विक्षनरी
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==उच्चारण==
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=== प्रकाशितकोशों से अर्थ ===
==== शब्दसागर ====
क्ष संज्ञा पुं॰ [सं॰] <br><br>१. विध्वंस । विनाश । <br><br>२. हानि । अंतर्धान । लोप । <br><br>३. खेत । <br><br>४. कृषक । किसान । <br><br>५. विष्णु का चौथा अवतार । <br><br>६. विद्युत । बिजली । <br><br>७. एक राक्षस [को॰] ।
[[श्रेणी: हिन्दी-प्रकाशितकोशों से अर्थ-शब्दसागर]]
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==उच्चारण==
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=== प्रकाशितकोशों से अर्थ ===
==== शब्दसागर ====
क्ष संज्ञा पुं॰ [सं॰] <br><br>१. विध्वंस । विनाश । <br><br>२. हानि । अंतर्धान । लोप । <br><br>३. खेत । <br><br>४. कृषक । किसान । <br><br>५. विष्णु का चौथा अवतार । <br><br>६. विद्युत । बिजली । <br><br>७. एक राक्षस [को॰] ।
[[श्रेणी: हिन्दी-प्रकाशितकोशों से अर्थ-शब्दसागर]]
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परीक्षा
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क्शत्रिय
21151
/* */ सही उच्चारण
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text/x-wiki
{{-hi-}}
'''परीक्शा'''
# ज्ञान, योग्यता, या क्षमता को परखने के लिए आयोजित किया जाने वाला मूल्यांकन।
# किसी वस्तु, व्यक्ति या प्रक्रिया का परीक्षण।
=== क्रिया ===
हमें क्या पता है, कितना कुछ सीखा इसे ज्ञात करने के लिए परीक्षा होती है।
=== उच्चारण ===
IPA: /pə.ɾiː.kʂɑː/
=== प्रकाशितकोशों से अर्थ ===
==== शब्दसागर ====
परीक्षा संज्ञा स्त्री॰ [सं॰] <br><br>१. किसी के गुण दोष आदि जानने के लिये उसे अच्छी तरह से देखने भालने का कार्य । निरीक्षा । समीक्षा । समालोचना । <br><br>२. वह कार्य जिससे किसी की योग्यता, सामर्थ्य आदि जाने जायँ । इम्तहान । क्रि॰ प्र॰—करना ।—देना ।—लेना । <br><br>३. वह कार्य जो किसी वस्तु के संबंध में कोई विशेष निश्चित करने के लिये किया जाय । आजमाइश । अनुभावार्थ प्रयोग । <br><br>४. मुआयना । निरीक्षण । जाँच पड़ताल । <br><br>५. किसी वस्तु के जो लक्षण माने या जो गुण कहे गए हों उनके ठीक होने न होने का प्रमाण द्वारा निश्चय करने का कार्य । <br><br>६. वह विधान जिससे प्राचीन न्यायालय किसी विशेष अभियुक्त के अपराधी या निरपराध अथवा विशेष साक्षी के सच्चे या झूठे होने का निश्चय करते थे । विशेष—अभियुक्त की परीक्षा को दिव्य और साक्षी की परीक्षा को लौकिक परीक्षा कहते थे । दिव्य परीक्षाएँ कुल नौ प्रकार की होती थीं । दे॰ 'दिव्य' । इनमें से अभियुक्त को उसकी अवस्था, ऋतु आदि के अनुसार कोई एक देनी होती थी । लौकिक परीक्षा में गवाह से कई प्रकार के प्रश्न किए जाते थे ।
=== उदाहरण वाक्य ===
* मेरी गणित की परीक्षा कल है।
* किसी भी योजना को लागू करने से पहले उसकी परीक्षा की जाती है।
[[श्रेणी: हिन्दी-प्रकाशितकोशों से अर्थ-शब्दसागर]]
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487217
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2026-05-04T02:05:27Z
क्शत्रिय
21151
सही उच्चारण
487217
wikitext
text/x-wiki
{{-hi-}}
'''परीक्षा'''
# ज्ञान, योग्यता, या क्षमता को परखने के लिए आयोजित किया जाने वाला मूल्यांकन।
# किसी वस्तु, व्यक्ति या प्रक्रिया का परीक्षण।
=== क्रिया ===
हमें क्या पता है, कितना कुछ सीखा इसे ज्ञात करने के लिए परीक्षा होती है।
=== उच्चारण ===
परीक्शा
=== प्रकाशितकोशों से अर्थ ===
==== शब्दसागर ====
परीक्षा संज्ञा स्त्री॰ [सं॰] <br><br>१. किसी के गुण दोष आदि जानने के लिये उसे अच्छी तरह से देखने भालने का कार्य । निरीक्षा । समीक्षा । समालोचना । <br><br>२. वह कार्य जिससे किसी की योग्यता, सामर्थ्य आदि जाने जायँ । इम्तहान । क्रि॰ प्र॰—करना ।—देना ।—लेना । <br><br>३. वह कार्य जो किसी वस्तु के संबंध में कोई विशेष निश्चित करने के लिये किया जाय । आजमाइश । अनुभावार्थ प्रयोग । <br><br>४. मुआयना । निरीक्षण । जाँच पड़ताल । <br><br>५. किसी वस्तु के जो लक्षण माने या जो गुण कहे गए हों उनके ठीक होने न होने का प्रमाण द्वारा निश्चय करने का कार्य । <br><br>६. वह विधान जिससे प्राचीन न्यायालय किसी विशेष अभियुक्त के अपराधी या निरपराध अथवा विशेष साक्षी के सच्चे या झूठे होने का निश्चय करते थे । विशेष—अभियुक्त की परीक्षा को दिव्य और साक्षी की परीक्षा को लौकिक परीक्षा कहते थे । दिव्य परीक्षाएँ कुल नौ प्रकार की होती थीं । दे॰ 'दिव्य' । इनमें से अभियुक्त को उसकी अवस्था, ऋतु आदि के अनुसार कोई एक देनी होती थी । लौकिक परीक्षा में गवाह से कई प्रकार के प्रश्न किए जाते थे ।
=== उदाहरण वाक्य ===
* मेरी गणित की परीक्षा कल है।
* किसी भी योजना को लागू करने से पहले उसकी परीक्षा की जाती है।
[[श्रेणी: हिन्दी-प्रकाशितकोशों से अर्थ-शब्दसागर]]
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action
0
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2026-05-04T05:01:27Z
क्शत्रिय
21151
सही उच्चारण यही है।
487222
wikitext
text/x-wiki
“एक्शन” (Action) का हिंदी में अर्थ होता है:
कार्य, क्रिया, कार्रवाई
यानी जब कोई व्यक्ति कुछ करता है या
कोई काम करता है, उसे “एक्शन” कहते हैं।
उदाहरण: उसे कुछ भी खराब लगे वह तुरंत एक्शन लेता है।
===अर्थ===
एक प्रकार की प्रतिक्रिया है।
===शब्द===
* [[अनुयोजन]]
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परीक्षण
0
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487214
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क्शत्रिय
21151
/* */ सही उच्चारण है
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wikitext
text/x-wiki
===उच्चारण===
'''क्शत्रिय'''
= {{हिन्दी}} =
== प्रकाशितकोशों से अर्थ ==
=== शब्दसागर ===
परीक्षण संज्ञा पुं॰ [सं॰] [वि॰ परीक्षित, परीक्ष्य] परीक्षा की क्रिया या कार्य । देख भाल, जाँच, पड़ताल आजमाइश या इम्तहान लेने की क्रिया या कार्य । निरीक्षण, समीक्षण अथवा आलोचना ।
[[श्रेणी: हिन्दी-प्रकाशितकोशों से अर्थ-शब्दसागर]]
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487214
2026-05-04T02:02:15Z
क्शत्रिय
21151
/* उच्चारण */
487215
wikitext
text/x-wiki
उच्चारण = क्शत्रिय
= {{हिन्दी}} =
== प्रकाशितकोशों से अर्थ ==
=== शब्दसागर ===
परीक्षण संज्ञा पुं॰ [सं॰] [वि॰ परीक्षित, परीक्ष्य] परीक्षा की क्रिया या कार्य । देख भाल, जाँच, पड़ताल आजमाइश या इम्तहान लेने की क्रिया या कार्य । निरीक्षण, समीक्षण अथवा आलोचना ।
[[श्रेणी: हिन्दी-प्रकाशितकोशों से अर्थ-शब्दसागर]]
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487215
2026-05-04T04:28:42Z
क्शत्रिय
21151
सही उच्चारण है
487219
wikitext
text/x-wiki
उच्चारण = परिक्शन
= {{हिन्दी}} =
== प्रकाशितकोशों से अर्थ ==
=== शब्दसागर ===
परीक्षण संज्ञा पुं॰ [सं॰] [वि॰ परीक्षित, परीक्ष्य] परीक्षा की क्रिया या कार्य । देख भाल, जाँच, पड़ताल आजमाइश या इम्तहान लेने की क्रिया या कार्य । निरीक्षण, समीक्षण अथवा आलोचना ।
[[श्रेणी: हिन्दी-प्रकाशितकोशों से अर्थ-शब्दसागर]]
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487219
2026-05-04T05:28:12Z
क्शत्रिय
21151
ठीक उच्चारण
487223
wikitext
text/x-wiki
उच्चारण = परिक्शण
= {{हिन्दी}} =
== प्रकाशितकोशों से अर्थ ==
=== शब्दसागर ===
परीक्षण संज्ञा पुं॰ [सं॰] [वि॰ परीक्षित, परीक्ष्य] परीक्षा की क्रिया या कार्य । देख भाल, जाँच, पड़ताल आजमाइश या इम्तहान लेने की क्रिया या कार्य । निरीक्षण, समीक्षण अथवा आलोचना ।
[[श्रेणी: हिन्दी-प्रकाशितकोशों से अर्थ-शब्दसागर]]
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पावती
0
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487196
2026-05-04T05:45:32Z
~2026-23770-79
21104
487225
wikitext
text/x-wiki
= {{हिन्दी}} =
== प्रकाशितकोशों से अर्थ ==
=== शब्दसागर ===
पावती संज्ञा स्त्री॰ [हि॰ पावना पाना] <br><br>१. प्राप्तिस्वीकार । किसी वस्तु के प्राप्त होने की रसीद । <br><br>२. वह रसीद जो किसी से रूपया लेते समय रुपया लेनेवाला देता है ।
[[श्रेणी: हिन्दी-प्रकाशितकोशों से अर्थ-शब्दसागर]]
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लक्षण
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क्शत्रिय
21151
सही उच्चारण है
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wikitext
text/x-wiki
= {{हिन्दी}} =
== प्रकाशितकोशों से अर्थ ==
=== शब्दसागर ===
=== लक्षण संज्ञा पुं॰ [सं॰] === <br><br>१. किसी पदार्थ की वह विशेषता जिसके द्वारा वह पहचाना जाय । वे गुण आदि जो किसी पदार्थ में विशिष्ट रूप से हों और जिनके द्वारा सहज में उसका ज्ञान हो सके । चिह्न । निशान । आसार । जैसे,—आकाश के लक्षण से जान पड़ता है कि आज पानी बरसेगा । <br><br>२. नाम । <br><br>३. परिभाषा । <br><br>४. शरीर में दिखाई पड़नेवाला वे चिह्न आदि जो किसी रोग के सूचक हों । जैसे,—इस रोगी में क्षय के सभी लक्षण दिखाई देते हैं । <br><br>५. दर्शन । <br><br>६. सारस पक्षी । <br><br>७. सामु- द्रिक के अनुसार शरीर के अँगों में होनेवाले कुछ विशेष चिह्न । जो शुभ या अशुभ माने जाते हैं । जैसे,—चक्रवर्ती और बुद्ध के लक्षण एक से होते हैं । <br><br>८. शरीर में होनेवाला एक विशेष प्रकार का काला दाग जो बालक के गर्भ में रहने के समय सूर्य या चंद्रग्रहण लगने के कारण पड़ जाता है । लच्छन । <br><br>९. चाल- ढाल । तौर तरीका । रंग ढंग । जैसे,—आजकल तुम्हारे लक्षण अच्छे नहीं जान पड़ते । <br><br>१०. दे॰ 'लक्ष्मण' । <br><br>११. पुरुषेद्रिय । शिश्न [को॰] । <br><br>१२. योनि । भग (को॰) । <br><br>१३. अध्याय । परिच्छेद । स्कंध (को॰) । <br><br>१४. व्याज । छल छद्म (को॰) । <br><br>१५. लक्ष्य । उद्देश्य (को॰) । <br><br>१६. बँधी हुई सीमा । दर (को॰) । <br><br>१७. प्रस्तुत प्रसंग । उपस्थित विषय (को॰) । <br><br>१८. कारण (को॰) । <br><br>१९. नतीजा । परिणाम । असर (को॰) ।
लक्षण ग्रंथ संज्ञा पुं॰ [सं॰ लक्षण + ग्रंथ] काव्य या साहित्य के लक्षणों का विवेचन करनेवाला ग्रंथ । साहित्यिक समीक्षा की पुस्तक । समालोचना शास्त्र । उ॰—पहली बात तो ध्यान देने की यह है कि लक्षण ग्रंथों के बनने के बहुत पहले से कविता होती आ रही थी । चिंतामणि, भा॰ २, पु॰ ९२ ।
लक्षण लक्षणा संज्ञा स्त्री॰ [सं॰] एक प्रकार की लक्षणा जिसे जहल्लक्षणा भी कहते हैं ।
[[श्रेणी: हिन्दी-प्रकाशितकोशों से अर्थ-शब्दसागर]]
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487221
487220
2026-05-04T04:40:22Z
क्शत्रिय
21151
सही उच्चारण है
487221
wikitext
text/x-wiki
= {{हिन्दी}} =
== प्रकाशितकोशों से अर्थ ==
=== शब्दसागर [ <big>लक्शन ]</big> ===
<big>लक्षण</big> संज्ञा पुं॰ [सं॰]<br>१. किसी पदार्थ की वह विशेषता जिसके द्वारा वह पहचाना जाय । वे गुण आदि जो किसी पदार्थ में विशिष्ट रूप से हों और जिनके द्वारा सहज में उसका ज्ञान हो सके । चिह्न । निशान । आसार । जैसे,—आकाश के लक्षण से जान पड़ता है कि आज पानी बरसेगा । <br><br>२. नाम । <br><br>३. परिभाषा । <br><br>४. शरीर में दिखाई पड़नेवाला वे चिह्न आदि जो किसी रोग के सूचक हों । जैसे,—इस रोगी में क्षय के सभी लक्षण दिखाई देते हैं । <br><br>५. दर्शन । <br><br>६. सारस पक्षी । <br><br>७. सामु- द्रिक के अनुसार शरीर के अँगों में होनेवाले कुछ विशेष चिह्न । जो शुभ या अशुभ माने जाते हैं । जैसे,—चक्रवर्ती और बुद्ध के लक्षण एक से होते हैं । <br><br>८. शरीर में होनेवाला एक विशेष प्रकार का काला दाग जो बालक के गर्भ में रहने के समय सूर्य या चंद्रग्रहण लगने के कारण पड़ जाता है । लच्छन । <br><br>९. चाल- ढाल । तौर तरीका । रंग ढंग । जैसे,—आजकल तुम्हारे लक्षण अच्छे नहीं जान पड़ते । <br><br>१०. दे॰ 'लक्ष्मण' । <br><br>११. पुरुषेद्रिय । शिश्न [को॰] । <br><br>१२. योनि । भग (को॰) । <br><br>१३. अध्याय । परिच्छेद । स्कंध (को॰) । <br><br>१४. व्याज । छल छद्म (को॰) । <br><br>१५. लक्ष्य । उद्देश्य (को॰) । <br><br>१६. बँधी हुई सीमा । दर (को॰) । <br><br>१७. प्रस्तुत प्रसंग । उपस्थित विषय (को॰) । <br><br>१८. कारण (को॰) । <br><br>१९. नतीजा । परिणाम । असर (को॰) ।
लक्षण ग्रंथ संज्ञा पुं॰ [सं॰ लक्षण + ग्रंथ] काव्य या साहित्य के लक्षणों का विवेचन करनेवाला ग्रंथ । साहित्यिक समीक्षा की पुस्तक । समालोचना शास्त्र । उ॰—पहली बात तो ध्यान देने की यह है कि लक्षण ग्रंथों के बनने के बहुत पहले से कविता होती आ रही थी । चिंतामणि, भा॰ २, पु॰ ९२ ।
लक्षण लक्षणा संज्ञा स्त्री॰ [सं॰] एक प्रकार की लक्षणा जिसे जहल्लक्षणा भी कहते हैं ।
[[श्रेणी: हिन्दी-प्रकाशितकोशों से अर्थ-शब्दसागर]]
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487224
487221
2026-05-04T05:31:54Z
क्शत्रिय
21151
व्याकरण में सुधार
487224
wikitext
text/x-wiki
= {{हिन्दी}} =
== प्रकाशितकोशों से अर्थ ==
=== शब्दसागर [ <big>लक्शण ]</big> ===
<big>लक्षण</big> संज्ञा पुं॰ [सं॰]<br>१. किसी पदार्थ की वह विशेषता जिसके द्वारा वह पहचाना जाय । वे गुण आदि जो किसी पदार्थ में विशिष्ट रूप से हों और जिनके द्वारा सहज में उसका ज्ञान हो सके । चिह्न । निशान । आसार । जैसे,—आकाश के लक्षण से जान पड़ता है कि आज पानी बरसेगा । <br><br>२. नाम । <br><br>३. परिभाषा । <br><br>४. शरीर में दिखाई पड़नेवाला वे चिह्न आदि जो किसी रोग के सूचक हों । जैसे,—इस रोगी में क्षय के सभी लक्षण दिखाई देते हैं । <br><br>५. दर्शन । <br><br>६. सारस पक्षी । <br><br>७. सामु- द्रिक के अनुसार शरीर के अँगों में होनेवाले कुछ विशेष चिह्न । जो शुभ या अशुभ माने जाते हैं । जैसे,—चक्रवर्ती और बुद्ध के लक्षण एक से होते हैं । <br><br>८. शरीर में होनेवाला एक विशेष प्रकार का काला दाग जो बालक के गर्भ में रहने के समय सूर्य या चंद्रग्रहण लगने के कारण पड़ जाता है । लच्छन । <br><br>९. चाल- ढाल । तौर तरीका । रंग ढंग । जैसे,—आजकल तुम्हारे लक्षण अच्छे नहीं जान पड़ते । <br><br>१०. दे॰ 'लक्ष्मण' । <br><br>११. पुरुषेद्रिय । शिश्न [को॰] । <br><br>१२. योनि । भग (को॰) । <br><br>१३. अध्याय । परिच्छेद । स्कंध (को॰) । <br><br>१४. व्याज । छल छद्म (को॰) । <br><br>१५. लक्ष्य । उद्देश्य (को॰) । <br><br>१६. बँधी हुई सीमा । दर (को॰) । <br><br>१७. प्रस्तुत प्रसंग । उपस्थित विषय (को॰) । <br><br>१८. कारण (को॰) । <br><br>१९. नतीजा । परिणाम । असर (को॰) ।
लक्षण ग्रंथ संज्ञा पुं॰ [सं॰ लक्षण + ग्रंथ] काव्य या साहित्य के लक्षणों का विवेचन करनेवाला ग्रंथ । साहित्यिक समीक्षा की पुस्तक । समालोचना शास्त्र । उ॰—पहली बात तो ध्यान देने की यह है कि लक्षण ग्रंथों के बनने के बहुत पहले से कविता होती आ रही थी । चिंतामणि, भा॰ २, पु॰ ९२ ।
लक्षण लक्षणा संज्ञा स्त्री॰ [सं॰] एक प्रकार की लक्षणा जिसे जहल्लक्षणा भी कहते हैं ।
[[श्रेणी: हिन्दी-प्रकाशितकोशों से अर्थ-शब्दसागर]]
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सदस्य:क्शत्रिय
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487218
2026-05-04T04:24:45Z
क्शत्रिय
21151
क्शन ही क्षण होता है
487218
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text/x-wiki
'''<big>क्शन ===क्षण===</big>'''
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