विकिसूक्ति hiwikiquote https://hi.wikiquote.org/wiki/%E0%A4%AE%E0%A5%81%E0%A4%96%E0%A4%AA%E0%A5%83%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%A0 MediaWiki 1.46.0-wmf.23 first-letter मीडिया विशेष वार्ता सदस्य सदस्य वार्ता विकिसूक्ति विकिसूक्ति वार्ता चित्र चित्र वार्ता मीडियाविकि मीडियाविकि वार्ता साँचा साँचा वार्ता सहायता सहायता वार्ता श्रेणी श्रेणी वार्ता TimedText TimedText talk मॉड्यूल मॉड्यूल वार्ता Event Event talk श्रीकान्त तलगेरी 0 9221 32750 2026-04-09T17:29:18Z अनुनाद सिंह 658 "'''[[:w:श्रीकान्त तलगेरी|श्रीकान्त तलगेरी]]''' भारत के एक प्रमुख शोधकर्ता हैं, जो [[ऋग्वेद]] के ऐतिहासिक विश्लेषण और [[देशी आर्य सिद्धान्त]] (या "आउट ऑफ इंडिया थ्योरी" (OIT)) के प्रब..." के साथ नया पृष्ठ बनाया 32750 wikitext text/x-wiki '''[[:w:श्रीकान्त तलगेरी|श्रीकान्त तलगेरी]]''' भारत के एक प्रमुख शोधकर्ता हैं, जो [[ऋग्वेद]] के ऐतिहासिक विश्लेषण और [[देशी आर्य सिद्धान्त]] (या "आउट ऑफ इंडिया थ्योरी" (OIT)) के प्रबल समर्थक के रूप में जाने जाते हैं। उन्होंने [[वेद|वेदों]] के आंतरिक साक्ष्यों के आधार पर आर्य-आक्रमण सिद्धान्त (AIT) का खण्डन किया है और आर्यों को भारत का मूल निवासी बताया है। == उद्धरण == 4soaftg2zbfayhsrsyjgkadag80t86n 32751 32750 2026-04-09T17:41:07Z अनुनाद सिंह 658 /* उद्धरण */ 32751 wikitext text/x-wiki '''[[:w:श्रीकान्त तलगेरी|श्रीकान्त तलगेरी]]''' भारत के एक प्रमुख शोधकर्ता हैं, जो [[ऋग्वेद]] के ऐतिहासिक विश्लेषण और [[देशी आर्य सिद्धान्त]] (या "आउट ऑफ इंडिया थ्योरी" (OIT)) के प्रबल समर्थक के रूप में जाने जाते हैं। उन्होंने [[वेद|वेदों]] के आंतरिक साक्ष्यों के आधार पर आर्य-आक्रमण सिद्धान्त (AIT) का खण्डन किया है और आर्यों को भारत का मूल निवासी बताया है। == उद्धरण == == श्रीकान्त तलगेरी के प्रमुख विचार == ; ऋग्वेद और भारतीयता पर : * ऋग्वेद केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं है, बल्कि यह विश्व का सबसे प्राचीन ऐतिहासिक दस्तावेज़ है, जो स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि भारत ही आर्य सभ्यता का मूल केंद्र था।<ref>The Rigveda and the Avesta : The Final Evidence</ref> * सत्य को प्रमाण की आवश्यकता होती है, और ऋग्वेद के भौगोलिक साक्ष्य भारतीय मूल सिद्धांत के सबसे बड़े प्रमाण हैं।<ref>The Rigveda : A Historical Analysis</ref> ; इतिहास लेखन की सत्यता पर: * इतिहास का पुनर्लेखन किसी विचारधारा को थोपने के लिए नहीं, बल्कि उन साक्ष्यों को उजागर करने के लिए होना चाहिए जिन्हें औपनिवेशिक और राजनीतिक कारणों से दबा दिया गया था। * भारतीय इतिहास को समझने के लिए हमें अपनी दृष्टि को औपनिवेशिक चश्मे से मुक्त करना होगा। * [[भाषाविज्ञान]] और [[इतिहास]] जब एक साथ मिलते हैं, तो वे अतीत की उन परतों को खोलते हैं जिन्हें केवल [[कल्पना]] के आधार पर नहीं समझा जा सकता। ; 'आर्यों के भारत से बाहर प्रवास पर : * भाषाई और साहित्यिक साक्ष्य इस बात की पुष्टि करते हैं कि हिंद-यूरोपीय भाषाओं का प्रसार भारत से बाहर की ओर हुआ था, न कि भारत में किसी बाहरी आक्रमण या प्रवास के माध्यम से। ; सांस्कृति की निरन्तरता पर : * भारतीय सभ्यता की नींव ऋग्वैदिक काल में इतनी सुदृढ़ रखी गई थी कि हजारों वर्षों के बाहरी प्रभावों के बाद भी इसकी मूल आत्मा और पहचान अक्षुण्ण बनी हुई है। ; तथ्यों की महत्ता पर: * विद्वत्ता का अर्थ केवल पुरानी धारणाओं को दोहराना नहीं है, बल्कि उपलब्ध आंकड़ों और साक्ष्यों का निष्पक्ष विश्लेषण करना है, चाहे वे स्थापित सिद्धांतों के कितने भी विपरीत क्यों न हों। ==सन्दर्भ== {{टिप्पणीसूची}} 9c0zslmp94vqioxg2opl1mn0ltqzuqo 32752 32751 2026-04-09T17:44:08Z अनुनाद सिंह 658 /* श्रीकान्त तलगेरी के प्रमुख विचार */ 32752 wikitext text/x-wiki '''[[:w:श्रीकान्त तलगेरी|श्रीकान्त तलगेरी]]''' भारत के एक प्रमुख शोधकर्ता हैं, जो [[ऋग्वेद]] के ऐतिहासिक विश्लेषण और [[देशी आर्य सिद्धान्त]] (या "आउट ऑफ इंडिया थ्योरी" (OIT)) के प्रबल समर्थक के रूप में जाने जाते हैं। उन्होंने [[वेद|वेदों]] के आंतरिक साक्ष्यों के आधार पर आर्य-आक्रमण सिद्धान्त (AIT) का खण्डन किया है और आर्यों को भारत का मूल निवासी बताया है। == उद्धरण == == श्रीकान्त तलगेरी के प्रमुख विचार == ; ऋग्वेद और भारतीयता पर : * ऋग्वेद केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं है, बल्कि यह विश्व का सबसे प्राचीन ऐतिहासिक दस्तावेज़ है, जो स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि भारत ही आर्य सभ्यता का मूल केंद्र था।<ref>The Rigveda and the Avesta : The Final Evidence</ref> * सत्य को प्रमाण की आवश्यकता होती है, और ऋग्वेद के भौगोलिक साक्ष्य भारतीय मूल सिद्धांत के सबसे बड़े प्रमाण हैं।<ref>The Rigveda : A Historical Analysis</ref> ; इतिहास लेखन की सत्यता पर: * [[इतिहास]] का पुनर्लेखन किसी विचारधारा को थोपने के लिए नहीं, बल्कि उन साक्ष्यों को उजागर करने के लिए होना चाहिए जिन्हें औपनिवेशिक और राजनीतिक कारणों से दबा दिया गया था। * भारतीय इतिहास को समझने के लिए हमें अपनी दृष्टि को औपनिवेशिक चश्मे से मुक्त करना होगा। * [[भाषाविज्ञान]] और [[इतिहास]] जब एक साथ मिलते हैं, तो वे अतीत की उन परतों को खोलते हैं जिन्हें केवल [[कल्पना]] के आधार पर नहीं समझा जा सकता। ; 'आर्यों के भारत से बाहर प्रवास पर : * भाषाई और साहित्यिक साक्ष्य इस बात की पुष्टि करते हैं कि हिंद-यूरोपीय भाषाओं का प्रसार भारत से बाहर की ओर हुआ था, न कि भारत में किसी बाहरी आक्रमण या प्रवास के माध्यम से। ; सांस्कृति की निरन्तरता पर : * [[भारतीय सभ्यता]] की नींव ऋग्वैदिक काल में इतनी सुदृढ़ रखी गई थी कि हजारों वर्षों के बाहरी प्रभावों के बाद भी इसकी मूल आत्मा और पहचान अक्षुण्ण बनी हुई है। ; तथ्यों की महत्ता पर: * विद्वत्ता का अर्थ केवल पुरानी धारणाओं को दोहराना नहीं है, बल्कि उपलब्ध आंकड़ों और साक्ष्यों का निष्पक्ष विश्लेषण करना है, चाहे वे स्थापित सिद्धांतों के कितने भी विपरीत क्यों न हों। ==सन्दर्भ== {{टिप्पणीसूची}} 5rb6czgz9eui1cffwhceguszo6480a4 भाषाविज्ञान 0 9222 32753 2026-04-09T17:46:29Z अनुनाद सिंह 658 " == उद्धरण == * भाषाविज्ञान और इतिहास जब एक साथ मिलते हैं, तो वे अतीत की उन परतों को खोलते हैं जिन्हें केवल कल्पना के आधार पर नहीं समझा जा सकता। -- [[श्रीकान्त तलगेरी]]" के साथ नया पृष्ठ बनाया 32753 wikitext text/x-wiki == उद्धरण == * भाषाविज्ञान और इतिहास जब एक साथ मिलते हैं, तो वे अतीत की उन परतों को खोलते हैं जिन्हें केवल कल्पना के आधार पर नहीं समझा जा सकता। -- [[श्रीकान्त तलगेरी]] 9ejy8dxvr4tc0gjmnyt984djkpe664q 32754 32753 2026-04-09T17:53:15Z अनुनाद सिंह 658 32754 wikitext text/x-wiki == उद्धरण == * भाषाविज्ञान और इतिहास जब एक साथ मिलते हैं, तो वे अतीत की उन परतों को खोलते हैं जिन्हें केवल कल्पना के आधार पर नहीं समझा जा सकता। -- [[श्रीकान्त तलगेरी]] * [[भाषा]] केवल विचारों को संप्रेषित करने का साधन नहीं है, बल्कि यह सोचने और मानसिक संगठन का एक उपकरण है। -- [[नोआम चोमस्की]] * भाषा एक ऐसी प्रणाली है जिसके सभी हिस्से एक-दूसरे से जुड़े होते हैं और उनकी भूमिका केवल उनके आपसी संबंधों से निर्धारित होती है। -- [[फर्डिनेंड डी सॉसर]] * भाषा वह माध्यम है जिससे हम वास्तविकता का निर्माण करते हैं। बिना भाषा के, हम एक अस्पष्ट और भ्रमित दुनिया में होते। -- [[एडवर्ड सपीर]] * भाषा एक उत्पाद (Product) नहीं, बल्कि एक गतिविधि (Activity) है। -- [[विल्हेम वॉन हम्बोल्ट]] * भाषा वह चाबी है जो किसी [[संस्कृति]] के हृदय के द्वार खोलती है। भाषा विज्ञान उस चाबी की बनावट को समझने का विज्ञान है। * भाषा विज्ञान का अध्ययन वास्तव में मानव मस्तिष्क की आंतरिक कार्यप्रणाली का अध्ययन है, क्योंकि भाषा ही हमारी बुद्धि का सबसे प्रत्यक्ष प्रमाण है। * शब्दों की यात्रा केवल अक्षरों का समूह नहीं है, बल्कि यह सभ्यताओं के प्रवास, संघर्ष और विकास का जीवित इतिहास है। * [[व्याकरण]] भाषा का अनुशासन है, लेकिन भाषा विज्ञान उसकी आत्मा की खोज है। * [[लिपि]] बदल सकती है, लेकिन [[ध्वनि]] का विज्ञान सार्वभौमिक रहता है। * भाषा विज्ञान हमें सिखाता है कि कोई भी भाषा 'शुद्ध' या 'अशुद्ध' नहीं होती, वह केवल 'परिवर्तनशील' होती है। ==इन्हें भी देखें== * [[भाषा]] * [[शब्द]] * [[व्याकरण]] * [[प्रमाण]] gq3qctz5cfndvthiwztmb0hmjxzdb5c 32755 32754 2026-04-09T17:54:31Z अनुनाद सिंह 658 32755 wikitext text/x-wiki '''भाषा विज्ञान''' (Linguistics) [[मानव]] [[भाषा]] की संरचना, विकास और उसके मनोवैज्ञानिक पहलुओं का वैज्ञानिक अध्ययन है। == उद्धरण == * भाषाविज्ञान और इतिहास जब एक साथ मिलते हैं, तो वे अतीत की उन परतों को खोलते हैं जिन्हें केवल कल्पना के आधार पर नहीं समझा जा सकता। -- [[श्रीकान्त तलगेरी]] * [[भाषा]] केवल विचारों को संप्रेषित करने का साधन नहीं है, बल्कि यह सोचने और मानसिक संगठन का एक उपकरण है। -- [[नोआम चोमस्की]] * भाषा एक ऐसी प्रणाली है जिसके सभी हिस्से एक-दूसरे से जुड़े होते हैं और उनकी भूमिका केवल उनके आपसी संबंधों से निर्धारित होती है। -- [[फर्डिनेंड डी सॉसर]] * भाषा वह माध्यम है जिससे हम वास्तविकता का निर्माण करते हैं। बिना भाषा के, हम एक अस्पष्ट और भ्रमित दुनिया में होते। -- [[एडवर्ड सपीर]] * भाषा एक उत्पाद (Product) नहीं, बल्कि एक गतिविधि (Activity) है। -- [[विल्हेम वॉन हम्बोल्ट]] * भाषा वह चाबी है जो किसी [[संस्कृति]] के हृदय के द्वार खोलती है। भाषा विज्ञान उस चाबी की बनावट को समझने का विज्ञान है। * भाषा विज्ञान का अध्ययन वास्तव में मानव मस्तिष्क की आंतरिक कार्यप्रणाली का अध्ययन है, क्योंकि भाषा ही हमारी बुद्धि का सबसे प्रत्यक्ष प्रमाण है। * शब्दों की यात्रा केवल अक्षरों का समूह नहीं है, बल्कि यह सभ्यताओं के प्रवास, संघर्ष और विकास का जीवित इतिहास है। * [[व्याकरण]] भाषा का अनुशासन है, लेकिन भाषा विज्ञान उसकी आत्मा की खोज है। * [[लिपि]] बदल सकती है, लेकिन [[ध्वनि]] का विज्ञान सार्वभौमिक रहता है। * भाषा विज्ञान हमें सिखाता है कि कोई भी भाषा 'शुद्ध' या 'अशुद्ध' नहीं होती, वह केवल 'परिवर्तनशील' होती है। ==इन्हें भी देखें== * [[भाषा]] * [[शब्द]] * [[व्याकरण]] * [[प्रमाण]] m8y6thhy03vatouw3xljt4otsta1h1q