विकिस्रोत hiwikisource https://hi.wikisource.org/wiki/%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A4%BF%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%A4:%E0%A4%AE%E0%A5%81%E0%A4%96%E0%A4%AA%E0%A5%83%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%A0 MediaWiki 1.46.0-wmf.22 first-letter मीडिया विशेष वार्ता सदस्य सदस्य वार्ता विकिस्रोत विकिस्रोत वार्ता चित्र चित्र वार्ता मीडियाविकि मीडियाविकि वार्ता साँचा साँचा वार्ता सहायता सहायता वार्ता श्रेणी श्रेणी वार्ता लेखक लेखक वार्ता अनुवाद अनुवाद वार्ता पृष्ठ पृष्ठ वार्ता विषयसूची विषयसूची वार्ता TimedText TimedText talk मॉड्यूल मॉड्यूल वार्ता Event Event talk पृष्ठ:काव्य-निर्णय.djvu/६४९ 250 68098 662632 589034 2026-04-02T16:54:50Z ममता साव9 2453 /* शोधित */ 662632 proofread-page text/x-wiki <noinclude><pagequality level="3" user="ममता साव9" />{{rh|६१४|काव्यनिर्णय|}}</noinclude>&nbsp; {{c|अस्य उदाहरण}} {| class= "wikitable center" | मु{{gap}} वाँ{{gap}} नी || नि{{gap}} वाँ {{gap}}नी || स्रि {{gap}}डाँ{{gap}} जी || भ{{gap}} वाँ{{gap}} नी। |- |द{{gap}} या{{gap}} लीं || क्रि{{gap}} पा {{gap}}ली || सु {{gap}}चा{{gap}} ली || वि{{gap}} सा{{gap}} ली॥ |- |वि{{gap}} रा{{gap}} जै || सु{{gap}} रा {{gap}}जै || ख {{gap}}ला{{gap}} जै || सु{{gap}} सा{{gap}} जै। |- |सु{{gap}} चं{{gap}} डी || प्र{{gap}} चं {{gap}}डी || अ {{gap}}खं{{gap}} डी || अ{{gap}} डं{{gap}} डी॥ |} &nbsp; {{c|अथ सरबतोमुख चित्रालंकार जथा—}} {{block center|<poem>'''मारा रामु; मुरा रामा, रास जाँनि निजाँ खरा। '''राजा रबी, बीर जारा, मुनि बीसु सुबी निम्॥</poem>}} {{c|अस्य उदाहरन}} {| class= "wikitable center" |१मा||रा|| रा||मु|| मु||रा||रा|| मा |- |२रा||स||जाँ||नि||नि||जाँ||स|| रा |- |३रा||जा|| र||बी|| बी||र||जा|| रा |- |४मु ||नि|| बी|| सु ||सु|| बी|| नि|| मु |- |मु|| नि|| बी|| सु|| सु ||बी|| नि ||मु४ |- |रा||जा|| र||बी|| बी||र||जा|| रा३ |- |रा||स||जाँ||नि||नि||जाँ||स|| रा२ |- |मा||रा|| रा||मु|| मु||रा||रा|| मा१ |}<noinclude></noinclude> rq4bmujhr1n3a642n37mc7jxafi4to6 662633 662632 2026-04-02T17:11:08Z ममता साव9 2453 662633 proofread-page text/x-wiki <noinclude><pagequality level="3" user="ममता साव9" />{{rh|६१४|काव्यनिर्णय|}}</noinclude>&nbsp; {{c|अस्य उदाहरण}} {| class= "wikitable center" | मु वाँ नी || नि वाँ नी || स्रि डाँ जी || भ वाँ नी। |- |द या लीं || क्रि पा ली || सु चा ली || वि सा ली॥ |- |वि रा जै || सु रा जै || ख ला जै || सु सा जै। |- |सु चं डी || प्र चं डी || अ खं डी || अ डं डी॥ |} &nbsp; {{c|अथ सरबतोमुख चित्रालंकार जथा—}} {{block center|<poem>'''मारा रामु; मुरा रामा, रास जाँनि निजाँ खरा। '''राजा रबी, बीर जारा, मुनि बीसु सुबी निम्॥</poem>}} {{c|अस्य उदाहरन}} {| class= "wikitable center" |१मा||रा|| रा||मु|| मु||रा||रा|| मा |- |२रा||स||जाँ||नि||नि||जाँ||स|| रा |- |३रा||जा|| र||बी|| बी||र||जा|| रा |- |४मु ||नि|| बी|| सु ||सु|| बी|| नि|| मु |- |मु|| नि|| बी|| सु|| सु ||बी|| नि ||मु४ |- |रा||जा|| र||बी|| बी||र||जा|| रा३ |- |रा||स||जाँ||नि||नि||जाँ||स|| रा२ |- |मा||रा|| रा||मु|| मु||रा||रा|| मा१ |}<noinclude></noinclude> 9i8ywhgjc5zyhqrbyhcu6x6gs3ie7kf 662635 662633 2026-04-02T18:01:24Z ममता साव9 2453 662635 proofread-page text/x-wiki <noinclude><pagequality level="3" user="ममता साव9" />{{rh|६१४|काव्य-निर्णय|}}</noinclude>&nbsp; {{c|अस्य उदाहरण}} {| class= "wikitable center" | मु वाँ नी || नि वाँ नी || स्रि डाँ जी || भ वाँ नी। |- |द या लीं || क्रि पा ली || सु चा ली || वि सा ली॥ |- |वि रा जै || सु रा जै || ख ला जै || सु सा जै। |- |सु चं डी || प्र चं डी || अ खं डी || अ डं डी॥ |} &nbsp; {{c|अथ सरबतोमुख चित्रालंकार जथा—}} {{block center|<poem>'''मारा रामु; मुरा रामा, रास जाँनि निजाँ खरा। '''राजा रबी, बीर जारा, मुनि बीसु सुबी निम्॥</poem>}} {{c|अस्य उदाहरन}} {| class= "wikitable center" |<sup>१</sup>मा||रा|| रा||मु|| मु||रा||रा|| मा |- |<sup>२</sup>रा||स||जाँ||नि||नि||जाँ||स|| रा |- |<sup>३</sup>रा||जा|| र||बी|| बी||र||जा|| रा |- |<sup>४</sup>मु ||नि|| बी|| सु ||सु|| बी|| नि|| मु |- |मु|| नि|| बी|| सु|| सु ||बी|| नि ||मु<sub>४</sub> |- |रा||जा|| र||बी|| बी||र||जा|| रा<sub>३</sub> |- |रा||स||जाँ||नि||नि||जाँ||स|| रा<sub>२</sub> |- |मा||रा|| रा||मु|| मु||रा||रा|| मा<sub>१</sub> |}<noinclude></noinclude> lhdc9goga7no1cwgt95m04aqxdilwy4 662636 662635 2026-04-02T18:06:11Z ममता साव9 2453 662636 proofread-page text/x-wiki <noinclude><pagequality level="3" user="ममता साव9" />{{rh|६१४|काव्य-निर्णय|}}</noinclude>&nbsp; {{c|अस्य उदाहरण}} {| class= "wikitable center" | मु वाँ नी || नि दाँ नी || म्रि डाँ जी || भ वाँ नी। |- |द या लीं || क्रि पा ली || सु चा ली || वि सा ली॥ |- |वि रा जै || सु रा जै || ख ला जै || सु सा जै। |- |सु चं डी || प्र चं डी || अ खं डी || अ डं डी॥ |} &nbsp; {{c|अथ सरबतोमुख चित्रालंकार जथा—}} {{block center|<poem>'''मारा रामु; मुरा रामा, रास जाँनि निजाँ खरा। '''राजा रबी, बीर जारा, मुनि बीसु सुबी निम्॥</poem>}} {{c|अस्य उदाहरन}} {| class= "wikitable center" |<sup>१</sup>मा||रा|| रा||मु|| मु||रा||रा|| मा |- |<sup>२</sup>रा||स||जाँ||नि||नि||जाँ||स|| रा |- |<sup>३</sup>रा||जा|| र||बी|| बी||र||जा|| रा |- |<sup>४</sup>मु ||नि|| बी|| सु ||सु|| बी|| नि|| मु |- |मु|| नि|| बी|| सु|| सु ||बी|| नि ||मु<sub>४</sub> |- |रा||जा|| र||बी|| बी||र||जा|| रा<sub>३</sub> |- |रा||स||जाँ||नि||नि||जाँ||स|| रा<sub>२</sub> |- |मा||रा|| रा||मु|| मु||रा||रा|| मा<sub>१</sub> |}<noinclude></noinclude> ijg5xprxqkblf5azuky4z2cl5t6v5go पृष्ठ:काव्य-निर्णय.djvu/६४८ 250 68099 662634 589033 2026-04-02T17:50:13Z ममता साव9 2453 /* शोधित */ 662634 proofread-page text/x-wiki <noinclude><pagequality level="3" user="ममता साव9" />{{rh||काव्य-निर्णय|६१३}}</noinclude>और बा" द्वितीय चरण का दूसरा, चौथा, छठवाँ, आठवाँ, दसत्रों, बारहवाँ, चौदहवाँ और सोलहवाँ अक्षर हाँ, हाँ, रे, रें, रें, थ, तु, न" से संयोग करने पर "मंत्र-गति” रूप में यह अलंकार बनता है। संस्कृत में इसका दूसरा नाम—"गोमूत्रिका चित्रालंकार" है। &nbsp; {{c|अथ अस्व-गति चित्रालंकार जथा—}} {{block center|<poem>'''जहाँ-जहाँ प्यारे फिरे, घरे हाथ धँन-बाँन। '''तहाँ-तहाँ तारे बिरे, करें' साथ मँनु प्राँन॥</poem>}} {{c|अस्य उदाहरन}} {|class = "wikitable center" |ज<sup>१</sup>||हाँ<sup>१८</sup>||ज<sup>३ ०</sup>||हाँ<sup>५</sup>|| प्या<sup>५</sup>||लें<sup>२३</sup>||फि<sup>७</sup>||रें<sup>२४</sup> |- |घ<sup>९</sup>||रें<sup>२६</sup>||हा<sup>११</sup>||थ<sup>२८</sup>||धँ<sup>१३</sup>||नु<sup>३०</sup>||बाँ<sup>१५</sup>||न<sup>३२</sup> |- |त<sup>१७</sup>||हाँ<sup>२</sup>||तो<sup>१९</sup>||हाँ<sup>४</sup>||ता<sup>३१</sup>||रे<sup>६</sup>||घि<sup>२३</sup>||रेंं<sup>८</sup> |- |क<sup>२५</sup>||रें<sup>१०</sup>||सा<sup>२७</sup>||थ<sup>१३</sup>||में<sup>२९</sup>||नु<sup>१४</sup>||प्राँ<sup>३१</sup>||न<sup>१६</sup>॥ |} वि॰—'यह दासजी कृत "अश्व-गति"—शतरंज (खेल) के घोड़े की भाँति ढाई घर चलने की चाल से पढ़ा जाने वाला 'चित्रालंकार है, जो बत्तीस-कोष्ठकों (घरों) में विभक्त है। इसे चित्र में दिये गये अंकानुसार पढ़ने से ऊपर उद्धृत दोहा-छंद बनता है।" &nbsp; {{c|अथ सुमुख-बंध चित्रालंकार जथा—}} {{block center|<poem>'''सुबाँनी, निदाँनी, स्रिड़ाँनी भबाँनी। '''दयाली, क्रिपाली{{ref|१}}, सुचाली, बिसाली॥ '''बिराजै, सुराजै, खलाजै, सु साजै। '''सु चंडी, प्रचंडी, अखंडी, अदंडी॥</poem>}} वि॰—"दासजी कृत यह "सुमुख-बद्ध" चित्रालंकार नीचे लिखे अनुसार सोलह प्रकार से छंद (भुजंगप्रयात) बनाता है। चाहें जहाँ से चरण-गत चार-चार शब्दों को लेकर उलटते-पलटते क्रमशः (अनेक) छंद बन सकते हैं।" यह उदाहरण—कामधेनु, सर्वतोमुख या भद्र रूप से भी लिखा, या कहा जा सकता है।" <noinclude>पा॰—&nbsp;<small>{{Note|१}} (प्र॰) कपाली<sup>. . .</sup>।</small></noinclude><noinclude></noinclude> dpc0oltgwuc05ccxq47oepbvtevev7l 662637 662634 2026-04-02T18:11:09Z ममता साव9 2453 662637 proofread-page text/x-wiki <noinclude><pagequality level="3" user="ममता साव9" />{{rh||काव्य-निर्णय|६१३}}</noinclude>और बा" द्वितीय चरण का दूसरा, चौथा, छठवाँ, आठवाँ, दसत्रों, बारहवाँ, चौदहवाँ और सोलहवाँ अक्षर हाँ, हाँ, रे, रें, रें, थ, तु, न" से संयोग करने पर "मंत्र-गति” रूप में यह अलंकार बनता है। संस्कृत में इसका दूसरा नाम—"गोमूत्रिका चित्रालंकार" है। &nbsp; {{c|अथ अस्व-गति चित्रालंकार जथा—}} {{block center|<poem>'''जहाँ-जहाँ प्यारे फिरे, घरे हाथ धँन-बाँन। '''तहाँ-तहाँ तारे बिरे, करें' साथ मँनु प्राँन॥</poem>}} {{c|अस्य उदाहरन}} {|class = "wikitable center" |ज<sup>१</sup>||हाँ<sup>१८</sup>||ज<sup>३ ०</sup>||हाँ<sup>२</sup>|| प्या<sup>५</sup>||ले<sup>२३</sup>||फि<sup>७</sup>||रें<sup>२४</sup> |- |घ<sup>९</sup>||रें<sup>२६</sup>||हा<sup>११</sup>||थ<sup>२८</sup>||धँ<sup>१३</sup>||नु<sup>३०</sup>||बाँ<sup>१५</sup>||न<sup>३२</sup> |- |त<sup>१७</sup>||हाँ<sup>२</sup>||त<sup>१९</sup>||हाँ<sup>४</sup>||ता<sup>३१</sup>||रे<sup>६</sup>||घि<sup>२३</sup>||रेंं<sup>८</sup> |- |क<sup>२५</sup>||रें<sup>१०</sup>||सा<sup>२७</sup>||थ<sup>१३</sup>||में<sup>२९</sup>||नु<sup>१४</sup>||प्राँ<sup>३१</sup>||न<sup>१६</sup>॥ |} वि॰—'यह दासजी कृत "अश्व-गति"—शतरंज (खेल) के घोड़े की भाँति ढाई घर चलने की चाल से पढ़ा जाने वाला 'चित्रालंकार है, जो बत्तीस-कोष्ठकों (घरों) में विभक्त है। इसे चित्र में दिये गये अंकानुसार पढ़ने से ऊपर उद्धृत दोहा-छंद बनता है।" &nbsp; {{c|अथ सुमुख-बंध चित्रालंकार जथा—}} {{block center|<poem>'''सुबाँनी, निदाँनी, स्रिड़ाँनी भबाँनी। '''दयाली, क्रिपाली{{ref|१}}, सुचाली, बिसाली॥ '''बिराजै, सुराजै, खलाजै, सु साजै। '''सु चंडी, प्रचंडी, अखंडी, अदंडी॥</poem>}} वि॰—"दासजी कृत यह "सुमुख-बद्ध" चित्रालंकार नीचे लिखे अनुसार सोलह प्रकार से छंद (भुजंगप्रयात) बनाता है। चाहें जहाँ से चरण-गत चार-चार शब्दों को लेकर उलटते-पलटते क्रमशः (अनेक) छंद बन सकते हैं।" यह उदाहरण—कामधेनु, सर्वतोमुख या भद्र रूप से भी लिखा, या कहा जा सकता है।" <noinclude>पा॰—&nbsp;<small>{{Note|१}} (प्र॰) कपाली<sup>. . .</sup>।</small></noinclude><noinclude></noinclude> 2abx0u9e0ol3d7gdjqd3kvs9ny7xvlm