पश्र्वनाथ के चरित्र भी वर्णित हैं।
=== चार मूलसूत्र ===
(1) उत्तराध्ययन, (2) दश्वैकालिक, (3) आवश्यक और (4) पिण्डनिर्युक्ति
इन सभी में मुख्यतया मुनि आचार का वर्णन है। इनमें उत्तराध्ययन की बड़ी प्रतिष्ठा है।
=== दस प्रकीर्णक ===
:(1) चतु:शरण (2) आतुर प्रत्याख्यान, (3) महाप्रत्याख्यान (4) भक्त परिज्ञा, (5) तंदुलवैचारिक,
:(6) संस्तारक (7) गच्छाचर, (8) गणिविद्य, (9) देवंद्रस्तव और (10) मरणसमाधि।
ये सभी प्रायः पद्यात्मक हैं और इनमें मुनियों के पालने योग्य नीति का उपदेश दिया गया है।
=== दो चूलिका सूत्र ===
(1) नंदी और (2) अनुयोगद्वार।
नंदी में ज्ञान के भेदों व श्रुतांगों का विस्तार से वर्णन है तथा अनुयोगद्वार में प्रश्नोत्तरों के रूप में नाना विषयों का परिचय कराया गया है जिसमें रसों व संगीत आदि का भी समावेश है।
उपरोक्त ही 45 जैनधार्मिक ग्रंथ है जो उपलब्ध अर्धमागधी साहित्य कहा जा सकता है। इन ग्रंथों पर निर्युक्ति, चूर्ण, टीका, भाष्य, वृत्ति आदि व्याख्यात्मक विशाल साहित्य प्राकृत और संस्कृत भाषाओं में पद्य और पद्यात्मक है। समस्त निर्युक्तियाँ भद्रबाहुकृत व चूर्णियाँ जिनदासगणि महत्तर कृत मानी जाती हैं। इनके भीतर जैन सिद्धांत के विवेचन के अतिरिक्त आख्यानात्मक रचनाओं का बड़ा वैपुल्य है जो साहित्य और इतिहास की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
दिगंबर संप्रदाय में इन 45 आगम ग्रंथों की मान्यता और प्रचार नहीं है। उस परम्परा में लुप्त हुए द्वादशांग श्रुत के आधार से [[शौरसेनी प्राकृत]] में स्वतंत्र साहित्य का निर्माण हुआ जिसकी सर्वप्राचीन रचनाएँ [[आचार्य पुष्पदंत|पुष्पदंत]] और [[भूतबलि|भूतबलिकृत]] '''कर्मप्राभृत''' नामक ग्रंथ हैं। इनमें जैन कर्मसिद्धांत का बड़ी व्यवस्था तथा सूक्ष्मता से प्ररूपण किया गया है। इनका रचनाकाल महावीर निर्वाण के के शीघ्र ही पश्चात् हुआ सिद्ध होता है। इनपर समय-समय पर अनेक टीकाएँ प्राकृत तथा संस्कृत में लिखी गईं, जिनमें से वर्तमान में सुप्रसिद्ध धवल और जयधवल नामक टीकाएँ हैं जिनके कर्ता [[वीरसेन]] और [[जिनसेन]] राष्ट्रकूट नरेश [[अमोघवर्ष]] (9वीं शती) के प्रायः समकालीन थे। प्राचीनता में कर्मप्राभृत और कषायप्राभृत के पश्चात् कुंदकुंदाचार्यकृत 12-13 शौरसेनी पद्यात्मक रचनाएँ हैं जिनमें प्रधान हैं - प्रवचनसार, समयसार, पंचास्तिकाय और नियमसार। इन सभी में जैन सिद्धांत, आचारशास्त्र, तथा स्थाद्वादात्मक न्याय का निरूपण किया गया है। [[समयसार]], पंचास्तिका और नियमासार। इन सभी में जैन सिद्धांत, आचारशास्त्र, तथा स्थाद्वादात्मक न्याय का निरूपण किया गया है। समयसार में जैसा आध्यामिक विवेचन किया गया है वैसा अन्यत्र नहीं पाया जाता।
== जैन परम्परा का कथात्मक साहित्य ==
धार्मिक साहित्य के अतिरिक्त जैन परम्परा का बहुत सा कथात्मक साहित्य भी प्राकृत में पाया जाता है। इस प्रकार की सबसे प्राचीन रचना [[विमलसूरि]]कृत '''[[पउमचरिउ|पउमचरियं]]''' (पद्मचरितम्) है जिसमें कर्ता ने अपने ग्रंथ की समाप्ति का समय दुषमा काल के 530 (वीर निर्वाण 534) वर्ष पश्चात् अर्थात् ईसवी सन् 7 सूचित किया है। किंतु विद्वानों को इसकी वास्तविकता में संदेह होता है और वह मुख्यत: इस आधार पर कि ग्रंथ में प्राकृत भाषा का जो स्वरूप मिलता है वह मध्ययुग के दूसरे स्तर का है, जिसका विकासकाल ई. सन् की दूसरी तीसरी शती से पूर्व नहीं माना जा सकता। यहाँ हमें भाषा की वे सब प्रवृत्तियाँ पुष्ट रूप से दिखाई देती हैं और जिन्हें प्राय: महाराष्ट्री प्राकृत के लक्षण माना जाता है। पउमचरियं में सात अधिकार हैं जो 118 उद्देश्यों में विभाजित हैं। समस्त रचना पद्यात्मक है। छंद गाथा है किंतु स्थान-स्थान पर छंदवैचित्र्य भी पाया जाता है। शैली सरस और सरल है तथा उसमें कथात्मकता ही प्रधान है। मूल कथा वाल्मीकि कृत [[रामायण]] के सदृश है, किंतु अवांतर बातों में उससे बहुत भिन्नता भी है, जैसे सीता का एक भाई भामंडल भी था; राम ने बर्बर जातियों के मिथिला पर आक्रमण होने पर जनक की सहायता की थी और इसी के उपलक्ष्य में जनक ने सीता को उन्हें अर्पित करने का संकल्प किया था। सुग्रीव, हनुमान आदि वानर नहीं थे, उनका ध्वजचिह्न वानर होने से वे वानरवंशी कहलाते थे। रावण के दशमुख नहीं थे, किंतु उसके प्राकृतिक एक मुख के अतिरिक्त नवरत्नमय हार में मुख के नव प्रतिबिंब दिखाई देने से वह दशानन कहलाने लगा था। उसकी मृत्यु राम के हाथ से नहीं, किंतु लक्ष्मण के हाथ से हुई।
प्राकृत में दूसरा जैन पुराण है- '''[[चउपन्नमहापुरिसरियं]]''' (चौपन महापुरुष चरित), जो शीलांकाचार्य द्वारा वि. सं. 925 में रचा गया था। यह प्रायः गद्यात्मक है और इसमें 24 तीर्थंकर, 12 चक्रवर्ती, 9 बलदेव और 9 वासुदेव - इन 54 महापुरुषों का चरित्र वर्णित है। वहाँ रामकथानक में वाल्मीकिकृत रामायण से कुछ और बातें भी ली गई हैं, जो पउमचरियं में नहीं हैं। प्राकृत गद्य में रचित एक और महापुराण भद्रेश्वरकृत '''कथावलि''' (12वीं शती) है, जिसमें उपर्युक्त 54 महापुरुषों के अतिरिक्त 9 प्रतिवासुदेवों के चरित्र सम्मिलित होने से समस्त 63 शलाकापुरुषों के चरित्र भी काव्य की रीति से वर्णित पाए जाते हैं। इनमें वर्धमानसूरिकृत '''आविनाथचरित''', सोमप्रभकृत '''सुमतिनाथचरित''', देवसूरिकृत '''पद्मप्रभचरित''', नेमिचंद्रकृत '''अनंतनाथचरित''', देवंद्रगणिकृत '''वर्धमान चरित''' आदि अनेक विशाल रचनाएँ प्रकाश में आ चुकी हैं। ये रचनाएँ प्राय: 12वीं, 13वीं शती ई. की हैं, इनकी भाषा वही प्राकृत है जिसका प्राकृत व्याकरणों में परिचय पाया जाता है और जिसे पाश्चात्य विद्वानों के "जैन महाराष्ट्रों" की संज्ञा प्रदान की है।
पादलिप्तसूरिकृत '''तरंगवतीकथा''' का उल्लेख अनेक प्राचीन ग्रंथों में मिलता है। यह मूल ग्रंथ पद्य अप्राप्य है, किंतु इसके आधार से निर्मित [[नेमिचंद्र]]कृत '''तरंगलीला''' (15वीं शती ई.) नामकरचना उपलब्ध है। इसका कथानक एक उपन्यास है, जिसमें पात्रों के अनेक जन्मों का वृत्तांत गुथा हुआ है और वह बाणकृत [[कादम्बरी|कादंबरी]] का स्मरण कराता है।
प्राकृत गद्य साहित्य में हरिभद्रसूरिकृत '''[[समरादित्यकथा]]''' (8वीं शती ई.) का विशेष स्थान है। यह धर्मकथा है जिसमें परस्पर विरोधी दो पुरुषों के नौ जन्मांतरों का क्रमश: वर्णन किया गया है। विद्वेषी पुरुष प्रत्येक जन्म में अपने वैरी से ईर्ष्याभाव के कारण उत्तरोत्तर अधोगति को प्राप्त होता है और चत्रिनायक अपने मन तथा चारित्र्य को उत्तरोत्तर शुद्ध बनाता हुआ अंतिम भाव में समरादित्य नाम का राजा होकर तपस्या द्वारा मोक्ष प्राप्त करता है। नौ ही भवों के कथानक अपने अपने रूप में स्वतंत्र और परिपूर्ण हैं तथा उनमें मानवीय भावनाओं तथा समाज के नाना स्तरों का सुदर चित्रण पाया जाता है। हरिभद्र की दूसरी उल्लेखनीय प्राकृत रचना है - '''[[धूर्ताख्यान]]'''। इसके पाँच आख्यानों में पाँच धूर्तों ने अपने अपने ऐसे कथानक सुनाए हैं जिनसे अनेक पौराणिक अतिशयोक्तिपूर्ण वृत्तांतों की व्यंग्यात्मक आलोचना होती है। इस प्रकार यह पद्यात्मक रचना प्राकृत में ही नहीं, किंतु प्राचीन भारतीय साहित्य में व्यंग्यकथा का एक अपूर्व उदाहरण है।
इसी प्रकार की एक कथा उद्योतनसूरिकृत '''[[कुवलयमाला]]''' (ई. सन् 778) है। इसमें नायिका तथा उसके अन्य साथियों के तीन-चार जन्मांतरों का वर्णन अति रोचकता के साथ ग्रथित किया गया है।
धनेश्वरसूरिकृत '''सुरसुंदरीचरित्र''' (11वीं शती ई.)। गाथात्मक कथानक है जिसमें अनेक संयोग और वियोगात्मक प्रेमाख्यान ग्रथित हैं। महेश्वरसूरिकृत '''ज्ञानपंचमीकथा''' (11वीं शती ई.) में दश धार्मिक कथाओं का समावेश हुआ है। हेमचंद्रकृत '''कुमारपालचरित''' (12वीं शती ई.) आठ सर्गो का एक काव्य है जिसमें कर्ता के समकालीन [[गुजरात]] के राजा [[कुमारपाल]] के चरित्रवर्णन के साथ साथ कवि ने अपने प्राकृत व्याकरण के नियमों को उसी क्रम से उदाहृत किया है। इस प्रकार यह संस्कृत के [[भट्टिकाव्य]] का स्मरण दिलाता है जिसमें पाणिनीय व्याकरण के उदाहरण उपस्थित किए गए हैं, यद्यपि यहाँ वे उदाहरण उस प्रकार क्रमबद्ध नहीं हैं जैसे कुमारपालचरित्र में। देवेंद्रसूरिकृत '''श्रीपालचरित''' (14वीं शती), देवंद्रगणिकृत '''रत्नचूडारायचरित''', सुमतिसूरिकृत '''जिनदत्ताख्यान''' तथा जिनहर्षगणिकृत '''रत्नशेखरीकथा''' आदि अनेक प्राकृत कथानक जैन साहित्य में उलब्ध हैं तथा इनके अतिरिक्त व्रतकथाओं के रूप में बहुत सी लघु कथाएँ भी प्राप्त हैं।
== महाराष्ट्री प्राकृत ==
{{मुख्य|महाराष्ट्री प्राकृत}}
[[दण्डी|दंडी]] ने अपने [[काव्यादर्श]] नामक [[काव्यशास्त्र|अलंकार शास्त्र]] में महाराष्ट्री को [[सेतुबंध]] आदि काव्यों की भाषा कहा है :
: ''सहाराष्ट्राश्रयां भाषां प्रकृतष्टं प्राकृतं विदुः।''
: ''सागरः सूक्तिरत्नानां सेतुबन्धादि यन्मयम्॥''
इससे प्राकृत भाषा और साहित्य के संबंध की दो महत्वपूर्ण बातें सिद्ध होती हैं- एक तो यह कि दंडी के समय (छठी सातवीं शती) में प्राकृत भाषा का जो स्वरूप विकसित होकर काव्यरचना में उतरने लगा था, उसी का नाम महाराष्ट्री प्राकृत प्रसिद्ध हुआ और दूसरी यह कि इसी प्राकृत में '''[[सेतुबंध]]''' और उसी के सदृश अन्य भी कुछ रचनाएँ उस समय प्रसिद्ध हो चुकी थीं। सौभाग्यतः [[दण्डी|दंडी]] द्वारा उल्लिखित सेतुबंध काव्य अब भी उपलब्ध है और प्राकृत की एक उत्कृष्ट रचना माना जाता है। इसका उल्लेख [[बाणभट्ट|वाणभट्ट]] ने भी [[हर्षचरितम्|हर्षचरित]] को उत्थानिका में इस प्रकार किया है :
: ''कीर्तिः प्रवरसेनस्य प्रयाता कुमुदोज्जवला।''
: ''सागरस्य परं पारं कपिसैनैव सेतुना॥''
इससे सिद्ध होता है कि इस सेतुबंध के कर्ता का नाम प्रवरसेन था और बाण के समय (सातवीं शती का मध्य) तक इसकी कीर्ति समुद्रपार संभवतः लंका तक पहुँच चुकी थी। इसका नाम रावणवध या दशमुखवध भी पाया जाता है। कहीं-कहीं इसके कर्ता [[कालिदास]] भी कहे गए हैं। इस संबंध के समस्त उल्लेखों के विवेचन से यह बात प्रमाणित होती है कि इस काव्य के कर्ता [[वाकाटक]]वंशी राजा रुद्रसेन के पुत्र प्रवरसेन ही हैं। उनके पिता की मृत्यु उनके बाल्यकाल में ही हो गई थी और उनकी माता प्रभावती गुप्ता राज्य का कार्य सँभालती थीं। प्रभावती गुप्ता सम्राट् [[चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य|चंद्रगुप्त विक्रमादित्य]] की पुत्री थीं। इसीलिये गुप्तसम्राट् ने अपनी सभा के महाकवि कालिदास का कुछ काल के लिये उनके सहायतार्थ भेजा था। अनुमानतः उसी बीच यह काव्यरचना हुई और कालिदास ने उसका कुछ संशोधन भी किया होगा। इस बात का कुछ आभास हमें काव्य के आदि में ही सातवीं गाथा में मिलता है। इन बातों से यह रचना गुप्तसम्राट् चंद्रगुप्त द्वितीय के राज्यकाल (ई. सन् 380 से 413) की सिद्ध होती है। इस काव्य में 15 आश्वास हैं और प्रत्येक आश्वास के अंतिम पद्य में कवि ने अपने को अनुरागअंक या अनुरागचिह्न द्वारा सूचित किया है। काव्य का कथानक सीता अपहरण के पश्चात् प्रारंभ होता है, जब राम वियोग की व्यथा में हैं। सुग्रीव की सहायता से हुनमान द्वारा लंका में सीता का पता लगाया गया और फिर राम लक्ष्मण वानरसेना सहित लंका पर आक्रमण करने के लिये निकले, किंतु समुद्रतट पर आकर एक बड़ी समस्या समुद्र पार करने की उपस्थित हुई। बड़े प्रयत्न से उस पर सेतु बनाया गया, सेना पार हुई; युद्ध में रावण मारा गया, तथा सीता की अग्निपरीक्षा के पश्चात् उन्हें साथ ले राम पुष्पक विमान द्वारा अयोध्या को लौट आए। कथानक वाल्मीकि रामायण का ही अनुसरण करता है, किंतु प्रकृति तथा घटनाओं का वर्णन कवि का अपना है। शैली समास और अलंकारप्रचुर है।
[[दण्डी|दंडी]] ने महाराष्ट्री को जो सेतुबंधादि काव्यों की भाषा कहा है, उससे उनका तात्पर्य संभवतः सेतुबंध के अतिरिक्त '''[[गाथासप्तशती]]''' से है जिसका उल्लेख [[बाणभट्ट|बाण]] ने [[हर्षचरितम्|हर्षचरित]] में इस प्रकार किया है:
: ''अविनाशिनमग्राह्यमकरोत्सातवाहन:।''
: ''विशुद्ध जातिभि: कोषं रत्नेखिसुभाषितै:॥'' ([[हर्षचरितम्|हर्षचरित]] 13)
इसके अनुसार सातवाहन ने सुंदर सुभाषितों का एक कोश निर्माण किया था। आदि में यह कोश सुभाषितकोश या गाथाकोश के नाम से ही प्रसिद्ध था। पीछे क्रमश: सात सौ गाथाओं का समावेश हो जाने पर उसकी सप्तशती नाम से प्रसिद्ध हुई। सातवाहन, शालिवाहन या हाल नरेश भारतीय कथासाहित्य में उसी प्रकार ख्यातिप्राप्त हैं जैसे विक्रमादित्य। [[वात्स्यायन]] तथा [[राजशेखर]] ने उन्हें कुंतल का राजा कहा है और सोमदेवकृत [[कथासरित्सागर]] के अनुसार वे नरवाहनदत के पुत्र थे तथा उनकी राजधानी प्रतिष्ठान (आधुनिक पैठण) थी। पुराणों में आंध्र भृत्यों की राजवंशावली में सर्वप्रथम राजा का नाम सातवाहन तथा सत्रहवें नरेश का नाम हाल निर्दिष्ट किया गया है। इन सब प्रमाणों से हाल का समय ई. की प्रथम दो, तीन शतियों के बीच सिद्ध होता है और उस समय गाथा सप्तशती का कोश नामक मूल संकलन किया गया होगा। राजशेखर के अनुसार सातवाहन ने अपने अंत:पुर में प्राकृत भाषा के ही प्रयोग का नियम बना दिया था। एक जनश्रुति के अनुसार उन्हीं के समय में गुणाढ्य द्वारा पैशाची प्राकृत में '''बृहत्कथा''' रची गई, जिसके अब केवल संस्कृत रूपांतर [[बृहत्कथामञ्जरी|बृहत्कथामंजरी]] तथा [[कथासरित्सागर]] मिलते हैं। गाथासप्तशती की प्रत्येक गाथा अपने रूप में परिपूर्ण है और किसी मानवीय भावना, व्यवहार या प्राकृतिक दृश्य का अत्यंत सरसता और सौंदर्य से चित्रण करती है। [[शृंगार रस|श्रृंगार रस]] की प्रधानता है, किंतु हास्य, कारुण्य आदि रसों का भी अभाव नहीं है। प्रकृतिचित्रण में विंध्यपर्वत ओर गोला (गोदावरी) नदी का नाम पुन:-पुन: आता है। ग्राम, खेत, उपवन, झाड़ी, नदी, कुएँ, तालाब आदि पर पुरुष स्त्रियों के विलासपूर्ण व्यवहार एव भावभंगियों का जैसा चित्रण यहाँ मिलता है, वैसा अन्यत्र दुर्लभ है। इस संग्रह का पश्चात्कालीन साहित्य पर बड़ा प्रभाव पड़ा है। इसी के आदर्श पर जैन कवि जयवल्लभ ने "वज्जालग्गं" नामक प्राकृत सुभाषितों का संग्रह तैयार किया, जिसकी लगभग 800 गाथाओं में से कोई 80 गाथाएँ इसी कोश से उद्धृत की गई हैं। संस्कृत में गोवर्धनाचार्य (11वीं-12वीं शती) ने इसी के अनुकरण पर '''आर्यासप्तशती''' की रचना की। हिंदी में तुलसीसतसई और बिहारी सतसई संभवत: इसी रचना से प्रभावित हुई हैं।
प्राकृत में जिस प्रकार सेतुबंध की ख्याति काव्य की दृष्टि से रही है, उसी प्रकार '''लीलावती''' की प्रसिद्धि कथा की दृष्टि से पाई जाती है। भोजदेव, हेमचंद्र, वाग्भट्ट आदि संस्कृत के अलंकार शास्त्रकारों ने गद्यमयी कथा का उदाहरण कादम्बरी और पद्यमयी कथा का लीलावती को दिया है। उद्योतनसूरि ने अपनी कुवलयमाला नामक कथा में कौतूहलकृत प्राकृत भाषा रचित एवं मरहट्ठ देशीवचन निबद्ध शुद्ध सकलकथा का उल्लेख किया है, जिससे इसी रचना का अभिप्राय सिद्ध होता है। उससे इसके कर्ता का नाम कौतूहल और रचनाकाल 778 ई. से पूर्व का निश्चय हो जाता है। यह रचना कुछ वर्ष पूर्व ही प्रकाश में आई है (भारतीय विद्याभवन, बंबई 1949) इसमें कोई परिच्छेदादि विभाग नहीं हैं। लगातार 13000 से कुछ अधिक गाथाओं में कथा समाप्त हुई है। 1330वीं गाथा में कवि ने स्वयं कहा है कि उन्होंने इसकी रचना महाराष्ट्री प्राकृत में की है (रइयं मरहट्ठ देसि भासाए)। इस कथा के नायक अस्मक देश के प्रतिष्ठाननगर के राजा सातवाहन हैं। एक महा घटनाचक्र के पश्चात् उनका विवाह सिंहल के राजा शिलामेघ की राजकुमारी लीलावती से हुआ। उनके मंत्रियों के नाम यहाँ पोट्सि और कुमारिल बतलाए गए हैं। ये दोनों नाम गाथासप्तशती व गाथाओं के कर्ताओं में भी पाए जाते हैं। इससे इस बात की भी पुष्टि होती है कि इस कथा के कर्ता सातवाहन, शालिवाहन या हाल ही हैं ये तीनों ही नाम इस कथा में यत्र-तत्र आए हैं। कथा बड़ी सरल और सरस शैली में वर्णित है।
महाराष्ट्री प्राकृत का एक उत्कृष्ट काव्य है '''[[गउडवहो]]''' (गौडवध) जिसके कर्ता [[वाक्पतिराज]] ने अपने को कान्यबुज नरेश [[यशोवर्मन (कन्नौज नरेश)|यशोवर्मा]] का समकालीन कहा है। उन्होंने [[भास]], संबंधु, हरिच एवं [[भवभूति]] आदि कवियों का उल्लेख भी किया है। इन सब लेखों पर से इनका समय 8 वीं शती ई. अनुमान किया जा सकता। इस काव्य में भी कोई परिच्छेद नहीं है। लगातार 1200 से कुछ ऊपर [[गाथा]]एँ हैं, जिनमें राजा यशोवर्मा के प्रताप और उनकी जययात्रा तथा गौड़देश के राजा के वध का वर्णन किया गया है।
प्राकृत काव्यरचना की परंपरा 18वीं शती तक बताई जाती है। इस शताब्दी के प्रसिद्ध प्राकृत कवि हैं [[रामपाणिवाद]] (ई. 1707 से 1775) जिनकी दो प्राकृत रचनाएँ सुप्रसिद्ध हैं। एक है '''कंसवहो''' (कंसवध) जिसके चार सर्गो में उद्धव के द्वारा कृष्ण और बलराम को धनुषयज्ञ के बहाने गोकुल से मथुरा ले जाने और उनके द्वारा कंस की मृत्यु का वर्णन भागवत की कथा के आधार किया गया है। शैली में [[कालिदास]], [[भारवि]] तथा [[माघ]] की रचनाओं का प्रभाव स्पष्ट दिखाई देता है। रामपाणिवाद का दूसरा प्राकाव्य है '''उषानिरुद्धं''', जिसमें प्रद्युम्न के पुत्र अनिरुद्ध का बाणाकी पुत्री उषा से [[विवाह]] का वर्णन चार सर्गो में किया गया है। यह कथानक भी [[भागवत पुराण|भागवतादि पुराणों]] पर आश्रित है, किंतु कवि ने अपनी काव्यप्रतिभा से अच्छा सजाया है। सुदूरवर्ती [[केरल]] में 18वीं शती में शुद्ध प्राकृत की ये काव्यरचनाएँ इस बात का प्रमाण हैं कि प्राकृत के पठन-पाठन तथा काव्यसृजन का प्रवाह परिस्थिति के अनुसार तीव्र और मंद भले ही पड़ा हो, किंतु वह सर्वथा सूखा नहीं है।
== प्राकृत साहित्य का महत्त्व ==
इस प्रकार प्राकृत साहित्य अपने रूप एवं विषय की दृष्टि से बड़ा महत्वपूर्ण है तथा भारतीय संस्कृति के सर्वांग परिशीलन के लिये उसका स्थान अद्वितीय है। उसमें उन लोकभाषाओं का प्रतिनिधित्व किया जाता है जिन्होंने वैदिक काल एवं संभवत: उससे भी पूर्वकाल से लेकर देश के नाना भागों को गंगा यमुना आदि महानदियों के अनुमान प्लावित किया है और उसकी साहित्यभूमि को उर्वरा बनाया हैं। ई. पूर्व छठी शती से लेकर प्राय: वर्तमान तक प्राकृत भाषाओं में ग्रंथरचना होती चली आई है, यद्यपि शास्त्रीय दृष्टि से उन भाषाओं का विकास ई. सन् 1000 तक ही माना जाता है, क्योंकि उसके पश्चात् [[हिंदी]], [[गुजराती]], [[मराठी]], [[बांग्ला|बँगला]], आदि आधुनिक भारतीय भाषाओं का युग प्रारंभ होता है। मगध से लेकर दरद प्रदेश (पश्चिमोत्तर भारत) तथा [[हिमालय]] से लेकर [[श्रीलंका का इतिहास|सिंहल द्वीप]] तक की नानाविध लोकभाषाओं का स्वरूप प्राकृत में सुरक्षित है। इस साहित्य का बहु भाग यद्यपि जैनधर्म विषयक है, तथापि उसमें तत्कालीन लोकजीवन ऐसा प्रतिबिंबित है जैसा अन्यत्र दुर्लभ है। इसमें नानाकालीन एवं नानादेशीय ऐतिहासिक, राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक आदि महत्वपूर्ण झाँकियाँ दिखाई देती है जिनका भारतीय इतिहास में यथोचित मूल्यांकन करना अभी शेष है। भाषाओं के अतिरिक्त देश के धार्मिक, दार्शनिक व नैतिक विकास की परम्परा और उसकी गुत्थियों को स्पष्टता से समझने में इस साहित्य से बहुमूल्य सहायता मिल सकती है। यह महत्वपूर्ण साहित्य अभी तक पूर्णतः प्रकाशित नहीं हो सका है। जितना भाग प्रकाशित हुआ है उसका भी समालोचनात्मक रीति से संपादन बहुत कम हुआ है वैज्ञानिक तथा तुलनात्मक अध्ययन भी बहुत शेष है।
== यह भी देखिये ==
* [[प्राकृत]]
* [[पालि]]
* [[अपभ्रंश]]
* [[अर्धमागधी]]
* [[शौरसेनी]]
* [[अवहट्ठ]]
* [[आगम (जैन)|जैन आगम]]
* [[संस्कृत साहित्य]]
* [[पालि भाषा का साहित्य]]
* [[हिंदी साहित्य|हिन्दी साहित्य]]
* [[भारत की भाषाएँ]]
==बाहरी कड़ियाँ==
*[https://archive.org/details/in.ernet.dli.2015.552436/page/n3/mode/2up प्राकृत साहित्य का इतिहास]
[[श्रेणी:साहित्य]]
[[श्रेणी:संस्कृत]]
[[श्रेणी:हिन्दी]]
as7soclerbwtn0zwto4movtg9y03frf
प्रोग्रामन भाषाओं की समयरेखा
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2026-05-02T12:10:14Z
अनुनाद सिंह
1634
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wikitext
text/x-wiki
{{शीह-ल5|बॉट=sanjeev bot}}
यहाँ पर ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण [[प्रोग्रामन भाषा]]ओं की [[समयरेखा]] (timeline) दर्शायी गयी है।
== संकेत ==
: (प्रविष्टि) ''का अर्थ है एक गैर-सार्वत्रिक प्रोग्रामन भाषा (non-universal programming language)''
: * <वर्ष> ''का अर्थ है एक अद्वितीय (unique) भाषा जिसका कोई पूर्ववर्ती न रहा हो।''
{|class="wikitable"
|-
| '''पूर्ववर्ती'''
| '''वर्ष'''
| '''नाम'''
| '''प्रमुख विकासकर्ता''', '''कम्पनी'''
|-
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== १९५० के पहले ==
|-
| *
| १८३७
| ''[[वैश्लेषिक इंजन|एनालिटिकल इंजन ऑर्डर कोड]]''
| [[चार्ल्स बैबेज]] तथा [[अडा लवलेस]] (Ada Lovelace)
|-
| *
| 1943-5
| '''[[Plankalkül]]''' (concept)
| [[Konrad Zuse]]
|-
| *
| 1943-6
| '''[[ENIAC koDiMg praNaalii]]'''
| [[एलन टुरिंग]] के बाद [[जॉन फॉन न्युमान]], [[जॉन माचली]], [[जे० प्रेस्पर एकर्त]], [[हर्मन गोल्डस्टाइन]],
|-
| ENIAC कोडिंग प्रणाली
| 1946
| '''[[ENIAC शॉर्ट कोड]]'''
| [[एलन टुरिंग]] के बाद [[रिचर्ड क्लिपिंजर]], [[जॉन फॉन न्युमान]]
|-
| ENIAC कोडिंग प्रणाली
| 1946
| '''[[फॉन न्युमान और गोलडस्टीन ग्राफिंग प्रणाली]]''' (निरूपण)
| [[जॉन फॉन न्युमान]] तथा [[हर्मन गोल्डस्टीन]]
|-
| ENIAC कोडिंग प्रणाली
| 1947
| '''[[ARC असेम्बली]]'''
| [[कैथलीन बूथ]]
|-
| एनालिटिकल इंजन ऑर्डर कोड
| 1948
| '''[[CPC कोडिंग पद्धति]]'''
| [[होवर्ड आइकेन]]
|-
| ENIAC कोडिंग प्रणाली
| 1948
| '''[[Curry notation system]]'''
| [[हास्केल करी]] (Haskell Curry)
|-
| ENIAC शॉर्ट कोड
| 1949
| '''[[ब्रीफ कोड]]'''
| [[जॉन मौचली]] और [[विलियम एफ० स्मिट्ट]]
|-
| ENIAC शॉर्ट कोड
| 1949
| '''C-10'''
| [[Betty Holberton]]
|-
| CPC कोडिंग पद्धति
| 1949
| '''[[सीबर कोडिंग पद्धति]]''' (concept)
| [[रॉबर्ट सीबर]]
|-
! colspan="4" |
== 1950 के बाद ==
=== 1950 के दशक में ===
|-
|ब्रीफ कोड
|1950
|'''[[Short Code (Computer language)|Short Code]]'''
| [[William F Schmidt]], [[A.B. Tonik]], [[J.R. Logan]]
|-
| ARC
| 1950
| '''[[Birkbeck Assembler]]'''
| [[Kathleen Booth]]
|-
| Plankalkül
| 1951
| '''[[Superplan]]'''
| [[Heinz Rutishauser]]
|-
| *
| 1951
| '''[[ALGAE]]'''
| [[Edward A Voorhees]] and [[Karl Balke]]
|-
| Short Code
| 1951
| '''[[Intermediate Programming Language]]'''
| [[Arthur Burks]]
|-
| EDSAC
| 1951
| '''[[Regional Assembly Language]]'''
| [[Maurice Wilkes]]
|-
| [[Aiken CPC system]]
| 1951
| '''[[Boehm unnamed coding system]]'''
| [[Corrado Boehm]]
|-
| Plankalkül
| 1951
| '''[[Klammerausdrücke]]'''
| [[Konrad Zuse]]
|-
| Short Code
| 1951
| '''[[OMNIBAC Symbolic Assembler]]'''
| [[Charles Katz]]
|-
| *
| 1951
| '''[[Stanislaus (programming language)|Stanislaus]]''' (Notation)
| [[Friedrich L. Bauer|Fritz Bauer]]
|-
| EDSAC
| 1951
| '''[[Whirlwind assembler]]'''
| [[Charles Adams (programmer)|Charles Adams]] and [[Jack Gilmore]] at [[MIT]] [[Project Whirlwind]]
|-
| EDSAC
| 1951
| '''[[Rochester assembler]]'''
| [[Nat Rochester]]
|-
| *
| 1951
| '''[[Sort Merge Generator]]'''
| [[Betty Holberton]]
|-
| C-10 and Short Code
| 1952
| '''[[A-0 (programming language)|A-0]]'''
| [[Grace Hopper]]
|-
| Aiken CPC
| 1952
| '''[[Autocode]]'''
| [[Alick Glennie]] after [[Alan Turing]]
|-
| SORT/MERGE
| 1952
| '''[[Editing Generator]]'''
| [[Milly Koss]]
|-
| *
| 1952
| '''[[COMPOOL]]'''
| [[RAND/SDC]]
|-
| *
| 1953
| '''[[Speedcoding]]'''
| [[John Backus|John W. Backus]]
|-
| *
| 1953
| '''[[READ/PRINT]]'''
| Don Harroff, James Fishman, George Ryckman
|-
| *
| 1954
| '''[[Laning and Zierler system]]'''
| Laning, Zierler, Adams at [[MIT]] [[Project Whirlwind]]
|-
| Glennie Autocode
| 1954
| '''[[Mark I Autocode]]'''
| [[Tony Brooker]]
|-
| Speedcoding
| 1954-1955
| '''[[FORTRAN|FORTRAN "0"]]''' (concept)
| Team led by [[John Backus|John W. Backus]] at [[IBM]]
|-
| A-0
| 1954
| '''[[ARITH-MATIC]]'''
| Team led by [[Grace Hopper]] at UNIVAC
|-
| A-0
| 1954
| '''[[MATH-MATIC]]'''
| Team led by Charles Katz
|-
| *
| 1954
| '''[[MATRIX MATH]]'''
| H G Kahrimanian
|-
| *
| 1954
| '''[[Information Processing Language|IPL I]]''' (concept)
| [[Allen Newell]], [[Cliff Shaw]], [[Herbert Simon]]
|-
| A-0
| 1955
| '''[[FLOW-MATIC]]'''
| Team led by [[Grace Hopper]] at UNIVAC
|-
|
| 1955
| '''BACAIC'''
| M. Grems and R. Porter
|-
| FORTRAN, A-2
| 1955
| '''[[PACT I]]'''
| [[SHARE]]
|-
| Boehm
| 1955-6
| '''[[Sequentielle Formelübersetzung]]'''
| [[Friedrich L. Bauer|Fritz Bauer]] and Karl Samelson
|-
| Laning and Zerler
| 1955-6
| '''[[Internal Translator|IT]]'''
| Team led by [[Alan Perlis]]
|-
|
| 1955
| '''PRINT'''
| IBM
|-
| IPL I
| 1958
| '''[[Information Processing Language|IPL II]]''' (implementation)
| [[Allen Newell]], [[Cliff Shaw]], [[Herbert Simon]]
|-
| IPL
| 1956-1958
| '''[[Lisp (programming language)|LISP]]''' (concept)
| [[John McCarthy (computer scientist)|John McCarthy]]
|-
| FLOW-MATIC
| 1957
| '''[[COMTRAN]]'''
| [[Bob Bemer]]
|-
| FORTRAN 0
| 1957
| '''[[FORTRAN|FORTRAN "I"]]''' (implementation)
| [[John Backus|John W. Backus]] at [[IBM]]
|-
| MATH-MATIC
| 1957-1958
| '''UNICODE'''
| Remington Rand UNIVAC
|-
| *
| 1957
| '''[[COMIT]]''' (concept)
|-
| FORTRAN I
| 1958
| '''[[Fortran#FORTRAN II|FORTRAN II]]'''
| Team led by [[John Backus|John W. Backus]] at [[IBM]]
|-
| FORTRAN, IT and Sequentielle Formelübersetzung
| 1958
| '''[[ALGOL (programming language)|ALGOL 58]]''' ('''[[IAL]]''')
| ACM/GAMM
|-
| IPL II
| 1958
| '''[[Information Processing Language|IPL V]]'''
| [[Allen Newell]], [[Cliff Shaw]], [[Herbert Simon]]
|-
| *
| 1959
| '''[[FACT computer language|FACT]]'''
| [[Fletcher R. Jones]], [[Roy Nutt]], Robert L. Patrick
|-
| FLOW-MATIC, COMTRAN, FACT
| 1959
| '''[[COBOL]]''' (concept)
| The [[Codasyl]] Committee
|-
| ALGOL 58
| 1959
| '''[[JOVIAL]]'''
| [[Jules Schwartz]] at [[System Development Corporation|SDC]]
|-
| IPL
| 1959
| '''[[Lisp (programming language)|LISP]]''' (implementation)
| [[John McCarthy (computer scientist)|John McCarthy]]
|-
|
| 1959
| '''[[TRAC (programming language)|TRAC]]''' (concept)
| [[Calvin Mooers|Mooers]]
|-
! colspan="4" |
=== 1960s ===
|-
| ALGOL 58
| 1960
| '''[[ALGOL 60]]'''
|-
| FLOW-MATIC, COMTRAN
| 1960
| '''[[COBOL|COBOL 61]]''' (implementation)
| The [[Codasyl]] Committee
|-
| *
| 1961
| '''[[COMIT]]''' (implementation)
|-
| FORTRAN II
| 1962
| '''[[Fortran|FORTRAN IV]]'''
|-
| *
| 1962
| '''[[APL (programming language)|APL]]''' (concept)
| [[Kenneth E. Iverson|Iverson]]
|-
| ALGOL 58
| 1962
| '''[[MAD (programming language)|MAD]]'''
| [[Bruce Arden|Arden]], ''et al.''
|-
| ALGOL 60
| 1962
| '''[[SIMULA]]''' (concept)
|-
| FORTRAN II, COMIT
| 1962
| '''[[SNOBOL]]'''
| [[Ralph Griswold|Griswold]], ''et al.''
|-
| ALGOL 60
| 1963
| '''[[Combined Programming Language|CPL]]'''
| Barron, [[Christopher Strachey|Strachey]], ''et al.''
|-
| SNOBOL
| 1963
| '''[[SNOBOL|SNOBOL3]]'''
| [[Ralph Griswold|Griswold]], ''et al.''
|-
| ALGOL 60
| 1963
| '''[[ALGOL|ALGOL 68]]''' (concept)
| [[Adriaan van Wijngaarden|van Wijngaarden]], ''et al.''
|-
| ALGOL 58
| 1963
| '''[[JOSS|JOSS I]]'''
| Cliff Shaw, [[RAND]]
|-
| MIDAS
| 1964
| '''[[MIMIC]]'''
| [[H. E. Petersen]], ''et al.''
|-
| CPL, LISP
| 1964
| '''[[COWSEL]]'''
| [[Rod Burstall|Burstall]], [[Robin Popplestone|Popplestone]]
|-
| ALGOL 60, COBOL, FORTRAN
| 1964
| '''[[PL/I]]''' (concept)
| [[IBM]]
|-
| FORTRAN II, JOSS
| 1964
| '''[[BASIC (programming language)|BASIC]]'''
| [[John Kemeny|Kemeny]] and [[Thomas Kurtz|Kurtz]]
|-
| FARGO
| 1964
| '''[[IBM RPG]]'''
| [[IBM]]
|-
|
| 1964
| '''[[MARK-IV (Software)|Mark-IV]]'''
| [[Sterling Software|Informatics]]
|-
|
| 1964
| '''[[TRAC (programming language)|TRAC]]''' (implementation)
| [[Calvin Mooers|Mooers]]
|-
|
| 1964?
| '''[[IITRAN]]'''
|-
| JOSS
| 1965
| '''[[TELCOMP]]'''
| [[Bolt, Beranek and Newman|BBN]]
|-
| JOSS I
| 1966
| '''[[JOSS|JOSS II]]'''
| Chuck Baker, [[RAND]]
|-
| ALGOL 60
| 1966
| '''[[ALGOL W]]'''
| [[Niklaus Wirth]], [[C. A. R. Hoare]] <!-- "A Contribution to the Development of Algol" in [ACM] (1966) [ACM] CACM 9(06) June 1966 -->
|-
| FORTRAN IV
| 1966
| '''[[Fortran|FORTRAN 66]]'''
|
|-
| LISP
| 1966
| ''' [[ISWIM|ISWIM (Concept)]]'''
| [[Peter J. Landin|Landin]]
|-
| ALGOL 60
| 1966
| '''[[CORAL66]]'''
|-
| CPL
| 1967
| '''[[BCPL]]'''
| [[Martin Richards|Richards]]
|-
| FORTRAN, TELCOMP
| 1967
| '''[[MUMPS]]'''
| [[Massachusetts General Hospital]]
|-
| *
| 1967
| '''[[APL (programming language)|APL]]''' (implementation)
| [[Kenneth E. Iverson|Iverson]]
|-
| ALGOL 60
| 1967
| '''[[Simula|SIMULA 67]]''' (implementation)
| [[Ole-Johan Dahl|Dahl]], [[Bjørn Myhrhaug|Myhrhaug]], [[Kristen Nygaard|Nygaard]] at [[Norsk Regnesentral]]
|-
| SNOBOL3
| 1967
| '''[[SNOBOL|SNOBOL4]]'''
| [[Ralph Griswold|Griswold]], ''et al.''
|-
| PL/I
| 1967
| '''[[XPL]]'''
| [[W. M. Mckeeman]], ''et al.'' at [[University Of California]] [[Santa Cruz, California]]<br />[[J. J. Horning]], ''et al.'' at [[Stanford University]]
|-
| ALGOL 60
| 1968
| '''[[ALGOL 68]]''' ([[युनेस्को]]/[[IFIP]] standard)
| [[Adriaan van Wijngaarden|A. van Wijngaarden]], [[Barry J. Mailloux|B.J. Mailloux]], [[John E. L. Peck|J.E.L. Peck]] and [[Cornelis H.A. Koster|C.H.A. Koster]], ''et al.'' <!-- The final version, MR 101, was adopted by the Working Group on December 20th 1968 in Munich, and was subsequently approved for publication by the General Assembly of I.F.I.P. -->
|-
| COWSEL
| 1968
| '''[[POP-1]]'''
| [[Rod Burstall|Burstall]], [[Robin Popplestone|Popplestone]]
|-
| DIBOL
| 1968
| '''[[DIBOL|DIBOL-8]]'''
| [[Digital Equipment Corporation|DEC]]
|-
|
| 1968
| '''[[Forth (programming language)|FORTH]]''' (concept)
| [[Charles H. Moore|Moore]]
|-
| LISP
| 1968
| '''[[Logo (programming language)|LOGO]]'''
| [[Seymour Papert|Papert]]
|-
| CRT RPS
| 1968
| '''[[MAPPER (Software)|MAPPER]]'''
| [[Unisys]]
|-
| *
| 1968
| '''[[REFAL]]''' (implementation)
| [[Valentin Turchin]]
|-
| ALGOL 60, COBOL, FORTRAN
| 1969
| '''[[PL/I]]''' (implementation)
| [[IBM]]
|-
| BCPL
| 1969
| '''[[B (programming language)|B]]'''
| [[Ken Thompson (computer programmer)|Ken Thompson]], with contributions from [[Dennis Ritchie]]
|-
|
| 1969
| '''[[Polymorphic Programming Language|PPL]]'''
| [[Thomas A. Standish]] at [[Harvard University]]
|-
|
| 1969
| '''[[SETL (programming language)|SETL]]'''
| [[Jacob T. Schwartz]] at [[Courant Institute]]
|-
|
| 1969
| '''[[TUTOT (programming language)|TUTOR]]'''
| [[University of Illinois at Urbana-Champaign]]
|-
! colspan="4" |
=== 1970s ===
|-
|
| 1970?
| '''[[Forth (programming language)|FORTH]]''' (implementation)
| [[Charles H. Moore|Moore]]
|-
| POP-1
| 1970
| '''[[POP-2]]'''
|-
| ALGOL 60, ALGOL W
| 1970
| '''[[Pascal (programming language)|Pascal]]'''
| [[Niklaus Wirth|Wirth]], [[Kathleen Jensen|Jensen]]
|-
| Pascal, XPL
| 1971
| '''[[Sue (programming language)|Sue]]'''
| [[Ric Holt|Holt]] ''et al.'' at [[University of Toronto]]
|-
| SIMULA 67
| 1972
| '''[[Smalltalk]]'''
| [[Xerox PARC]]
|-
| PL/I, ALGOL, XPL
| 1972
| '''[[PL/M]]'''
| [[Gary Kildall|Kildall]] at [[Digital Research]]
|-
| B, BCPL, ALGOL 68
| 1972
| '''[[C (programming language)|C]]'''
| [[Dennis Ritchie]]
|-
| *
| 1972
| '''[[INTERCAL]]'''
| [[Don Woods]] and [[James M. Lyon]]
|-
| 2-level W-Grammar
| 1972
| '''[[Prolog]]'''
| [[Alain Colmerauer|Colmerauer]]
|-
| Pascal, BASIC
| 1973
| '''[[COMAL]]'''
| [[Børge Christensen|Christensen]], [[Benedict Løfstedt|Løfstedt]]
|-
|
| 1973
| '''[[ML (programming language)|ML]]'''
| [[Robin Milner]]
|-
| Pascal, Sue
| 1973
| '''[[LIS (programming language)|LIS]]'''
| [[Jean Ichbiah|Ichbiah]] ''et al.'' at [[CII Honeywell Bull]]
|-
| BASIC
| 1974
| '''[[GRASS (programming language)|GRASS]]'''
| [[Tom DeFanti|DeFanti]]
|-
| Business BASIC
| 1974
| '''[[MAI Basic Four|BASIC FOUR]]'''
| MAI BASIC Four Inc.
|-
| [[SETL]]
| 1975
| '''[[ABC (programming language)|ABC]]'''
| [[Leo Geurts]] and [[Lambert Meertens]]
|-
| LISP
| 1975
| '''[[Scheme (programming language)|Scheme]]'''
| [[Gerald Jay Sussman|Sussman]], [[Guy L. Steele, Jr.|Steele]]
|-
| BASIC
| 1975
| '''[[Altair BASIC]]'''
| [[Bill Gates|Gates]], [[Paul Allen|Allen]]
|-
| ALGOL 68, BLISS, ECL, HAL
| 1975
| '''[[CS-4]]'''
| [[Benjamin M. Brosgol|Brosgol]] at [[Intermetrics]]
|-
| Pascal
| 1975
| '''[[Modula]]'''
| [[Niklaus Wirth|Wirth]]
|-
| Smalltalk-72
| 1976
| '''[[Smalltalk|Smalltalk-76]]'''
| [[Xerox PARC]]
|-
| Speakeasy-2
| 1976
| '''[[Speakeasy (computational environment)|Speakeasy-3]]'''
| [[Stanley Cohen]],[[Stephen Pieper]] at [[Argonne National Laboratory]]
|-
| C, FORTRAN
| 1976
| '''[[Ratfor]]'''
| [[Brian Kernighan|Kernighan]]
|-
| APL, PPL, Scheme
| 1976
| '''[[S (programming language)|S]]'''
| [[John Chambers (programmer)|John Chambers]] at [[Bell Laboratories]]
|-
| *
| 1977
| '''[[FP (programming language)|FP]]'''
| [[John Backus]]
|-
| *
| 1977
| '''[[Bourne Shell]]''' (''sh'')
| [[Stephen Bourne|Bourne]]
|-
| Fortran
| 1977
| '''[[IDL (programming language)|IDL]]'''
| David Stern of Research Systems Inc
|-
| MUMPS
| 1977
| '''[[MUMPS|Standard MUMPS]]'''
|-
| SNOBOL
| 1977
| '''[[Icon (programming language)|Icon]]''' (concept)
| [[Ralph Griswold|Griswold]]
|-
| ALGOL 68, LIS
| 1977
| '''[[Green (programming language)|Green]]'''
| [[Jean Ichbiah|Ichbiah]] ''et al.'' at [[CII Honeywell Bull]] for [[United States Department of Defense|US Dept of Defense]]
|-
| ALGOL 68, CS-4
| 1977
| '''[[Red (programming language)|Red]]'''
| [[Benjamin M. Brosgol|Brosgol]] ''et al.'' at [[Intermetrics]] for [[United States Department of Defense|US Dept of Defense]]
|-
| ALGOL 68,
| 1977
| '''[[Blue (programming language)|Blue]]'''
| [[John Goodenough|Goodenough]] ''et al.'' at [[SofTech]] for [[United States Department of Defense|US Dept of Defense]]
|-
| ALGOL 68,
| 1977
| '''[[Yellow (programming language)|Yellow]]'''
| [[Jay Spitzen|Spitzen]] ''et al.'' at [[SRI International]] for [[United States Department of Defense|US Dept of Defense]]
|-
| *
| 1978?
| '''[[MATLAB]]'''
| [[Cleve Moler|Moler]] at the [[University of New Mexico]]
|-
| Algol60
| 1978?
|[[SMALL (programming language)|SMALL]]
| [[Dr. Nevil Brownlee|Brownlee]] at the [[University of Auckland]]
|-
| Ingres
| 1978
| '''[[SQL]]''' aka ''structured query language''
| [[IBM]]
|-
| *
| 1978
| '''[[VISICALC]]'''
| [[Dan Bricklin|Bricklin]], [[Bob Frankston|Frankston]] marketed by [[VisiCorp]]
|-
| Modula
| 1979
| '''[[Modula-2]]'''
| [[Niklaus Wirth|Wirth]]
|-
| PL/I, BASIC, EXEC 2
| 1979
| '''[[REXX]]'''
| [[Mike Cowlishaw|Cowlishaw]]
|-
| C, SNOBOL
| 1979
| '''[[AWK (programming language)|AWK]]'''
| [[Alfred Aho|Aho]], [[Peter J. Weinberger|Weinberger]], [[Brian Kernighan|Kernighan]]
|-
| SNOBOL
| 1979
| '''[[Icon (programming language)|Icon]]''' (implementation)
| [[Ralph Griswold|Griswold]]
|-
| *
| 1979
| '''[[DBASE|Vulcan dBase-II]]'''
| [[Ratliff]]
|-
! colspan="4" |
=== 1980s ===
|-
| C, SIMULA 67
| 1980
| '''[[C with classes]]'''
| [[Bjarne Stroustrup|Stroustrup]]
|-
| BASIC, Compiler Systems, Digital Research
| 1980-1981
| '''[[CBASIC]]'''
| [[Gordon Eubanks]]
|-
| Speakeasy-3
| 1982?
| '''[[Speakeasy (computational environment)|Speakeasy-IV]]'''
| [[Stanley Cohen]], ''et al.'' at [[Speakeasy Computing Corporation]]
|-
| Smalltalk, C
| 1982
| '''[[Objective-C]]'''
| [[Brad Cox]]
|-
| [[BASICA]]
| 1983
| '''[[Gwbasic|GW-BASIC]]'''
| [[Microsoft]]
|-
| Green
| 1983
| '''[[Ada (programming language)|Ada]]'''
| [[CII Honeywell Bull]]
|-
| C with Classes
| 1983
| '''[[C++]]'''
| [[Bjarne Stroustrup|Stroustrup]]
|-
| BASIC
| 1983
| '''[[True BASIC]]'''
| [[John George Kemeny|Kemeny]], [[Thomas Kurtz|Kurtz]] at [[Dartmouth College]]
|-
| [[COBOL]]
| 1983?
| '''[[ABAP]]'''
| [[SAP]]
|-
| sh
| 1984?
| '''[[Korn Shell]]''' (''ksh'')
| [[David Korn (computer scientist)|David Korn]]
|-
| [[Forth (programming language)|Forth]], [[Lisp (programming language)|Lisp]]
| 1984
| '''[[RPL (programming language)|RPL]]'''
| [[Hewlett-Packard]]
|-
| ML
| 1984
| '''[[Standard ML]]'''
|-
| dBase
| 1984
| '''[[Clipper (programming language)|CLIPPER]]'''
| [[Nantucket]]
|-
| LISP
| 1984
| '''[[Common Lisp]]'''
| [[Guy Steele]] and many others
|-
|
| 1984
| '''[[Redcode]]'''
| [[A. K. Dewdney|A.K. Dewdney]] and [[D. G. Jones|D.G. Jones]]
|-
| Pascal
| 1985
| '''[[Object Pascal]]'''
| [[Apple Computer]]
|-
| dBase
| 1985
| '''[[Paradox (database)|PARADOX]]'''
| [[Borland]]
|-
| [[InterPress]]
| 1985
| '''[[PostScript]]'''
| [[John Warnock|Warnock]]
|-
| [[BASIC]]
| 1985
| '''[[QuickBASIC]]'''
| [[Microsoft]]
|-
| [[BASIC]]
| 1986
| '''[[GFA BASIC]]'''
| [[Frank Ostrowski]]
|-
|
| 1986
| '''[[Miranda (programming language)|Miranda]]'''
| [[David Turner (computer scientist)|David Turner]] at [[University of Kent]]
|-
|
| 1986
| '''[[LabVIEW]]'''
| [[National Instruments]]
|-
| SIMULA 67
| 1986
| '''[[Eiffel (programming language)|Eiffel]]'''
| [[Bertrand Meyer|Meyer]]
|-
|
| 1986
| '''[[Informix-4GL]]'''
| [[Informix]]
|-
| C
| 1986
| '''[[PROMAL]]'''
|
|-
| INFORM
| 1986
| '''[[CorVision]]'''
| Cortex
|-
| Smalltalk
| 1987
| '''[[Self (programming language)|Self]]''' (concept)
| [[Sun Microsystems|Sun Microsystems Inc.]]
|-
| *
| 1987
| '''[[HyperTalk]]'''
| [[Apple Computer|Apple]]
|-
| C
| 1987
| '''Magic'''
| [[Magic Software Enterprises]]
|-
| C, sed, awk, sh
| 1987
| '''[[Perl]]'''
| [[Larry Wall|Wall]]
|-
| Modula-2
| 1987
| '''[[Oberon (programming language)|Oberon]]'''
| [[Niklaus Wirth|Wirth]]
|-
| Prolog
| 1987
| '''[[Erlang (programming language)|Erlang]]'''
| [[Joe Armstrong (Programming)|Joe Armstrong]] and others in [[Ericsson]]
|-
| *
| 1987
| '''[[Mathematica]]'''
| [[Wolfram Research]]
|-
| BASIC/Z
| 1987
| '''[[Turbo Basic]]'''
| Robert 'Bob' Zale
|-
| [[MATLAB]]
| 1988
| '''[[GNU Octave|Octave]]'''
|-
| Awk, Lisp
| 1988
| '''[[Tcl]]'''
| [[John Ousterhout|Ousterhout]]
|-
| [[BASIC]]
| 1988
| '''[[STOS BASIC]]'''
| [[François Lionet]] and [[Constantin Sotiropoulos]]
|-
| REXX
| 1988
| '''[[REXX|Object REXX]]'''
| [[Simon C. Nash]]
|-
| Ada
| 1988
| '''[[SPARK (programming language)|SPARK]]'''
| [[Bernard A. Carré]]
|-
| APL
| 1988
| '''[[A plus|A+]]'''
| [[Arthur Whitney (computer scientist)|Arthur Whitney]]
|-
| Turbo Pascal, Object Pascal
| 1989
| '''[[Turbo Pascal#Object oriented programming|Turbo Pascal OOP]]'''
| [[Anders Hejlsberg|Hejlsberg]] at [[Borland]]
|-
| Modula-2
| 1989
| '''[[Modula-3]]'''
| Cardeli, et al. [[Digital Equipment Corporation|DEC]] and [[Olivetti]]
|-
| Turbo Basic
| 1989
| '''[[PowerBASIC]]'''
| Robert 'Bob' Zale
|-
! colspan="4" |
=== 1990s ===
|-
| [[STOS BASIC]]
| 1990
| '''[[AMOS BASIC]]'''
| [[François Lionet]] and [[Constantin Sotiropoulos]]
|-
| Oberon
| 1990
| '''[[Object Oberon]]'''
| H Mössenböck, J Templ, R Griesemer
|-
| APL, FP
| 1990
| '''[[J (programming language)|J]]'''
| [[Kenneth Iverson|Iverson]], [[Roger Hui|R. Hui]] at Iverson Software
|-
| Miranda
| 1990
| '''[[Haskell (programming language)|Haskell]]'''
|-
| [[Common Lisp]], Scheme
| 1990
| '''[[Eulisp]]'''
|-
| Object Oberon
| 1991
| '''[[Oberon (programming language)|Oberon-2]]'''
| Hanspeter Mössenböck, [[Niklaus Wirth|Wirth]]
|-
| [[ABC programming language|ABC]], [[ALGOL 68]]<ref>{{cite web |url=http://www.amk.ca/python/writing/gvr-interview |title=Interview with Guido van Rossum |year=1998 |month=June |accessdate=28 2008 |dateformat=mdy |archive-url=https://www.webcitation.org/66Xsipt2D?url=http://www.amk.ca/python/writing/gvr-interview |archive-date=30 मार्च 2012 |url-status=dead }}</ref>, [[Icon programming language|Icon]], [[Modula-3]]
| 1991
| '''[[Python (programming language)|Python]]'''
| [[Guido van Rossum|Van Rossum]]
|-
| Prolog
| 1991
| '''[[Oz programming language|Oz]]'''
| Gert Smolka and his students
|-
|
| 1991
| '''[[Q (programming language)|Q]]'''
| Albert Gräf
|-
| QuickBASIC
| 1991
| '''[[Visual Basic]]'''
| [[Alan Cooper]], sold to [[Microsoft]]
|-
| Turbo Pascal OOP
| 1992
| '''[[Borland Pascal]]'''
|-
| [[Common Lisp]], Scheme
| 1992
| '''[[Dylan (programming language)|Dylan]]'''
| many people at [[Apple Computer]]
|-
| ksh
| 1993?
| '''[[Z Shell]]''' (''zsh'')
|-
| Smalltalk
| 1993?
| '''[[Self (programming language)|Self]]''' (implementation)
| [[Sun Microsystems|Sun Microsystems Inc.]]
|-
| *
| 1993
| '''[[Brainfuck]]'''
| [[Urban Müller]]
|-
| Forth
| 1993
| '''[[FALSE]]'''
| [[Wouter van Oortmerssen]]
|-
| *
| 1993
| '''[[WinDev]]'''
| PC Soft
|-
| HyperTalk
| 1993
| '''[[Transcript (programming language)|Revolution Transcript]]'''
|-
| HyperTalk
| 1993
| '''[[AppleScript]]'''
| [[Apple Computer|Apple]]
|-
| APL, Lisp
| 1993
| '''[[K (programming language)|K]]'''
| [[Arthur Whitney (computer scientist)|Arthur Whitney]]
|-
| Smalltalk, Perl
| 1993
| '''[[Ruby (programming language)|Ruby]]'''
| [[Yukihiro Matsumoto]]
|-
| Lua
| 1993
| '''[[Lua (programming language)|Lua]]'''
| [[Roberto Ierusalimschy]] ''et al.'' at [[Tecgraf, PUC-Rio]]
|-
| C
| 1993
| '''[[ZPL (programming language)|ZPL]]'''
| Chamberlain ''et al.'' at [[University of Washington]]
|-
| Self, Dylan
| 1993
| '''[[NewtonScript]]'''
| Walter Smith
|-
| [[Common Lisp]]
| 1994
| '''[[Common Lisp|ANSI Common Lisp]]'''
|-
| Perl
| 1994
| '''[[PHP]]'''
| [[Rasmus Lerdorf]]
|-
| LPC, C, µLPC
| 1994
| '''[[Pike (programming language)|Pike]]'''
| Fredrik Hübinette et al. at [[Linköping University]]
|-
| Forth
| 1994
| '''[[ANS Forth]]'''
| [[Elizabeth Rather]], et al.
|-
| Borland Pascal
| 1995
| '''[[Borland Delphi]]'''
| [[Anders Hejlsberg]] at [[Borland]]
|-
|
| 1995
| '''[[ColdFusion (CFML)]]'''
| [[Allaire]]
|-
| C, SIMULA67 OR C++, Smalltalk, Ada 83, Objective-C
| 1995
| '''[[Java (programming language)|Java]]'''
| [[James Gosling]] at [[Sun Microsystems]]
|-
| Self, Java
| 1995
| '''[[LiveScript]]'''
| [[Brendan Eich]] at [[Netscape Communications Corporation|Netscape]]
|-
| Lisp, C++, Tcl/Tk, TeX, HTML
| 1996
| '''[[Curl (programming language)|Curl]]'''
| David Kranz, Steve Ward, Chris Terman at [[MIT]]
|-
| LiveScript
| 1996
| '''[[जावास्क्रिप्ट]]'''
| [[Brendan Eich]] at [[Netscape Communications Corporation|Netscape]]
|-
| APL, Perl
| 1996
| '''[[Perl Data Language]] (PDL)'''
| [[Karl Glazebrook]], [[Jarle Brinchmann]], [[Tuomas Lukka]], and [[Christian Soeller]]
|-
| S
| 1996
| '''[[R (programming language)|R]]
| [[Robert Gentleman]] and [[Ross Ihaka]]
|-
| REXX
| 1996
| '''[[REXX|NetRexx]]'''
| [[Mike Cowlishaw|Cowlishaw]]
|-
|
| 1996
| '''[[Lasso (programming language)|Lasso]]'''
| [[Blue World Communication]]
|-
| Oberon-2
| 1997
| '''[[Component Pascal]]'''
| Oberon microsystems, Inc
|-
| Joule, Original-E
| 1997
| '''[[E (programming language)|E]]'''
| [[Mark S. Miller]]
|-
| Scheme
| 1997
| '''[[Pico (programming language)|Pico]]'''
| Free University of [[Brussels]]
|-
| Smalltalk-80, Self
| 1997
| '''[[Squeak|Squeak Smalltalk]]'''
| [[Alan Kay]], ''et al.'' at [[Apple Computer]]
|-
| JavaScript
| 1997
| '''[[ECMAScript]]'''
| [[Ecma International|ECMA]] TC39-TG1
|-
| Smalltalk, APL, Objective-C
| 1997
| '''[[F-Script]]'''
| [[Philippe Mougin]]
|-
| [[Common Lisp]]
| 1997
| '''[[ISLISP]]'''
| ISO Standard ISLISP
|-
| [[Java (programming language)|Java]], [[Scheme (programming language)|Scheme]], [[Tcl]]
| 1997
| '''[[Tea (programming language)|Tea]]'''
| Jorge Nunes
|-
| [[Self (programming language)|Self]], [[Forth (programming language)|Forth]], [[Lisp (programming language)|Lisp]], [[Logo (programming language)|Logo]]
| 1997
| '''[[REBOL]]'''
| [[Carl Sassenrath]], Rebol Technologies
|-
| C++, Standard C
| 1998
| '''[[C++|Standard C++]]'''
| ANSI/ISO Standard C++
|-
| Erlang
| 1998
| '''[[Erlang (programming language)|Open Source Erlang]]'''
| [[Ericsson]]
|-
| AWK, Perl, Unix shell
| 1998
| '''[[PIKT|Pikt]]'''
| Robert Osterlund (then at [[University of Chicago]])
|-
| JAVA, SQL
| 1998
| '''[[DASL - Distributed Application Specification Language|DASL]] (BOS)'''
| Bob Goldberg and Ludovic Champenois at [[Sun Microsystems]]
|-
| Web 2.0 IDE & ALM
| 1999
| '''[[WebDev]]'''
| PC Soft
|-
| [[DSSSL]]
| 1999
| '''[[XSLT]]''' (+ '''[[XPath]]''')
| [[W3C]], [[James Clark (XML expert)|James Clark]]
|-
| [[Game Maker]]
| 1999
| '''[[Game Maker Language]] (GML)'''
| [[Mark Overmars]]
|-
| JAVA, HTML
| 1999
| '''[[DASL - Distributed Application Specification Language|DASL]] (AUS)'''
| Bob Goldberg, Bruce Daniels, Peter Yared, Yury Kamen, and Syed Ali at [[Sun Microsystems]]
|-
! colspan="4" |
=== 2000s ===
|-
| Java
| 2000
| '''[[Join Java]]'''
| [[G Stewart von Itzstein]]
|-
| FP, Forth
| 2000
| '''[[Joy (programming language)|Joy]]'''
| [[Manfred von Thun|von Thun]]
|-
| C, C++, C#, Java
| 2000
| '''[[D (programming language)|D]]'''
| [[Walter Bright]] at Digital Mars
|-
| Ada, C++, Lisp
| 2000
| '''[[XL (programming language)|XL]]'''
| [[Christophe de Dinechin]]
|-
| Magic
| 2000
| '''eDeveloper'''
| [[Magic Software Enterprises]]
|-
| C, C++, Java, Delphi
| 2000
| '''[[C Sharp (programming language)|C#]]'''
| [[Anders Hejlsberg]] at [[Microsoft]]([[ECMA]])
|-
| C, C++, Java, PHP, Python, Ruby, Scheme
| 2000
| '''[[Ferite]]'''
| Chris Ross
|-
| Java
| 2001
| '''[[AspectJ]]'''
| [[Xerox PARC]]
|-
| Visual Basic
| 2001
| '''[[Visual Basic.NET]]'''
| [[Microsoft]]
|-
| Self, NewtonScript
| 2002
| '''[[Io (programming language)|Io]]'''
| [[Steve Dekorte]]
|-
| C#, [[Standard ML|ML]], MetaHaskell
| 2003
| '''[[Nemerle]]'''
| University of [[Wrocław]]
|-
| Joy, Forth, Lisp
| 2003
| '''[[Factor (programming language)|Factor]]'''
| [[Slava Pestov]]
|-
| Smalltalk, Java, Haskell, Standard ML, OCaml
| 2003
| '''[[Scala (programming language)|Scala]]'''
| [[Martin Odersky]]
|-
| Lua
| 2003
| '''[[Squirrel (programming language)|Squirrel]]'''
| [[Alberto Demichelis]]
|-
| [[BASIC]]
| 2004
| '''[[Freebasic|FreeBASIC]]'''
| Andre Victor
|-
| Mobile Development
| 2004
| '''[[WinDev Mobile]]'''
| PC Soft
|-
| *
| 2004
| '''[[Subtext (programming language)|Subtext]]'''
| Jonathan Edwards
|-
| Python, C#
| 2004
| '''[[Boo (programming language)|Boo]]'''
| Rodrigo B. de Oliveira
|-
| [[Object Pascal]], C#
| 2004
| '''[[Oxygene (programming language)|Oxygene]]''' (formerly '''Chrome''')
| [https://web.archive.org/web/20090318133406/http://www.remobjects.com/ RemObjects Software]
|-
| Java
| 2004
| '''[[Groovy (programming language)|Groovy]]'''
| [[James Strachan (programmer)|James Strachan]]
|-
| [[BASIC]]
| 2004
| '''[[ThinBasic]]'''
| Eros Olmi [https://web.archive.org/web/20090503151822/http://community.thinbasic.com/ thinBasic community]
|-
| Objective Caml, C#, Haskell
| 2005
| '''[[F Sharp (programming language)|F#]]'''
| [[Don Syme]] at [[Microsoft Research]]
|-
| ARC Assembler
| 2005
| '''[[RAGE Assembler (programming language)|Rage Assembler]]'''
| [[Wim Boot]] at [[Micronix Softworks]]
|-
| *
| 2005
| '''[[Corn (programming language)|Corn]]'''
|
|-
| Haskell
| 2006
| '''[[Links (programming language)|Links]]'''
| [[Phil Wadler]], [[University of Edinburgh]]
|-
| *
| 2006
| '''[[Kite (programming language)|Kite]]'''
| Mooneer Salem
|-
| C#, ksh, Perl, [[AS/400 Control Language|CL]], [[DIGITAL Command Language|DCL]], SQL
| 2006
| '''[[Windows PowerShell]]'''
| [[Microsoft]]
|-
| C#, Scala, Ruby, Erlang
| 2007
| '''[[Fan (programming language)|Fan]]'''
| [[Brian Frank]], [[A Frank|Andy Frank]]
|-
| APEX
| 2007
| '''[[APEX (programming language)|APEX]]'''
| [[Salesforce.com]]
|-
| C#
| 2007
| '''[[Vala (programming language)|Vala]]'''
| [[GNOME]]
|-
| [[Lisp (programming language)|Lisp]], [[ML (programming language)|ML]], [[Haskell (programming language)|Haskell]], [[Erlang (programming language)|Erlang]]
| 2007
| '''[[Clojure]]'''
| [[Rich Hickey]]
|-
| *
| 2007
| '''[[LOLCODE]]'''
| Adam Lindsay
|-
| *
| 2008
| '''[[RapidRage (programming language)|RapidRage]]'''
| [[Wim Boot]] at [[Micronix Softworks]]
|-
| eDeveloper
| 2008
| '''[[uniPaaS]]'''
| [[Magic Software Enterprises]]
|-
| Haskell
| 2008
| '''Disciple'''
| Ben Lippmeier [https://web.archive.org/web/20150102192926/https://www.haskell.org/haskellwiki/DDC Disciple Wiki]
|-
| C, R
| 2008
| '''[[PCASTL]]'''
| [https://web.archive.org/web/20090606130714/http://www.pcosmos.ca/ Philippe Choquette]
|-
| *
| 2008
| '''[[Seccia]]'''
| [https://web.archive.org/web/20090801062337/http://www.seccia.org/ Sylvain Seccia]
|-
| Standard ML, SML/NJ
| 2009
| '''[[Mythryl]]'''
| [https://web.archive.org/web/20090628155325/http://mythryl.org/ Cynbe ru Taren]
|-
| *
| 2009
| '''[[icon.NET]]'''
| Dylan Borg
|}
== इन्हें भी देखें ==
* [[प्रोग्रामन भाषा]] (Programming language)
* [[संगणना की समयरेखा]] (Timeline of computing)
* [[संगणकीय हार्डवेयर का इतिहास]] (History of computing hardware)
* [[प्रोग्रामन भाषाओं का इतिहास]] (History of programming languages)
== सन्दर्भ ==
<references/>
== बाहरी कड़ियाँ ==
* [https://web.archive.org/web/20110220044217/http://hopl.murdoch.edu.au/ Online encyclopedia for the history of programming languages]
* [https://web.archive.org/web/20080513101124/http://merd.sourceforge.net/pixel/language-study/diagram.html Diagram & history of programming languages]
* [https://web.archive.org/web/20060107162045/http://www.levenez.com/lang/ Eric Levenez's timeline diagram of computer languages history]
* [https://web.archive.org/web/20051225011031/http://www.aisee.com/graph_of_the_month/lang.htm aiSee's timeline diagram of computer languages history]
[[श्रेणी:प्रोग्रामन]]
[[श्रेणी:सॉफ्टवेयर]]
[[श्रेणी:समयरेखायें]]
lz6b39pdq2ge8rp5pat35vdt3ocas78
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Rescuing 0 sources and tagging 1 as dead.) #IABot (v2.0.9.5
6547873
wikitext
text/x-wiki
{{ज्ञानसंदूक फूल
|name = ''Nyctanthes arbor-tristis''
|image = Flower & flower buds I IMG 2257.jpg
|regnum = [[पादप]]
|unranked_divisio = [[Angiosperms]]
|unranked_classis = [[Eudicots]]
|unranked_ordo = [[Asterids]]
|ordo = [[Lamiales]]
|familia = [[Oleaceae]]
|genus = ''[[Nyctanthes]]''
|species = '''''N. arbor-tristis'''''
|binomial = ''Nyctanthes arbor-tristis''
|binomial_authority = [[Carolus Linnaeus|L.]]
|}}
'''प्राजक्ता''' एक [[पुष्प]] देने वाला वृक्ष है। इसे '''पारिजात, हरिसिंगार, हरसिंगार, शेफाली, शिउली''' आदि नामो से भी जाना जाता है। इसका वृक्ष 10 से 15 फीट ऊँचा होता है।<ref>{{cite web|url=http://hindi.webdunia.com/miscellaneous/health/jadibuti/0903/18/1090318108_1.htm|title=हरसिंगार के गुण भी सुंदर|access-date=[[२१ मई]] [[२००९]]|format=|publisher=वेबदुनिया|language=|archive-url=https://web.archive.org/web/20090813001813/http://hindi.webdunia.com/miscellaneous/health/jadibuti/0903/18/1090318108_1.htm|archive-date=13 अगस्त 2009|url-status=live}}</ref>
इसका [[वानस्पतिक नाम]] 'निक्टेन्थिस आर्बोर्ट्रिस्टिस' है। पारिजात पर सुन्दर व सुगन्धित फूल लगते हैं। इसके फूल, पत्ते और [[छाल]] का उपयोग औषधि के रूप में किया जाता है। यह पूरे [[भारत]] में पैदा होता है। यह [[पश्चिम बंगाल]] का राजकीय पुष्प है।
== परिचय ==
यह 10 से 15 फीट ऊँचा और कहीं 25-30 फीट ऊँचा एक वृक्ष होता है और पूरे भारत में विशेषतः बाग-बगीचों में लगा हुआ मिलता है। विशेषकर मध्यभारत और हिमालय की नीची तराइयों में ज्यादातर पैदा होता है। इसके फूल बहुत सुगंधित, सफेद और सुन्दर होते हैं। इसके पुष्प सूर्यास्त के एक घण्टे बाद खिलते हैं और सुबह सूर्योदय होने तक मुरझा कर गिर जाते हैं।
'''विभिन्न भाषाओं में नाम''' :
[[संस्कृत]]- शेफालिका। [[हिन्दी]]- हरसिंगार।
[[मराठी]]- पारिजातक।[[कोंकणी]]- पार्दक। [[गुजराती]]- हरशणगार। [[बंगाली]]- शेफालिका, शिउली।
[[असमिया भाषा|असमिया]]- शेवालि।
[[तेलुगू]]- पारिजातमु, पगडमल्लै। [[तमिल]]- पवलमल्लिकै, मज्जपु।
[[मलयालम]] - पारिजातकोय, पविझमल्लि। [[कन्नड़]]- पारिजात।
[[उर्दू]]- गुलजाफरी। [[इंग्लिश]]- नाइट जेस्मिन।
[[मैथिली]]- सिंघार, सिंगरहार
=== उत्पत्ति कथा ===
[[चित्र:Nyctanthes arbor-tristis (Night jasmine) tree in RDA, Bogra 02.jpg|right|thumb|300px|पारिजात का वृक्ष]]
[हरिवंश]] में पारिजात वृक्ष की उत्पत्ति [[क्षीरसागर]] से बताई गई है। वह स्वर्गीय वृक्ष है। [[इन्द्र]] ने उसे [[शची]] का क्रीडावृक्ष बताकर [[शिव]] से ले लिया था। वह शचीदेवी और इन्द्र को मनोवांछित पदार्थ देता था। हरि ने सत्यभामा के पुण्यकार्य सम्पादन के लिए उसको स्वर्ग से लाने का संकल्प किया था-
: ''मया मुने प्रतिज्ञातं पुण्यार्थं सत्यभामया।
: ''स्वर्गादिहानयिष्यामि पारिजातमिति प्रभो ॥
सत्यभामा इस वृक्ष को पाकर बहुत प्रमुदित हुई और तदर्थ पुण्यव्रत के लिए सामग्री संगृहीत की थी-
: ''ननन्द सत्या कौरव्य देवी प्राप्य मनोरथम् ।
: ''पुण्यकार्थं तु सम्भारान् सम्भर्तुमुपचक्रमे ॥'' ( हरिवंश 2, 68, 35 एवं 75, 67 )
[[शिवधाम]] में इस वृक्ष को 'संगीताश्रयी द्रुम' भी कहा गया है। उसके आश्रय में सदा उत्सव रहता था । वहाँ गन्धर्वराज चित्ररथ पुत्र सहित प्रसन्नतापूर्वक देवसम्बधी वाद्य बजाते थे । ऊर्णायु, चित्रसेन, हाहा, हूहू, डुम्बर, तुम्बुरु तथा अन्य गन्धर्वगण छह गुणों (वक्रिम, स्निग्ध, मधुर, लास्य, विभक्त तथा अवबद्ध) से युक्त गीतों का गान करते थे । [[उर्वशी]], विप्रचित्ति, हेमा, रम्भा, हेमदन्ता, घृताची और सहजन्या आदि अप्सराएँ भी अपने नृत्य व गीतकला का प्रदर्शन करती थीं :
: ''गन्धर्वाधिपतिः श्रीमांसस्तत्र चित्ररथो नृप ।
: ''सपुत्रो वादयामास देववाद्यानि हृष्टवत् ॥
: ''ऊर्णाश्चित्रसेनश्च हाहा हूहूस्तथैव च ।
: ''डुम्बरस्तुम्बुरुश्चैव जगुरन्ये च षड्गुणान् ॥
: ''उर्वशी विप्रचित्तिश्च हेमा रम्भा च भारत।
: ''हेमदन्ता घृताची च सहजन्या तथैव च ॥'' ( तत्रैव 69, 13-15 )
== गुण ==
यह हलका, रूखा, तिक्त, कटु, गर्म, वात-कफनाशक, ज्वार नाशक, मृदु विरेचक, शामक, उष्णीय और रक्तशोधक होता है। सायटिका रोग को दूर करने का इसमें विशेष गुण है।
'''रासायनिक संघटन''' : इसके फूलों में सुगंधित तेल होता है। रंगीन पुष्प नलिका में निक्टैन्थीन नामक रंग द्रव्य ग्लूकोसाइड के रूप में 0.1% होता है जो केसर में स्थित ए-क्रोसेटिन के सदृश्य होता है। बीज मज्जा से 12-16% पीले भूरे रंग का स्थिर तेल निकलता है। पत्तों में टैनिक एसिड, मेथिलसेलिसिलेट, एक ग्लाइकोसाइड (1%), मैनिटाल (1.3%), एक राल (1.2%), कुछ उड़नशील तेल, विटामिन सी और ए पाया जाता है। छाल में एक ग्लाइकोसाइड और दो क्षाराभ होते हैं।
== उपयोग ==
[[चित्र:Nyctanthes arbor-tristis-4.JPG|right|thumb|300px|हरसिंगार की टहनी, पत्तियाँ, पुष्प]]
इस वृक्ष के पत्ते और छाल विशेष रूप से उपयोगी होते हैं। इसके पत्तों का सबसे अच्छा उपयोग [[गृध्रसी]] (सायटिका) रोग को दूर करने में किया जाता है।
'''विधि''': हरसिंगार के ढाई सौ ग्राम पत्ते साफ करके एक लीटर पानी में उबालें। जब पानी लगभग 700 मिली बचे तब उतारकर ठण्डा करके छान लें, पत्ते फेंक दें और 1-2 रत्ती केसर घोंटकर इस पानी में घोल दें। इस पानी को दो बड़ी बोतलों में भरकर रोज सुबह-शाम एक कप मात्रा में इसे पिएँ।
ऐसी चार बोतलें पीने तक सायटिका रोग जड़ से चला जाता है। किसी-किसी को जल्दी फायदा होता है फिर भी पूरी तरह चार बोतल पी लेना अच्छा होता है। इस प्रयोग में एक बात का खयाल रखें कि वसन्त ऋतु में ये पत्ते गुणहीन रहते हैं अतः यह प्रयोग वसन्त ऋतु में लाभ नहीं करता।
== सन्दर्भ ==
<references/>
==इन्हें भी देखें==
*[[गोरखचिंच]] - जिसे 'पारिजात' भी कहते हैं।
== बाहरी कड़ियाँ ==
* [https://sarkarifayde.com/harsingar-ke-fayde/ जानें हरसिंगार के चमत्कारी लाभ]{{Dead link|date=मई 2026 |bot=InternetArchiveBot }}
* [https://web.archive.org/web/20160305131704/http://shabd-braham.com/ShabdB/archive/v1i2/sbd-V1-i2-sn4.pdf कालिदास के काव्य में वर्णित पौराणिक देववृक्ष पारिजात : प्रकरण और कथा] (शब्द-ब्रह्म पत्रिका)
[[श्रेणी:फूलों वाले वृक्ष]]
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गढ़िया जगन्नाथ
0
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2026-05-02T14:48:52Z
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wikitext
text/x-wiki
{{स्रोतहीन|date=नवम्बर 2018}}
गढ़िया जगन्नाथ नाम का अर्थ है गढ़िया का अर्थ है (गढ़, छोटा किला , शाही निवास , बसाने वाला) तहसील- अलीगंज, जनपद- [[एटा]] (उत्तर प्रदेश) का गाँव है। यह गाँव क्षत्रिय वाहुल्य है। गढ़िया जगन्नाथ की दूरी अलीगंज, [[कायमगंज]], प्रसिध्द तीर्थ स्थल [[काम्पिल्य|कम्पिल]] से लगभग 8 किलोमीटर है। यह गाँव राजा का रामपुर के राजा रामसिंह् राठौड़ ने अपनी शिकारबाड़ी के तौर पे बसाया था। गढ़िया जगन्नाथ गाँव के निवासी शम्भू सिंह् राठौर राजपूत रेजीमेंट फ़तेहगढ़ में मेजर पद पर कार्यरत रहे। इसी गाँव के सूवेदार राजबीर सिंह् ने 1965 के युध्द में अपने पराक्रम का परिचय दिया और इन्हें भारत के राष्ट्रपति द्वारा वीरचक्र प्रदान किया गया। इसी गाँव के ठा. रनसिंह् अलीगंज के 1973 ब्लाक प्रमुख रहे। ग्राम गढ़िया जगन्नाथ से ही श्री अवधेश सिंह राठौड़ जी रिटायर्ड जिला अधिकारी (District Magistrate) 2012 भी रह चुके है जिन्होंने गांव का गौरव व मान बढ़ाया। बहुत से सम्मानित व्यक्तियों ने गांव का गौरव शिक्षा के क्षेत्र व देश की रक्षा में समर्पित हो कर बढ़ाया है गांव के युवा बहुत ही कर्मठ प्रवृत्ति के है गांव में कई देवी देवताओं के छोटे छोटे मंदिर व मठ है जहां हर समय कीर्तन व विधिवत पूजा पाठ का आयोजन होता रहता है।
[[श्रेणी:ऐतिहासिक स्थल]]
[[श्रेणी:एटा ज़िले के गाँव]]
[[श्रेणी:उत्तर प्रदेश]]
[[श्रेणी:उत्तर प्रदेश के गाँव]]
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अनुनाद सिंह
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text/x-wiki
{{स्रोतहीन|date=नवम्बर 2018}}
'''गढ़िया जगन्नाथ''' [[उत्तर प्रदेश]] के [[एटा]] जनपद के अलीगंज तहसील का एक गाँव है। 'गढ़िया' का अर्थ है : गढ़, छोटा किला , शाही निवास , बसाने वाला। गढ़िया जगन्नाथ की दूरी अलीगंज, [[कायमगंज]], प्रसिद्ध तीर्थ स्थल [[काम्पिल्य|कम्पिल]] से लगभग 8 किलोमीटर है।
इस गाँव में [[क्षत्रिय|क्षत्रियों]] का बाहुल्य है। यह गाँव [[राजा का रामपुर]] के राजा रामसिंह राठौड़ ने अपनी शिकारबाड़ी के तौर पे बसाया था। गढ़िया जगन्नाथ गाँव के निवासी शम्भू सिंह राठौर राजपूत रेजीमेंट फ़तेहगढ़ में मेजर पद पर कार्यरत रहे। इसी गाँव के सूवेदार राजबीर सिंह ने 1965 के युद्ध में अपने पराक्रम का परिचय दिया और इन्हें भारत के राष्ट्रपति द्वारा वीरचक्र प्रदान किया गया। इसी गाँव के ठा. रनसिंह अलीगंज के 1973 ब्लाक प्रमुख रहे। ग्राम गढ़िया जगन्नाथ से ही श्री अवधेश सिंह राठौड़ जी रिटायर्ड जिला अधिकारी (District Magistrate) 2012 भी रह चुके है जिन्होंने गांव का गौरव व मान बढ़ाया। बहुत से सम्मानित व्यक्तियों ने गांव का गौरव शिक्षा के क्षेत्र व देश की रक्षा में समर्पित हो कर बढ़ाया है। इस गांव के युवा बहुत ही कर्मठ प्रवृत्ति के है।
गांव में कई देवी देवताओं के छोटे छोटे मंदिर व मठ है जहां हर समय कीर्तन व विधिवत पूजा पाठ का आयोजन होता रहता है।
==सन्दर्भ==
{{टिप्पणीसूची}}
[[श्रेणी:ऐतिहासिक स्थल]]
[[श्रेणी:एटा ज़िले के गाँव]]
[[श्रेणी:उत्तर प्रदेश]]
[[श्रेणी:उत्तर प्रदेश के गाँव]]
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हरेकृष्ण मेहेर
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Sequencesolved
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/* परिचय */ एक कड़ी जोडी।
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wikitext
text/x-wiki
{{wikify}}
'''डॉ॰ हरेकृष्ण मेहेर (Dr. Harekrishna Meher) :'''
== परिचय ==
आधुनिक संस्कृत साहित्य के एक सुपरिचित कवि हैं। एक संस्कृत विद्वान्, अध्यापक, गवेषक, समालोचक, प्राबन्धिक, गीतिकार, स्वर-रचनाकार, सुवक्ता और सफल अनुवादक के रूप में उनकी ख्याति रही है।
एक कवि-परिवार में दिनांक ५ मई १९५६ में हरेकृष्ण मेहेर का जन्म हुआ। जन्मस्थान : सिनापालि (ओड़िशा)। पिता दिवंगत कवि नारायण भरसा मेहेर एवं माता श्रीमती सुमती देवी। उनके पितामह दिवंगत कवि मनोहर मेहेर ओड़िआ साहित्य में पश्चिम ओड़िशा के 'गणकवि' के रूप में चर्चित हुए हैं।
=== शिक्षा ===
रेवेन्शा महाविद्यालय कटक में अध्ययन पूर्वक उत्कल विश्वविद्यालय से
बी.ए. संस्कृत आनर्स, प्रथम श्रेणी में प्रथम (१९७५) ;
[[काशी हिन्दू विश्वविद्यालय|बनारस हिन्दु विश्वविद्यालय]] से तीन उपाधियाँ * * एम्.ए. संस्कृत, स्वर्णपदक प्राप्त (१९७७),
पीएच्.डी. संस्कृत (१९८१), डिप्लोमा इन् जर्मन् (१९७९)।
* बी.ए. संस्कृत आनर्स में सर्वोच्च स्थान अधिकार हेतु रेवेन्शा महाविद्यालय से जगन्नाथ मिश्र स्मारकी पुरस्कार प्राप्त।
* एम्.ए. संस्कृत परीक्षा में सर्वोच्च स्थान प्राप्ति हेतु बनारस हिन्दु विश्वविद्यालय-स्वर्णपदक, श्रीकृष्णानन्द पाण्डेय सहारनपुर-स्वर्णपदक, काशीराज-पदक एवं पुरस्कार से सम्मानित।
== सारस्वत-सेवा ==
ओड़िआ, हिन्दी, अंग्रेजी, संस्कृत एवं कोशली – इन पाँच भाषाओं में हरेकृष्ण मेहेर की मौलिक कृतियाँ एवं अनेक श्रेष्ठ काव्यकृतियों के छन्दोबद्ध अनुवाद हैं। ऊनके अनुवादों में स्वभावकवि गंगाधर मेहेर-प्रणीत ओड़िआ काव्य "तपस्विनी" के त्रिभाषी हिन्दी-अंग्रेजी-संस्कृत अनुवाद, कालिदास-कृत मेघदूत-काव्य का कोशली गीत-रूपान्तर एवं भर्तृहरि-कृत नीति-शृंगार-वैराग्य-शतकत्रय के ओड़िआ पद्यानुवाद उल्लेखनीय हैं। राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर की पत्रपत्रिकाओं में शोधलेख, प्रबन्ध और कविता आदि प्रकाशित हैं। विश्वसंस्कृत-सम्मेलनों, राज्य-स्तरीय अनेक सम्मेलनों एवं संगोष्ठियों में शोधलेख परिवेषण सहित कवि-सम्मेलनों में मौलिक कवितापाठ और सक्रिय योगदान रहा है। आकाशवाणी-दूरदर्शन आदि में लेख, परिचर्चा और कविताएँ प्रसारित हैं। संस्कृत के सरलीकरण और आधुनिकीकरण की दिशा में उनके विशेष प्रयत्न एवं अवदान प्रशंसनीय हैं।
समकालिक संस्कृत साहित्य में परम्परा और आधुनिकता के प्रसंग में डॉ॰ मेहेर समन्वयवादी सारस्वत साधक हैं। मौलिक नवीन छन्दों की उद्भावना सहित अपनी गीतियों की स्वर-रचना एवं परिवेषण उनकी कवि-प्रतिभा की विशेषता है। उनका आधुनिक गीतिकाव्य "मातृगीतिकांजलिः" साम्प्रतिक संस्कृत साहित्य में एक अभिनव लोकप्रिय कृति है। इसके अतिरिक्त उनकी संस्कृत कृतियों में पुष्पांजलि-विचित्रा, सारस्वतायनम्, सौन्दर्य-सन्दर्शनम्, सावित्रीनाटकम्, जीवनालेख्यम्, मौन-व्यंजना आदि उल्लेखनीय हैं।।
कवि-परम्परा से मौलिक सर्जनात्मक-प्रतिभासम्पन्न डॉ॰ मेहेर की भाषा-साहित्य एवं संगीत कला में विशष अभिरुचि।
कई उपलक्ष्यों में स्वरचित संस्कृत-गीतियाँ एवं कोशली गीत एकल तथा वृन्दगान के रूप में परिवेषित।
हाथरस उत्तरप्रदेश की लोकप्रिय ‘संगीत’ पत्रिका में अपनी मौलिक नवीन छन्दोबद्ध संस्कृत गीतियों सहित स्वरचित स्वरलिपियाँ प्रकाशित। डॉ॰ मेहेर-कृत संस्कृत-गीत "नववर्ष-गीतिका" की प्रसिद्ध संगीतकार पण्डित एच्. हरेन्द्र जोशी-रचित स्वरलिपियाँ भी वहाँ प्रकाशित। उनकी “नववर्ष-गीतिका” की आडियो कैसेट् एवं वीडियो कैसेट् मध्यप्रदेश की रतलाम एवं जावरा आदि नगरियों में स्थानीय टी.वी. चैनलों पर प्रसारित।
'''प्रमुख साहित्यिक एवं सांस्कृतिक अनुष्ठानों द्वारा सम्मान प्राप्त :'''
* गंगाधर सम्मान (२००२),
* गंगाधर सारस्वत सम्मान (२००२),
* जयकृष्ण मिश्र काव्य सम्मान (२००३),
* विद्यारत्न प्रतिभा सम्मान (२००५)।
* गंगाधर सम्मान- अशोक चन्दन स्मृति पुरस्कार (२००९)।
* आचार्य प्रफुल्लचन्द्र-राय स्मारक सम्मान (२०१०)- अकादेमी अफ् बेंगली पोएट्रि, कोलकाता।
* हरिप्रियामुण्ड-स्मारकी गंगाधर मेहेर सम्मान (२०१०)।
* एवार्ड् अफ़् एप्रिशिएशन् (जयदेव उत्सव- २००८)-ओड़िशी एकाडेमी, लोधीमार्ग, नई दिल्ली।
=== कर्मक्षेत्र ===
* १९८१ से ओड़िशा शिक्षा सेवा (ओ. ई. एस्.) में संस्कृत अध्यापक के रूप में डॉ॰ मेहेर कार्यरत हैं। सरकारी पंचायत महाविद्यालय बरगड़ एवं फकीरमोहन महाविद्यालय बालेश्वर में अध्यापना के उपरान्त सम्प्रति सरकारी स्वयंशासित महाविद्यालय, भवानीपाटना, ओड़िशा में संस्कृत विभाग के वरिष्ठ रीडर एवं विभागाध्यक्ष हैं।
== प्रकाशित कृतियाँ ==
(१) पीएच्. डी. शोधग्रन्थ [[Philosophical Reflections in the Naisadhacarita]] (ISBN :81-85094-21-7) प्रकाशक : पुन्थि पुस्तक, ३६/४ बि, विधान सरणी, कोलकाता, १९८९.
(२) [[मातृगीतिकांजलिः]] (मौलिक संस्कृत गीतिकाव्य) प्रकाशक : कलाहाण्डि लेखक कला परिषद, भवानीपाटना, ओड़िशा, १९९७.
(३) नैषध-महाकाव्ये धर्मशास्त्रीय-प्रतिफलनम् (संस्कृत आलोचना) प्रकाशक : धर्मशास्त्र विभाग, श्रीजगन्नाथ संस्कृत विश्वविद्यालय, पुरी, १९९४.
(४) साहित्यदर्पण – अळंकार (ISBN : 81-7411-12-7) प्रकाशक : विद्यापुरी, बालु बजार, कटक, ओड़िशा, १९९५.
(५) श्रीकृष्ण-जन्म, १९७७
(६) श्रीरामरक्षा-स्तोत्र (शिवरक्षा-स्तोत्र सहित अनुवाद), १९७७
(७) शिवताण्डव-स्तोत्र, १९७८
(८) विष्णु-सहस्र-नाम, १९७८
(९) गायत्री-सहस्र-नाम, १९८२ प्रकाशक : वाणी भण्डार, ब्रह्मपुर, गंजाम, ओड़िशा
(१०) मनोहर पद्यावली (संपादित), १९८५. प्रकाशक : नारायण भरसा मेहेर, मनोहर कवितावास, सिनापालि, ओड़िशा
(११) तपस्विनी (गंगाधर-मेहेर- कृत तपस्विनी- काव्य का सम्पूर्ण हिन्दी अनुवाद) प्रकाशक : सम्बलपुर विश्वविद्यालय, ज्योतिविहार, बुर्ला, सम्बलपुर, ओड़िशा, २०००.
(१२) [[Tapasvini of Gangadhara Meher]] (गंगाधर-मेहेर- कृत "तपस्विनी" काव्य का संपूर्ण अंग्रेजी अनुवाद) ISBN : 81-87661-63-1. Publisher : R. N. Bhattacharya, A-217, Road No. 4, HB Town, Sodepur, Kolkata, 2009.
(१३) कोशली मेघदूत (कालिदास-कृत मेघदूत-काव्य का सम्पूर्ण कोशली गीत-रूपान्तर)
Published by : Trupti Prakashan, Bhubaneswar-2, Orissa.
First Edition : 2010 ISBN : 13 978-93-80758-03-9.
(१४) साहित्यिक त्रैमासिक 'बर्त्तिका' मुखपत्र के विविध शारदीय विशेषांकों में प्रकाशित :
* नीतिशतक (भर्त्तृहरि-कृत काव्य का ओड़िआ पद्यानुवाद)
* शृंगार-शतक (भर्त्तृहरि-कृत काव्य का ओड़िआ पद्यानुवाद)
* वैराग्य-शतक (भर्त्तृहरि-कृत काव्य का ओड़िआ पद्यानुवाद)
* नैषधचरित-नवमसर्ग (श्रीहर्ष-कृत काव्य का ओड़िआ पद्यानुवाद)
* कालिदास-कृत रघुवंश-द्वितीय सर्ग, कुमारसम्भव के प्रथम, द्वितीय, पंचम, सप्तम एवं अष्टम सर्गों के ओड़िआ पद्यानुवाद।
(१५) “बर्षा” (कविवर-राधानाथ-राय-कृत ओड़िआ कविता का संस्कृत श्लोकानुवाद) लोकभाषा-प्रचार-समिति पुरी की 'लोकभाषा-सुश्री:' मुखपत्रिका में प्रकाशित।
== सहायक सूची ==
* https://web.archive.org/web/20101227082046/http://museindia.com/viewarticle.asp?myr=2008&issid=21&id=1258 (English Tapasvini : Muse India, e-journal)।
* सृजनगाथा : Srijangatha (Hindi e-magazine)
गंगाधर मेहेर की कवितायें :
https://web.archive.org/web/20101228215548/http://www.srijangatha.com/?pagename=Bhashantar2_May2K9
गंगाधर मेहेर -एक अमर प्रतिभा :
https://web.archive.org/web/20101228214902/http://www.srijangatha.com/?pagename=Hastakshar_Jun2k9
समन्वय के देवता दारुब्रह्म श्रीजगन्नाथ :
https://web.archive.org/web/20141029153323/http://www.srijangatha.com/prasangvash2_13jul2k10
साहित्य में मूल्यबोध :
https://web.archive.org/web/20100531010150/http://www.srijangatha.com/Alekh6_Mar2k10
व्यासकवि फकीरमोहन सेनापति :
https://web.archive.org/web/20120320102630/http://www.srijangatha.com/?pagename=hastakshar_16jun2k10
उत्कलगौरव मधुसूदन दास :
https://web.archive.org/web/20120320102218/http://www.srijangatha.com/?pagename=hastakshar_28Apr2k10
* The Lied and Art Song : https://web.archive.org/web/20100717115610/http://www.recmusic.org/lieder/get_texts.html?ContribId=632
* (कवितायें) https://web.archive.org/web/20100124005921/http://www.poemhunter.com/harekrishna-meher/poems/
* (काव्यालय - गंगाधर मेहेर): https://web.archive.org/web/20100215201116/http://manaskriti.com/kaavyaalaya/amritmay.stm
* https://web.archive.org/web/20101226213435/http://www.museindia.com/focuscontent.asp?issid=34&id=2292 (तपस्विनी काव्य -अंग्रेजी अनुवाद- लेख)
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सेनापति (कवि)
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अनुनाद सिंह
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'''सेनापति''' [[हिन्दी साहित्य]] के [[भक्ति काल]] एवं [[रीति काल]] के सन्धियुग के [[कवि]] हैं। अन्य प्राचीन कवियों की भाँति सेनापति का जीवनवृत सुज्ञात नहीं है। इनका मूल नाम ज्ञात नहीं है, 'सेनापति' उनका कवि-नाम है। इनके द्वारा रचित 'कवित्त रत्नाकर' के [[छन्द]] के आधार पर इतना ही ज्ञात है कि ये [[कान्यकुब्ज ब्राह्मण]] थे तथा इनके पिता का नाम गंगाधर तथा पितामह का नाम परशुराम दीक्षित था। इनके एक पद 'गंगा तीर वसति अनूप जिन पाई है' के अनुसार ये [[बुलंदशहर]] जिले के [[अनूपशहर]] के माने जाते हैं। सेनापति मुसलमानी दरबारों में भी रह चुके थे।
सेनापति के दो मुख्य ग्रंथ हैं- 'काव्य-कल्पद्रुम' तथा 'कवित्त-रत्नाकर'। जिसकी [[उपमा]]एँ अनूठी हैं।<ref>{{cite web|url=http://www.brandbihar.com/hindi/literature/kavya/senapati.html|title=हिन्दी के कवि सेनापति (17वीं शताब्दी)|access-date=[[१३ दिसंबर]] [[२००९]]|format=|publisher=Brand Bihar. Com|language=|archive-url=https://web.archive.org/web/20100103021943/http://brandbihar.com/hindi/literature/kavya/senapati.html|archive-date=3 जनवरी 2010|url-status=dead}}</ref>
सेनापति [[राम]] के विशेष भक्त थे। [[शिव]] तथा [[कृष्ण]] विषयक कविता लिखते हुए भी रूचि राम की ओर अधिक थी। उत्तर प्रदेश के [[अनूपशहर]] के रहने वाले थे परन्तु बाद के दिनों में वे [[वृन्दावन]] में क्षेत्र संन्यास लेकर वहीं सारा जीवन व्यतीत किए। सेनापति के काव्य में रीतिकालीन काव्य-परम्परा की झलक अधिकांश छन्दों में स्पष्ट रूप से विद्यमान है। चमत्कार प्रियता तथा [[नायिका भेद]] के उदाहरण भी उनकी कृतियों में उपलब्ध हैं।
इनकी रचनाओं में [[हिन्दी]] साहित्य की दोनों धाराओं का प्रभाव पड़ा है जिनमें [[भक्ति]] और [[शृंगार]] दोनों का मिश्रण है। इनके ऋतु वर्णन में सूक्ष्म प्रकृति निरीक्षण पाया जाता है जो साहित्य में अद्वितीय है।
== परिचय ==
सेनापति [[ब्रजभाषा]] काव्य के एक अत्यन्त शक्तिमान कवि माने जाते हैं। इनका समय रीति युग का प्रारंभिक काल है। उनका परिचय देने वाला स्रोत केवल उनके द्वारा रचित और एकमात्र उपलब्ध ग्रंथ ''''कवित्त रत्नाकर'''' है।
इसके आधार पर इनके पितामह का नाम परशुराम दीक्षित, पिता का नाम गंगाधर दीक्षित और गुरु का नाम हीरामणि दीक्षित था। 'गंगातीर बसति अनूप जिनि पाई है' से इनका अनूपशहर निवासी होना कुछ लोग स्वीकार करते हैं; परंतु कुछ लोग अनूप का अर्थ अनुपम बस्ती लगाते हैं और तर्क यह देते हैं कि यह नगर राजा [[अनूपसिंह बडगूजर]] से संबंध रखता है जिन्होंने एक चीते को मारकर जहाँगीर की रक्षा की थी और उससे यह स्थान पुरस्कार स्वरूप प्राप्त किया था और इस प्रकार उसने अनूपशहर बसाया। अनूप सिंह की पाँच पीढ़ी बाद उनकी संपत्ति उनके वंशजों में विभक्त हुई और किन्हीं तारा सिंह को अनूप शहर बँटवारे में मिला। ऐसी दशा में सेनापति के पिता को अनूपशहर कैसे मिल सकता था। परंतु, यह तर्क विषय संबद्ध नहीं है। अनूप बस्ती पाने का तात्पर्य उस बस्ती के अधिकार से नहीं, बल्कि अपने निवास के लिए सुंदर भूमि प्राप्त करने से है। ऐसी दशा में अनूपशहर से ऐसा तात्पर्य लेने में कोई असंभवता नहीं है।
सेनापति के उपर्युक्त परिचय तथा उनके काव्य की प्रवृत्ति देखने से यह स्पष्ट होता है कि [[संस्कृत]] के बहुत बड़े विद्वान थे और अपनी विद्वता और भाषाधिकार पर उन्हें गर्व भी था। अत: उनका संबंध किसी संस्कृत-ज्ञान-संपन्न वंश या परिवार से होना चाहिए। अभी हाल में प्रकाशित कवि कलानिधि देवर्षि श्रीकृष्ण भट्ट द्वारा लिखित, 'ईश्वर विलास' और 'पद्ममुक्तावली' नामक ग्रंथों में एक तैलंग ब्राह्मण वंश का परिचय मिलता है जो [[तेलंगाना]] प्रदेश से उत्तर की ओर आकर [[काशी]] में बसा। काशी से प्रयास, [[प्रयाग]] से बांधव देश ([[रीवाँ]]) और वहाँ से [[अनूपनगर]], [[भरतपुर]], [[बूँदी]] और [[जयपुर]] स्थानों में जा बसा।
इसी वंश के प्रसिद्ध कवि [[श्रीकृष्ण भट्ट देवर्षि]] ने [[संस्कृत]] के अतिरिक्त ब्रजभाषा में भी 'अलंकार कलानिधि', 'श्रृंगार-रस-माधुरी', 'विदग्ध रसमाधुरी', जैसे सुन्दर ग्रंथों की रचना की थी। इन ग्रंथों में इनका ब्रजभाषा पर अपूर्व अधिकार प्रकट होता है। ऐसी दशा में ऐसा अनुमान किया जा सकता है कि इसी देवर्षि भट्ट दीक्षितों की अनूपशहर में बसी शाखा से या तो स्वयं सेनापति का या उनके गुरु हीरामणि का संबंध रहा होगा। सेनापति और श्रीकृष्ण भट्ट की शैली को देखने पर भी एक-दूसरे पर पड़े प्रभाव की संभावना स्पष्ट होती है।
सेनापति का काव्य विदग्ध काव्य है। इनके द्वारा रचित दो ग्रंथों का उल्लेख मिलता है - एक 'काव्यकल्पद्रुम' और दूसरा 'कवित्त रत्नाकर'। परन्तु, 'कवित्त रत्नाकर' परन्तु, 'काव्यकल्पद्रुम' अभी तक प्राप्त नहीं हुआ। 'कवित्तरत्नाकर' संवत् 1706 में लिखा गया और यह एक प्रौढ़ काव्य है। यह पाँच तरंगों में विभाजित है। प्रथम तरंग में 97 कवित्त हैं, द्वितीय में 74, तृतीय में 62 और 8 [[कुंडलिया]], चतुर्थ में 76 और पंचम में 88 छंद हैं। इस प्रकार कुल मिलाकर इस ग्रंथ में 405 छंद हैं। इसमें अधिकांश लालित्य [[श्लेष]]युक्त छंदों का है परन्तु श्रृंगार, षट्ऋतु वर्णन और रामकथा के छंद अत्युुत्कृष्ट हैं।
सेनापति कृत ‘कवित्त-रत्नाकर’ की चतुर्थ तरंग का यह कवित्त देखिये जिसमें रामकथा मुक्त रुप में लिखी है-
:''कुस लव रस करि गाई सुर धुनि कहि,
:''भाई मन संतन के त्रिभुवन जानि है।
:''देबन उपाइ कीनौ यहै भौ उतारन कौं,
:''बिसद बरन जाकी सुधार सम बानी है।
:''भुवपति रुप देह धारी पुत्र सील हरि
:''आई सुरपुर तैं धरनि सियारानि है।
:''तीरथ सरब सिरोमनि सेनापति जानि,
:''राम की कहनी गंगाधार सी बखानी है।
:''सिवजू की निद्धि, हनूमान की सिद्धि,
:''बिभीषण की समृद्धि, बालमीकि नैं बखान्यो है।
:''बिधि को अधार, चारयौ बेदन को सार,
:''जप यज्ञ को सिंगार, सनकादि उर आन्यो है॥
:''सुधा के समान, भोग-मुकुति-निधान,
:''महामंगल निदान, 'सेनापति' पहिचान्यो है।
:''कामना को कामधेनु, रसना को बिसराम,
:''धरम को धाम, राम-नाम जग जान्यो है॥
पाँचवी तरंग में ८६ कवित्त हैं, जिनमें राम-रसायन वर्णन है। इनमें राम, कृष्ण, शिव और गंगा की महिमा का गान है। ‘गंगा-महिमा’ दृष्टव्य है-
:''पावन अधिक सब तीरथ तैं जाकी धार,
:''जहाँ मरि पापी होत सुरपुरपति है।
:''देखत ही जाकौ भलौ घाट पहिचानियत,
:''एक रुप बानी जाके पानी की रहति है।
:''बड़ी रज राखै जाकौ महा धीर तरसत,
:'' 'सेनापति' ठौर-ठौर नीकी यैं बहति है।
:''पाप पतवारि के कतल करिबै कौं गंगा,
:''पुन्य की असील तरवारि सी लसति है।
सेनापति ने अपने काव्य में सभी रसों को अपनाया है। ब्रजभाषा में लिखे पदों में [[फारसी]] और [[संस्कृत]] के शब्दों का भी प्रयोग किया है। अलंकारों की बात करें तो सेनापति को श्लेष से तो विशेष मोह था।
सेनापति का काव्य अपने सुन्दर यथातथ्य और मनोरम कल्पनापूर्ण षट्ऋतु वर्णन के लिए प्रसिद्ध हैं। ऐसा ऋतु-वर्णन हिंदी-साहित्य में बहुत कम मिलता है।
:''लाल-लाल टेसू, फूलि रहे हैं बिसाल संग,
:''स्याम रंग भेंटि मानौं मसि मैं मिलाए हैं।
:''तहाँ मधु काज, आइ बैठे मधुकर-पुंज,
:''मलय पवन, उपबन-बन धाए हैं॥
:'' 'सेनापति' माधव महीना मैं पलास तरु,
:''देखि-देखि भाउ, कबिता के मन आए हैं।
:''आधे अनसुलगि, सुलगि रहे आधे, मानौ,
:''बिरही दहन काम क्वैला परचाए हैं।
:''केतकि असोक, नव चंपक बकुल कुल,
:''कौन धौं बियोगिनी को ऐसो बिकरालु है।
:'' 'सेनापति' साँवरे की सूरत की सुरति की,
:''सुरति कराय करि डारतु बिहालु है॥
:''दच्छिन पवन ऐतो ताहू की दवन,
:''जऊ सूनो है भवन, परदेसु प्यारो लालु है।
:''लाल हैं प्रवाल, फूले देखत बिसाल जऊ,
:''फूले और साल पै रसाल उर सालु हैं॥
:''बृष को तरनि तेज, सहसौ किरन करि,
:''ज्वालन के जाल बिकराल बरसत हैं।
:''तपति धरनि, जग जरत झरनि, सीरी
:''छाँह कौं पकरि, पंथी-पंछी बिरमत हैं॥
:'' 'सेनापति' नैक, दुपहरी के ढरत, होत
:''घमका बिषम, ज्यौं न पात खरकत हैं।
:''मेरे जान पौनों, सीरी ठौर कौं पकरि कौनौं,
:''घरी एक बैठि, कँ घामै बितवत हैं।
:'' 'सेनापति' ऊँचे दिनकर के चलत लुवैं,
:''नदी नद कुवें कोपि डारत सुखाइ कै।
:''चलत पवन, मुरझात उपवन वन,
:''लाग्यो है तपन जारयो भूतलों तचाइ कै॥
:''भीषण तपत, रितु ग्रीष्म सकुच ताते,
:''सीरक छिपत तहखाननि में जाइकै।
:''मानौ सीतकाल सीतलता के जमाइबे को,
:''राखे हैं बिरंचि बीज धरा में धराइ कै॥
भाव एवं कल्पना चमत्कार के साथ-साथ वास्तविकता का चित्रण सेनापति की विशेषता है। सबसे प्रधान तत्व सेनापति की भाषा शैली का है जिसमें शब्दावली अत्यंत, संयत, भावोपयुक्त, गतिमय एवं अर्थगर्भ है।
सेनापति की भाषा शैली को देखकर ही उनके [[छंद]] बिना उनकी छाप के ही पहचाने जा सकते हैं। सेनापति की कविता में उनकी प्रतिभा फूटी पड़ती है। उनकी विलक्षण सूझ छंदों में उक्ति वैचित्रय का रूप धारण कर प्रकट हुई है जिससे वे मन और बुद्धि को एक साथ चमत्कृत करने वाले बन गए हैं। (उनके छंद एक कुशल सेनापति के दक्ष सैनिकों की भाँति पुकारकर कहते हैं 'हम सेनापति के हैं'।)
== संदर्भ ग्रंथ ==
* आचार्य रामचंद्र शुक्ल : हिंदी साहित्य का इतिहास, नागरी प्रचारिणी सभा, वाराणसी;
* उमाशंकर शुक्ल : कवित्त रत्नाकर;
* भगीरथ मिश्र : हिंदी रीति साहित्य
=== तथ्य सूची ===
{{टिप्पणीसूची}}
== इन्हें भी देखें ==
* [[सेनापति]]
== बाहरी कड़ियाँ ==
* [https://web.archive.org/web/20101127094217/http://dhankedeshme.blogspot.com/2010/07/blog-post_23.html अलौकिक ऋतु-वर्णन करने वाले रीतिकालीन कवि 'सेनापति']
[[श्रेणी:हिन्दी कवि]]
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वार्ता:भारतीय इतिहास की समयरेखा
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Sanjee hooda
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आशीष भटनागर के चौपाल पर किए गये अनुरोध के आधार पर भारत के विषय साँचे की लाल कड़ियों को नीला करने के दौरान इस पृष्ठ का निर्माण किया गया है। इसको बेहतर करने में आप सभी का सहयोग वांक्षित है। भारतीय इतिहास हमारी सभ्यता एवं संस्कृति का दर्पण है। इसमें सभी भारतीयों की रूची होना स्वाभाविक है।--<b>[[User:Munita Prasad|<font color="green">Munita Prasad</font>]]</b><sup>[[सदस्य वार्ता:Munita Prasad|<font color="blue">वार्ता</font>]]</sup> ०६:५७, २७ दिसंबर २००९ (UTC)
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. [[सदस्य:Sanjee hooda|Sanjee hooda]] ([[सदस्य वार्ता:Sanjee hooda|वार्ता]]) 22:17, 2 मई 2026 (UTC)
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}}
'''लिवोफ़्लॉक्सासिन''' [[फ़्लोरोक्विनोलोन]] दवा वर्ग का एक कृत्रिम [[रसायनोपचार]] एंटीबायोटिक है<ref>{{Cite journal | last1 = Nelson | first1 = JM. | last2 = Chiller | first2 = TM. | last3 = Powers | first3 = JH. | last4 = Angulo | first4 = FJ. | title = Fluoroquinolone-resistant Campylobacter species and the withdrawal of fluoroquinolones from use in poultry: a public health success story. | url = https://archive.org/details/sim_clinical-infectious-diseases_2007-04-01_44_7/page/976 | journal = Clin Infect Dis | volume = 44 | issue = 7 | pages = 977-80 | month = Apr | year = 2007 | doi = 10.1086/512369 | PMID = 17342653 }}</ref><ref>{{Cite journal | last1 = Kawahara | first1 = S. | title = [Chemotherapeutic agents under study] | journal = Nippon Rinsho | volume = 56 | issue = 12 | pages = 3096-9 | month = Dec | year = 1998 | PMID = 9883617 }}</ref> और गंभीर या प्राणघातक जीवाणु संक्रमण या अन्य [[प्रतिजैविकी]] वर्गों के प्रति प्रतिक्रिया दिखाने में विफल जीवाणु संक्रमणों के इलाज के लिए प्रयुक्त होता है।<ref name="Liu-2005">{{Cite journal | last1 = Liu | first1 = H. | last2 = Mulholland | first2 = SG. | title = Appropriate antibiotic treatment of genitourinary infections in hospitalized patients. | journal = Am J Med | volume = 118 Suppl 7A | pages = 14S-20S | month= July| year = 2005 | doi = 10.1016/j.amjmed.2005.05.009 | PMID = 15993673 }}</ref><ref name="pmid15757551">{{cite journal |author=MacDougall C, Guglielmo BJ, Maselli J, Gonzales R |title=Antimicrobial drug prescribing for pneumonia in ambulatory care |journal=Emerging Infect. Dis. |volume=11 |issue=3 |pages=380–4 |year=2005 |month=March |pmid=15757551 |url=http://www.cdc.gov/ncidod/EID/vol11no03/04-0819.htm |access-date=6 अप्रैल 2010 |archive-url=https://web.archive.org/web/20100628080459/http://www.cdc.gov/ncidod/eid/vol11no03/04-0819.htm |archive-date=28 जून 2010 |url-status=live }}</ref> यह विभिन्न ब्रांड नाम के तहत बेचा जाता है, जैसे सबसे सामान्य '''लेवाक्विन''' और '''तावानिक''' . नेत्र घोल के रूप में यह '''ऑफ़्टाक्विक्स''', '''क्विक्सिन''' और '''आइक्विक्स''' के रूप में जाना जाता है।
लिवोफ़्लॉक्सासिन एक [[काइरल]] फ़्लोरिनेटेड कार्बाक्सिक्विनोलोन है। एक पुरानी दवा [[ओफ़्लोक्ज़ासिन]], जो [[अम्लीय]] मिश्रण है, की जांच में पाया गया कि l फ़ार्म [(-)-(''S'' [[प्रतिबिंब]])] अधिक सक्रिय है। यह विशिष्ट घटक लिवोफ़्लॉक्सासिन है।<ref name="ReferenceB">{{cite web |url=http://www.accessdata.fda.gov/drugsatfda_docs/label/2008/021721s020_020635s57_020634s52_lbl.pdf |title=HIGHLIGHTS OF PRESCRIBING INFORMATION |author=Janssen Pharmaceutica |authorlink=Janssen Pharmaceutica |publisher=FDA |location=USA |format=PDF |month=September |year=2008 |access-date=6 अप्रैल 2010 |archive-url=https://web.archive.org/web/20100602045827/http://www.accessdata.fda.gov/drugsatfda_docs/label/2008/021721s020_020635s57_020634s52_lbl.pdf |archive-date=2 जून 2010 |url-status=live }}</ref><ref>{{Cite journal | last1 = Morrissey | first1 = I. | last2 = Hoshino | first2 = K. | last3 = Sato | first3 = K. | last4 = Yoshida | first4 = A. | last5 = Hayakawa | first5 = I. | last6 = Bures | first6 = MG. | last7 = Shen | first7 = LL. | title = Mechanism of differential activities of ofloxacin enantiomers. | journal = Antimicrob Agents Chemother | volume = 40 | issue = 8 | pages = 1775–84 | month = August | year = 1996 | url = http://aac.asm.org/cgi/reprint/40/8/1775.pdf | format = PDF | pmid = 8843280 | author2 = Hoshino | author3 = Sato | author4 = Yoshida | author5 = Hayakawa | author6 = Bures | author7 = Shen | pmc = 163416 | access-date = 6 अप्रैल 2010 | archive-url = https://web.archive.org/web/20110611220904/http://aac.asm.org/cgi/reprint/40/8/1775.pdf | archive-date = 11 जून 2011 | url-status = live }}</ref>
लिवोफ़्लॉक्सासिन अन्य कई दवाओं और साथ ही, जड़ी-बूटियों और प्राकृतिक पूरकों के साथ पारस्परिक क्रिया करता है। इस तरह की अन्योन्य क्रिया से [[हृदय-विषाक्तता]] और [[अतालता]], [[प्रतिस्कंदन]], ग़ैर-अवशोष्य ग्रंथियों के गठन का खतरा बढ़ जाता है और साथ ही साथ, विषाक्तता के जोखिम में भी वृद्धि होती है।<ref name="sdcfl">{{cite web |url=http://www.drugbank.ca/drugs/DB01137 |title=Showing drug card for Levofloxacin (DB01137) |author=DrugBank |location=Canada |date=19 फ़रवरी 2009 |access-date=6 अप्रैल 2010 |archive-url=https://web.archive.org/web/20100328012238/http://www.drugbank.ca/drugs/DB01137 |archive-date=28 मार्च 2010 |url-status=live }}</ref>
लिवोफ़्लॉक्सासिन, असंख्य गंभीर और प्राणघातक प्रतिकूल प्रतिक्रियाओं और साथ ही, स्वतःप्रवर्तित कंडरा विदर और अपरिवर्तनीय [[परिधीय न्यूरोपथी]] से जुड़ा हुआ है। ऐसी प्रतिक्रियाएं चिकित्सा संपन्न होने के लंबे समय बाद प्रकट हो सकती हैं और गंभीर मामलों में आजीवन विकलांगता में परिणत हो सकती है। लिवोफ़्लॉक्सासिन के उपयोग के साथ [[यकृत-विषाक्तता]] भी रिपोर्ट की गई है।<ref name="nda19jun2007" /><ref name="nda16ap2008" />
== इतिहास ==
लिवोफ़्लॉक्सासिन एक [[फ़्लोरोक्विनोलोन]] [[एंटीबायोटिक]] है, जिसे [[अमेरिका]] में [[ऑर्थो-मॅकनील]] द्वारा और [[कनाडा]] में विभिन्न व्यापार नामों के तहत बेचा जा रहा है।<ref>{{cite web |url=http://www.umm.edu/altmed/drugs/levofloxacin-075755.htm#U.S.%20Brand%20Names |title=Levofloxacin |author=[[University of Maryland Medical Center]] |publisher=University of Maryland |location=USA |access-date=6 अप्रैल 2010 |archive-url=https://web.archive.org/web/20100110052642/http://www.umm.edu/altmed/drugs/levofloxacin-075755.htm#U.S.%20Brand%20Names |archive-date=10 जनवरी 2010 |url-status=live }}</ref> लिवाक्विन का दुनिया भर में मौखिक और IV उपयोगार्थ विपणन और साथ ही, नेत्र संबंधी घोलों में भी इस्तेमाल किया जाता है।
[[डायची सैंक्यो]] ने सनोफ़ी-अवेंटिस को [[ब्रिटेन]] और [[मेक्सिको]] में लिवोफ़्लॉक्सासिन युक्त औषधीय संपाक तैयार करने, उपयोग करने और बेचने के लिए एक अनन्य लाइसेंस प्रदान की थी।<ref>{{cite web |url=http://www.daiichisankyo.com/news/yymmdd_nn.html?b_newsrelease_n1_eng.detail%5Bid%5D=682.3&b_newsrelease_n1_eng.year_selector%5Bid%5D=682.3&b_newsrelease_n1_eng.category_selector%5Bid%5D=682.3 |title=UK Levofloxacin SPC and Underlying Patent Upheld by High Court Patent Court |author=Takashi Shoda |publisher=Daiichi Sankyo, Limited |location=USA |date=23 अक्टूबर 2008 |access-date=6 अप्रैल 2010 |archive-url=https://web.archive.org/web/20090827100842/http://www.daiichisankyo.com/news/yymmdd_nn.html?b_newsrelease_n1_eng.detail%5Bid%5D=682.3&b_newsrelease_n1_eng.year_selector%5Bid%5D=682.3&b_newsrelease_n1_eng.category_selector%5Bid%5D=682.3 |archive-date=27 अगस्त 2009 |url-status=dead }}</ref> अन्य निर्माताओं में शामिल है नॉवेल फ़ार्मास्युटिकल लेबोरेटरीज़ (लीवोरस).
लिवाक्विन जॉनसन एंड जॉनसन / ऑर्थो मॅकनील के लिए एक अत्यधिक सफल दवा साबित हुई, जिसने अरबों डॉलर अतिरिक्त राजस्व पैदा किया। अकेले 2007 में लिवाक्विन, जॉनसन एंड जॉनसन के कुल राजस्व के 6.5% के लिए जिम्मेदार था, जिसकी वजह से पिछले वर्ष की तुलना में 8% वृद्धि सहित 1.6 बिलियन डॉलर की कमाई हुई.<ref>{{cite web |url=http://files.shareholder.com/downloads/JNJ/0x0x171267/057640f8-b2c0-4b0f-9f54-7a24a553c3ce/2007AR.pdf |title=Analysis of Sales by Business
Segments |author=Johnson & Johnson |publisher=Shareholder |page=27 |format=PDF |year=2009 |access-date=6 अप्रैल 2010 |archive-url=https://web.archive.org/web/20120917035220/http://files.shareholder.com/downloads/JNJ/0x0x171267/057640f8-b2c0-4b0f-9f54-7a24a553c3ce/2007AR.pdf |archive-date=17 सितंबर 2012 |url-status=dead }}</ref> शीर्ष 200 निर्देशित औषधियों में 2007 के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका में 37वां दर्जा और 2007 में दुनिया भर की बिक्री में 19वां दर्जा पाते हुए, लिवाक्विन की कुल बिक्री 1.6 बिलियन डॉलर अधिक थी।<ref name="drugpatentwatch.com" />
2007 के लिए लिवाक्विन दुनिया की सर्वाधिक निर्देशित फ़्लोरोक्विनोलोन दवा थी।<ref>{{cite web |url=http://www.pharmacytimes.com/issues/articles/2008-05_003.asp |title=Top 200 Prescription Drugs of 2007 |author=Ed Lamb |publisher=Pharmacy Times |location=USA |date=1 मई 2008 |access-date=6 अप्रैल 2010 |archive-url=https://web.archive.org/web/20090207090521/http://pharmacytimes.com/issues/articles/2008-05_003.asp |archive-date=7 फ़रवरी 2009 |url-status=dead }}</ref>
लिवोफ़्लॉक्सासिन को पहले, संयुक्त राज्य अमेरिका में गंभीर और प्राणघातक जीवाणु संक्रमण के इलाज में उपयोगार्थ, 1987 में पेटेंट किया गया (लिवोफ़्लॉक्सासिन यूरोपीय पेटेंट - डायची फ़ार्मास्युटिकल कंपनी लिमिटेड) और 20 दिसम्बर 1996 को अमेरिका के [[खाद्य एवं औषधि प्रशासन]] द्वारा यह अनुमोदित हुआ।<ref name="accessdata.fda.gov" />
कई महत्वपूर्ण चिकित्सा प्रकाशनों और पुस्तकों में लिवोफ़्लॉक्सासिन को फ़्लोरोक्विनोलोन की ''दूसरी पीढ़ी'' के रूप में वर्णित किया गया है।<ref>{{Cite journal | title = Levofloxacin. | url = https://archive.org/details/sim_tuberculosis_2008-03_88_2/page/119 | journal = Tuberculosis (Edinb) | volume = 88 | issue = 2 | pages = 119–21 | month= March| year = 2008 | doi = 10.1016/S1472-9792(08)70013-1 | pmid = 18486047 }}</ref><ref>{{cite journal | author = North DS, Fish DN, Redington JJ | title = Levofloxacin, a second-generation fluoroquinolone | journal = Pharmacotherapy | volume = 18 | issue = 5 | pages = 915–35 | year = 1998 | pmid = 9758306 | accessdate = 29 जून 2009 }}</ref><ref>{{cite book |last1=Lemke |first1=Thomas L. |last2=Williams |first2=David A. |title=Foye's Principles of Medicinal Chemistry |url=http://books.google.co.uk/books?id=NHQQBMM-qMEC&pg=PP1 |edition=6 |date=1 अक्टूबर 2007 |publisher=Lippincott Williams & Wilkins |isbn=978-0781768795 |location=USA |author=edited by Thomas L. Lemke, David A. Williams ; assistant editors, Victoria F. Roche, S. William Zito ... }}</ref> जबकि कुछ चिकित्सीय वेब साइटों में इसे ''तीसरी पीढ़ी'' के फ़्लोरोक्विनोलोन के रूप में वर्णित किया गया है।<ref>{{cite web |url=http://www.medications.com/drugs/levaquin |title=Levaquin Information |publisher=Medications.com |location=USA |access-date=6 अप्रैल 2010 |archive-url=https://web.archive.org/web/20100126184337/http://www.medications.com/drugs/levaquin |archive-date=26 जनवरी 2010 |url-status=live }}</ref><ref>{{cite journal | author = King DE, Malone R, Lilley SH | title = New classification and update on the quinolone antibiotics | journal = American Family Physician | volume = 61 | issue = 9 | pages = 2741–8 | year = 2000 | month = May | pmid = 10821154 | url = http://www.aafp.org/afp/20000501/2741.html | accessdate = 30 जून 2009 | archive-url = https://web.archive.org/web/20110606041802/http://www.aafp.org/afp/20000501/2741.html | archive-date = 6 जून 2011 | url-status = live }}</ref>
[[अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन]] (FDA) द्वारा लिवोफ़्लॉक्सासिन को ऑफ़्लॉक्सासिन के रूप में ही माना गया है, माइकोबैक्टीरिया के प्रति ''कृत्रिम वातावरण में'' दर्शाई गई क्षमता के अपवाद के साथ. कृत्रिम वातावरण में, सामान्यतः, ऑफ़्लॉक्सासिन से इसकी दोहरी क्षमता है, पर डी-ऑफ़्लॉक्सासिन माइकोबैक्टीरिया के प्रति कम सक्रिय है।<ref>{{cite journal | author = Davis R, Bryson HM | title = Levofloxacin. A review of its antibacterial activity, pharmacokinetics and therapeutic efficacy | journal = Drugs | volume = 47 | issue = 4 | pages = 677–700 | year = 1994 | month = April | pmid = 7516863 | accessdate = 29 जून 2009 | doi = 10.2165/00003495-199447040-00008 }}</ref><ref>{{cite web |url=http://www.accessdata.fda.gov/drugsatfda_docs/nda/96/020634-4.pdf |title=STATISTICAL REVIEW AND EVALUATION |publisher=FDA |location=USA |page= |pages= |format=PDF |date=21 नवम्बर 1996 |access-date=6 अप्रैल 2010 |archive-url=https://web.archive.org/web/20121018202909/http://www.accessdata.fda.gov/drugsatfda_docs/nda/96/020634-4.pdf |archive-date=18 अक्तूबर 2012 |url-status=live }}</ref>
मौजूदा अमेरिकी पेटेंट ऑर्थो-मॅकनील-जैनसेन द्वारा धारित है।<ref name="drugpatentwatch.com">{{cite web |url=http://www.drugpatentwatch.com/premium/preview/detail/index.php?searchtype=alpha&category=Tradename&searchstring=LEVAQUIN |title=LEVAQUIN |publisher=drugpatentwatch.com |location=USA |access-date=6 अप्रैल 2010 |archive-url=https://web.archive.org/web/20090301094421/http://www.drugpatentwatch.com/premium/preview/detail/index.php?searchtype=alpha&category=Tradename&searchstring=LEVAQUIN |archive-date=1 मार्च 2009 |url-status=dead }}</ref>
2007 में दुनिया की बिक्री में 19वें दर्जे के साथ, लिवाक्विन की बिक्री 1.4 बिलियन डॉलर को पार कर गई।<ref name="drugpatentwatch.com" /> 2007 के लिए लिवाक्विन दुनिया की सर्वाधिक निर्देशित फ़्लोरोक्विनोलोन दवा थी।<ref>{{cite web |author=Ed Lamb |title=Top 200 Prescription Drugs of 2007 |url=http://www.pharmacytimes.com/issues/articles/2008-05_003.asp |publisher=Pharmacy Times |date=1st May 2008 |accessdate=21 जुलाई 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20090207090521/http://pharmacytimes.com/issues/articles/2008-05_003.asp |archive-date=7 फ़रवरी 2009 |url-status=dead }}</ref>
लिवोफ़्लॉक्सासिन का विपणन विश्व भर में असंख्य विभिन्न ब्रांड नामों के तहत होता है, जिससे पश्च-विपणन निगरानी मुश्किल हो जाती है।<ref>Cravit, Cravit Ophthalmic, Elequine, Floxel, Iquix, Leroxacin, Lesacin, Levaquin, Levokacin, Levox, Levoxacin, Mosardal, Nofaxin, Quixin, Reskuin, Tavanic, Volequin http://www.drugbank.ca/drugs/DB01137 {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20100328012238/http://www.drugbank.ca/drugs/DB01137 |date=28 मार्च 2010 }}</ref><ref>Cravox, Floxlevo, Levoxacine, Levoxetina, Nislev, Oftaquix, Prixar, Reskuin, Tavanic source: http://www.umm.edu/altmed/drugs/levofloxacin-075755.htm#International%20Brand%20Names {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20100110052642/http://www.umm.edu/altmed/drugs/levofloxacin-075755.htm#International%20Brand%20Names |date=10 जनवरी 2010 }}</ref>
इसके अतिरिक्त, लिवोफ़्लॉक्सासिन के व्यापक संस्करण 2004 से ही उपलब्ध हैं और विभिन्न ब्रांड नामों की किस्मों के तहत एक सामान्य औषधि के रूप में विपणन किया जाता है। लेकिन डायची सैंक्यो-जॉनसन एंड जॉनसन-ऑर्थो मॅकनील ने यह दावा करते हुए, ऐसे सामान्य समकक्ष दवाइयों के विपणन को रोकने के लिए असंख्य पेटेंट मुकदमे दायर किए कि उनका पेटेंट 23 जून 2009 तक समाप्त नहीं होता है।<ref name="investing.businessweek.com">{{cite web |url=http://investing.businessweek.com/research/stocks/private/snapshot.asp?privcapId=4240255 |title=Novopharm Limited |author= |authorlink= |coauthors= |publisher= |location=USA |date=3 नवम्बर 2009 |access-date=6 अप्रैल 2010 |archive-url=https://web.archive.org/web/20090826103834/http://investing.businessweek.com/research/stocks/private/snapshot.asp?privcapId=4240255 |archive-date=26 अगस्त 2009 |url-status=live }}</ref> देखें [[जेनेरिक समकक्ष]]
== लाइसेंसकृत उपयोग ==
संयुक्त राज्य अमेरिका में मौखिक और I.V. लिवोफ़्लॉक्सासिन के लिए लाइसेंसकृत उपयोग निम्नतः हैं:
वयस्क जनता में मौखिक और I.V. लिवोफ़्लॉक्सासिन, गंभीर और प्राणघातक जीवाणु संक्रमणों के इलाज तक ही सीमित हैं, जैसे:
* मूत्र पथ संक्रमण 17/12/1998 को जोड़ा गया<ref>{{cite web |url=http://www.accessdata.fda.gov/drugsatfda_docs/nda/98/020634s04_appltr.pdf |title=Center for drug evaluation and research |author=Mark J. Goldberger |publisher=FDA |location=USA |format=PDF |date=17 दिसम्बर 1998 |access-date=6 अप्रैल 2010 |archive-url=https://web.archive.org/web/20120617012922/http://www.accessdata.fda.gov/drugsatfda_docs/nda/98/020634s04_appltr.pdf |archive-date=17 जून 2012 |url-status=live }}</ref>
* [[समुदाय उपार्जित निमोनिया]] 2/2/2000 को जोड़ा गया<ref name="ReferenceA">{{cite web |url=http://www.accessdata.fda.gov/drugsatfda_docs/appletter/2000/20635S7,8LTR.PDF |title=NDA 20-634/S-008, S-009, NDA 20-635/S-007, S-008 |author=Mark J. Goldberger |publisher=FDA |location=USA |format=PDF |access-date=6 अप्रैल 2010 |archive-url=https://web.archive.org/web/20121016180239/http://www.accessdata.fda.gov/drugsatfda_docs/appletter/2000/20635S7,8LTR.PDF |archive-date=16 अक्तूबर 2012 |url-status=live }}</ref>
* त्वचा और त्वचा संरचना संक्रमण 8/9/2000 को जोड़ा गया<ref>{{cite web |url=http://www.accessdata.fda.gov/drugsatfda_docs/appletter/2000/20635S10ltr.pdf |title=NDA 20-634/S-013, NDA 20-635/S-010 |author=Renata Albrecht, |publisher=FDA |location=USA |format=PDF |access-date=6 अप्रैल 2010 |archive-url=https://web.archive.org/web/20121018202725/http://www.accessdata.fda.gov/drugsatfda_docs/appletter/2000/20635S10ltr.pdf |archive-date=18 अक्तूबर 2012 |url-status=live }}</ref>
* [[नोसोकोमियल न्यूमोनिया]] 30/10/2002 को जोड़ा गया<ref>{{cite web |url=http://www.accessdata.fda.gov/drugsatfda_docs/appletter/2002/20634se1-025,20635se1-022ltr.pdf |title=NDA 20-634/S-025, NDA 20-635/S-022 |author=Renata Albrecht |publisher=FDA |location=USA |format=PDF |access-date=6 अप्रैल 2010 |archive-url=https://web.archive.org/web/20121018202731/http://www.accessdata.fda.gov/drugsatfda_docs/appletter/2002/20634se1-025,20635se1-022ltr.pdf |archive-date=18 अक्तूबर 2012 |url-status=live }}</ref>
* [[क्रॉनिक बैक्टीरियल प्रोस्टाटिटिस]] 23/05/2003 को जोड़ा गया<ref>{{cite web |url=http://www.accessdata.fda.gov/drugsatfda_docs/appletter/2003/20634se1-027,20635se1-026ltr.pdf |title=NDA 20-634/S-027, NDA 20-635/S-026 |author=Renata Albrecht |publisher=FDA |location=USA |format=PDF |date=23 मई 2003 |access-date=6 अप्रैल 2010 |archive-url=https://web.archive.org/web/20121018202736/http://www.accessdata.fda.gov/drugsatfda_docs/appletter/2003/20634se1-027,20635se1-026ltr.pdf |archive-date=18 अक्तूबर 2012 |url-status=live }}</ref> कूटभेषज के प्रति श्रेष्ठता की कमी के कारण आम तौर पर सिफ़ारिश नहीं की जाती.<ref>{{Cite journal | last1 = Nickel | first1 = JC. | last2 = Downey | first2 = J. | last3 = Clark | first3 = J. | last4 = Casey | first4 = RW. | last5 = Pommerville | first5 = PJ. | last6 = Barkin | first6 = J. | last7 = Steinhoff | first7 = G. | last8 = Brock | first8 = G. | last9 = Patrick | first9 = AB. | title = Levofloxacin for chronic prostatitis/chronic pelvic pain syndrome in men: a randomized placebo-controlled multicenter trial. | url = https://archive.org/details/sim_urology_2003-10_62_4/page/614 | journal = Urology | volume = 62 | issue = 4 | pages = 614–7 | month= October| year = 2003 | doi = 10.1016/S0090-4295(03)00583-1| pmid = 14550427 | author2 = Downey | author3 = Clark | author4 = Casey | author5 = Pommerville | author6 = Barkin | author7 = Steinhoff | author8 = Brock | author9 = Patrick }}</ref>
* अभिश्वसनीय एंथ्रेक्स (अरक्षितता के बाद) 24/11/2004 को जोड़ा गया<ref>{{cite web |url=http://www.accessdata.fda.gov/drugsatfda_docs/appletter/2004/20634s035,20635s035,21721s003ltr.pdf |title=NDA 20-634/S-035, NDA 20-635/S-035, NDA 21-721/S-003 |author=Renata Albrecht |publisher=FDA |location=USA |format=PDF |date=24 नवम्बर 2004 |access-date=6 अप्रैल 2010 |archive-url=https://web.archive.org/web/20121018202743/http://www.accessdata.fda.gov/drugsatfda_docs/appletter/2004/20634s035,20635s035,21721s003ltr.pdf |archive-date=18 अक्तूबर 2012 |url-status=live }}</ref>
* गंभीर जीवाणु संबंधित शिरानालशोथ 4/8/2005 को जोड़ा गया<ref>{{cite web |url=http://www.accessdata.fda.gov/drugsatfda_docs/appletter/2005/020634s037,020635s038,021721s002ltr.pdf |title=NDA 20-634/S-037, NDA 20-635/S-038, NDA 21-721/S-002 |author=Renata Albrecht |publisher=FDA |location=USA |format=PDF |date=8 अप्रैल 2005 |access-date=6 अप्रैल 2010 |archive-url=https://web.archive.org/web/20121018202757/http://www.accessdata.fda.gov/drugsatfda_docs/appletter/2005/020634s037,020635s038,021721s002ltr.pdf |archive-date=18 अक्तूबर 2012 |url-status=live }}</ref> 23/6/2006 को संशोधित<ref name="fdajune2006">{{cite web |url=http://www.accessdata.fda.gov/drugsatfda_docs/appletter/2006/020634s040,020635s043,021721s007LTR.pdf |title=NDA 20-634/S-040, NDA 20-635/S-043, NDA 21-721/S-007 |author=Renata Albrecht |publisher=FDA |location=USA |format=PDF |date=23 जून 2006 |access-date=6 अप्रैल 2010 |archive-url=https://web.archive.org/web/20121018202852/http://www.accessdata.fda.gov/drugsatfda_docs/appletter/2006/020634s040,020635s043,021721s007LTR.pdf |archive-date=18 अक्तूबर 2012 |url-status=live }}</ref>
* गंभीर जीवाणु संबंधित चिरकालिक ब्रॉन्काइटिस तीव्रता 23/6/2006 को जोड़ा गया<ref name="fdajune2006" />
* गंभीर तीव्र वृक्कगोणिका शोथ 23/6/2006 को जोड़ा गया<ref name="fdajune2006" />
बाल-चिकित्सा समुदाय के बीच मौखिक और I.V. लिवोफ़्लॉक्सासिन निम्न तक ही सीमित है:
* अभिश्वसनीय एंथ्रेक्स (अरक्षितता के बाद) 5/5/2008 को जोड़ा गया<ref name="nda5may08">{{cite web |url=http://www.accessdata.fda.gov/drugsatfda_docs/appletter/2008/020634se5-047020635se5-051021721se5-015ltr.pdf |title=NDA 20-634/S-047, NDA 20-635/S-051, NDA 21-721/S-015 |author=Renata Albrecht |publisher=FDA |location=USA |format=FDA |date=5 मई 2008 |access-date=6 अप्रैल 2010 |archive-url=https://web.archive.org/web/20121018202858/http://www.accessdata.fda.gov/drugsatfda_docs/appletter/2008/020634se5-047020635se5-051021721se5-015ltr.pdf |archive-date=18 अक्तूबर 2012 |url-status=live }}</ref>
ध्यान दें: लिवोफ़्लॉक्सासिन ने अवायुजीवियों के प्रति मंद क्रियाशीलता दिखाई है और इसमें माइकोबैक्टिरियम ट्युबरक्युलॉसिस तथा माइकोबैक्टिरियम एवियम कॉम्पलेक्स सहित अन्य माइकोबैक्टिरिया के प्रति ऑफ़्लॉक्सासिन की प्रभावकारिता से दुगुनी प्रबलता है।<ref>{{cite journal |issn=1068-7777 |title=New and Emerging Quinolone Antibiotics |author=John A. Bosso |journal=Journal of Infectious Disease Pharmacotherapy |url=http://bubl.ac.uk/archive/journals/jidp/v02n0498.htm#6new |volume=2 |issue=4 |pages=61–76 |doi=10.1300/J100v02n04_06 |year=1998 |access-date=6 अप्रैल 2010 |archive-url=https://web.archive.org/web/20110616191606/http://bubl.ac.uk/archive/journals/jidp/v02n0498.htm#6new |archive-date=16 जून 2011 |url-status=dead }}</ref>
पेशीकंकालीय प्रणाली को परिवर्तनीय या अपरिवर्तनीय<ref name="aidac62m">{{cite web |url=http://fqresearch.org/pdf_files/62nd_fda_meeting.pdf |title=ANTI-INFECTIVE DRUGS ADVISORY COMMITTEE 62nd MEETING |first= |last= |author=DAVID C. VAN SICKLE |coauthors=BARTH RELLER, JON S. ABRAMSON, IRENE BIDAULT, JOHN S. BRADLEY et, al. |publisher=FDA |location=USA |format=PDF |quote=One interesting case which is not included on this slide for arthralgias was a 15 year old boy who received ofloxacin IV for an emergency appendectomy and had not grown more than his 70 inches in height over the last year. The 15th percentile for height for a 15 year old boy however is 66.5 inches and the expected growth rate is about two inches per year…The third case is articular. It is a 17-year-old patient who experienced arthropathy and the drug was not suspected and the treatment was continued two following months. It leads to destructive arthropathy of the knees and the hip and prothesis was performed three years later.…if an irreversible cartilaginous lesion can occur, it is very likely that is going to cause problems down the line and we can't even anticipate what they are like… |date=19 नवम्बर 1996 |access-date=6 अप्रैल 2010 |archive-url=https://web.archive.org/web/20090108061225/http://www.fqresearch.org/pdf_files/62nd_fda_meeting.pdf |archive-date=8 जनवरी 2009 |url-status=live }}</ref> जोखिम के कारण, मौखिक और I.V. लिवाक्विन, बच्चों में इस्तेमाल के लिए FDA द्वारा, अपवाद (अभिश्वसनीय एंथ्रेक्स) के अलावा,<ref>{{cite web |url=http://download.veritasmedicine.com/PDF/CR002392_CSR.pdf |title=SYNOPSIS |publisher=veritasmedicine.com |format=PDF |date=6 सितंबर 2005 |access-date=6 अप्रैल 2010 |archive-url=https://web.archive.org/web/20090309204002/http://download.veritasmedicine.com/PDF/CR002392_CSR.pdf |archive-date=9 मार्च 2009 |url-status=live }}</ref> लाइसेंस नहीं दिया गया है।<ref name="Dolui">{{cite journal | author = Dolui SK, Das M, Hazra A | title = Ofloxacin-induced reversible arthropathy in a child | journal = Journal of Postgraduate Medicine | volume = 53 | issue = 2 | pages = 144–5 | year = 2007 | pmid = 17495385 | doi = 10.4103/0022-3859.32220 | accessdate = 29 जून 2009 }}</ref> हालांकि प्रभावी होने का दावा किया गया है, तथापि लिवोफ़्लॉक्सासिन को गंभीर प्रतिकूल प्रतिक्रिया और घातक परिणामों सहित अन्य गंभीर प्रतिकूल प्रतिक्रियाओं की वजह से, बाल-चिकित्सा वाले बच्चों में पेशीकंकालीय प्रणाली के प्रति प्रथमोपचार एजेंट के रूप में विचार नहीं करना चाहिए.<ref name="aidac62m" /><ref name="Dolui" /><ref>विशेष रोगजनक और प्रतिरक्षा औषध उत्पाद प्रभाग का एक बाल चिकित्सा के लिखित अनुरोध के जवाब में प्रस्तुत अध्ययनों की मैदानिक समीक्षा का सारांश</ref><ref>{{cite journal | author = Chalumeau M, Tonnelier S, D'Athis P | title = Fluoroquinolone safety in pediatric patients: a prospective, multicenter, comparative cohort study in France | journal = Pediatrics | volume = 111 | issue = 6 Pt 1 | pages = e714–9 | year = 2003 | month = June | pmid = 12777590 | url = http://pediatrics.aappublications.org/cgi/content/full/111/6/e714 | accessdate = 29 जून 2009 | doi = 10.1542/peds.111.6.e714 | archive-url = https://web.archive.org/web/20080919110822/http://pediatrics.aappublications.org/cgi/content/full/111/6/e714 | archive-date = 19 सितंबर 2008 | url-status = live }}</ref><ref>{{cite web |url=http://download.veritasmedicine.com/PDF/CR002392_CSR.pdf |title=SYNOPSIS |publisher=veritasmedicine.com |format=PDF |access-date=6 अप्रैल 2010 |archive-url=https://web.archive.org/web/20090309204002/http://download.veritasmedicine.com/PDF/CR002392_CSR.pdf |archive-date=9 मार्च 2009 |url-status=live }}</ref><ref>{{cite web |url=http://download.veritasmedicine.com/PDF/CR002389_CSR.pdf |title=SYNOPSIS |publisher=veritasmedicine.com |format=PDF |access-date=6 अप्रैल 2010 |archive-url=https://web.archive.org/web/20090309203958/http://download.veritasmedicine.com/PDF/CR002389_CSR.pdf |archive-date=9 मार्च 2009 |url-status=live }}</ref><ref>{{cite web |url=http://download.veritasmedicine.com/PDF/CR002389_CSR.pdf |title=SYNOPSIS |publisher=veritasmedicine.com |location=USA |format=PDF |access-date=6 अप्रैल 2010 |archive-url=https://web.archive.org/web/20090309203958/http://download.veritasmedicine.com/PDF/CR002389_CSR.pdf |archive-date=9 मार्च 2009 |url-status=live }}</ref>
एंथ्रेक्स अध्ययन (उर्फ़ सिप्रो 60-दिवसीय अध्ययन) के लिए प्रतिसूक्ष्मजीवी अनावरणपश्च रोगनिरोध के अंतर्गत प्रलेखित प्रतिकूल प्रतिक्रियाओं के जोखिम के कारण CDC ने एंथ्रेक्स (अंशतः) के इलाज के लिए प्रथमोपचार एजेंट के रूप में फ़्लोरोक्विनोलोन (सिप्रोफ़्लॉक्सासिन) के उपयोग के बारे में अपनी सिफ़ारिश को रद्द कर दी.<ref>{{cite journal | author = Shepard CW, Soriano-Gabarro M, Zell ER | title = Antimicrobial postexposure prophylaxis for anthrax: adverse events and adherence | journal = Emerging Infectious Diseases | volume = 8 | issue = 10 | pages = 1124–32 | year = 2002 | month = October | pmid = 12396927 | url = http://www.cdc.gov/ncidod/EID/vol8no10/02-0349.htm | accessdate = 30 जून 2009 | pmc = 2730317 | archive-url = https://web.archive.org/web/20090604182744/http://www.cdc.gov/ncidod/EID/vol8no10/02-0349.htm | archive-date = 4 जून 2009 | url-status = live }}</ref> हालांकि, ब्रिटेन में मूत्राशयी तंतुमयता से ग्रस्त बच्चों में न्यून श्वसन संक्रमण के इलाज के लिए फ़्लोरोक्विनोलोन को लाइसेंस हासिल है।
नोट: दुनिया भर में विभिन्न नियामक एजेंसियों द्वारा लिवोफ़्लॉक्सासिन को अन्य उपयोगों के लिए लाइसेंस दिया, या प्रतिबंधित किया जा सकता है।
== उपलब्धता ==
लिवोफ़्लॉक्सासिन डॉक्टरी नुस्ख़े के ज़रिए गोली के रूप में (मौखिक एकाधिक सांद्रताओं में), इंजेक्शन (एकाधिक सांद्रताएं), घोल (मौखिक 250 mg/10ml) के रूप में उपलब्ध है और साथ ही, आंख और कान की बूंदों के औषध-निर्देशनों में प्रयुक्त होता है।<ref name="ReferenceB" />
== अपथ्य-निर्देशन ==
ऊपर उल्लेखानुसार, लाइसेंस उपयोग के तहत, लिवोफ़्लॉक्सासिन को अब बैक्टीरिया के प्रतिरोध के कारण, कतिपय विशेषज्ञों द्वारा कुछ यौन संचारित रोगों के इलाज के लिए परहेज़ माना जाता है।<ref>{{cite web |title = DOHMH ALERT #8:Fluoroquinolone-resistant gonorrhea, NYC |url = http://www.nycms.org/article_view.php3?view=947&part=1 |publisher = NY County Medical Society |date = 30 अप्रैल 2004 |accessdate = 30 जून 2009 |archive-url = https://web.archive.org/web/20110722022617/http://www.nycms.org/article_view.php3?view=947&part=1 |archive-date = 22 जुलाई 2011 |url-status = dead }}</ref>
संप्रति लिवाक्विन के लिए 2008 पैकेज निविष्टि में एक परहेज़ मिलता है, यथा लिवोफ़्लॉक्सासिन या अन्य क्विनोलोन दवाओं के प्रति ज्ञात अतिसंवेदनशील मरीज़ों के लिए लिवाक्विन का परिहार करना चाहिए.<ref name="ReferenceB" />
दक्षिण-पूर्व एशिया में फ़्लोरोक्विनोलोन के प्रति बढ़ते एंटीबायोटिक प्रतिरोध के कारण, दक्षिण-पूर्व एशिया से लौटने वाले रोगियों में लिवोफ़्लॉक्सासिन के उपयोग का तेजी से परहेज़ किया जा रहा है।<ref>{{cite journal |title=Fluoroquinolone resistance in Neisseria gonorrhoeae—Colorado and Washington, 1995 |journal=MMWR Morb Mortal Wkly Rep. |volume=44 |issue=41 |pages=761–4 |year=1995 |month=October |pmid=7565558 |url=http://www.cdc.gov/mmwr/preview/mmwrhtml/00039305.htm |author1=Centers for Disease Control and Prevention (CDC) |access-date=6 अप्रैल 2010 |archive-url=https://web.archive.org/web/20100310204703/http://www.cdc.gov/mmwr/preview/mmwrhtml/00039305.htm |archive-date=10 मार्च 2010 |url-status=live }}</ref>
[[यकृत रोग]] से पीड़ित मरीज़ों के लिए नुस्ख़ा लिखते समय सावधानी बरतनी चाहिए.<ref>{{cite journal |author=Coban S, Ceydilek B, Ekiz F, Erden E, Soykan I |title=Levofloxacin-induced acute fulminant hepatic failure in a patient with chronic hepatitis B infection |journal=Ann Pharmacother |volume=39 |issue=10 |pages=1737–40 |year=2005 |month=October |pmid=16105873 |doi=10.1345/aph.1G111 |url=https://archive.org/details/sim_annals-of-pharmacotherapy_2005-10_39_10/page/1737}}</ref>
[[मिर्गी]] या अन्य जब्ती विकार के रोगियों में भी लिवोफ़्लॉक्सासिन को परहेज़ माना जाता है।
;गर्भावस्था
अनुसंधान इंगित करता है कि फ़्लोरोक्विनोलोन तेजी से रक्त गर्भनाल और रक्त-दूध बाधा पार कर सकते हैं और बड़े पैमाने पर भ्रूण के ऊतकों में वितरित किए जाते हैं। मानवीय स्तन के दूध में चरम सांद्रता प्लाज़्मा में उपलब्ध स्तरों के समान है। स्तन-पान कराने वाली माताएं, जो लिवोफ़्लॉक्सासिन लेती हैं, अपने बच्चों को गंभीर प्रतिकूल प्रतिक्रिया के प्रति अरक्षित छोड़ सकती हैं और गर्भवती महिलाओं को स्वतःस्फूर्त गर्भपात और जन्म-दोष का जोखिम हो सकता है।<ref>{{cite journal | author = Cahill JB, Bailey EM, Chien S, Johnson GM | title = Levofloxacin secretion in breast milk: a case report | url = https://archive.org/details/sim_pharmacotherapy_2005-01_25_1/page/116 | journal = Pharmacotherapy | volume = 25 | issue = 1 | pages = 116–8 | year = 2005 | month = January | pmid = 15767227 | doi = 10.1592/phco.25.1.116.55616 | accessdate = 30 जून 2009 }}</ref><ref>{{cite journal | author = Nardiello S, Pizzella T, Ariviello R | title = [Risks of antibacterial agents in pregnancy] | language = it | journal = Le Infezioni in Medicina | volume = 10 | issue = 1 | pages = 8–15 | year = 2002 | month = March | pmid = 12700435 | url = http://www.infezmed.it/VisualizzaUnArticolo.aspx?Anno=2002&numero=1&ArticoloDaVisualizzare=Vol_10_1_2002_1 | accessdate = 30 जून 2009 | archive-url = https://web.archive.org/web/20110722035452/http://www.infezmed.it/VisualizzaUnArticolo.aspx?Anno=2002&numero=1&ArticoloDaVisualizzare=Vol_10_1_2002_1 | archive-date = 22 जुलाई 2011 | url-status = dead }}</ref><ref>{{cite journal | author = Loebstein R, Addis A, Ho E | title = Pregnancy outcome following gestational exposure to fluoroquinolones: a multicenter prospective controlled study | url = https://archive.org/details/sim_antimicrobial-agents-and-chemotherapy_1998-06_42_6/page/1336 | journal = Antimicrobial Agents and Chemotherapy | volume = 42 | issue = 6 | pages = 1336–9 | year = 1998 | month = June | pmid = 9624471 | pmc = 105599 | accessdate = 30 जून 2009 }}</ref>
इस कारण गर्भावस्था के दौरान लिवोफ़्लॉक्सासिन का निर्धारण परहेज़ योग्य है। अन्य फ़्लोरोक्विनोलोनों के भी मां के दूध में मौजूद रहने और स्तनपान करने वाले बच्चों को पारित किए जाने की सूचना है।<ref>{{cite journal |author=Shin HC, Kim JC, Chung MK |title=Fetal and maternal tissue distribution of the new fluoroquinolone DW-116 in pregnant rats |journal=Comp. Biochem. Physiol. C Toxicol. Pharmacol. |volume=136 |issue=1 |pages=95–102 |year=2003 |month=September |pmid=14522602 |doi= 10.1016/j.cca.2003.08.004|url=}}</ref><ref>{{cite journal |author=Dan M, Weidekamm E, Sagiv R, Portmann R, Zakut H |title=Penetration of fleroxacin into breast milk and pharmacokinetics in lactating women |journal=Antimicrob. Agents Chemother. |volume=37 |issue=2 |pages=293–6 |year=1993 |month=February |pmid=8452360 |pmc=187655}}</ref>
;बाल-चिकित्सा उपयोग
बाल-चिकित्सा रोगी को गंभीर, प्राणघातक और स्थाई घाव की वजह से, बाल-चिकित्सा समुदाय के उपयोग के लिए मौखिक और I.V. लिवोफ़्लॉक्सासिन को लाइसेंस नहीं दिया गया है, सिवाय ऊपर उल्लेख किए गए मामलों में. एक अध्ययन में यह कहा गया है कि बाल-चिकित्सा रोगी को पेशीकंकालीय प्रतिकूल घटना के अनुभव के 3.8% मौक़े हैं।<ref>{{cite journal |author=Noel GJ, Bradley JS, Kauffman RE |title=Comparative safety profile of levofloxacin in 2523 children with a focus on four specific musculoskeletal disorders |journal=Pediatr. Infect. Dis. J. |volume=26 |issue=10 |pages=879–91 |year=2007 |month=October |pmid=17901792 |doi= 10.1097/INF.0b013e3180cbd382|url=https://archive.org/details/sim_pediatric-infectious-disease-journal_2007-10_26_10/page/879}}</ref>
बच्चों में लिवोफ़्लॉक्सासिन के उपयोग के साथ जुड़े प्रतिकूल प्रभाव में पेशीकंकालीय विकार शामिल हैं, जैसे संधिशूल, गठिया, कंडरारोग और चाल असामान्यता.<ref name="nda5may08" /> अध्ययन ने पाया कि लिवोफ़्लॉक्सासिन<ref name="accessdata.fda.gov">{{cite web |title=Levaquin (Levofloxacin) NDA 20634 |url=http://www.accessdata.fda.gov/drugsatfda_docs/nda/96/020634_levaquin_toc.cfm |author=R.W. Johnson |publisher=FDA |location=USA |date=20 दिसम्बर 1996 |access-date=6 अप्रैल 2010 |archive-url=https://web.archive.org/web/20120404184452/http://www.accessdata.fda.gov/drugsatfda_docs/nda/96/020634_levaquin_toc.cfm |archive-date=4 अप्रैल 2012 |url-status=live }}</ref> के लिए नए औषध अनुप्रयोग (NDA) के अंतर्गत, 40% से अधिक प्रतिकूल औषध प्रतिक्रिया (ADR) देखी गई और साथ ही असंख्य मौत रिपोर्ट किए गए। बहरहाल, लिवोफ़्लॉक्सासिन के उपयोग को शामिल किए हुए हाल ही के दो बाल-चिकित्सा अध्ययन इंगित करते हैं कि बाल-चिकित्सा मरीज़ को एक या अधिक प्रतिकूल प्रतिक्रिया अनुभव करने की 50% से अधिक संभावना है। पहले बाल-चिकित्सा अध्ययन में<ref name="s2009" /> यह कहा गया है कि “सुरक्षा के लिए मूल्यांकित 712 मरीज़ों में, लिवोफ़्लॉक्सासिन का उपचार पाने वाले 275 (52%) मरीज़ों ने एक या अधिक प्रतिकूल घटनाओं को अनुभव किया।... लिवोफ़्लॉक्सासिन का उपचार पाने वाले 33 (6%) मरीज़ों में गंभीर प्रतिकूल घटनाएं रिपोर्ट की गईं.... लिवोफ़्लॉक्सासिन का उपचार पाने वाले मरीज़ों में दो गंभीर प्रतिकूल घटनाएं मौत में परिणत हुईं." दूसरे बाल-चिकित्सा अध्ययन में<ref>{{cite web| url = http://download.veritasmedicine.com/PDF/CR002389_CSR.pdf| title = SYNOPSIS| accessdate = 29 जनवरी 2009| location = USA| archive-url = https://web.archive.org/web/20090309203958/http://download.veritasmedicine.com/PDF/CR002389_CSR.pdf| archive-date = 9 मार्च 2009| url-status = live}}</ref> यह कहा गया कि "सुरक्षा के लिए मूल्यांकित 204 मरीज़ों में से 122 ने एक या अधिक प्रतिकूल घटनाओं को अनुभव किया।... बारह मरीज़ों ने (6%) प्रतिकूल घटना की वजह से अध्ययन औषधि को लेना बंद कर दिया.... सात मरीजों ने (3%) 8 गंभीर प्रतिकूल घटनाओं का अनुभव किया। "(लगभग 2007)
बाल-चिकित्सा समुदाय में मौखिक और I.V. लिवोफ़्लॉक्सासिन और अन्य फ़्लोरोक्विनोलोन के उपयोग पर मौजूदा प्रतिबंध, असंख्य नैदानिक अध्ययनों द्वारा समर्थित है। संक्रामी-रोधी औषध सलाहकार समिति की 62वीं बैठक प्रस्तुत प्रमाणों ने दर्शाया कि बाल-चिकित्सा समुदाय में फ़्लोरोक्विनोलोन अपरिवर्तनीय जोड़ नुक्सान होता है। इस सलाहकार समिति ने निष्कर्ष निकाला कि संभाव्य लाभों की तुलना में स्थायी चोट के जोखिम का पलड़ा भारी है।<ref name="aidac62m" /> 1997 में आयोजित इस बैठक के बाद, खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने कहा कि इन निष्कर्षों के बावजूद, उनका इरादा संयुक्त राज्य अमेरिका में बाल-चिकित्सा उपयोग के लिए फ़्लोरोक्विनोलोन के लाइसेंस को पाने का प्रयास जारी रखना है।
== विशेष सावधानियां ==
लिवोफ़्लॉक्सासिन की खुराक़ ''केवल'' वर्तमान पैकेज निविष्टि में पाई गई चिकित्सा मार्गनिर्देश सारणी के अंतर्गत वर्णित तरीक़े से ही दी जानी होगी. रोगी के गुर्दे और यकृत की क्रियागत स्थिति पर भी ''ज़रूर'' ध्यान रखना होगा, ताकि संचयन से बचा जा सके जोकि घातक रूप से दवा की अधिक मात्रा का कारक बन सकता है। लिवोफ़्लॉक्सासिन मुख्यतः वृक्कीय उत्सर्जन से हटाया जाता है। हालांकि, दवा को उपापचयित और आंशिक रूप से यकृत और आंत के माध्यम से साफ़ किया जाता है। प्रभावित यकृत या गुर्दे वाले मरीज़ों के लिए, पैकेज निविष्टि में उपलब्ध तालिका के अनुसार खुराक में संशोधन की ''सिफारिश '' की जाती है (विशेष रूप से ''गंभीर वृक्क रोग'' वाले मरीजों के लिए). पैकेज निविष्टि में, यह कहा गया है कि "... चूंकि दवा तत्वतः गुर्दों द्वारा उत्सर्जित मानी जाती है, इस दवा की विषाक्त प्रतिक्रियाओं का जोखिम असामान्य यकृत क्रिया वाले रोगियों को अधिक हो सकता है।"<ref name="ReferenceB" /> उपचार की अवधि संक्रमण की ''गंभीरता'' पर निर्भर करती है और यह अवधि 3 दिन से 60 दिनों के बीच हो सकती है।<ref name="ReferenceB" />
नोट: रोगी के सीरम स्तर पर ''उपचार के दौरान निगरानी की रखी जानी चाहिए'', ताकि दवा के अधिक सेवन से बच सकें. उचित ख़ुराक दिशा निर्देश और प्रासंगिक चेतावनी/सावधानियों के लिए सबसे हाल की पैकेज निविष्टि देखें.
== प्रतिकूल प्रभाव ==
{{See also|Adverse effects of fluoroquinolones}}
किसी अन्य एंटीबायोटिक औषधि क़िस्मों की तुलना में फ़्लोरोक्विनोलोन के साथ गंभीर प्रतिकूल घटनाएं आम तौर पर अधिक होती हैं। अधिकांशतः प्रतिकूल प्रतिक्रियाएं मंद से मध्यम के बीच होती हैं, लेकिन कभी-कभी गंभीर प्रतिकूल प्रभाव भी हो सकते हैं।<ref>{{cite journal |pmid=15942881 |year=2005 |month= July|last1=Owens Rc |first1=Jr |last2=Ambrose |first2=PG |title=Antimicrobial safety: focus on fluoroquinolones. |volume=41 Suppl 2 |pages=S144–57 |issn=1058-4838 |doi=10.1086/428055 |journal=Clinical infectious diseases : an official publication of the Infectious Diseases Society of America |author2=Ambrose }}</ref><ref name="pmid11172695">{{cite journal |author=De Sarro A, De Sarro G |title=Adverse reactions to fluoroquinolones. an overview on mechanistic aspects |journal=Curr. Med. Chem. |volume=8 |issue=4 |pages=371–84 |year=2001 |month=March |pmid=11172695 |doi= |url=http://www.fqresearch.org/pdf_files/cmc.pdf |format=PDF |access-date=6 अप्रैल 2010 |archive-url=https://web.archive.org/web/20110723015021/http://www.fqresearch.org/pdf_files/cmc.pdf |archive-date=23 जुलाई 2011 |url-status=live }}</ref> ऐसी प्रतिकूल प्रतिक्रियाओं की वजह से, असंख्य नियामक कार्रवाइयां की गई हैं, जिनमें शामिल हैं चेतावनियों का प्रकाशन<ref>{{Cite web |url=http://www.fqresearch.org/text_documents/FDA_Medical_Bulletin_1996.doc |title=संग्रहीत प्रति |access-date=6 अप्रैल 2010 |archive-url=https://web.archive.org/web/20110723015531/http://www.fqresearch.org/text_documents/FDA_Medical_Bulletin_1996.doc |archive-date=23 जुलाई 2011 |url-status=dead }}</ref><ref>{{cite web |author=U S Food and Drug Administration |authorlink=US Food and Drug Administration |title=FDA Requests Boxed Warnings on Fluoroquinolone Antimicrobial Drugs |url=http://www.fda.gov/NewsEvents/Newsroom/PressAnnouncements/2008/ucm116919.htm |publisher=FDA |location=USA |format=PDF |date=8 जुलाई 2008 |accessdate=5 सितंबर 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20161022204401/http://www.fda.gov/NewsEvents/Newsroom/PressAnnouncements/2008/ucm116919.htm |archive-date=22 अक्तूबर 2016 |url-status=live }}</ref><ref>{{cite web |author=US Food and Drug Administration |authorlink=US Food and Drug Administration |title=Fluoroquinolone Antimicrobial Drugs [ciprofloxacin (marketed as Cipro and generic ciprofloxacin), ciprofloxacin extended release (marketed as Cipro XR and Proquin XR), gemifloxacin (marketed as Factive), levofloxacin (marketed as Levaquin), moxifloxacin (marketed as Avelox), norfloxacin (marketed as Noroxin), and ofloxacin (marketed as Floxin and generic ofloxacin)] |url=http://www.fda.gov/Drugs/DrugSafety/PostmarketDrugSafetyInformationforPatientsandProviders/DrugSafetyInformationforHeathcareProfessionals/ucm084316.htm |publisher= |location=USA |year=2008 |accessdate=5 सितंबर 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20091016230518/http://www.fda.gov/Drugs/DrugSafety/PostmarketDrugSafetyInformationforPatientsandProviders/DrugSafetyInformationforHeathcareProfessionals/ucm084316.htm |archive-date=16 अक्तूबर 2009 |url-status=live }}</ref> पैकेज निविष्टियों में अतिरिक्त चेतावनियों और सुरक्षा सूचनाओं का समायोजन, जिनमें ब्लैक बॉक्स चेतावनियां<ref name="dafda">{{cite web |author=US Food and Drug Administration |authorlink=US Food and Drug Administration |title=Drugs at FDA: FDA Approved Drug Products |url=http://www.accessdata.fda.gov/scripts/cder/drugsatfda/index.cfm?fuseaction=Search.Label_ApprovalHistory#apphist |publisher=FDA |location=USA |accessdate=5 सितंबर 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20160506041852/http://www.accessdata.fda.gov/scripts/cder/drugsatfda/index.cfm?fuseaction=Search.Label_ApprovalHistory#apphist |archive-date=6 मई 2016 |url-status=live }}</ref> भी सम्मिलित हैं, जिनके साथ हैं ब्लैक बॉक्स चेतावनियों को हाल ही में जोड़ने से संबंधित "प्रिय डॉक्टर पत्र"<ref name="Rosenthal">{{cite web |last=Rosenthal |first=Norman |title=Important Change in the LEVAQUIN (Ievofloxacin) Complete Prescribing Information -Addition of Boxed Warning and Medication Guide Regarding Tendinitis and Tendon Rupture |date=नवम्बर 2008 |publisher=Ortho-McNeil Janssen Scientific Affairs, LLC |url=http://www.fqresearch.org/pdf_files/Levaquin_11_2008_ortho_mcneil_dear_dr_letter.pdf |accessdate=27 दिसंबर 2008 |archive-url=https://web.archive.org/web/20090309203955/http://www.fqresearch.org/pdf_files/Levaquin_11_2008_ortho_mcneil_dear_dr_letter.pdf |archive-date=9 मार्च 2009 |url-status=live }}</ref>.
2004 में FDA ने अनुरोध किया कि [[परिधीय न्यूरोपथी]] (अपरिवर्तनीय तंत्रिका क्षति),<ref name="fda14sep04" /><ref name="nda14jul2004">{{cite web |url=http://www.accessdata.fda.gov/drugsatfda_docs/appletter/2004/19537s053,054,20780s017,018ltr.pdf |title=NDA 19-537/S-053, S-054, NDA 20-780/S-017, S-018 |author=Renata Albrecht |publisher=FDA |location=USA |format=PDF |date=14 जुलाई 2004 |accessdate=5 सितंबर 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20121016174615/http://www.accessdata.fda.gov/drugsatfda_docs/appletter/2004/19537s053,054,20780s017,018ltr.pdf |archive-date=16 अक्तूबर 2012 |url-status=live }}</ref> [[कण्डरा]] क्षति,<ref name="nda18dec2001">{{cite web |url=http://www.accessdata.fda.gov/drugsatfda_docs/appletter/2001/20634s15s21s22ltr.pdf |title=NDA 20-634/S-015, S-021, S-022, NDA 20-635/S-012, S-019, S-020 |author=Renata Albrecht |publisher=FDA |location=USA |format=PDF |date=18 दिसम्बर 2001 |access-date=6 अप्रैल 2010 |archive-url=https://web.archive.org/web/20120404184500/http://www.accessdata.fda.gov/drugsatfda_docs/appletter/2001/20634s15s21s22ltr.pdf |archive-date=4 अप्रैल 2012 |url-status=live }}</ref><ref>{{cite web |url=http://www.accessdata.fda.gov/drugsatfda_docs/appletter/2004/20635s037,20634s036ltr.pdf |title=NDA 20-634/S-036, NDA 20-635/S-037 |author=Renata Albrecht |publisher=FDA |location=USA |format=PDF |date=4 नवम्बर 2004 |access-date=6 अप्रैल 2010 |archive-url=https://web.archive.org/web/20120404184605/http://www.accessdata.fda.gov/drugsatfda_docs/appletter/2004/20635s037,20634s036ltr.pdf |archive-date=4 अप्रैल 2012 |url-status=live }}</ref> हृदय रोग (लंबा QT अंतराल/[[Torsades de pointes]]),<ref name="ReferenceA" /><ref name="fda14sep04" /> कृत्रिम झिल्लीमय वृहदांत्रशोथ,<ref>{{Cite web |url=http://www.fqresearch.org/pub_med_levaquin/clostridum_difficicile_pub_med_levaquin.doc |title=संग्रहीत प्रति |access-date=6 अप्रैल 2010 |archive-url=https://web.archive.org/web/20110723020126/http://www.fqresearch.org/pub_med_levaquin/clostridum_difficicile_pub_med_levaquin.doc |archive-date=23 जुलाई 2011 |url-status=dead }}</ref> [[रेखीपेशीलयन]] (पेशी क्षयकारी),<ref name="ReferenceC">{{Cite journal | last1 = Petitjeans | first1 = F. | last2 = Nadaud | first2 = J. | last3 = Perez | first3 = JP. | last4 = Debien | first4 = B. | last5 = Olive | first5 = F. | last6 = Villevieille | first6 = T. | last7 = Pats | first7 = B. | title = A case of rhabdomyolysis with fatal outcome after a treatment with levofloxacin. | url = https://archive.org/details/sim_european-journal-of-clinical-pharmacology_2003-12_59_10/page/779 | journal = Eur J Clin Pharmacol | volume = 59 | issue = 10 | pages = 779–80 | month= December| year = 2003 | doi = 10.1007/s00228-003-0688-x | pmid = 14576967 }}</ref><ref>{{Cite journal | last1 = Hsiao | first1 = SH. | last2 = Chang | first2 = CM. | last3 = Tsao | first3 = CJ. | last4 = Lee | first4 = YY. | last5 = Hsu | first5 = MY. | last6 = Wu | first6 = TJ. | title = Acute rhabdomyolysis associated with ofloxacin/levofloxacin therapy. | url = https://archive.org/details/sim_annals-of-pharmacotherapy_2005-01_39_1/page/146 | journal = Ann Pharmacother | volume = 39 | issue = 1 | pages = 146–9 | month= January| year = 2005 | doi = 10.1345/aph.1E285 | pmid = 15562138 }}</ref><ref>{{Cite journal | last1 = Korzets | first1 = A. | last2 = Gafter | first2 = U. | last3 = Dicker | first3 = D. | last4 = Herman | first4 = M. | last5 = Ori | first5 = Y. | title = Levofloxacin and rhabdomyolysis in a renal transplant patient. | journal = Nephrol Dial Transplant | volume = 21 | issue = 11 | pages = 3304–5 | month= November| year = 2006 | doi = 10.1093/ndt/gfl396 | pmid = 16968728 }}</ref> स्टीवन जॉनसन सिंड्रोम,<ref>{{cite web |url=http://www.accessdata.fda.gov/drugsatfda_docs/appletter/2007/020634s042,020635s045,021721s010ltr.pdf |title=NDA 20-634/S-042, NDA 20-635/S-045, NDA 21-721/S-010 |author=Renata Albrecht |coauthors= |publisher=FDA |location=USA |format=PDF |date=31 मई 2007 |access-date=6 अप्रैल 2010 |archive-url=https://web.archive.org/web/20120404184617/http://www.accessdata.fda.gov/drugsatfda_docs/appletter/2007/020634s042,020635s045,021721s010ltr.pdf |archive-date=4 अप्रैल 2012 |url-status=live }}</ref> और इन प्रतिक्रियाओँ की गंभीरता में योगदान देने वाले [[NSAID]] के समवर्ती उपयोग के लिए,<ref name="fda14sep04">{{cite web |url=http://www.accessdata.fda.gov/drugsatfda_docs/appletter/2004/20634s033,034,20635s033,034ltr.pdf |title=NDA 20-634/S-033, S-034, NDA 20-635/S-033, S-034 |author=Renata Albrecht |publisher=FDA |location=USA |format=PDF |date=14 सितंबर 2004 |access-date=6 अप्रैल 2010 |archive-url=https://web.archive.org/web/20120404184559/http://www.accessdata.fda.gov/drugsatfda_docs/appletter/2004/20634s033,034,20635s033,034ltr.pdf |archive-date=4 अप्रैल 2012 |url-status=live }}</ref> लिवोफ़्लॉक्सिन सहित सभी फ़्लोरोक्विनोलोन के लिए नई चेतावनी लेबल जोड़ें.
इसके बाद, 25 जून 2007 को, FDA ने निर्माता से अपेक्षा की कि वे पैकेज निविष्टियों में अतिरिक्त चेतावनी जोड़ें, जिसमें उल्लेख हो कि "लिवोफ़्लॉक्सासिन सहित क्विनोलोन का उपचार प्राप्त करने वाले मरीज़ों में, कुछ मामलों में [[अतिसंवेदनशीलता]], तथा कुछ में अनिश्चित निदानशास्त्र के कारण, कतिपय गंभीर और कभी-कभी घातक घटनाओं की रिपोर्ट मिली है।<ref>{{cite web |url=http://www.accessdata.fda.gov/drugsatfda_docs/appletter/2006/019537s62,020780s23,019847s37,019857s42,021473s16LTR.pdf |title=NDA 19-537/S-062, NDA 20-780/S-023, NDA 19-847/S-037, NDA 19-857/S-042, NDA 21-473/S-016 |author=Renata Albrecht |publisher=FDA |location=USA |format=PDF |date=19 जून 2006 |accessdate=5 सितंबर 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20120404184401/http://www.accessdata.fda.gov/drugsatfda_docs/appletter/2006/019537s62,020780s23,019847s37,019857s42,021473s16LTR.pdf |archive-date=4 अप्रैल 2012 |url-status=live }}</ref><ref name="ndafdamar2004">{{cite web |url=http://www.accessdata.fda.gov/drugsatfda_docs/appletter/2004/20634slr029,20635slr029ltr.pdf |title=NDA 20-634/S-029, NDA 20-635/S-029 |author=Renata Albrecht |publisher=FDA |location=USA |format=PDF |date=5 मार्च 2004 |access-date=6 अप्रैल 2010 |archive-url=https://web.archive.org/web/20120404184539/http://www.accessdata.fda.gov/drugsatfda_docs/appletter/2004/20634slr029,20635slr029ltr.pdf |archive-date=4 अप्रैल 2012 |url-status=live }}</ref>
लिवोफ़्लॉक्सासिन चिकित्सा के परिणामस्वरूप जो गंभीर प्रतिकूल प्रभाव हो सकते हैं उनमें शामिल हैं अपरिवर्तनीय परिधीय न्यूरोपथी,<ref name="nda14jul2004" /><ref>{{cite journal | author =Cohen JS | year =2001 | month =December | title =Peripheral Neuropathy Associated with Fluoroquinolones | journal =Ann Pharmacother | volume =35 | issue =12 | pages =1540–7 | pmid =11793615 | url =http://fqvictims.org/fqvictims/News/neuropathy/Neuropathy.pdf | format =PDF | doi =10.1345/aph.1Z429 | access-date =6 अप्रैल 2010 | archive-url =https://web.archive.org/web/20181001062601/http://fqvictims.org/fqvictims/News/neuropathy/Neuropathy.pdf | archive-date =1 अक्तूबर 2018 | url-status =live }}</ref> सहज कंडरा विदर और कंडरा शोथ,<ref name="nda19jun2007">{{cite web |url=http://www.accessdata.fda.gov/drugsatfda_docs/appletter/2007/020634s045,%20020635s048,%20021721s013ltr.pdf |title=NDA 20-634/S-045, NDA 20-635/S-048, NDA 21-721/S-013 |author=Renata Albrecht |publisher=FDA |location=USA |language= |format=PDF |date=19 जून 2007 |access-date=6 अप्रैल 2010 |archive-url=https://web.archive.org/web/20120404184624/http://www.accessdata.fda.gov/drugsatfda_docs/appletter/2007/020634s045,%20020635s048,%20021721s013ltr.pdf |archive-date=4 अप्रैल 2012 |url-status=live }}</ref><ref name="nda16ap2008">{{cite web |url=http://www.accessdata.fda.gov/drugsatfda_docs/appletter/2008/020634s051,%20020635s055,%20021721s019ltr.pdf |title=NDA 20-634/S-051, NDA 20-635/S-055, NDA 21-721/S-019 |author=Renata Albrecht |publisher=FDA |location=USA |format=PDF |date=16 अप्रैल 2008 |access-date=6 अप्रैल 2010 |archive-url=https://web.archive.org/web/20120404184644/http://www.accessdata.fda.gov/drugsatfda_docs/appletter/2008/020634s051,%20020635s055,%20021721s019ltr.pdf |archive-date=4 अप्रैल 2012 |url-status=live }}</ref><ref>{{cite web |url=http://www.accessdata.fda.gov/drugsatfda_docs/appletter/2004/19537slr048,050,051,20780slr012,014,015ltr.pdf |title=NDA 19-537/S-048, S-050, S-051 NDA 20-780/S-012, S-014, S-015 |author=Renata Albrecht |publisher=FDA |location=USA |format=PDF |date=15 मार्च 2004 |accessdate=सितंबर 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20121016174624/http://www.accessdata.fda.gov/drugsatfda_docs/appletter/2004/19537slr048,050,051,20780slr012,014,015ltr.pdf |archive-date=16 अक्तूबर 2012 |url-status=live }}</ref><ref>{{cite web |url=http://www.accessdata.fda.gov/drugsatfda_docs/appletter/2008/020634s052,%20020635s057,021721s020ltr%20.pdf |title=NDA 20-634/S-052, NDA 20-635/S-057, NDA 21-721/S-020 |author=Renata Albrecht |date=3 अक्टूबर 2008 |publisher=FDA |location=USA |format=PDF |access-date=6 अप्रैल 2010 |archive-url=https://web.archive.org/web/20120404184710/http://www.accessdata.fda.gov/drugsatfda_docs/appletter/2008/020634s052,%20020635s057,021721s020ltr%20.pdf |archive-date=4 अप्रैल 2012 |url-status=live }}</ref><ref>{{cite web |url=http://www.accessdata.fda.gov/drugsatfda_docs/appletter/2008/019537s068,019847s042ltr.pdf |title=NDA 19-537/S-068, NDA 19-847/S-042, NDA 19-857/S-049, NDA 20-780/S-026, NDA 21-473/S-024 |author=Renata Albrecht |publisher=FDA |location=USA |format=PDF |date=3 अक्टूबर 2008 |accessdate=5 सितंबर 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20120404184308/http://www.accessdata.fda.gov/drugsatfda_docs/appletter/2008/019537s068,019847s042ltr.pdf |archive-date=4 अप्रैल 2012 |url-status=live }}</ref> QTc प्रवर्द्धन/torsades de pointes,<ref name="nda19jun2007" /> विषाक्त बाह्यत्वचा संबंधी ऊतिलयन (TEN)<ref name="nda19jun2007" /> और स्टीवेन्स-जॉनसन सिंड्रोम, [[बहुरूपी पर्विल]],<ref name="nda13dec2004" /> जब्ती सहित गंभीर केंद्रीय तंत्रिका प्रणाली विकार (CNS),<ref>{{Cite journal | last1 = Kushner | first1 = JM. | last2 = Peckman | first2 = HJ. | last3 = Snyder | first3 = CR. | title = Seizures associated with fluoroquinolones. | url = https://archive.org/details/sim_annals-of-pharmacotherapy_2001-10_35_10/page/1194 | journal = Ann Pharmacother | volume = 35 | issue = 10 | pages = 1194–8 | month= October| year = 2001 | doi = 10.1345/aph.10359| pmid = 11675843 }}</ref><ref>{{Cite web |url=http://www.fqresearch.org/pub_med_levaquin/seizures_pub_med_levaquin.doc |title=संग्रहीत प्रति |access-date=6 अप्रैल 2010 |archive-url=https://web.archive.org/web/20110723015910/http://www.fqresearch.org/pub_med_levaquin/seizures_pub_med_levaquin.doc |archive-date=23 जुलाई 2011 |url-status=dead }}</ref> तथा क्लॉस्ट्राइडियम डिफ़ीसाइल से जुड़े रोग (CDAD: कृत्रिम झिल्लीमय बृहदांत्रशोथ)<ref>{{Cite journal | last1 = Ozawa | first1 = TT. | last2 = Valadez | first2 = T. | title = Clostridium difficile infection associated with levofloxacin treatment. | journal = Tenn Med | volume = 95 | issue = 3 | pages = 113–5 | month= March| year = 2002 | pmid = 11898264 }}</ref><ref>{{Cite journal | last1 = Gopal Rao | first1 = G. | last2 = Mahankali Rao | first2 = CS. | last3 = Starke | first3 = I. | title = Clostridium difficile-associated diarrhoea in patients with community-acquired lower respiratory infection being treated with levofloxacin compared with beta-lactam-based therapy. | journal = J Antimicrob Chemother | volume = 51 | issue = 3 | pages = 697–701 | month= March| year = 2003 | doi = 10.1093/jac/dkg115| pmid = 12615873 }}</ref><ref>{{cite journal |author=Muto CA, Pokrywka M, Shutt K |title=A large outbreak of Clostridium difficile-associated disease with an unexpected proportion of deaths and colectomies at a teaching hospital following increased fluoroquinolone use |journal=Infect Control Hosp Epidemiol |volume=26 |issue=3 |pages=273–80 |year=2005 |month=March |pmid=15796280 |doi=10.1086/502539 |url=http://www.journals.uchicago.edu/doi/pdf/10.1086/502539 }}{{Dead link|date=जनवरी 2022 |bot=InternetArchiveBot }}</ref><ref>{{Cite journal | last1 = Deshpande | first1 = A. | last2 = Pant | first2 = C. | last3 = Jain | first3 = A. | last4 = Fraser | first4 = TG. | last5 = Rolston | first5 = DD. | title = Do fluoroquinolones predispose patients to Clostridium difficile associated disease? A review of the evidence. | journal = Curr Med Res Opin | volume = 24 | issue = 2 | pages = 329–33 | month= February| year = 2008 | doi = 10.1185/030079908X253735 | pmid = 18067688 }}</ref> प्रकाशसुग्राहिता/ प्रकाशविषाक्तता प्रतिक्रियाएं,<ref name="nda13dec2004">{{cite web |url=http://www.accessdata.fda.gov/drugsatfda_docs/appletter/2007/020634s050,%20020635s054,%20021721s018ltr.pdf |title=NDA 20-634/S-050, NDA 20-635/S-054, NDA 21-721/S-018 |author=Renata Albrecht |publisher=FDA |location=USA |format=PDF |date=13 दिसम्बर 2007 |access-date=6 अप्रैल 2010 |archive-url=https://web.archive.org/web/20120404184628/http://www.accessdata.fda.gov/drugsatfda_docs/appletter/2007/020634s050,%20020635s054,%20021721s018ltr.pdf |archive-date=4 अप्रैल 2012 |url-status=live }}</ref><ref>{{Cite journal | last1 = Cho | first1 = S. | last2 = Breedlove | first2 = JJ. | last3 = Gunning | first3 = ST. | title = Radiation recall reaction induced by levofloxacin. | journal = J Drugs Dermatol | volume = 7 | issue = 1 | pages = 64–7 | month= January| year = 2008 | pmid = 18246700 }}</ref> घातक अल्पग्लूकोज़रक्तता,<ref>{{Cite web |url=http://www.fqresearch.org/pub_med_levaquin/hypoglycemia_pib_med_levaquin.doc |title=संग्रहीत प्रति |access-date=6 अप्रैल 2010 |archive-url=https://web.archive.org/web/20110723015848/http://www.fqresearch.org/pub_med_levaquin/hypoglycemia_pib_med_levaquin.doc |archive-date=23 जुलाई 2011 |url-status=dead }}</ref> गुर्दा क्षति,<ref>{{Cite web |url=http://www.fqresearch.org/pub_med_levaquin/kidney_damage_pub_med_levaquin.doc |title=संग्रहीत प्रति |access-date=6 अप्रैल 2010 |archive-url=https://web.archive.org/web/20110723015855/http://www.fqresearch.org/pub_med_levaquin/kidney_damage_pub_med_levaquin.doc |archive-date=23 जुलाई 2011 |url-status=dead }}</ref>
रेखीपेशीलयन (पेशी क्षयकारी)<ref name="ReferenceC" /><ref>{{Cite journal | last1 = Hsiao | first1 = SH. | last2 = Chang | first2 = CM. | last3 = Tsao | first3 = CJ. | last4 = Lee | first4 = YY. | last5 = Hsu | first5 = MY. | last6 = Wu | first6 = TJ. | title = Acute rhabdomyolysis associated with ofloxacin/levofloxacin therapy. | url = https://archive.org/details/sim_annals-of-pharmacotherapy_2005-01_39_1/page/146 | journal = Ann Pharmacother | volume = 39 | issue = 1 | pages = 146–9 | month= January| year = 2005 | doi = 10.1345/aph.1E285 | pmid = 15562138 }}</ref><ref>{{Cite journal | last1 = Korzets | first1 = A. | last2 = Gafter | first2 = U. | last3 = Dicker | first3 = D. | last4 = Herman | first4 = M. | last5 = Ori | first5 = Y. | title = Levofloxacin and rhabdomyolysis in a renal transplant patient. | journal = Nephrol Dial Transplant | volume = 21 | issue = 11 | pages = 3304–5 | month= November| year = 2006 | doi = 10.1093/ndt/gfl396 | pmid = 16968728 }}</ref> और तीवग्राहिताभ प्रतिक्रियाएं<ref>{{Cite journal | last1 = Smythe | first1 = MA. | last2 = Cappelletty | first2 = DM. | title = Anaphylactoid reaction to levofloxacin. | url = https://archive.org/details/sim_pharmacotherapy_2000-12_20_12/page/1520 | journal = Pharmacotherapy | volume = 20 | issue = 12 | pages = 1520–3 | month= December| year = 2000 | doi = 10.1592/phco.20.19.1520.34868| pmid = 11130225 }}</ref><ref>{{Cite journal | last1 = Takahama | first1 = H. | last2 = Tsutsumi | first2 = Y. | last3 = Kubota | first3 = Y. | title = Anaphylaxis due to levofloxacin. | url = https://archive.org/details/sim_international-journal-of-dermatology_2005-09_44_9/page/789 | journal = Int J Dermatol | volume = 44 | issue = 9 | pages = 789–90 | month= September| year = 2005 | doi = 10.1111/j.1365-4632.2004.02325.x | pmid = 16135155 }}</ref> और पेशीदुर्बलता संकट.<ref>{{Cite journal | last1 = Gunduz | first1 = A. | last2 = Turedi | first2 = S. | last3 = Kalkan | first3 = A. | last4 = Nuhoglu | first4 = I. | title = Levofloxacin induced myasthenia crisis. | journal = Emerg Med J | volume = 23 | issue = 8 | pages = 662 | month= August| year = 2006 | doi = 10.1136/emj.2006.038091 | pmid = 16858118 |url=http://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC2564188/?tool=pubmed | pmc = 2564188 }}</ref>
अतिरिक्त गंभीर प्रतिकूल प्रतिक्रियाओं में शामिल हैं तीव्र अग्नाशयशोथ,<ref>{{Cite journal | last1 = Mennecier | first1 = D. | last2 = Thiolet | first2 = C. | last3 = Bredin | first3 = C. | last4 = Potier | first4 = V. | last5 = Vergeau | first5 = B. | last6 = Farret | first6 = O. | title = [Acute pancreatitis after treatment by levofloxacin and methylprednisolone] | journal = Gastroenterol Clin Biol | volume = 25 | issue = 10 | pages = 921–2 | month= October| year = 2001 | pmid = 11852403 }}</ref><ref>{{Cite journal | last1 = Domínguez Jiménez | first1 = JL. | last2 = Bernal Blanco | first2 = E. | last3 = Marín Moreno | first3 = MA. | last4 = Puente Gutiérrez | first4 = JJ. | title = [Acute pancreatitis associated with levofloxacin] | journal = Gastroenterol Hepatol | volume = 32 | issue = 4 | pages = 323–4 | month = April | year = 2009 | doi = 10.1016/j.gastrohep.2008.09.027 | pmid = 19371975 | url = http://www.elsevier.es/revistas/ctl_servlet?_f=7064&ip=94.7.35.23&articuloid=13136637&revistaid=14 | language = es }}{{Dead link|date=जून 2021 |bot=InternetArchiveBot }}</ref> स्थाई और अस्थाई दृष्टि लोप, अपरिवर्तनीय दोहरी दृष्टि,<ref name="Fraunfelder, FW 2009">{{Cite journal | last1 = Fraunfelder | first1 = FW. | last2 = Fraunfelder | first2 = FT. | title = Diplopia and fluoroquinolones. | url = https://archive.org/details/sim_ophthalmology_2009-09_116_9/page/1814 | journal = Ophthalmology | volume = 116 | issue = 9 | pages = 1814–7 | month= September| year = 2009 | doi = 10.1016/j.ophtha.2009.06.027 | pmid = 19643481 }}</ref>
ख़राब रंग दृष्टि, स्फोटक ज्वर, पेट दर्द, व्यग्रता, दवा बुखार,<ref>{{Cite journal | last1 = Grépinet | first1 = C. | last2 = Guillocheau | first2 = E. | last3 = Berteloot | first3 = A. | last4 = Vachée | first4 = A. | last5 = Herbin | first5 = O. | last6 = Gautier | first6 = S. | title = [Drug-induced fever during treatment with levofloxacin: a case-report] | journal = Therapie | volume = 63 | issue = 4 | pages = 341–3 | year = 2008 | pmid = 19043827 | author7 = l'association des centres régionaux de pharmacovigilance }}</ref> अपसंवेदन और इसिनोफ़ीलिया। लिवोफ़्लॉक्सासिन की गंभीर प्रतिकूल प्रतिक्रिया के रूप में कृत्रिमट्यूमर प्रमस्तिष्क, जो सामान्यतः अज्ञातहेतुक अंतःकपालीय उच्च रक्तचाप (IIH) के रूप में जाना जाता है, (वर्धित अंतःकपालीय दबाव के रूप में भी विख्यात),<ref>{{Cite journal | last1 = Lardizabal | first1 = DV. | title = Intracranial hypertension and levofloxacin: a case report. | url = https://archive.org/details/sim_headache_2009-02_49_2/page/300 | journal = Headache | volume = 49 | issue = 2 | pages = 300–1 | month= February| year = 2009 | doi = 10.1111/j.1526-4610.2008.01212.x | pmid = 18647180 }}</ref> रिपोर्ट किया गया है। एक अन्य गंभीर प्रतिकूल प्रभाव है [[स्वरोगक्षम रक्तलायी अरक्तता]].<ref>{{cite journal |author=Oh YR, Carr-Lopez SM, Probasco JM, Crawley PG |title=Levofloxacin-induced autoimmune hemolytic anemia |journal=Ann Pharmacother |volume=37 |issue=7-8 |pages=1010–3 |year=2003 |pmid=12841809 |doi= 10.1345/aph.1C525|url=}}</ref>
पुराने रोगियों में, विशेष रूप से सहवर्ती कॉर्टिकोस्टेरॉयड के उपयोग के साथ, कंडरा संबंधी (फटन सहित) काफ़ी जोखिम रहता है और ऐसे रोगी QT अंतराल प्रवर्धन के प्रति अधिक रोगप्रवण होते हैं।<ref name="ReferenceB" /> ज्ञात प्रवर्द्धन सहित, अल्पपोटाशियमरक्तता वाले या QT अंतराल को प्रवर्द्धित करने वाली अन्य दवाओं के साथ उपचार किए जाने वाले मरीज़ों को लिवाक्विन के प्रयोग से बचना चाहिए. एकाधिक खुराकों के बाद रक्त संबंधी प्रतिक्रियाएं (कणीश्वेतकोशिकाहीनता, बिम्बाणु-अल्पता सहित) और गुर्दे की विषाक्तता हो सकती है।<ref name="ReferenceB" /><ref name="nda16ap2008" />
बच्चे और बुजुर्गों द्वारा ऐसी प्रतिकूल प्रतिक्रियाएं अनुभव करने का ज़्यादा ख़तरा है।<ref>{{Cite journal | last1 = Iannini | first1 = PB. | title = The safety profile of moxifloxacin and other fluoroquinolones in special patient populations. | journal = Curr Med Res Opin | volume = 23 | issue = 6 | pages = 1403–13 | month= June| year = 2007 | doi = 10.1185/030079907X188099 | pmid = 17559736 }}</ref><ref>{{Cite journal | last1 = Owens | first1 = RC. | last2 = Ambrose | first2 = PG. | title = Antimicrobial safety: focus on fluoroquinolones. | journal = Clin Infect Dis | volume = 41 Suppl 2 | pages = S144–57 | month= July| year = 2005 | doi = 10.1086/428055 | pmid = 15942881 }}</ref> इस तरह की प्रतिक्रियाएं फ़्लोरोक्विनोलोन उपचार के दौरान और साथ ही, उपचार रोक दिए जाने के बाद भी प्रकट हो सकती हैं।<ref>{{Cite journal | last1 = Saint | first1 = F. | last2 = Gueguen | first2 = G. | last3 = Biserte | first3 = J. | last4 = Fontaine | first4 = C. | last5 = Mazeman | first5 = E. | title = [Rupture of the patellar ligament one month after treatment with fluoroquinolone] | journal = Rev Chir Orthop Reparatrice Appar Mot | volume = 86 | issue = 5 | pages = 495–7 | month= September| year = 2000 | pmid = 10970974 }}</ref>
फ़्लोरोक्विनोलोन नेत्र चिकित्सा के साथ गंभीर दृश्य जटिलताएं भी रिपोर्ट की गई हैं, जो लिवोफ़्लॉक्सासिन आई ड्रॉप्स के साथ भी हो सकती है, विशेष रूप से नेत्रपटल वेध, साथ ही, आशयनिष्कासन और समूलनिष्कासन. नेत्रपटल वेध की घटनाओं में यह वृद्धि, पंजरीय कोलेजन में फ़्लोरोक्विनोलोन द्वारा प्रवर्तित परिवर्तनों के कारण हो सकती है, जिससे विवर्तनिक शक्ति में कमी हो जाती है।<ref>{{Cite journal | last1 = Gangopadhyay | first1 = N. | last2 = Daniell | first2 = M. | last3 = Weih | first3 = L. | last4 = Taylor | first4 = HR. | title = Fluoroquinolone and fortified antibiotics for treating bacterial corneal ulcers. | journal = Br J Ophthalmol | volume = 84 | issue = 4 | pages = 378–84 | month = April | year = 2000 | doi = 10.1136/bjo.84.4.378 | pmid = 10729294 | url = http://www.pubmedcentral.nih.gov/picrender.fcgi?artid=1723447&blobtype=pdf | format = PDF | pmc = 1723447 }}{{Dead link|date=नवंबर 2024 |bot=InternetArchiveBot }}</ref><ref>{{Cite journal | last1 = Walter | first1 = K. | last2 = Tyler | first2 = ME. | title = Severe corneal toxicity after topical fluoroquinolone therapy: report of two cases. | journal = Cornea | volume = 25 | issue = 7 | pages = 855–7 | month= August| year = 2006 | doi = 10.1097/01.ico.0000224642.43601.14 | pmid = 17068466 }}</ref> पहले देखे गए अनुसार स्थाई दोहरी दृष्टि (द्विगुणदृष्टि) भी रिपोर्ट की गई है।<ref name="Fraunfelder, FW 2009" />
कुछ समूह इन प्रतिकूल घटनाओं को "फ़्लोरोक्विनोलोन विषाक्तता" के रूप में संदर्भित करते हैं। लोगों के इन समूहों का दावा है कि फ़्लोरोक्विनोलोन के उपयोग से उन्हें अपने स्वास्थ्य के प्रति गंभीर दीर्घकालिक नुकसान उठाना पड़ा. इसके कारण फ़्लोरोक्विनोलोन के प्रयोग से हानि उठाने वाले लोगों द्वारा वर्ग कार्रवाई मुकदमा दायर किया गया और उपभोक्ता पैरवी समूह पब्लिक सिटीज़न द्वारा भी क़ानूनी कार्रवाई की गई।<ref>{{cite web |title=Public Citizen Warns of Cipro Dangers |url=http://www.consumeraffairs.com/news04/2006/08/pubcit_cipro.html |publisher=Consumer affairs |location=USA |date=30 अगस्त 2006 |accessdate=7 सितंबर 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20100402112958/http://www.consumeraffairs.com/news04/2006/08/pubcit_cipro.html |archive-date=2 अप्रैल 2010 |url-status=live }}</ref> आंशिक रूप से इलिनॉइस राज्य और पब्लिक सिटीज़न के प्रयासों के परिणामस्वरूप FDA ने उपभोक्ताओं को फ़्लोरोक्विनोलोन का कंडराओं पर संभाव्य विषाक्त प्रभाव के बारे में सूचित करते हुए सभी फ़्लोरोक्विनोलोन पर ब्लैक बॉक्स चेतावनियों को जारी करने का आदेश दिया.<ref>{{cite web |url=http://www.cnn.com/2008/HEALTH/07/08/antibiotics.risk/index.html |title=FDA orders 'black box' label on some antibiotics |accessdate=8 जुलाई 2008 |archive-url=https://web.archive.org/web/20171107221712/http://www.cnn.com/2008/HEALTH/07/08/antibiotics.risk/index.html |archive-date=7 नवंबर 2017 |url-status=live }}</ref>
== ओवरडोज़ ==
तीव्र अतिमात्रा की स्थिति में, पेट को ख़ाली करना चाहिए. मरीज़ पर निगरानी रखनी चाहिए और उपयुक्त जलयोजन का अनुरक्षण करना चाहिए. लिवोफ़्लॉक्सासिन को रक्त-अपोहन या उदरावरणीय-अपोहन द्वारा कुशलता से हटाया नहीं जा सकता है।<ref name="ReferenceB" />
== औषध विज्ञान ==
लिवोफ़्लॉक्सासिन रेसमेट का L-समावयव, ऑफ़्लॉक्सासिन, एक क्विनोलोन रोगाणुरोधी एजेंट है।
रासायनिक तौर पर, लिवोफ़्लॉक्सासिन, एक कैरल फ़्लोरिनीकृत कार्बॉक्सिक्विनोलोन, रेकेमिक औषध
पदार्थ ऑफ़्लॉक्सासिन का शुद्ध (-)-(S) प्रतिबिंब है। रासायनिक नाम है (-)-(S)-9फ़्लोरो-2,3-डीहाइड्रो-3-मिथाइल-10-(4-मिथाइल-1-पाइपराज़िनाइल)-7-ऑक्सो-7H-पाइरिडो[1,2,3-डी]-1,4बेंज़ॉक्साज़ाइन-6-कार्बाक्सिलिक एसिड हेमीहाइड्रेट है। प्रयोगाश्रित सूत्र है C18H20FN3O4 • ½ H2O और आणविक भार है 370.38. लिवोफ़्लॉक्सासिन एक हल्के पीले-सफ़ेद से पीला-सफ़ेद क्रिस्टल या क्रिस्टलीय पाउडर है।<ref name="ReferenceB" />
लिवोफ़्लॉक्सासिन से प्रभावित कुछ अंतर्जात यौगिकों में शामिल हैं GABA ग्राहक (निषेधक), OCTN2 (निषेधक)<ref>{{cite journal | author = Hirano T, Yasuda S, Osaka Y | title = The inhibitory effects of fluoroquinolones on L-carnitine transport in placental cell line BeWo | journal = International Journal of Pharmaceutics | volume = 351 | issue = 1-2 | pages = 113–8 | year = 2008 | month = March | pmid = 17977676 | doi = 10.1016/j.ijpharm.2007.09.022 | accessdate = 30 जून 2009 }}</ref> रक्त शर्करा (परिवर्तन) पोटेशियम चैनल (हृदपेशीय कोशिकाओं में - निषेधक)<ref>{{Cite journal | last1 = Friedrich | first1 = LV. | last2 = Dougherty | first2 = R. | title = Fatal hypoglycemia associated with levofloxacin. | journal = Pharmacotherapy | volume = 24 | issue = 12 | pages = 1807–12 | month = December | year = 2004 | doi = 10.1592/phco.24.17.1807.52348 | pmid = 15585448 | url = http://www.medscape.com/viewarticle/496197 | access-date = 6 अप्रैल 2010 | archive-url = https://web.archive.org/web/20111029091347/http://www.medscape.com/viewarticle/496197 | archive-date = 29 अक्तूबर 2011 | url-status = live }}</ref> अग्नाशयी β-कोशिका पोटेशियम चैनल (निषेधक)<ref>{{cite journal |author=Melissa Hunt |month=January |year=2007 |title=Levofloxacin: dysglycemia and liver disorders |journal=Canadian adverse reaction newsletter |volume=17 |issue=1 |publisher=Health Canada Newsletter |location=Canada |url=http://www.hc-sc.gc.ca/dhp-mps/alt_formats/hpfb-dgpsa/pdf/medeff/carn-bcei_v17n1-eng.pdf |format=PDF }}{{Dead link|date=जून 2020 |bot=InternetArchiveBot }}</ref> और ग्लूटाथाइओन (अवक्षेपक).
== औषधबलगतिकी ==
लिवोफ़्लॉक्सासिन औषधबलगतिकी रैखिक और एकल तथा बहुल मौखिक या IV खुराक पथ्यापथ्य-नियम के बाद प्रतिपाद्य रहे हैं। लिवोफ़्लॉक्सासिन तेजी से और, तत्वतः, मौखिक खुराक के बाद पूरी तरह से अवशोषित हो जाता है। चरम प्लाज्मा सांद्रता सामान्यतया मौखिक खुराक के एक या दो घंटे बाद हासिल होता है। IV खुराक के बाद लिवोफ़्लॉक्सासिन का प्लाज़्मा सांद्रता प्रोफ़ाइल LEVAQUIN गोलियों की बराबर खुराक (mg/mg) दिए जाने पर परिलक्षित के समान और अरक्षितता की मात्रा (AUC) से तुलनीय है। लिवोफ़्लॉक्सासिन मुख्यतः मूत्र में अपरिवर्तित दवा के रूप में उत्सर्जित होता है। लिवोफ़्लॉक्सासिन माध्य अंतस्थ प्लाज़्मा उन्मूलन अर्ध-जीवन मौखिक या अंतःशिरा तौर पर लिवोफ़्लॉक्सासिन की एकल या बहुल खुराकों के बाद लगभग 6 से 8 घंटे के बीच होती है।<ref name="ReferenceB" />
लिवोफ़्लॉक्सासिन हाइड्रोक्लोराइड के लिए ग्लूकरॉनडेशन और हाइड्राक्सिलेशन प्रमुख चयापचय मार्गों में से एक के रूप में उद्धृत किए गए हैं।<ref>{{cite web |url=http://www.drugbank.ca/drugs/DB00478 |title=Showing drug card for Rimantadine (DB00478) |location=Canada |date=23 जून 2009 |access-date=6 अप्रैल 2010 |archive-url=https://web.archive.org/web/20100222090211/http://www.drugbank.ca/drugs/DB00478 |archive-date=22 फ़रवरी 2010 |url-status=live }}</ref> हालांकि लिवोफ़्लॉक्सासिन के लिए औषध कार्ड ([https://web.archive.org/web/20100328012238/http://www.drugbank.ca/drugs/DB01137 DB01137]) में उल्लेख है कि कि जैव-रूपांतरण की जानकारी उपलब्ध नहीं है।<ref name="sdcfl" /> पैकेज निविष्टियों में जैव-रूपांतरण के संबंध में विशेष जानकारी आसानी से उपलब्ध प्रतीत नहीं होती. अर्ध-जीवन 6-8 घंटे है।<ref name="sdcfl" />
== कार्रवाई तंत्र ==
लिवोफ़्लॉक्सासिन एक [[व्यापक-स्पेक्ट्रम एंटीबायोटिक]] है जो दोनों के प्रति सक्रिय है,
[[ग्राम-पॉज़िटिव]] और [[ग्राम-नेगेटिव]] बैक्टीरिया. यह [[DNA कर्णक]], टाइप II [[टोपोईसोमरेज़]] और टोपोईसोमरेज़ iv, के निषेध द्वारा कार्य करता है,<ref>{{cite journal |author=Drlica K, Zhao X |title=DNA gyrase, topoisomerase IV, and the 4-quinolones |journal=Microbiol Mol Biol Rev. |volume=61 |issue=3 |pages=377–92 |date=1 सितंबर 1997 |pmid=9293187 |pmc=232616 |url=http://mmbr.asm.org/cgi/pmidlookup?view=long&pmid=9293187 |access-date=6 अप्रैल 2010 |archive-url=https://archive.today/20120711193037/http://mmbr.asm.org/cgi/pmidlookup?view=long&pmid=9293187 |archive-date=11 जुलाई 2012 |url-status=dead }}</ref> जो DNA प्रतिकृति को अलग करने के लिए आवश्यक किण्वक है, जिससे कोशिका विभाजन को रोकता है।
फ़्लोरोक्विनोलोन DNA कर्णक नामक एक किण्वक ग्रंथि के निषेध द्वारा DNA प्रतिकृति के साथ हस्तक्षेप करता है। यह स्तनधारी कोशिका प्रतिकृति को भी प्रभावित कर सकता है। विशेष रूप से, इस औषध वंश के कुछ सजातीय न केवल जीवाणु टोपोईसोमरेज़ों के प्रति उच्च क्रियाशीलता प्रदर्शित करते हैं, बल्कि यूकैरियॉटिक टोपोईसोमरेज़ों के प्रति भी और संवर्धित स्तनधारी कोशिकाओं और ''अंतर्जीवी'' ट्यूमर मॉडलों के लिए विषैले हैं। हालांकि क्विनोलोन संवर्धित स्तनधारी कोशिकाओं के लिए बहुत विषैले हैं, उसकी कोशिका-विषाक्त क्रियाविधि ज्ञात नहीं है। क्विनोलोन-प्रेरित DNA क्षति पहली बार 1986 में रिपोर्ट की गई।<ref>{{cite journal |author=Hussy P, Maass G, Tümmler B, Grosse F, Schomburg U |title=Effect of 4-quinolones and novobiocin on calf thymus DNA polymerase alpha primase complex, topoisomerases I and II, and growth of mammalian lymphoblasts |journal=Antimicrob. Agents Chemother. |volume=29 |issue=6 |pages=1073–8 |year=1986 |month=June |pmid=3015015 |pmc=180502 |doi= |url=http://aac.asm.org/cgi/reprint/29/6/1073.pdf |access-date=6 अप्रैल 2010 |archive-url=https://web.archive.org/web/20110611212802/http://aac.asm.org/cgi/reprint/29/6/1073.pdf |archive-date=11 जून 2011 |url-status=dead }}</ref>
हाल के अध्ययन क्विनोलोन की स्तनधारी कोशिका विषाक्तता और सूक्ष्मकेंद्रकों के प्रेरक के बीच सह-संबंध प्रदर्शित किया है।<ref>{{cite journal |last= |first= |author=Hosomi JA |year=1988 |title=Mutagenicity of norfloxacin and AM-833 in bacteria and mammalian cells |journal=Rev. Infect |volume=10 |series=1 |pages=S148–S149 |publisher=jstor.org |url=http://www.jstor.org/pss/4454399 |first2= . |first3= . |first4= . |author5= Yokota }}</ref><ref>{{cite journal | author = Forsgren A, Bredberg A, Pardee AB, Schlossman SF, Tedder TF | title = Effects of ciprofloxacin on eucaryotic pyrimidine nucleotide biosynthesis and cell growth | journal = Antimicrobial Agents and Chemotherapy | volume = 31 | issue = 5 | pages = 774–9 | year = 1987 | month = May | pmid = 3606077 | pmc = 174831 | accessdate = 30 जून 2009 }}</ref><ref>{{cite journal | author = Gootz TD, Barrett JF, Sutcliffe JA | title = Inhibitory effects of quinolone antibacterial agents on eucaryotic topoisomerases and related test systems | journal = Antimicrobial Agents and Chemotherapy | volume = 34 | issue = 1 | pages = 8–12 | year = 1990 | month = January | pmid = 2158274 | pmc = 171510 | accessdate = 30 जून 2009 }}</ref><ref>{{cite journal | author = Lawrence JW, Darkin-Rattray S, Xie F, Neims AH, Rowe TC | title = 4-Quinolones cause a selective loss of mitochondrial DNA from mouse L1210 leukemia cells | url = https://archive.org/details/sim_journal-of-cellular-biochemistry_1993-02_51_2/page/165 | journal = Journal of Cellular Biochemistry | volume = 51 | issue = 2 | pages = 165–74 | year = 1993 | month = February | pmid = 8440750 | doi = 10.1002/jcb.240510208 | accessdate = 30 जून 2009 }}</ref>
इस प्रकार कुछ फ़्लोरोक्विनोलोन यूकैरियॉटिक कोशिकाओं के गुणसूत्र को चोट पहुंचा सकता है।<ref>{{cite journal | author = Elsea SH, Osheroff N, Nitiss JL | title = Cytotoxicity of quinolones toward eukaryotic cells. Identification of topoisomerase II as the primary cellular target for the quinolone CP-115,953 in yeast | journal = The Journal of Biological Chemistry | volume = 267 | issue = 19 | pages = 13150–3 | date = 5 जुलाई 1992 | pmid = 1320012 | url = http://www.jbc.org/cgi/pmidlookup?view=long&pmid=1320012 | format = PDF | accessdate = 3 जून 2009 }}{{Dead link|date=फ़रवरी 2021 |bot=InternetArchiveBot }}</ref><ref>{{cite journal | author = Suto MJ, Domagala JM, Roland GE, Mailloux GB, Cohen MA | title = Fluoroquinolones: relationships between structural variations, mammalian cell cytotoxicity, and antimicrobial activity | journal = Journal of Medicinal Chemistry | volume = 35 | issue = 25 | pages = 4745–50 | year = 1992 | month = December | pmid = 1469702 | doi = 10.1021/jm00103a013 | accessdate = 30 जून 2009}}</ref><ref>{{cite journal |author=Enzmann H, Wiemann C, Ahr HJ, Schlüter G |title=Damage to mitochondrial DNA induced by the quinolone Bay y 3118 in embryonic turkey liver |journal=Mutat. Res. |volume=425 |issue=2 |pages=213–24 |year=1999 |month=April |pmid=10216214 |doi= |url=}}</ref><ref>{{cite journal | author = Kashida Y, Sasaki YF, Ohsawa K | title = Mechanistic study on flumequine hepatocarcinogenicity focusing on DNA damage in mice | journal = Toxicological Sciences : an Official Journal of the Society of Toxicology | volume = 69 | issue = 2 | pages = 317–21 | year = 2002 | month = October | pmid = 12377980 | doi = 10.1093/toxsci/69.2.317 | url = http://toxsci.oxfordjournals.org/cgi/content/full/69/2/317 | accessdate = 30 जून 2009 | archive-url = https://web.archive.org/web/20090615033339/http://toxsci.oxfordjournals.org/cgi/content/full/69/2/317 | archive-date = 15 जून 2009 | url-status = live }}</ref><ref>{{cite journal | author = Thomas A, Tocher J, Edwards DI | title = Electrochemical characteristics of five quinolone drugs and their effect on DNA damage and repair in Escherichia coli | journal = The Journal of Antimicrobial Chemotherapy | volume = 25 | issue = 5 | pages = 733–44 | year = 1990 | month = May | pmid = 2165050 | doi = 10.1093/jac/25.5.733 | url = http://jac.oxfordjournals.org/cgi/pmidlookup?view=long&pmid=2165050 | accessdate = 30 जून 2009
}}</ref><ref>{{cite web| url = http://www.academy.org.uk/pharmacy/fluoroq.htm| title = Fluoroquinolones and Quinolones| accessdate = 29 जनवरी 2009| publisher = The American Academy of Optometry (British Chapter)| archive-url = https://web.archive.org/web/20090312030120/http://www.academy.org.uk/pharmacy/fluoroq.htm| archive-date = 12 मार्च 2009| url-status = live}}</ref>
इस बात पर बहस जारी है कि इस DNA क्षति को फ़्लोरोक्विनोलोन उपचार पाने वाले मरीज़ों द्वारा अनुभूत गंभीर और अनिवारणीय प्रतिकूल प्रतिक्रियाओं से संबंधित क्रियाविधि तंत्रों में से एक माना जाए या नहीं.<ref>{{cite journal |author=Yaseen A. Al-Soud; Najim A. Al-Masoudi |title=A new class of dihaloquinolones bearing N'-aldehydoglycosylhydrazides, mercapto-1,2,4-triazole, oxadiazoline and a-amino ester precursors: synthesis and antimicrobial activity |journal=J. Braz. Chem. Soc |volume=14 |issue=5 |pages= |year=2003 |doi=10.1590/S0103-50532003000500014 |url=http://www.scielo.br/scielo.php?script=sci_arttext&pid=S0103-50532003000500014&lng=es&nrm=iso&tlng=es |quote=Nevertheless, some quinolones cause injury to the chromosome of eukaryotic cells.21,22 These findings prompted us to optimize the substituent at C-3, by... |access-date=6 अप्रैल 2010 |archive-url=https://web.archive.org/web/20100110134007/http://www.scielo.br/scielo.php?script=sci_arttext |archive-date=10 जनवरी 2010 |url-status=live }}</ref><ref>{{cite journal |author=Yaseen A. Al-Soud a and Najim A. Al-Masoudi |title=A New Class of Dihaloquinolones Bearing N’-Aldehydoglycosylhydrazides, Mercapto-1,2,4-triazole, Oxadiazoline and α-Amino Ester Precursors: Synthesis and Antimicrobial Activity |journal=J. Braz. Chem. Soc |volume=14 |issue=5 |pages=790–796 |year=2003 |url=http://jbcs.sbq.org.br/jbcs/2003/v14_n5/13-048-02.pdf |quote=Although the current quinolones are not considered to be potent inhibitors of eucaryotic topoisomerases, some effects on these and other enzymes involved with DNA replication have been observed |archive-url=https://web.archive.org/web/20040214143253/http://jbcs.sbq.org.br/jbcs/2003/v14_n5/13-048-02.pdf |archive-date=14 फ़रवरी 2004 |access-date=6 अप्रैल 2010 |url-status=dead }}</ref><ref>{{cite journal | author = Sissi C, Palumbo M | title = The quinolone family: from antibacterial to anticancer agents | journal = Current Medicinal Chemistry. Anti-cancer Agents | volume = 3 | issue = 6 | pages = 439–50 | year = 2003 | month = November | pmid = 14529452 | doi = 10.2174/1568011033482279 | accessdate = 30 जून 2009 | quote = The present review focuses on the structural modifications responsible for the transformation of an antibacterial into an anticancer agent. Indeed, a distinctive feature of drugs based on the quinolone structure is their remarkable ability to target different type II topoisomerase enzymes. In particular, some congeners of this drug family display high activity not only against bacterial topoisomerases, but also against eukaryotic topoisomerases and are toxic to cultured mammalian cells and in vivo tumor models }}</ref>
== अन्योन्य क्रिया ==
औषधियों की विषाक्तता, जिनका उपापचयन [[साइटोक्रोम P450]] प्रणाली द्वारा होता है, कुछ क्विनोलोन के सहवर्ती उपयोग से बढ़ जाती है। सह-ख़ुराक से काउमडिन [[वारफ़रिन]] गतिविधि में गंभीर रूप से वृद्धि हो सकती है; INR पर बारीकी से नज़र रखी जानी चाहिए. वे [[GABA A रिसेप्टर]] से भी अन्योन्य क्रिया कर सकते हैं और तांत्रिकी लक्षण पैदा कर सकती है; यह प्रभाव कुछ [[गैर-स्टेरॉयड प्रदाहरोधी]] औषधियों द्वारा संवर्धित होता है।<ref>{{cite journal |author=Brouwers JR |title=Drug interactions with quinolone antibacterials |journal=Drug Saf |volume=7 |issue=4 |pages=268–81 |year=1992 |pmid=1524699 |doi=10.2165/00002018-199207040-00003 }}</ref> [[क्वरसेटिन,]] कभी-कभी [[आहार अनुपूरक]] के रूप में प्रयुक्त एक [[फ़्लेवोनाइड]], फ़्लोरोक्विनोलोन के साथ अन्योन्य क्रिया कर सकता है, क्योंकि क्वरसेटिन प्रतियोगी रूप से जीवाणु DNA कर्णक से बंध जाते हैं। [[लहसुन]] और [[सेब]] जैसे कुछ खाद्य पदार्थों में क्वरसेटिन का उच्च स्तर मौजूद होता है; क्या यह फ़्लोरोक्विनोलोन के प्रभाव को रोकता या बढ़ाता है, यह पूरी तरह से स्पष्ट नहीं है।<ref>{{cite journal |author=Hilliard JJ, Krause HM, Bernstein JI |title=A comparison of active site binding of 4-quinolones and novel flavone gyrase inhibitors to DNA gyrase |journal=Adv Exp Med Biol. |volume=390 |pages=59–69 |year=1995 |pmid=8718602 }}</ref>
लिवोफ़्लॉक्सासिन के साथ विशिष्ट औषधि अन्योन्य क्रिया अध्ययन नहीं किए गए हैं। हालांकि, कुछ क्विनोलोन की सर्वांगीण ख़ुराक से कतिपय क्विनोलोन द्वारा कैफ़ीन के चयापचय के साथ हस्तक्षेप, थियोफ़िलाइन की प्लाज़्मा सांद्रता में वृद्धि और वारफ़रिन तथा उसके संजातों के प्रभाव को बढ़ाना देखा गया है। सर्वांगीण साइक्लोस्पोरीन सहवर्ती रूप से प्राप्त करने वाले रोगियों में, सीरम क्रिएटिनाइन में क्षणिक उन्नयन नोट किया गया है।<ref name="sdcfl" />
=== महत्वपूर्ण औषध पारस्परिक क्रिया ===
लिवोफ़्लॉक्सासिन के बारे में सूचना है कि यह कई महत्वपूर्ण अन्य दवाओं और साथ ही, असंख्य हर्बल और प्राकृतिक पूरकों के साथ परस्पर क्रिया करता है। ऐसी क्रियाओं से हृदय-विषाक्तता और अतालता, स्कंदनरोधी प्रभाव, अनवशोषनीय संमिश्र और साथ ही, विषाक्तता का जोखिम बढ़ सकता है।
कुछ औषध अन्योन्य क्रियाएं क्विनोलोन वलय की आणविक संरचना संशोधनों के साथ जुड़ी हैं, विशेष रूप से NSAIDS और [[थियोफ़िलाइन]] शामिल अन्योन्य क्रियाएं. फ़्लोरोक्विनोलोन<ref>{{cite journal |author=Harder S, Fuhr U, Staib AH, Wolff T |title=Ciprofloxacin-caffeine: a drug interaction established using in vivo and in vitro investigations |journal=Am. J. Med. |volume=87 |issue=5A |pages=89S–91S |year=1989 |month=November |pmid=2589393 |doi= 10.1016/0002-9343(89)90031-4|url=}}</ref> [[कैफ़ीन]] के चयापचय और [[लिवोथाइरॉक्सिन]] के अवशोषण के साथ हस्तक्षेप करते हुए भी देखा गया है। कैफ़ीन के चयापचय के साथ हस्तक्षेप की वजह से कैफ़ीन की कम निकासी और उसके सीरम के अर्ध-जीवन का प्रवर्धन, जिससे परिणामस्वरूप कैफ़ीन की अधिक मात्रा की संभावना है। सिप्रोफ़्लॉक्सासिन को थायरॉयड दवाएं (लिवोथाइरॉक्सिन) के साथ पारस्परिक क्रिया करते देखा गया है, जिसके परिणामस्वरूप अस्पष्टीकृत [[हाइपोथाइरॉयडिज़्म]] हो सकता है।<ref>{{cite journal |author=Cooper JG, Harboe K, Frost SK, Skadberg Ø |title=Ciprofloxacin interacts with thyroid replacement therapy |journal=BMJ |volume=330 |issue=7498 |pages=1002 |year=2005 |month=April |pmid=15860826 |pmc=557149 |doi=10.1136/bmj.330.7498.1002 |url=http://www.bmj.com/cgi/content/full/330/7498/1002 |access-date=6 अप्रैल 2010 |archive-url=https://web.archive.org/web/20090218152316/http://www.bmj.com/cgi/content/full/330/7498/1002 |archive-date=18 फ़रवरी 2009 |url-status=live }}</ref> अतः यह संभव है कि लिवोफ़्लॉक्सासिन थाइराइड दवाओं के साथ भी पारस्परिक क्रिया करे.
फ़्लोरोक्विनोलोन उपचार के दौरान NSAID (गैर-स्टेरॉयड शोथरोधी औषधियां) के उपयोग से परहेज़ है, चूंकि गंभीर CNS प्रतिकूल प्रतिक्रियाओं का जोख़िम हो सकता है, जिसमें जब्ती विकार भी शामिल है, लेकिन उसी तक सीमित नहीं. फ़्लोरोक्विनोलोन में 7वें स्तर पर अप्रतिस्थापित पाइपराजिनाइल मोइटी सहित NSAID और/या अपने चयापचयकों के साथ पारस्परिक क्रिया की संभावना मौजूद है, जिसके परिणामस्वरूप [[GABA]] तंत्रिकासंचरण का प्रतिरोध हो सकता है।<ref>{{cite journal |author=Domagala JM |title=Structure-activity and structure-side-effect relationships for the quinolone antibacterials |journal=J. Antimicrob. Chemother. |volume=33 |issue=4 |pages=685–706 |year=1994 |month=April |pmid=8056688 |doi=10.1093/jac/33.4.685 |url=http://jac.oxfordjournals.org/cgi/reprint/33/4/685 |access-date=6 अप्रैल 2010 |archive-url=https://web.archive.org/web/20090629021930/http://jac.oxfordjournals.org/cgi/reprint/33/4/685 |archive-date=29 जून 2009 |url-status=live }}</ref> उपचार पूरा होने पर ऐसी प्रतिक्रियाएं हो सकती हैं या नहीं, यह स्पष्ट नहीं है। रोगियों ने फ़्लोरोक्विनोलोन उपचार पूरा होने के बहुत समय बाद NSAIDS के प्रति प्रतिक्रियाओं की सूचना दी है, लेकिन ऐसा प्रतीत नहीं होता है कि इन क़िस्सों की रिपोर्ट के अलावा कोई अनुसंधान हुआ है, जो इस सहयोग की पुष्टि या इनकार करें.
कुछ क्विनोलोन, साइटोक्रोम P-450 प्रणाली पर निरोधक प्रभाव डालती हैं, जिससे थियोफ़िलाइन निकासी कम होती है और थियोफ़िलाइन रक्त स्तर बढ़ जाता है। कुछ फ़्लोरोक्विनोलोन और अन्य दवाओं की सह-ख़ुराक से मुख्यतः [[CYP1A2]] (जैसे, थियोफ़िलाइन, [[मिथाइलक्सैंथिनेस]], [[टिज़ानीडाइन]]) द्वारा उपापचय वर्धित प्लाज़्मा सांद्रता में परिणत होता है और सह-ख़ुराक दवा के नैदानिक रूप से महत्वपूर्ण दुष्प्रभाव की ओर ले जा सकता है। इसके अलावा, अन्य फ़्लोरोक्विनोलोन, विशेष रूप से [[इनोक्सासिन]] और कुछ कम हद तक सिप्रोफ़्लॉक्सासिन तथा [[पेफ़्लॉक्सासिन]] भी, थियोफ़िलाइन के चयापचय निकासी को रोकते हैं।<ref>{{cite journal |author=Janknegt R |title=Drug interactions with quinolones |journal=J. Antimicrob. Chemother. |volume=26 Suppl D |issue= |pages=7–29 |year=1990 |month=November |pmid=2286594 |doi= |url=}}</ref>
ऐसी दवाओं की पारस्परिक क्रियाएं क्विनोलोन वलय के संरचनात्मक परिवर्तनों और साइटोक्रोम P-450 प्रणाली पर निरोधात्मक प्रभाव से संबंधित प्रतीत होती हैं। अतः, फ़्लोरोक्विनोलोन सम्मिलित ऐसी औषध पारस्परिक क्रियाएं क़िस्म प्रभावित नहीं, बल्कि दवा विशेष से जुड़ी प्रतीत होती हैं।
मौखिक [[कॉर्टिकोस्टेरॉयड]] के साथ वर्तमान या पिछले उपचार, [[स्नायुजाल विदर]] के वर्धित जोखिम से संबंधित हैं, खास कर फ़्लोरोक्विनोलोन लेने वाले बुजुर्ग रोगियों में. यह प्रभाव 60 या उससे अधिक उम्र वाले व्यक्तियों में प्रतिबंधित नज़र आता है और इस समूह के भीतर कॉर्टिकोस्टेरॉयड के सहवर्ती उपयोग से जोखिम काफी बढ़ जाता है।<ref name="nda18dec2001" /><ref>{{cite journal |author=van der Linden PD, Sturkenboom MC, Herings RM, Leufkens HM, Rowlands S, Stricker BH |title=Increased risk of achilles tendon rupture with quinolone antibacterial use, especially in elderly patients taking oral corticosteroids |journal=Arch. Intern. Med. |volume=163 |issue=15 |pages=1801–7 |year=2003 |pmid=12912715 |doi=10.1001/archinte.163.15.1801 |url=http://archinte.ama-assn.org/cgi/content/full/163/15/1801 |access-date=6 अप्रैल 2010 |archive-url=https://web.archive.org/web/20120213234659/http://archinte.ama-assn.org/cgi/content/full/163/15/1801 |archive-date=13 फ़रवरी 2012 |url-status=live }}</ref>
== संयुक्त राज्य अमेरिका में अतिरिक्त विनियामक इतिहास ==
लिवोफ़्लॉक्सासिन को सर्वप्रथम 1987 में पेटेंट कराया गया था और बाद में जापान (1 अक्टूबर 1993), कोरिया (4 अप्रैल 1994), हांगकांग (3 अक्टूबर 1994), चीन (3 मई 1995) में उपयोगार्थ अनुमोदित किया गया था। लिवोफ़्लॉक्सासिन ने संयुक्त राज्य अमेरिका में 20 दिसम्बर 1996 को में FDA अनुमोदन प्राप्त किया। फ़्लॉक्सिन (ओफ़्लॉक्सासिन - फ़्लॉक्सासिन) को 1982 में (यूरोपियन पेटेंट डायची) पेटेंट कराया गया था और 28 दिसम्बर 1990 को इसे FDA अनुमोदन प्राप्त हुआ। अमेरिकी पेटेंट डायची सैंक्यो के स्वामित्व में है और ऑर्थो-मॅकनील को अनन्य लाइसेंस प्राप्त है।<ref name="accessdata.fda.gov" /><ref>{{cite web |url=http://apps.shareholder.com/sec/viewerContent.aspx?companyid=JNJ&docid=2940855 |title=UNITED STATES SECURITIES AND EXCHANGE COMMISSION |author=JOHNSON & JOHNSON |publisher=shareholder.com |location=USA |pages=28–29 |date=28 मार्च 2004 |access-date=6 अप्रैल 2010 |archive-url=https://web.archive.org/web/20110718215747/http://apps.shareholder.com/sec/viewerContent.aspx?companyid=JNJ&docid=2940855 |archive-date=18 जुलाई 2011 |url-status=dead }}</ref>
कई नैदानिक विच्छेदन जिन्हें शुरूआत में लिवोफ़्लॉक्सासिन डिस्क के बजाय फ़्लॉक्सिन (ओफ़्लॉक्सासिन-फ़्लॉक्सासिन) डिस्क के प्रति लिवोफ़्लॉक्सासिन के लिए NDA के अंतर्गत परीक्षित किए गए, पर लिवोफ़्लॉक्सासिन के प्रति अतिसंवेदनशील या प्रतिरोधी रिपोर्ट किए गए। जब प्रारंभिक नैदानिक परीक्षणों में लिवोफ़्लॉक्सासिन डिस्क उपलब्ध नहीं थे, एक 5-pg फ़्लॉक्सिन (ओफ़्लॉक्सासिन-फ़्लॉक्सासिन) डिस्क से प्रतिस्थापित किया गया। FDA चिकित्सा समीक्षकों ने दो दवाओं को एक और इसलिए अंतर्बदल माना.<ref name="accessdata.fda.gov" />
* 12 मार्च 2009<ref>{{cite web |url=http://www.accessdata.fda.gov/drugsatfda_docs/appletter/2009/020634s054,020635s059,021721s022ltr.pdf |title=NDA 20-634/S-054, NDA 20-635/S-059, NDA 21-721/S-022 |author= |coauthors= |date=12 मार्च 2009 |publisher=FDA |location=USA |format=PDF |access-date=6 अप्रैल 2010 |archive-url=https://web.archive.org/web/20120404184212/http://www.accessdata.fda.gov/drugsatfda_docs/appletter/2009/020634s054,020635s059,021721s022ltr.pdf |archive-date=4 अप्रैल 2012 |url-status=live }}</ref>
FDA ने अनुरोध किया कि कार्टन और कंटेनर लेबल अद्यतन करने के लिए एक कथन जोड़ा जाए ताकि वितरक जान सके कि 21 CFR 208.24 (d) में निर्दिष्टानुसार चिकित्सा गाइड विनियमों के अनुपालन में, उत्पाद के साथ चिकित्सा गाइड भी वितरित की जानी होगी.
* 27 अप्रैल 2009<ref>{{cite web |url=http://www.accessdata.fda.gov/drugsatfda_docs/appletter/2009/020634s053,020635s058,021721s021lt.pdf |title=NDA 20-634/S-053, NDA 20-635/S-058, NDA 21-721/S-021 |author=Ozlem Belen |date=27 मार्च 2009 |publisher=FDA |location=USA |format=PDF |access-date=6 अप्रैल 2010 |archive-url=https://web.archive.org/web/20120404184219/http://www.accessdata.fda.gov/drugsatfda_docs/appletter/2009/020634s053,020635s058,021721s021lt.pdf |archive-date=4 अप्रैल 2012 |url-status=live }}</ref>
चिकित्सा गाइड के निर्गम और संशोधनों में नई सुरक्षा जानकारी शामिल होनी चाहिए. FDA ने निर्धारित किया है कि लिवोफ़्लॉक्सासिन एक ''गंभीर'' और ''महत्वपूर्ण'' सार्वजनिक स्वास्थ्य चिंता का विषय बन गया है, जिस वजह से चिकित्सा गाइड का वितरण अपेक्षित है। बहरहाल चिकित्सा गाइड में कोई ब्लैक बॉक्स चेतावनियां शामिल नहीं है।<ref>{{cite web |url=http://www.accessdata.fda.gov/drugsatfda_docs/label/2009/020634s053,020635s058,%20021721s021lbl.pdf |title=FDA-Approved Medication Guide |author=Ortho-McNeil-Janssen Pharmaceuticals, Inc. |month=October |year=2008 |publisher=FDA |location=USA |format=PDF |access-date=6 अप्रैल 2010 |archive-url=https://web.archive.org/web/20110116120901/http://www.accessdata.fda.gov/drugsatfda_docs/label/2009/020634s053,020635s058,%20021721s021lbl.pdf |archive-date=16 जनवरी 2011 |url-status=live }}</ref>
नोट: हालांकि FDA ने अनुरोध किया था कि संशोधित लेबल (जिनमें ब्लैक बॉक्स चेतावनियां शामिल होनी थीं)<ref>{{cite web |url=http://www.accessdata.fda.gov/drugsatfda_docs/appletter/2008/019735s059ltr.pdf |title=NDA 19-735/S-059 |author=Renata Albrecht |coauthors= |date=3 अक्टूबर 2008 |publisher=FDA |location=USA |format=PDF |access-date=6 अप्रैल 2010 |archive-url=https://web.archive.org/web/20120404184205/http://www.accessdata.fda.gov/drugsatfda_docs/appletter/2008/019735s059ltr.pdf |archive-date=4 अप्रैल 2012 |url-status=live }}</ref> किसी भी नए प्रेषित उत्पादों के लिए पैकेज निविष्टियों के साथ होनी चाहिए (जनवरी 2009 से प्रभावी), सतत रिपोर्ट मिल रही हैं कि यथा जुलाई 2009, उत्पादों के साथ संशोधित लेबल नहीं बल्कि पुराने लेबल का उपयोग जारी हैं और वितरण के लिए चिकित्सा गाइड (ब्लैक बॉक्स चेतावनियों के बिना) उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं।
=== ब्लैक बॉक्स चेतावनियों का इतिहास ===
[[नैलीडिक्सिक एसिड]] की प्रतिकूल प्रतिक्रिया स्वरूप पेशीकंकालीय विकार होने के तौर पर, 1972 में पहली बार क्विनोलोन एंटीबायोटिक दवाओं के उपयोग को ज़िम्मेदार ठहराते हुए, चिकित्सा साहित्य में सूचित किया गया।<ref>{{cite journal |author=Bailey RR, Natale R, Linton AL |title=Nalidixic acid arthralgia |journal=Can Med Assoc J |volume=107 |issue=7 |pages=604 passim |year=1972 |month=October |pmid=4541768 |pmc=1940945}}</ref> ग्यारह साल बाद फ़्लोरोक्विनोलोन ([[नॉरफ़्लॉक्सासिन]]) के उपयोग के बाद आमवाती रोग होने की सूचना पहली बार दी गई।<ref>{{cite journal |author=Bailey RR, Kirk JA, Peddie BA |title=Norfloxacin-induced rheumatic disease |url=https://archive.org/details/sim_new-zealand-medical-journal_1983-07-27_96_736/page/n48 |journal=N Z Med J |volume=96 |issue=736 |pages=590 |year=1983 |month=July |pmid=6223241}}</ref> ''[[न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ़ मेडिसिन]]'' में प्रकाशित एक 1995 पत्र में, [[अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन]] (FDA) के प्रतिनिधियों ने कहा कि एजेंसी "सभी विपणित फ़्लोरोक्विनोलोन के लिए लेबलों को [पैकेज निविष्टि] कण्डरा के फटने की संभावना के बारे एक चेतावनी शामिल करते हुए अद्यतन करेगी".<ref>{{cite journal |author=Szarfman A, Chen M, Blum MD |title=More on fluoroquinolone antibiotics and tendon rupture |url=https://archive.org/details/sim_new-england-journal-of-medicine_the-new-england-journal-of-medicine_1995-01-19_332_3/page/192 |journal=N Engl J Med |volume=332 |issue=3 |pages=193 |year=1995 |month=January |pmid=7800023 |format=letter |doi=10.1056/NEJM199501193320319}}</ref>
1996 अगस्त तक FDA ने कोई कार्रवाई नहीं की थी और उपभोक्ता पैरवी समूह [[पब्लिक सिटिज़न]] ने एक याचिका दायर की, जिससे FDA ने एजेंसी को कार्रवाई करने के लिए उकसाया.<ref name="ptrawoafa">{{cite web |title=Petition to Require a Warning on All Fluoroquinolone Antibiotics (HRG Publication #1399) |date=अगस्त 1, 1996 |publisher=[[Public Citizen]] |url=http://www.citizen.org/publications/release.cfm?ID=6595 |access-date=6 अप्रैल 2010 |archive-url=https://web.archive.org/web/20091203163040/http://www.citizen.org/publications/release.cfm?ID=6595 |archive-date=3 दिसंबर 2009 |url-status=dead }} 27 दिसम्बर 2008 को पुनःप्राप्त</ref> दो महीने बाद, FDA ने ''FDA मेडिकल बुलेटिन'' में एक चेतावनी प्रकाशित की और अनुरोध किया कि फ़्लोरोक्विनोलोन पैकेज निविष्टयों को इस जोखिम के बारे में जानकारी शामिल करते हुए संशोधित किया जाए.<ref>{{cite journal |title=Reports of adverse events with fluoroquinolones |journal=FDA Medical Bulletin |date=अक्टूबर 1996 |volume=26 |issue=3 |url=http://www.fda.gov/medbull/oct96/adverse.html |format={{Dead link|date=जून 2009}} |access-date=6 अप्रैल 2010 |archive-url=https://web.archive.org/web/20090525235606/http://www.fda.gov/medbull/oct96/adverse.html |archive-date=25 मई 2009 |url-status=live }}Retrieved on December 27, 2008. alternate link: http://www.fqresearch.org/text_documents/FDA_Medical_Bulletin_1996.doc {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20110723015531/http://www.fqresearch.org/text_documents/FDA_Medical_Bulletin_1996.doc |date=23 जुलाई 2011 }}</ref>
2005 में, [[इलिनॉइस के अटॉर्नी जनरल]] ने FDA के साथ कंडरा फटने के जोखिम पर बल देते हुए [[ब्लैक बॉक्स चेतावनियां]] और "प्रिय चिकित्सक" पत्र प्राप्त करने के लिए एक याचिका दायर की; FDA ने जवाब दिया कि वे इस मामले पर अभी तक किसी निर्णय पर नहीं पहुंच पाए हैं।<ref name="Madigan">{{cite press release |title=Madigan, Public Citizen, petition FDA for "black box" warning regarding potential adverse effects of certain popular antibiotics |date=अगस्त 29, 2006 |publisher=Office of the Illinois Attorney General |url=http://www.illinoisattorneygeneral.gov/pressroom/2006_08/20060829.html |accessdate=27 दिसंबर 2008 |archive-url=https://web.archive.org/web/20170118130222/http://www.illinoisattorneygeneral.gov/pressroom/2006_08/20060829.html |archive-date=18 जनवरी 2017 |url-status=live |archivedate=18 जनवरी 2017 |archiveurl=https://web.archive.org/web/20170118130222/http://www.illinoisattorneygeneral.gov/pressroom/2006_08/20060829.html }}एक अमेरिकी उपभोक्ता समर्थक समूह, फ़्लोरोक्विनोलोन विषाक्तता अनुसंधान प्रतिष्ठान से उपलब्ध [http://fqresearch.org/pdf_files/fda_response.pdf 2005 petition] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20090309203959/http://fqresearch.org/pdf_files/fda_response.pdf |date=9 मार्च 2009 }} और [http://fqresearch.org/pdf_files/illinois.pdf FDA response] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20090309203956/http://fqresearch.org/pdf_files/illinois.pdf |date=9 मार्च 2009 }} का संपूर्ण पाठ.</ref> वर्ष 2006 में, इलिनॉइस के अटॉर्नी जनरल द्वारा समर्थित पब्लिक सिटिज़न ने, ब्लैक बॉक्स चेतावनी के लिए दस साल पहले की अपनी मांग को नवीकृत किया।<ref name="Madigan" /><ref name="pcptftibb">{{cite web |title=Public Citizen Petitions the FDA to Include a Black Box Warning on Fluoroquinolone Antibiotics (HRG Publication #1781) |date=अगस्त 29, 2006 |publisher=Public Citizen |url=http://www.citizen.org/publications/release.cfm?ID=7453 |accessdate=27 दिसंबर 2008 |archive-url=https://web.archive.org/web/20091121151107/http://www.citizen.org/publications/release.cfm?ID=7453 |archive-date=21 नवंबर 2009 |url-status=dead }}</ref> जनवरी 2008 में, पब्लिक सिटिज़न ने 2006 में दायर अपनी याचिका के प्रति जवाब देने के लिए FDA को मजबूर किया।<ref>{{cite web |url=http://www.citizen.org/litigation/forms/cases/CaseDetails.cfm?cID=444 |title=Public Citizen v. Food and Drug Administration (FDA) (Fluoroquinolone) |date=जनवरी 3, 2008 |publisher=Public Citizen |accessdate=27 दिसंबर 2008 |archive-url=https://web.archive.org/web/20091009144928/http://www.citizen.org/litigation/forms/cases/CaseDetails.cfm?cID=444 |archive-date=9 अक्तूबर 2009 |url-status=dead }}</ref><ref>{{cite news |last=Ravn |first=Karen |title=Behind the FDA’s ‘black box’ warnings |date=अगस्त 18, 2008 |publisher=''[[लॉस एंजिल्स टाइम्स]]'' |url=http://articles.latimes.com/2008/aug/18/health/he-closer18 |accessdate=27 दिसंबर 2008 |archive-url=https://web.archive.org/web/20170704160540/http://articles.latimes.com/2008/aug/18/health/he-closer18 |archive-date=4 जुलाई 2017 |url-status=live }}</ref> 7 जुलाई को, FDA ने सर्वांगीण-प्रयोग फ़्लोरोक्विनोलोन के निर्माताओं को आदेश दिया कि कंडरा फटने संबंधी एक बॉक्स्ड चेतावनी जोड़ें और मरीज़ों के लिए एक चिकित्सा गाइड विकसित करें.<ref name="FDA">{{cite press release |url=http://www.fda.gov/bbs/topics/NEWS/2008/NEW01858.html |title=FDA Requests Boxed Warnings on Fluoroquinolone Antimicrobial Drugs |publisher=[[U.S. Food and Drug Administration]] |date=8 जुलाई 2008 |accessdate=11 अक्टूबर 2008 |archive-url=https://web.archive.org/web/20090512083247/http://www.fda.gov/bbs/topics/NEWS/2008/NEW01858.html |archive-date=12 मई 2009 |url-status=live }}</ref><ref>{{Cite web |url=http://www.fda.gov/NewsEvents/Newsroom/PressAnnouncements/2008/ucm116919.htm |title=संग्रहीत प्रति |access-date=6 अप्रैल 2010 |archive-url=https://web.archive.org/web/20161022204401/http://www.fda.gov/NewsEvents/Newsroom/PressAnnouncements/2008/ucm116919.htm |archive-date=22 अक्तूबर 2016 |url-status=live }}</ref> इन नई चेतावनियों को शामिल करते हुए 8 सितंबर 2008 को सिप्रो ([[सिप्रोफ़्लॉक्सासिन]]), एवेलॉक्स ([[मॉक्सीफ़्लॉक्सासिन]]), प्रोक्विन XR, फ़ैक्टिव ([[जेमिफ़्लॉक्सासिन]]), फ़्लॉक्सिन ([[ऑफ़्लॉक्सासिन]]), नोरोक्सिन ([[नॉरफ़्लॉक्सासिन]]) और लिवाक्विन (लिवोफ़्लॉक्सासिन) की पैकेज निविष्टियों को संशोधित किया गया।<ref name="dafda" /> [[बायर]] ने, जो सिप्रो, एवेलॉक्स और प्रोक्विन XR का विनिर्माण करता है, 22 अक्टूबर को इन परिवर्तनों के विषय में प्रिय हेल्थकेयर व्यावसायिक पत्र जारी किया।<ref>{{cite web |last=MacCarthy |first=Paul |title=Important Change in the Avelox (moxifloxacin hydrochloride) and Cipro (ciprofloxacin) Complete Prescribing Information – Addition of Boxed Warning and Medication Guide Regarding Tendinitis and Tendon Rupture |date=अक्टूबर 22, 2008 |publisher=Bayer HealthCare Pharmaceuticals |url=http://www.cipro.com/html/pdf/dhpl.pdf |accessdate=27 दिसंबर 2008 |archive-url=https://web.archive.org/web/20100728081333/http://www.cipro.com/html/pdf/dhpl.pdf |archive-date=28 जुलाई 2010 |url-status=live }}</ref> लिवाक्विन के निर्माता [[ऑर्थो-मॅकनील]] ने नवंबर में<ref name="Rosenthal" /> लाइसेंस प्राप्त हेल्थकेयर पेशेवरों को औषधी चेतावनियां वितरित करने वाली पंजीकरण-मात्र वेबसाइट, हेल्थकेयर नोटिफ़िकेशन नेटवर्क के माध्यम से इसी तरह का पत्र जारी किया।
FDA वेबसाइट की समीक्षा से संकेत मिलता है कि यथा जुलाई 2009, अधिकांश फ़्लोरोक्विनोलोन के जेनेरिक रूपांतरणों में यह ब्लैक बॉक्स चेतावनी शामिल करते हुए अद्यतन ''नहीं'' किया गया है। और ऐसी असंख्य रिपोर्टें हैं कि यह जानकारी फार्मासिस्ट को परिचालित नहीं की गई है, बिना इस चेतावनी के पिछले लेबल ही उत्पादों पर लगे हैं और फ़ार्मासिस्ट या चिकित्सकों को वितरणार्थ चिकित्सा गाइडें उपलब्ध नहीं कराई गई हैं।
== एंटीबायोटिक दुरुपयोग और बैक्टीरिया प्रतिरोध ==
{{See also|Antibiotic abuse|Antibiotic resistance}}
लिवोफ़्लॉक्सासिन और अन्य फ़्लोरोक्विनोलोन के प्रति, उपचार के दौरान भी, [[प्रतिरोध]] तेजी से विकसित हो सकती है। ''[[स्टैफ़ीलोकॉकस ऑरियस]]'', [[एनटरोकॉकी]] और ''[[स्ट्रोप्टोकॉकस पायोजीन्स]]'' सहित अब कई [[रोगजनक]] दुनिया भर में प्रतिरोध प्रदर्शित कर रहे हैं।<ref>एम.याकूब, विश्वव्यापी रोगाणुरोधी प्रतिरोध का सिंहावलोकन. रोगाणुरोधी एजेंटों और प्रतिरोध पर अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी 2005.</ref> प्रतिरोध के तीन ज्ञात तंत्र मौजूद हैं। [[बहिःस्राव]] पंप के कुछ प्रकार अंतःकोशिकी क्विनोलोन सांद्रता को कम करने का कार्य कर सकते हैं। ग्राम-नेगेटिव बैक्टीरिया में, प्लाज़्मिड-मध्यस्थता प्रतिरोध जीन ऐसे प्रोटीन का उत्पादन कर सकते हैं, जो [[DNA कर्णक]] से बंध सकते हैं, जिससे वे क्विनोलोन के प्रभाव से बच सके. अंततः, DNA कर्णक या [[टोपोइसोमरेज़ IV]] में महत्वपूर्ण स्थलों पर उत्परिवर्तन क्विनोलोन के प्रति अपने बंधकारी घनिष्ठता को कम कर सकते हैं, जिससे दवा का प्रभाव कम हो सकता है।<ref>{{cite journal | author = Robicsek A, Jacoby GA, Hooper DC | title = The worldwide emergence of plasmid-mediated quinolone resistance | journal = The Lancet Infectious Diseases | volume = 6 | issue = 10 | pages = 629–40 | year = 2006 | month = October | pmid = 17008172 | doi = 10.1016/S1473-3099(06)70599-0 | accessdate = 30 जून 2009 }}</ref>
बरसों पहले FDA ने ऐसे नुस्ख़ों के दुरुपयोग से निपटने के लिए पैकेज निविष्टियों के अंदर लिवाक्विन के समुचित उपयोग के बारे में चेतावनी जोड़ी थी। चिकित्सकों को यह सलाह देते हुए कि लिवोफ़्लॉक्सासिन: "... का उपयोग केवल ऐसे उपचार या संक्रमण को रोकने के लिए की जानी चाहिए, जिसमें बैक्टीरिया द्वारा बीमारी का ख़तरा साबित हुआ हो या सुदृढ़ रूप से प्रत्याशित हो...."<ref name="ndafdamar2004" />
"आम तौर पर लिवोफ़्लॉक्सासिन का उपयोग ''केवल'' उन रोगियों में किया जाना चाहिए, जो कम से कम एक पूर्व चिकित्सा में विफल रहे हैं। गंभीर रूप से बीमार मरीज़ और जिन्हें तत्काल अस्पताल में भर्ती कराने की आवश्यकता हो सकती है, उनके लिए आरक्षित"<ref>जिम हूवर, बायर कार्पोरेशन, अलास्का फ़ार्मसी और चिकित्सीय समिति के लिए 19 मार्च 2004</ref> हालांकि गंभीर और प्राणघातक बैक्टीरिया के संक्रमणों के इलाज के लिए बहुत महत्वपूर्ण और जरूरी दवा मानी जाती है, संबद्ध लिवोफ़्लॉक्सासिन नुस्ख़ों का दुरुपयोग अबाधित रहा है, जिसने बैक्टीरिया प्रतिरोध की समस्या में योगदान दिया है। [[ओटिटिस मीडिया]] से पीड़ित बच्चों के साथ हो रहे जैसे [[एंटीबायोटिक के अति प्रयोग]] ने एक सुपर बैक्टीरिया की नस्ल को जन्म दिया है, जो एंटीबायोटिक दवाओं के लिए पूरी तरह से प्रतिरोधी रहे हैं।<ref>{{cite journal | author = Froom J, Culpepper L, Jacobs M | title = Antimicrobials for acute otitis media? A review from the International Primary Care Network | journal = BMJ (Clinical Research Ed.) | volume = 315 | issue = 7100 | pages = 98–102 | year = 1997 | month = July | pmid = 9240050 | pmc = 2127061 | accessdate = 30 जून 2009 }}</ref>
2002 में लिवोफ़्लॉक्सासिन सहित फ़्लोरोक्विनोलोन, वयस्कों के लिए निर्धारित एंटीबायोटिक दवाओं का वर्ग बन गया था। एक अध्ययन के अनुसार, जिसे अंशतः हेल्थकेयर अनुसंधान और गुणवत्ता की एजेंसी द्वारा समर्थित किया गया है, इन नुस्ख़ों में से लगभग आधे (42%) ऐसी स्थितियों के लिए थे, जो FDA द्वारा अनुमोदित नहीं थे।<ref name="Lind">{{cite journal | author = Linder JA, Huang ES, Steinman MA, Gonzales R, Stafford RS | title = Fluoroquinolone prescribing in the United States: 1995 to 2002 | url = https://archive.org/details/sim_american-journal-of-medicine_2005-03_118_3/page/259 | journal = The American Journal of Medicine | volume = 118 | issue = 3 | pages = 259–68 | year = 2005 | month = March | pmid = 15745724 | doi = 10.1016/j.amjmed.2004.09.015 | accessdate = 30 जून 2009 }}</ref><ref>K08 HS14563 और HS11313</ref> इसके अलावा, आम तौर पर उन्हें ऐसी चिकित्सा दशाओं के लिए निर्धारित किया जाता है, जो बैक्टीरिया से संबंधित भी नहीं हैं, जैसे वायरल संक्रमण, या उनके लिए जिनका कोई सिद्ध लाभ मौजूद नहीं है।
== सामाजिक और आर्थिक प्रभाव ==
{{See also|Quinolone#Social and economic impact}}
लिवोफ़्लॉक्सासिन और अन्य फ़्लोरोक्विनोलोन दवाओं के प्रतिकूल औषध प्रतिक्रिया प्रोफ़ाइल ने इससे प्रभावित लोगों के मूल स्तर पर आंदोलन को जन्म दिया, जिसकी बदौलत ब्लैक बॉक्स चेतावनियां और ''प्रिय चिकित्सक पत्र'' के लिए समर्थन जुटाया गया और साथ ही नैदानिक उपयोग से कुछ फ़्लोरोक्विनोलोन दवाओं को हटाने के लिए FDA की याचिका दायर की गई।<ref name="ptrawoafa" /><ref name="pcptftibb" /><ref>{{cite web |url=http://www.careydanis.com/files/ciprocomplaint.pdf |title=In The United States District Court For The District Of Columbia |author=Public Citizen |authorlink=Public Citizen |coauthors=Michael T. Kickpatrick |publisher=Carey & Danis, LLC |location=USA |format=PDF |date=3 जनवरी 2008 |archive-url=http://www.fqresearch.org/fda_suit.htm |archive-date=2008 }}</ref><ref>{{cite web |url=http://www.fda.gov/ohrms/dockets/dockets/05p0205/05p-0205-cp00001-01-vol1.pdf |title=Office Of The Attorney General State Of Illinois, CITIZEN PETITION |author=Lisa Madigan |authorlink=Lisa Madigan |publisher=FDA |location=USA |format=PDF |date=18 मई 2005 |archive-url=https://web.archive.org/web/20110606104933/http://www.fda.gov/ohrms/dockets/dockets/05p0205/05p-0205-cp00001-01-vol1.pdf |archive-date=6 जून 2011 |access-date=6 अप्रैल 2010 |url-status=live }}</ref><ref>{{cite web |url=http://www.fqresearch.org/pdf_files/illinois.pdf |title=Re: Docket No. 2005P-0205 |author=Jane A. Axelrad |publisher=FDA |location=USA |format=PDF |date=16 नवम्बर 2005 |access-date=6 अप्रैल 2010 |archive-url=https://web.archive.org/web/20090309203956/http://fqresearch.org/pdf_files/illinois.pdf |archive-date=9 मार्च 2009 |url-status=live }}</ref><ref>{{cite web |url=http://www.citizen.org/publications/release.cfm?ID=6639 |title=Petition to the Food and Drug Administration to immediately stop the distribution of dangerous, misleading prescription drug information to the public. (HRG Publication #1442) |author=Michael A. Friedman, M.D. |coauthors= |publisher=[[Public Citizen]] |location=USA |date=9 जून 1998 |archive-url=https://web.archive.org/web/20110215224240/http://www.citizen.org/publications/release.cfm?ID=6639 |archive-date=15 फ़रवरी 2011 |access-date=6 अप्रैल 2010 |url-status=dead }}</ref>
=== पेटेंट विस्तार ===
[[बुश प्रशासन]] (2001-2008) के अधीन, पेटेंट विस्तार विधान को क़ानून बनाने के लिए हस्ताक्षर किए गए, जिसने जॉनसन एंड जॉनसन-ऑर्थो मॅकनील और साथ ही अन्य औषध कंपनियों को, बच्चों में उत्पादों की सुरक्षा के प्रति परीक्षण के लिए छह महीने के लिए पेटेंट विस्तार को अनुमत किया। FDA द्वारा हाल ही में लिवाक्विन के लिए बाल-चिकित्सा अनन्यता प्रदान करने के कारण, जॉनसन एंड जॉनसन-ऑर्थो मॅकनील करोड़ों डॉलर कमाने का मौक़ा मिला है, क्योंकि इसकी वजह से 2010 के अंत तक उनके पेटेंट एकाधिकार का विस्तार होगा. जॉनसन एंड जॉनसन-ऑर्थो मॅकनील और अन्य औषध निर्माताओं को उनके पेटेंट पर (बाल-चिकित्सा परीक्षण के आयोजन के लिए) छह महीने का विस्तार मंजूर करते हुए राष्ट्रपति बुश द्वारा हस्ताक्षरित विधान, बायर A.G., जॉनसन एंड जॉनसन-ऑर्थो मॅकनील और अन्य द्वारा कांग्रेस के कई सदस्यों की व्यापक पैरवी के बाद तैयार किया गया था। इस विधान के चार प्रायोजकों में से एक थे [[क्रिस डॉड]] (D-CT), जो उस समय, औषध कंपनियों द्वारा अभियान चंदे के शीर्ष तीन लाभार्थियों में से एक थे। सेनेटर एडवर्ड केनेडी (D-Mass.), जिन्होंने बिल पर न्यायाधिकार वाली समिति की अध्यक्षता कर रहे थे, ने भाषा के प्रति लड़ने से इन्कार कर दिया कि (अगर यह शामिल किया गया होता तो) औषध कंपनी का मुनाफ़ा इन पेटेंट विस्तारों की वजह से कम हो जाता. सेनेटर एडवर्ड कैनेडी द्वारा इस भाषा के शामिल किए जाने के लिए नहीं लड़ने के फैसले के कारणों का ख़ुलासा नहीं किया गया।<ref>{{cite web |url=http://www.citizen.org/print_article.cfm?ID=6435 |title=Patently Offensive: Congress Set to Extend Monopoly Patents for Cipro and Other Drugs |author=Public Citizen |authorlink=Public Citizen |publisher=Citizen.org |location=USA |access-date=6 अप्रैल 2010 |archive-url=https://web.archive.org/web/20100118143646/http://www.citizen.org/print_article.cfm?ID=6435 |archive-date=18 जनवरी 2010 |url-status=dead }}</ref>
लिवोफ़्लॉक्सासिन को शामिल कर इन बाल-चिकित्सा परीक्षणों के परिणामों में सूचित दो बाल-चिकित्सा घातक परिणाम सम्मिलित थे, जिन्हें जांचकर्ताओं ने दवा से संबंधित न होने का निर्धारण किया।<ref name="s2009">{{cite web| url = http://download.veritasmedicine.com/PDF/CR002392_CSR.pdf| title = SYNOPSIS| accessdate = 29 जनवरी 2009| location = USA| archive-url = https://web.archive.org/web/20090309204002/http://download.veritasmedicine.com/PDF/CR002392_CSR.pdf| archive-date = 9 मार्च 2009| url-status = live}}</ref> एक अध्ययन में यह कहा गया कि बाल-चिकित्सा रोगी द्वारा गंभीर पेशीकंकालीय प्रतिकूल घटना अनुभव किए जाने का 3.8% मौक़ा है।<ref>{{cite journal |author=Noel GJ, Bradley JS, Kauffman RE |title=Comparative safety profile of levofloxacin in 2523 children with a focus on four specific musculoskeletal disorders |journal=Pediatr. Infect. Dis. J. |volume=26 |issue=10 |pages=879–91 |year=2007 |month=October |pmid=17901792 |doi=10.1097/INF.0b013e3180cbd382 |url=https://archive.org/details/sim_pediatric-infectious-disease-journal_2007-10_26_10/page/879}}</ref> बहरहाल, लिवोफ़्लॉक्सासिन के इस्तेमाल को शामिल करते हुए दो सबसे हाल ही में बाल-चिकित्सा अध्ययन इंगित करते हैं कि बाल-चिकित्सा मरीज़ द्वारा एक या अधिक प्रतिकूल प्रतिक्रिया अनुभव करने का 50% मौक़ा है, जो लिवोफ़्लॉक्सासिन<ref name="accessdata.fda.gov" /> के लिए NDA (नई दवा अनुप्रयोग) के अंतर्गत पाए गए अध्ययनों के अनुरूप होंगे, जिसने 40% से अधिक ADR दर और असंख्य सूचित अपमृत्यु दर्शाया है। पहले अध्ययन में,<ref name="s2009" /> यह कहा गया कि “सुरक्षा के लिए मूल्यांकित 712 मरीज़ों में से, 275 (52%) लिवोफ़्लॉक्सासिन के उपचार वाले मरीज़ों ने एक या एक से अधिक प्रतिकूल घटनाओं को अनुभव किया।... लिवोफ़्लॉक्सासिन उपचार वाले मरीज़ों में 33 (6%) गंभीर प्रतिकूल घटनाएं सूचित की गईं.... लिवोफ़्लॉक्सासिन उपचार वाले मरीज़ो में दो गंभीर प्रतिकूल घटनाओं के परिणाम घातक रहे." दूसरे अध्ययन में<ref>{{cite web |title=SYNOPSIS |url=http://download.veritasmedicine.com/PDF/CR002389_CSR.pdf |publisher=Veritas Medicine |location=USA |format=PDF |date=30 जून 2004 |accessdate=13 अगस्त 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20090309203958/http://download.veritasmedicine.com/PDF/CR002389_CSR.pdf |archive-date=9 मार्च 2009 |url-status=live }}</ref> यह कहा गया कि "सुरक्षा के लिए मूल्यांकित 204 मरीज़ों में से, 122 ने एक या अधिक प्रतिकूल घटनाओं का अनुभव किया।... बारह मरीज़ों ने (6%) प्रतिकूल घटना के कारण अध्ययन औषध को बंद कर दिया.... सात मरीज़ों ने (3%) 8 गंभीर प्रतिकूल घटनाओं का अनुभव किया। "(लगभग 2007)
=== सामान्य समानक ===
2005 में, फ़ेडरल सर्किट के लिए [[अमेरिकी अपील अदालत]] ने डायची सैंक्यो कं.लि. द्वारा धारित, लिवोफ़्लॉक्सासिन पर अमेरिकी पेटेंट (नं.5,053,407) की वैधता की पुष्टि की. 17 अक्टूबर 2006 को [[डायची सैंक्यो]] ने कनाडा में लिवाक्विन के सामान्य रूपांतरण से संबंधित पेटेंट उल्लंघन मुकदमा जीता. कनाडा की फ़ेडरल अपील कोर्ट ने पिछले अक्टूबर की निचली अदालत के फ़ैसले को सही ठहराया, जिसने डायची सैंक्यो की पेटेंट की वैधता 23 जून 2009 तक स्वीकार की. डायची सैंक्यो और जॉनसन एंड जॉनसन की सहायक कंपनी जैनसेन-ऑर्थो इंक ने, दिसम्बर 2004 में [[नोवोफ़ार्म]] लिमिटेड द्वारा लिवोफ़्लॉक्सासिन के सामान्य रूपांतरण की बिक्री शुरू करने के बाद, टोरंटो के एक संघीय अदालत में मुकदमा दायर किया। टोरंटो में कनाडा की संघीय अदालत ने नोवोफ़ार्म को दवा के सामान्य रूपांतरण की बिक्री को रोकने का आदेश दिया. निर्णय से असंतुष्ट नोवोफ़ार्म ने उच्च न्यायालय में अपील की.<ref name="investing.businessweek.com" /> 7 जून 2007 को कनाडा की संघीय अपील न्यायालय ने इस अपील को खारिज कर दिया. 23 जून 2009 को पेटेंट की समाप्ति तक नोवोफ़ार्म को लिवोफ़्लॉक्सासिन गोलियों के सामान्य रूपांतरण के निर्माण, उपयोग, बिक्री हेतु पेशकश, या कनाडाई बाज़ार में बेचने से रोका गया। नोवोफ़ार्म द्वारा लिवाक्विन का सामान्य रूपांतरण 2004 से कनाडा में बेचा गया था।
== वर्तमान मुकदमेबाज़ी ==
अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा बॉस्टन के एक संघीय अदालत में एक सरकारी शिकायत दायर की गई है (जनवरी 2010) जिसमें जॉनसन एंड जॉनसन पर अवैध रूप से ऑम्नीकेयर को रिश्वत में करोड़ों डॉलर अदा करने का आरोप है, जोकि नर्सिंग होम मरीज़ों के प्रति विशेषज्ञता वाली देश की सबसे बड़ी फार्मेसियों में से एक है। बदले में, ऑम्नीकोयर ने जॉनसन और जॉनसन उत्पादों की अपनी वार्षिक खरीद को लगभग तीन गुणा कर दिया; जिसमें लिवाक्विन भी शामिल है। लिवाक्विन की बिक्री, 1999 और 2004 के बीच पांच वर्ष की अवधि में सिप्रोफ़्लॉक्सासिन जैसे अन्य प्रमुख दवाओं से अधिक हुई. बुजुर्गों में ऐसे उपचार से संबंधित गंभीर प्रतिकूल प्रतिक्रियाओं से संबंधित रिपोर्टों के बावजूद नाटकीय रूप से बिक्री में यह वृद्धि हुई.<ref>सुज़न टोड द्वारा जॉनसन एंड जॉनसन पर फार्मेसी श्रृंखला ऑम्नीकेयर को रिश्वत देने का आरोप/द स्टार लेजर 15 जनवरी 2010, 8:12 PM http://www.nj.com/business/index.ssf/2010/01/johnsonjohnson_accused_of_payi.html {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20100119161819/http://www.nj.com/business/index.ssf/2010/01/johnsonjohnson_accused_of_payi.html |date=19 जनवरी 2010 }}</ref><ref>गायिका नताशा द्वारा जॉनसन एंड जॉनसन पर ड्रग रिश्वतखोरी का आरोप प्रकाशित: 15 जनवरी 2010 http://www.nytimes.com/2010/01/16/business/16drug.html {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20100121101941/http://www.nytimes.com/2010/01/16/business/16drug.html |date=21 जनवरी 2010 }}</ref><ref>http://newsfeedresearcher.com/data/articles_b4/johnson-omnicare-drug.html{{Dead link|date=जनवरी 2022 |bot=InternetArchiveBot }}</ref>
इसके अलावा संप्रति लिवाक्विन से संबंधित अनेक महत्वपूर्ण मामले मिनेसोटा जिले के [[संयुक्त राज्य अमेरिका जिला न्यायालय]] के समक्ष लंबित है। 13 जून 2008 को बहुजिला याचिका (MDL) पर एक न्यायिक पैनल ने प्रतिवादी [[जॉनसन और जॉनसन]]/[[ऑर्थो मॅकनील]] की आपत्ति पर, व्यक्तिगत और सामूहिक कार्वाई मुकदमों के केंद्रीकरण के लिए वादी के प्रावेदन को स्वीकृति दी.<ref name="mnd.uscourts.gov">{{cite web |author=Judge John R. Tunheim |title=Levaquin MDL |url=http://www.mnd.uscourts.gov/MDL-Levaquin/index.shtml |publisher=US Courts |location=USA |accessdate=7 सितंबर 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20091124200542/http://www.mnd.uscourts.gov/MDL-Levaquin/index.shtml |archive-date=24 नवंबर 2009 |url-status=dead }}</ref>
इस आदेश के परिणामस्वरूप, उत्पाद देयता वकील इस समय अतिरिक्त वादियों की तलाश कर रहे हैं, जो इस दवा के शिकार हुए हों. 6 जुलाई 2009 को [[न्यू जर्सी सुप्रीम कोर्ट]] ने लिवाक्विन पर सामूहिक हानि के रूप में मुकदमा निर्दिष्ट और उसे एक अटलांटिक काउंटी, N.J., न्यायाधीश को सौंपा. याचिकाओं में आरोप है कि दवा ने [[स्नायुजाल]] फटन और अन्य स्थाई नुक्सान पहुंचाया है।<ref>{{cite web |url=http://www.law.com/jsp/article.jsp?id=1202431984309 |title=Litigation Over Johnson & Johnson Antibiotic Levaquin Designated N.J. Mass Tort |author=Charles Toutant |publisher=New Jersey Law Journal |date=6 जुलाई 2009 |access-date=6 अप्रैल 2010 |archive-date=28 अगस्त 2021 |archive-url=https://web.archive.org/web/20210828142956/https://www.law.com/?id=1202431984309&slreturn=20210728102956 |url-status=dead }}</ref>
हाल ही में सेंट लुइस में स्थित नेशनल लॉ फ़र्म द्वारा इलिनोइस राज्य न्यायालय में अतिरिक्त मुकदमें दायर किए गए (सितम्बर 2009), जो संप्रति 1,200 संभाव्य दावों की जांच कर रहा है, जिसमें जॉनसन एंड जॉनसन और ऑर्थो-मॅकनील फ़ार्मास्युटिकल इंक. पर आरोप लगाया गया है कि उन्होंने अध्ययन आंकड़ों में जोड़-तोड़ द्वारा मरीज़ों को जोखिम के बारे में चेतावनी देने के प्रारंभिक प्रयासों को विफल किया और उन्होंने चिकित्सकों के सामने जोखिम को महत्व नहीं दिया.<ref>{{cite web |url=http://www.reuters.com/article/pressRelease/idUS199242+03-Sep-2009+BW20090903 |title=Carey and Danis LLC Announces Four Lawsuits against the Makers of Levaquin |author=Carey and Danis LLC |publisher=Reuters |date=3 सितंबर 2009 |access-date=6 अप्रैल 2010 |archive-date=9 सितंबर 2012 |archive-url=https://archive.today/20120909175035/http://www.reuters.com/article/pressRelease/idUS199242+03-Sep-2009+BW20090903 |url-status=dead }}</ref>
विभिन्न निर्माताओं ने इन आरोपों का यह कहते हुए खंडन किया कि उनका यह मानना है कि ये दवाएं सुरक्षित और कारगर एंटीबायोटिक, दोनों हैं, जो न्यूनतम अनुषंगी-प्रभावों के साथ सहनीय हैं, कि ऐसी प्रतिक्रियाएं "दुर्लभ" हैं और अनुभूत जोखिमों की तुलना में ऐसी चिकित्सा के लाभ अधिक हैं।<ref>{{cite web |url=http://www.fqresearch.org/pdf_files/232-1.pdf |title=DEFENDANT JOHNSON & JOHNSON'S ANSWER TO PLAINTIFF'S COMPLAINT |author=The United States District Court District Of Minnesota |location=USA |format=PDF |date=12 मई 2009 }}{{Dead link|date=जून 2020 |bot=InternetArchiveBot }}</ref>
2001 के एंथ्रैक्स भय के दौरान, सिप्रोफ़्लॉक्सासिन दवा लेने वालों द्वारा प्रतिकूल प्रतिक्रिया झेलने वालों द्वारा भी कई सामूहिक कार्रवाई मुकदमे दायर किए गए हैं।<ref>{{cite web |title=Anthrax Scare Leaves Trail of Cipro Victims - Class Actions filed in Two States |url=http://www.sheller.com/NewsDetails.asp?NewsID=72 |publisher=Sheller Ludwig & Sheller |location=USA |date=17 अक्टूबर 2003 |accessdate=9 सितंबर 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20070509175854/http://www.sheller.com/NewsDetails.asp?NewsID=72 |archive-date=9 मई 2007 |url-status=dead }}</ref><ref>{{cite web |title=LEGAL BRIEF of Postal Employees Cases (EEOC, MSPB, District Courts) |url=http://www.lunewsviews.com/legal_briefs_archives.htm#cipro |publisher=Postal Reporter |location=USA |accessdate=9 सितंबर 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20071021073109/http://www.lunewsviews.com/legal_briefs_archives.htm#cipro |archive-date=21 अक्तूबर 2007 |url-status=live }}</ref><ref>{{cite web |author=Charles P. Goodell, Jr |title=Profile |url=http://www.gdldlaw.com/content/bio_goodell.htm |publisher=Goodell, DeVries, Leech & Dann, LLP |location=USA |accessdate=9 सितंबर 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20091224144602/http://www.gdldlaw.com/content/bio_goodell.htm |archive-date=24 दिसंबर 2009 |url-status=dead }}</ref>
== पैकेज निविष्टि लिंक ==
* [https://web.archive.org/web/20100602045827/http://www.accessdata.fda.gov/drugsatfda_docs/label/2008/021721s020_020635s57_020634s52_lbl.pdf Levaquin Package Insert]
* [https://web.archive.org/web/20121016084015/http://www.accessdata.fda.gov/drugsatfda_docs/label/2004/21571_iquix_lbl.pdf Iquix Package Insert]
* [https://web.archive.org/web/20121018203000/http://www.accessdata.fda.gov/drugsatfda_docs/label/2005/021199s004,005lbl.pdf Quixin Package Insert]
== इन्हें भी देखें ==
* [[फ़्लोरोक्विनोलोन विषाक्तता]]
* [[फ़्लोरोक्विनोलोन]]
* [[क्विनोलोन]]
== सन्दर्भ ==
{{Reflist|2}}
== बाहरी कड़ियाँ ==
* {{DMOZ|Society/Issues/Health/Drugs/Medical}}
* [https://web.archive.org/web/20100304200427/http://druginfo.nlm.nih.gov/drugportal/dpdirect.jsp?name=Levofloxacin U.S. National Library of Medicine: Drug Information Portal - Levofloxacin]
{{-}}
{{QuinoloneAntiBiotics}}
[[श्रेणी:क्विनोलोन एंटीबायोटिक्स]]
[[श्रेणी:फ़्लोरोक्विनोलोन एंटीबायोटिक्स]]
[[श्रेणी:एनांटियोप्युर दवाएं]]
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== हिंदी ==
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तुल्यकालिक मोटर
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अनुनाद सिंह
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[[चित्र:Sink-320x240-3x-rot.gif|right|thumb|270px|विद्युत धारा द्वारा त्रिफेजी तुल्यकालिक मोटर के रोटर का निरंतर घूमना]]
[[चित्र:3phase-rmf-60fv2-airopt.gif|right|thumb|200px|त्रिफेजी तुल्यकालिक मोटर के रोटर का घूमना : स्टेटर में एक घूर्णी चुम्बकीय क्षेत्र बनता है जो तीनों वाइण्डिग्स के द्वारा उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र के योग के बराबर होता है।]]
[[चित्र:Torque electric motor AC2.svg|right|thumb|200px|त्रिफेजी तुल्यकालिक मोटर का टॉर्क-स्पीड वक्र]]
'''तुल्यकालिक मोटर''' या '''सिन्क्रोनस मोटर''' [[प्रत्यावर्ती धारा]] से चलने वाली [[विद्युत मोटर]] है। इसका नाम तुल्याकालिका मोटर या सिन्क्रोनस मोटर इस कारण है क्योंकि इसके रोटर की घूर्णन गति ठीक-ठीक उतनी ही होती है जितनी स्टेटर में निर्मित घूर्णी [[चुम्बकीय क्षेत्र]] (rotating magnetic field) की गति होती है। इस मोटर का उपयोग प्रायः किसी लोड को घुमाने में नहीं किया जाता बल्कि [[शक्ति गुणांक]] को सुधारने में किया जाता है।
विशेष स्थितियों में इसका उपयोग लोड चलाने में भी किया जाता है। इसकी क्षमता MVAR मे अभिव्यक्त की जाती है।
सिन्क्रोनस चाल,
:<math>n=\frac{120 \cdot f}{p}</math>
जहाँ:
* f: स्टेटर में लगायी गये प्रत्यावर्ती वोल्टेज की आवृत्ति (Hz)
* p: मोटर के ध्रुवों (पोल्स) की संख्या
* n: रोटर की चाल (चक्कर प्रति मिनट)
== संरचना ==
[[चित्र:Drehstrom-Synchron-Generator.jpg|right|thumb|200px|तुल्यकालिक मोटर के अन्दर की संरचना]]
तुल्यकालिक मोटर के मुख्य भाग हैं- स्टेटर और रोटर। इसकी स्टेटर भी [[प्रेरणी मोटर|प्रेरण मोटर]] के समान ही होती है जिस पर तीन-फेजी वाइण्डिंग की गयी होती है। रोटर पर या तो स्थायी चुम्बक से चुम्बकीय क्षेत्र पैदा किया जाता है या रोटर पर निर्मित विद्युतचुम्बकों में डीसी देकर पैदा किया जाता है। बाहर से इस डीसी को रोटर पर लाने के लिये स्प्लिट रिंग का प्रयोग करना पड़ता है। बड़ी-बड़ी मोटरों में उसी शैफ्ट पर एक डी सी जनित्र बैठा दिया जाता है। इससे प्राप्त डीसी को रोटर पर बने विद्युत्चुम्बकों को दिया जाता है।
रचना के आधार पर रोटर दो तरह के होते हैं-
# सैलिएण्ट रोटर
# बेलनाकार रोटर
== उपयोग ==
=== मोटर के रूप में ===
इसका उपयोग कई उपयोगों में [[मोटर]] के रूप में (विद्युत ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा में बदलने के लिये) किया जाता है। उदाहरण के लिये कुछ आधुनिक विद्युतचालित गाड़ियों में तुल्यकालिक मोटरों का उपयोग किया जा रहा है। वस्तुतः विद्युतचालित गाड़ियों में मुख्यतः तीन प्रकार के मोटरों का उपयोग किया जा रहा है- तुल्यकालिक मोटरें, इंडक्शन मोटरें और [[ब्रशरहित डीसी मोटर]] ।
=== शक्ति गुणांक को उन्नत बनाने के लिये ===
[[चित्र:V curve synchronous motor.svg|right|thumb|200px|तुल्यकालिक मोटर के ''वी-कर्व''' (इनका आकार अंग्रेजी अक्षर '''V''' से मिलते हैं।)]]
तुल्यकालिक मोटर को 'ओवर-इक्साइट' करके चलाने पर इसके द्वारा ली गयी धारा इसके वोल्टेज से अग्रगामी (लीडिंग) होती है। इसी आधार पर यह [[शक्ति गुणांक]] को बढाने के लिये उपयोग में लाया जा सकता है। इसकी सबसे अच्छी बात यह है कि यदि लोड का शक्ति-गुणांक परिवर्तित हो रहा हो तो इस मोटर की फिल्ड-वाइडिंग की धारा को परिवर्तित करके इसके द्वारा ली जाने वाली धारा का शक्ति-गुणांक भी इस प्रकार परिवर्तित किया जा सकता है कि लोड तथा यह तुल्यकालिक मोटर का सम्मिलित शक्ति-गुणांक १ हो जाय।
तुल्यकालिक मोटर का ''वी-वक्र''' (V-Curve) सामने के चित्र में दिखाया गया है। इससे स्पष्ट होता है कि रोटर का फिल्ड इक्साइटेशन बदलने पर इसके स्टेटर से ली गयी धारा का फेज बदलता है।
== स्टार्ट करने की विधियाँ==
* बहुत छोटी तुल्यकालिक मोटरें (जिनके रोटर का [[जड़त्वाघूर्ण]] बहुत कम होता है) सप्लाई लगाते ही चालू हो जाती हैं और बहुत अल्प समय में सिन्क्रोनस स्पीड पर चली जातीं हैं।
* किन्तु मध्यम और बड़े आकार की तुल्यकालिक मोटरें सेल्फ-स्टार्टिंग नहीं होतीं। इन्हें नीचे दी गयीं विभिन्न विधियों से चालू किया जाता है।
:* कुछ बड़ी मोटरें किसी अन्य मोटर से घुमाकर सिन्क्रोनस स्पीड तक ले जायी जातीं है। किन्तु अभी तक इन पर लोड नहीं लगाया जाता। सिन्क्रोनस स्पीड पर पहुंचने पर इनके स्टेटर और रोटर को इक्साइट कर दिया जाता है, पोनी मोटर को बन्द कर दिया जाता है, लोड लगा दिया जाता है।
:* कॉमर्शियल आवृत्ति (जैसे ५० हर्ट्स) पर काम करने वाली बड़ी तुल्यकालिक मोटरों के रोटर में 'स्क्वैरेल केज' वाइण्डिग भी होती है। इसके कारण यह मोटर इण्डक्सन मोटर की तरह काम करते हुए त्वरित होकर सिन्क्रोनस स्पीड के आसपास पहुंचती है। इसके बाद इसकी फिल्ड वाइण्डिंग को इक्साइट किया जाता है और मोटर सिन्क्रोनस स्पीड पकड़ लेती है। इस तरह की मोटरों की रोटर पर लगी 'स्क्वैरेल केज' वाइण्डिग का एक और लाभ भी है- यह चलते समय मोटर के रोटर में होने वाले झटकों (oscillations) को डैम्प करने में यह मदद करता है।
:* आजकल [[चर आवृत्ति ड्राइव|परिवर्ती आवृत्ति ड्राइव]] (VFD) भी आ गयी हैं। इनसे चलने वाली मशीने शून्य चाल से शुरू होकर धीरे-धीरे त्वरित होती हैं। जैसे जैसे चाल बडती जाती है, इनकी आवृति क्रमशः बढायी जाती है। अन्ततः यह अन्तिम आवृत्ति और उसके संगत सिन्क्रोनस स्पीड पर चलने लगती है।
Principal of working of synchronous motor:synchronous motor is use for looking motor. Where two motor indication inducted motor
== तुल्यकालिक मोटरों के प्रकार ==
# तीन फेजी एसी तुल्यकालिक मोटर (Three-phase AC synchronous motors)
# Synchronous brushless wound-rotor doubly fed electric machine
# [[स्टेपर मोटर]] (Stepper motor) - यह सिन्क्रोनस भी हो सकती है और नहीं भी।
# रिलक्टैन्स मोटर (Reluctance motor) - यह सिन्क्रोनस भी हो सकती है और नहीं भी।
==इन्हें भी देखें==
* [[अल्टरनेटर]]
== बाहरी कड़ियाँ ==
* [https://web.archive.org/web/20100726113618/http://www.animations.physics.unsw.edu.au/jw/electricmotors.html#ACmotors Synchronous motor animation]
[[श्रेणी:विद्युत मोटर]]
{{आधार}}
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6547812
2026-05-02T16:18:37Z
अनुनाद सिंह
1634
/* शक्ति गुणांक को उन्नत बनाने के लिये */
6547813
wikitext
text/x-wiki
[[चित्र:Sink-320x240-3x-rot.gif|right|thumb|270px|विद्युत धारा द्वारा त्रिफेजी तुल्यकालिक मोटर के रोटर का निरंतर घूमना]]
[[चित्र:3phase-rmf-60fv2-airopt.gif|right|thumb|200px|त्रिफेजी तुल्यकालिक मोटर के रोटर का घूमना : स्टेटर में एक घूर्णी चुम्बकीय क्षेत्र बनता है जो तीनों वाइण्डिग्स के द्वारा उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र के योग के बराबर होता है।]]
[[चित्र:Torque electric motor AC2.svg|right|thumb|200px|त्रिफेजी तुल्यकालिक मोटर का टॉर्क-स्पीड वक्र]]
'''तुल्यकालिक मोटर''' या '''सिन्क्रोनस मोटर''' [[प्रत्यावर्ती धारा]] से चलने वाली [[विद्युत मोटर]] है। इसका नाम तुल्याकालिका मोटर या सिन्क्रोनस मोटर इस कारण है क्योंकि इसके रोटर की घूर्णन गति ठीक-ठीक उतनी ही होती है जितनी स्टेटर में निर्मित घूर्णी [[चुम्बकीय क्षेत्र]] (rotating magnetic field) की गति होती है। इस मोटर का उपयोग प्रायः किसी लोड को घुमाने में नहीं किया जाता बल्कि [[शक्ति गुणांक]] को सुधारने में किया जाता है।
विशेष स्थितियों में इसका उपयोग लोड चलाने में भी किया जाता है। इसकी क्षमता MVAR मे अभिव्यक्त की जाती है।
सिन्क्रोनस चाल,
:<math>n=\frac{120 \cdot f}{p}</math>
जहाँ:
* f: स्टेटर में लगायी गये प्रत्यावर्ती वोल्टेज की आवृत्ति (Hz)
* p: मोटर के ध्रुवों (पोल्स) की संख्या
* n: रोटर की चाल (चक्कर प्रति मिनट)
== संरचना ==
[[चित्र:Drehstrom-Synchron-Generator.jpg|right|thumb|200px|तुल्यकालिक मोटर के अन्दर की संरचना]]
तुल्यकालिक मोटर के मुख्य भाग हैं- स्टेटर और रोटर। इसकी स्टेटर भी [[प्रेरणी मोटर|प्रेरण मोटर]] के समान ही होती है जिस पर तीन-फेजी वाइण्डिंग की गयी होती है। रोटर पर या तो स्थायी चुम्बक से चुम्बकीय क्षेत्र पैदा किया जाता है या रोटर पर निर्मित विद्युतचुम्बकों में डीसी देकर पैदा किया जाता है। बाहर से इस डीसी को रोटर पर लाने के लिये स्प्लिट रिंग का प्रयोग करना पड़ता है। बड़ी-बड़ी मोटरों में उसी शैफ्ट पर एक डी सी जनित्र बैठा दिया जाता है। इससे प्राप्त डीसी को रोटर पर बने विद्युत्चुम्बकों को दिया जाता है।
रचना के आधार पर रोटर दो तरह के होते हैं-
# सैलिएण्ट रोटर
# बेलनाकार रोटर
== उपयोग ==
=== मोटर के रूप में ===
इसका उपयोग कई उपयोगों में [[मोटर]] के रूप में (विद्युत ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा में बदलने के लिये) किया जाता है। उदाहरण के लिये कुछ आधुनिक विद्युतचालित गाड़ियों में तुल्यकालिक मोटरों का उपयोग किया जा रहा है। वस्तुतः विद्युतचालित गाड़ियों में मुख्यतः तीन प्रकार के मोटरों का उपयोग किया जा रहा है- तुल्यकालिक मोटरें, इंडक्शन मोटरें और [[ब्रशरहित डीसी मोटर]] ।
=== शक्ति गुणांक को उन्नत बनाने के लिये ===
[[चित्र:V curve synchronous motor.svg|right|thumb|200px|तुल्यकालिक मोटर के ''वी-कर्व''' (इनका आकार अंग्रेजी अक्षर '''V''' से मिलते हैं।)]]
तुल्यकालिक मोटर को 'ओवर-इक्साइट' करके चलाने पर इसके द्वारा ली गयी धारा इसके वोल्टेज से अग्रगामी (लीडिंग) होती है। इसी आधार पर यह [[शक्ति गुणांक]] को बढाने के लिये उपयोग में लाया जा सकता है। इसकी सबसे अच्छी बात यह है कि यदि लोड का शक्ति-गुणांक परिवर्तित हो रहा हो तो इस मोटर की फिल्ड-वाइडिंग की धारा को परिवर्तित करके इसके द्वारा ली जाने वाली धारा का शक्ति-गुणांक भी इस प्रकार परिवर्तित किया जा सकता है कि लोड तथा यह तुल्यकालिक मोटर का सम्मिलित शक्ति-गुणांक १ हो जाय।
तुल्यकालिक मोटर का '''वी-वक्र''' (V-Curve) सामने के चित्र में दिखाया गया है। इससे स्पष्ट होता है कि रोटर का फिल्ड इक्साइटेशन बदलने पर इसके स्टेटर से ली गयी धारा का फेज बदलता है।
== स्टार्ट करने की विधियाँ==
* बहुत छोटी तुल्यकालिक मोटरें (जिनके रोटर का [[जड़त्वाघूर्ण]] बहुत कम होता है) सप्लाई लगाते ही चालू हो जाती हैं और बहुत अल्प समय में सिन्क्रोनस स्पीड पर चली जातीं हैं।
* किन्तु मध्यम और बड़े आकार की तुल्यकालिक मोटरें सेल्फ-स्टार्टिंग नहीं होतीं। इन्हें नीचे दी गयीं विभिन्न विधियों से चालू किया जाता है।
:* कुछ बड़ी मोटरें किसी अन्य मोटर से घुमाकर सिन्क्रोनस स्पीड तक ले जायी जातीं है। किन्तु अभी तक इन पर लोड नहीं लगाया जाता। सिन्क्रोनस स्पीड पर पहुंचने पर इनके स्टेटर और रोटर को इक्साइट कर दिया जाता है, पोनी मोटर को बन्द कर दिया जाता है, लोड लगा दिया जाता है।
:* कॉमर्शियल आवृत्ति (जैसे ५० हर्ट्स) पर काम करने वाली बड़ी तुल्यकालिक मोटरों के रोटर में 'स्क्वैरेल केज' वाइण्डिग भी होती है। इसके कारण यह मोटर इण्डक्सन मोटर की तरह काम करते हुए त्वरित होकर सिन्क्रोनस स्पीड के आसपास पहुंचती है। इसके बाद इसकी फिल्ड वाइण्डिंग को इक्साइट किया जाता है और मोटर सिन्क्रोनस स्पीड पकड़ लेती है। इस तरह की मोटरों की रोटर पर लगी 'स्क्वैरेल केज' वाइण्डिग का एक और लाभ भी है- यह चलते समय मोटर के रोटर में होने वाले झटकों (oscillations) को डैम्प करने में यह मदद करता है।
:* आजकल [[चर आवृत्ति ड्राइव|परिवर्ती आवृत्ति ड्राइव]] (VFD) भी आ गयी हैं। इनसे चलने वाली मशीने शून्य चाल से शुरू होकर धीरे-धीरे त्वरित होती हैं। जैसे जैसे चाल बडती जाती है, इनकी आवृति क्रमशः बढायी जाती है। अन्ततः यह अन्तिम आवृत्ति और उसके संगत सिन्क्रोनस स्पीड पर चलने लगती है।
Principal of working of synchronous motor:synchronous motor is use for looking motor. Where two motor indication inducted motor
== तुल्यकालिक मोटरों के प्रकार ==
# तीन फेजी एसी तुल्यकालिक मोटर (Three-phase AC synchronous motors)
# Synchronous brushless wound-rotor doubly fed electric machine
# [[स्टेपर मोटर]] (Stepper motor) - यह सिन्क्रोनस भी हो सकती है और नहीं भी।
# रिलक्टैन्स मोटर (Reluctance motor) - यह सिन्क्रोनस भी हो सकती है और नहीं भी।
==इन्हें भी देखें==
* [[अल्टरनेटर]]
== बाहरी कड़ियाँ ==
* [https://web.archive.org/web/20100726113618/http://www.animations.physics.unsw.edu.au/jw/electricmotors.html#ACmotors Synchronous motor animation]
[[श्रेणी:विद्युत मोटर]]
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2026-05-02T16:20:15Z
अनुनाद सिंह
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/* शक्ति गुणांक को उन्नत बनाने के लिये */
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wikitext
text/x-wiki
[[चित्र:Sink-320x240-3x-rot.gif|right|thumb|270px|विद्युत धारा द्वारा त्रिफेजी तुल्यकालिक मोटर के रोटर का निरंतर घूमना]]
[[चित्र:3phase-rmf-60fv2-airopt.gif|right|thumb|200px|त्रिफेजी तुल्यकालिक मोटर के रोटर का घूमना : स्टेटर में एक घूर्णी चुम्बकीय क्षेत्र बनता है जो तीनों वाइण्डिग्स के द्वारा उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र के योग के बराबर होता है।]]
[[चित्र:Torque electric motor AC2.svg|right|thumb|200px|त्रिफेजी तुल्यकालिक मोटर का टॉर्क-स्पीड वक्र]]
'''तुल्यकालिक मोटर''' या '''सिन्क्रोनस मोटर''' [[प्रत्यावर्ती धारा]] से चलने वाली [[विद्युत मोटर]] है। इसका नाम तुल्याकालिका मोटर या सिन्क्रोनस मोटर इस कारण है क्योंकि इसके रोटर की घूर्णन गति ठीक-ठीक उतनी ही होती है जितनी स्टेटर में निर्मित घूर्णी [[चुम्बकीय क्षेत्र]] (rotating magnetic field) की गति होती है। इस मोटर का उपयोग प्रायः किसी लोड को घुमाने में नहीं किया जाता बल्कि [[शक्ति गुणांक]] को सुधारने में किया जाता है।
विशेष स्थितियों में इसका उपयोग लोड चलाने में भी किया जाता है। इसकी क्षमता MVAR मे अभिव्यक्त की जाती है।
सिन्क्रोनस चाल,
:<math>n=\frac{120 \cdot f}{p}</math>
जहाँ:
* f: स्टेटर में लगायी गये प्रत्यावर्ती वोल्टेज की आवृत्ति (Hz)
* p: मोटर के ध्रुवों (पोल्स) की संख्या
* n: रोटर की चाल (चक्कर प्रति मिनट)
== संरचना ==
[[चित्र:Drehstrom-Synchron-Generator.jpg|right|thumb|200px|तुल्यकालिक मोटर के अन्दर की संरचना]]
तुल्यकालिक मोटर के मुख्य भाग हैं- स्टेटर और रोटर। इसकी स्टेटर भी [[प्रेरणी मोटर|प्रेरण मोटर]] के समान ही होती है जिस पर तीन-फेजी वाइण्डिंग की गयी होती है। रोटर पर या तो स्थायी चुम्बक से चुम्बकीय क्षेत्र पैदा किया जाता है या रोटर पर निर्मित विद्युतचुम्बकों में डीसी देकर पैदा किया जाता है। बाहर से इस डीसी को रोटर पर लाने के लिये स्प्लिट रिंग का प्रयोग करना पड़ता है। बड़ी-बड़ी मोटरों में उसी शैफ्ट पर एक डी सी जनित्र बैठा दिया जाता है। इससे प्राप्त डीसी को रोटर पर बने विद्युत्चुम्बकों को दिया जाता है।
रचना के आधार पर रोटर दो तरह के होते हैं-
# सैलिएण्ट रोटर
# बेलनाकार रोटर
== उपयोग ==
=== मोटर के रूप में ===
इसका उपयोग कई उपयोगों में [[मोटर]] के रूप में (विद्युत ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा में बदलने के लिये) किया जाता है। उदाहरण के लिये कुछ आधुनिक विद्युतचालित गाड़ियों में तुल्यकालिक मोटरों का उपयोग किया जा रहा है। वस्तुतः विद्युतचालित गाड़ियों में मुख्यतः तीन प्रकार के मोटरों का उपयोग किया जा रहा है- तुल्यकालिक मोटरें, इंडक्शन मोटरें और [[ब्रशरहित डीसी मोटर]] ।
=== शक्ति गुणांक को उन्नत बनाने के लिये ===
[[चित्र:V curve synchronous motor.svg|right|thumb|200px|तुल्यकालिक मोटर के '''वी-कर्व''' (इनका आकार अंग्रेजी अक्षर '''V''' से मिलते हैं।)]]
तुल्यकालिक मोटर को 'ओवर-इक्साइट' करके चलाने पर इसके द्वारा ली गयी धारा इसके वोल्टेज से अग्रगामी (लीडिंग) होती है। इसी आधार पर यह [[शक्ति गुणांक]] को बढाने के लिये उपयोग में लाया जा सकता है। इसकी सबसे अच्छी बात यह है कि यदि लोड का शक्ति-गुणांक परिवर्तित हो रहा हो तो इस मोटर की फिल्ड-वाइडिंग की धारा को परिवर्तित करके इसके द्वारा ली जाने वाली धारा का शक्ति-गुणांक भी इस प्रकार परिवर्तित किया जा सकता है कि लोड तथा यह तुल्यकालिक मोटर का सम्मिलित शक्ति-गुणांक १ हो जाय।
तुल्यकालिक मोटर का '''वी-वक्र''' (V-Curve) सामने के चित्र में दिखाया गया है। इससे स्पष्ट होता है कि रोटर का फिल्ड इक्साइटेशन बदलने पर इसके स्टेटर से ली गयी धारा का फेज बदलता है।
== स्टार्ट करने की विधियाँ==
* बहुत छोटी तुल्यकालिक मोटरें (जिनके रोटर का [[जड़त्वाघूर्ण]] बहुत कम होता है) सप्लाई लगाते ही चालू हो जाती हैं और बहुत अल्प समय में सिन्क्रोनस स्पीड पर चली जातीं हैं।
* किन्तु मध्यम और बड़े आकार की तुल्यकालिक मोटरें सेल्फ-स्टार्टिंग नहीं होतीं। इन्हें नीचे दी गयीं विभिन्न विधियों से चालू किया जाता है।
:* कुछ बड़ी मोटरें किसी अन्य मोटर से घुमाकर सिन्क्रोनस स्पीड तक ले जायी जातीं है। किन्तु अभी तक इन पर लोड नहीं लगाया जाता। सिन्क्रोनस स्पीड पर पहुंचने पर इनके स्टेटर और रोटर को इक्साइट कर दिया जाता है, पोनी मोटर को बन्द कर दिया जाता है, लोड लगा दिया जाता है।
:* कॉमर्शियल आवृत्ति (जैसे ५० हर्ट्स) पर काम करने वाली बड़ी तुल्यकालिक मोटरों के रोटर में 'स्क्वैरेल केज' वाइण्डिग भी होती है। इसके कारण यह मोटर इण्डक्सन मोटर की तरह काम करते हुए त्वरित होकर सिन्क्रोनस स्पीड के आसपास पहुंचती है। इसके बाद इसकी फिल्ड वाइण्डिंग को इक्साइट किया जाता है और मोटर सिन्क्रोनस स्पीड पकड़ लेती है। इस तरह की मोटरों की रोटर पर लगी 'स्क्वैरेल केज' वाइण्डिग का एक और लाभ भी है- यह चलते समय मोटर के रोटर में होने वाले झटकों (oscillations) को डैम्प करने में यह मदद करता है।
:* आजकल [[चर आवृत्ति ड्राइव|परिवर्ती आवृत्ति ड्राइव]] (VFD) भी आ गयी हैं। इनसे चलने वाली मशीने शून्य चाल से शुरू होकर धीरे-धीरे त्वरित होती हैं। जैसे जैसे चाल बडती जाती है, इनकी आवृति क्रमशः बढायी जाती है। अन्ततः यह अन्तिम आवृत्ति और उसके संगत सिन्क्रोनस स्पीड पर चलने लगती है।
Principal of working of synchronous motor:synchronous motor is use for looking motor. Where two motor indication inducted motor
== तुल्यकालिक मोटरों के प्रकार ==
# तीन फेजी एसी तुल्यकालिक मोटर (Three-phase AC synchronous motors)
# Synchronous brushless wound-rotor doubly fed electric machine
# [[स्टेपर मोटर]] (Stepper motor) - यह सिन्क्रोनस भी हो सकती है और नहीं भी।
# रिलक्टैन्स मोटर (Reluctance motor) - यह सिन्क्रोनस भी हो सकती है और नहीं भी।
==इन्हें भी देखें==
* [[अल्टरनेटर]]
== बाहरी कड़ियाँ ==
* [https://web.archive.org/web/20100726113618/http://www.animations.physics.unsw.edu.au/jw/electricmotors.html#ACmotors Synchronous motor animation]
[[श्रेणी:विद्युत मोटर]]
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अनुनाद सिंह
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/* स्टार्ट करने की विधियाँ */
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wikitext
text/x-wiki
[[चित्र:Sink-320x240-3x-rot.gif|right|thumb|270px|विद्युत धारा द्वारा त्रिफेजी तुल्यकालिक मोटर के रोटर का निरंतर घूमना]]
[[चित्र:3phase-rmf-60fv2-airopt.gif|right|thumb|200px|त्रिफेजी तुल्यकालिक मोटर के रोटर का घूमना : स्टेटर में एक घूर्णी चुम्बकीय क्षेत्र बनता है जो तीनों वाइण्डिग्स के द्वारा उत्पन्न चुम्बकीय क्षेत्र के योग के बराबर होता है।]]
[[चित्र:Torque electric motor AC2.svg|right|thumb|200px|त्रिफेजी तुल्यकालिक मोटर का टॉर्क-स्पीड वक्र]]
'''तुल्यकालिक मोटर''' या '''सिन्क्रोनस मोटर''' [[प्रत्यावर्ती धारा]] से चलने वाली [[विद्युत मोटर]] है। इसका नाम तुल्याकालिका मोटर या सिन्क्रोनस मोटर इस कारण है क्योंकि इसके रोटर की घूर्णन गति ठीक-ठीक उतनी ही होती है जितनी स्टेटर में निर्मित घूर्णी [[चुम्बकीय क्षेत्र]] (rotating magnetic field) की गति होती है। इस मोटर का उपयोग प्रायः किसी लोड को घुमाने में नहीं किया जाता बल्कि [[शक्ति गुणांक]] को सुधारने में किया जाता है।
विशेष स्थितियों में इसका उपयोग लोड चलाने में भी किया जाता है। इसकी क्षमता MVAR मे अभिव्यक्त की जाती है।
सिन्क्रोनस चाल,
:<math>n=\frac{120 \cdot f}{p}</math>
जहाँ:
* f: स्टेटर में लगायी गये प्रत्यावर्ती वोल्टेज की आवृत्ति (Hz)
* p: मोटर के ध्रुवों (पोल्स) की संख्या
* n: रोटर की चाल (चक्कर प्रति मिनट)
== संरचना ==
[[चित्र:Drehstrom-Synchron-Generator.jpg|right|thumb|200px|तुल्यकालिक मोटर के अन्दर की संरचना]]
तुल्यकालिक मोटर के मुख्य भाग हैं- स्टेटर और रोटर। इसकी स्टेटर भी [[प्रेरणी मोटर|प्रेरण मोटर]] के समान ही होती है जिस पर तीन-फेजी वाइण्डिंग की गयी होती है। रोटर पर या तो स्थायी चुम्बक से चुम्बकीय क्षेत्र पैदा किया जाता है या रोटर पर निर्मित विद्युतचुम्बकों में डीसी देकर पैदा किया जाता है। बाहर से इस डीसी को रोटर पर लाने के लिये स्प्लिट रिंग का प्रयोग करना पड़ता है। बड़ी-बड़ी मोटरों में उसी शैफ्ट पर एक डी सी जनित्र बैठा दिया जाता है। इससे प्राप्त डीसी को रोटर पर बने विद्युत्चुम्बकों को दिया जाता है।
रचना के आधार पर रोटर दो तरह के होते हैं-
# सैलिएण्ट रोटर
# बेलनाकार रोटर
== उपयोग ==
=== मोटर के रूप में ===
इसका उपयोग कई उपयोगों में [[मोटर]] के रूप में (विद्युत ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा में बदलने के लिये) किया जाता है। उदाहरण के लिये कुछ आधुनिक विद्युतचालित गाड़ियों में तुल्यकालिक मोटरों का उपयोग किया जा रहा है। वस्तुतः विद्युतचालित गाड़ियों में मुख्यतः तीन प्रकार के मोटरों का उपयोग किया जा रहा है- तुल्यकालिक मोटरें, इंडक्शन मोटरें और [[ब्रशरहित डीसी मोटर]] ।
=== शक्ति गुणांक को उन्नत बनाने के लिये ===
[[चित्र:V curve synchronous motor.svg|right|thumb|200px|तुल्यकालिक मोटर के '''वी-कर्व''' (इनका आकार अंग्रेजी अक्षर '''V''' से मिलते हैं।)]]
तुल्यकालिक मोटर को 'ओवर-इक्साइट' करके चलाने पर इसके द्वारा ली गयी धारा इसके वोल्टेज से अग्रगामी (लीडिंग) होती है। इसी आधार पर यह [[शक्ति गुणांक]] को बढाने के लिये उपयोग में लाया जा सकता है। इसकी सबसे अच्छी बात यह है कि यदि लोड का शक्ति-गुणांक परिवर्तित हो रहा हो तो इस मोटर की फिल्ड-वाइडिंग की धारा को परिवर्तित करके इसके द्वारा ली जाने वाली धारा का शक्ति-गुणांक भी इस प्रकार परिवर्तित किया जा सकता है कि लोड तथा यह तुल्यकालिक मोटर का सम्मिलित शक्ति-गुणांक १ हो जाय।
तुल्यकालिक मोटर का '''वी-वक्र''' (V-Curve) सामने के चित्र में दिखाया गया है। इससे स्पष्ट होता है कि रोटर का फिल्ड इक्साइटेशन बदलने पर इसके स्टेटर से ली गयी धारा का फेज बदलता है।
== स्टार्ट करने की विधियाँ==
* बहुत छोटी तुल्यकालिक मोटरें (जिनके रोटर का [[जड़त्वाघूर्ण]] बहुत कम होता है) सप्लाई लगाते ही चालू हो जाती हैं और बहुत अल्प समय में सिन्क्रोनस स्पीड पर चली जातीं हैं।
* किन्तु मध्यम और बड़े आकार की तुल्यकालिक मोटरें सेल्फ-स्टार्टिंग नहीं होतीं। इन्हें नीचे दी गयीं विभिन्न विधियों से चालू किया जाता है।
:* कुछ बड़ी मोटरें किसी अन्य मोटर से घुमाकर सिन्क्रोनस स्पीड तक ले जायी जातीं है। किन्तु अभी तक इन पर लोड नहीं लगाया जाता। सिन्क्रोनस स्पीड पर पहुंचने पर इनके स्टेटर और रोटर को इक्साइट कर दिया जाता है, पोनी मोटर को बन्द कर दिया जाता है, लोड लगा दिया जाता है।
:* कॉमर्शियल आवृत्ति (जैसे ५० हर्ट्स) पर काम करने वाली बड़ी तुल्यकालिक मोटरों के रोटर में 'स्क्वैरेल केज' वाइण्डिग भी होती है। इसके कारण यह मोटर इण्डक्सन मोटर की तरह काम करते हुए त्वरित होकर सिन्क्रोनस स्पीड के आसपास पहुंचती है। इसके बाद इसकी फिल्ड वाइण्डिंग को इक्साइट किया जाता है और मोटर सिन्क्रोनस स्पीड पकड़ लेती है। इस तरह की मोटरों की रोटर पर लगी 'स्क्वैरेल केज' वाइण्डिग का एक और लाभ भी है- यह चलते समय मोटर के रोटर में होने वाले झटकों (oscillations) को डैम्प करने में यह मदद करता है।
:* आजकल [[चर आवृत्ति ड्राइव|परिवर्ती आवृत्ति ड्राइव]] (VFD) भी आ गयी हैं। इनसे चलने वाली मशीने शून्य चाल से शुरू होकर धीरे-धीरे त्वरित होती हैं। जैसे जैसे चाल बडती जाती है, इनकी आवृति क्रमशः बढायी जाती है। अन्ततः यह अन्तिम आवृत्ति और उसके संगत सिन्क्रोनस स्पीड पर चलने लगती है।
== तुल्यकालिक मोटरों के प्रकार ==
# तीन फेजी एसी तुल्यकालिक मोटर (Three-phase AC synchronous motors)
# Synchronous brushless wound-rotor doubly fed electric machine
# [[स्टेपर मोटर]] (Stepper motor) - यह सिन्क्रोनस भी हो सकती है और नहीं भी।
# रिलक्टैन्स मोटर (Reluctance motor) - यह सिन्क्रोनस भी हो सकती है और नहीं भी।
==इन्हें भी देखें==
* [[अल्टरनेटर]]
== बाहरी कड़ियाँ ==
* [https://web.archive.org/web/20100726113618/http://www.animations.physics.unsw.edu.au/jw/electricmotors.html#ACmotors Synchronous motor animation]
[[श्रेणी:विद्युत मोटर]]
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| nickname = <!-- do not add nicknames without reviewing discussion on talk page first --> "रोज़ सिटी," "स्टम्पटाउन," "[[पी-टाउन]]," "[[पीडीएक्स]]", और "लिटिल बेरूत"<ref name="Oregonian1">{{cite news
| last = मैककॉल
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}}</ref> पूरी सूची के लिए देखें [[:en:Nicknames of Portland, Oregon]].
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| leader_name = टेड व्हीलर<ref>{{cite web |url=https://www.portland.gov/wheeler |title=Mayor Ted Wheeler - City of Portland, Oregon Portland.gov|accessdate=26 नवम्बर 2021 |year=2021|publisher=पोर्टलैंड शहर, ओरेगॉन}}</ref>
| leader_title1 = Commissioners
| leader_name1 = [[Randy Leonard]]<br />[[Dan Saltzman]]<br />[[Nick Fish]]<br />[[Amanda Fritz]]
| leader_title2 = Auditor
| leader_name2 = [[LaVonne Griffin-Valade]]
| established_title = [[नगरपालिका|स्थापना]]
| established_title2 = [[नगरपालिका|बनाई गई]]
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| timezone = [[पैसिफिक मानक समय|पीएसटी]]
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}}
'''पोर्टलैंड''', [[पश्चिमोत्तर]] [[संयुक्त राज्य अमेरिका]] में [[ऑरेगॉन]] राज्य की [[विल्मेट]] और [[कोलंबिया]] नदियों के [[संगम]] के पास स्थित एक शहर है।
जुलाई 2009 तक, इसकी अनुमानित आबादी 582,130 थी और यह संयुक्त राज्य अमेरिका का [[सबसे अधिक आबादी वाला 29वां]] राज्य है।<ref name="prc">{{cite web|url=http://www.pdx.edu/sites/www.pdx.edu.prc/files/media_assets/2009CertPopEst_web3.pdf|publisher=Portland State University|title=Certified Population Estimates for Oregon and Oregon Counties|accessdate=31 जनवरी 2010|archive-date=27 सितंबर 2011|archive-url=https://web.archive.org/web/20110927063750/http://www.pdx.edu/sites/www.pdx.edu.prc/files/media_assets/2009CertPopEst_web3.pdf|url-status=dead}}</ref>
इसे दुनिया में दूसरा और संयुक्त राज्य अमेरिका में सबसे अधिक [[पर्यावरण के अनुकूल]] या "ग्रीन" शहर माना गया है।<ref>{{cite web |url=http://www.grist.org/news/maindish/2007/07/19/cities/ |title=15 Green Cities |accessdate=8 जुलाई 2008 |author=Kate Sheppard |date=19 जुलाई 2007 |publisher=Environmental News and Commentary }}</ref>
पोर्टलैंड ऑरेगॉन का सबसे अधिक आबादी वाला शहर है और [[सिएटल]], [[वाशिंगटन]] और [[वैंकूवर]], [[ब्रिटिश कोलंबिया]] के बाद [[पश्चिमोत्तर प्रशांत महासागर]] का तीसरा सबसे अधिक आबादी वाला शहर है।
जुलाई 2006 तक, [[संयुक्त राज्य अमेरिका]] के [[23वें सबसे अधिक आबादी]] वाले [[पोर्टलैंड महानगरीय क्षेत्र]] [[(एमएसए)]] में लगभग 20 लाख लोग रहते थे।<ref>{{cite web|title=JULY 1, 2006 Population estimates for Metropolitan Combined Statistical Areas| publisher=U.S. Census Bureau|url=http://www.census.gov/population/www/estimates/metro_general/2006/CBSA-EST2006-01.csv|format=[[csv]]|accessdate=19 अक्टूबर 2007}}</ref>
पोर्टलैंड को 1851 में शामिल किया गया और यह [[मल्टनोमाह काउंटी]] (मल्टनोमाह County) की [[काउंटी सीट]] है।{{GR|6}}
शहर पश्चिम में थोड़ा [[वाशिंगटन काउंटी]] और दक्षिण में [[क्लैकामस काउंटी]] (क्लैकामस County) में फैला हुआ है।
यह एक [[महापौर]] और अन्य चार आयुक्तों की अध्यक्षता वाली [[आयोग-आधारित सरकार]] द्वारा शासित है।
यह शहर और क्षेत्र, सुदृढ़ भूमि-उपयोग योजना<ref name="smartplan" /> और [[मेट्रो]] द्वारा समर्थित, [[लाइट रेल]] में किए गए निवेश के लिए प्रसिद्ध एक विशिष्ट क्षेत्रीय सरकार है।
पोर्टलैंड बड़ी संख्या में अपनी [[माइक्रो मद्यनिर्माणशाला]] और [[माइक्रो भट्टियों]] तथा [[कॉफ़ी]] के शौक के लिए जाना जाता है।
यह [[ट्रेल ब्लेज़र्स]] [[एनबीए]] टीम का भी घर है।
पोर्टलैंड [[पश्चिम समुद्री तटीय]] [[जलवायु]] क्षेत्र में पड़ता है जहां गर्म, शुष्क गर्मियां और बरसातें किन्तु समशीतोष्ण सर्दियां होती हैं।
यह मौसम गुलाब की खेती के लिए आदर्श है और एक सदी से भी अधिक समय से पोर्टलैंड को "[[गुलाबों]] का शहर"<ref>{{cite web |url=http://www.frommers.com/articles/1721.html |title=Portland, Oregon: Green City of Roses | Frommers.com |publisher=Frommers.com |date= |accessdate=20 अक्टूबर 2008 |archive-date=7 जनवरी 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20090107121014/http://www.frommers.com/articles/1721.html |url-status=dead }}</ref><ref>{{cite web |url=http://encarta.msn.com/encyclopedia_761561539/portland.html |title=Portland - MSN Encarta |publisher=Encarta.msn.com |date= |accessdate=20 अक्टूबर 2008 |archive-date=29 अक्तूबर 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20091029125320/http://encarta.msn.com/encyclopedia_761561539/Portland.html |url-status=dead }}</ref> के रूप में जाना जाता है, यहां कई [[गुलाब के उद्यान]] हैं जिनमें सबसे प्रमुख [[अंतरराष्ट्रीय गुलाब टेस्ट गार्डन]] है।
== इतिहास ==
[[चित्र:Portland Oregon in 1890.jpg|thumb|left|1890 में पोर्टलैंड]]
{{Main|History of Portland, Oregon}}
पोर्टलैंड का प्रारंभ [[ऑरेगॉन सिटी]] और [[फ़ोर्ट वैंकूवर]] के बीच आधे रास्ते पर विल्मेट के तट पर स्थित "द क्लियरिंग"<ref>{{cite journal |quotes=no |last=Orloff |first=Chet |year=2004 |title=Maintaining Eden: John Charles Olmsted and the Portland Park System |journal=Yearbook of the Association of Pacific Coast Geographers |volume=66 |pages=114–119 |doi=10.1353/pcg.2004.0006 }}</ref> के रूप में जानी जाने वाली जगह के रूप में हुआ।
1843 में, [[विलियम ओवरटॉन]] ने इस जगह में बहुत वाणिज्यिक क्षमता देखी लेकिन उसके पास ज़मीन का दावा करने के लिए आवश्यक धनराशि न थी।
उसने अपने भागीदार [[बॉस्टन, मैसाचुसेट्स]] के [[आसा लवजॉय]] के साथ एक सौदा किया: [[25¢]] के लिए ओवरटॉन 640 एकड़ (2.6 km²) ज़मीन का दावेदार होगा.
बाद में ओवरटॉन ने अपना आधा हिस्सा [[पोर्टलैंड, मेन]] के [[फ्रांसिस डब्ल्यू. पेटीग्रोव]] को बेच दिया.
पेटीग्रोव और लवजॉय दोनो ही अपने अपने गृहनगर के नाम से नए शहर का नाम रखना चाहते थे; फैसला हुआ [[सिक्का उछालकर]] जिसमें तीन बार में से दो बार पेटीग्रोव की जीत हुई.<ref>{{cite web | title = Portland: The Town that was Almost Boston | publisher = Portland Oregon Visitors Association | url = http://www.travelportland.com/media/history.html | accessdate = 18 नवंबर 2006 | archive-date = 1 जनवरी 2011 | archive-url = https://web.archive.org/web/20110101150705/http://www.travelportland.com/media/history.html | url-status = dead }}</ref>
इस निर्णय के लिए प्रयोग किया गया सिक्का जिसे अब [[पोर्टलैंड पेनी]] के नाम से जाना जाता है, [[ऑरेगॉन ऐतिहासिक सोसायटी]] के मुख्यालय में प्रदर्शित है।
8 फ़रवरी 1851 को समावेश के समय पोर्टलैंड में थे 800 से अधिक निवासी<ref name="Gibson">गिब्सन, कैम्पबेल (जून 1998). [http://www.census.gov/population/www/documentation/twps0027.html Population of the 100 Largest Cities and Other Urban Places in the United States: 1790 to 1990]. ''अमेरिकी जनगणना ब्यूरो - जनसंख्या प्रभाग'' .</ref>, एक भाप चीरघर, एक [[लॉग केबिन]] होटल और एक अखबार, ''[[वीकली ऑरेगॉनियन]]'' .
1879 तक जनसंख्या बढ़कर 17,500 हो गई थी।<ref>{{cite book|last=Loy|first=William G.|author2=Stuart Allan, Aileen R. Buckley, James E. Meecham|title= Atlas of Oregon|publisher=[[University of Oregon Press]]|year=2001|pages=32–33|isbn=0-87114-102-7}}</ref> शहर का 1891 में एल्बिना और पूर्व पोर्टलैंड के साथ और 1915 में लिंटन और सेंट जॉन्स के साथ विलय हुआ।
पोर्टलैंड की अवस्थिति, विल्मेट और कोलंबिया नदियों के माध्यम से [[प्रशांत महासागर]] और
वेस्ट हिल्स (वर्तमान में [[यू.एस. मार्ग 26]]) में "ग्रेट प्लैंक रोड" के बीच से एक घाटी के
माध्यम से कृषि [[टुएलटिन वैली]] दोनों ही पहुंच में होने से इसे पड़ोसी बंदरगाहों अपेक्षा लाभ हुआ और यह तेज़ी से विकसित हुआ।<ref>"सिटी कीप्स लाइवली पल्स." (स्पेन्सर हेन्ज़, ''[[द ऑरेगॉनियन]]'', 23 जनवरी 2001)</ref>
19वीं सदी में अधिकतर 1890 के दशक तक यह उत्तर पश्चिमी प्रशांत की प्रमुख बंदरगाह रहा, जब [[सिएटल]] की गहरे पानी वाली बंदरगाह को रेलमार्ग द्वारा मुख्य भूमि से जोड़ा गया तो कोलंबिया रीवर के दुष्कर मार्ग से बचकर अंतर्देशीय मार्ग सुलभ हुआ।
=== उपनाम ===
{{Main|Nicknames of Portland, Oregon}}
पोर्टलैंड का सबसे अधिक प्रचलित उपनाम है ''गुलाबों का शहर''<ref name="cityrecorder">[http://www.portlandonline.com/auditor/index.cfm?a=jbgc&c=cheid City Flower] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20090423075247/http://www.portlandonline.com/auditor/index.cfm?a=jbgc&c=cheid |date=23 अप्रैल 2009 }}. ''कार्यालय शहर पोर्टलैंड के लेखा परीक्षक - सिटी डिवीजन रिकॉर्डर'' .</ref> और 2003 में यह शहर का आधिकारिक उपनाम बन गया।<ref name="cityrecorder"/>
अन्य उपनामों में शामिल हैं, ''[[स्टम्पटाऊन]]'',<ref name="endoftheoregontrail">{{cite web | publisher = End of the Oregon Trail Interpretive Center | title = From Robin's Nest to Stumptown | url = http://www.endoftheoregontrail.org/road2oregon/sa33pdx.html | accessdate = 7 नवंबर 2006 | archive-date = 1 सितंबर 2000 | archive-url = https://archive.today/20000901050119/http://www.endoftheoregontrail.org/road2oregon/sa33pdx.html | url-status = dead }}</ref> ''ब्रिजटाउन'',<ref name="bridgetown">{{cite web | publisher = [[Portland State University]] | title = The Water | url = http://www.pdx.edu/water.html | accessdate = 7 नवंबर 2006 | archive-date = 31 अक्तूबर 2006 | archive-url = https://web.archive.org/web/20061031090707/http://www.pdx.edu/water.html | url-status = dead }}</ref> ''रिप सिटी'',<ref>{{Citation | first = Nena | last = Baker | title = R.I.P. FOR 'Rip City' Ruckus | date = May 21, 1991 | newspaper = The Oregonian | pages = A01 }}</ref> ''लिटिल बेरूत'',<ref name="Oregonian1" /> ''बियरवैना''<ref>{{cite news|url=http://www.latimes.com/travel/la-tr-beer-20100530,0,767659.story|title=Achieving Beervana in Portland, Ore.|last=Engel|first=Mary|date=30 मई 2010|work=[[लॉस एंजिल्स टाइम्स]]|accessdate=30 मई 2010}}</ref><ref>{{cite news|url=http://www.oregonlive.com/portland/index.ssf/2010/05/beervana_gets_shout_out_in_la.html|title=Beervana gets shout out in L.A. Times|last=Terry|first=Lynne|date=29 मई 2010|work=[[The Oregonian]]|accessdate=30 मई 2010}}</ref> या ''बियरटाऊन'',<ref>{{Cite web |url=http://www.draftmag.com/beertowns/detail/portland |title=संग्रहीत प्रति |access-date=19 जुलाई 2010 |archive-date=6 अगस्त 2012 |archive-url=https://www.webcitation.org/69hclwPdk?url=http://draftmag.com/new/beertowns/ |url-status=dead }}</ref> ''पी-टाउन''<ref name="Oreg-June2003" /><ref>{{cite news
| last = Hagestedt
| first = Andre
| title = The Missing Oregon Coast: Waves After Dark
| url = http://www.beachconnection.net/news/missin040709_147.php
| accessdate = 30 अप्रैल 2009
| date = 7 अप्रैल 2009
| quote = I’m used to seeing that hint of dawn back in P-town, with my wretched habit of playing video games until 6 a.m}}</ref> और ''[[पीडीएक्स]]'' .
== भूगोल ==
{{wide image|WillametteRvrPano edit.jpg|1500px|The [[Willamette River]] runs through the center of the city, while [[Mount Tabor, Portland, Oregon|Mount Tabor]] (center<!--Please scroll the picture (or your page) horizontally and look at the entire image, before you attempt to edit this.-->) rises on the city's east side. [[Mount Saint Helens]] (left) and [[Mount Hood]] (right center) are visible from many places in the city.}}
=== स्थलाकृति ===
पोर्टलैंड [[ऑरेगॉन]] के सबसे अधिक आबादी वाले क्षेत्र [[विल्मेट वैली]] के उत्तरी छोर पर स्थित है। हालांकि महानगरीय क्षेत्र वैली के बाकी हिस्सों से सांस्कृतिक और राजनैतिक रूप से अलग है, स्थानीय उपयोग में अक्सर पोर्टलैंड वास्तविक वैली से छूट जाता है। हालांकि, लगभग सारा पोर्टलैंड मल्टनोमाह काउंटी में पड़ता है, शहर के छोटे भाग क्लैकामस
और वाशिंगटन काउंटी
क्रमशः 785 और 1,455 के सभी के में अनुमानित आबादी के मध्य-2005 के साथ [[क्लैकामस]] के भीतर निहित [[मल्टनोमाह]] भीतर, झूठ. [[विल्मेट नदी]] शहर के उत्तर से थोड़ी दूरी पर [[कोलंबिया नदी]] (जो [[वाशिंगटन]] राज्य को [[ऑरेगॉन]] राज्य से अलग करती है) में मिलने के लिए उत्तर पश्चिम की ओर मुड़ने से पहले, शहर को पूर्व और पश्चिम में बांटती हुई शहर के मध्य से उत्तर को बहती है।
[[संयुक्त राज्य अमेरिका के जनगणना ब्यूरो]] के अनुसार शहर का कुल क्षेत्रफल 145.4 [[वर्ग मील]] (376.5 km²) है।
इसमें 134.3 वर्ग मील (347.9 km²) भूमि है और 11.1 वर्ग मील (28.6 km²) या 7.6% पानी है।{{GR|1}}
पोर्टलैंड [[बोरिंग लावा फील्ड]] के नाम से विख्यात एक विलुप्त प्लिओ-प्लीस्टोसेन ज्वालामुखी क्षेत्र के ऊपर स्थित है।<ref name="volcano">{{cite web | title = The Boring Lava Field, Portland, Oregon | publisher = [[USGS]] Cascades Volcano Observatory | url = http://vulcan.wr.usgs.gov/Volcanoes/Oregon/BoringLavaField/description_boring_lava.html | accessdate = 7 नवंबर 2006 | archive-date = 1 जुलाई 2011 | archive-url = https://web.archive.org/web/20110701101745/http://vulcan.wr.usgs.gov/Volcanoes/Oregon/BoringLavaField/description_boring_lava.html | url-status = dead }}</ref>
बोरिंग लावा फील्ड में [[माउंट ताबोर]]<ref>{{cite web | title = Mount Tabor Cinder Cone, Portland, Oregon | publisher = [[USGS]] Cascades Volcano Observatory | url = http://vulcan.wr.usgs.gov/Volcanoes/Oregon/BoringLavaField/VisitVolcano/mount_tabor.html | accessdate = 20 अप्रैल 2007 | archive-date = 16 जुलाई 2012 | archive-url = https://web.archive.org/web/20120716231818/http://vulcan.wr.usgs.gov/Volcanoes/Oregon/BoringLavaField/VisitVolcano/mount_tabor.html | url-status = dead }}</ref> जैसे कम से कम 32 शंकु अंगार शामिल हैं और इसका केंद्र दक्षिणपूर्व पोर्टलैंड में पड़ता है।
खुले मौसम में शहर के अधिकतर हिस्सों से पोर्टलैंड के पूर्व में निष्क्रिय लेकिन संभावित सक्रिय ज्वालामुखी [[माउंट हुड]] आसानी से दिखाई देता है।
[[वॉशिंगटन]] के उत्तर में सक्रिय ज्वालामुखी [[माउंट सेंट हेलेन्स]] शहर के ऊंचे स्थानों से सुदूर में स्पष्ट दिखाई देता है और इतना पास भी है कि [[18 मई 1980 को फूटे]] ज्वालामुखी की राख शहर को ढक ले.<ref>{{cite news|title=History, relived saved from St. Helens by a six-pack of Fresca|last=Nokes|first=R. Gregory|date=दिसम्बर 4, 2000|work=The Oregonian|pages=17|accessdate=27 अक्टूबर 2008}}</ref>
=== जलवायु ===
पोर्टलैंड की जलवायु शीतोष्ण है जिसे आम तौर पर हल्की, नम सर्दियों और अपेक्षाकृत शुष्क, गर्म ग्रीष्मकाल वाली [[समुद्री]] या [[मरीन पश्चिम तटीय]] जलवायु के रूप में वर्णित किया जाता है।
अधिकतर [[उत्तर पश्चिमी प्रशांत]] की तरह, [[कोप्पेन जलवायु वर्गीकरण]] के अनुसार इसे ठंडा, शुष्क गर्म उपोष्णकटिबंधीय अंचल (''Csb'') में वर्गीकृत किया जा सकता है, इसकी अपेक्षाकृत सूखी गर्मियों के कारण इसे ठंडी-गर्म [[भूमध्य]] के रूप में भी संदर्भित किया जाता है।<ref>{{cite journal | last = Kottek | first = M. |author2=J. Grieser, C. Beck, B. Rudolf, and F. Rubel | title =World Map of the Köppen-Geiger climate classification updated | journal =Meteorol. Z. | volume =15 | pages =259–263 | url =http://koeppen-geiger.vu-wien.ac.at/pics/kottek_et_al_2006.gif | doi =10.1127/0941-2948/2006/0130 | accessdate = 15 फरवरी 2007 | year =2006 }}</ref>
अन्य जलवायु वर्गीकरण प्रणालियों जैसे [[ट्रेवर्था]], के अनुसार यह निश्चित रूप से समुद्री अंचल (''Do'') के अंतर्गत आता है।<ref>http://www.fao.org/docrep/006/ad652e/ad652e07.htm</ref>
पोर्टलैंड में ग्रीष्मकाल गर्म, धूप वाला और शुष्क होता है, जुलाई तक औसत अधिकांश 81 °F (27 °C) और महीने के अंत में न्यूनतम 8 °F (14 °C) तक हो जाता है।
इसकी अंतर्देशीय अवस्थिति के कारण और जब समुद्री हवा नहीं होती तो [[लू]] चलने लगती हैं (विशेष रूप से जुलाई और अगस्त के माह में) और वायु का तापमान 100 °F (38 °C) से भी ऊपर चला जाता है।
शीतकाल हल्के से लेकर ठंडा, बहुत नम हो सकता है और जनवरी से तापमान अधिकांश 46 °F (8 °C) और न्यूनतम 7 °F (3 °C) भी हो जाता है।
बसंत ऋतु का मौसम अप्रत्याशित हो सकता है, कभी गर्म है तो कभी कैसकेड रेंज (Cascade Range) पर गरजते बादल उमड़ते दिखाई देते हैं।
प्रति वर्ष पोर्टलैंड के व्यापारिक शहर में औसत वर्षा{{convert|37.5|in|mm}} होती है। पोर्टलैंड में वर्ष में [[वर्षण]] का औसत 155 दिन है।
ठंड कम समय के लिए होती हैं और हिमपात भी प्रति वर्ष कुछ बार ही होता है हालांकि [[कोलंबिया रीवर गॉर्ज]] से उठने वाली ठंडी हवा की मेहरबानी से शहर बर्फ और बर्फानी तूफान के कारण सुप्रसिद्ध है।
सर्दियों में शहर में हिमपात का योग कई अवसरों पर नाममात्र से लेकर 1892-93 में, 60.9 इंच (154.7 cm) का है। पोर्टलैंड में आज तक दर्ज सबसे कम तापमान 2 फ़रवरी 1950 को था −3 °F (−19 °C)
आज तक दर्ज उच्चतम तापमान 30 जुलाई 1965, 8 अगस्त 1981 और 10 अगस्त 1981 को 107 °F (42 °C) था।
मई से लेकर सितंबर तक प्रत्येक महीने में 100 °F (38 °C) का तापमान दर्ज किया गया है।
{{Infobox Weather
| metric_first=
| single_line=Yes
| location =Portland, Oregon
| Jan_Hi_°F =45.6
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<!--
| Jan_REC_Hi_°F =66
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-->
| Jan_Precip_inch =5.07
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|Jan_Snow_days = 1.0 |Jan_Precip_days = 17.2
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|Mar_Snow_days = 0 |Mar_Precip_days = 17.2
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<!-- Optional: Average number of rainy, snowy and precipitation days for Year. If not present, will be filled by a sum of data above. -->
|Year_Rain_days = |Year_Snow_days = |Year_Precip_days =
| source = National Climatic Data Center<ref>{{Cite web
|url=http://www.wrh.noaa.gov/pqr/climate/pdx_clisummary.php |title=NOW Data-NOAA Online Weather Data |publisher=National Oceanic and Atmospheric Administration |year=2009 |accessdate=30 जुलाई 2009}}</ref>
|accessdate = July 2009}}
== नगरदृश्य ==
{{wide image|HawthorneBridge-Pano.jpg|1200px|Panorama of downtown Portland. [[Hawthorne Bridge]] viewed from a dock on the [[Willamette River]] near the [[Oregon Museum of Science and Industry]] (OMSI)}}
{{wide image|Portland_Night_panorama.jpg|1200px|Panorama of downtown Portland at night. Viewed from across the [[Willamette River]] in SE Portland.}}
{{See also|Architecture of Portland, Oregon|List of tallest buildings in Portland, Oregon|Downtown Portland|Neighborhoods of Portland, Oregon}}
[[कोलंबिया नदी]] के साथ विल्मेट नदी के संगम के पास पोर्टलैंड विल्मेट नदी के आरपार फैला है।
अधिक घना और पहले से विकसित पश्चिमी क्षेत्र ज़्यादातर नज़दीकी [[वेस्ट हिल्स (टुएलटिन पर्वत)]] से सटा हुआ है हालांकि यह उनके ऊपर से होकर वाशिंगटन काउंटी की सीमा तक विस्तृत है।
समतल पूर्वी क्षेत्र [[ग्रेशम]] के उपनगर तक लगभग 180 ब्लॉकों में फैला है।
ग्रामीण मल्टनोमाह काउंटी सुदूर पूर्व में स्थित है।
[[चित्र:portland.png|thumb|left|पोर्टलैंड के वर्ग]]
1891 में पोर्टलैंड, [[एलबिना]] और [[पूर्वी पोर्टलैंड]] के शहर संगठित हुए और पुनरावृत नामों वाली सड़कों को नए नाम दिए गए।
2 सितंबर 1931 को "महान पुनर्संख्याकंन" ने सड़कों के नामकरण की विधि का मानकीकरण किया और घरों के नंबर बदलकर 20 प्रति ब्लॉक की जगह 100 प्रति ब्लॉक कर दिया.
इससे पोर्टलैंड दक्षिण पश्चिम, दक्षिण पूर्व, उत्तर पश्चिमी, उत्तरी और पूर्वोत्तर पाँच खण्डों
में विभाजित हो गया।
बर्नसाइड स्ट्रीट उत्तर और दक्षिण को विभाजित करती है और विल्मेट नदी पूरब और पश्चिम
को विभाजित करती है। नदी बर्नसाइड के उत्तर में पांच ब्लॉक पश्चिम की ओर मुड़ती है और इसके स्थान पर विलियम्स ऐवन्यू एक भाजक के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।
उत्तरी खंड विलियम्स ऐवन्यू और पश्चिम में विल्मेट नदी के बीच स्थित है।
पश्चिम की तरफ, रीवरप्लेस, जॉन्स लैंडिंग और साउथ वॉटरफ़्रन्ट डिस्ट्रिक्ट्स "छठे चतुर्थांश" में पड़ते हैं जहां पते पश्चिम से पूर्व को नदी की ओर ऊपर की तरफ़ जाते हैं।
यह "छठा चतुर्थांश" पश्चिम में नैटो पार्कवे और बार्बर बुलेवार्ड से, उत्तर में मांटगोमेरी स्ट्रीट और दक्षिण में नेवेडा स्ट्रीट से घिरा है।
इस क्षेत्र में पूर्व-पश्चिम के पते एक अग्रणी शून्य के साथ चिह्नित हैं। (इसका मतलब है कि 0246 एसडब्ल्यू कैलिफोर्निया स्ट्रीट 246 एसडब्ल्यू कैलिफोर्निया स्ट्रीट नहीं है। अधिकांश मानचित्रण कार्यक्रम इन दो अलग अलग पतों में भेद नहीं कर पाते.)
=== पार्क और उद्यान ===
{{Main|List of parks in Portland, Oregon}}
[[चित्र:IntnlRoseTestGarden.jpg|thumb|right|इंटरनेशनल टेस्ट रोज़ गार्डन का एक विहंगम दृश्य]]
[[चित्र:TomMcCallWaterfrontPark.jpg|thumb|right|उत्तर से देखा गया टॉम मैक्कॉल वॉटरफ़्रन्ट पार्क]]
पोर्टलैंड को अपने पार्कों और खुली जगहों को बनाए रखने की अपनी विरासत पर गर्व है। पार्क और हरे-भरे स्थानों की योजना [[जॉन चार्ल्स ओमस्टेड]] की 1903 रिपोर्ट ''टू द पोर्टलैंड पार्क बोर्ड'' से चली आ रही है।
1995 में पोर्टलैंड महानगरीय क्षेत्र के मतदाताओं ने मछली, वन्य जीवन और लोगों के लिए मूल्यवान प्राकृतिक क्षेत्रों के अधिग्रहण के लिए एक क्षेत्रीय बांड पारित किया।
दस साल बाद, पारिस्थितिक महत्व के अधिकतर{{convert|8100|acre|km2|0}} प्राकृतिक क्षेत्र खरीदे जा चुके हैं
और वे स्थायी रूप से विकास से सुरक्षित है।<ref>{{cite web | last = Houck | first = Mike | title = Metropolitan Greenspaces: A Grassroots Perspective | publisher = Audubon Society of Portland | url = http://www.audubonportland.org/conservation_advocacy/urbanconservation/metro_greenspaces | accessdate = 7 नवंबर 2006 | archive-date = 28 सितंबर 2007 | archive-url = https://web.archive.org/web/20070928071519/http://www.audubonportland.org/conservation_advocacy/urbanconservation/metro_greenspaces | url-status = dead }}</ref>
पोर्टलैंड [[समीपवर्ती अमेरिका]] में ([[जैक्सन, मिसिसिपी]] और [[बेंड, ऑरेगॉन]] के अलावा) केवलमात्र ऐसे तीन शहरों में से एक है जिनकी सीमाओं के भीतर विलुप्त ज्वालामुखी हैं।
[[माउंट ताबोर पार्क]] अपने सुंदर प्राकृतिक दृश्यों और ऐतिहासिक जलाशयों के लिए जाना जाता है।<ref>{{ cite web | title = Mount Tabor Park | publisher = Portland Parks & Recreation | url = http://www.portlandonline.com/parks/finder/index.cfm?action=ViewPark&PropertyID=275 | accessdate = 7 नवंबर 2006}}</ref>
[[फ़ॉरेस्ट पार्क]] संयुक्त राज्य अमेरिका में शहर की सीमा के भीतर वाला सबसे बड़ा वन्य पार्क है जो 5,000 एकड़ (20 km²) से अधिक के क्षेत्र में फैला है।
दुनिया का सबसे छोटा पार्क (एक दो-फुट-व्यास का दायरा, पार्क का क्षेत्र केवल 0.3 वर्ग है)
[[मिल एंड्स पार्क]] भी पोर्टलैंड में है।
[[वाशिंगटन पार्क]] शहर के पश्चिमी व्यापारिक क्षेत्र में है, [[ऑरेगॉन चिड़ियाघर]], [[पोर्टलैंड जापानी गार्डन]] और [[इंटरनेशनल रोज़ टेस्ट गार्डन]] है।
नज़दीक में पोर्टलैंड का उच्चतम बिंदु, [[काउंसिल क्रेस्ट पार्क]] है।
[[टॉम मैक्कॉल वॉटरफ़्रन्ट पार्क]] व्यापारिक क्षेत्र में विल्मेट के पश्चिम किनारे के साथ साथ बना है।
[[हार्बर ड्राइव]] हटाने के बाद 1974 में {{convert|37|acre|0|adj=on}}पार्क बनाया गया था और अब यहां साल भर बड़े बड़े कार्यक्रम आयोजित होते रहते हैं।
पोर्टलैंड के व्यापारिक क्षेत्र में शहर के ब्लॉकों के दो समूह पार्क के लिए समर्पित हैं: [[उत्तर]] और [[दक्षिण पार्क ब्लॉक]].
[[ट्रायऑन क्रीक स्टेट नैचुरल एरिया]] पोर्टलैंड के तीन [[ऑरेगॉन स्टेट पार्क्स]] में से एक और सर्वाधिक लोकप्रिय है इसके नाले में [[स्टीलहैड]] होते हैं।
अन्य दो स्टेट पार्क हैं वेस्ट हिल्स में स्थित [[विल्मेट स्टोन स्टेट हेरिटेज साइट]] और [[पोर्टलैंड अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे]] के पास [[कोलंबिया रीवर]] में स्थित [[गवर्नमेंट आइलैंड स्टेट रीक्रिएशन एरिया]].
== संस्कृति और समकालीन जीवन ==
{{See also|List of fiction set in Oregon}}
पोर्टलैंड को अक्सर "अमेरिका का सबसे हरा शहर" से सम्मानित किया जाता है और दुनिया के शीर्ष दस हरे-भरे शहरों में इसका शुमार है। [[पॉपुलर साइंस]] ने पोर्टलैंड को लगातार अमेरिका का सबसे हरियाला शहर के रूप में पुरस्कृत किया है और [[ग्रीस्ट मैगज़ीन]] के अनुसार यह विश्व के हरियाले शहरों की सूची में दूसरे नंबर पर आता है।<ref>{{ cite web |url= http://www.popsci.com/environment/article/2008-02/americas-50-greenest-cities?page=1|title= America's 50 Greenest Cities |accessdate= 10 जून 2010 }}</ref>
<ref>{{ cite web |url= http://www.grist.org/article/cities3/|title= 15 Green Cities |accessdate= 10 जून 2010 }}</ref> पोर्टलैंड को अमेरिकी DIY युवा संस्कृति का घर माना जाता है।
1980 के उत्तरार्ध से आज तक पोर्टलैंड, [[ज़ीन]]-रचना जैसे आंदोलनों का प्रमुख केंद्र, [[पोर्टलैंड ज़ीन संगोष्ठी]]<ref>{{cite web |url= http://www.pdxzines.com/info/ |title= Portland Zine Symposium Official Site |accessdate= 15 सितंबर 2007 |archive-date= 4 नवंबर 2011 |archive-url= https://web.archive.org/web/20111104035943/http://pdxzines.com/info/ |url-status= dead }}</ref> जैसी घटनाओं का आयोजक और [[Microcosm]] जैसे प्रमुख [[ज़ीन]] वितरकों का घर रहा है।
[[DIY]] शिल्प समुदाय ने 1990 के दशक से पोर्टलैंड में जनसंख्या विस्फोट भी देखा है
और अब [[क्राफ़्टी वंडरलैंड]]<ref>{{ cite web |url= http://www.craftywonderland.com/|title= Crafty Wonderland Official Site |accessdate= 15 सितंबर 2007 }}</ref> और नियमित [[चर्च ऑफ़ क्राफ़्ट]]<ref>{{cite web |url= http://www.churchofcraft.org/index4.html |title= Church of Craft Official Site |accessdate= 15 सितंबर 2007 |archive-date= 15 सितंबर 2007 |archive-url= https://web.archive.org/web/20070915144045/http://www.churchofcraft.org/index4.html |url-status= dead }}</ref> बैठकों जैसी घटनाओं की मेज़बानी करता है और [[Knittn' Kitten]]<ref>{{ cite web |url= http://knittnkitten.com/|title= Knittn Kitten Official Site |accessdate= 15 सितंबर 2007 }}</ref>, [[SCRAP]]<ref>{{cite web |url= http://www.scrapaction.org/ |title= School & Community Reuse Action Project Official Site |accessdate= 15 सितंबर 2007 |archive-date= 29 जनवरी 2011 |archive-url= https://web.archive.org/web/20110129095815/http://scrapaction.org/ |url-status= dead }}</ref>, जैसे स्टोरों और Bolt, [[PDX Seamsters Drop-in Sewing Studio]]<ref>{{cite web|url= http://pdxseamsters.com/|title= PDX Seamsters Official website|accessdate= 21 अप्रैल 2010|archive-date= 7 फ़रवरी 2011|archive-url= https://web.archive.org/web/20110207145024/http://pdxseamsters.com/|url-status= dead}}</ref>, [[Yarn Garden]]<ref>{{cite web |url= http://www.yarngarden.net/ |title= Yarn Garden Official Site |accessdate= 15 सितंबर 2007 |archive-date= 4 जुलाई 2010 |archive-url= https://web.archive.org/web/20100704072206/http://yarngarden.net/ |url-status= dead }}</ref> और व्यापारिक क्षेत्र में [[Fiber District]] जैसे स्वतंत्र स्वामित्व वाले अनेक स्टोरों का घर है।
पोर्टलैंड कट्टरपंथी नारीवादी और [[समलैंगिक]] सक्रियता जैसे आंदोलनों का घर है और 1975 में शुरू एवं [[इम्पिरीअल साव्रन रोज़ कोर्ट ऑफ़ ऑरेगॉन]]<ref>{{cite web|url=http://www.rosecourt.org/|title=Imperial Sovereign Rose Court official site|3=access date+ 8 दिसंबर 2008|access-date=19 जुलाई 2010|archive-date=15 सितंबर 2000|archive-url=https://web.archive.org/web/20000915183117/http://www.rosecourt.org/|url-status=dead}}</ref> की रूपरेखा पर तैयार द वर्ल्डस ओल्डेस्ट टीनेज ड्रैग क्वीन पेजेंट रोज़ बॅड और थॉर्न पेजेंट का गृह नगर भी है, इस शहर को [[पंक]], [[कट्टर]], [[क्रस्ट पंक]] और [[अराजकतावादी]] आंदोलनों और उप शैली जिसमें उपरोक्त [[उप संस्कृतियों]] का ही हिस्सा आत्मनिर्भर [[DIY संस्कृति]] आंदोलन भी शामिल है, का आश्रयस्थल भी माना जाता है।
=== मनोरंजन और ललितकलाएं ===
{{See also|Music of Oregon#Portland}}
[[चित्र:SchnitzerAtNightFront.jpg|thumb|right|आरलेन श्निज़र कॉन्सर्ट हॉल, ऑरेगॉन सिम्फनी का घर, अन्य के साथ]]
अधिकतर बड़े शहरों की तरह पोर्टलैंड में भी गीत-संगीत के अनेक संस्थान हैं जैसे [[ऑरेगॉन बैले थिएटर]], [[ऑरेगॉन सिम्फ़नी]], [[पोर्टलैंड सेंटर स्टेज]], [[पोर्टलैंड बरोक ऑर्केस्ट्रा]] और [[पोर्टलैंड ओपेरा]].
न्यूयॉर्क के [[ऑफ़ ब्रॉडवे]] या [[ऑफ़-ऑफ़ ब्रॉडवे]] जैसे कई रंगमंच भी हैं उदाहरणार्थ [[पोर्टलैंड सेंटर स्टेज]], [[आर्टिस्ट्स रिपर्टरी थिएटर]], [[मिरैक्ल थिएटर]], [[स्टार्क रेविंग थिएटर]] और [[टीअर्स ऑफ़ जॉय]].
पोर्टलैंड [[हॉलिवुड थिएटर]] में विश्व के एकमात्र [[ऐचपी लवरक्राफ़्ट फ़िल्म फ़ेस्टिवल]]<ref>{{ cite web |url= http://www.hplfilmfestival.com/|title= Lovecraft Film Festival Official Site |accessdate= 25 नवंबर 2007 }}</ref> का आयोजन करता है।
पोर्टलैंड [[लुई लुई]] के लिए विक्यात [[द किंग्समैन]] और [[पॉल रिविर एंड द रेडर्स]] जैसे प्रसिद्ध बैंडों का भी घर है।
अन्य सुविख्यात संगीत समूहों में शामिल हैं [[द डैंडी वॉरहोल्ड्स]], [[एवरक्लियर]], [[मॉडेस्ट माउस]], [[पिंक मार्टिनी]], [[स्लीटर-किन्नी]], [[द शिन्स]], [[ब्लिटज़ेन ट्रैपर]], [[द डिसेम्बरीस्ट्स]] और स्वर्गीय [[इलियट स्मिथ]] का.
शहर का [[सैटिरीकॉन नाइट]] क्लब ऐसे स्थान के रूप में भी प्रसिद्ध है जहां [[निर्वाण]] के अग्रणी स्वर्गीय [[कर्ट कोबेन]] और रॉक संगीतकार [[कोर्टनी लव]] मिले थे और फिर उन्होंने शादी कर ली थी।<ref>{{citeweb|url=http://www.biography.com/articles/Kurt-Cobain-9542179?print|work=Biography.com|title=Kurt Cobain|accessdate=17 मई 2010}}</ref>
सुविख्यात ऐनिमेटर्स [[मैट ग्रोनिंग]](''द सिम्प्सन्स''), [[विल विन्टॉन]] (''विल विन्टॉनज़ ए क्लेमेटन क्रिस्मस सेलिब्रेशन'') और फ़िल्म निर्माता [[गस वैन सेंट]] (''गुड विल हंटिंग'' (1997), ''[[मिल्क]]'' (2008).
अभिनेता [[सैम इलियट]] और [[सैली स्ट्रदर्स]] पोर्टलैंड से हैं। ''[[हैवी मैटल]]'' और अन्य पत्रिकाओं के कार्टूनिस्ट-चित्रकार [[डैन स्टेफ़ान]], पोर्टलैंड में रहते हैं।
हाल में पोर्टलैंड में बनी और फ़िल्मांकित फ़िल्में हैं ''[[एक्स्ट्राऑर्डिनेरी मश्ज़र्स]]'', ''[[बॉडी ऑफ़ एविडेन्स]]'', ''[[व्हाट द ब्लीप डू वी नो!?]]'', ''[[द हंटिड]]'', ''[[ट्वॉयलाइट]]'', ''[[पैरानॉयड पार्क]]'', ''[[वेंडी एंड लूसी]]'', ''[[फ़ीस्ट ऑफ़ लव]]'' और ''[[अनट्रेसेबल]]'' .
पोर्टलैंड में मनोरंजन की एक असाधारण विशेषता है कि बड़ी संख्या में फिल्म थिएटरों में अक्सर दूसरी बार चलने वाली या पुनः प्रदर्शित फिल्मों के दौरान बियर परोसी जाती है। ऐसे "ब्रू एंड व्यू" थियेटरों का एक उल्लेखनीय उदाहरण है [[द बगदाद थिएटर एंड पॅब]].
टीवी शो जिनमें ''[[लिवरेज]]'' और अंडर ''[[सस्पिशन]]'' शामिल हैं, पोर्टलैंड में फ़िल्माये गये हैं।
=== लेखक ===
पोर्टलैंड के लेखकों में शामिल हैं, ''[[अर्थसी]]'' उपन्यासों, ''[[हैनिश साइकल]]'' और ऑर्सिनियन टेल्स के लिए प्रसिद्ध विज्ञान कथा लेखक [[उर्सुला के. ली गुइन]], अपने पुरस्कार विजेता उपन्यास फ़ाइट क्लब के लिए सुविख्यात अपराध कथा उपन्यासकार [[चॅक पालानिक]], [[हैन्री हगिन्स]], उसका कुत्ता [[रिब्सी]], [[बीट्रिस "बीज़्स" क्विम्बी]] और [[रैमोना क्विम्बी]] के पात्रों वाली बच्चों की किताबों की प्रसिद्ध श्रृंखला की लेखिका [[बेवर्ली क्लैरी]].
[[क्लिकीटैट स्ट्रीट]] जहां क्लैरी के पात्र रहते हैं, वह यथार्थ में पोर्टलैंड के उत्तरपूर्व में एक गली है।
पास के ग्रांट पार्क में पात्रों की मूर्तियां खड़ी हैं।
=== पर्यटन ===
{{See also|Tourism in Portland, Oregon|List of artists and art institutions in Portland, Oregon}}
]]
पोर्टलैंड विविध श्रेणी के कलाकारों और कला संगठनों का घर है और 2006 में ''[[अमेरिकन स्टाइल]]'' पत्रिका ने इसे अमेरिका का दसवां सर्वश्रेष्ठ बिग सिटी आर्ट्स डेस्टिनेशन का नाम दिया था।
[[द पोर्टलैंड आर्ट म्युज़ियम]] शहर के सबसे बड़ा कला संग्रह का मालिक है और प्रत्येक वर्ष विविध दौरा प्रदर्शनियां प्रस्तुत करता है और हाल ही में आधुनिक और समकालीन कला विंग जोड़ दिए जाने से यह संयुक्त राज्य अमेरिका का पच्चीसवां सबसे बड़ा संग्रहालय बन गया है। व्यापारिक क्षेत्र, पर्ल डिस्ट्रिक्ट, अल्बर्टा डिस्ट्रिक्ट और शहर भर में अन्य इलाकों में कला दीर्घाएं मिलती हैं।
[[ऑरेगॉन म्युज़ियम ऑफ़ साइंस एंड इंडस्ट्री]] (OMSI) व्यापारिक पोर्टलैंड से विल्मेट रीवर के पार पूर्वी किनारे पर स्थित है और इसमें भौतिक विज्ञान, जीवन विज्ञान, पृथ्वी विज्ञान, प्रौद्योगिकी, खगोल विज्ञान और प्रारंभिक बचपन की शिक्षा पर विभिन्न प्रकार के सूचनापरक प्रदर्शन निहित हैं। OMSI का एक OMNIMAX थियेटर भी है और ''[[द हंट फ़ॉर रेड ऑक्टूबर]]'' फ़िल्म में इस्तेमाल [[यूएसएस ब्लुबैक (SS-581)|यूएसएस ''ब्लुबैक'' (SS-581)]] पनडुब्बी का घर है।
पोर्टलैंड प्रामाणिक [[सूज़ौ]]-शैली के चारदिवारी वाले [[पोर्टलैंड क्लासिकल चाइनीज़ गार्डन]] का भी घर है।
[[पोर्टलैंड बिल्डिंग]] के पश्चिम की ओर [[पोर्टलैंडिया]] मूर्ति (स्टैचू ऑफ़ लिबर्टी के बाद) ठुके हुए तांबे से बनी अमेरिका की दूसरी सबसे बड़ी मूर्ति है।
पोर्टलैंड की सार्वजनिक कलाकृतियों का प्रबंधन [[रीजनल आर्ट्स एंड कल्चर कौंसिल]] द्वारा किया जाता है।
[[पावेल्स सिटी ऑफ़ बुक्स]] संयुक्त राज्य अमेरिका में किताबों की सबसे बड़ी स्वतंत्र दुकान और मिसिसिपी रीवर के पश्चिम की सबसे बड़ी किताबों की दुकान होने का दावा करता है।
[[पोर्टलैंड रोज़ फ़ेस्टिवल]] हर साल जून में होता है और इसमें दो परेड, [[ड्रेगन बोट]] दौड़, टॉम मैक्कॉल वॉटरफ़्रन्ट पार्क में आनंदोत्सव सवारी और ऐसी दर्जनों घटनाएं शामिल होती हैं।
वेस्ट हिल्स का [[वाशिंगटन पार्क]] पोर्टलैंड के कुछ सबसे लोकप्रिय मनोरंजक स्थलों का घर है जिसमें शामिल हैं [[ऑरेगॉन चिड़ियाघर]], [[पोर्टलैंड जापानी गार्डन]], [[वर्ल्ड फ़ॉरेस्टरी सेंटर]] और [[हॉयत अर्बोरटम]].
बियर और मद्य की खुशी में पोर्टलैंड में सारा साल उत्सव होते रहते हैं जिनमें [[ऑरेगॉन ब्रुअर्स फ़ेस्टिवल]] भी शामिल है। प्रत्येक गर्मियों के दौरान जुलाई के अंतिम सप्ताहांत में आयोजित, यह उत्तरी अमेरिका का सबसे बड़ा आउटडोर त्योहार है जिसमें 2008 में 70,000 लोगों ने भाग लिया।<ref>{{cite web|url=http://blog.oregonlive.com/thebeerhere/2008/07/2008_obf_biggest_ever_say_orga.html|title=OregonLive blog|access-date=19 जुलाई 2010|archive-date=22 सितंबर 2013|archive-url=https://web.archive.org/web/20130922011706/http://blog.oregonlive.com/thebeerhere/2008/07/2008_obf_biggest_ever_say_orga.html|url-status=dead}}</ref> कैलेंडर वर्ष में अन्य प्रमुख बियर त्योहारों में अप्रैल में स्प्रिंग बियर एंड वाइन फ़ेस्टिवल, जून में नॉर्थ अमेरिकन ऑरगैनिक ब्रुअर्स फ़ेस्टिवल, जुलाई में [[पोर्टलैंड इंटरनैशनल बियर फ़ेस्ट]] और दिसंबर में हॉलिडे ऐल फ़ेस्टिवल शामिल हैं।<ref>{{cite news
| title = Brewers, beer lovers get many reasons to raise a glass
| first = Anne Marie
| last = Distefano
| work = Portland Tribune
| date = July 8, 2005
| url = http://www.portlandtribune.com/features/story.php?story_id=30717
| access-date = 19 जुलाई 2010
| archive-date = 6 दिसंबर 2008
| archive-url = https://web.archive.org/web/20081206074237/http://www.portlandtribune.com/features/story.php?story_id=30717
| url-status = dead
}}</ref>
=== ख़रीदारी ===
[[चित्र:MadeinOregonsign.jpg|thumb|द मेड इन ऑरेगॉन में साइन]]
पोर्टलैंड में ख़रीदारी के लिए कई विकल्प हैं। ख़रीदारी के लिए मशहूर कुछ क्षेत्र हैं [[डाउनटाउन पोर्टलैंड]] N.W. 23वां<sup></sup> एवेन्यू, [[पर्ल डिस्ट्रिक्ट]] और [[लॉयड डिस्ट्रिक्ट|लॉयड डिस्ट्रिक्ट[[]]]]. प्रमुख डिपार्टमेंट स्टोर में शामिल है [[Nordstrom]], [[Macy*s]], [[Saks 5th Avenue]] और Mario's. महानगरीय क्षेत्र में बड़े मॉल हैं [[ब्रिजपोर्ट विलेज]], [[वॉशिंगटन स्क्वायर]], [[क्लैकामस टाउन सेंटर]], [[लॉयड सेंटर]], [[वैंकूवर मॉल]] और [[पायोनियर प्लेस]]. एक अन्य गंतव्य है [[पोर्टलैंड सैटरडे मार्केट]], शहरी बाजार जैसा स्थान जहां पोर्टलैंड की संस्कृतियों को दर्शाते हुए हस्तशिल्प से लेकर आयातित तिब्बती माल बेचा जाता है। शनिवार बाजार मार्च से लेकर क्रिसमस तक हर सप्ताहांत खुला रहता है। [[मेड इन ऑरेगॉन]] कंपनी पोर्टलैंड में स्थित है, [[ऑरेगॉन]] में निर्मित उत्पाद और उपहार उनकी विशेषता है।
=== ब्रुअरीज़ ===
पोर्टलैंड अपनी [[माइक्रोब्रुअरी]] [[बियर]] के लिए बहुत प्रसिद्ध है।<ref name="brewpub">{{cite news |url=http://travel.nytimes.com/2006/01/13/travel/escapes/13beer.html | title=In Oregon, It's a Brew Pub World | first = Jessica | last = Merrill | date=January 13, 2006 | accessdate=16 दिसंबर 2009 | work=दि न्यू यॉर्क टाइम्स}}</ref> ऑरेगॉन पब्लिक ब्रॉडकास्टिंग ने संयुक्त राज्य अमेरिका में [[माइक्रोब्रू]] क्रांति में पोर्टलैंड की भूमिका को "बियरवैना"<ref>{{cite web |url=http://www.opb.org/programs/oregonexperiencearchive/beervana/player.php |title=Oregon Experience: Beervana |accessdate=January 6, 2009 |archive-date=6 अगस्त 2012 |archive-url=https://www.webcitation.org/69hcvE5J8?url=http://www.opb.org/programs/oregonexperiencearchive/beervana/player.php |url-status=dead }}</ref> नामक रिपोर्ट में प्रलेखित किया है, इस शब्द का अर्थ है "पोर्टलैंड स्टेट ऑफ़ माइंड".{{Tone-inline|date=दिसम्बर 2009}}{{Citation needed|date=अक्टूबर 2008}} कुछ लोग [[पेय]] में पोर्टलैंड वालों की रुचि का कारण इस तरह बताते हैं, 1888 में स्थानीय शराब निर्माता [[हेन्री वाइनहार्ड]] ने अपनी [[ब्रुअरी]] से नव समर्पित फ़व्वारे स्किडमोर फाउंटेन में बियर प्रवाह का प्रस्ताव किया। तथापि अच्छी गुणवत्ता वाली बियर के लिए यह 1980 के दशक से ही प्रसिद्ध है जब शराब की भट्टी के परिसर में बियर पीने की अनुमति देने के लिए राज्य के कानून में परिवर्तन किया गया था।
थोड़े ही समय में, सारे शहर में [[माइक्रोब्रुअरी]] और [[ब्रुपब्स]] जहां तहां खुलने लगी.
{{Citation needed|date=अक्टूबर 2008}}उनकी वृद्धि हुई स्थानीय सामग्री कम प्रोटीन वाली [[जौ]], दो दर्जन से अधिक किस्म के [[हॉप]] की प्रचुरता से और [[बुल रन वॉटरशेड]] से आते शुद्ध पानी से. विल्मेट वैली संयुक्त राज्य अमेरिका में हॉप की खेती करने वाला प्रमुख क्षेत्र है।
आज, शहर के भीतर अट्ठाईस ब्रुअरीज वाला पोर्टलैंड, देश के दूसरे किसी शहर की तुलना में सबसे अधिक ब्रुअरीज का घर है।<ref name="brewpub"/> अकेले [[मैक्मेनामिन ब्रदर्स]] की ही तीस से अधिक ब्रुपब्स, भट्टियाँ और शराबघर
महानगरीय क्षेत्र में फैले पड़े हैं, अनेक जीर्णोद्धार किए हुए [[थिएटरों]] और गिराए जाने के लिए तय पुरानी इमारतों में खुली हुई हैं।
पोर्टलैंड के अन्य उल्लेखनीय शराब निर्माता हैं [[विड्मर ब्रदर्स]], [[ब्रिजपोर्ट]] और [[हेअर ऑफ़ डॉग]] और अनेक छोटे गुणवत्ता वाले शराब निर्माता.
1999 में, लेखक [[माइकल "बियरहंटर" जैक्सन]] ने पोर्टलैंड को ''दुनिया की बियर राजधानी'' कहा क्योंकि शहर में [[कोलोन]], [[जर्मनी]] से भी ज़्यादा ब्रुअरीज़ हैं।
पोर्टलैंड ऑरेगॉन विज़िटर्स एसोसिएशन शहर के उपनामों के तौर पर "बियरवैना" और "ब्रुटोपिया" को बढ़ावा दे रही है।<ref name="Beer">{{cite web | title = Portland: The center of the beer universe | publisher = Portland Oregon Visitors Association | url = http://www.travelportland.com/media/mbmedkit/mb_beer.html | accessdate = 18 नवंबर 2006 | archive-date = 23 मार्च 2006 | archive-url = https://web.archive.org/web/20060323063856/http://www.travelportland.com/media/mbmedkit/mb_beer.html | url-status = dead }}</ref>
मध्य जनवरी 2006 में, मेयर टॉम पॉटर ने आधिकारिक तौर पर शहर को एक नया उपनाम -बियरटाउन दिया<ref>{{cite web | title = Portland lifts a glass to its new name | publisher = KOIN 6 News | date = January 12, 2006 | url = http://www.koin.com/Global/story.asp?S=5932394 | accessdate = 26 जनवरी 2007 | archive-date = 13 फ़रवरी 2007 | archive-url = https://web.archive.org/web/20070213215818/http://koin.com/Global/story.asp?S=5932394 | url-status = dead }}</ref>.
=== व्यंजन ===
{{Commons category|Restaurants in Portland, Oregon}}
पोर्टलैंड में अनेक रेस्तरां हैं और 2007 में [[फ़ूड नेटवर्क्स अवार्ड्स]] के तीन नामितों में से इसे "वर्ष का स्वादिष्ट गंतव्य: भोजन के परिप्रेक्ष्य में उभरता शहर" का पुरस्कार मिला.<ref>{{cite web |url=http://www.foodnetwork.com/food/show_aw/text/0,3151,FOOD_28456_61089,00.html |title=TV : Food Network Awards : Food Network Awards Winners : Food Network |publisher=Foodnetwork.com |date= |accessdate=6 अक्टूबर 2008 |archive-date=18 अप्रैल 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20070418122635/http://www.foodnetwork.com/food/show_aw/text/0%2C3151%2CFOOD_28456_61089%2C00.html |url-status=dead }}</ref>
[[चित्र:StumptownCoffeeDivision.jpg|thumb|180px|left| 47वें और डिवीज़न पर मूल स्टम्पटाउन कॉफ़ी स्थान.]]उसी वर्ष ''[[न्यू यॉर्क टाइम्स]]'' ने भी रेस्तरां की बढ़ती हुई संख्या के लिए पोर्टलैंड को पहचाना.<ref>{{cite news|url=http://www.nytimes.com/2007/09/26/dining/26port.html?pagewanted=3&_r=1 |title=In Portland, a Golden Age of Dining and Drinking - New York Times |publisher=Nytimes.com |date=Published: September 26, 2007 |accessdate=6 अक्टूबर 2008 | first=Eric | last=Asimov}}</ref>
2007 में ''[[ट्रैवल + लीश्ज़र]]'' ने सभी राष्ट्रीय शहरों में से पोर्टलैंड को #9 घोषित किया।<ref>{{cite web|url=http://www.travelandleisure.com/afc/2007/category/6 |title=America's Favorite Cities 2007 | Food/Dining | Food/Dining (Overall) | Travel + Leisure |publisher=Travelandleisure.com |date= |accessdate=6 अक्टूबर 2008}}</ref>
शहर अमेरिका में सबसे ज़्यादा [[शाकाहारी]]- अनुकूल शहर होने के लिए भी प्रसिद्ध है।<ref>{{cite web|url=http://www.goveg.com/f-vegcities-portland.asp |title=GoVeg.com // Features // North America's Most Vegetarian-Friendly Cities! // Portland, Oregon |publisher=Goveg.com |date= |accessdate=6 अक्टूबर 2008}}</ref>
बियर के अलावा, प्रशांत उत्तरपश्चिम में पोर्टलैंड प्रमुख कॉफ़ी गंतव्य के रूप में जाना जाता है, कॉफ़ी हाउस की प्रचुरता के संदर्भ में सिएटल के बाद इसी का नाम आता है।
[[Yelp.com]] ने पोर्टलैंड के 20 से अधिक कॉफ़ी हाउस को 4.5-5 सितारा श्रेणी का दर्जा दिया है।<ref>{{cite web|url=
http://www.yelp.com/c/portland/coffee |title=Portland Coffee Shops |publisher=Yelp.com |date= |accessdate=15 अक्टूबर 2009}}</ref>
शहर मूल [[स्टम्पटाउन कॉफ़ी रोस्टर्स]] का घर है प्रशंसक इसे प्रत्यक्ष व्यापार के लिए राष्ट्र की उच्चतम गुणवत्ता वाली रोस्टरीज़,<ref>{{cite news|url=http://www.nytimes.com/2009/09/16/dining/reviews/16brief-001.html |title=A Seductive Cup |publisher=New York Times |date= 16 सितंबर 2009|accessdate=15 अक्टूबर 2009 | first=Oliver | last=Strand}}</ref> साथ ही अन्य दर्जनों माइक्रो-रोस्टरीज़ और कैफ़े में से एक मानते हैं।
=== खेलकूद ===
{{Main|Sports in Portland, Oregon}}
[[चित्र:RoseGardenArenaS.jpg|thumb|right|द रोज़ गार्डन, पोर्टलैंड ट्रेल ब्लेज़र्स का घर.]]
पोर्टलैंड [[नेशनल बास्केटबॉल एसोसिएशन]] के [[ट्रेल ब्लेज़र्स]] का घर है।<ref>{{cite web|url=http://sports.espn.go.com/mlb/columns/story?columnist=neyer_rob&id=1600284|title=Though not perfect, Portland a viable city for baseball|last=Neyer|first=Rob|date=अगस्त 21, 2003|publisher=ESPN.com|quote="Portland is the largest metropolitan area with just one major professional sports team (the Trail Blazers)."|accessdate=6 जनवरी 2009}}</ref>
2011 में शुरू, शहर [[मेजर लीग सॉकर]] फ़्रेंचाइज़ की मेज़बानी करेगा जो [[पोर्टलैंड टिम्बर्स]] की श्रंखला में होगा.<ref>{{Cite web |url=http://web.mlsnet.com/news/mls_news.jsp?ymd=20090320&content_id=228140&vkey=pr_mls&fext=.jsp |title=संग्रहीत प्रति |access-date=15 जनवरी 2021 |archive-date=19 मार्च 2010 |archive-url=https://web.archive.org/web/20100319020353/http://web.mlsnet.com/news/mls_news.jsp?ymd=20090320&content_id=228140&vkey=pr_mls&fext=.jsp |url-status=dead }}</ref>
शहर में माइनर लीग की कई टीमें हैं। दौड़ महानगरीय क्षेत्र का लोकप्रिय खेल है जो पोर्टलैंड मैराथन और अधिकतर [[हूड टू कॉस्ट रिले]] (दुनिया की सबसे बड़ी घटना) की मेज़बानी करता है।
[[स्कीइंग]] और [[स्नोबोर्डिंग]] भी अत्यधिक लोकप्रिय हैं, साल-भर चलने वाले [[टिम्बरलेन]] सहित पास के [[माउंट हुड]] पर अनेक रीसॉर्ट हैं।
पहले यह ऑरेगॉन की पहली पेशेवर खेलकूद टीम और अमेरिका की पहली पेशेवर हॉकी टीम, [[पैसिफ़िक कॉस्ट हॉकी एसोसिएशन]] की [[पोर्टलैंड रोज़बड्स]] का घर था। रोज़बड्स ने अमेरिका की पहली टीम के तौर पर 1916 में [[स्टैन्ली कप]] फ़ाइनल खेला।
अमेरिका में [[साइकिल दौड़]] पोर्टलैंड में ही सबसे ज़्यादा सक्रिय है, [[ऑरेगॉन बाइसिकल रेसिंग एसोसिएशन]] प्रत्येक वर्ष सैकड़ों घटनाओं की मंजूरी देती है।
बसंत और गर्मियों में [[एल्पेनरोज़ वेल्ड्रोम]] में साप्ताहिक और [[पोर्टलैंड इंटरनेशनल रेसवे]] में सप्ताह की हर रात को दौड़ आयोजित होती है और शरद में [[क्रॉस क्रुसेड]] जैसी [[साइक्लोक्रॉस]] दौड़ों में 1000 से ज़्यादा सवार और उत्साही दर्शक भाग लेते हैं।
इसके अतिरिक्त, पोर्टलैंड मेट्रो की अपनी [[क्रिकेट]] लीग, ऑरेगॉन क्रिकेट लीग (OCL) है जो हर साल क्रिकेट के आउटडोर खेल के 2 फ़ॉरमैट का आयोजन करती है।<ref>{{Cite web |url=http://www.oregonsports.org/not-every-sport-requires-a-ball/ |title=संग्रहीत प्रति |access-date=19 जुलाई 2010 |archive-date=2 अक्तूबर 2011 |archive-url=https://web.archive.org/web/20111002030311/http://www.oregonsports.org/not-every-sport-requires-a-ball/ |url-status=dead }}</ref><ref>{{Cite web |url=http://www.oregoncricketleague.org/ |title=संग्रहीत प्रति |access-date=19 जुलाई 2010 |archive-date=25 जुलाई 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20090725121402/http://www.oregoncricketleague.org/ |url-status=dead }}</ref>
{{List of Portland, Oregon sports teams}}
=== मीडिया ===
{{Main|Media in Portland}}
''[[द ऑरेगॉनियन]]'' पोर्टलैंड का एकमात्र आम दैनिक अखबार है। यह राज्य भर में और [[क्लार्क काउंटी, वॉशिंगटन]] में भी परिचालित होता है।
अखबारों के बक्से और शहर के आसपास के स्थानों पर मुफ़्त वितरित छोटे स्थानीय समाचार पत्रों में शामिल हैं ''[[पोर्टलैंड ट्रिब्यून]]'' (बृहस्पतिवार को कागज पर प्रकाशित होने वाला सामान्य रुचि का अखबार), ''[[विल्मेट वीक]]'' (सामान्य रुचि का [[वैकल्पिक साप्ताहिक]] अखबार), ''[[द पोर्टलैंड मरकरी]]'' (युवा शहरी पाठकों के लिए एक और साप्ताहिक) और ''[[द एशियन रिपोर्टर]]'' (अंतर्राष्ट्रीय और स्थानीय एशियाई समाचारों को कवर करने वाला एक साप्ताहिक).
[[पोर्टलैंड इंडीमीडिया]] सबसे पुराना और सबसे बड़े स्वतंत्र मीडिया केंद्रों में से एक है। ''[[द पोर्टलैंड एलायंस]]'', एक बड़ा सत्ताविरोधी प्रगतिशील मासिक, शहर का सबसे बड़ा कट्टरपंथी मुद्रित पत्र है। पोर्टलैंड में द्विमासिक प्रकाशित होनेवाला ''[[जस्ट आऊट]]'' क्षेत्र का अग्रणी [[LGBT]] प्रकाशन है। एक द्विसाप्ताहिक पत्र, ''[[स्ट्रीट रूट्स]]'' भी बेघर समुदाय के सदस्यों द्वारा शहर में बेचा जाता है।
साप्ताहिक ''द पोर्टलैंड [[बिजनेस जर्नल]]'' और ''द [[डेली जर्नल ऑफ़ कॉमर्स]]'' व्यापार से संबंधित खबरें छापते हैं।
''[[पोर्टलैंड मन्थली]]'' मासिक समाचार और संस्कृति पत्रिका है। 100 साल से अधिक पुराना ''[[द बी]]'' दक्षिण पूर्वी जनता की सेवा में एक और स्थानीय अखबार है।
पोर्टलैंड में टीवी और रेडियो की अच्छी सेवा है। महानगरीय क्षेत्र 1,086,900 घरों और अमेरिकी बाजार के 0.992% वाला 22वां सबसे बड़ा
अमेरिकी [[बाजारी क्षेत्र]] है।{{Citation needed|date= फ़रवरी 2009}}
प्रमुख टेलीविजन नेटवर्क के सहयोगियों में शामिल हैं:
* [[KATU]] 2 ([[ABC]])
*
[[KOIN]] 6 ([[CBS]])
* [[KGW]] 8 ([[NBC]])
* [[KOPB-TV]] 10 Oregon Public Broadcasting ([[PBS]])
* [[KPTV]] 12 ([[Fox]])
* [[KPXG]] 22 ([[ION]])
* [[KRCW-TV]] 32 ([[The CW]])
* [[KUNP-LP]] 47 ([[Univision]])
* [[KPDX]] 49 ([[MyNetworkTV]])
== अर्थव्यवस्था ==
पिछले दशक के दौरान पोर्टलैंड महानगरीय क्षेत्र की जनसंख्या वृद्धि ने राष्ट्रीय औसत को पछाड़ दिया है, मौजूदा अनुमान के अनुसार अगले 50 साल में जनसंख्या वृद्धि में 60% से अधिक की वृद्धि होने की 80% संभावना है।<ref name="pt_growth">{{cite web | title = Metro takes long view of growth | url = http://www.portlandtribune.com/news/story.php?story_id=121200846357363500 | last = Law | first = Steve | publisher = Portland Tribune | date = 29 मई 2008 | accessdate = 4 जून 2008 | archive-date = 6 दिसंबर 2008 | archive-url = https://web.archive.org/web/20081206074247/http://www.portlandtribune.com/news/story.php?story_id=121200846357363500 | url-status = dead }}</ref>
[[चित्र:Portland house price index.gif|thumb|पोर्टलैंड हाउस-मूल्य सूचकांक राष्ट्रीय औसत से अधिक मजबूत बना हुआ है।]]
पोर्टलैंड की अवस्थिति कई उद्योगों के लिए फ़ायदेमंद है। अपेक्षाकृत कम ऊर्जा लागत, सुलभ संसाधन, उत्तर-दक्षिण और पूर्व-पश्चिम अंतर्राज्य, अंतरराष्ट्रीय हवाई टर्मिनल, बड़े समुद्री नौवहन सुविधाएं और दोनों पश्चिमी तट अंतरमहाद्वीपीय रेलसड़कें सभी आर्थिक रूप से फ़ायदेमंद हैं।<ref name="citydata_economy" /> [[अमेरिकी परामर्श फ़र्म मर्सर]] ने 2009 के "कर्मचारियों को अंतरराष्ट्रीय कार्य पर लगाए जाने के लिए सरकारों और प्रमुख कंपनियों की सहायता के लिए" किए गए मूल्यांकन में, [[दुनिया भर में जीवन में गुणवत्ता]] के लिए पोर्टलैंड को 42वां स्थान दिया; सर्वेक्षण [[राजनीतिक स्थिरता]],
[[व्यक्तिगत स्वतंत्रता]], स्वच्छता, अपराध, आवास, प्राकृतिक वातावरण, मनोरंजन, बैंकिंग सुविधाएं, [[उपभोक्ता वस्तुओं]] की उपलब्धता, शिक्षा और सार्वजनिक परिवहन सेवाओं पर आधारित था।<ref>{{cite web| url=http://www.mercer.com/referencecontent.htm?idContent=1173105 | title = Quality of Living global city rankings 2009 – Mercer survey | publisher = [[Mercer (consulting firm)|Mercer]]| date=28 अप्रैल 2009| accessdate=8 मई 2009 }}</ref>
=== भूमि-भवन और निर्माण ===
[[चित्र:Urban Growth Portland Oregon.ogg|पोर्टलैंड के शहरी विकास सीमा का थम्ब|वीडियो.]][[चित्र:Urban Growth Portland Oregon.ogg|लाल बिंदु 1986 और 1996 के बीच विकास के क्षेत्रों को इंगित करते हैं। [[:File:Urban Growth Portland Oregon.ogg|(बड़ा आकार)]]]]
ऑरेगॉन के 1973 का "[[शहरी विकास सीमा कानून]]" ऑरेगॉन के प्रत्येक महानगरीय क्षेत्र में बड़े पैमाने पर विकास की सीमाएं निर्धारित करता है।<ref name="metro_ugb">{{cite web | title = Metro: Urban growth boundary | url = http://www.metro-region.org/index.cfm/go/by.web/id/277 | accessdate = 4 जून 2008 | archive-date = 12 अगस्त 2012 | archive-url = https://web.archive.org/web/20120812085659/http://www.oregonmetro.gov/index.cfm/go/by.web/id/277 | url-status = dead }}</ref> यह सीमा मलजल, पानी और दूरसंचार जैसी उपयोगिताओं तथा अग्निशमन, पुलिस और स्कूलों के विस्तार को सीमित करती है।<ref name="metro_ugb" /> मूल रूप से इस कानून के अनुसार यह अनिवार्य था कि शहर की सीमा के भीतर पर्याप्त भूमि रखी जाए जो अनुमानित 20 साल की वृद्धि के लिए काफ़ी हो किन्तु 2007 में विधायक द्वारा संशोधित कानून के अनुसार सीमा के भीतर अनुमानित 50 साल की वृद्धि के लिए व्यवस्था की जानी है और साथ ही खेत और ग्रामीण भूमि का भी संरक्षण किया जाना है।<ref name="pt_growth" />
वृद्धि की सीमा और आर्थिक विकास अंचल बनाने के PDC के प्रयासों ने, शहर के एक बड़े व्यापारिक हिस्से, बड़ी संख्या में मध्य व उच्च विकास और आवास एंव व्यापार घनत्व में समग्र वृद्धि को प्रेरित किया है।<ref name="ssp_portland">{{cite web | title = Portland - SkyscraperPage | url=http://skyscraperpage.com/cities/?cityID=29 | accessdate = 4 जून 2008}}</ref><ref name="olmis_jobgrowth">{{cite web | title = OLMIS - Portland Metro Area: A Look at Recent Job Growth | url = http://www.qualityinfo.org/olmisj/ArticleReader?itemid=00005735 | accessdate = 4 जून 2008 | archive-date = 31 अक्तूबर 2012 | archive-url = https://web.archive.org/web/20121031180919/http://www.qualityinfo.org/olmisj/ArticleReader?itemid=00005735 | url-status = dead }}</ref> अक्टूबर 2009 में [[फोर्ब्स पत्रिका]] ने पोर्टलैंड को अमेरिका के तीसरे सबसे सुरक्षित शहर का दर्ज़ा दिया है।<ref>{{Cite web |url=http://www.forbes.com/2009/10/26/safest-cities-ten-lifestyle-real-estate-metros-msa.html |title=America's Safest Cities for Real Estate |access-date=31 जुलाई 2012 |archive-url=https://archive.today/20120731111427/http://www.forbes.com/2009/10/26/safest-cities-ten-lifestyle-real-estate-metros-msa.html |archive-date=31 जुलाई 2012 |url-status=live }}</ref>
=== विनिर्माण ===
कंप्यूटर हिस्सों के निर्माता [[इन्टेल]] पोर्टलैंड क्षेत्र के सबसे बड़े नियोक्ता है, 14,000 से अधिक निवासियों को रोज़गार उपलब्ध कराया है और मध्य पोर्टलैंड के पश्चिम में [[हिल्सबोरो]] शहर में इनमें कई परिसर हैं।<ref name="citydata_economy">{{cite web | title = Portland: Economy - Major Industries and Commercial Activity | url=http://www.city-data.com/us-cities/The-West/Portland-Economy.html | accessdate = 4 जून 2008 }}</ref>
महानगरीय क्षेत्र में 1,200 से अधिक प्रौद्योगिकी कंपनियां हैं।<ref name="citydata_economy" /> क्षेत्र में पेड़ों की बहुतायत से संदर्भ लेते हुए, प्रौद्योगिकी कंपनियों के इस उच्च घनत्व के कारण पोर्टलैंड को [[सिलिकॉन वन]] का उपनाम मिला है।
पोर्टलैंड में [[एडिडास]] का क्षेत्रीय मुख्यालय है। महानगरीय क्षेत्र में [[कोलंबिया स्पोर्ट्सवियर]] कॉरपोरेशन, याकिमा प्रोडक्टस और [[Nike, इंक.]] के मुख्यालय हैं।
केवल दो [[फॉर्च्यून 500]] कंपनियों [[बीवरटॉन, ऑरेगॉन्स]] Nike इंक. और पोर्टलैंड्स [[प्रेसिजन कास्टपार्ट्स कॉरपोरेशन]] के मुख्यालय ऑरेगॉन में हैं।
[[फिलिप नाइट]] Nike के सह संस्थापक और अध्यक्ष ऑरेगॉन निवासी और [[ऑरेगॉन विश्वविद्यालय]] के पूर्व छात्र हैं।
पोर्टलैंड के इस्पात उद्योग का इतिहास [[द्वितीय विश्व युद्ध]] से पुराना है।<ref name="history_pdx_steel">{{cite web | title = Steel Industry | url = http://www.history.pdx.edu/guildslake/industry/steel1.htm | accessdate = 4 जून 2008 | archive-date = 6 अगस्त 2012 | archive-url = https://www.webcitation.org/69hdAqlqF?url=http://www.pdx.edu/history/ | url-status = dead }}</ref>
प्रमुख इस्पात कंपनी [[श्निज़्र स्टील इंडस्ट्रीज]] के साथ क्षेत्र में स्टील उद्योग खूब पनप रहा है जिसका 2003 के दौरान 1.15 बिलियन टन धातु स्क्रैप एशिया को भेजने का रिकार्ड है।<ref name="history_pdx_steel" />
20वीं सदी के उत्तरार्ध में पोर्टलैंड क्षेत्र में एल्यूमीनियम उद्योग का विस्तार हुआ। यह मुख्य रूप से क्षेत्र में अपेक्षाकृत कम लागत वाली बिजली, स्थानीय नदियों पर कई बांधों के सौजन्य से हुआ था। इस उद्योग में राजनैतिक रूप से बहुत घुसपैठ हुई है, शेष शहर की तुलना में आवासीय और व्यावसायिक ऊर्जा की लागत पर प्रभाव के कारण और एल्यूमीनियम उत्पादन के साथ जुड़े प्रदूषण के कारण.<ref name="jstor">{{cite web | title = The Juice Junkie | url = http://wweek.com/editorial/2730/1708/ | accessdate = 4 जून 2008 | archive-date = 20 अक्तूबर 2008 | archive-url = https://web.archive.org/web/20081020040022/http://wweek.com/editorial/2730/1708/ | url-status = dead }}</ref>
=== प्रचालन तंत्र ===
संयुक्त राज्य अमेरिका में सबसे अधिक गेहूं पोर्टलैंड बाहर भेजता है,<ref>{{cite web
| url = http://learfieldcreative.typepad.com/brownfield/2009/01/next-stop-port-of-portland-.html
| title = Next stop: Port of Portland
| date = January 7, 2009
| accessdate = 6 फरवरी 2009
| archive-date = 6 अगस्त 2012
| archive-url = https://www.webcitation.org/69hdBXpeD?url=http://learfieldcreative.typepad.com/brownfield/2009/01/next-stop-port-of-portland-.html
| url-status = dead
}}</ref><ref>{{cite web
| url = http://www.ccrh.org/comm/slough/primary/stmntofnd.htm
| title = Port of Portland's Statement of Need
| publisher = Center for Columbia River History
| accessdate = 6 फरवरी 2009
}}</ref> और दुनिया में गेहूं की दूसरी सबसे बड़ी बंदरगाह है।<ref>[http://georgewbush-whitehouse.archives.gov/news/releases/2004/08/20040813-1.html White House press release: The Columbia River Channel Deepening Project, August 13, 2004]</ref>
अकेले समुद्री टर्मिनल प्रति वर्ष 13 मिलियन टन से अधिक माल की संभाल करते हैं और देश के बड़े वाणिज्यिक जहाज़ गोदामों में से एक का घर है।<ref name="answers_cg">{{cite web | title = Cascade General, Inc. | url=http://www.answers.com/topic/cascade-general-inc?cat=biz-fin | accessdate = 4 जून 2008 }}</ref><ref name="portofportland_report">{{cite web | title= Portfolio | url= http://www.portofportland.com/PDFPOP/Portfolio_06_07.pdf | format= PDF | accessdate= 4 जून 2008 | archive-date= 15 जनवरी 2013 | archive-url= https://web.archive.org/web/20130115174439/http://www.portofportland.com/PDFPOP/Portfolio_06_07.pdf | url-status= dead }}</ref> द पोर्ट ऑफ़ पोर्टलैंड पश्चिमी तट पर है तीसरी सबसे बड़ी अमेरिकी बंदरगाह है, हालांकि यह प्रवाह के विपरीत दिशा में {{convert|80|mi|km}}स्थित है।<ref name="citydata_economy" /><ref name="portofportland_report" />
== परिवहन ==
{{multiple image
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| footer =
| image1 = PortlandTriMetMAX.jpg
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| caption1 = [[MAX Light Rail]] is the centerpiece of the city's public transportation system
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| caption2 = [[Portland Streetcar]] runs north-south through Downtown
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| caption3 = [[Portland Aerial Tram]] car descends towards the [[South Waterfront]] district
}}
{{Main|Transportation in Portland, Oregon}}
पोर्टलैंड महानगरीय क्षेत्र की परिवहन सेवाएँ अमेरिका के प्रमुख शहरों के लिए आम हैं, हालांकि ऑरेगॉन का जोर [[शहरी विकास सीमा]] के भीतर सक्रिय [[भूमि-उपयोग योजना]] और [[पारगमन-उन्मुख विकास]] पर रहा है जिसका मतलब है कि यात्रियों के पास अच्छी तरह से विकसित कई विकल्प हैं।
कुछ पोर्टलैंडवासी अपने दैनिक आवागमन के लिए मास ट्रांज़िट का उपयोग करते हैं। 2008 में, पोर्टलैंड में कुल आवागमन का 12.6% सार्वजनिक पारगमन पर था।<ref>{{cite web
|title=American Community Survey 2006, Table S0802
|publisher=[[संयुक्त राज्य जनगणना ब्यूरो|U.S. Census Bureau]]
|url=http://factfinder.census.gov/servlet/STGeoSearchByListServlet?ds_name=ACS_2008_1YR_G00_
|access-date=19 जुलाई 2010
|archive-date=12 फ़रवरी 2020
|archive-url=https://archive.today/20200212054754/http://factfinder.census.gov/servlet/STGeoSearchByListServlet?ds_name=ACS_2008_1YR_G00_
|url-status=dead
}}</ref> [[ट्राइमेट]] क्षेत्र की अधिकांश बसें संचालित करता है और [[MAX]] (मेट्रोपोलिटन एरिया एक्सप्रेस का संक्षिप्त नाम) [[लाइट रेल]] प्रणाली शहर और उपनगरों को जोड़ती है। फ़रवरी 2009 में, पोर्टलैंड के पश्चिमी उपनगरों के लिए [[बीवरटॉन]] और [[विल्सनविल]] को जोड़ने वाली [[वेस्टसाइड एक्सप्रेस सर्विस]] या वेस को रेल यात्री के रूप में खोला गया।
[[पोर्टलैंड स्ट्रीटकार]] साउथ वॉटरफ़्रंट से लेकर पोर्टलैंड स्टेट विश्वविद्यालय से होती हुई
उत्तर के आसपास के घरों और बाज़ारों को जाती है।
व्यापारिक क्षेत्र में केंद्रित निर्दिष्ट भौगोलिक क्षेत्र [[फ़्री रेल ज़ोन]] में ट्राइमेट की मैक्स और स्ट्रीटकार मुफ़्त हैं।
व्यापारिक क्षेत्र में फ़िफ़्थ और सिक्स्थ एवेन्यू [[पोर्टलैंड ट्रांजिट मॉल]] है ये दोनो मार्ग
सीमित ऑटोमोबाइल उपयोग के साथ मुख्य रूप से बस और लाइट रेल ट्रैफ़िक को समर्पित हैं।
गहन सार्वजनिक परिवहन विकास जारी है, दो लाइट रेल लाइनें और कई पारगमन विकल्प जोड़ने वाला एक नया व्यापारिक पारगमन मॉल निर्माणाधीन हैं। ट्राइमेट भी अपने ट्रांज़िटट्रैकर के साथ बसों और गाड़ियों के वास्तविक समय पर नज़र रखता है और सॉफ्टवेयर डेवलपर्स को डेटा उपलब्ध करता है ताकि वे अपने अनुकूलित उपकरणों का निर्माण कर सकें.<ref>[http://www.myTrimet.com Trimet website]</ref>
[[I-5]] पोर्टलैंड को [[विल्मेट वैली]], [[दक्षिणी ऑरेगॉन]], दक्षिण को [[कैलिफोर्निया]] से और उत्तर में [[वाशिंगटन]] के साथ जोड़ता है।
[[I-405]] शहर के केंद्रीय व्यापारिक क्षेत्र के आसपास I-5 के साथ घेरा बनाता है और [[I-205]] पूर्व में लूप फ्रीवे मार्ग है जो [[पोर्टलैंड अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे]] के साथ जोड़ता है।
[[यूएस 26]] मेट्रो क्षेत्र के भीतर आवागमन को सुकर बनाती है और पश्चिम की ओर [[प्रशांत महासागर]] और [[माउंट हूड]] और पूर्व की ओर [[केन्द्रीय ऑरेगॉन]] की ओर जाती है।
यूएस 30 का एक मुख्य बाईपास और व्यापार मार्ग है जो शहर के बीच से होते हुए पश्चिम में [[एस्टोरिया, ऑरेगॉन]]; [[ग्रेशम, ऑरेगॉन]], पूर्वी [[उपनगर के परे]] से होता हुआ [[I-84]] को जोड़ता हुआ [[इडाहो, बॉइस]] की ओर जाता है।
पोर्टलैंड का मुख्य हवाई अड्डा [[पोर्टलैंड अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा]] है जो व्यापारिक शहर के उत्तर पूर्व में कार द्वारा 20 मिनट (मैक्स द्वारा 40 मिनट) की दूरी पर स्थित है।
इसके अलावा पोर्टलैंड [[ऑरेगॉन]] के एकमात्र सार्वजनिक उपयोग के हेलिपोर्ट, [[पोर्टलैंड डाउनटाउन हेलिपोर्ट]] का घर है।
[[एम्ट्रैक]], राष्ट्रीय यात्री रेल तंत्र, [[यूनियन स्टेशन]] से तीन मार्गों पर पोर्टलैंड को सेवा प्रदान करता है।
लंबी दूरी के रेल मार्गों में [[कोस्ट स्टारलाईट]](लॉस एंजिल्स से सिएटल को) और [[एम्पायर बिल्डर]] (पोर्टलैंड से शिकागो के लिए) शामिल है।
[[Amtrak Cascades]] यात्री रेल गाड़ियां [[वैंकूवर, ब्रिटिश कोलंबिया]] और [[यूजीन, ऑरेगॉन]] और पोर्टलैंड के बीच दिन में कई बार चलती हैं।
शहर [[शहरी साइकिलिंग]] के लिए विशेष रूप से अनुकूल है और इसके रास्तों के नेटवर्क और अन्य साइकिल-अनुकूल सेवाओं के लिए [[लीग ऑफ़ अमेरिकन बाइसिक्लिस्ट्स]] ने इसे मान्यता
दी है।<ref>{{cite web
| url=http://www.bikeleague.org/media/press/
| title=League of American Bicyclists * Press Releases
| publisher=Bikeleague.org
| accessdate=6 अक्टूबर 2008
| archive-date=30 मई 2013
| archive-url=https://web.archive.org/web/20130530133918/http://www.bikeleague.org/media/press/
| url-status=dead
}}</ref>
दुनिया के साइकिल अनुकूल शहरों में इसका उच्च स्थान है।<ref>{{cite web
| url = http://www.virgin-vacations.com/site_vv/11-most-bike-friendly-cities.asp
| title = 11 Most Bike Friendly Cities in the World – Bicycle friendly cities
| work = Virgin Vacations
| publisher = Virgin Airlines
| accessdate = 18 जून 2009
| archive-date = 1 जनवरी 2010
| archive-url = https://web.archive.org/web/20100101015142/http://virgin-vacations.com/site_vv/11-most-bike-friendly-cities.asp
| url-status = dead
}}</ref>
[[बाइसिकल ट्रांसपोर्टेशन एलायंस]] एक वार्षिक बाइसिकल कॉमयूट चैलेंज प्रायोजित करता है जिसमें हजारों यात्री लंबाई और उनके कॉमयूट की आवृत्ति पर आधारित पुरस्कार और मान्यता के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं।<ref>[http://www.bikecommutechallenge.com/oregon Bicycle Commute Challenge] जानकारी</ref>
अनुमानित 8% यात्री साइकिल पर काम को जाते हैं जो किसी भी प्रमुख अमेरिकी नगर का उच्चतम अनुपात है और राष्ट्रीय औसत का लगभग 10 गुणा है।<ref>[http://online.wsj.com/article/SB124242099361525009.html 'Youth Magnet' Cities Hit Midlife Crisis] द वॉल स्ट्रीट जर्नल. 14 जून 2009 को पुनः प्राप्त.</ref> [[ज़िपकार]] और [[यू कार शेयर]] के माध्यम से [[साझा कार]] शहर के निवासियों और कुछ भीतरी उपनगरों के निवासियों के लिए उपलब्ध है।
पोर्टलैंड का कॉमयूटर एरियल केबलवे, [[पोर्टलैंड एरियल ट्रैम]] है जो विल्मेट रीवर पर [[साउथ वॉटरफ़्रन्ट]] जिले को मैरक्वेम हिल पर [[ऑरेगॉन हैल्थ एंड साइंस यूनिवर्सिटी]] परिसर से जोड़ता है।
पोर्टलैंड के पांच इनडोर [[स्केटपार्क]] हैं और ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण [[बर्नसाइड स्केटपार्क]] का घर है।
हाल ही में 12 जुलाई 2008 को [[गैब्रियल स्केटपार्क]] खोला गया है।
अन्य चौदह पर काम चल रहा है।<ref>{{cite web |url=http://skateportland.org/?page_id=11 |title=19: Portland's Skatepark Master Plan |accessdate=18 जुलाई 2006 |publisher=Skaters for Portland Skateparks}}</ref> [[वाल स्ट्रीट जर्नल]] ने कहा पोर्टलैंड "अमेरिका में सबसे ज़्यादा स्केटबोर्ड के अनुकूल शहर हो सकता है।"<ref>{{cite news|url=http://online.wsj.com/article/SB10001424052970204119704574238073660408040.html|title=Skateboarding Capital of the World|last=Dougherty|first=Conor|date=जुलाई 30, 2009|work=[[The Wall Street Journal]]|accessdate=31 जुलाई 2009}}</ref>
== कानून और सरकार ==
{{See also|Government of Portland, Oregon}}
[[चित्र:PortlandCityHall.jpg|right|thumb|पोर्टलैंड सिटी हॉल]]
पोर्टलैंड शहर [[पोर्टलैंड सिटी काउंसिल]] द्वारा शासित है जिसमें मेयर, चार कमिश्नर और एक लेखा परीक्षक शामिल है।
प्रत्येक शहर द्वारा चार साल के कार्यकाल के लिए निर्वाचित होता है।
लेखा परीक्षक कमीशन के रूप में सरकार पर अंकुश और संतुलन प्रदान करता है तथा सार्वजनिक संसाधनों का उपयोग करने के लिए जवाबदेह होता है।
इसके अलावा, लेखा परीक्षक शहर के विभिन्न सरकारी मामलों पर जानकारी और रिपोर्ट उपलब्ध कराता है।
शहर का ऑ़फ़िस ऑफ़ नेबरहुड इन्वॉल्वमेंट शहर की सरकार और 95 [[पड़ोसी एसोसिएशनों]] के बीच वाहक के रूप में कार्य करता है जो सात गठबंधनों में समूहीकृत है।
पोर्टलैंड और उसके आसपास का महानगरीय क्षेत्र [[मेट्रो]] द्वारा शासित है जो संयुक्त राज्य अमेरिका की सीधे निर्वाचित एकमात्र क्षेत्रीय सरकार है। मेट्रो चार्टर में भूमि उपयोग और परिवहन नियोजन, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और मानचित्र विकास शामिल हैं। यह [[ऑरेगॉन कन्वेंशन सेंटर]], [[ऑरेगॉन चिड़ियाघर]], [[पोर्टलैंड सेंटर फ़ॉर परफ़ॉरमिंग आर्ट्स]] और [[पोर्टलैंड मेट्रोपॉलिटन एक्सपॉज़िशन सेंटर]] का मालिक और संचालक भी है।
[[मल्टनोमाह काउंटी]] सरकार ने भी दक्षिण और पश्चिम में [[वॉशिंगटन]] और [[क्लैकामस]] काउंटी के साथ साथ पोर्टलैंड क्षेत्र के लिए कई सेवाएं प्रदान की हैं।
1950 के दशक के बाद से, यदि पहले नहीं तो, पोर्टलैंड ने सरकार के सभी स्तरों पर [[डेमोक्रेटिक पार्टी]] को जोरदार समर्थन किया है।{{Citation needed|date=दिसम्बर 2008}} हालांकि स्थानीय चुनाव स्वतंत्र रूप से होते हैं, शहर के अधिकांश निर्वाचित अधिकारी डेमोक्रेट होते हैं। [[ऑरेगॉन विधानमंडल]] में शहर के प्रतिनिधिमंडल में भी डेमोक्रेट हावी रहते हैं।
संघ के तौर पर, पोर्टलैंड तीन [[कांग्रेसी जिलों]] में विभाजित है।
अधिकांश शहर [[तीसरे जिले]] में है जिसका प्रतिनिधित्व [[अर्ल ब्लूम्नॉर]] करते हैं जिन्होंने 1996 में कांग्रेस में निर्वाचित होने तक 1986 से सिटी कौंसिल की सेवा की है।
विल्मेट रीवर का अधिकांश पश्चिमी हिस्सा [[प्रथम जिला]] का हिस्सा है जिसका प्रतिनिधित्व [[डेविड वू]] करते हैं।
शहर का एक छोटा हिस्सा [[पांचवें जिले]] में है जिसका प्रतिनिधित्व [[कर्ट श्रेडर]] करते हैं।
सभी तीनों डेमोक्रेट हैं, 1975 के बाद से किसी भी [[रिपब्लिकन]] ने पोर्टलैंड के महत्वपूर्ण हिस्से का प्रतिनिधित्व नहीं किया है। ऑरेगॉन के दोनों सेनेटर [[रॉन वाइडन]] और [[जेफ़ मर्कली]] पोर्टलैंड से हैं।
पोर्टलैंड के वर्तमान मेयर, सैम एडम्स, 2009 में बने पहले खुलेआम समलैंगिक मेयर हैं।<ref>{{Cite web |url=http://www.sovo.com/2009/1-9/news/national/9647.cfm |title=Portland becomes largest U.S. city with gay mayor - Southern Voice |access-date=19 जुलाई 2010 |archive-date=16 जून 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20090616134227/http://www.sovo.com/2009/1-9/news/national/9647.cfm |url-status=dead }}</ref> उस समय, पोर्टलैंड GLBT मेयर वाला सबसे बड़ा अमेरिकी शहर बना. 2004 में, मल्टनोमाह काउंटी ने [[ऑरेगॉन बैलेट मीज़र 36]] के खिलाफ़ 59.7% मतदान किया जिसने [[ऑरेगॉन संविधान]] में संशोधन करके शादी को एक आदमी और एक औरत के रूप में
परिभाषित किया और [[समलैंगिक विवाह]] का निषेध किया, हालांकि यह राज्यव्यापी वोट के कोवल 56.6% के साथ ही पारित हुआ।
[[बेन्टन काउंटी]], जिसमें [[कॉरवैलिस]] शामिल हैं और जो [[ऑरेगॉन स्टेट यूनिव्रसिटी]] का घर है, एकमात्र अन्य काउंटी है जहां यह प्रयास विफल रहा.<ref>[http://www.uselectionatlas.org/RESULTS/state.php?year=2004&off=60&elect=0&fips=41&f=0 Oregon Measure 36 Results by County]</ref>
=== योजना और विकास ===
[[चित्र:PortlandOR-aerial.jpg|thumb|केंद्रीय पोर्टलैंड का हवाई दृश्य]]
[[चित्र:PDX1966PGEplant.jpg|thumb|right|1966 फोटो व्यापारिक क्षेत्र के सिरे पर बुरादा-चालित ऊर्जा संयंत्र को दर्शाता है जिसे घने आवासीय विकास के लिए हटा दिया गया था। पृष्ठभूमि में बायीं ओर के ऊंचे भवन पोर्टलैंड विकास आयोग की प्रारंभिक परियोजनाएं थीं।]]
शहर ने 1903 में ही शहरी नियोजकों के साथ परामर्श किया था।
[[वाशिंगटन पार्क]] और शहर के कई पार्कों को जोड़ने वाले देश के बेहतरीन ग्रीनवेज़, [[40 माइल लूप]], का विकास करना शुरू किया।
सुदृढ़ [[भूमि उपयोग योजना]] नियंत्रण वाले शहर के रूप में अक्सर पोर्टलैंड का उदाहरण दिया जाता है।<ref name="smartplan">{{cite web | title = The "Smart Growth" Debate Continues | publisher = Urban Mobility Corporation | date = May/June 2003 | url = http://www.innobriefs.com/editor/20030423smartgrowth.html | accessdate = 7 नवंबर 2006 | archive-date = 6 अगस्त 2012 | archive-url = https://www.webcitation.org/69hdOobtC?url=http://www.innobriefs.com/editor/20030423smartgrowth.html | url-status = dead }}</ref> यह राज्यपाल [[टॉम मैक्कॉल]] के अधीन अपनाई गई राज्यव्यापी भूमि संरक्षण नीतियों, विशेष रूप से हर शहर और महानगरीय क्षेत्र के लिए [[शहरी विकास सीमा]] (UGB) की आवश्यकता, का परिणाम है।
इसके चरम विपरीत बहुत कम या किसी भी नियंत्रण के बगैर शहर का ज्वलन्त उदाहरण [[हूस्टन, टेक्सास]] है।<ref>{{cite web|url=http://www.businessweek.com/the_thread/hotproperty/archives/2007/10/how_houston_get.html |title=How Houston gets along without zoning - BusinessWeek |publisher=Businessweek.com |date= |accessdate=20 अक्टूबर 2008}}</ref><ref>{{cite news|url=http://www.usatoday.com/travel/destinations/cityguides/houston/2003-10-07-spotlight-zoning_x.htm |title=USATODAY.com - Houston: A city without zoning |publisher=Usatoday.com |author=Sherry Thomas, special for USATODAY.com |date=Posted 10/30/2003 12:20 PM |accessdate=20 अक्टूबर 2008}}</ref><ref>{{cite web|url=http://www.planetizen.com/node/109 |title=Zoning Without Zoning | Planetizen |publisher=Planetizen.com |author=Author: Michael Lewyn |date= |accessdate=20 अक्टूबर 2008}}</ref><ref>{{cite news|url=http://query.nytimes.com/gst/fullpage.html?res=9A0DEFDB103FF934A2575BC0A960948260 |title=FOCUS: Houston; A Fresh Approach To Zoning - New York Times |publisher=Query.nytimes.com |author=Robert Reinhold |date=Published: August 17, 1986 |accessdate=20 अक्टूबर 2008}}</ref><ref>{{cite web|url=http://houston.bizjournals.com/houston/stories/2006/04/10/editorial1.html |title='The only major U.S. city without zoning' - Houston Business Journal: |publisher=Houston.bizjournals.com |date= |accessdate=20 अक्टूबर 2008}}</ref>
1979 में अपनायी गई पोर्टलैंड की शहरी विकास सीमा शहरी क्षेत्रों (जहां उच्च घनत्व विकास को प्रोत्साहित किया जाता है) को पारंपरिक कृषि भूमि (जहां गैर-कृषि विकास बहुत प्रतिबंधित है) से अलग करती है।<ref>[http://www.oregon.gov/LCD/goals.shtml Statewide Planning Goals.] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20111103211716/http://www.oregon.gov/LCD/goals.shtml |date=3 नवंबर 2011 }} भूमि संरक्षण और विकास विभाग ऑरेगॉन. 23 दिसम्बर 2007 को पुनः प्राप्त.</ref>
यह उस युग में था जब कई क्षेत्रों ने ऑटोमोबाइल उपयोग के कारण [[अंतर्राज्यीय राजमार्ग]] के साथ, [[उपनगरों]] में और [[उपग्रह शहरों]] में विकास को ज्यादा महत्व देते हुए महत्वपूर्ण शहरों की उपेक्षा की.
जनसंख्या बढ़ने के साथ शहरी विकास सीमा के अंदर अविकसित भूमि कम पड़ने लगी है, ऐसे में नियमों को बदलने या इनमें ढील देने के लिए दबाव पड़ने लगा है।{{Citation needed|date=अक्टूबर 2008}}
वाशिंगटन काउंटी में दो प्रमुख नियोक्ताओं [[Nike]] और [[Intel]] के तेजी से हुए विकास ने इस दबाव में योगदान दिया है।{{Citation needed|date=अक्टूबर 2008}}
राज्य के मूल नियमों में शहरी विकास की सीमाओं के विस्तार के लिए प्रावधान किया गया है
लेकिन आलोचकों को लगा इसका पालन नहीं किया जा रहा. 1995 में, राज्य ने कानून पारित किया जिसके अनुसार अनुमानित वृद्धि स्तर पर भविष्य में अगले 20 वर्ष के आवास की पर्याप्त आपूर्ति के लिए अविकसित भूमि उपलब्ध कराने के लिए शहरों को UGBs विस्तृत करनी होगी.<ref>{{cite web | title = Comprehensive Land Use Planning Coordination | publisher = Legislative Counsel Committee of the Oregon Legislative Assembly | url = http://www.leg.state.or.us/ors/197.html | accessdate = 7 नवंबर 2006 | archive-date = 28 अक्तूबर 2012 | archive-url = https://web.archive.org/web/20121028035146/http://www.leg.state.or.us/ors/197.html | url-status = dead }}</ref>
[[पोर्टलैंड डेवलपमेंट कमीशन]] एक अर्द्ध सरकारी एजेंसी है जो व्यापारिक क्षेत्र के विकास में एक प्रमुख भूमिका निभाता है, शहर की [[शहरी नवीकरण]] एजेंसी के तौर पर शहर के मतदाताओं द्वारा 1958 में इसका गठन किया गया।
यह शहर के भीतर आवास और आर्थिक विकास कार्यक्रमों प्रदान करता है और बड़ी परियोजनाएं बनाने के लिए प्रमुख स्थानीय डेवलपर्स के साथ पर्दे के पीछे काम करता है।
1960 के प्रारंभ में, PDC ने लगभग I-405 फ्रीवे, विल्मेट रीवर, 4 एवेन्यू और मार्केट स्ट्रीट से घिरे एक बड़े इतालवी-यहूदी इलाके को गिराया.
मेयर [[नील गोल्डश्मिट]] ने 1970 में कार्यालय संभाला जो शाम के पांच बजे बाद के खाली होने वाले व्यापारिक क्षेत्र में जीवन शक्ति और आवास वापस लाने के प्रस्तावक थे।
तब से 30 वर्षों में इस प्रयास का नाटकीय प्रभाव पड़ा है, तीन क्षेत्रों, पोर्टलैंड स्टेट यूनिवर्सिटी के उत्तर में (I-405 फ्रीवे,SW ब्रॉडवे और SW टेलर स्ट्रीट के बीच); मैरक्म (I-5) ब्रिज के नीचे वॉटरफ़्रन्ट के साथ रीवरप्लेस डेवलपमेंट और विशेष रूप से पर्ल डिस्ट्रिक्ट (I-405, बर्नसाइड स्ट्रीट, NW Northrup St. और NW 9th ऐवन्यू के बीच) में कई हज़ार नए आवासों का झुरमुट हो गया है।
पोर्टलैंड स्टेट यूनिवर्सिटी के भूगोल विभाग के मानचित्रण अनुसंधान केन्द्र में स्थित अर्बन ग्रीनस्पेसिज़ इंस्टिट्यूट निर्मित और प्राकृतिक वातावरण के बेहतर एकीकरण को बढ़ावा देता है।
संस्थान शहरी पार्क, ट्रेल और स्थानीय और क्षेत्रीय दोनों स्तरों पर प्राकृतिक क्षेत्र योजना मुद्दों के संबंध में काम करता है।
''[[ग्रिस्ट]]'' पत्रिका के अनुसार, ''[[रिक्जेविक]]'', ''[[आइसलैंड]]'' के बाद पोर्टलैंड दुनिया का दूसरा सबसे ''[[पर्यावरण के अनुकूल]]'' या "हरा" शहर है।<ref>{{cite web | title = Grist 15 Green Cities | publisher = ''Grist'' Magazine Online | url = http://www.grist.org/news/maindish/2007/07/19/cities/index.html | accessdate = 2 जनवरी 2007 | archive-date = 2 जनवरी 2011 | archive-url = https://web.archive.org/web/20110102130205/http://www.grist.org/news/maindish/2007/07/19/cities/index.html | url-status = dead }}</ref>
2010 में, [[Move.com]] ने पोर्टलैंड को "शीर्ष 10 पर्यावरण अनुकूल शहर" की अपनी सूची में रखा.<ref>{{cite news|url=http://www.oregonlive.com/idahosportugal/index.ssf/2010/03/portland_makes_list_of_top_10.html|title=Top 10 greenest cities: Portland makes the cut|last=Sienstra|date=24 मार्च 2010|work=[[The Oregonian]]|accessdate=24 मार्च 2010}}</ref><ref>{{cite web|url=http://www.move.com/home-finance/real-estate/general/top-greenest-cities-in-us.aspx|title=The Top 10 Greenest Cities|last=Kipen|first=Nicki|date=24 मार्च 2010|work=[[Move.com]]|accessdate=24 मार्च 2010|archive-date=6 अगस्त 2012|archive-url=https://www.webcitation.org/69hdRdHwz?url=http://www.realtor.com/home-finance/real-estate/general/top-greenest-cities-in-us.aspx|url-status=dead}}</ref>
=== मुक्त भाषण ===
[[ऑरेगॉन संविधान]] द्वारा मुक्त भाषण की सशक्त सुरक्षा के कारण जिसे [[ऑरेगॉन उच्चतम न्यायालय]] ने [[हेन्री बनाम ऑरेगॉन संविधान 1987]] ने वैध ठहराया जिसने विशेष रूप से पाया
कि पूरी नग्नता और स्ट्रिप क्लब में लैप डांस संरक्षित भाषण हैं,<ref>{{cite web
| last = Busse
| first = Phil
| publisher = [[The Portland Mercury]]
| title = Cover Yourself!
| date = November 7, 2002
| url = http://www.portlandmercury.com/portland/Content?oid=27886&category=22101
| accessdate = 1 फरवरी 2007
}}</ref> पोर्टलैंड में [[लास वेगास]]
या [[सैन फ्रांसिस्को]] की तुलना में प्रति व्यक्ति अधिक लैप डांस हैं।<ref>{{cite web
| last = Moore
| first = Adam S.
| author2 = Beck, Byron
| title = Bump and Grind
| publisher = [[Willamette Week]]
| date = November 8, 2004
| url = http://www.wweek.com/story.php?story=6093
| accessdate = 1 फरवरी 2007
| archive-date = 6 अगस्त 2012
| archive-url = https://www.webcitation.org/69hdVNoXh?url=http://www.wweek.com/portland/article-4194-1995.html
| url-status = dead
}}</ref><ref>{{cite web
| url = http://abcnews.go.com/TheLaw/Story?id=6088041&page=1
| title = Strip Club Teases Small Oregon City—In National Capital of Stripping, Residents Say Free Speech Has Gone Too Far
| author = Susan Donaldson James
| publisher = ABC News
| date = October 22, 2008
| accessdate = 8 दिसंबर 2008
}}</ref><ref>{{cite web
| url = http://www.katu.com/news/local/8263157.html
| title = Judge: Salem lap dances protected by constitution
| author = Associated Press
| work = KATU News
| date = June 30, 2007
| accessdate = 8 दिसंबर 2008
| archive-date = 6 मई 2012
| archive-url = https://web.archive.org/web/20120506210914/http://www.katu.com/news/local/8263157.html
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}}</ref>
एक जज ने नवंबर 2008 में एक नंगे साइकिलवाला के खिलाफ़ आरोपों को इस आधार पर खारिज कर दिया कि शहर का वार्षिक [[वर्ल्ड नेकेड बाइक राइड]] "पोर्टलैंड की सुस्थापित परंपरा
थी"<ref>{{cite web
| url = http://www.katu.com/news/local/34445764.html
| title = Judge: riding in the buff is 'tradition,' man cleared
| work = Associated Press
| publisher = KATU
| date = November 21, 2008
| accessdate = 8 दिसंबर 2008
| archive-date = 22 जनवरी 2009
| archive-url = https://web.archive.org/web/20090122082145/http://www.katu.com/news/local/34445764.html
| url-status = dead
}}</ref>
यह 2009 की नेकेड बाइक राइड हुई बिना किसी महत्वपूर्ण घटना के हुई.<ref>{{cite web
| url = http://www.youtube.com/watch?v=i5wSKi5Bchk
| title = BUTTCRACKS AND BICYCLES: the Portland naked bike ride 2009!
| author = magnifiquem
| work = YouTube
| date = June 12, 2009
| accessdate = 22 जून 2009
}}</ref> शहर की पुलिस यातायात के चौराहों पर तैनात रही.<ref>{{cite web
| url = http://www.katu.com/news/local/48028862.html
| title = Cyclists bare all in naked ride through Portland
| date = June 14, 2009
| work = KATU
| accessdate = 22 जून 2009
| archive-date = 6 अगस्त 2012
| archive-url = https://www.webcitation.org/69hiBW0JZ?url=http://www.katu.com/news/local/48028862.html
| url-status = dead
}}</ref> एक अनुमान के अनुसार वहाँ 3000 से 5000 प्रतिभागी थे।<ref>{{cite web
| url = http://pdxpipeline.wordpress.com/2009/06/15/portland-naked-bike-ride-5000-people-pictures-story/
| title = Portland Naked Bike Ride: 5000 People
| date = June 15, 2009
| work = PDX Pipeline
| author = Jonathan Maus, BikePortland
| accessdate = 22 जून 2009
}}</ref><ref>{{cite web
| url = http://bikeportland.org/2009/06/14/world-naked-bike-ride-was-it-good-for-you/
| title = An estimated 5,000 take part in Portland’s Naked Bike Ride
| author = Jonathan Maus
| work = Bike Portland
| date = June 14, 2009
| accessdate = 22 जून 2009
}}</ref>
एक राज्य कानून सार्वजनिक तौर पर किसी व्यक्ति के अपमान करने, जिसके जवाब में व्यक्ति भड़ककर हिंसा पर उतारू हो जाए, पर रोक लगाने के बारे में था, उसे पोर्टलैंड में परीक्षण के तौक पर लागू किया गया तो इसे राज्य के उच्चतम न्यायालय ने स्वतंत्र भाषण का उल्लंघन और अतिश्योक्ति कहकर सर्वसम्मति से निरस्त कर दिया.<ref>{{cite web
| url = http://www.seattlepi.com/local/375034_racist15.html
| title = Oregon Court: Racist, insulting speech is protected
| date = August 14, 2008
| author = Associated Press
| work = Seattle Post-Intelligencer
| accessdate = 8 दिसंबर 2008
}}</ref>
== जनसांख्यिकी ==
{{USCensusPop
| 1850 = 821
| 1860 = 2874
| 1870 = 8293
| 1880 = 17577
| 1890 = 46385
| 1900 = 90426
| 1910 = 207214
| 1920 = 258288
| 1930 = 301815
| 1940 = 305394
| 1950 = 373628
| 1960 = 372676
| 1970 = 382619
| 1980 = 366383
| 1990 = 437319
| 2000 = 529121
| footnote =<ref>{{cite web | title = State & County QuickFacts | publisher = U.S. Census Bureau | url = http://quickfacts.census.gov/qfd/states/41/4159000.html | accessdate = 7 नवंबर 2006 | archive-date = 6 अगस्त 2012 | archive-url = https://www.webcitation.org/69hd3i5Qq?url=http://quickfacts.census.gov/qfd/states/41/4159000.html | url-status = dead }}</ref>
}}
2000 को, एक अनुमान के अनुसार शहर में 223,737 घरों में और 118,356 परिवारों में 529,121 लोग रहते हैं। [[जनसंख्या का घनत्व]] प्रति वर्ग मील (1,655.31/km²) 4,228.38 लोग हैं। एक औसत 1,766.7/वर्ग मील (682.1/km²) के घनत्व में 237307 आवास इकाइयां हैं।
{| class="wikitable"
! colspan="3"|2005-7 अमेरिकी समुदाय के सर्वेक्षण अनुमान<ref>?http://factfinder.census.gov/servlet/ADPTable?_bm=y&-geo_id=16000US4159000&-qr_name=ACS_2007_3YR_G00_DP3YR5&-ds_name=ACS_2007_3YR_G00_&-_lang=en&-redoLog=false&-_sse=on {{Webarchive|url=https://archive.today/20200211182630/http://factfinder.census.gov/servlet/ADPTable?_bm=y&-geo_id=16000US4159000&-qr_name=ACS_2007_3YR_G00_DP3YR5&-ds_name=ACS_2007_3YR_G00_&-_lang=en&-redoLog=false&-_sse=on |date=11 फ़रवरी 2020 }}</ref>
! ''(NH) ''
! ''(DC)''
|- align="right"
| 425,535
| 78.6%
| align="left"|'''श्वेत'''
| ''74.1%''
| ''81.9%''
|- align="right"
| 36,495
| 6.7%
| align="left"|'''एशियाई'''
| ''6.7%''
| ''7.9%''
|- align="right"
| 35,853
| 6.6%
| align="left"|'''अश्वेत या अफ़्रीकी अमेरिकी'''
| ''6.5%''
| ''7.9%''
|- align="right"
| 6,999
| 1.3%
| align="left"|'''अमेरिकी भारतीय, अलास्का मूल निवासी'''
| ''0.6%''
| ''2.8%''
|- align="right"
| 2,521
| 0.5%
| align="left"|'''हवाई के मूल निवासी, प्रशांत द्वीप वासी'''
| ''0.5%''
| ''0.6%''
|- align="right"
| 14,438
| 2.7%
| align="left"|'''कुछ अन्य जातियां'''
| ''0.2 %''
| ''2.9%''
|- align="right"
| 19,709
| 3.6%
| align="left"|'''दो या अधिक जातियां'''
| ''3.0%''
| rowspan="5" valign="bottom"|''104%''
|- align="right"
| 541,550
| 100%
| align="left"| '''सभी जातियों का कुल'''
| rowspan="3" valign="bottom"|''91.5%''
|- align="right"
| 46,296
| 8.5%
| align="left"| '''कुल हिस्पैनिक / लैटिनो''' (किसी भी जाति के)
|- align="right"
| colspan="3"| '''''(NH)'' ''' ''कुल गैर-हिस्पैनिक जातियां''
|- align="right"
| colspan="4"| '''''(DC)'' ''' ''कुल, दोगुना / तिगुना 'गिनती दो या अधिक जातियां'''
|-
|}
ऑरेगॉन राज्य औसत की तुलना में पोर्टलैंड का घरेलू आव्यूह गुणन राज्य औसत से ऊपर है और इसकी औसत अश्वेत, हिस्पैनिक और विदेश-में-जन्मी जनसंख्या राज्य औसत से काफ़ी ऊपर हैं।{{Citation needed|date=मार्च 2009}}
223,737 घरों में से 24.5% लोगों के 18 से उम्र के बच्चे उनके साथ रहते हैं, 38.1% [[विवाहित जोड़े]] एक साथ रहते हैं, 10.8% में बिना पति की गृहस्थ महिला है और 47.1% गैर-परिवार हैं।
सभी घरों का 34.6% व्यक्ति हैं और 9% के पास 65 वर्ष या ऊपर की उम्र के व्यक्ति हैं। घर का औसत आकार 2.3 और औसत परिवार का आकार 3 है।
आयु वितरण है, 18 वर्ष से कम उम्र 21.1%, 18 से 24 के 10.3%, 25 से 44 के 34.7%, 45 से 64 के 22.4% और 65 वर्ष के या इससे ऊपर के 11.6% हैं।
औसत उम्र 35 वर्ष है। हर 100 महिलाओं के लिए 97.8 पुरुष हैं। 18 और उससे अधिक आयु वाली प्रत्येक 100 महिलाओं के लिए 95.9 पुरुष हैं।
शहर में एक घर की औसत आय $40,146 है और एक परिवार की औसत आय $50,271 है। महिलाओं की $29,344 आय की तुलना में पुरुषों की औसत आय $35,279 है। शहर की [[प्रति व्यक्ति आय]] $22,643 है। जनसंख्या का 13.1% और परिवारों का 8.5% [[गरीबी रेखा]] के नीचे है। कुल जनसंख्या में से 18 वर्ष की आयु के नीचे के 15.7% और 65 वर्ष के और उससे ऊपर की आयु के 10.4% लोग गरीबी रेखा से नीचे रह रहे हैं। जाति के आधार पर आय के स्तर की रूपरेखा के आंकड़े इस समय उपलब्ध नहीं हैं।
हालांकि शहर की आबादी बढ़ रही है किन्तु बच्चों की कुल जनसंख्या कम हो रही है जिससे पब्लिक स्कूल तंत्र को स्कूल बंद करने पड़ रहे हैं। 2005 के एक अध्ययन में पाया गया कि 1925 की तुलना में पोर्टलैंड में अब कम बच्चे शिक्षा पा रहे हैं जबकि तब से शहर की आबादी लगभग दोगुनी हो गई है और अगले
दशक में प्रत्येक वर्ष तीन-चार प्राथमिक स्कूल बंद करने पड़ेंगे.<ref>{{ cite news | last = Egan | first = Timothy | url = http://www.nytimes.com/2005/03/24/national/24childless.html?ei=5090&en=cbfa254535a51a5f&ex=1269320400&partner=rssuserland&pagewanted=all&position= | title = Vibrant Cities Find One Thing Missing: Children | publisher = ''[[दि न्यू यॉर्क टाइम्स]]'' | date = March 24, 2005 }}</ref>
1940 में, पोर्टलैंड में [[अफ़्रीकी-अमेरिकी]] आबादी लगभग 2,000 थी और इसमें बड़े पैमाने पर रेल कर्मचारी और उनके परिवार शामिल थे।<ref name="maccoll">{{cite book
| last = MacColl
| first = E. Kimbark
| authorlink =
|author2=
| title = The Growth of a City: Power and Politics in Portland, Oregon 1915-1950
| url = https://archive.org/details/growthofcitypowe0000macc
| origyear = 1979
| edition =
| year = 1979
| publisher = The Georgian Press
| location = Portland, [[Oregon]]
| isbn = 0-9603408-1-5
}}</ref> युद्ध के दौरान [[लिबर्टी जहाज]] निर्माण की अप्रत्याशित मांग के कारण मजदूरी के लिए कई अश्वेत शहर में आने लगे.
ये अश्वेत विशिष्ट क्षेत्रों में जा बसे जैसे [[अल्बिना]] डिस्ट्रिक्ट और [[वैनपोर्ट]].
मई 1948 की बाढ़ में [[वैनपोर्ट]] के नष्ट होने से एकमात्र एकीकृत पड़ोस का भी सफ़ाया हो गया और अश्वेतों ने शहर के पूर्वोत्तर चतुर्थांश में जमावड़ा जारी रखा.<ref name="maccoll" />
7.90% पर पोर्टलैंड की अफ़्रीकी-अमेरिकी आबादी राज्य के औसत का लगभग चार गुना है। ऑरेगॉन के दो तिहाई से अधिक अफ़्रीकी-अमेरिकी निवासी पोर्टलैंड में रहते हैं।<ref name="maccoll" />
2000 की जनगणना के अनुसार, कुल जनसंख्या को दर्शाते हुए, इसके तीन उच्च विद्यालयों (क्लीवलैंड, लिंकन और विल्सन) में 70% से अधिक श्वेत थे जबकि जेफ़रसन हाई स्कूल में 76% अश्वेत थे। शेष छह स्कूलों मे कालों और एशियाई सहित अश्वेतों की संख्या उच्च थी। विल्सन में हिस्पैनिक छात्रों का औसत 3.3% था और रूज़वेल्ट का 14.9% था।<ref>{{cite web | title = Abernethy Elementary School: Recent Enrollment Trends, 1995-96 through 2002-03 | publisher = Portland Public Schools, Prepared by Management Information Services | url = http://www.pps.k12.or.us/depts/mis/enroll/current/EnrollxSchl95-03.pdf | format = PDF | date = October 30, 2002 | access-date = 19 जुलाई 2010 | archive-date = 6 अगस्त 2012 | archive-url = https://www.webcitation.org/69hd4noUH?url=http://www.pps.k12.or.us/depts/mis/enroll/current/EnrollxSchl95-03.pdf | url-status = dead }}</ref>
पोर्टलैंड अमेरिका का सातवां सबसे बड़ा समलैंगिक शहर है, 8.8% निवासी समलिंगी हैं
और महानगरीय क्षेत्र में 6.1% होने से इसका शुमार चौथे नंबर पर होता है।
<ref name="ACSGates">गैरी जे गेट्स{{PDFlink|[http://www.law.ucla.edu/williamsinstitute/publications/SameSexCouplesandGLBpopACS.pdf Same-sex Couples and the Gay, Lesbian, Bisexual Population: New Estimates from the American Community Survey]|2.07 [[Mebibyte|MiB]]<!-- application/pdf, 2180309 bytes -->}}. [[The Williams Institute on Sexual Orientation Law and Public Policy, UCLA School of Law, October 2006.]] 28 अप्रैल 2007 को पुनः प्राप्त.</ref>
== अपराध ==
पोर्टलैंड की अपराध दर हत्या के अतिरिक्त सभी श्रेणियों में राष्ट्रीय औसत से ऊपर है।<ref>{{cite web
| url = http://www.cityrating.com/citycrime.asp?city=Portland&state=OR
| title = Crime Statistics
| work = City Rating
| date = 2003
| accessdate = 24 अप्रैल 2010
}}</ref>
== शिक्षा ==
{{Main|Education in Portland, Oregon}}
पोर्टलैंड में छह पब्लिक स्कूल जिले और कई निजी स्कूल हैं। [[पोर्टलैंड पब्लिक स्कूल्ज़]] सबसे बड़ा स्कूल जिला है। इसमें कई कॉलेज और विश्वविद्यालय भी हैं- सबसे बड़े [[पोर्टलैंड कम्युनिटी कॉलेज]], [[पोर्टलैंड स्टेट युनिवर्सिटी]] और [[ऑरेगॉन हेल्थ एंड साइंस युनिवर्सिटी]] हैं।
== सहयोगी शहर ==
पोर्टलैंड के नौ [[सहयोगी शहर]] हैं:<ref>{{cite web | title = About Portland's Sister Cities | publisher = Office of Mayor Sam Adams | url = http://portlandonline.com/mayor/index.cfm?c=49918 | accessdate = 18 मार्च 2009 | archive-date = 16 जून 2009 | archive-url = https://web.archive.org/web/20090616201710/http://portlandonline.com/mayor/index.cfm?c=49918 | url-status = dead }}</ref>
<div style="float:left;width:48%">
* {{Flagicon|Israel}}[[एश्कलॉन]], [[इज़राइल]]
* {{Flagicon|Taiwan}}[[काऊशुंग]], [[ताइवान]]
* {{Flagicon|South Korea}}[[उल्सान]], [[दक्षिण कोरिया]]
* {{Flagicon|Zimbabwe}}[[मुटारे]], [[जिम्बाब्वे]]
* {{Flagicon|Mexico}}[[ग्वाडलहारा]], [[मेक्सिको]]
</div><div style="float:right;width:48%">
* {{Flagicon|Russia}}[[खाबरोवस्क]], [[रूस]]
* {{Flagicon|Japan}}[[साप्पोरो]], [[जापान]]
* {{Flagicon|China}}[[सूज़ौ]], [[चीन]]
* {{Flagicon|Italy}}[[बोलोग्ना]], [[इटली]]
</div>
{{-}}
<br />
पोर्टलैंड के एक "मित्रता शहर" के साथ संबंध भी है:
* {{Flagicon|Estonia}}[[तेलिन]], [[एस्टोनिया]]<ref>{{Cite web |url=http://portlandonline.com/mayor/index.cfm?c=49951&a=235160 |title=About the Sister City Program |access-date=15 जनवरी 2021 |archive-date=16 जून 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20090616235442/http://portlandonline.com/mayor/index.cfm?c=49951&a=235160 |url-status=dead }}</ref>
== गैलरी ==
<div style="text-align: center;">
<gallery>
File:Portland or 1897.png|1897 का पोर्टलैंड का स्थलाकृतिक मानचित्र सड़कों, रेलसड़कों और कोलंबिया स्लौ में महत्वपूर्ण अंतर को दर्शाता है।
File:Portland rose.jpg|पोर्टलैंड के इतिहास में गुलाब की महत्वपूर्ण भूमिका है एक उपनाम इसी से प्रेरित है।
File:Portland Max Tunnel.jpg|मैक्स लाइट रेल और ऑरेगॉन चिड़ियाघर में भूमिगत स्टेशन
File:Panorama of Portland, Oregon from atop the KOIN Tower.jpg|कोइन सेंटर की छत से विल्मेट रीवर का एक दृश्य
</gallery></div>
== इन्हें भी देखें ==
{{Portal|Oregon}}
* [[पोर्टलैंड, ऑरेगॉन से लोगों की सूची]]
* [[1972 पोर्टलैंड-वैंकूवर चक्रवात]]
* [[पोर्टलैंड, ऑरेगॉन में अस्पतालों की सूची]]
== सन्दर्भ ==
{{Reflist|2}}
== आगे पढ़ें ==
* सी. एब्बॉट, ''ग्रेटर पोर्टलैंड: अर्बन लाइफ़ एंड लैंडस्केप इन द पैसिफ़िक नॉर्थवेस्ट'' . फ़िलाडेल्फि़या पेंसिल्वेनिया प्रेस, 2001. ISBN 0-8122-1779-9
* सी. ओज़ावा (Ed.), ''द पोर्टलैंड एज: चैलेंजिस एंड सक्सेसिज़ इन ग्रोइंग कम्युनिटीज़.'' वॉशिंगटन: आइलैंड प्रेस, 2004. ISBN 1-55963-695-5
* [[चक पलाहनुक]],[258]. क्राउन, 2003. ISBN 1-4000-4783-8
* [[स्टीवर्ट होलब्रुक]] ''द फ़ार कॉर्नर'' कॉमस्टॉक संस्करण, 1952. ISBN 0-89174-043-0
* ई. किम्बार्क मैक्कॉल ''द शेपिंग ऑफ़ ए सिटी: बिज़नेस एंड पॉलिटिक्स इन पोर्टलैंड, ऑरेगॉन 1885 से 1915'' . पोर्टलैंड: जॉर्जियन प्रेस, 1976. {{OCLC|2645815}} {{ASIN|B0006CP2A0}}
* ई. किम्बार्क मैक्कॉल, ''द ग्रोथ ऑफ़ ए सिटी: पावर एंड पॉलिटिक्स इन पोर्टलैंड, ऑरेगॉन 1915 से 1950'' . पोर्टलैंड: जॉर्जियन प्रेस, 1979. ISBN 0-9603408-1-5
* ज्यूअल लैंसिंग,''पोर्टलैंड: पीपुल, पॉलिटिक्स, एंड पावर 1851-2001'' . ऑरेगॉन स्टेट यूनिवर्सिटी प्रेस, 2003. ISBN 978-0870715594
*
{{cite book|author=MacGibbon, Elma|title=[http://www.secstate.wa.gov/history/publications%5Fdetail.aspx?p=63 Leaves of knowledge]|publisher=Shaw & Borden Co|year=1904}}1898 से संयुक्त राज्य अमेरिका में एल्मा मैक्गिब्बन्स के यात्रा संस्मरण जो मुख्य रूप से ऑरेगॉन और वॉशिंगटन के थे। अध्याय शामिल है "पोर्टलैंड, द वेस्टर्न हब."
* ओटूल, रैंडल. [http://www.cato.org/pubs/pas/pa-596.pdf ''डीबंकिंग पोर्टलैंड: द सिटी दैट डज़न्ट वर्क'' ]. ''पॉलिसी एनालसिस. '' ''नंबर 596. '' ''कैटो संस्थान, 9 जुलाई 2007. ''
== बाहरी कड़ियाँ ==
{{Sisterlinks|Portland, Oregon}}
* [http://www.portlandonline.com/ City of Portland, Oregon] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20100710115957/http://www.portlandonline.com/ |date=10 जुलाई 2010 }}
** [http://www.portlandmaps.com/ Portland Maps ] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20100722074758/http://www.portlandmaps.com/ |date=22 जुलाई 2010 }} (lot-level GIS)
** [http://www.gis.ci.portland.or.us/maps/police/index.cfm Portland CrimeMapper] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20080915204607/http://www.gis.ci.portland.or.us/maps/police/index.cfm |date=15 सितंबर 2008 }}
* [http://www.portlandalliance.com/ Portland Business Alliance - Portland Chamber of Commerce]
* [http://www.travelportland.com/ Travel Portland]
* [http://www.platial.com/tinzeroes/map/2221?title=Demolished_Buildings_of_PDX. Map of now-Demolished Buildings of PDX] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20080508175057/http://www.platial.com/tinzeroes/map/2221?title=Demolished_Buildings_of_PDX. |date=8 मई 2008 }} Mapped on Platial.
'''पोर्टलैंड की वेबसाइटें है जो [[विकि]] की भी हैं'''
* [[बीवरटॉन]] से [[हावर्ड कनिंघम]] द्वारा स्थापित[[WikiWikiWeb:|WikiWikiWeb]].
चूंकि वार्ड ने wiki wiki वेब की अवधारणा का आविष्कार किया, यह सबसे पहले का wiki है।
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== संबंधित जानकारी ==
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[[श्रेणी:संयुक्त राज्य अमेरिका]]
[[श्रेणी:संयुक्त राज्य अमेरिका के नगर]]
[[श्रेणी:ऑरेगॉन में शहर]]
[[श्रेणी:ऑरेगॉन में काउंटी सीटें]]
[[श्रेणी:नया शहरीवाद]]
[[श्रेणी:पोर्टलैंड, ऑरेगॉन]]
[[श्रेणी:1840 के दशक में स्थापित आबादी वाले स्थान]]
[[श्रेणी:ऑरेगॉन में पोर्ट बस्तियां]]
[[श्रेणी:कोलंबिया रीवर के आबादी वाले स्थान]]
[[श्रेणी:पोर्टलैंड महानगरीय क्षेत्र]]
[[श्रेणी:गूगल परियोजना]]
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अच्युतानन्द
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text/x-wiki
[[चित्र:Achyutananda 2.png]]
'''अच्युतानन्द दास''' 16वीं सदी के कवि, द्रष्टा और [[ओडिशा|उड़ीसा]], के वैष्णव संत थे। कहते हैं कि उन्हें भूत, वर्तमान एवं भविष्य देखने की शक्ति प्राप्त थी। वे महान लेखक थे। वे उन पाँच व्यक्तियों में से थे जिन्होने [[संस्कृत]] ग्रन्थों का स्थानीय भाषाओं में अनुवाद करके पूर्वी भारत में आध्यात्मिक क्रान्ति ला दी। उनका [[ओड़िया भाषा|ओड़िया]] भाषा में रचित ग्रन्थ "शून्यसंहिता" प्रसिद्ध है!
==साहित्यिक कृतियाँ==
=== शून्यसंहिता ===
रामदास के प्रश्न सुनकर अत्युतनन्द ने जो उपदेश दिया वे ही शून्यसंहिता में हैं।
महापुरुष अच्युतानन्द ने ३६ संहिता, ७८ गीता, २७ हरिबंशादि चरित, १२ उपबंश चरित, १०० पुराण या माळिका की रचना की। इनके अतिरिक्त उन्होने अनेक भजन चौपदी भी लिखे हैं। <ref name=":0" />{{Col-begin}}
=== पुराण ===
* हरिबंश
=== माळिका ===
* आगत-भविष्य माळिका
* जाईफुल माळिका
* दशपटळ माळिका
* कळियुग माळिका
=== गीता ===
* गुरुभक्ति गीता
* ब्रह्म एकाक्षर गीता
* शून्य गीता
* कैवर्त्त गीता
* कळियुग गीता
* गरुड़ गीता
* उपदेशचक्र गीता
* मणिबन्ध गीता
* आदिब्रह्म गीता
* आदिलिळा गीता
* भक्तलीळा गीता
=== कोइलि ===
* ज्ञानोदय कोइलि
* डिबिडिबि कोइलि
* बाखर कोइलि
=== संहिता ===
* शून्य संहिता
* अणाकार संहिता
* बट संहिता
* अमरजुमर संहिता
* छाया संहिता
* अबाड़ संहिता
* ज्योति संहिता
* अनाहत संहिता
* बीज संहिता
* ब्रह्म संहिता
=== राहास ===
* नित्य राहास
* महानित्य राहास
* शून्य राहास
* ठुळशुन्य राहास
* राधा रास
* दुती राहास
* बृन्दा राहास
* परम राहास
* अनन्त रास
* पद्मबन रास
=== टीका ===
* बर्ण टीका
* कळ्प टीका
* चन्द्रकळ्प टीका
* पद्मकळ्प टीका
=== पटळ ===
* छयाळिश पटळ
* चबिश पटळ
* षोडश पटळ
=== अन्यान्य पद्यावली और ग्रन्थसमूह ===
* अष्ट गुजरी
* नब गुजरी
* तेरजन्म स्मरण
* गोपाळङ्क ओगाळि ओ लउड़ि खेळ
* पट्टा मड़ाण
* चकड़ा मड़ाण
* शिब कळ्प
* शरण पञ्जर
* तत्त्वबोधिनी
* भाबनाबर
* चौराशी यन्त्र
* श्रीअणाकरब्रह्म यन्त्र
* ब्रह्म शाङ्कुळि
* अभय कबच
== बाहरी कड़ियाँ ==
* https://nvacreator.blogspot.com/2023/07/sant-achyutananda-das.html
* https://nvacreator.blogspot.com/2023/07/blog-post_19.html
* https://web.archive.org/web/20091016012510/http://www.garoiashram.org/english/index-eng.html
* https://web.archive.org/web/20071105091526/http://www.sriachyuta.org/
* https://web.archive.org/web/20081019042242/http://www.trahiachyuta.com/sri.htm
* https://web.archive.org/web/20110716184243/https://tagmeme.com/orissa/pothis.html
{{ओड़िआ साहित्य}}
[[श्रेणी:ओड़िया साहित्यकार]]
[[श्रेणी:भक्त कवि]]
[[श्रेणी:भक्ति आन्दोलन]]
[[श्रेणी:१६वीं सदी के कवि]]
{{लेखक-आधार}}
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हिम तेन्दुआ
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अंग्रेजी से हिन्दी में अनुवाद किया।
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text/x-wiki
{{Taxobox
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| name = हिम तेन्दुआ<ref name=msw3>{{MSW3 Wozencraft | pages = 548}}</ref>
| status = EN
| status_system = iucn3.1
| status_ref =<ref name="iucn">{{IUCN2006|assessors=Cat Specialist Group|year=2002|id=22732|title=Uncia uncia|downloaded=11 मई 2006}}</ref>
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[[File:Snow leopard in Ladakh.webm|thumb|right|लद्दाख में हिम तेंदुए का वीडियो]]
'''हिम तेन्दुआ''' (''Uncia uncia'') एक विडाल प्रजाति है जो [[मध्य एशिया]] में रहती है।
यद्यपि हिम तेन्दुए के नाम में "तेन्दुआ" है लेकिन यह एक छोटे तेन्दुए के समान दिखता है और इनमें आपसी सम्बन्ध नहीं है।
== रंगरूप ==
हिम तेन्दुए लगभग १.४ मीटर लम्बे होते हैं और इनकी पूँछ ९०-१०० सेमी तक होती है। इनका भार ७५ किलो तक हो सकता है। इनकी खाल पर सलेटी और सफ़ेद फ़र होता है और गहरे लाल रंग के धब्बे होते हैं और पूँछ पर धारियाँ बनीं होती हैं। इनका फर बहुत लम्बा और मोटा होता है जो इन्हे ऊँचे ठण्डे स्थानो पर भीषण सर्दी से बचा कर रखता है। इन तेन्दुओं के पैर भी बड़े और ऊनी होते हैं, ताकि हिम में चलना सहज हो सके।
ये लगभग १५ मीटर की ऊँचाई तक उछल सकते हैं।
ये बिल्ली-परिवार की एकमात्र प्रजाति है जो दहाड़ नहीं सकती है लेकिन घुरघुरा (बिल्ली के जैसी आवाज़ निकालना) सकती है।
== जीवन ==
हिम तेन्दुए अधिकांशतः रात्री में सक्रिय होते हैं। ये अकेले रहने वाले जीव हैं। लगभग९०- १०० दिनों के गर्भाधान के बाद मादा २-३ शावकों को जन्म देती है। यह बड़ी आकार की बिल्लियाँ है और लोग इनका शिकार इनके फर के लिए करते हैं।
== फैलाव ==
हिम तेंदुए वर्तमान में [[अफगानिस्तान]], [[भूटान]], [[चीन]], [[भारत]], [[कजाकिस्तान]], [[किर्गिस्तान]], [[नेपाल]], [[पाकिस्तान]], [[रूस]], [[ताजिकिस्तान]], [[उजबेकिस्तान]]<ref name="carnivoreconservation1"/><ref name="iucnredlist1">[http://www.iucnredlist.org/apps/redlist/details/22732/0 Panthera uncia (Ounce, Snow Leopard)] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20120719062739/http://www.iucnredlist.org/apps/redlist/details/22732/0 |date=19 जुलाई 2012 }}. Iucnredlist.org. Retrieved on 23 अगस्त 2012.</ref><ref>[http://www.catsg.org/catnews/02_webarchive/news-nr48-2008/content-nr48-2008.htm#Article%2002 Contents Cat News 48 – Spring 2008] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20141213023144/http://www.catsg.org/catnews/02_webarchive/news-nr48-2008/content-nr48-2008.htm#Article%2002 |date=13 दिसंबर 2014 }}. Catsg.org. Retrieved on 23 अगस्त 2012.</ref> में एशिया तक ही सीमित है और संभवतः भी [[म्यांमार]] है।<ref>[http://snowleopardconservancy.org/text/how/range.htm A map of the snow leopard’s range] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20130524102438/http://www.snowleopardconservancy.org/text/how/range.htm |date=24 मई 2013 }}. Snowleopardconservancy.org. Retrieved on 3 जून 2013.</ref>
इसकी भौगोलिक वितरण पूर्वी अफगानिस्तान में हिंदू कुश से चलाता है और दक्षिणी [[साइबेरिया]] के लिए [[पामीर पर्वतमाला]], [[काराकोरम]] और [[हिमालय]] के पहाड़ों के माध्यम से, सीमा [[बयकाल झील]] के पश्चिम में रूसी [[अल्ताई पर्वत शृंखला]] और पहाड़ों को शामिल किया गया है। तिब्बत में, यह उत्तर में अत्त्य्न-तघ् लिए ऊपर पाया जाता है।<ref name=NatGeog>{{cite web | work = National Geographic | year = 2008 | url = http://ngm.nationalgeographic.com/2008/06/snow-leopards/chadwick-text/1 | title = Out of the Shadows By Douglas H. Chadwick | accessdate = 29 जनवरी 2010 | archive-url = https://www.webcitation.org/6128bsHUR?url=http://ngm.nationalgeographic.com/2008/06/snow-leopards/chadwick-text/1 | archive-date = 18 अगस्त 2011 | url-status = live }}</ref><ref>{{cite book|author=Geptner, Vladimir G. ''et al.''|title=Mammals of the Soviet Union: Carnivora|url=http://books.google.com/books?id=UxWZ-OmTqVoC|date=1992|publisher=BRILL|isbn=978-90-4-08876-4|access-date=23 सितंबर 2013|archive-url=https://web.archive.org/web/20131012220720/http://books.google.com/books?id=UxWZ-OmTqVoC|archive-date=12 अक्तूबर 2013|url-status=live}}</ref>
== जनसंख्या और संरक्षित क्षेत्रों==
हिम तेंदुए की कुल जंगली आबादी 4510 के लिए 7350 व्यक्तियों पर अनुमान लगाया गया था।<ref name="carnivoreconservation1"/> 1972 में, प्रकृति के संरक्षण (आईयूसीएन) के लिए अंतर्राष्ट्रीय संघ विश्व स्तर पर "लुप्तप्राय" के रूप में संकटग्रस्त प्रजाति के अपने लाल सूची पर हिम तेंदुए रखा, उसी खतरा वर्ग 2008 में किए गए आकलन में लागू किया गया था।
दुनिया भर के चिड़ियाघरों में लगभग 600 बर्फ तेंदुओं भी कर रहे हैं।<ref name=Trust>{{cite web| work = snowleopard.org| title = Snow Leopard Fact Sheet| year = 2008| url = http://www.snowleopard.org/downloads/snow_leopard_fact_sheet_english.pdf| accessdate = 3 जुलाई 2008| archive-url = https://web.archive.org/web/20121002062406/http://www.snowleopard.org/downloads/snow_leopard_fact_sheet_english.pdf| archive-date = 2 अक्तूबर 2012| url-status = dead}}</ref>
{| class="wikitable sortable"
|- valign=bottom
! रेंज देश !! पर्यावास क्षेत्र<br>(कि.मी.<sup>2</sup>.) !! अनुमानित<br>जनसंख्या<ref name=iucn/>
|-
| अफगानिस्तान || 50,000 || 100–200?
|-
| भूटान || 15,000 || 100–200?
|-
| चीन || 1,100,000 || 2,000–2,500
|-
| भारत || 75,000 || 200–600
|-
| कजाकिस्तान || 50,000 || 180–200
|-
| किर्गिस्तान || 105,000|| 150–500
|-
| मंगोलिया || 101,000 || 500–1,000
|-
| नेपाल || 30,000 || 300–500
|-
| पाकिस्तान || 80,000 || 200–420
|-
| ताजिकिस्तान || 100,000 || 180–220
|-
| उजबेकिस्तान || 10,000|| 20–50
|}
[[File:Lightmatter snowleopard.jpg|thumb|सैन डिएगो चिड़ियाघर में हिम तेंदुआ]]
'''संरक्षित क्षेत्रों:'''
* [[हेमिस राष्ट्रीय उद्यान]], [[भारत]]
* [[नन्दा देवी राष्ट्रीय उद्यान]], [[भारत]]<ref>http://whc.unesco.org/en/list/335 {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20170711013014/http://whc.unesco.org/en/list/335 |date=11 जुलाई 2017 }} Nanda Devi and Valley of Flowers National Parks</ref>
* [[फूलों की घाटी राष्ट्रीय उद्यान]], [[भारत]]
* [[पिन घाटी राष्ट्रीय उद्यान]], [[भारत]]
* [[ग्रेट हिमालयन राष्ट्रीय उद्यान]], [[भारत]]
== प्रतीक ==
हिम तेंदुए पशु इर्बिस् के रूप में जाना जाता है जहां मध्य एशिया के तुर्की लोगों के लिए प्रतीकात्मक अर्थ है, इसलिए यह व्यापक रूप से एक प्रतीक के रूप में प्रयोग किया जाता है।
हिम तेंदुए [[तातार लोग|तातारी]] और [[कज़ाख़ लोग|कजाख]] के लिए एक राष्ट्रीय प्रतीक है: एक हिम तेंदुए [[अलमाती]] के शहर के सरकारी मुहर पर पाया जाता है और एक पंख हिम तेंदुए [[तातारस्तान]] प्रतीक पर पाया जाता है।
<gallery perrow="5">
File:SnowLeopard10000KZT.jpg|पुरानी 10000-कजाखस्तान नोट के पिछली ओर हिमपात तेंदुए।
File:Coat of arms of Tatarstan.svg|हिम तेंदुए तातारस्तान का प्रतीक है।
File:Coat of arms of Almaty.svg|[[अलमाटी]], [[कजाकिस्तान]] के प्रतीक
File:Old coat of arms of Astana.svg|[[अस्ताना]] का प्रतीक, [[कजाकिस्तान]] की राजधानी
File:Coat of arms of Bishkek Kyrgyzstan.svg|[[बिश्केक]], [[किर्गिस्तान]] की राजधानी का प्रतीक
</gallery>
== सन्दर्भ ==
<!-- If not explicitly said, all URLs accessed prior to March 27, 2006. -->
{{reflist|35em|refs=
<ref name="carnivoreconservation1">{{cite book|author=McCarthy, T. M. and Chapron, G.|year=2003|url=http://www.panthera.org/sites/default/files/McCarthy_et_al_2003_Snow_leopard_survival_strategy.pdf|title=Snow Leopard Survival Strategy|publisher=ISLT and SLN|place=Seattle, USA|page=15 and Table II|access-date=23 सितंबर 2013|archive-url=https://web.archive.org/web/20150924064508/http://www.panthera.org/sites/default/files/McCarthy_et_al_2003_Snow_leopard_survival_strategy.pdf|archive-date=24 सितंबर 2015|url-status=dead}}</ref>
}}
<!-- Please inline these references:
* Janczewski, Dianne N., William S. Modi, J. Claiborne Stephens, and Stephen J. O'Brien. 1995. [http://mbe.oxfordjournals.org/cgi/reprint/12/4/690 Molecular Evolution of Mitochondrial 12S RNA and Cytochrome b Sequences in the Pantherine Lineage of Felidae]. ''Molecular Biology and Evolution'' '''12'''(4):690–707.
* Theile, Stephanie. 2003. [http://assets.panda.org/downloads/trafficsnowleopardreportaugust2003.pdf ''Fading Footprints: The Killing and Trade of Snow Leopards'']. TRAFFIC International. ISBN 1-85850-201-2.
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[[श्रेणी:एशिया के स्तनधारी]]
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पोमेरेनियन (कुत्ता)
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{{Infobox Dogbreed
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}}
'''पोमेरेनियन''' (अक्सर '''पोम''' के नाम से या अधिक विनोद से '''पोम पोम''' के रूप में जाना जाता है) स्पिट्ज नस्ल का [[श्वान|कुत्ता]] है जिसका नाम केंद्रीय यूरोप (आज पूर्वी [[जर्मनी]] और उत्तरी पोलैंड का हिस्सा है) के पोमेरेनिया क्षेत्र पर रखा गया है। लेकिन कुछ लोग उसे पॉमेरियन और पामोलियन कहते है , पर वो गलत है इसका नाम पोमेरेनियन ही है | छोटे आकार की वजह से इसे छोटे कुत्ते की नस्ल के रूप में वर्गीकृत किया जाता है, पोमेरेनियन विशाल आकार वाले स्पिट्ज प्रकार के कुत्तों, खासकर जर्मन स्पिट्ज के वंशज हैं। फ़ेडरेशन सैनोलॉजिक इंटरनेशनेल द्वारा इसे जर्मन स्पिट्ज नस्ल का हिस्सा निर्धारित किया गया है और कई देशों में ये '''ज्वेर्गस्पिट्ज''' (''बौने स्पिट्ज'') या '''ट्वाय जर्मन स्पिट्ज''' के नाम से जाने जाते हैं।
17 वीं और 18 वीं शताब्दियों के दौरान कुछ शाही मालिकों की वजह से यह नस्ल लोकप्रिय हो गयी। उस समय रानी विक्टोरिया के पास विशेष रूप से एक छोटा पोमेरेनियन था और इसलिये यह नस्ल विश्वस्तर पर लोकप्रिय हो गयी। रानी विक्टोरिया के जीवनकाल में ही इस नस्ल का आकार 50% घट गया था। पोमेरेनियन स्थिर, सुसंगत, आज्ञाकारिता प्रशिक्षण देने पर अच्छी तरह से बर्ताव करते हैं, अन्यथा वही करते हैं जो उनका मन करता है।<ref>{{Cite book | last = Lowell| first = Michelle| authorlink = | coauthors = | title = Your Purebred Puppy: A Buyers Guide| url = https://archive.org/details/yourpurebredpupp00lowe| publisher = Henry Holt| year = 1990| location = New York, NY| pages = | isbn = 0-8050-1411-X}}</ref> वे बाहर से कोई आवाज मिलने पर जवाब में भौंकने के लिए जाने जाते हैं। कुल मिलाकर पोमेरेनियन बहादुर और स्वस्थ कुत्ता है। इनमे सबसे आम बीमारी है लक्सेटिंग पटेल्ला. सांस की नली का विफल होना भी चिंता का कारण हो सकता है। कभी-कभार वे त्वचा की बीमारी, जिसे बोलचाल की भाषा में "काली त्वचा की बीमारी" या असमय गंजापन कहते हैं, से ग्रस्त हो सकते हैं। यह एक आनुवांशिक बीमारी है जिससे कुत्तों की त्वचा काली हो जाती है या उसके सारे या अधिकांश बाल झड़ जाते हैं। और इसको बचपनमे ज्यादा हाथ लगाने से इसके बाल गिरने भी शुरु हो सकते है | संयुक्त राज्य अमेरिका में यह नस्ल इस समय की 15 शीर्ष लोकप्रिय नस्लों में शामिल है और छोटे कुत्तों के शौकीनों की वजह से इनकी लोकप्रियता दुनिया भर में बढ़ गयी है। वे बहुत ही छोटे कुत्ते हैं फिर भी कभी-कभी अपने मालिकों की सुरक्षा कर लेते हैं। सहसा आक्रमण होने पर अपने आकार की वजह से वे दब भी सकते हैं।
== विवरण ==
[[चित्र:Pomeranian orange sable 600.jpg|thumb|right|एक ऑरेंज सेबल पोमेरेनियन]]
=== स्वरूप ===
पोमेरेनियन छोटे कुत्ते हैं जिनका स्कंध प्रदेश वजनी{{convert|1.9|-|3.5|kg|lb|abbr=off}} और ऊंचा{{convert|5.0|-|11|in|cm|abbr=off}} होता है।<ref name="cunliffe">{{cite book |title=The Encyclopedia of Dog Breeds |last=Cunliffe |first=Juliette |authorlink= |coauthors= |year=1999 |publisher=Parragon |location= |isbn=9-780752-580180 |page=[https://archive.org/details/encyclopediaofdo0000cunl/page/262 262] |pages= |url=https://archive.org/details/encyclopediaofdo0000cunl|url-access=registration |accessdate=28 नवंबर 2009}}</ref> वे छोटे मगर मजबूत कुत्ते हैं जिन पर प्रचुर रोएं होते है और उनकी पूंछ ऊपर की ओर मुड़ी और चपटी होती है।<ref name="dogs101">{{cite book |title=Dogs: 101 Adorable Breeds |last=Hale |first=Rachael |authorlink= |coauthors= |year=2008 |publisher=Andrews McMeel Publishing |location= |isbn=978-0740773426 |page=[https://archive.org/details/dogs101adorableb0000mcke/page/197 197] |pages= |url=https://archive.org/details/dogs101adorableb0000mcke/page/197 |accessdate=2 दिसंबर 2009 }}</ref> इनके गले और पीठ पर ऊपरी परत में बहुत अधिक बाल होते है और इनकी पिछली टांगों व पुट्ठों पर भी घने बाल होते हैं।<ref name="prem">{{cite web |url=http://premierpoms.com/history.html |title=Pomeranian History |author= |date= |work= |publisher=Premier Pomeranians |accessdate=4 दिसंबर 2009 |archive-date=15 जुलाई 2011 |archive-url=https://web.archive.org/web/20110715113622/http://premierpoms.com/history.html |url-status=dead }}</ref>
शुरुआत में पोम सफेद या कभी-कभी काले हुआ करते थे, हालांकि [[विक्टोरिया|क्वीन विक्टोरिया]] ने 1888 में एक छोटे लाल पोमेरेनियन को पाला था, जिसकी वजह से 19 वीं सदी के अंत तक यह रंग लोकप्रिय बन गया।<ref>{{cite web|url=http://www.webanswers.com/pets/what-is-a-pomeranian-8a12b7|title=What is a pomeranian|work=Web Answers|accessdate=2 फरवरी 2010|archive-date=28 जुलाई 2011|archive-url=https://web.archive.org/web/20110728040008/http://www.webanswers.com/pets/what-is-a-pomeranian-8a12b7|url-status=dead}}</ref> आधुनिक समय में पोमेरेनियन दूसरे किसी भी कुत्ते की नस्ल के मुकाबले व्यापक रंगों की विविधता में उपलब्ध हैं, जिनमें सफेद, काले, भूरे, लाल, नारंगी, क्रीम, नीला, स्याह, काला और भूरा, भूरा और झुलसा हुआ, चितकबरे, भूरी धारियां और इन सभी रंगों के संयोजन भी शामिल है।<ref>{{cite book |title=Pomeranians for Dummies |last=Coile |first=D. Caroline |authorlink= |coauthors= |year=2007 |publisher=For Dummies |location= |isbn=978-0470106020 |page=[https://archive.org/details/pomeraniansfordu00coil_169/page/29 29] |pages= |url=https://archive.org/details/pomeraniansfordu00coil_169|url-access=registration |accessdate=2 दिसंबर 2009}}</ref> सबसे आम रंग नारंगी, काला या क्रीम/सफेद है।<ref name="dogs101" />
मर्ले पोमेरेनियन हाल ही में प्रजनकों द्वारा विकसित एक नया रंग है। यह हल्के नीले/ग्रे धब्बे के साथ ठोस आधार वाले रंग का संयोजन है, जो एक विचित्र प्रभाव देता है। सबसे आम आधार वाले रंग लाल/भूरे या काले प्रभाव वाले रंग हैं, हालांकि यह अन्य रंगों के साथ भी दिखाई दे सकते हैं। चितकबरे मर्ले या लीवर मर्ले जैसे संयोजन वाले नस्ल मानक में स्वीकार्य नहीं हैं। इसके अतिरिक्त मर्ले में आंख, नाक और पंजे की गद्दी का रंग भी अलग है, जैसे कि आंखों का रंग नीला और नाक एवं पंजे की गद्दियां विचित्र ढंग से गुलाबी और काली हो जाती हैं।<ref name="merle">{{cite web |url=http://www.merlepomeranian.com/ |title=Merle Pomeranians |author= |date= |work= |publisher=Merle Pomeranians |accessdate=6 दिसंबर 2009 |archive-date=5 अगस्त 2010 |archive-url=https://web.archive.org/web/20100805050659/http://www.merlepomeranian.com/ |url-status=dead }}</ref>
[[चित्र:PomPhoto10.jpg|thumb|right|एक रंगबिरंगा पोमेरेनियन]]
पोमेरेनियन के रोएं बहुत घुंघराले होते हैं, तथा हालांकि इन्हें संवारना मुश्किल नहीं है, लेकिन प्रजनकों का सुझाव है कि काफी घने होने और लगातार झाड़ते रहने की वजह से ऐसा रोज किया जाता है। बाहरी रोएं लम्बे सीधे और बनावट में कठोर है जबकि अन्दर के रोयें नरम, घने और छोटे होते हैं। इसके रोएं आसानी से उलझ जाते हैं और उनमें गांठ पड़ जाती है, खासकर जब भीतरी सतह हर दो साल में झड़ जाती है।<ref>{{cite web |url=http://www.happypomeranians.com/pomeranian-dogs/tips-on-pomeranian-grooming |title=Tips on Pomeranian Grooming |author=Dane Stanton |year=2009 |work=Pomeranian Dogs |accessdate=2 फरवरी 2010 |archive-date=16 मार्च 2010 |archive-url=https://web.archive.org/web/20100316130834/http://www.happypomeranians.com/pomeranian-dogs/tips-on-pomeranian-grooming |url-status=dead }}</ref>
=== व्यवहार ===
पोमेरेनियन आमतौर पर बहुत दोस्ताना और जीवंत नस्ल के कुत्ते हैं। वे अपने मालिकों के आस-पास रहना पसंद करते हैं और उनकी रक्षा करने के लिए भी जाने जाते हैं।<ref name="dogster">{{cite web |url=http://www.dogster.com/breeds/pomeranian |title=Pomeranian Dogs |author= |date= |work= |publisher=Dogster.com |accessdate=6 जनवरी 2010}}</ref> वे अपने मालिक के साथ बहुत जल्द घुलमिल जाते हैं और अगर उन्हें अकेले रहने का प्रशिक्षण नहीं दिया गया तो वे जुदाई की चिंता से ग्रस्त हो सकते हैं।<ref name="pets4you" /> पोमेरेनियन अपने पर्यावरण में होने वाले परिवर्तनों के प्रति सतर्क रहते हैं और नए माहौल में उत्तेजित होकर भौंकना किसी भी स्थिति में जरूरत से ज्यादा भौंकने की आदत में विकसित हो सकता है। वे अपने क्षेत्र के बचाव की मुद्रा में रहते हैं इसलिए कोई भी बाहरी आवाज मिलने पर वे भौंकना शुरू कर देते हैं।<ref name="pets4you" /> पोमेरेनियन बुद्धिमान कुत्ते हैं और प्रशिक्षण देने पर अच्छी तरह से पेश आते हैं और अपने मालिक से वो जो भी चाहते हैं उसे हासिल करने में सफल हो सकते हैं।<ref name="dogster" />
वे ठंडे वातावरण की तलाश में रहते हैं और इसीलिए उन्हें टाइल वाली ठंडी फर्श पर लेटे हुए देखे जा सकता है जो आमतौर पर रात और दिन में भी ठंडी रहती है।<ref name="pets4you">{{cite web |url=http://www.pets4you.com/dog_breed_description/pomeranian/ |title=Pomeranian |author= |date=22 दिसंबर 09 |work= |publisher=Pets4You |accessdate=6 जनवरी 2010 |archive-date=5 जनवरी 2010 |archive-url=https://web.archive.org/web/20100105043408/http://www.pets4you.com/dog_breed_description/pomeranian/ |url-status=dead }}</ref> यह नस्ल अपार्टमेंट में रहने की आदी है और घर के भीतर बहुत सक्रिय रहती है।<ref>{{cite web |url=http://movingtoanapartment.com/pet-friendly-apartments/top-50-most-popular-apartment-dogs.htm |title=Top 50 Most Popular Apartment Dogs |author= |date=27 नवंबर 2007 |work= |publisher=MovingToAnApartment.com |accessdate=6 जनवरी 2010 |archive-date=10 जुलाई 2012 |archive-url=https://archive.today/20120710102631/http://movingtoanapartment.com/pet-friendly-apartments/top-50-most-popular-apartment-dogs.htm |url-status=bot: unknown }}</ref>
== स्वास्थ्य ==
[[चित्र:Pipin Pomeranian.jpg|upright|thumb|right|एक सफेद पोमेरेनियन.]]
=== समग्र स्वास्थ्य ===
पोमेरेनियन की औसतन उम्र 12-16 वर्ष है।<ref name="pompom">{{cite web |url=http://www.petpom.com/ |title=Pomeranian Information |author= |date= |work= |publisher=PomPom.com |accessdate=30 नवंबर 2009}}</ref> अच्छे आहार और उचित व्यायाम करने वाले इस नस्ल के कुत्ते को कम बीमारियां होंगी और यदि ट्रिम और फिट रखा जाए तो पोमेरेनियन एक तगड़ा छोटा कुत्ता है।<ref>{{cite web |url=http://www.mydogbreed.com/pomeranian/pomeranian-health.php |title=Pomeranian Health Management |work=My Dog Breed: The Pomeranian |accessdate=2 फरवरी 2010 |archive-date=14 जुलाई 2011 |archive-url=https://web.archive.org/web/20110714142255/http://www.mydogbreed.com/pomeranian/pomeranian-health.php |url-status=dead }}</ref> इस नस्ल के कुत्ते के स्वास्थ्य मुद्दे भी अन्य नस्लों के कुत्तों के समान हैं, फिर भी पोमेरेनियन की हलकी बनावट की वजह से हिप डिस्प्लाज़िया जैसे कुछ मुद्दे इनमे आम नहीं है।<ref name="pomhealth">{{cite web |url=http://www.mbfonline.com/pomhealth/ |title=Pomeranian Health Problems |author= |date= |work= |publisher= |accessdate=30 नवंबर 2009 |archive-date=14 जुलाई 2011 |archive-url=https://web.archive.org/web/20110714055305/http://www.mbfonline.com/pomhealth/ |url-status=dead }}</ref> इनकी देखभाल की अनदेखी करने, दांत, कान और आंखों की सफाई नहीं करने पर स्वास्थ्य सम्बन्धी कुछ समस्याएं विकसित हो सकती हैं। हालांकि नियमित रूप से ध्यान देने पर इन समस्याओं से बचा जा सकता है।<ref>{{cite web |url=http://www.happypomeranians.com/pomeranian-dogs/pomeranian-health-caring-for-your-pomeranian |title=Pomeranian Health - Caring For Your Pomeranian |author= |date= |work=Pomeranian Dogs |publisher= |accessdate=2 फरवरी 2010 |archive-date=7 नवंबर 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20091107050233/http://www.happypomeranians.com/pomeranian-dogs/pomeranian-health-caring-for-your-pomeranian |url-status=dead }}</ref>
=== आम समस्याएं ===
रंगीन मर्ले कुत्तों को हल्के से गंभीर बहरेपन, अंतःचाक्षुश दबाव, दृष्टिदोष अपसामान्य दृष्टि, लघु नेत्र और नेत्रविदर की शिकायत हो सकती है। मर्ले कुत्ते जिनके माता-पिता दोनों मर्ले हों, वे ढांचे, हृदय संबंधी या प्रजनन संबंधी मामलों में असामान्यताओं से ग्रस्त हो सकते हैं।<ref>{{cite web |url=http://www.genmarkag.com/download/Factsheet_Merle_Gene.pdf |title=Merle Gene |author= |date= |work=GenMark |publisher= |accessdate=6 दिसंबर 2009 |archive-date=12 मई 2008 |archive-url=https://web.archive.org/web/20080512051549/http://www.genmarkag.com/download/Factsheet_Merle_Gene.pdf |url-status=dead }}</ref>
पोमेरेनियन नस्ल में लक्सेटिंग पटेलास एक अन्य आम बीमारी है।<ref name="pomhealth" /> यह तब होता है जब अन्य विकृति या चोट की वजह से घुटने में घुटने का जोड़ बनाने वाली मेड़ सही स्थिति में न हो या इतना उथला हो कि जानुफलक को सही और सुरक्षित ढंग से बैठने नहीं दे रहा हो. यह जानुफलक को अपनी जगह से खिसका (खांचे से बाहर निकालना) सकता है जिससे पैर मुड़ना बंद हो जाएगा और तलवा जमीन से ऊपर रहेगा.<ref name="patellas">{{cite web |url=http://www.peteducation.com/article.cfm?c=1+1321&aid=457 |title=Luxating Patella |author= |date= |publisher=[[Drs. Foster & Smith, Inc]] |work=PetEducation.com |accessdate=30 नवंबर 2009}}</ref> जबकि मांसपेशियों के संकुचित होने की वजह से घुटने की चक्की सही स्थिति में नहीं लौट सकती. प्रारंभिक दर्द घुटने के ऊपर की हड्डी (नी कैप) के जांघ की हड्डी के मेड के पार फिसलने से होता है। एक बार जगह से हट जाने के बाद, कुत्ते को स्लिप डिस्क की वजह से कोई दर्द महसूस नहीं होता है। ऐसी स्थिति छोटी नस्ल में, विशेष रूप से छोटे और टॉय पूडलस में अधिक आम होती है।<ref name="patellas" />
[[चित्र:Pomeranian Abashed.JPG|thumb|right|पोमेरेनियन के मुहरा और चेहरे की विशेषताओं का क्लोज़ अप.]]
सांस की नली का विफल होना (त्रचेल कोलैप्स) सांस की नली में श्वशन छल्लों की कमजोरी के कारण होता है। यह तब होता है जब सामान्य रूप से सांस की नली के आकार को बनाये रखने वाले छल्ले विफल होकर हवा का मार्ग बंद कर देते हैं। यह आमतौर पर पोमेरेनियनों और यॉर्कशायर टेरियर तथा पूडल और छोटी नस्ल के अन्य कुत्तों में देखा जाता है। इस विफलता के लक्षण में भोंपू जैसी खांसी जो बतख की चीख जैसी सुनाई देती है, व्यायाम के लिए असहिष्णुता, बेहोशी के दौरे और गर्म मौसम, व्यायाम तथा उत्तेजना से बिगड़ी हुई खांसी शामिल है।<ref>{{cite web |url=http://www.vetsurgerycentral.com/tracheal_collapse.htm |title=Tracheal Collapse |author=Degner, Dr. Daniel A. |year=2004 |publisher=Drs. Foster & Smith, Inc |work=PetEducation.com |accessdate=30 नवंबर 2009}}</ref>
पोमेरेनियनों को अक्सर "काली त्वचा की बीमारी" हो जाती है जो गंजापन (बालों के झड़ने) और अतिवर्णकता (त्वचा का अस्वाभाविक रूप से काला हो जाना) का संयोजन है। इस अवस्था के अन्य नाम हैं ऊनी कोट, कोट दुर्गंध, छद्म कुशिंग रोग या बालों का बुरी तरह से झड़ना. यह बीमारी मादा की तुलना में नर पोमेनेरियनों को अधिक प्रभावित करती है और वंशानुगत हो सकती है। कई अन्य नस्लों को भी यह त्वचा विकार होता है, जिनमें [[अमेरिकन वाटर स्पैनियल|अमेरिकी जल स्पेनियल]] (शिकारी कुत्ता), डाक्सहूण्ड (छोटे-छोटे पैरों वाले कुत्ते की एक जाति), कीसहूण्ड (हॉलैण्ड के कुत्तों की एक नस्ल) और चाउ चाउ (चीन के कुत्तों की एक नस्ल) शामिल है।<ref name="blackskin">{{cite web |url=http://www.pommania.co.uk/blackskindisease.htm |title=BSD - Black Skin Disease - Alopecia X - Coat Funk |author= |date= |work= |publisher=Pommania Pomeranains |accessdate=30 नवंबर 2009 }}{{Dead link|date=अक्तूबर 2022 |bot=InternetArchiveBot }}</ref> हालांकि अधिकतर कुत्तों में यौवन में यह लक्षण दिखता है, लेकिन यह किसी भी उम्र में हो सकता है। कुशिंग सिंड्रोम, [[हाइपोथाइरॉयडिज़्म|हाइपोथायरायडिज्म]] त्वचा में दीर्घकालिक संक्रमण और प्रजनन हार्मोन विकारों सहित कई स्थितियां इस स्थिति के सदृश्य हो सकती हैं।<ref name="blackskin" />
गुप्तवृषणता नर पोमेरेनिअनों में होने वाला एक अन्य आम विकार है। यह तब होता है जब या तो एक या दोनों अंडकोष नहीं उतरते. इस मामले में उन्हें मुक्त करने के लिए पेट की शल्य-क्रिया की आवश्यकता होती है। अच्छी खबर यह है कि यह उन्हें स्वस्थ बनाता है और अन्य समस्याओं के साथ कैंसर के जोखिम को कम करता है।
== इतिहास ==
=== उत्पत्ति ===
[[चित्र:Pomeranian (Miniature) from 1915.JPG|thumb|right|1915 से एक लघु पोमेरेनियन]]
[[आर्कटिक]] क्षेत्र के काम करने वाले बड़े कुत्ते पोमेरेनियन की वर्तमान नस्ल के अग्रवर्ती थे। इन कुत्तों को आम तौर पर वुल्फस्पिट्ज या स्पिट्ज टाइप के रूप में जाना जाता है, जो "नुकीला बिंदु" के लिए प्रयोग किया जाने वाला जर्मन शब्द है, यह 16 वीं सदी के काउंट एबेर्हार्ड ज़ू सायन द्वारा कुत्ते की नाक और थूथन के संदर्भ में इस्तेमाल किया गया मूल शब्द है। पोमेरेनियन को स्पिट्ज जर्मन का वंशज माना जाता है।<ref name="vanderlip">{{cite book |title=The Pomeranian Handbook |last=Vanderlip |first=Sharon |authorlink= |coauthors= |year=2007 |publisher=Barron's Educational Series |location= |isbn=978-0764135453 |page= |pages=2–8 |url=https://archive.org/details/pomeranianhandbo0000vand|url-access=registration |accessdate=6 जनवरी 2010}}</ref>
माना जाता है इस नस्ल को अपना नाम उस इलाके से सम्बंधित होने की वजह से मिला है, जो आज [[जर्मनी]] का उत्तर-पूर्वी क्षेत्र है तथा पोमेरेनिया के रूप में जाना जाता है। हालांकि यह इस नस्ल का मूल क्षेत्र नहीं है, लेकिन इस क्षेत्र को प्रजनन का श्रेय दिया जाता है जो कुत्ते की मूल पोमेरेनियन नस्ल की और जाती है। हालांकि, [[संयुक्त राजशाही (ब्रिटेन)|यूनाइटेड किंगडम]] में पोमेरेनियन का परिचय प्राप्त होने तक उचित प्रलेखन का अभाव था।<ref name="vanderlip" />
पोमेरेनियन नस्ल का एक प्रारंभिक आधुनिक रिकॉर्ड संदर्भ 2 नवम्बर 1764 से है, जो जेम्स बोसवेल के ''बोसवेल ऑन द ग्रैंड टूर: जर्मनी एंड स्विट्जरलैंड'' की एक डायरी प्रविष्टि के रूप में है। "उस फ्रांसीसी व्यक्ति के पास पोमेर नाम का एक पोमेरेनियन कुत्ता था जिसे वह बहुत चाहता था।"<ref>{{cite book |title=Boswell on the Grand Tour: Germany and Switzerland |last=Boswell |first=James|editor=Pottle, Frederick A. |authorlink=James Boswell |coauthors= |year=1764 |publisher=McGraw-Hill Book Company Inc |edition=First |isbn= |page=165 |pages= |url=http://www.archive.org/stream/boswellonthegran006270mbp#page/n0/mode/2up |accessdate=29 नवंबर 2009}}</ref> थॉमस पेनेंट के 1769 से ''अ टूर इन स्कॉटलैंड'' में लंदन के एक पशु व्यापारी द्वारा एक पोमेरेनियन नस्ल और एक भेड़िये का मेल करने का ज़िक्र है।<ref>{{cite book |title=A Tour in Scotland 1769 |last=Pennant|first=Thomas |authorlink=Thomas Pennant |coauthors= |year=1776 |publisher=Benj White |edition=Fourth |isbn= |page=195 |pages= |url=http://books.google.co.uk/books?id=vk8JAAAAQAAJ&pg=PA159&lpg=PA159&dq=thomas+pennant+pomeranian&source=bl&ots=YIDBDNFkjy&sig=bD8BmaQsCFbLC3rTZE3pR5GWn2Q&hl=en&ei=GQgTS_-6FYL74AbAwMiEBA&sa=X&oi=book_result&ct=result&resnum=2&ved=0CAoQ6AEwAQ#v=onepage&q=pomeranian&f=false |accessdate=29 नवंबर 2009}}</ref>
[[चित्र:Mr and Mrs William Hallett.jpg|upright|thumb|left|alt="A man and a woman walking next to a wood with their white dog. The woman is dressed in a white 18th century gown and a black hat, and the man is dressed in a black suit with white stockings."|1785 में थॉमस गेन्सबोरो द्वारा श्रीमान और श्रीमती का एक चित्रपुराने प्रकार के वैशिष्ट्य का एक बड़ा पोमेरेनियन.]]
ब्रिटिश शाही परिवार के दो सदस्यों ने नस्ल के विकास को प्रभावित किया। 1767 में इंग्लैंड के किंग जॉर्ज-III की रानी रानी शेर्लोट दो पोमेरेनियनों को इंग्लैंड लायीं. फ़ोबे और मर्करी नामक इन कुत्तों को सर थॉमस ग़ेइन्सबोरो ने अपने चित्रों में चित्रित किया। इन चित्रों में आधुनिक नस्ल से बड़े एक कुत्ते को चित्रित किया गया है, कथित रूप से इसका वजन{{convert|30|-|50|lb|kg|abbr=on}} से ज्यादा है, लेकिन घने रोयें, कान और पीछे की ओर मुड़ी हुयी पूंछ आधुनिक लक्षण दर्शाती है।<ref name="vanderlip" />
रानी शेर्लोट की पोती, रानी विक्टोरिया भी काफी उत्साही थी और उसने एक बड़ा प्रजनन श्वानालय स्थापित किया। उसके पसंदीदा कुत्तों में से एक अपेक्षाकृत छोटा लाल सेबल पोमेरेनियन था जिसे उसने "विंडर्स मार्को" नाम दिया था और उसका वज़न मात्र {{convert|12|lb|kg|abbr=on}} था। 1891 में जब उसने पहली बार मार्को का प्रदर्शन किया, वह छोटे आकार के पोमेरेनियन के तुरंत लोकप्रिय होने का कारण बना और प्रजनकों ने प्रजनन के लिए केवल छोटे नमूनों का चयन शुरू किया। उसके जीवनकाल के दौरान पोमेरेनियन नस्ल के आकार में 50% की कमी होने की सूचना मिली थी।<ref name="vanderlip" /> रानी विक्टोरिया ने अपने प्रजनन कार्यक्रम में जोड़ने के लिए विभिन्न यूरोपीय देशों से विभिन्न रंगों के छोटे पोमेरेनियनों के आयात द्वारा पोमेरेनियन नस्ल को बेहतर बनाने और बढ़ावा देने के लिए कार्य किया।<ref>{{cite web |url=http://www.pomeranian.org/breed-profile |title=Pomeranian Profile |author=Denise Leo |year=2009 |work=Pomeranian.com |publisher= |accessdate=6 जनवरी 2010 |archive-date=27 नवंबर 2010 |archive-url=https://web.archive.org/web/20101127184123/http://pomeranian.org/breed-profile |url-status=dead }}</ref> इस अवधि के शाही मालिकों में फ्रांस के नेपोलियन प्रथम की पत्नी जोसेफिन द बेऔहर्नैस और इंग्लैंड के राजा चतुर्थ जॉर्ज भी शामिल थे।
1891 में, पहला नस्ल क्लब इंग्लैंड में स्थापित किया गया और उसके बाद शीघ्र ही पहला नस्ल मानक लिखा गया था। नस्ल का पहला सदस्य 1898 में [[संयुक्त राज्य अमेरिका|अमेरिका]] के अमेरिकन केनेल क्लब के लिए दर्ज किया गया था और बाद में जल्द ही इसे 1900 में मान्यता दी गयी। ग्लेन रोज़ फ्लैशअवे ने 1926 के वेस्टमिंस्टर केनेल क्लब डॉग शो में ट्वॉय ग्रुप जीता, जो वेस्टमिंस्टर में समूह जीतने वाला पहला पोमेरेनियन था।<ref name="vanderlip" /> वेस्टमिंस्टर शो में पहला सर्वश्रेष्ठ ग्रेट एल्म्स प्रिंस चार्मिंग द्वितीय बनाने में 1988 तक का समय लगा.<ref>{{cite web |url=http://www.westminsterkennelclub.org/history/biswinners.html |title=Best in Show Winners |author= |date= |work=Westminster Kennel Club |publisher= |accessdate=6 जनवरी 2010 |archive-date=25 दिसंबर 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20071225033923/http://westminsterkennelclub.org/history/biswinners.html |url-status=dead }}</ref>
1998 में प्रकाशित मानक में फ़ेडरेशन सैनोलॉजिक इंटरनेशनेल द्वारा कीशहोंड साथ-साथ पोमेरेनियन को जर्मन स्पिट्ज मानक में शामिल किया गया।<ref name="standard">{{cite web |url=http://www.google.co.uk/url?sa=t&source=web&ct=res&cd=1&ved=0CAcQFjAA&url=http%3A%2F%2Fwww.fci.be%2Fuploaded_files%2F097gb98_en.doc&rct=j&q=fci+german+spitz+pomeranian&ei=7hlFS6OvIYKI0wTsqp2SBQ&usg=AFQjCNFaTxbdduvIvta5pAv_k1YW8R10rg |title=FCI-Standard N° 97: GERMAN SPITZ, INCLUDING KEESHOND AND POMERANIAN |author= |date=5 मार्च 1998 |work= |publisher=Fédération Cynologique Internationale |accessdate=6 जनवरी 2010}}</ref> मानक के अनुसार "स्पिट्ज नस्ल मनोरम हैं" और इसमें एक "अद्वितीय विशेषतायुक्त, मुखर उपस्थिति" है।<ref name="standard" />
=== लोकप्रियता ===
पोमेरेनियन संयुक्त राज्य अमेरिका के सबसे अधिक लोकप्रिय कुत्तों में है और पिछले 10 वर्षों से अधिक समय से लगातार एकेसी (AKC) कुत्ता नस्लों में 15 शीर्ष नस्लों में पंजीकृत है।<ref name="akcranking">{{cite web |url=http://www.akc.org/reg/dogreg_stats.cfm |title=AKC Dog Registration Statistics |author= |date= |work=American Kennel Club |publisher= |accessdate=29 नवंबर 2009 |archive-date=7 फ़रवरी 2015 |archive-url=https://web.archive.org/web/20150207063213/http://www.akc.org/reg/dogreg_stats.cfm |url-status=dead }}</ref> नस्ल ने 2008 की रैंकिंग में #13वां रैंक प्राप्त किया, 2007 और 2003 में भी उसे यही रैंकिंग प्राप्त है।<ref name="akcranking" />
हालांकि, यह 2008 या 2007 में ब्रिटेन में 20 शीर्ष नस्लों में सूचीबद्ध नहीं है।<ref>{{cite web |url=http://www.thekennelclub.org.uk/download/5675/2007-2008-Top-20.pdf |title=Top Twenty Breeds in Registration Order for the Years 2007 and 2008 |author= |date= |work=The Kennel Club |publisher= |accessdate=30 नवंबर 2009 |archive-date=17 अक्तूबर 2011 |archive-url=https://web.archive.org/web/20111017204734/http://www.thekennelclub.org.uk/download/5675/2007-2008-Top-20.pdf |url-status=dead }}</ref> ऑस्ट्रेलिया में उनकी लोकप्रियता में 1986 के बाद से गिरावट आई है, 1987 में राष्ट्रीय ऑस्ट्रेलियाई श्वानालय परिषद में 1128 पोमेरेनियनों के पंजीकरण के साथ चोटी पर पहुंचने के बाद 2008 में केवल 577 को पंजीकृत किया गया। लेकिन यह अपने आप में 2004 से अधिक है जब केवल 491 कुत्ते पंजीकृत थे।<ref>{{cite web |url=http://www.ankc.org.au/media/scripts/doc_download.aspx?did=532 |title=National Animal Registration Analysis 1986-2009 |author= |date= |work=Australian National Kennel Council |publisher= |accessdate=27 सितंबर 2010 }}{{Dead link|date=जनवरी 2021 |bot=InternetArchiveBot }}</ref>
यह 2008 में [[संयुक्त राज्य अमेरिका|अमेरिकी]] शहरों में अधिक लोकप्रिय रहा, इसने [[डेट्राइट, मिशिगन|डेट्रोइट]]<ref name="akccities2">{{cite web |url=http://www.akc.org/reg/topdogsbycity.cfm?page=2#DALLAS |title=Top 10 Most Popular Breeds in the 50 Largest U.S. Cities: Page 2 |author= |date= |work=American Kennel Club |publisher= |accessdate=29 नवंबर 2009 |archive-date=9 अप्रैल 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20090409015348/http://www.akc.org/reg/topdogsbycity.cfm?page=2#DALLAS |url-status=dead }}</ref> और ऑरलैंडो<ref name="akccities4">{{cite web |url=http://www.akc.org/reg/topdogsbycity.cfm?page=4#OKLAHOMACITY |title=Top 10 Most Popular Breeds in the 50 Largest U.S. Cities: Page 3 |author= |date= |work=American Kennel Club |publisher= |accessdate=29 नवंबर 2009 |archive-date=26 मई 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20090526082938/http://www.akc.org/reg/topdogsbycity.cfm?page=4#OKLAHOMACITY |url-status=dead }}</ref> में दसवीं संयुक्त रैंकिंग ([[अमेरिकन बुलडॉग|अमेरिकी बुलडॉग]] के साथ), [[लॉस ऐन्जेलिस|लॉस एंजिल्स]]<ref name="akccities3">{{cite web |url=http://www.akc.org/reg/topdogsbycity.cfm?page=3#LONGBEACH |title=Top 10 Most Popular Breeds in the 50 Largest U.S. Cities: Page 4 |author= |date= |work=American Kennel Club |publisher= |accessdate=29 नवंबर 2009 |archive-date=16 मार्च 2012 |archive-url=https://web.archive.org/web/20120316011334/http://www.akc.org/reg/topdogsbycity.cfm?page=3#LONGBEACH |url-status=dead }}</ref> में नौवीं, सिएटल में एक संयुक्त सातवीं (फिर से [[अमेरिकन बुलडॉग|अमेरिकी बुलडॉग]] के साथ,<ref name="akccities5">{{cite web |url=http://www.akc.org/reg/topdogsbycity.cfm?page=5#SALTLAKECITY |title=Top 10 Most Popular Breeds in the 50 Largest U.S. Cities: Page 5 |author= |date= |work=American Kennel Club |publisher= |accessdate=29 नवंबर 2009 |archive-date=10 अप्रैल 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20090410040949/http://www.akc.org/reg/topdogsbycity.cfm?page=5#SALTLAKECITY |url-status=dead }}</ref> और होनोलूलू में तीसरी रैंकिंग प्राप्त की, जिसमें केवल लेब्राडोर रिट्रेवर और [[जर्मन शेफर्ड|जर्मन शेफर्ड डॉग]] उससे आगे रहे.<ref name="akccities2" />
== इन्हें भी देखें ==
* लैप डॉग
* कम्पैन्यन डॉग
* कम्पैन्यन डॉग ग्रुप
== सन्दर्भ ==
{{reflist|2}}
==बाहरी कड़ियाँ==
{{Commonscat|Pomeranian}}
* {{Dmoz|Recreation/Pets/Dogs/Breeds/Toy_Group/Pomeranian|Pomeranian}}
{{Spitz}}
{{Toy dogs}}
[[श्रेणी:कुत्तों के नस्ल]]
[[श्रेणी:साथी कुत्ते]]
[[श्रेणी:जर्मनी में पैदा हुए कुत्तों की नस्लें]]
[[श्रेणी:गूगल परियोजना]]
[[श्रेणी:श्वान]]
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प्लाइवुड
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[[चित्र:Spruce plywood.JPG|thumb|स्प्रूस से बना हुआ 'सॉफ्टवुड प्लाईवुड']]
[[चित्र:How-To-Make-Plywood.gif|right|thumb|300px|प्लाईवुड ऐसे बनती है]]
'''परतदार लकड़ी''' या '''प्लाईवुड''' (जर्मन: Sperrholz, अंग्रेजी: plywood, फ्रेंच: contreplaqué) [[लकड़ी]] की अनेक पतली चादरों (परतों) से निर्मित एक प्रकार का कृत्रिम काष्ठ है। परतें परस्पर चिपकाई जाती हैं ताकि अधिक मजबूती के लिए आसन्न परतों के बीच लकड़ी के तंतु एक दूसरे से समकोण पर रहें। आमतौर पर परतें [[सम और विषम अंक|विषम संख्या]] में होती हैं क्योंकि समरूपता के कारण बोर्ड के मुड़ने की संभावना कम हो जाती है।
== किस्में ==
[[चित्र:plywood.jpg|thumb|right|शो वेनीर के साथ औसत-गुणवत्ता प्लाईवुड]]
[[चित्र:multiplex.png|thumb|right|प्लाईवुड में उच्च-गुणवत्ता कौन्कृट पोरिंग प्लेट]]
विभिन्न उपयोगों के लिए प्लाईवुड की अनेक किस्में उपलब्ध हैं।
=== ऊष्णकटिबंधीय प्लाईवुड ===
ऊष्णकटिबंधीय प्लाईवुड हमेशा मेरांती या एशियाई क्षेत्र की ऊष्णकटिबंधीय लकड़ी की मिश्रित प्रजातियों से बना होता है। ऊष्णकटिबंधीय प्लाईवुड अपने घनत्व, शक्ति, परतों की एकरूपता और उच्च गुणवत्ता के कारण मृदुकाष्ठ (सॉफ्टवुड) प्लाईवुड पर अपनी श्रेष्ठता समेटे हुए हैं। यदि उच्च मानकों के साथ निर्मित हो तो यह आमतौर पर अनेक बाजारों में अधिमूल्य पर बेचा जाता है। ऊष्णकटिबंधीय प्लाईवुड ब्रिटेन, जापान, ताइवान, इंडोनेशिया, कोरिया, दुबई और विश्व के अन्य प्रमुख शहरों में व्यापक रूप से प्रयोग किया जाता है। यह अनेक क्षेत्रों में निर्माण के प्रयोजन के लिए सबसे पसंदीदा विकल्प है।
=== मृदुकाष्ठ (सॉफ्टवुड) प्लाईवुड ===
मृदुकाष्ठ (सॉफ्टवुड) एनेल
यह आमतौर पर डगलस देवदार या शंकुवृक्ष (स्प्रूस), [[चीड़]] और देवदार (सामूहिक रूप से स्प्रूस-पाइन-फर या एसपीएफ़ के नाम से ज्ञात) से बना होता है और विशेष तौर पर निर्माण एवं औद्योगिक प्रयोजनों के लिए इसका इस्तेमाल होता है।<ref>ओ'हैलोरन, पृष्ठ. 221.</ref>
=== उत्पादन ===
प्लाईवुड अत्यंत व्यापक रूप से इस्तेमाल होने वाले लकड़ी के उत्पादों में से एक है। यह ज्वलनशील, लचीला, सस्ता, साध्य, पुनर्चक्रणीय होता है और आमतौर पर स्थानीय रूप से उत्पादित किया जा सकता है। प्लाईवुड पेड़ों से छीली गई लकड़ी की पतली परतों से बनाया जाता है। प्लाईवुड बनाने के लिए इन परतों (वीनियरों) (या पोशिशों) को परस्पर एक साथ चिपकाया जाता हैं। पोशिश (वीनियर) की प्रत्येक परत में तंतुओं की दिशा अगली परत के लम्बवत होती है। परतों की संख्या हमेशा विषम होती है ताकि चादर संतुलित रहे और मुड़े नहीं। प्लाईवुड जिस प्रकार जुड़ा हुआ होता है (संयोजित भाग विषम संख्या में और तंतु आमने-सामने रहते हैं) उसकी वजह से इसका तंतुओं की दिशा के लम्बवत मुड़ना बहुत ही कठिन है। सादा लकड़ी के बजाय प्लाईवुड का प्रयोग करने का एक आम कारण इसका चटखने, सिकुड़ने, बल खाने या मुड़ने के प्रति प्रतिरोध तथा इसकी सामान्य रूप से उच्च स्तर की ताकत है।
=== दृढ़काष्ठ (हार्डवुड) प्लाईवुड ===
कम मांग के उपयोगों के लिए प्रयुक्त होता है। सन्टी (सनोबर या भोजवृक्ष) प्लाईवुड की विशेषता उसकी उत्कृष्ट ताकत, कठोरता और प्रसाररोधक क्षमता है। इसकी उच्च द्विविमीय संरचनात्मक शक्ति और चोटरोधी क्षमता इसे विशेष रूप से भारी फर्श और दीवार संरचनाओं के लिए उपयुक्त बनाती है। अनुकूलित प्लाईवुड उत्पादन के पास उच्च भारवहन क्षमता है। सन्टी प्लाईवुड की सतह की कठोरता उत्कृष्ट है तथा यह क्षति एवं घिसावट रोधी है।
<ref name="Handbook">फिनिश प्लाईवुड का पुस्तिका, फिनिश अरण्य उद्योग फे'''डेरडेकोरेटिव प्लाईवुड''' एशन, 2002, ISBN 952-9506-63-5 [http://www.forestindustries.fi/infokortit/handbookplywood/Documents/HandbookOfFinnishPlywood.pdf] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20070927200306/http://www.forestindustries.fi/infokortit/handbookplywood/Documents/HandbookOfFinnishPlywood.pdf|date=27 सितंबर 2007}}</ref>
=== सजावटी प्लाईवुड ===
आमतौर पर दृढ़काष्ठ (हार्डवुड) के आवरण के साथ जिसमें लाल शाहबलूत, सन्टी, मेपल, लाउआन (फिलीपीन महोगनी) और बड़ी संख्या में अन्य दृढ़काष्ठ (हार्डवुड) शामिल हैं।
आंतरिक उपयोग वाले प्लाईवुड के लिए आम तौर पर यूरिया-फार्मेल्डीहाइड सरेस का प्रयोग किया जाता है जिसकी जलरोधक क्षमता सीमित होती है, जबकि बाह्य उपयोग वाले प्लाईवुड तथा मैरीन-ग्रेड प्लाईवुड को गलन का सामना करने हेतु डिजाइन किया जाता है और डिलेमिनेशन रोकने तथा भारी [[आर्द्रता|नमी]] में मजबूती बनाए रखने के लिए जलरोधी फिनोल-फार्मेल्डीहाइड सरेस का इस्तेमाल किया जाता है।
मृदुकाष्ठ (सॉफ्टवुड) प्लाईवुड की सबसे आम किस्में तीन, पांच या सात परतों में मीट्रिक परिमाप 1.2 मीटर × 2.4 मीटर में या थोड़े बड़े 4 फुट × 8 फुट के शाही परिमाप में आती हैं। प्लाई की मोटाई 1/10" से 1/6" तक होती है जो फलक की मोटाई के आधार पर निर्भर करती है। छत छाने के लिए पतले 5/8-इंच के प्लाईवुड का इस्तेमाल किया जा सकता है। फर्श में मोटाई कम से कम 3/4-इंच रहती है जो फर्श की कड़ियों के बीच की दूरी पर निर्फर करती है। फर्श के उपयोगों में प्लाईवुड में अक्सर जीभ और नाली जोड़ का इस्तेमाल किया जाता है। मिलान वाले एक किनारे पर एक "नाली" कटी हुई होती है जिसमें अगले बोर्ड के आसन्न किनारे पर निकली हुई एक नोकदार "जीभ" समा जाती है। यह पड़ोसी बोर्ड के सापेक्ष एक बोर्ड के ऊपर-नीचे हिलने को रोकता है जिससे जहां जोड़ कड़ियों पर नहीं हों वहां ठोस फर्श का एहसास हो। जीभ और नाली फर्श प्लाईवुड आम तौर पर 1" मोटाई के होते हैं।
=== विशिष्ट प्रयोजन प्लाईवुड ===
उच्च शक्ति प्लाईवुड, जो '''एयरक्राफ्ट प्लाईवुड''' के नाम से जाना जाता है, महोगनी और/या सन्टी से बनता है और इसमें ऐसे चिपकाने वाले पदार्थ का प्रयोग किया जाता है जो गर्मी और नमी का उच्च प्रतिरोधक हो। [[द्वितीय विश्वयुद्ध|द्वित्तीय विश्वयुद्ध]] में ब्रिटेन निर्मित मॉसक्विटो बॉम्बर जिसे '''वुडन वंडर''' का उपनाम दिया गया था, सहित अनेक लड़ाकू विमानों में इसका इस्तेमाल किया गया था।
कुछ विशेष प्लाईवुड में एकांतर प्लाई नहीं होती हैं। इन्हें विशिष्ट प्रयोजन के लिए डिजाइन किया जाता हैं। ऐसा ही एक प्लाईवुड "बेंडी बोर्ड" के रूप में जाना जाता है। यह बहुत लचीला होता है और घुमावदार भागों को बनाने के लिए डिजाइन किया जाता है। ब्रिटेन में इसे "हैटर्स प्लाई" के रूप में जाना जाता है क्योंकि विक्टोरिया युग में इसका इस्तेमाल पुरुषों के लंबे टोप बनाने के लिए किया गया था। हालांकि कुछ देशों में इसे प्लाईवुड नहीं कहा जाता क्योंकि प्लाईवुड के बुनियादी विवरण के अनुसार लकड़ी पोशिश (वीनियर) की परतों को एक दूसरे के ऊपर इस प्रकार रखा जाता है कि प्रत्येक परत के तंतु अगली परत के तंतुओं के लम्बवत होते हैं।
'''समुद्रीय प्लाईवुड''' का उच्च नमी के वातावरण में गलन से बचाने हेतु कोई विशेष उपचार नहीं किया जाता। इसकी संरचना ऐसी है कि इसे लंबी अवधि तक नमी वाले वातावरण में इस्तेमाल किया जा सकता है। प्रत्येक लकड़ी पोशिश (वीनियर) में मुख्य अंतर नगण्य होता है जिससे प्लाईवुड में पानी जाने की संभावना बहुत सीमित हो जाती है और इसलिए एक ठोस और स्थिर सरेस का जोड़ प्राप्त होता है। इसमें अन्य प्लाईवुड के समान ही बाह्य डब्लूबीपी (WBP) सरेस का उपयोग किया जाता है। समुद्रीय प्लाईवुड का उपयोग अक्सर गोदी और नाव के निर्माण में किया जाता है। यह मानक प्लाईवुड की तुलना में बहुत महंगा है: एक 4 फुट x 8 फुट 1/2-इंच मोटे बोर्ड की कीमत 75 से 100 अमरीकी डॉलर या $2.5 प्रति वर्ग फुट के आसपास है, जो मानक प्लाईवुड से लगभग तीन गुना महंगा है।
समुद्रीय प्लाईवुड को बीएस 1088 से, जो समुद्रीय प्लाईवुड के लिए [[यूनाइटेड किंगडम|ब्रिटिश]] मानक है, वर्गीकृत किया जा सकता है। समुद्रीय प्लाईवुड के श्रेणीकरण के लिए कुछ अंतरराष्ट्रीय मानक हैं और अधिकांश मानक स्वैच्छिक हैं। कुछ समुद्रीय प्लाईवुड पर लंदन के लॉयड्स की मुहर होती है जो कि इसे बीएस 1088 के अनुरूप होने के लिए प्रमाणित करता है। कुछ प्लाईवुड इसके निर्माण में प्रयुक्त हुई लकड़ी के आधार पर भी नामित हैं। इसके उदाहरण ओकुमे या मेरांती हैं।
प्लाईवुड के अन्य प्रकारों में शामिल हैं अग्निरोधक, नमी प्रतिरोधी, संकेत ग्रेड, दबाव उपचारित और निश्चित रूप से दृढ़काष्ठ (हार्डवुड) तथा मृदुकाष्ठ (सॉफ्टवुड) प्लाईवुड. इन में से प्रत्येक उत्पाद को उद्योग की किसी आवश्यकता को पूर्ण करने के लिए डिजाइन किया गया है।
== आकार ==
अमेरिका: 4 फुट x 8 फुट<br />
अमेरिका: 5 फुट x 5 फुट<br />
मीट्रिकः 1220मिमी x 2440मिमी<ref>{{Cite web |url=http://www.cps.gov.on.ca/english/plans/E9000/9011/M-9011L.pdf |title=मेट्रिक रूपांतरण, कनाडा सरकार प्रकाशन |access-date=11 अक्तूबर 2010 |archive-url=https://web.archive.org/web/20100216044053/http://www.cps.gov.on.ca/english/plans/E9000/9011/M-9011L.pdf |archive-date=16 फ़रवरी 2010 |url-status=dead }}</ref>
== उत्पादन ==
प्लाईवुड उत्पादन के लिए अच्छे कुंदों की आवश्यकता होती है, जो कि आम तौर से आयामित इमारती लकड़ी के रूप में प्रसंस्करण के लिए आराघरों में आवश्यक कुंदों की तुलना में सीधे और व्यास में बड़े होते हैं। कुंदे को क्षैतिज लिटाया जाता है और इसके लंबे अक्ष के चारों ओर घुमाते हुए एक लंबा आरा इस में दबाया जाता है (कुछ हद तक एक पटरी के किनारे पर एक स्विस रोल को घुमाये जाने की तरह) जिसके परिणामस्वरूप लकड़ी की एक पतली परत छिल कर अलग हो जाती है। इस प्रकार एक कुंदे को पोशिश (वीनियर) की चादरों में छील लिया जाता है, जिन्हें तब इच्छित आयाम में काट कर सुखाया जाता है, चकती लगाई जाती है और आपस में चिपका कर 140 °C (280 °F) तथा 19 एमपीए (2800 पीएसआई (psi)) पर एक प्रेस में गर्म करके प्लाईवुड का फलक बनाया जाता है। इस फलक को बाद में चकती लगाकर, पुनः आकार देकर, बालू डाल कर या अन्य प्रकार से इच्छित बाजार के अनुसार तैयार किया जाता है।
प्लाईवुड में प्रयुक्त चिपकाने वाले पदार्थ एक चिंता का मुद्दा बन गए हैं। यूरिया फॉर्मेल्डीहाइड और फिनोल फॉर्मेल्डीहाइड दोनों अति उच्च सांद्रता में कैंसरकारक हैं। परिणामस्वरूप, अनेक उत्पादक "ई" ("E") रेटिंग वाले ("ईओ" ("E0") न्यूनतम फॉर्मेल्डीहाइड- उत्सर्जक है) फॉर्मेल्डीहाइड- उत्सर्जक सरेस प्रणाली की ओर रुख कर रहे हैं। "ईओ" ("E0") के अनुरूप उत्पादित प्लाईवुड में फॉर्मेल्डीहाइड-उत्सर्जन प्रभावी रूप से शून्य है।<ref>{{Cite web |url=http://www.paa.asn.au/newsandmedia/downloads/media_release_-_formaldehyde_emissions.pdf |title=ऑस्ट्रेलिया के अभियंतीय लकड़ी उत्पाद एसोसिएशन |access-date=13 सितंबर 2009 |archive-url=https://web.archive.org/web/20090913044307/http://www.paa.asn.au/newsandmedia/downloads/media_release_-_formaldehyde_emissions.pdf |archive-date=13 सितंबर 2009 |url-status=dead }}</ref>
सरेस के मुद्दे को सामने लाये जाने के अलावा, ऊर्जा संरक्षण के साथ-साथ हमारे प्राकृतिक संसाधनों के लिए चिंता का विषय बनने के कारण लकड़ी के संसाधन स्वयं उत्पादकों के ध्यान का केन्द्र बन रहे हैं। जो निर्माता इन कार्यक्रमों में भाग लेते हैं उनके लिए अनेक प्रमाणपत्र उपलब्ध हैं। फॉरेस्ट स्टुअर्डशिप काउंसिल (एफएससी), लीडरशिप इन इनर्जी एंड इनवायर्नमेंटल डिजाइन (एलईईडी), सस्टेनेबल फॉरेस्ट्री इनीशियेटिव (एसएफआई (SFI)) तथा ग्रीनगार्ड प्रमाणीकरण कार्यक्रम हैं जो यह सुनिश्चित करते हैं कि निर्माण एवं उत्पादन विधियां जारी रखने योग्य हैं। इन में से अनेक कार्यक्रम उत्पादकों और प्रयोक्ताओं दोनों को कर-राहत का प्रस्ताव देते हैं।<ref>{{Cite web |url=http://www.prowoodworkingtips.com/Plywood.html |title=प्रो वुडवर्किंग Tips.com |access-date=11 अक्तूबर 2010 |archive-url=https://web.archive.org/web/20101005212434/http://prowoodworkingtips.com/Plywood.html |archive-date=5 अक्तूबर 2010 |url-status=dead }}</ref>
== अमेरिकी प्लाईवुड श्रेणियां ==
प्लाईवुड की श्रेणी प्रत्येक फलक के मुखभाग तथा पृष्ठभाग के पोशिश (वीनियर) की गुणवत्ता द्वारा निर्धारित होती है। प्रथम अक्षर फलक के मुखभाग के पोशिश (वीनियर) की गुणवत्ता बताता है जबकि दूसरा अक्षर पृष्ठ सतह की गुणवत्ता बताता है।<ref>{{Cite web |url=http://www.timber.org.au/NTEP/menu.asp?id=104#Veneer_quality |title=शिक्षा - प्लाईवुड |access-date=11 अक्तूबर 2010 |archive-url=https://web.archive.org/web/20101029231457/http://www.timber.org.au/NTEP/menu.asp?id=104#Veneer_quality |archive-date=29 अक्तूबर 2010 |url-status=dead }}</ref> अक्षर "एक्स" संकेत करता है कि फलक के निर्माण में स्क्रैप लकड़ी का इस्तेमाल केन्द्रीय प्लाई के रूप में हुआ है, न कि "बाह्य रूप से" जैसा कि आम तौर से सोचा जाता है।{{Citation needed|date= जनवरी 2010}} ए-डी रेटिंग केवल निर्माण प्लाईवुड (सॉफ्टवुड) के लिए अच्छी है शाहबलूत (ओक) या मेपल जैसे दृढ़काष्ठ (हार्डवुड) प्लाईवुड के लिए नहीं।
"ए": उपलब्ध उच्चतम गुणवत्ता श्रेणी. दोषमुक्त या छोटी गांठों से युक्त हो सकते हैं, बशर्ते उनमें डाट लगाई गई हो ("नाव" या "अमरीकी फुटबॉल" के आकार वाले डाट) अथवा कृत्रिम चकती लगा कर मरम्मत की गई हो। इस श्रेणी में सतह कभी-कभी चटकी हुई हो सकती है जिसकी मरम्मत कृत्रिम भराव से की जाती है। सतह हमेशा बालुई होती है जो रंगने योग्य चिकनी सतह की गुणवत्ता प्रदान करती है।
"ख": दूसरी उच्चतम गुणवत्ता पोशिश (वीनियर) श्रेणी. सामान्यतः अधोस्तरीय "ए" श्रेणी गुणवत्ता पोशिश (वीनियर) का उप-उत्पाद. ठोस सतह, लेकिन छोटे व्यास की गांठें हो सकती हैं और सतह में महीन चटक हो सकती है। सामान्यतः लकड़ी के डाट या कृत्रिम भराव द्वारा मरम्मत की हुई। सामान्य रूप से सतह बालू से चिकनी की हुई होती है।
"सी": एक निम्न स्तरीय मुखभाग गुणवत्ता युक्त माना जाता है, लेकिन सामान्य निर्माण प्रयोजनों के लिए एक उचित पसंद है। 1½ इंच व्यास की सख्त गांठें हो सकती हैं, कुछ गांठों के खुले छिद्र, ऊपरी सतह चटकी हुई और रंग उड़ा हुआ हो सकता है। कुछ उत्पादक कृत्रिम भराव से दोषों की मरम्मत कर सकते हैं। फलकों को आमतौर पर बालू से चिकना नहीं किया जाता है।
"डी": न्यूनतम गुणवत्ता पोशिश (वीनियर) समझा जाता है और अक्सर निर्माण श्रेणी के फलकों की पृष्ठ सतह के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। बड़ी और छोटी अनेक गांठें होती हैं, साथ ही 2½ इंच व्यास के गांठों के खुले छिद्र भी होते हैं। खुली गांठ, दरार और मलिनीकरण स्वीकार्य हैं। "डी" श्रेणी मलिनकिरण की न तो मरम्मत की जाती है और न ही उसे बालू से चिकना किया जाता है। इस श्रेणी को मौसमी तत्त्वों के प्रभाव में स्थायी रूप से खुला रखने की अनुशंसा नहीं की जाती।
== अनुप्रयोग ==
प्लाईवुड का प्रयोग अनेक ऐसे अनुप्रयोगों में किया जाता है जिनमें उच्च गुणवत्ता तथा उच्च शक्ति की शीट सामग्री की आवश्यकता होती है। इस संदर्भ में गुणवत्ता का अर्थ है चटकने, टूटने, सिकुड़ने, बल खाने और मुड़ने का प्रतिरोध।
बाहर से चिपके हुए प्लाईवुड बाह्य उपयोग के लिए उपयुक्त हैं, लेकिन क्योंकि नमी लकड़ी की शक्ति को प्रभावित करती है, अतः अनुकूलतम प्रदर्शन तभी हासिल किया जा सकता है जब उसके अंदर नमी की मात्रा अपेक्षाकृत कम हो। दूसरी ओर, शून्य से नीचे तापमान वाली परिस्थितियां प्लाईवुड के आकार या मजबूती के गुण पर कोई प्रभाव नहीं डालती, जो इसके कुछ विशेष अनुप्रयोगों में इस्तेमाल को संभव को संभव बनाता है।
प्लाईवुड का इस्तेमाल दबाव प्रक्रिया (स्ट्रेस्ड स्किन) वाले अनुप्रयोगों में इंजीनियरिंग सामग्री के रूप में भी किया जाता है। द्वितीय विश्व युद्ध से इसका इस्तेमाल समुद्रीय और विमानन अनुप्रयोगों के लिए किया गया है। इनमें सबसे उल्लेखनीय है ब्रिटेन का डी हैवीलैंड मॉसक्विटो बॉम्बर, जिसे मुख्य रूप से लकड़ी से बनाया गया था। वर्तमान में प्लाईवुड का इस्तेमाल दबाव प्रक्रिया अनुप्रयोग में सफलतापूर्वक किया जाता है।{{Citation needed|date=April 2007}}. अमेरिकी डिजाइनर चार्ल्स और रे ईम्स अपने प्लाईवुड आधारित फर्नीचर के लिए प्रसिद्ध हैं, जबकि फिल बोल्गर मुख्य रूप से प्लाईवुड से निर्मित नौकाओं की विस्तृत श्रृंखला की डिजाइनिंग के लिए प्रसिद्ध हैं।
=== मृदुकाष्ठ (सॉफ्टवुड) अनुप्रयोग ===
स्प्रूस प्लाईवुड के विशिष्ट इस्तेमाल हैं:
* भवन निर्माण में फर्श, दीवारें और छत
* हवा देने वाले फलक (पैनल)
* वाहनों की आंतरिक बॉडी का काम
* पैकेज और संदूक
* विज्ञापन पट
* हदबंदी (बाड़ लगाना)
कोटिंग वाले समाधान उपलब्ध हैं जो स्प्रूस प्लाईवुड की प्रमुख तंतु संरचना को ढक लेते हैं। इन लेपित प्लाईवुड के कुछ अंतिम उपयोग हैं जहां उचित शक्ति की जरूरत है लेकिन स्प्रूस का हल्कापन लाभदायक है, उदाहरण के लिएः
* कंक्रीट शटरिंग पैनल
* निर्माण में पेंट के लिए तैयार सतहें
=== सन्टी प्लाईवुड अनुप्रयोग ===
विशेष लेपित सन्टी प्लाईवुड विशिष्ट रूप से संस्थापना-को-तैयार घटक के रूप में इस्तेमाल किया जाता है, उदाहरण के लिए:
* कंक्रीट फॉर्मवर्क प्रणालियों में पैनल
* परिवहन वाहनों में फर्श, दीवार और छत
* कंटेनर फर्श,
* विभिन्न इमारतों और कारखानों के फर्श जहां अधिक घिसावट होती है।
* मचान सामग्री
सन्टी प्लाईबुड विशेष अनुप्रयोगों में एक संरचनात्मक सामग्री के रूप में प्रयोग किया जाता है, उदाहरण के लिए:
* [[पवन टर्बाइन|पवन टरबाइन]] ब्लेड
* तरलीकृत [[प्राकृतिक गैस]] (एलएनजी) वाहकों के लिए रोधन बक्से
चिकनी सतह और सटीक मोटाई, सामग्री के स्थायित्व के साथ मिल कर सन्टी प्लाईवुड को कई विशेष अंतिम उपयोगों के लिए एक अनुकूल सामग्री बनाते हैं, उदाहरण के लिएः
* डाई कटिंग बोर्ड
* लकड़ी के फर्श के लिए सहायक संरचना
* खेल के मैदान संबंधी उपकरण
* फर्नीचर
* दक्षतापूर्ण आउटडोर विज्ञापनों के लिए संकेत और बाड़
* वाद्य यंत्र
* खेल उपकरण
=== ऊष्णकटिबंधीय प्लाईवुड अनुप्रयोग ===
* आम प्लाईवुड
* कंक्रीट पैनल
* फर्श का आधार
* संरचना पैनल
* कंटेनर का फर्श
* लैमिन बोर्ड
* लैमिनेटेड वीनियर लम्बर (एलवीएल)
ऊष्णकटिबंधीय प्लाईवुड व्यापक रूप से दक्षिण पूर्व एशिया क्षेत्र, मुख्यतः मलेशिया और इंडोनेशिया से उपलब्ध है। ऊष्णकटिबंधीय प्लाईवुड प्रीमियम गुणवत्ता और शक्ति समेटे हुए हैं। मशीनरी पर निर्भर करते हुए, ऊष्णकटिबंधीय प्लाईवुड मोटाई में उच्च सटीकता के साथ बनाया जा सकता है तथा अमेरिका, जापान, [[मध्य पूर्व]], कोरिया और दुनिया भर के अन्य क्षेत्रों में एक बेहद बेहतर विकल्प है।
== इन्हें भी देखें ==
* योजित लकड़ी
* फाइबरबोर्ड
* ग्लूड लैमिनेटेड टिम्बर
* हार्डबोर्ड
* मैसोनाइट
* मध्यम घनत्व फाइबरबोर्ड
* ओरिएंटेड स्ट्रैंड बोर्ड
* पार्टिकल बोर्ड
* प्रेस्ड वुड
== सन्दर्भ ==
{{reflist}}
== बाहरी कड़ियाँ ==
* [https://web.archive.org/web/20130510051824/http://www.prowoodworkingtips.com/Material_Uses_Index.html मटिरियल यूज़ेस] प्रो वुडवर्किंग Tips.com
* [https://www.shivshaktiplywoods.com/plywood-shop-in-narela/ Plywood shop in narela]{{Dead link|date=मई 2026 |bot=InternetArchiveBot }} नरेला में उच्च गुणवत्ता वाला प्लाईवुड मिलने का भरोसेमंद स्थान।
[[श्रेणी:योजित लकड़ी]]
[[श्रेणी:संयुक्त सामग्री]]
tsqhj6pz26lw8o5l9nnumeo6yw4jv58
फास्ट फूड
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text/x-wiki
{{Other uses}}'''फास्ट फूड''' एक प्रकार का [[वृहद उत्पादन|बड़े पैमाने पर उत्पादित]] भोजन है जिसे व्यावसायिक पुनर्विक्रय के लिए डिज़ाइन किया गया है, जिसमें सेवा की गति पर एक मजबूत प्राथमिकता दी गई है। यह एक व्यावसायिक शब्द है, जो एक [[रेस्तरां]] या स्टोर में जमे हुए, पहले से गरम या पहले से पकाए गए अवयवों के साथ बेचे जाने वाले भोजन तक सीमित है और ले-आउट / टेक-अवे के लिए पैकेजिंग में परोसा जाता है। बड़ी संख्या में व्यस्त यात्रियों, यात्रियों और [[मजदूरी|वेतनभोगी कर्मचारियों को]] समायोजित करने के लिए फास्ट फूड को एक व्यावसायिक रणनीति के रूप में बनाया गया था। 2018 में, वैश्विक स्तर पर फास्ट फूड उद्योग का अनुमानित मूल्य $570 बिलियन था। <ref name="FH-2018">{{Cite web|url=https://www.franchisehelp.com/industry-reports/fast-food-industry-analysis-2018-cost-trends/|title=Fast Food Industry Analysis 2018 – Cost & Trends|date=2018|website=franchisehelp.com|publisher=Franchise Help|page=1|access-date=July 16, 2019}}<cite class="citation web cs1" data-ve-ignore="true">[https://www.franchisehelp.com/industry-reports/fast-food-industry-analysis-2018-cost-trends/ "Fast Food Industry Analysis 2018 – Cost & Trends"]. ''franchisehelp.com''. Franchise Help. 2018. p. 1<span class="reference-accessdate">. Retrieved <span class="nowrap">July 16,</span> 2019</span>.</cite></ref>
"फास्ट फूड" के सबसे तेज़ रूप में पहले से पका हुआ भोजन होता है जो प्रतीक्षा अवधि को केवल सेकंड तक कम कर देता है। अन्य फास्ट फूड आउटलेट, मुख्य रूप से [[मैकडॉनल्ड्स]] जैसे [[हैमबर्गर]] आउटलेट, बड़े पैमाने पर उत्पादित, पूर्व-तैयार सामग्री (बैग में बने बन्स और मसालों, जमे हुए बीफ़ पैटीज़, पहले से धुली हुई सब्जियां, पूर्व-कटा हुआ, या दोनों; आदि) का उपयोग करते हैं और मांस को पकाते हैं। और [[फ्रेंच फ्राइज़]] ताजा, "ऑर्डर करने के लिए" इकट्ठा करने से पहले।
फास्ट फूड रेस्तरां पारंपरिक रूप से ड्राइव-थ्रू द्वारा प्रतिष्ठित हैं। आउटलेट स्टैंड या कियोस्क हो सकते हैं, जो कोई आश्रय या बैठने की सुविधा प्रदान नहीं कर सकते हैं, <ref>{{Cite book|url=https://archive.org/details/fastfoodroadside0000jakl|title=Fast Food: Roadside Restaurants in the Automobile Age|last=Jakle|first=John|publisher=Johns Hopkins University Press|year=1999|isbn=978-0-8018-6920-4|url-access=registration}}<cite class="citation book cs1" data-ve-ignore="true" id="CITEREFJakle1999">Jakle, John (1999). <span class="cs1-lock-registration" title="Free registration required">[[iarchive:fastfoodroadside0000jakl|''Fast Food: Roadside Restaurants in the Automobile Age'']]</span>. Johns Hopkins University Press. [[अंतर्राष्ट्रीय मानक पुस्तक संख्या|ISBN]] [[विशेष: BookSources/978-0-8018-6920-4|<bdi>978-0-8018-6920-4</bdi>]].</cite>; {{Cite book|url=https://archive.org/details/textsundernegoti0000brue|title=Texts Under Negotiation: The Bible and Postmodern Imagination|last=Brueggemann|first=Walter|publisher=Fortress Press|year=1993|isbn=978-0-8006-2736-2|url-access=registration}}<cite class="citation book cs1" data-ve-ignore="true" id="CITEREFBrueggemann1993">Brueggemann, Walter (1993). <span class="cs1-lock-registration" title="Free registration required">[[iarchive:textsundernegoti0000brue|''Texts Under Negotiation: The Bible and Postmodern Imagination'']]</span>. Fortress Press. [[अंतर्राष्ट्रीय मानक पुस्तक संख्या|ISBN]] [[विशेष: BookSources/978-0-8006-2736-2|<bdi>978-0-8006-2736-2</bdi>]].</cite></ref> या फास्ट फूड रेस्तरां ( ''त्वरित सेवा रेस्तरां'' के रूप में भी जाना जाता है)। <ref>{{Cite web|url=https://www.globenewswire.com/en/news-release/2021/08/18/2282854/0/en/Quick-Service-Restaurants-QSR-Market-Worth-USD-577-71-Billion-by-2028-at-3-65-CAGR-Report-by-Market-Research-Future-MRFR.html|title=Quick Service Restaurants (QSR) Market Worth USD 577.71 Billion by 2028 at 3.65% CAGR – Report by Market Research Future (MRFR)|date=August 18, 2021|website=[[GlobeNewswire]]|access-date=August 26, 2021}}<cite class="citation web cs1" data-ve-ignore="true">[https://www.globenewswire.com/en/news-release/2021/08/18/2282854/0/en/Quick-Service-Restaurants-QSR-Market-Worth-USD-577-71-Billion-by-2028-at-3-65-CAGR-Report-by-Market-Research-Future-MRFR.html "Quick Service Restaurants (QSR) Market Worth USD 577.71 Billion by 2028 at 3.65% CAGR – Report by Market Research Future (MRFR)"]. ''[[ग्लोबन्यूज़वायर|GlobeNewswire]]''. August 18, 2021<span class="reference-accessdate">. Retrieved <span class="nowrap">August 26,</span> 2021</span>.</cite></ref> [[फ़्रेंचाइज़िंग|फ़्रैंचाइज़ी]] संचालन जो रेस्तरां श्रृंखलाओं का हिस्सा हैं, केंद्रीय स्थानों से प्रत्येक रेस्तरां में मानकीकृत खाद्य पदार्थों को भेज दिया गया है। <ref>{{Cite book|title=Fast Food, Fast Track: Immigrants, Big Business, and the American Dream|url=https://archive.org/details/fastfoodfasttrac0000talw|last=Talwar|first=Jennifer|publisher=Westview Press|year=2003|isbn=978-0-8133-4155-2}}<cite class="citation book cs1" data-ve-ignore="true" id="CITEREFTalwar2003">Talwar, Jennifer (2003). ''Fast Food, Fast Track: Immigrants, Big Business, and the American Dream''. Westview Press. [[अंतर्राष्ट्रीय मानक पुस्तक संख्या|ISBN]] [[विशेष: BookSources/978-0-8133-4155-2|<bdi>978-0-8133-4155-2</bdi>]].</cite></ref>
कई फास्ट फूड में संतृप्त वसा, चीनी, नमक और कैलोरी की मात्रा अधिक होती है। <ref>{{Cite web|url=http://www.livestrong.com/article/49366-definition-fast-foods/|title=Definition of Fast Foods {{!}} LIVESTRONG.COM|last=Hellesvig-Gaskell|first=Karen|website=LIVESTRONG.COM|access-date=May 3, 2016|archive-date=2 मार्च 2022|archive-url=https://web.archive.org/web/20220302133604/https://www.livestrong.com/article/49366-definition-fast-foods/|url-status=dead}}<cite class="citation web cs1" data-ve-ignore="true" id="CITEREFHellesvig-Gaskell">Hellesvig-Gaskell, Karen. [http://www.livestrong.com/article/49366-definition-fast-foods/ "Definition of Fast Foods | LIVESTRONG.COM"] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20220302133604/https://www.livestrong.com/article/49366-definition-fast-foods/ |date=2 मार्च 2022 }}. ''LIVESTRONG.COM''<span class="reference-accessdate">. Retrieved <span class="nowrap">May 3,</span> 2016</span>.</cite></ref> फास्ट फूड को [[हृदयवाहिका रोग|हृदय रोग]], [[बृहदांत्र कैन्सर|कोलोरेक्टल कैंसर]], [[मोटापा]], [[अतिवसारक्तता (हाइपरलिपीडेमिया)|उच्च कोलेस्ट्रॉल]], [[उपापचय संलक्षण|इंसुलिन प्रतिरोध की स्थिति]] और [[मनोदशा विकार|अवसाद]] के बढ़ते जोखिम से जोड़ा गया है। <ref>{{Cite web|url=https://www.eurekalert.org/pub_releases/2012-03/f-sf-tlb033012.php|title=The link between fast food and depression has been confirmed|website=EurekAlert!|language=en|access-date=April 22, 2018|archive-date=23 अप्रैल 2018|archive-url=https://web.archive.org/web/20180423102221/https://www.eurekalert.org/pub_releases/2012-03/f-sf-tlb033012.php|url-status=dead}}<cite class="citation web cs1" data-ve-ignore="true">[https://www.eurekalert.org/pub_releases/2012-03/f-sf-tlb033012.php "The link between fast food and depression has been confirmed"] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20180423102221/https://www.eurekalert.org/pub_releases/2012-03/f-sf-tlb033012.php |date=23 अप्रैल 2018 }}. 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[[पबमेड|PMID]] [https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/25303998 25303998].</cite></ref> ये सह-संबंध तब भी मजबूत बने रहते हैं, जब जटिल जीवन शैली चरों को नियंत्रित किया जाता है, फास्ट फूड की खपत और बीमारी और शुरुआती मृत्यु दर के बढ़ते जोखिम के बीच एक मजबूत संबंध का सुझाव देते हैं। <ref>{{Cite journal|last=Pan|first=An|last2=Malik|first2=Vasanti|last3=Hu|first3=Frank B.|date=July 10, 2012|title=Exporting Diabetes to Asia: The Impact of Western-Style Fast Food|journal=Circulation|volume=126|issue=2|pages=163–165|doi=10.1161/CIRCULATIONAHA.112.115923|issn=0009-7322|pmc=3401093|pmid=22753305}}<cite class="citation journal cs1" data-ve-ignore="true" id="CITEREFPanMalikHu2012">Pan, An; Malik, Vasanti; Hu, Frank B. (July 10, 2012). [https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC3401093 "Exporting Diabetes to Asia: The Impact of Western-Style Fast Food"]. ''Circulation''. '''126''' (2): 163–165. [[डिजिटल वस्तु अभिज्ञापक|doi]]:[[doi:10.1161/CIRCULATIONAHA.112.115923|10.1161/CIRCULATIONAHA.112.115923]]. [[अन्तर्राष्ट्रीय मानक क्रम संख्या|ISSN]] [[issn:0009-7322|0009-7322]]. [[पीएमसी (पहचानकर्ता)|PMC]] <span class="cs1-lock-free" title="Freely accessible">[https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC3401093 3401093]</span>. [[पबमेड|PMID]] [https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/22753305 22753305].</cite></ref>
== इतिहास ==
[[File:Chinese_noodles.JPG|अंगूठाकार|''लैमियन'' बनाने के लिए गेहूं के आटे को पतली लटों में खींचना]]
बिक्री के लिए तैयार भोजन की अवधारणा शहरी विकास के साथ घनिष्ठ रूप से जुड़ी हुई है। उभरते हुए शहरों में घरों में अक्सर पर्याप्त जगह या भोजन तैयार करने के उचित सामान की कमी होती थी। इसके अतिरिक्त, खाना पकाने के ईंधन की खरीद में खरीदे गए उत्पाद जितना खर्च हो सकता है। तलने वाले तेल के बर्तनों में खाद्य पदार्थ तलना उतना ही खतरनाक साबित हुआ जितना महंगा था। गृहस्वामियों को डर था कि एक दुष्ट खाना पकाने की आग "पूरे पड़ोस को आसानी से भड़का सकती है"। <ref>{{Cite journal|last=Laudan|first=Rachel|year=2001|title=A Plea for Culinary Modernism: Why We Should Love New, Fast, Processed Food|journal=Gastronomica: The Journal of Critical Food Studies|volume=1|pages=36–44|doi=10.1525/gfc.2001.1.1.36}}<cite class="citation journal cs1" data-ve-ignore="true" id="CITEREFLaudan2001">Laudan, Rachel (2001). "A Plea for Culinary Modernism: Why We Should Love New, Fast, Processed Food". ''Gastronomica: The Journal of Critical Food Studies''. '''1''': 36–44. [[डिजिटल वस्तु अभिज्ञापक|doi]]:[[doi:10.1525/gfc.2001.1.1.36|10.1525/gfc.2001.1.1.36]]. [[S2CID (पहचानकर्ता)|S2CID]] [https://api.semanticscholar.org/CorpusID:154951102 154951102].</cite></ref> इस प्रकार, शहरी लोगों को जब भी संभव हो, पहले से तैयार मीट या स्टार्च, जैसे ब्रेड या नूडल्स खरीदने के लिए प्रोत्साहित किया गया। इससे यह भी सुनिश्चित हुआ कि बेहद सीमित समय वाले ग्राहकों (उदाहरण के लिए, अपने परिवार के लिए घर लाने के लिए रात का खाना खरीदने के लिए रुकने वाला एक यात्री, या एक छोटे लंच ब्रेक पर एक घंटे का मजदूर) को अपने भोजन के पकने का इंतजार करने में असुविधा नहीं हुई। -स्पॉट (जैसा कि पारंपरिक "सिट डाउन" [[रेस्तरां]] से अपेक्षित है)। [[प्राचीन रोम सभ्यता|प्राचीन रोम]] में, शहरों में स्ट्रीट स्टैंड थे - बीच में एक पात्र के साथ एक बड़ा काउंटर जिसमें से भोजन या पेय परोसा जाता था। <ref>{{Cite web|url=http://www.abc.net.au/science/articles/2007/06/20/1956392.htm|title=Ancient Romans preferred fast food|date=June 19, 2007|website=ABC Science|access-date=June 30, 2016}}<cite class="citation web cs1" data-ve-ignore="true">[http://www.abc.net.au/science/articles/2007/06/20/1956392.htm "Ancient Romans preferred fast food"]. ''ABC Science''. June 19, 2007<span class="reference-accessdate">. Retrieved <span class="nowrap">June 30,</span> 2016</span>.</cite></ref> WWII के बाद के अमेरिकी आर्थिक उछाल के दौरान अमेरिकियों ने अधिक खर्च करना और अधिक खरीदना शुरू कर दिया क्योंकि अर्थव्यवस्था में उछाल आया और उपभोक्तावाद की संस्कृति खिल गई। यह सब पाने की इस नई इच्छा के परिणामस्वरूप, पुरुषों के दूर रहने के दौरान महिलाओं द्वारा किए गए कदमों के साथ, घर के दोनों सदस्यों ने घर से बाहर काम करना शुरू कर दिया। बाहर खाना, जिसे पहले एक विलासिता माना जाता था, एक सामान्य घटना बन गई और फिर एक आवश्यकता बन गई। श्रमिकों और कामकाजी परिवारों को लंच और डिनर दोनों के लिए त्वरित सेवा और सस्ते भोजन की आवश्यकता थी। पारंपरिक पारिवारिक रात्रिभोज का स्थान तेजी से टेकअवे फास्ट फूड ने ले लिया है। नतीजतन, भोजन तैयार करने में लगने वाला समय कम होता जा रहा है, संयुक्त राज्य अमेरिका में एक औसत महिला प्रतिदिन भोजन तैयार करने में 47 मिनट खर्च करती है और औसत पुरुष 2013 में प्रति दिन 19 मिनट खर्च करता है <ref>{{Cite journal|last=Jaworowska|first=Agnieszka|last2=Blackham|first2=Toni|last3=Davies|first3=Ian G.|last4=Stevenson|first4=Leonard|date=May 1, 2013|title=Nutritional challenges and health implications of takeaway and fast food|url=http://researchonline.ljmu.ac.uk/id/eprint/6791/1/O%3A%5CPhase%201%20-%20Manuscripts%5CAccepted%20-%20Nutrition%20Reviews%20%28The%20nutritional%20challenge%20and%20health%20implications%20of%20takeaway%20and%20fast%20food%29%5CSUBMITTED%20-%20The%20nutritional%20challenge%20and%20health%20%20%20Revised%20V1%200%2027%2001%2012%20%28submitted%20version%29.pdf|journal=Nutrition Reviews|language=en|volume=71|issue=5|pages=310–318|doi=10.1111/nure.12031|issn=0029-6643|pmid=23590707}}<cite class="citation journal cs1" data-ve-ignore="true" id="CITEREFJaworowskaBlackhamDaviesStevenson2013">Jaworowska, Agnieszka; Blackham, Toni; Davies, Ian G.; Stevenson, Leonard (May 1, 2013). [http://researchonline.ljmu.ac.uk/id/eprint/6791/1/O%3A%5CPhase%201%20-%20Manuscripts%5CAccepted%20-%20Nutrition%20Reviews%20%28The%20nutritional%20challenge%20and%20health%20implications%20of%20takeaway%20and%20fast%20food%29%5CSUBMITTED%20-%20The%20nutritional%20challenge%20and%20health%20%20%20Revised%20V1%200%2027%2001%2012%20%28submitted%20version%29.pdf "Nutritional challenges and health implications of takeaway and fast food"] <span class="cs1-format">(PDF)</span>. ''Nutrition Reviews''. '''71''' (5): 310–318. [[डिजिटल वस्तु अभिज्ञापक|doi]]:[[doi:10.1111/nure.12031|10.1111/nure.12031]]. [[अन्तर्राष्ट्रीय मानक क्रम संख्या|ISSN]] [[issn:0029-6643|0029-6643]]. [[पबमेड|PMID]] [https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/23590707 23590707]. [[S2CID (पहचानकर्ता)|S2CID]] [https://api.semanticscholar.org/CorpusID:20897192 20897192].</cite></ref>
=== पूर्व-औद्योगिक पुरानी दुनिया ===
रोमन पुरातनता के शहरों में, अधिकांश शहरी आबादी ''इंसुला'', बहु-मंजिला अपार्टमेंट ब्लॉकों में रहती थी, जो अपने भोजन के लिए खाद्य विक्रेताओं पर निर्भर थी; फोरम ने स्वयं एक बाज़ार के रूप में कार्य किया जहाँ रोमन पके हुए सामान और ठीक किए गए मांस खरीद सकते थे। <ref>{{Cite book|title=Daily Life in Ancient Rome|last=Dupont|first=Florence|publisher=Blackwell|year=1992|location=Oxford|pages=181}}<cite class="citation book cs1" data-ve-ignore="true" id="CITEREFDupont1992">Dupont, Florence (1992). ''Daily Life in Ancient Rome''. Oxford: Blackwell. p. 181.</cite></ref> सुबह में, शराब में भिगोई हुई ब्रेड को एक त्वरित नाश्ते के रूप में खाया जाता था और सब्जियों को पकाया जाता था और बाद में ''पोपिना'' में, एक साधारण प्रकार की खाने की स्थापना होती थी। <ref>{{Cite book|title=The Ancient Roman City|last=Stambaugh, John E.|publisher=JHU Press|year=1988|isbn=978-0-8018-3692-3|pages=200, 209}}<cite class="citation book cs1" data-ve-ignore="true" id="CITEREFStambaugh,_John_E.1988">Stambaugh, John E. (1988). ''The Ancient Roman City''. JHU Press. pp. 200, 209. [[अंतर्राष्ट्रीय मानक पुस्तक संख्या|ISBN]] [[विशेष: BookSources/978-0-8018-3692-3|<bdi>978-0-8018-3692-3</bdi>]].</cite></ref> एशिया में, 12वीं शताब्दी के चीनी तले हुए आटा, सूप और भरवां बन खाते थे, ये सभी अभी भी समकालीन स्नैक फूड के रूप में मौजूद हैं। <ref>{{Cite book|title=Food in Chinese Culture: Anthropological and Historical Perspectives|last=Chang|first=Kwang-chih|publisher=Yale University Press|year=1977|location=New Haven}}<cite class="citation book cs1" data-ve-ignore="true" id="CITEREFChang1977">Chang, Kwang-chih (1977). ''Food in Chinese Culture: Anthropological and Historical Perspectives''. New Haven: Yale University Press.</cite></ref> उनके बगदादी समकालीनों ने प्रसंस्कृत फलियां, खरीदे गए स्टार्च और यहां तक कि खाने के लिए तैयार मांस के साथ घर के पके हुए भोजन को पूरक बनाया। <ref>{{Cite book|title=Baghdad during the Abbasid Caliphate from Contemporary Arabic and Persian Sources, 81–82|last=Le Strange|first=G.|publisher=Oxford University Press|year=1924|location=London|pages=81–82}}<cite class="citation book cs1" data-ve-ignore="true" id="CITEREFLe_Strange1924">Le Strange, G. (1924). ''Baghdad during the Abbasid Caliphate from Contemporary Arabic and Persian Sources, 81–82''. London: Oxford University Press. pp. 81–82.</cite></ref> [[मध्ययुग|मध्य युग]] के दौरान, बड़े शहरों और प्रमुख शहरी क्षेत्रों जैसे [[लंदन]] और [[पेरिस]] ने कई विक्रेताओं का समर्थन किया, जो कि पाई, पेस्टी, फ्लैन्स, वैफल्स, वेफर्स, पेनकेक्स और पके हुए मांस जैसे व्यंजन बेचते थे। पुरातनता के दौरान रोमन शहरों की तरह, इनमें से कई प्रतिष्ठान उन लोगों की सेवा करते थे जिनके पास अपना खाना पकाने का साधन नहीं था, विशेष रूप से एकल परिवार। अमीर शहरवासियों के विपरीत, कई बार रसोई की सुविधा के साथ आवास का खर्च नहीं उठा सकते थे और इस तरह फास्ट फूड पर निर्भर थे। यात्रियों जैसे तीर्थयात्री एक पवित्र स्थल के रास्ते में, ग्राहकों के बीच थे। <ref>{{Cite book|title=Food and Eating in Medieval Europe|last=Carling, Martha|publisher=Bloomsbury Academic|year=2003|isbn=978-1-85285-148-4|pages=27–51}}<cite class="citation book cs1" data-ve-ignore="true" id="CITEREFCarling,_Martha2003">Carling, Martha (2003). ''Food and Eating in Medieval Europe''. Bloomsbury Academic. pp. 27–51. [[अंतर्राष्ट्रीय मानक पुस्तक संख्या|ISBN]] [[विशेष: BookSources/978-1-85285-148-4|<bdi>978-1-85285-148-4</bdi>]].</cite></ref>
=== यूनाइटेड किंगडम ===
[[File:Oldham_-_first_chip_shop_in_UK.jpg|बाएँ|अंगूठाकार|ओल्डहैम, इंग्लैंड में नीली पट्टिका मछली और चिप्स और फास्ट फूड उद्योग के 1860 के दशक की शुरुआत की याद दिलाती है]]
[[सागरतट|तटीय]] या ज्वार के पानी तक पहुंच वाले क्षेत्रों में, 'फास्ट फूड' में अक्सर स्थानीय शंख या समुद्री भोजन शामिल होता है, जैसे कि सीप या, जैसा कि लंदन में, ईल । अक्सर यह समुद्री भोजन सीधे घाट पर या पास में पकाया जाता था। <ref name="pie">{{Cite news|url=http://news.bbc.co.uk/2/hi/uk_news/politics/5301158.stm|title=Eel and pie shop|last=BBC|date=August 31, 2006|access-date=November 24, 2007|publisher=BBC}}<cite class="citation news cs1" data-ve-ignore="true" id="CITEREFBBC2006">BBC (August 31, 2006). [http://news.bbc.co.uk/2/hi/uk_news/politics/5301158.stm "Eel and pie shop"]. BBC<span class="reference-accessdate">. Retrieved <span class="nowrap">November 24,</span> 2007</span>.</cite></ref> उन्नीसवीं शताब्दी के मध्य में ट्रॉलर मछली पकड़ने के विकास ने एक ब्रिटिश पसंदीदा, मछली और चिप्स, और 1860 में पहली दुकान का विकास किया <ref name="Webb">Webb, Andrew (2011). Food Britannia. Random House. p. 397.</ref>
[[File:BCLM_fish+chips.jpg|अंगूठाकार|एक रैपर में मछली और चिप्स]]
ओल्डहैम के टॉमीफील्ड मार्केट में एक नीली पट्टिका मछली और चिप की दुकान और फास्ट फूड उद्योगों की उत्पत्ति का प्रतीक है। <ref name="Webb">Webb, Andrew (2011). Food Britannia. Random House. p. 397.</ref> रैपर में परोसे जाने वाले सस्ते फास्ट फूड के रूप में, मछली और चिप्स विक्टोरियन [[श्रमिक वर्ग|कामकाजी वर्गों]] के बीच स्टॉक भोजन बन गए। <ref name="Webb" /> 1910 तक, पूरे ब्रिटेन में 25,000 से अधिक मछली और चिप की दुकानें थीं, और 1920 के दशक में 35,000 से अधिक दुकानें थीं। <ref>{{Cite news|url=http://news.bbc.co.uk/1/hi/8419026.stm|title=The unlikely origin of fish and chips|last=Alexander|first=James|date=December 18, 2009|work=BBC News|access-date=July 16, 2013}}<cite class="citation news cs1" data-ve-ignore="true" id="CITEREFAlexander2009">Alexander, James (December 18, 2009). [http://news.bbc.co.uk/1/hi/8419026.stm "The unlikely origin of fish and chips"]. ''BBC News''<span class="reference-accessdate">. Retrieved <span class="nowrap">July 16,</span> 2013</span>.</cite></ref> हैरी रैम्सडेन की फास्ट फूड रेस्तरां श्रृंखला ने 1928 में गुइसेले, वेस्ट यॉर्कशायर में अपनी पहली मछली और चिप की दुकान खोली। 1952 में एक ही दिन में, दुकान ने ''[[गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स|गिनीज बुक ऑफ रिकॉर्ड्स]]'' में एक स्थान अर्जित करते हुए मछली और चिप्स के 10,000 हिस्से पेश किए। <ref>[https://www.theguardian.com/uk/the-northerner/2011/nov/30/harry-ramsdens-closure-guiseley-fish-and-chips "Harry Ramsden's famous original fish and chip shop faces closure after losses"]. The Guardian. Retrieved January 6, 2018</ref>
ब्रिटिश फास्ट फूड में काफी क्षेत्रीय भिन्नता थी। कभी-कभी किसी डिश की क्षेत्रीयता उसके संबंधित क्षेत्र की संस्कृति का हिस्सा बन जाती है, जैसे कि कोर्निश पेस्टी और डीप-फ्राइड मार्स बार । फास्ट फूड पाई की सामग्री अलग-अलग होती है, जिसमें आमतौर पर [[कुक्कुट|पोल्ट्री]] (जैसे [[मुर्गी|मुर्गियां]] ) या [[अनैटिडाए|वाइल्डफॉल का]] इस्तेमाल किया जाता है। [[द्वितीय विश्वयुद्ध|द्वितीय विश्व युद्ध]] के बाद से, टर्की का उपयोग फास्ट फूड में अधिक बार किया जाने लगा है। <ref name="turkeyuk">{{Cite news|url=http://news.bbc.co.uk/2/hi/uk_news/magazine/6331007.stm|title=How turkey became a fast food|last=BBC News|date=February 7, 2007|access-date=November 23, 2007|publisher=BBC}}<cite class="citation news cs1" data-ve-ignore="true" id="CITEREFBBC_News2007">BBC News (February 7, 2007). [http://news.bbc.co.uk/2/hi/uk_news/magazine/6331007.stm "How turkey became a fast food"]. BBC<span class="reference-accessdate">. Retrieved <span class="nowrap">November 23,</span> 2007</span>.</cite></ref> यूके ने अन्य संस्कृतियों के फास्ट फूड को भी अपनाया है, जैसे [[पिज़्ज़ा|पिज्जा]], डोनर कबाब और करी । हाल ही में, पारंपरिक फास्ट फूड के स्वस्थ विकल्प भी सामने आए हैं।
=== संयुक्त राज्य अमेरिका ===
[[File:Fastfood.jpg|अंगूठाकार|वेंडीज, [[केएफसी]], क्रिस्टल और टैको बेल के लिए बॉलिंग ग्रीन, केंटकी में पड़ोसी फास्ट फूड रेस्तरां विज्ञापन संकेत। [[मैकडॉनल्ड्स|मैकडॉनल्ड्स का]] चिन्ह बहुत दूर की पृष्ठभूमि में देखा जा सकता है।]]
चूंकि [[प्रथम विश्व युद्ध]] के बाद [[मोटरवाहन|ऑटोमोबाइल]] लोकप्रिय और अधिक किफायती हो गए, ड्राइव-इन रेस्तरां पेश किए गए। 1921 में [[केन्सास|विचिटा, कैनसस]] में बिली इनग्राम और वाल्टर एंडरसन द्वारा स्थापित अमेरिकी कंपनी व्हाइट कैसल को आम तौर पर दूसरा फास्ट फूड आउटलेट और पहली [[हैमबर्गर]] श्रृंखला खोलने का श्रेय दिया जाता है, प्रत्येक पांच सेंट के लिए हैम्बर्गर बेचता है। <ref name="npr">{{Cite web|url=https://www.npr.org/programs/morning/features/patc/hamburger/|title=The Hamburger|last=National Public Radio|authorlink=National Public Radio|year=2002|publisher=[[National Public Radio|NPR]]|archive-url=https://web.archive.org/web/20071222171713/http://www.npr.org/programs/morning/features/patc/hamburger/|archive-date=22 दिसंबर 2007|access-date=November 23, 2007|url-status=bot: unknown}}<cite class="citation web cs1" data-ve-ignore="true" id="CITEREFNational_Public_Radio2002">[[नेशनल पब्लिक रेडियो|National Public Radio]] (2002). . [[नेशनल पब्लिक रेडियो|NPR]]. Archived from [https://www.npr.org/programs/morning/features/patc/hamburger/ the original] on December 22, 2007<span class="reference-accessdate">. Retrieved <span class="nowrap">November 23,</span> 2007</span>.</cite></ref> वाल्टर एंडरसन ने 1916 में विचिटा में पहला व्हाइट कैसल रेस्तरां बनाया था, जिसमें सीमित मेनू, उच्च मात्रा, कम लागत, उच्च गति वाले हैमबर्गर रेस्तरां की शुरुआत की गई थी। <ref name="jpfarrell">{{Cite web|url=http://jpfarrell.blogspot.com/2007/11/evolution-of-quick-service-restaurant.html|title=The Evolution of the Quick Service Restaurant|last=James P Farrell|publisher=A Management Consultant @ Large|access-date=February 14, 2008}}<cite class="citation web cs1" data-ve-ignore="true" id="CITEREFJames_P_Farrell">James P Farrell. [http://jpfarrell.blogspot.com/2007/11/evolution-of-quick-service-restaurant.html "The Evolution of the Quick Service Restaurant"]. A Management Consultant @ Large<span class="reference-accessdate">. Retrieved <span class="nowrap">February 14,</span> 2008</span>.</cite></ref> अपने नवाचारों के बीच, कंपनी ने ग्राहकों को तैयार किए जा रहे भोजन को देखने की अनुमति दी। व्हाइट कैसल अपनी स्थापना से ही सफल रहा और कई प्रतियोगियों को जन्म दिया।
फ्रैंचाइज़िंग की शुरुआत 1921 में ए एंड डब्ल्यू रूट बीयर द्वारा की गई थी, जिसने इसके विशिष्ट सिरप को फ़्रैंचाइज़ किया था। हावर्ड जॉनसन ने पहली बार 1930 के दशक के मध्य में मेनू, साइनेज और विज्ञापन को औपचारिक रूप से मानकीकृत करते हुए रेस्तरां की अवधारणा को फ्रैंचाइज़ किया। <ref name="jpfarrell"/>
अंकुश सेवा 1920 के दशक के अंत में शुरू की गई थी और 1940 के दशक में जुटाई गई थी जब कारहॉप्स रोलर स्केट्स पर बंधे थे। <ref name="Honk for Service">{{Cite book|title=Honk for Service, a Man, a Tray, and the Glory Days of the Drive-in|last=Mcginley, Lou Ellen|publisher=Tray Days Publishing|year=2004|isbn=978-0-615-12697-5}}<cite class="citation book cs1" data-ve-ignore="true" id="CITEREFMcginley,_Lou_Ellen2004">Mcginley, Lou Ellen (2004). ''Honk for Service, a Man, a Tray, and the Glory Days of the Drive-in''. Tray Days Publishing. [[अंतर्राष्ट्रीय मानक पुस्तक संख्या|ISBN]] [[विशेष: BookSources/978-0-615-12697-5|<bdi>978-0-615-12697-5</bdi>]].</cite></ref>
संयुक्त राज्य अमेरिका में दुनिया का सबसे बड़ा फास्ट [[खाद्य उद्योग|फूड उद्योग]] है, और अमेरिकी फास्ट फूड रेस्तरां 100 से अधिक देशों में स्थित हैं। लगभग 5.4 2018 तक यूएस में फास्ट फूड सहित भोजन तैयार करने और फूड सर्विसिंग के क्षेत्रों में मिलियन अमेरिकी कर्मचारी कार्यरत हैं <ref name="bls.gov">{{Cite web|url=http://www.bls.gov/ooh/food-preparation-and-serving/food-and-beverage-serving-and-related-workers.htm|title=BLS.gov: Food and Beverage Serving and Related Workers|date=December 17, 2015|access-date=April 6, 2016}}<cite class="citation web cs1" data-ve-ignore="true">[http://www.bls.gov/ooh/food-preparation-and-serving/food-and-beverage-serving-and-related-workers.htm "BLS.gov: Food and Beverage Serving and Related Workers"]. December 17, 2015<span class="reference-accessdate">. Retrieved <span class="nowrap">April 6,</span> 2016</span>.</cite></ref> मोटापे की महामारी और उससे संबंधित बीमारियों की चिंता ने संयुक्त राज्य में कई स्थानीय सरकारी अधिकारियों को फास्ट-फूड रेस्तरां को सीमित या विनियमित करने का प्रस्ताव देने के लिए प्रेरित किया है। फिर भी, अमेरिकी वयस्क अपनी फास्ट फूड की खपत को बदलने के लिए तैयार नहीं हैं, यहां तक कि बढ़ती लागत और बेरोजगारी की वजह से [[2000 के दशक के उत्तरार्द्ध की आर्थिक मंदी|बड़ी मंदी की]] विशेषता है, जो एक अयोग्य मांग का सुझाव देता है। <ref>{{Cite journal|last=Smith|first=Lindsey P.|last2=Ng|first2=Shu Wen|last3=Popkin|first3=Barry M.|date=May 1, 2014|title=Resistant to the recession: low-income adults' maintenance of cooking and away-from-home eating behaviors during times of economic turbulence|journal=American Journal of Public Health|volume=104|issue=5|pages=840–846|doi=10.2105/AJPH.2013.301677|issn=1541-0048|pmc=3987573|pmid=24625145}}<cite class="citation journal cs1" data-ve-ignore="true" id="CITEREFSmithNgPopkin2014">Smith, Lindsey P.; Ng, Shu Wen; Popkin, Barry M. (May 1, 2014). [https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC3987573 "Resistant to the recession: low-income adults' maintenance of cooking and away-from-home eating behaviors during times of economic turbulence"]. ''American Journal of Public Health''. '''104''' (5): 840–846. [[डिजिटल वस्तु अभिज्ञापक|doi]]:[[doi:10.2105/AJPH.2013.301677|10.2105/AJPH.2013.301677]]. [[अन्तर्राष्ट्रीय मानक क्रम संख्या|ISSN]] [[issn:1541-0048|1541-0048]]. [[पीएमसी (पहचानकर्ता)|PMC]] <span class="cs1-lock-free" title="Freely accessible">[https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC3987573 3987573]</span>. [[पबमेड|PMID]] [https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/24625145 24625145].</cite></ref> हालांकि, कुछ क्षेत्र दूसरों की तुलना में अधिक प्रभावित होते हैं। लॉस एंजिल्स काउंटी में, उदाहरण के लिए, दक्षिण मध्य लॉस एंजिल्स में लगभग 45% रेस्तरां फास्ट-फूड चेन या न्यूनतम बैठने वाले रेस्तरां हैं। तुलनात्मक रूप से, वेस्टसाइड के केवल 16% ऐसे रेस्तरां हैं। <ref>{{Cite news|url=http://articles.latimes.com/2007/sep/10/local/me-fastfood10|title=A strict order for fast food|last=Tami Abdollah|date=September 10, 2007|work=Los Angeles Times}}<cite class="citation news cs1" data-ve-ignore="true" id="CITEREFTami_Abdollah2007">Tami Abdollah (September 10, 2007). [http://articles.latimes.com/2007/sep/10/local/me-fastfood10 "A strict order for fast food"]. ''Los Angeles Times''.</cite></ref>
==== काम करने की स्थिति ====
नेशनल एम्प्लॉयमेंट लॉ प्रोजेक्ट ने 2013 में लिखा, " [[कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, बर्कले|कैलिफोर्निया-बर्कले विश्वविद्यालय के]] शोधकर्ताओं द्वारा किए गए एक अध्ययन के अनुसार, फ्रंट-लाइन फास्ट-फूड श्रमिकों के आधे से अधिक (52 प्रतिशत) को समर्थन के लिए कम से कम एक सार्वजनिक सहायता कार्यक्रम पर भरोसा करना चाहिए। उनके परिवार। नतीजतन, कम मजदूरी, गैर-मौजूद लाभ, और सीमित काम के घंटों के फास्ट-फूड-उद्योग व्यापार मॉडल पर करदाताओं को हर साल औसतन लगभग $7 बिलियन का खर्च आता है।" उनका दावा है कि यह धन इन श्रमिकों को "स्वास्थ्य देखभाल, भोजन और अन्य बुनियादी आवश्यकताओं को वहन करने" की अनुमति देता है। <ref>{{Cite web|url=https://www.nelp.org/content/uploads/2015/03/NELP-Super-Sizing-Public-Costs-Fast-Food-Report.pdf|title=Super-Sizing public costs: How Low Wages at Top Fast-Food Chains Leave Taxpayers Footing the Bill|date=October 2013|publisher=National Employment Law Project|archive-url=https://web.archive.org/web/20150505194926/http://nelp.org/content/uploads/2015/03/NELP-Super-Sizing-Public-Costs-Fast-Food-Report.pdf|archive-date=5 मई 2015|access-date=May 22, 2015|url-status=dead}}<cite class="citation web cs1" data-ve-ignore="true"> <span class="cs1-format">(PDF)</span>. National Employment Law Project. October 2013. Archived from [https://www.nelp.org/content/uploads/2015/03/NELP-Super-Sizing-Public-Costs-Fast-Food-Report.pdf the original] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20150505194926/http://nelp.org/content/uploads/2015/03/NELP-Super-Sizing-Public-Costs-Fast-Food-Report.pdf |date=5 मई 2015 }} <span class="cs1-format">(PDF)</span> on May 5, 2015<span class="reference-accessdate">. Retrieved <span class="nowrap">May 22,</span> 2015</span>.</cite></ref> <ref>{{Cite web|url=http://laborcenter.berkeley.edu/publiccosts/fast_food_poverty_wages.pdf|title=Fast Food, Poverty Wages: The Public Cost of Low-wage jobs in the Fast Food Industry|last=Maclay, Kathleen|date=October 15, 2013|publisher=University of California Labor Center|access-date=16 अप्रैल 2023|archive-date=19 अक्तूबर 2013|archive-url=https://web.archive.org/web/20131019095926/http://laborcenter.berkeley.edu/publiccosts/fast_food_poverty_wages.pdf|url-status=dead}}<cite class="citation web cs1" data-ve-ignore="true" id="CITEREFMaclay,_Kathleen2013">Maclay, Kathleen (October 15, 2013). [http://laborcenter.berkeley.edu/publiccosts/fast_food_poverty_wages.pdf "Fast Food, Poverty Wages: The Public Cost of Low-wage jobs in the Fast Food Industry"] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20131019095926/http://laborcenter.berkeley.edu/publiccosts/fast_food_poverty_wages.pdf |date=19 अक्तूबर 2013 }} <span class="cs1-format">(PDF)</span>. University of California Labor Center.</cite></ref>
== सक्रिय ==
[[File:20070509_Rock_26_Roll_McDonalds_from_7th_fl_of_Sports_Authority.jpg|अंगूठाकार|[[मैकडॉनल्ड्स|मैकडॉनल्ड्स का]] पहला टू-लेन ड्राइव-थ्रू [[शिकागो]] में रॉक एन रोल मैकडॉनल्ड्स में था।]]
फास्ट फूड आउटलेट ''टेक-अवे'' या ''टेक-आउट'' प्रदाता हैं जो त्वरित सेवा का वादा करते हैं। इस तरह के फास्ट फूड आउटलेट अक्सर "ड्राइव-थ्रू" सेवा के साथ आते हैं जो ग्राहकों को अपने वाहनों से खाना ऑर्डर करने और लेने की सुविधा देता है। दूसरों के पास इनडोर या आउटडोर बैठने की जगह है जहां ग्राहक साइट पर खा सकते हैं। आईटी सेवाओं में उछाल ने हाल के दिनों में ग्राहकों को अपने स्मार्टफोन ऐप के माध्यम से अपने घरों से खाना ऑर्डर करने की अनुमति दी है।
लगभग अपनी स्थापना के समय से, फास्ट फूड को "चलते-फिरते" खाने के लिए डिज़ाइन किया गया है, अक्सर पारंपरिक कटलरी की आवश्यकता नहीं होती है, और इसे फिंगर फूड के रूप में खाया जाता है। फास्ट फूड आउटलेट्स पर सामान्य मेनू आइटम में मछली और चिप्स, [[सैंडविच]], पिटा, [[हैमबर्गर|हैम्बर्गर]], फ्राइड चिकन, [[फ्रेंच फ्राइज़]], प्याज के छल्ले, चिकन नगेट्स, टैकोस, [[पिज़्ज़ा|पिज्जा]], [[हॉट डॉग]] और [[आइसक्रीम]] शामिल हैं, हालांकि कई फास्ट फूड रेस्तरां "धीमी" पेशकश करते हैं। मिर्च, मैश किए हुए आलू और [[सलाद]] जैसे खाद्य पदार्थ।
=== भरने वाले स्टेशन ===
कई [[पेट्रोल पंप|पेट्रोल/गैस स्टेशनों]] के भीतर स्थित सुविधा स्टोर प्री-पैकेज्ड सैंडविच, डोनट्स और गर्म भोजन बेचते हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका और यूरोप में कई गैस स्टेशन भी जमे हुए खाद्य पदार्थ बेचते हैं, और उन्हें तैयार करने के लिए परिसर में [[सूक्ष्मतरंग चूल्हा|माइक्रोवेव ओवन]] होते हैं। ऑस्ट्रेलिया में पेट्रोल स्टेशन गर्म पाई, सैंडविच और चॉकलेट बार जैसे खाद्य पदार्थ बेचते हैं, जो ग्राहक के लिए यात्रा के दौरान आसानी से उपलब्ध होते हैं। पेट्रोल स्टेशन एक ऐसा स्थान है जो अक्सर लंबे समय तक खुला रहता है और दुकान के व्यापार के समय से पहले और बाद में खुला रहता है, इसलिए, यह उपभोक्ताओं के लिए उपयोग करना आसान बनाता है।
=== स्ट्रीट वेंडर और रियायतें ===
{{मुख्य|Street food}}
[[File:Messe-36.JPG|अंगूठाकार|[[नेपाल]] में स्ट्रीट वेंडर फास्ट फूड परोस रहा है]]
[[File:Pajdas,_Sobota.JPG|अंगूठाकार|[[पूर्वी यूरोप]] में फास्टफूड रेस्तरां: ''पजदास'' ( प्रीकममुर्जे बोली ''बडी'' में), मुर्स्का सोबोटा [[स्लोवेनिया]] ।]]
पारंपरिक स्ट्रीट फूड दुनिया भर में उपलब्ध है, आमतौर पर कार्ट, टेबल, पोर्टेबल ग्रिल या मोटर वाहन से संचालित छोटे और स्वतंत्र विक्रेताओं के माध्यम से। सामान्य उदाहरणों में [[वियतनाम|वियतनामी]] चावल सूप विक्रेता, मध्य पूर्वी फलाफेल स्टैंड, न्यूयॉर्क शहर के हॉट डॉग कार्ट और टैको ट्रक शामिल हैं। Turo-Turo विक्रेता (बिंदु बिंदु के लिए [[तगालोग भाषा|तागालोग]] ) [[फ़िलीपीन्स|फिलीपीन]] जीवन की एक विशेषता है। आम तौर पर, सड़क विक्रेता राहगीरों को आकर्षित करने और जितना जल्दी हो सके उतना ध्यान आकर्षित करने के लिए डिज़ाइन किए गए विकल्पों की एक रंगीन और अलग-अलग श्रेणी प्रदान करते हैं।
कई स्ट्रीट वेंडर विशिष्ट प्रकार के भोजन के विशेषज्ञ हो सकते हैं; आमतौर पर, वे स्थान के आधार पर दी गई सांस्कृतिक या जातीय परंपरा की विशेषता हैं। कुछ संस्कृतियों में, सड़क विक्रेताओं के लिए कीमतों को कॉल करना, बिक्री-पिचों को गाना या मंत्र देना, संगीत बजाना, या संभावित ग्राहकों को शामिल करने के लिए " [[नुक्कड़ नाटक|स्ट्रीट थियेट्रिक्स]] " के अन्य रूपों में शामिल होना सामान्य है। कुछ मामलों में, यह भोजन से अधिक ध्यान आकर्षित कर सकता है।
[[श्रेणी:Articles with unsourced statements from March 2012]]
<sup class="noprint Inline-Template Template-Fact" data-ve-ignore="true" style="white-space:nowrap;">[ ''[[विकिपीडिया:उद्धरण आवश्यक|<span title="This claim needs references to reliable sources. (March 2012)">उद्धरण वांछित</span>]]'' ]</sup>
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आपदा प्रबन्धन
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5481247
2026-05-02T18:52:33Z
अनुनाद सिंह
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wikitext
text/x-wiki
{{को विलय|आपदा तत्परता|date=मई 2021}}
{{स्रोतहीन|date=मई 2017}}
सूखा, बाढ़, चक्रवाती तूफानों, भूकम्प, भूस्खलन, वनों में लगनेवाली आग, ओलावृष्टि, टिड्डी दल और ज्वालामुखी फटने जैसी विभिन्न प्राकृतिक आपदाओं का पूर्वानुमान नहीं लगाया जा सकता है, न ही इन्हें रोका जा सकता है, लेकिन इनके प्रभाव को एक सीमा तक जरूर कम किया जा सकता है, जिससे कि जान-माल का कम से कम नुकसान हो। यह कार्य तभी किया जा सकता है, जब सक्षम रूप से आपदा प्रबंधन का सहयोग मिले। प्रत्येक वर्ष प्राकृतिक आपदाओं से अनेक लोगों की मृत्यु हो जाती है, इससे सर्वाधिक जाने चली जाती है।
==परिचय==
आपदा प्रबंधन के दो महत्वपूर्ण आंतरिक पहलू हैं। वह हैं पूर्ववर्ती और उत्तरवर्ती आपदा प्रबंधन। पूर्ववर्ती आपदा प्रबंधन को जोखिम प्रबंधन के रूप में जाना जाता है।
आपदा के खतरे जोखिम एवं शीघ्र चपेट में आनेवाली स्थितियों के मेल से उत्पन्न होते हैं। यह कारक समय और भौगोलिक – दोनों पहलुओं से बदलते रहते हैं। जोखिम [[प्रबन्धन|प्रबंधन]] के तीन घटक होते हैं। इसमें खतरे की पहचान, खतरा कम करना (ह्रास) और उत्तरवर्ती आपदा प्रबंधन शामिल है।
आपदा प्रबंधन का पहला चरण है खतरों की पहचान। इस अवस्था पर प्रकृति की जानकारी तथा किसी विशिष्ट अवस्थल की विशेषताओं से संबंधित खतरे की सीमा को जानना शामिल है। साथ ही इसमें जोखिम के आंकलन से प्राप्त विशिष्ट भौतिक खतरों की प्रकृति की सूचना भी समाविष्ट है।
इसके अतिरिक्त बढ़ती आबादी के प्रभाव क्षेत्र एवं ऐसे खतरों से जुड़े माहौल से संबंधित सूचना और डाटा भी आपदा प्रबंधन का अंग है। इसमें ऐसे निर्णय लिए जा सकते हैं कि [[निरन्तर|निरंतर]] चलनेवाली परियोजनाएं कैसे तैयार की जानी हैं और कहां पर धन का निवेश किया जाना उचित होगा, जिससे दुर्दम्य आपदाओं का सामना किया जा सके।
इस प्रकार जोखिम प्रबंधन तथा आपदा के लिए नियुक्त व्यावसायिक मिलकर जोखिम भरे क्षेत्रों के अनुमान से संबंधित कार्य करते हैं। ये व्यवसायी आपदा के [[पूर्वानुमान]] के आंकलन का [[प्रयास]] करते हैं और आवश्यक एहतियात बरतते हैं।
जनशक्ति, वित्त और अन्य आधारभूत समर्थन आपदा प्रबंधन की उप-शाखा का ही हिस्सा हैं। आपदा के बाद की स्थिति आपदा प्रबंधन का महत्वपूर्ण आधार है। जब [[आपदा]] के कारण सब कुछ अस्त-व्यस्त हो जाता है तब लोगों को स्वयं ही उजड़े जीवन को पुन: बसाना होता है तथा अपने दिन-प्रतिदिन के कार्य पुन: शुरू करने पड़ते हैं।
==इन्हें भी देखें==
*[[भारत में आपदा प्रबंधन]]
== बाहरी कड़ियाँ ==
* [https://web.archive.org/web/20110904132622/http://cbse.nic.in/DM%20HINDI.pdf आपदा प्रबन्धन (कक्षा-१० की आनलाइन पाठ्यपुस्तक)]
* [https://web.archive.org/web/20110725030507/http://mha.nic.in/hindi/pdfs_hin/NPDM(H)150110.pdf आपदा प्रबन्धन पर राष्ट्रीय नीति]
[[श्रेणी:आपदाएँ| ]]
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प्राकृतिक पर्यावरण
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text/x-wiki
{{wikify}}
[[File:Blue Linckia Starfish.JPG|thumb|जलीय पर्यावरण, प्राकृतिक पर्यावरण का उदाहरण]]
'''प्राकृतिक पर्यावरण''' या '''प्राकृतिक दुनिया''' में प्राकृतिक रूप से होने वाली सभी जीवित और निर्जीव चीजें शामिल हैं, जिसका अर्थ है कि इस मामले में कृत्रिम नहीं। यह शब्द अक्सर [[पृथ्वी]] या पृथ्वी के कुछ हिस्सों पर लागू होता है। इस वातावरण में सभी जीवित प्रजातियों, जलवायु, मौसम और प्राकृतिक संसाधनों की परस्पर क्रिया शामिल है जो मानव अस्तित्व और आर्थिक गतिविधि को प्रभावित करते हैं।<ref>{{cite journal |last1=Johnson |first1=D. L. |last2=Ambrose |first2=S. H. |last3=Bassett |first3=T. J. |last4=Bowen |first4=M. L. |last5=Crummey |first5=D. E. |last6=Isaacson |first6=J. S. |last7=Johnson |first7=D. N. |last8=Lamb |first8=P. |last9=Saul |first9=M. |last10=Winter-Nelson |first10=A. E. |title=Meanings of Environmental Terms |journal=Journal of Environmental Quality |date=1997 |volume=26 |issue=3 |pages=581–589 |doi=10.2134/jeq1997.00472425002600030002x |url=https://acsess.onlinelibrary.wiley.com/doi/abs/10.2134/jeq1997.00472425002600030002x |language=en |issn=1537-2537 |access-date=1 दिसंबर 2021 |archive-date=21 अप्रैल 2020 |archive-url=https://web.archive.org/web/20200421004828/https://acsess.onlinelibrary.wiley.com/doi/abs/10.2134/jeq1997.00472425002600030002x |url-status=dead }}</ref> प्राकृतिक पर्यावरण की अवधारणा को घटकों के रूप में प्रतिष्ठित किया जा सकता है:
* पूर्ण [[पारिस्थितिकी|पारिस्थितिक]] इकाइयाँ जो बड़े पैमाने पर सभ्य मानव हस्तक्षेप के बिना प्राकृतिक प्रणालियों के रूप में कार्य करती हैं, जिसमें सभी [[वनस्पति]], [[सूक्ष्मजीव]], मिट्टी, चट्टानें, वातावरण और प्राकृतिक घटनाएं शामिल हैं जो उनकी सीमाओं और उनकी प्रकृति के भीतर होती हैं।
* सार्वभौमिक [[प्राकृतिक संसाधन]] और भौतिक घटनाएं जिनमें स्पष्ट सीमाओं का अभाव है, जैसे कि हवा, पानी और जलवायु, साथ ही ऊर्जा, [[विकिरण]], [[विद्युत आवेश]] और [[चुंबकत्व]], जो सभ्य मानव क्रियाओं से उत्पन्न नहीं होते हैं।
प्राकृतिक पर्यावरण के विपरीत निर्मित वातावरण है। निर्मित वातावरण वे हैं जहां मानव ने शहरी सेटिंग्स और कृषि भूमि रूपांतरण जैसे मूल रूप से परिदृश्यों को बदल दिया है, प्राकृतिक पर्यावरण बहुत सरल मानव पर्यावरण में बदल गया है। यहां तक कि ऐसे कार्य भी जो कम चरम लगते हैं, जैसे रेगिस्तान में मिट्टी की झोपड़ी या फोटोवोल्टिक प्रणाली का निर्माण, संशोधित वातावरण एक कृत्रिम वातावरण बन जाता है। हालांकि कई जानवर अपने लिए बेहतर वातावरण प्रदान करने के लिए चीजों का निर्माण करते हैं, वे मानव नहीं हैं, इसलिए बीवर बांध, और टीले बनाने वाले [[दीमक]] के कार्यों को प्राकृतिक माना जाता है।
मानवता के बड़े पैमाने पर पर्यावरणीय परिवर्तनों ने सभी प्राकृतिक वातावरणों को मौलिक रूप से प्रभावित किया है: जिसमें [[जलवायु परिवर्तन]], जैव विविधता हानि और हवा और पानी में प्लास्टिक और अन्य रसायनों से प्रदूषण शामिल है।<ref>{{cite web |title=पर्यावरणीय प्रदूषण (Environmental Pollution) |url=https://hindi.indiawaterportal.org/content/parayaavaranaiya-paradauusana-environmental-pollution/content-type-page/68915 |website=India Water Portal Hindi |accessdate=1 दिसम्बर 2021 |language=en |archive-date=29 जून 2020 |archive-url=https://web.archive.org/web/20200629213336/https://hindi.indiawaterportal.org/content/parayaavaranaiya-paradauusana-environmental-pollution/content-type-page/68915 |url-status=dead }}</ref>
=== संयोजन ===
[[भौमिकी|पृथ्वी विज्ञान]] आम तौर पर चार क्षेत्रों, लिथोस्फीयर, जलमंडल, वायुमंडल और जीवमंडल<ref>{{cite web |title=पृथ्वी के 4 क्षेत्र क्या हैं? |url=https://www.greelane.com/hi/%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a5%80/%e0%a4%ad%e0%a5%82%e0%a4%97%e0%a5%8b%e0%a4%b2/the-four-spheres-of-the-earth-1435323/ |website=Greelane |accessdate=1 दिसम्बर 2021 }}{{Dead link|date=मई 2026 |bot=InternetArchiveBot }}</ref> को क्रमशः चट्टानों, जल, वायु और जीवन के अनुरूप मानता है। कुछ वैज्ञानिकों में पृथ्वी के गोले के हिस्से के रूप में, क्रायोस्फीयर (बर्फ के अनुरूप) हाइड्रोस्फीयर के एक अलग हिस्से के रूप में, साथ ही पीडोस्फीयर (मिट्टी के अनुरूप) एक सक्रिय और आपस में मिले हुए क्षेत्र के रूप में शामिल माना है। पृथ्वी विज्ञान (भूविज्ञान, भौगोलिक विज्ञान या पृथ्वी विज्ञान के रूप में भी जाना जाता है), पृथ्वी ग्रह से संबंधित विज्ञान के लिए एक सर्वव्यापी शब्द है। पृथ्वी विज्ञान में चार प्रमुख विषय हैं, अर्थात् [[भूगोल]], [[भूविज्ञान]], [[भूभौतिकी]] और [[भूगणित]]। ये प्रमुख विषय पृथ्वी के प्रमुख क्षेत्रों या क्षेत्रों की गुणात्मक और मात्रात्मक समझ बनाने के लिए [[भौतिक शास्त्र|भौतिकी]], [[रसायन विज्ञान]], [[जीव विज्ञान]], कालक्रम और [[गणित]] का उपयोग करते हैं।
=== संदर्भ ===
[[श्रेणी:पर्यावरण]]
{{आधार}}
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बलूचिस्तान मुक्ति सेना
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अनुनाद सिंह
1634
6547835
wikitext
text/x-wiki
{{Infobox War Faction
|name= बलूचिस्तान मुक्ति सेना (बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी)
|war=[[बलूचिस्तान संघर्ष]]
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|caption=बलूचिस्तान मुक्ति सेना का ध्वज
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|leaders=[[खैर बक्श मारी]]<ref>{{cite web|url=http://archives.dawn.com/archives/42906|title=All Baloch shouldn't be tarred with same brush|publisher=Archives.dawn.com|author=Cyril Almeida|authorlink=Cyril Almeida|date=2010-07-25|accessdate=2013-06-15|archive-url=https://web.archive.org/web/20130702082334/http://archives.dawn.com/archives/42906|archive-date=2 जुलाई 2013|url-status=live}}</ref>
[[Hyrbyair Marri]]
|area=[[बलोचिस्तान]], पाकिस्तान <br> [[अफगानिस्तान]]<ref>{{cite web |url=http://vkb.isvg.org/Wiki/Groups/Balochistan_Liberation_Army |title=Balochistan Liberation Army |work=Violent Extremism Knowledge Base |publisher=Institute for the Study of Violent Groups |url-status=dead |archiveurl=https://web.archive.org/web/20130102153136/http://vkb.isvg.org/Wiki/Groups/Balochistan_Liberation_Army |archivedate=2 जनवरी 2013 |df= |access-date=25 अक्तूबर 2016 }}</ref>|strength=10,000<ref>{{cite web|last=Krishna|first=Maloy|url=http://maloykrishnadhar.com/balochistan-cruces-of-history-part-ii|title=Balochistan: Cruces of History- Part II|publisher=Maloy Krishna Dhar|date=10 August 2009|accessdate=21 December 2010|archive-url=https://web.archive.org/web/20101011084818/http://maloykrishnadhar.com/balochistan-cruces-of-history-part-ii|archive-date=11 अक्तूबर 2010|url-status=dead}}</ref>
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[[बलोच मुक्ति मोर्चा]], [[बलोच रिपब्लिकन आर्मी]], [[लश्कर-ए-बलूचिस्तान]], [[बलोचिस्तान लिबरेशन युनाइटेड फ्रॉन्ट]], [[बलोच छात्र संगठन|बीएसओ (आजाद)]],
|opponents={{flag|Pakistan}}<ref>{{Cite web |url=http://thediplomat.com/2015/03/chinese-operations-in-balochistan-again-targeted-by-militants/ |title=संग्रहीत प्रति |access-date=25 अक्तूबर 2016 |archive-url=https://web.archive.org/web/20181119131356/https://thediplomat.com/2015/03/chinese-operations-in-balochistan-again-targeted-by-militants/ |archive-date=19 नवंबर 2018 |url-status=live }}</ref><br>{{flag|China}}<ref>{{Cite web |url=http://thediplomat.com/2015/03/chinese-operations-in-balochistan-again-targeted-by-militants/ |title=संग्रहीत प्रति |access-date=25 अक्तूबर 2016 |archive-url=https://web.archive.org/web/20181119131356/https://thediplomat.com/2015/03/chinese-operations-in-balochistan-again-targeted-by-militants/ |archive-date=19 नवंबर 2018 |url-status=live }}</ref>
|battles=[[Balochistan conflict#Fifth conflict 2004–to date|Balochistan Conflict]]
}}
'''बलूचिस्तान मुक्ति सेना''' [[पाकिस्तान]] के [[बलूचिस्तान (पाकिस्तान)|बलूचिस्तान]] प्रांत में सक्रिय एक गोरिला संगठन है जो [[बलूचिस्तान (पाकिस्तान)|बलूचिस्तान]] के पाकिस्तान से अलग होने के लक्ष्य पर काम कर रही है। अपने स्थापना के समय से ही यह बलूचिस्तान में गैस लाइनें उड़ाने, सेना और पुलिस पर हमले और गैर स्थानीय लोगों पर हमले में शामिल रही है। पाकिस्तान सरकार के अनुसार आतंकवादी संगठन के दांडी [[हिन्दुस्तान]] से जा मिलते हैं। [[मीर बालाच मेरी]] इसका पहला कमांडर था जो वर्ष २००८ में [[अफ़ग़ानिस्तान]] में गठबंधन वायुसेना के हमले में मारा गया।
==सन्दर्भ==
{{Reflist}}
==इन्हें भी देखें==
* [[बलूचिस्तान में मानवाधिकार हनन]]
* [[महरंग बलोच]]
==बाहरी कड़ियाँ==
*[http://www.punjabkesari.in/international/news/strategic-shift-the-republic-of-balochistan-determination-2329512 टूटने की कगार पर पाकिस्तान: बलूचिस्तान बनने जा रहा स्वतंत्र देश !]
{{बलोच राष्ट्रवाद}}
{{पाकिस्तान के अलगाववादी संगठन}}
[[श्रेणी:बलूचिस्तान]]
[[श्रेणी:बलोच राष्ट्रवाद]]
{{आधार}}
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कबीर पंथ
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Jitendra pl
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wikitext
text/x-wiki
{{सफाई|reason=खराब मशीनी अनुवाद, वाक्यों का गलत गठन और संदर्भों में टूटे हुए HTML कोड।|date=अप्रैल 2026}}
{{ज्ञानसन्दूक धार्मिक समूह|group=Kabir Panth|image=[[File:Kabir panth.jpg|thumb|A prominent pilgrimage site of Kabirpanth — Kabir Dharmanagar, Damakheda (District Baloda Bazar), showcasing a grand complex that reflects devotion, spiritual heritage, and the legacy of Kabir tradition.]]|image_caption=Painting of Kabir (left) with a disciple (right), Mughal school of art|founder=[[Kabir ]]Saheb|regions=Indian subcontinent • Caribbean • Oceania|religions=[[कबीर पंथ ]]|scriptures=बीजक , अनुराग सागर , कबीर ग्रंथावली, कबीर साहब की शब्दावली among others}}
[[कबीर पंथ]] 15वीं शताब्दी के संत [[कबीर]] साहेब की शिक्षाओं पर आधारित एक संत परंपरा है। यह निराकार ईश्वर की भक्ति, समानता तथा धार्मिक आडंबरों और सामाजिक भेदभाव के विरोध पर बल देता है। [[कबीर]] पंथ के अनुयायी भारत सहित विश्व के विभिन्न देशों में पाए जाते हैं, जिनकी संख्या करोड़ों में मानी जाती है।<ref name=":1">{{Cite web|url=https://ignca.gov.in/coilnet/kabir026.htm#10f|title=Kabir - Chhatisgarh - Parishisht|website=ignca.gov.in|access-date=2026-04-16}}</ref>
[[कबीर पंथ]], जिसे "[[कबीर]] का मार्ग" भी कहा जाता है, गुरु-भक्ति पर आधारित एक आध्यात्मिक परंपरा है। [[कबीर]] साहेब ने किसी विशेष धर्म-परिवर्तन का समर्थन नहीं किया, बल्कि सभी धर्मों की सीमाओं को उजागर करते हुए सत्य की खोज पर जोर दिया। कुछ विद्वानों के अनुसार, इस परंपरा में वैष्णव तथा सूफी विचारधाराओं का समन्वय दिखाई देता है। कबीर साहेब के प्रकट दिवस, '''ज्येष्ठ महीने की पूर्णिमा''' पर कबीरपंथी उनके सम्मान में '''[[कबीर जयंती]]''' मनाते हैं।<ref>{{Cite web|url=https://www.millenniumpost.in/nation/kabirpanth-holds-deep-influence-on-chhattisgarhs-peace-loving-land-cm-vishnu-deo-sai-646567|title=Kabirpanth holds deep influence on Chhattisgarh’s peace-loving land: CM Vishnu Deo Sai|last=MPost|date=2026-02-02|website=www.millenniumpost.in|language=en|access-date=2026-04-18}}</ref>
=== उत्पत्ति ===
[[चित्र:Painting_of_bhagat_Kabir_(seated_near_the_centre_of_the_frame),_his_son_Kamal_(fly-whisk_attendant;_standing_to_the_right),_and_two_of_his_disciples_Surat_Gopal_(seated_left)_and_Dharam_Das_(seated_right).jpg|अंगूठाकार|भगत कबीर (फ्रेम के केंद्र के पास बैठे) का चित्र उनके शिष्य कमाल (मक्खी-मूंछ वाला परिचारक) दाएँ खड़े हैं और उनके दो शिष्य बाएँ घुटने टेक रहे हैं, जिनमें सूरत गोपाल (बाएँ घुटना टेकना) और [[धनी धर्मदास साहेब|धरम दास]] (दाएँ ) शामिल हैं। यह कलाकृति बनारस (वाराणसी) में कबीर चौरा में स्थित थी।]]
कबीर साहेब ने अपने जीवनकाल में कोई औपचारिक संप्रदाय स्थापित नहीं किया था। उनके देहावसान के बाद उनके प्रमुख शिष्यों—धनी धर्मदास साहेब और सूरत गोपाल—ने उनकी शिक्षाओं के प्रचार हेतु मठों की स्थापना की।<ref name=":1" />
इनमें से [[धनी धर्मदास साहेब]] की परंपरा विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जाती है। परंपरागत मान्यता के अनुसार, कबीर साहेब ने उन्हें 42 वंशों (बयालीस वंश) की निरंतरता का आशीर्वाद दिया था। यह परंपरा “'''कबीर धर्मदास वंशावली'''” के नाम से जानी जाती है, जिसका प्रमुख केंद्र '''कबीर धर्मनगर दामाखेड़ा''' में स्थित है।<ref>{{Cite web|url=https://www.dakshinkosaltoday.com/download/kabrapathaya-ka-aasatha-ka-kanathara-thamakha#:~:text=%E0%A4%95%E0%A4%AC%E0%A5%80%E0%A4%B0%20%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%B9%E0%A4%AC%20%E0%A4%95%E0%A5%87%20%E0%A4%B8%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%AF,%20%E0%A4%9C%E0%A5%8D%E0%A4%9E%E0%A4%BE%E0%A4%A8,%E0%A4%B6%E0%A5%81%E0%A4%AD%20%E0%A4%85%E0%A4%B5%E0%A4%B8%E0%A4%B0%20%E0%A4%AA%E0%A4%B0%20%E0%A4%95%E0%A5%80%20%E0%A4%A5%E0%A5%80%E0%A5%A4&text=%E0%A4%AF%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%81%20%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%AE%E0%A5%8D%E0%A4%A8%20%E0%A4%A6%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B6%E0%A4%A8%E0%A5%80%E0%A4%AF%20%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A5%E0%A4%B2%20%E0%A4%B9%E0%A5%88,%E2%80%931-%20%E0%A4%95%E0%A4%AC%E0%A5%80%E0%A4%B0%20%E0%A4%86%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%AE,2-%20%E0%A4%B8%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%A7%E0%A4%BF%20%E0%A4%AE%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%B0%E0%A5%A4|title=कबीरपंथियों के आस्था का केन्द्र दामाखेड़ा|website=www.dakshinkosaltoday.com|access-date=2026-04-16}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://kabirdharmdasvanshavali.org/About/Info/?title=%E0%A4%B5%E0%A4%82%E0%A4%B6+%E0%A4%97%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A5%81+%E0%A4%97%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A5%80|title=Kabir Panthi|website=kabirdharmdasvanshavali.org|access-date=2026-04-19}}</ref>
धनी धर्मदास साहेब के पुत्र चूड़ामणि नाम साहेब (मुक्तामणि नाम साहेब) को इस वंश परंपरा का प्रथम वंशगुरु माना जाता है। <ref name=":2">{{Cite web|url=https://www.dakshinkosaltoday.com/download/kabrapathaya-ka-aasatha-ka-kanathara-thamakha#:~:text=%E0%A4%95%E0%A4%AC%E0%A5%80%E0%A4%B0%20%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%B9%E0%A4%AC%20%E0%A4%95%E0%A5%87%20%E0%A4%B8%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%AF,%20%E0%A4%9C%E0%A5%8D%E0%A4%9E%E0%A4%BE%E0%A4%A8,%E0%A4%B6%E0%A5%81%E0%A4%AD%20%E0%A4%85%E0%A4%B5%E0%A4%B8%E0%A4%B0%20%E0%A4%AA%E0%A4%B0%20%E0%A4%95%E0%A5%80%20%E0%A4%A5%E0%A5%80%E0%A5%A4&text=%E0%A4%AF%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%81%20%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%AE%E0%A5%8D%E0%A4%A8%20%E0%A4%A6%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B6%E0%A4%A8%E0%A5%80%E0%A4%AF%20%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A5%E0%A4%B2%20%E0%A4%B9%E0%A5%88,%E2%80%931-%20%E0%A4%95%E0%A4%AC%E0%A5%80%E0%A4%B0%20%E0%A4%86%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%AE,2-%20%E0%A4%B8%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%A7%E0%A4%BF%20%E0%A4%AE%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%B0%E0%A5%A4|title=कबीरपंथियों के आस्था का केन्द्र दामाखेड़ा|website=www.dakshinkosaltoday.com|access-date=2026-04-16}}</ref>
==== कबीर धर्मनगर दामाखेड़ा ====
{{Trivia}}
इसकी प्रमुख शाखाओं में, धनी धर्मदास साहेब की वंशावली को सबसे प्रमुख माना जाता है।<ref>{{Cite web|url=https://www.etvbharat.com/hi/state/damakheda-will-now-be-known-as-kabir-dharma-nagar-damakheda-notification-issued-chhattisgarh-news-cts26020705550|title=दामाखेड़ा अब कबीर धर्म नगर दामाखेड़ा हुआ: अधिसूचना जारी, कबीर पंथियों की आस्था को मिली आधिकारिक पहचान|last=Bharat|first=E. T. V.|date=2026-02-07|website=ETV Bharat News|language=hi|access-date=2026-04-16}}</ref> कबीर साहेब के मुख्य शिष्य धर्मदास ने कबीर पंथ परंपरा के आयोजन और प्रचार में केंद्रीय भूमिका निभाई। इस शाखा का नाम '''कबीर धर्मदास वंशावली''' है <ref>{{Cite web|url=https://www.prabhasakshi.com/articles-on-gods/damakheda-is-a-religious-and-center-place-of-kabirpanth|title=रायपुर के पास है कबीर पंथियों की तीर्थ स्थल दामाखेड़ा|website=Prabhasakshi|language=hi|access-date=2026-04-16}}</ref>
परंपरा के अनुसार, कबीर साहेब ने धनी धर्मदास साहेब को '''"बयालीस वंश'''" (अटल बयालिस वंश) की निरंतरता का '''आशीर्वाद''' दिया, जो धनी धर्मदास वंश प्रणाली का आधार बना।<ref>{{Cite web|url=https://kabirdharmdasvanshavali.org/About/Info/?title=%E0%A4%B5%E0%A4%82%E0%A4%B6+%E0%A4%97%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A5%81+%E0%A4%97%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A5%80|title=Kabir Panthi|website=kabirdharmdasvanshavali.org|access-date=2026-04-16}}</ref> <ref>{{Cite web|url=https://sadgurukabirfederation.org/vansh-guru/|title=FOUNDATION OF AKHAND VANSH BAYALISH – Sadguru Kabir Federation|language=en-US|access-date=2026-04-16}}</ref>
धनी धर्मदास के पुत्र '''चूडामणिनाम''' (मुक्तामणि नाम साहेब) को इस परंपरा के '''पहले वंश गुरु''' (वंशगुरु) के रूप में माना जाता है।
कबीर धर्मनगर दामाखेड़ा (वर्तमान छत्तीसगढ़ में ) '''कबीर''' '''धर्मदास वंशावली''' कबीर पंथके केंद्र के रूप में कार्य करती है, जिससे सबसे अधिक कबीरपंथी लोग जुड़े हुए हैं । इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के अभिलेखों के अनुसार, धर्मदास वंश में 42 वंशावली और आचार्यों का एक संरचित उत्तराधिकार शामिल है, जिसमें '''मुक्तामणि नाम साहब''' से लेकर वर्तमान में आचार्यों जैसे पंथश्री ग्रंधमुनि नाम साहब, '''पंथश्री''' '''प्रकाशमुनि नाम साहब,''' <ref>{{Cite web|url=https://www.deccanherald.com/india/amit-shah-seeks-blessings-691250.html|title=Amit Shah seeks blessings of Prakash Muni|website=Deccan Herald|language=en|access-date=2026-04-19}}</ref>और '''पंथश्री''' '''उदितमुनि नाम साहब''' से लेकर आने वाले 42 गुरुओं तक आध्यात्मिक नेताओं को सूचीबद्ध किया गया है। <ref>{{Cite web|url=https://www.prabhasakshi.com/articles-on-gods/damakheda-is-a-religious-and-center-place-of-kabirpanth|title=रायपुर के पास है कबीर पंथियों की तीर्थ स्थल दामाखेड़ा|website=Prabhasakshi|language=hi|access-date=2026-04-16}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://ignca.gov.in/coilnet/kabir026.htm#10f|title=Kabir - Chhatisgarh - Parishisht|website=ignca.gov.in|access-date=2026-04-16}}</ref>
धनी धर्मदास वंश के गुरु के दामाखेड़ा वंश गुरुगद्दी (जिसे ''माई'' के रूप में भी जाना जाता है जिसका अर्थ है "आधुनिक [[छत्तीसगढ़]] में स्थित मां"। इसने [[मध्य भारत एजेंसी|मध्य भारत]] में गतिविधियों का संचालन किया और रायपुर, बिलासपुर और छिंदवाड़ा में स्थित शाखाएँ थीं।<ref>{{Cite web|url=https://ignca.gov.in/coilnet/kabir026.htm#10f|title=Kabir – Chhatisgarh – Parishisht|website=ignca.gov.in|access-date=2026-04-16}}</ref>
==== कबीर चौरा ====
सूरत गोपाल ने सबसे पहले [[कबीर चौरा]] मठ (जिसे बाप के रूप में भी जाना जाता है जिसका [[वाराणसी]] में अर्थ है "पिता") की स्थापना की। इसने [[गुजरात]], [[उत्तर प्रदेश]] और [[बिहार]] में मिशनरी गतिविधियों का संचालन किया और मगहर में स्थित एक शाखा थी।<ref name=":0">{{Cite book|title=The Encyclopedia of Sikhism|last=Singh|first=Harbans|publisher=Punjabi University, Patiala|year=2011|edition=3rd|volume=2: E-L|pages=405–406}}</ref>
== मान्यताएँ और व्यवहार ==
{{unreferenced section}}
कबीरपंथी एक-दूसरे का '''अभिवादन''' '''" साहेब बंदगी"''' (अर्थ: आपके अंदर बैठे परमात्मा को बंदगी ) शब्द के माध्यम से करते हैं।<ref>{{Cite web|url=https://www.jagran.com/politics/national-do-you-know-that-why-pm-modi-says-saheb-bandgi-three-times-in-maghar-jagran-special-18134460.html|title=पीएम मोदी ने मगहर में तीन बार क्यों कहा 'साहेब बंदगी', इस बारे में कितना जानते हैं आप - Do you know that why PM Modi says Saheb Bandgi three times in Maghar jagran special|website=Jagran|language=hi|access-date=2026-04-18}}</ref>
इसके अतिरिक्त, अनुयायियों को दुष्ट स्वभाव वाली महिलाओं की संगति से बचने, अपनी पत्नी को संपत्ति से वंचित न करने, कभी झूठ न बोलने, चोरी न करने, किसी के विरुद्ध झूठी गवाही न देने तथा दूसरों की निंदा या बुराई करने से दूर रहने का निर्देश दिया गया है।हिंदू कबीरपंथी सत्य नाम का पाठ करते हैं जबकि मुस्लिम कबीरपंथी [[ख़ुदा|खुदा]] के नाम के रूप में खुदा नाम का इस्तेमाल करते हैं।ले कबीरपंथियों का नेतृत्व एक महंत द्वारा किया जाता है। कबीरपंथी महंत को विशेष परिधानों में सजाया जाता है, जैसे कि एक शंक्वाकार टोपी, एक हार जिसे कांठी के रूप में जाना जाता है, ''तुलसी'' की माला (मीठी तुलसी) और सफेद या भूरे-लाल रंग के कपड़े।महंतो के पास वैष्णव परंपरा का ''[[तिलक]]'' (सामने का निशान) हो सकता है। सामने का निशान चंदन या ''गोपीचंदन'' पेस्ट का उपयोग करके उनकी नाक के किनारे पर एक लकीर भी हो सकता है। महंतो ब्रह्मचारी बने रहने के लिए बाध्य नहीं हैं और कुछ शादी करते हैं।<ref name=":0" />
कबीर पंथियों को परंपरा के अनुसार उस दिन के नैतिक और सामाजिक रीति-रिवाजों का पालन करने में कोई बाधा नहीं है। सामान्य व्यक्तियों का अंतिम संस्कार हिंदू कानून के अनुसार किया जा सकता है और पुजारियों को दफनाया या अंतिम संस्कार किया जा सकता हैं, जो कि उस परंपरा के आधार पर है जिसका कोई पालन करना चाहता है। [[कैरिबियाई क्षेत्र|कैरेबियन]] और पूरे [[उत्तर अमेरिका|उत्तरी अमेरिका]] में, कबीर पंथ जलाने या दफनाने का विकल्प चुन सकते हैं।
कबीर पंथ के लोग अपने दैनिक जीवन और व्यवहार में पवित्रता और शुद्धता का पालन करते हैं। उनके विश्वास और व्यवहार की नींव है
* [[धर्म]], या "जीवन का प्राकृतिक नियम",
* सत्य, या "आदिम और शाश्वत सत्य",
* [[अहिंसा]], या "शब्द और कर्म के माध्यम से सभी प्राणियों के प्रति अहिंसा",
* [[भक्ति]], या "ईश्वर के लिए भक्ति प्रेम और एक उच्च आध्यात्मिक वास्तविकता",
* श्रद्धा, या "विश्वास और अटल निष्ठा",
* [[अस्तेय|अस्तेया]], या "न तो जमाखोरी और न ही लालच",
* क्षमा, या "क्षमा और धैर्य",
* दया, या "करुणा, दया, और सभी प्राणियों के प्रति क्रूरता और असंवेदनशीलता की भावनाओं पर विजय प्राप्त करना",
* [[शौच (नियम)|शौचा]] या "शरीर, मन और वाणी में शुद्धता",
* अपरिग्रह, या "संपत्ति को आवश्यक तक सीमित करना और गैर-भौतिकवादी होना",
* [[अनेकांतवाद|अनेकान्तवाद]], या "विभिन्न मान्यताओं की स्वीकृति और दृष्टिकोण की बहुलता",
* विश्व बंधुत्व, या "सभी प्राणियों का सार्वभौमिक भाईचारा" और
* आत्मज्ञान या "अपने सच्चे स्व की जागरूकता, जो एक सच्ची वास्तविकता से अलग नहीं है जो हर किसी में व्याप्त है, इस प्रकार हर किसी को एक और एकमात्र सच्ची वास्तविकता बनाती है।"
दिशा-निर्देशों का ये बुनियादी सेट कबीर पंथ को प्रेम, विनम्रता, करुणा और एकता के लिए एक सर्वव्यापी सूत्र देता है। कबीर पंथी के सामान्य व्यक्ति को [[भक्ति|भक्त]] कहा जाता है [[गुरु|गुरु जी।]] को [[महंत|महांत]] की सम्मानजनक उपाधि से संबोधित किया जाता है। आध्यात्मिक नेताओं को [[आचार्य]] या गुरु कहा जाता है। जो भिक्षु प्रकृति में अधिक [[वैराग्यवाद|तपस्वी]] होते हैं, जो कभी एक स्थान पर नहीं रहते हुए विवाह नहीं करते हैं और अधिक गंभीर आध्यात्मिक कार्यों में संलग्न नहीं होते हैं, लगातार मठ से मठ में जाते हैं, उन्हें [[ब्रह्मचर्य|ब्रह्मचारी]] साधु कहा जाता है, जबकि जो भिक्षु विवाह करते हैं, बच्चे पैदा करते हैं और एक अधिक आराम से आध्यात्मिक जी[[गुरु|गुरु जी।]] हैं, वे ''गृहस्त'' साधु हैं। इसी तरह, जिन महिलाओं ने नन बनना चुना है, उन्हें साध्वी कहा जाता है। भगवान को अनंत नामों से बुलाया जाता है, लेकिन कुछ अधिक सामान्य नाम हैं "सत्य पुरुष", "सोहम सद्गुरु", "आदि गुरु परम सत्येश्वर" या बस "सद्गुरु कबीर साहेब"। अपने धार्मिक समारोहों के दौरान कबीर पंथियां झांझ, ढोल और अन्य भारतीय वाद्ययंत्रों के संगीत के लिए कबीर के गीत, ''[[भजन]]'' और सखियों को गाती हैं। गुरु विभिन्न प्रार्थनाओं और [[मन्त्र|मंत्र]] का पाठ करते हैं, जो सभी भक्तों को जो कुछ भी करते हैं उसमें भगवान को याद करने की याद दिलाते हैं।
[[चित्र:Painting_of_a_Kabirpanthi_from_a_folio_of_a_manuscript_of_the_Silsilah-i-Jogiyan,_ca.1800.jpg|अंगूठाकार|''सिलसिला-ए-जोगियाँ'' की पांडुलिपि के एक फोलियो से कबीरपंथी का चित्र, ca.1800]]
चिंतन और स्थूल और जटिल व्यवहार से बचने के द्वारा अपने मन और शरीर को शुद्ध रखना चाहिए। इस तरह के अभ्यास से व्यक्ति को जीवन जीते हुए मोक्ष प्राप्त करने में मदद मिलेगी, चाहे वह किसी भी धर्म या अन्य व्यक्तिगत प्रयास से जुड़ा हो। कबीर पंथ में दीक्षा का एक चिह्न कांठी माला के रूप में दिया गया है। यह [[विष्णु]] के लिए पवित्र [[तुलसी (पौधा)|तुलसी]] लकड़ी के मोतियों से बना एक हार है। यह [[शिव]] के लिए पवित्र [[रुद्राक्ष]] पत्थर के मोतियों से भी बना है। इसे केवल एक बड़ी तुलसी या रुद्राक्ष के मनका के साथ एक तार का उपयोग करके भी बनाया जा सकता है। यह अपनी पसंद से पहना जाता है और आमतौर पर उस व्यक्ति को दिया जाता है जिसने वासना, क्रोध, लालच, खराब होने वाली चीजों के प्रति लगाव और अहंकार से बचने के लिए प्रतिबद्ध किया है। [[सहज योग]] में ''सत्यनाम'' दोहराकर भगवान का स्मरण करना शामिल है। कबीर पंथ के लोग जीवन की सादगी-साधारण भोजन, कपड़े और सामान में विश्वास करते हैं। जीविका के लिए जो आवश्यक हो, उसे ही प्राप्त करना चाहिए। कबीर पंथियां सख्ती से शाकाहारी होती हैं और शराब, तंबाकू और नशीले पदार्थों के उपयोग से बचती हैं।
वर्षों से अलग-अलग संगठन बने हैं। भारत के बाहर कबीर पंथियों के सबसे बड़े समूहों में से एक [[त्रिनिदाद और टोबैगो]] में है। भारत के बाहर भी कई छोटे सक्रिय समूह मौजूद हैं, विशेष रूप से [[कनाडा]], [[फ़िजी|फिजी]], [[गयाना|गुयाना]], [[मॉरिशस|मॉरीशस]], [[नेपाल]], नीदरलैंड, [[सूरीनाम]] और [[संयुक्त राज्य अमेरिका]] में। त्रिनिदाद और टोबैगो में कबीर पंथ एसोसिएशन दो प्राथमिक विद्यालयों का संचालन करता है और इस क्षेत्र में स्थापित पहले गैर-ईसाई धार्मिक संप्रदाय स्कूलों में से एक था। हाल ही में, त्रिनिदाद और टोबैगो में अन्य समूहों का गठन किया गया है [जैसे कबीर चौरा मठ, सत्य कबीर निधि], जिनमें से प्रत्येक कबीर की शिक्षाओं पर अपना जोर देता है और त्रिनिदाद एवं टोबैगों, भारत और दुनिया में अन्य जगहों पर अपनी संबद्धता के साथ।
कबीर पंथ में सतलोक की अवधारणा शामिल है, जिसे स्वर्ग के बराबर माना जाता है। कहा जाता है कि अच्छे भक्त हमेशा के लिए सतलोक जा सकते हैं। सतलुख सतपुरुष का स्थान है। यह त्रिकुटी से परे स्थित है।<ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=ESL4DwAAQBAJ&dq=Satlok&pg=PA104|title=RAHAS|last=RANA|first=JAGENDRA|date=2020-08-18|publisher=Blue Rose Publishers|language=en}}</ref> ऐसा कहा जाता है कि केवल दीक्षा प्राप्त आत्माएं ही सतलोक तक पहुँच सकती हैं।<ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=6NFWAAAAMAAJ&q=Satlok|title=With the Three Masters: Being Extracts from the Private Diary of Rai Sahib Munshi Ram, M.A., P.C.S., Secretary to the Three Masters|last=Ram|first=Munshi|date=1967|publisher=Radhasoami Satsang|language=en}}</ref> सतलोक का अर्थ है लोक (सत्य का संसार) ।<ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=ALoUDAAAQBAJ&dq=Satlok&pg=PA333|title=Bodies of Song: Kabir Oral Traditions and Performative Worlds in North India|last=Hess|first=Linda|date=2015|publisher=Oxford University Press|isbn=978-0-19-937416-8|language=en}}</ref>
== शास्त्र ==
=== अनुराग सागर और बीजक ===
{{unreferenced section}}
कबीर पंथ संप्रदाय की सबसे पवित्र पुस्तकें अनुराग सागर और [[बीजक]] हैं<ref>{{Cite web|url=https://www.naidunia.com/madhya-pradesh/umaria-the-main-text-of-kabir-literature-has-been-composed-in-bandhavgarh-itself-7596809|title=बांधवगढ़ में ही हुई है कबीर साहित्य के प्रमुख ग्रंथ की रचना|date=2022-06-15|website=Nai Dunia|language=hi|access-date=2026-04-19}}</ref>, जिनमें से कई अंश [[गुरु ग्रन्थ साहिब|गुरु ग्रंथ साहिब]] और अनुराग सागर में प्रस्तुत किए गए हैं। एक कुंद और असम्बद्ध शैली में, बिजक अपने पाठकों को सत्य के प्रत्यक्ष अनुभव के पक्ष में अपने भ्रम, ढोंग और रूढ़िवादिता को छोड़ने के लिए प्रोत्साहित करता है। यह पाखंड, लालच और हिंसा पर व्यंग्य करता है, विशेष रूप से धार्मिक लोगों के बीच।
बिजक में तीन मुख्य खंड (जिन्हें ''रमैनी, शब्द'' और साक्षी कहा जाता है) और एक चौथा खंड जिसमें विविध लोकगीत शामिल हैं। कबीर की अधिकांश सामग्री को शब्द (या पद) के रूप में जाने जाने वाले गीत के माध्यम से और दो-पंक्ति की साक्षी (या दोह) के माध्यम से लोकप्रिय किया गया है जो पूरे उत्तर भारत में लोकप्रिय ज्ञान के वाहन के रूप में कार्य करता है। अनुराग सागर में, सृजन की कहानी धर्मदास (कबीर के शिष्यों में से एक) को बताई गई है और मान सरोवर कबीर पंथ की धर्मदासी शाखा से कबीर की शिक्षाओं का एक और संग्रह है।
* अनुराग सागर
* कबीर वाणी
* कबीर ग्रंथावली
* कबीर साहब की शब्दावली
* सखी ग्रंथ
* कबीर सागर
* कबीर अमृत संदेश
* संध्या पाठ
* गुरु महिमा
== संदर्भ ==
<references />
[[श्रेणी:उत्तर प्रदेश के सामाजिक समुदाय]]
[[श्रेणी:हिन्दू सम्प्रदाय]]
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आरोही कराधान
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अनुनाद सिंह
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अनुनाद सिंह
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कियारा आडवाणी
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Kiranveer Chahal
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{{ज्ञानसन्दूक व्यक्ति
| name = कियारा आडवाणी
| image = Kiara Advani.jpg
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| parents = गेनेवीवे जाफरी (माँ)<br>जगदीप आडवाणी (पिता)
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| birth_name = आलिया आडवाणी<ref name="India Today">{{Cite news |url = https://www.indiatoday.in/movies/bollywood/story/salman-khan-kiara-advani-alia-advani-alia-bhatt-fugly-195562-2014-06-03 |title = Salman Khan renamed Fugly actress as Kiara Advani |date = 3 जून 2014 |work = इंडिया टुडे |access-date = 7 अगस्त 2018 |archive-url = https://web.archive.org/web/20190626181130/https://www.indiatoday.in/movies/bollywood/story/salman-khan-kiara-advani-alia-advani-alia-bhatt-fugly-195562-2014-06-03 |archive-date = 26 जून 2019 |url-status = live }}</ref>
| birth_date = {{birth date and age|df=yes|1991|07|31}}
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'''कियारा आडवाणी''' (जन्म '''आलिया आडवानी'''; ३१ जुलाई १९९१)<ref>{{cite web|title=Kiara Advani Biography|trans-title=किरारा आडवानी की जीवनी|url=http://youthdevelopers.com/fugly-actress-kiara-advani-biography-marriage/|publisher=यूथ डेवलपर्स|date=१० मई २०१४|language=अंग्रेज़ी|accessdate=३ जून २०१४|archive-url=https://web.archive.org/web/20140615051838/http://youthdevelopers.com/fugly-actress-kiara-advani-biography-marriage/|archive-date=15 जून 2014|url-status=dead}}</ref><ref>{{cite web|last1=सिंह|first1=प्रशान्त|date=२ जून २०१४|title=Salman Khan ensures Bollywood doesn't get another Alia|url=http://www.hindustantimes.com/entertainment/bollywood/salman-khan-ensures-bollywood-doesn-t-get-another-alia/article1-1225187.aspx|website=हिन्दुस्तान टाइम्स|accessdate=३ जून २०१४|language=अंग्रेज़ी|archive-url=https://web.archive.org/web/20140603043246/http://www.hindustantimes.com/entertainment/bollywood/salman-khan-ensures-bollywood-doesn-t-get-another-alia/article1-1225187.aspx|archive-date=3 जून 2014|url-status=live}}</ref> भारतीय अभिनेत्री हैं जो बॉलीवुड फ़िल्मों में काम करती हैं। वह एक बहु-सांस्कृतिक वंश परिवार से यहां मिली थी। उनके पिता, जगदीप आडवाणी भारतीय हैं और माँ जेनेविज जाफरी मुस्लिम और आधी ब्रिटिश मूल की हैं। उन्होंने अपनी स्नातक जय हिंद कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में की।<ref>{{Cite web|url=https://fabulaes.com/kiara-advani/|title=Kiara Advani Wiki, Biography, Age, Family, Boyfriend & More|access-date=9 मार्च 2020|archive-date=18 सितंबर 2020|archive-url=https://web.archive.org/web/20200918233917/https://fabulaes.com/kiara-advani/|url-status=dead}}</ref>
==करियर==
[[File:Kiara Advani in promotion of 'M.S. Dhoni (01).jpg|thumb|upright|आडवाणी प्रचार ''[[एम.एस. धोनी: द अनटोल्ड स्टोरी | एम.एस. धोनी: द अनटोल्ड स्टोरी]]'' 2016 में]]
कियारा ने २०१४ की हिंदी फ़िल्म ''फ़गली'' से अभिनय की दुनिया में पदार्पण किया।<ref>{{cite web |title=सलमान ने बदला आलिया का नाम |url=http://www.bbc.co.uk/hindi/entertainment/2014/06/140603_salman_alia_kirara_pkp.shtml |date=३ जून २०१४ |accessdate=३ जून २०१४ |publisher=बीबीसी हिन्दी |archive-url=https://web.archive.org/web/20140604111051/http://www.bbc.co.uk/hindi/entertainment/2014/06/140603_salman_alia_kirara_pkp.shtml |archive-date=4 जून 2014 |url-status=live }}</ref><ref>{{cite web|url=http://midtown.patch.com/groups/announcements/p/kiara-advani-signed-opposite-mohit-marwah-by-akshay-kumar-in-fugly|title=Kiara Advani Signed Opposite Mohit Marwah by Akshay Kumar in Fugly|trans-title=|publisher=मिडटाउन पैच|date=१२ अगस्त २०१३|accessdate=३ जून २०१४|author=संजय शाह|language=अंग्रेज़ी|archive-url=https://web.archive.org/web/20140511023248/http://midtown.patch.com/groups/announcements/p/kiara-advani-signed-opposite-mohit-marwah-by-akshay-kumar-in-fugly|archive-date=11 मई 2014|url-status=dead}}</ref> इसके बाद वह २०१६ की हिंदी बायोपिक [[एम॰ एस॰ धोनी: द अनटॉल्ड स्टोरी|एम.एस. धोनी: द अनटोल्ड स्टोरी]], और फिर २०१८ की तेलुगु ड्रामा [[भरत अने नेनु|भारत अने नेनु]] में दिखाई दी। कियारा बाद में [[नेटफ्लिक्स]] फिल्म [[लस्ट स्टोरीज़]] में दिखाई दी।<ref>{{cite web|url=https://satyagrah.scroll.in/article/117172/vicky-kaushal-manisha-koirala-s-movie-lust-stories-review|title=लस्ट स्टोरीज : जो औरत के भीतर का औरतपन खुलकर दिखाती है|access-date=18 जून 2018|archive-date=2 दिसंबर 2020|archive-url=https://web.archive.org/web/20201202194124/https://satyagrah.scroll.in/article/117172/vicky-kaushal-manisha-koirala-s-movie-lust-stories-review|url-status=dead}}</ref><ref>{{cite web|url=https://www.dailyo.in/arts/lust-stories-bollywood-veere-di-wedding-swara-bhaskar-karan-johar-anurag-kashyap/story/1/24919.html|title=Lust Stories: Men? Who needs them when in Bollywood|access-date=18 जून 2018|archive-url=https://web.archive.org/web/20180618075814/https://www.dailyo.in/arts/lust-stories-bollywood-veere-di-wedding-swara-bhaskar-karan-johar-anurag-kashyap/story/1/24919.html|archive-date=18 जून 2018|url-status=dead}}</ref> फिल्म में कियारा आडवाणी का [[हस्तमैथुन]] दृश्य, एक [[वाइब्रेटर (सेक्स खिलौना)|वाइब्रेटर]] का उपयोग करके,<ref>{{cite web|url=http://www.bollywoodlife.com/news-gossip/lust-stories-actress-kiara-advani-talks-about-her-hilarious-vibrator-sequence-i-think-we-made-an-iconic-scene/|title=Lust Stories actress Kiara Advani talks about her hilarious vibrator sequence: I think we made an iconic scene|access-date=20 जून 2018|archive-url=https://web.archive.org/web/20180620153044/http://www.bollywoodlife.com/news-gossip/lust-stories-actress-kiara-advani-talks-about-her-hilarious-vibrator-sequence-i-think-we-made-an-iconic-scene/|archive-date=20 जून 2018|url-status=dead}}</ref> महिलाओं की कामुकता के स्पष्ट चित्रण के लिए प्रशंसा की गई थी।<ref>{{cite web|url=https://www.firstpost.com/entertainment/how-veere-di-wedding-and-lust-stories-spearhead-the-sexual-revolution-of-bollywoods-women-4540411.html|title=How Veere Di Wedding and Lust Stories spearhead the sexual revolution of Bollywood’s women|access-date=19 जून 2018|archive-url=https://web.archive.org/web/20180619220819/https://www.firstpost.com/entertainment/how-veere-di-wedding-and-lust-stories-spearhead-the-sexual-revolution-of-bollywoods-women-4540411.html|archive-date=19 जून 2018|url-status=dead}}</ref>
<br />
== पूर्व जीवन ==
[[File:Kiara Advani walks for Shyamal-Bhumika at India Couture Week 2018 Day 4 (03).jpg|thumb|right|2018 आडवाणी]]
कियारा आडवाणी का जन्म 31 JULY 1992 को व्यवसायी जगदीप आडवाणी और अध्यापिका गेनेवीवे जाफरी के घर में हुआ।
==निजी जीवन==
2020 से अभिनेता [[सिद्धार्थ मल्होत्रा]] के साथ डेटिंग की लगातार अफवाहों के बावजूद, आडवाणी ने सार्वजनिक रूप से रिश्ते के बारे में बात नहीं की। 7 फरवरी 2023 को, उन्होंने [[राजस्थान]] के [[जैसलमेर]] में एक पारंपरिक [[हिंदू विवाह]] समारोह में शादी की। <ref>{{cite web|url=https://www.ndtv.com/entertainment/ahead-of-sidharth-malhotra-kiara-advani-s-wedding-a-look-at-the-relationship-timeline-3755208|title=Ahead Of Sidharth Malhotra-Kiara Advani's Wedding, A Look At Their Relationship Timeline|website=NDTV|access-date=5 February 2023|archive-date=9 February 2023|archive-url=https://web.archive.org/web/20230209054023/https://www.ndtv.com/entertainment/ahead-of-sidharth-malhotra-kiara-advani-s-wedding-a-look-at-the-relationship-timeline-3755208|url-status=live}}</ref> उनकी शादी को व्यापक मीडिया का ध्यान मिला, जिसके परिणामस्वरूप उनकी शादी की तस्वीरें भारत में सबसे ज्यादा पसंद की जाने वाली [[इंस्टाग्राम]] पोस्ट बन गईं।<ref>{{Cite web |title=Kiara Advani's wedding pic with Sidharth Malhotra is most-liked Instagram post in India, leaves behind Alia Bhatt, Katrina Kaif |url=http://www.indianexpress.com/article/entertainment/bollywood/kiara-advani-sidharth-malhotra-wedding-pic-most-liked-instagram-post-in-india-alia-bhatt-left-behind-8434404/ |work=The Indian Express |date=9 February 2023 |access-date=17 February 2023 |archive-date=12 February 2023 |archive-url=https://web.archive.org/web/20230212023337/https://indianexpress.com/article/entertainment/bollywood/kiara-advani-sidharth-malhotra-wedding-pic-most-liked-instagram-post-in-india-alia-bhatt-left-behind-8434404/ |url-status=live }}</ref>
==फिल्मोग्राफी==
[[File:Shahid Kapoor and Kiara Advani.jpg|thumb|right|आडवाणी और [[शाहिद कपूर]] 2019 में ''[[कबीर सिंह]]'' का प्रचार कर रहे हैं]]
===फ़िल्म===
[https://bollyhollywoodnews.com/top-10-bollywood-actress-2023/ कियारा आडवाणी आकर्षक भारतीय एक्ट्रेस] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20230218162235/https://bollyhollywoodnews.com/top-10-bollywood-actress-2023/ |date=18 फ़रवरी 2023 }}
{| class="wikitable"
|+कुंजी
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| उन फिल्मों का प्रदर्शन करता है जो अभी तक रिलीज़ नहीं हुई हैं
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|-
| 2014
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|-
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| साक्षी सिंह रावत
|
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|
|-
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| मेघा
|[[करण जौहर]] का सेगमेंट; [[नेटफ्लिक्स]] फ़िल्म
|-
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|-
|rowspan="4"|2019
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| सीता
|-
! scope="row" |''[[कलंक]]''
| लज्जो||
|-
! scope="row" |''[[कबीर सिंह]]''
|प्रीति सिक्का
|
|-
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|मोनिका डिसूजा
|पोस्ट-प्रोडक्शन<ref>{{cite news|url=https://twitter.com/DharmaMovies/status/1068356864608362496|title=Dharma Productions on Twitter|date=30 November 2018|work=Twitter|access-date=30 November 2018|archive-url=https://web.archive.org/web/20190626181125/https://twitter.com/DharmaMovies/status/1068356864608362496|archive-date=26 जून 2019|url-status=live}}</ref>
|-
| rowspan="4" |2020
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|गीता वर्मा
|फिल्मांकन<ref name="indiatoday.in">{{cite news|url=https://www.indiatoday.in/movies/regional-cinema/story/akshay-kumar-and-raghava-lawrence-begin-shooting-of-kanchana-hindi-remake-lakshmi-1509243-2019-04-24|title=Akshay Kumar and Raghava Lawrence begin shooting of Kanchana Hindi remake Lakshmi|date=30 November 2018|work=India Today|access-date=26 April 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190424142627/https://www.indiatoday.in/movies/regional-cinema/story/akshay-kumar-and-raghava-lawrence-begin-shooting-of-kanchana-hindi-remake-lakshmi-1509243-2019-04-24|archive-date=24 अप्रैल 2019|url-status=live}}</ref>
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| डिंपल चीमा
|फिल्मांकन<ref>{{cite web|url=https://twitter.com/taran_adarsh/status/1125647335990513664?s=20|title=Sidharth Malhotra and Kiara Advani... #Shershaah goes on floors, filming begins... Directed by Vishnu Varadhan.|publisher=|accessdate=7 May 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190626181126/https://twitter.com/taran_adarsh/status/1125647335990513664?s=20|archive-date=26 जून 2019|url-status=live}}</ref>
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| 2018
| [[यो यो हनी सिंह]]
| [[शाहिद कपूर]]
| style="text-align: center;"| <ref>{{cite web |title=Watch: The teaser of Yo Yo Honey Singh's music video 'Urvashi' starring Shahid Kapoor and Kiara Advani out |url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/hindi/music/news/watch-the-teaser-of-yo-yo-honey-singhs-music-video-urvashi-starring-shahid-kapoor-and-kiara-advani-out/articleshow/65969166.cms |work=The Times of India |date=26 September 2018 |accessdate=26 September 2018 |archive-url=https://web.archive.org/web/20180927014851/https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/hindi/music/news/watch-the-teaser-of-yo-yo-honey-singhs-music-video-urvashi-starring-shahid-kapoor-and-kiara-advani-out/articleshow/65969166.cms |archive-date=27 सितंबर 2018 |url-status=live }}</ref>
|}
== इन्हें भी देखें ==
* [[ज़ोया अफ़रोज़]]
* [[कैटरीना कैफ़|कटरीना कैफ]]
* [[कृति सैनॉन]]
* [[ज़रीन खान]]
* [[शमा सिकंदर]]
== सन्दर्भ ==
{{टिप्पणीसूची}}
== बाहरी कड़ियाँ==
* {{imdb name|6442009}}
* {{Facebook|TheKiaraAdvani |कियारा आडवाणी}}
* {{Twitter|TheKiaraAdvani |कियारा आडवाणी}}
{{DEFAULTSORT:आडवाणी, कियारा}}
[[श्रेणी:1992 में जन्मे लोग]]
[[श्रेणी:भारतीय अभिनेत्री]]
[[श्रेणी:जीवित लोग]]
[[श्रेणी:हिन्दी अभिनेत्री]]
[[श्रेणी:मुंबई के लोग]]
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भाटुन्द
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wikitext
text/x-wiki
{{स्रोतहीन|date=नवम्बर 2018}}
{{ज्ञानसन्दूक भारत के क्षेत्र
|type = गाँव
|native_name = भाटुन्द
|state_name = [[राजस्थान]]
|district = [[पाली]]
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'''भाटुन्द''' [[राजस्थान]] के [[पाली जिला|पाली जिले]] मे स्थित एक गाँव है। यह गाँव पाली जिले के बाली ब्लाक से 25 किमी दूर है। [[भाटुन्द]] का पुराना नाम 'भाटुन' था। । भाटूंद ब्राह्मणों को मिली जागीर भूमि हे, यहां पर मुख्य जागीरदार दवे ,जानी , बोहरा आदि सरनेम वाले ब्राह्मण हे
==जनसांख्यिकी==
<!-- यहाँ जनसंख्या का विवरण दिया जा सकता है। -->भारत की सन् 2011 की जनगणना के अनुसार गाँव की कुल जनसंख्या 5178 है।<ref>{{Cite web|url=https://www.census2011.co.in/data/village/91325-bhatoond-rajasthan.html|title=Bhatoond Village Population - Bali - Pali, Rajasthan|website=www.census2011.co.in|access-date=2024-12-10}}</ref>
==भोगोलिक स्थिति ==
गाँव [[अरावली]] पर्वत के पश्चिम मे व जवाईबांध के पूर्व मे स्थित है।
== सन्दर्भ ==
{{टिप्पणीसूची}}
[[श्रेणी:पाली ज़िले के गाँव]]
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प्रेमचंद्र तर्कवागीश
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wikitext
text/x-wiki
'''प्रेमचंद्र तर्कवागीश''' () [[संस्कृत भाषा|संस्कृत]] विद्वान तथा लेखक थे। वे [[कोलकाता]] के [[संस्कृत कॉलेज]] में १८३२ से १८६४ तक प्राध्यापक थे। [[होरेस हेमैन विल्सन|होरेश हेमान विल्सन]] और ई बी कोवेल आदि पाश्चात्य संस्कृत विद्वानों को पढ़ाया था।
==बाहरी कड़ियाँ==
*[https://web.archive.org/web/20150411180321/http://timesofindia.indiatimes.com/city/kolkata/Calcutta-University-honours-legendary-Sanskrit-scholar/articleshow/46882293.cms Calcutta University honours legendary Sanskrit scholar]
[[श्रेणी:संस्कृत विद्वान]]
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अनुनाद सिंह
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'''प्रेमचंद्र तर्कवागीश''' (१८०५ - १८६७) [[संस्कृत भाषा|संस्कृत]] विद्वान तथा लेखक थे। वे [[कोलकाता]] के [[संस्कृत कॉलेज]] में १८३२ से १८६४ तक प्राध्यापक थे। [[होरेस हेमैन विल्सन|होरेश हेमान विल्सन]] और ई बी कोवेल आदि पाश्चात्य संस्कृत विद्वानों को पढ़ाया था। वे [[व्याकरण]] और [[संस्कृत साहित्य]] के विशेषज्ञ थे और [[जेम्स प्रिंसेप]] को [[ब्राह्मी लिपि]] में लिखे शिलालेखों को पढ़ने में सहायता करने के लिए जाने जाते हैं।
==बाहरी कड़ियाँ==
*[https://sohamchandra.blogspot.com/2016/01/sanskrit-college-pandit-premchand.html SANSKRIT COLLEGE & PANDIT PREMCHANDRA TARKABAGISH ... An Invaluable Chapter of Sanskrit Literature !!]
*[https://web.archive.org/web/20150411180321/http://timesofindia.indiatimes.com/city/kolkata/Calcutta-University-honours-legendary-Sanskrit-scholar/articleshow/46882293.cms Calcutta University honours legendary Sanskrit scholar]
[[श्रेणी:संस्कृत विद्वान]]
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अनुनाद सिंह
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'''प्रेमचंद्र तर्कवागीश''' (१८०५ - १८६७)<ref>[https://sohamchandra.blogspot.com/2016/01/sanskrit-college-pandit-premchand.html SANSKRIT COLLEGE & PANDIT PREMCHANDRA TARKABAGISH ... An Invaluable Chapter of Sanskrit Literature !!]</ref> [[संस्कृत भाषा|संस्कृत]] विद्वान तथा लेखक थे। वे [[कोलकाता]] के [[संस्कृत कॉलेज]] में १८३२ से १८६४ तक प्राध्यापक थे। [[होरेस हेमैन विल्सन|होरेश हेमान विल्सन]] और ई बी कोवेल आदि पाश्चात्य संस्कृत विद्वानों को पढ़ाया था। वे [[व्याकरण]] और [[संस्कृत साहित्य]] के विशेषज्ञ थे और [[जेम्स प्रिंसेप]] को [[ब्राह्मी लिपि]] में लिखे शिलालेखों को पढ़ने में सहायता करने के लिए जाने जाते हैं।
==बाहरी कड़ियाँ==
*[https://web.archive.org/web/20150411180321/http://timesofindia.indiatimes.com/city/kolkata/Calcutta-University-honours-legendary-Sanskrit-scholar/articleshow/46882293.cms Calcutta University honours legendary Sanskrit scholar]
*[https://archive.org/details/dli.bengal.10689.10033 Kavyadarsa Of Dandin] ( लेखक - प्रेमचन्द्र तर्कवागीश)
[[श्रेणी:संस्कृत विद्वान]]
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अनुनाद सिंह
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'''प्रेमचंद्र तर्कवागीश''' (१८०५ - १८६७)<ref>[https://sohamchandra.blogspot.com/2016/01/sanskrit-college-pandit-premchand.html SANSKRIT COLLEGE & PANDIT PREMCHANDRA TARKABAGISH ... An Invaluable Chapter of Sanskrit Literature !!]</ref> [[संस्कृत भाषा|संस्कृत]] विद्वान तथा लेखक थे। वे [[कोलकाता]] के [[संस्कृत कॉलेज]] में १८३२ से १८६४ तक प्राध्यापक थे। [[होरेस हेमैन विल्सन|होरेश हेमान विल्सन]] और ई बी कोवेल आदि पाश्चात्य संस्कृत विद्वानों को पढ़ाया था। वे [[व्याकरण]] और [[संस्कृत साहित्य]] के विशेषज्ञ थे और [[जेम्स प्रिंसेप]] को [[ब्राह्मी लिपि]] में लिखे शिलालेखों को पढ़ने में सहायता करने के लिए जाने जाते हैं।
==सन्दर्भ==
{{टिप्पणीसूची}}
==बाहरी कड़ियाँ==
*[https://web.archive.org/web/20150411180321/http://timesofindia.indiatimes.com/city/kolkata/Calcutta-University-honours-legendary-Sanskrit-scholar/articleshow/46882293.cms Calcutta University honours legendary Sanskrit scholar]
*[https://archive.org/details/dli.bengal.10689.10033 Kavyadarsa Of Dandin] ( लेखक - प्रेमचन्द्र तर्कवागीश)
[[श्रेणी:संस्कृत विद्वान]]
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ओपेनमॉडेलिका
0
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2026-05-03T06:59:21Z
अनुनाद सिंह
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text/x-wiki
{{Infobox software
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}}
'''ओपेनमॉडेलिका''' (OpenModelica), [[माडेलिका|मॉडेलिका]] [[प्रोग्रामिंग भाषा]] पर आधारित [[मुक्त स्रोत]] मॉडलन एवं [[सिमुलेशन]] प्रोग्राम है। इसका विकास 'ओपेन सोर्स मॉडेलिका कांसोर्शियम' (OSMC) नामक [[लाभ निरपेक्ष संस्था|लाभनिरपेक्ष संस्था]] करती है।
यह प्रोग्राम [[मैटलैब]] (MATLAB) की तरह अनेकों क्षेत्रों (जैसे इलेक्ट्रानिक्स, चुम्बकत्व, यांत्रिकी, तापीय, जैवरसायन, नियन्त्रण आदि) की समस्याओं का मॉडल करके उसका सिमुलेशन करने में सक्षम है।
==इन्हें भी देखें==
*[[माडेलिका|मॉडेलिका]]
==बाहरी कड़ियाँ==
*[https://web.archive.org/web/20150906023631/https://www.modelica.org/ ओपेन सोर्स मॉडेलिका कांसोर्शियम''' का जालघर]
*[https://web.archive.org/web/20180417024517/https://om.fossee.in/ आईआईटी मुम्बई में ओपेनमॉडेलिका]
[[श्रेणी:मुक्तस्रोत सॉफ्टवेयर]]
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2026-05-03T07:01:18Z
अनुनाद सिंह
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/* इन्हें भी देखें */
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text/x-wiki
{{Infobox software
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}}
'''ओपेनमॉडेलिका''' (OpenModelica), [[माडेलिका|मॉडेलिका]] [[प्रोग्रामिंग भाषा]] पर आधारित [[मुक्त स्रोत]] मॉडलन एवं [[सिमुलेशन]] प्रोग्राम है। इसका विकास 'ओपेन सोर्स मॉडेलिका कांसोर्शियम' (OSMC) नामक [[लाभ निरपेक्ष संस्था|लाभनिरपेक्ष संस्था]] करती है।
यह प्रोग्राम [[मैटलैब]] (MATLAB) की तरह अनेकों क्षेत्रों (जैसे इलेक्ट्रानिक्स, चुम्बकत्व, यांत्रिकी, तापीय, जैवरसायन, नियन्त्रण आदि) की समस्याओं का मॉडल करके उसका सिमुलेशन करने में सक्षम है।
==इन्हें भी देखें==
*[[माडेलिका|मॉडेलिका]]
*[[साईलैब]]
==बाहरी कड़ियाँ==
*[https://web.archive.org/web/20150906023631/https://www.modelica.org/ ओपेन सोर्स मॉडेलिका कांसोर्शियम''' का जालघर]
*[https://web.archive.org/web/20180417024517/https://om.fossee.in/ आईआईटी मुम्बई में ओपेनमॉडेलिका]
[[श्रेणी:मुक्तस्रोत सॉफ्टवेयर]]
{{आधार}}
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प्रो रेस्लिंग लीग
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6547889
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text/x-wiki
{{Infobox football league
|name = प्रो रेस्लिंग लीग
|country = भारत
|founded = 2015
|first = 10-27 दिस. 2015
|teams = 6
|season = 2015
|image = pwl-logo.png
|tv=[[सोनी सिक्स]]
|website={{url|www.prowrestlingleague.com}}
|date = 10-27 दिस.
|champions=[[मुम्बई गरुड़ा]]
}}
'''प्रो रेस्लिंग लीग''' (PWL) कार्तिकेय शर्मा की प्रो स्पोर्टिफाई द्वारा शुरु की गई एक पेशेवर कुश्ती प्रतियोगिता है<ref>{{Cite news|title = Kartikeya Sharma - Chief Managing Director of Pro Sportify 'Pro Wrestling League'|url = http://www.prowrestlingleague.com/kartikeya-sharma/|website = www.prowrestlingleague.com|access-date = 28 दिसंबर 2015|archive-url = https://web.archive.org/web/20151225020455/http://www.prowrestlingleague.com/kartikeya-sharma/|archive-date = 25 दिसंबर 2015|url-status = dead}}</ref> जिसका आयोजन दिसम्बर २०१५ में भारत में हुआ। इस श्रृंखला का पहला संस्करण १०-२७ दिसम्बर २०१५ तक भारत के ६ शहरों की टीमों के बीच खेला गया। इन ६ टीमों से दुनिया भर के ६६ पहलवानों ने भाग लिया। <ref name=":0">{{Cite web|title = Pro Wrestling League launched in presence of Sushil Kumar|url = http://indianexpress.com/article/sports/sport-others/pro-wrestling-league-launched-in-presence-of-sushil-kumar/|website = द इंडियन एक्सप्रेस|date = 2015-07-27|accessdate = 2015-12-02|archive-url = https://web.archive.org/web/20151231044553/http://indianexpress.com/article/sports/sport-others/pro-wrestling-league-launched-in-presence-of-sushil-kumar/|archive-date = 31 दिसंबर 2015|url-status = live}}</ref>
तीन बार की महिला विश्व विजेता अमेरिका की [[ऐडेलिन ग्रे]] ने कहा की "अंतरराष्ट्रीय कुश्ती में इतना ज्यादा पुरस्कार राशि दांव पर लगाकर इस खेल को दुनिया में प्रसिद्ध बनाने का यह एक ऐतिहासिक और हिम्मत भरा कदम है।"
{{quote box|quote=''historic move in international wrestling that, by bringing in huge sums of money, has taken a bold step in popularizing the sport at world level.''|source =ऐडेलिन ग्रे<ref>{{Cite news|title = And now the Pro Wrestling League|url = http://www.thehindu.com/sport/and-now-the-pro-wrestling-league/article7790696.ece|newspaper = द हिंदू|date = 2015-10-22|accessdate = 2015-12-02|issn = 0971-751X}}</ref>|width=20%|align = right|bgcolor =white|salign =right}}
[[डाबर|डाबर च्यवनप्राश]] इस प्रतियोगिता का प्रमुख और शीर्षक का प्रायोजक है। इस प्रतियोगिता का पहला संस्करण भारत में बहुत लोकप्रिय हुआ।
पहले संस्करण का विजेता [[मुम्बई गरुड़ा]] की टीम रही।
==प्रारूप==
इस प्रतियोगिता में कुल ६ टीमें होती हैं जिनमें १ प्रसिद्ध (आईकन खिलाड़ी) व अन्य ८ खिलाड़ी होते हैं। इन सभी में ५ भारतीय व ४ विदेशी खिलाड़ी होते हैं। साथ ही साथ ५ पुरुष व चार महिला खिलाड़ी भी होनी चाहिए। किसी एक मैच (टाई) में पाँच विदेशी खिलाड़ियों में से सिर्फ चार ही भाग ले सकते हैं। <ref name=":0" /> फाइनल के अलावा हर मुकाबले में ७ बाउट होते हैं (और दो रोके गए श्रेणियाँ (block categories) की होती हैं)। फाइनल में सभी ९ बाउट होते हैं। यानि कुल 18 मुकाबले (15 लीग, 2 सेमीफाइनल, और १ फाइनल) खेला जाता है।
इसमें पाँच भार श्रेणियाँ हैं (57 किग्रा., 65 किग्रा., 74 किग्रा., 97 किग्रा., 125 किग्रा.) पुरुषों के लिये और ४ भार श्रेणीयाँ (49 किग्रा., 53 किग्रा., 58 किग्रा., 69 किग्रा.) महिलाओं के लिये। बाउट शुरू होने से पहले हर टीम एक भार श्रेणी को रोके गए सकती है। लीग ''सर्वश्रेष्ठ नौ'' के सिद्धांत पर खेली जाती है और हर बाउट में ३-३ मिनट के २ चरण होते हैं जिनमें ९० सेकेन्ड का अंतराल होता है।<ref name=":0" />
==बोली==
६ टीमों के खिलाड़ियों को चुनने के लिये ३ नवम्बर को १५९ पहलवानों की बोली लगाई गई। १०१ पहलवानों को किसी ने नहीं खरीदा।<ref name=":1" /> हर फ्रैन्चाइज़ी के पास किसी खिलाड़ी को खरीदने के लिये २ करोड़ रुपये खर्च करने की छूट थी। एक आइकन खिलाड़ी का मूल भाव 33 लाख रुपये निर्धारित था। [[यूक्रेन]] की ओक्साना हर्हेल को उस दिन सबसे ज्यादा 41.3 लाख रुपये में हरियाणा की टीम ने खरीदा।<ref name=":1">{{Cite web|title = Pro Wrestling League 2015 auction: Full list of पहलवानs bought by 6 franchisees|url = http://www.ibtimes.co.in/pro-wrestling-league-auction-2015-full-list-पहलवानs-bought-by-6-franchisees-653135|website = International Business Times, India Edition|accessdate = 2015-12-02}}{{Dead link|date=सितंबर 2021 |bot=InternetArchiveBot }}</ref>
भारतीय पहलवानों में [[योगेश्वर दत्त]] को 39.70 लाख रुपये में हरियाणा टीम ने और [[सुशील कुमार (पहलवान)|सुशील कुमार]] को उत्तर प्रदेश की टीम ने 38.20 लाख में खरीदा।<ref name=":1" />
==प्रमुख भारतीय खिलाड़ी ==
1. [[सुशील कुमार (पहलवान)|सुशील कुमार]] [उत्तर प्रदेश वैरियर्स] [हट गये] <ref>{{Cite web|title = Sushil Kumar's priorities have changed, say Professional Wrestling League organisers {{!}} Latest News & Updates at Daily News & Analysis|url = http://www.dnaindia.com/sport/report-sushil-kumar-s-priorities-have-changed-say-professional-wrestling-league-organisers-2154720|website = dna|publisher = https://plus.google.com/104361763535834827695|accessdate = 2015-12-15|language = en-US|archive-url = https://web.archive.org/web/20151223013455/http://www.dnaindia.com/sport/report-sushil-kumar-s-priorities-have-changed-say-professional-wrestling-league-organisers-2154720|archive-date = 23 दिसंबर 2015|url-status = live}}</ref>
2. [[योगेश्वर दत्त]] [हरियाणा हैमर्स]
3. [[अमित कुमार (पहलवान)|अमित कुमार]] [हरियाणा हैमर्स]
4. [[बजरंग कुमार]] [बेंगालुरू योद्धाज़]
5. [[गीता फौगाट]] [पंजाब रोयल्स]
6. [[बबीता कुमारी (पहलवान)|बबीता कुमारी]] [उत्तर प्रदेश वैरियर्स]
7. [[गीतिका जाखड़]] [हरियाणा हैमर्स]
8. [[विनेश फौगाट]] [मंगलायतन विश्वविद्यालय दिल्ली वीर]
9. [[नरसिंह यादव|नरसिंह यादव]] [बेंगालुरू योद्धाज़]
== आयोजन स्थल==
{{Location map+|India
|places = {{location map~ |India |lat=28.3636 |long=77.1348 |label= <div style="font-size:100%;position:relative;top:4px;">{{nobreak|दिल्ली वीर}}</div>|position=bottom}}
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{{location map~ |India |lat=12.58|long=77.34|label= <div style="font-size:100%;">{{nobreak|बेंगालुरू योद्धाज़}}</div>|position=left}}|width = 350|float = right|caption = कुश्ती टीमों के स्थल|alt = Locations of the PWL Teams}}
{| class="wikitable sortable" style="text-align: left;"
|-
!शहर, राज्य
!आयोजन-स्थल
|-
| [[नई दिल्ली]], [[दिल्ली]]
|[[इंदिरा गाँधी ऐरेना|केडी जाधव कुश्ती स्टेडियम]]
|-
|[[नोएडा]], [[उत्तर प्रदेश]]
|[[जीबीयू इनडोर स्टेडियम]]
|-
|[[गुड़गाँव]], [[हरियाणा]]
|[[हयात रिजेन्सी]]<ref>{{Cite web |url=http://gurgaon.regency.hyatt.com/en/hotel/our-hotel.html |title=संग्रहीत प्रति |access-date=28 दिसंबर 2015 |archive-url=https://web.archive.org/web/20151222112214/http://gurgaon.regency.hyatt.com/en/hotel/our-hotel.html |archive-date=22 दिसंबर 2015 |url-status=dead }}</ref>
|-
|[[लुधियाना]], [[पंजाब]]
|[[गुरु नानक स्टेडियम]]
|-
|[[बैंगलोर]], [[कर्नाटक]]
|[[कोरमंगला इनडोर स्टेडियम]]
|}
== टीमें==
पीडब्ल्युएल के पहले सम्स्करण में ६ भारतीय शहरों की टीमें थीं। पहले हर टीम ने ३ भारतीय पुरुष व २ महिला भारतीय पहलवानों के साथ दो-दो अंतरराष्ट्रीय महिला व पुरुष पहलवानों को लेने का निर्णय लिया। हालाँकि खेल के बाद के हिस्सों में कई खिलाड़ियों ने अपने नाम वापस ले लिये और इस वजह से टीमों को फिर से ना बिके हुए खिलाड़ियों को खरीदने का मौका दिया गया।
मुम्बई गरुड़ा के अलावा हर टीम के प्रमुख (आईकन) खिलाड़ी भारतीय पहलवान हैं।
=== [[दिल्ली वीर|मंगलायतन विश्वविद्यालय दिल्ली वीर]] ===
मालिक: जीएमार समूह
बोली में कुल खर्च: ₹ 1,77,70,000<ref name=":2">{{Cite web|title = Auction Manager|url = http://www.auction.prowrestlingleague.com/|website = www.auction.prowrestlingleague.com|accessdate = 2015-12-02|archive-url = https://web.archive.org/web/20151212220923/http://www.auction.prowrestlingleague.com/|archive-date = 12 दिसंबर 2015|url-status = dead}}</ref>
{| class="wikitable sortable"
!खिलाड़ी
!देश
! rowspan="2" |दाम <br/>(लाख)
!श्रेणी
!अंक
! colspan="2" |बाउट्स
! rowspan="2" |बार
रोके गए
! rowspan="2" |अंक/मैच
! rowspan="2" |जीत%
|-
!
!
!
!
!खेले
!जीते
|-
|[[विनेश फौगाट]] (आईकन खिलाड़ी)
|{{Flagicon|IND}}
|₹29.7
|48 किलो [म]
|54
|5
|5
|0
|10.8
|100
|-
|लिलिया होरीश्ना
|{{Flagicon|UKR}}
|₹13.0
|53 किलो [म]
|23
|3
|1
|2
|7.6
|33.3
|-
|[[एलिफ़ याले येसिलिर्मैक|एलिफ़ याले येसिलिर्मैक]]
|{{Flagicon|TUR}}
|₹39.6
|58 किलो [म]
|6
|4
|1
|1
|1.5
|25
|-
|कृष्ण कुमार
|{{Flagicon|IND}}
|₹4.0
|125 किलो [पु]
|12
|5
|1
|0
|2.4
|20
|-
|[[ईख्तियोर नावरुज़ोव]]
|{{Flagicon|उज़्बेकिस्तान}}
|₹26.0
|65 किलो [पु]
|29
|4
|2
|1
|7.3
|50
|-
|एर्देनेबात बेखबयार
|{{Flagicon|मंगोलिया}}
|₹4.0
|57 किलो [पु]
|16
|3
|2
|2
|5.3
|66.6
|-
|गुरपाल सिंह
|{{Flagicon|IND}}
|₹4.0
|97 किलो [पु]
|12
|3
|1
|2
|4
|33.3
|-
|दिनेश कुमार
|{{Flagicon|IND}}
|₹4.0
|74 किलो [पु]
|11
|5
|1
|0
|2.3
|20
|-
|निक्की
|{{Flagicon|IND}}
|₹4.0
|69 किलो [म]
|2
|3
|0
|2
|0.6
|0
|-
! colspan="4" |कुल
|165
|35
|14
!'''NA'''
|4.7
|40
|}
=== [[यूपी वैरियर्स|उत्तर प्रदेश वैरियर्स]] ===
मालिक: लोटस ग्रीन्स, [[रोहित शर्मा]]
बोली में कुल खर्च: ₹ 1,72,30,000<ref name=":2" />
{| class="wikitable sortable"
!खिलाड़ी
!देश
! rowspan="2" |दाम <br/>(लाख)
!श्रेणी
!अंक
! colspan="2" |बाउट्स
! rowspan="2" |बार
रोके गए
! rowspan="2" |अंक/मैच
! rowspan="2" |जीत%
|-
!
!
!
!
!खेले
!जीते
|-
|[[बबीता कुमारी]] (आईकन खिलाड़ी)
|{{Flagicon|IND}}
|₹34.1
|53 किलो [म]
|36
|5
|4
|0
|7.2
|80
|-
|[[पुरेवजाव उनुरबात]]
|{{Flagicon|मंगोलिया}}
|₹34.1
|74 किलो [पु]
|23
|5
|2
|0
|4.6
|40
|-
|[[ओलेक्साँद्रा कोहुत]]
|{{Flagicon|UKR}}
|₹27.0
|48 किलो [म]
|10
|3
|1
|2
|3.3
|33.3
|-
|[[सत्यावर्त कादियाँ]]
|{{Flagicon|IND}}
|₹20.0
|97 किलो [पु]
|5
|4
|1
|1
|1.3
|25
|-
|सर्गेई रातुश्नेय
|{{Flagicon|UKR}}
|₹13.0
|57 किलो [पु]
|3
|2
|0
|1
|1.5
|0
|-
|गैंजोरिग मन्दाखनरन
|{{Flagicon|मंगोलिया}}
|₹13.0
|65 किलो [पु]
|14
|2
|1
|1
|7
|50
|-
|[[एलीना स्तैदनिक|एलीना स्तैदनिक मखीनिआ]]
|{{Flagicon|UKR}}
|₹13.0
|69 किलो [म]
|12
|3
|1
|2
|4
|33.3
|-
|जोगिन्दर कुमार
|{{Flagicon|IND}}
|₹7.0
|125 किलो [पु]
|8
|3
|0
|2
|2.6
|0
|-
|सरिता
|{{Flagicon|IND}}
|₹7.0
|58 किलो [म]
|3
|3
|1
|1
|1
|33.3
|-
|राहुल मान
|{{Flagicon|IND}}
|
|65 किलो [पु]
|2
|1
|0
|0
|2
|0
|-
|रितु मलिक
|{{Flagicon|IND}}
|
|58 किलो [म]
|1
|1
|0
|0
|1
|0
|-
|जयदीप
|{{Flagicon|IND}}
|
|57 किलो [पु]
|3
|2
|0
|0
|1.5
|0
|-
|विकाश
|{{Flagicon|IND}}
|
|65 किलो [पु]
|4
|1
|0
|0
|4
|0
|-
! colspan="4" |कुल
|126
|35
|11
!NA
|3.6
|31.4
|}
=== [[हरियाणा हैमर्स]] ===
मालिक: ओलिव ग्लोबल, भुपिन्दर सिंह, बुधराम पहलवान
बोली में कुल खर्च: ₹ 1,96,20,000<ref name=":2" />
{| class="wikitable sortable"
!खिलाड़ी
!देश
! rowspan="2" |दाम <br/>(लाख)
!श्रेणी
!अंक
! colspan="2" |बाउट्स
! rowspan="2" |बार
रोके गए
! rowspan="2" |अंक/मैच
! rowspan="2" |जीत%
|-
!
!
!
!
!खेले
!जीते
|-
|[[योगेश्वर दत्त]] (आईकन खिलाड़ी)
|{{Flagicon|IND}}
|₹39.70
|65 किलो [पु]
|21
|4
|4
|1
|5.3
|100
|-
|ओक्साना हर्हेल
|{{Flagicon|UKR}}
|₹41.3
|58 किलो [म]
|16
|4
|2
|1
|4
|50
|-
|[[अमित कुमार (पहलवान)|अमित दहिया]]
|{{Flagicon|IND}}
|₹30.1
|57 किलो [पु]
|0
|0
|0
|1
|0
|0
|-
|तात्याना किट
|{{Flagicon|UKR}}
|₹30.0
|53 किलो [म]
|12
|2
|1
|3
|6
|50
|-
|[[लिवान लोपेज़|इवान लोपेज़ एज़्कुई]]
|{{Flagicon|क्यूबा}}
|₹20.0
|74 किलो [पु]
|27
|4
|3
|1
|6.7
|75
|-
|हितेन्दर
|{{Flagicon|IND}}
|₹11.1
|125 किलो [पु]
|11
|4
|2
|1
|2.8
|50
|-
|[[गीतिका जाखड़]]
|{{Flagicon|IND}}
|₹10.0
|69 किलो [म]
|6
|5
|2
|0
|1.5
|40
|-
|[[युरी माएर]]
|{{Flagicon|ARG}}
|₹10.0
|97 किलो [पु]
|1
|3
|0
|1
|0.3
|0
|-
|निर्मल देवी
|{{Flagicon|IND}}
|₹4.0
|48 किलो [म]
|14
|4
|1
|1
|3.5
|25
|-
|नितिन
|{{Flagicon|IND}}
|
|57 किलो [पु]
|15
|4
|2
|0
|3.7
|50
|-
|आंद्रीतेसी वलेरी
|
|
|97 किलो [पु]
|2
|1
|1
|0
|2
|100
|-
! colspan="4" |कुल
|125
|35
|18
!NA
|3.6
|51.4
|}
=== [[पंजाब रोयल्स|सीडीआर पंजाब रोयल्स]] ===
मालिक: [[धर्मेन्द्र]] और सीडीआर समूह
बोली में कुल खर्च: ₹ 1,85,70,000<ref name=":2" />
{| class="wikitable sortable"
!खिलाड़ी
!देश
! rowspan="2" |दाम <br/>(लाख)
!श्रेणी
!अंक
! colspan="2" |बाउट्स
! rowspan="2" |बार
रोके गए
! rowspan="2" |अंक/मैच
! rowspan="2" |जीत%
|-
!
!
!
!
!खेले
!जीते
|-
|[[गीता फोगट]] (आईकन खिलाड़ी)
|{{Flagicon|IND}}
|₹33.0
|58 किलो [म]
|26
|5
|3
|0
|5.2
|60
|-
|[[वैसीलीज़ा मार्ज़ालिउक]]
|{{Flagicon|BLR}}
|₹40.2
|69 किलो [म]
|20
|4
|3
|1
|5
|75
|-
|[[व्लादिमिर खिन्चेगैशविली]]
|{{Flagicon|GEO}}
|₹35.3
|57 किलो [पु]
|28
|4
|4
|1
|7
|100
|-
|याना रत्तीगन
|{{Flagicon|UKR}}
|
|48 किलो [म]
|23
|3
|0
|2
|7.6
|0
|-
|[[जर्गलसाइखान चुलुनबात|जर्गलसाइखान चुलुनबात]]
|{{Flagicon|मंगोलिया}}
|₹17.0
|125 किलो [पु]
|19
|5
|3
|0
|3.8
|60
|-
|मौसम खत्री
|{{Flagicon|IND}}
|₹16.0
|97 किलो [पु]
|24
|4
|2
|1
|6
|50
|-
|परवीन राणा
|{{Flagicon|IND}}
|₹13.1
|74 किलो [पु]
|18
|4
|3
|1
|4.5
|75
|-
|रजनीश
|{{Flagicon|IND}}
|₹7.0
|65 किलो [पु]
|11
|3
|1
|2
|3.6
|33.3
|-
|प्रियंका फोगट
|{{Flagicon|IND}}
|₹7.0
|53 किलो [म]
|8
|3
|0
|2
|2.6
|0
|-
! colspan="4" |कुल
|178
|35
|19
!NA
|5.1
|54.3
|}
=== [[मुम्बई गरुड़ा|रेवन्ता मुम्बई गरुड़ा]] ===
मालिक: रेवन्ता समूह (मालिक-अंकुर प्रसाद, प्रदीप सेहरावत, सतेन्दर मान), गरुणाचार्या
बोली में कुल खर्च: ₹ 1,78,70,000<ref name=":2" />
{| class="wikitable sortable"
!खिलाड़ी
!देश
! rowspan="2" |दाम <br/>(लाख)
!श्रेणी
!अंक
! colspan="2" |बाउट्स
! rowspan="2" |बार
रोके गए
! rowspan="2" |अंक/मैच
! rowspan="2" |जीत%
|-
!
!
!
!
!खेले
!जीते
|-
|[[ऐडेलिन ग्रे]] (आईकन खिलाड़ी)
|{{Flagicon|USA}}
|₹37.0
|69 किलो [म]
|47
|5
|5
|0
|9.4
|100
|-
|अमित धनकण
|{{Flagicon|IND}}
|₹29.3
|65 किलो [पु]
|19
|3
|1
|2
|6.3
|33.3
|-
|राहुल अवारे
|{{Flagicon|IND}}
|₹26.6
|57 किलो [पु]
|23
|4
|3
|1
|5.7
|75
|-
|एलिज़बार ओदीकाद्ज़े
|{{Flagicon|GEO}}
|₹19.2
|97 किलो [पु]
|24
|4
|3
|1
|6
|75
|-
|[[लेवान बेरिआनिद्ज़े]]
|{{Flagicon|GEO}}
|₹17.0
|125 किलो [पु]
|6
|2
|2
|1
|3
|100
|-
|[[ओडुनायो अडेकुरोये]]
|{{Flagicon|नाइजीरिया}}
|₹17.0
|53 किलो [म]
|40
|4
|4
|1
|10
|100
|-
|रितु फोगट
|{{Flagicon|IND}}
|₹14.1
|48 किलो [म]
|14
|3
|2
|2
|4.6
|75
|-
|साक्षी मलिक
|{{Flagicon|IND}}
|₹12.9
|58 किलो [म]
|13
|3
|2
|2
|4.3
|75
|-
|परदीप
|{{Flagicon|IND}}
|₹5.6
|74 किलो [पु]
|9
|5
|0
|0
|1.8
|0
|-
|गिओर्गी सकैंदेलिद्ज़े
|{{Flagicon|GEO}}
|
|125 किलो [पु]
|20
|2
|2
|0
|10
|100
|-
! colspan="4" |'''कुल'''
|215
|35
|24
!NA
|6.1
|68.6
|}
=== [[बेंगालुरू योद्धाज़]] ===
मालिक: जेसडब्ल्यु समूह
बोली में कुल खर्च: ₹ 1,71,40,000<ref name=":2" />
{| class="wikitable sortable"
!खिलाड़ी
!देश
! rowspan="2" |दाम <br/>(लाख)
!श्रेणी
!अंक
! colspan="2" |बाउट्स
! rowspan="2" |बार
रोके गए
! rowspan="2" |अंक/मैच
! rowspan="2" |जीत%
|-
!
!
!
!
!खेले
!जीते
|-
|[[नरसिंह यादव]] (आईकन खिलाड़ी)
|{{Flagicon|IND}}
|₹34.50
|74 किलो [पु]
|37
|5
|5
|0
|7.4
|100
|-
|[[बजरंग कुमार|बजरंग पुनिया]]
|{{Flagicon|IND}}
|₹29.5
|65 किलो [पु]
|19
|4
|2
|1
|4.8
|50
|-
|[[पावलो ओलीयनिक|पावलोवा ओलीयनिक]]
|{{Flagicon|UKR}}
|₹29.0
|97 किलो [पु]
|16
|4
|3
|2
|5.3
|66.6
|-
|[[दैवित मोद्ज़्मानाश्विल]]
|{{Flagicon|GEO}}
|₹18.1
|125 किलो [पु]
|16
|3
|2
|2
|5
|66.6
|-
|[[ऐलीसा लैम्पे]]
|{{Flagicon|USA}}
|₹13.0
|48 किलो [म]
|35
|4
|2
|1
|8.8
|50
|-
|संदीप तोमर
|{{Flagicon|IND}}
|₹10.3
|57 किलो [पु]
|14
|5
|1
|0
|2.8
|20
|-
|[[ललिता शेरावत]]
|{{Flagicon|IND}}
|₹4.0
|53 किलो [म]
|11
|5
|1
|0
|2.2
|20
|-
|नवजोत कौर
|{{Flagicon|IND}}
|₹10.0
|69 किलो [म]
|3
|2
|0
|3
|1.5
|0
|-
|[[युलिया रैत्केविच|युलिया रैत्केविच]]
|{{Flagicon|AZE}}
|₹20.0
|58 किलो [म]
|26
|4
|3
|1
|6.5
|75
|-
! colspan="4" |कुल
|177
|35
|19
!NA
|5.1
|54.3
|}
== कार्यक्रम==
[] बाउट जीते
{| class="wikitable"
!मैच
<nowiki>#</nowiki>
दिनांक
!टीम 1
!टीम 1
स्कोर
!टीम 2
स्कोर
!टीम 2
!श्रेणियाँ
रोके गए
!जगह
!विवरण
|-
|1
|10 दिस.
| style="bacKground:lightgreen;" |[[मुम्बई गरुड़ा]]
|43 [5]
|25 [2]
|[[पंजाब रोयल्स]]
|48 किलो [म], 65 किलो [पु]
|[[इंदिरा गाँधी ऐरेना|केडी जाधव कुश्ती स्टेडियम]]
|<ref>{{Cite web|title = Pro Wrestling League: Shock defeat for Geeta as Mumbai beat Punjab in chaotic start - Firstpost|url = http://www.firstpost.com/sports/pro-wrestling-league-shock-defeat-for-geeta-as-mumbai-beat-punjab-in-chaotic-start-2541686.html|website = Firstpost|accessdate = 2015-12-11|archive-url = https://web.archive.org/web/20151214223003/http://www.firstpost.com/sports/pro-wrestling-league-shock-defeat-for-geeta-as-mumbai-beat-punjab-in-chaotic-start-2541686.html|archive-date = 14 दिसंबर 2015|url-status = dead}}</ref>
|-
|2
|11 दिस.
|[[यूपी वैरियर्स]]
|19 [1]
|36 [6]
|style="bacKground:lightgreen;" |[[बेंगालुरू योद्धाज़]]
|69 किलो [म], 125 किलो [म]
|[[इंदिरा गाँधी ऐरेना|केडी जाधव कुश्ती स्टेडियम]]
|<ref>{{Cite web|title = Narsingh Yadav steals the show as Bengaluru Yodhas humble UP Warriors in Pro Wrestling League|url = http://www.ibnlive.com/news/sports/narsingh-yadav-steals-the-show-as-bengaluru-yodhas-humble-up-warriors-in-pro-wrestling-league-1175929.html|website = IBNLive|accessdate = 2015-12-15|archive-url = https://web.archive.org/web/20160128124217/http://www.ibnlive.com/news/sports/narsingh-yadav-steals-the-show-as-bengaluru-yodhas-humble-up-warriors-in-pro-wrestling-league-1175929.html|archive-date = 28 जनवरी 2016|url-status = live}}</ref>
|-
|3
|12 दिस.
|[[दिल्ली वीर]]
|30 [2]
|25 [5]
|style="bacKground:lightgreen;"|[[हरियाणा हैमर्स]]
|53 किलो [म], 57 किलो [पु]
|[[इंदिरा गाँधी ऐरेना|केडी जाधव कुश्ती स्टेडियम]]
|<ref>{{Cite web|title = Pro Wrestling League: ओक्साना हर्हेल, योगेश्वर दत्त दिल्ली के खिलाफ़ हरियाणा की 5-2 से जीत में चमके|url = http://zeenews.india.com/sports/sports/wrestling/pro-wrestling-league-oksana-herhel-yogeshwar-dutt-shine-as-haryana-win-5-2-against-delhi_1833842.html|website = Zee News|publisher = https://plus.google.com/+zeenews/|accessdate = 2015-12-15|archive-url = https://web.archive.org/web/20151222155628/http://zeenews.india.com/sports/sports/wrestling/pro-wrestling-league-oksana-herhel-yogeshwar-dutt-shine-as-haryana-win-5-2-against-delhi_1833842.html|archive-date = 22 दिसंबर 2015|url-status = live}}</ref>
|-
|4
|13 दिस.
| style="bacKground:lightgreen;" |[[पंजाब रोयल्स]]
|36 [6]
|20 [1]
|[[यूपी वैरियर्स]]
|48 किलो [म], 57 किलो [पु]
|[[गुरु नानक स्टेडियम]]
|<ref>{{Cite web|title = Punjab thrash Uttar Pradesh to register their 1st win in Pro Wrestling League|url = http://www.ibnlive.com/news/sports/punjab-thrash-uttar-pradesh-to-register-their-1st-win-in-pro-wrestling-league-1176793.html|website = IBNLive|accessdate = 2015-12-15|archive-url = https://web.archive.org/web/20151216035154/http://www.ibnlive.com/news/sports/punjab-thrash-uttar-pradesh-to-register-their-1st-win-in-pro-wrestling-league-1176793.html|archive-date = 16 दिसंबर 2015|url-status = live}}</ref>
|-
|5
|14 दिस.
|style="bacKground:lightgreen;" |[[मुम्बई गरुड़ा]]
|41 [5]
|19 [2]
|[[बेंगालुरू योद्धाज़]]
|97 किलो [पु], 58 किलो [म]
|[[गुरु नानक स्टेडियम]]
|<ref>{{Cite web|title = प्रो रेसलिंग लीग: मुंबई गरूड़ ने बेंगलुरु योद्धा को हराया|url = http://www.inkhabar.com/sports/11003-Mumbai-defeated-Bengaluru-in-Pro-Wrestling-League%20|website = inkhabar.com|publisher = इन खबर|date = 2015-12-14|accessdate = 2015-12-28}}{{Dead link|date=मई 2026 |bot=InternetArchiveBot }}</ref>
|-
|6
|15 दिस.
|[[दिल्ली वीर]]
|38 [3]
|35 [4]
|style="bacKground:lightgreen;"|[[यूपी वैरियर्स]]
|69 किलो [म], 65 किलो [पु]
|[[गुरु नानक स्टेडियम]]
|<ref>{{Cite web|title = Pro Wrestling League - Day 6: UP Warriors complete incredible comeback to edge out Delhi Veer|url = http://www.sportskeeda.com/wrestling/pro-wrestling-league-day-6-up-warriors-complete-incredible-comeback-to-edge-out-delhi-veer|website = www.sportskeeda.com|publisher = https://plus.google.com/101781064736549245960/|accessdate = 2015-12-15|archive-url = https://web.archive.org/web/20151222094331/http://www.sportskeeda.com/wrestling/pro-wrestling-league-day-6-up-warriors-complete-incredible-comeback-to-edge-out-delhi-veer|archive-date = 22 दिसंबर 2015|url-status = dead}}</ref>
|-
|7
|16 दिस.
|style="bacKground:lightgreen;"|[[हरियाणा हैमर्स]]
|26 [4]
|42 [3]
|[[बेंगालुरू योद्धाज़]]
|48 किलो [म], 125 किलो [पु]
|[[गुरु नानक स्टेडियम]]
|<ref>{{Cite web|title = PWL: सातवें दिन हरियाणा हैमर्स ने बेंगलुरु योद्धा को दी पटखनी|url = http://www.inkhabar.com/sports/11107-Hariyana-hammers-beats-Bangalore-yodha-on-seventh-day|website = inkhabar.com|publisher = इन खबर|date = 2015-12-16|accessdate = 2015-12-28|archive-url = https://web.archive.org/web/20170116190255/http://www.inkhabar.com/sports/11107-Hariyana-hammers-beats-Bangalore-yodha-on-seventh-day|archive-date = 16 जनवरी 2017|url-status = dead}}</ref>
|-
|8
|17 दिस.
| style="bacKground:lightgreen;" |[[मुम्बई गरुड़ा]]
|52 [5]
|21 [2]
|[[यूपी वैरियर्स]]
|48 किलो [म], 125 किलो [पु]
|[[हयात रिजेन्सी]]
|<ref>{{Cite web|title =प्रो रेसलिंग लीग: आठवें दिन मुंबई गरुड़ ने यूपी वॉरियर्स को हराया|url =http://www.inkhabar.com/sports/11150-Pro-wrestling-league-mumbai-beats-UP-warriors-on-eigth-day|website =inkhabar.com|publisher =इन खबर|date =2015-12-17|accessdate =2015-12-28|archive-url =https://web.archive.org/web/20170116190300/http://www.inkhabar.com/sports/11150-Pro-wrestling-league-mumbai-beats-UP-warriors-on-eigth-day|archive-date =16 जनवरी 2017|url-status =dead}}</ref>
|-
|9
|18 दिस.
|[[दिल्ली वीर]]
|34 [3]
|31 [4]
|style="bacKground:lightgreen;" |[[पंजाब रोयल्स]]
|97 किलो [पु], 53 किलो [म]
|[[हयात रिजेन्सी]]
|<ref>{{Cite web|url = http://www.prowrestlingleague.com/preview-18-12-15.php|title = game update|date = |accessdate = |website = prowrestlingleague.com|publisher = prowrestlingleague.com|last = |first = |archive-url = https://web.archive.org/web/20151222101706/http://www.prowrestlingleague.com/preview-18-12-15.php|archive-date = 22 दिसंबर 2015|url-status = dead}}</ref>
|-
|10
|19 दिस.
|[[यूपी वैरियर्स]]
|31 [3]
|30 [4]
|style="bacKground:lightgreen;" |[[हरियाणा हैमर्स]]
|58 किलो [म], 97 किलो [पु]
|[[जीबीयू इनडोर स्टेडियम]]
|<ref>{{Cite web|title = Yogeshwar takes haryana hammers to third consecutive win in Pro Wrestling League|url = http://www.ibnlive.com/news/sports/yogeshwar-takes-haryana-hammers-to-third-consecutive-win-in-pro-wrestling-league-1179262.html|website = IBNLive|accessdate = 2015-12-22|archive-url = https://web.archive.org/web/20160128125814/http://www.ibnlive.com/news/sports/yogeshwar-takes-haryana-hammers-to-third-consecutive-win-in-pro-wrestling-league-1179262.html|archive-date = 28 जनवरी 2016|url-status = live}}</ref>
|-
|11
|20 दिस.
|style="bacKground:lightgreen;" |[[बेंगालुरू योद्धाज़]]
|52 [5]
|44 [2]
|[[पंजाब रोयल्स]]
|65 किलो [पु], 69 किलो [म]
|[[जीबीयू इनडोर स्टेडियम]]
|<ref>{{Cite web|title = बेंगालुरू योद्धाज़ ने पंजाब रोयल्स को 5-2 से हराया|url = http://www.ibnlive.com/news/sports/bengaluru-yodhas-post-5-2-win-over-punjab-royals-in-pro-wrestling-league-1179588.html|website = IBNLive|accessdate = 2015-12-22|archive-url = https://web.archive.org/web/20160128131338/http://www.ibnlive.com/news/sports/bengaluru-yodhas-post-5-2-win-over-punjab-royals-in-pro-wrestling-league-1179588.html|archive-date = 28 जनवरी 2016|url-status = live}}</ref>
|-
|12
|21 दिस.
|[[दिल्ली वीर]]
|20 [2]
|47 [5]
|style="bacKground:lightgreen;"|[[मुम्बई गरुड़ा]]
|58 किलो [म], 57 किलो [पु]
|[[इंदिरा गाँधी ऐरेना|केडी जाधव कुश्ती स्टेडियम]]
|<ref name=":3">{{Cite web|title = Pro Wrestling League: मुम्बई गरुड़ा Become First Team to Enter Semis|url = http://sports.ndtv.com/wrestling/news/253441-pro-wrestling-league-mumbai-garuda-become-first-team-to-enter-semis|website = NDTVSports.com|accessdate = 2015-12-22|archive-url = https://web.archive.org/web/20151223011040/http://sports.ndtv.com/wrestling/news/253441-pro-wrestling-league-mumbai-garuda-become-first-team-to-enter-semis|archive-date = 23 दिसंबर 2015|url-status = dead}}</ref>
|-
|13
|22 दिस.
|[[हरियाणा हैमर्स]]
|20 [2]
|43 [5]
|style="bacKground:lightgreen;" |[[पंजाब रोयल्स]]
|53 किलो [म], 74 किलो [पु]
|[[इंदिरा गाँधी ऐरेना|केडी जाधव कुश्ती स्टेडियम]]
|<ref>{{Cite web|title = Latest News on Pro Wrestling League India, Indian wrestler - www.prowrestlingleague.com|url = http://www.prowrestlingleague.com/preview-22-12-15.php|website = www.prowrestlingleague.com|accessdate = 2015-12-24|archive-url = https://web.archive.org/web/20151231134154/http://www.prowrestlingleague.com/preview-22-12-15.php|archive-date = 31 दिसंबर 2015|url-status = dead}}</ref>
|-
|14
|23 दिस.
|[[बेंगालुरू योद्धाज़]]
|28 [3]
|43 [4]
|style="bacKground:lightgreen;" |[[दिल्ली वीर]]
|69 किलो [म], 97 किलो [पु]
|[[कोरमंगला इनडोर स्टेडियम]]
|<ref>{{Cite web|title = Latest News on Pro Wrestling League India, Indian पहलवान - www.prowrestlingleague.com|url = http://www.prowrestlingleague.com/preview-23-12-15.php|website = www.prowrestlingleague.com|accessdate = 2015-12-24|archive-url = https://web.archive.org/web/20151226230432/http://www.prowrestlingleague.com/preview-23-12-15.php|archive-date = 26 दिसंबर 2015|url-status = dead}}</ref>
|-
|15
|24 दिस.
|style="bacKground:lightgreen;" |[[मुम्बई गरुड़ा]]
|32 [4]
|24 [3]
|[[हरियाणा हैमर्स]]
|53 किलो [म], 65 किलो [पु]
|[[कोरमंगला इनडोर स्टेडियम]]
|<ref>{{Cite web|title = Latest News on Pro Wrestling League India, Indian पहलवान - www.prowrestlingleague.com|url = http://www.prowrestlingleague.com/preview-24-12-15.php|website = www.prowrestlingleague.com|accessdate = 2015-12-24|archive-url = https://web.archive.org/web/20151231122743/http://www.prowrestlingleague.com/preview-24-12-15.php|archive-date = 31 दिसंबर 2015|url-status = dead}}</ref>
|-
! colspan="9" |SEMIFINALS
|-
|SF1
|25 दिस.
| style="bacKground:lightgreen;" |[[मुम्बई गरुड़ा]]
|5
|2
|[[बेंगालुरू योद्धाज़]]
|58 किलो [म], 57 किलो [पु]
|[[इंदिरा गाँधी ऐरेना|केडी जाधव कुश्ती स्टेडियम]]
|<ref>{{Cite web|title = Latest News on Pro Wrestling League India, Indian पहलवान - www.prowrestlingleague.com|url = http://www.prowrestlingleague.com/preview-25-12-15.php|website = www.prowrestlingleague.com|accessdate = 2015-12-26|archive-url = https://web.archive.org/web/20151227151451/http://www.prowrestlingleague.com/preview-25-12-15.php|archive-date = 27 दिसंबर 2015|url-status = dead}}</ref>
|-
|SF2
|26 दिस.
| style="bacKground:lightgreen;" |[[हरियाणा हैमर्स]]
|4
|3
|[[पंजाब रोयल्स]]
|48 किलो [म], 57 किलो [पु]
|[[इंदिरा गाँधी ऐरेना|केडी जाधव कुश्ती स्टेडियम]]
|<ref>{{Cite web|title = Latest News on Pro Wrestling League India, Indian पहलवान - www.prowrestlingleague.com|url = http://www.prowrestlingleague.com/preview-26-12-15.php|website = www.prowrestlingleague.com|accessdate = 2015-12-26|archive-url = https://web.archive.org/web/20151227160814/http://www.prowrestlingleague.com/preview-26-12-15.php|archive-date = 27 दिसंबर 2015|url-status = dead}}</ref>
|-
! colspan="9" |फाइनल
|-
|फाइनल
|27 दिस.
| style="bacKground:lightgreen;" |[[मुम्बई गरुड़ा]]
|7
|2
|[[हरियाणा हैमर्स]]
!NA
|[[इंदिरा गाँधी ऐरेना|केडी जाधव कुश्ती स्टेडियम]]
|<ref>{{Cite web|title = Latest News on Pro Wrestling League India, Indian पहलवान - www.prowrestlingleague.com|url = http://www.prowrestlingleague.com/preview-27-12-15.php|website = www.prowrestlingleague.com|accessdate = 2015-12-27|archive-url = https://web.archive.org/web/20151231064731/http://www.prowrestlingleague.com/preview-27-12-15.php|archive-date = 31 दिसंबर 2015|url-status = dead}}</ref>
|}
== अंक तालिका ==
20 दिसम्बर 2015 के अनुसार..<ref>{{Cite web|title = Latest News on Pro Wrestling League India, Indian पहलवान - www.prowrestlingleague.com|url = http://www.prowrestlingleague.com/fixtures.php|website = www.prowrestlingleague.com|accessdate = 2015-12-11|archive-url = https://web.archive.org/web/20151230112012/http://www.prowrestlingleague.com/fixtures.php|archive-date = 30 दिसंबर 2015|url-status = dead}}</ref>
{| class="wikitable sortable"
!वरीयता
!टीम
!मैच
!जीत
!हार
!बाउट
अंक
!बाउट
जीते
!बाउट
हारे
!बाउट
अंतर
!मैच
अंक
!टिप्पणियाँ
|-
| style="bacKground:lightgreen;" |1
| style="bacKground:lightgreen;" |[[मुम्बई गरुड़ा]]
| style="bacKground:lightgreen;" |5
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| style="bacKground:lightgreen;" |0
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| style="bacKground:lightgreen;" |24
| style="bacKground:lightgreen;" |11
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| style="bacKground:lightgreen;" |10
| rowspan="4" style="bacKground:lightgreen;" |से.फा. के लिये योग्य
|-
| style="bacKground:lightgreen;" |2
| style="bacKground:lightgreen;" |[[पंजाब रोयल्स]]
| style="bacKground:lightgreen;" |5
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| style="bacKground:lightgreen;" |3
| style="bacKground:lightgreen;" |6
|-
| style="bacKground:lightgreen;" |3
| style="bacKground:lightgreen;" |[[हरियाणा हैमर्स]]
| style="bacKground:lightgreen;" |5
| style="bacKground:lightgreen;" |3
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| style="bacKground:lightgreen;" |18
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|-
| style="bacKground:lightgreen;" |4
| style="bacKground:lightgreen;" |[[बेंगालुरू योद्धाज़]]
| style="bacKground:lightgreen;" |5
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|-
|5
|[[दिल्ली वीर]]
|5
|1
|4
|165
|14
|21
| -7
|2
|
|-
|6
|[[यूपी वैरियर्स]]
|5
|1
|4
|126
|11
|24
| -13
|2
|
|}
=== नॉक आउट चरण===
{{Round4
<!-- Date-Venue|Team 1|स्कोर 1|Team 2|स्कोर 2 -->
<!-- सेमी फाइनल -->
|25 दिसम्बर–[[इंदिरा गाँधी ऐरेना|केडी जाधव कुश्ती स्टेडियम]], [[दिल्ली]]|'''[[मुम्बई गरुड़ा]]'''|5|[[बेंगालुरू योद्धाज़]]|2|26 दिसम्बर–[[इंदिरा गाँधी ऐरेना|केडी जाधव कुश्ती स्टेडियम]], [[दिल्ली]]|[[पंजाब रोयल्स]]|3|'''[[हरियाणा हैमर्स]]'''|4
<!-- final -->
|27 दिसम्बर–[[इंदिरा गाँधी ऐरेना|केडी जाधव कुश्ती स्टेडियम]], [[दिल्ली]]|[[मुम्बई गरुड़ा]]'''|7|[[हरियाणा हैमर्स]]'''|2
}}
=== सेमी फाइनल ===
{| class="wikitable"
! colspan="5" |सेमी फाइनल 1
! rowspan="2" |वजन श्रेणी
! colspan="5" |सेमी फाइनल 2
|-
!बाउट
![[मुम्बई गरुड़ा]]
!अंक 1
!अंक 2
![[बेंगालुरू योद्धाज़]]
!बाउट
![[हरियाणा हैमर्स]]
!अंक 1
!अंक 2
![[पंजाब रोयल्स]]
|-
|1
| style="bacKground:lightgreen;" |ओदिकाद्ज़े एलिज़बार
|7
|2
|[[पावलो ओलीयनिक|पावलोवा ओलीयनिक]]
!97 किलो [पु]
|1
| style="bacKground:lightgreen;" |आंद्रीतेसी वलेरी
|5
|4
|मौसम खत्री
|-
|2
|अमित धनकण
|4
|10
| style="bacKground:lightgreen;" |[[बजरंग कुमार|बजरंग पुनिया]]
!65 किलो [पु]
|2
|विशाल राणा
|2
|12
| style="bacKground:lightgreen;" |रजनीश
|-
|3
| style="bacKground:lightgreen;" |रितु फोगाट
|10
|4
|[[ऐलीसा लैम्पे]]
!48 किलो [म]
|3
|निर्मल देवी
! colspan="2" |रोके गए
|याना रैटिंगन
|-
|4
| style="bacKground:lightgreen;" |[[ओडुनायो अडेकुरोये]]
|10
|0
|ललिता शेरावत
!53 किलो [म]
|4
| style="bacKground:lightgreen;" |तात्याना किट
|5
|4
|प्रियंका फोगाट
|-
|5
|परदीप
|0
|7
| style="bacKground:lightgreen;" |[[नरसिंह यादव]]
!74 किलो [पु]
|5
| style="bacKground:lightgreen;" |[[लिवान लोपेज़|इवान लोपेज़ एज़्कुई]]
|5
|1
|परवीन राणा
|-
|6
| style="bacKground:lightgreen;" |[[ऐडेलिन ग्रे]]
|10
|0
|नवजोत कौर
!69 किलो [म]
|6
|[[गीतिका जाखड़]]
|0
|4
| style="bacKground:lightgreen;" |[[वैसीलीज़ा मार्ज़ालिउक]]
|-
|7
| style="bacKground:lightgreen;" |गिओर्गी सकैंदेलिद्ज़े
|7
|4
|दैवित मोद्ज़्मानाश्विल
!125 किलो [पु]
|7
|हितेन्दर
|1
|5
| style="bacKground:lightgreen;" |[[जर्गलसाइखान चुलुनबात|जर्गलसाइखान चुलुनबात]]
|-
|8
|राहुल अवारे
! colspan="2" |रोके गए
|संदीप तोमर
!57 किलो [पु]
|8
|नितिन
! colspan="2" |रोके गए
|व्लादिमिर खिन्चेगैशविली
|-
|9
|साक्षी मलिक
! colspan="2" |रोके गए
|[[युलिया रैत्केविच|युलिया रैत्केविच]]
!58 किलो [म]
|9
| style="bacKground:lightgreen;" |ओक्साना हर्हेल
|4
|0
|[[गीता फोगट]]
|-
! colspan="2" |कुल अंक
|48
|27
!कुल अंक
! rowspan="2" |विवरण
|
!कुल अंक
|22
|30
!कुल अंक
|-
! colspan="2" |बाउट जीते
|5
|2
!बाउट जीते
|
!बाउट जीते
|4
|3
!बाउट जीते
|}
=== फाइनल===
{| class="wikitable"
![[मुम्बई गरुड़ा]]
!अंक 1
!वजन श्रेणी
!अंक 2
![[हरियाणा हैमर्स]]
|-
| style="bacKground:lightgreen;" |अमित धनकण
|12
!65 किलो [पु]
|0
|विशाल राणा
|-
|साक्षी मलिक
|4
!58 किलो [म]
|4
| style="bacKground:lightgreen;" |ओक्साना हर्हेल
|-
|परदीप
|6
!74 किलो [पु]
|11
| style="bacKground:lightgreen;" |[[लिवान लोपेज़|इवान लोपेज़ एज़्कुई]]
|-
| style="bacKground:lightgreen;" |[[ऐडेलिन ग्रे]]
|10
!69 किलो [म]
|0
|[[गीतिका जाखड़]]
|-
| style="bacKground:lightgreen;" |गिओर्गी सकैंदेलिद्ज़े
|10
!125 किलो [पु]
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|हितेन्दर
|-
| style="bacKground:lightgreen;" |[[ओडुनायो अडेकुरोये]]
|9
!53 किलो [म]
|0
|तात्याना किट
|-
| style="bacKground:lightgreen;" |ओदिकाद्ज़े एलिज़बार
|6
!97 किलो [पु]
|4
|आंद्रीतेसी वलेरी
|-
| style="bacKground:lightgreen;" |रितु फोगट
|4
!48 किलो [म]
|4
|निर्मल देवी
|-
| style="bacKground:lightgreen;" |राहुल अवारे
|6
!57 किलो [पु]
|3
|नितिन
|-
!कुल अंक
|67
! rowspan="2" |
|26
!कुल अंक
|-
!बाउट जीते
|7
|2
!बाउट जीते
|}
== खिलाड़ी साँख्यिकी==
सिर्फ वही खिलाड़ी जिन्होंने कम से कम पाँच मैच खेले हैं और 100% जीत का रिकॉर्ड है को ही यहाँ शामिल किया गया है।
{| class="wikitable"
!खिलाड़ी
!देश
!टीम
!बाउट
खेले
!जीत%
!कुल
अंक
!अंक/
मैच
!जीत
तकनीकी बढ़त
|-
|[[ऐडेलिन ग्रे]]
|{{Flagicon|USA}}
|[[ऐडेलिन ग्रे|रेवन्ता मुम्बई गरुड़ा]]
|7
|100.00
|67
|9.5
|6
|-
|[[ओडुनायो अडेकुरोये]]
|{{Flagicon|नाइजीरिया}}
|[[मुंबई|रेवन्ता मुम्बई गरुड़ा]]
|6
|100.00
|59
|9.8
|4
|-
|[[विनेश फोगट]]
|{{Flagicon|IND}}
|[[दिल्ली|एम यू दिल्ली वीर]]
|5
|100.00
|54
|10.8
|3
|-
|[[व्लादिमिर खिन्चेगैशविली]]
|{{Flagicon|GEO}}
|[[सीडीआर पंजाब रोयल्स]]
|5
|100.00
|28
|7
|1
|-
|[[नरसिंह यादव]]
|{{Flagicon|IND}}
|[[बेंगालुरू योद्धाज़]]
|6
|100.00
|44
|7.3
|0
|}
== पुरस्कार==
{| class="wikitable"
!पुरस्कार
!श्रेणी
!पहलवान
!देश
!टीम
|-
|<abbr title="श्रृंखला का सर्वश्रेष्ठ पहलवान">रेस्लर ऑफ़ द सीरीज़</abbr>
| rowspan="2" |महिला
|[[विनेश फोगट]]
|{{Flagicon|IND}}
|[[दिल्ली|दिल्ली वीर]]
|-
|रेस्लर ऑफ़ द सीरीज़
|[[ओडुनायो अडेकुरोये]]
|{{Flagicon|नाइजीरिया}}
|[[मुंबई|रेवन्ता मुम्बई गरुड़ा]]
|-
|रेस्लर ऑफ़ द सीरीज़
|पुरुष
|[[नरसिंह यादव]]
|{{Flagicon|IND}}
|[[बेंगालुरू योद्धाज़]]
|-
|आईकन मेन्टर
|NA
|[[योगेश्वर दत्त]]
|{{Flagicon|IND}}
|[[हरियाणा हैमर्स]]
|}
==बाहरी कड़ियाँ==
* [https://web.archive.org/web/20151212223948/http://www.prowrestlingleague.com/ आधिकारिक वेबसाइट]
* [https://web.archive.org/web/20160305154634/https://twitter.com/Official_PWL?ref_src=twsrc%5Etfw ट्विटर खाता]
==सन्दर्भ==
{{टिप्पणीसूची|2}}
[[श्रेणी:२०१५ विश्व कुश्ती प्रतियोगिताएँ| ]]
[[श्रेणी:विश्व कुश्ती प्रतियोगिताएँ]]
[[श्रेणी:भारत में खेल]]
[[श्रेणी:भारत में कुश्ती]]
tamae6pd372sfuy9s54dpqazciopvu9
फुफ्फुस कैन्सर
0
713352
6547991
6530241
2026-05-03T10:12:39Z
InternetArchiveBot
500600
Rescuing 1 sources and tagging 0 as dead.) #IABot (v2.0.9.5
6547991
wikitext
text/x-wiki
{{merge|फुफ्फुस कर्कट रोग}}
{{Infobox disease
|Name = फुफ्फुस कैन्सर <br>Lung cancer
|Image = LungCACXR.PNG
|Caption = A plane [[chest X-ray]] showing a tumor in the lung (marked by arrow)
|DiseasesDB = 7616
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}}
[[फुफ्फुस]] के दुर्दम अर्बुद (malignant tumor) को '''फुफ्फुस कैन्सर''' या 'फेफड़ों का कैन्सर' (Lung cancer या lung carcinoma) कहते हैं। इस रोग में फेफड़ों के [[ऊतक|ऊतकों]] में अनियंत्रित वृद्धि होने लगती है। यदि इसे अनुपचारित छोड़ दिया जाय तो यह वृद्धि [[विक्षेप]] कही जाने वाली प्रक्रिया से, फेफड़े से आगे नज़दीकी कोशिकाओं या शरीर के अन्य भागों में फैल सकता है। अधिकांश कैंसर जो फेफड़े में शुरु होते हैं और जिनको फेफड़े का प्राथमिक कैंसर कहा जाता है [[कार्सिनोमस]] होते हैं जो [[epithelium|उपकलीय]] कोशिकाओं से निकलते हैं। मुख्य प्रकार के फेफड़े के कैंसर छोटी-कोशिका फेफड़ा कार्सिनोमा (एससीएलसी) हैं, जिनको ओट कोशिका कैंसर तथा गैर-छोटी-कोशिका फेफड़ा कार्सिनोमा भी कहा जाता है। सबसे आम [[लक्षणों]] में खांसी ([[Hemoptysis|खूनी खांसी]] शामिल), वज़न में कमी तथा सांस का फूंलना शामिल हैं।<ref name="Harrison" />
फेफड़े के कैंसर का सबसे आम कारण [[tobacco smoking|तंबाकू के धुंए]] से अनावरण है,<ref name="Merck" /> जिसके कारण 80–90% फेफड़े के कैंसर होता है।<ref name="Harrison" /> धूम्रपान न करने वाले 10–15% फेफड़े के कैंसर के शिकार होते हैं,<ref name="Thun" /> और ये मामले अक्सर [[genetics|आनुवांशिक कारक]],<ref name="MurrayNadel46" /> [[रैडॉन]] गैस,<ref name="MurrayNadel46" /> [[ऐसबेस्टस]],<ref name="O'Reilly" /> और [[वायु प्रदूषण]]<ref name="MurrayNadel46" /> के संयोजन तथा [[passive smoking|अप्रत्यक्ष धूम्रपान]] से होते हैं।<ref name="AUTOREF" /><ref name="AUTOREF1" /> [[सीने के रेडियोग्राफ]] तथा [[अभिकलन टोमोग्राफी]] (सीटी स्कैन) द्वारा फेफड़े के कैंसर को देखा जा सकता है। [[medical diagnosis|निदान]] की पुष्टि [[बायप्सी]]<ref name="Holland-Frei78" /> से होती है जिसे [[ब्रांकोस्कोपी]] द्वारा किया जाता है या सीटी- मार्गदर्शन में किया जाता है। उपचार तथा दीर्घ अवधि परिणाम कैंसर के प्रकार, [[staging (pathology)|चरण]] (फैलाव के स्तर) तथा [[प्रदर्शन स्थिति]]से मापे गए, व्यक्ति के समग्र स्वास्थ्य पर निर्भर करते हैं।
आम उपचारों में [[शल्यक्रिया]], [[कीमोथेरेपी]] तथा [[radiation therapy|रेडियोथेरेपी]] शामिल है। एनएससीएलसी का उपचार कभी-कभार शल्यक्रिया से किया जाता है जबकि एससीएलसी का उपचार कीमोथेरेपी तथा रेडियोथेरेपी से किया जाता है।<ref>{{cite book |last=Chapman | first=S |author2=Robinson G, Stradling J, West S | title=Oxford Handbook of Respiratory Medicine |edition=2nd | chapter=Chapter 31 | publisher=Oxford University Press | year=2009 | isbn=9-780199-545162 }}</ref> समग्र रूप से, अमरीका के लगभग 15 प्रतिशत लोग फेफड़े के कैंसर के निदान के बाद 5 वर्ष तक [[survival rate|बचते]] हैं।<ref name="Collins" /> पूरी दुनिया में पुरुषों व महिलाओं में फेफड़े का [[कैंसर]], कैंसर से होने वाली मौतों में सबसे आम कारण है और यह 2008 में वार्षिक रूप से [[:Category:Deaths from lung cancer|1.38 मिलियन मौतों]] का कारण था।<ref name="GLOBOCAN" />
{{TOC limit|3}}
== चिह्न व लक्षण ==
फेफड़े के कैंसर से संबंधित लक्षण:<ref name="Harrison" />
* श्वसन लक्षण: [[खाँसी]], [[hemoptysis|खूनी खाँसी]], [[wheeze|घरघराहट]] or [[dyspnea|सांस की तकलीफ]]
* प्रणालीगत लक्षण: वज़न में कमी, [[बुखार]], अंगली के नाखूनों में [[Nail clubbing|क्लबिंग]] या [[Fatigue (physical)|थकान]]
* स्थानीय संपीड़न के कारण लक्षण: [[सीने का दर्द]], [[हड्डी का दर्द]], [[सुपीरियन वेना कावा ऑब्सट्रक्शन]], [[dysphagia|निगलने में कठिनाई]]
यदि कैसर [[वायुमार्ग]] में होता है तो इससे वायुमार्ग बाधित हो सकता है जिससे [[dyspnea|श्वसन संबंधी परेशानियां]] हो सकती हैं। यह बाधा, रुकावट के पीछे स्राव के संचय को बढ़ावा दे सकती है तथा [[निमोनिया]] हो सकता है।<ref name="Harrison" />
ट्यूमर के प्रकार के आधार पर, तथाकथित [[Paraneoplastic syndrome|पैरानियोप्लास्टिक परिदृष्य]] रोग की ओर ध्यानाकर्षित कर सकता है।<ref name="Honnorat" /> फेफड़े के कैंसर में इस परिदृष्य में [[लाम्बर्ट-एटन माएस्थेनिक सिंड्रोम]] ([[autoimmune disorder|ऑटोएंटीबॉडी]] के कारण मांसपेशीय कमजोरी), [[हाइपरकैल्सेमिया]] या [[सिंड्रोम ऑफ इनएप्रोप्रिएट एंटीडाइयूरेटिक हॉर्मोन]] (एसआईएडीएच) शामिल हो सकते हैं। [[Apex of lung|फेफड़े के शीर्ष में]] ट्यूमर जिनको [[पैनकोस्ट ट्यूमर]] कहा जाता है, [[अनुकंपी तंत्रिका तंत्र]] के स्थानीय भाग में दाखिल हो सकता है जिससे कि [[हॉर्नेस सिंड्रोम]] हो जाता है (आँख की पुतली और उस ओर की छोटी पुतली का गिरना), साथ ही [[ब्रैकिएल प्लैक्सेस]] में क्षति होना।<ref name="Harrison" />
फेफड़े के कैंसर के कई लक्षण (भूख कम लगना, वज़न घटना, बुखार, थकान) विशिष्ट नहीं हैं।<ref name="Holland-Frei78" /> बहुत से लोगों में, लक्षण दिखने और चिकित्सा की मांग करने के समय तक कैंसर मूल स्थान से अधिक फैल चुका होता है। फैलने के आम स्थानों में मस्तिष्क, हड्डी [[अधिवृक्क ग्रंथि]], फेफड़े के विपरीत, यकृत, [[हृदयावरण]] और [[गुर्दा]] शामिल है।<ref name="ajcc" /> फेफड़े के कैंसर से पीड़ित लोगों में से 10% में निदान के समय लक्षण नहीं दिखते हैं; ये कैंसर सीने की रेडियोग्राफी के समय दुर्घटनावश पता चलते हैं।<ref name="Collins" />
== कारण ==
कैंसर [[डीएनए]] को आनुवांशिक क्षति से विकसित होता है। यह आनुवांशिक क्षति कोशिका के सामान्य प्रकार्यों को प्रभावित करती है जिसमें कोशिका प्रसार, क्रमादेशित कोशिका मृत्यु ([[एपॉटॉसिस]]) तथा डीएनए मरम्मत शामिल है। जैसे जैसे क्षति एकत्रित होती जाती है, कैंसर का जोखिम बढ़ता जाता है।<ref name="Holland-Frei8">{{Cite book | last=Brown | first=KM |author2=Keats JJ, Sekulic A et al. |title=Holland-Frei Cancer Medicine | publisher=People's Medical Publishing House USA | year=2010 | chapter=8 | edition=8th| isbn=978-1607950141 }}</ref>
=== धूम्रपान ===
[[Image:Cancer smoking lung cancer correlation from NIH.svg|thumb|ग्राफ, जो यह दर्शाता है कि किस तरह से अमरीका में तम्बाकू उत्पादों की बिक्री में 20 वीं सदी के प्रथम चार दशकों में सामान्य वृद्धि (प्रति व्यक्ति सिगरेट प्रति वर्ष) के साथ 1930, 40 व 50 के दशक में फेफड़े के कैंसर होने की दर में तीव्र वृद्धि हुई (फेफड़े के कैंसर से प्रति एक लाख पुरुषों में प्रतिवर्ष मुत्यु)]]
[[File:Pathology of the lung (cancer).jpg|thumb|मानव फेफड़े की अनुप्रस्थ काट: ऊपरी हिस्से का सफेद क्षेत्र कैंसर है; काले क्षेत्र [[Tobacco smoking|धूम्रपान]] के कारण रंगहीन हुए क्षेत्र हैं।]]
[[Tobacco smoking|धूम्रपान]], विशेष रूप से [[सिगरेट]] फेफड़े के कैंसर का सबसे बड़ा कारण हैं।<ref name="AUTOREF5" /> सिगरेट के धुएं में 60 से अधिक ज्ञात [[कार्सिनोजेन]] होते हैं,<ref name="Hecht" /> जिनमें [[रैडॉन]] क्षय अनुक्रम के [[रेडियोआइसोटोप]], [[नाइट्रोसमाइन]] और [[बेंज़ोपाइरीन]] शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, निकोटिन अनावृत ऊतकों में कैसर की वृद्धि की प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को दबाता दिखता है।<ref name="AUTOREF6" /> विकिसत देशों में वर्ष 2000 में पुरुषों में फेफड़े के कैंसर से होने वाली मौतों का 90 प्रतिशत (महिलाओं में 70 प्रतिशत) धूम्रपान के कारण था।<ref name="Peto" /> धूम्रपान के कारण फेफड़े के कैंसर के 80–90% मामले होते हैं।<ref name="Harrison" />
[[निष्क्रिय धूम्रपान]]—किसी अन्य के धूम्रपान के धुएं का श्वसन—धूम्रपान न करने वालों में कैंसर का कारण होता है। किसी निष्क्रिय धूम्रपानकर्ता को एक धूम्रपानकर्ता के साथ रहने वाले या काम करने वाले के रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है। अमरीका,<ref name="AUTOREF7">{{Cite journal | last=California Environmental Protection Agency | title=Health effects of exposure to environmental tobacco smoke. California Environmental Protection Agency | journal=Tobacco Control | volume=6 | issue=4 | pages=346–353 | year=1997 | url=http://www.druglibrary.org/schaffer/tobacco/caets/ets-main.htm | pmid=9583639 | doi=10.1136/tc.6.4.346 | pmc=1759599 | access-date=13 मई 2016 | archive-url=https://web.archive.org/web/20070808045344/http://druglibrary.org/schaffer/tobacco/caets/ets-main.htm | archive-date=8 अगस्त 2007 | url-status=live }}<br />* {{Cite journal | last=CDC | authorlink=Centers for Disease Control and Prevention | title=State-specific prevalence of current cigarette smoking among adults, and policies and attitudes about secondhand smoke—United States, 2000 | journal=Morbidity and Mortality Weekly Report | volume=50 | issue=49 | pages=1101–1106 | publisher=CDC | location=Atlanta, Georgia | month=December | year=2001 | url=http://www.cdc.gov/mmwr/preview/mmwrhtml/mm5049a1.htm | pmid=11794619 | author1=Centers for Disease Control and Prevention (CDC) | access-date=13 मई 2016 | archive-url=https://web.archive.org/web/20160516203113/http://www.cdc.gov/mmwr/preview/mmwrhtml/mm5049a1.htm | archive-date=16 मई 2016 | url-status=live }}</ref><ref name="Alberg">{{Cite journal | last=Alberg | first=AJ | author2=Samet JM | title=Epidemiology of lung cancer | journal=Chest | volume=132 | issue=S3 | pages=29S–55S | publisher=American College of Chest Physicians | month=September | year=2007 | url=http://chestjournal.chestpubs.org/content/132/3_suppl/29S.long | pmid=17873159 | doi=10.1378/chest.07-1347 | access-date=13 मई 2016 | archive-date=29 मार्च 2020 | archive-url=https://web.archive.org/web/20200329053623/http://chestjournal.chestpubs.org/content/132/3_suppl/29S.long | url-status=dead }}</ref> यूरोप,<ref>{{Cite journal | last=Jaakkola | first=MS | author2=Jaakkola JJ | title=Impact of smoke-free workplace legislation on exposures and health: possibilities for prevention | journal=European Respiratory Journal | volume=28 | issue=2 | pages=397–408 | year=2006 | month=August | url=http://erj.ersjournals.com/content/28/2/397.long | pmid=16880370 | doi=10.1183/09031936.06.00001306 | access-date=13 मई 2016 | archive-url=https://web.archive.org/web/20130129003845/http://erj.ersjournals.com/content/28/2/397.long | archive-date=29 जनवरी 2013 | url-status=live }}</ref> यूके,<ref>{{Cite journal | last=Parkin | first=DM | title=Tobacco—attributable cancer burden in the UK in 2010 | journal=British Journal of Cancer | volume=105 | issue=Suppl. 2 | pages=S6–S13 | month=December | year=2011 | pmid=22158323 | doi=10.1038/bjc.2011.475 | url=http://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC3252064/?tool=pubmed | pmc=3252064 | access-date=13 मई 2016 | archive-url=https://web.archive.org/web/20170904155130/https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC3252064/?tool=pubmed | archive-date=4 सितंबर 2017 | url-status=live }}</ref> और ऑस्ट्रेलिया<ref name="NHMRC" /> में किए गए अध्ययन, निष्क्रिय धुएं से अनावृत्त लोगों में जोखिम की महत्वपूर्ण वृद्धि को लगातार दर्शा रहे हैं।<ref name="Taylor">{{Cite journal | last=Taylor | first=R | author2=Najafi F, Dobson A | title=Meta-analysis of studies of passive smoking and lung cancer: effects of study type and continent | journal=International Journal of Epidemiology | volume=36 | issue=5 | pages=1048–1059 | year=2007 | month=October | url=http://ije.oxfordjournals.org/content/36/5/1048.long | pmid=17690135 | doi=10.1093/ije/dym158 | access-date=13 मई 2016 | archive-url=https://web.archive.org/web/20110805173006/http://ije.oxfordjournals.org/content/36/5/1048.long | archive-date=5 अगस्त 2011 | url-status=live }}</ref> वे लोग जो धूम्रपान करने वाले किसी व्यक्ति के साथ रहते हैं उनमें 20–30% जोखिम बढ़ा होता है जबकि अप्रत्यक्ष धुएं के साथ वाले वातावरण के लोगों मे 16–19% जोखिम बढ़ा होता है।<ref>{{cite web|title=Frequently asked questions about second hand smoke|url=http://www.who.int/tobacco/research/secondhand_smoke/faq/en/index.html|work=World Health Organization|accessdate=25 जुलाई 2012|archive-url=https://web.archive.org/web/20130101163934/http://www.who.int/tobacco/research/secondhand_smoke/faq/en/index.html|archive-date=1 जनवरी 2013|url-status=live}}</ref> [[साइडस्ट्रीम धूम्रपान]] के परीक्षण से पता चलता है कि यह प्रत्यक्ष धूम्रपान से अधिक खतरनाक होता है।<ref name="Schick" /> निष्क्रिय धूम्रपान के कारण होने वाले फेफड़े के कैंसर से अमरीका में हर साल 3,400 मौते होती हैं।<ref name="Alberg" />
=== रैडॉन गैस ===
[[रैडॉन]] एक रंगहीन, गंधहीन [[गैस]] है जो रेडियोसक्रिय [[रेडियम]] के टूटने से पैदा होती है, जो कि [[यूरेनियम]] का क्षय उत्पाद है और जिसे पृथ्वी की [[Crust (geology)|पपड़ी]] पर पाया जाता है। रेडियोधर्मी क्षय उत्पाद जेनेटिक सामग्री को [[आयनी]]कृत करते हैं, जिससे म्यूटेशन होता है जो कभी-कभार कैंसरकारी हो जाता है। अमरीका में धूम्रपान के बाद, फेफड़े के कैंसर का दूसरा सबसे आम कारक रेडॉन है।<ref name="Alberg" /> यह जोखिम रैडॉन सांद्रता की प्रत्येक 100 [[becquerel|Bq]]/[[cubic metre|m³]] बढ़त के साथ 8–16% तक बढ़ता है।<ref>{{cite journal |author=Schmid K, Kuwert T, Drexler H |title=Radon in Indoor Spaces: An Underestimated Risk Factor for Lung Cancer in Environmental Medicine |journal=Dtsch Arztebl Int |volume=107|issue=11 |pages=181–6 |year=2010 |month=March |pmid=20386676 |pmc=2853156 |doi=10.3238/arztebl.2010.0181 |url=}}</ref> रैडॉन गैस का स्तर स्थान और मिट्टी तथा चट्टान में संघटन के साथ बदलता है। उदाहरण के लिए यूके के [[कॉर्नवेल]] जैसे क्षेत्र में (जिसमें अधःस्तर के रूप में [[ग्रेनाइट]] उपस्थि है), रैडॉन एक बड़ी समस्या है और रौडॉन गैस की सांद्रता को कम करने के लिए इमारतों को पंखों द्वारा विशेष रूप से हवादार रखना पड़ता है। [[संयुक्त राज्य पर्यावरणीय सुरक्षा एजेंसी]] (ईपीए) के आंकलन के अनुसार, अमरीका में हर 15 में से एक घर का रैडॉन स्तर अनुशंसित दिशानिर्देश 4 [[पिकोक्यूरी]] प्रतिलीटर (pCi/l) (148 Bq/m³) से अधिक है।<ref name="EPA radon" />
=== एसबेस्टस ===
[[एसबेस्टस]] कई प्रकार के फेफड़े के रोग पैदा कर सकता है जिसमें फेफड़े का कैंसर शामिल है। तंबाकू का धूम्रपान तथा एसबेस्टस में फेफड़े का कैंसर पैदा करने का [[synergy|सहक्रियाशीलता]] वाला प्रभाव होता है।<ref name="O'Reilly" /> एसबेस्टस [[मेसोथेलियोमा]] कहे जाने वाले [[फुफ्फुसावरण]] का कैंसर का कारण बनता है (जो कि फेफड़े के कैंसर से भिन्न होता है)।<ref>{{Cite book | last=Davies | first=RJO |author2=Lee YCG | title=Oxford Textbook Medicine | publisher=OUP Oxford | year=2010 | chapter=18.19.3 | edition=5th |isbn=978-0199204854 }}</ref>
=== वायु प्रदूषण ===
खुले में होने वाला वायु प्रदूषण का भी फेफड़े के कैंसर के बढ़ने पर हल्का प्रभाव होता है।<ref name="MurrayNadel46">{{Cite book |author=Alberg AJ, Samet JM | title=Murray & Nadel's Textbook of Respiratory Medicine |url=https://archive.org/details/murraynadelstext0001unse_5ed | publisher=Saunders Elsevier |year=2010 | chapter=Chapter 46 | edition=5th | isbn=978-1-4160-4710-0 }}</ref> महीन [[Atmospheric particulate matter|कण]] (PM<sub>2.5</sub>) और [[stratospheric sulfur aerosols|सल्फेट एयरोसॉल]], जो कि ट्रैफिक के धुएं से मुक्त हो सकते हैं, बढ़े जोखिम से कुछ हद तक संबंधित पाए गए हैं।<ref name="MurrayNadel46" /><ref>{{cite journal |last=Chen | first=H |author2=Goldberg MS, Villeneuve PJ | journal=Reviews on Environmental Health | year=2008 |month=Oct-Dec | volume=23 |issue=4 | pages=243–297 | title=A systematic review of the relation between long-term exposure to ambient air pollution and chronic diseases | pmid=19235364 }}</ref> [[नाइट्रोजन डाईऑक्साइड]] के लिए 10 [[भाग प्रति दस करोड़]] की बढ़ोत्तरी फेफड़े के कैंसर को 14 प्रतिशत तक बढ़ा सकती है।<ref>{{cite journal | last=Clapp | first=RW |author2=Jacobs MM, Loechler EL | journal=Reviews on Environmental Health | year=2008 | month=Jan-Mar | volume=23|issue=1 | pages=1–37 | title=Environmental and Occupational Causes of Cancer New Evidence, 2005–2007 | pmid=18557596 |url=http://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC2791455/?tool=pubmed | pmc=2791455}}</ref> खुले में होने वाला वायु प्रदूषण 1–2% तक फेफड़े के कैंसर के लिए जिम्मेदार माना जाता है।<ref name="MurrayNadel46" />
संभावित सबूत, खाना पकाने तथा गर्मी पैदा करने के लिए लकड़ी, गोबर या फसल के अवशेषों को जलाने से होने वाले [[भीतरी वायु प्रदूषण]] से फेफड़े के कैंसर के बढ़े हुए जोखिम का समर्थन करते दिखते हैं।<ref name=Lim2012>{{cite journal|last=Lim|first=WY|author2=Seow, A|title=Biomass fuels and lung cancer.|journal=Respirology (Carlton, Vic.)|date=2012 Jan|volume=17|issue=1|pages=20-31|pmid=22008241}}</ref> वे महिलाएं जो कोयले के धुएं से अनावृत्त होती हैं उनमें दोगुना जोखिम होता है और [[बायोमास]] जलने के कारण पैदा हुए कई उप-उत्पाद संदेहास्पद रूप से कैंसरजनक माने जाते हैं।<ref name=Sood2012/> यह जोखिम आमतौर पर लगभग 2.4 बिलियन लोगों को वैश्विक रूप से<ref name=Lim2012/> प्रभावित करता है तथा कुल कैंसर की मौतों के 1.5 प्रतिशत तक के लिए जिम्मेदार माना जाता है।<ref name=Sood2012>{{cite journal|last=Sood|first=A|title=Indoor fuel exposure and the lung in both developing and developed countries: an update.|url=https://archive.org/details/sim_clinics-in-chest-medicine_2012-12_33_4/page/649|journal=Clinics in chest medicine|date=2012 Dec|volume=33|issue=4|pages=649-65|pmid=23153607}}</ref>
=== आनुवांशिक ===
ऐसा आंकलन है कि फेफड़े के कैंसर के 8 से 14% मामले [[heredity|आनुवांशिक]] कारकों की देन हैं।<ref>{{cite book|last=Dudley|first=Joel|title=Exploring Personal Genomics|year=2013|publisher=Oxford University Press|isbn=9780199644483|page=25|url=http://books.google.ca/books?id=arCnThIq9LcC&pg=PA25|access-date=13 मई 2016|archive-url=https://web.archive.org/web/20131217054501/http://books.google.ca/books?id=arCnThIq9LcC&pg=PA25|archive-date=17 दिसंबर 2013|url-status=live}}</ref> फेफड़े के कैंसर वाले लोगों के संबंधियों में जोखिम 2.4 गुना अधिक होता है। यह संभवतः [[genetic polymorphism|जीनों के संयोजन]] के कारण होता है।<ref name="Fishman1802">{{Cite book | author=Kern JA, McLennan G | title=Fishman's Pulmonary Diseases and Disorders |publisher=McGraw-Hill | year=2008 | page=1802 | edition=4th | isbn=0-07-145739-9 }}</ref>
=== अन्य कारण ===
बहुत सारे अन्य पदार्थ, व्यवसाय और पर्यावरण के जोखिम, फेफड़े के कैंसर से जोड़े गए हैं। [[कैंसर पर शोध के लिए अन्तर्राष्ट्रीय एजेन्सी]] (आईएआरसी) के कथनानुसार निम्नलिखित के फेफड़े में कैंसरकारी होने के बारे में “पर्याप्त साक्ष्य” हैं:<ref name='WHOListLungCancer'>{{cite journal|last=Cogliano|first=VJ|author2=Baan, R; Straif, K; Grosse, Y; Lauby-Secretan, B; El Ghissassi, F; Bouvard, V; Benbrahim-Tallaa, L; Guha, N; Freeman, C; Galichet, L; Wild, CP|title=Preventable exposures associated with human cancers.|journal=Journal of the National Cancer Institute|date=2011 Dec 21|volume=103|issue=24|pages=1827-39|pmid=22158127|url=http://monographs.iarc.fr/ENG/Classification/Table4.pdf|access-date=13 मई 2016|archive-url=https://web.archive.org/web/20120920150724/http://monographs.iarc.fr/ENG/Classification/Table4.pdf|archive-date=20 सितंबर 2012|url-status=dead}}</ref>
*कुछ धातुएं (अल्यूमिनियम उत्पाद, [[कैडमियम]] और कैडमियम यौगिक, [[क्रोमियम]](VI) यौगिक, [[बेरीलियम]] और बेरिलियम यौगिक, लौह व स्टील फाउंडिंग, निकिल यौगिक, [[आर्सेनिक]] और अकार्बनिक आर्सेनिक यौगिक, भूमिगत [[हेमाटाइट]] खनन)
*दहन के कुछ उत्पाद (अपूर्ण दहन, कोयला (घरेलू कोयला दहन से भीतरी उत्सर्जन), कोयले का गैसीकरण, कोलताप पिच, [[Coke (fuel)|कोक उत्पादन]], कालिख, डीजल इंजन निकास)
* आयनीकरण विकिरण (एक्स-विकिरण, रैडॉन-222 और इसके अपघटन उत्पाद, [[गामा विकिरण]], [[प्लूटोनियम]])
* कुछ विषैली गैसें (मेथिल ईथर (तकनीकि ग्रेड), बिस-(क्लोरोमेथिल) ईथर, [[सल्फर मस्टर्ड]], एमओपीपी ([[Mustargen Oncovin Procarbazine Prednisone|विन्क्रिस्टाइन-प्रीड्निसोन-नाइट्रोजन मस्टर्ड-प्रोकार्बाज़ाइन मिश्रण]]), पेंटिंग से निकला धुआं)
* रबर उत्पादन तथा क्रिस्टलाइन [[Silicon dioxide|सिलिका धूल]]
== रोगजनन ==
दूसरे कई कैंसरों के समान, फेफड़े का कैंसर [[ऑन्कोजीन]] के सक्रियण या [[ट्यूमर शमन जीन]] के निष्क्रियण से शुरु होते हैं।<ref name="Fong" /> ऑन्कोजीन के कारण लोग कैंसर के प्रति अतिसंवेदनशील हो जाते हैं। [[प्रोटो-ऑन्कोजीन]] जब किसी विशेष कार्सियो जीन्स से अनावृत्त होती हैं तो वे ऑन्कोजीन में परिवर्तित हो जाती हैं।<ref name="Salgia" />''[[Ras (protein)|K-ras]]'' प्रोटो-ऑन्कोजीन में [[उत्परिवर्तन]] फेफड़े के एडिनोकार्सिनोमोसिस के 10–30% के लिए जिम्मेदार है।<ref name="NEJM-molecular" /><ref name="Aviel-Ronen" /> [[अधिचर्मक वृद्धि कारक रिसेप्टर]] (ईजीएफआर) कोशिकीय प्रसार, [[एपॉप्टॉसिस]], [[एंजियोजेनेसिस]] और ट्यूमर आक्रमण को नियमित करता है।<ref name="NEJM-molecular" /> गैर-छोटी कोशिका फेफड़े के कैंसर में ईजीएफआर के उत्परिवर्तन और प्रवर्धन आम हैं और ईजीएफआर-अवरोधकों के साथ उपचार का आधार प्रदान करता है। [[Her2/neu]] कम बार प्रभावित होता है।<ref name="NEJM-molecular" /> [[Chromosome|गुणसूत्रीय]] क्षति [[हेटरोज़ाइगोसिटी की हानि]] पैदा कर सकती है। इससे ट्यूमर शमन जीन का निष्क्रियण हो सकता है। छोटी-कोशिका फेफड़े के कार्सिनोमा में गुणसूत्र 3p, 5q, 13q और 17p विशेष रूप से आम हैं। गुणसूत्र 17p पर स्थित ''[[p53]]'' ट्यूमर शमन जीन 60-75% मामलों में प्रभावित होते हैं।<ref name="Devereux" /> अन्य जीन जो अक्सर उत्परिवर्तित व प्रवर्धित होते हैं वे ''[[c-MET]]'', ''[[NKX2-1]]'',''[[LKB1]]'', ''[[PIK3CA]]'' और ''[[BRAF (gene)|BRAF]]''हैं।<ref name="NEJM-molecular" />
== निदान ==
[[Image:Thorax CT peripheres Brronchialcarcinom li OF.jpg|thumb|बाएं फेफड़े में कैंसर कारक ट्यूमर दर्शाता [[सीटी स्कैन]]]]
यदि कोई व्यक्ति ऐसे लक्षण रिपोर्ट करता है जो फेफड़े के कैंसर का इशारा करें तो पहला परीक्षण चरण [[सीने का रेडियोग्राफ]] करना है। यह एक स्पष्ट द्रव्यमान [[मध्यस्थानिका]] का विस्तार ([[लिंफनोड]] के विस्तार को दर्शाती), [[श्वासरोध]] (निपात), जमाव ([[निमोनिया]]) या [[फुफ्फुसीय बहाव]] को दिखा सकता है।<ref name="Merck" /> [[X-ray computed tomography|सीटी इमेजिंग]] आम तौर से, रोग के प्रकार और हद के बारे में अधिक जानकारी प्रदान करने के लिए किया जाता है। [[ब्रॉन्कोस्कोपी]] या सीटी-निर्देशित [[बायप्सी]] को अक्सर [[हिस्टोपैथोलॉजी]] के लिए ट्यूमर के नमूने के लिए किया जाता हैं।<ref name="Collins" />
सीने के रेडियोग्राफ में कैंसर एक [[एकल फेफड़ा गांठ]] के रूप में दिख सकता है। हालांकि [[विभेदक निदान]] विस्तृत है। कई अन्य भी ऐसे रोग हैं जो ऐसे ही लगते हैं जिनमें [[तपेदिक]], फंगल संक्रमण, मेटास्टेटिक कैंसर या [[अनसुलझा निमोनिया]] शामिल है। एकल फेफड़ा गांठ के कम आम कारणों में [[हमरटोमा]], [[ब्रॉन्कोजेनिक सिस्ट]], [[एडीनोमा]], [[आर्ट्रियोवेनस मैलफंक्शन]], [[फेफड़े का सीक्वेस्ट्रेशन]], [[रुमेटी गांठ]], [[वेगनर्स ग्रैन्यूलोमेटोसिस]] या [[लिम्फोमा]] शामिल है।<ref>{{Cite book | last=Miller |first=WT | title=Fishman's Pulmonary Diseases and Disorders | publisher=McGraw-Hill | year=2008 | page=486 | edition=4th | isbn=0-07-145739-9 }}</ref> फेफड़े का कैंसर एक [[incidentaloma|प्रासंगिक खोज]] हो सकती है क्योंकि किसी असंबद्ध कारण से भी सीने के रेडियोग्राफ या सीटी स्कैन को किये जाने पर कोई एकल फेफड़े की गांठ मिल सकती है।<ref name="Fishman1815">{{Cite book | last=Kaiser | first=LR | title=Fishman's Pulmonary Diseases and Disorders | publisher=McGraw-Hill | year=2008 | pages=1815–1816 | edition=4th | isbn=0-07-145739-9 }}</ref> फेफड़े के कैंसर का निश्चित निदान, चिकित्सीय तथा रेडियोलॉजिकल गुणों के संदर्भ में संदेहास्पद ऊतकों के [[histopathology|ऊतकीय]] परीक्षण से होता है।<ref name="Harrison" />
=== वर्गीकरण ===
{| class="wikitable floatright" style="text-align:center;font-size:90%;width:45%;margin-left:1em"
|+ style="background:#E5AFAA;"|'''Age-adjusted [[incidence (epidemiology)|incidence]] of lung cancer by histological type'''<ref name="MurrayNadel46" />
|- style="background: #E5AFAA;text-align:center;font-size:90%;"
! abbr="Type" | Histological type
! abbr="Frequency" | Incidence per 100,000 per year
|-
| All types
| 66.9
|-
| Adenocarcinoma
| 22.1
|-
| Squamous-cell carcinoma
| 14.4
|-
| Small-cell carcinoma
| 9.8
|}
फेफड़े के कैंसर को [[histopathology|ऊतकीय प्रकार]] के अनुसार वर्गीकृत किया जाता है।<ref name="Holland-Frei78" /> यह वर्गीकरण, रोग के निर्धारण प्रबंधन तथा परिणामों की भविष्यवाणी के लिहाज से महत्वपूर्ण है। फेफड़े के कैंसरों का अधिकांश, [[उपत्वचीय कोशिकाओं]] से पैदा होने वाले[[कार्सिनोमा]]—दुर्दमताएं हैं। फेफड़े के कार्सिनोमाओं को [[माइक्रोस्कोप]] से हिस्टोपैथोलॉजिस्ट द्वारा देखे जाने पर दुर्दम कोशिकाओं के आकार व स्वरूप से वर्गीकृत किया जाता है। गैर-छोटी कोशिका तथा छोटी-कोशिका फेफड़ा कार्सिनोमा दो व्यापक वर्ग हैं।<ref name="Robbins" />
==== गैर-छोटे कोशिका फेफड़े के कार्सिनोमा ====
[[Image:Squamous carcinoma lung 2 cytology.jpg|thumb|left| [[स्क्वैमस कार्सिनोमा]] का [[माइक्रोग्राफ]] एक प्रकार का गैर-छोटा-कोशिका कार्सिनोमा, [[एफएनए नमूने]], [[पैप स्टेन]]]]
एनएससीएलसी के तीन मुख्य प्रकार [[एडेनोकार्सिनोमा]], [[स्क्वैमस-कोशिका फेफड़ा कार्सिनोमा]] और [[बड़ा-कोशिका-फेफड़ा कार्सिनोमा]] हैं।<ref name="Harrison" />
फेफड़े के कैंसर में से लगभग 40% एडेनोकार्सिनोमा होते हैं जो कि आम तौर पर परिधीय फेफड़ा ऊतकों में शुरु होते हैं।<ref name="Holland-Frei78">{{cite book | last=Lu | first=C |author2=Onn A, Vaporciyan AA et al. | title=Holland-Frei Cancer Medicine |edition=8th | chapter=78: Cancer of the Lung | publisher=People's Medical Publishing House | year=2010 |isbn=9781607950141}}</ref> एडेनोकार्सिनोमा अधिकांश मामले धूम्रपान से संबंधित है; हालांकि वे लोग, जिन्होने पूरे जीवन में 100 से कम सिगरटें पी हैं (“कभी भी धूम्रपान न करने वाले”),<ref name="Harrison" /> उनमें एडेनोकार्सिनोमा, फेफड़े के कैंसर का सबसे मुख्य कारण है।<ref name="Subramanian">{{cite journal | last=Subramanian | first=J |author2=Govindan R |title=Lung cancer in never smokers: a review | url=https://archive.org/details/sim_journal-of-clinical-oncology_2007-02-10_25_5/page/560 | journal=Journal of Clinical Oncology | volume=25 | issue=5 | pages=561–570| publisher=American Society of Clinical Oncology | month=February | year=2007 | pmid=17290066 |doi=10.1200/JCO.2006.06.8015 }}</ref> एडेनोकार्सिनोमा का एक उप-प्रकार [[ब्रॉन्किओलोआवियोलर कार्सिनोमा]], कभी धूम्रपान न करने वाली महिलाओं में अधिक आम है और उनमें अधिक लंबी उत्तरजीविता हो सकती है।<ref name="Raz"/>
स्क्वैमस-कोशिका कार्सिनोमा 30% से अधिक फेफड़े के कैंसर के लिए जिम्मेदार है। वे आम तौर पर बड़े वायु-मार्गों में होते हैं। एक खोखली गुहा तथा संबंधित [[necrosis|कोशिका मृत्यु]] आम तौर पर ट्यूमर के केन्द्र में पायी जाती है।<ref name="Holland-Frei78" /> फेफड़े के कैंसरों का लगभग 9% बड़ी-कोशिका कार्सिनोमा होते हैं। इनको यह नाम इसलिए दिया गया है क्योंकि कैंसर कोशिकाए बड़ी होती हैं जिनमें अतिरिक्त [[साइटोप्लास्म]], बड़ा [[cell nucleus|नाभिक]] और विशिष्ट [[nucleolus|न्यूक्लिओली]] होता है।<ref name="Holland-Frei78" />
==== छोटी-कोशिका फेफड़ा कार्सिनोमा ====
[[Image:Lung small cell carcinoma (1) by core needle biopsy.jpg|thumb|left|छोटी-कोशिका फेफड़ा कार्सिनोमा (कोर नीडिल बायप्सी का माइक्रोस्कोप का दृष्य)]]
[[चोटी-कोशिका फेफड़ा कैंसर]] (एसीसएलसी) में कोशिका में न्यूरोस्रावी कणिकाएं ([[vesicle (biology)|पुटिकाएं]] होती हैं जिनमें [[न्यूरोएंडोक्राइन]] [[हार्मोन]] शामिल होते हैं), जो ट्यूमर को एक एंडोक्राइन/पैरानियोप्लास्टिक सिंड्रोम संबंध प्रदान करते हैं।<ref name="Rosti" /> अधिकांश मामले बड़े वायुमार्गों (प्राथमिक तथा द्वितीयक [[bronchus|श्वासनली]]) में उत्पन्न होते हैं।<ref name="Collins" /> ये कैंसर रोग के दौरान शीघ्र व तेजी से फैलते हैं। प्रस्तुति के समय साठ से सत्तर प्रतिशत में मेटास्टेटिक रोग होता है। इस प्रकार के फेफड़े के कैंसर मजबूती के साथ धूम्रपान से जुड़े होते हैं।<ref name="Harrison" />
==== अन्य ====
चार मुख्य ऊतकीय उपप्रकार पहचाने गए हैं हालांकि कुछ कैंसरों में विभिन्न उपप्रकारों का संयोजन समाविष्ट हो सकता है।<ref name=Robbins>{{cite book | last=Maitra | first=A |author2=Kumar V | year=2007 | title=Robbins Basic Pathology|edition=8th | publisher=Saunders Elsevier | pages=528–529 | isbn=978-1-4160-2973-1 }}</ref> दुर्लभ उपप्रकारों में [[Salivary gland cancer|ग्रंथियों के ट्यूमर]], [[lung carcinoid|कार्सिनॉएड ट्यूमर]] और अविभाजित कार्सिनोमा शामिल हैं।<ref name="Harrison" />
==== विक्षेप ====
{| class="wikitable floatright" style="text-align:center;font-size:90%;width:45%;margin-left:1em"
|+ style="background:#E5AFAA;"|'''Typical [[immunostaining]] in lung cancer'''<ref name="Harrison" />
|- style="background: #E5AFAA;text-align:center;font-size:90%;"
! abbr="Type" | Histological type
! abbr="Frequency" | Immunostain
|-
| Squamous-cell carcinoma
| [[Cytokeratin|CK]]5/6 positive <br>[[Keratin 7|CK7]] negative
|-
| Adenocarcinoma
| CK7 positive <br>[[NK2 homeobox 1|TTF-1]] positive
|-
| Large-cell carcinoma
| TTF-1 negative
|-
| Small-cell carcinoma
| TTF-1 positive <br>[[Neural cell adhesion molecule|CD56]] positive <br>[[Granin|Chromogranin]] positive<br>[[Synaptophysin]] positive
|}
शरीर के दूसरे हस्सों से ट्यूमर के विस्तार के लिए, फेफड़ा एक आम स्थान है। द्वितियक कैंसर अपने मूल के स्थान के आधार पर वर्गीकृत किए जाते हैं; उदाहरण के लिए स्तन कैंसर जो कि फेफड़े में फैल जाता है उसे विक्षेपित स्तन कैंसर कहते हैं। विक्षेपों में अक्सर सीने के रेडियोग्राफ में गोल उपस्थिति का गुण दिखता है।<ref name="Seo" />
प्राथमिक फेफड़े के कैंसर अपने आप में सबसे अधिक आम तौर पर मस्तिष्क, हड्डियों, यकृत तथा [[अधिवृक्क ग्रंथियों]] विक्षेपित होते दिखते है।<ref name="Holland-Frei78" /> किसी बायप्सी की [[इम्युनोस्टेनिंग]] अक्सर मूल स्रोत के निर्धारण में सहायक होती है।<ref name="pmid18784820">{{cite journal |author=Tan D, Zander DS |title=Immunohistochemistry for Assessment of Pulmonary and Pleural Neoplasms: A Review and Update |journal=Int J Clin Exp Pathol |volume=1 |issue=1 |pages=19–31|year=2008|pmid=18784820 |pmc=2480532 }}</ref>
=== चरण निर्धारण ===
फेफड़े के [[कैसर का चरण निर्धारण]] मूल स्रोत से कैंसर के विस्तार की स्थिति की दर का आंकलन है। यह [[रोग के निदान]] तथा फेफड़े के कैंसर के संभावित उपचार को प्रभावित करने वाले कारकों में से एक है।<ref name="Harrison" />
गैर-छोटी कोशिका फेफड़े के कैंसर (एनएससीएलसी) के चरण निर्धारण का आरंभिक मूल्यांकन [[TNM staging system|टीएनएम वर्गीकरण]] का उपयोग करता है। यह प्राथमिक '''t'''umor (ट्यूमर) के आकार, लिंफ '''n'''ode (नोड) सहभागिता तथा दूरस्थ '''m'''etastasis (विक्षेप) पर आधारित होता है। इसके बाद टीएनएम वर्णनकर्ताओं का उपयोग करते हुए अदृष्य कैंसर से लेकर 0, IA (one-A), IB, IIA, IIB, IIIA, IIIB and IV (four) तक के समूहों में से एक असाइन किया जाता है। यह चरण समूह उपचार के चुनाव में तथा रोग के निदान में सहायता करता है।<ref name="Rami-Porta">{{Cite journal | last=Rami-Porta | first=R | author2=Crowley JJ, Goldstraw P | title=The revised TNM staging system for lung cancer | journal=Annals of Thoracic and Cardiovascular Surgery | volume=15 | issue=1 | pages=4–9 | month=February | year=2009 | url=http://www.atcs.jp/pdf/2009_15_1/4.pdf | pmid=19262443 | access-date=13 मई 2016 | archive-url=https://web.archive.org/web/20120509223416/http://www.atcs.jp/pdf/2009_15_1/4.pdf | archive-date=9 मई 2012 | url-status=live }}</ref>
छोटी-कोशिका फेफड़ा कार्सिनोमा (एससीएलसी) को पारंपरिक रूप से ‘सीमित चरण’ (छाती को आधे हिस्से में सीमित तथा एकल सहनीय [[रेडियोथेरेपी]] क्षेत्र के विस्तार के भीतर) या ‘व्यापक चरण’ (अधिक विस्तृत रोग) के रूप में वर्गीकृत किया जाता है।<ref name="Harrison" /> हालांकि, टीएनएम वर्गीकरण तथा समूहन रोग के निदान के परिकलन में उपयोगी हैं।<ref name="Rami-Porta" />
एनएससीएलसी तथा एससीएलसी, दोनो के लिए दो आम प्रकार के चरण निर्धारण – चिकित्सीय चरण निर्धारण तथा शल्य क्रिया चरण निर्धारण हैं। चिकित्सीय चरण निर्धारण को निश्चित शल्यक्रिया से पहले किया जाता है। यह इमेजिंग अध्ययन (जैसे कि [[X-ray computed tomography|सीटी स्कैन]] तथा [[positron emission tomography|पीईटी स्कैन]]) परिणामों तथा बायप्सी परिणामों पर आधारित होता है। शल्यक्रिया चरण निर्धारण को मूल्यांकन किसी शल्यक्रिया के दौरान या बाद में तथा शल्यक्रिया व चिकित्सीय परिणामों के संयुक्त परिणामों के आधार पर किया जाता है जिसमें थोरैकिक लिंफ नोड्स का चिकित्सीय नमूना लेना शामिल है।<ref name="Holland-Frei78" />
== रोकथाम ==
रोकथाम, फेफड़ा कैंसर विकास को घटाने का सबसे लागत प्रभावी उपाय है। जबकि अधिकांश देशों में औद्योगिक तथा स्थानीय कार्सिनोजेन पहचाने व प्रतिबंधित किए जा चुके हैं, तंबाकू का धूम्रपान अभी भी काफी फैला हुआ है। तंबाकू का धूम्रपान समाप्त करना फेफड़े के कैंसर की रोकथाम का प्राथमिक लक्ष्य है तथा [[धूम्रपान समाप्त]] करना इस प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण हथियार है।<ref>{{cite journal | last=Goodman | first=GE | title=Lung cancer. 1: prevention of lung cancer | journal=Thorax | volume=57 | issue=11 | year=2002 | month=November | pages=994–999 | url=http://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC1746232/pdf/v057p00994.pdf | pmid=12403886 | pmc=1746232 | access-date=13 मई 2016 | archive-url=https://web.archive.org/web/20170910181827/https://www.ncbi.nlm.nih.gov/pmc/articles/PMC1746232/pdf/v057p00994.pdf | archive-date=10 सितंबर 2017 | url-status=live }}</ref>
सार्वजनिक स्थलों जैसे रेस्टोरेंट तथा काम करने की जगहों आदि में [[अप्रत्यक्ष धूम्रपान]] कम करने से संबंधित नीतिगत हस्तक्षेप, कई पश्चिमी देशों में अधिक आम हो गया है।<ref>{{cite journal | last=McNabola | first=A |author2=Gill LW | title=The control of environmental tobacco smoke: a policy review | journal=International Journal of Environmental Research and Public Health |volume=6 | issue=2 | year=2009 | month=February | pages=741–758 | doi=10.3390/ijerph6020741 | pmid=19440413 |pmc=2672352}}</ref> [[भूटान]] 2005 से पूर्णतः धूम्रपान निषेध देश है<ref name="Bhutan" /> जबकि भारत ने अक्टूबर 2008 से सार्वजनिक स्थल पर धूम्रपान प्रतिबंधित किया है।<ref>{{cite news | last=Pandey | first=G | title=Indian ban on smoking in public | url=http://news.bbc.co.uk/1/hi/world/south_asia/7645868.stm | publisher=[[बीबीसी]] | date=2 अक्टूबर 2008 | accessdate=25 अप्रैल 2012 | archive-url=https://web.archive.org/web/20090115143617/http://news.bbc.co.uk/1/hi/world/south_asia/7645868.stm | archive-date=15 जनवरी 2009 | url-status=live }}</ref> [[विश्व स्वास्थ्य संगठन]] ने सरकारों से तंबाकू के विज्ञापनों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का आह्वान किया है जिससे कि युवा लोगों को धूम्रपान की लत से बचाया जा सके। उनका आंकलन है कि ऐसे प्रतिबंध जहां पर लगाए जाते हैं वहां पर 16 प्रतिशत तक तंबाकू की खपत में कमी आती है।<ref name="AUTOREF10">{{Cite press release |title=UN health agency calls for total ban on tobacco advertising to protect young |url=http://www.un.org/apps/news/story.asp?NewsID=26857 |publisher=[[United Nations]] News service |date=30 मई 2008 |accessdate=13 मई 2016 |archive-url=https://web.archive.org/web/20160304201703/http://www.un.org/apps/news/story.asp?NewsID=26857 |archive-date=4 मार्च 2016 |url-status=live }}</ref>
पूरक विटामिन A<ref name="Fabricius">{{cite journal | last=Fabricius | first=P |author2=Lange P | title=Diet and lung cancer | journal=Monaldi Archives for Chest Disease | volume=59 | issue=3 |year=2003 | month=July–September | pages=207–211 | pmid=15065316 }}</ref><ref>{{Cite journal | last=Fritz | first=H |author2=Kennedy D, Fergusson D et al. | title=Vitamin A and Retinoid Derivatives for Lung Cancer: A Systematic Review and Meta Analysis | journal=PLoS ONE | volume=6 | issue=6 | year=2011 | page=e21107 | pmid=21738614 |doi=10.1371/journal.pone.0021107 | pmc=3124481}}</ref> विटामिन C,<ref name="Fabricius" /> विटामिन D<ref>{{cite journal |last=Herr | first=C |author2=Greulich T, Koczulla RA et al. | title=The role of vitamin D in pulmonary disease: COPD, asthma, infection, and cancer | journal=Respiratory Research | volume=12 | issue=1 | year=2011 | month=March | page=31 |doi=10.1186/1465-31 दिसंबर 9921 | pmid=21418564 | pmc=3071319}}</ref> या विटामिन E<ref name="Fabricius" /> का दीर्घावधि उपयोग फेफड़े का जोखिम कम नहीं करता है। कुछ अध्ययन यह सुझाव देते हैं कि वे लोग जिनके भोजन में सब्ज़ियों और फलों की मात्रा अधिक होती है उनमें जोखिम कम होता है,<ref name="Alberg" /><ref name="Key">{{cite journal | last=Key | first=TJ | title=Fruit and vegetables and cancer risk | journal=British Journal of Cancer | volume=104 | issue=1 | year=2011 | month=January | pages=6–11 |doi=10.1038/sj.bjc.6606032 | pmid=21119663 | pmc=3039795}}</ref> लेकिन यह [[भ्रम]] भी हो सकता है। अधिक कठोर अध्ययन स्पष्ट संबंध का प्रदर्शन नहीं करते हैं।<ref name="Key" />
=== जांच ===
[[चिकित्सीय परीक्षणों]] द्वारा अलाक्षणिक लोगों में रोग की पहचान करने की प्रक्रिया [[Screening (medicine)|जांच]] कहलाती है। फेफड़े के कैंसर के संभावित परीक्षणों में [[थूक]] [[cytopathology|कोशिका जांच]], [[सीने का रेडियोग्राफ]] (सीएक्सआर) तथा [[अभिकलन टोमोग्राफी]] (सीटी) शामिल है। सीएक्सआर या कोशिका जांच से कोई लाभ प्रदर्शित नहीं हुए हैं।<ref>{{Cite journal | last=Manser | first=RL | author2=Irving LB, Stone C et al. | title=Screening for lung cancer | journal=Cochrane Database of Systematic Reviews | issue=1 | pages=CD001991 | year=2004 | pmid=14973979 | url=http://onlinelibrary.wiley.com/doi/10.1002/14651858.CD001991.pub2/full | doi=10.1002/14651858.CD001991.pub2 | access-date=13 मई 2016 | archive-url=https://web.archive.org/web/20160303182601/http://onlinelibrary.wiley.com/doi/10.1002/14651858.CD001991.pub2/full | archive-date=3 मार्च 2016 | url-status=live }}</ref> उच्च जोखिम वाले लोगों (55 से 79 की उम्र वाले वे लोग जो 30 [[पैकेट प्रतिवर्ष]] से अधिक धूम्रपान कर चुके हैं ये वे जिनको पहले फेफड़े का कैंसर हो चुका है) में कम-खुराक सीटी स्कैन हर साल कराने से फेफड़े के कैंसर से होने वाली मौत की संभावना में [[Absolute risk reduction|समग्र रूप से]] 0.3% की ([[Relative risk reduction|सापेक्ष रूप से]] 20% की) कमी होती है।<ref>{{cite journal |last=Jaklitsch | first=MT |author2=Jacobson FL, Austin JH et al. | title=The American Association for Thoracic Surgery guidelines for lung cancer screening using low-dose computed tomography scans for lung cancer survivors and other high-risk groups |url=https://archive.org/details/sim_journal-of-thoracic-and-cardiovascular-surgery_2012-07_144_1/page/33 | journal=Journal of Thoracic and Cardiovascular Surgery | month=July | year=2012 | volume=144 | issue=1 |pages=33–38 | pmid=22710039 | doi=10.1016/j.jtcvs.2012.05.060}}</ref><ref>{{cite journal | last=Bach | first=PB |author2=Mirkin JN, Oliver TK et al. | title=Benefits and harms of CT screening for lung cancer: a systematic review |journal=JAMA: the Journal of the American Medical Association | month=June | year=2012 | volume=307 | issue=22 |pages=2418–2429 | pmid=22610500 | doi=10.1001/jama.2012.5521}}</ref> हालांकि, गलत सकारात्मक स्कैनों की उच्च दर के कारण आक्रामक प्रक्रियाओं को अपनाना पड़ सकता है जिसके साथ काफी वित्तीय लागत लग सकती है।<ref>{{cite journal|last=Boiselle|first=PM|title=Computed tomography screening for lung cancer.|journal=JAMA : the journal of the American Medical Association|date=2013 Mar 20|volume=309|issue=11|pages=1163-70|pmid=23512063}}</ref> प्रत्येक सही सकारात्मक स्कैन के लिए 19 गलत सकारात्मक स्कैन होते हैं।<ref>{{cite journal |author=Bach PB, Mirkin JN, Oliver TK, ''et al.''|title=Benefits and harms of CT screening for lung cancer: a systematic review |journal=JAMA |volume=307 |issue=22|pages=2418–29 |year=2012 |month=June |pmid=22610500 |doi=10.1001/jama.2012.5521 |url=https://archive.org/details/sim_jama_2012-06-13_307_22/page/2418}}</ref> जांच के चलते विकिरण से अनावरण भी एक संभावित नुक्सान है।<ref>{{cite journal|last=Aberle|first=DR|author2=Abtin, F; Brown, K|title=Computed tomography screening for lung cancer: has it finally arrived? Implications of the national lung screening trial.|journal=Journal of clinical oncology : official journal of the American Society of Clinical Oncology|date=2013 Mar 10|volume=31|issue=8|pages=1002-8|pmid=23401434}}</ref>
== प्रबंधन ==
फेफड़े के कैंसर का उपचार कैंसर के विशिष्ट कोशिका प्रकार, किस हद तक [[cancer staging|फैलाव]] हुआ है तथा व्यक्ति की [[प्रदर्शन स्थिति]] पर निर्भर करता है। आम उपचारों में [[प्रशामक देखभाल]],<ref>{{cite journal | last=Ferrell |first=B |author2=Koczywas M, Grannis F, Harrington A | title=Palliative care in lung cancer | url=https://archive.org/details/sim_surgical-clinics-of-north-america_2011-04_91_2/page/403 | journal=Surgical Clinics of North America | volume=91 | issue=2 | pages=403–417 | year=2011 | month=April | pmid=21419260 |doi=10.1016/j.suc.2010.12.003}}</ref> [[शल्यक्रिया]], [[कीमोथेरेपी]] तथा [[विकिरण थेरेपी]] शामिल है।<ref name="Harrison" />
=== शल्यक्रिया ===
[[Image:Lung cancer.jpg|thumb|[[न्यूमोनेक्टॉमी]] नमूना जिसमें एक [[स्क्वामस-कोशिका कार्सिनोमा]] शामिल है और जो श्वासनलियों के पास में सफेद क्षेत्र के रूप में दिख रहा है]]
यदि जांच एनएससीएलसी की पुष्टि करते हैं तो [[cancer staging|चरण]] का आंकलन किया जाता है जिससे पता चलता है कि रोग स्थानीय है और शल्यक्रिया के प्रति संवेदी है या यह ऐसे बिंदु तक फैल गया है जहां से इसे शल्यक्रिया द्वारा ठीक नहीं किया जा सकता है। सीटी स्कैन तथा [[पोजीट्रान उत्सर्जन टोमोग्राफी]] को इस निर्धारण के लिए उपयोग किया जाता है।<ref name="Harrison" /> यदि मेडिएस्टाइनम लिम्फ नोड का शामिल होने की शंका हो तो, [[मेडिएस्टिनोस्कोपी]] के उपयोग से नोड्स के नमूने लेकर चरण पता करने में सहायता मिलती है।<ref name="Fishman1853">{{Cite book |author=Kaiser LR | title=Fishman's Pulmonary Diseases and Disorders | publisher=McGraw-Hill | year=2008 | pages=1853–1854| edition=4th | isbn=0-07-145739-9 }}</ref> [[रक्त परीक्षणों]] तथा [[फेफड़े की क्रियाशीलता का परीक्षण]] करके यह पता किया जाता है कि क्या व्यक्ति शल्यक्रिया के लिए पर्याप्त रूप से सक्षम है।<ref name="Collins" /> यदि फेफड़े की क्रियाशीलता के परीक्षण खराब श्वसन संचय बताएं तो शल्यक्रिया संभव नहीं भी हो सकती है।<ref name="Harrison" />
आरंभिक चरण वाले एनएससीएलसी के अधिकांश मामलों में फेफड़े की पालि को निकाल दिया जाना ([[लोबेक्टॉमी]]) शल्यक्रिया उपचार का एक विकल्प है। वे लोग जो पूर्ण लेबोक्टॉमी के लिए अनुपयुक्त हैं, उन पर छोटी उपपालि कांट-छांट ([[वेज उपच्छेदन]]) की जा सकती है। हालांकि लोबेक्टॉमी की तुलना में वेज उपच्छेदन में रोग के फिर होने की संभावना अधिक होती है।<ref name="Fishman1855">{{Cite book | author=Kaiser LR |title=Fishman's Pulmonary Diseases and Disorders | publisher=McGraw-Hill | year=2008 | pages=1855–1856 | edition=4th |isbn=0-07-145739-9 }}</ref> वेज उपच्छेदन के किनारो पर रेडियोसक्रिय [[आयोडीन]] [[ब्रेकीथेरेपी]] रोग के फिर से होने के जोखिम को कम करती है।<ref>{{cite journal | last=Odell | first=DD |author2=Kent MS, Fernando HC | title=Sublobar resection with brachytherapy mesh for stage I non-small cell lung cancer | journal=Seminars in Thoracic and Cardiovascular Surgery |volume=22 | issue=1 | pages=32–37 | year=2010 | month=Spring | pmid=20813314 | doi=10.1053/j.semtcvs.2010.04.003}}</ref> पूरे फेफड़े को निकालने की प्रक्रिया ([[न्यूमोनेक्टॉमी]]) बेहद कम मामलों में की जाती है।<ref name="Fishman1855" /> [[वीडियो की सहायता से की जाने वाली थेरोस्कोपिक शल्यक्रिया]] तथा [[वीएटीएस लोबेक्टॉमी]] में फेफड़े के कैंसर की शल्य क्रिया के प्रति एक बेहद कम आक्रामक दृष्टिकोण रखा जाता है।<ref>{{cite journal | last=Alam| first=N |author2=Flores RM | title=Video-assisted thoracic surgery (VATS) lobectomy: the evidence base |journal=Journal of the Society of Laparoendoscopic Surgeons | volume=11 | issue=3 | pages=368–374 | year=2007 |month=July–September | pmid=17931521 | pmc=3015831}}</ref> वीएटीएस लोबेक्टॉमी, परंपरागत खुली लोबेक्टॉमी की तुलना में समान रूप से प्रभावी है और इसमें शल्यक्रिया पश्चात कम बीमारी की स्थिति होती है।<ref>{{cite journal | last=Rueth | first=NM |author2=Andrade RS |title=Is VATS lobectomy better: perioperatively, biologically and oncologically? | journal=Annals of Thoracic Surgery |volume=89 | issue=6 | pages=S2107–S2111 | year=2010 | month=June | pmid=20493991 | doi=10.1016/j.athoracsur.2010.03.020}}</ref>
एससीएलसी में आम तौर पर, कीमोथेरेपी और/या रेडियोग्राफी उपयोग की जाती है।<ref name='SimonTurrisi'>{{cite journal |author=Simon GR, Turrisi A |title=Management of small cell lung cancer: ACCP evidence-based clinical practice guidelines (2nd edition)|journal=Chest |volume=132 |issue=3 Suppl |pages=324S–339S |year=2007 |month=September |pmid=17873178|doi=10.1378/chest.07-1385 |url=http://chestjournal.chestpubs.org/content/132/3_suppl/324S.long}}</ref> हालांकि एससीएलसी में शल्यक्रिया की भूमिका पर पुनः विचार किया जाता है। जब एससीएलसी के आरंभिक चरण में कीमोथेरेपी तथा विकिरण को जोड़ा जाता है तो शल्यक्रिया परिणामों को बेहतर कर सकती है।<ref>{{cite journal | last=Goldstein | first=SD |author2=Yang SC | title=Role of surgery in small cell lung cancer | journal=Surgical Oncology Clinics of North America | volume=20 | issue=4 | pages=769–777 | year=2011 |month=October | pmid=21986271 | doi=10.1016/j.soc.2011.08.001}}</ref>
=== रेडियोथेरेपी ===
[[Radiation therapy|रेडियोथेरेपी]] को अक्सर कीमोथेरेपी के साथ दिया जाता है और इसे एनएसीएलसी से पीड़ित ऐसे लोगों में उपचारात्मक इरादे के साथ उपयोग किया जाता है जिन पर शल्यक्रिया नहीं की जा सकती है। इस तरह की उच्च-तीव्रता वाली रेडियोथेरेपी को रैडिकल रेडियोथेरेपी कहा जाता है।<ref name="OTO" /> इस तकनीक का एक सुधरा हुआ रूप सतत लघुमात्रा त्वरित रेडियोथेरेपी (सीएचएआरटी) है जिसमें छोटी अवधि में रेडियोथेरेपी की उच्च मात्रा दी जाती है।<ref>{{Cite journal | last=Hatton | first=MQ|author2=Martin JE | title=Continuous hyperfractionated accelerated radiotherapy (CHART) and non-conventionally fractionated radiotherapy in the treatment of non-small cell lung cancer: a review and consideration of future directions| journal=Clinical Oncology (Royal College of Radiologists) | volume=22 | issue=5 | pages=356–364 | month=June | year=2010| pmid=20399629 | doi=10.1016/j.clon.2010.03.010}}</ref> शल्यक्रिया पश्चात छाती की रेडियोग्राफी को आम तौर पर एनएससीएलसी के लिए उपचार के प्रयोजन वाली शल्यक्रिया के बाद नहीं किया जाना चाहिए।<ref name="PORT Meta-analysis Trialists Group" /> मध्यस्थानिक एन2 लिम्फ नोड से पीड़ित कुछ लोगों में शल्यक्रिया पश्चात की रेडियोथेरेपी कुछ लाभ दे सकती है।<ref>{{Cite journal | last=Le Péchoux | first=C |title=Role of postoperative radiotherapy in resected non-small cell lung cancer: a reassessment based on new data |journal=Oncologist | volume=16 | issue=5 | pages=672–681 | year=2011 | pmid=21378080 | doi=10.1634/theoncologist.2010-0150| pmc=3228187}}</ref>
संभावित रूप से रोगमुक्त हो सकने वाले एससीएलसी मामलो में, सीने की रेडियोग्राफी को कीमोथैरेपी के साथ अक्सर अनुशंसित किया जाता है।<ref name="Holland-Frei78" />
यदि कैंसर की वृद्धि श्वसनी के कुछ भागों को अवरुद्ध करता है तो मार्ग को खोलने के लिए [[ब्रैन्कीथेरेपी]] (स्थानीय रेडियोथेरेपी) को सीधे वायुमार्ग में दिया जा सकता है।<ref>{{Cite journal | last=Cardona | first=AF |author2=Reveiz L, Ospina EG et al.| title=Palliative endobronchial brachytherapy for non-small cell lung cancer | journal=Cochrane Database of Systematic Reviews | issue=2 | pages=CD004284 | month=April | year=2008 | pmid=18425900 | doi=10.1002/14651858.CD004284.pub2}}</ref> बाह्य किरण रेडियोथेरेपी की तुलना में, ब्रैन्कीथेरेपी उपचार अवधि में कमी लाती है तथा स्वास्थ्य कर्मियों के लिए विकिरण के प्रकोप को कम करती है।<ref>{{Cite journal | last=Ikushima | first=H | title=Radiation therapy: state of the art and the future | journal=Journal of Medical Investigation | volume=57 | issue=1–2 | pages=1–11 | month=February | year=2010 | url=http://www.jstage.jst.go.jp/article/jmi/57/1,2/1/_pdf | pmid=20299738 }}{{Dead link|date=दिसंबर 2021 |bot=InternetArchiveBot }}</ref>
रोगनिरोधी कपाल विकिरण (पीसीआई), मस्तिष्क के लिए रेडियोथेरेपी का एक प्रकार है, [[विक्षेप]] के जोखिम को कम करने के लिए उपयोग किया जाता है पीसीआई एससीएलसी में सबसे उपयोगी होती है। सीमित-चरण रोग में पीसीआई तीन साल की उत्तरजीविता को 15 से 20 प्रतिशत तक बढ़ाती है; गंभीर रोग में, एक साल की उत्तरजीविता 13 से 27 प्रतिशत तक बढ़ती है।<ref>{{Cite journal | last=Paumier | first=A |author2=Cuenca X, Le Péchoux C | title=Prophylactic cranial irradiation in lung cancer | journal=Cancer Treatment Reviews | volume=37 | issue=4| pages=261–265 | month=June | year=2011 | pmid=20934256 | doi=10.1016/j.ctrv.2010.08.009}}</ref>
लक्ष्य साधने तथा इमेजिंग में हाल के हुए सुधारों ने फेफड़े के कैंसर के आरंभिक चरण के उपचार में स्टीरियोस्टेटिक विकिरण का विकास किया है। रेडियोथेरेपी के इस रूप में स्टीरियोस्टेटिक लक्ष्य साधने की तकनीकों का उपयोग करते हुए, उच्च खुराकों को छोटे सत्रों में दिया जाता है। प्राथमिक रूप से इसे उन रोगियों में उपयोग किया जाता है जो चिकित्सीय [[कोमोरबिडिटीस]] (रोग के पुराने निदान के साथ अतिरिक्त परिस्थितियों की उपस्थिति) के कारण शल्यक्रिया नहीं करा सकते हैं।<ref>{{Cite journal | last=Girard | first=N |author2=Mornex F | title=Stereotactic radiotherapy for non-small cell lung cancer: From concept to clinical reality. 2011 update | journal=Cancer Radiothérapie | volume=15 |issue=6–7 | pages=522–526 | month=October | year=2011 | pmid=21889901 | doi=10.1016/j.canrad.2011.07.241}}</ref>
एनएससीएलसी तथा एससीएलसी रोगियों के लिए, लक्षण नियंत्रण के लिए, सीने पर विकिरण की छोटी खुराकें ([[palliative care|पैलिएटिव]] रेडियोथेरेपी) उपयोग की जा सकती हैं।<ref>{{Cite journal | last=Fairchild | first=A | author2=Harris K, Barnes E et al. | title=Palliative thoracic radiotherapy for lung cancer: a systematic review | journal=Journal of Clinical Oncology | volume=26 | issue=24 | pages=4001–4011 | month=August | year=2008 | pmid=18711191 | url=http://jco.ascopubs.org/content/26/24/4001.full | doi=10.1200/JCO.2007.15.3312 | access-date=13 मई 2016 | archive-url=https://web.archive.org/web/20130413233918/http://jco.ascopubs.org/content/26/24/4001.full | archive-date=13 अप्रैल 2013 | url-status=live }}</ref>
=== कीमोथेरेपी ===
[[कीमोथेरेपी]] पथ्य, ट्यूमर के प्रकार पर निर्भर करता है।<ref name="Holland-Frei78" /> छोटी-कोशिका फेफड़ा कार्सिनोमा (एससीएलसी) का उपचार, यहां तक कि तुलनात्मक रूप से रोग के आरंभिक चरण में प्राथमिक रूप से कीमोथेरेपी व विकिरण द्वारा किया जाता है।<ref>{{cite journal |author=Hann CL, Rudin CM |title=Management of small-cell lung cancer: incremental changes but hope for the future |journal=Oncology (Williston Park)|date=30 नवंबर 2008|volume=22|issue=13|pages=1486–92 |pmid=19133604}}</ref> एससीएलसी में, [[सिस्प्लेटिन]] तथा[[एटेपोसाइड]] सबसे आम तौर पर उपयोग किए जाते हैं।<ref name="Murray"/> [[कार्बोप्लाटिन]], [[जेमसिटाबाइन]],[[पैक्लिटैक्सेल]], [[विनोरेल्बाइन]], [[टोपोटेकेन]] और [[इरिनोटेकान]] के साथ संयोजनों का उपयोग किया जाता है।<ref name="Azim" /><ref name="MacCallum" /> यदि पीड़ित रोगी उपचार के लिए पर्याप्त रूप से स्वस्थ है तो उन्नत गैर छोटे सेल फेफड़े कार्सिनोमा (एनएससीएलसी) में, कीमोथेरेपी उत्तरजीविता को बेहतर करती है तथा इसको पहली पंक्ति के उपचार के रूप में उपयोग किया जाता है।<ref name="pmid18678835" /> आम तौर से दो दवाएं उपयोग की जाती हैं जिनमें से एक अक्सर प्लेटिनम आधारित ([[सिस्प्लाटिन]] या [[कार्बोप्लाटिन]]) होती है। अन्य आम दवाओं में [[जेमसिटाबाइन]], [[पैक्लिटैक्सेल]], [[डोसेटेक्सल]],<ref name="Fishman1876">{{Cite book | author=Mehra R, Treat J | title=Fishman's Pulmonary Diseases and Disorders | publisher=McGraw-Hill | year=2008 | page=1876 | edition=4th | isbn=0-07-145739-9 }}</ref><ref name="Clegg" /> [[पेमेट्रेक्सेड]],<ref name="pmid20446853">{{cite journal |author=Fuld AD, Dragnev KH, Rigas JR|title=Pemetrexed in advanced non-small-cell lung cancer |journal=Expert Opin Pharmacother |volume=11 |issue=8|pages=1387–402 |year=2010 |month=June |pmid=20446853 |doi=10.1517/14656566.2010.482560 }}</ref> [[एटेपोसाइड]] या [[विनोरेल्बाइन]] शामिल हैं।<ref name="Clegg" />
[[सहायक कीमोथेरेपी]] एक ऐसी कीमोथेरेपी है जो उपचार के लिए की जाने वाली शल्यक्रिया के बाद परिणाम को बेहतर करने के लिए अपनायी जाती है। एनएससीएलसी में शल्य क्रिया के दौरान नमूनों को नज़दीकी [[लिम्फ नोड्स]] से लिया जाता है जिससे कि [[lung cancer staging|चरण निर्धारण]] में सहायता मिले। यदि दूसरे या तीसरे चरण के रोग की पुष्टि होती है तो सहायक कीमोथेरेपी, उत्तरजीविता को पांच वर्षों तक बढ़ाने में 5 प्रतिशत तक बढ़ जाती है।<ref name="Carbone">{{Cite journal | last=Carbone | first=DP |author2=Felip E | title=Adjuvant therapy in non-small cell lung cancer: future treatment prospects and paradigms | journal=Clinical Lung Cancer | volume=12 | issue=5 | pages=261–271 | month=September |year=2011 | pmid=21831720 | doi=10.1016/j.cllc.2011.06.002 }}</ref><ref name="Le Chevalier">{{Cite journal | last=Le Chevalier | first=T | title=Adjuvant chemotherapy for resectable non-small-cell lung cancer: where is it going? | journal=Annals of Oncology | volume=21 | issue=Suppl. 7 | pages=vii196–198 | month=October | year=2010 | pmid=20943614 | url=http://annonc.oxfordjournals.org/content/21/suppl_7/vii196.long | doi=10.1093/annonc/mdq376 | access-date=13 मई 2016 | archive-url=https://archive.today/20130113045819/http://annonc.oxfordjournals.org/content/21/suppl_7/vii196.long | archive-date=13 जनवरी 2013 | url-status=live }}</ref> विनोरेल्बाइन तथा सिस्प्लाटिन का संयोजन पुराने पथ्यों से अधिक प्रभावी होता है।<ref name="Le Chevalier" /> ऐसे लोग जिनका कैंसर IB चरण में है उनके साथ सहायक कीमोथेरेपी का उपयोग विवादास्पद है, क्योंकि चिकित्सीय परीक्षणों में उत्तरजीविता लाभ स्पष्ट रूप से नहीं दिखे हैं।<ref name="Horn" /><ref name="Wakelee" /> रीसेक्टेबिल एनएससीएलसी में शल्यक्रिया पूर्व कीमोथेरेपी ([[नवसहायक कीमोथेरपी]]) के परीक्षण अनिर्णायक रहे हैं।<ref name="Clinical evidence" />
=== प्रशामक देखभाल ===
सीमावर्ती रोग वाले लोगों में, प्रशामक देखभाल या हॉस्पिस प्रबंधन उपयुक्त हो सकते हैं।<ref name="Collins" /> ये दृष्टिकोण उपचार विकल्पों पर अतिरिक्त चर्चा करने देते हैं और अच्छी तरह से निर्णय लेने का अवसर प्रदान करते हैं<ref name="pmid20818881">{{cite journal |author=Kelley AS, Meier DE |title=Palliative care—a shifting paradigm |url=https://archive.org/details/sim_new-england-journal-of-medicine_2010-08-19_363_8/page/780 |journal=New England Journal of Medicine |volume=363 |issue=8 |pages=781–2|year=2010 |month=August |pmid=20818881|doi=10.1056/NEJMe1004139 }}</ref><ref name="pmid19856592">{{cite journal |author=Prince-Paul M |title=When hospice is the best option: an opportunity to redefine goals|journal=Oncology (Williston Park, N.Y.) |volume=23 |issue=4 Suppl Nurse Ed|pages=13–7 |year=2009 |month=April |pmid=19856592 }}</ref> और ये जीवन के अंत में असहायक तथा महंगी देखभाल से बचा सकते हैं।<ref name="pmid19856592"/>
कीमोथेरेपी को प्रशामक देखभाल के साथ जोड़ कर एनएससीएलसी का उपचार किया जा सकता है। उन्नत मामलों में उपयुक्त कीमोथेरेपी, मात्र समर्थित देखभाल की तुलना में उत्तरजीविता का [[median|औसत]] बेहतर करती है साथ ही जीवन की गुणवत्ता को बेहतर करती है।<ref name="pmid7551923">{{cite journal|author=Souquet PJ, Chauvin F, Boissel JP, Bernard JP |title=Meta-analysis of randomised trials of systemic chemotherapy versus supportive treatment in non-resectable non-small cell lung cancer |journal=Lung Cancer |volume=12 Suppl 1 |issue= |pages=S147–54|year=1995 |month=April |pmid=7551923 |doi=10.1016/0169-5002(95)00430-9 }}</ref> पर्याप्त [[Performance status|शारीरिक स्वस्थता]] की उपस्थिति में, फेफड़े के कैंसर में प्रशामक देखभाल के साथ कीमोथेरेपी उत्तरजीविता को 1.5 से 3 माह तक बढ़ा सकती है, लाक्षणिक लाभ तथा बेहतर गुणवत्ता का जीवन दे सकती है, जिसके साथ आधुनिक एजेंटो में बेहतर परिणाम दिखते हैं।<ref name="pmid11441939">{{cite journal |author=Sörenson S, Glimelius B, Nygren P |title=A systematic overview of chemotherapy effects in non-small cell lung cancer |journal=Acta Oncol |volume=40 |issue=2–3|pages=327–39 |year=2001 |pmid=11441939 |doi= }}</ref><ref name="pmid12065068">{{cite journal |author=Clegg A, Scott DA, Sidhu M, Hewitson P, Waugh N |title=A rapid and systematic review of the clinical effectiveness and cost-effectiveness of paclitaxel, docetaxel, gemcitabine and vinorelbine in non-small-cell lung cancer |journal=Health Technol Assess |volume=5|issue=32 |pages=1–195 |year=2001 |pmid=12065068 |doi= }}</ref> एनएससीएलसी मेटा-एनालिसिस कोलाबोरेटिव ग्रुप इस बात की अनुशंसा करता है कि यदि प्राप्तकर्ता चाहे और उपचार को सह सके तो उन्नत एनएससीएलसी में कीमोथेरेपी पर विचार किया जाना चाहिए।<ref name="pmid18678835">{{cite journal |title=Chemotherapy in Addition to Supportive Care Improves Survival in Advanced Non–Small-Cell Lung Cancer: A Systematic Review and Meta-Analysis of Individual Patient Data From 16 Randomized Controlled Trials |journal=J. Clin. Oncol. |volume=26 |issue=28|pages=4617–25 |year=2008 |month=October |pmid=18678835 |pmc=2653127|doi=10.1200/JCO.2008.17.7162 |author1=NSCLC Meta-Analyses Collaborative Group }}</ref><ref name="pmid20464750">{{cite Cochrane |title=Chemotherapy and supportive care versus supportive care alone for advanced non-small cell lung cancer|review=CD007309 |version=2 |issue=5 |year=2010 |pmid=20464750|editor1-last=Burdett |editor1-first=Sarah |author1=Non-Small Cell Lung Cancer Collaborative Group }}</ref>
== पूर्वानुमान ==
{| class="wikitable floatright" style="text-align:center;font-size:90%;width:45%;margin-left:1em"
|+ style="background:#E5AFAA;"|'''Outcomes in lung cancer according to clinical stage'''<ref name="Rami-Porta" />
|- style="background: #E5AFAA;text-align:center;font-size:90%;"
! abbr="Type" rowspan="2" | Clinical stage
! abbr="5-year" colspan="2" | Five-year survival (%)
|- style="background: #E5AFAA;text-align:center;font-size:90%;"
! abbr="NSCLC" | Non-small cell lung carcinoma
! abbr="SCLC" | Small cell lung carcinoma
|-
| IA
| 50
| 38
|-
| IB
| 47
| 21
|-
| IIA
| 36
| 38
|-
| IIB
| 26
| 18
|-
| IIIA
| 19
| 13
|-
| IIIB
| 7
| 9
|-
| IV
| 2
| 1
|}
आम तौर पर पूर्वानुमान कमजोर होता है। फेफड़े के कैंसर से पीड़ित सभी लोगों में से 15 प्रतिशत लोग ही निदान के पांच वर्षों तक जीवित रह पाते हैं।<ref name="Merck" /> निदान के समय तक अक्सर रोग का स्तर उन्नत हो चुका होता है। उपस्थिति के समय एनएससीएलसी के 30 से 40 प्रतिशत मामले चरण IV पर होते हैं और एससीएलसी के 60 प्रतिशत मामले, चरण IV पर होते हैं।<ref name="Holland-Frei78" />
एनएससीएलसी में पूर्वानुमान कारकों में फेफड़े संबंधी लक्षणों की उपस्थिति या अनुपस्थिति, [[ट्यूमर]] आकार, कोशिका प्रकार ([[हिस्टोलॉजी]]), विस्तार का स्तर [[staging (pathology)|(चरण)]] तथा [[मेटास्टेसिस]] से एकाधिक [[लिम्फ नोड]] और [[संवहनी आक्षेप]] शामिल हैं। शल्यक्रिया न किए जा सकने वाले रोग से पीड़ित लोगों में परिणाम उन लोगों में और बुरे होते हैं जिनकी [[प्रदर्शन स्थिति]] खराब तथा वजन में कमी 10% से अधिक है।<ref name="AUTOREF17">{{cite web |url=http://www.cancer.gov/cancertopics/pdq/treatment/non-small-cell-lung/HealthProfessional/page2 |title=Non-Small Cell Lung Cancer Treatment |publisher=National Cancer Institute |work=PDQ for Health Professionals |accessdate=22 नवंबर 2008 |archive-url=https://web.archive.org/web/20150408213444/http://www.cancer.gov/cancertopics/pdq/treatment/non-small-cell-lung/healthprofessional/page2 |archive-date=8 अप्रैल 2015 |url-status=live }}</ref> एससीएलसी में पूर्वानुमान कारकों में प्रदर्शन स्थिति, [[लिंग]], रोग का चरण तथा निदान के समय [[केन्द्रीय तंत्रिका तंत्र]] या [[यकृत]] में रोग होना शामिल है।<ref name="AUTOREF18" />
एनएससीएलसी के लिए, चरण IA रोग का सबसे अधिक अच्छा पूर्वानुमान पूर्ण शल्यक्रिया उच्छेदन द्वारा हासिल किया जाता है, जिसमें 5 वर्ष की उत्तरजीविता 70 प्रतिशत तक होती है।<ref name="OTM">{{Cite book | last=Spiro | first=SG | title=Oxford Textbook Medicine | publisher=OUP Oxford |year=2010 | chapter=18.19.1 | edition=5th | isbn=978-0199204854 }}</ref> एससीएलसी के लिए समग्र पांच वर्षीय उत्तरजीविता लगभग 5 प्रतिशत है।<ref name="Harrison" /> व्यापक चरण एससीएलसी वाले लोगों में औसत पांच वर्ष की उत्तरजीविता की दर 1% से कम है। सीमित चरण रोग स्थिति में औसत उत्तरजीविता समय 20 माह है, जिसमें उत्तरजीविता दर 20% है।<ref name="Merck" />
[[राष्ट्रीय कैंसर संस्थान]] द्वारा प्रदान किए गए आंकड़ों के अनुसार, अमरीका में फेफड़े के कैंसर के निदान की औसत उम्र 70 साल है,<ref>SEER data (SEER.cancer.gov)[http://seer.cancer.gov/csr/1975_2003/results_single/sect_01_table.11_2pgs.pdf Median Age of Cancer Patients at Diagnosis 2002-2003] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20110516124412/http://seer.cancer.gov/csr/1975_2003/results_single/sect_01_table.11_2pgs.pdf |date=16 मई 2011 }}</ref> तथा मृत्यु की औसत उम्र 72 साल है।<ref>SEER data (SEER.cancer.gov)[http://seer.cancer.gov/csr/1975_2006/results_single/sect_01_table.13_2pgs.pdf Median Age of Cancer Patients at Death 2002-2006] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20110722134255/http://seer.cancer.gov/csr/1975_2006/results_single/sect_01_table.13_2pgs.pdf |date=22 जुलाई 2011 }}</ref> अमरीका में चिकित्सीय बीमा अपनाने वाले लोगों में बेहतर परिणाम दिखते हैं।<ref>{{cite journal | last=Slatore | first=CG | author2=Au DH, Gould MK | title=An official American Thoracic Society systematic review: insurance status and disparities in lung cancer practices and outcomes | date=नवम्बर 2010 | journal=American Journal of Respiratory and Critical Care Medicine | volume=182 | issue=9 | pages=1195–1205 | pmid=21041563 | url=http://ajrccm.atsjournals.org/content/182/9/1195.long | doi=10.1164/rccm.2009-038ST | access-date=13 मई 2016 | archive-date=13 जून 2020 | archive-url=https://web.archive.org/web/20200613071318/https://www.atsjournals.org/doi/full/10.1164/rccm.2009-038ST | url-status=dead }}</ref>
== रोग जनन विज्ञान ==
[[Image:Trachea, bronchus, lung cancers world map - Death - WHO2004.svg|thumb|[[Age adjustment|उम्र-मानकीकृत]] 2004 में प्रति 100,000 निवासियों में सांस की नली, श्वसनी और फेफड़ों के कैंसर से मौत<ref name="AUTOREF20" />
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[[Image:Lung cancer US distribution.gif|right|thumb|[[अमरीका]] में फेफड़े के कैंसर का विस्तार]]
[[Incidence (epidemiology)|व्यापकता]] तथा उत्तरजीविता, दोनो के लिहाज से, पूरी दुनिया में फेफड़े का कैंसर सबसे आम कैंसर है। 2008 में, फेफड़े के कैंसर के 1.61 मिलियन नए मामले थे और 1.38 मिलियन मौते हुई थीं। सर्वोच्च दरें यूरोप तथा उत्तरी अमरीका में हैं।<ref name="GLOBOCAN">{{cite journal | last=Ferlay | first=J | author2=Shin HR, Bray F et al. | title=Estimates of worldwide burden of cancer in 2008: GLOBOCAN 2008 | journal=International Journal of Cancer | date=दिसम्बर 2010 | volume=127 | issue=12 | pages=2893–2917 | pmid=21351269 | url=http://onlinelibrary.wiley.com/doi/10.1002/ijc.25516/full | doi=10.1002/ijc.25516 | access-date=13 मई 2016 | archive-url=https://web.archive.org/web/20160506161811/http://onlinelibrary.wiley.com/doi/10.1002/ijc.25516/full | archive-date=6 मई 2016 | url-status=live }}</ref> 50 से ऊपर की उम्र वाले तथा धूम्रपान के इतिहास वाले जनसंख्या खंड के लोगों में फेफड़े के कैंसर के विस्तार की सबसे अधिक संभावना है। पुरुषों में 20 वर्ष पहले उत्तरजीविता दर घटनी शुरु हो गयी थी जबकि महिलाओं में फेफड़े के कैंसर से उत्तरजीविता दर पिछले दशक से बढ़नी शुरु हो गयी है और हाल ही में स्थिर होना शुरु हो गयी है।<ref name="AUTOREF22" /> अमरीका में फेफड़े के कैंसर के विकसित होने का [[जीवन काल जोखिम]] पुरुषों में 8% तथा महिलाओं में 6% है।<ref name="Harrison" />
प्रत्येक 3–4 मिलियन सिगरेटों के पिये जाने पर एक फेफड़े के कैंसर की मौत होती है।<ref name="Harrison" /><ref>{{cite journal |last=Proctor | first=RN | title=The history of the discovery of the cigarette-lung cancer link: evidentiary traditions, corporate denial, global toll | journal=Tobacco Control | volume=21 | issue=2 | pages=87–91 | month=March | year=2012 |pmid=22345227 | doi=10.1136/tobaccocontrol-2011-050338 }}</ref>"[[बिग टोबैको]]" का प्रभाव धूम्रपान संस्कृति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।<ref name="Lum" /> युवा गैर-धूम्रपानकर्ता जो तंबाकू विज्ञापन देखते हैं उनके धूम्रपान शुरु करने की काफी संभावना होती है।<ref>{{cite journal | last=Lovato | first=C |author2=Watts A, Stead LF | title=Impact of tobacco advertising and promotion on increasing adolescent smoking behaviours | date=अक्टूबर 2011 | journal=Cochrane Database of Systematic Reviews | issue=10 | pages=CD003439 | pmid=21975739 | doi=10.1002/14651858.CD003439.pub2}}</ref> [[निष्क्रिय धूम्रपान]] की भूमिका को फेफड़े के कैंसर के लिए अब अधिक मान्यता मिल रही है,<ref name="Taylor" /> जिसके कारण दूसरों के धूम्रपान के धुएं से धूम्रपान न करने वालों को बचाने के लिए नीतिगत दखल दिए जा रहे हैं।<ref>{{cite journal | last=Kemp |first=FB | title=Smoke free policies in Europe. An overview | journal=Pneumologia | volume=58 | issue=3 | pages=155–158 |month=Jul–Sep | year=2009 | pmid=19817310 }}</ref> मोटर वाहनों, कारखानों तथा विद्युत संयंत्रों के उत्सर्जन से भी संभावित जोखिम पैदा होता है।<ref name="MurrayNadel46" />
[[पूर्वी यूरोप]] के पुरुषों में फेफड़े के कैंसर से सबसे अधिक उत्तरजीविता दर है और उत्तरी यूरोप तथा अमरीका में महिलाओं में यह दर सबसे अधिक है। उत्तरी अमरीका में काले पुरुषों तथा महिलाओं में यह सबसे अधिक है।<ref>National Cancer Institute; SEER stat fact sheets: Lung and Bronchus. Surveillance Epidemiology and End Results. 2010 [http://seer.cancer.gov/statfacts/html/lungb.html#incidence-mortality] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20160304031945/http://seer.cancer.gov/statfacts/html/lungb.html#incidence-mortality|date=4 मार्च 2016}}</ref> फेफड़े के कैंसर की दर विकासशील देशों में वर्तमान में कम है।<ref name="AUTOREF23" /> विकासशील देशों में, धूम्रपान का चलन बढ़ने से, अगले कुछ वर्षों में दरों के बढ़ने की संभावना है विशेष रूप से चीन में<ref>{{cite journal | last=Zhang | first=J |author2=Ou JX, Bai CX |title=Tobacco smoking in China: prevalence, disease burden, challenges and future strategies | date=नवम्बर 2011 |journal=Respirology | volume=16 | issue=8 | pages=1165–1172 | pmid=21910781 | doi=10.1111/j.1440-1843.2011.02062.x }}</ref> तथा भारत में।<ref name="AUTOREF25" />
1960 से फेफड़े के एडीनोकार्सिनोमा की दर दूसरे प्रकार के कैंसरों की तुलना में बढ़ी है। इसका आंशिक कारण सिगरेटों में फिल्टर का शुरु किया जाना है। फिल्टर के उपयोग से तंबाकू के धुएं के बड़े कण हट जाते हैं जिससे बड़े वायुमार्ग में निक्षेप कम हो जाता है। हालांकि धूम्रपान करने वाले को उसी मात्रा में निकोटिन पाने के लिए अधिक जोर से अंतःश्वसन करना पड़ता है, जिससे छोटे वायुमार्ग में कणों का निक्षेप बढ़ जाता है और एडीनोकार्सिनोमा बढ़ जाता है।<ref name="Charloux" /> फेफड़े के एडीनोकार्सिनोमा की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं।<ref>{{cite journal | last=Kadara | first=H |author2=Kabbout M, Wistuba II | title=Pulmonary adenocarcinoma: a renewed entity in 2011 | journal=Respirology | volume=17 | issue=1 |pages=50–65 | month=January | year=2012 | pmid=22040022 | doi=10.1111/j.1440-1843.2011.02095.x }}</ref>
== इतिहास ==
फेफड़े का कैंसर, सिगरेट पीना शुरु करने के पहले आम नहीं था; 1761 तक इसे एक विशिष्ट रोग के रूप में मान्यता नहीं दी गयी थी।<ref name="AUTOREF27" /> फेफड़े का कैंसर के विभिन्न पहलुओं को 1810 में बताया गया था।<ref name="AUTOREF28" /> फेफड़े के घातक ट्यूमर, 1 प्रतिशत कैंसर का निर्माण करते थे तथा उनको ऑटोप्सी में 1878 में देखा गया, लेकिन 1900 की शुरुआत तक वे 10-15 प्रतिशत तक बढ़ गए थे।<ref name="Witschi" /> 1912 के चिकित्सीय साहित्य में पूरी दुनिया में ऐसे मामले मात्र 374 रिपोर्ट किए गए,<ref name="AUTOREF29" /> लेकिन ऑटोप्सी का समीक्षाओं ने दर्शाया कि फेफड़े के कैंसर 1852 में 0.3% से बढ़ कर 1952 में 5.66% हो गए।<ref name="Grannis" /> [[जर्मनी]] में 1929 में चिकित्सक फ्रिट्ज़ लिकिंट ने धूम्रपान तथा फेफड़े के कैंसर के बीच की कड़ी को मान्यता प्रदान की,<ref name="Witschi" /> जिसके कारण आक्रामक [[Anti-tobacco movement in Nazi Germany|धूम्रपान विरोधी अभियान]]चलाया गया।<ref name="Proctor" /> [[ब्रिटिश चिकित्सा अध्ययन]] जो 1950 में प्रकाशित हुआ, वह पहला ठोस [[epidemiology|रोज जनक विज्ञानी]] साक्ष्य था जो फेफड़े के कैंसर और धूम्रपान की कड़ी के स्थापित कर रहा था।<ref name="Doll" /> जिके परिणामस्वरूप 1964 में [[यूनाइटेड स्टेट्स के सर्जन जनरल]] ने अनुशंसा की कि घूम्रपान करने वालों को धूम्रपान करना छोड़ देना चाहिए।<ref name="AUTOREF30" />
[[स्कीनबर्ग, सेक्सोनी]] के निकट [[Ore Mountains (Germany)|ओरे माउंटेन्स]] में खनिकों में [[रेडॉन]] गैस का संबंध सबसे पहले स्थापित किया गया था। [[चांदी]] का खनन 1470 से किया जा रहा था और ये खानें [[यूरेनियम]] से भरपूर थीं तथा इनके साथ [[रेडियम]] और रेडियम गैस भी शामिल थी।<ref name="Greaves" /> खनिकों में गैरआनुपातिक रूप से फेफड़े के रोग विकसित हो गए, अंततः जिनको 1870 में फेफड़े के कैंसर के रूप में मान्यता दी गयी। <ref>{{Cite journal | last=Greenberg | first=M |author2=Selikoff IJ |title=Lung cancer in the Schneeberg mines: a reappraisal of the data reported by Harting and Hesse in 1879 | url=https://archive.org/details/sim_annals-of-occupational-hygiene_1993-02_37_1/page/5 |journal=Annals of Occupational Hygiene | volume=37 | issue=1 | pages=5–14 | month=February | year=1993 | pmid=8460878 }}</ref> इस खोज के बावजूद, [[USSR]] की मांग के कारण 1950 में खनन जारी रहा।<ref name="Greaves" /> 1960 में रेडॉन को कैंसर कारक के रूप में पुष्टि प्रदान कर दी गयी।<ref>{{Cite journal | last=Samet | first=JM |title=Radiation and cancer risk: a continuing challenge for epidemiologists | journal=Environmental Health | volume=10 |issue=Suppl. 1 | pages=S4 | month=April | year=2011 | pmid=21489214 | doi=10.1186/1476-069X-10-S1-S4 | pmc=3073196}}</ref>
फेफड़ के कैंसर के लिए पहली सफल [[न्यूमेनोएक्टोमी]] 1933 में की गयी।<ref name="AUTOREF32" /> प्रशामक [[रेडियोथेरेपी]] को 1940 से उपयोग किया जा रहा है।<ref name="Edwards" /> रेडिकल रेडियोथेरेपी को शुरु में 1950 में उपयोग किया गया था जो कि फेफड़े के कैंसर के शुरुआती चरण के उन रोगियों को विकिरण की बड़ी खुराकों को देने का प्रयास था जिन पर शल्यक्रिया नहीं की जा सकती थी।<ref name="AUTOREF33" /> 1997 में सतत लघुमात्रा त्वरित रेडियोथेरेपी (सीएचएआरटी) को परंपरागत रेडिकल रेडियोथेरेपी के सुधार रूप में देखा गया था।<ref name="Saunders" /> एससीएलसी के साथ 1960 में शल्यक्रिया उच्छेदन<ref name="AUTOREF34" /> तथा रेडिकल रेडियोथेरेपी के आरंभिक प्रयास<ref name="AUTOREF35" /> सफल थे। 1970 में सफल कीमोथेरेपी पथ्यों का विकास हुआ।<ref name="AUTOREF36" />
== सन्दर्भ ==
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<ref name="Witschi">{{Cite journal | last=Witschi | first=H | title=A short history of lung cancer | journal=[[Toxicological Sciences]] | volume=64 | issue=1 | pages=4–6 | date=नवम्बर 2001 | url=http://toxsci.oxfordjournals.org/cgi/content/full/64/1/4 | pmid=11606795 | doi=10.1093/toxsci/64.1.4 | access-date=13 मई 2016 | archive-url=https://web.archive.org/web/20070309064452/http://toxsci.oxfordjournals.org/cgi/content/full/64/1/4 | archive-date=9 मार्च 2007 | url-status=live }}</ref>
<ref name="AUTOREF29">{{Cite book|author=Adler, I |year=1912 |title=Primary Malignant Growths of the Lungs and Bronchi |url=https://archive.org/details/primarymalignan00adlegoog |place= New York |publisher=Longmans, Green, and Company |oclc=14783544 |ol=24396062M }}, cited in {{Cite journal |author=Spiro SG, Silvestri GA |title=One hundred years of lung cancer |journal=American Journal of Respiratory and Critical Care Medicine |volume=172 |issue=5 |pages=523–529 |year=2005 |pmid=15961694 |doi=10.1164/rccm.200504-531OE}}</ref>
<ref name="Grannis">{{cite web | last=Grannis | first=FW |title=History of cigarette smoking and lung cancer | publisher=smokinglungs.com | url=http://www.smokinglungs.com/cighist.htm | accessdate=6 अगस्त 2007 | archive-url = https://web.archive.org/web/20070718174754/http://www.smokinglungs.com/cighist.htm| archive-date = July 18, 2007}}</ref>
<ref name="Proctor">{{Cite book | last=Proctor | first=R | title=The Nazi War on Cancer | publisher=Princeton University Press | year=2000 | pages=[https://archive.org/details/naziwaroncancer00proc/page/173 173–246] | isbn=0-691-00196-0 | url=https://archive.org/details/naziwaroncancer00proc/page/173 }}</ref>
<ref name="Doll">{{Cite journal | last=Doll | first=R |author2=Hill AB | title=Lung Cancer and Other Causes of Death in Relation to Smoking | journal=British Medical Journal | volume=2 | issue=5001 | pages=1071–1081 |date=नवम्बर 1956 | pmid=13364389 | doi=10.1136/bmj.2.5001.1071 | pmc=2035864 }}</ref>
<ref name="AUTOREF30">{{cite web | author=US Department of Health Education and Welfare | title=Smoking and health: report of the advisory committee to the Surgeon General of the Public Health Service | location=Washington, DC | publisher=US Government Printing Office | year=1964 | url=http://profiles.nlm.nih.gov/NN/B/B/M/Q/_/nnbbmq.pdf | format=PDF | access-date=13 मई 2016 | archive-url=https://web.archive.org/web/20081217024606/http://profiles.nlm.nih.gov/NN/B/B/M/Q/_/nnbbmq.pdf | archive-date=17 दिसंबर 2008 | url-status=live }}</ref>
<ref name="Greaves">{{Cite book | last=Greaves | first=M | title=Cancer: the Evolutionary Legacy | publisher=Oxford University Press | year=2000 | pages=[https://archive.org/details/cancerevolutiona00grea/page/196 196–197] | isbn=0-19-262835-6 | url=https://archive.org/details/cancerevolutiona00grea/page/196 }}</ref>
<ref name="AUTOREF32">{{Cite journal | last=Horn | first=L | author2=Johnson DH | title=Evarts A. Graham and the first pneumonectomy for lung cancer | journal=Journal of Clinical Oncology | volume=26 | issue=19 | pages=3268–3275 | date=जुलाई 2008 | pmid=18591561 | url=http://jco.ascopubs.org/cgi/pdf_extract/26/19/3268 | doi=10.1200/JCO.2008.16.8260 | access-date=13 मई 2016 | archive-url=https://web.archive.org/web/20200317080747/https://ascopubs.org/cgi/pdf_extract/26/19/3268 | archive-date=17 मार्च 2020 | url-status=live }}</ref>
<ref name="Edwards">{{Cite journal | last=Edwards | first=AT | title=Carcinoma of the Bronchus | journal=Thorax | volume=1 | issue=1 | pages=1–25 | year=1946 | pmc = 1018207 | doi=10.1136/thx.1.1.1 | pmid=20986395}}</ref>
<ref name="AUTOREF33">{{Cite journal | last=Kabela | first=M | title=Erfahrungen mit der radikalen Röntgenbestrahlung des Bronchienkrebses |trans-title=Experience with radical irradiation of bronchial cancer | language = de | journal=Ceskoslovenská Onkológia | volume=3 | issue=2 | pages=109–115 | year=1956 | pmid=13383622 }}</ref>
<ref name="Saunders">{{Cite journal | last=Saunders | first=M |author2=Dische S, Barrett A et al. | title=Continuous hyperfractionated accelerated radiotherapy (CHART) versus conventional radiotherapy in non-small-cell lung cancer: a randomised multicentre trial | url=https://archive.org/details/sim_the-lancet_1997-07-19_350_9072/page/160 | journal=Lancet | volume=350 | issue=9072 | pages=161–165 | publisher=Elsevier |date=जुलाई 1997 | pmid=9250182 | doi=10.1016/S0140-6736(97)06305-8 }}</ref>
<ref name="AUTOREF34">{{Cite journal | last=Lennox | first=SC |author2=Flavell G, Pollock DJ et al. | title=Results of resection for oat-cell carcinoma of the lung | url=https://archive.org/details/sim_the-lancet_1968-11-02_2_7575/page/n9 | journal=Lancet | volume=2 | issue=7575 | pages=925–927 | publisher=Elsevier |date=नवम्बर 1968 | pmid=4176258 | doi=10.1016/S0140-6736(68)91163-X }}</ref>
<ref name="AUTOREF35">{{Cite journal | last=Miller | first=AB |author2=Fox W, Tall R | title=Five-year follow-up of the Medical Research Council comparative trial of surgery and radiotherapy for the primary treatment of small-celled or oat-celled carcinoma of the bronchus | journal=Lancet | volume=2 | issue=7619 | pages=501–505 | publisher=Elsevier |date=सितंबर 1969 | pmid=4184834 | doi=10.1016/S0140-6736(69)90212-8 }}</ref>
<ref name="AUTOREF36">{{Cite journal | last=Cohen | first=M |author2= Creaven PJ, Fossieck BE Jr et al. | title=Intensive chemotherapy of small cell bronchogenic carcinoma | journal=Cancer Treatment Reports | volume=61 | issue=3 | pages=349–354 | year=1977 | pmid=194691 }}</ref>
}}
==बाहरी कड़ियाँ==
*[https://www.indiatimes.com.co/2022/02/lung-cancer-symptoms-prevention-and-treatment.html क्यों होता फेफड़े का कैंसर, जानें लक्षण, बचाव और इलाज] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20220204121910/https://www.indiatimes.com.co/2022/02/lung-cancer-symptoms-prevention-and-treatment.html |date=4 फ़रवरी 2022 }} (Feb 2022)
*[https://web.archive.org/web/20180514010918/http://www.onlymyhealth.com/%E0%A4%AB%E0%A5%87%E0%A4%AB%E0%A4%A1%E0%A4%BC%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A5%88%E0%A4%82%E0%A4%B8%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A5%8D-%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%B9%E0%A5%88-17934864138 फेफड़े का कैंसर क्या है?]
*[https://web.archive.org/web/20160503040612/http://hindi.webdunia.com/health-care/5-sing-of-lung-cancer-116022500050_1.html फेफड़ों के कैंसर की हैं यह 5 निशानी] (वेबदुनिया)
*[https://web.archive.org/web/20160728023503/http://www.bbc.com/hindi/science/2014/04/140404_lung_cancer_survival_sr फेफड़े के कैंसर में बचना मुश्किलः अध्ययन] (बीबीसी हिन्दी)
*[https://web.archive.org/web/20170410154519/http://srirajivdixit.com/how-to-treat-lung-cancer/ फेफड़ों के कैन्सर का कैसे करें इलाज]
*[https://web.archive.org/web/20160506222106/http://onlyayurved.com/major-disease/cancer/%e0%a4%ab%e0%a5%87%e0%a4%ab%e0%a5%9c%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a5%88%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a4%b0/ फेफड़ों का कैन्सर]
[[श्रेणी:रोग]]
[[श्रेणी:फेफड़ा रोग]]
[[श्रेणी:कैंसर]]
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मॉरिशियाई रुपया
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AllahMaaliqwaHafiz
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wikitext
text/x-wiki
{{Infobox currency
| currency_name_in_local = Mauritian Rupee<br>Roupie mauricienne<br>மொரீசியஸ் ரூபாய்
| iso_code = MUR
| using_countries = {{MUS}}
| image_1 = Mauritian rupees 100.png
| image_title_1 = Rs. 100 का नोट
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'''मॉरिशियाई रुपया''' ({{Langx|mfe|Roupi|italic=no}}, {{Langx|ta|மொரீசியஸ் ரூபாய்|italic=no}}; [[मुद्रा चिह्न|चिह्न]]: '''Re'''/'''Rs'''; [[आईएसओ ४२१७|कोड]]: '''MUR''') [[मॉरिशस|मॉरीशस]] की मुद्रा है। यह 100 सेंट में विभाजित है।
== इतिहास ==
रुपया को सन 1876 मे क़ानूनी तौर पर मॉरिशस का मुद्रा बनाया गया था । रुपया को चुना गया क्योंकि रुपया को चुना गया क्योंकि भारतीयों के मॉरिशस में बसने ने कारण भारतीय बड़े पैमाने पर [[भारतीय रुपया|भारतीय रुपए]] देश में मौजूद थे। मॉरिशियाई रुपया को 1877 में भारतीय रुपया, [[पाउण्ड स्टर्लिंग|स्टर्लिंग]] और [[मॉरिशियाई डॉलर]] के बदले में इस्तेमाल में लाया गया, और एक मॉरिशियाई रुपया एक भारतीय रूपए के बराबर था, या एक मॉरिशियाई डॉलर का आधा। उस समय एक पाउंड 10¼ रुपए के बराबर था। मॉरीशस के मुद्रा को [[सेशेल्स]] में भी 1914 तक परिचालित किया गया, जब [[सेशेल्सी रुपया]] को उसकी जगह स्थापित किया गया। एक सेशेल्सी रुपया एक मॉरिशियाई रूपए के बराबर था।
1934 में, [[पाउण्ड स्टर्लिंग|स्टर्लिंग]] से पेग ने भारतीय रुपया से पेग की जगह ले ली, 1 रुपया = 1 शिलिंग 6 पेंस के दर से (जिस दर पर भारतीय रुपये का भी पेग था<ref name="mru">{{Cite web|url=http://users.erols.com/kurrency/mu.htm|title=Tables of Modern Monetary Systems (Mauritius)|accessdate=2007-03-03|last=Schuler|first=Kurt|publisher=Kurt Schuler|archive-url=https://web.archive.org/web/20070926220652/http://users.erols.com/kurrency/mu.htm|archive-date=26 सितंबर 2007|url-status=dead}}</ref>). इस दर (जो 13⅓ रुपए = 1 पाउंड के बराबर है) को १९७९ बनाए रखा गया था।.
== सिक्के ==
1877 में, 1, 2, 5, 10 और 20 सेंट के सिक्के शुरू किए गए थे, जहाँ 1, 2, 5 तांबे में और 10, 20 वाले चाँदी के बने थे। सिक्कों काहैं 1899 सुक गया और 1911 तक फिर शुरू नहीं हुआ, साथ ही चाँदी के सिक्कों का उत्पादन 1934 तक नहीं किया गया, जब ¼, ½ और 1 रुपया के सिक्के शुरू किए गए। 1947 में, ताम्र-निकल से बने 10 सेंट शुरू किया गया, और 1950 में चाँदी की जगह ताम्र-निकल का इस्तेमाल किया जाने लगा।
[[चित्र:Mauritius_-_1_Rupee_-_coin.jpg|अंगूठाकार|मॉरीशस गणराज्य के 1 रुपया का सिक्का]]
1971 शाही टकसाल ने सिक्कों और नोटों की एक नई सेट पेश की। इस सेट में आगे की तरफ़ महारानी एलिजाबेथ थीं और पीछे की तरफ़ राजकीय रूपांकन थे। पीछे के कुछ डिज़ाइनों को [[:en:Christopher_Ironside|क्रिस्टोफर आयरनसाइड]] ओबीई ने डिज़ाइन किया था, जैसे 10 रुपया, 200 स्वर्ण रुपया और 250 स्वर्ण रुपया (1988 में जारी)।
1987 में, सिक्कों की एक नई शृंखला पेश की गई जिनमें पहली बार ब्रिटिश सम्राट का चित्र नहीं था (मॉरीशस बन नहीं था एक गणराज्य 1992 तक), लेकिन उनकी जगर सर [[शिवसागर रामगुलाम]] का। इन सिक्कों में शामिल थे कॉपर-प्लेटेड-स्टील के 1 और 5 सेंट (5 सेंट का आकार काफ़ी छोटा कर दिया गया), निकल-प्लेटेड-स्टील 20 सेंट और ½ रुपया, और ताम्र-निकल के 1 और 5 रुपए। ताम्र-निकल के 10 रुपए में पेश किए गए 1997 में। वर्तमान में जो सिक्के प्रचलन में हैं, वे हैं 5 सेंट, 20 सेंट, ½ रुपया, 1, 5, 10 और 20 रुपए। 1 रूपए से कम कीमत वाले सिक्कों को "सुपरमार्केट" के छुट्टे पैसे समझे जाते हैं। 1 सेंट का सिक्का सालों से परिचालन में नहीं है, और 1 सेंट वाला अंतिम शृंखला 1987 में पेश की गई थी और अब ये कलेक्टरों के आइटम हैं।
2007 में एक द्वि-धातु का 20 रुपया का सिक्का जारी किया गया बैंक ऑफ मॉरिशस के 40वीं वर्षगांठ मनाने के लिए और यह सिक्का अब सामान्य प्रचलन में है।
== बैंकनोट ==
सबसे पहले बैंकनोट सरकार द्वारा जारी किए गए थे 1876 में, और 5, 10 और 50 रुपए के मूल्य में। 1 रुपये के नोट लाया गया था 1919 में। 1940 में 25 और 50 पैसे और 1 रुपए के आपातकालीन नोट बनाए गए थे। 1954 में, 25 और 1000 रुपए में शुरू किए गए थे।
बैंक ऑफ मॉरिशस को सितम्बर 1967 में स्थापित किया गया था देश के केंद्रीय बैंक के रूप में , और उस समय के बाद से सिक्कों और बैंकनोटों को जारी करने के लिए ज़िम्मेदार है।<ref>{{Cite book|last1=Linzmayer|first1=Owen|title=The Banknote Book|chapter=Mauritius|publisher=www.BanknoteNews.com|year=2012|location=San Francisco, CA|url=http://www.banknotebook.com|access-date=15 जून 2020|archive-url=https://web.archive.org/web/20120829063428/http://www.banknotebook.com/|archive-date=29 अगस्त 2012|url-status=dead}}</ref> बैंक ने अपने पहले नोट 1967 में जारी किए, जिनमें 5, 10, 25, और 50 रूपए शामिल थे। इन नोटों पर दिनांक नहीं छपा था और उनके ऊपर महारानी एलिज़ाबेथ द्वितीय का चित्र था। आने वाले वर्षों में, कुछ नोटों को गवर्नर और प्रबंध निदेशक के नए हस्ताक्षरों के साथ बदला गया, लेकिन इसके अलावा इनमें और कोई बदलाव नहीं था।
1985 में, बैंक ऑफ़ मॉरिशस ने बैंक नोटों की एक नई शृंखला जारी की जिसमें 5, 10, 20, 50, 100, 200, 500 और 1000 रूपए शामिल थे। इन नोटों को क़रीब से जाँचने पर पाया जाता है कि इन्हें दो नोट छापने वाली कंपनियों (ब्रैडबरी विलकिंसन और थॉमस दे ला र्यु) ने छापा था। इनका डिज़ाइन भी अलग-अलग समय पर किया गया था और इन नोटों के डिज़ाइन में ऐसी बहुत कम चीज़ें हैं जो सभी मूल्यों पर दिखती हैं। कई प्रकार की संख्या प्रणालियाँ, सुरक्षा धागे, मॉरिशियाई प्रतीक के अलग-अलग डिज़ाइन और आकार, अलग प्रकाश में परिवर्तनीय स्याही, और नोटों के आकार में बढ़ोतरी में गड़बड़ी और कई अलग-अलग टाइपसेट। ये समस्या 1998 तक रही।
1998 में, बैंक ऑफ़ मॉरीशस के नोटों की एक नई शृंखला जारी की, जिसमें 25, 50, 100, 200, 500, 1,000 और 2,000 रुपए हैं। इन नोटों का एक मानक प्रारूप था और सभी को एक साथ जारी किया गया नवंबर 1998 में। इस शृंखला के सभी नोटों को इंग्लैंड में Tथॉमस दे ला र्यु लिमिटेड ने मुद्रित किया था। इन नोटों को विवादों के बाद जून 1999 में परिचालन से हटा दिया गया।
बैंक ऑफ़ मॉरीशस ने अपनी नवीनतम नोटों की शृंखला जून 1999 के बाद जारी की, जिनका आज इस्तेमाल होता है।
{| class="wikitable"
! colspan="4" |1967 "एलिजाबेथ द्वितीय" मुद्दा
|-
!छवि
!मूल्य
!अग्रभाग
!रिवर्स
|-
| align="center" | [http://coinsbanknotespictures.blogspot.com/2012/11/mauritius-banknotes-5-rupees-queen.html]
| 5 रुपए
| rowspan="6" | [[एलिज़ाबेथ द्वितीय|महारानी एलिजाबेथ द्वितीय]]
|स्मारक को ग्रांड पोर्ट की खाड़ी में डच नाविकों के पहुँचने को दर्शाता है (1598), नौकायन नाव
|-
|
| 10 रुपए
| सरकार भवन, [[पोर्ट लुई]]
|-
| align="center" | [http://coinsbanknotespictures.blogspot.com/2010/05/mauritius-banknotes-25-rupees-banknote.html]
| 25 रुपए
|[[बैलगाड़ी]]
|-
|
| 50 रुपए
| [[पोर्ट लुई]] बंदरगाह
|}
=== वर्तमान में परिचालित नोट ===
==== अग्रभाग का डिज़ाइन ====
हर नोट में एक हाथ से उत्कीर्ण चित्र है एक प्रमुख मॉरीशियाई व्यक्ति की, जो बाएँ हिस्से में है।
{| class="wikitable"
!मूल्य
!'''चित्र'''
!'''शब्दचित्र'''
|-
|25 रुपए
|सर म्वालिन जीन आह-शुएन
|रॉड्रिक्स
|-
|50 रुपए
|जोसेफ मौरिस पातुरौ
|ले कौदोन
|-
|100 रुपए
|रेंगानादेन सीनीवासन
|न्यायलय भवन
|-
|200 रुपए
|सर अब्दुल रज़ाक मोहम्मद
|मॉरीशस का बाजार
|-
|500 रुपए
|श्री सूकदेव बिस्सूनदोयल
|मॉरीशस विश्वविद्यालय
|-
|1000 रुपए
|सर चार्ल्स गैतन डुवाल
|राज्य भवन
|-
|2000 रुपए
|सर [[शिवसागर रामगुलाम]]
|बैल और गन्ने की गाड़ी
|}
हर नोट पर बैंक ऑफ़ मॉरीशस के भवन की एक तस्वीर और न्याय के मूर्ति का चित्रण भी है। ऊपरी दाएँ कोने पर नेत्रहीन लोगों की सहायता के किए एक चिह्न है, नोटों के आकार में फ़र्क के साथ-साथ।
==== रिवर्स के डिजाइन ====
हर मूल्य के नोट में एक शब्दचित्र है, जो मॉरिशस के अलग-अलग चिह्नों को दर्शाता है। शब्दचित्र के नीचे संख्या तमिल में लिखी गई है।
== स्मारक सिक्के ==
{| class="wikitable" style="font-size: 90%"
!'''मूल्य'''
!'''संरचना और खत्म'''
!'''बड़े पैमाने पर'''
!'''व्यास'''
!'''जारी करने की तिथि'''
!'''स्मारक विषय'''
|-
| 25 रुपये
| [[चाँदी|चांदी]] गैर-सबूत
| 38.61 जी
| 38.61 मिमी
| अप्रैल 1978
| मारीशस की स्वतंत्रता के 10 वीं वर्षगाँठ के अवसर पर
|-
| 20 रुपए
| चांदी के सबूत
| 28.28 जी
| 38.61 मिमी
| मई 1998
| महारानी एलिजाबेथ द्वितीय और प्रिंस फिलिप के शादी की 50वीं सालगिरह
|-
| 1000 रुपये
| [[सोना|सोने के]] सबूत
| 17 जी
| 31.00 मिमी
|जनवरी 2000
|मॉरीशस चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री का 150वाँ वर्षगाँठ
|-
| 10 रुपये
| चांदी के सबूत
| 28.28 जी
| 38.60 मिमी
| जनवरी 2000
| मॉरीशस चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री का 150वाँ वर्षगाँठ
|-
| 100 रुपये
| चांदी के सबूत
| 36.76 जी
| 44 मिमी
| जुलाई 2001
| [[महात्मा गांधी]] के मॉरीशस में आगमन का 100वाँ वर्षगाँठ
|}
== References ==
{{Reflist}}
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पेमा खांडू
0
731992
6547980
6539335
2026-05-03T09:07:34Z
~2026-26816-83
922754
6547980
wikitext
text/x-wiki
6548002
6547980
2026-05-03T10:20:28Z
चाहर धर्मेंद्र
703114
[[Special:Contributions/~2026-26816-83|~2026-26816-83]] ([[User talk:~2026-26816-83|वार्ता]]) द्वारा किए गए बदलाव [[Special:Diff/6547980|6547980]] को पूर्ववत किया
6548002
wikitext
text/x-wiki
{{Infobox Indian politician
| name= पेमा खांडू
| image = Pema Khandu.png
| birth_date = {{birth date|1979|08|21|df=yes}}
| death_date =
| birth_place = ज्ञांगकर गाँव, [[तवांग जिला]]
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'''पेमा खांडू''' (जन्म : २१ अगस्त, १९७९) एक भारतीय राजनीतिज्ञ हैं। यह 17 जुलाई 2015 को [[अरुणाचल प्रदेश]] के सबसे युवा मुख्यमंत्री बने। इन्होंने अपनी पढ़ाई [[दिल्ली विश्वविद्यालय]] से पूरी की थी।<ref>{{cite news|title=पेमा खांडू बने अरुणाचल प्रदेश के नए मुख्यमंत्री|url=http://naidunia.jagran.com/national-pema-khandu-swears-in-as-new-cm-of-arunachal-pradesh-781440|accessdate=10 अगस्त 2015|date=17 जुलाई 2015|publisher=नई दुनिया|archive-url=https://web.archive.org/web/20160822085945/http://naidunia.jagran.com/national-pema-khandu-swears-in-as-new-cm-of-arunachal-pradesh-781440|archive-date=22 अगस्त 2016|url-status=dead}}</ref>
== राजनीतिक गतिविधियांं ==
अपने पिता के मृत्यु के बाद यह जल संसाधन विकास और पर्यटन मंत्री के रूप में [[अरुणाचल प्रदेश|अरुणाचल प्रदेश सरकार]] में शामिल हो गए। इन्होंने जून 2011 में अपने पिता के निर्वाचन क्षेत्र मुक्तो से अरुणाचल प्रदेश विधान सभा चुनाव निर्विरोध जीता था। वे उस समय [[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस]] के उम्मीदवार के रूप खड़े थे।
2005 में वे अरुणाचल प्रदेश कांग्रेस कमिटी के सचिव बने। 2010 में यह तवंग जिला कांग्रेस समिति के अध्यक्ष बन गए। 16 जुलाई 2016 को यह कांग्रेस के विधायक दल के नेता के रूप में चुनाव लड़े थे।
2014 में इन्होंने मुक्तो से फिर विधान सभा चुनाव लड़ा और निर्विरोध ही जीत गए। 37 वर्ष में 17 जुलाई 2016 को इन्होंने मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लिया।
16 सितम्बर 2016 को पेमा खांडू 43 सत्तापक्ष विधायकों के साथ [[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस]] छोड़कर [[पीपुल्स पार्टी ऑफ अरुणाचल]] में शामिल हो गये और [[भारतीय जनता पार्टी]] के साथ सरकार बनाई।<ref>{{cite web |url=http://khabar.ndtv.com/news/india/arunachal-pradesh-congress-chief-minister-pema-khandu-leads-revolt-who-is-he-1459536 |title=अरुणाचल प्रदेश कांग्रेस में नई बगावत के सूत्रधार हैं खुद मुख्यमंत्री पेमा खांडू, जानिए उनके बारे में... |publisher=एनडीटीवी |date=सितम्बर 16, 2016 |accessdate=जनवरी 1, 2017 |archive-url=https://web.archive.org/web/20170102080243/http://khabar.ndtv.com/news/india/arunachal-pradesh-congress-chief-minister-pema-khandu-leads-revolt-who-is-he-1459536 |archive-date=2 जनवरी 2017 |url-status=dead }}</ref>
31 दिसम्बर 2016 को वह [[पीपुल्स पार्टी ऑफ अरुणाचल]] के 33 विधायकों के साथ [[भारतीय जनता पार्टी]] में शामिल हो गए और सरकार का गठन किया।<ref>{{cite web |url=http://khabar.ndtv.com/news/india/bjp-government-in-arunachal-pradesh-pema-khandu-takes-cm-oath-1643780 |title=अरुणाचल प्रदेश में बीजेपी सरकार, पेमा खांडू समेत 33 विधायकों ने थामा BJP का दामन |publisher=एनडीटीवी |date=दिसम्बर 31, 2016 |accessdate=जनवरी 1, 2017 |archive-url=https://web.archive.org/web/20170101140839/http://khabar.ndtv.com/news/india/bjp-government-in-arunachal-pradesh-pema-khandu-takes-cm-oath-1643780 |archive-date=1 जनवरी 2017 |url-status=dead }}</ref>
==सन्दर्भ==
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{{s-ttl|title=[[अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्रियों की सूची|अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री]]|years=17 जुलाई 2016 - वर्तमान}}
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[[श्रेणी:जीवित लोग]]
[[श्रेणी:1979 में जन्मे लोग]]
[[श्रेणी:अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री]]
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{{भारतीय जनता पार्टी के मुख्यमंत्री}}
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डेनिस लेवेरतोव
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डेनिस लेवेरतोव
'''प्रिस्चिल्ला डेनिस लेवेरतोव''' (२४ अक्टूबर १९२३ - २० दिसम्बर १९९७) एक ब्रिटिश कवियत्री थीं।
== प्रारंभिक जीवन ==
उनका जन्म इल्फोर्ड, एसेक्स में हुआ। उनकी माँ, श्रीमती बीट्राइस एडिलेड लेवेरतोव, उत्तरी वेल्स के एक छोटे से गाँव से संबंधित थीं। उनके पिता, पॉल लेवेरतोव, लिपजिग विश्वविद्यालय में अध्यापक रह चुके थे और प्रथम विश्व युद्ध के दौरान रुसी हसीडीसी यहूदी होने के कारण, ऊनकी नैतिकता के आधार पर घर पर नज़रबंद भी किये गए थे। इस घटना के बाद वे ब्रिटैन आ गए और ईसाई धर्म में परिवर्तन के अंग्रेज़ी चर्च के पुजारी बन गए। लेवेरतोव घर पर ही शिक्षित की गईं। उन्होंने शुरुआती उम्र में ही लिखने के प्रति काफी उत्साह दिखाया ओर साथ ही साथ बैले, कला ओर फ्रेंच विषयों में भी रुचि दिखाई। जब वे पाँच साल की थीं, उन्होंने तय कर लिया कि वे बड़ी होक लेखिका बनेंगी। मात्र १२ साल की उम्र में उन्हीने अपनी कवितायें टी. एस. इलियट जिन्हीने २-पृष्ठ लंबा प्रोत्साहन भरा जवाब भेजा। सन १९४० में, मात्र १७ वर्ष की उम्र में उन्होंने पहली कविता प्रकाशित की। दूसरे विश्व युद्ध के दौरान उन्हीने सिविल नर्स के रूप में घायल सैनिकों की सेवा की। इसके छः साल बाद उनकी पहली किताब, दी डबल इमेज, प्रकाशित हुई। सन १९४७ में उन्होंने अमरीकी लेखक मिटचेल गुडमैन से ब्याह रचाया और अमेरिका चली गईं। उनका इस शादी से एक बेटा हुआ, निकोलाई। सन १९७५ में उनका और गुडमैन का तलाक हो गया।
== बाद का जीवन और काम ==
१९६० से ७० के दौरान लेवेरतोव अपने काम में राजनीतिक रूप से सक्रिय हो गईं। "द नेशन" की कविता संपादक होने के कारण वह नारीवादी और अन्य वामपंथी कार्यकर्ता कवियों के काम का समर्थन और प्रकाशन करने में सक्षम थीं। लेवेरतोव वियतनाम युद्ध के जवाब में युद्ध प्रतिरोधक लीग में शामिल हुईं और सन १९६८ में उन्होंने "राइटर्स एंड एडिटर्स वॉर टैक्स प्रोटेस्ट" प्रतिज्ञा पर हस्ताक्षर किया और युद्ध के विरोध में कर भुगतानों को मन करने का वचन दिया।
लेवेरतोव का बाद का जीवन शिक्षा में गुज़रा। मेसाचुसेट्स जाने के बाद, उन्होंने ब्रांड्स विश्वविद्यालय, एमआई टी और टफ्ट्स विश्वविद्यालय में पढ़ाया। वह कुछ समय तक पालो आल्टो में भी रहीं जहां उन्होंने स्टेनफोर्ड विश्वविद्यालय में अंग्रेज़ी पढ़ाया। सन १९८९ में वे सोमेरविल्ले, मेसाचुसेट्स से सीएटल, वाशिंगटन चली गईं जहां उनका वाशिंगटन विश्वविद्यालय में कुछ समय तक कार्यकाल रहा और ११ साल तक (१९८२-१९९३) वह स्टेनफोर्ड विश्वविद्यालय में प्राध्यापक के पद पर रहीं जहां उन्होंने "स्टेगनेर फेलोशिप कार्यक्रम" पढ़ाया। शिक्षण से अवकाश लेने के बाद उन्होंने अगले एक साल तक ब्रिटैन और अमरीका में कविता पाठ करने के लिए यात्रा की।
सन १९९४ में उन्हें लिंफोमा से पीड़ित पाया गया और उन्हें निमोनिया और तीव्र झड़प का भी सामना करना पड़ा। सन १९९७ में लेवेरतोव की ७४ वर्ष की उम्र में लिंफोमा के कारण मौत हो गयी। उन्हें सीएटल, वाशिंगटन के लेक व्यू कब्रिस्तान में दफनाया गया। लेवेरतोव की जीवनी दाना ग्रीन द्वारा लिखी गयी जो की अक्टूबर २०१२ में "डेनिस लेवेरतोव: अ पोएट'स लाइफ" के नाम से प्रकाशित हुई। डोना क्रोलीक होलनबेर्ग द्वारा लिखी हुई पर्याप्त जीवनचरित्र "अ पोएट'स रेवोल्यूशन: द लाइफ ऑफ डेनिस लेवेरतोव" अप्रैल २०१३ में कैलिफ़ोर्निया विश्वविद्यालय प्रेस द्वारा प्रकाशित किया गया।
== उपलब्धियां ==
लेवेरतोव ने अपने कार्यकाल में २४ पुस्तकें लिखीं और प्रकाशित की, उसके साथ इन्होंने आलोचना और अनुवाद भी प्रकाशित किये। उन्होंने कई संस्मरणों को भी संपादित किया। उनके कई पुरस्कारों और सम्मानों में शेली मेमोरियल पुरस्कार, रोबर्ट फ्रॉस्ट मैडल, लननं पुरस्कार, लियॉन मार्शल पुरस्कार शामिल हैं। उन्हें कैथरीन मेमोरियल ग्रांट, और गुग्गेनहेम फ़ेलोशिप से अनुदान भी प्राप्त है।
[[श्रेणी:निधन वर्ष अनुपलब्ध]]
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डेनिस लेवेरतोव
'''प्रिस्चिल्ला डेनिस लेवेरतोव''' (२४ अक्टूबर १९२३ - २० दिसम्बर १९९७) एक ब्रिटिश कवियत्री थीं।
== प्रारंभिक जीवन ==
उनका जन्म इल्फोर्ड, [[एसेक्स]] में हुआ। उनकी माँ, श्रीमती बीट्राइस एडिलेड लेवेरतोव, उत्तरी [[वेल्स]] के एक छोटे से गाँव से संबंधित थीं। उनके पिता, पॉल लेवेरतोव, [[लिपजिग विश्वविद्यालय]] में अध्यापक रह चुके थे और प्रथम विश्व युद्ध के दौरान रुसी हसीडीसी यहूदी होने के कारण, ऊनकी नैतिकता के आधार पर घर पर नज़रबंद भी किये गए थे। इस घटना के बाद वे ब्रिटैन आ गए और ईसाई धर्म में परिवर्तन के अंग्रेज़ी चर्च के पुजारी बन गए। लेवेरतोव घर पर ही शिक्षित की गईं। उन्होंने शुरुआती उम्र में ही लिखने के प्रति काफी उत्साह दिखाया ओर साथ ही साथ बैले, कला ओर फ्रेंच विषयों में भी रुचि दिखाई। जब वे पाँच साल की थीं, उन्होंने तय कर लिया कि वे बड़ी हो के लेखिका बनेंगी। मात्र १२ साल की उम्र में उन्हीने अपनी कवितायें [[टी. एस. इलियट]] जिन्हीने २-पृष्ठ लंबा प्रोत्साहन भरा जवाब भेजा। सन १९४० में, मात्र १७ वर्ष की उम्र में उन्होंने पहली कविता प्रकाशित की। दूसरे विश्व युद्ध के दौरान उन्हीने सिविल नर्स के रूप में घायल सैनिकों की सेवा की। इसके छः साल बाद उनकी पहली किताब, दी डबल इमेज, प्रकाशित हुई। सन १९४७ में उन्होंने अमरीकी लेखक [[मिटचेल गुडमैन]] से ब्याह रचाया और अमेरिका चली गईं। उनका इस शादी से एक बेटा हुआ, निकोलाई। सन १९७५ में उनका और गुडमैन का तलाक हो गया।
== बाद का जीवन और काम ==
१९६० से ७० के दौरान लेवेरतोव अपने काम में राजनीतिक रूप से सक्रिय हो गईं। "द नेशन" की कविता संपादक होने के कारण वह नारीवादी और अन्य वामपंथी कार्यकर्ता कवियों के काम का समर्थन और प्रकाशन करने में सक्षम थीं। लेवेरतोव वियतनाम युद्ध के जवाब में युद्ध प्रतिरोधक लीग में शामिल हुईं और सन १९६८ में उन्होंने "राइटर्स एंड एडिटर्स वॉर टैक्स प्रोटेस्ट" प्रतिज्ञा पर हस्ताक्षर किया और युद्ध के विरोध में कर भुगतानों को मन करने का वचन दिया।
लेवेरतोव का बाद का जीवन शिक्षा में गुज़रा। मेसाचुसेट्स जाने के बाद, उन्होंने ब्रांड्स विश्वविद्यालय, एमआई टी और टफ्ट्स विश्वविद्यालय में पढ़ाया। वह कुछ समय तक पालो आल्टो में भी रहीं जहां उन्होंने स्टेनफोर्ड विश्वविद्यालय में अंग्रेज़ी पढ़ाया। सन १९८९ में वे सोमेरविल्ले, मेसाचुसेट्स से सीएटल, वाशिंगटन चली गईं जहां उनका वाशिंगटन विश्वविद्यालय में कुछ समय तक कार्यकाल रहा और ११ साल तक (१९८२-१९९३) वह स्टेनफोर्ड विश्वविद्यालय में प्राध्यापक के पद पर रहीं जहां उन्होंने "स्टेगनेर फेलोशिप कार्यक्रम" पढ़ाया। शिक्षण से अवकाश लेने के बाद उन्होंने अगले एक साल तक ब्रिटैन और अमरीका में कविता पाठ करने के लिए यात्रा की।
सन १९९४ में उन्हें लिंफोमा से पीड़ित पाया गया और उन्हें निमोनिया और तीव्र झड़प का भी सामना करना पड़ा। सन १९९७ में लेवेरतोव की ७४ वर्ष की उम्र में लिंफोमा के कारण मौत हो गयी। उन्हें सीएटल, वाशिंगटन के लेक व्यू कब्रिस्तान में दफनाया गया। लेवेरतोव की जीवनी दाना ग्रीन द्वारा लिखी गयी जो की अक्टूबर २०१२ में "डेनिस लेवेरतोव: अ पोएट'स लाइफ" के नाम से प्रकाशित हुई। डोना क्रोलीक होलनबेर्ग द्वारा लिखी हुई पर्याप्त जीवनचरित्र "अ पोएट'स रेवोल्यूशन: द लाइफ ऑफ डेनिस लेवेरतोव" अप्रैल २०१३ में कैलिफ़ोर्निया विश्वविद्यालय प्रेस द्वारा प्रकाशित किया गया।
== उपलब्धियां ==
लेवेरतोव ने अपने कार्यकाल में २४ पुस्तकें लिखीं और प्रकाशित की, उसके साथ इन्होंने आलोचना और अनुवाद भी प्रकाशित किये। उन्होंने कई संस्मरणों को भी संपादित किया। उनके कई पुरस्कारों और सम्मानों में शेली मेमोरियल पुरस्कार, रोबर्ट फ्रॉस्ट मैडल, लननं पुरस्कार, लियॉन मार्शल पुरस्कार शामिल हैं। उन्हें कैथरीन मेमोरियल ग्रांट, और गुग्गेनहेम फ़ेलोशिप से अनुदान भी प्राप्त है।
[[श्रेणी:निधन वर्ष अनुपलब्ध]]
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डेनिस लेवेरतोव
'''प्रिस्चिल्ला डेनिस लेवेरतोव''' (२४ अक्टूबर १९२३ - २० दिसम्बर १९९७) एक ब्रिटिश कवियत्री थीं।
== प्रारंभिक जीवन ==
उनका जन्म इल्फोर्ड, [[एसेक्स]] में हुआ। उनकी माँ, श्रीमती बीट्राइस एडिलेड लेवेरतोव, उत्तरी [[वेल्स]] के एक छोटे से गाँव से संबंधित थीं। उनके पिता, पॉल लेवेरतोव, [[लिपजिग विश्वविद्यालय]] में अध्यापक रह चुके थे और प्रथम विश्व युद्ध के दौरान रुसी हसीडीसी यहूदी होने के कारण, ऊनकी नैतिकता के आधार पर घर पर नज़रबंद भी किये गए थे। इस घटना के बाद वे ब्रिटैन आ गए और ईसाई धर्म में परिवर्तन के अंग्रेज़ी चर्च के पुजारी बन गए। लेवेरतोव घर पर ही शिक्षित की गईं। उन्होंने शुरुआती उम्र में ही लिखने के प्रति काफी उत्साह दिखाया ओर साथ ही साथ बैले, कला ओर फ्रेंच विषयों में भी रुचि दिखाई। जब वे पाँच साल की थीं, उन्होंने तय कर लिया कि वे बड़ी हो के लेखिका बनेंगी। मात्र १२ साल की उम्र में उन्हीने अपनी कवितायें [[टी एस एलियट|टी. एस. इलियट]] जिन्हीने २-पृष्ठ लंबा प्रोत्साहन भरा जवाब भेजा। सन १९४० में, मात्र १७ वर्ष की उम्र में उन्होंने पहली कविता प्रकाशित की। दूसरे विश्व युद्ध के दौरान उन्हीने सिविल नर्स के रूप में घायल सैनिकों की सेवा की। इसके छः साल बाद उनकी पहली किताब, दी डबल इमेज, प्रकाशित हुई। सन १९४७ में उन्होंने अमरीकी लेखक [[मिटचेल गुडमैन]] से ब्याह रचाया और अमेरिका चली गईं। उनका इस शादी से एक बेटा हुआ, निकोलाई। सन १९७५ में उनका और गुडमैन का तलाक हो गया।
== बाद का जीवन और काम ==
१९६० से ७० के दौरान लेवेरतोव अपने काम में राजनीतिक रूप से सक्रिय हो गईं। "द नेशन" की कविता संपादक होने के कारण वह नारीवादी और अन्य वामपंथी कार्यकर्ता कवियों के काम का समर्थन और प्रकाशन करने में सक्षम थीं। लेवेरतोव वियतनाम युद्ध के जवाब में युद्ध प्रतिरोधक लीग में शामिल हुईं और सन १९६८ में उन्होंने "राइटर्स एंड एडिटर्स वॉर टैक्स प्रोटेस्ट" प्रतिज्ञा पर हस्ताक्षर किया और युद्ध के विरोध में कर भुगतानों को मन करने का वचन दिया।
लेवेरतोव का बाद का जीवन शिक्षा में गुज़रा। मेसाचुसेट्स जाने के बाद, उन्होंने ब्रांड्स विश्वविद्यालय, एमआई टी और टफ्ट्स विश्वविद्यालय में पढ़ाया। वह कुछ समय तक पालो आल्टो में भी रहीं जहां उन्होंने स्टेनफोर्ड विश्वविद्यालय में अंग्रेज़ी पढ़ाया। सन १९८९ में वे सोमेरविल्ले, मेसाचुसेट्स से सीएटल, वाशिंगटन चली गईं जहां उनका वाशिंगटन विश्वविद्यालय में कुछ समय तक कार्यकाल रहा और ११ साल तक (१९८२-१९९३) वह स्टेनफोर्ड विश्वविद्यालय में प्राध्यापक के पद पर रहीं जहां उन्होंने "स्टेगनेर फेलोशिप कार्यक्रम" पढ़ाया। शिक्षण से अवकाश लेने के बाद उन्होंने अगले एक साल तक ब्रिटैन और अमरीका में कविता पाठ करने के लिए यात्रा की।
सन १९९४ में उन्हें लिंफोमा से पीड़ित पाया गया और उन्हें निमोनिया और तीव्र झड़प का भी सामना करना पड़ा। सन १९९७ में लेवेरतोव की ७४ वर्ष की उम्र में लिंफोमा के कारण मौत हो गयी। उन्हें सीएटल, वाशिंगटन के लेक व्यू कब्रिस्तान में दफनाया गया। लेवेरतोव की जीवनी दाना ग्रीन द्वारा लिखी गयी जो की अक्टूबर २०१२ में "डेनिस लेवेरतोव: अ पोएट'स लाइफ" के नाम से प्रकाशित हुई। डोना क्रोलीक होलनबेर्ग द्वारा लिखी हुई पर्याप्त जीवनचरित्र "अ पोएट'स रेवोल्यूशन: द लाइफ ऑफ डेनिस लेवेरतोव" अप्रैल २०१३ में कैलिफ़ोर्निया विश्वविद्यालय प्रेस द्वारा प्रकाशित किया गया।
== उपलब्धियां ==
लेवेरतोव ने अपने कार्यकाल में २४ पुस्तकें लिखीं और प्रकाशित की, उसके साथ इन्होंने आलोचना और अनुवाद भी प्रकाशित किये। उन्होंने कई संस्मरणों को भी संपादित किया। उनके कई पुरस्कारों और सम्मानों में शेली मेमोरियल पुरस्कार, रोबर्ट फ्रॉस्ट मैडल, लननं पुरस्कार, लियॉन मार्शल पुरस्कार शामिल हैं। उन्हें कैथरीन मेमोरियल ग्रांट, और गुग्गेनहेम फ़ेलोशिप से अनुदान भी प्राप्त है।
[[श्रेणी:निधन वर्ष अनुपलब्ध]]
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सदस्य वार्ता:Babulal C Sharma
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सूचना: [[:गोमतीवाल ब्राहमण]] को [[विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा|हटाने हेतु]] नामांकन, [[विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/गोमतीवाल ब्राहमण|चर्चा पृष्ठ देखें]]
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text/x-wiki
{{साँचा:सहायता|realName=|name=Babulal C Sharma}}
-- [[सदस्य:नया सदस्य सन्देश|नया सदस्य सन्देश]] ([[सदस्य वार्ता:नया सदस्य सन्देश|वार्ता]]) 15:47, 17 सितंबर 2017 (UTC)
== अक्टूबर 2017 ==
[[File:Information.svg|25px|alt=|link=]] विकिपीडिया पे आपका स्वागत है। हालांकि सबका विकिपीडिया पे योगदान करने के लिए स्वागत है, परन्तु आपके द्वारा किए गए [[Special:Contributions/Babulal C Sharma|हाल ही के संपादनों में से कम से कम एक]] सकारात्मक नहीं दिखता व [[सहायता:प्रत्यावर्तन|प्रत्यावर्तित]] या हटा दिया गया है। किसी भी परीक्षण संपादन के लिए कृपया [[विकिपीडिया:प्रयोगपृष्ठ|प्रयोगपृष्ठ]] का उपयोग करें। हालाँकि इस ज्ञानकोश पर सकारात्मक सम्पादन द्वारा योगदान करने हेतु सभी का स्वागत है, फिर भी कृपया हमारी नीतियों और दिशानिर्देशों से स्वयं को अवगत करें। आप इनके बारे में जानकारी [[विकिपीडिया:नवागन्तुकों का स्वागत|स्वागत पृष्ठ]] पर पा सकते हैं जो कि इस ज्ञानकोश में रचनात्मक रूप से योगदान करने के बारे में और जानकारी प्रदान करता है। ''कृपया अपने सम्पादन तुरंत रोकिये। ''<!-- Template:uw-disruptive1 --> [[सदस्य:हिंदुस्थान वासी|<font color="80 00 80">हिंदुस्थान वासी</font>]]<sup> ''' [[सदस्य वार्ता:हिंदुस्थान वासी|वार्ता]]''' </sup> 14:07, 24 अक्टूबर 2017 (UTC)
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यदि आपने यह पृष्ठ परीक्षण के लिये बनाया था तो उसके लिये [[वि:प्रयोगस्थल|प्रयोगस्थल]] का उपयोग करें। यदि आप विकिपीडिया पर हिन्दी टाइप करना सीखना चाहते हैं तो [[विकिपीडिया:देवनागरी में कैसे टंकण करें?|देवनागरी में कैसे टाइप करें]] पृष्ठ देखें।
यदि यह पृष्ठ अभी हटाया नहीं गया है तो आप पृष्ठ में सुधार कर सकते हैं ताकि वह विकिपीडिया की नीतियों पर खरा उतरे। यदि आपको लगता है कि यह पृष्ठ इस मापदंड के अंतर्गत नहीं आता है तो आप पृष्ठ पर जाकर नामांकन टैग पर दिये हुए बटन पर क्लिक कर के इस नामांकन के विरोध का कारण बता सकते हैं। कृपया ध्यान रखें कि शीघ्र हटाने के नामांकन के पश्चात यदि पृष्ठ नीति अनुसार शीघ्र हटाने योग्य पाया जाता है तो उसे कभी भी हटाया जा सकता है।
यदि यह पृष्ठ हटा दिया गया है, तो आप [[वि:चौपाल|चौपाल]] पर इस पृष्ठ को अपने सदस्य उप-पृष्ठ में डलवाने, अथवा इसकी सामग्री ई-मेल द्वारा प्राप्त करने हेतु अनुरोध कर सकते हैं।[[सदस्य:Shreya.Bhopal|श्रेया द्विवेदी]] ([[सदस्य वार्ता:Shreya.Bhopal|वार्ता]]) 11:17, 4 नवम्बर 2017 (UTC)
== [[:बाली शीट|बाली शीट]] पृष्ठ को [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#शीघ्र हटाना|शीघ्र हटाने]] का नामांकन ==
[[File:Ambox warning pn.svg|48px|left|alt=|link=]]
नमस्कार, आपके द्वारा बनाए पृष्ठ [[:बाली शीट|बाली शीट]] को विकिपीडिया पर [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति|पृष्ठ हटाने की नीति]] के [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#व1|मापदंड व1]] के अंतर्गत शीघ्र हटाने के लिये नामांकित किया गया है।<center>'''[[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#व1|व1]]{{*}} अर्थहीन नाम अथवा सम्पूर्णतया अर्थहीन सामग्री वाले पृष्ठ'''</center>
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यदि आपने यह पृष्ठ परीक्षण के लिये बनाया था तो उसके लिये [[वि:प्रयोगस्थल|प्रयोगस्थल]] का उपयोग करें। यदि आप विकिपीडिया पर हिन्दी टाइप करना सीखना चाहते हैं तो [[विकिपीडिया:देवनागरी में कैसे टंकण करें?|देवनागरी में कैसे टाइप करें]] पृष्ठ देखें।
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यदि यह पृष्ठ हटा दिया गया है, तो आप [[वि:चौपाल|चौपाल]] पर इस पृष्ठ को अपने सदस्य उप-पृष्ठ में डलवाने, अथवा इसकी सामग्री ई-मेल द्वारा प्राप्त करने हेतु अनुरोध कर सकते हैं।[[सदस्य:Shreya.Bhopal|श्रेया द्विवेदी]] ([[सदस्य वार्ता:Shreya.Bhopal|वार्ता]]) 17:11, 15 दिसम्बर 2017 (UTC)
== आपके द्वारा बनाये गये पृष्ठ ==
नमस्कार Babulal C Sharma जी,
आपके द्वारा बनाये गये अधिकतर लेखों में नाममात्र की जानकारी दी गई है, और कहीं से भी ज्ञानवर्धक दिखाई नहीं देता है। आप यहा से [https://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%AA%E0%A5%80%E0%A4%A1%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE:%E0%A4%B8%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%A4%E0%A4%BE विकिपीडिया:सहायता] जानकारी प्राप्त कर अपने बनाये पृष्ठों में अधिक से अधिक जानकारी जोड़ सकते है। इसके अलावा अन्य किसी भी प्रकार की समस्या को चौपाल पर रख सकते हैं। धन्यवाद <span style="font-family: Cambria;">[[सदस्य:Nilesh shukla|<span style="color: teal;">'''निलेश शुक्ला'''</span>]] ([[User talk:Nilesh shukla|वार्ता]])</span> 06:48, 2 जनवरी 2018 (UTC)nilesh shukla
== [[:लाखाजौहर में 18 परिवारों|लाखाजौहर में 18 परिवारों]] पृष्ठ को [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#शीघ्र हटाना|शीघ्र हटाने]] का नामांकन ==
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इसमें वे पृष्ठ आते हैं जिन्हें परीक्षण के लिये बनाया गया है।
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== [[:बारीयो की सेरी (वास)|बारीयो की सेरी (वास)]] पृष्ठ को [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#शीघ्र हटाना|शीघ्र हटाने]] का नामांकन ==
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इसमें वे पृष्ठ आते हैं जिन्हें परीक्षण के लिये बनाया गया है।
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इसमें वे पृष्ठ आते हैं जिन्हें परीक्षण के लिये बनाया गया है।
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== [[:फुलमाली|फुलमाली]] पृष्ठ को [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#शीघ्र हटाना|शीघ्र हटाने]] का नामांकन ==
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इसमें वे सभी पृष्ठ आते हैं जिनमें कोई सामग्री नहीं है, और न ही किसी पुराने अवतरण में थी।
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<span style="font-family: Cambria;">[[सदस्य:Nilesh shukla|<span style="color: teal;">'''निलेश शुक्ला'''</span>]] ([[User talk:Nilesh shukla|वार्ता]])</span> 08:55, 2 जनवरी 2018 (UTC)
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इसमें वे पृष्ठ आते हैं जिन्हें परीक्षण के लिये बनाया गया है।
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<span style="font-family: Cambria;">[[सदस्य:Nilesh shukla|<span style="color: teal;">'''निलेश शुक्ला'''</span>]] ([[User talk:Nilesh shukla|वार्ता]])</span> 09:18, 2 जनवरी 2018 (UTC)
== [[:पोरी ढार हनुमानजी|पोरी ढार हनुमानजी]] पृष्ठ को [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#शीघ्र हटाना|शीघ्र हटाने]] का नामांकन ==
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इसमें वे पृष्ठ आते हैं जिन्हें परीक्षण के लिये बनाया गया है।
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<span style="font-family: Cambria;">[[सदस्य:Nilesh shukla|<span style="color: teal;">'''निलेश शुक्ला'''</span>]] ([[User talk:Nilesh shukla|वार्ता]])</span> 09:25, 2 जनवरी 2018 (UTC)
== [[:क्षेमकरण माता|क्षेमकरण माता]] पृष्ठ को [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#शीघ्र हटाना|शीघ्र हटाने]] का नामांकन ==
[[Image:Desc-i.svg|48px|left|alt=|link=]]
नमस्कार, आपके द्वारा बनाए पृष्ठ [[:क्षेमकरण माता|क्षेमकरण माता]] को विकिपीडिया पर [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति|पृष्ठ हटाने की नीति]] के [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#व2|मापदंड व2]] के अंतर्गत शीघ्र हटाने के लिये नामांकित किया गया है।<center>'''[[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#व2|व2]]{{*}} परीक्षण पृष्ठ'''</center>
इसमें वे पृष्ठ आते हैं जिन्हें परीक्षण के लिये बनाया गया है।
यदि आपने यह पृष्ठ परीक्षण के लिये बनाया था तो उसके लिये [[वि:प्रयोगस्थल|प्रयोगस्थल]] का उपयोग करें। यदि आप विकिपीडिया पर हिन्दी टाइप करना सीखना चाहते हैं तो [[विकिपीडिया:देवनागरी में कैसे टंकण करें?|देवनागरी में कैसे टाइप करें]] पृष्ठ देखें।
यदि यह पृष्ठ अभी हटाया नहीं गया है तो आप पृष्ठ में सुधार कर सकते हैं ताकि वह विकिपीडिया की नीतियों पर खरा उतरे। यदि आपको लगता है कि यह पृष्ठ इस मापदंड के अंतर्गत नहीं आता है तो आप पृष्ठ पर जाकर नामांकन टैग पर दिये हुए बटन पर क्लिक कर के इस नामांकन के विरोध का कारण बता सकते हैं। कृपया ध्यान रखें कि शीघ्र हटाने के नामांकन के पश्चात यदि पृष्ठ नीति अनुसार शीघ्र हटाने योग्य पाया जाता है तो उसे कभी भी हटाया जा सकता है।
<span style="font-family: Cambria;">[[सदस्य:Nilesh shukla|<span style="color: teal;">'''निलेश शुक्ला'''</span>]] ([[User talk:Nilesh shukla|वार्ता]])</span> 10:55, 4 जनवरी 2018 (UTC)
== [[:क्षेमकरणजी माताजी धर्मशाला|क्षेमकरणजी माताजी धर्मशाला]] पृष्ठ को [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#शीघ्र हटाना|शीघ्र हटाने]] का नामांकन ==
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इसमें वे पृष्ठ आते हैं जिन्हें परीक्षण के लिये बनाया गया है।
यदि आपने यह पृष्ठ परीक्षण के लिये बनाया था तो उसके लिये [[वि:प्रयोगस्थल|प्रयोगस्थल]] का उपयोग करें। यदि आप विकिपीडिया पर हिन्दी टाइप करना सीखना चाहते हैं तो [[विकिपीडिया:देवनागरी में कैसे टंकण करें?|देवनागरी में कैसे टाइप करें]] पृष्ठ देखें।
यदि यह पृष्ठ अभी हटाया नहीं गया है तो आप पृष्ठ में सुधार कर सकते हैं ताकि वह विकिपीडिया की नीतियों पर खरा उतरे। यदि आपको लगता है कि यह पृष्ठ इस मापदंड के अंतर्गत नहीं आता है तो आप पृष्ठ पर जाकर नामांकन टैग पर दिये हुए बटन पर क्लिक कर के इस नामांकन के विरोध का कारण बता सकते हैं। कृपया ध्यान रखें कि शीघ्र हटाने के नामांकन के पश्चात यदि पृष्ठ नीति अनुसार शीघ्र हटाने योग्य पाया जाता है तो उसे कभी भी हटाया जा सकता है।
<span style="font-family: Cambria;">[[सदस्य:Nilesh shukla|<span style="color: teal;">'''निलेश शुक्ला'''</span>]] ([[User talk:Nilesh shukla|वार्ता]])</span> 10:55, 4 जनवरी 2018 (UTC)
== [[:खिमज_माता|खिमज_माता]] पृष्ठ को [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#शीघ्र हटाना|शीघ्र हटाने]] का नामांकन ==
[[Image:Ambox warning pn.svg|48px|left|alt=|link=]]
नमस्कार, आपके द्वारा बनाए पृष्ठ [[:खिमज_माता|खिमज_माता]] को विकिपीडिया पर [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति|पृष्ठ हटाने की नीति]] के निम्न मापदंडों के अंतर्गत शीघ्र हटाने के लिये नामांकित किया गया है।
* '''[[वि:हटाना#व2|व2]]. परीक्षण पृष्ठ'''
* '''[[वि:हटाना#व5|व5]]. ख़ाली पृष्ठ'''
यदि यह पृष्ठ अभी हटाया नहीं गया है तो आप पृष्ठ में सुधार कर सकते हैं ताकि वह विकिपीडिया की नीतियों पर खरा उतरे। यदि आपको लगता है कि यह पृष्ठ इस मापदंड के अंतर्गत नहीं आता है तो आप पृष्ठ पर जाकर नामांकन टैग पर दिये हुए बटन पर क्लिक कर के इस नामांकन के विरोध का कारण बता सकते हैं। कृपया ध्यान रखें कि शीघ्र हटाने के नामांकन के पश्चात यदि पृष्ठ नीति अनुसार शीघ्र हटाने योग्य पाया जाता है तो उसे कभी भी हटाया जा सकता है।<span style="font-family: Cambria;">[[सदस्य:Nilesh shukla|<span style="color: teal;">'''निलेश शुक्ला'''</span>]] ([[User talk:Nilesh shukla|वार्ता]])</span> 10:56, 4 जनवरी 2018 (UTC)
== [[:गरू|गरू]] पृष्ठ को [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#शीघ्र हटाना|शीघ्र हटाने]] का नामांकन ==
[[Image:Desc-i.svg|48px|left|alt=|link=]]
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इसमें वे पृष्ठ आते हैं जिन्हें परीक्षण के लिये बनाया गया है।
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<span style="font-family: Cambria;">[[सदस्य:Nilesh shukla|<span style="color: teal;">'''निलेश शुक्ला'''</span>]] ([[User talk:Nilesh shukla|वार्ता]])</span> 10:57, 4 जनवरी 2018 (UTC)
== [[:बाला हनुमानजी|बाला हनुमानजी]] पृष्ठ का [[वि:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा|हटाने हेतु चर्चा]] के लिये नामांकन ==
नमस्कार, [[:बाला हनुमानजी|बाला हनुमानजी]] को विकिपीडिया पर [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति|पृष्ठ हटाने की नीति]] के अंतर्गत [[वि:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा|हटाने हेतु चर्चा]] के लिये नामांकित किया गया है। इस बारे में चर्चा '''[[:विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/बाला हनुमानजी|विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/बाला हनुमानजी]]''' पर हो रही है। इस चर्चा में भाग लेने के लिये आपका स्वागत है।
नामांकनकर्ता ने नामांकन करते समय निम्न कारण प्रदान किया है:
<center>शीह को हहेच में बदला।</center>
कृपया इस नामांकन का उत्तर चर्चा पृष्ठ पर ही दें।
चर्चा के दौरान आप पृष्ठ में सुधार कर सकते हैं ताकि वह विकिपीडिया की नीतियों पर खरा उतरे। परंतु जब तक चर्चा जारी है, कृपया पृष्ठ से नामांकन साँचा ना हटाएँ।[[सदस्य:आर्यावर्त|आर्यावर्त]] ([[सदस्य वार्ता:आर्यावर्त|वार्ता]]) 03:35, 6 मार्च 2018 (UTC)
== [[:छीपा|छीपा]] पृष्ठ को [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#शीघ्र हटाना|शीघ्र हटाने]] का नामांकन ==
[[Image:Desc-i.svg|48px|left|alt=|link=]]
नमस्कार, आपके द्वारा बनाए पृष्ठ [[:छीपा|छीपा]] को विकिपीडिया पर [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति|पृष्ठ हटाने की नीति]] के [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#व2|मापदंड व2]] के अंतर्गत शीघ्र हटाने के लिये नामांकित किया गया है।<center>'''[[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#व2|व2]]{{*}} परीक्षण पृष्ठ'''</center>
इसमें वे पृष्ठ आते हैं जिन्हें परीक्षण के लिये बनाया गया है।
यदि आपने यह पृष्ठ परीक्षण के लिये बनाया था तो उसके लिये [[वि:प्रयोगस्थल|प्रयोगस्थल]] का उपयोग करें। यदि आप विकिपीडिया पर हिन्दी टाइप करना सीखना चाहते हैं तो [[विकिपीडिया:देवनागरी में कैसे टंकण करें?|देवनागरी में कैसे टाइप करें]] पृष्ठ देखें।
यदि यह पृष्ठ अभी हटाया नहीं गया है तो आप पृष्ठ में सुधार कर सकते हैं ताकि वह विकिपीडिया की नीतियों पर खरा उतरे। यदि आपको लगता है कि यह पृष्ठ इस मापदंड के अंतर्गत नहीं आता है तो आप पृष्ठ पर जाकर नामांकन टैग पर दिये हुए बटन पर क्लिक कर के इस नामांकन के विरोध का कारण बता सकते हैं। कृपया ध्यान रखें कि शीघ्र हटाने के नामांकन के पश्चात यदि पृष्ठ नीति अनुसार शीघ्र हटाने योग्य पाया जाता है तो उसे कभी भी हटाया जा सकता है।
[[सदस्य:हिंदुस्थान वासी|<font color="80 00 80">हिंदुस्थान वासी</font>]]<sup> ''' [[सदस्य वार्ता:हिंदुस्थान वासी|वार्ता]]''' </sup> 16:10, 6 अप्रैल 2018 (UTC)
== [[:बाली तहसील|बाली तहसील]] पृष्ठ को [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#शीघ्र हटाना|शीघ्र हटाने]] का नामांकन ==
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नमस्कार, आपके द्वारा बनाए पृष्ठ [[:बाली तहसील|बाली तहसील]] को विकिपीडिया पर [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति|पृष्ठ हटाने की नीति]] के [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#व5|मापदंड व5]] के अंतर्गत शीघ्र हटाने के लिये नामांकित किया गया है।<center>'''[[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#व5|व5]]{{*}} ख़ाली पृष्ठ'''</center>
इसमें वे सभी पृष्ठ आते हैं जिनमें कोई सामग्री नहीं है, और न ही किसी पुराने अवतरण में थी।
यदि यह पृष्ठ अभी हटाया नहीं गया है तो आप पृष्ठ में सुधार कर सकते हैं ताकि वह विकिपीडिया की नीतियों पर खरा उतरे। यदि आपको लगता है कि यह पृष्ठ इस मापदंड के अंतर्गत नहीं आता है तो आप पृष्ठ पर जाकर नामांकन टैग पर दिये हुए बटन पर क्लिक कर के इस नामांकन के विरोध का कारण बता सकते हैं। कृपया ध्यान रखें कि शीघ्र हटाने के नामांकन के पश्चात यदि पृष्ठ नीति अनुसार शीघ्र हटाने योग्य पाया जाता है तो उसे कभी भी हटाया जा सकता है।
<span style="font-family: Cambria;">[[सदस्य:Nilesh shukla|<span style="color: teal;">'''निलेश शुक्ला'''</span>]] ([[User talk:Nilesh shukla|वार्ता]])</span> 10:43, 9 अप्रैल 2018 (UTC)
== [[:श्री आदोरजी महाराज ( आदरशी महाराज)|श्री आदोरजी महाराज ( आदरशी महाराज)]] पृष्ठ का [[वि:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा|हटाने हेतु चर्चा]] के लिये नामांकन ==
नमस्कार, [[:श्री आदोरजी महाराज ( आदरशी महाराज)|श्री आदोरजी महाराज ( आदरशी महाराज)]] को विकिपीडिया पर [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति|पृष्ठ हटाने की नीति]] के अंतर्गत [[वि:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा|हटाने हेतु चर्चा]] के लिये नामांकित किया गया है। इस बारे में चर्चा '''[[:विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/श्री आदोरजी महाराज ( आदरशी महाराज)|विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/श्री आदोरजी महाराज ( आदरशी महाराज)]]''' पर हो रही है। इस चर्चा में भाग लेने के लिये आपका स्वागत है।
नामांकनकर्ता ने नामांकन करते समय निम्न कारण प्रदान किया है:
<center>उल्लेखिता।</center>
कृपया इस नामांकन का उत्तर चर्चा पृष्ठ पर ही दें।
चर्चा के दौरान आप पृष्ठ में सुधार कर सकते हैं ताकि वह विकिपीडिया की नीतियों पर खरा उतरे। परंतु जब तक चर्चा जारी है, कृपया पृष्ठ से नामांकन साँचा ना हटाएँ।[[सदस्य:Hindustanilanguage|मुज़म्मिल]] ([[सदस्य वार्ता:Hindustanilanguage|वार्ता]]) 08:06, 2 मई 2018 (UTC)
== [[:ऊखली|ऊखली]] पृष्ठ को [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#शीघ्र हटाना|शीघ्र हटाने]] का नामांकन ==
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नमस्कार, आपके द्वारा बनाए पृष्ठ [[:ऊखली|ऊखली]] को विकिपीडिया पर [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति|पृष्ठ हटाने की नीति]] के [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#व2|मापदंड व2]] के अंतर्गत शीघ्र हटाने के लिये नामांकित किया गया है।<center>'''[[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#व2|व2]]{{*}} परीक्षण पृष्ठ'''</center>
इसमें वे पृष्ठ आते हैं जिन्हें परीक्षण के लिये बनाया गया है।
यदि आपने यह पृष्ठ परीक्षण के लिये बनाया था तो उसके लिये [[वि:प्रयोगस्थल|प्रयोगस्थल]] का उपयोग करें। यदि आप विकिपीडिया पर हिन्दी टाइप करना सीखना चाहते हैं तो [[विकिपीडिया:देवनागरी में कैसे टंकण करें?|देवनागरी में कैसे टाइप करें]] पृष्ठ देखें।
यदि यह पृष्ठ अभी हटाया नहीं गया है तो आप पृष्ठ में सुधार कर सकते हैं ताकि वह विकिपीडिया की नीतियों पर खरा उतरे। यदि आपको लगता है कि यह पृष्ठ इस मापदंड के अंतर्गत नहीं आता है तो आप पृष्ठ पर जाकर नामांकन टैग पर दिये हुए बटन पर क्लिक कर के इस नामांकन के विरोध का कारण बता सकते हैं। कृपया ध्यान रखें कि शीघ्र हटाने के नामांकन के पश्चात यदि पृष्ठ नीति अनुसार शीघ्र हटाने योग्य पाया जाता है तो उसे कभी भी हटाया जा सकता है।
[[सदस्य:Swapnil.Karambelkar|स्वप्निल करंबेलकर | Swapnil Karambelkar]] ([[सदस्य वार्ता:Swapnil.Karambelkar|वार्ता]]) 06:06, 3 मई 2018 (UTC)
== [[:खत श्री|खत श्री]] पृष्ठ को [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#शीघ्र हटाना|शीघ्र हटाने]] का नामांकन ==
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नमस्कार, आपके द्वारा बनाए पृष्ठ [[:खत श्री|खत श्री]] को विकिपीडिया पर [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति|पृष्ठ हटाने की नीति]] के [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#व2|मापदंड व2]] के अंतर्गत शीघ्र हटाने के लिये नामांकित किया गया है।<center>'''[[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#व2|व2]]{{*}} परीक्षण पृष्ठ'''</center>
इसमें वे पृष्ठ आते हैं जिन्हें परीक्षण के लिये बनाया गया है।
यदि आपने यह पृष्ठ परीक्षण के लिये बनाया था तो उसके लिये [[वि:प्रयोगस्थल|प्रयोगस्थल]] का उपयोग करें। यदि आप विकिपीडिया पर हिन्दी टाइप करना सीखना चाहते हैं तो [[विकिपीडिया:देवनागरी में कैसे टंकण करें?|देवनागरी में कैसे टाइप करें]] पृष्ठ देखें।
यदि यह पृष्ठ अभी हटाया नहीं गया है तो आप पृष्ठ में सुधार कर सकते हैं ताकि वह विकिपीडिया की नीतियों पर खरा उतरे। यदि आपको लगता है कि यह पृष्ठ इस मापदंड के अंतर्गत नहीं आता है तो आप पृष्ठ पर जाकर नामांकन टैग पर दिये हुए बटन पर क्लिक कर के इस नामांकन के विरोध का कारण बता सकते हैं। कृपया ध्यान रखें कि शीघ्र हटाने के नामांकन के पश्चात यदि पृष्ठ नीति अनुसार शीघ्र हटाने योग्य पाया जाता है तो उसे कभी भी हटाया जा सकता है।
[[सदस्य:Swapnil.Karambelkar|स्वप्निल करंबेलकर | Swapnil Karambelkar]] ([[सदस्य वार्ता:Swapnil.Karambelkar|वार्ता]]) 06:10, 3 मई 2018 (UTC)
== [[:श्रीमाली ब्राहमण|श्रीमाली ब्राहमण]] पृष्ठ को [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#शीघ्र हटाना|शीघ्र हटाने]] का नामांकन ==
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नमस्कार, आपके द्वारा बनाए पृष्ठ [[:श्रीमाली ब्राहमण|श्रीमाली ब्राहमण]] को विकिपीडिया पर [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति|पृष्ठ हटाने की नीति]] के [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#व1|मापदंड व1]] के अंतर्गत शीघ्र हटाने के लिये नामांकित किया गया है।<center>'''[[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#व1|व1]]{{*}} अर्थहीन नाम अथवा सम्पूर्णतया अर्थहीन सामग्री वाले पृष्ठ'''</center>
इसमें वे पृष्ठ आते हैं जिनका नाम अर्थहीन है, उदाहरण:"स्द्ग्फ्द्ग"; अथवा जिनमें सामग्री अर्थहीन है, चाहे उसका नाम अर्थहीन न हो, उदाहरण:लेख जिसमें सामग्री है:"ध्ब्द्फ्ह्फ़"
यदि आपने यह पृष्ठ परीक्षण के लिये बनाया था तो उसके लिये [[वि:प्रयोगस्थल|प्रयोगस्थल]] का उपयोग करें। यदि आप विकिपीडिया पर हिन्दी टाइप करना सीखना चाहते हैं तो [[विकिपीडिया:देवनागरी में कैसे टंकण करें?|देवनागरी में कैसे टाइप करें]] पृष्ठ देखें।
यदि यह पृष्ठ अभी हटाया नहीं गया है तो आप पृष्ठ में सुधार कर सकते हैं ताकि वह विकिपीडिया की नीतियों पर खरा उतरे। यदि आपको लगता है कि यह पृष्ठ इस मापदंड के अंतर्गत नहीं आता है तो आप पृष्ठ पर जाकर नामांकन टैग पर दिये हुए बटन पर क्लिक कर के इस नामांकन के विरोध का कारण बता सकते हैं। कृपया ध्यान रखें कि शीघ्र हटाने के नामांकन के पश्चात यदि पृष्ठ नीति अनुसार शीघ्र हटाने योग्य पाया जाता है तो उसे कभी भी हटाया जा सकता है।
यदि यह पृष्ठ हटा दिया गया है, तो आप [[वि:चौपाल|चौपाल]] पर इस पृष्ठ को अपने सदस्य उप-पृष्ठ में डलवाने, अथवा इसकी सामग्री ई-मेल द्वारा प्राप्त करने हेतु अनुरोध कर सकते हैं।[[सदस्य:राजू जांगिड़|राजू जांगिड़]] ([[सदस्य वार्ता:राजू जांगिड़|वार्ता]]) 11:25, 3 मई 2018 (UTC)
== [[:श्री बंशीलाल रामनाथ अग्रवाल राजकिय उच्च माध्यमिक विद्यालय|श्री बंशीलाल रामनाथ अग्रवाल राजकिय उच्च माध्यमिक विद्यालय]] पृष्ठ को [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#शीघ्र हटाना|शीघ्र हटाने]] का नामांकन ==
[[Image:Desc-i.svg|48px|left|alt=|link=]]
नमस्कार, आपके द्वारा बनाए पृष्ठ [[:श्री बंशीलाल रामनाथ अग्रवाल राजकिय उच्च माध्यमिक विद्यालय|श्री बंशीलाल रामनाथ अग्रवाल राजकिय उच्च माध्यमिक विद्यालय]] को विकिपीडिया पर [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति|पृष्ठ हटाने की नीति]] के [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#व2|मापदंड व2]] के अंतर्गत शीघ्र हटाने के लिये नामांकित किया गया है।<center>'''[[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#व2|व2]]{{*}} परीक्षण पृष्ठ'''</center>
इसमें वे पृष्ठ आते हैं जिन्हें परीक्षण के लिये बनाया गया है।
यदि आपने यह पृष्ठ परीक्षण के लिये बनाया था तो उसके लिये [[वि:प्रयोगस्थल|प्रयोगस्थल]] का उपयोग करें। यदि आप विकिपीडिया पर हिन्दी टाइप करना सीखना चाहते हैं तो [[विकिपीडिया:देवनागरी में कैसे टंकण करें?|देवनागरी में कैसे टाइप करें]] पृष्ठ देखें।
यदि यह पृष्ठ अभी हटाया नहीं गया है तो आप पृष्ठ में सुधार कर सकते हैं ताकि वह विकिपीडिया की नीतियों पर खरा उतरे। यदि आपको लगता है कि यह पृष्ठ इस मापदंड के अंतर्गत नहीं आता है तो आप पृष्ठ पर जाकर नामांकन टैग पर दिये हुए बटन पर क्लिक कर के इस नामांकन के विरोध का कारण बता सकते हैं। कृपया ध्यान रखें कि शीघ्र हटाने के नामांकन के पश्चात यदि पृष्ठ नीति अनुसार शीघ्र हटाने योग्य पाया जाता है तो उसे कभी भी हटाया जा सकता है।
[[सदस्य:राजू जांगिड़|राजू जांगिड़]] ([[सदस्य वार्ता:राजू जांगिड़|वार्ता]]) 11:36, 3 मई 2018 (UTC)
== [[:बारिया चौहान|बारिया चौहान]] पृष्ठ को [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#शीघ्र हटाना|शीघ्र हटाने]] का नामांकन ==
[[Image:Desc-i.svg|48px|left|alt=|link=]]
नमस्कार, आपके द्वारा बनाए पृष्ठ [[:बारिया चौहान|बारिया चौहान]] को विकिपीडिया पर [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति|पृष्ठ हटाने की नीति]] के [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#व2|मापदंड व2]] के अंतर्गत शीघ्र हटाने के लिये नामांकित किया गया है।<center>'''[[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#व2|व2]]{{*}} परीक्षण पृष्ठ'''</center>
इसमें वे पृष्ठ आते हैं जिन्हें परीक्षण के लिये बनाया गया है।
यदि आपने यह पृष्ठ परीक्षण के लिये बनाया था तो उसके लिये [[वि:प्रयोगस्थल|प्रयोगस्थल]] का उपयोग करें। यदि आप विकिपीडिया पर हिन्दी टाइप करना सीखना चाहते हैं तो [[विकिपीडिया:देवनागरी में कैसे टंकण करें?|देवनागरी में कैसे टाइप करें]] पृष्ठ देखें।
यदि यह पृष्ठ अभी हटाया नहीं गया है तो आप पृष्ठ में सुधार कर सकते हैं ताकि वह विकिपीडिया की नीतियों पर खरा उतरे। यदि आपको लगता है कि यह पृष्ठ इस मापदंड के अंतर्गत नहीं आता है तो आप पृष्ठ पर जाकर नामांकन टैग पर दिये हुए बटन पर क्लिक कर के इस नामांकन के विरोध का कारण बता सकते हैं। कृपया ध्यान रखें कि शीघ्र हटाने के नामांकन के पश्चात यदि पृष्ठ नीति अनुसार शीघ्र हटाने योग्य पाया जाता है तो उसे कभी भी हटाया जा सकता है।
[[सदस्य:Trikutdas|त्रिकूटदास ]] ([[सदस्य वार्ता:Trikutdas|वार्ता]]) 12:59, 3 मई 2018 (UTC)
== [[:फालना रेल्वे स्टेशन|फालना रेल्वे स्टेशन]] पृष्ठ को [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#शीघ्र हटाना|शीघ्र हटाने]] का नामांकन ==
[[Image:Desc-i.svg|48px|left|alt=|link=]]
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इसमें वे पृष्ठ आते हैं जिन्हें परीक्षण के लिये बनाया गया है।
यदि आपने यह पृष्ठ परीक्षण के लिये बनाया था तो उसके लिये [[वि:प्रयोगस्थल|प्रयोगस्थल]] का उपयोग करें। यदि आप विकिपीडिया पर हिन्दी टाइप करना सीखना चाहते हैं तो [[विकिपीडिया:देवनागरी में कैसे टंकण करें?|देवनागरी में कैसे टाइप करें]] पृष्ठ देखें।
यदि यह पृष्ठ अभी हटाया नहीं गया है तो आप पृष्ठ में सुधार कर सकते हैं ताकि वह विकिपीडिया की नीतियों पर खरा उतरे। यदि आपको लगता है कि यह पृष्ठ इस मापदंड के अंतर्गत नहीं आता है तो आप पृष्ठ पर जाकर नामांकन टैग पर दिये हुए बटन पर क्लिक कर के इस नामांकन के विरोध का कारण बता सकते हैं। कृपया ध्यान रखें कि शीघ्र हटाने के नामांकन के पश्चात यदि पृष्ठ नीति अनुसार शीघ्र हटाने योग्य पाया जाता है तो उसे कभी भी हटाया जा सकता है।
[[सदस्य:Trikutdas|त्रिकूटदास ]] ([[सदस्य वार्ता:Trikutdas|वार्ता]]) 13:03, 3 मई 2018 (UTC)
== [[:छोटी_ब्रह्मपुरी|छोटी_ब्रह्मपुरी]] पृष्ठ को [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#शीघ्र हटाना|शीघ्र हटाने]] का नामांकन ==
[[Image:Ambox warning pn.svg|48px|left|alt=|link=]]
नमस्कार, आपके द्वारा बनाए पृष्ठ [[:छोटी_ब्रह्मपुरी|छोटी_ब्रह्मपुरी]] को विकिपीडिया पर [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति|पृष्ठ हटाने की नीति]] के निम्न मापदंडों के अंतर्गत शीघ्र हटाने के लिये नामांकित किया गया है।
* '''[[वि:हटाना#व1|व1]]. अर्थहीन नाम अथवा सम्पूर्णतया अर्थहीन सामग्री वाले पृष्ठ'''
* '''[[वि:हटाना#व2|व2]]. परीक्षण पृष्ठ'''
यदि यह पृष्ठ अभी हटाया नहीं गया है तो आप पृष्ठ में सुधार कर सकते हैं ताकि वह विकिपीडिया की नीतियों पर खरा उतरे। यदि आपको लगता है कि यह पृष्ठ इस मापदंड के अंतर्गत नहीं आता है तो आप पृष्ठ पर जाकर नामांकन टैग पर दिये हुए बटन पर क्लिक कर के इस नामांकन के विरोध का कारण बता सकते हैं। कृपया ध्यान रखें कि शीघ्र हटाने के नामांकन के पश्चात यदि पृष्ठ नीति अनुसार शीघ्र हटाने योग्य पाया जाता है तो उसे कभी भी हटाया जा सकता है।[[सदस्य:Trikutdas|त्रिकूटदास ]] ([[सदस्य वार्ता:Trikutdas|वार्ता]]) 13:05, 3 मई 2018 (UTC)
== [[:भाारद्वाज गोत्र|भाारद्वाज गोत्र]] पृष्ठ को [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#शीघ्र हटाना|शीघ्र हटाने]] का नामांकन ==
[[File:Ambox warning pn.svg|48px|left|alt=|link=]]
नमस्कार, आपके द्वारा बनाए पृष्ठ [[:भाारद्वाज गोत्र|भाारद्वाज गोत्र]] को विकिपीडिया पर [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति|पृष्ठ हटाने की नीति]] के [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#ल4|मापदंड ल4]] के अंतर्गत शीघ्र हटाने के लिये नामांकित किया गया है।<center>'''[[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#ल4|ल4]]{{*}} प्रतिलिपि लेख'''</center>
इस मापदंड के अंतर्गत वो लेख आते हैं जो किसी पुराने लेख की प्रतिलिपि हैं। इसमें वे लेख भी आते हैं जो किसी ऐसे विषय पर बनाए गए हैं जिनपर पहले से लेख मौजूद है और पुराना लेख नए लेख से बेहतर है।
आपका बनाया लेख पहले ही [[:भरद्वाज]] नाम से मौजूद है। कृपया लेख बनाने से पहले उस शीर्षक के लिये [[विशेष:Search|खोज]] कर लिया करें। यदि आप इस विषय पर और लिखना चाहते हैं तो मूल लेख [[:भरद्वाज]] पर लिखें।
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[[सदस्य:Trikutdas|त्रिकूटदास ]] ([[सदस्य वार्ता:Trikutdas|वार्ता]]) 13:08, 3 मई 2018 (UTC)
== [[:बडी ब्रह्मपुरी|बडी ब्रह्मपुरी]] पृष्ठ को [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#शीघ्र हटाना|शीघ्र हटाने]] का नामांकन ==
[[Image:Desc-i.svg|48px|left|alt=|link=]]
नमस्कार, आपके द्वारा बनाए पृष्ठ [[:बडी ब्रह्मपुरी|बडी ब्रह्मपुरी]] को विकिपीडिया पर [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति|पृष्ठ हटाने की नीति]] के [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#व2|मापदंड व2]] के अंतर्गत शीघ्र हटाने के लिये नामांकित किया गया है।<center>'''[[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#व2|व2]]{{*}} परीक्षण पृष्ठ'''</center>
इसमें वे पृष्ठ आते हैं जिन्हें परीक्षण के लिये बनाया गया है।
यदि आपने यह पृष्ठ परीक्षण के लिये बनाया था तो उसके लिये [[वि:प्रयोगस्थल|प्रयोगस्थल]] का उपयोग करें। यदि आप विकिपीडिया पर हिन्दी टाइप करना सीखना चाहते हैं तो [[विकिपीडिया:देवनागरी में कैसे टंकण करें?|देवनागरी में कैसे टाइप करें]] पृष्ठ देखें।
यदि यह पृष्ठ अभी हटाया नहीं गया है तो आप पृष्ठ में सुधार कर सकते हैं ताकि वह विकिपीडिया की नीतियों पर खरा उतरे। यदि आपको लगता है कि यह पृष्ठ इस मापदंड के अंतर्गत नहीं आता है तो आप पृष्ठ पर जाकर नामांकन टैग पर दिये हुए बटन पर क्लिक कर के इस नामांकन के विरोध का कारण बता सकते हैं। कृपया ध्यान रखें कि शीघ्र हटाने के नामांकन के पश्चात यदि पृष्ठ नीति अनुसार शीघ्र हटाने योग्य पाया जाता है तो उसे कभी भी हटाया जा सकता है।
[[सदस्य:Trikutdas|त्रिकूटदास ]] ([[सदस्य वार्ता:Trikutdas|वार्ता]]) 13:09, 3 मई 2018 (UTC)
== [[:चामुंडा_माता|चामुंडा_माता]] पृष्ठ को [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#शीघ्र हटाना|शीघ्र हटाने]] का नामांकन ==
[[Image:Ambox warning pn.svg|48px|left|alt=|link=]]
नमस्कार, आपके द्वारा बनाए पृष्ठ [[:चामुंडा_माता|चामुंडा_माता]] को विकिपीडिया पर [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति|पृष्ठ हटाने की नीति]] के निम्न मापदंडों के अंतर्गत शीघ्र हटाने के लिये नामांकित किया गया है।
* '''[[वि:हटाना#ल4|ल4]]. प्रतिलिपि लेख''' मूल लेख: [[:चामुंडा]]
* '''[[वि:हटाना#व1|व1]]. अर्थहीन नाम अथवा सम्पूर्णतया अर्थहीन सामग्री वाले पृष्ठ'''
* '''[[वि:हटाना#व2|व2]]. परीक्षण पृष्ठ'''
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== [[:जोगी|जोगी]] पृष्ठ को [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#शीघ्र हटाना|शीघ्र हटाने]] का नामांकन ==
[[Image:Desc-i.svg|48px|left|alt=|link=]]
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इसमें वे पृष्ठ आते हैं जिन्हें परीक्षण के लिये बनाया गया है।
यदि आपने यह पृष्ठ परीक्षण के लिये बनाया था तो उसके लिये [[वि:प्रयोगस्थल|प्रयोगस्थल]] का उपयोग करें। यदि आप विकिपीडिया पर हिन्दी टाइप करना सीखना चाहते हैं तो [[विकिपीडिया:देवनागरी में कैसे टंकण करें?|देवनागरी में कैसे टाइप करें]] पृष्ठ देखें।
यदि यह पृष्ठ अभी हटाया नहीं गया है तो आप पृष्ठ में सुधार कर सकते हैं ताकि वह विकिपीडिया की नीतियों पर खरा उतरे। यदि आपको लगता है कि यह पृष्ठ इस मापदंड के अंतर्गत नहीं आता है तो आप पृष्ठ पर जाकर नामांकन टैग पर दिये हुए बटन पर क्लिक कर के इस नामांकन के विरोध का कारण बता सकते हैं। कृपया ध्यान रखें कि शीघ्र हटाने के नामांकन के पश्चात यदि पृष्ठ नीति अनुसार शीघ्र हटाने योग्य पाया जाता है तो उसे कभी भी हटाया जा सकता है।
[[सदस्य:Hindustanilanguage|मुज़म्मिल]] ([[सदस्य वार्ता:Hindustanilanguage|वार्ता]]) 04:57, 7 मई 2018 (UTC)
== [[:पालीवाल ब्राहमणो के 42 परगना|पालीवाल ब्राहमणो के 42 परगना]] पृष्ठ को [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#शीघ्र हटाना|शीघ्र हटाने]] का नामांकन ==
[[Image:Desc-i.svg|48px|left|alt=|link=]]
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इसमें वे पृष्ठ आते हैं जिन्हें परीक्षण के लिये बनाया गया है।
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यदि यह पृष्ठ अभी हटाया नहीं गया है तो आप पृष्ठ में सुधार कर सकते हैं ताकि वह विकिपीडिया की नीतियों पर खरा उतरे। यदि आपको लगता है कि यह पृष्ठ इस मापदंड के अंतर्गत नहीं आता है तो आप पृष्ठ पर जाकर नामांकन टैग पर दिये हुए बटन पर क्लिक कर के इस नामांकन के विरोध का कारण बता सकते हैं। कृपया ध्यान रखें कि शीघ्र हटाने के नामांकन के पश्चात यदि पृष्ठ नीति अनुसार शीघ्र हटाने योग्य पाया जाता है तो उसे कभी भी हटाया जा सकता है।
--[[User:SM7|<span style="color:#00A300">SM7</span>]]<sup>[[User talk:SM7|<small style="color:#6F00FF">--बातचीत--</small>]]</sup> 22:29, 17 अगस्त 2018 (UTC)
== [[:सूर्य मन्दिर, भाटुन्द, बाली,राजस्थान|सूर्य मन्दिर, भाटुन्द, बाली,राजस्थान]] पृष्ठ को [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#शीघ्र हटाना|शीघ्र हटाने]] का नामांकन ==
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इस मापदंड के अंतर्गत वो लेख आते हैं जो किसी पुराने लेख की प्रतिलिपि हैं। इसमें वे लेख भी आते हैं जो किसी ऐसे विषय पर बनाए गए हैं जिनपर पहले से लेख मौजूद है और पुराना लेख नए लेख से बेहतर है।
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== 2021 Wikimedia Foundation Board elections: Eligibility requirements for voters ==
Greetings,
The eligibility requirements for voters to participate in the 2021 Board of Trustees elections have been published. You can check the requirements on [[:m:Wikimedia_Foundation_elections/2021#Eligibility_requirements_for_voters|this page]].
You can also verify your eligibility using the [https://meta.toolforge.org/accounteligibility/56 AccountEligiblity tool].
[[सदस्य:MediaWiki message delivery|MediaWiki message delivery]] ([[सदस्य वार्ता:MediaWiki message delivery|वार्ता]]) 16:29, 30 जून 2021 (UTC)
<small>''Note: You are receiving this message as part of outreach efforts to create awareness among the voters.''</small>
<!-- https://meta.wikimedia.org/w/index.php?title=User:KCVelaga_(WMF)/Targets/Temp&oldid=21669859 पर मौजूद सूची का प्रयोग कर के User:KCVelaga (WMF)@metawiki द्वारा भेजा गया सन्देश -->
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== [[:गोमतीवाल ब्राहमण|गोमतीवाल ब्राहमण]] पृष्ठ का [[वि:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा|हटाने हेतु चर्चा]] के लिये नामांकन ==
नमस्कार, [[:गोमतीवाल ब्राहमण|गोमतीवाल ब्राहमण]] को विकिपीडिया पर [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति|पृष्ठ हटाने की नीति]] के अंतर्गत [[वि:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा|हटाने हेतु चर्चा]] के लिये नामांकित किया गया है। इस बारे में चर्चा '''[[:विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/गोमतीवाल ब्राहमण|विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/गोमतीवाल ब्राहमण]]''' पर हो रही है। इस चर्चा में भाग लेने के लिये आपका स्वागत है।
नामांकनकर्ता ने नामांकन करते समय निम्न कारण प्रदान किया है:
<center>उल्लेखनीय नहीं।</center>
कृपया इस नामांकन का उत्तर चर्चा पृष्ठ पर ही दें।
चर्चा के दौरान आप पृष्ठ में सुधार कर सकते हैं ताकि वह विकिपीडिया की नीतियों पर खरा उतरे। परंतु जब तक चर्चा जारी है, कृपया पृष्ठ से नामांकन साँचा ना हटाएँ। <span style="text-shadow:black 3px 3px 2px;color:orange;">☆★</span>[[सदस्य:चाहर धर्मेंद्र|<u><span style="color:Cyan;">चाहर धर्मेंद्र</span></u>]]<sup>[[सदस्य वार्ता:चाहर धर्मेंद्र|<small style="color:orange">--राम राम जी--</small>]]</sup> 10:17, 3 मई 2026 (UTC)
gph8qk2lbpudkv2rynfdzidv401dj9r
गोमतीवाल ब्राहमण
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2026-05-03T06:07:38Z
~2026-26824-39
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wikitext
text/x-wiki
{{Multiple issues|
{{लहजा|date=मार्च 2026}}
{{स्रोतहीन|date=मार्च 2026}}
}}
यहाँ के ब्राहमण गोमतिवाल कहलाते हैं। ये गोमती नदी के तट से ऊठे हुए थे। इस कारण उनको गोमतिवाल ब्राहमण कहते हैं। यह ब्राहमण राजस्थान के पाली,जालौर,सिरोही व गुजरात के कुछ जिलों में पाएं जाते हैं।
*#गोमतीवाल_ब्राह्मण*-
#राजस्थान के #गोडवाड़ क्षैत्र में स्थित #अरावली_पर्वत की तलहटियों में बसे गांव जो मेवाड़ के सीमावर्ती क्षेत्र में है, फैले हुए है।
कहा जाता है कि ईसा पूर्व वैदिक काल में यें *#गौमती_क्षेत्र* ( *#नैमिषारण्य*) जहां कभी *88 हजार* ऋषियों के #आश्रम हूआ करते थे, वहां से उठकर राजस्थान के इस गोड़वाड़ क्षैत्र की बस्तियों - नगरो मे उनके *सामाजिक* व *धार्मिक* कार्यो के लिए आयें हुए माने जाते है। प्रारंभ में ये ब्राह्मण शाखाऐ राजस्थान के *#हथूंडी_नगरी* व *#देवरी_नगरी* जो #महाभारतकालीन_नगरीयां थी वहां और इनके आस पास के क्षेत्रीय बस्तियो/ नगरों मे बसे हुए थे। प्राचीन काल से ही ये ब्राह्मण शाखाऐ *वैदिक ज्ञान*, *धार्मिक प्रतिष्ठान*, *वेदशालाओ*, *गुरुकुलो* के रूप में विकसित थी। गोमतीवाल ब्राह्मण राजस्थान के गोड़वाल प्रांत में बसे *प्रमुख ब्राह्मणों* मे से एक है।
माना जाता है कि इस क्षेत्र में ब्राह्मणो की सबसे पुरानी शाखाओ में से एक है जिनका इतिहास *वैदिक काल* से मिलता है।
हथूंडी नगर में *गंगा का प्राकट्य* इन ब्राह्मणों की देन है जो बाद मे नगरी भाटून्द बसाने के बाद इन्ही मां गंगा की एक धारा को नगरी भाटून्द में अवतरित कराया था माना गया है।
समकालीन राजा महाराजाओं द्वारा उनके कामों की सराहना में उन्हें भुमि अनुदान दिया गया ,जागीरी प्रदान की गई तब से ये सभी गोमतीवाल ब्राह्मण इन गोड़वाल प्रांत में जागीरदार गोमतीवाल ब्राह्मण नाम से प्रचलित हुए। ये ब्राह्मण शाखाऐ शास्त्र और शस्त्र में प्रवीण थी जो राजाओ के साथ युद्ध में हमेशा सरोकार हूआ करती थी । इन शाखाओ का संबंध
परिहार,प्रतिहार, राव-रावल,राठौड सिसोदियां आदी राजवंशो के साथ मधुर रहे है।
अपने पूर्वजों का मेवाड़ में आना जाना अधिक रहा होंगा, उस समय उदयपुर अस्तित्व में भी नहीं था, #चितौड़गढ़ पर #सिसोदिया_राजवंश का शासन था, चितौड़गढ़ कि एक बड़ी रियासत गोगुंदा थी, #गोगुंदा_रियासत में एक 44 गांवों का परगना था, जिसमें उस समय #वडैर_गांव_दियाण था, जिसमें भाटूंद की जागीर गोमतीवाल ब्राह्मणों को मिली जो आज भी गांव की मुख्य आबादी हे,इनमें मुख्यतया दवे ,बोहरा ,जानी सरनेम के जागीरदार आज भी गांव के पौराणिक रीति रिवाजों निर्वहन करते हे💪🏾💪🏾। बाद में बोलचाल भाषा में #भाटुन्द पड़ा।
#मदनलाल_सी_शर्मा 🙏🙏
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2026-05-03T08:31:04Z
Mnjkhan
900134
[[विशेष:योगदान/~2026-26824-39|~2026-26824-39]] ([[सदस्य वार्ता:~2026-26824-39|वार्ता]]) द्वारा 1 संपादन AMAN KUMARके अंतिम अवतरण पर प्रत्यावर्तित किया गया
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text/x-wiki
{{Multiple issues|
{{लहजा|date=मार्च 2026}}
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}}
यहाँ के ब्राहमण गोमतिवाल कहलाते हैं। ये गोमती नदी के तट से ऊठे हुए थे। इस कारण उनको गोमतिवाल ब्राहमण कहते हैं। यह ब्राहमण राजस्थान के पाली,जालौर,सिरोही व गुजरात के कुछ जिलों में पाएं जाते हैं।
*#गोमतीवाल_ब्राह्मण*-
#राजस्थान के #गोडवाड़ क्षैत्र में स्थित #अरावली_पर्वत की तलहटियों में बसे गांव जो मेवाड़ के सीमावर्ती क्षेत्र में है, फैले हुए है।
कहा जाता है कि ईसा पूर्व वैदिक काल में यें *#गौमती_क्षेत्र* ( *#नैमिषारण्य*) जहां कभी *88 हजार* ऋषियों के #आश्रम हूआ करते थे, वहां से उठकर राजस्थान के इस गोड़वाड़ क्षैत्र की बस्तियों - नगरो मे उनके *सामाजिक* व *धार्मिक* कार्यो के लिए आयें हुए माने जाते है। प्रारंभ में ये ब्राह्मण शाखाऐ राजस्थान के *#हथूंडी_नगरी* व *#देवरी_नगरी* जो #महाभारतकालीन_नगरीयां थी वहां और इनके आस पास के क्षेत्रीय बस्तियो/ नगरों मे बसे हुए थे। प्राचीन काल से ही ये ब्राह्मण शाखाऐ *वैदिक ज्ञान*, *धार्मिक प्रतिष्ठान*, *वेदशालाओ*, *गुरुकुलो* के रूप में विकसित थी। गोमतीवाल ब्राह्मण राजस्थान के गोड़वाल प्रांत में बसे *प्रमुख ब्राह्मणों* मे से एक है।
माना जाता है कि इस क्षेत्र में ब्राह्मणो की सबसे पुरानी शाखाओ में से एक है जिनका इतिहास *वैदिक काल* से मिलता है।
हथूंडी नगर में *गंगा का प्राकट्य* इन ब्राह्मणों की देन है जो बाद मे नगरी भाटून्द बसाने के बाद इन्ही मां गंगा की एक धारा को नगरी भाटून्द में अवतरित कराया था माना गया है।
समकालीन राजा महाराजाओं द्वारा उनके कामों की सराहना में उन्हें भुमि अनुदान दिया गया ,जागीरी प्रदान की गई तब से ये सभी गोमतीवाल ब्राह्मण इन गोड़वाल प्रांत में जागीरदार गोमतीवाल ब्राह्मण नाम से प्रचलित हुए। ये ब्राह्मण शाखाऐ शास्त्र और शस्त्र में प्रवीण थी जो राजाओ के साथ युद्ध में हमेशा सरोकार हूआ करती थी । इन शाखाओ का संबंध
परिहार,प्रतिहार, राव-रावल,राठौड सिसोदियां आदी राजवंशो के साथ मधुर रहे है।
अपने पूर्वजों का मेवाड़ में आना जाना अधिक रहा होंगा, उस समय उदयपुर अस्तित्व में भी नहीं था, #चितौड़गढ़ पर #सिसोदिया_राजवंश का शासन था, चितौड़गढ़ कि एक बड़ी रियासत गोगुंदा थी, #गोगुंदा_रियासत में एक 44 गांवों का परगना था, जिसमें उस समय #वडैर_गांव_दियाण था, जिसमें #पालीवाल_ब्राह्मणों का वर्चस्व था, उस गांव के मुखिया ( पंच ) के घर #जागीरदार श्री #आदोरजी_महाराज का #विवाह हुआ था।, भाटुन गांव इन्होंने ही बसाया था, #भाटुन गांव का #नामकरण भी उनके ही द्वारा हुआ था। बाद में बोलचाल भाषा में #भाटुन्द पड़ा।
#मदनलाल_सी_शर्मा 🙏🙏
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चाहर धर्मेंद्र
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सन्दर्भ
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wikitext
text/x-wiki
{{Multiple issues|
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}}
'''गोमतिवाल ब्राहमण''' समुदाय राजस्थान के गोड़वाल प्रांत में वैदिक काल से निवास कर रहा है।<ref>{{cite book|last= वेदश्रमी|first= शिवलाल दवे|title=गोमतीवाल-इतिहास कौमुदी-सहस्त्रौदीच्य गोमतीवाल ब्राह्मण : उद्भव एवं इतिहास-एक शोध
|url=https://www.google.co.th/books/edition/_/n-igzgEACAAJ|publisher=मिनर्वा पब्लिकेशन|year= 2015}}</ref> ये गोमती नदी के तट से ऊठे हुए थे। इस कारण उनको गोमतिवाल ब्राहमण कहते हैं। यह ब्राहमण राजस्थान के पाली,जालौर,सिरोही व गुजरात<ref>{{cite book|last=महादेवशास्त्री सीताराम जोशी|first= पद्मजा होदाकारा|title=Bhāratīya sãskrṭikośa: Sampādaka Mahādevaśāstrī Jośī. Sahasampādaka Padmajā Hodạ̄rakara,[Prathamāvrṭti] |url=https://www.google.co.th/books/edition/Bh%C4%81rat%C4%ABya_s%C3%A3skr%CC%A5tiko%C5%9Ba/WGMBAAAAMAAJ?hl=en&gbpv=1&bsq=%E0%A4%97%E0%A5%8B%E0%A4%AE%E0%A4%A4%E0%A5%80%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B2+%E0%A4%AC%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B9%E0%A5%8D%E0%A4%AE%E0%A4%A3&dq=%E0%A4%97%E0%A5%8B%E0%A4%AE%E0%A4%A4%E0%A5%80%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B2+%E0%A4%AC%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B9%E0%A5%8D%E0%A4%AE%E0%A4%A3&printsec=frontcover|publisher=भारतीय सांस्कृतिक कोश मंडळ|year= 1962}}</ref> के कुछ जिलों में पाएं जाते हैं।
== सन्दर्भ ==
e0nx9svchn8pdbn0sq1no62q2kv98kx
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चाहर धर्मेंद्र
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हटाने हेतु नामांकित; देखें [[:विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/गोमतीवाल ब्राहमण]]
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wikitext
text/x-wiki
{{हहेच लेख| कारण=उल्लेखनीय नहीं।| चर्चा_पृष्ठ= विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/गोमतीवाल ब्राहमण}}{{Multiple issues|
{{लहजा|date=मार्च 2026}}
{{स्रोतहीन|date=मार्च 2026}}
}}
'''गोमतिवाल ब्राहमण''' समुदाय राजस्थान के गोड़वाल प्रांत में वैदिक काल से निवास कर रहा है।<ref>{{cite book|last= वेदश्रमी|first= शिवलाल दवे|title=गोमतीवाल-इतिहास कौमुदी-सहस्त्रौदीच्य गोमतीवाल ब्राह्मण : उद्भव एवं इतिहास-एक शोध
|url=https://www.google.co.th/books/edition/_/n-igzgEACAAJ|publisher=मिनर्वा पब्लिकेशन|year= 2015}}</ref> ये गोमती नदी के तट से ऊठे हुए थे। इस कारण उनको गोमतिवाल ब्राहमण कहते हैं। यह ब्राहमण राजस्थान के पाली,जालौर,सिरोही व गुजरात<ref>{{cite book|last=महादेवशास्त्री सीताराम जोशी|first= पद्मजा होदाकारा|title=Bhāratīya sãskrṭikośa: Sampādaka Mahādevaśāstrī Jośī. Sahasampādaka Padmajā Hodạ̄rakara,[Prathamāvrṭti] |url=https://www.google.co.th/books/edition/Bh%C4%81rat%C4%ABya_s%C3%A3skr%CC%A5tiko%C5%9Ba/WGMBAAAAMAAJ?hl=en&gbpv=1&bsq=%E0%A4%97%E0%A5%8B%E0%A4%AE%E0%A4%A4%E0%A5%80%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B2+%E0%A4%AC%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B9%E0%A5%8D%E0%A4%AE%E0%A4%A3&dq=%E0%A4%97%E0%A5%8B%E0%A4%AE%E0%A4%A4%E0%A5%80%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B2+%E0%A4%AC%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B9%E0%A5%8D%E0%A4%AE%E0%A4%A3&printsec=frontcover|publisher=भारतीय सांस्कृतिक कोश मंडळ|year= 1962}}</ref> के कुछ जिलों में पाएं जाते हैं।
== सन्दर्भ ==
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कर कानून
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text/x-wiki
[[चित्र:Internal Revenue Code.jpg]]
'''कर कानून''' या '''[[कर]] विधि''' (Tax law) विधिक अध्ययन का महत्वपूर्ण क्षेत्र है जिसमें [[कर]]ाधान से सम्बन्धित [[संवैधानिक विधि]], [[सामान्य विधि]] (कॉमन-ला), [[सांविधिक विधि]], कर संधियाँ आदि आती हैं।
==इन्हें भी देखें==
*[[भारतीय कर व्यवस्था|भारत में कराधान]]
*[[कर]]ाधान
*[[कर]]
[[श्रेणी:विधि]]
[[श्रेणी:कर]]
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जाह्नवी कपूर
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Kiranveer Chahal
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text/x-wiki
{{ज्ञानसन्दूक व्यक्ति
| image = Janhvi Kapoor during baume and mercier event in 2026.jpg
| caption = 2026 में कपूर
| parents = [[श्रीदेवी]]<br>[[बोनी कपूर]]
| birth_date = {{Birth date and age|df=yes|1997|03|6}}
| birth_place = [[मुम्बई|मुंबई]], [[महाराष्ट्र]], भारत
| years_active = 2018–वर्तमान
| occupation = अभिनेत्री
| relatives = देखें [[हिन्दी फिल्म परिवारों की सूची#कपूर परिवार (सुरिंदर कपूर की)|कपूर परिवार]]
}}
'''जाह्नवी कपूर''' (जन्म 6 मार्च 1997) एक भारतीय अभिनेत्री हैं जो [[हिन्दी सिनेमा|हिन्दी फिल्मों]] में काम करती हैं। [[श्रीदेवी]] और [[बोनी कपूर]] से जन्मी, उन्होंने 2018 में रोमांटिक ड्रामा फिल्म [[धड़क]] से अपने अभिनय की शुरुआत की, जो एक व्यावसायिक सफलता थी और उन्होंने [[सर्वश्रेष्ठ महिला पदार्पण के लिए जी सिने पुरस्कार]] अर्जित किया।
==प्रारंभिक जीवन==
जाह्नवी कपूर का जन्म 6 मार्च 1997 को अभिनेत्री [[श्रीदेवी]] और फिल्म निर्माता [[बोनी कपूर]] के घर हुआ था।<ref name="bd">{{cite web|url=https://timesofindia.indiatimes.com/topic/Janhvi-Kapoor|title=Janhvi Kapoor|work=[[द टाइम्स ऑफ़ इण्डिया]]|accessdate=29 July 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190422104300/https://timesofindia.indiatimes.com/topic/Janhvi-Kapoor|archive-date=22 अप्रैल 2019|url-status=live}}</ref><ref>{{cite web|url=https://www.business-standard.com/article/news-ani/janhvi-kapoor-shares-a-throwback-picture-of-boney-kapoor-and-late-sridevi-119060200395_1.html|title=Janhvi Kapoor shares a throwback picture of Boney Kapoor and late Sridevi|work=[[बिजनेस स्टैंडर्ड]]|date=June 2, 2019|access-date=24 अक्तूबर 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190608194603/https://www.business-standard.com/article/news-ani/janhvi-kapoor-shares-a-throwback-picture-of-boney-kapoor-and-late-sridevi-119060200395_1.html|archive-date=8 जून 2019|url-status=live}}</ref> उनकी एक छोटी बहन, चूची कपुर और दो सौतेले भाई-बहन, अभिनेता [[अर्जुन कपूर]] और अंशुला कपूर हैं।<ref>{{cite web|url=https://m.hindustantimes.com/bollywood/arjun-kapoor-khushi-anshula-come-together-for-father-boney-kapoor-at-maidaan-mahurat-ceremony-see-pics/story-HVsAs55MCeRj7j7MC0gKqN.html|title=Arjun Kapoor, Khushi, Anshula come together for father Boney Kapoor at Maidaan mahurat ceremony. See pics|work=[[हिन्दुस्तान टाईम्स]]|date=August 22, 2019}}{{Dead link|date=मई 2025 |bot=InternetArchiveBot }}</ref> वह अभिनेता [[अनिल कपूर]] और [[संजय कपूर]] की भतीजी हैं। उन्होंने मुंबई के इकोले मोंडिएल वर्ल्ड स्कूल में पढ़ाई की। अपनी फिल्म की शुरुआत करने से पहले, उन्होंने कैलिफोर्निया में [[ली स्ट्रैसबर्ग थिएटर एंड फिल्म इंस्टीट्यूट]] से अभिनय का कोर्स किया।<ref name="bd"/>
==करियर==
कपूर ने 2018 में [[शशांक खेतान]] द्वारा निर्देशित रोमांस [[धड़क]] से, सह-अभिनेता [[ईशान खट्टर]] के साथ अभिनय की शुरुआत की। 2016 की [[मराठी भाषा|मराठी]] फिल्म [[सैराट]] की [[हिन्दी ]] भाषा की रीमेक, कपूर को एक उच्च वर्ग की लड़की की भूमिका में दिखाती है, जिसका जीवन एक निम्न-वर्ग के लड़के (खट्टर द्वारा अभिनीत) के साथ फ़रार होने के बाद दुखद हो जाता है। फिल्म को मुख्य रूप से नकारात्मक समीक्षा मिली,<ref>{{cite news|url=https://gulfnews.com/leisure/movies/reviews/dhadak-reviews-critics-give-film-a-thumbs-down-1.2254597|title=Dhadak: Critics give film thumbs down|date=21 July 2018|newspaper=[[Gulf News]]|accessdate=17 November 2018|archive-url=https://web.archive.org/web/20180813094514/https://gulfnews.com/leisure/movies/reviews/dhadak-reviews-critics-give-film-a-thumbs-down-1.2254597|archive-date=13 अगस्त 2018|url-status=live}}</ref> लेकिन दुनिया भर में, {{INR}}1.1 बिलियन के संग्रह के साथ, यह एक व्यावसायिक सफलता साबित हुई।<ref>{{cite web|url=https://boxofficeindia.com/report-details.php?articleid=4133|title=The Real Winner With Dhadak|website=Box Office India|date=25 July 2018|accessdate=27 July 2018|archive-url=https://web.archive.org/web/20180725183809/https://boxofficeindia.com/report-details.php?articleid=4133|archive-date=25 जुलाई 2018|url-status=dead|df=dmy-all}}</ref><ref>{{cite news|url=http://www.bollywoodhungama.com/news/box-office-special-features/box-office-worldwide-collections-day-wise-breakup-dhadak/|title=Box Office: Worldwide Collections and Day wise breakup of Dhadak|work=Bollywood Hungama|access-date=5 September 2018|archive-url=https://web.archive.org/web/20180802012850/http://www.bollywoodhungama.com/news/box-office-special-features/box-office-worldwide-collections-day-wise-breakup-dhadak/|archive-date=2 August 2018|url-status=live|df=dmy-all}}</ref> [[सीएनएन-न्यूज़ 18]] के लिए लिखते हुए, [[राजीव मसंद]] ने जाति-आधारित संदर्भों को हटाने के लिए फिल्म की आलोचना की और इसे मूल से हीन माना, लेकिन महसूस किया कि कपूर के पास "एक नाजुकता है जो उसे तुरंत प्रेमपूर्ण बनाती है, और एक आत्मीय गुण जो आपकी आंखों को स्क्रीन पर उतारना मुश्किल बना देता है"।<ref>{{cite web|author=Masand, Rajeev|url=https://www.rajeevmasand.com/reviews/our-films/caste-away-2/|title=Caste Away|website=RajeevMasand.com|date=20 July 2018|accessdate=27 September 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190707094447/https://www.rajeevmasand.com/reviews/our-films/caste-away-2/|archive-date=7 जुलाई 2019|url-status=dead}}</ref> इसके विपरीत, [[फर्स्टपोस्ट]] के [[अन्ना एम एम वेटिकैड]] ने लिखा, "करिश्मा तब भी आ सकता है जब वह दोषपूर्ण लेखन से बोझिल हो। दुर्भाग्य से, जाह्नवी के पास व्यक्तित्व की कमी है और वह एक बेरंग प्रदर्शन प्रस्तुत करती है"।<ref>{{cite web |url=https://www.firstpost.com/entertainment/dhadak-movie-review-janhvi-ishaan-are-so-so-in-an-insipid-sairat-remake-that-is-afraid-to-discuss-caste-4781021.html |title=Dhadak movie review: Janhvi-Ishaan are so-so in an insipid Sairat remake that is afraid to discuss caste |publisher=[[First Post]] |access-date=24 अक्तूबर 2019 |archive-url=https://web.archive.org/web/20190914232222/https://www.firstpost.com/entertainment/dhadak-movie-review-janhvi-ishaan-are-so-so-in-an-insipid-sairat-remake-that-is-afraid-to-discuss-caste-4781021.html |archive-date=14 सितंबर 2019 |url-status=dead }}</ref> उन्होंने [[सर्वश्रेष्ठ महिला पदार्पण के लिए जी सिने पुरस्कार]] जीता।<ref>{{cite news|title=Zee Cine Awards full winners list: Ranbir Kapoor and Deepika Padukone win big|url=https://www.indiatoday.in/movies/bollywood/story/zee-cine-awards-full-winners-list-ranbir-kapoor-and-deepika-padukone-win-big-1482407-2019-03-20|date=20 March 2019|accessdate=25 March 2019|work=India Today|archive-url=https://web.archive.org/web/20190321171351/https://www.indiatoday.in/movies/bollywood/story/zee-cine-awards-full-winners-list-ranbir-kapoor-and-deepika-padukone-win-big-1482407-2019-03-20|archive-date=21 मार्च 2019|url-status=live}}</ref> उसी वर्ष, सौंदर्य प्रसाधन ब्रांड [[न्याका]] ने कपूर को अपना ब्रांड एंबेसडर चुना।<ref>{{cite news|url=https://www.business-standard.com/article/news-ians/girls-should-be-unapologetic-about-what-they-want-janhvi-kapoor-118091201224_1.html|title=Girls should be unapologetic about what they want: Janhvi Kapoor|date=12 September 2018|work=[[बिजनेस स्टैंडर्ड]]|accessdate=17 November 2018|archive-url=https://web.archive.org/web/20180912174722/https://www.business-standard.com/article/news-ians/girls-should-be-unapologetic-about-what-they-want-janhvi-kapoor-118091201224_1.html|archive-date=12 सितंबर 2018|url-status=live}}</ref>
सितंबर 2019 तक, कपूर की पांच आगामी परियोजनाएं हैं। वह एक कॉमेडी हॉरर फिल्म [[रूही अफज़ा]] में [[राजकुमार राव]] के साथ दोहरी भूमिका निभाएंगी, और बायोपिक [[गुंजन सक्सेना|गुंजन सक्सेना: द कारगिल गर्ल]] में एविएटर गुंजन सक्सेना की शीर्षक भूमिका निभाएंगी।<ref name="roohi">{{Cite news|url=http://www.newindianexpress.com/entertainment/hindi/2019/jul/14/janhvi-kapoor-a-sincere-and-hardworking-actor-rajkummar-rao-on-rooh-afza-co-star-2003749.html|title=Janhvi Kapoor a sincere and hardworking actor: Rajkummar Rao on Rooh-Afza co-star|last=|first=|date=July 14, 2019|work=[[New Indian Express]]|access-date=July 25, 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190821054009/http://www.newindianexpress.com/entertainment/hindi/2019/jul/14/janhvi-kapoor-a-sincere-and-hardworking-actor-rajkummar-rao-on-rooh-afza-co-star-2003749.html|archive-date=21 अगस्त 2019|url-status=live}}</ref><ref>{{cite web|url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/hindi/bollywood/news/photo-janhvi-kapoors-first-look-as-gunjan-saxena-indias-first-female-combat-aviator/articleshow/67252234.cms|title=Photo: Janhvi Kapoor's first look as Gunjan Saxena - India's first female combat aviator|work=[[द टाइम्स ऑफ़ इण्डिया]]|date=December 26, 2018|access-date=24 अक्तूबर 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190221174309/https://m.timesofindia.com/entertainment/hindi/bollywood/news/photo-janhvi-kapoors-first-look-as-gunjan-saxena-indias-first-female-combat-aviator/amp_articleshow/67252234.cms|archive-date=21 फ़रवरी 2019|url-status=live}}</ref><ref>{{citenews|url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/hindi/bollywood/news/janhvi-kapoor-shooting-in-lucknow/articleshow/68095836.cms|title=Janhvi Kapoor shooting in Lucknow|newspaper=[[द टाइम्स ऑफ़ इण्डिया]]|date=22 February 2019|accessdate=27 April 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190510234239/https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/hindi/bollywood/news/janhvi-kapoor-shooting-in-lucknow/articleshow/68095836.cms|archive-date=10 मई 2019|url-status=live}}</ref> वह [[नेटफ्लिक्स]] एंथोलॉजी फिल्म [[घोस्ट स्टोरीज़ (2020 फ़िल्म)|घोस्ट स्टोरीज़]] में जोया अख्तर के सेगमेंट में भी अभिनय करेंगी।<ref name="ghost">{{Cite news |url=https://www.business-standard.com/article/news-ani/zoya-akhtar-announces-shooting-of-ghost-stories-119081700334_1.html |title=Zoya Akhtar announces shooting of 'Ghost Stories' |date=17 August 2019 |work=Business Standard |access-date=20 September 2019 |archive-url=https://web.archive.org/web/20190920135014/https://www.business-standard.com/article/news-ani/zoya-akhtar-announces-shooting-of-ghost-stories-119081700334_1.html |archive-date=20 सितंबर 2019 |url-status=live }}</ref> इसके अलावा, कपूर [[करण जौहर]] की एनसेम्बल पीरियड फिल्म तख्त में एक गुलाम लड़की का किरदार निभाएंगी और 2008 की रोमांटिक कॉमेडी फिल्म [[दोस्ताना (2008 फ़िल्म)|दोस्ताना]] की अगली कड़ी में [[कार्तिक आर्यन]] और [[लक्ष्य लालवानी]] के साथ अभिनय करेंगी।<ref>{{cite web|url=https://m.timesofindia.com/entertainment/hindi/bollywood/news/janhvi-kapoor-preps-up-for-takht/articleshow/66657100.cms|title=Janhvi Kapoor preps up for 'Takht'|work=[[द टाइम्स ऑफ़ इण्डिया]]|date=November 16, 2018|access-date=24 अक्तूबर 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20181117013209/https://m.timesofindia.com/entertainment/hindi/bollywood/news/janhvi-kapoor-preps-up-for-takht/articleshow/66657100.cms|archive-date=17 नवंबर 2018|url-status=live}}</ref><ref>{{Cite news |url=https://www.indiatoday.in/movies/bollywood/story/kartik-aaryan-and-janhvi-kapoor-in-dostana-2-announces-karan-johar-1556939-2019-06-27 |title=Kartik Aaryan and Janhvi Kapoor in Dostana 2, announces Karan Johar |date=27 June 2019 |work=[[इण्डिया टुडे]] |access-date=30 June 2019 |archive-url=https://web.archive.org/web/20190628191815/https://www.indiatoday.in/movies/bollywood/story/kartik-aaryan-and-janhvi-kapoor-in-dostana-2-announces-karan-johar-1556939-2019-06-27 |archive-date=28 जून 2019 |url-status=live }}</ref>
==फिल्मोग्राफी==
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|फिल्म या शो जो अभी रिलीज होना बाकी है
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|-
|2018
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| पार्थवी सिंह राठौर
|[[सर्वश्रेष्ठ महिला पदार्पण के लिए जी सिने पुरस्कार]]
|-
| 2020
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| गुंजन सक्सेना
| पोस्ट-प्रोडक्शन<ref>{{cite web|url=https://www.indiatoday.in/movies/bollywood/story/jahnvi-kapoor-to-gain-weight-for-kargil-girl-after-losing-10kg-for-roohiafza-1574646-2019-07-29|title=Janhvi Kapoor to gain weight for Kargil Girl after losing 10kg for RoohiAfza|work=[[इण्डिया टुडे]]|date=July 29, 2019|access-date=24 अक्तूबर 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190729155838/https://www.indiatoday.in/movies/bollywood/story/jahnvi-kapoor-to-gain-weight-for-kargil-girl-after-losing-10kg-for-roohiafza-1574646-2019-07-29|archive-date=29 जुलाई 2019|url-status=live}}</ref>
|-
|2020
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| रूही अरोड़ा/ अफसाना बेदी
| पोस्ट-प्रोडक्शन<ref name="roohi"/>
|-
|2020
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| टीबीए
| [[नेटफ्लिक्स]] एंथोलॉजी फिल्म; [[ज़ोया अख़्तर|जोया अख्तर]] का सेगमेंट<ref name="ghost"/>
|-
|2020
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| टीबीए
| फिल्मांकन
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|2024
!मिस्टर एंड मिसेज माही
|
|
|-
|2024
!उलझ
|
|
|-
|2024
!देवरा: पार्ट 1
|
|
|-
|2025
!होमबाउंड
|
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|-
|2025
!परम सुंदरि
|
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|-
|2025
!सन्नी संस्कारी की तुलसी कुमारी
|
|
|-
|2026
!पेड्डी
|
|
|}
==सन्दर्भ==
{{टिप्पणीसूची|2}}
==बाहरी कड़ियाँ==
{{Commons category|Janhvi Kapoor|जाह्नवी कपूर}}
<!-- According to [[WP:FACEBOOK]] and [[WP:Twitter-EL]], social networking links like Facebook, Twitter are allowed only if they are Verified Official links and the subject of the article has no other web presence. Kindly consider these rules before adding anything.--->
* {{IMDb name|id=9427099|name=जाह्नवी कपूर}}
* [https://web.archive.org/web/20190924182936/https://www.bollywoodhungama.com/celebrity/jhanvi-kapoor/ जाह्नवी कपूर] [[बॉलीवुड हँगामा|बॉलीवुड हंगामा]] पर
{{Portal bar|जीवनी|बॉलीवुड|फ़िल्म|भारत}}
[[श्रेणी:1997 में जन्मे लोग]]
[[श्रेणी:जीवित लोग]]
[[श्रेणी:भारतीय फ़िल्म अभिनेत्री]]
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'''मक्सी''' (Maksi) [[भारत]] के [[मध्य प्रदेश]] राज्य के [[शाजापुर ज़िले]] में स्थित एक नगर है। यह मक्सी पार्श्वनाथ जी नामक [[जैन धर्म|जैन]] मन्दिर के लिए प्रसिद्ध है।<ref>"[https://books.google.com/books?id=X6XNCwAAQBAJ Inde du Nord: Madhya Pradesh et Chhattisgarh] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20190703183559/https://books.google.com/books?id=X6XNCwAAQBAJ |date=3 जुलाई 2019 }}," Lonely Planet, 2016, ISBN 9782816159172</ref><ref>"[https://books.google.com/books?id=u6VB9_CrsfoC Tourism in the Economy of Madhya Pradesh]," Rajiv Dube, Daya Publishing House, 1987, ISBN 9788170350293</ref> यहां की लड़कियां सेक्सी होती हैं और मैक्सी पहनती हैं इसलिए इसका नाम मक्सी रखा गया है।
== इन्हें भी देखें ==
* [[शाजापुर ज़िला]]
== सन्दर्भ ==
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[[श्रेणी:शाजापुर ज़िले के नगर]]
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'''मक्सी''' (Maksi) [[भारत]] के [[मध्य प्रदेश]] राज्य के [[शाजापुर ज़िले]] में स्थित एक नगर है। यह मक्सी पार्श्वनाथ जी नामक [[जैन धर्म|जैन]] मन्दिर के लिए प्रसिद्ध है।<ref>"[https://books.google.com/books?id=X6XNCwAAQBAJ Inde du Nord: Madhya Pradesh et Chhattisgarh] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20190703183559/https://books.google.com/books?id=X6XNCwAAQBAJ |date=3 जुलाई 2019 }}," Lonely Planet, 2016, ISBN 9782816159172</ref><ref>"[https://books.google.com/books?id=u6VB9_CrsfoC Tourism in the Economy of Madhya Pradesh]," Rajiv Dube, Daya Publishing House, 1987, ISBN 9788170350293</ref> यहां की लड़कियां सुपर सेक्सी होती हैं और शानदार मैक्सी पहनती हैं इसलिए इसका नाम मक्सी रखा गया है।
== इन्हें भी देखें ==
* [[शाजापुर ज़िला]]
== सन्दर्भ ==
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'''मक्सी''' (Maksi) [[भारत]] के [[मध्य प्रदेश]] राज्य के [[शाजापुर ज़िले]] में स्थित एक नगर है। यह मक्सी पार्श्वनाथ जी नामक [[जैन धर्म|जैन]] मन्दिर के लिए प्रसिद्ध है।<ref>"[https://books.google.com/books?id=X6XNCwAAQBAJ Inde du Nord: Madhya Pradesh et Chhattisgarh] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20190703183559/https://books.google.com/books?id=X6XNCwAAQBAJ |date=3 जुलाई 2019 }}," Lonely Planet, 2016, ISBN 9782816159172</ref><ref>"[https://books.google.com/books?id=u6VB9_CrsfoC Tourism in the Economy of Madhya Pradesh]," Rajiv Dube, Daya Publishing House, 1987, ISBN 9788170350293</ref>
== इन्हें भी देखें ==
* [[शाजापुर ज़िला]]
== सन्दर्भ ==
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[[श्रेणी:शाजापुर ज़िला]]
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चाहर धर्मेंद्र
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}}
'''सिक्किम क्रन्तिकारी मोर्चा''' (SKM) , [[सिक्किम]] का एक [[राजनीतिक दल|राजनैतिक दल]] है। इसकी स्थापना ४ फरवरी २०१३ को सोरेङ नामक नगर में हुआ था। भारती शर्मा को इस दल का अध्यक्षा चुना गया था जो सिक्किम की किसी राजनैतिक दल की प्रथम महिला अध्यक्षा हैं।
==सन्दर्भ==
{{टिप्पणीसूची}}
[[श्रेणी:भारत के राजनीतिक दल]]
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गौडवहो
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अनुनाद सिंह
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text/x-wiki
''' गउडवहो ''' (गौडवध) ८वीं सदी के [[प्राकृत]] कवि [[वाक्पति]] की प्रसिद्ध रचना है। यह ऐतिहासिक काव्य है जिसमें [[कन्नौज]] के राजा [[यशोवर्मन]] का चरित अंकित है।
इसमें यशोवर्मन द्वारा लड़ी गयी लड़ाइयों का वर्णन है जिसमें यशोवर्मन की [[गौड़ राज्य|राजा गौड]] पर जीत मुख्य रूप से वर्णित है। <ref>{{Cite web |url=https://archive.org/details/gadavahohistor00vakpuoft |title=The Gaüdavaho; a historical poem in Prakrit. Edited by Shankar Pandurang Pandit |access-date=16 अगस्त 2018 |archive-url=https://web.archive.org/web/20160901083944/https://archive.org/details/gadavahohistor00vakpuoft |archive-date=1 सितंबर 2016 |url-status=live }}</ref>
गउडवहो [[महाराष्ट्री प्राकृत]] में रचित एक ऐतिहासिक महाकाव्य ([[प्रबंध काव्य|प्रबंधकाव्य]]) है। इसमें [[कन्नौज]] के राजा यशोवर्मन द्वारा गौड़ (बंगाल/मगध) के राजा के वध और उनके दिग्विजयों का वर्णन है। लगभग 1209 [[गाथा]]ओं के इस काव्य में यथार्थवादी युद्ध वर्णन के साथ-साथ शानदार प्राकृतिक और सांस्कृतिक चित्रण भी है। इसमें 8वीं सदी के प्रसिद्ध कवि [[भवभूति]] का उल्लेख है, जो वाक्पतिराज के समकालीन थे। यह काव्य अपनी सूक्ष्म निसर्गवर्णन (प्रकृति वर्णन) और अलंकारिक भाषा के लिए जाना जाता है। मूल रूप से, यह काव्य राजा यशोवर्मन की प्रशंसा में लिखा गया है। इसमें वर्णित मुख्य युद्ध का वर्णन बहुत संक्षिप्त है।
== संदर्भ ==
{{टिप्पणीसूची}}
==बाहरी कड़ियाँ==
*[https://archive.org/details/gaudavahodr.mithileshkumarimishra गउडवहो] (टीकाकार - डॉ० मिथिलेश कुमारी मिश्र)
[[श्रेणी:प्राकृत साहित्य]]
[[श्रेणी:प्राकृत काव्य]]
[[श्रेणी:दरबारी काव्य]]
[[श्रेणी:भारतीय साहित्य]]
{{आधार}}
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सम्राट चौधरी
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wikitext
text/x-wiki
{{Infobox officeholder
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| office = बिहार के मुख्यमंत्री पूर्णिया बीजेपी सुशीला भारती रवी रंजन प्रियंका प्रिया भूम-ईहारन बाबा चुत्तरमल माचोद भारत चोर है माचोद हिन्दू माचोद राम मां चोद भूम-ईहर गोत्र कुर्-मी कोइरी झा वर्मा शर्मा शुक्ला गुप्ता श्रीवास्तव सिंह चौधरी राय पाल योगी मोदी उपाध्याय घोष खान कपूर पांडेय तोमर साही इत्यादि
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}}
'''सम्राट चौधरी '''<ref>{{Cite web |title=Home - Show Member Personal Details |url=https://vidhanparishad.bihar.gov.in/profile/77 |access-date=2025-10-03 |website=vidhanparishad.bihar.gov.in}}</ref> (जन्म 16 नवंबर 1968), जिन्हें उनके उपनाम राकेश कुमार से भी जाना जाता है , एक भारतीय राजनीतिज्ञ हैं, जो वर्तमान में 2024 से विजय कुमार सिन्हा के साथ नीतीश कुमार के अधीन बिहार के 8वें उपमुख्यमंत्री के रूप में कार्यरत थे, अब मुख्यमंत्री चुन गए हैं, इन्होंने 15 अप्रैल 2026 को पद एवं गोपनीयता की शपथ ली<ref>{{Cite web|url=https://gyanok.com/state/bihar/who-is-samrat-chaudhary-bihar-new-cm-bjp-news/|title=Bihar New CM: कौन हैं सम्राट चौधरी? जिन्हें बीजेपी ने सौंपी बिहार की कमान, विधायक दल की बैठक में हुआ बड़ा फैसला - gyanok.com|date=2026-04-14|language=en-US|access-date=2026-04-17}}</ref>। वे 2025 में तारापुर विधानसभा क्षेत्र से बिहार विधानसभा के लिए चुने जाने से पहले भारतीय जनता पार्टी से बिहार विधान परिषद के सदस्य थे। वे मार्च 2023 से 25 जुलाई 2024 तक भाजपा बिहार राज्य इकाई के पार्टी अध्यक्ष रहे हैं। <ref>{{cite web|url=https://www.indiatoday.in/india/story/bihar-mlc-polls-bjp-candidates-1692214-2020-06-24|title=Mayukh, Samrat Choudhary BJP candidates for Bihar MLC polls|website=India Today|date=24 June 2020 |accessdate=15 November 2020|archive-date=14 October 2020|archive-url=https://web.archive.org/web/20201014013022/https://www.indiatoday.in/india/story/bihar-mlc-polls-bjp-candidates-1692214-2020-06-24|url-status=live}}</ref><ref>{{cite web|url=https://www.newsnationtv.com/states/bihar/all-9-candidates-have-been-elected-unopposed-for-9-seats-of-bihar-legislative-councile-148137.html|title=बिहार विधान परिषद चुनाव में सभी 9 उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए, JDU-RJD का दिखा दबदबा|website=newsnationtv|date=29 June 2020 |archive-url=https://web.archive.org/web/20201115202848/https://www.newsnationtv.com/states/bihar/all-9-candidates-have-been-elected-unopposed-for-9-seats-of-bihar-legislative-councile-148137.html|accessdate=15 November 2020|archive-date=15 November 2020|quote=The JDU's winning in Bihar Legislative Council are Dr. Kumud Verma, Professor Ghulam and Bhisam Sahni. While RJD to Mo Farooq, Rambali Singh and Sunil Kumar Singh have been made MLCs. On the other hand, Sanjay Prakash and Samrat Chaudhary from BJP have secured MLC seat while Sameer Kumar Singh from Congress has got a place in Bihar Legislative Council. }}</ref><ref>{{cite web|url=https://www.ndtv.com/india-news/nda-candidates-file-nomination-papers-for-council-elections-in-bihar-2252158|title=NDA Candidates File Nomination Papers For Council Elections In Bihar|website=NDTV|accessdate=15 November 2020|archive-date=6 September 2020|archive-url=https://web.archive.org/web/20200906215845/https://www.ndtv.com/india-news/nda-candidates-file-nomination-papers-for-council-elections-in-bihar-2252158|url-status=live}}</ref>
वे राष्ट्रीय जनता दल सरकार में विधान सभा के और बिहार सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं। चौधरी बिहार राज्य के लिए भाजपा के पूर्व उपाध्यक्ष रहे हैं और वर्तमान में 2019 में अपना पहला कार्यकाल समाप्त होने के बाद 2020 में एमएलसी के रूप में दूसरे कार्यकाल के लिए चुने गए हैं ।2022 में, उन्हें बिहार विधान परिषद में विपक्ष के नेता के रूप में चुना गया । 2024 में, उन्हें माल और सेवा कर दर युक्तिकरण पैनल पर मंत्रियों के समूह का संयोजक भी बनाया गया। वह बिहार सरकार में वर्तमान मुख्यमंत्री हैं ।
==सन्दर्भ==
[[श्रेणी:जीवित लोग]]
[[श्रेणी:भारतीय राजनीति]]
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चाहर धर्मेंद्र
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wikitext
text/x-wiki
{{Infobox officeholder
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| predecessor = [[नीतीश कुमार]]
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'''सम्राट चौधरी '''<ref>{{Cite web |title=Home - Show Member Personal Details |url=https://vidhanparishad.bihar.gov.in/profile/77 |access-date=2025-10-03 |website=vidhanparishad.bihar.gov.in}}</ref> (जन्म 16 नवंबर 1968), जिन्हें उनके उपनाम राकेश कुमार से भी जाना जाता है , एक भारतीय राजनीतिज्ञ हैं, जो वर्तमान में 2024 से विजय कुमार सिन्हा के साथ नीतीश कुमार के अधीन बिहार के 8वें उपमुख्यमंत्री के रूप में कार्यरत थे, अब मुख्यमंत्री चुन गए हैं, इन्होंने 15 अप्रैल 2026 को पद एवं गोपनीयता की शपथ ली<ref>{{Cite web|url=https://gyanok.com/state/bihar/who-is-samrat-chaudhary-bihar-new-cm-bjp-news/|title=Bihar New CM: कौन हैं सम्राट चौधरी? जिन्हें बीजेपी ने सौंपी बिहार की कमान, विधायक दल की बैठक में हुआ बड़ा फैसला - gyanok.com|date=2026-04-14|language=en-US|access-date=2026-04-17}}</ref>। वे 2025 में तारापुर विधानसभा क्षेत्र से बिहार विधानसभा के लिए चुने जाने से पहले भारतीय जनता पार्टी से बिहार विधान परिषद के सदस्य थे। वे मार्च 2023 से 25 जुलाई 2024 तक भाजपा बिहार राज्य इकाई के पार्टी अध्यक्ष रहे हैं। <ref>{{cite web|url=https://www.indiatoday.in/india/story/bihar-mlc-polls-bjp-candidates-1692214-2020-06-24|title=Mayukh, Samrat Choudhary BJP candidates for Bihar MLC polls|website=India Today|date=24 June 2020 |accessdate=15 November 2020|archive-date=14 October 2020|archive-url=https://web.archive.org/web/20201014013022/https://www.indiatoday.in/india/story/bihar-mlc-polls-bjp-candidates-1692214-2020-06-24|url-status=live}}</ref><ref>{{cite web|url=https://www.newsnationtv.com/states/bihar/all-9-candidates-have-been-elected-unopposed-for-9-seats-of-bihar-legislative-councile-148137.html|title=बिहार विधान परिषद चुनाव में सभी 9 उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए, JDU-RJD का दिखा दबदबा|website=newsnationtv|date=29 June 2020 |archive-url=https://web.archive.org/web/20201115202848/https://www.newsnationtv.com/states/bihar/all-9-candidates-have-been-elected-unopposed-for-9-seats-of-bihar-legislative-councile-148137.html|accessdate=15 November 2020|archive-date=15 November 2020|quote=The JDU's winning in Bihar Legislative Council are Dr. Kumud Verma, Professor Ghulam and Bhisam Sahni. While RJD to Mo Farooq, Rambali Singh and Sunil Kumar Singh have been made MLCs. On the other hand, Sanjay Prakash and Samrat Chaudhary from BJP have secured MLC seat while Sameer Kumar Singh from Congress has got a place in Bihar Legislative Council. }}</ref><ref>{{cite web|url=https://www.ndtv.com/india-news/nda-candidates-file-nomination-papers-for-council-elections-in-bihar-2252158|title=NDA Candidates File Nomination Papers For Council Elections In Bihar|website=NDTV|accessdate=15 November 2020|archive-date=6 September 2020|archive-url=https://web.archive.org/web/20200906215845/https://www.ndtv.com/india-news/nda-candidates-file-nomination-papers-for-council-elections-in-bihar-2252158|url-status=live}}</ref>
वे राष्ट्रीय जनता दल सरकार में विधान सभा के और बिहार सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं। चौधरी बिहार राज्य के लिए भाजपा के पूर्व उपाध्यक्ष रहे हैं और वर्तमान में 2019 में अपना पहला कार्यकाल समाप्त होने के बाद 2020 में एमएलसी के रूप में दूसरे कार्यकाल के लिए चुने गए हैं ।2022 में, उन्हें बिहार विधान परिषद में विपक्ष के नेता के रूप में चुना गया । 2024 में, उन्हें माल और सेवा कर दर युक्तिकरण पैनल पर मंत्रियों के समूह का संयोजक भी बनाया गया। वह बिहार सरकार में वर्तमान मुख्यमंत्री हैं ।
==सन्दर्भ==
[[श्रेणी:जीवित लोग]]
[[श्रेणी:भारतीय राजनीति]]
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फकीर मोहम्मद इब्राहिम कलीफुल्ला
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wikitext
text/x-wiki
'''फकीर मोहम्मद इब्राहिम कलीफुल्ला''' (जन्म २३ जुलाई १९५१) [[भारत का उच्चतम न्यायालय|भारत के सर्वोच्च न्यायालय]] के पूर्व न्यायाधीश हैं। उनका जन्म कराइकुडी, [[शिवगंगा जिला]], [[तमिल नाडु]], भारत में हुआ।
कलीफुल्ला ने २० अगस्त १९७५ को एक वकील की सनद हासिल की, जिसके बाद उन्होंने टी एस गोपालन एंड कंपनी की लॉ फर्म में [[श्रम कानून]] मे काम शुरू किया। २ मार्च २००० को, उन्हें [[मद्रास उच्च न्यायालय]] के न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया था। फरवरी २०११ में, वह [[जम्मू और कश्मीर उच्च न्यायालय|जम्मू और कश्मीर के उच्च न्यायालय]] के सदस्य बने और दो महीने बाद कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के रूप में नियुक्त हुए। सितंबर २०११ में, उन्हें जम्मू और कश्मीर के उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में नामित किया गया था। २ अप्रैल २०१२ को, उन्हें भारत के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश का पद प्रदान किया गया, जिसकी शपथ उन्हे मुख्य न्यायाधीश [[एस एच कापड़िया|सरोश होमी कपाड़िया]] ने दिलाई। न्यायमूर्ति कलीफुल्ला २२ जुलाई २०१६ को भारत के सर्वोच्च न्यायालय से सेवानिवृत्त हुए।
८ मार्च २०१९ को अयोध्या के [[अयोध्या विवाद|राम जन्मभूमि-बाबरी विवाद]] के मामले में मध्यस्थता के लिए तीन सदस्यीय पैनल नियुक्त किया गया; जिसमें कलीफुल्ला, आध्यात्मिक गुरू [[रवि शंकर (आध्यात्मिक गुरू)|श्री श्री रवी शंकर]] और मध्यस्थता विशेषज्ञ वकील [[श्रीराम पंचू]] हैं।<ref>{{cite web | url=https://hindi.news18.com/news/nation/know-who-is-justice-kalifulla-the-mediator-in-ayodhya-dispute-1738885.html | title=जानिए कौन हैं जस्टिस इब्राहिम कलीफुल्ला, जो सुलझाएंगे राम मंदिर विवाद का मुद्दा? | publisher=न्युज १८ | date=८ मार्च २०१९ | accessdate=११ मार्च २०१९ | archive-date=21 अक्तूबर 2023 | archive-url=https://web.archive.org/web/20231021060058/https://hindi.news18.com/news/nation/know-who-is-justice-kalifulla-the-mediator-in-ayodhya-dispute-1738885.html | url-status=dead }}</ref>
==सन्दर्भ==
{{टिप्पणीसूची}}
[[श्रेणी:1951 में जन्मे लोग]]
[[श्रेणी:भारतीय न्यायाधीश]]
[[श्रेणी:तमिलनाडु के लोग]]
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प्रेम सिंह तमांग
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प्रभात कोली
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{{उल्लेखनीयता|date=जुलाई 2020}}
'''प्रभात राजू कोली''' एक [[भारतीय]] [[तैराकी|तैराक]] है जिसने विश्व रिकॉर्ड बना रखा है<ref>{{Cite web|url=http://www.aees.gov.in/htmldocs/sports.html|title=About sports|website=www.aees.gov.in|access-date=2020-05-23|archive-url=https://web.archive.org/web/20191028091016/http://aees.gov.in/htmldocs/sports.html|archive-date=28 अक्तूबर 2019|url-status=dead}}</ref> एवं उन्हें [[भारत]] के [[राष्ट्रपति]] [[रामनाथ कोविंद]] ने '''तेनजिंग नोर्गे राष्ट्रीय साहसिक पुरस्कार''' द्वारा सम्मानित किया गया था।<ref>{{Cite web|url=http://pib.gov.in/Pressreleaseshare.aspx?PRID=1583116|title=Tenzing Norgay National Adventure Award 2018 Announced|website=pib.gov.in|access-date=2020-05-23}}</ref><ref name=":0">{{Cite web|url=https://openwaterswimming.com/2019/09/prabhat-koli-wins-tenzing-norgay-national-adventure-award/|title=Prabhat Koli Wins Tenzing Norgay National Adventure Award|last=Munatones|first=Steven|date=2019-09-01|website=WOWSA|language=en-US|access-date=2020-05-23}}</ref> यह पुरस्कार भूमि, [[महासागर]] और [[वायु]] की ओर यात्रा के क्षेत्र में उत्कृष्ट उपलब्धियों के लिए सर्वोच्च राष्ट्रीय पुरस्कार होता है।<ref>{{Cite web|url=https://www.powersportz.tv/ps-exclusive/news-tenzing-norgay-awardee-prabhat-koli-talks-to-ps-6620|title=News: Tenzing Norgay awardee Prabhat Koli talks to PS|website=Power Sportz|access-date=2020-05-23}}{{Dead link|date=मई 2026 |bot=InternetArchiveBot }}</ref> महाराष्ट्र सरकार ने उन्हें छत्रपती शिवाजी पुरस्कार से भी सम्मानित किया।<ref>{{Cite web|url=https://www.sakaltimes.com/sports/48-sportspersons-bag-shiv-chhatrapati-award-46483|title=48 sportspersons to bag Shiv Chhatrapati Award|date=2020-02-18|website=www.sakaltimes.com|language=en|access-date=2020-05-23}}{{Dead link|date=मई 2024 |bot=InternetArchiveBot }}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.theweek.in/wire-updates/sports/2020/02/18/bes20-mh-sports-awards.html|title=Maha 48 sportspersons to bag Shiv Chhatrapati Award|website=The Week|language=en|access-date=2020-05-23}}</ref>
{{Infobox swimmer|name=प्रभात राजू कोली|nationality=[[भारतीय]]|birth_name=प्रभात कोली|birth_place=नेरूल, [[मुंबई]], [[महाराष्ट्र]], [[भारत]]|birth_date=27 [[जुलाई]] 1999}}
पिछले 5 वर्षों में, प्रभात राजू कोली ने [[भारत]], [[इंग्लैण्ड|इंग्लैंड]], [[दक्षिण अफ्रीका]], [[डेनमार्क]], [[जापान]], [[स्कॉट्लैण्ड|स्कॉटलैंड]], [[स्पेन]], [[कैलिफ़ोर्निया]], [[हवाई]] और [[न्यूयॉर्क]] में [[मैराथन]] तैरते हुए चैनलों पर रिकॉर्ड क़ायम किया है। कोली [[:en:Triple Crown of Open Water Swimming|ट्रिपल क्राउन ऑफ़ ओपन वॉटर स्विमिंग]] जीतने वाले दुनिया के सबसे छोटी उम्र के तैराक है।<ref name=":0" />
== तैराकी ==
एक युवा तैराक के रूप में, उन्होंने [[पश्चिम बंगाल]] में 81 किमी भारत राष्ट्रीय ओपन वाटर स्विमिंग प्रतियोगिता, [[जर्सी]] के इस्ले के चारों ओर 66 किमी, अंग्रेजी चैनल के पार 34 किमी, [[केपटाउन]], [[दक्षिण]] [[अफ़्रीका|अफ्रीका]] में केप टाउन में 8 किमी लेंगबैन स्विम, रोबेन से 7.4 किमी की दूरी पर पूरा किया। दक्षिण अफ्रीका में ब्लौबर्ग में [[द्वीप]], दक्षिण अफ्रीका में लैंदुड्नो से कैम्पस बे तक 8 किमी, [[कैलिफ़ोर्निया|कैलिफोर्निया]] में कैटेलिना चैनल से 32.3 किमी, हवाई में मोलोकाई चैनल पर 42 किमी, [[न्यूयॉर्क]] में 45.9 किमी 20 पुल [[मैनहटन|मैनहट्टन]] तैरना में, 15.2 किमी। लिंडौ से बोडेन्सपेरंग, [[जर्मनी]] के रोर्सचाच, [[स्विट्ज़रलैण्ड|स्विटज़रलैंड]] तक, [[जापान]] में त्सुगुरु चैनल से 19.5 किमी, उत्तर चैनल के पार 35 किमी और स्पेन से [[मोरक्को]] तक [[जिब्राल्टर]] के स्ट्रेट के पार 14.4 किमी तैराकी की।<ref>{{Cite web|url=https://openwaterswimming.com/2020/02/prabhat-koli-getting-closer/|title=Prabhat Koli Getting Closer|last=admin|date=2020-02-20|website=WOWSA|language=en-US|access-date=2020-05-23}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://longswims.com/p/prabhat-koli/|title=Prabhat Koli {{!}} LongSwims Database|website=longswims.com|language=en|access-date=2020-05-23}}</ref>
== उपाधियां ==
* ट्रिपल क्राउन ऑफ़ ओपन वॉटर के सबसे कम उम्र के तैराक।<ref name=":1">{{Cite web|url=https://sportslounge.co.in/prabhat-koli-king-of-six-oceans-after-crossing-strait-of-gibraltar/|title=Prabhat Koli king of six oceans after crossing Strait of Gibraltar|last=Desai|first=Shail|date=2019-04-26|website=Sports Lounge|language=en-US|access-date=2020-05-23}}{{Dead link|date=नवंबर 2023 |bot=InternetArchiveBot }}</ref>
* [[जर्सी]] से [[फ़्रान्स|फ्रांस]] तक तैरने वाले पहले [[एशियाई]] तैराक।<ref name=":1" /><ref>{{Cite web|url=https://currentaffairs.adda247.com/prabhat-koli-1st-asian-teen-to-swim-uk/|title=Prabhat Koli, 1st Asian Teen to Swim UK-France Channel|last=Pundir|first=Amit|language=en-US|access-date=2020-05-23|archive-date=30 सितंबर 2020|archive-url=https://web.archive.org/web/20200930090655/https://currentaffairs.adda247.com/prabhat-koli-1st-asian-teen-to-swim-uk/|url-status=dead}}</ref>
* [[जर्मनी]] से [[स्विट्ज़रलैण्ड|स्विट्जरलैंड]] में तैरने वाले पहले एशियाई तैराक।<ref name=":1" />
* दक्षिण अफ्रीका में लेन्डुड्नो से कैम्प्स बे तक तैरने वाले सबसे कम उम्र के तैराक।<ref name=":1" />
* प्रभात कोली दक्षिण अफ्रीका में केपटाउन तट के किनारे तैरने वाले पहले तैराक हैं।<ref>{{Cite web|url=https://swimindia.in/prabhat-koli-emerges-as-the-first-swimmer-to-swim-across-the-cape-town-coast-in-south-africa|title=Prabhat Koli Emerges as the First Swimmer to Swim Across the Cape Town Coast in South Africa|last=Swimindia|website=SwimIndia - Swim Meets, Events, Results, Performance Analysis, Diet Tips|language=en|access-date=2020-05-23}}{{Dead link|date=अगस्त 2021 |bot=InternetArchiveBot }}</ref>
* प्रभात कोली अनाकापा में मुख्य भूमि में तैरने वाले पहले एशियाई तैराक हैं।<ref>{{Cite web|url=https://www.lokmat.com/other-sports/prabhat-koli-became-first-asian-swimmer-swim-mainland-anacapa/|title=मेनलॅन्ड ते अँनाकापा पोहणारा प्रभात ठरला पहिला आशियाई जलतरणपटू|last=author/online-lokmat|date=2019-08-08|website=Lokmat|language=mr-IN|access-date=2020-05-23}}</ref>
== संदर्भ ==
<references />
[[श्रेणी:कोली]]
[[श्रेणी:1999 में जन्मे लोग]]
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पूर्वोत्तर जनजाति शिक्षा समिति
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{{Infobox Organization|founder=विद्या भारती पूर्वोत्तर क्षेत्र|name=पूर्वोत्तर जनजाति शिक्षा समिति|motto=जय विद्या, जय संस्कृति, जय भारतमाता|formation=1997|type=[[शैक्षिक संस्थान]]|headquarters=16, विष्णुपथ, राधा गोविंद बरूआ रोड़, [[गुवाहाटी]], [[असम]], [[भारत]]|parent_organization=विद्या भारती पूर्वोत्तर क्षेत्र|sec_gen=डॉ. अभिजीत पायेंग|services=निःशुल्क शिक्षा|website=https://vbpjss.co.in|image=}}
'''पूर्वोत्तर जनजाति शिक्षा समिति''' [[विद्या भारती]] के अन्तर्गत [[पूर्वोत्तर भारत]] में कार्यरत एक [[अशासकीय संस्था|गैर सरकारी संगठन]] है। [[पूर्वोत्तर भारत]] में [[जनजाति|जनजातीय]] बच्चों में ज्ञान की अलख जगाने, [[जनजाति]] समाज में आत्मविश्वास की वृद्धि के साथ गुणवत्ता युक्त [[शिक्षा]] हेतु विभिन्न प्रांतीय समितियों को अरूणाचल प्रदेश, [[मेघालय]], [[मणिपुर]], [[नागालैण्ड]], [[त्रिपुरा]], [[असम]] व [[मिज़ोरम|मिजोरम]] में शैक्षिक व आर्थिक सहयोग हेतु [https://www.facebook.com/vbpjss/ पूर्वोत्तर जनजाति शिक्षा समिति]<ref>{{Cite web|url=https://www.google.com/maps/place/Purvottar+Janajati+Shiksha+Samiti/@26.1649306,91.7760017,16z/data=!4m5!3m4!1s0x0:0x563658ef7f56ff65!8m2!3d26.165701!4d91.7817309|title=पूर्वोत्तर जनजाति शिक्षा समिति|website=पूर्वोत्तर जनजाति शिक्षा समिति|language=hi-US|access-date=2020-10-16}}</ref><ref>{{Cite news|url=https://vskbharat.com/%e0%a4%b6%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b7%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b8%e0%a5%87%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b5-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b6/|title=पूर्वोत्तर जनजाति शिक्षा समिति की साधारण सभा|last=|first=|date=|work=VSK Bharat|access-date=}}</ref> का गठन सन् 1997 में किया गया। पूर्वोत्तर क्षेत्र में [[विद्या भारती]] की विभिन्न प्रांतीय समितियों<ref>{{Citation|title=विद्या भारती पूर्वोत्तर क्षेत्र|date=2020-10-24|url=https://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE_%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%A4%E0%A5%80_%E0%A4%AA%E0%A5%82%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A5%8B%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%B0_%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7%E0%A5%87%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0&oldid=4995779|work=विकिपीडिया|language=hi|access-date=2020-10-27}}{{Dead link|date=जनवरी 2022 |bot=InternetArchiveBot }}</ref> द्वारा संचालित जनजाति क्षेत्र में 84 औपचारिक विद्यालयों को पूर्वोत्तर जनजाति शिक्षा समिति<ref>{{Cite book|url=|title=Brahmaputra ke Kinare Kinare|last=|first=|publisher=Bhartiya Jnanpith|year=2006|isbn=8126313498|location=|pages=}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.saathire.com/24C/purvottar-janajati-shiksha-samiti/|title=Purvottar Janajati Shiksha Samiti - Saathi Re|website=www.saathire.com|access-date=2020-10-16}}{{Dead link|date=मई 2026 |bot=InternetArchiveBot }}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.justdial.com/Guwahati/Purvottar-Janajati-Shiksha-Samiti-Near-Shankar-Dev-Shishu-Niketan-School-Zoo-Road/9999PX361-X361-180914123001-X5R3_BZDET|title=PJSS|last=|first=|date=|website=justdial.com|archive-url=|archive-date=|dead-url=|access-date=}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.facebook.com/vbpjss/|title=Purvottar Janajati Shiksha Samiti|website=www.facebook.com|language=hi|access-date=2020-10-16}}</ref> सहयोग प्रदान करती है।
अन्य सामाजिक संगठन व संस्थाओं को प्रेरित कर शिक्षादान के प्रकल्प से जोड़ना तथा परोपकारी बन्धुओं एवं कोर्पोरेट से आर्थिक सहयोग एकत्रित कर विद्यालयों के निर्माण व निःशुल्क [[शिक्षा]] के साथ साथ न्यूनतम खर्च पर छात्रावास चलाने में पूर्वोत्तर जनजाति शिक्षा समिति<ref>{{Cite web|url=https://vbsamwad.co.in/tag/purvottar-janajati-shiksha-samiti/|title=PURVOTTAR JANAJATI SHIKSHA SAMITI|last=|first=|date=|website=Purvottar Samwad|archive-url=https://web.archive.org/web/20210624095454/https://vbsamwad.co.in/tag/purvottar-janajati-shiksha-samiti/|archive-date=24 जून 2021|dead-url=|access-date=|url-status=dead}}</ref><ref>{{Cite news|url=http://www.webhindi.in/posts/17309/%E0%A4%AA%E0%A5%82%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A5%8B%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%B0-%E0%A4%9C%E0%A4%A8%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A4%BF-%E0%A4%B6%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7%E0%A4%BE-%E0%A4%B8%E0%A4%AE%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A4%BF-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%A3%E0%A5%80-%E0%A4%97%E0%A4%A0%E0%A4%BF%E0%A4%A4|title=पूर्वोत्तर जनजाति शिक्षा समिति की कार्यकारिणी गठित|last=|first=|date=|work=webhindi.in|access-date=|archive-date=16 अक्तूबर 2020|archive-url=https://web.archive.org/web/20201016221959/http://www.webhindi.in/posts/17309/%E0%A4%AA%E0%A5%82%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A5%8B%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%B0-%E0%A4%9C%E0%A4%A8%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A4%BF-%E0%A4%B6%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7%E0%A4%BE-%E0%A4%B8%E0%A4%AE%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A4%BF-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%A3%E0%A5%80-%E0%A4%97%E0%A4%A0%E0%A4%BF%E0%A4%A4|url-status=dead}}</ref><ref>{{Citation|title=विद्या भारती पूर्वोत्तर क्षेत्र|date=2020-10-08|url=https://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE_%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%A4%E0%A5%80_%E0%A4%AA%E0%A5%82%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A5%8B%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%B0_%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7%E0%A5%87%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0&oldid=4977708|work=विकिपीडिया|language=hi|access-date=2020-10-16}}{{Dead link|date=जनवरी 2022 |bot=InternetArchiveBot }}</ref> सहयोग प्रदान करवाने हेतु सदैव तत्पर रहती है।
== [[एकल विद्यालय]] ==
वर्तमान में 540 [[एकल विद्यालय]] (एकल संस्कार केन्द्र<ref>{{Cite web|url=http://vidyabhartimahakoshal.org/Activity.aspx?activityname=%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0%20%E0%A4%95%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%20%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%9C%E0%A4%A8%E0%A4%BE|title=संस्कार केंद्र योजना|last=|first=|date=|website=vidyabhartimahakoshal.org|archive-url=https://web.archive.org/web/20201017195433/http://vidyabhartimahakoshal.org/Activity.aspx?activityname=%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0%20%E0%A4%95%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%20%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%9C%E0%A4%A8%E0%A4%BE|archive-date=17 अक्तूबर 2020|dead-url=|access-date=2020-10-16|url-status=dead}}</ref>) [[कार्बी आंगलोंग जिला|कार्बी आंगलोंग]] व [[कोकराझार]] जिले में जनसहयोग से चल रहे हैं। गांवों के जनजाति युवा न्यूनतम मानधन लेकर [[एकल विद्यालय]] व संस्कार केन्द्रों के माध्यम से निःशुल्क शिक्षा प्रदान कर रहे हैं। [[:en:Friends_of_Tribals_Society|वनबंधु परिषद]]<ref>{{Citation|title=Friends of Tribals Society|date=2020-06-29|url=https://en.wikipedia.org/w/index.php?title=Friends_of_Tribals_Society&oldid=965189928|work=Wikipedia|language=en|access-date=2020-10-16}}</ref> एक [[स्वयंसेवी संस्थान|स्वयंसेवी संस्था]] है जो कि एकल विद्यालय<ref>{{Citation|title=एकल विद्यालय|date=2020-09-21|url=https://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=%E0%A4%8F%E0%A4%95%E0%A4%B2_%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%AF&oldid=4956462|work=विकिपीडिया|language=hi|access-date=2020-10-16}}</ref> अभियान में विशेष आर्थिक सहयोग प्रदान करती है।<ref>{{Cite web|url=https://vidyabharatipurvottar.co.in/education/school-education/informal-schools/|title=Informal Schools – Vidya Bharati Purvottar Kshetra|language=en-US|access-date=2020-10-27|archive-date=13 अक्तूबर 2020|archive-url=https://web.archive.org/web/20201013001353/https://vidyabharatipurvottar.co.in/education/school-education/informal-schools/|url-status=dead}}</ref>
== कृष्णचन्द्र गांधी पुरस्कार ==
'''कृष्णचंद्र गांधी पुरस्कार''' वर्ष 2007 से निरंतर पूर्वोत्तर जनजाति शिक्षा समिति द्वारा जनजातीय क्षेत्र में अनुपम सेवायें प्रदान करने वाले एवं शिक्षादान को मूर्त रूप प्रदान करने व करवाने वाले कार्यकर्ता अथवा संस्था को प्रदान किया जाता है। स्वर्गीय कृष्णचंद्र गांधी जी के व्यापक विचार, अथक मेहनत एवं लगन के परिणाम स्वरूप विद्या भारती के प्रथम विद्यालय की स्थापना हुई। स्वर्गीय गांधी जी ने पूर्वोत्तर भारत के जनजाति समाज व वन अंचलो में शिक्षा का प्रचार-प्रसार तीव्र गति से बढ़े, इसके लिए कई योजनाएँ बनाई। इन्हें मूर्त रूप प्रदान करवाने के लिए जीवन के महत्वपूर्ण 25 वर्ष पूर्वोत्तर में कई बार भ्रमण किया। जनमानस को शिक्षा दान के लिए प्रेरित कर कार्यकर्ताओं व दानदाताओं को जोड़ा। स्वर्गीय कृष्णचंद्र गांधी जी के नाम से अलंकृत यह पुरस्कार कार्यकर्ता का सर्वोच्च सम्मान है एवं अन्य कार्यकर्ताओं को प्रेरणा के साथ साथ ऊर्जा प्रदान करने वाला है।
'''वर्ष 2007 से प्रारम्भ होकर 2023 तक 18 श्रेष्ठ सामाजिक कार्यकर्ताओं को यह पुरस्कार प्रदान किया गया है।'''
* 2007- श्री न्याग पायेंग, ([[अरुणाचल प्रदेश]])
* 2008- श्री लून्से टिमुंग, [[कार्बी आंगलोंग जिला|कार्बी आंगलोंग]] ([[असम]])<ref name=":0">{{Cite news|url=http://www.assamtribune.com/scripts/mdetails.asp?id=sep1210/city05|title=Krishna Ch Gandhi memorial awards presented|last=|first=|date=September 12, 2010|work=The Assam Tribune|access-date=|archive-date=31 अक्तूबर 2020|archive-url=https://web.archive.org/web/20201031084421/http://www.assamtribune.com/scripts/mdetails.asp?id=sep1210%2Fcity05|url-status=dead}}</ref>
* 2009- श्री तुलेश्वर नार्जरी, कोकराझार ([[असम]])<ref name=":0" />
* 2010- श्रीमती ड्रिम्सिरन खारकंग गोरे ([[मेघालय]])<ref name=":0" />
* 2011- श्री अर्नब हाजोंग, पश्चिम गारो पहाड़ ([[मेघालय]])
* 2012- श्री प्रवेश चंद्र धर, ([[त्रिपुरा]])
* 2013- श्री पाउतेम्जन न्यूमे, [[हाफलांग|हाफलोंग]], ([[असम]])
* 2014- श्रीमती करबीलता देउरी, ([[असम]])
* 2015- श्री मनेश्वर देउरी, ([[असम]])
* 2016- श्रीमती हिगियो अरुनी, ([[अरुणाचल प्रदेश|अरुणाचल]])<ref>{{Cite news|url=https://arunachal24.in/tag/krishna-chandra-gandhi-award-2016/|title=Chief Minister Pema Khandu handed over the Krishna Chandra Gandhi Award 2016 to Higio Aruni|last=|first=|date=|work=Arunachal24.in|access-date=}}</ref>
* 2017- श्रीमती फली बोडो, माईबोंग, ([[असम]])<ref name=":1">{{Cite journal|last=|first=|date=April 2019|title=श्रीकृष्ण चन्द्र गाँधी पुरस्कार वितरण समारोह का आयोजन|url=http://vidyabharti.net/sites/default/files/sankul-samvad/VIDYA%20BHARTI%20April.pdf|journal=Vidya Bharati Sankul Sanwad|volume=5|pages=4|via=}}</ref>
* 2018- डॉ उपेन राभा हकाचम, [[गुवाहाटी]], ([[असम]])<ref name=":1" />
* 2019- श्री श्री चित्तरंजन देवबर्मा, [[अगरतला]], [[त्रिपुरा]]<ref>{{Cite news|url=https://www.sentinelassam.com/guwahati-city/swami-chittaranjan-debbarma-to-be-conferred-krishna-chandra-award-2019/|title=Swami Chittaranjan Debbarma to be conferred Krishna Chandra Award 2019|last=|first=|date=|work=www.sentinelassam.com|access-date=}}</ref>
*2020- श्रीमती दिकी दोमा भूटिया, [[इम्फाल]], [[मणिपुर]]<ref>{{Citation|title=Retired teacher honoured with Krishna Chandra Gandhi Award in Manipur I Manipur News|url=https://www.youtube.com/watch?v=vczxW1Bmm5w|language=hi-IN|access-date=2021-03-16}}</ref>
*2021- श्री ताई तागक, ([[अरुणाचल प्रदेश]])<ref>{{Cite news|url=https://arunachalobserver.org/2022/05/24/tagak-receives-krishna-chandra-gandhi-award/|title=Tagak receives Krishna Chandra Gandhi Award|date=2022-05-24|work=Arunachal Observer}}</ref>
*2022- श्री अशोक वार्णेकर एवं श्रीमती अल्का वार्णेकर (संयुक्त), लखीमपुर, ([[असम]])<ref>{{Cite web|url=https://twitter.com/TheAshokSinghal/status/1589248812761382912?s=20|title=Krishna Chandra Gandhi award to Shri Ashok Barnekar & Smt. Alka Barnekar|website=Twitter|language=hi|access-date=2023-02-16}}</ref>
*2023- श्री राम पद जमातिया, (त्रिपुरा)<ref>{{Cite web|url=https://www.sentinelassam.com/north-east-india-news/assam-news/assam-rampad-jamatia-honored-with-prestigious-krishnachandra-gandhi-award-674283|title=Assam: Rampad Jamatia Honored With Prestigious Krishnachandra Gandhi Award - Sentinelassam|last=Desk|first=Sentinel Digital|date=2023-11-06|website=www.sentinelassam.com|language=en|access-date=2023-11-08}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.theteambwkhao.com/2023/11/mla-ram-pada-jamatia-ni-yago-krishna.html|title=MLA Ram Pada Jamatia ni yago Krishna Chandra Gandhi Memorial Award sakat taklai bisini|last=Blog|first=Kokborok News|website=KOKBOROK NEWS BLOG|access-date=2023-11-08}}</ref>
== इन्हें भी देखें ==
* [[विद्या भारती]]
* [[एकल विद्यालय]]
* [https://as.wikipedia.org/w/index.php?title=%E0%A6%B6%E0%A6%BF%E0%A6%B6%E0%A7%81_%E0%A6%B6%E0%A6%BF%E0%A6%95%E0%A7%8D%E0%A6%B7%E0%A6%BE_%E0%A6%B8%E0%A6%AE%E0%A6%BF%E0%A6%A4%E0%A6%BF,_%E0%A6%85%E0%A6%B8%E0%A6%AE শিশু শিক্ষা সমিতি, অসম]
== बाहरी कड़ियाँ ==
* [https://vidyabharatipurvottar.co.in/ विद्या भारती पूर्वोत्तर क्षेत्र] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20201011023803/https://vidyabharatipurvottar.co.in/ |date=11 अक्तूबर 2020 }} का जालस्थल<ref>{{Cite web|url=https://vidyabharatipurvottar.co.in/|title=Vidya Bharati Purvottar Kshetra – Affiliated to Vidya Bharati Akhil Bharatiya Shiksha Sansthan|language=en-US|access-date=2020-10-16|archive-date=11 अक्तूबर 2020|archive-url=https://web.archive.org/web/20201011023803/https://vidyabharatipurvottar.co.in/|url-status=dead}}</ref>
* [https://vbsamwad.co.in पूर्वोत्तर संवाद] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20200704185137/https://vbsamwad.co.in/ |date=4 जुलाई 2020 }} (समाचार पोर्टल) का जालस्थल<ref>{{Cite web|url=https://vbsamwad.co.in/|title=Purvottar Samwad|website=Purvottar Samwad|language=en-US|access-date=2020-10-16|archive-date=4 जुलाई 2020|archive-url=https://web.archive.org/web/20200704185137/https://vbsamwad.co.in/|url-status=dead}}</ref>
* [http://vidyabharti.net/ विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान] का जालस्थल<ref>{{Cite web|url=http://vidyabharti.net/|title=Home {{!}} Vidya Bharti Akhil Bhartiya Shiksha Sansthan|website=vidyabharti.net|access-date=2020-10-16}}</ref>
* [https://www.ftsindia.com/ वनबंधु परिषद] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20201017161419/https://www.ftsindia.com/ |date=17 अक्तूबर 2020 }} का जालस्थल<ref>{{Cite web|url=https://www.ftsindia.com/|title=Home {{!}} Friends of Tribals Society|website=FTS India|language=en-US|access-date=2020-10-16|archive-date=17 अक्तूबर 2020|archive-url=https://web.archive.org/web/20201017161419/https://www.ftsindia.com/|url-status=dead}}</ref>
* [https://www.ekal.org/ एकल विद्यालय] का जालस्थल<ref>{{Cite web|url=https://www.ekal.org/us|title=Ekal Foundation - United States|website=www.ekal.org|access-date=2020-10-16}}</ref>
== सन्दर्भ ==
<references />
[[श्रेणी:विद्या भारती]]
[[श्रेणी:शिक्षण संस्थान]]
[[श्रेणी:पूर्वोत्तर भारत]]
[[श्रेणी:पूर्वोत्तर भारत में शिक्षा]]
[[श्रेणी:संघ परिवार]]
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पासी (उपनाम)
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{{स्रोतहीन|date=दिसम्बर 2020}}
'''पासी''' नाम दो हिंदी शब्दों पा (पकड़) और असि (तलवार) से बना है, जिसका अर्थ है एक व्यक्ति जिसके हाथ में तलवार है, हालांकि पासी शब्द किसी भी वेद पुराण शास्त्र में नहीं पाया जाता यह शब्द किसी व्यक्ति विशेष का रचा हो सकता हमें, एक सैनिक।<ref>{{Cite book|last=General|first=India Office of the Registrar|url=https://books.google.com/books?id=LCbjAAAAMAAJ&q=Pa+,+meaning+'+grip+'+and+'+asi+'+,+meaning+'+a+sword+'|title=Census of India, 1971: Series 1. Monograph Series, Part 5, Ethnographic Study|date=1974|publisher=Controller of Publications|isbn=|location=|page=2|language=en}}</ref> पासी पासी समुदाय का एक उपनाम है, भारत में पाए जाते हैं
== उपनाम वाले उल्लेखनीय लोग ==
* महाराजा [[बिजली पासी]] [[पासी (जाति) | पासी]] समुदाय के एक राजा थे।
* [[मदारी पासी]] उग्रवादी किसान आंदोलन [[ईका आंदोलन]] का एक नेता था।
* [[वीरा पासी]] (जन्म १ ९ ६२) एक अमेरिकी राजनयिक हैं
* [[सुरेश पासी]] भारतीय राजनीतिज्ञ हैं और उत्तर प्रदेश की 17 वीं विधान सभा के सदस्य हैं
* [[सुभाष पासी]] उत्तर प्रदेश में विधान सभा के सदस्य हैं।
* [[मसुरिया दीन पासी]] (जन्म २ अक्टूबर १ ९ ११) एक भारतीय राजनीतिज्ञ थे, जो स्वतंत्रता के लिए एक सेनानी थे, जिन्होंने [[उत्तर प्रदेश] के सदस्य के रूप में कार्य किया था।
* [[बलराज पासी]] एक भारतीय राजनीतिज्ञ हैं। वह लोकसभा के लिए चुने गए थे
* [[उदा देवी पासी]], 1857 के भारतीय विद्रोह में सिकंदर बाग में एक सेनानी होने का दावा किया। इससे पहले उदा देवी एक अज्ञात वीरांगना थीं
*[[महाराजा सुहेलदेव पासी]],समुदाय के एक राजा थे।
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चाहर धर्मेंद्र
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सन्दर्भ रहित जानकारी
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text/x-wiki
{{स्रोतहीन|date=दिसम्बर 2020}}
'''पासी''' नाम दो हिंदी शब्दों पा (पकड़) और असि (तलवार) से बना है, जिसका अर्थ है एक व्यक्ति जिसके हाथ में तलवार है, दूसरे शब्दों में, एक सैनिक।<ref>{{Cite book|last=General|first=India Office of the Registrar|url=https://books.google.com/books?id=LCbjAAAAMAAJ&q=Pa+,+meaning+'+grip+'+and+'+asi+'+,+meaning+'+a+sword+'|title=Census of India, 1971: Series 1. Monograph Series, Part 5, Ethnographic Study|date=1974|publisher=Controller of Publications|isbn=|location=|page=2|language=en}}</ref> पासी पासी समुदाय का एक उपनाम है, उन्हें हिंदू के रूप में भी जाना जाता है जो वे आमतौर पर भारत में पाए जाते हैं
== उपनाम वाले उल्लेखनीय लोग ==
* महाराजा [[बिजली पासी]] [[पासी (जाति) | पासी]] समुदाय के एक राजा थे।
* [[मदारी पासी]] उग्रवादी किसान आंदोलन [[ईका आंदोलन]] का एक नेता था।
* [[वीरा पासी]] (जन्म १ ९ ६२) एक अमेरिकी राजनयिक हैं
* [[सुरेश पासी]] भारतीय राजनीतिज्ञ हैं और उत्तर प्रदेश की 17 वीं विधान सभा के सदस्य हैं
* [[सुभाष पासी]] उत्तर प्रदेश में विधान सभा के सदस्य हैं।
* [[मसुरिया दीन पासी]] (जन्म २ अक्टूबर १ ९ ११) एक भारतीय राजनीतिज्ञ थे, जो स्वतंत्रता के लिए एक सेनानी थे, जिन्होंने [[उत्तर प्रदेश] के सदस्य के रूप में कार्य किया था।
* [[बलराज पासी]] एक भारतीय राजनीतिज्ञ हैं। वह लोकसभा के लिए चुने गए थे
* [[उदा देवी पासी]], 1857 के भारतीय विद्रोह में सिकंदर बाग में एक सेनानी होने का दावा किया।
*[[महाराजा सुहेलदेव पासी]],समुदाय के एक राजा थे।
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पेशावर जाल्मी
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text/x-wiki
{{Infobox cricket team
| name = पेशावर जाल्मी<br />{{lang|ps|پېښور زلمي}}<br />{{lang|ur|{{Nastaliq|پشاور زلمی}}}}
| alt_name =
| image = Peshawar Zalmi logo.png
| caption =
| alt =
| nickname = ''खपाल टीम'' (जलाया हमारी टीम) ''पीला तूफान''
| captain = {{flagicon|PAK}} [[वहाब रियाज]]
| coach = {{flagicon|WI}} [[डैरेन सेमी|डैरेन सैमी]]
| city = [[पेशावर]], [[खैबर पख्तूनख्वा]], [[पाकिस्तान]]
| colors = [[File:Peshawar Zalmi team colors.png|Peshawar Zalmi team colors]]
| slogan =
| owner = <!-- कृपया इस त्रुटिपूर्ण जानकारी को बदलें या न निकालें -->{{flagicon|PAK}} [[जावेद अफरीदी]] ([[हायर पाकिस्तान]])<ref name="owner" /><ref>{{cite web|title=Karachi Pick Amir, Peshawar Bag Afridi For PSL|url=http://www.geo.tv/latest/8765-karachi-pick-amir-peshawar-bag-afridi-for-psl|website=[[Geo News]]|access-date=7 February 2016|date=22 December 2015}}</ref>
| founded = {{Start date and age|2015}}
| ground = [[अरबाज़ नियाज़ स्टेडियम]]<ref>{{cite news|url=https://www.geosuper.tv/latest/6412-peshawar|title=Peshawar, Quetta to again miss out on PSL 2021 matches, PCB confirms|work=Geo Super|date=15 September 2020|access-date=24 November 2020|first=Abdul Majid|last=Bhatti|quote=Two of the four provinces will once again see no action of the Pakistan Super League (PSL) next year as the Pakistan Cricket Board (PCB) has confirmed that Peshawar’s Arbab Niaz Stadium and Quetta’s Bugti Stadium won’t be ready in time to host matches for the 2021 tournament...|archive-url=https://web.archive.org/web/20200919002511/https://www.geosuper.tv/latest/6412-peshawar|archive-date=19 September 2020|url-status=live}}</ref>
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'''पेशावर ज़ल्मी''' ({{Langx|ur|{{unq|پِشَاوَر زَلْمِی}}}}, {{Langx|ps|{{naskh|پېښور زلمي}}}}, {{Langx|en|Peshawar Zalmi|italic=no}}) एक पाकिस्तानी फ्रेंचाइजी टी 20 क्रिकेट टीम है जो पाकिस्तान सुपर लीग में खेलती है और पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत की राजधानी पेशावर का प्रतिनिधित्व करती है। टीम का स्वामित्व जावेद अफरीदी के पास है जो एक प्रसिद्ध व्यवसायी हैं।<ref name="owner">{{cite news | url=http://www.channel24.pk/sports/peshawar-close-heart-psl-team-owner-javed-afridi/ | title=Peshawar is close to my heart: PSL Team owner Javed Afridi | access-date=13 December 2015 | archive-url=https://web.archive.org/web/20151222151837/http://channel24.pk/sports/peshawar-close-heart-psl-team-owner-javed-afridi/ | archive-date=22 December 2015 | url-status=dead }}</ref><ref name="emirates247.com">{{cite news|url=http://www.emirates247.com/sports/local/pakistan-super-league-t20-in-uae-seeks-to-rival-india-s-ipl-2015-09-29-1.604988|title=Pakistan Super League T20 in UAE seeks to rival India's IPL|date=29 September 2015|access-date=3 December 2015}}{{Dead link|date=मई 2026 |bot=InternetArchiveBot }}</ref> पेशावर ज़ालमी की स्थापना 2015 में [[पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड]] (पीसीबी) द्वारा [[पाकिस्तान सुपर लीग]] (पीएसएल) की घोषणा के बाद की गई थी।<ref name="emirates247.com"/> वहाब रियाज़ वर्तमान कप्तान हैं और डैरन सैमी टीम के वर्तमान मुख्य कोच हैं, जिन्हें 2020 के सीज़न के दौरान मिड-वे की स्थिति पर नियुक्त किया गया था, जिन्होंने मोहम्मद अकरम की जगह ली, जिन्होंने टीम निदेशक के रूप में अपना स्थान बनाए रखा।<ref>{{cite web|title=Daren Sammy relinquishes captaincy mid-season to become Peshawar Zalmi head coach|url=https://wisden.com/stories/global-t20-leagues/pakistan-super-league-2020/daren-sammy-relinquishes-captaincy-mid-season-to-become-peshawar-zalmi-head-coach|work=Wisden|access-date=4 March 2020|archive-date=23 मार्च 2020|archive-url=https://web.archive.org/web/20200323190429/https://www.wisden.com/stories/global-t20-leagues/pakistan-super-league-2020/daren-sammy-relinquishes-captaincy-mid-season-to-become-peshawar-zalmi-head-coach|url-status=dead}}</ref>
कामरान अकमल टीम की ओर से सबसे अधिक रन बनाने वाले बल्लेबाज हैं, <ref>{{cite web|title=Peshawar Zalmi/Most runs|url=http://stats.espncricinfo.com/pakistan-super-league-2016-17/engine/records/batting/most_runs_career.html?id=205;team=5791;type=trophy|publisher=ESPN|access-date=5 March 2017}}</ref>
जबकि वहाब रियाज अग्रणी विकेट लेने वाले गेंदबाज हैं।
==सन्दर्भ==
{{टिप्पणीसूची}}
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फिलिस्तीन राज्य में मानवाधिकार
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text/x-wiki
फिलिस्तीन राज्य में मानवाधिकार [[वेस्ट बैंक]] और [[गाज़ा]] में मानवाधिकार रिकॉर्ड को सन्दर्भित करता है।
== स्वतंत्रता, राजनीतिक अधिकार और नागरिक स्वतंत्रता की स्थिति ==
{| class="wikitable"
|+'''सीरिया, जॉर्डन, मिस्र और इज़राइल की तुलना में फिलीस्तीनी राष्ट्रीय प्राधिकरण की अर्थशास्त्री खुफिया इकाई ( लोकतंत्र सूचकांक''' <ref name="index2019">{{Cite web|url=https://www.eiu.com/public/topical_report.aspx?campaignid=democracyindex2019|title=Democracy Index 2019 A year of democratic setbacks and popular protest|website=[[Economist Intelligence Unit|EIU.com]]|url-access=registration|access-date=24 January 2020|archive-date=22 जनवरी 2020|archive-url=https://web.archive.org/web/20200122133836/https://www.eiu.com/public/topical_report.aspx?campaignid=democracyindex2019|url-status=dead}}</ref>
! देश
! संख्या<br /><br /><br /><br /><nowiki></br></nowiki> (रेटिंग में)
! सूची
! वर्ग<br /><br /><br /><br /><nowiki></br></nowiki> <small><span style="background:#99f; border:1px solid;">पूर्ण लोकतंत्र (1-22)</span>, <span style="background:#cfc; border:1px solid;">दोषपूर्ण लोकतंत्र (23-76)</span>, <span style="background:#ff9; border:1px solid;">हाइब्रिड शासन (77-113)</span>, <span style="background:#fcc; border:1px solid;">सत्तावादी शासन (113-167)</span></small>
|-
| align="left" |</img> [[फिलिस्तीन राज्य|फिलिस्तीन]]
| ११७
| 3.89
| style="background:#fcc;" | सत्तावादी शासन
|-
| align="left" |</img> [[सीरिया]]
| १६४
| 1.43
| style="background:#fcc;" | सत्तावादी शासन
|-
| align="left" |</img> [[जॉर्डन]]
| 114
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|-
| align="left" |</img> [[मिस्र]]
| 137
| 3.06
| style="background:#fcc;" | सत्तावादी शासन
|-
| align="left" |</img> [[इज़राइल|इजराइल]]
| 28
| 7.86
| style="background:#9f9;" | दोषपूर्ण लोकतंत्र
|}
== व्यक्तिगत स्वतन्त्रता और अधिकार ==
=== अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता ===
पीए ने फिलिस्तीनी आबादी को इकट्ठा होने की स्वतन्त्रता की गारण्टी दी है, और इसका विधान यह कहता है। फिर भी, पीए शासन या पीए नीति के विरोधियों के लिए प्रदर्शन करने का अधिकार पुलिस नियन्त्रण और प्रतिबन्ध के अधीन हो गया है और मानवाधिकार समूहों के लिए चिन्ता का एक स्रोत है।
कार्यकर्ताओं का कहना है कि फिलिस्तीनी सरकार की आलोचना करने वाले लेखकों पर कार्रवाई बढ़ रही है। एडवांसिंग ह्यूमन राइट्स डेविड कीज़ के कार्यकारी निदेशक के अनुसार, 2013 में, एक 26 वर्षीय फिलिस्तीनी कार्यकर्ता अनस अववाद को वेस्ट बैंक के नब्लस में एक फिलिस्तीनी न्यायालय ने अनुपस्थिति में एक साल की जेल की सजा सुनाई थी। फेसबुक पर फिलिस्तीनी प्राधिकरण के अध्यक्ष महमूद अब्बास के खिलाफ जीभ"। कीज़ ने यह भी कहा कि 2012 में, फिलिस्तीनी ब्लॉगर जमाल अबू रिहान को फिलिस्तीनी प्राधिकरण द्वारा "द पीपल वाण्ट एण्ड एण्ड टू करप्शन" नामक एक फेसबुक अभियान शुरू करने के लिए गिरफ्तार किया गया था, उन्हें फिलिस्तीनी नेतृत्व के खिलाफ "अपनी जीभ फैलाने" के आरोपों के तहत आरोपित किया गया था। .
[[श्रेणी:देशानुसार मानवाधिकार]]
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सदस्य वार्ता:कल्याण चार्ट
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Sagar19992
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/* कल्याण चार्ट फिक्स */ नया अनुभाग
6547983
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text/x-wiki
{{साँचा:सहायता|realName=|name=कल्याण चार्ट}}
-- [[सदस्य:नया सदस्य सन्देश|नया सदस्य सन्देश]] ([[सदस्य वार्ता:नया सदस्य सन्देश|वार्ता]]) 09:55, 10 जून 2021 (UTC)
== कल्याण चार्ट फिक्स ==
[https://kalyan-chart-fix.hindipanti.in/ कल्याण चार्ट फिक्स] को करोड़ो लोग रोजाना खोजते रहते है [[सदस्य:Sagar19992|Sagar19992]] ([[सदस्य वार्ता:Sagar19992|वार्ता]]) 09:12, 3 मई 2026 (UTC)
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प्राचीन मणिपुर
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{{About|वर्तमान काल के भारतीय राज्य [[मणिपुर]] के प्राचीन सभ्यता|[[महाभारत]] के मणिपुर|मणिपुर (महाभारत)}}
{{See|मणिपुर राज्य|मध्यकालीन मणिपुर|आधुनिक मणिपुर का इतिहास}}
[[File:Kangla_Sha.JPG|thumb]]
'''प्राचीन मणिपुर''' या '''प्राचीन कंलैपाक्'''<ref>{{Cite web |url=http://kanglaonline.com/2012/04/ancient-name-of-manipur/?amp=1 |title=संग्रहीत प्रति |access-date=14 जुलाई 2021 |archive-date=4 फ़रवरी 2021 |archive-url=https://web.archive.org/web/20210204234253/http://kanglaonline.com/2012/04/ancient-name-of-manipur/?amp=1 |url-status=dead }}</ref> वर्तमान [[मणिपुर]] के मध्य मेदान में प्रचलित एक प्राचीन सभ्यता है।<ref>{{Cite web |url=https://www.imphaltimes.com/it-articles/item/5532-is-32-000-years-of-meitei-civilization-a-sign-of-tribalism |title=संग्रहीत प्रति |access-date=14 जुलाई 2021 |archive-date=16 जनवरी 2022 |archive-url=https://web.archive.org/web/20220116183614/https://www.imphaltimes.com/it-articles/item/5532-is-32-000-years-of-meitei-civilization-a-sign-of-tribalism |url-status=dead }}</ref><ref>http://e-pao.net/epSubPageExtractor.asp?src=reviews.books.Review_Kangleipak_The_Cradle_Of_Man</ref> १४४५ इसाई पूर्व से लेकर ये सभ्यता प्रचलित हैं।<ref>https://themanipurpage.tripod.com/history/meiteikings.html</ref> इनके कयी राजधानी है, इनमें से [[कंला]] सहर सबसे प्रमुख राजधानी है।<ref>http://www.e-pao.net/epSubPageExtractor.asp?src=manipur.Kangla.Kangla_The_ancient_Capital_of_Manipur</ref>
[[File:Imphal_Valley_(Manipur).jpg|thumb]]
==इतिहास==
[[File:Sketch map of Manipur.jpg|thumb]]
प्राचीन मणिपुर का शाही इतिहास 1445 ईसा पूर्व में [[तंगजा लीला पखंगबा]] के शासनकाल के साथ शुरू हुआ था।<ref>https://themanipurpage.tripod.com/history/meiteikings.html</ref>
[[पोलो]] ([[सगोल कांगजेई]]) के खेल का आविष्कार [[तांगजा लीला पखंगबा]] के उत्तराधिकारी [[राजा कांगबा]] (1405 ईसा पूर्व-1359 ईसा पूर्व) के शासनकाल के दौरान हुआ था ।<ref>https://themanipurpage.tripod.com/history/sagolkangjei.html</ref> यह उल्लेखनीय उपलब्धि कई प्राचीन मणिपुरी शास्त्र सहित [[कांगबालोन]] और [[कांगजैलोन]] में दर्ज की गई है।<ref>https://themanipurpage.tripod.com/history/sagolkangjei.html</ref>
==भूगोल==
[[File:Imphal Valley (Manipur).jpg|thumb|center|upright=2.5|वर्तमान मणिपुर के प्राचीन सभ्यता मध्य मैदानों में केंद्रित थी। ]]
मणिपुर (कंगलैपाक) का क्षेत्र पहाड़ी है और इस प्रकार, प्राचीन मणिपुर में कई छोटे क्षेत्र शामिल हैं, जिनमें से प्रत्येक की अपनी बोली, सांस्कृतिक विशिष्टताएं और पहचान है।<ref>http://e-pao.net/epSubPageExtractor.asp?src=manipur.History_of_Manipur.Discovery_of_Kangleipak_8</ref><ref>{{Cite web |url=https://themanipurpage.tripod.com/history/puwarimeitei.html#1.GEOGRAPHIC%20LOCATION%20OF%20MANIPUR |title=संग्रहीत प्रति |access-date=10 अगस्त 2021 |archive-date=12 अगस्त 2025 |archive-url=https://web.archive.org/web/20250812214134/https://themanipurpage.tripod.com/history/puwarimeitei.html#1.GEOGRAPHIC%20LOCATION%20OF%20MANIPUR |url-status=dead }}</ref>
==भाषा==
[[चित्र:Meithei manuscript, a Indian language.jpg|350px|thumb|[[मैतै मयेक लिपि|मीतै लिपि]] में रचित एक [[पाण्डुलिपि]]]]
[[प्राचीन मणिपुरी भाषा]] ([[मणिपुरी भाषा]] के आधुनिक का प्रारंभिक रूप) के एक अमीर अन्न भंडार था ।<ref>http://e-pao.net/epSubPageExtractor.asp?src=news_section.opinions.The_Puya_and_Cheitharol_Kumbaba</ref><ref>{{Cite web |url=https://themanipurpage.tripod.com/history/puwarimeitei.html#2.HISTORICAL%20DOCUMENTS |title=संग्रहीत प्रति |access-date=10 अगस्त 2021 |archive-date=12 अगस्त 2025 |archive-url=https://web.archive.org/web/20250812214134/https://themanipurpage.tripod.com/history/puwarimeitei.html#2.HISTORICAL%20DOCUMENTS |url-status=dead }}</ref> मैतै शास्त्र ([[पुया]]- मणिपुरी ग्रंथों), कई विषयों की, पुरातन में मणिपुरी लिपि में उपलब्ध है।<ref>http://e-pao.net/epSubPageExtractor.asp?src=news_section.opinions.The_Puya_and_Cheitharol_Kumbaba</ref><ref>{{Cite web |url=https://themanipurpage.tripod.com/history/puwarimeitei.html#2.HISTORICAL%20DOCUMENTS |title=संग्रहीत प्रति |access-date=10 अगस्त 2021 |archive-date=12 अगस्त 2025 |archive-url=https://web.archive.org/web/20250812214134/https://themanipurpage.tripod.com/history/puwarimeitei.html#2.HISTORICAL%20DOCUMENTS |url-status=dead }}</ref> सबसे पुराने ग्रंथों में से एक है [[वाकोक्लोन हील थिलेन सलाई अमाइलोन पुकोक पुया]], जिसे १३९८ ईसा पूर्व (भारत के राष्ट्रीय अभिलेखागार, नई दिल्ली द्वारा सत्यापित) में लिखा गया था।<ref>http://paochelsalaitaret.net/puya/puyaproof.pdf</ref>
==संस्कृति==
===दैनिक जीवन===
प्राचीन मणिपुर के अधिकांश लोग अपनी भूमि से बंधे किसान थे। उनके आवास तत्काल परिवार के सदस्यों तक ही सीमित थे।
===वास्तुकला===
आम घरों के प्राचीन वास्तुशिल्प डिजाइनों को टिकाऊ, पर्यावरण के अनुकूल और किफायती माना जाता था। यह गर्म गर्मी के दौरान शीतलन प्रभाव देता है और ठंडा सर्दी के दौरान वार्मिंग प्रभाव देता है ।<ref>http://www.e-pao.net/epSubPageExtractor.asp?src=education.Scientific_Papers.Scientific_Principles_of_Ancient_Manipuri_Yumjao_House_and_its_Courtyard_By_Khwairakpam_Gajananda</ref>
===प्राचीन धर्म===
[[File:Kangla Temple.JPG|thumb]]
पहाड़ियों और मैदानों की स्वदेशी जातियों का प्राचीन धर्म [[सनमाही धर्म]] है । अंतरिक्ष समय इकाई की अमूर्त अवधारणा ब्रह्मांड का परम ईश्वर निर्माता है।<ref>http://e-pao.net/epSubPageExtractor.asp?src=manipur.History_of_Manipur.Discovery_of_Kangleipak.Discovery_of_Kangleipak_2</ref> प्राचीन मणिपुर की सभ्यता की शुरुआत से ही दैवीय और उसके बाद के जीवन में विश्वास निहित था। प्राचीन शासक राजाओं के दैवीय अधिकार पर आधारित थे।<ref>http://e-pao.net/epSubPageExtractor.asp?src=manipur.History_of_Manipur.Discovery_of_Kangleipak.Discovery_of_Kangleipak_2</ref>
==सैन्य==
[[File:Manipuri horseman.jpg|thumb]]
[[लाल-लूप प्रणाली]] (शाब्दिक रूप से, लाल का अर्थ है [[युद्ध]] ; लुप का अर्थ है [[क्लब]] या [[संघ]] या [[संगठन]]) प्राचीन मणिपुर में एक प्रमुख [[प्रणाली]] थी। प्रणाली के अनुसार, 16 वर्ष से अधिक आयु के स्वदेशी जातीयता का प्रत्येक पुरुष सदस्य था।<ref>http://e-pao.net/epSubPageExtractor.asp?src=manipur.History_of_Manipur.Discovery_of_Kangleipak.Discovery_of_Kangleipak_2</ref>
==चित्र==
<gallery>
File:Kangla_Fort_Complex,_Imphal_(10).jpeg
File:Knagla_fort,_manipur,_India_2.jpg
File:The_kangla.jpg
File:Kangla_Fort_Complex,_Imphal_(221).jpeg
File:Kangla Fort, Manipur, India.jpg
File:Knagla_fort,_manipur,_India_6.jpg
File:Kangla_Fort_Complex,_Imphal_(36).jpeg
File:Uttra sanglen.jpg
File:Temple of God Pakhangba of Sanamahi religion inside the Kangla Fort, Imphal West, Manipur.jpg
File:Knagla fort, manipur, India 5.jpg
File:Pakhangba_Temple_at_Kangla_Fort.JPG
File:Knagla fort, manipur, India 3.jpg
File:Flag of Manipur hoisted on the Independence Day 1947.jpg
File:Stone Erections of Willong Khullen.jpg
File:Temple at Kangla.jpg
File:Uttra Sanglen.JPG
File:Pakhangba Temple, Kangla, Imphal West district, Manipur, India (2017).jpg
File:Kangla Fort, Manipur, India 4.jpg
</gallery>
==इसे भी देखीए==
* [[मध्यकालीन मणिपुर]]
* [[मैतै द्रेगन]]
==अन्य वेबसाइट==
* https://www.researchgate.net/figure/The-site-of-Kangla-from-which-the-potteries-and-bricks-were-excavated_fig2_242219964
* http://e-pao.net/epSubPageExtractor.asp?src=manipur.History_of_Manipur.Discovery_of_Kangleipak
* http://e-pao.net/epSubPageExtractor.asp?src=manipur.History_of_Manipur.The_Kingdom_of_Manipur
* http://e-pao.net/epSubPageExtractor.asp?src=manipur.History_of_Manipur.Thawan_Thaba_burial_discovery_A_medieval_findings_lost_amidst_tragic_ignorance_By_Phanjoubam_Chingkheinganba
==सन्दर्भ==
{{Reflist}}
[[श्रेणी:मणिपुर]]
{{Stub}}
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फेविपिराविर
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{{Infobox drug|drug_name=|DrugBank=DB12466|ChEMBL_Ref=|ChEBI=134722|ChEBI_Ref=|KEGG=D09537|KEGG_Ref=|UNII=EW5GL2X7E0|ChemSpiderID=431002|ChemSpiderID_Ref=|DrugBank_Ref=|NIAID_ChemDB=|IUPHAR_ligand=|PubChem=492405|CAS_supplemental=|CAS_number=259793-96-9|CAS_number_Ref=|excretion=<!-- Identifiers -->|duration_of_action=|elimination_half-life=|onset=|ChEMBL=221722|PDB_ligand=|metabolism=|density=|sol_units=|solubility=|boiling_notes=|boiling_point=|melting_notes=|melting_high=|melting_point=|density_notes=|StdInChIKey=ZCGNOVWYSGBHAU-UHFFFAOYSA-N|synonyms=T-705, favipira, favilavir
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'''फेविपिराविर ( Favipiravir),''' '''Avigan''' ब्रांड नाम के तहत बेचा जाता है| <ref>{{Cite news|url=https://www.business-standard.com/article/companies/glenmark-launches-covid-19-drug-fabiflu-priced-at-rs-103-per-tablet-120062000872_1.html|title=Glenmark launches Covid-19 drug FabiFlu, priced at Rs 103 per tablet|last=India|first=Press Trust of|date=20 June 2020|work=Business Standard India}}</ref> यह एक अन्टीवाइरल दवा है जिसतक उपयोग् [[इनफ़्लुएंज़ा|इन्फ्लूएंजा]] कि इलाज मे जापान में किया गया। <ref name="Du2020">{{Cite journal|vauthors=Du YX, Chen XP|date=April 2020|title=Favipiravir: pharmacokinetics and concerns about clinical trials for 2019-nCoV infection|journal=Clinical Pharmacology and Therapeutics|volume=108|issue=2|pages=242–247|doi=10.1002/cpt.1844|pmid=32246834|doi-access=free}}</ref> [[2019 नोवेल कोरोनावायरस|SARS-CoV-2]] सहित कई अन्य वायरल संक्रमणों के इलाज के लिए भी इसका अध्ययन किया जा रहा है। <ref name="Du2020" /> प्रायोगिक एंटीवायरल ड्रग्स T-1105 और T-1106 की तरह, यह एक पाइराज़िन कार्बोक्सामाइड व्युत्पन्न है। <ref>{{Cite journal|last=Furuta|first=Yousuke|last2=Takahashi|first2=Kazumi|last3=Shiraki|first3=Kimiyasu|last4=Sakamoto|first4=Kenichi|last5=Smee|first5=Donald F.|last6=Barnard|first6=Dale L.|last7=Gowen|first7=Brian B.|last8=Julander|first8=Justin G.|last9=Morrey|first9=John D.|year=2009|title=T-705 (Favipiravir) and related compounds: Novel broad-spectrum inhibitors of RNA viral infections|journal=Antiviral Research|volume=82|issue=3|pages=95–102|doi=10.1016/j.antiviral.2009.02.198|pmc=7127082|pmid=19428599}}</ref>
इसे टोयामा केमिकल (फूजीफिल्म की एक सहायक कंपनी) द्वारा विकसित और निर्मित किया जा रहा है और इसे 2014 में जापान में चिकित्सा उपयोग के लिए अनुमोदित किया गया था। <ref name="Shi2020">{{Cite journal|vauthors=Shiraki K, Daikoku T|date=February 2020|title=Favipiravir, an anti-influenza drug against life-threatening RNA virus infections|journal=Pharmacology & Therapeutics|volume=209|pages=107512|doi=10.1016/j.pharmthera.2020.107512|pmc=7102570|pmid=32097670}}</ref> 2016 में, फुजीफिल्म ने इसे चीन की झेजियांग हिसुन फार्मास्युटिकल कंपनी को लाइसेंस दिया। <ref>{{Cite news|url=https://www.fiercepharma.com/pharma-asia/japan-s-fujifilm-licenses-flu-drug-api-to-china-s-zhejiang-hisun-pharmaceutical-a-first|title=Fujifilm in Avigan API license with Zhejiang Hisun Pharmaceuticals|last=EJ Lane|date=June 22, 2016|work=Fierce Pharma|access-date=April 20, 2020}}</ref> [[सामान्य दवा|यह 2019 में एक जेनेरिक दवा]] बन गई, जिससे कंपनी को पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना में इसका उत्पादन करने की अनुमति मिली।
== चिकित्सा उपयोग ==
Favipiravir को जापान में [[इनफ़्लुएंज़ा|इन्फ्लूएंजा के]] इलाज के लिए मंजूरी दे दी गई है। <ref name="Shi2020"/> हालाँकि, यह केवल मौसमी इन्फ्लूएंजा के बजाय उपन्यास इन्फ्लूएंजा (उपभेद जो अधिक गंभीर बीमारी का कारण बनता है) के लिए संकेत दिया गया है। <ref name="Shi2020" /> 2020 तक, प्रतिरोध विकसित होने की संभावना कम दिखाई देती है। <ref name="Shi2020" />
== दुष्प्रभाव ==
इस बात के प्रमाण हैं कि गर्भावस्था के दौरान उपयोग करने से बच्चे को नुकसान हो सकता है । <ref name="Shi2020"/> चार जानवरों की प्रजातियों पर प्रयोगो से टेराटोजेनिक और भ्रूणोटॉक्सिक प्रभाव दिखाए गए थे। <ref name="Shi2020" /> <ref>{{Cite journal|last=Pilkington|first=Victoria|last2=Pepperrell|first2=Toby|last3=Hill|first3=Andrew|date=2020|title=A review of the safety of favipiravir – a potential treatment in the COVID-19 pandemic?|journal=Journal of Virus Eradication|volume=6|issue=2|pages=45–51|doi=10.1016/S2055-6640(20)30016-9|issn=2055-6640|pmc=7331506|pmid=32405421}}</ref>
== कार्यविधि ==
इसके कार्यों का तंत्र वायरल आरएनए-निर्भर आरएनए पोलीमरेज़ के चयनात्मक निषेध से संबंधित माना जाता है। <ref name="bp">{{Cite journal|vauthors=Jin Z, Smith LK, Rajwanshi VK, Kim B, Deval J|year=2013|title=The ambiguous base-pairing and high substrate efficiency of T-705 (Favipiravir) Ribofuranosyl 5'-triphosphate towards influenza A virus polymerase|journal=PLOS ONE|volume=8|issue=7|pages=e68347|bibcode=2013PLoSO...868347J|doi=10.1371/journal.pone.0068347|pmc=3707847|pmid=23874596|doi-access=free}}</ref> Favipiravir एक है प्रोड्रग कि अपनी सक्रिय रूप है, favipiravir-ribofuranosyl-5'-ट्रायफ़ोस्फेट (favipiravir-आरटीपी) करने के लिए चयापचय होता है, दोनों मौखिक और नसों में योगों में उपलब्ध है। <ref>{{Cite journal|displayauthors=6|vauthors=Guedj J, Piorkowski G, Jacquot F, Madelain V, Nguyen TH, Rodallec A, Gunther S, Carbonnelle C, Mentré F, Raoul H, de Lamballerie X|date=March 2018|title=Antiviral efficacy of favipiravir against Ebola virus: A translational study in cynomolgus macaques|journal=PLOS Medicine|volume=15|issue=3|pages=e1002535|doi=10.1371/journal.pmed.1002535|pmc=5870946|pmid=29584730}}</ref> <ref>{{Cite journal|vauthors=Smee DF, Hurst BL, Egawa H, Takahashi K, Kadota T, Furuta Y|date=October 2009|title=Intracellular metabolism of favipiravir (T-705) in uninfected and influenza A (H5N1) virus-infected cells|journal=The Journal of Antimicrobial Chemotherapy|volume=64|issue=4|pages=741–6|doi=10.1093/jac/dkp274|pmc=2740635|pmid=19643775}}</ref> 2014 में, जापान में इन्फ्लूएंजा महामारी के खिलाफ भंडार के लिए फेविपिराविर को मंजूरी दी गई थी। <ref>{{Cite news|url=https://www.bloomberg.com/news/2014-08-07/ebola-drug-from-japan-may-emerge-among-key-candidates.html|title=Ebola Drug From Japan May Emerge Among Key Candidates|last=Koons|first=Cynthia|date=7 August 2014|publisher=Bloomberg.com}}</ref> हालांकि, फेविपिराविर को प्राथमिक मानव वायुमार्ग कोशिकाओं में प्रभावी नहीं दिखाया गया है, जिससे इन्फ्लूएंजा उपचार में इसकी प्रभावकारिता पर संदेह होता है। <ref>{{Cite journal|displayauthors=6|vauthors=Yoon JJ, Toots M, Lee S, Lee ME, Ludeke B, Luczo JM, Ganti K, Cox RM, Sticher ZM, Edpuganti V, Mitchell DG, Lockwood MA, Kolykhalov AA, Greninger AL, Moore ML, Painter GR, Lowen AC, Tompkins SM, Fearns R, Natchus MG, Plemper RK|date=August 2018|title=Orally Efficacious Broad-Spectrum Ribonucleoside Analog Inhibitor of Influenza and Respiratory Syncytial Viruses|journal=Antimicrobial Agents and Chemotherapy|volume=62|issue=8|pages=e00766–18|doi=10.1128/AAC.00766-18|pmc=6105843|pmid=29891600}}</ref>
[[चित्र:Favipiravir-RTP_structure.png|बाएँ|अंगूठाकार|280x280पिक्सेल| Favipiravir राइबोफुरानोसिल ट्राइफॉस्फेट का शरीर के अंदर सक्रिय रूप]]
Favipiravir-RTP एक न्यूक्लियोसाइड एनालॉग है । यह वायरल RdRP के लिए ग्वानोसिन और एडेनोसाइन दोनों की नकल करता है। ऐसे दो बैस को एक पंक्ति में शामिल करने से प्राइमर एक्सटेंशन रुक जाता है, हालांकि यह स्पष्ट नहीं है। <ref name="bp"/>
== समाज और संस्कृति ==
=== कानूनी दर्जा ===
अमेरिकी रक्षा विभाग ने मेडीवेक्टर, इंक. के साथ साझेदारी में एक व्यापक स्पेक्ट्रम एंटीवायरल के रूप में फेविपिराविर विकसित किया और इसे एफडीए चरण II और चरण III नैदानिक परीक्षणों के माध्यम से प्रायोजित किया, जहां इसने मनुष्यों में सुरक्षा और इन्फ्लूएंजा वायरस के खिलाफ प्रभावकारिता का प्रदर्शन किया। <ref>{{Cite web|url=https://www.biospace.com/article/releases/medivector-completes-patient-enrollment-in-two-phase-3-studies-of-favipiravir-for-influenza-/|title=MediVector Completes Patient Enrollment In Two Phase 3 Studies Of Favipiravir For Influenza|website=BioSpace|access-date=5 May 2020}}</ref> अप्रकाशित चरण III परीक्षणों में 2,000 से अधिक रोगियों में सुरक्षा का प्रदर्शन करने और showing accelerated clearance of influenza virus by 6 to 14 hours in the unpublished Phase III trials , यूके और [[संयुक्त राज्य अमेरिका|यूएसए]] में फ़ेविपिराविर अस्वीकृत है। <ref>{{Cite journal|last=Lumby|first=Casper|date=3 March 2020|title=Favipiravir and Zanamivir Cleared Infection with Influenza B in a Severely Immunocompromised Child|journal=Clinical Infectious Diseases|volume=71|issue=7|pages=e191–e194|doi=10.1093/cid/ciaa023|pmid=32124919|doi-access=free}}</ref> 2014 में, जापान ने वर्तमान एंटीवायरल के प्रति अनुत्तरदायी इन्फ्लूएंजा उपभेदों के इलाज के लिए फेविपिराविर को मंजूरी दी। <ref>{{Cite journal|vauthors=Hayden FG, Shindo N|date=April 2019|title=Influenza virus polymerase inhibitors in clinical development|journal=Current Opinion in Infectious Diseases|volume=32|issue=2|pages=176–186|doi=10.1097/QCO.0000000000000532|pmc=6416007|pmid=30724789|doi-access=free}} {{Open access}}</ref> टोयामा केमिकल को शुरू में उम्मीद थी कि फेविपिरवीर एक नई इन्फ्लूएंजा दवा बन जाएगी जो ओसेल्टामिविर (ब्रांड नाम टैमीफ्लू) की जगह ले सकती है। हालांकि, पशु प्रयोग टेराटोजेनिक प्रभावों की क्षमता दिखाते हैं, और स्वास्थ्य, श्रम और कल्याण मंत्रालय द्वारा उत्पादन की मंजूरी में काफी देरी हुई थी और उत्पादन की स्थिति केवल जापान में आपात स्थिति में ही सीमित है। <ref>{{Cite web|url=https://diamond.jp/articles/-/49229|language=ja|script-title=ja:条件付き承認で普及に足かせ 富山化学インフル薬の"無念"|access-date=25 February 2014}}</ref>
प्रभावकारिता पर सीमित आंकड़ों के बावजूद, मार्च 2021 तक हंगरी में हल्के से मध्यम COVID-19 के आउट पेशेंट उपचार के लिए फेविपिरवीर को व्यापक रूप से निर्धारित किया गया है। <ref>{{Cite web|url=https://telex.hu/koronavirus/2021/03/11/koronavirus-elleni-gyogyszer-favipiravir-haziorvos-feliras-klinikai-teszt-hatasossag|title=A kórházakat tehermentesítheti az egyforintos koronavírus-gyógyszer|date=2021-03-11|website=telex|language=hu|access-date=2021-03-30}}</ref> मरीजों को दवा प्राप्त करने से पहले एक सहमति फॉर्म पर हस्ताक्षर करने की आवश्यकता होती है।
=== ब्रांड के नाम ===
{{Nihongo|Avigan|アビガン|Abigan}} , Avifavir, <ref name="Avifavir">{{Cite web|url=https://medum.ru/avifavir|title=Avifavir|website=Russian drug reference|publisher=Medum.ru|access-date=2 अक्तूबर 2021|archive-date=10 अक्तूबर 2022|archive-url=https://web.archive.org/web/20221010073819/https://medum.ru/avifavir|url-status=dead}}</ref> Areplivir, <ref name="Areplivir">{{Cite web|url=https://medum.ru/areplivir|title=Arelpivir|website=Russian drug reference|publisher=Medum.ru|access-date=2 अक्तूबर 2021|archive-date=28 मार्च 2023|archive-url=https://web.archive.org/web/20230328012711/https://medum.ru/areplivir|url-status=dead}}</ref> FabiFlu, <ref name="FabiFlu">{{Cite web|url=https://www.dnaindia.com/health/report-fabiflu-is-the-most-economical-covid-19-treatment-option-glenmark-s-reply-to-centre-on-alleged-overpricing-2833294|title='FabiFlu is the most economical COVID-19 treatment option': Glenmark's reply to Centre on alleged 'overpricing'|date=21 July 2020|website=DNA India|access-date=22 July 2020}}</ref> और Favipira ब्रांड नाम से बेचा जाता है। <ref name="Favipira">{{Cite web|url=https://medex.com.bd/brands/28003/favipira-200mg|title=Favipira - Tablet - 200 mg - Beacon Pharmaceuticals Ltd. - Indications, Pharmacology, Dosage, Side Effects & other Generic Info|website=Medex|access-date=22 July 2020}}</ref>
== अनुसंधान ==
=== COVID-19 ===
Fabipravir, एक एंटीवायरल दवा के रूप में, आपातकालीन प्रावधानों के तहत जापान, रूस, तुर्की और [[भारत]] सहित कई देशों में COVID-19 के इलाज के लिए अधिकृत है। <ref>{{Cite journal|last=Ueda|first=Munetaka|last2=Tanimoto|first2=Tetsuya|last3=Murayama|first3=Anju|last4=Ozaki|first4=Akihiko|last5=Kami|first5=Masahiro|year=2021|title=Japan's Drug Regulation During the COVID-19 Pandemic: Lessons From a Case Study of Favipiravir|journal=Clinical Pharmacology & Therapeutics|language=en|volume=n/a|issue=n/a|doi=10.1002/cpt.2251|issn=1532-6535|pmc=8251038|pmid=33882157|doi-access=free}}</ref> <ref>{{Cite news|url=https://www.reuters.com/article/us-health-coronavirus-russia-rpharm-idUSKBN26917Z|title=Russia approves first COVID-19 prescription drug for sale in pharmacies|last=Reuters Staff|date=2020-09-18|work=Reuters|access-date=2021-05-20|language=en}}</ref> <ref>{{Cite web|url=https://science.thewire.in/the-sciences/favipiravir-glenmark-open-label-trial-primary-endpoints-efficacy-cure-times-misleading-press-release/|title=Is Favipiravir Good for COVID-19? Clinical Trial Says No, Press Release Says Yes|last=Pulla|first=Priyanka|date=2020-11-25|website=The Wire Science|language=en-GB|access-date=2021-05-20}}</ref> सितंबर 2020 में एक तेजी से मेटा-समीक्षा (चार अध्ययनों का विश्लेषण) ने नोट किया कि दवा ने नैदानिक और रेडियोलॉजिकल सुधार किए; हालांकि, मृत्यु दर में कोई कमी या ऑक्सीजन-समर्थन की आवश्यकता में अंतर नहीं देखा गया और अधिक कठोर अध्ययन की मांग की गई। <ref>{{Cite journal|last=Vaidyanathan|first=Gayathri|date=2020-11-09|title=Scientists criticize use of unproven COVID drugs in India|journal=Nature|language=en|volume=587|issue=7833|pages=187–188|bibcode=2020Natur.587..187V|doi=10.1038/d41586-020-03105-7|pmid=33169025|doi-access=free}}</ref> <ref>{{Cite journal|vauthors=Shrestha DB, Budhathoki P, Khadka S, Shah PB, Pokharel N, Rashmi P|date=September 2020|title=Favipiravir versus other antiviral or standard of care for COVID-19 treatment: a rapid systematic review and meta-analysis|url=|journal=Virol J|volume=17|issue=1|pages=141|doi=10.1186/s12985-020-01412-z|pmc=7512218|pmid=32972430}}</ref>
{{As of|May 2021}}, large-cohort clinical trials चल रहे है.<ref>{{Cite news|url=https://www.principletrial.org/news/favipiravir-to-be-investigated-as-a-possible-covid-19-treatment-for-at-home-recovery-in-the-principle-trial|title=Favipiravir to be investigated as a possible COVID-19 treatment for at-home recovery in the PRINCIPLE trial|last=|date=8 April 2021|work=PRINCIPLE Trial|quote=Led by University of Oxford researchers, PRINCIPLE is one of the UK Government's national priority platform trials for COVID-19 treatments and was set-up with the intention that drugs shown to have a clinical benefit could be rapidly introduced into routine NHS care.}}</ref>
=== इबोला ===
2014 में अनुसंधान ने सुझाव दिया कि माउस मॉडल में अध्ययन के आधार पर [[इबोला वायरस रोग|फेविपिरवीर इबोला के]] खिलाफ प्रभावकारी हो सकता है; मनुष्यों में प्रभावकारिता को संबोधित नहीं किया गया था। <ref name="Gatherer 2014">{{Cite journal|vauthors=Gatherer D|date=August 2014|title=The 2014 Ebola virus disease outbreak in West Africa|journal=The Journal of General Virology|volume=95|issue=Pt 8|pages=1619–1624|doi=10.1099/vir.0.067199-0|pmid=24795448|doi-access=free}}</ref> <ref>{{Cite journal|vauthors=Oestereich L, Lüdtke A, Wurr S, Rieger T, Muñoz-Fontela C, Günther S|date=May 2014|title=Successful treatment of advanced Ebola virus infection with T-705 (favipiravir) in a small animal model|journal=Antiviral Research|volume=105|pages=17–21|doi=10.1016/j.antiviral.2014.02.014|pmid=24583123|doi-access=free}}</ref> <ref>{{Cite journal|vauthors=Smither SJ, Eastaugh LS, Steward JA, Nelson M, Lenk RP, Lever MS|date=April 2014|title=Post-exposure efficacy of oral T-705 (Favipiravir) against inhalational Ebola virus infection in a mouse model|journal=Antiviral Research|volume=104|pages=153–5|doi=10.1016/j.antiviral.2014.01.012|pmid=24462697}}</ref>
[[पश्चिमी अफ्रीकी इबोला महामारी|2014 के पश्चिम अफ्रीका इबोला वायरस के प्रकोप के दौरान]] [[मेड्सें सां फ्रंटियेर|, लाइबेरिया में मेडेकिन्स सैन्स फ्रंटियरेस]] (एमएसएफ) के लिए स्वेच्छा से इबोला से अनुबंधित एक फ्रांसीसी नर्स कथित तौर पर फेविपिरवीर का एक कोर्स प्राप्त करने के बाद ठीक हो गई थी। <ref>{{Cite news|url=https://www.reuters.com/article/us-health-ebola-france-idUSKCN0HT0D720141004|title=First French Ebola patient leaves hospital|date=4 October 2016|work=Reuters}}</ref> इबोला वायरस रोग के खिलाफ फेविपिरवीर के उपयोग की जांच करने वाला एक नैदानिक परीक्षण दिसंबर 2014 में गुएकेडो <ref>{{Cite web|url=http://allafrica.com/stories/201412260651.html|title=Guinea: Clinical Trial for Potential Ebola Treatment Started in MSF Clinic in Guinea|publisher=AllAfrica – All the Time|access-date=28 December 2014}}</ref> 2016 में प्रस्तुत किए गए प्रारंभिक परिणाम रेट्रोवायरस और अवसरवादी संक्रमण (सीआरओआई) पर सम्मेलन में, बाद में प्रकाशित हुए, रक्त में वायरस के निम्न-से-मध्यम स्तर वाले रोगियों में मृत्यु दर में कमी देखी गई, लेकिन उच्च स्तर (समूह) वाले रोगियों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा। मृत्यु के उच्च जोखिम पर)। <ref>{{Cite web|url=http://www.croiconference.org/sessions/favipiravir-patients-ebola-virus-disease-early-results-jiki-trial-guinea|title=Favipiravir in Patients with Ebola Virus Disease: Early Results of the JIKI trial in Guinea|website=CROIconference.org|access-date=2016-03-17}}</ref> <ref>{{Cite journal|displayauthors=6|vauthors=Sissoko D, Laouenan C, Folkesson E, M'Lebing AB, Beavogui AH, Baize S, Camara AM, Maes P, Shepherd S, Danel C, Carazo S, Conde MN, Gala JL, Colin G, Savini H, Bore JA, Le Marcis F, Koundouno FR, Petitjean F, Lamah MC, Diederich S, Tounkara A, Poelart G, Berbain E, Dindart JM, Duraffour S, Lefevre A, Leno T, Peyrouset O, Irenge L, Bangoura N, Palich R, Hinzmann J, Kraus A, Barry TS, Berette S, Bongono A, Camara MS, Chanfreau Munoz V, Doumbouya L, Kighoma PM, Koundouno FR, Loua CM, Massala V, Moumouni K, Provost C, Samake N, Sekou C, Soumah A, Arnould I, Komano MS, Gustin L, Berutto C, Camara D, Camara FS, Colpaert J, Delamou L, Jansson L, Kourouma E, Loua M, Malme K, Manfrin E, Maomou A, Milinouno A, Ombelet S, Sidiboun AY, Verreckt I, Yombouno P, Bocquin A, Carbonnelle C, Carmoi T, Frange P, Mely S, Nguyen VK, Pannetier D, Taburet AM, Treluyer JM, Kolie J, Moh R, Gonzalez MC, Kuisma E, Liedigk B, Ngabo D, Rudolf M, Thom R, Kerber R, Gabriel M, Di Caro A, Wölfel R, Badir J, Bentahir M, Deccache Y, Dumont C, Durant JF, El Bakkouri K, Gasasira Uwamahoro M, Smits B, Toufik N, Van Cauwenberghe S, Ezzedine K, D'Ortenzio E, Dortenzio E, Pizarro L, Etienne A, Guedj J, Fizet A, Barte de Sainte Fare E, Murgue B, Tran-Minh T, Rapp C, Piguet P, Poncin M, Draguez B, Allaford Duverger T, Barbe S, Baret G, Defourny I, Carroll M, Raoul H, Augier A, Eholie SP, Yazdanpanah Y, Levy-Marchal C, Antierrens A, Van Herp M, Günther S, de Lamballerie X, Keïta S, Mentre F, Anglaret X, Malvy D|date=March 2016|title=Experimental Treatment with Favipiravir for Ebola Virus Disease (the JIKI Trial): A Historically Controlled, Single-Arm Proof-of-Concept Trial in Guinea|journal=PLOS Medicine|volume=13|issue=3|pages=e1001967|doi=10.1371/journal.pmed.1001967|pmc=4773183|pmid=26930627}}</ref> <ref>{{Cite news|url=https://www.nytimes.com/2015/02/05/science/ebola-drug-has-encouraging-early-results-and-questions-follow.html|title=Ebola Drug Aids Some in a Study in West Africa|last=Fink|first=Sheri|date=4 February 2015|work=[[The New York Times]]}}</ref> केवल ऐतिहासिक नियंत्रणों का उपयोग करने के लिए परीक्षण डिजाइन की आलोचना की गई थी। <ref>{{Cite journal|last=Cohen|first=Jon|date=26 February 2015|title=Results from encouraging Ebola trial scrutinized|url=http://www.sciencemag.org/news/2015/02/results-encouraging-ebola-trial-scrutinized|journal=[[Science (journal)|Science]]|doi=10.1126/science.aaa7912|access-date=21 January 2016}}</ref>
=== निपा ===
[[हेनिपावाइरस|निपाह वायरस]] निमोनिया के साथ एन्सेफलाइटिस के प्रकोप का एक प्रेरक एजेंट है और इसकी उच्च मृत्यु दर है । मलेशिया-सिंगापुर में पहला प्रकोप हुआ, बूचड़खानों में सूअरों के संपर्क से संबंधित और फिलीपींस में घोड़ों के वध से संबंधित प्रकोप, अधिकांश अन्य प्रकोपों ने भारत और [[बांग्लादेश]] को प्रभावित किया है। बांग्लादेश में इसका प्रकोप अक्सर चमगादड़ों की लार और मूत्र से दूषित कच्चे खजूर के रस के सेवन से जुड़ा होता है। <ref>{{Cite journal|last=Banerjee|first=Sayantan|last2=Gupta|first2=Nitin|last3=Kodan|first3=Parul|last4=Mittal|first4=Ankit|last5=Ray|first5=Yogiraj|last6=Nischal|first6=Neeraj|last7=Soneja|first7=Manish|last8=Biswas|first8=Ashutosh|last9=Wig|first9=Naveet|date=February 2019|title=Nipah virus disease: A rare and intractable disease|journal=Intractable & Rare Diseases Research|volume=8|issue=1|pages=1–8|doi=10.5582/irdr.2018.01130|issn=2186-3644|pmc=6409114|pmid=30881850}}</ref> साइंटिफिक रिपोर्ट्स में प्रकाशित एक अध्ययन में, निपाह वायरस संक्रमण के लिए सीरियाई हम्सटर मॉडल का उपयोग किया गया था, जो मानव रोग के अधिकांश पहलुओं, जैसे कि व्यापक वास्कुलिटिस, निमोनिया और एन्सेफलाइटिस को बारीकी से दर्शाता है। हैम्स्टर्स पिछले अध्ययनों के समान इंट्रापेरिटोनियल (आईपी) मार्ग के माध्यम <sup>से 10 4</sup> पीएफयू एनआईवी-एम की घातक खुराक से संक्रमित थे और संक्रमण के तुरंत बाद उपचार शुरू किया गया था। फेविपिरवीर को 14 दिनों के लिए प्रतिदिन दो बार मौखिक (पीओ) मार्ग के माध्यम से प्रशासित किया गया था। उपचारित हैम्स्टर्स ने घातक NiV चुनौती के बाद 100% जीवित रहने और कोई स्पष्ट रुग्णता प्रदर्शित नहीं की, जबकि सभी नियंत्रण मामलों में गंभीर बीमारी से मृत्यु हो गई। <ref>{{Cite journal|last=Dawes|first=Brian E.|last2=Kalveram|first2=Birte|last3=Ikegami|first3=Tetsuro|last4=Juelich|first4=Terry|last5=Smith|first5=Jennifer K.|last6=Zhang|first6=Lihong|last7=Park|first7=Arnold|last8=Lee|first8=Benhur|last9=Komeno|first9=Takashi|date=15 May 2018|title=Favipiravir (T-705) protects against Nipah virus infection in the hamster model|journal=Scientific Reports|volume=8|issue=1|pages=7604|bibcode=2018NatSR...8.7604D|doi=10.1038/s41598-018-25780-3|issn=2045-2322|pmc=5954062|pmid=29765101}}</ref>
=== अन्य ===
पशुओं में प्रयोगों favipiravir के खिलाफ कार्रवाई से पता चला है में [[वेस्ट नील वाइरस|पश्चिम नील नदी वायरस]], [[पीतज्वर|पीले बुखार वायरस]], पैर और मुँह के रोग वायरस के साथ ही अन्य [[पीत विषाणु|flaviviruses]], [[एरिनावाइरस|arenaviruses]], bunyaviruses और [[अल्फावाइरस|alphaviruses]] । <ref name="Furuta">{{Cite journal|displayauthors=6|vauthors=Furuta Y, Takahashi K, Shiraki K, Sakamoto K, Smee DF, Barnard DL, Gowen BB, Julander JG, Morrey JD|date=June 2009|title=T-705 (favipiravir) and related compounds: Novel broad-spectrum inhibitors of RNA viral infections|journal=Antiviral Research|volume=82|issue=3|pages=95–102|doi=10.1016/j.antiviral.2009.02.198|pmc=7127082|pmid=19428599}}</ref> [[एंटेरोवायरस|एंटरोवायरस]] <ref name="Furuta2013">{{Cite journal|vauthors=Furuta Y, Gowen BB, Takahashi K, Shiraki K, Smee DF, Barnard DL|date=November 2013|title=Favipiravir (T-705), a novel viral RNA polymerase inhibitor|journal=Antiviral Research|volume=100|issue=2|pages=446–54|doi=10.1016/j.antiviral.2013.09.015|pmc=3880838|pmid=24084488}}</ref> और रिफ्ट वैली फीवर वायरस के खिलाफ गतिविधि का भी प्रदर्शन किया गया है। <ref>{{Cite journal|vauthors=Caroline AL, Powell DS, Bethel LM, Oury TD, Reed DS, Hartman AL|date=April 2014|title=Broad spectrum antiviral activity of favipiravir (T-705): protection from highly lethal inhalational Rift Valley Fever|journal=PLOS Neglected Tropical Diseases|volume=8|issue=4|pages=e2790|doi=10.1371/journal.pntd.0002790|pmc=3983105|pmid=24722586}}</ref> [[जिका विषाणु|Favipiravir ने जानवरों के अध्ययन में Zika वायरस के]] खिलाफ सीमित प्रभाव दिखाया है , लेकिन MK-608 जैसे अन्य एंटीवायरल की तुलना में कम प्रभावी था। <ref>{{Cite journal|vauthors=Mumtaz N, van Kampen JJ, Reusken CB, Boucher CA, Koopmans MP|year=2016|title=Zika Virus: Where Is the Treatment?|journal=Current Treatment Options in Infectious Diseases|volume=8|issue=3|pages=208–211|doi=10.1007/s40506-016-0083-7|pmc=4969322|pmid=27547128}}</ref> [[रेबीज़|एजेंट ने रेबीज के]] खिलाफ भी कुछ प्रभाव दिखाया है, <ref>{{Cite journal|vauthors=Yamada K, Noguchi K, Komeno T, Furuta Y, Nishizono A|date=April 2016|title=Efficacy of Favipiravir (T-705) in Rabies Postexposure Prophylaxis|journal=The Journal of Infectious Diseases|volume=213|issue=8|pages=1253–61|doi=10.1093/infdis/jiv586|pmc=4799667|pmid=26655300}}</ref> और वायरस से संक्रमित कुछ मनुष्यों में प्रयोगात्मक रूप से इसका इस्तेमाल किया गया है। <ref>{{Cite journal|displayauthors=6|vauthors=Murphy J, Sifri CD, Pruitt R, Hornberger M, Bonds D, Blanton J, Ellison J, Cagnina RE, Enfield KB, Shiferaw M, Gigante C, Condori E, Gruszynski K, Wallace RM|date=January 2019|title=Human Rabies - Virginia, 2017|journal=MMWR. Morbidity and Mortality Weekly Report|language=en-us|volume=67|issue=5152|pages=1410–1414|doi=10.15585/mmwr.mm675152a2|pmc=6334827|pmid=30605446}}</ref>
=== चलावयवता ===
favipiravir की संभव [[चलावयव|चलावयवता]] को computational विधि के द्वारा जांच की गई है। यह पाया गया कि कीटो-समान रूप की तुलना में जलीय घोल में ईनोल जैसा रूप काफी अधिक स्थिर था, जिसका अर्थ है कि फेविपिरवीर जलीय घोल में ईनोल जैसे रूप में विशेष रूप से मौजूद है। प्रोटोनेशन पर कीटो फॉर्म बन जाता है। हालाँकि इन निष्कर्षों को प्रयोगात्मक रूप से इसकी पुष्टि करने की आवश्यकता है। <ref>{{Cite journal|vauthors=Antonov L|year=2020|title=Favipiravir tautomerism: a theoretical insight|journal=Theoretical Chemistry Accounts|volume=139|issue=8|page=145|doi=10.1007/s00214-020-02656-2|pmc=7415411|pmid=32834770|doi-access=free}}</ref><gallery widths="200" heights="200">
चित्र:Avigan-enol.jpg|ईनोल जैसा टॉटोमेरिक फॉर्म
चित्र:Avigan-keto.jpg|कीटो जैसा टॉटोमेरिक फॉर्म
</gallery>
== संदर्भ ==
[[श्रेणी:कोरोनावायरस]]
[[श्रेणी:जापानी भाषा पाठ वाले लेख]]
[[श्रेणी:Anti–RNA virus drugs]]
[[श्रेणी:पायराजीन्स]]
[[श्रेणी:Pages with unreviewed translations]]
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नवाब मलिक
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text/x-wiki
'''नवाब मलिक''' एक भारतीय राजनीतिज्ञ हैं, जो वर्तमान [[महाराष्ट्र सरकार|अल्पसंख्यक विकास, औकाफ, महाराष्ट्र के कौशल विकास और उद्यमिता मंत्री हैं]] <ref>{{Cite web |url=https://www.aninews.in/videos/national/nawab-malik-ashok-chavan-take-oath-ministers/ |title=संग्रहीत प्रति |access-date=29 अक्तूबर 2021 |archive-date=19 अक्तूबर 2021 |archive-url=https://web.archive.org/web/20211019050827/https://www.aninews.in/videos/national/nawab-malik-ashok-chavan-take-oath-ministers/ |url-status=dead }}</ref> [[गोंदिया|और गोंदिया]] और [[परभणी]] के संरक्षक मंत्री भी हैं। [[राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी|वह राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी]] के राष्ट्रीय प्रवक्ता और मुंबई अध्यक्ष हैं, <ref>{{Cite web|url=https://www.ndtv.com/india-news/ncp-leader-nawab-malik-targets-anna-hazare-gets-sued-for-defamation-1986460|title=NCP Leader Nawab Malik Targets Anna Hazare, Gets Sued For Defamation|website=NDTV.com}}</ref> [[महाराष्ट्र|और महाराष्ट्र के]] पूर्व आवास मंत्री रह चुके हैं। <ref>{{Cite news|url=https://timesofindia.indiatimes.com/city/mumbai/Nawab-Malik-is-second-NCP-minister-to-quit/articleshow/1049486.cms|title=Nawab Malik is second NCP minister to quit|date=11 March 2005|work=[[द टाइम्स ऑफ़ इण्डिया]]}}</ref> नवाब मलिक का जन्म गांव धुसवा में हुआ था, यह स्थान 20 जून 1959 को जिला बलरामपुर (उत्तर प्रदेश) में उतरौला तहसील के पास है और 1970 में बॉम्बे (वर्तमान मुंबई) में चले गए। उन्होंने महजबीन से शादी की है और 4 बच्चों के पिता हैं; फ़राज़ (बेटा), नीलोफ़र (बेटी), सना मलिक शेख (बेटी) और आमिर (बेटा)। ये साहब समीर वानखेड़े की मां दोचने के लिए जाने जाते है।
== प्रारंभिक जीवन ==
उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जनपद को छोड़ के चले गये
== व्यक्तिगत जीवन ==
इन्होंने शायद २ शादियां की हैं
== विवाद ==
== संदर्भ ==
[[श्रेणी:1959 में जन्मे लोग]]
[[श्रेणी:समाजवादी पार्टी के राजनीतिज्ञ]]
[[श्रेणी:जीवित लोग]]
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चाहर धर्मेंद्र
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'''नवाब मलिक''' एक भारतीय राजनीतिज्ञ हैं, जो वर्तमान [[महाराष्ट्र सरकार|अल्पसंख्यक विकास, औकाफ, महाराष्ट्र के कौशल विकास और उद्यमिता मंत्री हैं]] <ref>{{Cite web |url=https://www.aninews.in/videos/national/nawab-malik-ashok-chavan-take-oath-ministers/ |title=संग्रहीत प्रति |access-date=29 अक्तूबर 2021 |archive-date=19 अक्तूबर 2021 |archive-url=https://web.archive.org/web/20211019050827/https://www.aninews.in/videos/national/nawab-malik-ashok-chavan-take-oath-ministers/ |url-status=dead }}</ref> [[गोंदिया|और गोंदिया]] और [[परभणी]] के संरक्षक मंत्री भी हैं। [[राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी|वह राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी]] के राष्ट्रीय प्रवक्ता और मुंबई अध्यक्ष हैं, <ref>{{Cite web|url=https://www.ndtv.com/india-news/ncp-leader-nawab-malik-targets-anna-hazare-gets-sued-for-defamation-1986460|title=NCP Leader Nawab Malik Targets Anna Hazare, Gets Sued For Defamation|website=NDTV.com}}</ref> [[महाराष्ट्र|और महाराष्ट्र के]] पूर्व आवास मंत्री रह चुके हैं। <ref>{{Cite news|url=https://timesofindia.indiatimes.com/city/mumbai/Nawab-Malik-is-second-NCP-minister-to-quit/articleshow/1049486.cms|title=Nawab Malik is second NCP minister to quit|date=11 March 2005|work=[[द टाइम्स ऑफ़ इण्डिया]]}}</ref> नवाब मलिक का जन्म गांव धुसवा में हुआ था, यह स्थान 20 जून 1959 को जिला बलरामपुर (उत्तर प्रदेश) में उतरौला तहसील के पास है और 1970 में बॉम्बे (वर्तमान मुंबई) में चले गए। उन्होंने महजबीन से शादी की है और 4 बच्चों के पिता हैं; फ़राज़ (बेटा), नीलोफ़र (बेटी), सना मलिक शेख (बेटी) और आमिर (बेटा)।
== प्रारंभिक जीवन ==
उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जनपद को छोड़ के चले गये
== व्यक्तिगत जीवन ==
इन्होंने शायद २ शादियां की हैं
== विवाद ==
== संदर्भ ==
[[श्रेणी:1959 में जन्मे लोग]]
[[श्रेणी:समाजवादी पार्टी के राजनीतिज्ञ]]
[[श्रेणी:जीवित लोग]]
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प्रणिता सुभाष
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{{Infobox person
| name = प्रणिता सुभाष
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| image = Pranitha at CCL 3's Chennai Rhinos Vs Karnataka Bulldozers match (cropped 2).jpg
| image_size = 250px
| caption = 2015 में सुभाष
| birth_name = प्रणिता सुभाष
| birth_date = {{birth date and age|1992|10|17|df=y}}
| birth_place = [[बैंगलोर]], [[कर्नाटक]], भारत
| nationality = भारतीय
| alma_mater = हार्वर्ड केनेडी स्कूल
| spouse = {{marriage|नितिन राजू|2021}}<ref name="marriage">{{Cite news|others=PTI|date=2021-06-01|title=Actor Pranitha Subhash gets married to Nitin Raju in private ceremony|language=en-IN|work=The Hindu|url=https://www.thehindu.com/entertainment/movies/actor-pranitha-subhash-gets-married-to-nitin-raju-in-private-ceremony/article34697326.ece|access-date=2021-07-16|issn=0971-751X}}</ref>
| occupation = {{hlist|अभिनेत्री}}
| years_active = 2010–अब तक
}}
'''प्रणिता सुभाष''' एक भारतीय [[अभिनेत्री]] हैं जो मुख्य रूप से [[कन्नड़]] , [[तेलुगु]] , [[तमिल]] और [[हिंदी]] [[फ़िल्म|फिल्मों]] में दिखाई देती हैं। उन्होंने 2010 की कन्नड़ फिल्म [[पोर्की]] से एक अभिनेत्री के रूप में शुरुआत की वह कई व्यावसायिक रूप से सफल [[तेलुगु]] और [[तमिल]] [[फ़िल्म|फिल्मों]] जैसे '''बावा''' (2010) , '''अटारिंटिकी डेरेडी''' (2013), '''मसू एंगिरा मासिलामणि''' (2015) , और '''एनक्कु वैथा आदिमाइगल''' में दिखाई दीं। 2012 में, उन्होंने समीक्षकों द्वारा प्रशंसित फिल्म '''भीमा थीराडल्ली''' में अभिनय किया।.<ref>{{cite news |last1=Shambhavi |title=South films actress Pranitha Subhash to make her Bollywood entry with 'Bhuj- The Pride Of India'. She married Nitin Raj a business man from Banglore. |url=https://www.theindianwire.com/entertainment/pranitha-subhash-bhuj-india-bollywood-117099/ |access-date=19 March 2021 |work=The Indian Wire |date=6 April 2019}}</ref>
==करियर==
प्रणिता ने 2010 की [[कन्नड़]] [[फ़िल्म|फिल्मों]] [[पोर्की]] में दर्शन के साथ डेब्यू किया। पोर्की की सफलता के बाद, उसने कन्नड़ फिल्मों के कई प्रस्तावों को अस्वीकार कर दिया और तेलुगु फिल्म बावा के लिए हस्ताक्षर करने से पहले अपनी परियोजनाओं के बारे में चुनी हुई हो गई, एक प्रेम कहानी जिसमें उसने [[सिद्धार्थ (अभिनेता)|सिद्धार्थ]] के साथ अभिनय किया।<ref>{{cite news |last1=Daithota |first1=Madhu |title=Pranitha moves to Tollywood |url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/regional/movie-details/news-interviews/pranitha-moves-to-tollywood/articleshow/6110237.cms |access-date=19 March 2021 |work=The Times of India |date=1 July 2010 |language=en}}</ref> फिल्म में एक तेलुगु गांव की बेले के चित्रण के लिए उनकी सर्वसम्मति से प्रशंसा की गई। इसके बाद वह अपनी पहली तमिल फिल्म, उदयन में दिखाई दीं, जिसमें अरुलनिथि ने अभिनय किया था
उसके बाद उन्हें अपनी दूसरी [[तमिल]] परियोजना सगुनी के लिए साइन किया गया, जो कार्थी के विपरीत थी, जो तमिल और तेलुगु दोनों भाषाओं में रिलीज़ हुई थी। सगुनी उनकी सबसे बड़ी रिलीज़ थी: एक ऐसी फ़िल्म जो [[दुनिया]] भर के [[रिकॉर्ड]] 1,150 थिएटरों में रिलीज़ हुई।
इसके बाद वह जरासंध और भीमा थेरादल्ली में दिखाई दीं, जो एक नक्सली की वास्तविक जीवन की कहानी है, दोनों दुनिया विजय के विपरीत हैं। सुभाष की आलोचकों द्वारा भीमाव के चित्रण के लिए प्रशंसा की गई और उसी के लिए फिल्मफेयर नामांकन जीता।<ref>{{cite magazine |title= 60th Idea Filmfare Awards 2013 (South) Nominations |url= http://www.filmfare.com/features/60th-idea-filmfare-awards-2013-south-nominations-3603.html |magazine= Filmfare |date= 4 July 2013 |access-date= 24 October 2013 |url-status= dead |archive-url= https://web.archive.org/web/20160406095119/http://www.filmfare.com/features/60th-idea-filmfare-awards-2013-south-nominations-3603.html |archive-date= 6 April 2016 |df= dmy-all }}</ref> उन्होंने उस वर्ष भीमा थेरादल्ली के लिए संतोषम पुरस्कार जीता।
इसके बाद उन्होंने कन्नड़ फिल्म व्हिसल में अभिनय किया, जिसके लिए उन्होंने सिइमा पुरस्कारों में नामांकन अर्जित किया।
इसके बाद, वह [[तेलुगु भाषा|तेलुगु ]] की फिल्म अटारिंटिकी डेरेडी में दिखाई दी, जो सितंबर 2013 में रिलीज़ हुई और ₹100 करोड़ से अधिक का संग्रह करते हुए अब तक की सबसे अधिक कमाई करने वाली तेलुगु भाषा की फिल्म बन गई। इसने विभिन्न पुरस्कार कार्यक्रमों में अपना नामांकन भी जीता। फिल्म का अन्य भाषाओं में रीमेक बनाया जा रहा है।
इसके बाद, वह तेलुगु भाषा की फिल्म अटारिंटिकी डेरेडी में दिखाई दी, जो सितंबर 2013 में रिलीज़ हुई और ₹100 करोड़ से अधिक का संग्रह करते हुए अब तक की सबसे अधिक कमाई करने वाली तेलुगु भाषा की फिल्म बन गई। इसने विभिन्न पुरस्कार कार्यक्रमों में अपना नामांकन भी जीता। फिल्म का अन्य भाषाओं में रीमेक बनाया जा रहा है।
उसी समय के दौरान, उन्होंने उपेंद्र के साथ कन्नड़ फिल्म ब्रह्मा में काम किया। उन्होंने [[रवीना टंडन]] और [[मोहन बाबू]] '''अभिनीत पांडवुलु''' में भी काम किया, जिसमें उन्हें मांचू मनोज के साथ जोड़ा गया था। दोनों फिल्मों ने अच्छा प्रदर्शन किया। दो साल के संक्षिप्त अंतराल के बाद, उन्होंने नवंबर 2014 के अंत में [[सूर्या]] के साथ एक और तमिल फिल्म मास के लिए हस्ताक्षर किए।<ref>{{cite news |title=Pranitha Pairs up with Vishnu Manchu |url=https://www.indiaglitz.com/Pranitha-Pairs-Up-With-Vishnu-Manchu-telugu-news-121931 |access-date=19 March 2021 |work=IndiaGlitz.com |date=28 December 2014 |archive-date=28 दिसंबर 2014 |archive-url=https://web.archive.org/web/20141228135622/http://www.indiaglitz.com/Pranitha-Pairs-Up-With-Vishnu-Manchu-telugu-news-121931 |url-status=dead }}</ref> 2014 के अंत में, उन्होंने मांचू विष्णु के साथ एक तेलुगु फिल्म डायनामाइट के लिए साइन किया।<ref>{{cite news |title=Pranitha Subhash joins Suriya's Masss |url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/tamil/movies/news/Pranitha-Subhash-joins-Suriyas-Masss/articleshow/45268060.cms |access-date=19 March 2021 |work=The Times of India |date=16 January 2017 |language=en}}</ref>
जून 2015 के अंत में, उन्होंने तेलुगु फिल्म ब्रह्मोत्सवम में अभिनय किया, जिसमें [[महेश बाबू]] थे।
उन्होंने हाल ही में [[आयुष्मान खुराना]] के साथ "चान किथन" गाने में काम किया।<ref>{{Citation|last=T-Series|title=Official Video: Chan Kitthan Song {{!}} Ayushmann {{!}} Pranitha {{!}} Bhushan Kumar {{!}} Rochak {{!}} Kumaar|date=28 June 2018|url=https://www.youtube.com/watch?v=JFYCc577kjQ|access-date=4 July 2018}}</ref>
दिसंबर 2020 में, सुभाष ने अपनी कार्यकारी शिक्षा पूरी की और हार्वर्ड केनेडी स्कूल से व्यावसायिक और नेतृत्व विकास में डिग्री प्राप्त की।<ref>{{cite news |title=Actress Pranitha Subhash is now a Harvard alumni - Times of India |url=https://timesofindia.indiatimes.com/entertainment/kannada/movies/news/actress-pranitha-subhash-is-now-a-harvard-alumni/articleshow/79526052.cms |access-date=2 February 2021 |work=The Times of India |date=2 December 2020 |language=en}}</ref>
== सन्दर्भ ==
{{reflist}}
== बाहरी कड़ियाँ ==
{{commons category| प्रणिता सुभाष}}
* {{Facebook| प्रणिता सुभाष}}
* {{IMDb name|id=3912256}}
[[श्रेणी: जीवित लोग]]
[[श्रेणी:1992 में जन्मे लोग]]
[[श्रेणी:भारतीय हिन्दू]]
[[श्रेणी:कन्नड़ अभिनेत्री]]
[[श्रेणी:हिन्दी अभिनेत्री]]
[[श्रेणी:बेंगलुरु से अभिनेत्रियाँ]]
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माँ शूलिनी
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| god_of = विजय की देवी
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| mount = [[शेर]]
}}
'''माँ शूलिनी''', (संस्कृत: शूलिनी) देवी दुर्गा या पार्वती का प्रमुख रूप है। उन्हें देवी और शक्ति, शूलिनी दुर्गा, शिवानी और सलोनी के नाम से भी जाना जाता है। माँ शूलिनी(महाशक्ति), ज्ञान, बुद्धिमत्ता, सृजन, संरक्षण और विनाश की मूल हैं। वे भगवान शिव की शक्ति हैं।
भगवान विष्णु के चौथे अवतार नरसिंह, उपद्रवी असुर राजा हिरण्यकश्यप को मारने के बाद अपने क्रोध को नियंत्रित नहीं कर सके। नरसिंह पूरे ब्रह्मांड के लिए खतरा बन रहे थे तब भगवान शिव, नरसिंह को शांत करने के लिए [[शरभ]] के रूप में प्रकट हुए। शरभ एक आठ पैरों वाला जानवर था, जो शेर या हाथी से अधिक शक्तिशाली था और सिंह को शांत करने में सक्षम भी था।<ref>{{Cite web|title=Cologne Scan|url=http://www.sanskrit-lexicon.uni-koeln.de/cgi-bin/monier/serveimg.pl?file=/scans/MWScan/MWScanjpg/mw1057-zaryahan.jpg|access-date=2022-03-28|archive-url=https://web.archive.org/web/20120226140735/http://www.sanskrit-lexicon.uni-koeln.de/cgi-bin/monier/serveimg.pl?file=/scans/MWScan/MWScanjpg/mw1057-zaryahan.jpg|archive-date=2012-02-26}}</ref> नरसिंह को शांत करने के लिए भगवान शिव के आशीर्वाद से शूलिनी भी प्रकट हुई थीं।
वे सोलन जन की कुल देवी भी हैं।
==माँ शूलिनी का अवतार==
भगवान विष्णु ने अपने भक्त प्रह्लाद को बचाने के लिए भगवान नरसिंह का रूप धारण किया था। यह भगवान विष्णु का चौथा अवतार था। नरसिंह आधा पुरुष और आधा सिंह था।<ref>{{Cite book|last=Williams, George M. (George Mason), 1940-|url=https://www.worldcat.org/oclc/124166483|title=Handbook of Hindu mythology|date=2008|publisher=Oxford University Press|isbn=978-0-19-533261-2|location=Oxford|oclc=124166483}}</ref>
== सन्दर्भ ==
[[श्रेणी:लोक संस्कृति]]
[[श्रेणी:देवियाँ]]
[[श्रेणी:हिन्दू देवियाँ]]
[[श्रेणी:भारतीय लोग धर्म अनुसार]]
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'''माँ शूलिनी''', (संस्कृत: शूलिनी) देवी दुर्गा या पार्वती का प्रमुख रूप है। उन्हें देवी और शक्ति, शूलिनी दुर्गा, शिवानी और सलोनी के नाम से भी जाना जाता है। माँ शूलिनी(महाशक्ति), ज्ञान, बुद्धिमत्ता, सृजन, संरक्षण और विनाश की मूल हैं। वे भगवान [[शिव]] की शक्ति हैं।
भगवान विष्णु के चौथे अवतार नरसिंह, उपद्रवी असुर राजा हिरण्यकश्यप को मारने के बाद अपने क्रोध को नियंत्रित नहीं कर सके। नरसिंह पूरे ब्रह्मांड के लिए खतरा बन रहे थे तब भगवान शिव, नरसिंह को शांत करने के लिए [[शरभ]] के रूप में प्रकट हुए। शरभ एक आठ पैरों वाला जानवर था, जो शेर या हाथी से अधिक शक्तिशाली था और सिंह को शांत करने में सक्षम भी था।<ref>{{Cite web|title=Cologne Scan|url=http://www.sanskrit-lexicon.uni-koeln.de/cgi-bin/monier/serveimg.pl?file=/scans/MWScan/MWScanjpg/mw1057-zaryahan.jpg|access-date=2022-03-28|archive-url=https://web.archive.org/web/20120226140735/http://www.sanskrit-lexicon.uni-koeln.de/cgi-bin/monier/serveimg.pl?file=/scans/MWScan/MWScanjpg/mw1057-zaryahan.jpg|archive-date=2012-02-26}}</ref> नरसिंह को शांत करने के लिए भगवान शिव के आशीर्वाद से शूलिनी भी प्रकट हुई थीं।
वे सोलन जन की कुल देवी भी हैं।
==माँ शूलिनी का अवतार==
भगवान विष्णु ने अपने भक्त प्रह्लाद को बचाने के लिए भगवान नरसिंह का रूप धारण किया था। यह भगवान विष्णु का चौथा अवतार था। नरसिंह आधा पुरुष और आधा सिंह था।<ref>{{Cite book|last=Williams, George M. (George Mason), 1940-|url=https://www.worldcat.org/oclc/124166483|title=Handbook of Hindu mythology|date=2008|publisher=Oxford University Press|isbn=978-0-19-533261-2|location=Oxford|oclc=124166483}}</ref>
== सन्दर्भ ==
[[श्रेणी:लोक संस्कृति]]
[[श्रेणी:देवियाँ]]
[[श्रेणी:हिन्दू देवियाँ]]
[[श्रेणी:भारतीय लोग धर्म अनुसार]]
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'''माँ शूलिनी''', (संस्कृत: शूलिनी) देवी दुर्गा या पार्वती का प्रमुख रूप है। उन्हें देवी और शक्ति, शूलिनी दुर्गा, शिवानी और सलोनी के नाम से भी जाना जाता है। माँ शूलिनी(महाशक्ति), ज्ञान, बुद्धिमत्ता, सृजन, संरक्षण और विनाश की मूल हैं। वे भगवान [[शिव]] की शक्ति हैं।
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वे सोलन जन की कुल देवी भी हैं।
==माँ शूलिनी का अवतार==
भगवान विष्णु ने अपने भक्त प्रह्लाद को बचाने के लिए भगवान नरसिंह का रूप धारण किया था। यह भगवान विष्णु का चौथा अवतार था। नरसिंह आधा पुरुष और आधा सिंह था।<ref>{{Cite book|last=Williams, George M. (George Mason), 1940-|url=https://www.worldcat.org/oclc/124166483|title=Handbook of Hindu mythology|date=2008|publisher=Oxford University Press|isbn=978-0-19-533261-2|location=Oxford|oclc=124166483}}</ref>
== सन्दर्भ ==
[[श्रेणी:लोक संस्कृति]]
[[श्रेणी:देवियाँ]]
[[श्रेणी:हिन्दू देवियाँ]]
[[श्रेणी:भारतीय लोग धर्म अनुसार]]
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खुनु लैम
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[[चित्र:The tableau of Manipur passes through the Raj path during the 61st Republic Day Parade-2010, in New Delhi on January 26, 2010.jpg]]
{{Infobox deity
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'''खुनु लैम''' (/khoo-noo lei-ma/) या '''खुनुरैम''' (/khoo-noo-rei-ma/) [[मेइतेइ लोग|मैतै लोग]] की [[मणिपुरी मिथक|मैतै पौराणिक कथाओं]] और [[सनमाही धर्म|प्राचीन मैतै धर्म (सनामही धर्म)]] में [[कबूतरों]] की देवी है। वह देवी [[ङानु लैम]] और [[शबी लैम]] की बहन हैं। किंवदंती है कि तीनों बहनों ने एक ही नश्वर व्यक्ति से [[विवाह]] किया था।<ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=q5eBAAAAMAAJ&q=Khunu+Leima+pigeon|title=Folk Culture of Manipur|last=Singh|first=Moirangthem Kirti|date=1993|publisher=Manas Publications|isbn=978-81-7049-063-0|language=en}}</ref><ref name=":0">{{Cite book|url=https://archive.org/details/dli.language.0065/page/n202/mode/2up|title=Manipuri Phungawari|website=archive.org|year=2014|pages=202|language=mni}}</ref><ref>{{Cite book|url=https://archive.org/details/in.ernet.dli.2015.467071/page/n107/mode/2up|title=Eben Mayogee Leipareng|website=archive.org|year=1995|pages=107|language=mni}}</ref><ref>{{Cite book|url=https://archive.org/details/in.ernet.dli.2015.466201/page/n43/mode/2up|title=Tal Taret|website=archive.org|year=2006|pages=43|language=mni}}</ref><ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=xfDNm96yCPIC&q=Khunu+Leima+goddess+pigeons&pg=PA70|title=Folk Tales of the North-East|last=Regunathan|first=Sudhamahi|date=2005|publisher=Children's Book Trust|isbn=978-81-7011-967-8|language=en}}</ref>
== विवरण ==
देवी खुनु लैम को दुनिया के सभी कबूतरों के शासक के रूप में वर्णित किया गया है। वह किसी भी समय सभी कबूतरों को अपनी इच्छानुसार किसी भी स्थान पर बुला सकती थी। वह भगवान सलाइलेन (उर्फ सोरारेन) की बेटियों में से एक है।<ref name=":0" /><ref>{{Cite book|url=https://archive.org/details/in.ernet.dli.2015.466201/page/n46/mode/2up|title=Tal Taret|website=archive.org|year=2006|pages=46|language=mni}}</ref>
== सन्दर्भ ==
{{Reflist}}
== ग्रन्थसूची ==
* Glimpses of Manipuri Culture - Dr. Yumlembam Gopi Devi
* The History of Manipur: An early period - Wahengbam Ibohal Singh · 1986
== अन्य वेबसाइट ==
* {{Cite web|url=http://www.e-pao.net/epSubPageSelector.asp?src=The_Widow_Son_Lukhrabi_Macha_By_Bidyarani_Thingujam&ch=manipur&sub1=Folks&sub2=Folk_Tales|title=The Widow's Son :: Lukhrabi Macha Fungawari Singbul by B. Jayantakumar Sharma|website=e-pao.net|language=en}}
[[श्रेणी:मैतै देवी-देवता]]
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शपी लैम
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}}
'''शपी लैम''' (/sha-pee lei-ma/) या '''शबीरैम''' (/sha-bee-rei-ma/) [[मेइतेइ लोग|मैतै लोग]] की [[मणिपुरी मिथक|मैतै पौराणिक कथाओं]] और [[सनमाही धर्म|प्राचीन मैतै धर्म (सनामही धर्म)]] में [[कृंतक|कृन्तकों]] की देवी है। वह देवी [[ङानु लैम]] और [[खुनु लैम]] की बहन हैं। किंवदंती है कि तीनों बहनों ने एक ही नश्वर व्यक्ति से [[विवाह]] किया था।<ref>{{Cite book|url=https://archive.org/details/in.ernet.dli.2015.466201/page/n39/mode/2up|title=Tal Taret|website=archive.org|year=2006|pages=39|language=mni}}</ref><ref name=":1">{{Cite book|url=https://archive.org/details/in.ernet.dli.2015.466201/page/n48/mode/2up|title=Tal Taret|website=archive.org|year=2006|pages=48|language=mni}}</ref><ref name=":2">{{Cite book|url=https://archive.org/details/dli.language.0065/page/n203/mode/2up|title=Manipuri Phungawari|website=archive.org|year=2014|pages=203|language=mni}}</ref><ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=xfDNm96yCPIC&q=Sabi+Leima+goddess+rodents&pg=PA70|title=Folk Tales of the North-East|last=Regunathan|first=Sudhamahi|date=2005|publisher=Children's Book Trust|isbn=978-81-7011-967-8|language=en}}</ref><ref name=":0">{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=q5eBAAAAMAAJ&q=Sabi+(+animal+sharp+teeth+)+|title=Folk Culture of Manipur|last=Singh|first=Moirangthem Kirti|date=1993|publisher=Manas Publications|isbn=978-81-7049-063-0|language=en}}</ref><ref>{{Cite book|url=https://archive.org/details/in.ernet.dli.2015.467071/page/n107/mode/2up|title=Eben Mayogee Leipareng|website=archive.org|year=1995|pages=107|language=mni}}</ref>
== विवरण ==
देवी शपी लैम को दुनिया के सभी कृन्तकों की मालकिन के रूप में वर्णित किया गया है। वह किसी भी समय सभी कृन्तकों को अपनी इच्छानुसार किसी भी स्थान पर बुला सकती थी। वह भगवान सलाइलेन (छद्म नाम सोरारेन) की सबसे छोटी बेटी है।<ref name=":1" /><ref name=":2" />
== सन्दर्भ ==
{{Reflist}}
== ग्रन्थसूची ==
* Glimpses of Manipuri Culture - Dr. Yumlembam Gopi Devi
* The History of Manipur: An early period - Wahengbam Ibohal Singh · 1986
== अन्य वेबसाइट ==
* {{Cite web|url=http://www.e-pao.net/epSubPageSelector.asp?src=The_Widow_Son_Lukhrabi_Macha_By_Bidyarani_Thingujam&ch=manipur&sub1=Folks&sub2=Folk_Tales|title=The Widow's Son :: Lukhrabi Macha Fungawari Singbul by B. Jayantakumar Sharma|website=e-pao.net|language=en}}
[[श्रेणी:मैतै देवी-देवता]]
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खोखर
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आगे की जानकारी सिद्ध की गई है
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text/x-wiki
{{ज्ञानसन्दूक सजातीय समूह
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| related_groups = [[जाट समुदाय]]|
}}
'''खोखर''' [[भारतीय उपमहाद्वीप]] के पंजाब क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण [[पंजाबी जट्ट|जाट समुदाय]]<ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=xQM9voN21ekC&q=Khokhar+clan&pg=PA125|title=Origins and History of Jats and Other Allied Nomadic Tribes of India: 900 B.C.-1947 A.D.|last=Nijjar|first=Bakhshish Singh|date=2008|publisher=Atlantic Publishers & Dist|isbn=978-81-269-0908-7|language=en}}</ref> होने का दावा करता है जो वर्तमान में [[भारत]] और [[पाकिस्तान]] के पंजाब और आसपास के क्षेत्रों में निवास करते हैं। [[भारत]] में खोखर आमतौर पर [[हिन्दू]] और [[सिख]] होते हैं जबकि [[पाकिस्तान]] में वे [[मुस्लिम]] होते हैं। खोखर [[राजस्थान]], [[पंजाब]], [[सिंध]], [[हरियाणा]] और [[उत्तर प्रदेश]] में पायी जाने वाली एक मुख्य [[जाट]] गोत्र है।<ref>{{cite book|title=Jats the Ancient Rulers (A clan study)|author=भीम सिंह दहिया|year=1980|isbn=978-1895603026|page=262|language=अंग्रेज़ी|trans-title=प्राचीन जाट शासक (एक गोत्र अध्ययन)}}</ref> मुस्लिम खोखर लोगों को हिंदू जाट समुदायों से धर्मान्तरण किया हुआ माना जाता है।<ref name="Singh20192">{{cite book|url=https://books.google.com/books?id=ZSGzDwAAQBAJ&pg=PT245|title=The Making of Medieval Panjab: Politics, Society and Culture c. 1000–c. 1500|author=Surinder Singh|date=30 September 2019|publisher=Taylor & Francis|isbn=978-1-00-076068-2|pages=245–}}</ref> मध्यकाल के फ़ारसी इतिहासकार [[फ़िरिश्ता]] ने तत्कालीन खोखर लोगों को "धर्म और नैतिकता विहीन बर्बर" जनजाति कहा है।<ref name="Khan20092">{{cite book|url=https://books.google.com/books?id=uHNddAz5cfAC&pg=PA114|title=Islamic Jihad: A Legacy of Forced Conversion, Imperialism, and Slavery|author=M. A. Khan|publisher=iUniverse|year=2009|isbn=978-1-4401-1846-3|pages=114–|access-date=24 अप्रैल 2020|archive-url=https://web.archive.org/web/20140627024458/http://books.google.com/books?id=uHNddAz5cfAC|archive-date=27 जून 2014|url-status=live}}</ref>
== इतिहास ==
खोखर जाटों ने [[मुहम्मद ग़ोरी]] के ख़िलाफ़ विद्रोह किया था और 1206 में ग़ोरी ने इस विद्रोह का क्रूरतापूर्वक दमन किया हालाँकि, वापस लौटते समय [[नमक कोह]] क्षेत्र{{cn|date=अप्रैल 2020}} में धम्यक में एक धावे में खोखर लोगों ने [[मुहम्मद ग़ोरी]] की हत्या कर दी।<ref>{{cite book|url=https://books.google.com/books?id=KPbuE5iOLb0C&pg=PA22|title=HISTORY AND cIVICS 7|publisher=Pearson Education India|isbn=978-81-317-0931-3|pages=22–}}</ref><ref name="Jaffer2008">{{cite book|url=https://books.google.com/books?id=Pd80dn6A8XAC&pg=PA121|title=The Book of Muinuddin Chishti|author=Mehru Jaffer|publisher=Penguin Books India|year=2008|isbn=978-0-14-306518-0|pages=121–|access-date=24 अप्रैल 2020|archive-url=https://web.archive.org/web/20131103182004/http://books.google.com/books?id=Pd80dn6A8XAC|archive-date=3 नवंबर 2013|url-status=live}}</ref> जम्मू-काश्मीर के खोखर लोगों में दो समुदाय पाए जाते हैं, क़ुतुब शाही खोखर और राजपूत खोखर; क़ुतुब शाह ने एक हिंदू राजा की लड़की से विवाह किया था और उनकी वंश परंपरा के लोग कुतुबशाही खोखर के रूप में जाने जाते हैं।<ref>{{cite book|url=https://books.google.com/books?id=cQxyT4gjdmQC&pg=PA48|title=Epilogue, Vol 3, Issue 11|publisher=Epilogue -Jammu Kashmir|pages=48–|id=GGKEY:YTT832HQYLA}}</ref> खोखर समुदाय का उल्लेखनीय राजा जसरथ (या दशरथ) था<ref name="IbbetsonMaclagan1990">{{cite book|url=https://books.google.com/books?id=1QmrSwFYe60C&pg=PA543|title=Glossary of the Tribes and Castes of the Punjab and North West Frontier Province|author1=Sir Denzil Ibbetson|author2=Maclagan|publisher=Asian Educational Services|year=1990|isbn=978-81-206-0505-3|pages=543–}}</ref> जिसके नेतृत्व में हुआ विद्रोह सैयद वंश के विनाश का कारण बना।<ref name="Mittal">{{cite book|url=https://books.google.com/books?id=yo04DwAAQBAJ&pg=PA179|title=Muslim Shasak tatha Bhartiya Jan Samaj|author=Dr Satish Chandra Mittal|publisher=Suruchi Prakashan|isbn=978-81-89622-34-3|pages=179–}}</ref>
=== जसरत खोखरी ===
मुस्तफा जसरत खोखर (कभी-कभी ''जसरथ'' या ''दशरथ'' ) {{Sfnp|Pandey|1970}} शेख खोखर के पुत्र थे। वह [[तैमूरलंग|तामेरलेन]] की मृत्यु के बाद और नेतृत्व लेने के इरादे से जेल से भागने के बाद खोखरों के नेता बन गए।{{स्पष्ट करें|reason=why was he imprisoned? where? when?|date=November 2011}} जसरत ने जल्द ही तैमूर सेना में एक जनरल का पद प्राप्त कर लिया और यहां तक कि शाहरुख मिर्जा की बेटी से शादी कर ली। बाद में वह पंजाब लौट आए। उन्होंने सैय्यद वंश के अली शाह के खिलाफ [[कश्मीर]] के नियंत्रण के लिए युद्ध में [[ज़ैन-उल-अबिदीन|शाही खान]] का समर्थन किया और बाद में उनकी जीत के लिए उन्हें पुरस्कृत किया गया। बाद में, उसने [[ख़िज्र खाँ|खिज्र खान]] की मृत्यु के बाद, [[दिल्ली]] को जीतने का प्रयास किया। वह केवल आंशिक रूप से सफल हुआ, [[तलवंडी]] और [[जलंधर|जालंधर]] में अभियान जीतने के दौरान, [[सरहिंद फतेहगढ़|सरहिंद]] पर कब्जा करने के अपने प्रयास में मौसमी बारिश से उसे बाधा उत्पन्न हुई। {{Sfnp|Singh|1972}}
== मध्यकालीन और आधुनिक युग ==
पंजाब में [[ब्रिटिश राज]] की भर्ती नीतियों के संदर्भ में, [[ब्रिटिश भारतीय सेना]] की तुलना में, टैन ताई योंग टिप्पणी करते हैं:
खोखर जाटों के उनके पारंपरिक आसन पर निवास के संदर्भ में, [[पोठोहार|पोटोहर पठार]] में [[नमक कोह|नमक की रेंज]]
== इन्हें भी देखें ==
* [[गक्खर लोग]]
* [[आवान लोग]]
* [[जाट समुदाय]]
== सन्दर्भ ==
{{टिप्पणीसूची}}{{जाट गोत्र}} ।
[[श्रेणी:पंजाब (पाकिस्तान) के सामाजिक समुदाय]]
[[श्रेणी:पंजाबी समुदाय]]
[[श्रेणी:पंजाब (भारत) के सामाजिक समुदाय]]
[[श्रेणी:जाट गोत्र]]
[[श्रेणी:जाट जनजाति]]
[[श्रेणी:जाट लोग]]
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Andre Engels
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[[मानकरी]] को अनुप्रेषित
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text/x-wiki
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पोकेमॉन जर्नी: द सीरीज
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{{Italic title|string=तिरछा शीर्षक/पोकेमॉन जर्नी: द सीरीज}}
{{Infobox television season
| season_number = 23
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| country = जापान
| network = TV Tokyo
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| next_season = [[पोकेमॉन मास्टर जर्नी: द सीरीज|मास्टर जर्नी]]
| show_name = पोकेमॉन जर्नी: द सीरीज
}}
'''''पोकेमॉन जर्नी: द सीरीज''''' [[पोकेमॉन (एनीमेशन)|''पोकेमॉन'']] एनीमे सीरीज़ का तेईसवां सीज़न है और '''''पोकेमॉन जर्नी: द सीरीज़''''' का पहला और टाइटैनिक सीज़न है, जिसे जापान में '''पॉकेट मॉन्सटर्स (Pocket Monsters)''' के नाम से जाना जाता है। सीज़न का प्रीमियर 17 नवंबर, 2019 से 4 दिसंबर, 2020 तक टीवी टोक्यो चैनल पर हुआ, और संयुक्त राज्य अमेरिका में, यह [[इंटरनेट टीवी|स्ट्रीमिंग टेलीविज़न]] सीज़न के रूप में रिलीज़ हुआ, जिसका प्रीमियर 12 जून, 2020 से 5 मार्च, 2021 तक [[नेटफ्लिक्स]] पर हुआ।, यह पिछली श्रृंखला के विपरीत, संयुक्त राज्य अमेरिका में पारंपरिक प्रसारण टेलीविजन पर प्रसारित नहीं होने वाली पहली पोकेमोन श्रृंखला बना रही है।इस शो का [[भारत]] में प्रीमियर 29 अक्टूबर, 2021 से शुक्रवार को साप्ताहिक आधार पर [[यूट्यूब|YouTube]] पर [[हिन्दी|हिंदी]] में डब किया गया। <ref>{{Cite web|url=https://in.portal-pokemon.com/topics/anime/211029090019_hindi-dubbed_version_of_pokemon_journeys_is_now_available_on_youtube.html|title=Hindi-dubbed version of "Pokémon Journeys" is now available on YouTube! {{!}} TV Anime series|website=Pokémon India|access-date=2022-02-07}}{{Dead link|date=मई 2026 |bot=InternetArchiveBot }}</ref>
जापान में इसका उद्घाटन गीत '''वान, सु, सूरी (Wan, Tsu, Suri)''' और अंग्रजी मैं इस गीत को '''One, Two, Three''' से जाना जाता है।'''वॉक ऑफ द अर्थ (Walk Of The Earth)''' का अंग्रेजी उद्घाटन गीत ''द जर्नी स्टार्ट्स टुडे (The Journey Starts Today)'' है। <ref>{{Cite web |date=April 23, 2020 |title='Pokémon Journeys: The Series' Heads To Netflix In The U.S. |url=https://deadline.com/2020/04/pokemon-journeys-the-series-netflix-u-s-trailer-pokemon-company-international-1202915601/ |access-date=April 23, 2020 |website=Deadline Hollywood}}</ref> इसका वाद्य संस्करण अंतिम विषय के रूप में कार्य करता है।
== एपिसोड ==
{| class="wikitable" style="width:100%; margin:auto; background:#FFF; table-layout:fixed;"
|- style="border-bottom:8px solid #DF73FF"
! style="width:3em;" |एपिसोड नंबर
! style="width:3em;" |पोकेमॉन जर्नी एपिसोड नंबर
! style="width:12em;"|हिन्दी टाइटल<ref>{{Cite web|url=https://www.youtube.com/playlist?list=PLxjFnCWdSoEU_WkY4ITVZyr8R3h6J0G92|title=Pokémon Journeys: the Series - YouTube|website=www.youtube.com|access-date=2022-07-07}}</ref><br />जापानी टाइटल
! style="width:3em;" |जापान में प्रकाशित होने की तारीख
! style="width:3em;" |हिंदी में प्रकाशित होने की तारीख
{{Episode list
| EpisodeNumber = 01
| EpisodeNumber2 = 01
| Title = पिकाचू की एंट्री!
| RTitle = ({{lang-en|Enter Pikachu!}})
| AltTitle = ({{lang-ja|ピカチュウ誕生!}})
| OriginalAirDate = {{start date|2019|11|17}}
| AltDate = अक्टूबर 29, 2021
| ShortSummary = इस एपिसोड में पिकाचू की अतीत के बारे में दिखाया गया है पिचु के रूप में। जब पिचु पहाड़ से नीचे गिरता है तो कंगासखान के झुंड में जाकर गिर जाता है उसमे से एक कंगासखान उसकी देखभाल करता है। आखिरी सीन में पिचु पिकाचू में विकसित हो जाता है।
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}}
{{Episode list
| EpisodeNumber = 02
| EpisodeNumber2 = 02
| Title = लेजेंड! चलो? दोस्तों! चलो?
| RTitle = ({{lang-en|Legend! Go? Friends! Go?}})
| AltTitle = ({{lang-ja|サトシとゴウ、ルギアでゴー!}})
| OriginalAirDate = {{start date|2019|11|24}}
| AltDate = अक्टूबर 29, 2021
| ShortSummary = ऐश, उनकी मां डेलिया, मिस्टर माइम और प्रोफेसर ओक प्रोफेसर सेरिस की नई शोध प्रयोगशाला के उद्घाटन में भाग लेने के लिए वर्मिलियन सिटी की यात्रा करते हैं। प्रोफ़ेसर सेरिस चाहते हैं कि नया ट्रेनर गोह कांटो स्टार्टर्स में से अपना पहला पोकेमॉन चुने, लेकिन उसने मना कर दिया क्योंकि वह इसके बजाय म्यू को चुनना चाहता है। लुगिया की अचानक उपस्थिति के कारण ऐश और गोह मिलते हैं और दोनों लुगिया के बारे में अधिक जानने के लिए जीवन भर की सवारी पर जाते हैं।
| LineColor = DF73FF
}}
{{Episode list
| EpisodeNumber = 03
| EpisodeNumber2 = 03
| Title = आइवीसॉर का रहस्यमयी टॉवर!
| RTitle = ({{lang-en|Ivysaur's Mysterious Tower!}})
| AltTitle = ({{lang-ja|フシギソウってフシギだね?}})
| OriginalAirDate = {{start date|2019|12|01}}
| AltDate = अक्टूबर 29, 2021
| ShortSummary = आइवीसॉर का एक झुंड वर्मिलियन सिटी में अराजकता पैदा कर रहा है, और प्रोफेसर सेरिस ऐश और गोह को जांच के लिए भेजते है। परेशानी का कारण जानने के दौरान, वे न केवल एक-दूसरे के बारे में अधिक सीखते हैं, बल्कि टीम रॉकेट से भी टकराते हैं, जो अब जियोवानी द्वारा एक पेलीपर के माध्यम से आपूर्ति किए गए पोकेबॉल का उपयोग कर रहे हैं, जब भी वे इसे बुलाते हैं। आइवीसॉर की मदद से, पिकाचू टीम रॉकेट को हरा देता है और आइवीसॉर वीनूसॉर में विकसित हो जाते है।
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}}
{{Episode list
| EpisodeNumber = 04
| EpisodeNumber2 = 04
| Title = स्कोरबनी से हिसाब चुकता!
| RTitle = ({{lang-en|Settling the Scorbunny!}})
| AltTitle = ({{lang-ja|行くぜガラル地方!ヒバニーとの出会い!!}})
| OriginalAirDate = {{start date|2019|12|08}}
| AltDate = अक्टूबर 29, 2021
| ShortSummary = ऐश और गोह गलार क्षेत्र की यात्रा करते हैं ताकि उन रिपोर्टों की जांच की जा सके कि पोकेमॉन विशाल आकार में बढ़ रहे हैं। वाइल्ड एरिया के लिए अपनी ट्रेन की प्रतीक्षा करते हुए, वे भोजन-चोर निकित की तिकड़ी से मिलते हैं, जिसका नेतृत्व एक शरारती स्कोरबनी करता है जो गोह से जुड़ता प्रतीत होता है।
| LineColor = DF73FF
}}
{{Episode list
| EpisodeNumber = 05
| EpisodeNumber2 = 05
| Title = धमाकेदार डायनामैक्स!
| RTitle = ({{lang-en|Mind-Boggling Gigantamax!}})
| AltTitle = ({{lang-ja|カビゴン巨大化!?ダイマックスの謎!!}})
| OriginalAirDate = {{start date|2019|12|15}}
| AltDate = नवम्बर 5, 2021
| ShortSummary = ऐश और गोह ने गलार के जंगली क्षेत्र में अपनी जांच जारी रखी, रहस्यमय घटना से प्रभावित एक स्नोरलैक्स का सामना करना पड़ा, जिसे अब "डायनामैक्स" कहा जाता है। इस बीच, पिछले एपिसोड से स्कोरबनी उनका पीछा कर रहा है।
| LineColor = DF73FF
}}
{{Episode list
| EpisodeNumber = 06
| EpisodeNumber2 = 06
| Title = म्यू तक का सफर!
| RTitle = ({{lang-en|Working My Way Back to Mew!}})
| AltTitle = ({{lang-ja|ポケモン大量ゲットだぜ!ミュウへの道!!}})
| OriginalAirDate = {{start date|2019|12|22}}
| AltDate = नवम्बर 12, 2021
| ShortSummary = गोह और स्कोरबनी पार्टनर्स बन गए हैं, लेकिन गोह अभी भी किसी दिन म्यू को पकड़ने के लिए दृढ़ है। हालाँकि, गोह को पता है कि कुछ पोकेमॉन को पकड़ना उतना आसान नहीं है जितना वह सोचता है।
| LineColor = DF73FF
}}
{{Episode list
| EpisodeNumber = 07
| EpisodeNumber2 = 07
| Title = "फ़्लूट कप में घमासान!
| RTitle = ({{lang-en|Serving Up the Flute Cup!}})
| AltTitle = ({{lang-ja|激闘のホウエン地方!挑戦バトルフロンティア!!}})
| OriginalAirDate = {{start date|2019|12|29}}
| AltDate = नवम्बर 19, 2021
| ShortSummary = होएन रीजन की बैटल फ्रंटियर ग्लास फ्लूट कप प्रतियोगिता के बारे में सुनकर, ऐश तुरंत खुद को और गोह दोनों को साइन कर लेता है। गोह की लड़ाई में अनुभव न होने के कारण उसे पहले दौर में बाहर कर दिया, लेकिन ऐश, पिकाचू और मिस्टर माइम उसे दिखाते हैं कि लड़ना मजेदार हो सकता है।
| LineColor = DF73FF
}}
{{Episode list
| EpisodeNumber = 08
| EpisodeNumber2 = 08
| Title = सिनोह की आइसबर्ग रेस!
| RTitle = ({{lang-en|The Sinnoh Iceberg Race!!}})
| AltTitle = ({{lang-ja|負けるなポッチャマ!シンオウ地方の流氷レース!!}})
| OriginalAirDate = {{start date|2020|01|12}}
| AltDate = नवम्बर 26, 2021
| ShortSummary = ऐश और गोह सिनोह क्षेत्र के एक पिपलप से मिलते हैं जो अपने मालिक लॉरेन से दूर भाग गया (वास्तव में तैर कर आता है)। इसे वापस करने के लिए सिनोह की यात्रा करते हुए, उन्हें पता चलता है कि पिपलप लॉरेन के क्रोगंक से ईर्ष्या के कारण भाग गया, जो उसके ध्यान के लिए पिपलप के साथ प्रतिस्पर्धा कर रहा है। दो पोकेमोन पोकेमोन आइसबर्ग रेस में प्रतिस्पर्धा करके अपने झगड़े को निपटाने का फैसला करते हैं, जिसमें ऐश और गोह भी प्रवेश करने का फैसला करते हैं, जबकि टीम रॉकेट ने प्रवेश करने वाले सभी पोकेमोन को पकड़कर दौड़ में तोड़फोड़ करने की योजना बनाई है।
| LineColor = DF73FF
}}
{{Episode list
| EpisodeNumber = 09
| EpisodeNumber2 = 09
| Title = एक लेजेंड की तलाश!
| RTitle = ({{lang-en|Finding a Legend!}})
| AltTitle = ({{lang-ja|あの日の誓い!ジョウト地方のホウオウ伝説!!}})
| OriginalAirDate = {{start date|2020|01|19}}
| AltDate = दिसम्बर 3, 2021
| ShortSummary = हो-ओह, पौराणिक पोकेमोन ऐश और पिकाचू के देखे जाने के जोहतो क्षेत्र की रिपोर्टें बहुत पहले देखी गईं, ऐश और गोह को इसे देखने की उम्मीद में जोहो को भेजें। एक प्राचीन घंटी टॉवर पर, वे एक लड़के से मिलते हैं जो हो-ओह और उसके दादा को भी देखना चाहता है, जिन्होंने पौराणिक पोकेमोन में अपना विश्वास खो दिया है।
| LineColor = DF73FF
}}
{{Episode list
| EpisodeNumber = 10
| EpisodeNumber2 = 10
| Title = जन्नत में एक इम्तिहान!
| RTitle = ({{lang-en|A Test in Paradise!}})
| AltTitle = ({{lang-ja|カイリューの楽園、ハクリューの試練!}})
| OriginalAirDate = {{start date|2020|01|26}}
| AltDate = दिसम्बर 10, 2021
| ShortSummary = ड्रैगनाइट के बारे में रिपोर्टों पर कार्रवाई करते हुए, ऐश और गोह एक रहस्यमय द्वीप की तलाश शुरू करते हैं जो ड्रैगनाइट निवास स्थान हो सकता है। वहां पहुंचने के लिए, गोह एक राइड पोकेमोन के रूप में उपयोग करने के लिए एक डेवॉन्ग को पकड़ता है, लेकिन एक मादा डेवगोंग का पीछा करते हुए इसे प्यार हो गया है, जो उन्हें एक तूफान में सिर के बल भेजता है; सौभाग्य से, उन्हें ड्रैगनाइट द्वारा बचाया जाता है जो उन्हें अपने द्वीप पर लाते हैं। वहां रहने वाले ड्रेटिनी, ड्रैगनएयर और ड्रैगनाइट के बारे में जानने के दौरान, ऐश और पिकाचू एक ड्रैगनएयर की मदद करते हैं, जिसे उड़ने का तरीका सीखने में परेशानी हो रही है। टीम रॉकेट के हमले के बाद, ड्रैगनएयर ड्रैगनाइट में विकसित होता है और ऐश को इसे पकड़ने की अनुमति देता है।
| LineColor = DF73FF
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{{Episode list
| EpisodeNumber = 11
| EpisodeNumber2 = 11
| Title = सबसे अच्छा दोस्त...सबसे बुरा सपना!
| RTitle = ({{lang-en|Best Friend...Worst Nightmare!}})
| AltTitle = ({{lang-ja|コハルとワンパチと、時々、ゲンガー}})
| OriginalAirDate = {{start date|2020|02|2}}
| AltDate = दिसम्बर 17, 2021
| ShortSummary = सेरीज़ इंस्टीट्यूट में पोल्टरजिस्ट गतिविधि के लिए एक गेंगर जिम्मेदार है, और ऐश और गोह इसे पकड़ने के लिए दौड़ लगाते हैं। इस बीच, क्लो को यकीन नहीं है कि भविष्य के लिए उसका सपना क्या है और उसे पोकेमोन भी पसंद है या नहीं, लेकिन लैब में लौटने पर वह ऐश/गोह और गेंगर के बीच लड़ाई में फंस जाती है।
| LineColor = DF73FF
}}
{{Episode list
| EpisodeNumber = 12
| EpisodeNumber2 = 12
| Title = टाइटन्स की टक्कर!
| RTitle = ({{lang-en|Flash of the Titans!}})
| AltTitle = ({{lang-ja|ダイマックスバトル!最強王者ダンデ!!}})
| OriginalAirDate = {{start date|2020|02|9}}
| AltDate = दिसम्बर 24, 2021
| ShortSummary = प्रोफ़ेसर सेरीज़ ऐश और गोह को वर्ल्ड कोरोनेशन सीरीज़ के लिए टिकट देते हैं, जो दुनिया के सबसे मजबूत ट्रेनर को तय करने के लिए एक वैश्विक प्रतियोगिता है। मौजूदा सीज़न के फ़ाइनल विंडन (गैलर क्षेत्र का एक शहर) में आयोजित किए जा रहे हैं। ऐश और गोह को पता चलता है कि कांटो एलीट फोर लांस और गैलर चैंपियन लियोन के बीच अंतिम लड़ाई के दौरान डायनामैक्स को नियंत्रित किया जा सकता है, जिसमें लियोन के चरज़ार्ड ने लांस के ग्याराडोस को हराया, जिससे लियोन को मोनार्क की उपाधि मिली। इस बीच, टीम रॉकेट एक बेलस्प्राउट के साथ लड़कर एक ड्रेडना को पकड़ने का प्रयास करता है, लेकिन ड्रेडना फिर गिगेंटामैक्स रूप में चला जाता है और एक क्रोध पर चला जाता है।
| LineColor = DF73FF
}}
{{Episode list
| EpisodeNumber = 13
| EpisodeNumber2 = 13
| Title = सबसे बेहतर बनने की राह पर!
| RTitle = ({{lang-en|The Climb to Be the Very Best}})
| AltTitle = ({{lang-ja|サトシ対ダンデ!最強への道!!}})
| OriginalAirDate = {{start date|2020|02|16}}
| AltDate = दिसम्बर 31, 2021
| ShortSummary = जबकि गिगेंटामैक्स ड्रेडनॉ टीम रॉकेट का पीछा करते हैं, ऐश और गोह उन्हें लुभाते हैं और पिकाचू और स्कॉर्बनी के साथ युद्ध करते हैं। जब गिगेंटामैक्स ड्रेडनॉ दरार से एक हड़ताल जमीन को खोलती है और ऊर्जा छोड़ती है, तो पिकाचू डायनामैक्स बैंड के उपयोग के बिना गिगेंटामैक्स पिकाचू बन जाता है। लियोन की मदद से, ऐश और पिकाचू ने ड्रेडना को हराया, दोनों पोकेमोन युद्ध के बाद सामान्य स्थिति में लौट आए। ऐश लियोन के साथ लड़ाई करने के लिए कहता है, जो बाद में ऐश और गोह से बात करता है और पूर्व के अनुरोध से सहमत होता है। हालांकि ऐश ने लियोन द्वारा उपहार में दिए गए नए डायनामैक्स बैंड के साथ कड़ी मेहनत और अच्छी तरह से लड़ाई की, गैलर चैंपियन जीत गया, हालांकि दोनों विश्व कोरोनेशन सीरीज़ में फिर से लड़ने का वादा करते हैं।
| LineColor = DF73FF
}}
{{Episode list
| EpisodeNumber = 14
| EpisodeNumber2 = 14
| Title = खंडहर में रेड बैटल!
| RTitle = ({{lang-en|Raid Battle in the Ruins}})
| AltTitle = ({{lang-ja|負けるなポッチャマ!シンオウ地方の流氷レース!!}})
| OriginalAirDate = {{start date|2020|02|23}}
| AltDate = जनवरी 7, 2022
| ShortSummary = ऐश और गोह डेजर्ट रिज़ॉर्ट के बीच में स्थित टाइटन के खंडहरों का पता लगाने के लिए उनोवा क्षेत्र की यात्रा करते हैं। गर्म रेत के कारण चलना मुश्किल हो जाता है, पोकेमोन रेंजर केइरा का सुझाव है कि वे अपने पोकेमोन का उपयोग स्लेज पार करने के लिए करते हैं। खंडहर तक पहुँचते हुए, ऐश, गोह और केइरा ग्रुप लीडर से मिलते हैं और खंडहरों का पता लगाते हैं, लेकिन पाते हैं कि प्राचीन टाइटन का सामना करने का रास्ता, एक विशाल गोलर्क, घातक जाल के साथ सेट है, जो एक लड़ाई की ओर ले जाता है।
| LineColor = DF73FF
}}
{{Episode list
| EpisodeNumber = 15
| EpisodeNumber2 = 15
| Title = बर्फ़ीले दिन में तलाश!
| RTitle = ({{lang-en|A Snow Day for Searching!}})
| AltTitle = ({{lang-ja|雪の日、カラカラのホネはどこ?}})
| OriginalAirDate = {{start date|2020|03|1}}
| AltDate = जनवरी 14, 2022
| ShortSummary = एक बड़ी बर्फबारी के कारण सेरीज़ इंस्टीट्यूट में सिस्टम डाउन होने के कारण, गोह अपने परिवार से मिलने के लिए घर जाने का फैसला करता है। अपने माता-पिता के आने की प्रतीक्षा करते हुए, वह और स्कॉर्बनी ने एक क्यूबोन को मैनकीज के एक गिरोह द्वारा धमकाया जा रहा है। जब मैनकीज़ क्यूबोन की हड्डी चुराते हैं, गोह, स्कॉर्बनी और उसके कुछ पोकेमोन क्यूबोन को उसकी कीमती हड्डी वापस पाने में मदद करने का फैसला करते हैं। इस बीच, क्योंकि गोह ने अपने माता-पिता के लिए अपना उपहार छोड़ दिया था, ऐश और पिकाचू उसकी तलाश में आते हैं, और यह जानने के बाद कि क्या हुआ स्वयंसेवक मदद करने के लिए।
| LineColor = DF73FF
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{{Episode list
| EpisodeNumber = 16
| EpisodeNumber2 = 16
| Title = एक डरावना श्राप!
| RTitle = ({{lang-en|A Chilling Curse!}})
| AltTitle = ({{lang-ja|呪われたサトシ...!}})
| OriginalAirDate = {{start date|2020|03|8}}
| AltDate = जनवरी 21, 2022
| ShortSummary = सेरीज़ लैब को "प्रेतवाधित" करने वाला गेंगर वापस आ गया है, और यह हमेशा की तरह शरारती है! ऐश और गोह इसे पकड़ने के लिए अपनी दौड़ फिर से शुरू करते हैं, लेकिन यह दूर हो जाता है। गोह यह कहना शुरू कर देता है कि गेंगर ऐश को शाप देने के लिए वापस आ सकता है, और ऐश के साथ अचानक अजीब घटनाएं होने लगती हैं। बाद में, वह सचमुच एक ट्रेनर से मिलता है जिसे गेंगर (जो ऐश की छाया में छिपा हुआ है) अपने पूर्व ट्रेनर के रूप में पहचानता है जिसने इसे छोड़ दिया था। ऐश हस्तक्षेप करता है जब क्रुद्ध गेंगर अपने पूर्व ट्रेनर पर हमला करता है, और टीम रॉकेट (जो किनारे से देख रहा है) फैसला करता है कि वे अपने लिए गेंगर चाहते हैं। ऐश और गेंगर टीम रॉकेट को हराने के लिए टीम बनाते हैं, और गेंगर ऐश को इसे पकड़ने की अनुमति देने का फैसला करते हैं।
| LineColor = DF73FF
}}
{{Episode list
| EpisodeNumber = 17
| EpisodeNumber2 = 17
| Title = एक नए कल की ओर!
| RTitle = ({{lang-en|Kicking It From Here Into Tomorrow!}})
| AltTitle = ({{lang-ja|ヒバニー、炎のキック!明日に向かって!!}})
| OriginalAirDate = {{start date|2020|03|15}}
| AltDate = जनवरी 28, 2022
| ShortSummary = ऐश और पिकाचू के साथ प्रशिक्षण के दौरान, स्कॉर्बनी को गोह के दारमैनिटन द्वारा आग-प्रकार की चाल का उपयोग करने के लिए चिढ़ाया जाता है, लेकिन चीजें ठीक नहीं होती हैं। स्कॉर्बनी निराश है, और जब गोह को असह्य लगता है तो स्कोरबनी भाग जाता है। यह एम्बर को सीखने का प्रबंधन करता है, लेकिन गोह को पोकेमोन को नोटिस करने में बहुत दिलचस्पी है। एक पेलिपर का पीछा करते हुए, गोह, और स्कॉर्बनी टीम रॉकेट में भाग जाते हैं, जो उन पर पोलीव्रथ और एक च्यूटल का उपयोग करके हमला करते हैं। जब स्पार्क्स की चाल फिर से विफल हो जाती है, तो स्कोरबनी जल्दी से हार जाता है, और ऐश और पिकाचू पिकाचू के साथ टीम रॉकेट को "विस्फोट" करते हैं। जब गोह फिर से असंगत लगता है, स्कोरबनी बार-बार भाग जाता है और फिर से टीम रॉकेट में भाग जाता है, जो इसे फिर से लड़ता है। इस बार, गोह और स्कॉर्बनी एक टीम के रूप में काम करते हैं, जिससे स्कोरबनी रैबूट में विकसित हो जाता है, जिसका नया एम्बर टीम रॉकेट को हरा देता है। हालांकि, लड़ाई के बाद, गोह और पूर्व स्कॉर्बनी के बीच संबंध कभी भी समान नहीं हो सकते हैं।
| LineColor = DF73FF
}}
{{Episode list
| EpisodeNumber = 18
| EpisodeNumber2 = 18
| Title = लक्ष्य: जीत का सेहरा!
| RTitle = ({{lang-en|Destination: Coronation}})
| AltTitle = ({{lang-ja|サトシ参戦!ポケモンワールドチャンピオンシップス!!}})
| OriginalAirDate = {{start date|2020|03|22}}
| AltDate = फ़रवरी 4, 2022
| ShortSummary = लियोन को फिर से लड़ने के लिए, ऐश आधिकारिक तौर पर विश्व राज्याभिषेक श्रृंखला के नए सत्र में प्रवेश करती है, हालांकि मास्टर क्लास में लियोन तक पहुंचने के लिए उसे रैंकों तक जीत हासिल करनी होगी। ऐश अपने पुराने प्रतिद्वंद्वी लेफ्टिनेंट सर्ज का सामना करने के लिए वर्मिलियन जिम पहुंचती है। हालांकि, लेफ्टिनेंट सर्ज के दूर रहने के बाद, जिम अब विस्केज़ द्वारा चलाया जा रहा है, जो ऐश की पहली विश्व कोरोनेशन सीरीज़ की नॉर्मल क्लास प्रतिद्वंद्वी बन गई है। उनकी लड़ाई टू-ऑन-टू मैच है, जिसमें पिकाचू और गेंगर का सामना विस्केज़ के रायचू और इलेक्ट्रोड से होता है। ऐश विजयी हुई, WCS में बढ़कर 3,763 हो गई।
| LineColor = DF73FF
}}
{{Episode list
| EpisodeNumber = 19
| EpisodeNumber2 = 19
| Title = नकल करने की प्रतिभा!
| RTitle = ({{lang-en|A Talent for Imitation!}})
| AltTitle = ({{lang-ja|ワタシはメタモン!}})
| OriginalAirDate = {{start date|2020|03|29}}
| AltDate = फ़रवरी 11, 2022
| ShortSummary = जेसी के पास अभी भी एक अभिनेत्री होने के सपने हैं, इसलिए वह और टीम रॉकेट एक फिल्म की शूटिंग के लिए एक स्टूडियो में घुसने की कोशिश करते हैं जिसमें अभिनेताओं में से एक ऐसा डिट्टो है जो ठीक से बदल नहीं सकता है। फिल्म के तानाशाह निर्देशक से घबराकर डिट्टो जेसी के बैग में छिपकर भाग जाता है। जब टीम रॉकेट अपने ठिकाने पर लौटने के बाद इसे ढूंढती है, तो जेसी फैसला करती है कि वह इसे ठीक से बदलने के लिए प्रशिक्षित करने जा रही है। इस बीच, ऐश और गोह लापता डिट्टो की तलाश कर रहे हैं।
| LineColor = DF73FF
}}
{{Episode list
| EpisodeNumber = 20
| EpisodeNumber2 = 20
| Title = सपने इन्हीं से बनते है!
| RTitle = ({{lang-en|Dreams Are Made of These!}})
| AltTitle = ({{lang-ja|夢へ向かってゴー!サトシとゴウ!!}})
| OriginalAirDate = {{start date|2020|04|5}}
| AltDate = फ़रवरी 18, 2022
| ShortSummary = आज Cerise Institute में पोकेमॉन ओरिएंटेशन डे है! छह आने वाले बच्चों को तीन टीमों में विभाजित किया गया है: टीम ब्लू ऐश और पिकाचू द्वारा अनुरक्षित; गोह, रबूट और क्लो द्वारा टीम रेड; शहर के एक हिस्से का पता लगाने और उनसे मिलने वाले पोकेमोन के बारे में जानने के लिए प्रोफेसर सेरिस और क्लो के यम्पर द्वारा टीम येलो। स्वाभाविक रूप से, बच्चे अलग-अलग लेकिन दिलचस्प अनुभवों के लिए हैं: ऐश और पिकाचू अपने बच्चों को पोकेमोन से जूझते हुए दिखाते हैं (रास्ते में एक विश्व कोरोनेशन सीरीज़ रैंकिंग मैच में शामिल होते हैं), और गोह अपनी जोड़ी के साथ पोकेमोन-पकड़ने की होड़ में जाते हैं। मुसीबत तब आती है जब टीम रॉकेट नकली लुगिया का उपयोग करके पिकाचू, रैबूट और यम्पर को चुराने की कोशिश करता है।
| LineColor = DF73FF
}}
{{Episode list
| EpisodeNumber = 21
| EpisodeNumber2 = 21
| Title = एक रहस्यमय चीज़ की देखभाल!
| RTitle = ({{lang-en|Caring for a Mystery!}})
| AltTitle = ({{lang-ja|とどけ波導!サトシと不思議なタマゴ!!}})
| OriginalAirDate = {{start date|2020|04|12}}
| AltDate = फ़रवरी 25, 2022
| ShortSummary = पोकेमोन अंडे की खोज के दौरान, ऐश और गोह का सामना एक ट्रेनर हेडन से होता है, जो ऐश को वर्ल्ड कोरोनेशन सीरीज़ रैंकिंग मैच के लिए चुनौती देता है, लेकिन उसका टॉरोस पिकाचू से हार जाता है। वर्मिलियन सिटी पोकेमोन सेंटर में, जबकि पिकाचू का इलाज किया जा रहा है, सिनोह क्षेत्र का एक पोकेमोन अंडा जो अभी तक हैच करने के लिए तैयार नहीं है, ऐश को प्रतिक्रिया देता है, और नर्स जॉय उसे अंडा सौंपती है। उस रात सेरीज़ इंस्टीट्यूट में, अंडा एक रियोलू को प्रकट करने के लिए हैच करता है, जो भाग जाता है और अंधाधुंध जंगली पोकेमोन पर हमला करना शुरू कर देता है, जिसमें एक ओनिक्स भी शामिल है जो रियोलू के लिए बहुत मजबूत है। सौभाग्य से ऐश और पिकाचू सहायता के लिए पहुंचते हैं, जिसके परिणामस्वरूप लड़ाई में रियोलू को ऐश की टीम में सबसे नया जोड़ा जाता है।
| LineColor = DF73FF
}}
{{Episode list
| EpisodeNumber = 22
| EpisodeNumber2 = 22
| Title = अलविदा दोस्त!
| RTitle = ({{lang-en|Goodbye, Friend!}})
| AltTitle = ({{lang-ja|さよなら、ラビフット!}})
| OriginalAirDate = {{start date|2020|04|19}}
| AltDate = मार्च 4, 2022
| ShortSummary = ऐश और गोह उस घटना की जांच करने के लिए होएन क्षेत्र गए हैं, जिसके कारण ब्यूटीफली पलायन करती है, लेकिन रबूट और गोह के बीच की दरार उस बिंदु तक बदतर और बदतर होती जा रही है जहां रैबूट गोह को सुनने से इनकार कर रहा है। जब वे सभी पोकेमोन सेंटर में रह रहे होते हैं, रात में रबूट चुपके से बाहर निकलता रहता है। ऐश, पिकाचू, और गोह एक भूमिगत पोकेमोन डांस क्लब में उसका पीछा करते हैं जहां रैबूट काफी डांस स्टार लगता है और काफी खुश दिखाई देता है। यह मानते हुए कि रैबूट उसके बिना बेहतर होगा, गोह ने रैबूट को रिहा करने का फैसला किया, लेकिन रैबूट ने गोह की खुशी के लिए अपने ट्रेनर के साथ रहने का फैसला किया।
| LineColor = DF73FF
}}
{{Episode list
| EpisodeNumber = 23
| EpisodeNumber2 = 23
| Title = पार्क में अफ़रातफ़री!
| RTitle = ({{lang-en|Panic in the Park!}})
| AltTitle = ({{lang-ja|大パニック!サクラギパーク!!}})
| OriginalAirDate = {{start date|2020|06|07}}
| AltDate = मार्च 11, 2022
| ShortSummary = Cerise Park का सारा खाना गायब हो गया है, और वहाँ के सभी पोकेमोन भूख से लड़ने लगे हैं। ऐश और गोह अपराधी को पकड़ने के लिए रात भर पार्क को दांव पर लगाने का फैसला करते हैं।
| LineColor = DF73FF
}}
{{Episode list
| EpisodeNumber = 24
| EpisodeNumber2 = 24
| Title = टीम रॉकेट की कुछ मस्ती और आराम!
| RTitle = ({{lang-en|A Little Rocket R&R!}})
| AltTitle = ({{lang-ja|休め!ロケット団!!}})
| OriginalAirDate = {{start date|2020|06|14}}
| AltDate = मार्च 18, 2022
| ShortSummary = टीम रॉकेट को जियोवानी से छुट्टी लेने के आदेश मिलते हैं, एक आदेश जो जाहिर तौर पर सभी टीम रॉकेट सदस्यों पर लागू होता है, लेकिन जब वे सिनोह क्षेत्र रिज़ॉर्ट क्षेत्र में चीजों को आसान बना रहे होते हैं, तो मटोरी और उनकी कुलीन टीम पोकेमोन को छीनना शुरू कर देती है! अब जेसी, जेम्स, मेवथ, और वोबफेट को ऐश और गोह के साथ काम करना है, जो सिनोह में भी हैं, बिना किसी को पता लगाए कि वे कौन हैं या मुख्यालय से उनके आदेशों का उल्लंघन करने के लिए सजा का सामना करने के लिए मटोरी को रोकने के लिए।
| LineColor = DF73FF
}}
{{Episode list
| EpisodeNumber = 25
| EpisodeNumber2 = 25
| Title = फेस्टिवल और रीयूनियन!
| RTitle = ({{lang-en|A Festival Reunion!}})
| AltTitle = ({{lang-ja|命爆発バトルフェス!VSメガルカリオ!!}})
| OriginalAirDate = {{start date|2020|06|21}}
| AltDate = मार्च 25, 2022
| ShortSummary = ऐश युद्ध महोत्सव में भाग लेने के लिए गोह के साथ कलोस क्षेत्र में लौटती है, जिसमें बहुत सारे प्रतिभागी विश्व राज्याभिषेक श्रृंखला में भी प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं। प्रतियोगिता के दौरान, जबकि गोह, हमेशा की तरह, नए पोकेमोन को पकड़ रहा है। वर्ल्ड कोरोनेशन सीरीज़ रैंकिंग मैच में, ऐश एक पुराने प्रतिद्वंद्वी और दोस्त के साथ आमने-सामने आती है: जिम लीडर कोरिना और उसका लुकारियो! यह ऐश के गेंगर और ड्रैगनाइट बनाम कोरिना के मिएनशाओ और लुकारियो के साथ दो-दो की लड़ाई है! कोरिना के मेगा लूकारियो के खिलाफ फिर से सामना करते हुए, ऐश विजयी होकर ग्रेट क्लास में आगे बढ़ती है।
| LineColor = DF73FF
}}
{{Episode list
| EpisodeNumber = 26
| EpisodeNumber2 = 26
| Title = ताज के लिए स्प्लैश, डैश और स्मैश! / स्लोकिंग की ताजपोशी!
| RTitle = ({{lang-en|Splash, Dash, and Smash for the Crown! / Slowking's Crowning!}})
| AltTitle = ({{lang-ja|はねろ!コイキング / かぶれ!ヤドキング}})
| OriginalAirDate = {{start date|2020|06|28}}
| AltDate = अप्रैल 1, 2022
| ShortSummary = '''ताज के लिए स्प्लैश, डैश और स्मैश!''': गोह ने अपने नए मैगीकार्प को एक मैगीकार्प हाई जंप टूर्नामेंट में प्रवेश करने का फैसला किया, लेकिन उसका मैजिकर्प कूदने के लिए बहुत बड़ा और मोटा हो गया है, इसलिए वह पोकेमोन द्वारा प्रशिक्षण टेप का उपयोग करके इसे प्रशिक्षित करने का फैसला करता है। विश्व उच्च कूद चैंपियन कासुकिंग ... साथ ही अपनी खुद की एक विशेष गुप्त तकनीक।
'''स्लोकिंग की ताजपोशी!''': ऐश और गोह स्लोपोक के लिए एक द्वीप निवास की यात्रा करते हैं, और जब एक उडोन-खाने वाला स्लोकिंग दिखाई देता है, तो ऐश अपने कुछ रेमन को इसके साथ साझा करता है। स्लोकिंग को यह इतना पसंद है कि वह रेमन के लिए अपने शेलर का आदान-प्रदान करता है, लेकिन जब शेल्डर ऐश के सिर पर लेट जाता है तो वह ऐश-किंग बन जाता है!
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}}
{{Episode list
| EpisodeNumber = 27
| EpisodeNumber2 = 27
| Title = किसमें कितना है दम!
| RTitle = ({{lang-en|Toughing It Out!}})
| AltTitle = ({{lang-ja|英雄伝説!ダンデ最強バトル!!}})
| OriginalAirDate = {{start date|2020|07|05}}
| AltDate = अप्रैल 8, 2022
| ShortSummary = पिकाचू, रबूट, रियोलू और गोह के फ़ारफ़ेचड के साथ, ऐश और गोह लियोन और उनके प्रतिद्वंद्वी: हैमरलॉक जिम लीडर और ड्रैगन-टाइप उपयोगकर्ता रेहान के बीच एक विश्व कोरोनेशन सीरीज़ मास्टर क्लास मैच देखने के लिए गैलार क्षेत्र में लौट आए। दोनों प्रशिक्षकों ने इसे गिगेंटामैक्स का उपयोग करके बाहर निकाला, लेकिन लियोन विजयी हुआ। बाद में, ऐश और गोह सोनिया नाम की एक युवा महिला से मिलते हैं, जो लियोन की एक पुरानी दोस्त है, जो उन्हें गिगेंटामैक्स के पीछे की शक्ति के बारे में कुछ परेशान करने वाली बात बताती है, और जब उनका सामना एक कठिन गैलेरियन फ़ारफ़ेचड से होता है, तो रियोलू को लड़ाई का पहला वास्तविक मौका मिलता है।
| LineColor = DF73FF
}}
{{Episode list
| EpisodeNumber = 28
| EpisodeNumber2 = 28
| Title = सुबकता हुआ सॉबल!
| RTitle = ({{lang-en|Sobbling Sobble!}})
| AltTitle = ({{lang-ja|めそめそメッソン}})
| OriginalAirDate = {{start date|2020|07|12}}
| AltDate = अप्रैल 15, 2022
| ShortSummary = गैलार क्षेत्र में रहते हुए, ऐश और गोह एक डरपोक सोबले से मिलते हैं जो न केवल रोना बंद कर देगा, बल्कि जिसके रोने से दूसरे लोग भी रोने लगते हैं। गोह उसे पकड़ने में कामयाब हो जाता है, लेकिन जब वह सिलिकोबरा को पकड़ने की कोशिश करने के लिए इसका इस्तेमाल करता है, तो वह भाग जाता है। बाद में, इसका सामना टीम रॉकेट से होता है, जो भूखे मोरपेको के साथ बुरा समय बिताने के बाद, पिकाचू को पकड़ने के लिए इसे चारा के रूप में इस्तेमाल करने का फैसला करता है, लेकिन इसके बजाय वाटरवर्क्स में फंस जाता है, ऐश और गोह को सोबले को मुक्त करने के लिए युद्ध करने के लिए मजबूर करता है।
| LineColor = DF73FF
}}
{{Episode list
| EpisodeNumber = 29
| EpisodeNumber2 = 29
| Title = आया एक नया मेहमान!
| RTitle = ({{lang-en|There's a New Kid in Town!}})
| AltTitle = ({{lang-ja|パチパチやきもち!ワンパチのきもち}})
| OriginalAirDate = {{start date|2020|07|19}}
| AltDate = अप्रैल 22, 2022
| ShortSummary = यम्पर एक घायल पिडोव को ढूंढता है और उसे सेरीज़ हाउस लाता है, और सेरीज़ परिवार उसकी देखभाल करने का फैसला करता है। समस्या यह है, जैसे-जैसे समय बीतता है, पिडोव यमपर से मजबूती से (और शारीरिक रूप से) जुड़ जाता है, लेकिन जब यम्पर को पिडोव और क्लो के बीच बढ़ते लगाव से जलन होती है, तो क्लो को यमपर के साथ अपने स्वयं के इतिहास की याद दिलाने की आवश्यकता होती है।
| LineColor = DF73FF
}}
{{Episode list
| EpisodeNumber = 30
| EpisodeNumber2 = 30
| Title = धोखा, परेशानी और बेबसी!
| RTitle = ({{lang-en|Betrayed, Bothered and Beleaguered!}})
| AltTitle = ({{lang-ja|いやいやピカチュウ、やれやれバリヤード}})
| OriginalAirDate = {{start date|2020|07|26}}
| AltDate = अप्रैल 29, 2022
| ShortSummary = जब ऐश रिओलू को प्रशिक्षण देने के बारे में सोचती है, तो पिकाचू, अकेलापन और ईर्ष्या महसूस करते हुए, पैलेट टाउन वापस भागने का फैसला करता है। माइमी उसका पीछा करती है, लेकिन पिकाचू नहीं सुनेगा, इसलिए माइमी दृढ़ता से उसका पीछा करती है। यह एक यात्रा शुरू करता है जिसमें न केवल यादों को पुनर्जीवित और पुन: अनुभव किया जाता है, बल्कि नए और पुराने दोनों बंधन बनते और फिर से बनते हैं।
| LineColor = DF73FF
}}
{{Episode list
| EpisodeNumber = 31
| EpisodeNumber2 = 31
| Title = ख़ूबसूरती का ओवरलोड!
| RTitle = ({{lang-en|The Cuteness Quotient!}})
| AltTitle = ({{lang-ja|ヒンバスのきれいなウロコ}})
| OriginalAirDate = {{start date|2020|08|02}}
| AltDate = मई 6, 2022
| ShortSummary = पार्कर की दोस्त जिनी परेशान है क्योंकि हर कोई उसे बताता रहता है कि उसका पोकेमोन, एक फीबास (जिसे दुनिया का सबसे जर्जर पोकेमोन कहा जाता है) प्यारा नहीं है। हालांकि, जिनी और फीबास का लक्ष्य फ्रेंडशिप कॉन्टेस्ट जीतना है। छोले, पार्कर, ऐश और गोह के प्रोत्साहन के साथ, वे प्रतियोगिता के लिए प्रशिक्षण शुरू करते हैं, लेकिन यह इतना आसान नहीं हो सकता है, खासकर जब से जिनी को पहले तैरना सीखना होगा और टीम रॉकेट, प्रतियोगिता की सुनवाई, इसे क्रैश करने का फैसला करती है। सभी प्रतिस्पर्धी पोकेमोन चोरी करें।
| LineColor = DF73FF
}}
{{Episode list
| EpisodeNumber = 32
| EpisodeNumber2 = 32
| Title = बार–बार हर बार!
| RTitle = ({{lang-en|Time After Time!}})
| AltTitle = ({{lang-ja|セレビィ 時を超えた約束}})
| OriginalAirDate = {{start date|2020|08|09}}
| AltDate = मई 13, 2022
| ShortSummary = तीन साल पहले, गोह की मुलाकात होरेस नाम के एक लड़के से हुई, जो जोहतो क्षेत्र के अज़ालिया टाउन की पारिवारिक यात्रा पर गया था। होरेस पौराणिक पोकेमोन सेलेबी की खोज कर रहा था और दोनों ने इसे एक साथ खोजने का फैसला किया, लेकिन सेलेबी को ढूंढना मुश्किल था। उन दोनों ने अपनी खोज जारी रखने के लिए अगले दिन फिर से मिलने का वादा किया, लेकिन होरेस कभी नहीं दिखा। वर्तमान में, गोह अज़ालिया टाउन लौटता है और अपने अतीत के भूतों का सामना करता है।
* नोट: इस एपिसोड में ऐश और पिकाचू अनुपस्थित थे।
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}}
{{Episode list
| EpisodeNumber = 33
| EpisodeNumber2 = 33
| Title = एक हाथ दो, एक हाथ लो!
| RTitle = ({{lang-en|Trade, Borrow and Steal!}})
| AltTitle = ({{lang-ja|ポケモン交換しませんか?}})
| OriginalAirDate = {{start date|2020|08|16}}
| AltDate = मई 20, 2022
| ShortSummary = वर्मिलियन सिटी में पोकेमॉन एक्सचेंज इवेंट में भाग लेने के दौरान ऐश और गोह बग-प्रकार के उत्साही और स्व-घोषित "बग पोकेमोन क्वीन ऑफ़ द सिनोह रीजन" क्रिकेटिना काइली से मिलते हैं, जो कांटो बग-टाइप पोकेमोन को इकट्ठा करना चाहते हैं। क्रिकेटिना गोह के पिंसिर के लिए अपने हेराक्रॉस का व्यापार करना चाहती है, लेकिन गोह इसे करने के लिए खुद को नहीं ला सकता है। इसलिए वह और ऐश, टीम रॉकेट (जो मोरपेको की बदौलत भूख से मर रहे हैं) और क्रिकेटिना के हेराक्रॉस के सौजन्य से दिलचस्प परिणाम के साथ, क्रिकेटिना के विशेष खाद्य चारा का उपयोग करके एक जंगली पिंसिर को पकड़ने में उसकी मदद करने की कोशिश करते हैं। इसके अलावा, ऐश एक ग्रेट क्लास मैच में काइली से लड़ती है, जिसके परिणामस्वरूप ऐश के लिए एक और जीत और रैंक में वृद्धि होती है।
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}}
{{Episode list
| EpisodeNumber = 34
| EpisodeNumber2 = 34
| Title = अकेला पर खतरनाक!
| RTitle = ({{lang-en|Solitary and Menacing!}})
| AltTitle = ({{lang-ja|孤高の闘士サイトウ!オトスパスの脅威!!}})
| OriginalAirDate = {{start date|2020|08|23}}
| AltDate = मई 27, 2022
| ShortSummary = ऐश और गोह केसर सिटी में फाइटिंग डोजो का दौरा कर रहे हैं, जहां कराटे मास्टर को गैलार क्षेत्र के एक फाइटिंग-टाइप जिम लीडर बी के हाथों एक करारी हार का सामना करना पड़ा है। अपनी विश्व कोरोनेशन सीरीज़ रैंकिंग बढ़ाने और अपनी जीत की लय को जारी रखने के लिए, ऐश ने बीए को एक आधिकारिक लड़ाई के लिए चुनौती दी। ऐश के रिओलू और फ़ारफ़ेच ने कड़ी मेहनत की होगी, लेकिन बी के हावलुचा और ग्रेप्लोक्ट के लिए बिल्कुल भी कोई मुकाबला साबित नहीं हुआ, जिसके परिणामस्वरूप एक अपमानजनक हार हुई और ऐश की विश्व कोरोनेशन सीरीज़ में पहली हार हुई।
| LineColor = DF73FF
}}
{{Episode list
| EpisodeNumber = 35
| EpisodeNumber2 = 35
| Title = अब किसे पकड़े?
| RTitle = ({{lang-en|Gotta Catch a What?}})
| AltTitle = ({{lang-ja|ピカチュウ、ゲットだぜ!!}})
| OriginalAirDate = {{start date|2020|08|30}}
| AltDate = जून 3, 2022
| ShortSummary = गोह ने अब तक बहुत सारे पोकेमोन पकड़े हैं, लेकिन आगे किसे पकड़ना है? ऐश और पिकाचू के बीच घनिष्ठ संबंध की प्रशंसा करते हुए, वह खुद का पिकाचू पकड़ने का फैसला करता है। संयोग से, प्रोफेसर सेरिस चाहते हैं कि हमारे नायक पिकाचू के प्रकोप पर शोध करें, इसलिए वे बंद हैं! जब वे पहुंचते हैं, गोह एक मादा पिकाचू को पकड़ता है, जिसके दोस्त पास की चट्टानों से थंडर स्टोन्स खोद रहे हैं ताकि वे रायचू में विकसित हो सकें। लेकिन टीम रॉकेट आता है, और वे न केवल जंगली पिकाचू, बल्कि ऐश के पिकाचू को भी घेरने का प्रबंधन करते हैं! लेकिन गोह के पिकाचू को पता है कि टीम रॉकेट को नष्ट करने के लिए क्या करना है।
| LineColor = DF73FF
}}
{{Episode list
| EpisodeNumber = 36
| EpisodeNumber2 = 36
| Title = रेत में जंग!
| RTitle = ({{lang-en|Making Battles in the Sand!}})
| AltTitle = ({{lang-ja|サトシとゴウ、砂地獄から這い上がれ}})
| OriginalAirDate = {{start date|2020|09|06}}
| AltDate = जून 10, 2022
| ShortSummary = बीए के साथ अपनी लड़ाई के परिणामस्वरूप, ऐश का आत्मविश्वास हिल गया है, उसे 2-हार हारने वाली स्ट्रीक में भेज दिया और उसे ग्रेट क्लास से वापस वर्ल्ड कोरोनेशन सीरीज़ में नॉर्मल क्लास में छोड़ दिया। इस बीच, मौविल शहर में एक रहस्यमयी बवंडर रेतीला तूफान सामने आया है, जो लोगों को एक अजीब गायन शोर के साथ आकर्षित कर रहा है। ऐश और गोह जांच करते हैं और पाते हैं कि तूफान एक शक्तिशाली फ्लाईगॉन के कारण हो रहा है! जब ऐसा लगता है कि ऐश हार सकती है, तो गोह एक शानदार नई रणनीति के साथ आता है।
| LineColor = DF73FF
}}
{{Episode list
| EpisodeNumber = 37
| EpisodeNumber2 = 37
| Title = मेरे पुराने दोस्तों का नया गैंग!
| RTitle = ({{lang-en|The New Old Gang of Mine!}})
| AltTitle = ({{lang-ja|ただいま!はじめましてアローラ!}})
| OriginalAirDate = {{start date|2020|09|13}}
| AltDate = जून 17, 2022
| ShortSummary = गोह के एक्ज़ेगक्यूट के एक एक्सेग्युटर में विकसित होने के बाद, ऐश उसे अलोलन एक्ज़ेगुटोर के बारे में बताता है और गोह एक को पकड़ने के विचार से उत्तेजित हो जाता है। ऐश और गोह अलोला क्षेत्र की यात्रा करते हैं जहां ऐश अपने अलोलन पोकेमोन और उसके पुराने दोस्तों, पोकेमोन और उसके गुरु प्रोफेसर कुकुई (साथ ही कुकुई परिवार के लिए नया जोड़ा) के साथ फिर से जुड़ जाता है। पार्टी में ऐश के दोस्त उसके लिए फेंक रहे हैं, किआवे गोह को एक लड़ाई के लिए चुनौती देता है कि क्या गोह ऐश के लिए एक उपयुक्त प्रतिद्वंद्वी है। यह एक युद्ध में किआवे के टर्टोनेटर के खिलाफ गोह का रबूट है जिसमें गोह को जेड-मूव से परिचित कराया जाता है, एक आश्चर्यजनक अंत के साथ!
| LineColor = DF73FF
}}
{{Episode list
| EpisodeNumber = 38
| EpisodeNumber2 = 38
| Title = जगाओ नयी उमंग!
| RTitle = ({{lang-en|Restore and Renew!}})
| AltTitle = ({{lang-ja|奇跡の復元、化石のポケモン!}})
| OriginalAirDate = {{start date|2020|09|20}}
| AltDate = जून 24, 2022
| ShortSummary = क्लो ने अपने स्कूल शोध प्रोजेक्ट: पोकेमोन फॉसिल्स पर निर्णय लिया है। ऐश और गोह उसके साथ एक उत्खनन स्थल पर जाते हैं, गोह संभवतः एक जीवाश्म-प्रकार के पोकेमोन को पकड़ने के विचार से उत्साहित हो जाते हैं, लेकिन टीम रॉकेट उसी विचार को ध्यान में रखते हुए उनका अनुसरण करती है। गोह को एक गुप्त एम्बर मिलता है, जो उस रात (टीम रॉकेट के रेस्टोरेशन रूम में घुसने और मशीनरी के साथ हस्तक्षेप करने के बाद) एक एयरोडैक्टाइल में पुनर्जीवित हो जाता है, जो बच जाता है! लेकिन जब गोह नए एयरोडैक्टाइल को पकड़ने के लिए दृढ़ संकल्पित है, ऐश को अपने दम पर टीम रॉकेट से लड़ना होगा।
| LineColor = DF73FF
}}
{{Episode list
| EpisodeNumber = 39
| EpisodeNumber2 = 39
| Title = ऑक्टोलॉक और जिम बैटल!
| RTitle = ({{lang-en|Octo-Gridlock at the Gym!}})
| AltTitle = ({{lang-ja|サトシ対サイトウ!攻略たこがため!!}})
| OriginalAirDate = {{start date|2020|09|27}}
| AltDate = जुलाई 1, 2022
| ShortSummary = ग्रेट क्लास में वापस अपने तरीके से लड़ने के बाद और यह सुनकर कि बीए जोहो क्षेत्र में है, ऐश उसे एक बार फिर चुनौती देने के लिए निकल पड़ता है। ऐश के पूर्व प्रतिद्वंद्वी जिम लीडर चक के नेतृत्व में सियानवुड सिटी जिम में, ऐश का सामना बी से होता है, जिसमें पिकाचू और रियोलू अपनी पिछली हार का बदला लेने के लिए बी के ग्रेप्लोक्ट और हिटमॉन्टोप से लड़ते हैं। पिकाचू हिटमॉन्टोप को नीचे ले जाता है लेकिन ग्रेप्लोक्ट द्वारा बेरहमी से हार जाता है। रियोलू का अगला सामना ग्रेप्लोक्ट से होता है, और ऐश की एक आश्चर्यजनक रणनीति के लिए धन्यवाद, ग्रेप्लोक्ट के हस्ताक्षर ऑक्टोलॉक चाल को दूर करने का प्रबंधन करता है। हालाँकि, लड़ाई का परिणाम ड्रॉ होता है, जिससे किसी भी ट्रेनर की रैंकिंग में कोई बदलाव नहीं होता है। ऐश और बी अल्ट्रा क्लास में फिर से एक-दूसरे से लड़ने की कसम खाते हैं।
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}}
{{Episode list
| EpisodeNumber = 40
| EpisodeNumber2 = 40
| Title = घमासन रेड बैटल!
| RTitle = ({{lang-en|A Crackling Raid Battle!}})
| AltTitle = ({{lang-ja|VSサンダー!伝説レイドバトル!!}})
| OriginalAirDate = {{start date|2020|10|09}}
| AltDate = जुलाई 8, 2022
| ShortSummary = वर्मिलियन सिटी की विद्युत शक्ति में कुछ बाधा आ रही है और उसका निकास हो रहा है। इसका कारण पौराणिक पोकेमोन जैपडोस हो सकता है, प्रोफेसर सेरिस ने ऐश और गोह को जांच के लिए भेजा, दोनों लड़के अपने लिए जैपडोस को पकड़ना चाहते हैं! जैपडोस को कांटो पावर प्लांट तक ट्रैक करना, एक प्रमुख रेड बैटल शुरू होता है, जिसमें ऐश और गोह सबसे अप्रत्याशित सहयोगियों से जुड़ते हैं ... टीम रॉकेट, जो अपने लिए जैपडोस भी चाहते हैं! वे थोड़ी देर के लिए एक साथ काम करने का प्रबंधन करते हैं, लेकिन जब ऐसा लगता है कि जैपडोस भाग रहा है, तो टीम रॉकेट ऐश को चालू कर देती है, जो गोह को जैपडोस के पीछे जाने का आदेश देता है जबकि वह और पिकाचू टीम रॉकेट से निपटते हैं। गोह राबूट की मदद करने के लिए अपने फ्लाईगॉन को बुलाता है, लेकिन वह जैपडोस को पकड़ने में विफल रहता है, जो पिकाचू सहित सभी क्षेत्र के इलेक्ट्रिक पोकेमोन को रिचार्ज करने के लिए अपनी संचित शक्ति का उपयोग करता है।
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}}
{{Episode list
| EpisodeNumber = 41
| EpisodeNumber2 = 41
| Title = पिकाचू की बोली, समझने में जुट गयी टोली!
| RTitle = ({{lang-en|Pikachu Translation Check!, Up to the Neck!}})
| AltTitle = ({{lang-ja|ピカチュウ アテレコ大作戦!, 半分、ヌマクロー。}})
| OriginalAirDate = {{start date|2020|10|16}}
| AltDate = जुलाई 15, 2022
| ShortSummary = '''पिकाचू की बोली''': मेवथ ने एक बुरी ठंड पकड़ी है, और बाकी टीम रॉकेट ज्यादा आराम नहीं दे रहे हैं। मेवथ को पता चलता है कि टीम रॉकेट में क्या कमी है, लेकिन बाकी को बताने से पहले वह सो जाता है। पिकाचू के कुछ ड्रोन फुटेज को कार्रवाई में देखने के बाद, जेसी और जेम्स पिकाचू का एक गंभीर अध्ययन करने का फैसला करते हैं ताकि अंत में उसे पकड़ सकें। परेशानी यह है कि, जेसी की योजना अपने भाषण को समझने के लिए पिकाचू पर डब करने की योजना उतनी शानदार नहीं हो सकती जितनी वह सोचती है क्योंकि न तो टीम रॉकेट मानव वास्तव में पिकाचू को समझती है।
'''समझने में जुट गयी टोली!''': ऐश, गोह और उनके पोकेमोन अच्छे मौसम का आनंद ले रहे हैं, जब वे पूरी तरह से सूखी हुई पृथ्वी के एक क्षेत्र के अंदर आधे-दबे मार्शटॉम्प में आते हैं। मार्शटॉम्प को खोदने के लिए उनके लिए जमीन बहुत कठिन है, और गोह की इसे मुक्त करने की विभिन्न योजनाएं, जैसे इसे पकड़कर या सोबले की वाटर गन चाल का उपयोग करके, पूरी तरह से विफल हो जाती हैं। जैसा कि ऐश और गोह मार्शटॉम्प को मुक्त करने के लिए पानी प्राप्त करने का एक तरीका निकालने की कोशिश करते हैं, एक लुडिकोलो रनपप्पा सिर्फ समाधान प्रदान कर सकता है ... अगर वे इसे समझ सकते हैं कि उन्हें क्या चाहिए।
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}}
{{Episode list
| EpisodeNumber = 42
| EpisodeNumber2 = 42
| Title = सॉर्ड एंड शील्ड, स्लंबरिंग वील्ड!
| RTitle = ({{lang-en|Sword and Shield, Slumbering Weald!}})
| AltTitle = ({{lang-ja|ソード&シールドI 「まどろみの森」}})
| OriginalAirDate = {{start date|2020|10|23}}
| AltDate = जुलाई 22, 2022
| ShortSummary = ऐश के डायनामैक्स बैंड के अचानक अपने आप चमकने के बाद, वह और गोह गैलार क्षेत्र का दौरा करने और डायनामैक्स अनुसंधान के प्रमुख अधिकारी प्रोफेसर मैगनोलिया को देखने का फैसला करते हैं, लेकिन रास्ते में उनकी ट्रेन एक रहस्यमय कोहरे से रुक जाती है। एक बन्लबी का पीछा करने के लिए ट्रेन छोड़कर, गोह द्वारा अपने दम पर बन्लबी का पीछा करने के बाद, वे घने धुंध में डूबे जंगल में अलग हो जाते हैं। एक दूसरे को खोजने की कोशिश में, वे दो रहस्यमय पोकेमोन का सामना करते हैं। इस बीच, गैलार क्षेत्र एक ऐसी घटना का अनुभव कर रहा है जहां पोकेमोन उन जगहों पर डायनेमैक्स कर रहे हैं जहां उनके लिए ऐसा करना सामान्य रूप से असंभव है और संकट को रोकने के लिए ऐश और लियोन को छोड़कर भगदड़ हो रही है।
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}}
{{Episode list
| EpisodeNumber = 43
| EpisodeNumber2 = 43
| Title = सॉर्ड एंड शील्ड: सबसे काला दिन!
| RTitle = ({{lang-en|Sword and Shield: The Darkest Day!}})
| AltTitle = ({{lang-ja|ソード&シールドII 「ブラックナイト」}})
| OriginalAirDate = {{start date|2020|10|30}}
| AltDate = जुलाई 29, 2022
| ShortSummary = गोह और सोनिया कुछ खंडहरों की जांच करने के लिए टर्फ़ील्ड की यात्रा करते हैं जो डायनामैक्स के रहस्य का सुराग लगा सकते हैं और फिर प्रोफेसर मैगनोलिया की प्रयोगशाला में उनसे परामर्श करने के लिए जाते हैं, जहां गोह को अपना डायनामैक्स बैंड प्राप्त होता है। ऐश और लियोन लियोन के सबसे बड़े प्रायोजक चेयरमैन रोज से मिलते हुए डायनामैक्स पोकेमोन से लड़ना जारी रखते हैं। रोज़ पूर्व की निजी परियोजनाओं में सहायता के बदले में ऐश को विशेष सहायता देने की कोशिश करता है, लेकिन ऐश ने मना कर दिया, अपने स्वयं के सपने का पालन करना चाहता है (रोज़ की सहायक ओलीना को क्रोधित करना)। अगले दिन जब सोनिया और गोह स्टोव-ऑन-साइड में एक भित्ति चित्र का दौरा कर रहे हैं, ओलेना का गुर्गा, जो उन्हें पूंछ रहा है, ओलीना के आदेश पर उनका अपहरण करने की कोशिश करता है, लेकिन रैबूट और गुर्गे के गारबोडोर के बीच एक डायनामैक्स लड़ाई के बारे में कुछ चौंकाने वाले नए सबूत सामने आते हैं। गलार की किंवदंती।
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}}
{{Episode list
| EpisodeNumber = 44
| EpisodeNumber2 = 44
| Title = सॉर्ड ऐंड शील्ड: यहाँ से इटर्नेटस की ओर!
| RTitle = ({{lang-en|Sword and Shield: From Here to Eternatus!}})
| AltTitle = ({{lang-ja|ソード&シールドIII 「ムゲンダイナ」}})
| OriginalAirDate = {{start date|2020|11|06}}
| AltDate = अगस्त 5, 2022
| ShortSummary = डायनामैक्स रैबूट ने ओलीना के गुर्गे के गिगेंटामैक्स गारबोडोर को हरा दिया, जिससे गुर्गे भाग गए। प्रकट प्रतिमाएँ ज़ासियान और ज़माज़ेंटा की तलवार और ढाल पकड़े हुए चित्र हैं, जो गलार के इतिहास पर नई रोशनी बिखेर रहे हैं। लियोन ने लेजेंडरी पोकेमोन इटरनेटस को चेयरमैन रोज के एनर्जी प्लांट कोर से मुक्त होते हुए देखा, जो सबसे काले दिन की तबाही को दूर करता है। ऐश इसे रोकने के लिए दौड़ता है, जबकि गोह सोनिया के साथ स्लीपरिंग वेल्ड में लौटता है, जहां वे न केवल ज़ासियान और ज़मामेंटा से मिलते हैं, बल्कि उन कलाकृतियों को भी उजागर करते हैं जो दुनिया को बचा सकती हैं। एनर्जी प्लांट में, चेयरमैन रोज़ ने ऐश और लियोन को अपने असली स्वभाव और बुरे इरादों का खुलासा किया। Eternatus मुक्त हो जाता है और भाग जाता है; जबकि लियोन इसके पीछे जाता है, ऐश रोज़ के कॉपरजाह और फेरोथॉर्न को पिकाचू और रियोलू के साथ लड़ने के लिए तैयार करता है। जब गोह आता है, तो वह और रबूट का सामना ओलीना और उसके मिलोटिक के खिलाफ होता है।
| LineColor = DF73FF
}}
{{Episode list
| EpisodeNumber = 45
| EpisodeNumber2 = 45
| Title = सॉर्ड ऐंड शील्ड...जाग उठे लेजेंड्स!
| RTitle = ({{lang-en|Sword and Shield...The Legends Awaken!}})
| AltTitle = ({{lang-ja|ソード&シールドIV 「最強の剣と盾」}})
| OriginalAirDate = {{start date|2020|11|13}}
| AltDate = अगस्त 12, 2022
| ShortSummary = ऐश, गोह और लियोन की संबंधित लड़ाई जारी है। लड़ाई के दौरान, रिओलू लुकारियो में विकसित होता है, राबूट सिंड्रेस में विकसित होता है, और रोज़ और ओलीना दोनों हार जाते हैं! लियोन के इटरनेटस पर कब्जा करने में विफल रहने के बाद, यह अपने इटरनामैक्स रूप को धारण कर लेता है और लियोन घायल हो जाता है। ऐश और गोह सॉर्ड और शील्ड लेते हैं और इटर्नमैक्स इटर्नैटस से लड़ते हैं, ज़ासियान और ज़ामाज़ेंटा को उनकी मदद करने के लिए बुलाते हैं और उनके पोकेमॉन एटरनेटस को हराने में मदद करते हैं। ऐश और गोह, काले दिन के खतरे को समाप्त करते हुए, इटरनेटस को दूर करने के लिए पोकेबॉल का उपयोग करते हैं, और स्वॉर्ड और शील्ड को स्लंबरिंग वेल्ड में वापस कर देते हैं। सोनिया को आधिकारिक तौर पर उनकी दादी द्वारा पोकेमॉन प्रोफेसर नियुक्त किया जाता है, जबकि रोज़ और ओलीना का ठिकाना एक रहस्य बना हुआ है।
| LineColor = DF73FF
}}
{{Episode list
| EpisodeNumber = 46
| EpisodeNumber2 = 46
| Title = जंग में मिला उम्मीद से ज़्यादा!
| RTitle = ({{lang-en|Getting More Than You Battled For!}})
| AltTitle = ({{lang-ja|バトル&ゲット!ミュウツーの復活}})
| OriginalAirDate = {{start date|2020|11|20}}
| AltDate = अगस्त 19, 2022
| ShortSummary = म्यू से संबंधित मानसिक ऊर्जा को सेरो द्वीप पर पाया गया है, और ऐश और गोह म्यू को खोजने की उम्मीद में तुरंत निकल जाते हैं। द्वीप पर पहुंचने पर, वे कई अलग-अलग पोकेमॉन से मिलते हैं (जिनमें से कई गोह तुरंत पकड़ लेते हैं) और पौराणिक क्लोन पोकेमॉन म्यूटू का सामना करते हैं। गोह ने म्यूटू को पकड़ने के अपने दृढ़ संकल्प की घोषणा की, और जब ऐश ने म्यूटू को युद्ध के लिए कहा तो वह एक ही समय में उन दोनों का सामना करने के लिए सहमत हो गया। पिकाचू, लुकारियो, और सिंड्रेस की सहायता से, ऐश और गोह अपने सपनों के साथ अपनी सबसे कठिन लड़ाई शुरू करते हैं!
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}}
{{Episode list
| EpisodeNumber = 47
| EpisodeNumber2 = 47
| Title = जीतेगा सबसे बड़ा पेटू!
| RTitle = ({{lang-en|Crowning the Chow Crusher!}})
| AltTitle = ({{lang-ja|ポケモンチャンピオン!大食い王決定戦!!}})
| OriginalAirDate = {{start date|2020|11|27}}
| AltDate = अगस्त 26, 2022
| ShortSummary = ऐश और गोह वर्मिलियन सिटी की ईटिंग प्रतियोगिता भाग लेते हैं। ऐश को अपने ड्रैगनाइट और गोह के साथ अपने स्कोवेट के साथ प्रतिस्पर्धा करने का निर्णय लेते हैं, लेकिन टीम रॉकेट भी उनके मोरपेको के साथ शामिल हो जाती है। पहले दौर में ऐश और ड्रैगनाइट का सफाया कर दिया जाता है और स्कोवेट और मोरपेको दोनों आगे बढ़ते हैं, लेकिन दूसरे दौर से पहले, टीम रॉकेट की धोखाधड़ी कुछ प्रतियोगियों को समाप्त कर देती है। स्कोवेट और मोरपेको फाइनल में जगह बनाते हैं और टीम रॉकेट सफलता के प्रति आश्वस्त हैं, लेकिन फिर पता चलता है का मोरपेको पूरी तरह से भर चुका है जबकि स्कोवेट उसी स्थिति में है। सौभाग्य से, स्कोवेट ग्रीडेंट में विकसित हो जाता है और बाकी भोजन को निगल जाता है, और गोह को प्रतियोगिता में जीत दिला देता है!
| LineColor = DF73FF
}}
{{Episode list
| EpisodeNumber = 48
| EpisodeNumber2 = 48
| Title = बाल-बाल बचे!
| RTitle = ({{lang-en|A Close Call... Practically!}})
| AltTitle = ({{lang-ja|ほぼほぼピカチュウ危機一髪!}})
| OriginalAirDate = {{start date|2020|12|04}}
| AltDate = सितम्बर 2, 2022
| ShortSummary = ऐश और गोह उनोवा क्षेत्र में कास्टेलिया सिटी का दौरा कर रहे हैं। हालांकि, टीम रॉकेट चुपके से उनके सामने पहुंच जाता है, पिकाचू को अपने मेच "लगभग पिकाचू" के साथ स्वैप करके चोरी करने का इरादा रखता है, जो पिकाचू की तरह दिखता है और कार्य करता है। समस्या यह है, जब दो पिकाचू एक साथ खेलना शुरू करते हैं और आगे बढ़ते हैं, तो वे नहीं बता सकते कि कौन सा है! जब वे अंत में उनमें से एक (जो वास्तव में नकली पिकाचू है), सिंड्रेस और लुकारियो (जो बहुत अच्छी तरह से नहीं मिल रहे हैं) को पकड़ लेते हैं, तो यह हो रहा है, टीम रॉकेट का पीछा करते हैं और छीने गए पिकाचू को बचाते हैं, जबकि सभी फंस गए हैं टीम रॉकेट के स्टिकी ग्रैबर द्वारा एक साथ। इस बीच, अनजान ऐश, गोह और पिकाचू उनोवा क्षेत्र के मिष्ठान व्यंजनों का स्वाद चख रहे हैं।
| LineColor = DF73FF
}}
|}
== पात्रों के नाम ==
=== मुख्य पात्र ===
* ऐश (Ash)
* गोह (Goh)
* क्लोई (Chloe)
=== मुख्य पोकेमॉन के नाम ===
* पिकाचू (Pikachu) — ऐश का पोकेमॉन
* स्कोरबनी (Scorbunny) — गोह का पोकेमॉन (एपिसोड नम्बर 04 से 17 तक)
* राबुत (Raboot) — गोह का पोकेमॉन (एपिसोड नम्बर 17 से 45 तक)
* सिंडरेस (Cinderace) — गोह का पोकेमॉन (एपिसोड नम्बर 45 से)
=== दुश्मन टीम का नाम ===
* टीम रॉकेट
=== दुश्मन टीम के पात्रों का नाम ===
* जैसी
* जेम्स
* म्याउथ
=== प्रोफ़ेसर के नाम ===
* प्रोफ़ेसर ओक
* प्रोफ़ेसर सीरीज
== रिफ्रेंस ==
[[श्रेणी:पोकेमॉन]]
[[श्रेणी:मीडिया फ्रेंचाइजी]]
ez8q906njpj0cpsamfxdmj4b8x21gvp
प्राची यादव
0
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wikitext
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{{ज्ञानसन्दूक खिलाड़ी|name=प्राची यादव|image=Prachi Yadav.png|nationality=भारतीय|birth_date=29 मई 1995|birth_place=[[ग्वालियर]] [[मध्य प्रदेश]]|height=5 ft 7 in|weight=61 KG|website=|country=[[भारत]]|sport=[[पैराकैनो]]|event=Women VL2 / Women KL2|coach=}}
'''प्राची यादव (जन्म 29 मई 1995 को [[ग्वालियर]] में) हुआ, यह''' एक भारतीय पैराकेनो [[एथलीट]] हैं जिन्होंने वर्ष 2020 टोक्यो पैरालिंपिक में भाग लिया था। <ref name="Freepressjournal">{{Cite news|url=https://www.freepressjournal.in/bhopal/madhya-pradesh-para-canoe-athlete-prachi-yadav-wins-bronze-at-world-cup|title=Madhya Pradesh: Para canoe athlete Prachi Yadav wins bronze at World Cup|last=Lane|first=Randell|work=freepressjournal.com|access-date=2022-05-29|language=en}}</ref> प्राची यादव ने पैरालिंपिक विश्व कप में [[कांस्य पदक]] <ref>{{Cite web|url=https://hindi.news18.com/news/sports/others-prachi-yadav-becomes-the-1st-indian-canoeist-to-win-a-world-cup-medal-4287040.html|title=प्राची यादव ने पैरा वर्ल्ड कप में कांस्य पदक जीत कर रचा इतिहास, कैनो में पदक जीतने वाली पहली खिलाड़ी बनी|date=2022-05-30|website=News18 हिंदी|language=hi|access-date=2022-11-28|archive-date=28 नवंबर 2022|archive-url=https://web.archive.org/web/20221128111020/https://hindi.news18.com/news/sports/others-prachi-yadav-becomes-the-1st-indian-canoeist-to-win-a-world-cup-medal-4287040.html|url-status=dead}}</ref> <ref>{{Cite web|url=https://www.business-standard.com/article/sports/para-canoeist-prachi-yadav-bags-bronze-in-paracanoe-world-cup-in-poland-122052900204_1.html|title=Para-canoeist Prachi Yadav bags bronze in Paracanoe World Cup in Poland|last=India|first=Press Trust of|date=2022-05-29|website=www.business-standard.com|language=en|access-date=2022-11-28}}</ref> जीतकर इतिहास रचा, <ref>{{Cite web|url=https://zeenews.india.com/hindi/india/madhya-pradesh-chhattisgarh/mp/prachi-yadav-paracanoe-athlete-became-first-indian-to-win-bronze-medal-in-paracano-world-cup-gwalior-sdmp/1202358|title=MP की बेटी ने पौलैंड में लहराया तिरंगा, विश्व कप में पदक जीतने वाली पहली भारतीय|website=Zee News|language=hi|access-date=2022-11-13}}</ref> कैनो में पदक जीतने वाली देश की पहली खिलाड़ी बनीं।
2022 आईसीएफ कैनो स्प्रिंट विश्व चैंपियनशिप में, प्राची यादव ने महिला वीएल2 के अंदर रहते हुए 1:11.15 मिनट में टॉप 10 खिलाडियों में जगह बनाई, इससे पहले वर्ष 2020 ग्रीष्मकालीन पैरालिम्पिक्स में पैराकेनोइंग - महिला वीएल2 - महिला वीएल2 ने 11.098 मिनट में अपना स्थान दर्ज किया और पहुंची 2019 आईसीएफ कैनो स्प्रिंट वर्ल्ड चैंपियनशिप - महिलाओं की वीएल2 में फाइनल, 16:35 मिनट में जीता था तथा 2023 के अर्जुन अवॉर्ड से सम्मननित किया गया ।
== के बारे में ==
प्राची यादव का जन्म 29 मई 1995 को [[ग्वालियर|ग्वालियर, मध्य प्रदेश, भारत]] में हुआ था। उनके पिता जगदीश सिंह यादव सेवानिवृत्त हो चुके है जो कृषि विभाग में उप निदेशक थे और उनकी माता चंद्र कुमारी यादव की मृत्यु 2003 में कैंसर से हो गई थी। उनकी शादी मनीष कौरव से हुई है, जो एक पैरा कैनोइस्ट हैं। उसने पैरा स्विमिंग नेशनल में भी भाग लिया है। <ref>{{Cite news|url=https://www.thehindu.com/sport/other-sports/prachi-yadav-qualifies-for-canoe-sprint-semifinal-at-tokyo-paralympics/article36241216.ece|title=Prachi Yadav qualifies for Canoe sprint semifinal at Tokyo Paralympics|date=September 2, 2021|work=The Hindu}}</ref>
== आजीविका ==
उन्होंने अपने कोच वीरेंद्र कुमार डबास की सिफारिश पर पैरा तैराकी में 2018 से अपने पैरा कैनो करियर की शुरुआत की। <ref>{{Cite web|url=https://www.paralympic.org/prachi-yadav|title=Prachi Yadav - Canoe {{!}} Paralympic Athlete Profile|website=International Paralympic Committee|language=en|access-date=2022-11-13}}</ref> <ref>{{Cite web|url=https://timesofindia.indiatimes.com/sports/tokyo-paralympics/paralympics-prachi-yadav-finishes-last-in-200m-canoe-vl2-final/articleshow/85888437.cms|title=Paralympics: Prachi Yadav finishes last in 200m canoe VL2 final {{!}} Tokyo Paralympics News - Times of India|last=Sep 3|first=PTI /|last2=2021|website=The Times of India|language=en|access-date=2022-11-28|last3=Ist|first3=09:50}}</ref> वह भारत के [[भोपाल]] में लोअर लेक में प्रशिक्षण लेती हैं। वह महिला सिंगल 200 मीटर कैनो स्प्रिंट में अपने उत्कृष्ट प्रदर्शन के साथ फाइनल में पहुंचीं और 1:07.329 के समय के साथ 8वें स्थान पर रहीं। <ref>{{Cite web|url=https://www.news18.com/news/sports/prachi-yadav-finishes-eighth-in-200m-canoe-sprint-at-tokyo-paralympics-4159757.html|title=Prachi Yadav Finishes Eighth in 200m Canoe Sprint at Tokyo Paralympics|date=2021-09-03|website=News18|language=en|access-date=2022-11-28}}</ref>
== 2020 ग्रीष्मकालीन पैरालिंपिक ==
प्राची [[टोक्यो]], [[जापान]] में 2020 समर पैरालिंपिक [[पैरालम्पिक खेल|पैरालिंपिक खेलों]] में पैराकेनो के लिए क्वालीफाई करने वाली पहली भारतीय पैराकेनो एथलीट बनीं.
== टूर्नामेंट रिकॉर्ड ==
{| class="wikitable sortable" style="font-size: 95%;"
|+अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता परिणाम
! साल
! आयोजन
! वर्ग
! जगह
! जगह
|-
| 2022
| ICF कैनो स्प्रिंट और Paracanoe वर्ल्ड कप
| वीएल2 महिला
| पॉज़्नान{{FlagIOCteam|POL|2020 Summer}}</img> [[Poland at the 2020 Summer Olympics|पोलैंड]]
|</img> पीतल
|-
| 2022
| एशियाई पैरा खेलों के लिए एशियाई डोंगी पैरा क्वालिफायर
| वीएल2 महिला
| रेयॉन्ग{{FlagIOCteam|THA|2020 Summer}}</img> [[Thailand at the 2020 Summer Olympics|थाईलैंड]]
|</img> सोना
|}
{| class="wikitable sortable" style="font-size: 95%;"
|+राष्ट्रीय प्रतियोगिता परिणाम
! साल
! आयोजन
! वर्ग
! जगह
! जगह
|-
| 2022
| 15 वीं राष्ट्रीय Paracanoe चैंपियनशिप और Paracanoe वर्गीकरण
| वीएल2 महिला
| भोपाल
|</img> सोना
|-
| 2022
| 15 वीं राष्ट्रीय Paracanoe चैंपियनशिप और Paracanoe वर्गीकरण
| KL2 महिला
| भोपाल
|</img> चाँदी
|-
| 2021
| 14 वीं राष्ट्रीय Paracanoe चैंपियनशिप
| वीएल2 महिला
| भोपाल
|</img> सोना
|-
| 2021
| 14 वीं राष्ट्रीय Paracanoe चैंपियनशिप
| KL2 महिला
| भोपाल
|</img> सोना
|-
| 2020
| राष्ट्रीय Paracanoe प्रतियोगिता और Paracanoe वर्गीकरण
| वीएल2 महिला
| भिंड
|</img> चाँदी
|-
| 2020
| राष्ट्रीय Paracanoe प्रतियोगिता और Paracanoe वर्गीकरण
| KL2 महिला
| भिंड
|</img> चाँदी
|-
| 2019
| 29वीं नेशनल कैनो स्प्रिंट एंड पैराकेनो चैंपियनशिप
| KL2 महिला
| दिल्ली
|</img> सोना
|-
| 2019
| 29वीं नेशनल कैनो स्प्रिंट एंड पैराकेनो चैंपियनशिप
| वीएल2 महिला
| दिल्ली
|</img> चाँदी
|}
== पुरस्कार ==
* 2020: [[राष्ट्रीय खेल दिवस]] पर [[मध्य प्रदेश सरकार]] द्वारा विक्रम पुरस्कार। <ref>{{Cite web|url=https://www.ibc24.in/state/10-vikram-15-eklavya-three-vishwamitra-one-lifetime-award-will-be-given-in-the-state-players-announced-587223.html|title=प्रदेश में 10 विक्रम,15 एकलव्य, तीन विश्वामित्र, एक लाइफटाइम अवार्ड दिए जाएंगे, खिलाड़ियों के नामों की हुई घोषणा {{!}}|website=www.ibc24.in|language=hi|access-date=2022-11-28}}</ref> <ref>{{Cite web|url=https://www.etvbharat.com/hindi/madhya-pradesh/state/bhopal/mps-khel-alankaran-award-2020-announced-vivek-sagar-will-get-vikram-award-28-celebrities-will-be-honored-see-list/mp20210828210628080|title=MP के खेल अलंकरण अवार्ड 2020 की घोषणा, विवेक सागर को मिलेगा विक्रम पुरस्कार, 28 हस्तियां होगी सम्मानित, देखें लिस्ट|website=ETV Bharat News|access-date=2022-11-28}}</ref> <ref>{{Cite web|url=https://www.naidunia.com/madhya-pradesh/gwalior-tokyo-olympics-2021-vikram-award-to-prachi-who-participated-in-paralympics-vishwamitra-award-to-dabas-of-gwalior-7016922|title=Tokyo Olympics 2021: पैरालिंपिक में भाग लेने वाली प्राची काे विक्रम अवार्ड ग्वालियर के डबास काे विश्वामित्र पुरस्कार|date=2021-08-29|website=Nai Dunia|language=hi|access-date=2022-11-28}}</ref>
{{Reflist}}
== बाहरी कड़ियाँ ==
* [https://olympics.com/tokyo-2020/paralympic-games/en/results/canoe-sprint/athlete-profile-n1784142-yadav-prachi.htm कैनो स्प्रिंट यादव प्राची - टोक्यो 2020 पैरालिंपिक]
* [https://thebridge.in/tokyo-2020-paralympics/prachi-yadav-finishes-eighth-final-women-canoe-sprint-24913 टोक्यो पैरालिंपिक: प्राची यादव महिला कैनो स्प्रिंट के फाइनल में 8वें स्थान पर रहीं]
* [https://www.sportskeeda.com/sports/news-prachi-yadav-finishes-8th-women-s-va-a-singles-200m-vl2-canoe-sprint-final-2021-paralympics 2021 पैरालिंपिक: प्राची यादव महिला वै'आ एकल 200 मीटर वीएल2 कैनो स्प्रिंट फाइनल में 8वें स्थान पर रहीं] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20250522170758/https://www.sportskeeda.com/sports/news-prachi-yadav-finishes-8th-women-s-va-a-singles-200m-vl2-canoe-sprint-final-2021-paralympics |date=22 मई 2025 }}
* [https://instagrambiography.com/post/para-athlete-prachi-yadav-biography-boyfriend-income-unknown-facts/2736 पैरा एथलीट प्राची यादव जीवनी, प्रेमी, आय, अज्ञात तथ्य] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20210904034636/https://instagrambiography.com/post/para-athlete-prachi-yadav-biography-boyfriend-income-unknown-facts/2736 |date=4 सितंबर 2021 }}
* [https://www.newindianexpress.com/sport/other/2021/may/19/qualification-done-prachiyadav-eyes-target-olympic-podium-scheme--exposure-trip-2304486.html क्वालिफिकेशन हो गया, प्राची यादव की निगाहें टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम और एक्सपोजर ट्रिप पर]
[[श्रेणी:जीवित लोग]]
[[श्रेणी:1995 में जन्मे लोग]]
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फव्वारा चौक
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{{Infobox television
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}}
'''''फव्वारा चौक''''' ({{Translation|Fountain Square}}) एक भारतीय टेलीविजन [[प्रहसन|कॉमेडी]] श्रृंखला है। एच3 एंटरटेनमेंट द्वारा निर्मित, [[दंगल टीवी]] पर 5 दिसंबर 2022 को प्रीमियर हुआ।<ref>{{Cite web|url=https://timesofindia.indiatimes.com/tv/news/hindi/exclusive-bharti-singh-and-haarsh-limbachiyaa-to-make-their-fiction-debut-with-favvara-chowk/articleshow/95681955.cms|title=Exclusive! Bharti Singh and Haarsh Limbachiyaa to make their fiction debut with Favvara Chowk - Times of India|website=[[द टाइम्स ऑफ़ इण्डिया]]}}</ref> इसमें [[भारती सिंह]], [[अंतरा बिस्वास|मोनालिसा]], [[अली असगर]], [[ये है मोहब्बतें|अभिषेक वर्मा]], सुरभि मेहरा, समृद्धि मेहरा और [[हर्ष लिम्बाचिया|हर्ष लिम्बाचिया हैं]]।<ref>{{Cite web|url=https://www.freepressjournal.in/entertainment/bharti-singh-on-her-first-fiction-show-favvara-chowk-the-biggest-challenge-was-to-bring-all-the-artistes-together|title=Bharti Singh on her first fiction show Favvara Chowk, 'The biggest challenge was to bring all the artistes together'}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.pinkvilla.com/tv/news/nazar-actress-monalisa-to-star-in-bharti-singh-and-haarsh-limbachiyaas-show-fawara-chowk-1202096?amp|title=Nazar actress Monalisa to star in Bharti Singh and Haarsh Limbachiyaa's show 'Fawara Chowk'|date=5 December 2022|access-date=8 जनवरी 2023|archive-date=31 दिसंबर 2022|archive-url=https://web.archive.org/web/20221231044810/https://www.pinkvilla.com/tv/news/nazar-actress-monalisa-to-star-in-bharti-singh-and-haarsh-limbachiyaas-show-fawara-chowk-1202096?amp|url-status=dead}}</ref>
== कलाकार ==
यह श्रृंखला इंदौर में आधारित है, अशोक के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपने बेटे मनोज और राम के साथ झामा झाम कैफे चलाता है, जो अपनी जुड़वां बेटियों के साथ माधुरी ब्यूटी पार्लर चलाती है।<ref>{{Cite web|url=https://timesofindia.indiatimes.com/tv/news/hindi/monalisa-every-comedy-show-needs-an-element-of-tadka-and-my-character-in-favvara-chowk-is-just-that/articleshow/95942743.cms|title=Monalisa: Every comedy show needs an element of tadka and my character in Favvara Chowk is just that - Times of India|website=[[द टाइम्स ऑफ़ इण्डिया]]}}</ref>
== कलाकार ==
* फव्वारा देवी के रूप में [[भारती सिंह]]
* [[अली असगर]] अशोक के रूप में
* राम के रूप में [[अंतरा बिस्वास|मोनालिसा]]
* मनोज के रूप में [[ये है मोहब्बतें|अभिषेक वर्मा]]
* समृद्धि मेहरा रिद्धि के रूप में
* सुरभि मेहरा सिद्धि के रूप में
* पप्पी फरार के रूप में [[हर्ष लिम्बाचिया]]
== उत्पादन ==
श्रृंखला की घोषणा 2022 में [[दंगल टीवी]] द्वारा की गई थी।<ref>{{Cite web|url=https://www.mumbailive.com/en/entertainment/bharti-singh-and-haarsh-limbachiyaa-set-to-make-their-fiction-debut-76050|title=Bharti Singh and Haarsh Limbachiyaa set to make their fiction debut | Bollywood News Today}}</ref> सीरीज का प्रोमो नवंबर 2022 में रिलीज किया गया था। <ref>{{Cite web|url=https://www.youtube.com/watch?v=vst2n3XobqQ|title=कुछ नमकीन-कुछ रंगीन किस्सों के साथ आ रहा है....{{!}} Favvara Chowk {{!}} 5th Dec, {{!}} New Promo {{!}} DangalTV|website=[[YouTube]]}}</ref> [[अंतरा बिस्वास|मोनालिसा]] और [[अली असगर]] को मुख्य भूमिका के लिए साइन किया गया था।<ref>{{Cite web|url=https://ndtv.in/television/monalisa-to-star-in-bharti-singh-and-haarsh-limbachiyaa-news-show-fawara-chowk-3580280|title=भाभी जी के लुक में मोनालिसा ने शेयर किया फोटो, फव्वारा चौक में भारती सिंह और चिंकी- मिंकी के साथ दिखेंगी एक्ट्रेस|access-date=8 जनवरी 2023|archive-date=31 दिसंबर 2022|archive-url=https://web.archive.org/web/20221231044317/https://ndtv.in/television/monalisa-to-star-in-bharti-singh-and-haarsh-limbachiyaa-news-show-fawara-chowk-3580280|url-status=dead}}</ref> श्रृंखला [[इन्दौर|इंदौर]] में सेट है, शूटिंग नवंबर 2022 में शुरू हुई और मुख्य रूप से [[मुम्बई फ़िल्म सिटी|फिल्म सिटी]], [[मुम्बई|मुंबई]] में शूट की गई।<ref>{{Cite web|url=https://www.abplive.com/entertainment/television/ali-asgar-and-monalisa-romantic-dance-video-going-viral-from-comedy-show-set-favvara-chowk-2279473|title='थप्पड़' के बाद अब अली असगर के साथ मोनालिसा का रोमांस! बालकनी में लगाए ठुमके, देखें वीडियो|date=11 December 2022}}</ref>
== यह भी देखें ==
* [[दंगल टीवी द्वारा प्रसारित कार्यक्रमों की सूची]]
== संदर्भ ==
{{Reflist}}
== बाहरी कड़ियाँ ==
* {{आईएमडीबी शीर्षक}}
[[श्रेणी:दंगल टीवी मूल धारावाहिक]]
[[श्रेणी:भारतीय टेलीविजन धारावाहिक]]
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फियर फैक्टर: खतरों के खिलाड़ी 4
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text/x-wiki
{{Infobox television season
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}}
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'''फियर फैक्टर: खतरों के खिलाड़ी टॉर्चर 4''' भारत के स्टंट/एक्शन [[वास्तविक टेलिविज़न|रियलिटी गेम शो]] का '''''चौथा सीजन''''' है। '''''[[फियर फैक्टर: खतरों के खिलाड़ी]]''''', [[संयुक्त राज्य अमेरिका|अमेरिकन]] फियर फैक्टर पर आधारित है। इस सीरीज का प्रीमियर [[कलर्स (टीवी चैनल)|कलर्स टीवी]] पर हुआ था। शो को [[अक्षय कुमार]] होस्ट कर रहे हैं। [[आरती छाबड़िया]] को शो की विनर घोषित किया गया।
== प्रतियोगी ==
{| class="wikitable sortable" style="text-align:center;"
|+
!प्रतियोगी
! पेशा
! दर्जा
! जगह
! संदर्भ
|-
| [[आरती छाबड़िया]]
| अभिनेत्री, मॉडल
| bgcolor="#73FB76" | विजेता
| 1
| <ref>{{Cite web|url=http://ibnlive.in.com/news/aarti-chhabria-is-khatron-ke-khiladi/169899-44.html|title=Aarti Chhabria is KKK4 Winner|last=IANS|publisher=CNN-IBN|archive-url=https://web.archive.org/web/20111113072025/http://ibnlive.in.com/news/aarti-chhabria-is-khatron-ke-khiladi/169899-44.html|archive-date=2011-11-13|access-date=2011-08-04}}</ref>
|-
| [[मौली दवे]]
| गायक, नर्तक, मेजबान, अभिनेत्री
| bgcolor="#D1E8EF" | पहला उपविजेता
| 2
|
|-
| [[डायेंड्रा सोरेस|डियांड्रा सोरेस]]
| मॉडल फैशन डिजाइनर, टेलीविजन होस्ट
| bgcolor="#7FFFD4" | द्वितीय उपविजेता
| 3
|
|-
| दीना सिंह
| अभिनेत्री
| bgcolor="pink" | तीसरा उपविजेता
| 4
|
|-
| मिया उएदा
| अभिनेत्री, मॉडल, वीजे, स्तंभकार
| bgcolor="yellow" | चौथा उपविजेता
| 5
| <ref name="autogenerated9">{{Cite web|url=http://articles.timesofindia.indiatimes.com/2011-05-28/news-interviews/29594387_1_stunts-vj-mia-reality|title=VJ Mia hopes to work in Bollywood|date=2011-05-29|website=[[द टाइम्स ऑफ़ इण्डिया]]|archive-url=https://web.archive.org/web/20120915014053/http://articles.timesofindia.indiatimes.com/2011-05-28/news-interviews/29594387_1_stunts-vj-mia-reality|archive-date=2012-09-15}}</ref>
|-
| [[अंजुम चोपड़ा]]
| क्रिकेटर
| rowspan="2" bgcolor="violet" | सेमीफाइनलिस्ट
| 6
| <ref name="autogenerated12">{{Cite web|url=http://www.indianexpress.com/news/we-all-vied-for-akshays-attention-on-khatron-smita-bansal/796160/|title=We all vied for Akshay's attention on 'Khatron': Smita Bansal|date=2011-05-27|publisher=[[Indian Express]]}}</ref>
|-
| [[आशका गोरडिया|आशका गोराडिया]]
| अभिनेत्री, मॉडल
| 7
| <ref name="autogenerated5">{{Cite web|url=http://www.mid-day.com/entertainment/2011/jun/010611-informer-2.htm|title=Akshay helps Aashka Goradia to loosen up|date=2011-01-06|publisher=Mid day}}</ref>
|-
| एलिसिया राउत
| अभिनेत्री, मॉडल
| rowspan="6" bgcolor="salmon" | सफाया
| 8
|
|-
| [[गुरबानी जज]]
| मॉडल, वीजे, टेलीविजन होस्ट
| 9
| <ref name="autogenerated2">{{Cite web|url=http://m.timesofindia.com/PDATOI/articleshow/7883098.cms|title=VJ Bani in another reality show|date=2011-07-04|publisher=[[द टाइम्स ऑफ़ इण्डिया]]}}</ref>
|-
| [[कश्मीरा शाह]]
| अभिनेत्री
| 10
| <ref name="autogenerated7">{{Cite web|url=http://www.hindustantimes.com/I-signed-up-four-months-ago-Akki/Article1-700178.aspx|title=I signed up four months ago: Akki|date=2011-05-22|publisher=[[हिन्दुस्तान टाईम्स]]|archive-url=https://archive.today/20130125114841/http://www.hindustantimes.com/I-signed-up-four-months-ago-Akki/Article1-700178.aspx|archive-date=2013-01-25}}</ref>
|-
| [[पूनम पांडेय|पूनम पांडे]]
| अभिनेत्री, मॉडल
| 11
| <ref>{{Cite web|url=https://www.indiatoday.in/movies/gossip/story/model-poonam-pandey-takes-up-khatron-ke-khiladi-offer-for-a-fat-sum-132036-2011-04-12|title=Model Poonam Pandey takes up Khatron ke Khiladi offer for a fat sum|date=12 April 2011}}</ref>
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| [[स्मिता बंसल]]
| अभिनेत्री
| 12
| <ref name="autogenerated1">{{Cite web|url=http://www.mid-day.com/entertainment/2011/may/060511-Akshay-Kumar-Khatron-Ke-Khiladi-4-promo-music-video.htm|title=Let's get dangerous|date=2011-06-05|publisher=Midday|access-date=19 मार्च 2023|archive-date=19 दिसंबर 2012|archive-url=https://web.archive.org/web/20121219112021/http://www.mid-day.com/entertainment/2011/may/060511-Akshay-Kumar-Khatron-Ke-Khiladi-4-promo-music-video.htm|url-status=dead}}</ref>
|-
| संभावना सेठ
| टेलीविजन प्रस्तुतकर्ता, अभिनेत्री, डांसर
| 13
| <ref name="autogenerated11">{{Cite web|url=http://english.samaylive.com/entertainment-news/676488045/sambhavna-eliminated-from-khatron-ke-khiladi-season-4.html|title=Sambhavna eliminated from 'Khatron Ke Khiladi' season 4|date=2011-03-06|publisher=Sahara Samay|archive-url=https://web.archive.org/web/20120927002024/http://english.samaylive.com/entertainment-news/676488045/sambhavna-eliminated-from-khatron-ke-khiladi-season-4.html|archive-date=27 September 2012|access-date=19 November 2015}}</ref>
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|}
== साझेदार ==
{| class="wikitable sortable" style="text-align:center;"
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! style="background:pink;" |मादा
! style="background:cyan;" | नर
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| '''आरती '''
| ''' धवल '''
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| ''' आशका '''
| '''सुनीत '''
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| '''एलेसिया'''
| '''शाश्वत'''
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| ''' अंजुम'''
| '''संदीप'''
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| ''' डाएंड्रा'''
| '''अहरन'''
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| ''' दिना'''
| '''प्रमोद'''
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| '''गुरबाणी'''
| '''अमित'''
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| ''' कश्मीरा'''
| ''' सुमित'''
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| '''मौली'''
| '''धीरज'''
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| ''' मिया'''
| '''संग्राम'''
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| '''पूनम'''
| '''प्रवीण'''
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| ''' संभावना'''
| '''खालिद'''
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| '''स्मिता'''
| '''सौरभ'''
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|}
== संदर्भ ==
{{Reflist}}
== बाहरी कड़ियाँ ==
* {{Official website|http://colors.in.com/in/khatronkekhiladi}}
[[श्रेणी:कलर्स चैनल के कार्यक्रम]]
[[श्रेणी:भारतीय वास्तविकता टेलीविजन श्रृंखला]]
[[श्रेणी:फियर फैक्टर: खतरों के खिलाड़ी]]
2xudpmbq88aeynzol84c0cyoq13465g
भारत में आपदा प्रबंधन
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अनुनाद सिंह
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प्राकृतिक या मानव निर्मित आपदा के दौरान जीवन और संपत्ति के संरक्षण और पुनर्प्राप्ति में सहायता करने के लिए कानूनी तौर पर जो भी नीतियाँ बनाई जाती है उसे '''आपदा प्रबंधन''' कहते हैं। बाढ़, तूफान/चक्रवात, जैसी आपदाओं से बड़े पैमाने पर होने वाली नुकसान और बीमारियों और (महामारी) का तेजी से प्रसार के रोकथाम। जैसे मुद्दों को संबोधित करने की योजना बनाई गई है।
मौसम संबंधी दृष्टिकोण से, [[भारत]] विशेष रूप से हिमालय के नीचे (खुले हिंद महासागर का सामना करने वाले) के साथ-साथ अपनी भू-जलवायु परिस्थितियों और विविध परिदृश्यों के कारणों से प्राकृतिक आपदाओं की चपेट में आ जाते हैं; उदाहरण के लिए,—पश्चिमी भारत के अधिक समशीतोष्ण से प्रभावित शुष्क क्षेत्रों में गर्मियों के दौरान गंभीर सूखे, अकाल और/या जंगल की आग का खतरा होता है। उत्तर के अधिक दूरस्थ, पहाड़ी क्षेत्र, विशेष रूप से हिमालयी राज्य, सर्दियों में विनाशकारी भूस्खलन, बाढ़ और शुष्क अवधि के दौरान बड़े भूस्खलन का अनुभव कर सकते हैं। यह उन भूकंपों के अन्तर्गत आते है, जो चट्टानों के गिरने, मिट्टी के धंसने और आकस्मिक बाढ़ के कारण तबाही की संभावना को बढ़ाते हैं। मानसून के दौरान, दक्षिण भारत के प्रायद्वीपीय क्षेत्र जो आम तौर पर चक्रवात या सुनामी से सबसे अधिक प्रभावित होते हैं;
== आपदा प्रबंधन अधिनियम, २००५ ==
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) भारतीय संस्था है जिसका प्राथमिक उद्देश्य प्राकृतिक या मानव निर्मित आपदाओं से उत्पन्न होने वाली हानिकारक परिस्थिति का रोकथाम करना है। आपदा प्रबंधन अधिनियम २८ नवंबर २००५ को लोकसभा द्वारा और १२ दिसंबर २००५<ref>{{citation |url=http://www.ndma.gov.in/en/about-ndma/roles-responsibilities.html |title=कार्य एवं उत्तरदायित्व।|work=[[आपदा प्रबंधन||राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (भारत)]]}}</ref> को राज्यसभा द्वारा पारित किया गया था। ९ जनवरी २००६ को इसे भारत के राष्ट्रपति की सहमति प्राप्त हुई थी। इसके बाद 'राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए)' कि स्थापना की गई।<ref>{{citation |url=http://www.ndma.gov.in/en/about-ndma/evolution-of-ndma.html |title=एनडीएमए का विकास|work=[[आपदा प्रबंधन|राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (भारत)]] }}</ref> प्रधानमंत्री एनडीएमए के पदेन अध्यक्ष बनाया गया। एनडीएमए के अन्तर्गत एक उपाध्यक्ष सहित ९ से अधिक सदस्य नहीं होते हैं। एनडीएमए के सदस्यों का कार्यकाल ५ वर्ष का होता है। एनडीएमए, जिसे शुरू में ३० मई २००५ को एक कार्यकारी आदेश द्वारा स्थापित किया गया था, २७ सितंबर २००५ को आपदा प्रबंधन अधिनियम की धारा – ३ (१) के तहत गठित किया गया था। जिसके अन्तर्गत एनडीएमए के लिए नीतियों, योजनाओं और दिशानिर्देशों को निर्धारित करने के लिए स्थापित किया गया।
== आपदा प्रबंधन योजना ==
१ जून २०१६ को, भारत सरकार ने भारत की आपदा प्रबंधन योजना शुरू की, जो आपदाओं की रोकथाम, शमन और प्रबंधन के लिए सरकारी संस्थाओं को एक रूपरेखा और दिशा प्रदान करना चाहती है। २००५ के आपदा प्रबंधन अधिनियम के लागू होने के बाद से राष्ट्रीय स्तर पर यह पहली योजना है।
==सन्दर्भ==
{{टिप्पणीसूची}}
[[श्रेणी:भारत में आपदा प्रबंधन]]
[[श्रेणी:भूगोल]]
[[श्रेणी:भारत में आपदाएँ]]
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प्रबंधन में भारतीय लोकाचार
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{{ख़राब अनुवाद|listed=yes|date=जून 2023}}
'''प्रबंधन में भारतीय लोकाचार''' उन मूल्यों और प्रथाओं को संदर्भित करता है जो [[भारत की संस्कृति]] सेवा, [[नेतृत्व]] और [[प्रबन्धन|प्रबंधन]] में योगदान कर सकती हैं। ये मूल्य और प्रथाएँ ''[[सनातन धर्म]]'' (शाश्वत सार) में निहित हैं, और [[भारतीय दर्शन]] के विभिन्न पहलुओं से प्रभावित हैं।
== भारतीय संस्कृति से कार्य मूल्य ==
# ''परोपकारअर्थम इदं शरीरम'' - शरीर दूसरों की सेवा करने या उच्च [[सर्वहित|सामान्य भलाई]] के लिए है।
# ''आत्मानोमोक्षार्थं जगत हितायच'' - स्वयं के (आध्यात्मिक) [[भलाई|कल्याण को ध्यान में रखते हुए विश्व के कल्याण को]] भी ध्यान में रखते हुए प्रयास करना चाहिए।
# ''[[मनस, वाचा, कार्मण|त्रिकरणशुद्धि]]'' - कर्म को 'विचार, वचन और कर्म की पवित्रता और एकता' में स्वयं को विकसित करने का साधन मानना।<ref>{{Cite journal|last=Sankar R N|first=Ajith|date=July–December 2012|title=Ascertaining Linkages between Trikarana Suddhi and 'Tapping Spirituality as the Context of Leadership'|url=http://www.ipeindia.org/data/IPEJM/IPEJM_2_2_6.pdf|journal=IPE Journal of Management|volume=2|issue=2|page=81|access-date=13 April 2016}}</ref>
# ''यज्ञ चरथा: कर्म'' - एक पवित्र भेंट के रूप में कार्य में संलग्न होना।<ref>{{Cite news|url=http://www.thehindu.com/features/friday-review/religion/karma-as-yagna/article8292954.ece|title=Karma as yagna|date=2016-02-29|work=The Hindu|access-date=14 April 2016}}</ref><ref>{{Cite web|url=http://indianethos.com/yagna-bhava-selfless-karma-with-an-attitude-of-sacrifice/|title=Yagna Bhava – Selfless Karma with an Attitude of Sacrifice|access-date=14 April 2016}}</ref>
== प्रभाव ==
प्रबंधन सिद्धांत और व्यवहार से संबंधित पहलुओं को भारत के विभिन्न ग्रंथों से निकालने का प्रयास किया गया है। विभिन्न प्रकार के कार्यों ने इस क्षेत्र को प्रभावित किया है और उनमें से कुछ में [[योगी कथामृत]], [[तिरुक्कुरल]], [[महाभारत]], [[रामायण]] और [[श्रीमद्भगवद्गीता]] शामिल हैं।<ref>{{cite web|url=https://www.inc.com/hitendra-wadhwa/steve-jobs-self-realization-yogananda.html|title=Steve Jobs's Secret to Greatness: Yogananda|date=21 June 2015}}</ref><ref>{{cite journal|last1=Muniapan|first1=Dr Balakrishnan|last2=Rajantheran|first2=M.Raja|date=1 January 2011|title=Ethics (business ethics) from the Thirukkural and its relevance for contemporary business leadership in the Indian context|url=https://www.researchgate.net/publication/264441071|journal=International Journal of Indian Culture and Business Management|volume=4|issue=4|pages=453–471|doi=10.1504/IJICBM.2011.040961|via=ResearchGate|s2cid=143379175}}</ref><ref>{{cite journal|last=Subramaniam|first=Sairavi|date=16 September 2018|title=Ethical Leadership Views from Tamil Classical Literature - With Reference to Thirukural|doi=10.2139/ssrn.1605320|ssrn=1605320}}</ref><ref>{{cite journal|last1=Chendroyaperumal|first1=Chendrayan|last2=Chandramouli|first2=Seetharaman|date=16 September 2018|title=Leadership and Managerial Implications for Practice and Organizational Excellence from a Drop of the Case of Ramayana - A Celebrated Indian Work on Wisdom|doi=10.2139/ssrn.1875495|ssrn=1875495|s2cid=154216871}}</ref><ref>{{cite web|url=http://www.shu.edu/business/news/bhagavad-gita-and-management.cfm|title=Bhagavad Gita and Management - Seton Hall University|date=September 2016|website=shu.edu|access-date=7 जून 2023|archive-date=10 दिसंबर 2022|archive-url=https://web.archive.org/web/20221210012611/https://www.shu.edu/business/news/bhagavad-gita-and-management.cfm|url-status=dead}}</ref><ref>http://vaikhari.org/downloads/Bhagavad%20Gita%20and%20Management.pdf {{Bare URL PDF|date=March 2022}}</ref>
== अभ्यास के उदाहरण ==
[[ई श्रीधरन]] उन लोगों में से एक हैं जो अपनी व्यावसायिक जीवन की सफलता का श्रेय श्रीमद्भागवद्गीता और उसके आदर्शों को देते हैं।<ref>{{Cite web|url=https://www.forbesindia.com/article/leaderhip-award-2012/e-sreedharan-more-than-the-metro-man/33847/1|title=E Sreedharan: More Than The Metro Man|website=Forbes India|language=en|access-date=2020-06-30}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.thehindubusinessline.com/opinion/metroman-may-your-tribe-increase/article8349044.ece|title='Metroman', may your tribe increase|last=Das|first=Mamuni|date=13 March 2016|website=@businessline|language=en|access-date=2020-06-30}}</ref> व्यवसाय के कई उदाहरण संरक्षित किए गए हैं।<ref>{{cite journal|last1=Sankar R N|first1=Ajith|date=July 11, 2012|title=Ethicus: India's First Ethical Fashion Brand|journal=The Journal of Values Based Leadership|volume=5|issue=1|pages=61–78|ssrn=2103599}}</ref><ref>{{cite journal|last1=Sankar R N|first1=Ajith|date=2011-05-16|title=The Enterprising Life of Isaac Tigrett|doi=10.2139/ssrn.1842943|ssrn=1842943}}</ref><ref>{{cite book|title=Leading With Wisdom: Spiritual-Based Leadership in Business|last1=Pruzan|first1=Peter|last2=Pruzan Mikkelsen|first2=Kirsten|date=June 1, 2007|publisher=Greenleaf}}</ref>
== लोकप्रियता ==
प्रोफेसर एस के चक्रवर्ती,<ref>{{cite journal|last1=Chakraborty|first1=S.K.|date=April 2005|title=Ethics: Light from the Golden Quartet|journal=Journal of Human Values|volume=11|issue=1|pages=1–8|doi=10.1177/097168580401100101|s2cid=220676569}}</ref> जैक हॉली,<ref>{{cite journal|last1=Hawley|first1=Jack|date=October 1995|title=Dharmic Management: A Concept-Based Paper on Inner Truth at Work|journal=Journal of Human Values|volume=1|issue=2|pages=239–248|doi=10.1177/097168589500100207|s2cid=143018317}}</ref> डेबरा और विलियम मिलर,<ref>{{cite web|url=http://www.globaldharma.org|title=Welcome to the Global Dharma Center!}}</ref> [[देवदत्त पटनायक]],<ref>{{cite web|url=http://articles.economictimes.indiatimes.com/2011-02-27/news/28638480_1_corruption-indian-culture-mythology|title=Management Mythos by Devdutt Pattanaik|access-date=14 April 2016|archive-date=6 अप्रैल 2016|archive-url=https://web.archive.org/web/20160406090605/http://articles.economictimes.indiatimes.com/2011-02-27/news/28638480_1_corruption-indian-culture-mythology|url-status=dead}}</ref> प्रोफेसर सुभाष शर्मा,<ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=XlJrVU3DfMUC|title=Management in New Age Western Windows Eastern Doors|last=Sharma|first=Subhash|date=2007|publisher=New Age International|isbn=9788122417890|language=en}}</ref> प्रोफेसर शारदा नंदराम,<ref>{{Cite book|url=https://www.springer.com/la/book/9783319117249|title=Organizational Innovation by Integrating Simplification|journal=<!---->|publisher=Springer|year=2015|isbn=9783319117249|series=Management for Professionals|language=en}}</ref> प्रोफेसर धर्म भावुक,<ref>{{Cite web|url=https://scholar.google.co.in/citations?user=NvjhvR8AAAAJ&hl=en&oi=sra|title=Dharm P S Bhawuk - Google Scholar Citations|website=scholar.google.co.in|access-date=2019-03-15}}</ref><ref>{{Cite web|url=http://shidler.hawaii.edu/directory/dharm-bhawuk/mir|title=Dharm Bhawuk {{!}} Shidler College of Business {{!}}|website=shidler.hawaii.edu|language=en|access-date=2019-03-15|archive-date=17 फ़रवरी 2019|archive-url=https://web.archive.org/web/20190217055101/http://shidler.hawaii.edu/directory/dharm-bhawuk/mir|url-status=dead}}</ref> अंकुर जोशी<ref>{{Citation|last1=Nandram|first1=Sharda|title=An Ethics of Care Induced from Kautilya's Wisdom|date=2016|work=Ethical Leadership|pages=53–69|publisher=Palgrave Macmillan UK|language=en|doi=10.1057/978-1-137-60194-0_4|isbn=9781137601933|last2=Joshi|first2=Ankur}}</ref><ref>{{Cite journal|last1=Joshi|first1=Ankur|last2=Gupta|first2=Rajen K.|date=2017|title=Elementary education in Bharat (that is India): insights from a postcolonial ethnographic study of a Gurukul|journal=International Journal of Indian Culture and Business Management|language=en|volume=15|issue=1|pages=100|doi=10.1504/ijicbm.2017.085390|issn=1753-0806}}</ref><ref>{{Cite journal|last1=Joshi|first1=Ankur|last2=Bindlish|first2=Puneet|last3=Verma|first3=Pawan|last4=Dutt|first4=Priyanka|date=2015-10-15|title=Exploring Indigenous Concepts of Public Administration: Learning for Leadership and Governance|language=en|location=Rochester, NY|ssrn=2674972}}</ref><ref>{{Cite journal|last1=Joshi|first1=Ankur|last2=Bindlish|first2=Puneet|last3=Verma|first3=Pawan Kumar|date=December 2014|title=A Post-colonial Perspective towards Education in Bharat|journal=Vision: The Journal of Business Perspective|language=en|volume=18|issue=4|pages=359–363|doi=10.1177/0972262914552171|issn=0972-2629|s2cid=144782215}}</ref> आदि जैसे शिक्षाविदों और चिकित्सकों ने इस डोमेन के विकास और लोकप्रियता में योगदान दिया है। स्टीफन कोवे ने अपनी पुस्तक ''प्रिंसिपल सेंटर्ड लीडरशिप'' के माध्यम से नेतृत्व में [[गांधीवाद|गांधीवादी]] मूल्यों के अनुप्रयोग का विस्तार से वर्णन किया है।<ref>{{cite web|url=http://www.mkgandhi.org/mgmnt.htm|title=Seven Deadly Sins as per Mahatma Gandhi|access-date=13 April 2016}}</ref> फैकल्टी ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज, बनस्थली विद्यापीठ १९९६ से प्रबंधन में भारतीय लोकाचार पढ़ा रही है।<ref>{{Cite web|url=http://www.banasthali.org/banasthali/wcms/en/home/lower-menu/faculties/management/wisdom-top/cour_n_schemes/mba.html|title=MBA - Courses & Schemes - Welcome to Banasthali Vidyapith|website=banasthali.org|access-date=2019-01-16}}</ref> हाल ही में भारतीय प्रबंध संस्थान अहमदाबाद ने प्रबंधन के लिए पंचतंत्र की कहानियों से सबक लेकर इस क्षेत्र में कदम रखा है।<ref>{{Cite web|url=https://www.hindustantimes.com/education/at-iim-ahmedabad-it-s-time-for-lessons-from-the-panchatantra/story-lWeMnBztsTThkXXghmtvGM.html|title=At IIM Ahmedabad, it's time for lessons from the Panchatantra|date=2017-10-17|website=Hindustan Times|language=en|access-date=2019-01-16}}</ref> एमबीए के लिए अपने मॉडल पाठ्यक्रम में एआईसीटीई ने एमबीए शिक्षा में भारतीय लोकाचार की आवश्यकता पर बल दिया है।<ref>{{Cite web|url=https://www.aicte-india.org/sites/default/files/AICTE_MBA.pdf|title=Model Curriculum for Management Program|website=aicte-india.org|access-date=2019-01-16}}</ref>
== प्रसार ==
यह विषय विभिन्न बिजनेस स्कूलों और विश्वविद्यालयों द्वारा पेश किए जाने वाले व्यवसाय प्रबंधन में कार्यक्रमों के हिस्से के रूप में अलग-अलग स्तरों में सन्निहित है।<ref>{{cite web|url=http://www.dauniv.ac.in/downloads/BBA_Final_6_sem.pdf|title=Devi Ahilya Vishwavidyalaya, Indore|access-date=20 March 2016}}</ref><ref>{{cite web|url=http://www.himtu.ac.in/pdf/jun-2013/Indian%20Ethos%20&%20Values.pdf|access-date=20 March 2016}}{{Dead link|date=मई 2026 |bot=InternetArchiveBot }}</ref><ref>{{cite web|url=http://psrt.cusat.ac.in/pages/PDF/indian%20ethos%20in%20management.pdf|access-date=20 March 2016}}</ref><ref>{{cite web|url=http://sssihl.edu.in/sssuniversity/Academics/DepartmentofManagementStudies/Overview.aspx|title=SSSIHL | Academics | Department of Management & Commerce | Overview|access-date=24 April 2016|archive-date=24 अप्रैल 2016|archive-url=https://web.archive.org/web/20160424190346/http://sssihl.edu.in/sssuniversity/Academics/DepartmentofManagementStudies/Overview.aspx|url-status=dead}}</ref>
* [[शिक्षा मंत्रालय (भारत)|मानव संसाधन विकास मंत्रालय]], भारत सरकार द्वारा स्थापित राष्ट्रीय संसाधन केंद्र के तहत [[वनस्थली विद्यापीठ]] में एफएमएस-विज़्डम ने प्रबंधन शिक्षकों के लिए भारतीय लोकाचार पर ध्यान देने के साथ वीडियो आधारित मॉड्यूल विकसित किए।<ref>{{Cite web|url=https://swayam.gov.in/courses/5296-management|title=Online Refresher Course in Management online course|website=swayam.gov.in|archive-url=https://web.archive.org/web/20190116200727/https://swayam.gov.in/courses/5296-management|archive-date=2019-01-16|access-date=2019-01-31}}</ref><ref>{{Cite web|url=http://mhrd.gov.in/sites/upload_files/mhrd/files/upload_document/Arpit%20Book%20.pdf|title=Annual Refresher Programme in Teaching|website=mhrd.gov.in|access-date=2019-01-31}}</ref>
* [[भारतीय प्रबंध संस्थान, कोलकाता|भारतीय प्रबंध संस्थान, कलकत्ता]] में भारतीय लोकाचार के क्षेत्र में अनुसंधान और शैक्षणिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए मानवीय मूल्यों का एक केंद्र है।<ref>{{Cite web|url=https://www.iimcal.ac.in/faculty/centers-of-excellence/management-center-for-human-values/management-center-for-human-values|title=Management Center for Human Values {{!}} IIM Calcutta|website=iimcal.ac.in|access-date=2019-03-15}}</ref>
* [[भारतीय प्रबंध संस्थान इंदौर]] ने दिसंबर २०१७ में भारतीय प्रबंधन पर एक सम्मेलन आयोजित किया।<ref>{{Cite web|url=https://www.iimidr.ac.in/news-events/5th-biennial-indam-conference-2017-begins-at-iim-indore/|title=5th Biennial INDAM Conference 2017 Begins at IIM Indore|website=भारतीय प्रबंध संस्थान इंदौर - IIM Indore|language=en-US|access-date=2019-03-15}}</ref>
* आईबीए बंगलौर ने सांस्कृतिक प्रतीकों को भारतीय लोकाचार के विचार से जोड़ा।<ref>{{Cite web|url=https://iba.ac.in/about-iba/cultural-symbols/|title=Cultural Symbols|website=IBA (Indus Business Academy)|language=en-US|access-date=2019-03-15}}</ref>
== संदर्भ ==
{{Reflist}}
[[श्रेणी:प्रबन्धन]]
[[श्रेणी:कार्यालय]]
[[श्रेणी:भारतीय संस्कृति]]
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फुलवारिया डैम
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{{Infobox dam
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| image = Phulwaria dam wide.jpg
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| dam_length = 1135 m<ref name=journal1>Ashok Kumar , Kamal Kishor Singh , Brishketu (2020). "Study of Water Quality of Phulwaria Dam of Rajauli Subdivision, Bihar". IJCRT. Volume 8, Issue 11 November 2020. ISSN 2320-2882.</ref>
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}}
[[चित्र:Phulwaria Dam and Reservoir pano.jpg|अंगूठाकार|मई 2023 में , चित्रमाला]]
'''फुलवारिया डैम''' ({{lang-en|Phulwaria dam}}) [[भारत]] के [[बिहार]] राज्य के [[नवादा ज़िले]] में स्थित एक [[बाँध]] है।<ref>{{Cite web|url=https://www.bhaskar.com/local/bihar/patna/nawada/news/phulwaria-dam-meghalaya-of-bihar-sailing-is-a-special-attraction-here-128074415.html|title=प्राकृतिक सौंदर्य का अनूठा संगम...:फुलवरिया डैम: बिहार का मेघालय, नौकायन यहां का विशेष आकर्षण|date=2021|website=[[दैनिक भास्कर]]|trans-title=Unique confluence of natural beauty...: Phulwaria Dam: Bihar's Meghalaya, boating is a special attraction here}}</ref> यह [[गंगा नदी|गंगा बेसिन]] में स्थित है।<ref name="book1">{{Cite book|title=Hydrology and Water Resources of India|url=https://archive.org/details/hydrologywaterre0000jain|last=Jain|first=Sharad K.|last2=Agarwal|first2=Pushpendra K.|last3=Singh|first3=Vijay P.|publisher=Springer|year=2007|isbn=9781402051807|pages=[https://archive.org/details/hydrologywaterre0000jain/page/n444 399]}}</ref>
फुलवारिया [[जलाशय]] और [[धनर्जय नदी|धनर्जय]] जलाशय को जोड़ने की योजना है।<ref>{{Cite book|title=Know Your State Bihar|publisher=Arihant|year=2020|isbn=9789313199755|pages=166}}</ref>
== सौर ऊर्जा ==
{{मुख्य|भारत में सौर ऊर्जा}}
*{{Cite web|url=https://www.inextlive.com/bihar/patna/preparations-started-for-setting-up-of-floating-solar-power-plant-in-nawada-1653675686|title=नवादा में फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट लगाने की तैयारी शुरू|date=27 May 2022|website=inextlive|language=hi|trans-title=Preparations started to set up floating solar power plant in Nawada|access-date=2023-06-08}}
== परमाणु ऊर्जा की योजना ==
{{मुख्य|भारत में परमाणु ऊर्जा}}
*{{Cite web|url=https://www.telegraphindia.com/bihar/water-sinks-bihar-s-nuke-power-plant-wish-dry-phulwaria-reservoir-a-hindrance-to-unit-set-up-dream-in-nawada/cid/424029|title=Water sinks Bihar's nuke power plant wish - Dry Phulwaria reservoir a hindrance to unit set up dream in Nawada|last=Raj|first=Anand|date=7 February 2011|website=www.telegraphindia.com|language=en|trans-title=पानी डूबा बिहार के परमाणु ऊर्जा संयंत्र की चाहत - सूखा फुलवरिया जलाशय नवादा में यूनिट लगाने के सपने में बाधक|archive-url=https://web.archive.org/web/20230608044440/https://www.telegraphindia.com/bihar/water-sinks-bihar-s-nuke-power-plant-wish-dry-phulwaria-reservoir-a-hindrance-to-unit-set-up-dream-in-nawada/cid/424029|archive-date=8 June 2023|access-date=2023-06-08}}
*{{Cite web|url=https://www.downtoearth.org.in/news/bihar-fasttracks-nuclear-power-plant-44616|title=Bihar fast-tracks nuclear power plant|last=Gupta|first=Alok|date=3 June 2014|website=www.downtoearth.org.in|language=en|trans-title=बिहार परमाणु ऊर्जा संयंत्र को तेजी से ट्रैक करता है|access-date=2023-06-08}}
== चित्र ==
<gallery>
चित्र:Boats at Phulwaria dam.jpg|alt=
चित्र:Phulwaria dam fishery scheme.jpg|alt=
चित्र:Phulwaria Dam and Reservoir 2023.jpg|alt=
चित्र:Phulwaria Reservoir 2023.jpg|alt=
</gallery>
== सन्दर्भ ==
{{टिप्पणीसूची}}
== और पढ़ें ==
*Kumara, P., & Singhb, A. K. (2021). [http://mset-biospectra.org/wp-content/uploads/2021/09/37-40.pdf Study of fluorosis problems in Hardia Sector D (Jajpur Village) of Rajauli Block of Nawada District, Bihar.] ISSN: 0973-7057, Vol. 16(1), March, 2021, pp. 37-40
*{{Cite web|url=https://www.jagran.com/bihar/nawada-phulwaria-dam-water-the-farmers-will-plant-trouble-14183006.html|title=फुलवरिया डैम में वाटर प्लांट स्थापित करने से किसानों को होगी परेशानी -|date=20 June 2016|website=[[दैनिक जागरण|जागरण]]|language=hi|access-date=2023-06-10}}
*{{Cite web|url=https://www.livehindustan.com/bihar/nawada/story-initiative-to-rehabilitate-the-displaced-people-of-phulwaria-dam-started-7419723.html|title=फुलवरिया डैम के विस्थापितों को पुनर्वासित कराने की पहल शुरू|date=29 November 2022|website=[[हिन्दुस्तान (समाचार पत्र)|हिन्दुस्तान]]|language=Hindi|access-date=2023-06-10}}
*{{Cite web|url=https://www.hindusthansamachar.in/Encyc/2022/4/27/Proposal-to-declare-Phulwaria-Dam-as-tourist-spot.php|title=फुलवरिया डैम को पर्यटक स्थल घोषित करने का प्रस्ताव|date=27 April 2022|website=[[हिन्दुस्तान समाचार]]|language=en|access-date=2023-06-10}}{{Dead link|date=मई 2026 |bot=InternetArchiveBot }}
*{{Cite web|url=https://www.aljazeera.com/features/2022/11/22/we-lived-there-once-an-underwater-mosque-resurfaces-in-india|title=‘We lived there once’: An underwater mosque resurfaces in India|last=Fareed|first=Rifat|date=22 November 2022|website=www.aljazeera.com|language=en|access-date=2023-06-11}}
{{बिहार के जल निकाय|state=expanded}}
[[श्रेणी:नवादा जिला]]
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पोलैंड का दूतावास, नई दिल्ली
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{{Infobox diplomatic mission
|name = पोलैंड का दूतावास, नई दिल्ली
|image = Polish embassy Delhi 1038.JPG
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|address = 50-एम, शांतिपथ, चाणक्यपुरी, नई दिल्ली, दिल्ली 110021
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}}
नई दिल्ली में पोलैंड का दूतावास, भारत के लिए एक पॉलिश राजनयिक मिशन है।
दूतावास के अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत भारत सहित अफगानिस्तान, बांग्लादेश, भूटान, मालदीव, नेपाल व श्रीलंका को सेवाएं देता है।
== कार्यालय संरचना ==
दूतावास की कार्य प्रणाली इस प्रकार है:
* राजनीतिक और आर्थिक विभाग
* कांसुलर और पोलिश प्रवासी विभाग
** कांसुलर क्षेत्र जो शामिल हैं:<ref>{{Cite web|url=https://www.gov.pl/web/indie/placowki|title=Placówki - Polska w Indiach - Portal Gov.pl|website=Polska w Indiach|language=pl-PL|access-date=2023-06-15}}</ref>
*** भारतीय राज्य: उत्तर, मध्य, पूर्व व उत्तर पूर्वी इलाके
*** अफ़ग़ानिस्तान,
*** बांग्लादेश,
*** भूटान,
*** मालदीव,
*** नेपाल,
*** श्रीलंका
* प्रशासन एवं वित्त विभाग
* सैन्य सुरक्षा सहचरी
== इतिहास ==
* पोलैंड ने 30 मार्च, 1954 को भारत के साथ, नई दिल्ली में पोलिश राजदूत की जिम्मेदारी के तहत अन्य देशों के साथ राजनयिक संबंध स्थापित किए।<ref>{{Cite web|url=http://www.msz.gov.pl/pl/polityka_zagraniczna/inne_kontynenty/azja_i_pacyfik/stosunki_dwustronne_azja_pacyfik/indie|title=Indie|date=2016-09-02|website=web.archive.org|access-date=2023-06-15|archive-date=2 सितंबर 2016|archive-url=https://web.archive.org/web/20160902194453/http://www.msz.gov.pl/pl/polityka_zagraniczna/inne_kontynenty/azja_i_pacyfik/stosunki_dwustronne_azja_pacyfik/indie|url-status=bot: unknown}}</ref>
* 18 अप्रैल, 1957 श्रीलंका के साथ; 1959-1993 के वर्षों में, कोलंबो में संचालित अर्थव्यवस्था मंत्रालय का एक पोलिश राजनयिक पद
* 24 नवंबर, 1959 को नेपाल से; 1967 में, काठमांडू में विदेश व्यापार मंत्री के प्रतिनिधि का कार्यालय खोला गया, 1974-1981 में काठमांडू में पोलिश पीपुल्स रिपब्लिक के दूतावास ने कार्य किया
* 12 जनवरी, 1972 को बांग्लादेश के साथ; ढाका में पोलिश दूतावास की गतिविधियों को 2001 में निलंबित कर दिया गया था
* 1 अक्टूबर, 1984 मालदीव के साथ; इस देश में पोलिश राजनयिक प्रतिनिधित्व कभी नहीं रहा
* 29 नवंबर, 2012 भूटान से; इस देश में पोलिश राजनयिक प्रतिनिधित्व कभी नहीं रहा
== यह भी देखें ==
* [[पोलैंड का महावाणिज्य दूतावास, मुंबई]]
== संदर्भ ==
{{reflist|
<ref name="gov.pl-indie-personel">{{cite web|url=https://www.gov.pl/web/indie/personel|title=Personel - Polska w Indiach - Portal Gov.pl|website=gov.pl|access-date=2021-01-25|archive=https://web.archive.org/web/20210125165525/https://www.gov.pl/web/indie/personel|archive-date=25 जनवरी 2021|archive-url=https://web.archive.org/web/20210125165525/https://www.gov.pl/web/indie/personel|url-status=dead}}</ref>
<ref name="msz.gov-">{{Cite web|url=http://www.msz.gov.pl/pl/aktualnosci/wiadomosci/zakonczenie_dzialalnosci_ambasady_rp_w_kabulu|title=Zakończenie działalności Ambasady RP w Kabulu|date=2017-06-12|website=web.archive.org|access-date=2023-06-15|archive-date=12 जून 2017|archive-url=https://web.archive.org/web/20170612111749/http://www.msz.gov.pl/pl/aktualnosci/wiadomosci/zakonczenie_dzialalnosci_ambasady_rp_w_kabulu|url-status=bot: unknown}}</ref>
<ref name="msz.gov-cmsap5p">[https://web.archive.org/web/20160902194453/http://www.msz.gov.pl/pl/polityka_zagraniczna/inne_kontynenty/azja_i_pacyfik/stosunki_dwustronne_azja_pacyfik/indie MSZ ''Indie'']</ref>
<ref name="msz.gov-cmsap5p2">[http://www.msz.gov.pl/pl/polityka_zagraniczna/inne_kontynenty/azja_i_pacyfik/stosunki_dwustronne_azja_pacyfik/afganistan_1;jsessionid=DDC46B54AE2BBA35F653F6C0B9D43A8C.cmsap5p MSZ ''Afganistan'']</ref>
<ref name="msz.gov-cmsap5p3">[https://web.archive.org/web/20170708065631/http://www.msz.gov.pl/pl/polityka_zagraniczna/inne_kontynenty/azja_i_pacyfik/stosunki_dwustronne_azja_pacyfik/bangladesz MSZ ''Bangladesz'']</ref>
<ref name="msz.gov-cmsap5p4">[http://www.msz.gov.pl/pl/polityka_zagraniczna/inne_kontynenty/azja_i_pacyfik/stosunki_dwustronne_azja_pacyfik/bhutan;jsessionid=DDC46B54AE2BBA35F653F6C0B9D43A8C.cmsap5p MSZ ''Bhutan'']</ref>
<ref name="msz.gov-malediwy">[http://www.msz.gov.pl/pl/polityka_zagraniczna/inne_kontynenty/azja_i_pacyfik/stosunki_dwustronne_azja_pacyfik/malediwy MSZ ''Malediwy'']</ref>
<ref name="msz.gov-nepal">[https://web.archive.org/web/20130102145944/http://www.msz.gov.pl/pl/polityka_zagraniczna/inne_kontynenty/azja_i_pacyfik/stosunki_dwustronne_azja_pacyfik/nepal MSZ ''Nepal'']</ref>
<ref name="msz.gov-sri-lanka">[http://www.msz.gov.pl/pl/polityka_zagraniczna/inne_kontynenty/azja_i_pacyfik/stosunki_dwustronne_azja_pacyfik/sri_lanka MSZ ''Sri Lanka'']</ref>
}}
== ग्रन्थसूची ==
* [https://www.gov.pl/web/india/embassy-new-delhi दूतावास की आधिकारिक वेबसाइट]
* {{Cite web|url=http://www.nowedelhi.msz.gov.pl/pl/|title=Ambasada Rzeczypospolitej Polskiej w New Delhi|date=2018-04-05|website=web.archive.org|access-date=2023-06-15|archive-date=5 अप्रैल 2018|archive-url=https://web.archive.org/web/20180405060601/http://www.nowedelhi.msz.gov.pl/pl/|url-status=dead}}
{{भारत में राजनयिक मिशन}}
[[श्रेणी:भारत में राजनयिक मिशन]]
[[श्रेणी:नई दिल्ली में राजनयिक मिशन]]
[[श्रेणी:पोलैंड के राजनयिक मिशन]]
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नाटक (फिल्म और दूरदर्शन)
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[[फ़िल्म|फिल्म]] और [[टेलीविजन कार्यक्रम|टेलीविजन]] में, '''नाटक''' [[कहानी|कथात्मक]] [[कपोलकल्पना|कथा]] (या [[डोकुड्रामा|अर्ध-काल्पनिक]] ) की एक श्रेणी या शैली है जिसका उद्देश्य हास्य की तुलना में अधिक गंभीर होना है।<ref>{{Cite web|url=http://www.merriam-webster.com/dictionary/drama|title=Drama|year=2015|publisher=Merriam-Webster, Incorporated|quote=a play, movie, television show, that is about a serious subject and is not meant to make the audience laugh}}</ref> इस प्रकार का नाटक आमतौर पर अतिरिक्त शब्दों के साथ योग्य होता है जो इसकी विशेष सुपर-शैली, मैक्रो-शैली, या सूक्ष्म-शैली को निर्दिष्ट करता है,<ref name=":0">{{Cite book|url=https://www.worldcat.org/oclc/993983488|title=The screenwriters taxonomy : a roadmap to collaborative storytelling|last=Williams, Eric R.|publisher=Routledge Studies in Media Theory and Practice|year=2017|isbn=978-1-315-10864-3|location=New York, NY|oclc=993983488}}</ref> जैसे [[सोप ओपेरा]], [[पुलिस प्रक्रियात्मक|पुलिस अपराध नाटक]], [[राजनीतिक नाटक]], [[कानूनी ड्रामा|कानूनी नाटक]], [[ऐतिहासिक नाटक]], [[घरेलू नाटक|घरेलू नाटक]], [[किशोर नाटक]], और [[कॉमेडी नाटक|कॉमेडी-ड्रामा]] (ड्रामेडी)। ये शब्द किसी विशेष [[अभिविन्यास (कहानी)|सेटिंग]] या विषय-वस्तु को इंगित करते हैं, अन्यथा वे ऐसे तत्वों के साथ नाटक के अन्यथा गंभीर स्वर को योग्य बनाते हैं जो मूड की व्यापक श्रृंखला को प्रोत्साहित करते हैं। इन उद्देश्यों के लिए, नाटक में एक प्राथमिक तत्व [[संघर्ष]] की घटना है - भावनात्मक, सामाजिक, या अन्यथा - और कहानी के दौरान इसका समाधान।
सिनेमा या टेलीविज़न के सभी रूप जिनमें [[कपोलकल्पना|काल्पनिक कहानियाँ]] शामिल हैं [[नाटक|, व्यापक अर्थों में नाटक]] के रूप हैं यदि उनकी कहानी कहने का उद्देश्य उन अभिनेताओं के माध्यम से प्राप्त किया जाता है जो [[पात्र (कलाशास्त्र)|पात्रों का]] प्रतिनिधित्व करते हैं [[अनुकरण|।]] इस व्यापक अर्थ में, नाटक उपन्यास, [[लघुकथा|लघु कथाएँ]] और कथा [[काव्य|कविता]] या [[गीत|गीतों]] से अलग एक विधा है।<ref name="elam98">Elam (1980, 98).</ref> सिनेमा या टेलीविजन के जन्म से पहले के आधुनिक युग में, [[रंगमंच|थिएटर]] के भीतर "नाटक" एक प्रकार का नाटक था जो न तो कॉमेडी था और न ही [[दुखान्त नाटक|त्रासदी]] । यह वह संकीर्ण अर्थ है जिसे फिल्म और टेलीविजन उद्योगों ने फिल्म अध्ययन के साथ-साथ अपनाया है। " रेडियो नाटक " का उपयोग दोनों अर्थों में किया गया है - मूल रूप से लाइव प्रदर्शन में प्रसारित किया गया है, इसका उपयोग [[रेडियो]] के नाटकीय आउटपुट के अधिक उच्च-भौंह और गंभीर अंत का वर्णन करने के लिए भी किया गया है।<ref>Banham (1998, 894–900).</ref>
==प्रकार/शैली संयोजन==
पटकथा लेखकों के वर्गीकरण के अनुसार, सभी फिल्म विवरणों में उनके प्रकार (कॉमेडी या ड्रामा) को ग्यारह सुपर-शैलियों में से एक (या अधिक) के साथ जोड़ा जाना चाहिए। यह संयोजन एक अलग शैली नहीं बनाता है, बल्कि फिल्म की बेहतर समझ प्रदान करता है।
वर्गीकरण के अनुसार प्रकार को शैली के साथ मिलाने से कोई अलग शैली नहीं बनती। उदाहरण के लिए, "हॉरर ड्रामा" बस एक नाटकीय हॉरर फिल्म है (कॉमेडिक हॉरर फिल्म के विपरीत)। "हॉरर ड्रामा" हॉरर शैली या नाटक प्रकार से अलग कोई शैली नहीं है।
===एक्शन ड्रामा ===
एक्शन ड्रामा गतिशील लड़ाई के दृश्यों, व्यापक पीछा करने वाले दृश्यों और नाटकीय कहानी और चरित्र चाप के साथ सहसंबद्ध दिल को छू लेने वाले स्टंट से भरपूर होते हैं। नायक लगभग हमेशा तेज़-तर्रार, अपने पैरों पर तेज़ चलने वाला और मानसिक और शारीरिक रूप से सुधार करने में सक्षम होता है। नायक फिल्म की शुरुआत एक आंतरिक समस्या से करता है, जिसके तुरंत बाद एक बाहरी समस्या आ जाती है। कहानी के अंत तक नायक दोनों समस्याओं का समाधान कर लेता है।
===अपराध नाटक ===
अपराध नाटक सत्य, न्याय और स्वतंत्रता के विषयों का पता लगाते हैं, और इसमें "अपराधी बनाम कानूनविद" का मौलिक द्वंद्व शामिल होता है। अपराध फिल्में दर्शकों को मानसिक "हुप्स" की एक श्रृंखला से गुज़रने पर मजबूर कर देती हैं; अपराध नाटक में दर्शकों और नायक को सक्रिय रखने के लिए मौखिक जिम्नास्टिक का उपयोग करना असामान्य नहीं है।
अपराध नाटकों के उदाहरणों में शामिल हैं: द गॉडफादर (1972), चाइनाटाउन (1974), गुडफेलस (1990), द उसुअल सस्पेक्ट्स (1995), और द बिग शॉर्ट (2015)।
===ड्रामा थ्रिलर ===
एक ड्रामा थ्रिलर में, नायक अक्सर एक अनजाने नायक होता है जो अनिच्छा से कहानी में शामिल हो जाता है और उसे निर्दोष पीड़ितों के जीवन को बचाने के लिए एक महाकाव्य खलनायक के साथ युद्ध करना पड़ता है; नायक अनिवार्य रूप से खुद को एक ऐसी स्थिति में गहराई से शामिल पाता है जिसमें बहुत ही अंधेरे अतीत वाले पागल अपराधी शामिल हैं, जो उनके रास्ते में आने वाले किसी भी व्यक्ति को धमकाएंगे, डबल-क्रॉस करेंगे और मार डालेंगे।
===काल्पनिक नाटक ===
एरिक आर विलियम्स के अनुसार , फंतासी ड्रामा फिल्मों की पहचान "आश्चर्य की भावना है, जो आमतौर पर पौराणिक प्राणियों, जादू या अतिमानवीय पात्रों द्वारा बसाई गई एक दृश्यमान गहन दुनिया में दिखाई जाती है। इन फिल्मों के भीतर प्रॉप्स और वेशभूषा अक्सर पौराणिक कथाओं की भावना को झुठलाती हैं और लोककथाएँ - चाहे प्राचीन हों, भविष्यवादी हों, या अन्य-सांसारिक हों। वेशभूषा, साथ ही विदेशी दुनिया, व्यक्तिगत, आंतरिक संघर्षों को दर्शाती है जिसका नायक कहानी में सामना करता है।"
फंतासी नाटकों के उदाहरणों में द लॉर्ड ऑफ द रिंग्स (2001-2003), पैन्स लेबिरिंथ (2006), व्हेयर द वाइल्ड थिंग्स आर (2009), और लाइफ ऑफ पाई (2012) शामिल हैं।
===डरावना नाटक ===
डरावने नाटकों में अक्सर केंद्रीय पात्रों को बाकी समाज से अलग-थलग कर दिया जाता है। ये पात्र अक्सर किशोर या अपने शुरुआती बीसवें वर्ष (शैली के केंद्रीय दर्शक) के लोग होते हैं और अंततः फिल्म के दौरान मारे जाते हैं। विषयगत रूप से, डरावनी फिल्में अक्सर नैतिकता की कहानियों के रूप में काम करती हैं, जिसमें हत्यारा पीड़ितों के पिछले पापों के लिए हिंसक प्रायश्चित करता है। प्रतीकात्मक रूप से, ये अच्छाई बनाम बुराई या पवित्रता बनाम पाप की लड़ाई बन जाते हैं।
रोमांटिक ड्रामा
रोमांटिक नाटक केंद्रीय विषयों वाली फिल्में हैं जो प्यार के बारे में हमारी धारणाओं को मजबूत करती हैं (उदाहरण: "पहली नजर में प्यार", "प्यार सभी को जीतता है", या "हर किसी के लिए कोई न कोई है" जैसे विषय); कहानी आम तौर पर पात्रों के प्यार में पड़ने (और बाहर होने और वापस आने) के इर्द-गिर्द घूमती है। [15]
एनी हॉल (1977), द नोटबुक (2004), कैरल (2015), हर (2013) , और ला ला लैंड (2016) रोमांस ड्रामा के उदाहरण हैं।
===विज्ञान कथा नाटक ===
साइंस फिक्शन ड्रामा फिल्म अक्सर एक नायक (और उनके सहयोगियों) की कहानी होती है जो कुछ "अज्ञात" का सामना करते हैं जो मानवता के भविष्य को बदलने की क्षमता रखते हैं; इस अज्ञात को अतुलनीय शक्तियों वाले एक खलनायक, एक ऐसे प्राणी द्वारा दर्शाया जा सकता है जिसे हम नहीं समझते हैं, या एक वैज्ञानिक परिदृश्य जो दुनिया को बदलने की धमकी देता है; विज्ञान कथा कहानी दर्शकों को मनुष्य की प्रकृति, समय या स्थान की सीमा या सामान्य रूप से मानव अस्तित्व की अवधारणाओं पर विचार करने के लिए मजबूर करती है।
==सन्दर्भ==
{{टिप्पणीसूची}}
[[श्रेणी:टेलिविज़न शैलियाँ]]
[[श्रेणी:नाटक फ़िल्में]]
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फोज डो इगुआसु
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text/x-wiki
{{Wikidata Infobox|qid=Q202316}}
'''फोज डो इगुआसु''' ({{Lang-pt|Foz do Iguaçu}}) [[इगुआसु जलप्रपात]] की सीमा पर [[ब्राज़ील|ब्राज़ीलियाई]] शहर है। इसकी जनसंख्या 285.415 लोग थी और [[पाराना]] राज्य में सातवां सबसे बड़ा शहर है।<ref>{{Cite web|url=https://g1.globo.com/pr/parana/noticia/2023/06/29/censo-2022-veja-o-ranking-das-cidades-paranaenses-com-mais-habitantes.ghtml|title=Censo 2022: veja o ranking das cidades do Paraná com mais habitantes|date=2023-06-29|website=G1|language=pt-br|access-date=2023-09-15}}</ref>
== सन्दर्भ ==
<references />
== बाहरी कड़ियाँ ==
{{wikivoyage|फोज डो इगुआसु}}
* {{in lang|pt}} [http://www.pmfi.pr.gov.br/ Official site of the city.]
* [https://web.archive.org/web/20130711003948/http://www.pmfi.pr.gov.br/turismo/en Official site of the city.]
* {{in lang|pt}} [http://www.iguassu.tur.br City Tourist Office] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20200225230912/http://www.iguassu.tur.br/|date=2020-02-25}}
* [http://www.visitefoz.com.br/ Visit Foz do Iguaçu]
* [http://www.waterlootravel.com/pt Turismo em Foz do Iguaçu] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20200928151731/http://www.waterlootravel.com/pt/ |date=28 सितंबर 2020 }}
{{Brazil-stub}}
[[श्रेणी:ब्राज़ील के शहर]]
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फ़ुशिमी
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wikitext
text/x-wiki
[[File:Fushimimomoyamajo 03.jpg|thumb|250px|फ़ुशिमी]]
'''फ़ुशिमी''' ([[जापानी भाषा|जापानी]]: 伏見区 Fushimi-ku?) [[जापान]] के [[क्योतो]] नगर का एक नगर है।
==बाहरी कड़ियाँ==
{{कॉमन्स|Fushimi-ku, Kyoto|फ़ुशिमी}}
* [https://www.city.kyoto.lg.jp/fushimi/index_sp.html आधिकारिक साइट]{{Dead link|date=मई 2026 |bot=InternetArchiveBot }}
[[श्रेणी:क्योतो]]
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प्यार से नशे में
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text/x-wiki
{{ज्ञानसन्दूक फ़िल्म
| image =
| director = [[Hassan Fathi]]
| writer = Hassan Fathi <br/>Farhad Tohidi
| producer = [[Mehran Broumand]]
| starring = {{plainlist|
* [[Parsa Pirouzfar]]
* [[Shahab Hosseini]]
* [[Hesam Manzour]]
* [[Hande Erçel]]
* [[Selma Ergeç]]
* [[Burak Tozkoparan]]
* [[Boran Kuzum]]
* [[Bensu Soral]]
* [[İbrahim Çelikkol]]
* [[Halit Ergenç]]
}}
| cinematography = [[Morteza Poursamadi]]
| editing = Ceyda Karagül<br/> Dilber Koyuncu
| music = Fahir Atakoğlu
| studio = Dijital Danatlar<br/> Simarya Film Production
| distributor = Filmiran (Iran)
| released =
| runtime = 105 minutes
| country = {{IRN}}<br/>{{TUR}}
| language = [[Persian language|Persian]] <br/>[[Turkish language|Turkish]]
}}
इन्टिकेटेड बाई लव (फ़ारसी: مست عشق, रोमानीकृत: मस्त-ए एशघ, तुर्की: मेवलाना मेस्ट-आई अस्क) एक 2024 ईरानी-तुर्की ऐतिहासिक ड्रामा रोमांस फिल्म है, जो हसन फाथी द्वारा लिखित और निर्देशित है। यह दो फ़ारसी कवियों मावलाना और शम्स तबरीज़ी के इर्द-गिर्द घूमती है, जिनकी भूमिका पारसा पिरौज़फ़र और शहाब होसैनी ने निभाई है। यह फिल्म ईरान और तुर्की का सह-उत्पादन है, जिसे डिजिटल डेनाटलर और सिमर्या फिल्म प्रोडक्शन ने बनाया है।<ref>{{Cite web|url=https://www.delgarm.com/news/art-news/191970-%D9%88%D8%A7%DA%A9%D9%86%D8%B4-%D8%B3%D8%A7%D8%B2%D9%86%D8%AF%DA%AF%D8%A7%D9%86-%D9%81%DB%8C%D9%84%D9%85-%C2%AB%D9%85%D8%B3%D8%AA-%D8%B9%D8%B4%D9%82%C2%BB-%D8%A8%D9%87-%D9%85%D8%AE%D8%A7%D9%84%D9%81%D8%AA-%D9%85%D8%B1%D8%A7%D8%AC%D8%B9|title=واکنش سازندگان فیلم "مست عشق" به مخالفت مراجع|date=2019-09-25|website=دلگرم|language=fa|access-date=2022-09-29|archive-date=3 अक्तूबर 2022|archive-url=https://web.archive.org/web/20221003204947/https://www.delgarm.com/news/art-news/191970-%D9%88%D8%A7%DA%A9%D9%86%D8%B4-%D8%B3%D8%A7%D8%B2%D9%86%D8%AF%DA%AF%D8%A7%D9%86-%D9%81%DB%8C%D9%84%D9%85-%C2%AB%D9%85%D8%B3%D8%AA-%D8%B9%D8%B4%D9%82%C2%BB-%D8%A8%D9%87-%D9%85%D8%AE%D8%A7%D9%84%D9%81%D8%AA-%D9%85%D8%B1%D8%A7%D8%AC%D8%B9|url-status=dead}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.delgarm.com/news/art-news/191970-%D9%88%D8%A7%DA%A9%D9%86%D8%B4-%D8%B3%D8%A7%D8%B2%D9%86%D8%AF%DA%AF%D8%A7%D9%86-%D9%81%DB%8C%D9%84%D9%85-%C2%AB%D9%85%D8%B3%D8%AA-%D8%B9%D8%B4%D9%82%C2%BB-%D8%A8%D9%87-%D9%85%D8%AE%D8%A7%D9%84%D9%81%D8%AA-%D9%85%D8%B1%D8%A7%D8%AC%D8%B9|title=واکنش سازندگان فیلم "مست عشق" به مخالفت مراجع|date=2019-09-25|website=دلگرم|language=fa|access-date=2022-09-29|archive-date=3 अक्तूबर 2022|archive-url=https://web.archive.org/web/20221003204947/https://www.delgarm.com/news/art-news/191970-%D9%88%D8%A7%DA%A9%D9%86%D8%B4-%D8%B3%D8%A7%D8%B2%D9%86%D8%AF%DA%AF%D8%A7%D9%86-%D9%81%DB%8C%D9%84%D9%85-%C2%AB%D9%85%D8%B3%D8%AA-%D8%B9%D8%B4%D9%82%C2%BB-%D8%A8%D9%87-%D9%85%D8%AE%D8%A7%D9%84%D9%81%D8%AA-%D9%85%D8%B1%D8%A7%D8%AC%D8%B9|url-status=dead}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://ifilo.net/v/PrzIjqy|title=تریلر رسمی فیلم مست عشق با بازی پارسا پیروزفر-فیلیمنا|website=فیلو - تماشای رایگان ویدیو|language=fa|access-date=2024-04-08|archive-date=8 अप्रैल 2024|archive-url=https://web.archive.org/web/20240408094438/https://ifilo.net/v/PrzIjqy|url-status=dead}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://ifilo.net/v/PrzIjqy|title=تریلر رسمی فیلم مست عشق با بازی پارسا پیروزفر-فیلیمنا|website=فیلو - تماشای رایگان ویدیو|language=fa|access-date=2024-04-08|archive-date=8 अप्रैल 2024|archive-url=https://web.archive.org/web/20240408094438/https://ifilo.net/v/PrzIjqy|url-status=dead}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.mashreghnews.ir/news/1218471/%DA%86%D8%B1%D8%A7-%D8%B3%D8%B1%D9%85%D8%A7%DB%8C%D9%87-%DA%AF%D8%B0%D8%A7%D8%B1%D8%A7%D9%86-%D9%BE%D8%B1%D9%88%DA%98%D9%87-%D9%85%D8%B3%D8%AA-%D8%B9%D8%B4%D9%82-%D9%86%D8%A7%D9%85-%D8%AE%D9%88%D8%AF-%D8%B1%D8%A7-%D9%85%D9%86%D8%AA%D8%B4%D8%B1-%D9%86%D9%85%DB%8C-%DA%A9%D9%86%D9%86%D8%AF|title=چرا سرمایهگذاران پروژه «مست عشق» نام خود را منتشر نمیکنند؟|date=2021-05-17|website=مشرق نیوز|language=fa|access-date=2024-04-08}}</ref>
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फोर्ट अगुआडा
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text/x-wiki
{{Infobox historic site|name=फोर्ट अगुआड़ा|native_language=|image=Fort_aguada.jpg|image_size=250px|caption=फोर्ट अगुआड़ा की प्राचीर से सिंक्वेरिम समुद्र तट और अरब सागर दिखाई देता है।|designation1=|designation1_date=|designation1_number=|designation1_criteria=|designation1_type=सांस्कृतिक|designation1_free1name=राज्य पार्टी|designation1_free1value={{IND}}|designation1_free2name=क्षेत्र|designation1_free2value=|location=[[गोवा]], [[भारत]]|elevation=|built={{start date and age|1612}}|architect=|architecture=|coordinates={{coord|15.488|73.763|display=inline, title}}|locmapin=India Goa#India|map_caption=गोवा, भारत में स्थान}}
'''फोर्ट अगुआडा''' एक अच्छी तरह से संरक्षित सत्रहवीं शताब्दी का [[पुर्तगाली साम्राज्य|पुर्तगाली]] [[किलाबंदी|किला]] है, जिसमें एक लाइटहाउस भी है, जो [[भारत|भारत के]] [[गोवा]] में सिंक्वेरिम बीच पर [[अरब सागर|अरब सागर के]] दृश्य के साथ स्थित है।<ref name=":1">{{Cite web|url=https://www.google.co.in/travel/entity/key/ChYInPalm4vG3cGjARoJL20vMDk0MDNxEAQ?ei=23ecX8X2A5GokwP5mpyQDQ&utm_campaign=sharing&utm_medium=link&utm_source=htls&ved=0CAAQ5JsGahcKEwj4mfKF6PiGAxUAAAAAHQAAAAAQBQ&ts=CAEaBAoCGgAqBAoAGgA|title=अगौडा फोर्ट|website=www.google.co.in|access-date=2024-06-26}}</ref> यह गोवा में [[भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण|एएसआई]] संरक्षित राष्ट्रीय महत्व का स्मारक है।<ref name=":1" />
== उत्पत्ति और इतिहास ==
किले का निर्माण मूल रूप से 1612 में [[डच साम्राज्य|डचों]] से बचाव के लिए किया गया था। यह उस समय [[यूरोप]] से आने वाले जहाजों के लिए एक संदर्भ बिंदु था। यह पुराना पुर्तगाली किला [[कैंडोलिम]] के दक्षिण में [[मांडवी नदी]] के तट पर स्थित है। शुरुआत में इसे शिपिंग और पास के [[बारदेज़]] उप-जिले की रक्षा का काम सौंपा गया था।<ref>{{Citation|last=Anand|first=Pankaj|title=Fort Aguada !!|date=2012-08-30|url=https://www.flickr.com/photos/pankajanand18/7975476080/|access-date=2024-06-26}}</ref>
किले के भीतर एक मीठे पानी का झरना रुकने वाले जहाजों को पानी उपलब्ध कराता था। इस प्रकार किले का नाम अगुआडा पड़ा, जिसका [[पुर्तगाली भाषा]] में अर्थ पानीदार होता है। गुजरने वाले जहाजों के दल अक्सर अपने मीठे पानी के भंडार को फिर से भरने के लिए आते थे। 1864 में निर्मित अगुआड़ा किला लाइटहाउस [[एशिया]] में अपनी तरह का सबसे पुराना [[प्रकाशस्तम्भ|लाइटहाउस]] है। 1612 में निर्मित, यह कभी 79 तोपों का भव्य स्तंभ था। इसमें 2,376,000 गैलन पानी भंडारण की क्षमता है, जो पूरे एशिया में उस समय के सबसे बड़े मीठे पानी के भंडारण में से एक है। यह किला दो खंडों में विभाजित है: ऊपरी हिस्सा किले और पानी देने वाले स्टेशन के रूप में काम करता था, जबकि निचला हिस्सा पुर्तगाली [[जलयान|जहाजों]] के लिए सुरक्षित बर्थ के रूप में काम करता था। जबकि ऊपरी भाग में एक [[खंदक|खाई]], भूमिगत जल भंडारण कक्ष, [[बारूद]] कक्ष, [[प्रकाशस्तम्भ|प्रकाशस्तंभ]] और बुर्ज हैं, इसमें युद्ध और आपातकाल के दौरान उपयोग करने के लिए एक गुप्त भागने का मार्ग भी है। प्रारंभिक चरण में लाइटहाउस का उपयोग 7 मिनट में एक बार प्रकाश उत्सर्जित करने के लिए किया जाता है।<ref>https://ffo.gov.in/locations/locationInformation/322</ref>
किला अगुआड़ा पुर्तगालियों का सबसे बेशकीमती और महत्वपूर्ण किला था। किला इतना बड़ा है कि यह [[बारदेज़]] के दक्षिण-पश्चिमी सिरे पर पूरे [[प्रायद्वीप]] को कवर करता है। [[मांडवी नदी]] के मुहाने पर निर्मित, यह रणनीतिक रूप से स्थित था और [[डच साम्राज्य|डचों]] के खिलाफ पुर्तगालियों की मुख्य रक्षा थी।<ref name=":0">{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=A1acCwAAQBAJ&dq=fort+aguada&pg=PT120|title=Maritime Heritage of India|last=Navy|first=Indian|date=1989|publisher=Notion Press|isbn=978-93-5206-917-0|language=en}}</ref>
सालाज़ार प्रशासन के दौरान, फोर्ट अगुआडा को मुख्य रूप से सालाज़ार के राजनीतिक विरोधियों के लिए जेल के रूप में उपयोग करने के लिए पुनर्निर्मित किया गया था।
== अगुआडा प्रकाशस्तंभ ==
अगुआड़ा लाइटहाउस 1864 में किले के पश्चिम में स्थित एक पहाड़ी पर बनाया गया था। यह एशिया में सबसे पुराने में से एक है। यह [[मुरगाँव]] प्रायद्वीप और कैलंगुट बीच के बीच स्थित है। लगभग एक शताब्दी तक सेवा देने के बाद 1976 में इसे एक नए लाइटहाउस से बदल दिया गया। लाइटहाउस पर एक बड़ी घंटी थी जो पुराने गोवा में सेंट ऑगस्टीन मठ के खंडहरों में पाई गई थी।<ref name=":0" />{{wide image|Fort_Aguada_Panorama.JPG|850px|<small>फोर्ट अगुआडा का पैनोरमा
</small>|align-cap=center}}
== अगुआडा सेंट्रल जेल ==
अगुआड़ा सेंट्रल जेल किले का एक हिस्सा है और 2015 तक गोवा की सबसे बड़ी जेल थी। 17वीं शताब्दी की पुर्तगाली युग की संरचना को गोवा पर्यटन विकास निगम ने गोवा हेरिटेज एक्शन ग्रुप और गोवा के स्वतंत्रता सेनानियों के साथ मिलकर पुनर्निर्मित किया है और इसे पर्यटकों के लिए खोल दिया है। गोवा के स्वतंत्रता संग्राम को प्रदर्शित करने और गोवा की मुक्ति में भाग लेने वाले और भारत की आजादी के लिए ब्रिटिश शासन के खिलाफ लड़ने वाले और वहां जेल जाने वाले सभी लोगों के वीरतापूर्ण कार्यों और गौरवशाली बलिदानों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि देने के लिए पर्यटकों को एक स्वतंत्रता संग्राम संग्रहालय के रूप में स्थापित किया जाएगा। इसका उद्घाटन 19 दिसंबर 2021 को पीएम [[नरेन्द्र मोदी|नरेंद्र मोदी]] ने किया था। केंद्र की स्वदेश दर्शन योजना के तहत पुनर्विकास की लागत लगभग 22 करोड़ रुपये है। इस संग्रहालय में मुक्ति सेनानियों टी बी कुन्हा और राम मनोहर लोहिया को समर्पित दो विशेष कक्ष हैं, जहां उन्हें पुर्तगाली शासन के तहत कैद किया गया था। इस साइट में पुर्तगाली तोपें और गोवा के उपनिवेशवाद-विरोधी संघर्ष के कई स्मारक भी हैं।<ref>{{cite news|url=https://timesofindia.indiatimes.com/travel/travel-news/goas-aguada-jail-to-become-a-tourist-hotspot-post-renovation-in-march-2021/as80130312.cms|title=Goa's Aguada Jail to become a tourist hotspot post renovation in March 2021|author=<!--Staff writer(s)/no by-line.-->|date=6 January 2021|work=[[The Times of India]]|access-date=20 December 2021|location=[[Goa]]}}</ref><ref>{{cite news|url=https://www.outlookindia.com/website/story/india-news-goa-unlocked-aguada-jail-to-become-tourist-attraction-by-march/369603|title=Goa Unlocked: Aguada Jail To Become Tourist Attraction By March|author=<!--Staff writer(s)/no by-line.-->|date=6 January 2021|work=[[Outlook (Indian magazine)]]|access-date=20 December 2021|location=}}</ref><ref>{{cite news|url=https://www.indiatoday.in/travel/travel-buzz/story/you-will-finally-be-able-to-visit-this-place-in-goa-as-a-tourist-fort-aguada-central-jail-gtdc-travel-india-324167-2016-05-18|title=This jail in Goa is set to become famous, and you won't believe why!|author=<!--Staff writer(s)/no by-line.-->|date=18 May 2016|work=[[India Today]]|access-date=20 December 2021|location=}}</ref><ref>{{cite news|url=https://www.livemint.com/news/india/goa-pm-arrives-to-inaugurate-multiple-development-projects-on-liberation-day-11639903681752.html|title=Goa: PM arrives to inaugurate multiple development projects on Liberation Day|last=Biswas|first=Sayantani|date=19 December 2021|work=[[Mint (newspaper)|Mint]]|access-date=20 December 2021|location=[[Panaji]]}}</ref><ref>{{cite news|url=https://timesofindia.indiatimes.com/city/goa/pm-likely-to-open-aguada-museum-on-december-19/articleshow/86152384.cms|title=PM likely to open Aguada museum on December 19|author=<!--Staff writer(s)/no by-line.-->|date=13 September 2021|work=[[The Times of India]]|access-date=20 December 2021|location=[[Calangute]]}}</ref>
== ताज फोर्ट अगुआडा रिज़ॉर्ट ==
[[ताज एक्जॉटीका रिज़ॉर्ट|ताज फोर्ट अगुआडा रिज़ॉर्ट]] जिसे पहले फोर्ट अगुआडा बीच रिज़ॉर्ट के नाम से जाना जाता था, [[ताज होटल्स रिसॉर्ट्स एंड पैलेसेज|ताज होटल समूह]] का हिस्सा है। यह होटल 1974 में ऐतिहासिक पुर्तगाली किले अगुआडा के स्थल पर खोला गया था। <ref>{{Cite web|url=http://www.uniindia.net/taj-fort-aguada-beach-resort-spa-gets-new-general-manager/business-economy/news/1129488.html|title=Taj Fort Aguada Beach Resort & Spa gets new General Manager}}{{Dead link|date=मई 2026 |bot=InternetArchiveBot }}</ref>
== गैलरी ==
<gallery class="center" widths="150px" heights="150px" caption="फोर्ट अगुआडा चित्र">
चित्र:Aguada_Fort_,_Goa,_India.JPG
चित्र:Fort_Aguada,_Goa.jpg
चित्र:Fort_Aguada_Goa.JPG|पाठ=Fort Aguada lighthouse|फोर्ट अगुआडा लाइटहाउस
चित्र:FortAquada1.jpg|पाठ=Information Plaque|सूचना
चित्र:FortAquada2.jpg
चित्र:FortAquada5.jpg
चित्र:FortAquada4.jpg
चित्र:Fort_Aguada_Light_House_.jpg
चित्र:Fort_Aguada_Light_House_1.jpg
चित्र:Fortification_wall_of_Auguda_Fortress_1_(_Lower_).jpg|पाठ=Fortification wall of Aguada Fortress (Lower)|अगुआडा किले की किलाबंदी दीवार (निचला)
चित्र:Fortification_wall_of_Auguda_Fortress_4_(_Lower_).jpg|पाठ=Fortification wall of Aguada Fortress (Lower)|अगुआडा किले की किलाबंदी दीवार (निचला)
चित्र:Auguda_Fortress_2_(_Upper_).jpg|पाठ=Aguada Fortress (Upper)|अगुआडा किला (उपाधि)
चित्र:Auguda_Fortress_5_(_Upper_).jpg|पाठ=Aguada Fortress (Upper)|अगुआडा किला (उपाधि)
चित्र:Auguda_Fortress_7_(_Upper_).jpg|पाठ=Aguada Fortress (Upper)|अगुआडा किला (उपाधि)
चित्र:Auguda_Fortress_8_(_Upper_).jpg|पाठ=Aguada Fortress (Upper)|अगुआडा किला (उपाधि)
चित्र:Auguda_Fortress_10_(_Upper_).jpg|पाठ=Aguada Fortress (Upper)|अगुआडा किला (उपाधि)
चित्र:Agoda_Goa_RajakumarDhaamodharan.jpg|पाठ=Agoda Goa RajakumarDhaamodharan|अगुआडा गोवा
चित्र:Aguada_Fort_-_Sinquerim_Beach_-_Goa_-_0001.jpg|पाठ=Part of Aguada Fort, Sinquerim Beach, Goa|अगुआडा किला का हिस्सा, सिंक्वेरिम बीच, गोवा
</gallery>
== संदर्भ ==
{{टिप्पणीसूची}}
== बाहरी कड़ी ==
* [http://indiatourism.ws/goa/fort_aguada/ फोर्ट अगुआडा] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20201024011229/http://indiatourism.ws/goa/fort_aguada/ |date=24 अक्तूबर 2020 }} - गोलाकार चित्रमाला 360°.
{{भारत के किले}}
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फोर्ट बॉयर्ड (गेम शो)
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text/x-wiki
{{Infobox television
| image =
| caption =
| alt_name = ''Les Clés de Fort Boyard''
| genre = गेम शो
| creator = [[जैक्स एंटोनी]]<br/>जीन-पियरे मित्रेसी<br/>पियरे लॉने
| presenter = '''फ्रांस'''<br>[[पैट्रिस लाफोंट]] (1990-1999)<br>[[जीन-पियरे कास्टाल्डी]] (2000-2002)<br>[[ओलिवियर मिन्ने]] (2003-वर्तमान )<br>'''यूनाइटेड किंगडम'''<br>[[मेलिंडा मैसेंजर]] (1998-2001)<br>जोडी पेनफ़ोल्ड (2003)
| starring = '''फ्रांस'''<br>सेंड्रिन डोमिन्ग्यूज़ (1993-2002)<br>'''यूनाइटेड किंगडम'''<br>[[लेस्ली ग्रांथम]] (1998–2001)<br>[[क्रिस्टोफर एलिसन]] (2003)<br>[[जेफ्री बेल्डन]] (1998–2001)<br>[[टॉम बेकर]] (2003)
| theme_music_composer = [[पॉल कौलाक]]
| country = फ्रांस
| num_series = 173 (कुल मिलाकर, आज तक सभी देश)<br/>30 (फ्रेंच संस्करण)<br/>5 (अंग्रेजी संस्करण)
| num_episodes = 1,856 (कुल योग, सभी देश आज तक)<br/>338 (फ्रेंच संस्करण, 2019 सीज़न के अंत में)<br/>78 (अंग्रेजी संस्करण)
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| runtime = यूके: 60 मिनट (विज्ञापन सहित)<br/>फ्रांस: 130 मिनट (2015–), 60–120 मिनट (1990–2010), 100 मिनट (2011–13), 110 मिनट (2014)
| company = [[एडवेंचर लाइन प्रोडक्शंस]]<br/>'''यूनाइटेड किंगडम'''<br/>[[रेग ग्रुंडी प्रोडक्शंस|ग्रुंडी प्रोडक्शंस]] (1998–2001)<br/>[[थेम्स टेलीविज़न|थेम्स]] (2001)<br/>रोनिन टीवी (2003)
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| related = ''[[द क्रिस्टल मेज़]]''<br>''[[द डेजर्ट फोर्जेस]]''<br/>''{{nowrap|[[#फोर्ट बॉयर्ड: टेक्स ऑन द वर्ल्ड|फोर्ट बॉयर्ड: टेक्स ऑन द वर्ल्ड]]}}''<br/>''[[फोर्ट बॉयर्ड: अल्टीमेट चैलेंज]]''<br/>''{{ill|बॉयर्ड लैंड|fr}}''
}}
'''''फोर्ट बोयार्ड''''', जैक्स एंटोनी द्वारा विकसित एक फ्रांसीसी गेम-शो, पहली बार 7 जुलाई 1990 को प्रसारित किया गया था (मूल रूप से ''लेस क्लेज़ डी फोर्ट बोयार्ड'' के रूप में, हालांकि 1991 में दूसरी श्रृंखला से ''फोर्ट बोयार्ड'' के रूप में छोटा कर दिया गया)। 1990 से अब तक इस शो के कई विदेशी संस्करण, कुल 1,800 से अधिक एपिसोड, दुनिया भर में प्रसारित हो चुके हैं।
फ्रांस के पश्चिमी तट पर इसी नाम के वास्तविक किले पर स्थापित और फिल्माया गया यह कार्यक्रम ब्रिटिश गेम शो ''द क्रिस्टल मेज'' (फरवरी 1990 से आगे) के समान प्रतीत होता है, जिसे एंटोनी द्वारा यूनाइटेड किंगडम में [[चैनल 4]] के लिए वैकल्पिक प्रारूप के रूप में बनाया गया था, क्योंकि उस समय किले के जीर्णोद्धार का कार्य चल रहा था (1989 के दौरान)। दोनों कार्यक्रमों में प्रतियोगियों को पुरस्कार राशि जीतने के लिए चुनौतियां पूरी करनी होंगी। हालांकि, जहां ''क्रिस्टल मेज में'' खेलों के प्रकार में काफी भिन्नता है, वहीं ''फोर्ट बॉयर्ड'' मुख्य रूप से शारीरिक और सहनशक्ति चुनौतियों पर ध्यान केंद्रित करता है। हालांकि ''फोर्ट बोयार्ड'' खेल-शो के डर और रोमांच के क्षेत्र में अग्रणी था, लेकिन बाद के कार्यक्रमों जैसे कि ''फियर फैक्टर ने'' चीजों को और भी आगे बढ़ाया, जिसके लिए ''फोर्ट बोयार्ड को'' नए मोड़ और खेलों के साथ प्रतिक्रिया और अनुकूलन करना पड़ा, जिसमें कुछ सीज़न शामिल हैं जिनमें प्रतियोगियों ने फोर्ट में रात बिताई (यह फ्रांसीसी और रूसी संस्करणों में विशेष रूप से लोकप्रिय साबित हुआ)।
''फोर्ट बोयार्ड'' सबसे अधिक निर्यात किया जाने वाला फ्रांसीसी टीवी प्रारूप है और <nowiki><i id="mwKQ">वाइपआउट</i></nowiki>, ''फियर फैक्टर'' और <nowiki><i id="mwLQ">सर्वाइवर</i></nowiki> के बाद दुनिया में चौथा सबसे अधिक निर्यात किया जाने वाला साहसिक शैली का गेम शो प्रारूप है। 2019 में, फ्रांस 2 चैनल ने ''{{अंतरभाषा कड़ी|Boyard Land|fr}}'' नामक एक स्पिन-ऑफ लॉन्च किया .
== इतिहास और पृष्ठभूमि ==
=== सृजन ===
[[चित्र:Aix-Fort-Boyard.jpg|बाएँ|अंगूठाकार|250x250पिक्सेल|1989 में चित्रित फोर्ट बॉयर्ड, अपने मूल पहुँच मंच के साथ नवीनीकरण कार्य के दौरान पहले से ही स्थापित है। [[संतरी बुर्ज|प्रहरीदुर्ग]] का अभी तक पुनर्निर्माण नहीं किया गया है।]]
1980 में, एंटेन 2 के ला चासे ऑक्स ट्रेजर्स (ट्रेजर हंट का मूल, फ्रांसीसी संस्करण) के सह-प्रस्तुतकर्ता फिलिप डी डियूलेवेल्ट [फ्रा] उबड़-खाबड़ समुद्रों में फोर्ट बॉयर्ड तक पहुंचने की कोशिश करते हुए डूबने के करीब आ गए।[fr] हेलीकॉप्टर द्वारा बचाए जाने से पहले वह 3 घंटे तक फंसे रहे। इस प्रकरण ने टीवी गेम शो फोर्ट बॉयर्ड के निर्माण में जैक्स एंटोनी (ला चासे ऑक्स ट्रेसोरस के निर्माता) को प्रेरित किया।<ref>{{Cite web|url=http://www.fortboyard.net/Episode-5-1913-1980-De-l-abandon-a.html|title=Episode 5 : 1913 - 1980 : De l'abandon à sa nouvelle vie - FortBoyard.net - Le premier site français sur Fort Boyard - saison 2018|website=www.fortboyard.net|access-date=22 December 2018}}</ref>
ट्रेजर हंट को सफल बनाने के लिए एक गेम शो खोजने के लिए एंटोनी की कंपनी में एक बैठक में 1986 में फोर्ट बॉयर्ड की अवधारणा की कल्पना और रूपरेखा तैयार की गई थी।<ref name="Book">{{Cite book|title=Les secrets de Fort Boyard|last=Mitrecey|last2=Perceva|date=2009|publisher=Fetjaine|isbn=978-2354251703|pages=12, 19, 29, 32, 41}}</ref> एक टीम गेम शो का विचार, जो भूमिका निभाने वाले खेल जैसे कि डंगऑन एंड ड्रैगन्स से अनुकूलित है, जो असाधारण पात्रों से भरे एक रहस्यमय टावर में हो रहा है, जिसका लक्ष्य एक खजाना खोजना है, आने वाले वर्षों में आकार लेता है।
एक सेट की तलाश में, एक प्रोडक्शन टीम ने अप्रैल 1987 में फोर्ट बॉयर्ड का दौरा किया और यह किलेबंदी, पेर्टी डी 'एंटियोचे जलडमरूमध्य में इले-डी' एक्स और इले डी 'ओलेरॉन के बीच स्थित है, जिसे नवंबर 1988 में डेढ़ मिलियन फ़्रैंक में खरीदा गया था।<ref name="Book" /> उत्पादन कंपनी ने किले को एक प्रतीकात्मक फ्रैंक के लिए चारेंटे-मैरीटाइम विभाग को फिर से बेच दिया, जिसके परिणामस्वरूप स्थानीय प्राधिकरण को जुलाई 1989 से हुए सभी नवीनीकरण कार्यों का प्रभार लेना पड़ा, और एंटोनी की उत्पादन कंपनी को साइट का विशेष उपयोग सुनिश्चित किया।<ref name="Book" /> मौसम की स्थिति के कारण, शो के लिए सेट का निर्माण दो चरणों में किया गया थाः नवीनीकरण की शुरुआत और अक्टूबर 1989 के बीच फिर अगले वसंत, और 30 जून 1990 को फिल्मांकन के पहले दिन से कुछ समय पहले पूरा किया गया था।<ref name="Book" /> मूल फ्रांसीसी संस्करण, लेस क्लेस डी फोर्ट बॉयर्ड (अंग्रेज़ीः द कीज़ ऑफ़ फोर्ट बॉयर्ड) के नाम से 7 जुलाई 1990 को प्रसारित होना शुरू हुआ, जिसकी मेजबानी पैट्रिस लैफ़ॉन्ट और मूल रूप से मैरी टैलन, बाद में सोफी डेवेंट ने एंटीना 2 पर की।
=== 1989-90: ब्रिटेन में अवधारणा की बिक्री ===
गेम शो फोर्ट बॉयर्ड (जिसे तब लेस क्लेस डी फोर्ट बॉयर्ड के नाम से जाना जाता था) को खरीदने वाला पहला देश यूनाइटेड किंगडम और प्रसारक [[चैनल 4]] था। फ्रांसीसी निर्माताओं, निर्माण कंपनी चैट्सवर्थ टेलीविजन (उस समय चैनल 4 के ट्रेजर हंट और आई. टी. वी. के इंटरसेप्टर के निर्माता, दोनों भी एंटोनी द्वारा बनाए गए गेम शो ने एक ब्रिटिश संस्करण तैयार करने का फैसला किया और एक अवधारणा बनाने पर काम करना शुरू कर दिया। मेजबान रिचर्ड ओ 'ब्रायन के अनुसार, मूल रूप से रेखांकित अवधारणा "कुछ हद तक ''डंगऑन और ड्रैगन'' की तरह" थी, जिसमें प्रस्तुतकर्ता "डंगऑन मास्टर" के रूप में काम कर रहा था।
==== लंदन में पायलट शो का फिल्मांकन ====
चैनल 4 द्वारा वित्तपोषित इस शो का एक गैर-टेलीविजन पायलट ओ'ब्रायन द्वारा प्रस्तुतकर्ता के रूप में लंदन के एक स्टूडियो में फिल्माया गया था, क्योंकि उस समय किला अपने चल रहे जीर्णोद्धार कार्य के कारण उपलब्ध नहीं था। ओ'ब्रायन के पायलट का फुटेज, प्रारूप के ''"ट्रेजर रूम"'' खंड के लिए प्रारंभिक विचार दिखा रहा है, बाद में मई 1990 में प्रसारित फ्रांसीसी संस्करण के लिए कास्टिंग कॉल विज्ञापन में दिखाई देता है। <ref>{{Cite web|url=http://www.bothersbar.co.uk/?p=8792|title=Is this Richard O' Brien on Fort Boyard?|date=11 August 2015|website=Bothersbar.co.uk|access-date=23 December 2018}}</ref> पायलट के अधिक फुटेज, जिसमें मूल सेट डिजाइन और कुछ प्रमुख गेम शामिल हैं (जिनमें से अधिकांश श्रृंखला में दिखाई देंगे), ''फोर्ट बॉयर्ड'' में दिखाए गए हैं'' : हमेशा और हमेशा!'' 22 जून 2019 को 30वें फ्रेंच सीज़न के पहले एपिसोड के बाद। <ref>{{Cite web|url=http://www.bothersbar.co.uk/?p=12351|title=OMG, it's about a minute of the Richard O Brien Fort Boyard pilot.|last=Bother|first=Brig|date=2019-06-22|website=Bother's Bar|language=en-US|access-date=2019-07-04}}</ref> 2009 में सह-निर्माता मिटरसी के अनुसार, पायलट को फरवरी 1989 में एल्स्ट्री स्टूडियो में फिल्माया गया था। छह अंग्रेजी प्रतियोगियों ने भाग लिया। यथासम्भव वास्तविकता के करीब पहुंचने के लिए, किले का एक चौथाई हिस्सा स्टूडियो में धातु संरचनाओं का उपयोग करके बनाया गया था, जिसमें गेम खेलने के लिए 18 कक्ष स्थापित किए गए थे, जिनका परीक्षण पहली बार किया गया था। रिकॉर्डिंग में बाघ भी मौजूद थे, साथ ही स्फिंक्स की एक बड़ी मूर्ति भी थी जो पहेलियाँ बना रही थी (बाद में वॉचटावर में फादर फौरास चरित्र के निर्माण के साथ इस विचार को थोड़ा संशोधित किया गया था) और पहलवान जैसे कुछ पात्र भी थे। ओ'ब्रायन के अनुसार, पायलट की रिकॉर्डिंग की लागत 2 मिलियन फ़्रैंक (लगभग €304,900) थी, जो उस समय एक रिकॉर्ड थी। <ref>{{Cite web|url=https://www.fan-fortboyard.fr/blog/saisons-1990-2005/les-maitres-des-jeux-tele-un-documentaire-sur-les-jeux-teles-avec-des-images-du-pilote-de-fort-boyard-le-dimanche-22-decembre-2019-sur-france-5.html|title="Les Maîtres des jeux télé" : un documentaire sur les jeux télé avec des images du pilote de Fort Boyard, le dimanche 22 décembre 2019 sur France 5|website=www.fan-fortboyard.fr|access-date=22 December 2019}}</ref> जून 2022 में, पायलट का एक बीस मिनट का संपादन पियरे लाउने द्वारा सोशल मीडिया पर अपलोड किया गया था। <ref>{{Cite web|url=https://www.bothersbar.co.uk/?p=14089|title=The actual real motherlode|last=Bother|first=Brig|date=21 June 2022|website=Bothersbar.co.uk|access-date=26 June 2022}}</ref>
ऐसा कहा जाता है कि चैनल 4 प्रारूप में जो महत्वपूर्ण परिवर्तन करना चाहता था, वह फोर्ट पर संभव नहीं हो सका, क्योंकि उस समय अपना संस्करण तैयार करने वाले प्रत्येक प्रसारणकर्ता को फ्रांसीसी प्रारूप का सख्ती से पालन करना पड़ता था। चैटस्वर्थ को भी फ्रांसीसी निर्माताओं द्वारा नवंबर 1989 में पहले अपने संस्करण को फिल्माने के लिए कहा गया था, लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया। <ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=R-YoDwAAQBAJ|title=The Crystal Maze Challenge: Let The Games Begin!|last=Simpson|first=Neale|date=19 October 2017|publisher=Headline|isbn=9781472250407|access-date=22 December 2019|via=Google Books}}</ref> चूंकि चैनल 4 ने इस शो को एक पूर्ण श्रृंखला के लिए कमीशन किया था, इसलिए निर्माता मैल्कम हेवर्थ ने ''फोर्ट बोयार्ड'' के निर्माता जैक्स एंटोनी से एक वैकल्पिक प्रारूप विकसित करने के बारे में संपर्क किया, तथा प्रस्ताव दिया कि शो को दृश्यात्मक रूप से ताजा बनाए रखने के लिए विषयगत क्षेत्रों का उपयोग किया जाए। ''क्रिस्टल भूलभुलैया'' की अवधारणा को सिर्फ "दो दिनों" में विकसित किया गया था, जिससे एक ऐसा खेल तैयार हुआ जो कि ''फोर्ट बॉयर्ड'' के समान होने के बावजूद प्रस्तुति और शैली के मामले में काफी अलग है। <ref name="fortboyardpilot">{{Cite web|url=http://www.robcrusade.com/articles/adhoc.html|title=The Richard O'Brien Crusade|date=21 September 2013|archive-url=https://web.archive.org/web/20130921055401/http://www.robcrusade.com/articles/adhoc.html|archive-date=21 September 2013|access-date=22 December 2018}}</ref> चैनल 4 का ''द क्रिस्टल मेज'' पहली बार 15 फरवरी 1990 को प्रसारित हुआ, जो कि फ्रांसीसी श्रृंखला से पांच महीने पहले था।
=== बाद के यूके संस्करण ===
बाद में चैनल 5 ने ''फोर्ट बोयार्ड'' के अधिकार खरीद लिए और अब नवीनीकृत सेट का उपयोग करते हुए अपना स्वयं का ब्रिटिश संस्करण बनाया, जो 16 अक्टूबर 1998 से 29 दिसम्बर 2001 तक चार श्रृंखलाओं के लिए प्रसारित किया गया। इसका निर्माण पॉल किरेज ने किया तथा इसका कार्यकारी निर्माण रिचर्ड होलोवे ने किया, जो बाद में ग्रुंडी प्रोडक्शंस (बाद में 2001 में टेम्स टेलीविजन ) के लिए ''द एक्स फैक्टर'' और यूके टेलीविजन पर अन्य उच्च-प्रोफ़ाइल शो के निर्माण के लिए जाने गए। हालांकि चैनल के लिए उचित रेटिंग प्राप्त करने के बावजूद, मार्च 2002 में यह घोषणा की गई कि चैनल 5 ने स्टेशन के पुनरुद्धार के हिस्से के रूप में शो को रद्द कर दिया है। <ref>{{Cite web|url=https://www.theguardian.com/media/2002/mar/06/channelfive.broadcasting|title=Ambitious Channel 5 cleans up its acts|last=Wells|first=Matt|date=6 March 2002|website=The Guardian|access-date=7 December 2016}}</ref> <ref>{{Cite news|url=http://news.bbc.co.uk/1/hi/entertainment/1857823.stm|title=Channel 5 heads for 'new direction'|date=6 March 2002|work=BBC News|access-date=7 December 2016}}</ref>
इसे 2003 में चैलेंज द्वारा एक श्रृंखला के लिए संक्षिप्त रूप से पुनर्जीवित किया गया, जिसमें एक दस-भाग की डॉक्यूमेंट्री, ''फोर्ट बोयार्ड: टेक्स ऑन द वर्ल्ड'', अक्टूबर 2004 में प्रसारित की गई। ''फोर्ट बोयार्ड'' बाद में जनवरी 2012 में बच्चों के चैनल CITV, ''फोर्ट बोयार्ड: अल्टीमेट चैलेंज'' पर प्रसारित एक नए प्रारूप के तहत यूके टेलीविजन पर लौट आया। यह संस्करण पांच श्रृंखलाओं के बाद दिसंबर 2014 में समाप्त हो गया, जिनमें से पहले दो संयुक्त राज्य अमेरिका में डिज्नी एक्सडी के साथ सह-निर्मित थे।
== ढालना ==
=== यूके कास्ट ===
ब्रिटेन में, ''फोर्ट बोयार्ड'' के लिए प्रस्तुतकर्ताओं के दो सेटों का उपयोग किया गया है। पहला सेट शो की पहली चार श्रृंखलाओं के दौरान प्रदर्शित हुआ था, जो चैनल 5 द्वारा प्रसारित किए गए थे, जबकि दूसरा सेट 2003 चैलेंज में प्रसारित पांचवीं श्रृंखला में प्रदर्शित हुआ था। चैनल 5 और चैलेंज पर ''फोर्ट बॉयर्ड'' के प्रमुख प्रस्तुतकर्ता मेलिंडा मैसेंजर (श्रृंखला 1-4) और जोडी पेनफोल्ड (श्रृंखला 5) थे। उनकी भूमिकाएं टीमों को सलाह और समर्थन देना, दर्शकों के लिए कमेंट्री करना, और "फोर्ट के मास्टर" बोयार्ड के साथ बुद्धिमता का मुकाबला करना था।
''फ़ोर्ट बोयार्ड'' के अन्य पात्र हैं:
* '''बोयार्ड''' (श्रृंखला 1-4 में लेस्ली ग्रांथम द्वारा, श्रृंखला 5 में क्रिस्टोफर एलिसन द्वारा अभिनीत) " '''किले का मास्टर''' " है, जो चुनौतियों को निर्धारित करता है जिन्हें टीम को जीतने के लिए पूरा करना होगा। शो के यूके संस्करण में उन्हें एक स्वार्थी, आदेशकारी और द्वेषपूर्ण चरित्र के रूप में चित्रित किया गया है, जो यह सुनिश्चित करने में बहुत आनंद लेता है कि प्रतिभागियों को भय और असफलता का सामना करना पड़े। ग्रांथम ने इन गुणों को थोड़ा अधिक सशक्त रूप से चित्रित किया, जिसमें एलिसन कभी-कभी सहानुभूति दिखाती थीं, या यहां तक कि प्रतियोगियों के प्रति उदार भी होती थीं।
* '''प्रोफेसर''' ( जेफ्री बेल्डन, श्रृंखला 1-4) एक विलक्षण वैज्ञानिक है, जो 'वॉच टॉवर' में ''बोयार्ड'' द्वारा बंदी बनाए जाने के परिणामस्वरूप वर्षों से पागल हो गया है। उनका कार्य प्रतियोगियों से पहेलियां पूछना है, जिनका सही उत्तर देने पर टीम को एक महत्वपूर्ण या सुराग मिल जाएगा। यदि वे सही उत्तर नहीं देंगे तो वह चाबी समुद्र में फेंक देगा। ''कैप्टन बेकर'' के साथ, वह पहेलियां पूछने से पहले प्रतियोगियों और दर्शकों से भी संक्षिप्त बातचीत करते हैं।
* '''कैप्टन बेकर''' ( टॉम बेकर, श्रृंखला 5), ''प्रोफेसर'' का प्रतिस्थापन, एक पागल समुद्री कप्तान है जिसे ''बोयार्ड'' द्वारा बंदी बना लिया गया है। वह पांचवीं श्रृंखला के प्रत्येक एपिसोड के अंत में कोड वर्ड का भी खुलासा करेंगे।
=== ''फ़ोर्ट बोयार्ड'' कास्ट ===
[[चित्र:Passe_Partout.jpg|अंगूठाकार|225x225पिक्सेल| आंद्रे बूचेट, 2009. (पासे-पार्टाउ)]]
इसमें ''फोर्ट बॉयर्ड के'' निवासी कलाकार भी हैं, जो पहली बार फ्रांसीसी संस्करण में दिखाई दिए थे, और बाद में मूल यूके संस्करणों सहित अधिकांश अन्य अंतर्राष्ट्रीय प्रारूपों में दिखाए गए थे, हालांकि इन सभी को ''फोर्ट बॉयर्ड: अल्टीमेट चैलेंज'' के लिए बाहर रखा गया था:
2014 तक, फ्रेंच संस्करण में 41 अक्षर थे। इनमें से अधिकांश किले पर विभिन्न खेलों में दिखाई दिए।
== प्रसिद्ध प्रतियोगी ==
=== फ्रेंच श्रृंखला ===
1993 से, शो के फ्रांसीसी संस्करण की टीमें पूरी तरह से मशहूर हस्तियों से बनी होती हैं। इनमें शामिल हैं: साइकिल चालक लॉरेंट फ़िग्नन, 2019 में फॉर्मूला 1 ड्राइवर रोमेन ग्रोसजेन, फिगर स्केटिंग चैंपियन ब्रायन जौबर्ट (2004, 2007, 2008 और 2012 में दिखाई दिए), जिब्रिल सिसे, उमर साय, [[रिद्म एंड ब्लूज़|आर एंड बी]] गायक लेस्ली (2002, 2003 और 2013 में), 2009 में टोनी पार्कर और ईवा लोंगोरिया, और कई अन्य। शो के कई पूर्व/नए होस्ट अक्सर प्रतियोगी के रूप में दिखाई देते हैं।
1997 में बॉयबैंड की एक श्रृंखला प्रदर्शित की गयी। इनमें 2Be3 और वर्ल्ड्स अपार्ट शामिल हैं।
हालाँकि, 2010 में फार्मूला नाटकीय रूप से बदल दिया गया और चार सदस्यों वाली टीम में कोई भी सेलिब्रिटी शामिल नहीं था। उस वर्ष "द्वंद" प्रारूप का प्रयोग किया गया था। ये सेलिब्रिटी 2011 में चैरिटी के लिए खेलते हुए वापस लौटे। 2019 में फ्रांसीसी [[२०१८ फीफा विश्व कप|विश्व कप]] विजेता फुटबॉलर [[आदिल रामी|आदिल रामी को]] शो में आने के लिए कथित तौर पर प्रशिक्षण से गायब रहने के कारण [[ओलिम्पिक डी मार्सिले|ओलंपिक डी मार्सिले]] द्वारा बर्खास्त कर दिया गया था। <ref>{{Cite web|url=https://www.gala.fr/l_actu/news_de_stars/affaire-adil-rami-lemission-fort-boyard-dans-la-tourmente_431615|title=Affaire Adil Rami : l'émission Fort Boyard dans la tourmente - Gala|last=Média|first=Prisma|date=29 June 2019|website=Gala.fr}}</ref>
=== यूके श्रृंखला ===
26 दिसंबर 1999 को, ''फोर्ट बॉयर्ड'' का एक सेलिब्रिटी संस्करण प्रसारित किया गया, जिसमें फ्रैंक ब्रूनो, सैमुअल केन, ग्लेंडा मैके, गैबी लोगान और शेरॉन डेविस प्रतियोगी के रूप में शामिल थे। <ref>[http://www.memorabletv.com/quizshows/quizshowsftoh.htm Memorable TV's Guide to Quiz and Game Shows] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20021219031827/http://www.memorabletv.com/quizshows/quizshowsftoh.htm|date=19 December 2002}} – Memorable TV – Retrieved 27 September 2006</ref> एक बार के लिए, शो की अवधि 80 मिनट तक बढ़ा दी गई ताकि टीम को पांच चाबियाँ (चार के बजाय) और कोड शब्द पचास-पांच मिनट में प्राप्त करना पड़े। फ्रैंक ने टीम की कप्तानी की और अपने नामित चैरिटी के लिए £7,910 की धनराशि जीती।
श्रृंखला 3 ने 1999 के विशेष कार्यक्रम की सफलता के बाद ''फोर्ट बॉयर्ड'' के दो सेलिब्रिटी संस्करण प्रसारित किए; 5 जनवरी और 25 अगस्त 2001 को प्रसारित, <ref>{{Cite web|url=http://www.fremantlearchivesales.com/footage_details.aspx?ID=107431&FremantleSource=2|title=Fremantle Archive Sales – Fort Boyard|publisher=FremantleMedia|archive-url=https://archive.today/20130124082357/http://www.fremantlearchivesales.com/footage_details.aspx?ID=107431&FremantleSource=2|archive-date=2013-01-24}}</ref> एक संस्करण में रोड्री विलियम्स, लिसा रोजर्स, "हैंडी" एंडी केन, ट्रिसिया पेनरोज़ और फिल गेल प्रतियोगियों के रूप में शामिल थे। रोड्री टीम के कप्तान थे और टीम ने चैरिटी के लिए £14,350 की धनराशि जीती। दूसरे में अन्ना वॉकर, विक्टर उबोगु, एनालीज़ ब्राकेनसिएक, टिम विंसेंट और ट्रॉय टाइटस-एडम्स शामिल थे। अन्ना वॉकर ने टीम की कप्तानी की और उन्होंने चैरिटी के लिए £7,190 की धनराशि जीती।
2001 में श्रृंखला चार (एपिसोड 14) के अंत में एक और सेलिब्रिटी संस्करण प्रसारित हुआ जिसमें सैली ग्रे, स्कॉट राइट, नेल मैकएंड्रू, कीथ डफी और ट्रिस पायने शामिल थे। सैली ग्रे टीम की कप्तान थीं और टीम ने चैरिटी के लिए £10,130 की धनराशि जीती। 13 अक्टूबर 2001 को प्रसारित श्रृंखला 4 का एपिसोड 4, ''द मोल'' की पहली श्रृंखला के प्रतियोगियों की एक विशेष विशेषता थी।
2003 की श्रृंखला के दौरान चैलेंज द्वारा सेलिब्रिटी संस्करण भी प्रसारित किए गए थे। इसमें डग विलियम्स, पॉल बर्चिल, निकिता, जेम्स टिघे और स्वीट सराया शामिल थे, जो सभी ब्रिटिश प्रमोशन FWA के कुश्ती सितारे थे। डग विलियम्स ने टीम की कप्तानी की और £190 जीते। श्रृंखला 5 में प्रदर्शित होने वाली अन्य हस्तियों में <nowiki><i id="mwAS0">बिग ब्रदर</i></nowiki> 2000 के विजेता टिम वाइन और क्रेग फिलिप्स शामिल थे। टीम ने चैरिटी के लिए £1,820 जीते, जिसे £5,000 से और बढ़ा दिया गया क्योंकि टिम वाइन ने एक मिनट में 10 चुटकुले सुनाने की चुनौती स्वीकार की थी।
=== अन्य श्रृंखला ===
डेनिश और स्वीडिश संस्करणों की अधिकांश श्रृंखलाओं में, टीमें पूरी तरह से मशहूर हस्तियों से बनी होती हैं। फिनिश संस्करण की 2010 और 2012 श्रृंखला में, टीम के सदस्य सेलिब्रिटी थे। रूसी श्रृंखला के अधिकांश (या सभी) एपिसोड में प्रसिद्ध राष्ट्रीय गायक, अभिनेता, टीवी प्रस्तोता और खिलाड़ी शामिल थे।
2013 के कनाडाई संस्करण में, टीमों में कुल 24 प्रतिभागी थे; 12 मशहूर हस्तियां और 12 आम लोग, जिन्हें चार-चार की छह टीमों में बराबर-बराबर बांटा गया था।
1999 और 2000 में प्रसारित इस शो के अर्जेंटीनी संस्करण में एक सेलिब्रिटी अन्य 4 लोगों के साथ शामिल होकर उनकी चुनौतियों में मदद करता था। अर्जेंटीना का संस्करण पहला ऐसा संस्करण था जिसमें एक महिला पात्र टावर की रखवाली कर रही थी: "ला दामा डेल फुएर्ते" जिसका किरदार इसाबेल अचावल ने निभाया था। इसके बाद 2000 में जर्मनी की सोन्या क्रॉस और तुर्की की यासेमिन कोज़ानोग्लू ने यह खिताब जीता। 4 जून 2019 को, स्वीडिश प्रसारक टीवी4 ने पुष्टि की कि सुज़ैन रॉयटर "मैडम फ़ोरास" की भूमिका में दिखाई देंगी। <ref>{{Cite web|url=https://www.tv4.se/f%C3%A5ngarna-p%C3%A5-fortet/artiklar/suzanne-reuter-%C3%A4r-g%C3%A5tst%C3%A4llare-i-nya-f%C3%A5ngarna-p%C3%A5-fortet-5cf67717cf4a379b210ee822|title=Suzanne Reuter är gåtställare i nya Fångarna på fortet - Fångarna på fortet|date=4 June 2019|website=tv4.se|access-date=15 August 2019}}</ref>
मोरक्को संस्करण में, जो 2015 के आरम्भ में प्रसारित हुआ था, लेकिन पिछले वर्ष फिल्माया गया था, चुनौतियों के लिए 3 मशहूर हस्तियां 2 अज्ञात लोगों के साथ टीमों में शामिल हुईं। ''जज़ीरत अल कंज़'' का पहला एपिसोड 24 फरवरी को प्रसारित हुआ और इसे 6.4 मिलियन लोगों ने देखा। मिलियन दर्शक, 2MTV के लिए रिकॉर्ड 59% दर्शक हिस्सेदारी। <ref>{{Cite web|url=http://www.aufait.ma/2015/03/05/2m-jazirat-al-kanz-fait-une-audience-record_638733|title=2M : " Jazirat Al Kanz " fait une audience record|website=Aufait Maroc|archive-url=https://web.archive.org/web/20150308140623/http://www.aufait.ma/2015/03/05/2m-jazirat-al-kanz-fait-une-audience-record_638733|archive-date=8 March 2015|access-date=28 March 2015}}</ref>
== दुनिया भर में ''फोर्ट बोयार्ड'' ==
[[चित्र:Fort_Boyard_States_play.svg|अंगूठाकार|350x350पिक्सेल| ''फ़ोर्ट बोयार्ड'' का अंतर्राष्ट्रीय संस्करण (मानचित्र 2018 तक सही है)]]
''फोर्ट बोयार्ड'' एक फ्रांसीसी गेम शो है जिसका प्रसारण पहली बार 1990 में हुआ था; हालांकि फोर्ट का उपयोग अन्य देशों के टेलीविजन स्टेशनों द्वारा भी अपने स्वयं के (आमतौर पर संशोधित) संस्करण बनाने के लिए किया जाता है, जिसमें मूल फ्रांसीसी शो की तकनीकी टीमों और पात्रों का उपयोग किया जाता है।
फिल्मांकन प्रत्येक वर्ष गर्मियों के महीनों (मई से जुलाई तक, तथा 2000 में बड़ी संख्या में देशों के भाग लेने के कारण अगस्त तक) के दौरान होता है। शो के विदेशी संस्करण आमतौर पर प्रति एपिसोड 22 से 80 मिनट तक चलते हैं, जो देश और प्रारूप पर निर्भर करता है। 1990 से अब तक दुनिया भर में कुल 34 विदेशी संस्करण प्रसारित हुए हैं। <ref>{{Cite web|url=https://www.fan-fortboyard.fr/pages/emission/versions-etrangeres-de-fort-boyard.html|title=Les versions étrangères de Fort Boyard|website=www.fan-fortboyard.fr|access-date=25 October 2018}}</ref>
मोरक्को संस्करण की रेटिंग सफलता के बाद, सितंबर 2019 से कैनाल+ अफ़्रीक पर फ्रेंच भाषी अफ्रीका के 24 देशों में एक अफ्रीकी संस्करण प्रसारित किया गया है। <ref>{{Cite news|url=http://fr.le360.ma/medias/jazirat-al-kanz-le-fort-boyard-marocain-a-la-conquete-de-lafrique-191394|title=Jazirat Al Kanz, le Fort Boyard marocain, à la conquête de l'Afrique|work=Le 360 Français|access-date=31 May 2019}}</ref>
=== प्रस्तावित संस्करण और पायलट ===
इटली ने ''फोर्ट बोयार्ड'' के लिए केवल 1991 में ही पायलट बनाया था। इस अप्रसारित संस्करण के मेजबान [[:it:Marco Predolin|मार्को प्रेडोलिन]] थे। उसी वर्ष फिल्माए गए [[अमेरिकन ब्रॉडकास्टिंग कंपनी|एबीसी]] के लिए अमेरिकी पायलट को अंततः 20 मार्च 1993 को प्रसारित किया गया। <ref>{{Cite web|url=https://www.gettyimages.in/detail/news-photo/pilot-7-91-aired-3-20-93-cathy-lee-crosby-hosted-this-pilot-news-photo/93406630|title=BOYARD - pilot - 7/91, aired 3/20/93, Cathy Lee Crosby hosted this...|date=25 November 2009|website=Getty Images|access-date=10 December 2019}}</ref>
दिसंबर 2005 में, यह बताया गया कि फ्रांसीसी निर्माता एडवेंचर लाइन प्रोडक्शंस देश में प्रारूप लाने के लिए लगभग तीन भारतीय प्रसारकों के साथ अंतिम बातचीत कर रहे थे; <ref>{{Cite news|url=https://economictimes.indiatimes.com/now-watch-indian-fort-boyard-soon/articleshow/1314374.cms|title=Now watch Indian 'Fort Boyard' soon|date=1 December 2005|work=The Economic Times|access-date=10 December 2019}}</ref> हालांकि अंत में ऐसा नहीं हुआ। अक्टूबर 2010 में यह बताया गया कि [[ब्राज़ील]] और [[तूनिसीया|ट्यूनीशिया ने]] 2011 में फिल्मांकन के लिए अनुबंध कर लिया है। हालाँकि, बाद में किसी भी देश के लिए कोई श्रृंखला नहीं बनाई गई। <ref>{{Cite web|url=http://realscreen.com/2010/10/01/fortboyard-20101001/|title=Fort Boyard storms across Europe; briefs|date=1 October 2010|publisher=Realscreen|access-date=26 August 2013}}</ref> दिसंबर 2012 में, यूक्रेनी चैनल आईसीटीवी ने घोषणा की कि वे देश में इस शो के दूसरे सीज़न का फिल्मांकन करने वाले हैं। हालाँकि, अज्ञात कारणों से फिल्मांकन नहीं हुआ। <ref>{{Cite web|url=https://www.segodnya.ua/lifestyle/showbiz/Novyy-TV-sezon-kasting-v-VIA-Gru-i-100-tysyach-za-suhie-shtany.html|date=12 December 2012|website=www.segodnya.ua|language=ru|script-title=ru:Новый ТВ-сезон: кастинг в "ВИА Гру" и 100 тысяч за сухие штаны|trans-title=New TV-season: casting in "VIA Gra" and 100 thousand for dry pants|access-date=7 January 2018|archive-date=8 जनवरी 2018|archive-url=https://web.archive.org/web/20180108063056/https://www.segodnya.ua/lifestyle/showbiz/Novyy-TV-sezon-kasting-v-VIA-Gru-i-100-tysyach-za-suhie-shtany.html|url-status=dead}}</ref> शो के चीनी संस्करण को सितंबर 2015 के मध्य में फिल्माए जाने की पुष्टि की गई थी, <ref>{{Cite news|url=http://www.sudouest.fr/2015/08/24/charente-maritime-fort-boyard-bientot-sous-pavillon-chinois-2104657-1391.php|title=Charente-Maritime : les Chinois investissent Fgrt Boyard|last=Aristégui|first=Marie-Claude|date=24 August 2015|access-date=24 August 2015|publisher=Sudouest.fr}}</ref> हालांकि बाद में सेंसरशिप की चिंताओं के कारण इसे रद्द कर दिया गया था। <ref>{{Cite news|url=http://www.sudouest.fr/2015/09/04/fort-boyard-la-tele-chinoise-annule-le-tournage-de-l-emission-par-peur-de-la-censure-2114877-1391.php|title=Fort Boyard : la télé chinoise annule le tournage de l'émission par peur de la censure|last=Briand|first=David|date=4 September 2015|access-date=5 September 2015|publisher=Sudouest.fr}}</ref>
=== कोविड-19 महामारी के प्रभाव ===
[[चित्र:Fort_Boyard_(51269094270).jpg|अंगूठाकार|250x250पिक्सेल| फ़ोर्ट बोयार्ड, जैसा कि फ़िल्मांकन अवधि के दौरान हवा से देखा गया (जून 2021)]]
2020 में, [[कोविड-19 विश्वमारी|COVID-19 महामारी]] के कारण, किसी भी विदेशी देश ने अपना संस्करण फिल्माने का विकल्प नहीं चुना। उस वर्ष प्रारंभ में छह देशों के भाग लेने की उम्मीद थी, जिनमें स्वीडन, मोरक्को, रूस और डेनमार्क शामिल थे। यह पहला और अब तक का एकमात्र वर्ष था जिसमें केवल फ्रांसीसी संस्करण ही फिल्माया गया था। स्वीडन, मोरक्को, यूक्रेन और पैन-अफ्रीकी संस्करणों ने महामारी से जुड़ी स्वास्थ्य बाधाओं के कारण 2021 के लिए फिल्मांकन रद्द कर दिया, हालांकि, नॉर्वे और पोलैंड ने पुष्टि की कि वे डेनमार्क और रूस के साथ वापस लौटेंगे। <ref>{{Cite web|url=https://fortboyard.tv/|title=FortBoyard.tv|website=FortBoyard.tv|access-date=23 June 2021}}</ref>
=== विशेष कार्यक्रम और उपोत्पाद ===
किले का उपयोग 2014, 2016 और 2019 में रूसी आगंतुकों द्वारा विशेष निजी कार्यक्रमों के लिए भी किया गया है <ref>{{Cite web|url=https://www.fan-fortboyard.fr/blog/saison-2014/fort-boyard-2014-les-tournages-francais-et-etrangers-2.html|title=Fort Boyard 2014: Les tournages français et étrangers [2]|date=17 July 2014|website=www.fan-fortboyard.fr|access-date=20 October 2018}}</ref> <ref>{{Cite web|url=https://www.fan-fortboyard.fr/blog/saison-2016/fort-boyard-2016-les-tournages-des-versions-etrangeres.html|title=Fort Boyard 2016: Les tournages des versions étrangères|date=6 July 2016|website=www.fan-fortboyard.fr|access-date=20 October 2018}}</ref> और 2011 से 2013 तक फ्रांसीसी प्रायोजक प्रिंस डी लू के लिए बच्चों की विशेषता वाले गैर-टेलीविज़न शो फिल्माए गए, <ref>{{Cite web|url=https://www.fan-fortboyard.fr/blog/saison-2013/prince-de-lu-2013-photos-du-tournage-des-emissions.html|title=Prince de LU 2013: Photos du tournage des émissions|date=10 July 2014|website=www.fan-fortboyard.fr|access-date=20 October 2018}}</ref> जिसमें ऐनी-गेले रिकियो मेजबान के रूप में लौटीं। <ref>{{Cite web|url=https://www.fan-fortboyard.fr/blog/saison-2011/anne-gaelle-riccio-toujours-animatrice-de-fort-boyard-en-2011.html|title=Anne-Gaëlle Riccio, toujours animatrice de Fort Boyard en 2011 !|date=24 July 2011|website=www.fan-fortboyard.fr|access-date=20 October 2018}}</ref> विली रोवेल्ली के शेफ चरित्र और खाने की चुनौती वाले आगे के मिनी-एपिसोड जून 2020 में फिल्माए गए और 14 अक्टूबर, 2020 से फ्रांस टेलीविज़न के बच्चों के ऑन-डिमांड प्लेटफॉर्म ''ओकू'' और इसकी वेबसाइट france.tv पर ऑनलाइन प्रीमियर किया गया। <ref>{{Cite web|url=https://www.fan-fortboyard.fr/blog/saison-2020/la-cuisine-de-willy-une-nouvelle-emission-avec-le-chef-willy-de-fort-boyard-des-le-14-octobre-2020-sur-okoo.html|title=''La Cuisine de Willy'' : une nouvelle émission avec le Chef Willy de Fort Boyard, dès le 14 octobre 2020 sur Okoo|website=www.fan-fortboyard.fr|archive-url=https://web.archive.org/web/20201020122841/https://www.fan-fortboyard.fr/blog/saison-2020/la-cuisine-de-willy-une-nouvelle-emission-avec-le-chef-willy-de-fort-boyard-des-le-14-octobre-2020-sur-okoo.html|archive-date=20 October 2020|access-date=18 November 2020}}</ref> जुलाई 2019 में यह पुष्टि की गई थी कि एक बड़ी स्टील कंपनी के एक अनाम रूसी अरबपति ने फोर्ट को तीन बार किराए पर लिया था, पहली बार 2014 में टीम बिल्डिंग सत्र के लिए और हाल ही में अपने 50वें जन्मदिन के लिए। <ref>{{Cite web|url=https://people.bfmtv.com/tv/fort-boyard-un-milliardaire-russe-privatise-les-lieux-pour-feter-ses-50-ans-1724079.html|title=Fort Boyard: un milliardaire russe privatise les lieux pour fêter ses 50 ans|last=BFMTV|website=BFMTV|language=fr|access-date=2019-07-04}}</ref>
=== अंतर्राष्ट्रीय संस्करण ===
'''दंतकथा:'''{{Color box|#ffeedd|border=darkgray}}मूल संस्करण {{Color box|#C2EF86|border=darkgray}}फिलहाल हो रहा प्रसारण {{Color box|#eeddff|border=darkgray}}आगामी सीज़न {{Color box|#e0e0e0|border=darkgray}}स्थिति अज्ञात {{Color box|#EFC2C2|border=darkgray}}अब प्रसारित नहीं होगा
{| class="wikitable" style="text-align:left; line-height:15px; background:#F8F8FF; width:100%;"
!Country/Region
!Local title
!Format
!Presenters{{Efn|The years next to the presenter(s) denotes when the series was filmed and not necessarily when it was aired on television}} <small>(filming years)</small>
!Channel
!Fort's Tower
!Broadcast
|-
| style="background-color: #ffdddd" |[[उप-सहारा अफ़्रीका|Africa]]
|''Fort Boyard Afrique''
| rowspan="4" |One team (Classic)
|Haussman Vwanderday
|Canal+ Afrique
|Valery Ndongo
|2019
|-
| style="background:#ffdddd;" |Algeria
|''برج الأبطال''<br /><br />{{Small|''Bourj El Abtal''}}
|Momo Djender and Samira Zitouni (2006, 2008–2011)
|Canal Algérie
|Yousfi Toufik
|2006, 2009–2012
|-
| style="background:#ffdddd;" |Argentina
|''Fort Boyard''
|Julián Weich and Araceli González
|Canal 13
|Isabel Achaval
|1999–2000<ref>{{Cite web|url=https://www.lanacion.com.ar/espectaculos/el-mas-fuerte-en-el-rating-nid144915|title=El más fuerte en el rating|date=7 July 1999|website=www.lanacion.com.ar|access-date=26 March 2019}}</ref>
|-
| style="background:#ffdddd;" |Armenia
|''Fort Boyard''
|Tina Kandelaki and Ruben Jaghinyan
|Armenia TV
|Hrachia Harutyunyan
|2009
|-
| style="background:#ffdddd;" |Azerbaijan
|''Fort Boyard''
|Two teams (Duel)
|Zaur Bakhshaliyev and Metanet Eliverdiyeva
|ATV
|Orxan Fikretoglu (2013)<br /><br />Farid Bey Kerimov (2014)
|2013–2014
|-
| rowspan="4" style="background:#eeddff;" |Belgium
|''[[:nl:De Sleutels van Fort Boyard|De Sleutels van Fort Boyard]]'' {{In lang|nl}}
|Two teams (Duel countries)
|Hans Schiffers and Alexandra Potvin (1991)
|BRT TV1
|Jan Wegter
|1992
|-
|''[[:nl:Fort Boyard (televisieprogramma)|Fort Boyard]]'' {{In lang|nl}}
| rowspan="3" |One team (Classic)
|Dagmar Liekens and Chris Van den Durpel (1999–2000)
|VT4
|Luk D'heu
|1999–2001
|-
| rowspan="2" |''[[:fr:Versions étrangères du jeu Fort Boyard#Version_belge_francophone_(2006-2007)|Fort Boyard]]'' {{In lang|fr}}
|Jean-Michel Zecca and Sandrine Dans (2006–2007)
|RTL-TVI
|Jean-Paul Andret (2006)<br /><br />Yann Le Gac (2007)
|2006–2008
|-
|Olivier Minne
|Tipik<ref>{{Cite web|url=https://www.rtbf.be/article/fort-boyard-la-35eme-saison-arrive-sur-tipik-et-une-version-belge-est-en-preparation-11384315|title=Fort Boyard : une version belge bientôt sur Tipik|website=RTBF|language=fr|access-date=2024-06-06}}</ref>
| {{TBA}}
|2024
|-
| style="background:#ffdddd;" |Bulgaria
|''[[:bg:Форт Бояр (предаване)|Fort Boyard]]''
|Tri-nations (Duels) (2007–2008)<br /><br />One team (Classic) (2009)
|Dimitar Pavlov and Monsieur Rochelle (2007–2009)
|bTV
|Philippe Leray
|2008–2010
|-
| rowspan="2" style="background:#ffdddd;" |Canada ([[क्यूबेक|Québec]])
| rowspan="2" |''[[:fr:Versions étrangères du jeu Fort Boyard#Version_québécoise_(1993-2000,_2013-2014)|Fort Boyard]]'' {{In lang|fr}}
|One team (Classic)
|Guy Richer and France Beaudoin (1993)<br /><br />Guy Mongrain (1994–2000)<br /><br />Marie-Soleil Tougas (1994–1997)<br /><br />Sylvie Bernier (1998–2000)
| rowspan="2" |TVA
| rowspan="2" |Yann Le Gac
|1993–2001
|-
|One team (Classic)<br /><br />Two teams (Duel)
|Guillaume Lemay-Thivierge and Dave Morissette (2013–2014)
|2014
|-
| style="background:#ffdddd;" |Czech Republic
|''[[:cs:Pevnost Boyard (česká soutěž)|Pevnost Boyard]]''
|One team (Classic)
|Libor Bouček (2016–2017)
|Prima<ref>{{Cite web|url=http://www.c21media.net/russia-ready-to-swap-wives/|title=Russia ready to swap wives|date=23 June 2016|publisher=C21Media|access-date=6 July 2016}}</ref>
|Jan Rosák
|2016–2018
|-
| rowspan="4" style="background:#ffdddd;" |Denmark
| rowspan="4" |''[[:da:Fangerne på Fortet|Fangerne på Fortet]]''
|One team (Classic)
|Thomas Mygind (1993–2000)<br /><br />Camilla Sachs Bostrup (1993–1994)<br /><br />Sidsel Agensø (1995)<br /><br />Kamilla Gregersen (1996)<br /><br />Camilla Ottesen (1997)<br /><br />Gitte Schnell (1999–2000)
| rowspan="3" |TV3
|Ove Sprogøe (1993)<br /><br />Tage Axelson (1994)<br /><br />Ole Ernst (1995–2000)
|1993–2000
|-
| rowspan="3" |Two teams (Duel)
|Camilla Ottesen and Peter Schmeichel
| {{N/A}}
|2009–2010
|-
| rowspan="2" |Camilla Ottesen and Joachim Boldsen (2019, 2021)
| rowspan="2" |Anders Lund Madsen
|2020
|-
|Viaplay<ref>{{Cite web|url=https://www.seoghoer.dk/reality/mascha-vang-og-pia-kjaersgaard-kaemper-i-ny-saeson-fangerne-paa-fortet|title=Mascha Vang og Pia Kjærsgaard kæmper i ny sæson "Fangerne på fortet"|last=Brix|first=Benedikte|date=15 October 2021|website=SE og HØR|language=da|access-date=2021-10-15}}</ref>
|2021
|-
| rowspan="3" style="background:#ffdddd;" |Finland
| rowspan="2" |''[[:fi:Fort Boyard Suomi|Fort Boyard – Linnake]]''
| rowspan="3" |Two teams (Duel)
|Merja Larivaara and Kari-Pekka Toivonen
|[[:fi:SuomiTV|SuomiTV]]
| rowspan="3" [{{N/A}}
|2010
|-
|Ellen Jokikunnas and Ivan Puopolo (2012)
|Nelonen
|2013
|-
|''[[:fi:Fort Boyard Suomi|Fort Boyard Suomi]]''
|Joanna Kuvaja and Ilkka Uusivuori
|MTV3
|2018–2019
|-
| style="background:#ffeedd;" |France
|''[[:fr:Fort Boyard (jeu télévisé)|Les Clés de Fort Boyard]]'' (1990)<br /><br />''[[:fr:Fort Boyard (jeu télévisé)|Fort Boyard]]'' (1991–)
|One team (Classic)<br /><br />Two teams (Duel) (2010)
|Patrice Laffont (1990–1999)<br /><br />Marie Talon (1990, first 9 episodes)<br /><br />Sophie Davant (1990–1991)<br /><br />Valérie Pascal (1992)<br /><br />Cendrine Dominguez (1993–2002)<br /><br />Jean-Pierre Castaldi (2000–2002)<br /><br />Olivier Minne (2003–present)<br /><br />Sarah Lelouch (2003–2005)<br /><br />Anne-Gaëlle Riccio (2006–2009)
|Antenne 2<br /><br />(1990–1991)<br /><br />France 2<br /><br />(1992–)
|Michel Scourneau (1990)<br /><br />Yann Le Gac (1991–present)<br /><br />Didier Hervé (2002)
|7 July 1990 – present
|-
| style="background-color: #ffdddd" |Georgia
|''Fort Boyard''
| rowspan="3" |One team (Classic)
|Duta Skhirtladze and Naniko Khazaradze
|Rustavi 2
|Leo Antadze
|2004
|-
| rowspan="4" style="background-color: #ffdddd" |Germany
|''[[:de:Fort Boyard (Deutschland)|Fort Boyard – Ein Spiel für Abenteurer]]''
|Reiner Schöne and Rita Werner (1990)
|Sat.1
|Michel Scourneau
|1990–1991
|-
|''[[:de:Fort Boyard (Deutschland)|Fort Boyard – Stars auf Schatzsuche]]''
|Steven Gätjen, Alexander Mazza and Sonya Kraus (2000–2001)
|Pro 7
|Sonya Kraus
|2000, 2002
|-
| rowspan="2" |''[[:de:Fort Boyard (Deutschland)|Fort Boyard]]''
|Two teams (Duel)
|Andrea Kaiser and Alexander Wesselsky (2010)
|Kabel 1
| {{N/A}}
|2011
|-
|One team (Classic)
|Matthias Killing
|Sat.1
|[[:de:Klaus Münster|Klaus Münster]]
|2018
|-
| style="background-color: #ffdddd" |Greece
|''[[:el:Fort Boyard (τηλεπαιχνίδι)|Fort Boyard]]''
|One team (Classic) (2004–2005)<br /><br />One team (Classic) later Two teams (Duel) (2006–2008)
|Christos Ferentinos and Orthoula Papadakou (2004–2008)
|STAR
|Angelos Papadimitriou
|2004–2009
|-
| rowspan="2" style="background-color: #eeddff" |Hungary
| rowspan="2" |''[[:hu:Fort Boyard – Az erőd|Fort Boyard – Az Erőd]]''
|One team (Classic)
|András Vizy and Zsuzsa Demcsák
|TV2
|György Bárdy
|2000
|-
|Two teams (Duel)
|Bence Istenes
|RTL<ref>{{Cite web|url=https://port.hu/cikk/tv/2024-ben-az-rtl-re-erkezik-a-fort-boyard-az-erod-kalandjatek/article-101818|title=2024-ben az RTL-re érkezik a Fort Boyard – Az erőd kalandjáték|date=10 May 2024}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://sorozatwiki.hu/hirek/24-ev-utan-az-rtl-en-ter-vissza-a-tv2-egykori-nagyszabasu-realityje/|title=24 év után az RTL-en tér vissza a TV2 egykori nagyszabású realityje|last=Dalma|first=Szabó|date=2024-05-10|website=SorozatWiki|language=hu|access-date=2024-05-11}}</ref>
|Péter Janklovics
|2024
|-
| style="background-color: #ffdddd" |Israel
|''[[:he:המבצר|המבצר]]''<br /><br />{{Small|''Ha-Mivtzar''}}
| rowspan="2" |One team (Classic)
|Aki Avni and Sigal Shachmon
|Channel 2
|Yehuda Fuchs
|1998–1999
|-
| style="background-color: #ffdddd" |Lebanon
|''[[:ar:حلها وإحتلها (برنامج)|Haluha wa'iihtalha]]''
|Tony Baroud and Karen Derkaloustian
|LBCI
|Gabriel Yammine
|2002–2003
|-
| rowspan="2" style="background-color: #eeddff" |Morocco
| rowspan="2" |''[[:fr:Versions étrangères du jeu Fort Boyard#Version_marocaine|جزيرة الكنز]]''<br /><br />{{Small|''Jazirat Al Kanz''}}
|One team (Classic)
| rowspan="2" |Hicham Masrar (2014–2019)<br /><br />Rachid Allali (2014–19,{{Efn|Only presented the final episode in 2019}} 2023)<br /><br />Meryem Zaïmi (2023)<br /><br />Hamza Filali and Rajaa Belmir (2024)
| rowspan="2" |2M TV
| rowspan="2" |Kamal Kadimi
|2015–2021
|-
|Two teams (Duel)
|2023–2024
|-
| rowspan="3" style="background-color: #ffdddd" |Netherlands
| rowspan="2" |''[[:nl:De Sleutels van Fort Boyard|De Sleutels van Fort Boyard]]''
|One team (Classic)
|Bas Westerweel and Ria Visser (1990)
| rowspan="2" |NPO 1
| rowspan="2" |Jan Wegter
|1991
|-
|Two teams (Duel countries)
|Hans Schiffers and Alexandra Potvin (1991)
|1992
|-
|''[[:nl:Fort Boyard (Nederlandse spelshow)|Fort Boyard]]''
|Two teams (Duel)
|Gerard Ekdom (2011–2012)<br /><br />Lauren Verster (2012, 2014)<br /><br />Art Rooijakkers (2011)<br /><br />Freek Bartels (2014)
|NPO 3
| {{N/A}}
|2011–2012<br /><br />2014
|-
| rowspan="3" style="background-color: #ffdddd" |Norway
| rowspan="3" |''[[:no:Fangene på fortet|Fangene på Fortet]]'' (1993–1997, 1999, 2010–2011, 2021, 2023)<br /><br />''Nye Fanger på Fortet'' (2000)
|One team (Classic)
|Jon Michelet (1993)<br /><br />Lise Nilssen (1993–1996)<br /><br />Steffen Tangstad (1994)<br /><br />Nils Ole Oftebro (1995–1996, 1999–2000)<br /><br />Susanne Steffens (1999)<br /><br />Elisa Røtterud (2000)
| rowspan="3" |TV3
|Helge Reiss (1993)<br /><br />Toralv Maurstad (1994)<br /><br />Lars Andreas Larssen (1995–1996)<br /><br />Trond Brænne (1999–2000)
|1993–1997<br /><br />1999–2001
|-
| rowspan="2" |Two teams (Duel)
|Daniel Franck (2010–2011)<br /><br />Jenny Skavlan (2010)<br /><br />Henriette Lien (2011)
| {{N/A}}
|2011
|-
|Julie Strømsvåg (2021–2022)<br /><br />Bernt Hulsker (2021)<br /><br />Kjetil Andre Aamodt (2022)<ref>{{Cite web|url=https://www.seher.no/studio/kjendisdgnet/664?post=96076|title=Kjendisdøgnet - Hulsker-erstatter klar|website=seher|language=no|access-date=2022-06-05|archive-date=19 फ़रवरी 2025|archive-url=https://web.archive.org/web/20250219110456/https://www.seher.no/studio/kjendisdgnet/664?post=96076|url-status=dead}}</ref>
|Karen-Marie Ellefsen (2021)<br /><br />Triana Iglesias (2022)
|2021, 2023
|-
| rowspan="2" style="background-color: #ffdddd" |Poland
|''[[:pl:Fort Boyard (polski program telewizyjny)|Fort Boyard]]''
|One team (Classic)
|Robert Gonera and Katarzyna Glinka
|TVP2
|Janusz Weiss
|2008–2009
|-
|''[[:pl:Fort Boyard (polski program telewizyjny)|Fort Boyard Polska]]''
|Two teams (Duel)
|Elżbieta Romanowska and Mariusz Kałamaga
|Viaplay<ref>{{Cite web|url=https://www.nentgroup.com/news/news-releases/nent-group-revive-fort-boyard-viaplay-poland-1894935|title=NENT Group to revive 'Fort Boyard' on Viaplay in Poland|website=Nordic entertainment group|language=en|access-date=2021-03-10}}</ref>
|Tamara Gonzalez Perea
|2021, 2022
|-
| style="background-color: #ffdddd" |Romania
|''Fort Boyard''
| rowspan="4" |One team (Classic)
|Paul Ipate and Octavian Strunila
|Pro TV
|Marius Manole
|2017
|-
| rowspan="6" style="background-color: #ffdddd" |Russia
| rowspan="6" |''[[:ru:Форт Боярд (русская версия)|Форт Боярд]]''
|Leonid Parfyonov and Yelena Khanga
|NTV
|Vadim Gushchin
|1998
|-
|Sergey Brilev and Yanina Batyrchina
| rowspan="3" |Rossiya 1
|Nikolay Denisov
|2002
|-
|Leonid Yarmolnik and [[ओक्साना फ़ेदरोवा|Oxana Fedorova]]
|Vasily Livanov (2003)<br /><br />Aleksandr Adabashyan (2004)
|2003–2004
|-
| rowspan="2" |Two teams (Duel)
|Leonid Yarmolnik, Ekaterina Konovalova and Elena Korikova
|Aleksandr Filippenko
|2006
|-
|Nikolai Valuev and Anna Ardova
|Channel One
|Viktor Verzhbitsky
|2013
|-
|One team (Classic)
|Sergey Shnurov (2019)<br /><br />Sergey Burunov (2021)<ref>{{Cite web|url=https://ctc.ru/zakadrom/novosti/fort_boyard__vozvraschenie/sergei-burunov-otkroet-vorota-forta-boyard-/|title=CTC|website=ctc.ru|script-title=ru:СТС – официальный сайт телеканала|access-date=2021-07-14}}</ref>
|STS
|Olivier Siou
|2019<br /><br />2021
|-
| style="background-color: #ffdddd" |Serbia
|''Fort Boyard''
|Tri-nations (Duels)
|Ivan Jevtovic (2007–2008)
|Fox televizija
|Philippe Leray
|2008–2009
|-
| rowspan="2" style="background-color: #ffdddd" |Slovakia
| rowspan="2" |''Pevnosť Boyard''
| rowspan="4" |One team (Classic)
|Stano Pavlík<br /><br />Andrea Timková (1998)<br /><br />Kveta Horváthová (1999)
| rowspan="2" |TV Markíza
|Ľubo Gregor (1998)<br /><br />Marian Zednikovic (1999)
|1998–1999
|-
|Martin Nikodým and Diana Hágerová
|Michal Ďuriš
|2017
|-
| style="background-color: #ffdddd" |South Korea
|''Fort Boyard''
|Nam Hee Suk and Lee Hyori
|SBS TV
|Ji Seok Jin
|2003
|-
| style="background-color: #ffdddd" |Spain
|''Fort Boyard''
|Paula Vázquez and Félix Álvarez
|Telecinco
|Óscar Ladoire
|2001
|-
| rowspan="2" style="background-color:#ffdddd" |Sweden
| rowspan="2" |''[[:sv:Fångarna på fortet|Fångarna på fortet]]'' (1990, 1992–1997, 1999–2000, 2010–17, 2019–)<br /><br />''Fortet'' (2003–05)
|One team (Classic) (1990–2000)<br /><br />Two teams (Duel) (2003–2017, 2019–)
|Erik Blix and Anne Barlind (1990)<br /><br />Gunde Svan (1992–1997, 2010–2017, 2019, 2022–)<br /><br />Agneta Sjödin (1992–1993, 1997, 2010–2014, 2016–2017, 2019, 2022–)<br /><br />Kayo Shekoni (1994–1996)<br /><br />Hans Fahlén and Kristin Kaspersen (2003–2004)<br /><br />Marie Serneholt (2015)
|TV4
|Martin Myrberg (1990)<br /><br />Stig Ossian Ericson (1992–2000)<br /><br />Felix Herngren (2003–2004)<br /><br />Rolf Skoglund (2010)<br /><br />Lasse Brandeby (2011)<br /><br />Peter Magnusson (2012)<br /><br />Börje Ahlstedt (2013–2016)<br /><br />Rikard Wolff (2017)<br /><br />Suzanne Reuter (2019)<br /><br />Peter Stormare (2022–2023)
|Autumn 1990<br /><br />1992–1998<br /><br />2003, 2005<br /><br />2010–2018<br /><br />2019–2020<br /><br />2022–2024
|-
| rowspan="3" |One team (Classic)
|Gry Forssell and Henrik Johnsson (1999)<br /><br />Håkan Södergren and Linda Nyberg (2000)
|TV3
|Stig Ossian Ericson
|2000
|-
| style="background-color: #ffdddd" |Switzerland
|''Fort Boyard'' {{In lang|fr}}
|Lolita Morena and Enrico Carpani
|TSR
|Cito Steiger
|1995
|-
| rowspan="2" style="background-color: #ffdddd" |Turkey
|''Hazine Adası''
|Yosi Mizrahi and Janset Paçal
|Star TV
|Yasemin Kozanoğlu
|2000
|-
|''Fort Boyard''
|Tri-nations (Duels)
|Evrim Akın (2007–2008)
|Fox Turkey
|Philippe Leray
|2008–2009
|-
| style="background-color: #ffdddd" |Ukraine
|''Форт Буаяр''
|One team (Classic)
|Gregory Hlady and Vita Smatcheliouk
|1+1
|Bohdan Stupka
|2004
|-
| rowspan="3" style="background-color: #ffdddd" |United Kingdom
| rowspan="2" |''Fort Boyard''
| rowspan="2" |One team (Classic)
|Melinda Messenger and Leslie Grantham
|Channel 5
|Geoffrey Bayldon
|1998–2001
|-
|Jodie Penfold and Christopher Ellison
|Challenge
|Tom Baker
|2003
|-
|''Fort Boyard: Ultimate Challenge''
| rowspan="2" |Two teams (Duel)
|Laura Hamilton (2011–2014)<br /><br />Geno Segers (2011)<br /><br />Andy Akinwolere (2012–2014)
|CITV
| rowspan=3 {{N/A}}
|2012–2014
|-
| rowspan="2" style="background-color: #ffdddd" |United States
|''Conquer Fort Boyard''
|Chris Berman and Cathy Lee Crosby (1991)
|[[अमेरिकन ब्रॉडकास्टिंग कंपनी|ABC]]
|March 20, 1993 (aired pilot)
|-
|''Fort Boyard: Ultimate Challenge''
|Two teams (Duel countries)
|Laura Hamilton and Geno Segers (2011)
|Disney XD
|2011–2012
|}
; नोट्स
{{Notelist}}
==== प्रसारण सिंडिकेशन ====
''फ़ोर्ट बॉयार्ड'' दुनिया भर के कई नेटवर्क पर प्रसारित हुआ है। <ref>{{Cite web|url=https://www.humanite.fr/node/248205|title=Fort Boyard rouvre ses portes|date=22 June 2001|website=L'Humanité|access-date=14 April 2020}}</ref> पुर्तगाल जैसे कुछ देशों ने अपना स्वयं का उत्पादन करने के बजाय मूल फ्रेंच संस्करण को [[डबिंग|डब करके]] या [[उपशीर्षक]] के साथ प्रसारित किया। <ref>{{Cite news|url=https://www.lemonde.fr/archives/article/1997/08/03/un-produit-international_3789787_1819218.html|title=Un produit international|date=3 August 1997|work=Le Monde.fr|access-date=3 May 2020|via=Le Monde}}</ref> अन्य में शामिल हैं:
बाद के वर्षों में अपने स्वयं के संस्करण तैयार करने से पहले कई अन्य देशों ने भी ऐसा ही किया। इसमे शामिल है:
* अज़रबैजान ( लीडर टीवी ने ग्रीक और फ्रेंच संस्करण प्रसारित किया, 2009-2010)
* चेक गणराज्य ( ČT2 (1992–94), टीवी नोवा (1994–95); <ref>{{Cite web|url=https://www.radiotv.cz/p_tv/legenda-%e2%80%9eklice-od-pevnosti-boyard-stale-zije-ve-francii-uz-22-rokem/|title=Legenda Klíče od pevnosti Boyard stále žije, ve Francii už 22. rokem | RadioTV|last=a.s|first=Media Marketing Services|access-date=3 May 2020}}</ref> प्राइमा कूल 2012 से, यूके संस्करण की श्रृंखला 3–5 प्रसारित करता है <ref>{{Cite web|url=https://www.radiotv.cz/p_tv/po-cem-touzi-divaci-primy-cool-na-podzim-pevnost-boyard-star-trek-a-south-park/|title=Po čem touží diváci Primy Cool na podzim? Pevnost Boyard, Star Trek a Sout... | RadioTV|last=a.s|first=Media Marketing Services|date=27 July 2011|access-date=3 May 2020}}</ref> और 2013 से फ्रेंच संस्करण)
* पोलैंड (पीटीके2 अपर सिलेसिया, 1992; एटीवी1/एटीवी रिलैक्स, 1993-99)
* फ़िनलैंड (1993 में येल टीवी1 ) <ref>{{Cite web|url=http://vintti.yle.fi/yle.fi/muistikuvaputki/muistikuvaputki/rouvaruutu/kilpailuohjelma-1990-luvulta-fort-boyard-seikkailujen-linnake.htm|title=Kilpailuohjelma 1990-luvulta: Fort Boyard - Seikkailujen linnake | Muistikuvaputki | yle.fi|date=9 March 2009|website=vintti.yle.fi|access-date=3 May 2020}}</ref>
* रोमानिया (1992 में टीवीआर1 ; प्रो टीवी, 1995–97) <ref>{{Cite web|url=https://www.vice.com/ro/article/kz3g9y/de-ce-a-esuat-fort-boyard-romania|title=Am văzut Fort Boyard în anii '90 și o să-ți explic de ce a eșuat în România|last=Iana|first=Florentina|date=5 November 2017|access-date=3 May 2020}}</ref>
* रूस (चैनल वन ओस्टैंकिनो 1992 में; एनटीवी ने ब्रिटिश, कनाडाई, फ्रेंच और नॉर्वेजियन संस्करण प्रसारित किए, <ref>{{Cite web|url=https://journalist-nsk.ru/en/iz-polikarbonata/programma-peredach-ort-31-dekabrya-1995-sam-sebe-rezhiss-r.html|title=Program schedule orth December 31, 1995. Director for himself|website=journalist-nsk.ru|access-date=3 May 2020}}</ref> 1994-2000)
* स्लोवाकिया
* यूक्रेन
फ्रांस में, 6 सितंबर 2014 से गुल्ली (2006-2014), टीवी5मोंडे यूरोप, 1ère और फ्रांस 4 पर अपने स्वयं के संस्करण का पुनः प्रसारण किया गया है। बेल्जियम में, 2017 से, फ्रेंच भाषा के प्रसारक आरटीबीएफ ने अधिकार हासिल कर लिए हैं, जिससे उसे फ्रांस में रिलीज की पूर्व संध्या पर शो प्रसारित करने की अनुमति मिल गई है। <ref>{{Cite web|url=https://www.dhnet.be/medias/television/fort-boyard-debarque-sur-la-rtbf-593adc41cd702b5fbf0f027c|title=Fort Boyard débarque sur la RTBF !|date=10 June 2017|website=DH Les Sports +|access-date=22 June 2021}}</ref> इसे शुरू में ला यून पर प्रसारित किया गया था लेकिन 2020 में इसे ला ड्यूक्स में स्थानांतरित कर दिया गया। <ref>{{Cite web|url=https://azapmedias.be/fort-boyard-lemission-sera-encore-diffusee-en-belgique-mais-change-de-chaine/|title=Fort Boyard : L'émission sera encore diffusée en Belgique mais change de chaîne !|date=23 June 2020|website=AZAP|access-date=22 June 2021}}</ref> यूक्रेन ( ТЕТ, 2006–2007), जॉर्जिया ( रुस्तवी 2, 2010), स्लोवाकिया ( दाज्टो, 2013), अल्जीरिया ( ए3 ), क्यूबेक ( प्राइज 2, 2009–2010), अर्जेंटीना ( [[:es:Volver (canal de televisión)|वोल्वर]], 2019), लेबनान ( एलबीसीआई, 2020–21) और यूके ने भी विभिन्न चैनलों पर पिछली श्रृंखला को दोहराया है।
==== भागीदारी तालिका ====
वर्ष 2000 में किसी भी वर्ष की तुलना में सबसे अधिक एपिसोड फिल्माए गए (फ्रांस सहित ग्यारह देशों के लिए 123)। आज तक (2020 को छोड़कर), 2005 में सबसे कम (26) उपस्थिति रही, जिसमें केवल फ्रेंच और ग्रीक संस्करण ही शामिल हुए। <ref name="stats">{{Cite web|url=http://www.fan-fortboyard.fr/pages/l-emission/les-versions-etrangeres-de-fort-boyard.html|title=Les versions étrangères de Fort Boyard – Fort Boyard | Fan-Fortboyard.fr – Le site des Fans de Fort Boyard|publisher=Fan-Fortboyard.fr|archive-url=https://web.archive.org/web/20120724152023/http://www.fan-fortboyard.fr/pages/l-emission/les-versions-etrangeres-de-fort-boyard.html|archive-date=24 July 2012|access-date=15 August 2012}}</ref> 2018 तक, फिल्माए गए एपिसोड की कुल संख्या 1,782 है, जिनमें से 29 सीज़न में 327 मूल फ्रांसीसी संस्करण के हैं। स्वीडन वह विदेशी देश है जिसने अब तक सबसे अधिक एपिसोड (19 सीज़न में 222) का निर्माण किया है।
== प्रारूप ==
[[चित्र:Intérieur_Fort_Boyard.jpg|अंगूठाकार| किले के उत्तरी भाग का आंतरिक भाग, मई 2007 में देखा गया।]]
''फोर्ट बोयार्ड'' का प्रारूप विभिन्न देशों में भिन्न है, लेकिन मूल बातें समान हैं। दोस्तों की एक टीम सोना जीतने के इरादे से किले में प्रवेश करती है। ऐसा करने के लिए, प्रतियोगियों को एक किले के मालिक द्वारा निर्धारित चुनौतियों की एक श्रृंखला को सफलतापूर्वक पूरा करना होगा, जो सोना अपने पास रखना चाहता है।
खेल में सबसे पहले फ्रांसीसी पात्र 'ला बौले' द्वारा किले का घंटा बजाया जाता है। जैसे ही घंटा बजता है खेल का समय कम होने लगता है। ब्रिटिश संस्करण में खेल 40 मिनट तक चलता था, जबकि फ्रेंच संस्करण में वर्ष के आधार पर 60 से 120 मिनट तक चलता था।
शो का मूल प्रारूप निम्नलिखित अनुभागों में बताया गया है।
; 2011 के लिए नए खेल
* '''स्ट्रेचर''' (सेल 212) - '''''मकड़ियों और बिच्छुओं की''''' जगह लेता है
* '''परित्यक्त केबिन''' (सेल 218 (2011), 216 (2012–)) – फ्रेंच एक्सक्लूसिव
* '''डूबी हुई कोशिका'''
* '''सेल रिकरेक''' - पहले '''''सिकुड़ती हुई कोशिका'''''
* '''टैंक''' (सेल 209) - 2012 में '''''कोल्ड रूम''''' द्वारा प्रतिस्थापित
* '''सीवेज''' (सेल 118) - ''अल्टीमेट चैलेंज'' में '''''डार्क डिसेंट''''' कहा जाता है
* '''प्राणी गणना/कोड''' (कोशिका 215B) – जिसे फ्रेंच संस्करण में '''''लोट्टो''''' कहा जाता है
* '''बीम-जेट'''
; 2013 के लिए नए खेल
* '''सर्कल''' (बाहर, आंगन के ऊपर) - ''अल्टीमेट चैलेंज'' में रिंग रन
* '''पनडुब्बी प्रशिक्षण''' (आउटडोर, ग्राउंड फ्लोर आँगन) - ''अल्टीमेट चैलेंज'' में प्रेशर टैंक
* '''छतरियां''' (बाहर, आंगन के ऊपर) – ''अल्टीमेट चैलेंज'' में छातों को संतुलित करना
* '''वेलिबरेटर''' (इनडोर बेसमेंट, टैंक में पानी भरा हुआ) - ''अल्टीमेट चैलेंज'' में पेडल पंप
* '''झूला''' (सेल 115) (द्वंद्वयुद्ध)
* '''पानी के नीचे गुब्बारे''' (द्वंद)
* '''घातक ड्रॉप''' (द्वंद)
नोट: इनमें से कुछ खेल अभी भी किले पर मौजूद हैं, लेकिन हाल ही में फ्रेंच संस्करण और अन्य में नहीं खेले गए हैं। इनमें से अधिकांश खेलों को उनके ''अल्टीमेट चैलेंज'' नामों से सूचीबद्ध किया गया है। '''ऊपर खेले गए सभी सुराग खेलों का उल्लेख नहीं किया गया है।'''
== वॉच टावर ==
[[चित्र:Fort_Boyard_vigie.JPG|दाएँ|अंगूठाकार| अगस्त 2014 में प्रहरीदुर्ग]]
किले के ''वॉच टावर'' में एक विलक्षण चरित्र रहता है जो कुछ प्रतियोगियों के लिए पहेलियां निर्धारित करता है; यदि प्रतियोगी समय सीमा के भीतर सही उत्तर दे देते हैं, तो उन्हें एक कुंजी प्राप्त होती है। सुराग पहेलियों के मामले में, पहेली का उत्तर ही सुराग शब्द होता है, इसलिए यदि प्रतियोगी ''वॉच टावर'' में इसका उत्तर नहीं भी दे पाता है तो भी वह खेल के बाकी समय में इसके बारे में सोच सकता है। पहेलियों के दौरान, प्रतियोगी तब तक अनुमान लगाता रह सकता है जब तक कि समय (जैक या जूल्स द्वारा रेत का टाइमर उठाकर दर्शाया गया) समाप्त न हो जाए। यदि प्रतियोगी समय सीमा के भीतर सही उत्तर का अनुमान लगाने में विफल रहता है, तो चाबी को समुद्र में फेंक दिया जाता है, और दूसरे प्रतियोगी को इसे निकालने के लिए तैरना पड़ता है। यह हमेशा तभी जीता जाता था जब सबसे मजबूत तैराक चाबी निकाल लेता था। यू.के. संस्करण की श्रृंखला 5 में तैराकी को हटा दिया गया था, लेकिन ''अल्टीमेट चैलेंज'' में इसे '''<nowiki/>'की टू द सी'''' ( ''वॉच टावर'' पहेली के बिना) के रूप में पुनः प्रस्तुत किया गया।
वर्ष 2006 के बाद से, प्रतियोगी चाबी के लिए तैर नहीं सकते; उसे वहीं वापस रख दिया जाता है जहां वह रखी गई थी। सुराग शब्द भी अलग है और पहेली के समान नहीं है। इसलिए, सुराग प्राप्त करने के लिए पहेली को समय सीमा के भीतर हल किया जाना चाहिए।
2011 से 2013 तक के फ्रेंच संस्करण में ''वॉच टावर का'' उपयोग नहीं किया गया; इसके स्थान पर '''इंटरएक्टिव सेल''' की तीन यात्राएं की गईं। दूसरी यात्रा एक '''दृश्य पहेली''' थी, जो प्रमुख खेलों के लगभग मध्य में थी, जिसमें फादर फौरास स्क्रीन पर थे। सुराग पहेली का स्थान टेलीफोन पहेली ने ले लिया है, जहां खिलाड़ी एक कक्ष के अंदर बूथ में होता है और उसके पास फादर फोरास द्वारा फोन पर दी गई पहेली को हल करने के लिए 1 मिनट का समय होता है, जबकि उसके ऊपर तिलचट्टे गिरा दिए जाते हैं। यह एक खेल का रूप लेता है, जिसे फ्रांसीसी संस्करण में '''<nowiki/>'एबंडन्ड केबिन'''' कहा जाता है। हालांकि ''वॉच टावर का'' प्रयोग 2012 में शो के रूसी संस्करण में किया गया (उस वर्ष इसका प्रयोग करने वाला एकमात्र देश) और 2013 में अज़रबैजान, कनाडाई और स्वीडिश संस्करणों में भी इसका प्रयोग किया गया।
== खजाना कक्ष ==
[[चित्र:Olivier_Minne_sur_Fort_Boyard_en_2007.jpg|अंगूठाकार| किले के खजाने के कमरे के बाहर फ्रांसीसी मेजबान ओलिवियर मिन्ने (मई 2007)]]
== संदर्भ ==
{{Reflist}}
; ग्रन्थसूची
== बाहरी संबंध ==
{{कॉमन्स श्रेणी|Fort Boyard (game show)}}
* {{आईएमडीबी शीर्षक|0173548}} (French series)
* {{आईएमडीबी शीर्षक|0173549|Fort Boyard UK}}
* {{आईएमडीबी शीर्षक|14984578|Fort Boyard Russia}}
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पेरीडोलिया
0
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wikitext
text/x-wiki
[[File:Martian face viking cropped.jpg|thumb|मंगाल ग्रह के सिडोनिया क्षेत्र के [[मेसा]] का उपग्रहीय चित्र, अक्सर इसे "मंगल पर मुह" कहा जाता है और इसे [[परग्रही जीवन|अलौकिक]] निवास के रूप में उद्धृत किया जाता है।]]'''पेरीडोलिया''' (pareidolia; पैरिडोलिया अथवा पैरेडोलिया भी)<ref>{{Cite web|url=https://www.bhaskar.com/news/KZHK-do-you-see-faces-in-these-photos-5588254-PHO.html|title=अगर इन Photos में दिख रहा है कोई चेहरा, तो इस बीमारी के शिकार हैं आप|date=2017-05-03|website=दैनिक भास्कर|access-date=22 नवम्बर 2024}}</ref> किसी धूंधले [[उद्दीपक (शरीरविज्ञान)|उद्दीपक]] के अर्थपूर्ण व्याख्या के रूप में देखने की [[अवगम|प्रवृति]] है। सामान्यतः इसमें दृश्य भाव को शामिल किया जाता है जिसमें कोई व्यक्ति क्सी ऐसे स्थान पर कुछ वस्तु, स्वरूप अथवा कुछ अर्थहीन देखता (संसूचित करता) है जबकि वहाँ कुछ भी नहीं है। पैरीडोलिया एक प्रकार का एपोफेनिया है जिसमें विलगित घटनाओं को जोड़कर देखनी की कोशिश की जाती है।
इसके कुछ सामान्य उदाहरणों में [[बादल|बादलों]] के निर्माण में वस्तुओं, चेहरों अथवा पशुओं की तस्वीरें देखना (विभिन्न संस्कृतियों में ऐसा देखा जाता है); अचेतन/निर्जीव वस्तुओं में चेहरे देखना; चन्द्रमां पर मानव अथवा खरगोस देखने जैसे चन्द्र-पेरीडोलिया आदि। पेरीडोलिया की अवधारणा को रिकॉर्ड किये संगीत को विपरीत स्वर में चलाकर अथवा सामान्य से उच्च- या निम्न-गति के साथ चलाकर छुपे हुये सन्देशों के रूप में विस्तारित करना भी शामिल है। इसमें यादृच्छिक रव में विशिष्ट ध्वनियां (पूर्णतः अस्पष्ट) सुनना भी शामिल हैं जिसके उदाहरण के रूप में पंखे अथवा वातानुकुलन की आवाज में कुछ विशेष ध्वनि को सुनना शामिल है।<ref>{{cite web|url=http://nautil.us/blog/why-we-hear-voices-in-random-noise|title=Why we hear voices in random noise|last=जेकेल|first=फिलिप|date=2017-01-29|publisher=नॉटिलस|language=en|trans-title=हम अनियमित शोर में आवाज़ें क्यों सुनते हैं|access-date=22 नवम्बर 2024|archive-date=24 नवंबर 2020|archive-url=https://web.archive.org/web/20201124213215/http://nautil.us/blog/why-we-hear-voices-in-random-noise|url-status=dead}}</ref><ref>{{cite web|url=https://hearinglosshelp.com/blog/apophenia-audio-pareidolia-and-musical-ear-syndrome/#:~:text=Musical%20Ear%20Syndrome%20is%20a,like%20music%2C%20singing%20or%20voices.&text=The%20fan%20is%20not%20producing,is%20just%20producing%20fan%20noise.|title=Apophenia, Audio Pareidolia and Musical Ear Syndrome|last=बाउमन|first=नील|date=2015-07-09|language=en}}
</ref> चेहरे का पेरीडोलिया [[रीसस बंदर|रीसस बंदरों]] पर प्रदर्शन किया जा चुका है।<ref>{{Cite journal |last1=Taubert |first1=Jessica |last2=Wardle |first2=Susan G. |last3=Flessert |first3=Molly |last4=Leopold |first4=David A. |last5=Ungerleider |first5=Leslie G. |date=2017 |title=Face Pareidolia in the Rhesus Monkey |journal=Current Biology |volume=27 |issue=16 |pages=2505–2509.e2 |doi=10.1016/j.cub.2017.06.075 |issn=0960-9822 |pmc=5584612 |pmid=28803877}}</ref>
== सन्दर्भ ==
{{reflist}}
[[श्रेणी:संज्ञानात्मक पूर्वग्रह]]
[[श्रेणी:दृश्य बोध]]
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प्रसूति एवं स्त्री रोग
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text/x-wiki
{{वैश्वीकरण|1=लेख|2=[[यूनाइटेड किंगडम]] |3=[[संयुक्त राज्य अमेरिका]]|date=फ़रवरी 2025}}
'''प्रसूति एवं स्त्री रोग''' (obstetrics and gynecology) [[चिकित्सीय विशेषज्ञता|चिकित्सा विशेषज्ञता]] है जो [[गर्भावस्था]] से लेकर [[प्रसूति विज्ञान|प्रसव]] के बाद तक महिलाओं की देखभाल तथा महिला प्रजनन तंत्र के विकारों के निदान और उपचार से संबंधित है। गर्भवती महिलाओं की चिकित्सा देखभाल (प्रसूति विज्ञान) और महिला जननांग रोगों की चिकित्सा देखभाल (स्त्री रोग) अलग-अलग ऐतिहासिक काल में विकसित हुई।<ref name=":0">{{cite web |title=Obstetrics and gynecology {{!}} Women’s Health, Pregnancy Care & Delivery {{!}} Britannica |url=https://www.britannica.com/science/obstetrics |website=www.britannica.com |accessdate=25 जनवरी 2025 |language=en |date=5 जनवरी 2025}}</ref> प्रसूति-[[स्त्री-रोग विज्ञान|स्त्रीरोग विशेषज्ञ]] (OB-GYN) को महिला प्रजनन स्वास्थ्य, गर्भावस्था और प्रसव में विशेषज्ञता प्राप्त होती है।
[[File:Handgriffe.JPG|thumb|प्रसूति के विभिन्न तरिके]]
==विकास==
प्रसूति विज्ञान लम्बे समय तक महिला दाइयों का क्षेत्र रहा था। लेकिन 17वीं शताब्दी में, यूरोपीय चिकित्सकों ने शाही और कुलीन परिवारों में होने वाले सामान्य प्रसवों में भाग लेना शुरू कर दिया ।उस शुरुआत से, यह प्रथा बढ़ी और मध्यम वर्ग तक फैल गई। प्रसव में प्रयुक्त होने वाले औजारों के आविष्कार,एनेस्थीसिया का प्रचलन, तथा इग्नाज सेमेल्विस द्वारा प्रसवकालीन बुखार के कारण की खोज तथा प्रसव कक्ष में एंटीसेप्टिक विधियों का प्रचलन, ये सभी प्रसूति क्रियाओं में प्रगति के प्रमुख कारक थीं। 19वीं सदी के प्रारंभ तक, प्रसूति विज्ञान यूरोप और संयुक्त राज्य अमेरिका में एक मान्यता प्राप्त चिकित्सा अनुशासन के रूप में स्थापित हो चुका था।
20वीं सदी में, प्रसूति विज्ञान मुख्य रूप से प्रजनन नियंत्रण और स्वस्थ जन्म लेने वाले बच्चों को बढ़ावा देने के क्षेत्रों में विकसित हुआ। जन्म दोषों और समस्याग्रस्त प्रसव को कम करने के लिए गर्भवती माताओं की प्रसवपूर्व देखभाल और निर्देश लगभग 1900 में शुरू किए गए और उसके बाद इसे पूरी दुनिया में तेजी से अपनाया गया।
1950 के दशक में हार्मोनल गर्भनिरोधक गोलियों के विकास के साथ ही प्रसूति-स्त्रीरोग विशेषज्ञ भी महिलाओं की प्रजनन क्षमता और प्रजनन क्षमता को विनियमित करने के लिए तेजी से जिम्मेदार बन गए हैं।<ref name=":0" />
==कार्यक्षेत्र==
अमेरिकन बोर्ड ऑफ ऑब्सटेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी (एबीओजी) के अनुसार, जो संयुक्त राज्य अमेरिका में ओबी-जीवाईएन प्रमाणपत्र जारी करने के लिए जिम्मेदार है, ओबी-जीवाईएन प्रमाणीकरण के लिए पहला कदम एमडी या डीओ डिग्री प्राप्त करने के लिए मेडिकल स्कूल पूरा करना है।<ref name="ABOG_certification">{{Cite web|title=Overview for Specialty Certification|url=https://www.abog.org/specialty-certification/overview|access-date=2021-12-08|website=American Board of Obstetrics and Gynecology|language=en}}{{Dead link|date=मई 2026 |bot=InternetArchiveBot }}</ref>
==सन्दर्भ==
{{टिप्पणीसूची}}
==बाहरी कड़ियाँ==
* [https://www.figo.org/ FIGO.org] International Federation of Gynaecology and Obstetrics|International Federation of Gynaecology and Obstetrics (FIGO)
* [https://obgyn.onlinelibrary.wiley.com/journal/14710528 ''BJOG: An International Journal of Obstetricians and Gynecologists'']
* [https://obgyn.onlinelibrary.wiley.com/journal/18793479 & Gynecology & Obstetrics'']
[[श्रेणी:प्रसूति]]
[[श्रेणी:स्त्री रोग]]
[[श्रेणी:प्रसव]]
[[श्रेणी:महिला रोग]]
[[श्रेणी:गर्भनिरोधक]]
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प्रकाश के. देसाई
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text/x-wiki
{{Infobox military person|name=एयर मार्शल पी. के. देसाई|honorific_suffix=(पीवीएसएम, एवीएसएम, वीएसएम)|image=|birth_date=१२ नवंबर, १९४४|birth_place=[[नवसारी]], [[गुजरात]], [[भारत]]|birth_name=प्रकाशचंद्र खंडूभाई देसाई|allegiance=भारत|branch=वायु सेना|rank=एयर मार्शल|awards=[[परम विशिष्ट सेवा मेडल]], अति विशिष्ट सेवा मेडल, विशिष्ट सेवा मेडल}}
'''एयर मार्शल पी. के. देसाई''' '''(पीवीएसएम, एवीएसएम, वीएसएम''') [[भारतीय वायुसेना|भारतीय वायु सेना]] (आईएएफ) के एक सेवानिवृत्त अधिकारी हैं।<ref>{{Cite web|url=http://www.bharat-rakshak.com/IAF/Database/10078|title=Service Record for Air Marshal Prakashchandra Khandubhai Desai 10078 AE(M) at Bharat Rakshak.com|website=Bharat Rakshak|language=en-gb|access-date=2023-03-04}}</ref> उन्होंने १९६६ से २००४ तक भारतीय वायुसेना में सेवा की। देसाई [[कानपुर]] में वायु सेना स्टेशन [[चकेरी]] के एयर ऑफिसर कमांडिंग थे। वह [[नागपुर]] में मेंटेनेंस कमाण्ड के सीनियर मेंटेनेंस स्टाफ ऑफ़िसर और [[नई दिल्ली]] में वायु मुख्यालय में असिस्टेंट चीफ ऑफ़ एयर स्टाफ इंजीनियरिंग भी रहे हैं।<ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=MT2BEAAAQBAJ|title=History of Maintenance of Indian Air Force 1977-2016: 12 Aeronautical Engineers' Course|last=Khandekar|first=A. Krupakaran, P.|date=2022-08-13|publisher=Notion Press|isbn=979-8-88749-925-3|language=en}}</ref><ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=90-6DQAAQBAJ|title=Indian Air Force: The Maintenance Paradigm: The Maintenance Paradigm|date=2013-01-15|publisher=KW Publishers Pvt Ltd|isbn=978-93-85714-97-9|language=en}}</ref><ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=BRStDwAAQBAJ|title=Under the Wings, On the Tarmac: A SERVICEGRAPHY OF AN IAF ENGINEER|last=Khandekar|first=Prashant|date=2019-09-04|publisher=Notion Press|isbn=978-1-64546-823-3|language=en}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://m.tribuneindia.com/2004/20041017/cth2.htm#1|title=Youth to get chances in aviation sector}}{{Dead link|date=जून 2025 |bot=InternetArchiveBot }}</ref>
== वैज्ञानिक योगदान ==
देसाई ने भारतीय वायुसेना के स्वदेशीकरण के अनुसंधान और विकास पहलुओं पर काम किया। वह एयरोनॉटिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया ([[उत्तर प्रदेश]] और [[बिहार]]) के अध्यक्ष थे।<ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=C05WAAAAMAAJ|title=The Journal of the Aeronautical Society of India|last=India|first=Aeronautical Society of|date=2000|publisher=Aeronautical Society of India|language=en}}</ref> उन्होंने सीएसआईआर-नेशनल एयरोस्पेस लेबोरेटरीज (सीएसआईआर-एनएएल) और इंडियन सोसाइटी ऑफ नॉन-डिस्ट्रक्टिव टेस्टिंग (आईएसएनडीटी) में वैज्ञानिक समितियों में भी काम किया।<ref>{{Cite web|url=https://www.ndt.net/article/wcndt00/papers/idn340/idn340.htm|title=NDE Methodologies for Examination of Tail Rotor Blades of Helicopters|website=www.ndt.net|access-date=2023-03-04}}{{Dead link|date=मई 2026 |bot=InternetArchiveBot }}</ref>
== लेखन ==
• रिपुदमन सिंह और पी. के. देसाई। धातु पक्षियों। भारत रक्षा समीक्षा। संपादकः मेजर जनरल अफसीर करीम एवीएसएम (सेवानिवृत्त). <ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=5FnbfXHqI9IC|title=Indian Defence Review|last=Verma|first=Bharat|publisher=Lancer Publishers|language=en}}</ref>
• पी. के. देसाई और सी. मोहंती। स्वदेशीकरण के लिए व्यावहारिक दृष्टिकोण। एयरोस्पेस विनिर्माण प्रौद्योगिकी। संपादकः एन. के. नाइक, कंचन विश्वास, जी. सी. पोपली।<ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=UthLRAEB16AC|title=Aerospace Manufacturing Technology|date=1997|publisher=Allied Publishers|isbn=978-81-7023-750-1|language=en}}</ref>
• पी. के. देसाई। विमान घटकों का जीवन विस्तार, एक आईएएफ परिप्रेक्ष्य।<ref>{{Cite web|url=https://eprints.nmlindia.org/2762/1/18-23.PDF|title=Life Extension of Aircraft Components - An IAF Perspective. P.K. DESAI}}</ref>
== राजनयिक सेवा ==
देसाई ने [[मास्को]] में [[भारत के राजनयिक मिशनों की सूची|भारतीय दूतावास]] में उप एयर अटैची के रूप में कार्य किया। बाद में, वह [[रूस]] और [[युक्रेन|यूक्रेन]] में कई भारतीय प्रतिनिधिमंडलों का हिस्सा थे, और सफलतापूर्वक रक्षा अनुबंध पूरा किया। वह २००२ में तत्कालीन रक्षा मंत्री [[जॉर्ज फ़र्नान्डिस|जॉर्ज फर्नांडीस]] के नेतृत्व में रूस जाने वाले भारतीय प्रतिनिधिमंडल के सदस्य थे।<ref>{{Cite news|url=https://economictimes.indiatimes.com/george-has-a-big-shopping-list-for-moscow-trip/articleshow/6253953.cms?from=mdr|title=George has a big shopping list for Moscow trip|date=2002-04-09|work=The Economic Times|access-date=2023-03-04|issn=0013-0389}}</ref>
== सम्मान==
[[भारत सरकार]] ने देसाई को [[परम विशिष्ट सेवा पदक]], [[अति विशिष्ट सेवा पदक]] और [[विशिष्ट सेवा पदक]] प्रदान किए।
{| style="margin:1em auto; text-align:center;"
|[[चित्र:Param-vishisht-seva-medal.png|350x350पिक्सेल|Param-vishisht-seva-medal]][[चित्र:Param_Vishisht_Seva_Medal_ribbon.svg|150x150पिक्सेल]]
|
|
|}
== सेवानिवृत्ति के बाद ==
देसाई भारतीय वायुसेना से सेवानिवृत्ति के बाद से [[अहमदाबाद]] में गुजरात वायु सेना संघ के अध्यक्ष हैं।<ref>{{Cite web|url=https://indianexpress.com/article/cities/ahmedabad/iaf-officers-call-for-war-memorial-at-gandhinagar/|title=IAF officers call for war memorial at Gandhinagar|date=2009-01-19|website=The Indian Express|language=en|access-date=2023-03-04}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://connectgujarat.com/celebrations-of-formation-day-of-air-force-association-gujarat-branch/|title=Celebrations of formation day of Air Force Association Gujarat Branch|last=|first=|date=2019-09-16|website=connectgujarat.com|language=en|access-date=2023-03-04}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://navjeevanexpress.com/air-force-assn-gujarat-branch-hosts-late-flying-officer-nirmal-jit-singh-sekhon-pvc-annual-memorial-lectures/|title=Air Force Assn, Gujarat Branch hosts Late Flying Officer Nirmal Jit Singh Sekhon PVC Annual Memorial Lectures|date=2022-11-13|website=Navjeevan Express|language=en-US|access-date=2023-03-04}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://gujarati.news18.com/news/politics/protests-by-former-armimena-funds-15503.html|title=અમદાવાદ ખાતે ભૂતપૂર્વ આર્મિમેન દ્વારા વિરોધ પ્રદર્શન કરાયુ|date=2015-06-14|website=News18 Gujarati|access-date=2023-04-04}}</ref> संघ सेवानिवृत्त वायु सेना कर्मियों के कल्याण की देखभाल करता है और सामुदायिक सेवा में भी शामिल है।<ref>{{Cite web|url=https://navjeevanexpress.com/air-force-association-of-gujarat-begins-5-day-womans-hygiene-awareness-drive-in-ahmedabad-gnagar/|title=Air Force Association of Gujarat begins 5-day menstrual hygiene awareness drive in Ahmedabad, G'nagar|date=2021-06-20|website=Navjeevan Express|language=en-US|access-date=2023-03-04}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://connectgujarat.com/gujarat/air-force-veterans-conducts-social-welfare-activities-under-afag-1105539|title=Air Force veterans conducts social welfare activities under AFAG|last=|first=|date=2021-06-20|website=connectgujarat.com|language=en|access-date=2023-04-04}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.divyabhaskar.co.in/news/MGUJ-AHM-HMU-MAT-latest-ahmedabad-news-122003-1896757-NOR.html|title=નિર્મલજિત સિંઘ શેખોન મેમોરિયલ લેક્ચર સિરીઝની બીજી આવૃત્તિ યોજાઇ|date=2017-01-30|website=Divya Bhaskar|access-date=2023-04-04}}</ref>
देसाई ने अपने भाई की याद में [[महाराष्ट्र]] में [[नागपुर]] के पास ''नवीन देसाई विद्यालय'' की स्थापना में मदद की है। स्कूल श्रमिकों के बच्चों को मुफ्त शिक्षा प्रदान करता है।<ref>{{Cite news|url=https://timesofindia.indiatimes.com/city/nagpur/now-a-school-for-quarry-workers-kids/articleshow/2549203.cms|title=Now, a school for quarry workers' kids|date=2007-11-18|work=The Times of India|access-date=2024-04-28|issn=0971-8257}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.thebetterindia.com/216752/nagpur-prostitution-sex-worker-children-rescue-activist-hero-india-gop94/|title=For 30 Years, This Nagpur Man Has Rescued And Educated Children of Sex Workers!|last=Karelia|first=Gopi|date=2020-02-24|website=The Better India|language=en-US|access-date=2024-04-28}}</ref>
== संदर्भ ==
{{Reflist}}
[[श्रेणी:परम विशिष्ट सेवा पदक प्राप्तकर्ता]]
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मिस यूनीवर्स 2012
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{{Infobox beauty pageant
| photo = Miss Universe Olivia Culpo.jpg
| caption = [[ओलिविया कल्पो]]
| winner = ओलिविया कल्पो
|represented=संयुक्त राज्य अमेरिका
| congeniality = लौरा गोडॉय, ग्वाटेमाला
| best national costume = जू जिदान, चीन
| photogenic = डायना अवदियू, कोसोवो
| date = 19 दिसंबर, 2012
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| presenters = {{Hlist|एंडी कोहेन|गिउलिआना रैंसिक|जेनी माई|शम्सी सुपसुप}}
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| before = [[मिस यूनीवर्स 2011|2011]]
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}}
'''मिस यूनीवर्स 2012''', [[मिस यूनिवर्स]] प्रतियोगिता का 61वां संस्करण था, जो 19 दिसंबर 2012 को पीएच लाइव, प्लैनेट हॉलीवुड रिसॉर्ट एंड कसीनो, [[लास वेगास]], [[नेवाडा]], [[संयुक्त राज्य अमेरिका]] में आयोजित किया गया।<ref name=":0">{{Cite news |last=Coleman |first=Korva |date=December 20, 2012 |title=Miss USA Olivia Culpo Crowned Miss Universe; Former Contestant Loses Lawsuit |language=en |work=[[NPR]] |url=https://www.npr.org/sections/thetwo-way/2012/12/20/167696763/miss-usa-olivia-culpo-crowned-miss-universe-former-contestant-loses-lawsuit |access-date=June 13, 2022 |archive-date=June 13, 2022 |archive-url=https://web.archive.org/web/20220613111923/https://www.npr.org/sections/thetwo-way/2012/12/20/167696763/miss-usa-olivia-culpo-crowned-miss-universe-former-contestant-loses-lawsuit |url-status=live }}</ref><ref>{{Cite web |date=December 20, 2012 |title=Crowning Miss Universe 2012 |url=http://www.today.com/slideshow/crowning-miss-universe-2012-50256832 |access-date=June 13, 2022 |website=[[Today (American TV program)|Today.com]] |language=en }}{{Dead link|date=November 2023 |bot=InternetArchiveBot |fix-attempted=yes }}</ref>
यह प्रतियोगिता संयुक्त राज्य अमेरिका की [[ओलिविया कल्पो]] ने जीती, जिन्हें [[अंगोला]] की [[लेइला लोपेस]] ने ताज पहनाया।
यह अमेरिका की पंद्रह वर्षों में पहली जीत थी, और मिस यूनिवर्स प्रतियोगिता में उसकी आठवीं जीत थी।<ref name=":0" /><ref>{{Cite web |last=Martinez |first=Edecio |date=December 20, 2012 |title=Miss USA crowned Miss Universe 2012 |url=https://www.cbsnews.com/pictures/miss-usa-crowned-miss-universe-2012/ |access-date=June 13, 2022 |website=[[CBS News]] |language=en-US |archive-date=June 13, 2022 |archive-url=https://web.archive.org/web/20220613083720/https://www.cbsnews.com/pictures/miss-usa-crowned-miss-universe-2012/ |url-status=live }}</ref>
इस वर्ष की प्रतियोगिता में 89 देशों और क्षेत्रों की प्रतिभागियों ने भाग लिया, जो पिछले वर्ष से तीन अधिक थीं।<ref>{{Cite web |date=December 21, 2012 |title=Miss USA Olivia Culpo is Miss Universe 2012! |url=https://www.indiatoday.in/lifestyle/buzz-top/story/miss-universe-2012-winner-olivia-culpo-124772-2012-12-19 |access-date=June 15, 2022 |website=[[India Today]] |language=en |archive-date=December 2, 2019 |archive-url=https://web.archive.org/web/20191202210819/https://www.indiatoday.in/lifestyle/buzz-top/story/miss-universe-2012-winner-olivia-culpo-124772-2012-12-19 |url-status=live }}</ref>
यह प्रतियोगिता एंडी कोहेन और जियुलियाना रैंसिक द्वारा होस्ट की गई थी, जबकि जिनी माई ने बैकस्टेज संवाददाता की भूमिका निभाई।
इस वर्ष के सौंदर्य प्रतियोगिता में अमेरिकन रॉक बैंड "ट्रेन" और ऑस्ट्रेलियाई संगीतकार टिम ओमाजी ने प्रस्तुति दी।<ref name="CBS News 2012">{{cite web |date=December 17, 2012 |title=Judges mum on 16 Miss Universe finalists |url=http://www.cbsnews.com/news/judges-mum-on-16-miss-universe-finalists/ |access-date=April 16, 2016 |website=[[CBS News]] |archive-date=April 25, 2016 |archive-url=https://web.archive.org/web/20160425113552/http://www.cbsnews.com/news/judges-mum-on-16-miss-universe-finalists/ |url-status=live }}</ref><ref>{{Cite web |last=Loinaz |first=Alexis |date=October 24, 2012 |title=Giuliana Rancic and Andy Cohen to Cohost Miss Universe Pageant in December |url=https://www.eonline.com/news/356566/giuliana-rancic-and-andy-cohen-to-cohost-miss-universe-pageant-in-december |access-date=June 13, 2022 |website=[[E!|E! Online]] |archive-date=June 13, 2022 |archive-url=https://web.archive.org/web/20220613111923/https://www.eonline.com/news/356566/giuliana-rancic-and-andy-cohen-to-cohost-miss-universe-pageant-in-december |url-status=live }}</ref>
==पृष्ठभूमि==
[[File:Planet hollywood resort-night.JPG|प्लैनेट हॉलीवुड रिज़ॉर्ट और कैसीनो, स्थल|thumb|240px]]
===स्थान और तिथि===
मार्च 2012 में, मिस यूनिवर्स संगठन ने घोषणा की कि इस बार की प्रतियोगिता को दिसंबर के मध्य तक के लिए स्थगित किया गया है, क्योंकि [[एनबीसी]] प्रसारणकर्ता एक ही समय पर [[2012 ग्रीष्मकालीन ओलम्पिक]] और [[संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव, २०१२]] के साथ इस प्रतियोगिता का प्रसारण नहीं कर सकता था।
अप्रैल 2012 में यह घोषणा की गई कि बांग्लादेश इस प्रतियोगिता की 13 दिसंबर 2012 को मेज़बानी करेगा। हालांकि, जुलाई में बांग्लादेश के राष्ट्रपति ने घोषणा की कि वे आर्थिक कठिनाइयों के कारण इस प्रतियोगिता की मेज़बानी नहीं कर पाएंगे।<ref name="confirm802">{{cite news |last1=Adina |first1=Armin |date=August 17, 2016 |title=Philippines' hosting of Miss Universe '80 percent confirmed' |work=Inquirer Lifestyle |publisher=[[Philippine Daily Inquirer]] |url=http://lifestyle.inquirer.net/235464/philippines-hosting-of-miss-universe-80-percent-confirmed |access-date=September 12, 2016 |archive-date=August 18, 2016 |archive-url=https://web.archive.org/web/20160818163854/http://lifestyle.inquirer.net/235464/philippines-hosting-of-miss-universe-80-percent-confirmed |url-status=live }}</ref>
अगस्त 2012 में, डोमिनिकन गणराज्य की सरकार को मिस यूनिवर्स संगठन से एक प्रस्ताव प्राप्त हुआ था कि प्रतियोगिता को 11 दिसंबर 2012 को वहां आयोजित किया जाए। इससे पहले डोमिनिकन गणराज्य ने मिस यूनिवर्स 1977 की मेज़बानी सांतो डोमिंगो में की थी।<ref>{{Cite web |date=June 14, 2012 |title=Official: Miss Universe chooses Dominican Republic |url=https://www.sandiegouniontribune.com/sdut-official-miss-universe-chooses-dominican-republic-2012jun14-story.html |access-date=June 13, 2022 |website=[[San Diego Union-Tribune]] |language=en-US |archive-date=June 13, 2022 |archive-url=https://web.archive.org/web/20220613121150/https://www.sandiegouniontribune.com/sdut-official-miss-universe-chooses-dominican-republic-2012jun14-story.html |url-status=live }}</ref> इस बार संगठन पंटा काना के हार्ड रॉक रिसॉर्ट एंड कसीनो में अंतिम रात आयोजित करने पर विचार कर रहा था।
हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया कि देश इस प्रतियोगिता के लिए कोई वित्तीय सहायता प्रदान नहीं कर सकता, इसलिए [[डोमिनिकन गणराज्य]] को मेजबानी का अधिकार नहीं मिला।<ref name="confirm802" /><ref name=":12">{{cite news |last=Leach |first=Robin |date=September 26, 2012 |title=2012 Miss Universe Pageant relocates to Las Vegas from Dominican Republic |work=[[Las Vegas Sun]] |url=http://www.lasvegassun.com/news/2012/sep/26/2012-miss-universe-pageant-relocates-las-vegas-dom/ |url-status=dead |access-date=January 3, 2013 |archive-url=https://web.archive.org/web/20121231223837/http://www.lasvegassun.com/news/2012/sep/26/2012-miss-universe-pageant-relocates-las-vegas-dom/ |archive-date=December 31, 2012}}</ref>
संगठन ने इस वर्ष की मिस यूनिवर्स प्रतियोगिता को पारंपरिक मध्य-वर्ष की समयसारणी से बदलकर दिसंबर में लास वेगास, नेवाडा में आयोजित करने का निर्णय लिया। 27 सितंबर 2012 को, संगठन ने पुष्टि की कि मिस यूनिवर्स 2012 प्रतियोगिता 19 दिसंबर 2012 को प्लैनेट हॉलीवुड रिसॉर्ट एंड कसीनो, लास वेगास, नेवाडा में आयोजित की जाएगी।<ref name=":12" />
===प्रतिभागियों का चयन===
उन्यासी देशों और क्षेत्रों की प्रतिभागियों को इस प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए चुना गया।
इनमें से सात प्रतिनिधियों को उनके राष्ट्रीय प्रतियोगिता में रनर-अप रहने या कास्टिंग प्रक्रिया के माध्यम से चुने जाने के बाद नियुक्त किया गया, जबकि नौ को मूल विजेताओं के स्थान पर चुना गया।
मिस यूनिवर्स कनाडा 2012 की प्रथम रनर-अप एड्वोआ यामोआ थीं इनको सहार बिनियाज़, मिस यूनिवर्स कनाडा 2012, के व्यक्तिगत कारणों से नाम वापस लेने के बाद कनाडा का प्रतिनिधित्व करने के लिए नियुक्त किया गया।<ref>{{Cite web |date=May 20, 2012 |title=Sahar Biniaz Crowned Miss Universe Canada 2012 |url=https://www.ibtimes.co.uk/sahar-biniaz-crowned-miss-universe-canada-2012-343053 |access-date=June 13, 2022 |website=[[International Business Times]] |language=en |archive-date=May 4, 2020 |archive-url=https://web.archive.org/web/20200504051640/https://www.ibtimes.co.uk/sahar-biniaz-crowned-miss-universe-canada-2012-343053 |url-status=live }}</ref><ref name=":2">{{Cite web |last=Cahute |first=Larissa |date=December 7, 2012 |title=Vancouver woman out of Miss Universe |url=https://theprovince.com/life/Vancouver+woman+Miss+Universe/7665563/story.html |url-status=dead |archive-url=https://web.archive.org/web/20140512221546/http://www2.canada.com/theprovince/news/story.html?id=831a432e-deeb-42e2-99a1-84826352c81d |archive-date=May 12, 2014 |access-date=December 9, 2012 |website=[[The Province]]}}</ref>
स्टार साइप्रस 2012 की रनर-अप इओआन्ना यियानाकोउ थीं इनको न्टानिएला केफाला, स्टार साइप्रस 2012, के अज्ञात कारणों से नाम वापस लेने के बाद साइप्रस का प्रतिनिधित्व करने के लिए नियुक्त किया गया।<ref>{{Cite web |last=Φούντα |first=Γωγώ |date=July 9, 2012 |title=Star Kύπρος 2012: Backstage και πρόβες από την μεγάλη βραδιά |url=https://www.queen.gr/juicy/juicy-news/story/54959/star-kypros-2012-backstage-kai-proves-apo-tin-megali-vradia |access-date=June 14, 2022 |website=Queen.gr |language=el |archive-date=April 3, 2023 |archive-url=https://web.archive.org/web/20230403225926/https://www.queen.gr/juicy/juicy-news/story/54959/star-kypros-2012-backstage-kai-proves-apo-tin-megali-vradia |url-status=live }}</ref>
मिस डोमिनिकन रिपब्लिक 2012 कारोला डुरान को प्रतियोगिता में भाग लेना था, लेकिन यह पता चलने के बाद कि वह पहले विवाह कर चुकी थीं और तलाकशुदा हैं, उनसे ताज वापस ले लिया गया। उनकी जगह प्रथम रनर-अप डुलसिटा लिग्गी को नियुक्त किया गया।<ref>{{Cite web |last=Macatee |first=Rebecca |date=April 27, 2012 |title=Another Miss Universe Scandal: Miss Dominican Republic Carlina Duran Dethroned for Being a Missus! |url=https://www.eonline.com/news/311756/another-miss-universe-scandal-miss-dominican-republic-carlina-duran-dethroned-for-being-a-missus |access-date=June 13, 2022 |website=[[E!|E! Online]] |archive-date=December 14, 2018 |archive-url=https://web.archive.org/web/20181214125247/https://www.eonline.com/news/311756/another-miss-universe-scandal-miss-dominican-republic-carlina-duran-dethroned-for-being-a-missus |url-status=live }}</ref>
नताली कोर्नेइत्सिक, जो मिस एस्टोनिया 2012 की प्रथम रनर-अप थीं, को विजेता कैटलिन वाल्डमेट्स के प्रायोजन की कमी के कारण नाम वापस लेने के बाद एस्टोनिया का प्रतिनिधित्व करने के लिए नियुक्त किया गया।<ref>{{Cite web |last=Sokol |first=Yulia |date=August 27, 2012 |title=Наталия Корнейчик: попрошу Эвелин Ильвес помочь с платьем на "Мисс Вселенную" |url=https://rus.err.ee/155861/natalija-kornejchik-poproshu-jevelin-ilves-pomoch-s-platem-na-miss-vselennuju |access-date=June 14, 2022 |website=[[Eesti Rahvusringhääling]] |language=ru |archive-date=April 3, 2023 |archive-url=https://web.archive.org/web/20230403225926/https://rus.err.ee/155861/natalija-kornejchik-poproshu-jevelin-ilves-pomoch-s-platem-na-miss-vselennuju |url-status=live }}</ref>
मैरी पायेट, जो मिस फ्रांस 2012 की प्रथम रनर-अप थीं, को मिस यूनिवर्स 2012 और मिस फ्रांस 2013 की तिथियों में संभावित टकराव के कारण फ्रांस का प्रतिनिधित्व करने के लिए नियुक्त किया गया, क्योंकि डेल्फीन वेस्पाइज़र, मिस फ्रांस 2012, को अनुबंध के अनुसार उस कार्यक्रम में उपस्थित रहना आवश्यक था।<ref>{{Cite web |last=Guardiola |first=Ari |date=October 10, 2012 |title=Miss Univers : Delphine Wespiser laisse sa place à la sublime Miss Réunion |url=https://www.purepeople.com/article/miss-univers-delphine-wespiser-laisse-sa-place-a-la-sublime-miss-reunion_a108338/1 |access-date=June 14, 2022 |website=[[Webedia#France|Purepeople]] |language=fr |archive-date=January 28, 2022 |archive-url=https://web.archive.org/web/20220128091448/https://www.purepeople.com/article/miss-univers-delphine-wespiser-laisse-sa-place-a-la-sublime-miss-reunion_a108338/1 |url-status=live }}</ref>
चन्ना डिवोवी, जो मिस गैबॉन 2012 की प्रथम रनर-अप थीं, को गैबॉन का प्रतिनिधित्व करने के लिए नियुक्त किया गया, क्योंकि मिस यूनिवर्स 2012 और मिस गैबॉन 2013 की तिथियों में संभावित टकराव था, जहाँ विजेता मैरी-नोएल अडा को अनुबंध के अनुसार उपस्थित रहना आवश्यक था।<ref>{{Cite web |last=Batassi |first=Pierre Eric |date=December 31, 2011 |title=Marie Noëlle Ada, nouvelle reine de la beauté gabonaise |url=https://www.afrik.com/marie-noelle-ada-nouvelle-reine-de-la-beaute-gabonaise |access-date=June 14, 2022 |website=Afrik |language=fr-FR |archive-date=April 3, 2023 |archive-url=https://web.archive.org/web/20230403225928/https://www.afrik.com/marie-noelle-ada-nouvelle-reine-de-la-beaute-gabonaise |url-status=live }}</ref>
जो आई एम सी 2012 की प्रथम रनर-अप शिल्पा सिंह थीं इनको [[उर्वशी रौतेला]], मिस यूनिवर्स इंडिया 2012, के नाम वापस लेने के बाद भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए नियुक्त किया गया, क्योंकि वह कम उम्र की थीं और उस समय मिस टूरिज्म क्वीन ऑफ द ईयर इंटरनेशनल का खिताब भी उनके पास था।<ref>{{Cite web |date=April 24, 2020 |title=Friday Trivia: Did you Know Urvashi Rautela was dethroned as Miss Universe? [Throwback] |url=https://www.ibtimes.co.in/friday-trivia-did-you-know-urvashi-rautela-was-dethroned-miss-universe-throwback-818276 |access-date=June 14, 2022 |website=[[International Business Times]] |language=en |archive-date=August 12, 2022 |archive-url=https://web.archive.org/web/20220812125014/https://www.ibtimes.co.in/friday-trivia-did-you-know-urvashi-rautela-was-dethroned-miss-universe-throwback-818276 |url-status=live }}</ref>
एवियंका बोहम, मिस यूनिवर्स न्यूज़ीलैंड 2012, को नागरिकता संबंधी समस्याओं के कारण उनकी प्रथम रनर-अप तालिया बेनेट से बदल दिया गया।<ref name="nzherald1">{{cite news |url=http://www.nzherald.co.nz/nz/news/article.cfm?c_id=1&objectid=10823532 |title=Miss Universe NZ stripped of her tiara – National – NZ Herald News |work=The New Zealand Herald |date=July 31, 2012 |access-date=August 9, 2012 |archive-date=August 7, 2012 |archive-url=https://web.archive.org/web/20120807105423/http://www.nzherald.co.nz/nz/news/article.cfm?c_id=1&objectid=10823532 |url-status=live }}</ref>
इसाबेला अयुक, मोस्ट ब्यूटीफुल गर्ल इन नाइजीरिया 2012, ने डेमिएट चार्ल्स ग्रैनविल, मोस्ट ब्यूटीफुल गर्ल इन नाइजीरिया यूनिवर्स 2012, के साथ प्रतियोगिताएँ बदल लीं, क्योंकि वह मिस वर्ल्ड के लिए अधिक आयु (ओवरएज) की हो गई थीं।<ref name=":3">{{cite news |last=Ogunjimi |first=Opeoluwani |date=June 22, 2012 |title=MBGN Controversy: Ayuk still queen but ... |newspaper=[[Vanguard (Nigeria)|Vanguard]] |url=http://www.vanguardngr.com/2012/06/mbgn-controversy-ayuk-still-queen-but-silverbird/ |location=Lagos, Nigeria|access-date=December 12, 2012 |archive-date=December 25, 2022 |archive-url=https://web.archive.org/web/20221225114343/https://www.vanguardngr.com/2012/06/mbgn-controversy-ayuk-still-queen-but-silverbird/ |url-status=live }}</ref>
एंड्रिया हुइसगेन, मिस स्पेन 2011, भाग लेने में असमर्थ थीं क्योंकि मिस स्पेन संगठन दिवालिया हो गया था, और लाइसेंस एक नए संगठन मिस यूनिवर्स स्पेन को दे दिया गया था।
हालांकि अधिकार बदल गए थे, फिर भी हुइसगेन को अनुबंध बदलने के बाद प्रतियोगिता में भाग लेने की अनुमति दी गई।<ref name=":4">{{cite news |date=November 23, 2012 |title=Andrea Huisgen podrá competir en Miss Universo tras renunciar a su contrato con Miss España |language=es |newspaper=[[20 minutos]] |url=http://www.20minutos.es/noticia/1657104/0/andrea-huisgen/competira/miss-universo/ |access-date=December 15, 2012 |archive-date=April 3, 2023 |archive-url=https://web.archive.org/web/20230403233421/https://www.20minutos.es/noticia/1657104/0/andrea-huisgen/competira/miss-universo/ |url-status=live }}</ref>
इस प्रतियोगिता में गैबॉन और लिथुआनिया ने पहली बार भाग लिया, जबकि बुल्गारिया, इथियोपिया, नामीबिया और नॉर्वे की वापसी हुई।<ref>{{Cite web |last=Gavilan |first=Jodesz |date=January 19, 2017 |title=FAST FACTS: Things to know about the Miss Universe pageant |url=https://www.rappler.com/newsbreak/iq/116694-fast-facts-miss-universe-pageant/ |access-date=June 14, 2022 |website=[[Rappler]] |language=en-US |archive-date=June 14, 2022 |archive-url=https://web.archive.org/web/20220614084024/https://www.rappler.com/newsbreak/iq/116694-fast-facts-miss-universe-pageant/ |url-status=live }}</ref>
बुल्गारिया, इथियोपिया और नामीबिया ने आखिरी बार [[मिस यूनीवर्स 2009]] में भाग लिया था, जबकि नॉर्वे ने आखिरी बार मिस यूनिवर्स 2010 में भाग लिया था।
मिस्र, कज़ाख़स्तान, पुर्तगाल, स्लोवेनिया, तुर्क्स और कैकोस आइलैंड्स और संयुक्त राज्य वर्जिन आइलैंड्स ने प्रतियोगिता से नाम वापस ले लिया।
ऐनूर टोल्येउओवा ने कम उम्र होने के कारण नाम वापस ले लिया।
मिस्र, पुर्तगाल, स्लोवेनिया, तुर्क्स और कैकोस तथा संयुक्त राज्य वर्जिन आइलैंड्स ने इसलिए प्रतियोगिता से नाम वापस लिया क्योंकि उनके संबंधित संगठनों ने राष्ट्रीय प्रतियोगिता आयोजित नहीं की या किसी प्रतिनिधि की नियुक्ति नहीं की।<ref>{{cite web |last=Boh |first=Tina |date=July 30, 2013 |title=Po enoletnem premoru bomo spet dobili mis Universe |url=http://www.siol.net/trendi/lepota_in_zdravje/lepota/2013/07/po_enoletnem_premoru_bomo_spet_dobili_mis_universe.aspx |url-status=dead |archive-url=https://web.archive.org/web/20130807065506/http://www.siol.net/trendi/lepota_in_zdravje/lepota/2013/07/po_enoletnem_premoru_bomo_spet_dobili_mis_universe.aspx |archive-date=August 7, 2013 |access-date=June 14, 2022 |website=[[Siol]]}}</ref>
====ट्रांसजेंडर महिलाओं को प्रतियोगिता में भाग लेने की अनुमति दी गई====
[[मिस यूनीवर्स 2013]] से शुरू होकर, मिस यूनिवर्स ऑर्गेनाइजेशन ने ग्लाड (GLAAD) से परामर्श के बाद [[ट्रांसजेंडर]] महिलाओं को प्रतियोगिता में भाग लेने की अनुमति दी।
नियमों में यह बदलाव जेना तलाकोवा के मामले के बाद आया, जो मिस यूनिवर्स कनाडा 2012 में भाग ले रही थीं और जिन्हें प्रतियोगिता से हटा दिया गया था।<ref>{{Cite news |date=April 10, 2012 |title=Miss Universe changes rules to include transgender women |language=en |work=[[Reuters]] |url=https://www.reuters.com/article/entertainment-us-missuniverse-transgende-idUSBRE8390N320120410 |access-date=June 14, 2022 |archive-date=June 14, 2022 |archive-url=https://web.archive.org/web/20220614141149/https://www.reuters.com/article/entertainment-us-missuniverse-transgende-idUSBRE8390N320120410 |url-status=live }}</ref> उन्हें इसलिए हटाया गया था क्योंकि वे “प्रतियोगिता में भाग लेने की आवश्यकताओं को पूरा नहीं करती थीं।”<ref>{{Cite web |last=Dyball |first=Rennie |date=March 26, 2012 |title=Jenna Talackova Removed from Miss Universe Canada for Being Transgender |url=https://people.com/celebrity/jenna-talackova-removed-from-miss-universe-canada-for-being-transgender/ |access-date=June 14, 2022 |website=[[People (magazine)|People.com]] |language=en |archive-date=June 14, 2022 |archive-url=https://web.archive.org/web/20220614141309/https://people.com/celebrity/jenna-talackova-removed-from-miss-universe-canada-for-being-transgender/ |url-status=live }}</ref>
हटाए जाने के एक महीने बाद संगठन ने तलाकोवा को फिर से प्रतियोगिता में भाग लेने की अनुमति दे दी, बशर्ते कि वे “कनाडा के कानूनी लिंग मान्यता संबंधी आवश्यकताओं और अन्य अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के मानकों को पूरा करें।”<ref>{{Cite web |last=Landis |first=Marina |date=April 3, 2012 |title=Miss Universe allows transgender contestant back into competition |url=https://www.cnn.com/2012/04/03/world/americas/canada-miss-universe-transgender-con/index.html |access-date=June 14, 2022 |website=[[CNN]] |archive-date=June 14, 2022 |archive-url=https://web.archive.org/web/20220614141149/https://www.cnn.com/2012/04/03/world/americas/canada-miss-universe-transgender-con/index.html |url-status=live }}</ref>
तलाकोवा शीर्ष 12 में पहुंचीं और मिस कंजेनियलिटी पुरस्कार जीतने वाली चार प्रतिभागियों में से एक रहीं।<ref>{{Cite web |last=Macatee |first=Rebecca |date=May 22, 2012 |title=Transgender Miss Universe Canada Contestant Jenna Talackova Places in Top 12, Wins Miss Congeniality Award |url=https://www.eonline.com/news/317810/transgender-miss-universe-canada-contestant-jenna-talackova-places-in-top-12-wins-miss-congeniality-award |access-date=June 14, 2022 |website=[[E!#E! Online|E! Online]] |archive-date=June 14, 2022 |archive-url=https://web.archive.org/web/20220614141309/https://www.eonline.com/news/317810/transgender-miss-universe-canada-contestant-jenna-talackova-places-in-top-12-wins-miss-congeniality-award |url-status=live }}</ref>
प्रतियोगिता के नियमों में बदलाव के छह साल बाद, एंजेला पोंसे ने [[मिस यूनिवर्स 2018]] में इतिहास रच दिया, क्योंकि वह मिस यूनिवर्स में भाग लेने वाली पहली ट्रांसजेंडर प्रतिभागी बनीं।<ref>{{Cite magazine |last=Lang |first=Cady |date=December 17, 2018 |title=Miss Spain is Miss Universe's First Transgender Competitor |url=https://time.com/5481417/miss-spain/ |access-date=June 14, 2022 |magazine=[[Time (magazine)|Time]] |language=en |archive-date=December 17, 2018 |archive-url=https://web.archive.org/web/20181217191738/http://time.com/5481417/miss-spain/ |url-status=live }}</ref>
==परिणाम==
[[File:Miss Universe 2012 map.png|thumb|240px|सहभागी देश और क्षेत्र]]
=== प्लेसमेंट ===
{| class="wikitable sortable" style="font-size: 95%;"
! स्थान!! प्रतियोगी
|-
| मिस यूनिवर्स 2012
|
* {{flagu|संयुक्त राज्य अमेरिका}} – [[ओलिविया कल्पो]]<ref name=":5">{{Cite web |date=December 20, 2012 |title=Philippines is 1st runner up in Miss Universe 2012 |url=https://www.rappler.com/life-and-style/18252-miss-philippines-wins-1st-runner-up-at-miss-universe-2012/ |access-date=June 14, 2022 |website=[[Rappler]] |language=en-US |archive-date=June 14, 2022 |archive-url=https://web.archive.org/web/20220614090549/https://www.rappler.com/life-and-style/18252-miss-philippines-wins-1st-runner-up-at-miss-universe-2012/ |url-status=live }}</ref>
|-
| प्रथम उपविजेता
|
* {{flagu|फिलिपींस}} – जेनीन टुगोनोन<ref name=":5" />
|-
| द्वितीय उपविजेता
|
* {{flagu|वेनेज़ुएला}} – इरेन एस्सर<ref name=":5" />
|-
| तीसरा उपविजेता
|
* {{flagu|ऑस्ट्रेलिया}} – रेनाए आयरिस<ref name=":5" />
|-
| चौथा उपविजेता
|
*{{flagu|ब्राज़ील}} – गैब्रिएला मार्कस<ref name=":5" />
|-
| शीर्ष 10<ref name=":5" />
|
* {{flagu|फ्रांस}} – मैरी पायेट
* {{flagu|हंगरी}} – एग्नेस कोंकोली
* {{flagu|मेक्सिको}} – करिना गोंज़ालेज़
* {{flagu|रूस}} – एलिज़ावेटा गोलोवानोवा
* {{flagu|दक्षिण अफ्रीका}} – मेलिंडा बाम
|-
| शीर्ष 16<ref name=":5" />
|
* {{flagu|क्रोएशिया}} – एलिजाबेथ बर्ग
* {{flagu|भारत}} – शिल्पा सिंह
* {{flagu|कोसोवो}} – डायना अवदिउ
* {{flagu|पेरू}} – निकोल कैवर्न
* {{flagu|पोलैंड}} – मार्सेलिना ज़ावाड्ज़्का
* {{flagu|तुर्की}} – कागिल ओज़कुल
|}
===विशेष पुरस्कार ===
{| class="wikitable sortable" style="font-size:95%;"
|-
! पुरस्कार
! प्रतियोगी
|-
| मिस कोंगेनीयलिटी
|
*{{flagu|ग्वाटेमाला}} – लौरा गोडॉय<ref name=":5" />
|-
| मिस फोटोजेनिक
|
*{{flagu|कोसोवो}} – डायना अवदिउ<ref name=":5" />
|}
==== सर्वश्रेष्ठ राष्ट्रीय पोशाक ====
{| class="wikitable sortable" style="font-size:95%;"
|-
! प्लेसमेंट
! प्रतियोगी
|-
| विजेता
|
*{{flagu|चीन}} – जू जिदान<ref name=":5" />
|-
| प्रथम उपविजेता
|
*{{flagu|मेक्सिको}} – करिना गोंजालेज<ref name=":5" />
|-
| द्वितीय उपविजेता
|
*{{Flagu|नीदरलैंड}} – नथाली डेन डेकर<ref name=":5" />
|-
| तीसरा उपविजेता
|
*{{Flagu|श्रीलंका}} – सबरीना हेर्फ्ट<ref name=":5" />
|-
| चौथे उपविजेता
|
*{{flagu|ब्राजील}} – गैब्रिएला मार्कस<ref name=":5" />
|-
| शीर्ष 10
|
*{{Flagu|ब्रिटिश वर्जिन द्वीपसमूह}} – अबीगैल हाइंडमैन<ref name=":5" />
*{{Flagu|निकारागुआ}} – फराह एस्लाक्विट<ref name=":5" />
*{{Flagu|इंडोनेशिया}} – मारिया सेलेना<ref name=":5" />
*{{Flagu|पनामा}} – स्टेफ़नी वेंडर वर्फ़<ref name=":5" />
*{{Flagu|पेरू}} – निकोल फेवरॉन<ref name=":5" />
|}
==प्रतियोगिता==
===प्रारूप===
मिस यूनिवर्स 2011 की तरह ही, पंद्रह सेमीफाइनलिस्ट प्रारंभिक प्रतियोगिता के माध्यम से चुने गए, जिसमें स्विमसूट और ईवनिंग गाउन प्रतियोगिताएँ तथा बंद कमरे में साक्षात्कार शामिल थे।
इंटरनेट वोटिंग भी लागू रही, जिसमें प्रशंसक एक अन्य प्रतिनिधि को वोट देकर सेमीफाइनल में आगे बढ़ा सकते थे, जिससे सेमीफाइनलिस्टों की संख्या सोलह हो गई। फैन वोट के विजेता का खुलासा अंतिम प्रसारण के दौरान नहीं किया गया।
सोलह सेमीफाइनलिस्टों ने स्विमसूट प्रतियोगिता में भाग लिया और उनकी संख्या घटाकर दस कर दी गई।
दस सेमीफाइनलिस्टों ने ईवनिंग गाउन प्रतियोगिता में भाग लिया और उनकी संख्या घटाकर पाँच कर दी गई।
पाँच फाइनलिस्टों ने प्रश्न-उत्तर चरण और अंतिम प्रस्तुति (फाइनल लुक) में भाग लिया।
==सन्दर्भ==
{{टिप्पणीसूची|30em}}
==बाहरी कड़ियाँ==
*[http://www.missuniverse.com मिस यूनिवर्स आधिकारिक वेबसाइट]
{{मिस यूनीवर्स}} {{सुन्दरता प्रतियोगिता}}
[[श्रेणी: मिस यूनीवर्स]]
[[श्रेणी: सुन्दरता प्रतियोगिता]]
[[श्रेणी: अंतर्राष्ट्रीय सुन्दरता प्रतियोगिता]]
a6xwy5dum3b1jjqox1w99ywpxq8iqm4
6547892
6547891
2026-05-03T03:07:49Z
खास विशेष
810972
/* प्रतियोगिता */ उपशिर्षक बनाकर जानकारी डाली और सन्दर्भ जोड़ा
6547892
wikitext
text/x-wiki
{{Infobox beauty pageant
| photo = Miss Universe Olivia Culpo.jpg
| caption = [[ओलिविया कल्पो]]
| winner = ओलिविया कल्पो
|represented=संयुक्त राज्य अमेरिका
| congeniality = लौरा गोडॉय, ग्वाटेमाला
| best national costume = जू जिदान, चीन
| photogenic = डायना अवदियू, कोसोवो
| date = 19 दिसंबर, 2012
| venue = पीएच लाइव, प्लैनेट हॉलीवुड रिज़ॉर्ट एंड कैसिनो, [[लास वेगास]], [[नेवादा]], संयुक्त राज्य अमेरिका
| presenters = {{Hlist|एंडी कोहेन|गिउलिआना रैंसिक|जेनी माई|शम्सी सुपसुप}}
| entertainment = {{Hlist|ट्रेन|टिमोमैटिक}}
| broadcaster = {{Hlist|[[एनबीसी]] (केएसएनवी-डीटी)|[[टेलीमंडो]] (केबीएलआर)}}
| entrants = 89
| placements = 16
| debuts = {{Hlist|गैबॉन | लिथुआनिया}}
| withdraws = {{Hlist|मिस्र | कजाकिस्तान | पुर्तगाल | स्लोवेनिया | तुर्क और कैकोस द्वीप समूह | संयुक्त राज्य वर्जिन द्वीप समूह}}
| returns = {{Hlist|बुल्गारिया | इथियोपिया | नामीबिया | नॉर्वे}}
| before = [[मिस यूनीवर्स 2011|2011]]
| next = [[मिस यूनीवर्स 2013|2013]]
}}
'''मिस यूनीवर्स 2012''', [[मिस यूनिवर्स]] प्रतियोगिता का 61वां संस्करण था, जो 19 दिसंबर 2012 को पीएच लाइव, प्लैनेट हॉलीवुड रिसॉर्ट एंड कसीनो, [[लास वेगास]], [[नेवाडा]], [[संयुक्त राज्य अमेरिका]] में आयोजित किया गया।<ref name=":0">{{Cite news |last=Coleman |first=Korva |date=December 20, 2012 |title=Miss USA Olivia Culpo Crowned Miss Universe; Former Contestant Loses Lawsuit |language=en |work=[[NPR]] |url=https://www.npr.org/sections/thetwo-way/2012/12/20/167696763/miss-usa-olivia-culpo-crowned-miss-universe-former-contestant-loses-lawsuit |access-date=June 13, 2022 |archive-date=June 13, 2022 |archive-url=https://web.archive.org/web/20220613111923/https://www.npr.org/sections/thetwo-way/2012/12/20/167696763/miss-usa-olivia-culpo-crowned-miss-universe-former-contestant-loses-lawsuit |url-status=live }}</ref><ref>{{Cite web |date=December 20, 2012 |title=Crowning Miss Universe 2012 |url=http://www.today.com/slideshow/crowning-miss-universe-2012-50256832 |access-date=June 13, 2022 |website=[[Today (American TV program)|Today.com]] |language=en }}{{Dead link|date=November 2023 |bot=InternetArchiveBot |fix-attempted=yes }}</ref>
यह प्रतियोगिता संयुक्त राज्य अमेरिका की [[ओलिविया कल्पो]] ने जीती, जिन्हें [[अंगोला]] की [[लेइला लोपेस]] ने ताज पहनाया।
यह अमेरिका की पंद्रह वर्षों में पहली जीत थी, और मिस यूनिवर्स प्रतियोगिता में उसकी आठवीं जीत थी।<ref name=":0" /><ref>{{Cite web |last=Martinez |first=Edecio |date=December 20, 2012 |title=Miss USA crowned Miss Universe 2012 |url=https://www.cbsnews.com/pictures/miss-usa-crowned-miss-universe-2012/ |access-date=June 13, 2022 |website=[[CBS News]] |language=en-US |archive-date=June 13, 2022 |archive-url=https://web.archive.org/web/20220613083720/https://www.cbsnews.com/pictures/miss-usa-crowned-miss-universe-2012/ |url-status=live }}</ref>
इस वर्ष की प्रतियोगिता में 89 देशों और क्षेत्रों की प्रतिभागियों ने भाग लिया, जो पिछले वर्ष से तीन अधिक थीं।<ref>{{Cite web |date=December 21, 2012 |title=Miss USA Olivia Culpo is Miss Universe 2012! |url=https://www.indiatoday.in/lifestyle/buzz-top/story/miss-universe-2012-winner-olivia-culpo-124772-2012-12-19 |access-date=June 15, 2022 |website=[[India Today]] |language=en |archive-date=December 2, 2019 |archive-url=https://web.archive.org/web/20191202210819/https://www.indiatoday.in/lifestyle/buzz-top/story/miss-universe-2012-winner-olivia-culpo-124772-2012-12-19 |url-status=live }}</ref>
यह प्रतियोगिता एंडी कोहेन और जियुलियाना रैंसिक द्वारा होस्ट की गई थी, जबकि जिनी माई ने बैकस्टेज संवाददाता की भूमिका निभाई।
इस वर्ष के सौंदर्य प्रतियोगिता में अमेरिकन रॉक बैंड "ट्रेन" और ऑस्ट्रेलियाई संगीतकार टिम ओमाजी ने प्रस्तुति दी।<ref name="CBS News 2012">{{cite web |date=December 17, 2012 |title=Judges mum on 16 Miss Universe finalists |url=http://www.cbsnews.com/news/judges-mum-on-16-miss-universe-finalists/ |access-date=April 16, 2016 |website=[[CBS News]] |archive-date=April 25, 2016 |archive-url=https://web.archive.org/web/20160425113552/http://www.cbsnews.com/news/judges-mum-on-16-miss-universe-finalists/ |url-status=live }}</ref><ref>{{Cite web |last=Loinaz |first=Alexis |date=October 24, 2012 |title=Giuliana Rancic and Andy Cohen to Cohost Miss Universe Pageant in December |url=https://www.eonline.com/news/356566/giuliana-rancic-and-andy-cohen-to-cohost-miss-universe-pageant-in-december |access-date=June 13, 2022 |website=[[E!|E! Online]] |archive-date=June 13, 2022 |archive-url=https://web.archive.org/web/20220613111923/https://www.eonline.com/news/356566/giuliana-rancic-and-andy-cohen-to-cohost-miss-universe-pageant-in-december |url-status=live }}</ref>
==पृष्ठभूमि==
[[File:Planet hollywood resort-night.JPG|प्लैनेट हॉलीवुड रिज़ॉर्ट और कैसीनो, स्थल|thumb|240px]]
===स्थान और तिथि===
मार्च 2012 में, मिस यूनिवर्स संगठन ने घोषणा की कि इस बार की प्रतियोगिता को दिसंबर के मध्य तक के लिए स्थगित किया गया है, क्योंकि [[एनबीसी]] प्रसारणकर्ता एक ही समय पर [[2012 ग्रीष्मकालीन ओलम्पिक]] और [[संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव, २०१२]] के साथ इस प्रतियोगिता का प्रसारण नहीं कर सकता था।
अप्रैल 2012 में यह घोषणा की गई कि बांग्लादेश इस प्रतियोगिता की 13 दिसंबर 2012 को मेज़बानी करेगा। हालांकि, जुलाई में बांग्लादेश के राष्ट्रपति ने घोषणा की कि वे आर्थिक कठिनाइयों के कारण इस प्रतियोगिता की मेज़बानी नहीं कर पाएंगे।<ref name="confirm802">{{cite news |last1=Adina |first1=Armin |date=August 17, 2016 |title=Philippines' hosting of Miss Universe '80 percent confirmed' |work=Inquirer Lifestyle |publisher=[[Philippine Daily Inquirer]] |url=http://lifestyle.inquirer.net/235464/philippines-hosting-of-miss-universe-80-percent-confirmed |access-date=September 12, 2016 |archive-date=August 18, 2016 |archive-url=https://web.archive.org/web/20160818163854/http://lifestyle.inquirer.net/235464/philippines-hosting-of-miss-universe-80-percent-confirmed |url-status=live }}</ref>
अगस्त 2012 में, डोमिनिकन गणराज्य की सरकार को मिस यूनिवर्स संगठन से एक प्रस्ताव प्राप्त हुआ था कि प्रतियोगिता को 11 दिसंबर 2012 को वहां आयोजित किया जाए। इससे पहले डोमिनिकन गणराज्य ने मिस यूनिवर्स 1977 की मेज़बानी सांतो डोमिंगो में की थी।<ref>{{Cite web |date=June 14, 2012 |title=Official: Miss Universe chooses Dominican Republic |url=https://www.sandiegouniontribune.com/sdut-official-miss-universe-chooses-dominican-republic-2012jun14-story.html |access-date=June 13, 2022 |website=[[San Diego Union-Tribune]] |language=en-US |archive-date=June 13, 2022 |archive-url=https://web.archive.org/web/20220613121150/https://www.sandiegouniontribune.com/sdut-official-miss-universe-chooses-dominican-republic-2012jun14-story.html |url-status=live }}</ref> इस बार संगठन पंटा काना के हार्ड रॉक रिसॉर्ट एंड कसीनो में अंतिम रात आयोजित करने पर विचार कर रहा था।
हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया कि देश इस प्रतियोगिता के लिए कोई वित्तीय सहायता प्रदान नहीं कर सकता, इसलिए [[डोमिनिकन गणराज्य]] को मेजबानी का अधिकार नहीं मिला।<ref name="confirm802" /><ref name=":12">{{cite news |last=Leach |first=Robin |date=September 26, 2012 |title=2012 Miss Universe Pageant relocates to Las Vegas from Dominican Republic |work=[[Las Vegas Sun]] |url=http://www.lasvegassun.com/news/2012/sep/26/2012-miss-universe-pageant-relocates-las-vegas-dom/ |url-status=dead |access-date=January 3, 2013 |archive-url=https://web.archive.org/web/20121231223837/http://www.lasvegassun.com/news/2012/sep/26/2012-miss-universe-pageant-relocates-las-vegas-dom/ |archive-date=December 31, 2012}}</ref>
संगठन ने इस वर्ष की मिस यूनिवर्स प्रतियोगिता को पारंपरिक मध्य-वर्ष की समयसारणी से बदलकर दिसंबर में लास वेगास, नेवाडा में आयोजित करने का निर्णय लिया। 27 सितंबर 2012 को, संगठन ने पुष्टि की कि मिस यूनिवर्स 2012 प्रतियोगिता 19 दिसंबर 2012 को प्लैनेट हॉलीवुड रिसॉर्ट एंड कसीनो, लास वेगास, नेवाडा में आयोजित की जाएगी।<ref name=":12" />
===प्रतिभागियों का चयन===
उन्यासी देशों और क्षेत्रों की प्रतिभागियों को इस प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए चुना गया।
इनमें से सात प्रतिनिधियों को उनके राष्ट्रीय प्रतियोगिता में रनर-अप रहने या कास्टिंग प्रक्रिया के माध्यम से चुने जाने के बाद नियुक्त किया गया, जबकि नौ को मूल विजेताओं के स्थान पर चुना गया।
मिस यूनिवर्स कनाडा 2012 की प्रथम रनर-अप एड्वोआ यामोआ थीं इनको सहार बिनियाज़, मिस यूनिवर्स कनाडा 2012, के व्यक्तिगत कारणों से नाम वापस लेने के बाद कनाडा का प्रतिनिधित्व करने के लिए नियुक्त किया गया।<ref>{{Cite web |date=May 20, 2012 |title=Sahar Biniaz Crowned Miss Universe Canada 2012 |url=https://www.ibtimes.co.uk/sahar-biniaz-crowned-miss-universe-canada-2012-343053 |access-date=June 13, 2022 |website=[[International Business Times]] |language=en |archive-date=May 4, 2020 |archive-url=https://web.archive.org/web/20200504051640/https://www.ibtimes.co.uk/sahar-biniaz-crowned-miss-universe-canada-2012-343053 |url-status=live }}</ref><ref name=":2">{{Cite web |last=Cahute |first=Larissa |date=December 7, 2012 |title=Vancouver woman out of Miss Universe |url=https://theprovince.com/life/Vancouver+woman+Miss+Universe/7665563/story.html |url-status=dead |archive-url=https://web.archive.org/web/20140512221546/http://www2.canada.com/theprovince/news/story.html?id=831a432e-deeb-42e2-99a1-84826352c81d |archive-date=May 12, 2014 |access-date=December 9, 2012 |website=[[The Province]]}}</ref>
स्टार साइप्रस 2012 की रनर-अप इओआन्ना यियानाकोउ थीं इनको न्टानिएला केफाला, स्टार साइप्रस 2012, के अज्ञात कारणों से नाम वापस लेने के बाद साइप्रस का प्रतिनिधित्व करने के लिए नियुक्त किया गया।<ref>{{Cite web |last=Φούντα |first=Γωγώ |date=July 9, 2012 |title=Star Kύπρος 2012: Backstage και πρόβες από την μεγάλη βραδιά |url=https://www.queen.gr/juicy/juicy-news/story/54959/star-kypros-2012-backstage-kai-proves-apo-tin-megali-vradia |access-date=June 14, 2022 |website=Queen.gr |language=el |archive-date=April 3, 2023 |archive-url=https://web.archive.org/web/20230403225926/https://www.queen.gr/juicy/juicy-news/story/54959/star-kypros-2012-backstage-kai-proves-apo-tin-megali-vradia |url-status=live }}</ref>
मिस डोमिनिकन रिपब्लिक 2012 कारोला डुरान को प्रतियोगिता में भाग लेना था, लेकिन यह पता चलने के बाद कि वह पहले विवाह कर चुकी थीं और तलाकशुदा हैं, उनसे ताज वापस ले लिया गया। उनकी जगह प्रथम रनर-अप डुलसिटा लिग्गी को नियुक्त किया गया।<ref>{{Cite web |last=Macatee |first=Rebecca |date=April 27, 2012 |title=Another Miss Universe Scandal: Miss Dominican Republic Carlina Duran Dethroned for Being a Missus! |url=https://www.eonline.com/news/311756/another-miss-universe-scandal-miss-dominican-republic-carlina-duran-dethroned-for-being-a-missus |access-date=June 13, 2022 |website=[[E!|E! Online]] |archive-date=December 14, 2018 |archive-url=https://web.archive.org/web/20181214125247/https://www.eonline.com/news/311756/another-miss-universe-scandal-miss-dominican-republic-carlina-duran-dethroned-for-being-a-missus |url-status=live }}</ref>
नताली कोर्नेइत्सिक, जो मिस एस्टोनिया 2012 की प्रथम रनर-अप थीं, को विजेता कैटलिन वाल्डमेट्स के प्रायोजन की कमी के कारण नाम वापस लेने के बाद एस्टोनिया का प्रतिनिधित्व करने के लिए नियुक्त किया गया।<ref>{{Cite web |last=Sokol |first=Yulia |date=August 27, 2012 |title=Наталия Корнейчик: попрошу Эвелин Ильвес помочь с платьем на "Мисс Вселенную" |url=https://rus.err.ee/155861/natalija-kornejchik-poproshu-jevelin-ilves-pomoch-s-platem-na-miss-vselennuju |access-date=June 14, 2022 |website=[[Eesti Rahvusringhääling]] |language=ru |archive-date=April 3, 2023 |archive-url=https://web.archive.org/web/20230403225926/https://rus.err.ee/155861/natalija-kornejchik-poproshu-jevelin-ilves-pomoch-s-platem-na-miss-vselennuju |url-status=live }}</ref>
मैरी पायेट, जो मिस फ्रांस 2012 की प्रथम रनर-अप थीं, को मिस यूनिवर्स 2012 और मिस फ्रांस 2013 की तिथियों में संभावित टकराव के कारण फ्रांस का प्रतिनिधित्व करने के लिए नियुक्त किया गया, क्योंकि डेल्फीन वेस्पाइज़र, मिस फ्रांस 2012, को अनुबंध के अनुसार उस कार्यक्रम में उपस्थित रहना आवश्यक था।<ref>{{Cite web |last=Guardiola |first=Ari |date=October 10, 2012 |title=Miss Univers : Delphine Wespiser laisse sa place à la sublime Miss Réunion |url=https://www.purepeople.com/article/miss-univers-delphine-wespiser-laisse-sa-place-a-la-sublime-miss-reunion_a108338/1 |access-date=June 14, 2022 |website=[[Webedia#France|Purepeople]] |language=fr |archive-date=January 28, 2022 |archive-url=https://web.archive.org/web/20220128091448/https://www.purepeople.com/article/miss-univers-delphine-wespiser-laisse-sa-place-a-la-sublime-miss-reunion_a108338/1 |url-status=live }}</ref>
चन्ना डिवोवी, जो मिस गैबॉन 2012 की प्रथम रनर-अप थीं, को गैबॉन का प्रतिनिधित्व करने के लिए नियुक्त किया गया, क्योंकि मिस यूनिवर्स 2012 और मिस गैबॉन 2013 की तिथियों में संभावित टकराव था, जहाँ विजेता मैरी-नोएल अडा को अनुबंध के अनुसार उपस्थित रहना आवश्यक था।<ref>{{Cite web |last=Batassi |first=Pierre Eric |date=December 31, 2011 |title=Marie Noëlle Ada, nouvelle reine de la beauté gabonaise |url=https://www.afrik.com/marie-noelle-ada-nouvelle-reine-de-la-beaute-gabonaise |access-date=June 14, 2022 |website=Afrik |language=fr-FR |archive-date=April 3, 2023 |archive-url=https://web.archive.org/web/20230403225928/https://www.afrik.com/marie-noelle-ada-nouvelle-reine-de-la-beaute-gabonaise |url-status=live }}</ref>
जो आई एम सी 2012 की प्रथम रनर-अप शिल्पा सिंह थीं इनको [[उर्वशी रौतेला]], मिस यूनिवर्स इंडिया 2012, के नाम वापस लेने के बाद भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए नियुक्त किया गया, क्योंकि वह कम उम्र की थीं और उस समय मिस टूरिज्म क्वीन ऑफ द ईयर इंटरनेशनल का खिताब भी उनके पास था।<ref>{{Cite web |date=April 24, 2020 |title=Friday Trivia: Did you Know Urvashi Rautela was dethroned as Miss Universe? [Throwback] |url=https://www.ibtimes.co.in/friday-trivia-did-you-know-urvashi-rautela-was-dethroned-miss-universe-throwback-818276 |access-date=June 14, 2022 |website=[[International Business Times]] |language=en |archive-date=August 12, 2022 |archive-url=https://web.archive.org/web/20220812125014/https://www.ibtimes.co.in/friday-trivia-did-you-know-urvashi-rautela-was-dethroned-miss-universe-throwback-818276 |url-status=live }}</ref>
एवियंका बोहम, मिस यूनिवर्स न्यूज़ीलैंड 2012, को नागरिकता संबंधी समस्याओं के कारण उनकी प्रथम रनर-अप तालिया बेनेट से बदल दिया गया।<ref name="nzherald1">{{cite news |url=http://www.nzherald.co.nz/nz/news/article.cfm?c_id=1&objectid=10823532 |title=Miss Universe NZ stripped of her tiara – National – NZ Herald News |work=The New Zealand Herald |date=July 31, 2012 |access-date=August 9, 2012 |archive-date=August 7, 2012 |archive-url=https://web.archive.org/web/20120807105423/http://www.nzherald.co.nz/nz/news/article.cfm?c_id=1&objectid=10823532 |url-status=live }}</ref>
इसाबेला अयुक, मोस्ट ब्यूटीफुल गर्ल इन नाइजीरिया 2012, ने डेमिएट चार्ल्स ग्रैनविल, मोस्ट ब्यूटीफुल गर्ल इन नाइजीरिया यूनिवर्स 2012, के साथ प्रतियोगिताएँ बदल लीं, क्योंकि वह मिस वर्ल्ड के लिए अधिक आयु (ओवरएज) की हो गई थीं।<ref name=":3">{{cite news |last=Ogunjimi |first=Opeoluwani |date=June 22, 2012 |title=MBGN Controversy: Ayuk still queen but ... |newspaper=[[Vanguard (Nigeria)|Vanguard]] |url=http://www.vanguardngr.com/2012/06/mbgn-controversy-ayuk-still-queen-but-silverbird/ |location=Lagos, Nigeria|access-date=December 12, 2012 |archive-date=December 25, 2022 |archive-url=https://web.archive.org/web/20221225114343/https://www.vanguardngr.com/2012/06/mbgn-controversy-ayuk-still-queen-but-silverbird/ |url-status=live }}</ref>
एंड्रिया हुइसगेन, मिस स्पेन 2011, भाग लेने में असमर्थ थीं क्योंकि मिस स्पेन संगठन दिवालिया हो गया था, और लाइसेंस एक नए संगठन मिस यूनिवर्स स्पेन को दे दिया गया था।
हालांकि अधिकार बदल गए थे, फिर भी हुइसगेन को अनुबंध बदलने के बाद प्रतियोगिता में भाग लेने की अनुमति दी गई।<ref name=":4">{{cite news |date=November 23, 2012 |title=Andrea Huisgen podrá competir en Miss Universo tras renunciar a su contrato con Miss España |language=es |newspaper=[[20 minutos]] |url=http://www.20minutos.es/noticia/1657104/0/andrea-huisgen/competira/miss-universo/ |access-date=December 15, 2012 |archive-date=April 3, 2023 |archive-url=https://web.archive.org/web/20230403233421/https://www.20minutos.es/noticia/1657104/0/andrea-huisgen/competira/miss-universo/ |url-status=live }}</ref>
इस प्रतियोगिता में गैबॉन और लिथुआनिया ने पहली बार भाग लिया, जबकि बुल्गारिया, इथियोपिया, नामीबिया और नॉर्वे की वापसी हुई।<ref>{{Cite web |last=Gavilan |first=Jodesz |date=January 19, 2017 |title=FAST FACTS: Things to know about the Miss Universe pageant |url=https://www.rappler.com/newsbreak/iq/116694-fast-facts-miss-universe-pageant/ |access-date=June 14, 2022 |website=[[Rappler]] |language=en-US |archive-date=June 14, 2022 |archive-url=https://web.archive.org/web/20220614084024/https://www.rappler.com/newsbreak/iq/116694-fast-facts-miss-universe-pageant/ |url-status=live }}</ref>
बुल्गारिया, इथियोपिया और नामीबिया ने आखिरी बार [[मिस यूनीवर्स 2009]] में भाग लिया था, जबकि नॉर्वे ने आखिरी बार मिस यूनिवर्स 2010 में भाग लिया था।
मिस्र, कज़ाख़स्तान, पुर्तगाल, स्लोवेनिया, तुर्क्स और कैकोस आइलैंड्स और संयुक्त राज्य वर्जिन आइलैंड्स ने प्रतियोगिता से नाम वापस ले लिया।
ऐनूर टोल्येउओवा ने कम उम्र होने के कारण नाम वापस ले लिया।
मिस्र, पुर्तगाल, स्लोवेनिया, तुर्क्स और कैकोस तथा संयुक्त राज्य वर्जिन आइलैंड्स ने इसलिए प्रतियोगिता से नाम वापस लिया क्योंकि उनके संबंधित संगठनों ने राष्ट्रीय प्रतियोगिता आयोजित नहीं की या किसी प्रतिनिधि की नियुक्ति नहीं की।<ref>{{cite web |last=Boh |first=Tina |date=July 30, 2013 |title=Po enoletnem premoru bomo spet dobili mis Universe |url=http://www.siol.net/trendi/lepota_in_zdravje/lepota/2013/07/po_enoletnem_premoru_bomo_spet_dobili_mis_universe.aspx |url-status=dead |archive-url=https://web.archive.org/web/20130807065506/http://www.siol.net/trendi/lepota_in_zdravje/lepota/2013/07/po_enoletnem_premoru_bomo_spet_dobili_mis_universe.aspx |archive-date=August 7, 2013 |access-date=June 14, 2022 |website=[[Siol]]}}</ref>
====ट्रांसजेंडर महिलाओं को प्रतियोगिता में भाग लेने की अनुमति दी गई====
[[मिस यूनीवर्स 2013]] से शुरू होकर, मिस यूनिवर्स ऑर्गेनाइजेशन ने ग्लाड (GLAAD) से परामर्श के बाद [[ट्रांसजेंडर]] महिलाओं को प्रतियोगिता में भाग लेने की अनुमति दी।
नियमों में यह बदलाव जेना तलाकोवा के मामले के बाद आया, जो मिस यूनिवर्स कनाडा 2012 में भाग ले रही थीं और जिन्हें प्रतियोगिता से हटा दिया गया था।<ref>{{Cite news |date=April 10, 2012 |title=Miss Universe changes rules to include transgender women |language=en |work=[[Reuters]] |url=https://www.reuters.com/article/entertainment-us-missuniverse-transgende-idUSBRE8390N320120410 |access-date=June 14, 2022 |archive-date=June 14, 2022 |archive-url=https://web.archive.org/web/20220614141149/https://www.reuters.com/article/entertainment-us-missuniverse-transgende-idUSBRE8390N320120410 |url-status=live }}</ref> उन्हें इसलिए हटाया गया था क्योंकि वे “प्रतियोगिता में भाग लेने की आवश्यकताओं को पूरा नहीं करती थीं।”<ref>{{Cite web |last=Dyball |first=Rennie |date=March 26, 2012 |title=Jenna Talackova Removed from Miss Universe Canada for Being Transgender |url=https://people.com/celebrity/jenna-talackova-removed-from-miss-universe-canada-for-being-transgender/ |access-date=June 14, 2022 |website=[[People (magazine)|People.com]] |language=en |archive-date=June 14, 2022 |archive-url=https://web.archive.org/web/20220614141309/https://people.com/celebrity/jenna-talackova-removed-from-miss-universe-canada-for-being-transgender/ |url-status=live }}</ref>
हटाए जाने के एक महीने बाद संगठन ने तलाकोवा को फिर से प्रतियोगिता में भाग लेने की अनुमति दे दी, बशर्ते कि वे “कनाडा के कानूनी लिंग मान्यता संबंधी आवश्यकताओं और अन्य अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के मानकों को पूरा करें।”<ref>{{Cite web |last=Landis |first=Marina |date=April 3, 2012 |title=Miss Universe allows transgender contestant back into competition |url=https://www.cnn.com/2012/04/03/world/americas/canada-miss-universe-transgender-con/index.html |access-date=June 14, 2022 |website=[[CNN]] |archive-date=June 14, 2022 |archive-url=https://web.archive.org/web/20220614141149/https://www.cnn.com/2012/04/03/world/americas/canada-miss-universe-transgender-con/index.html |url-status=live }}</ref>
तलाकोवा शीर्ष 12 में पहुंचीं और मिस कंजेनियलिटी पुरस्कार जीतने वाली चार प्रतिभागियों में से एक रहीं।<ref>{{Cite web |last=Macatee |first=Rebecca |date=May 22, 2012 |title=Transgender Miss Universe Canada Contestant Jenna Talackova Places in Top 12, Wins Miss Congeniality Award |url=https://www.eonline.com/news/317810/transgender-miss-universe-canada-contestant-jenna-talackova-places-in-top-12-wins-miss-congeniality-award |access-date=June 14, 2022 |website=[[E!#E! Online|E! Online]] |archive-date=June 14, 2022 |archive-url=https://web.archive.org/web/20220614141309/https://www.eonline.com/news/317810/transgender-miss-universe-canada-contestant-jenna-talackova-places-in-top-12-wins-miss-congeniality-award |url-status=live }}</ref>
प्रतियोगिता के नियमों में बदलाव के छह साल बाद, एंजेला पोंसे ने [[मिस यूनिवर्स 2018]] में इतिहास रच दिया, क्योंकि वह मिस यूनिवर्स में भाग लेने वाली पहली ट्रांसजेंडर प्रतिभागी बनीं।<ref>{{Cite magazine |last=Lang |first=Cady |date=December 17, 2018 |title=Miss Spain is Miss Universe's First Transgender Competitor |url=https://time.com/5481417/miss-spain/ |access-date=June 14, 2022 |magazine=[[Time (magazine)|Time]] |language=en |archive-date=December 17, 2018 |archive-url=https://web.archive.org/web/20181217191738/http://time.com/5481417/miss-spain/ |url-status=live }}</ref>
==परिणाम==
[[File:Miss Universe 2012 map.png|thumb|240px|सहभागी देश और क्षेत्र]]
=== प्लेसमेंट ===
{| class="wikitable sortable" style="font-size: 95%;"
! स्थान!! प्रतियोगी
|-
| मिस यूनिवर्स 2012
|
* {{flagu|संयुक्त राज्य अमेरिका}} – [[ओलिविया कल्पो]]<ref name=":5">{{Cite web |date=December 20, 2012 |title=Philippines is 1st runner up in Miss Universe 2012 |url=https://www.rappler.com/life-and-style/18252-miss-philippines-wins-1st-runner-up-at-miss-universe-2012/ |access-date=June 14, 2022 |website=[[Rappler]] |language=en-US |archive-date=June 14, 2022 |archive-url=https://web.archive.org/web/20220614090549/https://www.rappler.com/life-and-style/18252-miss-philippines-wins-1st-runner-up-at-miss-universe-2012/ |url-status=live }}</ref>
|-
| प्रथम उपविजेता
|
* {{flagu|फिलिपींस}} – जेनीन टुगोनोन<ref name=":5" />
|-
| द्वितीय उपविजेता
|
* {{flagu|वेनेज़ुएला}} – इरेन एस्सर<ref name=":5" />
|-
| तीसरा उपविजेता
|
* {{flagu|ऑस्ट्रेलिया}} – रेनाए आयरिस<ref name=":5" />
|-
| चौथा उपविजेता
|
*{{flagu|ब्राज़ील}} – गैब्रिएला मार्कस<ref name=":5" />
|-
| शीर्ष 10<ref name=":5" />
|
* {{flagu|फ्रांस}} – मैरी पायेट
* {{flagu|हंगरी}} – एग्नेस कोंकोली
* {{flagu|मेक्सिको}} – करिना गोंज़ालेज़
* {{flagu|रूस}} – एलिज़ावेटा गोलोवानोवा
* {{flagu|दक्षिण अफ्रीका}} – मेलिंडा बाम
|-
| शीर्ष 16<ref name=":5" />
|
* {{flagu|क्रोएशिया}} – एलिजाबेथ बर्ग
* {{flagu|भारत}} – शिल्पा सिंह
* {{flagu|कोसोवो}} – डायना अवदिउ
* {{flagu|पेरू}} – निकोल कैवर्न
* {{flagu|पोलैंड}} – मार्सेलिना ज़ावाड्ज़्का
* {{flagu|तुर्की}} – कागिल ओज़कुल
|}
===विशेष पुरस्कार ===
{| class="wikitable sortable" style="font-size:95%;"
|-
! पुरस्कार
! प्रतियोगी
|-
| मिस कोंगेनीयलिटी
|
*{{flagu|ग्वाटेमाला}} – लौरा गोडॉय<ref name=":5" />
|-
| मिस फोटोजेनिक
|
*{{flagu|कोसोवो}} – डायना अवदिउ<ref name=":5" />
|}
==== सर्वश्रेष्ठ राष्ट्रीय पोशाक ====
{| class="wikitable sortable" style="font-size:95%;"
|-
! प्लेसमेंट
! प्रतियोगी
|-
| विजेता
|
*{{flagu|चीन}} – जू जिदान<ref name=":5" />
|-
| प्रथम उपविजेता
|
*{{flagu|मेक्सिको}} – करिना गोंजालेज<ref name=":5" />
|-
| द्वितीय उपविजेता
|
*{{Flagu|नीदरलैंड}} – नथाली डेन डेकर<ref name=":5" />
|-
| तीसरा उपविजेता
|
*{{Flagu|श्रीलंका}} – सबरीना हेर्फ्ट<ref name=":5" />
|-
| चौथे उपविजेता
|
*{{flagu|ब्राजील}} – गैब्रिएला मार्कस<ref name=":5" />
|-
| शीर्ष 10
|
*{{Flagu|ब्रिटिश वर्जिन द्वीपसमूह}} – अबीगैल हाइंडमैन<ref name=":5" />
*{{Flagu|निकारागुआ}} – फराह एस्लाक्विट<ref name=":5" />
*{{Flagu|इंडोनेशिया}} – मारिया सेलेना<ref name=":5" />
*{{Flagu|पनामा}} – स्टेफ़नी वेंडर वर्फ़<ref name=":5" />
*{{Flagu|पेरू}} – निकोल फेवरॉन<ref name=":5" />
|}
==प्रतियोगिता==
===प्रारूप===
मिस यूनिवर्स 2011 की तरह ही, पंद्रह सेमीफाइनलिस्ट प्रारंभिक प्रतियोगिता के माध्यम से चुने गए, जिसमें स्विमसूट और ईवनिंग गाउन प्रतियोगिताएँ तथा बंद कमरे में साक्षात्कार शामिल थे।
इंटरनेट वोटिंग भी लागू रही, जिसमें प्रशंसक एक अन्य प्रतिनिधि को वोट देकर सेमीफाइनल में आगे बढ़ा सकते थे, जिससे सेमीफाइनलिस्टों की संख्या सोलह हो गई। फैन वोट के विजेता का खुलासा अंतिम प्रसारण के दौरान नहीं किया गया।
सोलह सेमीफाइनलिस्टों ने स्विमसूट प्रतियोगिता में भाग लिया और उनकी संख्या घटाकर दस कर दी गई।
दस सेमीफाइनलिस्टों ने ईवनिंग गाउन प्रतियोगिता में भाग लिया और उनकी संख्या घटाकर पाँच कर दी गई।
पाँच फाइनलिस्टों ने प्रश्न-उत्तर चरण और अंतिम प्रस्तुति (फाइनल लुक) में भाग लिया।
=== चयन समिति ===
==== प्रारंभिक प्रतियोगिता ====
* कार्लो अनाया – माई लाइफस्टाइल एक्स्ट्रा के होस्ट<ref name=":6">{{Cite web |last=Gámez |first=Sabino |date=December 14, 2012 |title=Las bellas del Miss Universo 2012 |url=https://www.laprensa.hn/sociales/las-bellas-del-miss-universo-2012-EYLP375717 |access-date=June 14, 2022 |website=[[La Prensa (Honduras)|La Prensa]] |language=es-HN |archive-date=April 3, 2023 |archive-url=https://web.archive.org/web/20230403225926/https://www.laprensa.hn/sociales/las-bellas-del-miss-universo-2012-EYLP375717 |url-status=live }}</ref>
* बेवर्ली फ्रैंक – 19 एंटरटेनमेंट के लिए व्यापार मामलों की कार्यकारी उपाध्यक्ष<ref name=":6" />
* डुआने गाज़ी – ट्रम्प मॉडल मैनेजमेंट के साथ अंतरराष्ट्रीय स्काउट<ref name=":6" />
* माइकल ग्रीनवाल्ड – डॉन बुचवाल्ड एंड एसोसिएट्स में टैलेंट के उपाध्यक्ष<ref name=":6" />
* जिम्मी गुयेन - मनोरंजन और नए मीडिया क्षेत्र के जाने-माने वकील<ref name=":6" />
* कोरिन निकोलस - ट्रम्प मॉडल मैनेजमेंट की अध्यक्ष<ref name=":6" />
* एमी सैडोव्स्की - प्लैनेट हॉलीवुड इंटरनेशनल की जनसंपर्क विभाग की वरिष्ठ उपाध्यक्ष<ref name=":6" />
* क्रिस्टल स्टीवर्ट – मिस यूएसए 2008, [[टेक्सास]] से।<ref name=":6" />
==सन्दर्भ==
{{टिप्पणीसूची|30em}}
==बाहरी कड़ियाँ==
*[http://www.missuniverse.com मिस यूनिवर्स आधिकारिक वेबसाइट]
{{मिस यूनीवर्स}} {{सुन्दरता प्रतियोगिता}}
[[श्रेणी: मिस यूनीवर्स]]
[[श्रेणी: सुन्दरता प्रतियोगिता]]
[[श्रेणी: अंतर्राष्ट्रीय सुन्दरता प्रतियोगिता]]
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6547893
6547892
2026-05-03T03:15:28Z
खास विशेष
810972
/* चयन समिति */ उपशीर्षक बनाकर जानकारी और संदर्भ जोड़ा
6547893
wikitext
text/x-wiki
{{Infobox beauty pageant
| photo = Miss Universe Olivia Culpo.jpg
| caption = [[ओलिविया कल्पो]]
| winner = ओलिविया कल्पो
|represented=संयुक्त राज्य अमेरिका
| congeniality = लौरा गोडॉय, ग्वाटेमाला
| best national costume = जू जिदान, चीन
| photogenic = डायना अवदियू, कोसोवो
| date = 19 दिसंबर, 2012
| venue = पीएच लाइव, प्लैनेट हॉलीवुड रिज़ॉर्ट एंड कैसिनो, [[लास वेगास]], [[नेवादा]], संयुक्त राज्य अमेरिका
| presenters = {{Hlist|एंडी कोहेन|गिउलिआना रैंसिक|जेनी माई|शम्सी सुपसुप}}
| entertainment = {{Hlist|ट्रेन|टिमोमैटिक}}
| broadcaster = {{Hlist|[[एनबीसी]] (केएसएनवी-डीटी)|[[टेलीमंडो]] (केबीएलआर)}}
| entrants = 89
| placements = 16
| debuts = {{Hlist|गैबॉन | लिथुआनिया}}
| withdraws = {{Hlist|मिस्र | कजाकिस्तान | पुर्तगाल | स्लोवेनिया | तुर्क और कैकोस द्वीप समूह | संयुक्त राज्य वर्जिन द्वीप समूह}}
| returns = {{Hlist|बुल्गारिया | इथियोपिया | नामीबिया | नॉर्वे}}
| before = [[मिस यूनीवर्स 2011|2011]]
| next = [[मिस यूनीवर्स 2013|2013]]
}}
'''मिस यूनीवर्स 2012''', [[मिस यूनिवर्स]] प्रतियोगिता का 61वां संस्करण था, जो 19 दिसंबर 2012 को पीएच लाइव, प्लैनेट हॉलीवुड रिसॉर्ट एंड कसीनो, [[लास वेगास]], [[नेवाडा]], [[संयुक्त राज्य अमेरिका]] में आयोजित किया गया।<ref name=":0">{{Cite news |last=Coleman |first=Korva |date=December 20, 2012 |title=Miss USA Olivia Culpo Crowned Miss Universe; Former Contestant Loses Lawsuit |language=en |work=[[NPR]] |url=https://www.npr.org/sections/thetwo-way/2012/12/20/167696763/miss-usa-olivia-culpo-crowned-miss-universe-former-contestant-loses-lawsuit |access-date=June 13, 2022 |archive-date=June 13, 2022 |archive-url=https://web.archive.org/web/20220613111923/https://www.npr.org/sections/thetwo-way/2012/12/20/167696763/miss-usa-olivia-culpo-crowned-miss-universe-former-contestant-loses-lawsuit |url-status=live }}</ref><ref>{{Cite web |date=December 20, 2012 |title=Crowning Miss Universe 2012 |url=http://www.today.com/slideshow/crowning-miss-universe-2012-50256832 |access-date=June 13, 2022 |website=[[Today (American TV program)|Today.com]] |language=en }}{{Dead link|date=November 2023 |bot=InternetArchiveBot |fix-attempted=yes }}</ref>
यह प्रतियोगिता संयुक्त राज्य अमेरिका की [[ओलिविया कल्पो]] ने जीती, जिन्हें [[अंगोला]] की [[लेइला लोपेस]] ने ताज पहनाया।
यह अमेरिका की पंद्रह वर्षों में पहली जीत थी, और मिस यूनिवर्स प्रतियोगिता में उसकी आठवीं जीत थी।<ref name=":0" /><ref>{{Cite web |last=Martinez |first=Edecio |date=December 20, 2012 |title=Miss USA crowned Miss Universe 2012 |url=https://www.cbsnews.com/pictures/miss-usa-crowned-miss-universe-2012/ |access-date=June 13, 2022 |website=[[CBS News]] |language=en-US |archive-date=June 13, 2022 |archive-url=https://web.archive.org/web/20220613083720/https://www.cbsnews.com/pictures/miss-usa-crowned-miss-universe-2012/ |url-status=live }}</ref>
इस वर्ष की प्रतियोगिता में 89 देशों और क्षेत्रों की प्रतिभागियों ने भाग लिया, जो पिछले वर्ष से तीन अधिक थीं।<ref>{{Cite web |date=December 21, 2012 |title=Miss USA Olivia Culpo is Miss Universe 2012! |url=https://www.indiatoday.in/lifestyle/buzz-top/story/miss-universe-2012-winner-olivia-culpo-124772-2012-12-19 |access-date=June 15, 2022 |website=[[India Today]] |language=en |archive-date=December 2, 2019 |archive-url=https://web.archive.org/web/20191202210819/https://www.indiatoday.in/lifestyle/buzz-top/story/miss-universe-2012-winner-olivia-culpo-124772-2012-12-19 |url-status=live }}</ref>
यह प्रतियोगिता एंडी कोहेन और जियुलियाना रैंसिक द्वारा होस्ट की गई थी, जबकि जिनी माई ने बैकस्टेज संवाददाता की भूमिका निभाई।
इस वर्ष के सौंदर्य प्रतियोगिता में अमेरिकन रॉक बैंड "ट्रेन" और ऑस्ट्रेलियाई संगीतकार टिम ओमाजी ने प्रस्तुति दी।<ref name="CBS News 2012">{{cite web |date=December 17, 2012 |title=Judges mum on 16 Miss Universe finalists |url=http://www.cbsnews.com/news/judges-mum-on-16-miss-universe-finalists/ |access-date=April 16, 2016 |website=[[CBS News]] |archive-date=April 25, 2016 |archive-url=https://web.archive.org/web/20160425113552/http://www.cbsnews.com/news/judges-mum-on-16-miss-universe-finalists/ |url-status=live }}</ref><ref>{{Cite web |last=Loinaz |first=Alexis |date=October 24, 2012 |title=Giuliana Rancic and Andy Cohen to Cohost Miss Universe Pageant in December |url=https://www.eonline.com/news/356566/giuliana-rancic-and-andy-cohen-to-cohost-miss-universe-pageant-in-december |access-date=June 13, 2022 |website=[[E!|E! Online]] |archive-date=June 13, 2022 |archive-url=https://web.archive.org/web/20220613111923/https://www.eonline.com/news/356566/giuliana-rancic-and-andy-cohen-to-cohost-miss-universe-pageant-in-december |url-status=live }}</ref>
==पृष्ठभूमि==
[[File:Planet hollywood resort-night.JPG|प्लैनेट हॉलीवुड रिज़ॉर्ट और कैसीनो, स्थल|thumb|240px]]
===स्थान और तिथि===
मार्च 2012 में, मिस यूनिवर्स संगठन ने घोषणा की कि इस बार की प्रतियोगिता को दिसंबर के मध्य तक के लिए स्थगित किया गया है, क्योंकि [[एनबीसी]] प्रसारणकर्ता एक ही समय पर [[2012 ग्रीष्मकालीन ओलम्पिक]] और [[संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव, २०१२]] के साथ इस प्रतियोगिता का प्रसारण नहीं कर सकता था।
अप्रैल 2012 में यह घोषणा की गई कि बांग्लादेश इस प्रतियोगिता की 13 दिसंबर 2012 को मेज़बानी करेगा। हालांकि, जुलाई में बांग्लादेश के राष्ट्रपति ने घोषणा की कि वे आर्थिक कठिनाइयों के कारण इस प्रतियोगिता की मेज़बानी नहीं कर पाएंगे।<ref name="confirm802">{{cite news |last1=Adina |first1=Armin |date=August 17, 2016 |title=Philippines' hosting of Miss Universe '80 percent confirmed' |work=Inquirer Lifestyle |publisher=[[Philippine Daily Inquirer]] |url=http://lifestyle.inquirer.net/235464/philippines-hosting-of-miss-universe-80-percent-confirmed |access-date=September 12, 2016 |archive-date=August 18, 2016 |archive-url=https://web.archive.org/web/20160818163854/http://lifestyle.inquirer.net/235464/philippines-hosting-of-miss-universe-80-percent-confirmed |url-status=live }}</ref>
अगस्त 2012 में, डोमिनिकन गणराज्य की सरकार को मिस यूनिवर्स संगठन से एक प्रस्ताव प्राप्त हुआ था कि प्रतियोगिता को 11 दिसंबर 2012 को वहां आयोजित किया जाए। इससे पहले डोमिनिकन गणराज्य ने मिस यूनिवर्स 1977 की मेज़बानी सांतो डोमिंगो में की थी।<ref>{{Cite web |date=June 14, 2012 |title=Official: Miss Universe chooses Dominican Republic |url=https://www.sandiegouniontribune.com/sdut-official-miss-universe-chooses-dominican-republic-2012jun14-story.html |access-date=June 13, 2022 |website=[[San Diego Union-Tribune]] |language=en-US |archive-date=June 13, 2022 |archive-url=https://web.archive.org/web/20220613121150/https://www.sandiegouniontribune.com/sdut-official-miss-universe-chooses-dominican-republic-2012jun14-story.html |url-status=live }}</ref> इस बार संगठन पंटा काना के हार्ड रॉक रिसॉर्ट एंड कसीनो में अंतिम रात आयोजित करने पर विचार कर रहा था।
हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया कि देश इस प्रतियोगिता के लिए कोई वित्तीय सहायता प्रदान नहीं कर सकता, इसलिए [[डोमिनिकन गणराज्य]] को मेजबानी का अधिकार नहीं मिला।<ref name="confirm802" /><ref name=":12">{{cite news |last=Leach |first=Robin |date=September 26, 2012 |title=2012 Miss Universe Pageant relocates to Las Vegas from Dominican Republic |work=[[Las Vegas Sun]] |url=http://www.lasvegassun.com/news/2012/sep/26/2012-miss-universe-pageant-relocates-las-vegas-dom/ |url-status=dead |access-date=January 3, 2013 |archive-url=https://web.archive.org/web/20121231223837/http://www.lasvegassun.com/news/2012/sep/26/2012-miss-universe-pageant-relocates-las-vegas-dom/ |archive-date=December 31, 2012}}</ref>
संगठन ने इस वर्ष की मिस यूनिवर्स प्रतियोगिता को पारंपरिक मध्य-वर्ष की समयसारणी से बदलकर दिसंबर में लास वेगास, नेवाडा में आयोजित करने का निर्णय लिया। 27 सितंबर 2012 को, संगठन ने पुष्टि की कि मिस यूनिवर्स 2012 प्रतियोगिता 19 दिसंबर 2012 को प्लैनेट हॉलीवुड रिसॉर्ट एंड कसीनो, लास वेगास, नेवाडा में आयोजित की जाएगी।<ref name=":12" />
===प्रतिभागियों का चयन===
उन्यासी देशों और क्षेत्रों की प्रतिभागियों को इस प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए चुना गया।
इनमें से सात प्रतिनिधियों को उनके राष्ट्रीय प्रतियोगिता में रनर-अप रहने या कास्टिंग प्रक्रिया के माध्यम से चुने जाने के बाद नियुक्त किया गया, जबकि नौ को मूल विजेताओं के स्थान पर चुना गया।
मिस यूनिवर्स कनाडा 2012 की प्रथम रनर-अप एड्वोआ यामोआ थीं इनको सहार बिनियाज़, मिस यूनिवर्स कनाडा 2012, के व्यक्तिगत कारणों से नाम वापस लेने के बाद कनाडा का प्रतिनिधित्व करने के लिए नियुक्त किया गया।<ref>{{Cite web |date=May 20, 2012 |title=Sahar Biniaz Crowned Miss Universe Canada 2012 |url=https://www.ibtimes.co.uk/sahar-biniaz-crowned-miss-universe-canada-2012-343053 |access-date=June 13, 2022 |website=[[International Business Times]] |language=en |archive-date=May 4, 2020 |archive-url=https://web.archive.org/web/20200504051640/https://www.ibtimes.co.uk/sahar-biniaz-crowned-miss-universe-canada-2012-343053 |url-status=live }}</ref><ref name=":2">{{Cite web |last=Cahute |first=Larissa |date=December 7, 2012 |title=Vancouver woman out of Miss Universe |url=https://theprovince.com/life/Vancouver+woman+Miss+Universe/7665563/story.html |url-status=dead |archive-url=https://web.archive.org/web/20140512221546/http://www2.canada.com/theprovince/news/story.html?id=831a432e-deeb-42e2-99a1-84826352c81d |archive-date=May 12, 2014 |access-date=December 9, 2012 |website=[[The Province]]}}</ref>
स्टार साइप्रस 2012 की रनर-अप इओआन्ना यियानाकोउ थीं इनको न्टानिएला केफाला, स्टार साइप्रस 2012, के अज्ञात कारणों से नाम वापस लेने के बाद साइप्रस का प्रतिनिधित्व करने के लिए नियुक्त किया गया।<ref>{{Cite web |last=Φούντα |first=Γωγώ |date=July 9, 2012 |title=Star Kύπρος 2012: Backstage και πρόβες από την μεγάλη βραδιά |url=https://www.queen.gr/juicy/juicy-news/story/54959/star-kypros-2012-backstage-kai-proves-apo-tin-megali-vradia |access-date=June 14, 2022 |website=Queen.gr |language=el |archive-date=April 3, 2023 |archive-url=https://web.archive.org/web/20230403225926/https://www.queen.gr/juicy/juicy-news/story/54959/star-kypros-2012-backstage-kai-proves-apo-tin-megali-vradia |url-status=live }}</ref>
मिस डोमिनिकन रिपब्लिक 2012 कारोला डुरान को प्रतियोगिता में भाग लेना था, लेकिन यह पता चलने के बाद कि वह पहले विवाह कर चुकी थीं और तलाकशुदा हैं, उनसे ताज वापस ले लिया गया। उनकी जगह प्रथम रनर-अप डुलसिटा लिग्गी को नियुक्त किया गया।<ref>{{Cite web |last=Macatee |first=Rebecca |date=April 27, 2012 |title=Another Miss Universe Scandal: Miss Dominican Republic Carlina Duran Dethroned for Being a Missus! |url=https://www.eonline.com/news/311756/another-miss-universe-scandal-miss-dominican-republic-carlina-duran-dethroned-for-being-a-missus |access-date=June 13, 2022 |website=[[E!|E! Online]] |archive-date=December 14, 2018 |archive-url=https://web.archive.org/web/20181214125247/https://www.eonline.com/news/311756/another-miss-universe-scandal-miss-dominican-republic-carlina-duran-dethroned-for-being-a-missus |url-status=live }}</ref>
नताली कोर्नेइत्सिक, जो मिस एस्टोनिया 2012 की प्रथम रनर-अप थीं, को विजेता कैटलिन वाल्डमेट्स के प्रायोजन की कमी के कारण नाम वापस लेने के बाद एस्टोनिया का प्रतिनिधित्व करने के लिए नियुक्त किया गया।<ref>{{Cite web |last=Sokol |first=Yulia |date=August 27, 2012 |title=Наталия Корнейчик: попрошу Эвелин Ильвес помочь с платьем на "Мисс Вселенную" |url=https://rus.err.ee/155861/natalija-kornejchik-poproshu-jevelin-ilves-pomoch-s-platem-na-miss-vselennuju |access-date=June 14, 2022 |website=[[Eesti Rahvusringhääling]] |language=ru |archive-date=April 3, 2023 |archive-url=https://web.archive.org/web/20230403225926/https://rus.err.ee/155861/natalija-kornejchik-poproshu-jevelin-ilves-pomoch-s-platem-na-miss-vselennuju |url-status=live }}</ref>
मैरी पायेट, जो मिस फ्रांस 2012 की प्रथम रनर-अप थीं, को मिस यूनिवर्स 2012 और मिस फ्रांस 2013 की तिथियों में संभावित टकराव के कारण फ्रांस का प्रतिनिधित्व करने के लिए नियुक्त किया गया, क्योंकि डेल्फीन वेस्पाइज़र, मिस फ्रांस 2012, को अनुबंध के अनुसार उस कार्यक्रम में उपस्थित रहना आवश्यक था।<ref>{{Cite web |last=Guardiola |first=Ari |date=October 10, 2012 |title=Miss Univers : Delphine Wespiser laisse sa place à la sublime Miss Réunion |url=https://www.purepeople.com/article/miss-univers-delphine-wespiser-laisse-sa-place-a-la-sublime-miss-reunion_a108338/1 |access-date=June 14, 2022 |website=[[Webedia#France|Purepeople]] |language=fr |archive-date=January 28, 2022 |archive-url=https://web.archive.org/web/20220128091448/https://www.purepeople.com/article/miss-univers-delphine-wespiser-laisse-sa-place-a-la-sublime-miss-reunion_a108338/1 |url-status=live }}</ref>
चन्ना डिवोवी, जो मिस गैबॉन 2012 की प्रथम रनर-अप थीं, को गैबॉन का प्रतिनिधित्व करने के लिए नियुक्त किया गया, क्योंकि मिस यूनिवर्स 2012 और मिस गैबॉन 2013 की तिथियों में संभावित टकराव था, जहाँ विजेता मैरी-नोएल अडा को अनुबंध के अनुसार उपस्थित रहना आवश्यक था।<ref>{{Cite web |last=Batassi |first=Pierre Eric |date=December 31, 2011 |title=Marie Noëlle Ada, nouvelle reine de la beauté gabonaise |url=https://www.afrik.com/marie-noelle-ada-nouvelle-reine-de-la-beaute-gabonaise |access-date=June 14, 2022 |website=Afrik |language=fr-FR |archive-date=April 3, 2023 |archive-url=https://web.archive.org/web/20230403225928/https://www.afrik.com/marie-noelle-ada-nouvelle-reine-de-la-beaute-gabonaise |url-status=live }}</ref>
जो आई एम सी 2012 की प्रथम रनर-अप शिल्पा सिंह थीं इनको [[उर्वशी रौतेला]], मिस यूनिवर्स इंडिया 2012, के नाम वापस लेने के बाद भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए नियुक्त किया गया, क्योंकि वह कम उम्र की थीं और उस समय मिस टूरिज्म क्वीन ऑफ द ईयर इंटरनेशनल का खिताब भी उनके पास था।<ref>{{Cite web |date=April 24, 2020 |title=Friday Trivia: Did you Know Urvashi Rautela was dethroned as Miss Universe? [Throwback] |url=https://www.ibtimes.co.in/friday-trivia-did-you-know-urvashi-rautela-was-dethroned-miss-universe-throwback-818276 |access-date=June 14, 2022 |website=[[International Business Times]] |language=en |archive-date=August 12, 2022 |archive-url=https://web.archive.org/web/20220812125014/https://www.ibtimes.co.in/friday-trivia-did-you-know-urvashi-rautela-was-dethroned-miss-universe-throwback-818276 |url-status=live }}</ref>
एवियंका बोहम, मिस यूनिवर्स न्यूज़ीलैंड 2012, को नागरिकता संबंधी समस्याओं के कारण उनकी प्रथम रनर-अप तालिया बेनेट से बदल दिया गया।<ref name="nzherald1">{{cite news |url=http://www.nzherald.co.nz/nz/news/article.cfm?c_id=1&objectid=10823532 |title=Miss Universe NZ stripped of her tiara – National – NZ Herald News |work=The New Zealand Herald |date=July 31, 2012 |access-date=August 9, 2012 |archive-date=August 7, 2012 |archive-url=https://web.archive.org/web/20120807105423/http://www.nzherald.co.nz/nz/news/article.cfm?c_id=1&objectid=10823532 |url-status=live }}</ref>
इसाबेला अयुक, मोस्ट ब्यूटीफुल गर्ल इन नाइजीरिया 2012, ने डेमिएट चार्ल्स ग्रैनविल, मोस्ट ब्यूटीफुल गर्ल इन नाइजीरिया यूनिवर्स 2012, के साथ प्रतियोगिताएँ बदल लीं, क्योंकि वह मिस वर्ल्ड के लिए अधिक आयु (ओवरएज) की हो गई थीं।<ref name=":3">{{cite news |last=Ogunjimi |first=Opeoluwani |date=June 22, 2012 |title=MBGN Controversy: Ayuk still queen but ... |newspaper=[[Vanguard (Nigeria)|Vanguard]] |url=http://www.vanguardngr.com/2012/06/mbgn-controversy-ayuk-still-queen-but-silverbird/ |location=Lagos, Nigeria|access-date=December 12, 2012 |archive-date=December 25, 2022 |archive-url=https://web.archive.org/web/20221225114343/https://www.vanguardngr.com/2012/06/mbgn-controversy-ayuk-still-queen-but-silverbird/ |url-status=live }}</ref>
एंड्रिया हुइसगेन, मिस स्पेन 2011, भाग लेने में असमर्थ थीं क्योंकि मिस स्पेन संगठन दिवालिया हो गया था, और लाइसेंस एक नए संगठन मिस यूनिवर्स स्पेन को दे दिया गया था।
हालांकि अधिकार बदल गए थे, फिर भी हुइसगेन को अनुबंध बदलने के बाद प्रतियोगिता में भाग लेने की अनुमति दी गई।<ref name=":4">{{cite news |date=November 23, 2012 |title=Andrea Huisgen podrá competir en Miss Universo tras renunciar a su contrato con Miss España |language=es |newspaper=[[20 minutos]] |url=http://www.20minutos.es/noticia/1657104/0/andrea-huisgen/competira/miss-universo/ |access-date=December 15, 2012 |archive-date=April 3, 2023 |archive-url=https://web.archive.org/web/20230403233421/https://www.20minutos.es/noticia/1657104/0/andrea-huisgen/competira/miss-universo/ |url-status=live }}</ref>
इस प्रतियोगिता में गैबॉन और लिथुआनिया ने पहली बार भाग लिया, जबकि बुल्गारिया, इथियोपिया, नामीबिया और नॉर्वे की वापसी हुई।<ref>{{Cite web |last=Gavilan |first=Jodesz |date=January 19, 2017 |title=FAST FACTS: Things to know about the Miss Universe pageant |url=https://www.rappler.com/newsbreak/iq/116694-fast-facts-miss-universe-pageant/ |access-date=June 14, 2022 |website=[[Rappler]] |language=en-US |archive-date=June 14, 2022 |archive-url=https://web.archive.org/web/20220614084024/https://www.rappler.com/newsbreak/iq/116694-fast-facts-miss-universe-pageant/ |url-status=live }}</ref>
बुल्गारिया, इथियोपिया और नामीबिया ने आखिरी बार [[मिस यूनीवर्स 2009]] में भाग लिया था, जबकि नॉर्वे ने आखिरी बार मिस यूनिवर्स 2010 में भाग लिया था।
मिस्र, कज़ाख़स्तान, पुर्तगाल, स्लोवेनिया, तुर्क्स और कैकोस आइलैंड्स और संयुक्त राज्य वर्जिन आइलैंड्स ने प्रतियोगिता से नाम वापस ले लिया।
ऐनूर टोल्येउओवा ने कम उम्र होने के कारण नाम वापस ले लिया।
मिस्र, पुर्तगाल, स्लोवेनिया, तुर्क्स और कैकोस तथा संयुक्त राज्य वर्जिन आइलैंड्स ने इसलिए प्रतियोगिता से नाम वापस लिया क्योंकि उनके संबंधित संगठनों ने राष्ट्रीय प्रतियोगिता आयोजित नहीं की या किसी प्रतिनिधि की नियुक्ति नहीं की।<ref>{{cite web |last=Boh |first=Tina |date=July 30, 2013 |title=Po enoletnem premoru bomo spet dobili mis Universe |url=http://www.siol.net/trendi/lepota_in_zdravje/lepota/2013/07/po_enoletnem_premoru_bomo_spet_dobili_mis_universe.aspx |url-status=dead |archive-url=https://web.archive.org/web/20130807065506/http://www.siol.net/trendi/lepota_in_zdravje/lepota/2013/07/po_enoletnem_premoru_bomo_spet_dobili_mis_universe.aspx |archive-date=August 7, 2013 |access-date=June 14, 2022 |website=[[Siol]]}}</ref>
====ट्रांसजेंडर महिलाओं को प्रतियोगिता में भाग लेने की अनुमति दी गई====
[[मिस यूनीवर्स 2013]] से शुरू होकर, मिस यूनिवर्स ऑर्गेनाइजेशन ने ग्लाड (GLAAD) से परामर्श के बाद [[ट्रांसजेंडर]] महिलाओं को प्रतियोगिता में भाग लेने की अनुमति दी।
नियमों में यह बदलाव जेना तलाकोवा के मामले के बाद आया, जो मिस यूनिवर्स कनाडा 2012 में भाग ले रही थीं और जिन्हें प्रतियोगिता से हटा दिया गया था।<ref>{{Cite news |date=April 10, 2012 |title=Miss Universe changes rules to include transgender women |language=en |work=[[Reuters]] |url=https://www.reuters.com/article/entertainment-us-missuniverse-transgende-idUSBRE8390N320120410 |access-date=June 14, 2022 |archive-date=June 14, 2022 |archive-url=https://web.archive.org/web/20220614141149/https://www.reuters.com/article/entertainment-us-missuniverse-transgende-idUSBRE8390N320120410 |url-status=live }}</ref> उन्हें इसलिए हटाया गया था क्योंकि वे “प्रतियोगिता में भाग लेने की आवश्यकताओं को पूरा नहीं करती थीं।”<ref>{{Cite web |last=Dyball |first=Rennie |date=March 26, 2012 |title=Jenna Talackova Removed from Miss Universe Canada for Being Transgender |url=https://people.com/celebrity/jenna-talackova-removed-from-miss-universe-canada-for-being-transgender/ |access-date=June 14, 2022 |website=[[People (magazine)|People.com]] |language=en |archive-date=June 14, 2022 |archive-url=https://web.archive.org/web/20220614141309/https://people.com/celebrity/jenna-talackova-removed-from-miss-universe-canada-for-being-transgender/ |url-status=live }}</ref>
हटाए जाने के एक महीने बाद संगठन ने तलाकोवा को फिर से प्रतियोगिता में भाग लेने की अनुमति दे दी, बशर्ते कि वे “कनाडा के कानूनी लिंग मान्यता संबंधी आवश्यकताओं और अन्य अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के मानकों को पूरा करें।”<ref>{{Cite web |last=Landis |first=Marina |date=April 3, 2012 |title=Miss Universe allows transgender contestant back into competition |url=https://www.cnn.com/2012/04/03/world/americas/canada-miss-universe-transgender-con/index.html |access-date=June 14, 2022 |website=[[CNN]] |archive-date=June 14, 2022 |archive-url=https://web.archive.org/web/20220614141149/https://www.cnn.com/2012/04/03/world/americas/canada-miss-universe-transgender-con/index.html |url-status=live }}</ref>
तलाकोवा शीर्ष 12 में पहुंचीं और मिस कंजेनियलिटी पुरस्कार जीतने वाली चार प्रतिभागियों में से एक रहीं।<ref>{{Cite web |last=Macatee |first=Rebecca |date=May 22, 2012 |title=Transgender Miss Universe Canada Contestant Jenna Talackova Places in Top 12, Wins Miss Congeniality Award |url=https://www.eonline.com/news/317810/transgender-miss-universe-canada-contestant-jenna-talackova-places-in-top-12-wins-miss-congeniality-award |access-date=June 14, 2022 |website=[[E!#E! Online|E! Online]] |archive-date=June 14, 2022 |archive-url=https://web.archive.org/web/20220614141309/https://www.eonline.com/news/317810/transgender-miss-universe-canada-contestant-jenna-talackova-places-in-top-12-wins-miss-congeniality-award |url-status=live }}</ref>
प्रतियोगिता के नियमों में बदलाव के छह साल बाद, एंजेला पोंसे ने [[मिस यूनिवर्स 2018]] में इतिहास रच दिया, क्योंकि वह मिस यूनिवर्स में भाग लेने वाली पहली ट्रांसजेंडर प्रतिभागी बनीं।<ref>{{Cite magazine |last=Lang |first=Cady |date=December 17, 2018 |title=Miss Spain is Miss Universe's First Transgender Competitor |url=https://time.com/5481417/miss-spain/ |access-date=June 14, 2022 |magazine=[[Time (magazine)|Time]] |language=en |archive-date=December 17, 2018 |archive-url=https://web.archive.org/web/20181217191738/http://time.com/5481417/miss-spain/ |url-status=live }}</ref>
==परिणाम==
[[File:Miss Universe 2012 map.png|thumb|240px|सहभागी देश और क्षेत्र]]
=== प्लेसमेंट ===
{| class="wikitable sortable" style="font-size: 95%;"
! स्थान!! प्रतियोगी
|-
| मिस यूनिवर्स 2012
|
* {{flagu|संयुक्त राज्य अमेरिका}} – [[ओलिविया कल्पो]]<ref name=":5">{{Cite web |date=December 20, 2012 |title=Philippines is 1st runner up in Miss Universe 2012 |url=https://www.rappler.com/life-and-style/18252-miss-philippines-wins-1st-runner-up-at-miss-universe-2012/ |access-date=June 14, 2022 |website=[[Rappler]] |language=en-US |archive-date=June 14, 2022 |archive-url=https://web.archive.org/web/20220614090549/https://www.rappler.com/life-and-style/18252-miss-philippines-wins-1st-runner-up-at-miss-universe-2012/ |url-status=live }}</ref>
|-
| प्रथम उपविजेता
|
* {{flagu|फिलिपींस}} – जेनीन टुगोनोन<ref name=":5" />
|-
| द्वितीय उपविजेता
|
* {{flagu|वेनेज़ुएला}} – इरेन एस्सर<ref name=":5" />
|-
| तीसरा उपविजेता
|
* {{flagu|ऑस्ट्रेलिया}} – रेनाए आयरिस<ref name=":5" />
|-
| चौथा उपविजेता
|
*{{flagu|ब्राज़ील}} – गैब्रिएला मार्कस<ref name=":5" />
|-
| शीर्ष 10<ref name=":5" />
|
* {{flagu|फ्रांस}} – मैरी पायेट
* {{flagu|हंगरी}} – एग्नेस कोंकोली
* {{flagu|मेक्सिको}} – करिना गोंज़ालेज़
* {{flagu|रूस}} – एलिज़ावेटा गोलोवानोवा
* {{flagu|दक्षिण अफ्रीका}} – मेलिंडा बाम
|-
| शीर्ष 16<ref name=":5" />
|
* {{flagu|क्रोएशिया}} – एलिजाबेथ बर्ग
* {{flagu|भारत}} – शिल्पा सिंह
* {{flagu|कोसोवो}} – डायना अवदिउ
* {{flagu|पेरू}} – निकोल कैवर्न
* {{flagu|पोलैंड}} – मार्सेलिना ज़ावाड्ज़्का
* {{flagu|तुर्की}} – कागिल ओज़कुल
|}
===विशेष पुरस्कार ===
{| class="wikitable sortable" style="font-size:95%;"
|-
! पुरस्कार
! प्रतियोगी
|-
| मिस कोंगेनीयलिटी
|
*{{flagu|ग्वाटेमाला}} – लौरा गोडॉय<ref name=":5" />
|-
| मिस फोटोजेनिक
|
*{{flagu|कोसोवो}} – डायना अवदिउ<ref name=":5" />
|}
==== सर्वश्रेष्ठ राष्ट्रीय पोशाक ====
{| class="wikitable sortable" style="font-size:95%;"
|-
! प्लेसमेंट
! प्रतियोगी
|-
| विजेता
|
*{{flagu|चीन}} – जू जिदान<ref name=":5" />
|-
| प्रथम उपविजेता
|
*{{flagu|मेक्सिको}} – करिना गोंजालेज<ref name=":5" />
|-
| द्वितीय उपविजेता
|
*{{Flagu|नीदरलैंड}} – नथाली डेन डेकर<ref name=":5" />
|-
| तीसरा उपविजेता
|
*{{Flagu|श्रीलंका}} – सबरीना हेर्फ्ट<ref name=":5" />
|-
| चौथे उपविजेता
|
*{{flagu|ब्राजील}} – गैब्रिएला मार्कस<ref name=":5" />
|-
| शीर्ष 10
|
*{{Flagu|ब्रिटिश वर्जिन द्वीपसमूह}} – अबीगैल हाइंडमैन<ref name=":5" />
*{{Flagu|निकारागुआ}} – फराह एस्लाक्विट<ref name=":5" />
*{{Flagu|इंडोनेशिया}} – मारिया सेलेना<ref name=":5" />
*{{Flagu|पनामा}} – स्टेफ़नी वेंडर वर्फ़<ref name=":5" />
*{{Flagu|पेरू}} – निकोल फेवरॉन<ref name=":5" />
|}
==प्रतियोगिता==
===प्रारूप===
मिस यूनिवर्स 2011 की तरह ही, पंद्रह सेमीफाइनलिस्ट प्रारंभिक प्रतियोगिता के माध्यम से चुने गए, जिसमें स्विमसूट और ईवनिंग गाउन प्रतियोगिताएँ तथा बंद कमरे में साक्षात्कार शामिल थे।
इंटरनेट वोटिंग भी लागू रही, जिसमें प्रशंसक एक अन्य प्रतिनिधि को वोट देकर सेमीफाइनल में आगे बढ़ा सकते थे, जिससे सेमीफाइनलिस्टों की संख्या सोलह हो गई। फैन वोट के विजेता का खुलासा अंतिम प्रसारण के दौरान नहीं किया गया।
सोलह सेमीफाइनलिस्टों ने स्विमसूट प्रतियोगिता में भाग लिया और उनकी संख्या घटाकर दस कर दी गई।
दस सेमीफाइनलिस्टों ने ईवनिंग गाउन प्रतियोगिता में भाग लिया और उनकी संख्या घटाकर पाँच कर दी गई।
पाँच फाइनलिस्टों ने प्रश्न-उत्तर चरण और अंतिम प्रस्तुति (फाइनल लुक) में भाग लिया।
=== चयन समिति ===
==== प्रारंभिक प्रतियोगिता ====
* कार्लो अनाया – माई लाइफस्टाइल एक्स्ट्रा के होस्ट<ref name=":6">{{Cite web |last=Gámez |first=Sabino |date=December 14, 2012 |title=Las bellas del Miss Universo 2012 |url=https://www.laprensa.hn/sociales/las-bellas-del-miss-universo-2012-EYLP375717 |access-date=June 14, 2022 |website=[[La Prensa (Honduras)|La Prensa]] |language=es-HN |archive-date=April 3, 2023 |archive-url=https://web.archive.org/web/20230403225926/https://www.laprensa.hn/sociales/las-bellas-del-miss-universo-2012-EYLP375717 |url-status=live }}</ref>
* बेवर्ली फ्रैंक – 19 एंटरटेनमेंट के लिए व्यापार मामलों की कार्यकारी उपाध्यक्ष<ref name=":6" />
* डुआने गाज़ी – ट्रम्प मॉडल मैनेजमेंट के साथ अंतरराष्ट्रीय स्काउट<ref name=":6" />
* माइकल ग्रीनवाल्ड – डॉन बुचवाल्ड एंड एसोसिएट्स में टैलेंट के उपाध्यक्ष<ref name=":6" />
* जिम्मी गुयेन - मनोरंजन और नए मीडिया क्षेत्र के जाने-माने वकील<ref name=":6" />
* कोरिन निकोलस - ट्रम्प मॉडल मैनेजमेंट की अध्यक्ष<ref name=":6" />
* एमी सैडोव्स्की - प्लैनेट हॉलीवुड इंटरनेशनल की जनसंपर्क विभाग की वरिष्ठ उपाध्यक्ष<ref name=":6" />
* क्रिस्टल स्टीवर्ट – मिस यूएसए 2008, [[टेक्सास]] से।<ref name=":6" />
==== अंतिम प्रसारण ====
* निगेल बार्कर - फैशन फोटोग्राफर और द फेस के होस्ट<ref name=":7">{{Cite web |last=Mann |first=Camille |date=December 14, 2012 |title=Cee Lo Green among judges for Miss Universe 2012 |url=https://www.cbsnews.com/news/cee-lo-green-among-judges-for-miss-universe-2012/ |access-date=June 14, 2022 |website=[[CBS News]] |language=en-US |archive-date=June 14, 2022 |archive-url=https://web.archive.org/web/20220614115208/https://www.cbsnews.com/news/cee-lo-green-among-judges-for-miss-universe-2012/ |url-status=live }}</ref>
* डिएगो बोनेटा - मेक्सिको के गायक, अभिनेता और गीतकार<ref name=":7" />
* स्कॉट डिसिक - व्यवसायी, उद्यमी और रियलिटी शो 'कीपिंग अप विद द कार्दशियन' के स्टार।<ref name=":7" />
* ब्रैड गोरेस्की - फैशन स्टाइलिस्ट और रियलिटी शो 'इट्स अ ब्रैड, ब्रैड वर्ल्ड' के स्टार<ref name=":7" />
* मासाहारू मोरीमोटो - जापान के शेफ और आयरन शेफ और आयरन शेफ अमेरिका के स्टार।<ref name=":7" />
* [[ज़िमेना नवारेटे]] - मेक्सिको से [[मिस यूनीवर्स 2010]]<ref name=":7" />
* पाब्लो सैंडोवल - वेनेजुएला के पेशेवर बेसबॉल खिलाड़ी<ref name=":7" />
* लिसा वैंडरपंप - द रियल हाउसवाइव्स ऑफ बेवर्ली हिल्स की रियलिटी स्टार<ref name=":7" />
* केरी वाल्श जेनिंग्स - पेशेवर बीच वॉलीबॉल खिलाड़ी और [[ग्रीष्मकालीन ओलंपिक खेल|ग्रीष्मकालीन ओलंपिक]] में तीन स्वर्ण पदक विजेता<ref name=":7" />
==सन्दर्भ==
{{टिप्पणीसूची|30em}}
==बाहरी कड़ियाँ==
*[http://www.missuniverse.com मिस यूनिवर्स आधिकारिक वेबसाइट]
{{मिस यूनीवर्स}} {{सुन्दरता प्रतियोगिता}}
[[श्रेणी: मिस यूनीवर्स]]
[[श्रेणी: सुन्दरता प्रतियोगिता]]
[[श्रेणी: अंतर्राष्ट्रीय सुन्दरता प्रतियोगिता]]
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फिजी में इस्लाम
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text/x-wiki
[[चित्र:Flag of the Kingdom of Fiji (1871-1874).svg|अंगूठाकार|फिजी झंडा ]]
'''[[फ़िजी|फिजी]] में [[इस्लाम|इस्लाम:]]''' फिजी में लगभग 60,000 मुसलमान हैं। तीसरा सबसे बड़ा धर्म है। <ref>{{Cite web|url=https://www.cia.gov/the-world-factbook/countries/fiji/|title=Australia – Oceania :: Fiji — The World Factbook – Central Intelligence Agency|website=cia.gov|access-date=14 December 2018|archive-date=27 अगस्त 2021|archive-url=https://web.archive.org/web/20210827055140/https://www.cia.gov/the|url-status=dead}}</ref> <ref>{{Cite web|url=https://www.abc.net.au/news/2014-09-04/comments-fiji-muslims-could-face-harm-irresponsible/5719344|title=Fiji military chief hits back at former PM's Muslim backlash claim|date=2014-09-04|website=www.abc.net.au|language=en-AU|access-date=2021-07-14}}</ref> फिजी में [[मुसलमान]] ज्यादातर [[सुन्नी इस्लाम|सुन्नी मुसलमान]] हैं, जिनमें [[शिया इस्लाम|शिया]] और [[अहमदिया]] अल्पसंख्यक हैं। <ref>{{Cite book|title=Indentured Muslims in the Diaspora|last=Ali-Chand|first=Zakia|last2=Buksh|first2=Shazna|last3=Anzeg|first3=Afshana|year=2016|isbn=9781315272030|pages=275–302|chapter=Islam in Fiji: Continuity, Adaptation and Change during the Indenture and Post-Indenture Periods|doi=10.4324/9781315272030-8|chapter-url=https://www.researchgate.net/publication/319725350}}</ref> 1966 के फिजी चुनावों में सुवा स्थित मुस्लिम सांप्रदायिक पार्टी, मुस्लिम पॉलिटिकल फ्रंट ने भाग लिया। वर्तमान में, [[उर्दू भाषा|उर्दू]] और [[फ़ीजी हिन्दी|फिजी हिंदी]] का उर्दूकृत/अरबीकृत/फारसीकृत रूप पूरे [[फ़िजी|फिजी]] में फिजी मुसलमानों के लिए [[मुसलमान|मुस्लिम]] स्कूलों में व्यापक रूप से पढ़ाया जाता है।
19वीं सदी की शुरुआत में मुसलमान दक्षिण एशिया से फिजी चले गए। <ref name=":0">{{Cite web|url=http://www.muslimpopulation.com/Oceania/Fiji/Islam%20in%20Fiji.php|title=Islam in Fiji|website=www.muslimpopulation.com|access-date=2021-07-14}}</ref> फ़िजी मुस्लिम लीग (एफएमएल) का गठन 1926 में हुआ था। <ref name="HassankhanVahed2016">{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=JjElDwAAQBAJ&pg=PA290|title=Indentured Muslims in the Diaspora: Identity and Belonging of Minority Groups in Plural Societies|last=Maurits S. Hassankhan|last2=Goolam Vahed|last3=Lomarsh Roopnarine|date=10 November 2016|publisher=Taylor & Francis|isbn=978-1-351-98687-8|page=290}}</ref> <ref name="FraenkelFirth2009">{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=NoUxrbSlylYC&pg=PA226|title=The 2006 Military Takeover in Fiji: A Coup to End All Coups?|last=Jon Fraenkel|last2=Stewart Firth|last3=Brij V. Lal|date=April 2009|publisher=ANU E Press|isbn=978-1-921536-51-9|page=226}}</ref> एफएमएल इस्लाम के विकास में महत्वपूर्ण था क्योंकि उन्होंने देश में मुस्लिम स्कूलों को शुरू करने के साथ फिजी की स्कूली शिक्षा प्रणाली में योगदान दिया था। <ref name="BaldaufKaplan2006">{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=INhL6k_89QoC&pg=PA57|title=Language Planning and Policy in the Pacific: Fiji, the Philippines and Vanuatu. Vol. 1|last=Richard B. Baldauf|last2=Robert B. Kaplan|publisher=Multilingual Matters|year=2006|isbn=978-1-85359-921-7|page=57}}</ref> 1929 में, फिजी मुस्लिम लीग ने फिजी विधान परिषद में मुसलमानों के लिए पृथक प्रतिनिधित्व हासिल करने की मांग की। <ref name=":0" />
[[सूडान]], [[यमन]] और मिस्र जैसे अरब देशों से कुछ आधुनिक मुस्लिम प्रवासी भी फिजी में बस गए हैं, जिससे फिजी-अरब आबादी बन गई है, तथा इस्लामी दुनिया के अन्य देशों से भी प्रवासी आ गए हैं। फिजी सरकार द्वारा मौलिद जैसे इस्लामी पवित्र दिनों को भी अवकाश के रूप में दिया जाता है। <ref>{{Cite web|url=https://silo.tips/download/the-history-of-the-mawlid|title=[PDF] The History of the Mawlid - Free Download PDF|website=silo.tips|language=en|access-date=2021-07-15}}</ref>
== प्रसिद्ध फ़िजी मुसलमान ==
* [[गाफर अहमद|गफ्फार अहमद]], फिजी राजनीतिज्ञ
* [[रोजी अकबर|रोज़ी अकबर]], फ़िजी राजनीतिज्ञ, वर्तमान शिक्षा मंत्री
* जॉय अली (1978-2015), फिजी मुक्केबाज
* जूनियर फरज़ान अली, फिजी मुक्केबाज, वर्तमान डब्ल्यूबीएफ एशिया पैसिफिक लाइटवेट चैंपियन (दिवंगत जॉय अली के भाई)
* [[षमीमा अली|शमीमा अली]], फ़िजी राजनीतिक कार्यकर्ता,
* [[अह्मद बाम्जी|अहमद भामजी]], फिजी के राजनीतिज्ञ और व्यवसायी, पूर्व संचार, परिवहन और निर्माण मंत्री
* एमएस बक्श, फिजी के राजनीतिज्ञ, औपचारिक शिक्षा प्राप्त करने वाले पहले इंडो-फिजियन माने जाते हैं
* मिर्ज़ा नमरुद बख्श (1925–2007), फ़िजी के टीवी और रेडियो व्यक्तित्व, नीलामीकर्ता और राजनीतिज्ञ
* फ़ारूक जनेमन (1953-2013), फ़िजी के पूर्व फुटबॉल खिलाड़ी और कोच
* अयाज सईद-खैयूम, फिजी राजनीतिज्ञ
* अय्यूब अली हुसैन, [[लउतोका|लुटोका]] से सांसद
* अमन समुत, व्यवसायी और [[लउतोका|लुटोका]] के मेयो
== संदर्भ ==
{{टिप्पणीसूची}}
== अग्रिम पठन ==
* {{Cite journal|last=अली|first=जान|date=April 2004|title=Islam and Muslims in Fiji|journal=[[Journal of Muslim Minority Affairs]]|volume=24|issue=1|pages=141–154|doi=10.1080/1360200042000212241|s2cid=144042694}}
[[श्रेणी:देशानुसार इस्लाम]]
[[श्रेणी:इस्लाम]]
[[श्रेणी:फिजी का इतिहास]]
[[श्रेणी:फिजी]]
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पेरी पेरी
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{{Infobox cultivar|name=पेरी-पेरी|image=African_red_devil_peppers.jpg|image_caption=पेरी-पेरी मिर्च (पकी हुई लाल और कच्ची हरी)|genus=''[[शिमला मिर्च]]''|species=''[[कैप्सिकम फ्रूटसेंस]]''|cultivar=पिली पिली|origin=[[महाअमेरिका]]}}
'''पिरी पिरी''' (/ˌpɪri ˈpɪri/, Piri piri), जिसे अक्सर हाइफ़न या एक शब्द के रूप में और '''पेरी-पेरी''' (/ˌpɛriˈpɛriː/, Peri-peri) या '''पिली पिली''' जैसे वैकल्पिक वर्तनी के साथ लिखा जाता है, मालागुएटा मिर्च से उत्पन्न कैप्सिकम फ्रूटेसेंस नामक [[मिर्च]] की एक क़िस्म है। इसका मूल उत्पादन पुर्तगाली अन्वेषकों द्वारा पुर्तगाल के पूर्व दक्षिणी अफ़्रीकी प्रदेशों में किया गया था और फिर यह अन्य पुर्तगाली अधिकार क्षेत्रों में फैल गई।<ref>{{Cite web|url=http://www.independent.co.uk/life-style/food-and-drink/nandos-peri-peri-chicken-origin-rise-popularity-spice-levels-uk-restaurant-a7846706.html|title=It turns out you were learning to love peri-peri long before we ever had Nando's|date=2017-07-18|website=The Independent|language=en|url-access=subscription|archive-url=https://ghostarchive.org/archive/20220525/http://www.independent.co.uk/life-style/food-and-drink/nandos-peri-peri-chicken-origin-rise-popularity-spice-levels-uk-restaurant-a7846706.html|archive-date=25 May 2022|access-date=2020-05-07}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://foodfuntravel.com/history-of-piri-piri-chicken/|title=History of Piri Piri Chicken|date=2020-01-13|website=Food Fun Travel Blog|language=en-US|access-date=2020-05-07}}</ref>
== व्युत्पत्ति ==
[[स्वाहिली भाषा]] में "पिलीपिली" का अर्थ "मिर्च" होता है। अन्य रोमन लिप्यंतरणों में [[कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य]] में पिली पिली और [[मलावी]] में पेरी पेरी शामिल हैं, जो अफ़्रीका के बंटू-भाषी विभिन्न हिस्सों में शब्द के उच्चारण भेदों से उत्पन्न हुए हैं। पेरी पेरी वर्तनी अंग्रेज़ी में [[दक्षिण अफ़्रीका]] में इसके प्रयोग के कारण आम है, हालाँकि पुर्तगाल और मोज़ाम्बिक जैसे पुर्तगाली-भाषी देशों में, जहाँ मिर्च का आधुनिक उपयोग शुरू हुआ, पिरी-पिरी वर्तनी प्रयोग होती है।<ref>{{Cite web|url=https://www.lexico.com/en/definition/peri_peri|title=Peri-Peri|website=Lexico Dictionaries: English|language=en|archive-url=https://web.archive.org/web/20190925051446/https://www.lexico.com/en/definition/peri_peri|archive-date=25 September 2019|access-date=2019-09-25}}</ref>
== पौधे की विशेषताएँ ==
[[चित्र:Pili-pili.JPG|अंगूठाकार|सूखी पीरी पीरी मिर्च]]
पौधे आमतौर पर बहुत झाड़ीदार होते हैं और ऊँचाई में ४५–१२० सेमी (१८–४७ इंच) तक बढ़ते हैं। इनकी पत्तियाँ ४–७ सेमी (डेढ़–तीन इंच) लंबी और १.३–१.५ सेमी (आधा–९/१६ इंच) चौड़ी होती हैं। फल आम तौर पर एक कुंद नोक की ओर संकीर्ण होते हैं और २–३ सेमी (३/४–सवा इंच) तक लंबे होते हैं। कच्ची फली का रंग हरा होता है; पकी फली का रंग चमकीला लाल या बैंगनी होता है। कुछ बर्ड्स-आई मिर्च क़िस्में १,७५,००० [[स्कोविल तीखापन इकाइयों]] तक पहुँच सकती हैं।<ref>{{Cite web|url=https://www.alimentarium.org/en/magazine/infographics/scoville-scale|title=The Scoville scale|website=www.alimentarium.org|language=en|access-date=2019-02-20}}{{Dead link|date=मई 2026 |bot=InternetArchiveBot }}</ref>
== खेती ==
सभी मिर्चों की तरह, पेरी-पेरी अमेरिका के पौधों से विकसित हुई है, लेकिन यह अफ़्रीका में सदियों से जंगली उगती रही है और अब [[ज़ाम्बिया]], [[युगांडा]], [[मलावी]], [[ज़िम्बाब्वे]] और [[रवांडा]] में व्यावसायिक रूप से इसकी खेती होती है। यह मुख्य रूप से [[मलावी]], [[इथियोपिया]], ज़ाम्बिया, [[दक्षिण अफ़्रीका]], [[घाना]], [[नाइजीरिया]], [[ज़िम्बाब्वे]], [[मोज़ाम्बीक|मोज़ाम्बिक]] और [[पुर्तगाल]] में उगाई जाती है। इसकी खेती व्यावसायिक खाद्य प्रसंस्करण और फार्मास्युटिकल उद्योग दोनों के लिए की जाती है। पेरी-पेरी की खेती श्रम-गहन होती है।है।<ref name="fiery-foods1">{{Cite web|url=http://www.fieryfoodscentral.com/2008/06/01/pepper-profile-african-birdseye-2/|title=Pepper Profile: African Birdseye|date=June 2008|website=Fiery Foods and Barbecue SuperSite|access-date=27 December 2011}}</ref>
== पीरी-पीरी सॉस (चटनी) ==
[[चित्र:Piri_piri_sauce_in_Mozambique.jpg|अंगूठाकार|पीरी-पीरी सॉस]]
पिरी-पिरी [[सॉस]] का निर्माण [[मिर्च]] को उन मसालों के साथ मिलाकर किया गया था जिनका पुर्तगालियों ने अपने [[एशियाई]] और [[भारतीय]] प्रदेशों के साथ व्यापार किया था। पहली सॉस [[पुर्तगाली साम्राज्य]] के किसी भी हिस्से में बनाई गई हो सकती है, क्योंकि विश्वसनीय स्रोतों की कमी है कि यह विशेष रूप से मोज़ाम्बिक में ही मिलाई गई थी। ऐसे में यह कहना असंभव है कि सॉस मूल रूप से पुर्तगाली साम्राज्य के भीतर ही बनाई गई थी, चाहे वह [[दक्षिणी अफ़्रीका]] में उनके प्रदेश हों या अन्यत्र।<ref>{{Cite web|url=https://nourishingafrica.com/food-culture/peri-peri-chicken/|title=Peri Peri Chicken: South Africa's Gift to the World|website=Nourishing Africa|language=en-US|access-date=2020-12-10}}{{Dead link|date=जुलाई 2025 |bot=InternetArchiveBot }}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.sbs.com.au/food/article/2017/01/20/uncovering-origins-peri-peri-sauce|title=Uncovering the origins of peri-peri sauce|website=Food|language=en|access-date=2020-12-10}}</ref>
यह सॉस पिरी-पिरी मिर्च से बनाई जाती है (जिसका उपयोग मसाले या मैरिनेड के रूप में किया जाता है)। पुर्तगालऔर दक्षिणी अफ़्रीकी क्षेत्र (अंगोला, नामीबिया, मोज़ाम्बिक और दक्षिण अफ़्रीका) के अलावा, जहाँ यह बहुत लोकप्रिय है, यह सॉस ब्रिटेन में विशेष रूप से प्रसिद्ध है, जिसका कारण दक्षिण अफ़्रीकी रेस्तराँ श्रृंखला [[नैंडोज़]] की सफलता है।<ref>Rowley Leigh, "A Fiery Challenge for Delicate Palates", ''The Financial Times'', London, 25 September 2004, p. 6.</ref>
विधियाँ क्षेत्र के अनुसार अलग-अलग होती हैं, और कभी-कभी उपयोग के इरादे के आधार पर एक ही क्षेत्र में भी भिन्न हो सकती हैं (उदाहरण के लिए, खाना पकाने बनाम टेबल पर मसाला डालने के लिए), लेकिन मुख्य सामग्री हैं मिर्च और लहसुन, जिसका आधार तेल या अम्लीय होता है।<ref>{{Cite book|title=Handbook of Spices, Seasonings, and Flavorings|last=Raghavan|first=Susheela|date=2006-10-23|isbn=9780429129513|doi=10.1201/b13597}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.vaqueiro.pt/recipes/molho-de-piripiri-200661|title=Molho de piripiri|website=Vaqueiro PT|language=pt-PT|access-date=2021-03-08}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.cooked.com/Rebecca-Seal/Hardie-Grant-Books/Lisbon/Sauces--preserves/Piri-piri-sauce-recipe|title=Piri piri sauce recipe from Lisbon by Rebecca Seal|website=Cooked|access-date=2021-03-08}}{{Dead link|date=जुलाई 2025 |bot=InternetArchiveBot }}</ref>
अन्य सामान्य सामग्री नमक, नींबू, स्पिरिट (जैसे कि [[व्हिस्की]], [[छिलका|साइट्रस का छिलका]], प्याज, काली मिर्च, तेजपत्ता, पेपरिका, पिमिएंटो, तुलसी, ओरेगानो और टैरागोन) हैं।<ref>{{Cite book|url=https://archive.org/details/dictionaryoffood00bend|title=A Dictionary of Food and Nutrition|date=2009|publisher=[[Oxford University Press]]|isbn=9780199234875|editor-last=Bender|editor-first=David A.|chapter=piri-piri|doi=10.1093/acref/9780199234875.001.0001|access-date=24 February 2013|chapter-url=http://www.oxfordreference.com/view/10.1093/acref/9780199234875.001.0001/acref-9780199234875-e-4235?rskey=EotPLm&result=4594&q=|url-access=registration}}</ref>
== संदर्भ ==
{{Reflist}}
[[श्रेणी:मसाले]]
[[श्रेणी:Pages with unreviewed translations]]
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ग्रेट निकोबार द्वीप विकास परियोजना
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अनुनाद सिंह
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{{एकाकी}}
[[चित्र:GreatNicobarBiosphereMap.jpg|अंगूठाकार|महान निकोबार जीवमंडल मानचित्र]]
'''ग्रेट निकोबार द्वीप विकास परियोजना''' [[अंडमान सागर]] में भारत के [[ग्रेट निकोबार द्वीप]] के दक्षिणी छोर के लिए एक नियोजित विशाल-बुनियादी ढांचा परियोजना है।<ref name="Mongabay">{{Cite news|url=https://india.mongabay.com/2022/10/maps-environmental-path-cleared-for-great-nicobar-mega-project/|title=Environmental path cleared for Great Nicobar mega project|last=Ramachandran|first=T.|date=10 October 2022|access-date=18 October 2022|publisher=Mongabay}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.hindustantimes.com/india-news/public-hearing-on-january-27-for-great-nicobar-development-project-101640943466176.html|title=Public hearing on January 27 for Great Nicobar development project|date=31 December 2021|website=Hindustan Times|language=en|access-date=16 October 2022}}</ref><ref name="Nod">{{Cite news|url=https://www.newindianexpress.com/nation/2022/sep/21/green-nod-for-strategically-crucial-great-nicobar-island-mega-project-around-85-lakh-trees-to-be-f-2500539.html|title=Green nod for strategically-crucial Great Nicobar Island mega project, around 8.5 lakh trees to be felled|date=21 September 2022|access-date=18 October 2022|publisher=The New Indian Express}}</ref> यह द्वीप भारतीय केंद्र शासित प्रदेश [[अण्डमान और निकोबार द्वीपसमूह|अंडमान और निकोबार द्वीप समूह]] में [[निकोबार ज़िला|निकोबार जिला]] प्रशासन के अंतर्गत आता है।
[[नीति आयोग]] द्वारा कमीशन की गई एक व्यवहार्यता रिपोर्ट (feasibility report) एईसीओएम इंडिया द्वारा तैयार की गई थी। विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति द्वारा आयोजित बैठक के बाद 25 मई 2021 को परियोजना के संदर्भ की शर्तें दी गईं।
इस परियोजना की कुल लागत ₹75,000 करोड़ (2022 में $9.4 बिलियन) है और 2025 में इसे सुधारकर ₹81,000 करोड़ कर दिया गया है, जिसकी परिकल्पना [[नीति आयोग]] द्वारा की गई थी और इसे अंडमान और निकोबार द्वीप समूह एकीकृत विकास निगम (एएनआईआईडीसी) द्वारा विकसित किया जा रहा है।<ref name="hindustantimes.com">{{Cite web|url=https://www.hindustantimes.com/india-news/trees-to-be-planted-in-haryana-s-aravallis-to-make-for-forest-loss-in-nicobar-due-to-infra-projects-101669573756590.html|title=Trees to be planted in Haryana's Aravallis to make for forest loss in Nicobar|date=27 November 2022|website=Hindustan Times|language=en|access-date=28 November 2022}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.thenewsminute.com/news/great-nicobar-tribal-lands-dont-show-up-on-maps-as-union-govt-pushes-mega-project|title=Great Nicobar: Tribal lands don't show up on maps as Union govt pushes mega project|last=Pardikar|first=Rishika|date=4 April 2025|website=The News Minute|access-date=12 September 2025}}</ref><ref name="Nod" /><ref name="nonsense">{{Cite web|url=https://theprint.in/environment/govt-vision-for-great-nicobar-includes-airport-township-some-experts-think-its-nonsense/814390/|title=Govt vision for Great Nicobar includes airport & township, some experts think it's 'nonsense'|last=Sirur|first=Simrin|date=30 January 2022|website=ThePrint|language=en-US|access-date=18 October 2022}}</ref> रक्षा, रसद, वाणिज्य और उद्योग, पर्यावरण पर्यटन, तटीय पर्यटन और तटीय विनियमन क्षेत्र के लिए भू-रणनीतिक महत्व प्रदान करना।<ref>{{Cite web|url=https://scroll.in/article/1034761/in-maps-the-extent-of-destruction-being-unleashed-on-the-forests-of-great-nicobar-island|title=In maps: The extent of destruction being unleashed on the forests of Great Nicobar Island|last=Ramachandran|first=T.|website=Scroll.in|access-date=29 November 2022}}</ref> यह परियोजना 30 वर्षों में चरणों में पूरी की जानी है, जिसमें शामिल हैंः
* गलाथिया बे इंटरनेशनल कंटेनर ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल (गलाथिया बे ICTT) गलाथिया बे के पूर्वी हिस्से में कुल 16 मिलियन TEU क्षमता, चरण-I में 4 मिलियन TEU क्षमता के साथ।
* '''ग्रेट निकोबार अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा''' (GNIA) 4,000 यात्रियों की पीक आवर क्षमता के साथ गलाथिया खाड़ी के तत्काल उत्तर-पूर्व की ओर एक ग्रीनफील्ड हवाई अड्डा है।<ref name="crush1" />
* '''ग्रेट निकोबार गैस और सौर ऊर्जा संयंत्र''' (ग्रेट निकोबार GSPP) के तत्काल उत्तर-पश्चिम की ओर और 450 एमवीए क्षमता के साथ गलाथिया खाड़ी, 16,610 हेक्टेयर में फैला हुआ है।<ref name="crush1" />
* दो नए ग्रीनफील्ड तटीय शहर एक ग्रेट निकोबार द्वीप के दक्षिण-पूर्व की ओर कैंपबेल खाड़ी और गलाथिया खाड़ी के बीच और दूसरा ग्रेट निकोबार द्वीप समूह के दक्षिण-पश्चिम की ओर गलाथिया खाड़ी. <ref name="crush1" />परियोजना के अन्य घटकों में शामिल हैंः
* क्रूज जहाज टर्मिनल
* लक्जरी पर्यटन रिसॉर्ट्स हब
* औद्योगिक केंद्र
==सन्दर्भ==
{{टिप्पणीसूची}}
[[श्रेणी:अण्डमान और निकोबार द्वीपसमूह में पर्यटन]]
[[श्रेणी:भारत सरकार की परियोजनाएँ]]
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अनुनाद सिंह
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text/x-wiki
[[चित्र:GreatNicobarBiosphereMap.jpg|अंगूठाकार|महान निकोबार जीवमंडल मानचित्र]]
'''महान निकोबार द्वीप विकास परियोजना''' [[अंडमान सागर]] में भारत के [[ग्रेट निकोबार द्वीप]] के दक्षिणी छोर के लिए एक नियोजित विशाल-बुनियादी ढांचा परियोजना है।<ref name="Mongabay">{{Cite news|url=https://india.mongabay.com/2022/10/maps-environmental-path-cleared-for-great-nicobar-mega-project/|title=Environmental path cleared for Great Nicobar mega project|last=Ramachandran|first=T.|date=10 October 2022|access-date=18 October 2022|publisher=Mongabay}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.hindustantimes.com/india-news/public-hearing-on-january-27-for-great-nicobar-development-project-101640943466176.html|title=Public hearing on January 27 for Great Nicobar development project|date=31 December 2021|website=Hindustan Times|language=en|access-date=16 October 2022}}</ref><ref name="Nod">{{Cite news|url=https://www.newindianexpress.com/nation/2022/sep/21/green-nod-for-strategically-crucial-great-nicobar-island-mega-project-around-85-lakh-trees-to-be-f-2500539.html|title=Green nod for strategically-crucial Great Nicobar Island mega project, around 8.5 lakh trees to be felled|date=21 September 2022|access-date=18 October 2022|publisher=The New Indian Express}}</ref> यह द्वीप भारतीय केंद्र शासित प्रदेश [[अण्डमान और निकोबार द्वीपसमूह|अंडमान और निकोबार द्वीप समूह]] में [[निकोबार ज़िला|निकोबार जिला]] प्रशासन के अंतर्गत आता है।
[[नीति आयोग]] द्वारा कमीशन की गई एक व्यवहार्यता रिपोर्ट (feasibility report) एईसीओएम इंडिया द्वारा तैयार की गई थी। विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति द्वारा आयोजित बैठक के बाद 25 मई 2021 को परियोजना के संदर्भ की शर्तें दी गईं।
इस परियोजना की कुल लागत ₹75,000 करोड़ (2022 में $9.4 बिलियन) है और 2025 में इसे सुधारकर ₹81,000 करोड़ कर दिया गया है, जिसकी परिकल्पना [[नीति आयोग]] द्वारा की गई थी और इसे अंडमान और निकोबार द्वीप समूह एकीकृत विकास निगम (एएनआईआईडीसी) द्वारा विकसित किया जा रहा है।<ref name="hindustantimes.com">{{Cite web|url=https://www.hindustantimes.com/india-news/trees-to-be-planted-in-haryana-s-aravallis-to-make-for-forest-loss-in-nicobar-due-to-infra-projects-101669573756590.html|title=Trees to be planted in Haryana's Aravallis to make for forest loss in Nicobar|date=27 November 2022|website=Hindustan Times|language=en|access-date=28 November 2022}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.thenewsminute.com/news/great-nicobar-tribal-lands-dont-show-up-on-maps-as-union-govt-pushes-mega-project|title=Great Nicobar: Tribal lands don't show up on maps as Union govt pushes mega project|last=Pardikar|first=Rishika|date=4 April 2025|website=The News Minute|access-date=12 September 2025}}</ref><ref name="Nod" /><ref name="nonsense">{{Cite web|url=https://theprint.in/environment/govt-vision-for-great-nicobar-includes-airport-township-some-experts-think-its-nonsense/814390/|title=Govt vision for Great Nicobar includes airport & township, some experts think it's 'nonsense'|last=Sirur|first=Simrin|date=30 January 2022|website=ThePrint|language=en-US|access-date=18 October 2022}}</ref> रक्षा, रसद, वाणिज्य और उद्योग, पर्यावरण पर्यटन, तटीय पर्यटन और तटीय विनियमन क्षेत्र के लिए भू-रणनीतिक महत्व प्रदान करना।<ref>{{Cite web|url=https://scroll.in/article/1034761/in-maps-the-extent-of-destruction-being-unleashed-on-the-forests-of-great-nicobar-island|title=In maps: The extent of destruction being unleashed on the forests of Great Nicobar Island|last=Ramachandran|first=T.|website=Scroll.in|access-date=29 November 2022}}</ref> यह परियोजना 30 वर्षों में चरणों में पूरी की जानी है, जिसमें शामिल हैंः
* गलाथिया बे इंटरनेशनल कंटेनर ट्रांसशिपमेंट टर्मिनल (गलाथिया बे ICTT) गलाथिया बे के पूर्वी हिस्से में कुल 16 मिलियन TEU क्षमता, चरण-I में 4 मिलियन TEU क्षमता के साथ।
* '''ग्रेट निकोबार अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा''' (GNIA) 4,000 यात्रियों की पीक आवर क्षमता के साथ गलाथिया खाड़ी के तत्काल उत्तर-पूर्व की ओर एक ग्रीनफील्ड हवाई अड्डा है।<ref name="crush1" />
* '''ग्रेट निकोबार गैस और सौर ऊर्जा संयंत्र''' (ग्रेट निकोबार GSPP) के तत्काल उत्तर-पश्चिम की ओर और 450 एमवीए क्षमता के साथ गलाथिया खाड़ी, 16,610 हेक्टेयर में फैला हुआ है।<ref name="crush1" />
* दो नए ग्रीनफील्ड तटीय शहर एक ग्रेट निकोबार द्वीप के दक्षिण-पूर्व की ओर कैंपबेल खाड़ी और गलाथिया खाड़ी के बीच और दूसरा ग्रेट निकोबार द्वीप समूह के दक्षिण-पश्चिम की ओर गलाथिया खाड़ी. <ref name="crush1" />परियोजना के अन्य घटकों में शामिल हैंः
* क्रूज जहाज टर्मिनल
* लक्जरी पर्यटन रिसॉर्ट्स हब
* औद्योगिक केंद्र
==सन्दर्भ==
{{टिप्पणीसूची}}
[[श्रेणी:अण्डमान और निकोबार द्वीपसमूह में पर्यटन]]
[[श्रेणी:भारत सरकार की परियोजनाएँ]]
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प्रेक्षणीय ब्रह्माण्ड
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text/x-wiki
'''प्रेक्षणीय ब्रह्माण्ड''' ([[अंग्रेज़ी भाषा|अंग्रेज़ी]]: ''Observable universe'') ब्रह्माण्ड का वह हिस्सा है जिसे पृथ्वी या किसी अन्य बिंदु से प्रकाश, विद्युतचुम्बकीय विकिरण या अन्य संकेतों के माध्यम से देखा और मापा जा सकता है। यह ब्रह्माण्ड की वास्तविक सीमा नहीं है, बल्कि उस दूरी तक का क्षेत्र है जहाँ तक बिग बैंग के बाद से प्रकाश पहुँच सका है।<ref name="NASA">{{Cite web |title=Observable Universe |url=https://science.nasa.gov/universe/cosmology/the-expanding-universe/observable-universe/ |website=NASA |access-date=2025-10-02 }}{{Dead link|date=मई 2026 |bot=InternetArchiveBot }}</ref>
== परिभाषा ==
प्रेक्षणीय ब्रह्माण्ड वह गोला है जिसका केंद्र पृथ्वी (या प्रेक्षक की स्थिति) पर होता है और जिसकी त्रिज्या लगभग 46.5 अरब [[प्रकाश वर्ष]] है। इसका व्यास लगभग 93 अरब प्रकाश वर्ष आँका गया है।<ref name="Brit">{{Cite web|url=https://www.britannica.com/science/observable-universe|title=Observable universe|website=Encyclopedia Britannica|access-date=2025-10-02}}</ref> यह सीमा [[प्रकाश की गति]] तथा ब्रह्माण्ड के विस्तार की वजह से निर्धारित होती है।
== विस्तार और सीमा ==
* बिग बैंग के लगभग 13.8 अरब वर्ष बाद भी ब्रह्माण्ड फैल रहा है।
* चूँकि अंतरिक्ष स्वयं फैलता है, इसलिए सबसे दूर स्थित आकाशगंगाएँ प्रकाश की तुलना में अधिक दूर हो गई हैं।
* वैज्ञानिक मानते हैं कि सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड का वास्तविक आकार इससे कहीं अधिक बड़ा है, किंतु हम केवल प्रेक्षणीय भाग को ही देख सकते हैं।<ref name="WikiEN">{{Cite web|title=Observable universe – Wikipedia|url=https://en.wikipedia.org/wiki/Observable_universe|access-date=2025-10-02}}</ref>
== विशेषताएँ ==
* इसमें अनुमानतः 2 ट्रिलियन (दो खरब) से अधिक आकाशगंगाएँ हैं।
* प्रत्येक आकाशगंगा में अरबों–खरबों तारे होते हैं।
* प्रेक्षणीय ब्रह्माण्ड में कॉस्मिक माइक्रोवेव पृष्ठभूमि विकिरण ''(CMB)'' भी शामिल है, जो बिग बैंग का अवशेष है।
* वैज्ञानिक दूरबीनों और उपग्रहों द्वारा इन क्षेत्रों का अध्ययन करते हैं।
== सीमाएँ ==
* प्रकाश की गति सीमित होने के कारण हम केवल उसी हिस्से को देख सकते हैं जिसका प्रकाश अब तक हम तक पहुँचा है।
* दूरस्थ क्षेत्रों का प्रकाश अभी हमारी ओर यात्रा पर है, इसलिए ब्रह्माण्ड का बड़ा भाग हमारी दृष्टि से परे है।
* विस्तार की वजह से कुछ क्षेत्र कभी भी प्रेक्षणीय नहीं हो पाएँगे।
== वैज्ञानिक महत्त्व ==
प्रेक्षणीय ब्रह्माण्ड का अध्ययन खगोलविदों को निम्नलिखित समझने में मदद करता है:
* ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति और विकास का इतिहास।
* आकाशगंगाओं और तारों का वितरण।
* डार्क मैटर और डार्क एनर्जी की भूमिका।
* ब्रह्माण्ड के विस्तार की दर और भविष्य।
== इधर भी देखें ==
* [[ब्रह्माण्ड]]
* [[बिग बैंग]]
* [[खगोल विज्ञान]]
== संदर्भ ==
{{Reflist}}
[[Category:खगोल विज्ञान]]
[[Category:ब्रह्माण्ड विज्ञान]]
[[Category:भौतिकी]]
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प्लोवदिव प्रांत
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{{ज्ञानसन्दूक अवस्थापन
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'''प्लोवदिव प्रांत''' ({{langx|bg|Област Пловдив}}) [[बुल्गारिया]] का एक [[बुल्गारिया के प्रांत|प्रांत]] है। इसकी राजधानी [[प्लोवदिव]] है। प्रांत का क्षेत्रफल 5972.9 km² है तथा फ़रवरी 2011 तक इसकी जनसंख्या 6,83,027 है।<ref name="phare">[http://www.zei.de/download/Phare/bulgaria.pdf Bulgarian Provinces area and population 1999 — National Center for Regional Development — page 90-91] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20110113004950/http://www.zei.de/download/Phare/bulgaria.pdf|date=January 13, 2011}}</ref><ref name="divisions"/><ref name="population">{{Cite web|url=http://www.citypopulation.de/Bulgaria-Cities.html|title=Bulgaria (Major Cities): Districts, Major Cities & Towns - Statistics & Maps on City Population|date=2011-12-31|publisher=Citypopulation.de|access-date=2012-06-08}}</ref><ref name="pop-stat-divisions">{{Cite web|url=http://pop-stat.mashke.org/bulgaria-division.htm|title=Division of Bulgaria|date=2011-02-01|publisher=Pop-stat.mashke.org|access-date=2012-06-08|archive-date=13 नवंबर 2017|archive-url=https://web.archive.org/web/20171113015521/http://pop-stat.mashke.org/bulgaria-division.htm|url-status=dead}}</ref>
== भूगोल ==
[[चित्र:SeloVrata.jpg|बाएँ|अंगूठाकार|प्रांत के दक्षिण में व्रता गाँव के पास [[रोडोपी पर्वतमाला|रोडोपी]] का दृश्य]]
प्लोवदीव प्रांत में [[ऊपरी थ्रेसी मैदान]], [[रोडोपी पर्वतमाला]], [[स्रेद्ना गोरा]], उप-बाल्कन घाटी और [[बाल्कन पर्वतमाला]] के कुछ भाग और उसकी सबसे ऊँची चोटी [[बोतेव]] (2,376 m) शामिल है। प्रांत की मुख्य नदियाँ [[मरित्सा नदी|मरित्सा]], [[स्त्र्यामा नदी|स्त्र्यामा]] और [[प्यसच्निक नदी|प्यसच्निक]] हैं। यहाँ कई बांध हैं, जिनमें से सबसे महत्वपूर्ण प्यसच्निक का है। खनिज झरने बड़ी मात्रा में हैं-कई प्रमुख [[स्पा रिज़ोर्ट]] हैं — [[हिसार्या]], [[नरेचेन]], [[बान्या, प्लोवदिव प्रांत|बान्या]], तथा [[क्लिसुरा, प्लोवदिव प्रांत|क्लिसुरा]], [[असेनोवग्राद]], [[कुक्लेन]], [[रोसिनो]], क्रास्नोवो, स्तोलेतोवो और अन्य नगरों में छोटे स्पा हैं। कई प्राकृतिक स्थल हैं, विशेषतः [[मध्य बाल्कन राष्ट्रीय उद्यान]] में, जिसमें बाल्कन का सबसे ऊँचा जलप्रपात [[रय्स्को प्रस्कलो]] शामिल है।
== नगरपालिकाएँ ==
[[चित्र:Plovdiv_Oblast_map.png|अंगूठाकार|397x397पिक्सेल|प्लोवदीव प्रांत की नगरपालिकाएँ]]
प्लोवदिव प्रांत के 18 नगरपालिकाओं हैं:<ref>[http://www.hs.government.bg/hs/index.html Oblast Haskovo -official website] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20090605022021/http://www.hs.government.bg/hs/index.html|date=June 5, 2009}}</ref>
{| class="wikitable sortable"
!नगरपालिका
!जनसंख्या<ref name="divisions"/><ref name="population"/><ref name="pop-stat-divisions"/>
!नगर/गाँव
!जनसंख्या<ref name="population" /><ref name="statistika">{{Cite web|url=http://www.nsi.bg/otrasalen.php?otr=53&a1=1583&a2=1584&a3=1588#cont|title=Bulgarian National Statistical Institute - Bulgarian towns in 2009|last=WebDesign Ltd. www.webdesign-bg.eu|publisher=Nsi.bg|access-date=2012-06-08}}</ref><ref name="pop-stat">{{Cite web|url=http://pop-stat.mashke.org/bulgaria-cities.htm|title=Cities of Bulgaria|date=2011-02-01|publisher=Pop-stat.mashke.org|access-date=2012-06-08|archive-date=16 अक्तूबर 2015|archive-url=https://web.archive.org/web/20151016140135/http://pop-stat.mashke.org/bulgaria-cities.htm|url-status=dead}}</ref><ref name="villages under 1000">{{Cite web|url=http://www.nsi.bg/nrnm/index.php?ezik=en&f=8&s=1&date=29.12.2010&e=1&s1=4&c1=2&a1=1000&c=0|title=Bulgarian Settlements less than 1000 inhabitants – December 2009|date=2009-12-31|publisher=Bulgarian National Statistical Institute|access-date=2018-05-02}}</ref><ref name="Settlements 1000-5000">{{Cite web|url=http://www.nsi.bg/nrnm/index.php?ezik=en&f=8&s=1&date=29.12.2010&e=1&s1=4&c1=3&a1=1000&c=1&s2=4&c2=2&a2=5000|title=Bulgarian Settlements 1000–5000 inhabitants – December 2009|date=2009-12-31|publisher=Bulgarian National Statistical Institute|access-date=2012-06-08}}</ref>
|-
|असेनोवग्राद
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|[[असेनोवग्राद]]
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|-
|ब्रेज़ोवो
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|-
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|[[हिसार्या]]
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|-
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|-
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|-
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| style="text-align:right;" |8,590
|-
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|-
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|[[लकी, प्लोवदिव प्रांत|लकी]]
| style="text-align:right;" |2,491
|-
|मरित्सा
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|[[प्लोवदीव]]
| style="text-align:right;" |नीचे देखें
|-
|पेरुश्तित्सा
| style="text-align:right;" |5,194
|[[पेरुश्तित्सा]]
| style="text-align:right;" |5,194
|-
|प्लोवदिव
| style="text-align:right;" |348,465
|प्लोवदिव
| style="text-align:right;" |348,465
|-
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|[[पर्वोमाय]]
| style="text-align:right;" |13,984
|-
|रकोव्स्की
| style="text-align:right;" |26,683
|रकोव्स्की
| style="text-align:right;" |15,265
|-
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|प्लोवदीव
| style="text-align:right;" |ऊपर देखें
|-
|सादोवो
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|[[सादोवो]]
| style="text-align:right;" |2,507
|-
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|[[सोपोत, प्लोवदिव प्रांत|सोपोत]]
| style="text-align:right;" |9,299
|-
|स्तंबोलिय्स्की
| style="text-align:right;" |20,879
|[[स्तंबोलिय्स्की]]
| style="text-align:right;" |11,721
|-
|सएदिनेनिए
| style="text-align:right;" |11,193
|[[सएदिनेनिए, प्लोवदिव प्रांत|सएदिनेनिए]]
| style="text-align:right;" |6,050
|}
== जनसांख्यिकी ==
{{historical populations|1946|515887|1956|564910|1965|647653|1975|725452|1985|760076|1992|739694|2001|715816|2011|683027|2021|634497|align=right|cols=1|source=pop-stat.mashke.org<ref>{{cite web|title=Divisions of Bulgaria|url=http://pop-stat.mashke.org/bulgaria-division.htm|date=2024-04-03|access-date=9 अक्तूबर 2025|archive-date=13 नवंबर 2017|archive-url=https://web.archive.org/web/20171113015521/http://pop-stat.mashke.org/bulgaria-division.htm|url-status=dead}}</ref>}}
2009 के अंत तक, बुल्गारियाई राष्ट्रीय सांख्यिकी संस्थान द्वारा घोषित जनसंख्या 7,01,684 थी, जिनमें से {{Percentage|168908|701684|1}} 60 वर्ष से अधिक आयु के थें।<ref name="divisions">{{Cite web|url=http://www.nsi.bg/otrasalen.php?otr=53&a1=1583&a2=1584&a3=1585#cont|title=Bulgarian National Statistical Institute - Bulgarian provinces and municipalities in 2009|last=WebDesign Ltd. www.webdesign-bg.eu|publisher=Nsi.bg|access-date=2012-06-08}}</ref><ref name="NSI age">{{Cite web|url=http://www.nsi.bg/otrasalen.php?otr=53&a1=1583&a2=1584&a3=1587#cont|title=Bulgarian National Statistical Institute - Population by age in 2009|last=WebDesign Ltd. www.webdesign-bg.eu|publisher=Nsi.bg|archive-url=https://web.archive.org/web/20120513121908/http://www.nsi.bg/otrasalen.php?otr=53&a1=1583&a2=1584&a3=1587#cont|archive-date=2012-05-13|access-date=2012-06-08}}</ref>
=== जातीय समूह ===
{{bar box|title=प्लोवदिव प्रांत के जातीय समूह (2011)|titlebar=#ddd|left1=जातीय समूह|right1=प्रतिशत|float=right|bars={{bar percent|[[बुल्गारियाई लोग|बुल्गारियाई]]|#00966E|87.1}}
{{bar percent|[[तुर्की लोग|तुर्की]]|red|6.5}}
{{bar percent|[[रोमा लोग|रोमा]]|brown|4.9}}
{{bar percent|अन्य|purple|1.5}}}}2011 की जनगणना के अनुसार, प्रांत की जनसंख्या में से 5,40,303 (87.09%) [[बुल्गारियाई लोग|बुल्गारियाई]], 40,255 (6.49%) [[तुर्की लोग|तुर्की]], 30,202 (4.87%) [[रोमा]] और 9,613 (1,54%) अन्य जातीय समूह के थें।<ref>{{In lang|bg}} [http://www.nsi.bg/ORPDOCS/Census2011_1.pop_by_age.xls Population on 01.02.2011 by provinces, municipalities, settlements and age; National Statistical Institute]</ref><ref>[http://www.nsi.bg/ORPDOCS/Census2011_4.pop_by_ethnos.xls Population by province, municipality, settlement and ethnic identification, by 01.02.2011; Bulgarian National Statistical Institute] {{In lang|bg}}</ref>
=== धर्म ===
{{bar box|title=प्लोवदिव प्रांत में धर्म (2011)<ref>{{cite web|url=http://pop-stat.mashke.org/bulgaria-religion2011.htm|title=Religious composition: 2011 census|publisher=pop-stat.mashke.org|access-date=29 जून 2018|archive-date=29 मई 2023|archive-url=https://web.archive.org/web/20230529223408/http://pop-stat.mashke.org/bulgaria-religion2011.htm|url-status=dead}}</ref>|titlebar=#ddd|left1=धर्म|right1=प्रतिशत|float=right|bars={{bar percent|[[पूर्वी रूढ़िवादी गिरजाघर|पूर्वी रूढ़िवाद]]|#D4AF37|62.67}}
{{bar percent|[[इस्लाम]]|green|5.3}}
{{bar percent|[[कैथोलिक गिरजाघर|कैथोलिकवाद]]|blue|2.85}}
{{bar percent|[[प्रोटेस्टेंटवाद]]|orange|0.9}}
{{bar percent|अन्य|purple|28.23}}}}
== अर्थव्यवस्था ==
[[चित्र:Roman-fortress-Hissarya-Walls.jpg|बाएँ|अंगूठाकार|हिसार्या क़िले के दीवारें]]
प्रांत की अर्थव्यवस्था बहुत महत्वपूर्ण है। उच्च स्तर की सिंचाई के साथ कृषि उत्पादन गहन और कुशल है। प्रमुख फ़सलें फल (सेब, आलू बुख़ारा, नाशपाती, आलूबालू), अंगूर, ख़रबूज़े और तरबूज, सब्ज़ियाँ (टमाटर, काली मिर्च, गाजर, पत्तागोभी, आलू) गेहूँ, चावल, जौ और अन्य हैं। उद्योग बहुत विकसित हैः प्लोवदिव के पास लौह धातु विज्ञान; प्लोवदिव, सएदिनेनिए, वोयवोदिनोवो, रदिनोवो और क्षेत्र के अन्य गांवों में संपन्न इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग; कर्लोवो में कृषि मशीनरी; सोपोत, कर्लोवो और प्लोवदिव में हथियार और सैन्य संयंत्रों; प्लोवदिव में रसायनिक उद्योग; खाद्य उद्योग लगभग हर स्थान विकसित किया गया है, विशेषतः प्लोवदिव और असेनोवग्राद में। पर्यटन प्रांत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और कई खनिज झरने के साथ एक बढ़ता हुआ उद्योग है जो अंतरराष्ट्रीय महत्व के हैं।<sup class="noprint Inline-Template Template-Fact" style="white-space:nowrap;">[''[[विकिपीडिया:उद्धरण आवश्यक|<span title="This claim needs references to reliable sources. (March 2023)">citation needed</span>]]'']</sup>
== यह भी देखें ==
* [[प्लोवदिव]]
== संदर्भ ==
{{Reflist}}
== बाहरी कड़ी ==
* {{फेसबुक|OAPlovdiv}}
{{Provinces of Bulgaria}}
{{Authority control}}
[[श्रेणी:बुल्गारिया के प्रांत]]
[[श्रेणी:Pages with unreviewed translations]]
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{{Infobox station
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}}
डीएलएफ फेज़ 1, हरियाणा, भारत में रैपिड मेट्रो गुड़गांव का एक स्टेशन है। यह स्टेशन 31 मार्च 2017 को जनता के लिए खोला गया था।<ref>{{cite news |title=Two more Rapid Metro Phase 2 stations made operational in Gurgaon |url=https://www.hindustantimes.com/gurugram/two-more-rapid-metro-phase-2-stations-made-operational-in-gurugram/story-3qWj8gjoSjxbjkvGassCpJ.html |accessdate=27 February 2019 |work=Hindustan Times |date=25 April 2017}}</ref> इसका स्वामित्व हरियाणा मास रैपिड ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HMRTC) के पास है और इसका संचालन दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) द्वारा किया जाता है।<ref>{{Cite web |title=Welcome to Delhi Metro Rail Corporation(DMRC) {{!}} Official Website |url=https://www.delhimetrorail.com/rapid-metro |access-date=2022-04-25 |website=www.delhimetrorail.com}}</ref> इससे पहले इसका संचालन रैपिड मेट्रो गुड़गांव लिमिटेड (RMGL) द्वारा किया जाता था।
==संदर्भ==
{{reflist}}
==बाहरी कड़ियाँ==
{{commons category|Rapid Metro Gurgaon}}
* {{Cite web |title=Rapid Metro Gurgaon |url=https://www.delhimetrorail.com/rapid-metro |website=Delhi Metro Rail Corporation}}
* {{Cite web |title=Rapid Metro Gurgaon |url=http://rapidmetrogurgaon.com/home/ |url-status=usurped |archive-url=https://web.archive.org/web/20170822221208/http://rapidmetrogurgaon.com/home/ |archive-date=2017-08-22 |access-date=2022-04-22 |website=Former website}}
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[[श्रेणी:रैपिड मेट्रो गुरुग्राम]]
[[श्रेणी:लाइन 1 (रैपिड मेट्रो गुरुग्राम) स्टेशन]]
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प्रवाल भित्ति मछलीयाँ
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text/x-wiki
[[File:Underwater World.jpg|thumb|upright=1.35|प्रवाल भित्ति के आसपास रहने वाली असंख्य और विविध मछलियों की प्रजातियाँ]]
'''प्रवाल भित्ति मछलियाँ''' वे मछलियाँ होती हैं जो असंख्य प्रवाल भित्तियों के आसपास के जलीय वातावरण में निवास करती हैं। जहाँ रंग-बिरंगी मछलियों की सैकड़ों प्रजातियाँ पाई जाती हैं। इन मछलियों की सुंदरता, आकार, और व्यवहार समुद्री पारिस्थितिकी का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत करते हैं। छोटी प्रवाल भित्तियों में रहने वाली ''गोबी प्रजाति'' की मछलियाँ विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। इसी समूह की सात अलग-अलग आकृति वाली मछलीयों में ''पिग्मी गोबी'' को विश्व की सबसे छोटी कशेरुकी प्रजाति माना गया है, जो लगभग 60 से भी कम दिनों तक जीवित रहती है।<ref>{{citation|doi=10.1016/j.cub.2005.04.016|pmid=15854891|title=प्रवाल भित्तियों की मछली में सबसे कम जीवनकाल पाया गया।|journal=सामान्य जीवविज्ञान|volume=15|issue=8|pages=R288-9|year=2005|last1=डेप्ज़िंस्की|first1=मारटीयल|last2=बेलवुड|first2=डेविड आर॰|s2cid=22684907 }}</ref>
==विविधता और वितरण==
प्रवाल भित्तियाँ समुद्र का वह भाग हैं जहाँ मछलियों की विविधता [[पृथ्वी]] के किसी भी अन्य क्षेत्र से अधिक पाई जाती है। अनुमानतः विश्व के [[महासागरों]] की प्रवाल भित्तियों में लगभग छह से आठ हज़ार मछलीयों की अलग-अलग प्रजातियाँ निवास करती हैं। यह विविधता जलीय वातावरण में उपलब्ध भोजन के प्रकार, उनके अस्थायी वितरण में होने वाली जटिल प्रक्रियाओं के कारण बनी है। इन सभी कारणों की परस्पर क्रियाओं को वैज्ञानिक अभी पूरी तरह समझ नहीं पाए हैं। प्रवाल भित्तियों का अधिकांश भाग [[समुद्रतल]] पर रहने वाली रंगीन मछलियों से भरा होता है, जो समुद्री [[पारिस्थितिकी]]की स्थिरता और संतुलन बनाए रखने में प्रमुख भूमिका निभाती हैं।<ref>[https://www.techexplorist.com/tiny-fishes-fuel-life-coral-reefs/23466/प्रवाल भित्तियों पर जीवन का आधार सूक्ष्म या अत्यंत छोटी मछलियाँ होती हैं। ये प्रवाल भित्तियाँ सामान्यतः स्वच्छ, फिरोज़ा-नीले जल और असंख्य रंग-बिरंगी मछलियों के अद्भुत समूहों का दृश्य प्रस्तुत करती हैं। परंतु यह प्रश्न महत्वपूर्ण है कि इतनी विशाल जैव विविधता और जीवन की समृद्धता को वास्तव में कौन-सा तंत्र या स्रोत बनाए रखता है?—अमित मालेवार]{{Dead link|date=मई 2026 |bot=InternetArchiveBot }} 24, 2019 को प्रकाशित</ref>
==विषैली मछलियाँ==
[[File:Pterois volitans Manado-e edit.jpg|thumb|260px|right|विषैली मछली का सीधा दृश्य]]
कई प्रवाल भित्ति मछलियाँ स्वभावतः जहरीली होती हैं। जहरीली मछलियाँ वे होती हैं जिनके शरीर में हानीकारक विष पाया जाता है। हालाँकि "जहरीली" और "विषैली" मछलियों में सूक्ष्म अंतर होता है। दोनों में विष तो होता है, परंतु विष पहुँचाने का तरीका अलग होता है। जहरीली मछलियाँ अपने डंक या काँटों से आक्रमण कर विष छोड़ती हैं, जिससे पीड़ित शरीर में विषक्रिया उत्पन्न होने लगती है। इन्हें खाने पर अक्सर कोई हानि नहीं होती क्योंकि अधिकांश विष [[पाचन तंत्र]] में नष्ट हो जाता है। इसके विपरीत, विषैली मछलियों में ऐसा विष होता है जो पाचन क्रिया से नष्ट नहीं होता, इसलिए उन्हें खाने से शरीर पर खतरनाक असर पड़ता है। <ref name="Biosearch">[http://www.greatbarrierreefs.com.au/biobits/biobits_venomous.htm जहरीली बनाम विषैली मछली : क्या अंतर है?]{{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20091030094110/http://www.greatbarrierreefs.com.au/biobits/biobits_venomous.htm |date=2009-10-30 }} रीफ बायोसर्च. Retrieved जुलाई.</ref>
==इन्हें भी देखे==
* [[समुद्री शैवाल]]
==संदर्भ==
{{reflist}}
{{Authority control}}
[[श्रेणी: समुद्री जीव]]
[[श्रेणी : समुद्र विज्ञान]]
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प्लेवेन प्रांत
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text/x-wiki
{{ज्ञानसन्दूक अवस्थापन
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| settlement_type = [[बुल्गारिया के प्रांत|प्रांत]]
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}}
'''प्लेवेन प्रांत''' ({{langx|bg|Област Плевен}}) [[बुल्गारिया]] का एक [[बुल्गारिया के प्रांत|प्रांत]] है, जिसकी सीमा [[डैन्यूब नदी]] और [[रोमानिया]] से लगी हुई है। इसकी राजधानी [[प्लेवेन]] है। इसका क्षेत्रफल 4,653.32 km² है तथा जनसंख्या फ़रवरी 2011 तक 2,69,752 है।<ref name="population2011">{{In lang|en}} [http://www.nsi.bg/census2011/pagebg2.php?p2=36&sp2=37&SSPP2=39 Census 2011] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20110714103411/http://www.nsi.bg/census2011/pagebg2.php?p2=36&sp2=37&SSPP2=39|date=2011-07-14}}</ref><ref name="divisions">{{In lang|en}} [http://www.nsi.bg/otrasalen.php?otr=53&a1=1583&a2=1584&a3=1585#cont Bulgarian National Statistical Institute - Bulgarian provinces and municipalities in 2009]</ref><ref name="population">{{In lang|en}} [http://www.citypopulation.de/Bulgaria-Cities.html „WorldCityPopulation“]</ref>
== भूगोल ==
प्लेवेन प्रांत मध्य [[डैन्यूबी मैदान]] का भाग है। इसे दक्षिण से उत्तर की ओर [[इस्कर नदी|इस्कर]], वित और [[ओसम नदी|ओसम]] नदियों द्वारा पार किया जाता है। नदी घाटियों चूना पत्थर के पठारों द्वारा अलग हैं।
== नगरपालिकाएँ ==
प्लेवेन प्रांत के 11 नगरपालिकाएँ हैं:
{| class="wikitable sortable"
!नगरपालिका
!जनसंख्या<ref name="divisions"/><ref name="population"/>
!कस्बा/गाँव
!जनसंख्या<ref name="population" /><ref name="statistika">{{In lang|en}} [http://www.nsi.bg/otrasalen.php?otr=53&a1=1583&a2=1584&a3=1588#cont Bulgarian National Statistical Institute - Bulgarian towns in 2009]</ref>
|-
|[[बेलेने नगरपालिका|बेलेने]]
| align="right" |10,908
|[[बेलेने]]
| align="right" |8,905
|-
|[[गुल्यांत्सी नगरपालिका|गुल्यांत्सी]]
| align="right" |13,561
|[[गुल्यांत्सी]]
| align="right" |3,432
|-
|[[दोल्ना मित्रोपोलिया नगरपालिका|दोल्ना मित्रोपोलिया]]
| align="right" |21,304
|[[दोल्ना मित्रोपोलिया]]
| align="right" |3,303
|-
|[[दोल्नी दब्निक नगरपालिका|दोल्नी दब्निक]]
| align="right" |14,438
|[[दोल्नी दब्निक]]
| align="right" |4,761
|-
|[[लेव्स्की नगरपालिका|लेव्स्की]]
| align="right" |21,487
|[[लेव्स्की, प्लेवेन प्रांत|लेव्स्की]]
| align="right" |10,571
|-
|[[निकोपोल नगरपालिका|निकोपोल]]
| align="right" |10,602
|[[निकोपोल, बुल्गारिया|निकोपोल]]
| align="right" |3,892
|-
|[[इस्कर नगरपालिका|इस्कर]]
| align="right" |7,717
|[[इस्कर]]
| align="right" |3,622
|-
|[[प्लेवेन नगरपालिका|प्लेवेन]]
| align="right" |138,095
|[[प्लेवेन]]
| align="right" |111,426
|-
|[[पोर्दिम नगरपालिका|पोर्दिम]]
| align="right" |7,114
|[[पोर्दिम]]
| align="right" |2,117
|-
|[[चेर्वेन ब्र्याग नगरपालिका|चेर्वेन ब्र्याग]]
| align="right" |30,524
|[[चेर्वेन ब्र्याग]]
| align="right" |13,856
|-
|[[क्नेझ़ा नगरपालिका|क्नेझ़ा]]
| align="right" |14,839
|[[क्नेझ़ा]]
| align="right" |11,191
|}
== जनसांख्यिकी ==
{{ऐतिहासिक जनसंख्याएं|1946|347299|1956|358270|1965|366347|1975|394734|1985|382634|1992|365254|2001|329064|2011|269752|2021|226120|align=right}}
फ़रवरी 2011 तक, बुल्गारियाई राष्ट्रीय सांख्यिकी संस्थान द्वारा घोषित प्रांत की जनसंख्या, जिसमें से {{Percentage|82455|290589|1}} 2,66,144 60 वर्ष से अधिक आयु के निवासी थें।<ref name="population2011"/><ref name="NSI age">{{In lang|en}} [http://www.nsi.bg/otrasalen.php?otr=53&a1=1583&a2=1584&a3=1587#cont Bulgarian National Statistical Institute - Population by age in 2009] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20120513121908/http://www.nsi.bg/otrasalen.php?otr=53&a1=1583&a2=1584&a3=1587|date=2012-05-13}}</ref>
=== जातीय समूह ===
{{Bar box|title=प्लेवेन प्रांत के प्लेवेन प्रांत के जातीय समूह(2011)|titlebar=#ddd|left1=जातीय समूह|right1=प्रतिशत|float=right|bars={{bar percent|[[बुल्गारियाई लोग|बुल्गारियाई]]|#00966E|91.4}}
{{bar percent|[[रोमा लोग|रोमा]]|brown|4.2}}
{{bar percent|[[तुर्की लोग|तुर्की]]|red|3.6}}
{{bar percent|अन्य|purple|0.8}}}}2011 के अनुसार, जनसंख्या में से 2,19,612 (91.40%) [[बुल्गारियाई लोग|बुल्गारियाई]], 9,961 (4.15%) [[रोमा]], 8,666 (3.61%) [[तुर्की लोग|तुर्की]] और 2,026 (0.84%) अन्य जातीय समूह के थें।<ref>[https://www.nsi.bg/census2011/PDOCS2/population-2011censusdata.xls Population by province, municipality, settlement and ethnic identification, by 01.02.2011; Bulgarian National Statistical Institute] {{In lang|en}}</ref>
=== धर्म ===
{{Bar box|title=प्लेवेन प्रांत में धर्म (2011)<ref>{{cite web|url=http://pop-stat.mashke.org/bulgaria-religion2011.htm|title="Religious composition: 2011 census"|publisher=pop-stat.mashke.org|access-date=29 June 2018|archive-date=29 मई 2023|archive-url=https://web.archive.org/web/20230529223408/http://pop-stat.mashke.org/bulgaria-religion2011.htm|url-status=dead}}</ref>|titlebar=#ddd|left1=धर्म|right1=प्रतिशत|float=right|bars={{bar percent|[[पूर्वी रूढ़िवादी गिरजाघर|पूर्वी रूढ़िवाद]]|#D4AF37|56.73}}
{{bar percent|[[कैथोलिक गिरजाघर|कैथोलिकवाद]]|blue|1.9}}
{{bar percent|[[इस्लाम]]|green|1.77}}
{{bar percent|[[प्रोटेस्टेंटवाद]]|orange|0.5}}
{{bar percent|अन्य|purple|39}}}}
== यह भी देखें ==
* [[बुल्गारिया के प्रांत]]
== संदर्भ ==
{{Reflist}}
== बाहरी कड़ी ==
* {{फेसबुक|Областен-управител-на-област-Плевен-61560004901650}}
{{Provinces of Bulgaria}}
{{Authority control}}
[[श्रेणी:बुल्गारिया के प्रांत]]
[[श्रेणी:Pages with unreviewed translations]]
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वैभव सूर्यवंशी
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एक चित्र जोड़ा।
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wikitext
text/x-wiki
[[चित्र:Vaibhav Suryavanshi meets PM Modi.jpg]]
'''वैभव सूर्यवंशी''' (जन्म 27 मार्च 2011) एक [[भारतीय क्रिकेट टीम|भारतीय क्रिकेटर]] हैं, जो घरेलू क्रिकेट में [[बिहार क्रिकेट टीम|बिहार]] के लिए और [[इंडियन प्रीमियर लीग]] (आईपीएल) में [[राजस्थान रॉयल्स]] के लिए खेलते हैं। वह बाएं हाथ के [[बल्लेबाज]] हैं और उन्होंने जनवरी 2024 में [[प्रथम श्रेणी क्रिकेट]] में पदार्पण किया। वह भारत के सबसे कम उम्र के [[लिस्ट ए क्रिकेट]] में पदार्पण करने वाले खिलाड़ी हैं, और आईपीएल में पदार्पण करने वाले सबसे कम उम्र के भारतीय खिलाड़ी भी हैं।<ref>{{Cite news|url=https://timesofindia.indiatimes.com/sports/cricket/news/exclusive-vaibhav-suryavanshi-the-12-year-old-who-broke-sachin-tendulkar-and-yuvraj-singhs-record/articleshow/107229054.cms|title=EXCLUSIVE: Vaibhav Suryavanshi - The 12-year-old who broke Sachin Tendulkar and Yuvraj Singh's record|date=2024-01-29|work=The Times of India|access-date=2025-10-13|issn=0971-8257}}</ref>
==प्रारंभिक जीवन==
वैभव सूर्यवंशी का जन्म 27 मार्च 2011 को [[ताजपुर]], जिला [[समस्तीपुर]], मिथिला क्षेत्र, बिहार, भारत में हुआ था।
उन्होंने चार वर्ष की आयु में क्रिकेट खेलना शुरू किया। प्रारंभ में उन्हें उनके पिता ने प्रशिक्षित किया, और बाद में नौ वर्ष की आयु में उन्होंने [[समस्तीपुर]] की एक [[क्रिकेट]] अकादमी में प्रशिक्षण लेना शुरू किया। सूर्यवंशी का संबंध [[मुज़फ्फरपुर|मुजफ्फरपुर]] जिला से भी गहरा रहा है, जहाँ उन्होंने एक इनडोर स्टेडियम में अभ्यास किया और अपने एक रिश्तेदार के घर पर रहते थे।<ref>{{Cite web|url=https://www.jagran.com/bihar/muzaffarpur-vaibhav-suryavanshi-muzaffarpur-connection-to-ipl-stars-success-23928300.html|title=Vaibhav Suryavanshi: वैभव को पसंद है बुआ दादी के हाथ का चिकन, मुजफ्फरपुर शहर से है खास कनेक्शन - Vaibhav Suryavanshi Muzaffarpur Connection to IPL Stars Success|website=Jagran|language=hi|access-date=2025-10-13}}</ref>
==युवास्था करियर==
सूर्यवंशी ने 12 वर्ष की आयु में विनू मांकड़ ट्रॉफी में बिहार की अंडर-19 टीम के लिए खेला।
2023 में, उन्होंने भारत बी अंडर-19 टीम के लिए एक क्वाड्रेंगुलर श्रृंखला में भाग लिया, जिसमें उन्होंने छह पारियों में 177 रन बनाए, जिनमें दो अर्धशतक शामिल थे।
सितंबर 2024 में उन्होंने भारत अंडर-19 टीम के लिए ऑस्ट्रेलिया अंडर-19 के खिलाफ पदार्पण किया।<ref>{{Cite web|url=https://www.amarujala.com/bihar/muzaffarpur/bihar-news-cricketer-vaibhav-suryavanshi-has-a-special-connection-with-muzaffarpur-2025-04-29|title=Bihar: मुजफ्फरपुर से रहा है क्रिकेटर वैभव सूर्यवंशी का खास जुड़ाव, बचपन में कोच बुलाते थे ‘माई लिटिल गेल’|website=Amar Ujala|language=hi|access-date=2025-10-13}}</ref> उन्होंने 58 गेंदों में शतक बनाया — जो किसी भी भारतीय अंडर-19 खिलाड़ी द्वारा सबसे तेज शतक था — और 104 रन बनाकर रन आउट हुए। यह अंतरराष्ट्रीय अंडर-19 क्रिकेट इतिहास का दूसरा सबसे तेज शतक था।
2024 एसीसी अंडर-19 एशिया कप में, सूर्यवंशी ने यूएई अंडर-19 के खिलाफ 46 गेंदों में 76 रन बनाए और सेमीफाइनल में श्रीलंका के खिलाफ 36 गेंदों में 67 रन बनाए।
==घरेलू करियर==
सूर्यवंशी ने जनवरी 2024 में बिहार की ओर से मुंबई के खिलाफ प्रथम श्रेणी क्रिकेट में पदार्पण किया, उस समय उनकी आयु 12 वर्ष और 284 दिन थी। इस उपलब्धि के साथ वे बिहार के लिए रणजी ट्रॉफी खेलने वाले दूसरे सबसे कम उम्र के खिलाड़ी और भारत के चौथे सबसे कम उम्र के प्रथम श्रेणी क्रिकेटर बने। उन्होंने युवराज सिंह (15 वर्ष 57 दिन) का रिकॉर्ड तोड़ दिया, जबकि अलीमुद्दीन का रिकॉर्ड अब भी कायम है, जिन्होंने 1942–43 सीज़न में राजपुताना की ओर से 12 वर्ष और 73 दिन की आयु में पदार्पण किया था।
नवंबर 2024 में, वे 13 वर्ष और 241 दिन की आयु में टी20 क्रिकेट में पदार्पण करने वाले सबसे कम उम्र के खिलाड़ी बने, जब उन्होंने सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी 2024–25 में बिहार की ओर से राजस्थान के खिलाफ खेला।<ref>{{Cite web|url=https://www.indiatvnews.com/sports/cricket/vaibhav-suryavanshi-smashes-fastest-hundred-for-india-u19-in-unofficial-youth-test-vs-australia-u19-2024-10-01-954855|title=13-year-old Vaibhav Suryavanshi smashes fastest hundred for India U19 in Youth Test vs Australia|last=Kavthale|first=Sumeet|last2=News|first2=India TV|date=2024-10-01|website=India TV News|language=en|access-date=2025-10-13}}</ref>
दिसंबर 2024 में, उन्होंने विजय हजारे ट्रॉफी 2024–25 में मध्य प्रदेश के खिलाफ बिहार की ओर से पदार्पण करते हुए 13 वर्ष और 269 दिन की आयु में लिस्ट ए क्रिकेट खेलने वाले सबसे कम उम्र के भारतीय खिलाड़ी का रिकॉर्ड बनाया।
==सन्दर्भ==
{{टिप्पणीसूची}}
[[श्रेणी: क्रिकेट]]
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प्यार (सिख धर्म)
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प्यार ([[पंजाबी भाषा|पञ्जाबी]]: {{lang|pa|ਪਿਆਰ}}) [[हिन्दी]] एवं [[पंजाबी भाषा|पञ्जाबी]] भाषाओं में 'प्रेम' के लिए प्रयुक्त शब्द है। यह संस्कृत के प्रिय तथा कार (कर्म) शब्दों से व्युत्पन्न है।{{Citation needed|date=July 2023}} यह [[सिख धर्म]] के पाँच सद्गुणों में से एक है।<ref>{{Cite web|url=http://sikhguru.org.uk/sikhsim/sikh-beliefs/five-virtues-and-five-evils/|title=Five Virtues and Five Evils|last=Makan|first=Pritpal Singh|website=Sikhguru Organization U.K.|language=en-UK|access-date=18 August 2022}}{{Dead link|date=मई 2026 |bot=InternetArchiveBot }}</ref>
== विवरण ==
[[सिख गुरु|सिख गुरुओं]] ने [[काम]] (अत्यधिक कामना, पाँच चोरों में एक) के उपचार हेतु प्यार को उपयुक्त मार्ग बताया है। प्यार के माध्यम से काम को रूपान्तरित करने के विषय में [[गुरु गोबिन्द सिंह]] जी ने यह वचन दिया:<ref name=":12">{{cite book|title=The Encyclopaedia of Sikhism|last1=Singh|first1=Harbans|date=1992–1998|publisher=Punjabi University|isbn=9788173803499|location=Patiala|page=419}}</ref>
{{Quote| सुनो सब जन, मैं सत्य कहता हूँ: केवल वही परमात्मा को प्राप्त करते हैं जो उससे प्यार करते हैं।
— गुरु गोबिन्द सिंह}}
सिख धर्म में ईश्वर और भक्त के मध्य आदर्श सम्बन्ध आत्मा-वधू के रूप में कल्पित है, जिसमें भक्त पति (कान्त) की अभिलाषा रखने वाली पत्नी होता है, और वह कान्त स्वयं ईश्वर है। यह भाव सम्पूर्ण गुरुबाणी में बारम्बार प्रकट होता है।<ref name=":13">{{cite book|title=The Encyclopaedia of Sikhism|last1=Singh|first1=Harbans|date=1992–1998|publisher=Punjabi University|isbn=9788173803499|location=Patiala|page=419}}</ref><ref name=":14">{{cite book|title=The Encyclopaedia of Sikhism|last1=Singh|first1=Harbans|date=1992–1998|publisher=Punjabi University|isbn=9788173803499|location=Patiala|page=419}}</ref>
भक्त ईश्वर से पृथक होने की पीड़ा अनुभव करता है और पुनः मिलन की तीव्र आकाङ्क्षा करता है। यह पूर्ण समर्पण की प्रक्रिया काम की नकारात्मक प्रवृत्तियों को शान्त करती है और उसकी ऊर्जा को आत्मिक उन्नति की ओर मोड़ देती है।<ref name=":15">{{cite book|title=The Encyclopaedia of Sikhism|last1=Singh|first1=Harbans|date=1992–1998|publisher=Punjabi University|isbn=9788173803499|location=Patiala|page=419}}</ref>
[[गुरु अर्जुन देव|गुरु अर्जुन देव जी]] ने [[गुरु ग्रन्थ साहिब]] के पृष्ठ ५३४ पर यह कहा है कि जो व्यक्ति वास्तव में ईश्वर से प्यार करता है, वह विनम्रतापूर्वक न तो सत्ता की कामना करता है, न अधिकार की, और न ही [[मोक्ष]] की अभिलाषा रखता है।<ref name=":16">{{cite book|title=The Encyclopaedia of Sikhism|last1=Singh|first1=Harbans|date=1992–1998|publisher=Punjabi University|isbn=9788173803499|location=Patiala|page=419}}</ref>
== सन्दर्भ ==
{{Reflist}}{{सिख धर्म}}
[[श्रेणी:पंजाबी शब्द और वाक्यांश]]
[[श्रेणी:हिंदी शब्द]]
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रेनी गुड की हत्या
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text/x-wiki
{{Expand English|Killing of Renee Good}}
{| class="infobox vevent"
|+ class="infobox-title summary" id="4" |रने गुड की हत्या
| colspan="2" class="infobox-subheader" |संयुक्त राज्य प्रव्रजन अभिकर्ताओं द्वारा द्वितीय ट्रम्प शासनकाल में की गई छापेमारी, गिरफ़्तारियाँ तथा गोलीकाण्ड का एक अंश
|-
| colspan="2" class="infobox-image" style="border-bottom:#aaa solid 1px" |[[File:Renee_Good_DHS_agent_perspective.jpg|फ़्रेमहीन]]<div class="infobox-caption">गुड अपनी गाड़ी में थीं, ठीक उस क्षण से पूर्व जब रॉस ने उन पर गोली चलाई।</div>
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| colspan="2" class="infobox-image" style="border-bottom:#aaa solid 1px" |<mapframe zoom="10" frameless="1" align="center" longitude="-93.267666666667" latitude="44.942222222222" height="200" width="270">{"type":"Feature","geometry":{"coordinates":[-93.26766666666667,44.94222222222222],"type":"Point"},"properties":{"title":"Killing of Renee Good","marker-color":"#5E74F3"}}</mapframe><div class="infobox-caption"></div>
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! class="infobox-label" scope="row" |तिथि
| class="infobox-data" style="text-align: left;" |७ जनवरी, २०२६
|-
! class="infobox-label" scope="row" |समय
| class="infobox-data" style="text-align: left;" |प्रातः ९:३७ (CST; UTC-०६:००)<ref name="ABC Good 2026-01-082">{{Cite news|url=https://abcnews.go.com/US/minneapolis-ice-shooting-minute-minute-timeline-renee-nicole/story?id=129021809|title=Minneapolis ICE Shooting: A Minute-By-Minute Timeline of How Renee Nicole Good Died|last1=Inal|first1=Kerem|date=January 8, 2026|work=[[ABC News (United States)|ABC News]]|archive-url=https://web.archive.org/web/20260109041201/https://abcnews.go.com/US/minneapolis-ice-shooting-minute-minute-timeline-renee-nicole/story?id=129021809|archive-date=January 9, 2026|last2=Kofsky|first2=Jared|last3=Margolin|first3=Josh|url-status=live}}</ref>
|-
! class="infobox-label" scope="row" |स्थान
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! class="infobox-label" scope="row" |'''प्रकार'''
| class="infobox-data" style="text-align: left;" |विधि प्रवर्तन द्वारा गोलीकाण्ड
|-
! class="infobox-label" scope="row" |'''सहभागी'''
| class="infobox-data attendee" style="text-align: left;" |
* ICE अभिकर्ता जोनाथन रॉस
* रने गुड (वाहनचालिका)
|-
! class="infobox-label" scope="row" |'''मृत्यु'''
| class="infobox-data" style="text-align: left;" |रने गुड
|}
[[चित्र:Jonathan_Ross_in_vehicle_reflection_enhanced.jpg|अंगूठाकार|गुड की एस.यू.वी. के प्रतिबिम्ब में रॉस]]
[[चित्र:ICE_agent's_cellphone_video_of_the_killing_of_Renee_Good.webm|अंगूठाकार|267x267पिक्सेल|गुड पर गोली चलाने वाले अभिकर्ता द्वारा लिया गया एक चलचित्र <ref>{{Cite news|url=https://www.nytimes.com/2026/01/08/us/politics/trump-minnesota-ice-shooting-video.html|title=We Pressed Trump on His Conclusion About the ICE Shooting. Here's What He Said.|last=Kanno-Youngs|first=Zolan|work=[[The New York Times]]|access-date=January 8, 2026|archive-url=https://archive.today/20260108172918/https://www.nytimes.com/2026/01/08/us/politics/trump-minnesota-ice-shooting-video.html|archive-date=January 8, 2026}}</ref>]]
७ जनवरी, २०२६ को, '''रने निकोल मैक्लिन गुड''' (Renée Nicole Macklin Good), आयु ३७ वर्ष, जो [[संयुक्त राज्य की नागरिकता|संयुक्त राज्य की नागरिक]] थीं, का [[मिनियापोलिस]], [[मिनेसोटा]] में {{अंतरभाषा कड़ी|संयुक्त राज्य प्रव्रजन तथा सीमा शुल्क प्रवर्तन|en|United States Immigration and Customs Enforcement}} (ICE) के अभिकर्ता जोनाथन रॉस द्वारा घातक रूप से गोली मारकर वध कर दिया गया।
गुड अपनी गाड़ी में थीं, जो मार्ग पर आड़ी खड़ी थी, तभी अभिकर्ताओं ने समीप आकर वार्ता की। लगभग एक मिनट तक संवाद के पश्चात् गुड ने गाड़ी आगे बढ़ाना आरम्भ किया, तभी एक ICE अभिकर्ता ने तीन गोलियाँ चलाईं, जिससे उनकी मृत्यु हो गई। संघीय अधिकारियों तथा राष्ट्रपति [[डॉनल्ड ट्रम्प|डोनाल्ड ट्रम्प]] ने इस गोलीकाण्ड का समर्थन कि\या, यह कहते हुए कि अभिकर्ता ने आत्मरक्षा में कार्य किया और असत्य रूप से दावा किया कि गुड ने "उसे गाड़ी से कुचल दिया।"<ref>{{cite news|url=https://www.nytimes.com/2026/01/08/us/politics/trump-minnesota-ice-shooting-video.html|title=We Pressed Trump on His Conclusion About the ICE Shooting. Here's What He Said.|last1=Kanno-Youngs|first1=Zolan|work=[[The New York Times]]|access-date=January 8, 2026|archive-url=https://archive.today/20260108172918/https://www.nytimes.com/2026/01/08/us/politics/trump-minnesota-ice-shooting-video.html|archive-date=January 8, 2026|url-status=live}}</ref>
इस वृत्तान्त का प्रतिवाद प्रत्यक्षदर्शियों, पत्रकारों, स्थानीय जनप्रतिनिधियों तथा [[डेमोक्रैटिक पार्टी (संयुक्त राज्य)|डेमोक्रेटिक दल]] के विधायकों द्वारा किया गया है, जिनमें से कुछ ने आपराधिक अन्वेषण की माँग की है।<ref name="startribune_6015598292">{{Cite news|url=https://www.startribune.com/mayor-jacob-freys-remarks-after-ice-agents-fatally-shoots-woman-in-minneapolis/601559829|title=Mayor Jacob Frey's Remarks After ICE Agent Fatally Shot Woman in Minneapolis|last=Barnett|first=Sofia|date=January 6, 2026|work=[[The Minnesota Star Tribune]]|archive-url=https://archive.today/20260108230603/https://www.startribune.com/mayor-jacob-freys-remarks-after-ice-agents-fatally-shoots-woman-in-minneapolis/601559829|archive-date=January 8, 2026}}</ref> मिनियापोलिस के महापौर {{अंतरभाषा कड़ी|जैकब फ़्रे|en|Jacob Frey}} तथा मिनेसोटा के राज्यपाल [[टिम वाल्ज़]] ने संघीय शासन से नगर में उनकी उपस्थिति समाप्त करने का आह्वान किया।<ref name="MinnPost2">{{Cite news|url=https://www.minnpost.com/metro/2026/01/minneapolis-vigil-draws-thousands-as-city-reels-following-ice-shooting/|title=Minneapolis Vigil Draws Thousands as City Reels Following ICE Shooting|last=Mitchell|first=Trevor|date=January 7, 2026|work=[[MinnPost]]|access-date=January 8, 2026|archive-url=https://web.archive.org/web/20260108044045/https://www.minnpost.com/metro/2026/01/minneapolis-vigil-draws-thousands-as-city-reels-following-ice-shooting/|archive-date=January 8, 2026|language=en-US|url-status=live}}</ref> हज़ारों लोग मिनियापोलिस में प्रदर्शन कर चुके हैं, और अन्य नगरों, जैसे शिकागो, न्यूयॉर्क नगर तथा वॉशिंगटन में भी जनसमूह ने विरोध किया है।<ref name="mpr2">{{cite news|url=https://www.mprnews.org/story/2026/01/07/shooting-south-minneapolis-ice-agents-federal-operation|title=Live Updates: Frey, Walz Dispute That ICE Killed Woman in Self-Defense|date=January 7, 2026|work=[[Minnesota Public Radio]]|access-date=January 7, 2026|archive-url=https://archive.today/20260108043705/https://www.mprnews.org/story/2026/01/07/shooting-south-minneapolis-ice-agents-federal-operation|archive-date=January 8, 2026|url-status=live}}</ref>
== पृष्ठभूमि ==
६ जनवरी को, {{अंतरभाषा कड़ी|संयुक्त राज्य गृह सुरक्षा विभाग|lt=गृह सुरक्षा विभाग|en|United States Immigration and Customs Enforcement}} (DHS) ने घोषणा की कि उसने अब तक का सबसे बड़ा प्रव्रजन प्रवर्तन अभियान आरम्भ किया है, जिसके अंतर्गत २,००० अभिकर्ताओं को मिनियापोलिस–सेंट पॉल महानगरीय क्षेत्र में भेजा गया। इस अभियान में गृह सुरक्षा अन्वेषण अधिकारियों को भी सम्मिलित किया गया, जो कथित धोखाधड़ी पर केन्द्रित थे। सेंट पॉल नगर परिषद् की सदस्य मॉली कोलमैन ने प्रथम दिवस की कार्यवाही को "ऐसा दिन जैसा हमने कभी अनुभव नहीं किया" कहा।<ref>{{Cite news|url=https://www.nytimes.com/2026/01/08/us/politics/trump-minnesota-ice-shooting-video.html|title=We Pressed Trump on His Conclusion About the ICE Shooting. Here's What He Said.|last=Kanno-Youngs|first=Zolan|work=[[The New York Times]]|access-date=January 8, 2026|archive-url=https://archive.today/20260108172918/https://www.nytimes.com/2026/01/08/us/politics/trump-minnesota-ice-shooting-video.html|archive-date=January 8, 2026}}</ref><ref name="Luscombe-Leingang-20262">{{Cite news|url=https://www.theguardian.com/us-news/2026/jan/07/minneapolis-shooting-immigration-crackdown|title=Woman in Minnesota Fatally Shot by ICE Agent During Raid, Video Shows|last1=Luscombe|first1=Richard|date=January 7, 2026|work=[[The Guardian]]|access-date=January 7, 2026|archive-url=https://web.archive.org/web/20260107191824/https://www.theguardian.com/us-news/2026/jan/07/minneapolis-shooting-immigration-crackdown|archive-date=January 7, 2026|last2=Leingang|first2=Rachel|language=en-GB|issn=0261-3077|last3=Betts|first3=Anna|url-status=live}}</ref>
एक प्रत्यक्षदर्शी ने गोलीकाण्ड के विषय में कहा, "हमारे पड़ोस के लोग छह सप्ताह से ICE द्वारा आतंकित किए जा रहे हैं।"<ref name="cpr_20260107_fatal2">{{Cite web|url=https://www.cpr.org/2026/01/07/fatal-minneapolis-ice-shooting-colorado-woman/|title=Woman Killed by ICE in Minneapolis Originally from Colorado|date=January 7, 2026|website=Colorado Public Radio|archive-url=https://web.archive.org/web/20260108103457/https://www.cpr.org/2026/01/07/fatal-minneapolis-ice-shooting-colorado-woman/|archive-date=January 8, 2026|url-status=live}}</ref> गुड की हत्या, सितम्बर २०२५ से अब तक ICE अभिकर्ताओं द्वारा लोगों पर गोली चलाने की नवमी घटना थी।<ref name="Lum-20262">{{Cite news|url=https://www.nytimes.com/live/2026/01/07/us/minnesota-shooting-ice?smid=url-share#2c4edcfa-3686-5fd3-a2e4-01adf98f84c4|title=Videos Show Federal Agent Shooting Motorist in Minneapolis|last=Lum|first=Devon|date=January 7, 2026|work=[[The New York Times]]|access-date=January 7, 2026|archive-url=https://archive.today/20260108010838/https://www.nytimes.com/live/2026/01/07/us/minnesota-shooting-ice%232c4edcfa-3686-5fd3-a2e4-01adf98f84c4|archive-date=January 8, 2026|url-status=live}}</ref> संघीय निर्वासन अभियानों के दौरान अन्य चार व्यक्तियों की भी मृत्यु हो चुकी है।<ref>{{Cite news|url=https://www.nytimes.com/2026/01/08/us/politics/trump-minnesota-ice-shooting-video.html|title=We Pressed Trump on His Conclusion About the ICE Shooting. Here's What He Said.|last=Kanno-Youngs|first=Zolan|work=[[The New York Times]]|access-date=January 8, 2026|archive-url=https://archive.today/20260108172918/https://www.nytimes.com/2026/01/08/us/politics/trump-minnesota-ice-shooting-video.html|archive-date=January 8, 2026}}</ref>
=== रने गुड ===
रने निकोल मैक्लिन गुड, आयु ३७ वर्ष, संयुक्त राज्य की नागरिक थीं। वह एक लेखिका तथा कवयित्री थीं,<ref name="Walsh-Day-20262">{{Cite news|url=https://www.startribune.com/she-was-an-amazing-human-being-mother-identifies-woman-shot-killed-by-ice-agent/601559922|title='She Was an Amazing Human Being': Mother Identifies Woman Shot, Killed by ICE Agent|last1=Walsh|first1=Paul|date=January 7, 2026|work=[[Minnesota Star Tribune]]|access-date=January 7, 2026|archive-url=https://archive.today/20260108042415/https://www.startribune.com/she-was-an-amazing-human-being-mother-identifies-woman-shot-killed-by-ice-agent/601559922|archive-date=January 8, 2026|last2=Day|first2=Jeff|url-status=live}}</ref><ref name="Cho-20262">{{Cite news|url=https://www.washingtonpost.com/immigration/2026/01/08/renee-good-ice-who-is/|title=Woman Killed by ICE in Minneapolis Was a Mother of 3 and a Poet|last1=Cho|first1=Kelly Kasulis|date=January 8, 2026|newspaper=[[The Washington Post]]|access-date=January 8, 2026|archive-url=https://archive.today/20260108065142/https://www.washingtonpost.com/immigration/2026/01/08/renee-good-ice-who-is/|archive-date=January 8, 2026|last2=Gowen|first2=Annie|language=en-US|issn=0190-8286|url-status=live}}</ref> जो मिनियापोलिस में अपनी पत्नी और छह वर्षीय सन्तान के साथ निवास करती थीं।<ref name="CBSNews-20262">{{Cite news|url=https://www.cbsnews.com/minnesota/live-updates/minneapolis-federal-agents-protesters-clash-portland-avenue/|title=ICE Officer Fatally Shoots Woman in Minneapolis; Gov. Walz Demands Investigation|last=Swanson|first=Stephen|date=January 7, 2026|work=[[CBS News]]|access-date=January 7, 2026|archive-url=https://archive.today/20260107172159/https://www.cbsnews.com/minnesota/live-updates/minneapolis-federal-agents-protesters-clash-portland-avenue/|archive-date=January 7, 2026|url-status=live}}</ref><ref name="apnews_8226702">{{Cite news|url=https://apnews.com/article/ice-shooting-minneapolis-minnesota-9aa822670b705c89906f2c699f1d16c5|title=Family and Neighbors Mourn Woman Who Was Shot by ICE Agent and Made Minneapolis Home|last1=Biesecker|first1=Michael|date=January 9, 2026|work=[[AP News]]|access-date=January 9, 2026|archive-url=https://web.archive.org/web/20260109012251/https://apnews.com/article/ice-shooting-minneapolis-minnesota-9aa822670b705c89906f2c699f1d16c5|archive-date=January 9, 2026|last2=Mustian|first2=Jim|language=en|last3=Dell'orto|first3=Giovanna|url-status=live}}</ref><ref name="Walsh-Day-20263">{{Cite news|url=https://www.startribune.com/she-was-an-amazing-human-being-mother-identifies-woman-shot-killed-by-ice-agent/601559922|title='She Was an Amazing Human Being': Mother Identifies Woman Shot, Killed by ICE Agent|last1=Walsh|first1=Paul|date=January 7, 2026|work=[[Minnesota Star Tribune]]|access-date=January 7, 2026|archive-url=https://archive.today/20260108042415/https://www.startribune.com/she-was-an-amazing-human-being-mother-identifies-woman-shot-killed-by-ice-agent/601559922|archive-date=January 8, 2026|last2=Day|first2=Jeff|url-status=live}}</ref><ref name="kansascity_3142527772">{{cite web|url=https://www.kansascity.com/news/local/article314252777.html|title=ICE Killing of Renee Good Leaves Son Orphaned and Former KC Neighbors Reeling|last1=Thomas|first1=Judy L.|last2=Pilling|first2=Nathan|website=The Kansas City Star|archive-url=https://web.archive.org/web/20260109171039/https://www.kansascity.com/news/local/article314252777.html|archive-date=January 9, 2026|access-date=January 9, 2026|last3=Green|first3=PJ|last4=Adler|first4=Eric}}</ref> उनका मूल स्थान कोलोराडो स्प्रिंग्स, कोलोराडो था।<ref name="wertheimer2">{{Cite news|url=https://www.bbc.com/news/articles/c1jepdjy256o|title=Who Was Renee Nicole Good, The Woman Killed by ICE?|last=Wertheimer|first=Tiffany|date=January 8, 2026|work=[[BBC News]]|access-date=January 8, 2026|archive-url=https://web.archive.org/web/20260109225656/https://www.bbc.com/news/articles/c1jepdjy256o|archive-date=January 9, 2026}}</ref> उन्होंने ओल्ड डोमिनियन विश्वविद्यालय से अंग्रेज़ी विषय में स्नातक उपाधि प्राप्त की।<ref name="WSJ-What We Know2">{{cite web|url=https://www.wsj.com/us-news/what-we-know-so-far-about-renee-nicole-good-bb3d847c|title=What We Know So Far About Renee Nicole Good|last1=Maher|first1=Kris|last2=Calfas|first2=Jennifer|date=January 9, 2026|website=[[The Wall Street Journal]]|last3=Albert|first3=Victoria}}</ref> एक पड़ोसी के अनुसार, गुड पूर्व में कान्सस सिटी, मिसौरी में रहती थीं, किन्तु [[संयुक्त राज्य राष्ट्रपति चुनाव, 2024|२०२४ के राष्ट्रपति चुनाव]] में ट्रम्प की विजय के पश्चात् अपने परिवार सहित कनाडा चली गईं। तत्पश्चात् वह मिनियापोलिस में आकर बस गईं।<ref name="kmbc_699406242">{{Cite web|url=https://www.kmbc.com/article/woman-killed-minneapolis-ice-shooting-kansas-city-ties/69940624|title=Kansas City Neighbors React After Former Waldo Resident Killed in Minneapolis ICE Shooting|last=Johnson|first=Brian|date=January 8, 2026|website=KMBC|language=en|archive-url=https://web.archive.org/web/20260108101619/https://www.kmbc.com/article/woman-killed-minneapolis-ice-shooting-kansas-city-ties/69940624|archive-date=January 8, 2026|access-date=January 8, 2026|url-status=live}}</ref>
गुड का विवाह पूर्व में दो बार हुआ था। उनका प्रथम विवाह २००९ से २०१६ तक रहा, जिससे उनके दो संतान हुए। द्वितीय पति से उनका एक संतान हुआ। उनके द्वितीय पति का २०२३ में ३६ वर्ष की आयु में निधन हो गया।<ref name="WSJ-What We Know3">{{cite web|url=https://www.wsj.com/us-news/what-we-know-so-far-about-renee-nicole-good-bb3d847c|title=What We Know So Far About Renee Nicole Good|last1=Maher|first1=Kris|last2=Calfas|first2=Jennifer|date=January 9, 2026|website=[[The Wall Street Journal]]|last3=Albert|first3=Victoria}}</ref><ref name="Biesecker22">{{Cite news|url=https://apnews.com/article/ice-shooting-minneapolis-minnesota-9aa822670b705c89906f2c699f1d16c5|title=Woman Killed by ICE Agent in Minneapolis Was a Mother of 3, Poet and New to the City|last1=Biesecker|first1=Michael|date=January 8, 2026|work=[[AP News]]|access-date=January 8, 2026|archive-url=https://web.archive.org/web/20260109163617/https://apnews.com/article/ice-shooting-minneapolis-minnesota-9aa822670b705c89906f2c699f1d16c5|archive-date=January 9, 2026|last2=Mustian|first2=Jim|language=en}}</ref><ref name="CNN Good 2026-01-082">{{Cite web|url=https://www.cnn.com/2026/01/08/us/renee-nicole-good-minneapolis-ice-shooting-hnk|title=Mother of 3 Who Loved to Sing and Write Poetry Shot and Killed by ICE in Minneapolis|last1=Musa|first1=Amanda|date=January 8, 2026|work=[[CNN]]|archive-url=https://web.archive.org/web/20260108144153/https://www.cnn.com/2026/01/08/us/renee-nicole-good-minneapolis-ice-shooting-hnk|archive-date=January 8, 2026|url-status=live}}</ref>
=== जोनाथन रॉस ===
गोलीकाण्ड के अगले दिन मिनेसोटा स्टार ट्रिब्यून ने सम्मिलित ICE अभिकर्ता की पहचान जोनाथन रॉस के रूप में की।<ref name="Sawyer2">{{Cite news|url=https://www.startribune.com/ice-agent-who-fatally-shot-woman-in-minneapolis-is-identified/601560214|title=Star Tribune Identifies ICE Agent Who Fatally Shot Woman in Minneapolis|last1=Sawyer|first1=Liz|date=January 8, 2026|work=[[Minnesota Star Tribune]]|access-date=January 8, 2026|archive-url=https://web.archive.org/web/20260108204249/https://www.startribune.com/ice-agent-who-fatally-shot-woman-in-minneapolis-is-identified/601560214|archive-date=January 8, 2026|last2=Mannix|first2=Andy|last3=Nelson|first3=Sara}}</ref> संघीय अधिकारियों ने उनका नाम सार्वजनिक नहीं किया था, किन्तु न्यायालय अभिलेखों के आधार पर स्टार ट्रिब्यून ने उनका नाम ज्ञात किया।<ref name="Ross CNN 2026-01-092">{{cite news|url=https://www.cnn.com/2026/01/08/us/ice-agent-minneapolis-shooting-car-dragged-invs|title=ICE Officer Who Shot Woman in Minneapolis Was Dragged and Injured in Traffic Stop Last Year|last1=Chapman|first1=Isabelle|date=January 9, 2026|work=[[CNN]]|access-date=January 9, 2026|archive-url=https://archive.today/20260109183442/https://www.cnn.com/2026/01/08/us/ice-agent-minneapolis-shooting-car-dragged-invs|archive-date=January 9, 2026|last2=Lybrand|first2=Holmes|language=en|last3=Gordon|first3=Allison|last4=Winter|first4=Jeff|last5=Tolan|first5=Casey|url-status=live}}</ref><ref name="Ross WAPO 2026-01-092">{{cite news|url=https://www.washingtonpost.com/immigration/2026/01/08/ice-jonathan-ross-dragged/|title=ICE Officer in Minneapolis Shooting Was Dragged by a Driver Months Earlier|last1=Sacchetti|first1=Maria|date=January 9, 2026|newspaper=[[The Washington Post]]|access-date=January 9, 2026|archive-url=https://archive.today/20260109060517/https://www.washingtonpost.com/immigration/2026/01/08/ice-jonathan-ross-dragged/|archive-date=January 9, 2026|url-status=live}}</ref>
घटना के तुरन्त पश्चात् आयोजित पत्रकार सम्मेलन में गृह सुरक्षा सचिव क्रिस्टी नोएम तथा उपराष्ट्रपति [[जेडी वेंस|जे.डी. वैन्स]] ने उल्लेख किया कि गोलीकाण्ड में सम्मिलित अभिकर्ता छः मास पूर्व एक यातायात जाँच में घायल हुआ था। उनके वक्तव्यों से स्टार ट्रिब्यून ने उस प्रकरण का पता लगाया।<ref name="Sawyer3">{{Cite news|url=https://www.startribune.com/ice-agent-who-fatally-shot-woman-in-minneapolis-is-identified/601560214|title=Star Tribune Identifies ICE Agent Who Fatally Shot Woman in Minneapolis|last1=Sawyer|first1=Liz|date=January 8, 2026|work=[[Minnesota Star Tribune]]|access-date=January 8, 2026|archive-url=https://web.archive.org/web/20260108204249/https://www.startribune.com/ice-agent-who-fatally-shot-woman-in-minneapolis-is-identified/601560214|archive-date=January 8, 2026|last2=Mannix|first2=Andy|last3=Nelson|first3=Sara}}</ref><ref name="Vance statement2">{{cite news|url=https://apnews.com/live/minneapolis-ice-shooting-updates-1-8-2026#0000019b-9ef7-deb2-a9bf-feffd1bd0000|title=Vance Says Good's Death Was 'A Tragedy of Her Own Making'|last1=Cooper|first1=Jonathan|date=January 8, 2026|work=[[Associated Press]]|access-date=January 8, 2026|archive-url=https://web.archive.org/web/20260109091737/https://apnews.com/live/minneapolis-ice-shooting-updates-1-8-2026#0000019b-9ef7-deb2-a9bf-feffd1bd0000|archive-date=January 9, 2026|url-status=live}}</ref><ref name="Advocate2">{{Cite magazine|last=Adamczeski|first=Ryan|date=January 9, 2026|title=Who Is Jonathan Ross? The ICE Agent Who Killed Renee Good|url=https://www.advocate.com/news/who-is-jonathan-ross-ice|url-status=live|archive-url=https://archive.today/20260110202137/https://www.advocate.com/news/who-is-jonathan-ross-ice%23rebelltitem1|archive-date=January 10, 2026|access-date=January 10, 2026|magazine=[[The Advocate (magazine)|The Advocate]]|language=en}}</ref> यह घटना १७ जून, २०२५ को हुई थी, जब रॉस ने एक वाहन की खिड़की तोड़कर भीतर से द्वार खोलने का प्रयास किया और वाहन ने उन्हें ५० गज (४५ मीटर) तक घसीटा, जिससे वह घायल हो गए।<ref name="Sawyer4">{{Cite news|url=https://www.startribune.com/ice-agent-who-fatally-shot-woman-in-minneapolis-is-identified/601560214|title=Star Tribune Identifies ICE Agent Who Fatally Shot Woman in Minneapolis|last1=Sawyer|first1=Liz|date=January 8, 2026|work=[[Minnesota Star Tribune]]|access-date=January 8, 2026|archive-url=https://web.archive.org/web/20260108204249/https://www.startribune.com/ice-agent-who-fatally-shot-woman-in-minneapolis-is-identified/601560214|archive-date=January 8, 2026|last2=Mannix|first2=Andy|last3=Nelson|first3=Sara}}</ref><ref name="thehill_56796232">{{cite news|url=https://thehill.com/homenews/state-watch/5679623-ice-agent-involved-minneapolis-shooting/|title=ICE Officer in Minneapolis Shooting Was Seriously Injured in 2025 Arrest Attempt|last1=Fields|first1=Ashleigh|work=[[The Hill (newspaper)|The Hill]]|access-date=January 9, 2026}}</ref><ref name="Ross AP 2026-01-092">{{Cite news|url=https://apnews.com/article/immigration-minnesota-jonathan-ross-b9ce88da676d74ec6a1ab36aa55fbda1?utm_source=onesignal&utm_medium=push&utm_campaign=2026-01-09-Minneapolis+shooting|title=ICE Officer Who Shot Renee Good in Minneapolis Has Served Decades in Military and Law Enforcement|last=Foley|first=Ryan J.|date=January 10, 2026|work=[[Associated Press]]|access-date=January 10, 2026}}</ref>
रॉस ने २००१ में रिचवुड्स उच्च विद्यालय से स्नातक किया।<ref name="Richwoods2">{{Cite news|url=https://www.wcbu.org/local-news/2026-01-09/minneapolis-ice-shooter-lived-in-peoria-graduated-from-richwoods|title=Minneapolis ICE shooter lived in Peoria, graduated from Richwoods|last1=Warnecke|first1=Lauren|work=NPR|access-date=January 11, 2026|last2=Denham|first2=Ryan|last3=Stock|first3=Eric}}</ref> उन्होंने २००७ से २०१५ तक संयुक्त राज्य सीमा गश्ती में कार्य किया। न्यायालय अभिलेखों में उनका ICE में प्रवेश वर्ष २०१६ अंकित है।<ref name="Ross AP 2026-01-093">{{Cite news|url=https://apnews.com/article/immigration-minnesota-jonathan-ross-b9ce88da676d74ec6a1ab36aa55fbda1?utm_source=onesignal&utm_medium=push&utm_campaign=2026-01-09-Minneapolis+shooting|title=ICE Officer Who Shot Renee Good in Minneapolis Has Served Decades in Military and Law Enforcement|last=Foley|first=Ryan J.|date=January 10, 2026|work=[[Associated Press]]|access-date=January 10, 2026}}</ref> गोलीकाण्ड के समय वह ICE के प्रवर्तन तथा निष्कासन परिचालन (ERO) विभाग में कार्यरत थे और पूर्व में [[इराक युद्ध|इराक़ युद्ध]] में भी तैनात रह चुके थे।<ref name="Ross AP 2026-01-094">{{Cite news|url=https://apnews.com/article/immigration-minnesota-jonathan-ross-b9ce88da676d74ec6a1ab36aa55fbda1?utm_source=onesignal&utm_medium=push&utm_campaign=2026-01-09-Minneapolis+shooting|title=ICE Officer Who Shot Renee Good in Minneapolis Has Served Decades in Military and Law Enforcement|last=Foley|first=Ryan J.|date=January 10, 2026|work=[[Associated Press]]|access-date=January 10, 2026}}</ref> दिसम्बर में रॉस ने साक्ष्य दिया कि वह "अस्त्र-शिक्षक, सक्रिय गोलीकाण्ड प्रशिक्षक, क्षेत्रीय गुप्तचर अधिकारी तथा सेंट पॉल [[स्वाट|विशेष प्रतिक्रिया दल]] (SWAT टीम) के सदस्य" हैं।<ref>{{Cite news|url=https://www.nytimes.com/2026/01/08/us/politics/trump-minnesota-ice-shooting-video.html|title=We Pressed Trump on His Conclusion About the ICE Shooting. Here's What He Said.|last=Kanno-Youngs|first=Zolan|work=[[The New York Times]]|access-date=January 8, 2026|archive-url=https://archive.today/20260108172918/https://www.nytimes.com/2026/01/08/us/politics/trump-minnesota-ice-shooting-video.html|archive-date=January 8, 2026}}</ref><ref name="independent_28975432">{{Cite news|url=https://www.independent.co.uk/news/world/americas/us-politics/ice-agent-father-minneapolis-shooting-b2897543.html|title=Father of ICE Agent Who Shot Renee Good Breaks Silence over Killing|last=Rascius|first=Brendan|date=January 9, 2026|work=[[The Independent]]|access-date=January 10, 2026|language=en}}</ref><ref>{{cite news|url=https://www.nytimes.com/2026/01/08/us/politics/trump-minnesota-ice-shooting-video.html|title=We Pressed Trump on His Conclusion About the ICE Shooting. Here's What He Said.|last1=Kanno-Youngs|first1=Zolan|work=[[The New York Times]]|access-date=January 8, 2026|archive-url=https://archive.today/20260108172918/https://www.nytimes.com/2026/01/08/us/politics/trump-minnesota-ice-shooting-video.html|archive-date=January 8, 2026|url-status=live}}</ref>
{{बाहरी मीडिया|topic=गोलीकाण्ड के चलचित्र युक्त वृत्तान्त
<!-- do not editorialize the title of any external content, use the title given by the media organization and attribute the publisher -->|video1={{YouTube|K9CJY5p0xz4|ICE officer fatally shoots driver in Minneapolis}} from ''[[Minnesota Reformer]]''|video2={{YouTube|vjJqo0qJEJ0|ICE agents prevent doctor from checking on shooting victim}} from ''[[TRT World]]''|video3=[https://www.nytimes.com/video/us/100000010631041/minneapolis-ice-shooting-video.html Videos Contradict Trump Administration Account of ICE Shooting in Minneapolis] from ''[[The New York Times]]''}}
[[चित्र:Jan_8_2026_NYC_anti-ICE_protest_1.webm|अंगूठाकार|267x267पिक्सेल|गुड की हत्या के अगले दिन मैनहैटन में ICE-विरोधी प्रदर्शन]]
== सन्दर्भ ==
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== बाह्य कड़ियाँ ==
* {{Commons category inline|Killing of Renee Good|रेनी गुड की हत्या}}
[[श्रेणी:विकिडेटा पर उपलब्ध निर्देशांक]]
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फराइज़ी आंदोलन 1842
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wikitext
text/x-wiki
{{ज्ञानसन्दूक फ़िल्म
| name =
| image =
| caption =
| director = डायल रहमान
| writer =
| screenplay = दयाल रहमान<br>छतकु अहमद
| producer = बासेट शिमोन
| starring = अमीन खान<br>नौशीन नेहरिन मौ
| cinematography = दयाल रहमान
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| music = {{Plainlist|
* '''गीत'''
* सुजान आरिफ
* शूब रिपन
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* मुखलेसुर रहमान
}}
| studio = वाइल्ड ड्रीम मल्टीमीडिया प्रोडक्शन
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| country = [[बांग्लादेश]]
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}}'''''फराईजी आंदोलन 1842''''' एक [[बांग्लादेश का सिनेमा|बांग्लादेशी]] [[जीवनचरित|जीवनीपरक]] [[चलचित्र|फिल्म]] है। फिल्म का निर्देशन दयाल रहमान ने किया है और इसका निर्माण वाइल्ड ड्रीम मल्टीमीडिया प्रोडक्शन के बैनर तले बेस्ड शिमोन ने किया है। फिल्म में अमीन खान और नौशीन मुख्य भूमिकाओं में हैं, और इसकी पटकथा निर्देशक दयाल रहमान ने लिखी है। फिल्म फराईजी आंदोलन के नेता दुदू मियां की जीवनी पर आधारित है। फिल्म का मुख्य विषय 1840-42 की अवधि के दौरान दुदू मियां के नेतृत्व में घटी ऐतिहासिक घटनाएं हैं। फिल्म का प्रारंभिक शीर्षक ''दुदू मियां'' था, लेकिन निर्माण कार्य पूरा होने के बाद इसका नाम बदलकर 'फराईजी दल' और बाद में ''फराईजी आंदोलन 1842'' कर दिया गया। <ref name=":1">{{Cite web|url=https://bmdb.co/%e0%a6%90%e0%a6%a4%e0%a6%bf%e0%a6%b9%e0%a6%be%e0%a6%b8%e0%a6%bf%e0%a6%95-%e0%a6%97%e0%a6%b2%e0%a7%8d%e0%a6%aa%e0%a7%87%e0%a6%b0-%e0%a6%a6%e0%a7%82%e0%a6%b0%e0%a7%8d%e0%a6%ac%e0%a6%b2-%e0%a6%89/|title=ঐতিহাসিক গল্পের দুর্বল উপস্থাপনা!|date=2019-12-22|website=বাংলা মুভি ডেটাবেজ|language=bn-BD|access-date=2019-12-23}}</ref> फिल्म 20 दिसंबर 2019 को रिलीज हुई थी। <ref name=":0">{{Cite web|url=https://www.prothomalo.com/entertainment/article/1630024/%E0%A6%AC%E0%A6%9B%E0%A6%B0-%E0%A6%B6%E0%A7%87%E0%A6%B7-%E0%A6%B9%E0%A6%9A%E0%A7%8D%E0%A6%9B%E0%A7%87-%E0%A6%85%E0%A6%A8%E0%A7%81%E0%A6%A6%E0%A6%BE%E0%A6%A8%E0%A7%87%E0%A6%B0-%E0%A6%9B%E0%A6%AC%E0%A6%BF%E0%A6%A4%E0%A7%87|title=বছর শেষ হচ্ছে অনুদানের ছবিতে|website=প্রথম আলো|language=bn|access-date=2019-12-22}}</ref> <ref>{{Cite web|url=https://inews.zoombangla.com/%e0%a7%a8%e0%a7%a6-%e0%a6%a1%e0%a6%bf%e0%a6%b8%e0%a7%87%e0%a6%ae%e0%a7%8d%e0%a6%ac%e0%a6%b0-%e0%a6%aa%e0%a7%8d%e0%a6%b0%e0%a7%87%e0%a6%95%e0%a7%8d%e0%a6%b7%e0%a6%be%e0%a6%97%e0%a7%83%e0%a6%b9%e0%a7%87/|title=২০ ডিসেম্বর প্রেক্ষাগৃহে আসছে ‘ফরায়েজী আন্দোলন ১৮৪২’|last=|first=|date=2019-11-23|website=Zoom Bangla News|language=bn|archive-url=|archive-date=|access-date=2019-12-15}}</ref>
== अभिनय में ==
अमीन खान - दूदू मिया
नौशिन नेहरिन मौ - मैना
अमीर सिराजी - मदन घोष, फरीदपुर क्षेत्र के जमींदार
अहमद शरीफ - मोहन घोष, फरीदपुर क्षेत्र के जमींदार
मामुन मुन्ना - सिकदार, फरीदपुर क्षेत्र का जमींदार
निझुम रूबीना - बाईजी
छटकू अहमद
जमीलुर रहमान शाखा
== निर्माण ==
फिल्म की शूटिंग दिसंबर 2012 में शुरू हुई। <ref name="d">{{Cite web|url=http://archive.prothom-alo.com/detail/date/2012-12-13/news/312973|title=দুদু মিয়া চরিত্রে আমিন খান|date=১৩ ডিসেম্বর ২০১২|website=প্রথম আলো|archive-url=https://web.archive.org/web/20190630161307/http://archive.prothom-alo.com/detail/date/2012-12-13/news/312973|archive-date=২০১৯-০৬-৩০|access-date=৩০ জুন ২০১৯}}</ref> फिल्म की शूटिंग 5 दिसंबर 2015 को समाप्त हुई। <ref>{{Cite web|url=https://inews.zoombangla.com/%e0%a7%a8%e0%a7%a6-%e0%a6%a1%e0%a6%bf%e0%a6%b8%e0%a7%87%e0%a6%ae%e0%a7%8d%e0%a6%ac%e0%a6%b0-%e0%a6%aa%e0%a7%8d%e0%a6%b0%e0%a7%87%e0%a6%95%e0%a7%8d%e0%a6%b7%e0%a6%be%e0%a6%97%e0%a7%83%e0%a6%b9%e0%a7%87/|title=২০ ডিসেম্বর প্রেক্ষাগৃহে আসছে ‘ফরায়েজী আন্দোলন ১৮৪২’|last=|first=|date=2019-11-23|website=Zoom Bangla News|language=bn|archive-url=|archive-date=|access-date=2019-12-15}}</ref> <ref>{{Cite web|url=https://archive1.ittefaq.com.bd/print-edition/entertainment/2016/01/07/93991.html|title=শেষ হলো ‘দুদু মিয়া’|date=৭ জানুয়ারি ২০১৬|archive-url=https://web.archive.org/web/20190630161306/https://archive1.ittefaq.com.bd/print-edition/entertainment/2016/01/07/93991.html|archive-date=৩০ জুন ২০১৯|access-date=৩০ জুন ২০১৯}}</ref> फिल्म की शूटिंग कई कारणों से बाधित हुई। फिल्म बनाने के लिए दुदु मियां के परिवार से अनुमति मिलने में देरी के कारण, फिल्म को बनने में सात साल से अधिक का समय लगा। <ref>{{Cite web|url=https://samakal.com/entertainment/article/19125851/%E0%A6%A1%E0%A6%BF%E0%A6%B8%E0%A7%87%E0%A6%AE%E0%A7%8D%E0%A6%AC%E0%A6%B0-%E0%A6%86%E0%A6%B8%E0%A6%9B%E0%A7%87-%E0%A6%86%E0%A6%AE%E0%A6%BF%E0%A6%A8-%E0%A6%96%E0%A6%BE%E0%A6%A8%E0%A7%87%E0%A6%B0-%E2%80%98%E0%A6%AB%E0%A6%B0%E0%A6%BE%E0%A7%9F%E0%A7%87%E0%A6%9C%E0%A7%80-%E0%A6%86%E0%A6%A8%E0%A7%8D%E0%A6%A6%E0%A7%8B%E0%A6%B2%E2%80%99|title=২০ ডিসেম্বর আসছে আমিন খানের ‘ফরায়েজী আন্দোলন’|last=|first=|date=২০১৯-১২-০৩|website=সমকাল|archive-url=https://web.archive.org/web/20191208052457/https://samakal.com/entertainment/article/19125851/%25E0%25A6%25A1%25E0%25A6%25BF%25E0%25A6%25B8%25E0%25A7%2587%25E0%25A6%25AE%25E0%25A7%258D%25E0%25A6%25AC%25E0%25A6%25B0-%25E0%25A6%2586%25E0%25A6%25B8%25E0%25A6%259B%25E0%25A7%2587-%25E0%25A6%2586%25E0%25A6%25AE%25E0%25A6%25BF%25E0%25A6%25A8-%25E0%25A6%2596%25E0%25A6%25BE%25E0%25A6%25A8%25E0%25A7%2587%25E0%25A6%25B0-%25E2%2580%2598%25E0%25A6%25AB%25E0%25A6%25B0%25E0%25A6%25BE%25E0%25A7%259F%25E0%25A7%2587%25E0%25A6%259C%25E0%25A7%2580-%25E0%25A6%2586%25E0%25A6%25A8%25E0%25A7%258D%25E0%25A6%25A6%25E0%25A7%258B%25E0%25A6%25B2%25E2%2580%2599|archive-date=২০১৯-১২-০৮|access-date=২০১৯-১২-০৮}}</ref> फिल्म को 27 जून 2019 को सेंसर बोर्ड से मंजूरी मिली। <ref name="a">{{Cite web|url=http://www.m.mzamin.com/article.php?mzamin=179179|title=ছাড়পত্র পেল আমিন খানের ‘ফরায়েজী আন্দোলন ১৮৪২’|date=৩০ জুন ২০১৯|website=মানবজমিন|access-date=৩০ জুন ২০১৯}}{{Dead link|date=मई 2026 |bot=InternetArchiveBot }}</ref> <ref name="b">{{Cite web|url=http://www.m.somoynews.tv/pages/details/163125|title=নতুন নামে ছাড়পত্র পেল ‘দুদু মিয়া’|date=৩০ জুন ২০১৯|website=সময় টিভি|archive-url=https://web.archive.org/web/20190630161309/http://www.m.somoynews.tv/pages/details/163125|archive-date=৩০ জুন ২০১৯|access-date=৩০ জুন ২০১৯}}</ref> <ref name="c">{{Cite web|url=https://m.rtvonline.com/entertainment/70452/%E0%A6%9B%E0%A6%BE%E0%A7%9C%E0%A6%AA%E0%A6%A4%E0%A7%8D%E0%A6%B0-%E0%A6%AA%E0%A7%87%E0%A6%B2-%E0%A6%86%E0%A6%AE%E0%A6%BF%E0%A6%A8-%E0%A6%A8%E0%A6%93%E0%A6%B6%E0%A7%80%E0%A6%A8%E0%A7%87%E0%A6%B0-%E0%A6%AB%E0%A6%B0%E0%A6%BE%E0%A7%9F%E0%A7%87%E0%A6%9C%E0%A7%80-%E0%A6%86%E0%A6%A8%E0%A7%8D%E0%A6%A6%E0%A7%8B%E0%A6%B2%E0%A6%A8-%E0%A7%A7%E0%A7%AE%E0%A7%AA%E0%A7%A8|title=ছাড়পত্র পেল আমিন-নওশীনের ‘ফরায়েজী আন্দোলন ১৮৪২’|date=৩০ জুন ২০১৯|website=আরটিভি|archive-url=https://web.archive.org/web/20190630161312/https://m.rtvonline.com/entertainment/70452/%25E0%25A6%259B%25E0%25A6%25BE%25E0%25A7%259C%25E0%25A6%25AA%25E0%25A6%25A4%25E0%25A7%258D%25E0%25A6%25B0-%25E0%25A6%25AA%25E0%25A7%2587%25E0%25A6%25B2-%25E0%25A6%2586%25E0%25A6%25AE%25E0%25A6%25BF%25E0%25A6%25A8-%25E0%25A6%25A8%25E0%25A6%2593%25E0%25A6%25B6%25E0%25A7%2580%25E0%25A6%25A8%25E0%25A7%2587%25E0%25A6%25B0-%25E0%25A6%25AB%25E0%25A6%25B0%25E0%25A6%25BE%25E0%25A7%259F%25E0%25A7%2587%25E0%25A6%259C%25E0%25A7%2580-%25E0%25A6%2586%25E0%25A6%25A8%25E0%25A7%258D%25E0%25A6%25A6%25E0%25A7%258B%25E0%25A6%25B2%25E0%25A6%25A8-%25E0%25A7%25A7%25E0%25A7%25AE%25E0%25A7%25AA%25E0%25A7%25A8|archive-date=৩০ জুন ২০১৯|access-date=৩০ জুন ২০১৯}}</ref>
== संगीत ==
फिल्म में तीन गाने हैं। <ref name=":0"/> ये गाने सुजान आरिफ, राजीव और कोना ने गाए हैं, जिनके बोल गुंजन चौधरी ने लिखे हैं और संगीत शिउब रिपन और सुजान आरिफ ने दिया है। ये गाने 4 अक्टूबर 2016 को जी-सीरीज़ द्वारा यूट्यूब पर रिलीज़ किए गए थे। <ref>{{Cite web|url=https://inews.zoombangla.com/%e0%a7%a8%e0%a7%a6-%e0%a6%a1%e0%a6%bf%e0%a6%b8%e0%a7%87%e0%a6%ae%e0%a7%8d%e0%a6%ac%e0%a6%b0-%e0%a6%aa%e0%a7%8d%e0%a6%b0%e0%a7%87%e0%a6%95%e0%a7%8d%e0%a6%b7%e0%a6%be%e0%a6%97%e0%a7%83%e0%a6%b9%e0%a7%87/|title=২০ ডিসেম্বর প্রেক্ষাগৃহে আসছে ‘ফরায়েজী আন্দোলন ১৮৪২’|last=|first=|date=2019-11-23|website=Zoom Bangla News|language=bn|archive-url=|archive-date=|access-date=2019-12-15}}</ref> <ref>{{Cite web|url=https://inews.zoombangla.com/%e0%a7%a8%e0%a7%a6-%e0%a6%a1%e0%a6%bf%e0%a6%b8%e0%a7%87%e0%a6%ae%e0%a7%8d%e0%a6%ac%e0%a6%b0-%e0%a6%aa%e0%a7%8d%e0%a6%b0%e0%a7%87%e0%a6%95%e0%a7%8d%e0%a6%b7%e0%a6%be%e0%a6%97%e0%a7%83%e0%a6%b9%e0%a7%87/|title=২০ ডিসেম্বর প্রেক্ষাগৃহে আসছে ‘ফরায়েজী আন্দোলন ১৮৪২’|last=|first=|date=2019-11-23|website=Zoom Bangla News|language=bn|archive-url=|archive-date=|access-date=2019-12-15}}</ref> <ref>{{Cite web|url=https://archive1.ittefaq.com.bd/print-edition/entertainment/2016/01/07/93991.html|title=শেষ হলো ‘দুদু মিয়া’|date=৭ জানুয়ারি ২০১৬|archive-url=https://web.archive.org/web/20190630161306/https://archive1.ittefaq.com.bd/print-edition/entertainment/2016/01/07/93991.html|archive-date=৩০ জুন ২০১৯|access-date=৩০ জুন ২০১৯}}</ref> मुखलेसर रहमान ने फिल्म के लिए बैकग्राउंड संगीत भी तैयार किया है।
== अभियान और रिलीज ==
फिल्म मूल रूप से 7 सितंबर 2019 को रिलीज होने वाली थी, <ref name="a"/> <ref name="b"/> <ref name="c"/> लेकिन बाद में इसे 20 दिसंबर को रिलीज करने की घोषणा की गई। <ref name="b" /> नई रिलीज तिथि की घोषणा के साथ, फिल्म का 3 मिनट, 41 सेकंड का ट्रेलर 2 दिसंबर 2019 को जारी किया गया। <ref>{{Cite web|url=https://inews.zoombangla.com/%e0%a7%a8%e0%a7%a6-%e0%a6%a1%e0%a6%bf%e0%a6%b8%e0%a7%87%e0%a6%ae%e0%a7%8d%e0%a6%ac%e0%a6%b0-%e0%a6%aa%e0%a7%8d%e0%a6%b0%e0%a7%87%e0%a6%95%e0%a7%8d%e0%a6%b7%e0%a6%be%e0%a6%97%e0%a7%83%e0%a6%b9%e0%a7%87/|title=২০ ডিসেম্বর প্রেক্ষাগৃহে আসছে ‘ফরায়েজী আন্দোলন ১৮৪২’|last=|first=|date=2019-11-23|website=Zoom Bangla News|language=bn|archive-url=|archive-date=|access-date=2019-12-15}}</ref> फिल्म बांग्लादेशी सिनेमाघरों में 20 दिसंबर 2019 को रिलीज हुई। <ref name=":0"/>
== प्रतिक्रिया ==
''बांग्ला मूवी डेटाबेस में'' फहीम ने फिल्म की कहानी और पटकथा में दयाल रहमान और अमीन खान के दमदार अभिनय की प्रशंसा की, जबकि छायांकन और संपादन की आलोचना की। रेटिंग प्रदान की गई। <ref name=":1"/>
== संदर्भ ==
{{Reflist|40em}}
<references responsive="" />
== बाहरी संबंध ==
* {{YouTube|i1zs7Cz6RTo}}
[[श्रेणी:2019 की फ़िल्में]]
[[श्रेणी:बांग्ला फ़िल्म]]
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फ़िलिस्तीन राज्य
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{{ज्ञानसन्दूक देश
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|item1_style=white-space:nowrap;margin-bottom:2px;|[[यरुशलम]]{{ref label|capital|ii|}}<ref name=Bissiop433>{{cite book |title=The World: A Third World Guide 1995–96 |url=https://archive.org/details/worldthirdworldg0000unse |editor=Bissio, Robert Remo |location=[[Montevideo]] |publisher=[[ITeM|Instituto del Tercer Mundo]] |year=1995 |page=[https://archive.org/details/worldthirdworldg0000unse/page/443 443] |isbn=978-0-85598-291-1}}</ref><ref name=Lapidoth>{{cite web |first1=Ruth |last1=Lapidoth |author1-link=Ruth Lapidoth |title=Jerusalem: Some Legal Issues |date=2011 |access-date=5 June 2014 |website=The Jerusalem Institute for Israel Studies |url=http://www.jiis.org/.upload/lapidoth-jerusalem.pdf |archive-url=https://web.archive.org/web/20140605013337/http://www.jiis.org/.upload/lapidoth-jerusalem.pdf |archive-date=5 June 2014 |url-status=dead |page=26 |quote=The attitude of the Palestinians was expressed inter alia in 1988 and 2002. When the Palestine National Council proclaimed in November 1988 the establishment of a Palestinian State, it asserted that Jerusalem was its capital. In October 2002, the Palestinian Legislative Council adopted the Law on the Capital, which stipulates that Jerusalem is the capital of the Palestinian State, the main seat of its three branches of government. The State of Palestine is the sovereign of Jerusalem and of its holy places. Any statute or agreement that diminishes the rights of the Palestinian State in Jerusalem is invalid. This statute can be amended only with the consent of two-thirds of the members of the Legislative Council. The 2003 Basic Law also asserts that Jerusalem is the capital of the State of Palestine. }} Reprinted from: [[Rüdiger Wolfrum|Wolfrum, Rüdiger]] (ed.) (online 2008, print 2011). ''[[Max Planck Encyclopedia of Public International Law|The Max Planck Encyclopedia of Public International Law]]''. Oxford University Press.</ref>
|[[रामल्ला]]<sup>c</sup>
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| HDI_ref = <ref name="UNHDR">{{cite book|title=Human Development Report 2020 The Next Frontier: Human Development and the Anthropocene|date=15 December 2020|publisher=United Nations Development Programme|isbn=978-92-1-126442-5|pages=343–346|url=http://hdr.undp.org/sites/default/files/hdr2020.pdf|access-date=16 December 2020}}</ref>
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| footnote_b = The territory claimed is under [[Israeli-occupied territories|Israeli occupation]].
| footnote_c = Ramallah is the administrative center of the Palestinian National Authority.<ref name="Eqeiq 2019 pp. 26–42">{{cite journal | last=Eqeiq | first=Amal | title=From Haifa to Ramallah (and Back): New/Old Palestinian Literary Topography | journal=Journal of Palestine Studies | volume=48 | issue=3 | date=1 May 2019 | issn=0377-919X | doi=10.1525/jps.2019.48.3.26 | pages=26–42 | url=/jps/article/48/3/26/55117/From-Haifa-to-Ramallah-and-Back-New-Old | access-date=22 November 2020}}</ref>
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| GDP_nominal_year = 2018
| GDP_nominal_rank = –
| GDP_nominal_per_capita_rank = –
}}
'''फ़िलिस्तीन''' ({{Langx|ar|فلسطين}}) आंशिक रूप से मान्यता प्राप्त राष्ट्र है। फ़िलिस्तीन लिबरेशन संगठन ने १५ नवम्बर १९८८ को अल्जीरिया के नैशनल असेम्बली की परिषद में फ़िलिस्तीनी स्वतन्त्रता की घोषणा की थी। यह अरब राज्यों के लीग का सदस्य है और कुछ राष्ट्रो द्वारा मान्यता प्राप्त है। फ़िलिस्तीन [[वेस्ट बैंक]] और [[गाजा पट्टी]] पर अपना दावा करता है<ref name=only1967>{{cite web |title=Ban sends Palestinian application for UN membership to Security Council |date=23 September 2011 |access-date=11 September 2015 |website=United Nations News Centre |url=https://www.un.org/apps/news/story.asp?NewsID=39722#.VfMZaZeM-ao |archive-url=https://web.archive.org/web/20151010151934/http://www.un.org/apps/news/story.asp?NewsID=39722#.VfMZaZeM-ao |archive-date=10 October 2015 |url-status=live }}</ref> आंशिक प्रशासनिक नियंत्रण केवल वेस्ट बैंक और गाजा पट्टी के आंतरिक भाग पर होता है, और इसका प्रशासनिक केंद्र तथा राजधानी रमल्ला में स्थित है।l
राज्य में दो अलग-अलग क्षेत्रों (पश्चिमी बैंक और गाजा पट्टी) शामिल हैं। हालांकि इसराइल ने बलपूर्वक फ़िलिस्तीन परकब्ज़ा किया है। 23 नवम्बर, 2011 से, फ़िलिस्तीन यूनेस्को का सदस्य है। एवं 29 नवम्बर, 2012 को, [[संयुक्त राष्ट्र महासभा]] ने एक प्रस्ताव अपनाया जिस पर फ़िलिस्तीन ने संयुक्त राष्ट्र "ग़ैर सदस्यीय राज्य" का दर्जा हासिल कर लिया। 138 अन्तरराष्ट्रीय सदस्यों ने संयुक्त राष्ट्र महासभा को फ़िलिस्तीन के लिए अन्तरराष्ट्रीय स्तर की अनुमति देने के लिए मतदान किया था।
==सरकार गणराज्य==
- राष्ट्रपति महमूद अब्बास
- फ़िलिस्तीनी संसद अध्यक्ष सलीमा अल-ज़ानुन
==आबादी==
- 2010 अनुमान 4 260 636 (124)
घनत्व 667 आदमी / किमी 2
== इन्हें भी देखें ==
* [[बहिष्कार, विनिवेश और प्रतिबंध]]
== सन्दर्भ ==
{{टिप्पणीसूची}}
{{एशिया के देश}}
[[श्रेणी:अरब लीग के देश]]
[[श्रेणी:फ़िलिस्तीनी राज्यक्षेत्र]]
{{आधार}}
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2026-05-03T10:17:10Z
The Sorter
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wikitext
text/x-wiki
{{ज्ञानसन्दूक देश
| conventional_long_name = फ़िलिस्तीन राज्य
| common_name = फ़िलिस्तीन
| native_name = {{lang|ar|دولة فلسطين}}
| image_flag = Flag of Palestine.svg
| image_coat = Coat of arms of Palestine.svg
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| national_anthem = {{lang|ar|فدائي}}<br/>({{lower|0.1em|''[[फ़िलिस्तीन का राष्ट्रगान|फ़िदायी]]''}}; "योद्धा")<div style="padding-top:0.5em;">{{Center|[[File:Anthem of Palestine.ogg]]}}</div>
| image_map = {{Switcher|[[File:State of Palestine (orthographic projection).svg|frameless]]|पृथवी दिखाये|[[File:Palestine Base Map.png|frameless]]|फ़िलिस्तीन का मानचित्र}}
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| map_caption = {{Legend|#336830|[[इसराइली-अधिकृत क्षेत्र#फ़िलिस्तीनी क्षेत्र|अधिकृत फ़िलिस्तीनी क्षेत्र]]}}
{{Legend|#61E760|[[पूर्व यरुशलम पर इसराइली क़ब्ज़ा|इसराइल द्वारा अधिकृत क्षेत्र]]}}
| capital = {{unbulleted list
| item1_style=margin-bottom:2px;|[[यरुशलम]] ([[यरुशलम की स्थिति|सीमित मान्यता]]){{efn|The [[Palestinian Declaration of Independence]] proclaims the "establishment of the State of Palestine on our Palestinian territory with its capital Jerusalem (Al-Quds Ash-Sharif)". Israel exercises ''de facto'' control over Jerusalem, but [[Status of Jerusalem|neither state's claims to Jerusalem are widely recognized by the international community]]. [[Ramallah]] is the administrative capital where government institutions and [[List of diplomatic missions to Palestine|foreign representative offices]] are located, while most countries maintain their [[List of diplomatic missions in Israel|embassies to Israel]] in [[Tel Aviv]]. In the [[Oslo I Accord]], a few parts of Jerusalem were placed under the control of the Palestinian government, but did not resolve the overall [[status of Jerusalem]].}}
| [[रामल्लाह]] (वस्तुतः)
}}
| status = इसराइली क़ब्ज़े के तहत [[संयुक्त राष्ट्र महासभा प्रेक्षक|संयुक्त राष्ट्र प्रेक्षक देश]]{{efn|[[United States]], a permanent member of the Security Council with veto power, has consistently used its veto or threatened to do so to block Palestine's full membership to UN<ref name="United Nations" />}}<br />[[फ़िलिस्तीन की अंतरराष्ट्रीय मान्यता|157 संयुक्त राष्ट्र सदस्यों द्वारा अभिज्ञात]]
| capital_type = {{unbulleted list
| item1_style=margin-top:2px;margin-bottom:2px;|राजधानी
| प्रशासनिक<br />केन्द्र
}}
| religion = {{tree list}}
* 80.73% [[फ़िलिस्तीन में इस्लाम|इस्लाम]] ([[राज्य धर्म]])
** 71.21% [[सुन्नी इस्लाम|सुन्नी]]
** 0.09% [[शिया इस्लाम|शिया]]
** 9.42% अन्य<ref>{{cite web|title=Association of Religion Data Archives-Islamic schismatics|url=https://www.thearda.com/world-religion/np-sort?var=ADH_512|quote=Islamic schismatics include Kharijite and other orthodox sects; reform movements (Sanusi, Mahdiya), also heterodox sects (Ahmadiya, Druzes, Sabbateans)}}</ref>
* 13.07% [[यहूदी धर्म]]{{efn|इसराइली उपनिवेशक}}
* 0.88% [[फ़िलिस्तीनी ईसाई|ईसाई धर्म]]
* 0.05% [[बहाई धर्म]]
* 5.27% [[अधार्मिकता]]
{{tree list/end}}
| official_languages = [[अरबी भाषा|अरबी]]
| demonym = [[फ़िलिस्तीनी]]
| government_type = [[Unitary state|Unitary]] [[Semi-presidential system|semi-presidential]] [[republic]]<ref name=declaration1988>{{cite web|title=Declaration of Independence (1988) (UN Doc) |date=18 November 1988 |access-date=8 June 2014 |website=State of Palestine Permanent Observer Mission to the United Nations |url=http://www.un.int/wcm/content/site/palestine/cache/offonce/pid/12353 |archive-url=https://web.archive.org/web/20140608203237/http://www.un.int/wcm/content/site/palestine/cache/offonce/pid/12353 |archive-date=8 June 2014 |url-status=dead |publisher=United Nations }}</ref><!-- Articles in Wikipedia may not be used as citations; I have cited the published document -->
| leader_title1 = [[फ़िलस्तीन के राष्ट्रपति|राष्ट्रपति]]
| leader_name1 = [[महमूद अब्बास]]{{efn|name=PLOchair}}
| leader_title2 = [[फ़िलस्तीन के उपराष्ट्रपति|उपराष्ट्रपति]]
| leader_name2 = [[हुसैन अल-शेख़]]
| leader_title3 = [[फ़िलस्तीन के प्रधानमंत्री|प्रधानमंत्री]]
| leader_name3 = [[मोहम्मद मुस्तफ़ा (राजनेता)|मोहम्मद मुस्तफ़ा]]
| legislature = [[फ़िलिस्तीनी विधान परिषद]]
| sovereignty_type = [[#इतिहास|स्थापना]]
| established_event1 = [[Palestinian Declaration of Independence|Declaration of Independence]]
| established_date1 = 15 November 1988
| established_event2 = [[United Nations General Assembly resolution 67/19|UNGA observer state resolution]]
| established_date2 = 29 November 2012
| established_event3 = Sovereignty dispute with [[Israel]]
| established_date3 = {{nowrap|''Ongoing''<sup>b</sup>{{ref label|control|iii|}}<ref>{{cite web|first1=Maayana |last1=Miskin |title=PA Weighs 'State of Palestine' Passport |date=5 December 2012 |access-date=8 June 2014 |website=israelnationalnews.com |url=http://www.israelnationalnews.com/News/News.aspx/162844#.U5TD6vmICm6 |archive-url=https://web.archive.org/web/20121207082503/http://www.israelnationalnews.com/News/News.aspx/162844 |archive-date=7 December 2012 |url-status=live |publisher=Arutz Sheva |quote=A senior PA official revealed the plans in an interview with ''Al-Quds'' newspaper. The change to 'state' status is important because it shows that 'the state of Palestine is occupied,' he said. }}</ref><ref name="Limitations">{{cite news|title=State of Palestine name change shows limitations|url=https://news.yahoo.com/state-palestine-name-change-shows-limitations-200641448.html|agency=AP|date=17 January 2013|quote=Israel remains in charge of territories the world says should one day make up that state.|archive-url=https://web.archive.org/web/20130110025703/http://news.yahoo.com/state-palestine-name-change-shows-limitations-200641448.html |archive-date=10 January 2013 }}</ref><!--end nowrap:-->}}
| area_km2 = 6,020<ref name="auto">{{cite book |chapter-url=https://unstats.un.org/unsd/demographic/products/dyb/dyb2012/Table03.pdf |chapter=Table 3, Population by sex, annual rate of population increase, surface area and density |title=Demographic Yearbook |url=https://unstats.un.org/unsd/demographic/products/dyb/dyb2012.htm |date=2012 |publisher=[[United Nations Statistics Division]] |access-date=28 January 2018 |archive-url=https://web.archive.org/web/20171015114145/https://unstats.un.org/unsd/demographic/products/dyb/dyb2012.htm |archive-date=15 October 2017 |url-status=live }}</ref> <!-- Area should match [[List of countries and dependencies by area]] -->
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| percent_water = 3.5<ref>{{cite web |url=https://www.cia.gov/the-world-factbook/countries/west-bank/ |title=The World Factbook: Middle East: West Bank |website=cia.gov |publisher=Central Intelligence Agency |date=7 April 2014 |access-date=8 June 2014 |archive-date=22 जुलाई 2021 |archive-url=https://web.archive.org/web/20210722231029/https://www.cia.gov/the-world-factbook/countries/west-bank/ |url-status=dead }}</ref>
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| area_data3 = 365 km{{smallsup|2}}<ref>{{cite web |url=https://www.cia.gov/the-world-factbook/countries/gaza-strip/ |title=The World Factbook: Middle East: Gaza Strip |website=cia.gov |publisher=Central Intelligence Agency |date=12 May 2014 |access-date=8 June 2014 |archive-date=11 सितंबर 2024 |archive-url=https://web.archive.org/web/20240911164503/https://www.cia.gov/the-world-factbook/countries/gaza-strip/ |url-status=dead }}</ref>
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| footnote_c = Ramallah is the administrative center of the Palestinian National Authority.<ref name="Eqeiq 2019 pp. 26–42">{{cite journal | last=Eqeiq | first=Amal | title=From Haifa to Ramallah (and Back): New/Old Palestinian Literary Topography | journal=Journal of Palestine Studies | volume=48 | issue=3 | date=1 May 2019 | issn=0377-919X | doi=10.1525/jps.2019.48.3.26 | pages=26–42 | url=/jps/article/48/3/26/55117/From-Haifa-to-Ramallah-and-Back-New-Old | access-date=22 November 2020}}</ref>
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|91.2% [[फ़िलिस्तीनी|फ़िलिस्तीनी अरब]]
|8.8% [[इसराइली यहूदी]]{{efn|Over 670,000 [[Israeli settlement|Israeli settlers]] live in the [[West Bank]] as of 2022; approximately 227,100 Israeli settlers live in [[East Jerusalem]] as of 2019.<ref>{{Cite web|url=https://www.cia.gov/the-world-factbook/countries/west-bank/#people-and-society|title=West Bank|date=17 October 2023|publisher=[[Central Intelligence Agency]]|access-date=25 December 2021|archive-date=22 July 2021|archive-url=https://web.archive.org/web/20210722231029/https://www.cia.gov/the-world-factbook/countries/west-bank/#people-and-society|url-status=dead}}</ref> These settlements are widely regarded as [[Legality of Israeli settlements|illegal under international law]].<ref>{{Cite journal |last1=Roberts |first1=Adam |author-link=Adam Roberts (scholar) |year=1990 |title=Prolonged Military Occupation: The Israeli-Occupied Territories Since 1967 |url=https://pdfs.semanticscholar.org/8aaa/455b51d4c49285089a97a08496071e322877.pdf |journal=The American Journal of International Law |volume=84 |issue=1 |pages=85–86 |doi=10.2307/2203016 |jstor=2203016 |archive-url=https://web.archive.org/web/20200215100933/https://pdfs.semanticscholar.org/8aaa/455b51d4c49285089a97a08496071e322877.pdf |archive-date=2020-02-15 |quote=The international community has taken a critical view of both deportations and settlements as being contrary to international law. General Assembly resolutions have condemned the deportations since 1969, and have done so by overwhelming majorities in recent years. Likewise, they have consistently deplored the establishment of settlements, and have done so by overwhelming majorities throughout the period (since the end of 1976) of the rapid expansion in their numbers. The Security Council has also been critical of deportations and settlements; and other bodies have viewed them as an obstacle to peace, and illegal under international law... Although East Jerusalem and the Golan Heights have been brought directly under Israeli law, by acts that amount to annexation, both of these areas continue to be viewed by the international community as occupied, and their status as regards the applicability of international rules is in most respects identical to that of the West Bank and Gaza. |s2cid=145514740|issn=0002-9300}}</ref>}}
}}|ethnic_groups_ref=<ref>{{cite web|archive-url=https://web.archive.org/web/20070524201914/https://theglobaleducationproject.org/mideast/info/cprofiles/palestine/palestine.html|archive-date=2007-05-24|title=PALESTINE (WEST BANK AND GAZA STRIP)|website=The Global Education Project|url=https://theglobaleducationproject.org/mideast/info/cprofiles/palestine/palestine.html}}</ref>|ethnic_groups_year=2007|religion_year=2020|religion_ref=<ref>{{Cite web |year=2020 |title=Occupied Palestinian Territories |url=https://www.thearda.com/world-religion/national-profiles?u=114c |access-date=2025-02-22 |website=[[Association of Religion Data Archives]] |language=en-gb}}</ref>|leader_title4=[[फ़िलिस्तीनी विधान परिषद के अध्यक्ष|विधान परिषद के अध्यक्ष]]|leader_name4=[[अज़ीज़ दुवैक]]}}
'''फ़िलिस्तीन''' ({{Langx|ar|فلسطين}}) आंशिक रूप से मान्यता प्राप्त राष्ट्र है। फ़िलिस्तीन लिबरेशन संगठन ने १५ नवम्बर १९८८ को अल्जीरिया के नैशनल असेम्बली की परिषद में फ़िलिस्तीनी स्वतन्त्रता की घोषणा की थी। यह अरब राज्यों के लीग का सदस्य है और कुछ राष्ट्रो द्वारा मान्यता प्राप्त है। फ़िलिस्तीन [[वेस्ट बैंक]] और [[गाजा पट्टी]] पर अपना दावा करता है<ref name=only1967>{{cite web |title=Ban sends Palestinian application for UN membership to Security Council |date=23 September 2011 |access-date=11 September 2015 |website=United Nations News Centre |url=https://www.un.org/apps/news/story.asp?NewsID=39722#.VfMZaZeM-ao |archive-url=https://web.archive.org/web/20151010151934/http://www.un.org/apps/news/story.asp?NewsID=39722#.VfMZaZeM-ao |archive-date=10 October 2015 |url-status=live }}</ref> आंशिक प्रशासनिक नियंत्रण केवल वेस्ट बैंक और गाजा पट्टी के आंतरिक भाग पर होता है, और इसका प्रशासनिक केंद्र तथा राजधानी रमल्ला में स्थित है।l
राज्य में दो अलग-अलग क्षेत्रों (पश्चिमी बैंक और गाजा पट्टी) शामिल हैं। हालांकि इसराइल ने बलपूर्वक फ़िलिस्तीन परकब्ज़ा किया है। 23 नवम्बर, 2011 से, फ़िलिस्तीन यूनेस्को का सदस्य है। एवं 29 नवम्बर, 2012 को, [[संयुक्त राष्ट्र महासभा]] ने एक प्रस्ताव अपनाया जिस पर फ़िलिस्तीन ने संयुक्त राष्ट्र "ग़ैर सदस्यीय राज्य" का दर्जा हासिल कर लिया। 138 अन्तरराष्ट्रीय सदस्यों ने संयुक्त राष्ट्र महासभा को फ़िलिस्तीन के लिए अन्तरराष्ट्रीय स्तर की अनुमति देने के लिए मतदान किया था।
==सरकार गणराज्य==
- राष्ट्रपति महमूद अब्बास
- फ़िलिस्तीनी संसद अध्यक्ष सलीमा अल-ज़ानुन
==आबादी==
- 2010 अनुमान 4 260 636 (124)
घनत्व 667 आदमी / किमी 2
== इन्हें भी देखें ==
* [[बहिष्कार, विनिवेश और प्रतिबंध]]
== सन्दर्भ ==
{{टिप्पणीसूची}}
{{एशिया के देश}}{{आधार}}
[[श्रेणी:फ़िलिस्तीन| ]]
[[श्रेणी:गणराज्य]]
[[श्रेणी:पश्चिम एशिया के देश]]
[[श्रेणी:लेवंट]]
[[श्रेणी:एशिया के देश]]
[[श्रेणी:अरबी-भाषी देश और क्षेत्र]]
[[श्रेणी:दो-राज्य समाधान]]
[[श्रेणी:इस्लामी सहयोग संगठन के सदस्य]]
[[श्रेणी:संयुक्त राष्ट्र महासभा के प्रेक्षक]]
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रोमागनोल
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text/x-wiki
{{Infobox language|name=रोमागनोल|nativename={{lang|rgn|Rumagnôl}}, {{lang|rgn|Rumagnùl}}<ref>Dizionario di Dialetto Sammarinese (2021), Ente Cassa di Faetano</ref>|states={{ITA}}, {{SMR}}|ethnicity=११ लाख (२००८)<ref>{{Cite web |last=Miani |first=Ivan |date=2008-04-12 |title=ISO 639-3 Registration Authority Request for New Language Code Element in ISO 639-3 |url=http://www-01.sil.org/iso639-3/cr_files/2008-040_rgn.pdf |website=ISO 639-3}}</ref>|speakers={{circa}} ४,३०,०००|date=२००६|ref=<ref>{{cite web |url=http://www3.istat.it/salastampa/comunicati/non_calendario/20070420_00/testointegrale.pdf |title=La lingua italiana, i dialetti e le lingue straniere Anno 2006 |language=it |trans-title=The Italian language, dialects and foreign languages Year 2006 |date=2006}}</ref>|familycolor=Indo-European|fam2=[[रोमांस भाषाएँ|रोमांस]]|fam3=गल्लो-रोमांस|fam4=गल्लो-इतालवी|fam5=एमिलियन-रोमागनोल|dia1=रैवेन्नाते|dia2=फोरलीवेसे|dia3=फैनटीनो|dia4=कैसेंनाते|dia5=रिमिनी|dia6={{interlanguage link|Sammarinese dialect{{!}}सम्मारिनी|it|Dialetto sammarinese}} (मानक)|dia7=गलो - पिसिन (विवादित)|script=[[लैटिन लिपि|लैटिन]]|minority=|iso3=rgn|lingua=[http://www.hortensj-garden.org/index.php?tnc=1&tr=lsr&nid=51-AAA-ok 51-AAA-oki ... okl]|glotto=roma1328|glottorefname=Romagnol|map=Mappa_linguistica_Romagna.jpg|mapcaption=|map2=|mapcaption2=|notice=IPA|conservation_status=DE}}
'''रोमागनोल''' (''Rumagnùl'') इटली में बोली जानी वाली एक भाषा है।
== इतिहास ==
क्षेत्रीय साहित्य के बाहर रोमाग्नोल की पहली स्वीकृति [[दांते एलीगियरी|दांते]] अलिघिएरी के ग्रंथ डी वल्गरी इलोक्वेन्शिया में थी, जिसमें दांते ने "रोमाग्ना की भाषा" की तुलना अपनी मूल टस्कन बोली से की थी। आखिरकार, १६२९ में, लेखक एड्रियानो बैंचीरी ने डिस्कोर्सो डेला लिंगुआ बोलोनीज़ नामक ग्रंथ लिखा, जिसने दांते के इस दावे का विरोध किया कि टस्कन बोली बेहतर थी, उनके इस विश्वास पर तर्क देते हुए कि बोलोनीज़ (रोमग्नोल से प्रभावित एक एमिलियन बोली जिसका लेखन में व्यापक उपयोग देखा गया था) "प्राकृतिकता, कोमलता, संगीत और उपयोगिता" में बेहतर थी। रोमाग्ना को पोप राज्यों से स्वतंत्रता प्राप्त करने के बाद रोमाग्नोल को अधिक मान्यता मिली।
== लिपि ==
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== सन्दर्भ ==
[[श्रेणी:इटली की भाषाएँ]]
<references />
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अहमद शम्सुद्दीन एत-तविली
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text/x-wiki
{{उल्लेखनीयता|date=मार्च 2026}}
{{Infobox religious biography
| name = अहमद शम्सुद्दीन एत-तविली
| native_name = الشيخ أحمد شمس الدين طويلة
| native_name_lang = ar
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| religion = [[इस्लाम]]
| order = [[नक्शबंदी]] (सूफी)
| birth_date = 1849 ई.
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| father = उस्मान सिराजुद्दीन एत-तविली
| known_for = अहमदावा खानकाह (Ahmedâvâ Tekkesi) की स्थापना
| title = सूफी संत, इस्लामी विद्वान
}}
'''अहमद शम्सुद्दीन एत-तविली''' ({{lang-ar|الشيخ أحمد شمس الدين طويلة}}; 1849 – 1890 ईस्वी) 19वीं शताब्दी के एक इराकी इस्लामी विद्वान और नक्शबंदी (Naqshbandi) सूफी संत थे। वे सूफी शेख उस्मान सिराजुद्दीन एत-तविली (Osman Sirâceddîn et-Tavilî) के चौथे पुत्र थे। उनका जन्म उस्मानी साम्राज्य के अंतर्गत इराक के अहमदाबात (Ahmedabat) गाँव में हुआ था और उनका अधिकांश जीवन इराक-ईरान सीमा पर स्थित तविला (Tavila) में व्यतीत हुआ।
== प्रारंभिक जीवन और व्यक्तित्व ==
अहमद शम्सुद्दीन को उनके समकालीनों द्वारा एक उत्कृष्ट विद्वान, फ़क़ीह (न्यायविद) और विरक्त (ज़ाहिद) संत के रूप में जाना जाता था। उन्होंने अपना अधिकांश समय इबादत (प्रार्थना) और इस्लामी शिक्षाओं के अध्ययन में समर्पित किया।
यद्यपि उनके अनुयायियों के बीच उनका आध्यात्मिक स्थान उच्च माना जाता था, लेकिन अपने बड़े भाई 'उमर जियाउद्दीन' (Ömer Ziyâeddîn) के प्रति सम्मान के कारण उन्होंने शायद ही कभी औपचारिक रूप से 'इरशाद' (आध्यात्मिक मार्गदर्शन) की गद्दी संभाली। अपने भाई के सम्मान में वे प्रायः नेपथ्य में रहे, यही कारण है कि इतिहास में उनके प्रत्यक्ष शिष्यों (मुरीदों) की संख्या अपेक्षाकृत कम दर्ज है।<ref>{{cite book |title=Sirâcü'l-Kulûb |author=Osman Sirâceddin-i Sânî |translator=Selahattin Alpay |page=79 |isbn=9789751625472}}</ref>
== अहमदावा खानकाह ==
अपने पिता उस्मान सिराजुद्दीन के निधन के बाद, अहमद शम्सुद्दीन ने इराक के हलबजा (Halabja) के खुरमाल (Hurmal) क्षेत्र में स्थित अहमदावा गाँव में एक खानकाह (सूफी आश्रम) का निर्माण कराया। इस 'अहमदावा खानकाह' ने उस क्षेत्र में आध्यात्मिक और इस्लामी शिक्षा के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बियारा (Biyara) और तविला की खानकाहों को उस्मानी साम्राज्य द्वारा भी आधिकारिक सहायता प्राप्त होती थी, जो आज तक सूफी शिक्षा के केंद्र के रूप में विद्यमान हैं।<ref>{{cite book |last=Müderris |first=Abdulkerim |title=‘Ulemâunâ fî hidmeti'l-ilmi ve'd-dîn |location=Baghdad |year=1983 |publisher=Dâru'l-Hürriyye |page=81}}</ref>
== उस्मानी सुल्तान से भेंट ==
अपने जीवनकाल में अहमद शम्सुद्दीन ने इस्तांबुल की यात्रा की, जहाँ तत्कालीन उस्मानी सुल्तान अब्दुल मजीद (Sultan Abdülmecid) ने उनका स्वागत किया। ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार, सुल्तान ने उन्हें इस्लामी पैगंबर मुहम्मद के पवित्र बाल (सकल-ए-शरीफ) और कुरान की एक दुर्लभ हस्तलिखित पांडुलिपि उपहार स्वरूप प्रदान की। सुल्तान द्वारा दिए गए ये उपहार आज भी इराक के तविला और बियारा की खानकाहों में संरक्षित रखे गए हैं।<ref>{{cite book |last=Muhammed |first=Osman |year=2017 |title=Osman Sirâceddîn-i Tavilî (en-nakşibendî, el-evvel) ve Ailesi |isbn=9786059261760 |page=24}}</ref>
== मृत्यु ==
अहमद शम्सुद्दीन एत-तविली का निधन 1890 ईस्वी में इराक के तविला में हुआ। उन्हें उनके पैतृक स्थान पर उनके पिता की कब्र के निकट दफनाया गया, जहाँ आज भी सूफी अनुयायी ज़ियारत (दर्शन) के लिए आते हैं।<ref>{{cite web |title=ŞEYH AHMED ŞEMSEDDÎN Hayatı - Evliyalar Ansiklopedisi |url=https://www.ehlisunnetbuyukleri.com/Evliyalar-Ansiklopedisi/Detay/Irak-Tavila-SEYH-AHMED-SEMSEDDIN/968 |website=ehlisunnetbuyukleri.com |language=tr |access-date=10 March 2026}}</ref>
== सन्दर्भ ==
{{reflist}}
== बाहरी कड़ियाँ ==
* [https://www.wikidata.org/wiki/Q131804177 विकिडाटा पर अहमद शम्सुद्दीन एत-तविली (Q131804177)]
{{Authority control}}
[[श्रेणी:1849 में जन्मे लोग]]
[[श्रेणी:1890 में निधन]]
[[श्रेणी:नक्शबंदी सूफी]]
[[श्रेणी:इराकी इस्लामी विद्वान]]
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[[श्रेणी:2026 विकि लव्ज़ रमजान प्रतियोगिता के लेख]]
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अलीकन ओन्लू
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wikitext
text/x-wiki
{{Infobox officeholder
| name = अलीकन ओन्लू
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| office = तुनजेली से संसद सदस्य (ग्रैंड नेशनल असेंबली)
| term_start = 7 जून 2015
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'''अलीकन ओन्लू''' ({{lang-tr|Alican Önlü}}; जन्म: 1967) एक कुर्द-अलेवी (Kurdish-Alevi) मूल के तुर्की राजनेता हैं, जो पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (HDP) से जुड़े हुए हैं। वे 2015 से 2023 तक तुर्की की ग्रैंड नेशनल असेंबली (संसद) में तुनजेली (Tunceli) प्रांत के प्रतिनिधि के रूप में संसद सदस्य रहे हैं।<ref>{{Cite journal|last=Gunes|first=Cengiz|date=2020-05-24|title=Political Representation of Alevi Kurds in Turkey: Historical Trends and Main Transformations|url=https://www.kurdishstudies.net/journal/ks/article/view/522|journal=Kurdish Studies|volume=8|issue=1|pages=71–90|doi=10.33182/ks.v8i1.522|issn=2051-4891}}{{Dead link|date=अप्रैल 2026 |bot=InternetArchiveBot }}</ref>
== प्रारंभिक जीवन और शिक्षा ==
अलीकन ओन्लू का जन्म 1967 में तुर्की के तुनजेली प्रांत के नाज़िमिये (Nazımiye) शहर में हुआ था। उन्होंने अपनी हाई स्कूल तक की शिक्षा वहीं पूरी की। राजनीति में प्रवेश करने से पहले वे विभिन्न कुर्द समर्थक और वामपंथी राजनीतिक आंदोलनों में सक्रिय रहे।<ref>{{Cite web|url=https://www.yeniakit.com.tr/biyografi/alican-onlu|title=Alican Önlü kimdir? - Yeni Akit|website=www.yeniakit.com.tr|language=tr|access-date=2026-03-10}}</ref>
== राजनीतिक करियर ==
ओन्लू का राजनीतिक करियर मुख्य रूप से कुर्द समर्थक दलों के साथ जुड़ा रहा है। 1994 से 1996 के बीच, उन्होंने पीपुल्स डेमोक्रेसी पार्टी (HADEP) के प्रांतीय अध्यक्ष के रूप में कार्य किया। इसके बाद वे डेमोक्रेटिक पीपुल्स पार्टी (DEHAP) की पार्टी असेंबली के सदस्य बने थे।
2009 के स्थानीय चुनावों में, उन्होंने डेमोक्रेटिक सोसाइटी पार्टी (DTP) की ओर से तुनजेली के मेयर पद के लिए चुनाव लड़ा, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। 2014 के स्थानीय चुनावों में उन्हें तुनजेली नगर पालिका में उप-मेयर चुना गया था।<ref>{{Cite web|url=https://www.merip.org/2010/08/the-pkk-and-the-closure-of-turkeys-kurdish-opening/|title=The PKK and the Closure of Turkey's Kurdish Opening - MERIP|date=2010-08-05|website=Middle East Research and Information Project|language=en|access-date=2026-03-10}}</ref>
जून 2015 के संसदीय चुनावों में, उन्हें पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (HDP) के उम्मीदवार के रूप में तुनजेली से संसद सदस्य (MP) चुना गया था।<ref>{{Cite web|url=https://www.yenisafak.com/secim-2015/tunceli-ili-secim-sonuclari|title=Tunceli Seçim Sonuçları Genel Seçim Sonuçları - 2015|last=Şafak|first=Yeni|date=2026-10-03|website=Yeni Şafak|language=tr-TR|access-date=2026-03-10}}</ref> उसी वर्ष नवंबर 2015 के मध्यावधि चुनावों में उन्होंने अपनी सीट बरकरार रखी।<ref>{{Cite web|url=https://www.yenisafak.com/secim-2015-kasim/tunceli-ili-secim-sonuclari|title=Tunceli Seçim Sonuçları Genel Seçim Sonuçları - 2015|last=Şafak|first=Yeni|date=2026-10-03|website=Yeni Şafak|language=tr-TR|access-date=2026-03-10}}</ref> 2018 के आम चुनावों में भी वे तुनजेली से दोबारा संसद के लिए चुने गए थे ।<ref>{{Cite web|url=https://www.yenisafak.com/secim-2018/tunceli-ili-secim-sonuclari|title=Tunceli Seçim Sonuçları - 2018 Genel Seçim Tunceli Oy Oranları {{!}} CANLI|last=Şafak|first=Yeni|date=2026-10-03|website=Yeni Şafak|language=tr-TR|access-date=2026-03-10}}</ref>
== कानूनी विवाद और अभियोजन ==
तुर्की में कई अन्य HDP राजनेताओं की तरह, ओन्लू को भी गंभीर कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। सितंबर 2016 में, उन्हें कुछ समय के लिए हिरासत में लिया गया और बाद में रिहा कर दिया गया। मार्च 2017 में उन्हें एक अदालत में गवाही देने के लिए फिर से हिरासत में लिया गया था।<ref name=":0">{{Cite web|url=https://bianet.org/haber/hdp-indictment-seeks-political-ban-for-687-members-including-demirtas-buldan-and-sancar-241005|title=HDP indictment seeks political ban for 687 members, including Demirtaş, Buldan and Sancar|website=bianet.org|language=en|access-date=2026-03-10}}</ref>
फ़रवरी 2019 में, एक तुर्की अदालत ने ओन्लू को आतंकवाद से संबंधित आरोपों ("आतंकवादी संगठन का प्रचार करने") के लिए सजा सुनाई गई थी ।<ref>{{Cite web|url=https://stockholmcf.org/2-pro-kurdish-hdp-deputies-sentenced-over-terrorism-charges-in-turkey/|title=2 pro-Kurdish HDP deputies sentenced by Turkish court on terrorism charges|last=SCF|date=2019-02-15|website=Stockholm Center for Freedom|language=en-US|access-date=2026-03-10}}</ref> सितंबर 2019 में सुप्रीम कोर्ट ऑफ अपील्स द्वारा इस सजा को बरकरार रखा गया हैं ।<ref>{{Cite web|url=https://bianet.org/haber/supreme-court-of-appeals-upholds-prison-sentences-of-3-hdp-mps-213474|title=Supreme Court of Appeals Upholds Prison Sentences of 3 HDP MPs|website=bianet.org|language=en|access-date=2026-03-10}}</ref>
मार्च 2021 में, तुर्की के एक राज्य अभियोजक ने संवैधानिक न्यायालय (Constitutional Court) के समक्ष एक अभियोग दायर किया, जिसमें ओन्लू सहित 687 HDP राजनेताओं पर पाँच साल के राजनीतिक प्रतिबंध (Political ban) की मांग की गई थी। अभियोजकों ने आरोप लगाया कि ये राजनेता पीकेके (PKK) के साथ वैचारिक रूप से जुड़े हुए थे।<ref name=":0" /><ref>{{Cite web|url=https://www.duvarenglish.com/turkish-prosecutor-seeks-political-ban-on-687-pro-kurdish-politicians-news-56691|title=Turkish prosecutor seeks political ban on 687 pro-Kurdish politicians|last=English|first=Duvar|date=2021-03-18|website=Duvarenglish.com|language=tr-TR|access-date=2026-03-10}}</ref>
== सन्दर्भ ==
{{reflist|30em}}
== बाहरी कड़ियाँ ==
* [https://www.wikidata.org/wiki/Q20476291 विकिडाटा पर अलीकन ओन्लू (Q20476291)]
{{Authority control}}
{{DEFAULTSORT:ओन्लू, अलीकन}}
[[श्रेणी:1967 में जन्मे लोग]]
[[श्रेणी:तुर्की के राजनेता]]
[[श्रेणी:जीवित लोग]]
[[श्रेणी:तुर्की की ग्रैंड नेशनल असेंबली के सदस्य]]
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text/x-wiki
'''फ़ाकफासु''' (<span lang="hak" dir="ltr">白話字</span>) एक लिपि है जिसका उपयोग [[होक्का भाषा|हक्का]] को लिखने के लिये किया जाता है। हक्का भाषा, चीनी भाषा का एक प्रकार है। फ़ाकफासु, [[पेवेजी]] से मिलती-जुलती लेखन पद्धति है। हक्का चीनी भाषा की एक पूरी शाखा है, और बड़े भौगोलिक क्षेत्र को देखते हुए, हक्का बोलियाँ एक-दूसरे के साथ पारस्परिक रूप से समझने योग्य नहीं हैं। बे लिरबिदांआ हक्कानि मोनसे थि रोखोमनि सायाव सावरायदों। वर्तनी का आविष्कार १९वीं शताब्दी में प्रेस्बिटेरियन चर्च द्वारा किया गया था। १९२४ में प्रकाशित ''<span lang="hak" dir="ltr">'द हक्का न्यू टेस्टामेंट'</span>'' इसी प्रणाली में लिखा गया है।<ref>{{Cite web|url=http://dcrc.org.tw/big5/?p=13|title=《客英大辭典》海陸成份初探 » 詞典及語料庫研究中心|last=D'Souza|first=Ajay|website=dcrc.org.tw|access-date=2026-03-14|archive-date=3 नवंबर 2007|archive-url=https://web.archive.org/web/20071103210259/http://dcrc.org.tw/big5/?p=13|url-status=dead}}</ref>
== लेखन प्रणाली ==
=== अक्षर ===
{| class=wikitable style="font-size: 1em;"
|-align=center
!बड़े अक्षर
||<span lang="hak" dir="ltr">A||<span lang="hak" dir="ltr">Ch||<span lang="hak" dir="ltr">Chh||<span lang="hak" dir="ltr">E||<span lang="hak" dir="ltr">F||<span lang="hak" dir="ltr">H||<span lang="hak" dir="ltr">I||<span lang="hak" dir="ltr">K||<span lang="hak" dir="ltr">Kh||<span lang="hak" dir="ltr">L||<span lang="hak" dir="ltr">M||<span lang="hak" dir="ltr">N||<span lang="hak" dir="ltr">Ng||<span lang="hak" dir="ltr">O||<span lang="hak" dir="ltr">P||<span lang="hak" dir="ltr">Ph||<span lang="hak" dir="ltr">S||<span lang="hak" dir="ltr">T||<span lang="hak" dir="ltr">Th||<span lang="hak" dir="ltr">U||<span lang="hak" dir="ltr">Ṳ</span>||<span lang="hak" dir="ltr">V||<span lang="hak" dir="ltr">Y
|-align=center
!छोटे अक्षर
|<span lang="hak" dir="ltr">a||<span lang="hak" dir="ltr">ch||<span lang="hak" dir="ltr">chh||<span lang="hak" dir="ltr">e||<span lang="hak" dir="ltr">f||<span lang="hak" dir="ltr">h||<span lang="hak" dir="ltr">i||<span lang="hak" dir="ltr">k||<span lang="hak" dir="ltr">kh||<span lang="hak" dir="ltr">l||<span lang="hak" dir="ltr">m||<span lang="hak" dir="ltr">n||<span lang="hak" dir="ltr">ng||<span lang="hak" dir="ltr">o||<span lang="hak" dir="ltr">p||<span lang="hak" dir="ltr">ph||<span lang="hak" dir="ltr">s||<span lang="hak" dir="ltr">t||<span lang="hak" dir="ltr">th||<span lang="hak" dir="ltr">u||<span lang="hak" dir="ltr">ṳ||<span lang="hak" dir="ltr">v||<span lang="hak" dir="ltr">y
|-align=center
!अक्षरों का नाम
|a||chi||chhi||e||fi||hi||i||ki||khi||li||mi||ni||ngi||o||pi||phi||si||ti||thi||u||ṳ||vi||yi
|}
===स्वर चिह्न===
हक्का की सिक्सियन और हैलु बोलियों के स्वर मूल्य नीचे सूचीबद्ध हैं:-<ref>客家語拼音聲調表。收錄於客家委員會。(2019)。客語能力認證基本詞彙-初級四縣腔(頁24)。</ref>
{|class=wikitable border=1 style="text-align: left;"
! चीनी स्वर नाम
! स्वर चिह्न
! उदाहरण
! सिक्सियन
! हैलु
|-
|陰平 yīnpíng
|<big>◌̂</big>
|<span lang="hak" dir="ltr">夫 fû</span>
|<span lang="hak" dir="ltr">24</span>
|<span lang="zh" dir="ltr">53</span>
|-
|陽平 yángpíng
|<big>◌̀</big>
|<span lang="zh" dir="ltr">扶 fù</span>
|<span lang="hak" dir="ltr">11</span>
|<span lang="zh" dir="ltr">55</span>
|-
|上聲 shǎngshēng
|<big>◌́</big>
|<span lang="nan" dir="ltr">府 fú</span>
|<span lang="hak" dir="ltr">31</span>
|<span lang="zh" dir="ltr">24</span>
|-
|陰去 yīnqù
|
|<span lang="hak" dir="ltr">富 fu</span>
| rowspan="2" |<span lang="hak" dir="ltr">55</span>
|<span lang="zh" dir="ltr">11</span>
|-
|陽去 yángqù
|<big>◌̊</big>
|<span lang="hak" dir="ltr">護 fů</span>
|<span lang="zh" dir="ltr">33</span>
|-
|陰入 yīnrù
|
|<span lang="hak" dir="ltr">福 fuk</span>
|<span lang="hak" dir="ltr">2</span>
|<span lang="zh" dir="ltr">5</span>
|-
|陽入 yángrù
|<big>◌̍</big>
|<span lang="hak" dir="ltr">服 fu̍k</span>
|<span lang="hak" dir="ltr">5</span>
|<span lang="zh" dir="ltr">2</span>
|}
== यह भी देखें ==
* [[पेवेजी]]
== सन्दर्भ ==
[[श्रेणी:ताइवान की भाषाएँ]]
3m9bw83u8hcjuvemfzbgvwfqe9vrmcg
फ़ैज़िया स्कूल
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{{Infobox religious building|building_name=फ़ैज़िया स्कूल<br>مدرسه فیضیه|religious_affiliation=[[इस्लाम]]|image=Feyziyeh School by Tasnim02.jpg|caption=|location=[[क़ोम]], ईरान|geo=|website=|architecture_type=स्कूल|architecture_style=[[ईरानी वास्तुकला|ईरानी]]|year_completed=1792|construction_cost=|capacity=|image_size=|architecture=yes|specifications=}}
'''फ़ैज़िया स्कूल''' ({{langx|fa|مدرسه فیضیه}}) ईरान के [[क़ोम]] में स्थित एक पुराना स्कूल है जिसकी स्थापना सफ़ाविद युग में हुई थी। इस स्कूल को 29 जनवरी 2008 से ईरान के राष्ट्रीय स्मारकों में से एक के रूप में सूचीबद्ध किया गया है। यह स्कूल मुख्य रूप से मोहम्मद रज़ा शाह पहलवी की सफ़ेद क्रांति के खिलाफ लिपिकीय विरोध के केंद्र के रूप में प्रसिद्ध है। 1963 में [[आशूरा]] के दिन अयातुल्ला रुहोल्लाह खोमैनी ने यहीं से शाह की निंदा करते हुए भाषण दिया था, जिसके कारण उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था।
== पृष्ठभूमि ==
फ़ैज़िया स्कूल की स्थापना सफ़ाविद युग के दौरान क़ोम में हुई थी। दक्षिण बरामदे पर लगा एक शिलालेख इसके निर्माण को शाह तहमास्प प्रथम के शासनकाल का बताता है।<ref name="Tarikh-e Qom">{{cite book|url=http://www.noorlib.ir/View/fa/Book/BookView/Image/8664|title=Tarikh-e Qom|author=Naser al-Sharia, Muhammad Hussain|publisher=Dar-al-Fekr|year=1971|series=تاریخ قم|location=Tehran|pages=155}}</ref> इस स्थान पर 6वीं से 11वीं शताब्दी तक ''अस्ताना'' नाम का एक स्कूल मौजूद था। सफ़ाविदों के तहत इसका पुनर्निर्माण किया गया और स्कूल का नाम बदलकर फ़ैज़िया कर दिया गया।<ref name="Vahid">{{cite journal|author=Mudarres Tabatabaee, Sayyid Hussain|year=1971|title=Madreseh Astaneh Mughaddaseh|url=http://www.noormags.ir/view/fa/articlepage/296056|journal=Vahid|volume=88|issue=88|pages=126–129}}</ref> 1799 में फ़तह-अली शाह क़ाजार के शासनकाल के दौरान स्कूल का पुनर्निर्माण और विस्तार किया गया था। स्कूल की पहली मंजिल पर 40 कमरे, 4 लंबे बरामदे, 12 स्टाल और एक चौकोर पूल है।<ref name="Ostan Qom">{{cite book|title=Ostan Qom|author=Zendeh-Del, Hussain|publisher=Jahangardan va Irangardan|year=2000|pages=57}}</ref>
== इतिहास ==
=== सफ़ेद क्रांति का विरोध ===
1963 में, मोहम्मद रज़ा शाह ने सुधारों के एक कार्यक्रम की घोषणा की जिसे उन्होंने सफ़ेद क्रांति का नाम दिया। ईरानी पादरी प्रस्तावित भूमि सुधारों से क्रोधित थे और उन्होंने इन बदलावों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। शाह ने क़ोम की यात्रा की और एक भाषण के दौरान पादरियों को लाल प्रतिक्रियावादियों से भी बुरा और कम्युनिस्टों से सौ गुना अधिक विश्वासघाती बताया। 26 जनवरी 1963 को विरोध के बावजूद एक जनमत संग्रह कराया गया, जिसमें आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार सुधारों के पक्ष में भारी मतदान हुआ। यह सरकार के लिए पादरियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का एक बहाना बन गया और 22 मार्च 1963 को जाफर अल-सादिक़ की बरसी के दिन शाह के गार्डों ने फ़ैज़िया स्कूल पर हमला किया और छात्रों एवं लोगों को मार डाला।<ref>{{cite book|title=Violence: Impact and Intervention|publisher=Atlantic|year=2008|isbn=978-8126909414|editor-last=Singh}}</ref>
=== खोमैनी का प्रवचन ===
3 जून 1963 को [[आशूरा]] की दोपहर को, खोमैनी ने फ़ैज़िया स्कूल में एक भाषण दिया जिसमें उन्होंने शाह को एक "दुष्ट, दुखी व्यक्ति" बताया और चेतावनी दी कि यदि उन्होंने अपने तरीके नहीं बदले, तो वह दिन आएगा जब लोग उनके देश छोड़ने पर धन्यवाद देंगे।<ref name="chamber">{{cite web|url=http://www.iranchamber.com/history/rkhomeini/ayatollah_khomeini.php|title=Moin, Khomeini|year=2000|page=104}}</ref> इस भाषण में भारी भीड़ उमड़ी थी, यहाँ तक कि स्कूल का पूरा प्रांगण और फातिमा मसूमे तीर्थ का परिसर लोगों से भर गया था। दो दिन बाद 5 जून 1963 को तड़के 3 बजे, पुलिस और कमांडो ने क़ोम में खोमैनी के घर में घुसकर उन्हें गिरफ्तार कर लिया। उन्हें तुरंत [[तेहरान]] की जेल में स्थानांतरित कर दिया गया। इन घटनाओं ने 15 खोरदाद के आंदोलन को जन्म दिया।
=== राष्ट्रीय स्मारक के रूप में पंजीकरण ===
फ़ैज़िया स्कूल को 29 जनवरी 2008 को ईरान के राष्ट्रीय स्मारकों में से एक के रूप में पंजीकृत किया गया था।<ref name="ostan-qom">{{cite web|url=http://www.ostan-qom.ir/index.aspx?siteid=1&pageid=1715|title=Athar Bastani va Tarikhi|accessdate=15 May 2015|archive-date=25 मई 2015|archive-url=https://web.archive.org/web/20150525103418/http://www.ostan-qom.ir/index.aspx?siteid=1&pageid=1715|url-status=dead}}</ref>{{wide image|Feyziyeh School by Tasnim01.jpg|500px|2015 में स्कूल का दृश्य}}
== संदर्भ ==
{{reflist}}{{coord|34.6427816|50.8792969|display=title}}
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फातिमा ख़ातून
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{{Infobox royalty|name=फातिमा ख़ातून|death_date=सितंबर 1147|death_place=[[बगदाद]]|spouse=[[अल-मुक़्तफ़ी]]|dynasty=[[सेलजुक राजवंश|सेलजुक]]|father=[[मुहम्मद प्रथम तापर]]|mother=निस्तंदर जहां|religion=[[सुन्नी इस्लाम]]}}
'''फातिमा ख़ातून''' ({{langx|tr|Fatma Hatun}}, {{langx|ar|فاطمة خاتون}}; {{langx|fa|فاطمه خاتون}}; मृत्यु सितंबर 1147) एक सेलजुक राजकुमारी, सुल्तान मुहम्मद प्रथम तापर की बेटी, सुल्तान ग़ियाथ अद-दीन मसूद की बहन और [[अब्बासी राजवंश|अब्बासी]] खलीफा अल-मुक़्तफ़ी की मुख्य पत्नी थी।
फातिमा की माँ निस्तंदर जहां थीं, जिन्हें सरजहाँ ख़ातून के नाम से भी जाना जाता था। सुल्तान ग़ियाथ अद-दीन मसूद उनके सगे भाई थे।<ref>{{cite book|title=Türk dünyası araştırmaları - Issue 173|author=Türk Dünyası Araştırmaları Vakfı|publisher=Türk Dünyası Araştırmaları Vakfı|year=2008|page=123}}</ref> 1118 में मुहम्मद की मृत्यु के बाद, फारसी इराक के गवर्नर मेंगुबर्स ने उनकी माँ से विवाह किया था।<ref>{{cite book|title=Tarih incelemeleri dergisi - Volume 28|author=Ege Üniversitesi. Edebiyat Fakültesi|publisher=Ege Üniversitesi Edebiyat Fakültesi|year=2013|page=197}}</ref>
फातिमा का विवाह मार्च-अप्रैल 1137 में खलीफा अल-मुक़्तफ़ी से हुआ था।<ref>{{cite book|title=Putting the Caliph in His Place: Power, Authority, and the Late Abbasid Caliphate|last=Hanne|first=Eric J.|publisher=Fairleigh Dickinson University Press|year=2007|isbn=978-0-8386-4113-2|page=170}}</ref> उनका दहेज एक लाख दीनार था। खलीफा के वज़ीर, अली इब्न तिराद अल-ज़ैनबी ने विवाह अनुबंध की स्वीकृति के लिए प्रतिनिधि के रूप में कार्य किया, जबकि कमाल अल-दीन अल-दरकाज़िनी सुल्तान के एजेंट के रूप में उपस्थित रहे।<ref name="richards">{{cite book|title=The Chronicle of Ibn Al-Athir...|last=Richards|first=D.S.|publisher=Ashgate|year=2010|isbn=978-0-7546-6950-0}}</ref> 1140 में, उनके भाई ने खलीफा की बेटी सैय्यदा ज़ुबैदा से विवाह किया।<ref>{{cite web|url=https://acikbilim.yok.gov.tr/handle/20.500.12812/441011|title=Orta Asya Türk-İslâm devletlerinde evlilikler ve evlilik gelenekleri|last=Güney|first=Alime Okumuş|date=2020-12-29|publisher=Sosyal Bilimler Enstitüsü|access-date=2024-01-13|archive-date=13 जनवरी 2024|archive-url=https://web.archive.org/web/20240113035338/https://acikbilim.yok.gov.tr/handle/20.500.12812/441011|url-status=dead}}</ref> इब्न-अल जौज़ी के अनुसार, फातिमा पढ़ना और लिखना जानती थीं।<ref name="Nashat">{{cite book|title=Women in Iran from the Rise of Islam to 1800|last1=Nashat|first1=G.|last2=Beck|first2=L.|publisher=University of Illinois Press|year=2003|isbn=978-0-252-07121-8|page=114}}</ref>
उनकी मृत्यु सितंबर 1147 में हुई।<ref>{{cite book|title=The Chronicle of Ibn Al-Athīr for the Crusading Period from Al-Kāmil Fīʼl-taʼrīkh: The years 541-589|last1=al-Athīr|first1=ʻIzz al-Dīn Ibn|last2=Richards|first2=Donaod Sidney|publisher=Ashgate|year=2006|isbn=978-0-7546-4078-3|page=16}}</ref>
== संदर्भ ==
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फरहत बशीर खान
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{{Infobox person|name=फरहत बशीर खान|image=File:Prof. FARHAT BASIR KHAN.jpg|caption=2022 में खान|birth_place=[[गोरखपुर]], उत्तर प्रदेश, भारत|other_names=एफ. बी. खान|occupation=अकादमिक, फोटोग्राफर|years_active=1975–वर्तमान}}'''फरहत बशीर खान''' एक भारतीय फोटोग्राफर हैं। उन्होंने एक अकादमिक और एक उद्योग पेशेवर के रूप में भारत में फोटोग्राफी और [[मीडिया अध्ययन]] में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।<ref>{{cite web|url=http://www.teacherguide.info/mentor_tet.php|title=Innovative photography|access-date=24 मार्च 2026|archive-date=9 दिसंबर 2013|archive-url=https://web.archive.org/web/20131209032530/http://teacherguide.info/mentor_tet.php|url-status=dead}}</ref>
खान ने एजेके मास कम्युनिकेशन रिसर्च सेंटर (AJK MCRC) में मीडिया और संचार के प्रोफेसर के रूप में भी कार्य किया है, जहाँ उन्होंने निदेशक की अनुपस्थिति में केंद्र के कार्यवाहक निदेशक के रूप में भी जिम्मेदारी संभाली है।<ref>{{cite news|url=http://www.thehindu.com/todays-paper/tp-features/tp-metroplus/article1157157.ece|title=Officiating Director at AJK MCRC|date=5 फरवरी 2011|work=The Hindu|location=चेन्नई, भारत}}</ref>
वे संगोष्ठियों के लिए मल्टीमीडिया इंस्टॉलेशन जैसे मीडिया प्रारूपों का उपयोग करते हैं। उन्होंने इंटरनेशनल सीएमएस वातावरण फिल्म फेस्टिवल (दिल्ली), फुजी फिल्म सुपर सिक्स, और [[आईआईटी कानपुर]] तथा [[आईआईटी दिल्ली]] के फिल्म फोटोग्राफी और एनीमेशन उत्सवों जैसे कई जूरी के सदस्य के रूप में कार्य किया है। वे कई वर्षों तक [[नीदरलैंड]] के एम्स्टर्डम में सामग्री निर्माण, प्रबंधन और वितरण के लिए अंतर्राष्ट्रीय प्रसारण सम्मेलन में भी जूरी सदस्य रहे हैं।
खान ने [[यूनिसेफ]] इंडिया और [[विश्व स्वास्थ्य संगठन]] (WHO) दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र के लिए पचास साल के स्मारक दृश्य-श्रव्य (Audio-Visual) कार्यक्रम का निर्माण किया और वे इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और वेब मीडिया में नियमित योगदान देते हैं।
== शैक्षणिक करियर ==
खान एजेके मास कम्युनिकेशन रिसर्च सेंटर (जामिया मिलिया इस्लामिया) से जुड़े हैं, जहाँ वे फोटोग्राफी, मल्टीमीडिया और दृश्य-श्रव्य विभागों के प्रमुख हैं और मौलाना अबुल कलाम आज़ाद चेयर संभालते हैं।
== सिनेमा, मीडिया और शिक्षा में योगदान ==
अपने शैक्षणिक करियर के दौरान उन्होंने [[शाहरुख खान]], रोशन अब्बास, [[बरखा दत्त]], [[कबीर खान (निर्देशक)|कबीर खान]], लवलीन टंडन, असीम मिश्रा और सौरभ नारंग जैसे प्रसिद्ध व्यक्तियों को पढ़ाया है।
=== व्यावसायिक कार्य ===
उन्होंने यूनिसेफ के प्रतिनिधियों के लिए 'वन वर्ल्ड' कार्यक्रम और [[एमआईटी]], रूसी फिल्म स्कूल तथा [[हार्वर्ड बिजनेस स्कूल]] जैसे संस्थानों के लिए विभिन्न अंतरराष्ट्रीय परियोजनाओं में योगदान दिया है। खान को दुनिया भर के पेशेवर फोटोग्राफरों में से यूनिसेफ और डब्ल्यूएचओ दोनों के लिए 50 साल के उपलक्ष्य में दृश्य-श्रव्य (Audio-Visual) बनाने के लिए चुना गया था।
==== सोनी वर्ल्ड फोटोग्राफी अवार्ड्स, कान्स ====
उन्होंने 2009 में [[कान्स]] में 'वर्ल्ड फोटोग्राफी अवार्ड - स्टूडेंट फोकस' भारत के नाम किया। उनके नेतृत्व में एजेके मास कम्युनिकेशन रिसर्च सेंटर की दो छात्रों की टीम ने अन्य महाद्वीपों के फाइनलिस्टों को हराकर यह जीत हासिल की थी। 2010 में भी उनके नेतृत्व वाली टीम एशिया फाइनलिस्ट रही थी। इस पुरस्कार ने विश्व फोटोग्राफी का ध्यान भारत और एजेके मास कम्युनिकेशन रिसर्च सेंटर की ओर खींचा।
==== 'फीमेल गेज़' पर शोध ====
विभिन्न महिला फोटोग्राफरों के कार्यों के अध्ययन के आधार पर, खान 'फीमेल गेज़' (महिला दृष्टि) को उस हर चीज़ से जोड़ते हैं जिसे एक महिला द्वारा फोटोग्राफ किया गया हो। उनके अनुसार, यह वास्तव में दृश्य कला के इतिहास में पुरुषों द्वारा बनाई गई उस रूढ़िवादी छवि को तोड़ता है जिसमें महिलाओं को एक खास रोशनी में दिखाया गया है।
=== सैनिकों के लिए अभियान "चिट्ठी आई है" ===
युवाओं में पत्र लिखने की आदत को प्रोत्साहित करने के लिए, खान ने #ChitthiAayiHai नामक एक मल्टीमीडिया परियोजना की कल्पना और संचालन किया। इसमें लोगों ने अपनी फोटो खिंचवाई और उसे पोस्टकार्ड पर छपवाकर अपने प्रियजनों और सैनिकों को व्यक्तिगत संदेश के साथ भेजा।
=== डॉक्युमेंटिंग रियलिटी: मेटाफ़र्स ऑफ़ लाइफ़ ===
खान ने [[लखनऊ]] के ललित कला अकादमी में एक व्याख्यान दिया, जिसमें उन्होंने एक अच्छी तस्वीर लेने के लिए ध्वनि प्रभाव, प्रकाश की दिशा और पात्रों के साथ संबंधों के महत्व पर बात की। उन्होंने छवि के महत्व और अन्य माध्यमों के साथ इसके संबंध को समझाने के लिए [[विंसेंट वैन गॉग]], [[आंद्रेई तारकोवस्की]] और [[अल्फ्रेड हिचकॉक]] के कार्यों के उदाहरणों का उपयोग किया।
== ग्रंथ सूची ==
* {{cite book|title=[[The Game of Votes]]|last1=Khan|first1=Farhat Basir|publisher=[[सेज पब्लिशिंग|सेज इंडिया]]|year=2019|isbn=9789353286927|location=भारत}}
== संदर्भ ==
{{reflist}}
{{authority control}}
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फातिमा अकबरी
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{{Infobox person
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}}
{{Hazara people}}
'''फातिमा अकबरी''' ({{langx|Prs|فاطمه اکبری}}; जन्म 1974)<ref name=VitalVoices>{{cite web|title=Fatema Akbari|publisher=[[Vital Voices|Vital Voices Global Partnership]]|url=http://www.vitalvoices.org/vital-voices-women/featured-voices/fatema-akbari|access-date=14 September 2011|archive-date=14 May 2016|archive-url=https://web.archive.org/web/20160514171217/http://www.vitalvoices.org/vital-voices-women/featured-voices/fatema-akbari|url-status=dead}}</ref> एक अफगान और जातीय [[हज़ारा लोग|हज़ारा]] उद्यमी और महिला अधिकार कार्यकर्ता हैं, जो 'गुलिस्तान सदाकत कंपनी' और [[गैर-सरकारी संगठन]] 'महिला मामला परिषद' (Women Affairs Council) की संस्थापक हैं। 2011 में, उन्हें '10,000 महिला उद्यमी उपलब्धि पुरस्कार' (10,000 Women Entrepreneurial Achievement Award) प्राप्त हुआ।<ref name=VitalVoices/><ref name=WashingtonScene>{{cite web |last=Reisner |first=Mimi |title=The Tenth Annual Vital Voices Global Leadership Awards |work=The Washington Scene |publisher=[[The Hill (newspaper)|The Hill]] |date=13 April 2011 |url=http://washingtonscene.thehill.com/party-events-pictures/archive/9143-the-tenth-annual-vital-voices-global-leadership-awards |access-date=14 September 2011 |url-status=dead |archive-url=https://web.archive.org/web/20110416222655/http://washingtonscene.thehill.com/party-events-pictures/archive/9143-the-tenth-annual-vital-voices-global-leadership-awards |archive-date=16 April 2011 }}</ref>
== करियर ==
1999 में अपने पति की मृत्यु के बाद अपने बच्चों के भरण-पोषण के लिए फातिमा अकबरी को मजबूरी में बढ़ईगीरी (carpentry) का काम चुनना पड़ा।<ref name=NATO>{{cite web|title=Afghan women carve a career in a man's world|publisher=[[NATO]]|date=8 March 2011|url=http://www.nato.int/cps/en/natolive/news_71227.htm|access-date=14 September 2011}}</ref> उन्होंने शुरू में [[ईरान]] में निर्माण स्थलों पर काम किया, जहाँ उनका परिवार [[तालिबान]] के अफगानिस्तान पर नियंत्रण के बाद भाग गया था।<ref name=VitalVoices/> 2003 में, वह स्वदेश लौटीं और [[काबुल]] में एक बढ़ईगीरी स्कूल के साथ '''गुलिस्तान सदाकत कंपनी''' की स्थापना करके फर्नीचर निर्माण व्यवसाय शुरू किया।<ref name=SylviaScott>{{cite web|last=Scott|first=Sylvia R.J.|title=Fatima Akbari, Afghan Mother, Role-Model, Social Entrepreneur and Business Owner|date=24 March 2011|url=http://sylviarjscott.com/women-entrepreneurs/fatima-akbari-afghan-mother-role-model-social-entrepreneur-and-business-owner/|access-date=14 September 2011|archive-url=https://web.archive.org/web/20110824020637/http://sylviarjscott.com/women-entrepreneurs/fatima-akbari-afghan-mother-role-model-social-entrepreneur-and-business-owner/|archive-date=24 August 2011|url-status=dead}}</ref> उन्होंने अफगानिस्तान में संघर्ष के दौरान मारे गए या विकलांग हुए पुरुषों की पत्नियों को कमाई के साधन के रूप में एक कार्यबल आधार प्रदान करने का प्रयास किया।<ref name=Wharton>{{cite web|title=Employee Dilemma: When Family and Business Don't Mix |work=Knowledge@Wharton |publisher=[[Wharton School of the University of Pennsylvania]] |date=6 January 2011 |url=http://knowledge.wharton.upenn.edu/10000women/article.cfm?articleid=6230 |access-date=14 September 2011 |url-status=dead |archive-url=https://web.archive.org/web/20111105221938/http://knowledge.wharton.upenn.edu/10000women/article.cfm?articleid=6230 |archive-date=5 November 2011 }}</ref> 2009 में, उन्होंने [[अफगानिस्तान का अमेरिकी विश्वविद्यालय]] में [[गोल्डमैन सैक्स]] द्वारा प्रायोजित [[10,000 Women|10,000 महिला]] कार्यक्रम में दाखिला लिया,<ref name=VitalVoices/> जो विकासशील देशों की महिलाओं को व्यवसाय और प्रबंधन में प्रशिक्षित करने के लिए लक्षित एक कार्यक्रम है।<ref name=GoldmanSachs>{{Cite press release |url=http://www.10000women.org/PDFs/10000Women_PressRelease.pdf |title=Goldman Sachs Launches 10,000 Women |publisher=Goldman Sachs |date=5 March 2008 |access-date=14 September 2011 |df=dmy-all |archive-url=https://web.archive.org/web/20110724202806/http://www.10000women.org/PDFs/10000Women_PressRelease.pdf |archive-date=2011-07-24 |url-status=live |archivedate=24 जुलाई 2011 |archiveurl=https://web.archive.org/web/20110724202806/http://www.10000women.org/PDFs/10000Women_PressRelease.pdf }}</ref>
अपने कार्यों और महिला साक्षरता कक्षाओं का विस्तार करते हुए, अकबरी स्थानीय नेताओं के साथ बातचीत के माध्यम से [[तालिबान]]-नियंत्रित क्षेत्रों में काम करने में सक्षम रही हैं और उन्होंने टिप्पणी की है कि ''"तालिबान के लिए देश के कार्यों में शामिल होना अच्छा होगा, ताकि वे देख सकें कि महिलाओं के घर से बाहर निकलने में कुछ भी गलत नहीं है।"''<ref name=NewYorkTimes>{{cite news|last=Kristof|first=Nicholas D.|title=What About Afghan Women?|newspaper=New York Times|location=New York City|date=23 October 2010|url=https://www.nytimes.com/2010/10/24/opinion/24kristof.html|access-date=14 September 2011}}</ref>
2004 में, फातिमा अकबरी ने दोनों लिंगों को मानवाधिकारों के बारे में शिक्षित करने के साथ-साथ महिलाओं को हस्तशिल्प में प्रशिक्षित करने के लिए अफगान [[गैर-सरकारी संगठन]] '''महिला मामला परिषद''' की स्थापना की।<ref name=BushCenterBooklet>{{Cite conference |title=Building Afghanistan's Future: Promoting Women's Freedom and Advancing their Economic Opportunity |book-title=Speakers and Panellists Bios |page=12 |publisher=[[George W. Bush Presidential Center#Policy Institute|George W. Bush Institute]] |df=dmy-all |date=March 31, 2011 |location=Dallas, Texas |url=http://www.bushcenter.com/images/downloads/TheInstitute/IntegratedInitiatives/WomensInitiatives/Speakers-and-Panelists.pdf |access-date=14 September 2011 |url-status=dead |archive-url=https://web.archive.org/web/20111218233209/http://bushcenter.com/images/downloads/TheInstitute/IntegratedInitiatives/WomensInitiatives/Speakers-and-Panelists.pdf |archive-date=18 December 2011 |archivedate=18 दिसंबर 2011 |archiveurl=https://web.archive.org/web/20111218233209/http://bushcenter.com/images/downloads/TheInstitute/IntegratedInitiatives/WomensInitiatives/Speakers-and-Panelists.pdf }}</ref> यह अनुमान लगाया गया है कि 2011 तक उन्होंने अपने एनजीओ और अपने व्यवसाय के माध्यम से पूरे अफगानिस्तान में 5,610 लोगों को प्रशिक्षित किया था।<ref name=BushCenterBooklet/>
== 10,000 महिला उद्यमी उपलब्धि पुरस्कार ==
12 अप्रैल 2011 को, अकबरी को [[Global Leadership Awards|ग्लोबल लीडरशिप अवार्ड्स]] में '10,000 महिला उद्यमी उपलब्धि पुरस्कार' से सम्मानित किया गया। पुरस्कार प्रदान करते समय, [[Vital Voices|वाइटल वॉयस]] ने उनकी सराहना करते हुए कहा:<blockquote>''"अन्य अफगान महिलाओं को सशक्त बनाने के उनके कार्य के लिए — उनके बढ़ईगीरी व्यवसाय द्वारा प्रदान किए गए प्रशिक्षण और रोजगार के माध्यम से, और उनके गैर-सरकारी संगठन (NGO) द्वारा तालिबान-नियंत्रित क्षेत्रों में महिलाओं को प्रदान किए गए साक्षरता और कौशल प्रशिक्षण के माध्यम से।"''<ref name=VitalVoices/></blockquote>
== अन्य कार्य ==
30-31 मार्च 2011 के दौरान, अकबरी [[डलास, टेक्सास]] में पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति [[जॉर्ज डब्ल्यू बुश]] और अफगान राष्ट्रपति [[हामिद करज़ई]] द्वारा आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन 'अफगानिस्तान के भविष्य का निर्माण: महिलाओं की स्वतंत्रता को बढ़ावा देना और उनके आर्थिक अवसर को आगे बढ़ाना' (Building Afghanistan’s Future: Promoting Women’s Freedom and Advancing Their Economic Opportunity) में एक पैनल सदस्य थीं।<ref name=BushCenter>{{Cite press release |title=Building Afghanistan's Future |publisher=[[George W. Bush Presidential Center#Policy Institute|George W. Bush Institute]] |date=March 31, 2011 |url=http://www.bushcenter.com/newsreleases/2011/03/building-afghanistans-future-promoting-womens-freedom-and-advancing-their-economic-opportunity |access-date=14 September 2011 |url-status=dead |archive-url=https://web.archive.org/web/20110815235136/http://www.bushcenter.com/newsreleases/2011/03/building-afghanistans-future-promoting-womens-freedom-and-advancing-their-economic-opportunity |archive-date=15 August 2011 |archivedate=15 अगस्त 2011 |archiveurl=https://web.archive.org/web/20110815235136/http://www.bushcenter.com/newsreleases/2011/03/building-afghanistans-future-promoting-womens-freedom-and-advancing-their-economic-opportunity }}</ref>
== इन्हें भी देखें ==
* [[हज़ारा लोगों की सूची]]
* [[10,000 Women]]
* [[Vital Voices]]
== सन्दर्भ ==
{{Reflist}}
== बाहरी कड़ियाँ ==
*[https://web.archive.org/web/20110425054026/http://www.vitalvoices.org/node/1564 फातिमा अकबरी @ Vital Voices]
*[https://web.archive.org/web/20120331021436/http://knowledge.wharton.upenn.edu/10000women/category.cfm?catid=10 फातिमा अकबरी @ 10,000 Women]
{{DEFAULTSORT:Akbari, Fatima}}
[[श्रेणी:अफगान महिला उद्यमी]]
[[श्रेणी:हज़ारा व्यवसायी]]
[[श्रेणी:अफगान महिला अधिकार कार्यकर्ता]]
[[श्रेणी:अफगान महिला कार्यकर्ता]]
[[श्रेणी:जीवित लोग]]
[[श्रेणी:अफगानिस्तान का अमेरिकी विश्वविद्यालय]]
[[श्रेणी:अफगान महिला कंपनी संस्थापक]]
[[श्रेणी:1974 में जन्मे लोग]]
[[श्रेणी:दायकुंडी प्रांत के लोग]]
[[श्रेणी:21वीं सदी के अफगान व्यवसायी]]
[[श्रेणी:21वीं सदी की महिला उद्यमी]]
[[श्रेणी:हज़ारा महिलाएँ]]
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फ़रिश्ते फ़ोरूग
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{{ख़राब अनुवाद|1=अंग्रेज़ी|date=मार्च 2026}}
{{Infobox person
| name = फ़रिश्ते फ़ोरूग
| native_name = فرشته فروغ
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| image = Fereshteh Forough.jpg
| caption =
| education = {{hlist|[[हेरात विश्वविद्यालय]]|[[बर्लिन का तकनीकी विश्वविद्यालय]]}}
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| years_active = 2012 - वर्तमान
| organization = कोड टू इंस्पायर
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}}
'''फ़रिश्ते फ़ोरूग''' ({{Langx|prs|فرشته فروغ}}) अफ़ग़ानिस्तान की एक प्रौद्योगिकीविद, शिक्षक और सामाजिक उद्यमी हैं।<ref name=":6" /><ref>{{Cite web |title=How learning to code can bring Afghan girls into the global tech marketplace – Women in the World |url=https://womenintheworld.com/2015/09/07/ceos-afghan-citadel-teaches-women-in-afghanistan-how-to-code/ |archive-url=https://web.archive.org/web/20190718025043/https://womenintheworld.com/2015/09/07/ceos-afghan-citadel-teaches-women-in-afghanistan-how-to-code/ |archive-date=18 जुलाई 2019 |access-date=2025-12-08 |website=womenintheworld.com |language=en-US |url-status=live }}</ref> वह 'कोड टू इंस्पायर' (सीटीआई) की संस्थापक और कार्यकारी निदेशक हैं, जो एक गैर-लाभकारी संगठन है जिसने 2015 में अफ़ग़ानिस्तान में लड़कियों के लिए पहला कोडिंग स्कूल शुरू किया था।<ref name="Guardian2016"/><ref name="FastCompany2016"/><ref name="BI2022"/> 'कोड टू इंस्पायर' के माध्यम से, उन्होंने अफ़गान लड़कियों के लिए प्रौद्योगिकी शिक्षा तक पहुँच का विस्तार करने और छात्रों को वैश्विक तकनीकी क्षेत्र में दूरस्थ रोजगार के अवसर प्राप्त करने में मदद करने के लिए काम किया है।<ref name="Reuters2021"/><ref name="ABC2021"/>
== प्रारंभिक जीवन और शिक्षा ==
[[File:Fereshteh Forough - IOM UN Migration 2017.webm|thumb|right|'इंटरनेशनल ऑर्गनाइजेशन फॉर माइग्रेशन' के एक वीडियो में फ़रिश्ते फ़ोरूग अपने परिवार के समर्थन पर चर्चा करते हुए।]]
फ़ोरूग का जन्म ईरान में अफ़गान शरणार्थी माता-पिता के यहाँ हुआ था<ref name=":7">{{Cite news |title=Fereshteh Forough – Coding the path to gender equality |url=http://explorer.sustainia.me/posts/fereshteh-forough-coding-the-path-to-gender-equality |access-date=2017-11-27 |language=en |archive-date=2017-12-07 |archive-url=https://web.archive.org/web/20171207085343/http://explorer.sustainia.me/posts/fereshteh-forough-coding-the-path-to-gender-equality |url-status=dead }}</ref> और उन्होंने अपना प्रारंभिक जीवन उसी देश में बिताया। 2001 में [[तालिबान]] के पतन के बाद उनका परिवार [[हेरात|हेरात, अफ़ग़ानिस्तान]] लौट आया।<ref>{{Cite web |date=2017-05-23 |title=Fereshteh Forough: Code to Inspire |url=https://womenforafghanwomen.org/fereshteh-forough-code-inspire/ |access-date=2025-12-07 |website=Women for Afghan Women |language=en-US}}</ref><ref name=":2">{{Cite web |title=Fereshteh Forough Is Empowering Afghani Women Through Code – Welcome to World Woman Foundation |url=http://www.worldwomanfoundation.com/fereshteh-forough-is-empowering-afghani-women-through-code/ |access-date=2017-11-27 |website=www.worldwomanfoundation.com |language=en-US}}</ref><ref>{{Cite web |last=एर्लिच |first=स्टीवन |title=Taliban Resurgence Could Threaten Afghan School Teaching Women To Code And Build Ethereum Apps |url=https://www.forbes.com/sites/stevenehrlich/2021/08/17/taliban-resurgence-could-threaten-afghan-school-teaching-women-to-code-and-build-ethereum-apps/ |access-date=2024-03-11 |website=फोर्ब्स |language=en}}</ref> उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा ईरान में पूरी की और बाद में [[हेरात विश्वविद्यालय]] से कंप्यूटर साइंस में स्नातक की डिग्री प्राप्त की, जिसके बाद उन्होंने [[बर्लिन का तकनीकी विश्वविद्यालय]] (टेक्निशे यूनिवर्सिटी बर्लिन) से सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) में मास्टर डिग्री प्राप्त की।<ref name=":3">{{Cite web |date=29 September 2016 |title=Want to visit Afghanistan? They're making an app for that |url=https://www.pbs.org/newshour/world/want-visit-afghanistan-theyre-making-app |access-date=2017-11-27 |website=पीबीएस न्यूजआवर |language=en-US}}</ref><ref name=FastCompany2016>{{Cite news|url=https://www.fastcompany.com/3065924/afghanistans-first-women-only-coding-school-just-graduated-its-first-class|title=Afghanistan's First Women-Only Coding School Just Graduated Its First Class|date=2016-12-05|work=फास्ट कंपनी|access-date=2017-11-27|language=en-US}}</ref>
उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि और एक शरणार्थी के रूप में उनके व्यक्तिगत अनुभव ने अफ़ग़ानिस्तान में लड़कियों के लिए प्रौद्योगिकी शिक्षा को बढ़ावा देने के उनके बाद के कार्यों को प्रभावित किया।<ref name="Guardian2016">{{cite news |last=किरमानी |first=शाहमीर |date=7 November 2016 |title=Afghanistan’s female coders defying gender stereotypes |url=https://www.theguardian.com/careers/2016/nov/07/afghanistan-female-coders-defying-gender-stereotypes |work=द गार्डियन}}</ref><ref name=":5">{{Cite news |date=2016-10-26 |title=Empowering Afghan Girls Through Code with Fereshteh Forough |url=https://www.creatorlab.fm/code-to-inspire-fereshteh-forough-interview/ |access-date=2017-11-27 |language=en-US}}</ref>
== करियर ==
मास्टर डिग्री प्राप्त करने के बाद, फ़ोरूग अपने पूर्व संस्थान, हेरात विश्वविद्यालय में कंप्यूटर साइंस की प्रोफेसर बन गईं।<ref name=":3" /><ref name=":1">{{Cite news |date=2016-12-12 |title=The Unstoppables: Meet the Winners of Our First-Ever Young Women's Honors |url=http://www.marieclaire.com/culture/a24040/marie-claires-young-womens-honors/ |access-date=2017-11-27 |work=मैरी क्लेयर |language=en-US}}</ref>
=== कोड टू इंस्पायर ===
फ़ोरूग ने 2015 में अफ़ग़ानिस्तान में पहले पूर्ण-महिला कोडिंग स्कूल के रूप में 'कोड टू इंस्पायर' (सीटीआई) की स्थापना की।<ref name="Guardian2016" /> हेरात में स्थित इस गैर-लाभकारी संस्था ने लड़कियों और युवा महिलाओं के लिए प्रोग्रामिंग, वेब डेवलपमेंट, ग्राफिक डिजाइन और डिजिटल साक्षरता के पाठ्यक्रम प्रदान किए।<ref name="FastCompany2016" /> 'कोड टू इंस्पायर' के शुरुआती कार्यों को क्राउडफंडिंग और अंतर्राष्ट्रीय दाताओं द्वारा समर्थित किया गया था, जिसमें एक 'इंडीगोगो' अभियान, एक 'गूगल राइज अवार्ड' अनुदान, और 'गिटहब' से शुरुआती दान, साथ ही 'द एशिया फाउंडेशन', 'डेटाकैम्प' और 'कॉनसेनसिस' जैसे संगठनों का समर्थन शामिल था।<ref>{{Cite web |date=2019-06-27 |title=Code to Inspire Founder Fereshteh Forough Is Building "Afghanistan 2.0" |url=https://www.inverse.com/science/57115-fereshteh-forough-code-to-inspire |access-date=2025-12-08 |website=इन्वर्स |language=en}}</ref><ref name="BitcoinMag2016">{{cite news |date=14 April 2016 |title=Code to Inspire: Bitcoin Gives Afghan Women Financial Freedom |url=https://bitcoinmagazine.com/culture/code-to-inspire-bitcoin-gives-afghan-women-financial-freedom-1460652348 |access-date=2025-12-08 |work=बिटकॉइन मैगज़ीन}}</ref><ref>{{Cite web |title=Celebrating a DataCamp Donates Scholarship Recipient and Code to Inspire Graduate |url=https://www.datacamp.com/blog/celebrating-saghar-hazinyar-a-datacamp-donates-scholarship-recipient-and-code-to-inspire-graduate |access-date=2025-12-08 |website=डेटाकैम्प |language=en}}</ref>
सीटीआई के छात्र मोबाइल एप्लिकेशन, वेबसाइट और शैक्षिक या सामाजिक-प्रभाव वाले गेम सहित व्यावहारिक परियोजनाओं पर काम करते हैं।<ref name="VOA2018">{{cite news |date=11 February 2018 |title=First Afghan Female Coders Create Opium-Fighting Video Game |url=https://learningenglish.voanews.com/a/first-afghan-female-coders-create-opium-fighting-video-game/4244836.html |access-date=2025-12-08 |work=वीओए लर्निंग इंग्लिश |agency=वॉयस ऑफ अमेरिका}}</ref><ref name="Guardian2016" /><ref>{{cite news |date=4 May 2018 |title=Female Afghan coders design games to fight opium and inequality |url=https://www.reuters.com/article/us-afghanistan-game-women/female-afghan-coders-design-games-to-fight-opium-and-inequality-idUSKBN1I901Z |work=रॉयटर्स}}</ref> तकनीकी प्रशिक्षण के साथ-साथ, सीटीआई ने डिजिटल भुगतान और [[क्रिप्टोकरेंसी]] में निर्देश भी शामिल किए हैं।<ref name="BitcoinMag2016" /><ref>{{Cite web |last=रॉबर्ट्स |first=डेनियल |title=Think there aren’t women in bitcoin? Think again. |url=https://fortune.com/2015/04/24/women-in-bitcoin/ |archive-url=https://archive.today/20150425000431/http://fortune.com/2015/04/24/women-in-bitcoin/ |archive-date=2015-04-25 |access-date=2025-12-08 |website=फॉर्च्यून |language=en}}</ref> अफ़ग़ानिस्तान के 2021 के बाद के आर्थिक संकट के दौरान, सीटीआई ने चुनिंदा छात्रों के परिवारों को क्रिप्टोकरेंसी में आपातकालीन सहायता भेजने के लिए अंतर्राष्ट्रीय समर्थकों के साथ भागीदारी की और प्रतिभागियों को डिजिटल वॉलेट बनाने और प्रबंधित करने, धन को स्टेबलकॉइन्स में बदलने और स्थानीय मुद्रा विनिमयकर्ताओं के माध्यम से नकद निकालने के लिए प्रशिक्षित किया।<ref name="BI2022" />
2021 में, तालिबान द्वारा देश पर नियंत्रण करने के कारण फ़ोरूग को हेरात में स्कूल के भौतिक स्थान को बंद करने के लिए मजबूर होना पड़ा।<ref name=":4">{{Cite web |date=2022-03-03 |title=The woman behind Afghanistan's first all-female coding school |url=https://www.newscentermaine.com/article/features/afghan-refugee-in-new-hampshire-creates-first-female-coding-school-in-afghanistan/97-582ac40f-94cd-4f44-a062-7b0e6bd37cc4 |access-date=2024-03-09 |website=न्यूजसेंटरमेन |language=en-US}}</ref> यह सुनिश्चित करने के लिए कि कक्षाएं वर्चुअली जारी रह सकें, सीटीआई ने जरूरतमंद छात्रों को लैपटॉप और इंटरनेट पैकेज प्रदान किए। अस्सी प्रतिशत छात्रों ने ऑनलाइन स्कूल में भाग लेना जारी रखा है।<ref name="Reuters2021">{{cite news |date=28 October 2021 |title=Afghan girls learn coding underground to bypass Taliban curbs |url=https://www.reuters.com/world/asia-pacific/afghan-girls-learn-code-underground-bypass-taliban-curbs-2021-10-28/ |work=रॉयटर्स}}</ref><ref name="ABC2021">{{cite news |date=31 October 2021 |title=Afghan girls learn to code underground to bypass Taliban curbs |url=https://www.abc.net.au/news/2021-10-31/afghan-girls-learn-code-underground-to-bypass-taliban-curbs/100581408 |work=एबीसी न्यूज}}</ref>
==== पुरस्कार ====
2016 में, सीटीआई को [[यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, बर्कले]] के 'सिट्रिस एथेना अवार्ड्स फॉर विमेन इन टेक्नोलॉजी नेक्स्ट जेनरेशन एंगेजमेंट अवार्ड' प्राप्त हुआ।<ref>{{Cite news|url=http://citris-uc.org/2016-athena-award-recipients/|title=CITRIS and the Banatao Institute announce recipients of the inaugural CITRIS Athena Awards for Women in Technology - CITRIS and the Banatao Institute|date=2016-09-28|work=सिट्रिस एंड द बनाटाओ इंस्टीट्यूट|access-date=2017-11-27|language=en-US}}</ref> संगठन को उसी वर्ष 'गूगल राइज अवार्ड' भी मिला।<ref>{{Cite web |date=2016-04-14 |title=Celebrating RISE Awards Winners Who Are Helping Increase Diversity in CS Education |url=https://blog.google/outreach-initiatives/education/celebrating-rise-awards-winners-who-are/ |access-date=2024-03-08 |website=गूगल |language=en-us}}</ref> 2017 में, सीटीआई को 'सस्टेनिया' (Sustainia) के कम्युनिटी अवार्ड से सम्मानित किया गया।<ref>{{Cite web |title=Communication {{!}} Connect4Climate |url=https://www.connect4climate.org/?q=civc-article-topic/communication&page=33 |access-date=2024-03-10 |website=कनेक्ट4क्लाइमेट |language=en}}</ref><ref name=":7" />
== वकालत ==
फ़ोरूग ने प्रौद्योगिकी, शिक्षा और डिजिटल रोजगार तक महिलाओं की पहुँच के बारे में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बात की है।<ref name="BI2022">{{cite news |date=14 January 2022 |title=Afghan women turn to cryptocurrency to feed their families |url=https://www.businessinsider.com/afghanistan-women-turn-to-cryptocurrency-to-feed-their-families-2022-1 |work=बिजनेस इनसाइडर|access-date=2025-12-07}}</ref> उन्होंने 2013 में एक 'टेड टॉक' (TED Talk) दिया और 2015 में 'क्लिंटन ग्लोबल इनीशिएटिव' में पैनल वक्ता थीं।<ref name=":0">{{Citation |last=टेड आर्काइव |title=The IT Women of Afghanistan {{!}} Fereshteh Forough |date=2017-11-20 |url=https://www.youtube.com/watch?v=DAd-T7Ssaf4 |accessdate=2017-11-27}}</ref><ref>{{Citation|last=क्लिंटन ग्लोबल इनीशिएटिव|title=Looking to the Next Frontier: Panel Discussion - CGI 2015 Annual Meeting|date=2015-10-09|url=https://www.youtube.com/watch?v=J267xB99RFM|accessdate=2017-11-27}}</ref><ref>{{Citation|last=क्लिंटन ग्लोबल इनीशिएटिव|title=Refugees, Conflict, and Community: Panel Discussion - CGI 2015 Annual Meeting|date=2015-12-09|url=https://www.youtube.com/watch?v=JDygUReyaSs|accessdate=2017-11-27}}</ref> उन्होंने गूगल की 2016 की "चेंज इज मेड विद कोड" पहल के लिए एक गुरु के रूप में भी काम किया है।<ref name=":5" /><ref>{{Cite web |date=2016-09-30 |title=Made With Code Unveiled New Project at Global Citizen Festival |url=https://www.huffpost.com/entry/made-with-code-impressed-_b_12226090 |access-date=2024-03-08 |website=हफ़पोस्ट |language=en}}</ref><ref>{{Cite web |title=Google Change Is Made with Code - The Shorty Awards |url=http://shortyawards.com/2nd-socialgood/google-change-is-made-with-code |access-date=2024-03-08 |website=शॉर्टी अवार्ड्स}}</ref> इसके अलावा, फ़ोरूग 'पीस इज लाउड' (Peace is Loud) की वक्ता हैं, जो सार्वजनिक चर्चाओं में शामिल होती हैं कि कैसे डिजिटल साक्षरता और दूरस्थ कार्य के अवसर प्रतिबंधात्मक वातावरण में महिलाओं के लिए आर्थिक संभावनाओं का विस्तार कर सकते हैं।<ref name=":6">{{Cite web |title=Fereshteh Forough {{!}} Advocate for Afghan Women {{!}} Peace is Loud |url=https://peaceisloud.org/speakers/fereshteh-forough/ |access-date=2017-12-04 |website=पीस इज लाउड |language=en-US}}</ref>
== मान्यता ==
2016 में 'मैरी क्लेयर' के पहले 'यंग विमेन ऑनर्स' में, फ़ोरूग ने 'द रिवोल्यूशनरी' पुरस्कार जीता।<ref name=":1" /> उन्हें 'द गेम अवार्ड्स 2019' में एक 'ग्लोबल गेमिंग सिटीजन' के रूप में भी मान्यता दी गई थी, जो सकारात्मक बदलाव लाने के लिए गेम का उपयोग करने वाले व्यक्ति को दिया जाता है।<ref>{{Cite web |date=2019-12-19 |title=Celebrating Global Gaming Citizens at The Game Awards 2019 |url=https://www.facebook.com/fbgaminghome/blog/celebrating-global-gaming-citizens-at-the-game-awards-2019?tags%5B0%5D=creator_blog |access-date=2024-03-10 |website=फेसबुक |language=en}}</ref><ref>{{cite AV media |url=https://www.youtube.com/watch?v=PhVsGeaTpP8 |title=Global Gaming Citizen: Code to Inspire – Fereshteh Forough |date=12 December 2019 |publisher=द गेम अवार्ड्स |access-date=2025-12-07}}</ref> उन्हें '200 विमेन: हू विल चेंज द वे यू सी द वर्ल्ड' (2017), 'अनलॉक्ड: हाउ एम्पायर्ड विमेन एम्पायर विमेन' (2021), और 'वी आर स्टिल हियर: अफ़गान विमेन ऑन करेज, फ्रीडम, एंड द फाइट टू बी हर्ड' (2022) जैसी पुस्तकों में चित्रित किया गया है।<ref>{{Cite AV media |url=https://www.twohundredwomen.com/www.twohundredwomen.com |title=200 Women |language=en |access-date=2025-12-08 |via=www.twohundredwomen.com }}{{Dead link|date=मई 2026 |bot=InternetArchiveBot }}</ref><ref>{{Cite web |last=एलायंस |first=द विमेन्स इम्पैक्ट |title=Unlocked – The Book |url=https://thewia.org/book/ |access-date=2024-03-10 |website=द विमेन्स इम्पैक्ट एलायंस (डब्ल्यूआईए)}}</ref><ref>{{Cite web |title=We Are Still Here: 9780593472903 {{!}} PenguinRandomHouse.com: Books |url=https://www.penguinrandomhouse.com/books/714175/we-are-still-here-by-edited-by-nahid-shahalimi-foreword-by-margaret-atwood/ |access-date=2024-03-10 |website=पेंगुइन रैंडम हाउस |language=en-US}}</ref>
== सन्दर्भ ==
{{Reflist}}
{{Authority control}}
[[श्रेणी:1985 में जन्मे लोग]]
[[श्रेणी:जीवित लोग]]
[[श्रेणी:अफ़गान शिक्षा कार्यकर्ता]]
[[श्रेणी:अफ़गान महिला कार्यकर्ता]]
[[श्रेणी:अफ़गान लेखक]]
[[श्रेणी:21वीं सदी की अफ़गान महिला लेखक]]
[[श्रेणी:हेरात विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र]]
[[श्रेणी:बर्लिन के तकनीकी विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र]]
[[श्रेणी:द गेम अवार्ड्स विजेता]]
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यौन इच्छा
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text/x-wiki
[[File:Aristide_Maillol_-_Désir.jpg|अंगूठाकार|अरिस्टाइड माइलोल द्वारा ''इच्छा'']]
'''यौन इच्छा''' एक भावना और प्रेरक स्थिति है जो यौन वस्तुओं या गतिविधियों में रुचि, या यौन वस्तुओं की तलाश करने या यौन गतिविधियों में संलग्न होने के लिए एक ड्राइव द्वारा विशेषता है।<ref>{{Cite journal|last=Mobbs|first=Anthony E. D.|date=2020|title=An atlas of personality, emotion and behaviour|journal=PLOS ONE|volume=15|issue=1|bibcode=2020PLoSO..1527877M|doi=10.1371/journal.pone.0227877|pmc=6974095|pmid=31961895|doi-access=free}}</ref><ref>{{Cite journal|last=Mobbs|first=Anthony E. D.|date=2020-01-21|title=An atlas of personality, emotion and behaviour|journal=PLOS ONE|language=en|volume=15|issue=1|bibcode=2020PLoSO..1527877M|doi=10.1371/journal.pone.0227877|issn=1932-6203|pmc=6974095|pmid=31961895|doi-access=free}}</ref><ref name="Regan&Atkins2006">{{Cite journal|last=Regan|first=P.C.|last2=Atkins|first2=L.|year=2006|title=Sex Differences and Similarities in Frequency and Intensity of Sexual Desire|journal=Social Behavior & Personality|volume=34|issue=1|pages=95–101|doi=10.2224/sbp.2006.34.1.95|s2cid=29944899|doi-access=free}}</ref> यह [[मानव कामुकता|कामुकता]] का एक पहलू है, जो एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में काफी भिन्न होता है, और परिस्थितियों के आधार पर भी उतार-चढ़ाव होता है। यह मानव जीवन में सबसे आम यौन घटना हो सकती है।<ref name="Regan&Atkins2006" />
यौन इच्छा एक व्यक्तिपरक भावना की स्थिति है जो आंतरिक और बाहरी दोनों संकेतों से शुरू हो सकती है, और इसके परिणामस्वरूप अत्यधिक यौन व्यवहार हो सकता है या नहीं भी हो सकता है।<ref name="Becketal1991">{{Cite journal|last=Beck|first=J.G.|last2=Bozman|first2=A.W.|last3=Qualtrough|first3=T.|year=1991|title=The Experience of Sexual Desire: Psychological Correlates in a College Sample|url=https://archive.org/details/sim_journal-of-sex-research_1991-08_28_3/page/442|journal=The Journal of Sex Research|volume=28|issue=3|pages=443–456|doi=10.1080/00224499109551618}}</ref> इच्छा को कल्पना और यौन कल्पनाओं के माध्यम से, या किसी ऐसे व्यक्ति को समझने से जगाया जा सकता है जिसे कोई आकर्षक पाता है।<ref name="Toates2009">{{Cite journal|last=Toates|first=F.|year=2009|title=An Integrative Theoretical Framework for Understanding Sexual Motivation, Arousal, and Behavior|journal=Journal of Sex Research|volume=46|issue=2–3|pages=168–193|doi=10.1080/00224490902747768|pmid=19308842|s2cid=24622934}}</ref> यह यौन तनाव के माध्यम से भी बनाया और बढ़ाया जाता है, जो यौन इच्छा के कारण होता है जिस पर अभी तक कार्रवाई नहीं की गई है। मनुष्यों में यौन इच्छा की शारीरिक अभिव्यक्तियों में चाटना, चूसना, जीभ का बाहर निकलना और होंठों को छूना और छूना शामिल है।<ref name="Gonzagaetal2006">{{Cite journal|last=Gonzaga|first=G. C.|last2=Turner|first2=R. A.|last3=Keltner|first3=D.|last4=Campos|first4=B.|last5=Altemus|first5=M.|year=2006|title=Romantic Love and Sexual Desire in Close Relationships|journal=Emotion|volume=6|issue=2|pages=163–179|citeseerx=10.1.1.116.1812|doi=10.1037/1528-3542.6.2.163|pmid=16768550}}</ref>
इच्छा सहज या उत्तरदायी, सकारात्मक या नकारात्मक हो सकती है, और एक स्पेक्ट्रम के साथ तीव्रता में भिन्न हो सकती है।<ref name="Basson2000">{{Cite journal|last=Basson|first=R.|year=2000|title=The Female Sexual Response: A Different Model|journal=Journal of Sex & Marital Therapy|volume=26|issue=1|pages=51–65|doi=10.1080/009262300278641|pmid=10693116|doi-access=free}}</ref>
==संदर्भ==
[[श्रेणी:अतिपरिचित सम्बन्ध]]
[[श्रेणी:मैथुन]]
[[श्रेणी:मानव कामुकता]]
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कुलपतियों की गुफा
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InternetArchiveBot
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wikitext
text/x-wiki
{{ख़राब अनुवाद|date=अप्रैल 2026}}
{{सफाई|reason=अस्पष्ट भाषा|date=अप्रैल 2026}}
{{ज्ञानसंदूक प्राचीन स्थल|name=कुलपतियों की गुफा|native_name={{lang|hbo|{{Script/Hebrew|מְעָרַת הַמַּכְפֵּלָה}}}}<br/>{{lang|ar|المسجد الإبراهيمي}}|alternate_name=कुलपतियों का मक़बरा, मकपेला की गुफा, इब्राहीम का मक़बरा, इब्राहीमी मस्जिद|image=Palestine Hebron Cave of the Patriarchs.jpg|alt=|caption=परिसर का दक्षिणी दृश्य, 2009|image_size=250px|map_type=West Bank#Palestine|map_alt=Map showing the location of the Cave of the Patriarchs within the West Bank and the State of Palestine|map_size=220|location=[[हेब्रोन]]|region=[[पश्चिमी तट]]|coordinates={{Coord|31.5247|35.1107|type:landmark_region:PS|display=inline,title}}|type=मक़बरा, [[मस्जिद]], [[आराधनालय]]<ref name ="Berney"/>|part_of=|length=|width=|area=|height=|builder=|material=|built=|abandoned=|epochs=|cultures=[[इब्रानी लोग|इब्रानी]], [[बाइज़ेंटाइन साम्राज्य|बाइज़ेंटाइन]], [[अय्यूबी राजवंश|अय्यूबी]], [[क्रूसयुद्ध|क्रूसयोद्धा]], [[उस्मानी साम्राज्य|उस्मानी]]|dependency_of=|occupants=|event=|excavations=|archaeologists=|condition=|ownership=|public_access=|website=}}
'''कुलपतियों की गुफा''' या '''कुलपतियों का मक़बरा''' [[पश्चिमी तट]] के [[पुराना हेब्रोन शहर|पुराने हेब्रोन शहर]] में स्थित गुफाओं की शृंखला है, जिसे [[यहूदी]] '''मकपेला की गुफा''' ({{langx|hbo|מְעָרַת הַמַּכְפֵּלָה|4=दोहरे की गुफा}}) और [[मुसलमान]] '''इब्राहीमी मस्जिद''' ({{langx|ar|المسجد الإبراهيمي}}), या '''इब्राहीम का मक़बरा''' ({{langx|ar|الحرم الإبراهيمي}}) के नाम से जानते हैं।<ref>{{Cite book|url=https://www.google.com.sa/books/edition/%D9%85%D8%B0%D8%A8%D8%AD%D8%A9_%D8%A7%D9%84%D8%AD%D8%B1%D9%85_%D8%A7%D9%84%D8%A5%D8%A8%D8%B1%D8%A7%D9%87%D9%8A%D9%85/cFNIAAAAMAAJ?hl=en&gbpv=1&bsq=%D8%A7%D9%84%D9%85%D8%B3%D8%AC%D8%AF+%D8%A7%D9%84%D8%A5%D8%A8%D8%B1%D8%A7%D9%87%D9%8A%D9%85%D9%8A&dq=%D8%A7%D9%84%D9%85%D8%B3%D8%AC%D8%AF+%D8%A7%D9%84%D8%A5%D8%A8%D8%B1%D8%A7%D9%87%D9%8A%D9%85%D9%8A&printsec=frontcover|title=مذبحة الحرم الإبراهيمي: القضية المنسية وسط التخاذل العربي والاستجابة لأنغام السلام المزيف|last=Sammān|first=Muḥammad ʻAbd Allāh|last2=الله|first2=سمان، محمد عبد|date=1994|publisher=دار الاعتصام،|language=ar}}</ref><ref>{{Cite book|url=https://www.google.com.sa/books/edition/%D8%A7%D9%84%D8%AF%D8%B9%D9%88%D8%A9_%D9%85%D8%AC%D9%84%D8%A9_%D8%A5%D8%B3%D9%84%D8%A7%D9%85%D9%8A%D8%A9_%D8%A7/0EEkAQAAIAAJ?hl=en&gbpv=1&bsq=%D8%A7%D9%84%D9%85%D8%B3%D8%AC%D8%AF+%D8%A7%D9%84%D8%A5%D8%A8%D8%B1%D8%A7%D9%87%D9%8A%D9%85%D9%8A&dq=%D8%A7%D9%84%D9%85%D8%B3%D8%AC%D8%AF+%D8%A7%D9%84%D8%A5%D8%A8%D8%B1%D8%A7%D9%87%D9%8A%D9%85%D9%8A&printsec=frontcover|title=الدعوة :مجلة إسلامية اسبوعية جامعة|date=1999|publisher=مؤسسة الدعوة الإسلامية الصحفية،|language=ar}}</ref><ref>{{Cite book|url=https://www.google.com.sa/books/edition/%D8%A7%D9%84%D9%85%D9%88%D8%B3%D9%88%D8%B9%D8%A9_%D8%A7%D9%84%D8%B9%D8%B1%D8%A8%D9%8A%D8%A9_%D8%A7%D9%84%D8%B9%D8%A7/wsU-EQAAQBAJ?hl=en&gbpv=1&dq=%D8%A7%D9%84%D9%85%D8%B3%D8%AC%D8%AF+%D8%A7%D9%84%D8%A5%D8%A8%D8%B1%D8%A7%D9%87%D9%8A%D9%85%D9%8A&pg=PT162&printsec=frontcover|title=الموسوعة العربية العالمية - المجلد العاشر - خ - د - ذ|last=والتوزيع|first=مؤسسة أعمال الموسوعة للنشر|date=1999|publisher=العبيكان للنشر|isbn=978-9960-803-42-5|language=ar}}</ref> इसे [[यहूदी धर्म]], [[ईसाई धर्म]], और [[इस्लाम]] में एक पवित्र स्थल माना जाता है।<ref name=":0">{{cite book|title=Where Islam and Judaism Join Together|last=Har-El|first=Shai|year=2014|isbn=978-1-349-48283-2|pages=69–86|chapter=The Gate of Legacy|doi=10.1057/9781137388124_6|quote=Hebron is regarded by the Jews as second in sanctity to Jerusalem, and by the Muslims as the fourth-holiest city after Mecca.}}</ref><ref name=":1">{{cite journal|last1=Alshweiky|first1=Rabab|last2=Gül Ünal|first2=Zeynep|year=2016|title=An approach to risk management and preservation of cultural heritage in multi identity and multi managed sites: Al-Haram Al-Ibrahimi/Abraham's Tombs of the Patriarchs in Al-Khalil/Hebron|journal=Journal of Cultural Heritage|volume=20|pages=709–14|doi=10.1016/j.culher.2016.02.014|quote=According to the Islamic belief, Al-Haram Al-Ibrahimi/Tombs of the Patriarchs is considered to be the fourth most important religious site in Islam after Mecca, Medina and Jerusalem and the second holiest place after the Aqsa Mosque in Palestine. Additionally, according to the Jewish belief, it is the world's most ancient Jewish site and the second holiest place for the Jews, after Temple Mount in Jerusalem.}}</ref><ref name="sellic1994">{{cite journal|last=Sellic|first=Patricia|year=1994|title=The Old City of Hebron: Can It be Saved?|url=https://archive.org/details/sim_journal-of-palestine-studies_summer-1994_23_4/page/68|journal=Journal of Palestine Studies|volume=23|issue=4|pages=69–82|doi=10.2307/2538213|jstor=2538213|quote=This deterioration has long-term implications for the Palestinians, since the old city of Hebron forms an important part of the Palestinian and indeed the Muslim heritage. It is one of the four holiest cities in Islam, along with Mecca, Medina, and Jerusalem.}}</ref>
[[इब्राहीमी धर्मों]] के अनुसार, [[इब्राहीम]] ने इस गुफा को समाधि के तौर से ख़रीदा था। दीवार के ऊपर [[हेरोद महान|हेरोड]] के काल से एक चौकोरी दीवार है।<ref>{{cite journal|last=Jacobsson|first=David M.|year=2000|title=Decorative Drafted-margin Masonry in Jerusalem and Hebron and its Relations|journal=The Journal of the Council for British Research in the Levant|volume=32|pages=135–54|doi=10.1179/lev.2000.32.1.135|issn=0075-8914|s2cid=162263112}}</ref> [[बाइज़ेंटाइन साम्राज्य|बाइज़ेंटाइन]] शासन के समय, यहाँ एक ईसाई [[बसिलिका]] को निर्मित किया गया था; [[सीरिया पर मुस्लिम विजय]] के बाद उसे इब्राहीमी मस्जिद में बनाया गया था। 12वीं शताब्दी तक, मस्जिद और उसके आसपास के क्षेत्र क्रूसयोद्धाओं के तहत थे, किन्तु 1188 को [[अय्यूबी साम्राज्य|अय्यूबी]] सुल्तान [[सलाउद्दीन]] ने उन्हें फिर से पाकर संरचना को वापस मस्जिद में बदला।<ref>{{cite web|url=https://www.pri.org/stories/2015-11-10/hebron-jews-and-palestinians-share-holy-site-begrudgingly|title=In Hebron, Israelis and Palestinians share a holy site ... begrudgingly|date=10 November 2015|work=PRI|archive-url=https://web.archive.org/web/20181129225306/https://www.pri.org/stories/2015-11-10/hebron-jews-and-palestinians-share-holy-site-begrudgingly|archive-date=29 November 2018|access-date=29 November 2018|url-status=live}}</ref> 1119 में, एक मठवासी को गुफा के अंदर हड्डियाँ मिलीं, यह मानते हुए कि वह [[कुलपति (बाइबिल)|कुलपतियों]] कि हड्डियाँ थीं।<ref name="BAR">{{cite web|url=https://www.baslibrary.org/biblical-archaeology-review/11/3/1|title=Patriarchal Burial Site Explored for First Time in 700 Years|author=Nancy Miller|date=May–June 1985|publisher=Biblical Archaeology Society|archive-url=https://web.archive.org/web/20210310071640/https://www.baslibrary.org/biblical-archaeology-review/11/3/1|archive-date=10 March 2021|access-date=21 January 2022|url-status=live}}</ref>
1967 में [[छः दिन का युद्ध|छह दिनों के युद्ध]] के दौरान, [[इसराइल]] ने [[पश्चिमी तट पर जॉर्डनी क़ब्ज़ा|पश्चिमी तट]] पर क़ब्ज़ा किया, जिसके बाद मस्जिद के आधे भाग को [[आराधनालय]] बनाया गया था।<ref>{{cite book|title=Shalom/Salaam/Peace: A Liberation Theology of Hope|last=Hammond|first=Constance A.|page=37}}</ref><ref name="Cohen1985">{{cite book|url=https://books.google.com/books?id=awq8AAAAIAAJ&pg=PA215|title=Human rights in the Israeli-occupied territories, 1967–1982|author=Esther Rosalind Cohen|publisher=Manchester University Press ND|year=1985|isbn=978-0-7190-1726-1|page=215|access-date=14 October 2010|archive-url=https://web.archive.org/web/20140103052543/http://books.google.com/books?id=awq8AAAAIAAJ&pg=PA215|archive-date=3 January 2014|url-status=live}}</ref> 1968 को, [[रोश हशाना]] और [[योम किपुर]] के समय विशेष यहूदी सेवाएँ अधिकृत की गई थीं।
== नाम ==
=== [[अमोराइम|अमोराई]] व्युत्पत्ति ===
''मकपेला'' नाम का मूल अज्ञात है। इसका अर्थ "दोहरा", "गुणित" या "दोगुना" हो सकता है, जिस प्रकार गुफा का नाम "दोहरे की गुफा" है। [[तालमुद|तलमूद]] के अध्याय एरुविन 53a में दो सिद्धांत माने जाते हैं:<blockquote>''मकपेला'' की गुफा: <blockquote>[[अब्बा अरिख़ा]] और [[शमूएल, नेहार्डिया के अमोरा|शमूएल]] [बहस किए]; एक ने कहा, "दो कक्ष हैं, एक दूसरे के पीछे", और दूसरे ने कहा, "दो कक्ष हैं, एक दूसरे के ऊपर।"{{Efn|In all printings of b. Eruvin, beginning with the 1509 Florence edition, this line reads "one chamber and a mezzanine above it", which reflects the citation of [[Rashi|Samuel b. Isaac]] in his commentary to Gen. 23:9. "Two chambers, one above the other", however, reflects all extant manuscripts and b. Bava Batra 58a.}}</blockquote>यह बात कि कक्ष ढेर हैं काफ़ी है—यह ''मकपेला'' है। हालाँकि, यदि एक दूसरे के पीछे है, तो फिर ''मकपेला'' क्या है? कि वह जोड़ों में मौजूद है:<blockquote>"और [[याक़ूब]] [[मम्रे]] में, जो किर्यतर्बा, अर्थात [[हब्रोन]] है, अपने पिता [[इसहाक|इसहाक़]] के पास आया ..." (उत्पत्ति 35:27)। इसाक लोहार ने कहा, "चार जोड़ों का शहर: [[आदम और हव्वा]], [[इब्राहीम]] और [[सारा]], [[इसहाक|इसहाक़]] और [[रिबका]], एवं [[याक़ूब]] और [[लिआ]]"।</blockquote></blockquote>बावा बत्रा 58a के अनुसार, अब्बा अरिख़ा और नेहार्डिया के शमूएल ने माने कि दोनों कक्ष समरूप हैं। [[उत्पत्ति रब्बा]] 58 एक तीसरा सिद्धांत पेश करता है:<blockquote>"सो एप्रोन की भूमि, जो माम्रे के सम्मुख की ''मकपेला'' में थी ..." (उत्पत्ति 23:17)। यह सिखाता है कि यह [अंदर] गाड़े गए व्यक्ति की ख्याति को दोगुना करता है, क्योंकि जो भी अंदर है उसे [स्वर्ग में] बहुत बड़ा इनाम मिले गा।</blockquote>
=== बाद की नामव्युत्पत्तियाँ ===
[[सादिया गाओन]] और [[अब्राहम इब्न एजरा|अब्राहम इब्न एज़्रा]] मानते थे कि नाम का अर्थ "गुफा के अंदर गुफा" है।<ref name=":2">{{Cite web|url=https://mg.alhatorah.org/Full/Bereshit/23.8#e0n6|title=MikraotGedolot – AlHaTorah.org|website=mg.alhatorah.org|language=he|archive-url=https://web.archive.org/web/20221127111431/https://mg.alhatorah.org/Full/Bereshit/23.8#e0n6|archive-date=27 November 2022|access-date=2022-06-06|url-status=live}}</ref> शमूएल बेन मेइर,<ref>{{Cite web|url=https://www.sefaria.org/Rashbam_on_Genesis.23.9.1|title=Rashbam on Genesis 23:9:1|website=www.sefaria.org|archive-url=https://web.archive.org/web/20220607015607/https://www.sefaria.org/Rashbam_on_Genesis.23.9.1|archive-date=7 June 2022|access-date=2022-06-06|url-status=live}}</ref> मोशे बेन नाख़मान,<ref>{{Cite web|url=https://www.sefaria.org/Ramban_on_Genesis.23.9.2|title=Ramban on Genesis 23:9:2|website=www.sefaria.org|archive-url=https://web.archive.org/web/20221203201404/https://www.sefaria.org/Ramban_on_Genesis.23.9.2|archive-date=3 December 2022|access-date=2022-06-06|url-status=live}}</ref> ओबद्याह स्फ़ोर्नो,<ref>{{Cite web|url=https://www.sefaria.org/Sforno_on_Genesis.23.9.1|title=Sforno on Genesis 23:9:1|website=www.sefaria.org|archive-url=https://web.archive.org/web/20220607015609/https://www.sefaria.org/Sforno_on_Genesis.23.9.1|archive-date=7 June 2022|access-date=2022-06-06|url-status=live}}</ref> मोसेस मेंडेलज़ोन, एर्न्स्ट रोसेनमुलर, और सामुएल दाविद लुत्सात्तो के अनुसार,<ref name=":2" /> ''मकपेला'' एक व्याकरण नहीं बल्कि भूमि का नाम है।<ref>{{cite journal|last=Merrill|first=Selah|year=1890|title=The Cave of Machpelah|journal=The Old and New Testament Student|volume=11|issue=6|pages=327–335|doi=10.1086/470621|jstor=3157472|doi-access=}}</ref> यह सिद्धांत [https://www.wordproject.org/bibles/in/01/49.htm#9 उत्पत्ति 49:30] ("अर्थात उसी गुफा में जो कनान देश में मम्रे के साम्हने वाली मकपेला की भूमि में है . . .") जैसे कुछ श्लोक की व्याख्याओं से समर्थित है। ''मकपेला'' की सही व्याख्या पर चर्चा हुई है।<ref>{{cite web|url=https://biblehub.com/commentaries/genesis/23-9.htm|title=Genesis 23:9|archive-url=https://web.archive.org/web/20181204053916/https://biblehub.com/commentaries/genesis/23-9.htm|archive-date=4 December 2018|access-date=4 December 2018|url-status=live}}</ref>
''[[स्ट्रांग की अनुक्रमणिका]] मकपेला'' को ''कपल'' ({{Langx|hbo|כָּפַל|4=दोगुना करना}}) क्रिया से व्युत्पन्न करता है।<ref>{{cite web|url=http://www.blueletterbible.org/lang/lexicon/lexicon.cfm?Strongs=H4375&t=KJV|title=Strong's H4375 - Makpela|publisher=Blue Letter Bible|archive-url=https://web.archive.org/web/20121022162658/http://www.blueletterbible.org/lang/lexicon/lexicon.cfm?Strongs=H4375&t=KJV|archive-date=22 October 2012|access-date=2022-06-07|url-status=live}}</ref><ref>{{cite web|url=http://www.blueletterbible.org/lang/lexicon/lexicon.cfm?Strongs=H3717&t=KJV|title=Strong's H3717 - kaphal|publisher=Blue Letter Bible|archive-url=https://web.archive.org/web/20120318104354/http://www.blueletterbible.org/lang/lexicon/lexicon.cfm?Strongs=H3717&t=KJV|archive-date=18 March 2012|access-date=2022-06-07|url-status=live}}</ref>
== बाइबिल में ==
[[File:The_Bible_and_its_story.._(1908)_(14576508228).jpg|अंगूठाकार|गुफा में सारा का दफ़न, [[गुस्ताव दोरे]] द्वारा काष्ठकला]]
[[File:Grave_of_Sarah_Ibrahimi_mosque,hebron.jpg|अंगूठाकार|मस्जिद में सारा का क़ब्र]]
[https://www.wordproject.org/bibles/in/01/23.htm#1 उत्पत्ति 23:1–20] के अनुसार, इब्राहीम की पत्नी सारा की मृत्यु 127 वर्ष की आयु में कनान के [[किर्यतर्बा]] में हुई, जिस प्रकार वह बाइबिल में एकल स्त्री है जिसकी आयु दी गई है। इब्राहीम उसके लिए रोने पीटने जाता है। बाद में वह [[हत्ती लोग|हत्तियों]] से बात करता है। वह उन्हें कहता है कि वह उनके बीच विदेशी है और उनसे एक क़ब्रिस्तान माँगता है जहाँ वह अपने मुर्दे को गाड़ सके। हत्तियों इब्राहीम की ख़ुशामद करते हैं, उन्हें अपना प्रभु कहकर बोलते हैं कि वह अपने मुर्दे को उनके किसी भी क़ब्रों में गाड़ सकता है। इब्राहीम उनके प्रस्ताव को अस्वीकार करके उनके राजा, एप्रोन, के पास जाकर उनसे "पूरे दाम" के लिए मकपेला की गुफा माँगता है। यह सुनकर एप्रोन कहता है कि वह मुफ़्त में भूमि और गुफा दे सकता है, यह जानते हुए कि इब्राहीम उन्हें हमेशा के लिए नहीं रख पाएगा।<ref name="theol">{{cite web|url=https://www.theologyofwork.org/old-testament/genesis-12-50-and-work/abraham-genesis-121-2511/a-burial-plot-for-sarah-genesis-231-20|title=A Burial Plot for Sarah (Genesis 23:1–20)|archive-url=https://web.archive.org/web/20181201222824/https://www.theologyofwork.org/old-testament/genesis-12-50-and-work/abraham-genesis-121-2511/a-burial-plot-for-sarah-genesis-231-20|archive-date=1 December 2018|access-date=3 December 2018|url-status=live}}</ref> इब्राहीम इसे इनकार करके भूमि को ख़रीदने का प्रस्ताव देता है। एप्रोन कहता है कि भूमि का दाम 400 रजत शेकेल है और इब्राहीम बिना सौदा करके दाम मान लेता है।<ref name="theol" /> वह फिर अपनी पत्नी [[सारा]] को वहाँ गाड़ता है।<ref>[https://www.wordproject.org/bibles/in/01/23.htm#9 उत्पत्ति 23:9–20]</ref>
सारा का दफ़न बाइबिल का पहला उल्लिखित दफ़न है।<ref>[[wikisource:Easton's Bible Dictionary (1897)/Burial|Easton's Bible Dictionary "Burial"]]</ref>
इब्राहीम 175 वर्ष तक जीया, जिसके बाद उसके बेटे इसहाक़ और इस्माइल ने उसे गुफा में गाड़ा।<ref>[https://www.wordproject.org/bibles/in/01/25.htm#7 उत्पत्ति 25:7–8], [https://www.wordproject.org/bibles/in/58/11.htm#9 इब्रानियों 11:9]</ref> इसहाक़ को वह गुफा विरासत में मिली।<ref>[https://www.wordproject.org/bibles/in/01/25.htm#5 उत्पत्ति 25:5–6]</ref><ref>[[wikisource:Easton's Bible Dictionary (1897)/Machpelah|Easton's Bible Dictionary "Machpelah"]]</ref> उसकी मृत्यु के बाद, उसके बेटे एसाव और याकूब ने भी उसे गुफा में गाड़ा।<ref>[https://www.wordproject.org/bibles/in/01/35.htm#28 उत्पत्ति 35:28–29]</ref> इसराइलियों को अपने आख़िरी संदेश में, याक़ूब ने कहा कि इसहाक़ की पत्नी रिबका को भी मकपेला में गाड़ा गया है। याक़ूब ख़ुद 147 वर्ष की आयु में मर जाता है।<ref>[https://www.wordproject.org/bibles/in/01/47.htm#28 उत्पत्ति 47:28]</ref>
उत्पत्ति पुस्तक के अंतिम अध्याय में, यूसुफ़ उसके वैद्यों से अपने पिता याक़ूब की लोथ में सुगंधद्रव्य भरवाता है, जिसके बाद उसे मिस्र से लेकर मकपेला की गुफा में गाड़ा जाता है।<ref>[https://www.wordproject.org/bibles/in/01/50.htm#1 उत्पत्ति 50:1–14]</ref> जब यूसुफ़ का निधन हुआ, उसकी लोथ में सुगंधद्रव्य भरे गए। जब इसराइली [[प्रतिज्ञात भूमि]] पहुँचे, उसकी हड्डियाँ शकेम में गाड़ी गई थी।<ref>[https://www.wordproject.org/bibles/in/06/24.htm#32 यहोशू 24:32]</ref>
=== अन्य ग्रंथों में ===
[[उगारिती ग्रंथ|उगारिती ग्रंथों]] (13वीं–12वीं शताब्दी ई.पू.) में खोजे गए छह संपत्ति अनुबंधों में से तीन 400 रजत शेकेल के थे, जो बाइबिल में मकपेला का भी दाम था। इससे पता चलता है कि 400 शेकेल कनानी संपत्ति का आम दाम होता था।<ref>Stieglitz, Robert R. “[http://www.jstor.org/stable/598945 Commodity Prices at Ugarit.] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20200821040528/https://www.jstor.org/stable/598945|date=21 August 2020}}” ''Journal of the American Oriental Society'', vol. 99, no. 1, 1979, pp. 15–23.</ref>
==सन्दर्भ==
{{टिप्पणीसूची}}
[[श्रेणी:इब्राहीम]]
[[श्रेणी:इसहाक़]]
[[श्रेणी:याक़ूब]]
[[श्रेणी:यहूदी मक़बरे]]
[[श्रेणी:अरबी वास्तुकला]]
[[श्रेणी:उत्पत्ति पुस्तक]]
[[श्रेणी:फ़िलिस्तीन की गुफाएँ]]
[[श्रेणी:सेनोटैफ़]]
[[श्रेणी:ईसाई तीर्थ]]
[[श्रेणी:इब्रानी बाइबिल के स्थान]]
[[श्रेणी:इसराइल राष्ट्रीय धरोहर स्थल]]
[[श्रेणी:बाइबिल के व्यक्तियों के मक़बरे]]
[[श्रेणी:तौरात के स्थान]]
[[श्रेणी:ज़ियारत]]
[[श्रेणी:फ़िलिस्तीन में विश्व धरोहर स्थल]]
[[श्रेणी:फ़िलिस्तीन में मक़बरे]]
[[श्रेणी:पवित्र गुफाएँ]]
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:नमस्कार
:मैंने लेख में किसी भी प्रकार का प्रचार करने का उद्देश्य नहीं रखा है। “यूथ की आवाज़” एक स्वतंत्र डिजिटल मीडिया मंच है, जिसके बारे में कई विश्वसनीय और स्वतंत्र स्रोतों जैसे NDTV, The Quint, TechCircle, Forbes तथा World Summit Awards में उल्लेख किया गया है।
:मैंने अब लेख को विकिपीडिया की नीतियों के अनुरूप संशोधित कर दिया है, जिसमें:
:तटस्थ (neutral) भाषा का उपयोग किया गया है
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:स्वतंत्र और विश्वसनीय स्रोतों को जोड़ा गया है
:विषय की उल्लेखनीयता (notability) को स्पष्ट किया गया
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:यदि लेख में और सुधार की आवश्यकता हो तो कृपया मार्गदर्शन प्रदान करें, मैं उसे सुधारने के लिए तैयार हूँ।
:धन्यवाद [[सदस्य:Citexji|Citexji]] ([[सदस्य वार्ता:Citexji|वार्ता]]) 04:56, 11 अप्रैल 2026 (UTC)
::नमस्ते! आपके हाल ही के लेखों में Encyclopaedia Britannica से लिए गए अनेक संदर्भ प्रयुक्त किए गए हैं। किंतु उन संदर्भों के लिंक खोलने पर “पृष्ठ नहीं मिला” का संदेश प्राप्त हो रहा है।
::अतः आपसे अनुरोध है कि कृपया इन सभी संदर्भों की जाँच कर उन्हें अद्यतन करें, ताकि वे सही रूप से कार्य करें। साथ ही, यदि संभव हो तो स्थायी एवं विश्वसनीय संदर्भ प्रदान करने का कष्ट करें, जिससे भविष्य में इस प्रकार की समस्या उत्पन्न न हो। कृपया इस विषय पर आवश्यक सुधार करने का कष्ट करें। <span style="color:orange;">☆★</span>[[सदस्य:चाहर धर्मेंद्र|<u><span style="color:Cyan;">चाहर धर्मेंद्र</span></u>]]<sup>[[सदस्य वार्ता:चाहर धर्मेंद्र|<small style="color:orange">--राम राम जी--</small>]]</sup> 06:05, 11 अप्रैल 2026 (UTC)
:::नमस्ते
:::आपके सुझाव के लिए धन्यवाद।
:::मैंने लेख में प्रयुक्त सभी संदर्भों की जाँच की है और जिन लिंक में समस्या थी, उन्हें अद्यतन/सुधार दिया है। अब केवल वही संदर्भ रखे गए हैं जो सही रूप से कार्य कर रहे हैं और विश्वसनीय स्रोतों से हैं।
:::आगे से मैं यह सुनिश्चित करूँगा कि सभी संदर्भ सटीक और सक्रिय (working) हों।
:::धन्यवाद [[सदस्य:Citexji|Citexji]] ([[सदस्य वार्ता:Citexji|वार्ता]]) 06:11, 11 अप्रैल 2026 (UTC)
==इस विषय पर ध्यान दे==
नमस्ते! हाल ही में आपने “[[समाचार एजेंसी]]” शीर्षक से एक लेख बनाया है, जबकि “[[समाचार संस्था]]” नाम से इसी विषय पर लेख पहले से ही उपलब्ध है। अतः आपसे अनुरोध है कि जब भी आप किसी नए विषय पर लेख बनाना प्रारंभ करें, उससे पूर्व यह अवश्य जाँच लें कि उस विषय से संबंधित कोई लेख पहले से मौजूद तो नहीं है। इससे सामग्री की गुणवत्ता और एकरूपता बनी रहेगी। <span style="color:orange;">☆★</span>[[सदस्य:चाहर धर्मेंद्र|<u><span style="color:Cyan;">चाहर धर्मेंद्र</span></u>]]<sup>[[सदस्य वार्ता:चाहर धर्मेंद्र|<small style="color:orange">--राम राम जी--</small>]]</sup> 13:24, 11 अप्रैल 2026 (UTC)
:* ऐसा आपने [[फोटो पत्रकारिता]] शीर्षक लेख में भी किया है, जबकि [[फोटो जर्नलिज़्म]] शीर्षक से लेख पहले से ही उपलब्ध है और उस पर आपने स्वयं भी सम्पादन किया है। इसके बावजूद उसी विषय पर अलग शीर्षक से नया लेख बनाना उचित प्रतीत नहीं होता, क्योंकि इससे अनावश्यक दोहराव और भ्रम की स्थिति उत्पन्न होती है। ऐसे मामलों में नया लेख बनाने के बजाय, पूर्व में उपलब्ध लेख के नाम परिवर्तन हेतु उसे नामांकित करना अधिक उपयुक्त रहता।
:<span style="color:orange;">☆★</span>[[सदस्य:चाहर धर्मेंद्र|<u><span style="color:Cyan;">चाहर धर्मेंद्र</span></u>]]<sup>[[सदस्य वार्ता:चाहर धर्मेंद्र|<small style="color:orange">--राम राम जी--</small>]]</sup> 13:32, 11 अप्रैल 2026 (UTC)
::इस विषय की ओर ध्यान दिलाने के लिए धन्यवाद।
::मुझे अब ज्ञात हुआ कि "[[समाचार संस्था]]" शीर्षक से इस विषय पर पहले से लेख उपलब्ध है। भविष्य में नया लेख बनाने से पहले मैं संबंधित विषयों की उपलब्धता की जाँच अवश्य करूँगा।
::साथ ही, जहाँ आवश्यक होगा, मैं नए लेख बनाने के बजाय मौजूदा लेखों में ही सुधार और विस्तार करने का प्रयास करूँगा, ताकि सामग्री की गुणवत्ता और एकरूपता बनी रहे।
::मार्गदर्शन के लिए धन्यवाद। [[सदस्य:Citexji|Citexji]] ([[सदस्य वार्ता:Citexji|वार्ता]]) 16:24, 11 अप्रैल 2026 (UTC)
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==फिर से वही गलती ==
नमस्ते! आपके द्वारा तैयार किए गए “[[से चीज़]]” लेख में दिए गए सन्दर्भों में त्रुटियाँ पाई गई हैं। लेख में कुल चार सन्दर्भ दिए गए हैं, जिनमें से दूसरा और चौथा सन्दर्भ खोलने पर “503 सेवा अस्थायी रूप से अनुपलब्ध” का संदेश प्रदर्शित हो रहा है। इसके अतिरिक्त, दूसरे सन्दर्भ में संबंधित विषय के बारे में अपेक्षित जानकारी भी उपलब्ध नहीं है।
* इस संबंध में पूर्व में भी आपको सूचित किया जा चुका है, फिर भी सन्दर्भों की उचित जाँच के बिना लेख तैयार किया गया है, जो कि उचित नहीं है। साथ ही, आपको [[विकिपीडिया:उल्लेखनीयता|उल्लेखनीयता]] के बारे में भी अवश्य जानकारी लेनी चाहिए और उसी के अनुसार लेख का निर्माण करना चाहिए।
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:नमस्ते @[[सदस्य:चाहर धर्मेंद्र|चाहर धर्मेंद्र]] जी,
:आपके द्वारा दिए गए सुझाव के लिए धन्यवाद। आपने जिन संदर्भों में समस्या बताई थी, उनमें से कुछ लिंक उस समय वेबसाइट के सर्वर इश्यू (503 error) के कारण अस्थायी रूप से उपलब्ध नहीं हो पा रहे थे।
:अब मैंने संबंधित संदर्भों को Internet Archive (वेब आर्काइव) से जोड़ दिया है, ताकि वे स्थायी रूप से उपलब्ध रहें और खुलने में कोई समस्या न हो। साथ ही, संदर्भों की प्रासंगिकता और सत्यता की भी पुनः जाँच कर ली गई है।
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:धन्यवाद। [[सदस्य:Citexji|Citexji]] ([[सदस्य वार्ता:Citexji|वार्ता]]) 07:34, 13 अप्रैल 2026 (UTC)
== से चीज़ के संदर्भ ==
@[[सदस्य:Citexji|Citexji]] महोदय, इसके संदर्भ को सुधारें तथा लेख की भाषा को भी सही करें [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 07:34, 13 अप्रैल 2026 (UTC)
:नमस्ते @[[सदस्य:AMAN KUMAR|AMAN KUMAR]] जी,
:आपके सुझाव के लिए धन्यवाद। मैंने लेख के संदर्भों की जाँच कर ली है तथा जिन लिंक में समस्या थी उन्हें ठीक करने का प्रयास किया है। साथ ही लेख की भाषा को भी अधिक स्पष्ट और विश्वसनीय बनाने के लिए सुधार किया जा रहा है। [[सदस्य:Citexji|Citexji]] ([[सदस्य वार्ता:Citexji|वार्ता]]) 07:47, 13 अप्रैल 2026 (UTC)
== [[:से चीज़|से चीज़]] पृष्ठ का [[वि:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा|हटाने हेतु चर्चा]] के लिये नामांकन ==
नमस्कार, [[:से चीज़|से चीज़]] को विकिपीडिया पर [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति|पृष्ठ हटाने की नीति]] के अंतर्गत [[वि:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा|हटाने हेतु चर्चा]] के लिये नामांकित किया गया है। इस बारे में चर्चा '''[[:विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/से चीज़|विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/से चीज़]]''' पर हो रही है। इस चर्चा में भाग लेने के लिये आपका स्वागत है।
नामांकनकर्ता ने नामांकन करते समय निम्न कारण प्रदान किया है:
<center>उल्लेखनीय नहीं।</center>
कृपया इस नामांकन का उत्तर चर्चा पृष्ठ पर ही दें।
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== अप्रैल 2026 ==
[[Image:Information.svg|25px|alt=|link=]] कृपया लेखों से [[साँचा:हहेच लेख|हटाने हेतु नामांकन की सूचना]] व [[वि:हहेच|हटाने हेतु चर्चा पृष्ठ]] से अन्य सदस्यों की टिप्पणियाँ न हटायें, जैसा कि आपने [[:से चीज़]] पर किया। ऐसा करने से चर्चा बंद नहीं होगी। आपका चर्चा पृष्ठ पर प्रस्तावित विलोपन के बारे में टिप्पणी करने के लिए स्वागत है। धन्यवाद।<!-- Template:uw-afd2 --> [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 05:01, 15 अप्रैल 2026 (UTC)
:धन्यवाद। मैं स्पष्ट करना चाहता हूँ कि मैंने किसी भी अन्य सदस्य की टिप्पणियाँ नहीं हटाई हैं। यदि किसी प्रकार से कोई टिप्पणी हट गई हो तो वह अनजाने में हुआ होगा, इसके लिए खेद है।
:मेरा उद्देश्य केवल लेख में सुधार करना और विश्वसनीय स्रोत जोड़ना है। मैं चर्चा में भाग लेने और आवश्यकतानुसार लेख को बेहतर बनाने के लिए तैयार हूँ। [[सदस्य:Citexji|Citexji]] ([[सदस्य वार्ता:Citexji|वार्ता]]) 05:08, 15 अप्रैल 2026 (UTC)
[[File:Nuvola apps important.svg|25px|alt=|link=]] कृपया [[विकिपीडिया:विघटनकारी सम्पादन|विघटनकारी संपादन]] करना बंद करें। अगर आप विकिपीडिया पृष्ठों से पाठ, साँचे अथवा अन्य सामग्री हटाना अथवा पृष्ठों को रिक्त करना जारी रखते हैं, जैसा कि आपने [[:प्राकृतिक स्वास्थ्य]] पर किया है, तो आपको [[विकिपीडिया:निषेध नियमावली|संपादन करने से अवरोधित]] किया जा सकता है। <!-- Template:uw-delete3 --> [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 10:00, 15 अप्रैल 2026 (UTC)
== [[:पार्वती कुराकुला|पार्वती कुराकुला]] पृष्ठ को [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#शीघ्र हटाना|शीघ्र हटाने]] का नामांकन ==
[[File:Ambox warning pn.svg|48px|left|alt=|link=]]
नमस्कार, आपके द्वारा बनाए पृष्ठ [[:पार्वती कुराकुला|पार्वती कुराकुला]] को विकिपीडिया पर [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति|पृष्ठ हटाने की नीति]] के [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#ल2|मापदंड ल2]] के अंतर्गत शीघ्र हटाने के लिये नामांकित किया गया है।<center>'''[[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#ल2|ल2]]{{*}} साफ़ प्रचार'''</center>
इसमें वे सभी पृष्ठ आते हैं जिनमें केवल प्रचार है, चाहे वह किसी व्यक्ति-विशेष का हो, किसी समूह का, किसी प्रोडक्ट का, अथवा किसी कंपनी का। इसमें प्रचार वाले केवल वही लेख आते हैं जिन्हें ज्ञानकोष के अनुरूप बनाने के लिये शुरू से दोबारा लिखना पड़ेगा।
यदि आप इस विषय पर लेख बनाना चाहते हैं तो पहले कृपया जाँच लें कि विषय [[वि:उल्लेखनीयता|उल्लेखनीय]] है या नहीं। यदि आपको लगता है कि इस नीति के अनुसार विषय उल्लेखनीय है तो कृपया लेख में उपयुक्त रूप से स्रोत देकर उल्लेखनीयता स्पष्ट करें। इसके अतिरिक्त याद रखें कि विकिपीडिया पर लेख [[वि:शैली मार्गदर्शक|ज्ञानकोष की शैली]] में लिखे जाने चाहियें।
यदि यह पृष्ठ अभी हटाया नहीं गया है तो आप पृष्ठ में सुधार कर सकते हैं ताकि वह विकिपीडिया की नीतियों पर खरा उतरे। यदि आपको लगता है कि यह पृष्ठ इस मापदंड के अंतर्गत नहीं आता है तो आप पृष्ठ पर जाकर नामांकन टैग पर दिये हुए बटन पर क्लिक कर के इस नामांकन के विरोध का कारण बता सकते हैं। कृपया ध्यान रखें कि शीघ्र हटाने के नामांकन के पश्चात यदि पृष्ठ नीति अनुसार शीघ्र हटाने योग्य पाया जाता है तो उसे कभी भी हटाया जा सकता है।<br /><br /> <!-- Template:Db-csd-notice-custom --> <span style="color:orange;">☆★</span>[[सदस्य:चाहर धर्मेंद्र|<u><span style="color:Cyan;">चाहर धर्मेंद्र</span></u>]]<sup>[[सदस्य वार्ता:चाहर धर्मेंद्र|<small style="color:orange">--राम राम जी--</small>]]</sup> 05:01, 19 अप्रैल 2026 (UTC)
:नमस्ते @[[सदस्य:चाहर धर्मेंद्र|चाहर धर्मेंद्र]]
:मैंने लेख को तटस्थ शैली में संशोधित किया है और प्रचारात्मक सामग्री हटा दी है। साथ ही विश्वसनीय स्रोत जोड़कर उल्लेखनीयता स्पष्ट करने का प्रयास किया गया है। कृपया पुनः समीक्षा करें। धन्यवाद। [[सदस्य:Citexji|Citexji]] ([[सदस्य वार्ता:Citexji|वार्ता]]) 05:32, 19 अप्रैल 2026 (UTC)
== [[:पार्वती कुराकुला|पार्वती कुराकुला]] पृष्ठ को [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#शीघ्र हटाना|शीघ्र हटाने]] का नामांकन ==
[[File:Ambox warning pn.svg|48px|left|alt=|link=]]
नमस्कार, आपके द्वारा बनाए पृष्ठ [[:पार्वती कुराकुला|पार्वती कुराकुला]] को विकिपीडिया पर [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति|पृष्ठ हटाने की नीति]] के [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#ल2|मापदंड ल2]] के अंतर्गत शीघ्र हटाने के लिये नामांकित किया गया है।<center>'''[[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#ल2|ल2]]{{*}} साफ़ प्रचार'''</center>
इसमें वे सभी पृष्ठ आते हैं जिनमें केवल प्रचार है, चाहे वह किसी व्यक्ति-विशेष का हो, किसी समूह का, किसी प्रोडक्ट का, अथवा किसी कंपनी का। इसमें प्रचार वाले केवल वही लेख आते हैं जिन्हें ज्ञानकोष के अनुरूप बनाने के लिये शुरू से दोबारा लिखना पड़ेगा।
यदि आप इस विषय पर लेख बनाना चाहते हैं तो पहले कृपया जाँच लें कि विषय [[वि:उल्लेखनीयता|उल्लेखनीय]] है या नहीं। यदि आपको लगता है कि इस नीति के अनुसार विषय उल्लेखनीय है तो कृपया लेख में उपयुक्त रूप से स्रोत देकर उल्लेखनीयता स्पष्ट करें। इसके अतिरिक्त याद रखें कि विकिपीडिया पर लेख [[वि:शैली मार्गदर्शक|ज्ञानकोष की शैली]] में लिखे जाने चाहियें।
यदि यह पृष्ठ अभी हटाया नहीं गया है तो आप पृष्ठ में सुधार कर सकते हैं ताकि वह विकिपीडिया की नीतियों पर खरा उतरे। यदि आपको लगता है कि यह पृष्ठ इस मापदंड के अंतर्गत नहीं आता है तो आप पृष्ठ पर जाकर नामांकन टैग पर दिये हुए बटन पर क्लिक कर के इस नामांकन के विरोध का कारण बता सकते हैं। कृपया ध्यान रखें कि शीघ्र हटाने के नामांकन के पश्चात यदि पृष्ठ नीति अनुसार शीघ्र हटाने योग्य पाया जाता है तो उसे कभी भी हटाया जा सकता है।<br /><br /> <!-- Template:Db-csd-notice-custom --> <span style="color:orange;">☆★</span>[[सदस्य:चाहर धर्मेंद्र|<u><span style="color:Cyan;">चाहर धर्मेंद्र</span></u>]]<sup>[[सदस्य वार्ता:चाहर धर्मेंद्र|<small style="color:orange">--राम राम जी--</small>]]</sup> 03:53, 23 अप्रैल 2026 (UTC)
:नमस्ते महोदय! @[[सदस्य:चाहर धर्मेंद्र|चाहर धर्मेंद्र]]
:लेख में प्रचारात्मक भाषा हटाकर इसे तटस्थ शैली में पुनर्लेखित किया गया है। वर्तमान सामग्री प्रकाशित स्रोतों पर आधारित है और लेख में किसी प्रकार की विज्ञापनात्मक भाषा का प्रयोग नहीं किया गया है।
:यदि समुदाय को किसी विशेष स्रोत या सामग्री पर आपत्ति हो तो उस पर चर्चा की जा सकती है तथा आवश्यकतानुसार और सुधार किए जा सकते हैं। अतः लेख को शीघ्र हटाने के बजाय सुधार हेतु रखा जाना अधिक उपयुक्त होगा।
:धन्यवाद। [[User:Citexji|<span style="text-shadow:gray 3px 3px 2px;color:red">'''Citexji'''</span>]]<sup>[[User talk:Citexji|<span style="color:green">बातचीत</span>]]</sup> 07:26, 23 अप्रैल 2026 (UTC)
==अंतिम चेतावनी==
आपसे अनुरोध है कि भविष्य में शीघ्र हटाने के अनुरोध अथवा पृष्ठ हटाने हेतु चल रही चर्चा के नामांकन को स्वयं न हटाएँ। ऐसी कार्यवाही विकिपीडिया की प्रक्रियाओं के अनुरूप नहीं है।
यदि आगे भी ऐसा किया जाता है, तो नीतियों के अनुसार आवश्यक प्रशासनिक कार्यवाही (जिसमें अवरोध भी सम्मिलित हो सकता है) की जा सकती है। कृपया इस संबंध में सावधानी बरतें।<span style="color:orange;">☆★</span>[[सदस्य:चाहर धर्मेंद्र|<u><span style="color:Cyan;">चाहर धर्मेंद्र</span></u>]]<sup>[[सदस्य वार्ता:चाहर धर्मेंद्र|<small style="color:orange">--राम राम जी--</small>]]</sup> 04:26, 28 अप्रैल 2026 (UTC)
== द ट्रेंडिंग पीपल ==
मोहदय,जी @[[सदस्य:Sanjeev bot|Sanjeev bot]] @[[सदस्य:SM7|SM7]] @[[सदस्य:चाहर धर्मेंद्र|चाहर धर्मेंद्र]] @[[सदस्य:Khushi200|Khushi200]] @[[सदस्य:AMAN KUMAR|AMAN KUMAR]] लेख को [https://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%AA%E0%A5%80%E0%A4%A1%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE:%E0%A4%AA%E0%A5%83%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%A0_%E0%A4%B9%E0%A4%9F%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%87_%E0%A4%95%E0%A5%80_%E0%A4%A8%E0%A5%80%E0%A4%A4%E0%A4%BF#%E0%A4%B22 व7/ ल2] के अंतर्गत हटाया गया हैं। हालांकि लेख में स्वतंत्र स्रोतों पर आधारित ज्ञानकोशीय सामग्री मौजूद थी और इसे सुधार योग्य बनाया जा सकता है। शीघ्र हटाने की नीति के अनुसार ऐसे मामलों में पूर्ववत अथवा ड्राफ्ट पुनर्स्थापन पर विचार किया जा सकता है। कृपया लेख को उपयोगकर्ता उपपृष्ठ में पुनर्स्थापित करने पर विचार करें। [[User:Citexji|<span style="text-shadow:gray 3px 3px 2px;color:red">'''Citexji'''</span>]]<sup>[[User talk:Citexji|<span style="color:green">बातचीत</span>]]</sup> 06:29, 28 अप्रैल 2026 (UTC)
:@[[सदस्य:Citexji|Citexji]] जी, [[सदस्य:Citexji/द ट्रेंडिंग पीपल|लेख की समीक्षा]] करने पर यह स्पष्ट है कि इसे व7 और ल2 के तहत बिल्कुल सही हटाया गया है। मेरा {{समर्थन}} है, कि इसे पुनर्स्थापित नहीं करना चाहिए| [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 08:15, 28 अप्रैल 2026 (UTC)
:::नमस्ते @[[सदस्य:AMAN KUMAR|AMAN KUMAR]] जी, प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद। मैं मानता हूँ कि पुराने लेख में व7/ल2 (प्रचार) की कमियां थीं। मैंने उन सभी गलतियों को सुधार कर पूरी तरह से एक नया और तटस्थ ड्राफ्ट तैयार किया है: [[सदस्य:Citexji/द_ट्रेंडिंग_पीपल]]। कृपया समय मिलने पर एक बार इसकी समीक्षा कर लें। धन्यवाद! [[User:Citexji|<span style="text-shadow:gray 3px 3px 2px;color:red">'''Citexji'''</span>]]<sup>[[User talk:Citexji|<span style="color:green">बातचीत</span>]]</sup> 09:02, 28 अप्रैल 2026 (UTC)
::::@[[सदस्य:Citexji|Citexji]] महोदय, "लेख की समीक्षा" में मैने [[सदस्य:Citexji/द_ट्रेंडिंग_पीपल]] को ही लिंक किया था [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 09:11, 28 अप्रैल 2026 (UTC)
* '''रखें''' – लेख में प्रयुक्त कुछ स्रोत स्वतंत्र हैं और विषय पर पर्याप्त सुधार संभव है। मेरा {{समर्थन}} है कि प्रचारात्मक भाषा हटाकर इसे ज्ञानकोशीय शैली में रखा जा सकता है, इसलिए सीधे हटाने के बजाय सुधार का अवसर दिया जाना चाहिए। [[सदस्य:Khushi200|<b style="color:#8B0000;font-size:17px;text-shadow:2px 2px 4px #999"><u>OhNoItsKhushi</u></b>]]<sup>[[सदस्य वार्ता:Khushi200|<b style="color:#1E90FF"><u>(वार्ता)</u></b>]]</sup> -- 08:42, 28 अप्रैल 2026 (UTC)
*:नमस्ते @[[सदस्य:Khushi200|Khushi200]] जी, 'द ट्रेंडिंग पीपल' लेख की चर्चा में आपके समर्थन और सकारात्मक सुझावों के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद। आपके कहे अनुसार मैंने लेख से प्रचारात्मक भाषा और उन चीज़ों को हटा दिया है जिनकी वजह से इसे व7/ल2 के अंतर्गत हटाया गया था। मैंने सुधार के बाद लेख का एक नया ड्राफ्ट अपने सदस्य उपपृष्ठ पर तैयार किया है। आप इसे यहाँ देख सकती हैं: [[सदस्य:Citexji/द_ट्रेंडिंग_पीपल]] कृपया जब भी आपको समय मिले, एक बार इस ड्राफ्ट लेख की समीक्षा कर लें। क्या आप बता सकती हैं कि क्या अब यह विकिपीडिया के ज्ञानकोशीय मापदंडों पर खरा उतरता है और क्या मैं इसे अब मुख्य नामस्थान में दोबारा प्रकाशित कर सकता हूँ? यदि इसमें अभी भी कोई सुधार बाकी है, तो कृपया मेरा मार्गदर्शन करें। आपके समय और मदद के लिए धन्यवाद! [[User:Citexji|<span style="text-shadow:gray 3px 3px 2px;color:red">'''Citexji'''</span>]]<sup>[[User talk:Citexji|<span style="color:green">बातचीत</span>]]</sup> 08:58, 28 अप्रैल 2026 (UTC)
*::@[[सदस्य:Citexji|Citexji]] महोदय, कचरा स्रोतों के साथ चाहे कितनी भी अच्छी भाषा लिखी जाए, विषय उल्लेखनीय नहीं हो जाता। [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 09:15, 28 अप्रैल 2026 (UTC)
*:::@[[सदस्य:Citexji|Citexji]] जी, आपने लेख में अच्छे सुधार किए हैं। तटस्थ शैली और स्वतंत्र स्रोतों पर ध्यान बनाए रखें। फिलहाल पहले इसे ड्राफ्ट/उपयोगकर्ता उपपृष्ठ में और सुधार लेना बेहतर होगा; उसके बाद मुख्य नामस्थान में पुनर्प्रकाशन पर विचार किया जा सकता है। [[सदस्य:Khushi200|<span style="color:#8B0000;font-family:Georgia;font-size:105%;"><b>OhNoItsKhushi</b></span>]] <sup>[[सदस्य वार्ता:Khushi200|<span style="color:#1E90FF;">✦ वार्ता ✦</span>]]</sup> 09:20, 28 अप्रैल 2026 (UTC)
*::::@[[सदस्य:AMAN KUMAR|AMAN KUMAR]] जी, कृपया स्रोतों के संबंध में चर्चा करते समय शिष्ट एवं नीति-आधारित भाषा का प्रयोग करें। यदि किसी स्रोत की विश्वसनीयता या उल्लेखनीयता पर आपत्ति है, तो उसे स्पष्ट रूप से नीति और स्रोत-मानकों के आधार पर समझाना अधिक उपयुक्त होगा। [[सदस्य:Khushi200|<span style="color:#8B0000;font-family:Georgia;font-size:105%;"><b>OhNoItsKhushi</b></span>]] <sup>[[सदस्य वार्ता:Khushi200|<span style="color:#1E90FF;">✦ वार्ता ✦</span>]]</sup> 09:21, 28 अप्रैल 2026 (UTC)
*:::::@[[सदस्य:Khushi200|Khushi200]] जी, क्षमा चाहता हूं और मेरा नया उत्तर "स्रोतों के साथ चाहे कितनी भी अच्छी भाषा लिखी जाए, विषय उल्लेखनीय नहीं हो जाता।" [[User:AMAN KUMAR|<b style="color:olive;font-size:18px;text-shadow:2px 2px 4px #888"><u>विक्रम प्रताप</u></b>]]<sup>[[User talk:AMAN KUMAR|<b style="color:teal"><u>(बातचीत)</u></b>]]</sup>-- 09:32, 28 अप्रैल 2026 (UTC)
*:::::::@[[सदस्य:AMAN KUMAR|AMAN KUMAR]] जी, आपकी उल्लेखनीयता संबंधी चिंता समझी जा सकती है। हालांकि, [[सदस्य:Citexji|Citexji]] द्वारा किए गए सुधारों के बाद लेख का स्वर पहले की तुलना में अधिक तटस्थ हुआ है। यदि आगे भी केवल स्वतंत्र एवं विश्वसनीय स्रोतों के आधार पर सामग्री विकसित की जाती है, तो इसे ड्राफ्ट स्तर पर सुधार योग्य माना जा सकता है। [[सदस्य:Khushi200|<span style="color:#8B0000;font-family:Georgia;font-size:105%;"><b>OhNoItsKhushi</b></span>]] <sup>[[सदस्य वार्ता:Khushi200|<span style="color:#1E90FF;">✦ वार्ता ✦</span>]]</sup> 09:38, 28 अप्रैल 2026 (UTC)
*:::::नमस्ते @[[सदस्य:Khushi200|Khushi200]] जी, मार्गदर्शन और समर्थन के लिए धन्यवाद। आपकी सलाह मानकर मैं अभी इसे ड्राफ्ट में ही रखूँगा। मैं कुछ और मजबूत व स्वतंत्र स्रोत (independent sources) खोजकर इसे और बेहतर बनाने पर काम करूँगा, उसके बाद ही इसे मुख्य पृष्ठ पर लाने के लिए आपसे संपर्क करूँगा। आभार! [[User:Citexji|<span style="text-shadow:gray 3px 3px 2px;color:red">'''Citexji'''</span>]]<sup>[[User talk:Citexji|<span style="color:green">बातचीत</span>]]</sup> 09:34, 28 अप्रैल 2026 (UTC)
*@[[सदस्य:Citexji|Citexji]] जी। ‘द ट्रेंडिंग पीपल’ लेख को अप्रैल माह में दो बार हटाया जा चुका है, तथा इससे पूर्व 2024 में भी इसे समान कारणों से हटाया गया था। ऐसी स्थिति में बार-बार उसी लेख को पुनः निर्मित करना विकिपीडिया की प्रक्रियाओं के अनुरूप नहीं है।
उपलब्ध परिस्थितियों से प्रतीत होता है कि लेख को व7/ल2 के अंतर्गत उचित रूप से हटाया गया है। अतः बिना पर्याप्त नए, स्वतंत्र एवं विश्वसनीय स्रोतों के इसे पुनः बनाना उचित नहीं होगा। कृपया भविष्य में ऐसे '''पुनर्निर्माण''' से बचें; अन्यथा इसे प्रचारात्मक गतिविधि के रूप में देखा जा सकता है।<span style="text-shadow:black 3px 3px 2px;color:orange;">☆★</span>[[सदस्य:चाहर धर्मेंद्र|<u><span style="color:Cyan;">चाहर धर्मेंद्र</span></u>]]<sup>[[सदस्य वार्ता:चाहर धर्मेंद्र|<small style="color:orange">--राम राम जी--</small>]]</sup> 13:22, 28 अप्रैल 2026 (UTC)
:@[[सदस्य:चाहर धर्मेंद्र|चाहर धर्मेंद्र]] जी, धन्यवाद।
:आपके द्वारा उठाए गए बिंदु समझ में आते हैं, विशेषकर पूर्व में लेख के हटाए जाने के संदर्भ में। तथापि, ल2 (साफ़ प्रचार) मापदंड के अनुसार केवल वही पृष्ठ शीघ्र हटाने योग्य होते हैं जिनमें पूर्णतः प्रचारात्मक सामग्री हो और जिन्हें ज्ञानकोश के अनुरूप बनाने के लिए शुरू से पुनर्लेखन आवश्यक हो।
:'''[https://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%B8%E0%A4%A6%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AF:Citexji/%E0%A4%A6_%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%A1%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%97_%E0%A4%AA%E0%A5%80%E0%A4%AA%E0%A4%B2 वर्तमान ड्राफ्ट]''' पूर्व संस्करणों से भिन्न है। इसमें प्रचारात्मक भाषा को हटाकर सामग्री को तटस्थ एवं ज्ञानकोशीय शैली में पुनर्लेखित किया गया है तथा स्वतंत्र और विश्वसनीय स्रोत जोड़ने का प्रयास किया गया है। इसलिए इसे केवल पूर्व हटाने के आधार पर पुनः उसी श्रेणी में रखना उचित नहीं होगा; बल्कि वर्तमान संस्करण का मूल्यांकन उसके वर्तमान स्वरूप के आधार पर किया जाना चाहिए।
:साथ ही, मैंने इस [https://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%B8%E0%A4%A6%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AF:Citexji/%E0%A4%A6_%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%A1%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%97_%E0%A4%AA%E0%A5%80%E0%A4%AA%E0%A4%B2 ड्राफ्ट की समीक्षा] हेतु @[[सदस्य:Khushi200|Khushi200]] जी से जांच का अनुरोध किया। उन्होंने समीक्षा के पश्चात यह बताया कि लेख में अच्छे सुधार हुए हैं और तटस्थता की दिशा में प्रगति हुई है।
:यदि अब भी आपको किसी विशेष भाग में प्रचारात्मक भाषा, स्रोतों की विश्वसनीयता, या उल्लेखनीयता से संबंधित कोई विशिष्ट आपत्ति प्रतीत होती है, तो कृपया उसे स्पष्ट रूप से इंगित करें, ताकि उसी के अनुसार आवश्यक सुधार किए जा सकें। [[User:Citexji|<span style="text-shadow:gray 3px 3px 2px;color:red">'''Citexji'''</span>]]<sup>[[User talk:Citexji|<span style="color:green">बातचीत</span>]]</sup> 20:11, 28 अप्रैल 2026 (UTC)
== Unblock Request for Account "Citexji" (Block ID: #9132) ==
{{unblock}} मैं अपने खाते "Citexji" के अवरोध (block) के संबंध में यह निवेदन कर रहा हूँ।
मुझे बताया गया है कि मेरे खाते को "long-term abuse" के आधार पर अवरुद्ध किया गया है, लेकिन मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूँ कि मैंने जानबूझकर किसी भी प्रकार का दुरुपयोग नहीं किया है। यदि मेरे किसी संपादन या गतिविधि से Wikipedia की नीतियों का उल्लंघन हुआ है, तो वह अनजाने में हुआ होगा।
मैं Wikipedia के नियमों और दिशानिर्देशों का सम्मान करता हूँ और भविष्य में पूरी सावधानी के साथ योगदान देने का आश्वासन देता हूँ। मैं आपसे विनम्र अनुरोध करता हूँ कि कृपया मेरे खाते की समीक्षा करें और यदि संभव हो तो इसे पुनः सक्रिय (unblock) करने पर विचार करें।
यदि किसी विशेष संपादन या व्यवहार के कारण यह कार्रवाई हुई है, तो कृपया मुझे उसके बारे में मार्गदर्शन दें ताकि मैं भविष्य में ऐसी गलती न करूँ।
धन्यवाद। [[User:Citexji|<span style="text-shadow:gray 3px 3px 2px;color:red">'''Citexji'''</span>]]<sup>[[User talk:Citexji|<span style="color:green">बातचीत</span>]]</sup> 19:29, 1 मई 2026 (UTC)
== मेरे खाते Citexji के ब्लॉक और फाइल डिलीशन के बारे में जानकारी ==
नमस्ते @[[सदस्य:WikiBayer|WikiBayer]] जी,
मैं आपसे यह पूछना चाहता हूँ कि मेरा खाता "Citexji" हिंदी विकिपीडिया पर क्यों ब्लॉक किया गया है। मुझे इसका सही कारण समझ नहीं आया।
इसके अलावा, मैंने देखा कि मेरे Wikimedia Commons के काम पर भी डिलीशन रिक्वेस्ट डाली गई है, जबकि वह मेरा खुद का काम है। साथ ही, मेरे द्वारा बनाए गए लेखों पर भी स्पैम की रिक्वेस्ट डाली गई है, और कुछ लेखों को आपने डिलीट भी कर दिया, जबकि उन पर समुदाय में चर्चा चल रही थी कि उन्हें रखा जाए या नहीं।
कृपया बताएं कि ऐसा क्यों किया गया।
अगर मुझसे कोई गलती हुई है तो कृपया मुझे समझाएं, मैं उसे सुधारने के लिए तैयार हूँ।
कृपया मुझे सही जानकारी दें ताकि मैं आगे सही तरीके से काम कर सकूँ।
धन्यवाद। [[User:Citexji|<span style="text-shadow:gray 3px 3px 2px;color:red">'''Citexji'''</span>]]<sup>[[User talk:Citexji|<span style="color:green">बातचीत</span>]]</sup> 20:24, 1 मई 2026 (UTC)
:नमस्ते @[[सदस्य:Khushi200|Khushi200]] @[[सदस्य:SM7|SM7]] @[[सदस्य:चाहर धर्मेंद्र|चाहर धर्मेंद्र]] @[[सदस्य:Sanjeev bot|Sanjeev bot]] जी,
:मैं आपसे सहायता के लिए संपर्क कर रहा हूँ। मेरा खाता "Citexji" हिंदी विकिपीडिया पर ब्लॉक कर दिया गया है, और मुझे इसका सही कारण पूरी तरह समझ नहीं आया।
:साथ ही, मेरा खाता "Citexji" हिंदी विकिपीडिया पर @[[सदस्य:Wikibayer|WikiBayer]]
:द्वारा ब्लॉक किया गया है, और इस स्थिति में भी मेरे योगदानों पर लगातार डिलीशन की कार्यवाही हो रही है, इसके अलावा, मेरे द्वारा बनाए गए लेखों और Wikimedia Commons पर अपलोड किए गए कार्यों पर भी डिलीशन रिक्वेस्ट डाली जा रही है। जिससे मुझे समझने में कठिनाई हो रही है कि समस्या वास्तव में क्या है।
:अगर मेरे कार्य में कोई कमी या गलती है, तो कृपया मुझे स्पष्ट रूप से बताएं ताकि मैं विकिपीडिया के नियमों का पालन करना चाहता हूँ और सही तरीके से योगदान देना चाहता हूँ। कृपया मेरा मार्गदर्शन करें कि मैं क्या सुधार कर सकता हूँ और इस स्थिति को कैसे ठीक कर सकता हूँ।
:कृपया सहयोग करें और मार्गदर्शन दें।
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== [[:सदस्य:Citexji/द ट्रेंडिंग पीपल|सदस्य:Citexji/द ट्रेंडिंग पीपल]] पृष्ठ को [[वि:पृष्ठ हटाने की नीति#शीघ्र हटाना|शीघ्र हटाने]] का नामांकन ==
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:नमस्ते @[[सदस्य:चाहर धर्मेंद्र|चाहर धर्मेंद्र]] मैं आपसे यह जानना चाहता हूँ कि आपको मेरे कार्य से क्या समस्या है। मैंने देखा है कि आप बार-बार मेरे बनाए गए लेखों को डिलीशन के लिए नामांकित कर देते हैं।
:अगर मेरे कार्य में कोई कमी या गलती है, तो कृपया मुझे बताएं ताकि मैं उसे सुधार सकूँ। मेरा उद्देश्य केवल विकिपीडिया पर सही और उपयोगी योगदान देना है।
:कृपया सहयोग करें और मार्गदर्शन दें।
:धन्यवाद। [[User:Citexji|<span style="text-shadow:gray 3px 3px 2px;color:red">'''Citexji'''</span>]]<sup>[[User talk:Citexji|<span style="color:green">बातचीत</span>]]</sup> 05:58, 2 मई 2026 (UTC)
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:::@[[सदस्य:चाहर धर्मेंद्र|चाहर धर्मेंद्र]] आपके जवाब के लिए धन्यवाद।
:::मैं आपकी बात समझता हूँ कि लेखों में स्वतंत्र एवं विश्वसनीय स्रोतों की कमी और उल्लेखनीयता से जुड़ी समस्याएँ हो सकती हैं। मैं इस विषय में आपकी मदद चाहता हूँ।
:::दरअसल, जिन लेखों की बात हो रही है, वे "[https://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%B8%E0%A4%A6%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AF:Citexji/%E0%A4%A6_%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%A1%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%97_%E0%A4%AA%E0%A5%80%E0%A4%AA%E0%A4%B2 द ट्रेंडिंग पीपल]" से संबंधित हैं। अगर इनमें किसी प्रकार की कमी है, तो कृपया मुझे स्पष्ट रूप से बताएं कि किस प्रकार के स्रोत और सुधार आवश्यक हैं, ताकि मैं उन्हें सही तरीके से अपडेट कर सकूँ। साथ ही, आप भी एक संपादक हैं, तो यदि संभव हो तो आप भी द ट्रेंडिंग पीपल में सुधार कर सकते हैं। इससे लेख और बेहतर हो जाएंगे और विकिपीडिया के मानकों के अनुसार तैयार हो पाएंगे।
:::मेरा उद्देश्य केवल नियमों के अनुसार सही और विश्वसनीय सामग्री देना है। कृपया मुझे मार्गदर्शन दें कि मैं अपने लेखों को कैसे बेहतर बना सकता हूँ ताकि वे विकिपीडिया के मानकों पर खरे उतरें।
:::आपकी सहायता मेरे लिए बहुत महत्वपूर्ण होगी। [[User:Citexji|<span style="text-shadow:gray 3px 3px 2px;color:red">'''Citexji'''</span>]]<sup>[[User talk:Citexji|<span style="color:green">बातचीत</span>]]</sup> 06:23, 2 मई 2026 (UTC)
::::{{ping|चाहर धर्मेंद्र}} {{ping|WikiBayer}} {{ping|अनुनाद सिंह}} {{ping|DreamRimmer}} @[[सदस्य:Khushi200|Khushi200]]
::::नमस्ते,
::::मैं अपने पिछले संदेश के संदर्भ में एक छोटा follow-up करना चाहता हूँ।
::::[[भूमिहीन कैंप (दिल्ली)]] यह पृष्ठ भी मैंने ही बनाया है, लेकिन मेरा खाता "Citexji" WikiBayer द्वारा अवरुद्ध कर दिया गया है, जिसके कारण मैं इसमें सुधार नहीं कर पा रहा हूँ। इस वजह से मेरे कई कार्यों को स्पैम मानकर डिलीट किया जा रहा है।
::::मैं आप सभी से अनुरोध करता हूँ कि कृपया इस पृष्ठ को स्पैम न मानें और यदि इसमें कोई कमी है तो कृपया स्पष्ट रूप से मार्गदर्शन दें कि किस प्रकार के स्रोत और सुधार आवश्यक हैं, ताकि इसे विकिपीडिया के मानकों के अनुसार बेहतर बनाया जा सके।
::::यदि संभव हो तो आप स्वयं भी आवश्यक सुधार कर सकते हैं।
::::मेरा उद्देश्य केवल नियमों के अनुसार सही और विश्वसनीय सामग्री प्रदान करना है।
::::धन्यवाद। [[User:Citexji|<span style="text-shadow:gray 3px 3px 2px;color:red">'''Citexji'''</span>]]<sup>[[User talk:Citexji|<span style="color:green">बातचीत</span>]]</sup> 15:43, 2 मई 2026 (UTC)
jeneoyqp7b2oojnj1g617u6ilqg1m85
प्रमाणित अनुवाद
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Rescuing 1 sources and tagging 0 as dead.) #IABot (v2.0.9.5
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wikitext
text/x-wiki
'''प्रमाणित [[अनुवाद]]''' लक्ष्य भाषा क्षेत्राधिकार की आवश्यकताओं के अनुसार स्रोत पाठ के अर्थ को दूसरी भाषा में प्रस्तुत करता है, जिससे इसे औपचारिक प्रक्रियाओं में उपयोग करने में सक्षम बनाया जा सकता है।अनुवादक इसकी सटीकता के लिए जिम्मेदारी स्वीकार करता है। ये आवश्यकताएँ देश-दर-देश व्यापक रूप से भिन्न होती हैं। जबकि कुछ देश केवल राज्य द्वारा नियुक्त अनुवादकों को इस तरह के अनुवाद करने की अनुमति देते हैं, वहीं कुछ अन्य देश किसी भी सक्षम द्विभाषी व्यक्ति द्वारा किए गए अनुवाद को स्वीकार कर लेते हैं। इन दो व्यापक सीमाओं के बीच कुछ ऐसे भी देश हैं जहाँ किसी भी पेशेवर अनुवादक द्वारा सही प्रमाण पत्र के साथ एक प्रमाणित अनुवाद किया जा सकता है (जिसमें विशिष्ट अनुवाद संघों की सदस्यता या कुछ योग्यताएँ शामिल हो सकती हैं) ।
अंग्रेजी बोलने वाले देश, जैसे कि [[यूनाइटेड किंगडम]], संयुक्त राज्य अमेरिका, [[ऑस्ट्रेलिया]] और [[न्यूज़ीलैण्ड|न्यूजीलैंड]], के स्पेक्ट्रम सख्त या थोड़े अनौपचारिक होते हैं, जिसमें अनुवादक प्रमाणित अनुवाद की अनुशंसा अपने आधिकारिक लेटर पैड आदि पर करता है जिसमें उक्त प्रमाणित अनुवाद की आवश्यकता, अनुवादक का विवरण एवं हस्ताक्षर दिनांक के साथ उपेक्षित होता है।
यह एक प्रकार का प्रमाणिकरण है जिसकी आवश्यकता यूके सरकार के निकायों, जैसे कि गृह कार्यालय और यूके सीमा एजेंसी के साथ-साथ विश्वविद्यालयों और अधिकांश विदेशी दूतावासों द्वारा की जाती है।
ब्रिटेन के अलावा अन्य यूरोपीय देशों में इस संबंध में बहुत सख्त कानून हैं कि कौन प्रमाणित अनुवाद जारी कर सकता है, जिसमें अधिकांश आधिकारिक प्रमाणित अनुवादकों की नियुक्ति उनके आधार पर स्थानीय राज्य-विनियमित योग्यता प्राप्त करने पर की जाती है।
== कानूनी आवश्यकताएं ==
कानूनी और आधिकारिक उद्देश्यों के लिए, [[साक्ष्य विधि|साक्ष्य दस्तावेज]] और अन्य आधिकारिक दस्तावेज आमतौर पर [[राजभाषा|आधिकारिक भाषा]] ([[अधिकारिता|अधिकार क्षेत्र]] की भाषा) में आवश्यक होते हैं।
कुछ [[देश]] में, ऐसे दस्तावेजों के अनुवाद के लिए यह आवश्यक है कि एक [[अनुवाद|अनुवादक]] [[शपथ]] लेकर यह प्रमाणित करे कि यह(अनूदित प्रमाणित अनुवाद) स्रोत पाठ के कानूनी समकक्ष है। अक्सर, केवल एक विशेष वर्ग के अनुवादकों को ही ऐसी शपथ लेने का अधिकार होता है। कुछ मामलों में, अनुवाद को कानूनी समकक्ष के रूप में तभी स्वीकार किया जाता है जब इसके साथ इसकी मूल या शपथ या प्रमाणित प्रति संलग्न हो।
भले ही कोई अनुवादक कानूनी अनुवाद में माहिर हो या अपने देश में एक वकील हो, यह जरूरी नहीं कि वे एक प्रमाणित अनुवादक बन जाए। कानूनी समतुल्यता में अनुवाद करने की प्रक्रिया देश-दर-देश अलग-अलग होती है।
=== अर्जेंटीना ===
स्थानीय कानूनों के अनुपालन में, स्पेनिश के अलावा अन्य भाषाओं में लिखे गए सभी दस्तावेजों का स्थानीय कानूनों के अनुसार एक प्रमाणित लाइसेंस प्राप्त अनुवादक द्वारा स्पेनिश में अनुवाद किया जाना चाहिए। आम तौर पर, अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत किए जाने वाले सभी दस्तावेजों (व्यक्तिगत कागजात और कुछ वाणिज्यिक अनुबंधों सहित) का अनुवाद और हस्ताक्षर एक प्रमाणित अनुवादक द्वारा किया जाना चाहिए, जिसका मुहर और हस्ताक्षर उस संबंधित पेशेवर संघ द्वारा प्रमाणित हो जो अनुवादक का लाइसेंस जारी करता हो। सभी निजी व्यक्ति, कंपनियां, न्यायपालिका और अन्य सरकारी विभाग विदेशी भाषा में दस्तावेजों या बयानों के संबंध में विभिन्न कानूनों के अधीन हैं, जैसे कि अर्जेंटीना सिविल और वाणिज्यिक संहिता, अर्जेंटीना कोड ऑफ सिविल एंड क्रिमिनल प्रोसीजर, अन्य।<ref>{{Cite web|url=http://www.traductores.org.ar/nuevo_org/home/ley/?id_ruta=1&nivel2=8&nivel3=9|title=Colegio de Traductores Públicos de la Ciudad de Buenos Aires|archive-url=https://web.archive.org/web/20091001142704/http://www.traductores.org.ar/nuevo_org/home/ley/?id_ruta=1&nivel2=8&nivel3=9|archive-date=October 1, 2009|access-date=March 10, 2010}}</ref> "पब्लिक ट्रांसलेटर" के रूप में प्रमाणित होने के लिए, उम्मीदवारों को "ट्रेडकटोर पब्लिक"/"ट्रेडकटा पब्लिक" की विश्वविद्यालयी डिग्री प्राप्त करना आवश्यक है।
=== ऑस्ट्रिया ===
शपथ और प्रमाणित विशेषज्ञ, दुभाषिया और अनुवादक अधिनियम #137/1995 (एसडीजी) की धारा 14 के अनुसार, क्षेत्रीय अदालतें [[जर्मन भाषा|जर्मन]] और किसी भी भाषा (सांकेतिक भाषा सहित) के बीच अनुवाद के लिए ऐसे किसी भी प्रमाणित अनुवादकों को नियुक्त करने के हकदार हैं, जिन्होंने एक आधिकारिक परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद अदालत में शपथ ली है।<ref>{{Cite web|url=https://www.gerichts-sv.at/sdg.html|title=SV- und Dolmetschergergesetz|archive-url=https://web.archive.org/web/20190306234811/https://www.gerichts-sv.at/sdg.html|archive-date=2019-03-06|access-date=2019-03-06}}</ref> प्रवेश परीक्षा में शामिल होने के लिए उम्मीदवारों को किसी विश्वविद्यालय से अनुवाद अध्ययन में स्नातक की डिग्री के साथ-साथ अनुवादक या दुभाषिया के रूप में कम से कम 5 वर्षों के अनुभव या कम से कम 2 वर्षों के अनुभव का प्रमाण प्रस्तुत करना होगा। हालांकि ज्यादातर "गेरिच्ट्सडोल्मेट्सचर" के रूप में संदर्भित किया जाता है, जबकि उसका सही नाम "ऑलजेमिन बीडेटे/आर उंड गेरिचट्लिच ज़र्टिफाइज़िएर्ट/आर डॉल्मेट्सचर/इन" है। शपथ लिए हुए अनुवादक मूल अनुवाद पर हस्ताक्षर करके और उन पर मुहर लगाकर सार्वजनिक स्वीकारोक्ति प्रदान करने के हकदार हैं। अनुवादों पर उनके हस्ताक्षर के आगे नोटराइजेशन की आवश्यकता नहीं है, और शपथ लेने वाले अनुवादक एक '''अपोस्टिल''' को जोड़ने के लिए अदालत में आवेदन कर सकते हैं। पुलिस को सलाह दी जाती है कि जब भी संभव हो भाषा की बाधाओं को दूर करने के लिए दुभाषियों को शामिल करें। ऑस्ट्रिया में अधिकांश सार्वजनिक अधिकारी दस्तावेजों के अनुवाद को कानूनी रूप से समकक्ष के रूप में तभी स्वीकार करते हैं जब दी गई भाषा के लिए एक शपथ दुभाषिया द्वारा सील और हस्ताक्षर किए जाते हैं।
यदि कोई दुभाषिया नियमित रूप से पेशेवर प्रशिक्षण में भाग नहीं लेगा तो प्राधिकरण समाप्त हो जाएगा।
=== बेल्जियम ===
"शपथ अनुवादक" (एकल [[डच भाषा|डच]] beëdigd vertaler, [[फ़्रान्सीसी भाषा|फ्रेंच]] transtuter assermenté अल्लतु "शपथ दुभाषिया" (एकल [[डच भाषा|डच]] beädigd tolk, [[फ़्रान्सीसी भाषा|फ्रेंच]] interprète assermente) न्यायाधिकरण के अध्यक्ष के समक्ष उस न्यायिक जिले के प्रथम उदाहरण की शपथ लेते हैं जिसमें उनका निवास स्थान है। अतीत में सभी न्यायिक जिलों में "शपथ" का दर्जा पाने के इच्छुक अनुवादकों और दुभाषियों की क्राउन प्रॉसिक्यूटर द्वारा उपयुक्तता के लिए जांच की जाती थी। उम्मीदवार को शपथ लेने के लिए भाषा संयोजनों(किस भाषा से, किस भाषा में अनुवाद करेंगे) बताना होगा। अनुवादक/दुभाषिया की डिग्री को आमतौर पर योग्यता का पर्याप्त प्रमाण माना जाता है। भाषा संयोजनों की कोई सीमा नहीं है जिन्हें पहचाना जा सकता है।
हालांकि, एक अवैध अप्रवासी से जुड़े घोटाले के बाद, जिसने शपथ अनुवादक का दर्जा प्राप्त किया था, [[एंटवर्प]] में प्रथम बार के न्यायाधिकरण के अध्यक्ष ने एक प्रयोगात्मक योजना शुरू की, जिसके तहत शपथ लेने वाले अनुवादकों और दुभाषियों को न्याय मंत्रालय द्वारा आयोजित प्रशिक्षण से गुजरना पड़ता है और परीक्षा में उपस्थित होना पड़ता है। भाषा कानूनों की अपनी व्याख्या के आधार पर, उसी राष्ट्रपति ने यह भी फैसला सुनाया कि एक शपथ अनुवादक/दुभाषिया के दर्जे के लिए मान्यता प्राप्त एकमात्र भाषा संयोजन वे थे जिनमें डच या तो मूल भाषा या लक्ष्य भाषा थी। बेल्जियम के अन्य न्यायिक जिलों द्वारा अभी तक इस दृष्टिकोण को नहीं अपनाया गया है।
=== ब्राजील ===
आधिकारिक दस्तावेजों का अनुवाद केवल सार्वजनिक अनुवादकों और दुभाषियों द्वारा किया जा सकता है, जो प्रत्येक राज्य की वाणिज्य रजिस्ट्री द्वारा प्रमाणित और मान्यता प्राप्त हैं। आवेदकों को उक्त भाषाओं मेें मौखिक और लिखित परीक्षाओं को उत्तीर्ण करना होगा। पंजीकरण संख्या प्राप्त करने से पहले उनकी पृष्ठभूमि की जांच की जाती है, जिसे प्रत्येक अनुवाद के शीर्षक में सूचित किया जाना चाहिए।
जब उक्त भाषाओं के लिए कोई सार्वजनिक अनुवादक पंजीकृत नहीं होता है, तो एकल अनुवाद कार्य करने के लिए वाणिज्य रजिस्ट्री द्वारा अस्थायी अनुवादकों को भी नियुक्त किया जा सकता है।
प्रत्येक राज्य की वाणिज्य रजिस्ट्री भी अनुवाद शुल्क निर्धारित करती है।
यद्यपि सार्वजनिक रूप से शपथ लेने वाले अनुवादक/दुभाषिया को पंजीकरण की स्थिति में रहना चाहिए, लेकिन उनके अनुवाद पूरे देश में मान्य हैं। सार्वजनिक रूप से शपथ लेने वाले अनुवादक के निवास से अलग शहरों और राज्यों में संस्थानों और सरकारी एजेंसियों को अनुवादक के हस्ताक्षर के नोटरी सत्यापन की आवश्यकता हो सकती है।
विदेशी दस्तावेजों को अनुवाद से पहले ब्राजील के वाणिज्य दूतावास या दूतावास द्वारा सत्यापित किया जाना चाहिए। यदि विदेशी देश की संस्था या सरकारी एजेंसी आवश्यक समझे तो विदेशी भाषा में अनूदित आधिकारिक दस्तावेजों में ब्राजील के विदेश मंत्रालय द्वारा सत्यापित सार्वजनिक शपथ अनुवादक के हस्ताक्षर आवश्यक होता है।[1]
=== कनाडा ===
दस्तावेजों का आधिकारिक अनुवाद दो तरीकों में से एक तरीके से किया जा सकता है। प्रमाणित अनुवाद, एक प्रमाणित अनुवादक द्वारा पूरा किए जाते हैं और अनुवादक की घोषणा, हस्ताक्षर और मुहर के साथ सत्यापित होते हैं। "प्रमाणित अनुवादक" का पद कनाडा में एक संरक्षित पद है, जिसमें केवल वे व्यक्ति जो प्रांतीय अनुवादक संघ के सक्रिय सदस्य हैं और एक प्रमाणन परीक्षा उत्तीर्ण कर चुके हैं, इस पद के लिए योग्य हैं और वही प्रमाणित अनुवाद कर सकते हैं। कनाडा में आधिकारिक अनुवाद प्रस्तुत करने का एक वैकल्पिक तरीका यह है कि अनुवाद का शपथ पत्र लेने के लिए एक नोटरी पब्लिक या आयुक्त की उपस्थिति में अनुवादक द्वारा हस्ताक्षरित एक शपथ पत्र संलग्न करना पड़ता है।
=== जर्मनी ===
जर्मन में वहां के क्षेत्रीय अदालतों (''लैंडगेरिचटे'') को "शपथ लेने वाले अनुवादकों" को नियुक्त करने की शक्ति है। प्रत्येक [[जर्मनी के राज्य|राज्य]] में विशेष पद और अलग-अलग नियुक्ति प्रक्रिया होती है। अधिकांश मामलों में, उम्मीदवारों को एक परीक्षा उत्तीर्ण करने की आवश्यकता होती है। जर्मनी अपने राज्यों में शपथ लेने वाले सभी अनुवादकों को सूचिबद्ध करने के लिए उनकी आधिकारिक सूचना www.justiz-uebersetzer.de पर ऑनलाइन उपलब्ध रखता है।
=== हंगरी ===
हंगरी में अनुवादकों और दुभाषियों के योग्यतानुसार लिए पाँच प्रकार हैंः तकनीकी अनुवादक, तकनीकी अनुवादक-प्रूफरीडर, दुभाषिया, तकनीकी दुभाषिया और सम्मेलन दुभाषिया( सभा दुभाषिया)। इन डिग्रियों को बीए और एमए प्रोग्राम्स, स्नातकोत्तर और लोक प्रशासन और न्याय मंत्रालय द्वारा मान्यता प्राप्त संस्थानों में प्राप्त किया जा सकता है।
इस योग्यता परीक्षा के लिए आवेदन करने में आवेदक उम्र की सीमा या अन्य किसी डिग्री के लिए बाध्य नहीं है। तकनीकी अनुवाद, तकनीकी अनुवाद प्रूफरीडिंग, तकनीकी विवेचन सम्मेलन विवेचन के लिए योग्यता निम्नलिखित संकायों (क्षेत्रों) में प्राप्त की जा सकती हैः सामाजिक विज्ञान, प्राकृतिक विज्ञान, प्रौद्योगिकी और अर्थशास्त्र। उपर्युक्त क्षेत्रों में से किसी एक में डिग्री रखने वाला कोई भी व्यक्ति दिए गए क्षेत्र में तकनीकी अनुवाद और तकनीकी व्याख्या में योग्यता परीक्षा के लिए आवेदन कर सकता है। योग्य तकनीकी दुभाषिया और तकनीकी अनुवादक क्रमशः सम्मेलन विवेचन और तकनीकी अनुवाद प्रूफरीडिंग के लिए भी योग्य हो सकते हैं।<ref>{{Cite web|url=http://net.jogtar.hu/jr/gen/getdoc2.cgi?dbnum=1&docid=98600007.MM|title=Szakfordító és tolmácsképesítések|publisher=net.jogtar.hu|access-date=22 August 2015}}</ref>
अनुवाद और साक्ष्यांकण (अनुप्रमाणन) राष्ट्रीय कार्यालय (Országos Fordító és Fordítashitelesító Iroda, OFFi′) हंगरी में एक कंपनी है जिसे कार्यालय या किसी अन्य द्वारा बनाए गए हंगेरियन से और हंगेरियन में दोनों अनुवाद को प्रमाणित करने और विदेशी भाषा में लिखे गए दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतियां बनाने का विशेष अधिकार है।<ref>{{Cite web|url=http://www.offi.hu/company|title=OFFI|publisher=www.offi.hu|access-date=22 August 2015|archive-date=24 सितंबर 2015|archive-url=https://web.archive.org/web/20150924055100/http://www.offi.hu/company|url-status=dead}}</ref><ref>{{Cite web|url=http://net.jogtar.hu/jr/gen/getdoc2.cgi?dbnum=1&docid=98600024.MT|title=a szakfordításról és tolmácsolásról|publisher=net.jogtar.hu|access-date=22 August 2015}}</ref> बुडापेस्ट की अदालतों में व्याख्या ओ. एफ. एफ. आई. द्वारा प्रदान की जाती है।
यदि कार्यालय दुभाषिया उपलब्ध नहीं करा सकता है तो बुडापेस्ट के बाहर की अदालतों के लिए, स्थानीय अधिकारियों द्वारा पंजीकृत एक दुभाषिया नियुक्त किया जाएगा। यदि कोई आधिकारिक दुभाषिया उपलब्ध नहीं है, तो आवश्यक भाषा की अच्छी समझ रखने वाला एक योग्य व्यक्ति नियुक्त किया जाएगा।<ref>{{Cite web|url=http://net.jogtar.hu/jr/gen/hjegy_doc.cgi?docid=98600007.IM|title=a szakfordításról és a tolmácsolásról szóló 24/1986. (VI. 26.) MT rendelet végrehajtásáról|publisher=net.jogtar.hu|access-date=22 August 2015}}</ref>
=== भारत ===
यहां कम दस्तावेज और स्रोत ज्ञात हैं। शपथ अधिनियम, 1969 की धारा 6 के अधीन विहित ओ. ए. टी. एच. एस. और ए. एफ. एफ. आई. डी. ए. वी. आई. टी. एस. के महाराष्ट्र न्यायालय सिविल विधि अध्याय 26 के अनुसार शपथ लेने वाला दुभाषिया या अनुवादक प्रपत्र संख्या 3 की सहायता से शपथ पत्र दे सकता है कि वह गवाहों द्वारा दिए गए साक्ष्यों की अच्छी तरह से और सही अर्थ में व्याख्या करेगा और अनुवाद के लिए उसे दिए गए सभी दस्तावेजों का सही और सटीक अनुवाद करेगा।
=== इंडोनेशिया ===
इंडोनेशिया में, शपथ अनुवादक वे व्यक्ति हैं जिन्होंने स्कूल ऑफ लिंग्विस्टिक्स एंड कल्चरल साइंसेज, इंडोनेशिया विश्वविद्यालय (एफ. आई. बी., यू. आई.) द्वारा आयोजित कानूनी अनुवाद परीक्षाओं में भाग लिया और उत्तीर्ण हुए हैं।
=== इटली ===
इतालवी अदालतों और वाणिज्य दूतावासों दोनों के पास "''आधिकारिक'' अनुवादकों" (ट्राडुटोरी गियुराटी या आधिकारिक उम्मीदवार) के रूप में उन उम्मीदवारों को नियुक्त करने की शक्ति है जो संबंधित परीक्षा उत्तीर्ण करते हैं या भाषा प्रवीणता का प्रमाण दिखाते हैं (यह प्रमाण आमतौर पर एक विश्वविद्यालय की डिग्री होता है) ।
=== मेक्सिको ===
[[मेक्सिको]] में, प्रमाणित अनुवाद एक ऐसे अनुवाद को समझा जाता है जो सरकार द्वारा अधिकृत विशेषज्ञ अनुवादक द्वारा सील और हस्ताक्षरित होता है (पेरीटो अनुवादक ऑटोरिज़ाडो) इन विशेषज्ञ अनुवादकों को आमतौर पर प्रत्येक राज्य के न्यायालय द्वारा या संघीय न्यायिक परिषद द्वारा अधिकृत किया जाता है, लेकिन कुछ मामलों में स्थानीय सरकारी कार्यालय भी प्रमाणित अनुवाद को सत्यापित कर सकते हैं (जैसे गुआनाजुआटो और जलिस्को में नागरिक रजिस्ट्री कार्यालय) ।<ref name="List of the experts authorized by Mexico City's Court of Justice">{{Cite web|url=https://www.iejcdmx.gob.mx/wp-content/uploads/PERITOS_ACTUALIZADA_MARZO-9.pdf|title=List of the experts authorized by Mexico City's Court of Justice, Information available in Spanish|access-date=April 28, 2023}}</ref><ref name="List of the experts authorized by Federal Judicial Council for 2021">{{Cite web|url=https://www.cjf.gob.mx/resources/index/infoRelevante/2021/pdf/peritos/listaPeritosOrganosPJF_2021.pdf|title=List of the experts authorized by Federal Judicial Council for 2021, Information available in Spanish|access-date=April 28, 2023}}</ref> प्रत्येक राज्य में प्राधिकरण प्रक्रिया अलग-अलग होती है, और ज्यादातर मामलों में उम्मीदवारों को एक परीक्षा उत्तीर्ण करने की आवश्यकता होती है। यहां अनुवाद की प्रामाणिकता की कोई अतिरिक्त आवश्यकता नहीं है।
=== नीदरलैंड्स ===
डच कानूनी सहायता परिषद का एक विभाग, ब्यूरो फॉर स्वोर्न इंटरप्रेटर एंड ट्रांसलेटर्स, जिसे न्याय मंत्रालय द्वारा स्वोर्न ट्रांसलेटर एंड ट्रांसलेटर एक्ट के संबंध में विभिन्न कार्यान्वयन कार्यों के लिए सौंपा गया है। उनके पास प्रमाणीकरण के दो तरीके हैं, हालांकि सबसे उत्तम तरीका कानूनी वैधता है।<ref>{{Cite web|url=http://www.bureaubtv.nl/en/|title=Bureau BTV|archive-url=https://web.archive.org/web/20150215134200/http://www.bureaubtv.nl/en/|archive-date=2015-02-15|access-date=2015-01-30}}</ref>
=== नॉर्वे ===
उम्मीदवारों को एक बहुत ही चुनौतीपूर्ण परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद, सरकारी अधिकृत अनुवादकों के संघ द्वारा प्रमाणित किया जाता है।<ref>{{Cite web|url=http://www.statsaut-translator.no/website.aspx?objectid=1&displayid=1205|title=Statsautoriserte translatørers forening - English|website=www.statsaut-translator.no|archive-url=https://web.archive.org/web/20100115221618/http://www.statsaut-translator.no/website.aspx?objectid=1&displayid=1205|archive-date=January 15, 2010}}</ref> इसके बाद ही सफल उम्मीदवारों को नॉर्वे की सरकार द्वारा "सच्चे प्रमाणित अनुवाद " वाक्यांश के बाद अपने अनुवाद पर हस्ताक्षर करने के लिए अधिकृत किया जाता है। इस संगठन की स्थापना 1913 में हुई थी।
=== पोलैंड ===
पोलैंड में अनुवाद के मानकों को न्याय मंत्रालय के एक प्रासंगिक विभाग द्वारा विनियमित किया जाता है, और ऐसी सेवाएं प्रदान करने के इच्छुक प्रत्येक अनुवादक को राज्य परीक्षा उत्तीर्ण करना पड़ता है।<ref>{{Cite web|url=http://www.ms.gov.pl/|title=Home|website=ms.gov.pl}}</ref> इसके बाद ऐसे व्यक्ति की एक आधिकारिक सूची में मुहर के साथ प्रविष्टि की जाती है और उसे एक शपथ अनुवादक घोषित कर दिया जाता है। हालांकि, साधारण अनुवाद (व्यवसाय, प्रशासन, पत्राचार) के लिए इस क्षेत्र में एक स्वतंत्र विशेषज्ञ होना पर्याप्त है।
=== दक्षिण अफ्रीका ===
[[दक्षिण अफ़्रीका|दक्षिण अफ्रीका]] में, अनुवादक को उच्च न्यायालय द्वारा अधिकृत होना चाहिए और उसे अपने स्रोत पाठ (या शपथ की एक मूल प्रति का) उपयोग करना चाहिए। अनुवादक केवल अपने अनुवाद की शपथ ले सकता है। अनुवाद की [[अधिप्रमाणन|प्रामाणिकता]] को प्रमाणित करने के लिए किसी अतिरिक्त गवाह (जैसे एक नोटरी) की कोई आवश्यकता नहीं है।
=== स्पेन ===
स्पेन में, शपथ अनुवाद का मतलब एक ऐसे अनुवाद से है जो स्पेनिश विदेश मंत्रालय, यूरोपीय संघ और सहयोग द्वारा नियुक्त अनुवादक द्वारा अनूदित हो। [[स्पेनी भाषा|कैस्टिलियन]] और दूसरी भाषा के संयोजन के लिए स्पेन में एक शपथ अनुवादक बनने के लिए, उम्मीदवार को विदेश मामलों और सहयोग मंत्रालय द्वारा "शपथ अनुवादक और दुभाषिया" (ट्रेड्यूक्टर-इंटर्प्रीट जुराडो) के रूप में प्रमाणित होना चाहिए। फिर, अनुवादक को मंत्रालय के साथ अपनी मुहर और हस्ताक्षर पंजीकृत करने की आवश्यकता होती है, जिसमें अनुवादक का डेटा शपथ लेने वाले दुभाषियों की सार्वजनिक सूची में शामिल होता है।<ref>{{Cite web|url=http://www.maec.es/es/MenuPpal/Ministerio/Tablondeanuncios/InterpretesJurados/Documents/IIJJ20090429.pdf|title=Archived copy|archive-url=https://web.archive.org/web/20090521005233/http://www.maec.es/es/MenuPpal/Ministerio/Tablondeanuncios/InterpretesJurados/Documents/IIJJ20090429.pdf|archive-date=2009-05-21|access-date=2009-06-12}}
[[Category:CS1 maint: archived copy as title]]</ref>
शपथ लिए हुए अनुवादक पेशेवर अनुवादक होते हैं (सामान्य रूप से ऐसे व्यक्ति जो अनुवाद और व्याख्या में डिग्री रखते हैं) जिन्होंने स्पेनिश विदेश मामलों और सहयोग मंत्रालय द्वारा दी गई परीक्षा उत्तीर्ण की है और इसलिए वे स्पेनिश से अन्य भाषाओं में अनुवाद करने के लिए अधिकृत होते हैं और अन्य भाषाओं से स्पेनिश में भी। पात्रता या तो राज्य परीक्षा के माध्यम से या स्पेनिश विश्वविद्यालय में अनुवाद और व्याख्या के डिग्री अध्ययन को पूरा करके प्राप्त की जा सकती है, बशर्ते कि अनुवादक ने कानून से संबंधित कुछ विषयों को पास किया हो।
स्पेन की अन्य तीन सह-आधिकारिक भाषाओं ([[बास्क भाषा|बास्क]], [[कातालान भाषा|कैटलन]] और गैलिशियन) सहित भाषाई मेल के लिए शपथ लेने वाले अनुवादकों को क्षेत्रीय अधिकारियों द्वारा स्पेनिश विदेश मंत्रालय के समान प्रक्रिया का पालन करते हुए प्रमाणित किया जाता है।
एक नियम के रूप में, स्पेन में प्रस्तुत सभी दस्तावेजों का अनुवाद स्पेन के विदेश मंत्रालय और सहयोग द्वारा प्रमाणित अनुवादक द्वारा किया जाना चाहिए, हालांकि, कई मामलों में, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनुवाद किए गए और विभिन्न वाणिज्य दूतावासों और दूतावासों में प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों का प्रस्तुत करने वाले देश के भीतर प्रमाणित अनुवादकों द्वारा संबंधित देश के भीतर अनुवाद किया जा सकता है। दूसरे शब्दों में, संयुक्त राज्य अमेरिका में एक प्रमाणित अनुवादक संयुक्त राज्य अमेरिका के स्पेनिश वाणिज्य दूतावासों में से एक के लिए दस्तावेजों का अनुवाद करने में सक्षम है, लेकिन यदि दस्तावेज़ स्पेन में प्रस्तुत किए जाने हैं तो नहीं।<ref>{{Cite web|url=https://www.sespanish.com/2019/04/02/how-to-get-an-apostille-for-an-fbi-background-check/|title=How to Get an Apostille for an FBI Background Check|date=2019-04-02|website=Southeast Spanish|language=en-US|access-date=2019-10-12}}</ref>
=== स्वीडन ===
कानूनी, वित्तीय और प्रशासनिक सेवा एजेंसी एक आधिकारिक एजेंसी है जो दुभाषियों और अनुवादकों को अधिकृत करती है, जिन्हें संगठन द्वारा आयोजित एक कड़ी परीक्षा उत्तीर्ण करनी होती है। अधिकृत अनुवादक एक कानूनी रूप से प्रतिबंधित पदनाम है और उनके अनुवाद को सभी कानूनी उद्देश्यों के लिए कानूनी और बाध्यकारी माना जाता है।<ref>{{Cite web|url=http://www.kammarkollegiet.se/kammarkollegiet|title=Kammarkollegiet | Kammarkollegiet|archive-url=https://web.archive.org/web/20140703053352/http://www.kammarkollegiet.se/kammarkollegiet|archive-date=2014-07-03|access-date=2014-08-13}}</ref>
=== यूनाइटेड किंगडम ===
यू. के. में, एक प्रमाणित अनुवाद का अर्थ केवल उस अनुवाद से है जो अनुवादक या अनुवाद एजेंसी द्वारा तारीख, अनुवादक के प्रमाण पत्र, संपर्क विवरण के साथ अनुवाद की सटीकता की गारंटी देता हुआ बयान के साथ संलग्न हो। उन्हें अक्सर हस्ताक्षरित और मुहरबंद किया जाता है और सटीकता की अतिरिक्त गारंटी के लिए उन्हें प्रूफरीड किया जाना चाहिए। यह उस प्रकार का प्रमाणन है जिसकी आवश्यकता यूके सरकार के निकायों जैसे गृह कार्यालय, पासपोर्ट कार्यालय और यूके सीमा एजेंसी के साथ-साथ विश्वविद्यालयों और यूके में अधिकांश विदेशी दूतावासों द्वारा की जाती है। एक प्रमाणित अनुवाद इसकी सटीकता की गारंटी देता है और इसमें अनुवादक या परियोजना प्रबंधक का नाम और संपर्क सूत्र होता है, जो उस सटीकता की पुष्टि कर सकता है और ऐसा करने के लिए अनुरोध करने वाले संगठन द्वारा संपर्क किया जा सकता है।
=== संयुक्त राज्य अमेरिका ===
एक प्रमाणित अनुवाद में स्रोत-भाषा पाठ, लक्षित-भाषा पाठ और अनुवादक या अनुवाद कंपनी के प्रतिनिधि द्वारा हस्ताक्षरित एक बयान होता है कि अनुवादक या अनुवाद कम्पनी के प्रतिनिधि का मानना है कि लक्षित-भाषा के पाठ स्रोत-भाषा के ग्रंथ का सटीक और पूर्ण अनुवाद है। हस्ताक्षर नोटरीकृत होना चाहिए। अनुवादकों के लिए कोई संघीय या राज्य लाइसेंस या प्रमाणन नहीं है। अनुवादकों के लिए कुछ प्रमाण पत्र उपलब्ध हैं लेकिन वे अन्य देशों में संघीय लाइसेंसिंग या प्रमाणन के समान मान्य नहीं हैं।<ref>{{Cite web|url=https://www.atanet.org/client-assistance/certified-translation-vs-certified-translator/|title=Certified Translation vs. Certified Translator|date=25 May 2016}}</ref>
=== संयुक्त अरब अमीरात ===
संयुक्त अरब अमीरात (यू. ए. ई.) में एक प्रमाणित अनुवाद कानूनी अनुवाद का पर्याय है। कानूनी अनुवाद केवल संयुक्त अरब अमीरात के न्याय मंत्रालय द्वारा लाइसेंस प्राप्त अनुवादक द्वारा किया जा सकता है। प्रत्येक अनुवादक को प्रत्येक भाषा जोड़ी(स्रोत भाषा एवं लक्ष्य भाषा) के लिए न्याय मंत्रालय, संयुक्त अरब अमीरात द्वारा आयोजित परीक्षा उत्तीर्ण करना होता है। एक भाषा जोड़ी में अरबी और एक विदेशी भाषा होती है। संयुक्त अरब अमीरात में केवल 9 विदेशी भाषाओं के लिए कानूनी अनुवादक उपलब्ध हैं जैसे अंग्रेज़ी, फ़्रेंच, जर्मन, स्पेनिश, इतालवी, रूसी, चीनी, फ़ारसी (फ़ारसी और तुर्की के रूप में भी जाना जाता है) । केवल कानूनी अनुवाद को संयुक्त अरब अमीरात के नोटरी पब्लिक, संयुक्त अरब अमीरात का न्याय मंत्रालय, विदेश मंत्रालय और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग मंत्रालय, संयुक्त अरब अरब अमीरात से नोटरीकृत, सत्यापित और वैध किया जा सकता है। संयुक्त अरब अमीरात में स्थित सभी दूतावास और वाणिज्य दूतावास केवल कानूनी अनुवाद को वैध बनाते हैं जो विदेश मंत्रालय और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग, यूएई द्वारा सत्यापित हैं। विदेश मामलों और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग मंत्रालय, यूएई से कानूनी अनुवाद को वैध बनाने के लिए इसे पहले यूएई के न्याय मंत्रालय या यूएई के नोटरी पब्लिक से वैध किया जाना ज़रूरी होता है। संयुक्त अरब अमीरात का न्याय मंत्रालय केवल उनके लाइसेंस प्राप्त अनुवादकों द्वारा किए गए अनुवाद को वैध बनाता है।
== यह भी देखें। ==
* [[अनुवाद|अनुवाद।]]
* [[Legal translation|कानूनी अनुवाद।]]
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प्रशांत कुमार सैनी (राजनीतिज्ञ)
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{{Infobox officeholder
| name = प्रशांत कुमार सैनी
| image = Prashant_Kumar_saini.jpg
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| birth_place = [[जयपुर]], [[राजस्थान]], भारत
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| known_for = विराज जन पार्टी के संस्थापक
}}
'''प्रशांत कुमार सैनी''' (अंग्रेज़ी: ''Prashant Kumar Saini''), जिन्हें '''प्रशांत सैनी''' के नाम से भी जाना जाता है, एक भारतीय राजनीतिज्ञ हैं जो [[जयपुर]], [[राजस्थान]] से संबंधित हैं।<ref>{{Cite web|title=विराज जन पार्टी का बड़ा ऐलान: आगामी चुनावों में सभी सीटों पर उतारेगी उम्मीदवार|url=https://bhaskardigital.com/viraj-jan-partys-big-announcement-will/|date=2025-12-09|access-date=2026-02-02|language=en}}</ref><ref>{{Cite web|title=Prashant Saini: Candidate Profile|url=https://m.economictimes.com/prashant-saini/amp_candidates/candidateid-11302.cms|website=The Economic Times|access-date=2026-02-02}}</ref> वह राजनीतिक संगठन '''विराज जन पार्टी''' के संस्थापक और राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं।<ref name="dj1">{{Cite web |date=9 December 2025 |title=Viraj Jan Party all set to enter the political arena in 2028: Prashant Kumar Saini |url=https://english.dainikjagranmpcg.com/politics/viraj-jan-party-all-set-to-enter-the-political-arena/article-9889 |access-date=5 January 2026}}</ref><ref>{{Cite web|title=विराज जन पार्टी 2028 में चुनावी मैदान में उतरेगी: प्रशांत कुमार सैनी|url=https://www.dainikjagranmpcg.com/election/prashant-kumar-saini-will-contest-elections-in-viraj-jan-party/article-39570|date=2025-12-09|access-date=2026-02-02|language=hi}}</ref>
== प्रारंभिक जीवन और शिक्षा ==
सैनी ने [[राजस्थान विश्वविद्यालय]] से अंग्रेज़ी साहित्य में स्नातकोत्तर की डिग्री प्राप्त की है और इसके साथ ही उन्होंने एमबीए भी किया है।<ref>{{Cite web |date=23 December 2025 |title=A massive rally and Membership campaign by Viraj Jan Party |url=https://english.dainikjagranmpcg.com/politics/-a-massive-rally-and-membership-campaign-by-viraj-jan/article-10900 |access-date=5 January 2026}}</ref><ref>{{Cite web|title=Candidate Affidavit Information|url=https://www.myneta.info/LokSabha2019/candidate.php?candidate_id=11302|website=Myneta|access-date=2026-02-02}}</ref>
== राजनीतिक करियर ==
प्रशांत कुमार सैनी ने 2019 का भारतीय आम चुनाव में जयपुर लोकसभा सीट से एक स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था।<ref>{{Cite web |title=Loksabha 2019 Candidate Details |url=https://www.myneta.info/LokSabha2019/candidate.php?candidate_id=11302 |access-date=4 January 2026}}</ref><ref>{{Cite web|title=जयपुर में विराज जन पार्टी की विशाल रैली|url=https://www.punjabkesari.in/national/news/viraj-jan-party-massive-rally-in-jaipur-public-support-growing-rapidly-2265351|date=2025-12-23|access-date=2026-02-02}}</ref>
वह '''विराज जन पार्टी''' के माध्यम से सक्रिय राजनीति में कार्यरत हैं और भविष्य में चुनावी विस्तार की योजना बना रहे हैं।<ref name="dj1" />
== अन्य कार्य ==
राजनीति में आने से पहले, सैनी एक बैंक कर्मचारी के रूप में कार्यरत थे। बाद में वे सामाजिक कार्यों में सक्रिय हो गए, विशेष रूप से पशु कल्याण से जुड़े कार्यों में, जो विराट सेना से संबंधित संगठनों के माध्यम से किए गए।<ref>{{Cite web |date=23 December 2025 |title=जयपुर में विराज जन पार्टी की विशाल रैली |url=https://www.punjabkesari.in/national/news/viraj-jan-partys-massive-rally-in-jaipur-public-support-growing-rapidly-2265351 |access-date=5 January 2026}}</ref><ref>{{Cite web|title=विराज जन पार्टी की रैली और मेंबरशिप अभियान|url=https://bhaskardigital.com/a-big-rally-and-membership-campaign-of-viraj/|date=2025-12-23|access-date=2026-02-02|language=en}}</ref>
== संदर्भ ==
{{reflist}}
== बाहरी कड़ियाँ ==
* {{Official website|https://www.myneta.info/}}
[[Category:जीवित लोग]]
[[Category:भारतीय राजनीतिज्ञ]]
[[Category:जयपुर के लोग]]
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चाहर धर्मेंद्र
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पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा
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{{हहेच लेख| कारण=लेख मूल शोध पर आधारित प्रतीत होता है तथा पर्याप्त विश्वसनीय स्रोतों द्वारा समर्थित नहीं है।| चर्चा_पृष्ठ= विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/प्रशांत कुमार सैनी (राजनीतिज्ञ)}}{{Infobox officeholder
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}}
'''प्रशांत कुमार सैनी''' (अंग्रेज़ी: ''Prashant Kumar Saini''), जिन्हें '''प्रशांत सैनी''' के नाम से भी जाना जाता है, एक भारतीय राजनीतिज्ञ हैं जो [[जयपुर]], [[राजस्थान]] से संबंधित हैं।<ref>{{Cite web|title=विराज जन पार्टी का बड़ा ऐलान: आगामी चुनावों में सभी सीटों पर उतारेगी उम्मीदवार|url=https://bhaskardigital.com/viraj-jan-partys-big-announcement-will/|date=2025-12-09|access-date=2026-02-02|language=en}}</ref><ref>{{Cite web|title=Prashant Saini: Candidate Profile|url=https://m.economictimes.com/prashant-saini/amp_candidates/candidateid-11302.cms|website=The Economic Times|access-date=2026-02-02}}</ref> वह राजनीतिक संगठन '''विराज जन पार्टी''' के संस्थापक और राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं।<ref name="dj1">{{Cite web |date=9 December 2025 |title=Viraj Jan Party all set to enter the political arena in 2028: Prashant Kumar Saini |url=https://english.dainikjagranmpcg.com/politics/viraj-jan-party-all-set-to-enter-the-political-arena/article-9889 |access-date=5 January 2026}}</ref><ref>{{Cite web|title=विराज जन पार्टी 2028 में चुनावी मैदान में उतरेगी: प्रशांत कुमार सैनी|url=https://www.dainikjagranmpcg.com/election/prashant-kumar-saini-will-contest-elections-in-viraj-jan-party/article-39570|date=2025-12-09|access-date=2026-02-02|language=hi}}</ref>
== प्रारंभिक जीवन और शिक्षा ==
सैनी ने [[राजस्थान विश्वविद्यालय]] से अंग्रेज़ी साहित्य में स्नातकोत्तर की डिग्री प्राप्त की है और इसके साथ ही उन्होंने एमबीए भी किया है।<ref>{{Cite web |date=23 December 2025 |title=A massive rally and Membership campaign by Viraj Jan Party |url=https://english.dainikjagranmpcg.com/politics/-a-massive-rally-and-membership-campaign-by-viraj-jan/article-10900 |access-date=5 January 2026}}</ref><ref>{{Cite web|title=Candidate Affidavit Information|url=https://www.myneta.info/LokSabha2019/candidate.php?candidate_id=11302|website=Myneta|access-date=2026-02-02}}</ref>
== राजनीतिक करियर ==
प्रशांत कुमार सैनी ने 2019 का भारतीय आम चुनाव में जयपुर लोकसभा सीट से एक स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था।<ref>{{Cite web |title=Loksabha 2019 Candidate Details |url=https://www.myneta.info/LokSabha2019/candidate.php?candidate_id=11302 |access-date=4 January 2026}}</ref><ref>{{Cite web|title=जयपुर में विराज जन पार्टी की विशाल रैली|url=https://www.punjabkesari.in/national/news/viraj-jan-party-massive-rally-in-jaipur-public-support-growing-rapidly-2265351|date=2025-12-23|access-date=2026-02-02}}</ref>
वह '''विराज जन पार्टी''' के माध्यम से सक्रिय राजनीति में कार्यरत हैं और भविष्य में चुनावी विस्तार की योजना बना रहे हैं।<ref name="dj1" />
== अन्य कार्य ==
राजनीति में आने से पहले, सैनी एक बैंक कर्मचारी के रूप में कार्यरत थे। बाद में वे सामाजिक कार्यों में सक्रिय हो गए, विशेष रूप से पशु कल्याण से जुड़े कार्यों में, जो विराट सेना से संबंधित संगठनों के माध्यम से किए गए।<ref>{{Cite web |date=23 December 2025 |title=जयपुर में विराज जन पार्टी की विशाल रैली |url=https://www.punjabkesari.in/national/news/viraj-jan-partys-massive-rally-in-jaipur-public-support-growing-rapidly-2265351 |access-date=5 January 2026}}</ref><ref>{{Cite web|title=विराज जन पार्टी की रैली और मेंबरशिप अभियान|url=https://bhaskardigital.com/a-big-rally-and-membership-campaign-of-viraj/|date=2025-12-23|access-date=2026-02-02|language=en}}</ref>
== संदर्भ ==
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== बाहरी कड़ियाँ ==
* {{Official website|https://www.myneta.info/}}
[[Category:जीवित लोग]]
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[[Category:जयपुर के लोग]]
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2026-05-02T20:36:33Z
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text/x-wiki
{{Infobox officeholder
| honorific_prefix = यूक्रेन के हीरो
| name = व्याचेस्लाव चोर्नोविल
| native_name = {{nobold|В'ячеслав Чорновіл}}
| image = НДУ 3 Чорновіл Вячеслав Максимович.jpg
| alt = काले सूट, नीली शर्ट और हरी टाई में चोर्नोविल।
| caption = 1998 में चोर्नोविल
| office = यूक्रेन के जन प्रतिनिधि
| term_start = 29 मार्च 1998
| term_end = 25 मार्च 1999
| constituency = यूक्रेन का जन आन्दोलन, नं॰ 1
| term_start1 = 10 मई 1994
| term_end1 = 29 मार्च 1998
| predecessor1 = ओलेक्ज़ेंडर शेवचेंको
| successor1 = ''निर्वाचन क्षेत्र समाप्त''
| constituency1 = तेरनोपिल ओब्लास्ट, नं॰ 357
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| term_end2 = 10 मई 1994
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| office3 = यूक्रेन का जन आन्दोलन के नेता
| term_start3 = दिसंबर 1992
| term_end3 = 25 मार्च 1999{{ref label|Dispute|B}}
| predecessor3 = इवान ड्रेच
| successor3 = हेनादिय उदोवेंको
| office4 = ल्वीव ओब्लास्ट परिषद के अध्यक्ष
| term_start4 = अप्रैल 1990
| term_end4 = अप्रैल 1992
| predecessor4 = ''पद स्थापित''
| successor4 = मायकोला होरिन
| birth_date = {{जन्म तिथि|1937|12|24|df=yes}}
| birth_place = येर्की, कीव ओब्लास्ट, यूक्रेनी सोवियत समाजवादी गणराज्य, सोवियत संघ
| death_cause = सड़क दुर्घटना{{ref label|Death|C}}
| death_date = {{मृत्यु तिथि |1999|3|25|df=yes}}
| death_place = बोरिस्पिल के पास, कीव ओब्लास्ट, यूक्रेन
| party = यूक्रेन का जन आन्दोलन (1989 से)
| other_party = कोम्सोमोल (1950 के दशक के अंत से–1966)
| spouse = {{plainlist|
<br/>{{marriage|इरीना ब्रुनेवेट्स|1960|1962|end=div}}
<br/>{{marriage|ओलेना एंटोनिव|1963||end=div}}
<br/>{{marriage|एटेना पाश्को|1969}}
}}
| children = {{hlist|एंड्री चोर्नोविल|तरास चोर्नोविल}}
| alma_mater = तरास शेवचेंको राष्ट्रीय विश्वविद्यालय कीव
| awards = {{plainlist|
<br/>यूक्रेन के हीरो (2000)
<br/>ऑर्डर ऑफ प्रिंस यारोस्लाव द वाइज (1997)
<br/>शेवचेंको राष्ट्रीय पुरस्कार (1996)
}}
| signature = Chornovil autograph.svg
| footnotes = A. {{note|PLPR||आनुपातिक प्रतिनिधित्व सीट।}}<br/>B. {{note|Dispute||''वास्तव में'' (De facto) 8 सितंबर 1989 से। 17 या 19 फरवरी 1999 से यूरी कोस्तेंको के साथ विवादित।}}<br/>C. {{note|Death||चोर्नोविल की मृत्यु की परिस्थितियाँ विवादित हैं; अधिक जानकारी के लिए § षड्यंत्र के सिद्धांत और जांच देखें।}}
}}
'''व्याचेस्लाव मक्सिमोविच चोर्नोविल''' ({{lang-uk|В'ячеслав Максимович Чорновіл}}; 24 दिसंबर 1937 – 25 मार्च 1999) एक प्रमुख यूक्रेनी सोवियत असंतुष्ट, स्वतंत्रता सेनानी और दूरदर्शी राजनीतिज्ञ थे। वे यूक्रेन के राजनीतिक और सामाजिक पुनर्जागरण के अग्रदूतों में गिने जाते हैं। वर्ष 1989 से लेकर अपने निधन तक वे यूक्रेन का जन आन्दोलन के नेता रहे, जिसने देश में लोकतांत्रिक परिवर्तन और राष्ट्रीय स्वतंत्रता की चेतना को सशक्त स्वर प्रदान किया।
मानवाधिकारों की रक्षा के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता ने उन्हें सोवियत शासन के विरोध का प्रमुख चेहरा बना दिया। इसके परिणामस्वरूप उन्हें कठोर दमन का सामना करना पड़ा और उन्होंने अपने जीवन के लगभग पंद्रह वर्ष कारावास और निर्वासन में व्यतीत किए।
वर्ष 1990 से 1999 तक यूक्रेन के जन प्रतिनिधि के रूप में कार्य करने वाले चोर्नोविल, यूक्रेन में सार्वजनिक पद धारण करने वाले पहले और सबसे प्रमुख कम्युनिस्ट-विरोधी नेताओं में से एक थे। उन्होंने यूक्रेन के राष्ट्रपति पद के लिए दो बार चुनाव लड़ा। वर्ष 1991 में अपने पहले प्रयास में वे [[लियोनिद क्रावचुक]] से हार गए थे, जबकि 1999 के चुनाव अभियान के दौरान एक कार दुर्घटना में विवादित परिस्थितियों में उनका निधन हो गया।
चोर्नोविल का जन्म तत्कालीन [[सोवियत संघ]] के अधीन मध्य यूक्रेन के येर्की गाँव में हुआ था। विश्वविद्यालय के दिनों से ही कोम्सोमोल के सदस्य रहे चोर्नोविल, प्रति-सांस्कृतिक सिक्सटियर्स आंदोलन से जुड़ गए थे। साम्यवाद के विरुद्ध आवाज उठाने के कारण अंततः उन्हें कोम्सोमोल से निष्कासित कर दिया गया। 1965-1966 के सोवियत दमन के दौरान गिरफ्तार किए गए बुद्धिजीवियों के प्रति हुए दुर्व्यवहार की जांच करने वाले उनके ''समिज्दात'' कार्यों ने उन्हें पश्चिमी देशों में भारी प्रशंसा दिलाई, लेकिन इसी के परिणामस्वरूप उन्हें याकूतिया में तीन साल के कारावास की सजा भी सुनाई गई। रिहाई के बाद, वे पुनः ''समिज्दात'' कार्यों में सक्रिय हो गए और उन्होंने ''द यूक्रेनी हेराल्ड'' का प्रकाशन शुरू किया, जिसे आधुनिक यूक्रेनी स्वतंत्र प्रेस का अग्रदूत माना जाता है।
वर्ष 1972 में, बुद्धिजीवियों के दमन के एक अन्य चक्र में चोर्नोविल को फिर से बंदी बना लिया गया, और उन्हें 1985 तक यूक्रेन लौटने की अनुमति नहीं दी गई। उन्होंने अपना यह अधिकांश समय कारावास में ही व्यतीत किया। जेल में रहने के दौरान, उनके साथी असंतुष्ट मिखाइल खेइफेट्स ने यूक्रेनी राजनीतिक कैदियों का नेतृत्व करने के कारण चोर्नोविल को "ज़ेकों (कैदियों) का जनरल" कहकर पुकारा था, और [[एमनेस्टी इंटरनेशनल]] ने भी उन्हें 'अंतरात्मा का बंदी' घोषित किया था।
उनकी रिहाई तब संभव हो सकी जब सोवियत सरकार ने ''पेरेस्त्रोइका'' नीति के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर लगे प्रतिबंधों में ढील दी। चोर्नोविल ने यूक्रेन में कम्युनिस्ट शासन के खिलाफ राजनीतिक विपक्ष तैयार करने में सक्रिय भूमिका निभाई, जिसके परिणामस्वरूप यूक्रेन का जन आन्दोलन पार्टी की स्थापना हुई और एक ऐसी लोकप्रिय क्रांति का जन्म हुआ जिसने साम्यवाद को जड़ से उखाड़ फेंका। इस क्रांति के बीच, चोर्नोविल ने यूक्रेन की संसद के सदस्य के रूप में पदभार ग्रहण किया। वे 1991 यूक्रेनी राष्ट्रपति चुनाव में दो मुख्य उम्मीदवारों में से एक थे, यद्यपि वे पूर्व कम्युनिस्ट नेता [[लियोनिद क्रावचुक]] से पराजित हो गए थे। चोर्नोविल ने [[यूरोपीय संघ]] में यूक्रेन की सदस्यता का पुरजोर समर्थन किया और यूक्रेनी कुलीन वर्गों के बढ़ते प्रभुत्व का कड़ा विरोध किया।
अपने जीवनकाल में चोर्नोविल एक अत्यंत विवादास्पद व्यक्ति माने जाते थे, और उनके जीवन के अंतिम महीनों में 'रूख' पार्टी के भीतर भारी गुटबाजी हावी रही। 1999 यूक्रेनी राष्ट्रपति चुनाव के दौरान एक कार दुर्घटना में उनकी मृत्यु हो गई, जहाँ वे तत्कालीन राष्ट्रपति [[लियोनिद कुचमा]] के प्रमुख प्रतिद्वंद्वी थे। उनकी मृत्यु ने कई षड्यंत्र के सिद्धांतों को जन्म दिया और वर्षों तक इसकी जांच और मुकदमे चलते रहे, जिन्होंने न तो [[हत्या]] की संभावना की पूरी तरह पुष्टि की और न ही इसे सिरे से खारिज किया। वे वर्तमान यूक्रेन में एक बेहद लोकप्रिय ऐतिहासिक व्यक्ति हैं; उन्हें दो बार यूक्रेन के शीर्ष दस सबसे लोकप्रिय व्यक्तियों की सूची में स्थान दिया गया है और उन्हें देश के लोकतंत्र, मानवाधिकार सक्रियता तथा यूरोप-समर्थक विचारधारा का प्रतीक माना जाता है।
== प्रारंभिक जीवन और शिक्षा ==
[[File:71-212-0076 SAM 9126 Vilkhovets.jpg|alt=पेड़ों से घिरे एक सफेद और हरे रंग के घर की तस्वीर|thumb|left|[[विल्खोवेट्स, चर्कासी ओब्लास्ट|विल्खोवेट्स]] में चोर्नोविल के बचपन का घर]]
व्याचेस्लाव मक्सिमोविच चोर्नोविल का जन्म 24 दिसंबर 1937 को तत्कालीन यूक्रेनी सोवियत समाजवादी गणराज्य के येर्की गाँव में शिक्षकों के एक परिवार में हुआ था।{{sfn|LIGA.net 2009}} उनके पिता, मक्सिम इओसिपोविच चोर्नोविल, कोसैक कुलीन वर्ग के वंशज थे, जबकि उनकी माता कुलीन तेरेशचेंको परिवार से संबंध रखती थीं।{{sfn|Kherson Oblast Universal Library 2024}} 'ग्रेट पर्ज' के दौरान जन्मे और पले-बढ़े व्याचेस्लाव के बचपन पर सोवियत दमन की गहरी छाप थी; उनके चाचा, पेत्रो इओसिपोविच को मृत्युदंड दे दिया गया था, जबकि उनके पिता यूक्रेन में कानून की नजरों से छिपकर एक भगोड़े का जीवन जी रहे थे।{{sfn|Kherson Oblast Universal Library 2024}} [[द्वितीय विश्व युद्ध]] और यूक्रेन पर जर्मन कब्जे के दौरान चोर्नोविल का परिवार हुसाकोव गाँव में रहा, जहाँ व्याचेस्लाव ने अपनी स्कूली शिक्षा प्राप्त की। उन्होंने बाद में अपनी आत्मकथा में यह दावा किया कि सोवियत संघ द्वारा हुसाकोव पर दोबारा कब्ज़ा किए जाने के बाद, उनके परिवार को गाँव से निकाल दिया गया था। इसके बाद वे विल्खोवेट्स में रहने लगे और वहीं से व्याचेस्लाव ने 1955 में स्वर्ण पदक के साथ अपनी माध्यमिक शिक्षा पूरी की।{{sfn|Chornovil, autobiography}} उनके अशांत बचपन को देखते हुए, चोर्नोविल के माता-पिता ने उन्हें यूक्रेनी राष्ट्रवाद के बारे में बताने से परहेज किया। इसके बजाय उनका पालन-पोषण कम्युनिस्ट विचारधारा की शिक्षाओं के साथ किया गया{{sfn|Derevinskyi 2017a|p=1}} और उन्हें लोगों के बीच मित्रता तथा सर्वहारा अंतर्राष्ट्रीयवाद जैसे आदर्श सिखाए गए।{{sfn|Matiash|2017|p=6}}
उसी वर्ष चोर्नोविल ने कीव के तरास शेवचेंको विश्वविद्यालय में दाखिला लिया, जहाँ वे पत्रकारिता की पढ़ाई कर रहे थे। इसी दौरान वे सोवियत संघ की कम्युनिस्ट पार्टी (CPSU) की युवा शाखा, कोम्सोमोल में भी शामिल हो गए। कीव की रूसी-भाषी आबादी द्वारा यूक्रेनी भाषा बोलने वालों के प्रति दिखाई जाने वाली नकारात्मक प्रतिक्रिया ने उन्हें भीतर से असंतुष्ट कर दिया और एक यूक्रेनी के रूप में उनकी चेतना को जागृत किया।{{sfn|Ivanova|2024}} उस समय के अन्य युवा सोवियत कार्यकर्ताओं की भाँति, चोर्नोविल भी 1956 में सी॰पी॰एस॰यू॰ की 20वीं कांग्रेस से अत्यधिक प्रभावित हुए थे, जिसमें [[निकिता ख्रुश्चेव]] ने [[जोसेफ स्टालिन]] के शासन की कड़ी निंदा करते हुए भाषण दिया था।{{sfn|Kulchytskyi|2019|p=50}}
1957 में उनके गैर-अनुरूपतावादी विचारों ने उन्हें संकाय के समाचार पत्र के साथ विवाद में ला खड़ा किया, जिसने "अमानक सोच" रखने के लिए उनकी निंदा की।{{sfn|Harasymiw|Koshelivets|Senkus|2015}} नतीजतन, उन्हें अपनी पढ़ाई बीच में ही रोकनी पड़ी और [[डोनबास]] शहर ज़दानोव में एक ब्लास्ट फर्नेस के निर्माण कार्य में लगा दिया गया।{{sfn|Chornovil, autobiography}} वहाँ उन्होंने ''कीव कोम्सोमोलेट्स'' समाचार पत्र के लिए एक भ्रमणशील संपादक के रूप में भी काम किया। एक वर्ष पश्चात, वे अपनी पढ़ाई पर लौट आए और 1960 में सम्मान के साथ स्नातक की उपाधि प्राप्त की।{{sfn|Harasymiw|Koshelivets|Senkus|2015}} उनका डिप्लोमा शोध प्रबंध 19वीं और 20वीं सदी की शुरुआत के प्रमुख यूक्रेनी लेखक और स्वतंत्रता कार्यकर्ता बोरिस ह्रीन्चेंको के कार्यों पर आधारित था।{{sfn|LB.ua 2015}} उसी वर्ष, उन्होंने अपनी पहली पत्नी, इरीना ब्रुनेवेट्स से विवाह कर लिया। 1962 में उनके तलाक से पूर्व, उनका एक बेटा हुआ, जिसका नाम एंड्री था।{{sfn|Istorychna Pravda 2017}}
== पत्रकारिता और पार्टी का करियर ==
स्नातक होने के बाद, जुलाई 1960 में चोर्नोविल ल्वीव टेलीविज़न (वर्तमान - सुस्पिल्ने ल्वीव) में एक संपादक बन गए । उन्होंने चैनल के युवा कार्यक्रमों के लिए पटकथाएँ लिखीं।{{sfn|Ostrovskyi 2018a|p=106}} इस अवधि में, चोर्नोविल ने साहित्यिक आलोचना पर भी काम किया, जिसमें मुख्य रूप से ह्रीन्चेंको, तरास शेवचेंको और वलोडिमिर सामिलेंको की कृतियों पर ध्यान केंद्रित किया गया था।{{sfn|Shvydkyi|2013}} इनमें से कुछ रचनाएँ टीवी पर भी प्रसारित हुईं; उदाहरण के लिए, 1962 में उन्होंने मिखाइलो स्टेल्माख, वासिल चुमाक और 'यंग म्यूज' समूह पर विशेष फीचर प्रसारित किए।{{sfn|Seko|2020|p=135}} संभवतः इसी दौरान उनकी मुलाकात ज़ेनोविय क्रासिव्स्की से हुई, जो ल्वीव विश्वविद्यालय में टेलीविजन पत्रकारिता की पढ़ाई कर रहे थे। चोर्नोविल की ही तरह, क्रासिव्स्की भी बाद में असंतुष्ट आंदोलन के एक बड़े नेता बने।{{sfn|Ostrovskyi 2018a|p=106}}
[[File:Київська ГЕС.jpg|alt=एक बड़े जलविद्युत ऊर्जा संयंत्र की हवाई तस्वीर|thumb|कीव हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर प्लांट, जहाँ चोर्नोविल ने 1963 से 1964 तक कोम्सोमोल सचिव के रूप में काम किया]]
मई 1963 में चोर्नोविल ने ल्वीव टेलीविज़न की अपनी नौकरी छोड़ दी और कीव लौट आए, ताकि वे अपना 'कैंडिडेट ऑफ साइंसेज' का शोध प्रबंध पूरा कर सकें।{{sfn|Derevinskyi 2017a|pp=1–2}} वहां, उन्होंने पास के विशहोरोद में कीव हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर प्लांट के निर्माण के लिए कोम्सोमोल सचिव के रूप में कार्य किया।{{sfn|Shvydkyi|2013}} उन्होंने कीव स्थित समाचार पत्रों ''यंग गार्ड'' और ''सेकंड रीडिंग'' के लिए एक संपादक के रूप में भी एक साथ काम किया,{{sfn|Chornovil, autobiography}} और वे 'आर्टिस्टिक यूथ्स क्लब' का हिस्सा बन गए, जो प्रति-सांस्कृतिक सिक्सटियर्स आंदोलन से जुड़े बुद्धिजीवियों का एक अनौपचारिक समूह था।{{sfn|Ostrovskyi 2018a|p=107}} जून 1963 में, चोर्नोविल ने अपनी दूसरी पत्नी, ओलेना एंटोनिव से विवाह किया, और 1964 में उनके दूसरे बेटे, तरास का जन्म हुआ।{{sfn|Istorychna Pravda 2017}} चोर्नोविल ने 1964 में कीव शैक्षणिक संस्थान में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों के लिए परीक्षा भी उत्तीर्ण कर ली। हालाँकि, उनकी राजनीतिक गतिविधियों के कारण उन्हें 'डॉक्टर ऑफ साइंसेज' की डिग्री हासिल करने के अधिकार से वंचित कर दिया गया।{{sfn|Shvydkyi|2013}}
9 मार्च 1964 को, सोवियत संघ ने यूक्रेन के राष्ट्रीय कवि तरास शेवचेंको की 150वीं वर्षगांठ मनाई। शेवचेंको पर सी॰पी॰एस॰यू॰ का आधिकारिक रुख, विशेष रूप से 'शेवचेंको दिवस' के दौरान, दास-प्रथा विरोधी गतिविधियों में कवि की भूमिका और ज़ारिस्ट निरंकुशता के प्रति उनके कड़े प्रतिरोध पर ज़ोर देता था। कीव हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर प्लांट के श्रमिकों को संबोधित करते हुए अपने भाषण में, चोर्नोविल ने निर्धारित कम्युनिस्ट व्याख्याओं से हटकर शेवचेंको को एक विशिष्ट रूप से यूक्रेनी नायक के रूप में प्रस्तुत किया। चोर्नोविल ने श्रोताओं से कवि के मुख्य कार्यों के संग्रह, ''कोबज़ार'' को "अपनी अपमानित और तिरस्कृत मातृभूमि के लिए कांपते हुए प्रेम" की अभिव्यक्ति के रूप में व्याख्यायित करने का आग्रह किया। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि शेवचेंको के कार्यों से यह सिद्ध होता है कि "मनुष्य द्वारा मनुष्य के उत्पीड़न पर, मानवीय गरिमा और अविच्छेद्य मानवाधिकारों की अवमानना पर, स्वतंत्र व मानवीय विचारों के दमन पर, और एक राष्ट्र द्वारा दूसरे राष्ट्र के उत्पीड़न पर टिकी हर व्यवस्था, चाहे वह किसी भी नए आवरण में क्यों न छिप जाए [...] मानव स्वभाव के घोर विरुद्ध है, और इसे नष्ट किया जाना चाहिए।"{{sfn|Seko|2020|pp=123–125}} इतिहासकार यारोस्लाव सेको इस भाषण को सिक्सटियर्स आंदोलन के एक विशिष्ट उदाहरण के रूप में देखते हैं, यद्यपि उनका यह भी मानना है कि उस समय ''इंटरनेशनलिज्म और रसिफिकेशन?'' के लेखक इवान डज़िउबा, और साथी असंतुष्ट येवहेन स्वेर्स्टिउक का प्रभाव कहीं अधिक व्यापक था।{{sfn|Seko|2020|pp=128–129}}
8 अगस्त 1965 को, शेषोरी गाँव में शेवचेंको के एक स्मारक के उद्घाटन के अवसर पर, चोर्नोविल ने घोर कम्युनिस्ट-विरोधी स्वर के साथ एक प्रखर भाषण दिया। परिणामस्वरूप, उन्हें उनकी कोम्सोमोल की नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया। अपनी बर्खास्तगी के बाद, चोर्नोविल ने अपनी बेगुनाही साबित करने के एक असफल प्रयास में कोम्सोमोल के नेतृत्व को कई पत्र भी लिखे।{{sfn|Istorychna Pravda 2017}}
== असंतुष्ट और मानवाधिकार कार्यकर्ता ==
=== 1965–1966 का दमन और उसके परिणाम ===
वर्ष 1965 में सिक्सटियर बुद्धिजीवियों की सामूहिक गिरफ्तारियों का एक नया सिलसिला शुरू हुआ क्योंकि अपेक्षाकृत उदार माने जाने वाले निकिता ख्रुश्चेव को हटाकर लियोनिद ब्रेझनेव को नियुक्त कर दिया गया था। इन गिरफ्तारियों के विरोध में, चोर्नोविल, डज़िउबा और छात्र वासिल स्टस ने कीव सिनेमा के भीतर एक बड़ा प्रदर्शन किया, जिसने सर्गेई पारजानोव की फिल्म 'शैडोज़ ऑफ़ फॉरगॉटन एंसेस्टर्स' के 4 सितंबर के प्रीमियर को बाधित कर दिया। चोर्नोविल ने जोर से चिल्लाकर कहा: "जो भी इस अत्याचार के विरुद्ध है, वह अपने स्थान पर खड़ा हो जाए!"
चोर्नोविल और डज़िउबा के इस घटना के संस्मरण काफी भिन्न रहे हैं। डज़िउबा ने बाद में यह दावा किया कि उन्हें याद नहीं कि चोर्नोविल वहाँ उपस्थित थे या उन्हें उस घटना की पूर्व जानकारी थी। दूसरी ओर, चोर्नोविल ने कहा कि वे और डज़िउबा स्वतंत्र रूप से इसी निष्कर्ष पर पहुँचे थे कि दमन के खिलाफ एक सार्वजनिक विरोध नितांत आवश्यक था, और जब डज़िउबा का भाषण दर्शकों के शोर में दब गया, तो चोर्नोविल ने वह वाक्य चिल्लाकर विरोध को जारी रखा। सेको डज़िउबा के अधिक सतर्क और सूचनात्मक भाषण की तुलना चोर्नोविल के अधिक उग्र और टकराव वाले दृष्टिकोण से करते हैं।{{sfn|Seko|2014|pp=128–130}}
उसी वर्ष 30 सितंबर को, चोर्नोविल के ल्वीव स्थित फ्लैट की सोवियत सुरक्षा एजेंसी, के॰जी॰बी॰ द्वारा तलाशी ली गई। वहाँ से साहित्य के 190 अंश जब्त किए गए, जिनमें 'गैलिसियन-वोलहिनियन क्रॉनिकल', 'बुक्स ऑफ द जेनेसिस ऑफ द यूक्रेनी पीपल', पांटेलीमोन कुलिश, वलोडिमिर एंटोनोविच, वलोडिमिर हनतियुक, दिमित्रो डोरोशेंको, इवान कृपियाकेविच और वलोडिमिर विन्नीचेंको के मोनोग्राफ व लेख, साथ ही पोलिश-लिथुआनियाई राष्ट्रमंडल, प्रथम विश्व युद्ध और यूक्रेनी स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास से जुड़ी पुस्तकें शामिल थीं। के॰जी॰बी॰ द्वारा उनके फ्लैट पर 3 अगस्त 1967 और 12 जनवरी 1972 को की गई दो अन्य छापेमारी में भी साहित्य की जब्ती हुई, हालांकि ये दोनों सितंबर 1965 की छापेमारी की तुलना में आकार में बहुत छोटी थीं।{{sfn|Ostrovskyi 2018b|p=119}}
उसी वर्ष कुछ समय पश्चात, दमन जारी रहने के कारण, चोर्नोविल को सिक्सटियर्स मिखाइलो ओसादची, बोहदान होरिन और मिखाइलो होरिन, तथा मायरोस्लावा ज़वारीचेवस्का के मुकदमों में साक्ष्य देने के लिए बुलाया गया। चोर्नोविल ने स्पष्ट रूप से गवाही देने से इनकार कर दिया, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें 'सेकंड रीडिंग' में उनके संपादक पद से हटा दिया गया। उन्होंने ''समिज्दात'' की ओर रुख किया और मई 1966 में अपनी रचना 'कोर्ट ऑफ लॉ ऑर ए रिटर्न ऑफ द टेरर?' प्रकाशित की, जिसने सिक्सटियर्स को दी गई सजा की वैधता और संवैधानिकता पर गंभीर सवाल उठाए।{{sfn|Derevinskyi|2007|p=38}} 8 जुलाई को यूक्रेनी एस॰एस॰आर॰ की आपराधिक संहिता के अनुच्छेद 179 के तहत मुकदमों में गवाही देने से इनकार करने का उन पर आरोप लगाया गया, और वेतन में 20% की कटौती के साथ उन्हें तीन महीने के कठोर श्रम की सजा सुनाई गई। इस अवधि में, उन्होंने कार्पेथियन पर्वत में यूक्रेन की विज्ञान अकादमी के अभियानों में एक तकनीशियन के रूप में, 'कीवकनीहतोर्ह' के लिए एक विज्ञापनदाता के रूप में, और प्रकृति संरक्षण के लिए ल्वीव क्षेत्रीय केंद्र में एक शिक्षक के रूप में विभिन्न कार्य किए।{{sfn|Shvydkyi|2013}}
1967 में चोर्नोविल ने ''समिज्दात'' की अपनी दूसरी महत्वपूर्ण कृति प्रकाशित की। 'वूम फ्रॉम विट: पोर्ट्रेट्स ऑफ ट्वेंटी "क्रिमिनल्स"' के नाम से विख्यात इस कृति में 1965–1966 के दमन के दौरान गिरफ्तार किए गए लोगों की जानकारी और उनकी गिरफ्तारी के दौरान सोवियत अधिकारियों द्वारा किए गए घोर कानून उल्लंघनों का पूरा विवरण शामिल था। चोर्नोविल ने इस कृति की प्रतियां यूक्रेन की कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय समिति, यूक्रेनी एस॰एस॰आर॰ के के॰जी॰बी॰, यूक्रेन के राइटर्स यूनियन और यूक्रेन के कलाकारों के संघ को भी भेजीं। 21 अक्टूबर 1967 को संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा समर्थित 'रेडियो लिबर्टी' के एक प्रसारण के दौरान इसे पढ़ा गया, और वर्ष के अंत तक इसे व्यावसायिक रूप से मुद्रित भी कर दिया गया था।{{sfn|Shvydkyi|2013}} चोर्नोविल का यह ''समिज्दात'' 1969 में पश्चिमी देशों में 'द चोर्नोविल पेपर्स' शीर्षक के तहत प्रकाशित हुआ, जिसने ऐसे समय में इस दमन की ओर पूरी दुनिया का ध्यान आकर्षित किया जब वैश्विक जनचेतना मुख्य रूप से सिन्याव्स्की-डैनियल परीक्षण पर केंद्रित थी।{{sfn|Bociurkiw|1970|p=343}} चोर्नोविल के इस साहसिक कार्य ने उन्हें उस समय यूक्रेनी कार्यकर्ताओं के बीच अग्रणी हस्तियों में से एक के रूप में स्थापित कर दिया।{{sfn|Matiash|2017|p=11}} ''वूम फ्रॉम विट'' के अतिरिक्त, चोर्नोविल ने गिरफ्तारियों के दौरान जांचकर्ताओं द्वारा किए गए कानूनी उल्लंघनों के संबंध में यूक्रेनी के॰जी॰बी॰ के प्रमुख और यूक्रेनी एस॰एस॰आर॰ के अभियोजक जनरल को औपचारिक शिकायतें भी लिखीं।
5 मई 1967 को, उन्हें ल्वीव ओब्लास्ट के उप अभियोजक जनरल ई॰ स्तारिकोव के कार्यालय में तलब किया गया, जिन्होंने उन्हें यूक्रेनी एस॰एस॰आर॰ की आपराधिक संहिता के अनुच्छेद 187-1 के अस्तित्व से अवगत कराया। यह कानून, जो सोवियत व्यवस्था या सरकार की निंदा करने पर पूरी तरह रोक लगाता था, अस्तित्व में तो था लेकिन आधिकारिक पुस्तकों में दर्ज नहीं था। इसलिए केवल उस बैठक के दौरान ही चोर्नोविल को आधिकारिक तौर पर यह ज्ञात हो सका कि उन्होंने शायद कुछ अवैध कार्य किया था। उस समय तक, के॰जी॰बी॰ की नजरों में उनकी छवि एक उपद्रवी की बन चुकी थी।{{sfn|Istorychna Pravda 2017}}
=== याकूतिया में निर्वासन ===
[[File:Якутия.png|alt=याकूत स्वायत्त सोवियत समाजवादी गणराज्य का एक स्थलाकृतिक मानचित्र|thumb|अगस्त 1967 की अपनी गिरफ्तारी के बाद चोर्नोविल को याकूत ए॰एस॰एस॰आर॰ भेज दिया गया था]]
''वूम फ्रॉम विट'' के प्रकाशन के प्रत्युत्तर में अगस्त 1967 में चोर्नोविल को गिरफ्तार कर लिया गया और उन पर अनुच्छेद 187-1 के तहत आरोप तय किए गए।{{sfn|Melnykova-Kurhanova|2019|p=79}} उनके फ्लैट की एक और तलाशी ली गई जिसके परिणामस्वरूप ''वूम फ्रॉम विट'' की एक प्रति के साथ-साथ वैलेन्टिन मोरोज़ की ''समिज्दात'' पुस्तिका ''रिपोर्ट फ्रॉम द बेरिया रिज़र्व'' भी जब्त कर ली गई, जो उनके खिलाफ मानहानि के आरोपों का मुख्य आधार बनी। चोर्नोविल ने पूछताछ के दौरान मौखिक के बजाय अपनी लिखित गवाही देने का विकल्प चुना, क्योंकि उस समय मौखिक पूछताछ के दौरान तर्कों को विकृत और हेरफेर किए जाने का भारी जोखिम था। चोर्नोविल ने अपनी बेगुनाही, साथ ही दमन के दौरान गिरफ्तार किए गए अन्य सभी लोगों की बेगुनाही का पुरजोर तर्क देते हुए लिखा:{{sfn|Istorychna Pravda 2017}}
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस पूरी प्रक्रिया, और उनकी शिकायतों पर सोवियत अधिकारियों की ओर से किसी भी कार्रवाई की कमी ने, सोवियत प्रणाली में उनके विश्वास को काफी हद तक समाप्त कर दिया था। हालाँकि, उन्होंने इस बात पर जोर देना जारी रखा कि सोवियत सरकार के प्रति उनके मन में कोई दुर्भावना नहीं थी, बल्कि उन्होंने यह आरोप लगाया कि उन्हें कुछ ऐसे भ्रष्ट अधिकारियों द्वारा निशाना बनाया जा रहा था जो अवैध रूप से उन्हें देश की वास्तविक स्थिति के बारे में उच्च पदस्थ अधिकारियों को सूचित करने से रोकना चाहते थे।{{sfn|Istorychna Pravda 2017}} इन तर्कों के बावजूद 13 नवंबर 1967 को चोर्नोविल को दोषी ठहराया गया और उन्हें तीन साल के कारावास की सजा सुनाई गई।{{sfn|Melnykova-Kurhanova|2019|p=79}} इस अवधि के दौरान, उन्हें याकूत स्वायत्त सोवियत समाजवादी गणराज्य के चप्पनदा गाँव में रखा गया था।{{sfn|Matiash|2017|p=29}}
[[File:Атена Пашко на Донбасі1.jpg|alt=कैप्शन देखें|thumb|[[एटेना पाश्को]], चोर्नोविल की तीसरी और अंतिम पत्नी]]
1969 में, चोर्नोविल ने साथी कार्यकर्ता एटेना पाश्को से विवाह किया, जिनसे वे एक अन्य असंतुष्ट इवान स्वितलीचनी के घर पर पहली बार मिले थे। उन दोनों ने याकूतिया के निउर्बा शहर में औपचारिक रूप से विवाह संपन्न किया।{{sfn|Matiash|2017|p=29}}
=== गिरफ्तारियों के बीच का जीवन (1969–1972) ===
1969 में एक [[आम माफी]] के तहत चोर्नोविल को जेल से रिहा कर दिया गया था। रिहाई के बाद उन्हें एक स्थिर नौकरी खोजने के लिए भारी संघर्ष करना पड़ा; उन्होंने ज़कारपट्टिया ओब्लास्ट में एक मौसम केंद्र पर, ओडेसा ओब्लास्ट के एक पुरातात्विक अभियान के दौरान एक उत्खननकर्ता के रूप में, और स्क्निलिव रेलवे स्टेशन पर एक सामान्य कर्मचारी के रूप में विभिन्न कार्य किए।{{sfn|Matiash|2017|p=13}} सितंबर 1969 में, वे वैलेन्टिन मोरोज़ से भी मिले, जो एक अन्य प्रमुख असंतुष्ट थे जिन्हें 1965-1966 के दमन के दौरान कैद किया गया था। उन दोनों ने जल्दी ही गहरी मित्रता कर ली और वे अक्सर एक-दूसरे से मिलते-जुलते रहते थे, क्योंकि वे दोनों असंतुष्ट आंदोलन को मजबूत करने और सरकारी दुर्व्यवहारों का अधिक दृढ़ता से सामना करने का प्रयास कर रहे थे। इस समयावधि के दौरान, चोर्नोविल ने, स्वितलीचनी और स्वेर्स्टिउक के साथ मिलकर, मोरोज़ को घोर गरीबी में जाने से रोकने के लिए एक दान अभियान का भी सफल नेतृत्व किया। इस अभियान ने 3,500 सोवियत रूबल एकत्र किए।{{sfn|Paska|2018|p=135}} उन्होंने अन्य पूर्व-कैद असंतुष्टों, जैसे कि शिवतोस्लाव कारावन्स्की और नीना स्ट्रोकाटा के लिए भी ऐसे ही दान अभियान आयोजित किए थे।{{sfn|Fedunyshyn|2018|p=199}}
जनवरी 1970 में चोर्नोविल ने ''द यूक्रेनी हेराल्ड'' के नाम से एक नया ''समिज्दात'' अखबार शुरू किया। इस अखबार में अन्य ''समिज्दात'' प्रकाशनों के साथ-साथ उस महत्वपूर्ण जानकारी को भी शामिल किया गया जिसे वे महान रूसी अंधराष्ट्रवाद और यूक्रेन-विरोधी भावना मानते थे। इसमें सोवियत सरकार और पुलिस द्वारा किए जा रहे मानवाधिकारों के दुरुपयोग का विस्तृत विवरण दिया गया था, जिसे चोर्नोविल सोवियत संघ के संविधान के सर्वथा विपरीत मानते थे, और इसमें यूक्रेन में असंतुष्ट आंदोलन से संबंधित अन्य जानकारी भी मौजूद थी।{{sfn|Shanovska|2019|pp=144–145}} चोर्नोविल ''द यूक्रेनी हेराल्ड'' के मुख्य संपादक थे, और इसके तीन संस्थापकों व संपादकों में से एक थे। ''द यूक्रेनी हेराल्ड'' ने एक बड़े पेशेवर कर्मचारियों के दल को बनाए रखा था, जिसके संवाददाता पूरे यूक्रेन में मौजूद थे,{{sfn|Dubyk|Zaitsev|2019}} और जीवनी लेखक वी॰ आई॰ मत्याश द्वारा इस अखबार को यूक्रेन में स्वतंत्र प्रेस के अग्रदूत के रूप में वर्णित किया गया है।{{sfn|Matiash|2017|p=8}}
गिरफ्तारी के डर से, जुलाई 1971 में चोर्नोविल ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार समिति को एक विस्तृत पत्र लिखा, इस आशा के साथ कि यदि वे फिर से कैद हो गए तो अंतर्राष्ट्रीय निकाय इसे प्रकाशित करेगा। इस पत्र में, उन्होंने सोवियत अधिकारियों द्वारा किए गए कानून के उल्लंघनों के ठोस उदाहरणों को रेखांकित किया, और यह तर्क दिया कि सोवियत राजनीतिक कैदियों के पास अपना बचाव करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं था और वे निरंतर निगरानी, ब्लैकमेल और धमकियों के क्रूर अभियान के अधीन थे। उन्होंने जांचकर्ताओं के साथ सहयोग करने की किसी भी संभावना को यह लिखते हुए सिरे से खारिज कर दिया: "मैं उपर्युक्त सिद्धांतों के आगे झुकने के बजाय सलाखों के पीछे मरना अधिक पसंद करूँगा।"{{sfn|Fedunyshyn|2018|p=200}}
इस समय, चोर्नोविल ने मायखाइलो द्रागोमानोव की मान्यताओं के आधार पर उदार लोकतंत्र में भी अपना विश्वास अपनाया। अक्टूबर 1971 में मोरोज़ को लिखे एक पत्र में, चोर्नोविल ने टिप्पणी की कि अराजकतावादी क्रांतिकारियों पियरे-जोसेफ प्राउधोन और मिखाइल बाकुनिन के अपने अध्ययन में, उन्होंने द्रागोमानोव की नीतियों के लिए बिना शर्त समर्थन को तो अस्वीकार कर दिया था, लेकिन उनका यह मानना था कि स्वशासन पर इस शुरुआती बुद्धिजीवी के विचार पूर्णतः समर्थन करने योग्य थे। इसी दृष्टिकोण ने बाद में संघवाद के लिए उनके मजबूत समर्थन को आकार दिया।{{sfn|Seko|2021|pp=95–96}} इस दौरान, चोर्नोविल ने स्वयं को एक समाजवादी के रूप में वर्णित करना जारी रखा, और एक बिना तिथि वाले पत्र में उन्होंने लिखा कि उन्होंने "हमेशा समाजवाद के मूल सिद्धांतों का दृढ़ता से पालन किया है और ऐसा करना जारी रखा है", जबकि राजनीतिक स्वतंत्रता पर प्रतिबंधों के लिए उन्होंने सोवियत सरकार की घोर आलोचना की।{{sfn|Bellezza|2019|p=119}}
कार्यकर्ता नीना स्ट्रोकाटा की गिरफ्तारी के पश्चात 21 दिसंबर 1971 को चोर्नोविल ने 'नीना स्ट्रोकाटा की रक्षा के लिए नागरिक समिति' की स्थापना की। इस समिति ने मानवाधिकार संगठनों के गठन के प्रति उनके दृष्टिकोण में एक बड़े बदलाव को चिह्नित किया; वे इससे पहले याचिका अभियानों के पक्ष में उन्हें अस्वीकार कर चुके थे, क्योंकि वे सोवियत संघ के भीतर यूक्रेन की स्थिति की कठोर परिस्थितियों के कारण एक संगठन के गठन को लगभग असंभव मानते थे। हालाँकि, उनके इस पुराने दृष्टिकोण की असंतुष्टों और यूक्रेनी जनता द्वारा बढ़ती आलोचना हुई थी, जो इन याचिका अभियानों को बहुत धीमा और महत्वपूर्ण परिणाम नहीं देने वाला मानते थे। इस नई समिति की जड़ें एंजेला डेविस की कानूनी रक्षा के लिए स्थापित सार्वजनिक समितियों में निहित थीं, जो एक अमेरिकी नागरिक अधिकार कार्यकर्ता थीं, जिनका मामला सोवियत संघ में इसलिए लोकप्रिय था क्योंकि वे एक कम्युनिस्ट थीं। चोर्नोविल का मानना था कि संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार समिति को मामले की जानकारी देकर स्ट्रोकाटा को मुक्त किया जा सकता है, और इसके अतिरिक्त उन्होंने दज़िउबा, स्ट्रोकाटा के करीबी दोस्त लियोनिद तिमचुक, मॉस्को स्थित कार्यकर्ताओं प्योत्र याकिर और ल्यूडमिला अलेक्सेयेवा, और लेखक इवान फ्रांको की पोती ज़िनोविया फ्रांको के प्रत्यक्ष समर्थन का भी अनुरोध किया।{{sfn|Derevinskyi|2015|pp=21–22}}
दज़िउबा और फ्रांको सहित कई अन्य असंतुष्टों ने इस समिति में भाग लेने से इनकार कर दिया। इन इन्कारों ने चोर्नोविल को काफी प्रभावित किया, विशेष रूप से फ्रांको के इनकार ने, जिनके पारिवारिक संबंधों के बारे में उनका यह मानना था कि वे समिति को सोवियत सरकार के हमलों से सुरक्षित रखने में मदद कर सकते थे।{{sfn|Derevinskyi|2015|pp=21–22}} तिमचुक अंततः इसमें शामिल हो गए, और वासिल स्टस भी आ जुड़े। इस समूह ने अपने बचाव के तर्क सोवियत संविधान, [[मानवाधिकारों की सार्वभौम घोषणा]] और नागरिक और राजनीतिक अधिकारों पर अंतर्राष्ट्रीय नियम पर आधारित किए। समिति के प्रकाशनों में, सोवियत कार्यकर्ताओं के इतिहास में पहली बार, इसके सदस्यों के पते स्पष्ट रूप से शामिल थे, जहाँ स्ट्रोकाटा की ओर से सामग्री प्रस्तुत की जानी थी। यह यूक्रेन के इतिहास में पहला मानवाधिकार संगठन था, लेकिन अगले ही वर्ष इसके सदस्य को छोड़कर सभी के गिरफ्तार होने के बाद इसे पूरी तरह नष्ट कर दिया जाएगा।{{sfn|Zaitsev|2006}}
=== रूस में जीवन (1972–1985) ===
==== ''यूक्रेनी हेराल्ड'' परीक्षण ====
[[File:1 Bandery Street, Lviv (01).jpg|alt=दो कोबलस्टोन सड़कों के चौराहे पर एक इमारत|thumb|left|द [[लॉकी स्ट्रीट पर जेल]], जहाँ 1972 की गिरफ्तारी के बाद चोर्नोविल को पूर्व-परीक्षण निरोध में रखा गया था]]
यूक्रेनी बुद्धिजीवियों पर एक और अत्यंत व्यापक दमन जनवरी 1972 में शुरू हुआ, जो बेल्जियम-यूक्रेनी यारोस्लाव दोबोश की गिरफ्तारी से भड़क गया था। दोबोश यूक्रेनी राष्ट्रवादियों का संगठन के एक सक्रिय सदस्य थे, जिन्हें सोवियत संघ से ''समिज्दात'' की तस्करी करने का गुप्त काम सौंपा गया था। चोर्नोविल को ओलेना एंटोनिव के ल्वीव फ्लैट में एक उत्सव के ठीक बाद 12 जनवरी को गिरफ्तार कर लिया गया था। उन पर यूक्रेनी एस॰एस॰आर॰ की आपराधिक संहिता के अनुच्छेद 62 (सोवियत विरोधी आंदोलन) और 187-1 (सोवियत संघ के खिलाफ निंदा) के तहत गंभीर आरोप लगाए गए थे।{{sfn|Tereshchuk|2022}} यह समारोह सोवियत सांस्कृतिक और धार्मिक नीति के मुखर विरोध के रूप में आयोजित किया गया था, और इसके अतिरिक्त इसने ''द यूक्रेनी हेराल्ड'' और राजनीतिक कैदियों तथा उनके बेसहारा परिवारों के लिए धन उगाहने के एक प्रयास के रूप में भी काम किया था। इसने 250 रूबल जुटाए थे, जिनका उपयोग दमन के दौरान गिरफ्तार किए गए लोगों की आर्थिक सहायता के लिए किया गया। चोर्नोविल को इरीना कालियनेट्स, इवान गेल, स्टेफानिया शबतुरा, मिखाइलो ओसादची और यारोस्लाव दशकेविच के साथ ल्वीव के के॰जी॰बी॰ पूर्व-परीक्षण निरोध केंद्र में कैद किया गया था।{{sfn|Hrytsiv|2017}}
चोर्नोविल का यह परीक्षण बंद दरवाजों के पीछे संपन्न हुआ था।{{sfn|Istorychna Pravda 2017}} अभियोजकों ने तर्क दिया कि चोर्नोविल ही ''द यूक्रेनी हेराल्ड'' की सामग्री के लिए पूरी तरह जिम्मेदार थे, जिस आरोप से उन्होंने स्पष्ट इनकार किया।{{sfn|Seko|2020|p=134}} जांच के दौरान, अन्य असंतुष्ट कार्यकर्ताओं ने समाचार पत्र में चोर्नोविल की भूमिका के सबूत देने से भी इनकार कर दिया; अंततः सरकार ने अपने तर्कों के लिए ज़िनोविया फ्रांको जैसे अन्य व्यक्तियों के अनुमानों पर भरोसा किया।{{sfn|Derevinskyi 2017b}} चोर्नोविल ने भी साथी असंतुष्टों के खिलाफ किसी भी प्रकार के सबूत देने या जांचकर्ताओं के साथ सहयोग करने से साफ इनकार कर दिया। पूछताछ के दौरान, उन्होंने अपना यह दृढ़ विश्वास व्यक्त किया कि यह परीक्षण पूरी तरह अवैध था और अन्य असंतुष्टों से असंबंधित था{{sfn|Istorychna Pravda 2017}} और उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारी अपने निपटान में उपलब्ध सभी साधनों का उपयोग करते हुए, उनके खिलाफ "एक नरसंहार" की तैयारी कर रहे थे।{{sfn|Seko|2020|p=134}} इस परीक्षण के दौरान उनसे सौ से भी अधिक बार कड़ी पूछताछ की गई।{{sfn|Istorychna Pravda 2017}} अभियोजकों ने ब्लैकमेल का भी सहारा लिया, उनके रिश्तेदारों को गिरफ्तारी और शारीरिक नुकसान पहुंचाने की धमकी दी, लेकिन इस प्रयास का उल्टा ही असर हुआ और चोर्नोविल ने पूछताछ में सहयोग करने से पूरी तरह इनकार कर दिया।{{sfn|Bazhan|2018|p=35}}
चोर्नोविल द्वारा लेखन और वर्तनी के कई अलग-अलग परस्पर विरोधी रूपों के उपयोग ने उनके बचाव का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया, और उन्होंने यह तर्क देने के लिए इसका इस्तेमाल किया कि उन्हें पाठ के उचित भाषाई विश्लेषण के बिना ही दोषी ठहराया गया था।{{sfn|Seko|2020|p=134}} चोर्नोविल के इन तर्कों के बावजूद, के॰जी॰बी॰ ने ऐसे सबूतों को उजागर किया जो चोर्नोविल को समाचार पत्र शुरू करने और जांच को विफल करने के स्पष्ट उद्देश्य से इसकी तस्करी का समन्वय करने में पूरी तरह फंसाते थे; लेकिन वे निर्णायक रूप से यह साबित करने में विफल रहे कि चोर्नोविल ही इसके मुख्य संपादक थे। चोर्नोविल के सेल में गुप्त रूप से सुनने वाले उपकरण लगाए गए थे, इसलिए सुरक्षा सेवा को यह भी पता चल गया कि यदि उन्हें यूक्रेन के बाहर निर्वासन में भेजा जाता है तो उनका इरादा भूख हड़ताल की घोषणा करने का था, और वे सोवियत संघ छोड़कर यूगोस्लाविया जाने की अनुमति चाहते थे।{{sfn|Bazhan|2018|p=35}}
चोर्नोविल के परीक्षण के समापन पर दी गई सजा काफी विवादित रही है; [[एमनेस्टी इंटरनेशनल]] ने 1977 में कहा था कि उन्हें सात साल के कारावास और पांच साल के निर्वासन की कड़ी सजा सुनाई गई थी;{{sfn|Amnesty International 1977}} मार्च 1973 में ''द न्यूयॉर्क टाइम्स'' ने दावा किया कि उन्हें दोनों के बीच अंतर किए बिना सीधे बारह साल के कारावास और निर्वासन के अधीन किया गया था;{{sfn|The New York Times 1973}} 2015 में एनसाइक्लोपीडिया ऑफ यूक्रेन ने दावा किया कि उन्हें छह साल के कारावास और तीन साल के आंतरिक निर्वासन की अवधि मिली थी,{{sfn|Harasymiw|Koshelivets|Senkus|2015}} जिसे इतिहासकार बोहदान पास्का{{sfn|Paska|2018|p=141}} और ओलेह बाज़ान ने भी समान रूप से स्वीकार किया। बाज़ान के अनुसार, चोर्नोविल को 8 अप्रैल 1973 को ल्वीव ओब्लास्ट कोर्ट द्वारा सजा सुनाई गई थी,{{sfn|Bazhan|2018|p=35}} यद्यपि चोर्नोविल ने 1974 में याद किया था कि उन्हें 12 अप्रैल को सजा सुनाई गई थी।{{sfn|Chornovil|1976|p=58}} चोर्नोविल ने अपने मामले के संबंध में उच्च न्यायालयों में तीन अपीलें दायर कीं; पहली दो को खारिज कर दिया गया, जबकि तीसरी को आंशिक रूप से औपचारिक रूप से स्वीकार कर लिया गया - हालांकि चोर्नोविल की अंतिम सजा में कोई बदलाव नहीं किया गया।{{sfn|Istorychna Pravda 2017}}
==== मोर्दोविया में कारावास (1972-1978) ====
अपनी दोषसिद्धि के बाद, चोर्नोविल को मोर्दोवियन स्वायत्त सोवियत समाजवादी गणराज्य में एक सुधारात्मक श्रम कॉलोनी में भेज दिया गया। 1973 से 1978 तक उन्हें विभिन्न रूप से दो कठोर शिविरों में कैद रखा गया था; ZhKh-385/17-अ और ZhKh-385/3।{{sfn|Shvydkyi|2013}} अपने अमानवीय कारावास के बावजूद, चोर्नोविल ने सक्रिय रूप से कैदियों के विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व करना जारी रखा, जिसके कारण लेखक और असंतुष्ट मिखाइल खेइफेट्स द्वारा उन्हें "ज़ेकों (कैदियों) के जनरल" का उपनाम दिया गया। उन्हें अन्य कैदियों से पूरी तरह अलग कर दिया गया और उन नियमों का पालन करने से इनकार करने के बाद उन्हें कड़ी निगरानी में रखा गया जिनका सभी कैदियों को पालन करना अनिवार्य था।{{sfn|Kheifets|2018}} बी॰ एज़र्निकोव और एल॰ कामिंस्की, दो रिफ्यूसेनिक जिन्हें चोर्नोविल के समान ही शिविर में कैद किया गया था, ने भी उन्हें "सभी राजनीतिक कैदियों के बीच महान अधिकार" रखने वाले एक प्रभावशाली व्यक्ति के रूप में वर्णित किया, और 1975 में सोवियत संघ छोड़ने के बाद वैश्विक समाज से उनकी रिहाई का आग्रह करते हुए एक खुला पत्र भी लिखा।{{sfn|Fedunyshyn|2021|pp=119–120}}
उनके कारावास के दौरान चोर्नोविल की गतिविधियों ने अंतर्राष्ट्रीय ध्यान आकर्षित करना जारी रखा। उन्हें मानवाधिकार समूह एमनेस्टी इंटरनेशनल द्वारा 'अंतरात्मा का बंदी' के रूप में मान्यता दी गई थी,{{sfn|Amnesty International 1977}} और 1975 में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए खतरे वाले लेखकों को मान्यता देने वाले निकोलस टोमालिन पत्रकारिता पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था।{{sfn|Chornovil|1976|p=57}} इसी समय के आसपास, चोर्नोविल ने अपने लेखन को जेल से बाहर तस्करी करना भी शुरू कर दिया था, और सोवियत मानवाधिकारों के हनन को प्रदर्शित करने के साधन के रूप में इस अवसर का भरपूर उपयोग किया।{{sfn|Fedunyshyn|2021|p=120}} उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति जेराल्ड फोर्ड को एक पत्र लिखकर सोवियत संघ में मानवाधिकारों की दिशा में बढ़े हुए ध्यान के साथ 'डिटेंटे' की नीति का मिलान करने का आग्रह किया, यह आरोप लगाते हुए कि सोवियत अधिकारियों ने असंतुष्ट आवाजों को बेरहमी से दबाने के साधन के रूप में इसका इस्तेमाल किया था।{{sfn|Chornovil|1975}} उन्होंने आगे उनसे जैक्सन-वैनिक संशोधन का पूर्ण समर्थन करने का आग्रह किया, जिसने देश से प्रवासन की स्वतंत्रता की अनुमति देने के प्रयास में सोवियत संघ पर प्रतिबंध लगा दिया था।{{sfn|Fedunyshyn|2018|pp=201–202}} बोरिस पेंसन के साथ मिलकर, उन्होंने ''समिज्दात'' पुस्तिका "डेली लाइफ इन द मोर्दोवियन कैंप्स" लिखी, जिसे यरूशलेम ले जाया गया और रूसी में प्रकाशित किया गया, इससे पहले कि अगले वर्ष म्यूनिख स्थित ''सुचास्निस्ट'' पत्रिका में इसका यूक्रेनी में अनुवाद किया गया।{{sfn|Harasymiw|Koshelivets|Senkus|2015}}
हेलसिंकी समझौते 30 जुलाई और 1 अगस्त 1975 के बीच हस्ताक्षरित किए गए थे। हस्ताक्षरकर्ता देशों में संपूर्ण यूरोप, सोवियत संघ, संयुक्त राज्य अमेरिका और कनाडा शामिल थे।{{sfn|Commission on Security and Cooperation in Europe 2019}} सोवियत संघ में, इस हेलसिंकी समझौते को असंतुष्टों के लिए एक नई शुरुआत के रूप में देखा गया, जिन्होंने पाया कि उनके पास अब सोवियत मानवाधिकारों के हनन को उजागर करने का एक साधन था।{{sfn|Marynovych|2021|p=86}} कीव में एक असंतुष्ट माइकोला रुडेंको ने उस उद्देश्य के लिए 9 नवंबर 1975 को यूक्रेनी हेलसिंकी समूह (UHG) के गठन की ऐतिहासिक घोषणा की।{{sfn|Marynovych|2021|p=90}} चोर्नोविल समूह की स्थापना के समय जेल में थे और 1979 तक वे इसमें शामिल नहीं हुए थे।{{sfn|Marynovych|2021|p=102}}
मोरोज़ और अन्य राजनीतिक कैदियों के साथ, चोर्नोविल की प्रतिरोध गतिविधियाँ UHG की स्थापना के बाद भी निर्बाध जारी रहीं। दोनों ने 12 जनवरी 1977 की भूख हड़ताल में भाग लिया, जिसमें उन्होंने अपने गैर-अनुरूपतावादी दृष्टिकोणों के आधार पर उत्पीड़न को पूरी तरह समाप्त करने का आह्वान किया। हालाँकि, इस समय, यूक्रेनी राजनीतिक कैदियों के बीच एक बड़ा विभाजन बन रहा था कि क्या सोवियत जेल प्रणाली का सक्रिय रूप से विरोध करना बेहतर था या वे जो आत्म-संरक्षण का पक्ष लेते थे। के॰जी॰बी॰ के प्रभाव से, दोनों गुट खुलकर आपस में भिड़ने लगे। मोरोज़ और शुमुक से अलग एक शिविर में कैद चोर्नोविल ने इस संघर्ष में पक्ष लेने से साफ इनकार कर दिया और एक मध्यस्थ के रूप में कार्य किया। 1977 की शुरुआत में, एक अस्पताल में शुमुक के साथ बैठक के दौरान, चोर्नोविल ने पूर्व पर मोरोज़ के साथ अपने संघर्ष को कृत्रिम रूप से तेज करने का आरोप लगाया, और कनाडाई परिवार के सदस्यों को शुमुक के पत्रों की तुलना सीधे पुलिस शिकायतों के समकक्ष की। जेल से रिहाई के बाद, चोर्नोविल ने शुमुक और मोरोज़ दोनों पर उनके अहंकारी रवैये के परिणामस्वरूप इस विवाद के लिए समान रूप से जिम्मेदार होने का आरोप लगाया।{{sfn|Paska|2018|pp=141–142}}
==== याकूतिया वापसी (1978-1980) ====
चोर्नोविल को जेल से रिहा कर दिया गया और 1978 की शुरुआत में उन्हें फिर से चप्पनदा भेज दिया गया। वहाँ, उन्होंने सोवियत संघ के भीतर राजनीतिक कैदियों की स्थिति और मानवाधिकारों के बारे में अपना लेखन जारी रखा।{{sfn|Zakharov|2005}} वे मोरोज़ और शुमुक के बीच चल रहे संघर्ष में भी शामिल होते रहे; मोरोज़ की पत्नी रायसा को लिखे एक पत्र में, उन्होंने शुमुक के सार्वजनिक "बहिष्कार" का आह्वान किया, जबकि यह तर्क दिया कि मोरोज़ अब अनम्य हो रहे थे। मोरोज़ के नौ साल के लंबे कारावास ने उनकी मानसिक और भावनात्मक स्थिति को गंभीर रूप से प्रभावित किया था; चोर्नोविल ने उन्हें आत्म-प्रशंसक और संकीर्ण बताया। अपने निर्वासन के दौरान, मोरोज़ के साथ चोर्नोविल की मित्रता भी समाप्त हो गई क्योंकि पूर्व ने शुमुक के साथ संघर्ष के कारण बाद वाले से खुद को दूर करने की कड़ी मांग की थी।{{sfn|Paska|2018|p=142}}
अपने निर्वासन के दौरान, चोर्नोविल ने सोवियत अधिकारियों को पत्र भेजना जारी रखा। सोवियत संघ के अभियोजक जनरल को लिखे 10 अप्रैल 1978 के एक पत्र में, उन्होंने इस तथ्य की घोर आलोचना की कि सोवियत संविधान द्वारा सैद्धांतिक रूप से दिए गए व्यापक अधिकार वास्तविकता में पूरी तरह अनुपस्थित थे, यह पूछते हुए कि "सोवियत कानून क्यों मौजूद हैं?"।{{sfn|Fedunyshyn|2018|p=202}} उन्होंने "ओनली वन ईयर" नामक एक ''समिज्दात'' पैम्फलेट भी लिखा,{{sfn|Matiash|2017|p=13}} और उन्हें उस वर्ष पीईएन इंटरनेशनल में भर्ती कराया गया।{{sfn|Zakharov|2005}} उस समय, वे निउर्बा में एक खेत में एक मजदूर के रूप में काम कर रहे थे,{{sfn|Matiash|2017|p=13}} जहाँ उन्हें अक्टूबर 1979 में भेजा गया था। पहले की तरह, चोर्नोविल के ''समिज्दात'' कार्यों में से अधिकांश ने मानवाधिकारों के हनन और अंतरात्मा के बंदियों द्वारा सामना की जाने वाली स्थितियों को चित्रित करने का महत्वपूर्ण काम किया।{{sfn|Ostrovskyi 2018a|pp=110–111}}
चोर्नोविल 22 मई 1979 को अपने निर्वासन से यूक्रेनी हेलसिंकी समूह (UHG) में शामिल हुए।{{sfn|Marynovych|2021|p=102}} नवंबर 1979 से मार्च 1980 तक उन्हें के॰जी॰बी॰ द्वारा निरंतर निगरानी में रखा गया था, जिसने यह दर्ज किया कि उन्होंने असंतुष्टों मिखाइलो होरिन, ओक्साना मेश्को और इवान सोकुलस्की के साथ संपर्क स्थापित किया था। उन्होंने कई अन्य व्यक्तियों से भी संपर्क किया जो यूक्रेन के ओब्लास्ट में UHG के अध्याय स्थापित करना चाहते थे। चोर्नोविल के अज्ञात, मेश्को, जो उस समय UHG के नेता थे, वे भी भारी के॰जी॰बी॰ निगरानी में आ गए थे, और उन्होंने अपनी गिरफ्तारी को रोकने के लिए व्यक्तियों को प्रवेश देना बंद कर दिया था। एक प्रमुख UHG सदस्य ज़ेनोविय क्रासिव्स्की ने कैद और निर्वासित असंतुष्टों से मिलने के लिए पेट्रो रोज़ुमनी को भेजा। उनमें चोर्नोविल भी थे, जिन्हें UHG के प्रमुख के रूप में मेश्को को बदलने के लिए विशेष रूप से कहा गया था।{{sfn|Ostrovskyi 2018a|pp=110–111}}
==== बलात्कार के प्रयास के लिए गलत सजा (1980-1985) ====
चोर्नोविल को 8,{{sfn|Kryzhanovska|2022}} 9,{{sfn|A Chronicle of Current Events 1983}} या 15{{sfn|Shvydkyi|2013}} अप्रैल 1980 को बलात्कार के प्रयास के घिनौने आरोप में फिर से गिरफ्तार कर लिया गया था। यूक्रेनी इतिहासलेखन में इन आरोपों को अक्सर मनगढ़ंत के रूप में वर्णित किया जाता है,{{sfn|Shvydkyi|2013}}{{sfn|Kryzhanovska|2022}}{{sfn|Matiash|2017|p=14}} और इसी तरह अमेरिकी पत्रिका ''[[टाइम (पत्रिका)|टाइम]]'' द्वारा भी इसे संदर्भित किया गया था।{{sfn|Blake|1980}} मायकोला होरबल, यारोस्लाव लेसियव और योसिफ़ ज़िसेल्स सहित कई अन्य प्रमुख असंतुष्टों को उस समय इसी तरह के फर्जी आरोप मिले थे। UHG के सदस्य मायरोस्लाव मैरिनोविच ने एक के॰जी॰बी॰ अधिकारी के हवाले से कहा कि "हम विशेष रूप से राजनीतिक आरोपों पर व्यक्तियों को गिरफ्तार करके अब कोई नया शहीद नहीं बनाएंगे।"{{sfn|Marynovych|2021|p=115}} चोर्नोविल की गिरफ्तारी, साथ ही यूक्रेन और पूरे सोवियत संघ के कई अन्य असंतुष्टों की गिरफ्तारी, मैड्रिड में यूरोप में सुरक्षा और सहयोग पर सम्मेलन की एक बैठक के ठीक बीच हुई, और ''टाइम'' ने कहा कि कुछ पर्यवेक्षकों का यह मानना था कि हेलसिंकी समझौते के प्रति सोवियत नाराजगी प्रदर्शित करने के लिए ही ये गिरफ्तारियां की गई थीं।{{sfn|Blake|1980}}
अपनी गिरफ्तारी के बाद, चोर्नोविल ने भूख हड़ताल की घोषणा कर दी,{{sfn|A Chronicle of Current Events 1983}} और अपनी तथा दूसरों की गिरफ्तारी को लेनिनवादी आदर्शों के घोर विपरीत और 1980 के ग्रीष्मकालीन ओलंपिक की अगुवाई में असंतोष को दबाने के प्रयास के रूप में चित्रित किया।{{sfn|Chornovil|2007|p=673}} उन्हें याकूतिया के तबागा में एक जेल शिविर में ले जाया गया, जहाँ उन्हें उल्टी और मल से सने एक अत्यंत गंदे सेल में रखा गया था। एक समय पर, उन्हें एक "मनोरंजन कक्ष" में स्थानांतरित कर दिया गया था, जहाँ उनकी पानी तक कोई पहुँच नहीं थी। अपनी भूख हड़ताल के परिणामस्वरूप शक्ति की भारी कमी के कारण, चोर्नोविल जेल के शौचालय तक पहुँचने के लिए चारों हाथों-पैरों के बल रेंगते थे, जो उनके सेल से एक मंजिल नीचे और जेल के यार्ड के पार स्थित था। कई बार, वे थकावट से बेहोश हो गए, और पहरेदारों द्वारा उन पर पानी डालकर जगाए गए। चोर्नोविल को अपना यह विरोध तब रोकना पड़ा जब डॉक्टरों ने कड़ी चेतावनी दी कि यदि उन्होंने भोजन से इनकार करना जारी रखा तो शिविर में एक महामारी के दौरान अनुबंधित पेचिश के लिए उनका इलाज नहीं किया जाएगा। इस हड़ताल के लिए, चोर्नोविल को 5 से 21 नवंबर 1980 तक एकांतवास में रखा गया था।{{sfn|A Chronicle of Current Events 1983}} उन्हें मिर्नी शहर में एक बंद अदालत द्वारा दोषी पाया गया और पांच साल की जेल की सजा सुनाई गई।{{sfn|Shvydkyi|2013}}
चोर्नोविल ने जेल में लिखना जारी रखा, जिसमें सी॰पी॰एस॰यू॰ की 26वीं कांग्रेस को लिखा गया फरवरी 1981 का एक खुला पत्र शामिल है, जिसमें उन्होंने महासचिव लियोनिद ब्रेझनेव और के॰जी॰बी॰ अध्यक्ष यूरी एंड्रोपोव पर UHG के खिलाफ बड़े पैमाने पर दमन करने का सीधा आरोप लगाया था। उन्होंने अपनी पत्नी को भी लिखा, और कांग्रेस के प्रति असंतुष्टों की प्रतिक्रियाओं में "कोई भी समझौता नहीं" करने का आग्रह किया। उन्होंने 9 अप्रैल 1981 को एक और पत्र लिखा, इस बार संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार समिति, एमनेस्टी इंटरनेशनल, कमिटी फॉर द फ्री वर्ल्ड और हेलसिंकी कमिटी फॉर ह्यूमन राइट्स को, सोवियत संघ के प्रति अपनी कूटनीतिक नीतियों को तैयार करने में UHG के सोवियत उत्पीड़न की दिशा में अधिक ध्यान बढ़ाने का आग्रह किया।{{sfn|Fedunyshyn|2018|pp=202–203}} 1983 में चोर्नोविल को रिहा कर दिया गया, लेकिन उन्हें यूक्रेन लौटने से सख्त रोक दिया गया। वे पोक्रोव्स्क शहर में ही रहे,{{sfn|Shvydkyi|2013}} एक फायर स्टोकर के रूप में काम करते हुए।{{sfn|Matiash|2017|p=14}} अंततः 15 अप्रैल 1985 को{{sfn|Shvydkyi|2013}} नए महासचिव मिखाइल गोर्बाचेव ने चोर्नोविल को ''पेरेस्त्रोइका'' के हिस्से के रूप में यूक्रेन लौटने की अनुमति प्रदान की।{{sfn|Ivanova|2024}}{{sfn|Kulchytskyi|2019|p=50}} चोर्नोविल ने सोवियत सरकार द्वारा कुल 15 साल कैद में बिताए थे।{{sfn|Ivanova|2024}}
=== यूक्रेन वापसी ===
जब तक चोर्नोविल यूक्रेन लौटे, तब तक देश नाटकीय रूप से बदल चुका था। यूक्रेन की कम्युनिस्ट पार्टी के प्रथम सचिव पेट्रो शेलेस्ट, जो एक उदारवादी नेता थे, को हटा दिया गया और उनकी जगह कट्टरपंथी वलोडिमिर शेर्बित्स्की को नियुक्त किया गया, जो ब्रेझनेव के निप्रॉपेट्रोस माफिया के एक सदस्य थे। शेर्बित्स्की ने रूसीकरण नीतियों और यूक्रेनी संस्कृति पर नकेल कसने को नाटकीय रूप से बढ़ा दिया था। आंशिक रूप से शेर्बित्स्की की नीतियों के परिणामस्वरूप, 1982 में ब्रेझनेव की मृत्यु के समय तक, जोसेफ स्टालिन के शासन के दौरान ब्रेझनेव के नेतृत्व में यूक्रेनी में बहुत कम किताबें प्रकाशित हुई थीं।{{sfn|Kuzio|2010}} यूक्रेनी संस्कृति में इस भारी गिरावट के साथ-साथ 1986 की [[चेर्नोबिल दुर्घटना]] के प्रति सरकार की धीमी प्रतिक्रिया ने जनमत को बुरी तरह खराब कर दिया और चोर्नोविल को कम्युनिस्ट शासन के खिलाफ एक संयुक्त मोर्चा बनाने के लिए प्रेरित किया।{{sfn|Poberezhets|2013|p=115}}
गोर्बाचेव के सुधारों के बावजूद, सोवियत सरकार ने चोर्नोविल और अन्य असंतुष्टों के खिलाफ हस्तक्षेप करना जारी रखा था। 1987 में राज्य ने चोर्नोविल के खिलाफ एक मानहानि अभियान शुरू किया, जिसका आंशिक कारण शेर्बित्स्की के रूसीकरण के प्रयासों पर आंतरिक असंतोष था{{sfn|Bilyk|2019|pp=14–15}} और आंशिक रूप से मॉस्को का भारी दबाव था।{{sfn|Danylenko|2019|pp=27-28}} ''द यूक्रेनी हेराल्ड'', जिसे अगस्त 1987 में फिर से लॉन्च किया गया था और जिसमें प्रमुख विपक्षी-दिमाग वाले बुद्धिजीवियों के निबंध प्रकाशित किए गए थे,{{sfn|Kipiani|2002}} ने "विदेशी विध्वंसक सुरक्षा एजेंसियों" द्वारा समर्थित होने के राज्य-समर्थित आरोपों को बहुत आकर्षित किया।{{sfn|Kipiani|2011}} उसी समय के आसपास, चोर्नोविल ने ''द यूक्रेनी वीकली'' को एक विस्तृत साक्षात्कार दिया, जिसमें उन्होंने धर्म और यूक्रेनी संस्कृति के प्रति असंतुष्ट आंदोलन के दृष्टिकोण को स्वतंत्र रूप से स्पष्ट किया। सरकार ने चोर्नोविल और असंतुष्ट आंदोलन की छवि को धूमिल करने के प्रयास में टेलीविजन पर बातचीत के कुछ क्लिप प्रसारित किए, लेकिन इस प्रयास का उल्टा ही असर हुआ। मार्था कोलोमियट्स, वे पत्रकार जिन्होंने चोर्नोविल से बात की थी, को बाद में एक "अमेरिकी सबोटूर" के रूप में गिरफ्तार किया गया था, लेकिन तब तक यह साक्षात्कार पहले ही व्यापक रूप से प्रचारित और साझा किया जा चुका था।{{sfn|Bila|2020}} दिसंबर में, शेर्बित्स्की के कार्यालय ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी की जिसमें विपक्ष की, विशेष रूप से चोर्नोविल की के॰जी॰बी॰ निगरानी बढ़ाने का वादा किया गया था, जिसने प्रिंट और प्रसारण मीडिया दोनों से हमलों की एक नई लहर देखी।{{sfn|Danylenko|2019|pp=27-28}} ल्वीव स्थित ''फ्री यूक्रेन'' समाचार पत्र में प्रकाशित एक राय-संपादकीय में, चोर्नोविल ने इन उपायों की कड़ी आलोचना की और कहा कि उनके और मिखाइलो होरिन के साथ किया गया व्यवहार 15 साल पहले अलेक्सांद्र सोल्झेनित्सिन के व्यवहार के बिल्कुल बराबर था।{{sfn|Chornovil|2011|pp=81–82}}
मानवाधिकार गतिविधियाँ उनकी रिहाई के बाद चोर्नोविल के अथक प्रयासों के लिए एक महत्वपूर्ण फोकस बनी रहीं। चोर्नोविल और होरिन वासिल बारलादियानु, गेल, ज़ोरियन पोपादियुक, और स्टीफन खमारा के साथ आपराधिक संहिता से सोवियत विरोधी आंदोलन को पूरी तरह हटाने और सभी राजनीतिक कैदियों की रिहाई और पुनर्वास की वकालत करने में शामिल हुए।{{sfn|Kharkiv Human Rights Protection Group 2006}} 24 फरवरी 1987 को, उन्होंने मॉस्को के के॰जी॰बी॰ मुख्यालय, लुब्यंका भवन की यात्रा की, जहाँ उन्होंने इन मांगों को मजबूती से दोहराया और जब्त की गई संपत्ति को वापस करने का आग्रह किया। लुब्यंका में रहते हुए, उन्होंने घोषणा की कि, रूस के ईसाईकरण (1988) की 1000वीं वर्षगांठ के आधिकारिक समारोहों के जवाब में, असंतुष्ट आंदोलन 1946 के ल्वीव धर्मसभा के फैसले को उलटने के लिए एक अभियान शुरू करेगा जिसने यूक्रेनी ग्रीक कैथोलिक चर्च का रूसी रूढ़िवादी चर्च में विलय कर दिया था।{{sfn|Danylenko|2019|p=26}} हालाँकि, सरकार ने उनकी सभा की स्वतंत्रता में भारी हस्तक्षेप किया - उदाहरण के लिए, चोर्नोविल को ल्वीव में एक "निवारक" साक्षात्कार के लिए बुलाकर सोवियत संघ के भीतर गैर-रूसी देशों के अधिकारों पर एक नियोजित दिसंबर 1987 के संगोष्ठी में भाग लेने से रोक दिया गया था, जहाँ उन्हें "असामाजिक" गतिविधियों में शामिल होने के खिलाफ कड़ी चेतावनी दी गई थी।{{sfn|Danylenko|2019|pp=26-27}}
11 मार्च 1988 को, चोर्नोविल ने औपचारिक रूप से होरिन और क्रासिव्स्की द्वारा सह-हस्ताक्षरित एक पत्र में यूक्रेनी हेलसिंकी समूह (UHG) को फिर से स्थापित किया, हालांकि समूह ने पिछले वर्ष की गर्मियों में ही अपनी गतिविधि फिर से शुरू कर दी थी और चोर्नोविल का ''हेराल्ड'' इसका प्रेस अंग था।{{sfn|Zakharov|2005}} इस समय तक, लायंस सोसाइटी, ''स्पाद्शच्यना'', और यूक्रेनी कल्टूरोलॉजिकल क्लब जैसे कई स्वतंत्र संगठन अस्तित्व में थे। असंतुष्ट आंदोलन की खंडित प्रकृति ने चोर्नोविल को अप्रैल 1988 में एक ही संरचना में संगठनों को एक साथ लाना शुरू करने के लिए प्रेरित किया।{{sfn|Krupnyk|2019|p=45}}
[[File:Гельсінська спілка-1.jpg|alt=सूट में ग्यारह पुरुषों की एक तस्वीर|thumb|1989 में यूक्रेनी हेलसिंकी संघ की डोनेट्स्क शाखा के सदस्यों के साथ चोर्नोविल]]
चोर्नोविल ने 7 जून 1988 को यूक्रेनी हेलसिंकी संघ (UHS) की स्थापना की। यह सोवियत यूक्रेन में पहली स्वतंत्र राजनीतिक पार्टी थी।{{sfn|Krupnyk|2019|pp=45-46}} चोर्नोविल ने पार्टी के मंच के सह-लेखक बने और उसे प्रस्तुत किया,{{sfn|Kobuta|2020|pp=36–37}} जिसने सोवियत राज्यों के परिसंघीय ढांचे के भीतर यूक्रेनी स्वतंत्रता का आह्वान किया। घोषणापत्र में यह तर्क दिया गया कि यूक्रेनी स्वतंत्रता से यूक्रेनियन और गैर-यूक्रेनियन दोनों को समान रूप से लाभ होगा, लेकिन परिसंघ के बारे में बिंदु जोड़ा ताकि UHS को अलगाववादी के रूप में प्रतिबंधित होने से रोका जा सके।{{sfn|Krupnyk|2019|p=46}}
इस समय अवधि के दौरान चोर्नोविल की गतिविधियाँ केवल यूक्रेन तक ही सीमित नहीं थीं; उन्होंने अन्य असंतुष्टों के साथ भी व्यापक संपर्क बनाए रखा, विशेष रूप से बाल्टिक राज्यों, आर्मेनिया और जॉर्जिया के असंतुष्टों के साथ। यूक्रेनी के॰जी॰बी॰ के 8 सितंबर 1988 के एक आंतरिक नोटिस ने गुर्गों को सूचित किया कि अंतर्राष्ट्रीय राजनीतिक कैदियों के संरक्षण के लिए समिति नामक एक संगठन मौजूद है। इस समिति की स्थापना चोर्नोविल और अर्मेनियाई असंतुष्ट पिरुयर हेयरिकयान द्वारा जनवरी 1988 में की गई थी, और यह सोवियत विरोधी आंदोलन कानून को निरस्त करने, जेल शिविरों और मनोरोग अस्पतालों को बंद करने के प्रयासों में सक्रिय रूप से शामिल थी, और यूक्रेन और सोवियत संघ के भीतर अन्य देशों के राष्ट्रवादी आंदोलनों के बीच सहयोग को मजबूत करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध थी।{{sfn|Krupnyk|2019|pp=46-47}} 24-25 सितंबर को, चोर्नोविल ने रीगा में असंतुष्ट समूहों के एक सम्मेलन में UHS का प्रतिनिधित्व किया। चोर्नोविल ने सम्मेलन का समापन बयान लिखा, जिसमें सभी "राष्ट्रीय लोकतांत्रिक आंदोलनों" से एक संयुक्त मोर्चा बनाने और बैनर के तहत विरोध करने का पुरजोर आग्रह किया गया।{{sfn|Krupnyk|2019|p=47}}
==== क्रांति ====
[[File:В.М.Чорновіл на шахті ім. Поченкова. 2.JPG|alt=चोर्नोविल अपने आसपास हड़ताली श्रमिकों से बात कर रहे हैं|thumb|1990 के दशक में माकिव्का खदान की बैठक में हड़ताली श्रमिकों के साथ चोर्नोविल]]
पूरे 1988 और 1989 में मध्य और पूर्वी यूरोप में चल रही 1989 की क्रांतियों ने चोर्नोविल को बहुत दिलचस्पी दी, विशेष रूप से अहिंसा के पालन में। उनकी सफलता ने चोर्नोविल को कम्युनिस्ट-विरोधी के पक्ष में मार्क्सवाद-लेनिनवाद के लिए अपने सार्वजनिक समर्थन को त्यागने के लिए प्रेरित किया, जिसका उन्होंने 1960 के दशक के मध्य से निजी तौर पर समर्थन किया था, लेकिन एक उदारवादी के रूप में प्रकट होने के प्रयास में इसे सार्वजनिक रूप से बताने से परहेज किया था।{{sfn|Seko|2019|p=124}} अन्य यूक्रेनी बुद्धिजीवियों ने भी कम्युनिस्ट-विरोधी समर्थन करना शुरू कर दिया, और राइटर्स यूनियन ऑफ यूक्रेन ने 1988 के अंत में एक लोकप्रिय मोर्चा विकसित करना शुरू किया, इसे स्थानीय सरकार में अधिक सक्रिय होने और आर्थिक चिंताओं में अधिक रुचि लेने के लिए जनता को प्रोत्साहित करने के रूप में न्यायोचित ठहराया।{{sfn|Adamovych|2020|p=8}} चोर्नोविल ने सोवियत संघ में एक मानवाधिकार आंदोलन, मेमोरियल, को यूक्रेन में फैलाने का भी समर्थन किया, और मार्च 1989 में इसकी स्थापना पर समूह के यूक्रेनी अध्याय के प्रेसिडियम को एक सकारात्मक पत्र लिखा।{{sfn|Chornovil|2009|pp=476–477}}
18 जुलाई 1989 को, पूरे संघ में खनन हड़तालों की लहर पूर्वी यूक्रेन के डोनबास क्षेत्र के माकिव्का शहर में कोयला खनिकों तक पहुँच गई।{{sfn|Lykhobova|Kuzina|2009|pp=155–156}}{{sfn|Safire|1989}} कर्मचारियों ने पहले बेहतर काम करने की स्थिति, बेहतर मजदूरी और बढ़ी हुई सामाजिक सुरक्षा की मांग की। हालाँकि, शुरुआत से ही, कई डोनबास खनिकों ने स्व-शासन के संभावित मार्ग के रूप में सहानुभूति के साथ यूक्रेनी स्वतंत्रता आंदोलन को भी देखा था।{{sfn|Walkowitz|1991}} चोर्नोविल ने अपने शुरुआती दिनों से ही हड़तालों का समर्थन किया, एक बयान जारी करते हुए कहा, अन्य बातों के अलावा, कि हड़ताल ने "पार्टी और लोगों की एकता के बारे में पार्टी की लफ्फाजी का पर्दा फाड़ दिया", जिसका कम्युनिस्टों ने दावा किया कि वहां विभिन्न "चरमपंथियों" द्वारा हमला किया जा रहा था।{{sfn|Radio Liberty 2014}} दूसरी ओर, शेर्बित्स्की खुश नहीं थे और सरकारी नियंत्रण वाले मीडिया में हड़तालियों को बदनाम करके और हड़ताल समितियों के लिए संचार काट कर उन पर कड़ी नकेल कसी।{{sfn|Walkowitz|1991}} इसने खनिकों को कट्टरपंथी बना दिया, जिन्होंने जल्द ही शेर्बित्स्की के इस्तीफे का आह्वान करना शुरू कर दिया।{{sfn|Radio Liberty 2021}}
मार्च 1990 के लिए निर्धारित सर्वोच्च सोवियत के चुनाव करीब आने के साथ, चोर्नोविल ने अभियान मोड में स्विच किया। उनके घोषणापत्र ने "राज्य का दर्जा, लोकतंत्र और स्वशासन" और गैर-जातीय यूक्रेनियनों के साथ सहयोग का आह्वान किया। चोर्नोविल के कार्यक्रम की आधारशिला बारह "भूमि" पर आधारित एक संघीय यूक्रेन का उनका विचार था, जिसे मोटे तौर पर यूक्रेनी जनवादी गणराज्य के गवर्नरेट और डोनबास के लिए एक अलग भूमि द्वारा परिभाषित किया गया था। क्रीमिया को एक स्वतंत्र राज्य या यूक्रेन के स्वायत्त गणराज्य के रूप में मौजूद होना था। विधायिका को एक द्विसदनीय केंद्रीय राडा के रूप में फिर से स्थापित किया जाना था, निचले सदन को आनुपातिक प्रतिनिधित्व द्वारा चुना जाना था और ऊपरी सदन को भूमि से चुना जाना था।{{sfn|Chornovil|2009|pp=580–583}} चोर्नोविल का मानना था कि संघवाद यूक्रेन और उसके क्षेत्रों को सोवियत संघ से स्वतंत्र अर्थव्यवस्था, संस्कृति और राजनीति विकसित करने की अनुमति देगा और सोवियत शैली की नौकरशाही की स्थापना को रोकेगा।{{sfn|Derevinskyi|2023|pp=54–55}} चोर्नोविल इस समय UHS के भीतर स्वतंत्रता-समर्थक पदों को अपनाने पर जोर देने वाले प्राथमिक व्यक्तियों में से एक थे, यह प्रस्ताव करते हुए कि पार्टी के कार्यक्रम में स्वतंत्रता का प्रश्न प्रस्तावित किया जाए।{{sfn|Derevinskyi|2023|p=335}}
[[File:1съезд.jpg|alt=एक सम्मेलन में एकत्रित कई व्यक्ति, उनमें से कुछ यूक्रेनी झंडे लहरा रहे हैं|thumb|left|यूक्रेन के जन आन्दोलन की पहली कांग्रेस सितंबर 1989 में हुई थी]]
8 सितंबर 1989 को, यूक्रेन का जन आन्दोलन (रूख) की स्थापना यूक्रेनी एस॰एस॰आर॰ की राज्य भाषा के रूप में यूक्रेनी की स्थापना, एक राष्ट्रीय और सांस्कृतिक पुनरुद्धार, और यूक्रेनी स्वशासन के साथ-साथ यूक्रेन के भीतर अल्पसंख्यकों के लिए भाषाई अधिकारों को मजबूत करने की वकालत करने वाले एक कार्यक्रम के साथ की गई थी। ये पद राइटर्स यूनियन के लोगों पर आधारित थे, जिन्होंने उस वर्ष फरवरी में उन्हें अपनाया था।{{sfn|Adamovych|2020|pp=8–9}} पूरी तरह से "पेरेस्त्रोइका के लिए यूक्रेन का जन आन्दोलन" के रूप में नामित, इसके पहले नेता कवि इवान ड्रेच थे। इसके बावजूद, हालाँकि, चोर्नोविल पार्टी के वास्तविक नेता थे और इतिहासकार रोमन ह्रीत्स्किंव के अनुसार, इसकी स्थापना का आयोजन भी उन्हीं ने किया था।{{sfn|Popovych|2023}} चोर्नोविल ने कट्टरपंथी और स्वतंत्रता के उदारवादी समर्थकों को फिर से जोड़ते हुए, 'रूख' को यूक्रेनी राष्ट्रवादियों के जन आंदोलन में बदलने की मांग की।{{sfn|Derevinskyi|2023|p=10}}
संयोग से, खनिकों की हड़ताल{{sfn|Radio Liberty 2021}} और गोर्बाचेव के दबाव के संयोजन के कारण शेर्बित्स्की को उसी महीने इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया गया था।{{sfn|Senkus|2007}}
चोर्नोविल ने 1919 के एकीकरण अधिनियम की वर्षगांठ मनाते हुए, 22 जनवरी 1990 को ल्वीव से कीव तक एक मानव शृंखला आयोजित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।{{sfn|Adamovych|2018|p=3}} लगभग तीस लाख लोगों ने शृंखला में भाग लिया जो उस समय तक 'रूख' द्वारा किया गया सबसे बड़ा विरोध प्रदर्शन था।{{sfn|Poberezhets|2011|p=288}} चोर्नोविल ने एकीकरण अधिनियम की वर्षगांठ को अवकाश के रूप में मान्यता देने की वकालत की।{{sfn|Adamovych|2018|p=3}}
== चोर्नोविल सत्ता में ==
{{Multiple image
| header = चोर्नोविल के आधिकारिक चित्र, [[यूक्रेन की संसद|संसद]]
| width = 100
| image1 = НДУ 1 Чорновіл Вячеслав Максимович.jpg
| caption1 = पहली (1990–1994)
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| caption2 = दूसरी (1994–1998)
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| caption3 = तीसरी (1998–1999)
}}
सोवियत यूक्रेन के इतिहास में पहला बहुदलीय मतदान, सर्वोच्च सोवियत चुनाव, 4 मार्च 1990 को आयोजित किया गया था। यह उच्च मतदान द्वारा चिह्नित किया गया था, जिसमें 85% पंजीकृत मतदाताओं ने भाग लिया था। अधिकांश यूक्रेन में, परिणाम कम्युनिस्टों के लिए फायदेमंद था, 90% पहले चुने गए प्रतिनिधि फिर से चुने गए और 450 प्रतिनिधियों में से 373 कम्युनिस्ट पार्टी के थे। हालाँकि, सभी तीन गैलिशियन ओब्लास्ट में, डेमोक्रेटिक ब्लॉक, एक 'रूख' नेतृत्व वाले गठबंधन{{sfn|Kozhanov|2020|p=44}} ने अधिकांश सीटें जीतीं। सुप्रीम सोवियत के उपाध्यक्ष के रूप में चुने गए इवान प्लियुश्च ने 2010 में लिखा था कि कम्युनिस्ट बहुमत संसदीय स्तर पर समान प्रभाव को कमान करने में असमर्थ था जैसा कि डेमोक्रेटिक ब्लॉक था।{{sfn|Kulchytskyi|2019|pp=51–52}} चोर्नोविल को ल्वीव शहर के शेवचेंकिव्स्की जिले से डेमोक्रेटिक ब्लॉक के उप-प्रतिनिधि के रूप में पूर्ण बहुमत से चुना गया, जिन्होंने सात अन्य उम्मीदवारों के खिलाफ 68.60% वोट जीते।{{sfn|1st Verkhovna Rada}} सुप्रीम सोवियत के भीतर, चोर्नोविल डेमोक्रेटिक ब्लॉक के कट्टरपंथी विंग के नेताओं में से थे।{{sfn|Fedunyshyn|2019|p=137}}
चोर्नोविल को अप्रैल 1990 में ल्वीव ओब्लास्ट परिषद का अध्यक्ष भी चुना गया, जिससे वे ल्वीव ओब्लास्ट के पहले गैर-कम्युनिस्ट प्रमुख बन गए।{{sfn|Fedunyshyn|2019|p=137}} उन्होंने जल्दी ही एक असंतुष्ट के रूप में जीवन से राजनीति में खुद को अनुकूलित कर लिया, दाईं ओर मुड़ते हुए और स्पष्ट रूप से कम्युनिस्ट-विरोधी क्रांति का समर्थन करने वाले पहले यूक्रेनी राजनेताओं में से एक बन गए।{{sfn|Seko|2018|p=174}} आर्थिक क्षेत्र में, उन्होंने आवास बाजार और प्रकाश उद्योग का निजीकरण किया, और सामूहिक खेतों को समाप्त करके और किसानों को भूमि पुनर्वितरित करके भूमि सुधार शुरू किए।{{sfn|Fedunyshyn|2019|p=137}} सामाजिक रूप से, उन्होंने यूक्रेन के सांस्कृतिक और राष्ट्रीय पुनरुद्धार का सक्रिय समर्थन किया; उनकी सरकार द्वारा सोवियत के बजाय यूक्रेनी प्रतीकों का उपयोग किया गया, यूक्रेनी विद्रोही सेना के सैनिकों को दिग्गजों के रूप में मान्यता दी गई, धर्मसभा ल्वीव द्वारा लगाए गए यूक्रेनी ग्रीक कैथोलिक चर्च पर प्रतिबंध निरस्त कर दिया गया और धार्मिक छुट्टियों को सार्वजनिक छुट्टियों के रूप में मान्यता दी गई।{{sfn|Adamovych|2018|p=3}} व्लादिमीर लेनिन की मूर्तियों को पहली बार चोर्नोविल की सरकार के तहत ध्वस्त किया गया था,{{sfn|Kobuta|2020|pp=37–38}} 1 जुलाई 1990 को चेर्वोनोग्राद में मूर्ति को गिरा दिया गया था। इसने 1990 और 1991 के दौरान गैलिसिया में लेनिन स्मारकों को गिराने की लहर शुरू कर दी।{{sfn|Gazeta.ua 2018}}
चोर्नोविल की नीतियां सीधे तौर पर यूक्रेनी एस॰एस॰आर॰ और सोवियत संघ के उस समय के कानूनों के विपरीत थीं, और यूक्रेनी और संघ-व्यापी सरकार-समर्थक मीडिया में उनकी सरकार की आलोचना की गई थी। इसके बावजूद, अन्य गैलिशियन ओब्लास्ट, जो 'रूख' के नियंत्रण में आ गए थे, ने जल्द ही सुधारों को आगे बढ़ाने में चोर्नोविल के उदाहरण का पालन किया।{{sfn|Kobuta|2020|pp=38–39}} इतिहासकार स्टीफन कोबुटा ने तर्क दिया है कि गैलिसिया द्वारा सोवियत कानूनों की अस्वीकृति चोर्नोविल के संघीय विश्वासों की अभिव्यक्ति थी।{{sfn|Kobuta|2020|p=39}} अपने लोकतांत्रिक लाभ को बनाए रखने और सोवियत राज्य संस्थानों का मुकाबला करने के लिए, गैलिशियन राष्ट्रीय डेमोक्रेट्स ने फरवरी 1991 में चोर्नोविल को इसके प्रमुख के रूप में नियुक्त करके गैलिशियन असेंबली का गठन किया।{{sfn|Muravskyi|2019|pp=139-140}}{{sfn|Semkiv|2014}}{{sfn|Adamovych|2018|p=3}}
सुप्रीम सोवियत के एक उप-प्रतिनिधि के रूप में, चोर्नोविल ने सोवियत संघ के भीतर यूक्रेन की संप्रभुता को स्वतंत्रता के अंतिम उद्देश्य के साथ-साथ भूमि सुधार, पर्यावरण संरक्षण, अल्पसंख्यक और धार्मिक अधिकारों, संघवाद और सरकार की एकमात्र भाषा के रूप में यूक्रेनी को स्थापित करने के लिए खुद को समर्पित किया।{{sfn|Kobuta|2020|p=37}} उन्हें सुप्रीम सोवियत के अध्यक्ष के लिए डेमोक्रेटिक ब्लॉक के उम्मीदवार के रूप में नामित किया गया था, हालांकि उन्होंने नामांकन को अस्वीकार कर दिया और गठबंधन के नेता, इहोर युखनोवस्की का समर्थन किया। अंततः, दोनों में से कोई भी नहीं चुना गया, क्योंकि कम्युनिस्टों ने व्लादिमीर इवाश्को के लिए मतदान किया।{{sfn|Kulchytskyi|2019|p=52}} मतदान के दौरान, चोर्नोविल ने खुले तौर पर सोवियत संघ से यूक्रेन की स्वतंत्रता का आह्वान किया, यह तर्क देते हुए कि उस समय यूक्रेन का सामना कर रहे "आर्थिक, पर्यावरणीय और आध्यात्मिक तबाही" को समाप्त करने का यह एकमात्र संभव तरीका था।{{sfn|Kobuta|2020|pp=37–38}}
चोर्नोविल ने संघवाद की वकालत करना जारी रखा, मई 1990 के एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि "कीवन केंद्रवाद" डोनबास में रूसी राष्ट्रवाद और ज़कारपट्टिया ओब्लास्ट में रुसिन पहचान के उद्भव को जन्म देगा।{{sfn|Riabinin|2021|p=90}} उसी महीने, जैसे ही ग्रामीण ग्रीक कैथोलिक और रूढ़िवादी ईसाइयों के बीच संघर्ष छिड़ गया, ल्वीव ओब्लास्ट की सरकार ने यह निर्धारित करने के लिए गांवों में जनमत संग्रह कराने का प्रयोग किया कि किस संप्रदाय को चर्चों का नियंत्रण दिया जाएगा। चोर्नोविल द्वारा लिखे गए इस प्रस्ताव के अनुसार, बहुसंख्यक संप्रदाय अल्पसंख्यक की आस्था से संबंधित एक चर्च के निर्माण की जिम्मेदारी वहन करेगा। इस प्रणाली ने क्षेत्र में एक धार्मिक संघर्ष को उभरने से सफलतापूर्वक रोका।{{sfn|Yurash|2021|pp=134–135}}
12 जून 1990 को, रूस ने सोवियत संघ के भीतर राज्य संप्रभुता की घोषणा की। इसने डेमोक्रेटिक ब्लॉक द्वारा यूक्रेन की राज्य संप्रभुता की घोषणा पर मतदान पर जोर देने के प्रयासों को बढ़ावा दिया, जिसे कम्युनिस्ट प्रतिनिधियों ने अवरुद्ध कर दिया था। घोषणा पर 5 जुलाई की बहस के दौरान, चोर्नोविल और साथी गठबंधन सदस्य मायखाइलो बतिह ने कम्युनिस्टों पर पार्टी द्वारा मतदान करने का तरीका बताने का आरोप लगाया। चोर्नोविल ने बाद में खुलासा किया कि कई प्रतिनिधियों को एक स्वतंत्र सेना या कानूनी प्रणाली की स्थापना जैसे उपायों को खत्म करने के लिए संप्रभुता पर मसौदा कानून में संशोधन करने के निर्देश मिले थे। इस खुलासे से कार्यवाहक सर्वोच्च सोवियत अध्यक्ष इवान प्लियुश्च ने एक जांच शुरू की, जो यह पता चलने के बाद तेज हो गई कि कई प्रतिनिधियों ने निर्देशों को शब्दशः उद्धृत किया था।{{sfn|Kulchytskyi|2019|pp=57–59}}
चोर्नोविल और एक अज्ञात कम्युनिस्ट उप-प्रतिनिधि ने तब घोषणा पर मतदान शुरू करने का प्रयास किया। प्लियुश्च ने यह कहते हुए इनकार कर दिया कि सोवियत संघ के पीपुल्स डिपुटीज के सदस्य अभी तक वापस नहीं आए थे और इसलिए कोरम असंभव था। जवाब में, चोर्नोविल ने सोवियत पीपुल्स डिपुटीज की तत्काल वापसी की मांग करने के लिए कदम उठाया, जिसे तब संप्रभुता-समर्थक कम्युनिस्टों द्वारा समर्थन दिया गया और बड़े अंतर से पारित किया गया। चार दिन बाद, प्रतिनिधि वापस आ गए और राज्य संप्रभुता की घोषणा पर बहस फिर से शुरू हो गई। घोषणा-विरोधी समूह का नेतृत्व स्टैनिस्लाव हुरेंको और लियोनिद क्रावचुक ने किया, जिन्होंने दावा किया कि संप्रभुता का मामला कीव के बजाय मॉस्को में हल किया जाएगा।{{sfn|Kulchytskyi|2019|pp=59–61}}
[[File:Підняття українського прапора над Києвом, подія.JPG|alt=कार्यालय भवनों के सामने मुख्य रूप से यूक्रेनी झंडों के साथ प्रदर्शन कर रहे कई लोग|thumb|left|300px|मध्य कीव में यूक्रेन की संप्रभुता की घोषणा के समर्थन में प्रदर्शन, जुलाई 1990]]
इवाश्को ने सोवियत संघ की कम्युनिस्ट पार्टी के उप महासचिव बनने के लिए 11 जुलाई को अपने यूक्रेनी सरकारी पदों से औपचारिक रूप से इस्तीफा दे दिया। यह कदम यूक्रेनी जनता के लिए एक सदमे के रूप में आया, क्योंकि सी॰पी॰एस॰यू॰ को ढहने के रूप में माना जाता था, और पार्टी की सेवा के लिए यूक्रेनी पदों से इवाश्को के इस्तीफे ने यूक्रेनी आबादी के प्रति उदासीनता का प्रदर्शन किया। इवाश्को के इस्तीफे के बाद, कम्युनिस्ट हतोत्साहित रह गए, जिससे चोर्नोविल को कार्यालय के माध्यम से घोषणा को आगे बढ़ाने की अनुमति मिली। यह अंततः 16 जुलाई 1990 को पारित किया गया था, जो सोवियत सरकार के कानूनों पर यूक्रेनी कानूनों को प्राथमिकता देता था।{{sfn|Kulchytskyi|2019|pp=61–63}} यह चोर्नोविल के लिए एक बड़ी जीत थी, जिन्होंने जुलाई 1989 से राज्य संप्रभुता की घोषणा की निजी तौर पर मांग की थी।{{sfn|Kobuta|2020|p=37}}
1990 के शेष भाग में यूक्रेनी जनभावना सरकार के खिलाफ मुड़ना जारी रही। छात्रों के विरोध की एक शृंखला, जिसे क्रांति पर ग्रेनाइट के रूप में जाना जाता है, अक्टूबर में शुरू हुई जब छात्रों के समूहों ने दावा किया कि सरकार ने डेमोक्रेटिक ब्लॉक को बहुमत हासिल करने से रोकने के लिए परिणामों में हेरफेर किया था। छात्रों ने कीव में अक्टूबर क्रांति स्क्वायर पर भूख हड़ताल शुरू कर दी, और बाद में कम्युनिस्ट प्रतिनिधियों द्वारा उनका मज़ाक उड़ाया गया। इस असंवेदनशील रवैये ने लगभग सभी नरमपंथियों और राष्ट्रीय कम्युनिस्टों को लेखक ओल्स होन्चर के नेतृत्व का पालन करते हुए कम्युनिस्ट पार्टी को छोड़ने के लिए प्रेरित किया। इन व्यक्तियों ने राष्ट्रीय-डेमोक्रेट्स की ओर दलबदल कर लिया, जिससे शेष कम्युनिस्टों को और कमजोर कर दिया।{{sfn|Pipash|2021|p=82}}
जनवरी की घटनाओं, जिसमें सोवियत सरकार ने लिथुआनिया को स्वतंत्र होने से रोकने के प्रयास में 16 जनवरी 1991 को सेना तैनात की, ने चोर्नोविल को अस्थायी रूप से सोवियत सेना से अलग यूक्रेनी सेना की स्थापना की दिशा में अपनी नीतियों को फिर से उन्मुख करने के लिए प्रेरित किया। इसे प्राप्त करने के लिए, उन्होंने इहोर डेरकाच, मायकोला पोरोव्स्की, विटाली लाज़ोर्किन और विलेन मार्टिरोसियन के साथ मिलकर 'रूख' के सैन्य कॉलेजियम की सह-स्थापना की, जिसे यूक्रेन के सशस्त्र बलों का निर्माण करने और सोवियत सरकार की कार्रवाई में यूक्रेनी सैनिकों के उपयोग को रोकने का काम सौंपा गया था।{{sfn|Lazorkin|2020|p=74}} चोर्नोविल ने 16 फरवरी 1991 को गैलिशियन असेंबली की दूसरी बैठक में गैलिशियन ओब्लास्ट के एकीकरण की वकालत करना जारी रखा, विशेष रूप से शिक्षा और अंतर-ओब्लास्ट व्यापार तक पहुंच का विस्तार करने में।{{sfn|Adamovych|2018|p=4}} चोर्नोविल ने मार्च 1991 के यूक्रेनी स्वतंत्रता जनमत संग्रह का भी निरीक्षण किया, जिसमें गैलिशियन ओब्लास्ट की अधिकांश आबादी ने सोवियत संघ से अलग होने के लिए मतदान किया।{{sfn|Fedyk|2019|p=137}}
=== स्वतंत्रता की घोषणा और राष्ट्रपति चुनाव ===
[[File:Chornovil5.JPG|alt=चोर्नोविल और एक अन्य व्यक्ति यूक्रेनी पारंपरिक कपड़े पहने कई महिलाओं के सामने और कई यूक्रेनी झंडों के नीचे खड़े हैं|thumb|1990 में क्रिवी रिह में चोर्नोविल]]
सुप्रीम सोवियत ने 5 जुलाई 1991 को एक कानून पारित किया जिसमें राष्ट्रपति का कार्यालय स्थापित किया गया, जिसके धारक को चुनाव द्वारा निर्धारित किया जाएगा।{{sfn|Law on Ukrainian SSR presidential elections 1991}}
सोवियत संघ के गोर्बाचेव के नेतृत्व का विरोध करने वाले कट्टरपंथियों ने 19 अगस्त 1991 को तख्तापलट शुरू किया। तख्तापलट के समय, चोर्नोविल एक व्यापार यात्रा पर ज़ापोरिज़्ज़िया शहर में थे। यह जानकर कि पुट्स हुआ था, वे तुरंत कीव लौट आए और यूक्रेनी एस॰एस॰आर॰ की सर्वोच्च सोवियत के आपातकालीन सत्र का आह्वान करना शुरू कर दिया; उन्होंने ल्वीव ओब्लास्ट में कम्युनिस्ट पार्टी की गतिविधियों पर भी प्रतिबंध लगा दिया। सुप्रीम सोवियत में, डेमोक्रेटिक ब्लॉक के प्रतिनिधियों ने यूक्रेनी स्वतंत्रता की वकालत करना शुरू कर दिया, यह तर्क देते हुए कि यूक्रेन यूरोप का हिस्सा था न कि सोवियत संघ का।{{sfn|Bohatchuk|2020|p=225}} तख्तापलट की विफलता के बाद, सुप्रीम सोवियत ने 24 अगस्त 1991 को यूक्रेन की स्वतंत्रता की घोषणा को अपनाया।{{sfn|Adamovych|2018|p=4}}
राष्ट्रपति चुनाव के लिए अभियान आधिकारिक तौर पर 1 सितंबर 1991 को शुरू हुआ।{{sfn|Zolotariova 2021a}} राष्ट्रीय-लोकतांत्रिक शिविर में तीन प्रमुख उम्मीदवार थे, जबकि क्रावचुक राज्य के प्रमुख के रूप में एक अच्छी तरह से स्थापित व्यक्ति थे।{{sfn|Potichnyj|1991|p=135}} दौड़ जल्द ही चोर्नोविल बनाम क्रावचुक के साथ एक प्रभावी दो-व्यक्ति अभियान में संकुचित हो गई, क्योंकि वे राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए आवश्यक संगठन के साथ एकमात्र उम्मीदवार थे। डेमोक्रेटिक ब्लॉक के युखनोव्स्की के नेतृत्व के बावजूद, वे बौद्धिक शहरी केंद्रों और पश्चिमी यूक्रेन के बाहर अलोकप्रिय थे, जबकि लुक्यानेंको, एक पसंदीदा स्वतंत्रता-समर्थक व्यक्ति होने के बावजूद, एक संगठित अभियान का अभाव था और यूक्रेन के अधिकांश हिस्सों में अज्ञात थे।{{sfn|Potichnyj|1991|pp=137–138}}
चोर्नोविल ने यूक्रेनी स्वतंत्रता का संदेश फैलाने के लिए पूरे यूक्रेन की यात्रा की, जिसमें क्रीमिया जैसे कट्टर रूसी-समर्थक क्षेत्र भी शामिल थे। दोनों भाषाओं में बोलकर रूसोफोन और यूक्रेनी-भाषा के दर्शकों दोनों से अपील करते हुए, चोर्नोविल ने एक ऐसे कार्यक्रम के लिए तर्क दिया जिसमें वे एक नियोजित अर्थव्यवस्था से मुक्त-बाजार पूंजीवाद में एक वर्ष के भीतर कई आदेशों और पश्चिमी निवेशकों का ध्यान आकर्षित करके संक्रमण करेंगे,{{sfn|Dahlburg|1991}} साथ ही यूरोपीय आर्थिक समुदाय और एक काल्पनिक अखिल-यूरोपीय सामूहिक सुरक्षा संगठन में सदस्यता लेंगे।{{sfn|Derevinskyi|2016|p=34}} चोर्नोविल ने क्रावचुक को "एक धूर्त राजनीतिज्ञ" के रूप में निंदा की जो "[यूक्रेन] को वापस [सोवियत संघ] में लाने की कोशिश कर रहा था," यह चेतावनी देते हुए कि वे रूस के साथ राजनीतिक और आर्थिक संबंधों को फिर से स्थापित करेंगे।{{sfn|Dahlburg|1991}}
[[File:1991 Ukrainian presidential election.svg|alt=1991 के यूक्रेनी राष्ट्रपति चुनाव के परिणामों का एक रंगीन मानचित्र|thumb|[[1991 यूक्रेनी राष्ट्रपति चुनाव]] के परिणाम।
चोर्नोविल द्वारा जीते गए ओब्लास्ट नीले रंग में दिखाए गए हैं।]]
चोर्नोविल शुरू में अपने विश्वासों के खिलाफ दशकों के सोवियत प्रचार के कारण अलोकप्रिय थे, जिसे क्रावचुक ने पहले निर्देशित किया था।{{sfn|Dahlburg|1991}} नेशनल-डेमोक्रेट्स द्वारा एकल उम्मीदवार को नामित करने में असमर्थता ने भी इस विश्वास में योगदान दिया कि असंतुष्ट जनचेतना में शासन करने के लिए अयोग्य थे।{{sfn|Kulchynskyi|2023}} इसके बावजूद, चोर्नोविल के अभियान ने जनमत सर्वेक्षण में गैलिसिया के बाहर की खाई को धीरे-धीरे बंद करना शुरू कर दिया; नवंबर 1991 के एक पोल ने ओडेसा में क्रावचुक के 28% की तुलना में चोर्नोविल को 22% वोट के साथ दिखाया, जिसमें अनिर्णीत मतदाताओं की संख्या एक चौथाई से बढ़कर स्थानीय मतदाताओं की एक तिहाई हो गई।{{sfn|Dahlburg|1991}} उत्तर पश्चिमी यूक्रेन ने अक्टूबर से एक महत्वपूर्ण युद्ध के मैदान के रूप में काम किया, क्योंकि सर्वेक्षणों ने शुरू में एक व्यावहारिक टाई का पूर्वानुमान लगाया था और बाद में चोर्नोविल को थोड़ी बढ़त दी थी।{{sfn|Potichnyj|1991|p=136}}
यूक्रेनियनों ने राष्ट्रपति चुनाव और यूक्रेन की स्वतंत्रता की पुष्टि करने वाले जनमत संग्रह दोनों में 1 दिसंबर 1991 को मतदान किया। 84.18% आबादी ने जनमत संग्रह में भाग लिया, जिसमें 90.32% ने पक्ष में मतदान किया।{{sfn|Potichnyj|1991|p=129}} क्रावचुक ने चुनाव के 61.59% के साथ राष्ट्रपति चुनाव जीता। चोर्नोविल 23.27% वोट के साथ दूर दूसरे स्थान पर रहे, एक रनऑफ से बचते हुए। उत्तर पश्चिमी ओब्लास्ट में चोर्नोविल की जीत की पूर्व भविष्यवाणियों के विपरीत, उन्होंने अंततः केवल गैलिसिया में जीत हासिल की, हालांकि उन्होंने चेर्निवत्सी, चर्कासी, कीव, रिव्ने, वोलिन और ज़कारपट्टिया ओब्लास्ट के साथ-साथ कीव शहर में अच्छा प्रदर्शन किया। चोर्नोविल ने चुनाव के दिन हार स्वीकार कर ली, कहा "चुनाव पूर्व अभियान ने मुझे पूरे यूक्रेन की यात्रा करने, लोगों से मिलने और पूर्व का राजनीतिकरण करने का अवसर दिया।"{{sfn|Potichnyj|1991|pp=134–135}} उन्होंने बाद में कहा कि 1991 में हुए संक्षिप्त अभियान के बजाय अभियान के एक और छह महीने ने जीत की अनुमति दी होती।{{sfn|Urban|1992|p=40}}
=== स्वतंत्र यूक्रेन ===
==== पार्टी शासन ====
राष्ट्रपति चुनाव के बाद, समूह के भविष्य को लेकर 'रूख' के भीतर दरारें आ गईं। ड्रेच और मिखाइलो होरिन के नेतृत्व में एक गुट ने संगठन को भंग करने और क्रावचुक के राष्ट्र निर्माण के प्रयासों का समर्थन करने की मांग की, जबकि चोर्नोविल और उनके समर्थकों ने चोर्नोविल की भविष्य की राष्ट्रपति महत्वाकांक्षाओं का समर्थन करने के लिए संगठन को एक पार्टी में सुधारने की मांग की।{{sfn|Potichnyj|1991|pp=138}} कई सदस्यों ने 'रूख' के चोर्नोविल के समर्थन को मात्र एक सिफारिश मानते हुए युखनोवस्की या लुक्यानेंको के पीछे अपना समर्थन दिया, जिससे अंतर्दलीय तनाव और बढ़ गया।{{sfn|Malynovskyi|2019|p=72}}
28 फरवरी 1992 को 'रूख' की तीसरी कांग्रेस में, संगठन में विभाजन को संक्षेप में टाल दिया गया था। दोनों गुटों के बीच एक समझौते के रूप में ड्रेच, होरिन और चोर्नोविल को 'रूख' के सह-अध्यक्षों के रूप में चुना गया था।{{sfn|Kulchytskyi|2020}} बहरहाल, यूक्रेनी रिपब्लिकन पार्टी और यूक्रेन की डेमोक्रेटिक पार्टी, जो 'रूख' से बनी थीं, ने क्रावचुक के साथ सहयोग करने का फैसला किया।{{sfn|Haran|Sydorchuk|2010}} अंततः दिसंबर 1992 में चौथी कांग्रेस में चोर्नोविल के गुट की जीत हुई क्योंकि 'रूख' को उनके नेतृत्व में एक केंद्र-दक्षिणपंथी राजनीतिक दल के रूप में पुनर्गठित किया गया था।{{sfn|Kulchytskyi|2020}}
==== क्रीमियन मुद्दा ====
[[File:Black Sea with the Crimea highlighted.svg|alt=काला सागर का एक मानचित्र, जिसमें क्रीमिया को हाइलाइट किया गया है|thumb|left|काला सागर के भीतर क्रीमिया का स्थान]]
सोवियत संघ के टूटने के कुछ ही समय बाद, क्रीमिया की जातीय-रूसी आबादी ने यूक्रेन से अलग होने और रूस के साथ एकीकरण करने की मांग की। 5 मई 1992 को, क्रीमिया ने एकतरफा रूप से यूक्रेन से अपनी स्वतंत्रता की घोषणा की, जिससे तनाव फैल गया। यूक्रेन के झंडे को रूस के झंडे से बदल दिया गया, और स्वदेशी क्रीमियन तातार आबादी के खिलाफ दमन की लहर शुरू हो गई।{{sfn|Derevinskyi|2018|p=50}} चोर्नोविल, जिन्होंने अपने कारावास के बाद से क्रीमियन तातारों में रुचि बनाए रखी थी,{{sfn|Finnin|2022|pp=147–148}} ने यूक्रेन की संसद से क्रीमिया की स्वतंत्रता की घोषणा को रद्द करने और उसकी संसद के लिए नए चुनावों की मांग करने का आह्वान किया। कई वर्षों तक चले इस संकट के दौरान, वे इस मुद्दे पर आक्रामक राजनेताओं में से थे।{{sfn|Derevinskyi|2018|p=50}}
1993 तक, रूस क्रीमिया संकट में कूद पड़ा। रूस की सर्वोच्च सोवियत के उपाध्यक्ष वैलेंटाइन अगाफोनोव ने जनमत संग्रह द्वारा क्रीमिया की स्वतंत्रता की पुष्टि होने पर उसे मान्यता देने का संकल्प लिया। जून में, सेवस्तोपोल शहर ने भी रूसी संघ में शामिल होने के लिए आवेदन किया। अग्रणी रूसी-समर्थक कार्यकर्ता यूरी मेशकोव ने सोवियत काला सागर बेड़े से बनी एक सेना की व्यवस्था की और समर्थकों के साथ पुलिस और मीडिया भवनों पर नियंत्रण कर लिया।{{sfn|Derevinskyi|2018|p=51}} एक समय पर, यूक्रेनी सरकार ने आर्थिक दबावों को कम करने के लिए सोवियत संघ से विरासत में मिले परमाणु शस्त्रागार को बेचने पर विचार किया,{{sfn|Schmemann|1992|p=10}} लेकिन अलगाव के खतरे और मॉस्को के व्यवहार ने यूक्रेनी आबादी को इस लेनदेन का विरोध करने के लिए प्रेरित किया। चोर्नोविल उन राजनेताओं में से थे जिन्होंने एक स्वतंत्र परमाणु शस्त्रागार, या वैकल्पिक रूप से नाटो की सदस्यता का समर्थन किया, जिसे उन्होंने रूसी विस्तारवाद के लिए एकमात्र संभावित निवारक के रूप में देखा था यदि यूक्रेन को परमाणु हथियार छोड़ने की आवश्यकता हो।{{sfn|Blank|1994|pp=10, 15}} उन्होंने स्वतंत्र राज्यों के राष्ट्रमंडल में यूक्रेन की भागीदारी का विरोध किया, हालांकि 1997 की रूसी-यूक्रेनी मैत्री संधि के अनुसमर्थन का समर्थन किया।{{sfn|Derevinskyi|2013|pp=358-359,493}}
चोर्नोविल ने जोर देकर कहा कि तत्काल अवधि में क्रीमिया को लेकर युद्ध नहीं होगा; उनका मानना था कि आधे साल से एक साल के भीतर, क्रीमियाई अलगाववाद लोकप्रियता खो देगा और रूसी कार्य क्रीमियाई अलगाववादियों के वित्तपोषण और यूक्रेन के खिलाफ एक सूचना युद्ध अभियान तक सीमित रहेंगे। ये दोनों भविष्यवाणियाँ अंततः सटीक साबित होंगी। हालाँकि, उनका यह भी मानना था कि अलगाववाद का खतरा अभी भी वास्तविक था। उनका मानना था कि इसका मुकाबला केवल एक ऐसी रणनीति से किया जा सकता है जो यूक्रेन के रूसीकृत क्षेत्रों को एकल अखिल-यूक्रेनी राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक-सांस्कृतिक वातावरण की ओर धकेले - जिस पर कार्रवाई नहीं की गई थी। चोर्नोविल ने क्रीमियन स्वायत्तता का विरोध किया जैसा कि यह मौजूद था, जिसे वे कृत्रिम मानते थे क्योंकि यह हाल ही में प्रत्यावर्तित क्रीमियन तातार आबादी पर आधारित नहीं था बल्कि रूसियों पर आधारित था जो बड़े पैमाने पर द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पहुंचे थे; उन्होंने यह भी सोचा कि प्रायद्वीप की विशेष स्थिति ने केवल संघर्ष को रोक दिया है।{{sfn|Derevinskyi|2018|p=51}}
==== अर्थव्यवस्था पर विचार ====
स्वतंत्रता के पहले वर्षों में तेजी से बिगड़ती अर्थव्यवस्था को ठीक करना एक अत्यंत गंभीर मुद्दा था। समस्या पूर्व सोवियत संघ के भीतर बदलती आर्थिक वास्तविकताओं के अनुकूल होने में सरकार की विफलता और आयात के प्रभुत्व वाली यूक्रेन की अर्थव्यवस्था से उपजी थी। हाइपरइन्फ्लेशन शुरू हो गया और उत्पादकता गिर गई। इन राजनीतिक और आर्थिक संकटों ने कई प्रतिनिधियों के बीच यह आशंका पैदा कर दी कि यूक्रेन जल्द ही अपनी स्वतंत्रता खो देगा;{{sfn|Schmemann|1992|p=10}} इसके विपरीत, चोर्नोविल का मानना था कि यूक्रेन की संप्रभुता सुनिश्चित करने से राजनीतिक और आर्थिक स्थितियों में सुधार होगा। उन्होंने क्रावचुक का विरोध करना जारी रखा, जिनके साथ वे तीखी प्रतिद्वंद्विता बनाए रखते थे।{{sfn|Schmemann|1992|p=19}}
स्वतंत्र व्यापार संघों ने क्रावचुक की सरकार द्वारा श्रमिकों के लाभ और मुआवजे की गारंटी देने से इनकार करने से क्षुब्ध होकर 2 सितंबर 1992 को व्यापक हड़तालें शुरू कीं। 1989-1991 की हड़तालों की तरह हड़ताल करने वाले बड़े पैमाने पर कोयला खनिक थे, लेकिन पिछली हड़तालों के विपरीत वे व्यापक समर्थन हासिल करने में विफल रहे, इस तथ्य को लाफयेत्ते कॉलेज के प्रोफेसर स्टीफन क्रॉले इस कारण बताते हैं कि इसे स्थानीय, डोनबास-आधारित हड़ताल समितियों के बजाय राष्ट्रव्यापी संघ द्वारा बुलाया गया था। फरवरी 1993 में कोयला खनिकों के साथ कीव के सार्वजनिक परिवहन कर्मचारी भी शामिल हो गए, एक ऐसा उपाय जिसने हड़ताल को जनता के बीच गहराई से अलोकप्रिय बना दिया। पिछली हड़तालों के विपरीत, 'रूख' ने हड़तालियों की निंदा की और सरकार से "हड़ताल के असली आयोजकों को दंडित करने" का आह्वान किया। चोर्नोविल ने विशेष रूप से स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए राजनीतिक गतिविधि, विशेष रूप से हड़तालों को कम करने का तर्क दिया।{{sfn|Crowley|1995|pp=54–55}}
==== 1994 के चुनाव ====
क्रावचुक की सरकार ने खनिकों के गुस्से को रोकने के लिए 17 जून 1993 को सुप्रीम राडा को भंग कर दिया और संसदीय और राष्ट्रपति चुनावों को जल्दी बुलाया।{{sfn|Zolotariova 2021b}}{{sfn|Stoliarova|Chernova|2021}} चोर्नोविल ने शुरू में संसदीय चुनाव में कीव सीट पर चुनाव लड़ने का फैसला किया, क्योंकि उन्हें लगा कि यह उन्हें एक राष्ट्रीय व्यक्ति के रूप में स्थापित करेगा और उन्हें अपनी वैचारिक दृष्टि को फैलाने के लिए पूरे यूक्रेन का दौरा करने का अवसर देगा। उनके करीबी सहयोगी और दोस्त मिखाइलो बॉयच्यशिन को 'रूख' द्वारा ल्वीव के शेवचेंकिव्स्की जिले के लिए उम्मीदवार के रूप में नामित किया गया था। उस समय बॉयच्यशिन 'रूख' के सचिवालय के अध्यक्ष थे, और अधिक आर्थिक रूप से केंद्रित नीति के लिए पार्टी के मुख्य पैरोकारों में से एक थे।{{sfn|Olenin|2021}}
14 या 15 जनवरी 1994 को बॉयच्यशिन कीव में 'रूख' के चुनाव प्रचार मुख्यालय से निकले। बाद में उसी शाम, सशस्त्र व्यक्तियों द्वारा उनका अपहरण कर लिया गया{{sfn|Zdorovylo|2025}} या दो हथियारबंद व्यक्ति अभियान मुख्यालय भवन में दाखिल हुए और बॉयच्यशिन के ठिकाने के बारे में जानना चाहा।{{sfn|Olenin|2021}} वे तब से नहीं देखे गए हैं, और माना जाता है कि उनकी मृत्यु हो चुकी है। बॉयच्यशिन का जबरन गायब होना यूक्रेन में एक महत्वपूर्ण क्षण था, पत्रकार एंड्री ओलेनिन के अनुसार यह राजनीति से प्रेरित गायब होने और हत्याओं की शृंखला में पहला था। बॉयच्यशिन के गायब होने के बाद, 'रूख' सामाजिक नीति और मानवाधिकारों पर ध्यान केंद्रित करने के पक्ष में एक आर्थिक कार्यक्रम को काफी हद तक छोड़ देगा।{{sfn|Olenin|2021}} बॉयच्यशिन के अपहरण के समय, चोर्नोविल दक्षिणी मायकोलाइव ओब्लास्ट में प्रचार कर रहे थे, और बॉयच्यशिन के "गायब" होने से कुछ समय पहले दोनों ने फोन पर बात की थी। बॉयच्यशिन के गायब होने का चोर्नोविल पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ा। उन्होंने बाद में कीव में एक सीट के बजाय 357वें चुनावी जिले में चुनाव लड़ने का विकल्प चुना, और वे 14 विरोधियों के खिलाफ 62.5% वोट के साथ सफलतापूर्वक चुने गए{{sfn|2nd Verkhovna Rada}}।{{sfn|Harasymiw|Koshelivets|Senkus|2015}}
संसदीय चुनाव के नतीजों ने राष्ट्रपति चुनाव में क्रावचुक की संभावनाओं के लिए खराब संकेत दिया: 75% आबादी ने मतदान किया, जो कम मतदान और उदासीनता की उम्मीदों से कहीं अधिक था। पूर्वी यूक्रेन, जिसने नव-पुनर्स्थापित कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ यूक्रेन के उम्मीदवारों को चुना, और मध्य और पश्चिमी यूक्रेन के बीच एक विभाजन विकसित हुआ, जहाँ 'रूख' ने विशेष रूप से अच्छा प्रदर्शन किया। चुनाव के बाद ''द न्यूयॉर्क टाइम्स'' ने कहा कि पूर्व प्रधान मंत्री लियोनिद कुचमा और इवान प्लियुश्च के साथ-साथ चोर्नोविल को क्रावचुक का एक अपेक्षित प्रतियोगी माना जाता था, जिन्होंने क्रावचुक के संभावित विरोधियों के रूप में स्थापित होने के बाद महत्वपूर्ण अंतर से जीत हासिल की थी। चुनाव के बाद, क्रावचुक ने 25 मार्च 1994 के संबोधन में तर्क दिया कि जून 1994 के लिए निर्धारित राष्ट्रपति चुनाव को रद्द करने की आवश्यकता होगी और आर्थिक सुधारों और संगठित अपराध से लड़ने के लिए आपातकालीन शक्तियां प्रदान करने के लिए सुप्रीम राडा में याचिका दायर की।{{sfn|Erlanger|1994}}
120 प्रतिनिधियों, जो बड़े पैमाने पर राष्ट्रीय-लोकतांत्रिक विपक्ष से संबंधित थे, ने क्रावचुक को चुनावों को रद्द करने और अधिक शक्तियां प्राप्त करने के उनके प्रयासों में अपना समर्थन दिया। 'रूख' ने इस औचित्य के तहत चुनावों को स्थगित करने के क्रावचुक के आह्वान का अनिच्छा से समर्थन किया कि चुनाव कानूनों में सुधार के बिना ऐसा नहीं करने से राजनीतिक संकट पैदा होगा, हालांकि चोर्नोविल ने उनकी शक्तियों के विस्तार का समर्थन करने से इनकार कर दिया और तर्क दिया कि वे इसका इस्तेमाल पूर्व कम्युनिस्ट अधिकारियों को सशक्त बनाने और रूस को परमाणु हथियार और काला सागर बेड़े दोनों सौंपने के लिए सहमत होने के लिए करेंगे। चोर्नोविल ने तर्क दिया कि राष्ट्रपति शक्तियों का विस्तार करने से "कुलीनतंत्र की एक मूक तानाशाही" का उदय होगा। अंततः, कोई भी प्रस्ताव पारित नहीं हुआ क्योंकि चुनाव के बाद कम्युनिस्टों ने सर्वोच्च राडा के नेतृत्व पर नियंत्रण कर लिया और चुनाव स्थगित करने या रद्द करने के किसी भी प्रयास को अवरुद्ध कर दिया।{{sfn|Kuzio|1996|pp=120–121}}
संसदीय चुनाव में अपनी चुनावी सफलता के बावजूद, चोर्नोविल ने 1994 के राष्ट्रपति चुनाव में नहीं लड़ने का फैसला किया और इसके बजाय अर्थशास्त्री वलोडिमिर लानोवी का समर्थन किया,{{sfn|Harasymiw|Koshelivets|Senkus|2015}} जिन्हें आर्थिक संकट को समाप्त करने के लिए सुधारों का प्रस्ताव देने के बाद क्रावचुक द्वारा सरकार से हटा दिया गया था।{{sfn|Erlanger|1994}} पत्रकार और 'रूख' के सहयोगी तारास ज़दोरोविलो ने दावा किया है कि यह संभव है कि यह निर्णय उनके जीवन और 'रूख' के भविष्य के डर से लिया गया हो; ज़दोरोविलो के अनुसार, चोर्नोविल ने जेल में अपने समय के संपर्कों का उपयोग यूक्रेनी माफिया के प्रमुख हस्तियों से गुप्त रूप से मिलने के लिए किया, जिन्होंने जिम्मेदारी से इनकार किया और दावा किया कि सरकार ने बॉयच्यशिन के अपहरण का आदेश दिया था।{{sfn|Zdorovylo|2025}} इस आरोप को 2013 में 'रूख' के प्रेस सचिव दिमित्रो पोनोमारचुक ने दोहराया था।{{sfn|Olenin|2021}} ज़दोरोविलो का यह भी कहना है कि क्रावचुक की सरकार ने चुनाव के दौरान 'रूख' के वित्त में राजनीति से प्रेरित जांच शुरू की और चोर्नोविल और पार्टी के उच्च-रैंकिंग सदस्य ओलेक्ज़ेंडर लवरिनोविच दोनों को एक सुरक्षा एस्कॉर्ट के तहत रखा, जिसने उनकी बातचीत की निगरानी की।{{sfn|Zdorovylo|2025}}
==== दूसरा संसदीय कार्यकाल ====
[[File:Zernovol 2.jpg|alt=चोर्नोविल और पाश्को अन्य व्यक्तियों के बीच खड़े हैं|thumb|300px|अक्टूबर 1995 में कीव हाउस ऑफ़ सिनेमा की यात्रा के दौरान चोर्नोविल और उनकी पत्नी एटेना पाश्को]]
लियोनिद कुचमा ने चुनाव में क्रावचुक को हराया, और यूक्रेन के दूसरे राष्ट्रपति बने। स्वतंत्र मीडिया पर कुचमा की बाद की कार्रवाई ने चोर्नोविल को उनकी सरकार के प्रमुख आलोचकों में से एक बना दिया।{{sfn|Marusenko|1999}} यद्यपि कुचमा की जीत के परिणामस्वरूप सत्ता एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में स्थानांतरित हो गई, लेकिन राजनीतिक स्थिति में महत्वपूर्ण बदलाव नहीं आया; देश पूर्व-कम्युनिस्ट ''नोमेनक्लातुरा'' द्वारा नियंत्रित रहा, जिसे चोर्नोविल 1996 में "सत्ता की पार्टी" के रूप में संदर्भित करेंगे, और उनसे जुड़े औद्योगिक कुलीन वर्गों का एक उभरता हुआ वर्ग। चोर्नोविल कुलीन वर्गों के आलोचक थे, सैनिकों, डॉक्टरों और शिक्षकों को वेतन का भुगतान न करने, संस्कृति और विज्ञान के लिए कम धन और टेलीविज़न प्रोग्रामिंग की खराब गुणवत्ता के लिए उन्हें दोषी ठहराते थे। उन्होंने कुलीन वर्गों पर "गैर-यूक्रेनी यूक्रेन" के भीतर एक निर्दलीय प्रणाली बनाने का प्रयास करने का आरोप लगाया, जिसमें सत्ता इसके बजाय एक महानगरीय वित्तीय अभिजात वर्ग में निहित होगी।{{sfn|Derevinskyi|2021|pp=20–21}}
स्वतंत्र यूक्रेन के लिए संविधान का मसौदा तैयार करने और उसका अनुसमर्थन करने की प्रक्रिया 1995 में शुरू हुई। चोर्नोविल, यूक्रेन के अधिकांश अन्य दक्षिणपंथी और मध्यमार्गी राजनेताओं की तरह, खुद को कुचमा के साथ गठबंधन में पाया क्योंकि संसदीय वामपंथियों ने भूमि की बिक्री और खरीद को रोकने और सोवियत युग के स्थानीय सरकारी निकायों के संरक्षण के लिए संवैधानिक लेखों पर जोर दिया। चोर्नोविल ने 25 मार्च 1995 को संकेत दिया कि उन्होंने कुचमा के प्रस्तावित संविधान का समर्थन किया है, हालांकि पत्रकार यूरी लुकानाव का कहना है कि उन्होंने व्यक्त किया कि इसके अंगीकरण पर 'रूख' को "ग्यारह गंभीर आपत्तियां" थीं।{{sfn|Lukanov|2023}}
कुचमा के प्रस्तावित संविधान को ओलेक्ज़ेंडर मोरोज़ द्वारा एक अत्यधिक-केंद्रीकृत राज्य बनाने के रूप में वर्णित किया गया था जिसमें कार्यपालिका के लिए मजबूत शक्तियां थीं और एक स्वतंत्र न्यायपालिका का अभाव था। उन्होंने सबसे पहले कुचमा के संविधान को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि मार्च में "ऐसा अलोकतांत्रिक संविधान यूरोप में कहीं नहीं है"। हालाँकि, उस वर्ष जून में, मोरोज़ ने "संवैधानिक आयोग" के हिस्से के रूप में कुचमा और 38 अन्य व्यक्तियों के साथ दूसरा संवैधानिक मसौदा तैयार किया। इस मसौदे को बदले में दाएं और मध्य द्वारा उसी कारण से खारिज कर दिया गया था जिस कारण मोरोज़ ने पहले मसौदे को खारिज कर दिया था। 24 नवंबर को, चोर्नोविल ने ''चास-टाइम'' समाचार पत्र में लिखा कि मसौदा "संसदीय विरोधी" था और मसौदा तैयार करने वालों पर सुप्रीम राडा को बाधित करने का प्रयास करने का आरोप लगाया।{{sfn|Lukanov|2023}} अंततः 28 जून 1996 को एक संविधान अपनाया गया, हालांकि निजी संपत्ति के अधिकार, एक एकात्मक राज्य के रूप में यूक्रेन की पुष्टि और आत्मनिर्णय के लिए यूक्रेनी लोगों के अधिकार जैसे 'रूख' द्वारा समर्थित कई प्रावधानों को नहीं अपनाया गया।{{sfn|Lukanov|2023}}
संविधान के अलावा, चोर्नोविल ने 1994 में वासिल सिमोनेनको इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स फाउंडेशन के अध्यक्ष के रूप में काम करना शुरू किया। उसी वर्ष उन्हें यूरोप की परिषद की संसदीय सभा में पहले यूक्रेनी प्रतिनिधियों में से एक के रूप में भी नियुक्त किया गया था,{{sfn|Fedunyshyn|2019|p=138}} और यूक्रेनी रेड क्रॉस सोसाइटी के साथ प्रथम चेचन युद्ध के दौरान चेचन नागरिकों को 50 टन मानवीय सहायता के दान का आयोजन किया।{{sfn|Pustovhar|2024}} समाचार पत्र ''गाज़ेटा.यूए'' ने 2017 में लिखा था कि पैट्रिआर्क वलोडिमिर के अंतिम संस्कार के दौरान चोर्नोविल यूक्रेनी रूढ़िवादी चर्च - कीव पैट्रिआर्कट के समर्थकों में से थे, जिनके साथ उन्हें कैद किया गया था, क्योंकि प्रदर्शनकारियों ने उन्हें सेंट सोफिया कैथेड्रल में दफनाने का प्रयास किया था,{{sfn|Gazeta.ua 2017}} हालांकि यूक्रेनी राष्ट्रीय स्मृति संस्थान इंगित करता है कि इसके बजाय उन्होंने दफन जारी रखने की मांग की थी।{{sfn|Ukrainian Institute of National Memory}} चोर्नोविल ने अपने राष्ट्रपति पद के शुरुआती वर्षों में कई मौकों पर कुचमा की सरकारी पदों पर राष्ट्रीय-लोकतांत्रिक नेताओं की नियुक्ति के लिए प्रशंसा की।{{sfn|Bondarenko|2002}} चोर्नोविल ने 14 से 16 सितंबर 1994 तक ओडेसा का भी दौरा किया, जहाँ उन्होंने 'रूख' की राजनीति और ऐतिहासिक भूमिका पर ओडेसा नेशनल पॉलिटेक्निक यूनिवर्सिटी में एक सम्मेलन की मेजबानी की। ओडेसा पॉलिटेक्निक में चोर्नोविल के भाषण ने लोकतांत्रिक मानदंडों को मजबूत करने और आर्थिक सुधारों के माध्यम से एक मध्यम वर्ग के निर्माण की वकालत की। उसी समय, उन्होंने उभरते हुए कुलीनतंत्र की अपनी आलोचना जारी रखी।{{sfn|Honcharuk|2018|p=45}}
1997 में, चोर्नोविल ने मोरोज़ के साथ अपने विवाद को बढ़ा दिया, उनके भाषणों को "आदिम लोकलुभावनवाद" के रूप में निंदा की और यूक्रेन में राजनीतिक ध्रुवीकरण को बढ़ाने के लिए उन्हें दोषी ठहराया।{{sfn|Suspilne 1997}} चोर्नोविल ने अन्य मध्य और पूर्वी यूरोपीय राज्यों के साथ यूक्रेनी एकीकरण की वकालत भी तेजी से की, बेलारूसी असंतुष्ट ज़ियानोन पज़नियाक के साथ एक "बाल्टिक-ब्लैक सी यूनियन", या मिज़्मोरिया की स्थापना का आह्वान किया। उन्होंने अतिरिक्त रूप से काला सागर के विसैन्यीकरण और नाटो में यूक्रेनी सदस्यता की वकालत की। अमेरिकी विदेश मंत्री मेडेलीन अलब्राइट, पूर्व ब्रिटिश प्रधान मंत्री मार्गरेट थैचर और चेक राष्ट्रपति वाक्लाव हावेल जैसे पश्चिमी सहयोगियों ने कई मौकों पर चोर्नोविल से मुलाकात की, और पश्चिमी नेताओं द्वारा यूक्रेन के बड़े पैमाने पर पूर्व कम्युनिस्ट नेतृत्व की तुलना में उन्हें तेजी से अधिक भरोसेमंद वार्ताकार के रूप में माना जाने लगा।{{sfn|Bila|2021}} चोर्नोविल एक समर्पित अटलांटिसवादी थे, और उन्होंने यूक्रेन के नाटो और [[यूरोपीय संघ]] दोनों का सदस्य बनने की वकालत की। उन्होंने यूक्रेन को यूरोपीय एकीकरण के लिए अभिन्न माना।{{sfn|Derevinskyi|p=118}}
मुट्ठी भर अन्य राजनेताओं के साथ, चोर्नोविल ने 1997 में चेचन गणराज्य इचकेरिया के राष्ट्रपति के रूप में असलान मस्खादोव के उद्घाटन में भाग लिया।{{sfn|Ukraina Moloda 2011}} 'रूख' ने उसी वर्ष अक्टूबर में औपचारिक रूप से कुचमा के शासन के विरोध में खुद को घोषित किया।{{sfn|Gawdiak|2003|p=7}}
==== 1998 के चुनाव ====
[[File:Вибори до ВР України 1998.svg|alt=1998 के यूक्रेनी संसदीय चुनाव के परिणामों का एक रंगीन मानचित्र|thumb|left|1998 के यूक्रेनी संसदीय चुनाव के परिणामों का मानचित्र; 'रूख' ने पश्चिमी यूक्रेन में वोट पर हावी रहा]]
चोर्नोविल ने फिर से 1998 के संसदीय चुनाव में 'रूख' का नेतृत्व किया, इस बार पार्टी के आनुपातिक प्रतिनिधित्व सूची में पहले उम्मीदवार के रूप में चल रहे थे।{{sfn|3rd Verkhovna Rada}} चुनाव के दौरान, 'रूख' ने संघवाद पर अपना रुख बदल दिया, चोर्नोविल ने तर्क दिया कि यूक्रेन को एक संघीय गणराज्य बनने के लिए आह्वान "कबीले संघवाद" थे।{{sfn|Semkiv|2014}} चोर्नोविल के साथ वलोडिमिर चेर्नियाक, विदेश मंत्री हेनादिय उदोवेंको, ड्रेच और पर्यावरण मंत्री यूरी कोस्टेंको प्रमुख पार्टी-सूची के उम्मीदवारों के रूप में, क्रीमियन तातार कार्यकर्ता मुस्तफा दज़ेमिलेव के साथ शामिल हुए। 'रूख' ने चुनाव लड़ने के लिए किसी अन्य दल के साथ गठबंधन नहीं किया, हालांकि इसके उम्मीदवारों में गैर-सरकारी संगठनों जैसे 'प्रोस्विता' और 'यूक्रेनी महिला संघ' के सदस्य शामिल थे। पार्टी ने आम तौर पर वामपंथ के खिलाफ प्रचार किया।{{sfn|Gawdiak|2003|p=7}} चोर्नोविल ने वामपंथी और दक्षिणपंथी 'कांग्रेस ऑफ यूक्रेनी नेशनलिस्ट्स' के खिलाफ गठबंधन बनाने के लिए सभी राष्ट्रीय-लोकतांत्रिक दलों का आह्वान किया, साथ ही कुचमा-समर्थक पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी और 'सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ यूक्रेन (यूनाइटेड)' के साथ एक महागठबंधन का भी तर्क दिया।{{sfn|Ukraina Moloda 2011}} किसी भी दल ने चोर्नोविल के गठबंधन के अनुरोधों पर सहमति नहीं जताई।{{sfn|Smiian|2017}}
यद्यपि वे सुप्रीम राडा में दूसरी सबसे बड़ी पार्टी थे, परिणाम 'रूख' के लिए सकारात्मक था, जिसने 1994 की तुलना में अपनी सीटें दोगुनी कर दीं।{{sfn|Bilyk|2019|p=39}} सामान्य रूप से दक्षिणपंथियों के लिए, हालांकि, चुनाव निराशाजनक था, क्योंकि केवल 'रूख' ने पार्टी-सूची प्रतिनिधित्व के लिए 4% की सीमा पार की और सामान्य रूप से दक्षिणपंथियों ने 20-25% सीटों के अपने पारंपरिक परिणाम से कम प्रदर्शन किया।{{sfn|Birch|Wilson|1999|p=280}} 'रूख' ने चुनाव के बाद अवैध के रूप में चुनाव परिणामों को चुनौती देने के अपने इरादे की घोषणा की। यूक्रेन की कम्युनिस्ट पार्टी फिर से सुप्रीम राडा में सबसे बड़ी पार्टी बन गई, जिसमें वामपंथी दलों ने बहुमत बनाया। हालांकि उन्होंने नोट किया कि परिणाम दक्षिणपंथियों के लिए पिछले चुनाव जितने खराब नहीं थे,{{sfn|Gawdiak|2003|p=5}} चोर्नोविल अभियान से थक गए थे और लगातार थके हुए होने की सार्वजनिक छवि प्राप्त की।{{sfn|Smiian|2017}} उस समय, वे 'चास-टाइम' और राजनीति के बीच प्रतिबद्धताओं को संतुलित करने के कारण प्रतिदिन पाँच घंटे से अधिक नहीं सो रहे थे। ल्वीव ओब्लास्ट में, उनके पारंपरिक समर्थन आधार और पूरे यूक्रेन में हुए निजीकरण के खिलाफ एक होल्डआउट में, 'रूख' की सरकार को एग्रेरियन पार्टी द्वारा बदल दिया गया था, जिसके तहत किकबैक, मनी लॉन्ड्रिंग और व्यापारिक विवादों के परिणामस्वरूप हिंसा से जुड़े राजनीतिक घोटाले आम हो गए।{{sfn|Kushnir|2011}}
==== नौवीं कांग्रेस, 1999 राष्ट्रपति चुनाव, 'रूख' में विभाजन ====
12 से 13 दिसंबर 1998 तक आयोजित 'रूख' की नौवीं कांग्रेस में, चोर्नोविल ने 1999 के राष्ट्रपति चुनाव के लिए पार्टी की रणनीति की घोषणा की। "फॉरवर्ड्स, टू द ईस्ट" नामक, इसमें पूर्वी और दक्षिणी यूक्रेन की आबादी पर अधिक ध्यान केंद्रित करने का आह्वान किया गया था, जबकि यूक्रेनी के साथ सह-आधिकारिक भाषा के रूप में रूसी की स्थापना के लिए अपना विरोध बनाए रखा।{{sfn|Adamovych|2018|p=24}}
उसी कांग्रेस में, चोर्नोविल ने 1999 के चुनाव में दूसरी बार राष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ने के अपने इरादे की घोषणा की। चोर्नोविल और हेनादिय उदोवेंको राष्ट्रपति पद के लिए नामांकित होने वाले 'रूख' के दो प्राथमिक उम्मीदवार थे; अंतिम निर्णय बाद की तारीख में लिया जाना था।{{sfn|Hai-Nyzhnyk|2012}} केंद्र-दक्षिणपंथी रिफॉर्म्स एंड ऑर्डर पार्टी के नेता विक्टर पिन्ज़ेनिक के अनुसार, उन्होंने और चोर्नोविल ने यूक्रेन के नेशनल बैंक के गवर्नर विक्टर युशचेंको को 1999 में राष्ट्रपति पद के लिए दौड़ने के लिए मनाने का भी प्रयास किया।{{sfn|Espreso TV 2018}}
इस समय तक, 'रूख' के उन सदस्यों के बीच विभाजन तेजी से स्पष्ट हो रहा था जो चोर्नोविल को एक पुरानी शख्सियत मानते थे और वे जो उनका समर्थन करते थे। पार्टी के भीतर चोर्नोविल के विरोधियों ने उन्हें अति-सत्तावादी, पार्टी नियमों का अनादर करने वाला{{sfn|Woronowycz 1999a|p=1}} और कुचमा के बहुत करीब माना;{{sfn|Ovsiienko|2022|p=146}} चोर्नोविल के समर्थकों ने भी उनके विरोधियों को कुचमा के बहुत करीब माना{{sfn|Ovsiienko|2022|p=146}} और पैसे वाले हितों द्वारा समर्थित माना।{{sfn|Woronowycz 1999a|p=3}} यूक्रेनी इतिहासकार पावलो हाई-न्यज़्न्यक ने कहा है कि चोर्नोविल ने जनवरी 1999 में राष्ट्रपति पद के नामांकन से अपना नाम वापस ले लिया{{sfn|Hai-Nyzhnyk|2012}} और जेम्सटाउन फाउंडेशन के अनुसार उन्होंने उदोवेंको का समर्थन किया,{{sfn|Jamestown Foundation 1999}} हालांकि चोर्नोविल के बेटे तारास ने इसका विरोध करते हुए कहा है कि वे अपनी मृत्यु तक राष्ट्रपति पद के लिए प्रचार कर रहे थे।{{sfn|Khalupa|2004}}
यह विभाजन फरवरी 1999 में अपने चरम पर पहुंच गया। यूरी कोस्टेंको ने 'रूख' के एक दल का नेतृत्व करते हुए 17{{sfn|Woronowycz 1999a|p=1}} या 19 फरवरी{{sfn|Koshiw|1999}} की संसदीय बैठक में चोर्नोविल को नेता के पद से हटाने की घोषणा की, और 27 फरवरी को अपने समर्थकों की बैठक में खुद को पार्टी का नेता घोषित किया।{{sfn|Woronowycz 1999a|p=1}} चोर्नोविल ने 22 फरवरी के एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में जवाब दिया जहाँ उन्होंने उनकी तुलना स्टेट कमेटी ऑन द स्टेट ऑफ़ इमरजेंसी से की, जिसने 1991 के सोवियत तख्तापलट का नेतृत्व किया था और उन पर यूक्रेनी सरकार से प्रति माह $40,000 लेने, 'रूख' कार्यालय से 4,000 रिव्निया लेने और 'रूख' पीपुल्स डिप्टी ओलेह इश्चेंको से दस लाख डॉलर की रिश्वत लेने का आरोप लगाया। ''कीव पोस्ट'' के उप संपादक जारोस्लाव कोशिव ने 25 फरवरी के एक राय लेख में लिखा था कि कोस्टेंको के दलबदल के बाद केवल 17 प्रतिनिधि ही चोर्नोविल के प्रति वफादार रहे।{{sfn|Koshiw|1999}}
'रूख' से जुड़े कई समाचार पत्र इस झगड़े से विभाजित हो गए; 11 ने चोर्नोविल का समर्थन किया, जबकि पाँच ने कोस्टेंको का समर्थन किया। ''दज़ेरकालो त्ज़न्ह्या'' ने एक स्वतंत्र रुख अपनाया, लेकिन आम तौर पर कुचमा और राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार येवहेन मार्चुक के साथ विभाजन के लिए चोर्नोविल को दोषी ठहराया।{{sfn|Ovsiienko|2022|p=145}} चोर्नोविल और उनके अनुयायी विभाजन के बाद कोस्टेंको के गुट के प्रति तिरस्कारपूर्ण थे; लेस् तनयुक ने कहा कि "ये वे लोग हैं जो अभी अपने मर्सिडीज पाने और अपने डाचा बनाने के लिए अधिक चिंतित हैं", जबकि चोर्नोविल ने कोस्टेंको के अधिग्रहण के प्रयास को "पार्टी का निजीकरण" बताया और कुचमा और सरकार को विभाजन को व्यवस्थित करने के लिए दोषी ठहराया।{{sfn|Woronowycz 1999a|p=3}}
चोर्नोविल की मौत से जुड़ी 2012 की अदालती कार्यवाही में, उदोवेंको ने गवाही दी कि फरवरी 1999 में रूसी संघीय सुरक्षा सेवा (FSB) द्वारा नियोजित एक यूक्रेनी नागरिक व्याचेस्लाव बाबेन्को ने उनसे संपर्क किया था। उदोवेंको के अनुसार, बाबेन्को ने उन्हें चेतावनी दी थी कि रूसी खुफिया एजेंसियों को शामिल करते हुए चोर्नोविल के जीवन पर एक प्रयास होगा। चोर्नोविल ने बाबेन्को की चेतावनी को डराने-धमकाने का प्रयास बताकर खारिज कर दिया। चोर्नोविल की मौत की जांच करने का काम सौंपे गए आंतरिक मामलों के मंत्रालय के एक कर्मचारी मायकोला स्टेपनेन्को ने बाबेन्को को एक ऐसे व्यक्ति के रूप में उल्लेख किया जिसे चोर्नोविल की दैनिक दिनचर्या और यात्रा योजनाओं का पर्याप्त ज्ञान था।{{sfn|Ukrainska Pravda 2012}}
चोर्नोविल ने 24 फरवरी को 'रूख' के संसदीय गुट का नाम बदलकर "पीपुल्स मूवमेंट ऑफ यूक्रेन - 1" कर दिया। 28 फरवरी को, कोस्टेंको के समर्थकों ने 'रूख' की दसवीं कांग्रेस के रूप में संदर्भित किया, जिसके दौरान उन्होंने घोषणा की कि चोर्नोविल को आधिकारिक तौर पर नेता के पद से हटा दिया गया है और पार्टी के विरोध की अवधि को "समान भागीदारी" में से एक द्वारा बदल दिया जाएगा। चोर्नोविल के अनुयायियों की एक कांग्रेस, जिसे चोर्नोविल द्वारा नौवीं कांग्रेस के "दूसरे चरण" के रूप में संदर्भित किया गया था, 7 मार्च को आयोजित की गई थी और इसमें 'रूख' विधानसभा के 520 प्रतिनिधियों ने भाग लिया था, जो पार्टी के क़ानून के तहत दो-तिहाई आवश्यकता से अधिक था।{{sfn|Ovsiienko|2022|pp=147–148}}
== मृत्यु और अंतिम संस्कार ==
24 मार्च 1999 को, चोर्नोविल किरोवोह्राद शहर में एक अभियान कार्यक्रम में थे, या तो अपने लिए या उदोवेंको के लिए।{{sfn|Woronowycz 1999b|p=1}} किरोवोह्राद में रहते हुए, उन्होंने एक साक्षात्कार दिया जहाँ उन्होंने यह विश्वास व्यक्त किया कि यूक्रेन के वित्तीय और संगठित अपराध कुलों ने इसे नष्ट करने और वित्तीय पूंजी के और संचय को सुरक्षित करने के प्रयास में 'रूख' को लक्षित किया था। उन्होंने आगे दावा किया कि कुचमा केवल अपने विरोधियों की हत्या करके या उन्हें एक-दूसरे के खिलाफ करके ही जीत सकते हैं। उनके आखिरी फोन कॉल का विवरण विवादित है; उनकी बहन वेलेंटीना ने कहा है कि उन्होंने उन्हें जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं और 'रूख' के विभाजन को "हमारे पीछे" बताया,{{sfn|Fedunyshyn|2019|pp=138–139}} जबकि कोस्टेंको ने आरोप लगाया कि उन्होंने संकेत दिया कि उन्होंने अपना मन बदल लिया है और राष्ट्रपति पद के लिए उदोवेंको के बजाय उनका समर्थन करना चाहते हैं।{{sfn|Perevozna|2007}}
25 मार्च 1999 की मध्यरात्रि से ठीक पहले,{{sfn|Harasymiw|Koshelivets|Senkus|2015}} चोर्नोविल किरोवोह्राद से कीव लौट रहे थे, उनके साथ सहयोगी येवहेन पावलोव और 'रूख' के प्रेस सचिव दिमित्रो पोनोमारचुक थे। बोरिस्पिल से पांच किलोमीटर दूर, 140 किमी/घंटा की गति से यात्रा करते हुए,{{sfn|Yasynskyi|2021}} चोर्नोविल की टोयोटा कोरोला अनाज ले जाने वाली एक कामाज़ लॉरी से टकरा गई, जो राजमार्ग पर एक मोड़ पर रुक रही थी। चोर्नोविल और पावलोव दोनों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि पोनोमारचुक को गंभीर चोटों के साथ अस्पताल में भर्ती कराया गया था।{{sfn|Karatnycky|2024|p=45}}
[[File:Будинок учителя, Київ.jpg|alt=कांच की छत वाली एक ईंट की इमारत|thumb|कीव सिटी टीचर्स हाउस, जो कभी सेंट्रल राडा की सीट थी, जहाँ चोर्नोविल का अंतिम संस्कार हुआ था]]
चोर्नोविल का अंतिम संस्कार 29 मार्च को कीव के सिटी टीचर्स हाउस में आयोजित किया गया था,{{sfn|Woronowycz 1999b|p=1}} जिसमें एक जुलूस बैकोव कब्रिस्तान में उनके दफनाने से पहले सेंट वलोडिमिर के कैथेड्रल की यात्रा कर रहा था।{{sfn|Harasymiw|Koshelivets|Senkus|2015}}{{sfn|Woronowycz 1999b|p=4}} ''[[द गार्जियन]]'' ने बताया कि "दसियों हज़ार यूक्रेनियन" मौजूद थे;{{sfn|Marusenko|1999}} मिलिशिया ने 10,000 के आंकड़े का दावा किया; जबकि ''द यूक्रेनी वीकली'' ने लिखा कि लगभग 50,000 लोग "उस अंतिम संस्कार में शामिल हुए जिसे कई लोग इस शहर [कीव] में अब तक का सबसे बड़ा अंतिम संस्कार मानते हैं"। उन्हें राज्य सम्मान गार्ड के साथ-साथ एक सैन्य ऑर्केस्ट्रा भी दिया गया था। यूक्रेन के अधिकांश राजनीतिक अभिजात वर्ग अंतिम संस्कार में मौजूद थे, जिनमें क्रावचुक, कुचमा, प्रधान मंत्री वालेरी पुस्टोवोइटेंको, और सुप्रीम राडा के अध्यक्ष ओलेक्ज़ेंडर टकाचेंको, साथ ही कई पूर्व असंतुष्ट और कम्युनिस्ट पार्टी और प्रोग्रेसिव सोशलिस्ट पार्टी ऑफ़ यूक्रेन के उल्लेखनीय अपवादों के साथ लगभग सभी राजनीतिक दलों के नेता शामिल थे।{{sfn|Woronowycz 1999b|p=1, 4}}
=== षड्यंत्र के सिद्धांत और जांच ===
चोर्नोविल की मृत्यु में यूक्रेनी सरकार की भागीदारी का संदेह लगभग तुरंत उभर आया,{{sfn|archives.gov.ua}} जो चोर्नोविल की विवादास्पद प्रकृति और आगामी राष्ट्रपति चुनाव से भड़क गया था। आंतरिक मामलों के मंत्री यूरी क्रावचेंको ने चोर्नोविल की मृत्यु की शाम को एक टेलीविज़न भाषण में कहा कि चोर्नोविल की मृत्यु की जांच में हत्या पर विचार नहीं किया जाएगा। उनके दफन से पहले, टैन्युक और क्रिश्चियन डेमोक्रेटिक पार्टी के डिप्टी विटाली ज़ुरावस्की दोनों ने आरोप लगाया कि चोर्नोविल की हत्या कर दी गई थी, जबकि पत्रकार सेरही नाबोका ने उल्लेख किया कि उनकी मृत्यु की परिस्थितियाँ सोवियत नेताओं के राजनीतिक विरोधियों की अन्य संदिग्ध मौतों के समान थीं।{{sfn|Woronowycz 1999c|p=5}} लॉरी चालक पर शुरू में लापरवाही का आरोप लगाया गया था,{{sfn|Karatnycky|2024|p=45}} लेकिन एक महीने के भीतर उसे आम माफी दे दी गई,{{sfn|archives.gov.ua}} और लॉरी के एक यात्री की अस्पष्ट परिस्थितियों में मृत्यु हो गई।{{sfn|Istorychna Pravda 2017}} करतनीकी, कुचमा के 1999 के अभियान के एक अनाम सदस्य का हवाला देते हुए, नोट करते हैं कि कुचमा के अन्य गैर-कम्युनिस्ट प्रतिद्वंद्वी उनके खिलाफ गठबंधन बनाने में विफल रहे, जिसके कारण अंततः उनकी जीत हुई;{{sfn|Karatnycky|2024|pp=46–47}} यूक्रेनी राजनीतिक वैज्ञानिक तारास कुज़ियो ने इसी तरह चोर्नोविल की मृत्यु के बाद कुचमा और येवहेन मार्चुक को राष्ट्रपति पद के लिए एकमात्र गंभीर गैर-वामपंथी दावेदारों के रूप में वर्णित किया।{{sfn|Kuzio|2007|p=34}}
चोर्नोविल की मृत्यु की जांच करने का पहला प्रयास अप्रैल 1999 में एक सुप्रीम राडा आयोग के साथ शुरू हुआ।{{sfn|BBC News 1999}} 2004-2005 की ऑरेंज क्रांति के बाद, कुचमा के उत्तराधिकारी विक्टर युशचेंको ने घोषणा की कि 23 अगस्त 2006 को चोर्नोविल की एक प्रतिमा के उद्घाटन समारोह में चोर्नोविल की मौत की परिस्थितियों की जांच फिर से शुरू की जाएगी।{{sfn|BBC News Ukrainian 2006}} 6 सितंबर 2006 को, आंतरिक मामलों के मंत्री यूरी लुट्सेंको ने घोषणा की कि चोर्नोविल की हत्या कर दी गई थी और इसे साबित करने वाले सबूत अभियोजक जनरल को सौंप दिए गए थे।{{sfn|Radio Ukraine 2006}} अभियोजक जनरल ऑलेक्ज़ेंडर मेदवेदको ने मामले के बारे में लुट्सेंको के बयानों को "हल्के ढंग से, अव्यवसायिक" बताकर आलोचना की, और आरोप लगाया कि जानकारी एक ऐसे व्यक्ति से आई है जिसे धोखाधड़ी के लिए दोषी ठहराया गया है और जिसके लिए इंटरपोल नोटिस जारी किया गया था।{{sfn|Yakhno|2006}} तब से, चोर्नोविल की मृत्यु की जांच को बार-बार बंद किया गया है और बिना यह निष्कर्ष निकाले फिर से खोला गया है कि चोर्नोविल एक हत्या की साजिश के शिकार थे या एक साधारण कार दुर्घटना के। बोरिस्पिल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने घोषणा की कि जनवरी 2014 में कोई हत्या की साजिश मौजूद नहीं थी और मामला बंद कर दिया, लेकिन मार्च 2015 तक यह फिर से अभियोजक जनरल के कार्यालय द्वारा जांच का विषय था।{{sfn|Harasymiw|Koshelivets|Senkus|2015}} 2019 तक, मामला जांच के अधीन रहा।{{sfn|Bellezza|2019|p=104}}
== विरासत ==
[[File:Vyacheslav Chornovil money.jpg|alt=चोर्नोविल के चेहरे को दर्शाने वाला एक सिक्का|thumb|चोर्नोविल को दर्शाने वाला 2-रिव्निया का स्मारक सिक्का]]
[[File:Stamp 2008 Chornovil.jpg|alt=एक स्टैम्प पर चोर्नोविल का एक पेंसिल चित्र|thumb|चोर्नोविल के सम्मान में यूक्रेनी टिकट, 2008]]
अपने जीवनकाल में, चोर्नोविल एक अत्यंत विवादास्पद व्यक्ति रहे। 1991 के चुनाव में उनके विरोधियों में से एक, वलोडिमिर ह्रीनीव ने 1992 में कहा था कि मतदाताओं को चोर्नोविल के राष्ट्रवादी दृष्टिकोण के अविश्वास और यह विश्वास कि वे यहूदी-विरोधी और रूसी-विरोधी थे, के कारण क्रावचुक का समर्थन करने के लिए लुभाया गया था; चोर्नोविल ने इन दावों को खारिज कर दिया, दावा किया कि "रोजमर्रा की जिंदगी में कोई यहूदी-विरोध नहीं है" और यह देखते हुए कि ल्वीव की अधिकांश जातीय-रूसी आबादी ने यूक्रेनी स्वतंत्रता का समर्थन किया था।{{sfn|Clarity|1992}} UHS के सह-नेता के रूप में, चोर्नोविल और पार्टी के अन्य नेताओं के अधिक कट्टरपंथी कम्युनिस्ट-विरोधी दृष्टिकोण ने सेंट्रल यूरोपियन यूनिवर्सिटी की मारियाना कोलिनचॉक के अनुसार, पार्टी में अतिवाद का लेबल ला दिया।{{sfn|Kolinchak|2007|p=5}} दाईं ओर, अधिक कट्टरपंथी राष्ट्रवादियों, जैसे कि ज़ेनोविय क्रासिव्स्की ने, राजनीतिक आदर्श के रूप में स्वतंत्रता को तुरंत अपनाने के बजाय, 1980 के दशक के अंत में सोवियत राजनीतिक संरचनाओं के भीतर काम करने के लिए चोर्नोविल और लुक्यानेंको की आलोचना की।{{sfn|Kuzio|1997|p=223}} 'रूख' के भीतर, एक सत्तावादी नेता के रूप में चोर्नोविल की धारणाओं के कारण दो विभाजन (1993 और 1999 में) हुए।{{sfn|Parfionov|1999|p=77}}
''द गार्जियन'' के एक पत्रकार पीटर मारुसेंको ने चोर्नोविल के अंतिम संस्कार की रिपोर्टिंग करते समय तर्क दिया कि यूक्रेनी इतिहास में उनके योगदान को कई यूक्रेनियन द्वारा उनकी मृत्यु के बाद तक मान्यता नहीं दी गई थी।{{sfn|Marusenko|1999}} 2017 की अपनी पुस्तक ''द नियर एब्रॉड'' में, प्रोफेसर ज़बिग्न्यू वोज्नोव्स्की ने चोर्नोविल को 20वीं सदी के शुरुआती और मध्य के राष्ट्रवादी नेता स्टीफन बांदेरा के विपरीत "यूक्रेन की अधिक समावेशी दृष्टि, स्पष्ट रूप से यूरोपीय समर्थक और कानून के शासन और संसदीय लोकतंत्र के प्रति प्रतिबद्धता से एकजुट" के रूप में वर्णित किया, और कहा कि 2013-2014 के यूरोमैडन विरोध प्रदर्शनों के दौरान चोर्नोविल का एक बड़ा पोस्टर मौजूद था।{{sfn|Wojnowski|2017|pp=207–208}} वोज्नोव्स्की ने चोर्नोविल की "सुधारवादी देशभक्ति" की विचारधारा को परिभाषित किया है, जो यूक्रेन को सुधारों का पालन करने और मध्य यूरोप के साथ ऐतिहासिक संबंधों को बनाए रखने की वकालत करता है, जो कि यूरोमैडन और ऑरेंज क्रांति के बाद यूक्रेनी समाज में फैल गया।{{sfn|Wojnowski|2017|p=212}}
अधिक आलोचनात्मक रूप से, दार्शनिक और लेखक पेट्रो क्रालियुक द्वारा 2017 के 'रेडियो लिबर्टी' लेख में चोर्नोविल पर "रोमांटिसिज्म" के बदले राजनीतिक वास्तविकताओं को नज़रअंदाज़ करने और राजनीति के प्रति एक भोला रवैया रखने का आरोप लगाया गया है। विशेष रूप से, क्रालियुक 1991 के चुनाव में हार के बाद क्रावचुक के साथ काम करने से इनकार करने और संघवाद में चोर्नोविल के विश्वास को रचनात्मक नहीं मानते हैं।{{sfn|Kraliuk|2017}}
एक यूक्रेनी राज्य को फिर से स्थापित करने में उनके महत्व की मान्यता में, चोर्नोविल को 2000 में मरणोपरांत यूक्रेन के हीरो की उपाधि से सम्मानित किया गया था।{{sfn|Ukrainian Institute of National Memory 2017}} उन्हें 1996 में उनकी खोजी पत्रकारिता, विशेष रूप से उनके ''समिज्दात'' के लिए शेवचेंको राष्ट्रीय पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था,{{sfn|Hrytsenko}} और 1997 में ऑर्डर ऑफ प्रिंस यारोस्लाव द वाइज से सम्मानित किया गया था।{{sfn|Kherson Oblast Universal Library 2024}} उन्हें दो बार सर्वकालिक दस सबसे लोकप्रिय यूक्रेनियनों में स्थान दिया गया है। 2008 के ''वेलीकी उक्रेन्त्सी'' पोल में, उन्हें यूक्रेन के सातवें सबसे लोकप्रिय व्यक्ति के रूप में स्थान दिया गया था, जिसमें 2.63% सर्वेक्षण वाले व्यक्तियों ने उन्हें सर्वकालिक महान यूक्रेनी के रूप में नामित किया था।{{sfn|Inter 2008}} 2022 के "पीपुल्स टॉप" पोल में, वे नौवें सबसे लोकप्रिय यूक्रेनी थे, जिसमें पिछले मतदान से संकेत मिलता था कि उनका समर्थन 2012 में 3.5% से बढ़कर 2022 में 8.7% हो गया था।{{sfn|People's Top 2022}}
2003 में, यूक्रेन के नेशनल बैंक ने चोर्नोविल को समर्पित 2 रिव्निया के नाममात्र के साथ एक स्मारक सिक्का जारी किया।{{sfn|National Bank of Ukraine}} 2009 में, चोर्नोविल को समर्पित एक यूक्रेनी स्टैम्प जारी किया गया था।{{sfn|Ukrinform 2008}}
== नोट्स ==
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== सन्दर्भ ==
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=== पुस्तकें ===
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* {{Cite book |last=Adamovych |first=Serhii |title=Чорноволівські читання: Матеріали VI Всеукраїнської наукової конференції |date=14 March 2020 |publisher=Beskydy |editor-last=Derevinskyi |editor-first=Vasyl |location=Kyiv |pages=8–12 |language=uk |trans-title=Chornovil Readings: materials of the 6th all-Ukrainian scientific conference |chapter=Ставлення Народного Руху України до національних меншин напередодні здобуття державної незалежності |trans-chapter=Attitude of the People's Movement of Ukraine towards national minorities on the eve of the attainment of state independence|url=https://www.academia.edu/127917089/%D0%A7%D0%BE%D1%80%D0%BD%D0%BE%D0%B2%D0%BE%D0%BB%D1%96%D0%B2%D1%81%D1%8C%D0%BA%D1%96_%D1%87%D0%B8%D1%82%D0%B0%D0%BD%D0%BD%D1%8F_v%D0%B0%D1%82%D0%B5%D1%80%D1%96%D0%B0%D0%BB%D0%B8_VI_%D0%92%D1%81%D0%B5%D1%83%D0%BA%D1%80%D0%B0%D1%97%D0%BD%D1%81%D1%8C%D0%BA%D0%BE%D1%97_%D0%BD%D0%B0%D1%83%D0%BA%D0%BE%D0%B2%D0%BE%D1%97_%D0%BA%D0%BE%D0%BD%D1%84%D0%B5%D1%80%D0%B5%D0%BD%D1%86%D1%96%D1%97_%D0%9A%D0%B8%D1%97%D0%B2_14_%D0%B1%D0%B5%D1%80%D0%B5%D0%B7%D0%BD%D1%8F_2020_%D1%83%D0%BF%D0%BE%D1%80%D1%8F%D0%B4_%D0%92_%D0%A4_%D0%94%D0%B5%D1%80%D0%B5%D0%B2%D1%96%D0%BD%D1%81%D1%8C%D0%BA%D0%B8%D0%B9_%D0%9A%D0%B8%D1%97%D0%B2_%D0%91%D0%B5%D1%81%D0%BA%D0%B8%D0%B4%D0%B8_2020_150_%D1%81}}
* {{Cite book |last=Bazhan |first=Oleh |title=Чорновілські читання. Візія майбутнього України: Матеріали III і IV наукових конференцій, присвячених 80-й річниці з дня народження Вячеслава Чорновола |publisher=Beskydy |year=2018 |editor-last=Derevinskyi |editor-first=Vasyl |location=Kyiv, Ternopil |pages=31–36 |language=uk |trans-title=Chornovil Readings: a Vision of Ukraine's Future: materials of the third and fourth scientific conferences celebrating the 80th birth anniversary of Viacheslav Chornovil |chapter=Вячеслав Чорновіл як об'єкт секретної справи КДБ «Блок» |trans-chapter=Viacheslav Chornovil as an object of the KGB's secret 'Bloc' case|url=https://shron2.chtyvo.org.ua/Zbirnyk_statei/Chornovolivski_chytannia_Viziia_maibutnoho_Ukrainy_Materialy_III_i_IV_naukovykh_konferentsii_prysvia.pdf}}
* {{Cite book |last=Bilyk |first=Yaroslav |title=Чорноволівські читання: Матеріали V Всеукраїнської наукової конференції |date=15 March 2019 |publisher=Beskydy |editor-last=Derevinskyi |editor-first=Vasyl |location=Kyiv |pages=14–18 |language=uk |trans-title=Chornovil Readings: materials of the 5th all-Ukrainian scientific conference |chapter=Мовна політика в діяльності лідерів НРУ |trans-chapter=Language politics in the activities of the leaders of the NRU}}
* {{Cite book |last=Chornovil |first=Viacheslav |title=Вячеслав Чорновіл. Твори в десяти томах. Том 5. публіцистика, документи, матеріали «Справи No.196» (1970–1984) |publisher=Smoloskyp |year=2007 |isbn=978-966-7332-87-7 |editor-last=Chornovil |editor-first=Valentyna |location=Kyiv |page=911 |language=uk |trans-title=Viacheslav Chornovil: Works in Ten Books. Book 5: Publications, Documents, and Materials of "Case No. 196" (1970–1984)}}
* {{Cite book |last=Chornovil |first=Viacheslav |title=Вячеслав Чорновіл. Твори в десяти томах. Том 6. Документи та матеріали (листопад 1985 – квітень 1990) |publisher=Smoloskyp |year=2009 |isbn=978-966-2164-07-7 |editor-last=Chornovil |editor-first=Valentyna |location=Kyiv |pages=1051 |language=uk |trans-title=Viacheslav Chornovil: Works in Ten Books. Book 6: Documents and Materials (November 1985–April 1990)}}
* {{Cite book |last=Chornovil |first=Viacheslav |title=Шлях до незалежності: суспільні настрої в Україні кін. 80-х рр. ХХ ст. Документи і матеріали. До 20-ї річниці незалежності України |publisher=[[Institute of History of Ukraine]] |year=2011 |isbn=978-966-02-5425-1 |editor-last=Smoliy |editor-first=Valeriy |editor-link=Valeriy Smoliy |location=Kyiv |pages=81–83 |language=uk |trans-title=Path to Independence: Public attitudes in late 1980s Ukraine: Documents and Materials: to the 20th anniversary of Ukrainian independence |chapter=Лист-відповідь В. Чорновола «Ось же вона, охоронна журналістика!» Любомирі Петрівні та Миколі Яковичу (авторам статті «Під маскою борців за гласність» / Вільна Україна, 20.12.1987 р.) |trans-chapter=V. Chornovil's letter response "Here it is, secure journalism!" to Lyubomira Petrivna and Mykola Yakovych (authors of the article "Under the Mask of Fighters for Glasnost" / Free Ukraine, 20.12.1987)}}
* {{Cite book |last=Danylenko |first=Viktor |title=Чорноволівські читання: Матеріали V Всеукраїнської наукової конференції |date=15 March 2019 |publisher=Beskydy |editor-last=Derevinskyi |editor-first=Vasyl |location=Kyiv |pages=25–30 |language=uk |trans-title=Chornovil Readings: materials of the 5th all-Ukrainian scientific conference |chapter=Політичний нагляд за діяльністю В. Чорновола в роки «перебудови» (друга половина 1980-х рр.) |trans-chapter=Political supervision of V. Chornovil's activities in the Perestroika years (second half of the 1980s)}}
* {{Cite book |last=Derevinskyi |first=Vasyl |url=https://irbis-nbuv.gov.ua/ulib/item/ukr0000015008 |title=В'ячеслав Чорновіл |publisher=Family Leisure Club |year=2017 |location=Kharkiv |pages=383 |language=uk |trans-title=Viacheslav Chornovil |ref={{sfnRef|Derevinskyi 2017a}}}}
* {{Cite book |last=Derevinskyi |first=Vasyl |title=Чорновілські читання. Візія майбутнього України: Матеріали III і IV наукових конференцій, присвячених 80-й річниці з дня народження Вячеслава Чорновола |publisher=Beskydy |year=2018 |editor-last=Derevinskyi |editor-first=Vasyl |location=Kyiv, Ternopil |pages=47–55 |language=uk |trans-title=Chornovil Readings: a Vision of Ukraine's Future: materials of the third and fourth scientific conferences celebrating the 80th birth anniversary of Viacheslav Chornovil |chapter=Вячеслав Чорновіл та кримське питання |trans-chapter=Viacheslav Chornovil and the Crimean question|url=https://shron2.chtyvo.org.ua/Zbirnyk_statei/Chornovolivski_chytannia_Viziia_maibutnoho_Ukrainy_Materialy_III_i_IV_naukovykh_konferentsii_prysvia.pdf}}
* {{Cite book |last=Derevinskyi |first=Vasyl |title=Чорноволівські читання: Матеріали VII Всеукраїнської наукової конференції |date=27 March 2021 |publisher=Beskydy |editor-last=Derevinskyi |editor-first=Vasyl |location=Kyiv |pages=17–23 |language=uk |trans-title=Chornovil Readings: materials of the 7th all-Ukrainian scientific conference |chapter=Вячеслав Чорновіл: П'ятиріччя незалежності та неукраїнська Україна |trans-chapter=Viacheslav Chornovil: Five Years of Independence and a Non-Ukrainian Ukraine}}
* {{Cite book |last=Fedunyshyn |first=Liubomyra |title=Чорновілські читання. Візія майбутнього України: Матеріали III і IV наукових конференцій, присвячених 80-й річниці з дня народження Вячеслава Чорновола |publisher=Beskydy |year=2018 |editor-last=Derevinskyi |editor-first=Vasyl |location=Kyiv, Ternopil |pages=197–203 |language=uk |trans-title=Chornovil Readings: a Vision of Ukraine's Future: materials of the third and fourth scientific conferences celebrating the 80th birth anniversary of Viacheslav Chornovil |chapter=Правозахисна діяльність В. Чорновола у 1960–1970-х рр. |trans-chapter=Human rights activities of V. Chornovil in the 1960s and 1970s|url=https://shron2.chtyvo.org.ua/Zbirnyk_statei/Chornovolivski_chytannia_Viziia_maibutnoho_Ukrainy_Materialy_III_i_IV_naukovykh_konferentsii_prysvia.pdf}}
* {{Cite book |last=Fedunyshyn |first=Liubomyra |title=Чорноволівські читання: Матеріали V Всеукраїнської наукової конференції |date=15 March 2019 |publisher=Beskydy |editor-last=Derevinskyi |editor-first=Vasyl |location=Kyiv |pages=137–142 |language=uk |trans-title=Chornovil Readings: materials of the 5th all-Ukrainian scientific conference |chapter=Вячеслав Чорновіл і Народний Рух України |trans-chapter=Viacheslav Chornovil and the People's Movement of Ukraine}}
* {{Cite book |last=Fedunyshyn |first=Liubomyra |title=Чорноволівські читання: Матеріали VII Всеукраїнської наукової конференції |date=27 March 2021 |publisher=Beskydy |editor-last=Derevinskyi |editor-first=Vasyl |location=Kyiv |pages=117–121 |language=uk |trans-title=Chornovil Readings: materials of the 7th all-Ukrainian scientific conference |chapter=Емоційно-психологічний світ Вячеслава Чорновола |trans-chapter=Viacheslav Chornovil's emotional and psychological world}}
* {{Cite book |last=Fedyk |first=Lidiia |title=Чорноволівські читання: Матеріали V Всеукраїнської наукової конференції |date=15 March 2019 |publisher=Beskydy |editor-last=Derevinskyi |editor-first=Vasyl |location=Kyiv |pages=132–136 |language=uk |trans-title=Chornovil Readings: materials of the 5th all-Ukrainian scientific conference |chapter=Особливості «вирішення національного питання» в УРСР крізь призму поглядів В. Чорновола |trans-chapter=Idiosyncracies of the "solution to the national question" in the Ukrainian SSR through the prism of V. Chornovil's views}}
* {{Cite book |last=Finnin |first=Rory |title=Blood of Others: Stalin's Crimean atrocity and the poetics of solidarity |publisher=[[University of Toronto Press]] |year=2022 |isbn=978-1-4875-3700-5 |location=Toronto |pages=334 |jstor=10.3138/j.ctv2p7j53j |lccn=2024391355}}
* {{Cite book |last=Hai-Nyzhnyk |first=Pavlo |author-link=Pavlo Hai-Nyzhnyk |title=Українська багатопартійність: політичні партії, виборчі блоки, лідери (кінець 1980-х – початок 2012 рр.). Енциклопедичний довідник |publisher=I. F. Kuras Institute of Political and Ethnonational Studies, National Academy of Sciences of Ukraine |year=2012 |location=Kyiv |pages=274–280 |language=uk |trans-title=Ukrainian Multi-Partisanship: Political Parties, Electoral Blocs, Leaders (Late 1980s–Early 2012): an Encyclopedic Overview |chapter=Народний Рух України |trans-chapter=People's Movement of Ukraine |chapter-url=https://hai-nyzhnyk.in.ua/doc/2012doc..n2.php}}
* {{Cite book |last=Honcharuk |first=Hryhorii |title=Чорновілські читання. Візія майбутнього України: Матеріали III і IV наукових конференцій, присвячених 80-й річниці з дня народження Вячеслава Чорновола |publisher=Beskydy |year=2018 |editor-last=Derevinskyi |editor-first=Vasyl |location=Kyiv, Ternopil |pages=45–46 |language=uk |trans-title=Chornovil Readings: a Vision of Ukraine's Future: materials of the third and fourth scientific conferences celebrating the 80th birth anniversary of Viacheslav Chornovil |chapter=Вячеслав Чорновіл в Одесі |trans-chapter=Viacheslav Chornovil in Odesa|url=https://shron2.chtyvo.org.ua/Zbirnyk_statei/Chornovolivski_chytannia_Viziia_maibutnoho_Ukrainy_Materialy_III_i_IV_naukovykh_konferentsii_prysvia.pdf}}
* {{Cite book |last=Karatnycky |first=Adrian |title=Battleground Ukraine: From Independence to the War with Russia |publisher=[[Yale University Press]] |year=2024 |isbn=978-0-300-26946-8 |location=New Haven and London |pages=346 |lccn=2023949848}}
* {{Cite book |last=Wojnowski |first=Zbigniew |title=The Near Abroad: Socialist Eastern Europe and Soviet Patriotism in Ukraine, 1956–1985 |publisher=[[University of Toronto Press]] |year=2017 |isbn=9781442631069 |location=Toronto, Buffalo, London |pages=317 |doi=10.3138/9781442631069}}
* {{Cite book |last=Kobuta |first=Stepan |title=Чорноволівські читання: Матеріали VI Всеукраїнської наукової конференції |date=14 March 2020 |publisher=Beskydy |editor-last=Derevinskyi |editor-first=Vasyl |location=Kyiv |pages=36–40 |language=uk |trans-title=Chornovil Readings: materials of the 6th all-Ukrainian scientific conference |chapter=Майбутній державно-політичний устрій та система владних відносин в Україні у бачення В.Чорновола у 1988–1991 роках |trans-chapter=The future state-political organisation and system of governing relations in Ukraine in the vision of V. Chornovil, 1988–1991|url=https://www.academia.edu/127917089/%D0%A7%D0%BE%D1%80%D0%BD%D0%BE%D0%B2%D0%BE%D0%BB%D1%96%D0%B2%D1%81%D1%8C%D0%BA%D1%96_%D1%87%D0%B8%D1%82%D0%B0%D0%BD%D0%BD%D1%8F_v%D0%B0%D1%82%D0%B5%D1%80%D1%96%D0%B0%D0%BB%D0%B8_VI_%D0%92%D1%81%D0%B5%D1%83%D0%BA%D1%80%D0%B0%D1%97%D0%BD%D1%81%D1%8C%D0%BA%D0%BE%D1%97_%D0%BD%D0%B0%D1%83%D0%BA%D0%BE%D0%B2%D0%BE%D1%97_%D0%BA%D0%BE%D0%BD%D1%84%D0%B5%D1%80%D0%B5%D0%BD%D1%86%D1%96%D1%97_%D0%9A%D0%B8%D1%97%D0%B2_14_%D0%B1%D0%B5%D1%80%D0%B5%D0%B7%D0%BD%D1%8F_2020_%D1%83%D0%BF%D0%BE%D1%80%D1%8F%D0%B4_%D0%92_%D0%A4_%D0%94%D0%B5%D1%80%D0%B5%D0%B2%D1%96%D0%BD%D1%81%D1%8C%D0%BA%D0%B8%D0%B9_%D0%9A%D0%B8%D1%97%D0%B2_%D0%91%D0%B5%D1%81%D0%BA%D0%B8%D0%B4%D0%B8_2020_150_%D1%81}}
* {{Cite book |last=Kozhanov |first=Andrii |title=Чорноволівські читання: Матеріали VI Всеукраїнської наукової конференції |date=14 March 2020 |publisher=Beskydy |editor-last=Derevinskyi |editor-first=Vasyl |location=Kyiv |pages=41–45 |language=uk |trans-title=Chornovil Readings: materials of the 6th all-Ukrainian scientific conference |chapter=Нонконформізм і протестні настрої на Одещині (1960–1980 рр.) |trans-chapter=Non-conformism and protest moods in Odeshchyna (1960–1980)|url=https://www.academia.edu/127917089/%D0%A7%D0%BE%D1%80%D0%BD%D0%BE%D0%B2%D0%BE%D0%BB%D1%96%D0%B2%D1%81%D1%8C%D0%BA%D1%96_%D1%87%D0%B8%D1%82%D0%B0%D0%BD%D0%BD%D1%8F_v%D0%B0%D1%82%D0%B5%D1%80%D1%96%D0%B0%D0%BB%D0%B8_VI_%D0%92%D1%81%D0%B5%D1%83%D0%BA%D1%80%D0%B0%D1%97%D0%BD%D1%81%D1%8C%D0%BA%D0%BE%D1%97_%D0%BD%D0%B0%D1%83%D0%BA%D0%BE%D0%B2%D0%BE%D1%97_%D0%BA%D0%BE%D0%BD%D1%84%D0%B5%D1%80%D0%B5%D0%BD%D1%86%D1%96%D1%97_%D0%9A%D0%B8%D1%97%D0%B2_14_%D0%B1%D0%B5%D1%80%D0%B5%D0%B7%D0%BD%D1%8F_2020_%D1%83%D0%BF%D0%BE%D1%80%D1%8F%D0%B4_%D0%92_%D0%A4_%D0%94%D0%B5%D1%80%D0%B5%D0%B2%D1%96%D0%BD%D1%81%D1%8C%D0%BA%D0%B8%D0%B9_%D0%9A%D0%B8%D1%97%D0%B2_%D0%91%D0%B5%D1%81%D0%BA%D0%B8%D0%B4%D0%B8_2020_150_%D1%81}}
* {{Cite book |last1=Kozhanov |first1=Andrii |last2=Shypotilova |first2=Olena |title=Чорноволівські читання: Матеріали VII Всеукраїнської наукової конференції |date=27 March 2021 |publisher=Beskydy |editor-last=Derevinskyi |editor-first=Vasyl |location=Kyiv |pages=32–35 |language=uk |trans-title=Chornovil Readings: materials of the 7th all-Ukrainian scientific conference |chapter=Неформальна преса як форма діяльності українських націонал-демократичних сил на завершальному етапі «перебудови» |trans-chapter=Informal press as a form of activity of Ukrainian National-Democratic forces at the final stage of perestroika}}
* {{Cite book |last=Krupnyk |first=Liuba |title=Чорноволівські читання: Матеріали V Всеукраїнської наукової конференції |date=15 March 2019 |publisher=Beskydy |editor-last=Derevinskyi |editor-first=Vasyl |location=Kyiv |pages=43–49 |language=uk |trans-title=Chornovil Readings: materials of the 5th all-Ukrainian scientific conference |chapter=Роль Вячеслава Чорновола в ході Української національго-демократичної революції кінця 1980-х – 1991 років |trans-chapter=Viacheslav Chornovil's role during the Ukrainian National-Democratic revolution of the late 1980s–1991}}
* {{Cite book |last=Kulchytskyi |first=Stanislav |title=Чорноволівські читання: Матеріали V Всеукраїнської наукової конференції |date=15 March 2019 |publisher=Beskydy |editor-last=Derevinskyi |editor-first=Vasyl |location=Kyiv |pages=50–63 |language=uk |trans-title=Chornovil Readings: materials of the 5th all-Ukrainian scientific conference |chapter=Діяльність Вячеслава Чорновола під час суверенізації радянської України (1990) |trans-chapter=Viacheslav Chornovil's activities during the sovereigntisation of Soviet Ukraine (1990)}}
* {{Cite book |last=Lazorkin |first=Vitalii |author-link=Vitalii Lazorkin |title=Чорноволівські читання: Матеріали VI Всеукраїнської наукової конференції |date=14 March 2020 |publisher=Beskydy |editor-last=Derevinskyi |editor-first=Vasyl |location=Kyiv |pages=63–76 |language=uk |trans-title=Chornovil Readings: materials of the 6th all-Ukrainian scientific conference |chapter=Вячеслав Чорновіл. Деякі сторінки з історії творення збройних сил України |trans-chapter=Viacheslav Chornovil: Some pages on the history of the Armed Forces of Ukraine's establishment|url=https://www.academia.edu/127917089/%D0%A7%D0%BE%D1%80%D0%BD%D0%BE%D0%B2%D0%BE%D0%BB%D1%96%D0%B2%D1%81%D1%8C%D0%BA%D1%96_%D1%87%D0%B8%D1%82%D0%B0%D0%BD%D0%BD%D1%8F_v%D0%B0%D1%82%D0%B5%D1%80%D1%96%D0%B0%D0%BB%D0%B8_VI_%D0%92%D1%81%D0%B5%D1%83%D0%BA%D1%80%D0%B0%D1%97%D0%BD%D1%81%D1%8C%D0%BA%D0%BE%D1%97_%D0%BD%D0%B0%D1%83%D0%BA%D0%BE%D0%B2%D0%BE%D1%97_%D0%BA%D0%BE%D0%BD%D1%84%D0%B5%D1%80%D0%B5%D0%BD%D1%86%D1%96%D1%97_%D0%9A%D0%B8%D1%97%D0%B2_14_%D0%B1%D0%B5%D1%80%D0%B5%D0%B7%D0%BD%D1%8F_2020_%D1%83%D0%BF%D0%BE%D1%80%D1%8F%D0%B4_%D0%92_%D0%A4_%D0%94%D0%B5%D1%80%D0%B5%D0%B2%D1%96%D0%BD%D1%81%D1%8C%D0%BA%D0%B8%D0%B9_%D0%9A%D0%B8%D1%97%D0%B2_%D0%91%D0%B5%D1%81%D0%BA%D0%B8%D0%B4%D0%B8_2020_150_%D1%81}}
* {{Cite book |last=Malynovskyi |first=Valentyn |title=Чорноволівські читання: Матеріали V Всеукраїнської наукової конференції |date=15 March 2019 |publisher=Beskydy |editor-last=Derevinskyi |editor-first=Vasyl |location=Kyiv |pages=71–77 |language=uk |trans-title=Chornovil Readings: materials of the 5th all-Ukrainian scientific conference |chapter=Вплив ІІІ Всеукраїнських Зборів НРУ на подальший розвиток організації |trans-chapter=Influence of the Third All-Ukrainian Assembly of the NRU on further development of the organisation}}
* {{Cite book |last=Marples |first=David R. |url=https://link.springer.com/book/10.1007/978-1-349-10880-0 |title=Ukraine under Perestroika: Ecology, Economics and the Workers' Revolt |publisher=University of Alberta Press |year=1991 |isbn=9780888642295 |pages=243 |author-link=David R. Marples |doi=10.1007/978-1-349-10880-0 }}
* {{Cite book |last=Marynovych |first=Myroslav |author-link=Myroslav Marynovych |id={{Project MUSE|84843|type=book}} |title=The Universe behind Barbed Wire: Memoirs of a Ukrainian Soviet Dissident |publisher=University of Rochester Press |year=2021 |isbn=978-1-78744-832-2 |editor-last=Younger |editor-first=Katherine |location=Rochester |pages=453 |translator-last=Hayuk |translator-first=Zoya }}
* {{Cite book |last=Matiash |first=V. I. |title="Я вірую в свій народ!": До 80-річчя від дня народження В.М. Чорновола |publisher=Oles Honchar Poltava Regional Children's Library |year=2017 |location=Poltava |pages=41 |language=uk |trans-title="I Believe in my People!": to the 80th birth anniversary of Viacheslav Chornovil}}
* {{Cite book |last=Melnykova-Kurhanova |first=Olena |title=Чорноволівські читання: Матеріали V Всеукраїнської наукової конференції |date=15 March 2019 |publisher=Beskydy |editor-last=Derevinskyi |editor-first=Vasyl |location=Kyiv |pages=78–83 |language=uk |trans-title=Chornovil Readings: materials of the 5th all-Ukrainian scientific conference |chapter=Правозахисна публіцистика та діяльність Вячеслава Чорновола |trans-chapter=The human rights writing and activity of Vyacheslav Chornovil}}
* {{Cite book |last=Ostrovskyi |first=Valerii |title=Чорновілські читання. Візія майбутнього України: Матеріали III і IV наукових конференцій, присвячених 80-й річниці з дня народження Вячеслава Чорновола |publisher=Beskydy |year=2018 |editor-last=Derevinskyi |editor-first=Vasyl |location=Kyiv, Ternopil |pages=105–117 |language=uk |trans-title=Chornovil Readings: a Vision of Ukraine's Future: materials of the third and fourth scientific conferences celebrating the 80th birth anniversary of Viacheslav Chornovil |chapter=Вячеслав Чорновіл і Зіновій Красівський: переплетіння доль і звершень |trans-chapter=Viacheslav Chornovil and Zinovii Krasivskyi: intertwined fates and achievements |ref={{sfnRef|Ostrovskyi 2018a}}|url=https://shron2.chtyvo.org.ua/Zbirnyk_statei/Chornovolivski_chytannia_Viziia_maibutnoho_Ukrainy_Materialy_III_i_IV_naukovykh_konferentsii_prysvia.pdf}}
* {{Cite book |last=Ostrovskyi |first=Valerii |title=Чорновілські читання. Візія майбутнього України: Матеріали III і IV наукових конференцій, присвячених 80-й річниці з дня народження Вячеслава Чорновола |publisher=Beskydy |year=2018 |editor-last=Derevinskyi |editor-first=Vasyl |location=Kyiv, Ternopil |pages=118–127 |language=uk |trans-title=Chornovil Readings: a Vision of Ukraine's Future: materials of the third and fourth scientific conferences celebrating the 80th birth anniversary of Viacheslav Chornovil |chapter=Трактування історії України в епістолярній спадщині Вячеслава Чорновола |trans-chapter=Interpretations of the history of Ukraine in the epistolary heritage of Vyacheslav Chornovil |ref={{sfnRef|Ostrovskyi 2018b}}|url=https://shron2.chtyvo.org.ua/Zbirnyk_statei/Chornovolivski_chytannia_Viziia_maibutnoho_Ukrainy_Materialy_III_i_IV_naukovykh_konferentsii_prysvia.pdf}}
* {{Cite book |last=Parfionov |first=Aleksandr |url=https://books.google.com/books?id=810jAQAAIAAJ |title=Between Russia and the West: Foreign and Security Policy of Independent Ukraine |publisher=[[Peter Lang (publisher)|Peter Lang]] |year=1999 |isbn=9780820446295 |editor-last=Spillman |editor-first=Kurt R. |series=Studies in Contemporary History and Security Policy |volume=2 |pages=75–94 |chapter=Foreign and Security Policy Views of Relevant Ukrainian Political Forces |issn=1422-8327 |editor-last2=Wenger |editor-first2=Andreas |editor-last3=Müller |editor-first3=Derek}}
* {{Cite book |last=Paska |first=Bohdan |title=Чорновілські читання. Візія майбутнього України: Матеріали III і IV наукових конференцій, присвячених 80-й річниці з дня народження Вячеслава Чорновола |publisher=Beskydy |year=2018 |editor-last=Derevinskyi |editor-first=Vasyl |location=Kyiv, Ternopil |pages=132–144 |language=uk |trans-title=Chornovil Readings: a Vision of Ukraine's Future: materials of the third and fourth scientific conferences celebrating the 80th birth anniversary of Viacheslav Chornovil |chapter=Взаємини Вячеслава Чорноволо та Валентина Мороза: від співпраці до конфронтації |trans-chapter=Relations between Vyacheslav Chornovil and Valentin Moroz: from cooperation to confrontation|url=https://shron2.chtyvo.org.ua/Zbirnyk_statei/Chornovolivski_chytannia_Viziia_maibutnoho_Ukrainy_Materialy_III_i_IV_naukovykh_konferentsii_prysvia.pdf}}
* {{Cite book |last=Pipash |first=Volodymyr |title=Чорноволівські читання: Матеріали VII Всеукраїнської наукової конференції |date=27 March 2021 |publisher=Beskydy |editor-last=Derevinskyi |editor-first=Vasyl |location=Kyiv |pages=79–140 |language=uk |trans-title=Chornovil Readings: materials of the 7th all-Ukrainian scientific conference |chapter=Націонал-комунізм та національно орієнтовані комуністи в Україні (60-ті – 80-ті рр. ХХ ст.) |trans-chapter=National communism and the national orientation of communists in Ukraine (1960s–1980s)}}
* {{Cite book |last=Riabinin |first=Yevhen |title=Чорноволівські читання: Матеріали VII Всеукраїнської наукової конференції |date=27 March 2021 |publisher=Beskydy |editor-last=Derevinskyi |editor-first=Vasyl |location=Kyiv |pages=89–92 |language=uk |trans-title=Chornovil Readings: materials of the 7th all-Ukrainian scientific conference |chapter=Ідеї В.Чорновола стосовно державно-територіального устрою України |trans-chapter=V. Chornovil's ideas regarding the state and territorial structure of Ukraine}}
* {{Cite book |last=Seko |first=Yaroslav |title=Другі Чорновілські читання. Матеріали наукової конференції, присвяченої 75-й річниці з дня народження В'ячеслава Чорновола |year=2014 |editor-last=Derevinskyi |editor-first=Vasyl |location=Ternopil |pages=127–137 |language=uk |trans-title=Second Chornovil Readings: Materials of the Scientific Conference celebrating the 75th birth anniversary of Viacheslav Chornovil |chapter=В'ячеслав Чорновіл: на роздоріжжі шістдесятницта |trans-chapter=Viacheslav Chornovil: at the crossroads of the sixties}}
* {{Cite book |last=Seko |first=Yaroslav |title=Чорновілські читання. Візія майбутнього України: Матеріали III і IV наукових конференцій, присвячених 80-й річниці з дня народження Вячеслава Чорновола |publisher=Beskydy |year=2018 |editor-last=Derevinskyi |editor-first=Vasyl |location=Kyiv, Ternopil |pages=174–184 |language=uk |trans-title=Chornovil Readings: a Vision of Ukraine's Future: materials of the third and fourth scientific conferences celebrating the 80th birth anniversary of Viacheslav Chornovil |chapter=Вячеслав Чорновіл і криза дисидентства у період перебудови|trans-chapter=Viacheslav Chornovil and the crisis of dissent in the perestroika period|url=https://shron2.chtyvo.org.ua/Zbirnyk_statei/Chornovolivski_chytannia_Viziia_maibutnoho_Ukrainy_Materialy_III_i_IV_naukovykh_konferentsii_prysvia.pdf}}
* {{Cite book |last=Seko |first=Yaroslav |title=Чорноволівські читання: Матеріали V Всеукраїнської наукової конференції |date=15 March 2019 |publisher=Beskydy |editor-last=Derevinskyi |editor-first=Vasyl |location=Kyiv |pages=124–131 |language=uk |trans-title=Chornovil Readings: materials of the 5th all-Ukrainian scientific conference |chapter=Концепція антикомунісичної революції Вячеслава Чорновола |trans-chapter=The Conception of Viacheslav Chornovil's Anticommunist Revolution}}
* {{Cite book |last=Seko |first=Yaroslav |title=Чорноволівські читання: Матеріали VI Всеукраїнської наукової конференції |date=14 March 2020 |publisher=Beskydy |editor-last=Derevinskyi |editor-first=Vasyl |location=Kyiv |pages=123–136 |language=uk |trans-title=Chornovil Readings: materials of the 6th all-Ukrainian scientific conference |chapter=Шевченкіана Вячеслава Чорновола |trans-chapter=The Shevchenkiana of Viacheslav Chornovil|url=https://www.academia.edu/127917089/%D0%A7%D0%BE%D1%80%D0%BD%D0%BE%D0%B2%D0%BE%D0%BB%D1%96%D0%B2%D1%81%D1%8C%D0%BA%D1%96_%D1%87%D0%B8%D1%82%D0%B0%D0%BD%D0%BD%D1%8F_v%D0%B0%D1%82%D0%B5%D1%80%D1%96%D0%B0%D0%BB%D0%B8_VI_%D0%92%D1%81%D0%B5%D1%83%D0%BA%D1%80%D0%B0%D1%97%D0%BD%D1%81%D1%8C%D0%BA%D0%BE%D1%97_%D0%BD%D0%B0%D1%83%D0%BA%D0%BE%D0%B2%D0%BE%D1%97_%D0%BA%D0%BE%D0%BD%D1%84%D0%B5%D1%80%D0%B5%D0%BD%D1%86%D1%96%D1%97_%D0%9A%D0%B8%D1%97%D0%B2_14_%D0%B1%D0%B5%D1%80%D0%B5%D0%B7%D0%BD%D1%8F_2020_%D1%83%D0%BF%D0%BE%D1%80%D1%8F%D0%B4_%D0%92_%D0%A4_%D0%94%D0%B5%D1%80%D0%B5%D0%B2%D1%96%D0%BD%D1%81%D1%8C%D0%BA%D0%B8%D0%B9_%D0%9A%D0%B8%D1%97%D0%B2_%D0%91%D0%B5%D1%81%D0%BA%D0%B8%D0%B4%D0%B8_2020_150_%D1%81}}
* {{Cite book |last=Seko |first=Yaroslav |title=Чорноволівські читання: Матеріали VII Всеукраїнської наукової конференції |date=27 March 2021 |publisher=Beskydy |editor-last=Derevinskyi |editor-first=Vasyl |location=Kyiv |pages=93–103 |language=uk |trans-title=Chornovil Readings: materials of the 7th all-Ukrainian scientific conference |chapter=Драгоманівський контекст ідеї федералізму Вячеслава Чорновола |trans-chapter=The Drahomanov context of Viacheslav Chornovil's ideas of federalism}}
* {{Cite book |last=Shanovska |first=Olena |title=Чорноволівські читання: Матеріали V Всеукраїнської наукової конференції |date=15 March 2019 |publisher=Beskydy |editor-last=Derevinskyi |editor-first=Vasyl |location=Kyiv |pages=143–146 |language=uk |trans-title=Chornovil Readings: materials of the 5th all-Ukrainian scientific conference |chapter=Еволюція світоглядних позицій В. Чорновола: від комуністичної прихильності до категоричного неприйняття радянської ідеології |trans-chapter=Evolution of the position of V. Chornovil's worldview: from communist participation to categorical rejection of Soviet ideology}}
* {{Cite book |last=Yurash |first=Andrii |title=Чорноволівські читання: Матеріали VII Всеукраїнської наукової конференції |date=27 March 2021 |publisher=Beskydy |editor-last=Derevinskyi |editor-first=Vasyl |location=Kyiv |pages=134–140 |language=uk |trans-title=Chornovil Readings: materials of the 7th all-Ukrainian scientific conference |chapter=Релігійні та етнонаціональні політики в сучасній Україні: плюралізм чи хаос? |trans-chapter=Religious and ethno-national politics in modern Ukraine: pluralism or chaos?}}
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=== जर्नल लेख ===
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* {{Cite journal|last=Adamovych|first=Serhii|date=2018|title=Vyacheslav Chornovil – intelektual, polityk, tvorets novitnoyi Ukrayinskoyi derzhavnosti|trans-title=Viacheslav Chornovil: an intellectual, a politician and the creator of modern Ukrainian statehood|url=http://lib.pnu.edu.ua:8080/handle/123456789/4255|journal=Beskedy|language=uk|pages=5|isbn=978-966-457-176-7|via=Precarpathian National University Repository|archive-date=15 March 2022|access-date=3 February 2025|archive-url=https://web.archive.org/web/20220315130315/http://lib.pnu.edu.ua:8080/handle/123456789/4255|url-status=live}}
* {{Cite journal|last=Bellezza|first=Simone A.|date=Winter 2019|title=The "Transnationalization" of Ukrainian Dissent: New York City Ukrainian Students and the Defense of Human Rights, 1968–80|url=https://muse.jhu.edu/pub/28/article/717541/pdf|journal=[[Kritika: Explorations in Russian and Eurasian History]]|volume=20|issue=1|pages=99–120|doi=10.1353/kri.2019.0005|via=Project MUSE|url-access=subscription}}
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* {{Cite news|date=19 May 2008|title=Yaroslav the Wise - the Greatest Ukrainian of all times|url=https://inter.ua/en/news/yaroslav-the-wise-the-greatest-ukrainian-of-all-times|url-status=live|archive-url=https://web.archive.org/web/20250509171933/https://inter.ua/en/news/yaroslav-the-wise-the-greatest-ukrainian-of-all-times|archive-date=9 May 2025|access-date=23 April 2025|work=[[Inter (TV channel)|Inter]]|ref={{sfnRef|Inter 2008}}}}
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* {{Cite web|date=17 September 1999|title=Udovenko and Kostenko: Rukh contenders|url=https://jamestown.org/program/udovenko-and-kostenko-rukh-contenders/|access-date=23 April 2025|website=[[Jamestown Foundation]]|ref={{sfnRef|Jamestown Foundation 1999}}}}
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* {{Cite news |last=Kheifets |first=Mikhail |date=9 December 2018 |title=Vyacheslav Chornovil – zekivskyy heneral. Frahment knyhy "Ukrayinski syluety" |trans-title=Viacheslav Chornovil – General of the Zeks: Fragments from the book 'Ukrainian Silhouettes' |url=https://www.istpravda.com.ua/articles/2018/12/9/153389/ |access-date=2 June 2024 |work=Istorychna Pravda |language=uk |archive-date=2 June 2024 |archive-url=https://web.archive.org/web/20240602050942/https://www.istpravda.com.ua/articles/201
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प्राकृतिक संसाधनों का दोहन
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[[चित्र:Timber DonnellyMills2005 SeanMcClean.jpg|right|thumb|300px|वृक्षों को अन्धाधुंध काटना प्राकृति का दोहन है।]]
[[चित्र:Бачатский экскаваторы.JPG|right|thumb|300px|खनिजों का दोहन]]
[[चित्र:Derelict fishing gear with animal carcasses.jpg|right|thumb|300px|अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी के सहारे मछली पकड़ना]]
'''प्राकृतिक संसाधनों का दोहन''' से आशय उन [[प्राकृतिक संसाधन|प्राकृतिक संपदाओं]]—जैसे खनिज, वन, जल या जीवाश्म ईंधन—के उपयोग से है, जिन्हें [[आर्थिक वृद्धि|आर्थिक विकास]]<ref> क्रोनिन, हेमांग
. (2011). "[http://www.stimson.org/images/uploads/research-pdfs/Exploiting_Natural_Resources-Chapter_5_Cronin.pdf Natural Resources and the Development-Environment Dilemma] {{Webarchive|url=https://web.archive.org/web/20160305015521/http://www.stimson.org/images/uploads/research-pdfs/Exploiting_Natural_Resources-Chapter_5_Cronin.pdf |date=2016-03-05 }}." ''प्राकृतिक संसाधनों का दोहन''. हेनरी एल. स्टिमसन केंद्र। पृ. 63</ref> और उन्नति<ref>{{Cite journal |last1=क्रोनिन |first1=रिचर्ड |last2=पंड्या |first2=अमित |date=2009 |title=Exploiting Natural Resources: Growth, Instability, and Conflict in the Middle East and Asia |url=https://www.stimson.org/wp-content/files/file-attachments/Exploiting_Natural_Resources-Full_0.pdf |journal=वैश्विक सुरक्षा के लिए स्टिमसन व्यावहारिक कदम }}</ref> के उद्देश्य से निकाला या उपभोग किया जाता है। प्रायः ये संसाधन सीमित या गैर-नवीकरणीय होते हैं, अतः उनका अनियंत्रित उपयोग दीर्घकालिक संतुलन के लिए चुनौती बन जाता है। संसाधनों के इस दोहन के साथ अनेक बार [[पर्यावरणीय अवनयन|पर्यावरणीय अवनति]], मानवीय असुरक्षा और सामाजिक तनाव भी जुड़ जाते हैं, जो विकास की प्रक्रिया को जटिल बना देते हैं।
[[संसाधन क्षरण|प्राकृतिक संसाधनों की कमी]] जहाँ स्थानीय स्तर पर [[आर्थिक वृद्धि|आर्थिक गतिविधियों]] को प्रभावित कर सकती है, वहीं उनकी प्रचुरता भी किसी राष्ट्र की समग्र समृद्धि की गारंटी नहीं होती। अनेक संसाधन-समृद्ध देश, विशेषकर तथाकथित [[उत्तर-दक्षिण विभाजन|वैश्विक दक्षिण]] में स्थित राष्ट्र, वितरण से जुड़े संघर्षों और प्रशासनिक कुप्रबंधन की समस्याओं से जूझते हैं। संसाधनों के उपयोग को लेकर स्थानीय [[अफसरशाही|प्रशासनिक तंत्र]] में मतभेद तथा नीतिगत अस्पष्टता अक्सर इन चुनौतियों को और गहरा करती है।
इसके अतिरिक्त, विदेशी उद्योगों की भूमिका भी इस प्रक्रिया में महत्त्वपूर्ण होती है, जहाँ [[विकासशील देश|विकासशील देशों]] से कच्चे संसाधनों का आयात किया जाता है, किंतु स्थानीय समुदायों को उसका अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाता। परिणामस्वरूप, संसाधन-समृद्ध क्षेत्रों के आसपास भी असमानता, प्रदूषण और सामाजिक विषमता जैसे नकारात्मक प्रभाव उभरते हैं।<ref name=":3" />
[[औद्योगिक क्रांति]] के प्रभाव से प्राकृतिक संसाधनों का दोहन 19वीं शताब्दी में अभूतपूर्व रूप से औद्योगिक पैमाने पर विकसित होने लगा। इस काल में [[कच्चा माल|कच्चे माल]] के निष्कर्षण और प्रसंस्करण—जैसे [[खनन]], [[भाप का इंजन|भाप-शक्ति]] का उपयोग तथा [[यंत्र|यांत्रिक उपकरणों]] का विस्तार—पूर्व-औद्योगिक समाजों की तुलना में कहीं अधिक तीव्र और व्यापक हो गया। उत्पादन की बढ़ती माँग और तकनीकी उन्नति ने संसाधनों के उपयोग को एक नई दिशा दी, जिससे प्रकृति और अर्थव्यवस्था के बीच संबंध और अधिक गहरे तथा जटिल होते गए।
20वीं शताब्दी में प्रवेश करते-करते ऊर्जा की खपत में तीव्र वृद्धि हुई, जिसने औद्योगिक विकास को और गति प्रदान की। 2012 तक विश्व की लगभग 78.3% ऊर्जा आवश्यकताओं की पूर्ति [[जीवाश्म ईंधन]] के निष्कर्षण से होने लगी, जिनमें [[खाद्य तेल|तेल]], [[कोयला]] और [[प्राकृतिक गैस]] प्रमुख हैं।<ref>{{cite web|last=प्लानास|first=फ्लोरेंट|title=The Exploitation of Natural Resources|url=http://www.unanpourlaplanete.org/en/the-human-footprint/the-exploitation-of-natural-resources.html|work=अन एन पोर ला प्लैनेट|access-date=22 मार्च 2012|archive-url=https://web.archive.org/web/20121112210559/http://www.unanpourlaplanete.org/en/the-human-footprint/the-exploitation-of-natural-resources.html|archive-date=12 नवंबर 2012|url-status=dead}}</ref> इस बढ़ती निर्भरता ने एक ओर वैश्विक विकास को सहारा दिया, तो दूसरी ओर पर्यावरणीय संतुलन, जलवायु परिवर्तन और संसाधनों की सीमितता जैसे गंभीर प्रश्नों को भी जन्म दिया, जो आज भी मानवता के सामने चुनौती के रूप में उपस्थित हैं।
मानव द्वारा व्यापक रूप से दोहन किए जाने वाले [[अनवीकरणीय संसाधन|गैर-नवीकरणीय संसाधनों]] में [[मृदा संस्तर|उपमृदा खनिजों]] का विशेष स्थान है, जिनमें [[बहुमूल्य धातु|बहुमूल्य धातुएँ]] सम्मिलित हैं और जिनका उपयोग मुख्यतः औद्योगिक [[पण्य|वस्तुओं के]] निर्माण में किया जाता है। इन संसाधनों का अनियंत्रित और तीव्र निष्कर्षण न केवल प्राकृतिक भंडार को क्षीण करता है, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन को भी प्रभावित करता है। इसी प्रकार, [[गहन कृषि]] उत्पादन—जो अधिक उपज प्राप्त करने के उद्देश्य से अपनाया जाता है—[[प्राकृतिक पर्यावरण|प्राकृतिक परिवेश]] के अनेक आयामों को बाधित करता है; उदाहरणस्वरूप, स्थलीय पारिस्थितिकी तंत्र में [[वन|वनों]] का [[पर्यावरणीय अवनयन|क्षरण]] तथा जलीय पारिस्थितिकी तंत्र में जल प्रदूषण इसके प्रमुख दुष्प्रभाव हैं।<ref name=":0" />
जैसे-जैसे वैश्विक जनसंख्या में वृद्धि होती है और आर्थिक विकास की गति तेज होती जाती है, वैसे-वैसे कच्चे माल के अस्थिर और अंधाधुंध निष्कर्षण के कारण प्राकृतिक संसाधनों का क्षय एक गंभीर चिंता का विषय बनता जा रहा है।<ref name=":0">{{cite book|last=मैकनिकोल|first=जेफ्री|title=Handbook of Sustainable Development|year=2007|publisher=एडवर्ड एल्गर पब्लिशिंग|pages=125–39|chapter-url=http://www.popcouncil.org/pdfs/wp/205.pdf|access-date=2012-03-13|chapter=Population and Sustainability|archive-url=https://web.archive.org/web/20120311102205/http://www.popcouncil.org/pdfs/wp/205.pdf|archive-date=2012-03-11|url-status=dead}}</ref> जल, खनिज और वनों के निरंतर दोहन से पर्यावरण में व्यापक परिवर्तन हो रहे हैं, जो आगे चलकर जलवायु-आधारित विस्थापन, संसाधनों की कमी से उत्पन्न संघर्ष तथा सामाजिक असमानताओं को और गहरा करने का कारण बन सकते हैं।<ref name=":3">{{Cite web |title=Climate and Environmental Security in the Democratic Republic of Congo {{!}} DGAP |url=https://dgap.org/en/research/publications/climate-and-environmental-security-democratic-republic-congo |access-date=2024-04-23 |website=dgap.org}}</ref> इस प्रकार, संसाधनों के उपयोग और संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करना आज की सबसे बड़ी वैश्विक आवश्यकताओं में से एक बन गया है।
[[File:Artisanal cobalt miners in the Democratic Republic of Congo.jpg|thumb|कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य की अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा खनिज निर्यात से प्राप्त राजस्व से आता है। कांगो खनिज संसाधनों से समृद्ध है, लेकिन इन भंडारों के खनन के लिए व्यापक स्तर पर शारीरिक श्रम की आवश्यकता होती है, जो अक्सर जानलेवा परिस्थितियों में किया जाता है। कोबाल्ट के खनन से मानवाधिकारों का हनन हो रहा है, जैसे कि असुरक्षित कार्यस्थल, बाल श्रम और जबरन श्रम, साथ ही साथ पर्यावरण का क्षरण भी हो रहा है।]]
==कारण==
प्राकृतिक संसाधनों के तीव्र दोहन के पीछे अनेक परस्पर जुड़े कारण कार्य करते हैं, जिनमें तकनीकी प्रगति, उपभोग की प्रवृत्तियाँ और नीतिगत दृष्टिकोण प्रमुख हैं। आधुनिक युग में तकनीकी परिष्कार ने संसाधनों के निष्कर्षण की गति को अभूतपूर्व रूप से बढ़ा दिया है। जहाँ कभी सीमित साधनों से वृक्षों की कटाई या खनन में लंबा समय लगता था, वहीं उन्नत यंत्रों और तकनीकों के कारण अब वनों की कटाई और खनिज उत्खनन अत्यंत तीव्र हो गया है।<ref>{{Cite book |last1=सबोगल |first1=सीज़र |url=https://doi.org/10.1007/0-387-29112-1_52 |title=Restoring Overlogged Tropical Forests. In: Forest Restoration in Landscapes. |last2=नासी |first2=रॉबर्ट |publisher=स्प्रिंगर, न्यूयॉर्क, एनवाई |year=2005 |isbn=978-0-387-29112-3 |pages=361–369 |doi=10.1007/0-387-29112-1_52 |language=en}}</ref> इस तीव्रता ने प्राकृतिक संतुलन पर गहरा प्रभाव डाला है।
इसके साथ ही अत्यधिक उपभोग की प्रवृत्ति ने प्राकृतिक संसाधनों की माँग को निरंतर बढ़ाया है। बढ़ती जनसंख्या और भौतिक सुख-सुविधाओं की चाह ने उत्पादन के विस्तार को प्रेरित किया, जिसके परिणामस्वरूप संसाधनों का दोहन और अधिक बढ़ गया।<ref>{{cite web |last1=सुब्रमणियन|first1=के.आर. |title=the crisis of consumption of natural resources. |url=https://www.researchgate.net/publication/327384344}}</ref> नई तकनीकों—विशेषकर विद्युत वाहनों और पोर्टेबल उपकरणों जैसे स्मार्टफ़ोन—के विकास ने भी खनिज संसाधनों पर निर्भरता को बढ़ाया है। उदाहरण के लिए, कोबाल्ट जैसे खनिजों के खनन में वृद्धि ने हरित आवरण को क्षति पहुँचाई है और खनन क्षेत्रों के आसपास रहने वाले समुदायों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है, विशेषकर विकासशील देशों में जैसे कि कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य में जहां खनन होता है।<ref name=":02">{{Cite journal |last1=बंज़ा लुबाबा नकुलु |first1=सेलेस्टिन |last2=कैसास |first2=लिडिया |last3=हॉफ़्रॉइड |first3=विंसेंट |last4=डी पुटर |first4=थियरी |last5=सेनेन |first5=नेली डी.|last6=कायम्बे-किटेंज |first6=टोनी |last7=मूसा ओबदिया |first7=पॉल |last8=कायनिका वा मुकोमा |first8=डैनियल |last9=लुंडा इलुंगा |first9=जीन-मैरी |last10=नवरोट |first10=टिम एस. |last11=लुबोया नुम्बी |first11=ऑस्कर |last12=स्मोल्डर्स |first12=एरिक |last13=नेमेरी |first13=बेनोइट |date= सितंबर 2018 |title=Sustainability of artisanal mining of cobalt in DR Congo |journal=प्रकृति स्थिरता |volume=1 |issue=9 |pages=495–504 |doi=10.1038/s41893-018-0139-4 |issn=2398-9629 |pmc=6166862 |pmid=30288453|bibcode=2018NatSu...1..495B }}</ref>
उपभोक्तावाद भी इस प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण कारण है। भौतिकवादी दृष्टिकोण से प्रेरित अस्थिर उपभोग न केवल उत्पादन की माँग को बढ़ाता है, बल्कि उन संसाधनों के अंधाधुंध निष्कर्षण को भी प्रोत्साहित करता है, जो इस माँग की पूर्ति के लिए आवश्यक होते हैं।<ref>{{Cite journal |last1=ओरेचिया |first1=कार्लो |last2=ज़ोपोली |first2=पिएत्रो |date=2007 |title=Consumerism and Environment: Does Consumption Behaviour Affect Environmental Quality?|journal=सीईआईएस टोर वर्गाटा |ssrn=1719507}}</ref> उदाहरणस्वरूप, आभूषणों की बढ़ती खपत ने सोने और हीरे के खनन को बढ़ावा दिया है, जिसके परिणामस्वरूप वनों का क्षरण, विषैले पदार्थों का प्रसार और पारिस्थितिकी तंत्र में असंतुलन उत्पन्न हुआ है।<ref name=":12">{{Cite journal |last1=टिमसिना |first1=श्रब्या|last2=हार्डी |first2=नोरा जी.|last3=वुडबरी |first3=डेविड जे.|last4=एश्टन |first4=मार्क एस. |last5=कुक-पैटन |first5=सुसान सी. |last6=पास्टर्नैक |first6=राहेल |last7=मार्टिन |first7=मेरेडिथ पी. |date=December 2022 |title=Tropical surface gold mining: A review of ecological impacts and restoration strategies |journal=भूमि क्षरण और विकास|language=en |volume=33 |issue=18 |pages=3661–3674 |doi=10.1002/ldr.4430 |bibcode=2022LDeDe..33.3661T |issn=1085-3278|doi-access=free }}</ref>
इसके अतिरिक्त, प्रबंधन की वह सोच भी संसाधनों के दोहन को बढ़ाती है, जिसमें दुर्लभता को प्रतिस्पर्धात्मक लाभ के रूप में देखा जाता है। इस दृष्टिकोण के कारण संसाधनों का संरक्षण करने के बजाय उनका अधिकाधिक दोहन किया जाता है, जिससे उनकी कमी और भी तीव्र हो जाती है।<ref>{{Cite journal |last1=कार्टन |first1=गुइलौम |last2=पैरिगोट |first2=जूलिया |date=2024-04-18 |title=Toward an Ecological Resource Orchestration Model |url=https://journals.sagepub.com/doi/10.1177/10860266241244784 |journal=संगठन और पर्यावरण |volume=37 |issue=4 |pages=526–548 |language=en |doi=10.1177/10860266241244784 |issn=1086-0266|url-access=subscription }}</ref> अंततः, मूल निवासियों के भूमि अधिकारों की उपेक्षा भी एक गंभीर कारण है। जब स्थानीय समुदायों के अधिकारों का सम्मान नहीं किया जाता, तो उनकी भूमि पर और उसके आसपास संसाधनों का शोषण बढ़ जाता है,<ref>{{Cite web |title=Lands, Natural Resources Represent Life for Indigenous Peoples, Not Mere Commodities, Speakers Stress as Permanent Forum begins Session {{!}} Meetings Coverage and Press Releases |url=https://press.un.org/en/2018/hr5387.doc.htm |access-date=2024-05-02 |website=press.un.org |archive-date=2 मई 2024 |archive-url=https://web.archive.org/web/20240502142235/https://press.un.org/en/2018/hr5387.doc.htm |url-status=dead }}</ref> जिससे न केवल पर्यावरण, बल्कि सामाजिक न्याय भी प्रभावित होता है।
इस प्रकार, प्राकृतिक संसाधनों का दोहन केवल तकनीकी या आर्थिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि सामाजिक, सांस्कृतिक और नीतिगत कारकों का सम्मिलित परिणाम है, जिसके समाधान के लिए संतुलित और संवेदनशील दृष्टिकोण आवश्यक है।
==संसाधनों के दोहन के परिणाम==
[[File:Deforestation in Nigeria team patrolling the deforestation site.jpg|thumb|नाइजीरिया में वनों की कटाई रोकने वाली एक टीम वनों की कटाई स्थल पर गश्त कर रही है। नाइजीरिया में वनों की कटाई में वृद्धि हुई है, जिसका एक कारण कृषि, लकड़ी उद्योग और शहरी विकास का विस्तार है। जनसंख्या वृद्धि और गरीबी के कारण भूमि उपयोग में ये परिवर्तन हो रहे हैं।<ref>{{Citation |last1=फसोना|first1=मायोवा |title=Drivers of Deforestation and Land-Use Change in Southwest Nigeria |date=2018 |work=Handbook of Climate Change Resilience |pages=1–24 |editor-last=लील फिल्हो|editor-first=वाल्टर |url=https://doi.org/10.1007/978-3-319-71025-9_139-1 |access-date=2024-04-18 |place=Cham |publisher=स्प्रिंगर इंटरनेशनल पब्लिशिंग |language=en |doi=10.1007/978-3-319-71025-9_139-1 |isbn=978-3-319-71025-9 |last2=एडेओनिपेकुन |first2=पीटर एडेगबेंगा |last3=अगबूला |first3=ओलुडारे |last4=अकिंतुयी |first4=अकिनलाबी |last5=बेलो |first5=एडेडोयिन |last6=ओगुंडिपे |first6=ओलुवातोयिन |last7=सोनी |first7=अलाबी |last8=ओमोजोला |first8=एडेमोला|url-access=subscription }}</ref>]]
प्राकृतिक संसाधन असीमित नहीं होते, और उनका लापरवाहीपूर्ण तथा अत्यधिक उपयोग दूरगामी और बहुआयामी दुष्परिणाम उत्पन्न करता है। जब मानव अपनी आवश्यकताओं और आकांक्षाओं की पूर्ति के लिए प्रकृति पर अत्यधिक निर्भर हो जाता है, तब संतुलन भंग होने लगता है और इसके प्रभाव पर्यावरण, समाज तथा अर्थव्यवस्था—तीनों पर स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं।
सबसे पहले, वनों की अंधाधुंध कटाई—चाहे वह कृषि विस्तार के लिए हो या औद्योगिक गतिविधियों के लिए—पृथ्वी के हरित आवरण को तेजी से नष्ट करती है। अनुमानतः पिछले आठ हजार वर्षों में मूल वन क्षेत्र का एक बड़ा भाग समाप्त हो चुका है,<ref>{{Citation |last=शिविडेन्को |first=ए. |title=Deforestation |date=2008-01-01 |pages=853–859 |editor-last=जॉर्गेनसेन|editor-first=स्वेन एरिक |url=https://www.sciencedirect.com/science/article/pii/B9780080454054005863 |access-date=2023-02-08 |place=ऑक्सफोर्ड |publisher=एकेडमिक प्रेस|language=en |isbn=978-0-08-045405-4 |editor2-last=फाथ |editor2-first=ब्रायन डी.|encyclopedia=नसाइक्लोपीडिया ऑफ इकोलॉजी }}</ref> जिससे जैव-विविधता और जलवायु संतुलन दोनों प्रभावित हुए हैं। इसी प्रकार, भूमि प्रबंधन में मानव-जनित हस्तक्षेप और जलवायु परिवर्तन के संयुक्त प्रभाव से मरुस्थलीकरण की प्रक्रिया तेज होती है, जिसमें उपजाऊ भूमि धीरे-धीरे बंजर होती जाती है और मिट्टी की उर्वरता तथा पारिस्थितिक सेवाएँ क्षीण हो जाती हैं।<ref>{{Cite journal |last1=डी'ओडोरिको|first1=पाओलो |last2=भट्टाचन |first2=अबिनाश |last3=डेविस |first3=काइल एफ. |last4=रवि |first4=सुजीत |last5=रनयान |first5=क्रिस्टियान डब्ल्यू.|date=2013-01-01 |title=Global desertification: Drivers and feedbacks |url=https://www.sciencedirect.com/science/article/pii/S0309170812000231 |journal=जल संसाधन में प्रगति |series=35वीं वर्षगांठ अंक |volume=51 |pages=326–344 |doi=10.1016/j.advwatres.2012.01.013 |bibcode=2013AdWR...51..326D |issn=0309-1708|url-access=subscription }}</ref>
प्राकृतिक संसाधनों का निरंतर और असंतुलित दोहन अंततः उनके क्षय का कारण बनता है, जब उनकी खपत उनकी पुनःपूर्ति की गति से अधिक हो जाती है।<ref name=":1">{{Cite journal |last1=मित्तल |first1=ईश्वर |last2=गुप्ता |first2=रवि कुमार |date=30 सितंबर 2015 |title=Natural Resources Depletion and Economic Growth in Present Era |journal=सोच मस्तनाथ जर्नल ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी|language=en |volume=10 |issue=3 |ssrn=2920080}}</ref> इसके साथ ही, संसाधनों के दोहन से जुड़े प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष प्रभाव अनेक प्रजातियों के विलुप्त होने का कारण बनते हैं<ref>{{Cite journal |last=रेडफोर्ड|first=केंट एच. |date=1992 |title=The Empty Forest |url=https://www.jstor.org/stable/1311860 |journal= बायोसाइंस |volume=42 |issue=6 |pages=412–422 |doi=10.2307/1311860 |jstor=1311860 |issn=0006-3568}}</ref>—कभी शिकार के रूप में, तो कभी उनके आवास के विनाश के कारण। पर्यावरणीय गिरावट के चलते मानव समुदायों को भी अपने निवास स्थान छोड़ने के लिए विवश होना पड़ता है, जिससे जबरन पलायन जैसी समस्याएँ जन्म लेती हैं।
इसके अतिरिक्त, मिट्टी का कटाव, तेल जैसे ऊर्जा स्रोतों की कमी,<ref>{{Cite journal |last1=सोरेल |first1=स्टीव |last2=स्पीयर्स |first2=जेमी |last3=बेंटली |first3=रोजर |last4=ब्रांट |first4=एडम |last5=मिलर |first5=रिचर्ड |date= सितंबर 2010 |title=Global oil depletion: A review of the evidence |url=https://www.sciencedirect.com/science/article/pii/S0301421510003204 |journal=ऊर्जा नीति |series=नियमित पत्रों के साथ शहरों में कार्बन उत्सर्जन और कार्बन प्रबंधन पर विशेष अनुभाग|language=en |volume=38 |issue=9 |pages=5290–5295 |doi=10.1016/j.enpol.2010.04.046 |bibcode=2010EnPol..38.5290S |issn=0301-4215 |via=एल्सवियर साइंस डायरेक्ट |url-access=subscription }}</ref> ओज़ोन परत का क्षरण, ग्रीनहाउस गैसों में वृद्धि और जल के रासायनिक प्रदूषण जैसी समस्याएँ भी संसाधनों के अत्यधिक उपयोग से उत्पन्न होती हैं। इन परिवर्तनों के परिणामस्वरूप प्राकृतिक आपदाओं की आवृत्ति और तीव्रता में वृद्धि देखी जाती है। धातुओं और खनिजों के क्षय से औद्योगिक विकास भी प्रभावित होता है, जिससे भविष्य की आर्थिक स्थिरता पर प्रश्नचिह्न लगते हैं।
इन सबके बीच सबसे अधिक प्रभावित वे स्वदेशी समुदाय होते हैं, जिनका जीवन सीधे प्रकृति पर निर्भर करता है। संसाधनों के क्षरण के कारण उनके पारंपरिक भोजन और जल स्रोत सीमित हो जाते हैं,<ref name=":4">{{cite book |last1=गिलियो-व्हिटेकर |first1=दीना |title=As long as grass grows: the indigenous fight for environmental justice, from colonization to Standing Rock |publisher=बीकन प्रेस}}</ref> जिससे उनके सांस्कृतिक अस्तित्व और जीवन-निर्वाह के साधनों पर गंभीर संकट उत्पन्न होता है। इस प्रकार, प्राकृतिक संसाधनों का असंतुलित दोहन केवल पर्यावरणीय समस्या नहीं, बल्कि मानवीय और सामाजिक न्याय से जुड़ा एक गहन वैश्विक प्रश्न बन जाता है।
== सन्दर्भ ==
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संकुचन वलय
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चाहर धर्मेंद्र
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पहला अनुच्छेद सुधारा
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text/x-wiki
[[चित्र:Cell cycle with images.jpg|thumb|चित्र 1. अंत्यावस्था या प्रारंभिक कोशिकाद्रव्य विभाजन के दौरान संकुचन वलय का निर्माण दर्शाता हुआ कोशिका चक्र।]]
'''''संकुचन वलय''''' (Contractile ring), जिसे एक्टोमायोसिन वलय अथवा साइटोकाइनेटिक वलय के नाम से भी जाना जाता है, [[कोशिकाद्रव्य]] विभाजन की प्रक्रिया (विशेषतः [[साइटोकाइनेसिस]]) के दौरान बनने वाली एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण और सूक्ष्म संरचना है।<ref name="Mangione2019">{{cite journal |last1=मैंगियोन |first1=एमसी |last2=गोल्ड |first2=केएल |title=Molecular form and function of the cytokinetic ring. |journal=जर्नल ऑफ सेल साइंस |date=17 जून 2019 |volume=132 |issue=12 |article-number=jcs226928 |doi=10.1242/jcs.226928 |pmid=31209062|pmc=6602304 }}</ref><ref name=":0">{{cite journal | pmid = 27505246 | year = 2016 | last1 = चेफिंग्स | first1 = टी. एच. | last2 = बरोज़ | first2 = एन. जे. | last3 = बालासुब्रमण्यन | first3 = एम. के. | title = Actomyosin Ring Formation and Tension Generation in Eukaryotic Cytokinesis | journal = करंटबायोलॉजी | volume = 26 | issue = 15 | pages = R719–R737 | doi = 10.1016/j.cub.2016.06.071 | s2cid = 3908927 | doi-access = free | bibcode = 2016CBio...26.R719C }}</ref> यह वलय विभाजन के अंतिम चरण, अर्थात् [[टेलोफेज|अंत्यावस्था]] के समापन के निकट, तर्कु उपकरण के अक्ष के लंबवत विकसित होता है। इसी समय संतति अर्धगुणसूत्र एक-दूसरे से पृथक होकर तंत्र के विपरीत ध्रुवों तक पहुँच चुके होते हैं और साथ ही नए नाभिकों का निर्माण भी आरंभ हो जाता है (जैसा कि चित्र 1 में दर्शाया गया है)।,<ref>{{cite book | doi = 10.1007/978-1-4419-9863-7_779 | chapter = Actomyosin Ring | title = Encyclopedia of Systems Biology | year = 2013 | last1 = मन-कैपेली | first1 = सेबस्टियन | last2 = मैक्कलम | first2 = डेनियल | page = 8 | isbn = 978-1-4419-9862-0 }}</ref> जिससे कोशिका विभाजन की दिशा स्पष्ट रूप से निर्धारित हो जाती है।
इस वलय का निर्माण एक सुव्यवस्थित और क्रमबद्ध घटनाक्रम का अनुसरण करता है, जिसमें सर्वप्रथम विभाजन स्थल की सटीक पहचान होती है, तत्पश्चात वलय का निर्माण, उसका क्रमिक संकुचन और अंततः उसका विघटन होता है।<ref name=":0" /> एक्टिन तथा मायोसिन द्वितीय तंतुओं से निर्मित होने के कारण इसे एक्टोमायोसिन वलय कहा जाता है, जो अपनी संरचना और क्रिया के आधार पर एक संकुचनशील तंत्र की भाँति कार्य करता है।<ref>{{cite journal | pmid = 24757001 | year = 2014 | last1 = मुंजल | first1 = ए. | last2 = लेकुइट | first2 = टी. | title = Actomyosin networks and tissue morphogenesis | journal = डेवलपमेंट | volume = 141 | issue = 9 | pages = 1789–1793 | doi = 10.1242/dev.091645 | s2cid = 5257808 | doi-access = free }}</ref> यह वलय संकुचित होकर कोशिका को बीच से विभाजित करने में निर्णायक भूमिका निभाता है, यद्यपि इस संकुचन को प्रेरित करने वाले सटीक आणविक तंत्र अभी भी वैज्ञानिक अनुसंधान का विषय बने हुए हैं।<ref>{{cite journal | pmid = 23931302 | year = 2013 | last1 = मेंडेस पिंटो | first1 = आई. | last2 = रुबिनस्टीन | first2 = बी. | last3 = ली | first3 = आर. | title = Force to divide: Structural and mechanical requirements for actomyosin ring contraction | journal = बायोफिज़िकल जर्नल | volume = 105 | issue = 3 | pages = 547–554 | doi = 10.1016/j.bpj.2013.06.033 | pmc = 3736747 | bibcode = 2013BpJ...105..547M }}</ref>
इसके अतिरिक्त, अन्य [[कोशिका कंकाल|कोशिका-कंकाल]] प्रोटीन भी इस वलय की स्थिरता को बनाए रखने<ref>{{cite journal | pmid = 27799371 | year = 2016 | last1 = मार्टिन | first1 = ए. सी. | title = Embryonic ring closure: Actomyosin rings do the two-step | journal = जर्नल ऑफ सेल बायोलॉजी | volume = 215 | issue = 3 | pages = 301–303 | doi = 10.1083/jcb.201610061 | pmc = 5100299 }}</ref> तथा इसके संकुचन की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित ढंग से संचालित करने में महत्त्वपूर्ण योगदान देते हैं।<ref>{{cite journal|last1=Kucera| first1=Ondrej| last2=Siahaan| first2=Valerie| last3=Janda| first3=Daniel| last4=Dijkstra| first4=Sietske H| last5=Pilatova| first5=Eliska | last6=Zatecka| first6=Eva | last7=Diez| first7=Stefan | last8=Braun| first8=Marcus | last9=Lansky| first9=Zdenek |date=2021| title=Anillin propels myosin-independent constriction of actin rings | journal=Nature Communications| volume=12| issue=1| pages=4595| doi=10.1038/s41467-021-24474-1| pmid=34321459| pmc=8319318| bibcode=2021NatCo..12.4595K}}</ref>
कोशिका विभाजन के अतिरिक्त, घाव भरने की प्रक्रिया के दौरान भी संकुचन वलय का संकुचन सक्रिय मिलताहै।<ref>{{cite journal | pmid = 27326928 | year = 2016 | last1 = श्वेयर | first1 = सी. | last2 = सिकोरा | first2 = एम. | last3 = स्लोवाकोवा | first3 = जे. | last4 = कार्दोस | first4 = आर. | last5 = हाइजेनबर्ग | first5 = सी. पी. | title = Actin Rings of Power | journal = विकासात्मक कोशिका| volume = 37 | issue = 6 | pages = 493–506 | doi = 10.1016/j.devcel.2016.05.024 | doi-access = free }}</ref> इस प्रक्रिया में एक्टिन तंतुओं का निम्नीकरण होता है, जिससे वलय की मोटाई संतुलित रहती है। कोशिकाद्रव्य विभाजन पूरा होने के पश्चात्, दोनों संतति कोशिकाओं में से किसी एक को अवशेष के रूप में एक संरचना प्राप्त होती है, जिसे मिडबॉडी वलय कहा जाता है।<ref>{{cite journal | pmid = 22683192 | year = 2012 | last1 = Pelletier | first1 = L. | last2 = Yamashita | first2 = Y. M. | title = Centrosome asymmetry and inheritance during animal development | journal = Current Opinion in Cell Biology | volume = 24 | issue = 4 | pages = 541–546 | doi = 10.1016/j.ceb.2012.05.005 | pmc = 3425708 }}</ref>
अंत्यावस्था के दौरान कोशिका-चक्र काइनेज के सक्रिय होने से खांच (furrow) बनती है, जो अंदर की ओर गति करते हुए एक्टोमायोसिन वलय का संकुचन प्रारंभ करती है। ROCK1 जैसे रो-काइनेज (Rho-kinase) एंजाइम, मायोसिन लाइट चेन (MLC) के फॉस्फोरिलीकरण के माध्यम से इस संकुचन को नियंत्रित करते हैं।<ref>{{cite journal | pmid = 23598717 | year = 2013 | last1 = Shi | first1 = J. | last2 = Surma | first2 = M. | last3 = Zhang | first3 = L. | last4 = Wei | first4 = L. | title = Dissecting the roles of ROCK isoforms in stress-induced cell detachment | journal = Cell Cycle | volume = 12 | issue = 10 | pages = 1492–1900 | doi = 10.4161/cc.24699 | pmc = 3680529 }}</ref> यह तंत्र कोशिकाओं के आपसी संपर्कों और उनकी अखंडता को बढ़ावा देता है, जिससे कोशिका आसंजन (cell adhesion) का निर्माण होता है।
== जीव जगत में भिन्नता ==
[[चित्र:Cytokinesis series of 6.jpg|thumb|चित्र 2. संकुचन वलय कोशिका विभाजन में सहायता के लिए विदलन खांच के निर्माण को प्रेरित करता है।]]
जंतुओं में, यह वलय प्लाज्मा झिल्ली के ठीक अंदर विदलन खांच के साथ बनता है और फिर विच्छेदन द्वारा कोशिका को दो भागों में बाँट देता है।<ref>{{cite journal | pmid = 22781903 | year = 2012 | last1 = Chen | first1 = C. T. | last2 = Hehnly | first2 = H. | last3 = Doxsey | first3 = S. J. | title = Orchestrating vesicle transport, ESCRTs and kinase surveillance during abscission | journal = Nature Reviews. Molecular Cell Biology | volume = 13 | issue = 8 | pages = 483–488 | doi = 10.1038/nrm3395 | pmc = 4215936 }}</ref><ref>{{cite journal | pmid = 22552143 | year = 2012 | last1 = Fededa | first1 = J. P. | last2 = Gerlich | first2 = D. W. | title = Molecular control of animal cell cytokinesis | journal = Nature Cell Biology | volume = 14 | issue = 5 | pages = 440–447 | doi = 10.1038/ncb2482 | s2cid = 3355851 | hdl = 11336/20338 | hdl-access = free }}</ref> [[कवक|कवकों]] में, यह समसूत्री विभाजन से पूर्व मातृ-मुकुल ग्रीवा पर विकसित होता है। कवकीय संकुचन वलय के निर्माण में सेप्टिन (septin) प्रोटीन की अहम भूमिका होती है।<ref>{{cite journal | pmid = 26845196 | year = 2016 | last1 = Meitinger | first1 = F. | last2 = Palani | first2 = S. | title = Actomyosin ring driven cytokinesis in budding yeast | journal = Seminars in Cell & Developmental Biology | volume = 53 | pages = 19–27 | doi = 10.1016/j.semcdb.2016.01.043 | pmc = 4884668 }}</ref> अधिकांश [[जीवाणु|जीवाणुओं]] और कई [[आर्किया]] में, FtsZ से एक समरूप संरचना बनती है, जिसे Z-वलय कहा जाता है।<ref>Alberts, B., A. Johnson, J. Lewis, D. Morgan, M. Raff, K. Roberts, and P. Walter, editors. (2015). Molecular Biology of the Cell, 6th edition. Garland Science: New York. 1464 pp.</ref> [[हरितलवक]] भी FtsZ से ही एक समरूप संरचना का निर्माण करते हैं। यद्यपि ये संरचनाएँ एक्टोमायोसिन से नहीं बनी होती हैं, फिर भी ये संकुचन और कोशिकाद्रव्य विभाजन में बिल्कुल वैसी ही भूमिका निभाती हैं।दूसरी ओर, पादप कोशिकाओं में ऐसा कोई संकुचन वलय नहीं पाया जाता है। इसके स्थान पर, विभाजन तल के केंद्र से एक कोशिका पट्टिका (cell plate) बाहर की ओर तब तक बढ़ती है, जब तक कि वह मौजूदा [[कोशिका भित्ति]] के साथ जुड़ न जाए।<ref>{{cite journal | pmid = 9732290 | year = 1998 | last1 = Bi | first1 = E. | last2 = Maddox | first2 = P. | last3 = Lew | first3 = D. J. | last4 = Salmon | first4 = E. D. | last5 = McMillan | first5 = J. N. | last6 = Yeh | first6 = E. | last7 = Pringle | first7 = J. R. | title = Involvement of an actomyosin contractile ring in Saccharomyces cerevisiae cytokinesis | journal = The Journal of Cell Biology | volume = 142 | issue = 5 | pages = 1301–1312 | doi = 10.1083/jcb.142.5.1301 | pmc = 2149343 }}</ref>
== इन्हें भी देखें ==
* [[सैक्रोमाइसीज़ सेरेविसी]]
== सन्दर्भ ==
{{Reflist}}
[[श्रेणी:कोशिका]]
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शेत
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The Sorter
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text/x-wiki
{{Infobox person|name=शेत|image=Spas na Ilyine - Patriarch Seth 2 (cropped).jpg|caption=[[थियोपेन्स यूनानी]] द्वारा फ़्रेस्को, 1378|death_date=3070 ई.पू. (आयु 912)|death_place=|other_names=|birth_date=3982 ई.पू.|occupation=|relatives=[[हाबील]] (भाई)<br>[[कैन]] (भाई)<br>[[एनोश]] (बेटा)<br>[[केनान]] (great-grandson)<br>[[महललेल]] (great-great-grandson)<br>[[येरेद]] (great-great-great-grandson)<br>[[हनोक]] (great-great-great-great-grandson)<br>[[मतूशेलह]] (great-great-great-great-great-grandson)<br>[[लेमेक]] (great-great-great-great-great-great-grandson)<br>''गत परंपरा के अनुसार:''<br>[[अकलीमा]] (बहन)<br>[[आज़ूरा]] (बहन)|children=[[एनोश]]|native_name_lang=hbo|native_name={{Script/Hebrew|שֵׁת}}}}
{{Infobox saint
| honorific_prefix = [[संत]]
| name = शेत
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| venerated_in = [[ईसाई धर्म]] ([[कैथोलिक गिरजाघर]], [[पूर्वी रूढ़िवादी गिरजाघर]], [[प्राच्य रूढ़िवादी गिरजाघर]])<br /> [[इस्लाम]]<br /> [[द्रूज़]]<br />
[[बहाई धर्म]]<br /> [[मनदाई धर्म]]<br />
| feast_day = 31 दिसंबर ([[कैथोलिक गिरजाघर]]) <br/> [[पवित्र पूर्वजों का रविवार]] ([[पूर्वी रूढ़िवादी गिरजाघर]])
}}
'''शेत''' ({{Langx|hbo|שֵׁת}}, {{Langx|grc|Σήθ}}) [[इब्राहीमी धर्मों]] में [[आदम]] और [[हव्वा]] का तीसरा बेटा है। वह [[हाबील]] और [[कैन]] का भाई है। उत्पत्ति 4:25 के अनुसार, शेत का जन्म हाबील की हत्या के बाद हुआ था और हव्वा मानी कि वह हाबील की जगह लेगा।
== बाइबिल में ==
[[उत्पत्ति पुस्तक|उत्पत्ति की पुस्तक]] के अनुसार, जब आदम 130 वर्ष का था, "उसकी समानता में उस ही स्वरूप के अनुसार" एक पुत्र का जन्म हुआ। आदम 930 वर्ष तक जीया तथा उसके "और भी बेटे बेटियां" हुए। शेत की मृत्यु 912 वर्ष की आयु में हुई थी।<ref>{{bibleverse|Genesis|5:8|HE}}</ref>
शेत की वंशावली [https://www.wordproject.org/bibles/in/13/1.htm 1 इतिहास 1:1–3] में दोहराई गई है।
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मल्ल (बहुविकल्पी)
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अनुनाद सिंह
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text/x-wiki
'''मल्ल''' शब्द का संस्कृत में शाब्दिक अर्थ '''योद्धा''' होता है। विकिपीडिया पर मल्ल शब्द से निम्नलिखित कई अन्य अर्थ सूचित हो सकते हैं:
* [[मल्लयुद्ध]] में निपुण योद्धा।
* [[मल्ल महाजनपद]] - प्राचीन भारत के 16 [[महाजनपद|महाजनपदों]] में से एक।
* [[मल्ल राजवंश]] - [[नेपाल]] का एक राजवंश जिसने 12वीं सदी से 18वीं सदी तक राज्य किया।
* [[मल्ल राज्य]] - [[रामायण]] और [[महाभारत]] आदि महाकाव्यों में वर्णित एक राज्य।
* भारत और नेपाल के अनेक भागों में प्रयुक्त '''उपाधि''' (सरनेम) -- जैसे [[अरि मल्ल]], [[अमरनाथ मल्ल]], [[देव्न्द्र मल्ल]] आदि।
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अनुनाद सिंह
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text/x-wiki
'''मल्ल''' शब्द का संस्कृत में शाब्दिक अर्थ '''योद्धा''' होता है। विकिपीडिया पर मल्ल शब्द से निम्नलिखित कई अन्य अर्थ सूचित हो सकते हैं:
* [[मल्लयुद्ध]] में निपुण योद्धा।
* [[मल्ल महाजनपद]] - प्राचीन भारत के 16 [[महाजनपद|महाजनपदों]] में से एक।
* [[मल्ल राजवंश]] - [[नेपाल]] का एक राजवंश जिसने 12वीं सदी से 18वीं सदी तक राज्य किया।
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अनुनाद सिंह
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text/x-wiki
'''मल्ल''' शब्द का संस्कृत में शाब्दिक अर्थ '''योद्धा''' होता है। विकिपीडिया पर मल्ल शब्द से निम्नलिखित कई अन्य अर्थ सूचित हो सकते हैं:
* [[मल्लयुद्ध]] में निपुण योद्धा।
* [[मल्ल महाजनपद]] - प्राचीन भारत के 16 [[महाजनपद|महाजनपदों]] में से एक।
* [[मल्ल राजवंश]] - [[नेपाल]] का एक राजवंश जिसने 12वीं सदी से 18वीं सदी तक राज्य किया।
* [[मल्ल राज्य]] - [[रामायण]] और [[महाभारत]] आदि महाकाव्यों में वर्णित एक राज्य।
* [[भारत]] और [[नेपाल]] के अनेक भागों में प्रयुक्त '''उपनाम''' (सरनेम) -- जैसे [[अरि मल्ल]], [[अमरनाथ मल्ल]], [[देवेन्द्र मल्ल]] आदि।
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साँचा:भारतीय स्वतंत्रता का क्रांतिकारी आन्दोलन
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अनुनाद सिंह
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अनुनाद सिंह
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* [[अनुशीलन समिति]]
* [[बंगाल के स्वयंसेवक]]
* [[बर्लिन समिति]]
* [[कम्युनिस्ट युनिटी]]
* [[ढाका अनुशीलन समिति]]
* [[गदर पार्टी]]
* [[हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन]]
* [[इण्डिया हाउस]]
* [[युगान्तर]]
* [[नौजवान भारत सभा]]
* [[पेरिस इंडियन सोसायटी]]
* [[श्रमिक एवं कृषक दल (भारत)|श्रमिक एवं कृषक दल]]
| group2 = लोक
| list2 =
* [[अविनाशचन्द्र भट्टाचार्य]]
* [[अम्बिका चक्रवर्ती]]
* [[अजय घोष]]
* [[अल्लूरी सीताराम राजू|अल्लुरि सीताराम राजू]]
* [[अनन्त कान्हेरे|अनन्त लक्ष्मण कान्हेरे]]
* [[अनन्त सिंह]]
* [[अनन्तहरि मित्र]]
* [[अशफ़ाक़ुल्लाह ख़ाँ]]
* [[अतुलकृष्ण घोष]]
* [[बादल गुप्त]]
* [[बाघा यतीन]]
* [[बैकुण्ठ शुक्ल]]
* [[बनवारी लाल|बनोवारी लाल]]
* [[बसन्त कुमार विश्वास]]
* [[बसावन सिंह|बाछावन सिंह]]
* [[बटुकेश्वर दत्त]]
* [[विनय बसु]]
* [[भगत सिंह]]
* [[भगवान सिंह ज्ञानी]]
* [[भगवती चरण वोहरा]]
* [[भाई बालमुकुन्द]]
* [[भाई परमानन्द]]
* [[भूपेन्द्र कुमार दत्त]]
* [[भूपेन्द्रनाथ दत्त]]
* [[भवभूषण मित्र]]
* [[वीणा दास]]
* [[बिनोदबिहारी चौधुरी|विनोद बिहारी चौधुरी]]
* [[बिपिन बिहारी गांगुली|विपिन बिहारी गांगुली]]
* [[चेम्पकरामन् पिल्लै]]
* [[चन्द्रशेखर आजाद]]
* [[चित्तप्रिय रायचौधुरी]]
* [[देव गुप्त]]
* [[दिनेश चन्द्र गुप्त|दिनेश गुप्त]]
* [[दुर्गा भाभी|दुर्गावती देवी]]
* [[गणेश दामोदर सावरकर]]
* [[गणेश घोष]]
* [[गया प्रसाद कटियार]]
* [[गुलाब कौर]]
* [[गुर दत्त कुमार]]
* [[लाला हरदयाल]]
* [[हरेकृष्ण कोङार]]
* [[हरिदास दत्त]]
* [[हरिगोपाल बाल]]
* [[हरि किशन तलवार]]
* [[हरनाम सिंह सैनी]]
* [[हेमचन्द्र कानूनगो]]
* [[हेमू कालाणी]]
* [[यदुगोपाल मुखोपाध्याय|यदुगोपाल मुखर्जी]]
* [[यतीन्द्रनाथ दास|यतीन्द्र नाथ दास]]
* [[जीवन घोषाल]]
* [[ज्ञानेन्द्र दास गुप्त]]
* [[योगेश चन्द्र चटर्जी]]
* [[कन्हाई लाल दत्त|कन्हाईलाल दत्त]]
* [[कल्पना दत्त]]
* [[कल्याणी दास]]
* [[कृष्णजी गोपाल कर्वे]]
* [[कर्तार सिंह सराभा]]
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* [[खुदीराम बसु]]
* [[प्रतापसिंह बारहठ|कुँवर प्रताप सिंह बरहठ]]
* [[कुशल कोंवार]]
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* [[मदन लाल ढींगरा]]
* [[महावीर सिंह (क्रांतिकारी)|महावीर सिंह]]
* [[मन्मथनाथ गुप्त]]
* [[मनोरंजन भट्टाचार्य (बिप्लवी)|मनोरंजन भट्टाचार्य]]
* [[मातंगिनी हाजरा]]
* [[मोहित मइत्र]]
* [[मोहन किशोर नामदास]]
* [[मतिलाल राय|मोतीलाल राय]]
* [[म पि टि आचार्य]]
* [[मुकुन्दी लाल|मुकुन्दी लाल]]
* [[मुनशा सिंह दुखी]]
* [[नरेन्द्र मोहन सेन]]
* [[निरालम्ब स्वामी]]
* [[निरंजन सेनगुप्त]]
* [[निर्मल जीवन घोष]]
* [[पण्डित कांशी राम]]
* [[पंचानन चक्रवर्ती]]
* [[पांडुरंग महादेव बापट|पाण्डुरंग महादेव बापट]]
* [[पांडुरंग सदाशिव खानखोजे]]
* [[प्रफुल्ल चाकी]]
* [[प्रमोद रंजन चौधुरी]]
* [[प्रतुल चन्द्र गांगुली]]
* [[प्रद्योत कुमार भट्टाचार्य]]
* [[प्रेमकृष्ण खन्ना|प्रेम कृष्ण खन्ना]]
* [[प्रीतिलता वाद्देदार]]
* [[पुलिन बिहारी दास]]
* [[पृ. भि कुरियन]]
* [[रजत सेन]]
* [[राजेन्द्र लाहिड़ी]]
* [[राम चन्द्र भारद्बाज]]
* [[रामकृष्ण बिश्वास]]
* [[राम प्रसाद बिस्मिल]]
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* [[रासबिहारी बोस]]
* [[रोशन सिंह]]
* [[शचीन्द्र बक्षी]]
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* [[सन्तोष कुमार मित्र]]
* [[सत्येन्द्रनाथ बसु]]
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* [[सोहनलाल पाठक]]
* [[श्री अरविन्द]]
* [[श्रीश पाल]]
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* [[सुखदेव थापर]]
* [[सुनीति चौधुरी]]
* [[सूर्य सेन]]
* [[तारक नाथ दास]]
* [[तारकेश्वर दस्तीदार]]
* [[तारकेश्वर सेनगुप्त]]
* [[केसरी सिंह बारहट|ठाकुर केशरी सिंह बारहट]]
* [[जोरावरसिंह बारहठ|ठाकुर जोरावर सिंह बरहठ]]
* [[उधम सिंह]]
* [[उल्लासकर दत्त]]
* [[वी वी एस ऐय्यर]]
* [[वंचिनाथन]]
* [[वीर भाई कोतवाल]]
* [[विनायक दामोदर सावरकर]]
* [[वीरेन्द्रनाथ चट्टोपाध्याय]]
* [[विष्णु गणेश पिंगले]]
* [[विश्वनाथ वैशम्पायन]]
* [[योगेन्द्र शुक्ल]]
| group3 = प्रकाशन
| list3 =
* [[बन्दे मातरम् (पत्रिका)|बन्दे मातरम्]]
* [[बन्दे मातरम् (पेरिस से प्रकाशित)|बन्दे मातरम् (पेरिस)]]
* [[हिन्दुस्तान ग़दर|हिन्दुस्तान गदर]]
* [[युगान्तर पत्रिका]]
| group4 = अनुष्ठान
| list4 =
* [[अलीपुर बम काण्ड]]
* [[बरिशाल षडयंत्र मामला]]
* [[चटगांव विद्रोह]]
* [[क्रिस्मस दिवस षडयंत्र]]
* [[दिल्ली षड्यंत्र मामला]]
* [[दिल्ली षड़यन्त्र आयोग]]
* [[ग़दर राज्य-क्रांति]]
* [[हिंदू-जर्मन षड्यंत्र]]
* [[हावड़ा-शिवपुर षड्यन्त्र]]
* [[काकोरी कांड]]
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* [[रोड्डा कम्पनी अस्त्र डकैती]]
}}<noinclude>
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[[Category:India templates]]
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अनुनाद सिंह
1634
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wikitext
text/x-wiki
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| name = भारतीय स्वतंत्रता का क्रांतिकारी आन्दोलन
| title = [[भारतीय स्वतंत्रता का क्रांतिकारी आन्दोलन]]
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| group1 = संगठन समूह
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* [[अभिनव भारत सोसायटी]]
* [[अनुशीलन समिति]]
* [[बंगाल के स्वयंसेवक]]
* [[बर्लिन समिति]]
* [[कम्युनिस्ट युनिटी]]
* [[ढाका अनुशीलन समिति]]
* [[गदर पार्टी]]
* [[हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन]]
* [[इण्डिया हाउस]]
* [[युगान्तर]]
* [[नौजवान भारत सभा]]
* [[पेरिस इंडियन सोसायटी]]
* [[श्रमिक एवं कृषक दल (भारत)|श्रमिक एवं कृषक दल]]
| group2 = लोक
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* [[अविनाशचन्द्र भट्टाचार्य]]
* [[अम्बिका चक्रवर्ती]]
* [[अजय घोष]]
* [[अल्लूरी सीताराम राजू|अल्लुरि सीताराम राजू]]
* [[अनन्त कान्हेरे|अनन्त लक्ष्मण कान्हेरे]]
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* [[अनन्तहरि मित्र]]
* [[अशफ़ाक़ुल्लाह ख़ाँ]]
* [[अतुलकृष्ण घोष]]
* [[बादल गुप्त]]
* [[बाघा यतीन]]
* [[बैकुण्ठ शुक्ल]]
* [[बनवारी लाल|बनोवारी लाल]]
* [[बसन्त कुमार विश्वास]]
* [[बसावन सिंह|बाछावन सिंह]]
* [[बटुकेश्वर दत्त]]
* [[विनय बसु]]
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* [[भगवान सिंह ज्ञानी]]
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* [[भाई बालमुकुन्द]]
* [[भाई परमानन्द]]
* [[भूपेन्द्र कुमार दत्त]]
* [[भूपेन्द्रनाथ दत्त]]
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* [[बिनोदबिहारी चौधुरी|विनोद बिहारी चौधुरी]]
* [[बिपिन बिहारी गांगुली|विपिन बिहारी गांगुली]]
* [[चेम्पकरामन् पिल्लै]]
* [[चन्द्रशेखर आजाद]]
* [[चित्तप्रिय रायचौधुरी]]
* [[देव गुप्त]]
* [[दिनेश चन्द्र गुप्त|दिनेश गुप्त]]
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* [[मदन लाल ढींगरा]]
* [[महावीर सिंह (क्रांतिकारी)|महावीर सिंह]]
* [[मन्मथनाथ गुप्त]]
* [[मनोरंजन भट्टाचार्य (बिप्लवी)|मनोरंजन भट्टाचार्य]]
* [[मातंगिनी हाजरा]]
* [[मोहित मइत्र]]
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* [[राजगुरु|शिवराम राजगुरु]]
* [[श्रीश चन्द्र घोष]]
* [[श्यामजी कृष्ण वर्मा]]
* [[सोहन सिंह भकना]]
* [[सोहनलाल पाठक]]
* [[श्री अरविन्द]]
* [[श्रीश पाल]]
* [[सुबोध राय]]
* [[सुखदेव थापर]]
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* [[सूर्य सेन]]
* [[तारक नाथ दास]]
* [[तारकेश्वर दस्तीदार]]
* [[तारकेश्वर सेनगुप्त]]
* [[केसरी सिंह बारहट|ठाकुर केशरी सिंह बारहट]]
* [[जोरावरसिंह बारहठ|ठाकुर जोरावर सिंह बरहठ]]
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* [[उल्लासकर दत्त]]
* [[वी. वी. एस. अय्यर]]
* [[वंचिनाथन]]
* [[वीर भाई कोतवाल]]
* [[विनायक दामोदर सावरकर]]
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* [[विष्णु गणेश पिंगले]]
* [[विश्वनाथ वैशम्पायन]]
* [[योगेन्द्र शुक्ल]]
| group3 = प्रकाशन
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* [[बन्दे मातरम् (पत्रिका)|बन्दे मातरम्]]
* [[बन्दे मातरम् (पेरिस से प्रकाशित)|बन्दे मातरम् (पेरिस)]]
* [[हिन्दुस्तान ग़दर|हिन्दुस्तान गदर]]
* [[युगान्तर पत्रिका]]
| group4 = अनुष्ठान
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* [[अलीपुर बम काण्ड]]
* [[बरिशाल षडयंत्र मामला]]
* [[चटगांव विद्रोह]]
* [[क्रिस्मस दिवस षडयंत्र]]
* [[दिल्ली षड्यंत्र मामला]]
* [[दिल्ली षड़यन्त्र आयोग]]
* [[ग़दर राज्य-क्रांति]]
* [[हिंदू-जर्मन षड्यंत्र]]
* [[हावड़ा-शिवपुर षड्यन्त्र]]
* [[काकोरी कांड]]
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* [[रोड्डा कम्पनी अस्त्र डकैती]]
}}<noinclude>
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[[Category:India templates]]
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स्टोरिको सेरामिका एलएलपी
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| colspan="2" style="text-align: center; font-size: larger; padding: 5px 0;" |'''स्टोरिको सेरामिका एलएलपी'''
|-
| colspan="2" style="text-align: center; padding: 0; background-color: #f9f9f9;" |
|-
| style="width: 30%; padding: 5px;" |'''स्थापना'''
| style="width: 70%; padding: 5px;" |19 दिसंबर 2023
|-
| style="width: 30%; padding: 5px;" |'''प्रकार'''
| style="width: 70%; padding: 5px;" |लिमिटेड लाइबिलिटी पार्टनरशिप
|-
| style="width: 30%; padding: 5px;" |'''उद्योग'''
| style="width: 70%; padding: 5px;" |निखिल नानजीभाई कानानी, शैलेश वालजीभाई घोडासरा, रिद्धि शैलेश घोडासरा
|-
| style="width: 30%; padding: 5px;" |'''संस्थापक'''
| style="width: 70%; padding: 5px;" |
* शैलेश वालजीभाई घोडासरा
* रिद्धि शैलेश घोडासरा
* निखिल नानजीभाई कानानी
|-
| style="width: 30%; padding: 5px;" |'''मुख्यालय'''
| style="width: 70%; padding: 5px;" |राजकोट, गुजरात, भारत
|-
| style="width: 30%; padding: 5px;" |'''उत्पाद'''
| style="width: 70%; padding: 5px;" |पोर्सिलेन टाइल्स, लार्ज फॉर्मेट स्लैब टाइल्स
|-
| style="width: 30%; padding: 5px;" |'''वेबसाइट'''
| style="width: 70%; padding: 5px;" |[https://www.storicoceramica.com/ storicoceramica.com]
|}
'''स्टोरिको सेरामिका एलएलपी''' ({{lang-en|Storico Ceramica LLP}}) भारत की एक सिरेमिक टाइल निर्माण एवं आपूर्ति कंपनी है, जिसकी स्थापना 19 दिसंबर 2023 को हुई थी। कंपनी मुख्य रूप से पोर्सिलेन टाइल्स और बड़े आकार (लार्ज फॉर्मेट) स्लैब टाइल्स के उत्पादन और वितरण में कार्यरत है। इसका मुख्यालय गुजरात के राजकोट में स्थित है।<ref>{{Cite web|url=https://www.business-tweet.com/business/from-morbi-to-the-world-inside-storico-ceramicas-growth-journey/|title=From Morbi to the World: Inside Storico Ceramica’s Growth Journey|last=Tripathi|first=Rohit|date=2026-03-26|website=Business Tweet|language=en-US|access-date=2026-05-02}}</ref><ref name=":0">{{Cite web|url=https://www.thehindubusinessline.com/companies/ceramic-industry-expects-demand-to-pick-up-post-west-asia-war/article70912141.ece|title=Ceramic industry expects demand to pick up post-West Asia war|last=Bureau|first=BL Mumbai|date=2026-04-27|website=BusinessLine|language=en|access-date=2026-05-02}}</ref>
== स्थापना और संस्थापक ==
स्टोरिको सेरामिका एलएलपी की स्थापना शैलेश वालजीभाई घोडासरा, रिद्धि शैलेश घोडासरा और निखिल नानजीभाई कानानी द्वारा की गई थी। कंपनी का उद्देश्य आधुनिक निर्माण और इंटीरियर डिजाइन के लिए उच्च गुणवत्ता वाली सिरेमिक टाइल्स उपलब्ध कराना है।<ref>{{Cite web|url=https://www.livemint.com/focus/how-indian-tile-brands-like-storico-ceramica-are-redefining-global-expectations-11775108932403.html|title=How Indian Tile Brands Like Storico Ceramica Are Redefining Global Expectations|last=Focus|date=2026-04-02|website=mint|language=en|access-date=2026-05-02}}
</ref>
== उत्पाद ==
कंपनी निम्नलिखित उत्पादों में विशेषज्ञता रखती है:
* पोर्सिलेन टाइल्स<ref>https://www.business-standard.com/content/specials/why-indian-tile-manufacturers-are-moving-from-volume-to-value-126040700824_1.html</ref>
* लार्ज फॉर्मेट स्लैब टाइल्स
ये उत्पाद आवासीय, वाणिज्यिक और औद्योगिक परियोजनाओं में उपयोग किए जाते हैं।<ref name=":0" />
== मुख्यालय ==
कंपनी का पंजीकृत कार्यालय निम्न पते पर स्थित है: ऑफिस नं. A-1307, आरके आइकोनिक, 150 फीट रिंग रोड, शीतल पार्क के पास, राजकोट, गुजरात, भारत।<ref>{{Cite web|url=https://www.mid-day.com/buzz/article/how-indian-manufacturers-are-strengthening-their-global-position-in-the-tile-export-market-9424|title=How Indian Manufacturers Are Strengthening Their Global Position in the Tile Export Market|website=Mid-day|access-date=2026-05-02}}</ref>
== बाहरी कड़ियाँ ==
* [https://www.storicoceramica.com/ आधिकारिक वेबसाइट]
== संदर्भ ==
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प्रतुलचन्द्र गांगुली
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2026-05-02T12:46:10Z
अनुनाद सिंह
1634
/* क्रांतिकारी जीवन */
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text/x-wiki
{{ज्ञानसन्दूक व्यक्ति|name=प्रतुलचन्द्र गाङ्गुली|image=[[File:Revolutionary Pratul Ganguly.jpg|thumb|महान क्रान्तिकारी '''प्रतुलचन्द्र गाङ्गुली''']]|caption=प्रतुलचन्द्र गांगुली|birth_name=|birth_date=16 अप्रैल 1894|birth_place=चालताबाड़ी ग्राम, चांदपुर, [[नारायणगंज]] (इस समय [[बांग्लादेश]] में)|death_date=५ जुलाई १९५७|death_place=[[कोलकाता]]|death_cause=|Body_discovered=|resting_place=|resting_place_coordinates=|burial_place=|burial_coordinates=|residence=|ethnicity=[[बंगाली]]|nationality=भारतीय|religion=[[हिन्दू]]|other_names=|citizenship=[[भारतीय]] <br />[[भारत]] |education=|alma_mater=|occupation=|years_active=|employer=|known_for=[[ब्रिटिश विरोधी स्वतंत्रता आन्दोलन]] के नायक|home_town=|salary=|height=|weight=|title=|term=|predecessor=|successor=|party=स्वाधीनता के पूर्व [[अनुशीलन समिति]], [[भारतीय राष्ट्रीय कंग्रेस]],|boards=|criminal_charge=|spouse=|partner=|children=|parents=|relatives=|callsign=|awards=|website=|signature=|footnotes=}}
'''प्रतुल चंद्र गांगुली''' (जन्म 16 अप्रैल 1894 - मृत्यु 5 जुलाई 1957) [[भारतीय उपमहाद्वीप|भारतीय उपमहाद्वीप के]] [[भारतीय स्वतन्त्रता आन्दोलन|ब्रिटिश विरोधी स्वतंत्रता आंदोलन में]] एक प्रमुख क्रांतिकारी थे।
== आरंभिक जीवन ==
प्रतुल चंद्र गांगुली का जन्म बंगाल के [[नारायणगंज]] के [[चांदपुर]] के पास चालताबाड़ी गांव में अपने मामा के घर हुआ था। विद्यार्थी जीवन के दौरान ही उन्होंने [[अनुशीलन समिति]] की नारायणगंज शाखा में अपने क्रांतिकारी जीवन की शुरुआत की। उन्होंने अपनी लगन और मेहनत से एक नेता के रूप में अपनी पहचान बनाई। 1908-09 में उन्होंने अपने क्रांतिकारी प्रयासों को विस्तार देने के लिए घर छोड़ दिया।
== क्रांतिकारी जीवन ==
अनुशीलन समिति की [[ढाका]] शाखा के मुख्य आयोजक [[पुलिन बिहारी दास]] की गिरफ्तारी के बाद, प्रतुल चंद्र गांगुली और [[त्रैलोक्यनाथ चक्रवर्ती]] ने अनुशीलन समिति का कार्यभार संभाला और समिति का पुनर्गठन किया। 1914 में [[बरिशाल षडयंत्र मामला|बरिशाल षडयंत्र मामले]] में उन पर अभियोग चला और उन्हें दस वर्ष की जेल की सजा सुनाई गई। परन्तु १० वर्ष की अवधि पूरी होने के पहले ही उन्हें छोड़ दिया गया था और 1924 में फिर से गिरफ्तार किया गया था।
वे ढाका जिला कांग्रेस समिति, बंगाल कांग्रेस समिति और अखिल भारतीय कांग्रेस समिति के अध्यक्ष बने।<ref>{{Cite web|url=https://peoplepill.com/people/pratul-chandra-ganguli/|title=Pratul Chandra Ganguli: Indian revolutionary (1884-1957) - Biography and Life|last=PeoplePill|website=peoplepill.com|language=en-US|access-date=2020-03-28}}</ref> 1929 में वे ढाका शहर से बंगाल विधानसभा के लिए चुने गए थे। 1930 में उन्होंने राजशाही में बंगाल प्रांतीय कांग्रेस के सम्मेलन की अध्यक्षता की। उन्हें पुनः गिरफ्तार किया गया और 1938 तक बिना मुकदमे के हिरासत में रखा गया। 1939 में पूर्वी बंगाल नगरपालिका निर्वाचन क्षेत्र से एम० एल० ए० चुने गए। जेल में उनका स्वास्थ्य बिगड़ गया। उन्होंने जेल में अनशन किया जिसका साथ सुभाष चंद्र बोस ने भी दिया। इसके बाद उन्हें रिहा कर दिया गया। इसके बाद सुभाष चंद्र के छिपकर भारत से बाहर बच निकलने पर उन्हें फिर से गिरफ्तार कर लिया गया और 1946 तक विभिन्न जेलों में कैद रखा गया। 1947 में भारत के विभाजन के बाद, वे कलकत्ता आ गये और १९५७ में अपनी मृत्यु तक वहीं रहे।<ref name="সংসদ">সুবোধ সেনগুপ্ত ও অঞ্জলি বসু সম্পাদিত, ''সংসদ বাঙালি চরিতাভিধান'', প্রথম খণ্ড, সাহিত্য সংসদ, কলকাতা, নভেম্বর ২০১৩, পৃষ্ঠা ২৯২, {{ISBN|978-81-7955-135-6}}</ref>
==सन्दर्भ==
{{टिप्पणीसूची}}
{{भारतीय स्वतंत्रता का क्रांतिकारी आन्दोलन}}
[[श्रेणी:1884 में जन्मे लोग]]
[[श्रेणी:१९५७ में निधन]]
[[श्रेणी:1894 में जन्मे लोग]]
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अतुलकृष्ण घोष
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अनुनाद सिंह
1634
"[[:bn:Special:Redirect/revision/8695372|অতুলকৃষ্ণ ঘোষ]]" पृष्ठ का अनुवाद करके निर्मित किया गया
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== आरंभिक जीवन ==
अतुलकृष्ण का जन्म 1890 में बंगाल के [[नदिया जिला|नदिया जिले]] [[कुश्तिया|के कुश्तिया में]] स्थित एतामामपुर-जादुबोयरा गाँव में एक बंगाली हिंदू मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ था। उनके माता-पिता तारेष चंद्र और बिनोदिनी देवी थे। इस दंपति के छह बच्चे थे। कुमारखाली में प्राथमिक शिक्षा प्राप्त करने के बाद, उन्होंने 1909 में [[कोलकाता|कलकत्ता]] [[हिन्दू स्कूल, कोलकाता|हिंदू स्कूल]] से प्रवेश परीक्षा, 1911 में स्कॉटिश चर्च कॉलेज से इंटरमीडिएट और 1913 में बरहामपुर के कृष्णनाथ कॉलेज से बीएससी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने कलकत्ता के प्रेसिडेंसी कॉलेज में एमएससी की पढ़ाई शुरू की, लेकिन राजनीतिक आंदोलन में सक्रिय होने के कारण उन्होंने कॉलेज छोड़ दिया।
== सशस्त्र आंदोलन ==
सन 1906 में वे अपने गाँव के साथी नलिनीकान्त कर के साथ यतीन्द्रनाथ मुखर्जी के अनुयायी बन गए। वे दोनों स्थानीय अनुशीलन समिति में शामिल हो गए। डब्ल्यू. सेली की रिपोर्ट के अनुसार, अतुलकृष्ण घोष और नलिनिकांत कर दोनों ने खतरनाक महत्वपूर्ण बंदूकें चलाना सीखा। (पृष्ठ 23) अतुल ने पातालडांगा में अनुशीलन समिति से आत्मरक्षा के लिए विशेष प्रशिक्षण प्राप्त किया।
अतुलकृष्ण घोष और जितेंद्रनाथ मुखर्जी ने पथुरियाघाट व्यायाम समिति की स्थापना की जो भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के सशस्त्र क्रांति का एक महत्वपूर्ण केंद्र था। जेल के अंदर, जितेंद्रनाथ को विदेशों में अपने राजदूतों से पता चला कि [[जर्मनी]] ग्रेट ब्रिटेन के खिलाफ युद्ध की तैयारी कर रहा है। 1911 में अपनी रिहाई के बाद, जितेंद्रनाथ ने सभी कट्टरपंथी गतिविधियों को निलंबित कर दिया, और अतुलकृष्ण ने सशस्त्र क्रांति के लिए सभी राजनीतिक दलों को एकजुट करने की प्रमुख जिम्मेदारी ली।
== यतीन्द्रनाथ मुखर्जी के साथ क्रांतिकारी गतिविधियाँ ==
कोलकाता की पूरी जिम्मेदारी अतुलकृष्ण घोष को सौंपकर और पुलिस को ठेंगा दिखाते हुए यतीन्द्र अपने पैतृक घर [[झेनईदह जिला|झेनाइदाह]] पहुँच गये। वहाँ उनने जेस्सोर-झेनाइदाह रेलवे लाइन के निर्माण के लिए ठेकेदारी का व्यवसाय शुरू किया। इस व्यवसाय के चलते वह साइकिल या घोड़े पर सवार होकर जिले-जिले घूमते रहे और अथक परिश्रम से गुप्त संगठन की शाखाएँ स्थापित करता रहा।
[[श्रेणी:१९६६ में निधन]]
[[श्रेणी:1890 में जन्मे लोग]]
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{{ज्ञानसन्दूक व्यक्ति|name=अतुलकृष्ण घोष|image=ATULKRISHNA GHOSE.JPG|caption=अतुलकृष्ण घोष|birth_name=|birth_place=ऐतमामपुर, [[यदुबयरा]], [[कुष्टिया]], [[भारत]] (वर्तमान समय में [[बांग्लादेश]] में)|birth_date=১৮৯০,|death_date=৪ মে ১৯৬৬|death_place=[[कोलकाता]] [[पश्चिम बंगाल]] , [[भारत]]|death_cause=|Body_discovered=|resting_place=|resting_place_coordinates=|burial_place=|burial_coordinates=|residence=|ethnicity=[[बंगाली]] [[बांग्लादेशी]]|nationality=|religion=[[हिन्दू]]|other_names=|citizenship=[[ब्रितानी भारतीय]] (१९४७ तक)<br />[[पाकिस्तान]] (১৯৬৪ तक)<br/>[[भारत]]|education=एस०एस०सी|alma_mater=|occupation=राजनेता|years_active=|employer=|known_for=ब्रिटिश विरोधी स्वाधीनता आन्दोलन के क्रान्तिकारी|home_town=|salary=|height=|weight=|title=|term=|predecessor=|successor=|party=स्वाधीनता के पहले [[युगान्तर दल]]|boards=|criminal_charge=|spouse=|partner=|children=|parents=|relatives=|callsign=|awards=|website=|signature=|footnotes=}}'''अतुलकृष्ण घोष''' (1890 – 4 मई 1966) <ref>{{Cite news|url=http://www.sahos24.com/history-and-traditions/20878/%E0%A7%AA-%E0%A6%AE%E0%A7%87-%E0%A6%87%E0%A6%A4%E0%A6%BF%E0%A6%B9%E0%A6%BE%E0%A6%B8%E0%A7%87%E0%A6%B0-%E0%A6%8F%E0%A6%87-%E0%A6%A6%E0%A6%BF%E0%A6%A8%E0%A7%87|title=৪ মে: ইতিহাসের এই দিনে|date=4 May 2017|work=Sahos 24|access-date=24 July 2017|archive-url=https://web.archive.org/web/20170611225131/http://www.sahos24.com/history-and-traditions/20878/%E0%A7%AA-%E0%A6%AE%E0%A7%87-%E0%A6%87%E0%A6%A4%E0%A6%BF%E0%A6%B9%E0%A6%BE%E0%A6%B8%E0%A7%87%E0%A6%B0-%E0%A6%8F%E0%A6%87-%E0%A6%A6%E0%A6%BF%E0%A6%A8%E0%A7%87|archive-date=১১ জুন ২০১৭}}</ref> एक [[भारत के लोग|भारतीय]] क्रांतिकारी, [[अनुशीलन समिति]] के सदस्य और [[युगान्तर|युगान्तर दल]] के नेता थे। [[प्रथम विश्व युद्ध|प्रथम विश्वयुद्ध]] के समय वे [[हिंदू-जर्मन षड्यंत्र|हिंदू-जर्मन हथियार षड्यंत्र]] में शामिल थे।
== आरंभिक जीवन ==
अतुलकृष्ण का जन्म 1890 में बंगाल के [[नदिया जिला|नदिया जिले]] [[कुश्तिया|के कुश्तिया में]] स्थित एतामामपुर-जादुबोयरा गाँव में एक बंगाली हिंदू मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ था। उनके माता-पिता तारेष चंद्र और बिनोदिनी देवी थे। इस दंपति के छह बच्चे थे। कुमारखाली में प्राथमिक शिक्षा प्राप्त करने के बाद, उन्होंने 1909 में [[कोलकाता|कलकत्ता]] [[हिन्दू स्कूल, कोलकाता|हिंदू स्कूल]] से प्रवेश परीक्षा, 1911 में स्कॉटिश चर्च कॉलेज से इंटरमीडिएट और 1913 में बरहामपुर के कृष्णनाथ कॉलेज से बीएससी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने कलकत्ता के प्रेसिडेंसी कॉलेज में एमएससी की पढ़ाई शुरू की, लेकिन राजनीतिक आंदोलन में सक्रिय होने के कारण उन्होंने कॉलेज छोड़ दिया।
== सशस्त्र आंदोलन ==
सन 1906 में वे अपने गाँव के साथी नलिनीकान्त कर के साथ यतीन्द्रनाथ मुखर्जी के अनुयायी बन गए। वे दोनों स्थानीय अनुशीलन समिति में शामिल हो गए। डब्ल्यू. सेली की रिपोर्ट के अनुसार, अतुलकृष्ण घोष और नलिनिकांत कर दोनों ने खतरनाक महत्वपूर्ण बंदूकें चलाना सीखा। (पृष्ठ 23) अतुल ने पातालडांगा में अनुशीलन समिति से आत्मरक्षा के लिए विशेष प्रशिक्षण प्राप्त किया।
अतुलकृष्ण घोष और जितेंद्रनाथ मुखर्जी ने पथुरियाघाट व्यायाम समिति की स्थापना की जो भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के सशस्त्र क्रांति का एक महत्वपूर्ण केंद्र था। जेल के अंदर, जितेंद्रनाथ को विदेशों में अपने राजदूतों से पता चला कि [[जर्मनी]] ग्रेट ब्रिटेन के खिलाफ युद्ध की तैयारी कर रहा है। 1911 में अपनी रिहाई के बाद, जितेंद्रनाथ ने सभी कट्टरपंथी गतिविधियों को निलंबित कर दिया, और अतुलकृष्ण ने सशस्त्र क्रांति के लिए सभी राजनीतिक दलों को एकजुट करने की प्रमुख जिम्मेदारी ली।
== जितेंद्रनाथ मुखर्जी के साथ क्रांतिकारी कार्रवाई ==
कोलकाता की पूरी जिम्मेदारी अतुलकृष्ण घोष को सौंपकर और पुलिस को ठेंगा दिखाते हुए यतीन्द्र अपने पैतृक घर [[झेनईदह जिला|झेनाइदाह]] पहुँच गये। वहाँ उनने जेस्सोर-झेनाइदाह रेलवे लाइन के निर्माण के लिए ठेकेदारी का व्यवसाय शुरू किया। इस व्यवसाय के चलते वह साइकिल या घोड़े पर सवार होकर जिले-जिले घूमते रहे और अथक परिश्रम से गुप्त संगठन की शाखाएँ स्थापित करता रहा।
[[श्रेणी:१९६६ में निधन]]
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== आरंभिक जीवन ==
अतुलकृष्ण का जन्म 1890 में बंगाल के [[नदिया जिला|नदिया जिले]] [[कुश्तिया|के कुश्तिया में]] स्थित एतामामपुर-जादुबोयरा गाँव में एक बंगाली हिंदू मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ था। उनके माता-पिता तारेष चंद्र और बिनोदिनी देवी थे। इस दंपति के छह बच्चे थे। कुमारखाली में प्राथमिक शिक्षा प्राप्त करने के बाद, उन्होंने 1909 में [[कोलकाता|कलकत्ता]] [[हिन्दू स्कूल, कोलकाता|हिंदू स्कूल]] से प्रवेश परीक्षा, 1911 में स्कॉटिश चर्च कॉलेज से इंटरमीडिएट और 1913 में बरहामपुर के कृष्णनाथ कॉलेज से बीएससी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने कलकत्ता के प्रेसिडेंसी कॉलेज में एमएससी की पढ़ाई शुरू की, लेकिन राजनीतिक आंदोलन में सक्रिय होने के कारण उन्होंने कॉलेज छोड़ दिया।
== सशस्त्र आंदोलन ==
सन 1906 में वे अपने गाँव के साथी नलिनीकान्त कर के साथ यतीन्द्रनाथ मुखर्जी के अनुयायी बन गए। वे दोनों स्थानीय अनुशीलन समिति में शामिल हो गए। डब्ल्यू. सेली की रिपोर्ट के अनुसार, अतुलकृष्ण घोष और नलिनिकांत कर दोनों ने खतरनाक महत्वपूर्ण बंदूकें चलाना सीखा। (पृष्ठ 23) अतुल ने पातालडांगा में अनुशीलन समिति से आत्मरक्षा के लिए विशेष प्रशिक्षण प्राप्त किया।
अतुलकृष्ण घोष और जितेंद्रनाथ मुखर्जी ने पथुरियाघाट व्यायाम समिति की स्थापना की जो भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के सशस्त्र क्रांति का एक महत्वपूर्ण केंद्र था। जेल के अंदर, जितेंद्रनाथ को विदेशों में अपने राजदूतों से पता चला कि [[जर्मनी]] ग्रेट ब्रिटेन के खिलाफ युद्ध की तैयारी कर रहा है। 1911 में अपनी रिहाई के बाद, जितेंद्रनाथ ने सभी कट्टरपंथी गतिविधियों को निलंबित कर दिया, और अतुलकृष्ण ने सशस्त्र क्रांति के लिए सभी राजनीतिक दलों को एकजुट करने की प्रमुख जिम्मेदारी ली।
== जितेंद्रनाथ मुखर्जी के साथ क्रांतिकारी कार्रवाई ==
कोलकाता की पूरी जिम्मेदारी अतुलकृष्ण घोष को सौंपकर और पुलिस को ठेंगा दिखाते हुए यतीन्द्र अपने पैतृक घर [[झेनईदह जिला|झेनाइदाह]] पहुँच गये। वहाँ उनने जेस्सोर-झेनाइदाह रेलवे लाइन के निर्माण के लिए ठेकेदारी का व्यवसाय शुरू किया। इस व्यवसाय के चलते वह साइकिल या घोड़े पर सवार होकर जिले-जिले घूमते रहे और अथक परिश्रम से गुप्त संगठन की शाखाएँ स्थापित करता रहा।
{{टिप्पणीसूची}}
{{भारतीय स्वतंत्रता का क्रांतिकारी आन्दोलन}}
[[श्रेणी:१९६६ में निधन]]
[[श्रेणी:1890 में जन्मे लोग]]
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== आरंभिक जीवन ==
अतुलकृष्ण का जन्म 1890 में बंगाल के [[नदिया जिला|नदिया जिले]] [[कुश्तिया|के कुश्तिया में]] स्थित एतामामपुर-जादुबोयरा गाँव में एक बंगाली हिंदू मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ था। उनके माता-पिता तारेष चंद्र और बिनोदिनी देवी थे। इस दंपति के छह बच्चे थे। कुमारखाली में प्राथमिक शिक्षा प्राप्त करने के बाद, उन्होंने 1909 में [[कोलकाता|कलकत्ता]] [[हिन्दू स्कूल, कोलकाता|हिंदू स्कूल]] से प्रवेश परीक्षा, 1911 में स्कॉटिश चर्च कॉलेज से इंटरमीडिएट और 1913 में बरहामपुर के कृष्णनाथ कॉलेज से बीएससी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने कलकत्ता के प्रेसिडेंसी कॉलेज में एमएससी की पढ़ाई शुरू की, लेकिन राजनीतिक आंदोलन में सक्रिय होने के कारण उन्होंने कॉलेज छोड़ दिया।
== सशस्त्र आंदोलन ==
सन 1906 में वे अपने गाँव के साथी नलिनीकान्त कर के साथ यतीन्द्रनाथ मुखर्जी के अनुयायी बन गए। वे दोनों स्थानीय अनुशीलन समिति में शामिल हो गए। डब्ल्यू. सेली की रिपोर्ट के अनुसार, अतुलकृष्ण घोष और नलिनिकांत कर दोनों ने खतरनाक महत्वपूर्ण बंदूकें चलाना सीखा। (पृष्ठ 23) अतुल ने पातालडांगा में अनुशीलन समिति से आत्मरक्षा के लिए विशेष प्रशिक्षण प्राप्त किया।
अतुलकृष्ण घोष और जितेंद्रनाथ मुखर्जी ने पथुरियाघाट व्यायाम समिति की स्थापना की जो भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के सशस्त्र क्रांति का एक महत्वपूर्ण केंद्र था। जेल के अंदर, जितेंद्रनाथ को विदेशों में अपने राजदूतों से पता चला कि [[जर्मनी]] ग्रेट ब्रिटेन के खिलाफ युद्ध की तैयारी कर रहा है। 1911 में अपनी रिहाई के बाद, जितेंद्रनाथ ने सभी कट्टरपंथी गतिविधियों को निलंबित कर दिया, और अतुलकृष्ण ने सशस्त्र क्रांति के लिए सभी राजनीतिक दलों को एकजुट करने की प्रमुख जिम्मेदारी ली।
== जितेंद्रनाथ मुखर्जी के साथ क्रांतिकारी कार्रवाई ==
कोलकाता की पूरी जिम्मेदारी अतुलकृष्ण घोष को सौंपकर और पुलिस को ठेंगा दिखाते हुए यतीन्द्र अपने पैतृक घर [[झेनईदह जिला|झेनाइदाह]] पहुँच गये। वहाँ उनने जेस्सोर-झेनाइदाह रेलवे लाइन के निर्माण के लिए ठेकेदारी का व्यवसाय शुरू किया। इस व्यवसाय के चलते वह साइकिल या घोड़े पर सवार होकर जिले-जिले घूमते रहे और अथक परिश्रम से गुप्त संगठन की शाखाएँ स्थापित करता रहा।
==सन्दर्भ==
{{टिप्पणीसूची}}
{{भारतीय स्वतंत्रता का क्रांतिकारी आन्दोलन}}
[[श्रेणी:१९६६ में निधन]]
[[श्रेणी:1890 में जन्मे लोग]]
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कृष्णजी गोपाल कर्वे
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अनुनाद सिंह
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"[[:en:Special:Redirect/revision/1122248454|Krishnaji Gopal Karve]]" पृष्ठ का अनुवाद करके निर्मित किया गया
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{{ज्ञानसन्दूक व्यक्ति|name=कृष्णजी गोपाल कर्वे|image=Revolutionary Krishna Karve.jpg|caption=कृष्णजी गोपाल कर्वे|birth_date=1887|birth_place=[[नासिक]], बम्बई प्रेसीडेन्सी|death_date={{death date and age|df=yes|1910|4|19|1887|1|11}}|death_place=[[ठाणे]], भारत|death_cause=फाँसी पर लटकाना|other_names=अन्ना कर्वे|known_for=[[भारतीय स्वतंत्रता का सशस्त्र आन्दोलन]]|education=[[कला स्नातक]]}}
'''कृष्णजी गोपाल कर्वे''' (1887-19 अप्रैल 1910) एक भारतीय स्वतंत्रता सेनानी एवं अंग्रेज-विरोधी [[भारतीय स्वतंत्रता का क्रांतिकारी आन्दोलन|क्रांतिकारी]] थे। वे [[नाशिक|नासिक]] में [[अभिनव भारत सोसायटी]] के सदस्य थे। 21 दिसंबर 1909 को उन्होंने [[अनन्त कान्हेरे|अनंत लक्ष्मण कन्हेरे]] और '''विनायक नारायण देशपांडे''' के साथ मिलकर नासिक के कलेक्टर जैक्सन को गोली मार दी। उन्हें बॉम्बे उच्च न्यायालय में मौत की सजा सुनाई गई और 19 अप्रैल 1910 को ठाणे जेल में फांसी दी गई।
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{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=BqU9AAAAMAAJ&q=%22krishnaji+gopal+karve%22|title=Militant Nationalism in India and Its Socio-religious Background, 1897-1917|last=Majumdar|first=Bimanbehari|date=1966|publisher=General Printers & Publishers|isbn=|location=|page=94|access-date=8 September 2014}}
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{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=9v-cxl3igB8C&q=%22krishnaji+gopal+karve%22|title=Source Material for a History of the Freedom Movement in India: 1885-1920|last=Phatak|first=N.R.|publisher=Government Central Press, Government of India|year=1958|isbn=|location=|pages=390, 394|access-date=8 September 2014}}
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उन्होंने बी. ए. (ऑनर्स) पूरा किया था और मुंबई विश्वविद्यालय में एल. एल. बी. में प्रवेश लिया था।
== संदर्भ ==
[[श्रेणी:1887 में जन्मे लोग]]
[[श्रेणी:१९१० में निधन]]
[[श्रेणी:Articles with hCards]]
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अनुनाद सिंह
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{{ज्ञानसन्दूक व्यक्ति|name=कृष्णजी गोपाल कर्वे|image=Revolutionary Krishna Karve.jpg|caption=कृष्णजी गोपाल कर्वे|birth_date=1887|birth_place=[[नासिक]], बम्बई प्रेसीडेन्सी|death_date={{death date and age|df=yes|1910|4|19|1887|1|11}}|death_place=[[ठाणे]], भारत|death_cause=फाँसी पर लटकाना|other_names=अन्ना कर्वे|known_for=[[भारतीय स्वतंत्रता का सशस्त्र आन्दोलन]]|education=[[कला स्नातक]]}}
'''कृष्णजी गोपाल कर्वे''' (1887-19 अप्रैल 1910) एक भारतीय स्वतंत्रता सेनानी एवं अंग्रेज-विरोधी [[भारतीय स्वतंत्रता का क्रांतिकारी आन्दोलन|क्रांतिकारी]] थे। वे [[नाशिक|नासिक]] में [[अभिनव भारत सोसायटी]] के सदस्य थे। 21 दिसंबर 1909 को उन्होंने [[अनन्त कान्हेरे|अनंत लक्ष्मण कन्हेरे]] और '''[[विनायक नारायण देशपांडे]]''' के साथ मिलकर नासिक के कलेक्टर जैक्सन को गोली मार दी। उन्हें बॉम्बे उच्च न्यायालय में मृत्य्दण्ड दिया गया। 19 अप्रैल 1910 को [[ठाणे]] जेल में फांसी दी गई।
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{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=BqU9AAAAMAAJ&q=%22krishnaji+gopal+karve%22|title=Militant Nationalism in India and Its Socio-religious Background, 1897-1917|last=Majumdar|first=Bimanbehari|date=1966|publisher=General Printers & Publishers|isbn=|location=|page=94|access-date=8 September 2014}}
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{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=9v-cxl3igB8C&q=%22krishnaji+gopal+karve%22|title=Source Material for a History of the Freedom Movement in India: 1885-1920|last=Phatak|first=N.R.|publisher=Government Central Press, Government of India|year=1958|isbn=|location=|pages=390, 394|access-date=8 September 2014}}
</ref>
उन्होंने बी. ए. (ऑनर्स) पूरा किया था और [[मुंबई विश्वविद्यालय]] में एल. एल. बी. में प्रवेश लिया था।
==सन्दर्भ==
{{टिप्पणीसूची}}
{{भारतीय स्वतंत्रता का क्रांतिकारी आन्दोलन}}
[[श्रेणी:1887 में जन्मे लोग]]
[[श्रेणी:१९१० में निधन]]
[[श्रेणी:Articles with hCards]]
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चित्तप्रिय रायचौधुरी
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{{ज्ञानसन्दूक व्यक्ति|name=चित्तप्रिय रायचौधुरी|image=শহীদ চিত্তপ্রিয় রায় চৌধুরী.jpg|caption=महान क्रान्तिकारी '''चित्तप्रिय रायचौधुरी'''|birth_date=६ दिसम्बर १८९४|birth_place=थालिया, [[राजेर उपजिला]], [[मादारीपुर]], [[बंगाल प्रेसीडेन्सी]]<br>(वर्तमान समय में [[बांग्लादेश]] में)|death_date=९ सितम्बर १९१५|death_place=[[बालेश्वर]], [[बंगाल प्रेसीडेन्सी]]|death_cause=सम्मुख युद्ध|other_names=कालो|known_for=भारतीय स्वतंत्रता आन्दोलन}}'''चित्तप्रिय रायचौधुरी''' (1894 - 1915) [[भारतीय उपमहाद्वीप|भारतीय उपमहाद्वीप के]] [[भारतीय स्वतन्त्रता आन्दोलन|ब्रिटिश-विरोधी स्वतंत्रता आंदोलन में]] एक महत्वपूर्ण व्यक्ति और अग्नि युग के क्रांतिकारी थे। वे पूर्णचंद्र दास के नेतृत्व वाली गुप्त क्रांतिकारी संस्था मदारीपुर समिति के सदस्य थे एवं वे पूर्णचंद्र दास के सहयोगी थे। उन्होंने महान क्रांतिकारी [[बाघा जतीन|बाघा जतिन]] के नेतृत्व में बुड़ी बालाम नदी के तट पर हुए आंशिक युद्ध में भाग लिया और आमने-सामने की लड़ाई में वीरगति को प्राप्त हुए। <ref name="সংসদ">সুবোধ সেনগুপ্ত ও অঞ্জলি বসু সম্পাদিত, ''সংসদ বাঙালি চরিতাভিধান'', প্রথম খণ্ড, সাহিত্য সংসদ, কলকাতা, নভেম্বর ২০১৩, পৃষ্ঠা ২২৩, {{ISBN|978-81-7955-135-6}}</ref>
== प्रारंभिक जीवन ==
चित्तप्रिय रायचौधुरी का जन्म 6 दिसंबर 1894 को मदारीपुर के [[राजैर उपज़िला|राजोइर उपजिला के अंतर्गत]] खलिया गांव में एक जमींदार परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम पंचानन रायचौधुरी और माता का नाम सुखदा सुन्दरी देवी था। उनके पिता पंचानन रायचौधुरी मदारीपुर शहर में मानद मजिस्ट्रेट थे। चित्तप्रिय जब थालिया हाई स्कूल और बाद में मदारीपुर हाई स्कूल के छात्र थे तब मदारीपुर समिति के क्रांतिकारी सदस्य बने (1910) । <ref>{{Cite book|title=মাদারীপুর জেলা পরিচিতি|last=জাব্বার মিয়া|first=আবদুল|publisher=মিসেস লীনা জাব্বার|year=১৯৯৪|isbn=|pages=১৬৭}}</ref>
== क्रांतिकारी गतिविधियाँ ==
दिसंबर 1913 में उन्हें फरीदपुर षड्यंत्र मामले में आरोपी के रूप में गिरफ्तार किया गया। उन्होंने पांच महीने जेल में बिताए। जेल से रिहा होने के बाद, 18 फरवरी 1915 को, [[कलकत्ता विश्वविद्यालय|कलकत्ता विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह के दिन,]] उन्होंने कुछ सहयोगियों की मदद से सड़क पर ड्यूटी पर तैनात पुलिस निरीक्षक सुरेश मुखर्जी की हत्या कर दी। क्रांतिकारी [[बाघा जतीन|जतिन मुखर्जी के सहयोगी के रूप में,]] उन्होंने [[जर्मनी]], [[जापान]], [[संयुक्त राज्य अमेरिका|अमेरिका]] और डच इंडीज से हथियार लाने का प्रयास किया। <ref name="সংসদ">সুবোধ সেনগুপ্ত ও অঞ্জলি বসু সম্পাদিত, ''সংসদ বাঙালি চরিতাভিধান'', প্রথম খণ্ড, সাহিত্য সংসদ, কলকাতা, নভেম্বর ২০১৩, পৃষ্ঠা ২২৩, {{ISBN|978-81-7955-135-6}}</ref>
== बुड़ी बालाम नदी के तट पर खण्डयुद्ध ==
7 सितंबर 1915 की देर रात, [[बाघा जतीन|जतिन मुखर्जी]] महलडीह में अपने अस्थायी निवास पर लौट आए। उनके साथ चित्तप्रिय रायचौधुरी, ज्योतिष चंद्र पाल, मनोरंजन सेनगुप्त और नीरेन्द्रनाथ दासगुप्त थे। 8 सितंबर को पूरा दिन गहरे जंगल में बीता। रात भर पैदल चलते हुए, वह 9 सितंबर की सुबह [[बालेश्वर|बालेश्वर के]] बलरामगढ़ी में बुड़ीबालाम (जिसे उड़िया में "बुड्ढाबालाङ्ग" कहा जाता है) नदी के किनारे पहुंचे।<ref>{{Cite web|url=http://m.dailyhunt.in/news/india/bangla/banglahunt-epaper-banhun/raktakt+budibalamer+tire-newsid-81261615|title=রক্তাক্ত বুড়িবালামের তীরে - Banglahunt|website=Dailyhunt|language=en|access-date=2019-08-11}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.enewsbangla.com/2019/04/Spend-some-days-in-simlipal.html|title=গরমের ছুটিতে সিমলিপাল জাতীয় উদ্যানে কয়েকটা দিন|last=giswami|first=Ifsita|website=E News Bangla {{!}} Bengali News Portal|archive-url=https://web.archive.org/web/20190811104913/https://www.enewsbangla.com/2019/04/Spend-some-days-in-simlipal.html|archive-date=২০১৯-০৮-১১|access-date=2019-08-11}}</ref> वहाँ नदी के पार तैरकर पहुँचे और युद्ध के लिए काफी उपयुक्त सूखे दलदल में शरण ले लिया। दूसरी तरफ चार्ल्स टेगर्ट, कमांडर रदरफोर्ड, जिला मजिस्ट्रेट किलवे, कई सशस्त्र पुलिस और सैन्य बलों के साथ दिखाई दिए। खाई के पीछे, बाघा जतिन के नेतृत्व में ये पाँचों थे और इनके हाथ में माउजर पिस्तौल थी। जब गोलीबारी शुरू हुई तो पुलिस की गोलीबारी में चित्तप्रिय घायल हुए एवं वीरगति को प्राप्त हुए। बाद में 16 अक्टूबर 1915 को एक मुकदमे में, मनोरंजन सेनगुप्त और नीरेन्द्रनाथ दासगुप्त को मौत की सजा सुनाई गई। उन दोनों को 3 दिसंबर 1915 को फांसी दी गई। ज्योतिष चंद्र पाल और ज्यादा दिन नहीं बचे। पुलिस के क्रूर अत्याचारों से परेशान होकर, [[अण्डमान|अंडमान]] की सेल्युलर जेल में कैद में पागल हो गये। 4 दिसंबर 1924 को बेरहामपुर उन्माद आश्रम में उनकी मृत्यु हो गई।<ref name="সংসদ3">সুবোধ সেনগুপ্ত ও অঞ্জলি বসু সম্পাদিত, ''সংসদ বাঙালি চরিতাভিধান'', প্রথম খণ্ড, সাহিত্য সংসদ, কলকাতা, নভেম্বর ২০১৩, পৃষ্ঠা ৫৪৮, {{ISBN|978-81-7955-135-6}}</ref>
== संदर्भ ==
[[श्रेणी:ब्रिटिश भारत के क़ैदी और बंदी]]
[[श्रेणी:१९१५ में निधन]]
[[श्रेणी:1894 में जन्मे लोग]]
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{{ज्ञानसन्दूक व्यक्ति|name=चित्तप्रिय रायचौधुरी|image=শহীদ চিত্তপ্রিয় রায় চৌধুরী.jpg|caption=महान क्रान्तिकारी '''चित्तप्रिय रायचौधुरी'''|birth_date=६ दिसम्बर १८९४|birth_place=थालिया, [[राजेर उपजिला]], [[मादारीपुर]], [[बंगाल प्रेसीडेन्सी]]<br>(वर्तमान समय में [[बांग्लादेश]] में)|death_date=९ सितम्बर १९१५|death_place=[[बालेश्वर]], [[बंगाल प्रेसीडेन्सी]]|death_cause=सम्मुख युद्ध|other_names=कालो|known_for=भारतीय स्वतंत्रता आन्दोलन}}'''चित्तप्रिय रायचौधुरी''' (1894 - 1915) [[भारतीय उपमहाद्वीप|भारतीय उपमहाद्वीप के]] [[भारतीय स्वतन्त्रता आन्दोलन|ब्रिटिश-विरोधी स्वतंत्रता आंदोलन में]] एक महत्वपूर्ण व्यक्ति और अग्नि युग के क्रांतिकारी थे। वे पूर्णचंद्र दास के नेतृत्व वाली गुप्त क्रांतिकारी संस्था मदारीपुर समिति के सदस्य थे एवं वे पूर्णचंद्र दास के सहयोगी थे। उन्होंने महान क्रांतिकारी [[बाघा जतीन|बाघा जतिन]] के नेतृत्व में बुड़ी बालाम नदी के तट पर हुए आंशिक युद्ध में भाग लिया और आमने-सामने की लड़ाई में वीरगति को प्राप्त हुए। <ref name="সংসদ">সুবোধ সেনগুপ্ত ও অঞ্জলি বসু সম্পাদিত, ''সংসদ বাঙালি চরিতাভিধান'', প্রথম খণ্ড, সাহিত্য সংসদ, কলকাতা, নভেম্বর ২০১৩, পৃষ্ঠা ২২৩, {{ISBN|978-81-7955-135-6}}</ref>
== प्रारंभिक जीवन ==
चित्तप्रिय रायचौधुरी का जन्म 6 दिसंबर 1894 को मदारीपुर के [[राजैर उपज़िला|राजोइर उपजिला के अंतर्गत]] खलिया गांव में एक जमींदार परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम पंचानन रायचौधुरी और माता का नाम सुखदा सुन्दरी देवी था। उनके पिता पंचानन रायचौधुरी मदारीपुर शहर में मानद मजिस्ट्रेट थे। चित्तप्रिय जब थालिया हाई स्कूल और बाद में मदारीपुर हाई स्कूल के छात्र थे तब मदारीपुर समिति के क्रांतिकारी सदस्य बने (1910) । <ref>{{Cite book|title=মাদারীপুর জেলা পরিচিতি|last=জাব্বার মিয়া|first=আবদুল|publisher=মিসেস লীনা জাব্বার|year=১৯৯৪|isbn=|pages=১৬৭}}</ref>
== क्रांतिकारी गतिविधियाँ ==
दिसंबर 1913 में उन्हें फरीदपुर षड्यंत्र मामले में आरोपी के रूप में गिरफ्तार किया गया। उन्होंने पांच महीने जेल में बिताए। जेल से रिहा होने के बाद, 18 फरवरी 1915 को, [[कलकत्ता विश्वविद्यालय|कलकत्ता विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह के दिन,]] उन्होंने कुछ सहयोगियों की मदद से सड़क पर ड्यूटी पर तैनात पुलिस निरीक्षक सुरेश मुखर्जी की हत्या कर दी। क्रांतिकारी [[बाघा जतीन|जतिन मुखर्जी के सहयोगी के रूप में,]] उन्होंने [[जर्मनी]], [[जापान]], [[संयुक्त राज्य अमेरिका|अमेरिका]] और डच इंडीज से हथियार लाने का प्रयास किया। <ref name="সংসদ">সুবোধ সেনগুপ্ত ও অঞ্জলি বসু সম্পাদিত, ''সংসদ বাঙালি চরিতাভিধান'', প্রথম খণ্ড, সাহিত্য সংসদ, কলকাতা, নভেম্বর ২০১৩, পৃষ্ঠা ২২৩, {{ISBN|978-81-7955-135-6}}</ref>
== बुड़ी बालाम नदी के तट पर खण्डयुद्ध ==
[[चित्र:Chittapriya roy chowdhary.tif|right|thumb|300px|'''चित्तप्रिय रायचौधुरी''' ने अंग्रेज पुलिस से संघर्ष करते हुए मृत्यु को गले लगाया।]]
7 सितंबर 1915 की देर रात, [[बाघा जतीन|जतिन मुखर्जी]] महलडीह में अपने अस्थायी निवास पर लौट आए। उनके साथ चित्तप्रिय रायचौधुरी, ज्योतिष चंद्र पाल, मनोरंजन सेनगुप्त और नीरेन्द्रनाथ दासगुप्त थे। 8 सितंबर को पूरा दिन गहरे जंगल में बीता। रात भर पैदल चलते हुए, वह 9 सितंबर की सुबह [[बालेश्वर|बालेश्वर के]] बलरामगढ़ी में बुड़ीबालाम (जिसे उड़िया में "बुड्ढाबालाङ्ग" कहा जाता है) नदी के किनारे पहुंचे।<ref>{{Cite web|url=http://m.dailyhunt.in/news/india/bangla/banglahunt-epaper-banhun/raktakt+budibalamer+tire-newsid-81261615|title=রক্তাক্ত বুড়িবালামের তীরে - Banglahunt|website=Dailyhunt|language=en|access-date=2019-08-11}}</ref><ref>{{Cite web|url=https://www.enewsbangla.com/2019/04/Spend-some-days-in-simlipal.html|title=গরমের ছুটিতে সিমলিপাল জাতীয় উদ্যানে কয়েকটা দিন|last=giswami|first=Ifsita|website=E News Bangla {{!}} Bengali News Portal|archive-url=https://web.archive.org/web/20190811104913/https://www.enewsbangla.com/2019/04/Spend-some-days-in-simlipal.html|archive-date=২০১৯-০৮-১১|access-date=2019-08-11}}</ref> वहाँ नदी के पार तैरकर पहुँचे और युद्ध के लिए काफी उपयुक्त सूखे दलदल में शरण ले लिया। दूसरी तरफ चार्ल्स टेगर्ट, कमांडर रदरफोर्ड, जिला मजिस्ट्रेट किलवे, कई सशस्त्र पुलिस और सैन्य बलों के साथ दिखाई दिए। खाई के पीछे, बाघा जतिन के नेतृत्व में ये पाँचों थे और इनके हाथ में माउजर पिस्तौल थी। जब गोलीबारी शुरू हुई तो पुलिस की गोलीबारी में चित्तप्रिय घायल हुए एवं वीरगति को प्राप्त हुए। बाद में 16 अक्टूबर 1915 को एक मुकदमे में, मनोरंजन सेनगुप्त और नीरेन्द्रनाथ दासगुप्त को मौत की सजा सुनाई गई। उन दोनों को 3 दिसंबर 1915 को फांसी दी गई। ज्योतिष चंद्र पाल और ज्यादा दिन नहीं बचे। पुलिस के क्रूर अत्याचारों से परेशान होकर, [[अण्डमान|अंडमान]] की सेल्युलर जेल में कैद में पागल हो गये। 4 दिसंबर 1924 को बेरहामपुर उन्माद आश्रम में उनकी मृत्यु हो गई।<ref name="সংসদ3">সুবোধ সেনগুপ্ত ও অঞ্জলি বসু সম্পাদিত, ''সংসদ বাঙালি চরিতাভিধান'', প্রথম খণ্ড, সাহিত্য সংসদ, কলকাতা, নভেম্বর ২০১৩, পৃষ্ঠা ৫৪৮, {{ISBN|978-81-7955-135-6}}</ref>
==सन्दर्भ==
{{टिप्पणीसूची}}
{{भारतीय स्वतंत्रता का क्रांतिकारी आन्दोलन}}
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पूर्णचन्द्र दास
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अनुनाद सिंह
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{{ज्ञानसन्दूक व्यक्ति|name=पूर्णचन्द्र दास|image=[[File:অগ্নিযুগের বিপ্লবী পূর্ণচন্দ্র দাস.jpg|thumb|अग्नियुग के महान क्रान्तिकारी '''पूर्णचन्द्र दास''']]|caption=पूर्णचन्द्र दास|birth_date=১ जून, ১৮৯৯|birth_place=[[राजेर उपजिला|राजेर]], [[मादारीपुर]], [[बंगाल प्रेसीडेन्सी]],[[ब्रितानी भारत]] (वर्तमान समय में [[बांग्लादेश]])|death_date=৪ सितम्बर, ১৯৫৬|death_place=|known=|occupation=|citizenship=|nationality=|ethnicity=[[बंगाली]]|religion=[[हिन्दू]]|signature=Purna Chandra Das's bengali signature.jpg}}'''पूर्णचन्द्र दास''' (1 जून, 1899 - 4 मई, 1956) [[भारतीय उपमहाद्वीप|भारतीय उपमहाद्वीप के]] [[भारतीय स्वतन्त्रता आन्दोलन|ब्रिटिश-विरोधी स्वतंत्रता आंदोलन में]] एक महत्वपूर्ण व्यक्ति और अग्नि युग के क्रांतिकारी थे। उन्होंने [[बंगबासी कॉलेज|बंगबाशी कॉलेज में]] अपनी पढ़ाई छोड़ दी और 1910 में [[मदारीपुर जिला|मदारिपुर में]] " मदारिपुर समिति " नामक एक ब्रिटिश-विरोधी क्रांतिकारी समूह का गठन किया। <ref>{{Cite book|url=https://www.google.co.in/books/edition/Bh%C4%81ratabarshera_sv%C4%81dhinat%C4%81_yuddhera_i/SJ4JAQAAIAAJ?hl=en&gbpv=1&bsq=%E0%A6%AA%E0%A7%82%E0%A6%B0%E0%A7%8D%E0%A6%A3%E0%A6%9A%E0%A6%A8%E0%A7%8D%E0%A6%A6%E0%A7%8D%E0%A6%B0+%E0%A6%A6%E0%A6%BE%E0%A6%B8+%E0%A6%AE%E0%A6%BE%E0%A6%A6%E0%A6%BE%E0%A6%B0%E0%A7%80%E0%A6%AA%E0%A7%81%E0%A6%B0&dq=%E0%A6%AA%E0%A7%82%E0%A6%B0%E0%A7%8D%E0%A6%A3%E0%A6%9A%E0%A6%A8%E0%A7%8D%E0%A6%A6%E0%A7%8D%E0%A6%B0+%E0%A6%A6%E0%A6%BE%E0%A6%B8+%E0%A6%AE%E0%A6%BE%E0%A6%A6%E0%A6%BE%E0%A6%B0%E0%A7%80%E0%A6%AA%E0%A7%81%E0%A6%B0&printsec=frontcover|title=Bhāratabarshera svādhinatā yuddhera itihāsa|last=Roy|first=Sukumar|date=1949|publisher=Oriẏeṇṭa Buka Koṃ.|language=bn}}</ref>
== क्रांतिकारी गतिविधियाँ ==
[[चित्र:Statue_of_Purna_Chandra_Das.jpg|बाएँ|अंगूठाकार|<nowiki>'''पूर्णचंद्र दास'''</nowiki> की मूर्ति ( रासबिहारी एवेन्यू, कोलकाता, पश्चिम बंगाल, भारत)]]
1914-15 में, उन्होंने [[बाघा जतीन|बाघा जतिन]] के साथ काम किया। [[बालेश्वर|बालासोर के खाई युद्ध में,]] बाघा जतिन के चार सहयोगी उनके ही दल ( मदारिपुर समिति ) के सदस्य थे। बाघा जतिन के ये चार सहयोगी [[चित्तप्रिय रायचौधुरी]], ज्योतिष चंद्र पाल, मनोरंजन सेनगुप्त और नीनिरेन्द्रनाथ दासगुप्त थे। 1913 में, पूर्ण चंद्र को फरीदपुर षड्यंत्र मामले में गिरफ्तार किया गया और कुछ दिनों बाद रिहा कर दिया गया। पुनः 1914 में उन्हें भारत रक्षा अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया गया और 1920 तक कारावास में रखा गया। बाद में, वे नेताजी [[सुभाष चन्द्र बोस|सुभाष चंद्र के]] नवगठित फॉरवर्ड ब्लॉक में शामिल हो गए और 1940 में फिर से गिरफ्तार हुए और 1946 में रिहा हुए। <ref>{{Cite web|url=http://onushilon.org/corita/purno0chondro-das.htm|title=পূর্ণচন্দ্র দাস|website=onushilon.org|access-date=2025-08-20}}</ref> देश के विभाजन के बाद, उन्होंने पार्टी की राजनीति छोड़ दी और कलकत्ता में शरणार्थी पुनर्वास बोर्ड के सदस्य बन गए और बेघरों के कल्याण के लिए काम किया।
उन्हें कुल 27 साल की कैद हुई। वे 2 साल तक फरार रहे। उन्होंने 33 दिनों तक भूख हड़ताल की। <ref name="সংসদ">সুবোধ সেনগুপ্ত ও অঞ্জলি বসু সম্পাদিত, ''সংসদ বাঙালি চরিতাভিধান'', প্রথম খণ্ড, সাহিত্য সংসদ, কলকাতা, নভেম্বর ২০১৩, পৃষ্ঠা ৩৯৬-৩৯৭, {{ISBN|978-81-7955-135-6}}</ref>
1956 में बल्लीगंज में सुबोध नामक एक पूर्व क्रांतिकारी ने उनकी चाकू मारकर हत्या कर दी <ref>{{Cite book|url=https://www.google.co.in/books/edition/Annual_Report_on_the_Police_Administrati/cCP_XD00Gc8C?hl=en&gbpv=1&bsq=Subodh+killed+Purna+chandra+das&dq=Subodh+killed+Purna+chandra+das&printsec=frontcover|title=Annual Report on the Police Administration of the Town of Calcutta and Its Suburbs|last=Police|first=Calcutta Commissioner of|date=1954|language=en}}</ref>
== जन्म और शिक्षा ==
पूर्णचंद्र दास का जन्म [[मदारीपुर जिला|मदारीपुर जिले]] के [[राजैर उपज़िला|राजोइर उपजिले]] के समाज ईशिबपु में हुआ था। उनके पिता का नाम काशीनाथ दास था। उन्होंने 1910 में मदारीपुर हाई स्कूल से मैट्रिक किया और कोलकाता के [[बंगबासी कॉलेज|बंगबासी कॉलेज से]] अपनी पढ़ाई शुरू की। <ref name="সংসদ">সুবোধ সেনগুপ্ত ও অঞ্জলি বসু সম্পাদিত, ''সংসদ বাঙালি চরিতাভিধান'', প্রথম খণ্ড, সাহিত্য সংসদ, কলকাতা, নভেম্বর ২০১৩, পৃষ্ঠা ৩৯৬-৩৯৭, {{ISBN|978-81-7955-135-6}}</ref>
== संदर्भ ==
[[श्रेणी:१९५६ में निधन]]
[[श्रेणी:1889 में जन्मे लोग]]
[[श्रेणी:Pages using infoboxes with thumbnail images]]
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{{ज्ञानसन्दूक व्यक्ति|name=पूर्णचन्द्र दास|image=[[File:অগ্নিযুগের বিপ্লবী পূর্ণচন্দ্র দাস.jpg|thumb|अग्नियुग के महान क्रान्तिकारी '''पूर्णचन्द्र दास''']]|caption=पूर्णचन्द्र दास|birth_date=১ जून, ১৮৯৯|birth_place=[[राजेर उपजिला|राजेर]], [[मादारीपुर]], [[बंगाल प्रेसीडेन्सी]],[[ब्रितानी भारत]] (वर्तमान समय में [[बांग्लादेश]])|death_date=৪ सितम्बर, ১৯৫৬|death_place=|known=|occupation=|citizenship=|nationality=|ethnicity=[[बंगाली]]|religion=[[हिन्दू]]|signature=Purna Chandra Das's bengali signature.jpg}}'''पूर्णचन्द्र दास''' (1 जून, 1899 - 4 मई, 1956) [[भारतीय उपमहाद्वीप|भारतीय उपमहाद्वीप के]] [[भारतीय स्वतन्त्रता आन्दोलन|ब्रिटिश-विरोधी स्वतंत्रता आंदोलन में]] एक महत्वपूर्ण व्यक्ति और अग्नि युग के क्रांतिकारी थे। उन्होंने [[बंगबासी कॉलेज|बंगबाशी कॉलेज में]] अपनी पढ़ाई छोड़ दी और 1910 में [[मदारीपुर जिला|मदारिपुर में]] " मदारिपुर समिति " नामक एक ब्रिटिश-विरोधी क्रांतिकारी समूह का गठन किया। <ref>{{Cite book|url=https://www.google.co.in/books/edition/Bh%C4%81ratabarshera_sv%C4%81dhinat%C4%81_yuddhera_i/SJ4JAQAAIAAJ?hl=en&gbpv=1&bsq=%E0%A6%AA%E0%A7%82%E0%A6%B0%E0%A7%8D%E0%A6%A3%E0%A6%9A%E0%A6%A8%E0%A7%8D%E0%A6%A6%E0%A7%8D%E0%A6%B0+%E0%A6%A6%E0%A6%BE%E0%A6%B8+%E0%A6%AE%E0%A6%BE%E0%A6%A6%E0%A6%BE%E0%A6%B0%E0%A7%80%E0%A6%AA%E0%A7%81%E0%A6%B0&dq=%E0%A6%AA%E0%A7%82%E0%A6%B0%E0%A7%8D%E0%A6%A3%E0%A6%9A%E0%A6%A8%E0%A7%8D%E0%A6%A6%E0%A7%8D%E0%A6%B0+%E0%A6%A6%E0%A6%BE%E0%A6%B8+%E0%A6%AE%E0%A6%BE%E0%A6%A6%E0%A6%BE%E0%A6%B0%E0%A7%80%E0%A6%AA%E0%A7%81%E0%A6%B0&printsec=frontcover|title=Bhāratabarshera svādhinatā yuddhera itihāsa|last=Roy|first=Sukumar|date=1949|publisher=Oriẏeṇṭa Buka Koṃ.|language=bn}}</ref>
== क्रांतिकारी गतिविधियाँ ==
[[चित्र:Statue_of_Purna_Chandra_Das.jpg|बाएँ|अंगूठाकार|<nowiki>'''पूर्णचंद्र दास'''</nowiki> की मूर्ति ( रासबिहारी एवेन्यू, कोलकाता, पश्चिम बंगाल, भारत)]]
1914-15 में, उन्होंने [[बाघा जतीन|बाघा जतिन]] के साथ काम किया। [[बालेश्वर|बालासोर के खाई युद्ध में,]] बाघा जतिन के चार सहयोगी उनके ही दल ( मदारिपुर समिति ) के सदस्य थे। बाघा जतिन के ये चार सहयोगी [[चित्तप्रिय रायचौधुरी]], ज्योतिष चंद्र पाल, मनोरंजन सेनगुप्त और नीनिरेन्द्रनाथ दासगुप्त थे। 1913 में, पूर्ण चंद्र को फरीदपुर षड्यंत्र मामले में गिरफ्तार किया गया और कुछ दिनों बाद रिहा कर दिया गया। पुनः 1914 में उन्हें भारत रक्षा अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया गया और 1920 तक कारावास में रखा गया। बाद में, वे नेताजी [[सुभाष चन्द्र बोस|सुभाष चंद्र के]] नवगठित फॉरवर्ड ब्लॉक में शामिल हो गए और 1940 में फिर से गिरफ्तार हुए और 1946 में रिहा हुए। <ref>{{Cite web|url=http://onushilon.org/corita/purno0chondro-das.htm|title=পূর্ণচন্দ্র দাস|website=onushilon.org|access-date=2025-08-20}}</ref> देश के विभाजन के बाद, उन्होंने पार्टी की राजनीति छोड़ दी और कलकत्ता में शरणार्थी पुनर्वास बोर्ड के सदस्य बन गए और बेघरों के कल्याण के लिए काम किया।
उन्हें कुल 27 साल की कैद हुई। वे 2 साल तक फरार रहे। उन्होंने 33 दिनों तक भूख हड़ताल की। <ref name="সংসদ">সুবোধ সেনগুপ্ত ও অঞ্জলি বসু সম্পাদিত, ''সংসদ বাঙালি চরিতাভিধান'', প্রথম খণ্ড, সাহিত্য সংসদ, কলকাতা, নভেম্বর ২০১৩, পৃষ্ঠা ৩৯৬-৩৯৭, {{ISBN|978-81-7955-135-6}}</ref>
1956 में बल्लीगंज में सुबोध नामक एक पूर्व क्रांतिकारी ने उनकी चाकू मारकर हत्या कर दी <ref>{{Cite book|url=https://www.google.co.in/books/edition/Annual_Report_on_the_Police_Administrati/cCP_XD00Gc8C?hl=en&gbpv=1&bsq=Subodh+killed+Purna+chandra+das&dq=Subodh+killed+Purna+chandra+das&printsec=frontcover|title=Annual Report on the Police Administration of the Town of Calcutta and Its Suburbs|last=Police|first=Calcutta Commissioner of|date=1954|language=en}}</ref>
== जन्म और शिक्षा ==
पूर्णचंद्र दास का जन्म [[मदारीपुर जिला|मदारीपुर जिले]] के [[राजैर उपज़िला|राजोइर उपजिले]] के समाज ईशिबपु में हुआ था। उनके पिता का नाम काशीनाथ दास था। उन्होंने 1910 में मदारीपुर हाई स्कूल से मैट्रिक किया और कोलकाता के [[बंगबासी कॉलेज|बंगबासी कॉलेज से]] अपनी पढ़ाई शुरू की। <ref name="সংসদ">সুবোধ সেনগুপ্ত ও অঞ্জলি বসু সম্পাদিত, ''সংসদ বাঙালি চরিতাভিধান'', প্রথম খণ্ড, সাহিত্য সংসদ, কলকাতা, নভেম্বর ২০১৩, পৃষ্ঠা ৩৯৬-৩৯৭, {{ISBN|978-81-7955-135-6}}</ref>
==सन्दर्भ==
{{टिप्पणीसूची}}
{{भारतीय स्वतंत्रता का क्रांतिकारी आन्दोलन}}
[[श्रेणी:१९५६ में निधन]]
[[श्रेणी:1889 में जन्मे लोग]]
[[श्रेणी:Pages using infoboxes with thumbnail images]]
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अनुनाद सिंह
1634
/* क्रांतिकारी गतिविधियाँ */
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text/x-wiki
{{ज्ञानसन्दूक व्यक्ति|name=पूर्णचन्द्र दास|image=[[File:অগ্নিযুগের বিপ্লবী পূর্ণচন্দ্র দাস.jpg|thumb|अग्नियुग के महान क्रान्तिकारी '''पूर्णचन्द्र दास''']]|caption=पूर्णचन्द्र दास|birth_date=১ जून, ১৮৯৯|birth_place=[[राजेर उपजिला|राजेर]], [[मादारीपुर]], [[बंगाल प्रेसीडेन्सी]],[[ब्रितानी भारत]] (वर्तमान समय में [[बांग्लादेश]])|death_date=৪ सितम्बर, ১৯৫৬|death_place=|known=|occupation=|citizenship=|nationality=|ethnicity=[[बंगाली]]|religion=[[हिन्दू]]|signature=Purna Chandra Das's bengali signature.jpg}}'''पूर्णचन्द्र दास''' (1 जून, 1899 - 4 मई, 1956) [[भारतीय उपमहाद्वीप|भारतीय उपमहाद्वीप के]] [[भारतीय स्वतन्त्रता आन्दोलन|ब्रिटिश-विरोधी स्वतंत्रता आंदोलन में]] एक महत्वपूर्ण व्यक्ति और अग्नि युग के क्रांतिकारी थे। उन्होंने [[बंगबासी कॉलेज|बंगबाशी कॉलेज में]] अपनी पढ़ाई छोड़ दी और 1910 में [[मदारीपुर जिला|मदारिपुर में]] " मदारिपुर समिति " नामक एक ब्रिटिश-विरोधी क्रांतिकारी समूह का गठन किया। <ref>{{Cite book|url=https://www.google.co.in/books/edition/Bh%C4%81ratabarshera_sv%C4%81dhinat%C4%81_yuddhera_i/SJ4JAQAAIAAJ?hl=en&gbpv=1&bsq=%E0%A6%AA%E0%A7%82%E0%A6%B0%E0%A7%8D%E0%A6%A3%E0%A6%9A%E0%A6%A8%E0%A7%8D%E0%A6%A6%E0%A7%8D%E0%A6%B0+%E0%A6%A6%E0%A6%BE%E0%A6%B8+%E0%A6%AE%E0%A6%BE%E0%A6%A6%E0%A6%BE%E0%A6%B0%E0%A7%80%E0%A6%AA%E0%A7%81%E0%A6%B0&dq=%E0%A6%AA%E0%A7%82%E0%A6%B0%E0%A7%8D%E0%A6%A3%E0%A6%9A%E0%A6%A8%E0%A7%8D%E0%A6%A6%E0%A7%8D%E0%A6%B0+%E0%A6%A6%E0%A6%BE%E0%A6%B8+%E0%A6%AE%E0%A6%BE%E0%A6%A6%E0%A6%BE%E0%A6%B0%E0%A7%80%E0%A6%AA%E0%A7%81%E0%A6%B0&printsec=frontcover|title=Bhāratabarshera svādhinatā yuddhera itihāsa|last=Roy|first=Sukumar|date=1949|publisher=Oriẏeṇṭa Buka Koṃ.|language=bn}}</ref>
== क्रांतिकारी गतिविधियाँ ==
[[चित्र:Statue_of_Purna_Chandra_Das.jpg|बाएँ|अंगूठाकार|'''पूर्णचंद्र दास''' की मूर्ति ( रासबिहारी एवेन्यू, कोलकाता, पश्चिम बंगाल, भारत)]]
1914-15 में, उन्होंने [[बाघा जतीन|बाघा जतिन]] के साथ काम किया। [[बालेश्वर|बालासोर के खाई युद्ध में,]] बाघा जतिन के चार सहयोगी उनके ही दल ( मदारिपुर समिति ) के सदस्य थे। बाघा जतिन के ये चार सहयोगी [[चित्तप्रिय रायचौधुरी]], ज्योतिष चंद्र पाल, मनोरंजन सेनगुप्त और नीनिरेन्द्रनाथ दासगुप्त थे। 1913 में, पूर्ण चंद्र को फरीदपुर षड्यंत्र मामले में गिरफ्तार किया गया और कुछ दिनों बाद रिहा कर दिया गया। पुनः 1914 में उन्हें भारत रक्षा अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया गया और 1920 तक कारावास में रखा गया। बाद में, वे नेताजी [[सुभाष चन्द्र बोस|सुभाष चंद्र के]] नवगठित फॉरवर्ड ब्लॉक में शामिल हो गए और 1940 में फिर से गिरफ्तार हुए और 1946 में रिहा हुए। <ref>{{Cite web|url=http://onushilon.org/corita/purno0chondro-das.htm|title=পূর্ণচন্দ্র দাস|website=onushilon.org|access-date=2025-08-20}}</ref> देश के विभाजन के बाद, उन्होंने पार्टी की राजनीति छोड़ दी और कलकत्ता में शरणार्थी पुनर्वास बोर्ड के सदस्य बन गए और बेघरों के कल्याण के लिए काम किया।
उन्हें कुल 27 साल की कैद हुई। वे 2 साल तक फरार रहे। उन्होंने 33 दिनों तक भूख हड़ताल की। <ref name="সংসদ">সুবোধ সেনগুপ্ত ও অঞ্জলি বসু সম্পাদিত, ''সংসদ বাঙালি চরিতাভিধান'', প্রথম খণ্ড, সাহিত্য সংসদ, কলকাতা, নভেম্বর ২০১৩, পৃষ্ঠা ৩৯৬-৩৯৭, {{ISBN|978-81-7955-135-6}}</ref>
1956 में [[बल्लीगंज]] में सुबोध नामक एक पूर्व क्रांतिकारी ने उनकी चाकू मारकर हत्या कर दी <ref>{{Cite book|url=https://www.google.co.in/books/edition/Annual_Report_on_the_Police_Administrati/cCP_XD00Gc8C?hl=en&gbpv=1&bsq=Subodh+killed+Purna+chandra+das&dq=Subodh+killed+Purna+chandra+das&printsec=frontcover|title=Annual Report on the Police Administration of the Town of Calcutta and Its Suburbs|last=Police|first=Calcutta Commissioner of|date=1954|language=en}}</ref>
== जन्म और शिक्षा ==
पूर्णचंद्र दास का जन्म [[मदारीपुर जिला|मदारीपुर जिले]] के [[राजैर उपज़िला|राजोइर उपजिले]] के समाज ईशिबपु में हुआ था। उनके पिता का नाम काशीनाथ दास था। उन्होंने 1910 में मदारीपुर हाई स्कूल से मैट्रिक किया और कोलकाता के [[बंगबासी कॉलेज|बंगबासी कॉलेज से]] अपनी पढ़ाई शुरू की। <ref name="সংসদ">সুবোধ সেনগুপ্ত ও অঞ্জলি বসু সম্পাদিত, ''সংসদ বাঙালি চরিতাভিধান'', প্রথম খণ্ড, সাহিত্য সংসদ, কলকাতা, নভেম্বর ২০১৩, পৃষ্ঠা ৩৯৬-৩৯৭, {{ISBN|978-81-7955-135-6}}</ref>
==सन्दर्भ==
{{टिप्पणीसूची}}
{{भारतीय स्वतंत्रता का क्रांतिकारी आन्दोलन}}
[[श्रेणी:१९५६ में निधन]]
[[श्रेणी:1889 में जन्मे लोग]]
[[श्रेणी:Pages using infoboxes with thumbnail images]]
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वार्ता:स्वास्थ्य संवर्धन
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/* महमूदाबाद क्षेत्र के स्वास्थ्य संसाधन प्रबंधन का अध्यन */ नया अनुभाग
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== महमूदाबाद क्षेत्र के स्वास्थ्य संसाधन प्रबंधन का अध्यन ==
महमूदाबाद क्षेत्र के स्वास्थ्य संसाधन प्रबंधन का अध्यन [[विशेष:योगदान/~2026-26811-55|~2026-26811-55]] ([[सदस्य वार्ता:~2026-26811-55|वार्ता]]) 14:16, 2 मई 2026 (UTC)
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चेम्पकरामन् पिल्लै
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अनुनाद सिंह
1634
"[[:en:Special:Redirect/revision/1345645139|Chempakaraman Pillai]]" पृष्ठ का अनुवाद करके निर्मित किया गया
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{{ज्ञानसन्दूक व्यक्ति|name=चेम्पकरामन् पिल्लै|image=Champakraman Pillai.jpg|caption=|other_names=चम्पक|birth_date={{Birth date|1891|09|15|df=yes}}|birth_place=[[तिरुवनन्तपुरम्]], [[त्रावणकोर|त्रावणकोर राज्य]], [[ब्रितानी भारत]]<br>(सम्प्रति [[तिरुवनन्तपुरम् जिला]], [[केरलम्]], भारत)|death_date={{Death date and age|1934|05|26|1891|09|15|df=yes}}|death_place=[[बर्लिन]]}}
'''चेम्पकरामन् पिल्लै''' (15 सितंबर 1891-26 मई 1934) भारतीय मूल के राजनीतिक कार्यकर्ता और क्रांतिकारी थे।<ref name="OnmanoramaIndugopan20160927">{{Cite news|url=https://www.onmanorama.com/lifestyle/news/chempaka-raman-pillai-indian-revolutionary-freedom-fighter.html|title=Chempaka Raman Pillai: The freedom fighter who coined 'Jai Hind'|last=Indugopan|first=G.R.|date=27 September 2016|work=[[Malayala Manorama|Onmanorama]]|access-date=7 October 2020}}</ref><ref name="ScrollKrishnan20160817">{{Cite news|url=https://scroll.in/article/803179/did-a-tamil-man-from-trivandrum-mastermind-the-bombing-of-british-madras-during-world-war-i|title=Did a Tamil man from Trivandrum mastermind the bombing of British Madras during World War I?|last=Krishnan|first=Sairam|date=17 August 2016|work=[[Scroll.in]]|access-date=7 October 2020}}</ref> उनका जन्म [[तिरुवनन्तपुरम|तिरुवनंतपुरम]] जिले में हुआ था किन्तु युवा अवस्था में ही वे [[यूरोप]] चले गए, जहाँ उन्होंने अपना शेष सक्रिय जीवन एक भारतीय राष्ट्रवादी और क्रांतिकारी के रूप में बिताया।<ref>{{Cite book|title=Malayala Manorama Yearbook|last=Mathew|first=K. M.|last2=Mammen|first2=Matthew|date=2009|publisher=Malayala Manorama Co.|isbn=978-8-189-00412-5|location=Kottayam|page=301|language=ta}}</ref>
भारत की स्वतंत्रता से पहले के दिनों में [[जय हिन्द|जय हिंद]] के अभिवादन और नारे के निर्माण का श्रेय चेम्पकरामन् पिल्लै को दिया जाता है।<ref name="OnmanoramaIndugopan20160927" /><ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=Qoe_EAAAQBAJ&pg=PA24|title=Encyclopaedia of South Indian Culture and Heritage|publisher=New Bharatiya Book Corporation|year=2021|isbn=978-93-5521-768-4|page=24|access-date=16 December 2024}}</ref> भारत में अभी भी इस नारे का व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है।
उनकी मृत्यु के तुरंत बाद के वर्षों में यूरोप में उनके जीवन के बारे में जानकारी अस्पष्ट थी।<ref name="onmanorama.com">{{Cite web|url=https://www.onmanorama.com/lifestyle/news/chempaka-raman-pillai-indian-revolutionary-freedom-fighter.html|title=Chempaka Raman Pillai: The freedom fighter who coined 'Jai Hind'}}</ref> हाल के वर्षों में अधिक जानकारी सामने आई है।<ref name="OnmanoramaIndugopan20160927" />उनका जीवन [[एडोल्फ़ हिटलर|एडॉल्फ हिटलर]] के साथ एक झगड़े सहित कई विवादों में घिर गया था।
उन्होंने 31 जुलाई 1914 को भारतीय राष्ट्रीय स्वैच्छिक कोर (Indian National Voluntary Corps) की शुरुआत की। नेताजी [[सुभाष चन्द्र बोस|सुभाष चंद्र बोस]] को [[आज़ाद हिन्द फ़ौज|भारतीय राष्ट्रीय सेना]] (आईएनए) शुरू करने के लिए प्रेरित करने में चेम्पकरामन पिल्लै ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।<ref name="onmanorama.com">{{Cite web|url=https://www.onmanorama.com/lifestyle/news/chempaka-raman-pillai-indian-revolutionary-freedom-fighter.html|title=Chempaka Raman Pillai: The freedom fighter who coined 'Jai Hind'}}<cite class="citation web cs1" data-ve-ignore="">[https://www.onmanorama.com/lifestyle/news/chempaka-raman-pillai-indian-revolutionary-freedom-fighter.html "Chempaka Raman Pillai: The freedom fighter who coined 'Jai Hind'"].</cite></ref>
== प्रारंभिक जीवन ==
चेम्पकरामन का जन्म आधुनिक [[केरल]] राज्य में पूर्ववर्ती त्रावणकोर राज्य की राजधानी [[तिरुवनन्तपुरम|तिरुवनंतपुरम]] में एक तमिल वेल्लालर परिवार में हुआ था।<ref>{{Cite book|url=https://www.google.co.in/books/edition/TAMILNADU_A_JOURNEY_IN_TIME_Part_1/AkQgEAAAQBAJ?hl=en&gbpv=1&dq=Chempakaraman+Pillai+vellalar&pg=PT145&printsec=frontcover|title=TAMILNADU: A Journey in Time, Part 1|last=George Abraham Pottamkulam|publisher=Notion Press|year=2020|isbn=9781649516909|page=PT145}}</ref> उनके माता-पिता, चिन्नास्वामी पिल्लै और नागम्मल, नानजीनाड (तब त्रावणकोर, वर्तमान में [[कन्याकुमारी जिला]], [[तमिल नाडु|तमिलनाडु]]) के रहने वाले थे।<ref name="ScrollKrishnan20160817">{{Cite news|url=https://scroll.in/article/803179/did-a-tamil-man-from-trivandrum-mastermind-the-bombing-of-british-madras-during-world-war-i|title=Did a Tamil man from Trivandrum mastermind the bombing of British Madras during World War I?|last=Krishnan|first=Sairam|date=17 August 2016|work=[[Scroll.in]]|access-date=7 October 2020}}<cite class="citation news cs1" data-ve-ignore="" id="CITEREFKrishnan2016">Krishnan, Sairam (17 August 2016). [https://scroll.in/article/803179/did-a-tamil-man-from-trivandrum-mastermind-the-bombing-of-british-madras-during-world-war-i "Did a Tamil man from Trivandrum mastermind the bombing of British Madras during World War I?"]. ''[[Scroll.in]]''<span class="reference-accessdate">. Retrieved <span class="nowrap">7 October</span> 2020</span>.</cite></ref> 1908 में 17 साल की उम्र में एक यूरोपीय की मदद से वे भारत छोड़कर यूरोप चले गये।<ref name="Sendurpandian1999">{{Cite journal|last=Sendurpandian|first=M.|year=1999|title=Shenbagaraman Pillai – His German Connection and India's Freedom Struggle (1891–1934)|journal=Proceedings of the Indian History Congress|volume=60|pages=1169|jstor=44144227}}</ref>
== यूरोप में ==
चेम्पकरामन ने अक्टूबर 1910 से 1914 तक [[ईटीएच ज़्यूरिख़|ईटीएच ज्यूरिख में]] इंजीनियरिंग में डिप्लोमा प्राप्त किया। [[प्रथम विश्व युद्ध]] के शुरू होने के बाद, उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय भारत समर्थक समिति (International Pro-India Committee) की स्थापना की जिसका मुख्यालय [[ज़्यूरिख़|ज्यूरिख]] में था। सितंबर 1914 में स्वयं को इसका अध्यक्ष नियुक्त किया। उन्होंने ''<nowiki/>'प्रो इंडिया''' नाम से एक पत्रिका भी प्रकाशित की। <ref name="Sendurpandian1999">{{Cite journal|last=Sendurpandian|first=M.|year=1999|title=Shenbagaraman Pillai – His German Connection and India's Freedom Struggle (1891–1934)|journal=Proceedings of the Indian History Congress|volume=60|pages=1169|jstor=44144227}}<cite class="citation journal cs1" data-ve-ignore="" id="CITEREFSendurpandian1999">Sendurpandian, M. (1999). "Shenbagaraman Pillai – His German Connection and India's Freedom Struggle (1891–1934)". ''Proceedings of the Indian History Congress''. '''60''': 1169. [[जेस्टोर|JSTOR]] [https://www.jstor.org/stable/44144227 44144227].</cite></ref> इसी दौरान जर्मनी में रहने वाले भारतीय प्रवासियों के एक समूह ने बर्लिन में एक [[बर्लिन समिति|भारतीय स्वतंत्रता समिति का]] गठन किया। इस समूह में [[वीरेन्द्रनाथ चट्टोपाध्याय|वीरेंद्रनाथ चट्टोपाध्याय]], [[भूपेन्द्रनाथ दत्त|भूपेंद्रनाथ दत्त]], ए. रमन पिल्लई, [[तारकनाथ दास]], [[अब्दुल हाफ़िज़ मोहम्मद बरकतउल्ला|मौलवी बरकतुल्लाह]], चंद्रकांत चक्रवर्ती, एम. प्रभाकर, बीरेंद्र सरकार और हेरम्बा लाल गुप्ता शामिल थे।
अक्टूबर 1914 में चेम्पाकरन् बर्लिन चले गए और [[बर्लिन समिति]] में शामिल हो गए। इसे यूरोप में सभी भारतीय समर्थक क्रांतिकारी गतिविधियों के लिए मार्गदर्शक और नियंत्रण संस्थान के रूप में अपनी अंतर्राष्ट्रीय भारत समर्थक समिति के साथ विलय कर दिया। [[वीरेन्द्रनाथ चट्टोपाध्याय]] के अलावा, पिल्लै बर्लिन समूह के एकमात्र सदस्य थे जिनको लोग जानते थे। शेष सभी सामान्य छात्र थे जिन्होंने अपने देश की सेवा करने के आह्वान पर इस समिति में शामिल हुए थे।<ref name="Bose1971p92">{{Cite book|title=Indian Revolutionaries Abroad, 1905–1922|last=Bose|first=Arun Coomer|publisher=Bharati Bhawan|year=1971|location=Patna|pages=92–93}}</ref> [[लाला हरदयाल]] को भी आंदोलन में शामिल होने के लिए राजी किया गया। दोनों ने 'पूर्वी देशों के लिए जर्मन खुफिया ब्यूरो' के साथ सहयोग किया और जर्मन शिविरों, विशेष रूप से हैलबमॉन्डलेगर में भारतीय [[युद्ध-बन्दी|पीओडब्ल्यू]] पर निर्देशित जर्मन प्रचार बनाने में मदद की।<ref name=":0">{{Cite journal|last=Liebau|first=Heike|date=2019|title="Unternehmungen und Aufwiegelungen": Das Berliner Indische Unabhängigkeitskomitee in den Akten des Politischen Archivs des Auswärtigen Amts (1914–1920)|url=https://www.projekt-mida.de/reflexicon/unternehmungen-und-aufwiegelungen-das-berliner-indische-unabhaengigkeitskomitee-in-den-akten-des-politischen-archivs-des-auswaertigen-amts-1914-1920/|journal=MIDA Archival Reflexicon|pages=2–4}}</ref> बर्लिन में, उन्होंने बड़ी संख्या में आये श्रोताओं के सामने ब्रिटिश-विरोधी व्याख्यान दिए, और [[मेसोपोटामिया]], [[तुर्की]] और [[सीरिया]] में युद्ध के कैदियों और भारतीय निवासियों के बीच एक भारतीय राष्ट्रवादी सेना कोर को बढ़ाने के प्रयासों में बर्लिन-भारत समिति के साथ सहयोग किया।<ref name="Sendurpandian1999">{{Cite journal|last=Sendurpandian|first=M.|year=1999|title=Shenbagaraman Pillai – His German Connection and India's Freedom Struggle (1891–1934)|journal=Proceedings of the Indian History Congress|volume=60|pages=1169|jstor=44144227}}<cite class="citation journal cs1" data-ve-ignore="" id="CITEREFSendurpandian1999">Sendurpandian, M. (1999). "Shenbagaraman Pillai – His German Connection and India's Freedom Struggle (1891–1934)". ''Proceedings of the Indian History Congress''. '''60''': 1169. [[जेस्टोर|JSTOR]] [https://www.jstor.org/stable/44144227 44144227].</cite></ref> 1916 के मध्य तक, भारतीय समिति के शाखा कार्यालय [[ज़्यूरिख़|ज्यूरिख]], [[ऐम्स्टर्डैम|एम्स्टर्डम]] और [[स्टॉकहोम]] में स्थापित किए गए थे, जिनकी अध्यक्षता क्रमशः [[Jnan Chandra Dasgupta|दासगुप्त]], पिल्लै और [[वीरेन्द्रनाथ चट्टोपाध्याय|चट्टोपाध्याय]] ने की थी।<ref name="Bose1971p95">{{Cite book|title=Indian Revolutionaries Abroad, 1905–1922|last=Bose|first=Arun Coomer|publisher=Bharati Bhawan|year=1971|location=Patna|pages=95–96}}</ref>
पिल्लै ने पूर्वी एशिया में भारतीय क्रांतिकारी गतिविधियों को पुनर्जीवित करने के लिए एक योजना तैयार की। वह निर्वासित इंडोनेशियाई राष्ट्रवादी डॉ. दौस डेक्कर से परिचित थे, जो बराकतुल्ला के अनुरोध पर जनवरी 1915 की शुरुआत में [[ज़्यूरिख़|ज्यूरिख]] से बर्लिन आए थे। पिल्लै ने पहले दौस डेक्कर से हॉलैंड के माध्यम से प्रचार पत्रकों के वितरण की व्यवस्था करने के लिए कहा, फिर जुलाई 1915 में उन्होंने प्रस्ताव दिया कि दौस डेकर भारतीय प्रचार और भारतीय और इंडोनेशियाई राष्ट्रवादियों के बीच सहयोग को बढ़ावा देने के लिए [[थाईलैण्ड|थाईलैंड]] की यात्रा करें। जर्मन विदेश कार्यालय के वेसेनडॉक के साथ संयुक्त रूप से योजना पर चर्चा करने के बाद, डॉस डेक्कर 8 सितंबर 1915 को [[रॉटर्डम|रॉटरडैम]] से संयुक्त राज्य अमेरिका के रास्ते रवाना हुए, जहाँ वे सैन फ्रांसिस्को में [[Ram Chandra (Indian revolutionary)|रामचंद्र]] से मिले और फिर [[टोक्यो]] और [[बैंकॉक]] गए। किन्तु उन्हे [[हॉन्ग कॉन्ग|हांगकांग]] में गिरफ्तार कर लिया गया और उनने सब कुछ स्वीकार कर लिया। इस झटके के बाद, इस मिशन की विफलता ने दक्षिण-पूर्व एशिया में भारतीय क्रांतिकारी प्रयासों को प्रभावी ढंग से समाप्त कर दिया।<ref name="Bose1971p143">{{Cite book|title=Indian Revolutionaries Abroad, 1905–1922|last=Bose|first=Arun Coomer|publisher=Bharati Bhawan|year=1971|location=Patna|pages=143–144}}</ref>
== एसएमएस एम्डेन द्वारा ब्रिटिश मद्रास पर बमबारी ==
22 सितंबर 1914 को, कैप्टन कार्ल वॉन मुलर की कमान में एक जर्मन युद्धपोत, एसएमएस ''एमडेन'', [[चेन्नई|मद्रास]] के तट के पानी में प्रवेश किया और मद्रास बंदरगाह के पास की अधोसंरचनाओं पर बमबारी की और वापस समुद्र में चला गया। इस अचानक हमले में अंग्रेज चकित रह गए। पिल्लै के परिवार का कहना था कि चेम्पकरामन ने एसएमएस ''एमडेन'' में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहते हुए जर्मन हमले का समन्वय किया, हालांकि आधिकारिक विचार ऐसा नहीं है। व्यापक रूप से यह माना जाता है कि चेम्पकरामन पिल्लै और कुछ भारतीय क्रांतिकारियों का मद्रास के एसएमएस एम्डेन बमबारी में हाथ था।<ref name="ScrollKrishnan20160817">{{Cite news|url=https://scroll.in/article/803179/did-a-tamil-man-from-trivandrum-mastermind-the-bombing-of-british-madras-during-world-war-i|title=Did a Tamil man from Trivandrum mastermind the bombing of British Madras during World War I?|last=Krishnan|first=Sairam|date=17 August 2016|work=[[Scroll.in]]|access-date=7 October 2020}}<cite class="citation news cs1" data-ve-ignore="" id="CITEREFKrishnan2016">Krishnan, Sairam (17 August 2016). [https://scroll.in/article/803179/did-a-tamil-man-from-trivandrum-mastermind-the-bombing-of-british-madras-during-world-war-i "Did a Tamil man from Trivandrum mastermind the bombing of British Madras during World War I?"]. ''[[Scroll.in]]''<span class="reference-accessdate">. Retrieved <span class="nowrap">7 October</span> 2020</span>.</cite></ref><ref name="OnmanoramaIndugopan20160927">{{Cite news|url=https://www.onmanorama.com/lifestyle/news/chempaka-raman-pillai-indian-revolutionary-freedom-fighter.html|title=Chempaka Raman Pillai: The freedom fighter who coined 'Jai Hind'|last=Indugopan|first=G.R.|date=27 September 2016|work=[[Malayala Manorama|Onmanorama]]|access-date=7 October 2020}}<cite class="citation news cs1" data-ve-ignore="" id="CITEREFIndugopan2016">Indugopan, G.R. (27 September 2016). [https://www.onmanorama.com/lifestyle/news/chempaka-raman-pillai-indian-revolutionary-freedom-fighter.html "Chempaka Raman Pillai: The freedom fighter who coined 'Jai Hind'"]. ''[[मलयाला मनोरमा (अख़बार)|Onmanorama]]''<span class="reference-accessdate">. Retrieved <span class="nowrap">7 October</span> 2020</span>.</cite></ref>
== युद्ध की गतिविधियाँ ==
भारतीय स्वतंत्रता समिति अंततः संयुक्त राज्य अमेरिका में ग़दर पार्टी के साथ [[हिंदू-जर्मन षड्यंत्र]] में शामिल हो गई। [[कैसर विल्हेम द्वितीय (जर्मनी)|कैसर विल्हेम द्वितीय]] के नेतृत्व में जर्मन विदेश कार्यालय ने इस समिति की ब्रिटिश विरोधी गतिविधियों को वित्तपोषित किया। त्रावणकोर के चेम्पकरामन और ए. रामन पिल्लै और जर्मन विश्वविद्यालयों के दोनों छात्रों ने समिति पर एक साथ काम किया। बाद में चेम्पकरामन पिल्लै ने '''आजाद हिन्द फौज''' प्रमुख [[सुभाष चन्द्र बोस|सुभाष चंद्र बोस]] के साथ गठबंधन किया।
ए. रमन पिल्लई, जो उस समय गोटिंगन विश्वविद्यालय में छात्र थे, को लिखे चेम्पकरामन पिल्लै के कई पत्र रमन पिल्लई के बेटे रॉस्कोटे कृष्ण पिल्लई के पास थे। इन पत्रों में 1914 और 1920 के बीच जर्मनी में चेम्पकरामन पिल्लै के जीवन के कुछ पहलुओं का खुलासा हुआ है। उदाहरण के लिये जुलाई 1914 को उन्होंने [[ब्रिटिश भारतीय सेना]] के भारतीय सैनिकों को विद्रोह करने और अंग्रेजों के खिलाफ लड़ने का आह्वान किया था।
प्रथम विश्वयुद्ध के अन्त होने पर चेम्पकरामन पिल्लै जर्मनी में ही रह गये। वहाँ वे एक कारखाने में तकनीशियन के रूप में कार्य करते रहे। जब नेताजी सुभाष चन्द्र बोस ने विएना का दौरा किया, तब चेम्पकरामन पिल्लै ने उनसे मुलाकात की और अपने कार्ययोजना के बारे में उन्हें बताया था।
== युद्ध के बाद जर्मनी में सक्रियता ==
1919 में चेम्पकरामन पिल्लै ने भारत की स्वतंत्रता के समर्थन में अपनी राजनीतिक गतिविधियों को जारी रखने के लिए जर्मन-इंडियन लीग का गठन किया।<ref name="Sendurpandian1999">{{Cite journal|last=Sendurpandian|first=M.|year=1999|title=Shenbagaraman Pillai – His German Connection and India's Freedom Struggle (1891–1934)|journal=Proceedings of the Indian History Congress|volume=60|pages=1169|jstor=44144227}}<cite class="citation journal cs1" data-ve-ignore="" id="CITEREFSendurpandian1999">Sendurpandian, M. (1999). "Shenbagaraman Pillai – His German Connection and India's Freedom Struggle (1891–1934)". ''Proceedings of the Indian History Congress''. '''60''': 1169. [[जेस्टोर|JSTOR]] [https://www.jstor.org/stable/44144227 44144227].</cite></ref> 1924 तक, वह सक्रिय रूप से जर्मन "राष्ट्रवादी पार्टी" का समर्थन कर रहे थे । उन्होंने "भारतीय स्वतंत्रता के अधिकार" और "[[असहयोग आन्दोलन|गांधी आंदोलन]]" पर लीग ऑफ ऑप्रेस्ड पीपुल्स के तत्वावधान में एक व्याख्यान दिया।<ref name="Sendurpandian1999" />
1926 में चेम्पकरामन ने [[हैदराबाद]] से प्रकाशित समाचार पत्र ''नवयुह'' के संपादक को एक पत्र लिखा। किन्तु [[भारत सरकार अधिनियम, १९१९|अंग्रेज सरकार]] को इसका पता चल गया। सरकार ने [[मद्रास प्रैज़िडन्सी|मद्रास सरकार]] को पत्र लिखकर निर्देश दे दिया गया कि अगर चेम्पकरामन् अपनी राजद्रोही और ब्रिटिश विरोधी गतिविधियों के लिये भारत लौटते हैं तो उससे निपटने के लिए एहतियाती उपाय किए जाएं।<ref name="Sendurpandian1999">{{Cite journal|last=Sendurpandian|first=M.|year=1999|title=Shenbagaraman Pillai – His German Connection and India's Freedom Struggle (1891–1934)|journal=Proceedings of the Indian History Congress|volume=60|pages=1169|jstor=44144227}}<cite class="citation journal cs1" data-ve-ignore="" id="CITEREFSendurpandian1999">Sendurpandian, M. (1999). "Shenbagaraman Pillai – His German Connection and India's Freedom Struggle (1891–1934)". ''Proceedings of the Indian History Congress''. '''60''': 1169. [[जेस्टोर|JSTOR]] [https://www.jstor.org/stable/44144227 44144227].</cite></ref>
== भारत की अस्थायी सरकार के विदेश मंत्री ==
[[चित्र:Maaveeran_Senbagaraaman.JPG|दाएँ|अंगूठाकार|333x333पिक्सेल|[[चेन्नई]] में <nowiki>'''चेम्पकरमन् पिल्लै'''</nowiki> की प्रतिमा]]
1 दिसंबर 1915 को [[अफ़ग़ानिस्तान|अफगानिस्तान]] के [[काबुल]] में [[भारत की अन्तरिम सरकार|भारत की अस्थायी सरकार]] स्थापित की गयी थी। चेम्पकरामन् इस सरकार के विदेश मन्त्री थे। इनके अलावा [[राजा महेन्द्र प्रताप सिंह|राजा महेंद्र प्रताप]] राष्ट्रपति और [[अब्दुल हाफ़िज़ मोहम्मद बरकतउल्ला|मौलाना बरकतुल्लाह]] प्रधानमंत्री थे।
प्रथम महायुद्ध में जर्मनों की हार होने के कारण क्रांतिकारियों की आशाएँ धूमिल हो गयीं। अंग्रेजों ने 1919 में उन्हें अफगानिस्तान से बाहर कर दिया।
इस समय जर्मन अपने उद्देश्यों से प्रेरित होकर भारतीय क्रांतिकारियों की मदद कर रहे थे। हालांकि भारतीयों ने जर्मनों को यह स्पष्ट कर दिया कि वे अंग्रेजों के खिलाफ अपनी लड़ाई में बराबरी के भागीदार थे, किन्तु क्रांतिकारियों के प्रचार कार्य और सैन्य खुफिया का उपयोग जर्मन अपने उद्देश्यों के लिए करना चाहते थे।<ref name=":0">{{Cite journal|last=Liebau|first=Heike|date=2019|title="Unternehmungen und Aufwiegelungen": Das Berliner Indische Unabhängigkeitskomitee in den Akten des Politischen Archivs des Auswärtigen Amts (1914–1920)|url=https://www.projekt-mida.de/reflexicon/unternehmungen-und-aufwiegelungen-das-berliner-indische-unabhaengigkeitskomitee-in-den-akten-des-politischen-archivs-des-auswaertigen-amts-1914-1920/|journal=MIDA Archival Reflexicon|pages=2–4}}<cite class="citation journal cs1" data-ve-ignore="" id="CITEREFLiebau2019">Liebau, Heike (2019). [https://www.projekt-mida.de/reflexicon/unternehmungen-und-aufwiegelungen-das-berliner-indische-unabhaengigkeitskomitee-in-den-akten-des-politischen-archivs-des-auswaertigen-amts-1914-1920/ ""Unternehmungen und Aufwiegelungen": Das Berliner Indische Unabhängigkeitskomitee in den Akten des Politischen Archivs des Auswärtigen Amts (1914–1920)"]. ''MIDA Archival Reflexicon'': <span class="nowrap">2–</span>4.</cite></ref>
1907 में चेम्पकरामन् पिल्लै ने "जय हिंद" शब्द गढ़ा, जिसे आबिद हसन के सुझाव पर 1940 के दशक में [[आज़ाद हिन्द फ़ौज|आजाद हिन्द फौज]] के नारे के रूप में अपनाया गया।<ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=tOtCAQAAIAAJ|title=Germany's Asia-Pacific Empire: Colonialism and Naval Policy, 1885-1914|last=Charles Stephenson|publisher=Boydell Press|year=2009|isbn=978-1-84383-518-9|page=233|quote=...Champakaraman Pillai, a committed anti-imperialist. He is credited with coining the phrase 'Jai Hind' meaning 'Victory for India'...}}</ref><ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=-ExuAAAAMAAJ|title=Madras Presidency in pre-Gandhian era: a historical perspective, 1884-1915|last=Saroja Sundararajan|publisher=Lalitha Publications|year=1997|page=535|quote=To Champakaraman Pillai goes the credit of coining the taraka mantra "Jai Hind" in 1907...}}</ref><ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=Qoe_EAAAQBAJ&pg=PA24|title=Encyclopaedia of South Indian Culture and Heritage|publisher=New Bharatiya Book Corporation|year=2021|isbn=978-93-5521-768-4|page=24|access-date=16 December 2024}}</ref><ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=NiMgAAAAMAAJ|title=The Tiger Strikes: An Unwritten Chapter of Netaji's Life History|last=Gurbachan Singh Mangat|publisher=Gagan Publishers|year=1986|page=95}}</ref> भारत की स्वतंत्रता के बाद, यह एक राष्ट्रीय नारे के रूप में उभरा।<ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=vrxsDwAAQBAJ&pg=PA49|title=Secular States, Religious Politics|last=Sumantra Bose|publisher=Cambridge University Press|year=2018|isbn=978-1-108-47203-6|pages=49–50}}</ref>
== विवाह और आगे का जीवन ==
1931 में चेम्पकरामन् पिल्लै ने लक्ष्मी बाई से विवाह किया जो [[मणिपुर]] की रहने वाली थीं। वे उनसे [[बर्लिन]] में मिले थे। दुर्भाग्य से उनका वैवाहिक जीवन अधिक समय नहीं रहा। चेम्पकरामन् कुछ दिनों बाद बीमार हो गए। उनके शरीर में धीमे विष के लक्षण थे। चिकित्सा के लिये वे इटली चले गए।
28 मई 1934 को बर्लिन में चेम्पकरामन् की मृत्यु हो गई। 1935 में लक्ष्मीबाई उनकी अस्थियों को [[ब्रिटिश राज|भारत]] लाईं। बाद में उन्हें पूरे राजकीय सम्मान के साथ [[कन्याकुमारी]] में औपचारिक रूप से विसर्जित किया गया।<ref name="Rose2007">{{Cite news|url=http://orkut.google.com/c17467411-t2a31c39a3e13b67c.html|title=A Forgotten Fighter|last=Rose|first=N. Daniel|date=4 December 2007|work=[[The New Indian Express]]|access-date=4 September 2018|archive-url=https://web.archive.org/web/20170312074509/http://orkut.google.com/c17467411-t2a31c39a3e13b67c.html|archive-date=12 March 2017|location=[[Chennai]]}}</ref> चेम्पकरामन् की अंतिम इच्छा यह थी कि उनकी अस्थियों को नानजीनाड ([[कन्याकुमारी जिला|कन्याकुमारी]]) में उनके परिवार के पैतृक स्थान पर छिड़का जाए।<ref name="ScrollKrishnan20160817">{{Cite news|url=https://scroll.in/article/803179/did-a-tamil-man-from-trivandrum-mastermind-the-bombing-of-british-madras-during-world-war-i|title=Did a Tamil man from Trivandrum mastermind the bombing of British Madras during World War I?|last=Krishnan|first=Sairam|date=17 August 2016|work=[[Scroll.in]]|access-date=7 October 2020}}<cite class="citation news cs1" data-ve-ignore="" id="CITEREFKrishnan2016">Krishnan, Sairam (17 August 2016). [https://scroll.in/article/803179/did-a-tamil-man-from-trivandrum-mastermind-the-bombing-of-british-madras-during-world-war-i "Did a Tamil man from Trivandrum mastermind the bombing of British Madras during World War I?"]. ''[[Scroll.in]]''<span class="reference-accessdate">. Retrieved <span class="nowrap">7 October</span> 2020</span>.</cite></ref>
== संदर्भ ==
[[श्रेणी:भारत के क्रांतिकारी]]
[[श्रेणी:१९३४ में निधन]]
[[श्रेणी:1891 में जन्मे लोग]]
[[श्रेणी:Articles with hCards]]
[[श्रेणी:Pages with unreviewed translations]]
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अनुनाद सिंह
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{{ज्ञानसन्दूक व्यक्ति|name=चेम्पकरामन् पिल्लै|image=Champakraman Pillai.jpg|caption=|other_names=चम्पक|birth_date={{Birth date|1891|09|15|df=yes}}|birth_place=[[तिरुवनन्तपुरम्]], [[त्रावणकोर|त्रावणकोर राज्य]], [[ब्रितानी भारत]]<br>(सम्प्रति [[तिरुवनन्तपुरम् जिला]], [[केरलम्]], भारत)|death_date={{Death date and age|1934|05|26|1891|09|15|df=yes}}|death_place=[[बर्लिन]]}}
'''चेम्पकरामन् पिल्लै''' (15 सितंबर 1891-26 मई 1934) भारतीय मूल के राजनीतिक कार्यकर्ता और क्रांतिकारी थे।<ref name="OnmanoramaIndugopan20160927">{{Cite news|url=https://www.onmanorama.com/lifestyle/news/chempaka-raman-pillai-indian-revolutionary-freedom-fighter.html|title=Chempaka Raman Pillai: The freedom fighter who coined 'Jai Hind'|last=Indugopan|first=G.R.|date=27 September 2016|work=[[Malayala Manorama|Onmanorama]]|access-date=7 October 2020}}</ref><ref name="ScrollKrishnan20160817">{{Cite news|url=https://scroll.in/article/803179/did-a-tamil-man-from-trivandrum-mastermind-the-bombing-of-british-madras-during-world-war-i|title=Did a Tamil man from Trivandrum mastermind the bombing of British Madras during World War I?|last=Krishnan|first=Sairam|date=17 August 2016|work=[[Scroll.in]]|access-date=7 October 2020}}</ref> उनका जन्म [[तिरुवनन्तपुरम|तिरुवनंतपुरम]] जिले में हुआ था किन्तु युवा अवस्था में ही वे [[यूरोप]] चले गए, जहाँ उन्होंने अपना शेष सक्रिय जीवन एक भारतीय राष्ट्रवादी और क्रांतिकारी के रूप में बिताया।<ref>{{Cite book|title=Malayala Manorama Yearbook|last=Mathew|first=K. M.|last2=Mammen|first2=Matthew|date=2009|publisher=Malayala Manorama Co.|isbn=978-8-189-00412-5|location=Kottayam|page=301|language=ta}}</ref>
भारत की स्वतंत्रता से पहले के दिनों में [[जय हिन्द|जय हिंद]] के अभिवादन और नारे के निर्माण का श्रेय चेम्पकरामन् पिल्लै को दिया जाता है।<ref name="OnmanoramaIndugopan20160927" /><ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=Qoe_EAAAQBAJ&pg=PA24|title=Encyclopaedia of South Indian Culture and Heritage|publisher=New Bharatiya Book Corporation|year=2021|isbn=978-93-5521-768-4|page=24|access-date=16 December 2024}}</ref> भारत में अभी भी इस नारे का व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है।
उनकी मृत्यु के तुरंत बाद के वर्षों में यूरोप में उनके जीवन के बारे में जानकारी अस्पष्ट थी।<ref name="onmanorama.com">{{Cite web|url=https://www.onmanorama.com/lifestyle/news/chempaka-raman-pillai-indian-revolutionary-freedom-fighter.html|title=Chempaka Raman Pillai: The freedom fighter who coined 'Jai Hind'}}</ref> हाल के वर्षों में अधिक जानकारी सामने आई है।<ref name="OnmanoramaIndugopan20160927" />उनका जीवन [[एडोल्फ़ हिटलर|एडॉल्फ हिटलर]] के साथ एक झगड़े सहित कई विवादों में घिर गया था।
उन्होंने 31 जुलाई 1914 को भारतीय राष्ट्रीय स्वैच्छिक कोर (Indian National Voluntary Corps) की शुरुआत की। नेताजी [[सुभाष चन्द्र बोस|सुभाष चंद्र बोस]] को [[आज़ाद हिन्द फ़ौज|भारतीय राष्ट्रीय सेना]] (आईएनए) शुरू करने के लिए प्रेरित करने में चेम्पकरामन पिल्लै ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।<ref name="onmanorama.com">{{Cite web|url=https://www.onmanorama.com/lifestyle/news/chempaka-raman-pillai-indian-revolutionary-freedom-fighter.html|title=Chempaka Raman Pillai: The freedom fighter who coined 'Jai Hind'}}<cite class="citation web cs1" data-ve-ignore="">[https://www.onmanorama.com/lifestyle/news/chempaka-raman-pillai-indian-revolutionary-freedom-fighter.html "Chempaka Raman Pillai: The freedom fighter who coined 'Jai Hind'"].</cite></ref>
== प्रारंभिक जीवन ==
चेम्पकरामन का जन्म आधुनिक [[केरल]] राज्य में पूर्ववर्ती त्रावणकोर राज्य की राजधानी [[तिरुवनन्तपुरम|तिरुवनंतपुरम]] में एक तमिल वेल्लालर परिवार में हुआ था।<ref>{{Cite book|url=https://www.google.co.in/books/edition/TAMILNADU_A_JOURNEY_IN_TIME_Part_1/AkQgEAAAQBAJ?hl=en&gbpv=1&dq=Chempakaraman+Pillai+vellalar&pg=PT145&printsec=frontcover|title=TAMILNADU: A Journey in Time, Part 1|last=George Abraham Pottamkulam|publisher=Notion Press|year=2020|isbn=9781649516909|page=PT145}}</ref> उनके माता-पिता, चिन्नास्वामी पिल्लै और नागम्मल, नानजीनाड (तब त्रावणकोर, वर्तमान में [[कन्याकुमारी जिला]], [[तमिल नाडु|तमिलनाडु]]) के रहने वाले थे।<ref name="ScrollKrishnan20160817">{{Cite news|url=https://scroll.in/article/803179/did-a-tamil-man-from-trivandrum-mastermind-the-bombing-of-british-madras-during-world-war-i|title=Did a Tamil man from Trivandrum mastermind the bombing of British Madras during World War I?|last=Krishnan|first=Sairam|date=17 August 2016|work=[[Scroll.in]]|access-date=7 October 2020}}<cite class="citation news cs1" data-ve-ignore="" id="CITEREFKrishnan2016">Krishnan, Sairam (17 August 2016). [https://scroll.in/article/803179/did-a-tamil-man-from-trivandrum-mastermind-the-bombing-of-british-madras-during-world-war-i "Did a Tamil man from Trivandrum mastermind the bombing of British Madras during World War I?"]. ''[[Scroll.in]]''<span class="reference-accessdate">. Retrieved <span class="nowrap">7 October</span> 2020</span>.</cite></ref> 1908 में 17 साल की उम्र में एक यूरोपीय की मदद से वे भारत छोड़कर यूरोप चले गये।<ref name="Sendurpandian1999">{{Cite journal|last=Sendurpandian|first=M.|year=1999|title=Shenbagaraman Pillai – His German Connection and India's Freedom Struggle (1891–1934)|journal=Proceedings of the Indian History Congress|volume=60|pages=1169|jstor=44144227}}</ref>
== यूरोप में ==
चेम्पकरामन ने अक्टूबर 1910 से 1914 तक [[ईटीएच ज़्यूरिख़|ईटीएच ज्यूरिख में]] इंजीनियरिंग में डिप्लोमा प्राप्त किया। [[प्रथम विश्व युद्ध]] के शुरू होने के बाद, उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय भारत समर्थक समिति (International Pro-India Committee) की स्थापना की जिसका मुख्यालय [[ज़्यूरिख़|ज्यूरिख]] में था। सितंबर 1914 में स्वयं को इसका अध्यक्ष नियुक्त किया। उन्होंने ''<nowiki/>'प्रो इंडिया''' नाम से एक पत्रिका भी प्रकाशित की। <ref name="Sendurpandian1999">{{Cite journal|last=Sendurpandian|first=M.|year=1999|title=Shenbagaraman Pillai – His German Connection and India's Freedom Struggle (1891–1934)|journal=Proceedings of the Indian History Congress|volume=60|pages=1169|jstor=44144227}}<cite class="citation journal cs1" data-ve-ignore="" id="CITEREFSendurpandian1999">Sendurpandian, M. (1999). "Shenbagaraman Pillai – His German Connection and India's Freedom Struggle (1891–1934)". ''Proceedings of the Indian History Congress''. '''60''': 1169. [[जेस्टोर|JSTOR]] [https://www.jstor.org/stable/44144227 44144227].</cite></ref> इसी दौरान जर्मनी में रहने वाले भारतीय प्रवासियों के एक समूह ने बर्लिन में एक [[बर्लिन समिति|भारतीय स्वतंत्रता समिति का]] गठन किया। इस समूह में [[वीरेन्द्रनाथ चट्टोपाध्याय|वीरेंद्रनाथ चट्टोपाध्याय]], [[भूपेन्द्रनाथ दत्त|भूपेंद्रनाथ दत्त]], ए. रमन पिल्लई, [[तारकनाथ दास]], [[अब्दुल हाफ़िज़ मोहम्मद बरकतउल्ला|मौलवी बरकतुल्लाह]], चंद्रकांत चक्रवर्ती, एम. प्रभाकर, बीरेंद्र सरकार और हेरम्बा लाल गुप्ता शामिल थे।
अक्टूबर 1914 में चेम्पाकरन् बर्लिन चले गए और [[बर्लिन समिति]] में शामिल हो गए। इसे यूरोप में सभी भारतीय समर्थक क्रांतिकारी गतिविधियों के लिए मार्गदर्शक और नियंत्रण संस्थान के रूप में अपनी अंतर्राष्ट्रीय भारत समर्थक समिति के साथ विलय कर दिया। [[वीरेन्द्रनाथ चट्टोपाध्याय]] के अलावा, पिल्लै बर्लिन समूह के एकमात्र सदस्य थे जिनको लोग जानते थे। शेष सभी सामान्य छात्र थे जिन्होंने अपने देश की सेवा करने के आह्वान पर इस समिति में शामिल हुए थे।<ref name="Bose1971p92">{{Cite book|title=Indian Revolutionaries Abroad, 1905–1922|last=Bose|first=Arun Coomer|publisher=Bharati Bhawan|year=1971|location=Patna|pages=92–93}}</ref> [[लाला हरदयाल]] को भी आंदोलन में शामिल होने के लिए राजी किया गया। दोनों ने 'पूर्वी देशों के लिए जर्मन खुफिया ब्यूरो' के साथ सहयोग किया और जर्मन शिविरों, विशेष रूप से हैलबमॉन्डलेगर में भारतीय [[युद्ध-बन्दी|पीओडब्ल्यू]] पर निर्देशित जर्मन प्रचार बनाने में मदद की।<ref name=":0">{{Cite journal|last=Liebau|first=Heike|date=2019|title="Unternehmungen und Aufwiegelungen": Das Berliner Indische Unabhängigkeitskomitee in den Akten des Politischen Archivs des Auswärtigen Amts (1914–1920)|url=https://www.projekt-mida.de/reflexicon/unternehmungen-und-aufwiegelungen-das-berliner-indische-unabhaengigkeitskomitee-in-den-akten-des-politischen-archivs-des-auswaertigen-amts-1914-1920/|journal=MIDA Archival Reflexicon|pages=2–4}}</ref> बर्लिन में, उन्होंने बड़ी संख्या में आये श्रोताओं के सामने ब्रिटिश-विरोधी व्याख्यान दिए, और [[मेसोपोटामिया]], [[तुर्की]] और [[सीरिया]] में युद्ध के कैदियों और भारतीय निवासियों के बीच एक भारतीय राष्ट्रवादी सेना कोर को बढ़ाने के प्रयासों में बर्लिन-भारत समिति के साथ सहयोग किया।<ref name="Sendurpandian1999">{{Cite journal|last=Sendurpandian|first=M.|year=1999|title=Shenbagaraman Pillai – His German Connection and India's Freedom Struggle (1891–1934)|journal=Proceedings of the Indian History Congress|volume=60|pages=1169|jstor=44144227}}<cite class="citation journal cs1" data-ve-ignore="" id="CITEREFSendurpandian1999">Sendurpandian, M. (1999). "Shenbagaraman Pillai – His German Connection and India's Freedom Struggle (1891–1934)". ''Proceedings of the Indian History Congress''. '''60''': 1169. [[जेस्टोर|JSTOR]] [https://www.jstor.org/stable/44144227 44144227].</cite></ref> 1916 के मध्य तक, भारतीय समिति के शाखा कार्यालय [[ज़्यूरिख़|ज्यूरिख]], [[ऐम्स्टर्डैम|एम्स्टर्डम]] और [[स्टॉकहोम]] में स्थापित किए गए थे, जिनकी अध्यक्षता क्रमशः [[Jnan Chandra Dasgupta|दासगुप्त]], पिल्लै और [[वीरेन्द्रनाथ चट्टोपाध्याय|चट्टोपाध्याय]] ने की थी।<ref name="Bose1971p95">{{Cite book|title=Indian Revolutionaries Abroad, 1905–1922|last=Bose|first=Arun Coomer|publisher=Bharati Bhawan|year=1971|location=Patna|pages=95–96}}</ref>
चेम्पकरामन पिल्लै ने पूर्वी एशिया में भारतीय क्रांतिकारी गतिविधियों को पुनर्जीवित करने के लिए एक योजना तैयार की। वह निर्वासित इंडोनेशियाई राष्ट्रवादी डॉ. दौस डेक्कर से परिचित थे, जो बराकतुल्ला के अनुरोध पर जनवरी 1915 की शुरुआत में [[ज़्यूरिख़|ज्यूरिख]] से बर्लिन आए थे। पिल्लै ने पहले दौस डेक्कर से हॉलैंड के माध्यम से प्रचार पत्रकों के वितरण की व्यवस्था करने के लिए कहा, फिर जुलाई 1915 में उन्होंने प्रस्ताव दिया कि दौस डेकर भारतीय प्रचार और भारतीय और इंडोनेशियाई राष्ट्रवादियों के बीच सहयोग को बढ़ावा देने के लिए [[थाईलैण्ड|थाईलैंड]] की यात्रा करें। जर्मन विदेश कार्यालय के वेसेनडॉक के साथ संयुक्त रूप से योजना पर चर्चा करने के बाद, डॉस डेक्कर 8 सितंबर 1915 को [[रॉटर्डम|रॉटरडैम]] से संयुक्त राज्य अमेरिका के रास्ते रवाना हुए, जहाँ वे सैन फ्रांसिस्को में [[Ram Chandra (Indian revolutionary)|रामचंद्र]] से मिले और फिर [[टोक्यो]] और [[बैंकॉक]] गए। किन्तु उन्हे [[हॉन्ग कॉन्ग|हांगकांग]] में गिरफ्तार कर लिया गया और उनने सब कुछ स्वीकार कर लिया। इस झटके के बाद, इस मिशन की विफलता ने दक्षिण-पूर्व एशिया में भारतीय क्रांतिकारी प्रयासों को प्रभावी ढंग से समाप्त कर दिया।<ref name="Bose1971p143">{{Cite book|title=Indian Revolutionaries Abroad, 1905–1922|last=Bose|first=Arun Coomer|publisher=Bharati Bhawan|year=1971|location=Patna|pages=143–144}}</ref>
== एसएमएस एम्डेन द्वारा ब्रिटिश मद्रास पर बमबारी ==
22 सितंबर 1914 को, कैप्टन कार्ल वॉन मुलर की कमान में एक जर्मन युद्धपोत, एसएमएस ''एमडेन'', [[चेन्नई|मद्रास]] के तट के पानी में प्रवेश किया और मद्रास बंदरगाह के पास की अधोसंरचनाओं पर बमबारी की और वापस समुद्र में चला गया। इस अचानक हमले में अंग्रेज चकित रह गए। पिल्लै के परिवार का कहना था कि चेम्पकरामन ने एसएमएस ''एमडेन'' में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहते हुए जर्मन हमले का समन्वय किया, हालांकि आधिकारिक विचार ऐसा नहीं है। व्यापक रूप से यह माना जाता है कि चेम्पकरामन पिल्लै और कुछ भारतीय क्रांतिकारियों का मद्रास के एसएमएस एम्डेन बमबारी में हाथ था।<ref name="ScrollKrishnan20160817">{{Cite news|url=https://scroll.in/article/803179/did-a-tamil-man-from-trivandrum-mastermind-the-bombing-of-british-madras-during-world-war-i|title=Did a Tamil man from Trivandrum mastermind the bombing of British Madras during World War I?|last=Krishnan|first=Sairam|date=17 August 2016|work=[[Scroll.in]]|access-date=7 October 2020}}<cite class="citation news cs1" data-ve-ignore="" id="CITEREFKrishnan2016">Krishnan, Sairam (17 August 2016). [https://scroll.in/article/803179/did-a-tamil-man-from-trivandrum-mastermind-the-bombing-of-british-madras-during-world-war-i "Did a Tamil man from Trivandrum mastermind the bombing of British Madras during World War I?"]. ''[[Scroll.in]]''<span class="reference-accessdate">. Retrieved <span class="nowrap">7 October</span> 2020</span>.</cite></ref><ref name="OnmanoramaIndugopan20160927">{{Cite news|url=https://www.onmanorama.com/lifestyle/news/chempaka-raman-pillai-indian-revolutionary-freedom-fighter.html|title=Chempaka Raman Pillai: The freedom fighter who coined 'Jai Hind'|last=Indugopan|first=G.R.|date=27 September 2016|work=[[Malayala Manorama|Onmanorama]]|access-date=7 October 2020}}<cite class="citation news cs1" data-ve-ignore="" id="CITEREFIndugopan2016">Indugopan, G.R. (27 September 2016). [https://www.onmanorama.com/lifestyle/news/chempaka-raman-pillai-indian-revolutionary-freedom-fighter.html "Chempaka Raman Pillai: The freedom fighter who coined 'Jai Hind'"]. ''[[मलयाला मनोरमा (अख़बार)|Onmanorama]]''<span class="reference-accessdate">. Retrieved <span class="nowrap">7 October</span> 2020</span>.</cite></ref>
== युद्ध की गतिविधियाँ ==
भारतीय स्वतंत्रता समिति अंततः संयुक्त राज्य अमेरिका में ग़दर पार्टी के साथ [[हिंदू-जर्मन षड्यंत्र]] में शामिल हो गई। [[कैसर विल्हेम द्वितीय (जर्मनी)|कैसर विल्हेम द्वितीय]] के नेतृत्व में जर्मन विदेश कार्यालय ने इस समिति की ब्रिटिश विरोधी गतिविधियों को वित्तपोषित किया। त्रावणकोर के चेम्पकरामन और ए. रामन पिल्लै और जर्मन विश्वविद्यालयों के दोनों छात्रों ने समिति पर एक साथ काम किया। बाद में चेम्पकरामन पिल्लै ने '''आजाद हिन्द फौज''' प्रमुख [[सुभाष चन्द्र बोस|सुभाष चंद्र बोस]] के साथ गठबंधन किया।
ए. रमन पिल्लई, जो उस समय गोटिंगन विश्वविद्यालय में छात्र थे, को लिखे चेम्पकरामन पिल्लै के कई पत्र रमन पिल्लई के बेटे रॉस्कोटे कृष्ण पिल्लई के पास थे। इन पत्रों में 1914 और 1920 के बीच जर्मनी में चेम्पकरामन पिल्लै के जीवन के कुछ पहलुओं का खुलासा हुआ है। उदाहरण के लिये जुलाई 1914 को उन्होंने [[ब्रिटिश भारतीय सेना]] के भारतीय सैनिकों को विद्रोह करने और अंग्रेजों के खिलाफ लड़ने का आह्वान किया था।
प्रथम विश्वयुद्ध के अन्त होने पर चेम्पकरामन पिल्लै जर्मनी में ही रह गये। वहाँ वे एक कारखाने में तकनीशियन के रूप में कार्य करते रहे। जब नेताजी सुभाष चन्द्र बोस ने विएना का दौरा किया, तब चेम्पकरामन पिल्लै ने उनसे मुलाकात की और अपने कार्ययोजना के बारे में उन्हें बताया था।
== युद्ध के बाद जर्मनी में सक्रियता ==
1919 में चेम्पकरामन पिल्लै ने भारत की स्वतंत्रता के समर्थन में अपनी राजनीतिक गतिविधियों को जारी रखने के लिए जर्मन-इंडियन लीग का गठन किया।<ref name="Sendurpandian1999">{{Cite journal|last=Sendurpandian|first=M.|year=1999|title=Shenbagaraman Pillai – His German Connection and India's Freedom Struggle (1891–1934)|journal=Proceedings of the Indian History Congress|volume=60|pages=1169|jstor=44144227}}<cite class="citation journal cs1" data-ve-ignore="" id="CITEREFSendurpandian1999">Sendurpandian, M. (1999). "Shenbagaraman Pillai – His German Connection and India's Freedom Struggle (1891–1934)". ''Proceedings of the Indian History Congress''. '''60''': 1169. [[जेस्टोर|JSTOR]] [https://www.jstor.org/stable/44144227 44144227].</cite></ref> 1924 तक, वह सक्रिय रूप से जर्मन "राष्ट्रवादी पार्टी" का समर्थन कर रहे थे । उन्होंने "भारतीय स्वतंत्रता के अधिकार" और "[[असहयोग आन्दोलन|गांधी आंदोलन]]" पर लीग ऑफ ऑप्रेस्ड पीपुल्स के तत्वावधान में एक व्याख्यान दिया।<ref name="Sendurpandian1999" />
1926 में चेम्पकरामन ने [[हैदराबाद]] से प्रकाशित समाचार पत्र ''नवयुह'' के संपादक को एक पत्र लिखा। किन्तु [[भारत सरकार अधिनियम, १९१९|अंग्रेज सरकार]] को इसका पता चल गया। सरकार ने [[मद्रास प्रैज़िडन्सी|मद्रास सरकार]] को पत्र लिखकर निर्देश दे दिया गया कि अगर चेम्पकरामन् अपनी राजद्रोही और ब्रिटिश विरोधी गतिविधियों के लिये भारत लौटते हैं तो उससे निपटने के लिए एहतियाती उपाय किए जाएं।<ref name="Sendurpandian1999">{{Cite journal|last=Sendurpandian|first=M.|year=1999|title=Shenbagaraman Pillai – His German Connection and India's Freedom Struggle (1891–1934)|journal=Proceedings of the Indian History Congress|volume=60|pages=1169|jstor=44144227}}<cite class="citation journal cs1" data-ve-ignore="" id="CITEREFSendurpandian1999">Sendurpandian, M. (1999). "Shenbagaraman Pillai – His German Connection and India's Freedom Struggle (1891–1934)". ''Proceedings of the Indian History Congress''. '''60''': 1169. [[जेस्टोर|JSTOR]] [https://www.jstor.org/stable/44144227 44144227].</cite></ref>
== भारत की अस्थायी सरकार के विदेश मंत्री ==
[[चित्र:Maaveeran_Senbagaraaman.JPG|दाएँ|अंगूठाकार|333x333पिक्सेल|[[चेन्नई]] में <nowiki>'''चेम्पकरमन् पिल्लै'''</nowiki> की प्रतिमा]]
1 दिसंबर 1915 को [[अफ़ग़ानिस्तान|अफगानिस्तान]] के [[काबुल]] में [[भारत की अन्तरिम सरकार|भारत की अस्थायी सरकार]] स्थापित की गयी थी। चेम्पकरामन् इस सरकार के विदेश मन्त्री थे। इनके अलावा [[राजा महेन्द्र प्रताप सिंह|राजा महेंद्र प्रताप]] राष्ट्रपति और [[अब्दुल हाफ़िज़ मोहम्मद बरकतउल्ला|मौलाना बरकतुल्लाह]] प्रधानमंत्री थे।
प्रथम महायुद्ध में जर्मनों की हार होने के कारण क्रांतिकारियों की आशाएँ धूमिल हो गयीं। अंग्रेजों ने 1919 में उन्हें अफगानिस्तान से बाहर कर दिया।
इस समय जर्मन अपने उद्देश्यों से प्रेरित होकर भारतीय क्रांतिकारियों की मदद कर रहे थे। हालांकि भारतीयों ने जर्मनों को यह स्पष्ट कर दिया कि वे अंग्रेजों के खिलाफ अपनी लड़ाई में बराबरी के भागीदार थे, किन्तु क्रांतिकारियों के प्रचार कार्य और सैन्य खुफिया का उपयोग जर्मन अपने उद्देश्यों के लिए करना चाहते थे।<ref name=":0">{{Cite journal|last=Liebau|first=Heike|date=2019|title="Unternehmungen und Aufwiegelungen": Das Berliner Indische Unabhängigkeitskomitee in den Akten des Politischen Archivs des Auswärtigen Amts (1914–1920)|url=https://www.projekt-mida.de/reflexicon/unternehmungen-und-aufwiegelungen-das-berliner-indische-unabhaengigkeitskomitee-in-den-akten-des-politischen-archivs-des-auswaertigen-amts-1914-1920/|journal=MIDA Archival Reflexicon|pages=2–4}}<cite class="citation journal cs1" data-ve-ignore="" id="CITEREFLiebau2019">Liebau, Heike (2019). [https://www.projekt-mida.de/reflexicon/unternehmungen-und-aufwiegelungen-das-berliner-indische-unabhaengigkeitskomitee-in-den-akten-des-politischen-archivs-des-auswaertigen-amts-1914-1920/ ""Unternehmungen und Aufwiegelungen": Das Berliner Indische Unabhängigkeitskomitee in den Akten des Politischen Archivs des Auswärtigen Amts (1914–1920)"]. ''MIDA Archival Reflexicon'': <span class="nowrap">2–</span>4.</cite></ref>
1907 में चेम्पकरामन् पिल्लै ने "जय हिंद" शब्द गढ़ा, जिसे आबिद हसन के सुझाव पर 1940 के दशक में [[आज़ाद हिन्द फ़ौज|आजाद हिन्द फौज]] के नारे के रूप में अपनाया गया।<ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=tOtCAQAAIAAJ|title=Germany's Asia-Pacific Empire: Colonialism and Naval Policy, 1885-1914|last=Charles Stephenson|publisher=Boydell Press|year=2009|isbn=978-1-84383-518-9|page=233|quote=...Champakaraman Pillai, a committed anti-imperialist. He is credited with coining the phrase 'Jai Hind' meaning 'Victory for India'...}}</ref><ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=-ExuAAAAMAAJ|title=Madras Presidency in pre-Gandhian era: a historical perspective, 1884-1915|last=Saroja Sundararajan|publisher=Lalitha Publications|year=1997|page=535|quote=To Champakaraman Pillai goes the credit of coining the taraka mantra "Jai Hind" in 1907...}}</ref><ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=Qoe_EAAAQBAJ&pg=PA24|title=Encyclopaedia of South Indian Culture and Heritage|publisher=New Bharatiya Book Corporation|year=2021|isbn=978-93-5521-768-4|page=24|access-date=16 December 2024}}</ref><ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=NiMgAAAAMAAJ|title=The Tiger Strikes: An Unwritten Chapter of Netaji's Life History|last=Gurbachan Singh Mangat|publisher=Gagan Publishers|year=1986|page=95}}</ref> भारत की स्वतंत्रता के बाद, यह एक राष्ट्रीय नारे के रूप में उभरा।<ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=vrxsDwAAQBAJ&pg=PA49|title=Secular States, Religious Politics|last=Sumantra Bose|publisher=Cambridge University Press|year=2018|isbn=978-1-108-47203-6|pages=49–50}}</ref>
== विवाह और आगे का जीवन ==
1931 में चेम्पकरामन् पिल्लै ने लक्ष्मी बाई से विवाह किया जो [[मणिपुर]] की रहने वाली थीं। वे उनसे [[बर्लिन]] में मिले थे। दुर्भाग्य से उनका वैवाहिक जीवन अधिक समय नहीं रहा। चेम्पकरामन् कुछ दिनों बाद बीमार हो गए। उनके शरीर में धीमे विष के लक्षण थे। चिकित्सा के लिये वे इटली चले गए।
28 मई 1934 को बर्लिन में चेम्पकरामन् की मृत्यु हो गई। 1935 में लक्ष्मीबाई उनकी अस्थियों को [[ब्रिटिश राज|भारत]] लाईं। बाद में उन्हें पूरे राजकीय सम्मान के साथ [[कन्याकुमारी]] में औपचारिक रूप से विसर्जित किया गया।<ref name="Rose2007">{{Cite news|url=http://orkut.google.com/c17467411-t2a31c39a3e13b67c.html|title=A Forgotten Fighter|last=Rose|first=N. Daniel|date=4 December 2007|work=[[The New Indian Express]]|access-date=4 September 2018|archive-url=https://web.archive.org/web/20170312074509/http://orkut.google.com/c17467411-t2a31c39a3e13b67c.html|archive-date=12 March 2017|location=[[Chennai]]}}</ref> चेम्पकरामन् की अंतिम इच्छा यह थी कि उनकी अस्थियों को नानजीनाड ([[कन्याकुमारी जिला|कन्याकुमारी]]) में उनके परिवार के पैतृक स्थान पर छिड़का जाए।<ref name="ScrollKrishnan20160817">{{Cite news|url=https://scroll.in/article/803179/did-a-tamil-man-from-trivandrum-mastermind-the-bombing-of-british-madras-during-world-war-i|title=Did a Tamil man from Trivandrum mastermind the bombing of British Madras during World War I?|last=Krishnan|first=Sairam|date=17 August 2016|work=[[Scroll.in]]|access-date=7 October 2020}}<cite class="citation news cs1" data-ve-ignore="" id="CITEREFKrishnan2016">Krishnan, Sairam (17 August 2016). [https://scroll.in/article/803179/did-a-tamil-man-from-trivandrum-mastermind-the-bombing-of-british-madras-during-world-war-i "Did a Tamil man from Trivandrum mastermind the bombing of British Madras during World War I?"]. ''[[Scroll.in]]''<span class="reference-accessdate">. Retrieved <span class="nowrap">7 October</span> 2020</span>.</cite></ref>
==सन्दर्भ==
{{टिप्पणीसूची}}
{{भारतीय स्वतंत्रता का क्रांतिकारी आन्दोलन}}
[[श्रेणी:भारत के क्रांतिकारी]]
[[श्रेणी:१९३४ में निधन]]
[[श्रेणी:1891 में जन्मे लोग]]
[[श्रेणी:Articles with hCards]]
[[श्रेणी:Pages with unreviewed translations]]
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6547797
2026-05-02T15:10:53Z
अनुनाद सिंह
1634
/* भारत की अस्थायी सरकार के विदेश मंत्री */
6547798
wikitext
text/x-wiki
{{ज्ञानसन्दूक व्यक्ति|name=चेम्पकरामन् पिल्लै|image=Champakraman Pillai.jpg|caption=|other_names=चम्पक|birth_date={{Birth date|1891|09|15|df=yes}}|birth_place=[[तिरुवनन्तपुरम्]], [[त्रावणकोर|त्रावणकोर राज्य]], [[ब्रितानी भारत]]<br>(सम्प्रति [[तिरुवनन्तपुरम् जिला]], [[केरलम्]], भारत)|death_date={{Death date and age|1934|05|26|1891|09|15|df=yes}}|death_place=[[बर्लिन]]}}
'''चेम्पकरामन् पिल्लै''' (15 सितंबर 1891-26 मई 1934) भारतीय मूल के राजनीतिक कार्यकर्ता और क्रांतिकारी थे।<ref name="OnmanoramaIndugopan20160927">{{Cite news|url=https://www.onmanorama.com/lifestyle/news/chempaka-raman-pillai-indian-revolutionary-freedom-fighter.html|title=Chempaka Raman Pillai: The freedom fighter who coined 'Jai Hind'|last=Indugopan|first=G.R.|date=27 September 2016|work=[[Malayala Manorama|Onmanorama]]|access-date=7 October 2020}}</ref><ref name="ScrollKrishnan20160817">{{Cite news|url=https://scroll.in/article/803179/did-a-tamil-man-from-trivandrum-mastermind-the-bombing-of-british-madras-during-world-war-i|title=Did a Tamil man from Trivandrum mastermind the bombing of British Madras during World War I?|last=Krishnan|first=Sairam|date=17 August 2016|work=[[Scroll.in]]|access-date=7 October 2020}}</ref> उनका जन्म [[तिरुवनन्तपुरम|तिरुवनंतपुरम]] जिले में हुआ था किन्तु युवा अवस्था में ही वे [[यूरोप]] चले गए, जहाँ उन्होंने अपना शेष सक्रिय जीवन एक भारतीय राष्ट्रवादी और क्रांतिकारी के रूप में बिताया।<ref>{{Cite book|title=Malayala Manorama Yearbook|last=Mathew|first=K. M.|last2=Mammen|first2=Matthew|date=2009|publisher=Malayala Manorama Co.|isbn=978-8-189-00412-5|location=Kottayam|page=301|language=ta}}</ref>
भारत की स्वतंत्रता से पहले के दिनों में [[जय हिन्द|जय हिंद]] के अभिवादन और नारे के निर्माण का श्रेय चेम्पकरामन् पिल्लै को दिया जाता है।<ref name="OnmanoramaIndugopan20160927" /><ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=Qoe_EAAAQBAJ&pg=PA24|title=Encyclopaedia of South Indian Culture and Heritage|publisher=New Bharatiya Book Corporation|year=2021|isbn=978-93-5521-768-4|page=24|access-date=16 December 2024}}</ref> भारत में अभी भी इस नारे का व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है।
उनकी मृत्यु के तुरंत बाद के वर्षों में यूरोप में उनके जीवन के बारे में जानकारी अस्पष्ट थी।<ref name="onmanorama.com">{{Cite web|url=https://www.onmanorama.com/lifestyle/news/chempaka-raman-pillai-indian-revolutionary-freedom-fighter.html|title=Chempaka Raman Pillai: The freedom fighter who coined 'Jai Hind'}}</ref> हाल के वर्षों में अधिक जानकारी सामने आई है।<ref name="OnmanoramaIndugopan20160927" />उनका जीवन [[एडोल्फ़ हिटलर|एडॉल्फ हिटलर]] के साथ एक झगड़े सहित कई विवादों में घिर गया था।
उन्होंने 31 जुलाई 1914 को भारतीय राष्ट्रीय स्वैच्छिक कोर (Indian National Voluntary Corps) की शुरुआत की। नेताजी [[सुभाष चन्द्र बोस|सुभाष चंद्र बोस]] को [[आज़ाद हिन्द फ़ौज|भारतीय राष्ट्रीय सेना]] (आईएनए) शुरू करने के लिए प्रेरित करने में चेम्पकरामन पिल्लै ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।<ref name="onmanorama.com">{{Cite web|url=https://www.onmanorama.com/lifestyle/news/chempaka-raman-pillai-indian-revolutionary-freedom-fighter.html|title=Chempaka Raman Pillai: The freedom fighter who coined 'Jai Hind'}}<cite class="citation web cs1" data-ve-ignore="">[https://www.onmanorama.com/lifestyle/news/chempaka-raman-pillai-indian-revolutionary-freedom-fighter.html "Chempaka Raman Pillai: The freedom fighter who coined 'Jai Hind'"].</cite></ref>
== प्रारंभिक जीवन ==
चेम्पकरामन का जन्म आधुनिक [[केरल]] राज्य में पूर्ववर्ती त्रावणकोर राज्य की राजधानी [[तिरुवनन्तपुरम|तिरुवनंतपुरम]] में एक तमिल वेल्लालर परिवार में हुआ था।<ref>{{Cite book|url=https://www.google.co.in/books/edition/TAMILNADU_A_JOURNEY_IN_TIME_Part_1/AkQgEAAAQBAJ?hl=en&gbpv=1&dq=Chempakaraman+Pillai+vellalar&pg=PT145&printsec=frontcover|title=TAMILNADU: A Journey in Time, Part 1|last=George Abraham Pottamkulam|publisher=Notion Press|year=2020|isbn=9781649516909|page=PT145}}</ref> उनके माता-पिता, चिन्नास्वामी पिल्लै और नागम्मल, नानजीनाड (तब त्रावणकोर, वर्तमान में [[कन्याकुमारी जिला]], [[तमिल नाडु|तमिलनाडु]]) के रहने वाले थे।<ref name="ScrollKrishnan20160817">{{Cite news|url=https://scroll.in/article/803179/did-a-tamil-man-from-trivandrum-mastermind-the-bombing-of-british-madras-during-world-war-i|title=Did a Tamil man from Trivandrum mastermind the bombing of British Madras during World War I?|last=Krishnan|first=Sairam|date=17 August 2016|work=[[Scroll.in]]|access-date=7 October 2020}}<cite class="citation news cs1" data-ve-ignore="" id="CITEREFKrishnan2016">Krishnan, Sairam (17 August 2016). [https://scroll.in/article/803179/did-a-tamil-man-from-trivandrum-mastermind-the-bombing-of-british-madras-during-world-war-i "Did a Tamil man from Trivandrum mastermind the bombing of British Madras during World War I?"]. ''[[Scroll.in]]''<span class="reference-accessdate">. Retrieved <span class="nowrap">7 October</span> 2020</span>.</cite></ref> 1908 में 17 साल की उम्र में एक यूरोपीय की मदद से वे भारत छोड़कर यूरोप चले गये।<ref name="Sendurpandian1999">{{Cite journal|last=Sendurpandian|first=M.|year=1999|title=Shenbagaraman Pillai – His German Connection and India's Freedom Struggle (1891–1934)|journal=Proceedings of the Indian History Congress|volume=60|pages=1169|jstor=44144227}}</ref>
== यूरोप में ==
चेम्पकरामन ने अक्टूबर 1910 से 1914 तक [[ईटीएच ज़्यूरिख़|ईटीएच ज्यूरिख में]] इंजीनियरिंग में डिप्लोमा प्राप्त किया। [[प्रथम विश्व युद्ध]] के शुरू होने के बाद, उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय भारत समर्थक समिति (International Pro-India Committee) की स्थापना की जिसका मुख्यालय [[ज़्यूरिख़|ज्यूरिख]] में था। सितंबर 1914 में स्वयं को इसका अध्यक्ष नियुक्त किया। उन्होंने ''<nowiki/>'प्रो इंडिया''' नाम से एक पत्रिका भी प्रकाशित की। <ref name="Sendurpandian1999">{{Cite journal|last=Sendurpandian|first=M.|year=1999|title=Shenbagaraman Pillai – His German Connection and India's Freedom Struggle (1891–1934)|journal=Proceedings of the Indian History Congress|volume=60|pages=1169|jstor=44144227}}<cite class="citation journal cs1" data-ve-ignore="" id="CITEREFSendurpandian1999">Sendurpandian, M. (1999). "Shenbagaraman Pillai – His German Connection and India's Freedom Struggle (1891–1934)". ''Proceedings of the Indian History Congress''. '''60''': 1169. [[जेस्टोर|JSTOR]] [https://www.jstor.org/stable/44144227 44144227].</cite></ref> इसी दौरान जर्मनी में रहने वाले भारतीय प्रवासियों के एक समूह ने बर्लिन में एक [[बर्लिन समिति|भारतीय स्वतंत्रता समिति का]] गठन किया। इस समूह में [[वीरेन्द्रनाथ चट्टोपाध्याय|वीरेंद्रनाथ चट्टोपाध्याय]], [[भूपेन्द्रनाथ दत्त|भूपेंद्रनाथ दत्त]], ए. रमन पिल्लई, [[तारकनाथ दास]], [[अब्दुल हाफ़िज़ मोहम्मद बरकतउल्ला|मौलवी बरकतुल्लाह]], चंद्रकांत चक्रवर्ती, एम. प्रभाकर, बीरेंद्र सरकार और हेरम्बा लाल गुप्ता शामिल थे।
अक्टूबर 1914 में चेम्पाकरन् बर्लिन चले गए और [[बर्लिन समिति]] में शामिल हो गए। इसे यूरोप में सभी भारतीय समर्थक क्रांतिकारी गतिविधियों के लिए मार्गदर्शक और नियंत्रण संस्थान के रूप में अपनी अंतर्राष्ट्रीय भारत समर्थक समिति के साथ विलय कर दिया। [[वीरेन्द्रनाथ चट्टोपाध्याय]] के अलावा, पिल्लै बर्लिन समूह के एकमात्र सदस्य थे जिनको लोग जानते थे। शेष सभी सामान्य छात्र थे जिन्होंने अपने देश की सेवा करने के आह्वान पर इस समिति में शामिल हुए थे।<ref name="Bose1971p92">{{Cite book|title=Indian Revolutionaries Abroad, 1905–1922|last=Bose|first=Arun Coomer|publisher=Bharati Bhawan|year=1971|location=Patna|pages=92–93}}</ref> [[लाला हरदयाल]] को भी आंदोलन में शामिल होने के लिए राजी किया गया। दोनों ने 'पूर्वी देशों के लिए जर्मन खुफिया ब्यूरो' के साथ सहयोग किया और जर्मन शिविरों, विशेष रूप से हैलबमॉन्डलेगर में भारतीय [[युद्ध-बन्दी|पीओडब्ल्यू]] पर निर्देशित जर्मन प्रचार बनाने में मदद की।<ref name=":0">{{Cite journal|last=Liebau|first=Heike|date=2019|title="Unternehmungen und Aufwiegelungen": Das Berliner Indische Unabhängigkeitskomitee in den Akten des Politischen Archivs des Auswärtigen Amts (1914–1920)|url=https://www.projekt-mida.de/reflexicon/unternehmungen-und-aufwiegelungen-das-berliner-indische-unabhaengigkeitskomitee-in-den-akten-des-politischen-archivs-des-auswaertigen-amts-1914-1920/|journal=MIDA Archival Reflexicon|pages=2–4}}</ref> बर्लिन में, उन्होंने बड़ी संख्या में आये श्रोताओं के सामने ब्रिटिश-विरोधी व्याख्यान दिए, और [[मेसोपोटामिया]], [[तुर्की]] और [[सीरिया]] में युद्ध के कैदियों और भारतीय निवासियों के बीच एक भारतीय राष्ट्रवादी सेना कोर को बढ़ाने के प्रयासों में बर्लिन-भारत समिति के साथ सहयोग किया।<ref name="Sendurpandian1999">{{Cite journal|last=Sendurpandian|first=M.|year=1999|title=Shenbagaraman Pillai – His German Connection and India's Freedom Struggle (1891–1934)|journal=Proceedings of the Indian History Congress|volume=60|pages=1169|jstor=44144227}}<cite class="citation journal cs1" data-ve-ignore="" id="CITEREFSendurpandian1999">Sendurpandian, M. (1999). "Shenbagaraman Pillai – His German Connection and India's Freedom Struggle (1891–1934)". ''Proceedings of the Indian History Congress''. '''60''': 1169. [[जेस्टोर|JSTOR]] [https://www.jstor.org/stable/44144227 44144227].</cite></ref> 1916 के मध्य तक, भारतीय समिति के शाखा कार्यालय [[ज़्यूरिख़|ज्यूरिख]], [[ऐम्स्टर्डैम|एम्स्टर्डम]] और [[स्टॉकहोम]] में स्थापित किए गए थे, जिनकी अध्यक्षता क्रमशः [[Jnan Chandra Dasgupta|दासगुप्त]], पिल्लै और [[वीरेन्द्रनाथ चट्टोपाध्याय|चट्टोपाध्याय]] ने की थी।<ref name="Bose1971p95">{{Cite book|title=Indian Revolutionaries Abroad, 1905–1922|last=Bose|first=Arun Coomer|publisher=Bharati Bhawan|year=1971|location=Patna|pages=95–96}}</ref>
चेम्पकरामन पिल्लै ने पूर्वी एशिया में भारतीय क्रांतिकारी गतिविधियों को पुनर्जीवित करने के लिए एक योजना तैयार की। वह निर्वासित इंडोनेशियाई राष्ट्रवादी डॉ. दौस डेक्कर से परिचित थे, जो बराकतुल्ला के अनुरोध पर जनवरी 1915 की शुरुआत में [[ज़्यूरिख़|ज्यूरिख]] से बर्लिन आए थे। पिल्लै ने पहले दौस डेक्कर से हॉलैंड के माध्यम से प्रचार पत्रकों के वितरण की व्यवस्था करने के लिए कहा, फिर जुलाई 1915 में उन्होंने प्रस्ताव दिया कि दौस डेकर भारतीय प्रचार और भारतीय और इंडोनेशियाई राष्ट्रवादियों के बीच सहयोग को बढ़ावा देने के लिए [[थाईलैण्ड|थाईलैंड]] की यात्रा करें। जर्मन विदेश कार्यालय के वेसेनडॉक के साथ संयुक्त रूप से योजना पर चर्चा करने के बाद, डॉस डेक्कर 8 सितंबर 1915 को [[रॉटर्डम|रॉटरडैम]] से संयुक्त राज्य अमेरिका के रास्ते रवाना हुए, जहाँ वे सैन फ्रांसिस्को में [[Ram Chandra (Indian revolutionary)|रामचंद्र]] से मिले और फिर [[टोक्यो]] और [[बैंकॉक]] गए। किन्तु उन्हे [[हॉन्ग कॉन्ग|हांगकांग]] में गिरफ्तार कर लिया गया और उनने सब कुछ स्वीकार कर लिया। इस झटके के बाद, इस मिशन की विफलता ने दक्षिण-पूर्व एशिया में भारतीय क्रांतिकारी प्रयासों को प्रभावी ढंग से समाप्त कर दिया।<ref name="Bose1971p143">{{Cite book|title=Indian Revolutionaries Abroad, 1905–1922|last=Bose|first=Arun Coomer|publisher=Bharati Bhawan|year=1971|location=Patna|pages=143–144}}</ref>
== एसएमएस एम्डेन द्वारा ब्रिटिश मद्रास पर बमबारी ==
22 सितंबर 1914 को, कैप्टन कार्ल वॉन मुलर की कमान में एक जर्मन युद्धपोत, एसएमएस ''एमडेन'', [[चेन्नई|मद्रास]] के तट के पानी में प्रवेश किया और मद्रास बंदरगाह के पास की अधोसंरचनाओं पर बमबारी की और वापस समुद्र में चला गया। इस अचानक हमले में अंग्रेज चकित रह गए। पिल्लै के परिवार का कहना था कि चेम्पकरामन ने एसएमएस ''एमडेन'' में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहते हुए जर्मन हमले का समन्वय किया, हालांकि आधिकारिक विचार ऐसा नहीं है। व्यापक रूप से यह माना जाता है कि चेम्पकरामन पिल्लै और कुछ भारतीय क्रांतिकारियों का मद्रास के एसएमएस एम्डेन बमबारी में हाथ था।<ref name="ScrollKrishnan20160817">{{Cite news|url=https://scroll.in/article/803179/did-a-tamil-man-from-trivandrum-mastermind-the-bombing-of-british-madras-during-world-war-i|title=Did a Tamil man from Trivandrum mastermind the bombing of British Madras during World War I?|last=Krishnan|first=Sairam|date=17 August 2016|work=[[Scroll.in]]|access-date=7 October 2020}}<cite class="citation news cs1" data-ve-ignore="" id="CITEREFKrishnan2016">Krishnan, Sairam (17 August 2016). [https://scroll.in/article/803179/did-a-tamil-man-from-trivandrum-mastermind-the-bombing-of-british-madras-during-world-war-i "Did a Tamil man from Trivandrum mastermind the bombing of British Madras during World War I?"]. ''[[Scroll.in]]''<span class="reference-accessdate">. Retrieved <span class="nowrap">7 October</span> 2020</span>.</cite></ref><ref name="OnmanoramaIndugopan20160927">{{Cite news|url=https://www.onmanorama.com/lifestyle/news/chempaka-raman-pillai-indian-revolutionary-freedom-fighter.html|title=Chempaka Raman Pillai: The freedom fighter who coined 'Jai Hind'|last=Indugopan|first=G.R.|date=27 September 2016|work=[[Malayala Manorama|Onmanorama]]|access-date=7 October 2020}}<cite class="citation news cs1" data-ve-ignore="" id="CITEREFIndugopan2016">Indugopan, G.R. (27 September 2016). [https://www.onmanorama.com/lifestyle/news/chempaka-raman-pillai-indian-revolutionary-freedom-fighter.html "Chempaka Raman Pillai: The freedom fighter who coined 'Jai Hind'"]. ''[[मलयाला मनोरमा (अख़बार)|Onmanorama]]''<span class="reference-accessdate">. Retrieved <span class="nowrap">7 October</span> 2020</span>.</cite></ref>
== युद्ध की गतिविधियाँ ==
भारतीय स्वतंत्रता समिति अंततः संयुक्त राज्य अमेरिका में ग़दर पार्टी के साथ [[हिंदू-जर्मन षड्यंत्र]] में शामिल हो गई। [[कैसर विल्हेम द्वितीय (जर्मनी)|कैसर विल्हेम द्वितीय]] के नेतृत्व में जर्मन विदेश कार्यालय ने इस समिति की ब्रिटिश विरोधी गतिविधियों को वित्तपोषित किया। त्रावणकोर के चेम्पकरामन और ए. रामन पिल्लै और जर्मन विश्वविद्यालयों के दोनों छात्रों ने समिति पर एक साथ काम किया। बाद में चेम्पकरामन पिल्लै ने '''आजाद हिन्द फौज''' प्रमुख [[सुभाष चन्द्र बोस|सुभाष चंद्र बोस]] के साथ गठबंधन किया।
ए. रमन पिल्लई, जो उस समय गोटिंगन विश्वविद्यालय में छात्र थे, को लिखे चेम्पकरामन पिल्लै के कई पत्र रमन पिल्लई के बेटे रॉस्कोटे कृष्ण पिल्लई के पास थे। इन पत्रों में 1914 और 1920 के बीच जर्मनी में चेम्पकरामन पिल्लै के जीवन के कुछ पहलुओं का खुलासा हुआ है। उदाहरण के लिये जुलाई 1914 को उन्होंने [[ब्रिटिश भारतीय सेना]] के भारतीय सैनिकों को विद्रोह करने और अंग्रेजों के खिलाफ लड़ने का आह्वान किया था।
प्रथम विश्वयुद्ध के अन्त होने पर चेम्पकरामन पिल्लै जर्मनी में ही रह गये। वहाँ वे एक कारखाने में तकनीशियन के रूप में कार्य करते रहे। जब नेताजी सुभाष चन्द्र बोस ने विएना का दौरा किया, तब चेम्पकरामन पिल्लै ने उनसे मुलाकात की और अपने कार्ययोजना के बारे में उन्हें बताया था।
== युद्ध के बाद जर्मनी में सक्रियता ==
1919 में चेम्पकरामन पिल्लै ने भारत की स्वतंत्रता के समर्थन में अपनी राजनीतिक गतिविधियों को जारी रखने के लिए जर्मन-इंडियन लीग का गठन किया।<ref name="Sendurpandian1999">{{Cite journal|last=Sendurpandian|first=M.|year=1999|title=Shenbagaraman Pillai – His German Connection and India's Freedom Struggle (1891–1934)|journal=Proceedings of the Indian History Congress|volume=60|pages=1169|jstor=44144227}}<cite class="citation journal cs1" data-ve-ignore="" id="CITEREFSendurpandian1999">Sendurpandian, M. (1999). "Shenbagaraman Pillai – His German Connection and India's Freedom Struggle (1891–1934)". ''Proceedings of the Indian History Congress''. '''60''': 1169. [[जेस्टोर|JSTOR]] [https://www.jstor.org/stable/44144227 44144227].</cite></ref> 1924 तक, वह सक्रिय रूप से जर्मन "राष्ट्रवादी पार्टी" का समर्थन कर रहे थे । उन्होंने "भारतीय स्वतंत्रता के अधिकार" और "[[असहयोग आन्दोलन|गांधी आंदोलन]]" पर लीग ऑफ ऑप्रेस्ड पीपुल्स के तत्वावधान में एक व्याख्यान दिया।<ref name="Sendurpandian1999" />
1926 में चेम्पकरामन ने [[हैदराबाद]] से प्रकाशित समाचार पत्र ''नवयुह'' के संपादक को एक पत्र लिखा। किन्तु [[भारत सरकार अधिनियम, १९१९|अंग्रेज सरकार]] को इसका पता चल गया। सरकार ने [[मद्रास प्रैज़िडन्सी|मद्रास सरकार]] को पत्र लिखकर निर्देश दे दिया गया कि अगर चेम्पकरामन् अपनी राजद्रोही और ब्रिटिश विरोधी गतिविधियों के लिये भारत लौटते हैं तो उससे निपटने के लिए एहतियाती उपाय किए जाएं।<ref name="Sendurpandian1999">{{Cite journal|last=Sendurpandian|first=M.|year=1999|title=Shenbagaraman Pillai – His German Connection and India's Freedom Struggle (1891–1934)|journal=Proceedings of the Indian History Congress|volume=60|pages=1169|jstor=44144227}}<cite class="citation journal cs1" data-ve-ignore="" id="CITEREFSendurpandian1999">Sendurpandian, M. (1999). "Shenbagaraman Pillai – His German Connection and India's Freedom Struggle (1891–1934)". ''Proceedings of the Indian History Congress''. '''60''': 1169. [[जेस्टोर|JSTOR]] [https://www.jstor.org/stable/44144227 44144227].</cite></ref>
== भारत की अस्थायी सरकार के विदेश मंत्री ==
[[चित्र:Maaveeran_Senbagaraaman.JPG|दाएँ|अंगूठाकार|333x333पिक्सेल|[[चेन्नई]] में '''चेम्पकरमन् पिल्लै''' की प्रतिमा]]
1 दिसंबर 1915 को [[अफ़ग़ानिस्तान|अफगानिस्तान]] के [[काबुल]] में [[भारत की अन्तरिम सरकार|भारत की अस्थायी सरकार]] स्थापित की गयी थी। चेम्पकरामन् इस सरकार के विदेश मन्त्री थे। इनके अलावा [[राजा महेन्द्र प्रताप सिंह|राजा महेंद्र प्रताप]] राष्ट्रपति और [[अब्दुल हाफ़िज़ मोहम्मद बरकतउल्ला|मौलाना बरकतुल्लाह]] प्रधानमंत्री थे।
प्रथम महायुद्ध में जर्मनों की हार होने के कारण क्रांतिकारियों की आशाएँ धूमिल हो गयीं। अंग्रेजों ने 1919 में उन्हें अफगानिस्तान से बाहर कर दिया।
इस समय जर्मन अपने उद्देश्यों से प्रेरित होकर भारतीय क्रांतिकारियों की मदद कर रहे थे। हालांकि भारतीयों ने जर्मनों को यह स्पष्ट कर दिया कि वे अंग्रेजों के खिलाफ अपनी लड़ाई में बराबरी के भागीदार थे, किन्तु क्रांतिकारियों के प्रचार कार्य और सैन्य खुफिया का उपयोग जर्मन अपने उद्देश्यों के लिए करना चाहते थे।<ref name=":0">{{Cite journal|last=Liebau|first=Heike|date=2019|title="Unternehmungen und Aufwiegelungen": Das Berliner Indische Unabhängigkeitskomitee in den Akten des Politischen Archivs des Auswärtigen Amts (1914–1920)|url=https://www.projekt-mida.de/reflexicon/unternehmungen-und-aufwiegelungen-das-berliner-indische-unabhaengigkeitskomitee-in-den-akten-des-politischen-archivs-des-auswaertigen-amts-1914-1920/|journal=MIDA Archival Reflexicon|pages=2–4}}<cite class="citation journal cs1" data-ve-ignore="" id="CITEREFLiebau2019">Liebau, Heike (2019). [https://www.projekt-mida.de/reflexicon/unternehmungen-und-aufwiegelungen-das-berliner-indische-unabhaengigkeitskomitee-in-den-akten-des-politischen-archivs-des-auswaertigen-amts-1914-1920/ ""Unternehmungen und Aufwiegelungen": Das Berliner Indische Unabhängigkeitskomitee in den Akten des Politischen Archivs des Auswärtigen Amts (1914–1920)"]. ''MIDA Archival Reflexicon'': <span class="nowrap">2–</span>4.</cite></ref>
1907 में चेम्पकरामन् पिल्लै ने "जय हिंद" शब्द गढ़ा, जिसे आबिद हसन के सुझाव पर 1940 के दशक में [[आज़ाद हिन्द फ़ौज|आजाद हिन्द फौज]] के नारे के रूप में अपनाया गया।<ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=tOtCAQAAIAAJ|title=Germany's Asia-Pacific Empire: Colonialism and Naval Policy, 1885-1914|last=Charles Stephenson|publisher=Boydell Press|year=2009|isbn=978-1-84383-518-9|page=233|quote=...Champakaraman Pillai, a committed anti-imperialist. He is credited with coining the phrase 'Jai Hind' meaning 'Victory for India'...}}</ref><ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=-ExuAAAAMAAJ|title=Madras Presidency in pre-Gandhian era: a historical perspective, 1884-1915|last=Saroja Sundararajan|publisher=Lalitha Publications|year=1997|page=535|quote=To Champakaraman Pillai goes the credit of coining the taraka mantra "Jai Hind" in 1907...}}</ref><ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=Qoe_EAAAQBAJ&pg=PA24|title=Encyclopaedia of South Indian Culture and Heritage|publisher=New Bharatiya Book Corporation|year=2021|isbn=978-93-5521-768-4|page=24|access-date=16 December 2024}}</ref><ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=NiMgAAAAMAAJ|title=The Tiger Strikes: An Unwritten Chapter of Netaji's Life History|last=Gurbachan Singh Mangat|publisher=Gagan Publishers|year=1986|page=95}}</ref> भारत की स्वतंत्रता के बाद, यह एक राष्ट्रीय नारे के रूप में उभरा।<ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=vrxsDwAAQBAJ&pg=PA49|title=Secular States, Religious Politics|last=Sumantra Bose|publisher=Cambridge University Press|year=2018|isbn=978-1-108-47203-6|pages=49–50}}</ref>
== विवाह और आगे का जीवन ==
1931 में चेम्पकरामन् पिल्लै ने लक्ष्मी बाई से विवाह किया जो [[मणिपुर]] की रहने वाली थीं। वे उनसे [[बर्लिन]] में मिले थे। दुर्भाग्य से उनका वैवाहिक जीवन अधिक समय नहीं रहा। चेम्पकरामन् कुछ दिनों बाद बीमार हो गए। उनके शरीर में धीमे विष के लक्षण थे। चिकित्सा के लिये वे इटली चले गए।
28 मई 1934 को बर्लिन में चेम्पकरामन् की मृत्यु हो गई। 1935 में लक्ष्मीबाई उनकी अस्थियों को [[ब्रिटिश राज|भारत]] लाईं। बाद में उन्हें पूरे राजकीय सम्मान के साथ [[कन्याकुमारी]] में औपचारिक रूप से विसर्जित किया गया।<ref name="Rose2007">{{Cite news|url=http://orkut.google.com/c17467411-t2a31c39a3e13b67c.html|title=A Forgotten Fighter|last=Rose|first=N. Daniel|date=4 December 2007|work=[[The New Indian Express]]|access-date=4 September 2018|archive-url=https://web.archive.org/web/20170312074509/http://orkut.google.com/c17467411-t2a31c39a3e13b67c.html|archive-date=12 March 2017|location=[[Chennai]]}}</ref> चेम्पकरामन् की अंतिम इच्छा यह थी कि उनकी अस्थियों को नानजीनाड ([[कन्याकुमारी जिला|कन्याकुमारी]]) में उनके परिवार के पैतृक स्थान पर छिड़का जाए।<ref name="ScrollKrishnan20160817">{{Cite news|url=https://scroll.in/article/803179/did-a-tamil-man-from-trivandrum-mastermind-the-bombing-of-british-madras-during-world-war-i|title=Did a Tamil man from Trivandrum mastermind the bombing of British Madras during World War I?|last=Krishnan|first=Sairam|date=17 August 2016|work=[[Scroll.in]]|access-date=7 October 2020}}<cite class="citation news cs1" data-ve-ignore="" id="CITEREFKrishnan2016">Krishnan, Sairam (17 August 2016). [https://scroll.in/article/803179/did-a-tamil-man-from-trivandrum-mastermind-the-bombing-of-british-madras-during-world-war-i "Did a Tamil man from Trivandrum mastermind the bombing of British Madras during World War I?"]. ''[[Scroll.in]]''<span class="reference-accessdate">. Retrieved <span class="nowrap">7 October</span> 2020</span>.</cite></ref>
==सन्दर्भ==
{{टिप्पणीसूची}}
{{भारतीय स्वतंत्रता का क्रांतिकारी आन्दोलन}}
[[श्रेणी:भारत के क्रांतिकारी]]
[[श्रेणी:१९३४ में निधन]]
[[श्रेणी:1891 में जन्मे लोग]]
[[श्रेणी:Articles with hCards]]
[[श्रेणी:Pages with unreviewed translations]]
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वार्ता:भूमिहीन कैंप (दिल्ली)
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अनुनाद सिंह
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== शीघ्र हटाने पर चर्चा ==
इस पृष्ठ को शीघ्र नहीं हटाया जाना चाहिये क्योंकि... (यह '''स्पैम''' कैसे है? यह दिल्ली की एक प्रमुख बस्ती के बारे में है। यह उल्लेखनीय हो सकती है।) --[[सदस्य:अनुनाद सिंह|अनुनाद सिंह]] ([[सदस्य वार्ता:अनुनाद सिंह|वार्ता]]) 15:17, 2 मई 2026 (UTC)
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अनुनाद सिंह
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== शीघ्र हटाने पर चर्चा ==
इस पृष्ठ को शीघ्र नहीं हटाया जाना चाहिये क्योंकि... (यह '''स्पैम''' कैसे है? यह दिल्ली की एक प्रमुख बस्ती के बारे में है। यह बस्ती उल्लेखनीय हो सकती है।) --[[सदस्य:अनुनाद सिंह|अनुनाद सिंह]] ([[सदस्य वार्ता:अनुनाद सिंह|वार्ता]]) 15:17, 2 मई 2026 (UTC)
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पंडित कांशी राम
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अनुनाद सिंह
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"[[:en:Special:Redirect/revision/1293761347|Pandit Kanshi Ram]]" पृष्ठ का अनुवाद करके निर्मित किया गया
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{{ज्ञानसन्दूक व्यक्ति|name=कांशी राम|image=Revolutionary Pandit Kanshi Ram.jpg|caption=|other_names=|birth_date={{birth date|1883|10|13|df=y}}|birth_place=मरौली कलां, [[पंजाब]], [[ब्रितानी राज]] ( अब [[रूपनगर जिला]], भारतीय पंजाब)|death_date={{death date and age|1915|3|27|1883|10|13|df=y}}|death_place=[[लाहौर]]|title=|death_cause=फाँसी पर लटकाने से}}
'''पंडित कांशीराम''' (13 अक्टूबर 1883 - 27 मार्च 1915) एक [[ब्रिटिश भारत के प्रेसिडेंसी और प्रांत|भारतीय]] [[भारतीय स्वतन्त्रता आन्दोलन|क्रांतिकारी]] थे, जो [[लाला हरदयाल|हरदयाल]] और [[सोहन सिंह भकना|सोहन सिंह भाकना]] के साथ ग़दर पार्टी की स्थापना करने वाले तीन प्रमुख सदस्यों में से एक थे। उन्होंने 1913 से 1914 तक गदर पार्टी की स्थापना से पार्टी के कोषाध्यक्ष के रूप में कार्य किया। 1914 में, वे ग़दर विद्रोह के उद्देश्य से भारत लौटे। गदर विद्रोह के द्वारा [[प्रथम विश्व युद्ध|प्रथम विश्वयुद्ध]] के समय [[ब्रिटिश भारतीय सेना]] में विद्रोह को भड़काने का प्रयास किया गया था।
फरवरी की असफल प्रयास के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था। बाद में लाहौर षडयंत्र नाम से मुकदमा चला। कर्तार सिंह सराभा और [[विष्णु गणेश पिंगले]] के साथ कांशी राम पर आरोप लगाया गया और 27 मार्च 1915 को उन्हें फांसी दी गई।
== संदर्भ ==
[[श्रेणी:ब्रिटिश भारत द्वारा फाँसी पर लटकाए गए लोग]]
[[श्रेणी:१९१५ में निधन]]
[[श्रेणी:1883 में जन्मे लोग]]
[[श्रेणी:भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम]]
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[[श्रेणी:Articles with hCards]]
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अनुनाद सिंह
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'''पंडित कांशीराम''' (13 अक्टूबर 1883 - 27 मार्च 1915) एक [[ब्रिटिश भारत के प्रेसिडेंसी और प्रांत|भारतीय]] [[भारतीय स्वतन्त्रता आन्दोलन|क्रांतिकारी]] थे, जो [[लाला हरदयाल]] और [[सोहन सिंह भकना|सोहन सिंह भकना]] के साथ [[ग़दर पार्टी]] की स्थापना करने वाले तीन प्रमुख सदस्यों में से एक थे। उन्होंने 1913 से 1914 तक गदर पार्टी की स्थापना से पार्टी के कोषाध्यक्ष के रूप में कार्य किया। 1914 में वे [[ग़दर विद्रोह]] के उद्देश्य से भारत लौटे। गदर विद्रोह के द्वारा [[प्रथम विश्व युद्ध|प्रथम विश्वयुद्ध]] के समय [[ब्रिटिश भारतीय सेना]] में विद्रोह को भड़काने का प्रयास किया गया था।
फरवरी के असफल प्रयास के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था। बाद में [[लाहौर षडयंत्र]] नाम से मुकदमा चला। [[कर्तार सिंह सराभा]] और [[विष्णु गणेश पिंगले]] के साथ पण्डित कांशी राम पर आरोप लगाया गया। 27 मार्च 1915 को उन्हें [[फांसी]] दे दी गई।
==सन्दर्भ==
{{टिप्पणीसूची}}
{{भारतीय स्वतंत्रता का क्रांतिकारी आन्दोलन}}
[[श्रेणी:ब्रिटिश भारत द्वारा फाँसी पर लटकाए गए लोग]]
[[श्रेणी:१९१५ में निधन]]
[[श्रेणी:1883 में जन्मे लोग]]
[[श्रेणी:भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम]]
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[[श्रेणी:Articles with hCards]]
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पण्डित कांशी राम
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अनुनाद सिंह
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[[पंडित कांशी राम]] को अनुप्रेषित
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#पुनर्प्रेषित [[पंडित कांशी राम]]
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अरि मल्ल
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अनुनाद सिंह
1634
"[[:en:Special:Redirect/revision/1337716774|Arimalla]]" पृष्ठ का अनुवाद करके निर्मित किया गया
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text/x-wiki
{{Infobox royalty|image=|name=अरि मल्ल|title=|succession=[[नेपाल]] के एक राजा|reign=1201 – 1216|predecessor=|successor=[[अभय मल्ल]]|religion=|full name=|father=|mother=|spouse=|issue=[[अभय मल्ल]]|birth_date=1153|birth_place=[[नेपाल मण्डल|नेपाल]]|death_date=1216|death_place=}}
'''अरि मल्ल''', (नेवार : अरिदेव मल्ल) [[काठमांडू घाटी]] के मल्ल राजवंश के प्रथम राजा थे। काठमांडू घाटी को उस समय 'नेपाल मण्डल' के नाम से जाना जाता था।<ref name=":0">{{Cite book|url=https://himalaya.socanth.cam.ac.uk/collections/rarebooks/downloads/History_Ancient_Medieval_Nepal.pdf|title=The History of Ancient and Medieval Nepal|last=Shrestha|first=D.B.|last2=Singh|first2=C.B.|publisher=University of Cambridge|year=1972}}</ref>
== मल्ल शब्द की व्युत्पत्ति ==
१२वीं शताब्दी के आरंभ में, [[काठमांडू घाटी]] के प्रमुख व्यक्ति अपने नाम में ''मल्ल'' ( [[संस्कृत भाषा|संस्कृत]] में इस शब्द का अर्थ 'पहलवान' होता है) उपाधि लगाने लगे। यह शब्द उनके अत्यधिक बलवान और शक्तिशाली होने का संकेत देता था। अरि देव [[कुश्ती]] के बड़े प्रशंसक थे और स्वयं भी पहलवान थे, इसलिए संभव है कि उन्होंने अपने नाम में ''मल्ल'' शब्द जोड़ा हो और इस प्रकार [[मल्ल राजवंश]] अस्तित्व में आया हो। हालांकि, इस पर विवाद है क्योंकि मल्ल वंश के अस्तित्व में आने से पहले ही ''मल्ल'' शब्द का प्रचलन था, जैसे कि [[Mallapuri|मल्लपुरी]] नामक स्थान, जिस पर मानदेव ने विजय प्राप्त की थी। <ref name=":0">{{Cite book|url=https://himalaya.socanth.cam.ac.uk/collections/rarebooks/downloads/History_Ancient_Medieval_Nepal.pdf|title=The History of Ancient and Medieval Nepal|last=Shrestha|first=D.B.|last2=Singh|first2=C.B.|publisher=University of Cambridge|year=1972}}<cite class="citation book cs1" data-ve-ignore="" id="CITEREFShresthaSingh1972">Shrestha, D.B.; Singh, C.B. (1972). [https://himalaya.socanth.cam.ac.uk/collections/rarebooks/downloads/History_Ancient_Medieval_Nepal.pdf ''The History of Ancient and Medieval Nepal''] <span class="cs1-format">(PDF)</span>. University of Cambridge.</cite></ref> मानदेव इस नाम से पुकारे जाने वाले पहले राजा थे, और नेपाल में १८वीं शताब्दी तक शासकों द्वारा इस प्रकार का नाम अपनाने की प्रथा नियमित रूप से जारी रही। <sup class="noprint Inline-Template Template-Fact" style="white-space:nowrap;">[ ''[[विकिपीडिया:उद्धरण आवश्यक|<span title="This claim needs references to reliable sources. (June 2025)">प्रशस्ति - पत्र आवश्यक</span>]]'' ]</sup>
एक अन्य संभावना यह है कि अरिदेव ने ''मल्ल'' की उपाधि को अपनाया क्योंकि यह उस समय [[भारत]] में लोकप्रिय था। यह अधिक विश्वसनीय लगता है क्योंकि अरिदेव, वामदेव द्वारा शुरू किए गए [[राजवंश]] से संबंधित थे, और उनके पूर्ववर्तियों में से किसी ने भी अपने नामों में मल्ल का उपयोग नहीं किया था। यदि ऐसा है, तो यह [[मल्ल राजवंश]] को भारत में उत्पन्न हुए मल्ल समुदाय से अलग करता है। <ref>{{Cite book|url=https://himalaya.socanth.cam.ac.uk/collections/journals/regmi/pdf/Regmi_03.pdf|title=Regmi Research Series|last=Regmi|first=Mahesh C.|publisher=University of Cambridge|pages=252}}</ref>
== राज्यकाल ==
यद्यपि अरि मल्ल के शासनकाल का ठीक-ठीक पता नहीं है, किन्तु माना जाता है कि अरि मल्ल ने 1201 से 1216 तक शासन किया और उनके पुत्र अभय मल्ल उनके उत्तराधिकारी बने।<ref>{{Cite web|url=https://www.historyfiles.co.uk/KingListsFarEast/IndiaNepal.htm|title=Kingdoms of South Asia - Nepal|last=Kessler|first=P. L.|website=The History Files|language=en|access-date=2023-01-19}}</ref>
== संदर्भ ==
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अनुनाद सिंह
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text/x-wiki
{{Infobox royalty|image=|name=अरि मल्ल|title=|succession=[[नेपाल]] के एक राजा|reign=1201 – 1216|predecessor=|successor=[[अभय मल्ल]]|religion=|full name=|father=|mother=|spouse=|issue=[[अभय मल्ल]]|birth_date=1153|birth_place=[[नेपाल मण्डल|नेपाल]]|death_date=1216|death_place=}}
'''अरि मल्ल''', (नेवार : अरिदेव मल्ल) [[काठमांडू घाटी]] के [[मल्ल राजवंश]] के प्रथम राजा थे। काठमांडू घाटी को उस समय '[[नेपाल मण्डल]]' के नाम से जाना जाता था।<ref name=":0">{{Cite book|url=https://himalaya.socanth.cam.ac.uk/collections/rarebooks/downloads/History_Ancient_Medieval_Nepal.pdf|title=The History of Ancient and Medieval Nepal|last=Shrestha|first=D.B.|last2=Singh|first2=C.B.|publisher=University of Cambridge|year=1972}}</ref>
== मल्ल शब्द की व्युत्पत्ति ==
१२वीं शताब्दी के आरंभ में, [[काठमांडू घाटी]] के प्रमुख व्यक्ति अपने नाम में ''मल्ल'' ( [[संस्कृत भाषा|संस्कृत]] में इस शब्द का अर्थ 'पहलवान' होता है) उपाधि लगाने लगे। यह शब्द उनके अत्यधिक बलवान और शक्तिशाली होने का संकेत देता था। अरि देव [[कुश्ती]] के बड़े प्रशंसक थे और स्वयं भी पहलवान थे, इसलिए संभव है कि उन्होंने अपने नाम में ''मल्ल'' शब्द जोड़ा हो और इस प्रकार [[मल्ल राजवंश]] अस्तित्व में आया हो। हालांकि, इस पर विवाद है क्योंकि मल्ल वंश के अस्तित्व में आने से पहले ही ''मल्ल'' शब्द का प्रचलन था, जैसे कि [[मल्लपुरी]] नामक स्थान, जिस पर मानदेव ने विजय प्राप्त की थी। <ref name=":0">{{Cite book|url=https://himalaya.socanth.cam.ac.uk/collections/rarebooks/downloads/History_Ancient_Medieval_Nepal.pdf|title=The History of Ancient and Medieval Nepal|last=Shrestha|first=D.B.|last2=Singh|first2=C.B.|publisher=University of Cambridge|year=1972}}<cite class="citation book cs1" data-ve-ignore="" id="CITEREFShresthaSingh1972">Shrestha, D.B.; Singh, C.B. (1972). [https://himalaya.socanth.cam.ac.uk/collections/rarebooks/downloads/History_Ancient_Medieval_Nepal.pdf ''The History of Ancient and Medieval Nepal''] <span class="cs1-format">(PDF)</span>. University of Cambridge.</cite></ref> मानदेव, इस नाम से पुकारे जाने वाले पहले राजा थे, और नेपाल में १८वीं शताब्दी तक शासकों द्वारा इस प्रकार का नाम अपनाने की प्रथा नियमित रूप से जारी रही। <sup class="noprint Inline-Template Template-Fact" style="white-space:nowrap;">[ ''[[विकिपीडिया:उद्धरण आवश्यक|<span title="This claim needs references to reliable sources. (June 2025)">प्रशस्ति - पत्र आवश्यक</span>]]'' ]</sup>
एक अन्य संभावना यह है कि अरिदेव ने ''मल्ल'' की उपाधि को अपनाया क्योंकि यह उस समय [[भारत]] में लोकप्रिय था। यह अधिक विश्वसनीय लगता है क्योंकि अरिदेव, वामदेव द्वारा शुरू किए गए [[राजवंश]] से संबंधित थे, और उनके पूर्ववर्तियों में से किसी ने भी अपने नामों में मल्ल का उपयोग नहीं किया था। यदि ऐसा है, तो यह [[मल्ल राजवंश]] को भारत में उत्पन्न हुए मल्ल समुदाय से अलग करता है। <ref>{{Cite book|url=https://himalaya.socanth.cam.ac.uk/collections/journals/regmi/pdf/Regmi_03.pdf|title=Regmi Research Series|last=Regmi|first=Mahesh C.|publisher=University of Cambridge|pages=252}}</ref>
== राज्यकाल ==
यद्यपि अरि मल्ल के शासनकाल का ठीक-ठीक पता नहीं है, किन्तु माना जाता है कि अरि मल्ल ने 1201 से 1216 तक शासन किया और उनके पुत्र अभय मल्ल उनके उत्तराधिकारी बने।<ref>{{Cite web|url=https://www.historyfiles.co.uk/KingListsFarEast/IndiaNepal.htm|title=Kingdoms of South Asia - Nepal|last=Kessler|first=P. L.|website=The History Files|language=en|access-date=2023-01-19}}</ref>
==सन्दर्भ==
{{टिप्पणीसूची}}
[[श्रेणी:नेपाल का इतिहास]]
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वी. वी. एस. अय्यर
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अनुनाद सिंह
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text/x-wiki
{{ज्ञानसन्दूक व्यक्ति|name=वाराहनेरि वेंकटेश सुब्रमनियम अय्यर|image=[[File:Vvsaiyar.jpg|250px]]|caption='''वाराहनेरि वेंकटेश सुब्रमनियम अय्यर''' का चित्र|birth_date=2 अप्रैल 1881|birth_place=[[तिरुचिपल्ली]] , [[मद्रास प्रेसीडेन्सी]]|death_date={{death date and age|df=yes|1925|06|3|1881|04|2}}|death_place=पापनाशम निर्झर, [[मद्रास प्रेसीडेन्सी]], भारत|other_names=वी०वी०एस० अय्यर|known_for=[[भारतीय स्वतंत्रता आन्दोलन]], [[इण्डिया हाउस]], [[साहित्यिक कार्य]]|education=[[लिंकन इन्न]], [[लन्दन]]|party=|spouse=|children=|signature=}}
'''वराहनेरी वेंकटेश सुब्रमण्यम अय्यर''' (2 अप्रैल 1881 - 3 जून 1925) [[तमिल नाडु|तमिलनाडु]] के एक भारतीय क्रांतिकारी थे जिन्होंने [[ब्रिटिश राज|भारत में ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन]] के खिलाफ संघर्ष किया। उनके समकालीनों में [[सुब्रह्मण्य भारती|सुब्रमण्य भारती]] और [[वी० ओ० चिदम्बरम पिल्लै|वी. ओ. चिदंबरम पिल्लई]] शामिल हैं, जिन्होंने ब्रिटिश औपनिवेशिक सरकार के खिलाफ प्रतिरोध के उग्रवादी रूपों को अपनाया। लंदन में [[इंडिया हाउस]] में रहने के समय उन्होंने [[विनायक दामोदर सावरकर]] के साथ विचारों का आदान-प्रदान भी किया। जब ब्रितानी सरकार ने उनकी गिरफ्तारी का वारंट निकाला तब वे [[पुदुचेरी ज़िला|पांडिचेरी]] चले गये जो उस समय [[फ्रांसीसी भारत|फ्रांसीसी शासन]] के अन्तर्गत आता था। , जब उनकी उग्रवादी गतिविधियों ने ब्रिटिश औपनिवेशिक सरकार से उनकी गिरफ्तारी के लिए वारंट आकर्षित किया।
वीवीएस अय्यर एक [[तमिल भाषा|तमिल]] लेखक भी थे। उन्हें आधुनिक तमिल लघु कथा का जनक माना जाता है। उन्होंने कंबर और [[तिरुक्कुरल]] के ''रामावतारम'' का अंग्रेजी में अनुवाद भी किया। वी. वी. एस. अय्यर [[वंचिनाथन|वांचीनाथन]] के मार्गदर्शक हैं।
== प्रारंभिक जीवन ==
वेंकटेश सुब्रमण्यम अय्यर का जन्म 2 अप्रैल 1881 को [[तिरुचिरापल्ली|तिरुचि]] के उपनगर वराहनेरी में हुआ था। अपनी प्रारंभिक शिक्षा के बाद, उन्होंने सेंट जोसेफ कॉलेज में अध्ययन किया और इतिहास, राजनीति और लैटिन में बी. ए. किया। उन्होंने कानून पेशे के लिए अध्ययन किया और 1902 में मद्रास विश्वविद्यालय से प्लीडर (जूनियर वकील) परीक्षा उत्तीर्ण की। इसके बाद उन्होंने तिरुचि के जिला न्यायालयों में वकील के रूप में वकालत की। इसके बाद वे 1906 में [[यांगून|रंगून]] चले गए और एक अंग्रेजी बैरिस्टर के चैंबर्स में एक जूनियर के रूप में अभ्यास करना शुरू कर दिया। रंगून से, वे 1907 में लंदन चले गए और लॉ में बैरिस्टर बनने के उद्देश्य से लिंकन इन में दाखिला लिया। लंदन में रहते हुए वे [[इंडिया हाउस]] के सदस्य बने। इसके बाद ही उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता के लिए उग्रवादी संघर्ष में सक्रिय भूमिका निभानी शुरू कर दी। उनका एक बेटा और दो बेटियाँ थीं।<ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=oiRbEAAAQBAJ|title=Hindutva and Violence: V. D. Savarkar and the Politics of History|last=Chaturvedi|first=Vinayak|date=September 2022|isbn=9781438488783}}</ref>
== मित्रता ==
वेंकटेश सुब्रमण्यम अय्यर शुद्धानंद भारती के निकट मित्र थे, उन्होंने चेरनमादेवी में भारद्वाज आश्रम शुरू किया।
== राजनीतिक गतिविधियां ==
वीवीएस अय्यर के चरमपन्थी रवैये के कारण 1910 में [[ब्रिटिश राज]] ने लंदन और [[पेरिस]] में एक अराजकतावादी साजिश में उनकी कथित संलिप्तता के लिए उनकी गिरफ्तारी के लिए वारंट जारी किया। अय्यर ने लिंकन इन से इस्तीफा दे दिया और पेरिस भाग गए। हालाँकि वे राजनीतिक निर्वासन के रूप में पेरिस में रहना चाहते थे, लेकिन उन्हें भारत लौटना पड़ा। गिरफ्तारी से बचने के लिए वे [[मुसलमान]] का रूप धारण करके 4 दिसंबर 1910 को [[पुदुचेरी (नगर)|पांडिचेरी]] पहुंचे और निर्वासन के रूप में वहीं रहे। दस वर्ष से अधिक समय तक वे पांडिचेरी में रहे। पांडिचेरी में रहते हुए अय्यर साथी क्रांतिकारियों [[सुब्रह्मण्य भारती|सुब्रमण्य भारती]] और अरबिंदो से मिले। पांडिचेरी में, अय्यर [[तिरुनेलवेली]] के कलेक्टर ऐश की हत्या की साजिश में शामिल थे। उनके एक छात्र, [[वंचिनाथन|वांचीनाथन]] ने ऐश की हत्या कर दी। इस प्रकार अय्यर और उनके साथी सुब्रमण्य भारती के लिए और अधिक परेशानी पैदा हो गई।
22 सितंबर 1914 को जर्मन क्रूजर एस. एम. एस. एमडेन ने [[चेन्नई|मद्रास]] बंदरगाह में प्रवेश किया और शहर पर बमबारी की। ब्रिटिश औपनिवेशिक सरकार ने इसके लिए पांडिचेरी में निर्वासितों की गतिविधियों को दोषी ठहराया और फ्रांसीसी राज्यपाल से अय्यर और उनके साथियों को अफ्रीका निर्वासित करने का आग्रह किया। फ्रांसीसी पुलिस ने क्रांतिकारियों के खिलाफ कई आरोप लगाए, लेकिन उन्हें दोषी ठहराने में विफल रही। इस अवधि में अय्यर ने [[तिरुक्कुरल]] का अंग्रेजी में अनुवाद किया। बाद में उन्होंने खुलासा किया कि अगर उन्हें देश छोड़ने के लिए मजबूर किया जाता है तो वह एक विरासत छोड़ना चाहते हैं।
[[प्रथम विश्व युद्ध]] के बाद वे मद्रास लौट आए और ''''देशभक्त'''' नामक पत्र के संपादक के रूप में काम किया। 1921 में उन्हें राजद्रोह के आरोप में गिरफ्तार किया गया और नौ महीने जेल में बिताए। जेल में रहते हुए अय्यर ने 'अ स्टडी ऑफ कम्ब रामायण' नामक पुस्तक लिखी।
एक लेखक के रूप में, अय्यर को अक्सर तमिल में लघु कथा शैली के "संस्थापक" के रूप मान्यता है।{{Sfnp|Ebeling|2010}}
== चेरानमहादेवी गुरुकुलम मुद्दा ==
असहयोग आंदोलन के दौरान [[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस|भारतीय राष्ट्रीय]] [[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस|कांग्रेस]] के अनुयायियों के बीच अपने बच्चों को [[ब्रिटिश राज|ब्रिटिश शैक्षणिक संस्थान]] में नहीं भेजने के लिए आम सहमति थी और अय्यर ने तमिलनाडु कांग्रेस के वित्त पोषण से [[चेरनमहादेवी|चेरनमादेवी]] में एक [[गुरुकुल|गुरुकुलम]] आरम्भ किया।<ref>{{Cite web|url=https://www.indiatoday.in/interactive/visuals/time-tide-tamil-alliances-and-animosities-the-political-ping-pong-and-punching-bags-part-21-346-05-02-2026|title=Alliances & Animosities: The Political Ping-Pong & Punching Bags|last=indiatoday|website=indiatoday|language=en|access-date=2026-02-23}}</ref> 1923-24 में इस विद्यालय में [[भारत में जाति से संबंधित हिंसा|जाति भेदभाव]] को लेकर एक विवाद छिड़ गया जब [[ब्राह्मण]] और गैर-ब्राह्मण छात्रों को अलग-अलग स्थानों पर भोजन परोसा गया।<ref>{{Cite news|url=https://www.thehindu.com/news/national/tamil-nadu/varadarajulu-naidu-a-committed-nationalist-with-varied-interests/article3487237.ece|title=Varadarajulu Naidu, a committed nationalist with varied interests|date=2012-06-03|work=The Hindu|access-date=2026-02-23|language=en-IN|issn=0971-751X}}</ref> [[महात्मा गांधी]] ने इस मुद्दे को मध्यस्थता और हल करने की कोशिश की। इस घटना के कारण [[पेरियार]] को 1925 में [[कांचीपुरम]] सम्मेलन में कांग्रेस छोड़ने और [[जस्टिस पार्टी]] में शामिल होने के लिए प्रेरित किया।<ref>{{Cite web|url=https://www.thestatesman.com/opinion/periyar-and-gandhii-1503174077.html|title=Periyar and Gandhi~I|last=Service|first=Statesman News|date=2023-04-21|website=The Statesman|language=en|access-date=2026-02-23}}</ref>
== साहित्यिक कृतियाँ ==
वीवीएस अय्यर ने कुराल का अंग्रेजी गद्य में अनुवाद किया, जो किसी देशी विद्वान द्वारा किया गया पहला पूर्ण अंग्रेजी अनुवाद है। अय्यर के इस कृति को चेक विद्वान कामिल ज़्वेलेबिल सहित विभिन्न विद्वानों ने तब तक किए गए सभी अंग्रेजी अनुवादों में सबसे विद्वान माना है, जिसमें देशी अंग्रेजी विद्वान भी शामिल हैं।<ref name="Manavalan_Compendium">{{Cite book|title=A Compendium of ''Tirukkural'' Translations in English|last=Manavalan|first=A. A.|date=2010|publisher=Central Institute of Classical Tamil|isbn=978-81-908000-2-0|volume=4 vols.|location=Chennai|language=English}}</ref><ref>{{Cite book|title=Forward. Tirukkural by Tiruvalluvar. Translated by K. M. Balasubramaniam|last=Zvelevil|first=K.|date=1962|publisher=Manali Lakshmana Mudaliar Specific Endowments|location=Madras|pages=327}}</ref> उन्होंने 12वीं शताब्दी ईस्वी में कंबर द्वारा लिखित ''रामावतारम'' का भी अनुवाद किया।
== निजी जीवन ==
वीवीएस अय्यर ने भाग्यलक्ष्मी अम्मल से विवाह किया। उनकी सुभद्रा नाम की एक बेटी और कृष्णमूर्ति नाम का एक बेटा है। <sup class="noprint Inline-Template Template-Fact" style="white-space:nowrap;">[ ''[[विकिपीडिया:उद्धरण आवश्यक|<span title="This claim needs references to reliable sources. (October 2021)">संदर्भ आवश्यक</span>]]'' ]</sup> बाद के वर्षों में उनका बेटा [[तिरुचिरापल्ली|त्रिचिरापल्ली]] में एक चिकित्सक के रूप में कार्यरत हो गया।
== मृत्यु ==
3 जून 1925 को पापनाशम् जलप्रपात में डूबकर अय्यर की मृत्यु हो गई। उस समय वे अपनी डूबती हुई बेटी सुभद्रा को बचाने की कोशिश कर रहे थे। <sup class="noprint Inline-Template Template-Fact" style="white-space:nowrap;">[ ''[[विकिपीडिया:उद्धरण आवश्यक|<span title="This claim needs references to reliable sources. (April 2012)">प्रशस्ति - पत्र आवश्यक</span>]]'' ]</sup>
== यह भी देखें ==
* तिरुक्कुरल अनुवाद
* तिरुक्कुरल का अंग्रेजी में अनुवाद
* अंग्रेज़ी में अनुवादकों की सूची
== संदर्भ ==
[[श्रेणी:१९२५ में निधन]]
[[श्रेणी:1881 में जन्मे लोग]]
[[श्रेणी:तमिल लेखक]]
[[श्रेणी:Articles with hCards]]
[[श्रेणी:Pages with unreviewed translations]]
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अनुनाद सिंह
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text/x-wiki
{{ज्ञानसन्दूक व्यक्ति|name=वाराहनेरि वेंकटेश सुब्रमनियम अय्यर|image=[[File:Vvsaiyar.jpg|250px]]|caption='''वाराहनेरि वेंकटेश सुब्रमनियम अय्यर''' का चित्र|birth_date=2 अप्रैल 1881|birth_place=[[तिरुचिपल्ली]] , [[मद्रास प्रेसीडेन्सी]]|death_date={{death date and age|df=yes|1925|06|3|1881|04|2}}|death_place=पापनाशम निर्झर, [[मद्रास प्रेसीडेन्सी]], भारत|other_names=वी०वी०एस० अय्यर|known_for=[[भारतीय स्वतंत्रता आन्दोलन]], [[इण्डिया हाउस]], [[साहित्यिक कार्य]]|education=[[लिंकन इन्न]], [[लन्दन]]|party=|spouse=|children=|signature=}}
'''वराहनेरी वेंकटेश सुब्रमण्यम अय्यर''' (2 अप्रैल 1881 - 3 जून 1925) [[तमिल नाडु|तमिलनाडु]] के एक भारतीय क्रांतिकारी थे जिन्होंने [[ब्रिटिश राज|भारत में ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन]] के खिलाफ संघर्ष किया। उनके समकालीनों में [[सुब्रह्मण्य भारती|सुब्रमण्य भारती]] और [[वी० ओ० चिदम्बरम पिल्लै|वी. ओ. चिदंबरम पिल्लई]] शामिल हैं, जिन्होंने ब्रिटिश औपनिवेशिक सरकार के खिलाफ प्रतिरोध के उग्रवादी रूपों को अपनाया। लंदन में [[इंडिया हाउस]] में रहने के समय उन्होंने [[विनायक दामोदर सावरकर]] के साथ विचारों का आदान-प्रदान भी किया। जब ब्रितानी सरकार ने उनकी गिरफ्तारी का वारंट निकाला तब वे [[पुदुचेरी ज़िला|पांडिचेरी]] चले गये जो उस समय [[फ्रांसीसी भारत|फ्रांसीसी शासन]] के अन्तर्गत आता था। , जब उनकी उग्रवादी गतिविधियों ने ब्रिटिश औपनिवेशिक सरकार से उनकी गिरफ्तारी के लिए वारंट आकर्षित किया।
वीवीएस अय्यर एक [[तमिल भाषा|तमिल]] लेखक भी थे। उन्हें आधुनिक तमिल लघु कथा का जनक माना जाता है। उन्होंने कंबर और [[तिरुक्कुरल]] के ''रामावतारम'' का अंग्रेजी में अनुवाद भी किया। वी. वी. एस. अय्यर [[वंचिनाथन|वांचीनाथन]] के मार्गदर्शक हैं।
== प्रारंभिक जीवन ==
वेंकटेश सुब्रमण्यम अय्यर का जन्म 2 अप्रैल 1881 को [[तिरुचिरापल्ली|तिरुचि]] के उपनगर वराहनेरी में हुआ था। अपनी प्रारंभिक शिक्षा के बाद, उन्होंने सेंट जोसेफ कॉलेज में अध्ययन किया और इतिहास, राजनीति और लैटिन में बी. ए. किया। उन्होंने कानून पेशे के लिए अध्ययन किया और 1902 में मद्रास विश्वविद्यालय से प्लीडर (जूनियर वकील) परीक्षा उत्तीर्ण की। इसके बाद उन्होंने तिरुचि के जिला न्यायालयों में वकील के रूप में वकालत की। इसके बाद वे 1906 में [[यांगून|रंगून]] चले गए और एक अंग्रेजी बैरिस्टर के चैंबर्स में एक जूनियर के रूप में अभ्यास करना शुरू कर दिया। रंगून से, वे 1907 में लंदन चले गए और लॉ में बैरिस्टर बनने के उद्देश्य से लिंकन इन में दाखिला लिया। लंदन में रहते हुए वे [[इंडिया हाउस]] के सदस्य बने। इसके बाद ही उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता के लिए उग्रवादी संघर्ष में सक्रिय भूमिका निभानी शुरू कर दी। उनका एक बेटा और दो बेटियाँ थीं।<ref>{{Cite book|url=https://books.google.com/books?id=oiRbEAAAQBAJ|title=Hindutva and Violence: V. D. Savarkar and the Politics of History|last=Chaturvedi|first=Vinayak|date=September 2022|isbn=9781438488783}}</ref>
== मित्रता ==
वेंकटेश सुब्रमण्यम अय्यर शुद्धानंद भारती के निकट मित्र थे, उन्होंने चेरनमादेवी में भारद्वाज आश्रम शुरू किया।
== राजनीतिक गतिविधियां ==
वीवीएस अय्यर के चरमपन्थी रवैये के कारण 1910 में [[ब्रिटिश राज]] ने लंदन और [[पेरिस]] में एक अराजकतावादी साजिश में उनकी कथित संलिप्तता के लिए उनकी गिरफ्तारी के लिए वारंट जारी किया। अय्यर ने लिंकन इन से इस्तीफा दे दिया और पेरिस भाग गए। हालाँकि वे राजनीतिक निर्वासन के रूप में पेरिस में रहना चाहते थे, लेकिन उन्हें भारत लौटना पड़ा। गिरफ्तारी से बचने के लिए वे [[मुसलमान]] का रूप धारण करके 4 दिसंबर 1910 को [[पुदुचेरी (नगर)|पांडिचेरी]] पहुंचे और निर्वासन के रूप में वहीं रहे। दस वर्ष से अधिक समय तक वे पांडिचेरी में रहे। पांडिचेरी में रहते हुए अय्यर साथी क्रांतिकारियों [[सुब्रह्मण्य भारती|सुब्रमण्य भारती]] और अरबिंदो से मिले। पांडिचेरी में, अय्यर [[तिरुनेलवेली]] के कलेक्टर ऐश की हत्या की साजिश में शामिल थे। उनके एक छात्र, [[वंचिनाथन|वांचीनाथन]] ने ऐश की हत्या कर दी। इस प्रकार अय्यर और उनके साथी सुब्रमण्य भारती के लिए और अधिक परेशानी पैदा हो गई।
22 सितंबर 1914 को जर्मन क्रूजर एस. एम. एस. एमडेन ने [[चेन्नई|मद्रास]] बंदरगाह में प्रवेश किया और शहर पर बमबारी की। ब्रिटिश औपनिवेशिक सरकार ने इसके लिए पांडिचेरी में निर्वासितों की गतिविधियों को दोषी ठहराया और फ्रांसीसी राज्यपाल से अय्यर और उनके साथियों को अफ्रीका निर्वासित करने का आग्रह किया। फ्रांसीसी पुलिस ने क्रांतिकारियों के खिलाफ कई आरोप लगाए, लेकिन उन्हें दोषी ठहराने में विफल रही। इस अवधि में अय्यर ने [[तिरुक्कुरल]] का अंग्रेजी में अनुवाद किया। बाद में उन्होंने खुलासा किया कि अगर उन्हें देश छोड़ने के लिए मजबूर किया जाता है तो वह एक विरासत छोड़ना चाहते हैं।
[[प्रथम विश्व युद्ध]] के बाद वे मद्रास लौट आए और ''''देशभक्त'''' नामक पत्र के संपादक के रूप में काम किया। 1921 में उन्हें राजद्रोह के आरोप में गिरफ्तार किया गया और नौ महीने जेल में बिताए। जेल में रहते हुए अय्यर ने 'अ स्टडी ऑफ कम्ब रामायण' नामक पुस्तक लिखी।
एक लेखक के रूप में, अय्यर को अक्सर तमिल में लघु कथा शैली के "संस्थापक" के रूप मान्यता है।{{Sfnp|Ebeling|2010}}
== चेरानमहादेवी गुरुकुलम मुद्दा ==
असहयोग आंदोलन के दौरान [[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस|भारतीय राष्ट्रीय]] [[भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस|कांग्रेस]] के अनुयायियों के बीच अपने बच्चों को [[ब्रिटिश राज|ब्रिटिश शैक्षणिक संस्थान]] में नहीं भेजने के लिए आम सहमति थी और अय्यर ने तमिलनाडु कांग्रेस के वित्त पोषण से [[चेरनमहादेवी|चेरनमादेवी]] में एक [[गुरुकुल|गुरुकुलम]] आरम्भ किया।<ref>{{Cite web|url=https://www.indiatoday.in/interactive/visuals/time-tide-tamil-alliances-and-animosities-the-political-ping-pong-and-punching-bags-part-21-346-05-02-2026|title=Alliances & Animosities: The Political Ping-Pong & Punching Bags|last=indiatoday|website=indiatoday|language=en|access-date=2026-02-23}}</ref> 1923-24 में इस विद्यालय में [[भारत में जाति से संबंधित हिंसा|जाति भेदभाव]] को लेकर एक विवाद छिड़ गया जब [[ब्राह्मण]] और गैर-ब्राह्मण छात्रों को अलग-अलग स्थानों पर भोजन परोसा गया।<ref>{{Cite news|url=https://www.thehindu.com/news/national/tamil-nadu/varadarajulu-naidu-a-committed-nationalist-with-varied-interests/article3487237.ece|title=Varadarajulu Naidu, a committed nationalist with varied interests|date=2012-06-03|work=The Hindu|access-date=2026-02-23|language=en-IN|issn=0971-751X}}</ref> [[महात्मा गांधी]] ने इस मुद्दे को मध्यस्थता और हल करने की कोशिश की। इस घटना के कारण [[पेरियार]] को 1925 में [[कांचीपुरम]] सम्मेलन में कांग्रेस छोड़ने और [[जस्टिस पार्टी]] में शामिल होने के लिए प्रेरित किया।<ref>{{Cite web|url=https://www.thestatesman.com/opinion/periyar-and-gandhii-1503174077.html|title=Periyar and Gandhi~I|last=Service|first=Statesman News|date=2023-04-21|website=The Statesman|language=en|access-date=2026-02-23}}</ref>
== साहित्यिक कृतियाँ ==
वीवीएस अय्यर ने कुराल का अंग्रेजी गद्य में अनुवाद किया, जो किसी देशी विद्वान द्वारा किया गया पहला पूर्ण अंग्रेजी अनुवाद है। अय्यर के इस कृति को चेक विद्वान कामिल ज़्वेलेबिल सहित विभिन्न विद्वानों ने तब तक किए गए सभी अंग्रेजी अनुवादों में सबसे विद्वान माना है, जिसमें देशी अंग्रेजी विद्वान भी शामिल हैं।<ref name="Manavalan_Compendium">{{Cite book|title=A Compendium of ''Tirukkural'' Translations in English|last=Manavalan|first=A. A.|date=2010|publisher=Central Institute of Classical Tamil|isbn=978-81-908000-2-0|volume=4 vols.|location=Chennai|language=English}}</ref><ref>{{Cite book|title=Forward. Tirukkural by Tiruvalluvar. Translated by K. M. Balasubramaniam|last=Zvelevil|first=K.|date=1962|publisher=Manali Lakshmana Mudaliar Specific Endowments|location=Madras|pages=327}}</ref> उन्होंने 12वीं शताब्दी ईस्वी में कंबर द्वारा लिखित ''रामावतारम'' का भी अनुवाद किया।
== निजी जीवन ==
वीवीएस अय्यर ने भाग्यलक्ष्मी अम्मल से विवाह किया। उनकी सुभद्रा नाम की एक बेटी और कृष्णमूर्ति नाम का एक बेटा है। <sup class="noprint Inline-Template Template-Fact" style="white-space:nowrap;">[ ''[[विकिपीडिया:उद्धरण आवश्यक|<span title="This claim needs references to reliable sources. (October 2021)">संदर्भ आवश्यक</span>]]'' ]</sup> बाद के वर्षों में उनका बेटा [[तिरुचिरापल्ली|त्रिचिरापल्ली]] में एक चिकित्सक के रूप में कार्यरत हो गया।
== मृत्यु ==
3 जून 1925 को पापनाशम् जलप्रपात में डूबकर अय्यर की मृत्यु हो गई। उस समय वे अपनी डूबती हुई बेटी सुभद्रा को बचाने की कोशिश कर रहे थे। <sup class="noprint Inline-Template Template-Fact" style="white-space:nowrap;">[ ''[[विकिपीडिया:उद्धरण आवश्यक|<span title="This claim needs references to reliable sources. (April 2012)">प्रशस्ति - पत्र आवश्यक</span>]]'' ]</sup>
== यह भी देखें ==
* तिरुक्कुरल अनुवाद
* तिरुक्कुरल का अंग्रेजी में अनुवाद
* अंग्रेज़ी में अनुवादकों की सूची
==सन्दर्भ==
{{टिप्पणीसूची}}
{{भारतीय स्वतंत्रता का क्रांतिकारी आन्दोलन}}
[[श्रेणी:१९२५ में निधन]]
[[श्रेणी:1881 में जन्मे लोग]]
[[श्रेणी:तमिल लेखक]]
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[[श्रेणी:Pages with unreviewed translations]]
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[https://www.google.com/search?kgmid=/g/11n9s9r8kp] एकेएम फरहादुल कबीर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संगठित 'डॉ. एम.ए. वाजेद मिया मेमोरियल फाउंडेशन' के संस्थापक हैं। <ref>{{Cite web|url=https://bn.wikipedia.org/wiki/%E0%A6%A1_%E0%A6%8F%E0%A6%AE_%E0%A6%8F_%E0%A6%93%E0%A6%AF%E0%A6%BC%E0%A6%BE%E0%A6%9C%E0%A7%87%E0%A6%A6_%E0%A6%AE%E0%A6%BF%E0%A6%AF%E0%A6%BC%E0%A6%BE_%E0%A6%B8%E0%A7%8D%E0%A6%AC%E0%A6%B0%E0%A7%8D%E0%A6%A3%E0%A6%AA%E0%A6%A6%E0%A6%95|title=BN Wiki}}</ref>
उन्हें अंतरराष्ट्रीय पदक प्रदान करने की प्रणाली के प्रवर्तक के रूप में विश्व भर में जाना जाता है।{{ज्ञानसन्दूक व्यक्ति|name=AKM Farhadul Kabir|image=Farhadulkabir.jpg|nationality=bangali|citizenship=États-Unis Amérique tɔn|footnotes=Talanta ɖó dogbó ǎ.|children=vǐ nyɔnu : Mashrur K. (M.K. Shishir) {{!}} vǐ nyɔnu : Jannatul Adnin|title=Tɔ́ nú Siká Ajɔ|party=Awyamilig {{!}} International Leaders|religion=Islam|spouse=Nasrin Akter Seema|parents=tɔ́ . Abu Bakkar Siddiqu {{!}} nɔ. Fatema Begum}}
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उन्हें अंतरराष्ट्रीय पदक प्रदान करने की प्रणाली के प्रवर्तक के रूप में विश्व भर में जाना जाता है।{{ज्ञानसन्दूक व्यक्ति|name=AKM Farhadul Kabir|image=Farhadulkabir.jpg|nationality=बांग्लादेशी|citizenship=अमेरिकी|footnotes=Talanta ɖó dogbó ǎ.|children=vǐ nyɔnu : Mashrur K. (M.K. Shishir) {{!}} vǐ nyɔnu : Jannatul Adnin|title=अंतर्राष्ट्रीय पदकों के जनक|party=अंतर्राष्ट्रीय राजनीतिक नेता|religion=इसलाम|spouse=नसरीन अख्तर सीमा|parents=tɔ́ . Abu Bakkar Siddiqu {{!}} nɔ. Fatema Begum}}
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उन्हें अंतरराष्ट्रीय पदक प्रदान करने की प्रणाली के प्रवर्तक के रूप में विश्व भर में जाना जाता है।{{ज्ञानसन्दूक व्यक्ति|name=AKM Farhadul Kabir|image=Farhadulkabir.jpg|nationality=बांग्लादेशी|citizenship=अमेरिकी|footnotes=प्रतिभा की कोई सीमा नहीं होती।|children=बेटा: एमके शिशिर
बेटी: जन्नतुल अदनीन फ़रिहा|title=अंतर्राष्ट्रीय पदकों के जनक|party=अंतर्राष्ट्रीय राजनीतिक नेता|religion=इसलाम|spouse=नसरीन अख्तर सीमा|parents=दिवंगत: वीर स्वतंत्रता सेनानी श्री अबू बक्कर सिद्दीकी (पिता) और दिवंगत: फातिमा बेगम (माता)}}
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चाहर धर्मेंद्र
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शीघ्र हटाने का अनुरोध ( मापदंड:[[वि:शीह#ल2|शीह ल2]])
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[https://www.google.com/search?kgmid=/g/11n9s9r8kp] एकेएम फरहादुल कबीर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संगठित 'डॉ. एम.ए. वाजेद मिया मेमोरियल फाउंडेशन' के संस्थापक हैं। <ref>{{Cite web|url=https://bn.wikipedia.org/wiki/%E0%A6%A1_%E0%A6%8F%E0%A6%AE_%E0%A6%8F_%E0%A6%93%E0%A6%AF%E0%A6%BC%E0%A6%BE%E0%A6%9C%E0%A7%87%E0%A6%A6_%E0%A6%AE%E0%A6%BF%E0%A6%AF%E0%A6%BC%E0%A6%BE_%E0%A6%B8%E0%A7%8D%E0%A6%AC%E0%A6%B0%E0%A7%8D%E0%A6%A3%E0%A6%AA%E0%A6%A6%E0%A6%95|title=BN Wiki}}</ref>
उन्हें अंतरराष्ट्रीय पदक प्रदान करने की प्रणाली के प्रवर्तक के रूप में विश्व भर में जाना जाता है।{{ज्ञानसन्दूक व्यक्ति|name=AKM Farhadul Kabir|image=Farhadulkabir.jpg|nationality=बांग्लादेशी|citizenship=अमेरिकी|footnotes=प्रतिभा की कोई सीमा नहीं होती।|children=बेटा: एमके शिशिर
बेटी: जन्नतुल अदनीन फ़रिहा|title=अंतर्राष्ट्रीय पदकों के जनक|party=अंतर्राष्ट्रीय राजनीतिक नेता|religion=इसलाम|spouse=नसरीन अख्तर सीमा|parents=दिवंगत: वीर स्वतंत्रता सेनानी श्री अबू बक्कर सिद्दीकी (पिता) और दिवंगत: फातिमा बेगम (माता)}}
<references />
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डॉ. एम. ए. वाजेद मिया अंतर्राष्ट्रीय स्वर्ण पदक
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अंतर्राष्ट्रीय स्वर्ण पदक पुरस्कार
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सूचना: [[:डॉ. एम. ए. वाजेद मिया अंतर्राष्ट्रीय स्वर्ण पदक]] को शीघ्र हटाने का नामांकन
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इसमें वे सभी पृष्ठ आते हैं जिनमें केवल प्रचार है, चाहे वह किसी व्यक्ति-विशेष का हो, किसी समूह का, किसी प्रोडक्ट का, अथवा किसी कंपनी का। इसमें प्रचार वाले केवल वही लेख आते हैं जिन्हें ज्ञानकोष के अनुरूप बनाने के लिये शुरू से दोबारा लिखना पड़ेगा।
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सूचना: [[:एकेम फरहादुल कबीर]] को शीघ्र हटाने का नामांकन
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वार्ता:संचरण स्तम्भ
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~2026-26749-29
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text/x-wiki
== Wire ==
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कन्नड़ सिनेमा
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चाहर धर्मेंद्र
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कन्नड़ भाषा फिल्म उद्योग
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{{Infobox cinema market
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| screens_per_capita = 1.3 per 100,000
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|महात्मा पिक्चर्स|
|श्री वज्रेश्वरी कंबाइन्स|
|[[रविचंद्रन (कन्नड़ अभिनेता)|श्री ईश्वरी कंबाइन्स]]|
|केसीएन मूवीज
|[[रॉकलिन वेंकटेश]]
|जयन्ना कंबाइन्स|
|[[दर्शन (अभिनेता)|थूगुदीपा डिस्ट्रीब्यूटर्स]]
|पीआरके प्रोडक्शंस
|परमवाह स्टूडियोज
|[[होम्बाले फ़िल्म्स]]
|पुष्कर फिल्म्स
|केआरजी स्टूडियोज
|मार्स डिस्ट्रीब्यूटर्स}}
| produced_year = 2019
| produced_ref = <ref>{{Cite web |title=Indian Feature Films Certified In 2019 |url=http://filmfed.org/downloads/Language-wise-Region-2018-19-26062019.pdf |archive-url=https://web.archive.org/web/20200413030711/http://filmfed.org/downloads/Language-wise-Region-2018-19-26062019.pdf |archive-date=13 April 2020 |access-date=29 March 2022 |website=Filmfed}}</ref>
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| box_office_total =
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}}
'''''कन्नड़ सिनेमा''''', जिसे प्रचलित रूप में सैंडलवुड<ref>{{cite web | url=https://theculturetrip.com/asia/india/articles/the-biggest-regional-film-industries-in-india-you-should-know-about/ | title=The Biggest Regional Film Industries in India You Should Know About | date=31 December 2017 }}</ref> अथवा चंदनवन<ref>{{Cite web |title=From The Golden Era Of 70s To Now: A Brief History Of The Birth & Rise Of Kannada Cinema - ZEE5 News |url=https://www.zee5.com/zee5news/from-the-golden-era-of-70s-to-now-a-brief-history-of-the-birth-rise-of-kannada-cinema/ |website=zee5.com|date=24 August 2019 }}</ref> भी कहा जाता है, भारतीय सिनेमा का वह महत्त्वपूर्ण अंग है<ref name="deccanherald.com">{{Cite web |last=Manohar |first=R. |date=11 March 2011 |title=Sandalwood rechristened |url=https://www.dnaindia.com/entertainment/slideshow-sandalwood-rechristened-1518654 |website=DNA India}}</ref> जो कन्नड़ भाषा में चलचित्रों के निर्माण और प्रस्तुति के लिए समर्पित है। यह उद्योग मुख्यतः कर्नाटक राज्य में विकसित हुआ है, जहाँ कन्नड़ भाषा व्यापक रूप से बोली और समझी जाती है।<ref>{{Cite book |last=Shampa Banerjee, Anil Srivastava |title=One Hundred Indian Feature Films: An Annotated Filmography |publisher=Taylor & Francis |year=1988 |isbn=0-8240-9483-2 |orig-date=1988}}</ref><ref>{{Cite news |last=Shenoy |first=Megha |date=27 December 2010 |title=When it rained films |work=Deccan Herald |url=http://www.deccanherald.com/content/124106/when-rained-films.html |access-date=29 July 2017}}</ref><ref>{{Cite web |date=3 May 1913 |title=Statewise number of single screens |url=http://www.filmfed.org/singlescreen.html |access-date=29 July 2013 |website=chitraloka.com|archive-url=http://web.archive.org/web/20110722191347/http://www.filmfed.org/singlescreen.html|archive-date=22 July 2011}}</ref> इसका केंद्र बेंगलुरु के गांधी नगर क्षेत्र में स्थित है,<ref>{{cite web|url=https://www.deccanherald.com/india/karnataka/bengaluru/once-cinema-hub-gandhinagar-no-2000345|title=Once a cinema hub, Gandhinagar no longer a draw for movie business|website=[[Deccan Herald]]|date=17 April 2017}}</ref> जो लंबे समय से फिल्म निर्माण, वितरण और प्रदर्शन की गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।
कन्नड़ सिनेमा के इतिहास में सन् 1934 एक निर्णायक वर्ष के रूप में दर्ज है, जब सती सुलोचना नामक पहली बोलती (टॉकी) फिल्म प्रदर्शित हुई।<ref name="Rediff">{{Cite news |last=Dhaan |first=M S |date=13 April 2006 |title=Dr.Raj's impact on Kannada cinema |work=Rediff.com |url=http://www.rediff.com/movies/2006/apr/13ms.htm |access-date=18 March 2021}}</ref><ref>{{Cite news |date=31 December 2004 |title=First film to talk in Kannada |work=[[The Hindu]] |location=Chennai, India |url=http://www.hindu.com/thehindu/fr/2004/12/31/stories/2004123102420300.htm |url-status=dead |archive-url=https://web.archive.org/web/20050410165948/http://www.hindu.com/thehindu/fr/2004/12/31/stories/2004123102420300.htm |archive-date=10 April 2005}}</ref><ref>{{Cite news |date=22 August 2003 |title=A revolutionary filmmaker |work=[[The Hindu]] |location=Chennai, India |url=http://www.hindu.com/thehindu/fr/2003/08/22/stories/2003082201400400.htm |url-status=dead |archive-url=https://web.archive.org/web/20040117021114/http://www.hindu.com/thehindu/fr/2003/08/22/stories/2003082201400400.htm |archive-date=17 January 2004}}</ref> इस ऐतिहासिक कृति का निर्देशन वाई.वी. राव ने किया था, जबकि इसमें सुब्बैया नायडू और त्रिपुरम्बा ने प्रमुख भूमिकाएँ निभाईं। यह फिल्म तत्कालीन मैसूर साम्राज्य में प्रदर्शित होने वाली पहली कन्नड़ टॉकी भी थी,<ref name="ss">{{Cite news |date=31 December 2004 |title=First film to talk in Kannada |work=[[The Hindu]] |location=Chennai, India |url=http://www.hindu.com/fr/2004/12/31/stories/2004123102420300.htm |url-status=dead |access-date=21 April 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20050104030339/http://www.hindu.com/fr/2004/12/31/stories/2004123102420300.htm |archive-date=4 January 2005}}</ref> जिसने क्षेत्रीय सिनेमा के विकास की दिशा को एक नई पहचान दी।
इस फिल्म का निर्माण चमनलाल डूंगाजी ने किया था, जिन्होंने सन् 1932 में बेंगलुरु में ‘साउथ इंडिया मूवीटोन’ की स्थापना की थी।<ref name="thehindu">{{Cite news |last=Khajane |first=Muralidhara |date=25 February 2012 |title=Philatelic show to mark 78th anniversary of 'Sati Sulochana' |language=en-IN |work=The Hindu |url=https://www.thehindu.com/news/national/karnataka/philatelic-show-to-mark-78th-anniversary-of-sati-sulochana/article2929333.ece/ |access-date=3 September 2018}}</ref><ref name="dailyhunt">{{Cite news |title=Wealth of material found on first Kannada talkie |language=en |work=DailyHunt |url=https://m.dailyhunt.in/news/bangladesh/english/deccan+herald-epaper-deccan/wealth+of+material+found+on+first+kannada+talkie-newsid-85780599 |access-date=3 September 2018}}</ref>
कन्नड़ सिनेमा की एक विशिष्ट पहचान यह रही है कि उसने प्रमुख साहित्यिक कृतियों को प्रभावशाली ढंग से परदे पर रूपांतरित किया है, जिससे साहित्य और चलचित्र के बीच एक सशक्त सेतु का निर्माण हुआ। इस परंपरा के अंतर्गत कई महत्वपूर्ण फिल्में बनीं, जिन्होंने न केवल कलात्मक ऊँचाइयाँ छुईं, बल्कि सामाजिक और वैचारिक विमर्श को भी समृद्ध किया।
इसी क्रम में चोमना डूडी (1975), जिसका निर्देशन बी.वी. कारंत ने किया, प्रसिद्ध लेखक शिवराम कारंत की कृति पर आधारित है। वहीं काडू (1973), जिसे गिरीश कर्नाड ने निर्देशित किया, श्रीकृष्ण अलनहल्ली के उपन्यास से प्रेरित है। संस्कार (1970), जिसका निर्देशन पट्टाभिराम रेड्डी ने किया, यू.आर. अनंतमूर्ति की बहुचर्चित कृति पर आधारित है। इस फिल्म को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिली और इसे लोकार्नो अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में कांस्य तेंदुआ पुरस्कार से सम्मानित किया गया।<ref name="1nellore.com">{{Cite web |title=Tikkavarapu Pattabhirama Reddy – Poet, Film maker of international fame from Nellore |url=http://1nellore.com/1849/tikkavarapu-pattabhirama-reddy-poet-film-maker-of-international-fame/ |url-status=dead |archive-url=https://web.archive.org/web/20141006102018/http://1nellore.com/1849/tikkavarapu-pattabhirama-reddy-poet-film-maker-of-international-fame/ |archive-date=6 October 2014 |access-date=26 January 2016}}</ref>
इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए मैसूर मल्लिगे (1992), जिसका निर्देशन टी.एस. नागभरण ने किया, प्रसिद्ध कवि के.एस. नरसिम्हास्वामी की काव्य रचनाओं पर आधारित है।<ref>{{Cite web |title=TS Nagabharana movies list |url=http://www.bharatmovies.com/director/ts-nagabharana-movies.htm |access-date=4 November 2016 |website=bharatmovies.com}}</ref>
==इतिहास==
===प्रारंभिक इतिहास===
सन् 1934 कन्नड़ सिनेमा के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध हुआ, जब पहली कन्नड़ बोलती फिल्म सती सुलोचना सिनेमाघरों में प्रदर्शित हुई।<ref>{{usurped|[https://web.archive.org/web/20070105012711/http://www.hinduonnet.com/thehindu/fr/2004/12/31/stories/2004123102420300.htm "First film to talk in Kannada"]}} article in ''The Hindu''</ref> इसके तुरंत बाद भक्त ध्रुव (जिसे ध्रुव कुमार के नाम से भी जाना जाता है) रिलीज़ हुई, जिसने इस नवोदित फिल्म उद्योग को आगे बढ़ाने में योगदान दिया। “सती सुलोचना” में सुब्बैया नायडू और त्रिपुरम्बा ने प्रमुख भूमिकाएँ निभाईं। इस फिल्म की शूटिंग कोल्हापुर के छत्रपति स्टूडियो में की गई थी, जबकि इसके अधिकांश दृश्यांकन, ध्वनि रिकॉर्डिंग और पश्च-निर्माण कार्य चेन्नई में संपन्न हुए—जो उस समय फिल्म निर्माण के प्रमुख केंद्रों में से एक था।<ref name="Routledge">{{Cite book |last1=K. Moti Gokulsing |url=https://books.google.com/books?id=djUFmlFbzFkC |title=Routledge Handbook of Indian Cinemas |last2=Wimal Dissanayake |date=17 April 2013 |publisher=Routledge |isbn=978-1-136-77284-9}}</ref>
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आगे चलकर सन् 1949 में होन्नप्पा भगवथर ने भक्त कुंभारा का निर्माण किया, जिसमें उन्होंने पंडारीबाई के साथ मुख्य भूमिका निभाई। यह फिल्म भक्ति-आधारित कथानकों की लोकप्रियता को दर्शाती है। सन् 1955 में भगवथर ने एक और महत्त्वपूर्ण कन्नड़ फिल्म महाकवि कालिदास का निर्माण किया, जिसके माध्यम से उन्होंने अभिनेत्री बी. सरोजा देवी को फिल्म जगत में परिचित कराया—जो आगे चलकर कन्नड़ तथा दक्षिण भारतीय सिनेमा की एक प्रतिष्ठित हस्ती बनीं।<ref name="Routledge" />
इसी कालखंड में बी.एस. रंगा जैसे बहुआयामी प्रतिभा के धनी व्यक्तित्व ने भी कन्नड़ सिनेमा को समृद्ध किया। वे एक कुशल छायाकार, अभिनेता, लेखक, निर्माता और निर्देशक थे, जिन्होंने ‘विक्रम स्टूडियो’ के अंतर्गत कई ऐतिहासिक और भव्य फिल्मों का निर्माण किया।<ref>{{Cite news |last=Guy |first=Randor |author-link=Randor Guy |date=19 July 2014 |title=Ratnapuri Ilavarasi (1960) |work=[[The Hindu]] |url=http://www.thehindu.com/features/cinema/ratnapuri-ilavarasi-1960/article6229101.ece |url-status=live |access-date=5 April 2018 |archive-url=https://web.archive.org/web/20170731094156/http://www.thehindu.com/features/cinema/ratnapuri-ilavarasi-1960/article6229101.ece |archive-date=31 July 2017}}</ref>
==इन्हें भी देखें==
* [[कन्नड़ फिल्मों की सूची]]
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== सन्दर्भ ==
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'''''कन्नड़ सिनेमा''''', जिसे प्रचलित रूप में सैंडलवुड<ref>{{cite web | url=https://theculturetrip.com/asia/india/articles/the-biggest-regional-film-industries-in-india-you-should-know-about/ | title=The Biggest Regional Film Industries in India You Should Know About | date=31 December 2017 }}</ref> अथवा चंदनवन<ref>{{Cite web |title=From The Golden Era Of 70s To Now: A Brief History Of The Birth & Rise Of Kannada Cinema - ZEE5 News |url=https://www.zee5.com/zee5news/from-the-golden-era-of-70s-to-now-a-brief-history-of-the-birth-rise-of-kannada-cinema/ |website=zee5.com|date=24 August 2019 }}</ref> भी कहा जाता है, भारतीय सिनेमा का वह महत्त्वपूर्ण अंग है<ref name="deccanherald.com">{{Cite web |last=Manohar |first=R. |date=11 March 2011 |title=Sandalwood rechristened |url=https://www.dnaindia.com/entertainment/slideshow-sandalwood-rechristened-1518654 |website=DNA India}}</ref> जो कन्नड़ भाषा में चलचित्रों के निर्माण और प्रस्तुति के लिए समर्पित है। यह उद्योग मुख्यतः कर्नाटक राज्य में विकसित हुआ है, जहाँ कन्नड़ भाषा व्यापक रूप से बोली और समझी जाती है।<ref>{{Cite book |last=Shampa Banerjee, Anil Srivastava |title=One Hundred Indian Feature Films: An Annotated Filmography |publisher=Taylor & Francis |year=1988 |isbn=0-8240-9483-2 |orig-date=1988}}</ref><ref>{{Cite news |last=Shenoy |first=Megha |date=27 December 2010 |title=When it rained films |work=Deccan Herald |url=http://www.deccanherald.com/content/124106/when-rained-films.html |access-date=29 July 2017}}</ref><ref>{{Cite web |date=3 May 1913 |title=Statewise number of single screens |url=http://www.filmfed.org/singlescreen.html |access-date=29 July 2013 |website=chitraloka.com|archive-url=http://web.archive.org/web/20110722191347/http://www.filmfed.org/singlescreen.html|archive-date=22 July 2011}}</ref> इसका केंद्र बेंगलुरु के गांधी नगर क्षेत्र में स्थित है,<ref>{{cite web|url=https://www.deccanherald.com/india/karnataka/bengaluru/once-cinema-hub-gandhinagar-no-2000345|title=Once a cinema hub, Gandhinagar no longer a draw for movie business|website=[[Deccan Herald]]|date=17 April 2017}}</ref> जो लंबे समय से फिल्म निर्माण, वितरण और प्रदर्शन की गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।
कन्नड़ सिनेमा के इतिहास में सन् 1934 एक निर्णायक वर्ष के रूप में दर्ज है, जब सती सुलोचना नामक पहली बोलती (टॉकी) फिल्म प्रदर्शित हुई।<ref name="Rediff">{{Cite news |last=Dhaan |first=M S |date=13 April 2006 |title=Dr.Raj's impact on Kannada cinema |work=Rediff.com |url=http://www.rediff.com/movies/2006/apr/13ms.htm |access-date=18 March 2021}}</ref><ref>{{Cite news |date=31 December 2004 |title=First film to talk in Kannada |work=[[The Hindu]] |location=Chennai, India |url=http://www.hindu.com/thehindu/fr/2004/12/31/stories/2004123102420300.htm |url-status=dead |archive-url=https://web.archive.org/web/20050410165948/http://www.hindu.com/thehindu/fr/2004/12/31/stories/2004123102420300.htm |archive-date=10 April 2005}}</ref><ref>{{Cite news |date=22 August 2003 |title=A revolutionary filmmaker |work=[[The Hindu]] |location=Chennai, India |url=http://www.hindu.com/thehindu/fr/2003/08/22/stories/2003082201400400.htm |url-status=dead |archive-url=https://web.archive.org/web/20040117021114/http://www.hindu.com/thehindu/fr/2003/08/22/stories/2003082201400400.htm |archive-date=17 January 2004}}</ref> इस ऐतिहासिक कृति का निर्देशन वाई.वी. राव ने किया था, जबकि इसमें सुब्बैया नायडू और त्रिपुरम्बा ने प्रमुख भूमिकाएँ निभाईं। यह फिल्म तत्कालीन मैसूर साम्राज्य में प्रदर्शित होने वाली पहली कन्नड़ टॉकी भी थी,<ref name="ss">{{Cite news |date=31 December 2004 |title=First film to talk in Kannada |work=[[The Hindu]] |location=Chennai, India |url=http://www.hindu.com/fr/2004/12/31/stories/2004123102420300.htm |url-status=dead |access-date=21 April 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20050104030339/http://www.hindu.com/fr/2004/12/31/stories/2004123102420300.htm |archive-date=4 January 2005}}</ref> जिसने क्षेत्रीय सिनेमा के विकास की दिशा को एक नई पहचान दी।
इस फिल्म का निर्माण चमनलाल डूंगाजी ने किया था, जिन्होंने सन् 1932 में बेंगलुरु में ‘साउथ इंडिया मूवीटोन’ की स्थापना की थी।<ref name="thehindu">{{Cite news |last=Khajane |first=Muralidhara |date=25 February 2012 |title=Philatelic show to mark 78th anniversary of 'Sati Sulochana' |language=en-IN |work=The Hindu |url=https://www.thehindu.com/news/national/karnataka/philatelic-show-to-mark-78th-anniversary-of-sati-sulochana/article2929333.ece/ |access-date=3 September 2018}}</ref><ref name="dailyhunt">{{Cite news |title=Wealth of material found on first Kannada talkie |language=en |work=DailyHunt |url=https://m.dailyhunt.in/news/bangladesh/english/deccan+herald-epaper-deccan/wealth+of+material+found+on+first+kannada+talkie-newsid-85780599 |access-date=3 September 2018}}</ref>
कन्नड़ सिनेमा की एक विशिष्ट पहचान यह रही है कि उसने प्रमुख साहित्यिक कृतियों को प्रभावशाली ढंग से परदे पर रूपांतरित किया है, जिससे साहित्य और चलचित्र के बीच एक सशक्त सेतु का निर्माण हुआ। इस परंपरा के अंतर्गत कई महत्वपूर्ण फिल्में बनीं, जिन्होंने न केवल कलात्मक ऊँचाइयाँ छुईं, बल्कि सामाजिक और वैचारिक विमर्श को भी समृद्ध किया।
इसी क्रम में चोमना डूडी (1975), जिसका निर्देशन बी.वी. कारंत ने किया, प्रसिद्ध लेखक शिवराम कारंत की कृति पर आधारित है। वहीं काडू (1973), जिसे गिरीश कर्नाड ने निर्देशित किया, श्रीकृष्ण अलनहल्ली के उपन्यास से प्रेरित है। संस्कार (1970), जिसका निर्देशन पट्टाभिराम रेड्डी ने किया, यू.आर. अनंतमूर्ति की बहुचर्चित कृति पर आधारित है। इस फिल्म को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिली और इसे लोकार्नो अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में कांस्य तेंदुआ पुरस्कार से सम्मानित किया गया।<ref name="1nellore.com">{{Cite web |title=Tikkavarapu Pattabhirama Reddy – Poet, Film maker of international fame from Nellore |url=http://1nellore.com/1849/tikkavarapu-pattabhirama-reddy-poet-film-maker-of-international-fame/ |url-status=dead |archive-url=https://web.archive.org/web/20141006102018/http://1nellore.com/1849/tikkavarapu-pattabhirama-reddy-poet-film-maker-of-international-fame/ |archive-date=6 October 2014 |access-date=26 January 2016}}</ref>
इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए मैसूर मल्लिगे (1992), जिसका निर्देशन टी.एस. नागभरण ने किया, प्रसिद्ध कवि के.एस. नरसिम्हास्वामी की काव्य रचनाओं पर आधारित है।<ref>{{Cite web |title=TS Nagabharana movies list |url=http://www.bharatmovies.com/director/ts-nagabharana-movies.htm |access-date=4 November 2016 |website=bharatmovies.com}}</ref>
==इतिहास==
===प्रारंभिक इतिहास===
सन् 1934 कन्नड़ सिनेमा के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध हुआ, जब पहली कन्नड़ बोलती फिल्म सती सुलोचना सिनेमाघरों में प्रदर्शित हुई।<ref>{{usurped|[https://web.archive.org/web/20070105012711/http://www.hinduonnet.com/thehindu/fr/2004/12/31/stories/2004123102420300.htm "First film to talk in Kannada"]}} article in ''The Hindu''</ref> इसके तुरंत बाद भक्त ध्रुव (जिसे ध्रुव कुमार के नाम से भी जाना जाता है) रिलीज़ हुई, जिसने इस नवोदित फिल्म उद्योग को आगे बढ़ाने में योगदान दिया। “सती सुलोचना” में सुब्बैया नायडू और त्रिपुरम्बा ने प्रमुख भूमिकाएँ निभाईं। इस फिल्म की शूटिंग कोल्हापुर के छत्रपति स्टूडियो में की गई थी, जबकि इसके अधिकांश दृश्यांकन, ध्वनि रिकॉर्डिंग और पश्च-निर्माण कार्य चेन्नई में संपन्न हुए—जो उस समय फिल्म निर्माण के प्रमुख केंद्रों में से एक था।<ref name="Routledge">{{Cite book |last1=K. Moti Gokulsing |url=https://books.google.com/books?id=djUFmlFbzFkC |title=Routledge Handbook of Indian Cinemas |last2=Wimal Dissanayake |date=17 April 2013 |publisher=Routledge |isbn=978-1-136-77284-9}}</ref>
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आगे चलकर सन् 1949 में होन्नप्पा भगवथर ने भक्त कुंभारा का निर्माण किया, जिसमें उन्होंने पंडारीबाई के साथ मुख्य भूमिका निभाई। यह फिल्म भक्ति-आधारित कथानकों की लोकप्रियता को दर्शाती है। सन् 1955 में भगवथर ने एक और महत्त्वपूर्ण कन्नड़ फिल्म महाकवि कालिदास का निर्माण किया, जिसके माध्यम से उन्होंने अभिनेत्री बी. सरोजा देवी को फिल्म जगत में परिचित कराया—जो आगे चलकर कन्नड़ तथा दक्षिण भारतीय सिनेमा की एक प्रतिष्ठित हस्ती बनीं।<ref name="Routledge" />
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==इन्हें भी देखें==
* [[कन्नड़ फिल्मों की सूची]]
* [[भारतीय सिनेमा]]
* [[भारतीय मीडिया]]
== सन्दर्भ ==
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'''''कन्नड़ सिनेमा''''', जिसे प्रचलित रूप में सैंडलवुड<ref>{{cite web | url=https://theculturetrip.com/asia/india/articles/the-biggest-regional-film-industries-in-india-you-should-know-about/ | title=The Biggest Regional Film Industries in India You Should Know About | date=31 December 2017 }}</ref> अथवा चंदनवन<ref>{{Cite web |title=From The Golden Era Of 70s To Now: A Brief History Of The Birth & Rise Of Kannada Cinema - ZEE5 News |url=https://www.zee5.com/zee5news/from-the-golden-era-of-70s-to-now-a-brief-history-of-the-birth-rise-of-kannada-cinema/ |website=zee5.com|date=24 August 2019 }}</ref> भी कहा जाता है, भारतीय सिनेमा का वह महत्त्वपूर्ण अंग है<ref name="deccanherald.com">{{Cite web |last=Manohar |first=R. |date=11 March 2011 |title=Sandalwood rechristened |url=https://www.dnaindia.com/entertainment/slideshow-sandalwood-rechristened-1518654 |website=DNA India}}</ref> जो कन्नड़ भाषा में चलचित्रों के निर्माण और प्रस्तुति के लिए समर्पित है। यह उद्योग मुख्यतः कर्नाटक राज्य में विकसित हुआ है, जहाँ कन्नड़ भाषा व्यापक रूप से बोली और समझी जाती है।<ref>{{Cite book |last=Shampa Banerjee, Anil Srivastava |title=One Hundred Indian Feature Films: An Annotated Filmography |publisher=Taylor & Francis |year=1988 |isbn=0-8240-9483-2 |orig-date=1988}}</ref><ref>{{Cite news |last=Shenoy |first=Megha |date=27 December 2010 |title=When it rained films |work=Deccan Herald |url=http://www.deccanherald.com/content/124106/when-rained-films.html |access-date=29 July 2017}}</ref><ref>{{Cite web |date=3 May 1913 |title=Statewise number of single screens |url=http://www.filmfed.org/singlescreen.html |access-date=29 July 2013 |website=chitraloka.com|archive-url=http://web.archive.org/web/20110722191347/http://www.filmfed.org/singlescreen.html|archive-date=22 July 2011}}</ref> इसका केंद्र बेंगलुरु के गांधी नगर क्षेत्र में स्थित है,<ref>{{cite web|url=https://www.deccanherald.com/india/karnataka/bengaluru/once-cinema-hub-gandhinagar-no-2000345|title=Once a cinema hub, Gandhinagar no longer a draw for movie business|website=[[Deccan Herald]]|date=17 April 2017}}</ref> जो लंबे समय से फिल्म निर्माण, वितरण और प्रदर्शन की गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।
कन्नड़ सिनेमा के इतिहास में सन् 1934 एक निर्णायक वर्ष के रूप में दर्ज है, जब सती सुलोचना नामक पहली बोलती (टॉकी) फिल्म प्रदर्शित हुई।<ref name="Rediff">{{Cite news |last=Dhaan |first=M S |date=13 April 2006 |title=Dr.Raj's impact on Kannada cinema |work=Rediff.com |url=http://www.rediff.com/movies/2006/apr/13ms.htm |access-date=18 March 2021}}</ref><ref>{{Cite news |date=31 December 2004 |title=First film to talk in Kannada |work=[[The Hindu]] |location=Chennai, India |url=http://www.hindu.com/thehindu/fr/2004/12/31/stories/2004123102420300.htm |url-status=dead |archive-url=https://web.archive.org/web/20050410165948/http://www.hindu.com/thehindu/fr/2004/12/31/stories/2004123102420300.htm |archive-date=10 April 2005}}</ref><ref>{{Cite news |date=22 August 2003 |title=A revolutionary filmmaker |work=[[The Hindu]] |location=Chennai, India |url=http://www.hindu.com/thehindu/fr/2003/08/22/stories/2003082201400400.htm |url-status=dead |archive-url=https://web.archive.org/web/20040117021114/http://www.hindu.com/thehindu/fr/2003/08/22/stories/2003082201400400.htm |archive-date=17 January 2004}}</ref> इस ऐतिहासिक कृति का निर्देशन वाई.वी. राव ने किया था, जबकि इसमें सुब्बैया नायडू और त्रिपुरम्बा ने प्रमुख भूमिकाएँ निभाईं। यह फिल्म तत्कालीन मैसूर साम्राज्य में प्रदर्शित होने वाली पहली कन्नड़ टॉकी भी थी,<ref name="ss">{{Cite news |date=31 December 2004 |title=First film to talk in Kannada |work=[[The Hindu]] |location=Chennai, India |url=http://www.hindu.com/fr/2004/12/31/stories/2004123102420300.htm |url-status=dead |access-date=21 April 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20050104030339/http://www.hindu.com/fr/2004/12/31/stories/2004123102420300.htm |archive-date=4 January 2005}}</ref> जिसने क्षेत्रीय सिनेमा के विकास की दिशा को एक नई पहचान दी।
इस फिल्म का निर्माण चमनलाल डूंगाजी ने किया था, जिन्होंने सन् 1932 में बेंगलुरु में ‘साउथ इंडिया मूवीटोन’ की स्थापना की थी।<ref name="thehindu">{{Cite news |last=Khajane |first=Muralidhara |date=25 February 2012 |title=Philatelic show to mark 78th anniversary of 'Sati Sulochana' |language=en-IN |work=The Hindu |url=https://www.thehindu.com/news/national/karnataka/philatelic-show-to-mark-78th-anniversary-of-sati-sulochana/article2929333.ece/ |access-date=3 September 2018}}</ref><ref name="dailyhunt">{{Cite news |title=Wealth of material found on first Kannada talkie |language=en |work=DailyHunt |url=https://m.dailyhunt.in/news/bangladesh/english/deccan+herald-epaper-deccan/wealth+of+material+found+on+first+kannada+talkie-newsid-85780599 |access-date=3 September 2018}}</ref>
कन्नड़ सिनेमा की एक विशिष्ट पहचान यह रही है कि उसने प्रमुख साहित्यिक कृतियों को प्रभावशाली ढंग से परदे पर रूपांतरित किया है, जिससे साहित्य और चलचित्र के बीच एक सशक्त सेतु का निर्माण हुआ। इस परंपरा के अंतर्गत कई महत्वपूर्ण फिल्में बनीं, जिन्होंने न केवल कलात्मक ऊँचाइयाँ छुईं, बल्कि सामाजिक और वैचारिक विमर्श को भी समृद्ध किया।
इसी क्रम में चोमना डूडी (1975), जिसका निर्देशन बी.वी. कारंत ने किया, प्रसिद्ध लेखक शिवराम कारंत की कृति पर आधारित है। वहीं काडू (1973), जिसे गिरीश कर्नाड ने निर्देशित किया, श्रीकृष्ण अलनहल्ली के उपन्यास से प्रेरित है। संस्कार (1970), जिसका निर्देशन पट्टाभिराम रेड्डी ने किया, यू.आर. अनंतमूर्ति की बहुचर्चित कृति पर आधारित है। इस फिल्म को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिली और इसे लोकार्नो अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में कांस्य तेंदुआ पुरस्कार से सम्मानित किया गया।<ref name="1nellore.com">{{Cite web |title=Tikkavarapu Pattabhirama Reddy – Poet, Film maker of international fame from Nellore |url=http://1nellore.com/1849/tikkavarapu-pattabhirama-reddy-poet-film-maker-of-international-fame/ |url-status=dead |archive-url=https://web.archive.org/web/20141006102018/http://1nellore.com/1849/tikkavarapu-pattabhirama-reddy-poet-film-maker-of-international-fame/ |archive-date=6 October 2014 |access-date=26 January 2016}}</ref>
इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए मैसूर मल्लिगे (1992), जिसका निर्देशन टी.एस. नागभरण ने किया, प्रसिद्ध कवि के.एस. नरसिम्हास्वामी की काव्य रचनाओं पर आधारित है।<ref>{{Cite web |title=TS Nagabharana movies list |url=http://www.bharatmovies.com/director/ts-nagabharana-movies.htm |access-date=4 November 2016 |website=bharatmovies.com}}</ref>
==इतिहास==
===प्रारंभिक इतिहास===
सन् 1934 कन्नड़ सिनेमा के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध हुआ, जब पहली कन्नड़ बोलती फिल्म सती सुलोचना सिनेमाघरों में प्रदर्शित हुई।<ref>{{usurped|[https://web.archive.org/web/20070105012711/http://www.hinduonnet.com/thehindu/fr/2004/12/31/stories/2004123102420300.htm "First film to talk in Kannada"]}} article in ''The Hindu''</ref> इसके तुरंत बाद भक्त ध्रुव (जिसे ध्रुव कुमार के नाम से भी जाना जाता है) रिलीज़ हुई, जिसने इस नवोदित फिल्म उद्योग को आगे बढ़ाने में योगदान दिया। “सती सुलोचना” में सुब्बैया नायडू और त्रिपुरम्बा ने प्रमुख भूमिकाएँ निभाईं। इस फिल्म की शूटिंग कोल्हापुर के छत्रपति स्टूडियो में की गई थी, जबकि इसके अधिकांश दृश्यांकन, ध्वनि रिकॉर्डिंग और पश्च-निर्माण कार्य चेन्नई में संपन्न हुए—जो उस समय फिल्म निर्माण के प्रमुख केंद्रों में से एक था।<ref name="Routledge">{{Cite book |last1=K. Moti Gokulsing |url=https://books.google.com/books?id=djUFmlFbzFkC |title=Routledge Handbook of Indian Cinemas |last2=Wimal Dissanayake |date=17 April 2013 |publisher=Routledge |isbn=978-1-136-77284-9}}</ref>
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आगे चलकर सन् 1949 में होन्नप्पा भगवथर ने भक्त कुंभारा का निर्माण किया, जिसमें उन्होंने पंडारीबाई के साथ मुख्य भूमिका निभाई। यह फिल्म भक्ति-आधारित कथानकों की लोकप्रियता को दर्शाती है। सन् 1955 में भगवथर ने एक और महत्त्वपूर्ण कन्नड़ फिल्म महाकवि कालिदास का निर्माण किया, जिसके माध्यम से उन्होंने अभिनेत्री बी. सरोजा देवी को फिल्म जगत में परिचित कराया—जो आगे चलकर कन्नड़ तथा दक्षिण भारतीय सिनेमा की एक प्रतिष्ठित हस्ती बनीं।<ref name="Routledge" />
इसी कालखंड में बी.एस. रंगा जैसे बहुआयामी प्रतिभा के धनी व्यक्तित्व ने भी कन्नड़ सिनेमा को समृद्ध किया। वे एक कुशल छायाकार, अभिनेता, लेखक, निर्माता और निर्देशक थे, जिन्होंने ‘विक्रम स्टूडियो’ के अंतर्गत कई ऐतिहासिक और भव्य फिल्मों का निर्माण किया।<ref>{{Cite news |last=Guy |first=Randor |author-link=Randor Guy |date=19 July 2014 |title=Ratnapuri Ilavarasi (1960) |work=[[The Hindu]] |url=http://www.thehindu.com/features/cinema/ratnapuri-ilavarasi-1960/article6229101.ece |url-status=live |access-date=5 April 2018 |archive-url=https://web.archive.org/web/20170731094156/http://www.thehindu.com/features/cinema/ratnapuri-ilavarasi-1960/article6229101.ece |archive-date=31 July 2017}}</ref>
==इन्हें भी देखें==
* [[कन्नड़ फिल्मों की सूची]]
* [[भारतीय सिनेमा]]
* [[भारतीय मीडिया]]
== सन्दर्भ ==
{{टिप्पणीसूची}}
[[श्रेणी:कन्नड़ भाषी चलचित्र]]
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2026-05-03T09:31:40Z
चाहर धर्मेंद्र
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कुछ स्रोत सुधारे
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wikitext
text/x-wiki
{{काम जारी|date=मई 2026}}
{{Infobox cinema market
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| screens = 925 (2022 तक)<ref name="Scree2022">{{Cite news |date=11 अप्रैल 2022 |title=KGF Chapter 2 to hit 6,000 screens across India |work=द न्यू इंडियन एक्सप्रेस |url=https://www.newindianexpress.com/entertainment/kannada/2022/apr/11/kgf-chapter-2to-hit-6000-screens-across-india-2440448.html |access-date=16 अप्रैल 2022}}</ref><br/>जिसमें शामिल हैं:{{ubl|{{nowrap|630 सिंगल स्क्रीन (2021–22 तक)}},<ref name="Scree2022" /><ref name="Screen_2021" />|{{nowrap|260 मल्टीप्लेक्स स्क्रीन (2021 तक)}}<ref name="Screen_2021">{{Cite news |date=23 जुलाई 2021 |title=With no new movie releases, single-screen theatres in Karnataka struggle to survive |work=[[हिन्दुस्तान टाईम्स]] |url=https://www.hindustantimes.com/india-news/with-no-new-movie-releases-single-screen-theatres-in-karnataka-struggle-to-survive-101626982741172.html |url-status=live |access-date=24 मार्च 2022 |archive-url=https://web.archive.org/web/20220324093748/https://www.hindustantimes.com/india-news/with-no-new-movie-releases-single-screen-theatres-in-karnataka-struggle-to-survive-101626982741172.html |archive-date=24 मार्च 2022}}</ref>}}
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'''''कन्नड़ सिनेमा''''', जिसे प्रचलित रूप में सैंडलवुड<ref>{{cite web | url=https://theculturetrip.com/asia/india/articles/the-biggest-regional-film-industries-in-india-you-should-know-about/ | title=The Biggest Regional Film Industries in India You Should Know About | date=31 दिसंबर 2017 }}</ref> अथवा चंदनवन<ref>{{Cite web |title=From The Golden Era Of 70s To Now: A Brief History Of The Birth & Rise Of Kannada Cinema - ZEE5 News |url=https://www.zee5.com/zee5news/from-the-golden-era-of-70s-to-now-a-brief-history-of-the-birth-rise-of-kannada-cinema/ |website=zee5.com|date=24 अगस्त 2019 }}</ref> भी कहा जाता है, भारतीय सिनेमा का वह महत्त्वपूर्ण अंग है<ref name="deccanherald.com">{{Cite web |last=मनोहर |first=आर. |date=11 मार्च 2011 |title=Sandalwood rechristened |url=https://www.dnaindia.com/entertainment/slideshow-sandalwood-rechristened-1518654 |website=डीएनए इंडिया}}</ref> जो कन्नड़ भाषा में चलचित्रों के निर्माण और प्रस्तुति के लिए समर्पित है। यह उद्योग मुख्यतः कर्नाटक राज्य में विकसित हुआ है, जहाँ कन्नड़ भाषा व्यापक रूप से बोली और समझी जाती है।<ref>{{Cite book |last=शम्पा बनर्जी, अनिल श्रीवास्तव |title=One Hundred Indian Feature Films: An Annotated Filmography |publisher=टेलर एंड फ्रांसिस |year=1988 |isbn=0-8240-9483-2 |orig-date=1988}}</ref><ref>{{Cite news |last=शेनॉय |first=मेघा |date=27 दिसंबर 2010 |title=When it rained films |work=डेक्कन हेराल्ड |url=http://www.deccanherald.com/content/124106/when-rained-films.html |access-date=29 जुलाई 2017}}</ref><ref>{{Cite web |date=3 May 1913 |title=Statewise number of single screens |url=http://www.filmfed.org/singlescreen.html |access-date=29 जुलाई 2013 |website=चित्रलोका डॉट कॉम|archive-url=http://web.archive.org/web/20110722191347/http://www.filmfed.org/singlescreen.html|archive-date=22 जुलाई 2011}}</ref> इसका केंद्र बेंगलुरु के गांधी नगर क्षेत्र में स्थित है,<ref>{{cite web|url=https://www.deccanherald.com/india/karnataka/bengaluru/once-cinema-hub-gandhinagar-no-2000345|title=Once a cinema hub, Gandhinagar no longer a draw for movie business|website=[[डेक्कन हेराल्ड]]|date=17 अप्रैल 2017}}</ref> जो लंबे समय से फिल्म निर्माण, वितरण और प्रदर्शन की गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।
कन्नड़ सिनेमा के इतिहास में सन् 1934 एक निर्णायक वर्ष के रूप में दर्ज है, जब सती सुलोचना नामक पहली बोलती (टॉकी) फिल्म प्रदर्शित हुई।<ref name="Rediff">{{Cite news |last=धान |first=एमएस |date=13 अप्रैल 2006 |title=Dr.Raj's impact on Kannada cinema |work=Rediff.com |url=http://www.rediff.com/movies/2006/apr/13ms.htm |access-date=18 मार्च 2021}}</ref><ref>{{Cite news |date=31 दिसंबर 2004 |title=First film to talk in Kannada |work=[[द हिन्दू]] |location=चेन्नई, भारत |url=http://www.hindu.com/thehindu/fr/2004/12/31/stories/2004123102420300.htm |url-status=dead |archive-url=https://web.archive.org/web/20050410165948/http://www.hindu.com/thehindu/fr/2004/12/31/stories/2004123102420300.htm |archive-date=10 अप्रैल 2005}}</ref><ref>{{Cite news |date=22 अगस्त 2003 |title=A revolutionary filmmaker |work=[[द हिन्दू]] |location=चेन्नई, भारत |url=http://www.hindu.com/thehindu/fr/2003/08/22/stories/2003082201400400.htm |url-status=dead |archive-url=https://web.archive.org/web/20040117021114/http://www.hindu.com/thehindu/fr/2003/08/22/stories/2003082201400400.htm |archive-date=17 जनवरी 2004}}</ref> इस ऐतिहासिक कृति का निर्देशन वाई.वी. राव ने किया था, जबकि इसमें सुब्बैया नायडू और त्रिपुरम्बा ने प्रमुख भूमिकाएँ निभाईं। यह फिल्म तत्कालीन मैसूर साम्राज्य में प्रदर्शित होने वाली पहली कन्नड़ टॉकी भी थी,<ref name="ss">{{Cite news |date=31 दिसंबर 2004 |title=First film to talk in Kannada |work=[[द हिन्दू]] |location=चेन्नई, भारत |url=http://www.hindu.com/fr/2004/12/31/stories/2004123102420300.htm |url-status=dead |access-date=21 अप्रैल 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20050104030339/http://www.hindu.com/fr/2004/12/31/stories/2004123102420300.htm |archive-date=4 जनवरी 2005}}</ref> जिसने क्षेत्रीय सिनेमा के विकास की दिशा को एक नई पहचान दी।
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कन्नड़ सिनेमा की एक विशिष्ट पहचान यह रही है कि उसने प्रमुख साहित्यिक कृतियों को प्रभावशाली ढंग से परदे पर रूपांतरित किया है, जिससे साहित्य और चलचित्र के बीच एक सशक्त सेतु का निर्माण हुआ। इस परंपरा के अंतर्गत कई महत्वपूर्ण फिल्में बनीं, जिन्होंने न केवल कलात्मक ऊँचाइयाँ छुईं, बल्कि सामाजिक और वैचारिक विमर्श को भी समृद्ध किया।
इसी क्रम में चोमना डूडी (1975), जिसका निर्देशन बी.वी. कारंत ने किया, प्रसिद्ध लेखक शिवराम कारंत की कृति पर आधारित है। वहीं काडू (1973), जिसे गिरीश कर्नाड ने निर्देशित किया, श्रीकृष्ण अलनहल्ली के उपन्यास से प्रेरित है। संस्कार (1970), जिसका निर्देशन पट्टाभिराम रेड्डी ने किया, यू.आर. अनंतमूर्ति की बहुचर्चित कृति पर आधारित है। इस फिल्म को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिली और इसे लोकार्नो अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में कांस्य तेंदुआ पुरस्कार से सम्मानित किया गया।<ref name="1nellore.com">{{Cite web |title=Tikkavarapu Pattabhirama Reddy – Poet, Film maker of international fame from Nellore |url=http://1nellore.com/1849/tikkavarapu-pattabhirama-reddy-poet-film-maker-of-international-fame/ |url-status=dead |archive-url=https://web.archive.org/web/20141006102018/http://1nellore.com/1849/tikkavarapu-pattabhirama-reddy-poet-film-maker-of-international-fame/ |archive-date=6 अक्टूबर 2014 |access-date=26 जनवरी 2016}}</ref>
इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए मैसूर मल्लिगे (1992), जिसका निर्देशन टी.एस. नागभरण ने किया, प्रसिद्ध कवि के.एस. नरसिम्हास्वामी की काव्य रचनाओं पर आधारित है।<ref>{{Cite web |title=TS Nagabharana movies list |url=http://www.bharatmovies.com/director/ts-nagabharana-movies.htm |access-date=4 नवंबर 2016 |website=bharatmovies.com}}</ref>
==इतिहास==
===प्रारंभिक इतिहास===
सन् 1934 कन्नड़ सिनेमा के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध हुआ, जब पहली कन्नड़ बोलती फिल्म सती सुलोचना सिनेमाघरों में प्रदर्शित हुई।<ref>{{Cite news |date=31 दिसंबर 2004 |title=First film to talk in Kannada |work=[[द हिन्दू]] |url=http://www.hinduonnet.com/thehindu/fr/2004/12/31/stories/2004123102420300.htm|url-status=dead |access-date=31 दिसंबर 2004 |archive-url=https://web.archive.org/web/20070105012711/http://www.hinduonnet.com/thehindu/fr/2004/12/31/stories/2004123102420300.htm |archive-date=5 जनवरी 2007}}</ref> इसके तुरंत बाद भक्त ध्रुव (जिसे ध्रुव कुमार के नाम से भी जाना जाता है) रिलीज़ हुई, जिसने इस नवोदित फिल्म उद्योग को आगे बढ़ाने में योगदान दिया। “सती सुलोचना” में सुब्बैया नायडू और त्रिपुरम्बा ने प्रमुख भूमिकाएँ निभाईं। इस फिल्म की शूटिंग कोल्हापुर के छत्रपति स्टूडियो में की गई थी, जबकि इसके अधिकांश दृश्यांकन, ध्वनि रिकॉर्डिंग और पश्च-निर्माण कार्य चेन्नई में संपन्न हुए—जो उस समय फिल्म निर्माण के प्रमुख केंद्रों में से एक था।<ref name="Routledge">{{Cite book |last1=के. मोती गोकुलसिंह |url=https://books.google.com/books?id=djUFmlFbzFkC |title=Routledge Handbook of Indian Cinemas |last2=विमल दिसानायके |date=17 अप्रैल 2013 |publisher= रूटलेज |isbn=978-1-136-77284-9}}</ref>
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आगे चलकर सन् 1949 में होन्नप्पा भगवथर ने भक्त कुंभारा का निर्माण किया, जिसमें उन्होंने पंडारीबाई के साथ मुख्य भूमिका निभाई। यह फिल्म भक्ति-आधारित कथानकों की लोकप्रियता को दर्शाती है। सन् 1955 में भगवथर ने एक और महत्त्वपूर्ण कन्नड़ फिल्म महाकवि कालिदास का निर्माण किया, जिसके माध्यम से उन्होंने अभिनेत्री बी. सरोजा देवी को फिल्म जगत में परिचित कराया—जो आगे चलकर कन्नड़ तथा दक्षिण भारतीय सिनेमा की एक प्रतिष्ठित हस्ती बनीं।<ref name="Routledge" />
इसी कालखंड में बी.एस. रंगा जैसे बहुआयामी प्रतिभा के धनी व्यक्तित्व ने भी कन्नड़ सिनेमा को समृद्ध किया। वे एक कुशल छायाकार, अभिनेता, लेखक, निर्माता और निर्देशक थे, जिन्होंने ‘विक्रम स्टूडियो’ के अंतर्गत कई ऐतिहासिक और भव्य फिल्मों का निर्माण किया।<ref>{{Cite news |last=गाय |first=रैंडोर |date=19 जुलाई 2014 |title=Ratnapuri Ilavarasi (1960) |work=[[द हिन्दू]] |url=http://www.thehindu.com/features/cinema/ratnapuri-ilavarasi-1960/article6229101.ece |url-status=live |access-date=5 अप्रैल 2018 |archive-url=https://web.archive.org/web/20170731094156/http://www.thehindu.com/features/cinema/ratnapuri-ilavarasi-1960/article6229101.ece |archive-date=31 जुलाई 2017}}</ref>
==इन्हें भी देखें==
* [[कन्नड़ फिल्मों की सूची]]
* [[भारतीय सिनेमा]]
* [[भारतीय मीडिया]]
== सन्दर्भ ==
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[[श्रेणी:कन्नड़ भाषी चलचित्र]]
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चाहर धर्मेंद्र
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'''''कन्नड़ सिनेमा''''', जिसे प्रचलित रूप में सैंडलवुड<ref>{{cite web | url=https://theculturetrip.com/asia/india/articles/the-biggest-regional-film-industries-in-india-you-should-know-about/ | title=The Biggest Regional Film Industries in India You Should Know About | date=31 दिसंबर 2017 }}</ref> अथवा चंदनवन<ref>{{Cite web |title=From The Golden Era Of 70s To Now: A Brief History Of The Birth & Rise Of Kannada Cinema - ZEE5 News |url=https://www.zee5.com/zee5news/from-the-golden-era-of-70s-to-now-a-brief-history-of-the-birth-rise-of-kannada-cinema/ |website=zee5.com|date=24 अगस्त 2019 }}</ref> भी कहा जाता है, [[भारतीय सिनेमा]] का वह महत्त्वपूर्ण अंग है<ref name="deccanherald.com">{{Cite web |last=मनोहर |first=आर. |date=11 मार्च 2011 |title=Sandalwood rechristened |url=https://www.dnaindia.com/entertainment/slideshow-sandalwood-rechristened-1518654 |website=डीएनए इंडिया}}</ref> जो [[कन्नड़ भाषा]] में चलचित्रों के निर्माण और प्रस्तुति के लिए समर्पित है। यह उद्योग मुख्यतः [[कर्नाटक]] राज्य में विकसित हुआ है, जहाँ कन्नड़ भाषा व्यापक रूप से बोली और समझी जाती है।<ref>{{Cite book |last=शम्पा बनर्जी, अनिल श्रीवास्तव |title=One Hundred Indian Feature Films: An Annotated Filmography |publisher=टेलर एंड फ्रांसिस |year=1988 |isbn=0-8240-9483-2}}</ref><ref>{{Cite news |last=शेनॉय |first=मेघा |date=27 दिसंबर 2010 |title=When it rained films |work=डेक्कन हेराल्ड |url=http://www.deccanherald.com/content/124106/when-rained-films.html |access-date=29 जुलाई 2017}}</ref><ref>{{Cite web |date=3 मई 1913 |title=Statewise number of single screens |url=http://www.filmfed.org/singlescreen.html |access-date=29 जुलाई 2013 |website=चित्रलोका डॉट कॉम|archive-url=http://web.archive.org/web/20110722191347/http://www.filmfed.org/singlescreen.html|archive-date=22 जुलाई 2011}}</ref> इसका केंद्र बेंगलुरु के गांधी नगर क्षेत्र में स्थित है,<ref>{{cite web|url=https://www.deccanherald.com/india/karnataka/bengaluru/once-cinema-hub-gandhinagar-no-2000345|title=Once a cinema hub, Gandhinagar no longer a draw for movie business|website=[[डेक्कन हेराल्ड]]|date=17 अप्रैल 2017}}</ref> जो लंबे समय से फिल्म निर्माण, वितरण और प्रदर्शन की गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।
कन्नड़ सिनेमा के इतिहास में सन् 1934 एक निर्णायक वर्ष के रूप में दर्ज है, जब सती सुलोचना नामक पहली बोलती (टॉकी) फिल्म प्रदर्शित हुई।<ref name="Rediff">{{Cite news |last=धान |first=एमएस |date=13 अप्रैल 2006 |title=Dr.Raj's impact on Kannada cinema |work=Rediff.com |url=http://www.rediff.com/movies/2006/apr/13ms.htm |access-date=18 मार्च 2021}}</ref><ref>{{Cite news |date=31 दिसंबर 2004 |title=First film to talk in Kannada |work=[[द हिन्दू]] |location=चेन्नई, भारत |url=http://www.hindu.com/thehindu/fr/2004/12/31/stories/2004123102420300.htm |url-status=dead |archive-url=https://web.archive.org/web/20050410165948/http://www.hindu.com/thehindu/fr/2004/12/31/stories/2004123102420300.htm |archive-date=10 अप्रैल 2005}}</ref><ref>{{Cite news |date=22 अगस्त 2003 |title=A revolutionary filmmaker |work=[[द हिन्दू]] |location=चेन्नई, भारत |url=http://www.hindu.com/thehindu/fr/2003/08/22/stories/2003082201400400.htm |url-status=dead |archive-url=https://web.archive.org/web/20040117021114/http://www.hindu.com/thehindu/fr/2003/08/22/stories/2003082201400400.htm |archive-date=17 जनवरी 2004}}</ref> इस ऐतिहासिक कृति का निर्देशन वाई.वी. राव ने किया था, जबकि इसमें सुब्बैया नायडू और त्रिपुरम्बा ने प्रमुख भूमिकाएँ निभाईं। यह फिल्म तत्कालीन [[मैसूर का साम्राज्य|मैसूर साम्राज्य]] में प्रदर्शित होने वाली पहली कन्नड़ टॉकी भी थी,<ref name="ss">{{Cite news |date=31 दिसंबर 2004 |title=First film to talk in Kannada |work=[[द हिन्दू]] |location=चेन्नई, भारत |url=http://www.hindu.com/fr/2004/12/31/stories/2004123102420300.htm |url-status=dead |access-date=21 अप्रैल 2007 |archive-url=https://web.archive.org/web/20050104030339/http://www.hindu.com/fr/2004/12/31/stories/2004123102420300.htm |archive-date=4 जनवरी 2005}}</ref> जिसने क्षेत्रीय सिनेमा के विकास की दिशा को एक नई पहचान दी।
इस फिल्म का निर्माण चमनलाल डूंगाजी ने किया था, जिन्होंने सन् 1932 में [[बेंगलुरु]] में ‘साउथ इंडिया मूवीटोन’ की स्थापना की थी।<ref name="thehindu">{{Cite news |last=खजाने |first=मुरलीधरा |date=25 फरवरी 2012 |title=Philatelic show to mark 78th anniversary of 'Sati Sulochana' |language=en-IN |work=द हिन्दू |url=https://www.thehindu.com/news/national/karnataka/philatelic-show-to-mark-78th-anniversary-of-sati-sulochana/article2929333.ece/ |access-date=3 सितंबर 2018}}</ref><ref name="dailyhunt">{{Cite news |title=Wealth of material found on first Kannada talkie |language=en |work= डेलीहंट |url=https://m.dailyhunt.in/news/bangladesh/english/deccan+herald-epaper-deccan/wealth+of+material+found+on+first+kannada+talkie-newsid-85780599 |access-date=3 सितंबर 2018}}</ref>
कन्नड़ सिनेमा की एक विशिष्ट पहचान यह रही है कि उसने प्रमुख साहित्यिक कृतियों को प्रभावशाली ढंग से परदे पर रूपांतरित किया है, जिससे साहित्य और चलचित्र के बीच एक सशक्त सेतु का निर्माण हुआ। इस परंपरा के अंतर्गत कई महत्वपूर्ण फिल्में बनीं, जिन्होंने न केवल कलात्मक ऊँचाइयाँ छुईं, बल्कि सामाजिक और वैचारिक विमर्श को भी समृद्ध किया।
इसी क्रम में चोमना डूडी (1975), जिसका निर्देशन [[ब॰ व॰ कारन्त|बी.वी. कारंत]] ने किया, प्रसिद्ध लेखक [[कोटा शिवराम कारन्त|शिवराम कारंत]] की कृति पर आधारित है। वहीं काडू (1973), जिसे [[गिरीश कर्नाड]] ने निर्देशित किया, श्रीकृष्ण अलनहल्ली के उपन्यास से प्रेरित है। संस्कार (1970), जिसका निर्देशन पट्टाभिराम रेड्डी ने किया, [[उडुपी राजगोपालाचार्य अनंतमूर्ति|यू.आर. अनंतमूर्ति]] की बहुचर्चित कृति पर आधारित है। इस फिल्म को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिली और इसे लोकार्नो अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में कांस्य तेंदुआ पुरस्कार से सम्मानित किया गया।<ref name="1nellore.com">{{Cite web |title=Tikkavarapu Pattabhirama Reddy – Poet, Film maker of international fame from Nellore |url=http://1nellore.com/1849/tikkavarapu-pattabhirama-reddy-poet-film-maker-of-international-fame/ |url-status=dead |archive-url=https://web.archive.org/web/20141006102018/http://1nellore.com/1849/tikkavarapu-pattabhirama-reddy-poet-film-maker-of-international-fame/ |archive-date=6 अक्टूबर 2014 |access-date=26 जनवरी 2016}}</ref>
इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए मैसूर मल्लिगे (1992), जिसका निर्देशन टी.एस. नागभरण ने किया, प्रसिद्ध कवि [[के. एस. नरसिंह स्वामी|के.एस. नरसिम्हास्वामी]] की काव्य रचनाओं पर आधारित है।<ref>{{Cite web |title=TS Nagabharana movies list |url=http://www.bharatmovies.com/director/ts-nagabharana-movies.htm |access-date=4 नवंबर 2016 |website=bharatmovies.com}}</ref>
==इतिहास==
===प्रारंभिक इतिहास===
सन् 1934 कन्नड़ सिनेमा के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध हुआ, जब पहली कन्नड़ [[वाक्पट|बोलती फिल्म]] सती सुलोचना सिनेमाघरों में प्रदर्शित हुई।<ref>{{Cite news |date=31 दिसंबर 2004 |title=First film to talk in Kannada |work=[[द हिन्दू]] |url=http://www.hinduonnet.com/thehindu/fr/2004/12/31/stories/2004123102420300.htm|url-status=dead |access-date=31 दिसंबर 2004 |archive-url=https://web.archive.org/web/20070105012711/http://www.hinduonnet.com/thehindu/fr/2004/12/31/stories/2004123102420300.htm |archive-date=5 जनवरी 2007}}</ref> इसके तुरंत बाद भक्त ध्रुव (जिसे ध्रुव कुमार के नाम से भी जाना जाता है) रिलीज़ हुई, जिसने इस नवोदित फिल्म उद्योग को आगे बढ़ाने में योगदान दिया। “सती सुलोचना” में सुब्बैया नायडू और त्रिपुरम्बा ने प्रमुख भूमिकाएँ निभाईं। इस फिल्म की शूटिंग [[कोल्हापुर]] के छत्रपति स्टूडियो में की गई थी, जबकि इसके अधिकांश दृश्यांकन, ध्वनि रिकॉर्डिंग और पश्च-निर्माण कार्य [[चेन्नई]] में संपन्न हुए—जो उस समय फिल्म निर्माण के प्रमुख केंद्रों में से एक था।<ref name="Routledge">{{Cite book |last1=के. मोती गोकुलसिंह |url=https://books.google.com/books?id=djUFmlFbzFkC |title=Routledge Handbook of Indian Cinemas |last2=विमल दिसानायके |date=17 अप्रैल 2013 |publisher= रूटलेज |isbn=978-1-136-77284-9}}</ref>
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आगे चलकर सन् 1949 में होन्नप्पा भगवथर ने भक्त कुंभारा का निर्माण किया, जिसमें उन्होंने पंडारीबाई के साथ मुख्य भूमिका निभाई। यह फिल्म भक्ति-आधारित कथानकों की लोकप्रियता को दर्शाती है। सन् 1955 में भगवथर ने एक और महत्त्वपूर्ण कन्नड़ फिल्म महाकवि कालिदास का निर्माण किया, जिसके माध्यम से उन्होंने अभिनेत्री [[बी. सरोजा देवी]] को फिल्म जगत में परिचित कराया—जो आगे चलकर कन्नड़ तथा दक्षिण भारतीय सिनेमा की एक प्रतिष्ठित हस्ती बनीं।<ref name="Routledge" />
इसी कालखंड में बी.एस. रंगा जैसे बहुआयामी प्रतिभा के धनी व्यक्तित्व ने भी कन्नड़ सिनेमा को समृद्ध किया। वे एक कुशल छायाकार, अभिनेता, लेखक, निर्माता और निर्देशक थे, जिन्होंने ‘विक्रम स्टूडियो’ के अंतर्गत कई ऐतिहासिक और भव्य फिल्मों का निर्माण किया।<ref>{{Cite news |last=गाय |first=रैंडोर |date=19 जुलाई 2014 |title=Ratnapuri Ilavarasi (1960) |work=[[द हिन्दू]] |url=http://www.thehindu.com/features/cinema/ratnapuri-ilavarasi-1960/article6229101.ece |url-status=live |access-date=5 अप्रैल 2018 |archive-url=https://web.archive.org/web/20170731094156/http://www.thehindu.com/features/cinema/ratnapuri-ilavarasi-1960/article6229101.ece |archive-date=31 जुलाई 2017}}</ref>
==इन्हें भी देखें==
* [[कन्नड़ फिल्मों की सूची]]
* [[भारतीय सिनेमा]]
* [[भारतीय मीडिया]]
== सन्दर्भ ==
{{टिप्पणीसूची}}
[[श्रेणी:कन्नड़ भाषी चलचित्र]]
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साहिब इब्न अब्बाद
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अबू-अल-कासिम इस्माइल इब्न अब्बास इब्न अल-अब्बास (फ़ारसी: ابوالقاسم اسماعیل بن عباد بن عباس; जन्म 938 - मृत्यु 30 मार्च 995), जिन्हें साहिब इब्न अब्बास (صاحب بن عباد) के नाम से बेहतर जाना जाता है, और अल-साहिब (الصاحب) के नाम से भी जाना जाता है, एक [[फ़ारसी विद्वान]] और राजनेता थे, जिन्होंने 976 से 995 तक रे शहर के बुईद शासकों के ग्रैंड वज़ीर के रूप में काम किया।
इस्फ़हान के उपनगरों के मूल निवासी, वे अरब संस्कृति में बहुत रुचि रखते थे, और हठधर्मितापूर्ण धर्मशास्त्र, इतिहास, व्याकरण, कोशलेखन, विद्वानों की आलोचना पर लिखा और कविता और बेलेस-लेट्रेस लिखे।
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अबू-अल-कासिम इस्माइल इब्न अब्बास इब्न अल-अब्बास (फ़ारसी: ابوالقاسم اسماعیل بن عباد بن عباس; जन्म 938 - मृत्यु 30 मार्च 995), जिन्हें साहिब इब्न अब्बास (صاحب بن عباد) के नाम से बेहतर जाना जाता है, और अल-साहिब (الصاحب) के नाम से भी जाना जाता है, एक [[फ़ारसी विद्वान]] और राजनेता थे, जिन्होंने 976 से 995 तक रे शहर के बुईद शासकों के ग्रैंड वज़ीर के रूप में काम किया।
इस्फ़हान के उपनगरों के मूल निवासी, वे अरब संस्कृति में बहुत रुचि रखते थे, और हठधर्मितापूर्ण धर्मशास्त्र, इतिहास, व्याकरण, कोशलेखन, विद्वानों की आलोचना पर लिखा और कविता और बेलेस-लेट्रेस लिखे।
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अबू-अल-कासिम इस्माइल इब्न अब्बास इब्न अल-अब्बास (फ़ारसी: ابوالقاسم اسماعیل بن عباد بن عباس; जन्म 938 - मृत्यु 30 मार्च 995), जिन्हें साहिब इब्न अब्बास (صاحب بن عباد) के नाम से बेहतर जाना जाता है, और अल-साहिब (الصاحب) के नाम से भी जाना जाता है, एक [[फ़ारसी विद्वान]] और राजनेता थे, जिन्होंने 976 से 995 तक रे शहर के बुईद शासकों के ग्रैंड वज़ीर के रूप में काम किया।
इस्फ़हान के उपनगरों के मूल निवासी, वे अरब संस्कृति में बहुत रुचि रखते थे, और हठधर्मितापूर्ण धर्मशास्त्र, इतिहास, व्याकरण, कोशलेखन, विद्वानों की आलोचना पर लिखा और कविता और बेलेस-लेट्रेस लिखे।
==जीवन==
साहिब का जन्म 14 सितंबर 938 को तलाक़ंचा में हुआ था। यह गाँव बुईद साम्राज्य के एक बड़े शहर इस्फ़हान से लगभग 20 मील दक्षिण में स्थित था। उनके पिता का नाम अबुल-हसन अब्बाद इब्न अब्बास (मृत्यु 946) था। वे एक जाने-माने और उच्च शिक्षित प्रशासक थे, जिन्होंने मुअतज़िली सिद्धांत पर कई रचनाएँ लिखी थीं। साहिब ने अपना बचपन तलाकान में बिताया। यह क़ज़वीन के पास, दयलम् क्षेत्र में स्थित एक कस्बा था। बाद में वे इस्फ़हान में बस गए और कुछ समय तक जिबाल के बुईद शासक, रुकन अल-दौला (शासनकाल: 935–976) के अधिकारी के रूप में कार्य किया। अपने पिता की मृत्यु के बाद, साहिब ने विद्वान और दार्शनिक इब्न अल-अमीद को अपना गुरु बना लिया।
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अबू-अल-कासिम इस्माइल इब्न अब्बास इब्न अल-अब्बास (फ़ारसी: ابوالقاسم اسماعیل بن عباد بن عباس; जन्म 938 - मृत्यु 30 मार्च 995), जिन्हें साहिब इब्न अब्बास (صاحب بن عباد) के नाम से बेहतर जाना जाता है, और अल-साहिब (الصاحب) के नाम से भी जाना जाता है, एक [[फ़ारसी विद्वान]] और राजनेता थे, जिन्होंने 976 से 995 तक रे शहर के बुईद शासकों के ग्रैंड वज़ीर के रूप में काम किया।<ref>{{cite book|last1=Cook|first1=Michael|author-link=Michael Cook (historian)|title=Commanding Right and Forbidding Wrong in Islamic Thought|date=2001|publisher=Cambridge University Press|isbn=9781139431606|page=201}}</ref>
इस्फ़हान के उपनगरों के मूल निवासी, वे अरब संस्कृति में बहुत रुचि रखते थे, और हठधर्मितापूर्ण धर्मशास्त्र, इतिहास, व्याकरण, कोशलेखन, विद्वानों की आलोचना पर लिखा और कविता और बेलेस-लेट्रेस लिखे।
==जीवन==
साहिब का जन्म 14 सितंबर 938 को तलाक़ंचा में हुआ था। यह गाँव बुईद साम्राज्य के एक बड़े शहर इस्फ़हान से लगभग 20 मील दक्षिण में स्थित था। उनके पिता का नाम अबुल-हसन अब्बाद इब्न अब्बास (मृत्यु 946) था। वे एक जाने-माने और उच्च शिक्षित प्रशासक थे, जिन्होंने मुअतज़िली सिद्धांत पर कई रचनाएँ लिखी थीं। साहिब ने अपना बचपन तलाकान में बिताया। यह क़ज़वीन के पास, दयलम् क्षेत्र में स्थित एक कस्बा था। बाद में वे इस्फ़हान में बस गए और कुछ समय तक जिबाल के बुईद शासक, रुकन अल-दौला (शासनकाल: 935–976) के अधिकारी के रूप में कार्य किया। अपने पिता की मृत्यु के बाद, साहिब ने विद्वान और दार्शनिक इब्न अल-अमीद को अपना गुरु बना लिया।
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अबू-अल-कासिम इस्माइल इब्न अब्बास इब्न अल-अब्बास (फ़ारसी: ابوالقاسم اسماعیل بن عباد بن عباس; जन्म 938 - मृत्यु 30 मार्च 995), जिन्हें साहिब इब्न अब्बास (صاحب بن عباد) के नाम से बेहतर जाना जाता है, और अल-साहिब (الصاحب) के नाम से भी जाना जाता है, एक [[फ़ारसी विद्वान]] और राजनेता थे, जिन्होंने 976 से 995 तक रे शहर के बुईद शासकों के ग्रैंड वज़ीर के रूप में काम किया।<ref>{{cite book|last1=Cook|first1=Michael|author-link=Michael Cook (historian)|title=Commanding Right and Forbidding Wrong in Islamic Thought|date=2001|publisher=Cambridge University Press|isbn=9781139431606|page=201}}</ref>
इस्फ़हान के उपनगरों के मूल निवासी, वे अरब संस्कृति में बहुत रुचि रखते थे, और हठधर्मितापूर्ण धर्मशास्त्र, इतिहास, व्याकरण, कोशलेखन, विद्वानों की आलोचना पर लिखा और कविता और बेलेस-लेट्रेस लिखे।.<ref name="Donzel1994">{{cite book | last1=Donzel | first1=E. J. van| author-link=Emeri Johannes van Donzel | title=Islamic Desk Reference | date=1 January 1994 | publisher=BRILL | isbn=978-90-04-09738-4 | page=[https://archive.org/details/islamicdeskrefer00donz_0/page/142 142] | quote=Ibn Abbad*, Abu l-Qasim* (al-Sahib): vizier and man of letters of the Buyid period; 938995. Of Persian origin, he was an arabophile and wrote on dogmatic theology, history, grammar, lexicography, literary criticism and composed poetry and belles-lettres. | url-access=registration|url=https://archive.org/details/islamicdeskrefer00donz_0/page/142 }}</ref>
==जीवन==
साहिब का जन्म 14 सितंबर 938 को तलाक़ंचा में हुआ था। यह गाँव बुईद साम्राज्य के एक बड़े शहर इस्फ़हान से लगभग 20 मील दक्षिण में स्थित था। उनके पिता का नाम अबुल-हसन अब्बाद इब्न अब्बास (मृत्यु 946) था। वे एक जाने-माने और उच्च शिक्षित प्रशासक थे, जिन्होंने मुअतज़िली सिद्धांत पर कई रचनाएँ लिखी थीं। साहिब ने अपना बचपन तलाकान में बिताया। यह क़ज़वीन के पास, दयलम् क्षेत्र में स्थित एक कस्बा था। बाद में वे इस्फ़हान में बस गए और कुछ समय तक जिबाल के बुईद शासक, रुकन अल-दौला (शासनकाल: 935–976) के अधिकारी के रूप में कार्य किया। अपने पिता की मृत्यु के बाद, साहिब ने विद्वान और दार्शनिक इब्न अल-अमीद को अपना गुरु बना लिया।
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'''अबू-अल-कासिम इस्माइल इब्न अब्बास इब्न अल-अब्बास''' (फ़ारसी: ابوالقاسم اسماعیل بن عباد بن عباس; जन्म 938 - मृत्यु 30 मार्च 995), जिन्हें साहिब इब्न अब्बास (صاحب بن عباد) के नाम से बेहतर जाना जाता है, और अल-साहिब (الصاحب) के नाम से भी जाना जाता है, एक [[फ़ारसी विद्वान]] और राजनेता थे, जिन्होंने 976 से 995 तक रे शहर के बुईद शासकों के ग्रैंड वज़ीर के रूप में काम किया।<ref>{{cite book|last1=Cook|first1=Michael|author-link=Michael Cook (historian)|title=Commanding Right and Forbidding Wrong in Islamic Thought|date=2001|publisher=Cambridge University Press|isbn=9781139431606|page=201}}</ref>
इस्फ़हान के उपनगरों के मूल निवासी, वे अरब संस्कृति में बहुत रुचि रखते थे, और हठधर्मितापूर्ण धर्मशास्त्र, इतिहास, व्याकरण, कोशलेखन, विद्वानों की आलोचना पर लिखा और कविता और बेलेस-लेट्रेस लिखे।.<ref name="Donzel1994">{{cite book | last1=Donzel | first1=E. J. van| author-link=Emeri Johannes van Donzel | title=Islamic Desk Reference | date=1 January 1994 | publisher=BRILL | isbn=978-90-04-09738-4 | page=[https://archive.org/details/islamicdeskrefer00donz_0/page/142 142] | quote=Ibn Abbad*, Abu l-Qasim* (al-Sahib): vizier and man of letters of the Buyid period; 938995. Of Persian origin, he was an arabophile and wrote on dogmatic theology, history, grammar, lexicography, literary criticism and composed poetry and belles-lettres. | url-access=registration|url=https://archive.org/details/islamicdeskrefer00donz_0/page/142 }}</ref>
==जीवन==
साहिब का जन्म 14 सितंबर 938 को तलाक़ंचा में हुआ था। यह गाँव बुईद साम्राज्य के एक बड़े शहर इस्फ़हान से लगभग 20 मील दक्षिण में स्थित था। उनके पिता का नाम अबुल-हसन अब्बाद इब्न अब्बास (मृत्यु 946) था। वे एक जाने-माने और उच्च शिक्षित प्रशासक थे, जिन्होंने मुअतज़िली सिद्धांत पर कई रचनाएँ लिखी थीं। साहिब ने अपना बचपन तलाकान में बिताया। यह क़ज़वीन के पास, दयलम् क्षेत्र में स्थित एक कस्बा था। बाद में वे इस्फ़हान में बस गए और कुछ समय तक जिबाल के बुईद शासक, रुकन अल-दौला (शासनकाल: 935–976) के अधिकारी के रूप में कार्य किया। अपने पिता की मृत्यु के बाद, साहिब ने विद्वान और दार्शनिक इब्न अल-अमीद को अपना गुरु बना लिया।
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'''अबू-अल-कासिम इस्माइल इब्न अब्बास इब्न अल-अब्बास''' (फ़ारसी: ابوالقاسم اسماعیل بن عباد بن عباس; जन्म 938 - मृत्यु 30 मार्च 995), जिन्हें साहिब इब्न अब्बास (صاحب بن عباد) के नाम से बेहतर जाना जाता है, और अल-साहिब (الصاحب) के नाम से भी जाना जाता है, एक [[फ़ारसी विद्वान]] और राजनेता थे, जिन्होंने 976 से 995 तक रे शहर के बुईद शासकों के ग्रैंड वज़ीर के रूप में काम किया।<ref>{{cite book|last1=Cook|first1=Michael|author-link=Michael Cook (historian)|title=Commanding Right and Forbidding Wrong in Islamic Thought|date=2001|publisher=Cambridge University Press|isbn=9781139431606|page=201}}</ref>
इस्फ़हान के उपनगरों के मूल निवासी, वे अरब संस्कृति में बहुत रुचि रखते थे, और हठधर्मितापूर्ण धर्मशास्त्र, इतिहास, व्याकरण, कोशलेखन, विद्वानों की आलोचना पर लिखा और कविता और बेलेस-लेट्रेस लिखे।.<ref name="Donzel1994">{{cite book | last1=Donzel | first1=E. J. van| author-link=Emeri Johannes van Donzel | title=Islamic Desk Reference | date=1 January 1994 | publisher=BRILL | isbn=978-90-04-09738-4 | page=[https://archive.org/details/islamicdeskrefer00donz_0/page/142 142] | quote=Ibn Abbad*, Abu l-Qasim* (al-Sahib): vizier and man of letters of the Buyid period; 938995. Of Persian origin, he was an arabophile and wrote on dogmatic theology, history, grammar, lexicography, literary criticism and composed poetry and belles-lettres. | url-access=registration|url=https://archive.org/details/islamicdeskrefer00donz_0/page/142 }}</ref>
==जीवन==
साहिब का जन्म 14 सितंबर 938 को तलाक़ंचा में हुआ था। यह गाँव बुईद साम्राज्य के एक बड़े शहर इस्फ़हान से लगभग 20 मील दक्षिण में स्थित था। उनके पिता का नाम अबुल-हसन अब्बाद इब्न अब्बास (मृत्यु 946) था। वे एक जाने-माने और उच्च शिक्षित प्रशासक थे, जिन्होंने मुअतज़िली सिद्धांत पर कई रचनाएँ लिखी थीं। साहिब ने अपना बचपन तलाकान में बिताया। यह क़ज़वीन के पास, दयलम् क्षेत्र में स्थित एक कस्बा था। बाद में वे इस्फ़हान में बस गए और कुछ समय तक जिबाल के बुईद शासक, रुकन अल-दौला (शासनकाल: 935–976) के अधिकारी के रूप में कार्य किया। अपने पिता की मृत्यु के बाद, साहिब ने विद्वान और दार्शनिक इब्न अल-अमीद को अपना गुरु बना लिया।
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'''अबू-अल-कासिम इस्माइल इब्न अब्बास इब्न अल-अब्बास''' (फ़ारसी: ابوالقاسم اسماعیل بن عباد بن عباس; जन्म 938 - मृत्यु 30 मार्च 995), जिन्हें साहिब इब्न अब्बास (صاحب بن عباد) के नाम से बेहतर जाना जाता है, और अल-साहिब (الصاحب) के नाम से भी जाना जाता है, एक [[फ़ारसी विद्वान]] और राजनेता थे, जिन्होंने 976 से 995 तक रे शहर के बुईद शासकों के ग्रैंड वज़ीर के रूप में काम किया।<ref>{{cite book|last1=Cook|first1=Michael|author-link=Michael Cook (historian)|title=Commanding Right and Forbidding Wrong in Islamic Thought|date=2001|publisher=Cambridge University Press|isbn=9781139431606|page=201}}</ref>
इस्फ़हान के उपनगरों के मूल निवासी, वे अरब संस्कृति में बहुत रुचि रखते थे, और हठधर्मितापूर्ण धर्मशास्त्र, इतिहास, व्याकरण, कोशलेखन, विद्वानों की आलोचना पर लिखा और कविता और बेलेस-लेट्रेस लिखे।.<ref name="Donzel1994">{{cite book | last1=Donzel | first1=E. J. van| author-link=Emeri Johannes van Donzel | title=Islamic Desk Reference | date=1 January 1994 | publisher=BRILL | isbn=978-90-04-09738-4 | page=[https://archive.org/details/islamicdeskrefer00donz_0/page/142 142] | quote=Ibn Abbad*, Abu l-Qasim* (al-Sahib): vizier and man of letters of the Buyid period; 938995. Of Persian origin, he was an arabophile and wrote on dogmatic theology, history, grammar, lexicography, literary criticism and composed poetry and belles-lettres. | url-access=registration|url=https://archive.org/details/islamicdeskrefer00donz_0/page/142 }}</ref>
==जीवन==
साहिब का जन्म 14 सितंबर 938 को तलाक़ंचा में हुआ था। यह गाँव बुईद साम्राज्य के एक बड़े शहर [[इस्फ़हान]] से लगभग 20 मील दक्षिण में स्थित था। उनके पिता का नाम अबुल-हसन अब्बाद इब्न अब्बास (मृत्यु 946) था। वे एक जाने-माने और उच्च शिक्षित प्रशासक थे, जिन्होंने मुअतज़िली सिद्धांत पर कई रचनाएँ लिखी थीं। साहिब ने अपना बचपन तलाकान में बिताया। यह क़ज़वीन के पास, दयलम् क्षेत्र में स्थित एक कस्बा था। बाद में वे इस्फ़हान में बस गए और कुछ समय तक जिबाल के बुईद शासक, रुकन अल-दौला (शासनकाल: 935–976) के अधिकारी के रूप में कार्य किया। अपने पिता की मृत्यु के बाद, साहिब ने विद्वान और दार्शनिक इब्न अल-अमीद को अपना गुरु बना लिया था।
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}}
'''अबू-अल-कासिम इस्माइल इब्न अब्बास इब्न अल-अब्बास''' (फ़ारसी: ابوالقاسم اسماعیل بن عباد بن عباس; जन्म 938 - मृत्यु 30 मार्च 995), जिन्हें साहिब इब्न अब्बास (صاحب بن عباد) के नाम से बेहतर जाना जाता है, और अल-साहिब (الصاحب) के नाम से भी जाना जाता है, एक [[ईरान|फ़ारसी विद्वान]] और राजनेता थे, जिन्होंने 976 से 995 तक रे शहर के बुईद शासकों के ग्रैंड वज़ीर के रूप में काम किया।<ref>{{cite book|last1=Cook|first1=Michael|author-link=Michael Cook (historian)|title=Commanding Right and Forbidding Wrong in Islamic Thought|date=2001|publisher=Cambridge University Press|isbn=9781139431606|page=201}}</ref>
इस्फ़हान के उपनगरों के मूल निवासी, वे अरब संस्कृति में बहुत रुचि रखते थे, और हठधर्मितापूर्ण धर्मशास्त्र, इतिहास, व्याकरण, कोशलेखन, विद्वानों की आलोचना पर लिखा और कविता और बेलेस-लेट्रेस लिखे।.<ref name="Donzel1994">{{cite book | last1=Donzel | first1=E. J. van| author-link=Emeri Johannes van Donzel | title=Islamic Desk Reference | date=1 January 1994 | publisher=BRILL | isbn=978-90-04-09738-4 | page=[https://archive.org/details/islamicdeskrefer00donz_0/page/142 142] | quote=Ibn Abbad*, Abu l-Qasim* (al-Sahib): vizier and man of letters of the Buyid period; 938995. Of Persian origin, he was an arabophile and wrote on dogmatic theology, history, grammar, lexicography, literary criticism and composed poetry and belles-lettres. | url-access=registration|url=https://archive.org/details/islamicdeskrefer00donz_0/page/142 }}</ref>
==जीवन==
साहिब का जन्म 14 सितंबर 938 को तलाक़ंचा में हुआ था। यह गाँव बुईद साम्राज्य के एक बड़े शहर [[इस्फ़हान]] से लगभग 20 मील दक्षिण में स्थित था। उनके पिता का नाम अबुल-हसन अब्बाद इब्न अब्बास (मृत्यु 946) था। वे एक जाने-माने और उच्च शिक्षित प्रशासक थे, जिन्होंने मुअतज़िली सिद्धांत पर कई रचनाएँ लिखी थीं। साहिब ने अपना बचपन तलाकान में बिताया। यह क़ज़वीन के पास, दयलम् क्षेत्र में स्थित एक कस्बा था। बाद में वे इस्फ़हान में बस गए और कुछ समय तक जिबाल के बुईद शासक, रुकन अल-दौला (शासनकाल: 935–976) के अधिकारी के रूप में कार्य किया। अपने पिता की मृत्यु के बाद, साहिब ने विद्वान और दार्शनिक इब्न अल-अमीद को अपना गुरु बना लिया था।
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{{Distinguish|टाकरी लिपि}}
[[File:Dogra_alphabet.jpg|अंगूठाकार|डोगरा लिपि में वर्णमाला तालिका]]
'''डोगरी लिपि''' ([[डोगरी भाषा|डोगरी]]:{{Lang|dgo|नमे डोगरा अख्खर}}, {{Lang|dgo|𑠝𑠢𑠳𑠷 𑠖𑠵𑠌𑠤𑠬 𑠀𑠊𑠹𑠋𑠤}}) एक लेखन प्रणाली है जिसका उपयोग मूल रूप से [[भारतीय उपमहाद्वीप]] के उत्तरी भाग में [[जम्मू और कश्मीर (केंद्र शासित प्रदेश)|जम्मू और कश्मीर]] में [[डोगरी भाषा]] लिखने के लिए किया जाता है।<ref name="L215234">{{Cite web|url=https://www.unicode.org/L2/L2015/15234r-dogra.pdf|title=L2/15-234R: Proposal to encode the Dogra script|last=Pandey|first=Anshuman|date=2015-11-04}}</ref>
== सन्दर्भ ==
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'''डोगरी लिपि''' ([[डोगरी भाषा|डोगरी]]:{{Lang|dgo|नमे डोगरा अख्खर}}, {{Lang|dgo|𑠝𑠢𑠳𑠷 𑠖𑠵𑠌𑠤𑠬 𑠀𑠊𑠹𑠋𑠤}}) एक लेखन प्रणाली है जिसका उपयोग मूल रूप से [[भारतीय उपमहाद्वीप]] के उत्तरी भाग में [[जम्मू और कश्मीर (केंद्र शासित प्रदेश)|जम्मू और कश्मीर]] में [[डोगरी भाषा]] लिखने के लिए किया जाता है।<ref name="L215234">{{Cite web|url=https://www.unicode.org/L2/L2015/15234r-dogra.pdf|title=L2/15-234R: Proposal to encode the Dogra script|last=Pandey|first=Anshuman|date=2015-11-04}}</ref>[[चित्र:Dogri Varnamala.png|अंगूठाकार|डोगरा लिपि में एक और वर्णमाला तालिका नोटो सैन्स डोगरी फाॅन्ट में]]
== सन्दर्भ ==
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{{Distinguish|टाकरी लिपि}}
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'''डोगरी लिपि''' ([[डोगरी भाषा|डोगरी]]:{{Lang|dgo|नमे डोगरा अख्खर}}, {{Lang|dgo|𑠝𑠢𑠳𑠷 𑠖𑠵𑠌𑠤𑠬 𑠀𑠊𑠹𑠋𑠤}}) एक लेखन प्रणाली है जिसका उपयोग मूल रूप से [[भारतीय उपमहाद्वीप]] के उत्तरी भाग में [[जम्मू और कश्मीर (केंद्र शासित प्रदेश)|जम्मू और कश्मीर]] में [[डोगरी भाषा]] लिखने के लिए किया जाता है।<ref name="L215234">{{Cite web|url=https://www.unicode.org/L2/L2015/15234r-dogra.pdf|title=L2/15-234R: Proposal to encode the Dogra script|last=Pandey|first=Anshuman|date=2015-11-04}}</ref>[[चित्र:Dogri Varnamala.png|अंगूठाकार|डोगरा लिपि में एक और वर्णमाला तालिका नोटो सैन्स डोगरी फाॅन्ट में]]
== नमून पाठ ==
=== डोगरी लिपि ===
𑠩𑠬𑠤𑠳 𑠂𑠷𑠝𑠩𑠬𑠝 𑠁𑠑𑠺𑠬𑠛 𑠑𑠢𑠳𑠷 𑠚𑠳 𑠝,
=== डोगरी ===
सारे इंसान आज़ाद जमें दे न, ते गरिमा ते अधिकारें च बराबर न। उनेंगी कोल समझ-बूझ ते ज़मीर ऐ, ते उनें गी आपस च भाईचारे दे भाअ दा बरताव करना चाहिदा।
=== अर्थ ===
सभी इंसान आज़ाद पैदा होते हैं और सम्मान और अधिकारों में बराबर होते हैं। उनमें समझ और विवेक होना चाहिए और उन्हें एक-दूसरे के साथ भाईचारे की भावना से पेश आना चाहिए।
== सन्दर्भ ==
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'''डोगरी लिपि''' ([[डोगरी भाषा|डोगरी]]:{{Lang|dgo|नमे डोगरा अख्खर}}, {{Lang|dgo|𑠝𑠢𑠳𑠷 𑠖𑠵𑠌𑠤𑠬 𑠀𑠊𑠹𑠋𑠤}}) एक लेखन प्रणाली है जिसका उपयोग मूल रूप से [[भारतीय उपमहाद्वीप]] के उत्तरी भाग में [[जम्मू और कश्मीर (केंद्र शासित प्रदेश)|जम्मू और कश्मीर]] में [[डोगरी भाषा]] लिखने के लिए किया जाता है।<ref name="L215234">{{Cite web|url=https://www.unicode.org/L2/L2015/15234r-dogra.pdf|title=L2/15-234R: Proposal to encode the Dogra script|last=Pandey|first=Anshuman|date=2015-11-04}}</ref>[[चित्र:Dogri Varnamala.png|अंगूठाकार|डोगरा लिपि में एक और वर्णमाला तालिका नोटो सैन्स डोगरी फाॅन्ट में]]
== नमून पाठ ==
=== डोगरी लिपि ===
𑠩𑠬𑠤𑠳 𑠂𑠷𑠝𑠩𑠬𑠝 𑠁𑠑𑠺𑠬𑠛 𑠑𑠢𑠳𑠷 𑠚𑠳 𑠝, 𑠙𑠳 𑠌𑠤𑠭𑠢𑠬 𑠙𑠳 𑠀𑠜𑠭
=== डोगरी ===
सारे इंसान आज़ाद जमें दे न, ते गरिमा ते अधिकारें च बराबर न। उनेंगी कोल समझ-बूझ ते ज़मीर ऐ, ते उनें गी आपस च भाईचारे दे भाअ दा बरताव करना चाहिदा।
=== अर्थ ===
सभी इंसान आज़ाद पैदा होते हैं और सम्मान और अधिकारों में बराबर होते हैं। उनमें समझ और विवेक होना चाहिए और उन्हें एक-दूसरे के साथ भाईचारे की भावना से पेश आना चाहिए।
== सन्दर्भ ==
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{{Distinguish|टाकरी लिपि}}
[[File:Dogra_alphabet.jpg|अंगूठाकार|डोगरा लिपि में वर्णमाला तालिका]]
'''डोगरी लिपि''' ([[डोगरी भाषा|डोगरी]]:{{Lang|dgo|नमे डोगरा अख्खर}}, {{Lang|dgo|𑠝𑠢𑠳𑠷 𑠖𑠵𑠌𑠤𑠬 𑠀𑠊𑠹𑠋𑠤}}) एक लेखन प्रणाली है जिसका उपयोग मूल रूप से [[भारतीय उपमहाद्वीप]] के उत्तरी भाग में [[जम्मू और कश्मीर (केंद्र शासित प्रदेश)|जम्मू और कश्मीर]] में [[डोगरी भाषा]] लिखने के लिए किया जाता है।<ref name="L215234">{{Cite web|url=https://www.unicode.org/L2/L2015/15234r-dogra.pdf|title=L2/15-234R: Proposal to encode the Dogra script|last=Pandey|first=Anshuman|date=2015-11-04}}</ref>[[चित्र:Dogri Varnamala.png|अंगूठाकार|डोगरा लिपि में एक और वर्णमाला तालिका नोटो सैन्स डोगरी फाॅन्ट में]]
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== नमून पाठ ==
=== डोगरी लिपि ===
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=== डोगरी ===
सारे इंसान आज़ाद जमें दे न, ते गरिमा ते अधिकारें च बराबर न। उनेंगी कोल समझ-बूझ ते ज़मीर ऐ, ते उनें गी आपस च भाईचारे दे भाअ दा बरताव करना चाहिदा।
=== अर्थ ===
सभी इंसान आज़ाद पैदा होते हैं और सम्मान और अधिकारों में बराबर होते हैं। उनमें समझ और विवेक होना चाहिए और उन्हें एक-दूसरे के साथ भाईचारे की भावना से पेश आना चाहिए।
== सन्दर्भ ==
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{{Distinguish|टाकरी लिपि}}
[[File:Dogra_alphabet.jpg|अंगूठाकार|डोगरा लिपि में वर्णमाला तालिका]]
'''डोगरी लिपि''' ([[डोगरी भाषा|डोगरी]]:{{Lang|dgo|नमे डोगरा अख्खर}}, {{Lang|dgo|𑠝𑠢𑠳𑠷 𑠖𑠵𑠌𑠤𑠬 𑠀𑠊𑠹𑠋𑠤}}) एक लेखन प्रणाली है जिसका उपयोग मूल रूप से [[भारतीय उपमहाद्वीप]] के उत्तरी भाग में [[जम्मू और कश्मीर (केंद्र शासित प्रदेश)|जम्मू और कश्मीर]] में [[डोगरी भाषा]] लिखने के लिए किया जाता है।<ref name="L215234">{{Cite web|url=https://www.unicode.org/L2/L2015/15234r-dogra.pdf|title=L2/15-234R: Proposal to encode the Dogra script|last=Pandey|first=Anshuman|date=2015-11-04}}</ref>[[चित्र:Dogri Varnamala.png|अंगूठाकार|डोगरा लिपि में एक और वर्णमाला तालिका नोटो सैन्स डोगरी फाॅन्ट में]]
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== नमून पाठ ==
=== डोगरी लिपि ===
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=== डोगरी ===
सारे इंसान आज़ाद जमें दे न, ते गरिमा ते अधिकारें च बराबर न। उनेंगी कोल समझ-बूझ ते ज़मीर ऐ, ते उनें गी आपस च भाईचारे दे भाअ दा बरताव करना चाहिदा।
=== अर्थ ===
सभी इंसान आज़ाद पैदा होते हैं और सम्मान और अधिकारों में बराबर होते हैं। उनमें समझ और विवेक होना चाहिए और उन्हें एक-दूसरे के साथ भाईचारे की भावना से पेश आना चाहिए।
== सन्दर्भ ==
{{ब्राह्मी}}
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विकिपीडिया:पृष्ठ हटाने हेतु चर्चा/लेख/गोमतीवाल ब्राहमण
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चाहर धर्मेंद्र
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[[:गोमतीवाल ब्राहमण]] को हटाने हेतु चर्चा पृष्ठ बनाया जा रहा
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text/x-wiki
=== [[:गोमतीवाल ब्राहमण]] ===
{{हहेच श्रेणीकरण|वर्तमान=हाँ|प्रकार=लेख|तिथि=मई 2026}}
:{{la|1=गोमतीवाल ब्राहमण}}
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वार्ता:एकेम फरहादुल कबीर
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Rahji34
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