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श्रीकान्त तलगेरी
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अनुनाद सिंह
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"'''[[:w:श्रीकान्त तलगेरी|श्रीकान्त तलगेरी]]''' भारत के एक प्रमुख शोधकर्ता हैं, जो [[ऋग्वेद]] के ऐतिहासिक विश्लेषण और [[देशी आर्य सिद्धान्त]] (या "आउट ऑफ इंडिया थ्योरी" (OIT)) के प्रब..." के साथ नया पृष्ठ बनाया
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'''[[:w:श्रीकान्त तलगेरी|श्रीकान्त तलगेरी]]''' भारत के एक प्रमुख शोधकर्ता हैं, जो [[ऋग्वेद]] के ऐतिहासिक विश्लेषण और [[देशी आर्य सिद्धान्त]] (या "आउट ऑफ इंडिया थ्योरी" (OIT)) के प्रबल समर्थक के रूप में जाने जाते हैं। उन्होंने [[वेद|वेदों]] के आंतरिक साक्ष्यों के आधार पर आर्य-आक्रमण सिद्धान्त (AIT) का खण्डन किया है और आर्यों को भारत का मूल निवासी बताया है।
== उद्धरण ==
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'''[[:w:श्रीकान्त तलगेरी|श्रीकान्त तलगेरी]]''' भारत के एक प्रमुख शोधकर्ता हैं, जो [[ऋग्वेद]] के ऐतिहासिक विश्लेषण और [[देशी आर्य सिद्धान्त]] (या "आउट ऑफ इंडिया थ्योरी" (OIT)) के प्रबल समर्थक के रूप में जाने जाते हैं। उन्होंने [[वेद|वेदों]] के आंतरिक साक्ष्यों के आधार पर आर्य-आक्रमण सिद्धान्त (AIT) का खण्डन किया है और आर्यों को भारत का मूल निवासी बताया है।
== उद्धरण ==
== श्रीकान्त तलगेरी के प्रमुख विचार ==
; ऋग्वेद और भारतीयता पर :
* ऋग्वेद केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं है, बल्कि यह विश्व का सबसे प्राचीन ऐतिहासिक दस्तावेज़ है, जो स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि भारत ही आर्य सभ्यता का मूल केंद्र था।<ref>The Rigveda and the Avesta : The Final Evidence</ref>
* सत्य को प्रमाण की आवश्यकता होती है, और ऋग्वेद के भौगोलिक साक्ष्य भारतीय मूल सिद्धांत के सबसे बड़े प्रमाण हैं।<ref>The Rigveda : A Historical Analysis</ref>
; इतिहास लेखन की सत्यता पर:
* इतिहास का पुनर्लेखन किसी विचारधारा को थोपने के लिए नहीं, बल्कि उन साक्ष्यों को उजागर करने के लिए होना चाहिए जिन्हें औपनिवेशिक और राजनीतिक कारणों से दबा दिया गया था।
* भारतीय इतिहास को समझने के लिए हमें अपनी दृष्टि को औपनिवेशिक चश्मे से मुक्त करना होगा।
* [[भाषाविज्ञान]] और [[इतिहास]] जब एक साथ मिलते हैं, तो वे अतीत की उन परतों को खोलते हैं जिन्हें केवल [[कल्पना]] के आधार पर नहीं समझा जा सकता।
; 'आर्यों के भारत से बाहर प्रवास पर :
* भाषाई और साहित्यिक साक्ष्य इस बात की पुष्टि करते हैं कि हिंद-यूरोपीय भाषाओं का प्रसार भारत से बाहर की ओर हुआ था, न कि भारत में किसी बाहरी आक्रमण या प्रवास के माध्यम से।
; सांस्कृति की निरन्तरता पर :
* भारतीय सभ्यता की नींव ऋग्वैदिक काल में इतनी सुदृढ़ रखी गई थी कि हजारों वर्षों के बाहरी प्रभावों के बाद भी इसकी मूल आत्मा और पहचान अक्षुण्ण बनी हुई है।
; तथ्यों की महत्ता पर:
* विद्वत्ता का अर्थ केवल पुरानी धारणाओं को दोहराना नहीं है, बल्कि उपलब्ध आंकड़ों और साक्ष्यों का निष्पक्ष विश्लेषण करना है, चाहे वे स्थापित सिद्धांतों के कितने भी विपरीत क्यों न हों।
==सन्दर्भ==
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अनुनाद सिंह
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/* श्रीकान्त तलगेरी के प्रमुख विचार */
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'''[[:w:श्रीकान्त तलगेरी|श्रीकान्त तलगेरी]]''' भारत के एक प्रमुख शोधकर्ता हैं, जो [[ऋग्वेद]] के ऐतिहासिक विश्लेषण और [[देशी आर्य सिद्धान्त]] (या "आउट ऑफ इंडिया थ्योरी" (OIT)) के प्रबल समर्थक के रूप में जाने जाते हैं। उन्होंने [[वेद|वेदों]] के आंतरिक साक्ष्यों के आधार पर आर्य-आक्रमण सिद्धान्त (AIT) का खण्डन किया है और आर्यों को भारत का मूल निवासी बताया है।
== उद्धरण ==
== श्रीकान्त तलगेरी के प्रमुख विचार ==
; ऋग्वेद और भारतीयता पर :
* ऋग्वेद केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं है, बल्कि यह विश्व का सबसे प्राचीन ऐतिहासिक दस्तावेज़ है, जो स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि भारत ही आर्य सभ्यता का मूल केंद्र था।<ref>The Rigveda and the Avesta : The Final Evidence</ref>
* सत्य को प्रमाण की आवश्यकता होती है, और ऋग्वेद के भौगोलिक साक्ष्य भारतीय मूल सिद्धांत के सबसे बड़े प्रमाण हैं।<ref>The Rigveda : A Historical Analysis</ref>
; इतिहास लेखन की सत्यता पर:
* [[इतिहास]] का पुनर्लेखन किसी विचारधारा को थोपने के लिए नहीं, बल्कि उन साक्ष्यों को उजागर करने के लिए होना चाहिए जिन्हें औपनिवेशिक और राजनीतिक कारणों से दबा दिया गया था।
* भारतीय इतिहास को समझने के लिए हमें अपनी दृष्टि को औपनिवेशिक चश्मे से मुक्त करना होगा।
* [[भाषाविज्ञान]] और [[इतिहास]] जब एक साथ मिलते हैं, तो वे अतीत की उन परतों को खोलते हैं जिन्हें केवल [[कल्पना]] के आधार पर नहीं समझा जा सकता।
; 'आर्यों के भारत से बाहर प्रवास पर :
* भाषाई और साहित्यिक साक्ष्य इस बात की पुष्टि करते हैं कि हिंद-यूरोपीय भाषाओं का प्रसार भारत से बाहर की ओर हुआ था, न कि भारत में किसी बाहरी आक्रमण या प्रवास के माध्यम से।
; सांस्कृति की निरन्तरता पर :
* [[भारतीय सभ्यता]] की नींव ऋग्वैदिक काल में इतनी सुदृढ़ रखी गई थी कि हजारों वर्षों के बाहरी प्रभावों के बाद भी इसकी मूल आत्मा और पहचान अक्षुण्ण बनी हुई है।
; तथ्यों की महत्ता पर:
* विद्वत्ता का अर्थ केवल पुरानी धारणाओं को दोहराना नहीं है, बल्कि उपलब्ध आंकड़ों और साक्ष्यों का निष्पक्ष विश्लेषण करना है, चाहे वे स्थापित सिद्धांतों के कितने भी विपरीत क्यों न हों।
==सन्दर्भ==
{{टिप्पणीसूची}}
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भाषाविज्ञान
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अनुनाद सिंह
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" == उद्धरण == * भाषाविज्ञान और इतिहास जब एक साथ मिलते हैं, तो वे अतीत की उन परतों को खोलते हैं जिन्हें केवल कल्पना के आधार पर नहीं समझा जा सकता। -- [[श्रीकान्त तलगेरी]]" के साथ नया पृष्ठ बनाया
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== उद्धरण ==
* भाषाविज्ञान और इतिहास जब एक साथ मिलते हैं, तो वे अतीत की उन परतों को खोलते हैं जिन्हें केवल कल्पना के आधार पर नहीं समझा जा सकता। -- [[श्रीकान्त तलगेरी]]
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अनुनाद सिंह
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== उद्धरण ==
* भाषाविज्ञान और इतिहास जब एक साथ मिलते हैं, तो वे अतीत की उन परतों को खोलते हैं जिन्हें केवल कल्पना के आधार पर नहीं समझा जा सकता। -- [[श्रीकान्त तलगेरी]]
* [[भाषा]] केवल विचारों को संप्रेषित करने का साधन नहीं है, बल्कि यह सोचने और मानसिक संगठन का एक उपकरण है। -- [[नोआम चोमस्की]]
* भाषा एक ऐसी प्रणाली है जिसके सभी हिस्से एक-दूसरे से जुड़े होते हैं और उनकी भूमिका केवल उनके आपसी संबंधों से निर्धारित होती है। -- [[फर्डिनेंड डी सॉसर]]
* भाषा वह माध्यम है जिससे हम वास्तविकता का निर्माण करते हैं। बिना भाषा के, हम एक अस्पष्ट और भ्रमित दुनिया में होते। -- [[एडवर्ड सपीर]]
* भाषा एक उत्पाद (Product) नहीं, बल्कि एक गतिविधि (Activity) है। -- [[विल्हेम वॉन हम्बोल्ट]]
* भाषा वह चाबी है जो किसी [[संस्कृति]] के हृदय के द्वार खोलती है। भाषा विज्ञान उस चाबी की बनावट को समझने का विज्ञान है।
* भाषा विज्ञान का अध्ययन वास्तव में मानव मस्तिष्क की आंतरिक कार्यप्रणाली का अध्ययन है, क्योंकि भाषा ही हमारी बुद्धि का सबसे प्रत्यक्ष प्रमाण है।
* शब्दों की यात्रा केवल अक्षरों का समूह नहीं है, बल्कि यह सभ्यताओं के प्रवास, संघर्ष और विकास का जीवित इतिहास है।
* [[व्याकरण]] भाषा का अनुशासन है, लेकिन भाषा विज्ञान उसकी आत्मा की खोज है।
* [[लिपि]] बदल सकती है, लेकिन [[ध्वनि]] का विज्ञान सार्वभौमिक रहता है।
* भाषा विज्ञान हमें सिखाता है कि कोई भी भाषा 'शुद्ध' या 'अशुद्ध' नहीं होती, वह केवल 'परिवर्तनशील' होती है।
==इन्हें भी देखें==
* [[भाषा]]
* [[शब्द]]
* [[व्याकरण]]
* [[प्रमाण]]
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अनुनाद सिंह
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text/x-wiki
'''भाषा विज्ञान''' (Linguistics) [[मानव]] [[भाषा]] की संरचना, विकास और उसके मनोवैज्ञानिक पहलुओं का वैज्ञानिक अध्ययन है।
== उद्धरण ==
* भाषाविज्ञान और इतिहास जब एक साथ मिलते हैं, तो वे अतीत की उन परतों को खोलते हैं जिन्हें केवल कल्पना के आधार पर नहीं समझा जा सकता। -- [[श्रीकान्त तलगेरी]]
* [[भाषा]] केवल विचारों को संप्रेषित करने का साधन नहीं है, बल्कि यह सोचने और मानसिक संगठन का एक उपकरण है। -- [[नोआम चोमस्की]]
* भाषा एक ऐसी प्रणाली है जिसके सभी हिस्से एक-दूसरे से जुड़े होते हैं और उनकी भूमिका केवल उनके आपसी संबंधों से निर्धारित होती है। -- [[फर्डिनेंड डी सॉसर]]
* भाषा वह माध्यम है जिससे हम वास्तविकता का निर्माण करते हैं। बिना भाषा के, हम एक अस्पष्ट और भ्रमित दुनिया में होते। -- [[एडवर्ड सपीर]]
* भाषा एक उत्पाद (Product) नहीं, बल्कि एक गतिविधि (Activity) है। -- [[विल्हेम वॉन हम्बोल्ट]]
* भाषा वह चाबी है जो किसी [[संस्कृति]] के हृदय के द्वार खोलती है। भाषा विज्ञान उस चाबी की बनावट को समझने का विज्ञान है।
* भाषा विज्ञान का अध्ययन वास्तव में मानव मस्तिष्क की आंतरिक कार्यप्रणाली का अध्ययन है, क्योंकि भाषा ही हमारी बुद्धि का सबसे प्रत्यक्ष प्रमाण है।
* शब्दों की यात्रा केवल अक्षरों का समूह नहीं है, बल्कि यह सभ्यताओं के प्रवास, संघर्ष और विकास का जीवित इतिहास है।
* [[व्याकरण]] भाषा का अनुशासन है, लेकिन भाषा विज्ञान उसकी आत्मा की खोज है।
* [[लिपि]] बदल सकती है, लेकिन [[ध्वनि]] का विज्ञान सार्वभौमिक रहता है।
* भाषा विज्ञान हमें सिखाता है कि कोई भी भाषा 'शुद्ध' या 'अशुद्ध' नहीं होती, वह केवल 'परिवर्तनशील' होती है।
==इन्हें भी देखें==
* [[भाषा]]
* [[शब्द]]
* [[व्याकरण]]
* [[प्रमाण]]
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